अंतर्वस्तु विश्लेषण
[ Content Analysis]
द्वारा- डॉक्टर ममता उपाध्याय
एसोसिएट प्रोफ
े सर, राजनीति विज्ञान
क
ु मारी मायावती राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय
बादलपुर गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश
यह सामग्री विशेष रूप से शिक्षण और सीखने को बढ़ाने क
े शैक्षणिक उद्देश्यों क
े लिए है। आर्थिक / वाणिज्यिक अथवा
किसी अन्य उद्देश्य क
े लिए इसका उपयोग पूर्णत: प्रतिबंध है। सामग्री क
े उपयोगकर्ता इसे किसी और क
े साथ वितरित,
प्रसारित या साझा नहीं करेंगे और इसका उपयोग व्यक्तिगत ज्ञान की उन्नति क
े लिए ही करेंगे। इस ई - क
ं टेंट में जो
जानकारी की गई है वह प्रामाणिक है और मेरे ज्ञान क
े अनुसार सर्वोत्तम है।
उद्देश्य-
● सामाजिक- राजनीतिक अनुसंधान कार्य में अंतर्वस्तु विश्लेषण की तकनीक से परिचित कराना.
● अंतर्वस्तु विश्लेषण क
े विभिन्न प्रकारों की जानकारी
● शोध कार्य में अंतर्वस्तु विश्लेषण क
े लाभों का परिचय कराना
● अंतर्वस्तु विश्लेषण तकनीक की सीमाओं का ज्ञान
अंतर्वस्तु विश्लेषण शोध की एक तकनीक है, जिसका उद्देश्य प्राप्त तथ्यों में मौजूद शब्दों, धारणाओं
एवं वाक्यों की व्याख्या करते हुए किन्ही निश्चित निष्कर्षों तक पहुंचना होता है। अंतर्वस्तु विश्लेषण का
प्रयोग करते हुए एक शोधकर्ता तथ्य क
े रूप में संकलित विषयों,शब्दों , धारणाओं एवं सिद्धांतों क
े मध्य
संबंधों की व्याख्या कर सकता है। जैसे- एक शोधकर्ता किसी समाचार पत्र या पत्रिका में प्रकाशित लेख मे
व्यक्त किए गए तथ्यों की प्रामाणिकता की जांच उसी विषय पर क्षेत्र में उत्तर दाताओं से संपर्क स्थापित
करक
े प्राप्त किए गए तथ्यों से कर सकता है या किसी अन्य सूचना मे निहित सांस्कृ तिक -सामयिक
संदर्भ को लेते हुए तुलनात्मक रूप से उसकी व्याख्या कर सकता है।
किसी शोध कार्य में संकलित तथ्यों क
े स्रोत - साक्षात्कार, प्रश्नावली, क्षेत्र से प्राप्त लिखित
सामग्री, वार्तालाप, पुस्तक, निबंध, चर्चा परिचर्चा, समाचार पत्रों की सुर्खियां, भाषण, मीडिया से प्राप्त
सूचना या ऐतिहासिक प्रलेख हो सकते हैं। तथ्य क
े विश्लेषण हेतु शोधकर्ता इन सभी स्रोतों की सहायता
लेता है। विश्लेषण किए जाने क
े लिए यह आवश्यक है कि तथ्य सारणीबद्ध , वर्गीकृ त एवं संक
े त करण
से युक्त हो ।
परिभाषाएं-
होल्सटी [ 1968] क
े अनुसार , ‘’ऐसी कोई भी तकनीक जिसका प्रयोग सूचनाओं की व्यवस्थित एवं
वस्तुनिष्ठ व्याख्या क
े लिए किया जाता है, अंतर्वस्तु विश्लेषण कहलाता है। ‘’
एक अन्य परिभाषा क
े अनुसार ,’’अंतर्वस्तु विश्लेषण एक व्याख्यात्मक प्राकृ तिक दृष्टिकोण है जो
अपनी प्रकृ ति से अवलोकनात्मक एवं कथनात्मक है तथा प्रयोगात्मक तत्वों से कम संबंधित है जो
सामान्यतया वैज्ञानिक अनुसंधान से संबंधित होता है। ‘’
बेरेलसों क
े अनुसार, ‘’ अंतर्वस्तु विश्लेषण एक शोध तकनीक है जो विभिन्न प्रकार क
े संचार में प्रदर्शित
तथ्यों का व्यवस्थित, वस्तुनिष्ठ एवं परिमाणात्मक वर्णन प्रस्तुत करता है। ‘’
❖ अंतर्वस्तु विश्लेषण तकनीक क
े प्रयोग का उद्देश्य-
● किसी व्यक्ति समूह या संस्था की प्रवृत्तियों ,व्यवहार एवं संचार में व्यक्त भावों की पहचान
करना।
● किसी व्यक्ति या व्यक्ति- समूह की मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक दशाओं को सुनिश्चित करना।
● राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संचार माध्यमों में व्यक्त तथ्यों की विभिन्नता को प्रकाश मे लाना।
● विषय वस्तु में दिखाई देने वाली प्रवृत्तियों को सामने लाना।
● साक्षात्कार या सर्वेक्षण पद्धति में सुधार करने क
े उद्देश्य से पूर्व परीक्षण करना।
● निदर्शन क
े रूप में चयनित व्यक्ति समूह से लिए गए साक्षात्कार या खुली प्रश्नावली से एकत्रित
किए गए तथ्यों का विश्लेषण करना
❖ अंतर्वस्तु विश्लेषण क
े प्रकार-
अंतर्वस्तु विश्लेषण क
े सामान्य रूप से दो प्रकार होते हैं, जो इस प्रकार हैं-
1 . अवधारणात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण-[ Conceptual Analysis]
अवधारणात्मक विश्लेषण क
े अंतर्गत किसी शब्द या वाक्य में निहित अवधारणाओं की मौजूदगी और
उसकी बारंबारता को ढूंढने का प्रयत्न किया जाता है। सामान्य रूप से अंतर्वस्तु विश्लेषण का यही प्रकार
प्रचलित है। इसक
े अंतर्गत शोधकर्ता अध्ययन विषय में व्यक्त धारणा क
े आधार पर प्राप्त सामग्री में यह
देखने का प्रयास करता है कि वह धारणा क
े कितना अनुरूप है या कितना प्रतिक
ू ल है । यह धारणाएं
प्रत्यक्ष भी हो सकती है और निहित भी ।
धारणात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण क
े लिए आवश्यक है कि पहले शोध से संबंधित प्रश्नों की
पहचान की जाए ,तत्पश्चात निदर्शन का चयन किया जाए और निदर्शन से प्राप्त सूचनाओं को क
ु छ
निश्चित वर्गों में वर्गीकृ त करक
े सारणीबद्ध किया जाए । वर्गीकरण और सारणीयन क
े माध्यम से
अनावश्यक सूचनाओं को बाहर निकाल दिया जाता है और उपयोगी सूचनाओं को ही विश्लेषण हेतु रखा
जाता है। सामान्य रूप से धारणात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण क
े लिए निम्नांकित चरणों का प्रयोग किया
जाता है-
1. विश्लेषण क
े स्तर का निश्चय- शब्द, शब्द भाव, वाक्य, वाक्य समूह या धारणाओं क
े रूप में।
2. संक
े तीकरण हेतु धारणाओं की संख्या निश्चित करना एवं उन्हें वर्गीकृ त करना। ऐसा करते समय
विभिन्न वर्गों में लचीलापन रखना।
3. यह निश्चित करना कि तथ्यों में किस धारणा की मौजूदगी है और उसकी पुनरावृत्ति कितनी बार हुई
है।
4. यह निश्चित करना कि तथ्यों में व्यक्त विभिन्न धारणाओं में क्या भिन्नता है। समान भाव वाले
शब्दों को एक ही श्रेणी में वर्गीकृ त किया जाए या अलग-अलग, इसका निश्चय करना। जैसे - ‘ गंभीर’
एवं ‘गंभीरता’ इन दो शब्दों को एक ही श्रेणी में रखा जाए या अलग अलग, इसका निश्चय करना।
5 . वाक्यों का संक
े त करण एवं अनुवाद [Codification] करने हेतु नियमों का विकास करना। इसक
े
माध्यम से शोधकर्ता तथ्यों को व्यवस्थित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि इस वाक्य या शब्द
का क्या अर्थ विश्लेषण में लिया जाएगा। उदाहरणार्थ निम्नांकित संक
े टकरण को देख सकते हैं ।
https://www.researchgate.net/profile/Gernot_Grabher/publication/258171999/figur
6. अप्रासंगिक सूचनाओं क
े विषय में क्या कदम उठाया जाएगा, इसका निश्चय करना। क्या ऐसी
सूचनाओं को नजरअंदाज कर दिया जाए [ जैसे- अंग्रेजी क
े शब्द the एवं and जैसे शब्द ] या संक
े त
करण में उनका प्रयोग किया जाए।
7. वाक्य एवं शब्दों का संक
े त करण करना। यह कार्य हस्त लिखित रूप में भी हो सकता है और क
ं प्यूटर
सॉफ्टवेयर क
े माध्यम से भी हो सकता है। क
ं प्यूटर का प्रयोग करते समय शोधकर्ता श्रेणियों को क
ं प्यूटर
में फीड कर देता है और ऑटोमेटिक रूप से कोडिंग हो जाती है। क
ं प्यूटर से कार्य शीघ्रता पूर्वक एवं
अधिक क
ु शलता क
े साथ होता है । हाथ से संक
े तीकरण करने पर शोधकर्ता वाक्य या वाक्यांश में निहित
व्याकरण संबंधी गलतियों को आसानी से ढूंढ सकता है।
8. परिणामों का विश्लेषण करना, जिसक
े अंतर्गत निष्कर्षों एवं समान्यीकरणों तक पहुंचा जाता है।
2. संबंधात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण [ Relational content analysis]
संबंधात्मक विश्लेषण क
े अंतर्गत भी प्रारंभ में एक धारणा को परीक्षण हेतु चुना जाता है एवं विषय
सामग्री में मौजूद विभिन्न धारणाओं क
े मध्य अंतर संबंधों को ढूंढा जाता है। संबंधात्मक अंतर्वस्तु
विश्लेषण की तीन उप श्रेणियां हैं-
अ . इफ
े क्ट एक्सट्रैक्शन ,जिसक
े अंतर्गत किसी वाक्यांश या शब्द में प्रदर्शित धारणाओं का भावनात्मक
आधार पर मूल्यांकन करना। इस पद्धति की प्रमुख चुनौती यह है कि भावनाएं समय, जनसंख्या एवं
स्थान क
े अनुसार भिन्नता युक्त होती है।
ब . प्रॉक्सिमिटी एनालिसिस- जिसमें शब्दों या वाक्यांशों मे साथ -साथ प्रदर्शित दो या तीन धारणाओं
का मूल्यांकन किया जाता है । इस मूल्यांकन क
े अंतर्गत तथ्यों में अंतर्निहित धारणाओं का एक समूह
बन जाता है जिसक
े आधार पर तथ्य क
े संपूर्ण अर्थ को स्पष्ट किया जाता है।
स . कॉग्निटिव मैपिंग -जिसक
े माध्यम से संपूर्ण तथ्यों का समग्र रूप से अर्थ स्पष्ट करने वाले मॉडल
का निर्माण किया जाता है। इस मॉडल क
े माध्यम से विभिन्न धारणाओं क
े मध्य संबंधों को स्पष्ट
किया जाता है।
❖ अंतर्वस्तु विश्लेषण की विश्वसनीयता एवं वैधता
शोधकर्ताओं की मानवीय प्रकृ ति क
े कारण तथ्यों की संक
े तीकरण एवं विश्लेषण संबंधित त्रुटियों को
पूर्णतः समाप्त नहीं किया जा सकता, हालांकि उन्हें कम किया जा सकता है। निम्नांकित 3 का
कसौटियों क
े आधार पर अंतर्वस्तु विश्लेषण की विश्वसनीयता का परीक्षण किया जा सकता है।
1. संक
े तकरण में स्थिरता- यदि संबंधित तथ्य को अन्य शोधकर्ताओं द्वारा एक समय क
े अंतर्गत पुनः
संक
े त करण किया जाए एवं दोनों क
े संक
े त करण में एक निरंतरता देखने को मिलती है, तो वह विश्लेषण
विश्वसनीय माना जाता है।
2 . पुनः उत्पादकता- जिसका तात्पर्य है कि संक
े तीकरण करने वाले शोधकर्ताओं की प्रवृत्ति समान
श्रेणियों का निर्धारण करने की हो ।
3 . सत्यता- जिसका तात्पर्य है वर्गीकृ त श्रेणियां किस सीमा तक गणनात्मक मानकों क
े अनुरूप हैं।
❖ अंतर्वस्तु विश्लेषण क
े लाभ
● अंतर्वस्तु विश्लेषण एक व्यवस्थित विधि है जिसमें शोधकर्ता क्रमबद्ध और व्यवस्थित ढंग से
विषय का विश्लेषण करता है। इस विधि का प्रयोग करने से प्राप्त तथ्य सार्थक और उपयोगी
बनते हैं।
● इस विधि से गुणात्मक एवं मात्रात्मक इन दोनों प्रकार क
े तथ्यों का विश्लेषण संभव हो पाता है।
● अंतर्वस्तु विश्लेषण की तकनीक तथ्यों को विश्वसनीय और वैध बनाती है।
● विषय का गहराई से विश्लेषण करने क
े कारण इस विधि से समय क
े साथ- साथ ऐतिहासिक एवं
सांस्कृ तिक अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है।
● शोध की अन्य पद्धतियों जैसे -साक्षात्कार, अवलोकन एवं ऐतिहासिक लेखों क
े साथ संबद्ध
करने से यह तकनीक अत्यधिक उपयोगी हो जाती है।
● अंतर्वस्तु विश्लेषण आसानी से समझ में आने योग्य पद्धति है । यह कम खर्चीली भी है ।
● इस प्रविधि की सहायता से सामाजिक- राजनीतिक जीवन की जटिल समस्याओं का अध्ययन
और विश्लेषण किया जा सकता है।
● इस प्रविधि क
े माध्यम से विभिन्न संस्कृ तियों का तुलनात्मक अध्ययन और विश्लेषण किया
जा सकता है।
● युद्ध काल और उद्योग क
े क्षेत्र में प्रचार की स्थिति का विश्लेषण करने क
े लिए इस प्रविधि का
उपयोग किया जा सकता है और यह जाना जा सकता है कि विरोधी पक्ष क
े द्वारा प्रचार क
े लिए
कौन सी प्रविधियों का उपयोग किया जा रहा है।
● इस प्रविधि की सहायता से व्यक्तियों और समूहों की मनोवैज्ञानिक स्थिति को ज्ञात किया जा
सकता है।
दोष-
● अंतर्वस्तु विश्लेषण की तकनीक मे भी अन्य प्रविधियों क
े समान ही शोधकर्ता क
े व्यक्तिगत
विचारों, भावनाओं आदि का प्रभाव पड़ सकता है जिसक
े कारण परिणाम पक्षपातपूर्ण हो सकते
हैं।
● शोधकर्ता द्वारा एकत्रित की गई त्रुटिपूर्ण सामग्री का विश्लेषण निष्कर्षों को दोषपूर्ण बना सकता
है।
● इस विधि का प्रयोग क
े वल प्रलेखों और संवाद से प्राप्त सामग्री तक सीमित होने क
े कारण
सीमित रूप में किया जा सकता है।
● इस तकनीक का प्रयोग करने क
े लिए शोधकर्ता क
े समुचित प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
● इस विधि का प्रयोग करते समय शोधकर्ता क
े सामने प्रतिनिधित्वपूर्ण निदर्शन क
े चयन की
समस्या रहती है। प्रमाणित लेख और संचार सामग्री कहां से और क
ै से प्राप्त की जाए जो
प्रामाणिक हो और जिस क
े विश्लेषण से विश्वसनीय परिणाम प्राप्त किए जा सक
ें , इस विषय में
शोधकर्ता भ्रमित रहता है।
मुख्य शब्द-
अंतर्वस्तु, विश्लेषण, संक
े तीकरण, वर्गीकरण, सारणीयन, प्रलेख, विश्वसनीय
REFERENCES AND SUGG ESTED READINGS
● http//www.publichealth.columbia.edu
● http//www.sciencedirect.com
● http//www.css.ac.in
● Laxmi Narayan Kohli,Research Methodology, Y.k.,Publishers, Agra
● C.R.Kothari,Research Methodology; Methods And Techniques
प्रश्न-
निबंधात्मक-
● अंतर्वस्तु विश्लेषण को परिभाषित कीजिए तथा इसक
े प्रकारों की विवेचना कीजिए।
● अंतर्वस्तु विश्लेषण तकनीक क
े लाभ एवं सीमाओं का उल्लेख कीजिए।
● अवधारणात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण क
े प्रमुख चरणों की विवेचना कीजिए। अंतर्वस्तु विश्लेषण
सामाजिक राजनीतिक अनुसंधान में किन उद्देश्यों से प्रेरित होता है।
वस्तुनिष्ठ-
1. अंतर्वस्तु विश्लेषण क
े विषय में निम्नांकित में से कौन सा कथन सत्य है।
[ अ ] इस तकनीक का प्रयोग प्रयोगात्मक अनुसंधान में किया जाता है।
[ ब ] इसक
े माध्यम से तथ्यों को सार्थकता प्रदान की जाती है।
[ स ] इस तकनीक का प्रयोग गुणात्मक तथ्यों को विश्लेषित करने क
े लिए नहीं किया जा सकता है।
[ द ] इस तकनीक क
े माध्यम से मात्रात्मक तथ्यों को ही विश्लेषित किया जा सकता है।
2. अंतर्वस्तु विश्लेषण का उद्देश्य निम्नांकित में से क्या नहीं है।
[ अ ] किसी व्यक्ति समूह या संस्था क
े भावों एवं आंतरिक मनोविज्ञान को पहचानना
[ ब ] साक्षात्कार या सर्वेक्षण पद्धति में सुधार करने क
े उद्देश्य से पूर्व परीक्षण करना।
[ स ] तथ्यों की विश्वसनीयता ज्ञात करना।
[ द ] प्राप्त तथ्यों क
े आधार पर विभिन्न संस्कृ तियों का तुलनात्मक विवेचन करना।
3. अंतर्वस्तु विश्लेषण से पूर्व तथ्यों को किस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है ताकि सार्थक निष्कर्षों तक
पहुंचा जा सक
े ।
[ अ ] सारणीयन
[ ब ] वर्गीकरण
[ स ] संक
े त करण
[ द ] उपर्युक्त सभी
4 . अंतर्वस्तु विश्लेषण की सीमाएं क्या है।
[ अ ] त्रुटिपूर्ण तथ्यों क
े विश्लेषण से गलत निष्कर्षों की संभावना।
[ ब ] अध्ययन कर्ता का पक्षपात और पूर्वाग्रह
[ स ] प्रामाणिक स्रोतों से सामग्री प्राप्त करने की समस्या
[ द ] उपर्युक्त सभी
5. अंतर्वस्तु विश्लेषण क
े लिए पूर्व आवश्यकता क्या है।
[ अ ] तथ्यों का बड़ी मात्रा में संग्रह
[ ब ] प्रशिक्षित शोधकर्ता
[ स ] तथ्यों की विश्वसनीयता का पूर्व परीक्षण
[ द ] उपर्युक्त सभी
6. निम्नलिखित में से क्या अंतर्वस्तु विश्लेषण का एक प्रकार नहीं है।
[ अ ] अवधारणात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण
[ ब ] संबंधात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण
[ स ] प्रक्रियात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण
[ द ] उपर्युक्त सभी
7 . शब्दों एवं वाक्य में निहित अवधारणाओं क
े आधार पर किए जाने वाले अंतर्वस्तु विश्लेषण को किस
श्रेणी में रखते हैं।
[ अ ] संबंधात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण
[ ब ] अवधारणात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण
[ स ] वाक्यांश आधारित विश्लेषण
[ द ] शब्दांश आधारित विश्लेषण
उत्तर- 1. ब 2. स 3.द 4. द 5.ब 6. स 7. ब

Content analysis

  • 1.
    अंतर्वस्तु विश्लेषण [ ContentAnalysis] द्वारा- डॉक्टर ममता उपाध्याय एसोसिएट प्रोफ े सर, राजनीति विज्ञान क ु मारी मायावती राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय बादलपुर गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश यह सामग्री विशेष रूप से शिक्षण और सीखने को बढ़ाने क े शैक्षणिक उद्देश्यों क े लिए है। आर्थिक / वाणिज्यिक अथवा किसी अन्य उद्देश्य क े लिए इसका उपयोग पूर्णत: प्रतिबंध है। सामग्री क े उपयोगकर्ता इसे किसी और क े साथ वितरित, प्रसारित या साझा नहीं करेंगे और इसका उपयोग व्यक्तिगत ज्ञान की उन्नति क े लिए ही करेंगे। इस ई - क ं टेंट में जो जानकारी की गई है वह प्रामाणिक है और मेरे ज्ञान क े अनुसार सर्वोत्तम है। उद्देश्य- ● सामाजिक- राजनीतिक अनुसंधान कार्य में अंतर्वस्तु विश्लेषण की तकनीक से परिचित कराना. ● अंतर्वस्तु विश्लेषण क े विभिन्न प्रकारों की जानकारी ● शोध कार्य में अंतर्वस्तु विश्लेषण क े लाभों का परिचय कराना ● अंतर्वस्तु विश्लेषण तकनीक की सीमाओं का ज्ञान अंतर्वस्तु विश्लेषण शोध की एक तकनीक है, जिसका उद्देश्य प्राप्त तथ्यों में मौजूद शब्दों, धारणाओं एवं वाक्यों की व्याख्या करते हुए किन्ही निश्चित निष्कर्षों तक पहुंचना होता है। अंतर्वस्तु विश्लेषण का प्रयोग करते हुए एक शोधकर्ता तथ्य क े रूप में संकलित विषयों,शब्दों , धारणाओं एवं सिद्धांतों क े मध्य संबंधों की व्याख्या कर सकता है। जैसे- एक शोधकर्ता किसी समाचार पत्र या पत्रिका में प्रकाशित लेख मे व्यक्त किए गए तथ्यों की प्रामाणिकता की जांच उसी विषय पर क्षेत्र में उत्तर दाताओं से संपर्क स्थापित करक े प्राप्त किए गए तथ्यों से कर सकता है या किसी अन्य सूचना मे निहित सांस्कृ तिक -सामयिक संदर्भ को लेते हुए तुलनात्मक रूप से उसकी व्याख्या कर सकता है। किसी शोध कार्य में संकलित तथ्यों क े स्रोत - साक्षात्कार, प्रश्नावली, क्षेत्र से प्राप्त लिखित सामग्री, वार्तालाप, पुस्तक, निबंध, चर्चा परिचर्चा, समाचार पत्रों की सुर्खियां, भाषण, मीडिया से प्राप्त सूचना या ऐतिहासिक प्रलेख हो सकते हैं। तथ्य क े विश्लेषण हेतु शोधकर्ता इन सभी स्रोतों की सहायता लेता है। विश्लेषण किए जाने क े लिए यह आवश्यक है कि तथ्य सारणीबद्ध , वर्गीकृ त एवं संक े त करण से युक्त हो ।
  • 2.
    परिभाषाएं- होल्सटी [ 1968]क े अनुसार , ‘’ऐसी कोई भी तकनीक जिसका प्रयोग सूचनाओं की व्यवस्थित एवं वस्तुनिष्ठ व्याख्या क े लिए किया जाता है, अंतर्वस्तु विश्लेषण कहलाता है। ‘’ एक अन्य परिभाषा क े अनुसार ,’’अंतर्वस्तु विश्लेषण एक व्याख्यात्मक प्राकृ तिक दृष्टिकोण है जो अपनी प्रकृ ति से अवलोकनात्मक एवं कथनात्मक है तथा प्रयोगात्मक तत्वों से कम संबंधित है जो सामान्यतया वैज्ञानिक अनुसंधान से संबंधित होता है। ‘’ बेरेलसों क े अनुसार, ‘’ अंतर्वस्तु विश्लेषण एक शोध तकनीक है जो विभिन्न प्रकार क े संचार में प्रदर्शित तथ्यों का व्यवस्थित, वस्तुनिष्ठ एवं परिमाणात्मक वर्णन प्रस्तुत करता है। ‘’ ❖ अंतर्वस्तु विश्लेषण तकनीक क े प्रयोग का उद्देश्य- ● किसी व्यक्ति समूह या संस्था की प्रवृत्तियों ,व्यवहार एवं संचार में व्यक्त भावों की पहचान करना। ● किसी व्यक्ति या व्यक्ति- समूह की मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक दशाओं को सुनिश्चित करना। ● राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संचार माध्यमों में व्यक्त तथ्यों की विभिन्नता को प्रकाश मे लाना। ● विषय वस्तु में दिखाई देने वाली प्रवृत्तियों को सामने लाना। ● साक्षात्कार या सर्वेक्षण पद्धति में सुधार करने क े उद्देश्य से पूर्व परीक्षण करना। ● निदर्शन क े रूप में चयनित व्यक्ति समूह से लिए गए साक्षात्कार या खुली प्रश्नावली से एकत्रित किए गए तथ्यों का विश्लेषण करना ❖ अंतर्वस्तु विश्लेषण क े प्रकार- अंतर्वस्तु विश्लेषण क े सामान्य रूप से दो प्रकार होते हैं, जो इस प्रकार हैं- 1 . अवधारणात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण-[ Conceptual Analysis] अवधारणात्मक विश्लेषण क े अंतर्गत किसी शब्द या वाक्य में निहित अवधारणाओं की मौजूदगी और उसकी बारंबारता को ढूंढने का प्रयत्न किया जाता है। सामान्य रूप से अंतर्वस्तु विश्लेषण का यही प्रकार
  • 3.
    प्रचलित है। इसक ेअंतर्गत शोधकर्ता अध्ययन विषय में व्यक्त धारणा क े आधार पर प्राप्त सामग्री में यह देखने का प्रयास करता है कि वह धारणा क े कितना अनुरूप है या कितना प्रतिक ू ल है । यह धारणाएं प्रत्यक्ष भी हो सकती है और निहित भी । धारणात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण क े लिए आवश्यक है कि पहले शोध से संबंधित प्रश्नों की पहचान की जाए ,तत्पश्चात निदर्शन का चयन किया जाए और निदर्शन से प्राप्त सूचनाओं को क ु छ निश्चित वर्गों में वर्गीकृ त करक े सारणीबद्ध किया जाए । वर्गीकरण और सारणीयन क े माध्यम से अनावश्यक सूचनाओं को बाहर निकाल दिया जाता है और उपयोगी सूचनाओं को ही विश्लेषण हेतु रखा जाता है। सामान्य रूप से धारणात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण क े लिए निम्नांकित चरणों का प्रयोग किया जाता है- 1. विश्लेषण क े स्तर का निश्चय- शब्द, शब्द भाव, वाक्य, वाक्य समूह या धारणाओं क े रूप में। 2. संक े तीकरण हेतु धारणाओं की संख्या निश्चित करना एवं उन्हें वर्गीकृ त करना। ऐसा करते समय विभिन्न वर्गों में लचीलापन रखना। 3. यह निश्चित करना कि तथ्यों में किस धारणा की मौजूदगी है और उसकी पुनरावृत्ति कितनी बार हुई है। 4. यह निश्चित करना कि तथ्यों में व्यक्त विभिन्न धारणाओं में क्या भिन्नता है। समान भाव वाले शब्दों को एक ही श्रेणी में वर्गीकृ त किया जाए या अलग-अलग, इसका निश्चय करना। जैसे - ‘ गंभीर’ एवं ‘गंभीरता’ इन दो शब्दों को एक ही श्रेणी में रखा जाए या अलग अलग, इसका निश्चय करना। 5 . वाक्यों का संक े त करण एवं अनुवाद [Codification] करने हेतु नियमों का विकास करना। इसक े माध्यम से शोधकर्ता तथ्यों को व्यवस्थित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि इस वाक्य या शब्द का क्या अर्थ विश्लेषण में लिया जाएगा। उदाहरणार्थ निम्नांकित संक े टकरण को देख सकते हैं ।
  • 4.
    https://www.researchgate.net/profile/Gernot_Grabher/publication/258171999/figur 6. अप्रासंगिक सूचनाओंक े विषय में क्या कदम उठाया जाएगा, इसका निश्चय करना। क्या ऐसी सूचनाओं को नजरअंदाज कर दिया जाए [ जैसे- अंग्रेजी क े शब्द the एवं and जैसे शब्द ] या संक े त करण में उनका प्रयोग किया जाए। 7. वाक्य एवं शब्दों का संक े त करण करना। यह कार्य हस्त लिखित रूप में भी हो सकता है और क ं प्यूटर सॉफ्टवेयर क े माध्यम से भी हो सकता है। क ं प्यूटर का प्रयोग करते समय शोधकर्ता श्रेणियों को क ं प्यूटर में फीड कर देता है और ऑटोमेटिक रूप से कोडिंग हो जाती है। क ं प्यूटर से कार्य शीघ्रता पूर्वक एवं अधिक क ु शलता क े साथ होता है । हाथ से संक े तीकरण करने पर शोधकर्ता वाक्य या वाक्यांश में निहित व्याकरण संबंधी गलतियों को आसानी से ढूंढ सकता है। 8. परिणामों का विश्लेषण करना, जिसक े अंतर्गत निष्कर्षों एवं समान्यीकरणों तक पहुंचा जाता है। 2. संबंधात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण [ Relational content analysis] संबंधात्मक विश्लेषण क े अंतर्गत भी प्रारंभ में एक धारणा को परीक्षण हेतु चुना जाता है एवं विषय सामग्री में मौजूद विभिन्न धारणाओं क े मध्य अंतर संबंधों को ढूंढा जाता है। संबंधात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण की तीन उप श्रेणियां हैं- अ . इफ े क्ट एक्सट्रैक्शन ,जिसक े अंतर्गत किसी वाक्यांश या शब्द में प्रदर्शित धारणाओं का भावनात्मक आधार पर मूल्यांकन करना। इस पद्धति की प्रमुख चुनौती यह है कि भावनाएं समय, जनसंख्या एवं स्थान क े अनुसार भिन्नता युक्त होती है।
  • 5.
    ब . प्रॉक्सिमिटीएनालिसिस- जिसमें शब्दों या वाक्यांशों मे साथ -साथ प्रदर्शित दो या तीन धारणाओं का मूल्यांकन किया जाता है । इस मूल्यांकन क े अंतर्गत तथ्यों में अंतर्निहित धारणाओं का एक समूह बन जाता है जिसक े आधार पर तथ्य क े संपूर्ण अर्थ को स्पष्ट किया जाता है। स . कॉग्निटिव मैपिंग -जिसक े माध्यम से संपूर्ण तथ्यों का समग्र रूप से अर्थ स्पष्ट करने वाले मॉडल का निर्माण किया जाता है। इस मॉडल क े माध्यम से विभिन्न धारणाओं क े मध्य संबंधों को स्पष्ट किया जाता है। ❖ अंतर्वस्तु विश्लेषण की विश्वसनीयता एवं वैधता शोधकर्ताओं की मानवीय प्रकृ ति क े कारण तथ्यों की संक े तीकरण एवं विश्लेषण संबंधित त्रुटियों को पूर्णतः समाप्त नहीं किया जा सकता, हालांकि उन्हें कम किया जा सकता है। निम्नांकित 3 का कसौटियों क े आधार पर अंतर्वस्तु विश्लेषण की विश्वसनीयता का परीक्षण किया जा सकता है। 1. संक े तकरण में स्थिरता- यदि संबंधित तथ्य को अन्य शोधकर्ताओं द्वारा एक समय क े अंतर्गत पुनः संक े त करण किया जाए एवं दोनों क े संक े त करण में एक निरंतरता देखने को मिलती है, तो वह विश्लेषण विश्वसनीय माना जाता है। 2 . पुनः उत्पादकता- जिसका तात्पर्य है कि संक े तीकरण करने वाले शोधकर्ताओं की प्रवृत्ति समान श्रेणियों का निर्धारण करने की हो । 3 . सत्यता- जिसका तात्पर्य है वर्गीकृ त श्रेणियां किस सीमा तक गणनात्मक मानकों क े अनुरूप हैं। ❖ अंतर्वस्तु विश्लेषण क े लाभ ● अंतर्वस्तु विश्लेषण एक व्यवस्थित विधि है जिसमें शोधकर्ता क्रमबद्ध और व्यवस्थित ढंग से विषय का विश्लेषण करता है। इस विधि का प्रयोग करने से प्राप्त तथ्य सार्थक और उपयोगी बनते हैं। ● इस विधि से गुणात्मक एवं मात्रात्मक इन दोनों प्रकार क े तथ्यों का विश्लेषण संभव हो पाता है। ● अंतर्वस्तु विश्लेषण की तकनीक तथ्यों को विश्वसनीय और वैध बनाती है। ● विषय का गहराई से विश्लेषण करने क े कारण इस विधि से समय क े साथ- साथ ऐतिहासिक एवं सांस्कृ तिक अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है। ● शोध की अन्य पद्धतियों जैसे -साक्षात्कार, अवलोकन एवं ऐतिहासिक लेखों क े साथ संबद्ध करने से यह तकनीक अत्यधिक उपयोगी हो जाती है। ● अंतर्वस्तु विश्लेषण आसानी से समझ में आने योग्य पद्धति है । यह कम खर्चीली भी है ।
  • 6.
    ● इस प्रविधिकी सहायता से सामाजिक- राजनीतिक जीवन की जटिल समस्याओं का अध्ययन और विश्लेषण किया जा सकता है। ● इस प्रविधि क े माध्यम से विभिन्न संस्कृ तियों का तुलनात्मक अध्ययन और विश्लेषण किया जा सकता है। ● युद्ध काल और उद्योग क े क्षेत्र में प्रचार की स्थिति का विश्लेषण करने क े लिए इस प्रविधि का उपयोग किया जा सकता है और यह जाना जा सकता है कि विरोधी पक्ष क े द्वारा प्रचार क े लिए कौन सी प्रविधियों का उपयोग किया जा रहा है। ● इस प्रविधि की सहायता से व्यक्तियों और समूहों की मनोवैज्ञानिक स्थिति को ज्ञात किया जा सकता है। दोष- ● अंतर्वस्तु विश्लेषण की तकनीक मे भी अन्य प्रविधियों क े समान ही शोधकर्ता क े व्यक्तिगत विचारों, भावनाओं आदि का प्रभाव पड़ सकता है जिसक े कारण परिणाम पक्षपातपूर्ण हो सकते हैं। ● शोधकर्ता द्वारा एकत्रित की गई त्रुटिपूर्ण सामग्री का विश्लेषण निष्कर्षों को दोषपूर्ण बना सकता है। ● इस विधि का प्रयोग क े वल प्रलेखों और संवाद से प्राप्त सामग्री तक सीमित होने क े कारण सीमित रूप में किया जा सकता है। ● इस तकनीक का प्रयोग करने क े लिए शोधकर्ता क े समुचित प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। ● इस विधि का प्रयोग करते समय शोधकर्ता क े सामने प्रतिनिधित्वपूर्ण निदर्शन क े चयन की समस्या रहती है। प्रमाणित लेख और संचार सामग्री कहां से और क ै से प्राप्त की जाए जो प्रामाणिक हो और जिस क े विश्लेषण से विश्वसनीय परिणाम प्राप्त किए जा सक ें , इस विषय में शोधकर्ता भ्रमित रहता है। मुख्य शब्द- अंतर्वस्तु, विश्लेषण, संक े तीकरण, वर्गीकरण, सारणीयन, प्रलेख, विश्वसनीय REFERENCES AND SUGG ESTED READINGS ● http//www.publichealth.columbia.edu ● http//www.sciencedirect.com
  • 7.
    ● http//www.css.ac.in ● LaxmiNarayan Kohli,Research Methodology, Y.k.,Publishers, Agra ● C.R.Kothari,Research Methodology; Methods And Techniques प्रश्न- निबंधात्मक- ● अंतर्वस्तु विश्लेषण को परिभाषित कीजिए तथा इसक े प्रकारों की विवेचना कीजिए। ● अंतर्वस्तु विश्लेषण तकनीक क े लाभ एवं सीमाओं का उल्लेख कीजिए। ● अवधारणात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण क े प्रमुख चरणों की विवेचना कीजिए। अंतर्वस्तु विश्लेषण सामाजिक राजनीतिक अनुसंधान में किन उद्देश्यों से प्रेरित होता है। वस्तुनिष्ठ- 1. अंतर्वस्तु विश्लेषण क े विषय में निम्नांकित में से कौन सा कथन सत्य है। [ अ ] इस तकनीक का प्रयोग प्रयोगात्मक अनुसंधान में किया जाता है। [ ब ] इसक े माध्यम से तथ्यों को सार्थकता प्रदान की जाती है। [ स ] इस तकनीक का प्रयोग गुणात्मक तथ्यों को विश्लेषित करने क े लिए नहीं किया जा सकता है। [ द ] इस तकनीक क े माध्यम से मात्रात्मक तथ्यों को ही विश्लेषित किया जा सकता है। 2. अंतर्वस्तु विश्लेषण का उद्देश्य निम्नांकित में से क्या नहीं है। [ अ ] किसी व्यक्ति समूह या संस्था क े भावों एवं आंतरिक मनोविज्ञान को पहचानना [ ब ] साक्षात्कार या सर्वेक्षण पद्धति में सुधार करने क े उद्देश्य से पूर्व परीक्षण करना। [ स ] तथ्यों की विश्वसनीयता ज्ञात करना। [ द ] प्राप्त तथ्यों क े आधार पर विभिन्न संस्कृ तियों का तुलनात्मक विवेचन करना। 3. अंतर्वस्तु विश्लेषण से पूर्व तथ्यों को किस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है ताकि सार्थक निष्कर्षों तक पहुंचा जा सक े । [ अ ] सारणीयन [ ब ] वर्गीकरण [ स ] संक े त करण [ द ] उपर्युक्त सभी 4 . अंतर्वस्तु विश्लेषण की सीमाएं क्या है। [ अ ] त्रुटिपूर्ण तथ्यों क े विश्लेषण से गलत निष्कर्षों की संभावना। [ ब ] अध्ययन कर्ता का पक्षपात और पूर्वाग्रह
  • 8.
    [ स ]प्रामाणिक स्रोतों से सामग्री प्राप्त करने की समस्या [ द ] उपर्युक्त सभी 5. अंतर्वस्तु विश्लेषण क े लिए पूर्व आवश्यकता क्या है। [ अ ] तथ्यों का बड़ी मात्रा में संग्रह [ ब ] प्रशिक्षित शोधकर्ता [ स ] तथ्यों की विश्वसनीयता का पूर्व परीक्षण [ द ] उपर्युक्त सभी 6. निम्नलिखित में से क्या अंतर्वस्तु विश्लेषण का एक प्रकार नहीं है। [ अ ] अवधारणात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण [ ब ] संबंधात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण [ स ] प्रक्रियात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण [ द ] उपर्युक्त सभी 7 . शब्दों एवं वाक्य में निहित अवधारणाओं क े आधार पर किए जाने वाले अंतर्वस्तु विश्लेषण को किस श्रेणी में रखते हैं। [ अ ] संबंधात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण [ ब ] अवधारणात्मक अंतर्वस्तु विश्लेषण [ स ] वाक्यांश आधारित विश्लेषण [ द ] शब्दांश आधारित विश्लेषण उत्तर- 1. ब 2. स 3.द 4. द 5.ब 6. स 7. ब