Yoga in Gherand Samhita
घेरण्ड संहिता
Dr Shivam Mishra
Director SKM Yoga International
Director Yoga Song Khoe Vietnam
घेरण्ड संहिता
• घेरण्ड संहिता क
े रचहिता मिहषि घेरण्ड िैं । जिााँ कि ं भ िोग हिद्या क चचाि
िोत िैं िि ं पर घेरण्ड संहिता का िर्िन अिश्य िोता िै । घेरण्ड संहिता का
िर्िन िोग क
े अत्यंत उत्क
ृ ष्ट पुस्तकों में आता िै , िोग क
े रूप में घटस्थ िोग का
िर्िन और चण्ड कापहि को िोग का ज्ञान देते समि हिहभन्न हिषिों का िर्िन
करने िािे घेरण्ड मुहन को प्रर्ाम करते हुए घेरण्ड संहिता क
े दर्िन क र्ुरिात
करते िैं
घेरण्ड संहिता का काल / समय :-
• घेरण्ड संहिता क
े काि क
े हिषि में भ बहुत सारे हिद्वानों क
े अिग – अिग मत
िैं । उन सभ मतों क
े ब च इसका काि 17 व ं शताब्द क
े आसपास का माना
जाता िै ।
घेरण्ड संहिता क
े योग का उद्देश्य
• मिहषि घेरण्ड अपन िोग हिद्या का उपदेर् तत्त्व ज्ञान क प्राप्ति क
े हिए करते िैं
। इसमें िोग को सबसे बड़ा बि बतािा िै । साधक इस िोगबि से ि उस
तत्त्वज्ञान क प्राप्ति करता िै ।
घेरण्ड संहिता में योग का स्वरूप
• घेरण्ड संहिता में िोग को सबसे बड़ा बि मानते हुए तत्त्वज्ञान क प्राप्ति क
े हिए इसका उपदेर् हदिा गिा िै ।
इसक
े िोग को घटस्थ योग क
े नाम से भ जाना जाता िै । इसक
े सात (7) अध्यािों में िोग क
े सात ि अंगों क
चचाि क गई िै । जो इस प्रकार िैं –
1. षट्कमि
2. आसन
3. मुद्रा
4. प्रत्यािार
5. प्राणायाम
6. ध्यान
7. समाहि ।
सप्त योग का लाभ
• िोग क
े सि साधनों का िर्िन करते हुए उनक
े िाभों क चचाि भ इस अध्याि में क गई
िै । िोग क
े सभ अंगों क
े िाभ इस प्रकार िैं –
षट्कमि = शोिन
आसन = दृढ़ता
मुद्रा = स्स्थरता
प्रत्यािार = िैयि
प्राणायाम = लघुता / िल्कापन
ध्यान = प्रत्यक्ष करण / साक्षात्कार
समाहि = हनहलिप्तता / अनासक्त अवस्था
षट्कमि वणिन
• िौहत
• धौहत क
े मुख्य चार भाग माने गए िैं । और आगे उनक
े भागों क
े भ हिभाग हकिे
जाने से उनक क
ु ि संख्या 13 िो जात िै ।
धौहत क
े चार प्रकार
1.अन्तिौहत
2.दन्त िौहत
3.हृद्धिौहत
4.मूलशोिन ।
अन्तिौहत क
े प्रकार
1.वातसार िौहत
2.वाररसार िौहत
3.अहिसार िौहत
4.बहिष्क
ृ त िौहत ।
दन्तिौहत क
े प्रकार
2.दन्तमूल िौहत
3.हिह्वाशोिन िौहत
• कणिरन्ध्र िौहत ( दोनों कानों से )
5.कपालरन्ध्र िौहत ।
हृद्धिौहत क
े प्रकार
3.दण्ड िौहत
4.वमन िौहत
5.वस्त्र िौहत ।
मूलशोिन :- मूिर्ोधन धौहत क
े अन्य कोई भाग
नि ं हकए गए िैं ।
बस्ि :- बप्तस्त क
े दो प्रकार िोते िैं –
• िल बस्ि
• स्थल बस्ि ।
नेहत :- नेहत हििा क
े दो भाग हकिे गए िैं
3.िलनेहत
4.सूत्रनेहत
लौहलक :- िौहिक अथाित नौहि हििा क
े त न
भाग माने जाते िैं
4.मध्य नौहल
5.वाम नौहल
6.दहक्षण नौहल
त्राटक :- त्राटक क
े अन्य हिभाग नि ं हकिे गए िैं
। िैसे इसक
े त न भाग िोते िैं िेहकन िि अन्य
िोहगिों क
े द्वारा किे गए िैं
कपालभाहत :- कपािभाहत क
े त न भाग िोते िैं
6.वातक्रम कपालभाहत
7.व्युत्क्रम कपालभाहत
8.श तक्रम कपालभाहत
हित य अध्याय
• दू सरे अध्याि में आसनों का िर्िन हकिा गिा िै । मिहषि घेरण्ड का मानना िै हक
संसार में हजतने भ ज ि – जन्तु िैं, उतने ि आसन िोते िै । भगिान हर्ि ने
चौरास िाख (8400000) आसन किे िैं, उनमें से उन्ोंने चौरास (84) को ि
श्रेष्ठ माना िै । ििााँ पर मिहषि घेरण्ड किते िैं हक उन चौरास श्रेष्ठ आसनों में से भ
बत्त स (32) आसन अहत हिहर्ष्ट िोते िैं । अतः घेरण्ड संहिता में क
ु ि बत्त स
आसनों का िर्िन हमिता िै । हजनक
े नाम हनम्नहिप्तखत िैं
• हसद्धासन, 2. पद्मासन, 3. भद्रासन, 4. मुक्तासन, 5. वज्रासन, 6.
स्वस्िकासन, 7. हसंिासन, 8. गोमुखासन, 9. व रासन,10. िनुरासन, 11.
मृतासन / शवासन, 12. गुप्तासन, 13. मत्स्यासन, 14. मत्स्येन्द्रासन, 15.
गोरक्षासन, 16. पहिमोत्तानासन, 17. उत्कट आसन, 18. संकट आसन, 19.
मयूरासन, 20. क
ु क्क
ु टासन, 21. क
ू मािसन, 22. उत्तानक
ू मािसन, 23.
मण्डुकासन, 24. उत्तान मण्डुकासन, 25. वृक्षासन, 26. गरुड़ासन, 27.
वृषासन, 28. शलभासन, 29. मकरासन, 30. उष्ट्रासन,
तृत य अध्याय
• त सरे अध्याि में िोग क मुद्राओं का िर्िन हकिा गिा िै । मुद्राओं का अभ्यास करने से
र्र र में प्तस्थरता आत िै । घेरण्ड संहिता में क
ु ि पच्च स (25) मुद्राओं का उल्लेख
हमिता िै । इन पच्च स मुद्राओं क
े नाम हनम्न िैं –
1.मिामुद्रा, 2. नभोमुद्रा, 3. उहियान बन्ध, 4. िालन्धर बन्ध, 5. मूलबन्ध, 6. मिाबंि,
7. मिाबेि मुद्रा, 8. खेचर मुद्रा, 9. हवपर तकरण मुद्रा, 10. योहन मुद्रा, 11. वज्रोल
मुद्रा, 12. शस्क्तचाहलन मुद्रा, 13. तड़ाग मुद्रा, 14. माण्डुक मुद्रा, 15. शाम्भव
मुद्रा, 16. पाहथिव िारणा, 17. आम्भस िारणा, 18. आिेय िारणा, 19. वायव य
िारणा, 20. आकाश िारणा, 21. अहिन मुद्रा, 22. पाहशन मुद्रा, 23. काक मुद्रा,
24. मातङ्ग मुद्रा, 25. भुिहङ्गन मुद्रा ।
चतुथि अध्याय
• चौथे अध्याि में प्रत्यािार का िर्िन हकिा गिा िै । प्रत्यािार क
े पािन से िमार
इप्तििााँ अन्तमुिख िोत िै । साथ ि धैिि क िृप्ति िोत िै । जब साधक क
इप्तििााँ बहिमुिख िोत िैं तो उससे साधना में हिघ्न उत्पन्न िोता िै । इसहिए
साधक को धैिि ि संिम क प्राप्ति क
े हिए प्रत्यािार का पािन करना चाहिए ।
पंचम अध्याय
• पााँचिें अध्याि में मुख्य रूप से प्रार्ािाम क चचाि क गई िै । िेहकन प्रार्ािाम क चचाि
से पििे आिार क
े ऊपर हिर्ेष बि हदिा गिा िै । मुख्य रूप से त न प्रकार क
े आिार
क चचाि क गई िै । हजसमें आिार क त न श्रेहर्िााँ बताई िैं –
•
1.हमतािार
2.ग्राह्य या हितकार आिार
3.अग्राह्य हनहषद्ध आिार ।
नाड़ शोिन हक्रया :-
घेरण्ड संहिता में भ प्रार्ािाम से पूिि नाड़ र्ोधन
हििा क
े अभ्यास क बात कि गई िै ।
प्राणायाम चचाि
• पााँचिें अध्याि का मुख्य हिषि प्रार्ािाम ि िै । ििााँ पर भ प्रार्ािाम को क
ु म्भक
किा िै । इस ग्रन्थ में भ आठ क
ु म्भकों अथाित प्रार्ािामों का िर्िन हकिा गिा िै
। जो हनम्न िैं –
1.सहित ( सगभि ि हनगभि ) 2. सूयिभेद , 3. उज्जाय , 4. श तल , 5. भस्स्त्रका, 6.
भ्रामर , 7. मूर्ाि, 8. क
े वल ।
षष्ठ अध्याय
• छटे अध्याि में ध्यान क चचाि क गई िै । घेरण्ड संहिता में त न प्रकार क
े ध्यान
का उल्लेख हमिता िै –
1.स्थूल ध्यान, 2. ज्योहतध्यािन 3. सूक्ष्म ध्यान ।
• इनमें सबसे उत्तम ध्यान सूक्ष्म ध्यान को माना गिा िै
सप्तम अध्याय
• सातिें अथाित अप्तन्तम अध्याि में समाहध क चचाि क गई िै । समाहध हचत्त क
उत्क
ृ ष्ट अथाित उत्तम अिस्था को किा गिा िै । समाहध से हनहिििता आत िै ।
जब िमारे हचत्त क सभ पदाथों क
े प्रहत हििता समाि िो जात िै । तब िि
िोग हसि िोता िै । घेरण्ड संहिता में समाहध क
े छः (6) भेद किे गए िैं –
1.ध्यानयोग समाहि, 2. नादयोग समाहि, 3. रसानन्द योग समाहि, 4. लययोग
समाहि, 5. भस्क्तयोग समाहि, 6. राियोग समाहि ।
Thanks

Gherand Samhita By Dr Shivam Mishra .pptx

  • 1.
    Yoga in GherandSamhita घेरण्ड संहिता Dr Shivam Mishra Director SKM Yoga International Director Yoga Song Khoe Vietnam
  • 2.
    घेरण्ड संहिता • घेरण्डसंहिता क े रचहिता मिहषि घेरण्ड िैं । जिााँ कि ं भ िोग हिद्या क चचाि िोत िैं िि ं पर घेरण्ड संहिता का िर्िन अिश्य िोता िै । घेरण्ड संहिता का िर्िन िोग क े अत्यंत उत्क ृ ष्ट पुस्तकों में आता िै , िोग क े रूप में घटस्थ िोग का िर्िन और चण्ड कापहि को िोग का ज्ञान देते समि हिहभन्न हिषिों का िर्िन करने िािे घेरण्ड मुहन को प्रर्ाम करते हुए घेरण्ड संहिता क े दर्िन क र्ुरिात करते िैं
  • 3.
    घेरण्ड संहिता काकाल / समय :- • घेरण्ड संहिता क े काि क े हिषि में भ बहुत सारे हिद्वानों क े अिग – अिग मत िैं । उन सभ मतों क े ब च इसका काि 17 व ं शताब्द क े आसपास का माना जाता िै ।
  • 4.
    घेरण्ड संहिता क ेयोग का उद्देश्य • मिहषि घेरण्ड अपन िोग हिद्या का उपदेर् तत्त्व ज्ञान क प्राप्ति क े हिए करते िैं । इसमें िोग को सबसे बड़ा बि बतािा िै । साधक इस िोगबि से ि उस तत्त्वज्ञान क प्राप्ति करता िै ।
  • 5.
    घेरण्ड संहिता मेंयोग का स्वरूप • घेरण्ड संहिता में िोग को सबसे बड़ा बि मानते हुए तत्त्वज्ञान क प्राप्ति क े हिए इसका उपदेर् हदिा गिा िै । इसक े िोग को घटस्थ योग क े नाम से भ जाना जाता िै । इसक े सात (7) अध्यािों में िोग क े सात ि अंगों क चचाि क गई िै । जो इस प्रकार िैं – 1. षट्कमि 2. आसन 3. मुद्रा 4. प्रत्यािार 5. प्राणायाम 6. ध्यान 7. समाहि ।
  • 6.
    सप्त योग कालाभ • िोग क े सि साधनों का िर्िन करते हुए उनक े िाभों क चचाि भ इस अध्याि में क गई िै । िोग क े सभ अंगों क े िाभ इस प्रकार िैं – षट्कमि = शोिन आसन = दृढ़ता मुद्रा = स्स्थरता प्रत्यािार = िैयि प्राणायाम = लघुता / िल्कापन ध्यान = प्रत्यक्ष करण / साक्षात्कार समाहि = हनहलिप्तता / अनासक्त अवस्था
  • 7.
    षट्कमि वणिन • िौहत •धौहत क े मुख्य चार भाग माने गए िैं । और आगे उनक े भागों क े भ हिभाग हकिे जाने से उनक क ु ि संख्या 13 िो जात िै ।
  • 8.
    धौहत क े चारप्रकार 1.अन्तिौहत 2.दन्त िौहत 3.हृद्धिौहत 4.मूलशोिन ।
  • 9.
    अन्तिौहत क े प्रकार 1.वातसारिौहत 2.वाररसार िौहत 3.अहिसार िौहत 4.बहिष्क ृ त िौहत ।
  • 10.
    दन्तिौहत क े प्रकार 2.दन्तमूलिौहत 3.हिह्वाशोिन िौहत • कणिरन्ध्र िौहत ( दोनों कानों से ) 5.कपालरन्ध्र िौहत ।
  • 11.
    हृद्धिौहत क े प्रकार 3.दण्डिौहत 4.वमन िौहत 5.वस्त्र िौहत ।
  • 12.
    मूलशोिन :- मूिर्ोधनधौहत क े अन्य कोई भाग नि ं हकए गए िैं । बस्ि :- बप्तस्त क े दो प्रकार िोते िैं – • िल बस्ि • स्थल बस्ि ।
  • 13.
    नेहत :- नेहतहििा क े दो भाग हकिे गए िैं 3.िलनेहत 4.सूत्रनेहत
  • 14.
    लौहलक :- िौहिकअथाित नौहि हििा क े त न भाग माने जाते िैं 4.मध्य नौहल 5.वाम नौहल 6.दहक्षण नौहल
  • 15.
    त्राटक :- त्राटकक े अन्य हिभाग नि ं हकिे गए िैं । िैसे इसक े त न भाग िोते िैं िेहकन िि अन्य िोहगिों क े द्वारा किे गए िैं
  • 16.
    कपालभाहत :- कपािभाहतक े त न भाग िोते िैं
  • 17.
  • 18.
    हित य अध्याय •दू सरे अध्याि में आसनों का िर्िन हकिा गिा िै । मिहषि घेरण्ड का मानना िै हक संसार में हजतने भ ज ि – जन्तु िैं, उतने ि आसन िोते िै । भगिान हर्ि ने चौरास िाख (8400000) आसन किे िैं, उनमें से उन्ोंने चौरास (84) को ि श्रेष्ठ माना िै । ििााँ पर मिहषि घेरण्ड किते िैं हक उन चौरास श्रेष्ठ आसनों में से भ बत्त स (32) आसन अहत हिहर्ष्ट िोते िैं । अतः घेरण्ड संहिता में क ु ि बत्त स आसनों का िर्िन हमिता िै । हजनक े नाम हनम्नहिप्तखत िैं
  • 19.
    • हसद्धासन, 2.पद्मासन, 3. भद्रासन, 4. मुक्तासन, 5. वज्रासन, 6. स्वस्िकासन, 7. हसंिासन, 8. गोमुखासन, 9. व रासन,10. िनुरासन, 11. मृतासन / शवासन, 12. गुप्तासन, 13. मत्स्यासन, 14. मत्स्येन्द्रासन, 15. गोरक्षासन, 16. पहिमोत्तानासन, 17. उत्कट आसन, 18. संकट आसन, 19. मयूरासन, 20. क ु क्क ु टासन, 21. क ू मािसन, 22. उत्तानक ू मािसन, 23. मण्डुकासन, 24. उत्तान मण्डुकासन, 25. वृक्षासन, 26. गरुड़ासन, 27. वृषासन, 28. शलभासन, 29. मकरासन, 30. उष्ट्रासन,
  • 20.
    तृत य अध्याय •त सरे अध्याि में िोग क मुद्राओं का िर्िन हकिा गिा िै । मुद्राओं का अभ्यास करने से र्र र में प्तस्थरता आत िै । घेरण्ड संहिता में क ु ि पच्च स (25) मुद्राओं का उल्लेख हमिता िै । इन पच्च स मुद्राओं क े नाम हनम्न िैं – 1.मिामुद्रा, 2. नभोमुद्रा, 3. उहियान बन्ध, 4. िालन्धर बन्ध, 5. मूलबन्ध, 6. मिाबंि, 7. मिाबेि मुद्रा, 8. खेचर मुद्रा, 9. हवपर तकरण मुद्रा, 10. योहन मुद्रा, 11. वज्रोल मुद्रा, 12. शस्क्तचाहलन मुद्रा, 13. तड़ाग मुद्रा, 14. माण्डुक मुद्रा, 15. शाम्भव मुद्रा, 16. पाहथिव िारणा, 17. आम्भस िारणा, 18. आिेय िारणा, 19. वायव य िारणा, 20. आकाश िारणा, 21. अहिन मुद्रा, 22. पाहशन मुद्रा, 23. काक मुद्रा, 24. मातङ्ग मुद्रा, 25. भुिहङ्गन मुद्रा ।
  • 21.
    चतुथि अध्याय • चौथेअध्याि में प्रत्यािार का िर्िन हकिा गिा िै । प्रत्यािार क े पािन से िमार इप्तििााँ अन्तमुिख िोत िै । साथ ि धैिि क िृप्ति िोत िै । जब साधक क इप्तििााँ बहिमुिख िोत िैं तो उससे साधना में हिघ्न उत्पन्न िोता िै । इसहिए साधक को धैिि ि संिम क प्राप्ति क े हिए प्रत्यािार का पािन करना चाहिए ।
  • 22.
    पंचम अध्याय • पााँचिेंअध्याि में मुख्य रूप से प्रार्ािाम क चचाि क गई िै । िेहकन प्रार्ािाम क चचाि से पििे आिार क े ऊपर हिर्ेष बि हदिा गिा िै । मुख्य रूप से त न प्रकार क े आिार क चचाि क गई िै । हजसमें आिार क त न श्रेहर्िााँ बताई िैं – • 1.हमतािार 2.ग्राह्य या हितकार आिार 3.अग्राह्य हनहषद्ध आिार ।
  • 23.
    नाड़ शोिन हक्रया:- घेरण्ड संहिता में भ प्रार्ािाम से पूिि नाड़ र्ोधन हििा क े अभ्यास क बात कि गई िै ।
  • 24.
    प्राणायाम चचाि • पााँचिेंअध्याि का मुख्य हिषि प्रार्ािाम ि िै । ििााँ पर भ प्रार्ािाम को क ु म्भक किा िै । इस ग्रन्थ में भ आठ क ु म्भकों अथाित प्रार्ािामों का िर्िन हकिा गिा िै । जो हनम्न िैं – 1.सहित ( सगभि ि हनगभि ) 2. सूयिभेद , 3. उज्जाय , 4. श तल , 5. भस्स्त्रका, 6. भ्रामर , 7. मूर्ाि, 8. क े वल ।
  • 25.
    षष्ठ अध्याय • छटेअध्याि में ध्यान क चचाि क गई िै । घेरण्ड संहिता में त न प्रकार क े ध्यान का उल्लेख हमिता िै – 1.स्थूल ध्यान, 2. ज्योहतध्यािन 3. सूक्ष्म ध्यान । • इनमें सबसे उत्तम ध्यान सूक्ष्म ध्यान को माना गिा िै
  • 26.
    सप्तम अध्याय • सातिेंअथाित अप्तन्तम अध्याि में समाहध क चचाि क गई िै । समाहध हचत्त क उत्क ृ ष्ट अथाित उत्तम अिस्था को किा गिा िै । समाहध से हनहिििता आत िै । जब िमारे हचत्त क सभ पदाथों क े प्रहत हििता समाि िो जात िै । तब िि िोग हसि िोता िै । घेरण्ड संहिता में समाहध क े छः (6) भेद किे गए िैं – 1.ध्यानयोग समाहि, 2. नादयोग समाहि, 3. रसानन्द योग समाहि, 4. लययोग समाहि, 5. भस्क्तयोग समाहि, 6. राियोग समाहि ।
  • 27.