प्रकरण अध्ययन
डॉ. आर. पुष्पा नामदेव
सहायक प्राध्यापक (शिक्षा शवभाग)
महात्मा गाांधी अांतरराष्रीय शहन्दी शवश्वशवद्यालय
वधाा, महाराष्र
प्रकरण अध्ययन
यह एक ऐसी शवशध है शिसमें शकसी सामाशिक इकाई के िीवन की घटनाओांका
अन्वेषण एवां शवश्लेषण शकया िाता है।
सामाशिक इकाई के रूप में शकसी एक व्यशि, एक पररवार, एक सांस्था, एक समुदाय,
घटना, सांगठन आशद को शलया िा सकता है।
इस अध्ययन में शकसी सामाशिक इकाई के शवकासात्मक घटनाओांका अध्ययन शकया
िाता अथाात सामाशिक इकाई का अध्ययन उसके शवकास के ऐशतहाशसक पृष्ठभूशम में
शकया िाता है।
इसमें सामाशिक इकाई के एकात्म इकाई को टूटने नहीं शदया िाता है।
इसमें अध्ययन के शलए चुने गए सामाशिक इकाई के ‘क्या’ और ‘क्यों’ दोनों
पक्षों का अध्ययन शकया िाता है।
प्रकरण अध्ययन सामाशिक इकाई के िशटल व्यवहार परक पैटना की व्याख्या
तो करता है साथ ही साथ उन कारकों का भी पता लगाता है शिसमें इस तरह के
िशटल व्यवहार की उत्पशि होती है ।
प्रकरण अध्ययन द्वारा असमानताओां का शवश्लेषण तो होता ही है
शकन्तु इसका लक्ष्य केवल कारण ढूांढना ही नहीं है अशपतु बारीकी
से समस्याओांको समझे तो कहीं न कहीं उस समस्या के हल प्राप्त
करना भी होता है । शिससे की अध्ययन साथाक हो तथा उसके कुछ
अच्छे पररणाम शनकलकर आ सके। इसशलए इसकी गहनता तथा
गहराई में िाना आवश्यक है।
ऐशतहाशसक पृष्ठभूशम
प्रकरण अध्ययन का सवा प्रथम प्रयोग फेशिक ली प्ले ने 1829 में
सामाशिक शवज्ञान में शकया। वहीं 1967 में बारने ग्लेिर एवां एन्सेलम
स्टाांस िैसे समाििाशियों ने पुनः इसे पररष्कृत रूप में सामाशिक शवज्ञान
में नवीन शसद्धान्त के रूप में प्रयुि शकया। वतामान में प्रकरण अध्ययन का
प्रयोग शिक्षा में भी शकया िा रहा है।
प्रकरण अध्ययन का मूल उद्देश्य शकसी व्यशि के व्यवहार
तथा उसके कारणों को ज्ञात करना होता है शिसे शविेष ध्यान
शदया िाना आवश्यक है | शिससे उसके समस्या के कारणों
का ज्ञान हो सके एवां उसका शनवारण शकया िा सके |
प्रकरण(व्यशि/वैयशिक/के स)अध्ययन
प्रकरण(के स)क्या है ?
प्रकरण एक पररवार, एक समुदाय, समाि,सांस्था,एक कक्षा अथवा
एक व्यशि हो सकता है|
प्रकरण (के स) के प्रकार?
ऐशतहाशसक, नैदाशनक, कानूनी, सांस्थागत, िैशक्षक
प्रकरण(के स)की पहचान
शिन शवद्याशथायों में असाधारण योग्यता हो |
कक्षा में वे बुशद्धमान शवद्याशथायों शिनका पूवा का िैशक्षक इशतहास उच्च रहा हो परांतु
उसका अचानक ही शिक्षा का स्तर शनम्न हो गया हो |
वे शवद्याथी िो गांभीर व्यवहाररक समस्या प्रस्तुत करते हो |
वे शवद्याथी िो कक्षा में शवलांब से आते हो |
वे शवद्याथी शिनके परीक्षा पररणाम में शनरांतर शगरावट आ रही हो |
वे शवद्याथी िो कक्षा में सबसे अशधक िमीले व डरपोक हो |
वे शवद्याथी िो कक्षा में प्रायः िैशक्षक/ सह िैशक्षक गशतशवशधयों में शनशष्िय हो |
प्रकरण(के स)अध्ययन प्रतिवेदन
प्रकरण अध्ययन प्रशतवेदन वह है शिसे शकसी एक व्यशि या समुदाय के
शवस्तृत अध्ययन के पश्चात तैयार शकया िाता है |
शवद्यालयीन शिक्षा/शिक्षण के पररप्रेक्ष्य में प्रकरण अध्ययन का महत्व ?
प्रकरण/शवद्याथी
व्यशिगत शभन्नता को समझना
समस्याओांसे पररशचत होना
के गुण, दोष एवां असमानताओांका शवश्लेषण
के समायोशित व्यशित्व के शनमााण में सहायता
के शवशभन्न पहलुओांएवां उसमें होने वाली अन्तः शियाओांका अध्ययन करना।
प्रकरण (के स) अध्ययन के प्रकार
औपचाररक- प्रकरण से िुड़ी सभी सूचनाओांको शलशित
रूप में रिा िाता है।
अनौपचाररक- सामान्य सूचनाओांको एकशित कर, इनकी
सहायता से समायोिन सांबांधी समस्याओांका समाधान शकया
िाता है।
प्रकरण (के स) अध्ययन के प्रकार
व्याख्यात्मक प्रकरण अध्ययन – इसका उद्देश्य शकसी प्रशिया एवां
व्यवहार में शनशहत कारणों का स्पिीकरण या व्याख्या करना होता
है ।
शववरणात्मक प्रकरण अध्ययन – इसका उद्देश्य एक पररशस्थशत,
घटना या प्रशिया का शववरण, प्रलेि और वगीकरण प्रदान करना
होता है ।
प्रकरण अध्ययन के सोपान एवं प्रतिवेदन का तनर्ााण
1. प्रकरण /समस्या का चयन, शविेषतायें एवां औशचत्य
2. प्रकरण का पररचयात्मक शववरण
अ. प्रकरण प्रोफ़ाइल-
पररचय – नाम, पता, कक्षा, शलांग, शवद्यालय, शपता व माता का नाम, घर का पता, आयु, नागररकता, पररवार का प्रकार, भाई- बहन
की सांख्या, िन्म िम,पररवार के सदस्यों का शववरण, शवद्याथी का स्वास््य-ऊ
ँ चाई, विन, दृशि, बोलने की क्षमता आशद।
सामाशिक आशथाक पृष्ठभूशम- धमा, िाशत, भाषा, माता व शपता की िैशक्षक शस्थशत,आय, व्यवसाय, आदतें, रुशचयाँ, सामुदाशयक
कायों में सहभाशगता ।
िैशक्षक व सह िैक्षशणक योग्यताएां एवां अशभक्षमता- शवषयानुसार परीक्षा पररणाम(उपलशधध), सह िैक्षशणक उपलशधध िैसे-
NSS,NCC, िेल कूद प्रशतयोशगता, क्षमताएां, रुशच, सृिनिीलता, महत्वाकाांक्षा
शविेष शववरण यशद हो
ब. तववरण एकत्रण हेिु तवतियााँ/उपकरण-
प्रश्नावली, पोटाफोशलयो, साक्षात्कार, उपलशधध परीक्षण
3.प्रकरण की वतामान शस्थशत का शववरण(प्रकरण अवलोकन)-शवद्यालय में
समायोिन (शिक्षकों एवां सहपाशठयों के साथ व्यवहार), गृह समायोिन,
सामाशिक समायोिन तथा कक्षा के अन्य गशतशवशधयों का अवलोकन
4.प्रकरण का इशतहास-प्रकरण के व्यवहार के कारणों को िानने के शलए प्रकरण से
सांबशन्धत व्यशियों (माता-शपता, शिक्षक, सहपाठी, भाई-बहन आशद) के साथ
साक्षात्कार व प्रश्नावली का प्रिासन, शनदेिन एवां परामिादाता से सांपका साथ ही
शचशकत्सकों के प्रशतवेदन/ प्रशतपुिी
5.प्रकरण की समस्या के समाधान हेतु सांभाशवत प्रयास
6.प्रकरण को स्व-आकलन/ अवलोकन के शलए प्रोत्साशहत करना- उसकी
अपनी समस्या के प्रशत शवचार, शचांतन,भावी योिनाएां।
7.प्रकरण अध्ययनकताा द्वारा प्रशतशबम्बन/शवचारिील शचांतन
8.प्रकरण के समस्या समाधान हेतु व्यवहाररक सुझाव
प्रकरण अध्ययन के गुण
प्रकरण अध्ययन वृहद रूप से होता है |
शिक्षकों में सहनिीलता शवकशसत होती है |
प्रकरण अध्ययन पयााप्त तथा सही त्यों पर आधाररत होता है |
प्रकरण अध्ययन के दोष
व्यशिशनष्ठ होने की सांभावना होती है |
प्रकरण अध्ययनकताा में पररपक्वता, अनुभव एवां प्रशिक्षण की आवश्यकता होती
है|
समय अशधक लगता है |
प्रकरण के शवशभन्न पक्षों के बारे में सूचना एकशित करना एवां व्यशि इशतहास तैयार
करना कशठन काया है |
बहुत अशधक चचाा की आवश्यकता होती है|
धन्यवाद

प्रकरण अध्ययन/ केस अध्ययन/ Case Study/व्यष्टि अध्ययन

  • 1.
    प्रकरण अध्ययन डॉ. आर.पुष्पा नामदेव सहायक प्राध्यापक (शिक्षा शवभाग) महात्मा गाांधी अांतरराष्रीय शहन्दी शवश्वशवद्यालय वधाा, महाराष्र
  • 2.
    प्रकरण अध्ययन यह एकऐसी शवशध है शिसमें शकसी सामाशिक इकाई के िीवन की घटनाओांका अन्वेषण एवां शवश्लेषण शकया िाता है। सामाशिक इकाई के रूप में शकसी एक व्यशि, एक पररवार, एक सांस्था, एक समुदाय, घटना, सांगठन आशद को शलया िा सकता है। इस अध्ययन में शकसी सामाशिक इकाई के शवकासात्मक घटनाओांका अध्ययन शकया िाता अथाात सामाशिक इकाई का अध्ययन उसके शवकास के ऐशतहाशसक पृष्ठभूशम में शकया िाता है।
  • 3.
    इसमें सामाशिक इकाईके एकात्म इकाई को टूटने नहीं शदया िाता है। इसमें अध्ययन के शलए चुने गए सामाशिक इकाई के ‘क्या’ और ‘क्यों’ दोनों पक्षों का अध्ययन शकया िाता है। प्रकरण अध्ययन सामाशिक इकाई के िशटल व्यवहार परक पैटना की व्याख्या तो करता है साथ ही साथ उन कारकों का भी पता लगाता है शिसमें इस तरह के िशटल व्यवहार की उत्पशि होती है ।
  • 4.
    प्रकरण अध्ययन द्वाराअसमानताओां का शवश्लेषण तो होता ही है शकन्तु इसका लक्ष्य केवल कारण ढूांढना ही नहीं है अशपतु बारीकी से समस्याओांको समझे तो कहीं न कहीं उस समस्या के हल प्राप्त करना भी होता है । शिससे की अध्ययन साथाक हो तथा उसके कुछ अच्छे पररणाम शनकलकर आ सके। इसशलए इसकी गहनता तथा गहराई में िाना आवश्यक है।
  • 5.
    ऐशतहाशसक पृष्ठभूशम प्रकरण अध्ययनका सवा प्रथम प्रयोग फेशिक ली प्ले ने 1829 में सामाशिक शवज्ञान में शकया। वहीं 1967 में बारने ग्लेिर एवां एन्सेलम स्टाांस िैसे समाििाशियों ने पुनः इसे पररष्कृत रूप में सामाशिक शवज्ञान में नवीन शसद्धान्त के रूप में प्रयुि शकया। वतामान में प्रकरण अध्ययन का प्रयोग शिक्षा में भी शकया िा रहा है।
  • 6.
    प्रकरण अध्ययन कामूल उद्देश्य शकसी व्यशि के व्यवहार तथा उसके कारणों को ज्ञात करना होता है शिसे शविेष ध्यान शदया िाना आवश्यक है | शिससे उसके समस्या के कारणों का ज्ञान हो सके एवां उसका शनवारण शकया िा सके |
  • 7.
    प्रकरण(व्यशि/वैयशिक/के स)अध्ययन प्रकरण(के स)क्याहै ? प्रकरण एक पररवार, एक समुदाय, समाि,सांस्था,एक कक्षा अथवा एक व्यशि हो सकता है| प्रकरण (के स) के प्रकार? ऐशतहाशसक, नैदाशनक, कानूनी, सांस्थागत, िैशक्षक
  • 8.
    प्रकरण(के स)की पहचान शिनशवद्याशथायों में असाधारण योग्यता हो | कक्षा में वे बुशद्धमान शवद्याशथायों शिनका पूवा का िैशक्षक इशतहास उच्च रहा हो परांतु उसका अचानक ही शिक्षा का स्तर शनम्न हो गया हो | वे शवद्याथी िो गांभीर व्यवहाररक समस्या प्रस्तुत करते हो | वे शवद्याथी िो कक्षा में शवलांब से आते हो | वे शवद्याथी शिनके परीक्षा पररणाम में शनरांतर शगरावट आ रही हो | वे शवद्याथी िो कक्षा में सबसे अशधक िमीले व डरपोक हो | वे शवद्याथी िो कक्षा में प्रायः िैशक्षक/ सह िैशक्षक गशतशवशधयों में शनशष्िय हो |
  • 9.
    प्रकरण(के स)अध्ययन प्रतिवेदन प्रकरणअध्ययन प्रशतवेदन वह है शिसे शकसी एक व्यशि या समुदाय के शवस्तृत अध्ययन के पश्चात तैयार शकया िाता है |
  • 10.
    शवद्यालयीन शिक्षा/शिक्षण केपररप्रेक्ष्य में प्रकरण अध्ययन का महत्व ? प्रकरण/शवद्याथी व्यशिगत शभन्नता को समझना समस्याओांसे पररशचत होना के गुण, दोष एवां असमानताओांका शवश्लेषण के समायोशित व्यशित्व के शनमााण में सहायता के शवशभन्न पहलुओांएवां उसमें होने वाली अन्तः शियाओांका अध्ययन करना।
  • 11.
    प्रकरण (के स)अध्ययन के प्रकार औपचाररक- प्रकरण से िुड़ी सभी सूचनाओांको शलशित रूप में रिा िाता है। अनौपचाररक- सामान्य सूचनाओांको एकशित कर, इनकी सहायता से समायोिन सांबांधी समस्याओांका समाधान शकया िाता है।
  • 12.
    प्रकरण (के स)अध्ययन के प्रकार व्याख्यात्मक प्रकरण अध्ययन – इसका उद्देश्य शकसी प्रशिया एवां व्यवहार में शनशहत कारणों का स्पिीकरण या व्याख्या करना होता है । शववरणात्मक प्रकरण अध्ययन – इसका उद्देश्य एक पररशस्थशत, घटना या प्रशिया का शववरण, प्रलेि और वगीकरण प्रदान करना होता है ।
  • 13.
    प्रकरण अध्ययन केसोपान एवं प्रतिवेदन का तनर्ााण 1. प्रकरण /समस्या का चयन, शविेषतायें एवां औशचत्य 2. प्रकरण का पररचयात्मक शववरण अ. प्रकरण प्रोफ़ाइल- पररचय – नाम, पता, कक्षा, शलांग, शवद्यालय, शपता व माता का नाम, घर का पता, आयु, नागररकता, पररवार का प्रकार, भाई- बहन की सांख्या, िन्म िम,पररवार के सदस्यों का शववरण, शवद्याथी का स्वास््य-ऊ ँ चाई, विन, दृशि, बोलने की क्षमता आशद। सामाशिक आशथाक पृष्ठभूशम- धमा, िाशत, भाषा, माता व शपता की िैशक्षक शस्थशत,आय, व्यवसाय, आदतें, रुशचयाँ, सामुदाशयक कायों में सहभाशगता । िैशक्षक व सह िैक्षशणक योग्यताएां एवां अशभक्षमता- शवषयानुसार परीक्षा पररणाम(उपलशधध), सह िैक्षशणक उपलशधध िैसे- NSS,NCC, िेल कूद प्रशतयोशगता, क्षमताएां, रुशच, सृिनिीलता, महत्वाकाांक्षा शविेष शववरण यशद हो ब. तववरण एकत्रण हेिु तवतियााँ/उपकरण- प्रश्नावली, पोटाफोशलयो, साक्षात्कार, उपलशधध परीक्षण
  • 14.
    3.प्रकरण की वतामानशस्थशत का शववरण(प्रकरण अवलोकन)-शवद्यालय में समायोिन (शिक्षकों एवां सहपाशठयों के साथ व्यवहार), गृह समायोिन, सामाशिक समायोिन तथा कक्षा के अन्य गशतशवशधयों का अवलोकन 4.प्रकरण का इशतहास-प्रकरण के व्यवहार के कारणों को िानने के शलए प्रकरण से सांबशन्धत व्यशियों (माता-शपता, शिक्षक, सहपाठी, भाई-बहन आशद) के साथ साक्षात्कार व प्रश्नावली का प्रिासन, शनदेिन एवां परामिादाता से सांपका साथ ही शचशकत्सकों के प्रशतवेदन/ प्रशतपुिी
  • 15.
    5.प्रकरण की समस्याके समाधान हेतु सांभाशवत प्रयास 6.प्रकरण को स्व-आकलन/ अवलोकन के शलए प्रोत्साशहत करना- उसकी अपनी समस्या के प्रशत शवचार, शचांतन,भावी योिनाएां। 7.प्रकरण अध्ययनकताा द्वारा प्रशतशबम्बन/शवचारिील शचांतन 8.प्रकरण के समस्या समाधान हेतु व्यवहाररक सुझाव
  • 16.
    प्रकरण अध्ययन केगुण प्रकरण अध्ययन वृहद रूप से होता है | शिक्षकों में सहनिीलता शवकशसत होती है | प्रकरण अध्ययन पयााप्त तथा सही त्यों पर आधाररत होता है |
  • 17.
    प्रकरण अध्ययन केदोष व्यशिशनष्ठ होने की सांभावना होती है | प्रकरण अध्ययनकताा में पररपक्वता, अनुभव एवां प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है| समय अशधक लगता है | प्रकरण के शवशभन्न पक्षों के बारे में सूचना एकशित करना एवां व्यशि इशतहास तैयार करना कशठन काया है | बहुत अशधक चचाा की आवश्यकता होती है|
  • 18.