पद
परिचय
कें द्रीय विद्यालय , गोमतीनगर , लखनऊ
कक्षा – 10 ,बी
द्िारा
विषय – ह िंदी
 १.म ीप स िं ( मू नेता)
 २.अपराजिता स िं ( मू
उपनेता)
 ३.विद्या ागर पन्त
 ४.लततका स िं
 ५.देशराि
 ६.असमतेश यादि
पद-परिचय- वाक्यगत शब्दों के रूप औि उनका
पािस्परिक संबंध बताने में जिस प्रक्रिया की
आवश्यकता पड़ती है वह पद-परिचय या
शब्दबोध कहलाता है।
पररभाषा-िाक्यगत प्रत्येक पद (शब्द) का
व्याकरण की दृजटि े पूणण पररचय देना ी
पद-पररचय क लाता ै।
* मेरा नाम क्षक्षतति ै।
* मैं रायगिंि में र ता ूूँ।
* मैं शारदा विद्या मिंहदर में पढ़ता ूूँ।
* मुझे खेलना ब ुत प िंद अच्छा लगता
ै।
 इ प्रकार अपने बारे में बताने को पररचय देना
क ते ैं। िै े म अपना पररचय देते ैं, ठीक उ ी
प्रकार एक िाक्य में जितने शब्द ोते ैं, उनका भी
पररचय ुआ करता ै।िाक्य में िो शब्द ोते ैं,उन् ें
‘पद’ क ते ैं।उन पदों का पररचय देना ‘पद पररचय’
क लाता ै।
1. िंज्ञा- भेद, सलिंग, िचन, कारक, क्रिया
अथिा अन्य शब्दों े िंबिंध।
शब्द आठ प्रकाि के होते हैं-
 2. िणनाम- भेद, पुरुष, सलिंग, िचन, कारक,
क्रिया अथिा अन्य शब्दों े िंबिंध। क्रक
िंज्ञा के स्थान पर आया ै (यहद पता ो)।
3.क्रिया- भेद, सलिंग, िचन, प्रयोग, धातु, काल,
िाच्य, कताण और कमण े िंबिंध।
4.विशेषण- भेद, सलिंग, िचन और विशेटय
की विशेषता।
 5.क्रिया-विशेषण- भेद, जि क्रिया की विशेषता
बताई गई ो उ के बारे में तनदेश।
6. िंबिंधबोधक- भेद, जि े
िंबिंध ै उ का तनदेश।
8.विस्मयाहदबोधक- भेद अथाणत
कौन- ा भाि स्पटि कर र ा
ै।
 7. मुच्चयबोधक- भेद, अजन्ित
शब्द, िाक्यािंश या िाक्य।
िंज्ञा का पद पररचय
िंज्ञा का पद पररचय देते मय तनम्नसलखखत प लुओिं की
िानकारी देनी चाह ए :--
1. िंज्ञा का भेद
2.सलिंग
3.िचन
4.कारक
5.क्रिया के ाथ पद का
िंबिंध
पत्र -- िाततिाचक , पुज्लिंग ,
एकिचन , कमणकारक , ‘सलखती
ै’ क्रिया का कमण।
अपूिाण -- व्यजक्तिाचक िंज्ञा, स्त्रीसलिंग,एकिचन,
कताण कारक, 'सलखती ै' क्रिया का कताण।
िणनाम का पद पररचय
5.क्रिया के साथ संबंध
िणनाम का पद पररचय देते मय तनम्नसलखखत
प लुओिं की िानकारी देनी चाह ए:-
1. िणनाम का भेद उपभेद
2.सलिंग
3.िचन
4.कारक
उदा रण
2 .मेघा और म मेला देखने गए।
उ े --पुरूषिाचक िणनाम,अन्य पुरूष,उभय
सलिंग,एकिचन,कमण कारक,‘मारा’ क्रिया का कमण।
म - पुरूषिाचक िणनाम,उत्तम
पुरूष,पुज्लिंग,
ब ुिचन, कताण कारक ‘देखने गए’ क्रिया का
कताण।
िै े- 1. गोलू ने उ े ब ुत मारा।
विशेषण का पद पररचय
विशेषण का पद पररचय देते मय
तनम्नसलखखत प लुओिं की िानकारी देनी चाह ए:-
1.भेद,उपभेद
2.सलिंग
3.िचन
4.कारक
5.विशेटय
उदा रण
1.तनशा दशिी कक्षा में पड़ती ै
*दशिी- िंख्यािाचक विशेषण , तनजचचत
िंख्यािाचक विशेषण, स्त्रीसलिंग , एकिचन ,
अधधकरण कारक, ‘कक्षा’ का विशेषण |
2. य पुस्तक अप्पू की ै।
* य - ािणनासमक विशेषण,स्त्रीसलिंग,
एकिचन,‘पुस्तक’ का विशेषण।
3. अथिण ब ुत शैतान लड़का ै।
*ब ुत प्रविशेषण, पुज्लिंग, एकिचन,
कमणकारक, ‘शैतान’ का विशेषण ।
*शैतान- गुणिाचक विशेषण, पुज्लिंग,
कमणकारक, ‘लड़का’ का विशेषण ।
क्रिया का पद पररचय
क्रिया का पद पररचय देते मय तनम्नसलखखत
प लुओिं की िानकारी देनी चाह ए:-
1.भेद (कमण के आधार पर)
2.सलिंग
3.िचन
4.धातु
5.काल
6.कताण का िंके त
1 .जस्नग्धा तनबिंध सलखती ै।
'
उ*सलखती ै - कमणकक्रिया, स्त्रीसलिंग, एकिचन,
‘सलख’धातु, ितणमानकाल, जस्नगधा इ की कताण
2. बच्चे रोज़ स्कू ल िाते ैं।’
*िाते ैं- अकमणक क्रिया, पुज्लिंग, ब ुिचन,
‘िा’ धातु , ितणमान काल, ‘बच्चे’ इ के कताण ।’
अव्यय : क्रिया विशेषण
क्रिया विशेषण का पद पररचय देते
मय तनम्नसलखखत प लुओिं की
िानकारी देनी चाह ए :--
1.भेद
2.उपभेद
3.विशेटय-क्रिया का तनदेश।
1. रोि िेरे-क्रिया विशेषण, कालिाचक
क्रिया विशेषण, ‘ि लती ै’ क्रिया का
विशेषण
िीणा रोि िेरे धीरे-धीरे ि लती ै।
2 .धीरे धीरे-क्रिया विशेषण, रीततिाचक क्रिया
विशेषण, ‘ि लती ै’ क्रिया की विशेषता बताता
ै।
अव्यय : मुच्चयबोधक (योिक)
मुच्चयबोधक का पद पररचय देते मय तनम्नसलखखत
प लुओिं की िानकारी देनी चाह ए :--
1.भेद
2.उपभेद
3. िंयुक्त शब्द अथिा िाक्य
1.देििानी और श्रेयािंश भाई-ब न ैं।
और – मुच्यबोधकअव्यय,
माधधकरण योिक,
‘देििानी’ और ‘श्रेयािंश’ शब्दों
को समला र ा ै।
2. भी लड़क्रकयाूँ खाती ैं
िबक्रक प्लिी बचाती ै।
*िबक्रक- मुच्चयबोधक अव्यय, व्यधधकरण योिक,
‘ भी लड़क्रकयाूँ खाती ैं’, तथा ‘प्लिी बचाती ै’
दो िाक्यों को समला र ा ै।
संबंधबोधक का पद परिचय देते समय निम्िनिनित
पहिुओंकी जािकािी देिी चानहए।
अव्यय : संबंधबोधक.
1.भेद
2.पदों/पदबिंधों/िाक्यािंशों े िंबिंध का तनदेश
1.हमािे विद्यालय
के पीछे खेल का
मैदान है।
* के पीछे - िंबिंधबोधक
अव्यय, स्थानिाचक,
‘विद्यालय’ का िंबिंध अन्य
शब्दों े िोड़ने िाला।
2. चोि के कारण हदव्या
ो भी न ीिं पा र ी ै ।
* के कारण- िंबिंधबोधक
अव्यय,कारण ूचक,‘चोि’ का
िंबिंध अन्य शब्द े िोड़ता
ै।
अव्यय : निस्मयानदबोधक
1.भेद
2.उपभेद
3. ूचक-भाि
उद ारण
1.शाबाश ! बबट्िू ने तो कमाल कर हदया।
 * शाबाश ! - अव्यय ,
विस्मयाहदबोधक - अव्यय,
षण ूचक |
*. ाय ! -अव्यय,
विस्मयाहदबोधक,शोक ूचक |
2 . ाय ! बाढ़ ने तो ब कु छ डूबो हदया।
*धन्यिाद

पद परिचय

  • 1.
  • 2.
    कें द्रीय विद्यालय, गोमतीनगर , लखनऊ कक्षा – 10 ,बी द्िारा विषय – ह िंदी  १.म ीप स िं ( मू नेता)  २.अपराजिता स िं ( मू उपनेता)  ३.विद्या ागर पन्त  ४.लततका स िं  ५.देशराि  ६.असमतेश यादि
  • 3.
    पद-परिचय- वाक्यगत शब्दोंके रूप औि उनका पािस्परिक संबंध बताने में जिस प्रक्रिया की आवश्यकता पड़ती है वह पद-परिचय या शब्दबोध कहलाता है। पररभाषा-िाक्यगत प्रत्येक पद (शब्द) का व्याकरण की दृजटि े पूणण पररचय देना ी पद-पररचय क लाता ै।
  • 4.
    * मेरा नामक्षक्षतति ै। * मैं रायगिंि में र ता ूूँ। * मैं शारदा विद्या मिंहदर में पढ़ता ूूँ। * मुझे खेलना ब ुत प िंद अच्छा लगता ै।  इ प्रकार अपने बारे में बताने को पररचय देना क ते ैं। िै े म अपना पररचय देते ैं, ठीक उ ी प्रकार एक िाक्य में जितने शब्द ोते ैं, उनका भी पररचय ुआ करता ै।िाक्य में िो शब्द ोते ैं,उन् ें ‘पद’ क ते ैं।उन पदों का पररचय देना ‘पद पररचय’ क लाता ै।
  • 5.
    1. िंज्ञा- भेद,सलिंग, िचन, कारक, क्रिया अथिा अन्य शब्दों े िंबिंध। शब्द आठ प्रकाि के होते हैं-  2. िणनाम- भेद, पुरुष, सलिंग, िचन, कारक, क्रिया अथिा अन्य शब्दों े िंबिंध। क्रक िंज्ञा के स्थान पर आया ै (यहद पता ो)।
  • 6.
    3.क्रिया- भेद, सलिंग,िचन, प्रयोग, धातु, काल, िाच्य, कताण और कमण े िंबिंध। 4.विशेषण- भेद, सलिंग, िचन और विशेटय की विशेषता।  5.क्रिया-विशेषण- भेद, जि क्रिया की विशेषता बताई गई ो उ के बारे में तनदेश।
  • 7.
    6. िंबिंधबोधक- भेद,जि े िंबिंध ै उ का तनदेश। 8.विस्मयाहदबोधक- भेद अथाणत कौन- ा भाि स्पटि कर र ा ै।  7. मुच्चयबोधक- भेद, अजन्ित शब्द, िाक्यािंश या िाक्य।
  • 8.
    िंज्ञा का पदपररचय िंज्ञा का पद पररचय देते मय तनम्नसलखखत प लुओिं की िानकारी देनी चाह ए :-- 1. िंज्ञा का भेद 2.सलिंग 3.िचन 4.कारक 5.क्रिया के ाथ पद का िंबिंध
  • 9.
    पत्र -- िाततिाचक, पुज्लिंग , एकिचन , कमणकारक , ‘सलखती ै’ क्रिया का कमण। अपूिाण -- व्यजक्तिाचक िंज्ञा, स्त्रीसलिंग,एकिचन, कताण कारक, 'सलखती ै' क्रिया का कताण।
  • 10.
    िणनाम का पदपररचय 5.क्रिया के साथ संबंध िणनाम का पद पररचय देते मय तनम्नसलखखत प लुओिं की िानकारी देनी चाह ए:- 1. िणनाम का भेद उपभेद 2.सलिंग 3.िचन 4.कारक
  • 11.
    उदा रण 2 .मेघाऔर म मेला देखने गए। उ े --पुरूषिाचक िणनाम,अन्य पुरूष,उभय सलिंग,एकिचन,कमण कारक,‘मारा’ क्रिया का कमण। म - पुरूषिाचक िणनाम,उत्तम पुरूष,पुज्लिंग, ब ुिचन, कताण कारक ‘देखने गए’ क्रिया का कताण। िै े- 1. गोलू ने उ े ब ुत मारा।
  • 12.
    विशेषण का पदपररचय विशेषण का पद पररचय देते मय तनम्नसलखखत प लुओिं की िानकारी देनी चाह ए:- 1.भेद,उपभेद 2.सलिंग 3.िचन 4.कारक 5.विशेटय
  • 13.
    उदा रण 1.तनशा दशिीकक्षा में पड़ती ै *दशिी- िंख्यािाचक विशेषण , तनजचचत िंख्यािाचक विशेषण, स्त्रीसलिंग , एकिचन , अधधकरण कारक, ‘कक्षा’ का विशेषण |
  • 14.
    2. य पुस्तकअप्पू की ै। * य - ािणनासमक विशेषण,स्त्रीसलिंग, एकिचन,‘पुस्तक’ का विशेषण। 3. अथिण ब ुत शैतान लड़का ै। *ब ुत प्रविशेषण, पुज्लिंग, एकिचन, कमणकारक, ‘शैतान’ का विशेषण । *शैतान- गुणिाचक विशेषण, पुज्लिंग, कमणकारक, ‘लड़का’ का विशेषण ।
  • 15.
    क्रिया का पदपररचय क्रिया का पद पररचय देते मय तनम्नसलखखत प लुओिं की िानकारी देनी चाह ए:- 1.भेद (कमण के आधार पर) 2.सलिंग 3.िचन 4.धातु 5.काल 6.कताण का िंके त
  • 16.
    1 .जस्नग्धा तनबिंधसलखती ै। ' उ*सलखती ै - कमणकक्रिया, स्त्रीसलिंग, एकिचन, ‘सलख’धातु, ितणमानकाल, जस्नगधा इ की कताण 2. बच्चे रोज़ स्कू ल िाते ैं।’ *िाते ैं- अकमणक क्रिया, पुज्लिंग, ब ुिचन, ‘िा’ धातु , ितणमान काल, ‘बच्चे’ इ के कताण ।’
  • 17.
    अव्यय : क्रियाविशेषण क्रिया विशेषण का पद पररचय देते मय तनम्नसलखखत प लुओिं की िानकारी देनी चाह ए :-- 1.भेद 2.उपभेद 3.विशेटय-क्रिया का तनदेश।
  • 18.
    1. रोि िेरे-क्रियाविशेषण, कालिाचक क्रिया विशेषण, ‘ि लती ै’ क्रिया का विशेषण िीणा रोि िेरे धीरे-धीरे ि लती ै। 2 .धीरे धीरे-क्रिया विशेषण, रीततिाचक क्रिया विशेषण, ‘ि लती ै’ क्रिया की विशेषता बताता ै।
  • 19.
    अव्यय : मुच्चयबोधक(योिक) मुच्चयबोधक का पद पररचय देते मय तनम्नसलखखत प लुओिं की िानकारी देनी चाह ए :-- 1.भेद 2.उपभेद 3. िंयुक्त शब्द अथिा िाक्य
  • 20.
    1.देििानी और श्रेयािंशभाई-ब न ैं। और – मुच्यबोधकअव्यय, माधधकरण योिक, ‘देििानी’ और ‘श्रेयािंश’ शब्दों को समला र ा ै। 2. भी लड़क्रकयाूँ खाती ैं िबक्रक प्लिी बचाती ै। *िबक्रक- मुच्चयबोधक अव्यय, व्यधधकरण योिक, ‘ भी लड़क्रकयाूँ खाती ैं’, तथा ‘प्लिी बचाती ै’ दो िाक्यों को समला र ा ै।
  • 21.
    संबंधबोधक का पदपरिचय देते समय निम्िनिनित पहिुओंकी जािकािी देिी चानहए। अव्यय : संबंधबोधक. 1.भेद 2.पदों/पदबिंधों/िाक्यािंशों े िंबिंध का तनदेश
  • 22.
    1.हमािे विद्यालय के पीछेखेल का मैदान है। * के पीछे - िंबिंधबोधक अव्यय, स्थानिाचक, ‘विद्यालय’ का िंबिंध अन्य शब्दों े िोड़ने िाला। 2. चोि के कारण हदव्या ो भी न ीिं पा र ी ै । * के कारण- िंबिंधबोधक अव्यय,कारण ूचक,‘चोि’ का िंबिंध अन्य शब्द े िोड़ता ै।
  • 23.
  • 24.
    उद ारण 1.शाबाश !बबट्िू ने तो कमाल कर हदया।  * शाबाश ! - अव्यय , विस्मयाहदबोधक - अव्यय, षण ूचक |
  • 25.
    *. ाय !-अव्यय, विस्मयाहदबोधक,शोक ूचक | 2 . ाय ! बाढ़ ने तो ब कु छ डूबो हदया।
  • 26.