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गुरुत्ल कामाारम द्वाया प्रस्तुत भासवक ई-ऩत्रिका -2019
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E CIRCULAR
गुरुत्ल ज्मोततऴ भासवक
ई-ऩत्रिका भें रेखन शेतु
फ्रीराॊव (स्लतॊि) रेखकों का
स्लागत शैं...
गुरुत्ल ज्मोततऴ भासवक ई-
ऩत्रिका भें आऩके द्वारा सरखे गमे
भॊि, मॊि, तॊि, ज्मोततऴ, अॊक
ज्मोततऴ, लास्तु, पें गळुई, टैयों, येकी
एलॊ अन्म आध्मात्त्भक सान लधाक
रेख को प्रकासळत कयने शेतु बेज
वकते शैं।
अधधक जानकायी शेतु वॊऩका कयें।
GURUTVA KARYALAY
BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) INDIA
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गुरुत्ल ज्मोततऴ
भासवक ई-ऩत्रिका
2019
वॊऩादक
ध ॊतन जोळी
वॊऩका
गुरुत्ल ज्मोततऴ वलबाग
गुरुत्ल कामाारम
92/3. BANK COLONY,
BRAHMESHWAR PATNA,
BHUBNESWAR-751018,
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ऩत्रिका प्रस्तुतत
ध ॊतन जोळी,
गुरुत्ल कामाारम
पोटो ग्राफपक्व
ध ॊतन जोळी,
गुरुत्ल कामाारम
अनुक्रभ
7 59
8 60
- ? 11 ? 63
13 ? 64
? 14 ब ? 69
? 15 ? 71
16 ? 74
17 ? 77
… 18 - ? 79
20 81
21 84
24 ? 85
… 26 86
28 ? 89
ब … 30 ? 90
33 ब ब ? 91
36 ब ? 92
39 93
39 ब ? 95
40 ? 97
41 98
41 105
42 108
43 ? 109
- 43 111
44 113
44 113
45 114
46 118
48 118
49 119
52 120
( ) 56 120
58 121
59 121
स्थामी औय अन्म रेख
4 146
2019 137 147
2019 - - 139 - 148
2019 - 146
वप्रम आत्त्भम,
फॊधु/ फहशन
जम गुरुदेल
वलाभॊगर-भाॊगल्मे सळलेवलााथावाधधके ।
ळयण्मे िमम्फके गौरय नायामणण नभोऽस्तुते॥
वृत्टटत्स्थतत वलनाळानाॊ ळत्क्तबूते वनाततन।
गुणाश्रमे गुणभमे नायामणण नभोऽस्तुते॥
अथाात: शे देली नायामणी आऩ वफ प्रकाय का भॊगर प्रदान कयने लारी भॊगरभमी शो। कल्माण दातमनी सळला शो। वफ ऩुरूऴाथों
को सवद्ध कयने लारी ळयणा गतलत्वरा तीन नेिों लारी गौयी शो, आऩको नभस्काय शैं। आऩ वृत्टट का ऩारन औय वॊशाय कयने
लारी ळत्क्तबूता वनातनी देली, आऩ गुणों का आधाय तथा वलागुणभमी शो। नायामणी देली तुम्शें नभस्काय शै।
इव भॊि के जऩ वे भाॉ फक ळयणागती प्राप्त शोती शैं। त्जस्वे भनुटम के जन्भ-जन्भ के ऩाऩों का नाळ शोता शै। भाॊ
जननी वृत्टट फक आहद, अॊत औय भध्म शैं।
देली प्रऩन्नातताशये प्रवीद प्रवीद भातजागतोsणखरस्म।
ऩवीद वलश्लेतरय ऩाहश वलश्लॊ त्लभीश् यी देली या यस्म।
अथाात: ळयणागत फक ऩीडा दूय कयने लारी देली आऩ शभ ऩय प्रवन्न शों। वॊऩूणा जगत भाता प्रवन्न शों। वलश्लेश्लयी देली वलश्ल
फक यषा कयो। देली आऩ हश एक भाि या य जगत फक अधधश्लयी शो।
नलयाि के नौ हदनों भें तीन देवलमों क्रभळ् ऩालाती, रक्ष्भी औय वयस्लती औय देली के नौ रुऩों का कभळ्
ळैरऩुिी, ब्रह्भा ारयणी, ॊद्रघण्टा, कू टभाण्डा, स्कॊ दभाता, कात्मामनी, कारयात्रि, भशागौयी औय सववद्धदािी का ऩूजन
फकमा जाता शैं। नलयािे के प्रथभ तीन हदन ऩालाती के तीन स्लरुऩों का ऩूजन फकमा जाता शैं, अगरे तीन हदन भाॉ
रक्ष्भी के स्लरुऩों का ऩूजन फकमा जाता शैं औय आणखयी के तीन हदन वयस्लती भाता के स्लरुऩों की ऩूजा की
जाती शैं। उवी प्रकाय नौ देलीमों को क्रभळ् प्रथभ हदन ळैरऩुिी, द्वद्वतीम हदन ब्रह्भा ारयणी, तृतीम हदन न्द्रघण्टा,
तुथा हदन कु टभाण्डा, ऩॊ भ् हदन स्कन्द भाता, ऴटठभ् हदन कात्मातमनी, वाप्तभ् हदन कारयात्रि, अटटभ् हदन
भशागौयी औय नौलें हदन सववद्धदािी के रुऩ का ऩूजन फकमा जाता शैं।
नलयाि अथाात भाॉ दुगाा की उऩावना भें वभवऩात नौ यात। दुगाा का अथा हैं, दुगातत नासळनी शैं, जगत ्की
उत्ऩत्त्त, ऩारन एलॊ वॊ ारन तीनों व्मलस्थाएॊ त्जव ळत्क्त के आधीन वम्ऩाहदत शोती शै लश जगत जननी भाॉ
आहदळत्क्त बगलती शैं। भाॉ दुगाा के रुऩ अनॊत शैं, रेफकन देली को प्रधान नौ रूऩों भें नलदुगाा के नाभ वे जाना
जाता शैं। आहद ळत्क्त भाॉ दुगाा वभग्र रोक भें अऩनी कृ ऩा औय करूणा लऴााती शै, भाॉ दुगाा अऩने बक्तों भें वद्द
गुणों का वलकाव कयके उनभें अऩनी ळत्क्त का वॊ ाय कयते शुले वॊवाय के वभग्र प्राणणमों का वॊ ारन कयती शै।
आज बौततकता भें यत भनुटम को अवॊखम उऩाम, ऩूजन, शलन, जऩ-तऩ के फाद बी भन की ळाॊतत नशीॊ
सभरती। ऐवे भें शय तयश वे तनयाळ औय शाया ुका भनुटम महद भाॊ दुगाा की ळयण रेता शै जो तनत्श् त शी भाॉ दुगाा
उवकी दुगातत का तनलायण कयती शी शै।
क्मोफक, भाॉ आद्यळत्क्त की कृ ऩा वे भनुटम भें आत्भफर, द्दढ़ वलश्लाव, दमा, प्रेभ, बत्क्त जैवे वद्गुणों का
वलकाव शोता शैं। जीलन के इन्शीॊ भूल्मों को वभझ कय भनुटम जीलन भें वच् ा वुख-ळाॊतत, लैबल, धन वॊऩदा को
प्राप्त कयता शै। अन्मथा इव वॊवाय के दरदर वे तनकरना उवके सरए वॊबल नशीॊ शै। इवसरए भनुटम को अवॊबल
को बी वॊबल कय हदखाने की ळत्क्त देली कृ ऩा वे शी प्राप्त शोती शैं।
भाॊ दुगाा का ऩूजन हशन्दू वॊस्कृ ती भें वलााधधक रोकवप्रम शैं मशीॊ कायण शैं की वैकडों लऴो वे देली दुगाा का
ऩूजन छोटे-फडे वबी प्रादेसळक षेिों भें वलााधधक प्र सरत यशा शैं। देली दुगाा को आद्य ळत्क्त बगलती का वाषात
स्लरुऩ भाना जाता शैं। देली दुगाा की भहशभा अऩयॊऩाय शैं, जो अऩने बक्तों के दु्खों का नाळ कयने लारी, दुटटों वे
यषा कयने लारी एलॊ अऩने बक्तों के वकर भनोयथ को सवद्ध कयने लारी वाषात देली शैं।
नलयाि के दौयान दव भशावलद्या का ऩूजन बी वलळेऴ भशत्लऩूणा भाना गमा शैं क्मोकी इन को देली दुगाा के
शी दव रूऩ भाने जाते शैं। दवों भशावलद्या भें शय भशावलद्या अऩनी अद्वद्वतीम ळत्क्त वे भनुटम के वभस्त वॊकटों को
दूय कयने लारी शैं। इन दव भशावलद्याओॊ के भशत्ल को वलसबन्न धभाळास्िों भें अत्मॊत उऩमोगी औय भशत्लऩूणा भाना
गमा शैं।
नलयािी के दौयान ग्रश ळाॊतत के उऩामो को कय के भनुटम वबी अळुब ग्रश जतनत फाधाऔ को वयरता वे
दूय कय वकता शैं। नलयाि का वभम ग्रशों को ळाॊत कयने शेतु वलोत्तभ वभम भाना जाता शैं। क्मोफक नलयािी के
दौयान प्रकृ तत भें शोने लारे ऩरयलतान एलॊ वाभात्जक ऩरयलेळ के कायण भनुटम की आध्मात्त्भक ळत्क्त एलॊ उवकी
वॊमभ ळत्क्त का अत्माधधक उच् स्तय की शोती शैं। महश कायण शैं की इव दौयान फक जाने लारी वबी ऩूजा,
उऩावना, वाधना आहद अत्माधधक राबप्रद भानी गई शैं। महद भनुटम फकवी ग्रशों वे ऩीडडत शो, तो लश इन नौ
हदनों भें देली दुगाा के ऩूजन के वाथ भें महद ग्रश ळाॊतत के उऩामो को कयके ळीघ्र राब प्राप्त कय वकते शैं, नलयाि
ग्रश ळाॊतत के सरए बी उत्तभ वभम शोता शै।
वलद्वानों का कथन शैं की देली दुगाा शी वबी प्रकाय के भॊि, मॊि औय तॊि का भुख्म आधाय शैं। धभा ळास्िों भें
वभस्त भॊि, मॊि औय तॊि का उद्गभ देली आद्यळत्क्त बगलती वे भाना गमा शैं। महद जन्भ कुॊ डरी (जातक/ जन्भ
ऩिी) भें कोई ग्रश कभजोय शै मा अळुब बाल का स्लाभी शो एलॊ अन्म बाल को देख कय अऩना अळुब प्रबाल दे यशा
शो तो जातक के सरए उव ग्रश को ळाॊत कयना आलश्मक शोता शैं त्जस्वे ग्रश अऩना प्रततकू र प्रबाल के स्थान ऩय
अनुकू र प्रबाल प्रदान कयें।फकवी बी ग्रश के प्रबाल को अनुकू र फनाने का उत्तभ वभम नलयाि शैं, नलयाि के दौयान
ग्रश ळाॊतत के उऩामो द्वाया ग्रश के अळुब प्रबाल को ळीघ्र एलॊ अतत वयरता वे कभ फकमा जा वकता शैं।
इव भासवक ई-ऩत्रिका भें वॊफॊधधत जानकायीमों के वलऴम भें वाधक एलॊ वलद्वान ऩाठको वे अनुयोध शैं, महद
दळाामे गए भॊि, श्रोक, मॊि, वाधना एलॊ उऩामों मा अन्म जानकायी के राब, प्रबाल इत्मादी के वॊकरन, प्रभाण
ऩढ़ने, वॊऩादन भें, डडजाईन भें, टाईऩीॊग भें, वप्रॊहटॊग भें, प्रकाळन भें कोई िुहट यश गई शो, तो उवे स्लमॊ वुधाय रें मा
फकवी मोग्म ज्मोततऴी, गुरु मा वलद्वान वे वराश वलभळा कय रे । क्मोफक वलद्वान ज्मोततऴी, गुरुजनो एलॊ वाधको के
तनजी अनुबल वलसबन्न भॊि, श्रोक, मॊि, वाधना, उऩाम के प्रबालों का लणान कयने भें बेद शोने ऩय काभना सववद्ध
शेतु फक जाने लारी लारी ऩूजन वलधध एलॊ उवके प्रबालों भें सबन्नता वॊबल शैं।
आऩका जीलन वुखभम, भॊगरभम शो भाॊ बगलती की कृ ऩा आऩके ऩरयलाय ऩय
फनी यशे। भाॊ बगलती वे मशी प्राथना शैं… ध ॊतन जोळी
6 2019
***** भासवक ई-ऩत्रिका वे वॊफॊधधत वू ना *****
 ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत वबी रेख गुरुत्ल कामाारम के अधधकायों के वाथ शी आयक्षषत शैं।
 ई-ऩत्रिका भें लणणात रेखों को नात्स्तक/अवलश्लावु व्मत्क्त भाि ऩठन वाभग्री वभझ वकते शैं।
 ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत रेख आध्मात्भ वे वॊफॊधधत शोने के कायण बायततम धभा ळास्िों वे प्रेरयत
शोकय प्रस्तुत फकमा गमा शैं।
 ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत रेख वे वॊफॊधधत फकवी बी वलऴमो फक वत्मता अथला प्राभाणणकता ऩय फकवी
बी प्रकाय की त्जन्भेदायी कामाारम मा वॊऩादक फक नशीॊ शैं।
 ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत जानकायीकी प्राभाणणकता एलॊ प्रबाल की त्जन्भेदायी कामाारम मा वॊऩादक की
नशीॊ शैं औय ना शीॊ प्राभाणणकता एलॊ प्रबाल की त्जन्भेदायी के फाये भें जानकायी देने शेतु कामाारम
मा वॊऩादक फकवी बी प्रकाय वे फाध्म शैं।
 ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत रेख वे वॊफॊधधत रेखो भें ऩाठक का अऩना वलश्लाव शोना आलश्मक शैं। फकवी
बी व्मत्क्त वलळेऴ को फकवी बी प्रकाय वे इन वलऴमो भें वलश्लाव कयने ना कयने का अॊततभ तनणाम
स्लमॊ का शोगा।
 ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत रेख वे वॊफॊधधत फकवी बी प्रकाय की आऩत्ती स्लीकामा नशीॊ शोगी।
 ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत रेख शभाये लऴो के अनुबल एलॊ अनुळॊधान के आधाय ऩय हदए गमे शैं। शभ
फकवी बी व्मत्क्त वलळेऴ द्वाया प्रमोग फकमे जाने लारे धासभाक, एलॊ भॊि- मॊि मा अन्म प्रमोग मा
उऩामोकी त्जन्भेदायी नहशॊ रेते शैं। मश त्जन्भेदायी भॊि- मॊि मा अन्म उऩामोको कयने लारे व्मत्क्त
फक स्लमॊ फक शोगी।
 क्मोफक इन वलऴमो भें नैततक भानदॊडों, वाभात्जक, कानूनी तनमभों के णखराप कोई व्मत्क्त महद
नीजी स्लाथा ऩूतता शेतु प्रमोग कताा शैं अथला प्रमोग के कयने भे िुहट शोने ऩय प्रततकू र ऩरयणाभ
वॊबल शैं।
 ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत रेख वे वॊफॊधधत जानकायी को भाननने वे प्राप्त शोने लारे राब, राब की
शानी मा शानी की त्जन्भेदायी कामाारम मा वॊऩादक की नशीॊ शैं।
 शभाये द्वाया प्रकासळत फकमे गमे वबी रेख, जानकायी एलॊ भॊि-मॊि मा उऩाम शभने वैकडोफाय स्लमॊ
ऩय एलॊ अन्म शभाये फॊधुगण ऩय प्रमोग फकमे शैं त्जस्वे शभे शय प्रमोग मा कल , भॊि-मॊि मा उऩामो
द्वाया तनत्श् त वपरता प्राप्त शुई शैं।
 ई-ऩत्रिका भें गुरुत्ल कामाारम द्वाया प्रकासळत वबी उत्ऩादों को के लर ऩाठको की जानकायी शेतु हदमा
गमा शैं, कामाारम फकवी बी ऩाठक को इन उत्ऩादों का क्रम कयने शेतु फकवी बी प्रकाय वे फाध्म
नशीॊ कयता शैं। ऩाठक इन उत्ऩादों को कशीॊ वे बी क्रम कयने शेतु ऩूणात् स्लतॊि शैं।
अधधक जानकायी शेतु आऩ कामाारम भें वॊऩका कय वकते शैं।
(वबी वललादो के सरमे के लर बुलनेश्लय न्मामारम शी भान्म शोगा।)
7 2019
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
नभो देव्मै भशादेव्मै सळलामै वततॊ नभ:।
नभ: प्रकृ त्मै बद्रामै तनमता: प्रणता: स्भताभ्॥
अथाात: देली को नभस्काय शैं, भशादेली को नभस्काय शैं।
भशादेली सळला को वलादा नभस्काय शैं। प्रकृ तत एलॊ बद्रा को
भेया प्रणाभ शैं। शभ रोग तनमभऩूलाक देली जगदम्फा को
नभस्काय कयते शैं।
उऩयोक्त भॊि वे देली दुगाा का स्भयण कय प्राथाना कयने भाि
वे देली प्रवन्न शोकय अऩने बक्तों की इच्छा ऩूणा कयती शैं।
वभस्त देल गण त्जनकी स्तुतत प्राथना कयते शैं। भाॉ दुगाा
अऩने बक्तो की यषा कय उन ऩय कृ ऩा द्रटटी लऴााती शैं औय
उवको उन्नती के सळखय ऩय जाने का भागा प्रवस्त कयती
शैं। इव सरमे ईश्लय भें श्रद्धा वलश्लाय यखने लारे वबी
भनुटम को देली की ळयण भें जाकय देली वे तनभार रृदम वे
प्राथाना कयनी ाहशमे।
देली प्रऩन्नातताशये प्रवीद प्रवीद भातजागतोsणखरस्म।
ऩवीद वलश्लेतरय ऩाहश वलश्लॊ त्लभीश् यी देली या यस्म।
अथाात: ळयणागत फक ऩीडा दूय कयने लारी देली आऩ शभ ऩय
प्रवन्न शों। वॊऩूणा जगत भाता प्रवन्न शों। वलश्लेश्लयी देली
वलश्ल फक यषा कयो। देली आऩ हश एक भाि या य जगत
फक अधधश्लयी शो।
वलाभॊगर-भाॊगल्मे सळलेवलााथावाधधके ।
ळयण्मे िमम्फके गौरय नायामणण नभोऽस्तुते॥
वृत्टटत्स्थतत वलनाळानाॊ ळत्क्तबूते वनाततन।
गुणाश्रमे गुणभमे नायामणण नभोऽस्तुते॥
अथाात: शे देली नायामणी आऩ वफ प्रकाय का भॊगर प्रदान
कयने लारी भॊगरभमी शो। कल्माण दातमनी सळला शो। वफ
ऩुरूऴाथों को सवद्ध कयने लारी ळयणा गतलत्वरा तीन नेिों
लारी गौयी शो, आऩको नभस्काय शैं। आऩ वृत्टट का ऩारन
औय वॊशाय कयने लारी ळत्क्तबूता वनातनी देली, आऩ गुणों
का आधाय तथा वलागुणभमी शो। नायामणी देली तुम्शें
नभस्काय शै।
इव भॊि के जऩ वे भाॉ फक ळयणागती प्राप्त शोती शैं।
त्जस्वे भनुटम के जन्भ-जन्भ के ऩाऩों का नाळ शोता शै।
भाॊ जननी वृत्टट फक आहद, अॊत औय भध्म शैं।
देवी से प्राथाना कयें –
ळयणागत-दीनाता-ऩरयिाण-ऩयामणे
वलास्माततिंशये देवल नायामणण नभोऽस्तुते॥
अथाात: ळयण भें आए शुए दीनों एलॊ ऩीडडतों की यषा भें
वॊरग्न यशने लारी तथा वफ फक ऩीडा दूय कयने लारी
नायामणी देली आऩको नभस्काय शै।
योगानळेऴानऩशॊसव तुटटा रूटटा तु काभान वकरानबीटटान्।
त्लाभाधश्रतानाॊ न वलऩन्नयाणाॊ त्लाभाधश्रता शाश्रमताॊ प्रमात्न्त।
अथाात् देली आऩ प्रवन्न शोने ऩय वफ योगों को नटट कय
देती शो औय कु वऩत शोने ऩय भनोलाॊतछत वबी काभनाओॊ का
नाळ कय देती शो। जो रोग तुम्शायी ळयण भें जा ुके शै।
उनको वलऩत्त्त आती शी नशीॊ। तुम्शायी ळयण भें गए शुए
भनुटम दूवयों को ळयण देने लारे शो जाते शैं।
वलाफाधाप्रळभनॊ िेरोक्मस्माणखरेश्लयी।
एलभेल त्लमा कामाभस्मध्दैरयवलनाळनभ्।
अथाात् शे वलेश्लयी आऩ तीनों रोकों फक वभस्त फाधाओॊ को
ळाॊत कयो औय शभाये वबी ळिुओॊ का नाळ कयती यशो।
ळाॊततकभाणण वलाि तथा दु:स्लप्रदळाने।
ग्रशऩीडावु ोग्रावु भशात्भमॊ ळणुमात्भभ।
अथाात् वलाि ळाॊतत कभा भें, फुये स्लप्न हदखाई देने ऩय तथा
ग्रश जतनत ऩीडा उऩत्स्थत शोने ऩय भाशात्म्म श्रलण कयना
ाहशए। इववे वफ ऩीडाएॉ ळाॊत औय दूय शो जाती शैं।
महह कायण हैं सहस्रमुगों से भाॊ बगवती जगतजननी
दुगाा की उऩासना प्रतत वषा वसॊत, आश्ववन एवॊ गुप्त
नवयारी भें ववशेष रुऩ से कयने का ववधान हहन्दु धभा
ग्रॊथो भें हैं।
***
8 2019
ैि नलयाि व्रत वलळेऴ राबदामी शोता शैं।
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
हहन्दु सॊसकृ तत के अनुशाय नललऴा का ळुबायॊब
ैि भाव के ळुक्र ऩष की प्रथभ ततधथ वे शोता शै। इव
हदन वे लवॊतकारीन नलयाि की ळुरुआत शोती शैं।
वलद्वानो के भतानुळाय ैि भाव के कृ टण ऩष की
वभात्प्त के वाथ बूरोक के ऩरयलेळ भें एक वलळेऴ
ऩरयलतान दृत्टटगो य शोने रगता शैं त्जवके अनेक स्तय
औय स्लरूऩ शोते शैं।
इव दौयान ऋतुओॊ के
ऩरयलतान के वाथ नलयािों का
तौशाय भनुटम के जीलन भें
फाह्म औय आॊतरयक ऩरयलतान भें
एक वलळेऴ वॊतुरन स्थावऩत
कयने भें वशामक शोता शैं। त्जव
तयश फाह्म जगत भें ऩरयलतान
शोता शै उवी प्रकाय भनुटम के
ळयीय भें बी ऩरयलतान शोता शै।
इव सरमे नलयाि उत्वल को
आमोत्जत कयने का उद्देश्म शोता
शैं की भनुटम के बीतय भें
उऩमुक्त ऩरयलतान कय उवे फाह्म
ऩरयलतान के अनुकू र फनाकय उवे
स्लमॊ के औय प्रकृ तत के फी भें वॊतुरन फनामे यखना
शैं।
नलयािों के दौयान फकए जाने लारी ऩूजा-अ ाना,
व्रत इत्माहद वे ऩमाालयण की ळुवद्ध शोती शैं। उवीके
वाथ-वाथ भनुटम के ळयीय औय बालना की बी ळुवद्ध शो
जाती शैं। क्मोफक व्रत-उऩलाव ळयीय को ळुद्ध कयने का
ऩायॊऩरयक तयीका शैं जो प्राकृ ततक-ध फकत्वा का बी एक
भशत्लऩूणा तत्ल शै। मशी कायण शैं की वलश्ल के प्राम्
वबी प्रभुख धभों भें व्रत का भशत्ल शैं। इवी सरए हशन्दू
वॊस्कृ तत भें मुगो-मुगो वे नलयािों के दौयान व्रत कयने
का वलधान शैं। क्मोकी व्रत के भाध्मभ वे प्रथभ भनुटम
का ळयीय ळुद्ध शोता शैं, ळयीय ळुद्ध शोतो भन एलॊ
बालनाएॊ ळुद्ध शोती शैं। ळयीय की ळुवद्ध के त्रफना भन ल
बाल की ळुवद्ध वॊबल नशीॊ शैं। ैि नलयािों के दौयान
वबी प्रकाय के व्रत-उऩलाव ळयीय औय भन की ळुवद्ध भें
वशामक शोते शैं।
नलयािों भें फकमे गमे व्रत-उऩलाव का वीधा
अवय शभाये अच्छे स्लास््म औय योगभुत्क्त के सरमे बी
वशामक शोता शैं। फडी धूभ-धाभ वे
फकमा गमा नलयािों का आमोजन
शभें वुखानुबूतत एलॊ आनॊदानुबूतत
प्रदान कयता शैं।
भनुटम के सरए आनॊद
की अलस्था वफवे अच्छी
अलस्था शैं। जफ व्मत्क्त आनॊद
की अलस्था भें शोता शैं तो उवके
ळयीय भें तनाल उत्ऩन्न कयने
लारे वूक्ष्भ कोऴ वभाप्त शो जाते
शैं औय जो वूक्ष्भ कोऴ उत्वत्जता
शोते शैं ले शभाये ळयीय के सरए
अत्मॊत राबदामक शोते शैं। जो
शभें नई व्माधधमों वे फ ाने के वाथ
शी योग शोने की दळा भें ळीघ्र योगभुत्क्त प्रदान कयने भें
बी वशामक शोते शैं।
नलयाि भें दुगाावप्तळती को ऩढने मा वुनने वे देली
अत्मन्त प्रवन्न शोती शैं एवा ळास्िोक्त ल न शैं।
वप्तळती का ऩाठ उवकी भूर बाऴा वॊस्कृ त भें कयने ऩय शी
ऩूणा प्रबाली शोता शैं।
व्मत्क्त को श्रीदुगाावप्तळती को बगलती दुगाा का
शी स्लरूऩ वभझना ाहशए। ऩाठ कयने वे ऩूला
श्रीदुगाावप्तळती फक ऩुस्तक का इव भॊि वे ऩॊ ोऩ ायऩूजन
कयें-
9 2019
नभोदेव्मैभशादेव्मैसळलामैवततॊनभ:। नभ:
प्रकृ त्मैबद्रामैतनमता:प्रणता:स्भताभ्॥
जो व्मत्क्त दुगाावप्तळतीके भूर वॊस्कृ त भें ऩाठ कयने भें
अवभथा शों तो उव व्मत्क्त को वप्तश्रोकी दुगाा को ऩढने
वे राब प्राप्त शोता शैं। क्मोफक वात श्रोकों लारे इव
स्तोि भें श्रीदुगाावप्तळती का वाय वभामा शुला शैं।
जो व्मश्तत सप्तवरोकी दुगाा का बी न कय सके वह के वर
नवााण भॊर का अधधकाधधक जऩ कयें।
देवी के ऩूजन के सभम इस भॊर का जऩ कये।
जमन्ती भङ्गराकारी बद्रकारी कऩासरनी। दुगाा षभा सळला
धािी स्लाशा स्लधानभोऽस्तुते॥
देवी से प्राथाना कयें-
वलधेहशदेवलकल्माणॊवलधेहशऩयभाॊधश्रमभ्।
रूऩॊदेहशजमॊदेहशमळोदेहशद्वद्वऴोजहश॥
अथाात् शे देवल! आऩ भेया कल्माण कयो। भुझे श्रेटठ
वम्ऩत्त्त प्रदान कयो। भुझे रूऩ दो, जम दो, मळ दो औय भेये
काभ-क्रोध इत्माहद ळिुओॊ का नाळ कयो।
ववद्वानो के अनुशाय सम्ऩूणा नवयारव्रत के ऩारन भें जो
रोगों असभथा हो वह नवयार के सात यारी,ऩाॊच यारी, दों
यारी औय एक यारी का व्रत बी कयके राब प्राप्त कय
सकते हैं। नवयार भें नवदुगाा की उऩासना कयने से नवग्रहों
का प्रकोऩ शाॊत होता हैं।
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10 2019
वला कामा सववद्ध कल
त्जव व्मत्क्त को राख प्रमत्न औय ऩरयश्रभ कयने के
फादबी उवे भनोलाॊतछत वपरतामे एलॊ फकमे गमे कामा भें
सववद्ध (राब) प्राप्त नशीॊ शोती, उव व्मत्क्त को वला कामा
सववद्ध कल अलश्म धायण कयना ाहशमे।
कवच के प्रभुख राब: वला कामा सववद्ध कल के द्वारा
वुख वभृवद्ध औय नव ग्रहों के नकायात्भक प्रबाल को ळाॊत कय
धायण कयता व्मत्क्त के जीलन वे वला प्रकाय के दु:ख-दारयद्र
का नाळ शो कय वुख-वौबाग्म एलॊ उन्नतत प्रात्प्त शोकय
जीलन भे वसब प्रकाय के ळुब कामा सवद्ध शोते शैं। त्जवे धायण
कयने वे व्मत्क्त महद व्मलवाम कयता शोतो कायोफाय भे लृवद्ध
शोतत शैं औय महद नौकयी कयता शोतो उवभे उन्नतत शोती शैं।
 वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें सवाजन वशीकयण कल
के सभरे शोने की लजश वे धायण कताा की फात का दूवये
व्मत्क्तओ ऩय प्रबाल फना यशता शैं।
 वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें अष्ट रक्ष्भी कल के
सभरे शोने की लजश वे व्मत्क्त ऩय वदा भाॊ भशा रक्ष्भी
की कृ ऩा एलॊ आळीलााद फना यशता शैं। त्जस्वे भाॊ रक्ष्भी
के अटट रुऩ (१)-आहद रक्ष्भी, (२)-धान्म रक्ष्भी, (३)- धैमा रक्ष्भी, (४)-गज रक्ष्भी, (५)-वॊतान रक्ष्भी, (६)-
वलजम रक्ष्भी, (७)-वलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो का अळीलााद प्राप्त शोता शैं।
 वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें तॊर यऺा कल के सभरे शोने की लजश वे ताॊत्रिक फाधाए दूय शोती शैं,
वाथ शी नकायात्भक ळत्क्तमो का कोइ कु प्रबाल धायण कताा व्मत्क्त ऩय नशीॊ शोता। इव कल के प्रबाल
वे इऴाा-द्वेऴ यखने लारे व्मत्क्तओ द्वारा शोने लारे दुटट प्रबालो वे यषा शोती शैं।
 वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें शरु ववजम कल के सभरे शोने की लजश वे ळिु वे वॊफॊधधत वभस्त
ऩयेळातनओ वे स्लत् शी छु टकाया सभर जाता शैं। कल के प्रबाल वे ळिु धायण कताा व्मत्क्त का ाशकय
कु छ नशी त्रफगाड वकते।
अन्म कल के फाये भे अधधक जानकायी के सरमे कामाारम भें वॊऩका कये:
फकवी व्मत्क्त वलळेऴ को वला कामा सववद्ध कल देने नशी देना का अॊततभ तनणाम शभाये ऩाव वुयक्षषत शैं।
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11 2019
क्मा फकवी के ळयीय भें देली-देलता आ वकते शैं ?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
क्मा इव आधुतनक मुग भें फकवी भानल ळयीय
भें देली-देलता आ वकते शैं?
क्मा देली-देलता के भानल ळयीय भें प्रलेळ वे
स्िी-ऩुरुऴ का अॊगायों ऩय रना, उऩरते दूध मा तेर भें
शाथ डारना, अऩने ळायीय भें कीर मा नुकीरी ीजे
फ़वाना, इत्माहद अनेको उदाशयण शभें आए हदन देखने
को सभर जाते शैं।
क्मा देली-देलता भानल ळयीय भें
प्रलेळ कय अजीफ तयीके वे व्मलशाय
कयते शैं।
इव वॊवाय भें एवे रोग
शैं जो भानते शै मा त्जनका दाला
शैं फक फकवी व्मत्क्त वलळेऴ के
ळयीय भें फकवी एक तनत्श् त
वभम, लाय, ततधथ अथला व्मत्क्त के
फुराने ऩय उवके ळयीय भें देली-देलता
प्रलेळ कयेते शैं, औय रोगों के दु्ख,
ददा, फीभायी इत्मादी को दूय कयते
शैं। त्जवभे कु छ का भानना शैं देली-
देलता ऩीडडत व्मत्क्त के भन के वलारों
मा अथला उनकी वभस्माओॊ को जान रेते
शैं औय उनके द्वाया उवके वलार ऩुछने वे
ऩशरे शैं देली-देलता उवके प्रश्नों का शर फता
देते शै ?
कु छ जानकायों का मश भानना शैं फक जो रोग
अऩने ळयीय भें देली-देलता आने का दाला कयते शैं, औय
जफ उनके ळयीय भें देली-देलता का प्रलेळ शोता शैं मा
ळयीय भें शोते शैं तफ लश रोग स्लमॊ देली-देलता की
आयाधना कयते शैं औय लशाॊ ऩय उऩत्स्थत बक्त गणों
को देली-देलता के रुऩभें आळीलााद बी प्रदान कयते शैं।
महद उवके ळयीय भें स्लमॊ देली-देलता का प्रलेळ शोता शैं
तो लश देली-देलता अऩने ध ि मा भूतता मा स्लमॊ की
आयाधना मा उऩावना क्मों कयते शैं ?
क्मा मश वॊबफ शैं कोई देले-देलता स्लमॊ की
आयाधना मा उऩावना कयते शो?
शभाये देळ भें कु छ एवी
जगशें शैं जशा रोगों का भानना शैं
की फकवी तनत्श् त वभम, हदन,
ततधथ को फकवी वलळेऴ एक देली-
देलता प्रलेळ फकवी ळयीय भें अथला
एक वे अधधक देली-देलता का एक
वाथ भें एकाधधक ळयीय भें प्रलेळ
शोता शैं?
कु छ का कशना शैं की जफ
एकाधधक ळयीय भें देली-देलता का प्रलेळ
शोता शैं तो लश वफ देली-देलता सभरकय
नृत्म कयने रगते शै?, खेरने रगते
शैं?, अॊगायों ऩय नॊगे ऩैय रने रगते
शै?, अजीफ तयीके की शयकते कयने रगते
शैं? क्मा मश वॊबल शैं?
कु छ जानकाय वलद्वानों एलॊ ळोध
कताा की भाने तो मश वॊबल नशीॊ शैं,
जो रोग मश दाला कयते शैं की उनके ळयीय भें देली-
देलता का प्रलेळ शोता शैं उन रोगों का उद्देळ के लर
अन्म रोगों को अऩनी औय आकवऴात कयना मा ऩैवे
तनकारना अथला अऩना उल्रू वीधा कयना शी शोता शैं।
अधधकतय वलद्वान वाधकों के भतानुळाय देली-
देलता महद फकवी भनुटम के वभष बी शो तो के लर
12 2019
भनुटम को अनुबूतत शोती शैं। जैवे उव ळत्क्त की
उऩत्स्थती वे लातालयण भें आकत्स्भक ऩरयलतान शोना,
उनके उऩत्स्थत शोने वे फकवी हदव्म तेज अथला ळत्क्त
ऩूॊज, लातालयण भें वुगॊध का पै रना इत्माहद का आबाव
शोता शैं एलॊ देली-देलता फकवी भनुटम देश भें प्रलेळ नशीॊ
कयते मा लश फकवी बी तयश के बौततक ध ह्न नशीॊ
छोडते!
कु छ वलद्वानों का कथ शैं की देली-देलता के दळान
वाधक को तफ शोता शै, जफ उवके अॊतय भन के बाल
गशन शोते शैं, तफ वाधना के दौयान एक वभम आता शैं
जफ वाधक को मश अनुबल शोता शैं की देली-देलता
उवके वाभने प्रकट शो गमे शैं मा उन्शें दळान दे यशे शैं,
उवी रुऩ भें मा आकृ तत भे शोते शैं जो आकृ तत वाधक
के अॊतय भन भें अॊफकत शोती शैं। वाधक को अनुबूतत
शोती शैं की लश देली-देलता उनवे फाते कय यशा शैं, मश
वाधक की कल्ऩना का वाकाय शोना शै। लश देली-देलता
लास्तल भें वाधक वे फात कयती शैं उवके प्रश्नो का
उत्तय देती शै मा उवे आळीलााद देकय दळान देती शैं। मश
वफ के लर वाधक को शी अनुबूत शोती शैं, लशाॊ कोई
औय अन्म व्मत्क्त बी शो तो वाधक के अराला फकवी
दूवये को उवकी अनुबूतत मा दळान नशीॊ शोता।
मश वफ वाधक के गशन बाल के अनुरुऩ शी
प्रकट शोती शैं रेफकन फकवी दूवये भनुटम के ळयीय भें
प्रलेळ नशीॊ कयती!
ववशेष सूचना: मशा लणणात रेख के लर रेखक के ळोध
एलॊ अनुबलों के आधाय ऩय सरखा गमा शैं। इव रेख का
उद्देश्म के लर ऩाठको का भागादळान भाि शैं, फकवी वी
बी व्मत्क्त वलळेऴ की धासभाक बालनाओॊ को ठेव
ऩशुॊ ाने का नशीॊ शैं। इव वलऴम भें सबन्न-सबन्न रोगों
के वल ाय सबन्न शो वकते शैं।
***
भॊि सवद्ध दुराब वाभग्री
कारी शल्दी:- 370, 550, 730, 1450, 1900 कभर गट्टे की भारा - Rs- 370
भामा जार- Rs- 251, 551, 751 शल्दी भारा - Rs- 280
धन लृवद्ध शकीक वेट Rs-280 (कारी शल्दी के वाथ Rs-550) तुरवी भारा - Rs- 190, 280, 370, 460
घोडे की नार- Rs.351, 551, 751 नलयत्न भारा- Rs- 1050, 1900, 2800, 3700 & Above
शकीक: 11 नॊग-Rs-190, 21 नॊग Rs-370 नलयॊगी शकीक भारा Rs- 280, 460, 730
रघु श्रीपर: 1 नॊग-Rs-21, 11 नॊग-Rs-190 शकीक भारा (वात यॊग) Rs- 280, 460, 730, 910
नाग के ळय: 11 ग्राभ, Rs-145 भूॊगे की भारा Rs- 190, 280, Real -1050, 1900 & Above
स्पहटक भारा- Rs- 235, 280, 460, 730, DC 1050, 1250 ऩायद भारा Rs- 1450, 1900, 2800 & Above
वपे द ॊदन भारा - Rs- 460, 640, 910 लैजमॊती भारा Rs- 190, 280, 460
यक्त (रार) ॊदन - Rs- 370, 550, रुद्राष भारा: 190, 280, 460, 730, 1050, 1450
भोती भारा- Rs- 460, 730, 1250, 1450 & Above वलधुत भारा - Rs- 190, 280
कासभमा सवॊदूय- Rs- 460, 730, 1050, 1450, & Above भूल्म भें अॊतय छोटे वे फडे आकाय के कायण शैं।
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13 2019
ऩूजा भें करळ स्थाऩन का भशत्ल
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
-
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ब
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ब
ब
 क्मा आऩके फच् े कु वॊगती के सळकाय शैं?
 क्मा आऩके फच् े आऩका कशना नशीॊ भान यशे शैं?
 क्मा आऩके फच् े घय भें अळाॊतत ऩैदा कय यशे शैं?
घय ऩरयलाय भें ळाॊतत एलॊ फच् े को कु वॊगती वे छु डाने शेतु फच् े के नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्वाया
ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रततत्टठत ऩूणा ैतन्म मुक्त लळीकयण कल एलॊ एव.एन.डडब्फी
फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भें स्थावऩत कय अल्ऩ ऩूजा, वलधध-वलधान वे आऩ वलळेऴ राब प्राप्त कय वकते
शैं। महद आऩ तो आऩ भॊि सवद्ध लळीकयण कल एलॊ एव.एन.डडब्फी फनलाना ाशते शैं, तो वॊऩका इव कय
वकते शैं।
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14 2019
ळुब कामों भें श्रीपर ढ़ाने का भशत्ल?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
नारयमर ळुबता का वू क शोने के कायण शी इवे "श्रीपर" कशा जाता शैं। श्रीपर का भशत्ल अत्माधधक एलॊ
वलाि यशा शैं। श्रीपर को हशॊदी भें नारयमर, खोऩया, गयी, गोरा आहद नाभ वे जाना जाता शैं, इव भयाठी भें नायऱ,
गुजयाती भें नारयमय, श्रीपर, नारयमेऱ, फॊगारी भें, नारयके र, डाफेय नायके र, ऩमोधय, कन्नड भें तॊधगनकातम, तॊधगन,
कॊब्फरय, तॊधगनकातमम भरमारभ भें नासऱके यॊ, लेसऱच् ण्ण, तेण्णा, नेऩासर भें नरयलर, नरयलरको तसभर भें तेंकाम,
तेन्नै, तेनकु , तेरुगु कोब्फरय, आहद नाभों वे जाना जाता शैं।
नारयमर को वॊस्कृ त भें श्रीपर कशा जाता शैं। हशॊदू धभा भें वबी प्रकाय के धासभाक एलॊ भाॊगसरक कामों भें
श्रीपर अथाात नारयमर का वलळेऴ भशत्ल ऩौयाणणक कार वे शी यशा शै। हशॊदू धभा की ऩयॊऩयाओॊ के अनुळाय जफ
फकवी नमे कामाा मा ळुब कामा का प्रायॊब मा ळुबायॊब कयना शो तो देली-देलता के वम्भुख श्रीपर अऩाण कयने औय
उवे पोडने का वलळेऴ भशत्ल यशा शै।
महश कायण शैं की वबी प्रकाय के धासभाक कामों भें अन्म ऩूजन वाभग्रीमों के वाथ भें श्रीपर बी वलळेऴ रुऩ
वे शोता शैं। धासभाक भान्मता के अनुळाय श्रीपर का उऩमोग फसर कभा के प्रततक के रुऩ भें बी फकमा जाता शैं। फसर
कभा अथाात उऩशाय अथला नैलेद्य की लस्तु। देली-देलताओॊको फसर अऩाण कयने का तत्ऩमा शोता शैं उनकी वलळेऴ कृ ऩा
प्राप्त कयना मा उनकी द्वाया प्राप्त शुई कृ ऩा के प्रतत कृ तसता अथाात आबाय व्मक्त कयना।
श्रीपर पोडने की ऩयॊऩया
भान्मता शैं की ऩुयातन कार भें हशॊदू धभा भें भनुटम औय जानलयों की फसर देने फक ऩयॊऩया एक वाभान्म प्रथा थी।
वलद्वानों के भतानुळाय जगदगुरु आहद ळॊकया ामा जी ने इव फसर ऩयॊऩया को तोडा औय भनुटम-जानलयों के स्थान ऩय
श्रीपर ढ़ाने की ऩयॊऩया ळुरु शुई।
श्रीपर को भनुटम के भस्तक का प्रततक भान कय फसर स्लरुऩ ढ़ामा जाता शैं। श्रीपर की जटा को भनुटम
के फार, श्रीपर की जटा के तनकट हदखने लारे तीन गोराकाय ध ह्नों को को भनुटम की आॊखों एलॊ नाक, श्रीपर
के कठोय कल को भनुटम की खोऩडी, श्रीपर के ऩानी को भनुटम के खून, श्रीपर के गूदे को भनुटम का हदभाग
भाना जाता शै।
श्रीपर पोडने का भशत्ल
श्रीपर पोडने भुख्म उद्देश्म भनुटम के अशॊकाय को दूय कय औय स्लमॊ को बगलान वभवऩात कयने की बालना शैं।
भान्मता शैं फक ऐवा कयने ऩय भनुटम की असानता एलॊ अशॊकाय का कठोय कल टूट जाता शै औय मश आत्भ ळुवद्ध
औय सान का द्वाय खोरता शै, त्जववे नारयमर के गूदे लारे वपे द हशस्वे के रूऩ भें देखा जाता शै। श्रीपर को देली-
देलता को आऩाब कय उवका प्रवाद फाॉटने की प्रथा हशॊदू वॊस्कृ तत भें वलााधधक रोकवप्रम शैं। वलद्वानों को भतानुळाय
श्रीपर के ऩानी को ऩीने वे भनुटम को अत्मधधक वुख एलॊ वॊतुत्टट की अनुबूतत शोती शैं।

15 2019
नलयाि व्रत की वयर वलधध?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
नल हदनों तक रने लारे इव ऩला ऩय शभ व्रत यखकय भाॊ के नौ अरग-अरग रूऩ की ऩूजा की जाती शैं। इव दौयान घय
भें फकमा जाने लारा वलधधलत शलन बी स्लास््म के सरए अत्मॊत राबप्रद शैं। शलन वे आत्त्भक ळाॊतत औय लातालयण फक ळुवद्ध
के अराला घय नकायात्भक ळत्क्तमों का नाळ शो कय वकायात्भक ळत्क्तमो का प्रलेळ शोता शैं।
नवयार व्रत
नलयाि भें नल याि वे रेकय वात यािी,ऩाॊ यािी, दों यािी औय एक यािी व्रत कयने का बी वलधान शैं।
नलयाि व्रत के धासभाक भशत्ल के अराला लैसातनक भशत्ल शैं, जो स्लास््म की दृत्टट वे कापी राबदामक शोता शैं। व्रत कयने
वे ळयीय भें ुस्ती-पु तॉ फनी यशती शैं। योजाना कामा कयने लारे ऩा न तॊि को बी व्रत के हदन आयाभ सभरता शैं। फच् े,
फुजुगा, फीभाय, गबालती भहशरा को नलयाि व्रत का नशीॊ यखना ाहशए।
नवयार व्रत से सॊफॊधधत उऩमोगी सुझाव
 व्रत के दौयान अधधक वभम भौन धायण कयें।
 व्रत के ळुरुआत भें बूख कापी रगती शैं। ऐवे भें नीॊफू ऩानी वऩमा जा वकता शै। इववे बूख को तनमॊत्रित यखने भें भदद
सभरेगी।
 जशा तक वॊबल शो तनजारा उऩलाव न यखें। इववे ळयीय भें ऩानी फक कभी शो जाती शैं औय अऩसळटट ऩदाथा ळयीय के
फाशय नशीॊ आ ऩाते। इववे ऩेट भें जरन, कब्ज, वॊक्रभण, ऩेळाफ भें जरन जैवी कई वभस्माएॊ ऩैदा शो वकती शैं।
 एक वाथ खूफ वाया ऩानी ऩीने के फजाए हदन भें कई फाय नीॊफू ऩानी वऩएॊ।
 ज्मादातय रोगो को उऩलाव भें अक्वय कब्ज की सळकामत शो जाती शैं। इवसरए व्रत ळुरू कयने के ऩशरे त्रिपरा,
आॊलरा, ऩारक का वूऩ मा कयेरे के यव इत्माहद ऩदाथो का वेलन कयें। इववे ऩेट वाप यशता शै।
 व्रत के दौयान ाम, कापी का वेलन कापी फढ़ जाता शै। इव ऩय तनमॊिण यखें।
व्रत के दौयान कौनसे खाद्य ऩदाथा ग्रहण कयें?
 व्रत भें अन्न का वेलन लत्जात शैं। त्जव कायण ळयीय भें ऊजाा की कभी शो जाती शैं।
 अनाज फक जगश परों ल वत्ब्जमों का वेलन फकमा जा वकता शैं। इववे ळयीय को जरुयी ऊजाा सभरती शैं।
 वुफश के वभम आरू को फ्राई कयके खामा जा वकता शैं। आरू भें काफोशाइड्रेट प्र ुय भािा भें शोता शै। इव सरए आरू खाने
वे ळयीय को ताकत सभरती शै।
 वुफश एक धगराव दूध वऩरें। दोऩशय के वभम पर मा जूव रें। ळाभ को ाम ऩी वकते शैं।
 कई रोग व्रत भें एक फाय शी बोजन कयते शैं। ऐवे भें एक तनत्श् त अॊतयार ऩय पर खा वकते शैं। यात के खाने भें सवॊघाडे
के आटे वे फने ऩकलान खा वकते शैं।
16 2019
भाॊ के यणों तनलाव कयते वभस्त शैं तीथा
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
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***
17 2019
देली उऩावना भें उऩमुक्त एलॊ तनवऴद्ध ऩि ऩुटऩ
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
देवी के लरमे उऩमुतत ऩर-ऩुष्ऩ का चमन
 वलद्वानों के भतानुळाय जो ऩि-ऩुटऩ बगलान सळलजी को वप्रम शैं मा जो सळलजी को अऩाण फकमे जाते शैं ले वबी
ऩि-ऩुटऩ देली बगलती को बी वप्रम शैं ।
 देली बगलती को अऩाभागा अधधक वप्रम शैं, इव सरए अधधकतय देली ऩूजन भें अऩाभागा वलळेऴ रुऩ वे ढामा जाता
शैं।
 इव के अराला वलद्वानो का कथन शैं की जो ऩि-ऩुटऩ ळास्िोक्त वलधान वे बगलान सळल की ऩूजा भें तनऴेध शैं
उवे बी देली ऩूजन भें ढ़ामे जा वकते शैं।
 देली बगलती को वबी प्रकाय के रार पू र ढाएॊ जा वकते शैं क्मोफक रार यॊग के वबी पू र बगलतीको वप्रम शैं
तथा वुगत्न्धत वभस्त श्लेत पू र बी बगलतीको अधधक वप्रम शैं।
 देली बगलती के ऩूजन भें भेरी, भदाय, के वय, फेरा, श्लेत औय रार पू र, श्लेत कभर, ऩराळ, तगय, अळोक,
ॊऩा, भौरसवयी, कुॊ द, रोध, कनेय, आक, ळीळभ औय अऩयात्जत ( अथाात ळॊखऩुटऩी) आहदका उऩमोग फकमा जा
वकता शैं।
 कु छ जानकायों का कथन शैं की देली बगलती के ऩूजन भें आक औय भदाय मश दो पू रों को तनऴेध शैं।
 मशीॊ कायण शैं की उक्त दोनों पू र को वलसबन्न भत के कायण देली दुगाा के ऩूजन भे उऩमोग बी फकम जाते शैं
औय तनवऴद्ध बी भाने जाते शैं।
 महद फकवी कायण लळ जफ अन्म उऩमुक्त पू र न सभरे तफ इन दोनोंका उऩमोग फकमा जा वकता शैं ।
 देली दुगाा को छोडकय देवलमों ऩय इन दोनों को नशीॊ ढाना ाहशए। रेफकन देली दुगाा ऩय ढ़ामा जा वकता शैं।
क्मोंफक कु छ जानकायों का भत शैं की दुगााकी ऩूजाभें इन दोनोंका वलधान ळास्िोक्त शैं।
 ळभी, अळोक, कणणाकाय (कतनमाय मा अभरताव), गूभा, दोऩशरयमा, अगस्त्म, भदन, सवन्दुलाय, ळल्रकी, भाधल
आहद रताऍ, कु ळकी भॊजरयम ॊ, त्रफल्लऩि, के लडा, कदम्फ, बटकटैमा, कभर मे पू र देली बगलती को वप्रम शैं।
 आक औय भदायकी तयश दूलाा, ततरक, भारती, तुरवी, बॊगयैमा औय तभार उऩमुक्त एलॊ प्रततवऴद्ध शैं अथाात मे
ळास्िोंवे वलहशत बी शैं औय तनवऴद्ध बी शैं।
* वलहशत-प्रततसळद्धके वम्फन्धके तत्त्लवागयवॊहशताक भें उल्रेख शैं फक जफ ळास्िोंवे वलहशत पू र न सभर ऩामें तो
वलहशत-प्रततवऴद्ध पू रोंवे ऩूजा फक जा वकती शैं।
श्री भहारक्ष्भी मॊर
धन फक देली रक्ष्भी शैं जो भनुटम को धन, वभृवद्ध एलॊ ऐश्लमा प्रदान कयती शैं। अथा(धन) के त्रफना भनुटम जीलन दु्ख,
दरयद्रता, योग, अबालों वे ऩीडडत शोता शैं, औय अथा(धन) वे मुक्त भनुटम जीलन भें वभस्त वुख-वुवलधाएॊ बोगता शैं। श्री
भशारक्ष्भी मॊि के ऩूजन वे भनुटम की जन्भों जन्भ की दरयद्रता का नाळ शोकय, धन प्रात्प्त के प्रफर मोग फनने रगते शैं,
उवे धन-धान्म औय रक्ष्भी की लृवद्ध शोती शैं। श्री भशारक्ष्भी मॊि के तनमसभत ऩूजन एलॊ दळान वे धन की प्रात्प्त शोती शै
औय मॊि जी तनमसभत उऩावना वे देली रक्ष्भी का स्थाई तनलाव शोता शै। श्री भशारक्ष्भी मॊि भनुटम फक वबी बौततक
काभनाओॊ को ऩूणा कय धन ऐश्लमा प्रदान कयने भें वभथा शैं। अषम तृतीमा, धनतेयव, दीलालरी, गुरु ऩुटमाभृत मोग
यवलऩुटम इत्माहद ळुब भुशूता भें मॊि की स्थाऩना एलॊ ऩूजन का वलळेऴ भशत्ल शैं। >> Shop Online | Order Now
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18 2019
भनोकाभना ऩूतता शेतु नलयाि भें देली को कै वे अऩाण कयें बोग?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
नलयाि के नौ हदनों भें तीन देवलमों क्रभळ्
ऩालाती, रक्ष्भी औय वयस्लती औय देली के नौ रुऩों का
कभळ् ळैरऩुिी, ब्रह्भा ारयणी, ॊद्रघण्टा, कू टभाण्डा,
स्कॊ दभाता, कात्मामनी, कारयात्रि, भशागौयी औय
सववद्धदािी का ऩूजन फकमा जाता शैं।, नलयािे के प्रथभ
तीन हदन ऩालाती के तीन स्लरुऩों का ऩूजन फकमा जाता
शैं, अगरे तीन हदन भाॉ रक्ष्भी के स्लरुऩों का ऩूजन
फकमा जाता शैं औय आणखयी के तीन हदन वयस्लती
भाता के स्लरुऩों की ऩूजा की जाती शैं। उवी प्रकाय नौ
देलीमों को क्रभळ् प्रथभ हदन ळैरऩुिी, द्वद्वतीम हदन
ब्रह्भा ारयणी, तृतीम हदन न्द्रघण्टा, तुथा हदन
कु टभाण्डा, ऩॊ भ् हदन स्कन्द भाता, ऴटठभ ् हदन
कात्मातमनी, वाप्तभ् हदन कारयात्रि, अटटभ् हदन
भशागौयी औय नौलें हदन सववद्धदािी के रुऩ का ऩूजन फकमा
जाता शैं।
नलयािे के नौ हदनों तक बक्त के भन भें मश
कौतुशर शोता शैं, फक लश भाता को बोग भें क्मा ढ़ामे,
त्जववे भाॉ ळीघ्र प्रवन्न शों जामे. हशन्दू धभा भें कोई बी
त्मौशाय, व्रत-उऩलाव देली-देलताओॊ को बोग, प्रवाद
अत्ऩाण फकमे त्रफना वॊऩन्न नशीॊ शोता शै। नलयािे के नौ
हदन भें नौ देवलमों को अरग-अरग बोग रगाने का
वलधान धभाळास्िों भें लणणात शैं।
नवयार के प्रथभ हदन देवी शैरऩुरी:
नलयाि के प्रथभ हदन भाॊ के ळैरऩुिी स्लरूऩ का
ऩूजन कयने का वलधान शैं। ऩलातयाज (ळैरयाज) हशभारम
के मशाॊ ऩालाती रुऩ भें जन्भ रेने वे बगलती को ळैरऩुिी
कशा जाता शैं। इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन
कयके नैलेद्य के रूऩ भें देली को गाम का घृत (घी)
अऩाण कयना ाहशए। भाॊ को यणों ढ़ामे गमे घृत को
ब्राम्शणों भें फाॊटने वे योगों वे भुत्क्त सभरती शै। देली
कृ ऩा वे व्मत्क्त वदा धन-धान्म वे वॊऩन्न यशता शैं।
अथाात उवे त्जलन भें धन एलॊ अन्म वुख वाधनो को
कभी भशवुव नशीॊ शोतीॊ।
नवयार के द्वद्वतीम हदन ब्रह्भाचारयणी:
नलयाि के दूवये हदन भाॊ के ब्रह्भ ारयणी स्लरूऩ
का ऩूजन कयने का वलधान शैं। क्मोफक ब्रह्भ का अथा शैं
तऩ। भाॊ ब्रह्भ ारयणी तऩ का आ यण कयने लारी
बगलती शैं इवी कायण उन्शें ब्रह्भ ारयणी कशा गमा।
इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली को
ीनी का बोग रगाकय दान कयना ाहशए। ीनी का
बोग रागाने वे भनुटम दीघाजीली शोता शैं। देली कृ ऩा वे
व्मत्क्त को अनॊत पर फक प्रात्प्त शोती शैं। व्मत्क्त भें
तऩ, त्माग, वदा ाय, वॊमभ जैवे वद् गुणों फक लृवद्ध शोती
शैं।
नवयार के तृतीम हदन चन्रघॊटा:
नलयाि के तीवये हदन भाॊ के न्द्रघण्टा स्लरूऩ
का ऩूजन कयने का वलधान शैं। न्द्रघण्टा का स्लरूऩ
ळाॊततदामक औय ऩयभ कल्माणकायी शैं। न्द्रघण्टा के
भस्तक ऩय घण्टे के आकाय का अधा न्द्र ळोसबत यशता
शैं। इव सरमे भाॊ को न्द्रघण्टा देली कशा जाता शैं। इव
हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली को दूध
का बोग रगाकय दान कयना ाहशए। दूध का बोग
रागाने वे व्मत्क्त को दुखों वे भुत्क्त सभरती शैं। देली
कृ ऩा वे व्मत्क्त को वबी ऩाऩों वे भुत्क्त सभरती शैं उवे
वभस्त वाॊवारयक आधध-व्माधध वे भुत्क्त सभरती शैं।
इवके उऩयाॊत व्मत्क्त को ध यामु, आयोग्म, वुखी औय
वॊऩन्न शोनता प्राप्त शोती शैं। व्मत्क्त के वाशव एल
वलयता भें लृवद्ध शोती शैं। व्मत्क्त स्लय भें सभठाव आती
शैं उवके आकऴाण भें बी लृवद्ध शोती शैं। न्द्रघण्टा को
सान की देली बी भाना गमा शै।
19 2019
नवयार के चतुथा हदन कू ष्भाण्डा:
नलयाि के तुथा हदन भाॊ के कू टभाण्डा स्लरूऩ
का ऩूजन कयने का वलधान शैं। अऩनी भॊद शॊवी द्वाया
ब्रह्भाण्ड को उत्ऩन्न फकमा था इवीके कायण इनका
नाभ कू टभाण्डा देली यखा गमा। इव हदन देली का
ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली को भारऩुआ बोग
रगाकय दान कयना ाहशए। भारऩुए का बोग रागाने
वे व्मत्क्त फक वलऩत्त्त का नाळ शोता शैं। देली कृ ऩा वे
व्मत्क्त को वबी प्रकाय के योग, ळोक औय क्रेळ वे
भुत्क्त सभरती शैं, उवे आमुटम, मळ, फर औय फुवद्ध प्राप्त
शोती शैं।
नवयार के ऩॊचभ हदन स्कॊ दभाता:
नलयाि के ऩाॊ लें हदन भाॊ के स्कॊ दभाता स्लरूऩ
का ऩूजन कयने का वलधान शैं। स्कॊ दभाता कु भाय अथाात ्
कातताके म फक भाता शोने के कायण, उन्शें स्कन्दभाता के
नाभ वे जाना जाता शैं। इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय
वे ऩूजन कयके देली को के रे का बोग रगाकय दान
कयना ाहशए। के रे का बोग रागाने वे व्मत्क्त फक
फुवद्ध, वललेक का वलकाव शोता शैं। व्मत्क्त के
ऩरयलायीकवुख वभृवद्ध भें लृवद्ध शोती शैं। देली कृ ऩा वे
व्मत्क्त फक वभस्त इच्छाओॊ की ऩूतता शोती शैं एलॊ
जीलन भें ऩयभ वुख एलॊ ळाॊतत प्राप्त शोती शैं।
नवयार के षष्ठभ् हदन कात्मामनी
नलयाि के छठें हदन भाॊ के कात्मामनी स्लरूऩ
का ऩूजन कयने का वलधान शैं। भशवऴा कात्मामन फक ऩुिी
शोने के कायण उन्शें कात्मामनी के नाभ वे जाना जाता
शैं। इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली
को भधु (ळशद, भशु, भध) का बोग रगाकय दान कयना
ाहशए। भधु का बोग रागाने वे व्मत्क्त को वुॊदय
स्लरूऩ फक प्रात्प्त शोती शैं। कात्मामनी देली को लैहदक
मुग भें मे ऋवऴ-भुतनमों को कटट देने लारे यष-दानल,
ऩाऩी जील को अऩने तेज वे शी नटट कय देने लारी
भाना गमा शैं।
नवयार के सप्तभ् हदन कारयात्रर
नलयाि के वातलें हदन भाॊ के कारयात्रि स्लरूऩ
का ऩूजन कयने का वलधान शैं। कारयात्रि देली के ळयीय
का यॊग घने अॊधकाय फक तयश एकदभ कारा शैं। इव
हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली को गुड
का बोग रगाकय दान कयना ाहशए। गुड का बोग
रागाने वे व्मत्क्त के वभस्त ळोक दूय शोते शैं।
कारयात्रि के ऩूजन वे अत्ग्न बम, आकाळ बम, बूत
वऩळा इत्मादी ळत्क्तमाॊ कारयात्रि देली के स्भयण भाि
वे शी बाग जाते शैं, कारयात्रि का स्लरूऩ देखने भें
अत्मॊत बमानक शोते शुले बी वदैल ळुब पर देने लारा
शोता शैं, इव सरमे कारयात्रि को ळुबॊकयी के नाभवे बी
जाना जाता शैं। कारयात्रि ळिु एलॊ दुटटों का वॊशाय कय ने
लारी देली शैं।
नवयार के अष्टभ् हदन भहागौयी
नलयाि के आठलें हदन भाॊ के भशागौयी स्लरूऩ
का ऩूजन कयने का वलधान शैं। भशागौयी स्लरूऩ
उज्जलर, कोभर, श्लेतलणाा शोने के कायण इनका नाभ
भशागौयी शैं। इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन
कयके देली को श्रीपर (नारयमर) का बोग रगाकय दान
कयना ाहशए। श्रीपर (नारयमर) का बोग रागाने वे
व्मत्क्त के वॊताऩ दूय शोते शैं। भशागौयी के ऩूजन कयने
लारे वाधन के सरमे भाॊ अन्नऩूणाा के वभान, धन, लैबल
औय वुख-ळाॊतत प्रदान कयने लारी एलॊ वॊकट वे भुत्क्त
हदराने लारी देली भशागौयी शैं।
नवयार के नवभ् हदन लसविदारी
नलयाि के नौलें हदन भाॊ के सववद्धदािी स्लरूऩ का ऩूजन
कयने का वलधान शैं। भाता सववद्धदािी वबी प्रकाय की
सववद्धमों की प्रदाता भाना गमा शैं। सववद्धदािी को
वभस्त्म सववद्धमों की स्लासभनी बी भाना जाता शैं। इव हदन
देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली को धान के
राले का बोग रागाने वे व्मत्क्त को रोक औय ऩयरोक
का वुख प्राप्त शोता शैं। सववद्धदािी के ऩूजन वे व्मत्क्त
फक वभस्त काभनाओॊ फक ऩूतता शोकय उवे ऋवद्ध, सववद्ध
फक प्रात्प्त शोती शैं। ऩूजन वे मळ, फर औय धन फक
प्रात्प्त कामो भें रे आ यशे फाधा-वलध्न वभाप्त शो जाते
शैं। व्मत्क्त को मळ, फर औय धन फक प्रात्प्त शोकय उवे
भाॊ फक कृ ऩा वे धभा, अथा, काभ औय भोष फक बी प्रात्प्त
स्लत् शो जाती शैं।
20 2019
नलयािी भाॉ को प्रवन्न कयने का वुनशया अलवय
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
नलयाि अथाात भाॉ दुगाा की उऩावना भें वभवऩात नौ यात। दुगाा का अथा हैं, दुगातत नासळनी शैं, जगत ् की
उत्ऩत्त्त, ऩारन एलॊ वॊ ारन तीनों व्मलस्थाएॊ त्जव ळत्क्त के आधीन वम्ऩाहदत शोती शै लश जगत जननी भाॉ
आहदळत्क्त बगलती शैं। भाॉ दुगाा के रुऩ अनॊत शैं, रेफकन देली को प्रधान नौ रूऩों भें नलदुगाा के नाभ वे जाना जाता
शैं। आहद ळत्क्त भाॉ दुगाा वभग्र रोक भें अऩनी कृ ऩा औय करूणा लऴााती शै, भाॉ दुगाा अऩने बक्तों भें वद्द गुणों का
वलकाव कयके उनभें अऩनी ळत्क्त का वॊ ाय कयते शुले वॊवाय के वभग्र प्राणणमों का वॊ ारन कयती शै।
बौततकता भें यत भनुटम को अवॊखम उऩाम, ऩूजन, शलन, जऩ-तऩ के फाद बी भन की ळाॊतत नशीॊ सभरती।
ऐवे भें शय तयश वे तनयाळ औय शाया ुका भनुटम महद भाॊ दुगाा की ळयण रेता शै जो तनत्श् त शी भाॉ दुगाा उवकी
दुगातत का तनलायण कयती शी शै।
क्मोफक, भाॉ आद्यळत्क्त की कृ ऩा वे भनुटम भें आत्भफर, द्दढ़ वलश्लाव, दमा, प्रेभ, बत्क्त जैवे वद्गुणों का
वलकाव शोता शैं। जीलन के इन्शीॊ भूल्मों को वभझ कय भनुटम जीलन भें वच् ा वुख-ळाॊतत, लैबल, धन वॊऩदा को
प्राप्त कयता शै। अन्मथा इव वॊवाय के दरदर वे तनकरना उवके सरए वॊबल नशीॊ शै। इवसरए भनुटम को अवॊबल
को बी वॊबल कय हदखाने की ळत्क्त देली कृ ऩा वे शी प्राप्त शोती शैं।
नलयाि भें ऩूजा उऩावना का भुख्म उद्देश्म शोता शैं, नलयाि भें भाॉ दुगाा की आयाधना, भनुटम के तन-भन औय
इत्न्द्रमाॊ वॊमसभत शोने रगती शैं। ऩूणा तनटठा एलॊ श्रद्धा बाल वे फक गई उऩलाव वे भनुटम का तन वॊतुसरत शोता शै।
भनुटम के तन के वन्तुसरत शोने ऩय मोग फर वे भनुटम की इॊहद्रमाॊ वॊमसभत शो जाती शै। इत्न्द्रमों के वॊमसभत शोने
ऩय भनुटम का भन देली आयाध्मा भें त्स्थय शो जाता शै। त्जव के फर ऩय भनुटम को भनोलाॊतछत राब की प्रात्प्त शो
वकती शैं, त्जवभें जया बी वॊवम नशीॊ शैं।
देली उऩावना के फाये भें उल्रेख सभरता शैं की जो भनुटम अऩने भन को त्स्थय कय रेता शैं, लश वॊवाय वबी
क्र वे छू ट जाता शै। वॊवाय के फकवी प्रकाय के वलध्न-फाधाएॊ उवे कटट नशीॊ ऩशुॊ ा वकते। लश भनुटम भाॉ बगलती
दुगाा के वप्रम लाशन सवॊश की तयश तनबाम फन जाता शै, वॊवाय की वभस्त सववद्धमाॊ अऩने ऩयाक्रभ के फर ऩय सभरने
रगती शैं। नलयाि के दौयान ळास्िोक्त भॊिों द्वाया देली वे मशीॊ प्राथना की जाती शैं, की देली अलगुणों वे शभें भुक्त
कयके वद्गुणों वे मुक्त कयें।
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21 2019
नलयाि भें दव भशावलद्या की उऩावना वलळेऴ राबप्रद शैं
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
दव भशावल को देली दुगाा के शी दव रूऩ भाने
जाते शैं। दवों भशावल भें शय भशावल अऩनी
अद्वद्वतीम ळत्क्त वे भनुटम के वभस्त वॊकटों को दूय
कयने लारी शैं। इन दव भशावल ओॊ के भशत्ल को
वलसबन्न धभाळास्िों भें अत्मॊत उऩमोगी औय भशत्लऩूणा
भाना गमा शैं।
दळ भशावल को ळास्िों भें आ बगलती के
दव बेद कशे गमे शैं, जो क्रभळ् (1) कारी, (2) ताया,
(3) ऴोडळी, (4) बुलनेश्लयी, (5) बैयली, (6)
तछन्नभस्ता, (7) धूभालती, (8) फगरा, (9) भातॊगी एलॊ
(10) कभात्त्भका।
देवी कारी
कारी हशन्दू धभा की एक प्रभुख देली शैं । देली कारी को
भाॊ दुगाा की दव भशावल ओॊ भे वे एक भाना गमा शैं।
देली कारी ळत्क्त का अद्दबुत स्लरूऩ शै। भाॊ दुगाा ने
कारी रूऩ दैत्मों के वॊशाय के सरए धायण फकमा था।
देली कारी की उत्ऩत्त्त याषवों का अॊत कयने के सरए
शुई थी। देली कारी की उत्ऩत्त्त का भूर कायण धभा की
यषा औय धभा की स्थाऩना शी था देली कारी का ऩूजन
बायत के वलसबन्न प्रादेसळक षेिों भें वैकडो लऴो वे शोता
आमा शै। देली कारी का अथा कार अथाात वभम वे शै
जो वफको ग्राव कय रेती शै। देली कारी का स्लरूऩ बरे
शी कारा औय डयालना रगता शैं रेफकन देली भाॉ अऩने
बक्तों को अबम लयदान देने लारी शै। बगलती तनयाकाय
शोकय बी वॊवाय के वभस्त प्राणीमों के दु:ख दूय कयने
के सरमे मुग-मुग भें अनेकों रूऩ धायण कयके अलताय
रेती यशीॊ शैं। देली कारी को कार एलॊ ऩरयलतान की देली
भाना गमा शैं। देली कारी का ऩूजन ब्रह्भाॊड के उद्धायक
रूऩ भें फकमा जाता शै।
देवी ताया
भाॉ ताया को भाॊ दुगाा की दव भशावल ओॊ भे वे एक
भाना गमा शैं। वलसबन्न तॊि वाधनाओॊ भें देली ताया की
उऩावना वलासववद्धदामक भानी जाती शै। देली ताया को
वूमा प्ररम की अतघटठािी देली उग्र रुऩ भाना गमा शै।
जफ भनुटम को ायों औय तनयाळा औय घोय वलऩत्त्त
नज़य आयशी शो उववे छु टकाया ऩाने के सरए कोई याश
हदखाई नशीॊ दें यशी शो, जफ अन्म कोई देली-देलता
वशामक न शो तफ भाॊ बगलती ताया के रूऩ भें
उऩत्स्थत शो कय अऩने बक्त को घोय वलऩत्त्त वे भुक्त
कयाती शैं। देली ताया के ऩूजन वे ळिुओॊ का नाळ शोता
शैं, सान, वुख-वॊऩदा, ऐश्लमा, रूऩ-वौंदमा की लृवद्ध शोती
नलयत्न जडडत श्री मॊि ळास्ि ल न के अनुवाय ळुद्ध वुलणा मा यजत भें तनसभात श्री मॊि के ायों औय महद
नलयत्न जडला ने ऩय मश नलयत्न जडडत श्री मॊि कशराता शैं। वबी यत्नो को उवके तनत्श् त स्थान ऩय जड कय र के ट
के रूऩ भें धायण कयने वे व्मत्क्त को अनॊत एश्लमा एलॊ रक्ष्भी की प्रात्प्त शोती शैं। व्मत्क्त को एवा आबाव शोता शैं
जैवे भाॊ रक्ष्भी उवके वाथ शैं। नलग्रश को श्री मॊि के वाथ रगाने वे ग्रशों की अळुब दळा का धायण कयने लारे व्मत्क्त
ऩय प्रबाल नशीॊ शोता शैं। गरे भें शोने के कायण मॊि ऩवलि यशता शैं एलॊ स्नान कयते वभम इव मॊि ऩय स्ऩळा कय जो
जर त्रफॊदु ळयीय को रगते शैं, लश गॊगा जर के वभान ऩवलि शोता शैं। इव सरमे इवे वफवे तेजस्ली एलॊ परदातम
कशजाता शैं। जैवे अभृत वे उत्तभ कोई औऴधध नशीॊ, उवी प्रकाय रक्ष्भी प्रात्प्त के सरमे श्री मॊि वे उत्तभ कोई मॊि
वॊवाय भें नशीॊ शैं एवा ळास्िोक्त ल न शैं। इव प्रकाय के नलयत्न जडडत श्री मॊि गुरूत्ल कामाारम द्वाया ळुब भुशूता भें
प्राण प्रततत्टठत कयके फनालाए जाते शैं। Rs: 4600, 5500, 6400 वे 10,900 वे अधधक >> OrderNow
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22 2019
शैं। इव के अराला देली ताया बोग औय भोष प्रदान
कयने भें बी वशामक भानी गई शैं। उग्र ताया, नीर
वयस्लती औय एकजटा देली ताया के रूऩ शैं। देली ताया
को ब्रह्भाॊड की प्रभुख देली एलॊ याज-याजेश्लयी भाना गमा
शैं।
भाता रलरता
भाॉ रसरता दव भशावल ओॊ भें वे एक शैं मश देली दुगाा
का एक रूऩ शैं जो रसरता के नाभ वे जाना जाता शै।।
देली रसरता जी का स्लरुऩ अत्मॊत शी उज्जलर ल
प्रकाळ भान शै। कासरका ऩुयाण भें उल्रेख शैं की देली
की गौय लणा, दो बुजाओॊ मुक्त यत्क्तभ कभर ऩय
वलयात्जत शैं। रसरता देली के ऩूजन वे भनुटम को
वभृवद्ध की प्राप्त शोती शै। दक्षषणभागॉ ळाक्तों (अथाात
बगलती ळत्क्त की उऩावना) के भतानुवाय देली रसरता
को ण्डी का स्थान प्राप्त शै। भाॉ रसरता की ऩूजा
ऩद्धतत भें रसरतावशस्रनाभ, रसरतोऩाख्मान,
रसरतात्रिळती आहद का ऩाठ फकमा जाता शै।
भाता बुवनेववयी
धभा ळास्िों भें भाता बुलनेश्लयी को वृत्टट के
वभस्त ऐश्लमय की स्लासभनी कशाॊ गमा शैं। बुलनेश्लयी
भाता का लणा श्माभ तथा गौय लणा शैं, स्लरुऩ एक भुख,
ाय शाथ शैं ाय शाथों भें गदा ळत्क्त का एलॊ दॊड
व्मलस्था का प्रतीक शै। आळीलााद भुद्रा प्रजाऩारन का
प्रतीक शै, मश वलोच् वत्ता का प्रतीक शैं। वलश्ल बुलन
भें जो, ईश्लय शैं, लश देली बुलनेश्लयी शैं। देली के नख भें
ब्रह्भाण्ड का दळान शोता शै। भाता बुलनेश्लयी वूमा के
वभान रार लणा मुक्त हदव्म आबा वे मुक्त शैं। भाता
के भॊि बी अत्मॊत प्रबाली भाने जाते शैं। भाॉ के बक्तो
के सरए देली के फीज भॊि का प्रमोग अन्म देली-देलताओॊ
की आयाधना भें वलळेऴ वशामक भाना गमा शैं भाता
बुलनेश्लयी के भूर भॊि औय ऩॊ ाषयी भॊि का जाऩ
कयना वलळेऴ राबप्रद एलॊ सववद्ध प्रदान कयने लारा शैं।
त्ररऩुय बैयवी
धभा ळास्िों भें भाॉ त्रिऩुय बैयली को तभोगुण एलॊ
यजोगुण वे मुक्त भाना गमा शैं। ळास्िों भें भाॉ बैयली के
अन्म तेयश स्लरुऩ फतामे गमे शैं। भाता के फकवी बी
स्लरुऩ की वाधना भनुटम को वलळेऴ पर प्रदान कयने
लारी शै। भाॉ त्रिऩुय का स्लरुऩ कॊ ठ भें भुॊड भारा धायण
फकमे, शाथों भें भारा धायण फकमे यशती शैं। भाॉ त्रिऩुय
बैयली स्लमॊ वाधनाभम शैं उनका एक शाथ अबम भुद्रा
औय दूवया शाथ लय भुद्रा भैं शै जो बक्तों को वबी
प्रकाय के वुख वौबाग्म प्रदाता शै। भाॉ त्रिऩुय बैयली रार
लस्ि धायण फकमा शै। भाॉ त्रिऩुय बैयली के ऩूजन भें रार
यॊग का वलळेऴ रुऩ वे प्रमोग फकमा जाता शै। त्रिऩुय
बैयली सववद्धमाॉ प्रदान कयने लारी शोती शैं।
तिन्नभस्ता
दव भशा वल ओॊ भें देली तछन्नभस्ता को छठी
भशावल कशा जाता शैं। भाकिं डेम ऩुयाण ल सळल ऩुयाण
आहद भें तछन्नभस्ता देली के रूऩ का स्ऩटट लणान
फकमा गमा शै इनके अनुवाय जफ देली ने ॊडी का रूऩ
धायण कय याषवों का वॊशाय फकमा। दैत्मों को ऩयास्त
कय देलों को वलजम हदरलाई तो ायों ओय उनके नाभ
की जमजम काय शोने रगी। रेफकन देली की वशामक
मोधगतनमाॉ अजमा औय वलजमा की यक्त वऩऩावा ळाॊत
नशीीँ शो ऩाई थी, इव ऩय उनकी यक्त वऩऩावा को ळाॊत
कयने शेतु देली तछन्नभस्ता ने अऩना भस्तक काटकय
अऩने यक्त वे उनकी यक्त प्माव फुझाई। इव कायण
भाता को तछन्नभत्स्तका नाभ वे जाना जाता शैं।
धूभावती
धूभालती देली का स्लरुऩ फडा बमॊकय प्रतीत
शोता शै। देली धूभालती का स्लरूऩ ाशे त्जतना उग्र मा
बमॊकय क्मों न शो लश वॊतान के सरए कल्माणकायी शी
शोता शै। आद्यळत्क्त बगलती नें धूभालती रूऩ ळिुओॊ के
वॊशाय के सरए शी धायण फकमा शै। भाॊ धूभालती के
ऩूजन वे भनुटम को अबीटट पर की प्रात्प्त शोती शै।
वृटटी भें फकवी बी प्राणी को नटट कयने मा वॊशाय कयने
की वबी षभताएॊ देली भें तनशीत शैं। ळास्िोक्त भतानुऴा
भशवऴा बृगु, ऋवऴ दुलाावा, ऩयळुयाभ आहद की भूर
ळत्क्त धूभालती शैं। धूभालती देली को वृत्टट भें करश
की देली शोने के कायण इनको करशवप्रम बी कशा जाता
23 2019
शै। लऴाा ऋतु के ाय भहशने देली का वप्रम वभम शोता
शै इव दौयान देली की ऩूजा-अ ाना, वाधना आहद कयना
वलळेऴ राबप्रद भाना जाता शै। धूभालती देली को बम
कायक एलॊ करश वप्रम बी भाना गमा शैं। भाॉ धूभालती
बक्तों को वबी कटटों को भुक्त कय देने लारी शै।
भाॉ फगराभुखी
देली फगराभुखी दवभशावल भें आठलीॊ
भशावल शैं। भाॉ फगराभुखी स्तॊबन ळत्क्त की
अधधटठािी देली शैं। फगराभुखी देली यत्नजडडत सवशावन
ऩय वलयाजती शो कय ळिुओॊ का नाळ कयती शैं। भाॉ
फगराभुखी अऩने बक्तों के बम को दूय कयने लारी
औय अऩने बक्त के ळिुओॊ की अतनटटकायी ळत्क्तमों
को नाळ कयने लारी शैं। भाॉ फगराभुखी को ऩीताम्फया
नाभ वे बी जाना जाता शै, क्मोकी देली को ऩीरा यॊग
अतत वप्रम शै। धभाळास्िों भें देली फगराभुखी का यॊग
स्लणा के वभान ऩीरा फतामा गमा शै। भाॉ फगराभुखी भें
वॊऩूणा ब्रह्भाण्ड की ळत्क्त का वभाहशत शैं। भाता
फगराभुखी की उऩावना भुख्म रुऩ वे ळिुनाळ,
लाकसववद्ध, लाद वललाद भें वलजम के सरए की जाती शै।
भाॉ फगराभुखी की उऩावना वे बक्त के वकर ळिुओॊ
का नाळ शोता शै तथा बक्त का जीलन वबी प्रकाय की
फाधा वे भुक्त शो जाता शै।
देवी भातॊगी
देली भातॊगी दवभशावल भें नलीॊ भशावल शैं।
मश लाणी औय वॊगीत की अधधटठािी देली भानी जाती
शैं। देली भातॊगी भें वॊऩूणा ब्रह्भाण्ड की ळत्क्त का
वभालेळ शैं। देली भातॊगी दाॊऩत्म जीलन को वुखी एलॊ
वभृद्ध फनाने लारी शोती शैं। देली भातॊगी के ऩूजन वे
गृशस्थ भनुटम को वबी प्रकाय के वुख प्राप्त शोते शैं।
देली भातॊगी अऩने बक्तों को अबम का पर प्रदान
कयती शैं। देली भातॊगी अबीटट सववद्ध प्रदान कयने लारी
शैं। देली भातॊगी को उत्च्छटट ाॊडासरनी ल भशावऩळाध नी
के नाभ वे बी जाना जाता शै। ळास्िकायों ने भातॊगी के
वलसबन्न प्रकाय के बेद फतामे शैं, उनभें प्रभुख शैं,
उत्च्छटटभातॊगी, याजभाॊतगी, वुभुखी, लैश्मभातॊगी,
कणाभातॊगी, आहद मश देली दक्षषण तथा ऩत्श् भ की
आधधटठाता शैं। ब्रह्भमाभर भें उल्रेख शैं की भातॊग
भुतन की दीघाकारीन तऩस्मा के कायण देली याजभातॊगी
रूऩ भें उनके वम्भुख प्रकट शुईं।
देवी कभरा
देली कभरा का स्लरुऩ का लणा स्लणा जैवी
आबा मुक्त शै। देली कभरा को गजयाज वूॊड भें वुलणा
करळ रेकय स्नान कयाते शैं। कभर ऩय आवीन शुए भाॊ
स्लणा वे वुळोसबत यशती शैं। वुख वॊऩदा की अधधटठािी
देली कभरा वभृवद्ध औय ऐश्लमा दामक शैं। देली कभरा
की वाधना वे वाधक धनी औय वल लान फन जाता शै।
बत्क्त को ायों तयप मळ औय वम्भान की प्रात्प्त
शोती शै। देली कभरा ायों ऩुरुऴाथों को प्रदान कयने
लारी औय वाधक को वभस्त फॊधनों वे भुक्त कया देने
लारी शैं। भाॉ कभरा ऐश्लमा, धन वॊऩदा की आधधटठािी
देली शै, इव सरए बौततक वुख-वाधनों की इच्छा यखने
लार वबी भनुटमों के सरए देली कभरा की अयाधना
वलाश्रेटठ फतामी गमी शैं।
आकत्स्भक धन प्रात्प्त कल
आकत्स्भक धन प्रात्प्त कल अऩने नाभ के अनुवाय शी भनुटम को आकत्स्भक धन प्रात्प्त शेतु परप्रद शैं इव कल
को धायण कयने वे वाधक को अप्रत्मासळत धन राब प्राप्त शोता शैं। ाशे लश धन राब व्मलवाम वे शो, नौकयी वे
शो, धन-वॊऩत्त्त इत्माहद फकवी बी भाध्मभ वे मश राब प्राप्त शो वकता शैं। शभाये लऴों के अनुवॊधान एलॊ अनुबलों
वे शभने आकत्स्भक धन प्रात्प्त कल को धायण कयने वे ळेमय ट्रेडडॊग, वोने- ाॊदी के व्माऩाय इत्माहद वॊफॊधधत षेि
वे जुडे रोगो को वलळेऴ रुऩ वे आकत्स्भक धन राब प्राप्त शोते देखा शैं। आकत्स्भक धन प्रात्प्त कल वे वलसबन्न
स्रोत वे धनराब बी सभर वकता शैं। भूल्म भार: 1250 >> Order Now
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24 2019
 वॊकरन गुरुत्ल का नलयािी भें कये ग्रश ळाॊतत के वयर उऩाम
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
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द्य
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द्वद्व
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 ब
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25 2019
ब 108 ब
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ब 108 ब
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26 2019
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 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
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1000
3000
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27 2019
द्वादश महा यंत्र
मॊि को अतत प्राध न एलॊ दुराब मॊिो के वॊकरन वे शभाये लऴो के अनुवॊधान द्वारा फनामा गमा शैं।
 ऩयभ दुराब लळीकयण मॊि,
 बाग्मोदम मॊि
 भनोलाॊतछत कामा सववद्ध मॊि
 याज्म फाधा तनलृत्त्त मॊि
 गृशस्थ वुख मॊि
 ळीघ्र वललाश वॊऩन्न गौयी अनॊग मॊि
 वशस्िाषी रक्ष्भी आफद्ध मॊि
 आकत्स्भक धन प्रात्प्त मॊि
 ऩूणा ऩौरुऴ प्रात्प्त काभदेल मॊि
 योग तनलृत्त्त मॊि
 वाधना सववद्ध मॊि
 ळिु दभन मॊि
उऩयोक्त वबी मॊिो को द्वादश भशा मॊि के रुऩ भें ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे भॊि सवद्ध ऩूणा प्राणप्रततत्टठत एलॊ ैतन्म मुक्त
फकमे जाते शैं। त्जवे स्थाऩीत कय त्रफना फकवी ऩूजा अ ाना-वलधध वलधान वलळेऴ राब प्राप्त कय वकते शैं।
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28 2019
भॊि सवद्ध स्पहटक श्री मॊि
"श्री मॊि" वफवे भशत्लऩूणा एलॊ ळत्क्तळारी मॊि शै। "श्री मॊि" को मॊि याज कशा जाता शै क्मोफक मश अत्मन्त ळुब
फ़रदमी मॊि शै। जो न के लर दूवये मन्िो वे अधधक वे अधधक राब देने भे वभथा शै एलॊ वॊवाय के शय व्मत्क्त के सरए
पामदेभॊद वात्रफत शोता शै। ऩूणा प्राण-प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म मुक्त "श्री मॊि" त्जव व्मत्क्त के घय भे शोता शै उवके
सरमे "श्री मॊि" अत्मन्त फ़रदामी सवद्ध शोता शै उवके दळान भाि वे अन-धगनत राब एलॊ वुख की प्रात्प्त शोतत शै। "श्री
मॊि" भे वभाई अद्वलतीम एलॊ अद्रश्म ळत्क्त भनुटम की वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे वभथा शोतत शै। त्जस्वे
उवका जीलन वे शताळा औय तनयाळा दूय शोकय लश भनुटम अवफ़रता वे वफ़रता फक औय तनयन्तय गतत कयने रगता
शै एलॊ उवे जीलन भे वभस्त बौततक वुखो फक प्रात्प्त शोतत शै। "श्री मॊि" भनुटम जीलन भें उत्ऩन्न शोने लारी वभस्मा-
फाधा एलॊ नकायात्भक उजाा को दूय कय वकायत्भक उजाा का तनभााण कयने भे वभथा शै। "श्री मॊि" की स्थाऩन वे घय मा
व्माऩाय के स्थान ऩय स्थावऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फत्न्धत ऩयेळातन भे न्मुनता आतत शै ल वुख-वभृवद्ध,
ळाॊतत एलॊ ऐश्लमा फक प्रत्प्त शोती शै।
गुरुत्व कामाारम भे "श्री मॊि" 12 ग्राभ वे 2250 Gram (2.25Kg) तक फक वाइज भे उप्रब्ध शै
.
भूल्म:- प्रतत ग्राभ Rs. 28 से Rs.100 >>Order Now
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 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
दुगाा फीवा मॊि
ळास्िोक्त भत के अनुळाय दुगाा फीवा मॊि
दुबााग्म को दूय कय व्मत्क्त के वोमे शुले बाग्म को
जगाने लारा भाना गमा शैं। दुगाा फीवा मॊि द्वाया व्मत्क्त
को जीलन भें धन वे वॊफॊधधत वॊस्माओॊ भें राब प्राप्त
शोता शैं। जो व्मत्क्त आधथाक वभस्मावे ऩयेळान शों, लश
व्मत्क्त महद नलयािों भें प्राण प्रततत्टठत फकमा गमा दुगाा
फीवा मॊि को स्थात्प्त कय रेता शैं, तो उवकी धन,
योजगाय एलॊ व्मलवाम वे वॊफॊधी वबी वभस्मों का ळीघ्र
शी अॊत शोने रगता शैं। नलयाि के हदनो भें प्राण
प्रततत्टठत दुगाा फीवा मॊि को अऩने घय-दुकान-ओफपव-
पै क्टयी भें स्थावऩत कयने वे वलळेऴ राब प्राप्त शोता शैं,
व्मत्क्त ळीघ्र शी अऩने व्माऩाय भें लृवद्ध एलॊ अऩनी
आधथाक त्स्थती भें वुधाय शोता देखेंगे। वॊऩूणा प्राण
प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म दुगाा फीवा मॊि को ळुब
भुशूता भें अऩने घय-दुकान-ओफपव भें स्थावऩत कयने वे
वलळेऴ राब प्राप्त शोता शैं।
भूल्म 730 वे:10900 >>Shop Online |Order Now
श्रीदुगाा मॊि
श्रीदुगाा मॊि ळत्क्त एलॊ बत्क्त के वाथ वभस्त
वाॊवारयक वुखों को प्रदान कयने लारा वलााधधक
रोकवप्रम मॊि शैं। अळुब ळत्क्तमों के दुटप्रबाल वे फ ने
के सरए भाॊ दुगाा की ऩूजा कयने वे वलळेऴ राब प्राप्त
शोता शै। श्रीदुगाा मॊि का ऩूजन व्मत्क्त को धभा, अथा,
काभ औय भोष इन ाय की प्रात्प्त भें बी वशामक
सवद्ध शोता शैं।
ळास्िोक्त लणान शैं की देली दुगाा के श्रीदुगाा मॊि
के ऩूजन औय दळान कयने भाि वे देली प्रवन्न शोकय
अऩने बक्तों की असबटट इच्छाएॊ ऩूणा शोती शैं। भाॉ दुगाा
के बक्तो की भाॉ स्लमॊ यषा कय उन ऩय अऩनी कृ ऩा
29 2019
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द्रटटी लऴााती शैं औय बक्तों को उन्नती के सळखय ऩय
जाने का भागा प्रवस्त कयती शैं। भाॉ दुगाा के बक्तो को
देली की ळीघ्र कृ ऩा प्रात्प्त शेतु श्रीदुगाा मॊि को अऩने
घय, दुकान, ओफपव इत्माहद भें ऩूजा स्थन भें स्थावऩत
कयना ाहशमे।
वलद्वानो का भत शैं की श्रीदुगाा मॊि के ऩूजन वे
भनुटम को लाक् सववद्ध, वॊतान प्रात्प्त, ळिु ऩय वलजम,
ऋण-योग आहद ऩीडा वे भुत्क्त प्राप्त शोती शैं औय
व्मत्क्त को जीलन भें वॊऩूणा वुखों की प्रात्प्त शो इव के
सरमे मश श्रीदुगाा मॊि अ ूक एलॊ सववद्धदामक भाना गमा
शैं। फकवी बी प्रकाय के वॊकट मा फाधा की आळॊका शोने
ऩय इव मॊि का तनमसभत ऩूजन कयने वे व्मत्क्त को
वबी प्रकाय की फाधा वे भुत्क्त सभरती शैं औय धन-धान्म
की प्रात्प्त शोती शैं।
श्रीदुगाा मॊि की ऩूजा एलॊ स्थाऩना के सरए
आत्श्लन एलॊ ैि नलयािी वलळेऴ राब प्रद शैं। क्मोफक
नलयाि को आद्म ् ळत्क्त की उऩावना का भशाऩला भाना
गमा शैं।
भूल्म 730 वे:10900 >>Shop Online |Order Now
नलाणा मॊि ( ाभुॊडा मॊि)
महद कोई व्मत्क्त दु:ख, दरयद्रता औय बम वे
अत्माधधक ऩयेळान शो, औय ाशकय बी मा ऩयीश्रभ के
उऩयाॊत बी उवी लाॊत्च्छत वपरता प्राप्त नशीॊ शो यशी शों
तो उवे नलाणा मॊि औय भॊि का प्रमोग कयना ाहशए।
फकवी बी प्रकाय के जादू-टोना, योग, बम, बूत,
वऩळाच् , डाफकनी, ळाफकनी आहद वे भुत्क्त फक प्रात्प्त
के सरमे भाॊ दुगाा के नलाणा मॊि का वलधध-वलधान वे
ऩूजन-अ ान वलादा परदामक शोता शै। दुगाा दुखों का
नाळ कयने लारी शैं। इवसरए नलयात्रि के हदनो भें जफ
उनकी ऩूजा ऩूणा श्रद्धा औय वलश्लाव वे फक जाती शैं, तो
भाॊ दुगाा फक प्रभुख नौ ळत्क्तमाॉ जाग्रत शो जाती शैं,
त्जववे नलों ग्रशों को तनमॊत्रित कयती शैं, त्जववे नौग्रशों
वे प्राप्त शोने लारे अतनटट प्रबाल वे यषा शोकय ग्रश
जनीत ऩीडाएॊ बी ळाॊत शो जाती शैं।
नलाणा भॊि: ऐॊ ह्ीॊ क्रीॊ ाभुॊडामै वलच् े
नल अषयों लारे इव अद्भुत नलाणा भॊि के शय
अषय भें देली दुगाा फक एक-एक ळत्क्त वभामी शुई शैं,
त्जव का वॊफॊध एक-एक ग्रशों वे शैं।
महद कोई भनुटम अत्माधधक कटट मा वॊकटों वे ग्रस्त
शो तो उवे प्रततहदन स्नान इत्माहदवे ळुद्ध शोकय नलाणा
मॊि के वम्भुख नलाणा भॊि का जाऩ 108 दाने फक
भारा वे कभ वे कभ तीन भारा जाऩ अलश्म कयना
ाहशए।
भूल्म 730 वे:10900 >>Shop Online |Order Now
30 2019
ऩढाई वे वॊफॊधधत वभस्मा
क्मा आऩके रडके -रडकी की ऩढाई भें अनालश्मक रूऩ वे फाधा-वलघ्न मा रुकालटे शो यशी शैं? फच् ो को अऩने ऩूणा
ऩरयश्रभ एलॊ भेशनत का उध त पर नशीॊ सभर यशा? अऩने रडके -रडकी की कुॊ डरी का वलस्तृत अध्ममन अलश्म
कयलारे औय उनके वलद्या अध्ममन भें आनेलारी रुकालट एलॊ दोऴो के कायण एलॊ उन दोऴों के तनलायण के उऩामो के
फाय भें वलस्ताय वे जनकायी प्राप्त कयें।
GURUTVA KARYALAY
Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785,
देली कल दुबााग्म को वौबाग्म भें फदर वकते शै…
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
दव भशा वलद्या कल
Dus Mahavidya Kawach
दव भशा वलद्या कल को देली दव भशा वलद्या
की ळत्क्तमों वे वॊऩन्न अत्मॊत प्रबालळारी औय दुराब
कल भाना गमा शैं।
इव कल के भाध्मभ वे वाधक को दवो
भशावलद्याओॊ आसळलााद प्राप्त शो वकता शैं। दव भशा
वलद्या कल को धायण कयने वे वाधक की वबी
भनोकाभनाओॊ की ऩूतता शोती शैं। दव भशा वलद्या
कल वाधक की वभस्त इच्छाओॊ की ऩूतता कयने भें
वभथा शैं। दव भशा वलद्या कल धायण कताा को
ळत्क्तवॊऩन्न एलॊ बूसभलान फनाने भें वभथा शैं।
दव भशा वलद्या कल को श्रद्धाऩूलाक धायण
कयने वे ळीघ्र देली कृ ऩा प्राप्त शोती शैं औय धायण
कताा को दव भशा वलद्या देलीमों की कृ ऩा वे वॊवाय
की वभस्त सववद्धमों की प्रात्प्त वॊबल शैं। देली दव
भशा वलद्या की कृ ऩा वे वाधक को धभा, अथा, काभ ल्
भोष तुवलाध ऩुरुऴाथों की प्रात्प्त शो वकती शैं। दव
भशा वलद्या कल भें भाॉ दुगाा के दव अलतायों का
आळीलााद वभाहशत शोता शैं, इव सरए दव भशा वलद्या
कल को धायण कय के धायण कयके व्मत्क्त अऩने
जीलन को तनयॊतय अधधक वे अधधक वाथाक एलॊ
वपर फना वकता शैं।
दळ भशावलद्या को ळास्िों भें आद्या बगलती के दव
बेद कशे गमे शैं, जो क्रभळ् (1) कारी, (2) ताया, (3)
ऴोडळी, (4) बुलनेश्लयी, (5) बैयली, (6) तछन्नभस्ता,
(7) धूभालती, (8) फगरा, (9) भातॊगी एलॊ (10)
कभात्त्भका। इव वबी देली स्लरुऩों को, वत्म्भसरत
रुऩ भें दळभशावलद्या के नाभ वे जाना जाता शैं।
भूल्म भार: 6400 >>Shop Online |Order Now
नलदुगाा ळत्क्त कल
Navdurga Shakiti Kawach
भाॊ दुगाा के नवरुऩ क्रभश्
1. ळैरऩुिी
2. ब्रह्भ ारयणी
3. न्द्रघण्टा
4. कू टभाण्डा
5. स्कन्दभाता
6. कात्मामनी
7. कारयात्रि
8. भशागौयी
9. सववद्धदािी शैं।
नौदेलीमों के कल ों को एक वाथ भें सभराकय
फनाकय नलदुगाा कल का तनभााण फकमा जाता शैं।
त्जववे धायण कताा को नौ देलीमों का आसळलााद एक
वाथ प्राप्त शो जाता शैं।
नौ देलीमों के कल का भशत्ल क्रभळ् आऩके
भागादळान शेतु मशाॉ प्रस्तुत शैं।
देली ळैरऩुिी का कल धायण कयने लारा
व्मत्क्त वदा धन-धान्म वे वॊऩन्न यशता शैं। अथाात उवे
त्जलन भें धन एलॊ अन्म वुख वाधनो की कभी भशवुव
नशीॊ शोतीॊ। व्मत्क्त को अनेक प्रकाय की सववद्धमाॊ एलॊ
31 2019
रक्ष्भीकु फेय धन आकऴाण मॊि
श्रीमॊि को वभस्त प्रकाय के श्रीमॊिों भें वलाश्रेटठ भाना गमा शै औय कु फेय मॊि को देलताओॊ भें धन के देलता कु फेय जी
का वफवे प्रबालळारी मॊि भाना जाता शैं इव मॊि के ऩूजन वे अषम धन कोऴ की प्रात्प्त शोती शैं औय भनुटम के
सरए नलीन आम के स्रोत फनते शैं। प्रततहदन रक्ष्भीकु फेय धन आकऴाण मॊि का ऩूजन एलॊ दळान कयने वे व्मत्क्त को
जीलन भें धन औय ऐश्लमा की कबी बी कभी नशीॊ शोती शै। वलद्लानों ने अऩने अनुबलों भें ऩामा शैं की जो भनुटम
अऩने गृशस्थ जीलन भें धन, लैबल, ऐश्लमा, वुख-वभृवद्ध, व्माऩाय भें वपरता, वलदेळ राब, याजनीतत भें वपरता,
नौकयी भें ऩदौत्न्न्त आहद की काभना यखता शैं तो उवके सरए श्री रक्ष्भीकु फेय धन आकऴाण मॊि वलाश्रेऴ मॊि शैं।
भनुटम को रक्ष्भीकु फेय धन आकऴाण मॊि के ऩूजन वे जीलन के वबी षेि भें वुख-वभृवद्ध एलॊ वौबाग्म की प्राप्त
शोने रगती शै। महद फकवी व्मत्क्त को व्माऩाय भें महद व्माऩाय भें ऩूणा ऩरयश्रभ एलॊ रगने वे कामा कयने ऩय बी
अधधक राब की प्रात्प्त नशीॊ शो यशी शो, व्माऩाय भॊदा र यशा शो मा फाय-फाय राब के स्थान ऩय शातन शो यशी शो
तो उवे रक्ष्भीकु फेय धन आकऴाण मॊि को अलश्म अऩने व्मलवामीक स्थान ऩय स्थावऩत कयना ाहशए। त्जववे
व्माऩाय भें फाय-फाय शोने लारे घाटे मा नुकवान वे ळीघ्र शी राब प्राप्त शोने के मोग फनने रगते शैं। >> OrderNow
उऩरत्ब्धमाॊ प्राप्त शोती शैं।
देली ब्रह्भ ारयणी का कल धायण कयने लारे
व्मत्क्त को अनॊत पर की प्रात्प्त शोती शैं। कल के
प्रबाल वे व्मत्क्त भें तऩ, त्माग, वदा ाय, वॊमभ जैवे
वद् गुणों फक लृवद्ध शोती शैं।
देली न्द्रघण्टा का कल धायण कयने वे
व्मत्क्त को वबी ऩाऩों वे भुत्क्त सभरती शैं उवे वभस्त
वाॊवारयक आधध-व्माधध वे भुत्क्त सभरती शैं। इवके
उऩयाॊत व्मत्क्त को ध यामु, आयोग्म, वुखी औय
वॊऩन्नता प्राप्त शोती शैं। कल के प्रबाल वे व्मत्क्त के
वाशव एल वलयता भें लृवद्ध शोती शैं। व्मत्क्त के स्लय भें
सभठाव आती शैं उवके आकऴाण भें बी लृवद्ध शोती शैं।
क्मोफक, न्द्रघण्टा को सान की देली बी भाना गमा शैं।
देली कू टभाण्डा के कल को धायण कयने लारे
व्मत्क्त को वबी प्रकाय के योग, ळोक औय क्रेळ वे
भुत्क्त सभरती शैं, उवे आमुटम, मळ, फर औय फुवद्ध
प्राप्त शोती शैं।
देली स्कॊ दभाता के कल को धायण कयने वे
व्मत्क्त की वभस्त इच्छाओॊ की ऩूतता शोती शैं एलॊ
जीलन भें ऩयभ वुख एलॊ ळाॊतत प्राप्त शोती शैं।
देली कात्मामनी का कल धायण कयने वे
व्मत्क्त को वबी प्रकाय के योग, ळोक, बम वे भुत्क्त
सभरती शैं। कात्मामनी देली को लैहदक मुग भें मे ऋवऴ-
भुतनमों को कटट देने लारे यष-दानल, ऩाऩी जील को
अऩने तेज वे शी नटट कय देने लारी भाना गमा शैं।
देली कारयात्रि का कल धायण कयने वे अत्ग्न
बम, आकाळ बम, बूत वऩळा इत्मादी ळत्क्तमाॊ
कारयात्रि देली के स्भयण भाि वे शी बाग जाते शैं,
कारयात्रि ळिु एलॊ दुटटों का वॊशाय कयने लारी देली शैं।
देली भशागौयी के कल को धायण कयने वे
व्मत्क्त के वभस्त ऩाऩों वे छु टकाया सभरता शैं। मश भाॊ
अन्नऩूणाा के वभान, धन, लैबल औय वुख-ळाॊतत प्रदान
कयने लारी एलॊ वॊकट वे भुत्क्त हदराने लारी देली
भशागौयी का कल शैं।
देली सववद्धदािी के कल को धायण कयने वे
व्मत्क्त फक वभस्त काभनाओॊ फक ऩूतता शोती शैं उवे
ऋवद्ध-सववद्ध की प्रात्प्त शोती शैं। कल के प्रबाल वे
व्मत्क्त के मळ, फर औय धन की प्रात्प्त आहद कामो भें
शो यशे फाधा-वलध्न वभाप्त शो जाते शैं। व्मत्क्त को मळ,
फर औय धन की प्रात्प्त शो कय उवे भाॊ की कृ ऩा वे
धभा, अथा, काभ औय भोष फक बी प्रात्प्त स्लत् शो
जाती शैं।
भूल्म भार: 6400 >>Shop Online |Order Now
श्रीदुगाा फीवा कल
Durga Visha Kawach
श्रीदुगाा फीवा कल वाधक को बत्क्त के वाथ वभस्त
वाॊवारयक वुखों को प्रदान कयने लारा वलासववद्धप्रद कल
शैं। श्रीदुगाा फीवा कल को धायण कयने वे वाधक को
32 2019
धभा, अथा, काभ औय भोष इन ाय की प्रात्प्त भें बी
वशामता प्राप्त शोती शैं।
ळास्िोक्त लणान शैं की भाॉ दुगाा का श्रीदुगाा फीवा कल
को धायण कयने वे देली प्रवन्न शोकय, ळीघ्र शी वाधक
की असबटट इच्छाएॊ ऩूणा कयती शैं। भाॉ दुगाा अऩने बक्त
की स्लमॊ यषा कय उन ऩय कृ ऩा दृटटी कयती शैं। श्रीदुगाा
फीवा कल धायण कयने वे भाॉ दुगाा की कृ ऩा वे नौकयी
व्मलवाम भें वाधक को उन्नतत के सळखय ऩय जाने का
भागा प्रवस्त शोता शैं।
श्रीदुगाा फीवा कल के प्रबाल वे धायण कताा को धन-
धान्म, वुख-वॊऩत्त्त, वॊतान का वुख प्राप्त शोता शैं औय
ळिु ऩय वलजम, ऋण-योग आहद ऩीडा वे भुत्क्त प्राप्त
शोती शैं औय वाधक को जीलन भें वॊऩूणा वुखों की
प्रात्प्त शोती शैं। जीलन भें फकवी बी प्रकाय के वॊकट मा
फाधा की आळॊका शोने ऩय श्रीदुगाा फीवा कल को
श्रद्धाऩूलाक धायण कयने वे वाधक को वबी प्रकाय की
फाधा वे भुत्क्त सभरती शैं औय धन-धान्म की प्रात्प्त शो
वकती शैं।
भूल्म भार: 1900 >>Shop Online |Order Now
नलााण फीवा कल
Narvan Visha Kawach
नलाणा (नलााण) फीवा कल देली दुगाा का कल शैं।
हशन्दू धभा भें देली दुगाा को दु्खों का नाळ कयने लारी
कशा गमा शैं। देली दुगाा की ळत्क्त को जाग्रत कयने शेतु
ळास्िों भें नलाणा भॊि का जाऩ कयने का वलधान फतामा
गमा शैं। वलद्वानों का कथन शैं की जो भनुटम तनमसभत
भॊि जाऩ कयने भें अवभथा शो उनके सरए नलाणा फीवा
कल धायण कयना भॊि जऩ के वभान पर प्रदान कयने
लारा शैं। नलाणा फीवा कल को धायण कयने वे व्मत्क्त
को धभा, अथा, काभ औय भोष इन ाय की प्रात्प्त भें
बी वशाता प्राप्त शोती शैं। भूल्म भार:
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कनकधाया मॊि
आज के बौततक मुग भें शय व्मत्क्त अततळीघ्र वभृद्ध फनना ाशता शैं।
कनकधाया मॊि फक ऩूजा अ ाना कयने वे व्मत्क्त के जन्भों जन्भ के ऋण
औय दरयद्रता वे ळीघ्र भुत्क्त सभरती शैं। मॊि के प्रबाल वे व्माऩाय भें उन्नतत
शोती शैं, फेयोजगाय को योजगाय प्रात्प्त शोती शैं। कनकधाया मॊि अत्मॊत दुराब
मॊिो भें वे एक मॊि शैं त्जवे भाॊ रक्ष्भी फक प्रात्प्त शेतु अ ूक प्रबाला ळारी
भाना गमा शैं। कनकधाया मॊि को वलद्वानो ने स्लमॊसवद्ध तथा वबी प्रकाय के
ऐश्लमा प्रदान कयने भें वभथा भाना शैं। आज के मुग भें शय व्मत्क्त अततळीघ्र
वभृद्ध फनना ाशता शैं। धन प्रात्प्त शेतु प्राण-प्रततत्टठत कनकधाया मॊि के
वाभने फैठकय कनकधाया स्तोि का ऩाठ कयने वे वलळेऴ राब प्राप्त शोता शैं। इव कनकधाया मॊि फक ऩूजा अ ाना
कयने वे ऋण औय दरयद्रता वे ळीघ्र भुत्क्त सभरती शैं। व्माऩाय भें उन्नतत शोती शैं, फेयोजगाय को योजगाय प्रात्प्त
शोती शैं। जैवे श्री आहद ळॊकया ामा द्वारा कनकधाया स्तोि फक य ना कु छ इव प्रकाय की गई शैं, फक त्जवके श्रलण
एलॊ ऩठन कयने वे आव-ऩाव के लामुभॊडर भें वलळेऴ अरौफकक हदव्म उजाा उत्ऩन्न शोती शैं। हठक उवी प्रकाय वे
कनकधाया मॊि अत्मॊत दुराब मॊिो भें वे एक मॊि शैं त्जवे भाॊ रक्ष्भी फक प्रात्प्त शेतु अ ूक प्रबाला ळारी भाना गमा
शैं। कनकधाया मॊि को वलद्वानो ने स्लमॊसवद्ध तथा वबी प्रकाय के ऐश्लमा प्रदान कयने भें वभथा भाना शैं। जगद्गुरु
ळॊकया ामा ने दरयद्र ब्राह्भण के घय कनकधाया स्तोि के ऩाठ वे स्लणा लऴाा कयाने का उल्रेख ग्रॊथ ळॊकय हदत्ग्लजम
भें सभरता शैं। कनकधाया भॊि:- ॐ लॊ श्रीॊ लॊ ऐॊ ह्ीॊ-श्रीॊ क्रीॊ कनक धायमै स्लाशा' >> OrderNow
33 2019
भाॉ दुगाा की कृ ऩा प्रात्प्त शेतु वयर वाधनाएॊ
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
प्रबालळारी दुगाा वाधना
भाॊ दुगाा का ऩूजन हशन्दू वॊस्कृ ती भें वलााधधक रोकवप्रम शैं मशीॊ
कायण शैं की वैकडों लऴो वे देली दुगाा का ऩूजन छोटे-फडे वबी
प्रादेसळक षेिों भें वलााधधक प्र सरत यशा शैं। देली दुगाा को आद्य
ळत्क्त बगलती का वाषात स्लरुऩ भाना जाता शैं। देली दुगाा की
भहशभा अऩयॊऩाय शैं, जो अऩने बक्तों के दु्खों का नाळ कयने लारी,
दुटटों वे यषा कयने लारी एलॊ अऩने बक्तों के वकर भनोयथ को
सवद्ध कयने लारी वाषात देली शैं।
वाधना शेतु वाभग्री:-
भारा: स्पहटक
हदळा: उत्तय मा ऩूला
आवन: रार आवन
लस्ि: रार लस्ि,
अन्म ऩूजन वाभग्रीमाॊ: देली प्रततभा, ऩूजन शेतु सवॊदूय, यक्त ॊदन,
रार मा ऩीरे पू र, धूऩ, दीऩ, शलन शेतु ततर, घी, जौ, अषत, दूफा,
दशी, आहद नैलेद्य, ऩीतर मा ताॊफे का करळ, करळ स्थाऩना शेतु
गेशूॊ, आहद ळुब धान, आभ के ऩल्रल, शलन शेतु रकडडमाॊ आहद
शलन वाभग्रीमाॊ।
भॊि:–
ॐ ऐॊ ह्ीॊ क्रीॊ ाभुॊडामे वलच् ै ।
ॐ ग्रौं शुॊ क्रीॊ जूॊ व् ज्लारम ज्लारम ज्लर ज्लर प्रज्लर प्रज्लर ऐॊ ह्ीॊ क्रीॊ ाभुॊडामे वलच् ै ज्लर शॊ वॊ रॊ षॊ
पट् स्लाशा ॥
Om Aim Hreem Kleem Chamundaye Vichchai |
Om Gloum Hum Kleem Jum Sah Jvalaya Jvalaya Jvala Jvala Prajvala Prajvala Aim Hreem Kleem
Chamundaye Vichchai Jvala Ham Sam Lam Ksham Phat Swaha ||
वलधध:–
वाधना वे ऩूला ऩूजन स्थान की बूसभ एलॊ वाभग्री आहद को ऩवलत्रिकयण कयके वलधध-वलधान वे स्लच्छ कयरें।
देली दुगाा की वाधना प्रात्कार वे प्रायॊब कयें। वाधना का प्रायॊब नलयाि भें कयना उत्तभ भाना गमा शैं, महद नलयाि
भें वाधना कयना वॊबल न शो तो, वाधना फकवी बी भाव की ळुक्र ऩष प्रततऩदा अथाात एकभ वे प्रायॊब की जा
वकती शैं, प्रततऩदा वे रेकय दवलीॊ ततधथ तक दव हदनों भें वाधना वॊऩन्न कयरें।
आग्नेम कोण भें लेदी फनाकय उत्तय हदळा मा ऩूला की ओय भुख भें आवन रगामे। वलधध-वलधान वे करळ की
स्थाऩना कयें। करळ को गेशूॊ, धान आहद ळुब अन्न ऩय स्थावऩत कयें। करळ भें आम्रऩल्रल के डॊठर जरभे यशे इव
प्रकाय डार दें। करळ ऩय दीऩक प्रज्ज्लसरत कयके यख दें। फपय शलन कुॊ ड को अत्ग्न वे प्रज्ज्लसरत कयें। उक्त
34 2019
वभस्त वलधध-वलधाय कयते शुले भाॊ दुगाा के भॊि का जऩ कयते यशें। उक्त वभस्ि फक्रमा के ऩश् मात आवन ऩय फैठे-
फैठे देली की तेजस्ली प्रततभा मा स्लरुऩ का िाटक भें ध्मान कयते शुले प्रततभा को स्थावऩत कयें। प्रततभा को स्थावऩत
कय। भॊि ऩढ़ते शुले अत्ग्न भें शवल दें। दव हदनों तक प्रततहदन 1188 भॊिों का जऩ कयें। भॊि जऩ के दौयान देली
दुगाा की प्रततभा ऩय अऩना ध्मान फनामे यखें।
राब: उक्त वलधध वे वाधना कयने वे भाॊ दुगाा के आसळलााद वे वाधक के आत्भफर, ओज, तेज, फर, ऩयाक्रभ भें
लृवद्ध शोती शैं, उवे स्लास््मराब प्राप्त शोता शैं। वाधक को अऩने कामा भें भनोलाॊतछत वपरता की प्रात्प्त शोती शैं।
दुगााटटाषय भॊि वाधना
वलधध:–
दुगााटटाषय भॊि अत्मॊि गोऩनीम शैं। ळास्िों भें दुगााटटाषय भॊि को ळीघ्र सववद्धदामक एलॊ दुराब भाना गमा शैं। इव
सरए दुगााटटाषय भॊि के फाये भें उल्रेख फकमा गमा शैं..
वाषात्त्ववद्धप्रदो भॊिो दुगाामा् कसरनाळन् ।
अटटाषयो अटट सववद्धळो गोऩनीमो हदगॊफयै् ॥
अथाात: मश दुगाा भॊि वाषात सववद्ध प्रदान कयने लारा, करेळों का नाळ
कयने लारा शैं, आठ अषयों लारे इव भॊि भें अटट सववद्ध मा वभाहशत शैं
अत् मश अत्मॊत गोऩनीम शैं।
वलतनमोग
ॐ अस्म श्री दुगााटटाषय भन्िस्म भशेश्लय ऋवऴ्,
श्री दुगााटटाषयात्त्भका देलता, दुॊ फीजभ्।,
ह्ीॊ ळत्क्त्, ॐ कीरकाम नभ् इतत हदग्फॊध्,
धभााथा काभ भोषाथे जऩे वलतनमोग्।
ध्मान
दुलाातनबाॊ त्रिनमनाॊ वलरवत्त्कयीटाभ्
ळॊखाब्जख्ङ्ग ळय खेटक ळूर ाऩान् ।
वॊतजानी दधतीॊ भहशऴावनस्थाॊ
दुगाा नलायकु र ऩीठगताॊ बजेऽशभ् ॥
भॊि:–
ॐ ह्ीॊ दुॊ दुगाामै नभ्।
Om Hreem Dum Durgayai Namah ।
राब: दुगााटटाषय भॊि का एक राख जऩ कयने वे मश भॊि सवद्ध शोता शै। जऩ शेतु प्रततहदन तनत्श् त वभम का
ुनाल कयें औय प्रततहदन अऩनी वुवलधा के अनुळाय 5, 11, 21 हदन भें भें फकवी तनत्श् त वॊख्मा भें एक राख जऩ
ऩूणा कयें। भॊि जाऩ ऩूणा शोने के ऩश् मात प्रततहदन प्रात् एक भारा जऩ कयें। इव भॊि भें अद्भुत ळत्क्त वभाहशत
शोने वे वाधक को लाक् सववद्ध, वॊतान प्रात्प्त, ळिु वलजम, योग-भुत्क्त औय जीलन भें वबी प्रकाय के बौततक वुखों
की प्रात्प्त के सरए दुगााटटाषय भॊि अ ूक एलॊ सववद्धदामक शै |
35 2019
दुगाा स्भृता भॊि वाधना
ॐ ऐॊ ह्ीॊ क्रीॊ ाभुॊडामे वलच् ै ॐ ह्ीॊ श्रीॊ ॐ ह्ीॊ श्रीॊ काॊवोत्स्भताॊ हशयण्म प्राकाया भाद्रािंज्लरन्तीॊ तृप्ताॊ तऩामन्तीभ्। ऩद्मेत्स्थताॊ
ऩद्मलणािं तासभशोऩह्लमे धश्रमभ् , ॐ ह्ीॊ श्रीॊ क्रीॊ ॐ ह्ीॊ श्रीॊ क्रीॊ दुगेस्भृता शयसव बीततभळेऴ जॊतो: स्लस्थैं: स्भृताभतत भतील
ळुबाॊ ददासव। मदॊतत, मच् दूयके बमॊ वलॊदतत भासभश ऩलभान वलतज्जहश, दारयद्र्म दु्ख बमशारयणण का त्लदन्मा
वलोऩकायकयणाम वदाद्रा ध त्ता ॐ ह्ीॊ श्रीॊ क्रीॊ ॐ ह्ीॊ श्रीॊ क्रीॊ काॊवोत्स्भताॊ हशयण्म प्राकाया भाद्रााज्लरन्तीॊ तृप्ताॊ
तऩामॊतीॊ, ऩद्मेत्स्थताॊ ऩद्मभ् लणाा तासभशोऩह्व्मे धश्रमभ्, ॐ ह्ीॊ श्रीॊ क्रीॊ ाभुॊडामे वलच् ै ।
उक्त दुगाा स्भृता भॊि के एक राख जऩ कयने वे भॊि सवद्ध शोता शैं। जऩ ऩूणा शोने ऩय भॊि की दळाॊळ शोभ कयना
ाहशए। दुगाा स्भृता भॊि के सवद्ध शोने ऩय वाधक को जीलन भें वबी कामों भें ऩूणा सववद्धमॊ प्राप्त शोने रगती शैं।
वाधक वॊवाय भें वलाि आदयणणम शो जाता शैं।
दुगाा वाधना
वाधना शेतु वाभग्री:-
भारा: स्पहटक | हदळा: उत्तय | जऩ वॊख्मा: वला राख | आवन: वपे द | लस्ि: रार लस्ि, | वभम : यािी कार |
अन्म ऩूजन वाभग्रीमाॊ: दुगाा मॊि, घी का दीऩ, जरऩाि
भॊि:–
शुॊ दुगाामै नभ् ।
Hum Durgayai Namah |
वलधध:-
फकवी बी भाव की ळुक्र ऩष की ऩॊ भी मा तुदाळी वे मश प्रमोग प्रायॊब कयें।
वलद्वानों का कथ शैं की ऩूणा श्रद्धा एलॊ वलश्लाय वे जाऩ कयने वे भाॊ दुगाा के दळान अलश्म शोते शैं।
भॊि जाऩ की वभात्प्त ऩय फकवी कुॊ लायी कन्मा को बोजन कयामे उवे मथा ळत्क्त बेट एलॊ दक्षषणा दें कय प्रवन्न
कयने वे मश वाधना वॊऩन्न शोती शैं।
राब: देली दुगाा की असवभ कृ ऩा प्राप्त शोती शैं, वाधक को जीलन भें वबी प्रकाय के वुख वाधनों की प्रात्प्त शोती
शैं।
धन लृवद्ध डडब्फी
धन लृवद्ध डडब्फी को अऩनी अरभायी, कै ळ फोक्व, ऩूजा स्थान भें यखने वे धन लृवद्ध शोती शैं त्जवभें कारी
हल्दी, रार- ऩीरा-वपे द रक्ष्भी कायक शकीक (अकीक), रक्ष्भी कायक स्पहटक यत्न, 3 ऩीरी कौडी, 3
वपे द कौडी, गोभती क्र, वपे द गुॊजा, यक्त गुॊजा, कारी गुॊजा, इॊद्र जार, भामा जार, इत्मादी दुराब
लस्तुओॊ को ळुब भशुता भें तेजस्ली भॊि द्लाया असबभॊत्रित फकम जाता शैं।
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36 2019
नलयाि व्रतकथा
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
प्रा ीन कार भें ैि लॊळी वुयथ नाभक एक याजा
याज कयते थे। एक फाय उनके ळिुओॊ ने आक्रभण कय
हदमा औय उन्शें मुद्ध भें शया हदमा। याजा को फरशीन
देखकय उवके दुटट भॊत्रिमों ने याजा की वेना औय
खजाना अऩने अतघकाय भें रे सरमा। त्जवके ऩरयणाभ
स्लरूऩ याजा वुयथ दुखी औय तनयाळ शोकय लन की ओय
रे गए औय लशाॊ भशवऴा भेधा के आश्रभ भें तनलाव
कयने रगे।
एक हदन आश्रभ भें याजा की बेंट वभातघ नाभक
एक लैश्म वे शुई, जो अऩनी स्िी औय ऩुिों के दुव्मालशाय
वे अऩभातनत शोकय लशाॊ तनलाव कय यशा था।
वभातघ ने याजा को फतामा फक लश अऩने दुटट
स्िी औय ऩुि आहदकों वे अऩभातनत शोने के फाद बी
उनका भोश नशीॊ छोड ऩा यशा शै। उवके ध त्त को
ळात्न्त नशीॊ सभर ऩा यशी शै। इधय याजा का भन बी
उवके अधीन नशीॊ था। याज्म, धनाहद की ध ॊता अबी बी
उवे फनी शुई थी, त्जववे लश फशुत दुखी थे। तदान्तय
दोनों भशवऴा भेधा के ऩाव गए।
भशवऴा भेधा मथामोग्म वम्बाटण कयके दोनों वे
लाताा आयॊब की। उन्शोने फतामा "मद्यवऩ शभ दोनों अऩने
स्लजनों वे अत्मॊत अऩभातनत औय ततयस्कृ त शोकय मशाॉ
आए शैं, फपय बी उनके प्रतत शभाया भोश नशीॊ छू टता ।
इवका क्मा कायण शै?
भशवऴा भेधा ने कशा भन ळत्क्त के अधीन शोता
शै। आहदळत्क्त बगलती के दो रूऩ शैं- वलद्या औय
अवलद्या। वलद्या भन का स्लरूऩ शै तथा अवलद्या असान
का स्लरूऩ शै। अवलद्या भोश की जननी शै फकॊ तु रोग भाॊ
बगलती को वॊवाय का आहद कायण भानकय बत्क्त कयते
शैं, भाॊ बगलती उन्शें जीलन भुक्त कय देती शै।" याजा
वुयध ने ऩूछा- बगलन लश देली कौन वी शै, त्जवको आऩ
भशाभामा कशते शैं?
शे ब्रह्भन ्। लश कै वे उत्ऩन्न शुई। औय उवका
क्मा कामा शै? उवके रयि कौन कौन वे शैं?
प्रबो ! उवका प्रबाल, स्लरूऩ आहद के फाये भें शभे
वलस्ताय भें फताइए।
भशवऴा भेधा फोरे - याजन ्! लश देली तो
तनत्मास्लरूऩ शै, उनके द्वाया मश वॊवाय य ा गमा शै। तफ
बी उवकी उत्ऩत्त्त अनेक प्रकाय वे शोती शै, त्जवे भैं
फताता शूॊ। वॊवाय को जरभम कयके जफ बगलान वलटणु
मागतनद्रा का आश्रम रेकय, ळेऴळय्मा ऩय वो यशे थे, तफ
भधु-कै टब नाभ के अवुय उनके कानों के भैर वे प्रकट
शुए औय लश श्री ब्रह्भाजी को भायने के सरए तैमाय शो
गए। उनके इव बमानक रूऩ को देखकय ब्रह्भाजी ने
अनुभान रगा सरमा फक बगलान वलटणु के सवलाम भेया
कोई यषक नशीॊ शै। फकन्तु वलडम्फना मश थी फक
बगलान वलटणु वो यशे थे। तफ उन्शोंने श्री बगलान को
जगाने के सरए उनके नेिों भें तनलाव कयने लारी
मोगतनद्रा की स्तुतत की।
तफ वबीगुण अतघटठािी देली मोगतनद्रा बगलान
वलटणु के नेि, नसवका, भुख, फाशु औय ह्लदम वे
तनकरकय ब्रह्भा जी के वाभने खडी शो गई। मोगतनद्रा
के तनकरते शी श्रीशरय तुयॊत जाग उठे। उन्शें देखकय
याषव क्रोतघत शो उठे औय मुद्ध के सरए उनकी तयप
दौडे। बगलान वलटणु औय उन याषवों भें ऩाॉ शजाय
लऴो तक मुद्ध शुआ। अॊत भें दोनों याषवों ने बगलान की
लीयता देख कय उन्शें लय भाॉगने को कशा।
बगलान ने कशा महद तुभ भुझ ऩय प्रवन्न शो
तो अफ भेये शाथों भय जाओ। फव, इतना शी लय भें तुभ
वे भाॉगता शूॉ।
भशवऴा भेधा फोरे - इव तयश वे जफ लश धोखे भें
आ गए औय अऩने ायों ओय जर शी जर देखा तो
बगलान वे कशने रगे फक जशाॊ जर न शो, उवी जगश
शभाया लध कीत्जए।
तथास्तु कशकय बगलान श्री शरय ने उन दोनो को
अऩनी जाॊघ ऩय सरटा कय सवय काट डारे।
भशवऴा भेधा फोरे इव तयश वे मश देली श्री ब्रह्भाजी की
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स्तुतत कयने ऩय प्रकट शुई थी, अफ तुभ वे उनके प्रबाल
का लणान कयता शूॊ, त्जवको ध्मान वे वुनो - प्रा ीन कार
भें देलताओॊ के स्लाभी इॊद्र औय अवुयों के स्लाभी
भहशऴावुय के फी ऩूये वौ लऴो तक मुद्ध शुआ था। इव
मुद्ध भें देलताओॊ की वेना ऩयास्त शो गई औय इव प्रकाय
देलताओॊ को जीत भहशऴावुय इन्द्र फन फैठा शाये शुए
देलता श्री ब्रह्भाजी को वाथ रेकय बगलान ळॊकय ल
वलटणु जी के ऩाव गए औय अऩनी शाय का वाया लृताॊत
उन्शें कश वुनामा। उन्शोने भहशऴावुय के लध की प्रथना
के उऩाम की प्रथाना की। वाथ शी याज्म लाऩव ऩाने के
सरए उनकी कृ ऩा की स्तुतत की।
देलताओॊ की फातें वुनकय बगलान वलटणु औय
ळॊकय जी को देलताओॊ ऩय फडा गुस्वा आमा। गुस्वे वे
बये शुए बगलान वलटणु के भुख वे फडा बायी तेज
तनकरा औय उवी प्रकाय का तेज बगलान ळॊकय, ब्रह्भा
आहद देलताओॊ के भुख वे प्रकट शुआ, त्जववे दवों
हदळाएॊ जरने रगी। अॊत भें मशी तेज एक देली के रूऩ
भें ऩरयलततात शो गमा।
देली ने वबी देलताओॊ वे आमुध, ळत्क्त तथा
आबूऴण प्राप्त कय उच् स्लय भें गगनबेदी गजाना की।
त्जववे वभस्त वलश्ल भें शर र भ गई ऩृ्ली, ऩलात
आहद डोर गए। क्रोतघत भहशऴावुय दैत्म वेना रेकय इव
सवॊशनाद की ओय दौडा। उवने देखा फक देली की प्रबा वे
तीनों रोक प्रकासळत शो यशे शैं। भहशऴावुय ने अऩना
वभस्त फर औय छर रगा हदमा ऩयॊतु देली के वाभने
उवकी एक न री। अॊत भें लश देली के शाथों भाया
गमा। आगे रकय मशी देली ळुम्ब-तनळुम्ब नाभक
अवुयों का लध कयने के सरए गौयी देली के ळयीय वे
उत्ऩन्न शुई।
उव वभम देली हशभारम ऩय वल य यशीॊ थी। जफ
ळुम्ब-तनळुम्ब के वेलकों ने उव ऩयभ भनोशय रूऩ लारी
जगदॊफा देली को देखा औय तुयन्त अऩने स्लाभी के ऩाव
जाकय कशा फक "शे भशायाज ! दुतनमा के वाये यत्न
आऩके अतघकाय भें शैं। ले वफ आऩके मशाॉ ळोबा ऩाते
शैं। ऎवे शी एक स्िी यत्न को शभने हशभारम की
ऩशाडडमों भें देखा शै। आऩ हशभारम को प्रकासळत कयने
लारी हदव्म क्राॊतत मुक्त इव देली का लयण कीत्जए। मश
वुनकय दैत्मयाज ळुम्ब ने वुग्रील को अऩना दूत फनाकय
देली के ऩाव अऩना वललाश प्रस्ताल बेजा। देली ने प्रस्ताल
को ना भानकय कशा जो भुझवे मुद्ध भें जीतेगा। भैं
उववे वललाश करूॉ गी। मश वुनकय अवुयेन्द्र के क्रोध का
ऩायालाय न यशा औय उवने अऩने वेनाऩतत धूम्ररो न को
देली के के ळों वे ऩकडकय राने का आदेळ हदमा। इव
ऩय धूम्ररो न वाठ शजाय याषवों की वेना वाथ रेकय
देली वे मुद्ध के सरए लशाॉ ऩशुॉ ा औय देली को ररकायने
रगा। देली ने सवपा अऩनी शुॊकाय वे शी उवे बस्भ कय
हदमा औय देली के लाशन सवॊश ने फाकी अवुय वेना का
वॊशाय कय हदमा।
इवके फाद ण्ड भुण्ड नाभक दैत्मों को एक फडी
वेना के वाथ मुद्ध के सरए बेजा गमा। जफ अवुय देली
को तरलायें रेकय उनकी ओय फढ़े तफ देली ने कारी का
वलकयार रूऩ धायण कय उन ऩय टूट ऩडी। कु छ शी देय
भें वम्ऩूणा वेना को नटट कय हदमा। फपय देली ने "शूॉ"
ळब्द कशकय ण्ड का सवय काट हदमा औय भुण्ड को
मभरोक ऩशुॉ ा हदमा। तफ वे देली कारी की वॊवाय भें
ाभुॊडा के नाभ वे ख्मातत शोने रगी।
भशवऴा भेधा ने आगे फतामा - ण्ड भुण्ड औय
वायी वेना के भाये जाने की खफय वुनकय अवुयों के
याजा ळुम्ब ने अऩनी वम्ऩूणा वेना को मुद्ध के सरए
तैमाय शोने की आसा दी। ळुम्ब की वेना को अऩनी
ओय आता देखकय देली ने अऩने धनुऴ की टॊकाय वे
ऩृ्ली औय आकाळ के फी का बाग गुॊजा हदमा। ऎवे
बमॊकय ळब्द वुनकय याषवी वेना ने देली औय सवॊश को
ायों ओय वे घेय सरमा। उव वभम दैत्मों के नाळ के
सरए औय देलताओॊ के हशत के सरए वभस्त देलताओॊ की
ळत्क्तमाॉ उनके ळयीय वे तनकरकय उन्शीॊ के रूऩ भें
आमुधों वे वजकय दैत्मों वे मुद्ध कयने के सरए प्रस्तुत
शो गई। इन देल ळत्क्तमों वे तघये शुए बगलान ळॊकय ने
देली वे कशा भेयी प्रवन्नता के सरए तुभ ळीघ्र शी इन
अवुयों को भायो।
इवके ऩश् मात ् देली के ळयीय वे अत्मॊत उग्र रूऩ
लारी औय वैंकडों गीदडडमों के वभान आलाज कयने लारी
त्ण्डका ळत्क्त प्रकट शुई। उव अऩयात्जता देली ने
बगलान ळॊकय को अऩना दूत फनाकय ळुम्ब, तनळुम्ब के
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ऩाव इव वॊदेळ के वाथ बेजा जो तुम्शे अऩने जीवलत
यशने की इच्छा शो तो त्रिरोकी का याज्म इन्द्र को दे
दो, देलताओॊ को उनका मस बाग सभरना आयॊब शो जाए
औय तुभ ऩातार को रौट जाओ, फकन्तु महद फर के गला
वे तुम्शायी रडने की इच्छा शो तो फपय आ जाओ,
तुम्शाये भाॉव वे भेयी मोतनमाॉ तृप्त शोंगी।"
ूॊफक उव देली ने बगलान ळॊकय को दूत के
कामा भें तनमुक्त फकमा था, इवसरए लश वॊवाय भें
सळलदूती के नाभ वे वलख्मात शुई। भगय दैत्म बरा कशाॊ
भानने लारे थे। ले तो अऩनी ळत्क्त के भद भें ूय थे।
उन्शोने देली की फात अनवुनी कय दी औय मुद्ध को
तत्ऩय शो उठे। देखते शी देखते ऩुन: मुद्ध तछड गमा।
फकॊ तु देली के वभष अवुय कफ तक ठशय वकते थे। कु छ
शी देय भें देली ने उनके अस्ि, ळस्िों को काट डारा। जफ
फशुत वे दैत्म कार के भुख भें वभा गए तो भशादैत्म
यक्तफीज मुद्ध के सरए आगे फढ़ा। उवके ळयीय वे यक्त
की फूॊदे ऩृ्ली ऩय जैवे शी धगयती थीॊ। तुयॊत लैवे शी
ळयीय लारा दैत्म ऩृ्ली ऩय उत्ऩन्न शो जाता था। मश
देखकय देलताओॊ को बम शुआ, देलताओॊ को बमबीत
देखकय ॊडडका ने कारी वे कशा "शे ाभुण्डे" तुभ अऩने
भुख को पै राओ औय भेये ळस्िाघात वे उत्ऩन्न शुए
यक्त त्रफन्दुओॊ तथा यक्त त्रफन्दुओॊ वे उत्ऩन्न शुए
भशाअवुयों को तुभ अऩने इव भुख वे बषण कयती शुई
यणबूसभ भें वल यो। इव प्रकाय उव दैत्म का यक्त षीण
शो जाएगा औय लश स्लमॊ नटट शो जाएगा। इव प्रकाय
अन्म दैत्म उत्ऩन्न नशीॊ शोंगे।
कारी के इव प्रकाय कशकय त्ण्डका देली ने
यक्तफीज ऩय अऩने त्रिळुर वे प्रशाय फकमा औय कारी
देली ने अऩने भुख भें उवका यक्त रे सरमा। त्ण्डका ने
उव दैत्म को फज्र, फाण, खड्भ इत्माहद वे भाय डारा।
भशादैत्म यक्तफीज के भयते शी देलता अत्मॊत प्रवन्न शुए
औय भाताएॊ उन अवुयों का यक्त ऩीने के ऩश् मात उद्धत
शोकय नृत्म कयने रगीॊ। यक्तफीज के भाये जाने ऩय
ळुम्ब ल तनळुम्ब को फडा क्रोध आमा औय अऩनी फशुत
फडी वेना रेकय भशाळत्क्त वे मुद्ध कयने र हदए।
भशाऩयाक्रभी ळुम्ब बी अऩनी वेना वहशत भातृगणों वे
मुद्ध कयने के सरए आ ऩशुॉ ा। फकन्तु ळीघ्र शी वबी दैत्म
भाये गए औय देली ने ळुम्ब तनळुम्ब का वॊशाय कय
हदमा। वाये वॊवाय भें ळाॊतत छा गई औय देलता गण
शवऴात शोकय देली की लॊदना कयने रगे। इन वफ
उऩाख्मानों को वुनकय भेधा ऋवऴ ने याजा वुयध तथा
लणणक वभातघ वे देली स्तुलन की वलतघलत व्माख्मा की,
त्जवके प्रबाल वे दोनों नदी तट ऩय जाकय तऩस्मा भें
रीन शो गए। तीन लऴा फाद दुगाा भाता ने प्रकट शोकय
दोनों को आळीलााद हदमा। इव प्रकाय लणणक तो वॊवारयक
भोश वे भुक्त शोकय आत्भध ॊतन भें रग गमा तथा
याजा ने ळिुओॊ को ऩयात्जत कय अऩना खोमा शुआ याज
लैबल ऩुन: प्राप्त कय सरमा।
Beautiful Stone Bracelets
 Lapis Lazuli Bracelet
 Rudraksha Bracelet
 Pearl Bracelet
 Smoky Quartz Bracelet
 Druzy Agate Beads Bracelet
 Howlite Bracelet
 Aquamarine Bracelet
 White Agate Bracelet
 Amethyst Bracelet
 Black Obsidian Bracelet
 Red Carnelian Bracelet
 Tiger Eye Bracelet
 Lava (slag) Bracelet
 Blood Stone Bracelet
 Green Jade Bracelet
 7 Chakra Bracelet
 Amanzonite Bracelet
 Amethyst Jade
 Sodalite Bracelet
 Unakite Bracelet
 Calcite Bracelet
 Yellow Jade Bracelet
 Rose Quartz Bracelet
 Snow Flakes Bracelet
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39 2019
वप्तश्र्लरोकी दुगाा
देवल त्लॊ बक्तवुरबे वलाकामावलधातमनी।
करौ हश कामासवद्धमथाभुऩामॊ ब्रूहश मित्॥
देव उवाच:
श्रृणु देल प्रलक्ष्मासभ करौ वलेटटवाधनभ्।
भमा तलैल स्नेशेनाप्मम्फास्तुतत् प्रकाश्मते॥
ववतनमोग्
ॐ अस्म श्री दुगाावप्तश्रोकीस्तोिभन्िस्म
नायामण ऋवऴ् अनुटटऩ्छन्द्,
श्रीभह्भकारी भशारक्ष्भी भशावयस्लत्मो देलता्,
श्रीदुगााप्रीत्मथिं वप्तश्रोकीदुगााऩाठे वलतनमोग्।
ॐ सातननाभवऩ ेताॊसव देली बगलती हशवा।
फरादाकृ टम भोशाम भशाभामा प्रमच्छतत॥
दुगे स्भृता शयसव बीततभळेऴजन्तो्
स्लस्थै् स्भृता भततभतील ळुबाॊ ददासव।
दारयद्र्मदु्खबमशारयणण त्लदन्मा
वलोऩकायकयणाम वदाद्राध त्ता॥
वलाभॊगरभॊगल्मे सळले वलााथावाधधके ।
ळयण्मे त्र्मम्फके गौरय नायामणण नभोऽस्तुते॥
ळयणागतदीनाताऩरयिाणऩयामणे।
वलास्मातताशये देवल नायामणण नभोऽस्तुते॥
वलास्लरूऩे वलेळे वलाळत्क्तवभत्न्लते।
बमेभ्मस्िाहश नो देवल दुगे देवल नभोऽस्तुते॥
योगानळोऴानऩशॊसव तुटटा रूटटा तु काभान ् वकरानबीटटान ्।
त्लाभाधश्रतानाॊ न वलऩन्नयाणाॊ त्लाभाधश्रता ह्भाश्रमताॊ प्रमात्न्त॥
वलााफाधाप्रळभनॊ िैरोक्मस्माणखरेश्र्ललरय।
एलभेल त्लमा कामाभस्मद्लैरयवलनाळनभ्॥
॥ इतत श्रीवप्तश्रोकी दुगाा वॊऩूणाभ् ॥
दुगाा आयती
जम अम्फे गौयी भैमा जम श्माभा गौयी।
तुभको तनवहदन ध्मालत शरय ब्रम्शा सळलयी॥१॥
भाॊग सवॊदूय वलयाजत टीको भृगभदको।
उज्जलर वे दोऊ नैना न्द्रलदन नीको॥२॥
कनक वभान करेलय यक्ताम्फय याजे।
यक्त ऩुटऩ गर भारा कण्ठन ऩय वाजे॥३॥
के शरय लाशन याजत खड्ग खप्ऩय धायी।
वुय नय भुतन जन वेलत ततनके दु्ख शायी॥४॥
कानन कुॊ डर ळोसबत नावाग्रे भोती।
कोहटक ॊद्र हदलाकय याजत वभ ज्मोतत॥५॥
ळुॊब तनळॊबु वलदाये भहशऴावुयधाती।
धूम्रवलरो न नैना तनळहदन भदभाती॥६॥
ण्ड भुण्ड वॊशाये ळोणणत फीज शये।
भधु कै टब दोउ भाये वुय बमशीन कये॥७॥
ब्रम्शाणी रुद्राणी तुभ कभरायानी।
आगभ तनगभ फखानी तुभ सळल ऩटयानी॥८॥
ौवॊठ मोधगनी गालत नृत्म कयत बैरुॉ।
फाजत तार भृदॊगा अरु डभरुॉ॥९॥
तुभ शी जग की भाता तुभ शी शो बयता।
बक्तन की दु्खशताा वुख वम्ऩत्त्त कताा॥१०॥
बुजा ाय अतत ळोसबत लय भुद्रा धायी।
भनलाॊत्च्छत पर ऩाले वेलत नय नायी॥११॥
कॊ न थार वलयाजत अगय कऩुय फात्ती।
श्री भार के तु भें याजत कोहट यतन ज्मोती॥१२॥
भाॉ अम्फे जी की आयती जो कोई नय गामे।
कशत सळलानॊद स्लाभी वुख वॊऩत्त्त ऩामे॥१३॥
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श्रीकृ टण कृ त देली स्तुतत
नलयाि भें श्रद्धा औय प्रेभऩूलाक भशाळत्क्त बगलती देली की ऩूजा-उऩावना कयने वे मश तनगुाण स्लरूऩा देली ऩृ्ली के
वभस्त जीलों ऩय दमा कयके स्लमॊ शी वगुणबाल को प्राप्त शोकय ब्रह्भा, वलटणु औय भशेळ रूऩ वे उत्ऩत्त्त, ऩारन औय वॊशाय
कामा कयती शैं।
श्रीकृ ष्ण उवाच
त्लभेल वलाजननी भूरप्रकृ ततयीश्लयी। त्लभेलाद्या वृत्टटवलधौ स्लेच्छमा त्रिगुणात्त्भका॥१॥
कामााथे वगुणा त्लॊ लस्तुतो तनगुाणा स्लमभ्। ऩयब्रह्भास्लरूऩा त्लॊ वत्मा तनत्मा वनातनी॥२॥
तेज्स्लरूऩा ऩयभा बक्तानुग्रशवलग्रशा। वलास्लरूऩा वलेळा वलााधाया ऩयात्ऩय॥३॥
वलाफीजस्लरूऩा वलाऩूज्मा तनयाश्रमा। वलासा वलातोबद्रा वलाभॊगरभॊगरा॥४॥
अथाात् आऩ वलश्लजननी भूर प्रकृ तत ईश्लयी शो, आऩ वृत्टट की उत्ऩत्त्त के वभम आद्याळत्क्त के रूऩ भें वलयाजभान यशती शो
औय स्लेच्छा वे त्रिगुणात्त्भका फन जाती शो। मद्यवऩ लस्तुत् आऩ स्लमॊ तनगुाण शो तथावऩ प्रमोजनलळ वगुण शो जाती शो। आऩ
ऩयब्रह्भ स्लरूऩ, वत्म, तनत्म एलॊ वनातनी शो। ऩयभ तेजस्लरूऩ औय बक्तों ऩय अनुग्रश कयने आऩ ळयीय धायण कयती शों। आऩ
वलास्लरूऩा, वलेश्लयी, वलााधाय एलॊ ऩयात्ऩय शो। आऩ वलााफीजस्लरूऩ, वलाऩूज्मा एलॊ आश्रमयहशत शो। आऩ वलास, वलाप्रकाय वे
भॊगर कयने लारी एलॊ वला भॊगरों फक बी भॊगर शो।
ऋग्लेदोक्त देली वूक्तभ्
अशसभत्मटट ास्म वूक्त स्म लागाम्बृणी ऋवऴ: वत्च् त्वुखात्भक: वलागत: ऩयभात्भा देलता,
द्वद्वतीमामा ऋ ो जगती, सळटटानाॊ त्रिटटुऩ् छन्द:, देलीभाशात्म्म ऩाठे वलतनमोग्।
ध्मानभ ्
सवॊशस्था ळसळळेखया भयकतप्रख्मैश् तुसबाबुाजै: ळङ्खॊ क्रधनु:ळयाॊश् दधती नेिैत्स्िसब: ळोसबता।
आभुक्ताङ्गदशायकङ्कणयणत्काञ् ीयणन्नूऩुया दुगाा दुगाततशारयणी बलतु नो यत्नोल्रवत्कु ण्डरा॥
देलीवूक्तभ ्
अशॊ रुद्रेसबलावुसबश् याम्मशभाहदत्मैरुत वलश्लदेलै्। अशॊ सभिालरुणोबा त्रफबम्माशसभन्द्राग्नी अशभधश्र ्लनोबा॥१॥
अशॊ वोभभाशनवॊ त्रफबम्माशॊ त्लटटायभुत ऩूऴणॊ बगभ्। अशॊ दधासभ द्रवलणॊ शवलटभते वुप्राव्मे मजभानाम वुन्लते॥२॥
अशॊ याटट्री वॊगभनी लवूनाॊ ध फकतुऴी प्रथभा मक्षसमानाभ्। ताॊ भा देला व्मदधु: ऩुरुिा बूरयस्थािाॊ बूय्र्मालेळमन्तीभ्॥३॥
भमावो अन्नभत्त्त मोवलऩश्मतत म: प्राणणतत मईश्रृणोत्मुक्त भ्। अभन्तलो भाॊ तउऩ क्षषमत्न्त श्रुधधश्रुत श्रवद्धलॊ ते
लदासभ॥४॥
अशभेल स्लमसभदॊ लदासभ जुटटॊ देलेसबरुत भानुऴेसब्। मॊ काभमे तॊ तभुग्रॊ कृ णोसभ तॊ ब्रह्भाणॊ तभृवऴॊ तॊ वुभेधाभ्॥५॥
अशॊ रुद्राम धनुया तनोसभ ब्रह्भद्वद्वऴे ळयले शन्तला उ। अशॊ जनाम वभदॊ कृ णोम्मशॊद्यालाऩृधथलीआवललेळ॥६॥
अशॊ वुले वऩतयभस्म भूधान्भभ मोतनयप्स्लन्त: वभुद्रे। ततो वल ततटठे बुलनानु वलश्लोताभूॊ द्माॊ लटभाणोऩ स्ऩळसभ॥७॥
अशभेल लात इल प्रलाम्मायबभाणा बुलनातन वलश्ला। ऩयो हदला ऩय एना ऩृधथव्मैतालती भहशना वॊफबूल॥८॥
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वलश्लॊबयी स्तुतत
वलश्लॊबयी स्तुतत भूर रुऩवे गुजयाती भें लल्रब बट्ट द्वाया सरखी गई शैं। वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
वलश्लॊबयी अणखर वलश्लतणी जनेता।
वलद्या धयी लदनभाॊ लवजो वलधाता॥
दुफुावद्ध दुय कयी वद्दफुवद्ध आऩो।
भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥१॥
बूरो ऩडड बलयने बटकुॊ बलानी।
वुझे नहश रगीय कोइ हदळा जलानी॥
बावे बमॊकय लऱी भनना उताऩो।
भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥२॥
आ यॊकने उगयला नथी कोइ आयो।
जन्भाॊध छु जननी शु ग्रशी शाथ तायो॥
ना ळुॊ वुणो बगलती सळळुना वलराऩो।
भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥३॥
भा कभा जन्भ कथनी कयताॊ वल ारु।
आ वृत्टटभाॊ तुज वलना नथी कोइ भारु॥
कोने कशुॊ कठण काऱ तणो फऱाऩो।
भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥४॥
शुॊ काभ क्रोध भध भोश थकी बयेरो।
आडॊफये अतत धणो भद्थी छके रो॥
दोऴो फधा दूय कयी भाप ऩाऩो।
भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥५॥
ना ळास्िना श्रलणनु ऩम्ऩान ऩीधु।
ना भॊि के स्तुतत कथा नथी काइ कीधु॥
श्रद्धा धयी नथी कमाा तल नाभ जाऩो।
भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥६॥
ये ये बलानी फशु बूर थई ज भायी।
आ त्जॊदगी थई भने अततळे अकायी॥
दोऴो प्रजासऱ वधऱा तल छाऩ छाऩो।
भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥७॥
खारी न कोइ स्थऱ छे वलण आऩ धायो।
ब्रह्भाॊडभाॊ अणु-अणु भशीॊ लाव तायो॥
ळत्क्त न भाऩ गणला अगणणत भाऩो।
भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥८॥
ऩाऩो प्रऩॊ कयला फधी यीते ऩूयो।
खोटो खयो बगलती ऩण शुॊ तभायो॥
जाडमाॊधकाय कयी दूय वुफुवद्ध स्थाऩो।
भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥९॥
ळीखे वुणे यसवक छॊद ज एक ध त्ते।
तेना थकी त्रिवलध ताऩ टऱे खध ते॥
फुवद्ध वलळेऴ जगदॊफ तणा प्रताऩो।
भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥१०॥
श्री वदगुरु ळयनभाॊ यशीने मजुॊ छुॊ।
यात्रि हदने बगलती तुजने बजुॊ छु ॥
वदबक्त वेलक तणा ऩरयताऩ ाऩो।
भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥११॥
अॊतय वलऴे अधधक उसभा थताॊ बलानी।
गाऊ स्तुतत तल फऱे नभीने भृडानी॥
वॊवायना वकऱ योग वभूऱ काऩो।
भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥१२॥
46 2019
भहशऴावुयभहदातनस्तोिभ्
||बगलतीऩद्यऩुटऩाॊजसरस्तोि भहशऴावुयभहदातनस्तोिभ् ||
श्री त्रिऩुयवुन्दमै नभ् ||
बगलती बगलत्ऩदऩङ्कजॊ भ्रभयबूतवुयावुयवेवलतभ् | वुजनभानवशॊवऩरयस्तुतॊ कभरमाऽभरमा तनबृतॊ बजे ||१|| ते उबे
असबलन्देऽशॊ वलघ्नेळकु रदैलते | नयनागाननस्त्लेको नयसवॊश नभोऽस्तुते ||२|| शरयगुरुऩदऩद्मॊ ळुद्धऩद्मेऽनुयागाद्
वलगतऩयभबागे वत्न्नधामादयेण | तदनु रय कयोसभ प्रीतमे बत्क्तबाजाॊ बगलतत ऩदऩद्मे ऩद्यऩुटऩाञ्जसरॊ ते ||३|| के नैते
यध ता् कु तो न तनहशता् ळुम्बादमो दुभादा् के नैते तल ऩासरता इतत हश तत ् प्रश्ने फकभा क्ष्भशे | ब्रह्भाद्या अवऩ
ळॊफकता् स्लवलऴमे मस्मा् प्रवादालधध प्रीता वा भहशऴावुयप्रभधथनीच्दद्मादलद्यातन भे ||४|| ऩातु श्रीस्तु तुबुाजा फकभु
तुफााशोभाशौजान्बुजान ् धत्तेऽटटादळधा हश कायणगुणान्कामे गुणायम्बका् | वत्मॊ हदक्ऩततदत्न्तवॊख्मबुजबृच्छम्बु्
स्लय्म्बू् स्लमॊ धाभैकप्रततऩत्तमे फकभथला ऩातुॊ दळाटटौ हदळ् ||५|| प्रीत्माऽटटादळवॊसभतेऴु मुगऩद्द्लीऩेऴु दातुॊ लयान ्
िातुॊ ला बमतो त्रफबवऴा बगलत्मटटादळैतान ् बुजान ् | मद्वाऽटटादळधा बुजाॊस्तु त्रफबृत् कारी वयस्लत्मुबे
भीसरत्लैकसभशानमो् प्रथतमतुॊ वा त्लॊ यभे यषभाभ् ||६|| अतम धगरयनॊहदतन नॊहदतभेहदतन वलश्लवलनोहदतन नॊदनुते धगरयलय
वलॊध्म सळयोधधतनलासवतन वलटणुवलरासवतन त्जटणुनुते | बगलतत शे सळततकण्ठकु टुॊत्रफतन बूरय कु टुॊत्रफतन बूरय कृ ते जम
जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||७|| वुयलयलवऴाणण दुधायधवऴाणण दुभुाखभवऴाणण शऴायते त्रिबुलनऩोवऴणण
ळॊकयतोवऴणण फकत्ल्फऴभोवऴणण घोऴयते | दनुज तनयोवऴणण हदततवुत योवऴणण दुभाद ळोवऴणण सवन्धुवुते जम जम शे
भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||८|| अतम जगदॊफ भदॊफ कदॊफ लनवप्रम लासवतन शावयते सळखरय सळयोभणण
तुङ्ग हशभारम ळृॊग तनजारम भध्मगते | भधु भधुये भधु कै टब गॊत्जतन कै टब बॊत्जतन यावयते जम जम शे
भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||९|| अतम ळतखण्ड वलखत्ण्डत रुण्ड वलतुत्ण्डत ळुण्ड गजाधधऩते रयऩु गज
गण्ड वलदायण ण्ड ऩयाक्रभ ळुण्ड भृगाधधऩते | तनज बुज दण्ड तनऩाततत खण्ड वलऩाततत भुण्ड बटाधधऩते जम जम
शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१०|| अतम यण दुभाद ळिु लधोहदत दुधाय तनजाय ळत्क्तबृते तुय वल ाय
धुयीण भशासळल दूतकृ त प्रभथाधधऩते | दुरयत दुयीश दुयाळम दुभातत दानलदूत कृ ताॊतभते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन
यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||११|| अतम ळयणागत लैरय लधूलय लीय लयाबम दामकये त्रिबुलन भस्तक ळूर वलयोधध सळयोधध
कृ ताभर ळूरकये | दुसभदुसभ ताभय दुॊदुसबनाद भशो भुखयीकृ त ततग्भकये जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन
ळैरवुते ||१२|| अतम तनज शुॉकृ तत भाि तनयाकृ त धूम्र वलरो न धूम्र ळते वभय वलळोवऴत ळोणणत फीज वभुद्भल ळोणणत
फीज रते | सळल सळल ळुॊब तनळुॊब भशाशल तवऩात बूत वऩळा यते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते
||१३|| धनुयनु वॊग यणषणवॊग ऩरयस्पु य दॊग नटत्कटके कनक वऩळॊग ऩृऴत्क तनऴॊग यवद्भट ळृॊग शतालटुके | कृ त
तुयङ्ग फरक्षषतत यङ्ग घटद्फशुयङ्ग यटद्फटुके जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१४||
वुयररनाततथेतमतथेतमतथासबनमोत्तयनृत्मयते शाववलरावशुरावभतम प्रणताताजनेऽसभतप्रेभबये |
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धधसभफकटधधक्कटधधकटधधसभध्लतनघोयभृदॊगतननादयते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१५|| जम
जम जप्म जमेजम ळब्द ऩयस्तुतत तत्ऩय वलश्लनुते झण झण णझत्ञ्जसभ णझॊकृ त नूऩुय सवॊत्जत भोहशत बूतऩते |
नहटत नटाधा नटीनट नामक नाहटत नाट्म वुगानयते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१६|| अतम
वुभन् वुभन् वुभन् वुभन् वुभनोशय काॊततमुते धश्रत यजनी यजनी यजनी यजनी यजनीकय लक्िलृते | वुनमन
वलभ्रभय भ्रभय भ्रभय भ्रभय भ्रभयाधधऩते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१७|| वहशत भशाशल
भल्रभ तत्ल्रक भत्ल्रत यल्रक भल्रयते वलयध त लत्ल्रक ऩत्ल्रक भत्ल्रक णझत्ल्रक सबत्ल्रक लगा लृते |
सवतकृ त पु त्ल्रवभुल्र सवतारुण तल्रज ऩल्रल वल्रसरते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१८||
अवलयर गण्ड गरन्भद भेदुय भत्त भतङ्गज याजऩते त्रिबुलन बूऴण बूत करातनधध रूऩ ऩमोतनधध याजवुते | अतम
वुद तीजन रारवभानव भोशन भन्भथ याजवुते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१९|| कभर
दराभर कोभर काॊतत कराकसरताभर बाररते वकर वलराव करातनरमक्रभ के सर रत्कर शॊव कु रे | असरकु र
वङ्कु र कु लरम भण्डर भौसरसभरद्भकु रासर कु रे जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२०|| कय भुयरी
यल लीत्जत कू त्जत रत्ज्जत कोफकर भञ्जुभते सभसरत ऩुसरन्द भनोशय गुत्ञ्जत यॊत्जतळैर तनकु ञ्जगते | तनजगुण
बूत भशाळफयीगण वद्गुण वॊबृत के सरतरे जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२१|| कहटतट ऩीत
दुकू र वलध ि भमूखततयस्कृ त ॊद्र रु े प्रणत वुयावुय भौसरभणणस्पु य दॊळुर वन्नख ॊद्र रु े | त्जत कनका र
भौसरऩदोत्जात तनबाय कुॊ जय कुॊ बकु े जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२२|| वलत्जत वशस्रकयैक
वशस्रकयैक वशस्रकयैकनुते कृ त वुयतायक वङ्गयतायक वङ्गयतायक वूनुवुते | वुयथ वभाधध वभानवभाधध
वभाधधवभाधध वुजातयते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२३|| ऩदकभरॊ करुणातनरमे
लरयलस्मतत मोऽनुहदनॊ व सळले अतम कभरे कभरातनरमे कभरातनरम् व कथॊ न बलेत ् | तल ऩदभेल
ऩयॊऩदसभत्मनुळीरमतो भभ फकॊ न सळले जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२४|| कनकरवत्कर
सवन्धु जरैयनु सवत्ञ् नुते गुण यङ्गबुलॊ बजतत व फकॊ न ळ ीकु कुॊ ब तटी ऩरययॊब वुखानुबलभ् | तल यणॊ ळयणॊ
कयलाणण नताभयलाणण तनलासव सळलॊ जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२५|| तल वलभरेन्दुकु रॊ
लदनेन्दुभरॊ वकरॊ ननु कू रमते फकभु ऩुरुशूत ऩुयीन्दुभुखी वुभुखीसबयवौ वलभुखीफक्रमते | भभ तु भतॊ सळलनाभधने
बलती कृ ऩमा फकभुत फक्रमते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२६|| अतम भतम दीनदमारुतमा
कृ ऩमैल त्लमा बवलतव्मभुभे अतम जगतो जननी कृ ऩमासव मथासव तथाऽनुसभतासवयते | मदुध तभि बलत्मुयरय
कु रुतादुरुताऩभऩाकु रुते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२७|| स्तुततसभतत्स्तसभत् वुवभाधधना
तनमभतोऽमभतोऽनुहदनॊ ऩठेत ् | ऩयभमा यभमावऩ तनऴेव्मते ऩरयजनोऽरयजनोऽवऩ तॊ बजेत ् ||२८|| यभमतत फकर
कऴास्तेऴु ध त्तॊ नयाणाभलयजलय मस्भाद्राभकृ टण् कलीनाभ् | अकृ त वुकृ ततगम्मॊ यम्मऩद्दैकशम्मिं स्तलनभलनशेतुॊ प्रीतमे
वलश्लभातु् ||२९|| इन्दुयम्मो भुशुत्रफान्दुयम्मो भुशुत्रफान्दुयम्मो मत् वोऽनलद्म् स्भृत् | श्रीऩते् वूनूना कारयतो मोऽधुना
वलश्लभातु् ऩदे ऩद्यऩुटऩाञ्जसर् ||३०|| || इतत श्रीबगलतीऩद्यऩुटऩाञ्जसरस्तोिभ ् ||
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ळाऩ वलभो न भॊि
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
चश्ण्डका शाऩ ववभोचन भॊर
त्ण्डका ळाऩ वलभो न भॊि के ऩाठ को कयने वे देली की ऩूजा भें की गमी फकवी बी प्रकाय िुहट (बूर) वे सभरा
श्राऩ खत्भ शो जाता शै।
शाऩ-ववभोचन सॊकल्ऩ
ऊॉ अस्म श्री त्ण्डकामा ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩवलभो न भन्िस्म लसवटठनायदवॊलादवाभलेदाधधऩततब्रह्भाण ऋऴम:
वलैश्लमाकारयणी श्रीदुगाा देलता रयििमॊ फीजॊ ह्ीॊ ळत्क्त: त्रिगुणात्भस्लरूऩ त्ण्डकाळाऩवलभुक्तो भभ
वॊकत्ल्ऩतकामासवद्धमथे जऩे वलतनमोग:।
शाऩववभोचन भॊर
ॐ (ह्ीॊ) यीॊ येत:स्लरूवऩण्मै भधुकै टबभहदान्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१॥
ॐ यॊ यक्तस्लरूवऩण्मै भहशऴावुयभहदान्मै,ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥२॥
ॐ षुॊ षुधास्लरूवऩण्मै देललत्न्दतामै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥३॥
ॐ छाॊ छामास्लरूवऩण्मै दूतवॊलाहदन्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥४॥
ॐ ळॊ ळत्क्तस्लरूवऩण्मै धूम्ररो नघाततन्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥५॥
ॐ तॊ तृऴास्लरूवऩण्मै ण्डभुण्डलधकारयण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥६॥
ॐ षाॊ षात्न्तस्लरूवऩण्मै यक्तफीजलधकारयण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥७॥
ॐ जाॊ जाततरूवऩण्मै तनळुम्बलधकारयण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥८॥
ॐ रॊ रज्जास्लरूवऩण्मै ळुम्बलधकारयण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥९॥
ॐ ळाॊ ळात्न्तस्लरूवऩण्मै देलस्तुत्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१०॥
ॐ श्रॊ श्रद्धास्लरूवऩण्मै वकरफ़रदात्र्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥११॥
ॐ श्रीॊ फुवद्धस्लरूवऩण्मै भहशऴावुयवैन्मनासळन्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१२॥
ॐ काॊ कात्न्तस्लरूवऩण्मै याजलयप्रदामै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१३॥
ॐ भाॉ भातृस्लरूवऩण्मै अनगारभहशभावहशतामै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१४॥
ॐ ह्ीॊ श्रीॊ दुॊ दुगाामै वॊ वलैश्लमाकारयण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१५॥
ॐ ऐॊ ह्ीॊ क्रीॊ नभ: सळलामै अबेद्यकल स्लरूवऩण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१६॥
ॐ क्रीॊ काल्मै कासर ह्ीॊ फ़ट स्लाशामै ऋग्लेदस्लरूवऩण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१७॥
ॐ ऐॊ ह्ीॊ क्रीॊ भशाकारीभशारक्ष्भीभशावयस्लतीस्लरूवऩण्मै त्रिगुणात्त्भकामै दुगाादेव्मै नभ:॥१८॥
इत्मेलॊ हश भशाभन्िान ऩहठत्ला ऩयभेश्लय, ण्डीऩाठॊ हदला यािौ कु माादेल न वॊळम:॥१९॥
एलॊ भन्िॊ न जानातत ण्डीऩाठॊ कयोतत म:, आत्भानॊ ैल दातायॊ षीणॊ कु माान्न वॊळम:॥२०॥
(श्रीदुगााभाऩाणाभस्तु)
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श्रीदुगााअटटोत्तय ळतनाभ ऩूजन
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
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अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कल
अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल ल उल्रेणखत अन्म वाभग्रीमों को ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे वलद्वान
ब्राह्भणो द्वाया सवा राख भहाभृत्मुॊजम भॊर जऩ एलॊ दळाॊळ शलन द्वाया तनसभात कल अत्मॊत
प्रबालळारी शोता शैं।
अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल
कल फनलाने शेतु:
अऩना नाभ, वऩता-भाता का नाभ, गोि, एक
नमा पोटो बेजे
कल के वलऴम भें अधधक जानकायी शेतु गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें।
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 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
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 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
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58 2019
श्री भाका ण्डेम कृ त रघु दुगाा वप्तळती स्तोिभ्
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
ॐ लीॊलीॊलीॊ लेणुशस्ते स्तुततवलधलटुके शाॊ तथा तानभाता,
स्लानॊदेभॊदरुऩे अवलशततनरुते बत्क्तदे भुत्क्तदे त्लभ्।
शॊव् वोशॊ वलळारे लरमगततशवे सववद्धदे लाभभागे, ह्ीॊ ह्ीॊ
ह्ीॊ सवद्धरोके कऴ कऴ वलऩुरे लीयबद्रे नभस्ते॥१॥
ॐ ह्ीॊ-कायॊ ोच् यॊती भभशयतु बमॊ भाभुॊडे प्र ॊडे,
खाॊखाॊखाॊ खड्गऩाणे ध्रकध्रकध्रफकते उग्ररुऩे स्लरुऩे।
शुॊशुॊशुॊ-काय-नादे गगन-बुवल तथा व्मावऩनी व्मोभरुऩे, शॊशॊशॊ-
कायनादे वुयगणनसभते याषवानाॊ तनशॊत्रि॥२॥
ऐॊ रोके कीतामॊती भभ शयतु बमॊ ॊडरुऩे नभस्ते, घ्राॊ घ्राॊ
घ्राॊ घोयरुऩे घघघघघहटते घघाये घोययाले।
तनभािंवे काकजॊघे घसवत-नख-नखा-धूम्र-नेिे त्रिनेिे,
शस्ताब्जे ळूरभुॊडे करकु रकु कु रे श्रीभशेळी नभस्ते॥३॥
क्रीॊ क्रीॊ क्रीॊ ऐॊ कु भायी कु शकु शभणखरे कोफकरे, भानुयागे
भुद्रावॊसत्रियेखाॊ कु रु कु रु वततॊ श्रीभशाभारय गुह्मे।
तेजोंगे सववद्धनाथे भनुऩलन रे नैल आसा तनधाने, ऐॊकाये
यात्रिभध्मे ळतमतऩळुजने तॊिकाॊते नभस्ते॥४॥
ॐ व्राॊ व्रीॊ व्रुॊ व्रूॊ कवलत्मे दशनऩुयगते रुक्भरुऩेण क्रे ,
त्रि्ळक्त्मा मुक्तलणााहदककयनसभते दाहदलॊऩूणालणे।
ह्ीॊ-स्थाने काभयाजे ज्लर ज्लर ज्लसरते
कोसळतैस्तास्तुऩिे स्लच्छॊदॊ कटटनाळे वुयलयलऩुऴे गुह्मभुॊडे
नभस्ते॥५॥
ॐ घ्राॊ घ्रीॊ घ्रूॊ घोयतुॊडे घघघघघघघे घघायान्माॊतघ्रघोऴे, ह्ीॊ
क्रीॊ द्रॊ द्रौं क्र य य य य यसभते वलाफोधप्रधाने।
द्रीॊ तीथे द्रीॊ तज्मेटठ जुगजुगजजुगे म्रेच्छदे कारभुॊडे,
वलािंगे यक्तघोयाभथनकयलये लज्रदॊडे नभस्ते॥६॥
ॐ क्राॊ क्रीॊ क्रूॊ लाभसबत्ते गगनगडगडे गुह्ममोन्माहशभुॊडे,
लज्राॊगे लज्रशस्ते वुयऩततलयदे भत्तभातॊगरुढे।
वूतेजे ळुद्धदेशे रररररसरते छेहदते ऩाळजारे,
कुॊ डल्माकायरुऩे लृऴलृऴबशये ऐॊहद्र भातनाभस्ते॥७॥
ॐ शुॊशुॊशुॊकायनादे कऴकऴलसवनी भाॊसव लैतारशस्ते,
वुॊसवद्धऴै् वुसववद्धढाढढढढढढ् वलाबषी प्र ॊडी।
जूॊ व् वौं ळाॊततकभे भृतभृततनगडे तन्वभे वीवभुद्रे, देवल
त्लॊ वाधकानाॊ बलबमशयणे बद्रकारी नभस्ते॥८॥
ॐ देवल त्लॊ तुमाशस्ते कयधृतऩरयघे त्लॊ लयाशस्लरुऩे, त्लॊ
ेंद्री त्लॊ कु फेयी त्लभसव जननी त्लॊ ऩुयाणी भशेंद्री।
ऐॊ ह्ीॊ ह्ीॊ कायबूते अतरतरतरे बूतरे स्लगाभागे, ऩातारे
ळैरबृॊगे शरयशयबुलने सववद्ध ॊडी नभस्ते॥९॥
शॊसव त्लॊ ळौंडदु्खॊ ळसभतबलबमे वलावलघ्नाॊतकामे,
गाॊगीॊगूॊगैंऴडॊगे गगनगहटतटे सववद्धदे सववद्धवाध्मे।
क्रूॊ क्रूॊ भुद्रागजाॊळो गवऩलनगते त्र्मषये लै कयारे, ॐ शीॊ
शूॊ गाॊ गणेळी गजभुखजननी त्लॊ गणेळी नभस्ते॥१०॥
॥इतत भाका ण्डेम कृ त रघु सप्तशती दुगाा स्तोरभ्॥
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गुप्त वप्तळती
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
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63 2019
बायततम ऩॊ ाॊग का भूर आधाय?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
हशन्दू वॊस्कृ तत भें ऩॊ ाॊग का वलळेऴ भशत्ल शै। शभाये मशाॊ ऩॊ ाॊग भें लणणात ततधथ, ऩष, ग्रश, नषि आहद
की त्स्थती के आधाय ऩय जीलन के वलसबन्न 16 वॊस्कायों वे रेकय मािा इत्माहद कामों शेतु बी ळुब भुशूता का
मन कयने ऩय वलळेऴ जोय हदमा जाता शैं।
ळुब भुशूता देखने का भुख्म उद्देश्म शोता शैं की व्मत्क्त को अऩने ळुब कामा भे तनत्श् त वपरता प्राप्त
शो वके भुख्मत् अमन, वलऴुल, ऋतु, वूमा एलॊ ॊद्र, ऩष, ततधथ, नषि, कयण, मोग, वूमोदम ल ॊद्रोदम,
हदनभान, यात्रिभान औय ऩॊ ाॊग के भुख्म अॊग भाने जाते शैं। उऩयोक्त वबी भशत्लऩूणा त्स्थतीमों का गणणत के
आधाय ऩय वूक्ष्भ वलश्रेऴण फकमा जाता शै।
वलद्वानो के भत वे लैहदक प्रणारी भें इनका कोई वलळेऴ तनदेळ नशीॊ शै। रेफकन कारगणना भें ऩरयळुद्धता
के सरए इन्शें अऩनामा जाता शैं।
ऩृ्ली वूमा के आकऴाण वे तनधाारयत एक तनमत भागा भें वतत भ्रभण कयती शै। वाधायणत् ऩृ्ली वे
वूमा त्जव भागा ऩय रता शुआ प्रतीत शोता शै, उवे ज्मोततऴ की ऩारयबावऴक ळब्दालरी भें क्राॊततलृत्त अथाात
एकसरत्प्टक (Ecliptic) कशते शैं। इव क्राॊततलृत्त भागा के 9 अॊळ वे फने वलस्ताय को ब क्र कशते शैं। ऩृ्ली की
तनमत गतत के कायण शी अमन, वलऴुल, ऋतु एलॊ हदन-यात शोते शैं।
वॊक्राॊतत तनधाायण औय ऩॊ ाॊग की ऩरयळुद्धता भें अमन औय वलऴुल ततधथमों की बूसभका प्रभुख भानी जाती
शैं। त्जव प्रकाय ऩृ्ली का वॊफॊध वूमा क्राॊततलृत्त वे यशता शै उवी प्रकाय ऩृ्ली का वॊफॊध वे ॊद्र अऩने तनत्श् त
भाग्र भें भ्रभण कयता शै। अन्म ग्रशो की अऩेषा ॊद्र अतत ळीघ्र गतत कयता शै इव सरए ॊद्र जफ वूमा वे 12
अॊळों के अॊतय ऩय आता शै, तफ एक ततधथ का क्रभ ऩूया शो जाता शै। इव प्रकाय क्रभळ् 12-12 अॊळों के अॊतय
वे तनमसभत ततधथमाॊ फदरती शैं।
बायततम वॊस्कृ तत भे भुशूता का भशत्ल
बायततम वॊस्कृ तत भे भुशूता का वलळेऴ भशत्ल शैं। शभाये ऋवऴ-भुतन वलद्वान आ ामों ने जन्भ वे
अॊत्मेत्टट(भृत व्मत्क्त फक अॊततभ फक्रमा) तक वबी वॊस्कायों एलॊ अन्म वबी भाॊगसरक कामों के सरए भुशूता का
वलधान आलश्मक फतामा गमा शैं।फकवी कामा वलळेऴ भें वपरता फक प्तात्प्त शेतु तनत्श् त भुशूता का ुनाल फकमा
जाता शैं।
बायतीम ज्मोततऴ सवद्धान्त के अनुळाय शय भुशूता का अऩना लैसातनक प्रबाल एलॊ भशत्ल शैं। कोई बी
व्मत्क्त इन भुशूता के प्रबाल एलॊ भशत्ल के फाये भे ऩूणा जानकायी प्राप्त कय व्मत्क्त अऩने फकवी बी कामा उद्देश्म
भें वलळेऴ वपरता प्रात्प्त शेतु उध त भुशूता का ुनाल कय वपरता प्रात्प्त फक वॊबालना फढा वकते शैं। एलॊ
ज्मोततऴीम भत वे ळुब पर प्रदान कयने लारे भुशूता भें फकमे गमे कामो भें उव कामा की वपरता की वॊबालना
कई गुणा फढ़ जाती शै।
प्राम् शय भुशूता का तनणाम ब्रह्भाॊड भें त्स्थत ग्रशो फक त्स्थततमों फक गणना कय फकमा जाता शैं। बायततम
वॊस्कृ तत भें प्राम् शय ळुब कामा भें बायत के प्रभुख 16 वॊस्कायो को वॊऩन्न कयने शेतु भुशूता का ुनाल अतत
आलश्मक भाना गमा शैं। क्मोफक ळुबा भुशूता भें फकमे गमे शय ळुब कामा अत्माधधक ळुब पर प्रदान कयने लारे
शोते शैं।
64 2019
बायतीम ऩॊ ाॊग गणना की लैसातनक ऩद्धतत क्मा शैं?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
बायतीम ऩॊ ाॊग का इततशाव अत्मॊत प्राध न शैं।
बायत भें वलसबन्न प्रादेसळक ऩॊ ाॊग भें क्रभळ ततधथ,
लाय, नषि, मोग औय कयण मश ऩाॊ प्रभुख अॊग शोते
शैं। क्मोफक, इवी ऩाॊ अॊगों को सभराकय बायतीम
ततधथऩि अथाात ् हदनदसळाका अथाात ्
कै रेंडय को ऩॊ ाॊग कशा जाता शैं।
ऩुयातन कार वे
रेकय आज के
आधुतनक मुग भें
ऩॊ ाॊग की ऩौयाणणक
गणना एलॊ तनभााण
ऩद्धतत भें वभम-
वभम ऩय वुधाय मा
वुक्ष्भता आती यशी
शैं। क्मोफक, ऩॊ ाॊग का भुख्म उद्देश्म भानल जीलन को
प्रबावलत कयने लारे ग्रश, नषि आहद ब्रह्भाॊडडम ळत्क्त
की स्टीक गणना कय भानल वभाज के वम्भुख प्रस्तुत
कयना एलॊ उनको राबाॊवलत कयना शैं, इव सरए ऩॊ ाॊग
भें नए ळोध एलॊ आधुतनक ऩरयषण द्वाय ऩॊ ाॊग गणना
भें स्टीकता आतत यशी शैं। इव ऩरयणाभ शैं की, आज
शभाये ऩाव ऩॊ ाॊग गणना एलॊ तनभााण के वळक्त
भाध्मभ उऩरब्ध शै। आज बायत बय भें याटट्रीम ऩॊ ाॊग
के के वाथ-वाथ कई षेिीम ऩॊ ाॊग उऩरब्ध शैं।
अॊदाजन ई.500 के कयीफ आ ामा रगध का
लेदाॊग-ज्मोततऴ (कक् ल माजुऴ्) की य ना की थी। त्जव
भें लणणात शैं की ऩाॊ लऴा का एक मुग, 366 हदनों का
लऴा शोता शैं।
11 लीॊ वदी वे ऩूलाकार भें अधधकतय बायतीम
ऩॊ ाॊग की गणना आ ामा रगध द्वाया यध त ग्रॊथ वेदाॊग
ज्मोततष भें उल्रेणखत त्मों ऩय आधारयत शोती थी।
ळास्िों भें कशाॉ गमा शैं।
कारसानॊ प्र क्ष्मासभ रगधस्म भशात्भन्।
कारसान फोधक ज्मोततऴळास्ि का लताभान वलकसवत
स्लरुऩ आ ामा रगध भुतन की देन शैं।
वभम के वाथ-वाथ आमाबट्ट की खगोरीम
गणना की वलधधमाॊ बी फशुत प्रबालळारी वात्रफत शुई, फक
उनके द्वाया प्रमोग फकए गए सवद्धाॊत वलश्ल की अन्म
वभ्मता एलॊ वॊस्कृ ततमों भें बी नजय आने रगे थे।
11लीॊ वदी भें स्ऩेन के भवशूय लैसातनक अर झकाारी
(Al Zarkali) ने बी अऩने कामों भें आमाबट्ट की
खगोरीम गणना वे भेरखाती शुई प्रणारी को तोरेडो
(Toledo) नाभ हदमा। कयीफ 11लीॊ- 12लीॊ वदी वे रेकय
कई वदीमों तक भें मूयोऩीमन देळों भें तोरेडो प्रणारी
को वलााधधक वूक्ष्भ गणना के तौय ऩय फकमा जाता था।
बायतीत गणणतस आमाबट्ट ने अऩने अनुबलों एलॊ
ळोधनकामा वे आमाबट्ट सवद्धाॊत नाभक ग्रॊथ की य ना
की त्जव भें दैतनक खगोरीम गणना औय अनुटठानों के
सरए ळुब भुशूता इत्माहद का वभालेळ फकमा गमा।
वलद्वानों के भत वे आमाबट्ट सवद्धाॊत को ायों ओय वे
स्लीकृ तत सभरी थी। क्मोफक आमाबट्ट अऩने वभम के
वफवे फडे गणणतस थे।
आमाबट्ट सवद्धाॊत की रोकवप्रमता एलॊ प्राभाणणकता
सवद्ध शोते शी बायतीम ऩॊ ाॊग की गणना एलॊ तनधाायण
भें वलळेऴ भशत्ल एलॊ मोगदान यशा शैं। आमाबट्ट के वभम
वे रेकय आजके आधुतनक मुग भें बी इव सवद्धाॊत को
व्मालशारयक उद्देश्मों वे बायत एलॊ वलदेळों भें तनयॊतय
इस्तेभार भें यशा शैं।
आ ामा रगध द्वाया यध त ग्रॊथ वेदाॊग ज्मोततष
भें लणणात वूमा सवद्धाॊत की प्राभाणणकता सवद्ध शोने ऩय
ऩॊ ाॊग गणना भें वुरबता शोने रगी। त्जव भें
आगे रकय आमाबट्ट, लयाशसभहशय औय बास्कय ने अऩने
मोगदान वे ऩॊ ाॊग गणना ऩद्धतत वे जुडे ग्रॊथो भें
व्माऩक वुधाय फकए।
65 2019
वलसबन्न प्रदेळो एलॊ वॊस्कृ तत की सबन्नता के कायण
ऩॊ ाॊगों की गणनाओॊ भें अॊतय शो जाता शै, रेफकन कु छ
त्म प्राम् वबी ऩॊ ाॊगों भें वभान शोते शैं।
वबी ऩॊ ाॊगों के भुख्म ऩाॉ अॊग: ततधथ, लाय, नषि,
मोग औय कयण।
लृशदलकशडा क्रभ, ऩॊ ाॊग प्रकयण, श्रोक 1 भें
कशा गमा शै -
ततधथ लारयश् नषिाॊ मोग कयणभेल ।
एतेऴाॊ मिा वलसानॊ ऩॊ ाॊग तत्न्नगद्यते॥
फकवी बी वलळुद्ध ऩॊ ाॊग को फकवी स्थान वलळेऴ
के अषाॊळ औय येखाॊळ ऩय तनधाारयत फकमा जाता शैं।
फकवी ऩॊ ाॊग के तनभााण के सरए फकवी तनधाारयत स्थान
वलळेऴ के अषाॊळ येखाॊळ का स्ऩटट उल्रेख फकमा जाता
शैं।
भुख्मत् ऩॊ ाॊग प्रस्तुतत की दो भुख्म ऩद्धततमाॊ
भानी जाती शैं। एक शैं तनयमन औय औय दूवयी शैं
वामन।
बायतीम के ऩॊ ाॊग भें ज्मादातय तनयमन ऩद्धतत अधधक
प्र सरत शैं औय ऩाश् ात्म देळों भें वामन ऩद्धतत अधधक
प्र सरत शैं।
ततधथ :
ॊद्र की एक करा को ततधथ कशा जाता शैं। करा
का भान वूमा औय ॊद्र के अॊतयाॊळों ऩय तनधाारयत फकमा
जाता शैं।
ततधथ तनधाायण के वलऴम भें ळास्ि भें लणणात शैं।
अकााद्वद्वतनवृज् प्रा ीॊ मद्यात्मशयश् ळऴी।
तच् ान्द्रभानभॊऴैस्तु सेमा द्वादऴसबत्स्तधथ्॥
(श्रोक 13:भानाध्माम:वूमा सवद्धाॊत:)
लैहदक ज्मोततऴ भें यासळमो को 360 डडग्री को
12 बागो भें फाॊटा गमा शै त्जवे बचक्र कशते शैं।
लैहदक ऩॊ ाॊग भें 30 ततधथमाॊ शोती शैं। त्जवभें
15 ततधथमाॊ कृ टण ऩष की तथा 15 ळुक्र ऩष की
शोती शैं। रेफकन ॊद्र की गतत भें सबन्नता शोने के
कायण ततधथ के भान भें न्मूना एलॊ धधकता फनी यशती
शै।
वॊऩूणा ब क्र की 360 डडग्री को 30 ततधथमों को
360 ÷ 30 =12 ळेऴ फ ते शैं। ॊद्र अऩने ऩरयक्रभा ऩथ
ऩय एक हदन भें रगबग 13 अॊळ फढ़ता शै। वूमा बी
ऩृ्ली के वॊदबा भें एक हदन भें 1° मा 60 करा आगे
फढ़ता शैं। इव सरए एक हदन भें ॊद्र की कु र फढ़त 13
अॊळ वे वूमा की फढ़त के 1 अॊळ घटाने ऩय 12 अॊळ
(13°-1°=12°) ळेऴ यश जाते शैं। ळेऴ फ ी फढ़त शी वूमा
औय ॊद्र की गतत का अॊतय शोती शैं।
अभालस्मा के हदन वूमा औय ॊद्र एक वाथ एक
शी यासळ ल एक शी अॊळों भें त्स्थत शोते शैं। दोनों के
फी का यासळ अॊतय ळून्म शोता शैं, इवसरए ॊद्र हदखाई
नशीॊ देता शैं। जफ दोनों का अॊतय ळून्म वे फढ़ने रगता
शैं तफ ळुक्र प्रततऩदा ततधथ का उदम (प्रायॊब) शोने
रगता शैं। वभम के वाथ जफ मश अॊतय फढ़ते-फढ़ते
12° अॊळ का शो जाता शै, तफ प्रततऩदा ततधथ ऩूणा
शोकय द्वद्वतीमा ततधथ का उदम शोता शै। ूॊफक प्रततऩदा
ततधथ के हदन बी ॊद्र वूमा वे के लर 12 अॊळ शी आगे
तनकरता शै, इवसरए प्रततऩदा ततधथ को बी आकाळ भें
ॊद्रदळान नशीॊ शोते शैं। इवी प्रकाय वूमा- ॊद्र के यासळ
अतय वे फकवी ततधथ वलळेऴ का तनधाायण फकमा जाता
शैं। कयीफन ऩॊद्रश हदन फाद भें जफ ॊद्र का अॊतय वूमा
वे 180 अॊळ शोता शैं (12 x15=180) आगे शोता शै,
तफ ऩूणणाभा ततधथ की वभात्प्त शोती शैं तथा कृ टणऩष
की प्रततऩदा ततधथ का उदम शोता शैं। ऩुन् जफ वूमा
औय ॊद्र का अॊतय 360 अॊळ अथाात ळून्म शोता शैं तफ
कृ टण ऩष की अभालस्मा ततधथ वभाप्त शोती शैं।
लाय:
बायतीम ज्मोततऴ भें एक लाय एक वूमोदम वे
दूवये वूमोदम तक यशता शैं।
वाय को ऩरयबावषत कयते हुए शास्रों भें उल्रेख ककमा
गमा हैं
उदमात्उदमॊ लाय्।
66 2019
लाय को ऩौयाणणक ज्मोततऴ भें वालन हदन मा अशगाण
के नाभ वे बी जाना जाता शैं। लायों का प्र सरत क्रभ
ऩुये वलश्ल भें एक वभान शै।
वात लायों के नाभ वात ग्रशों के नाभ ऩय यखे
गए शैं। इन वात लायों का क्रभ शोया क्रभ के आधाय ऩय
यखे गए शै औय शोया क्रभ ब्रह्भाॊड भें त्स्थत वूमााहद
ग्रशों के कष क्रभ के अनुवाय तनधाारयत फकए गए शैं।
नषि :
ज्मोततऴ ळास्ि भें 12 यासळमाॊ अथाात ब क्र
360 अॊळ को 27 नषिों के 27 बागों भें फाॊटा गमा
शैं। शय बाग एक नषि का कायक शै औय शय एक
बाग को नषिों का एक तनधाारयत नाभ हदमा गमा शै।
कु छ वलद्वानो के भतानुळाय 27 नषिों के
अततरयक्त एक औय नषि शैं त्जवे असबत्जत नषि के
नाभ वे जाना जाता शैं इव सरए उनके भत वे कु र
सभराकय 28 शोते शैं।
वूमा सवद्धाॊत के अनुवाय एक नषि का भान
360 अॊळ /27 नषि अथाात एक नषि के सरए 13
अॊळ 20 करा ळेऴ यशता शैं।
वलद्वानों के कथन अनुवाय उत्तयाऴाढ़ा नषि की
अॊततभ 15 तथा श्रलण नषि की प्रथभ 4 घहटमाॊ के
त्रफ का कार असबत्जत नषि की शोती शैं। इव तयश
असबत्जत नषि का भान कु र सभराकय 19 शै। रेफकन
प्राम् ऩॊ ाॊगों भें इव नषि की गणना देखने को नशीॊ
सभरती शैं।
फृशत्वॊहशता भें ॊद्र का नषिों वे मोग फताते
शुए उल्रेख फकमा गमा शैं:-
ऴडनागतातनऩौटणाद् द्वादळयौद्राच् भध्ममोगीतन।
जेटठाद्यातननलषााण्मपडुऩततनातीत्म मुज्मन्ते॥
इव श्रोक के अनुवाय बी 27 नषिों लारा भत
प्राभाणणक भाना जाता शैं।
ज्मोततऴ भें 27 नषिों को 12 यासळमों भें
वलबात्जत फकमा जाता शैं। प्रत्मेक नषि के ाय यण
(बाग) फकए गए शैं। त्जववे प्रत्मेक यण का भान 13
अॊळ 20 करा भाना गमा शैं त्जवे उवके ाय यण वे
बाग देने ऩय 3 अॊळ 20 करा ळेऴ फ ती शैं। (13 अॊळ
20 ÷ 4 = 3 अॊळ 20 करा)
इस प्रकाय 27 नऺरों भें कु र 108 चयण होते हैं।
लृशज्जातकभ् के अनुवाय प्रत्मेक यासळ भें 108
यण को 12 यासळ भें बाग देने वे 9 यण शोंगे।
(108÷ 12 = 9) वलद्वानो के भत वे ॊद्र रगबग 27
हदन 7 घॊटे 43 सभनट भें 27 नषि की ऩरयक्रभा ऩूणा
कय रेता शैं। इव सरए ॊद्र रगबग 1 हदन (60 घटी)
भें एक नषि भें भ्रभण कयता शैं। रेफकन अऩनी गतत
कभ-ज्मादा शोने कायण ॊद्र एक नषि को अऩनी कभ
वे ऩाय कयने भें रगबग 67 घटी एलॊ अऩनी अधधकतभ
गतत वे ऩाय कयने भें रगबग 52 घटी का वभम रेता
शैं।
मोग :
ऩॊचाॊग भें भुख्मत् मोग दो प्रकाय के भाने गए हैं
(१) आनॊदाहद मोग औय
(२) वलटकॊ बाहद मोग
त्जव प्रकाय वूमा औय ॊद्र के यासळ अॊतय वे
ततधथ का तनधाायण शोता शैं, उवी प्रकाय वूमा औय ॊद्र
के यासळ अॊतय के मोग कयने वे वलटकॊ बाहद मोग का
तनधाायण शोता शैं। मशाॊ स्ऩटट फकमा जा यशा शैं, की
मोग ब्रह्भाॊड के फकवी प्रकाय के ताया वभूश अथाात ग्रश
नषि नशीॊ शैं। लयन ॊद्र एलॊ वूमा के अॊतय का मोग
तनधाायण की त्स्थती का नाभ शैं।
आकाळ भें तनयमन इत्माहद त्रफॊदुओॊ वे वूमा औय
ॊद्र को वॊमुक्त रूऩ वे 13 अॊळ 20 करा अथाात 800
करा का ऩूया बोग कयने भें त्जतना वभम रगता शै,
लश मोग कशराता शै। इव प्रकाय के फकवी बी एक मोग
का भान नषि की बाॊतत 800 करा शोता शैं।
वलटकॊ बाहद मोगों की कु र वॊख्मा 27 शैं।
मोग का दैतनक भान रगबग 60 घटी 13 ऩर
शोता शै। वूमा औय ॊद्र की गततमों की अवभानता के
कायण भध्मभ भान भें न्मूनता एलॊ धधकता फनती शैं।
इन मोगों भें लैधृतत एलॊ व्मततऩात नाभक मोगों को
भशाऩातक कशते शैं।
67 2019
लाय औय नषि के वॊमोग वे तात्कासरक
आनॊदाहद मोग फनते शैं। ऩौयाणणक ग्रथों भें इनकी
वॊख्मा 28 दळााई शै। इन्शें त्स्थय मोग बी कशते शैं।
इनकी गणणतीम फक्रमा नशीॊ शै। मे मोग वूमोदम वे
अगरे वूमोदम तक यशते शैं। इन मोगों का तनधाायण
लाय वलळेऴ को तनहदाटट नषि वे वलद्यभान नषि
(असबत्जत नषि के वाथ) तक की गणना द्वाया शोता
शै।
कयण:
फकवी बी ततधथ का आधा बाग कयण कशराता
शैं। वूमा औय ॊद्र भें 60 अॊळ का अॊतय शोने भें त्जतना
वभम रगता उव अॊतय वे कयण का तनधाायण फकमा
जाता शैं। फकवी-फकवी ऩॊ ाॊगों भें कयण का लणान के लर
वूमोदमकारीन वभम वे फकमा जाता शैं, तो फकवी-फकवी
ऩॊ ाॊगों भें ततधथ की वॊऩूणा अलधध को दो वभान बाग
कयके वलळेळ तौय ऩय कयणों का तनधाायण कय देते शैं।
एक ततधथ भें दो कयण शोते शैं। इनकी कु र वॊख्मा ११
शै।
कयण को दो बागों भें फाॊटा गमा शैं य औय त्स्थय।
फल, फारल, कौरल, तैत्त्तर, गय, लणणज एलॊ
वलत्टट (बद्रा) य औय फकॊ स्तुन, ळकु तन, तुटऩद एलॊ
नाग त्स्थय वॊसक कयण शैं।
कयण की ळुरुआत त्स्थय कयण अथाात फकॊ स्तुन
वे शोती शैं जफ ब क्र भें वूमा औय ॊद्र के फी अॊळ
का अॊतय ळून्म शोता शैं, तो प्रततऩदा ततधथ के वाथ शी
त्स्थय फकॊ स्तुन कयण का ळुरु शोता शैं। जफ ॊद्र गतत
वूमा वे 6 अॊळ आगे तनकर जाती शैं, तफ फकॊ स्तुन
कयण की वभात्प्त शोती शैं। अथाात वूमा औय ॊद्र भें 6
अॊळ का अॊतय शोने भें जो वभम रगता शैं, उवे फकॊ स्तुन
कयण कशा जाता शैं। इवी प्रकाय क्रभळ् 6-6 अॊळ के
अॊतय ऩय कयण फदर जाते शैं।
कयण ततधथ का आधा बाग शोता शैं।
ततधथ के ऩूलााद्धा अथाात ऩशरे आधे बाग भें एक
कयण, उत्तयाद्धा अथाात दूवये आधे बाग का एक कयण।
इव प्रकाय एक ततधथ भें 2 कयण शोते शैं।
वूमा औय न्द्रभा के फी 6º अॊळ का अन्तय
शोने वे एक कयण शोता शैं। ज्मोततऴ ळास्ि के अनुवाय
कयण की कु र वॊख्मा 11 शोती शैं। 11 यण को दो
बागो भें फाटा गमा शैं य कयण औय त्स्थय कयण।
य कयण भें
1) फल
2) फारल
3) कौरल
4) तैततर
5) गय
6) लणणज
7) वलत्टट का वभालेळ फकमा गमा शैं।
त्स्थय कयण भें
1) ळकु तन 2) तुटऩद 3) नाग
4) फकस्तुध्न का वभालेळ फकमा गमा शैं।
जफ वूमा औय न्द्रभा की गतत भें 13º-20' का
अन्तय शोने वे एक मोग शोता शैं। कु र सभरा कय 27
मोग शोते शैं आकाळ की त्स्थतत वे इन मोगो का कोइ
वम्फन्ध नशीॊ शैं। लैवे बी मोगो की आलश्मकता वलळेऴ
रुऩ वे मािा, भुशुता इत्माहद प्रवॊगों भें ऩडती शैं।
मोगो के नाभ
1) वलटकु म्ब
2) प्रीतत
3) आमुटभान
4) वौबाग्म
5) ळोबन
6) अततगड
7) वुकभाा
8) घृतत
9) ळूर
10) गॊड
11) लृवद्ध
12) ध्रुल
13) व्माघात
14) शऴाण
15) लज्र
16) सववद्ध
17) व्मतीऩात
18) लयीमान
19) ऩरयध
20) सळल
21) सवद्ध
22) वाध्म
23) ळुब
24) ळुक्र
25) ब्रह्भ
26) ऎन्द्र
27) लैधृतत
68 2019
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ान्द्र भाव
ान्द्र भाव भें कु र 30 ततधथमाॉ शोती शैं त्जनभें 15
ततधथमाॉ ळुक्र ऩष की औय 15 कृ टण ऩष की शोती शैं।
ततधथमाॉ तनम्न प्रकाय की शैं।
1) प्रततऩदा
2) द्वद्वतीमा
3) तृतीमा
4) तुथॉ
5) ऩॊ भी
6) ऴटटी
7) वप्तभी
8) अटटभी
9) नलभी
10) दळभी
11) एकादळी
12) द्वादळी
13) िमोदळी
14) तुदाळी
15) ऩूणणाभा
30) अभालस्मा
ततधथमाॉ ळुक्रऩष की प्रततऩदा वे धगनी जाती
शैं। ऩूणणाभा को 15 तथा अभालस्मा को 30 ततधथ कशते
शैं। त्जव हदन वूमा ल न्द्रभा भें 180º अॊळ का अन्तय
(दूयी) शोता शैं अथाात वूमा ल न्द्र आभने-वाभने शो
जाते शैं तो उवे ऩूणणाभा ततधथ कशा जाता शैं औय जफ
वुमा ल न्द्रभा एक शी स्थान ऩयशोते शैं अथाात 0º का
अन्तय शोता शैं तो अभालस्मा ततधथ कशते शैं। ब क्र
का कु रभान 360º शैं, तो एक ततधथ= 360÷ 30=12º
अथाात वूमा- न्द्र भें 12º का अन्तय ऩडने ऩय एक ततधथ
शोती शैं।
उदाशयण स्लरुऩ:
0º वे 12º तक ळुक्र ऩष की प्रततऩदा 12º वे 24º
तक द्वद्वतीम तथा क्रभळ् ततधथ लृवद्ध शोकय अॊत भें
330º वे 360º तक कृ टण ऩष की अभालस्मा को अॊत
शोती शैं।
बायतीम ज्मोततऴ की ऩयम्ऩया भें ततधथ की लृवद्ध
एलॊ ततधथ का षम बी शोता शैं। महद फकवी ततधथभें दो
फाय वूमोदम शो जाता शैं, तो उवे ततधथ लृवद्ध कशराती
शैं तथा त्जव ततधथ भें वूमोदम न शो तो उवे ततधथका
षम शो जाना कशा जाता शैं।
उदाशयण के सरए एक ततधथ वूमोदम वे ऩूला
प्रायम्ब शोती शैं तथा वॊऩूणा हदन यशकय अगरे हदन
वूमोदम के 2 घॊटे ऩश् ात तक बी यशती शैं तो मश
ततधथ दो वूमोदम को स्ऩळा कय रेती शैं।
इवसरए इव ततधथभें लृवद्ध शो जाती शैं। इवी
प्रकाय एक अन्म ततधथ वूमोदम के ऩश् ात प्रायम्ब शोती
शै तथा दूवये हदन वूमोदम वे ऩशरे वभाप्त शो जाती
शैं, तो मश ततधथ एक बी वूमोदम को स्ऩळा नशीॊ कयती
इव कायण उवे षम शोने वे ततधथषम कशा जाता शैं।
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कै रेण्डय मुग की उत्ऩत्त्त कफ शुई ?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
वाधायणत् कै रेण्डय का उऩमोग हदनाॊकों
(तायीखों) भहशने, लऴा का हशवाफ यखने के सरए फकमा
जाता शैं। कै रेण्डय का उद्गभ कफ शुला औय कै रेण्डय
का उऩमोग भानल वभाज कफ वे कय यशा शैं मश दाले
के वाथ कोई नशीॊ कश वकता! क्मोफक, जफ ऩौयाणणक
कार भें जफ आहद भानल लन-फीशडों औय गुपाओॊ भें
यशते थे तो, मशॊ देख कय अलश्म आश् मा फकत शुए
शोंगे फक, प्रततहदन वूयज उदम शोता शैं औय ळाभ को
अस्त शो जाता शैं, ाॊद तनकरता शै औय छू ऩ जाता शैं।
कबी बमॊकय गभॉ ऩडती शैं, तो कबी जोयों की लऴाा
शोने रगती शैं। औय फपय, कबी हशरा कय यख देने
लारी ठॊड ऩडने रगती शैं। उवने जरूय वो ा शोगा फक
प्रकृ तत भें वभम-वभम ऩय ऐवे फदराल क्मों शोते शैं?
क्मों ऋतुएॊ आती-जाती शैं?
जफ आहद भानल ने खेती कयना ळुरू फकमा शोगा
तफ, उवने जभीन भें फीज फोमे शोंगे तो उवने देखा
शोगा फक पवर उगती शैं, फढ़ती शै औय वभम के वाथ-
वाथ ऩक जाती शै। फपय उव पवर की कटाई कय रेता
शोगा। ऩुन् फीज फोने का वभम आने ऩय फपय वे फीज
फोए शोंगे। इव तयश पवर की फोआई-कटाई का क्रभ
रता यशा शोगा। इव क्रभ वे ळामद उवने ऩशरी फाय
इव फात का अॊदाजा रगाना ळुरू फकमा शोगा फक पवर
फोने के फकतने वभम फाद फपय वे नई पवर के फीज
फोने शैं। धीये-धीये आहद भानल नें इव तयश ळामद
ऩशरी फाय ऩूये लऴा का हशवाफ रगामा शोगा। आहद
कार वे शी फकवी बी तयश वलश्ल की वलसबन्न
वभ्मताओॊ ने तनत्श् त तौय ऩय अऩने-अऩने ढॊग वे
वभम का हशवाफ रगामा शोगा।
सभस्रलावीमों के भत वे:
अनुभातनक तौय ऩय एवा भाना जाता शैं की लऴा का
ऩशरा हशवाफ वफवे 6,000 लऴा ऩशरे सभस्र के
तनलासवमों ने रगामा था। शय वार जफ नीर नदी भें
फाढ़ आती थी तो उवके फाद ले पवरों की फोआई कयते
थे। फाढ़ आने के फाद जफ नीर नदी भें दुफाया फाढ़
आती थी तो उन्शोंने देखा फक उव दौयान ाॊद 12 फाय
उगता था। मानी, 12 ॊद्र-भाशों के फाद फाढ़ आती थी
औय तफ ले पवर की फोआई कयते थे। सभस्र के कु छ
वलद्वानो ने देखा फक जफ फाढ़ आती शै तो आवभान भें
एक तेज भकदाय ताया बी हदखाई देने रगता शै।
उन्शोंने गणना की तो ऩता रगा फक 365 हदन-यात के
फाद फपय ऐवा शी शोता शै। फपय ताया भकने रगता
शै। सभस्र के तनलासवमों ने 365 हदन के लऴा को 30
हदन के 12 भशीनों भें फाॊट हदमा। लऴा के अॊत भें ऩाॊ
हदन फ गए। इव तयश सभस्र के तनलासवमों ने कै रेंडय
का आवलटकाय कय सरमा शोगा।
अबी तक शुए ऐततशासवक ळोध वे जुसरमन औय
ग्रेगोयीमन कै रेंडय भशत्लऩूणा भाने जाते शैं। जुसरमन
कै रेंडय योभ के ळावक जुसरमव वीजय ने तैमाय फकमा
था। आगे र कय ऩोऩ ग्रेगोयी तेयशलें ने इव कै रेण्ड भें
वुधाय कयके ग्रेगोयीमन कै रेंडय तैमाय फकमा था।
45 ईस्ली ऩूला वे अथाात इव वभम वे ऩशरे
तक योभ वाम्राज्म भें योभन कै रेंडय प्र सरत था।
योभन कै रेंडय भें लऴा का प्रायॊब 1 भा ा वे शोता था।
प्रायॊब भें योभन कै रेंडय भें लऴा 10 भाश का शोता था
फपय उवे 12 भहशनो का फकमा गमा।
जफ योभन कै रेंडय भें 10 भाश शोते थे तो उव
भें 10 भाश क्रभळ् भाहटाअव, एवप्रसरव, भेअव,
जूतनअव, त्क्लॊहटसरव, वैत्क्वहटसरव, वेप्टेंफय, अक्टूफय,
नलॊफय तथा हदवॊफय।
योभन कै रेंडय को 10 भाश वे जफ 2 भाश
सभरा कय उवे 12 भहशनो का फकमा गमा तो उव भें
12 भाश क्रभळ् रान्मुआयीअव, पे ब्रुआयीअव,
भाहटाअव, एवप्रसरव, भेअव, जूतनअव, त्क्लॊहटसरव,
वैत्क्वहटसरव, वेप्टेंफय, अक्टूफय, नम्फफय तथा हदवफफय
थे।
70 2019
योभन कै रेंडय के 10 भशीनों के लऴा भें के लर
304 हदन शोते थे। एवा भाना जाता शै फक योभ के
वम्राट ‘नुभा ऩोत्म्ऩसरअव’ ने हदवॊफय औय भा ा भशीनों
के फी पयलयी औय जनलयी भाश जोडे। त्जववे लऴा
354 मा 355 हदनों का शो गमा। शय दो लऴा फाद
अधधभाव जोड कय 366 हदन का लऴा भान सरमा
जाता था। वभम के वाथ-वाथ इवभें वुधाय शोते यशे।
त्जववे कै रेंडय की गणनाएॊ ॊद्रभा के फजाम
हदनों के आधाय ऩय शोने रगीॊ। ऩृ्ली द्वाया वूमा की
ऩरयक्रभा की गणना के आधाय ऩय लऴा भें हदनों की
वॊख्मा 365.25 शो गई। इव वला अथाात ् एक ौथाई
हदन वे गणना भें फडा भ्रभ ऩैदा शोने रगा।
उव वभम योभ के ळावक जुसरमव वीजय ने
योभन कै रेंडय भें वलळेऴ वुधाय फकमा। ईस्ली ऩूला 44 भें
त्क्लॊहटसरव भाश का नाभ फदर कय जूसरमव वीजय के
वम्भान भें ‘जुराई’ यख हदमा गमा। जुसरमव वीजय ने
कै रेंडय को वुधायने भें सभस्र के खगोरवलद वोसवजेनीज
की भदद री। फपय लऴा 1 जनलयी वे ळुरू फकमा गमा।
त्जव भें शय ौथे लऴा को छोड कय प्रत्मेक लऴा 365
हदन का शोगा। ौथा लऴा रीऩ लऴा शोगा औय उवभें
366 हदन शोंगे। पयलयी को छोड कय प्रत्मेक भाश भें
31 मा 30 हदन शोंगे। पयलयी भें 28 हदन शोंगे रेफकन
रीऩ लऴा भें पयलयी भें 29 हदन भाने जाएॊगे। अनुभान
शै फक 8 ईस्ली ऩूला भें वम्राट ऑगस्टव के नाभ ऩय
वेक्वहटसरव भाश का नाभ ‘अगस्त’ यख हदमा गमा।
भाना जाता शैं की जूसरमन कै रेंडय के अनुळाय
ईस्टय का त्मौशाय औय अन्म धासभाक ततधथमाॊ वॊफॊधधत
ऋतुओॊ भें वशी वभम ऩय नशीॊ आती थीॊ। त्जववे
कै रेंडय भें अततरयक्त हदन जभा शो गए थे। ऩोऩ
ग्रेगोयी 1572 वे 1585 तक तेयशलें ऩोऩ यशे। वन ्
1582 तक लनार इत्क्लन क्व 10 हदन वऩछड ुका था।
ऩोऩ ग्रेगोयी तेयशलें ने जूसरमन कै रेंडय की 10
हदनों की िुहट को वुधायने के सरए उव लऴा 5 अक्टूफय
की ततधथ को 15 अक्टूफय भानने का वुझाल हदमा।
त्जवके परस्लरुऩ जूसरमन कै रेंडय भें वे 10 हदन घटा
हदए गए। उव वभम रीऩ लऴा ळताब्दी के अॊत भें यखा
गमा फळते लश 400 की वॊख्मा वे वलबात्जत शोता शो।
इवीसरए 1700, 1800 औय 1900 रीऩ लऴा नशीॊ थे
जफफक लऴा 2000 रीऩ लऴा था। इव वॊळोधन वे
ग्रेगोयीम कै रेंडय की ळुरूआत शुई त्जवे आज वलश्ल के
अधधकाॊळ देळों भें अऩनामा जा यशा शै।
इवके फालजूद वलश्ल के कई देळ वभम की
गणना के सरए अबी बी अऩने ऩयॊऩयागत ऩॊ ाॊग मा
कै रेंडय का उऩमोग कय यशे शैं। हशन्दु, ीनी, इस्राभी
मा हशजयी औय मशूदी कै रेंडय इवके प्रभुख उदाशयण शैं।
श्री शनुभान मॊि
ळास्िों भें उल्रेख शैं की श्री शनुभान जी को बगलान वूमादेल ने ब्रह्भा जी के आदेळ ऩय शनुभान जी को
अऩने तेज का वौलाॉ बाग प्रदान कयते शुए आळीलााद प्रदान फकमा था, फक भैं शनुभान को वबी ळास्ि का
ऩूणा सान दूॉगा। त्जववे मश तीनोरोक भें वला श्रेटठ लक्ता शोंगे तथा ळास्ि वलद्या भें इन्शें भशायत शासवर
शोगी औय इनके वभन फरळारी औय कोई नशीॊ शोगा। जानकायो ने भतानुळाय शनुभान मॊि की आयाधना वे
ऩुरुऴों की वलसबन्न फीभारयमों दूय शोती शैं, इव मॊि भें अद्भुत ळत्क्त वभाहशत शोने के कायण व्मत्क्त की
स्लप्न दोऴ, धातु योग, यक्त दोऴ, लीमा दोऴ, भूछाा, नऩुॊवकता इत्माहद अनेक प्रकाय के दोऴो को दूय कयने भें
अत्मन्त राबकायी शैं। अथाात मश मॊि ऩौरुऴ को ऩुटट कयता शैं। श्री शनुभान मॊि व्मत्क्त को वॊकट, लाद-
वललाद, बूत-प्रेत, द्मूत फक्रमा, वलऴबम, ोय बम, याज्म बम, भायण, वम्भोशन स्तॊबन इत्माहद वे वॊकटो वे
यषा कयता शैं औय सववद्ध प्रदान कयने भें वषभ शैं। श्री शनुभान मॊि के वलऴम भें अधधक जानकायी के सरमे
गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें। भूल्म Rs- 325 से 12700 तक >> Shop Online | Order Now
71 2019
ऩौयाणणक कार भें ऩॊ ाॊग गणना कै वे शोती थी?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
12
1 4 14
13 –
ब
द्वा
द्वा
600
400 1,400
1830 62
1860 67
:





ब
421 427 द्वा
72 2019
:
द्वा
ब
: 520
560
961
1036
1420
1530 - -
ब ब
,
ब
-
8000
500
4 4 11
3 10 4 1
ब
ब
ब
1 1
60
; 1 24 ; 1 24
60 2 1 2 1
ब
ब
ब
ब 23
1
73 2019
50 2
365 o 15 o 31 o 31
o 24 o 8 34 37
8 27
ब ब
ब 6 ब
12 13
ब
12 ब ब
ब 1
ब
 17,28,000
 द्वा 12,96,000
 8 64,000
 4,32,000
 43,20,000
 1000 4,32,00,00,000
ब
17 3102 o o
ब
द्य :
ब
द्वा
ब ब
-
ब द्य
ब 360
360 720
शभायें मशाॊ वबी प्रकाय की भॊि सवद्ध ऩायद प्रततभाएॊ, सळलसरॊग, वऩयासभड, भारा एलॊ गुहटका ळुद्ध ऩायद भें उऩरब्ध शैं।
त्रफना भॊि सवद्ध की शुई ऩायद प्रततभाएॊ थोक व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शैं। ज्मोततऴ, यत्न व्मलवाम, ऩूजा-ऩाठ इत्माहद षेि वे
जुडे फॊधु/फशन के सरमे शभायें वलळेऴ मॊि, कल , यत्न, रुद्राष ल अन्म दुरब वाभग्रीमों ऩय वलळेऴ वुत्रफधाएॊ उऩरब्ध शैं। अधधक
जानकायी शेतु वॊऩका कयें।
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74 2019
लैहदक ऩॊ ाॊग का इततशाव?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
ब
- -
ब
:
ब
ब
5 000
द्वा ब
- 30
360
,
द्वा
-
:-
,
,
,
,
:
-
12
366 12
75 2019
1 200
1400
ब
ब
‘ ’
ब
ब
ब
ब
‘
‘
’, ‘ ’
‘
’, ‘ ’
1952
ब
द्य
ब
‘ ’
365 258756
0 258756
01656
500
23 2 ब
‘ ’ 21 ब
22 ब 13 14
‘ ’
365 25
1582 - 10
ब
5 ब 15
ब
1954
18
‘ ’
1955
76 2019
79
1879
22
1957 22
1957
365
366
78
4
100
400
12 :
31
30
31
30
22 ब 21
1400
23
21
वलासववद्धदामक भुहद्रका
इव भुहद्रका भें भूॊगे को ळुब भुशूता भें त्रिधातु (वुलणा+यजत+ताॊफें) भें जडला कय उवे ळास्िोक्त वलधध-
वलधान वे वलसळटट तेजस्ली भॊिो द्वारा वलासववद्धदामक फनाने शेतु प्राण-प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म मुक्त
फकमा जाता शैं। इव भुहद्रका को फकवी बी लगा के व्मत्क्त शाथ की फकवी बी उॊगरी भें धायण कय
वकते शैं। मशॊ भुहद्रका कबी फकवी बी त्स्थती भें अऩवलि नशीॊ शोती। इवसरए कबी भुहद्रका को
उतायने की आलश्मक्ता नशीॊ शैं। इवे धायण कयने वे व्मत्क्त की वभस्माओॊ का वभाधान शोने
रगता शैं। धायणकताा को जीलन भें वपरता प्रात्प्त एलॊ उन्नतत के नमे भागा प्रवस्त शोते यशते शैं
औय जीलन भें वबी प्रकाय की सववद्धमाॊ बी ळीध्र प्राप्त शोती शैं। भूल्म भार- 6400/-
>> Shop Online | Order Now
(नोट: इव भुहद्रका को धायण कयने वे भॊगर ग्रश का कोई फुया प्रबाल वाधक ऩय नशीॊ शोता शैं।)
सवालसविदामक भुहरका के ववषम भें अधधक जानकायी के लरमे हेतु सम्ऩका कयें।
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77 2019
कै रेंडय ल ऩॊ ाॊग भें क्मा अॊतय शैं?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
( ) , ,
ब , 100
400 ब
365.2425
365.2422
ब ब 3000 ब
1
-
-
365 2563
0 0142 ब
100 1 42
100
-
(Ecliptic) 23 4
ब
ब
(Ecliptic)
ब
50 3
360
360 50
23 285 ब
24
ब
ब
78 2019
ब
ब
ब
ब
-
-
-
-
ब
ब
-
79 2019
ज्मोततऴ के अनुळाय ळुब-अळुब भुशूता का प्रबाल?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
आज की अत्माधुतनक लैसातनक ऩद्धतत के अनुवाय
ब्रह्भाणड भें वभम अथाात कार ल अनॊत आकाळ के
अततरयक्त वभस्त लस्तुएॊ भमाादा मुक्त शैं। इव सरए वभम
का न शी कोई प्रायॊब शै न शी कोई अॊत शै। अन्म ळब्दों भें
वभझे तो शभ एवे कोई बी वलळेऴ षण को ध त्न्शत नशीॊ
कश वकते फक कफ वभम अत्स्तत्ल भें आमा मा वभम इव
षण वे आयॊब शोता शै। इवी तयश शभ मश बी नशीॊ कश
वकते शै फक, इव षण के फाद वभम का अत्स्तत्ल
वभाप्त शो जाएगा?, मा वभम मशाॉ रुक जाएगा।
क्मोफक अनॊत आकाळ की वभम की तयश कोई
भमाादा नशीॊ शै, इव सरए तो इवका कशीॊ बी प्रायॊब मा
अॊत नशीॊ शोता शैं।
आधुतनक भानल ने इन दोनों तत्लों को शभेळा
वभझने का ल अऩने अनुवाय इनभें वल यण कयने का
प्रमाव फकमा शै, रेफकन उवे बी तक कोई वपरता
प्राप्त नशीॊ शुई शै।
मे दोनों तत्ल वलसबन्न रुऩोंभें अऩना भशातम्म
भनुटम ऩय जभाते आए शै। मश दोनों तत्ल भानल
जीलन को अत्मॊत शी भशत्लऩूण्ाा तयीके वे भानुटम को
प्रबावलत कयते शै।
प्रा ीन ऋऴी-भुतनमों को इन दोनों तत्लों का
बरी बाॊतत फोध था। इव सरए उन्शोंने अऩने आत्भीम
एलॊ भनोफरव वे वाभ्मा, ध त्त की एकाग्रता ल
के त्न्द्रत ध्मान वे, ऩूण्ाा ैतन्म ल अद्धा ैतन्म ळत्क्त ल
फर वे एलॊ उच् कोहट के सान ल अऩनी हदव्म सान षु
वे इन तत्लों को वभझ सरमा था जो फक आज फक
अत्माधुतनक तकनीक वे कोवों दूय शैं।
उन्शोंने देखा ल जाना कै वे वभम ल अनॊत
ब्रह्भाॊड फक ळत्क्तमाॊ शभें प्रबावलत कयती शै, कै वे नषिा
ल ग्रशों का भेर शभाये जीलन को भशत्त्लऩूण्ाा हदळा ल
ऩरयलतान देता शै।
उन्शोंने वफवे भशत्त्लऩूण्ाा फात मश वभझी फक
भनुटम आकाळीम वऩॊडों के वशमोग वे फकतने
आश् माजनक रुऩ वे अऩने भशत्लऩूणा कामों भें वपरता
प्रात्प्त के सरए एलॊ जीलन क्रभ को अथाात अऩने
बवलटम को उज्जलर कय वकता शैं। एक ळुब भुशूता भें
प्रायॊब फकमा गमा कोबी कामा भनुश्म को ळीघ्र शी जीलन
भें वबी प्रकाय वुख को प्राप्त कय अनेको उऩरत्ब्धमाॊ
हदराने भें वभथा शोता शैं।
भुशूता शभाये वल नो या खोज की गई वलााधधक
भशत्त्लऩूण्ाा ऩरयकल्ऩना शै। भुशूता का अथा शै फकवी बी
कामा को कयने के सरए वफवे वलााधधक उत्तभ वभम
मा ळुब वभम ल ततधथ का मन कयना।
कामा ऩूण्ाात् परदामक शो इवके सरए वभस्त
ग्रशों ल अन्म ज्मोततऴ तत्लों का वूक्ष्भ वलश्रेऴण फकमा
जाता शै फक ले दुटप्रबालों को वलपर कय देते शै। ले
भनुटम की जन्भ कु ण्डरी की वभस्त फाधाओॊ को दूय
कयने भें ल दुमोगों को शटाने भें वशामक शोते शैं।
भुशूता भनुटम के सरए ग्रश, नषि एलॊ मोग का
ऎवा अनूठा वॊगभ शै फक लश कामा कयने लारे भनुटम
को ऩूण्ाात् वपरता की ओय उन्भुख कय देता शै।
इव सरए वल नो का भत शैं की भनुटम जफ बी
अऩने जीलन भें ऎवा भशत्लऩूणा कामा कयने जा यशा शों,
त्जवभें उवका अधधक वभम ल ळत्क्त प्रमोग भें शुला शो
अथला इव कामा का भनुटम के जीलन ऩय कापी वभम
तक प्रबाल यशने लारा शो, तफ उवे मश कामा ळुब भुशूता
भें शी कयना ाहशए। त्जववे मश कामा अतत ळीघ्र
परदामक शोगा ल लशॉ अधधक वुखभमी ल वॊतुटट
जीलन व्मतीत कय वके ।
ज्मोततऴ वल भें कामा का प्रायॊब वभम,
कु ण्डरी ल उवकी गणना कयके फकमा जाता शै। इव
सरए फकवी बी ळुबकामा कयने के सरए उवके प्रायॊब
कयने का वभम अथाात भुशूता अतत भशत्लऩूण्ाा शोता शै।
भनुटम का बवलटम एलॊ जीलन की भशत्लऩूणा घटनाएॉ
इव फात ऩय तनबाय कयती शैं फक उवका जन्भ फकव
वभम शुआ था। रेफकन भनुटम फक वलडम्फना तो मश
80 2019
शै फक भनुटम का स्लमॊ के जन्भ वभम ऩय कोई
तनमॊिण नशीॊ शै। रेफकन जीलन के अन्म फक्रमा-कराऩों
ऩय उवका ऩूण्ाा तनमॊियण शै। इव सरए लश कामा कयने
का वभम स्लमॊ वुतनत्श् त कय वकता शै। मशी भुशूता
की ऩरयबाऴा शै। महद कामा प्रायॊब का वभम ळुब शैं तो
कामापर तनत्श् त रुऩ वे परदामक एलॊ इत्च्छत शोगा।
इव सरए तो कशाॉ जाता शैं की ळुब प्रायॊब अथाात आधा
कामा स्लत् ऩूण्ाा शोना।
ळुब मोग
भुशूता अच्छे ल फुये दोनों मोगों का सभश्रण शै। कोई बी
भुशूता अऩने आऩ भें ऩूणा रुऩ वे ळुब नशीॊ शोता शै,
त्जव ऩय कोई बी फुया प्रबाल न शो। रेफकन ग्रशों के
वलळेऴ मोगाहद के ळुबत्ल का वूक्ष्भ अध्ममन कयके कु छ
मोग ऎवे बी शोते शैं जो फक फकवी दोऴ वलळेऴों को
शटाने लारे मोगों शोते शैं, जो शजायों फुये प्रबाल शटा देते
शै। इव तयश वे, ऩॊ ाॊग तत्त्लों के ळुबत्ल के अततरयक्त
बी ले वभस्त घटक फक अलश्म जाॉ कयनी ाहशए, जो
भुशूता ऩय ळुब प्रबाल डारते शैं।
अळुब मोग
जैवा की शभने फतामा की अळुब तत्त्ल बी शभेळा शी
भौजूद शोते शैं। आलश्मकता शै फकवी एवी मुत्क्त की जो
अळुब घटकों को अधधक वे अधधक कभ कय वके ए
अधधक अळुब घटकों को शटा वके तथा उऩत्स्थत अळुब
घटकों को प्रबालशीन कय वके । अत् अळुब ल दोऴऩूणा
वॊमोजन को देख शी फकवी भुशूता का मन कयना ाहशए, इव
प्रकाय वबी ऩरयत्स्थततमों का ऩूणा अध्ममन कयना आलश्मक
शोता शै।
***
ऩतत-ऩत्नी भें करश तनलायण शेतु
महद ऩरयलायों भें वुख-वुवलधा के वभस्त वाधान शोते शुए बी छोटी-छोटी फातो भें ऩतत-ऩत्नी के त्रफ भे
करश शोता यशता शैं, तो घय के त्जतने वदस्म शो उन वफके नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्वारा ळास्िोक्त
वलधध-वलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रततत्टठत ऩूणा ैतन्म मुक्त लळीकयण कल एलॊ गृश करश नाळक
डडब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भें त्रफना फकवी ऩूजा, वलधध-वलधान वे आऩ वलळेऴ राब प्राप्त कय
वकते शैं। महद आऩ भॊि सवद्ध ऩतत लळीकयण मा ऩत्नी लळीकयण एलॊ गृश करश नाळक डडब्फी फनलाना
ाशते शैं, तो वॊऩका आऩ कय वकते शैं।
100 वे अधधक जैन मॊि
शभाये मशाॊ जैन धभा के वबी प्रभुख, दुराब एलॊ ळीघ्र प्रबालळारी मॊि ताम्र ऩि,
सवरलय ( ाॊदी) ओय गोल्ड (वोने) भे उऩरब्ध शैं।
शभाये मशाॊ वबी प्रकाय के मॊि कोऩय ताम्र ऩि, सवरलय ( ाॊदी) ओय गोल्ड (वोने) भे फनलाए जाते शै।
इवके अराला आऩकी आलश्मकता अनुवाय आऩके द्वारा प्राप्त (ध ि, मॊि, डडज़ाईन) के अनुरुऩ मॊि
बी फनलाए जाते शै. गुरुत्ल कामाारम द्वारा उऩरब्ध कयामे गमे वबी मॊि अखॊडडत एलॊ 22 गेज ळुद्ध
कोऩय(ताम्र ऩि)- 99.99 ट ळुद्ध सवरलय ( ाॊदी) एलॊ 22 के येट गोल्ड (वोने) भे फनलाए जाते शै। मॊि
के वलऴम भे अधधक जानकायी के सरमे शेतु वम्ऩका कयें।
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81 2019
बद्रा वल ाय
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
एवी ऩौयाणणक भान्मता शैं की ऩुला कार भें देल
दानल मुद्ध भें सळल ळॊकय के देश वे मश बद्रा उत्ऩन्न
शुई शैं। अन्म भान्मता के अनुळाय बद्रा बगलान वूमा
देल की ऩुिी औय ळतनदेल की फशन शै। ळतन की तयश
शी इवका स्लबाल बी क्रू य भाना गमा शै। इव उग्र
स्लबाल को तनमॊत्रित कयने के सरए शी बगलान ब्रह्भा
ने उवे कारगणना अथाात ऩॊ ाग के एक प्रभुख अॊग
कयण भें स्थाऩीत फकमा।
बद्रा की उत्ऩत्त्त के वलऴम भें एवा भाना जाता
शैं की दैत्मों को भायने के सरमे बद्रा गदाब (गधा) के
भुख औय रॊफे ऩुछॉ वहशत औय तीन ऩैय मुक्त उत्ऩन्न
शुई शै। सवॊश जैवी भुदे ऩय ढी शुई वात शाथ औय
ळुटक ऩेटलारी भशाबमॊकय, वलकयार भुखी, कामा का
नाळ कयने लारी, अत्ग्न, ज्लारा वहशत देलों या बेजी
गई बद्रा ऩृ्ली ऩय उतयी शै। अत् ळुब कामों भें बद्रा
त्मागना शी वलाश्रेटठ शै।
बद्रा ऩॊ ाॊग के ऩाॊ अॊगों भें वे एक अॊग-'कयण'
ऩय आधारयत शै मश एक अळुब मोग शै। बद्रा (वलत्टट
कयण) भें अत्ग्न रगाना, फकवी को दण्ड देना इत्माहद
वभस्त दुटट कभा तो फकमे जा वकते शैं फकॊ तु फकवी बी
भाॊगसरक कामा के सरए बद्रा वलाथा त्माज्म शै।
ऩौयाणणक कथा के अनुवाय बद्रा बगलान वूमा
नायामण की कन्मा शै, बद्रा वूमा की ऩत्नी छामा वे
उत्ऩन्न शै। बद्राका स्लरुऩ कारे लणा, रॊफे के ळ तथा
फडे-फडे दाॊतों लारी तथा बमॊकय रूऩ लारी कन्मा शै।
जन्भ रेते शी बद्रा मसों भें वलघ्न-फाधा ऩशुॊ ाने
रगी औय उत्वलों तथा भॊगर-मािा आहद भें उऩद्रल
कयने रगी तथा वॊऩूणा जगत को ऩीडा ऩशुॊ ाने रगी।
उवके दुटट स्लबाल को देख वूमा को उवके वललाश की
ध ॊता शोने रगी औय ले वो ने रगे फक इव स्लेच्छा
ारयणी, दुटटा, कु रुऩा कन्मा का वललाश फकवके वाथ
फकमा जाम। वूमा ने त्जव-त्जव देलता, अवुय, फकन्नय
आहद वे बद्रा के वललाश का प्रस्ताल यखा, वबी ने उनके
प्रस्ताल ठु कया हदमा। मशाॊ तक फक बद्रा ने वूमा देल
या फनलामे गमे अऩने वललाश भण्डऩ, तोयण आहद
नटट कय हदमा तथा वबी रोगों को औय बी अधधक
कटट देने रगी।
उवी वभम देल-दानल-भानल के दु्ख को देखकय
ब्रह्भा जी वूमा के ऩाव आमे। वूमा वे अऩनी कन्मा को
वन्भागा ऩय राने के सरए ब्रह्भा जी वे उध त ऩयाभळा
देने को कशा। तफ ब्रह्भा जी ने वलत्टट को फुराकय
कशा- 'बद्रे, फल, फारल, कौरल आहद कयणों के अॊत भें
तुभ तनलाव कयो औय जो व्मत्क्त मािा, गृश प्रलेळ तथा
अन्म भाॊगसरक कामा तुम्शाये वभम के दौयान कये, तो
तुभ उन्शीॊ भें वलघ्न कयो, जो तुम्शाया आदय न कये,
उनका कामा तुभ त्रफगाड देना। इव प्रकाय वलत्टट को
उऩदेळ देकय ब्रह्भा जी अऩने रोग रे गमे।
ब्रह्भाजी के फात वुनकय वलत्टट अऩने वभम भें
देल-दानल-भानल वभस्त प्राणणमों को कटट देती शुई
घूभने रगी। इव प्रकाय बद्रा की उत्ऩत्त्त शुई।
बद्रा का दुवया नाभ वलटटी कयण शैं।
कृ टणऩष की तृतीमा, दळभी औय ळूक्र ऩष की तुथॉ
एकादळी के उत्तयाधा भें एलॊ कृ टणऩष की वप्तभी,
तुदाळी, ळुक्रऩष की अटटभी, ऩुणणाभा के ऩुलााधा भें
बद्रा यशती शै। त्जव बद्रा के वभम ॉद्रभा भेऴ, लृऴ,
सभथुन, लृत्श् क यासळ भें त्स्थत शो तो बद्रा तनलाव
स्लगा भें यशता शै। ॊद्रभा कन्मा,तुरा, धनु, भकय यासळ
भें शो तो बद्रा ऩातार भें लाव कयती शैं औय कका , सवॊश,
कुॊ ब, भीन याळी का ॊद्रभा शो तो बद्रा का बुरोक ऩय
तनलाव यशता शै। ळास्िों के अनुवाय बुरोक की बद्रा शी
अळुब भानी जाती शै। ततथी के ऩुलााधा भें (कृ टणऩष की
वप्तभी एलॊ तुदाळी औय ळुक्रऩष की अटटभी ऩूणणाभा
ततथी ) हदन की बद्रा कशराती शै। ततथी के उत्तयाधा
की (कृ टणऩष की तृतीमा एलॊ दळभी औय ळुक्रऩष की
तुथॉ एलॊ एकादळी) की बद्रा यािी की बद्रा कशराती
शै। महद हदन की बद्रा यािी के वभम औय यािी की बद्रा
82 2019
हदन के वभम आ जामे तो उवे वल नो ने ळुब भाना
शै। अतत आलश्मक कामा आ जाए तो बद्रा की प्रायम्ब
की 5 घटी जो बद्रा का भुख शोती शै, अलश्म शी
त्मागनी ाहशए। श्रेटठ तो मशी शै की बद्रा को त्माग
कयके शी भाॊगरीक कामा वम्ऩन्न कयने ाहशए।
बद्रा पर
बद्रा का भुख औय ऩूॊछ:
बद्रा ऩाॊ घडी भुख भें, दो घडी कण्ठ भें, ग्मायश घडी
रृदम भें, ाय घडी ऩुच्छ भें त्स्थत यशती शै।
ळास्िोक्त भत वे
 जफ बद्रा भुख भें यशती शै तो कामा का नाळ शोता
शैं।
 जफ बद्रा कण्ठ भें यशती शै तो धन का नाळ शोता
शैं।
 जफ बद्रा रृदम भें यशती शै तो प्राण का नाळ शोता
शैं।
 जफ बद्रा नासब भें यशती शै तो करश शोता शैं।
 जफ बद्रा कहट भें यशती शै तो अथानाळ शोता शैं।
 रेफकन जफ बद्रा ऩुच्छ भें शोती शैं, तो वलजम की
प्राप्त एलॊ कामा सवद्ध शोते शै।
ज्मोततऴ के अनुळाय वलत्टट कयण को ाय बागों भें
वलबात्जत कयके बद्रा भुख औय ऩूॊछ वयरता वे सात
फकमा जा वकता शैं।
बद्राकी प्रकृ तत अतत दुटट शै इवसरए भाॊगसरक कामों
भें बद्राकार का अलश्म शी त्माग कयना ाहशए।
बद्राकार भें वललाश, भुॊडन, गृशप्रलेळ, मसोऩवलत,
यषाफॊधन मा कोई बी नमा काभ ळुरू कयना लत्जात
भाना गमा शै। रेफकन बद्राकार भें तॊि कामा, ऑऩयेळन
कयना, भुकदभा कयना, याजनैततक ुनाल, फकवी लस्तु
का कटना, मस कयना, लाशन खयीदना आहद कभा ळुब
भाने गए शैं।
वलद्वानो के भत वे:
 वोभलाय औय ळुक्रलाय की बद्रा को कल्माणी,
 ळतनलाय की बद्रा को लृत्श् की,
 गुरुलाय की बद्रा को ऩुण्मैलती,
 यवललाय, फुधलाय औय भॊगरलाय की बद्रा को
बहद्रका भाना शैं।
 वलळेऴ कय ळतनलाय की बद्रा अळुब भानी जाती
शैं।
बद्रा व्रत
बद्रा के अळुब प्रबाल वे यषा के सरए व्रत आहद
के वलधान फताए गए शैं, फकॊ तु आवान उऩामों शैं, वुफश
बद्रा के दळ नाभ अथाात 12 नाभ भॊि का स्भयण
कामासववद्ध के वाथ वलघ्न, योग, बम को दूय कय
ग्रशदोऴों को बी ळाॊत कयने लारा भाना गमा शै।
बरा मोग भें कामा लसवि के लरए प्रमोग ककए जाने
वारा भॊर:
धन्मा दधधभुखी बद्रा भशाभायी खयानना।
कारयात्रिभाशारुद्रा वलत्टटश् कु रऩुत्रिका॥
बैयली भशाकारी अवुयाणाॊ षमॊकयी।
द्वादळैल तु नाभातन प्रातरुत्थाम म: ऩठेत्॥
न व्माधधबालेत् तस्म योगी योगात्प्रभुच्मते।
ग्रह्म: वलेनुकू रा: स्मुना वलघ्राहद जामते॥
ळास्िोक्त भत शैं, की जो व्मत्क्त प्रात् बद्रा के
इन फायश नाभों का स्भयण कयता शै उवे फकवी बी
व्माधध का बम नशीॊ शोता औय उवके वबी ग्रश अनुकू र
शो जाते शैं। उवके कामों भें कोई वलघ्न नशीॊ शोता। मुद्ध
भें लश वलजम प्राप्त कयता शै, जो वलधध ऩूलाक वलत्टट
का ऩूजन कयता शै, तन्वॊदेश उवके वबी कामा सवद्ध शो
जाते शैं।
बद्रा के व्रत की ळास्िोक्त वलधध :
त्जव हदन बद्रा शो, उव हदन व्रत-उऩलाव कयना
ाहशए। महद यात्रि के वभम बद्रा शो तो दो हदन तक
उऩलाव कयना ाहशए। स्िी अथला ऩुरुऴ दोनो के सरए
व्रत अधधक उऩमुक्त शोता शैं।
व्रत के हदन व्रती को वलोऴधध मुक्त जर वे
स्नान कयना ाहशए मा नदी ऩय जाकय वलधध ऩूलाक
स्नान कयना ाहशए। देलता तथा वऩतयों का तऩाण एलॊ
ऩूजन कय कु ळा की बद्रा की भूतता फनामें औय गॊध,
ऩुटऩ, धूऩ, दीऩ, नैलेद्य आहद वे उवकी ऩूजन कयना
83 2019
ाहशए। बद्रा के फायश नाभों वे 108 फाय शलन कयके
ब्राह्भण को बोजन कयलाना ाहशए स्लमॊ बी ततर
सभधश्रत बोजन ग्रशण कयना ाहशए।
ऩूजन की सभाप्ती ऩय इस भन्र से प्राथाना कयनी
चाहहए।
छामा वूमावुते देवल वलत्टटरयटटाथा दातमनी।
ऩूत्जतासव मथाळक्त्मा बद्रे बद्रप्रदा बल॥
इव प्रकाय विश बद्राव्रत कयने के ऩश् मात अॊत
भें उ ऩन कयना ाहशए। रोशे की ऩीठ ऩय बद्रा की
भूतता स्थावऩत कयनी ाहशए, कारा लस्ि अवऩात
कयके गन्ध, ऩुटऩ आहद वे वलधधलत ऩूजन कय प्राथाना
कयनी ाहशए। रोशा, फैर, ततर, फछडा वहशत कारी
गाम, कारा कॊ फर औय मथाळत्क्त दक्षषणा के वाथ लश
भूतता ब्राह्भण को दान कयनी ाहशए मा उवका वलवजान
कय दें। इव प्रकाय जो बी व्मत्क्त बद्रा व्रत एलॊ तदॊतय
वलधध ऩूलाक व्रत का उ ऩन कयता शै उवके फकवी बी
कामा भें वलघ्न नशीॊ ऩडता तथा उवे प्रेत, ग्रश, बूत,
वऩळा , डाफकनी, ळाफकनी, मष, गॊधला, याषव आहद
आवुयी ळत्क्त वे फकवी प्रकाय का कटट नशीॊ शो वकता।
भॊि सवद्ध लाशन दुघाटना नाळक भारुतत मॊि
ऩौयाणणक ग्रॊथो भें उल्रेख शैं की भशाबायत के मुद्ध के वभम अजुान के यथ के अग्रबाग ऩय भारुतत ध्लज
एलॊ भारुतत मन्ि रगा शुआ था। इवी मॊि के प्रबाल के कायण वॊऩूणा मुद्ध के दौयान शज़ायों-राखों प्रकाय के आग्नेम
अस्ि-ळस्िों का प्रशाय शोने के फाद बी अजुान का यथ जया बी षततग्रस्त नशीॊ शुआ। बगलान श्री कृ टण भारुतत मॊि
के इव अद्भुत यशस्म को जानते थे फक त्जव यथ मा लाशन की यषा स्लमॊ श्री भारुतत नॊदन कयते शों, लश
दुघाटनाग्रस्त कै वे शो वकता शैं। लश यथ मा लाशन तो लामुलेग वे, तनफााधधत रुऩ वे अऩने रक्ष्म ऩय वलजम ऩतका
रशयाता शुआ ऩशुॊ ेगा। इवी सरमे श्री कृ टण नें अजुान के यथ ऩय श्री भारुतत मॊि को अॊफकत कयलामा था।
त्जन रोगों के स्कू टय, काय, फव, ट्रक इत्माहद लाशन फाय-फाय दुघाटना ग्रस्त शो यशे शो!, अनालश्मक लाशन
को नुषान शो यशा शों! उन्शें शानी एलॊ दुघाटना वे यषा के उद्देश्म वे अऩने लाशन ऩय भॊि सवद्ध श्री भारुतत मॊि अलश्म
रगाना ाहशए। जो रोग ट्रान्स्ऩोहटिंग (ऩरयलशन) के व्मलवाम वे जुडे शैं उनको श्रीभारुतत मॊि को अऩने लाशन भें
अलश्म स्थावऩत कयना ाहशए, क्मोफक, इवी व्मलवाम वे जुडे वैकडों रोगों का अनुबल यशा शैं की श्री भारुतत मॊि
को स्थावऩत कयने वे उनके लाशन अधधक हदन तक अनालश्मक ख ो वे एलॊ दुघाटनाओॊ वे वुयक्षषत यशे शैं। शभाया
स्लमॊका एलॊ अन्म वलद्वानो का अनुबल यशा शैं, की त्जन रोगों ने श्री भारुतत मॊि अऩने लाशन ऩय रगामा शैं, उन
रोगों के लाशन फडी वे फडी दुघाटनाओॊ वे वुयक्षषत यशते शैं। उनके लाशनो को कोई वलळेऴ नुक्ळान इत्माहद नशीॊ शोता
शैं औय नाशीॊ अनालश्मक रुऩ वे उवभें खयाफी आतत शैं।
वास्तु प्रमोग भें भारुतत मॊर: मश भारुतत नॊदन श्री शनुभान जी का मॊि शै। महद कोई जभीन त्रफक नशीॊ यशी शो, मा
उव ऩय कोई लाद-वललाद शो, तो इच्छा के अनुरूऩ लशॉ जभीन उध त भूल्म ऩय त्रफक जामे इव सरमे इव भारुतत मॊि
का प्रमोग फकमा जा वकता शैं। इव भारुतत मॊि के प्रमोग वे जभीन ळीघ्र त्रफक जाएगी मा वललादभुक्त शो जाएगी।
इव सरमे मश मॊि दोशयी ळत्क्त वे मुक्त शै।
भारुतत मॊि के वलऴम भें अधधक जानकायी के सरमे गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें।
भूल्म Rs- 325 से 12700 तक
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92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA,
BHUBNESWAR-751018, (ODISHA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
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84 2019
हदळाळूर वल ाय
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
हदळाळूर के वलऴम भें ळास्िोक्त भत:
ळनौ न्द्रे त्मजेत्ऩूलाा, दक्षषणाॊ हदळाॊ गुयौ।
वूमे ळुक्रे ऩत्श् भाम् , फुधे बौभे तथोत्तयभ्॥
अथाात: ळतनलाय औय न्द्रलाय अथाात वोभलाय को ऩूला
हदळा को हदळाळूर शोती शैं। फृशस्ऩततलाय (गुरुलाय) को
दक्षषण हदळा भें, इतलाय (यवललाय) औय ळुक्रलाय को
ऩत्श् भ भें औय भॊगर तथा फुधलाय को उत्तय हदळा भें
ळूर शोती शैं। इव सरमे त्जव लाय को त्जव हदळा भें
हदळाळूर शो उव हदळा भें मािा नशीॊ कयनी ाहशमे।
अन्म भत वे:
वोभ ळतन य ऩूयफ ना ारू। भॊगर फुध
उत्तयहदसवकार॥
यवल ळुक्र जो ऩत्श् भ जाम। शातन शोम ऩथ वुख नहशॊ
ऩाम॥
गुयौ दत्क्खन कये ऩमाना, फपय नशीॊ वभझो ताको आना॥
अथाात: वोभलाय एलॊ ळतनलाय को ऩूयफ हदळा भें तथा
भॊगर एलॊ फुधलाय को उत्तय हदळा भें मािा नशीॊ कयनी
ाहशमे। यवललाय एलॊ ळुक्रलाय को ऩत्श् भ हदळा भें मािा
कयना वलादा शातनकायक शोता शै। गुरूलाय के हदन तो
दक्षषण हदळा भें मािा कयना अळुब शै। मे हदळाळुर
कशराते शै। ळास्िोक्त भान्मता के अनुळाय हदळाळूर
लारी हदळा भें मािा कयने वे कामा सवद्धी नशीॊ शोता|
हदळाळूर ऩरयशाय के सरए
 यवललाय को घी ऩीकय।
 वोभलाय को दूध ऩीकय।
 भॊगरलाय को गुड खाकय।
 फुधलाय को ततर खाकय।
 गुरुलाय को दशी खाकय।
 ळुक्रलाय को जौ खाकय।
 ळतनलाय को उडद खाकय मािा कयने वे हदळाळूर
का दोऴ ऩरयशाय भाना जाता शैं।
हदळाळूर ऩरयशाय के अन्म उऩाम
 हदळाळूर ऩरयशाय के सरए
 यवललाय को ऩान का दान।
 वोभलाय को ॊदन का दान।
 भॊगरलाय को छाछ का दान।
 फुधलाय को ऩुटऩ का दान।
 गुयलाय को दशी का दान।
 ळुक्रलाय को धृत (घी) का दान।
 ळतनलाय को कारे ततर का दान कयने वे
हदळाळूर ऩरयशाय शो जाता शैं।
***
Natural 2 Mukhi Rudraksha
1 Kg Seller Pack
or
100 Pcs Seller Pack
Size : Assorted 20 mm to 35 mm and above
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85 2019
हदळाळूर भशत्लऩूणा मा कताव्म भशत्लऩूणा शै?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
एक फाय एक याजा के ऊऩय उवके प्रततद्लॊदी
याजा ने शभरा कय हदमा। याजा ने याज ज्मोततऴी को
फुरामा औय उनवे ऩूछा फक इव लक्त शभें क्मा कयना
ाहशए। ज्मोततऴी ने उत्तय हदमा भशायाज त्जव हदळा वे
शभरा शुआ शे लश हदळा ऩूला शैं औय आज उव हदळा भें
हदळाळूर शे, आज शभें उव हदळा भें नशीॊ जाना ाहशमे।
ज्मोततऴी की फात को व़जीय फी भें काट कय फयाफय
कश यशा शे फक भशायाज पौयन शभरा कयो। याजा ने
कशा नशीॊ शभ को ज्मोततऴी की फात भननी शै।
ज्मोततळी ने कशा शभ को इव वभम उरटी हदळा भें
अथाात ऩत्श् भ हदळा भें जाना ाहशए। औय लो ऩत्श् भ
की औय र हदए।
यास्ते भें उनका व़जीय फाय-फाय कश यशा था
भशायज शभरा कयो। रेफकन व़जीय की फात को याजा ने
नशीॊ वुना।
यावते भें उन्शें एक फकवान सभरा जो ऩूला हदळा की औय
जा यश था। ज्मोततऴी ने उवे योका औय कशाॉ आज इधय
हदळाळूर शै इधय भत जाओ । फकवान फोरा ऩॊडडतजी
इव हदळा भें तो भैंने जफ शोळ वम्बारा शैं अऩने खेत
ऩय जाता यशा शूॉ औय भेये वऩताजी वे रेकय दादा
ऩयदादा बी जाते यशे शैं। ज्मोततऴी ने कशा अच्छा अऩना
शाथ हदखा। फकवान ने ज्मोततऴी को अऩना शाथ उरटा
हदखामा ज्मोततऴी ने कशा वीधा कय के हदखाओ।
फकवान फोरा शभ सबखायी नशी शैं जो शाथ
पे राए। शभाये षेि भे वाषात सळलजी का लाव शे शभ
को फकवी ध ज का डय नशीॊ शैं। लश फकवान जम
भशाकार फोर कय रा गमा।
फकवान की फात वे याजा को बी अकर आइ
औय उवने भॊिी वे कशा लाऩव रो औय शभरा फोरो,
याजा ने बी जम भशकार का नाया रगा कय शभरा
फोर हदमा औय जीत गमा।
नोट: हदळाळूर भाि वे अऩने कताव्म वे ऩीछे शटना
कोयी भूखात शोती शैं। इव सरए आकत्स्भक प्रवॊगो एलॊ
घटनाओॊ वे तनऩटने के सरए हदळाळूर का वल ाय त्माग
कय अऩनी फुवद्ध एलॊ वललेक वे कामा कयना ाहशए।
Mantra Siddha
Parad Shivling
+
Free Rudraksha Mala
Size: 21, 27, 46, 55, 72, 100 Gram above
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86 2019
याभ नाभ की भहशभा
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
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88 2019
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89 2019
क्मा श्राऩ के कायण सभरा याभ अलताय?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
एक फाय सळल जी कै राव ऩलात ऩय एक वलळार फयगद के लृष के नी े फाघ भा त्रफछाकय आनन्द ऩूलाक फैठे थे। उध त
अलवय जानकय भाता ऩालाती बी लशाॉ आकय उनके ऩाव फैठ गईं। ऩालाती जी ने सळल जी वे कशा, शे नाथ! ऩूला जन्भ भें भुझे एवा
भोश शो गमा था औय भैंने श्री याभ की ऩयीषा री थी। भेया लश भोश अफ वभाप्त शो ुका शै फकन्तु भैं अबी बी भ्रसभत शूॉ फक महद
श्री याभ याजऩुि शैं तो ब्रह्भ कै वे शो वकते शैं? आऩ कृ ऩा कयके भुझे श्री याभ की कथा वुनाएॉ औय भेये भ्रभ को दूय कयें।
ऩालाती जी के प्रश्न वे प्रवन्न शोकय सळल जी फोरे, शे ऩालाती! श्री याभ न्द्र जी की कथा काभधेनु के वभान वबी वुखों
को प्रदान कयने लारी शैं। अत् भैं उव कथा को, त्जवे काकबुळुत्ण्ड जी ने गरुड को वुनामा था, उव कथा को भैं तुम्शें वुनाता
शूॉ। शे वुभुणख! जफ-जफ धभा का ह्ाव शोता शै औय देलताओॊ, ब्राह्भणों ऩय अत्मा ाय कयने लारे दुटट ल नी असबभानी याषवों
की लृवद्ध शो जाती शै तफ-तफ कृ ऩा के वागय बगलान श्री वलटणु बाॉतत-बाॉतत के अलताय धायण कय वज्जनों की ऩीडा को शयते शैं।
ले अवुयों को भाय कय देलताओॊ की वत्ता को स्थावऩत कयते शैं।
बगलान श्री वलटणु का श्री याभ न्द्र जी के रुऩ भें अलताय रेने का बी मशी कायण शैं। उनकी कथा अत्मन्त वलध ि
शै। भैं उनके जन्भों की कशानी तुम्शें वुनाता शूॉ। श्री शरय के जम औय वलजम नाभक दो वप्रम यऩार शैं। एक फाय वनकाहद
ऋवऴमों ने उन्शें भृत्मुरोक भें रे जाने के सरमे ळाऩ दे हदमा। ळाऩलळ उन्शें भृत्मुरोक भें तीन फाय याषव के रूऩ भें जन्भ रेना
ऩडा। ऩशरी फाय उनका जन्भ हशयण्मकश्मऩु औय हशयण्माष के रूऩ भें शुआ। उन दोनों के अत्मा ाय फशुत अधधक फढ़ जाने के
कायण श्री शरय ने लयाश का ळयीय धायण कयके हशयण्माष का लध फकमा औय नयसवॊश रूऩ धायण कय के हशयण्मकश्मऩु को भाया।
उन्शीॊ दोनों ने यालण औय कु म्बकणा के रूऩ भें फपय वे जन्भ सरमा औय अत्मन्त ऩयाक्रभी याषव फने। तफ कश्मऩ भुतन
औय अहदतत, जो के दळयथ औय कौळल्मा के रूऩ भें अलतरयत शुए थे, का ऩुि फनकय श्री शरय ने उनका लध फकमा।
एक कल्ऩ भें जरन्धय नाभक दैत्म ने वभस्त देलतागण को ऩयास्त कय हदमा तफ सळल जी ने जरन्धय वे मुद्ध फकमा।
उव दैत्म की स्िी ऩयभ ऩततव्रता थी अत् सळल जी बी उव दैत्म वे नशीॊ जीत वके ।
तफ श्री वलटणु ने छरऩूलाक उव स्िी का व्रत बॊग कय देलताओॊ का कामा फकमा। तफ उव स्िी ने श्री वलटणु को भनुटम देश
धायण कयने का ळाऩ हदमा था।
श्री वलटणु के श्री याभ के रूऩ भें अलतरयत शोने का एक कायण मश बी था। लशी जरन्धय दैत्म अगरे जन्भ भें यालण के
रुऩ भें अलतरयत शुआ त्जवे श्री याभ ने मुद्ध भें भाय कय ऩयभऩद प्रदान फकमा।
अन्म एक कथा के अनुवाय एक फाय नायद ने श्री वलटणु को भनुटमदेश धायण कयने का ळाऩ हदमा था
त्जवके कायण श्री याभ का अलताय शुआ।”
ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे तेजस्ली भॊिों द्वाया असबभॊत्रित धनलृवद्ध ऩाउडय को प्रतत
फुधलाय के हदन अऩने कै ळ फोक्व, भनीऩवा आहद भें थोडा डारने वे तनयॊतय धन
वॊ म शोता शैं। 1 Box Rs- 280
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90 2019
धन्म तो मश रक्ष्भण शै?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
याभजी, वीताजी औय रक्ष्भणजी जॊगर भें एक लृष के नी े फैठे थे। उव लृष औय डारी ऩय एक रता छाई शुई थी। रता के
नमी कोभर-कोभर कोंऩरें तनकर यशी थी औय कशीॊ-कशीॊ ऩय ताम्रलणा के ऩत्ते तनकर यशे थे। ऩुटऩ औय ऩत्तों वे रता छाई
शुई थी त्जस्वे लृष की वुन्दय ळोबा फढा यशे थे। लृष फशुत शी वुशालना रग यशा था। उव लृष की ळोबा को देखकय बगलान
श्रीयाभजी ने रक्ष्भण जी वे कशा, देखो रक्ष्भण ! मश रता अऩने वुन्दय-वुन्दय पर, वुगत्न्धत पू र औय शयी-शयी ऩत्त्तमों वे
इव लृष की कै वी ळोबा फढा यशी शै ! जॊगर के अन्म वफ लृषों वे मश लृष फकतना वुन्दय हदख यशा शै ! इतना शी नशीॊ, इव लृष के
कायण शी वाये जॊगर की ळोबा शो यशी शै। इव रता के कायण शी ऩळु-ऩषी इव लृष का आश्रम रेते शैं। धन्म शै मश रता !
बगलान श्रीयाभ के भुख वे रता की प्रळॊवा वुनकय वीताजी रक्ष्भण वे फोरी्देखो रक्ष्भण बैमा ! तुभने ख्मार फकमा फक नशीॊ ?
देखो, इव रता का ऊऩय ढ़ जाना, पू र ऩत्तों वे छा जाना, तन्तुओॊ का पै र जाना, मे वफ लृष के आधश्रत शैं, लृष के कायण शी
शैं। इव रता की ळोबा बी लृष के शी कायण शै। अत् भूर भें भहशभा तो लृष की शी शै। आधाय तो लृष शी शै। लृष के वशाये त्रफना
रता स्लमॊ क्मा कय वकती शै ? कै वे छा वकती शै ? अफ फोरो रक्ष्भण बैमा ! तुम्शीॊ फताओ, भहशभा लृष की शी शुई न ? लृष का
वशाया ऩाकय शी रता धन्म शुई न ?
याभ जी ने कशा् क्मों रक्ष्भण ! मश भहशभा तो रता की शी शुई न ? रता को ऩाकय लृष शी धन्म शुआ न ?
रक्ष्भण जी फोरे् शभें तो एक तीवयी शी फात वूझती शै।
वीता जी ने ऩूछा् लश क्मा शै देलय जी ?
रक्ष्भणजी फोरे् न लृष धन्म शै न रता धन्म शै। धन्म तो मश रक्ष्भण शै जो आऩ दोनों की छामा भें यशता शै।
बैयल जी को बगलान सळल के द्वादळ स्लरूऩ
के रुऩ भें ऩूजा जाता शैं। बैयलजी को तीन
स्लरुऩ फटुक बैयल, भशाकार बैयल औय
स्लणााकऴाण बैयल के रुऩ भें जाना जाता शैं।
वलद्वानों ने स्लणााकऴाण-बैयल को धन-धान्म औय वम्ऩत्त्त के देलता भाना शै। धभाग्रॊथों भें उल्रेख सभरता शैं की आधथाक
त्स्थती हदन-प्रततहदन खयाफ शोती जायशी शो, कजा का फोझ फढ़ता जा यशा शो, वभस्मा के वभाधान शेतु कोई यास्ता न
हदखाई दे यशा शो, वबी प्रकाय के ऩूजा ऩाठ, भॊि, मॊि, तॊि, मस, शलन, वाधना आहद वे कोई वलळेऴ राब की प्रात्प्त न
शो यशी शो, तफ स्लणााकऴाण बैयल जी का भॊि, मॊि, वाधना इत्माहद का आश्रम रेना ाहशए। जो व्मत्क्त स्लणााकऴाण
बैयल की वाधना, भॊि जऩ आहद को कयने भें अवभथा शो लश रोग स्लणााकऴाण बैयल कल को धायण कय वलळेऴा राब
प्राप्त कय वकते शैं। स्लणााकऴाण बैयल कल को धन प्रात्प्त के सरए अ ूक औय अत्मॊत प्रबालळारी भाना जाता शैं।
स्लणााकऴाण बैयल कल धायण कताा की वबी प्रकाय की आधथाक वभस्माओॊ को वभाप्त कयने भें वभथा शैं। इवभें जया
बी वॊदेश नशीॊ शैं। इव करमुग भें त्जव प्रकाय भृत्मु बम के तनलायण शेतु भशाभृत्मुॊजम कल अभोघ शै उवी प्रकाय
आधथाक वभस्माओॊ के वभाधान शेतु स्लणााकऴाण बैयल कल अभोघ भाना गमा शैं। धासभाक भान्मताओॊ के अनुळाय ऐवा
भाना जाता शैं की बैयलजी की ऩूजा-उऩावना श्रीगणेळ, वलटणु, ॊद्रभा, कु फेय आहद देलताओॊ ने बी फक थी, बैयल उऩावना
के प्रबाल वे बगलान वलटणु रक्ष्भीऩतत फने थे, वलसबन्न अप्वयाओॊ को वौबाग्म सभरने का उल्रेख धभाग्रॊथो भें सभरता
शैं। महश कायण शैं की स्लणााकऴाण बैयल कल आधथाक वभस्माओॊ के वभाधान शेतु अत्मॊत राबप्रद शैं। इव कल को
धायण कयने वे वबी प्रकाय वे आधथाक राब की प्रात्प्त शोती शैं। Rs.4600
91 2019
जफ कफीयजी को सभरी याभ भॊि दीषा?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
वॊत कफीय फकवी ऩशु े शुए गुरु वे भॊिदीषा
प्राप्त कयना ाशते थे। उव वभम काळी भें याभानॊद स्लाभी
फडे उच् कोहट के भशाऩुरुऴ भाने जाते थे। कफीय जी ने उनके
आश्रभ के भुख्म य ऩय आकय यऩार वे वलनती की् भुझे
गुरुजी के दळान कया दो। उव वभम जात-ऩाॉत का फडा
फोरफारा था। औय फपय काळी जैवी ऩालन नगयी भें
ऩॊडडतों औय ऩॊडे रोगों का अधधक प्रबाल था। कफीयजी फकवके
घय ऩैदा शुए थे – हशॊदू के मा भुवसरभ के ? कु छ ऩता नशीॊ था।
कफीय जी एक जुराशे को ताराफ के फकनाये सभरे थे। उवने
कफीय जी का ऩारन-ऩोऴण कयके उन्शें फडा फकमा था। जुराशे
के घय फडे शुए तो जुराशे का धॊधा कयने रगे। रोग भानते थे
फक कफीय जी भुवरभान की वॊतान शैं।
यऩारों ने कफीयजी को आश्रभ भें नशीॊ जाने हदमा।
कफीय जी ने वो ा फक अगय ऩशुॉ े शुए भशात्भा वे गुरुभॊि नशीॊ
सभरा तो भनभानी वाधना वे शरय के दाव फन वकते शैं ऩय
शरयभम नशीॊ फन वकते। कै वे बी कयके भुझे याभानॊद जी
भशायाज वे शी भॊिदीषा रेनी शै।
कफीयजी ने देखा फक स्लाभी याभानॊदजी शययोज वुफश
3-4 फजे खडाऊॉ ऩशन कय टऩ...टऩ आलाज कयते शुए गॊगा भें
स्नान कयने जाते शैं। कफीय जी ने गॊगा के घाट ऩय उनके जाने
के यास्ते भें वफ जगश फाड कय दी औय आने-जाने का एक
शी भागा यखा। उव भागा भें वुफश के अॉधेये भें कफीय जी वो
गमे। गुरु भशायाज आमे तो अॉधेये के कायण स्लाभी
याभानॊदजी का कफीयजी ऩय ऩैय ऩड गमा। उनके भुख वे
स्लत् उदगाय तनकर ऩडे् याभ..... याभ...!
कफीयजी का तो काभ फन गमा। गुरुजी के दळान बी
शो गमे, उनकी ऩादुकाओॊ का स्ऩळा तथा गुरुभुख वे याभ भॊि
बी सभर गमा। गुरुदीषा के फाद अफ दीषा भें फाकी शी क्मा
यशा? कफीय जी ना ते, गुनगुनाते घय लाऩव आमे। याभ नाभ
की औय गुरुदेल के नाभ की यट रगा दी। अत्मॊत स्नेशऩूणा
रृदम वे गुरुभॊि का जऩ कयते, गुरुनाभ का कीतान कयते शुए
वाधना कयने रगे। हदनोंहदन कफीय जी भस्ती फढ़ने रगी।
काळी के ऩॊडडतों ने देखा फक मलन का ऩुि कफीय याभ नाभ
जऩता शैं, स्लाभी याभानॊद के नाभ का कीतान कयता शैं। उव
मलन को याभ नाभ की दीषा फकवने दी? क्मों दी? उवने भॊि
को भ्रटट कय हदमा !
ऩॊडडतों ने कफीय जी वे ऩूछा् तुभको याभनाभ की
दीषा फकवने दी? कफीयजी फोरे, स्लाभी याभानॊदजी
भशायाज के श्रीभुख वे सभरी। ऩॊडडतों ने फपय ऩूछा् कशाॉ दी
दीषा?, कफीयजी फोरे, गॊगा के घाट ऩय।
ऩॊडडत ऩशुॉ े याभानॊदजी के ऩाव् आऩने मलन को
याभभॊि की दीषा देकय भॊि को भ्रटट कय हदमा, वम्प्रदाम को
भ्रटट कय हदमा। गुरु भशायाज ! मश आऩने क्मा फकमा? गुरु
भशायाज ने कशा् भैंने तो फकवी को दीषा नशीॊ दी।
लश मलन जुराशा तो याभानॊद..... याभानॊद..... भेये
गुरुदेल याभानॊद...की यट रगाकय ना ता शैं, आऩका नाभ
फदनाभ कयता शैं। याभानॊदजी फोरे बाई ! भैंने तो उवको
कु छ नशीॊ कशा। उवको फुरा कय ऩूछा जाम। ऩता र
जामगा।
काळी के ऩॊडडत इकट्ठे शो गमे। जुराशा वच् ा फक
याभानॊदजी वच् े मश देखने के सरए बीड इक्कठी शो गमी।
कफीय जी को फुरामा गमा। गुरु भशायाज भॊ ऩय वलयाजभान
शैं। वाभने वल न ऩॊडडतों की वबा शैं।
याभानॊदजी ने कफीय वे ऩूछा् भैंने तुम्शें कफ दीषा
दी? भैं कफ तेया गुरु फना? कफीयजी फोरे् भशायाज ! उव हदन
प्रबात को आऩने भुझे ऩादुका-स्ऩळा कयामा औय याभभॊि बी
हदमा, लशाॉ गॊगा के घाट ऩय।
याभानॊद स्लाभी ने कफीयजी के सवय ऩय धीये वे
खडाऊॉ भायते शुए कशा् याभ... याभ.. याभ.... भुझे झूठा फनाता
शै? गॊगा के घाट ऩय भैंने तुझे कफ दीषा दी थी ?
कफीयजी फोर उठे् गुरु भशायाज ! तफ की दीषा झूठी
तो अफ की तो वच् ी....! भुख वे याभ नाभ का भॊि बी सभर
गमा औय सवय ऩय आऩकी ऩालन ऩादुका का स्ऩळा बी शो
गमा। स्लाभी याभानॊदजी उच् कोहट के वॊत भशात्भा थे।
उन्शोंने ऩॊडडतों वे कशा् रो, मलन शो मा कु छ बी शो, भेया
ऩशरे नॊफय का सळटम मशी शै।
92 2019
जफ बक्त के सरमे स्लमॊ बगलान भयने को तैमाय शोते शैं?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
एक प्रवॊग के अनुळाय
जफ वलबीऴण बगलान श्रीयाभ के यणों की ळयण भें शो जाता शै, तफ बगलान श्रीयाभ वलबीऴण के दोऴों को अऩने शी
दोऴ भानते शैं। एक वभम वलबीऴण वभुद्र राॊघ कय वभुद्र के दूवये छोय ऩय आमे। लशाॉ वलप्रघोऴ नाभक गाॉल भें उनवे
असात शी एक ब्रह्भशत्मा शो गई। जफ फाकी के गाॉल लारो को इव फात का ऩता रगा तो लशाॉ के वबी ब्राह्भणों ने
इकट्ठे शोकय वलबीऴण को खूफ भाया-ऩीटा, ऩय वलबीऴण भये नशीॊ। फपय ब्राह्भणों ने वलबीऴण को जॊजीयों वे फाॉधकय जभीन के
बीतय एक गुपा भें रे जाकय फॊध कय हदमा।
जफ बगलान श्रीयाभ को ऩता रगा की तो श्रीयाभ जी ऩुटऩक वलभान के या तत्कार, गाॉल भें ऩशुॉ े। ब्राह्भणों ने याभ
जी का फशुत आदय-वत्काय फकमा औय कशा फक, भशायाज ! इवने ब्रह्भशत्मा कय दी शै। इवको शभने फशुत भाया, ऩय मश भया
नशीॊ।
बगलान याभ ने कशा् शे ब्राह्भणों ! वलबीऴण को भैंने कल्ऩ तक की आमु औय याज्म दे यखा शैं, लश कै वे भाया जा वकता शै ! औय
उवको भायने की जरूयत शी क्मा शैं? लश तो भेया बक्त शैं।
भेयें बक्त के सरए भैं स्लमॊ भयने को तैमाय शूॉ। शभाये मशाॉ वलधान शै फक दाव के अऩयाध की त्जम्भेलायी उवके स्लाभी ऩय शोती शैं।
स्लाभी शी उवके दण्ड का ऩाि शोता शैं। इवसरए वलबीऴण के फदरे आऩ रोग भेयें को शी दण्ड दें। बगलान की मश ळयणागत
लत्वरता देखकय वफ ब्राह्भण आश् मा कयने रगे औय उन वफ ने उवी षण बगलान श्रीयाभ की ळयण रे री।
भाॊगलरक मोग तनवायण कवच
जन्भ रग्न वे प्रथभ, द्वद्वतीम, तुथा, वप्तभ, अटटभ मा द्वादळ स्थान भे भॊगर त्स्थत शोने ऩय भॊगर दोऴ
मा कु ज दोऴ अथाात भाॊगसरक मोग का तनभााण शोता शैं। कु छ आ ामों के अनुवाय रग्न के अततरयक्त
भॊगरी दोऴ न्द्र रग्न, ळुक्र मा वप्तभेळ वे इन्शीॊ स्थानो भें भॊगर त्स्थत शोने ऩय बी शोता शैं।
ळास्िोक्त भान्मता के अनुळाय भॊगरी मोग लैलाहशक जीलन को वलसबन्न प्रकाय वे प्रबावलत कयता शै,
वललाश भे वलघ्न, वलरम्फ, व्मलधान मा धोखा, वललाशोऩयान्त दम्ऩतत भे वे फकवी एक अथला दोनाको ळायीरयक,
भानसवक अथला आधथाक कटट, ऩायस्ऩरयक भन-भुटाल, लाद-वललाद तथा वललाश-वलच्छेद। अगय दोऴ अत्मधधक
प्रफर शुआ तो दोना अथला फकवी एक की भृत्मु का बम यशता शै।
कुॊ डरी भें महद भॊगरी मोग शो तो उस्वे बमबीत मा आतॊफकत नशीॊ शोना ाहशमे। प्रमाव मश कयना ाहशमे फक
भॊगरी जातक का वललाश भॊगरी जातक वे शी शो महद भाॊगसरक मोग के कायण वललाश भें वलरॊफ शो यशा शो तो
भाॊगसरक मोग तनलायण कल को धायण कयने वे वललाश वॊफॊधधत वभस्माओॊ का तनलायण शोता शैं।
Rs.1450
GURUTVA KARYALAY
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93 2019
श्री याभ ळराका प्रश्नालरी
वु प्र उ त्रफ शो भु ग फ वु नु त्रफ घ धध इ द
य रु प सव सव यें फव शै भॊ र न र म न अॊ
वुज वो ग वु कु भ व ग त न ई र धा फे नो
त्म य न कु जो भ रय य य अ की शो वॊ या म
ऩु वु थ वी जै इ ग भ वॊ क ये शो व व तन
त य त य व शुॉ श फ फ ऩ ध व म व तु
भ का ाा य य भा सभ भी म्शा ाा जा शू शीॊ ाा जू
ता या ये यी ह् का प खा त्ज ई य या ऩू द र
तन को सभ गो न भ त्ज म ने भतन क ज ऩ व र
हश या सभ वभ रय ग द न ख भ णख त्ज तन त जॊ
सवॊ भु न न कौ सभ ज य ग धु ख वु का व य
गु क भ अ ध तन भ र ाा न फ ती न रय ब
ना ऩु ल अ ढ़ा य र का ए तू य न नु ल थ
सव श वु म्श य य व हशॊ य त न ख ाा ाा ाा
य वा ाा रा धी ाा यी जा शू शीॊ ऴा जू ई या ये
ववधध-
श्रीयाभ न्द्रजी का ध्मान कय अऩने प्रश्न को भन भें दोशयामें। फपय ऊऩय दी गई वायणी भें वे
फकवी एक अषय अॊगुरी यखें। अफ उववे अगरे अषय वे क्रभळ् नौलाॊ अषय सरखते जामें जफ तक ऩुन्
उवी जगश नशीॊ ऩशुॉ जामें। इव प्रकाय एक ौऩाई फनेगी, जो अबीटट प्रश्न का उत्तय शोगी।
मशाॊ शभने आऩकी अनुकू रता शेतु नौले अषय के कोटटक को एक वभान यॊग भें यॊगने का
प्रमाव फकमा शैं त्जववे आऩको शय नौले अषयको धगनती कयने की आलश्मक्ता न यशें आऩ वीधे
एक वभान यॊगो के कोटटक भें रीखे अषयोको सभरारे/सरख रे औय जो ौऩाई फने उव ौऩाई को
बी देखने भें आऩको आवानी शो इव उद्देश्म वे उवी यॊग भें यॊगने का प्रमाव फकमा शैं।
94 2019
1 सुनु लसम सत्म असीस हभायी। ऩूश्जहह भन काभना तुम्हायी।
पर् -प्रश्नकत्ताा का प्रश्न उत्तभ शै, कामा सवद्ध शोगा।
मश ौऩाई फारकाण्ड भें श्रीवीताजी के गौयीऩूजन के प्रवॊग भें शै। गौयीजी ने श्रीवीताजी को आळीलााद हदमा शै।
2 प्रत्रफलस नगय कीजै सफ काजा। हृदम याखख कोसरऩुय याजा।
पर्-बगलान ् का स्भयण कयके कामाायम्ब कयो, वपरता सभरेगी।
मश ौऩाई वुन्दयकाण्ड भें शनुभानजी के रॊका भें प्रलेळ कयने के वभम की शै।
3 उघयें अॊत न होइ तनफाहू। कारनेलभ श्जलभ यावन याहू।।
पर्-इव कामा भें बराई नशीॊ शै। कामा की वपरता भें वन्देश शै।
मश ौऩाई फारकाण्ड के आयम्ब भें वत्वॊग-लणान के प्रवॊग भें शै।
4 त्रफधध फस सुजन कु सॊगत ऩयहीॊ। पतन भतन सभ तनज गुन अनुसयहीॊ।।
पर्-खोटे भनुटमों का वॊग छोड दो। कामा की वपरता भें वन्देश शै।
मश ौऩाई फारकाण्ड के आयम्ब भें वत्वॊग-लणान के प्रवॊग भें शै।
5 होइ है सोई जो याभ यधच याखा। को करय तयक फढावहहॊ साषा।।
पर्-कामा शोने भें वन्देश शै, अत् उवे बगलान ् ऩय छोड देना श्रेमटकय शै।
मश ौऩाई फारकाण्डान्तगात सळल औय ऩालाती के वॊलाद भें शै।
6 भुद भॊगरभम सॊत सभाजू। श्जलभ जग जॊगभ तीयथ याजू।।
पर्-प्रश्न उत्तभ शै। कामा सवद्ध शोगा।
मश ौऩाई फारकाण्ड भें वॊत-वभाजरुऩी तीथा के लणान भें शै।
7 गयर सुधा रयऩु कयम लभताई। गोऩद लसॊधु अनर लसतराई।।
पर्-प्रश्न फशुत श्रेटठ शै। कामा वपर शोगा।
मश ौऩाई श्रीशनुभान ् जी के रॊका प्रलेळ कयने के वभम की शै।
8 फरुन कु फेय सुयेस सभीया। यन सनभुख धरय काह न धीया।।
पर्-कामा ऩूणा शोने भें वन्देश शै।
मश ौऩाई रॊकाकाण्ड भें यालन की भृत्मु के ऩश् ात ् भन्दोदयी के वलराऩ के प्रवॊग भें शै।
9 सुपर भनोयथ होहुॉ तुम्हाये। याभ रखनु सुतन बए सुखाये।।
पर्-प्रश्न फशुत उत्तभ शै। कामा सवद्ध शोगा।
मश ौऩाई फारकाण्ड ऩुटऩलाहटका वे ऩुटऩ राने ऩय वलश्लासभिजी का आळीलााद शै।
95 2019
जफ श्रीयाभ ने फकम वलजमा एकादळी व्रत?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
एक फाय मुधधश्ष्ठय ने श्री कृ टण वे ऩूिा हे प्रबु
पाल्गुन (गुजयात-भशायाटट्र भें भाघ) के कृ टणऩष को फकव
नाभ की एकादळी शोती शैं औय उवका व्रत कयने की वलधध क्मा
शैं? कृ ऩा कयके फताइमे ।
पाल्गुन के कृ टणऩष की एकादळी को ‘वलजमा एकादळी’ के
नाभ वे जाना जाता शैं।
बगवान श्रीकृ ष्ण
ऩुन् फोरे: मुधधत्टठय ! एक
फाय नायदजी ने ब्रह्भाजी वे
पाल्गुन के कृ टणऩष की
‘वलजमा एकादळी’ के व्रत वे
शोनेलारे ऩुण्म के फाये भें ऩूछा
था तथा ब्रह्भाजी ने इव व्रत
के फाये भें नायदजी को जो
कथा औय वलधध फतामी थी,
उवे वुनो :
ब्रह्भाजी ने कहा :
नायद ! मश व्रत फशुत शी
प्रा ीन, ऩवलि औय ऩाऩ
नाळक शैं । मश एकादळी
याजाओॊ को वलजम प्रदान
कयती शैं, इवभें ततनक बी
वॊदेश नशीॊ शैं ।
िेतामुग भें भमाादा
ऩुरुऴोत्तभ श्रीयाभ न्द्रजी जफ रॊका ऩय ढ़ाई कयने के सरए
वभुद्र के फकनाये ऩशुॉ े, तफ उन्शें वभुद्र को ऩाय कयने का कोई
उऩाम नशीॊ वूझ यशा था ।
उन्शोंने रक्ष्भणजी वे ऩूछा : ‘वुसभिानन्दन ! फकव
उऩाम वे इव वभुद्र को ऩाय फकमा जा वकता शै ? मश अत्मन्त
अगाध औय बमॊकय जर जन्तुओॊ वे बया शुआ शै । भुझे ऐवा
कोई उऩाम नशीॊ हदखामी देता, त्जववे इवको वुगभता वे ऩाय
फकमा जा वके ।
रक्ष्भणजी फोरे : शे प्रबु ! आऩ शी आहददेल औय
ऩुयाण ऩुरुऴ ऩुरुऴोत्तभ शैं । आऩवे क्मा तछऩा शैं? मशाॉ
वे आधे मोजन की दूयी ऩय कु भायी द्लीऩ भें फकदाल्भ्म नाभक
भुतन यशते शैं । आऩ उन वल न भुनीश्लय के ऩाव जाकय
उन्शीॊवे इवका उऩाम ऩूतछमे ।
श्रीयाभ न्द्रजी भशाभुतन फकदाल्भ्म के आश्रभ ऩशुॉ े
औय उन्शोंने भुतन को प्रणाभ फकमा ।
भशवऴा ने प्रवन्न शोकय श्रीयाभजी के आगभन का
कायण ऩूछा ।
श्रीयाभचन्रजी फोरे : ब्रह्भन ्!
भैं रॊका ऩय ढ़ाई कयने के उद्धेश्म
वे अऩनी वेनावहशत मशाॉ आमा शूॉ
।
भुने ! अफ त्जव प्रकाय वभुद्र
ऩाय फकमा जा वके , कृ ऩा कयके
लश उऩाम फताइमे ।
फकदाल्बम भुतन ने
कहा : शे श्रीयाभजी ! पाल्गुन
के कृ टणऩष भें जो ‘वलजमा’
नाभ की एकादळी शोती शै,
उवका व्रत कयने वे आऩकी
वलजम शोगी। तनश् म शी आऩ
अऩनी लानय वेना के वाथ वभुद्र को
ऩाय कय रेंगे । याजन ् ! अफ इव व्रत की
परदामक वलधध वुतनमे :
एकादळी के एक हदन ऩूला दळभी के हदन वोने,
ाॉदी, ताॉफे अथला सभट्टी का एक करळ स्थावऩत कय उव
करळ को जर वे बयकय उवभें ऩल्रल डार दें । उव करळ
के ऊऩय बगलान नायामण के वुलणाभम वलग्रश की स्थाऩना
कयें । फपय एकादळी के हदन प्रात: कार स्नान कयें । करळ को
ऩुन: स्थावऩत कयें । भारा, न्दन, वुऩायी तथा नारयमर आहद
के या वलळेऴ रुऩ वे उवका ऩूजन कयें ।
करळ के ऊऩय वप्तधान्म औय जौ यखें । गन्ध, धूऩ,
दीऩ औय बाॉतत-बाॉतत के नैलेघ वे बगलान नायामण का
96 2019
ऩूजन कयें । करळ के वाभने फैठकय उत्तभ कथा लाताा आहद
के या वाया हदन व्मतीत कयें औय यात भें बी लशाॉ जागयण
कयें । अखण्ड व्रत की सववद्ध के सरए घी का दीऩक जरामें ।
फपय दळी के हदन वूमोदम शोने ऩय उव करळ को
फकवी जराळम के वभीऩ स्थावऩत कयें औय उवकी वलधधलत ्
ऩूजा कयके देल प्रततभावहशत उव करळ को लेदलेत्ता ब्राह्भण
के सरए दान कय दें । करळ के वाथ शी औय बी फडे फडे दान
देने ाहशए । श्रीयाभ ! आऩ अऩने वेनाऩततमों के वाथ इवी
वलधध वे प्रमत्नऩूलाक ‘वलजमा एकादळी’ का व्रत कीत्जमे ।
इववे आऩकी वलजम शोगी ।
ब्रह्भाजी कहते हैं : नायद ! मश वुनकय श्रीयाभ न्द्रजी
ने भुतन के कथनानुवाय उव वभम ‘वलजमा एकादळी’ का व्रत
फकमा । उव व्रत के कयने वे श्रीयाभ न्द्रजी वलजमी शुए ।
उन्शोंने वॊग्राभ भें यालण को भाया, रॊका ऩय वलजम ऩामी औय
वीता को प्राप्त फकमा । फेटा ! जो भनुटम इव वलधध वे व्रत
कयते शैं, उन्शें इव रोक भें वलजम प्राप्त शोती शै औय उनका
ऩयरोक बी अषम फना यशता शैं।
बगवान श्रीकृ ष्ण कहते हैं : मुधधत्टठय ! इव कायण
‘वलजमा’ का व्रत कयना ाहशए । इव प्रवॊग को ऩढ़ने औय
वुनने वे लाजऩेम मस के वभान पर सभरता शैं।
बायतीम ज्मोततऴ ळास्ि भें ळुब औय अळुब दोनों प्रकाय के मोगों का लणान सभरता शैं। इन मोगों भें एक मोग
"श्रावऩत मोग" शैं इवे "ळावऩत दोऴ" बी कशा जाता शैं। इव मोग के वॊफॊध भें कशाॊ जाता शैं की त्जव व्मत्क्त की
कु ण्डरी भें श्रावऩत मोग शोता शै, उनकी कु ण्डरी भें भौजूद अन्म ळुब मोगों का प्रबाल कभ शो जाता शै त्जववे
व्मत्क्त को जीलन भें वलसबन्न कहठनाईमों एलॊ ुनौततमों का वाभना कयना ऩडता शै। कु छ जानकाय कु ण्डरी भें
भौजूद श्रावऩत मोग का कायण बी ऩूला जन्भ के कभों का पर भानते शैं। कु छ ज्मोततऴी का भानना शैं की श्रावऩत
मोग अत्मॊत अळुब परदामी शैं। श्रावऩत मोग का पर व्मत्क्त को अऩने कभों के अनुवाय बोगना ऩडता शैं। कै वे
जाने जन्भ कुॊ डरी भें श्रावऩत मोग शैं मा नशीॊ? यतीम ज्मोततऴळास्ि भें वूमा, भॊगर, ळतन, याशु औय के तु को अळुब
ग्रशों भाना गमा शै। इन अळुब ग्रशों भें जफ ळातन औय याशु की एक यासळ भें भौजूद शो तो श्रावऩत मोग का तनभााण
शोता शै। ळतन औय याशु दोनों शी ग्रश अळुब पर देते शैं इवसरए इन दोनों ग्रशों के वॊमोग वे फनने लारे मोग को
ळावऩत मोग मा श्रावऩत मोग कशा जाता शै। कु छ ज्मोततऴ के जानकाय मश भानते शैं फक ळतन की याशु ऩय दृत्टट
शोने वे बी इव मोग का तनभााण शोता शैं। वाधायण बाऴा भें वभझे तो ळाऩ का अथा ळुब परों नाळ शोना भाना
जाता शै। उवी प्रकाय ळावऩत मोग का अथा शैं, ळुब मोगों को नाळ कयने लारा मोग। त्जव फकवी की कु ण्डरी भें मश
मोग का तनभााण शोता शै उवे इवी प्रकाय का पर सभरता शै अथाात उनकी कु ण्डरी भें त्जतने बी ळुब मोग शोते शैं
ले इव मोग के कायण प्रबालशीन शो जाते शैं! आभतौय ऩय ऐवा भाना जाता शैं की ळावऩत मोग वे ऩीडडत व्मत्क्त को
अऩने कामों भें वलसबन्न प्रकाय की कहठन ुनौततमों एलॊ भुत्श्करों का वाभना कयना शोता शैं। रेफकन कु छ ज्मोततऴी
इववे वशभत नशीॊ शैं, उनका भानना शैं की ळावऩत मोग वे वॊफॊधधत मश धायण ऩूयी तयश गरत शै, त्जव व्मत्क्त की
कु ण्डरी भें ळावऩत मोग फनता शै, उन व्मत्क्त की कु ण्डरी भें अन्म मोगों की अऩेषा ळावऩत मोग अधधक
प्रबालळारी शोकय व्मत्क्त को ळुब पर देता शैं! त्जव प्रकाय ज्मोततऴळास्ि के अनुळाय जफ दो सभि ग्रशों की मुतत
फकवी यासळ भें फनती शै तो उनका अळुब प्रबाल वभाप्त शो जाता शै औय दोनों सभिग्रश सभरकय व्मत्क्त को ळुब
पर देते शैं। उवी प्रकाय वे लश ळतन एलॊ याशु के मोग वे तनसभात शोने लारे ळावऩत मोग को अळुब नशीॊ भानते शैं।
रेफकन मश एक लै ारयक भतबेद का भुद्दा शैं, महद आऩकी जन्भ कुॊ डरी भें श्रावऩत मोग का तनभााण शो यशा शो, औय
आऩको इववे वॊफॊधधत कटट प्राप्त शो यशे शो तो आऩ श्रावऩत मोग तनलायण कल को धायण कयके धायण कताा को
वलळेऴ राब प्राप्त कय अऩनी ऩयेळातनमों को दूय कय वकते शैं। इव कल के प्रबाल वे श्रावऩत मोग के प्रबालों भें
न्मूनता आती शैं। Rs.1900
श्रावऩत मोग तनलायण कल
97 2019
स्लमॊप्रबा ने की याभदूतो की वशामता?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
भाॉ वीता की खोज कयते-कयते शनुभान, जाम्फॊत, अॊगद आहद स्लमॊप्रबा के आश्रभ भें ऩशुॉ े। उन्शें जोयों की
बूख औय प्माव रगी थी। उन्शें देखकय स्लमॊप्रबा ने ऩूछा फक् क्मा तुभ शनुभान शो? श्रीयाभजी के दूत शो? वीता जी
की खोज भें तनकरे शो?"
शनुभानजी ने कशा् "शाॉ, भाॉ! शभ वीता भाता की खोज भें इधय तक आमे शैं।"
फपय स्लमॊप्रबा ने अॊगद की ओय देखकय कशा् तुभ वीता जी को खोज तो यशे शो, फकन्तु आॉखें फॊद कयके
खोज यशे शो मा आॉखें खोरकय?"
अॊगद फोरा् शभ क्मा आॉखें फन्द कयके खोजते शोंगे? शभ तो आॉखें खोरकय शी भाता वीता की खोज कय
यशे शैं।
स्लमॊप्रबा फोरी् वीताजी को खोजना शै तो आॉखें खोरकय नशीॊ फॊद कयके खोजना शोगा। वीता जी अथाात ्
बगलान की अधािंधगनी, वीताजी मानी ब्रह्भवल , आत्भवल । ब्रह्भवल को खोजना शै तो आॉखें खोरकय नशीॊ आॉखें
फॊद कयके शी खोजना ऩडेगा। आॉखें खोरकय खोजोगे तो वीताजी नशीॊ सभरेंगीॊ। तुभ आॉखें फन्द कयके शी वीताजी
(ब्रह्भवल ) को ऩा वकते शो। ठशयो भैं तुम्शे फताती शूॉ फक वीता जी अबी कशाॉ शैं।
ध्मान कयके स्लमॊप्रबा ने फतामा् वीताजी मशाॉ कशीॊ बी नशीॊ, लयन ् वागय ऩाय रॊका भें शैं। अळोकलाहटका भें
फैठी शैं औय याषसवमों वे तघयी शैं। उनभें त्रिजटा नाभक याषवी शैं तो यालण की वेवलका, फकन्तु वीताजी की बक्त
फन गमी शै। वीताजी लशीॊ यशती शैं।"
याभदूत लानय वो ने रगे फक बगलान याभ ने तो एक भशीने के अॊदय वीता भाता का ऩता रगाने के सरए
कशा था। अबी तीन वप्ताश वे ज़्मादा वभम तो मशीॊ शो गमा शैं। लाऩव क्मा भुॉश रेकय जाएॉ? वागय तट तक
ऩशुॉ ते-ऩशुॉ ते कई हदन रग जाएॉगे। अफ क्मा कयें?
उनके भन की फात जानकय स्लमॊप्रबा ने कशा् ध न्ता भत कयो। अऩनी आॉखें फॊद कयो। भैं मोगफर वे एक
षण भें तुम्शें लशाॉ ऩशुॉ ा देती शूॉ।
शनुभान, अॊगद औय अन्म लानय अऩनी आॉखें फन्द कयते शैं औय स्लमॊप्रबा अऩनी मोगळत्क्त वे उन्शें वागय-
तट ऩय कु छ शी ऩर भैं ऩशुॉ ा देती शैं।
इव सरमे श्रीयाभ रयतभानव भें उल्रेख शैं।
ठाडे सकर लसॊधु के तीया।
वकर वम्भान प्रात्प्त कल
वकर वम्भान प्रात्प्त कल को धायण कयने वे धायणकताा या फकमे गमे कामा भें वाभात्जक भान-वम्भान औय
ऩद-प्रततटठा भें लृवद्ध शोती शैं। कु छ रोगो को एवा रगता शैं की उवके ऩरयजन मा वप्रमजन उवका वम्भान नशीॊ
कयते, फकतना बी अच्छा कामा कयने ऩय बी उनका भान-वम्भान नशीॊ कयते मा फाय-फाय उनका भजाक उडाते शो,
उनका अऩभान कयते शो, एवी त्स्थती भें वकर वम्भान प्रात्प्त कल अत्मॊत राबदामक सवद्ध शोता शैं। वकर
वम्भान प्रात्प्त कल को धायण कयने वे धायण कताा के वभात्जक भान-प्रततटठा भें लृवद्ध शोती शैं, त्जववे धायण
कताा का वाभात्जक जीलन उच् स्तय का शो वकता शैं। इटट सभि एलॊ वप्रमजनों वे बी भान-वभान की प्रात्प्त शोती
शैं। Rs.1450
98 2019
अॊगद ने यालण के घभॊडको ूय फकमा
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
रॊका ऩशूॉ कय अगरे हदन वुफेर ऩलात ऩय
वलश्राभ कय प्रात्कार श्री यघुनाथजी उढे औय वफ
भॊत्रिमों को फुराकय वराश भें ऩूछा की ळीघ्र फताइए अफ
क्मा उऩाम कयना ाहशए? जाम्फलान ्ने श्री याभजी के
यणों भें सवय नलाकय कशा शे वफ कु छ जानने लारे। शे
वफके रृदम भें तनलाव कयने लारे अॊतमााभी! शे फुवद्ध,
फर, तेज, धभा औय गुणों के अधधऩतत वुतनए! भैं अऩनी
फुवद्ध के अनुवाय वराश देता शूॉ फक फासरकु भाय अॊगद को
दूत फनाकय यालण की रॊका भें बेजा जाए।
मश अच्छी वराश वफके भन भें जॉ गई। कृ ऩा
के तनधान श्री याभजी ने अॊगद वे कशा शे फर, फुवद्ध औय
गुणों के धाभ फासरऩुि! शे तात! तुभ भेये काभ के सरए
रॊका जाओ। तुभको अधधक वभझाकय क्मा कशूॉ! भैं
जानता शूॉ, तुभ ऩयभ तुय शो। ळिु वे लशी फात ीत
कयना, त्जववे शभाया काभ शो औय उवका कल्माण शो
जाए।
प्रबु श्री याभकी आसा भें सवय ढ़कय औय उनके
यणों की लॊदना कयके अॊगदजी उठे औय फोरे शे
बगलान ्श्री याभजी आऩ त्जव ऩय कृ ऩा कयें, लशी गुणों
का वभुद्र शो जाता शै। स्लाभी वफ कामा अऩने-आऩ सवद्ध
शैं, मश तो प्रबु ने भुझ को कामा हदमा शै। ऐवे वल ाय
कयते शूॉए मुलयाज अॊगद का रृदम शवऴात औय ळयीय
ऩुरफकत शो गमा। यणों की लॊदना कयके यभाजी की
प्रबुता रृदम भें धायणकय अॊगद वफको प्रणाभ कय रे।
रॊका भें प्रलेळ कयते शी यालण के ऩुि वे अॊगद
की बेंट शो गई, जो लशाॉ खेर यशा था। फातों शी फातों भें
दोनों भें झगडा फढ़ गमा, यालण के ऩुि ने अॊगद ऩय
रात उठाई। अॊगद ने तफ ऩैय ऩकडकय उवे घुभाकय
जभीन ऩय दे ऩटक कय भाय धगयामा। मश द्रटट देख कय
याषवो के वभूश अॊगद को देखकय जशाॉ-तशाॉ बाग गएॊ, ले
डय के भाये उनके भुख वे ळब्द नशीॊ तनकर यशे थे।
एक-दूवये वे अवरी फात नशीॊ फतराते, यालण के
ऩुि की भृत्मु वभझकय वफ ुऩ यश जाते शैं। यालण ऩुि
की भृत्मु जानकय औय याषवों को बम के भाये बागते
देखकय नगयबय भें कोराशर भ गमा फक त्जवने रॊका
जराई थी, लशी लानय फपय आ गमा शै। वफ अत्मॊत
बमबीत शोकय वल ाय कयने रगे फक वलधाता अफ न
जाने क्मा कयेगा। ले त्रफना ऩूछे शी अॊगद को यालण के
दयफाय भें जाने का यास्ता फता देते शैं। त्जवे शी ले
देखते शैं, लशी डय के भाये वूख जाते।
श्री याभजी के यणकभरों का स्भयण कयके
अॊगद यालण की वबा के य ऩय गए औय ले धीय, लीय
औय फर की यासळ अॊगद सवॊश की तयश इधय-उधय देखने
रगे।
तुयॊत शी अॊगदने एक याषव को बेजा औय यालण को
अऩने आने का वभा ाय वूध त फकमा। वुनते शी यालण
शॉवकय फोरा- फुरा राओ, देखें कशाॉ का फॊदय शै।
आसा ऩाकय फशुत वे दूत दौडे औय लानयों के
फी भें शाथी के वभान अॊगद को फुरा राए। अॊगद की
बुजाएॉ लृषों के औय सवय ऩलातों के सळखयों के
वभान शैं। योभालरी भानो फशुत वी रताएॉ शैं। भुॉश, नाक,
नेि औय कान ऩलात की कन्दयाओॊ औय खोशों के फयाफय
शैं। अत्मॊत फरलान ्फाॉके लीय फासरऩुि अॊगद वबा भें गए,
ले भन भें जया बी नशीॊ णझझके । अॊगद को देखते शी
वफ वबावद् उठ खडे शुए। मश देखकय यालण के रृदम
भें फडा क्रोध शुआ।
जैवे भतलारे शाधथमों के झुॊड भें सवॊश तन्ळॊक
शोकय रा जाता शैं, उवी प्रकाय श्री याभजी के प्रताऩ का
रृदम भें स्भयण कयके अॊगद तनबाम शोकय वबा भें फैठ
गए। यालण ने कशा अये फॊदय! तू कौन शै?, अॊगद ने कशा
शे दळग्रील! भैं श्री यघुलीय का दूत शूॉ। भेये वऩता वे
तुम्शायी सभिता थी, इवसरए शे बाई! भैं तुम्शायी बराई
के सरए शी आमा शूॉ।
तुम्शाया उत्तभ कु र शै, ऩुरस्त्म ऋवऴ के तुभ
ऩौि शो। सळलजी की औय ब्रह्भाजी की तुभने फशुत
प्रकाय वे ऩूजा की शै। उनवे लय ऩाए शैं औय वफ काभ
99 2019
सवद्ध फकए शैं। रोकऩारों औय वफ याजाओॊ को तुभने
जीत सरमा शै।
याजभद वे मा भोशलळ तुभ जगज्जननी वीताजी को शय
राए शो। अफ तुभ भेये ळुब ल न अथाात भेयी वराश
वुनो! उवके अनुवाय रने वे प्रबु श्री याभजी तुम्शाये
वफ अऩयाध भाप कय देंगे। दाॉतों भें ततनका दफाओ,
गरे भें कु ल्शाडी डारो औय कु टुत्म्फमों वहशत अऩनी
त्स्िमों को वाथ रेकय, आदयऩूलाक जानकीजी को आगे
कयके , इव प्रकाय वफ बम छोडकय रो-औय 'शे
ळयणागत के ऩारन कयने लारे यघुलॊळ सळयोभणण श्री
याभजी! भेयी यषा कीत्जए, यषा कीत्जए। इव तयश प्राथाना
कयो। अॊतय ऩुकाय वुनते शी प्रबु तुभको तनबाम कय देंगे।
यालण ने कशा अये फॊदय के फच् े! वॉबारकय फोर! भूखा!
भुझ देलताओॊ के ळिु को तूने जाना नशीॊ? अये बाई!
अऩना औय अऩने फाऩ का नाभ तो फता। फकव नाते वे
सभिता भानता शै?
अॊगद ने कशा- भेया नाभ अॊगद शै, भैं फासर का
ऩुि शूॉ। उनवे कबी तुम्शायी बेंट शुई थी? अॊगद का ल न
वुनते शी यालण कु छ वकु ा गमा औय फोरा-शाॉ, भैं जान
गमा भुझे माद आ गमा, फासर नाभ का एक फॊदय था।
अये अॊगद! तू शी फासर का रडका शै? अये कु रनाळक! तू
तो अऩने कु ररूऩी फाॉव के सरए अत्ग्न रूऩ शी ऩैदा
शुआ! गबा भें शी क्मों न नटट शो गमा तू? व्मथा शी ऩैदा
शुआ जो अऩने शी भुॉश वे तऩत्स्लमों का दूत कशरामा।
अफ फासर की कु ळर तो फता, लश आजकर कशाॉ शै? तफ
अॊगद ने शॉवकय कशा फव कु छ हदन फीतने ऩय स्लमॊ शी
फासर के ऩाव जाकय, अऩने सभि को रृदम वे रगाकय,
उवी वे कु ळर ऩूछ रेना। श्री याभजी वे वलयोध कयने ऩय
जैवी कु ळर शोती शै, लश वफ तुभको ले वुनालेंगे। शे
भूखा! वुन, बेद उवी के भन भें ऩड वकता शै, बेद नीतत उवी
ऩय अऩना प्रबाल डार वकती शै त्जवके रृदम भें श्री यघुलीय
न शों। व शै, भैं तो कु र का नाळ कयने लारा शूॉ औय शे
यालण! तुभ कु र के यषक शो। अॊधे-फशये बी ऐवी फात नशीॊ
कशते, तुम्शाये तो फीव नेि औय फीव कान शैं। सळल, ब्रह्भा
आहद देलता औय भुतनमों के वभुदाम त्जनके यणों की वेला
कयना ाशते शैं, उनका दूत शोकय भैंने कु र को डुफा
हदमा? अये ऐवी फुवद्ध शोने ऩय बी तुम्शाया रृदम पट
नशीॊ जाता?
अॊगद की कठोय लाणी वुनकय यालण आॉखें
ततयछी कयके फोरा- अये दुटट! भैं तेये वफ कठोय ल न
इवीसरए वश यशा शूॉ फक भैं नीतत औय धभा को जानता
शूॉ औय उन्शीॊ की यषा कय यशा शूॉ। अॊगद ने कशा-
तुम्शायी धभाळीरता भैंने बी वुनी शै। जैवे की तुभने
ऩयाई स्िी की ोयी की शै! औय दूत की यषा की फात
तो अऩनी आॉखों वे देख री। ऐवे धभा के व्रत को
धायण (ऩारन) कयने लारे तुभ डूफकय भय क्मों नशीॊ
जाते। नाक-कान वे यहशत फहशन को देखकय तुभने धभा
वल ायकय शी तो षभा कय हदमा था! तुम्शायी धभाळीरता
जगजाहशय शै। भैं बी फडा बाग्मलान ्शूॉ, जो भैंने तुम्शाया
दळान ऩामा?। यालण ने कशा- अये जड जन्तु लानय! व्मथा
फक-फक न कय, अये भूखा! भेयी बुजाएॉ तो देख। मे वफ
रोकऩारों के वलळार फर रूऩी ॊद्रभा को ग्रवने के सरए
याशु के वभान शैं। फपय तूने वुना शी शोगा फक आकाळ
रूऩी ताराफ भें भेयी बुजाओॊ रूऩी कभरों ऩय फवकय
सळलजी वहशत कै राव शॊव के वभान ळोबा को प्राप्त
शुआ था। अये अॊगद! वुन, तेयी वेना भें फता, ऐवा कौन
मोद्धा शै, जो भुझवे सबड वके गा। तेया भासरक तो स्िी
के वलमोग भें फरशीन शो यशा शै औय उवका छोटा बाई
उवी के दु्ख वे दु्खी औय उदाव शै।
तुभ औय वुग्रील, दोनों नदी तट के लृष शो यशा
भेया छोटा बाई वलबीऴण, वो लश बी फडा डयऩोक शै।
भॊिी जाम्फलान ्फशुत फूढ़ा शै। लश अफ रडाई भें क्मा कय
वकता शै?। नर-नीर तो सळल्ऩ-कभा जानते शैं ले रडना
क्मा जानें?, शाॉ, एक लानय जरूय भशान ्फरलान ् शै, जो
ऩशरे आमा था औय त्जवने रॊका जराई थी। मश ल न
वुनते शी फासर ऩुि अॊगद ने कशा-शे याषवयाज! वच् ी
फात कशो! क्मा उव लानय ने व भु तुम्शाया नगय
जरा हदमा? यालण जैवे जगवलजमी मोद्धा का नगय एक
छोटे वे लानय ने जरा हदमा। ऐवे ल न वुनकय उन्शें
वत्म कौन कशेगा
शे यालण! त्जवको तुभने फशुत फडा मोद्धा कशकय वयाशा
शै, लश तो वुग्रील का एक छोटा वा दौडकय रने लारा
शयकाया शै। लश फशुत रता शै, लीय नशीॊ शै। उवको तो
100 2019
शभने के लर खफय रेने के सरए बेजा था। क्मा व भु
शी उव लानय ने प्रबु की आसा ऩाए त्रफना शी तुम्शाया
नगय जरा डारा? भारूभ शोता शै, इवी डय वे लश रौटकय
वुग्रील के ऩाव नशीॊ गमा औय कशीॊ तछऩा यशा!
शे यालण! तुभ वफ वत्म शी कशते शो, भुझे
वुनकय कु छ बी क्रोध नशीॊ शै। व भु शभायी वेना भें
कोई बी ऐवा नशीॊ शै, जो तुभवे रडने भें ळोबा ऩाए।
प्रीतत औय लैय फयाफयी लारे वे शी कयना ाहशए, नीतत
ऐवी शी शै। सवॊश महद भेंढकों को भाये, तो क्मा उवे कोई
बरा कशेगा
मद्यवऩ तुम्शें भायने भें श्री याभजी की रघुता शै
औय फडा दोऴ बी शै तथावऩ शे यालण! वुनो, षत्रिम
जातत का क्रोध फडा कहठन शोता शैं। लक्रोत्क्त रूऩी धनुऴ
वे ल न रूऩी फाण भायकय अॊगद ने ळिु का रृदम जरा
हदमा। लीय यालण उन फाणों को भानो प्रत्मुत्तय रूऩी
वॉडसवमों वे तनकार यशा शै। तफ यालण शॉवकय फोरा-
फॊदय भें मश एक फडा गुण शै फक जो उवे ऩारता शै,
उवका लश अनेकों उऩामों वे बरा कयने की ेटटा कयता
शै। फॊदय को धन्म शै, जो अऩने भासरक के सरए राज
छोडकय जशाॉ-तशाॉ ना ता शै। ना -कू दकय, रोगों को
रयझाकय, भासरक का हशत कयता शै। मश उवके धभा की
तनऩुणता शै। शे अॊगद! तेयी जातत स्लासभबक्त शै फपय
बरा तू अऩने भासरक के गुण इव प्रकाय कै वे न
फखानेगा? भैं गुण ग्राशक गुणों का आदय कयने लारा
औय ऩयभ वभझदाय शूॉ, इवी वे तेयी जरी-कटी फक-फक
ऩय ध्मान नशीॊ देता।
अॊगद ने कशा- तुम्शायी वच् ी गुण ग्राशकता तो
भुझे शनुभान ्ने वुनाई थी। उवने अळोक लन भें वलध्लॊव
कयके , तुम्शाये ऩुि को भायकय नगय को जरा हदमा था।
तो बी तुभने अऩनी गुण ग्राशकता के कायण मशी वभझा
फक उवने तुम्शाया कु छ बी अऩकाय नशीॊ फकमा। तुम्शाया
लशी वुॊदय स्लबाल वल ाय कय, शे दळग्रील! भैंने कु छ
धृटटता की शै। शनुभान ्ने जो कु छ कशा था, उवे आकय
भैंने प्रत्मष देख सरमा फक तुम्शें न रज्जा शै, न क्रोध शै
औय न ध ढ़ शै। (यालण फोरा-अये लानय! जफ तेयी ऐवी
फुवद्ध शै, तबी तो तू फाऩ को खा गमा। ऐवा ल न
कशकय यालण शॉवा। अॊगद ने कशा- वऩता को खाकय फपय
तुभको बी खा डारता, ऩयन्तु अबी तुयॊत कु छ औय शी
फात भेयी वभझ भें आ गई।
अये नी असबभानी! फासर के तनभार मळ का
कायण जानकय तुम्शें भैं नशीॊ भायता। यालण! मश तो
फता फक जगत ्भें फकतने यालण शैं? भैंने त्जतने यालण
अऩने कानों वे वुन यखे शैं, उन्शें वुन एक यालण तो फसर
को जीतने ऩातार भें गमा था, तफ फच् ों ने उवे घुडवार
भें फाॉध यखा। फारक खेरते थे औय जा-जाकय उवे
भायते थे।
फसर को दमा रगी, तफ उन्शोंने उवे छु डा हदमा
फपय एक यालण को वशस्रफाशु ने देखा, औय उवने दौडकय
उवको एक वलळेऴ प्रकाय के वलध ि जन्तु की तयश
वभझकय ऩकड सरमा। तभाळे के सरए लश उवे घय रे
आमा। तफ ऩुरस्त्म भुतन ने जाकय उवे छु डामा। एक
यालण की फात कशने भें तो भुझे फडा वॊको शो यशा शै-
लश फशुत हदनों तक फासर की काॉख भें यशा था। इनभें वे
तुभ कौन वे यालण शो? खीझना छोडकय व -व
फताओ।
यालण ने कशा-अये भूखा! वुन, भैं लशी
फरलान ्यालण शूॉ, त्जवकी बुजाओॊ की कयाभात कै राव
ऩलात जानता शै। त्जवकी ळूयता उभाऩतत भशादेलजी
जानते शैं, त्जन्शें अऩने सवय रूऩी ऩुटऩ ढ़ा- ढ़ाकय भैंने
ऩूजा था। सवय रूऩी कभरों को अऩने शाथों वे उताय-
उतायकय भैंने अगणणत फाय त्रिऩुयारय सळलजी की ऩूजा
की शै।
अये भूखा! भेयी बुजाओॊ का ऩयाक्रभ हदक्ऩार जानते
शैं, त्जनके रृदम भें लश आज बी ुब यशा शै। हदग्गज भेयी
छाती की कठोयता को जानते शैं। त्जनके बमानक दाॉत, जफ-
जफ जाकय भैं उनवे जफयदस्ती सबडा, भेयी छाती भें कबी
नशीॊ पू टे, फत्ल्क भेयी छाती वे रगते शी ले भूरी की तयश टूट
गए। त्जवके रते वभम ऩृ्ली इव प्रकाय हशरती शै जैवे
भतलारे शाथी के ढ़ते वभम छोटी नाल! भैं लशी जगत
प्रसवद्ध प्रताऩी यालण शूॉ। अये झूठी फकलाव कयने लारे! क्मा
तूने भुझको कानों वे कबी वुना। भशान प्रताऩी औय जगत
प्रसवद्ध भुझे तू छोटा कशता शै औय भनुटम की फडाई कयता
101 2019
शै? अये दुटट, अवभ्म, तुच्छ फॊदय! अफ भैंने तेया सान
जान सरमा।
यालण के मे ल न वुनकय अॊगद क्रोध वहशत
ल न फोरे- अये नी असबभानी! वॉबरकय फोर।
त्जनका पयवा वशस्रफाशु की बुजाओॊ रूऩी अऩाय लन को
जराने के सरए अत्ग्न के वभान था। त्जनके पयवा
रूऩी वभुद्र की तीव्र धाया भें अनधगनत याजा अनेकों फाय
डूफ गए, उन ऩयळुयाभजी का गला त्जन्शें देखते शी बाग
गमा, अये अबागे दळळीळ! ले भनुटम क्मों कय शैं?,
क्मों ये भूखा उद्दण्ड! श्री याभ ॊद्रजी भनुटम शैं?
काभदेल बी क्मा धनुधाायी शै? औय गॊगाजी क्मा नदी शैं?
काभधेनु क्मा ऩळु शै? औय कल्ऩलृष क्मा ऩेड शै? अन्न
बी क्मा दान शै? औय अभृत क्मा यव शै? गरुडजी क्मा
ऩषी शैं? ळेऴजी क्मा वऩा शैं? अये यालण! ध ॊताभणण बी
क्मा ऩत्थय शै? अये ओ भूखा! वुन, लैकु ण्ठ बी क्मा रोक
शै? औय श्री यघुनाथजी की अखण्ड बत्क्त क्मा राब शै?
वेना वभेत तेया भान भथकय, अळोक लन को उजाडकय,
नगय को जराकय औय तेये ऩुि को भायकय जो रौट गए
औय तू उनका कु छ बी न त्रफगाड वका क्मों ये दुटट! ले
शनुभान ्जी क्मा लानय शैं?
अये यालण! तुयाई छोडकय वुन। कृ ऩा के वभुद्र
श्री यघुनाथजी का तू बजन क्मों नशीॊ कयता? अये दुटट!
महद तू श्री याभजी का लैयी शुआ तो तुझे ब्रह्भा औय रुद्र
बी नशीॊ फ ा वकें गे।
शे भूढ़! व्मथा की डीॊग न शाॉक। श्री याभजी वे
लैय कयने ऩय तेया ऐवा शार शोगा फक तेये सवय वभूश श्री
याभजी के फाण रगते शी लानयों के आगे ऩृ्ली ऩय
ऩडेंगे औय यीछ-लानय तेये उन गेंद के वभान अनेकों
सवयों वे ौगान खेरेंगे। जफ श्री यघुनाथजी मुद्ध भें कोऩ
कयेंगे औय उनके अत्मॊत तीक्ष्ण फशुत वे फाण छू टेंगे,
तफ क्मा तेया गार रेगा? ऐवा वल ाय कय कृ ऩारु श्री
याभजी को बज। अॊगद के मे ल न वुनकय यालण फशुत
अधधक जर उठा। भानो जरती शुई प्र ण्ड अत्ग्न भें घी
ऩड गमा शो लश फोरा- अये भूखा! कुॊ बकणा- ऐवा भेया
बाई शै, इन्द्र का ळिु वुप्रसवद्ध भेघनाद भेया ऩुि शै! औय
भेया ऩयाक्रभ तो तूने वुना शी नशीॊ फक भैंने वॊऩूणा जड-
ेतन जगत ्को जीत सरमा शै!
ये दुटट! लानयों की वशामता जोडकय याभ ने
वभुद्र फाॉध सरमा, फव, मशी उवकी प्रबुता शै। वभुद्र को
तो अनेकों ऩषी बी राॉघ जाते शैं। ऩय इवी वे ले वबी
ळूयलीय नशीॊ शो जाते। अये भूखा फॊदय! वुन- भेया एक-एक
बुजा रूऩी वभुद्र फर रूऩी जर वे ऩूणा शै, त्जवभें फशुत
वे ळूयलीय देलता औय भनुटम डूफ ूके शैं। फता कौन ऐवा
ळूयलीय शै, जो भेये इन अथाश औय अऩाय फीव वभुद्रों का
ऩाय ऩा जाएगा?
अये दुटट! भैंने हदक्ऩारों तक वे जर बयलामा
औय तू एक याजा का भुझे वुमळ वुनाता शै! महद तेया
भासरक, त्जवकी गुणगाथा तू फाय-फाय कश यशा शै, वॊग्राभ
भें रडने लारा मोद्धा शै- तो फपय लश दूत फकवसरए
बेजता शै? ळिु वे प्रीतत कयते उवे राज नशीॊ आती?
ऩशरे कै राव का भथन कयने लारी भेयी बुजाओॊ
को देख। फपय अये भूखा लानय! अऩने भासरक की
वयाशना कयना। यालण के वभान ळूयलीय कौन शै?
त्जवने अऩने शाथों वे सवय काट-काटकय अत्मॊत
शऴा के वाथ फशुत फाय उन्शें अत्ग्न भें शोभ हदमा! स्लमॊ
गौयीऩतत सळलजी इव फात के वाषी शैं।
भस्तकों के जरते वभम जफ भैंने अऩने रराटों
ऩय सरखे शुए वलधाता के अषय देखे, तफ भनुटम के शाथ
वे अऩनी भृत्मु शोना फाॉ कय, वलधाता के रेख कोअवत्म
जानकय भैं शॉवा। उव फात को स्भयण कयके बी भेये
भन भें डय नशीॊ शै। क्मोंफक भैं वभझता शूॉ फक फूढ़े
ब्रह्भा ने फुवद्ध भ्रभ वे ऐवा सरख हदमा शै। अये भूखा! तू
रज्जा औय भमाादा छोडकय भेये आगे फाय-फाय दूवये लीय
का फर कशता शै!
अॊगद ने कशा- अये यालण! तेये वभान
रज्जालान ्जगत ्भें कोई नशीॊ शै। रज्जाळीरता तो तेया
वशज स्लबाल शी शै। तू अऩने भुॉश वे अऩने गुण कबी
नशीॊ कशता।
सवय काटने औय कै राव उठाने की कथा ध त्त भें
ढ़ी शुई थी, इववे तूने उवे फीवों फाय कशा। बुजाओॊ के
उव फर को तूने रृदम भें शी तछऩा यखा शै, त्जववे तूने
वशस्रफाशु, फसर औय फासर को जीता था।अये भॊद फुवद्ध!
वुन, अफ फव कय। सवय काटने वे बी क्मा कोई ळूयलीय
शो जाता शै? इॊद्रजार य ने लारे को लीय नशीॊ कशा जाता,
102 2019
मद्यवऩ लश अऩने शी शाथों अऩना वाया ळयीय काट
डारता शै!।
अये भॊद फुवद्ध! वभझकय देख। ऩतॊगे भोशलळ
आग भें जर भयते शैं, गदशों के झुॊड फोझ रादकय रते
शैं, ऩय इव कायण ले ळूयलीय नशीॊ कशराते।
अये दुटट! अफ फतफढ़ाल भत कय, भेया ल न वुन
औय असबभान त्माग दे! शे दळभुख! भैं दूत की तयश
वत्न्ध कयने नशीॊ आमा शूॉ। श्री यघुलीय ने ऐवा वल ाय
कय भुझे बेजा शै- कृ ऩारु श्री याभजी फाय-फाय ऐवा कशते
शैं फक स्माय के भायने वे सवॊश को मळ नशीॊ सभरता।
अये भूखा! प्रबु के ल नों को भन भें वभझकय माद
कयके शी भैंने तेये कठोय ल न वशे शैं।
नशीॊ तो तेये भुॉश तोडकय भैं वीताजी को
जफयदस्ती रे जाता। अये अधभ! देलताओॊ के ळिु! तेया
फर तो भैंने तबी जान सरमा, जफ तू वूने भें ऩयाई स्िी
को शय रामा। तू याषवों का याजा औय फडा असबभानी
शै, ऩयन्तु भैं तो श्री यघुनाथजी के वेलक वुग्रील के वेलक
का बी वेलक शूॉ। महद भैं श्री याभजी के अऩभान वे न
डरूॉ तो तेये देखते-देखते ऐवा तभाळा करूॉ फक- तुझे
जभीन ऩय ऩटककय, तेयी वेना का वॊशाय कय औय तेये
गाॉल को नटट-भ्रटट कयके , अये भूखा! तेयी मुलती त्स्िमों
वहशत जानकीजी को रे जाऊॉ । महद ऐवा करूॉ , तो बी
इवभें कोई फडाई नशीॊ शै। भये शुए को भायने भें कु छ बी
ऩुरुऴत्ल नशीॊ शै। लाभभागॉ, काभी, कॊ जूव, अत्मॊत भूढ़,
अतत दरयद्र, फदनाभ, फशुत फूढ़ा, तनत्म का योगी, तनयॊतय
क्रोधमुक्त यशने लारा, बगलान ्वलटणु वे वलभुख, लेद औय
वॊतों का वलयोधी, अऩना शी ळयीय ऩोऴण कयने लारा,
ऩयाई तनॊदा कयने लारा औय ऩाऩ की खान- मे ौदश
प्राणी जीते शी भुयदे के वभान शैं।
अये दुटट! ऐवा वल ाय कय भैं तुझे नशीॊ भायता।
अफ तू भुझभें क्रोध न ऩैदा कय। अॊगद के ल न वुनकय
याषव याज यालण दाॉतों वे शोठ काटकय, क्रोधधत शोकय
शाथ भरता शुआ फोरा- अये नी फॊदय! अफ तू भयना शी
ाशता शै! इवी वे छोटे भुॉश फडी फात कशता शै।
अये भूखा फॊदय! तू त्जवके फर ऩय कडुए ल न
फक यशा शै, उवभें फर, प्रताऩ, फुवद्ध अथला तेज कु छ बी
नशीॊ शै।
उवे गुणशीन औय भानशीन वभझकय शी तो वऩता
ने लनलाव दे हदमा। उवे एक तो उवका दु्ख, उव ऩय
मुलती स्िी का वलयश औय फपय यात-हदन भेया डय फना
यशता शै। त्जनके फर का तुझे गला शै, ऐवे अनेकों
भनुटमों को तो याषव यात-हदन खामा कयते शैं।
अये भूढ़! त्जद्द छोडकय वल ाय कय। जफ उवने श्री
याभजी की तनॊदा की, तफ तो कवऩश्रेटठ अॊगद अत्मॊत
क्रोधधत शुए, क्मोंफक ळास्ि ऐवा कशते शैं फक जो अऩने
कानों वे बगलान ्वलटणु औय सळल की तनॊदा वुनता शै,
उवे गो लध के वभान ऩाऩ रगता शै।
लानय श्रेटठ अॊगद फशुत जोय वे कटकटाए औय
उन्शोंने तभककय जोय वे अऩने दोनों बुजदण्डों को ऩृ्ली
ऩय दे भाया। तफ ऩृ्ली हशरने रगी, त्जववे फैठे शुए
वबावद् धगय ऩडे औय बम रूऩी बूत वे ग्रस्त शोकय
बाग रे।
यालण धगयते-धगयते वॉबरकय उठा। उवके अत्मॊत
वुॊदय भुकु ट ऩृ्ली ऩय धगय ऩडे। कु छ तो उवने उठाकय
अऩने सवयों ऩय हठक कय यख सरए औय कु छ अॊगद ने
उठाकय प्रबु श्री याभ ॊद्रजी के ऩाव पें क हदए। भुकु टों को
आते देखकय लानय बागे। वो ने रगे वलधाता! क्मा हदन
भें शी उल्काऩात शोने रगा ताये टूटकय धगयने रगे?
अथला क्मा यालण ने क्रोध कयके ाय लज्र राए शैं, जो
फडे धाए के वाथ लेग वे आ यशे शैं?। प्रबु ने उनवे
शॉवकय कशा- भन भें डयो नशीॊ। मे न उल्का शैं, न लज्र शैं
औय न के तु मा याशु शी शैं। अये बाई! मे तो यालण के
भुकु ट शैं, जो फासरऩुि अॊगद के य पें के शुए आ यशे शैं।
ऩलन ऩुि श्री शनुभान ्जी ने उछरकय उनको शाथ
वे ऩकड सरमा औय राकय प्रबु के ऩाव यख हदमा। यीछ
औय लानय तभाळा देखने रगे। उनका प्रकाळ वूमा के
वभान था।
वबा भें क्रोधमुक्त यालण वफवे क्रोधधत शोकय
कशने रगा फक- फॊदय को ऩकड रो औय ऩकडकय भाय
डारो। अॊगद मश वुनकय भुस्कु याने रगे।
यालण फपय फोरा-इवे भायकय वफ मोद्धा तुयॊत
दौडो औय जशाॉ कशीॊ यीछ-लानयों को ऩाओ, लशीॊ खा
डारो। ऩृ्ली को फॊदयों वे यहशत कय दो औय जाकय दोनों
तऩस्ली बाइमों याभ-रक्ष्भण को जीते जी ऩकड रो।
103 2019
यालण के मे कोऩबये ल न वुनकय मुलयाज अॊगद क्रोधधत
शोकय फोरे- तुझे अऩने गार फजाते राज नशीॊ आती!
अये तनराज्ज! अये कु रनाळक! गरा काटकय आत्भशत्मा
कयके भय जा! भेया फर देखकय बी क्मा तेयी छाती नशीॊ
पटती!।
अये स्िी के ोय! अये कु भागा ऩय रने लारे!
अये दुटट, ऩाऩ की यासळ, भन्द फुवद्ध औय काभी! तू
वत्न्नऩात भें क्मा दुला न फक यशा शै? अये दुटट याषव!
तू कार के लळ शो गमा शै!
इवका पर तू आगे लानय औय बारुओॊ के ऩेटे
रगने ऩय ऩालेगा। याभ भनुटम शैं, ऐवा ल न फोरते शी,
अये असबभानी! तेयी जीबें नशीॊ धगय ऩडतीॊ?॥4॥
इवभें वॊदेश नशीॊ शै फक तेयी जीबें अके रे नशीॊ ऩय तेये
सवयों के वाथ यणबूसभ भें धगयेंगी।
ये दळकन्ध! त्जवने एक शी फाण वे फासर को भाय डारा,
लश भनुटम कै वे शै? अये कु जातत, अये जड! फीव आॉखें
शोने ऩय बी तू अॊधा शै। तेये जन्भ को धधक्काय शै। श्री
याभ ॊद्रजी के फाण वभूश तेये यक्त की प्माव वे प्मावे
शैं। ले प्मावे शी यश जाएॉगे इव डय वे, अये कडली फकलाद
कयने लारे नी याषव! भैं तुझे छोडता शूॉ। भैं तेये दाॉत
तोडने भें वभथा शूॉ। ऩय क्मा करूॉ ? श्री यघुनाथजी ने भुझे
आसा नशीॊ दी। ऐवा क्रोध आता शै फक तेये दवों भुॉश
तोड डारूॉ औय तेयी रॊका को ऩकडकय वभुद्र भें डुफो दूॉ।
तेयी रॊका गूरय के पर के वभान शै। तुभ वफ कीडे
उवके बीतय तनडय शोकय फव यशे शो। भैं फॊदय शूॉ, भुझे
इव पर को खाते क्मा देय थी? ऩय कृ ऩारु श्री
याभ ॊद्रजी ने लैवी आसा नशीॊ दी।
अॊगद की मुत्क्त वुनकय यालण भुस्कु यामा औय
फोरा-अये भूखा! फशुत झूठ फोरना तूने कशाॉ वे वीखा?
फासर ने तो कबी ऐवा गार नशीॊ भाया। जान ऩडता शै
तू तऩत्स्लमों वे सभरकय रफाय शो गमा शै।
अॊगद ने कशा-अये फीव बुजा लारे! महद तेयी
दवों जीबें भैंने नशीॊ उखाड रीॊ तो व भु भैं रफाय शी
शूॉ। श्री याभ ॊद्रजी के प्रताऩ को स्भयण कयके अॊगद
क्रोधधत शो उठे औय उन्शोंने यालण की वबा भें प्रण
कयके दृढ़ता के वाथ ऩैय जभा हदमा। औय कशा-अये
भूखा! महद तू भेया यण शटा वके तो श्री याभजी रौट
जाएॉगे, भैं वीताजी को शाय गमा। यालण ने कशा- शे वफ
लीयो! वुनो, ऩैय ऩकडकय फॊदय को ऩृ्ली ऩय ऩछाड दो।
इॊद्रजीत, भेघनाद आहद अनेकों फरलान ्मोद्धा जशाॉ-
तशाॉ वे शवऴात शोकय उठे। ले ऩूये फर वे फशुत वे उऩाम
कयके झऩटते शैं। ऩय ऩैय टरता नशीॊ, तफ सवय नी ा
कयके फपय अऩने-अऩने स्थान ऩय जा फैठ जाते शैं।
काकबुळुत्ण्डजी कशते शैं- ले देलताओॊ के ळिु याषव फपय
उठकय झऩटते शैं, ऩयन्तु शे वऩों के ळिु गरुडजी! अॊगद
का यण उनवे लैवे शी नशीॊ टरता जैवे कु मोगी ऩुरुऴ
भोश रूऩी लृष को नशीॊ उखाड वकते।
कयोडों लीय मोद्धा जो फर भें भेघनाद के वभान
थे, शवऴात शोकय उठे, ले फाय-फाय झऩटते शैं, ऩय लानय का
यण नशीॊ उठता, तफ रज्जा के भाये सवय नलाकय फैठ
जाते शैं।
जैवे कयोडों वलघ्न आने ऩय बी वॊत का भन
नीतत को नशीॊ छोडता, लैवे शी अॊगद का यण ऩृ्ली को
नशीॊ छोडता। मश देखकय यालण का भद दूय शो गमा!।
अॊगद का फर देखकय वफ रृदम भें शाय गए।
तफ अॊगद के ररकायने ऩय यालण स्लमॊ उठा। जफ लश
अॊगद का यण ऩकडने रगा, तफ फासर कु भाय अॊगद ने
कशा- भेया यण ऩकडने वे तेया फ ाल नशीॊ शोगा। अये
भूखा- तू जाकय श्री याभजी के यण क्मों नशीॊ ऩकडता?
मश वुनकय यालण भन भें फशुत शी वकु ाकय रौट
गमा। उवकी वायी श्री जाती यशी। लश ऐवा तेजशीन शो
गमा जैवे भध्माह्न भें ॊद्रभा हदखाई देता शै।
लश सवय नी ा कयके सवॊशावन ऩय जा फैठा।
भानो वायी वम्ऩत्त्त गॉलाकय फैठा शो। श्री याभ ॊद्रजी
जगत ्बय के आत्भा औय प्राणों के स्लाभी शैं। उनवे
वलभुख यशने लारा ळाॊतत कै वे ऩा वकता शै?
सळलजी कशते शैं-शे उभा! त्जन श्री याभ ॊद्रजी के
बौंश के इळाये वे वलश्ल उत्ऩन्न शोता शै औय फपय नाळ
को प्राप्त शोता शै, जो तृण को लज्र औय लज्र को तृण
फना देते शैं अत्मॊत तनफार को भशान ्प्रफर औय
भशान ्प्रफर को अत्मॊत तनफार कय देते शैं, उनके दूत का
प्रण कशो, कै वे टर वकता शै?।
फपय अॊगद ने अनेकों प्रकाय वे नीतत कशी। ऩय
यालण नशीॊ भाना, क्मोंफक उवका कार तनकट आ गमा
104 2019
था। ळिु के गला को ूय कयके अॊगद ने उवको प्रबु श्री
याभ ॊद्रजी का वुमळ वुनामा औय फपय लश याजा फासर
का ऩुि मश कशकय र हदमा- यणबूसभ भें तुझे खेरा-
खेराकय न भारूॉ तफ तक अबी ऩशरे वे क्मा फडाई
करूॉ ।
अॊगद ने ऩशरे शी वबा भें आने वे ऩूला शी उवके
ऩुि को भाय डारा था। लश वॊलाद वुनकय यालण दु्खी
शो गमा। अॊगद का प्रण देखकय वफ याषव बम वे
अत्मन्त शी व्माकु र शो गए। ळिु के फर का भदान कय,
फर की यासळ फासर ऩुि अॊगदजी ने शवऴात शोकय आकय
श्री याभ ॊद्रजी के यणकभर ऩकड सरए। उनका ळयीय
ऩुरफकत शै औय नेिों भें आनॊदाश्रुओॊ का जर बया शै।
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105 2019
श्री याभ के सवद्धभॊि
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
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107 2019
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108 2019
याभ एलॊ शनुभान भॊि
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
याभ गामिी भॊि:
ॐ दाळयथमे वलद्मशे जानकी लल्रबाम धी भहश॥
तन्नो याभ् प्र ोदमात ्॥
श्री याभ भूर भॊि:
ॐ ह्ाॊ ह्ीॊ याॊ याभाम नभ्॥
श्री याभ तायक भॊि:
ॐ जानकीकाॊत तायक याॊ याभाम नभ्॥
याभ भॊि
याॊ याभम नभ्।
पर: छ् राख भॊि जऩ कयने वे मश भॊि सववद्ध शोता शैं औय इस्वे वाधक की याभ भें बत्क्त दृढ़ शोती शैं।
बगलान याभ का भॊि:
ॐ याभाम नभ्।
दळाषय याभ भॊि:
शुॊ जानकी लल्रबाम स्लाशा।
पर: मश भॊि दव राख जऩने वे सवद्ध शोत शैं औय मश भॊि वबी प्रकाय वे वाधक को वपरता एल्ॊ भोष प्रदान
कयने भें वशामक शैं।
शये कृ टण शये कृ टण, कृ टण-कृ टण शये शये।
शये याभ शये याभ, याभ-याभ शये शये।
इव भॊि को तनमसभत स्नान इत्माहद वे तनलृत शोकय स्लच्छ कऩडे ऩशन कय 108 फाय जाऩ कयने वे व्मत्क्त को
जीलन भे वभस्त बौततक वुखो एलॊ भोष प्रात्प्त शोती शैं।
शनुभत ् गामिी भॊि:
ॐ अॊजनीजाम वलद्मशे लामुऩुिाम धी भहश॥
तन्नो शनुभान प्र ोदमात ्॥
श्री शनुभान भूर भॊि:
ॐ ह्ाॊ ह्ीॊ ह्ॊ ह्ैं ह्ौं ह््॥
द्वादळाषय शनुभान भॊि:
शॊ शनुभते रुद्रात्भकाम शुॊ पट्।
पर: वे इव भॊि के फाये ळास्िो भें लणणात शैं की मश भॊि स्लतॊत सळलजी ने श्रीकृ टण को फतामा औय श्रीकृ टण नें मश
भॊि अजुान को सवद्ध कयलामा था त्जस्वे अजुान ने य-अ य जगत ् को जीत सरमा था।
109 2019
वीता जी को श्राऩ के पर वे लनलाव शुला?
 वॊकरन गुरुत्ल कामाारम
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लसवि ववनामक कवच
सववद्ध वलनामक कल को वलळेऴ ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे तैमाय फकमा जाता शैं, त्जववे धायण कताा के वबी प्रकाय
के वलघ्न-फाधाओॊ का नाळ शो कय उवे अऩने इत्च्छत कामों भें ळीध्र वपरता की प्रात्प्त शो, श्री गणेळजी के
आसळलााद वे धायण कताा को वबी ळुब कामों भें वयरता वे सववद्ध प्राप्त शो वकती शैं औय उवे वबी प्रकाय वे वुख
प्राप्त शो जाते शैं। गणेळजी की कृ ऩा वे धायण कताा को वल -फुवद्ध की प्रात्प्त शोती शैं। ळास्िों भें बगलान श्री गणेळ
को वभस्त सववद्धमों को देने लारा भाना गमा शै। वायी सववद्धमाॉ गणेळ भें लाव कयती शैं। बगलान श्री गणेळ अऩने
बक्तो के वभस्त वलघ्न फाधाओॊ को दूय कयने लारे वलनामक शैं। कल को श्रीगणेळजी की कृ ऩा प्रात्प्त शेतु धायण
कयना अत्मॊत राबप्रद भाना गमा शैं। सववद्ध वलनामक कल को बगलान श्री गणेळ को प्रवन्न कयने के सरए धायण
फकमा जाता शै। Rs.1450
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भॊि सवद्ध मॊि
रक्ष्भी-गणेळ (ध िमुक्त) कभरा मॊि वलातोबद्र मॊि
रक्ष्भी वलनामक मॊि बुलनेश्लयी मॊि कातताके म मॊि
लास्तुदोऴ तनलायण (ऩुरुऴाकृ तत मुक्त) वुमा (भुखाकृ तीमुक्त) लवुधया वलवा मॊि
लास्तु मॊि (ध िमुक्त) शीॊगराज मॊि कल्माणकायी सवद्ध वलवा मॊि
गृशलास्तु मॊि ब्रह्भाणी मॊि कोटा क ेयी मॊि
लास्तु ळान्ती मॊि भेरडी भाता का मॊि जैन मॊि
भशाकारी मॊि कात्मामनी मॊि वयस्लती मॊि (ध िमुक्त)
उत्च्छटट गणऩती मॊि ऩॊदयीमा मॊि (ऩॊ दळी मॊि) फालनलीय मॊि
भशा गणऩती मॊि भशावुदळान मॊि ऩॊ गुरी मॊि
ळिु दभनालणा मॊि काभाख्मा मॊि वूयी भॊि
ऋणभुत्क्त मॊि रक्ष्भी वॊऩुट मॊि ततजमऩशुत वलातोबद्र मॊि
रक्ष्भीधाया मॊि लीवा मॊि 16 वलद्यादेली मुक्त वलातोबद्र
रक्ष्भी प्राप्ती औय व्माऩायलधाक तछन्नभस्ता (ध ि + मॊि) गौतभस्लाभी मॊि
सवद्ध भशारक्ष्भी मॊि घुभालती (ध ि + मॊि) अनॊतरब्धीतनधान गौतभ स्लाभी
कनकधाया मॊि (कृ भऩृटट) कारी (ध ि + मॊि) बक्ताम्फय (१ वे ४८) हदगम्फय
दुगाा मॊि (अॊकात्भक) श्री भातृका मॊि ऩद्मालती देली मॊि
भातॊगी मॊि वलातोबद्र मॊि (गणेळ) वलजम ऩताका मॊि
GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA,
BHUBNESWAR-751018, (ODISHA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
Shop @ : www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvakaryalay.in
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वॊऩूणा प्राणप्रततत्टठत 22 गेज ळुद्ध स्टीर भें तनसभात अखॊडडत
ऩुरुषाकाय शतन मॊर
ऩुरुऴाकाय ळतन मॊि (स्टीर भें) को तीव्र प्रबालळारी फनाने शेतु ळतन की कायक धातु ळुद्ध
स्टीर(रोशे) भें फनामा गमा शैं। त्जव के प्रबाल वे वाधक को तत्कार राब प्राप्त शोता शैं। महद
जन्भ कुॊ डरी भें ळतन प्रततकू र शोने ऩय व्मत्क्त को अनेक कामों भें अवपरता प्राप्त शोती शै, कबी
व्मलवाम भें घटा, नौकयी भें ऩयेळानी, लाशन दुघाटना, गृश क्रेळ आहद ऩयेळानीमाॊ फढ़ती जाती शै
ऐवी त्स्थततमों भें प्राणप्रततत्टठत ग्रश ऩीडा तनलायक ळतन मॊि की अऩने को व्मऩाय स्थान मा घय भें
स्थाऩना कयने वे अनेक राब सभरते शैं। महद ळतन की ढैमा मा वाढ़ेवाती का वभम शो तो इवे
अलश्म ऩूजना ाहशए। ळतनमॊि के ऩूजन भाि वे व्मत्क्त को भृत्मु, कजा, कोटाके ळ, जोडो का ददा,
फात योग तथा रम्फे वभम के वबी प्रकाय के योग वे ऩयेळान व्मत्क्त के सरमे ळतन मॊि अधधक
राबकायी शोगा। नौकयी ऩेळा आहद के रोगों को ऩदौन्नतत बी ळतन द्वारा शी सभरती शै अत् मश
मॊि अतत उऩमोगी मॊि शै त्जवके द्वारा ळीघ्र शी राब ऩामा जा वकता शै।
भूल्म: 1225 से 8200 >> Shop Online | Order Now
118 2019
वीतायाभ स्तोिभ ्
कभर रो नौ याभ काॊ नाम्फयौ कल बूऴणौ याभ काभुाकात्न्लतौ ।
करुऴवॊशायौ याभ कासभतप्रदौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥१॥
भकयकु ण्डरौ याभ भौसरवेवलतौ भणणफकयीहटनौ याभ भञ्जुबावऴणौ ।
भनुकु रोद्भलौ याभ भानुऴोत्तभौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥२॥
वत्मवम्ऩन्नौ याभ वभयबीकयौ वलायषणौ याभ वलाबूऴणौ ।
वत्मभानवौ याभ वलाऩोवऴतौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥३॥
धृतसळखत्ण्डनौ याभ दीनयषकौ धृतहशभा रौ याभ हदव्मवलग्रशौ ।
वलवलधऩूत्जतौ याभ दीघादोमुागौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥४॥
बुलनजानुकौ याभ ऩाद ारयणौ ऩृथुसळरीभुकौ याभ ऩाऩनाङ्तघ्रकौ ।
ऩयभवात्त्लकौ याभ बक्तलत्वरौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥५॥
लनवलशारयणौ याभ लल्कराॊफयौ लनपरासळनौ याभ लावलाध ातौ ।
लयगुणाकयौ याभ लासरभदानौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥६॥
दळयथात्भजौ याभ ऩळुऩततवप्रमौ ळसळतनलासवनौ याभ वलळदभानवौ ।
दळभुखान्तकौ याभ तनसळतवामकौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ
॥७॥
कभर रो नौ याभ वभयऩत्ण्डतौ बीभवलग्रशौ याभ काभवुन्दयौ ।
दाभबूऴणौ याभ शेभनूऩुयौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥८॥
बयतवेवलतौ याभ दुरयतभो कौ कयधृताळुगौ याभ वूकयस्तुतौ ।
ळयधध धायणौ याभ धीयकलध नौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥९॥
धभा ारयणौ याभ कभावाक्षषणौ धभाकाभुाखौ याभ ळभादामकौ ।
धभाळोसबतौ याभ कभाभोहदनौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥१०॥
नीरदेहशनौ याभ रोरकु न्दरौ कारबीकयौ याभ लासरभदानौ ।
करुऴशारयणौ याभ रसरतबूऴणौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥११॥
भातृनन्दनौ याभ बाद्रफारकौ भ्रातॄ वम्भतौ याभ ळिुवूदकौ ।
भ्रातृळेखयौ याभ वेतुनामकौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥१२॥
ळयधधफन्धनौ याभ दसरतदानलौ कु रवललधानौ याभ फरवलयात्जतौ ।
वोरजात्जतौ याभ फरवलयात्जतौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥१३॥
याजरषणौ याभ वलजम काङ्क्षषणौ गजलयारुशौ याभ ऩूत्जताभयौ ।
वलत्जतभत्वयौ याभ बत्जतलायणौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ
॥१४॥
वलाभातनतौ याभ वलाकारयणौ गलाबञ्जनौ याभ तनवलाकायणौ ।
दुवलाबासवतौ याभ वलाबावकौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥१५॥
यवलकु रोद्भलौ याभ बलवलनाळकौ कानकाधश्रतौ याभ ऩादकोळकौ ।
यवलवुतवप्रमौ याभ कवलसबयीडडतौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ
॥१६॥
याभ याघल वीता याभ याघल याभ याघल वीता याभ याघल ।
कृ टणके ळल याधा कृ टणके ळल कृ टणके ळल याधा कृ टणके ळल ॥१७॥
याभाटटकभ्
बजे वलळेऴवुन्दयॊ वभस्तऩाऩखण्डनभ ् ।
स्लबक्तध त्तयञ्जनॊ वदैल याभभ मभ ् ॥ १ ॥
जटाकराऩळोसबतॊ वभस्तऩाऩनाळकभ् ।
स्लबक्तबीततबॊजनॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ २ ॥
तनजस्लरूऩफोधकॊ कृ ऩाकयॊ बलाऩशभ् ।
वभॊ सळलॊ तनयॊजनॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ ३ ॥
वदाप्रञ् कत्ल्ऩतॊ ह्मनाभरूऩलास्तलभ ् ।
तनयाकृ ततॊ तनयाभमॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ ४ ॥
तनटप्रऩञ् तनवलाकल्ऩतनभारॊ तनयाभमभ् ॥
ध देकरूऩवॊततॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ ५ ॥
बलात्ब्धऩोतरूऩकॊ ह्मळेऴदेशकत्ल्ऩतभ् ।
गुणाकयॊ कृ ऩाकयॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ ६ ॥
भशालाक्मफोधकै वलायाजभनलाक्ऩदै् ।
ऩयब्रह्भ व्माऩकॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ ७ ॥
सळलप्रदॊ वुखप्रदॊ बलत्च्छदॊ भ्रभाऩशभ् ।
वलयाजभानदैसळकॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ ८ ॥
याभाटटकॊ ऩठतत म् वुकयॊ वुऩुण्मॊ व्मावेन
बावऴतसभदॊ श्रृणुते भनुटम् ।
वलद्माॊ धश्रमॊ वलऩुरवौख्मभनन्तकीतता वम्प्राप्म
देशवलरमे रबते भोषभ् ॥ ९ ॥
॥ इतत श्रीव्माववलयध तॊ याभाटटकॊ वॊऩूणाभ ् ॥
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याभ न्द्र स्तुतत
नभासभ बक्तलत्वरॊ कृ ऩारु ळीर कोभरॊ
बजासभ ते ऩदाॊफुजॊ अकासभनाॊ स्लधाभदॊ।
तनकाभ श्माभ वुॊदयॊ बलाॊफुनाथ भन्दयॊ
प्रपु ल्र कॊ ज रो नॊ भदाहद दोऴ भो नॊ॥१॥
प्ररॊफ फाशु वलक्रभॊ प्रबोडप्रभेम लैबलॊ
तनऴॊग ाऩ वामकॊ धयॊ त्रिरोक नामकॊ ।
हदनेळ लॊळ भॊडनॊ भशेळ ाऩ खॊडनॊ
भुनीॊद्र वॊत यॊजनॊ वुयारय लृॊद बॊजनॊ॥२॥
भनोज लैरय लॊहदतॊ अजाहद देल वेवलतॊ
वलळुद्ध फोध वलग्रशॊ वभस्त दूऴणाऩशॊ।
नभासभ इॊहदया ऩततॊ वुखाकयॊ वताॊ गततॊ
बजे वळत्क्त वानुजॊ ळ ी ऩतत वप्रमानुजॊ॥३॥
त्लदॊतघ्र भूर मे नया: बजत्न्त शीन भत्वया:
ऩतॊतत नो बलाणाले वलतका लीध वॊकु रे।
वलवलक्त लासवन: वदा बजॊतत भुक्तमे भुदा
तनयस्म इॊहद्रमाहदकॊ प्रमाॊतत ते गततॊ स्लकॊ ॥४॥
तभेकभद्भुतॊ प्रबुॊ तनयीशभीश्लयॊ वलबुॊ
जगद्गरुॊ ळाश्ल तॊ तुयीमभेल भेलरॊ।
बजासभ बाल लल्रबॊ कु मोधगनाॊ वुदुराबा
स्लबक्त कल्ऩ ऩादऩॊ वभॊ वुवेव्मभन्लशॊ॥५॥
अनूऩ रूऩ बूऩततॊ नतोडशभुवलाजा ऩततॊ
प्रवीद भे नभासभ ते ऩदाब्ज बत्क्त देहश भे।
ऩठॊतत मे स्लतॊ इदॊ नयादयेण ते ऩदॊ
व्रजॊतत नाि वॊळमॊ त्लदीम बत्क्त वॊमुता:॥६॥
इव स्तोि का तनत्म आदयऩूलाक ऩाठ कयने वे
व्मत्क्त को ऩद फक तनवॊदे् प्रात्प्त शोती शैं।
याभस्तुतत
श्रीयाभ न्द्र कृ ऩारु बजु भन शयण बलबम दारुणभ ् ।
नलकञ्ज रो न कञ्ज भुखकय कञ्जऩद कञ्जरुणभ् ॥१॥
कॊ दऩा अगणणत असभत छत्रफ नल नीर नीयज वुन्दयभ् ।
ऩटऩीत ऩानशुॉ तडडत रुध वुध नौसभ जनक वुतालयभ् ॥२॥
बजु दीन फन्धु हदनेळ दानल दैत्मलॊळतनकन्दनभ ् ।
यघुनन्द आनॊदकॊ द कोळर न्द दळयथ नन्दनभ ् ॥३॥
सवयक्रीट कु ण्डर ततरक ारु उदाय अङ्ग वलबूऴणभ् ।
आजानुबुज वय ाऩधय वङ्ग्राभ त्जत खयदूऴणभ ् ॥४॥
इतत लदतत तुरवीदाव ळङ्कय ळेऴ भुतन भनयञ्जनभ् ।
भभ रृदमकञ्ज तनलाव कु रु काभाहदखरदरभञ्जनभ ् ॥५॥
भन जाहश या ो सभरहश वोलय वशजवुन्दय वाॊलयो ।
करुणातनधान वुजान ळीर वनेश जानत यालयो ॥६॥
एहश बाॉतत गौरय अळीव वुतन सवम वहशत हशम शवऴात अरी ।
तुरवी बलातनहशॊ ऩूत्ज ऩुतन ऩुतन भुहदत भन भत्न्दय री ॥७॥
जातन गौरय अनुकू र सवम हशम शऴान् जात कहश ।
भञ्जुर भङ्गर भूर लाभ अङ्ग ऩयकन रगे ॥८॥
सवमालय याभ न्द्र ऩद गहश यशुॉ ।
उभालय ळम्बुनाथ ऩद गहश यशुॉ ।
भशावलय फजयॉगी ऩद गहश यशुॉ । ळयणा गतो शरय ॥
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जटामुकृ त याभ स्तोिभ ्
श्रीगणेळाम नभ् । जटामुरुला ।
अगणणतगुणभप्रभेमभाद्मॊ वकरजगत्त्स्थततवॊमभाहदशेतुभ ् ।
उऩयभऩयभॊऩयात्भबृतॊवततभशॊ प्रणतोऽत्स्भ याभ न्द्रभ ्॥ १ ॥
तनयलधधवुखसभॊहदयाकटाषॊ षवऩतवुयेन्द्र तुभुाखहददु्खभ ् ।
नयलयभतनळॊनतोऽत्स्भयाभॊ लयदभशॊ लय ाऩफाणशस्तभ ् ॥ २ ॥
त्रिबुलनकभनीमरूऩभीड्मॊ यवलळतबावुयभीहशतप्रदानभ ् ।
ळयणदभतनळॊ वुयागभूरे कृ ततनरमॊ यघुनन्दनॊ प्रऩद्मे ॥ ३ ॥
बलवलवऩनदलात्ग्नभधेमॊ बलभुखदैलतदैलतॊ दमारुभ ् ।
दनुजऩततवशस्िकोहटनाळॊ यवलतनमावदृळॊ शरयॊ प्रऩद्मे ॥ ४ ॥
अवलयतबलबालनाततदूयॊ बलवलभुखैभुातनसब् वदैल दृश्मभ ् ।
बलजरधधवुतायणाॊतघ्रऩोतॊ ळयणभशॊ यघुनन्दनॊ प्रऩद्मे ॥ ५ ॥
धगरयळधगरयवुतभनोतनलावॊ धगरयलयधारयणभीहशतासबयाभभ ् ।
वुयलयदनुजेन्द्रवेवलताॊतघ्रॊ वुयलयदॊ यघुनामकॊ प्रऩद्मे ॥ ६ ॥
ऩयधनऩयदायलत्जातानाॊ ऩयगुणबूततऴु तुटटभानवानाभ ् ।
ऩयहशततनयतात्भनाॊ वुवेव्मॊ यघुलयभॊफुजरो नॊ प्रऩद्मे ॥ ७ ॥
त्स्भतरुध यवलकासवताब्जभततवुरबॊ वुययाजनीरनीरभ ् ।
सवतजररुश ारुनेिळोबॊ यघुऩततभीळगुयोगुारुॊ प्रऩद्मे ॥ ८ ॥
शरयकभरजळॊबुरूऩबेदात्त्लभहश वलबासव गुणिमानुलृत्त् ।
यवलरयल जल्ऩूरयतोदऩािेटलभयऩततस्तुततऩािभीळभीडे ॥ ९ ॥
यततऩततळतकोहटवुन्दयाङ्ग ळतऩथगो यबालनावलदूयभ ्।
मततऩततह्दमेवदावलबाॊतॊयघुऩततभातताशयॊ प्रबुॊ प्रऩद्मे ॥ १० ॥
इत्मेलॊ स्तुलतस्तस्म प्रवन्नोऽबूद्रघूत्तभ् ।
उला गच्छ बद्रॊ ते भभ वलटणो् ऩयॊ ऩदभ ् ॥ ११ ॥
श्रृतोतत म इदॊ स्तोिॊ सरखे तनमत् ऩठेत ् ।
व मातत भभ वारूप्मॊ भयणे भत्स्भृततॊ रबेत ् ॥ १२ ॥
इतत याघलबावऴतॊ तदा श्रुतलान् शऴावभाकु रो द्वद्वज् ।
यघुनन्दनवाम्मभात्स्थत् प्रममौ ब्रह्भवुऩूत्जतॊ ऩदभ ् ॥ १३ ॥
॥ इतत श्रीभदध्मात्भयाभामणे आयण्मकाॊडे जटामुकृ तयाभस्तोिॊ
वॊऩूणाभ ् ॥
भशादेल कृ त याभस्तुतत
श्री भशादेल उला ।
नभोऽस्तु याभाम वळत्क्तकाम नीरोत्ऩरश्माभकोभराम ।
फकयीटशायाङ्गदबूऴणाम सवॊशावनस्थाम भशाप्रबाम ॥ १ ॥
त्लभाहदभध्माॊतवलशीन एक् स्रृजस्मलस्मत्त्व रोकजातभ ् ।
स्लभाममातेन नसरप्मवे त्लॊ मत्स्ले वुखेऽजस्ियतोऽनलद्म्॥ २ ॥
रीराॊ वलधत्वे गुणवॊलृतस्त्लॊ प्रवन्नबक्तानुवलधानशेतो् ।
नानाऽलतायै् वुयभानुऴाद्मै् प्रतीमवे सातनसबयेल तनत्मभ ् ॥ ३ ॥
स्लाॊळेन रोकॊ वकरॊ वलधाम तॊ त्रफबवऴा त्लॊ तदध् पणीश्लय् ।
उऩमाधो बान्लतनरोड्डऩौऴधीन्प्रकऴारूऩोलसव नैकधा जगत ् ॥४॥
त्लसभश देशबृताॊ सळणखरूऩ् ऩ सव बक्तभळेऴभजस्िभ ् ।
ऩलनऩॊ करूऩवशामो जगदखॊडभनेन त्रफबवऴा ॥ ५ ॥
ॊद्रवूमासळणखभध्मगतॊ मत्तेज ईळ ध दळेऴतनूनाभ ् ।
प्राबलत्तनुबृतासभश धैमिं ळौमाभामुयणखरॊ तल वत्त्लभ ् ॥ ६ ॥
त्लॊ वलरयत्ञ् सळलवलटणुवलबेदात्कारकभाळसळवूमावलबागात ् ।
लाहदनाॊ ऩृथधगलेळ वलबासव ब्रह्भ तनत्श् तभनन्महदशैकभ ् ॥ ७ ॥
भत्स्माहदरूऩेण मथा त्लभेक् श्रुतौ ऩुयाणेऴु रोकसवद्ध् ।
तथैल वलिं सदसद्वद्वभागस्त्वमेव नान्मद्भलतो वलबातत ॥ ८ ॥
मद्यत्वभुत्ऩन्नभनन्तवृटटालुत्ऩत्स्मते मच् बलच् मच् ।
न दृश्मते स्थालयजॊगभादौ त्लमा वलनाऽत् ऩयत् ऩयस्त्लभ ्॥ ९ ॥
तत्त्लॊ न जानॊतत ऩयात्भनस्ते जना् वभस्तास्तल भाममात् ।
त्लद्भक्तवेलाभरभानवानाॊ वलबातत तत्त्लॊ ऩयभेकभैळभ ् ॥ १० ॥
ब्रह्भादमस्ते न वलदु् स्लरूऩॊ ध दात्भतत्त्लॊ फहशयथाबाला् ।
ततोफुधस्त्लासभदभेल रूऩॊ बक्त्मा बजन्भुत्क्तभुऩैत्मदु्ख्॥ ११ ॥
अशॊ बलन्नाभगुणै् कृ ताथो लवासभ काश्माभतनळॊ बलान्मा ।
भुभूऴाभाणस्म वलभुक्तमेऽशॊ हदळासभ भॊिॊ तल याभ नाभ ॥ १२ ॥
इभॊ स्तलॊ तनत्मभनन्मबक्त्मा श्रृण्लत्न्त गामॊतत सरखॊतत मे लै ।
तेवव्वौख्मॊऩयभॊ रब्ध्ला बलत्ऩदॊ मात्न्त बलत्प्रवादात ्॥ १३ ॥
॥ इतत श्रीभशादेलकृ तस्तोि वॊऩूणाभ ् ॥
122 2019
 वॊकरनकारवऩा मोग एक कटटदामक मोग !
कार का भतरफ शै भृत्मु । ज्मोततऴ के जानकायों
के अनुवाय त्जव व्मत्क्त का जन्भ अळुबकायी कारवऩा
मोग भे शुला शो लश व्मत्क्त जीलन बय भृत्मु के वभान
कटट बोगने लारा शोता शै, व्मत्क्त जीलन बय कोइ ना
कोइ वभस्मा वे ग्रस्त शोकय अळाॊत ध त शोता शै।
कारवऩा मोग अळुब एलॊ ऩीडादामक शोने ऩय व्मत्क्त के
जीलन को अत्मॊत दु्खदामी फना देता शै।
कारसऩा मोग भतरफ तमा?
जफ जन्भ कुॊ डरी भें वाये ग्रश याशु औय के तु के
फी त्स्थत यशते शैं तो उववे ज्मोततऴ वलद्या के जानकाय
उवे कारवऩा मोग कशा जाता शै।
कारसऩा मोग ककस प्रकाय फनता है औय तमों
फनता हैं?
जफ 7 ग्रश याशु औय के तु के भध्म भे त्स्थत शो
मश अत्च्छ त्स्थतत नहश शै। याशु औय के तु के भध्म भे
फाकी वफ ग्रश आजाने वे याशु के तु अन्म ळुब ग्रशों के
प्रबालों को षीण कय देते शों!, तो अळुब कारवऩा मोग
फनता शै, क्मोफक ज्मोततऴ भे याशु को वऩा(वाऩ) का
भुश(भुख) एलॊ के तु को ऩूॊछ कशा जाता शै।
कारसऩा मोग का प्रबाव तम होता है?
त्जव प्रकाय फकवी व्मत्क्त को वाऩ काट रे तो
लश व्मत्क्त ळाॊतत वे नशी फेठ वकता लेवे शी कारवऩा
मोग वे ऩीडडत व्मत्क्त को जीलन ऩमान्त ळायीरयक,
भानसवक, आधथाक ऩयेळानी का वाभना कयना ऩडता शै।
वललाश वलरम्फ वे शोता शै एलॊ वललाश के ऩश्च्मात वॊतान
वे वॊफॊधी कटट जेवे उवे वॊतान शोती शी नशीॊ मा शोती शै
तो योग ग्रस्त शोती शै। उवे जीलन भें फकवी न फकवी
भशत्लऩूणा लस्तु का अबाल यशता शै। जातक को कारवऩा
मोग के कायण वबी कामों भें अत्माधधक वॊघऴा कयना
ऩडताअ शै। उवकी योजी-योटी का जुगाड बी फडी भुत्श्कर
वे शो ऩाता शै। अगय जुगाड शोजामे तो रम्फे वभम तक
हटकती नशी शै। फाय-फाय व्मलवाम मा नौकयी भे फदराल
आते येशते शै। धनाढम घय भें ऩैदा शोने के फालजूद फकवी
न फकवी लजश वे उवे अप्रत्मासळत रूऩ वे आधथाक षतत
शोती यशती शै। तयश-तयश की ऩयेळानी वे तघये यशते शैं।
एक वभस्मा खतभ शोते शी दूवयी ऩाल ऩवाये खडी शोजाती
शै। कारवऩा मोग वे व्मत्क्त को ैन नशी सभरता उवके
कामा फनते शी नशी औय फन जामे आधे भे रुक जाते शै।
व्मत्क्त के 99% शो ुका कामा बी आखयी ऩरो भे
अकस्भात शी रुक जात शै।
ऩयॊतु मश ध्मान यशे, कारवऩा मोग लारे वबी
जातकों ऩय इव मोग का वभान प्रबाल नशी ऩडता।
क्मोफक फकव बाल भें कौन वी यासळ अलत्स्थत शै औय
उवभें कौन-कौन ग्रश कशाॊ त्स्थत शैं औय दृत्टट कय यशे शै
उस्का प्रबाल फराफर फकतना शै - इन वफ फातों का बी
वॊफॊधधत जातक ऩय भशत्लऩूणा प्रबाल ऩडता शै।
इवसरए भािा कारवऩा मोग वुनकय बमबीत शो
जाने की जरूयत नशीॊ फत्ल्क उवका जानकाय मा कु ळर
ज्मोततऴी वे ज्मोततऴीम वलश्रेऴण कयलाकय उवके प्रबालों
की वलस्तृत जानकायी शासवर कय रेना शी फुवद्धभत्ता शै।
जफ अवरी कायण ज्मोततऴीम वलश्रेऴण वे स्ऩटट शो जामे
तो तत्कार उवका उऩाम कयना ाहशए। उऩाम वे कारवऩा
मोग के कु प्रबालो को कभ फकमा जा वकता शै।
महद आऩकी जन्भ कुॊ डरी भे बी अळुब कारवऩा मोग का
फन यशा शो औय आऩ उवके अळुब प्रबालों वे ऩयेळान शो,
तो कारवऩा मोग के अळुब प्राबालों को ळाॊत कयने के
सरमे वलळेऴ अनुबूत उऩामों को अऩना कय अऩने जीलन
को वुखी एलॊ वभृद्ध फनाए। ***
कारवऩा ळाॊतत शेतु अनुबूत एलॊ वयर उऩाम
भॊि सवद्ध
कारवऩा ळाॊतत मॊि
भॊि सवद्ध
कारवऩा ळाॊतत क ल
वलस्तृत जानकायी शेतु वॊऩका कयें। GURUTVA KARYALAY
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123 2019
भॊि सवद्ध दुराब वाभग्री
कारी शल्दी:- 370, 550, 730, 1450, 1900 कभर गट्टे की भारा - Rs- 370
भामा जार- Rs- 251, 551, 751 शल्दी भारा - Rs- 280
धन लृवद्ध शकीक वेट Rs-280 (कारी शल्दी के वाथ Rs-550) तुरवी भारा - Rs- 190, 280, 370, 460
घोडे की नार- Rs.351, 551, 751 नलयत्न भारा- Rs- 1050, 1900, 2800, 3700 & Above
शकीक: 11 नॊग-Rs-190, 21 नॊग Rs-370 नलयॊगी शकीक भारा Rs- 280, 460, 730
रघु श्रीपर: 1 नॊग-Rs-21, 11 नॊग-Rs-190 शकीक भारा (वात यॊग) Rs- 280, 460, 730, 910
नाग के ळय: 11 ग्राभ, Rs-145 भूॊगे की भारा Rs- 190, 280, Real -1050, 1900 & Above
स्पहटक भारा- Rs- 235, 280, 460, 730, DC 1050, 1250 ऩायद भारा Rs- 1450, 1900, 2800 & Above
वपे द ॊदन भारा - Rs- 460, 640, 910 लैजमॊती भारा Rs- 190, 280, 460
यक्त (रार) ॊदन - Rs- 370, 550, रुद्राष भारा: 190, 280, 460, 730, 1050, 1450
भोती भारा- Rs- 460, 730, 1250, 1450 & Above वलधुत भारा - Rs- 190, 280
कासभमा सवॊदूय- Rs- 460, 730, 1050, 1450, & Above भूल्म भें अॊतय छोटे वे फडे आकाय के कायण शैं।
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भॊि सवद्ध स्पहटक श्री मॊि
"श्री मॊि" वफवे भशत्लऩूणा एलॊ ळत्क्तळारी मॊि शै। "श्री मॊि" को मॊि याज कशा जाता शै क्मोफक मश अत्मन्त
ळुब फ़रदमी मॊि शै। जो न के लर दूवये मन्िो वे अधधक वे अधधक राब देने भे वभथा शै एलॊ वॊवाय के शय
व्मत्क्त के सरए पामदेभॊद वात्रफत शोता शै। ऩूणा प्राण-प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म मुक्त "श्री मॊि" त्जव व्मत्क्त
के घय भे शोता शै उवके सरमे "श्री मॊि" अत्मन्त फ़रदामी सवद्ध शोता शै उवके दळान भाि वे अन-धगनत राब
एलॊ वुख की प्रात्प्त शोतत शै। "श्री मॊि" भे वभाई अहद्रततम एलॊ अद्रश्म ळत्क्त भनुटम की वभस्त ळुब इच्छाओॊ
को ऩूया कयने भे वभथा शोतत शै। त्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय तनयाळा दूय शोकय लश भनुटम अवफ़रता
वे वफ़रता फक औय तनयन्तय गतत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे वभस्त बौततक वुखो फक प्रात्प्त शोतत
शै। "श्री मॊि" भनुटम जीलन भें उत्ऩन्न शोने लारी वभस्मा-फाधा एलॊ नकायात्भक उजाा को दूय कय वकायत्भक
उजाा का तनभााण कयने भे वभथा शै। "श्री मॊि" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय के स्थान ऩय स्थावऩत कयने वे
लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फत्न्धत ऩयेळातन भे न्मुनता आतत शै ल वुख-वभृवद्ध, ळाॊतत एलॊ ऐश्लमा फक प्रत्प्त
शोती शै। >> Shop Online | Order Now
गुरुत्व कामाारम भे वलसबन्न आकाय के "श्री मॊि" उप्रब्ध शै
भूल्म:- प्रतत ग्राभ Rs. 28.00 से Rs.100.00
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124 2019
वला कामा सववद्ध कल
त्जव व्मत्क्त को राख प्रमत्न औय ऩरयश्रभ कयने के
फादबी उवे भनोलाॊतछत वपरतामे एलॊ फकमे गमे कामा भें
सववद्ध (राब) प्राप्त नशीॊ शोती, उव व्मत्क्त को वला कामा
सववद्ध कल अलश्म धायण कयना ाहशमे।
कवच के प्रभुख राब: वला कामा सववद्ध कल के द्वारा
वुख वभृवद्ध औय नव ग्रहों के नकायात्भक प्रबाल को ळाॊत कय
धायण कयता व्मत्क्त के जीलन वे वला प्रकाय के दु:ख-दारयद्र
का नाळ शो कय वुख-वौबाग्म एलॊ उन्नतत प्रात्प्त शोकय
जीलन भे वसब प्रकाय के ळुब कामा सवद्ध शोते शैं। त्जवे धायण
कयने वे व्मत्क्त महद व्मलवाम कयता शोतो कायोफाय भे लृवद्ध
शोतत शैं औय महद नौकयी कयता शोतो उवभे उन्नतत शोती शैं।
 वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें सवाजन वशीकयण कल
के सभरे शोने की लजश वे धायण कताा की फात का दूवये
व्मत्क्तओ ऩय प्रबाल फना यशता शैं।
 वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें अष्ट रक्ष्भी कल के
सभरे शोने की लजश वे व्मत्क्त ऩय वदा भाॊ भशा रक्ष्भी
की कृ ऩा एलॊ आळीलााद फना यशता शैं। त्जस्वे भाॊ रक्ष्भी
के अटट रुऩ (१)-आहद रक्ष्भी, (२)-धान्म रक्ष्भी, (३)- धैमा रक्ष्भी, (४)-गज रक्ष्भी, (५)-वॊतान रक्ष्भी, (६)-
वलजम रक्ष्भी, (७)-वलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो का अळीलााद प्राप्त शोता शैं।
 वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें तॊर यऺा कल के सभरे शोने की लजश वे ताॊत्रिक फाधाए दूय शोती शैं,
वाथ शी नकायात्भक ळत्क्तमो का कोइ कु प्रबाल धायण कताा व्मत्क्त ऩय नशीॊ शोता। इव कल के प्रबाल
वे इऴाा-द्वेऴ यखने लारे व्मत्क्तओ द्वारा शोने लारे दुटट प्रबालो वे यषा शोती शैं।
 वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें शरु ववजम कल के सभरे शोने की लजश वे ळिु वे वॊफॊधधत वभस्त
ऩयेळातनओ वे स्लत् शी छु टकाया सभर जाता शैं। कल के प्रबाल वे ळिु धायण कताा व्मत्क्त का ाशकय
कु छ नशी त्रफगाड वकते।
अन्म कल के फाये भे अधधक जानकायी के सरमे कामाारम भें वॊऩका कये:
फकवी व्मत्क्त वलळेऴ को वला कामा सववद्ध कल देने नशी देना का अॊततभ तनणाम शभाये ऩाव वुयक्षषत शैं।
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125 2019
श्री गणेळ मॊि
गणेळ मॊि वला प्रकाय की ऋवद्ध-सववद्ध प्रदाता एलॊ वबी प्रकाय की उऩरत्ब्धमों देने भें वभथा शै, क्मोकी श्री गणेळ मॊि
के ऩूजन का पर बी बगलान गणऩतत के ऩूजन के वभान भाना जाता शैं। शय भनुटम को को जीलन भें वुख-वभृवद्ध
की प्रात्प्त एलॊ तनमसभत जीलन भें प्राप्त शोने लारे वलसबन्न कटट, फाधा-वलघ्नों को नाव के सरए श्री गणेळ मॊि को
अऩने ऩूजा स्थान भें अलश्म स्थावऩत कयना ाहशए। श्रीगणऩत्मथलाळीऴा भें लणणात शैं ॐकाय का शी व्मक्त स्लरूऩ
श्री गणेळ शैं। इवी सरए वबी प्रकाय के ळुब भाॊगसरक कामों औय देलता-प्रततटठाऩनाओॊ भें बगलान गणऩतत का
प्रथभ ऩूजन फकमा जाता शैं। त्जव प्रकाय वे प्रत्मेक भॊि फक ळत्क्त को फढाने के सरमे भॊि के आगें ॐ (ओभ्)
आलश्म रगा शोता शैं। उवी प्रकाय प्रत्मेक ळुब भाॊगसरक कामों के सरमे बगलान ् गणऩतत की ऩूजा एलॊ स्भयण
अतनलामा भाना गमा शैं। इव ऩौयाणणक भत को वबी ळास्ि एलॊ लैहदक धभा, वम्प्रदामों ने गणेळ जी के ऩूजन शेतु
इव प्रा ीन ऩयम्ऩया को एक भत वे स्लीकाय फकमा शैं।
श्री गणेळ मॊि के ऩूजन वे व्मत्क्त को फुवद्ध, द्ववद्या, वललेक का वलकाव शोता शैं औय योग, व्माधध एलॊ वभस्त
वलध्न-फाधाओॊ का स्लत् नाळ शोता शै। श्री गणेळजी की कृ ऩा प्राप्त शोने वे व्मत्क्त के भुत्श्कर वे भुत्श्कर कामा
बी आवान शो जाते शैं।
त्जन रोगो को व्मलवाम-नौकयी भें वलऩयीत ऩरयणाभ प्राप्त शो यशे शों, ऩारयलारयक तनाल, आधथाक तॊगी, योगों वे
ऩीडा शो यशी शो एलॊ व्मत्क्त को अथक भेशनत कयने के उऩयाॊत बी नाकाभमाफी, दु:ख, तनयाळा प्राप्त शो यशी शो,
तो एवे व्मत्क्तमो की वभस्मा के तनलायण शेतु तुथॉ के हदन मा फुधलाय के हदन श्री गणेळजी की वलळेऴ ऩूजा-
अ ाना कयने का वलधान ळास्िों भें फतामा शैं।
त्जवके पर वे व्मत्क्त की फकस्भत फदर जाती शैं औय उवे जीलन भें वुख, वभृवद्ध एलॊ ऐश्लमा की प्रात्प्त शोती
शैं। त्जव प्रकाय श्री गणेळ जी का ऩूजन अरग-अरग उद्देश्म एलॊ काभनाऩूतता शेतु फकमा जाता शैं, उवी प्रकाय श्री
गणेळ मॊि का ऩूजन बी अरग-अरग उद्देश्म एलॊ काभनाऩूतता शेतु अरग-अरग फकमा जाता वकता शैं।
श्री गणेळ मॊि के तनमसभत ऩूजन वे भनुटम को जीलन भें वबी प्रकाय की ऋवद्ध-सववद्ध ल धन-वम्ऩत्त्त की प्रात्प्त
शेतु श्री गणेळ मॊि अत्मॊत राबदामक शैं। श्री गणेळ मॊि के ऩूजन वे व्मत्क्त की वाभात्जक ऩद-प्रततटठा औय
कीतता ायों औय पै रने रगती शैं।
 द्ववद्वानों का अनुबल शैं की फकवी बी ळुब कामा को प्रायॊऩ कयने वे ऩूला मा ळुबकामा शेतु घय वे फाशय जाने वे ऩूला
गणऩतत मॊि का ऩूजन एलॊ दळान कयना ळुब परदामक यशता शैं। जीलन वे वभस्त वलघ्न दूय शोकय धन,
आध्मात्त्भक ेतना के वलकाव एलॊ आत्भफर की प्रात्प्त के सरए भनुटम को गणेळ मॊि का ऩूजन कयना ाहशए।
गणऩतत मॊि को फकवी बी भाश की गणेळ तुथॉ मा फुधलाय को प्रात: कार अऩने घय, ओफपव, व्मलवामीक
स्थर ऩय ऩूजा स्थर ऩय स्थावऩत कयना ळुब यशता शैं।
गुरुत्व कामाारम भें उऩरब्ध अन्म : रक्ष्भी गणेळ मॊि | गणेळ मॊि | गणेळ मॊि (वॊऩूणा फीज भॊि वहशत) | गणेळ
सवद्ध मॊि | एकाषय गणऩतत मॊि | शरयद्रा गणेळ मॊि बी उऩरब्ध शैं। अधधक जानकायी आऩ शभायी लेफ वाइट ऩय
प्राप्त कय वकते शैं।
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126 2019
दव भशावलद्या ऩूजन मॊि
Das Mahavidya Poojan Yantra | Dasmahavidya Pujan Yantra
दव भशावलद्या ऩूजन मॊि को देली दव
भशावलद्या की ळत्क्तमों वे मुक्त अत्मॊत
प्रबालळारी औय दुराब मॊि भाना गमा शैं।
इव मॊि के भाध्मभ वे वाधक के ऩरयलाय
ऩय दवो महाद्ववद्याओॊ का आसळलााद प्राप्त शोता
शैं। दव भशावलद्या मॊि के तनमसभत ऩूजन-दळान
वे भनुटम की वबी भनोकाभनाओॊ की ऩूतता शोती
शैं। दव भशावलद्या मॊि वाधक की वभस्त
इच्छाओॊ को ऩूणा कयने भें वभथा शैं। दव
भशावलद्या मॊि भनुटम को ळत्क्तवॊऩन्न एलॊ
बूसभलान फनाने भें वभथा शैं।
दव भशावलद्या मॊि के श्रद्धाऩूलाक ऩूजन
वे ळीघ्र देली कृ ऩा प्राप्त शोती शैं औय वाधक को
दव भशावलद्या देलीमों की कृ ऩा वे वॊवाय की
वभस्त सववद्धमों की प्रात्प्त वॊबल शैं। देली दव
भशावलद्या की कृ ऩा वे वाधक को धभा, अथा,
काभ ल् भोष तुवलाध ऩुरुऴाथों की प्रात्प्त शो
वकती शैं। दव भशावलद्या मॊि भें भाॉ दुगाा के दव
अलतायों का आळीलााद वभाहशत शैं, इवसरए दव
भशावलद्या मॊि को के ऩूजन एलॊ दळान भाि वे व्मत्क्त अऩने जीलन को तनयॊतय अधधक वे अधधक वाथाक एलॊ
वपर फनाने भें वभथा शो वकता शैं।
देली के आसळलााद वे व्मत्क्त को सान, वुख, धन-वॊऩदा, ऐश्लमा, रूऩ-वौंदमा की प्रात्प्त वॊबल शैं। व्मत्क्त को लाद-
वललाद भें ळिुओॊ ऩय वलजम की प्रात्प्त शोती शैं।
दळ भशावलद्या को ळास्िों भें आद्या बगलती के दव बेद कशे गमे शैं, जो क्रभळ् (1) कारी, (2) ताया, (3)
ऴोडळी, (4) बुलनेश्लयी, (5) बैयली, (6) तछन्नभस्ता, (7) धूभालती, (8) फगरा, (9) भातॊगी एलॊ (10)
कभात्त्भका। इव वबी देली स्लरुऩों को, वत्म्भसरत रुऩ भें दळ भशावलद्या के नाभ वे जाना जाता शैं।
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127 2019
अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कल
अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल ल उल्रेणखत अन्म वाभग्रीमों को ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे
वलद्वान ब्राह्भणो द्वारा सवा राख भहाभृत्मुॊजम भॊर जऩ एलॊ दळाॊळ शलन द्वारा तनसभात कल
अत्मॊत प्रबालळारी शोता शैं।
अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल
कल फनलाने शेतु:
अऩना नाभ, वऩता-भाता का नाभ,
गोि, एक नमा पोटो बेजे
कल के वलऴम भें अधधक जानकायी शेतु गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें। >> Order Now
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श्री शनुभान मॊि
ळास्िों भें उल्रेख शैं की श्री शनुभान जी को बगलान वूमादेल ने ब्रह्भा जी के आदेळ ऩय शनुभान जी को
अऩने तेज का वौलाॉ बाग प्रदान कयते शुए आळीलााद प्रदान फकमा था, फक भैं शनुभान को वबी ळास्ि का
ऩूणा सान दूॉगा। त्जववे मश तीनोरोक भें वला श्रेटठ लक्ता शोंगे तथा ळास्ि वलद्या भें इन्शें भशायत शासवर
शोगी औय इनके वभन फरळारी औय कोई नशीॊ शोगा। जानकायो ने भतानुळाय शनुभान मॊि की आयाधना वे
ऩुरुऴों की वलसबन्न फीभारयमों दूय शोती शैं, इव मॊि भें अद्भुत ळत्क्त वभाहशत शोने के कायण व्मत्क्त की
स्लप्न दोऴ, धातु योग, यक्त दोऴ, लीमा दोऴ, भूछाा, नऩुॊवकता इत्माहद अनेक प्रकाय के दोऴो को दूय कयने भें
अत्मन्त राबकायी शैं। अथाात मश मॊि ऩौरुऴ को ऩुटट कयता शैं। श्री शनुभान मॊि व्मत्क्त को वॊकट, लाद-
वललाद, बूत-प्रेत, द्मूत फक्रमा, वलऴबम, ोय बम, याज्म बम, भायण, वम्भोशन स्तॊबन इत्माहद वे वॊकटो वे
यषा कयता शैं औय सववद्ध प्रदान कयने भें वषभ शैं। श्री शनुभान मॊि के वलऴम भें अधधक जानकायी के सरमे
गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें। भूल्म Rs- 325 से 12700 तक >> Shop Online | Order Now
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अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम
कल
दक्षषणा भाि: 10900
128 2019
भॊि सवद्ध ऩायद प्रततभा
ऩायद श्री मॊि ऩायद रक्ष्भी गणेळ ऩायद रक्ष्भी नायामण ऩायद रक्ष्भी नायामण
21 Gram वे 5.250 Kg तक
उऩरब्ध
100 Gram 121 Gram 100 Gram
ऩायद सळलसरॊग ऩायद सळलसरॊग+नॊहद ऩायद सळलजी ऩायद कारी
21 Gram वे 5.250 Kg तक
उऩरब्ध
101 Gram वे 5.250 Kg
तक उऩरब्ध
75 Gram 37 Gram
ऩायद दुगाा ऩायद दुगाा ऩायद वयस्लती ऩायद वयस्लती
82 Gram 100 Gram 50 Gram 225 Gram
ऩायद शनुभान 2 ऩायद शनुभान 3 ऩायद शनुभान 1 ऩायद कु फेय
100 Gram 125 Gram 100 Gram 100 Gram
शभायें मशाॊ वबी प्रकाय की भॊि सवद्ध ऩायद प्रततभाएॊ, सळलसरॊग, वऩयासभड, भारा एलॊ गुहटका ळुद्ध ऩायद भें उऩरब्ध शैं।
त्रफना भॊि सवद्ध की शुई ऩायद प्रततभाएॊ थोक व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शैं।
ज्मोततऴ, यत्न व्मलवाम, ऩूजा-ऩाठ इत्माहद षेि वे जुडे फॊधु/फशन के सरमे शभायें वलळेऴ मॊि, कल , यत्न, रुद्राष ल अन्म दुरब
वाभग्रीमों ऩय वलळेऴ वुत्रफधाएॊ उऩरब्ध शैं। अधधक जानकायी शेतु वॊऩका कयें।
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129 2019
शभाये वलळेऴ मॊि
व्माऩाय वृवि मॊर: शभाये अनुबलों के अनुवाय मश मॊि व्माऩाय लृवद्ध एलॊ ऩरयलाय भें वुख वभृवद्ध शेतु वलळेऴ प्रबालळारी शैं।
बूलभराब मॊर: बूसभ, बलन, खेती वे वॊफॊधधत व्मलवाम वे जुडे रोगों के सरए बूसभराब मॊि वलळेऴ राबकायी सवद्ध
शुला शैं।
तॊर यऺा मॊर: फकवी ळिु द्वारा फकमे गमे भॊि-तॊि आहद के प्रबाल को दूय कयने एलॊ बूत, प्रेत नज़य आहद फुयी
ळत्क्तमों वे यषा शेतु वलळेऴ प्रबालळारी शैं।
आकश्स्भक धन प्राश्प्त मॊर: अऩने नाभ के अनुवाय शी भनुटम को आकत्स्भक धन प्रात्प्त शेतु परप्रद शैं इव
मॊि के ऩूजन वे वाधक को अप्रत्मासळत धन राब प्राप्त शोता शैं। ाशे लश धन राब व्मलवाम वे शो, नौकयी वे शो,
धन-वॊऩत्त्त इत्माहद फकवी बी भाध्मभ वे मश राब प्राप्त शो वकता शैं। शभाये लऴों के अनुवॊधान एलॊ अनुबलों वे
शभने आकत्स्भक धन प्रात्प्त मॊि वे ळेमय ट्रेडडॊग, वोने- ाॊदी के व्माऩाय इत्माहद वॊफॊधधत षेि वे जुडे रोगो को
वलळेऴ रुऩ वे आकत्स्भक धन राब प्राप्त शोते देखा शैं। आकत्स्भक धन प्रात्प्त मॊि वे वलसबन्न स्रोत वे धनराब बी
सभर वकता शैं।
ऩदौन्नतत मॊर: ऩदौन्नतत मॊि नौकयी ऩैवा रोगो के सरए राबप्रद शैं। त्जन रोगों को अत्माधधक ऩरयश्रभ एलॊ श्रेटठ
कामा कयने ऩय बी नौकयी भें उन्नतत अथाात प्रभोळन नशीॊ सभर यशा शो उनके सरए मश वलळेऴ राबप्रद शो वकता शैं।
यत्नेववयी मॊर: यत्नेश्लयी मॊि शीये-जलाशयात, यत्न ऩत्थय, वोना- ाॊदी, ज्लैरयी वे वॊफॊधधत व्मलवाम वे जुडे रोगों के
सरए अधधक प्रबाली शैं। ळेय फाजाय भें वोने- ाॊदी जैवी फशुभूल्म धातुओॊ भें तनलेळ कयने लारे रोगों के सरए बी
वलळेऴ राबदाम शैं।
बूलभ प्राश्प्त मॊर: जो रोग खेती, व्मलवाम मा तनलाव स्थान शेतु उत्तभ बूसभ आहद प्राप्त कयना ाशते शैं, रेफकन
उव कामा भें कोई ना कोई अड न मा फाधा-वलघ्न आते यशते शो त्जव कायण कामा ऩूणा नशीॊ शो यशा शो, तो उनके
सरए बूसभ प्रात्प्त मॊि उत्तभ परप्रद शो वकता शैं।
गृह प्राश्प्त मॊर: जो रोग स्लमॊ का घय, दुकान, ओफपव, पै क्टयी आहद के सरए बलन प्राप्त कयना ाशते शैं।
मथाथा प्रमावो के उऩयाॊत बी उनकी असबराऴा ऩूणा नशीॊ शो ऩायशी शो उनके सरए गृश प्रात्प्त मॊि वलळेऴ उऩमोगी सवद्ध
शो वकता शैं।
कै रास धन यऺा मॊर: कै राव धन यषा मॊि धन लृवद्ध एलॊ वुख वभृवद्ध शेतु वलळेऴ परदाम शैं।
आधथाक राब एलॊ वुख वभृवद्ध शेतु 19 दुराब रक्ष्भी मॊि >> Shop Online | Order Now
वलसबन्न रक्ष्भी मॊि
श्री मॊि (रक्ष्भी मॊि) भशारक्ष्भमै फीज मॊि कनक धाया मॊि
श्री मॊि (भॊि यहशत) भशारक्ष्भी फीवा मॊि लैबल रक्ष्भी मॊि (भशान सववद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊि)
श्री मॊि (वॊऩूणा भॊि वहशत) रक्ष्भी दामक सवद्ध फीवा मॊि श्री श्री मॊि (रसरता भशात्रिऩुय वुन्दमै श्री भशारक्ष्भमैं श्री भशामॊि)
श्री मॊि (फीवा मॊि) रक्ष्भी दाता फीवा मॊि अॊकात्भक फीवा मॊि
श्री मॊि श्री वूक्त मॊि रक्ष्भी फीवा मॊि ज्मेटठा रक्ष्भी भॊि ऩूजन मॊि
श्री मॊि (कु भा ऩृटठीम) रक्ष्भी गणेळ मॊि धनदा मॊि > Shop Online | Order Now
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130 2019
वलासववद्धदामक भुहद्रका
इव भुहद्रका भें भूॊगे को ळुब भुशूता भें त्रिधातु (वुलणा+यजत+ताॊफें) भें जडला कय उवे ळास्िोक्त वलधध-
वलधान वे वलसळटट तेजस्ली भॊिो द्वारा वलासववद्धदामक फनाने शेतु प्राण-प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म मुक्त
फकमा जाता शैं। इव भुहद्रका को फकवी बी लगा के व्मत्क्त शाथ की फकवी बी उॊगरी भें धायण कय
वकते शैं। मशॊ भुहद्रका कबी फकवी बी त्स्थती भें अऩवलि नशीॊ शोती। इवसरए कबी भुहद्रका को
उतायने की आलश्मक्ता नशीॊ शैं। इवे धायण कयने वे व्मत्क्त की वभस्माओॊ का वभाधान शोने
रगता शैं। धायणकताा को जीलन भें वपरता प्रात्प्त एलॊ उन्नतत के नमे भागा प्रवस्त शोते यशते शैं
औय जीलन भें वबी प्रकाय की सववद्धमाॊ बी ळीध्र प्राप्त शोती शैं। भूल्म भार- 6400/-
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(नोट: इव भुहद्रका को धायण कयने वे भॊगर ग्रश का कोई फुया प्रबाल वाधक ऩय नशीॊ शोता शैं।)
सवालसविदामक भुहरका के ववषम भें अधधक जानकायी के लरमे हेतु सम्ऩका कयें।
ऩतत-ऩत्नी भें करश तनलायण शेतु
महद ऩरयलायों भें वुख-वुवलधा के वभस्त वाधान शोते शुए बी छोटी-छोटी फातो भें ऩतत-ऩत्नी के त्रफ भे
करश शोता यशता शैं, तो घय के त्जतने वदस्म शो उन वफके नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्वारा ळास्िोक्त
वलधध-वलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रततत्टठत ऩूणा ैतन्म मुक्त लळीकयण कल एलॊ गृश करश नाळक
डडब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भें त्रफना फकवी ऩूजा, वलधध-वलधान वे आऩ वलळेऴ राब प्राप्त कय
वकते शैं। महद आऩ भॊि सवद्ध ऩतत लळीकयण मा ऩत्नी लळीकयण एलॊ गृश करश नाळक डडब्फी फनलाना
ाशते शैं, तो वॊऩका आऩ कय वकते शैं।
100 वे अधधक जैन मॊि
शभाये मशाॊ जैन धभा के वबी प्रभुख, दुराब एलॊ ळीघ्र प्रबालळारी मॊि ताम्र ऩि,
सवरलय ( ाॊदी) ओय गोल्ड (वोने) भे उऩरब्ध शैं।
शभाये मशाॊ वबी प्रकाय के मॊि कोऩय ताम्र ऩि, सवरलय ( ाॊदी) ओय गोल्ड (वोने) भे फनलाए जाते शै।
इवके अराला आऩकी आलश्मकता अनुवाय आऩके द्वारा प्राप्त (ध ि, मॊि, डडज़ाईन) के अनुरुऩ मॊि
बी फनलाए जाते शै. गुरुत्ल कामाारम द्वारा उऩरब्ध कयामे गमे वबी मॊि अखॊडडत एलॊ 22 गेज ळुद्ध
कोऩय(ताम्र ऩि)- 99.99 ट ळुद्ध सवरलय ( ाॊदी) एलॊ 22 के येट गोल्ड (वोने) भे फनलाए जाते शै। मॊि
के वलऴम भे अधधक जानकायी के सरमे शेतु वम्ऩका कयें।
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131 2019
द्वादळ भशा मॊि
मॊि को अतत प्राध न एलॊ दुराब मॊिो के वॊकरन वे शभाये लऴो के अनुवॊधान
द्वारा फनामा गमा शैं।
 ऩयभ दुराब लळीकयण मॊि,
 बाग्मोदम मॊि
 भनोलाॊतछत कामा सववद्ध मॊि
 याज्म फाधा तनलृत्त्त मॊि
 गृशस्थ वुख मॊि
 ळीघ्र वललाश वॊऩन्न गौयी अनॊग मॊि
 वशस्िाषी रक्ष्भी आफद्ध मॊि
 आकत्स्भक धन प्रात्प्त मॊि
 ऩूणा ऩौरुऴ प्रात्प्त काभदेल मॊि
 योग तनलृत्त्त मॊि
 वाधना सववद्ध मॊि
 ळिु दभन मॊि
उऩयोक्त वबी मॊिो को द्वादळ भशा मॊि के रुऩ भें ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे भॊि सवद्ध ऩूणा
प्राणप्रततत्टठत एलॊ ैतन्म मुक्त फकमे जाते शैं। त्जवे स्थाऩीत कय त्रफना फकवी ऩूजा
अ ाना-वलधध वलधान वलळेऴ राब प्राप्त कय वकते शैं।
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 क्मा आऩके फच् े कु वॊगती के सळकाय शैं?
 क्मा आऩके फच् े आऩका कशना नशीॊ भान यशे शैं?
 क्मा आऩके फच् े घय भें अळाॊतत ऩैदा कय यशे शैं?
घय ऩरयलाय भें ळाॊतत एलॊ फच् े को कु वॊगती वे छु डाने शेतु फच् े के नाभ वे गुरुत्ल कामाारत
द्वारा ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रततत्टठत ऩूणा ैतन्म मुक्त लळीकयण कल
एलॊ एव.एन.डडब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भें स्थावऩत कय अल्ऩ ऩूजा, वलधध-वलधान वे
आऩ वलळेऴ राब प्राप्त कय वकते शैं। महद आऩ तो आऩ भॊि सवद्ध लळीकयण कल एलॊ
एव.एन.डडब्फी फनलाना ाशते शैं, तो वॊऩका इव कय वकते शैं।
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92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA,
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132 2019
वॊऩूणा प्राणप्रततत्टठत 22 गेज ळुद्ध स्टीर भें तनसभात अखॊडडत
ऩुरुषाकाय शतन मॊर
ऩुरुऴाकाय ळतन मॊि (स्टीर भें) को तीव्र प्रबालळारी फनाने शेतु ळतन की कायक धातु ळुद्ध
स्टीर(रोशे) भें फनामा गमा शैं। त्जव के प्रबाल वे वाधक को तत्कार राब प्राप्त शोता शैं। महद
जन्भ कुॊ डरी भें ळतन प्रततकू र शोने ऩय व्मत्क्त को अनेक कामों भें अवपरता प्राप्त शोती शै, कबी
व्मलवाम भें घटा, नौकयी भें ऩयेळानी, लाशन दुघाटना, गृश क्रेळ आहद ऩयेळानीमाॊ फढ़ती जाती शै
ऐवी त्स्थततमों भें प्राणप्रततत्टठत ग्रश ऩीडा तनलायक ळतन मॊि की अऩने को व्मऩाय स्थान मा घय भें
स्थाऩना कयने वे अनेक राब सभरते शैं। महद ळतन की ढैमा मा वाढ़ेवाती का वभम शो तो इवे
अलश्म ऩूजना ाहशए। ळतनमॊि के ऩूजन भाि वे व्मत्क्त को भृत्मु, कजा, कोटाके ळ, जोडो का ददा,
फात योग तथा रम्फे वभम के वबी प्रकाय के योग वे ऩयेळान व्मत्क्त के सरमे ळतन मॊि अधधक
राबकायी शोगा। नौकयी ऩेळा आहद के रोगों को ऩदौन्नतत बी ळतन द्वारा शी सभरती शै अत् मश
मॊि अतत उऩमोगी मॊि शै त्जवके द्वारा ळीघ्र शी राब ऩामा जा वकता शै।
भूल्म: 1225 से 8200 >> Shop Online | Order Now
वॊऩूणा प्राणप्रततत्टठत
22 गेज ळुद्ध स्टीर भें तनसभात अखॊडडत
ळतन तैततवा मॊि
ळतनग्रश वे वॊफॊधधत ऩीडा के तनलायण शेतु वलळेऴ राबकायी मॊि।
भूल्म: 640 से 12700 >> Shop Online | Order Now
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133 2019
नलयत्न जडडत श्री मॊि
ळास्ि ल न के अनुवाय ळुद्ध वुलणा मा
यजत भें तनसभात श्री मॊि के ायों औय
महद नलयत्न जडला ने ऩय मश नलयत्न
जडडत श्री मॊि कशराता शैं। वबी यत्नो को
उवके तनत्श् त स्थान ऩय जड कय र के ट
के रूऩ भें धायण कयने वे व्मत्क्त को
अनॊत एश्लमा एलॊ रक्ष्भी की प्रात्प्त शोती
शैं। व्मत्क्त को एवा आबाव शोता शैं जैवे
भाॊ रक्ष्भी उवके वाथ शैं। नलग्रश को श्री
मॊि के वाथ रगाने वे ग्रशों की अळुब
दळा का धायणकयने लारे व्मत्क्त ऩय
प्रबाल नशीॊ शोता शैं।
गरे भें शोने के कायण मॊि ऩवलि यशता शैं एलॊ स्नान कयते वभम इव मॊि ऩय स्ऩळा कय जो
जर त्रफॊदु ळयीय को रगते शैं, लश गॊगा जर के वभान ऩवलि शोता शैं। इव सरमे इवे वफवे
तेजस्ली एलॊ परदातम कशजाता शैं। जैवे अभृत वे उत्तभ कोई औऴधध नशीॊ, उवी प्रकाय
रक्ष्भी प्रात्प्त के सरमे श्री मॊि वे उत्तभ कोई मॊि वॊवाय भें नशीॊ शैं एवा ळास्िोक्त ल न शैं।
इव प्रकाय के नलयत्न जडडत श्री मॊि गुरूत्ल कामाारम द्वाया ळुब भुशूता भें प्राण प्रततत्टठत
कयके फनालाए जाते शैं। Rs: 4600, 5500, 6400 वे 10,900 वे अधधक
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अधधक जानकायी शेतु वॊऩका कयें।
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134 2019
भॊि सवद्ध लाशन दुघाटना नाळक भारुतत मॊि
ऩौयाणणक ग्रॊथो भें उल्रेख शैं की भशाबायत के मुद्ध के वभम अजुान के यथ के अग्रबाग ऩय भारुतत ध्लज
एलॊ भारुतत मन्ि रगा शुआ था। इवी मॊि के प्रबाल के कायण वॊऩूणा मुद्ध के दौयान शज़ायों-राखों प्रकाय के आग्नेम
अस्ि-ळस्िों का प्रशाय शोने के फाद बी अजुान का यथ जया बी षततग्रस्त नशीॊ शुआ। बगलान श्री कृ टण भारुतत मॊि
के इव अद्भुत यशस्म को जानते थे फक त्जव यथ मा लाशन की यषा स्लमॊ श्री भारुतत नॊदन कयते शों, लश
दुघाटनाग्रस्त कै वे शो वकता शैं। लश यथ मा लाशन तो लामुलेग वे, तनफााधधत रुऩ वे अऩने रक्ष्म ऩय वलजम ऩतका
रशयाता शुआ ऩशुॊ ेगा। इवी सरमे श्री कृ टण नें अजुान के यथ ऩय श्री भारुतत मॊि को अॊफकत कयलामा था।
त्जन रोगों के स्कू टय, काय, फव, ट्रक इत्माहद लाशन फाय-फाय दुघाटना ग्रस्त शो यशे शो!, अनालश्मक लाशन
को नुषान शो यशा शों! उन्शें शानी एलॊ दुघाटना वे यषा के उद्देश्म वे अऩने लाशन ऩय भॊि सवद्ध श्री भारुतत मॊि अलश्म
रगाना ाहशए। जो रोग ट्रान्स्ऩोहटिंग (ऩरयलशन) के व्मलवाम वे जुडे शैं उनको श्रीभारुतत मॊि को अऩने लाशन भें
अलश्म स्थावऩत कयना ाहशए, क्मोफक, इवी व्मलवाम वे जुडे वैकडों रोगों का अनुबल यशा शैं की श्री भारुतत मॊि
को स्थावऩत कयने वे उनके लाशन अधधक हदन तक अनालश्मक ख ो वे एलॊ दुघाटनाओॊ वे वुयक्षषत यशे शैं। शभाया
स्लमॊका एलॊ अन्म वलद्वानो का अनुबल यशा शैं, की त्जन रोगों ने श्री भारुतत मॊि अऩने लाशन ऩय रगामा शैं, उन
रोगों के लाशन फडी वे फडी दुघाटनाओॊ वे वुयक्षषत यशते शैं। उनके लाशनो को कोई वलळेऴ नुक्ळान इत्माहद नशीॊ शोता
शैं औय नाशीॊ अनालश्मक रुऩ वे उवभें खयाफी आतत शैं।
वास्तु प्रमोग भें भारुतत मॊर: मश भारुतत नॊदन श्री शनुभान जी का मॊि शै। महद कोई जभीन त्रफक नशीॊ यशी शो, मा
उव ऩय कोई लाद-वललाद शो, तो इच्छा के अनुरूऩ लशॉ जभीन उध त भूल्म ऩय त्रफक जामे इव सरमे इव भारुतत मॊि
का प्रमोग फकमा जा वकता शैं। इव भारुतत मॊि के प्रमोग वे जभीन ळीघ्र त्रफक जाएगी मा वललादभुक्त शो जाएगी।
इव सरमे मश मॊि दोशयी ळत्क्त वे मुक्त शै।
भारुतत मॊि के वलऴम भें अधधक जानकायी के सरमे गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें।
भूल्म Rs- 325 से 12700 तक
श्री शनुभान मॊि ळास्िों भें उल्रेख शैं की श्री शनुभान जी को बगलान वूमादेल ने ब्रह्भा जी के आदेळ ऩय
शनुभान जी को अऩने तेज का वौलाॉ बाग प्रदान कयते शुए आळीलााद प्रदान फकमा था, फक भैं शनुभान को वबी ळास्ि
का ऩूणा सान दूॉगा। त्जववे मश तीनोरोक भें वला श्रेटठ लक्ता शोंगे तथा ळास्ि वलद्या भें इन्शें भशायत शासवर शोगी
औय इनके वभन फरळारी औय कोई नशीॊ शोगा। जानकायो ने भतानुवाय शनुभान मॊि की आयाधना वे ऩुरुऴों की
वलसबन्न फीभारयमों दूय शोती शैं, इव मॊि भें अद्भुत ळत्क्त वभाहशत शोने के कायण व्मत्क्त की स्लप्न दोऴ, धातु योग,
यक्त दोऴ, लीमा दोऴ, भूछाा, नऩुॊवकता इत्माहद अनेक प्रकाय के दोऴो को दूय कयने भें अत्मन्त राबकायी शैं। अथाात
मश मॊि ऩौरुऴ को ऩुटट कयता शैं। श्री शनुभान मॊि व्मत्क्त को वॊकट, लाद-वललाद, बूत-प्रेत, द्मूत फक्रमा, वलऴबम, ोय
बम, याज्म बम, भायण, वम्भोशन स्तॊबन इत्माहद वे वॊकटो वे यषा कयता शैं औय सववद्ध प्रदान कयने भें वषभ शैं।
श्री शनुभान मॊि के वलऴम भें अधधक जानकायी के सरमे गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें।
भूल्म Rs- 910 से 12700 तक
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135 2019
ववलबन्न देवताओॊ के मॊर
गणेश मॊर भशाभृत्मुॊजम मॊि याभ यषा मॊि याज
गणेश मॊर (सॊऩूणा फीज भॊर सहहत) भशाभृत्मुॊजम कल मॊि याभ मॊि
गणेश लसि मॊर भशाभृत्मुॊजम ऩूजन मॊि द्वादळाषय वलटणु भॊि ऩूजन मॊि
एकाऺय गणऩतत मॊर भशाभृत्मुॊजम मुक्त सळल खप्ऩय भाशा सळल
मॊि
वलटणु फीवा मॊि
हरयरा गणेश मॊर सळल ऩॊ ाषयी मॊि गरुड ऩूजन मॊि
कु फेय मॊर सळल मॊि ध ॊताभणी मॊि याज
श्री द्वादशाऺयी रुर ऩूजन मॊर अद्वद्वतीम वलाकाम्म सववद्ध सळल मॊि ध ॊताभणी मॊि
दत्तारम मॊर नृसवॊश ऩूजन मॊि स्लणााकऴाणा बैयल मॊि
दत्त मॊर ऩॊ देल मॊि शनुभान ऩूजन मॊि
आऩदुिायण फटुक बैयव मॊर वॊतान गोऩार मॊि शनुभान मॊि
फटुक मॊर श्री कृ टण अटटाषयी भॊि ऩूजन मॊि वॊकट भो न मॊि
व्मॊकटेश मॊर कृ टण फीवा मॊि लीय वाधन ऩूजन मॊि
कातावीमााजुान ऩूजन मॊर वला काभ प्रद बैयल मॊि दक्षषणाभूतता ध्मानभ ् मॊि
भनोकाभना ऩूतता एवॊ कष्ट तनवायण हेतु ववशेष मॊर
व्माऩाय वृवि कायक मॊर अभृत तत्ल वॊजीलनी कामा कल्ऩ मॊि िम ताऩोंवे भुत्क्त दाता फीवा मॊि
व्माऩाय वृवि मॊर वलजमयाज ऩॊ दळी मॊि भधुभेश तनलायक मॊि
व्माऩाय वधाक मॊर वलद्यामळ वलबूतत याज वम्भान प्रद सवद्ध फीवा
मॊि
ज्लय तनलायण मॊि
व्माऩायोन्नतत कायी लसि मॊर वम्भान दामक मॊि योग कटट दरयद्रता नाळक मॊि
बाग्म वधाक मॊर वुख ळाॊतत दामक मॊि योग तनलायक मॊि
स्वश्स्तक मॊर फारा मॊि तनाल भुक्त फीवा मॊि
सवा कामा फीसा मॊर फारा यषा मॊि वलद्मुत भानव मॊि
कामा लसवि मॊर गबा स्तम्बन मॊि गृश करश नाळक मॊि
सुख सभृवि मॊर वॊतान प्रात्प्त मॊि करेळ शयण फत्त्तवा मॊि
सवा रयवि लसवि प्रद मॊर प्रवूता बम नाळक मॊि लळीकयण मॊि
सवा सुख दामक ऩैंसहठमा मॊर प्रवल-कटटनाळक ऩॊ दळी मॊि भोहशतन लळीकयण मॊि
ऋवि लसवि दाता मॊर ळाॊतत गोऩार मॊि कणा वऩळा नी लळीकयण मॊि
सवा लसवि मॊर त्रिळूर फीळा मॊि लाताारी स्तम्बन मॊि
साफय लसवि मॊर ऩॊ दळी मॊि (फीवा मॊि मुक्त ायों
प्रकायके )
लास्तु मॊि
शाफयी मॊर फेकायी तनलायण मॊि श्री भत्स्म मॊि
लसिाश्रभ मॊर ऴोडळी मॊि लाशन दुघाटना नाळक मॊि
ज्मोततष तॊर ऻान ववऻान प्रद लसि फीसा
मॊर
अडवहठमा मॊि प्रेत-फाधा नाळक मॊि
ब्रह्भाण्ड साफय लसवि मॊर अस्वीमा मॊि बूतादी व्माधधशयण मॊि
कु ण्डलरनी लसवि मॊर ऋवद्ध कायक मॊि कटट तनलायक सववद्ध फीवा मॊि
क्राश्न्त औय श्रीवधाक चौंतीसा मॊर भन लाॊतछत कन्मा प्रात्प्त मॊि बम नाळक मॊि
श्री ऺेभ कल्माणी लसवि भहा मॊर वललाशकय मॊि स्लप्न बम तनलायक मॊि
136 2019
ऻान दाता भहा मॊर रग्न वलघ्न तनलायक मॊि कु दृत्टट नाळक मॊि
कामा कल्ऩ मॊर रग्न मोग मॊि श्री ळिु ऩयाबल मॊि
दीधाामु अभृत तत्व सॊजीवनी मॊर दरयद्रता वलनाळक मॊि ळिु दभनाणाल ऩूजन मॊि
भॊर लसि ववशेष दैवी मॊर सूधच
आद्य शश्तत दुगाा फीसा मॊर (अॊफाजी फीसा मॊर) वयस्लती मॊि
भहान शश्तत दुगाा मॊर (अॊफाजी मॊर) वप्तवती भशामॊि(वॊऩूणा फीज भॊि वहशत)
नव दुगाा मॊर कारी मॊि
नवाणा मॊर (चाभुॊडा मॊर) श्भळान कारी ऩूजन मॊि
नवाणा फीसा मॊर दक्षषण कारी ऩूजन मॊि
चाभुॊडा फीसा मॊर ( नवग्रह मुतत) वॊकट भोध नी कासरका सववद्ध मॊि
त्ररशूर फीसा मॊर खोडडमाय मॊि
फगरा भुखी मॊर खोडडमाय फीवा मॊि
फगरा भुखी ऩूजन मॊर अन्नऩूणाा ऩूजा मॊि
याज याजेववयी वाॊिा कल्ऩरता मॊर एकाॊषी श्रीपर मॊि
भॊर लसि ववशेष रक्ष्भी मॊर सूधच
श्री मॊर (रक्ष्भी मॊर) भशारक्ष्भमै फीज मॊि
श्री मॊर (भॊर यहहत) भशारक्ष्भी फीवा मॊि
श्री मॊर (सॊऩूणा भॊर सहहत) रक्ष्भी दामक सवद्ध फीवा मॊि
श्री मॊर (फीसा मॊर) रक्ष्भी दाता फीवा मॊि
श्री मॊर श्री सूतत मॊर रक्ष्भी गणेळ मॊि
श्री मॊर (कु भा ऩृष्ठीम) ज्मेटठा रक्ष्भी भॊि ऩूजन मॊि
रक्ष्भी फीसा मॊर कनक धाया मॊि
श्री श्री मॊर (श्रीश्री रलरता भहात्ररऩुय सुन्दमै श्री भहारक्ष्भमैं श्री भहामॊर) लैबल रक्ष्भी मॊि (भशान सववद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊि)
अॊकात्भक फीसा मॊर
ताम्र ऩर ऩय सुवणा ऩोरीस
(Gold Plated)
ताम्र ऩर ऩय यजत ऩोरीस
(Silver Plated)
ताम्र ऩर ऩय
(Copper)
वाईज भूल्म वाईज भूल्म वाईज भूल्म
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”
550
910
1450
2350
3700
9100
12700
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”
370
640
1050
1450
2800
4600
9100
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”
325
550
910
1225
2350
4150
9100
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137 2019
2019 भासवक ऩॊ ाॊग
Panchang
दद वार माह पक्ष
द्विद्वि
समाद्वि नक्षत्र समाद्वि योग समाद्वि करण समाद्वि
चंद्र
राद्वश
समाद्वि
1 वोभ ैि कृ टण एकादळी 06:04 धतनटठा 21:53 वाध्म 20:28 कौरल 19:09 भकय 08:22
2 भॊगर ैि कृ टण द्वादळी 08:26 ळतसबऴा 24:48 ळुब 21:18 तैततर 08:26 कुॊ ब -
3 फुध ैि कृ टण िमोदळी 10:48 ऩूलााबाद्रऩद 27:24 ळुक्र 21:52 लणणज 10:48 कुॊ ब 20:48
4 गुरु ैि कृ टण तुदाळी 12:47 उत्तयाबाद्रऩद 29:35 ब्रह्भ 22:08 ळकु तन 12:47 भीन -
5 ळुक्र ैि कृ टण अभालस्मा 14:20 येलतत - इन्द्र 22:05 भघा 14:20 भीन -
6 ळतन ैि ळुक्र प्रततऩदा 15:27 येलतत 07:22 लैधृतत 21:42 फल 15:27 भीन 07:23
7 यवल ैि ळुक्र द्वद्वतीमा 16:08 अत्श्लनी 08:44 वलऴकुॊ ब 21:00 कौरल 16:08 भेऴ -
8 वोभ ैि ळुक्र तृतीमा 16:25 बयणी 09:42 प्रीतत 20:00 गय 16:25 भेऴ 15:54
9 भॊगर ैि ळुक्र तुथॉ 16:19 कृ ततका 10:18 आमुटभान 18:44 वलत्टट 16:19 लृऴ -
10 फुध ैि ळुक्र ऩॊ भी 15:50 योहशणण 10:33 वौबाग्म 17:10 फारल 15:50 लृऴ 22:33
11 गुरु ैि ळुक्र ऴटठी 14:57 भृगसळया 10:25 ळोबन 15:18 तैततर 14:57 सभथुन -
12 ळुक्र ैि ळुक्र वप्तभी 13:39 आद्रा 09:53 अततगॊड 13:08 लणणज 13:39 सभथुन -
13 ळतन ैि ळुक्र अटटभी 11:56 ऩुनलावु 08:58 वुकभाा 10:39 फल 11:56 सभथुन 03:15
14 यवल ैि ळुक्र
नलभी-
दळभी
09:49 ऩुटम 07:39 धृतत 07:52 कौरल 09:49 कका -
138 2019
15 वोभ ैि ळुक्र
दळभी -
एकादळी
07:20-
04:33
भघा 28:0 गॊड 25:28 गय 07:20 कका 06:00
16 भॊगर ैि ळुक्र द्वादळी 03:34 ऩूलाापाल्गुनी 25:50 लृवद्ध 21:58 फल 15:05 सवॊश -
17 फुध ैि ळुक्र िमोदळी 22:29 उत्तयापाल्गुनी 23:35 ध्रुल 18:24 कौरल 12:02 सवॊश 07:17
18 गुरु ैि ळुक्र तुदाळी 19:29 शस्त 21:25 व्माघात 14:53 गय 08:58 कन्मा -
19 ळुक्र ैि ळुक्र ऩूणणाभा 16:41 ध िा 19:29 शऴाण 11:31 वलत्टट 06:03 कन्मा 08:25
20 ळतन लैळाख कृ टण एकभ 14:17 स्लाती 17:57 लज्र 08:26 कौरल 14:17 तुरा -
21 यवल लैळाख कृ टण द्वद्वतीमा 12:26 वलळाखा 17:00 व्मततऩात 27:37 गय 12:26 तुरा 11:12
22 वोभ लैळाख कृ टण तृतीमा 11:15 अनुयाधा 16:45 लरयमान 26:5 वलत्टट 11:15 लृत्श् क -
23 भॊगर लैळाख कृ टण तुथॉ 10:51 जेटठा 17:16 ऩरयग्रश 25:10 फारल 10:51 लृत्श् क 17:17
24 फुध लैळाख कृ टण ऩॊ भी 11:16 भूर 18:34 सळल 24:53 तैततर 11:16 धनु -
25 गुरु लैळाख कृ टण ऴटठी 12:28 ऩूलााऴाढ़ 20:36 सवद्ध 25:9 लणणज 12:28 धनु -
26 ळुक्र लैळाख कृ टण वप्तभी 14:20 उत्तयाऴाढ़ 23:13 वाध्म 25:50 फल 14:20 धनु 03:14
27 ळतन लैळाख कृ टण अटटभी 16:41 श्रलण 26:12 ळुब 26:46 कौरल 16:41 भकय -
28 यवल लैळाख कृ टण नलभी 19:14 धतनटठा 29:17 ळुक्र 27:47 तैततर 05:57 भकय 15:46
29 वोभ लैळाख कृ टण दळभी 21:46 ळतसबऴा .... ब्रह्भ 28:41 लणणज 08:32 कुॊ ब -
30 भॊगर लैळाख कृ टण एकादळी 24:03 ळतसबऴा 08:14 इन्द्र 29:20 फल 10:57 कुॊ ब -
139 2019
2019 भासवक व्रत-ऩला-त्मौशाय
हद वाय भाह ऩऺ ततधथ सभाश्प्त प्रभुख व्रत-त्मोहाय
1 वोभ ैि कृ टण एकादळी 06:04 ऩाऩभो नी एकादळी, भूखा हदलव
2 भॊगर ैि कृ टण द्वादळी 08:26 भशाद्वादळी, प्रदोऴ व्रत, बौभ प्रदोऴ व्रत,
3 फुध ैि कृ टण िमोदळी 10:48
भासवक सळल तुदाळी व्रत/ सळलयात्रि व्रत,
गॊगा लरूणा वॊगभ ऩय स्नान, दभनोत्वल, भधुश्रला िमोदळी,
4 गुरु ैि कृ टण तुदाळी 12:47 श्राद्ध-तऩाण इत्माहद शेतु उत्तभ ैिी अभालस्मा
5 ळुक्र ैि कृ टण अभालस्मा 14:20
व्रत-स्नान-दान श्राद्ध शेतु उत्तभ ैिी अभालस्मा, आज के हदन गॊगा
स्नान वे वशस्ि गामों के दान का पर प्राप्त शोता शै 2075
(वलयोधकृ त) वलक्रभीम वभाप्त, अन्लाधान,
6 ळतन ैि ळुक्र प्रततऩदा 15:27
ैि भाव ळुक्र ऩष आयम्ब, ैि लावत्न्तक नलयािायम्ब, वलक्रभ
वम्लत ् 2076 (ऩरयधाली) प्रायम्ब, करळ स्थाऩन, ध्लजायोशण,
लऴाऩतत ऩूजा, कल्ऩाहद, आयोग्म व्रत, वल व्रत, नल वम्लत्वयोत्वल,
गुडी ऩडला, उगाहद, ॊद्र दळान , लवॊत ऋतू
7 यवल ैि ळुक्र द्वद्वतीमा 16:08
गणगौय, गणगौयी व्रत, वौबाग्म ळमन तृतीमा, वामॊ दोरारुढ़ सळल
गौयी ऩूजन, वयशुर (त्रफशाय), भनोयथ तृतीमा व्रत, अरून्धती व्रत-
ऩूजन, भन्लाहद, याटट्रीम ैि भावायम्ब, याटट्रीम ळक वम्लत ् 1941
प्रायम्ब,
8 वोभ ैि ळुक्र तृतीमा 16:25 गणगौय, गणगौयी व्रत, वौबाग्म वुॊदयी व्रत
9 भॊगर ैि ळुक्र तुथॉ 16:19
लयद तुथॉ, लैनामकी श्री गणेळ तुथॉ व्रत, ( ॊद्र अस्त यात 08: 94
फजे)
10 फुध ैि ळुक्र ऩॊ भी 15:50
ऩॊ भी, कल्ऩाहद, डोरोत्वल, श्री वूमा ऴटठी व्रत (वामान्शव्मावऩनी
ऴटठी भें),
11 गुरु ैि ळुक्र ऴटठी 14:57 स्कन्द ऴटठी व्रत, श्री अळोक ऴटठी व्रत (ऩ.फॊ),
12 ळुक्र ैि ळुक्र वप्तभी 13:39
लावन्ती दुगाा ऩूजायम्ब, भध्माह्न कारीन भशातनळा ऩूजा, श्री
दुगााटटभी, बलानी उत्ऩत्त्त, अळोक कसरका प्राळन, श्री भशाटटभी 8
व्रत, श्री अळोकाटटभी, अन्नऩूणाा ऩूजन
13 ळतन ैि ळुक्र अटटभी 11:56
वूमोदम कारीन श्री दुगााटटभी, बलानी उत्ऩत्त्त, अळोक कसरका
प्राळन, श्री भशाटटभी 8 व्रत, श्री अळोकाटटभी, अन्नऩूणाा ऩूजन
भध्माह्न कारीन श्री याभनलभी व्रत, श्री दुगाानलभी, श्री याभ-जन्भ
भशोत्वल, ताया जमन्ती, ैि नलयाि वभाप्त, ऩुटम नषि 08:58 फजे
140 2019
वे
14 यवल ैि ळुक्र
नलभी-
दळभी
09:49
वूमोदम कारीन याभनलभी व्रत, श्री दुगाानलभी, श्री याभ-जन्भ
भशोत्वल, ताया जमन्ती, ैि नलयाि वभाप्त, ऩुटम नषि 07:40 फजे
तक, वूमा की भेऴ वॊक्रात्न्त का वाभान्म ऩुण्मकार वूमोदम वे
वूमाास्त तक, खय (भीन) भाव वभाप्त, नलयाि व्रत का ऩायण, श्री
धभायाज दळभी, यवल दळभी ऩला,
15 वोभ ैि ळुक्र
दळभी -
एकादळी
07:20-
04:33
काभदा एकादळी व्रत,
16 भॊगर ैि ळुक्र द्वादळी 03:34
श्री वलटणु दोरोत्वल, भदन द्वादळी, प्रदोऴ व्रत, शरय दभनोत्वल, लाभन
द्वादळी, प्रदोऴ व्रत,
17 फुध ैि ळुक्र िमोदळी 22:29 प्रदोऴ व्रत, श्री भशालीय जमन्ती (जैन), अनॊग िमोदळी व्रत,
18 गुरु ैि ळुक्र तुदाळी 19:29 दभनक तुदाळी
19 ळुक्र ैि ळुक्र ऩूणणाभा 16:41
स्नान-दान-व्रत इत्माहद शेतु उत्तभ ैिी ऩूणणाभा, ाॊडक ऩूजा (ऩ.फॊ),
अन्लाधान, भन्लाहद, वलादेल दभनकोत्वल, श्री शनुभान जमॊती, लैळाख
भावीम व्रत-मभ-तनमभाहद प्रायम्ब,
20 ळतन लैळाख कृ टण एकभ 14:17 लैळाख कृ टण ऩषायम्ब,
21 यवल लैळाख कृ टण द्वद्वतीमा 12:26 आळा द्वद्वतीमा
22 वोभ लैळाख कृ टण तृतीमा 11:15 वॊकटटी श्री गणेळ तुथॉ व्रत, ( न्द्रोदम.या.20.04),
23 भॊगर लैळाख कृ टण तुथॉ 10:51 -
24 फुध लैळाख कृ टण ऩॊ भी 11:16 -
25 गुरु लैळाख कृ टण ऴटठी 12:28 -
26 ळुक्र लैळाख कृ टण वप्तभी 14:20 श्री ळीतरावप्तभी व्रत,, काराटटभी, बानु वप्तभी
27 ळतन लैळाख कृ टण अटटभी 16:41 श्री ळीतराटटभी व्रत, अटटका, काराटटभी
28 यवल लैळाख कृ टण नलभी 19:14 त्ण्डका नलभी व्रत
29 वोभ लैळाख कृ टण दळभी 21:46 -
30 भॊगर लैळाख कृ टण एकादळी 24:03 लरुधथनी एकादळी व्रत वफका,
141 2019
यासळ यत्न
भेऴ यासळ: लृऴब यासळ: सभथुन यासळ: कका यासळ: सवॊश यासळ: कन्मा यासळ:
भूॊगा शीया ऩन्ना भोती भाणेक ऩन्ना
Red Coral
(Special)
Diamond
(Special)
Green Emerald
(Special)
Naturel Pearl
(Special)
Ruby
(Old Berma)
(Special)
Green
Emerald
(Special)
5.25" Rs. 1050 10 cent Rs. 4100 5.25" Rs. 9100 5.25" Rs. 910 2.25" Rs. 12500 5.25" Rs. 9100
6.25" Rs. 1250 20 cent Rs. 8200 6.25" Rs. 12500 6.25" Rs. 1250 3.25" Rs. 15500 6.25" Rs. 12500
7.25" Rs. 1450 30 cent Rs. 12500 7.25" Rs. 14500 7.25" Rs. 1450 4.25" Rs. 28000 7.25" Rs. 14500
8.25" Rs. 1800 40 cent Rs. 18500 8.25" Rs. 19000 8.25" Rs. 1900 5.25" Rs. 46000 8.25" Rs. 19000
9.25" Rs. 2100 50 cent Rs. 23500 9.25" Rs. 23000 9.25" Rs. 2300 6.25" Rs. 82000 9.25" Rs. 23000
10.25" Rs. 2800 10.25" Rs. 28000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs. 28000
** All Weight In Rati
All Diamond are Full
White Colour.
** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati
** All Weight In
Rati
तुरा यासळ: लृत्श् क यासळ: धनु यासळ: भकय यासळ: कुॊ ब यासळ: भीन यासळ:
शीया भूॊगा ऩुखयाज नीरभ नीरभ ऩुखयाज
Diamond
(Special)
Red Coral
(Special)
Y.Sapphire
(Special)
B.Sapphire
(Special)
B.Sapphire
(Special)
Y.Sapphire
(Special)
10 cent Rs. 4100 5.25" Rs. 1050 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000
20 cent Rs. 8200 6.25" Rs. 1250 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000
30 cent Rs. 12500 7.25" Rs. 1450 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000
40 cent Rs. 18500 8.25" Rs. 1800 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000
50 cent Rs. 23500 9.25" Rs. 2100 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000
10.25" Rs. 2800 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000
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* उऩमोक्त लजन औय भूल्म वे अधधक औय कभ लजन औय भूल्म के यत्न एलॊ उऩयत्न बी शभाये मशा व्माऩायी भूल्म ऩय
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142 2019
श्रीकृ टण फीवा मॊि
फकवी बी व्मत्क्त का जीलन तफ आवान फन जाता शैं जफ उवके ायों औय का भाशोर उवके अनुरुऩ उवके लळ
भें शों। जफ कोई व्मत्क्त का आकऴाण दुवयो के उऩय एक ुम्फकीम प्रबाल डारता शैं, तफ रोग उवकी वशामता एलॊ
वेला शेतु तत्ऩय शोते शै औय उवके प्राम् वबी कामा त्रफना अधधक कटट ल
ऩयेळानी वे वॊऩन्न शो जाते शैं। आज के बौततकता लाहद मुग भें शय व्मत्क्त
के सरमे दूवयो को अऩनी औय खी ने शेतु एक प्रबालळासर ुॊफकत्ल को
कामभ यखना अतत आलश्मक शो जाता शैं। आऩका आकऴाण औय व्मत्क्तत्ल
आऩके ायो ओय वे रोगों को आकवऴात कये इव सरमे वयर उऩाम शैं,
श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर। क्मोफक बगलान श्री कृ टण एक अरौफकल एलॊ हदलम
ुॊफकीम व्मत्क्तत्ल के धनी थे। इवी कायण वे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर के ऩूजन
एलॊ दळान वे आकऴाक व्मत्क्तत्ल प्राप्त शोता शैं।
श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर के वाथ व्मत्क्तको दृढ़ इच्छा ळत्क्त एलॊ उजाा
प्राप्त शोती शैं, त्जस्वे व्मत्क्त शभेळा एक बीड भें शभेळा आकऴाण का कें द्र
यशता शैं।
महद फकवी व्मत्क्त को अऩनी प्रततबा ल आत्भवलश्लाव के स्तय भें
लृवद्ध, अऩने सभिो ल ऩरयलायजनो के त्रफ भें रयश्तो भें वुधाय कयने की
ईच्छा शोती शैं उनके सरमे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर का ऩूजन एक वयर ल वुरब
भाध्मभ वात्रफत शो वकता शैं।
श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर ऩय अॊफकत ळत्क्तळारी वलळेऴ येखाएॊ, फीज भॊि एलॊ
अॊको वे व्मत्क्त को अद्द्भुत आॊतरयक ळत्क्तमाॊ प्राप्त शोती शैं जो व्मत्क्त
को वफवे आगे एलॊ वबी षेिो भें अग्रणणम फनाने भें वशामक सवद्ध शोती शैं।
श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर के ऩूजन ल तनमसभत दळान के भाध्मभ वे बगलान
श्रीकृ टण का आळीलााद प्राप्त कय वभाज भें स्लमॊ का अद्वद्वतीम स्थान स्थावऩत कयें।
श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर अरौफकक ब्रह्भाॊडीम उजाा का वॊ ाय कयता शैं, जो एक प्राकृ त्त्त भाध्मभ वे व्मत्क्त के बीतय
वद्दबालना, वभृवद्ध, वपरता, उत्तभ स्लास््म, मोग औय ध्मान के सरमे एक ळत्क्तळारी भाध्मभ शैं!
 श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर के ऩूजन वे व्मत्क्त के वाभात्जक भान-वम्भान ल ऩद-प्रततटठा भें लृवद्ध शोती शैं।
 वलद्वानो के भतानुवाय श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर के भध्मबाग ऩय ध्मान मोग कें हद्रत कयने वे व्मत्क्त फक ेतना ळत्क्त जाग्रत
शोकय ळीघ्र उच् स्तय को प्राप्तशोती शैं।
 जो ऩुरुऴों औय भहशरा अऩने वाथी ऩय अऩना प्रबाल डारना ाशते शैं औय उन्शें अऩनी औय आकवऴात कयना ाशते
शैं। उनके सरमे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर उत्तभ उऩाम सवद्ध शो वकता शैं।
 ऩतत-ऩत्नी भें आऩवी प्रभ की लृवद्ध औय वुखी दाम्ऩत्म जीलन के सरमे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर राबदामी शोता शैं।
भूल्म:- Rs. 910 वे Rs. 12700 तक उप्रब्द्ध >> Shop Online
श्रीकृ टण फीवा कल
श्रीकृ टण फीवा कल को के लर
वलळेऴ ळुब भुशुता भें तनभााण फकमा
जाता शैं। कल को वलद्वान
कभाकाॊडी ब्राशभणों द्वाया ळुब भुशुता
भें ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे वलसळटट
तेजस्ली भॊिो द्वाया सवद्ध प्राण-
प्रततत्टठत ऩूणा ैतन्म मुक्त कयके
तनभााण फकमा जाता शैं। त्जव के
पर स्लरुऩ धायण कयता व्मत्क्त
को ळीघ्र ऩूणा राब प्राप्त शोता शैं।
कल को गरे भें धायण कयने वे
लशॊ अत्मॊत प्रबाल ळारी शोता शैं।
गरे भें धायण कयने वे कल
शभेळा रृदम के ऩाव यशता शैं त्जस्वे
व्मत्क्त ऩय उवका राब अतत तीव्र
एलॊ ळीघ्र सात शोने रगता शैं।
भूरम भार: 2350 >>Order Now
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143 2019
जैन धभाके वलसळटट मॊिो की वू ी
श्री ौफीव तीथिंकयका भशान प्रबावलत भत्कायी मॊि श्री एकाषी नारयमेय मॊि
श्री ोफीव तीथिंकय मॊि वलातो बद्र मॊि
कल्ऩलृष मॊि वला वॊऩत्त्तकय मॊि
ध ॊताभणी ऩाश्लानाथ मॊि वलाकामा-वला भनोकाभना सववद्धअ मॊि (१३० वलातोबद्र मॊि)
ध ॊताभणी मॊि (ऩैंवहठमा मॊि) ऋवऴ भॊडर मॊि
ध ॊताभणी क्र मॊि जगदलल्रब कय मॊि
श्री क्रे श्लयी मॊि ऋवद्ध सववद्ध भनोकाभना भान वम्भान प्रात्प्त मॊि
श्री घॊटाकणा भशालीय मॊि ऋवद्ध सववद्ध वभृवद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊि
श्री घॊटाकणा भशालीय वला सववद्ध भशामॊि
(अनुबल सवद्ध वॊऩूणा श्री घॊटाकणा भशालीय ऩतका मॊि)
वलऴभ वलऴ तनग्रश कय मॊि
श्री ऩद्मालती मॊि षुद्रो ऩद्रल तननााळन मॊि
श्री ऩद्मालती फीवा मॊि फृशच् क्र मॊि
श्री ऩाश्लाऩद्मालती ह्ींकाय मॊि लॊध्मा ळब्दाऩश मॊि
ऩद्मालती व्माऩाय लृवद्ध मॊि भृतलत्वा दोऴ तनलायण मॊि
श्री धयणेन्द्र ऩद्मालती मॊि काॊक लॊध्मादोऴ तनलायण मॊि
श्री ऩाश्लानाथ ध्मान मॊि फारग्रश ऩीडा तनलायण मॊि
श्री ऩाश्लानाथ प्रबुका मॊि रधुदेल कु र मॊि
बक्ताभय मॊि (गाथा नॊफय १ वे ४४ तक) नलगाथात्भक उलवग्गशयॊ स्तोिका वलसळटट मॊि
भणणबद्र मॊि उलवग्गशयॊ मॊि
श्री मॊि श्री ऩॊ भॊगर भशाश्रृत स्कॊ ध मॊि
श्री रक्ष्भी प्रात्प्त औय व्माऩाय लधाक मॊि ह्ीॊकाय भम फीज भॊि
श्री रक्ष्भीकय मॊि लधाभान वलद्या ऩट्ट मॊि
रक्ष्भी प्रात्प्त मॊि वलद्या मॊि
भशावलजम मॊि वौबाग्मकय मॊि
वलजमयाज मॊि डाफकनी, ळाफकनी, बम तनलायक मॊि
वलजम ऩतका मॊि बूताहद तनग्रश कय मॊि
वलजम मॊि ज्लय तनग्रश कय मॊि
सवद्ध क्र भशामॊि ळाफकनी तनग्रश कय मॊि
दक्षषण भुखाम ळॊख मॊि आऩत्त्त तनलायण मॊि
दक्षषण भुखाम मॊि ळिुभुख स्तॊबन मॊि
मॊर के ववषम भें अधधक जानकायी हेतु सॊऩका कयें।
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144 2019
घॊटाकणा भशालीय वला सववद्ध भशामॊि को
स्थाऩीत कयने वे वाधक की वला भनोकाभनाएॊ ऩूणा
शोती शैं। वला प्रकाय के योग बूत-प्रेत आहद उऩद्रल वे
यषण शोता शैं। जशयीरे औय हशॊवक प्राणीॊ वे वॊफॊधधत
बम दूय शोते शैं। अत्ग्न बम, ोयबम आहद दूय शोते
शैं।
दुटट ल अवुयी ळत्क्तमों वे उत्ऩन्न शोने लारे
बम वे मॊि के प्रबाल वे दूय शो जाते शैं।
मॊि के ऩूजन वे वाधक को धन, वुख, वभृवद्ध,
ऎश्लमा, वॊतत्त्त-वॊऩत्त्त आहद की प्रात्प्त शोती शैं।
वाधक की वबी प्रकाय की वात्त्लक इच्छाओॊ की ऩूतता
शोती शैं।
महद फकवी ऩरयलाय मा ऩरयलाय के वदस्मो ऩय
लळीकयण, भायण, उच् ाटन इत्माहद जादू-टोने लारे
प्रमोग फकमे गमें शोतो इव मॊि के प्रबाल वे स्लत्
नटट शो जाते शैं औय बवलटम भें महद कोई प्रमोग
कयता शैं तो यषण शोता शैं।
कु छ जानकायो के श्री घॊटाकणा भशालीय ऩतका
मॊि वे जुडे अद्द्भुत अनुबल यशे शैं। महद घय भें श्री
घॊटाकणा भशालीय ऩतका मॊि स्थावऩत फकमा शैं औय महद कोई इऴाा, रोब, भोश मा ळिुतालळ महद
अनुध त कभा कयके फकवी बी उद्देश्म वे वाधक को ऩयेळान कयने का प्रमाव कयता शैं तो मॊि के
प्रबाल वे वॊऩूणा ऩरयलाय का यषण तो शोता शी शैं, कबी-कबी ळिु के द्वाया फकमा गमा अनुध त कभा
ळिु ऩय शी उऩय उरट लाय शोते देखा शैं। भूल्म:- Rs. 2350 से Rs. 12700 तक उप्रब्ि
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145 2019
अभोघ भशाभृत्मुॊजम कल
अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल ल उल्रेणखत अन्म वाभग्रीमों को ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे
वलद्वान ब्राह्भणो द्वाया सवा राख भहाभृत्मुॊजम भॊर जऩ एलॊ दळाॊळ शलन द्वाया तनसभात फकमा
जाता शैं इवसरए कल अत्मॊत प्रबालळारी शोता शैं। >> Order Now
अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल
कल फनलाने शेतु:
अऩना नाभ, वऩता-भाता का नाभ,
गोि, एक नमा पोटो बेजे
याळी यत्न एलॊ उऩयत्न
वलळेऴ मॊि
शभायें मशाॊ वबी प्रकाय के मॊि वोने- ाॊहद-
ताम्फे भें आऩकी आलश्मक्ता के अनुवाय
फकवी बी बाऴा/धभा के मॊिो को आऩकी
आलश्मक डडजाईन के अनुवाय २२ गेज
ळुद्ध ताम्फे भें अखॊडडत फनाने की वलळेऴ
वुवलधाएॊ उऩरब्ध शैं।
वबी वाईज एलॊ भूल्म ल क्लासरहट के
अवरी नलयत्न एलॊ उऩयत्न बी उऩरब्ध शैं।
शभाये मशाॊ वबी प्रकाय के यत्न एलॊ उऩयत्न व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शैं। ज्मोततऴ कामा वे जुडे
फधु/फशन ल यत्न व्मलवाम वे जुडे रोगो के सरमे वलळेऴ भूल्म ऩय यत्न ल अन्म वाभग्रीमा ल अन्म
वुवलधाएॊ उऩरब्ध शैं।
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अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम
कल
दक्षषणा भाि: 10900
146 2019
अप्रैर 2019 -वलळेऴ मोग
कामा सववद्ध मोग
07 प्रात: 05:50 वे वुफश 08:05 तक 20 प्रात: 05:40 वे यात 10:18 तक
09 प्रात: 05:48 वे वुफश 09:05 तक 22 प्रात: 05:40 वे वॊध्मा 06:46 तक
10 प्रात: 05:46 वे वुफश 08:51 तक 27 प्रात: 05:37 वे यात 02:40 तक
त्ररऩुष्कय मोग (तीनगुना पर दामक )
20 वॊध्मा अगरे हदन यवल प्रात् 05:37 तक 30 याि 11:26 वे प्रात् 05:28 तक
21 प्रात: 05:37 वे दोऩशय 01:58 तक
14 वे प्रात: 05:21 वे यात 01:02 तक
ववघ्नकायक बरा
03 वुफश 10:56 वे याि 11:57 तक (ऩातार) 18 यात 07:26 वे अगरे हदन प्रात् 06:04 तक(ऩातार)
09 प्रात् 01:14 वे वॊध्मा 04:07 तक (स्लगा) 21 यात 11:53 वे अगरे हदन दोऩशय 11:25 तक (स्लगा)
12 दोऩशय 01:24 वे याि 12:53 तक (स्लगा) 25 यात 12:46 वे देय यात 01:40 तक(ऩातार)
15 वॊध्मा 05:46 वे अगरे हदन प्रात् 04:24 तक (ऩृ्ली) 29 प्रात् 08:50 वे याि 10:05 तक (स्लगा)
मोग पर :
 कामा सववद्ध मोग भे फकमे गमे ळुब कामा भे तनत्श् त वपरता प्राप्त शोती शैं, एवा ळास्िोक्त ल न शैं।
 त्रिऩुटकय मोग भें फकमे गमे ळुब कामो का राब तीन गुना शोता शैं। एवा ळास्िोक्त ल न शैं।
 यवल-ऩुटमाभृत मोग भे फकमे गमे ळुब कामा भे तनत्श् त ळुब पर प्राप्त शोते शैं, एवा ळास्िोक्त ल न शैं।
 ळास्िोंक्त भत वे वलघ्नकायक बद्रा मोग भें ळुब कामा कयना लत्जात शैं।
दैतनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान तासरका
गुसरक कार (ळुब) मभ कार (अळुब) याशु कार (अळुब)
लाय वभम अलधध वभम अलधध वभम अलधध
यवललाय 03:00 वे 04:30 12:00 वे 01:30 04:30 वे 06:00
वोभलाय 01:30 वे 03:00 10:30 वे 12:00 07:30 वे 09:00
भॊगरलाय 12:00 वे 01:30 09:00 वे 10:30 03:00 वे 04:30
फुधलाय 10:30 वे 12:00 07:30 वे 09:00 12:00 वे 01:30
गुरुलाय 09:00 वे 10:30 06:00 वे 07:30 01:30 वे 03:00
ळुक्रलाय 07:30 वे 09:00 03:00 वे 04:30 10:30 वे 12:00
ळतनलाय 06:00 वे 07:30 01:30 वे 03:00 09:00 वे 10:30
147 2019
हदन के ौघडडमे
वभम यवललाय वोभलाय भॊगरलाय फुधलाय गुरुलाय ळुक्रलाय ळतनलाय
06:00 वे 07:30 उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ चल काल
07:30 वे 09:00 चल काल उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ
09:00 वे 10:30 लाभ शुभ चल काल उद्वेग अमृि रोग
10:30 वे 12:00 अमृि रोग लाभ शुभ चल काल उद्वेग
12:00 वे 01:30 काल उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ चल
01:30 वे 03:00 शुभ चल काल उद्वेग अमृि रोग लाभ
03:00 वे 04:30 रोग लाभ शुभ चल काल उद्वेग अमृि
04:30 वे 06:00 उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ चल काल
यात के ौघडडमे
वभम यवललाय वोभलाय भॊगरलाय फुधलाय गुरुलाय ळुक्रलाय ळतनलाय
06:00 वे 07:30 शुभ चल काल उद्वेग अमृि रोग लाभ
07:30 वे 09:00 अमृि रोग लाभ शुभ चल काल उद्वेग
09:00 वे 10:30 चल काल उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ
10:30 वे 12:00 रोग लाभ शुभ चल काल उद्वेग अमृि
12:00 वे 01:30 काल उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ चल
01:30 वे 03:00 लाभ शुभ चल काल उद्वेग अमृि रोग
03:00 वे 04:30 उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ चल काल
04:30 वे 06:00 शुभ चल काल उद्वेग अमृि रोग लाभ
ळास्िोक्त भत के अनुवाय महद फकवी बी कामा का प्रायॊब ळुब भुशूता मा ळुब वभम ऩय फकमा जामे तो कामा भें
वपरता प्राप्त शोने फक वॊबालना ज्मादा प्रफर शो जाती शैं। इव सरमे दैतनक ळुब वभम ौघडडमा देखकय प्राप्त फकमा जा
वकता शैं।
नोट: प्राम् हदन औय यात्रि के ौघडडमे फक धगनती क्रभळ् वूमोदम औय वूमाास्त वे फक जाती शैं। प्रत्मेक ौघडडमे फक अलधध
1 घॊटा 30 सभतनट अथाात डेढ़ घॊटा शोती शैं। वभम के अनुवाय ौघडडमे को ळुबाळुब तीन बागों भें फाॊटा जाता शैं, जो क्रभळ्
ळुब, भध्मभ औय अळुब शैं।
ौघडडमे के स्लाभी ग्रश * शय कामा के सरमे ळुब/अभृत/राब का
ौघडडमा उत्तभ भाना जाता शैं।
* शय कामा के सरमे र/कार/योग/उद्वेग
का ौघडडमा उध त नशीॊ भाना जाता।
ळुब ौघडडमा भध्मभ ौघडडमा अळुब ौघडडमा
ौघडडमा स्लाभी ग्रश ौघडडमा स्लाभी ग्रश ौघडडमा स्लाभी ग्रश
ळुब गुरु य ळुक्र उद्बेग वूमा
अभृत ॊद्रभा कार ळतन
राब फुध योग भॊगर
148 2019
हदन फक शोया - वूमोदम वे वूमाास्त तक
लाय 1.घॊ 2.घॊ 3.घॊ 4.घॊ 5.घॊ 6.घॊ 7.घॊ 8.घॊ 9.घॊ 10.घॊ 11.घॊ 12.घॊ
यवललाय वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन
वोभलाय ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा
भॊगरलाय भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र
फुधलाय फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर
गुरुलाय गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध
ळुक्रलाय ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु
ळतनलाय ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र
यात फक शोया – वूमाास्त वे वूमोदम तक
यवललाय गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध
वोभलाय ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु
भॊगरलाय ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र
फुधलाय वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन
गुरुलाय ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा
ळुक्रलाय भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र
ळतनलाय फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर
शोया भुशूता को कामा सववद्ध के सरए ऩूणा परदामक एलॊ अ ूक भाना जाता शैं, हदन-यात के २४ घॊटों भें ळुब-अळुब
वभम को वभम वे ऩूला सात कय अऩने कामा सववद्ध के सरए प्रमोग कयना ाहशमे।
ववद्वानो के भत से इश्छित कामा लसवि के लरए ग्रह से सॊफॊधधत होया का चुनाव कयने से ववशेष राब
प्राप्त होता हैं।
 वूमा फक शोया वयकायी कामो के सरमे उत्तभ शोती शैं।
 ॊद्रभा फक शोया वबी कामों के सरमे उत्तभ शोती शैं।
 भॊगर फक शोया कोटा-क ेयी के कामों के सरमे उत्तभ शोती शैं।
 फुध फक शोया वलद्या-फुवद्ध अथाात ऩढाई के सरमे उत्तभ शोती शैं।
 गुरु फक शोया धासभाक कामा एलॊ वललाश के सरमे उत्तभ शोती शैं।
 ळुक्र फक शोया मािा के सरमे उत्तभ शोती शैं।
 ळतन फक शोया धन-द्रव्म वॊफॊधधत कामा के सरमे उत्तभ शोती शैं।
149 2019
वला योगनाळक मॊि/कल
भनुटम अऩने जीलन के वलसबन्न वभम ऩय फकवी ना फकवी वाध्म मा अवाध्म योग वे ग्रस्त शोता
शैं। उध त उऩ ाय वे ज्मादातय वाध्म योगो वे तो भुत्क्त सभर जाती शैं, रेफकन कबी-कबी वाध्म योग
शोकय बी अवाध्म शोजाते शैं, मा कोइ अवाध्म योग वे ग्रसवत शोजाते शैं। शजायो राखो रुऩमे ख ा कयने ऩय
बी अधधक राब प्राप्त नशीॊ शो ऩाता। ड क्टय द्वारा हदजाने लारी दलाईमा अल्ऩ वभम के सरमे कायगय
वात्रफत शोती शैं, एवी त्स्थती भें राब प्रात्प्त के सरमे व्मत्क्त एक ड क्टय वे दूवये ड क्टय के क्कय रगाने
को फाध्म शो जाता शैं।
बायतीम ऋऴीमोने अऩने मोग वाधना के प्रताऩ वे योग ळाॊतत शेतु वलसबन्न आमुलेय औऴधो के
अततरयक्त मॊि, भॊि एलॊ तॊि का उल्रेख अऩने ग्रॊथो भें कय भानल जीलन को राब प्रदान कयने का वाथाक
प्रमाव शजायो लऴा ऩूला फकमा था। फुवद्धजीलो के भत वे जो व्मत्क्त जीलनबय अऩनी हदन माा ऩय तनमभ,
वॊमभ यख कय आशाय ग्रशण कयता शैं, एवे व्मत्क्त को वलसबन्न योग वे ग्रसवत शोने की वॊबालना कभ शोती
शैं। रेफकन आज के फदरते मुग भें एवे व्मत्क्त बी बमॊकय योग वे ग्रस्त शोते हदख जाते शैं। क्मोफक वभग्र
वॊवाय कार के अधीन शैं। एलॊ भृत्मु तनत्श् त शैं त्जवे वलधाता के अराला औय कोई टार नशीॊ वकता,
रेफकन योग शोने फक त्स्थती भें व्मत्क्त योग दूय कयने का प्रमाव तो अलश्म कय वकता शैं। इव सरमे मॊर
भॊर एवॊ तॊर के कु ळर जानकाय वे मोग्म भागादळान रेकय व्मत्क्त योगो वे भुत्क्त ऩाने का मा उवके प्रबालो
को कभ कयने का प्रमाव बी अलश्म कय वकता शैं।
ज्मोततष द्ववद्या के कु ळर जानकय बी कार ऩुरुऴकी गणना कय अनेक योगो के अनेको यशस्म को
उजागय कय वकते शैं। ज्मोततऴ ळास्ि के भाध्मभ वे योग के भूरको ऩकडने भे वशमोग सभरता शैं, जशा
आधुतनक ध फकत्वा ळास्ि अषभ शोजाता शैं लशा ज्मोततऴ ळास्ि द्वाया योग के भूर(जड) को ऩकड कय
उवका तनदान कयना राबदामक एलॊ उऩामोगी सवद्ध शोता शैं।
शय व्मत्क्त भें रार यॊगकी कोसळकाए ऩाइ जाती शैं, त्जवका तनमभीत वलकाव क्रभ फद्ध तयीके वे
शोता यशता शैं। जफ इन कोसळकाओ के क्रभ भें ऩरयलतान शोता शै मा वलखॊडडन शोता शैं तफ व्मत्क्त के ळयीय
भें स्लास््म वॊफॊधी वलकायो उत्ऩन्न शोते शैं। एलॊ इन कोसळकाओ का वॊफॊध नल ग्रशो के वाथ शोता शैं।
त्जस्वे योगो के शोने के कायण व्मत्क्त के जन्भाॊग वे दळा-भशादळा एलॊ ग्रशो फक गो य त्स्थती वे प्राप्त
शोता शैं।
वला योग तनलायण कल एलॊ भशाभृत्मुॊजम मॊि के भाध्मभ वे व्मत्क्त के जन्भाॊग भें त्स्थत कभजोय
एलॊ ऩीडडत ग्रशो के अळुब प्रबाल को कभ कयने का कामा वयरता ऩूलाक फकमा जावकता शैं। जेवे शय
व्मत्क्त को ब्रह्भाॊड फक उजाा एलॊ ऩृ्ली का गुरुत्लाकऴाण फर प्रबालीत कताा शैं हठक उवी प्रकाय कल एलॊ
मॊि के भाध्मभ वे ब्रह्भाॊड फक उजाा के वकायात्भक प्रबाल वे व्मत्क्त को वकायात्भक उजाा प्राप्त शोती शैं
त्जस्वे योग के प्रबाल को कभ कय योग भुक्त कयने शेतु वशामता सभरती शैं।
योग तनलायण शेतु भशाभृत्मुॊजम भॊि एलॊ मॊि का फडा भशत्ल शैं। त्जस्वे हशन्दू वॊस्कृ तत का प्राम् शय
व्मत्क्त भशाभृत्मुॊजम भॊि वे ऩरयध त शैं।
150 2019
कवच के राब :
 एवा ळास्िोक्त ल न शैं त्जव घय भें भशाभृत्मुॊजम मॊि स्थावऩत शोता शैं लशा तनलाव कताा शो नाना
प्रकाय फक आधध-व्माधध-उऩाधध वे यषा शोती शैं।
 ऩूणा प्राण प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म मुक्त वला योग तनलायण कल फकवी बी उम्र एलॊ जातत धभा के
रोग ाशे स्िी शो मा ऩुरुऴ धायण कय वकते शैं।
 जन्भाॊगभें अनेक प्रकायके खयाफ मोगो औय खयाफ ग्रशो फक प्रततकू रता वे योग उतऩन्न शोते शैं।
 कु छ योग वॊक्रभण वे शोते शैं एलॊ कु छ योग खान-ऩान फक अतनमसभतता औय अळुद्धतावे उत्ऩन्न शोते शैं।
कल एलॊ मॊि द्वाया एवे अनेक प्रकाय के खयाफ मोगो को नटट कय, स्लास््म राब औय ळायीरयक यषण
प्राप्त कयने शेतु वला योगनाळक कल एलॊ मॊि वला उऩमोगी शोता शैं।
 आज के बौततकता लादी आधुतनक मुगभे अनेक एवे योग शोते शैं, त्जवका उऩ ाय ओऩयेळन औय दलावे
बी कहठन शो जाता शैं। कु छ योग एवे शोते शैं त्जवे फताने भें रोग हश फक ाते शैं ळयभ अनुबल कयते शैं
एवे योगो को योकने शेतु एलॊ उवके उऩ ाय शेतु वला योगनाळक कल एलॊ मॊि राबादातम सवद्ध शोता शैं।
 प्रत्मेक व्मत्क्त फक जेवे-जेवे आमु फढती शैं लैवे-लवै उवके ळयीय फक ऊजाा कभ शोती जाती शैं। त्जवके
वाथ अनेक प्रकाय के वलकाय ऩैदा शोने रगते शैं एवी त्स्थती भें उऩ ाय शेतु वलायोगनाळक कल एलॊ
मॊि परप्रद शोता शैं।
 त्जव घय भें वऩता-ऩुि, भाता-ऩुि, भाता-ऩुिी, मा दो बाई एक हश नषिभे जन्भ रेते शैं, तफ उवकी
भाता के सरमे अधधक कटटदामक त्स्थती शोती शैं। उऩ ाय शेतु भशाभृत्मुॊजम मॊि परप्रद शोता शैं।
 त्जव व्मत्क्त का जन्भ ऩरयधध मोगभे शोता शैं उन्शे शोने लारे भृत्मु तुल्म कटट एलॊ शोने लारे योग,
ध ॊता भें उऩ ाय शेतु वला योगनाळक कल एलॊ मॊि ळुब परप्रद शोता शैं।
नोट:- ऩूणा प्राण प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म मुक्त वला योग तनलायण कल एलॊ मॊि के फाये भें अधधक
जानकायी शेतु वॊऩका कयें। >> Shop Online | Order Now
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Our Goal
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151 2019
भॊर लसि कवच
मंत्र द्वसद्ध कवच को द्ववशेष प्रयोजन में उपयोग के द्वलए और शीघ्र प्रभाव शाली बनाने के द्वलए िेजस्तवी मंत्रो द्वारा शुभ महूित में शुभ
ददन को िैयार दकये जािे है । अलग-अलग कवच िैयार करने केद्वलए अलग-अलग िरह के मंत्रो का प्रयोग दकया जािा है ।
 क्यों चुने मंत्र द्वसद्ध कवच?  उपयोग में आसान कोई प्रद्विबन्ध नशीॊ  कोई द्ववशेष द्वनद्वि-द्वनयम नहीं  कोई बुरा प्रभाव नहीं
भॊर लसि कवच सूधच
राज राजेश्वरी कवच
Raj Rajeshwari Kawach ………..………………………
11000 द्ववष्णु बीसा कवच
Vishnu Visha Kawach ………..………………………... 2350
अमोघ महामृ्युंजय कवच
Amogh Mahamrutyunjay Kawach ……………………. 10900
रामभद्र बीसा कवच
Ramabhadra Visha Kawach ………..………………… 2350
दस महाद्ववद्या कवच
Dus Mahavidhya Kawach ………..……………………. 7300
कुबेर बीसा कवच
Kuber Visha Kawach ………..…………………………. 2350
श्री घंटाकणत महावीर सवत द्वसद्वद्ध प्रद कवच
Shri Ghantakarn Mahavir Sarv Siddhi Prad Kawach.. 6400
गरुड बीसा कवच
Garud Visha Kawach ………..………………………… 2350
सकल द्वसद्वद्ध प्रद गायत्री कवच
Sakal Siddhi Prad Gayatri Kawach …………………... 6400
लक्ष्मी बीसा कवच
Lakshmi Visha Kawach ……..…………………………. 2350
नवदुगात शद्वि कवच
Navdurga Shakiti Kawach ………..…………………… 6400
ससह बीसा कवच
Sinha Visha Kawach ………..…………………………. 2350
रसायन द्वसद्वद्ध कवच
Rasayan Siddhi Kawach ………..…………………….. 6400
नवातण बीसा कवच
Narvan Visha Kawach ………..……………………….. 2350
पंचदेव शद्वि कवच
Pancha Dev Shakti Kawach ………..…………………. 6400
संकट मोद्वचनी काद्वलका द्वसद्वद्ध कवच
Sankat Mochinee Kalika Siddhi Kawach ………..…… 2350
सवत कायत द्वसद्वद्ध कवच
Sarv Karya Siddhi Kawach ………..………………….. 5500
राम रक्षा कवच
Ram Raksha Kawach ………..………………………… 2350
सुवणत लक्ष्मी कवच
Suvarn Lakshmi Kawach ………..……………………. 4600
नारायण रक्षा कवच
Narayan Raksha Kavach .……………………………... 2350
स्तवणातकषतण भैरव कवच
Swarnakarshan Bhairav Kawach ………..…………… 4600
हनुमान रक्षा कवच
Hanuman Raksha Kawach ………..………………….. 2350
कालसपत शांद्वि कवच
Kalsharp Shanti Kawach ………..…………………….. 3700
भैरव रक्षा कवच
Bhairav Raksha Kawach ………………………………. 2350
द्ववलक्षण सकल राज वशीकरण कवच
Vilakshan Sakal Raj Vasikaran Kawach ………..…… 3250
शद्वन साड़ेसािी और ढ़ैया कष्ट द्वनवारण कवच
Shani Sadesatee aur Dhaiya Kasht Nivaran Kawach ….. 2350
इष्ट द्वसद्वद्ध कवच
Isht Siddhi Kawach ………..…………………………… 2800
श्राद्वपि योग द्वनवारण कवच
Sharapit Yog Nivaran Kawach ……..………………… 1900
परदेश गमन और लाभ प्राद्वि कवच
Pardesh Gaman Aur Labh Prapti Kawach ………...... 2350
द्ववष योग द्वनवारण कवच
Vish Yog Nivaran Kawach ……..……………………. 1900
श्रीदुगात बीसा कवच
Durga Visha Kawach ………..…………………………. 2350
सवतजन वशीकरण कवच
Sarvjan Vashikaran Kawach ……..…………………… 1450
कृ ष्ण बीसा कवच
Krushna Bisa Kawach ………..………………………... 2350
द्वसद्वद्ध द्ववनायक कवच
Siddhi Vinayak Ganapati Kawach ……..…………….. 1450
अष्ट द्ववनायक कवच
Asht Vinayak Kawach ………..………………………... 2350
सकल सम्मान प्राद्वि कवच
Sakal Samman Praapti Kawach ……..………………. 1450
आकषतण वृद्वद्ध कवच
Aakarshan Vruddhi Kawach ……..…………………… 1450
स्तवप्न भय द्वनवारण कवच
Swapna Bhay Nivaran Kawach ……..……………….. 1050
152 2019
वशीकरण नाशक कवच
Vasikaran Nashak Kawach ……..…………………….. 1450
सरस्तविी कवच (कक्षा +10 के द्वलए)
Saraswati Kawach (For Class +10) ………………….. 1050
प्रीद्वि नाशक कवच
Preeti Nashak Kawach ……..…………………………. 1450
सरस्तविी कवच (कक्षा 10 िकके द्वलए)
Saraswati Kawach (For up to Class 10) …………….. 910
चंडाल योग द्वनवारण कवच
Chandal Yog Nivaran Kawach ……..………………… 1450
वशीकरण कवच (2-3 व्यद्विके द्वलए)
Vashikaran Kawach For (For 2-3 Person) ……………. 1250
ग्रहण योग द्वनवारण कवच
Grahan Yog Nivaran Kawach ……..………………….. 1450
पत्नी वशीकरण कवच
Patni Vasikaran Kawach ………………………………... 820
मांगद्वलक योग द्वनवारण कवच (कुजा योग )
Magalik Yog Nivaran Kawach (Kuja Yoga) …………. 1450
पद्वि वशीकरण कवच
Pati Vasikaran Kawach …………………………………. 820
अष्ट लक्ष्मी कवच
Asht Lakshmi Kawach ……..………………………... 1250
वशीकरण कवच ( 1 व्यद्वि के द्वलए)
Vashikaran Kawach (For 1 Person) …………………… 820
आकद्वस्तमक धन प्राद्वि कवच
Akashmik Dhan Prapti Kawach ……..……………….. 1250
सुदशतन बीसा कवच
Sudarshan Visha Kawach ……..…………………...…... 910
स्तपे.व्यापार वृद्वद्ध कवच
Special Vyapar Vruddhi Kawach ……..……………… 1250
महा सुदशतन कवच
Mahasudarshan Kawach ……..……………...…………. 910
धन प्राद्वि कवच
Dhan Prapti Kawach ……..…………………………... 1250
िंत्र रक्षा कवच
Tantra Raksha Kawach …………………………………. 910
कायत द्वसद्वद्ध कवच
Karya Siddhi Kawach ……..…………………………… 1250
वशीकरण कवच (2-3 व्यद्विके द्वलए)
Vashikaran Kawach For (For 2-3 Person) ……………. 1250
भूद्वमलाभ कवच
Bhumilabh Kawach ……..……………………………. 1250
पत्नी वशीकरण कवच
Patni Vasikaran Kawach ………………………………... 820
नवग्रह शांद्वि कवच
Navgrah Shanti Kawach ……..……………………….. 1250
पद्वि वशीकरण कवच
Pati Vasikaran Kawach …………………………………. 820
संिान प्राद्वि कवच
Santan Prapti Kawach ……..………………………….. 1250
वशीकरण कवच ( 1 व्यद्वि के द्वलए)
Vashikaran Kawach (For 1 Person) …………………… 820
कामदेव कवच
Kamdev Kawach ……..………………………………. 1250
सुदशतन बीसा कवच
Sudarshan Visha Kawach ……..…………………...…... 910
हंस बीसा कवच
Hans Visha Kawach ……..…………………………….. 1250
महा सुदशतन कवच
Mahasudarshan Kawach ……..……………...…………. 910
पदौन्नद्वि कवच
Padounnati Kawach ……..…………………………. 1250
िंत्र रक्षा कवच
Tantra Raksha Kawach …………………………………. 910
ऋण / कजत मुद्वि कवच
Rin / Karaj Mukti Kawach ……..……………………… 1250
द्वत्रशूल बीसा कवच
Trishool Visha Kawach ……..…………………………... 910
शत्रु द्ववजय कवच
Shatru Vijay Kawach ………………………………….. 1050
व्यापर वृद्वद्ध कवच
Vyapar Vruddhi Kawach ………………………………... 910
द्वववाह बाधा द्वनवारण कवच
Vivah Badha Nivaran Kawach ………………………... 1050
सवत रोग द्वनवारण कवच
Sarv Rog Nivaran Kawach ……………………………... 910
स्तवद्वस्तिक बीसा कवच
Swastik Visha Kawach ……..…………………………. 1050
शारीररक शद्वि वधतक कवच
Sharirik Shakti Vardhak Kawach ..……………………... 910
मद्वस्तिष्क पृद्वष्ट वधतक कवच
Mastishk Prushti Vardhak Kawach …………………… 820
द्वसद्ध शुक्र कवच
Siddha Shukra Kawach …………………………………. 820
153 2019
वाणी पृद्वष्ट वधतक कवच
Vani Prushti Vardhak Kawach ………………………… 820
द्वसद्ध शद्वन कवच
Siddha Shani Kawach …………………………………... 820
कामना पूर्ति कवच
Kamana Poorti Kawach ………………………………. 820
द्वसद्ध राहु कवच
Siddha Rahu Kawach …………………………………… 820
द्ववरोध नाशक कवच
Virodh Nashan Kawach ………………………………. 820
द्वसद्ध केिु कवच
Siddha Ketu Kawach ……………………………………. 820
द्वसद्ध सूयत कवच
Siddha Surya Kawach …………………………………. 820
रोजगार वृद्वद्ध कवच
Rojgar Vruddhi Kawach ………………………………… 730
द्वसद्ध चंद्र कवच
Siddha Chandra Kawach ……………………………… 820
द्ववघ्न बाधा द्वनवारण कवच
Vighna Badha Nivaran Kawah …………………………. 730
द्वसद्ध मंगल कवच (कु जा)
Siddha Mangal Kawach (Kuja) ……………………… 820
नज़र रक्षा कवच
Najar Raksha Kawah ……………………………………. 730
द्वसद्ध बुध कवच
Siddha Bhudh Kawach ………………………………… 820
रोजगार प्राद्वि कवच
Rojagar Prapti Kawach …………………………………. 730
द्वसद्ध गुरु कवच
Siddha Guru Kawach ………………………………..… 820
दुभातग्य नाशक कवच
Durbhagya Nashak ……………………………………… 640
उऩयोक्त कल के अराला अन्म वभस्मा वलळेऴ के वभाधान शेतु एलॊ उद्देश्म ऩूतता शेतु कल का तनभााण फकमा जाता शैं। कल के वलऴम भें
अधधक जानकायी शेतु वॊऩका कयें। *कल भाि ळुब कामा मा उद्देश्म के सरमे >> Shop Online | Order Now
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154 2019
Gemstone Price List
NAME OF GEM STONE GENERAL MEDIUM FINE FINE SUPER FINE SPECIAL
Emerald (ऩन्ना) 200.00 500.00 1200.00 1900.00 2800.00 & above
Yellow Sapphire (ऩुखयाज) 550.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above
Yellow Sapphire Bangkok (फैंकोक ऩुखयाज) 550.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above
Blue Sapphire (नीरभ) 550.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above
White Sapphire (वफ़े द ऩुखयाज) 1000.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above
Bangkok Black Blue(फैंकोक नीरभ) 100.00 150.00 190.00 550.00 1000.00 & above
Ruby (भाणणक) 100.00 190.00 370.00 730.00 1900.00 & above
Ruby Berma (फभाा भाणणक) 5500.00 6400.00 8200.00 10000.00 21000.00 & above
Speenal (नयभ भाणणक/रारडी) 300.00 600.00 1200.00 2100.00 3200.00 & above
Pearl (भोतत) 30.00 60.00 90.00 120.00 280.00 & above
Red Coral (4 यतत तक) (रार भूॊगा) 125.00 190.00 280.00 370.00 460.00 & above
Red Coral (4 यतत वे उऩय)(रार भूॊगा) 190.00 280.00 370.00 460.00 550.00 & above
White Coral (वफ़े द भूॊगा) 73.00 100.00 190.00 280.00 460.00 & above
Cat’s Eye (रशवुतनमा) 25.00 45.00 90.00 120.00 190.00 & above
Cat’s Eye ODISHA(उडडवा रशवुतनमा) 280.00 460.00 730.00 1000.00 1900.00 & above
Gomed (गोभेद) 19.00 28.00 45.00 100.00 190.00 & above
Gomed CLN (सवरोनी गोभेद) 190.00 280.00 460.00 730.00 1000.00 & above
Zarakan (जयकन) 550.00 730.00 820.00 1050.00 1250.00 & above
Aquamarine (फेरुज) 210.00 320.00 410.00 550.00 730.00 & above
Lolite (नीरी) 50.00 120.00 230.00 390.00 500.00 & above
Turquoise (फफ़योजा) 100.00 145.00 190.00 280.00 460.00 & above
Golden Topaz (वुनशरा) 28.00 46.00 90.00 120.00 190.00 & above
Real Topaz (उडडवा ऩुखयाज/टोऩज) 100.00 190.00 280.00 460.00 640.00 & above
Blue Topaz (नीरा टोऩज) 100.00 190.00 280.00 460.00 640.00 & above
White Topaz (वफ़े द टोऩज) 60.00 90.00 120.00 240.00 410.00& above
Amethyst (कटेरा) 28.00 46.00 90.00 120.00 190.00 & above
Opal (उऩर) 28.00 46.00 90.00 190.00 460.00 & above
Garnet (गायनेट) 28.00 46.00 90.00 120.00 190.00 & above
Tourmaline (तुभारीन) 120.00 140.00 190.00 300.00 730.00 & above
Star Ruby (वुमाकान्त भणण) 45.00 75.00 90.00 120.00 190.00 & above
Black Star (कारा स्टाय) 15.00 30.00 45.00 60.00 100.00 & above
Green Onyx (ओनेक्व) 10.00 19.00 28.00 55.00 100.00 & above
Lapis (राजलात) 15.00 28.00 45.00 100.00 190.00 & above
Moon Stone ( न्द्रकान्त भणण) 12.00 19.00 28.00 55.00 190.00 & above
Rock Crystal (स्फ़हटक) 19.00 46.00 15.00 30.00 45.00 & above
Kidney Stone (दाना फफ़यॊगी) 09.00 11.00 15.00 19.00 21.00 & above
Tiger Eye (टाइगय स्टोन) 03.00 05.00 10.00 15.00 21.00 & above
Jade (भयग ) 12.00 19.00 23.00 27.00 45.00 & above
Sun Stone (वन सवताया) 12.00 19.00 23.00 27.00 45.00 & above
Note : Bangkok (Black) Blue for Shani, not good in looking but mor effective, Blue Topaz not Sapphire This Color of Sky Blue, For Venus
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155 2019
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YANTRA LIST EFFECTS
Our Splecial Yantra
1 12 – YANTRA SET For all Family Troubles
2 VYAPAR VRUDDHI YANTRA For Business Development
3 BHOOMI LABHA YANTRA For Farming Benefits
4 TANTRA RAKSHA YANTRA For Protection Evil Sprite
5 AAKASMIK DHAN PRAPTI YANTRA For Unexpected Wealth Benefits
6 PADOUNNATI YANTRA For Getting Promotion
7 RATNE SHWARI YANTRA For Benefits of Gems & Jewellery
8 BHUMI PRAPTI YANTRA For Land Obtained
9 GRUH PRAPTI YANTRA For Ready Made House
10 KAILASH DHAN RAKSHA YANTRA -
Shastrokt Yantra
11 AADHYA SHAKTI AMBAJEE(DURGA) YANTRA Blessing of Durga
12 BAGALA MUKHI YANTRA (PITTAL) Win over Enemies
13 BAGALA MUKHI POOJAN YANTRA (PITTAL) Blessing of Bagala Mukhi
14 BHAGYA VARDHAK YANTRA For Good Luck
15 BHAY NASHAK YANTRA For Fear Ending
16 CHAMUNDA BISHA YANTRA (Navgraha Yukta) Blessing of Chamunda & Navgraha
17 CHHINNAMASTA POOJAN YANTRA Blessing of Chhinnamasta
18 DARIDRA VINASHAK YANTRA For Poverty Ending
19 DHANDA POOJAN YANTRA For Good Wealth
20 DHANDA YAKSHANI YANTRA For Good Wealth
21 GANESH YANTRA (Sampurna Beej Mantra) Blessing of Lord Ganesh
22 GARBHA STAMBHAN YANTRA For Pregnancy Protection
23 GAYATRI BISHA YANTRA Blessing of Gayatri
24 HANUMAN YANTRA Blessing of Lord Hanuman
25 JWAR NIVARAN YANTRA For Fewer Ending
26 JYOTISH TANTRA GYAN VIGYAN PRAD SHIDDHA BISHA
YANTRA
For Astrology & Spritual Knowlage
27 KALI YANTRA Blessing of Kali
28 KALPVRUKSHA YANTRA For Fullfill your all Ambition
29 KALSARP YANTRA (NAGPASH YANTRA) Destroyed negative effect of Kalsarp Yoga
30 KANAK DHARA YANTRA Blessing of Maha Lakshami
31 KARTVIRYAJUN POOJAN YANTRA -
32 KARYA SHIDDHI YANTRA For Successes in work
33  SARVA KARYA SHIDDHI YANTRA For Successes in all work
34 KRISHNA BISHA YANTRA Blessing of Lord Krishna
35 KUBER YANTRA Blessing of Kuber (Good wealth)
36 LAGNA BADHA NIVARAN YANTRA For Obstaele Of marriage
37 LAKSHAMI GANESH YANTRA Blessing of Lakshami & Ganesh
38 MAHA MRUTYUNJAY YANTRA For Good Health
39 MAHA MRUTYUNJAY POOJAN YANTRA Blessing of Shiva
40 MANGAL YANTRA ( TRIKON 21 BEEJ MANTRA) For Fullfill your all Ambition
41 MANO VANCHHIT KANYA PRAPTI YANTRA For Marriage with choice able Girl
42 NAVDURGA YANTRA Blessing of Durga
156 2019
YANTRA LIST EFFECTS
43 NAVGRAHA SHANTI YANTRA For good effect of 9 Planets
44 NAVGRAHA YUKTA BISHA YANTRA For good effect of 9 Planets
45  SURYA YANTRA Good effect of Sun
46  CHANDRA YANTRA Good effect of Moon
47  MANGAL YANTRA Good effect of Mars
48  BUDHA YANTRA Good effect of Mercury
49  GURU YANTRA (BRUHASPATI YANTRA) Good effect of Jyupiter
50  SUKRA YANTRA Good effect of Venus
51  SHANI YANTRA (COPER & STEEL) Good effect of Saturn
52  RAHU YANTRA Good effect of Rahu
53  KETU YANTRA Good effect of Ketu
54 PITRU DOSH NIVARAN YANTRA For Ancestor Fault Ending
55 PRASAW KASHT NIVARAN YANTRA For Pregnancy Pain Ending
56 RAJ RAJESHWARI VANCHA KALPLATA YANTRA For Benefits of State & Central Gov
57 RAM YANTRA Blessing of Ram
58 RIDDHI SHIDDHI DATA YANTRA Blessing of Riddhi-Siddhi
59 ROG-KASHT DARIDRATA NASHAK YANTRA For Disease- Pain- Poverty Ending
60 SANKAT MOCHAN YANTRA For Trouble Ending
61 SANTAN GOPAL YANTRA Blessing Lorg Krishana For child acquisition
62 SANTAN PRAPTI YANTRA For child acquisition
63 SARASWATI YANTRA Blessing of Sawaswati (For Study & Education)
64 SHIV YANTRA Blessing of Shiv
65 SHREE YANTRA (SAMPURNA BEEJ MANTRA)
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth &
Peace
66 SHREE YANTRA SHREE SUKTA YANTRA Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth
67 SWAPNA BHAY NIVARAN YANTRA For Bad Dreams Ending
68 VAHAN DURGHATNA NASHAK YANTRA For Vehicle Accident Ending
69 VAIBHAV LAKSHMI YANTRA (MAHA SHIDDHI DAYAK SHREE
MAHALAKSHAMI YANTRA)
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & All
Successes
70 VASTU YANTRA For Bulding Defect Ending
71 VIDHYA YASH VIBHUTI RAJ SAMMAN PRAD BISHA YANTRA For Education- Fame- state Award Winning
72 VISHNU BISHA YANTRA Blessing of Lord Vishnu (Narayan)
73 VASI KARAN YANTRA Attraction For office Purpose
74  MOHINI VASI KARAN YANTRA Attraction For Female
75  PATI VASI KARAN YANTRA Attraction For Husband
76  PATNI VASI KARAN YANTRA Attraction For Wife
77  VIVAH VASHI KARAN YANTRA Attraction For Marriage Purpose
Yantra Available @:- Rs- 325 to 12700 and Above…..
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157 2019
वू ना
 ऩत्रिका भें प्रकासळत वबी रेख ऩत्रिका के अधधकायों के वाथ शी आयक्षषत शैं।
 रेख प्रकासळत शोना का भतरफ मश कतई नशीॊ फक कामाारम मा वॊऩादक बी इन वल ायो वे वशभत शों।
 नात्स्तक/ अवलश्लावु व्मत्क्त भाि ऩठन वाभग्री वभझ वकते शैं।
 ऩत्रिका भें प्रकासळत फकवी बी नाभ, स्थान मा घटना का उल्रेख मशाॊ फकवी बी व्मत्क्त वलळेऴ मा फकवी बी स्थान मा
घटना वे कोई वॊफॊध नशीॊ शैं।
 प्रकासळत रेख ज्मोततऴ, अॊक ज्मोततऴ, लास्तु, भॊि, मॊि, तॊि, आध्मात्त्भक सान ऩय आधारयत शोने के कायण
महद फकवी के रेख, फकवी बी नाभ, स्थान मा घटना का फकवी के लास्तवलक जीलन वे भेर शोता शैं तो मश भाि
एक वॊमोग शैं।
 प्रकासळत वबी रेख बायततम आध्मात्त्भक ळास्िों वे प्रेरयत शोकय सरमे जाते शैं। इव कायण इन वलऴमो फक
वत्मता अथला प्राभाणणकता ऩय फकवी बी प्रकाय फक त्जन्भेदायी कामाारम मा वॊऩादक फक नशीॊ शैं।
 अन्म रेखको द्वाया प्रदान फकमे गमे रेख/प्रमोग फक प्राभाणणकता एलॊ प्रबाल फक त्जन्भेदायी कामाारम मा
वॊऩादक फक नशीॊ शैं। औय नाशीॊ रेखक के ऩते हठकाने के फाये भें जानकायी देने शेतु कामाारम मा वॊऩादक
फकवी बी प्रकाय वे फाध्म शैं।
 ज्मोततऴ, अॊक ज्मोततऴ, लास्तु, भॊि, मॊि, तॊि, आध्मात्त्भक सान ऩय आधारयत रेखो भें ऩाठक का अऩना
वलश्लाव शोना आलश्मक शैं। फकवी बी व्मत्क्त वलळेऴ को फकवी बी प्रकाय वे इन वलऴमो भें वलश्लाव कयने ना
कयने का अॊततभ तनणाम स्लमॊ का शोगा।
 ऩाठक द्वारा फकवी बी प्रकाय फक आऩत्ती स्लीकामा नशीॊ शोगी।
 शभाये द्वारा ऩोस्ट फकमे गमे वबी रेख शभाये लऴो के अनुबल एलॊ अनुळॊधान के आधाय ऩय सरखे शोते शैं। शभ फकवी बी
व्मत्क्त वलळेऴ द्वारा प्रमोग फकमे जाने लारे भॊि- मॊि मा अन्म प्रमोग मा उऩामोकी त्जन्भेदायी नहशॊ रेते शैं।
 मश त्जन्भेदायी भॊि-मॊि मा अन्म प्रमोग मा उऩामोको कयने लारे व्मत्क्त फक स्लमॊ फक शोगी। क्मोफक इन वलऴमो भें
नैततक भानदॊडों, वाभात्जक, कानूनी तनमभों के णखराप कोई व्मत्क्त महद नीजी स्लाथा ऩूतता शेतु प्रमोग कताा शैं
अथला प्रमोग के कयने भे िुहट शोने ऩय प्रततकू र ऩरयणाभ वॊबल शैं।
 शभाये द्वारा ऩोस्ट फकमे गमे वबी भॊि-मॊि मा उऩाम शभने वैकडोफाय स्लमॊ ऩय एलॊ अन्म शभाये फॊधुगण ऩय प्रमोग फकमे
शैं त्जस्वे शभे शय प्रमोग मा भॊि-मॊि मा उऩामो द्वारा तनत्श् त वपरता प्राप्त शुई शैं।
 ऩाठकों फक भाॊग ऩय एक हश रेखका ऩून् प्रकाळन कयने का अधधकाय यखता शैं। ऩाठकों को एक रेख के
ऩून् प्रकाळन वे राब प्राप्त शो वकता शैं।
 अधधक जानकायी शेतु आऩ कामाारम भें वॊऩका कय वकते शैं।
(सबी वववादो के लरमे के वर बुवनेववय न्मामारम ही भान्म होगा।)
158 2019
FREE
E CIRCULAR
गुरुत्ल ज्मोततऴ भासवक ई-ऩत्रिका
2019
वॊऩादक
ध ॊतन जोळी
वॊऩका
गुरुत्ल ज्मोततऴ वलबाग
गुरुत्ल कामाारम
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159 2019
शभाया उद्देश्म
वप्रम आत्त्भम
फॊधु/ फहशन
जम गुरुदेल
जशाॉ आधुतनक वलसान वभाप्त शो जाता शैं। लशाॊ आध्मात्त्भक सान प्रायॊब
शो जाता शैं, बौततकता का आलयण ओढे व्मत्क्त जीलन भें शताळा औय तनयाळा भें
फॊध जाता शैं, औय उवे अऩने जीलन भें गततळीर शोने के सरए भागा प्राप्त नशीॊ शो
ऩाता क्मोफक बालनाए हश बलवागय शैं, त्जवभे भनुटम की वपरता औय
अवपरता तनहशत शैं। उवे ऩाने औय वभजने का वाथाक प्रमाव शी श्रेटठकय
वपरता शैं। वपरता को प्राप्त कयना आऩ का बाग्म शी नशीॊ अधधकाय शैं। ईवी
सरमे शभायी ळुब काभना वदैल आऩ के वाथ शैं। आऩ अऩने कामा-उद्देश्म एलॊ
अनुकू रता शेतु मॊि, ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न औय दुराब भॊि ळत्क्त वे ऩूणा प्राण-
प्रततत्टठत ध ज लस्तु का शभेंळा प्रमोग कये जो १००% परदामक शो। ईवी सरमे
शभाया उद्देश्म मशीॊ शे की ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे वलसळटट तेजस्ली भॊिो द्वाया
सवद्ध प्राण-प्रततत्टठत ऩूणा ैतन्म मुक्त वबी प्रकाय के मन्ि- कल एलॊ ळुब
परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩके घय तक ऩशो ाने का शैं।
वूमा की फकयणे उव घय भें प्रलेळ कयाऩाती शैं।
जीव घय के णखडकी दयलाजे खुरे शों।
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160 2019
GURUTVA JYOTISH
Monthly
APR -2019

GURUTVA JYOTISH APRIL-2019

  • 1.
    Nonprofit Publications . गुरुत्लकामाारम द्वाया प्रस्तुत भासवक ई-ऩत्रिका -2019 Our Web Site: www.gurutvajyotish.com Shp Our Product Online www.gurutvakaryalay.com Join Us: fb.com/gurutva.karyalay | twitter.com/#!/GURUTVAKARYALAY | plus.google.com/u/0/+ChintanJoshi
  • 2.
    FREE E CIRCULAR गुरुत्ल ज्मोततऴभासवक ई-ऩत्रिका भें रेखन शेतु फ्रीराॊव (स्लतॊि) रेखकों का स्लागत शैं... गुरुत्ल ज्मोततऴ भासवक ई- ऩत्रिका भें आऩके द्वारा सरखे गमे भॊि, मॊि, तॊि, ज्मोततऴ, अॊक ज्मोततऴ, लास्तु, पें गळुई, टैयों, येकी एलॊ अन्म आध्मात्त्भक सान लधाक रेख को प्रकासळत कयने शेतु बेज वकते शैं। अधधक जानकायी शेतु वॊऩका कयें। GURUTVA KARYALAY BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) INDIA Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com गुरुत्ल ज्मोततऴ भासवक ई-ऩत्रिका 2019 वॊऩादक ध ॊतन जोळी वॊऩका गुरुत्ल ज्मोततऴ वलबाग गुरुत्ल कामाारम 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) INDIA पोन 91+9338213418, 91+9238328785, ईभेर gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, लेफ www.gurutvakaryalay.com www.gurutvakaryalay.in http://gk.yolasite.com/ www.shrigems.com www.gurutvakaryalay.blogspot.com/ ऩत्रिका प्रस्तुतत ध ॊतन जोळी, गुरुत्ल कामाारम पोटो ग्राफपक्व ध ॊतन जोळी, गुरुत्ल कामाारम
  • 3.
    अनुक्रभ 7 59 8 60 -? 11 ? 63 13 ? 64 ? 14 ब ? 69 ? 15 ? 71 16 ? 74 17 ? 77 … 18 - ? 79 20 81 21 84 24 ? 85 … 26 86 28 ? 89 ब … 30 ? 90 33 ब ब ? 91 36 ब ? 92 39 93 39 ब ? 95 40 ? 97 41 98 41 105 42 108 43 ? 109 - 43 111 44 113 44 113 45 114 46 118 48 118 49 119 52 120 ( ) 56 120 58 121 59 121 स्थामी औय अन्म रेख 4 146 2019 137 147 2019 - - 139 - 148 2019 - 146
  • 4.
    वप्रम आत्त्भम, फॊधु/ फहशन जमगुरुदेल वलाभॊगर-भाॊगल्मे सळलेवलााथावाधधके । ळयण्मे िमम्फके गौरय नायामणण नभोऽस्तुते॥ वृत्टटत्स्थतत वलनाळानाॊ ळत्क्तबूते वनाततन। गुणाश्रमे गुणभमे नायामणण नभोऽस्तुते॥ अथाात: शे देली नायामणी आऩ वफ प्रकाय का भॊगर प्रदान कयने लारी भॊगरभमी शो। कल्माण दातमनी सळला शो। वफ ऩुरूऴाथों को सवद्ध कयने लारी ळयणा गतलत्वरा तीन नेिों लारी गौयी शो, आऩको नभस्काय शैं। आऩ वृत्टट का ऩारन औय वॊशाय कयने लारी ळत्क्तबूता वनातनी देली, आऩ गुणों का आधाय तथा वलागुणभमी शो। नायामणी देली तुम्शें नभस्काय शै। इव भॊि के जऩ वे भाॉ फक ळयणागती प्राप्त शोती शैं। त्जस्वे भनुटम के जन्भ-जन्भ के ऩाऩों का नाळ शोता शै। भाॊ जननी वृत्टट फक आहद, अॊत औय भध्म शैं। देली प्रऩन्नातताशये प्रवीद प्रवीद भातजागतोsणखरस्म। ऩवीद वलश्लेतरय ऩाहश वलश्लॊ त्लभीश् यी देली या यस्म। अथाात: ळयणागत फक ऩीडा दूय कयने लारी देली आऩ शभ ऩय प्रवन्न शों। वॊऩूणा जगत भाता प्रवन्न शों। वलश्लेश्लयी देली वलश्ल फक यषा कयो। देली आऩ हश एक भाि या य जगत फक अधधश्लयी शो। नलयाि के नौ हदनों भें तीन देवलमों क्रभळ् ऩालाती, रक्ष्भी औय वयस्लती औय देली के नौ रुऩों का कभळ् ळैरऩुिी, ब्रह्भा ारयणी, ॊद्रघण्टा, कू टभाण्डा, स्कॊ दभाता, कात्मामनी, कारयात्रि, भशागौयी औय सववद्धदािी का ऩूजन फकमा जाता शैं। नलयािे के प्रथभ तीन हदन ऩालाती के तीन स्लरुऩों का ऩूजन फकमा जाता शैं, अगरे तीन हदन भाॉ रक्ष्भी के स्लरुऩों का ऩूजन फकमा जाता शैं औय आणखयी के तीन हदन वयस्लती भाता के स्लरुऩों की ऩूजा की जाती शैं। उवी प्रकाय नौ देलीमों को क्रभळ् प्रथभ हदन ळैरऩुिी, द्वद्वतीम हदन ब्रह्भा ारयणी, तृतीम हदन न्द्रघण्टा, तुथा हदन कु टभाण्डा, ऩॊ भ् हदन स्कन्द भाता, ऴटठभ् हदन कात्मातमनी, वाप्तभ् हदन कारयात्रि, अटटभ् हदन भशागौयी औय नौलें हदन सववद्धदािी के रुऩ का ऩूजन फकमा जाता शैं। नलयाि अथाात भाॉ दुगाा की उऩावना भें वभवऩात नौ यात। दुगाा का अथा हैं, दुगातत नासळनी शैं, जगत ्की उत्ऩत्त्त, ऩारन एलॊ वॊ ारन तीनों व्मलस्थाएॊ त्जव ळत्क्त के आधीन वम्ऩाहदत शोती शै लश जगत जननी भाॉ आहदळत्क्त बगलती शैं। भाॉ दुगाा के रुऩ अनॊत शैं, रेफकन देली को प्रधान नौ रूऩों भें नलदुगाा के नाभ वे जाना जाता शैं। आहद ळत्क्त भाॉ दुगाा वभग्र रोक भें अऩनी कृ ऩा औय करूणा लऴााती शै, भाॉ दुगाा अऩने बक्तों भें वद्द गुणों का वलकाव कयके उनभें अऩनी ळत्क्त का वॊ ाय कयते शुले वॊवाय के वभग्र प्राणणमों का वॊ ारन कयती शै। आज बौततकता भें यत भनुटम को अवॊखम उऩाम, ऩूजन, शलन, जऩ-तऩ के फाद बी भन की ळाॊतत नशीॊ सभरती। ऐवे भें शय तयश वे तनयाळ औय शाया ुका भनुटम महद भाॊ दुगाा की ळयण रेता शै जो तनत्श् त शी भाॉ दुगाा उवकी दुगातत का तनलायण कयती शी शै। क्मोफक, भाॉ आद्यळत्क्त की कृ ऩा वे भनुटम भें आत्भफर, द्दढ़ वलश्लाव, दमा, प्रेभ, बत्क्त जैवे वद्गुणों का वलकाव शोता शैं। जीलन के इन्शीॊ भूल्मों को वभझ कय भनुटम जीलन भें वच् ा वुख-ळाॊतत, लैबल, धन वॊऩदा को
  • 5.
    प्राप्त कयता शै।अन्मथा इव वॊवाय के दरदर वे तनकरना उवके सरए वॊबल नशीॊ शै। इवसरए भनुटम को अवॊबल को बी वॊबल कय हदखाने की ळत्क्त देली कृ ऩा वे शी प्राप्त शोती शैं। भाॊ दुगाा का ऩूजन हशन्दू वॊस्कृ ती भें वलााधधक रोकवप्रम शैं मशीॊ कायण शैं की वैकडों लऴो वे देली दुगाा का ऩूजन छोटे-फडे वबी प्रादेसळक षेिों भें वलााधधक प्र सरत यशा शैं। देली दुगाा को आद्य ळत्क्त बगलती का वाषात स्लरुऩ भाना जाता शैं। देली दुगाा की भहशभा अऩयॊऩाय शैं, जो अऩने बक्तों के दु्खों का नाळ कयने लारी, दुटटों वे यषा कयने लारी एलॊ अऩने बक्तों के वकर भनोयथ को सवद्ध कयने लारी वाषात देली शैं। नलयाि के दौयान दव भशावलद्या का ऩूजन बी वलळेऴ भशत्लऩूणा भाना गमा शैं क्मोकी इन को देली दुगाा के शी दव रूऩ भाने जाते शैं। दवों भशावलद्या भें शय भशावलद्या अऩनी अद्वद्वतीम ळत्क्त वे भनुटम के वभस्त वॊकटों को दूय कयने लारी शैं। इन दव भशावलद्याओॊ के भशत्ल को वलसबन्न धभाळास्िों भें अत्मॊत उऩमोगी औय भशत्लऩूणा भाना गमा शैं। नलयािी के दौयान ग्रश ळाॊतत के उऩामो को कय के भनुटम वबी अळुब ग्रश जतनत फाधाऔ को वयरता वे दूय कय वकता शैं। नलयाि का वभम ग्रशों को ळाॊत कयने शेतु वलोत्तभ वभम भाना जाता शैं। क्मोफक नलयािी के दौयान प्रकृ तत भें शोने लारे ऩरयलतान एलॊ वाभात्जक ऩरयलेळ के कायण भनुटम की आध्मात्त्भक ळत्क्त एलॊ उवकी वॊमभ ळत्क्त का अत्माधधक उच् स्तय की शोती शैं। महश कायण शैं की इव दौयान फक जाने लारी वबी ऩूजा, उऩावना, वाधना आहद अत्माधधक राबप्रद भानी गई शैं। महद भनुटम फकवी ग्रशों वे ऩीडडत शो, तो लश इन नौ हदनों भें देली दुगाा के ऩूजन के वाथ भें महद ग्रश ळाॊतत के उऩामो को कयके ळीघ्र राब प्राप्त कय वकते शैं, नलयाि ग्रश ळाॊतत के सरए बी उत्तभ वभम शोता शै। वलद्वानों का कथन शैं की देली दुगाा शी वबी प्रकाय के भॊि, मॊि औय तॊि का भुख्म आधाय शैं। धभा ळास्िों भें वभस्त भॊि, मॊि औय तॊि का उद्गभ देली आद्यळत्क्त बगलती वे भाना गमा शैं। महद जन्भ कुॊ डरी (जातक/ जन्भ ऩिी) भें कोई ग्रश कभजोय शै मा अळुब बाल का स्लाभी शो एलॊ अन्म बाल को देख कय अऩना अळुब प्रबाल दे यशा शो तो जातक के सरए उव ग्रश को ळाॊत कयना आलश्मक शोता शैं त्जस्वे ग्रश अऩना प्रततकू र प्रबाल के स्थान ऩय अनुकू र प्रबाल प्रदान कयें।फकवी बी ग्रश के प्रबाल को अनुकू र फनाने का उत्तभ वभम नलयाि शैं, नलयाि के दौयान ग्रश ळाॊतत के उऩामो द्वाया ग्रश के अळुब प्रबाल को ळीघ्र एलॊ अतत वयरता वे कभ फकमा जा वकता शैं। इव भासवक ई-ऩत्रिका भें वॊफॊधधत जानकायीमों के वलऴम भें वाधक एलॊ वलद्वान ऩाठको वे अनुयोध शैं, महद दळाामे गए भॊि, श्रोक, मॊि, वाधना एलॊ उऩामों मा अन्म जानकायी के राब, प्रबाल इत्मादी के वॊकरन, प्रभाण ऩढ़ने, वॊऩादन भें, डडजाईन भें, टाईऩीॊग भें, वप्रॊहटॊग भें, प्रकाळन भें कोई िुहट यश गई शो, तो उवे स्लमॊ वुधाय रें मा फकवी मोग्म ज्मोततऴी, गुरु मा वलद्वान वे वराश वलभळा कय रे । क्मोफक वलद्वान ज्मोततऴी, गुरुजनो एलॊ वाधको के तनजी अनुबल वलसबन्न भॊि, श्रोक, मॊि, वाधना, उऩाम के प्रबालों का लणान कयने भें बेद शोने ऩय काभना सववद्ध शेतु फक जाने लारी लारी ऩूजन वलधध एलॊ उवके प्रबालों भें सबन्नता वॊबल शैं। आऩका जीलन वुखभम, भॊगरभम शो भाॊ बगलती की कृ ऩा आऩके ऩरयलाय ऩय फनी यशे। भाॊ बगलती वे मशी प्राथना शैं… ध ॊतन जोळी
  • 6.
    6 2019 ***** भासवकई-ऩत्रिका वे वॊफॊधधत वू ना *****  ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत वबी रेख गुरुत्ल कामाारम के अधधकायों के वाथ शी आयक्षषत शैं।  ई-ऩत्रिका भें लणणात रेखों को नात्स्तक/अवलश्लावु व्मत्क्त भाि ऩठन वाभग्री वभझ वकते शैं।  ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत रेख आध्मात्भ वे वॊफॊधधत शोने के कायण बायततम धभा ळास्िों वे प्रेरयत शोकय प्रस्तुत फकमा गमा शैं।  ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत रेख वे वॊफॊधधत फकवी बी वलऴमो फक वत्मता अथला प्राभाणणकता ऩय फकवी बी प्रकाय की त्जन्भेदायी कामाारम मा वॊऩादक फक नशीॊ शैं।  ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत जानकायीकी प्राभाणणकता एलॊ प्रबाल की त्जन्भेदायी कामाारम मा वॊऩादक की नशीॊ शैं औय ना शीॊ प्राभाणणकता एलॊ प्रबाल की त्जन्भेदायी के फाये भें जानकायी देने शेतु कामाारम मा वॊऩादक फकवी बी प्रकाय वे फाध्म शैं।  ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत रेख वे वॊफॊधधत रेखो भें ऩाठक का अऩना वलश्लाव शोना आलश्मक शैं। फकवी बी व्मत्क्त वलळेऴ को फकवी बी प्रकाय वे इन वलऴमो भें वलश्लाव कयने ना कयने का अॊततभ तनणाम स्लमॊ का शोगा।  ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत रेख वे वॊफॊधधत फकवी बी प्रकाय की आऩत्ती स्लीकामा नशीॊ शोगी।  ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत रेख शभाये लऴो के अनुबल एलॊ अनुळॊधान के आधाय ऩय हदए गमे शैं। शभ फकवी बी व्मत्क्त वलळेऴ द्वाया प्रमोग फकमे जाने लारे धासभाक, एलॊ भॊि- मॊि मा अन्म प्रमोग मा उऩामोकी त्जन्भेदायी नहशॊ रेते शैं। मश त्जन्भेदायी भॊि- मॊि मा अन्म उऩामोको कयने लारे व्मत्क्त फक स्लमॊ फक शोगी।  क्मोफक इन वलऴमो भें नैततक भानदॊडों, वाभात्जक, कानूनी तनमभों के णखराप कोई व्मत्क्त महद नीजी स्लाथा ऩूतता शेतु प्रमोग कताा शैं अथला प्रमोग के कयने भे िुहट शोने ऩय प्रततकू र ऩरयणाभ वॊबल शैं।  ई-ऩत्रिका भें प्रकासळत रेख वे वॊफॊधधत जानकायी को भाननने वे प्राप्त शोने लारे राब, राब की शानी मा शानी की त्जन्भेदायी कामाारम मा वॊऩादक की नशीॊ शैं।  शभाये द्वाया प्रकासळत फकमे गमे वबी रेख, जानकायी एलॊ भॊि-मॊि मा उऩाम शभने वैकडोफाय स्लमॊ ऩय एलॊ अन्म शभाये फॊधुगण ऩय प्रमोग फकमे शैं त्जस्वे शभे शय प्रमोग मा कल , भॊि-मॊि मा उऩामो द्वाया तनत्श् त वपरता प्राप्त शुई शैं।  ई-ऩत्रिका भें गुरुत्ल कामाारम द्वाया प्रकासळत वबी उत्ऩादों को के लर ऩाठको की जानकायी शेतु हदमा गमा शैं, कामाारम फकवी बी ऩाठक को इन उत्ऩादों का क्रम कयने शेतु फकवी बी प्रकाय वे फाध्म नशीॊ कयता शैं। ऩाठक इन उत्ऩादों को कशीॊ वे बी क्रम कयने शेतु ऩूणात् स्लतॊि शैं। अधधक जानकायी शेतु आऩ कामाारम भें वॊऩका कय वकते शैं। (वबी वललादो के सरमे के लर बुलनेश्लय न्मामारम शी भान्म शोगा।)
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    7 2019  वॊकरनगुरुत्ल कामाारम नभो देव्मै भशादेव्मै सळलामै वततॊ नभ:। नभ: प्रकृ त्मै बद्रामै तनमता: प्रणता: स्भताभ्॥ अथाात: देली को नभस्काय शैं, भशादेली को नभस्काय शैं। भशादेली सळला को वलादा नभस्काय शैं। प्रकृ तत एलॊ बद्रा को भेया प्रणाभ शैं। शभ रोग तनमभऩूलाक देली जगदम्फा को नभस्काय कयते शैं। उऩयोक्त भॊि वे देली दुगाा का स्भयण कय प्राथाना कयने भाि वे देली प्रवन्न शोकय अऩने बक्तों की इच्छा ऩूणा कयती शैं। वभस्त देल गण त्जनकी स्तुतत प्राथना कयते शैं। भाॉ दुगाा अऩने बक्तो की यषा कय उन ऩय कृ ऩा द्रटटी लऴााती शैं औय उवको उन्नती के सळखय ऩय जाने का भागा प्रवस्त कयती शैं। इव सरमे ईश्लय भें श्रद्धा वलश्लाय यखने लारे वबी भनुटम को देली की ळयण भें जाकय देली वे तनभार रृदम वे प्राथाना कयनी ाहशमे। देली प्रऩन्नातताशये प्रवीद प्रवीद भातजागतोsणखरस्म। ऩवीद वलश्लेतरय ऩाहश वलश्लॊ त्लभीश् यी देली या यस्म। अथाात: ळयणागत फक ऩीडा दूय कयने लारी देली आऩ शभ ऩय प्रवन्न शों। वॊऩूणा जगत भाता प्रवन्न शों। वलश्लेश्लयी देली वलश्ल फक यषा कयो। देली आऩ हश एक भाि या य जगत फक अधधश्लयी शो। वलाभॊगर-भाॊगल्मे सळलेवलााथावाधधके । ळयण्मे िमम्फके गौरय नायामणण नभोऽस्तुते॥ वृत्टटत्स्थतत वलनाळानाॊ ळत्क्तबूते वनाततन। गुणाश्रमे गुणभमे नायामणण नभोऽस्तुते॥ अथाात: शे देली नायामणी आऩ वफ प्रकाय का भॊगर प्रदान कयने लारी भॊगरभमी शो। कल्माण दातमनी सळला शो। वफ ऩुरूऴाथों को सवद्ध कयने लारी ळयणा गतलत्वरा तीन नेिों लारी गौयी शो, आऩको नभस्काय शैं। आऩ वृत्टट का ऩारन औय वॊशाय कयने लारी ळत्क्तबूता वनातनी देली, आऩ गुणों का आधाय तथा वलागुणभमी शो। नायामणी देली तुम्शें नभस्काय शै। इव भॊि के जऩ वे भाॉ फक ळयणागती प्राप्त शोती शैं। त्जस्वे भनुटम के जन्भ-जन्भ के ऩाऩों का नाळ शोता शै। भाॊ जननी वृत्टट फक आहद, अॊत औय भध्म शैं। देवी से प्राथाना कयें – ळयणागत-दीनाता-ऩरयिाण-ऩयामणे वलास्माततिंशये देवल नायामणण नभोऽस्तुते॥ अथाात: ळयण भें आए शुए दीनों एलॊ ऩीडडतों की यषा भें वॊरग्न यशने लारी तथा वफ फक ऩीडा दूय कयने लारी नायामणी देली आऩको नभस्काय शै। योगानळेऴानऩशॊसव तुटटा रूटटा तु काभान वकरानबीटटान्। त्लाभाधश्रतानाॊ न वलऩन्नयाणाॊ त्लाभाधश्रता शाश्रमताॊ प्रमात्न्त। अथाात् देली आऩ प्रवन्न शोने ऩय वफ योगों को नटट कय देती शो औय कु वऩत शोने ऩय भनोलाॊतछत वबी काभनाओॊ का नाळ कय देती शो। जो रोग तुम्शायी ळयण भें जा ुके शै। उनको वलऩत्त्त आती शी नशीॊ। तुम्शायी ळयण भें गए शुए भनुटम दूवयों को ळयण देने लारे शो जाते शैं। वलाफाधाप्रळभनॊ िेरोक्मस्माणखरेश्लयी। एलभेल त्लमा कामाभस्मध्दैरयवलनाळनभ्। अथाात् शे वलेश्लयी आऩ तीनों रोकों फक वभस्त फाधाओॊ को ळाॊत कयो औय शभाये वबी ळिुओॊ का नाळ कयती यशो। ळाॊततकभाणण वलाि तथा दु:स्लप्रदळाने। ग्रशऩीडावु ोग्रावु भशात्भमॊ ळणुमात्भभ। अथाात् वलाि ळाॊतत कभा भें, फुये स्लप्न हदखाई देने ऩय तथा ग्रश जतनत ऩीडा उऩत्स्थत शोने ऩय भाशात्म्म श्रलण कयना ाहशए। इववे वफ ऩीडाएॉ ळाॊत औय दूय शो जाती शैं। महह कायण हैं सहस्रमुगों से भाॊ बगवती जगतजननी दुगाा की उऩासना प्रतत वषा वसॊत, आश्ववन एवॊ गुप्त नवयारी भें ववशेष रुऩ से कयने का ववधान हहन्दु धभा ग्रॊथो भें हैं। ***
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    8 2019 ैि नलयािव्रत वलळेऴ राबदामी शोता शैं।  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम हहन्दु सॊसकृ तत के अनुशाय नललऴा का ळुबायॊब ैि भाव के ळुक्र ऩष की प्रथभ ततधथ वे शोता शै। इव हदन वे लवॊतकारीन नलयाि की ळुरुआत शोती शैं। वलद्वानो के भतानुळाय ैि भाव के कृ टण ऩष की वभात्प्त के वाथ बूरोक के ऩरयलेळ भें एक वलळेऴ ऩरयलतान दृत्टटगो य शोने रगता शैं त्जवके अनेक स्तय औय स्लरूऩ शोते शैं। इव दौयान ऋतुओॊ के ऩरयलतान के वाथ नलयािों का तौशाय भनुटम के जीलन भें फाह्म औय आॊतरयक ऩरयलतान भें एक वलळेऴ वॊतुरन स्थावऩत कयने भें वशामक शोता शैं। त्जव तयश फाह्म जगत भें ऩरयलतान शोता शै उवी प्रकाय भनुटम के ळयीय भें बी ऩरयलतान शोता शै। इव सरमे नलयाि उत्वल को आमोत्जत कयने का उद्देश्म शोता शैं की भनुटम के बीतय भें उऩमुक्त ऩरयलतान कय उवे फाह्म ऩरयलतान के अनुकू र फनाकय उवे स्लमॊ के औय प्रकृ तत के फी भें वॊतुरन फनामे यखना शैं। नलयािों के दौयान फकए जाने लारी ऩूजा-अ ाना, व्रत इत्माहद वे ऩमाालयण की ळुवद्ध शोती शैं। उवीके वाथ-वाथ भनुटम के ळयीय औय बालना की बी ळुवद्ध शो जाती शैं। क्मोफक व्रत-उऩलाव ळयीय को ळुद्ध कयने का ऩायॊऩरयक तयीका शैं जो प्राकृ ततक-ध फकत्वा का बी एक भशत्लऩूणा तत्ल शै। मशी कायण शैं की वलश्ल के प्राम् वबी प्रभुख धभों भें व्रत का भशत्ल शैं। इवी सरए हशन्दू वॊस्कृ तत भें मुगो-मुगो वे नलयािों के दौयान व्रत कयने का वलधान शैं। क्मोकी व्रत के भाध्मभ वे प्रथभ भनुटम का ळयीय ळुद्ध शोता शैं, ळयीय ळुद्ध शोतो भन एलॊ बालनाएॊ ळुद्ध शोती शैं। ळयीय की ळुवद्ध के त्रफना भन ल बाल की ळुवद्ध वॊबल नशीॊ शैं। ैि नलयािों के दौयान वबी प्रकाय के व्रत-उऩलाव ळयीय औय भन की ळुवद्ध भें वशामक शोते शैं। नलयािों भें फकमे गमे व्रत-उऩलाव का वीधा अवय शभाये अच्छे स्लास््म औय योगभुत्क्त के सरमे बी वशामक शोता शैं। फडी धूभ-धाभ वे फकमा गमा नलयािों का आमोजन शभें वुखानुबूतत एलॊ आनॊदानुबूतत प्रदान कयता शैं। भनुटम के सरए आनॊद की अलस्था वफवे अच्छी अलस्था शैं। जफ व्मत्क्त आनॊद की अलस्था भें शोता शैं तो उवके ळयीय भें तनाल उत्ऩन्न कयने लारे वूक्ष्भ कोऴ वभाप्त शो जाते शैं औय जो वूक्ष्भ कोऴ उत्वत्जता शोते शैं ले शभाये ळयीय के सरए अत्मॊत राबदामक शोते शैं। जो शभें नई व्माधधमों वे फ ाने के वाथ शी योग शोने की दळा भें ळीघ्र योगभुत्क्त प्रदान कयने भें बी वशामक शोते शैं। नलयाि भें दुगाावप्तळती को ऩढने मा वुनने वे देली अत्मन्त प्रवन्न शोती शैं एवा ळास्िोक्त ल न शैं। वप्तळती का ऩाठ उवकी भूर बाऴा वॊस्कृ त भें कयने ऩय शी ऩूणा प्रबाली शोता शैं। व्मत्क्त को श्रीदुगाावप्तळती को बगलती दुगाा का शी स्लरूऩ वभझना ाहशए। ऩाठ कयने वे ऩूला श्रीदुगाावप्तळती फक ऩुस्तक का इव भॊि वे ऩॊ ोऩ ायऩूजन कयें-
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    9 2019 नभोदेव्मैभशादेव्मैसळलामैवततॊनभ:। नभ: प्रकृत्मैबद्रामैतनमता:प्रणता:स्भताभ्॥ जो व्मत्क्त दुगाावप्तळतीके भूर वॊस्कृ त भें ऩाठ कयने भें अवभथा शों तो उव व्मत्क्त को वप्तश्रोकी दुगाा को ऩढने वे राब प्राप्त शोता शैं। क्मोफक वात श्रोकों लारे इव स्तोि भें श्रीदुगाावप्तळती का वाय वभामा शुला शैं। जो व्मश्तत सप्तवरोकी दुगाा का बी न कय सके वह के वर नवााण भॊर का अधधकाधधक जऩ कयें। देवी के ऩूजन के सभम इस भॊर का जऩ कये। जमन्ती भङ्गराकारी बद्रकारी कऩासरनी। दुगाा षभा सळला धािी स्लाशा स्लधानभोऽस्तुते॥ देवी से प्राथाना कयें- वलधेहशदेवलकल्माणॊवलधेहशऩयभाॊधश्रमभ्। रूऩॊदेहशजमॊदेहशमळोदेहशद्वद्वऴोजहश॥ अथाात् शे देवल! आऩ भेया कल्माण कयो। भुझे श्रेटठ वम्ऩत्त्त प्रदान कयो। भुझे रूऩ दो, जम दो, मळ दो औय भेये काभ-क्रोध इत्माहद ळिुओॊ का नाळ कयो। ववद्वानो के अनुशाय सम्ऩूणा नवयारव्रत के ऩारन भें जो रोगों असभथा हो वह नवयार के सात यारी,ऩाॊच यारी, दों यारी औय एक यारी का व्रत बी कयके राब प्राप्त कय सकते हैं। नवयार भें नवदुगाा की उऩासना कयने से नवग्रहों का प्रकोऩ शाॊत होता हैं। Are you Looking for earn a great Incomes ? Join us and Become a Seller / Reseller with Minimum investment. Start Sell products Online & Offline. We are offer to Seller/Reseller A Free Multiple Premium E-commerce Website (Get A Live E-commerce Website in 1 Hour.) + Free Product Catalog Support + Premium Seller Support Team to make everything easy and convenient. >> to know more Ask us >> GURUTVA KARYALAY BHUBNESWAR-751018, (ODISHA), Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Check Our Products Online : www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvakaryalay.in
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    10 2019 वला कामासववद्ध कल त्जव व्मत्क्त को राख प्रमत्न औय ऩरयश्रभ कयने के फादबी उवे भनोलाॊतछत वपरतामे एलॊ फकमे गमे कामा भें सववद्ध (राब) प्राप्त नशीॊ शोती, उव व्मत्क्त को वला कामा सववद्ध कल अलश्म धायण कयना ाहशमे। कवच के प्रभुख राब: वला कामा सववद्ध कल के द्वारा वुख वभृवद्ध औय नव ग्रहों के नकायात्भक प्रबाल को ळाॊत कय धायण कयता व्मत्क्त के जीलन वे वला प्रकाय के दु:ख-दारयद्र का नाळ शो कय वुख-वौबाग्म एलॊ उन्नतत प्रात्प्त शोकय जीलन भे वसब प्रकाय के ळुब कामा सवद्ध शोते शैं। त्जवे धायण कयने वे व्मत्क्त महद व्मलवाम कयता शोतो कायोफाय भे लृवद्ध शोतत शैं औय महद नौकयी कयता शोतो उवभे उन्नतत शोती शैं।  वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें सवाजन वशीकयण कल के सभरे शोने की लजश वे धायण कताा की फात का दूवये व्मत्क्तओ ऩय प्रबाल फना यशता शैं।  वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें अष्ट रक्ष्भी कल के सभरे शोने की लजश वे व्मत्क्त ऩय वदा भाॊ भशा रक्ष्भी की कृ ऩा एलॊ आळीलााद फना यशता शैं। त्जस्वे भाॊ रक्ष्भी के अटट रुऩ (१)-आहद रक्ष्भी, (२)-धान्म रक्ष्भी, (३)- धैमा रक्ष्भी, (४)-गज रक्ष्भी, (५)-वॊतान रक्ष्भी, (६)- वलजम रक्ष्भी, (७)-वलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो का अळीलााद प्राप्त शोता शैं।  वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें तॊर यऺा कल के सभरे शोने की लजश वे ताॊत्रिक फाधाए दूय शोती शैं, वाथ शी नकायात्भक ळत्क्तमो का कोइ कु प्रबाल धायण कताा व्मत्क्त ऩय नशीॊ शोता। इव कल के प्रबाल वे इऴाा-द्वेऴ यखने लारे व्मत्क्तओ द्वारा शोने लारे दुटट प्रबालो वे यषा शोती शैं।  वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें शरु ववजम कल के सभरे शोने की लजश वे ळिु वे वॊफॊधधत वभस्त ऩयेळातनओ वे स्लत् शी छु टकाया सभर जाता शैं। कल के प्रबाल वे ळिु धायण कताा व्मत्क्त का ाशकय कु छ नशी त्रफगाड वकते। अन्म कल के फाये भे अधधक जानकायी के सरमे कामाारम भें वॊऩका कये: फकवी व्मत्क्त वलळेऴ को वला कामा सववद्ध कल देने नशी देना का अॊततभ तनणाम शभाये ऩाव वुयक्षषत शैं। >> Shop Online | Order Now GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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    11 2019 क्मा फकवीके ळयीय भें देली-देलता आ वकते शैं ?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम क्मा इव आधुतनक मुग भें फकवी भानल ळयीय भें देली-देलता आ वकते शैं? क्मा देली-देलता के भानल ळयीय भें प्रलेळ वे स्िी-ऩुरुऴ का अॊगायों ऩय रना, उऩरते दूध मा तेर भें शाथ डारना, अऩने ळायीय भें कीर मा नुकीरी ीजे फ़वाना, इत्माहद अनेको उदाशयण शभें आए हदन देखने को सभर जाते शैं। क्मा देली-देलता भानल ळयीय भें प्रलेळ कय अजीफ तयीके वे व्मलशाय कयते शैं। इव वॊवाय भें एवे रोग शैं जो भानते शै मा त्जनका दाला शैं फक फकवी व्मत्क्त वलळेऴ के ळयीय भें फकवी एक तनत्श् त वभम, लाय, ततधथ अथला व्मत्क्त के फुराने ऩय उवके ळयीय भें देली-देलता प्रलेळ कयेते शैं, औय रोगों के दु्ख, ददा, फीभायी इत्मादी को दूय कयते शैं। त्जवभे कु छ का भानना शैं देली- देलता ऩीडडत व्मत्क्त के भन के वलारों मा अथला उनकी वभस्माओॊ को जान रेते शैं औय उनके द्वाया उवके वलार ऩुछने वे ऩशरे शैं देली-देलता उवके प्रश्नों का शर फता देते शै ? कु छ जानकायों का मश भानना शैं फक जो रोग अऩने ळयीय भें देली-देलता आने का दाला कयते शैं, औय जफ उनके ळयीय भें देली-देलता का प्रलेळ शोता शैं मा ळयीय भें शोते शैं तफ लश रोग स्लमॊ देली-देलता की आयाधना कयते शैं औय लशाॊ ऩय उऩत्स्थत बक्त गणों को देली-देलता के रुऩभें आळीलााद बी प्रदान कयते शैं। महद उवके ळयीय भें स्लमॊ देली-देलता का प्रलेळ शोता शैं तो लश देली-देलता अऩने ध ि मा भूतता मा स्लमॊ की आयाधना मा उऩावना क्मों कयते शैं ? क्मा मश वॊबफ शैं कोई देले-देलता स्लमॊ की आयाधना मा उऩावना कयते शो? शभाये देळ भें कु छ एवी जगशें शैं जशा रोगों का भानना शैं की फकवी तनत्श् त वभम, हदन, ततधथ को फकवी वलळेऴ एक देली- देलता प्रलेळ फकवी ळयीय भें अथला एक वे अधधक देली-देलता का एक वाथ भें एकाधधक ळयीय भें प्रलेळ शोता शैं? कु छ का कशना शैं की जफ एकाधधक ळयीय भें देली-देलता का प्रलेळ शोता शैं तो लश वफ देली-देलता सभरकय नृत्म कयने रगते शै?, खेरने रगते शैं?, अॊगायों ऩय नॊगे ऩैय रने रगते शै?, अजीफ तयीके की शयकते कयने रगते शैं? क्मा मश वॊबल शैं? कु छ जानकाय वलद्वानों एलॊ ळोध कताा की भाने तो मश वॊबल नशीॊ शैं, जो रोग मश दाला कयते शैं की उनके ळयीय भें देली- देलता का प्रलेळ शोता शैं उन रोगों का उद्देळ के लर अन्म रोगों को अऩनी औय आकवऴात कयना मा ऩैवे तनकारना अथला अऩना उल्रू वीधा कयना शी शोता शैं। अधधकतय वलद्वान वाधकों के भतानुळाय देली- देलता महद फकवी भनुटम के वभष बी शो तो के लर
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    12 2019 भनुटम कोअनुबूतत शोती शैं। जैवे उव ळत्क्त की उऩत्स्थती वे लातालयण भें आकत्स्भक ऩरयलतान शोना, उनके उऩत्स्थत शोने वे फकवी हदव्म तेज अथला ळत्क्त ऩूॊज, लातालयण भें वुगॊध का पै रना इत्माहद का आबाव शोता शैं एलॊ देली-देलता फकवी भनुटम देश भें प्रलेळ नशीॊ कयते मा लश फकवी बी तयश के बौततक ध ह्न नशीॊ छोडते! कु छ वलद्वानों का कथ शैं की देली-देलता के दळान वाधक को तफ शोता शै, जफ उवके अॊतय भन के बाल गशन शोते शैं, तफ वाधना के दौयान एक वभम आता शैं जफ वाधक को मश अनुबल शोता शैं की देली-देलता उवके वाभने प्रकट शो गमे शैं मा उन्शें दळान दे यशे शैं, उवी रुऩ भें मा आकृ तत भे शोते शैं जो आकृ तत वाधक के अॊतय भन भें अॊफकत शोती शैं। वाधक को अनुबूतत शोती शैं की लश देली-देलता उनवे फाते कय यशा शैं, मश वाधक की कल्ऩना का वाकाय शोना शै। लश देली-देलता लास्तल भें वाधक वे फात कयती शैं उवके प्रश्नो का उत्तय देती शै मा उवे आळीलााद देकय दळान देती शैं। मश वफ के लर वाधक को शी अनुबूत शोती शैं, लशाॊ कोई औय अन्म व्मत्क्त बी शो तो वाधक के अराला फकवी दूवये को उवकी अनुबूतत मा दळान नशीॊ शोता। मश वफ वाधक के गशन बाल के अनुरुऩ शी प्रकट शोती शैं रेफकन फकवी दूवये भनुटम के ळयीय भें प्रलेळ नशीॊ कयती! ववशेष सूचना: मशा लणणात रेख के लर रेखक के ळोध एलॊ अनुबलों के आधाय ऩय सरखा गमा शैं। इव रेख का उद्देश्म के लर ऩाठको का भागादळान भाि शैं, फकवी वी बी व्मत्क्त वलळेऴ की धासभाक बालनाओॊ को ठेव ऩशुॊ ाने का नशीॊ शैं। इव वलऴम भें सबन्न-सबन्न रोगों के वल ाय सबन्न शो वकते शैं। *** भॊि सवद्ध दुराब वाभग्री कारी शल्दी:- 370, 550, 730, 1450, 1900 कभर गट्टे की भारा - Rs- 370 भामा जार- Rs- 251, 551, 751 शल्दी भारा - Rs- 280 धन लृवद्ध शकीक वेट Rs-280 (कारी शल्दी के वाथ Rs-550) तुरवी भारा - Rs- 190, 280, 370, 460 घोडे की नार- Rs.351, 551, 751 नलयत्न भारा- Rs- 1050, 1900, 2800, 3700 & Above शकीक: 11 नॊग-Rs-190, 21 नॊग Rs-370 नलयॊगी शकीक भारा Rs- 280, 460, 730 रघु श्रीपर: 1 नॊग-Rs-21, 11 नॊग-Rs-190 शकीक भारा (वात यॊग) Rs- 280, 460, 730, 910 नाग के ळय: 11 ग्राभ, Rs-145 भूॊगे की भारा Rs- 190, 280, Real -1050, 1900 & Above स्पहटक भारा- Rs- 235, 280, 460, 730, DC 1050, 1250 ऩायद भारा Rs- 1450, 1900, 2800 & Above वपे द ॊदन भारा - Rs- 460, 640, 910 लैजमॊती भारा Rs- 190, 280, 460 यक्त (रार) ॊदन - Rs- 370, 550, रुद्राष भारा: 190, 280, 460, 730, 1050, 1450 भोती भारा- Rs- 460, 730, 1250, 1450 & Above वलधुत भारा - Rs- 190, 280 कासभमा सवॊदूय- Rs- 460, 730, 1050, 1450, & Above भूल्म भें अॊतय छोटे वे फडे आकाय के कायण शैं। >> Shop Online | Order Now GURUTVA KARYALAY BHUBNESWAR-751018, (ODISHA), Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com
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    13 2019 ऩूजा भेंकरळ स्थाऩन का भशत्ल  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम - - ब - ब ब  क्मा आऩके फच् े कु वॊगती के सळकाय शैं?  क्मा आऩके फच् े आऩका कशना नशीॊ भान यशे शैं?  क्मा आऩके फच् े घय भें अळाॊतत ऩैदा कय यशे शैं? घय ऩरयलाय भें ळाॊतत एलॊ फच् े को कु वॊगती वे छु डाने शेतु फच् े के नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्वाया ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रततत्टठत ऩूणा ैतन्म मुक्त लळीकयण कल एलॊ एव.एन.डडब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भें स्थावऩत कय अल्ऩ ऩूजा, वलधध-वलधान वे आऩ वलळेऴ राब प्राप्त कय वकते शैं। महद आऩ तो आऩ भॊि सवद्ध लळीकयण कल एलॊ एव.एन.डडब्फी फनलाना ाशते शैं, तो वॊऩका इव कय वकते शैं। GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com www.gurutvajyotish.com and gurutvakaryalay.blogspot.com
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    14 2019 ळुब कामोंभें श्रीपर ढ़ाने का भशत्ल?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम नारयमर ळुबता का वू क शोने के कायण शी इवे "श्रीपर" कशा जाता शैं। श्रीपर का भशत्ल अत्माधधक एलॊ वलाि यशा शैं। श्रीपर को हशॊदी भें नारयमर, खोऩया, गयी, गोरा आहद नाभ वे जाना जाता शैं, इव भयाठी भें नायऱ, गुजयाती भें नारयमय, श्रीपर, नारयमेऱ, फॊगारी भें, नारयके र, डाफेय नायके र, ऩमोधय, कन्नड भें तॊधगनकातम, तॊधगन, कॊब्फरय, तॊधगनकातमम भरमारभ भें नासऱके यॊ, लेसऱच् ण्ण, तेण्णा, नेऩासर भें नरयलर, नरयलरको तसभर भें तेंकाम, तेन्नै, तेनकु , तेरुगु कोब्फरय, आहद नाभों वे जाना जाता शैं। नारयमर को वॊस्कृ त भें श्रीपर कशा जाता शैं। हशॊदू धभा भें वबी प्रकाय के धासभाक एलॊ भाॊगसरक कामों भें श्रीपर अथाात नारयमर का वलळेऴ भशत्ल ऩौयाणणक कार वे शी यशा शै। हशॊदू धभा की ऩयॊऩयाओॊ के अनुळाय जफ फकवी नमे कामाा मा ळुब कामा का प्रायॊब मा ळुबायॊब कयना शो तो देली-देलता के वम्भुख श्रीपर अऩाण कयने औय उवे पोडने का वलळेऴ भशत्ल यशा शै। महश कायण शैं की वबी प्रकाय के धासभाक कामों भें अन्म ऩूजन वाभग्रीमों के वाथ भें श्रीपर बी वलळेऴ रुऩ वे शोता शैं। धासभाक भान्मता के अनुळाय श्रीपर का उऩमोग फसर कभा के प्रततक के रुऩ भें बी फकमा जाता शैं। फसर कभा अथाात उऩशाय अथला नैलेद्य की लस्तु। देली-देलताओॊको फसर अऩाण कयने का तत्ऩमा शोता शैं उनकी वलळेऴ कृ ऩा प्राप्त कयना मा उनकी द्वाया प्राप्त शुई कृ ऩा के प्रतत कृ तसता अथाात आबाय व्मक्त कयना। श्रीपर पोडने की ऩयॊऩया भान्मता शैं की ऩुयातन कार भें हशॊदू धभा भें भनुटम औय जानलयों की फसर देने फक ऩयॊऩया एक वाभान्म प्रथा थी। वलद्वानों के भतानुळाय जगदगुरु आहद ळॊकया ामा जी ने इव फसर ऩयॊऩया को तोडा औय भनुटम-जानलयों के स्थान ऩय श्रीपर ढ़ाने की ऩयॊऩया ळुरु शुई। श्रीपर को भनुटम के भस्तक का प्रततक भान कय फसर स्लरुऩ ढ़ामा जाता शैं। श्रीपर की जटा को भनुटम के फार, श्रीपर की जटा के तनकट हदखने लारे तीन गोराकाय ध ह्नों को को भनुटम की आॊखों एलॊ नाक, श्रीपर के कठोय कल को भनुटम की खोऩडी, श्रीपर के ऩानी को भनुटम के खून, श्रीपर के गूदे को भनुटम का हदभाग भाना जाता शै। श्रीपर पोडने का भशत्ल श्रीपर पोडने भुख्म उद्देश्म भनुटम के अशॊकाय को दूय कय औय स्लमॊ को बगलान वभवऩात कयने की बालना शैं। भान्मता शैं फक ऐवा कयने ऩय भनुटम की असानता एलॊ अशॊकाय का कठोय कल टूट जाता शै औय मश आत्भ ळुवद्ध औय सान का द्वाय खोरता शै, त्जववे नारयमर के गूदे लारे वपे द हशस्वे के रूऩ भें देखा जाता शै। श्रीपर को देली- देलता को आऩाब कय उवका प्रवाद फाॉटने की प्रथा हशॊदू वॊस्कृ तत भें वलााधधक रोकवप्रम शैं। वलद्वानों को भतानुळाय श्रीपर के ऩानी को ऩीने वे भनुटम को अत्मधधक वुख एलॊ वॊतुत्टट की अनुबूतत शोती शैं। 
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    15 2019 नलयाि व्रतकी वयर वलधध?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम नल हदनों तक रने लारे इव ऩला ऩय शभ व्रत यखकय भाॊ के नौ अरग-अरग रूऩ की ऩूजा की जाती शैं। इव दौयान घय भें फकमा जाने लारा वलधधलत शलन बी स्लास््म के सरए अत्मॊत राबप्रद शैं। शलन वे आत्त्भक ळाॊतत औय लातालयण फक ळुवद्ध के अराला घय नकायात्भक ळत्क्तमों का नाळ शो कय वकायात्भक ळत्क्तमो का प्रलेळ शोता शैं। नवयार व्रत नलयाि भें नल याि वे रेकय वात यािी,ऩाॊ यािी, दों यािी औय एक यािी व्रत कयने का बी वलधान शैं। नलयाि व्रत के धासभाक भशत्ल के अराला लैसातनक भशत्ल शैं, जो स्लास््म की दृत्टट वे कापी राबदामक शोता शैं। व्रत कयने वे ळयीय भें ुस्ती-पु तॉ फनी यशती शैं। योजाना कामा कयने लारे ऩा न तॊि को बी व्रत के हदन आयाभ सभरता शैं। फच् े, फुजुगा, फीभाय, गबालती भहशरा को नलयाि व्रत का नशीॊ यखना ाहशए। नवयार व्रत से सॊफॊधधत उऩमोगी सुझाव  व्रत के दौयान अधधक वभम भौन धायण कयें।  व्रत के ळुरुआत भें बूख कापी रगती शैं। ऐवे भें नीॊफू ऩानी वऩमा जा वकता शै। इववे बूख को तनमॊत्रित यखने भें भदद सभरेगी।  जशा तक वॊबल शो तनजारा उऩलाव न यखें। इववे ळयीय भें ऩानी फक कभी शो जाती शैं औय अऩसळटट ऩदाथा ळयीय के फाशय नशीॊ आ ऩाते। इववे ऩेट भें जरन, कब्ज, वॊक्रभण, ऩेळाफ भें जरन जैवी कई वभस्माएॊ ऩैदा शो वकती शैं।  एक वाथ खूफ वाया ऩानी ऩीने के फजाए हदन भें कई फाय नीॊफू ऩानी वऩएॊ।  ज्मादातय रोगो को उऩलाव भें अक्वय कब्ज की सळकामत शो जाती शैं। इवसरए व्रत ळुरू कयने के ऩशरे त्रिपरा, आॊलरा, ऩारक का वूऩ मा कयेरे के यव इत्माहद ऩदाथो का वेलन कयें। इववे ऩेट वाप यशता शै।  व्रत के दौयान ाम, कापी का वेलन कापी फढ़ जाता शै। इव ऩय तनमॊिण यखें। व्रत के दौयान कौनसे खाद्य ऩदाथा ग्रहण कयें?  व्रत भें अन्न का वेलन लत्जात शैं। त्जव कायण ळयीय भें ऊजाा की कभी शो जाती शैं।  अनाज फक जगश परों ल वत्ब्जमों का वेलन फकमा जा वकता शैं। इववे ळयीय को जरुयी ऊजाा सभरती शैं।  वुफश के वभम आरू को फ्राई कयके खामा जा वकता शैं। आरू भें काफोशाइड्रेट प्र ुय भािा भें शोता शै। इव सरए आरू खाने वे ळयीय को ताकत सभरती शै।  वुफश एक धगराव दूध वऩरें। दोऩशय के वभम पर मा जूव रें। ळाभ को ाम ऩी वकते शैं।  कई रोग व्रत भें एक फाय शी बोजन कयते शैं। ऐवे भें एक तनत्श् त अॊतयार ऩय पर खा वकते शैं। यात के खाने भें सवॊघाडे के आटे वे फने ऩकलान खा वकते शैं।
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    16 2019 भाॊ केयणों तनलाव कयते वभस्त शैं तीथा  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम : : ब , , ? : ' , ब : , ब , ब - , ब ब ब , : ब -ब ब ब ब ब ब ब ब - ब ब ब ब ***
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    17 2019 देली उऩावनाभें उऩमुक्त एलॊ तनवऴद्ध ऩि ऩुटऩ  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम देवी के लरमे उऩमुतत ऩर-ऩुष्ऩ का चमन  वलद्वानों के भतानुळाय जो ऩि-ऩुटऩ बगलान सळलजी को वप्रम शैं मा जो सळलजी को अऩाण फकमे जाते शैं ले वबी ऩि-ऩुटऩ देली बगलती को बी वप्रम शैं ।  देली बगलती को अऩाभागा अधधक वप्रम शैं, इव सरए अधधकतय देली ऩूजन भें अऩाभागा वलळेऴ रुऩ वे ढामा जाता शैं।  इव के अराला वलद्वानो का कथन शैं की जो ऩि-ऩुटऩ ळास्िोक्त वलधान वे बगलान सळल की ऩूजा भें तनऴेध शैं उवे बी देली ऩूजन भें ढ़ामे जा वकते शैं।  देली बगलती को वबी प्रकाय के रार पू र ढाएॊ जा वकते शैं क्मोफक रार यॊग के वबी पू र बगलतीको वप्रम शैं तथा वुगत्न्धत वभस्त श्लेत पू र बी बगलतीको अधधक वप्रम शैं।  देली बगलती के ऩूजन भें भेरी, भदाय, के वय, फेरा, श्लेत औय रार पू र, श्लेत कभर, ऩराळ, तगय, अळोक, ॊऩा, भौरसवयी, कुॊ द, रोध, कनेय, आक, ळीळभ औय अऩयात्जत ( अथाात ळॊखऩुटऩी) आहदका उऩमोग फकमा जा वकता शैं।  कु छ जानकायों का कथन शैं की देली बगलती के ऩूजन भें आक औय भदाय मश दो पू रों को तनऴेध शैं।  मशीॊ कायण शैं की उक्त दोनों पू र को वलसबन्न भत के कायण देली दुगाा के ऩूजन भे उऩमोग बी फकम जाते शैं औय तनवऴद्ध बी भाने जाते शैं।  महद फकवी कायण लळ जफ अन्म उऩमुक्त पू र न सभरे तफ इन दोनोंका उऩमोग फकमा जा वकता शैं ।  देली दुगाा को छोडकय देवलमों ऩय इन दोनों को नशीॊ ढाना ाहशए। रेफकन देली दुगाा ऩय ढ़ामा जा वकता शैं। क्मोंफक कु छ जानकायों का भत शैं की दुगााकी ऩूजाभें इन दोनोंका वलधान ळास्िोक्त शैं।  ळभी, अळोक, कणणाकाय (कतनमाय मा अभरताव), गूभा, दोऩशरयमा, अगस्त्म, भदन, सवन्दुलाय, ळल्रकी, भाधल आहद रताऍ, कु ळकी भॊजरयम ॊ, त्रफल्लऩि, के लडा, कदम्फ, बटकटैमा, कभर मे पू र देली बगलती को वप्रम शैं।  आक औय भदायकी तयश दूलाा, ततरक, भारती, तुरवी, बॊगयैमा औय तभार उऩमुक्त एलॊ प्रततवऴद्ध शैं अथाात मे ळास्िोंवे वलहशत बी शैं औय तनवऴद्ध बी शैं। * वलहशत-प्रततसळद्धके वम्फन्धके तत्त्लवागयवॊहशताक भें उल्रेख शैं फक जफ ळास्िोंवे वलहशत पू र न सभर ऩामें तो वलहशत-प्रततवऴद्ध पू रोंवे ऩूजा फक जा वकती शैं। श्री भहारक्ष्भी मॊर धन फक देली रक्ष्भी शैं जो भनुटम को धन, वभृवद्ध एलॊ ऐश्लमा प्रदान कयती शैं। अथा(धन) के त्रफना भनुटम जीलन दु्ख, दरयद्रता, योग, अबालों वे ऩीडडत शोता शैं, औय अथा(धन) वे मुक्त भनुटम जीलन भें वभस्त वुख-वुवलधाएॊ बोगता शैं। श्री भशारक्ष्भी मॊि के ऩूजन वे भनुटम की जन्भों जन्भ की दरयद्रता का नाळ शोकय, धन प्रात्प्त के प्रफर मोग फनने रगते शैं, उवे धन-धान्म औय रक्ष्भी की लृवद्ध शोती शैं। श्री भशारक्ष्भी मॊि के तनमसभत ऩूजन एलॊ दळान वे धन की प्रात्प्त शोती शै औय मॊि जी तनमसभत उऩावना वे देली रक्ष्भी का स्थाई तनलाव शोता शै। श्री भशारक्ष्भी मॊि भनुटम फक वबी बौततक काभनाओॊ को ऩूणा कय धन ऐश्लमा प्रदान कयने भें वभथा शैं। अषम तृतीमा, धनतेयव, दीलालरी, गुरु ऩुटमाभृत मोग यवलऩुटम इत्माहद ळुब भुशूता भें मॊि की स्थाऩना एलॊ ऩूजन का वलळेऴ भशत्ल शैं। >> Shop Online | Order Now GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
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    18 2019 भनोकाभना ऩूतताशेतु नलयाि भें देली को कै वे अऩाण कयें बोग?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम नलयाि के नौ हदनों भें तीन देवलमों क्रभळ् ऩालाती, रक्ष्भी औय वयस्लती औय देली के नौ रुऩों का कभळ् ळैरऩुिी, ब्रह्भा ारयणी, ॊद्रघण्टा, कू टभाण्डा, स्कॊ दभाता, कात्मामनी, कारयात्रि, भशागौयी औय सववद्धदािी का ऩूजन फकमा जाता शैं।, नलयािे के प्रथभ तीन हदन ऩालाती के तीन स्लरुऩों का ऩूजन फकमा जाता शैं, अगरे तीन हदन भाॉ रक्ष्भी के स्लरुऩों का ऩूजन फकमा जाता शैं औय आणखयी के तीन हदन वयस्लती भाता के स्लरुऩों की ऩूजा की जाती शैं। उवी प्रकाय नौ देलीमों को क्रभळ् प्रथभ हदन ळैरऩुिी, द्वद्वतीम हदन ब्रह्भा ारयणी, तृतीम हदन न्द्रघण्टा, तुथा हदन कु टभाण्डा, ऩॊ भ् हदन स्कन्द भाता, ऴटठभ ् हदन कात्मातमनी, वाप्तभ् हदन कारयात्रि, अटटभ् हदन भशागौयी औय नौलें हदन सववद्धदािी के रुऩ का ऩूजन फकमा जाता शैं। नलयािे के नौ हदनों तक बक्त के भन भें मश कौतुशर शोता शैं, फक लश भाता को बोग भें क्मा ढ़ामे, त्जववे भाॉ ळीघ्र प्रवन्न शों जामे. हशन्दू धभा भें कोई बी त्मौशाय, व्रत-उऩलाव देली-देलताओॊ को बोग, प्रवाद अत्ऩाण फकमे त्रफना वॊऩन्न नशीॊ शोता शै। नलयािे के नौ हदन भें नौ देवलमों को अरग-अरग बोग रगाने का वलधान धभाळास्िों भें लणणात शैं। नवयार के प्रथभ हदन देवी शैरऩुरी: नलयाि के प्रथभ हदन भाॊ के ळैरऩुिी स्लरूऩ का ऩूजन कयने का वलधान शैं। ऩलातयाज (ळैरयाज) हशभारम के मशाॊ ऩालाती रुऩ भें जन्भ रेने वे बगलती को ळैरऩुिी कशा जाता शैं। इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके नैलेद्य के रूऩ भें देली को गाम का घृत (घी) अऩाण कयना ाहशए। भाॊ को यणों ढ़ामे गमे घृत को ब्राम्शणों भें फाॊटने वे योगों वे भुत्क्त सभरती शै। देली कृ ऩा वे व्मत्क्त वदा धन-धान्म वे वॊऩन्न यशता शैं। अथाात उवे त्जलन भें धन एलॊ अन्म वुख वाधनो को कभी भशवुव नशीॊ शोतीॊ। नवयार के द्वद्वतीम हदन ब्रह्भाचारयणी: नलयाि के दूवये हदन भाॊ के ब्रह्भ ारयणी स्लरूऩ का ऩूजन कयने का वलधान शैं। क्मोफक ब्रह्भ का अथा शैं तऩ। भाॊ ब्रह्भ ारयणी तऩ का आ यण कयने लारी बगलती शैं इवी कायण उन्शें ब्रह्भ ारयणी कशा गमा। इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली को ीनी का बोग रगाकय दान कयना ाहशए। ीनी का बोग रागाने वे भनुटम दीघाजीली शोता शैं। देली कृ ऩा वे व्मत्क्त को अनॊत पर फक प्रात्प्त शोती शैं। व्मत्क्त भें तऩ, त्माग, वदा ाय, वॊमभ जैवे वद् गुणों फक लृवद्ध शोती शैं। नवयार के तृतीम हदन चन्रघॊटा: नलयाि के तीवये हदन भाॊ के न्द्रघण्टा स्लरूऩ का ऩूजन कयने का वलधान शैं। न्द्रघण्टा का स्लरूऩ ळाॊततदामक औय ऩयभ कल्माणकायी शैं। न्द्रघण्टा के भस्तक ऩय घण्टे के आकाय का अधा न्द्र ळोसबत यशता शैं। इव सरमे भाॊ को न्द्रघण्टा देली कशा जाता शैं। इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली को दूध का बोग रगाकय दान कयना ाहशए। दूध का बोग रागाने वे व्मत्क्त को दुखों वे भुत्क्त सभरती शैं। देली कृ ऩा वे व्मत्क्त को वबी ऩाऩों वे भुत्क्त सभरती शैं उवे वभस्त वाॊवारयक आधध-व्माधध वे भुत्क्त सभरती शैं। इवके उऩयाॊत व्मत्क्त को ध यामु, आयोग्म, वुखी औय वॊऩन्न शोनता प्राप्त शोती शैं। व्मत्क्त के वाशव एल वलयता भें लृवद्ध शोती शैं। व्मत्क्त स्लय भें सभठाव आती शैं उवके आकऴाण भें बी लृवद्ध शोती शैं। न्द्रघण्टा को सान की देली बी भाना गमा शै।
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    19 2019 नवयार केचतुथा हदन कू ष्भाण्डा: नलयाि के तुथा हदन भाॊ के कू टभाण्डा स्लरूऩ का ऩूजन कयने का वलधान शैं। अऩनी भॊद शॊवी द्वाया ब्रह्भाण्ड को उत्ऩन्न फकमा था इवीके कायण इनका नाभ कू टभाण्डा देली यखा गमा। इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली को भारऩुआ बोग रगाकय दान कयना ाहशए। भारऩुए का बोग रागाने वे व्मत्क्त फक वलऩत्त्त का नाळ शोता शैं। देली कृ ऩा वे व्मत्क्त को वबी प्रकाय के योग, ळोक औय क्रेळ वे भुत्क्त सभरती शैं, उवे आमुटम, मळ, फर औय फुवद्ध प्राप्त शोती शैं। नवयार के ऩॊचभ हदन स्कॊ दभाता: नलयाि के ऩाॊ लें हदन भाॊ के स्कॊ दभाता स्लरूऩ का ऩूजन कयने का वलधान शैं। स्कॊ दभाता कु भाय अथाात ् कातताके म फक भाता शोने के कायण, उन्शें स्कन्दभाता के नाभ वे जाना जाता शैं। इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली को के रे का बोग रगाकय दान कयना ाहशए। के रे का बोग रागाने वे व्मत्क्त फक फुवद्ध, वललेक का वलकाव शोता शैं। व्मत्क्त के ऩरयलायीकवुख वभृवद्ध भें लृवद्ध शोती शैं। देली कृ ऩा वे व्मत्क्त फक वभस्त इच्छाओॊ की ऩूतता शोती शैं एलॊ जीलन भें ऩयभ वुख एलॊ ळाॊतत प्राप्त शोती शैं। नवयार के षष्ठभ् हदन कात्मामनी नलयाि के छठें हदन भाॊ के कात्मामनी स्लरूऩ का ऩूजन कयने का वलधान शैं। भशवऴा कात्मामन फक ऩुिी शोने के कायण उन्शें कात्मामनी के नाभ वे जाना जाता शैं। इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली को भधु (ळशद, भशु, भध) का बोग रगाकय दान कयना ाहशए। भधु का बोग रागाने वे व्मत्क्त को वुॊदय स्लरूऩ फक प्रात्प्त शोती शैं। कात्मामनी देली को लैहदक मुग भें मे ऋवऴ-भुतनमों को कटट देने लारे यष-दानल, ऩाऩी जील को अऩने तेज वे शी नटट कय देने लारी भाना गमा शैं। नवयार के सप्तभ् हदन कारयात्रर नलयाि के वातलें हदन भाॊ के कारयात्रि स्लरूऩ का ऩूजन कयने का वलधान शैं। कारयात्रि देली के ळयीय का यॊग घने अॊधकाय फक तयश एकदभ कारा शैं। इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली को गुड का बोग रगाकय दान कयना ाहशए। गुड का बोग रागाने वे व्मत्क्त के वभस्त ळोक दूय शोते शैं। कारयात्रि के ऩूजन वे अत्ग्न बम, आकाळ बम, बूत वऩळा इत्मादी ळत्क्तमाॊ कारयात्रि देली के स्भयण भाि वे शी बाग जाते शैं, कारयात्रि का स्लरूऩ देखने भें अत्मॊत बमानक शोते शुले बी वदैल ळुब पर देने लारा शोता शैं, इव सरमे कारयात्रि को ळुबॊकयी के नाभवे बी जाना जाता शैं। कारयात्रि ळिु एलॊ दुटटों का वॊशाय कय ने लारी देली शैं। नवयार के अष्टभ् हदन भहागौयी नलयाि के आठलें हदन भाॊ के भशागौयी स्लरूऩ का ऩूजन कयने का वलधान शैं। भशागौयी स्लरूऩ उज्जलर, कोभर, श्लेतलणाा शोने के कायण इनका नाभ भशागौयी शैं। इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली को श्रीपर (नारयमर) का बोग रगाकय दान कयना ाहशए। श्रीपर (नारयमर) का बोग रागाने वे व्मत्क्त के वॊताऩ दूय शोते शैं। भशागौयी के ऩूजन कयने लारे वाधन के सरमे भाॊ अन्नऩूणाा के वभान, धन, लैबल औय वुख-ळाॊतत प्रदान कयने लारी एलॊ वॊकट वे भुत्क्त हदराने लारी देली भशागौयी शैं। नवयार के नवभ् हदन लसविदारी नलयाि के नौलें हदन भाॊ के सववद्धदािी स्लरूऩ का ऩूजन कयने का वलधान शैं। भाता सववद्धदािी वबी प्रकाय की सववद्धमों की प्रदाता भाना गमा शैं। सववद्धदािी को वभस्त्म सववद्धमों की स्लासभनी बी भाना जाता शैं। इव हदन देली का ऴोडळेऩ ाय वे ऩूजन कयके देली को धान के राले का बोग रागाने वे व्मत्क्त को रोक औय ऩयरोक का वुख प्राप्त शोता शैं। सववद्धदािी के ऩूजन वे व्मत्क्त फक वभस्त काभनाओॊ फक ऩूतता शोकय उवे ऋवद्ध, सववद्ध फक प्रात्प्त शोती शैं। ऩूजन वे मळ, फर औय धन फक प्रात्प्त कामो भें रे आ यशे फाधा-वलध्न वभाप्त शो जाते शैं। व्मत्क्त को मळ, फर औय धन फक प्रात्प्त शोकय उवे भाॊ फक कृ ऩा वे धभा, अथा, काभ औय भोष फक बी प्रात्प्त स्लत् शो जाती शैं।
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    20 2019 नलयािी भाॉको प्रवन्न कयने का वुनशया अलवय  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम नलयाि अथाात भाॉ दुगाा की उऩावना भें वभवऩात नौ यात। दुगाा का अथा हैं, दुगातत नासळनी शैं, जगत ् की उत्ऩत्त्त, ऩारन एलॊ वॊ ारन तीनों व्मलस्थाएॊ त्जव ळत्क्त के आधीन वम्ऩाहदत शोती शै लश जगत जननी भाॉ आहदळत्क्त बगलती शैं। भाॉ दुगाा के रुऩ अनॊत शैं, रेफकन देली को प्रधान नौ रूऩों भें नलदुगाा के नाभ वे जाना जाता शैं। आहद ळत्क्त भाॉ दुगाा वभग्र रोक भें अऩनी कृ ऩा औय करूणा लऴााती शै, भाॉ दुगाा अऩने बक्तों भें वद्द गुणों का वलकाव कयके उनभें अऩनी ळत्क्त का वॊ ाय कयते शुले वॊवाय के वभग्र प्राणणमों का वॊ ारन कयती शै। बौततकता भें यत भनुटम को अवॊखम उऩाम, ऩूजन, शलन, जऩ-तऩ के फाद बी भन की ळाॊतत नशीॊ सभरती। ऐवे भें शय तयश वे तनयाळ औय शाया ुका भनुटम महद भाॊ दुगाा की ळयण रेता शै जो तनत्श् त शी भाॉ दुगाा उवकी दुगातत का तनलायण कयती शी शै। क्मोफक, भाॉ आद्यळत्क्त की कृ ऩा वे भनुटम भें आत्भफर, द्दढ़ वलश्लाव, दमा, प्रेभ, बत्क्त जैवे वद्गुणों का वलकाव शोता शैं। जीलन के इन्शीॊ भूल्मों को वभझ कय भनुटम जीलन भें वच् ा वुख-ळाॊतत, लैबल, धन वॊऩदा को प्राप्त कयता शै। अन्मथा इव वॊवाय के दरदर वे तनकरना उवके सरए वॊबल नशीॊ शै। इवसरए भनुटम को अवॊबल को बी वॊबल कय हदखाने की ळत्क्त देली कृ ऩा वे शी प्राप्त शोती शैं। नलयाि भें ऩूजा उऩावना का भुख्म उद्देश्म शोता शैं, नलयाि भें भाॉ दुगाा की आयाधना, भनुटम के तन-भन औय इत्न्द्रमाॊ वॊमसभत शोने रगती शैं। ऩूणा तनटठा एलॊ श्रद्धा बाल वे फक गई उऩलाव वे भनुटम का तन वॊतुसरत शोता शै। भनुटम के तन के वन्तुसरत शोने ऩय मोग फर वे भनुटम की इॊहद्रमाॊ वॊमसभत शो जाती शै। इत्न्द्रमों के वॊमसभत शोने ऩय भनुटम का भन देली आयाध्मा भें त्स्थय शो जाता शै। त्जव के फर ऩय भनुटम को भनोलाॊतछत राब की प्रात्प्त शो वकती शैं, त्जवभें जया बी वॊवम नशीॊ शैं। देली उऩावना के फाये भें उल्रेख सभरता शैं की जो भनुटम अऩने भन को त्स्थय कय रेता शैं, लश वॊवाय वबी क्र वे छू ट जाता शै। वॊवाय के फकवी प्रकाय के वलध्न-फाधाएॊ उवे कटट नशीॊ ऩशुॊ ा वकते। लश भनुटम भाॉ बगलती दुगाा के वप्रम लाशन सवॊश की तयश तनबाम फन जाता शै, वॊवाय की वभस्त सववद्धमाॊ अऩने ऩयाक्रभ के फर ऩय सभरने रगती शैं। नलयाि के दौयान ळास्िोक्त भॊिों द्वाया देली वे मशीॊ प्राथना की जाती शैं, की देली अलगुणों वे शभें भुक्त कयके वद्गुणों वे मुक्त कयें। Natural Nepali 5 Mukhi Rudraksha 1 Kg Seller Pack Size : Assorted 15 mm to 18 mm and above Price Starting Rs.550 to 1450 Per KG GURUTVA KARYALAY Call Us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 or Shop Online @ www.gurutvakaryalay.com
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    21 2019 नलयाि भेंदव भशावलद्या की उऩावना वलळेऴ राबप्रद शैं  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम दव भशावल को देली दुगाा के शी दव रूऩ भाने जाते शैं। दवों भशावल भें शय भशावल अऩनी अद्वद्वतीम ळत्क्त वे भनुटम के वभस्त वॊकटों को दूय कयने लारी शैं। इन दव भशावल ओॊ के भशत्ल को वलसबन्न धभाळास्िों भें अत्मॊत उऩमोगी औय भशत्लऩूणा भाना गमा शैं। दळ भशावल को ळास्िों भें आ बगलती के दव बेद कशे गमे शैं, जो क्रभळ् (1) कारी, (2) ताया, (3) ऴोडळी, (4) बुलनेश्लयी, (5) बैयली, (6) तछन्नभस्ता, (7) धूभालती, (8) फगरा, (9) भातॊगी एलॊ (10) कभात्त्भका। देवी कारी कारी हशन्दू धभा की एक प्रभुख देली शैं । देली कारी को भाॊ दुगाा की दव भशावल ओॊ भे वे एक भाना गमा शैं। देली कारी ळत्क्त का अद्दबुत स्लरूऩ शै। भाॊ दुगाा ने कारी रूऩ दैत्मों के वॊशाय के सरए धायण फकमा था। देली कारी की उत्ऩत्त्त याषवों का अॊत कयने के सरए शुई थी। देली कारी की उत्ऩत्त्त का भूर कायण धभा की यषा औय धभा की स्थाऩना शी था देली कारी का ऩूजन बायत के वलसबन्न प्रादेसळक षेिों भें वैकडो लऴो वे शोता आमा शै। देली कारी का अथा कार अथाात वभम वे शै जो वफको ग्राव कय रेती शै। देली कारी का स्लरूऩ बरे शी कारा औय डयालना रगता शैं रेफकन देली भाॉ अऩने बक्तों को अबम लयदान देने लारी शै। बगलती तनयाकाय शोकय बी वॊवाय के वभस्त प्राणीमों के दु:ख दूय कयने के सरमे मुग-मुग भें अनेकों रूऩ धायण कयके अलताय रेती यशीॊ शैं। देली कारी को कार एलॊ ऩरयलतान की देली भाना गमा शैं। देली कारी का ऩूजन ब्रह्भाॊड के उद्धायक रूऩ भें फकमा जाता शै। देवी ताया भाॉ ताया को भाॊ दुगाा की दव भशावल ओॊ भे वे एक भाना गमा शैं। वलसबन्न तॊि वाधनाओॊ भें देली ताया की उऩावना वलासववद्धदामक भानी जाती शै। देली ताया को वूमा प्ररम की अतघटठािी देली उग्र रुऩ भाना गमा शै। जफ भनुटम को ायों औय तनयाळा औय घोय वलऩत्त्त नज़य आयशी शो उववे छु टकाया ऩाने के सरए कोई याश हदखाई नशीॊ दें यशी शो, जफ अन्म कोई देली-देलता वशामक न शो तफ भाॊ बगलती ताया के रूऩ भें उऩत्स्थत शो कय अऩने बक्त को घोय वलऩत्त्त वे भुक्त कयाती शैं। देली ताया के ऩूजन वे ळिुओॊ का नाळ शोता शैं, सान, वुख-वॊऩदा, ऐश्लमा, रूऩ-वौंदमा की लृवद्ध शोती नलयत्न जडडत श्री मॊि ळास्ि ल न के अनुवाय ळुद्ध वुलणा मा यजत भें तनसभात श्री मॊि के ायों औय महद नलयत्न जडला ने ऩय मश नलयत्न जडडत श्री मॊि कशराता शैं। वबी यत्नो को उवके तनत्श् त स्थान ऩय जड कय र के ट के रूऩ भें धायण कयने वे व्मत्क्त को अनॊत एश्लमा एलॊ रक्ष्भी की प्रात्प्त शोती शैं। व्मत्क्त को एवा आबाव शोता शैं जैवे भाॊ रक्ष्भी उवके वाथ शैं। नलग्रश को श्री मॊि के वाथ रगाने वे ग्रशों की अळुब दळा का धायण कयने लारे व्मत्क्त ऩय प्रबाल नशीॊ शोता शैं। गरे भें शोने के कायण मॊि ऩवलि यशता शैं एलॊ स्नान कयते वभम इव मॊि ऩय स्ऩळा कय जो जर त्रफॊदु ळयीय को रगते शैं, लश गॊगा जर के वभान ऩवलि शोता शैं। इव सरमे इवे वफवे तेजस्ली एलॊ परदातम कशजाता शैं। जैवे अभृत वे उत्तभ कोई औऴधध नशीॊ, उवी प्रकाय रक्ष्भी प्रात्प्त के सरमे श्री मॊि वे उत्तभ कोई मॊि वॊवाय भें नशीॊ शैं एवा ळास्िोक्त ल न शैं। इव प्रकाय के नलयत्न जडडत श्री मॊि गुरूत्ल कामाारम द्वाया ळुब भुशूता भें प्राण प्रततत्टठत कयके फनालाए जाते शैं। Rs: 4600, 5500, 6400 वे 10,900 वे अधधक >> OrderNow GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 | Shop Online : www.gurutvakaryalay.com
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    22 2019 शैं। इवके अराला देली ताया बोग औय भोष प्रदान कयने भें बी वशामक भानी गई शैं। उग्र ताया, नीर वयस्लती औय एकजटा देली ताया के रूऩ शैं। देली ताया को ब्रह्भाॊड की प्रभुख देली एलॊ याज-याजेश्लयी भाना गमा शैं। भाता रलरता भाॉ रसरता दव भशावल ओॊ भें वे एक शैं मश देली दुगाा का एक रूऩ शैं जो रसरता के नाभ वे जाना जाता शै।। देली रसरता जी का स्लरुऩ अत्मॊत शी उज्जलर ल प्रकाळ भान शै। कासरका ऩुयाण भें उल्रेख शैं की देली की गौय लणा, दो बुजाओॊ मुक्त यत्क्तभ कभर ऩय वलयात्जत शैं। रसरता देली के ऩूजन वे भनुटम को वभृवद्ध की प्राप्त शोती शै। दक्षषणभागॉ ळाक्तों (अथाात बगलती ळत्क्त की उऩावना) के भतानुवाय देली रसरता को ण्डी का स्थान प्राप्त शै। भाॉ रसरता की ऩूजा ऩद्धतत भें रसरतावशस्रनाभ, रसरतोऩाख्मान, रसरतात्रिळती आहद का ऩाठ फकमा जाता शै। भाता बुवनेववयी धभा ळास्िों भें भाता बुलनेश्लयी को वृत्टट के वभस्त ऐश्लमय की स्लासभनी कशाॊ गमा शैं। बुलनेश्लयी भाता का लणा श्माभ तथा गौय लणा शैं, स्लरुऩ एक भुख, ाय शाथ शैं ाय शाथों भें गदा ळत्क्त का एलॊ दॊड व्मलस्था का प्रतीक शै। आळीलााद भुद्रा प्रजाऩारन का प्रतीक शै, मश वलोच् वत्ता का प्रतीक शैं। वलश्ल बुलन भें जो, ईश्लय शैं, लश देली बुलनेश्लयी शैं। देली के नख भें ब्रह्भाण्ड का दळान शोता शै। भाता बुलनेश्लयी वूमा के वभान रार लणा मुक्त हदव्म आबा वे मुक्त शैं। भाता के भॊि बी अत्मॊत प्रबाली भाने जाते शैं। भाॉ के बक्तो के सरए देली के फीज भॊि का प्रमोग अन्म देली-देलताओॊ की आयाधना भें वलळेऴ वशामक भाना गमा शैं भाता बुलनेश्लयी के भूर भॊि औय ऩॊ ाषयी भॊि का जाऩ कयना वलळेऴ राबप्रद एलॊ सववद्ध प्रदान कयने लारा शैं। त्ररऩुय बैयवी धभा ळास्िों भें भाॉ त्रिऩुय बैयली को तभोगुण एलॊ यजोगुण वे मुक्त भाना गमा शैं। ळास्िों भें भाॉ बैयली के अन्म तेयश स्लरुऩ फतामे गमे शैं। भाता के फकवी बी स्लरुऩ की वाधना भनुटम को वलळेऴ पर प्रदान कयने लारी शै। भाॉ त्रिऩुय का स्लरुऩ कॊ ठ भें भुॊड भारा धायण फकमे, शाथों भें भारा धायण फकमे यशती शैं। भाॉ त्रिऩुय बैयली स्लमॊ वाधनाभम शैं उनका एक शाथ अबम भुद्रा औय दूवया शाथ लय भुद्रा भैं शै जो बक्तों को वबी प्रकाय के वुख वौबाग्म प्रदाता शै। भाॉ त्रिऩुय बैयली रार लस्ि धायण फकमा शै। भाॉ त्रिऩुय बैयली के ऩूजन भें रार यॊग का वलळेऴ रुऩ वे प्रमोग फकमा जाता शै। त्रिऩुय बैयली सववद्धमाॉ प्रदान कयने लारी शोती शैं। तिन्नभस्ता दव भशा वल ओॊ भें देली तछन्नभस्ता को छठी भशावल कशा जाता शैं। भाकिं डेम ऩुयाण ल सळल ऩुयाण आहद भें तछन्नभस्ता देली के रूऩ का स्ऩटट लणान फकमा गमा शै इनके अनुवाय जफ देली ने ॊडी का रूऩ धायण कय याषवों का वॊशाय फकमा। दैत्मों को ऩयास्त कय देलों को वलजम हदरलाई तो ायों ओय उनके नाभ की जमजम काय शोने रगी। रेफकन देली की वशामक मोधगतनमाॉ अजमा औय वलजमा की यक्त वऩऩावा ळाॊत नशीीँ शो ऩाई थी, इव ऩय उनकी यक्त वऩऩावा को ळाॊत कयने शेतु देली तछन्नभस्ता ने अऩना भस्तक काटकय अऩने यक्त वे उनकी यक्त प्माव फुझाई। इव कायण भाता को तछन्नभत्स्तका नाभ वे जाना जाता शैं। धूभावती धूभालती देली का स्लरुऩ फडा बमॊकय प्रतीत शोता शै। देली धूभालती का स्लरूऩ ाशे त्जतना उग्र मा बमॊकय क्मों न शो लश वॊतान के सरए कल्माणकायी शी शोता शै। आद्यळत्क्त बगलती नें धूभालती रूऩ ळिुओॊ के वॊशाय के सरए शी धायण फकमा शै। भाॊ धूभालती के ऩूजन वे भनुटम को अबीटट पर की प्रात्प्त शोती शै। वृटटी भें फकवी बी प्राणी को नटट कयने मा वॊशाय कयने की वबी षभताएॊ देली भें तनशीत शैं। ळास्िोक्त भतानुऴा भशवऴा बृगु, ऋवऴ दुलाावा, ऩयळुयाभ आहद की भूर ळत्क्त धूभालती शैं। धूभालती देली को वृत्टट भें करश की देली शोने के कायण इनको करशवप्रम बी कशा जाता
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    23 2019 शै। लऴााऋतु के ाय भहशने देली का वप्रम वभम शोता शै इव दौयान देली की ऩूजा-अ ाना, वाधना आहद कयना वलळेऴ राबप्रद भाना जाता शै। धूभालती देली को बम कायक एलॊ करश वप्रम बी भाना गमा शैं। भाॉ धूभालती बक्तों को वबी कटटों को भुक्त कय देने लारी शै। भाॉ फगराभुखी देली फगराभुखी दवभशावल भें आठलीॊ भशावल शैं। भाॉ फगराभुखी स्तॊबन ळत्क्त की अधधटठािी देली शैं। फगराभुखी देली यत्नजडडत सवशावन ऩय वलयाजती शो कय ळिुओॊ का नाळ कयती शैं। भाॉ फगराभुखी अऩने बक्तों के बम को दूय कयने लारी औय अऩने बक्त के ळिुओॊ की अतनटटकायी ळत्क्तमों को नाळ कयने लारी शैं। भाॉ फगराभुखी को ऩीताम्फया नाभ वे बी जाना जाता शै, क्मोकी देली को ऩीरा यॊग अतत वप्रम शै। धभाळास्िों भें देली फगराभुखी का यॊग स्लणा के वभान ऩीरा फतामा गमा शै। भाॉ फगराभुखी भें वॊऩूणा ब्रह्भाण्ड की ळत्क्त का वभाहशत शैं। भाता फगराभुखी की उऩावना भुख्म रुऩ वे ळिुनाळ, लाकसववद्ध, लाद वललाद भें वलजम के सरए की जाती शै। भाॉ फगराभुखी की उऩावना वे बक्त के वकर ळिुओॊ का नाळ शोता शै तथा बक्त का जीलन वबी प्रकाय की फाधा वे भुक्त शो जाता शै। देवी भातॊगी देली भातॊगी दवभशावल भें नलीॊ भशावल शैं। मश लाणी औय वॊगीत की अधधटठािी देली भानी जाती शैं। देली भातॊगी भें वॊऩूणा ब्रह्भाण्ड की ळत्क्त का वभालेळ शैं। देली भातॊगी दाॊऩत्म जीलन को वुखी एलॊ वभृद्ध फनाने लारी शोती शैं। देली भातॊगी के ऩूजन वे गृशस्थ भनुटम को वबी प्रकाय के वुख प्राप्त शोते शैं। देली भातॊगी अऩने बक्तों को अबम का पर प्रदान कयती शैं। देली भातॊगी अबीटट सववद्ध प्रदान कयने लारी शैं। देली भातॊगी को उत्च्छटट ाॊडासरनी ल भशावऩळाध नी के नाभ वे बी जाना जाता शै। ळास्िकायों ने भातॊगी के वलसबन्न प्रकाय के बेद फतामे शैं, उनभें प्रभुख शैं, उत्च्छटटभातॊगी, याजभाॊतगी, वुभुखी, लैश्मभातॊगी, कणाभातॊगी, आहद मश देली दक्षषण तथा ऩत्श् भ की आधधटठाता शैं। ब्रह्भमाभर भें उल्रेख शैं की भातॊग भुतन की दीघाकारीन तऩस्मा के कायण देली याजभातॊगी रूऩ भें उनके वम्भुख प्रकट शुईं। देवी कभरा देली कभरा का स्लरुऩ का लणा स्लणा जैवी आबा मुक्त शै। देली कभरा को गजयाज वूॊड भें वुलणा करळ रेकय स्नान कयाते शैं। कभर ऩय आवीन शुए भाॊ स्लणा वे वुळोसबत यशती शैं। वुख वॊऩदा की अधधटठािी देली कभरा वभृवद्ध औय ऐश्लमा दामक शैं। देली कभरा की वाधना वे वाधक धनी औय वल लान फन जाता शै। बत्क्त को ायों तयप मळ औय वम्भान की प्रात्प्त शोती शै। देली कभरा ायों ऩुरुऴाथों को प्रदान कयने लारी औय वाधक को वभस्त फॊधनों वे भुक्त कया देने लारी शैं। भाॉ कभरा ऐश्लमा, धन वॊऩदा की आधधटठािी देली शै, इव सरए बौततक वुख-वाधनों की इच्छा यखने लार वबी भनुटमों के सरए देली कभरा की अयाधना वलाश्रेटठ फतामी गमी शैं। आकत्स्भक धन प्रात्प्त कल आकत्स्भक धन प्रात्प्त कल अऩने नाभ के अनुवाय शी भनुटम को आकत्स्भक धन प्रात्प्त शेतु परप्रद शैं इव कल को धायण कयने वे वाधक को अप्रत्मासळत धन राब प्राप्त शोता शैं। ाशे लश धन राब व्मलवाम वे शो, नौकयी वे शो, धन-वॊऩत्त्त इत्माहद फकवी बी भाध्मभ वे मश राब प्राप्त शो वकता शैं। शभाये लऴों के अनुवॊधान एलॊ अनुबलों वे शभने आकत्स्भक धन प्रात्प्त कल को धायण कयने वे ळेमय ट्रेडडॊग, वोने- ाॊदी के व्माऩाय इत्माहद वॊफॊधधत षेि वे जुडे रोगो को वलळेऴ रुऩ वे आकत्स्भक धन राब प्राप्त शोते देखा शैं। आकत्स्भक धन प्रात्प्त कल वे वलसबन्न स्रोत वे धनराब बी सभर वकता शैं। भूल्म भार: 1250 >> Order Now GURUTVA KARYALAY: Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com
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    24 2019  वॊकरनगुरुत्ल का नलयािी भें कये ग्रश ळाॊतत के वयर उऩाम  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम ब द्वा द्य ब द्वा द्वा  द्वद्व  ब   ब     - - ब  द्वा
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    25 2019 ब 108ब  ब 108 ब  ब ब ब ब 108 ब ब  ब 108 ब  ब ब ब ब 108 ब ब  ब 108 ब  ब 108 ब  ब 108 ब  ब 108 ब  द्वद्व ब ब  द्वद्व ब ब  - ***
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    26 2019 …  वॊकरनगुरुत्ल कामाारम - ब - - - द्वा 1000 3000 - द्वा ब ब ब
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    27 2019 द्वादश महायंत्र मॊि को अतत प्राध न एलॊ दुराब मॊिो के वॊकरन वे शभाये लऴो के अनुवॊधान द्वारा फनामा गमा शैं।  ऩयभ दुराब लळीकयण मॊि,  बाग्मोदम मॊि  भनोलाॊतछत कामा सववद्ध मॊि  याज्म फाधा तनलृत्त्त मॊि  गृशस्थ वुख मॊि  ळीघ्र वललाश वॊऩन्न गौयी अनॊग मॊि  वशस्िाषी रक्ष्भी आफद्ध मॊि  आकत्स्भक धन प्रात्प्त मॊि  ऩूणा ऩौरुऴ प्रात्प्त काभदेल मॊि  योग तनलृत्त्त मॊि  वाधना सववद्ध मॊि  ळिु दभन मॊि उऩयोक्त वबी मॊिो को द्वादश भशा मॊि के रुऩ भें ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे भॊि सवद्ध ऩूणा प्राणप्रततत्टठत एलॊ ैतन्म मुक्त फकमे जाते शैं। त्जवे स्थाऩीत कय त्रफना फकवी ऩूजा अ ाना-वलधध वलधान वलळेऴ राब प्राप्त कय वकते शैं। GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 | Shop Online : www.gurutvakaryalay.com - - ब ब ब - ब ब ब - ब द्वा - *** >> Shop Online | Order Now | Call Now | Email US
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    28 2019 भॊि सवद्धस्पहटक श्री मॊि "श्री मॊि" वफवे भशत्लऩूणा एलॊ ळत्क्तळारी मॊि शै। "श्री मॊि" को मॊि याज कशा जाता शै क्मोफक मश अत्मन्त ळुब फ़रदमी मॊि शै। जो न के लर दूवये मन्िो वे अधधक वे अधधक राब देने भे वभथा शै एलॊ वॊवाय के शय व्मत्क्त के सरए पामदेभॊद वात्रफत शोता शै। ऩूणा प्राण-प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म मुक्त "श्री मॊि" त्जव व्मत्क्त के घय भे शोता शै उवके सरमे "श्री मॊि" अत्मन्त फ़रदामी सवद्ध शोता शै उवके दळान भाि वे अन-धगनत राब एलॊ वुख की प्रात्प्त शोतत शै। "श्री मॊि" भे वभाई अद्वलतीम एलॊ अद्रश्म ळत्क्त भनुटम की वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे वभथा शोतत शै। त्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय तनयाळा दूय शोकय लश भनुटम अवफ़रता वे वफ़रता फक औय तनयन्तय गतत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे वभस्त बौततक वुखो फक प्रात्प्त शोतत शै। "श्री मॊि" भनुटम जीलन भें उत्ऩन्न शोने लारी वभस्मा- फाधा एलॊ नकायात्भक उजाा को दूय कय वकायत्भक उजाा का तनभााण कयने भे वभथा शै। "श्री मॊि" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय के स्थान ऩय स्थावऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फत्न्धत ऩयेळातन भे न्मुनता आतत शै ल वुख-वभृवद्ध, ळाॊतत एलॊ ऐश्लमा फक प्रत्प्त शोती शै। गुरुत्व कामाारम भे "श्री मॊि" 12 ग्राभ वे 2250 Gram (2.25Kg) तक फक वाइज भे उप्रब्ध शै . भूल्म:- प्रतत ग्राभ Rs. 28 से Rs.100 >>Order Now GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Visit Us: www.gurutvakaryalay.com www.gurutvajyotish.com and gurutvakaryalay.blogspot.com  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम दुगाा फीवा मॊि ळास्िोक्त भत के अनुळाय दुगाा फीवा मॊि दुबााग्म को दूय कय व्मत्क्त के वोमे शुले बाग्म को जगाने लारा भाना गमा शैं। दुगाा फीवा मॊि द्वाया व्मत्क्त को जीलन भें धन वे वॊफॊधधत वॊस्माओॊ भें राब प्राप्त शोता शैं। जो व्मत्क्त आधथाक वभस्मावे ऩयेळान शों, लश व्मत्क्त महद नलयािों भें प्राण प्रततत्टठत फकमा गमा दुगाा फीवा मॊि को स्थात्प्त कय रेता शैं, तो उवकी धन, योजगाय एलॊ व्मलवाम वे वॊफॊधी वबी वभस्मों का ळीघ्र शी अॊत शोने रगता शैं। नलयाि के हदनो भें प्राण प्रततत्टठत दुगाा फीवा मॊि को अऩने घय-दुकान-ओफपव- पै क्टयी भें स्थावऩत कयने वे वलळेऴ राब प्राप्त शोता शैं, व्मत्क्त ळीघ्र शी अऩने व्माऩाय भें लृवद्ध एलॊ अऩनी आधथाक त्स्थती भें वुधाय शोता देखेंगे। वॊऩूणा प्राण प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म दुगाा फीवा मॊि को ळुब भुशूता भें अऩने घय-दुकान-ओफपव भें स्थावऩत कयने वे वलळेऴ राब प्राप्त शोता शैं। भूल्म 730 वे:10900 >>Shop Online |Order Now श्रीदुगाा मॊि श्रीदुगाा मॊि ळत्क्त एलॊ बत्क्त के वाथ वभस्त वाॊवारयक वुखों को प्रदान कयने लारा वलााधधक रोकवप्रम मॊि शैं। अळुब ळत्क्तमों के दुटप्रबाल वे फ ने के सरए भाॊ दुगाा की ऩूजा कयने वे वलळेऴ राब प्राप्त शोता शै। श्रीदुगाा मॊि का ऩूजन व्मत्क्त को धभा, अथा, काभ औय भोष इन ाय की प्रात्प्त भें बी वशामक सवद्ध शोता शैं। ळास्िोक्त लणान शैं की देली दुगाा के श्रीदुगाा मॊि के ऩूजन औय दळान कयने भाि वे देली प्रवन्न शोकय अऩने बक्तों की असबटट इच्छाएॊ ऩूणा शोती शैं। भाॉ दुगाा के बक्तो की भाॉ स्लमॊ यषा कय उन ऩय अऩनी कृ ऩा
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    29 2019 Now Shop OurExclusive Products Online @ www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvakaryalay.in | www.shrigems.com Our Store Location: GURUTVA KARYALAY BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, द्रटटी लऴााती शैं औय बक्तों को उन्नती के सळखय ऩय जाने का भागा प्रवस्त कयती शैं। भाॉ दुगाा के बक्तो को देली की ळीघ्र कृ ऩा प्रात्प्त शेतु श्रीदुगाा मॊि को अऩने घय, दुकान, ओफपव इत्माहद भें ऩूजा स्थन भें स्थावऩत कयना ाहशमे। वलद्वानो का भत शैं की श्रीदुगाा मॊि के ऩूजन वे भनुटम को लाक् सववद्ध, वॊतान प्रात्प्त, ळिु ऩय वलजम, ऋण-योग आहद ऩीडा वे भुत्क्त प्राप्त शोती शैं औय व्मत्क्त को जीलन भें वॊऩूणा वुखों की प्रात्प्त शो इव के सरमे मश श्रीदुगाा मॊि अ ूक एलॊ सववद्धदामक भाना गमा शैं। फकवी बी प्रकाय के वॊकट मा फाधा की आळॊका शोने ऩय इव मॊि का तनमसभत ऩूजन कयने वे व्मत्क्त को वबी प्रकाय की फाधा वे भुत्क्त सभरती शैं औय धन-धान्म की प्रात्प्त शोती शैं। श्रीदुगाा मॊि की ऩूजा एलॊ स्थाऩना के सरए आत्श्लन एलॊ ैि नलयािी वलळेऴ राब प्रद शैं। क्मोफक नलयाि को आद्म ् ळत्क्त की उऩावना का भशाऩला भाना गमा शैं। भूल्म 730 वे:10900 >>Shop Online |Order Now नलाणा मॊि ( ाभुॊडा मॊि) महद कोई व्मत्क्त दु:ख, दरयद्रता औय बम वे अत्माधधक ऩयेळान शो, औय ाशकय बी मा ऩयीश्रभ के उऩयाॊत बी उवी लाॊत्च्छत वपरता प्राप्त नशीॊ शो यशी शों तो उवे नलाणा मॊि औय भॊि का प्रमोग कयना ाहशए। फकवी बी प्रकाय के जादू-टोना, योग, बम, बूत, वऩळाच् , डाफकनी, ळाफकनी आहद वे भुत्क्त फक प्रात्प्त के सरमे भाॊ दुगाा के नलाणा मॊि का वलधध-वलधान वे ऩूजन-अ ान वलादा परदामक शोता शै। दुगाा दुखों का नाळ कयने लारी शैं। इवसरए नलयात्रि के हदनो भें जफ उनकी ऩूजा ऩूणा श्रद्धा औय वलश्लाव वे फक जाती शैं, तो भाॊ दुगाा फक प्रभुख नौ ळत्क्तमाॉ जाग्रत शो जाती शैं, त्जववे नलों ग्रशों को तनमॊत्रित कयती शैं, त्जववे नौग्रशों वे प्राप्त शोने लारे अतनटट प्रबाल वे यषा शोकय ग्रश जनीत ऩीडाएॊ बी ळाॊत शो जाती शैं। नलाणा भॊि: ऐॊ ह्ीॊ क्रीॊ ाभुॊडामै वलच् े नल अषयों लारे इव अद्भुत नलाणा भॊि के शय अषय भें देली दुगाा फक एक-एक ळत्क्त वभामी शुई शैं, त्जव का वॊफॊध एक-एक ग्रशों वे शैं। महद कोई भनुटम अत्माधधक कटट मा वॊकटों वे ग्रस्त शो तो उवे प्रततहदन स्नान इत्माहदवे ळुद्ध शोकय नलाणा मॊि के वम्भुख नलाणा भॊि का जाऩ 108 दाने फक भारा वे कभ वे कभ तीन भारा जाऩ अलश्म कयना ाहशए। भूल्म 730 वे:10900 >>Shop Online |Order Now
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    30 2019 ऩढाई वेवॊफॊधधत वभस्मा क्मा आऩके रडके -रडकी की ऩढाई भें अनालश्मक रूऩ वे फाधा-वलघ्न मा रुकालटे शो यशी शैं? फच् ो को अऩने ऩूणा ऩरयश्रभ एलॊ भेशनत का उध त पर नशीॊ सभर यशा? अऩने रडके -रडकी की कुॊ डरी का वलस्तृत अध्ममन अलश्म कयलारे औय उनके वलद्या अध्ममन भें आनेलारी रुकालट एलॊ दोऴो के कायण एलॊ उन दोऴों के तनलायण के उऩामो के फाय भें वलस्ताय वे जनकायी प्राप्त कयें। GURUTVA KARYALAY Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, देली कल दुबााग्म को वौबाग्म भें फदर वकते शै…  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम दव भशा वलद्या कल Dus Mahavidya Kawach दव भशा वलद्या कल को देली दव भशा वलद्या की ळत्क्तमों वे वॊऩन्न अत्मॊत प्रबालळारी औय दुराब कल भाना गमा शैं। इव कल के भाध्मभ वे वाधक को दवो भशावलद्याओॊ आसळलााद प्राप्त शो वकता शैं। दव भशा वलद्या कल को धायण कयने वे वाधक की वबी भनोकाभनाओॊ की ऩूतता शोती शैं। दव भशा वलद्या कल वाधक की वभस्त इच्छाओॊ की ऩूतता कयने भें वभथा शैं। दव भशा वलद्या कल धायण कताा को ळत्क्तवॊऩन्न एलॊ बूसभलान फनाने भें वभथा शैं। दव भशा वलद्या कल को श्रद्धाऩूलाक धायण कयने वे ळीघ्र देली कृ ऩा प्राप्त शोती शैं औय धायण कताा को दव भशा वलद्या देलीमों की कृ ऩा वे वॊवाय की वभस्त सववद्धमों की प्रात्प्त वॊबल शैं। देली दव भशा वलद्या की कृ ऩा वे वाधक को धभा, अथा, काभ ल् भोष तुवलाध ऩुरुऴाथों की प्रात्प्त शो वकती शैं। दव भशा वलद्या कल भें भाॉ दुगाा के दव अलतायों का आळीलााद वभाहशत शोता शैं, इव सरए दव भशा वलद्या कल को धायण कय के धायण कयके व्मत्क्त अऩने जीलन को तनयॊतय अधधक वे अधधक वाथाक एलॊ वपर फना वकता शैं। दळ भशावलद्या को ळास्िों भें आद्या बगलती के दव बेद कशे गमे शैं, जो क्रभळ् (1) कारी, (2) ताया, (3) ऴोडळी, (4) बुलनेश्लयी, (5) बैयली, (6) तछन्नभस्ता, (7) धूभालती, (8) फगरा, (9) भातॊगी एलॊ (10) कभात्त्भका। इव वबी देली स्लरुऩों को, वत्म्भसरत रुऩ भें दळभशावलद्या के नाभ वे जाना जाता शैं। भूल्म भार: 6400 >>Shop Online |Order Now नलदुगाा ळत्क्त कल Navdurga Shakiti Kawach भाॊ दुगाा के नवरुऩ क्रभश् 1. ळैरऩुिी 2. ब्रह्भ ारयणी 3. न्द्रघण्टा 4. कू टभाण्डा 5. स्कन्दभाता 6. कात्मामनी 7. कारयात्रि 8. भशागौयी 9. सववद्धदािी शैं। नौदेलीमों के कल ों को एक वाथ भें सभराकय फनाकय नलदुगाा कल का तनभााण फकमा जाता शैं। त्जववे धायण कताा को नौ देलीमों का आसळलााद एक वाथ प्राप्त शो जाता शैं। नौ देलीमों के कल का भशत्ल क्रभळ् आऩके भागादळान शेतु मशाॉ प्रस्तुत शैं। देली ळैरऩुिी का कल धायण कयने लारा व्मत्क्त वदा धन-धान्म वे वॊऩन्न यशता शैं। अथाात उवे त्जलन भें धन एलॊ अन्म वुख वाधनो की कभी भशवुव नशीॊ शोतीॊ। व्मत्क्त को अनेक प्रकाय की सववद्धमाॊ एलॊ
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    31 2019 रक्ष्भीकु फेयधन आकऴाण मॊि श्रीमॊि को वभस्त प्रकाय के श्रीमॊिों भें वलाश्रेटठ भाना गमा शै औय कु फेय मॊि को देलताओॊ भें धन के देलता कु फेय जी का वफवे प्रबालळारी मॊि भाना जाता शैं इव मॊि के ऩूजन वे अषम धन कोऴ की प्रात्प्त शोती शैं औय भनुटम के सरए नलीन आम के स्रोत फनते शैं। प्रततहदन रक्ष्भीकु फेय धन आकऴाण मॊि का ऩूजन एलॊ दळान कयने वे व्मत्क्त को जीलन भें धन औय ऐश्लमा की कबी बी कभी नशीॊ शोती शै। वलद्लानों ने अऩने अनुबलों भें ऩामा शैं की जो भनुटम अऩने गृशस्थ जीलन भें धन, लैबल, ऐश्लमा, वुख-वभृवद्ध, व्माऩाय भें वपरता, वलदेळ राब, याजनीतत भें वपरता, नौकयी भें ऩदौत्न्न्त आहद की काभना यखता शैं तो उवके सरए श्री रक्ष्भीकु फेय धन आकऴाण मॊि वलाश्रेऴ मॊि शैं। भनुटम को रक्ष्भीकु फेय धन आकऴाण मॊि के ऩूजन वे जीलन के वबी षेि भें वुख-वभृवद्ध एलॊ वौबाग्म की प्राप्त शोने रगती शै। महद फकवी व्मत्क्त को व्माऩाय भें महद व्माऩाय भें ऩूणा ऩरयश्रभ एलॊ रगने वे कामा कयने ऩय बी अधधक राब की प्रात्प्त नशीॊ शो यशी शो, व्माऩाय भॊदा र यशा शो मा फाय-फाय राब के स्थान ऩय शातन शो यशी शो तो उवे रक्ष्भीकु फेय धन आकऴाण मॊि को अलश्म अऩने व्मलवामीक स्थान ऩय स्थावऩत कयना ाहशए। त्जववे व्माऩाय भें फाय-फाय शोने लारे घाटे मा नुकवान वे ळीघ्र शी राब प्राप्त शोने के मोग फनने रगते शैं। >> OrderNow उऩरत्ब्धमाॊ प्राप्त शोती शैं। देली ब्रह्भ ारयणी का कल धायण कयने लारे व्मत्क्त को अनॊत पर की प्रात्प्त शोती शैं। कल के प्रबाल वे व्मत्क्त भें तऩ, त्माग, वदा ाय, वॊमभ जैवे वद् गुणों फक लृवद्ध शोती शैं। देली न्द्रघण्टा का कल धायण कयने वे व्मत्क्त को वबी ऩाऩों वे भुत्क्त सभरती शैं उवे वभस्त वाॊवारयक आधध-व्माधध वे भुत्क्त सभरती शैं। इवके उऩयाॊत व्मत्क्त को ध यामु, आयोग्म, वुखी औय वॊऩन्नता प्राप्त शोती शैं। कल के प्रबाल वे व्मत्क्त के वाशव एल वलयता भें लृवद्ध शोती शैं। व्मत्क्त के स्लय भें सभठाव आती शैं उवके आकऴाण भें बी लृवद्ध शोती शैं। क्मोफक, न्द्रघण्टा को सान की देली बी भाना गमा शैं। देली कू टभाण्डा के कल को धायण कयने लारे व्मत्क्त को वबी प्रकाय के योग, ळोक औय क्रेळ वे भुत्क्त सभरती शैं, उवे आमुटम, मळ, फर औय फुवद्ध प्राप्त शोती शैं। देली स्कॊ दभाता के कल को धायण कयने वे व्मत्क्त की वभस्त इच्छाओॊ की ऩूतता शोती शैं एलॊ जीलन भें ऩयभ वुख एलॊ ळाॊतत प्राप्त शोती शैं। देली कात्मामनी का कल धायण कयने वे व्मत्क्त को वबी प्रकाय के योग, ळोक, बम वे भुत्क्त सभरती शैं। कात्मामनी देली को लैहदक मुग भें मे ऋवऴ- भुतनमों को कटट देने लारे यष-दानल, ऩाऩी जील को अऩने तेज वे शी नटट कय देने लारी भाना गमा शैं। देली कारयात्रि का कल धायण कयने वे अत्ग्न बम, आकाळ बम, बूत वऩळा इत्मादी ळत्क्तमाॊ कारयात्रि देली के स्भयण भाि वे शी बाग जाते शैं, कारयात्रि ळिु एलॊ दुटटों का वॊशाय कयने लारी देली शैं। देली भशागौयी के कल को धायण कयने वे व्मत्क्त के वभस्त ऩाऩों वे छु टकाया सभरता शैं। मश भाॊ अन्नऩूणाा के वभान, धन, लैबल औय वुख-ळाॊतत प्रदान कयने लारी एलॊ वॊकट वे भुत्क्त हदराने लारी देली भशागौयी का कल शैं। देली सववद्धदािी के कल को धायण कयने वे व्मत्क्त फक वभस्त काभनाओॊ फक ऩूतता शोती शैं उवे ऋवद्ध-सववद्ध की प्रात्प्त शोती शैं। कल के प्रबाल वे व्मत्क्त के मळ, फर औय धन की प्रात्प्त आहद कामो भें शो यशे फाधा-वलध्न वभाप्त शो जाते शैं। व्मत्क्त को मळ, फर औय धन की प्रात्प्त शो कय उवे भाॊ की कृ ऩा वे धभा, अथा, काभ औय भोष फक बी प्रात्प्त स्लत् शो जाती शैं। भूल्म भार: 6400 >>Shop Online |Order Now श्रीदुगाा फीवा कल Durga Visha Kawach श्रीदुगाा फीवा कल वाधक को बत्क्त के वाथ वभस्त वाॊवारयक वुखों को प्रदान कयने लारा वलासववद्धप्रद कल शैं। श्रीदुगाा फीवा कल को धायण कयने वे वाधक को
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    32 2019 धभा, अथा,काभ औय भोष इन ाय की प्रात्प्त भें बी वशामता प्राप्त शोती शैं। ळास्िोक्त लणान शैं की भाॉ दुगाा का श्रीदुगाा फीवा कल को धायण कयने वे देली प्रवन्न शोकय, ळीघ्र शी वाधक की असबटट इच्छाएॊ ऩूणा कयती शैं। भाॉ दुगाा अऩने बक्त की स्लमॊ यषा कय उन ऩय कृ ऩा दृटटी कयती शैं। श्रीदुगाा फीवा कल धायण कयने वे भाॉ दुगाा की कृ ऩा वे नौकयी व्मलवाम भें वाधक को उन्नतत के सळखय ऩय जाने का भागा प्रवस्त शोता शैं। श्रीदुगाा फीवा कल के प्रबाल वे धायण कताा को धन- धान्म, वुख-वॊऩत्त्त, वॊतान का वुख प्राप्त शोता शैं औय ळिु ऩय वलजम, ऋण-योग आहद ऩीडा वे भुत्क्त प्राप्त शोती शैं औय वाधक को जीलन भें वॊऩूणा वुखों की प्रात्प्त शोती शैं। जीलन भें फकवी बी प्रकाय के वॊकट मा फाधा की आळॊका शोने ऩय श्रीदुगाा फीवा कल को श्रद्धाऩूलाक धायण कयने वे वाधक को वबी प्रकाय की फाधा वे भुत्क्त सभरती शैं औय धन-धान्म की प्रात्प्त शो वकती शैं। भूल्म भार: 1900 >>Shop Online |Order Now नलााण फीवा कल Narvan Visha Kawach नलाणा (नलााण) फीवा कल देली दुगाा का कल शैं। हशन्दू धभा भें देली दुगाा को दु्खों का नाळ कयने लारी कशा गमा शैं। देली दुगाा की ळत्क्त को जाग्रत कयने शेतु ळास्िों भें नलाणा भॊि का जाऩ कयने का वलधान फतामा गमा शैं। वलद्वानों का कथन शैं की जो भनुटम तनमसभत भॊि जाऩ कयने भें अवभथा शो उनके सरए नलाणा फीवा कल धायण कयना भॊि जऩ के वभान पर प्रदान कयने लारा शैं। नलाणा फीवा कल को धायण कयने वे व्मत्क्त को धभा, अथा, काभ औय भोष इन ाय की प्रात्प्त भें बी वशाता प्राप्त शोती शैं। भूल्म भार: 1900 >>Shop Online |Order Now Email US | Help Desk: 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 कनकधाया मॊि आज के बौततक मुग भें शय व्मत्क्त अततळीघ्र वभृद्ध फनना ाशता शैं। कनकधाया मॊि फक ऩूजा अ ाना कयने वे व्मत्क्त के जन्भों जन्भ के ऋण औय दरयद्रता वे ळीघ्र भुत्क्त सभरती शैं। मॊि के प्रबाल वे व्माऩाय भें उन्नतत शोती शैं, फेयोजगाय को योजगाय प्रात्प्त शोती शैं। कनकधाया मॊि अत्मॊत दुराब मॊिो भें वे एक मॊि शैं त्जवे भाॊ रक्ष्भी फक प्रात्प्त शेतु अ ूक प्रबाला ळारी भाना गमा शैं। कनकधाया मॊि को वलद्वानो ने स्लमॊसवद्ध तथा वबी प्रकाय के ऐश्लमा प्रदान कयने भें वभथा भाना शैं। आज के मुग भें शय व्मत्क्त अततळीघ्र वभृद्ध फनना ाशता शैं। धन प्रात्प्त शेतु प्राण-प्रततत्टठत कनकधाया मॊि के वाभने फैठकय कनकधाया स्तोि का ऩाठ कयने वे वलळेऴ राब प्राप्त शोता शैं। इव कनकधाया मॊि फक ऩूजा अ ाना कयने वे ऋण औय दरयद्रता वे ळीघ्र भुत्क्त सभरती शैं। व्माऩाय भें उन्नतत शोती शैं, फेयोजगाय को योजगाय प्रात्प्त शोती शैं। जैवे श्री आहद ळॊकया ामा द्वारा कनकधाया स्तोि फक य ना कु छ इव प्रकाय की गई शैं, फक त्जवके श्रलण एलॊ ऩठन कयने वे आव-ऩाव के लामुभॊडर भें वलळेऴ अरौफकक हदव्म उजाा उत्ऩन्न शोती शैं। हठक उवी प्रकाय वे कनकधाया मॊि अत्मॊत दुराब मॊिो भें वे एक मॊि शैं त्जवे भाॊ रक्ष्भी फक प्रात्प्त शेतु अ ूक प्रबाला ळारी भाना गमा शैं। कनकधाया मॊि को वलद्वानो ने स्लमॊसवद्ध तथा वबी प्रकाय के ऐश्लमा प्रदान कयने भें वभथा भाना शैं। जगद्गुरु ळॊकया ामा ने दरयद्र ब्राह्भण के घय कनकधाया स्तोि के ऩाठ वे स्लणा लऴाा कयाने का उल्रेख ग्रॊथ ळॊकय हदत्ग्लजम भें सभरता शैं। कनकधाया भॊि:- ॐ लॊ श्रीॊ लॊ ऐॊ ह्ीॊ-श्रीॊ क्रीॊ कनक धायमै स्लाशा' >> OrderNow
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    33 2019 भाॉ दुगााकी कृ ऩा प्रात्प्त शेतु वयर वाधनाएॊ  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम प्रबालळारी दुगाा वाधना भाॊ दुगाा का ऩूजन हशन्दू वॊस्कृ ती भें वलााधधक रोकवप्रम शैं मशीॊ कायण शैं की वैकडों लऴो वे देली दुगाा का ऩूजन छोटे-फडे वबी प्रादेसळक षेिों भें वलााधधक प्र सरत यशा शैं। देली दुगाा को आद्य ळत्क्त बगलती का वाषात स्लरुऩ भाना जाता शैं। देली दुगाा की भहशभा अऩयॊऩाय शैं, जो अऩने बक्तों के दु्खों का नाळ कयने लारी, दुटटों वे यषा कयने लारी एलॊ अऩने बक्तों के वकर भनोयथ को सवद्ध कयने लारी वाषात देली शैं। वाधना शेतु वाभग्री:- भारा: स्पहटक हदळा: उत्तय मा ऩूला आवन: रार आवन लस्ि: रार लस्ि, अन्म ऩूजन वाभग्रीमाॊ: देली प्रततभा, ऩूजन शेतु सवॊदूय, यक्त ॊदन, रार मा ऩीरे पू र, धूऩ, दीऩ, शलन शेतु ततर, घी, जौ, अषत, दूफा, दशी, आहद नैलेद्य, ऩीतर मा ताॊफे का करळ, करळ स्थाऩना शेतु गेशूॊ, आहद ळुब धान, आभ के ऩल्रल, शलन शेतु रकडडमाॊ आहद शलन वाभग्रीमाॊ। भॊि:– ॐ ऐॊ ह्ीॊ क्रीॊ ाभुॊडामे वलच् ै । ॐ ग्रौं शुॊ क्रीॊ जूॊ व् ज्लारम ज्लारम ज्लर ज्लर प्रज्लर प्रज्लर ऐॊ ह्ीॊ क्रीॊ ाभुॊडामे वलच् ै ज्लर शॊ वॊ रॊ षॊ पट् स्लाशा ॥ Om Aim Hreem Kleem Chamundaye Vichchai | Om Gloum Hum Kleem Jum Sah Jvalaya Jvalaya Jvala Jvala Prajvala Prajvala Aim Hreem Kleem Chamundaye Vichchai Jvala Ham Sam Lam Ksham Phat Swaha || वलधध:– वाधना वे ऩूला ऩूजन स्थान की बूसभ एलॊ वाभग्री आहद को ऩवलत्रिकयण कयके वलधध-वलधान वे स्लच्छ कयरें। देली दुगाा की वाधना प्रात्कार वे प्रायॊब कयें। वाधना का प्रायॊब नलयाि भें कयना उत्तभ भाना गमा शैं, महद नलयाि भें वाधना कयना वॊबल न शो तो, वाधना फकवी बी भाव की ळुक्र ऩष प्रततऩदा अथाात एकभ वे प्रायॊब की जा वकती शैं, प्रततऩदा वे रेकय दवलीॊ ततधथ तक दव हदनों भें वाधना वॊऩन्न कयरें। आग्नेम कोण भें लेदी फनाकय उत्तय हदळा मा ऩूला की ओय भुख भें आवन रगामे। वलधध-वलधान वे करळ की स्थाऩना कयें। करळ को गेशूॊ, धान आहद ळुब अन्न ऩय स्थावऩत कयें। करळ भें आम्रऩल्रल के डॊठर जरभे यशे इव प्रकाय डार दें। करळ ऩय दीऩक प्रज्ज्लसरत कयके यख दें। फपय शलन कुॊ ड को अत्ग्न वे प्रज्ज्लसरत कयें। उक्त
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    34 2019 वभस्त वलधध-वलधायकयते शुले भाॊ दुगाा के भॊि का जऩ कयते यशें। उक्त वभस्ि फक्रमा के ऩश् मात आवन ऩय फैठे- फैठे देली की तेजस्ली प्रततभा मा स्लरुऩ का िाटक भें ध्मान कयते शुले प्रततभा को स्थावऩत कयें। प्रततभा को स्थावऩत कय। भॊि ऩढ़ते शुले अत्ग्न भें शवल दें। दव हदनों तक प्रततहदन 1188 भॊिों का जऩ कयें। भॊि जऩ के दौयान देली दुगाा की प्रततभा ऩय अऩना ध्मान फनामे यखें। राब: उक्त वलधध वे वाधना कयने वे भाॊ दुगाा के आसळलााद वे वाधक के आत्भफर, ओज, तेज, फर, ऩयाक्रभ भें लृवद्ध शोती शैं, उवे स्लास््मराब प्राप्त शोता शैं। वाधक को अऩने कामा भें भनोलाॊतछत वपरता की प्रात्प्त शोती शैं। दुगााटटाषय भॊि वाधना वलधध:– दुगााटटाषय भॊि अत्मॊि गोऩनीम शैं। ळास्िों भें दुगााटटाषय भॊि को ळीघ्र सववद्धदामक एलॊ दुराब भाना गमा शैं। इव सरए दुगााटटाषय भॊि के फाये भें उल्रेख फकमा गमा शैं.. वाषात्त्ववद्धप्रदो भॊिो दुगाामा् कसरनाळन् । अटटाषयो अटट सववद्धळो गोऩनीमो हदगॊफयै् ॥ अथाात: मश दुगाा भॊि वाषात सववद्ध प्रदान कयने लारा, करेळों का नाळ कयने लारा शैं, आठ अषयों लारे इव भॊि भें अटट सववद्ध मा वभाहशत शैं अत् मश अत्मॊत गोऩनीम शैं। वलतनमोग ॐ अस्म श्री दुगााटटाषय भन्िस्म भशेश्लय ऋवऴ्, श्री दुगााटटाषयात्त्भका देलता, दुॊ फीजभ्।, ह्ीॊ ळत्क्त्, ॐ कीरकाम नभ् इतत हदग्फॊध्, धभााथा काभ भोषाथे जऩे वलतनमोग्। ध्मान दुलाातनबाॊ त्रिनमनाॊ वलरवत्त्कयीटाभ् ळॊखाब्जख्ङ्ग ळय खेटक ळूर ाऩान् । वॊतजानी दधतीॊ भहशऴावनस्थाॊ दुगाा नलायकु र ऩीठगताॊ बजेऽशभ् ॥ भॊि:– ॐ ह्ीॊ दुॊ दुगाामै नभ्। Om Hreem Dum Durgayai Namah । राब: दुगााटटाषय भॊि का एक राख जऩ कयने वे मश भॊि सवद्ध शोता शै। जऩ शेतु प्रततहदन तनत्श् त वभम का ुनाल कयें औय प्रततहदन अऩनी वुवलधा के अनुळाय 5, 11, 21 हदन भें भें फकवी तनत्श् त वॊख्मा भें एक राख जऩ ऩूणा कयें। भॊि जाऩ ऩूणा शोने के ऩश् मात प्रततहदन प्रात् एक भारा जऩ कयें। इव भॊि भें अद्भुत ळत्क्त वभाहशत शोने वे वाधक को लाक् सववद्ध, वॊतान प्रात्प्त, ळिु वलजम, योग-भुत्क्त औय जीलन भें वबी प्रकाय के बौततक वुखों की प्रात्प्त के सरए दुगााटटाषय भॊि अ ूक एलॊ सववद्धदामक शै |
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    35 2019 दुगाा स्भृताभॊि वाधना ॐ ऐॊ ह्ीॊ क्रीॊ ाभुॊडामे वलच् ै ॐ ह्ीॊ श्रीॊ ॐ ह्ीॊ श्रीॊ काॊवोत्स्भताॊ हशयण्म प्राकाया भाद्रािंज्लरन्तीॊ तृप्ताॊ तऩामन्तीभ्। ऩद्मेत्स्थताॊ ऩद्मलणािं तासभशोऩह्लमे धश्रमभ् , ॐ ह्ीॊ श्रीॊ क्रीॊ ॐ ह्ीॊ श्रीॊ क्रीॊ दुगेस्भृता शयसव बीततभळेऴ जॊतो: स्लस्थैं: स्भृताभतत भतील ळुबाॊ ददासव। मदॊतत, मच् दूयके बमॊ वलॊदतत भासभश ऩलभान वलतज्जहश, दारयद्र्म दु्ख बमशारयणण का त्लदन्मा वलोऩकायकयणाम वदाद्रा ध त्ता ॐ ह्ीॊ श्रीॊ क्रीॊ ॐ ह्ीॊ श्रीॊ क्रीॊ काॊवोत्स्भताॊ हशयण्म प्राकाया भाद्रााज्लरन्तीॊ तृप्ताॊ तऩामॊतीॊ, ऩद्मेत्स्थताॊ ऩद्मभ् लणाा तासभशोऩह्व्मे धश्रमभ्, ॐ ह्ीॊ श्रीॊ क्रीॊ ाभुॊडामे वलच् ै । उक्त दुगाा स्भृता भॊि के एक राख जऩ कयने वे भॊि सवद्ध शोता शैं। जऩ ऩूणा शोने ऩय भॊि की दळाॊळ शोभ कयना ाहशए। दुगाा स्भृता भॊि के सवद्ध शोने ऩय वाधक को जीलन भें वबी कामों भें ऩूणा सववद्धमॊ प्राप्त शोने रगती शैं। वाधक वॊवाय भें वलाि आदयणणम शो जाता शैं। दुगाा वाधना वाधना शेतु वाभग्री:- भारा: स्पहटक | हदळा: उत्तय | जऩ वॊख्मा: वला राख | आवन: वपे द | लस्ि: रार लस्ि, | वभम : यािी कार | अन्म ऩूजन वाभग्रीमाॊ: दुगाा मॊि, घी का दीऩ, जरऩाि भॊि:– शुॊ दुगाामै नभ् । Hum Durgayai Namah | वलधध:- फकवी बी भाव की ळुक्र ऩष की ऩॊ भी मा तुदाळी वे मश प्रमोग प्रायॊब कयें। वलद्वानों का कथ शैं की ऩूणा श्रद्धा एलॊ वलश्लाय वे जाऩ कयने वे भाॊ दुगाा के दळान अलश्म शोते शैं। भॊि जाऩ की वभात्प्त ऩय फकवी कुॊ लायी कन्मा को बोजन कयामे उवे मथा ळत्क्त बेट एलॊ दक्षषणा दें कय प्रवन्न कयने वे मश वाधना वॊऩन्न शोती शैं। राब: देली दुगाा की असवभ कृ ऩा प्राप्त शोती शैं, वाधक को जीलन भें वबी प्रकाय के वुख वाधनों की प्रात्प्त शोती शैं। धन लृवद्ध डडब्फी धन लृवद्ध डडब्फी को अऩनी अरभायी, कै ळ फोक्व, ऩूजा स्थान भें यखने वे धन लृवद्ध शोती शैं त्जवभें कारी हल्दी, रार- ऩीरा-वपे द रक्ष्भी कायक शकीक (अकीक), रक्ष्भी कायक स्पहटक यत्न, 3 ऩीरी कौडी, 3 वपे द कौडी, गोभती क्र, वपे द गुॊजा, यक्त गुॊजा, कारी गुॊजा, इॊद्र जार, भामा जार, इत्मादी दुराब लस्तुओॊ को ळुब भशुता भें तेजस्ली भॊि द्लाया असबभॊत्रित फकम जाता शैं। भूल्म भाि Rs-730 >> Order Now GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com www.gurutvajyotish.com and gurutvakaryalay.blogspot.com
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    36 2019 नलयाि व्रतकथा वॊकरन गुरुत्ल कामाारम प्रा ीन कार भें ैि लॊळी वुयथ नाभक एक याजा याज कयते थे। एक फाय उनके ळिुओॊ ने आक्रभण कय हदमा औय उन्शें मुद्ध भें शया हदमा। याजा को फरशीन देखकय उवके दुटट भॊत्रिमों ने याजा की वेना औय खजाना अऩने अतघकाय भें रे सरमा। त्जवके ऩरयणाभ स्लरूऩ याजा वुयथ दुखी औय तनयाळ शोकय लन की ओय रे गए औय लशाॊ भशवऴा भेधा के आश्रभ भें तनलाव कयने रगे। एक हदन आश्रभ भें याजा की बेंट वभातघ नाभक एक लैश्म वे शुई, जो अऩनी स्िी औय ऩुिों के दुव्मालशाय वे अऩभातनत शोकय लशाॊ तनलाव कय यशा था। वभातघ ने याजा को फतामा फक लश अऩने दुटट स्िी औय ऩुि आहदकों वे अऩभातनत शोने के फाद बी उनका भोश नशीॊ छोड ऩा यशा शै। उवके ध त्त को ळात्न्त नशीॊ सभर ऩा यशी शै। इधय याजा का भन बी उवके अधीन नशीॊ था। याज्म, धनाहद की ध ॊता अबी बी उवे फनी शुई थी, त्जववे लश फशुत दुखी थे। तदान्तय दोनों भशवऴा भेधा के ऩाव गए। भशवऴा भेधा मथामोग्म वम्बाटण कयके दोनों वे लाताा आयॊब की। उन्शोने फतामा "मद्यवऩ शभ दोनों अऩने स्लजनों वे अत्मॊत अऩभातनत औय ततयस्कृ त शोकय मशाॉ आए शैं, फपय बी उनके प्रतत शभाया भोश नशीॊ छू टता । इवका क्मा कायण शै? भशवऴा भेधा ने कशा भन ळत्क्त के अधीन शोता शै। आहदळत्क्त बगलती के दो रूऩ शैं- वलद्या औय अवलद्या। वलद्या भन का स्लरूऩ शै तथा अवलद्या असान का स्लरूऩ शै। अवलद्या भोश की जननी शै फकॊ तु रोग भाॊ बगलती को वॊवाय का आहद कायण भानकय बत्क्त कयते शैं, भाॊ बगलती उन्शें जीलन भुक्त कय देती शै।" याजा वुयध ने ऩूछा- बगलन लश देली कौन वी शै, त्जवको आऩ भशाभामा कशते शैं? शे ब्रह्भन ्। लश कै वे उत्ऩन्न शुई। औय उवका क्मा कामा शै? उवके रयि कौन कौन वे शैं? प्रबो ! उवका प्रबाल, स्लरूऩ आहद के फाये भें शभे वलस्ताय भें फताइए। भशवऴा भेधा फोरे - याजन ्! लश देली तो तनत्मास्लरूऩ शै, उनके द्वाया मश वॊवाय य ा गमा शै। तफ बी उवकी उत्ऩत्त्त अनेक प्रकाय वे शोती शै, त्जवे भैं फताता शूॊ। वॊवाय को जरभम कयके जफ बगलान वलटणु मागतनद्रा का आश्रम रेकय, ळेऴळय्मा ऩय वो यशे थे, तफ भधु-कै टब नाभ के अवुय उनके कानों के भैर वे प्रकट शुए औय लश श्री ब्रह्भाजी को भायने के सरए तैमाय शो गए। उनके इव बमानक रूऩ को देखकय ब्रह्भाजी ने अनुभान रगा सरमा फक बगलान वलटणु के सवलाम भेया कोई यषक नशीॊ शै। फकन्तु वलडम्फना मश थी फक बगलान वलटणु वो यशे थे। तफ उन्शोंने श्री बगलान को जगाने के सरए उनके नेिों भें तनलाव कयने लारी मोगतनद्रा की स्तुतत की। तफ वबीगुण अतघटठािी देली मोगतनद्रा बगलान वलटणु के नेि, नसवका, भुख, फाशु औय ह्लदम वे तनकरकय ब्रह्भा जी के वाभने खडी शो गई। मोगतनद्रा के तनकरते शी श्रीशरय तुयॊत जाग उठे। उन्शें देखकय याषव क्रोतघत शो उठे औय मुद्ध के सरए उनकी तयप दौडे। बगलान वलटणु औय उन याषवों भें ऩाॉ शजाय लऴो तक मुद्ध शुआ। अॊत भें दोनों याषवों ने बगलान की लीयता देख कय उन्शें लय भाॉगने को कशा। बगलान ने कशा महद तुभ भुझ ऩय प्रवन्न शो तो अफ भेये शाथों भय जाओ। फव, इतना शी लय भें तुभ वे भाॉगता शूॉ। भशवऴा भेधा फोरे - इव तयश वे जफ लश धोखे भें आ गए औय अऩने ायों ओय जर शी जर देखा तो बगलान वे कशने रगे फक जशाॊ जर न शो, उवी जगश शभाया लध कीत्जए। तथास्तु कशकय बगलान श्री शरय ने उन दोनो को अऩनी जाॊघ ऩय सरटा कय सवय काट डारे। भशवऴा भेधा फोरे इव तयश वे मश देली श्री ब्रह्भाजी की
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    37 2019 स्तुतत कयनेऩय प्रकट शुई थी, अफ तुभ वे उनके प्रबाल का लणान कयता शूॊ, त्जवको ध्मान वे वुनो - प्रा ीन कार भें देलताओॊ के स्लाभी इॊद्र औय अवुयों के स्लाभी भहशऴावुय के फी ऩूये वौ लऴो तक मुद्ध शुआ था। इव मुद्ध भें देलताओॊ की वेना ऩयास्त शो गई औय इव प्रकाय देलताओॊ को जीत भहशऴावुय इन्द्र फन फैठा शाये शुए देलता श्री ब्रह्भाजी को वाथ रेकय बगलान ळॊकय ल वलटणु जी के ऩाव गए औय अऩनी शाय का वाया लृताॊत उन्शें कश वुनामा। उन्शोने भहशऴावुय के लध की प्रथना के उऩाम की प्रथाना की। वाथ शी याज्म लाऩव ऩाने के सरए उनकी कृ ऩा की स्तुतत की। देलताओॊ की फातें वुनकय बगलान वलटणु औय ळॊकय जी को देलताओॊ ऩय फडा गुस्वा आमा। गुस्वे वे बये शुए बगलान वलटणु के भुख वे फडा बायी तेज तनकरा औय उवी प्रकाय का तेज बगलान ळॊकय, ब्रह्भा आहद देलताओॊ के भुख वे प्रकट शुआ, त्जववे दवों हदळाएॊ जरने रगी। अॊत भें मशी तेज एक देली के रूऩ भें ऩरयलततात शो गमा। देली ने वबी देलताओॊ वे आमुध, ळत्क्त तथा आबूऴण प्राप्त कय उच् स्लय भें गगनबेदी गजाना की। त्जववे वभस्त वलश्ल भें शर र भ गई ऩृ्ली, ऩलात आहद डोर गए। क्रोतघत भहशऴावुय दैत्म वेना रेकय इव सवॊशनाद की ओय दौडा। उवने देखा फक देली की प्रबा वे तीनों रोक प्रकासळत शो यशे शैं। भहशऴावुय ने अऩना वभस्त फर औय छर रगा हदमा ऩयॊतु देली के वाभने उवकी एक न री। अॊत भें लश देली के शाथों भाया गमा। आगे रकय मशी देली ळुम्ब-तनळुम्ब नाभक अवुयों का लध कयने के सरए गौयी देली के ळयीय वे उत्ऩन्न शुई। उव वभम देली हशभारम ऩय वल य यशीॊ थी। जफ ळुम्ब-तनळुम्ब के वेलकों ने उव ऩयभ भनोशय रूऩ लारी जगदॊफा देली को देखा औय तुयन्त अऩने स्लाभी के ऩाव जाकय कशा फक "शे भशायाज ! दुतनमा के वाये यत्न आऩके अतघकाय भें शैं। ले वफ आऩके मशाॉ ळोबा ऩाते शैं। ऎवे शी एक स्िी यत्न को शभने हशभारम की ऩशाडडमों भें देखा शै। आऩ हशभारम को प्रकासळत कयने लारी हदव्म क्राॊतत मुक्त इव देली का लयण कीत्जए। मश वुनकय दैत्मयाज ळुम्ब ने वुग्रील को अऩना दूत फनाकय देली के ऩाव अऩना वललाश प्रस्ताल बेजा। देली ने प्रस्ताल को ना भानकय कशा जो भुझवे मुद्ध भें जीतेगा। भैं उववे वललाश करूॉ गी। मश वुनकय अवुयेन्द्र के क्रोध का ऩायालाय न यशा औय उवने अऩने वेनाऩतत धूम्ररो न को देली के के ळों वे ऩकडकय राने का आदेळ हदमा। इव ऩय धूम्ररो न वाठ शजाय याषवों की वेना वाथ रेकय देली वे मुद्ध के सरए लशाॉ ऩशुॉ ा औय देली को ररकायने रगा। देली ने सवपा अऩनी शुॊकाय वे शी उवे बस्भ कय हदमा औय देली के लाशन सवॊश ने फाकी अवुय वेना का वॊशाय कय हदमा। इवके फाद ण्ड भुण्ड नाभक दैत्मों को एक फडी वेना के वाथ मुद्ध के सरए बेजा गमा। जफ अवुय देली को तरलायें रेकय उनकी ओय फढ़े तफ देली ने कारी का वलकयार रूऩ धायण कय उन ऩय टूट ऩडी। कु छ शी देय भें वम्ऩूणा वेना को नटट कय हदमा। फपय देली ने "शूॉ" ळब्द कशकय ण्ड का सवय काट हदमा औय भुण्ड को मभरोक ऩशुॉ ा हदमा। तफ वे देली कारी की वॊवाय भें ाभुॊडा के नाभ वे ख्मातत शोने रगी। भशवऴा भेधा ने आगे फतामा - ण्ड भुण्ड औय वायी वेना के भाये जाने की खफय वुनकय अवुयों के याजा ळुम्ब ने अऩनी वम्ऩूणा वेना को मुद्ध के सरए तैमाय शोने की आसा दी। ळुम्ब की वेना को अऩनी ओय आता देखकय देली ने अऩने धनुऴ की टॊकाय वे ऩृ्ली औय आकाळ के फी का बाग गुॊजा हदमा। ऎवे बमॊकय ळब्द वुनकय याषवी वेना ने देली औय सवॊश को ायों ओय वे घेय सरमा। उव वभम दैत्मों के नाळ के सरए औय देलताओॊ के हशत के सरए वभस्त देलताओॊ की ळत्क्तमाॉ उनके ळयीय वे तनकरकय उन्शीॊ के रूऩ भें आमुधों वे वजकय दैत्मों वे मुद्ध कयने के सरए प्रस्तुत शो गई। इन देल ळत्क्तमों वे तघये शुए बगलान ळॊकय ने देली वे कशा भेयी प्रवन्नता के सरए तुभ ळीघ्र शी इन अवुयों को भायो। इवके ऩश् मात ् देली के ळयीय वे अत्मॊत उग्र रूऩ लारी औय वैंकडों गीदडडमों के वभान आलाज कयने लारी त्ण्डका ळत्क्त प्रकट शुई। उव अऩयात्जता देली ने बगलान ळॊकय को अऩना दूत फनाकय ळुम्ब, तनळुम्ब के
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    38 2019 ऩाव इववॊदेळ के वाथ बेजा जो तुम्शे अऩने जीवलत यशने की इच्छा शो तो त्रिरोकी का याज्म इन्द्र को दे दो, देलताओॊ को उनका मस बाग सभरना आयॊब शो जाए औय तुभ ऩातार को रौट जाओ, फकन्तु महद फर के गला वे तुम्शायी रडने की इच्छा शो तो फपय आ जाओ, तुम्शाये भाॉव वे भेयी मोतनमाॉ तृप्त शोंगी।" ूॊफक उव देली ने बगलान ळॊकय को दूत के कामा भें तनमुक्त फकमा था, इवसरए लश वॊवाय भें सळलदूती के नाभ वे वलख्मात शुई। भगय दैत्म बरा कशाॊ भानने लारे थे। ले तो अऩनी ळत्क्त के भद भें ूय थे। उन्शोने देली की फात अनवुनी कय दी औय मुद्ध को तत्ऩय शो उठे। देखते शी देखते ऩुन: मुद्ध तछड गमा। फकॊ तु देली के वभष अवुय कफ तक ठशय वकते थे। कु छ शी देय भें देली ने उनके अस्ि, ळस्िों को काट डारा। जफ फशुत वे दैत्म कार के भुख भें वभा गए तो भशादैत्म यक्तफीज मुद्ध के सरए आगे फढ़ा। उवके ळयीय वे यक्त की फूॊदे ऩृ्ली ऩय जैवे शी धगयती थीॊ। तुयॊत लैवे शी ळयीय लारा दैत्म ऩृ्ली ऩय उत्ऩन्न शो जाता था। मश देखकय देलताओॊ को बम शुआ, देलताओॊ को बमबीत देखकय ॊडडका ने कारी वे कशा "शे ाभुण्डे" तुभ अऩने भुख को पै राओ औय भेये ळस्िाघात वे उत्ऩन्न शुए यक्त त्रफन्दुओॊ तथा यक्त त्रफन्दुओॊ वे उत्ऩन्न शुए भशाअवुयों को तुभ अऩने इव भुख वे बषण कयती शुई यणबूसभ भें वल यो। इव प्रकाय उव दैत्म का यक्त षीण शो जाएगा औय लश स्लमॊ नटट शो जाएगा। इव प्रकाय अन्म दैत्म उत्ऩन्न नशीॊ शोंगे। कारी के इव प्रकाय कशकय त्ण्डका देली ने यक्तफीज ऩय अऩने त्रिळुर वे प्रशाय फकमा औय कारी देली ने अऩने भुख भें उवका यक्त रे सरमा। त्ण्डका ने उव दैत्म को फज्र, फाण, खड्भ इत्माहद वे भाय डारा। भशादैत्म यक्तफीज के भयते शी देलता अत्मॊत प्रवन्न शुए औय भाताएॊ उन अवुयों का यक्त ऩीने के ऩश् मात उद्धत शोकय नृत्म कयने रगीॊ। यक्तफीज के भाये जाने ऩय ळुम्ब ल तनळुम्ब को फडा क्रोध आमा औय अऩनी फशुत फडी वेना रेकय भशाळत्क्त वे मुद्ध कयने र हदए। भशाऩयाक्रभी ळुम्ब बी अऩनी वेना वहशत भातृगणों वे मुद्ध कयने के सरए आ ऩशुॉ ा। फकन्तु ळीघ्र शी वबी दैत्म भाये गए औय देली ने ळुम्ब तनळुम्ब का वॊशाय कय हदमा। वाये वॊवाय भें ळाॊतत छा गई औय देलता गण शवऴात शोकय देली की लॊदना कयने रगे। इन वफ उऩाख्मानों को वुनकय भेधा ऋवऴ ने याजा वुयध तथा लणणक वभातघ वे देली स्तुलन की वलतघलत व्माख्मा की, त्जवके प्रबाल वे दोनों नदी तट ऩय जाकय तऩस्मा भें रीन शो गए। तीन लऴा फाद दुगाा भाता ने प्रकट शोकय दोनों को आळीलााद हदमा। इव प्रकाय लणणक तो वॊवारयक भोश वे भुक्त शोकय आत्भध ॊतन भें रग गमा तथा याजा ने ळिुओॊ को ऩयात्जत कय अऩना खोमा शुआ याज लैबल ऩुन: प्राप्त कय सरमा। Beautiful Stone Bracelets  Lapis Lazuli Bracelet  Rudraksha Bracelet  Pearl Bracelet  Smoky Quartz Bracelet  Druzy Agate Beads Bracelet  Howlite Bracelet  Aquamarine Bracelet  White Agate Bracelet  Amethyst Bracelet  Black Obsidian Bracelet  Red Carnelian Bracelet  Tiger Eye Bracelet  Lava (slag) Bracelet  Blood Stone Bracelet  Green Jade Bracelet  7 Chakra Bracelet  Amanzonite Bracelet  Amethyst Jade  Sodalite Bracelet  Unakite Bracelet  Calcite Bracelet  Yellow Jade Bracelet  Rose Quartz Bracelet  Snow Flakes Bracelet GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com www.gurutvajyotish.com and gurutvakaryalay.blogspot.com
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    39 2019 वप्तश्र्लरोकी दुगाा देवलत्लॊ बक्तवुरबे वलाकामावलधातमनी। करौ हश कामासवद्धमथाभुऩामॊ ब्रूहश मित्॥ देव उवाच: श्रृणु देल प्रलक्ष्मासभ करौ वलेटटवाधनभ्। भमा तलैल स्नेशेनाप्मम्फास्तुतत् प्रकाश्मते॥ ववतनमोग् ॐ अस्म श्री दुगाावप्तश्रोकीस्तोिभन्िस्म नायामण ऋवऴ् अनुटटऩ्छन्द्, श्रीभह्भकारी भशारक्ष्भी भशावयस्लत्मो देलता्, श्रीदुगााप्रीत्मथिं वप्तश्रोकीदुगााऩाठे वलतनमोग्। ॐ सातननाभवऩ ेताॊसव देली बगलती हशवा। फरादाकृ टम भोशाम भशाभामा प्रमच्छतत॥ दुगे स्भृता शयसव बीततभळेऴजन्तो् स्लस्थै् स्भृता भततभतील ळुबाॊ ददासव। दारयद्र्मदु्खबमशारयणण त्लदन्मा वलोऩकायकयणाम वदाद्राध त्ता॥ वलाभॊगरभॊगल्मे सळले वलााथावाधधके । ळयण्मे त्र्मम्फके गौरय नायामणण नभोऽस्तुते॥ ळयणागतदीनाताऩरयिाणऩयामणे। वलास्मातताशये देवल नायामणण नभोऽस्तुते॥ वलास्लरूऩे वलेळे वलाळत्क्तवभत्न्लते। बमेभ्मस्िाहश नो देवल दुगे देवल नभोऽस्तुते॥ योगानळोऴानऩशॊसव तुटटा रूटटा तु काभान ् वकरानबीटटान ्। त्लाभाधश्रतानाॊ न वलऩन्नयाणाॊ त्लाभाधश्रता ह्भाश्रमताॊ प्रमात्न्त॥ वलााफाधाप्रळभनॊ िैरोक्मस्माणखरेश्र्ललरय। एलभेल त्लमा कामाभस्मद्लैरयवलनाळनभ्॥ ॥ इतत श्रीवप्तश्रोकी दुगाा वॊऩूणाभ् ॥ दुगाा आयती जम अम्फे गौयी भैमा जम श्माभा गौयी। तुभको तनवहदन ध्मालत शरय ब्रम्शा सळलयी॥१॥ भाॊग सवॊदूय वलयाजत टीको भृगभदको। उज्जलर वे दोऊ नैना न्द्रलदन नीको॥२॥ कनक वभान करेलय यक्ताम्फय याजे। यक्त ऩुटऩ गर भारा कण्ठन ऩय वाजे॥३॥ के शरय लाशन याजत खड्ग खप्ऩय धायी। वुय नय भुतन जन वेलत ततनके दु्ख शायी॥४॥ कानन कुॊ डर ळोसबत नावाग्रे भोती। कोहटक ॊद्र हदलाकय याजत वभ ज्मोतत॥५॥ ळुॊब तनळॊबु वलदाये भहशऴावुयधाती। धूम्रवलरो न नैना तनळहदन भदभाती॥६॥ ण्ड भुण्ड वॊशाये ळोणणत फीज शये। भधु कै टब दोउ भाये वुय बमशीन कये॥७॥ ब्रम्शाणी रुद्राणी तुभ कभरायानी। आगभ तनगभ फखानी तुभ सळल ऩटयानी॥८॥ ौवॊठ मोधगनी गालत नृत्म कयत बैरुॉ। फाजत तार भृदॊगा अरु डभरुॉ॥९॥ तुभ शी जग की भाता तुभ शी शो बयता। बक्तन की दु्खशताा वुख वम्ऩत्त्त कताा॥१०॥ बुजा ाय अतत ळोसबत लय भुद्रा धायी। भनलाॊत्च्छत पर ऩाले वेलत नय नायी॥११॥ कॊ न थार वलयाजत अगय कऩुय फात्ती। श्री भार के तु भें याजत कोहट यतन ज्मोती॥१२॥ भाॉ अम्फे जी की आयती जो कोई नय गामे। कशत सळलानॊद स्लाभी वुख वॊऩत्त्त ऩामे॥१३॥
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    40 2019 १ २ ३ ४ ५ ब ६ ब ७ ८ बब ९ ब ब १० ब ११ १२ १३ ब १४ ब १५ १६ १७ १८ १९ ब २० ब २१ २२ २३ ब ब ब ब २४ ब ब ब २५ - २६ २७ - २८ ब २९ ब ३० ३१ ब ३२ ब ब ३३ ब ब ३४ ब ३५ ब ब ३६ ३७ - ३८ ब ३९ ब ४० ब
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    41 2019 श्रीकृ टणकृ त देली स्तुतत नलयाि भें श्रद्धा औय प्रेभऩूलाक भशाळत्क्त बगलती देली की ऩूजा-उऩावना कयने वे मश तनगुाण स्लरूऩा देली ऩृ्ली के वभस्त जीलों ऩय दमा कयके स्लमॊ शी वगुणबाल को प्राप्त शोकय ब्रह्भा, वलटणु औय भशेळ रूऩ वे उत्ऩत्त्त, ऩारन औय वॊशाय कामा कयती शैं। श्रीकृ ष्ण उवाच त्लभेल वलाजननी भूरप्रकृ ततयीश्लयी। त्लभेलाद्या वृत्टटवलधौ स्लेच्छमा त्रिगुणात्त्भका॥१॥ कामााथे वगुणा त्लॊ लस्तुतो तनगुाणा स्लमभ्। ऩयब्रह्भास्लरूऩा त्लॊ वत्मा तनत्मा वनातनी॥२॥ तेज्स्लरूऩा ऩयभा बक्तानुग्रशवलग्रशा। वलास्लरूऩा वलेळा वलााधाया ऩयात्ऩय॥३॥ वलाफीजस्लरूऩा वलाऩूज्मा तनयाश्रमा। वलासा वलातोबद्रा वलाभॊगरभॊगरा॥४॥ अथाात् आऩ वलश्लजननी भूर प्रकृ तत ईश्लयी शो, आऩ वृत्टट की उत्ऩत्त्त के वभम आद्याळत्क्त के रूऩ भें वलयाजभान यशती शो औय स्लेच्छा वे त्रिगुणात्त्भका फन जाती शो। मद्यवऩ लस्तुत् आऩ स्लमॊ तनगुाण शो तथावऩ प्रमोजनलळ वगुण शो जाती शो। आऩ ऩयब्रह्भ स्लरूऩ, वत्म, तनत्म एलॊ वनातनी शो। ऩयभ तेजस्लरूऩ औय बक्तों ऩय अनुग्रश कयने आऩ ळयीय धायण कयती शों। आऩ वलास्लरूऩा, वलेश्लयी, वलााधाय एलॊ ऩयात्ऩय शो। आऩ वलााफीजस्लरूऩ, वलाऩूज्मा एलॊ आश्रमयहशत शो। आऩ वलास, वलाप्रकाय वे भॊगर कयने लारी एलॊ वला भॊगरों फक बी भॊगर शो। ऋग्लेदोक्त देली वूक्तभ् अशसभत्मटट ास्म वूक्त स्म लागाम्बृणी ऋवऴ: वत्च् त्वुखात्भक: वलागत: ऩयभात्भा देलता, द्वद्वतीमामा ऋ ो जगती, सळटटानाॊ त्रिटटुऩ् छन्द:, देलीभाशात्म्म ऩाठे वलतनमोग्। ध्मानभ ् सवॊशस्था ळसळळेखया भयकतप्रख्मैश् तुसबाबुाजै: ळङ्खॊ क्रधनु:ळयाॊश् दधती नेिैत्स्िसब: ळोसबता। आभुक्ताङ्गदशायकङ्कणयणत्काञ् ीयणन्नूऩुया दुगाा दुगाततशारयणी बलतु नो यत्नोल्रवत्कु ण्डरा॥ देलीवूक्तभ ् अशॊ रुद्रेसबलावुसबश् याम्मशभाहदत्मैरुत वलश्लदेलै्। अशॊ सभिालरुणोबा त्रफबम्माशसभन्द्राग्नी अशभधश्र ्लनोबा॥१॥ अशॊ वोभभाशनवॊ त्रफबम्माशॊ त्लटटायभुत ऩूऴणॊ बगभ्। अशॊ दधासभ द्रवलणॊ शवलटभते वुप्राव्मे मजभानाम वुन्लते॥२॥ अशॊ याटट्री वॊगभनी लवूनाॊ ध फकतुऴी प्रथभा मक्षसमानाभ्। ताॊ भा देला व्मदधु: ऩुरुिा बूरयस्थािाॊ बूय्र्मालेळमन्तीभ्॥३॥ भमावो अन्नभत्त्त मोवलऩश्मतत म: प्राणणतत मईश्रृणोत्मुक्त भ्। अभन्तलो भाॊ तउऩ क्षषमत्न्त श्रुधधश्रुत श्रवद्धलॊ ते लदासभ॥४॥ अशभेल स्लमसभदॊ लदासभ जुटटॊ देलेसबरुत भानुऴेसब्। मॊ काभमे तॊ तभुग्रॊ कृ णोसभ तॊ ब्रह्भाणॊ तभृवऴॊ तॊ वुभेधाभ्॥५॥ अशॊ रुद्राम धनुया तनोसभ ब्रह्भद्वद्वऴे ळयले शन्तला उ। अशॊ जनाम वभदॊ कृ णोम्मशॊद्यालाऩृधथलीआवललेळ॥६॥ अशॊ वुले वऩतयभस्म भूधान्भभ मोतनयप्स्लन्त: वभुद्रे। ततो वल ततटठे बुलनानु वलश्लोताभूॊ द्माॊ लटभाणोऩ स्ऩळसभ॥७॥ अशभेल लात इल प्रलाम्मायबभाणा बुलनातन वलश्ला। ऩयो हदला ऩय एना ऩृधथव्मैतालती भहशना वॊफबूल॥८॥
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    43 2019 ब द्या १ - -ब २ - - ३ - ४ ब ब ५ ६ ७ - ८ . - १ २ ३ ब : ४ ब ५ द्वद्व ६ : ७ ८
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    44 2019 १ द्या २ ब३ ४ द्या ५ ब ६ ७ ८ ब ब ब ९ १० ११ १२ ब ब १३ १४ १५ द्य १६ १७ १८ : १९ २० २१  ब ब द्वा  द्य-  ब , ब    ब  ब
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    45 2019 वलश्लॊबयी स्तुतत वलश्लॊबयीस्तुतत भूर रुऩवे गुजयाती भें लल्रब बट्ट द्वाया सरखी गई शैं। वॊकरन गुरुत्ल कामाारम वलश्लॊबयी अणखर वलश्लतणी जनेता। वलद्या धयी लदनभाॊ लवजो वलधाता॥ दुफुावद्ध दुय कयी वद्दफुवद्ध आऩो। भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥१॥ बूरो ऩडड बलयने बटकुॊ बलानी। वुझे नहश रगीय कोइ हदळा जलानी॥ बावे बमॊकय लऱी भनना उताऩो। भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥२॥ आ यॊकने उगयला नथी कोइ आयो। जन्भाॊध छु जननी शु ग्रशी शाथ तायो॥ ना ळुॊ वुणो बगलती सळळुना वलराऩो। भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥३॥ भा कभा जन्भ कथनी कयताॊ वल ारु। आ वृत्टटभाॊ तुज वलना नथी कोइ भारु॥ कोने कशुॊ कठण काऱ तणो फऱाऩो। भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥४॥ शुॊ काभ क्रोध भध भोश थकी बयेरो। आडॊफये अतत धणो भद्थी छके रो॥ दोऴो फधा दूय कयी भाप ऩाऩो। भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥५॥ ना ळास्िना श्रलणनु ऩम्ऩान ऩीधु। ना भॊि के स्तुतत कथा नथी काइ कीधु॥ श्रद्धा धयी नथी कमाा तल नाभ जाऩो। भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥६॥ ये ये बलानी फशु बूर थई ज भायी। आ त्जॊदगी थई भने अततळे अकायी॥ दोऴो प्रजासऱ वधऱा तल छाऩ छाऩो। भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥७॥ खारी न कोइ स्थऱ छे वलण आऩ धायो। ब्रह्भाॊडभाॊ अणु-अणु भशीॊ लाव तायो॥ ळत्क्त न भाऩ गणला अगणणत भाऩो। भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥८॥ ऩाऩो प्रऩॊ कयला फधी यीते ऩूयो। खोटो खयो बगलती ऩण शुॊ तभायो॥ जाडमाॊधकाय कयी दूय वुफुवद्ध स्थाऩो। भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥९॥ ळीखे वुणे यसवक छॊद ज एक ध त्ते। तेना थकी त्रिवलध ताऩ टऱे खध ते॥ फुवद्ध वलळेऴ जगदॊफ तणा प्रताऩो। भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥१०॥ श्री वदगुरु ळयनभाॊ यशीने मजुॊ छुॊ। यात्रि हदने बगलती तुजने बजुॊ छु ॥ वदबक्त वेलक तणा ऩरयताऩ ाऩो। भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥११॥ अॊतय वलऴे अधधक उसभा थताॊ बलानी। गाऊ स्तुतत तल फऱे नभीने भृडानी॥ वॊवायना वकऱ योग वभूऱ काऩो। भाभ् ऩाहश ॐ बगलती बल दु्ख काऩो ॥१२॥
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    46 2019 भहशऴावुयभहदातनस्तोिभ् ||बगलतीऩद्यऩुटऩाॊजसरस्तोि भहशऴावुयभहदातनस्तोिभ्|| श्री त्रिऩुयवुन्दमै नभ् || बगलती बगलत्ऩदऩङ्कजॊ भ्रभयबूतवुयावुयवेवलतभ् | वुजनभानवशॊवऩरयस्तुतॊ कभरमाऽभरमा तनबृतॊ बजे ||१|| ते उबे असबलन्देऽशॊ वलघ्नेळकु रदैलते | नयनागाननस्त्लेको नयसवॊश नभोऽस्तुते ||२|| शरयगुरुऩदऩद्मॊ ळुद्धऩद्मेऽनुयागाद् वलगतऩयभबागे वत्न्नधामादयेण | तदनु रय कयोसभ प्रीतमे बत्क्तबाजाॊ बगलतत ऩदऩद्मे ऩद्यऩुटऩाञ्जसरॊ ते ||३|| के नैते यध ता् कु तो न तनहशता् ळुम्बादमो दुभादा् के नैते तल ऩासरता इतत हश तत ् प्रश्ने फकभा क्ष्भशे | ब्रह्भाद्या अवऩ ळॊफकता् स्लवलऴमे मस्मा् प्रवादालधध प्रीता वा भहशऴावुयप्रभधथनीच्दद्मादलद्यातन भे ||४|| ऩातु श्रीस्तु तुबुाजा फकभु तुफााशोभाशौजान्बुजान ् धत्तेऽटटादळधा हश कायणगुणान्कामे गुणायम्बका् | वत्मॊ हदक्ऩततदत्न्तवॊख्मबुजबृच्छम्बु् स्लय्म्बू् स्लमॊ धाभैकप्रततऩत्तमे फकभथला ऩातुॊ दळाटटौ हदळ् ||५|| प्रीत्माऽटटादळवॊसभतेऴु मुगऩद्द्लीऩेऴु दातुॊ लयान ् िातुॊ ला बमतो त्रफबवऴा बगलत्मटटादळैतान ् बुजान ् | मद्वाऽटटादळधा बुजाॊस्तु त्रफबृत् कारी वयस्लत्मुबे भीसरत्लैकसभशानमो् प्रथतमतुॊ वा त्लॊ यभे यषभाभ् ||६|| अतम धगरयनॊहदतन नॊहदतभेहदतन वलश्लवलनोहदतन नॊदनुते धगरयलय वलॊध्म सळयोधधतनलासवतन वलटणुवलरासवतन त्जटणुनुते | बगलतत शे सळततकण्ठकु टुॊत्रफतन बूरय कु टुॊत्रफतन बूरय कृ ते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||७|| वुयलयलवऴाणण दुधायधवऴाणण दुभुाखभवऴाणण शऴायते त्रिबुलनऩोवऴणण ळॊकयतोवऴणण फकत्ल्फऴभोवऴणण घोऴयते | दनुज तनयोवऴणण हदततवुत योवऴणण दुभाद ळोवऴणण सवन्धुवुते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||८|| अतम जगदॊफ भदॊफ कदॊफ लनवप्रम लासवतन शावयते सळखरय सळयोभणण तुङ्ग हशभारम ळृॊग तनजारम भध्मगते | भधु भधुये भधु कै टब गॊत्जतन कै टब बॊत्जतन यावयते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||९|| अतम ळतखण्ड वलखत्ण्डत रुण्ड वलतुत्ण्डत ळुण्ड गजाधधऩते रयऩु गज गण्ड वलदायण ण्ड ऩयाक्रभ ळुण्ड भृगाधधऩते | तनज बुज दण्ड तनऩाततत खण्ड वलऩाततत भुण्ड बटाधधऩते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१०|| अतम यण दुभाद ळिु लधोहदत दुधाय तनजाय ळत्क्तबृते तुय वल ाय धुयीण भशासळल दूतकृ त प्रभथाधधऩते | दुरयत दुयीश दुयाळम दुभातत दानलदूत कृ ताॊतभते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||११|| अतम ळयणागत लैरय लधूलय लीय लयाबम दामकये त्रिबुलन भस्तक ळूर वलयोधध सळयोधध कृ ताभर ळूरकये | दुसभदुसभ ताभय दुॊदुसबनाद भशो भुखयीकृ त ततग्भकये जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१२|| अतम तनज शुॉकृ तत भाि तनयाकृ त धूम्र वलरो न धूम्र ळते वभय वलळोवऴत ळोणणत फीज वभुद्भल ळोणणत फीज रते | सळल सळल ळुॊब तनळुॊब भशाशल तवऩात बूत वऩळा यते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१३|| धनुयनु वॊग यणषणवॊग ऩरयस्पु य दॊग नटत्कटके कनक वऩळॊग ऩृऴत्क तनऴॊग यवद्भट ळृॊग शतालटुके | कृ त तुयङ्ग फरक्षषतत यङ्ग घटद्फशुयङ्ग यटद्फटुके जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१४|| वुयररनाततथेतमतथेतमतथासबनमोत्तयनृत्मयते शाववलरावशुरावभतम प्रणताताजनेऽसभतप्रेभबये |
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    47 2019 धधसभफकटधधक्कटधधकटधधसभध्लतनघोयभृदॊगतननादयते जमजम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१५|| जम जम जप्म जमेजम ळब्द ऩयस्तुतत तत्ऩय वलश्लनुते झण झण णझत्ञ्जसभ णझॊकृ त नूऩुय सवॊत्जत भोहशत बूतऩते | नहटत नटाधा नटीनट नामक नाहटत नाट्म वुगानयते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१६|| अतम वुभन् वुभन् वुभन् वुभन् वुभनोशय काॊततमुते धश्रत यजनी यजनी यजनी यजनी यजनीकय लक्िलृते | वुनमन वलभ्रभय भ्रभय भ्रभय भ्रभय भ्रभयाधधऩते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१७|| वहशत भशाशल भल्रभ तत्ल्रक भत्ल्रत यल्रक भल्रयते वलयध त लत्ल्रक ऩत्ल्रक भत्ल्रक णझत्ल्रक सबत्ल्रक लगा लृते | सवतकृ त पु त्ल्रवभुल्र सवतारुण तल्रज ऩल्रल वल्रसरते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१८|| अवलयर गण्ड गरन्भद भेदुय भत्त भतङ्गज याजऩते त्रिबुलन बूऴण बूत करातनधध रूऩ ऩमोतनधध याजवुते | अतम वुद तीजन रारवभानव भोशन भन्भथ याजवुते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||१९|| कभर दराभर कोभर काॊतत कराकसरताभर बाररते वकर वलराव करातनरमक्रभ के सर रत्कर शॊव कु रे | असरकु र वङ्कु र कु लरम भण्डर भौसरसभरद्भकु रासर कु रे जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२०|| कय भुयरी यल लीत्जत कू त्जत रत्ज्जत कोफकर भञ्जुभते सभसरत ऩुसरन्द भनोशय गुत्ञ्जत यॊत्जतळैर तनकु ञ्जगते | तनजगुण बूत भशाळफयीगण वद्गुण वॊबृत के सरतरे जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२१|| कहटतट ऩीत दुकू र वलध ि भमूखततयस्कृ त ॊद्र रु े प्रणत वुयावुय भौसरभणणस्पु य दॊळुर वन्नख ॊद्र रु े | त्जत कनका र भौसरऩदोत्जात तनबाय कुॊ जय कुॊ बकु े जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२२|| वलत्जत वशस्रकयैक वशस्रकयैक वशस्रकयैकनुते कृ त वुयतायक वङ्गयतायक वङ्गयतायक वूनुवुते | वुयथ वभाधध वभानवभाधध वभाधधवभाधध वुजातयते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२३|| ऩदकभरॊ करुणातनरमे लरयलस्मतत मोऽनुहदनॊ व सळले अतम कभरे कभरातनरमे कभरातनरम् व कथॊ न बलेत ् | तल ऩदभेल ऩयॊऩदसभत्मनुळीरमतो भभ फकॊ न सळले जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२४|| कनकरवत्कर सवन्धु जरैयनु सवत्ञ् नुते गुण यङ्गबुलॊ बजतत व फकॊ न ळ ीकु कुॊ ब तटी ऩरययॊब वुखानुबलभ् | तल यणॊ ळयणॊ कयलाणण नताभयलाणण तनलासव सळलॊ जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२५|| तल वलभरेन्दुकु रॊ लदनेन्दुभरॊ वकरॊ ननु कू रमते फकभु ऩुरुशूत ऩुयीन्दुभुखी वुभुखीसबयवौ वलभुखीफक्रमते | भभ तु भतॊ सळलनाभधने बलती कृ ऩमा फकभुत फक्रमते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२६|| अतम भतम दीनदमारुतमा कृ ऩमैल त्लमा बवलतव्मभुभे अतम जगतो जननी कृ ऩमासव मथासव तथाऽनुसभतासवयते | मदुध तभि बलत्मुयरय कु रुतादुरुताऩभऩाकु रुते जम जम शे भहशऴावुयभहदातन यम्मकऩहदातन ळैरवुते ||२७|| स्तुततसभतत्स्तसभत् वुवभाधधना तनमभतोऽमभतोऽनुहदनॊ ऩठेत ् | ऩयभमा यभमावऩ तनऴेव्मते ऩरयजनोऽरयजनोऽवऩ तॊ बजेत ् ||२८|| यभमतत फकर कऴास्तेऴु ध त्तॊ नयाणाभलयजलय मस्भाद्राभकृ टण् कलीनाभ् | अकृ त वुकृ ततगम्मॊ यम्मऩद्दैकशम्मिं स्तलनभलनशेतुॊ प्रीतमे वलश्लभातु् ||२९|| इन्दुयम्मो भुशुत्रफान्दुयम्मो भुशुत्रफान्दुयम्मो मत् वोऽनलद्म् स्भृत् | श्रीऩते् वूनूना कारयतो मोऽधुना वलश्लभातु् ऩदे ऩद्यऩुटऩाञ्जसर् ||३०|| || इतत श्रीबगलतीऩद्यऩुटऩाञ्जसरस्तोिभ ् ||
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    48 2019 ळाऩ वलभोन भॊि  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम चश्ण्डका शाऩ ववभोचन भॊर त्ण्डका ळाऩ वलभो न भॊि के ऩाठ को कयने वे देली की ऩूजा भें की गमी फकवी बी प्रकाय िुहट (बूर) वे सभरा श्राऩ खत्भ शो जाता शै। शाऩ-ववभोचन सॊकल्ऩ ऊॉ अस्म श्री त्ण्डकामा ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩवलभो न भन्िस्म लसवटठनायदवॊलादवाभलेदाधधऩततब्रह्भाण ऋऴम: वलैश्लमाकारयणी श्रीदुगाा देलता रयििमॊ फीजॊ ह्ीॊ ळत्क्त: त्रिगुणात्भस्लरूऩ त्ण्डकाळाऩवलभुक्तो भभ वॊकत्ल्ऩतकामासवद्धमथे जऩे वलतनमोग:। शाऩववभोचन भॊर ॐ (ह्ीॊ) यीॊ येत:स्लरूवऩण्मै भधुकै टबभहदान्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१॥ ॐ यॊ यक्तस्लरूवऩण्मै भहशऴावुयभहदान्मै,ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥२॥ ॐ षुॊ षुधास्लरूवऩण्मै देललत्न्दतामै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥३॥ ॐ छाॊ छामास्लरूवऩण्मै दूतवॊलाहदन्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥४॥ ॐ ळॊ ळत्क्तस्लरूवऩण्मै धूम्ररो नघाततन्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥५॥ ॐ तॊ तृऴास्लरूवऩण्मै ण्डभुण्डलधकारयण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥६॥ ॐ षाॊ षात्न्तस्लरूवऩण्मै यक्तफीजलधकारयण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥७॥ ॐ जाॊ जाततरूवऩण्मै तनळुम्बलधकारयण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥८॥ ॐ रॊ रज्जास्लरूवऩण्मै ळुम्बलधकारयण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥९॥ ॐ ळाॊ ळात्न्तस्लरूवऩण्मै देलस्तुत्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१०॥ ॐ श्रॊ श्रद्धास्लरूवऩण्मै वकरफ़रदात्र्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥११॥ ॐ श्रीॊ फुवद्धस्लरूवऩण्मै भहशऴावुयवैन्मनासळन्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१२॥ ॐ काॊ कात्न्तस्लरूवऩण्मै याजलयप्रदामै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१३॥ ॐ भाॉ भातृस्लरूवऩण्मै अनगारभहशभावहशतामै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१४॥ ॐ ह्ीॊ श्रीॊ दुॊ दुगाामै वॊ वलैश्लमाकारयण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१५॥ ॐ ऐॊ ह्ीॊ क्रीॊ नभ: सळलामै अबेद्यकल स्लरूवऩण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१६॥ ॐ क्रीॊ काल्मै कासर ह्ीॊ फ़ट स्लाशामै ऋग्लेदस्लरूवऩण्मै ब्रह्भलसवटठवलश्लासभिळाऩाद वलभुक्ताबल॥१७॥ ॐ ऐॊ ह्ीॊ क्रीॊ भशाकारीभशारक्ष्भीभशावयस्लतीस्लरूवऩण्मै त्रिगुणात्त्भकामै दुगाादेव्मै नभ:॥१८॥ इत्मेलॊ हश भशाभन्िान ऩहठत्ला ऩयभेश्लय, ण्डीऩाठॊ हदला यािौ कु माादेल न वॊळम:॥१९॥ एलॊ भन्िॊ न जानातत ण्डीऩाठॊ कयोतत म:, आत्भानॊ ैल दातायॊ षीणॊ कु माान्न वॊळम:॥२०॥ (श्रीदुगााभाऩाणाभस्तु)
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    49 2019 श्रीदुगााअटटोत्तय ळतनाभऩूजन  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम द्वद्व ब- - ( - - - - - - ब द्वा - ब - - - - - - - - - - - - - - - - ‘ ’ ब ब ब ब
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    50 2019 - ब- - द्य ब ब ब - - - - - - - - ब - - - - - - - - - - - - ब - - - - - - - - ब ब ब - -
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    51 2019 - - - -- - - - - - - - - - - - - ब - - - - -ब - - - - - - अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कल अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल ल उल्रेणखत अन्म वाभग्रीमों को ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे वलद्वान ब्राह्भणो द्वाया सवा राख भहाभृत्मुॊजम भॊर जऩ एलॊ दळाॊळ शलन द्वाया तनसभात कल अत्मॊत प्रबालळारी शोता शैं। अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल कल फनलाने शेतु: अऩना नाभ, वऩता-भाता का नाभ, गोि, एक नमा पोटो बेजे कल के वलऴम भें अधधक जानकायी शेतु गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें। GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल दक्षषणा भाि: 10900
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    52 2019  वॊकरनगुरुत्ल कामाारम - - - ब ब ब ब ब ब ब ब ब - ब ब ब ब ब ब
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    54 2019 ब ब ब - ब ब ब ब ब - - बब द्वा , ; द्य ; ब ; - ; द्वा ; ब ; - ;
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    55 2019 ; ब - ; ; ब ब ब- ब ब ब ; ; ब ब ब ब ब ब : ब -ब - ; द्वा ब ब Seven Chakra Stone Chips ORGONE PYRAMID Best For Remove Negativity Energy & Increase Positive Energy Price Starting Rs.550 Onwards
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    56 2019  वॊकरनगुरुत्ल कामाारम १ २ ३ ब ४ ५ ब ६ ७ ब ब ८ ९ ब १० ब ११ ब ब १२ १३ १४ १५ ब १६ १७ १८ १९ २० २१ २२ ब ब २३ २४ २५ २६ - २७ २८ २९ ३० ३१ ब
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    57 2019 ३२ ३३ ३४ ३५ ३६ ३७ ३८ ३९ ४ ४१ , . Natural Shaligram Pair GandakiRiver Nepal Price 1100 & Above Natural Chakra Shaligram Gandaki River Nepal Price 550 & Above Natural Two Chakra Shaligram Gandaki River Nepal Price 1100 & Above GURUTVA KARYALAY BHUBNESWAR-751018, (ODISHA), Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com 1
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    58 2019 श्री भाकाण्डेम कृ त रघु दुगाा वप्तळती स्तोिभ्  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम ॐ लीॊलीॊलीॊ लेणुशस्ते स्तुततवलधलटुके शाॊ तथा तानभाता, स्लानॊदेभॊदरुऩे अवलशततनरुते बत्क्तदे भुत्क्तदे त्लभ्। शॊव् वोशॊ वलळारे लरमगततशवे सववद्धदे लाभभागे, ह्ीॊ ह्ीॊ ह्ीॊ सवद्धरोके कऴ कऴ वलऩुरे लीयबद्रे नभस्ते॥१॥ ॐ ह्ीॊ-कायॊ ोच् यॊती भभशयतु बमॊ भाभुॊडे प्र ॊडे, खाॊखाॊखाॊ खड्गऩाणे ध्रकध्रकध्रफकते उग्ररुऩे स्लरुऩे। शुॊशुॊशुॊ-काय-नादे गगन-बुवल तथा व्मावऩनी व्मोभरुऩे, शॊशॊशॊ- कायनादे वुयगणनसभते याषवानाॊ तनशॊत्रि॥२॥ ऐॊ रोके कीतामॊती भभ शयतु बमॊ ॊडरुऩे नभस्ते, घ्राॊ घ्राॊ घ्राॊ घोयरुऩे घघघघघहटते घघाये घोययाले। तनभािंवे काकजॊघे घसवत-नख-नखा-धूम्र-नेिे त्रिनेिे, शस्ताब्जे ळूरभुॊडे करकु रकु कु रे श्रीभशेळी नभस्ते॥३॥ क्रीॊ क्रीॊ क्रीॊ ऐॊ कु भायी कु शकु शभणखरे कोफकरे, भानुयागे भुद्रावॊसत्रियेखाॊ कु रु कु रु वततॊ श्रीभशाभारय गुह्मे। तेजोंगे सववद्धनाथे भनुऩलन रे नैल आसा तनधाने, ऐॊकाये यात्रिभध्मे ळतमतऩळुजने तॊिकाॊते नभस्ते॥४॥ ॐ व्राॊ व्रीॊ व्रुॊ व्रूॊ कवलत्मे दशनऩुयगते रुक्भरुऩेण क्रे , त्रि्ळक्त्मा मुक्तलणााहदककयनसभते दाहदलॊऩूणालणे। ह्ीॊ-स्थाने काभयाजे ज्लर ज्लर ज्लसरते कोसळतैस्तास्तुऩिे स्लच्छॊदॊ कटटनाळे वुयलयलऩुऴे गुह्मभुॊडे नभस्ते॥५॥ ॐ घ्राॊ घ्रीॊ घ्रूॊ घोयतुॊडे घघघघघघघे घघायान्माॊतघ्रघोऴे, ह्ीॊ क्रीॊ द्रॊ द्रौं क्र य य य य यसभते वलाफोधप्रधाने। द्रीॊ तीथे द्रीॊ तज्मेटठ जुगजुगजजुगे म्रेच्छदे कारभुॊडे, वलािंगे यक्तघोयाभथनकयलये लज्रदॊडे नभस्ते॥६॥ ॐ क्राॊ क्रीॊ क्रूॊ लाभसबत्ते गगनगडगडे गुह्ममोन्माहशभुॊडे, लज्राॊगे लज्रशस्ते वुयऩततलयदे भत्तभातॊगरुढे। वूतेजे ळुद्धदेशे रररररसरते छेहदते ऩाळजारे, कुॊ डल्माकायरुऩे लृऴलृऴबशये ऐॊहद्र भातनाभस्ते॥७॥ ॐ शुॊशुॊशुॊकायनादे कऴकऴलसवनी भाॊसव लैतारशस्ते, वुॊसवद्धऴै् वुसववद्धढाढढढढढढ् वलाबषी प्र ॊडी। जूॊ व् वौं ळाॊततकभे भृतभृततनगडे तन्वभे वीवभुद्रे, देवल त्लॊ वाधकानाॊ बलबमशयणे बद्रकारी नभस्ते॥८॥ ॐ देवल त्लॊ तुमाशस्ते कयधृतऩरयघे त्लॊ लयाशस्लरुऩे, त्लॊ ेंद्री त्लॊ कु फेयी त्लभसव जननी त्लॊ ऩुयाणी भशेंद्री। ऐॊ ह्ीॊ ह्ीॊ कायबूते अतरतरतरे बूतरे स्लगाभागे, ऩातारे ळैरबृॊगे शरयशयबुलने सववद्ध ॊडी नभस्ते॥९॥ शॊसव त्लॊ ळौंडदु्खॊ ळसभतबलबमे वलावलघ्नाॊतकामे, गाॊगीॊगूॊगैंऴडॊगे गगनगहटतटे सववद्धदे सववद्धवाध्मे। क्रूॊ क्रूॊ भुद्रागजाॊळो गवऩलनगते त्र्मषये लै कयारे, ॐ शीॊ शूॊ गाॊ गणेळी गजभुखजननी त्लॊ गणेळी नभस्ते॥१०॥ ॥इतत भाका ण्डेम कृ त रघु सप्तशती दुगाा स्तोरभ्॥ Kamiya Sindoor Available in Natural Solid Rock Shape 7 Gram to 100 Gram Pack Available *Powder Also Available Kamiya Sindoor Use in Various Religious Pooja, Sadhana and Customize Wish Fulfillment GURUTVA KARYALAY Call Us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 or Shop Online @ www.gurutvakaryalay.com
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    59 2019 ब ब १ २ ब ब३ ब ४ ५ ६ ब ७ ८ ९ ब १० ११ ब ब
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    60 2019 गुप्त वप्तळती वॊकरन गुरुत्ल कामाारम , ब ब - - - , - १ - २ - - - - ३ - - - ४ - ब - ब ब - ब - - , - , , - - - - - - ब - - - , - - , - - , - - 7 ब , , - , - , , - , - - - - , - , - - - - , - -ब - , - , - , - - , - - - - , - - , - १ , , - - - - , - , -
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    61 2019 - -, - - , - - - , - - , - २ , , - - - , - - , - - , - - , - - - , - , - ३ - - , - - , - - - , - , - - , - - , - - , - - , ४ - - , - - - - , - , - , - - - , - , - - , - - , - ५ - - - , - - - , - - , - , - - - - - - , - ६ - , - - - , - , - - , - - , - , - - , - - , - , ७ - , - , - - - - , - - , - - - - , , , - , - ८ , ब , - ब , , - , - - , - - - , - - , - ९ - , - , - - , - - , - - , , - - , १० - , - - , - - - , - - , - , - - ब , - , - १ - , - - - - - - , - - - , - , - २ - , - , - - , - ब- , - - - - , - ३ - - - - ब - - , - - , - - - ४ - , - - , - , - - -
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    62 2019 - -- - - - , - ५ - - - , - - - - , - - , - - - - - ६ - - - - - - - , - - , - ७ - - - - - - - - - - , - - , - ८ - - - , - - - , - - , , - ९ - - - , - - - - - - - - १० - - - - - - - - - - ११ ब - - - - - - - - - - - - १२ - - - - - - - - - - - - - - - - - १३ ई- जन्भ ऩत्रिका एडलाॊस्ड E- HOROSCOPE (Advanced) अत्माधुतनक ज्मोततऴ ऩद्धतत द्वाया उत्कृ टट बवलटमलाणी के वाथ 500+ ऩेज भें प्रस्तुत Create By Advanced Astrology Excellent Prediction 500+ Pages हशॊदी/ English भें भूल्म भाि 2800 Limited time offer 1225 Only GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) INDIA Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
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    63 2019 बायततम ऩॊाॊग का भूर आधाय?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम हशन्दू वॊस्कृ तत भें ऩॊ ाॊग का वलळेऴ भशत्ल शै। शभाये मशाॊ ऩॊ ाॊग भें लणणात ततधथ, ऩष, ग्रश, नषि आहद की त्स्थती के आधाय ऩय जीलन के वलसबन्न 16 वॊस्कायों वे रेकय मािा इत्माहद कामों शेतु बी ळुब भुशूता का मन कयने ऩय वलळेऴ जोय हदमा जाता शैं। ळुब भुशूता देखने का भुख्म उद्देश्म शोता शैं की व्मत्क्त को अऩने ळुब कामा भे तनत्श् त वपरता प्राप्त शो वके भुख्मत् अमन, वलऴुल, ऋतु, वूमा एलॊ ॊद्र, ऩष, ततधथ, नषि, कयण, मोग, वूमोदम ल ॊद्रोदम, हदनभान, यात्रिभान औय ऩॊ ाॊग के भुख्म अॊग भाने जाते शैं। उऩयोक्त वबी भशत्लऩूणा त्स्थतीमों का गणणत के आधाय ऩय वूक्ष्भ वलश्रेऴण फकमा जाता शै। वलद्वानो के भत वे लैहदक प्रणारी भें इनका कोई वलळेऴ तनदेळ नशीॊ शै। रेफकन कारगणना भें ऩरयळुद्धता के सरए इन्शें अऩनामा जाता शैं। ऩृ्ली वूमा के आकऴाण वे तनधाारयत एक तनमत भागा भें वतत भ्रभण कयती शै। वाधायणत् ऩृ्ली वे वूमा त्जव भागा ऩय रता शुआ प्रतीत शोता शै, उवे ज्मोततऴ की ऩारयबावऴक ळब्दालरी भें क्राॊततलृत्त अथाात एकसरत्प्टक (Ecliptic) कशते शैं। इव क्राॊततलृत्त भागा के 9 अॊळ वे फने वलस्ताय को ब क्र कशते शैं। ऩृ्ली की तनमत गतत के कायण शी अमन, वलऴुल, ऋतु एलॊ हदन-यात शोते शैं। वॊक्राॊतत तनधाायण औय ऩॊ ाॊग की ऩरयळुद्धता भें अमन औय वलऴुल ततधथमों की बूसभका प्रभुख भानी जाती शैं। त्जव प्रकाय ऩृ्ली का वॊफॊध वूमा क्राॊततलृत्त वे यशता शै उवी प्रकाय ऩृ्ली का वॊफॊध वे ॊद्र अऩने तनत्श् त भाग्र भें भ्रभण कयता शै। अन्म ग्रशो की अऩेषा ॊद्र अतत ळीघ्र गतत कयता शै इव सरए ॊद्र जफ वूमा वे 12 अॊळों के अॊतय ऩय आता शै, तफ एक ततधथ का क्रभ ऩूया शो जाता शै। इव प्रकाय क्रभळ् 12-12 अॊळों के अॊतय वे तनमसभत ततधथमाॊ फदरती शैं। बायततम वॊस्कृ तत भे भुशूता का भशत्ल बायततम वॊस्कृ तत भे भुशूता का वलळेऴ भशत्ल शैं। शभाये ऋवऴ-भुतन वलद्वान आ ामों ने जन्भ वे अॊत्मेत्टट(भृत व्मत्क्त फक अॊततभ फक्रमा) तक वबी वॊस्कायों एलॊ अन्म वबी भाॊगसरक कामों के सरए भुशूता का वलधान आलश्मक फतामा गमा शैं।फकवी कामा वलळेऴ भें वपरता फक प्तात्प्त शेतु तनत्श् त भुशूता का ुनाल फकमा जाता शैं। बायतीम ज्मोततऴ सवद्धान्त के अनुळाय शय भुशूता का अऩना लैसातनक प्रबाल एलॊ भशत्ल शैं। कोई बी व्मत्क्त इन भुशूता के प्रबाल एलॊ भशत्ल के फाये भे ऩूणा जानकायी प्राप्त कय व्मत्क्त अऩने फकवी बी कामा उद्देश्म भें वलळेऴ वपरता प्रात्प्त शेतु उध त भुशूता का ुनाल कय वपरता प्रात्प्त फक वॊबालना फढा वकते शैं। एलॊ ज्मोततऴीम भत वे ळुब पर प्रदान कयने लारे भुशूता भें फकमे गमे कामो भें उव कामा की वपरता की वॊबालना कई गुणा फढ़ जाती शै। प्राम् शय भुशूता का तनणाम ब्रह्भाॊड भें त्स्थत ग्रशो फक त्स्थततमों फक गणना कय फकमा जाता शैं। बायततम वॊस्कृ तत भें प्राम् शय ळुब कामा भें बायत के प्रभुख 16 वॊस्कायो को वॊऩन्न कयने शेतु भुशूता का ुनाल अतत आलश्मक भाना गमा शैं। क्मोफक ळुबा भुशूता भें फकमे गमे शय ळुब कामा अत्माधधक ळुब पर प्रदान कयने लारे शोते शैं।
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    64 2019 बायतीम ऩॊाॊग गणना की लैसातनक ऩद्धतत क्मा शैं?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम बायतीम ऩॊ ाॊग का इततशाव अत्मॊत प्राध न शैं। बायत भें वलसबन्न प्रादेसळक ऩॊ ाॊग भें क्रभळ ततधथ, लाय, नषि, मोग औय कयण मश ऩाॊ प्रभुख अॊग शोते शैं। क्मोफक, इवी ऩाॊ अॊगों को सभराकय बायतीम ततधथऩि अथाात ् हदनदसळाका अथाात ् कै रेंडय को ऩॊ ाॊग कशा जाता शैं। ऩुयातन कार वे रेकय आज के आधुतनक मुग भें ऩॊ ाॊग की ऩौयाणणक गणना एलॊ तनभााण ऩद्धतत भें वभम- वभम ऩय वुधाय मा वुक्ष्भता आती यशी शैं। क्मोफक, ऩॊ ाॊग का भुख्म उद्देश्म भानल जीलन को प्रबावलत कयने लारे ग्रश, नषि आहद ब्रह्भाॊडडम ळत्क्त की स्टीक गणना कय भानल वभाज के वम्भुख प्रस्तुत कयना एलॊ उनको राबाॊवलत कयना शैं, इव सरए ऩॊ ाॊग भें नए ळोध एलॊ आधुतनक ऩरयषण द्वाय ऩॊ ाॊग गणना भें स्टीकता आतत यशी शैं। इव ऩरयणाभ शैं की, आज शभाये ऩाव ऩॊ ाॊग गणना एलॊ तनभााण के वळक्त भाध्मभ उऩरब्ध शै। आज बायत बय भें याटट्रीम ऩॊ ाॊग के के वाथ-वाथ कई षेिीम ऩॊ ाॊग उऩरब्ध शैं। अॊदाजन ई.500 के कयीफ आ ामा रगध का लेदाॊग-ज्मोततऴ (कक् ल माजुऴ्) की य ना की थी। त्जव भें लणणात शैं की ऩाॊ लऴा का एक मुग, 366 हदनों का लऴा शोता शैं। 11 लीॊ वदी वे ऩूलाकार भें अधधकतय बायतीम ऩॊ ाॊग की गणना आ ामा रगध द्वाया यध त ग्रॊथ वेदाॊग ज्मोततष भें उल्रेणखत त्मों ऩय आधारयत शोती थी। ळास्िों भें कशाॉ गमा शैं। कारसानॊ प्र क्ष्मासभ रगधस्म भशात्भन्। कारसान फोधक ज्मोततऴळास्ि का लताभान वलकसवत स्लरुऩ आ ामा रगध भुतन की देन शैं। वभम के वाथ-वाथ आमाबट्ट की खगोरीम गणना की वलधधमाॊ बी फशुत प्रबालळारी वात्रफत शुई, फक उनके द्वाया प्रमोग फकए गए सवद्धाॊत वलश्ल की अन्म वभ्मता एलॊ वॊस्कृ ततमों भें बी नजय आने रगे थे। 11लीॊ वदी भें स्ऩेन के भवशूय लैसातनक अर झकाारी (Al Zarkali) ने बी अऩने कामों भें आमाबट्ट की खगोरीम गणना वे भेरखाती शुई प्रणारी को तोरेडो (Toledo) नाभ हदमा। कयीफ 11लीॊ- 12लीॊ वदी वे रेकय कई वदीमों तक भें मूयोऩीमन देळों भें तोरेडो प्रणारी को वलााधधक वूक्ष्भ गणना के तौय ऩय फकमा जाता था। बायतीत गणणतस आमाबट्ट ने अऩने अनुबलों एलॊ ळोधनकामा वे आमाबट्ट सवद्धाॊत नाभक ग्रॊथ की य ना की त्जव भें दैतनक खगोरीम गणना औय अनुटठानों के सरए ळुब भुशूता इत्माहद का वभालेळ फकमा गमा। वलद्वानों के भत वे आमाबट्ट सवद्धाॊत को ायों ओय वे स्लीकृ तत सभरी थी। क्मोफक आमाबट्ट अऩने वभम के वफवे फडे गणणतस थे। आमाबट्ट सवद्धाॊत की रोकवप्रमता एलॊ प्राभाणणकता सवद्ध शोते शी बायतीम ऩॊ ाॊग की गणना एलॊ तनधाायण भें वलळेऴ भशत्ल एलॊ मोगदान यशा शैं। आमाबट्ट के वभम वे रेकय आजके आधुतनक मुग भें बी इव सवद्धाॊत को व्मालशारयक उद्देश्मों वे बायत एलॊ वलदेळों भें तनयॊतय इस्तेभार भें यशा शैं। आ ामा रगध द्वाया यध त ग्रॊथ वेदाॊग ज्मोततष भें लणणात वूमा सवद्धाॊत की प्राभाणणकता सवद्ध शोने ऩय ऩॊ ाॊग गणना भें वुरबता शोने रगी। त्जव भें आगे रकय आमाबट्ट, लयाशसभहशय औय बास्कय ने अऩने मोगदान वे ऩॊ ाॊग गणना ऩद्धतत वे जुडे ग्रॊथो भें व्माऩक वुधाय फकए।
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    65 2019 वलसबन्न प्रदेळोएलॊ वॊस्कृ तत की सबन्नता के कायण ऩॊ ाॊगों की गणनाओॊ भें अॊतय शो जाता शै, रेफकन कु छ त्म प्राम् वबी ऩॊ ाॊगों भें वभान शोते शैं। वबी ऩॊ ाॊगों के भुख्म ऩाॉ अॊग: ततधथ, लाय, नषि, मोग औय कयण। लृशदलकशडा क्रभ, ऩॊ ाॊग प्रकयण, श्रोक 1 भें कशा गमा शै - ततधथ लारयश् नषिाॊ मोग कयणभेल । एतेऴाॊ मिा वलसानॊ ऩॊ ाॊग तत्न्नगद्यते॥ फकवी बी वलळुद्ध ऩॊ ाॊग को फकवी स्थान वलळेऴ के अषाॊळ औय येखाॊळ ऩय तनधाारयत फकमा जाता शैं। फकवी ऩॊ ाॊग के तनभााण के सरए फकवी तनधाारयत स्थान वलळेऴ के अषाॊळ येखाॊळ का स्ऩटट उल्रेख फकमा जाता शैं। भुख्मत् ऩॊ ाॊग प्रस्तुतत की दो भुख्म ऩद्धततमाॊ भानी जाती शैं। एक शैं तनयमन औय औय दूवयी शैं वामन। बायतीम के ऩॊ ाॊग भें ज्मादातय तनयमन ऩद्धतत अधधक प्र सरत शैं औय ऩाश् ात्म देळों भें वामन ऩद्धतत अधधक प्र सरत शैं। ततधथ : ॊद्र की एक करा को ततधथ कशा जाता शैं। करा का भान वूमा औय ॊद्र के अॊतयाॊळों ऩय तनधाारयत फकमा जाता शैं। ततधथ तनधाायण के वलऴम भें ळास्ि भें लणणात शैं। अकााद्वद्वतनवृज् प्रा ीॊ मद्यात्मशयश् ळऴी। तच् ान्द्रभानभॊऴैस्तु सेमा द्वादऴसबत्स्तधथ्॥ (श्रोक 13:भानाध्माम:वूमा सवद्धाॊत:) लैहदक ज्मोततऴ भें यासळमो को 360 डडग्री को 12 बागो भें फाॊटा गमा शै त्जवे बचक्र कशते शैं। लैहदक ऩॊ ाॊग भें 30 ततधथमाॊ शोती शैं। त्जवभें 15 ततधथमाॊ कृ टण ऩष की तथा 15 ळुक्र ऩष की शोती शैं। रेफकन ॊद्र की गतत भें सबन्नता शोने के कायण ततधथ के भान भें न्मूना एलॊ धधकता फनी यशती शै। वॊऩूणा ब क्र की 360 डडग्री को 30 ततधथमों को 360 ÷ 30 =12 ळेऴ फ ते शैं। ॊद्र अऩने ऩरयक्रभा ऩथ ऩय एक हदन भें रगबग 13 अॊळ फढ़ता शै। वूमा बी ऩृ्ली के वॊदबा भें एक हदन भें 1° मा 60 करा आगे फढ़ता शैं। इव सरए एक हदन भें ॊद्र की कु र फढ़त 13 अॊळ वे वूमा की फढ़त के 1 अॊळ घटाने ऩय 12 अॊळ (13°-1°=12°) ळेऴ यश जाते शैं। ळेऴ फ ी फढ़त शी वूमा औय ॊद्र की गतत का अॊतय शोती शैं। अभालस्मा के हदन वूमा औय ॊद्र एक वाथ एक शी यासळ ल एक शी अॊळों भें त्स्थत शोते शैं। दोनों के फी का यासळ अॊतय ळून्म शोता शैं, इवसरए ॊद्र हदखाई नशीॊ देता शैं। जफ दोनों का अॊतय ळून्म वे फढ़ने रगता शैं तफ ळुक्र प्रततऩदा ततधथ का उदम (प्रायॊब) शोने रगता शैं। वभम के वाथ जफ मश अॊतय फढ़ते-फढ़ते 12° अॊळ का शो जाता शै, तफ प्रततऩदा ततधथ ऩूणा शोकय द्वद्वतीमा ततधथ का उदम शोता शै। ूॊफक प्रततऩदा ततधथ के हदन बी ॊद्र वूमा वे के लर 12 अॊळ शी आगे तनकरता शै, इवसरए प्रततऩदा ततधथ को बी आकाळ भें ॊद्रदळान नशीॊ शोते शैं। इवी प्रकाय वूमा- ॊद्र के यासळ अतय वे फकवी ततधथ वलळेऴ का तनधाायण फकमा जाता शैं। कयीफन ऩॊद्रश हदन फाद भें जफ ॊद्र का अॊतय वूमा वे 180 अॊळ शोता शैं (12 x15=180) आगे शोता शै, तफ ऩूणणाभा ततधथ की वभात्प्त शोती शैं तथा कृ टणऩष की प्रततऩदा ततधथ का उदम शोता शैं। ऩुन् जफ वूमा औय ॊद्र का अॊतय 360 अॊळ अथाात ळून्म शोता शैं तफ कृ टण ऩष की अभालस्मा ततधथ वभाप्त शोती शैं। लाय: बायतीम ज्मोततऴ भें एक लाय एक वूमोदम वे दूवये वूमोदम तक यशता शैं। वाय को ऩरयबावषत कयते हुए शास्रों भें उल्रेख ककमा गमा हैं उदमात्उदमॊ लाय्।
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    66 2019 लाय कोऩौयाणणक ज्मोततऴ भें वालन हदन मा अशगाण के नाभ वे बी जाना जाता शैं। लायों का प्र सरत क्रभ ऩुये वलश्ल भें एक वभान शै। वात लायों के नाभ वात ग्रशों के नाभ ऩय यखे गए शैं। इन वात लायों का क्रभ शोया क्रभ के आधाय ऩय यखे गए शै औय शोया क्रभ ब्रह्भाॊड भें त्स्थत वूमााहद ग्रशों के कष क्रभ के अनुवाय तनधाारयत फकए गए शैं। नषि : ज्मोततऴ ळास्ि भें 12 यासळमाॊ अथाात ब क्र 360 अॊळ को 27 नषिों के 27 बागों भें फाॊटा गमा शैं। शय बाग एक नषि का कायक शै औय शय एक बाग को नषिों का एक तनधाारयत नाभ हदमा गमा शै। कु छ वलद्वानो के भतानुळाय 27 नषिों के अततरयक्त एक औय नषि शैं त्जवे असबत्जत नषि के नाभ वे जाना जाता शैं इव सरए उनके भत वे कु र सभराकय 28 शोते शैं। वूमा सवद्धाॊत के अनुवाय एक नषि का भान 360 अॊळ /27 नषि अथाात एक नषि के सरए 13 अॊळ 20 करा ळेऴ यशता शैं। वलद्वानों के कथन अनुवाय उत्तयाऴाढ़ा नषि की अॊततभ 15 तथा श्रलण नषि की प्रथभ 4 घहटमाॊ के त्रफ का कार असबत्जत नषि की शोती शैं। इव तयश असबत्जत नषि का भान कु र सभराकय 19 शै। रेफकन प्राम् ऩॊ ाॊगों भें इव नषि की गणना देखने को नशीॊ सभरती शैं। फृशत्वॊहशता भें ॊद्र का नषिों वे मोग फताते शुए उल्रेख फकमा गमा शैं:- ऴडनागतातनऩौटणाद् द्वादळयौद्राच् भध्ममोगीतन। जेटठाद्यातननलषााण्मपडुऩततनातीत्म मुज्मन्ते॥ इव श्रोक के अनुवाय बी 27 नषिों लारा भत प्राभाणणक भाना जाता शैं। ज्मोततऴ भें 27 नषिों को 12 यासळमों भें वलबात्जत फकमा जाता शैं। प्रत्मेक नषि के ाय यण (बाग) फकए गए शैं। त्जववे प्रत्मेक यण का भान 13 अॊळ 20 करा भाना गमा शैं त्जवे उवके ाय यण वे बाग देने ऩय 3 अॊळ 20 करा ळेऴ फ ती शैं। (13 अॊळ 20 ÷ 4 = 3 अॊळ 20 करा) इस प्रकाय 27 नऺरों भें कु र 108 चयण होते हैं। लृशज्जातकभ् के अनुवाय प्रत्मेक यासळ भें 108 यण को 12 यासळ भें बाग देने वे 9 यण शोंगे। (108÷ 12 = 9) वलद्वानो के भत वे ॊद्र रगबग 27 हदन 7 घॊटे 43 सभनट भें 27 नषि की ऩरयक्रभा ऩूणा कय रेता शैं। इव सरए ॊद्र रगबग 1 हदन (60 घटी) भें एक नषि भें भ्रभण कयता शैं। रेफकन अऩनी गतत कभ-ज्मादा शोने कायण ॊद्र एक नषि को अऩनी कभ वे ऩाय कयने भें रगबग 67 घटी एलॊ अऩनी अधधकतभ गतत वे ऩाय कयने भें रगबग 52 घटी का वभम रेता शैं। मोग : ऩॊचाॊग भें भुख्मत् मोग दो प्रकाय के भाने गए हैं (१) आनॊदाहद मोग औय (२) वलटकॊ बाहद मोग त्जव प्रकाय वूमा औय ॊद्र के यासळ अॊतय वे ततधथ का तनधाायण शोता शैं, उवी प्रकाय वूमा औय ॊद्र के यासळ अॊतय के मोग कयने वे वलटकॊ बाहद मोग का तनधाायण शोता शैं। मशाॊ स्ऩटट फकमा जा यशा शैं, की मोग ब्रह्भाॊड के फकवी प्रकाय के ताया वभूश अथाात ग्रश नषि नशीॊ शैं। लयन ॊद्र एलॊ वूमा के अॊतय का मोग तनधाायण की त्स्थती का नाभ शैं। आकाळ भें तनयमन इत्माहद त्रफॊदुओॊ वे वूमा औय ॊद्र को वॊमुक्त रूऩ वे 13 अॊळ 20 करा अथाात 800 करा का ऩूया बोग कयने भें त्जतना वभम रगता शै, लश मोग कशराता शै। इव प्रकाय के फकवी बी एक मोग का भान नषि की बाॊतत 800 करा शोता शैं। वलटकॊ बाहद मोगों की कु र वॊख्मा 27 शैं। मोग का दैतनक भान रगबग 60 घटी 13 ऩर शोता शै। वूमा औय ॊद्र की गततमों की अवभानता के कायण भध्मभ भान भें न्मूनता एलॊ धधकता फनती शैं। इन मोगों भें लैधृतत एलॊ व्मततऩात नाभक मोगों को भशाऩातक कशते शैं।
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    67 2019 लाय औयनषि के वॊमोग वे तात्कासरक आनॊदाहद मोग फनते शैं। ऩौयाणणक ग्रथों भें इनकी वॊख्मा 28 दळााई शै। इन्शें त्स्थय मोग बी कशते शैं। इनकी गणणतीम फक्रमा नशीॊ शै। मे मोग वूमोदम वे अगरे वूमोदम तक यशते शैं। इन मोगों का तनधाायण लाय वलळेऴ को तनहदाटट नषि वे वलद्यभान नषि (असबत्जत नषि के वाथ) तक की गणना द्वाया शोता शै। कयण: फकवी बी ततधथ का आधा बाग कयण कशराता शैं। वूमा औय ॊद्र भें 60 अॊळ का अॊतय शोने भें त्जतना वभम रगता उव अॊतय वे कयण का तनधाायण फकमा जाता शैं। फकवी-फकवी ऩॊ ाॊगों भें कयण का लणान के लर वूमोदमकारीन वभम वे फकमा जाता शैं, तो फकवी-फकवी ऩॊ ाॊगों भें ततधथ की वॊऩूणा अलधध को दो वभान बाग कयके वलळेळ तौय ऩय कयणों का तनधाायण कय देते शैं। एक ततधथ भें दो कयण शोते शैं। इनकी कु र वॊख्मा ११ शै। कयण को दो बागों भें फाॊटा गमा शैं य औय त्स्थय। फल, फारल, कौरल, तैत्त्तर, गय, लणणज एलॊ वलत्टट (बद्रा) य औय फकॊ स्तुन, ळकु तन, तुटऩद एलॊ नाग त्स्थय वॊसक कयण शैं। कयण की ळुरुआत त्स्थय कयण अथाात फकॊ स्तुन वे शोती शैं जफ ब क्र भें वूमा औय ॊद्र के फी अॊळ का अॊतय ळून्म शोता शैं, तो प्रततऩदा ततधथ के वाथ शी त्स्थय फकॊ स्तुन कयण का ळुरु शोता शैं। जफ ॊद्र गतत वूमा वे 6 अॊळ आगे तनकर जाती शैं, तफ फकॊ स्तुन कयण की वभात्प्त शोती शैं। अथाात वूमा औय ॊद्र भें 6 अॊळ का अॊतय शोने भें जो वभम रगता शैं, उवे फकॊ स्तुन कयण कशा जाता शैं। इवी प्रकाय क्रभळ् 6-6 अॊळ के अॊतय ऩय कयण फदर जाते शैं। कयण ततधथ का आधा बाग शोता शैं। ततधथ के ऩूलााद्धा अथाात ऩशरे आधे बाग भें एक कयण, उत्तयाद्धा अथाात दूवये आधे बाग का एक कयण। इव प्रकाय एक ततधथ भें 2 कयण शोते शैं। वूमा औय न्द्रभा के फी 6º अॊळ का अन्तय शोने वे एक कयण शोता शैं। ज्मोततऴ ळास्ि के अनुवाय कयण की कु र वॊख्मा 11 शोती शैं। 11 यण को दो बागो भें फाटा गमा शैं य कयण औय त्स्थय कयण। य कयण भें 1) फल 2) फारल 3) कौरल 4) तैततर 5) गय 6) लणणज 7) वलत्टट का वभालेळ फकमा गमा शैं। त्स्थय कयण भें 1) ळकु तन 2) तुटऩद 3) नाग 4) फकस्तुध्न का वभालेळ फकमा गमा शैं। जफ वूमा औय न्द्रभा की गतत भें 13º-20' का अन्तय शोने वे एक मोग शोता शैं। कु र सभरा कय 27 मोग शोते शैं आकाळ की त्स्थतत वे इन मोगो का कोइ वम्फन्ध नशीॊ शैं। लैवे बी मोगो की आलश्मकता वलळेऴ रुऩ वे मािा, भुशुता इत्माहद प्रवॊगों भें ऩडती शैं। मोगो के नाभ 1) वलटकु म्ब 2) प्रीतत 3) आमुटभान 4) वौबाग्म 5) ळोबन 6) अततगड 7) वुकभाा 8) घृतत 9) ळूर 10) गॊड 11) लृवद्ध 12) ध्रुल 13) व्माघात 14) शऴाण 15) लज्र 16) सववद्ध 17) व्मतीऩात 18) लयीमान 19) ऩरयध 20) सळल 21) सवद्ध 22) वाध्म 23) ळुब 24) ळुक्र 25) ब्रह्भ 26) ऎन्द्र 27) लैधृतत
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    68 2019 Now Shop OurExclusive Products Online @ www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvakaryalay.in Our Store Location: GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, ान्द्र भाव ान्द्र भाव भें कु र 30 ततधथमाॉ शोती शैं त्जनभें 15 ततधथमाॉ ळुक्र ऩष की औय 15 कृ टण ऩष की शोती शैं। ततधथमाॉ तनम्न प्रकाय की शैं। 1) प्रततऩदा 2) द्वद्वतीमा 3) तृतीमा 4) तुथॉ 5) ऩॊ भी 6) ऴटटी 7) वप्तभी 8) अटटभी 9) नलभी 10) दळभी 11) एकादळी 12) द्वादळी 13) िमोदळी 14) तुदाळी 15) ऩूणणाभा 30) अभालस्मा ततधथमाॉ ळुक्रऩष की प्रततऩदा वे धगनी जाती शैं। ऩूणणाभा को 15 तथा अभालस्मा को 30 ततधथ कशते शैं। त्जव हदन वूमा ल न्द्रभा भें 180º अॊळ का अन्तय (दूयी) शोता शैं अथाात वूमा ल न्द्र आभने-वाभने शो जाते शैं तो उवे ऩूणणाभा ततधथ कशा जाता शैं औय जफ वुमा ल न्द्रभा एक शी स्थान ऩयशोते शैं अथाात 0º का अन्तय शोता शैं तो अभालस्मा ततधथ कशते शैं। ब क्र का कु रभान 360º शैं, तो एक ततधथ= 360÷ 30=12º अथाात वूमा- न्द्र भें 12º का अन्तय ऩडने ऩय एक ततधथ शोती शैं। उदाशयण स्लरुऩ: 0º वे 12º तक ळुक्र ऩष की प्रततऩदा 12º वे 24º तक द्वद्वतीम तथा क्रभळ् ततधथ लृवद्ध शोकय अॊत भें 330º वे 360º तक कृ टण ऩष की अभालस्मा को अॊत शोती शैं। बायतीम ज्मोततऴ की ऩयम्ऩया भें ततधथ की लृवद्ध एलॊ ततधथ का षम बी शोता शैं। महद फकवी ततधथभें दो फाय वूमोदम शो जाता शैं, तो उवे ततधथ लृवद्ध कशराती शैं तथा त्जव ततधथ भें वूमोदम न शो तो उवे ततधथका षम शो जाना कशा जाता शैं। उदाशयण के सरए एक ततधथ वूमोदम वे ऩूला प्रायम्ब शोती शैं तथा वॊऩूणा हदन यशकय अगरे हदन वूमोदम के 2 घॊटे ऩश् ात तक बी यशती शैं तो मश ततधथ दो वूमोदम को स्ऩळा कय रेती शैं। इवसरए इव ततधथभें लृवद्ध शो जाती शैं। इवी प्रकाय एक अन्म ततधथ वूमोदम के ऩश् ात प्रायम्ब शोती शै तथा दूवये हदन वूमोदम वे ऩशरे वभाप्त शो जाती शैं, तो मश ततधथ एक बी वूमोदम को स्ऩळा नशीॊ कयती इव कायण उवे षम शोने वे ततधथषम कशा जाता शैं।
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    69 2019 कै रेण्डयमुग की उत्ऩत्त्त कफ शुई ?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम वाधायणत् कै रेण्डय का उऩमोग हदनाॊकों (तायीखों) भहशने, लऴा का हशवाफ यखने के सरए फकमा जाता शैं। कै रेण्डय का उद्गभ कफ शुला औय कै रेण्डय का उऩमोग भानल वभाज कफ वे कय यशा शैं मश दाले के वाथ कोई नशीॊ कश वकता! क्मोफक, जफ ऩौयाणणक कार भें जफ आहद भानल लन-फीशडों औय गुपाओॊ भें यशते थे तो, मशॊ देख कय अलश्म आश् मा फकत शुए शोंगे फक, प्रततहदन वूयज उदम शोता शैं औय ळाभ को अस्त शो जाता शैं, ाॊद तनकरता शै औय छू ऩ जाता शैं। कबी बमॊकय गभॉ ऩडती शैं, तो कबी जोयों की लऴाा शोने रगती शैं। औय फपय, कबी हशरा कय यख देने लारी ठॊड ऩडने रगती शैं। उवने जरूय वो ा शोगा फक प्रकृ तत भें वभम-वभम ऩय ऐवे फदराल क्मों शोते शैं? क्मों ऋतुएॊ आती-जाती शैं? जफ आहद भानल ने खेती कयना ळुरू फकमा शोगा तफ, उवने जभीन भें फीज फोमे शोंगे तो उवने देखा शोगा फक पवर उगती शैं, फढ़ती शै औय वभम के वाथ- वाथ ऩक जाती शै। फपय उव पवर की कटाई कय रेता शोगा। ऩुन् फीज फोने का वभम आने ऩय फपय वे फीज फोए शोंगे। इव तयश पवर की फोआई-कटाई का क्रभ रता यशा शोगा। इव क्रभ वे ळामद उवने ऩशरी फाय इव फात का अॊदाजा रगाना ळुरू फकमा शोगा फक पवर फोने के फकतने वभम फाद फपय वे नई पवर के फीज फोने शैं। धीये-धीये आहद भानल नें इव तयश ळामद ऩशरी फाय ऩूये लऴा का हशवाफ रगामा शोगा। आहद कार वे शी फकवी बी तयश वलश्ल की वलसबन्न वभ्मताओॊ ने तनत्श् त तौय ऩय अऩने-अऩने ढॊग वे वभम का हशवाफ रगामा शोगा। सभस्रलावीमों के भत वे: अनुभातनक तौय ऩय एवा भाना जाता शैं की लऴा का ऩशरा हशवाफ वफवे 6,000 लऴा ऩशरे सभस्र के तनलासवमों ने रगामा था। शय वार जफ नीर नदी भें फाढ़ आती थी तो उवके फाद ले पवरों की फोआई कयते थे। फाढ़ आने के फाद जफ नीर नदी भें दुफाया फाढ़ आती थी तो उन्शोंने देखा फक उव दौयान ाॊद 12 फाय उगता था। मानी, 12 ॊद्र-भाशों के फाद फाढ़ आती थी औय तफ ले पवर की फोआई कयते थे। सभस्र के कु छ वलद्वानो ने देखा फक जफ फाढ़ आती शै तो आवभान भें एक तेज भकदाय ताया बी हदखाई देने रगता शै। उन्शोंने गणना की तो ऩता रगा फक 365 हदन-यात के फाद फपय ऐवा शी शोता शै। फपय ताया भकने रगता शै। सभस्र के तनलासवमों ने 365 हदन के लऴा को 30 हदन के 12 भशीनों भें फाॊट हदमा। लऴा के अॊत भें ऩाॊ हदन फ गए। इव तयश सभस्र के तनलासवमों ने कै रेंडय का आवलटकाय कय सरमा शोगा। अबी तक शुए ऐततशासवक ळोध वे जुसरमन औय ग्रेगोयीमन कै रेंडय भशत्लऩूणा भाने जाते शैं। जुसरमन कै रेंडय योभ के ळावक जुसरमव वीजय ने तैमाय फकमा था। आगे र कय ऩोऩ ग्रेगोयी तेयशलें ने इव कै रेण्ड भें वुधाय कयके ग्रेगोयीमन कै रेंडय तैमाय फकमा था। 45 ईस्ली ऩूला वे अथाात इव वभम वे ऩशरे तक योभ वाम्राज्म भें योभन कै रेंडय प्र सरत था। योभन कै रेंडय भें लऴा का प्रायॊब 1 भा ा वे शोता था। प्रायॊब भें योभन कै रेंडय भें लऴा 10 भाश का शोता था फपय उवे 12 भहशनो का फकमा गमा। जफ योभन कै रेंडय भें 10 भाश शोते थे तो उव भें 10 भाश क्रभळ् भाहटाअव, एवप्रसरव, भेअव, जूतनअव, त्क्लॊहटसरव, वैत्क्वहटसरव, वेप्टेंफय, अक्टूफय, नलॊफय तथा हदवॊफय। योभन कै रेंडय को 10 भाश वे जफ 2 भाश सभरा कय उवे 12 भहशनो का फकमा गमा तो उव भें 12 भाश क्रभळ् रान्मुआयीअव, पे ब्रुआयीअव, भाहटाअव, एवप्रसरव, भेअव, जूतनअव, त्क्लॊहटसरव, वैत्क्वहटसरव, वेप्टेंफय, अक्टूफय, नम्फफय तथा हदवफफय थे।
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    70 2019 योभन कैरेंडय के 10 भशीनों के लऴा भें के लर 304 हदन शोते थे। एवा भाना जाता शै फक योभ के वम्राट ‘नुभा ऩोत्म्ऩसरअव’ ने हदवॊफय औय भा ा भशीनों के फी पयलयी औय जनलयी भाश जोडे। त्जववे लऴा 354 मा 355 हदनों का शो गमा। शय दो लऴा फाद अधधभाव जोड कय 366 हदन का लऴा भान सरमा जाता था। वभम के वाथ-वाथ इवभें वुधाय शोते यशे। त्जववे कै रेंडय की गणनाएॊ ॊद्रभा के फजाम हदनों के आधाय ऩय शोने रगीॊ। ऩृ्ली द्वाया वूमा की ऩरयक्रभा की गणना के आधाय ऩय लऴा भें हदनों की वॊख्मा 365.25 शो गई। इव वला अथाात ् एक ौथाई हदन वे गणना भें फडा भ्रभ ऩैदा शोने रगा। उव वभम योभ के ळावक जुसरमव वीजय ने योभन कै रेंडय भें वलळेऴ वुधाय फकमा। ईस्ली ऩूला 44 भें त्क्लॊहटसरव भाश का नाभ फदर कय जूसरमव वीजय के वम्भान भें ‘जुराई’ यख हदमा गमा। जुसरमव वीजय ने कै रेंडय को वुधायने भें सभस्र के खगोरवलद वोसवजेनीज की भदद री। फपय लऴा 1 जनलयी वे ळुरू फकमा गमा। त्जव भें शय ौथे लऴा को छोड कय प्रत्मेक लऴा 365 हदन का शोगा। ौथा लऴा रीऩ लऴा शोगा औय उवभें 366 हदन शोंगे। पयलयी को छोड कय प्रत्मेक भाश भें 31 मा 30 हदन शोंगे। पयलयी भें 28 हदन शोंगे रेफकन रीऩ लऴा भें पयलयी भें 29 हदन भाने जाएॊगे। अनुभान शै फक 8 ईस्ली ऩूला भें वम्राट ऑगस्टव के नाभ ऩय वेक्वहटसरव भाश का नाभ ‘अगस्त’ यख हदमा गमा। भाना जाता शैं की जूसरमन कै रेंडय के अनुळाय ईस्टय का त्मौशाय औय अन्म धासभाक ततधथमाॊ वॊफॊधधत ऋतुओॊ भें वशी वभम ऩय नशीॊ आती थीॊ। त्जववे कै रेंडय भें अततरयक्त हदन जभा शो गए थे। ऩोऩ ग्रेगोयी 1572 वे 1585 तक तेयशलें ऩोऩ यशे। वन ् 1582 तक लनार इत्क्लन क्व 10 हदन वऩछड ुका था। ऩोऩ ग्रेगोयी तेयशलें ने जूसरमन कै रेंडय की 10 हदनों की िुहट को वुधायने के सरए उव लऴा 5 अक्टूफय की ततधथ को 15 अक्टूफय भानने का वुझाल हदमा। त्जवके परस्लरुऩ जूसरमन कै रेंडय भें वे 10 हदन घटा हदए गए। उव वभम रीऩ लऴा ळताब्दी के अॊत भें यखा गमा फळते लश 400 की वॊख्मा वे वलबात्जत शोता शो। इवीसरए 1700, 1800 औय 1900 रीऩ लऴा नशीॊ थे जफफक लऴा 2000 रीऩ लऴा था। इव वॊळोधन वे ग्रेगोयीम कै रेंडय की ळुरूआत शुई त्जवे आज वलश्ल के अधधकाॊळ देळों भें अऩनामा जा यशा शै। इवके फालजूद वलश्ल के कई देळ वभम की गणना के सरए अबी बी अऩने ऩयॊऩयागत ऩॊ ाॊग मा कै रेंडय का उऩमोग कय यशे शैं। हशन्दु, ीनी, इस्राभी मा हशजयी औय मशूदी कै रेंडय इवके प्रभुख उदाशयण शैं। श्री शनुभान मॊि ळास्िों भें उल्रेख शैं की श्री शनुभान जी को बगलान वूमादेल ने ब्रह्भा जी के आदेळ ऩय शनुभान जी को अऩने तेज का वौलाॉ बाग प्रदान कयते शुए आळीलााद प्रदान फकमा था, फक भैं शनुभान को वबी ळास्ि का ऩूणा सान दूॉगा। त्जववे मश तीनोरोक भें वला श्रेटठ लक्ता शोंगे तथा ळास्ि वलद्या भें इन्शें भशायत शासवर शोगी औय इनके वभन फरळारी औय कोई नशीॊ शोगा। जानकायो ने भतानुळाय शनुभान मॊि की आयाधना वे ऩुरुऴों की वलसबन्न फीभारयमों दूय शोती शैं, इव मॊि भें अद्भुत ळत्क्त वभाहशत शोने के कायण व्मत्क्त की स्लप्न दोऴ, धातु योग, यक्त दोऴ, लीमा दोऴ, भूछाा, नऩुॊवकता इत्माहद अनेक प्रकाय के दोऴो को दूय कयने भें अत्मन्त राबकायी शैं। अथाात मश मॊि ऩौरुऴ को ऩुटट कयता शैं। श्री शनुभान मॊि व्मत्क्त को वॊकट, लाद- वललाद, बूत-प्रेत, द्मूत फक्रमा, वलऴबम, ोय बम, याज्म बम, भायण, वम्भोशन स्तॊबन इत्माहद वे वॊकटो वे यषा कयता शैं औय सववद्ध प्रदान कयने भें वषभ शैं। श्री शनुभान मॊि के वलऴम भें अधधक जानकायी के सरमे गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें। भूल्म Rs- 325 से 12700 तक >> Shop Online | Order Now
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    71 2019 ऩौयाणणक कारभें ऩॊ ाॊग गणना कै वे शोती थी?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम 12 1 4 14 13 – ब द्वा द्वा 600 400 1,400 1830 62 1860 67 :      ब 421 427 द्वा
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    72 2019 : द्वा ब : 520 560 961 1036 1420 1530- - ब ब , ब - 8000 500 4 4 11 3 10 4 1 ब ब ब 1 1 60 ; 1 24 ; 1 24 60 2 1 2 1 ब ब ब ब 23 1
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    73 2019 50 2 365o 15 o 31 o 31 o 24 o 8 34 37 8 27 ब ब ब 6 ब 12 13 ब 12 ब ब ब 1 ब  17,28,000  द्वा 12,96,000  8 64,000  4,32,000  43,20,000  1000 4,32,00,00,000 ब 17 3102 o o ब द्य : ब द्वा ब ब - ब द्य ब 360 360 720 शभायें मशाॊ वबी प्रकाय की भॊि सवद्ध ऩायद प्रततभाएॊ, सळलसरॊग, वऩयासभड, भारा एलॊ गुहटका ळुद्ध ऩायद भें उऩरब्ध शैं। त्रफना भॊि सवद्ध की शुई ऩायद प्रततभाएॊ थोक व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शैं। ज्मोततऴ, यत्न व्मलवाम, ऩूजा-ऩाठ इत्माहद षेि वे जुडे फॊधु/फशन के सरमे शभायें वलळेऴ मॊि, कल , यत्न, रुद्राष ल अन्म दुरब वाभग्रीमों ऩय वलळेऴ वुत्रफधाएॊ उऩरब्ध शैं। अधधक जानकायी शेतु वॊऩका कयें। GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 | Visit Us: www.gurutvakaryalay.com
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    74 2019 लैहदक ऩॊाॊग का इततशाव?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम ब - - ब : ब ब 5 000 द्वा ब - 30 360 , द्वा - :- , , , , : - 12 366 12
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    75 2019 1 200 1400 ब ब ‘’ ब ब ब ब ‘ ‘ ’, ‘ ’ ‘ ’, ‘ ’ 1952 ब द्य ब ‘ ’ 365 258756 0 258756 01656 500 23 2 ब ‘ ’ 21 ब 22 ब 13 14 ‘ ’ 365 25 1582 - 10 ब 5 ब 15 ब 1954 18 ‘ ’ 1955
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    76 2019 79 1879 22 1957 22 1957 365 366 78 4 100 400 12: 31 30 31 30 22 ब 21 1400 23 21 वलासववद्धदामक भुहद्रका इव भुहद्रका भें भूॊगे को ळुब भुशूता भें त्रिधातु (वुलणा+यजत+ताॊफें) भें जडला कय उवे ळास्िोक्त वलधध- वलधान वे वलसळटट तेजस्ली भॊिो द्वारा वलासववद्धदामक फनाने शेतु प्राण-प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म मुक्त फकमा जाता शैं। इव भुहद्रका को फकवी बी लगा के व्मत्क्त शाथ की फकवी बी उॊगरी भें धायण कय वकते शैं। मशॊ भुहद्रका कबी फकवी बी त्स्थती भें अऩवलि नशीॊ शोती। इवसरए कबी भुहद्रका को उतायने की आलश्मक्ता नशीॊ शैं। इवे धायण कयने वे व्मत्क्त की वभस्माओॊ का वभाधान शोने रगता शैं। धायणकताा को जीलन भें वपरता प्रात्प्त एलॊ उन्नतत के नमे भागा प्रवस्त शोते यशते शैं औय जीलन भें वबी प्रकाय की सववद्धमाॊ बी ळीध्र प्राप्त शोती शैं। भूल्म भार- 6400/- >> Shop Online | Order Now (नोट: इव भुहद्रका को धायण कयने वे भॊगर ग्रश का कोई फुया प्रबाल वाधक ऩय नशीॊ शोता शैं।) सवालसविदामक भुहरका के ववषम भें अधधक जानकायी के लरमे हेतु सम्ऩका कयें। GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com
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    77 2019 कै रेंडयल ऩॊ ाॊग भें क्मा अॊतय शैं?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम ( ) , , ब , 100 400 ब 365.2425 365.2422 ब ब 3000 ब 1 - - 365 2563 0 0142 ब 100 1 42 100 - (Ecliptic) 23 4 ब ब (Ecliptic) ब 50 3 360 360 50 23 285 ब 24 ब ब
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    79 2019 ज्मोततऴ केअनुळाय ळुब-अळुब भुशूता का प्रबाल?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम आज की अत्माधुतनक लैसातनक ऩद्धतत के अनुवाय ब्रह्भाणड भें वभम अथाात कार ल अनॊत आकाळ के अततरयक्त वभस्त लस्तुएॊ भमाादा मुक्त शैं। इव सरए वभम का न शी कोई प्रायॊब शै न शी कोई अॊत शै। अन्म ळब्दों भें वभझे तो शभ एवे कोई बी वलळेऴ षण को ध त्न्शत नशीॊ कश वकते फक कफ वभम अत्स्तत्ल भें आमा मा वभम इव षण वे आयॊब शोता शै। इवी तयश शभ मश बी नशीॊ कश वकते शै फक, इव षण के फाद वभम का अत्स्तत्ल वभाप्त शो जाएगा?, मा वभम मशाॉ रुक जाएगा। क्मोफक अनॊत आकाळ की वभम की तयश कोई भमाादा नशीॊ शै, इव सरए तो इवका कशीॊ बी प्रायॊब मा अॊत नशीॊ शोता शैं। आधुतनक भानल ने इन दोनों तत्लों को शभेळा वभझने का ल अऩने अनुवाय इनभें वल यण कयने का प्रमाव फकमा शै, रेफकन उवे बी तक कोई वपरता प्राप्त नशीॊ शुई शै। मे दोनों तत्ल वलसबन्न रुऩोंभें अऩना भशातम्म भनुटम ऩय जभाते आए शै। मश दोनों तत्ल भानल जीलन को अत्मॊत शी भशत्लऩूण्ाा तयीके वे भानुटम को प्रबावलत कयते शै। प्रा ीन ऋऴी-भुतनमों को इन दोनों तत्लों का बरी बाॊतत फोध था। इव सरए उन्शोंने अऩने आत्भीम एलॊ भनोफरव वे वाभ्मा, ध त्त की एकाग्रता ल के त्न्द्रत ध्मान वे, ऩूण्ाा ैतन्म ल अद्धा ैतन्म ळत्क्त ल फर वे एलॊ उच् कोहट के सान ल अऩनी हदव्म सान षु वे इन तत्लों को वभझ सरमा था जो फक आज फक अत्माधुतनक तकनीक वे कोवों दूय शैं। उन्शोंने देखा ल जाना कै वे वभम ल अनॊत ब्रह्भाॊड फक ळत्क्तमाॊ शभें प्रबावलत कयती शै, कै वे नषिा ल ग्रशों का भेर शभाये जीलन को भशत्त्लऩूण्ाा हदळा ल ऩरयलतान देता शै। उन्शोंने वफवे भशत्त्लऩूण्ाा फात मश वभझी फक भनुटम आकाळीम वऩॊडों के वशमोग वे फकतने आश् माजनक रुऩ वे अऩने भशत्लऩूणा कामों भें वपरता प्रात्प्त के सरए एलॊ जीलन क्रभ को अथाात अऩने बवलटम को उज्जलर कय वकता शैं। एक ळुब भुशूता भें प्रायॊब फकमा गमा कोबी कामा भनुश्म को ळीघ्र शी जीलन भें वबी प्रकाय वुख को प्राप्त कय अनेको उऩरत्ब्धमाॊ हदराने भें वभथा शोता शैं। भुशूता शभाये वल नो या खोज की गई वलााधधक भशत्त्लऩूण्ाा ऩरयकल्ऩना शै। भुशूता का अथा शै फकवी बी कामा को कयने के सरए वफवे वलााधधक उत्तभ वभम मा ळुब वभम ल ततधथ का मन कयना। कामा ऩूण्ाात् परदामक शो इवके सरए वभस्त ग्रशों ल अन्म ज्मोततऴ तत्लों का वूक्ष्भ वलश्रेऴण फकमा जाता शै फक ले दुटप्रबालों को वलपर कय देते शै। ले भनुटम की जन्भ कु ण्डरी की वभस्त फाधाओॊ को दूय कयने भें ल दुमोगों को शटाने भें वशामक शोते शैं। भुशूता भनुटम के सरए ग्रश, नषि एलॊ मोग का ऎवा अनूठा वॊगभ शै फक लश कामा कयने लारे भनुटम को ऩूण्ाात् वपरता की ओय उन्भुख कय देता शै। इव सरए वल नो का भत शैं की भनुटम जफ बी अऩने जीलन भें ऎवा भशत्लऩूणा कामा कयने जा यशा शों, त्जवभें उवका अधधक वभम ल ळत्क्त प्रमोग भें शुला शो अथला इव कामा का भनुटम के जीलन ऩय कापी वभम तक प्रबाल यशने लारा शो, तफ उवे मश कामा ळुब भुशूता भें शी कयना ाहशए। त्जववे मश कामा अतत ळीघ्र परदामक शोगा ल लशॉ अधधक वुखभमी ल वॊतुटट जीलन व्मतीत कय वके । ज्मोततऴ वल भें कामा का प्रायॊब वभम, कु ण्डरी ल उवकी गणना कयके फकमा जाता शै। इव सरए फकवी बी ळुबकामा कयने के सरए उवके प्रायॊब कयने का वभम अथाात भुशूता अतत भशत्लऩूण्ाा शोता शै। भनुटम का बवलटम एलॊ जीलन की भशत्लऩूणा घटनाएॉ इव फात ऩय तनबाय कयती शैं फक उवका जन्भ फकव वभम शुआ था। रेफकन भनुटम फक वलडम्फना तो मश
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    80 2019 शै फकभनुटम का स्लमॊ के जन्भ वभम ऩय कोई तनमॊिण नशीॊ शै। रेफकन जीलन के अन्म फक्रमा-कराऩों ऩय उवका ऩूण्ाा तनमॊियण शै। इव सरए लश कामा कयने का वभम स्लमॊ वुतनत्श् त कय वकता शै। मशी भुशूता की ऩरयबाऴा शै। महद कामा प्रायॊब का वभम ळुब शैं तो कामापर तनत्श् त रुऩ वे परदामक एलॊ इत्च्छत शोगा। इव सरए तो कशाॉ जाता शैं की ळुब प्रायॊब अथाात आधा कामा स्लत् ऩूण्ाा शोना। ळुब मोग भुशूता अच्छे ल फुये दोनों मोगों का सभश्रण शै। कोई बी भुशूता अऩने आऩ भें ऩूणा रुऩ वे ळुब नशीॊ शोता शै, त्जव ऩय कोई बी फुया प्रबाल न शो। रेफकन ग्रशों के वलळेऴ मोगाहद के ळुबत्ल का वूक्ष्भ अध्ममन कयके कु छ मोग ऎवे बी शोते शैं जो फक फकवी दोऴ वलळेऴों को शटाने लारे मोगों शोते शैं, जो शजायों फुये प्रबाल शटा देते शै। इव तयश वे, ऩॊ ाॊग तत्त्लों के ळुबत्ल के अततरयक्त बी ले वभस्त घटक फक अलश्म जाॉ कयनी ाहशए, जो भुशूता ऩय ळुब प्रबाल डारते शैं। अळुब मोग जैवा की शभने फतामा की अळुब तत्त्ल बी शभेळा शी भौजूद शोते शैं। आलश्मकता शै फकवी एवी मुत्क्त की जो अळुब घटकों को अधधक वे अधधक कभ कय वके ए अधधक अळुब घटकों को शटा वके तथा उऩत्स्थत अळुब घटकों को प्रबालशीन कय वके । अत् अळुब ल दोऴऩूणा वॊमोजन को देख शी फकवी भुशूता का मन कयना ाहशए, इव प्रकाय वबी ऩरयत्स्थततमों का ऩूणा अध्ममन कयना आलश्मक शोता शै। *** ऩतत-ऩत्नी भें करश तनलायण शेतु महद ऩरयलायों भें वुख-वुवलधा के वभस्त वाधान शोते शुए बी छोटी-छोटी फातो भें ऩतत-ऩत्नी के त्रफ भे करश शोता यशता शैं, तो घय के त्जतने वदस्म शो उन वफके नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्वारा ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रततत्टठत ऩूणा ैतन्म मुक्त लळीकयण कल एलॊ गृश करश नाळक डडब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भें त्रफना फकवी ऩूजा, वलधध-वलधान वे आऩ वलळेऴ राब प्राप्त कय वकते शैं। महद आऩ भॊि सवद्ध ऩतत लळीकयण मा ऩत्नी लळीकयण एलॊ गृश करश नाळक डडब्फी फनलाना ाशते शैं, तो वॊऩका आऩ कय वकते शैं। 100 वे अधधक जैन मॊि शभाये मशाॊ जैन धभा के वबी प्रभुख, दुराब एलॊ ळीघ्र प्रबालळारी मॊि ताम्र ऩि, सवरलय ( ाॊदी) ओय गोल्ड (वोने) भे उऩरब्ध शैं। शभाये मशाॊ वबी प्रकाय के मॊि कोऩय ताम्र ऩि, सवरलय ( ाॊदी) ओय गोल्ड (वोने) भे फनलाए जाते शै। इवके अराला आऩकी आलश्मकता अनुवाय आऩके द्वारा प्राप्त (ध ि, मॊि, डडज़ाईन) के अनुरुऩ मॊि बी फनलाए जाते शै. गुरुत्ल कामाारम द्वारा उऩरब्ध कयामे गमे वबी मॊि अखॊडडत एलॊ 22 गेज ळुद्ध कोऩय(ताम्र ऩि)- 99.99 ट ळुद्ध सवरलय ( ाॊदी) एलॊ 22 के येट गोल्ड (वोने) भे फनलाए जाते शै। मॊि के वलऴम भे अधधक जानकायी के सरमे शेतु वम्ऩका कयें। GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com
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    81 2019 बद्रा वलाय  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम एवी ऩौयाणणक भान्मता शैं की ऩुला कार भें देल दानल मुद्ध भें सळल ळॊकय के देश वे मश बद्रा उत्ऩन्न शुई शैं। अन्म भान्मता के अनुळाय बद्रा बगलान वूमा देल की ऩुिी औय ळतनदेल की फशन शै। ळतन की तयश शी इवका स्लबाल बी क्रू य भाना गमा शै। इव उग्र स्लबाल को तनमॊत्रित कयने के सरए शी बगलान ब्रह्भा ने उवे कारगणना अथाात ऩॊ ाग के एक प्रभुख अॊग कयण भें स्थाऩीत फकमा। बद्रा की उत्ऩत्त्त के वलऴम भें एवा भाना जाता शैं की दैत्मों को भायने के सरमे बद्रा गदाब (गधा) के भुख औय रॊफे ऩुछॉ वहशत औय तीन ऩैय मुक्त उत्ऩन्न शुई शै। सवॊश जैवी भुदे ऩय ढी शुई वात शाथ औय ळुटक ऩेटलारी भशाबमॊकय, वलकयार भुखी, कामा का नाळ कयने लारी, अत्ग्न, ज्लारा वहशत देलों या बेजी गई बद्रा ऩृ्ली ऩय उतयी शै। अत् ळुब कामों भें बद्रा त्मागना शी वलाश्रेटठ शै। बद्रा ऩॊ ाॊग के ऩाॊ अॊगों भें वे एक अॊग-'कयण' ऩय आधारयत शै मश एक अळुब मोग शै। बद्रा (वलत्टट कयण) भें अत्ग्न रगाना, फकवी को दण्ड देना इत्माहद वभस्त दुटट कभा तो फकमे जा वकते शैं फकॊ तु फकवी बी भाॊगसरक कामा के सरए बद्रा वलाथा त्माज्म शै। ऩौयाणणक कथा के अनुवाय बद्रा बगलान वूमा नायामण की कन्मा शै, बद्रा वूमा की ऩत्नी छामा वे उत्ऩन्न शै। बद्राका स्लरुऩ कारे लणा, रॊफे के ळ तथा फडे-फडे दाॊतों लारी तथा बमॊकय रूऩ लारी कन्मा शै। जन्भ रेते शी बद्रा मसों भें वलघ्न-फाधा ऩशुॊ ाने रगी औय उत्वलों तथा भॊगर-मािा आहद भें उऩद्रल कयने रगी तथा वॊऩूणा जगत को ऩीडा ऩशुॊ ाने रगी। उवके दुटट स्लबाल को देख वूमा को उवके वललाश की ध ॊता शोने रगी औय ले वो ने रगे फक इव स्लेच्छा ारयणी, दुटटा, कु रुऩा कन्मा का वललाश फकवके वाथ फकमा जाम। वूमा ने त्जव-त्जव देलता, अवुय, फकन्नय आहद वे बद्रा के वललाश का प्रस्ताल यखा, वबी ने उनके प्रस्ताल ठु कया हदमा। मशाॊ तक फक बद्रा ने वूमा देल या फनलामे गमे अऩने वललाश भण्डऩ, तोयण आहद नटट कय हदमा तथा वबी रोगों को औय बी अधधक कटट देने रगी। उवी वभम देल-दानल-भानल के दु्ख को देखकय ब्रह्भा जी वूमा के ऩाव आमे। वूमा वे अऩनी कन्मा को वन्भागा ऩय राने के सरए ब्रह्भा जी वे उध त ऩयाभळा देने को कशा। तफ ब्रह्भा जी ने वलत्टट को फुराकय कशा- 'बद्रे, फल, फारल, कौरल आहद कयणों के अॊत भें तुभ तनलाव कयो औय जो व्मत्क्त मािा, गृश प्रलेळ तथा अन्म भाॊगसरक कामा तुम्शाये वभम के दौयान कये, तो तुभ उन्शीॊ भें वलघ्न कयो, जो तुम्शाया आदय न कये, उनका कामा तुभ त्रफगाड देना। इव प्रकाय वलत्टट को उऩदेळ देकय ब्रह्भा जी अऩने रोग रे गमे। ब्रह्भाजी के फात वुनकय वलत्टट अऩने वभम भें देल-दानल-भानल वभस्त प्राणणमों को कटट देती शुई घूभने रगी। इव प्रकाय बद्रा की उत्ऩत्त्त शुई। बद्रा का दुवया नाभ वलटटी कयण शैं। कृ टणऩष की तृतीमा, दळभी औय ळूक्र ऩष की तुथॉ एकादळी के उत्तयाधा भें एलॊ कृ टणऩष की वप्तभी, तुदाळी, ळुक्रऩष की अटटभी, ऩुणणाभा के ऩुलााधा भें बद्रा यशती शै। त्जव बद्रा के वभम ॉद्रभा भेऴ, लृऴ, सभथुन, लृत्श् क यासळ भें त्स्थत शो तो बद्रा तनलाव स्लगा भें यशता शै। ॊद्रभा कन्मा,तुरा, धनु, भकय यासळ भें शो तो बद्रा ऩातार भें लाव कयती शैं औय कका , सवॊश, कुॊ ब, भीन याळी का ॊद्रभा शो तो बद्रा का बुरोक ऩय तनलाव यशता शै। ळास्िों के अनुवाय बुरोक की बद्रा शी अळुब भानी जाती शै। ततथी के ऩुलााधा भें (कृ टणऩष की वप्तभी एलॊ तुदाळी औय ळुक्रऩष की अटटभी ऩूणणाभा ततथी ) हदन की बद्रा कशराती शै। ततथी के उत्तयाधा की (कृ टणऩष की तृतीमा एलॊ दळभी औय ळुक्रऩष की तुथॉ एलॊ एकादळी) की बद्रा यािी की बद्रा कशराती शै। महद हदन की बद्रा यािी के वभम औय यािी की बद्रा
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    82 2019 हदन केवभम आ जामे तो उवे वल नो ने ळुब भाना शै। अतत आलश्मक कामा आ जाए तो बद्रा की प्रायम्ब की 5 घटी जो बद्रा का भुख शोती शै, अलश्म शी त्मागनी ाहशए। श्रेटठ तो मशी शै की बद्रा को त्माग कयके शी भाॊगरीक कामा वम्ऩन्न कयने ाहशए। बद्रा पर बद्रा का भुख औय ऩूॊछ: बद्रा ऩाॊ घडी भुख भें, दो घडी कण्ठ भें, ग्मायश घडी रृदम भें, ाय घडी ऩुच्छ भें त्स्थत यशती शै। ळास्िोक्त भत वे  जफ बद्रा भुख भें यशती शै तो कामा का नाळ शोता शैं।  जफ बद्रा कण्ठ भें यशती शै तो धन का नाळ शोता शैं।  जफ बद्रा रृदम भें यशती शै तो प्राण का नाळ शोता शैं।  जफ बद्रा नासब भें यशती शै तो करश शोता शैं।  जफ बद्रा कहट भें यशती शै तो अथानाळ शोता शैं।  रेफकन जफ बद्रा ऩुच्छ भें शोती शैं, तो वलजम की प्राप्त एलॊ कामा सवद्ध शोते शै। ज्मोततऴ के अनुळाय वलत्टट कयण को ाय बागों भें वलबात्जत कयके बद्रा भुख औय ऩूॊछ वयरता वे सात फकमा जा वकता शैं। बद्राकी प्रकृ तत अतत दुटट शै इवसरए भाॊगसरक कामों भें बद्राकार का अलश्म शी त्माग कयना ाहशए। बद्राकार भें वललाश, भुॊडन, गृशप्रलेळ, मसोऩवलत, यषाफॊधन मा कोई बी नमा काभ ळुरू कयना लत्जात भाना गमा शै। रेफकन बद्राकार भें तॊि कामा, ऑऩयेळन कयना, भुकदभा कयना, याजनैततक ुनाल, फकवी लस्तु का कटना, मस कयना, लाशन खयीदना आहद कभा ळुब भाने गए शैं। वलद्वानो के भत वे:  वोभलाय औय ळुक्रलाय की बद्रा को कल्माणी,  ळतनलाय की बद्रा को लृत्श् की,  गुरुलाय की बद्रा को ऩुण्मैलती,  यवललाय, फुधलाय औय भॊगरलाय की बद्रा को बहद्रका भाना शैं।  वलळेऴ कय ळतनलाय की बद्रा अळुब भानी जाती शैं। बद्रा व्रत बद्रा के अळुब प्रबाल वे यषा के सरए व्रत आहद के वलधान फताए गए शैं, फकॊ तु आवान उऩामों शैं, वुफश बद्रा के दळ नाभ अथाात 12 नाभ भॊि का स्भयण कामासववद्ध के वाथ वलघ्न, योग, बम को दूय कय ग्रशदोऴों को बी ळाॊत कयने लारा भाना गमा शै। बरा मोग भें कामा लसवि के लरए प्रमोग ककए जाने वारा भॊर: धन्मा दधधभुखी बद्रा भशाभायी खयानना। कारयात्रिभाशारुद्रा वलत्टटश् कु रऩुत्रिका॥ बैयली भशाकारी अवुयाणाॊ षमॊकयी। द्वादळैल तु नाभातन प्रातरुत्थाम म: ऩठेत्॥ न व्माधधबालेत् तस्म योगी योगात्प्रभुच्मते। ग्रह्म: वलेनुकू रा: स्मुना वलघ्राहद जामते॥ ळास्िोक्त भत शैं, की जो व्मत्क्त प्रात् बद्रा के इन फायश नाभों का स्भयण कयता शै उवे फकवी बी व्माधध का बम नशीॊ शोता औय उवके वबी ग्रश अनुकू र शो जाते शैं। उवके कामों भें कोई वलघ्न नशीॊ शोता। मुद्ध भें लश वलजम प्राप्त कयता शै, जो वलधध ऩूलाक वलत्टट का ऩूजन कयता शै, तन्वॊदेश उवके वबी कामा सवद्ध शो जाते शैं। बद्रा के व्रत की ळास्िोक्त वलधध : त्जव हदन बद्रा शो, उव हदन व्रत-उऩलाव कयना ाहशए। महद यात्रि के वभम बद्रा शो तो दो हदन तक उऩलाव कयना ाहशए। स्िी अथला ऩुरुऴ दोनो के सरए व्रत अधधक उऩमुक्त शोता शैं। व्रत के हदन व्रती को वलोऴधध मुक्त जर वे स्नान कयना ाहशए मा नदी ऩय जाकय वलधध ऩूलाक स्नान कयना ाहशए। देलता तथा वऩतयों का तऩाण एलॊ ऩूजन कय कु ळा की बद्रा की भूतता फनामें औय गॊध, ऩुटऩ, धूऩ, दीऩ, नैलेद्य आहद वे उवकी ऩूजन कयना
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    83 2019 ाहशए। बद्राके फायश नाभों वे 108 फाय शलन कयके ब्राह्भण को बोजन कयलाना ाहशए स्लमॊ बी ततर सभधश्रत बोजन ग्रशण कयना ाहशए। ऩूजन की सभाप्ती ऩय इस भन्र से प्राथाना कयनी चाहहए। छामा वूमावुते देवल वलत्टटरयटटाथा दातमनी। ऩूत्जतासव मथाळक्त्मा बद्रे बद्रप्रदा बल॥ इव प्रकाय विश बद्राव्रत कयने के ऩश् मात अॊत भें उ ऩन कयना ाहशए। रोशे की ऩीठ ऩय बद्रा की भूतता स्थावऩत कयनी ाहशए, कारा लस्ि अवऩात कयके गन्ध, ऩुटऩ आहद वे वलधधलत ऩूजन कय प्राथाना कयनी ाहशए। रोशा, फैर, ततर, फछडा वहशत कारी गाम, कारा कॊ फर औय मथाळत्क्त दक्षषणा के वाथ लश भूतता ब्राह्भण को दान कयनी ाहशए मा उवका वलवजान कय दें। इव प्रकाय जो बी व्मत्क्त बद्रा व्रत एलॊ तदॊतय वलधध ऩूलाक व्रत का उ ऩन कयता शै उवके फकवी बी कामा भें वलघ्न नशीॊ ऩडता तथा उवे प्रेत, ग्रश, बूत, वऩळा , डाफकनी, ळाफकनी, मष, गॊधला, याषव आहद आवुयी ळत्क्त वे फकवी प्रकाय का कटट नशीॊ शो वकता। भॊि सवद्ध लाशन दुघाटना नाळक भारुतत मॊि ऩौयाणणक ग्रॊथो भें उल्रेख शैं की भशाबायत के मुद्ध के वभम अजुान के यथ के अग्रबाग ऩय भारुतत ध्लज एलॊ भारुतत मन्ि रगा शुआ था। इवी मॊि के प्रबाल के कायण वॊऩूणा मुद्ध के दौयान शज़ायों-राखों प्रकाय के आग्नेम अस्ि-ळस्िों का प्रशाय शोने के फाद बी अजुान का यथ जया बी षततग्रस्त नशीॊ शुआ। बगलान श्री कृ टण भारुतत मॊि के इव अद्भुत यशस्म को जानते थे फक त्जव यथ मा लाशन की यषा स्लमॊ श्री भारुतत नॊदन कयते शों, लश दुघाटनाग्रस्त कै वे शो वकता शैं। लश यथ मा लाशन तो लामुलेग वे, तनफााधधत रुऩ वे अऩने रक्ष्म ऩय वलजम ऩतका रशयाता शुआ ऩशुॊ ेगा। इवी सरमे श्री कृ टण नें अजुान के यथ ऩय श्री भारुतत मॊि को अॊफकत कयलामा था। त्जन रोगों के स्कू टय, काय, फव, ट्रक इत्माहद लाशन फाय-फाय दुघाटना ग्रस्त शो यशे शो!, अनालश्मक लाशन को नुषान शो यशा शों! उन्शें शानी एलॊ दुघाटना वे यषा के उद्देश्म वे अऩने लाशन ऩय भॊि सवद्ध श्री भारुतत मॊि अलश्म रगाना ाहशए। जो रोग ट्रान्स्ऩोहटिंग (ऩरयलशन) के व्मलवाम वे जुडे शैं उनको श्रीभारुतत मॊि को अऩने लाशन भें अलश्म स्थावऩत कयना ाहशए, क्मोफक, इवी व्मलवाम वे जुडे वैकडों रोगों का अनुबल यशा शैं की श्री भारुतत मॊि को स्थावऩत कयने वे उनके लाशन अधधक हदन तक अनालश्मक ख ो वे एलॊ दुघाटनाओॊ वे वुयक्षषत यशे शैं। शभाया स्लमॊका एलॊ अन्म वलद्वानो का अनुबल यशा शैं, की त्जन रोगों ने श्री भारुतत मॊि अऩने लाशन ऩय रगामा शैं, उन रोगों के लाशन फडी वे फडी दुघाटनाओॊ वे वुयक्षषत यशते शैं। उनके लाशनो को कोई वलळेऴ नुक्ळान इत्माहद नशीॊ शोता शैं औय नाशीॊ अनालश्मक रुऩ वे उवभें खयाफी आतत शैं। वास्तु प्रमोग भें भारुतत मॊर: मश भारुतत नॊदन श्री शनुभान जी का मॊि शै। महद कोई जभीन त्रफक नशीॊ यशी शो, मा उव ऩय कोई लाद-वललाद शो, तो इच्छा के अनुरूऩ लशॉ जभीन उध त भूल्म ऩय त्रफक जामे इव सरमे इव भारुतत मॊि का प्रमोग फकमा जा वकता शैं। इव भारुतत मॊि के प्रमोग वे जभीन ळीघ्र त्रफक जाएगी मा वललादभुक्त शो जाएगी। इव सरमे मश मॊि दोशयी ळत्क्त वे मुक्त शै। भारुतत मॊि के वलऴम भें अधधक जानकायी के सरमे गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें। भूल्म Rs- 325 से 12700 तक GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, >> Shop Online | Order Now
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    84 2019 हदळाळूर वलाय  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम हदळाळूर के वलऴम भें ळास्िोक्त भत: ळनौ न्द्रे त्मजेत्ऩूलाा, दक्षषणाॊ हदळाॊ गुयौ। वूमे ळुक्रे ऩत्श् भाम् , फुधे बौभे तथोत्तयभ्॥ अथाात: ळतनलाय औय न्द्रलाय अथाात वोभलाय को ऩूला हदळा को हदळाळूर शोती शैं। फृशस्ऩततलाय (गुरुलाय) को दक्षषण हदळा भें, इतलाय (यवललाय) औय ळुक्रलाय को ऩत्श् भ भें औय भॊगर तथा फुधलाय को उत्तय हदळा भें ळूर शोती शैं। इव सरमे त्जव लाय को त्जव हदळा भें हदळाळूर शो उव हदळा भें मािा नशीॊ कयनी ाहशमे। अन्म भत वे: वोभ ळतन य ऩूयफ ना ारू। भॊगर फुध उत्तयहदसवकार॥ यवल ळुक्र जो ऩत्श् भ जाम। शातन शोम ऩथ वुख नहशॊ ऩाम॥ गुयौ दत्क्खन कये ऩमाना, फपय नशीॊ वभझो ताको आना॥ अथाात: वोभलाय एलॊ ळतनलाय को ऩूयफ हदळा भें तथा भॊगर एलॊ फुधलाय को उत्तय हदळा भें मािा नशीॊ कयनी ाहशमे। यवललाय एलॊ ळुक्रलाय को ऩत्श् भ हदळा भें मािा कयना वलादा शातनकायक शोता शै। गुरूलाय के हदन तो दक्षषण हदळा भें मािा कयना अळुब शै। मे हदळाळुर कशराते शै। ळास्िोक्त भान्मता के अनुळाय हदळाळूर लारी हदळा भें मािा कयने वे कामा सवद्धी नशीॊ शोता| हदळाळूर ऩरयशाय के सरए  यवललाय को घी ऩीकय।  वोभलाय को दूध ऩीकय।  भॊगरलाय को गुड खाकय।  फुधलाय को ततर खाकय।  गुरुलाय को दशी खाकय।  ळुक्रलाय को जौ खाकय।  ळतनलाय को उडद खाकय मािा कयने वे हदळाळूर का दोऴ ऩरयशाय भाना जाता शैं। हदळाळूर ऩरयशाय के अन्म उऩाम  हदळाळूर ऩरयशाय के सरए  यवललाय को ऩान का दान।  वोभलाय को ॊदन का दान।  भॊगरलाय को छाछ का दान।  फुधलाय को ऩुटऩ का दान।  गुयलाय को दशी का दान।  ळुक्रलाय को धृत (घी) का दान।  ळतनलाय को कारे ततर का दान कयने वे हदळाळूर ऩरयशाय शो जाता शैं। *** Natural 2 Mukhi Rudraksha 1 Kg Seller Pack or 100 Pcs Seller Pack Size : Assorted 20 mm to 35 mm and above GURUTVA KARYALAY Call Us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 or Shop Online @ www.gurutvakaryalay.com
  • 85.
    85 2019 हदळाळूर भशत्लऩूणामा कताव्म भशत्लऩूणा शै?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम एक फाय एक याजा के ऊऩय उवके प्रततद्लॊदी याजा ने शभरा कय हदमा। याजा ने याज ज्मोततऴी को फुरामा औय उनवे ऩूछा फक इव लक्त शभें क्मा कयना ाहशए। ज्मोततऴी ने उत्तय हदमा भशायाज त्जव हदळा वे शभरा शुआ शे लश हदळा ऩूला शैं औय आज उव हदळा भें हदळाळूर शे, आज शभें उव हदळा भें नशीॊ जाना ाहशमे। ज्मोततऴी की फात को व़जीय फी भें काट कय फयाफय कश यशा शे फक भशायाज पौयन शभरा कयो। याजा ने कशा नशीॊ शभ को ज्मोततऴी की फात भननी शै। ज्मोततळी ने कशा शभ को इव वभम उरटी हदळा भें अथाात ऩत्श् भ हदळा भें जाना ाहशए। औय लो ऩत्श् भ की औय र हदए। यास्ते भें उनका व़जीय फाय-फाय कश यशा था भशायज शभरा कयो। रेफकन व़जीय की फात को याजा ने नशीॊ वुना। यावते भें उन्शें एक फकवान सभरा जो ऩूला हदळा की औय जा यश था। ज्मोततऴी ने उवे योका औय कशाॉ आज इधय हदळाळूर शै इधय भत जाओ । फकवान फोरा ऩॊडडतजी इव हदळा भें तो भैंने जफ शोळ वम्बारा शैं अऩने खेत ऩय जाता यशा शूॉ औय भेये वऩताजी वे रेकय दादा ऩयदादा बी जाते यशे शैं। ज्मोततऴी ने कशा अच्छा अऩना शाथ हदखा। फकवान ने ज्मोततऴी को अऩना शाथ उरटा हदखामा ज्मोततऴी ने कशा वीधा कय के हदखाओ। फकवान फोरा शभ सबखायी नशी शैं जो शाथ पे राए। शभाये षेि भे वाषात सळलजी का लाव शे शभ को फकवी ध ज का डय नशीॊ शैं। लश फकवान जम भशाकार फोर कय रा गमा। फकवान की फात वे याजा को बी अकर आइ औय उवने भॊिी वे कशा लाऩव रो औय शभरा फोरो, याजा ने बी जम भशकार का नाया रगा कय शभरा फोर हदमा औय जीत गमा। नोट: हदळाळूर भाि वे अऩने कताव्म वे ऩीछे शटना कोयी भूखात शोती शैं। इव सरए आकत्स्भक प्रवॊगो एलॊ घटनाओॊ वे तनऩटने के सरए हदळाळूर का वल ाय त्माग कय अऩनी फुवद्ध एलॊ वललेक वे कामा कयना ाहशए। Mantra Siddha Parad Shivling + Free Rudraksha Mala Size: 21, 27, 46, 55, 72, 100 Gram above GURUTVA KARYALAY Call Us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 or Shop Online @ www.gurutvakaryalay.com
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    86 2019 याभ नाभकी भहशभा  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम : ' ' ब -ब - .... ब ब द्य ब , - ब - - ! ब , ब - ? , ब ? ? ब ? ? ! ब ? , ! , - ? ब , ब ब , ? ! , ब ब ? " ! ( ) ( ) - द्य ब
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    87 2019 ब ब? , ! ब ब ? ब - - - ब , ! ब ? ब ब ! ब ब ? , ब , ब ! ब ब - - ब ब द्य- ब ब ब , , , ब , ब ! , - ? ! ब ब ! ब ? ब ब , ब ब ब ब ? ब ? ? ! ब ब - , ब
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    88 2019 ब ब ब 500 ब 500 ,ब ब ब ब ब , ? ब , ! ब ? ब ब ? ब ब ब ब ब - ब ब ब ब ब ब ! ! ब ! ब ब - - - - :
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    89 2019 क्मा श्राऩके कायण सभरा याभ अलताय?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम एक फाय सळल जी कै राव ऩलात ऩय एक वलळार फयगद के लृष के नी े फाघ भा त्रफछाकय आनन्द ऩूलाक फैठे थे। उध त अलवय जानकय भाता ऩालाती बी लशाॉ आकय उनके ऩाव फैठ गईं। ऩालाती जी ने सळल जी वे कशा, शे नाथ! ऩूला जन्भ भें भुझे एवा भोश शो गमा था औय भैंने श्री याभ की ऩयीषा री थी। भेया लश भोश अफ वभाप्त शो ुका शै फकन्तु भैं अबी बी भ्रसभत शूॉ फक महद श्री याभ याजऩुि शैं तो ब्रह्भ कै वे शो वकते शैं? आऩ कृ ऩा कयके भुझे श्री याभ की कथा वुनाएॉ औय भेये भ्रभ को दूय कयें। ऩालाती जी के प्रश्न वे प्रवन्न शोकय सळल जी फोरे, शे ऩालाती! श्री याभ न्द्र जी की कथा काभधेनु के वभान वबी वुखों को प्रदान कयने लारी शैं। अत् भैं उव कथा को, त्जवे काकबुळुत्ण्ड जी ने गरुड को वुनामा था, उव कथा को भैं तुम्शें वुनाता शूॉ। शे वुभुणख! जफ-जफ धभा का ह्ाव शोता शै औय देलताओॊ, ब्राह्भणों ऩय अत्मा ाय कयने लारे दुटट ल नी असबभानी याषवों की लृवद्ध शो जाती शै तफ-तफ कृ ऩा के वागय बगलान श्री वलटणु बाॉतत-बाॉतत के अलताय धायण कय वज्जनों की ऩीडा को शयते शैं। ले अवुयों को भाय कय देलताओॊ की वत्ता को स्थावऩत कयते शैं। बगलान श्री वलटणु का श्री याभ न्द्र जी के रुऩ भें अलताय रेने का बी मशी कायण शैं। उनकी कथा अत्मन्त वलध ि शै। भैं उनके जन्भों की कशानी तुम्शें वुनाता शूॉ। श्री शरय के जम औय वलजम नाभक दो वप्रम यऩार शैं। एक फाय वनकाहद ऋवऴमों ने उन्शें भृत्मुरोक भें रे जाने के सरमे ळाऩ दे हदमा। ळाऩलळ उन्शें भृत्मुरोक भें तीन फाय याषव के रूऩ भें जन्भ रेना ऩडा। ऩशरी फाय उनका जन्भ हशयण्मकश्मऩु औय हशयण्माष के रूऩ भें शुआ। उन दोनों के अत्मा ाय फशुत अधधक फढ़ जाने के कायण श्री शरय ने लयाश का ळयीय धायण कयके हशयण्माष का लध फकमा औय नयसवॊश रूऩ धायण कय के हशयण्मकश्मऩु को भाया। उन्शीॊ दोनों ने यालण औय कु म्बकणा के रूऩ भें फपय वे जन्भ सरमा औय अत्मन्त ऩयाक्रभी याषव फने। तफ कश्मऩ भुतन औय अहदतत, जो के दळयथ औय कौळल्मा के रूऩ भें अलतरयत शुए थे, का ऩुि फनकय श्री शरय ने उनका लध फकमा। एक कल्ऩ भें जरन्धय नाभक दैत्म ने वभस्त देलतागण को ऩयास्त कय हदमा तफ सळल जी ने जरन्धय वे मुद्ध फकमा। उव दैत्म की स्िी ऩयभ ऩततव्रता थी अत् सळल जी बी उव दैत्म वे नशीॊ जीत वके । तफ श्री वलटणु ने छरऩूलाक उव स्िी का व्रत बॊग कय देलताओॊ का कामा फकमा। तफ उव स्िी ने श्री वलटणु को भनुटम देश धायण कयने का ळाऩ हदमा था। श्री वलटणु के श्री याभ के रूऩ भें अलतरयत शोने का एक कायण मश बी था। लशी जरन्धय दैत्म अगरे जन्भ भें यालण के रुऩ भें अलतरयत शुआ त्जवे श्री याभ ने मुद्ध भें भाय कय ऩयभऩद प्रदान फकमा। अन्म एक कथा के अनुवाय एक फाय नायद ने श्री वलटणु को भनुटमदेश धायण कयने का ळाऩ हदमा था त्जवके कायण श्री याभ का अलताय शुआ।” ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे तेजस्ली भॊिों द्वाया असबभॊत्रित धनलृवद्ध ऩाउडय को प्रतत फुधलाय के हदन अऩने कै ळ फोक्व, भनीऩवा आहद भें थोडा डारने वे तनयॊतय धन वॊ म शोता शैं। 1 Box Rs- 280 GURUTVA KARYALAY Call Us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 or Shop Online @ www.gurutvakaryalay.com
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    90 2019 धन्म तोमश रक्ष्भण शै?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम याभजी, वीताजी औय रक्ष्भणजी जॊगर भें एक लृष के नी े फैठे थे। उव लृष औय डारी ऩय एक रता छाई शुई थी। रता के नमी कोभर-कोभर कोंऩरें तनकर यशी थी औय कशीॊ-कशीॊ ऩय ताम्रलणा के ऩत्ते तनकर यशे थे। ऩुटऩ औय ऩत्तों वे रता छाई शुई थी त्जस्वे लृष की वुन्दय ळोबा फढा यशे थे। लृष फशुत शी वुशालना रग यशा था। उव लृष की ळोबा को देखकय बगलान श्रीयाभजी ने रक्ष्भण जी वे कशा, देखो रक्ष्भण ! मश रता अऩने वुन्दय-वुन्दय पर, वुगत्न्धत पू र औय शयी-शयी ऩत्त्तमों वे इव लृष की कै वी ळोबा फढा यशी शै ! जॊगर के अन्म वफ लृषों वे मश लृष फकतना वुन्दय हदख यशा शै ! इतना शी नशीॊ, इव लृष के कायण शी वाये जॊगर की ळोबा शो यशी शै। इव रता के कायण शी ऩळु-ऩषी इव लृष का आश्रम रेते शैं। धन्म शै मश रता ! बगलान श्रीयाभ के भुख वे रता की प्रळॊवा वुनकय वीताजी रक्ष्भण वे फोरी्देखो रक्ष्भण बैमा ! तुभने ख्मार फकमा फक नशीॊ ? देखो, इव रता का ऊऩय ढ़ जाना, पू र ऩत्तों वे छा जाना, तन्तुओॊ का पै र जाना, मे वफ लृष के आधश्रत शैं, लृष के कायण शी शैं। इव रता की ळोबा बी लृष के शी कायण शै। अत् भूर भें भहशभा तो लृष की शी शै। आधाय तो लृष शी शै। लृष के वशाये त्रफना रता स्लमॊ क्मा कय वकती शै ? कै वे छा वकती शै ? अफ फोरो रक्ष्भण बैमा ! तुम्शीॊ फताओ, भहशभा लृष की शी शुई न ? लृष का वशाया ऩाकय शी रता धन्म शुई न ? याभ जी ने कशा् क्मों रक्ष्भण ! मश भहशभा तो रता की शी शुई न ? रता को ऩाकय लृष शी धन्म शुआ न ? रक्ष्भण जी फोरे् शभें तो एक तीवयी शी फात वूझती शै। वीता जी ने ऩूछा् लश क्मा शै देलय जी ? रक्ष्भणजी फोरे् न लृष धन्म शै न रता धन्म शै। धन्म तो मश रक्ष्भण शै जो आऩ दोनों की छामा भें यशता शै। बैयल जी को बगलान सळल के द्वादळ स्लरूऩ के रुऩ भें ऩूजा जाता शैं। बैयलजी को तीन स्लरुऩ फटुक बैयल, भशाकार बैयल औय स्लणााकऴाण बैयल के रुऩ भें जाना जाता शैं। वलद्वानों ने स्लणााकऴाण-बैयल को धन-धान्म औय वम्ऩत्त्त के देलता भाना शै। धभाग्रॊथों भें उल्रेख सभरता शैं की आधथाक त्स्थती हदन-प्रततहदन खयाफ शोती जायशी शो, कजा का फोझ फढ़ता जा यशा शो, वभस्मा के वभाधान शेतु कोई यास्ता न हदखाई दे यशा शो, वबी प्रकाय के ऩूजा ऩाठ, भॊि, मॊि, तॊि, मस, शलन, वाधना आहद वे कोई वलळेऴ राब की प्रात्प्त न शो यशी शो, तफ स्लणााकऴाण बैयल जी का भॊि, मॊि, वाधना इत्माहद का आश्रम रेना ाहशए। जो व्मत्क्त स्लणााकऴाण बैयल की वाधना, भॊि जऩ आहद को कयने भें अवभथा शो लश रोग स्लणााकऴाण बैयल कल को धायण कय वलळेऴा राब प्राप्त कय वकते शैं। स्लणााकऴाण बैयल कल को धन प्रात्प्त के सरए अ ूक औय अत्मॊत प्रबालळारी भाना जाता शैं। स्लणााकऴाण बैयल कल धायण कताा की वबी प्रकाय की आधथाक वभस्माओॊ को वभाप्त कयने भें वभथा शैं। इवभें जया बी वॊदेश नशीॊ शैं। इव करमुग भें त्जव प्रकाय भृत्मु बम के तनलायण शेतु भशाभृत्मुॊजम कल अभोघ शै उवी प्रकाय आधथाक वभस्माओॊ के वभाधान शेतु स्लणााकऴाण बैयल कल अभोघ भाना गमा शैं। धासभाक भान्मताओॊ के अनुळाय ऐवा भाना जाता शैं की बैयलजी की ऩूजा-उऩावना श्रीगणेळ, वलटणु, ॊद्रभा, कु फेय आहद देलताओॊ ने बी फक थी, बैयल उऩावना के प्रबाल वे बगलान वलटणु रक्ष्भीऩतत फने थे, वलसबन्न अप्वयाओॊ को वौबाग्म सभरने का उल्रेख धभाग्रॊथो भें सभरता शैं। महश कायण शैं की स्लणााकऴाण बैयल कल आधथाक वभस्माओॊ के वभाधान शेतु अत्मॊत राबप्रद शैं। इव कल को धायण कयने वे वबी प्रकाय वे आधथाक राब की प्रात्प्त शोती शैं। Rs.4600
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    91 2019 जफ कफीयजीको सभरी याभ भॊि दीषा?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम वॊत कफीय फकवी ऩशु े शुए गुरु वे भॊिदीषा प्राप्त कयना ाशते थे। उव वभम काळी भें याभानॊद स्लाभी फडे उच् कोहट के भशाऩुरुऴ भाने जाते थे। कफीय जी ने उनके आश्रभ के भुख्म य ऩय आकय यऩार वे वलनती की् भुझे गुरुजी के दळान कया दो। उव वभम जात-ऩाॉत का फडा फोरफारा था। औय फपय काळी जैवी ऩालन नगयी भें ऩॊडडतों औय ऩॊडे रोगों का अधधक प्रबाल था। कफीयजी फकवके घय ऩैदा शुए थे – हशॊदू के मा भुवसरभ के ? कु छ ऩता नशीॊ था। कफीय जी एक जुराशे को ताराफ के फकनाये सभरे थे। उवने कफीय जी का ऩारन-ऩोऴण कयके उन्शें फडा फकमा था। जुराशे के घय फडे शुए तो जुराशे का धॊधा कयने रगे। रोग भानते थे फक कफीय जी भुवरभान की वॊतान शैं। यऩारों ने कफीयजी को आश्रभ भें नशीॊ जाने हदमा। कफीय जी ने वो ा फक अगय ऩशुॉ े शुए भशात्भा वे गुरुभॊि नशीॊ सभरा तो भनभानी वाधना वे शरय के दाव फन वकते शैं ऩय शरयभम नशीॊ फन वकते। कै वे बी कयके भुझे याभानॊद जी भशायाज वे शी भॊिदीषा रेनी शै। कफीयजी ने देखा फक स्लाभी याभानॊदजी शययोज वुफश 3-4 फजे खडाऊॉ ऩशन कय टऩ...टऩ आलाज कयते शुए गॊगा भें स्नान कयने जाते शैं। कफीय जी ने गॊगा के घाट ऩय उनके जाने के यास्ते भें वफ जगश फाड कय दी औय आने-जाने का एक शी भागा यखा। उव भागा भें वुफश के अॉधेये भें कफीय जी वो गमे। गुरु भशायाज आमे तो अॉधेये के कायण स्लाभी याभानॊदजी का कफीयजी ऩय ऩैय ऩड गमा। उनके भुख वे स्लत् उदगाय तनकर ऩडे् याभ..... याभ...! कफीयजी का तो काभ फन गमा। गुरुजी के दळान बी शो गमे, उनकी ऩादुकाओॊ का स्ऩळा तथा गुरुभुख वे याभ भॊि बी सभर गमा। गुरुदीषा के फाद अफ दीषा भें फाकी शी क्मा यशा? कफीय जी ना ते, गुनगुनाते घय लाऩव आमे। याभ नाभ की औय गुरुदेल के नाभ की यट रगा दी। अत्मॊत स्नेशऩूणा रृदम वे गुरुभॊि का जऩ कयते, गुरुनाभ का कीतान कयते शुए वाधना कयने रगे। हदनोंहदन कफीय जी भस्ती फढ़ने रगी। काळी के ऩॊडडतों ने देखा फक मलन का ऩुि कफीय याभ नाभ जऩता शैं, स्लाभी याभानॊद के नाभ का कीतान कयता शैं। उव मलन को याभ नाभ की दीषा फकवने दी? क्मों दी? उवने भॊि को भ्रटट कय हदमा ! ऩॊडडतों ने कफीय जी वे ऩूछा् तुभको याभनाभ की दीषा फकवने दी? कफीयजी फोरे, स्लाभी याभानॊदजी भशायाज के श्रीभुख वे सभरी। ऩॊडडतों ने फपय ऩूछा् कशाॉ दी दीषा?, कफीयजी फोरे, गॊगा के घाट ऩय। ऩॊडडत ऩशुॉ े याभानॊदजी के ऩाव् आऩने मलन को याभभॊि की दीषा देकय भॊि को भ्रटट कय हदमा, वम्प्रदाम को भ्रटट कय हदमा। गुरु भशायाज ! मश आऩने क्मा फकमा? गुरु भशायाज ने कशा् भैंने तो फकवी को दीषा नशीॊ दी। लश मलन जुराशा तो याभानॊद..... याभानॊद..... भेये गुरुदेल याभानॊद...की यट रगाकय ना ता शैं, आऩका नाभ फदनाभ कयता शैं। याभानॊदजी फोरे बाई ! भैंने तो उवको कु छ नशीॊ कशा। उवको फुरा कय ऩूछा जाम। ऩता र जामगा। काळी के ऩॊडडत इकट्ठे शो गमे। जुराशा वच् ा फक याभानॊदजी वच् े मश देखने के सरए बीड इक्कठी शो गमी। कफीय जी को फुरामा गमा। गुरु भशायाज भॊ ऩय वलयाजभान शैं। वाभने वल न ऩॊडडतों की वबा शैं। याभानॊदजी ने कफीय वे ऩूछा् भैंने तुम्शें कफ दीषा दी? भैं कफ तेया गुरु फना? कफीयजी फोरे् भशायाज ! उव हदन प्रबात को आऩने भुझे ऩादुका-स्ऩळा कयामा औय याभभॊि बी हदमा, लशाॉ गॊगा के घाट ऩय। याभानॊद स्लाभी ने कफीयजी के सवय ऩय धीये वे खडाऊॉ भायते शुए कशा् याभ... याभ.. याभ.... भुझे झूठा फनाता शै? गॊगा के घाट ऩय भैंने तुझे कफ दीषा दी थी ? कफीयजी फोर उठे् गुरु भशायाज ! तफ की दीषा झूठी तो अफ की तो वच् ी....! भुख वे याभ नाभ का भॊि बी सभर गमा औय सवय ऩय आऩकी ऩालन ऩादुका का स्ऩळा बी शो गमा। स्लाभी याभानॊदजी उच् कोहट के वॊत भशात्भा थे। उन्शोंने ऩॊडडतों वे कशा् रो, मलन शो मा कु छ बी शो, भेया ऩशरे नॊफय का सळटम मशी शै।
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    92 2019 जफ बक्तके सरमे स्लमॊ बगलान भयने को तैमाय शोते शैं?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम एक प्रवॊग के अनुळाय जफ वलबीऴण बगलान श्रीयाभ के यणों की ळयण भें शो जाता शै, तफ बगलान श्रीयाभ वलबीऴण के दोऴों को अऩने शी दोऴ भानते शैं। एक वभम वलबीऴण वभुद्र राॊघ कय वभुद्र के दूवये छोय ऩय आमे। लशाॉ वलप्रघोऴ नाभक गाॉल भें उनवे असात शी एक ब्रह्भशत्मा शो गई। जफ फाकी के गाॉल लारो को इव फात का ऩता रगा तो लशाॉ के वबी ब्राह्भणों ने इकट्ठे शोकय वलबीऴण को खूफ भाया-ऩीटा, ऩय वलबीऴण भये नशीॊ। फपय ब्राह्भणों ने वलबीऴण को जॊजीयों वे फाॉधकय जभीन के बीतय एक गुपा भें रे जाकय फॊध कय हदमा। जफ बगलान श्रीयाभ को ऩता रगा की तो श्रीयाभ जी ऩुटऩक वलभान के या तत्कार, गाॉल भें ऩशुॉ े। ब्राह्भणों ने याभ जी का फशुत आदय-वत्काय फकमा औय कशा फक, भशायाज ! इवने ब्रह्भशत्मा कय दी शै। इवको शभने फशुत भाया, ऩय मश भया नशीॊ। बगलान याभ ने कशा् शे ब्राह्भणों ! वलबीऴण को भैंने कल्ऩ तक की आमु औय याज्म दे यखा शैं, लश कै वे भाया जा वकता शै ! औय उवको भायने की जरूयत शी क्मा शैं? लश तो भेया बक्त शैं। भेयें बक्त के सरए भैं स्लमॊ भयने को तैमाय शूॉ। शभाये मशाॉ वलधान शै फक दाव के अऩयाध की त्जम्भेलायी उवके स्लाभी ऩय शोती शैं। स्लाभी शी उवके दण्ड का ऩाि शोता शैं। इवसरए वलबीऴण के फदरे आऩ रोग भेयें को शी दण्ड दें। बगलान की मश ळयणागत लत्वरता देखकय वफ ब्राह्भण आश् मा कयने रगे औय उन वफ ने उवी षण बगलान श्रीयाभ की ळयण रे री। भाॊगलरक मोग तनवायण कवच जन्भ रग्न वे प्रथभ, द्वद्वतीम, तुथा, वप्तभ, अटटभ मा द्वादळ स्थान भे भॊगर त्स्थत शोने ऩय भॊगर दोऴ मा कु ज दोऴ अथाात भाॊगसरक मोग का तनभााण शोता शैं। कु छ आ ामों के अनुवाय रग्न के अततरयक्त भॊगरी दोऴ न्द्र रग्न, ळुक्र मा वप्तभेळ वे इन्शीॊ स्थानो भें भॊगर त्स्थत शोने ऩय बी शोता शैं। ळास्िोक्त भान्मता के अनुळाय भॊगरी मोग लैलाहशक जीलन को वलसबन्न प्रकाय वे प्रबावलत कयता शै, वललाश भे वलघ्न, वलरम्फ, व्मलधान मा धोखा, वललाशोऩयान्त दम्ऩतत भे वे फकवी एक अथला दोनाको ळायीरयक, भानसवक अथला आधथाक कटट, ऩायस्ऩरयक भन-भुटाल, लाद-वललाद तथा वललाश-वलच्छेद। अगय दोऴ अत्मधधक प्रफर शुआ तो दोना अथला फकवी एक की भृत्मु का बम यशता शै। कुॊ डरी भें महद भॊगरी मोग शो तो उस्वे बमबीत मा आतॊफकत नशीॊ शोना ाहशमे। प्रमाव मश कयना ाहशमे फक भॊगरी जातक का वललाश भॊगरी जातक वे शी शो महद भाॊगसरक मोग के कायण वललाश भें वलरॊफ शो यशा शो तो भाॊगसरक मोग तनलायण कल को धायण कयने वे वललाश वॊफॊधधत वभस्माओॊ का तनलायण शोता शैं। Rs.1450 GURUTVA KARYALAY BHUBNESWAR-751018, (ODISHA), Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com
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    93 2019 श्री याभळराका प्रश्नालरी वु प्र उ त्रफ शो भु ग फ वु नु त्रफ घ धध इ द य रु प सव सव यें फव शै भॊ र न र म न अॊ वुज वो ग वु कु भ व ग त न ई र धा फे नो त्म य न कु जो भ रय य य अ की शो वॊ या म ऩु वु थ वी जै इ ग भ वॊ क ये शो व व तन त य त य व शुॉ श फ फ ऩ ध व म व तु भ का ाा य य भा सभ भी म्शा ाा जा शू शीॊ ाा जू ता या ये यी ह् का प खा त्ज ई य या ऩू द र तन को सभ गो न भ त्ज म ने भतन क ज ऩ व र हश या सभ वभ रय ग द न ख भ णख त्ज तन त जॊ सवॊ भु न न कौ सभ ज य ग धु ख वु का व य गु क भ अ ध तन भ र ाा न फ ती न रय ब ना ऩु ल अ ढ़ा य र का ए तू य न नु ल थ सव श वु म्श य य व हशॊ य त न ख ाा ाा ाा य वा ाा रा धी ाा यी जा शू शीॊ ऴा जू ई या ये ववधध- श्रीयाभ न्द्रजी का ध्मान कय अऩने प्रश्न को भन भें दोशयामें। फपय ऊऩय दी गई वायणी भें वे फकवी एक अषय अॊगुरी यखें। अफ उववे अगरे अषय वे क्रभळ् नौलाॊ अषय सरखते जामें जफ तक ऩुन् उवी जगश नशीॊ ऩशुॉ जामें। इव प्रकाय एक ौऩाई फनेगी, जो अबीटट प्रश्न का उत्तय शोगी। मशाॊ शभने आऩकी अनुकू रता शेतु नौले अषय के कोटटक को एक वभान यॊग भें यॊगने का प्रमाव फकमा शैं त्जववे आऩको शय नौले अषयको धगनती कयने की आलश्मक्ता न यशें आऩ वीधे एक वभान यॊगो के कोटटक भें रीखे अषयोको सभरारे/सरख रे औय जो ौऩाई फने उव ौऩाई को बी देखने भें आऩको आवानी शो इव उद्देश्म वे उवी यॊग भें यॊगने का प्रमाव फकमा शैं।
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    94 2019 1 सुनुलसम सत्म असीस हभायी। ऩूश्जहह भन काभना तुम्हायी। पर् -प्रश्नकत्ताा का प्रश्न उत्तभ शै, कामा सवद्ध शोगा। मश ौऩाई फारकाण्ड भें श्रीवीताजी के गौयीऩूजन के प्रवॊग भें शै। गौयीजी ने श्रीवीताजी को आळीलााद हदमा शै। 2 प्रत्रफलस नगय कीजै सफ काजा। हृदम याखख कोसरऩुय याजा। पर्-बगलान ् का स्भयण कयके कामाायम्ब कयो, वपरता सभरेगी। मश ौऩाई वुन्दयकाण्ड भें शनुभानजी के रॊका भें प्रलेळ कयने के वभम की शै। 3 उघयें अॊत न होइ तनफाहू। कारनेलभ श्जलभ यावन याहू।। पर्-इव कामा भें बराई नशीॊ शै। कामा की वपरता भें वन्देश शै। मश ौऩाई फारकाण्ड के आयम्ब भें वत्वॊग-लणान के प्रवॊग भें शै। 4 त्रफधध फस सुजन कु सॊगत ऩयहीॊ। पतन भतन सभ तनज गुन अनुसयहीॊ।। पर्-खोटे भनुटमों का वॊग छोड दो। कामा की वपरता भें वन्देश शै। मश ौऩाई फारकाण्ड के आयम्ब भें वत्वॊग-लणान के प्रवॊग भें शै। 5 होइ है सोई जो याभ यधच याखा। को करय तयक फढावहहॊ साषा।। पर्-कामा शोने भें वन्देश शै, अत् उवे बगलान ् ऩय छोड देना श्रेमटकय शै। मश ौऩाई फारकाण्डान्तगात सळल औय ऩालाती के वॊलाद भें शै। 6 भुद भॊगरभम सॊत सभाजू। श्जलभ जग जॊगभ तीयथ याजू।। पर्-प्रश्न उत्तभ शै। कामा सवद्ध शोगा। मश ौऩाई फारकाण्ड भें वॊत-वभाजरुऩी तीथा के लणान भें शै। 7 गयर सुधा रयऩु कयम लभताई। गोऩद लसॊधु अनर लसतराई।। पर्-प्रश्न फशुत श्रेटठ शै। कामा वपर शोगा। मश ौऩाई श्रीशनुभान ् जी के रॊका प्रलेळ कयने के वभम की शै। 8 फरुन कु फेय सुयेस सभीया। यन सनभुख धरय काह न धीया।। पर्-कामा ऩूणा शोने भें वन्देश शै। मश ौऩाई रॊकाकाण्ड भें यालन की भृत्मु के ऩश् ात ् भन्दोदयी के वलराऩ के प्रवॊग भें शै। 9 सुपर भनोयथ होहुॉ तुम्हाये। याभ रखनु सुतन बए सुखाये।। पर्-प्रश्न फशुत उत्तभ शै। कामा सवद्ध शोगा। मश ौऩाई फारकाण्ड ऩुटऩलाहटका वे ऩुटऩ राने ऩय वलश्लासभिजी का आळीलााद शै।
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    95 2019 जफ श्रीयाभने फकम वलजमा एकादळी व्रत?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम एक फाय मुधधश्ष्ठय ने श्री कृ टण वे ऩूिा हे प्रबु पाल्गुन (गुजयात-भशायाटट्र भें भाघ) के कृ टणऩष को फकव नाभ की एकादळी शोती शैं औय उवका व्रत कयने की वलधध क्मा शैं? कृ ऩा कयके फताइमे । पाल्गुन के कृ टणऩष की एकादळी को ‘वलजमा एकादळी’ के नाभ वे जाना जाता शैं। बगवान श्रीकृ ष्ण ऩुन् फोरे: मुधधत्टठय ! एक फाय नायदजी ने ब्रह्भाजी वे पाल्गुन के कृ टणऩष की ‘वलजमा एकादळी’ के व्रत वे शोनेलारे ऩुण्म के फाये भें ऩूछा था तथा ब्रह्भाजी ने इव व्रत के फाये भें नायदजी को जो कथा औय वलधध फतामी थी, उवे वुनो : ब्रह्भाजी ने कहा : नायद ! मश व्रत फशुत शी प्रा ीन, ऩवलि औय ऩाऩ नाळक शैं । मश एकादळी याजाओॊ को वलजम प्रदान कयती शैं, इवभें ततनक बी वॊदेश नशीॊ शैं । िेतामुग भें भमाादा ऩुरुऴोत्तभ श्रीयाभ न्द्रजी जफ रॊका ऩय ढ़ाई कयने के सरए वभुद्र के फकनाये ऩशुॉ े, तफ उन्शें वभुद्र को ऩाय कयने का कोई उऩाम नशीॊ वूझ यशा था । उन्शोंने रक्ष्भणजी वे ऩूछा : ‘वुसभिानन्दन ! फकव उऩाम वे इव वभुद्र को ऩाय फकमा जा वकता शै ? मश अत्मन्त अगाध औय बमॊकय जर जन्तुओॊ वे बया शुआ शै । भुझे ऐवा कोई उऩाम नशीॊ हदखामी देता, त्जववे इवको वुगभता वे ऩाय फकमा जा वके । रक्ष्भणजी फोरे : शे प्रबु ! आऩ शी आहददेल औय ऩुयाण ऩुरुऴ ऩुरुऴोत्तभ शैं । आऩवे क्मा तछऩा शैं? मशाॉ वे आधे मोजन की दूयी ऩय कु भायी द्लीऩ भें फकदाल्भ्म नाभक भुतन यशते शैं । आऩ उन वल न भुनीश्लय के ऩाव जाकय उन्शीॊवे इवका उऩाम ऩूतछमे । श्रीयाभ न्द्रजी भशाभुतन फकदाल्भ्म के आश्रभ ऩशुॉ े औय उन्शोंने भुतन को प्रणाभ फकमा । भशवऴा ने प्रवन्न शोकय श्रीयाभजी के आगभन का कायण ऩूछा । श्रीयाभचन्रजी फोरे : ब्रह्भन ्! भैं रॊका ऩय ढ़ाई कयने के उद्धेश्म वे अऩनी वेनावहशत मशाॉ आमा शूॉ । भुने ! अफ त्जव प्रकाय वभुद्र ऩाय फकमा जा वके , कृ ऩा कयके लश उऩाम फताइमे । फकदाल्बम भुतन ने कहा : शे श्रीयाभजी ! पाल्गुन के कृ टणऩष भें जो ‘वलजमा’ नाभ की एकादळी शोती शै, उवका व्रत कयने वे आऩकी वलजम शोगी। तनश् म शी आऩ अऩनी लानय वेना के वाथ वभुद्र को ऩाय कय रेंगे । याजन ् ! अफ इव व्रत की परदामक वलधध वुतनमे : एकादळी के एक हदन ऩूला दळभी के हदन वोने, ाॉदी, ताॉफे अथला सभट्टी का एक करळ स्थावऩत कय उव करळ को जर वे बयकय उवभें ऩल्रल डार दें । उव करळ के ऊऩय बगलान नायामण के वुलणाभम वलग्रश की स्थाऩना कयें । फपय एकादळी के हदन प्रात: कार स्नान कयें । करळ को ऩुन: स्थावऩत कयें । भारा, न्दन, वुऩायी तथा नारयमर आहद के या वलळेऴ रुऩ वे उवका ऩूजन कयें । करळ के ऊऩय वप्तधान्म औय जौ यखें । गन्ध, धूऩ, दीऩ औय बाॉतत-बाॉतत के नैलेघ वे बगलान नायामण का
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    96 2019 ऩूजन कयें। करळ के वाभने फैठकय उत्तभ कथा लाताा आहद के या वाया हदन व्मतीत कयें औय यात भें बी लशाॉ जागयण कयें । अखण्ड व्रत की सववद्ध के सरए घी का दीऩक जरामें । फपय दळी के हदन वूमोदम शोने ऩय उव करळ को फकवी जराळम के वभीऩ स्थावऩत कयें औय उवकी वलधधलत ् ऩूजा कयके देल प्रततभावहशत उव करळ को लेदलेत्ता ब्राह्भण के सरए दान कय दें । करळ के वाथ शी औय बी फडे फडे दान देने ाहशए । श्रीयाभ ! आऩ अऩने वेनाऩततमों के वाथ इवी वलधध वे प्रमत्नऩूलाक ‘वलजमा एकादळी’ का व्रत कीत्जमे । इववे आऩकी वलजम शोगी । ब्रह्भाजी कहते हैं : नायद ! मश वुनकय श्रीयाभ न्द्रजी ने भुतन के कथनानुवाय उव वभम ‘वलजमा एकादळी’ का व्रत फकमा । उव व्रत के कयने वे श्रीयाभ न्द्रजी वलजमी शुए । उन्शोंने वॊग्राभ भें यालण को भाया, रॊका ऩय वलजम ऩामी औय वीता को प्राप्त फकमा । फेटा ! जो भनुटम इव वलधध वे व्रत कयते शैं, उन्शें इव रोक भें वलजम प्राप्त शोती शै औय उनका ऩयरोक बी अषम फना यशता शैं। बगवान श्रीकृ ष्ण कहते हैं : मुधधत्टठय ! इव कायण ‘वलजमा’ का व्रत कयना ाहशए । इव प्रवॊग को ऩढ़ने औय वुनने वे लाजऩेम मस के वभान पर सभरता शैं। बायतीम ज्मोततऴ ळास्ि भें ळुब औय अळुब दोनों प्रकाय के मोगों का लणान सभरता शैं। इन मोगों भें एक मोग "श्रावऩत मोग" शैं इवे "ळावऩत दोऴ" बी कशा जाता शैं। इव मोग के वॊफॊध भें कशाॊ जाता शैं की त्जव व्मत्क्त की कु ण्डरी भें श्रावऩत मोग शोता शै, उनकी कु ण्डरी भें भौजूद अन्म ळुब मोगों का प्रबाल कभ शो जाता शै त्जववे व्मत्क्त को जीलन भें वलसबन्न कहठनाईमों एलॊ ुनौततमों का वाभना कयना ऩडता शै। कु छ जानकाय कु ण्डरी भें भौजूद श्रावऩत मोग का कायण बी ऩूला जन्भ के कभों का पर भानते शैं। कु छ ज्मोततऴी का भानना शैं की श्रावऩत मोग अत्मॊत अळुब परदामी शैं। श्रावऩत मोग का पर व्मत्क्त को अऩने कभों के अनुवाय बोगना ऩडता शैं। कै वे जाने जन्भ कुॊ डरी भें श्रावऩत मोग शैं मा नशीॊ? यतीम ज्मोततऴळास्ि भें वूमा, भॊगर, ळतन, याशु औय के तु को अळुब ग्रशों भाना गमा शै। इन अळुब ग्रशों भें जफ ळातन औय याशु की एक यासळ भें भौजूद शो तो श्रावऩत मोग का तनभााण शोता शै। ळतन औय याशु दोनों शी ग्रश अळुब पर देते शैं इवसरए इन दोनों ग्रशों के वॊमोग वे फनने लारे मोग को ळावऩत मोग मा श्रावऩत मोग कशा जाता शै। कु छ ज्मोततऴ के जानकाय मश भानते शैं फक ळतन की याशु ऩय दृत्टट शोने वे बी इव मोग का तनभााण शोता शैं। वाधायण बाऴा भें वभझे तो ळाऩ का अथा ळुब परों नाळ शोना भाना जाता शै। उवी प्रकाय ळावऩत मोग का अथा शैं, ळुब मोगों को नाळ कयने लारा मोग। त्जव फकवी की कु ण्डरी भें मश मोग का तनभााण शोता शै उवे इवी प्रकाय का पर सभरता शै अथाात उनकी कु ण्डरी भें त्जतने बी ळुब मोग शोते शैं ले इव मोग के कायण प्रबालशीन शो जाते शैं! आभतौय ऩय ऐवा भाना जाता शैं की ळावऩत मोग वे ऩीडडत व्मत्क्त को अऩने कामों भें वलसबन्न प्रकाय की कहठन ुनौततमों एलॊ भुत्श्करों का वाभना कयना शोता शैं। रेफकन कु छ ज्मोततऴी इववे वशभत नशीॊ शैं, उनका भानना शैं की ळावऩत मोग वे वॊफॊधधत मश धायण ऩूयी तयश गरत शै, त्जव व्मत्क्त की कु ण्डरी भें ळावऩत मोग फनता शै, उन व्मत्क्त की कु ण्डरी भें अन्म मोगों की अऩेषा ळावऩत मोग अधधक प्रबालळारी शोकय व्मत्क्त को ळुब पर देता शैं! त्जव प्रकाय ज्मोततऴळास्ि के अनुळाय जफ दो सभि ग्रशों की मुतत फकवी यासळ भें फनती शै तो उनका अळुब प्रबाल वभाप्त शो जाता शै औय दोनों सभिग्रश सभरकय व्मत्क्त को ळुब पर देते शैं। उवी प्रकाय वे लश ळतन एलॊ याशु के मोग वे तनसभात शोने लारे ळावऩत मोग को अळुब नशीॊ भानते शैं। रेफकन मश एक लै ारयक भतबेद का भुद्दा शैं, महद आऩकी जन्भ कुॊ डरी भें श्रावऩत मोग का तनभााण शो यशा शो, औय आऩको इववे वॊफॊधधत कटट प्राप्त शो यशे शो तो आऩ श्रावऩत मोग तनलायण कल को धायण कयके धायण कताा को वलळेऴ राब प्राप्त कय अऩनी ऩयेळातनमों को दूय कय वकते शैं। इव कल के प्रबाल वे श्रावऩत मोग के प्रबालों भें न्मूनता आती शैं। Rs.1900 श्रावऩत मोग तनलायण कल
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    97 2019 स्लमॊप्रबा नेकी याभदूतो की वशामता?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम भाॉ वीता की खोज कयते-कयते शनुभान, जाम्फॊत, अॊगद आहद स्लमॊप्रबा के आश्रभ भें ऩशुॉ े। उन्शें जोयों की बूख औय प्माव रगी थी। उन्शें देखकय स्लमॊप्रबा ने ऩूछा फक् क्मा तुभ शनुभान शो? श्रीयाभजी के दूत शो? वीता जी की खोज भें तनकरे शो?" शनुभानजी ने कशा् "शाॉ, भाॉ! शभ वीता भाता की खोज भें इधय तक आमे शैं।" फपय स्लमॊप्रबा ने अॊगद की ओय देखकय कशा् तुभ वीता जी को खोज तो यशे शो, फकन्तु आॉखें फॊद कयके खोज यशे शो मा आॉखें खोरकय?" अॊगद फोरा् शभ क्मा आॉखें फन्द कयके खोजते शोंगे? शभ तो आॉखें खोरकय शी भाता वीता की खोज कय यशे शैं। स्लमॊप्रबा फोरी् वीताजी को खोजना शै तो आॉखें खोरकय नशीॊ फॊद कयके खोजना शोगा। वीता जी अथाात ् बगलान की अधािंधगनी, वीताजी मानी ब्रह्भवल , आत्भवल । ब्रह्भवल को खोजना शै तो आॉखें खोरकय नशीॊ आॉखें फॊद कयके शी खोजना ऩडेगा। आॉखें खोरकय खोजोगे तो वीताजी नशीॊ सभरेंगीॊ। तुभ आॉखें फन्द कयके शी वीताजी (ब्रह्भवल ) को ऩा वकते शो। ठशयो भैं तुम्शे फताती शूॉ फक वीता जी अबी कशाॉ शैं। ध्मान कयके स्लमॊप्रबा ने फतामा् वीताजी मशाॉ कशीॊ बी नशीॊ, लयन ् वागय ऩाय रॊका भें शैं। अळोकलाहटका भें फैठी शैं औय याषसवमों वे तघयी शैं। उनभें त्रिजटा नाभक याषवी शैं तो यालण की वेवलका, फकन्तु वीताजी की बक्त फन गमी शै। वीताजी लशीॊ यशती शैं।" याभदूत लानय वो ने रगे फक बगलान याभ ने तो एक भशीने के अॊदय वीता भाता का ऩता रगाने के सरए कशा था। अबी तीन वप्ताश वे ज़्मादा वभम तो मशीॊ शो गमा शैं। लाऩव क्मा भुॉश रेकय जाएॉ? वागय तट तक ऩशुॉ ते-ऩशुॉ ते कई हदन रग जाएॉगे। अफ क्मा कयें? उनके भन की फात जानकय स्लमॊप्रबा ने कशा् ध न्ता भत कयो। अऩनी आॉखें फॊद कयो। भैं मोगफर वे एक षण भें तुम्शें लशाॉ ऩशुॉ ा देती शूॉ। शनुभान, अॊगद औय अन्म लानय अऩनी आॉखें फन्द कयते शैं औय स्लमॊप्रबा अऩनी मोगळत्क्त वे उन्शें वागय- तट ऩय कु छ शी ऩर भैं ऩशुॉ ा देती शैं। इव सरमे श्रीयाभ रयतभानव भें उल्रेख शैं। ठाडे सकर लसॊधु के तीया। वकर वम्भान प्रात्प्त कल वकर वम्भान प्रात्प्त कल को धायण कयने वे धायणकताा या फकमे गमे कामा भें वाभात्जक भान-वम्भान औय ऩद-प्रततटठा भें लृवद्ध शोती शैं। कु छ रोगो को एवा रगता शैं की उवके ऩरयजन मा वप्रमजन उवका वम्भान नशीॊ कयते, फकतना बी अच्छा कामा कयने ऩय बी उनका भान-वम्भान नशीॊ कयते मा फाय-फाय उनका भजाक उडाते शो, उनका अऩभान कयते शो, एवी त्स्थती भें वकर वम्भान प्रात्प्त कल अत्मॊत राबदामक सवद्ध शोता शैं। वकर वम्भान प्रात्प्त कल को धायण कयने वे धायण कताा के वभात्जक भान-प्रततटठा भें लृवद्ध शोती शैं, त्जववे धायण कताा का वाभात्जक जीलन उच् स्तय का शो वकता शैं। इटट सभि एलॊ वप्रमजनों वे बी भान-वभान की प्रात्प्त शोती शैं। Rs.1450
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    98 2019 अॊगद नेयालण के घभॊडको ूय फकमा  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम रॊका ऩशूॉ कय अगरे हदन वुफेर ऩलात ऩय वलश्राभ कय प्रात्कार श्री यघुनाथजी उढे औय वफ भॊत्रिमों को फुराकय वराश भें ऩूछा की ळीघ्र फताइए अफ क्मा उऩाम कयना ाहशए? जाम्फलान ्ने श्री याभजी के यणों भें सवय नलाकय कशा शे वफ कु छ जानने लारे। शे वफके रृदम भें तनलाव कयने लारे अॊतमााभी! शे फुवद्ध, फर, तेज, धभा औय गुणों के अधधऩतत वुतनए! भैं अऩनी फुवद्ध के अनुवाय वराश देता शूॉ फक फासरकु भाय अॊगद को दूत फनाकय यालण की रॊका भें बेजा जाए। मश अच्छी वराश वफके भन भें जॉ गई। कृ ऩा के तनधान श्री याभजी ने अॊगद वे कशा शे फर, फुवद्ध औय गुणों के धाभ फासरऩुि! शे तात! तुभ भेये काभ के सरए रॊका जाओ। तुभको अधधक वभझाकय क्मा कशूॉ! भैं जानता शूॉ, तुभ ऩयभ तुय शो। ळिु वे लशी फात ीत कयना, त्जववे शभाया काभ शो औय उवका कल्माण शो जाए। प्रबु श्री याभकी आसा भें सवय ढ़कय औय उनके यणों की लॊदना कयके अॊगदजी उठे औय फोरे शे बगलान ्श्री याभजी आऩ त्जव ऩय कृ ऩा कयें, लशी गुणों का वभुद्र शो जाता शै। स्लाभी वफ कामा अऩने-आऩ सवद्ध शैं, मश तो प्रबु ने भुझ को कामा हदमा शै। ऐवे वल ाय कयते शूॉए मुलयाज अॊगद का रृदम शवऴात औय ळयीय ऩुरफकत शो गमा। यणों की लॊदना कयके यभाजी की प्रबुता रृदम भें धायणकय अॊगद वफको प्रणाभ कय रे। रॊका भें प्रलेळ कयते शी यालण के ऩुि वे अॊगद की बेंट शो गई, जो लशाॉ खेर यशा था। फातों शी फातों भें दोनों भें झगडा फढ़ गमा, यालण के ऩुि ने अॊगद ऩय रात उठाई। अॊगद ने तफ ऩैय ऩकडकय उवे घुभाकय जभीन ऩय दे ऩटक कय भाय धगयामा। मश द्रटट देख कय याषवो के वभूश अॊगद को देखकय जशाॉ-तशाॉ बाग गएॊ, ले डय के भाये उनके भुख वे ळब्द नशीॊ तनकर यशे थे। एक-दूवये वे अवरी फात नशीॊ फतराते, यालण के ऩुि की भृत्मु वभझकय वफ ुऩ यश जाते शैं। यालण ऩुि की भृत्मु जानकय औय याषवों को बम के भाये बागते देखकय नगयबय भें कोराशर भ गमा फक त्जवने रॊका जराई थी, लशी लानय फपय आ गमा शै। वफ अत्मॊत बमबीत शोकय वल ाय कयने रगे फक वलधाता अफ न जाने क्मा कयेगा। ले त्रफना ऩूछे शी अॊगद को यालण के दयफाय भें जाने का यास्ता फता देते शैं। त्जवे शी ले देखते शैं, लशी डय के भाये वूख जाते। श्री याभजी के यणकभरों का स्भयण कयके अॊगद यालण की वबा के य ऩय गए औय ले धीय, लीय औय फर की यासळ अॊगद सवॊश की तयश इधय-उधय देखने रगे। तुयॊत शी अॊगदने एक याषव को बेजा औय यालण को अऩने आने का वभा ाय वूध त फकमा। वुनते शी यालण शॉवकय फोरा- फुरा राओ, देखें कशाॉ का फॊदय शै। आसा ऩाकय फशुत वे दूत दौडे औय लानयों के फी भें शाथी के वभान अॊगद को फुरा राए। अॊगद की बुजाएॉ लृषों के औय सवय ऩलातों के सळखयों के वभान शैं। योभालरी भानो फशुत वी रताएॉ शैं। भुॉश, नाक, नेि औय कान ऩलात की कन्दयाओॊ औय खोशों के फयाफय शैं। अत्मॊत फरलान ्फाॉके लीय फासरऩुि अॊगद वबा भें गए, ले भन भें जया बी नशीॊ णझझके । अॊगद को देखते शी वफ वबावद् उठ खडे शुए। मश देखकय यालण के रृदम भें फडा क्रोध शुआ। जैवे भतलारे शाधथमों के झुॊड भें सवॊश तन्ळॊक शोकय रा जाता शैं, उवी प्रकाय श्री याभजी के प्रताऩ का रृदम भें स्भयण कयके अॊगद तनबाम शोकय वबा भें फैठ गए। यालण ने कशा अये फॊदय! तू कौन शै?, अॊगद ने कशा शे दळग्रील! भैं श्री यघुलीय का दूत शूॉ। भेये वऩता वे तुम्शायी सभिता थी, इवसरए शे बाई! भैं तुम्शायी बराई के सरए शी आमा शूॉ। तुम्शाया उत्तभ कु र शै, ऩुरस्त्म ऋवऴ के तुभ ऩौि शो। सळलजी की औय ब्रह्भाजी की तुभने फशुत प्रकाय वे ऩूजा की शै। उनवे लय ऩाए शैं औय वफ काभ
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    99 2019 सवद्ध फकएशैं। रोकऩारों औय वफ याजाओॊ को तुभने जीत सरमा शै। याजभद वे मा भोशलळ तुभ जगज्जननी वीताजी को शय राए शो। अफ तुभ भेये ळुब ल न अथाात भेयी वराश वुनो! उवके अनुवाय रने वे प्रबु श्री याभजी तुम्शाये वफ अऩयाध भाप कय देंगे। दाॉतों भें ततनका दफाओ, गरे भें कु ल्शाडी डारो औय कु टुत्म्फमों वहशत अऩनी त्स्िमों को वाथ रेकय, आदयऩूलाक जानकीजी को आगे कयके , इव प्रकाय वफ बम छोडकय रो-औय 'शे ळयणागत के ऩारन कयने लारे यघुलॊळ सळयोभणण श्री याभजी! भेयी यषा कीत्जए, यषा कीत्जए। इव तयश प्राथाना कयो। अॊतय ऩुकाय वुनते शी प्रबु तुभको तनबाम कय देंगे। यालण ने कशा अये फॊदय के फच् े! वॉबारकय फोर! भूखा! भुझ देलताओॊ के ळिु को तूने जाना नशीॊ? अये बाई! अऩना औय अऩने फाऩ का नाभ तो फता। फकव नाते वे सभिता भानता शै? अॊगद ने कशा- भेया नाभ अॊगद शै, भैं फासर का ऩुि शूॉ। उनवे कबी तुम्शायी बेंट शुई थी? अॊगद का ल न वुनते शी यालण कु छ वकु ा गमा औय फोरा-शाॉ, भैं जान गमा भुझे माद आ गमा, फासर नाभ का एक फॊदय था। अये अॊगद! तू शी फासर का रडका शै? अये कु रनाळक! तू तो अऩने कु ररूऩी फाॉव के सरए अत्ग्न रूऩ शी ऩैदा शुआ! गबा भें शी क्मों न नटट शो गमा तू? व्मथा शी ऩैदा शुआ जो अऩने शी भुॉश वे तऩत्स्लमों का दूत कशरामा। अफ फासर की कु ळर तो फता, लश आजकर कशाॉ शै? तफ अॊगद ने शॉवकय कशा फव कु छ हदन फीतने ऩय स्लमॊ शी फासर के ऩाव जाकय, अऩने सभि को रृदम वे रगाकय, उवी वे कु ळर ऩूछ रेना। श्री याभजी वे वलयोध कयने ऩय जैवी कु ळर शोती शै, लश वफ तुभको ले वुनालेंगे। शे भूखा! वुन, बेद उवी के भन भें ऩड वकता शै, बेद नीतत उवी ऩय अऩना प्रबाल डार वकती शै त्जवके रृदम भें श्री यघुलीय न शों। व शै, भैं तो कु र का नाळ कयने लारा शूॉ औय शे यालण! तुभ कु र के यषक शो। अॊधे-फशये बी ऐवी फात नशीॊ कशते, तुम्शाये तो फीव नेि औय फीव कान शैं। सळल, ब्रह्भा आहद देलता औय भुतनमों के वभुदाम त्जनके यणों की वेला कयना ाशते शैं, उनका दूत शोकय भैंने कु र को डुफा हदमा? अये ऐवी फुवद्ध शोने ऩय बी तुम्शाया रृदम पट नशीॊ जाता? अॊगद की कठोय लाणी वुनकय यालण आॉखें ततयछी कयके फोरा- अये दुटट! भैं तेये वफ कठोय ल न इवीसरए वश यशा शूॉ फक भैं नीतत औय धभा को जानता शूॉ औय उन्शीॊ की यषा कय यशा शूॉ। अॊगद ने कशा- तुम्शायी धभाळीरता भैंने बी वुनी शै। जैवे की तुभने ऩयाई स्िी की ोयी की शै! औय दूत की यषा की फात तो अऩनी आॉखों वे देख री। ऐवे धभा के व्रत को धायण (ऩारन) कयने लारे तुभ डूफकय भय क्मों नशीॊ जाते। नाक-कान वे यहशत फहशन को देखकय तुभने धभा वल ायकय शी तो षभा कय हदमा था! तुम्शायी धभाळीरता जगजाहशय शै। भैं बी फडा बाग्मलान ्शूॉ, जो भैंने तुम्शाया दळान ऩामा?। यालण ने कशा- अये जड जन्तु लानय! व्मथा फक-फक न कय, अये भूखा! भेयी बुजाएॉ तो देख। मे वफ रोकऩारों के वलळार फर रूऩी ॊद्रभा को ग्रवने के सरए याशु के वभान शैं। फपय तूने वुना शी शोगा फक आकाळ रूऩी ताराफ भें भेयी बुजाओॊ रूऩी कभरों ऩय फवकय सळलजी वहशत कै राव शॊव के वभान ळोबा को प्राप्त शुआ था। अये अॊगद! वुन, तेयी वेना भें फता, ऐवा कौन मोद्धा शै, जो भुझवे सबड वके गा। तेया भासरक तो स्िी के वलमोग भें फरशीन शो यशा शै औय उवका छोटा बाई उवी के दु्ख वे दु्खी औय उदाव शै। तुभ औय वुग्रील, दोनों नदी तट के लृष शो यशा भेया छोटा बाई वलबीऴण, वो लश बी फडा डयऩोक शै। भॊिी जाम्फलान ्फशुत फूढ़ा शै। लश अफ रडाई भें क्मा कय वकता शै?। नर-नीर तो सळल्ऩ-कभा जानते शैं ले रडना क्मा जानें?, शाॉ, एक लानय जरूय भशान ्फरलान ् शै, जो ऩशरे आमा था औय त्जवने रॊका जराई थी। मश ल न वुनते शी फासर ऩुि अॊगद ने कशा-शे याषवयाज! वच् ी फात कशो! क्मा उव लानय ने व भु तुम्शाया नगय जरा हदमा? यालण जैवे जगवलजमी मोद्धा का नगय एक छोटे वे लानय ने जरा हदमा। ऐवे ल न वुनकय उन्शें वत्म कौन कशेगा शे यालण! त्जवको तुभने फशुत फडा मोद्धा कशकय वयाशा शै, लश तो वुग्रील का एक छोटा वा दौडकय रने लारा शयकाया शै। लश फशुत रता शै, लीय नशीॊ शै। उवको तो
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    100 2019 शभने केलर खफय रेने के सरए बेजा था। क्मा व भु शी उव लानय ने प्रबु की आसा ऩाए त्रफना शी तुम्शाया नगय जरा डारा? भारूभ शोता शै, इवी डय वे लश रौटकय वुग्रील के ऩाव नशीॊ गमा औय कशीॊ तछऩा यशा! शे यालण! तुभ वफ वत्म शी कशते शो, भुझे वुनकय कु छ बी क्रोध नशीॊ शै। व भु शभायी वेना भें कोई बी ऐवा नशीॊ शै, जो तुभवे रडने भें ळोबा ऩाए। प्रीतत औय लैय फयाफयी लारे वे शी कयना ाहशए, नीतत ऐवी शी शै। सवॊश महद भेंढकों को भाये, तो क्मा उवे कोई बरा कशेगा मद्यवऩ तुम्शें भायने भें श्री याभजी की रघुता शै औय फडा दोऴ बी शै तथावऩ शे यालण! वुनो, षत्रिम जातत का क्रोध फडा कहठन शोता शैं। लक्रोत्क्त रूऩी धनुऴ वे ल न रूऩी फाण भायकय अॊगद ने ळिु का रृदम जरा हदमा। लीय यालण उन फाणों को भानो प्रत्मुत्तय रूऩी वॉडसवमों वे तनकार यशा शै। तफ यालण शॉवकय फोरा- फॊदय भें मश एक फडा गुण शै फक जो उवे ऩारता शै, उवका लश अनेकों उऩामों वे बरा कयने की ेटटा कयता शै। फॊदय को धन्म शै, जो अऩने भासरक के सरए राज छोडकय जशाॉ-तशाॉ ना ता शै। ना -कू दकय, रोगों को रयझाकय, भासरक का हशत कयता शै। मश उवके धभा की तनऩुणता शै। शे अॊगद! तेयी जातत स्लासभबक्त शै फपय बरा तू अऩने भासरक के गुण इव प्रकाय कै वे न फखानेगा? भैं गुण ग्राशक गुणों का आदय कयने लारा औय ऩयभ वभझदाय शूॉ, इवी वे तेयी जरी-कटी फक-फक ऩय ध्मान नशीॊ देता। अॊगद ने कशा- तुम्शायी वच् ी गुण ग्राशकता तो भुझे शनुभान ्ने वुनाई थी। उवने अळोक लन भें वलध्लॊव कयके , तुम्शाये ऩुि को भायकय नगय को जरा हदमा था। तो बी तुभने अऩनी गुण ग्राशकता के कायण मशी वभझा फक उवने तुम्शाया कु छ बी अऩकाय नशीॊ फकमा। तुम्शाया लशी वुॊदय स्लबाल वल ाय कय, शे दळग्रील! भैंने कु छ धृटटता की शै। शनुभान ्ने जो कु छ कशा था, उवे आकय भैंने प्रत्मष देख सरमा फक तुम्शें न रज्जा शै, न क्रोध शै औय न ध ढ़ शै। (यालण फोरा-अये लानय! जफ तेयी ऐवी फुवद्ध शै, तबी तो तू फाऩ को खा गमा। ऐवा ल न कशकय यालण शॉवा। अॊगद ने कशा- वऩता को खाकय फपय तुभको बी खा डारता, ऩयन्तु अबी तुयॊत कु छ औय शी फात भेयी वभझ भें आ गई। अये नी असबभानी! फासर के तनभार मळ का कायण जानकय तुम्शें भैं नशीॊ भायता। यालण! मश तो फता फक जगत ्भें फकतने यालण शैं? भैंने त्जतने यालण अऩने कानों वे वुन यखे शैं, उन्शें वुन एक यालण तो फसर को जीतने ऩातार भें गमा था, तफ फच् ों ने उवे घुडवार भें फाॉध यखा। फारक खेरते थे औय जा-जाकय उवे भायते थे। फसर को दमा रगी, तफ उन्शोंने उवे छु डा हदमा फपय एक यालण को वशस्रफाशु ने देखा, औय उवने दौडकय उवको एक वलळेऴ प्रकाय के वलध ि जन्तु की तयश वभझकय ऩकड सरमा। तभाळे के सरए लश उवे घय रे आमा। तफ ऩुरस्त्म भुतन ने जाकय उवे छु डामा। एक यालण की फात कशने भें तो भुझे फडा वॊको शो यशा शै- लश फशुत हदनों तक फासर की काॉख भें यशा था। इनभें वे तुभ कौन वे यालण शो? खीझना छोडकय व -व फताओ। यालण ने कशा-अये भूखा! वुन, भैं लशी फरलान ्यालण शूॉ, त्जवकी बुजाओॊ की कयाभात कै राव ऩलात जानता शै। त्जवकी ळूयता उभाऩतत भशादेलजी जानते शैं, त्जन्शें अऩने सवय रूऩी ऩुटऩ ढ़ा- ढ़ाकय भैंने ऩूजा था। सवय रूऩी कभरों को अऩने शाथों वे उताय- उतायकय भैंने अगणणत फाय त्रिऩुयारय सळलजी की ऩूजा की शै। अये भूखा! भेयी बुजाओॊ का ऩयाक्रभ हदक्ऩार जानते शैं, त्जनके रृदम भें लश आज बी ुब यशा शै। हदग्गज भेयी छाती की कठोयता को जानते शैं। त्जनके बमानक दाॉत, जफ- जफ जाकय भैं उनवे जफयदस्ती सबडा, भेयी छाती भें कबी नशीॊ पू टे, फत्ल्क भेयी छाती वे रगते शी ले भूरी की तयश टूट गए। त्जवके रते वभम ऩृ्ली इव प्रकाय हशरती शै जैवे भतलारे शाथी के ढ़ते वभम छोटी नाल! भैं लशी जगत प्रसवद्ध प्रताऩी यालण शूॉ। अये झूठी फकलाव कयने लारे! क्मा तूने भुझको कानों वे कबी वुना। भशान प्रताऩी औय जगत प्रसवद्ध भुझे तू छोटा कशता शै औय भनुटम की फडाई कयता
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    101 2019 शै? अयेदुटट, अवभ्म, तुच्छ फॊदय! अफ भैंने तेया सान जान सरमा। यालण के मे ल न वुनकय अॊगद क्रोध वहशत ल न फोरे- अये नी असबभानी! वॉबरकय फोर। त्जनका पयवा वशस्रफाशु की बुजाओॊ रूऩी अऩाय लन को जराने के सरए अत्ग्न के वभान था। त्जनके पयवा रूऩी वभुद्र की तीव्र धाया भें अनधगनत याजा अनेकों फाय डूफ गए, उन ऩयळुयाभजी का गला त्जन्शें देखते शी बाग गमा, अये अबागे दळळीळ! ले भनुटम क्मों कय शैं?, क्मों ये भूखा उद्दण्ड! श्री याभ ॊद्रजी भनुटम शैं? काभदेल बी क्मा धनुधाायी शै? औय गॊगाजी क्मा नदी शैं? काभधेनु क्मा ऩळु शै? औय कल्ऩलृष क्मा ऩेड शै? अन्न बी क्मा दान शै? औय अभृत क्मा यव शै? गरुडजी क्मा ऩषी शैं? ळेऴजी क्मा वऩा शैं? अये यालण! ध ॊताभणण बी क्मा ऩत्थय शै? अये ओ भूखा! वुन, लैकु ण्ठ बी क्मा रोक शै? औय श्री यघुनाथजी की अखण्ड बत्क्त क्मा राब शै? वेना वभेत तेया भान भथकय, अळोक लन को उजाडकय, नगय को जराकय औय तेये ऩुि को भायकय जो रौट गए औय तू उनका कु छ बी न त्रफगाड वका क्मों ये दुटट! ले शनुभान ्जी क्मा लानय शैं? अये यालण! तुयाई छोडकय वुन। कृ ऩा के वभुद्र श्री यघुनाथजी का तू बजन क्मों नशीॊ कयता? अये दुटट! महद तू श्री याभजी का लैयी शुआ तो तुझे ब्रह्भा औय रुद्र बी नशीॊ फ ा वकें गे। शे भूढ़! व्मथा की डीॊग न शाॉक। श्री याभजी वे लैय कयने ऩय तेया ऐवा शार शोगा फक तेये सवय वभूश श्री याभजी के फाण रगते शी लानयों के आगे ऩृ्ली ऩय ऩडेंगे औय यीछ-लानय तेये उन गेंद के वभान अनेकों सवयों वे ौगान खेरेंगे। जफ श्री यघुनाथजी मुद्ध भें कोऩ कयेंगे औय उनके अत्मॊत तीक्ष्ण फशुत वे फाण छू टेंगे, तफ क्मा तेया गार रेगा? ऐवा वल ाय कय कृ ऩारु श्री याभजी को बज। अॊगद के मे ल न वुनकय यालण फशुत अधधक जर उठा। भानो जरती शुई प्र ण्ड अत्ग्न भें घी ऩड गमा शो लश फोरा- अये भूखा! कुॊ बकणा- ऐवा भेया बाई शै, इन्द्र का ळिु वुप्रसवद्ध भेघनाद भेया ऩुि शै! औय भेया ऩयाक्रभ तो तूने वुना शी नशीॊ फक भैंने वॊऩूणा जड- ेतन जगत ्को जीत सरमा शै! ये दुटट! लानयों की वशामता जोडकय याभ ने वभुद्र फाॉध सरमा, फव, मशी उवकी प्रबुता शै। वभुद्र को तो अनेकों ऩषी बी राॉघ जाते शैं। ऩय इवी वे ले वबी ळूयलीय नशीॊ शो जाते। अये भूखा फॊदय! वुन- भेया एक-एक बुजा रूऩी वभुद्र फर रूऩी जर वे ऩूणा शै, त्जवभें फशुत वे ळूयलीय देलता औय भनुटम डूफ ूके शैं। फता कौन ऐवा ळूयलीय शै, जो भेये इन अथाश औय अऩाय फीव वभुद्रों का ऩाय ऩा जाएगा? अये दुटट! भैंने हदक्ऩारों तक वे जर बयलामा औय तू एक याजा का भुझे वुमळ वुनाता शै! महद तेया भासरक, त्जवकी गुणगाथा तू फाय-फाय कश यशा शै, वॊग्राभ भें रडने लारा मोद्धा शै- तो फपय लश दूत फकवसरए बेजता शै? ळिु वे प्रीतत कयते उवे राज नशीॊ आती? ऩशरे कै राव का भथन कयने लारी भेयी बुजाओॊ को देख। फपय अये भूखा लानय! अऩने भासरक की वयाशना कयना। यालण के वभान ळूयलीय कौन शै? त्जवने अऩने शाथों वे सवय काट-काटकय अत्मॊत शऴा के वाथ फशुत फाय उन्शें अत्ग्न भें शोभ हदमा! स्लमॊ गौयीऩतत सळलजी इव फात के वाषी शैं। भस्तकों के जरते वभम जफ भैंने अऩने रराटों ऩय सरखे शुए वलधाता के अषय देखे, तफ भनुटम के शाथ वे अऩनी भृत्मु शोना फाॉ कय, वलधाता के रेख कोअवत्म जानकय भैं शॉवा। उव फात को स्भयण कयके बी भेये भन भें डय नशीॊ शै। क्मोंफक भैं वभझता शूॉ फक फूढ़े ब्रह्भा ने फुवद्ध भ्रभ वे ऐवा सरख हदमा शै। अये भूखा! तू रज्जा औय भमाादा छोडकय भेये आगे फाय-फाय दूवये लीय का फर कशता शै! अॊगद ने कशा- अये यालण! तेये वभान रज्जालान ्जगत ्भें कोई नशीॊ शै। रज्जाळीरता तो तेया वशज स्लबाल शी शै। तू अऩने भुॉश वे अऩने गुण कबी नशीॊ कशता। सवय काटने औय कै राव उठाने की कथा ध त्त भें ढ़ी शुई थी, इववे तूने उवे फीवों फाय कशा। बुजाओॊ के उव फर को तूने रृदम भें शी तछऩा यखा शै, त्जववे तूने वशस्रफाशु, फसर औय फासर को जीता था।अये भॊद फुवद्ध! वुन, अफ फव कय। सवय काटने वे बी क्मा कोई ळूयलीय शो जाता शै? इॊद्रजार य ने लारे को लीय नशीॊ कशा जाता,
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    102 2019 मद्यवऩ लशअऩने शी शाथों अऩना वाया ळयीय काट डारता शै!। अये भॊद फुवद्ध! वभझकय देख। ऩतॊगे भोशलळ आग भें जर भयते शैं, गदशों के झुॊड फोझ रादकय रते शैं, ऩय इव कायण ले ळूयलीय नशीॊ कशराते। अये दुटट! अफ फतफढ़ाल भत कय, भेया ल न वुन औय असबभान त्माग दे! शे दळभुख! भैं दूत की तयश वत्न्ध कयने नशीॊ आमा शूॉ। श्री यघुलीय ने ऐवा वल ाय कय भुझे बेजा शै- कृ ऩारु श्री याभजी फाय-फाय ऐवा कशते शैं फक स्माय के भायने वे सवॊश को मळ नशीॊ सभरता। अये भूखा! प्रबु के ल नों को भन भें वभझकय माद कयके शी भैंने तेये कठोय ल न वशे शैं। नशीॊ तो तेये भुॉश तोडकय भैं वीताजी को जफयदस्ती रे जाता। अये अधभ! देलताओॊ के ळिु! तेया फर तो भैंने तबी जान सरमा, जफ तू वूने भें ऩयाई स्िी को शय रामा। तू याषवों का याजा औय फडा असबभानी शै, ऩयन्तु भैं तो श्री यघुनाथजी के वेलक वुग्रील के वेलक का बी वेलक शूॉ। महद भैं श्री याभजी के अऩभान वे न डरूॉ तो तेये देखते-देखते ऐवा तभाळा करूॉ फक- तुझे जभीन ऩय ऩटककय, तेयी वेना का वॊशाय कय औय तेये गाॉल को नटट-भ्रटट कयके , अये भूखा! तेयी मुलती त्स्िमों वहशत जानकीजी को रे जाऊॉ । महद ऐवा करूॉ , तो बी इवभें कोई फडाई नशीॊ शै। भये शुए को भायने भें कु छ बी ऩुरुऴत्ल नशीॊ शै। लाभभागॉ, काभी, कॊ जूव, अत्मॊत भूढ़, अतत दरयद्र, फदनाभ, फशुत फूढ़ा, तनत्म का योगी, तनयॊतय क्रोधमुक्त यशने लारा, बगलान ्वलटणु वे वलभुख, लेद औय वॊतों का वलयोधी, अऩना शी ळयीय ऩोऴण कयने लारा, ऩयाई तनॊदा कयने लारा औय ऩाऩ की खान- मे ौदश प्राणी जीते शी भुयदे के वभान शैं। अये दुटट! ऐवा वल ाय कय भैं तुझे नशीॊ भायता। अफ तू भुझभें क्रोध न ऩैदा कय। अॊगद के ल न वुनकय याषव याज यालण दाॉतों वे शोठ काटकय, क्रोधधत शोकय शाथ भरता शुआ फोरा- अये नी फॊदय! अफ तू भयना शी ाशता शै! इवी वे छोटे भुॉश फडी फात कशता शै। अये भूखा फॊदय! तू त्जवके फर ऩय कडुए ल न फक यशा शै, उवभें फर, प्रताऩ, फुवद्ध अथला तेज कु छ बी नशीॊ शै। उवे गुणशीन औय भानशीन वभझकय शी तो वऩता ने लनलाव दे हदमा। उवे एक तो उवका दु्ख, उव ऩय मुलती स्िी का वलयश औय फपय यात-हदन भेया डय फना यशता शै। त्जनके फर का तुझे गला शै, ऐवे अनेकों भनुटमों को तो याषव यात-हदन खामा कयते शैं। अये भूढ़! त्जद्द छोडकय वल ाय कय। जफ उवने श्री याभजी की तनॊदा की, तफ तो कवऩश्रेटठ अॊगद अत्मॊत क्रोधधत शुए, क्मोंफक ळास्ि ऐवा कशते शैं फक जो अऩने कानों वे बगलान ्वलटणु औय सळल की तनॊदा वुनता शै, उवे गो लध के वभान ऩाऩ रगता शै। लानय श्रेटठ अॊगद फशुत जोय वे कटकटाए औय उन्शोंने तभककय जोय वे अऩने दोनों बुजदण्डों को ऩृ्ली ऩय दे भाया। तफ ऩृ्ली हशरने रगी, त्जववे फैठे शुए वबावद् धगय ऩडे औय बम रूऩी बूत वे ग्रस्त शोकय बाग रे। यालण धगयते-धगयते वॉबरकय उठा। उवके अत्मॊत वुॊदय भुकु ट ऩृ्ली ऩय धगय ऩडे। कु छ तो उवने उठाकय अऩने सवयों ऩय हठक कय यख सरए औय कु छ अॊगद ने उठाकय प्रबु श्री याभ ॊद्रजी के ऩाव पें क हदए। भुकु टों को आते देखकय लानय बागे। वो ने रगे वलधाता! क्मा हदन भें शी उल्काऩात शोने रगा ताये टूटकय धगयने रगे? अथला क्मा यालण ने क्रोध कयके ाय लज्र राए शैं, जो फडे धाए के वाथ लेग वे आ यशे शैं?। प्रबु ने उनवे शॉवकय कशा- भन भें डयो नशीॊ। मे न उल्का शैं, न लज्र शैं औय न के तु मा याशु शी शैं। अये बाई! मे तो यालण के भुकु ट शैं, जो फासरऩुि अॊगद के य पें के शुए आ यशे शैं। ऩलन ऩुि श्री शनुभान ्जी ने उछरकय उनको शाथ वे ऩकड सरमा औय राकय प्रबु के ऩाव यख हदमा। यीछ औय लानय तभाळा देखने रगे। उनका प्रकाळ वूमा के वभान था। वबा भें क्रोधमुक्त यालण वफवे क्रोधधत शोकय कशने रगा फक- फॊदय को ऩकड रो औय ऩकडकय भाय डारो। अॊगद मश वुनकय भुस्कु याने रगे। यालण फपय फोरा-इवे भायकय वफ मोद्धा तुयॊत दौडो औय जशाॉ कशीॊ यीछ-लानयों को ऩाओ, लशीॊ खा डारो। ऩृ्ली को फॊदयों वे यहशत कय दो औय जाकय दोनों तऩस्ली बाइमों याभ-रक्ष्भण को जीते जी ऩकड रो।
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    103 2019 यालण केमे कोऩबये ल न वुनकय मुलयाज अॊगद क्रोधधत शोकय फोरे- तुझे अऩने गार फजाते राज नशीॊ आती! अये तनराज्ज! अये कु रनाळक! गरा काटकय आत्भशत्मा कयके भय जा! भेया फर देखकय बी क्मा तेयी छाती नशीॊ पटती!। अये स्िी के ोय! अये कु भागा ऩय रने लारे! अये दुटट, ऩाऩ की यासळ, भन्द फुवद्ध औय काभी! तू वत्न्नऩात भें क्मा दुला न फक यशा शै? अये दुटट याषव! तू कार के लळ शो गमा शै! इवका पर तू आगे लानय औय बारुओॊ के ऩेटे रगने ऩय ऩालेगा। याभ भनुटम शैं, ऐवा ल न फोरते शी, अये असबभानी! तेयी जीबें नशीॊ धगय ऩडतीॊ?॥4॥ इवभें वॊदेश नशीॊ शै फक तेयी जीबें अके रे नशीॊ ऩय तेये सवयों के वाथ यणबूसभ भें धगयेंगी। ये दळकन्ध! त्जवने एक शी फाण वे फासर को भाय डारा, लश भनुटम कै वे शै? अये कु जातत, अये जड! फीव आॉखें शोने ऩय बी तू अॊधा शै। तेये जन्भ को धधक्काय शै। श्री याभ ॊद्रजी के फाण वभूश तेये यक्त की प्माव वे प्मावे शैं। ले प्मावे शी यश जाएॉगे इव डय वे, अये कडली फकलाद कयने लारे नी याषव! भैं तुझे छोडता शूॉ। भैं तेये दाॉत तोडने भें वभथा शूॉ। ऩय क्मा करूॉ ? श्री यघुनाथजी ने भुझे आसा नशीॊ दी। ऐवा क्रोध आता शै फक तेये दवों भुॉश तोड डारूॉ औय तेयी रॊका को ऩकडकय वभुद्र भें डुफो दूॉ। तेयी रॊका गूरय के पर के वभान शै। तुभ वफ कीडे उवके बीतय तनडय शोकय फव यशे शो। भैं फॊदय शूॉ, भुझे इव पर को खाते क्मा देय थी? ऩय कृ ऩारु श्री याभ ॊद्रजी ने लैवी आसा नशीॊ दी। अॊगद की मुत्क्त वुनकय यालण भुस्कु यामा औय फोरा-अये भूखा! फशुत झूठ फोरना तूने कशाॉ वे वीखा? फासर ने तो कबी ऐवा गार नशीॊ भाया। जान ऩडता शै तू तऩत्स्लमों वे सभरकय रफाय शो गमा शै। अॊगद ने कशा-अये फीव बुजा लारे! महद तेयी दवों जीबें भैंने नशीॊ उखाड रीॊ तो व भु भैं रफाय शी शूॉ। श्री याभ ॊद्रजी के प्रताऩ को स्भयण कयके अॊगद क्रोधधत शो उठे औय उन्शोंने यालण की वबा भें प्रण कयके दृढ़ता के वाथ ऩैय जभा हदमा। औय कशा-अये भूखा! महद तू भेया यण शटा वके तो श्री याभजी रौट जाएॉगे, भैं वीताजी को शाय गमा। यालण ने कशा- शे वफ लीयो! वुनो, ऩैय ऩकडकय फॊदय को ऩृ्ली ऩय ऩछाड दो। इॊद्रजीत, भेघनाद आहद अनेकों फरलान ्मोद्धा जशाॉ- तशाॉ वे शवऴात शोकय उठे। ले ऩूये फर वे फशुत वे उऩाम कयके झऩटते शैं। ऩय ऩैय टरता नशीॊ, तफ सवय नी ा कयके फपय अऩने-अऩने स्थान ऩय जा फैठ जाते शैं। काकबुळुत्ण्डजी कशते शैं- ले देलताओॊ के ळिु याषव फपय उठकय झऩटते शैं, ऩयन्तु शे वऩों के ळिु गरुडजी! अॊगद का यण उनवे लैवे शी नशीॊ टरता जैवे कु मोगी ऩुरुऴ भोश रूऩी लृष को नशीॊ उखाड वकते। कयोडों लीय मोद्धा जो फर भें भेघनाद के वभान थे, शवऴात शोकय उठे, ले फाय-फाय झऩटते शैं, ऩय लानय का यण नशीॊ उठता, तफ रज्जा के भाये सवय नलाकय फैठ जाते शैं। जैवे कयोडों वलघ्न आने ऩय बी वॊत का भन नीतत को नशीॊ छोडता, लैवे शी अॊगद का यण ऩृ्ली को नशीॊ छोडता। मश देखकय यालण का भद दूय शो गमा!। अॊगद का फर देखकय वफ रृदम भें शाय गए। तफ अॊगद के ररकायने ऩय यालण स्लमॊ उठा। जफ लश अॊगद का यण ऩकडने रगा, तफ फासर कु भाय अॊगद ने कशा- भेया यण ऩकडने वे तेया फ ाल नशीॊ शोगा। अये भूखा- तू जाकय श्री याभजी के यण क्मों नशीॊ ऩकडता? मश वुनकय यालण भन भें फशुत शी वकु ाकय रौट गमा। उवकी वायी श्री जाती यशी। लश ऐवा तेजशीन शो गमा जैवे भध्माह्न भें ॊद्रभा हदखाई देता शै। लश सवय नी ा कयके सवॊशावन ऩय जा फैठा। भानो वायी वम्ऩत्त्त गॉलाकय फैठा शो। श्री याभ ॊद्रजी जगत ्बय के आत्भा औय प्राणों के स्लाभी शैं। उनवे वलभुख यशने लारा ळाॊतत कै वे ऩा वकता शै? सळलजी कशते शैं-शे उभा! त्जन श्री याभ ॊद्रजी के बौंश के इळाये वे वलश्ल उत्ऩन्न शोता शै औय फपय नाळ को प्राप्त शोता शै, जो तृण को लज्र औय लज्र को तृण फना देते शैं अत्मॊत तनफार को भशान ्प्रफर औय भशान ्प्रफर को अत्मॊत तनफार कय देते शैं, उनके दूत का प्रण कशो, कै वे टर वकता शै?। फपय अॊगद ने अनेकों प्रकाय वे नीतत कशी। ऩय यालण नशीॊ भाना, क्मोंफक उवका कार तनकट आ गमा
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    104 2019 था। ळिुके गला को ूय कयके अॊगद ने उवको प्रबु श्री याभ ॊद्रजी का वुमळ वुनामा औय फपय लश याजा फासर का ऩुि मश कशकय र हदमा- यणबूसभ भें तुझे खेरा- खेराकय न भारूॉ तफ तक अबी ऩशरे वे क्मा फडाई करूॉ । अॊगद ने ऩशरे शी वबा भें आने वे ऩूला शी उवके ऩुि को भाय डारा था। लश वॊलाद वुनकय यालण दु्खी शो गमा। अॊगद का प्रण देखकय वफ याषव बम वे अत्मन्त शी व्माकु र शो गए। ळिु के फर का भदान कय, फर की यासळ फासर ऩुि अॊगदजी ने शवऴात शोकय आकय श्री याभ ॊद्रजी के यणकभर ऩकड सरए। उनका ळयीय ऩुरफकत शै औय नेिों भें आनॊदाश्रुओॊ का जर बया शै। Beautiful Stone Bracelets Natural Om Mani Padme Hum Bracelet 8 MM Rs. 415 Natural Citrine Golden Topaz Sunehla ( ) Bracelet 8 MM Rs. 415  Lapis Lazuli Bracelet  Rudraksha Bracelet  Pearl Bracelet  Smoky Quartz Bracelet  Druzy Agate Beads Bracelet  Howlite Bracelet  Aquamarine Bracelet  White Agate Bracelet  Amethyst Bracelet  Black Obsidian Bracelet  Red Carnelian Bracelet  Tiger Eye Bracelet  Lava (slag) Bracelet  Blood Stone Bracelet  Green Jade Bracelet  7 Chakra Bracelet  Amanzonite Bracelet  Amethyst Jade  Sodalite Bracelet  Unakite Bracelet  Calcite Bracelet  Yellow Jade Bracelet  Rose Quartz Bracelet  Snow Flakes Bracelet GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com www.gurutvajyotish.com and gurutvakaryalay.blogspot.com
  • 105.
    105 2019 श्री याभके सवद्धभॊि  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम :- ब :- ब ब :- :- ब :- , ब , ब :- ब :- :- ब ब :- :- :- ब :- :- ब - :-
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    106 2019 :- ब ब ब :- ब :- ब , :- बब :- ब ब :- - :- :- ब ब ब :- :- ब ब :- :- ब ब :- ब ब ब ब :- ब ब बब ब :- :- ब :- ब ब ब ब
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    107 2019 - :- :- :- ब :- :- *** 91 Multilayer Vastu Pyramid + Vastu Yantra Set For Positive Energy Balance Size 1” Inch Size 1 6” Inch Size 2” Inch 25 mm x 25 mm Rs.154 41 mm x 41 mm Rs.325 50 mm x 50 mm Rs.370 >> Order Now GURUTVA KARYALAY BHUBNESWAR-751018, (ODISHA), Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Shop Online : www.gurutvakaryalay.com
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    108 2019 याभ एलॊशनुभान भॊि  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम याभ गामिी भॊि: ॐ दाळयथमे वलद्मशे जानकी लल्रबाम धी भहश॥ तन्नो याभ् प्र ोदमात ्॥ श्री याभ भूर भॊि: ॐ ह्ाॊ ह्ीॊ याॊ याभाम नभ्॥ श्री याभ तायक भॊि: ॐ जानकीकाॊत तायक याॊ याभाम नभ्॥ याभ भॊि याॊ याभम नभ्। पर: छ् राख भॊि जऩ कयने वे मश भॊि सववद्ध शोता शैं औय इस्वे वाधक की याभ भें बत्क्त दृढ़ शोती शैं। बगलान याभ का भॊि: ॐ याभाम नभ्। दळाषय याभ भॊि: शुॊ जानकी लल्रबाम स्लाशा। पर: मश भॊि दव राख जऩने वे सवद्ध शोत शैं औय मश भॊि वबी प्रकाय वे वाधक को वपरता एल्ॊ भोष प्रदान कयने भें वशामक शैं। शये कृ टण शये कृ टण, कृ टण-कृ टण शये शये। शये याभ शये याभ, याभ-याभ शये शये। इव भॊि को तनमसभत स्नान इत्माहद वे तनलृत शोकय स्लच्छ कऩडे ऩशन कय 108 फाय जाऩ कयने वे व्मत्क्त को जीलन भे वभस्त बौततक वुखो एलॊ भोष प्रात्प्त शोती शैं। शनुभत ् गामिी भॊि: ॐ अॊजनीजाम वलद्मशे लामुऩुिाम धी भहश॥ तन्नो शनुभान प्र ोदमात ्॥ श्री शनुभान भूर भॊि: ॐ ह्ाॊ ह्ीॊ ह्ॊ ह्ैं ह्ौं ह््॥ द्वादळाषय शनुभान भॊि: शॊ शनुभते रुद्रात्भकाम शुॊ पट्। पर: वे इव भॊि के फाये ळास्िो भें लणणात शैं की मश भॊि स्लतॊत सळलजी ने श्रीकृ टण को फतामा औय श्रीकृ टण नें मश भॊि अजुान को सवद्ध कयलामा था त्जस्वे अजुान ने य-अ य जगत ् को जीत सरमा था।
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    109 2019 वीता जीको श्राऩ के पर वे लनलाव शुला?  वॊकरन गुरुत्ल कामाारम ब - ब ब ब ब ब ब ब ब ब ब ब ब ब ब ब ब ब ? ब " ! - ब ब ब ब - ब , , ब ब ब - ? ब ब ब ब ब , , ब ब
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    110 2019 ब ब ब बब , ब - ब - ब ब , ब ब ब ब - ब - ब ब ब ब ब ब - लसवि ववनामक कवच सववद्ध वलनामक कल को वलळेऴ ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे तैमाय फकमा जाता शैं, त्जववे धायण कताा के वबी प्रकाय के वलघ्न-फाधाओॊ का नाळ शो कय उवे अऩने इत्च्छत कामों भें ळीध्र वपरता की प्रात्प्त शो, श्री गणेळजी के आसळलााद वे धायण कताा को वबी ळुब कामों भें वयरता वे सववद्ध प्राप्त शो वकती शैं औय उवे वबी प्रकाय वे वुख प्राप्त शो जाते शैं। गणेळजी की कृ ऩा वे धायण कताा को वल -फुवद्ध की प्रात्प्त शोती शैं। ळास्िों भें बगलान श्री गणेळ को वभस्त सववद्धमों को देने लारा भाना गमा शै। वायी सववद्धमाॉ गणेळ भें लाव कयती शैं। बगलान श्री गणेळ अऩने बक्तो के वभस्त वलघ्न फाधाओॊ को दूय कयने लारे वलनामक शैं। कल को श्रीगणेळजी की कृ ऩा प्रात्प्त शेतु धायण कयना अत्मॊत राबप्रद भाना गमा शैं। सववद्ध वलनामक कल को बगलान श्री गणेळ को प्रवन्न कयने के सरए धायण फकमा जाता शै। Rs.1450
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    111 2019 ब : ब ब १ २ ब ३ ४ ५ ६ ब७ ८ ९ ब १० ११ १२ १३ १४ ब ब १५ १६ ब ब १७ १८ १९ २० ब २१ ब २२ २३ २४ २५ २६ २७ २८
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    112 2019 २९ ३० ३१ ३२ ब ३३ ३४ ३५ ब ३६ ३७ ३८ ब भॊि सवद्धमॊि रक्ष्भी-गणेळ (ध िमुक्त) कभरा मॊि वलातोबद्र मॊि रक्ष्भी वलनामक मॊि बुलनेश्लयी मॊि कातताके म मॊि लास्तुदोऴ तनलायण (ऩुरुऴाकृ तत मुक्त) वुमा (भुखाकृ तीमुक्त) लवुधया वलवा मॊि लास्तु मॊि (ध िमुक्त) शीॊगराज मॊि कल्माणकायी सवद्ध वलवा मॊि गृशलास्तु मॊि ब्रह्भाणी मॊि कोटा क ेयी मॊि लास्तु ळान्ती मॊि भेरडी भाता का मॊि जैन मॊि भशाकारी मॊि कात्मामनी मॊि वयस्लती मॊि (ध िमुक्त) उत्च्छटट गणऩती मॊि ऩॊदयीमा मॊि (ऩॊ दळी मॊि) फालनलीय मॊि भशा गणऩती मॊि भशावुदळान मॊि ऩॊ गुरी मॊि ळिु दभनालणा मॊि काभाख्मा मॊि वूयी भॊि ऋणभुत्क्त मॊि रक्ष्भी वॊऩुट मॊि ततजमऩशुत वलातोबद्र मॊि रक्ष्भीधाया मॊि लीवा मॊि 16 वलद्यादेली मुक्त वलातोबद्र रक्ष्भी प्राप्ती औय व्माऩायलधाक तछन्नभस्ता (ध ि + मॊि) गौतभस्लाभी मॊि सवद्ध भशारक्ष्भी मॊि घुभालती (ध ि + मॊि) अनॊतरब्धीतनधान गौतभ स्लाभी कनकधाया मॊि (कृ भऩृटट) कारी (ध ि + मॊि) बक्ताम्फय (१ वे ४८) हदगम्फय दुगाा मॊि (अॊकात्भक) श्री भातृका मॊि ऩद्मालती देली मॊि भातॊगी मॊि वलातोबद्र मॊि (गणेळ) वलजम ऩताका मॊि GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Shop @ : www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvakaryalay.in New Arrival
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    116 2019 ६८ ६९ ब ७० ७१ द्वद्व ७२ ७३ ब ब ब७४ ७५ ७६ ७७ ७८ ७९ ८० ८१ ८२ ८३ ८४ ८५ ८६ ८७ ८८ ८९ ९० ९१ ९२ ९३ ब ९४ ९५ ९६ ९७ : ९८ ९९ १०० १०१
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    117 2019 १०२ १०३ १०४ ब १०५ १०६ १०७ १०८ १०९ ११० १११ ११२ ११३ ११४ द्वद्व ११५ ११६ ११७ ११८ ११९ १२० वॊऩूणाप्राणप्रततत्टठत 22 गेज ळुद्ध स्टीर भें तनसभात अखॊडडत ऩुरुषाकाय शतन मॊर ऩुरुऴाकाय ळतन मॊि (स्टीर भें) को तीव्र प्रबालळारी फनाने शेतु ळतन की कायक धातु ळुद्ध स्टीर(रोशे) भें फनामा गमा शैं। त्जव के प्रबाल वे वाधक को तत्कार राब प्राप्त शोता शैं। महद जन्भ कुॊ डरी भें ळतन प्रततकू र शोने ऩय व्मत्क्त को अनेक कामों भें अवपरता प्राप्त शोती शै, कबी व्मलवाम भें घटा, नौकयी भें ऩयेळानी, लाशन दुघाटना, गृश क्रेळ आहद ऩयेळानीमाॊ फढ़ती जाती शै ऐवी त्स्थततमों भें प्राणप्रततत्टठत ग्रश ऩीडा तनलायक ळतन मॊि की अऩने को व्मऩाय स्थान मा घय भें स्थाऩना कयने वे अनेक राब सभरते शैं। महद ळतन की ढैमा मा वाढ़ेवाती का वभम शो तो इवे अलश्म ऩूजना ाहशए। ळतनमॊि के ऩूजन भाि वे व्मत्क्त को भृत्मु, कजा, कोटाके ळ, जोडो का ददा, फात योग तथा रम्फे वभम के वबी प्रकाय के योग वे ऩयेळान व्मत्क्त के सरमे ळतन मॊि अधधक राबकायी शोगा। नौकयी ऩेळा आहद के रोगों को ऩदौन्नतत बी ळतन द्वारा शी सभरती शै अत् मश मॊि अतत उऩमोगी मॊि शै त्जवके द्वारा ळीघ्र शी राब ऩामा जा वकता शै। भूल्म: 1225 से 8200 >> Shop Online | Order Now
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    118 2019 वीतायाभ स्तोिभ् कभर रो नौ याभ काॊ नाम्फयौ कल बूऴणौ याभ काभुाकात्न्लतौ । करुऴवॊशायौ याभ कासभतप्रदौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥१॥ भकयकु ण्डरौ याभ भौसरवेवलतौ भणणफकयीहटनौ याभ भञ्जुबावऴणौ । भनुकु रोद्भलौ याभ भानुऴोत्तभौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥२॥ वत्मवम्ऩन्नौ याभ वभयबीकयौ वलायषणौ याभ वलाबूऴणौ । वत्मभानवौ याभ वलाऩोवऴतौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥३॥ धृतसळखत्ण्डनौ याभ दीनयषकौ धृतहशभा रौ याभ हदव्मवलग्रशौ । वलवलधऩूत्जतौ याभ दीघादोमुागौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥४॥ बुलनजानुकौ याभ ऩाद ारयणौ ऩृथुसळरीभुकौ याभ ऩाऩनाङ्तघ्रकौ । ऩयभवात्त्लकौ याभ बक्तलत्वरौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥५॥ लनवलशारयणौ याभ लल्कराॊफयौ लनपरासळनौ याभ लावलाध ातौ । लयगुणाकयौ याभ लासरभदानौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥६॥ दळयथात्भजौ याभ ऩळुऩततवप्रमौ ळसळतनलासवनौ याभ वलळदभानवौ । दळभुखान्तकौ याभ तनसळतवामकौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥७॥ कभर रो नौ याभ वभयऩत्ण्डतौ बीभवलग्रशौ याभ काभवुन्दयौ । दाभबूऴणौ याभ शेभनूऩुयौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥८॥ बयतवेवलतौ याभ दुरयतभो कौ कयधृताळुगौ याभ वूकयस्तुतौ । ळयधध धायणौ याभ धीयकलध नौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥९॥ धभा ारयणौ याभ कभावाक्षषणौ धभाकाभुाखौ याभ ळभादामकौ । धभाळोसबतौ याभ कभाभोहदनौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥१०॥ नीरदेहशनौ याभ रोरकु न्दरौ कारबीकयौ याभ लासरभदानौ । करुऴशारयणौ याभ रसरतबूऴणौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥११॥ भातृनन्दनौ याभ बाद्रफारकौ भ्रातॄ वम्भतौ याभ ळिुवूदकौ । भ्रातृळेखयौ याभ वेतुनामकौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥१२॥ ळयधधफन्धनौ याभ दसरतदानलौ कु रवललधानौ याभ फरवलयात्जतौ । वोरजात्जतौ याभ फरवलयात्जतौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥१३॥ याजरषणौ याभ वलजम काङ्क्षषणौ गजलयारुशौ याभ ऩूत्जताभयौ । वलत्जतभत्वयौ याभ बत्जतलायणौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥१४॥ वलाभातनतौ याभ वलाकारयणौ गलाबञ्जनौ याभ तनवलाकायणौ । दुवलाबासवतौ याभ वलाबावकौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥१५॥ यवलकु रोद्भलौ याभ बलवलनाळकौ कानकाधश्रतौ याभ ऩादकोळकौ । यवलवुतवप्रमौ याभ कवलसबयीडडतौ यशसव नौसभ तौ वीतायाभरक्ष्भणौ ॥१६॥ याभ याघल वीता याभ याघल याभ याघल वीता याभ याघल । कृ टणके ळल याधा कृ टणके ळल कृ टणके ळल याधा कृ टणके ळल ॥१७॥ याभाटटकभ् बजे वलळेऴवुन्दयॊ वभस्तऩाऩखण्डनभ ् । स्लबक्तध त्तयञ्जनॊ वदैल याभभ मभ ् ॥ १ ॥ जटाकराऩळोसबतॊ वभस्तऩाऩनाळकभ् । स्लबक्तबीततबॊजनॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ २ ॥ तनजस्लरूऩफोधकॊ कृ ऩाकयॊ बलाऩशभ् । वभॊ सळलॊ तनयॊजनॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ ३ ॥ वदाप्रञ् कत्ल्ऩतॊ ह्मनाभरूऩलास्तलभ ् । तनयाकृ ततॊ तनयाभमॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ ४ ॥ तनटप्रऩञ् तनवलाकल्ऩतनभारॊ तनयाभमभ् ॥ ध देकरूऩवॊततॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ ५ ॥ बलात्ब्धऩोतरूऩकॊ ह्मळेऴदेशकत्ल्ऩतभ् । गुणाकयॊ कृ ऩाकयॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ ६ ॥ भशालाक्मफोधकै वलायाजभनलाक्ऩदै् । ऩयब्रह्भ व्माऩकॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ ७ ॥ सळलप्रदॊ वुखप्रदॊ बलत्च्छदॊ भ्रभाऩशभ् । वलयाजभानदैसळकॊ बजे श याभभ मभ ् ॥ ८ ॥ याभाटटकॊ ऩठतत म् वुकयॊ वुऩुण्मॊ व्मावेन बावऴतसभदॊ श्रृणुते भनुटम् । वलद्माॊ धश्रमॊ वलऩुरवौख्मभनन्तकीतता वम्प्राप्म देशवलरमे रबते भोषभ् ॥ ९ ॥ ॥ इतत श्रीव्माववलयध तॊ याभाटटकॊ वॊऩूणाभ ् ॥
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    119 2019 १ २ ३ ४ब ५ द्य - ६ ' - - - ' ब ७ - - - - - - - - - ब ८ ९ - - ११ १२ १३ १४ - - १५ १६ ' १७ - ब ब १८ - १९ ब २० - ब - ब - ब २१ - - २२ - - २३ - ब ब - २४ ब २५ २६ २७ २८
  • 120.
    120 2019 याभ न्द्रस्तुतत नभासभ बक्तलत्वरॊ कृ ऩारु ळीर कोभरॊ बजासभ ते ऩदाॊफुजॊ अकासभनाॊ स्लधाभदॊ। तनकाभ श्माभ वुॊदयॊ बलाॊफुनाथ भन्दयॊ प्रपु ल्र कॊ ज रो नॊ भदाहद दोऴ भो नॊ॥१॥ प्ररॊफ फाशु वलक्रभॊ प्रबोडप्रभेम लैबलॊ तनऴॊग ाऩ वामकॊ धयॊ त्रिरोक नामकॊ । हदनेळ लॊळ भॊडनॊ भशेळ ाऩ खॊडनॊ भुनीॊद्र वॊत यॊजनॊ वुयारय लृॊद बॊजनॊ॥२॥ भनोज लैरय लॊहदतॊ अजाहद देल वेवलतॊ वलळुद्ध फोध वलग्रशॊ वभस्त दूऴणाऩशॊ। नभासभ इॊहदया ऩततॊ वुखाकयॊ वताॊ गततॊ बजे वळत्क्त वानुजॊ ळ ी ऩतत वप्रमानुजॊ॥३॥ त्लदॊतघ्र भूर मे नया: बजत्न्त शीन भत्वया: ऩतॊतत नो बलाणाले वलतका लीध वॊकु रे। वलवलक्त लासवन: वदा बजॊतत भुक्तमे भुदा तनयस्म इॊहद्रमाहदकॊ प्रमाॊतत ते गततॊ स्लकॊ ॥४॥ तभेकभद्भुतॊ प्रबुॊ तनयीशभीश्लयॊ वलबुॊ जगद्गरुॊ ळाश्ल तॊ तुयीमभेल भेलरॊ। बजासभ बाल लल्रबॊ कु मोधगनाॊ वुदुराबा स्लबक्त कल्ऩ ऩादऩॊ वभॊ वुवेव्मभन्लशॊ॥५॥ अनूऩ रूऩ बूऩततॊ नतोडशभुवलाजा ऩततॊ प्रवीद भे नभासभ ते ऩदाब्ज बत्क्त देहश भे। ऩठॊतत मे स्लतॊ इदॊ नयादयेण ते ऩदॊ व्रजॊतत नाि वॊळमॊ त्लदीम बत्क्त वॊमुता:॥६॥ इव स्तोि का तनत्म आदयऩूलाक ऩाठ कयने वे व्मत्क्त को ऩद फक तनवॊदे् प्रात्प्त शोती शैं। याभस्तुतत श्रीयाभ न्द्र कृ ऩारु बजु भन शयण बलबम दारुणभ ् । नलकञ्ज रो न कञ्ज भुखकय कञ्जऩद कञ्जरुणभ् ॥१॥ कॊ दऩा अगणणत असभत छत्रफ नल नीर नीयज वुन्दयभ् । ऩटऩीत ऩानशुॉ तडडत रुध वुध नौसभ जनक वुतालयभ् ॥२॥ बजु दीन फन्धु हदनेळ दानल दैत्मलॊळतनकन्दनभ ् । यघुनन्द आनॊदकॊ द कोळर न्द दळयथ नन्दनभ ् ॥३॥ सवयक्रीट कु ण्डर ततरक ारु उदाय अङ्ग वलबूऴणभ् । आजानुबुज वय ाऩधय वङ्ग्राभ त्जत खयदूऴणभ ् ॥४॥ इतत लदतत तुरवीदाव ळङ्कय ळेऴ भुतन भनयञ्जनभ् । भभ रृदमकञ्ज तनलाव कु रु काभाहदखरदरभञ्जनभ ् ॥५॥ भन जाहश या ो सभरहश वोलय वशजवुन्दय वाॊलयो । करुणातनधान वुजान ळीर वनेश जानत यालयो ॥६॥ एहश बाॉतत गौरय अळीव वुतन सवम वहशत हशम शवऴात अरी । तुरवी बलातनहशॊ ऩूत्ज ऩुतन ऩुतन भुहदत भन भत्न्दय री ॥७॥ जातन गौरय अनुकू र सवम हशम शऴान् जात कहश । भञ्जुर भङ्गर भूर लाभ अङ्ग ऩयकन रगे ॥८॥ सवमालय याभ न्द्र ऩद गहश यशुॉ । उभालय ळम्बुनाथ ऩद गहश यशुॉ । भशावलय फजयॉगी ऩद गहश यशुॉ । ळयणा गतो शरय ॥
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    121 2019 जटामुकृ तयाभ स्तोिभ ् श्रीगणेळाम नभ् । जटामुरुला । अगणणतगुणभप्रभेमभाद्मॊ वकरजगत्त्स्थततवॊमभाहदशेतुभ ् । उऩयभऩयभॊऩयात्भबृतॊवततभशॊ प्रणतोऽत्स्भ याभ न्द्रभ ्॥ १ ॥ तनयलधधवुखसभॊहदयाकटाषॊ षवऩतवुयेन्द्र तुभुाखहददु्खभ ् । नयलयभतनळॊनतोऽत्स्भयाभॊ लयदभशॊ लय ाऩफाणशस्तभ ् ॥ २ ॥ त्रिबुलनकभनीमरूऩभीड्मॊ यवलळतबावुयभीहशतप्रदानभ ् । ळयणदभतनळॊ वुयागभूरे कृ ततनरमॊ यघुनन्दनॊ प्रऩद्मे ॥ ३ ॥ बलवलवऩनदलात्ग्नभधेमॊ बलभुखदैलतदैलतॊ दमारुभ ् । दनुजऩततवशस्िकोहटनाळॊ यवलतनमावदृळॊ शरयॊ प्रऩद्मे ॥ ४ ॥ अवलयतबलबालनाततदूयॊ बलवलभुखैभुातनसब् वदैल दृश्मभ ् । बलजरधधवुतायणाॊतघ्रऩोतॊ ळयणभशॊ यघुनन्दनॊ प्रऩद्मे ॥ ५ ॥ धगरयळधगरयवुतभनोतनलावॊ धगरयलयधारयणभीहशतासबयाभभ ् । वुयलयदनुजेन्द्रवेवलताॊतघ्रॊ वुयलयदॊ यघुनामकॊ प्रऩद्मे ॥ ६ ॥ ऩयधनऩयदायलत्जातानाॊ ऩयगुणबूततऴु तुटटभानवानाभ ् । ऩयहशततनयतात्भनाॊ वुवेव्मॊ यघुलयभॊफुजरो नॊ प्रऩद्मे ॥ ७ ॥ त्स्भतरुध यवलकासवताब्जभततवुरबॊ वुययाजनीरनीरभ ् । सवतजररुश ारुनेिळोबॊ यघुऩततभीळगुयोगुारुॊ प्रऩद्मे ॥ ८ ॥ शरयकभरजळॊबुरूऩबेदात्त्लभहश वलबासव गुणिमानुलृत्त् । यवलरयल जल्ऩूरयतोदऩािेटलभयऩततस्तुततऩािभीळभीडे ॥ ९ ॥ यततऩततळतकोहटवुन्दयाङ्ग ळतऩथगो यबालनावलदूयभ ्। मततऩततह्दमेवदावलबाॊतॊयघुऩततभातताशयॊ प्रबुॊ प्रऩद्मे ॥ १० ॥ इत्मेलॊ स्तुलतस्तस्म प्रवन्नोऽबूद्रघूत्तभ् । उला गच्छ बद्रॊ ते भभ वलटणो् ऩयॊ ऩदभ ् ॥ ११ ॥ श्रृतोतत म इदॊ स्तोिॊ सरखे तनमत् ऩठेत ् । व मातत भभ वारूप्मॊ भयणे भत्स्भृततॊ रबेत ् ॥ १२ ॥ इतत याघलबावऴतॊ तदा श्रुतलान् शऴावभाकु रो द्वद्वज् । यघुनन्दनवाम्मभात्स्थत् प्रममौ ब्रह्भवुऩूत्जतॊ ऩदभ ् ॥ १३ ॥ ॥ इतत श्रीभदध्मात्भयाभामणे आयण्मकाॊडे जटामुकृ तयाभस्तोिॊ वॊऩूणाभ ् ॥ भशादेल कृ त याभस्तुतत श्री भशादेल उला । नभोऽस्तु याभाम वळत्क्तकाम नीरोत्ऩरश्माभकोभराम । फकयीटशायाङ्गदबूऴणाम सवॊशावनस्थाम भशाप्रबाम ॥ १ ॥ त्लभाहदभध्माॊतवलशीन एक् स्रृजस्मलस्मत्त्व रोकजातभ ् । स्लभाममातेन नसरप्मवे त्लॊ मत्स्ले वुखेऽजस्ियतोऽनलद्म्॥ २ ॥ रीराॊ वलधत्वे गुणवॊलृतस्त्लॊ प्रवन्नबक्तानुवलधानशेतो् । नानाऽलतायै् वुयभानुऴाद्मै् प्रतीमवे सातनसबयेल तनत्मभ ् ॥ ३ ॥ स्लाॊळेन रोकॊ वकरॊ वलधाम तॊ त्रफबवऴा त्लॊ तदध् पणीश्लय् । उऩमाधो बान्लतनरोड्डऩौऴधीन्प्रकऴारूऩोलसव नैकधा जगत ् ॥४॥ त्लसभश देशबृताॊ सळणखरूऩ् ऩ सव बक्तभळेऴभजस्िभ ् । ऩलनऩॊ करूऩवशामो जगदखॊडभनेन त्रफबवऴा ॥ ५ ॥ ॊद्रवूमासळणखभध्मगतॊ मत्तेज ईळ ध दळेऴतनूनाभ ् । प्राबलत्तनुबृतासभश धैमिं ळौमाभामुयणखरॊ तल वत्त्लभ ् ॥ ६ ॥ त्लॊ वलरयत्ञ् सळलवलटणुवलबेदात्कारकभाळसळवूमावलबागात ् । लाहदनाॊ ऩृथधगलेळ वलबासव ब्रह्भ तनत्श् तभनन्महदशैकभ ् ॥ ७ ॥ भत्स्माहदरूऩेण मथा त्लभेक् श्रुतौ ऩुयाणेऴु रोकसवद्ध् । तथैल वलिं सदसद्वद्वभागस्त्वमेव नान्मद्भलतो वलबातत ॥ ८ ॥ मद्यत्वभुत्ऩन्नभनन्तवृटटालुत्ऩत्स्मते मच् बलच् मच् । न दृश्मते स्थालयजॊगभादौ त्लमा वलनाऽत् ऩयत् ऩयस्त्लभ ्॥ ९ ॥ तत्त्लॊ न जानॊतत ऩयात्भनस्ते जना् वभस्तास्तल भाममात् । त्लद्भक्तवेलाभरभानवानाॊ वलबातत तत्त्लॊ ऩयभेकभैळभ ् ॥ १० ॥ ब्रह्भादमस्ते न वलदु् स्लरूऩॊ ध दात्भतत्त्लॊ फहशयथाबाला् । ततोफुधस्त्लासभदभेल रूऩॊ बक्त्मा बजन्भुत्क्तभुऩैत्मदु्ख्॥ ११ ॥ अशॊ बलन्नाभगुणै् कृ ताथो लवासभ काश्माभतनळॊ बलान्मा । भुभूऴाभाणस्म वलभुक्तमेऽशॊ हदळासभ भॊिॊ तल याभ नाभ ॥ १२ ॥ इभॊ स्तलॊ तनत्मभनन्मबक्त्मा श्रृण्लत्न्त गामॊतत सरखॊतत मे लै । तेवव्वौख्मॊऩयभॊ रब्ध्ला बलत्ऩदॊ मात्न्त बलत्प्रवादात ्॥ १३ ॥ ॥ इतत श्रीभशादेलकृ तस्तोि वॊऩूणाभ ् ॥
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    122 2019  वॊकरनकारवऩामोग एक कटटदामक मोग ! कार का भतरफ शै भृत्मु । ज्मोततऴ के जानकायों के अनुवाय त्जव व्मत्क्त का जन्भ अळुबकायी कारवऩा मोग भे शुला शो लश व्मत्क्त जीलन बय भृत्मु के वभान कटट बोगने लारा शोता शै, व्मत्क्त जीलन बय कोइ ना कोइ वभस्मा वे ग्रस्त शोकय अळाॊत ध त शोता शै। कारवऩा मोग अळुब एलॊ ऩीडादामक शोने ऩय व्मत्क्त के जीलन को अत्मॊत दु्खदामी फना देता शै। कारसऩा मोग भतरफ तमा? जफ जन्भ कुॊ डरी भें वाये ग्रश याशु औय के तु के फी त्स्थत यशते शैं तो उववे ज्मोततऴ वलद्या के जानकाय उवे कारवऩा मोग कशा जाता शै। कारसऩा मोग ककस प्रकाय फनता है औय तमों फनता हैं? जफ 7 ग्रश याशु औय के तु के भध्म भे त्स्थत शो मश अत्च्छ त्स्थतत नहश शै। याशु औय के तु के भध्म भे फाकी वफ ग्रश आजाने वे याशु के तु अन्म ळुब ग्रशों के प्रबालों को षीण कय देते शों!, तो अळुब कारवऩा मोग फनता शै, क्मोफक ज्मोततऴ भे याशु को वऩा(वाऩ) का भुश(भुख) एलॊ के तु को ऩूॊछ कशा जाता शै। कारसऩा मोग का प्रबाव तम होता है? त्जव प्रकाय फकवी व्मत्क्त को वाऩ काट रे तो लश व्मत्क्त ळाॊतत वे नशी फेठ वकता लेवे शी कारवऩा मोग वे ऩीडडत व्मत्क्त को जीलन ऩमान्त ळायीरयक, भानसवक, आधथाक ऩयेळानी का वाभना कयना ऩडता शै। वललाश वलरम्फ वे शोता शै एलॊ वललाश के ऩश्च्मात वॊतान वे वॊफॊधी कटट जेवे उवे वॊतान शोती शी नशीॊ मा शोती शै तो योग ग्रस्त शोती शै। उवे जीलन भें फकवी न फकवी भशत्लऩूणा लस्तु का अबाल यशता शै। जातक को कारवऩा मोग के कायण वबी कामों भें अत्माधधक वॊघऴा कयना ऩडताअ शै। उवकी योजी-योटी का जुगाड बी फडी भुत्श्कर वे शो ऩाता शै। अगय जुगाड शोजामे तो रम्फे वभम तक हटकती नशी शै। फाय-फाय व्मलवाम मा नौकयी भे फदराल आते येशते शै। धनाढम घय भें ऩैदा शोने के फालजूद फकवी न फकवी लजश वे उवे अप्रत्मासळत रूऩ वे आधथाक षतत शोती यशती शै। तयश-तयश की ऩयेळानी वे तघये यशते शैं। एक वभस्मा खतभ शोते शी दूवयी ऩाल ऩवाये खडी शोजाती शै। कारवऩा मोग वे व्मत्क्त को ैन नशी सभरता उवके कामा फनते शी नशी औय फन जामे आधे भे रुक जाते शै। व्मत्क्त के 99% शो ुका कामा बी आखयी ऩरो भे अकस्भात शी रुक जात शै। ऩयॊतु मश ध्मान यशे, कारवऩा मोग लारे वबी जातकों ऩय इव मोग का वभान प्रबाल नशी ऩडता। क्मोफक फकव बाल भें कौन वी यासळ अलत्स्थत शै औय उवभें कौन-कौन ग्रश कशाॊ त्स्थत शैं औय दृत्टट कय यशे शै उस्का प्रबाल फराफर फकतना शै - इन वफ फातों का बी वॊफॊधधत जातक ऩय भशत्लऩूणा प्रबाल ऩडता शै। इवसरए भािा कारवऩा मोग वुनकय बमबीत शो जाने की जरूयत नशीॊ फत्ल्क उवका जानकाय मा कु ळर ज्मोततऴी वे ज्मोततऴीम वलश्रेऴण कयलाकय उवके प्रबालों की वलस्तृत जानकायी शासवर कय रेना शी फुवद्धभत्ता शै। जफ अवरी कायण ज्मोततऴीम वलश्रेऴण वे स्ऩटट शो जामे तो तत्कार उवका उऩाम कयना ाहशए। उऩाम वे कारवऩा मोग के कु प्रबालो को कभ फकमा जा वकता शै। महद आऩकी जन्भ कुॊ डरी भे बी अळुब कारवऩा मोग का फन यशा शो औय आऩ उवके अळुब प्रबालों वे ऩयेळान शो, तो कारवऩा मोग के अळुब प्राबालों को ळाॊत कयने के सरमे वलळेऴ अनुबूत उऩामों को अऩना कय अऩने जीलन को वुखी एलॊ वभृद्ध फनाए। *** कारवऩा ळाॊतत शेतु अनुबूत एलॊ वयर उऩाम भॊि सवद्ध कारवऩा ळाॊतत मॊि भॊि सवद्ध कारवऩा ळाॊतत क ल वलस्तृत जानकायी शेतु वॊऩका कयें। GURUTVA KARYALAY Call Us - 9338213418, 9238328785
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    123 2019 भॊि सवद्धदुराब वाभग्री कारी शल्दी:- 370, 550, 730, 1450, 1900 कभर गट्टे की भारा - Rs- 370 भामा जार- Rs- 251, 551, 751 शल्दी भारा - Rs- 280 धन लृवद्ध शकीक वेट Rs-280 (कारी शल्दी के वाथ Rs-550) तुरवी भारा - Rs- 190, 280, 370, 460 घोडे की नार- Rs.351, 551, 751 नलयत्न भारा- Rs- 1050, 1900, 2800, 3700 & Above शकीक: 11 नॊग-Rs-190, 21 नॊग Rs-370 नलयॊगी शकीक भारा Rs- 280, 460, 730 रघु श्रीपर: 1 नॊग-Rs-21, 11 नॊग-Rs-190 शकीक भारा (वात यॊग) Rs- 280, 460, 730, 910 नाग के ळय: 11 ग्राभ, Rs-145 भूॊगे की भारा Rs- 190, 280, Real -1050, 1900 & Above स्पहटक भारा- Rs- 235, 280, 460, 730, DC 1050, 1250 ऩायद भारा Rs- 1450, 1900, 2800 & Above वपे द ॊदन भारा - Rs- 460, 640, 910 लैजमॊती भारा Rs- 190, 280, 460 यक्त (रार) ॊदन - Rs- 370, 550, रुद्राष भारा: 190, 280, 460, 730, 1050, 1450 भोती भारा- Rs- 460, 730, 1250, 1450 & Above वलधुत भारा - Rs- 190, 280 कासभमा सवॊदूय- Rs- 460, 730, 1050, 1450, & Above भूल्म भें अॊतय छोटे वे फडे आकाय के कायण शैं। >> Shop Online | Order Now भॊि सवद्ध स्पहटक श्री मॊि "श्री मॊि" वफवे भशत्लऩूणा एलॊ ळत्क्तळारी मॊि शै। "श्री मॊि" को मॊि याज कशा जाता शै क्मोफक मश अत्मन्त ळुब फ़रदमी मॊि शै। जो न के लर दूवये मन्िो वे अधधक वे अधधक राब देने भे वभथा शै एलॊ वॊवाय के शय व्मत्क्त के सरए पामदेभॊद वात्रफत शोता शै। ऩूणा प्राण-प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म मुक्त "श्री मॊि" त्जव व्मत्क्त के घय भे शोता शै उवके सरमे "श्री मॊि" अत्मन्त फ़रदामी सवद्ध शोता शै उवके दळान भाि वे अन-धगनत राब एलॊ वुख की प्रात्प्त शोतत शै। "श्री मॊि" भे वभाई अहद्रततम एलॊ अद्रश्म ळत्क्त भनुटम की वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे वभथा शोतत शै। त्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय तनयाळा दूय शोकय लश भनुटम अवफ़रता वे वफ़रता फक औय तनयन्तय गतत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे वभस्त बौततक वुखो फक प्रात्प्त शोतत शै। "श्री मॊि" भनुटम जीलन भें उत्ऩन्न शोने लारी वभस्मा-फाधा एलॊ नकायात्भक उजाा को दूय कय वकायत्भक उजाा का तनभााण कयने भे वभथा शै। "श्री मॊि" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय के स्थान ऩय स्थावऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फत्न्धत ऩयेळातन भे न्मुनता आतत शै ल वुख-वभृवद्ध, ळाॊतत एलॊ ऐश्लमा फक प्रत्प्त शोती शै। >> Shop Online | Order Now गुरुत्व कामाारम भे वलसबन्न आकाय के "श्री मॊि" उप्रब्ध शै भूल्म:- प्रतत ग्राभ Rs. 28.00 से Rs.100.00 GURUTVA KARYALAY BHUBNESWAR-751018, (ODISHA), Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com
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    124 2019 वला कामासववद्ध कल त्जव व्मत्क्त को राख प्रमत्न औय ऩरयश्रभ कयने के फादबी उवे भनोलाॊतछत वपरतामे एलॊ फकमे गमे कामा भें सववद्ध (राब) प्राप्त नशीॊ शोती, उव व्मत्क्त को वला कामा सववद्ध कल अलश्म धायण कयना ाहशमे। कवच के प्रभुख राब: वला कामा सववद्ध कल के द्वारा वुख वभृवद्ध औय नव ग्रहों के नकायात्भक प्रबाल को ळाॊत कय धायण कयता व्मत्क्त के जीलन वे वला प्रकाय के दु:ख-दारयद्र का नाळ शो कय वुख-वौबाग्म एलॊ उन्नतत प्रात्प्त शोकय जीलन भे वसब प्रकाय के ळुब कामा सवद्ध शोते शैं। त्जवे धायण कयने वे व्मत्क्त महद व्मलवाम कयता शोतो कायोफाय भे लृवद्ध शोतत शैं औय महद नौकयी कयता शोतो उवभे उन्नतत शोती शैं।  वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें सवाजन वशीकयण कल के सभरे शोने की लजश वे धायण कताा की फात का दूवये व्मत्क्तओ ऩय प्रबाल फना यशता शैं।  वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें अष्ट रक्ष्भी कल के सभरे शोने की लजश वे व्मत्क्त ऩय वदा भाॊ भशा रक्ष्भी की कृ ऩा एलॊ आळीलााद फना यशता शैं। त्जस्वे भाॊ रक्ष्भी के अटट रुऩ (१)-आहद रक्ष्भी, (२)-धान्म रक्ष्भी, (३)- धैमा रक्ष्भी, (४)-गज रक्ष्भी, (५)-वॊतान रक्ष्भी, (६)- वलजम रक्ष्भी, (७)-वलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो का अळीलााद प्राप्त शोता शैं।  वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें तॊर यऺा कल के सभरे शोने की लजश वे ताॊत्रिक फाधाए दूय शोती शैं, वाथ शी नकायात्भक ळत्क्तमो का कोइ कु प्रबाल धायण कताा व्मत्क्त ऩय नशीॊ शोता। इव कल के प्रबाल वे इऴाा-द्वेऴ यखने लारे व्मत्क्तओ द्वारा शोने लारे दुटट प्रबालो वे यषा शोती शैं।  वला कामा सववद्ध कल के वाथ भें शरु ववजम कल के सभरे शोने की लजश वे ळिु वे वॊफॊधधत वभस्त ऩयेळातनओ वे स्लत् शी छु टकाया सभर जाता शैं। कल के प्रबाल वे ळिु धायण कताा व्मत्क्त का ाशकय कु छ नशी त्रफगाड वकते। अन्म कल के फाये भे अधधक जानकायी के सरमे कामाारम भें वॊऩका कये: फकवी व्मत्क्त वलळेऴ को वला कामा सववद्ध कल देने नशी देना का अॊततभ तनणाम शभाये ऩाव वुयक्षषत शैं। >> Shop Online | Order Now GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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    125 2019 श्री गणेळमॊि गणेळ मॊि वला प्रकाय की ऋवद्ध-सववद्ध प्रदाता एलॊ वबी प्रकाय की उऩरत्ब्धमों देने भें वभथा शै, क्मोकी श्री गणेळ मॊि के ऩूजन का पर बी बगलान गणऩतत के ऩूजन के वभान भाना जाता शैं। शय भनुटम को को जीलन भें वुख-वभृवद्ध की प्रात्प्त एलॊ तनमसभत जीलन भें प्राप्त शोने लारे वलसबन्न कटट, फाधा-वलघ्नों को नाव के सरए श्री गणेळ मॊि को अऩने ऩूजा स्थान भें अलश्म स्थावऩत कयना ाहशए। श्रीगणऩत्मथलाळीऴा भें लणणात शैं ॐकाय का शी व्मक्त स्लरूऩ श्री गणेळ शैं। इवी सरए वबी प्रकाय के ळुब भाॊगसरक कामों औय देलता-प्रततटठाऩनाओॊ भें बगलान गणऩतत का प्रथभ ऩूजन फकमा जाता शैं। त्जव प्रकाय वे प्रत्मेक भॊि फक ळत्क्त को फढाने के सरमे भॊि के आगें ॐ (ओभ्) आलश्म रगा शोता शैं। उवी प्रकाय प्रत्मेक ळुब भाॊगसरक कामों के सरमे बगलान ् गणऩतत की ऩूजा एलॊ स्भयण अतनलामा भाना गमा शैं। इव ऩौयाणणक भत को वबी ळास्ि एलॊ लैहदक धभा, वम्प्रदामों ने गणेळ जी के ऩूजन शेतु इव प्रा ीन ऩयम्ऩया को एक भत वे स्लीकाय फकमा शैं। श्री गणेळ मॊि के ऩूजन वे व्मत्क्त को फुवद्ध, द्ववद्या, वललेक का वलकाव शोता शैं औय योग, व्माधध एलॊ वभस्त वलध्न-फाधाओॊ का स्लत् नाळ शोता शै। श्री गणेळजी की कृ ऩा प्राप्त शोने वे व्मत्क्त के भुत्श्कर वे भुत्श्कर कामा बी आवान शो जाते शैं। त्जन रोगो को व्मलवाम-नौकयी भें वलऩयीत ऩरयणाभ प्राप्त शो यशे शों, ऩारयलारयक तनाल, आधथाक तॊगी, योगों वे ऩीडा शो यशी शो एलॊ व्मत्क्त को अथक भेशनत कयने के उऩयाॊत बी नाकाभमाफी, दु:ख, तनयाळा प्राप्त शो यशी शो, तो एवे व्मत्क्तमो की वभस्मा के तनलायण शेतु तुथॉ के हदन मा फुधलाय के हदन श्री गणेळजी की वलळेऴ ऩूजा- अ ाना कयने का वलधान ळास्िों भें फतामा शैं। त्जवके पर वे व्मत्क्त की फकस्भत फदर जाती शैं औय उवे जीलन भें वुख, वभृवद्ध एलॊ ऐश्लमा की प्रात्प्त शोती शैं। त्जव प्रकाय श्री गणेळ जी का ऩूजन अरग-अरग उद्देश्म एलॊ काभनाऩूतता शेतु फकमा जाता शैं, उवी प्रकाय श्री गणेळ मॊि का ऩूजन बी अरग-अरग उद्देश्म एलॊ काभनाऩूतता शेतु अरग-अरग फकमा जाता वकता शैं। श्री गणेळ मॊि के तनमसभत ऩूजन वे भनुटम को जीलन भें वबी प्रकाय की ऋवद्ध-सववद्ध ल धन-वम्ऩत्त्त की प्रात्प्त शेतु श्री गणेळ मॊि अत्मॊत राबदामक शैं। श्री गणेळ मॊि के ऩूजन वे व्मत्क्त की वाभात्जक ऩद-प्रततटठा औय कीतता ायों औय पै रने रगती शैं।  द्ववद्वानों का अनुबल शैं की फकवी बी ळुब कामा को प्रायॊऩ कयने वे ऩूला मा ळुबकामा शेतु घय वे फाशय जाने वे ऩूला गणऩतत मॊि का ऩूजन एलॊ दळान कयना ळुब परदामक यशता शैं। जीलन वे वभस्त वलघ्न दूय शोकय धन, आध्मात्त्भक ेतना के वलकाव एलॊ आत्भफर की प्रात्प्त के सरए भनुटम को गणेळ मॊि का ऩूजन कयना ाहशए। गणऩतत मॊि को फकवी बी भाश की गणेळ तुथॉ मा फुधलाय को प्रात: कार अऩने घय, ओफपव, व्मलवामीक स्थर ऩय ऩूजा स्थर ऩय स्थावऩत कयना ळुब यशता शैं। गुरुत्व कामाारम भें उऩरब्ध अन्म : रक्ष्भी गणेळ मॊि | गणेळ मॊि | गणेळ मॊि (वॊऩूणा फीज भॊि वहशत) | गणेळ सवद्ध मॊि | एकाषय गणऩतत मॊि | शरयद्रा गणेळ मॊि बी उऩरब्ध शैं। अधधक जानकायी आऩ शभायी लेफ वाइट ऩय प्राप्त कय वकते शैं। GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in Shop Online: www.gurutvakaryalay.com
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    126 2019 दव भशावलद्याऩूजन मॊि Das Mahavidya Poojan Yantra | Dasmahavidya Pujan Yantra दव भशावलद्या ऩूजन मॊि को देली दव भशावलद्या की ळत्क्तमों वे मुक्त अत्मॊत प्रबालळारी औय दुराब मॊि भाना गमा शैं। इव मॊि के भाध्मभ वे वाधक के ऩरयलाय ऩय दवो महाद्ववद्याओॊ का आसळलााद प्राप्त शोता शैं। दव भशावलद्या मॊि के तनमसभत ऩूजन-दळान वे भनुटम की वबी भनोकाभनाओॊ की ऩूतता शोती शैं। दव भशावलद्या मॊि वाधक की वभस्त इच्छाओॊ को ऩूणा कयने भें वभथा शैं। दव भशावलद्या मॊि भनुटम को ळत्क्तवॊऩन्न एलॊ बूसभलान फनाने भें वभथा शैं। दव भशावलद्या मॊि के श्रद्धाऩूलाक ऩूजन वे ळीघ्र देली कृ ऩा प्राप्त शोती शैं औय वाधक को दव भशावलद्या देलीमों की कृ ऩा वे वॊवाय की वभस्त सववद्धमों की प्रात्प्त वॊबल शैं। देली दव भशावलद्या की कृ ऩा वे वाधक को धभा, अथा, काभ ल् भोष तुवलाध ऩुरुऴाथों की प्रात्प्त शो वकती शैं। दव भशावलद्या मॊि भें भाॉ दुगाा के दव अलतायों का आळीलााद वभाहशत शैं, इवसरए दव भशावलद्या मॊि को के ऩूजन एलॊ दळान भाि वे व्मत्क्त अऩने जीलन को तनयॊतय अधधक वे अधधक वाथाक एलॊ वपर फनाने भें वभथा शो वकता शैं। देली के आसळलााद वे व्मत्क्त को सान, वुख, धन-वॊऩदा, ऐश्लमा, रूऩ-वौंदमा की प्रात्प्त वॊबल शैं। व्मत्क्त को लाद- वललाद भें ळिुओॊ ऩय वलजम की प्रात्प्त शोती शैं। दळ भशावलद्या को ळास्िों भें आद्या बगलती के दव बेद कशे गमे शैं, जो क्रभळ् (1) कारी, (2) ताया, (3) ऴोडळी, (4) बुलनेश्लयी, (5) बैयली, (6) तछन्नभस्ता, (7) धूभालती, (8) फगरा, (9) भातॊगी एलॊ (10) कभात्त्भका। इव वबी देली स्लरुऩों को, वत्म्भसरत रुऩ भें दळ भशावलद्या के नाभ वे जाना जाता शैं। >> Shop Online GURUTVA KARYALAY Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Shop Pnlone @ : www.gurutvakaryalay.com
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    127 2019 अभोद्य भशाभृत्मुॊजमकल अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल ल उल्रेणखत अन्म वाभग्रीमों को ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे वलद्वान ब्राह्भणो द्वारा सवा राख भहाभृत्मुॊजम भॊर जऩ एलॊ दळाॊळ शलन द्वारा तनसभात कल अत्मॊत प्रबालळारी शोता शैं। अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल कल फनलाने शेतु: अऩना नाभ, वऩता-भाता का नाभ, गोि, एक नमा पोटो बेजे कल के वलऴम भें अधधक जानकायी शेतु गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें। >> Order Now GURUTVA KARYALAY 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Website: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | श्री शनुभान मॊि ळास्िों भें उल्रेख शैं की श्री शनुभान जी को बगलान वूमादेल ने ब्रह्भा जी के आदेळ ऩय शनुभान जी को अऩने तेज का वौलाॉ बाग प्रदान कयते शुए आळीलााद प्रदान फकमा था, फक भैं शनुभान को वबी ळास्ि का ऩूणा सान दूॉगा। त्जववे मश तीनोरोक भें वला श्रेटठ लक्ता शोंगे तथा ळास्ि वलद्या भें इन्शें भशायत शासवर शोगी औय इनके वभन फरळारी औय कोई नशीॊ शोगा। जानकायो ने भतानुळाय शनुभान मॊि की आयाधना वे ऩुरुऴों की वलसबन्न फीभारयमों दूय शोती शैं, इव मॊि भें अद्भुत ळत्क्त वभाहशत शोने के कायण व्मत्क्त की स्लप्न दोऴ, धातु योग, यक्त दोऴ, लीमा दोऴ, भूछाा, नऩुॊवकता इत्माहद अनेक प्रकाय के दोऴो को दूय कयने भें अत्मन्त राबकायी शैं। अथाात मश मॊि ऩौरुऴ को ऩुटट कयता शैं। श्री शनुभान मॊि व्मत्क्त को वॊकट, लाद- वललाद, बूत-प्रेत, द्मूत फक्रमा, वलऴबम, ोय बम, याज्म बम, भायण, वम्भोशन स्तॊबन इत्माहद वे वॊकटो वे यषा कयता शैं औय सववद्ध प्रदान कयने भें वषभ शैं। श्री शनुभान मॊि के वलऴम भें अधधक जानकायी के सरमे गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें। भूल्म Rs- 325 से 12700 तक >> Shop Online | Order Now GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल दक्षषणा भाि: 10900
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    128 2019 भॊि सवद्धऩायद प्रततभा ऩायद श्री मॊि ऩायद रक्ष्भी गणेळ ऩायद रक्ष्भी नायामण ऩायद रक्ष्भी नायामण 21 Gram वे 5.250 Kg तक उऩरब्ध 100 Gram 121 Gram 100 Gram ऩायद सळलसरॊग ऩायद सळलसरॊग+नॊहद ऩायद सळलजी ऩायद कारी 21 Gram वे 5.250 Kg तक उऩरब्ध 101 Gram वे 5.250 Kg तक उऩरब्ध 75 Gram 37 Gram ऩायद दुगाा ऩायद दुगाा ऩायद वयस्लती ऩायद वयस्लती 82 Gram 100 Gram 50 Gram 225 Gram ऩायद शनुभान 2 ऩायद शनुभान 3 ऩायद शनुभान 1 ऩायद कु फेय 100 Gram 125 Gram 100 Gram 100 Gram शभायें मशाॊ वबी प्रकाय की भॊि सवद्ध ऩायद प्रततभाएॊ, सळलसरॊग, वऩयासभड, भारा एलॊ गुहटका ळुद्ध ऩायद भें उऩरब्ध शैं। त्रफना भॊि सवद्ध की शुई ऩायद प्रततभाएॊ थोक व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शैं। ज्मोततऴ, यत्न व्मलवाम, ऩूजा-ऩाठ इत्माहद षेि वे जुडे फॊधु/फशन के सरमे शभायें वलळेऴ मॊि, कल , यत्न, रुद्राष ल अन्म दुरब वाभग्रीमों ऩय वलळेऴ वुत्रफधाएॊ उऩरब्ध शैं। अधधक जानकायी शेतु वॊऩका कयें। GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Visit Us: www.gurutvakaryalay.com
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    129 2019 शभाये वलळेऴमॊि व्माऩाय वृवि मॊर: शभाये अनुबलों के अनुवाय मश मॊि व्माऩाय लृवद्ध एलॊ ऩरयलाय भें वुख वभृवद्ध शेतु वलळेऴ प्रबालळारी शैं। बूलभराब मॊर: बूसभ, बलन, खेती वे वॊफॊधधत व्मलवाम वे जुडे रोगों के सरए बूसभराब मॊि वलळेऴ राबकायी सवद्ध शुला शैं। तॊर यऺा मॊर: फकवी ळिु द्वारा फकमे गमे भॊि-तॊि आहद के प्रबाल को दूय कयने एलॊ बूत, प्रेत नज़य आहद फुयी ळत्क्तमों वे यषा शेतु वलळेऴ प्रबालळारी शैं। आकश्स्भक धन प्राश्प्त मॊर: अऩने नाभ के अनुवाय शी भनुटम को आकत्स्भक धन प्रात्प्त शेतु परप्रद शैं इव मॊि के ऩूजन वे वाधक को अप्रत्मासळत धन राब प्राप्त शोता शैं। ाशे लश धन राब व्मलवाम वे शो, नौकयी वे शो, धन-वॊऩत्त्त इत्माहद फकवी बी भाध्मभ वे मश राब प्राप्त शो वकता शैं। शभाये लऴों के अनुवॊधान एलॊ अनुबलों वे शभने आकत्स्भक धन प्रात्प्त मॊि वे ळेमय ट्रेडडॊग, वोने- ाॊदी के व्माऩाय इत्माहद वॊफॊधधत षेि वे जुडे रोगो को वलळेऴ रुऩ वे आकत्स्भक धन राब प्राप्त शोते देखा शैं। आकत्स्भक धन प्रात्प्त मॊि वे वलसबन्न स्रोत वे धनराब बी सभर वकता शैं। ऩदौन्नतत मॊर: ऩदौन्नतत मॊि नौकयी ऩैवा रोगो के सरए राबप्रद शैं। त्जन रोगों को अत्माधधक ऩरयश्रभ एलॊ श्रेटठ कामा कयने ऩय बी नौकयी भें उन्नतत अथाात प्रभोळन नशीॊ सभर यशा शो उनके सरए मश वलळेऴ राबप्रद शो वकता शैं। यत्नेववयी मॊर: यत्नेश्लयी मॊि शीये-जलाशयात, यत्न ऩत्थय, वोना- ाॊदी, ज्लैरयी वे वॊफॊधधत व्मलवाम वे जुडे रोगों के सरए अधधक प्रबाली शैं। ळेय फाजाय भें वोने- ाॊदी जैवी फशुभूल्म धातुओॊ भें तनलेळ कयने लारे रोगों के सरए बी वलळेऴ राबदाम शैं। बूलभ प्राश्प्त मॊर: जो रोग खेती, व्मलवाम मा तनलाव स्थान शेतु उत्तभ बूसभ आहद प्राप्त कयना ाशते शैं, रेफकन उव कामा भें कोई ना कोई अड न मा फाधा-वलघ्न आते यशते शो त्जव कायण कामा ऩूणा नशीॊ शो यशा शो, तो उनके सरए बूसभ प्रात्प्त मॊि उत्तभ परप्रद शो वकता शैं। गृह प्राश्प्त मॊर: जो रोग स्लमॊ का घय, दुकान, ओफपव, पै क्टयी आहद के सरए बलन प्राप्त कयना ाशते शैं। मथाथा प्रमावो के उऩयाॊत बी उनकी असबराऴा ऩूणा नशीॊ शो ऩायशी शो उनके सरए गृश प्रात्प्त मॊि वलळेऴ उऩमोगी सवद्ध शो वकता शैं। कै रास धन यऺा मॊर: कै राव धन यषा मॊि धन लृवद्ध एलॊ वुख वभृवद्ध शेतु वलळेऴ परदाम शैं। आधथाक राब एलॊ वुख वभृवद्ध शेतु 19 दुराब रक्ष्भी मॊि >> Shop Online | Order Now वलसबन्न रक्ष्भी मॊि श्री मॊि (रक्ष्भी मॊि) भशारक्ष्भमै फीज मॊि कनक धाया मॊि श्री मॊि (भॊि यहशत) भशारक्ष्भी फीवा मॊि लैबल रक्ष्भी मॊि (भशान सववद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊि) श्री मॊि (वॊऩूणा भॊि वहशत) रक्ष्भी दामक सवद्ध फीवा मॊि श्री श्री मॊि (रसरता भशात्रिऩुय वुन्दमै श्री भशारक्ष्भमैं श्री भशामॊि) श्री मॊि (फीवा मॊि) रक्ष्भी दाता फीवा मॊि अॊकात्भक फीवा मॊि श्री मॊि श्री वूक्त मॊि रक्ष्भी फीवा मॊि ज्मेटठा रक्ष्भी भॊि ऩूजन मॊि श्री मॊि (कु भा ऩृटठीम) रक्ष्भी गणेळ मॊि धनदा मॊि > Shop Online | Order Now GURUTVA KARYALAY :Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
  • 130.
    130 2019 वलासववद्धदामक भुहद्रका इवभुहद्रका भें भूॊगे को ळुब भुशूता भें त्रिधातु (वुलणा+यजत+ताॊफें) भें जडला कय उवे ळास्िोक्त वलधध- वलधान वे वलसळटट तेजस्ली भॊिो द्वारा वलासववद्धदामक फनाने शेतु प्राण-प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म मुक्त फकमा जाता शैं। इव भुहद्रका को फकवी बी लगा के व्मत्क्त शाथ की फकवी बी उॊगरी भें धायण कय वकते शैं। मशॊ भुहद्रका कबी फकवी बी त्स्थती भें अऩवलि नशीॊ शोती। इवसरए कबी भुहद्रका को उतायने की आलश्मक्ता नशीॊ शैं। इवे धायण कयने वे व्मत्क्त की वभस्माओॊ का वभाधान शोने रगता शैं। धायणकताा को जीलन भें वपरता प्रात्प्त एलॊ उन्नतत के नमे भागा प्रवस्त शोते यशते शैं औय जीलन भें वबी प्रकाय की सववद्धमाॊ बी ळीध्र प्राप्त शोती शैं। भूल्म भार- 6400/- >> Shop Online | Order Now (नोट: इव भुहद्रका को धायण कयने वे भॊगर ग्रश का कोई फुया प्रबाल वाधक ऩय नशीॊ शोता शैं।) सवालसविदामक भुहरका के ववषम भें अधधक जानकायी के लरमे हेतु सम्ऩका कयें। ऩतत-ऩत्नी भें करश तनलायण शेतु महद ऩरयलायों भें वुख-वुवलधा के वभस्त वाधान शोते शुए बी छोटी-छोटी फातो भें ऩतत-ऩत्नी के त्रफ भे करश शोता यशता शैं, तो घय के त्जतने वदस्म शो उन वफके नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्वारा ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रततत्टठत ऩूणा ैतन्म मुक्त लळीकयण कल एलॊ गृश करश नाळक डडब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भें त्रफना फकवी ऩूजा, वलधध-वलधान वे आऩ वलळेऴ राब प्राप्त कय वकते शैं। महद आऩ भॊि सवद्ध ऩतत लळीकयण मा ऩत्नी लळीकयण एलॊ गृश करश नाळक डडब्फी फनलाना ाशते शैं, तो वॊऩका आऩ कय वकते शैं। 100 वे अधधक जैन मॊि शभाये मशाॊ जैन धभा के वबी प्रभुख, दुराब एलॊ ळीघ्र प्रबालळारी मॊि ताम्र ऩि, सवरलय ( ाॊदी) ओय गोल्ड (वोने) भे उऩरब्ध शैं। शभाये मशाॊ वबी प्रकाय के मॊि कोऩय ताम्र ऩि, सवरलय ( ाॊदी) ओय गोल्ड (वोने) भे फनलाए जाते शै। इवके अराला आऩकी आलश्मकता अनुवाय आऩके द्वारा प्राप्त (ध ि, मॊि, डडज़ाईन) के अनुरुऩ मॊि बी फनलाए जाते शै. गुरुत्ल कामाारम द्वारा उऩरब्ध कयामे गमे वबी मॊि अखॊडडत एलॊ 22 गेज ळुद्ध कोऩय(ताम्र ऩि)- 99.99 ट ळुद्ध सवरलय ( ाॊदी) एलॊ 22 के येट गोल्ड (वोने) भे फनलाए जाते शै। मॊि के वलऴम भे अधधक जानकायी के सरमे शेतु वम्ऩका कयें। GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com
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    131 2019 द्वादळ भशामॊि मॊि को अतत प्राध न एलॊ दुराब मॊिो के वॊकरन वे शभाये लऴो के अनुवॊधान द्वारा फनामा गमा शैं।  ऩयभ दुराब लळीकयण मॊि,  बाग्मोदम मॊि  भनोलाॊतछत कामा सववद्ध मॊि  याज्म फाधा तनलृत्त्त मॊि  गृशस्थ वुख मॊि  ळीघ्र वललाश वॊऩन्न गौयी अनॊग मॊि  वशस्िाषी रक्ष्भी आफद्ध मॊि  आकत्स्भक धन प्रात्प्त मॊि  ऩूणा ऩौरुऴ प्रात्प्त काभदेल मॊि  योग तनलृत्त्त मॊि  वाधना सववद्ध मॊि  ळिु दभन मॊि उऩयोक्त वबी मॊिो को द्वादळ भशा मॊि के रुऩ भें ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे भॊि सवद्ध ऩूणा प्राणप्रततत्टठत एलॊ ैतन्म मुक्त फकमे जाते शैं। त्जवे स्थाऩीत कय त्रफना फकवी ऩूजा अ ाना-वलधध वलधान वलळेऴ राब प्राप्त कय वकते शैं। >> Shop Online | Order Now  क्मा आऩके फच् े कु वॊगती के सळकाय शैं?  क्मा आऩके फच् े आऩका कशना नशीॊ भान यशे शैं?  क्मा आऩके फच् े घय भें अळाॊतत ऩैदा कय यशे शैं? घय ऩरयलाय भें ळाॊतत एलॊ फच् े को कु वॊगती वे छु डाने शेतु फच् े के नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्वारा ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रततत्टठत ऩूणा ैतन्म मुक्त लळीकयण कल एलॊ एव.एन.डडब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भें स्थावऩत कय अल्ऩ ऩूजा, वलधध-वलधान वे आऩ वलळेऴ राब प्राप्त कय वकते शैं। महद आऩ तो आऩ भॊि सवद्ध लळीकयण कल एलॊ एव.एन.डडब्फी फनलाना ाशते शैं, तो वॊऩका इव कय वकते शैं। GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com
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    132 2019 वॊऩूणा प्राणप्रततत्टठत22 गेज ळुद्ध स्टीर भें तनसभात अखॊडडत ऩुरुषाकाय शतन मॊर ऩुरुऴाकाय ळतन मॊि (स्टीर भें) को तीव्र प्रबालळारी फनाने शेतु ळतन की कायक धातु ळुद्ध स्टीर(रोशे) भें फनामा गमा शैं। त्जव के प्रबाल वे वाधक को तत्कार राब प्राप्त शोता शैं। महद जन्भ कुॊ डरी भें ळतन प्रततकू र शोने ऩय व्मत्क्त को अनेक कामों भें अवपरता प्राप्त शोती शै, कबी व्मलवाम भें घटा, नौकयी भें ऩयेळानी, लाशन दुघाटना, गृश क्रेळ आहद ऩयेळानीमाॊ फढ़ती जाती शै ऐवी त्स्थततमों भें प्राणप्रततत्टठत ग्रश ऩीडा तनलायक ळतन मॊि की अऩने को व्मऩाय स्थान मा घय भें स्थाऩना कयने वे अनेक राब सभरते शैं। महद ळतन की ढैमा मा वाढ़ेवाती का वभम शो तो इवे अलश्म ऩूजना ाहशए। ळतनमॊि के ऩूजन भाि वे व्मत्क्त को भृत्मु, कजा, कोटाके ळ, जोडो का ददा, फात योग तथा रम्फे वभम के वबी प्रकाय के योग वे ऩयेळान व्मत्क्त के सरमे ळतन मॊि अधधक राबकायी शोगा। नौकयी ऩेळा आहद के रोगों को ऩदौन्नतत बी ळतन द्वारा शी सभरती शै अत् मश मॊि अतत उऩमोगी मॊि शै त्जवके द्वारा ळीघ्र शी राब ऩामा जा वकता शै। भूल्म: 1225 से 8200 >> Shop Online | Order Now वॊऩूणा प्राणप्रततत्टठत 22 गेज ळुद्ध स्टीर भें तनसभात अखॊडडत ळतन तैततवा मॊि ळतनग्रश वे वॊफॊधधत ऩीडा के तनलायण शेतु वलळेऴ राबकायी मॊि। भूल्म: 640 से 12700 >> Shop Online | Order Now GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com
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    133 2019 नलयत्न जडडतश्री मॊि ळास्ि ल न के अनुवाय ळुद्ध वुलणा मा यजत भें तनसभात श्री मॊि के ायों औय महद नलयत्न जडला ने ऩय मश नलयत्न जडडत श्री मॊि कशराता शैं। वबी यत्नो को उवके तनत्श् त स्थान ऩय जड कय र के ट के रूऩ भें धायण कयने वे व्मत्क्त को अनॊत एश्लमा एलॊ रक्ष्भी की प्रात्प्त शोती शैं। व्मत्क्त को एवा आबाव शोता शैं जैवे भाॊ रक्ष्भी उवके वाथ शैं। नलग्रश को श्री मॊि के वाथ रगाने वे ग्रशों की अळुब दळा का धायणकयने लारे व्मत्क्त ऩय प्रबाल नशीॊ शोता शैं। गरे भें शोने के कायण मॊि ऩवलि यशता शैं एलॊ स्नान कयते वभम इव मॊि ऩय स्ऩळा कय जो जर त्रफॊदु ळयीय को रगते शैं, लश गॊगा जर के वभान ऩवलि शोता शैं। इव सरमे इवे वफवे तेजस्ली एलॊ परदातम कशजाता शैं। जैवे अभृत वे उत्तभ कोई औऴधध नशीॊ, उवी प्रकाय रक्ष्भी प्रात्प्त के सरमे श्री मॊि वे उत्तभ कोई मॊि वॊवाय भें नशीॊ शैं एवा ळास्िोक्त ल न शैं। इव प्रकाय के नलयत्न जडडत श्री मॊि गुरूत्ल कामाारम द्वाया ळुब भुशूता भें प्राण प्रततत्टठत कयके फनालाए जाते शैं। Rs: 4600, 5500, 6400 वे 10,900 वे अधधक >> Shop Online | Order Now अधधक जानकायी शेतु वॊऩका कयें। GURUTVA KARYALAY 92/3BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com
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    134 2019 भॊि सवद्धलाशन दुघाटना नाळक भारुतत मॊि ऩौयाणणक ग्रॊथो भें उल्रेख शैं की भशाबायत के मुद्ध के वभम अजुान के यथ के अग्रबाग ऩय भारुतत ध्लज एलॊ भारुतत मन्ि रगा शुआ था। इवी मॊि के प्रबाल के कायण वॊऩूणा मुद्ध के दौयान शज़ायों-राखों प्रकाय के आग्नेम अस्ि-ळस्िों का प्रशाय शोने के फाद बी अजुान का यथ जया बी षततग्रस्त नशीॊ शुआ। बगलान श्री कृ टण भारुतत मॊि के इव अद्भुत यशस्म को जानते थे फक त्जव यथ मा लाशन की यषा स्लमॊ श्री भारुतत नॊदन कयते शों, लश दुघाटनाग्रस्त कै वे शो वकता शैं। लश यथ मा लाशन तो लामुलेग वे, तनफााधधत रुऩ वे अऩने रक्ष्म ऩय वलजम ऩतका रशयाता शुआ ऩशुॊ ेगा। इवी सरमे श्री कृ टण नें अजुान के यथ ऩय श्री भारुतत मॊि को अॊफकत कयलामा था। त्जन रोगों के स्कू टय, काय, फव, ट्रक इत्माहद लाशन फाय-फाय दुघाटना ग्रस्त शो यशे शो!, अनालश्मक लाशन को नुषान शो यशा शों! उन्शें शानी एलॊ दुघाटना वे यषा के उद्देश्म वे अऩने लाशन ऩय भॊि सवद्ध श्री भारुतत मॊि अलश्म रगाना ाहशए। जो रोग ट्रान्स्ऩोहटिंग (ऩरयलशन) के व्मलवाम वे जुडे शैं उनको श्रीभारुतत मॊि को अऩने लाशन भें अलश्म स्थावऩत कयना ाहशए, क्मोफक, इवी व्मलवाम वे जुडे वैकडों रोगों का अनुबल यशा शैं की श्री भारुतत मॊि को स्थावऩत कयने वे उनके लाशन अधधक हदन तक अनालश्मक ख ो वे एलॊ दुघाटनाओॊ वे वुयक्षषत यशे शैं। शभाया स्लमॊका एलॊ अन्म वलद्वानो का अनुबल यशा शैं, की त्जन रोगों ने श्री भारुतत मॊि अऩने लाशन ऩय रगामा शैं, उन रोगों के लाशन फडी वे फडी दुघाटनाओॊ वे वुयक्षषत यशते शैं। उनके लाशनो को कोई वलळेऴ नुक्ळान इत्माहद नशीॊ शोता शैं औय नाशीॊ अनालश्मक रुऩ वे उवभें खयाफी आतत शैं। वास्तु प्रमोग भें भारुतत मॊर: मश भारुतत नॊदन श्री शनुभान जी का मॊि शै। महद कोई जभीन त्रफक नशीॊ यशी शो, मा उव ऩय कोई लाद-वललाद शो, तो इच्छा के अनुरूऩ लशॉ जभीन उध त भूल्म ऩय त्रफक जामे इव सरमे इव भारुतत मॊि का प्रमोग फकमा जा वकता शैं। इव भारुतत मॊि के प्रमोग वे जभीन ळीघ्र त्रफक जाएगी मा वललादभुक्त शो जाएगी। इव सरमे मश मॊि दोशयी ळत्क्त वे मुक्त शै। भारुतत मॊि के वलऴम भें अधधक जानकायी के सरमे गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें। भूल्म Rs- 325 से 12700 तक श्री शनुभान मॊि ळास्िों भें उल्रेख शैं की श्री शनुभान जी को बगलान वूमादेल ने ब्रह्भा जी के आदेळ ऩय शनुभान जी को अऩने तेज का वौलाॉ बाग प्रदान कयते शुए आळीलााद प्रदान फकमा था, फक भैं शनुभान को वबी ळास्ि का ऩूणा सान दूॉगा। त्जववे मश तीनोरोक भें वला श्रेटठ लक्ता शोंगे तथा ळास्ि वलद्या भें इन्शें भशायत शासवर शोगी औय इनके वभन फरळारी औय कोई नशीॊ शोगा। जानकायो ने भतानुवाय शनुभान मॊि की आयाधना वे ऩुरुऴों की वलसबन्न फीभारयमों दूय शोती शैं, इव मॊि भें अद्भुत ळत्क्त वभाहशत शोने के कायण व्मत्क्त की स्लप्न दोऴ, धातु योग, यक्त दोऴ, लीमा दोऴ, भूछाा, नऩुॊवकता इत्माहद अनेक प्रकाय के दोऴो को दूय कयने भें अत्मन्त राबकायी शैं। अथाात मश मॊि ऩौरुऴ को ऩुटट कयता शैं। श्री शनुभान मॊि व्मत्क्त को वॊकट, लाद-वललाद, बूत-प्रेत, द्मूत फक्रमा, वलऴबम, ोय बम, याज्म बम, भायण, वम्भोशन स्तॊबन इत्माहद वे वॊकटो वे यषा कयता शैं औय सववद्ध प्रदान कयने भें वषभ शैं। श्री शनुभान मॊि के वलऴम भें अधधक जानकायी के सरमे गुरुत्ल कामाारम भें वॊऩका कयें। भूल्म Rs- 910 से 12700 तक GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, >> Shop Online | Order Now
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    135 2019 ववलबन्न देवताओॊके मॊर गणेश मॊर भशाभृत्मुॊजम मॊि याभ यषा मॊि याज गणेश मॊर (सॊऩूणा फीज भॊर सहहत) भशाभृत्मुॊजम कल मॊि याभ मॊि गणेश लसि मॊर भशाभृत्मुॊजम ऩूजन मॊि द्वादळाषय वलटणु भॊि ऩूजन मॊि एकाऺय गणऩतत मॊर भशाभृत्मुॊजम मुक्त सळल खप्ऩय भाशा सळल मॊि वलटणु फीवा मॊि हरयरा गणेश मॊर सळल ऩॊ ाषयी मॊि गरुड ऩूजन मॊि कु फेय मॊर सळल मॊि ध ॊताभणी मॊि याज श्री द्वादशाऺयी रुर ऩूजन मॊर अद्वद्वतीम वलाकाम्म सववद्ध सळल मॊि ध ॊताभणी मॊि दत्तारम मॊर नृसवॊश ऩूजन मॊि स्लणााकऴाणा बैयल मॊि दत्त मॊर ऩॊ देल मॊि शनुभान ऩूजन मॊि आऩदुिायण फटुक बैयव मॊर वॊतान गोऩार मॊि शनुभान मॊि फटुक मॊर श्री कृ टण अटटाषयी भॊि ऩूजन मॊि वॊकट भो न मॊि व्मॊकटेश मॊर कृ टण फीवा मॊि लीय वाधन ऩूजन मॊि कातावीमााजुान ऩूजन मॊर वला काभ प्रद बैयल मॊि दक्षषणाभूतता ध्मानभ ् मॊि भनोकाभना ऩूतता एवॊ कष्ट तनवायण हेतु ववशेष मॊर व्माऩाय वृवि कायक मॊर अभृत तत्ल वॊजीलनी कामा कल्ऩ मॊि िम ताऩोंवे भुत्क्त दाता फीवा मॊि व्माऩाय वृवि मॊर वलजमयाज ऩॊ दळी मॊि भधुभेश तनलायक मॊि व्माऩाय वधाक मॊर वलद्यामळ वलबूतत याज वम्भान प्रद सवद्ध फीवा मॊि ज्लय तनलायण मॊि व्माऩायोन्नतत कायी लसि मॊर वम्भान दामक मॊि योग कटट दरयद्रता नाळक मॊि बाग्म वधाक मॊर वुख ळाॊतत दामक मॊि योग तनलायक मॊि स्वश्स्तक मॊर फारा मॊि तनाल भुक्त फीवा मॊि सवा कामा फीसा मॊर फारा यषा मॊि वलद्मुत भानव मॊि कामा लसवि मॊर गबा स्तम्बन मॊि गृश करश नाळक मॊि सुख सभृवि मॊर वॊतान प्रात्प्त मॊि करेळ शयण फत्त्तवा मॊि सवा रयवि लसवि प्रद मॊर प्रवूता बम नाळक मॊि लळीकयण मॊि सवा सुख दामक ऩैंसहठमा मॊर प्रवल-कटटनाळक ऩॊ दळी मॊि भोहशतन लळीकयण मॊि ऋवि लसवि दाता मॊर ळाॊतत गोऩार मॊि कणा वऩळा नी लळीकयण मॊि सवा लसवि मॊर त्रिळूर फीळा मॊि लाताारी स्तम्बन मॊि साफय लसवि मॊर ऩॊ दळी मॊि (फीवा मॊि मुक्त ायों प्रकायके ) लास्तु मॊि शाफयी मॊर फेकायी तनलायण मॊि श्री भत्स्म मॊि लसिाश्रभ मॊर ऴोडळी मॊि लाशन दुघाटना नाळक मॊि ज्मोततष तॊर ऻान ववऻान प्रद लसि फीसा मॊर अडवहठमा मॊि प्रेत-फाधा नाळक मॊि ब्रह्भाण्ड साफय लसवि मॊर अस्वीमा मॊि बूतादी व्माधधशयण मॊि कु ण्डलरनी लसवि मॊर ऋवद्ध कायक मॊि कटट तनलायक सववद्ध फीवा मॊि क्राश्न्त औय श्रीवधाक चौंतीसा मॊर भन लाॊतछत कन्मा प्रात्प्त मॊि बम नाळक मॊि श्री ऺेभ कल्माणी लसवि भहा मॊर वललाशकय मॊि स्लप्न बम तनलायक मॊि
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    136 2019 ऻान दाताभहा मॊर रग्न वलघ्न तनलायक मॊि कु दृत्टट नाळक मॊि कामा कल्ऩ मॊर रग्न मोग मॊि श्री ळिु ऩयाबल मॊि दीधाामु अभृत तत्व सॊजीवनी मॊर दरयद्रता वलनाळक मॊि ळिु दभनाणाल ऩूजन मॊि भॊर लसि ववशेष दैवी मॊर सूधच आद्य शश्तत दुगाा फीसा मॊर (अॊफाजी फीसा मॊर) वयस्लती मॊि भहान शश्तत दुगाा मॊर (अॊफाजी मॊर) वप्तवती भशामॊि(वॊऩूणा फीज भॊि वहशत) नव दुगाा मॊर कारी मॊि नवाणा मॊर (चाभुॊडा मॊर) श्भळान कारी ऩूजन मॊि नवाणा फीसा मॊर दक्षषण कारी ऩूजन मॊि चाभुॊडा फीसा मॊर ( नवग्रह मुतत) वॊकट भोध नी कासरका सववद्ध मॊि त्ररशूर फीसा मॊर खोडडमाय मॊि फगरा भुखी मॊर खोडडमाय फीवा मॊि फगरा भुखी ऩूजन मॊर अन्नऩूणाा ऩूजा मॊि याज याजेववयी वाॊिा कल्ऩरता मॊर एकाॊषी श्रीपर मॊि भॊर लसि ववशेष रक्ष्भी मॊर सूधच श्री मॊर (रक्ष्भी मॊर) भशारक्ष्भमै फीज मॊि श्री मॊर (भॊर यहहत) भशारक्ष्भी फीवा मॊि श्री मॊर (सॊऩूणा भॊर सहहत) रक्ष्भी दामक सवद्ध फीवा मॊि श्री मॊर (फीसा मॊर) रक्ष्भी दाता फीवा मॊि श्री मॊर श्री सूतत मॊर रक्ष्भी गणेळ मॊि श्री मॊर (कु भा ऩृष्ठीम) ज्मेटठा रक्ष्भी भॊि ऩूजन मॊि रक्ष्भी फीसा मॊर कनक धाया मॊि श्री श्री मॊर (श्रीश्री रलरता भहात्ररऩुय सुन्दमै श्री भहारक्ष्भमैं श्री भहामॊर) लैबल रक्ष्भी मॊि (भशान सववद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊि) अॊकात्भक फीसा मॊर ताम्र ऩर ऩय सुवणा ऩोरीस (Gold Plated) ताम्र ऩर ऩय यजत ऩोरीस (Silver Plated) ताम्र ऩर ऩय (Copper) वाईज भूल्म वाईज भूल्म वाईज भूल्म 1” X 1” 2” X 2” 3” X 3” 4” X 4” 6” X 6” 9” X 9” 12” X12” 550 910 1450 2350 3700 9100 12700 1” X 1” 2” X 2” 3” X 3” 4” X 4” 6” X 6” 9” X 9” 12” X12” 370 640 1050 1450 2800 4600 9100 1” X 1” 2” X 2” 3” X 3” 4” X 4” 6” X 6” 9” X 9” 12” X12” 325 550 910 1225 2350 4150 9100 मॊर के ववषम भें अधधक जानकायी हेतु सॊऩका कयें। >> Shop Online | Order Now GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com
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    137 2019 2019 भासवकऩॊ ाॊग Panchang दद वार माह पक्ष द्विद्वि समाद्वि नक्षत्र समाद्वि योग समाद्वि करण समाद्वि चंद्र राद्वश समाद्वि 1 वोभ ैि कृ टण एकादळी 06:04 धतनटठा 21:53 वाध्म 20:28 कौरल 19:09 भकय 08:22 2 भॊगर ैि कृ टण द्वादळी 08:26 ळतसबऴा 24:48 ळुब 21:18 तैततर 08:26 कुॊ ब - 3 फुध ैि कृ टण िमोदळी 10:48 ऩूलााबाद्रऩद 27:24 ळुक्र 21:52 लणणज 10:48 कुॊ ब 20:48 4 गुरु ैि कृ टण तुदाळी 12:47 उत्तयाबाद्रऩद 29:35 ब्रह्भ 22:08 ळकु तन 12:47 भीन - 5 ळुक्र ैि कृ टण अभालस्मा 14:20 येलतत - इन्द्र 22:05 भघा 14:20 भीन - 6 ळतन ैि ळुक्र प्रततऩदा 15:27 येलतत 07:22 लैधृतत 21:42 फल 15:27 भीन 07:23 7 यवल ैि ळुक्र द्वद्वतीमा 16:08 अत्श्लनी 08:44 वलऴकुॊ ब 21:00 कौरल 16:08 भेऴ - 8 वोभ ैि ळुक्र तृतीमा 16:25 बयणी 09:42 प्रीतत 20:00 गय 16:25 भेऴ 15:54 9 भॊगर ैि ळुक्र तुथॉ 16:19 कृ ततका 10:18 आमुटभान 18:44 वलत्टट 16:19 लृऴ - 10 फुध ैि ळुक्र ऩॊ भी 15:50 योहशणण 10:33 वौबाग्म 17:10 फारल 15:50 लृऴ 22:33 11 गुरु ैि ळुक्र ऴटठी 14:57 भृगसळया 10:25 ळोबन 15:18 तैततर 14:57 सभथुन - 12 ळुक्र ैि ळुक्र वप्तभी 13:39 आद्रा 09:53 अततगॊड 13:08 लणणज 13:39 सभथुन - 13 ळतन ैि ळुक्र अटटभी 11:56 ऩुनलावु 08:58 वुकभाा 10:39 फल 11:56 सभथुन 03:15 14 यवल ैि ळुक्र नलभी- दळभी 09:49 ऩुटम 07:39 धृतत 07:52 कौरल 09:49 कका -
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    138 2019 15 वोभैि ळुक्र दळभी - एकादळी 07:20- 04:33 भघा 28:0 गॊड 25:28 गय 07:20 कका 06:00 16 भॊगर ैि ळुक्र द्वादळी 03:34 ऩूलाापाल्गुनी 25:50 लृवद्ध 21:58 फल 15:05 सवॊश - 17 फुध ैि ळुक्र िमोदळी 22:29 उत्तयापाल्गुनी 23:35 ध्रुल 18:24 कौरल 12:02 सवॊश 07:17 18 गुरु ैि ळुक्र तुदाळी 19:29 शस्त 21:25 व्माघात 14:53 गय 08:58 कन्मा - 19 ळुक्र ैि ळुक्र ऩूणणाभा 16:41 ध िा 19:29 शऴाण 11:31 वलत्टट 06:03 कन्मा 08:25 20 ळतन लैळाख कृ टण एकभ 14:17 स्लाती 17:57 लज्र 08:26 कौरल 14:17 तुरा - 21 यवल लैळाख कृ टण द्वद्वतीमा 12:26 वलळाखा 17:00 व्मततऩात 27:37 गय 12:26 तुरा 11:12 22 वोभ लैळाख कृ टण तृतीमा 11:15 अनुयाधा 16:45 लरयमान 26:5 वलत्टट 11:15 लृत्श् क - 23 भॊगर लैळाख कृ टण तुथॉ 10:51 जेटठा 17:16 ऩरयग्रश 25:10 फारल 10:51 लृत्श् क 17:17 24 फुध लैळाख कृ टण ऩॊ भी 11:16 भूर 18:34 सळल 24:53 तैततर 11:16 धनु - 25 गुरु लैळाख कृ टण ऴटठी 12:28 ऩूलााऴाढ़ 20:36 सवद्ध 25:9 लणणज 12:28 धनु - 26 ळुक्र लैळाख कृ टण वप्तभी 14:20 उत्तयाऴाढ़ 23:13 वाध्म 25:50 फल 14:20 धनु 03:14 27 ळतन लैळाख कृ टण अटटभी 16:41 श्रलण 26:12 ळुब 26:46 कौरल 16:41 भकय - 28 यवल लैळाख कृ टण नलभी 19:14 धतनटठा 29:17 ळुक्र 27:47 तैततर 05:57 भकय 15:46 29 वोभ लैळाख कृ टण दळभी 21:46 ळतसबऴा .... ब्रह्भ 28:41 लणणज 08:32 कुॊ ब - 30 भॊगर लैळाख कृ टण एकादळी 24:03 ळतसबऴा 08:14 इन्द्र 29:20 फल 10:57 कुॊ ब -
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    139 2019 2019 भासवकव्रत-ऩला-त्मौशाय हद वाय भाह ऩऺ ततधथ सभाश्प्त प्रभुख व्रत-त्मोहाय 1 वोभ ैि कृ टण एकादळी 06:04 ऩाऩभो नी एकादळी, भूखा हदलव 2 भॊगर ैि कृ टण द्वादळी 08:26 भशाद्वादळी, प्रदोऴ व्रत, बौभ प्रदोऴ व्रत, 3 फुध ैि कृ टण िमोदळी 10:48 भासवक सळल तुदाळी व्रत/ सळलयात्रि व्रत, गॊगा लरूणा वॊगभ ऩय स्नान, दभनोत्वल, भधुश्रला िमोदळी, 4 गुरु ैि कृ टण तुदाळी 12:47 श्राद्ध-तऩाण इत्माहद शेतु उत्तभ ैिी अभालस्मा 5 ळुक्र ैि कृ टण अभालस्मा 14:20 व्रत-स्नान-दान श्राद्ध शेतु उत्तभ ैिी अभालस्मा, आज के हदन गॊगा स्नान वे वशस्ि गामों के दान का पर प्राप्त शोता शै 2075 (वलयोधकृ त) वलक्रभीम वभाप्त, अन्लाधान, 6 ळतन ैि ळुक्र प्रततऩदा 15:27 ैि भाव ळुक्र ऩष आयम्ब, ैि लावत्न्तक नलयािायम्ब, वलक्रभ वम्लत ् 2076 (ऩरयधाली) प्रायम्ब, करळ स्थाऩन, ध्लजायोशण, लऴाऩतत ऩूजा, कल्ऩाहद, आयोग्म व्रत, वल व्रत, नल वम्लत्वयोत्वल, गुडी ऩडला, उगाहद, ॊद्र दळान , लवॊत ऋतू 7 यवल ैि ळुक्र द्वद्वतीमा 16:08 गणगौय, गणगौयी व्रत, वौबाग्म ळमन तृतीमा, वामॊ दोरारुढ़ सळल गौयी ऩूजन, वयशुर (त्रफशाय), भनोयथ तृतीमा व्रत, अरून्धती व्रत- ऩूजन, भन्लाहद, याटट्रीम ैि भावायम्ब, याटट्रीम ळक वम्लत ् 1941 प्रायम्ब, 8 वोभ ैि ळुक्र तृतीमा 16:25 गणगौय, गणगौयी व्रत, वौबाग्म वुॊदयी व्रत 9 भॊगर ैि ळुक्र तुथॉ 16:19 लयद तुथॉ, लैनामकी श्री गणेळ तुथॉ व्रत, ( ॊद्र अस्त यात 08: 94 फजे) 10 फुध ैि ळुक्र ऩॊ भी 15:50 ऩॊ भी, कल्ऩाहद, डोरोत्वल, श्री वूमा ऴटठी व्रत (वामान्शव्मावऩनी ऴटठी भें), 11 गुरु ैि ळुक्र ऴटठी 14:57 स्कन्द ऴटठी व्रत, श्री अळोक ऴटठी व्रत (ऩ.फॊ), 12 ळुक्र ैि ळुक्र वप्तभी 13:39 लावन्ती दुगाा ऩूजायम्ब, भध्माह्न कारीन भशातनळा ऩूजा, श्री दुगााटटभी, बलानी उत्ऩत्त्त, अळोक कसरका प्राळन, श्री भशाटटभी 8 व्रत, श्री अळोकाटटभी, अन्नऩूणाा ऩूजन 13 ळतन ैि ळुक्र अटटभी 11:56 वूमोदम कारीन श्री दुगााटटभी, बलानी उत्ऩत्त्त, अळोक कसरका प्राळन, श्री भशाटटभी 8 व्रत, श्री अळोकाटटभी, अन्नऩूणाा ऩूजन भध्माह्न कारीन श्री याभनलभी व्रत, श्री दुगाानलभी, श्री याभ-जन्भ भशोत्वल, ताया जमन्ती, ैि नलयाि वभाप्त, ऩुटम नषि 08:58 फजे
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    140 2019 वे 14 यवलैि ळुक्र नलभी- दळभी 09:49 वूमोदम कारीन याभनलभी व्रत, श्री दुगाानलभी, श्री याभ-जन्भ भशोत्वल, ताया जमन्ती, ैि नलयाि वभाप्त, ऩुटम नषि 07:40 फजे तक, वूमा की भेऴ वॊक्रात्न्त का वाभान्म ऩुण्मकार वूमोदम वे वूमाास्त तक, खय (भीन) भाव वभाप्त, नलयाि व्रत का ऩायण, श्री धभायाज दळभी, यवल दळभी ऩला, 15 वोभ ैि ळुक्र दळभी - एकादळी 07:20- 04:33 काभदा एकादळी व्रत, 16 भॊगर ैि ळुक्र द्वादळी 03:34 श्री वलटणु दोरोत्वल, भदन द्वादळी, प्रदोऴ व्रत, शरय दभनोत्वल, लाभन द्वादळी, प्रदोऴ व्रत, 17 फुध ैि ळुक्र िमोदळी 22:29 प्रदोऴ व्रत, श्री भशालीय जमन्ती (जैन), अनॊग िमोदळी व्रत, 18 गुरु ैि ळुक्र तुदाळी 19:29 दभनक तुदाळी 19 ळुक्र ैि ळुक्र ऩूणणाभा 16:41 स्नान-दान-व्रत इत्माहद शेतु उत्तभ ैिी ऩूणणाभा, ाॊडक ऩूजा (ऩ.फॊ), अन्लाधान, भन्लाहद, वलादेल दभनकोत्वल, श्री शनुभान जमॊती, लैळाख भावीम व्रत-मभ-तनमभाहद प्रायम्ब, 20 ळतन लैळाख कृ टण एकभ 14:17 लैळाख कृ टण ऩषायम्ब, 21 यवल लैळाख कृ टण द्वद्वतीमा 12:26 आळा द्वद्वतीमा 22 वोभ लैळाख कृ टण तृतीमा 11:15 वॊकटटी श्री गणेळ तुथॉ व्रत, ( न्द्रोदम.या.20.04), 23 भॊगर लैळाख कृ टण तुथॉ 10:51 - 24 फुध लैळाख कृ टण ऩॊ भी 11:16 - 25 गुरु लैळाख कृ टण ऴटठी 12:28 - 26 ळुक्र लैळाख कृ टण वप्तभी 14:20 श्री ळीतरावप्तभी व्रत,, काराटटभी, बानु वप्तभी 27 ळतन लैळाख कृ टण अटटभी 16:41 श्री ळीतराटटभी व्रत, अटटका, काराटटभी 28 यवल लैळाख कृ टण नलभी 19:14 त्ण्डका नलभी व्रत 29 वोभ लैळाख कृ टण दळभी 21:46 - 30 भॊगर लैळाख कृ टण एकादळी 24:03 लरुधथनी एकादळी व्रत वफका,
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    141 2019 यासळ यत्न भेऴयासळ: लृऴब यासळ: सभथुन यासळ: कका यासळ: सवॊश यासळ: कन्मा यासळ: भूॊगा शीया ऩन्ना भोती भाणेक ऩन्ना Red Coral (Special) Diamond (Special) Green Emerald (Special) Naturel Pearl (Special) Ruby (Old Berma) (Special) Green Emerald (Special) 5.25" Rs. 1050 10 cent Rs. 4100 5.25" Rs. 9100 5.25" Rs. 910 2.25" Rs. 12500 5.25" Rs. 9100 6.25" Rs. 1250 20 cent Rs. 8200 6.25" Rs. 12500 6.25" Rs. 1250 3.25" Rs. 15500 6.25" Rs. 12500 7.25" Rs. 1450 30 cent Rs. 12500 7.25" Rs. 14500 7.25" Rs. 1450 4.25" Rs. 28000 7.25" Rs. 14500 8.25" Rs. 1800 40 cent Rs. 18500 8.25" Rs. 19000 8.25" Rs. 1900 5.25" Rs. 46000 8.25" Rs. 19000 9.25" Rs. 2100 50 cent Rs. 23500 9.25" Rs. 23000 9.25" Rs. 2300 6.25" Rs. 82000 9.25" Rs. 23000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs. 28000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs. 28000 ** All Weight In Rati All Diamond are Full White Colour. ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati तुरा यासळ: लृत्श् क यासळ: धनु यासळ: भकय यासळ: कुॊ ब यासळ: भीन यासळ: शीया भूॊगा ऩुखयाज नीरभ नीरभ ऩुखयाज Diamond (Special) Red Coral (Special) Y.Sapphire (Special) B.Sapphire (Special) B.Sapphire (Special) Y.Sapphire (Special) 10 cent Rs. 4100 5.25" Rs. 1050 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 20 cent Rs. 8200 6.25" Rs. 1250 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 30 cent Rs. 12500 7.25" Rs. 1450 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 40 cent Rs. 18500 8.25" Rs. 1800 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 50 cent Rs. 23500 9.25" Rs. 2100 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 All Diamond are Full White Colour. ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati * उऩमोक्त लजन औय भूल्म वे अधधक औय कभ लजन औय भूल्म के यत्न एलॊ उऩयत्न बी शभाये मशा व्माऩायी भूल्म ऩय उप्रब्ध शैं। >> Shop Online | Order Now GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Shop Online @ : www.gurutvakaryalay.com
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    142 2019 श्रीकृ टणफीवा मॊि फकवी बी व्मत्क्त का जीलन तफ आवान फन जाता शैं जफ उवके ायों औय का भाशोर उवके अनुरुऩ उवके लळ भें शों। जफ कोई व्मत्क्त का आकऴाण दुवयो के उऩय एक ुम्फकीम प्रबाल डारता शैं, तफ रोग उवकी वशामता एलॊ वेला शेतु तत्ऩय शोते शै औय उवके प्राम् वबी कामा त्रफना अधधक कटट ल ऩयेळानी वे वॊऩन्न शो जाते शैं। आज के बौततकता लाहद मुग भें शय व्मत्क्त के सरमे दूवयो को अऩनी औय खी ने शेतु एक प्रबालळासर ुॊफकत्ल को कामभ यखना अतत आलश्मक शो जाता शैं। आऩका आकऴाण औय व्मत्क्तत्ल आऩके ायो ओय वे रोगों को आकवऴात कये इव सरमे वयर उऩाम शैं, श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर। क्मोफक बगलान श्री कृ टण एक अरौफकल एलॊ हदलम ुॊफकीम व्मत्क्तत्ल के धनी थे। इवी कायण वे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर के ऩूजन एलॊ दळान वे आकऴाक व्मत्क्तत्ल प्राप्त शोता शैं। श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर के वाथ व्मत्क्तको दृढ़ इच्छा ळत्क्त एलॊ उजाा प्राप्त शोती शैं, त्जस्वे व्मत्क्त शभेळा एक बीड भें शभेळा आकऴाण का कें द्र यशता शैं। महद फकवी व्मत्क्त को अऩनी प्रततबा ल आत्भवलश्लाव के स्तय भें लृवद्ध, अऩने सभिो ल ऩरयलायजनो के त्रफ भें रयश्तो भें वुधाय कयने की ईच्छा शोती शैं उनके सरमे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर का ऩूजन एक वयर ल वुरब भाध्मभ वात्रफत शो वकता शैं। श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर ऩय अॊफकत ळत्क्तळारी वलळेऴ येखाएॊ, फीज भॊि एलॊ अॊको वे व्मत्क्त को अद्द्भुत आॊतरयक ळत्क्तमाॊ प्राप्त शोती शैं जो व्मत्क्त को वफवे आगे एलॊ वबी षेिो भें अग्रणणम फनाने भें वशामक सवद्ध शोती शैं। श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर के ऩूजन ल तनमसभत दळान के भाध्मभ वे बगलान श्रीकृ टण का आळीलााद प्राप्त कय वभाज भें स्लमॊ का अद्वद्वतीम स्थान स्थावऩत कयें। श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर अरौफकक ब्रह्भाॊडीम उजाा का वॊ ाय कयता शैं, जो एक प्राकृ त्त्त भाध्मभ वे व्मत्क्त के बीतय वद्दबालना, वभृवद्ध, वपरता, उत्तभ स्लास््म, मोग औय ध्मान के सरमे एक ळत्क्तळारी भाध्मभ शैं!  श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर के ऩूजन वे व्मत्क्त के वाभात्जक भान-वम्भान ल ऩद-प्रततटठा भें लृवद्ध शोती शैं।  वलद्वानो के भतानुवाय श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर के भध्मबाग ऩय ध्मान मोग कें हद्रत कयने वे व्मत्क्त फक ेतना ळत्क्त जाग्रत शोकय ळीघ्र उच् स्तय को प्राप्तशोती शैं।  जो ऩुरुऴों औय भहशरा अऩने वाथी ऩय अऩना प्रबाल डारना ाशते शैं औय उन्शें अऩनी औय आकवऴात कयना ाशते शैं। उनके सरमे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर उत्तभ उऩाम सवद्ध शो वकता शैं।  ऩतत-ऩत्नी भें आऩवी प्रभ की लृवद्ध औय वुखी दाम्ऩत्म जीलन के सरमे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊर राबदामी शोता शैं। भूल्म:- Rs. 910 वे Rs. 12700 तक उप्रब्द्ध >> Shop Online श्रीकृ टण फीवा कल श्रीकृ टण फीवा कल को के लर वलळेऴ ळुब भुशुता भें तनभााण फकमा जाता शैं। कल को वलद्वान कभाकाॊडी ब्राशभणों द्वाया ळुब भुशुता भें ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे वलसळटट तेजस्ली भॊिो द्वाया सवद्ध प्राण- प्रततत्टठत ऩूणा ैतन्म मुक्त कयके तनभााण फकमा जाता शैं। त्जव के पर स्लरुऩ धायण कयता व्मत्क्त को ळीघ्र ऩूणा राब प्राप्त शोता शैं। कल को गरे भें धायण कयने वे लशॊ अत्मॊत प्रबाल ळारी शोता शैं। गरे भें धायण कयने वे कल शभेळा रृदम के ऩाव यशता शैं त्जस्वे व्मत्क्त ऩय उवका राब अतत तीव्र एलॊ ळीघ्र सात शोने रगता शैं। भूरम भार: 2350 >>Order Now GURUTVA KARYALAY Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Shop Online @ : www.gurutvakaryalay.com
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    143 2019 जैन धभाकेवलसळटट मॊिो की वू ी श्री ौफीव तीथिंकयका भशान प्रबावलत भत्कायी मॊि श्री एकाषी नारयमेय मॊि श्री ोफीव तीथिंकय मॊि वलातो बद्र मॊि कल्ऩलृष मॊि वला वॊऩत्त्तकय मॊि ध ॊताभणी ऩाश्लानाथ मॊि वलाकामा-वला भनोकाभना सववद्धअ मॊि (१३० वलातोबद्र मॊि) ध ॊताभणी मॊि (ऩैंवहठमा मॊि) ऋवऴ भॊडर मॊि ध ॊताभणी क्र मॊि जगदलल्रब कय मॊि श्री क्रे श्लयी मॊि ऋवद्ध सववद्ध भनोकाभना भान वम्भान प्रात्प्त मॊि श्री घॊटाकणा भशालीय मॊि ऋवद्ध सववद्ध वभृवद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊि श्री घॊटाकणा भशालीय वला सववद्ध भशामॊि (अनुबल सवद्ध वॊऩूणा श्री घॊटाकणा भशालीय ऩतका मॊि) वलऴभ वलऴ तनग्रश कय मॊि श्री ऩद्मालती मॊि षुद्रो ऩद्रल तननााळन मॊि श्री ऩद्मालती फीवा मॊि फृशच् क्र मॊि श्री ऩाश्लाऩद्मालती ह्ींकाय मॊि लॊध्मा ळब्दाऩश मॊि ऩद्मालती व्माऩाय लृवद्ध मॊि भृतलत्वा दोऴ तनलायण मॊि श्री धयणेन्द्र ऩद्मालती मॊि काॊक लॊध्मादोऴ तनलायण मॊि श्री ऩाश्लानाथ ध्मान मॊि फारग्रश ऩीडा तनलायण मॊि श्री ऩाश्लानाथ प्रबुका मॊि रधुदेल कु र मॊि बक्ताभय मॊि (गाथा नॊफय १ वे ४४ तक) नलगाथात्भक उलवग्गशयॊ स्तोिका वलसळटट मॊि भणणबद्र मॊि उलवग्गशयॊ मॊि श्री मॊि श्री ऩॊ भॊगर भशाश्रृत स्कॊ ध मॊि श्री रक्ष्भी प्रात्प्त औय व्माऩाय लधाक मॊि ह्ीॊकाय भम फीज भॊि श्री रक्ष्भीकय मॊि लधाभान वलद्या ऩट्ट मॊि रक्ष्भी प्रात्प्त मॊि वलद्या मॊि भशावलजम मॊि वौबाग्मकय मॊि वलजमयाज मॊि डाफकनी, ळाफकनी, बम तनलायक मॊि वलजम ऩतका मॊि बूताहद तनग्रश कय मॊि वलजम मॊि ज्लय तनग्रश कय मॊि सवद्ध क्र भशामॊि ळाफकनी तनग्रश कय मॊि दक्षषण भुखाम ळॊख मॊि आऩत्त्त तनलायण मॊि दक्षषण भुखाम मॊि ळिुभुख स्तॊबन मॊि मॊर के ववषम भें अधधक जानकायी हेतु सॊऩका कयें। GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Shop Online @ : www.gurutvakaryalay.com
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    144 2019 घॊटाकणा भशालीयवला सववद्ध भशामॊि को स्थाऩीत कयने वे वाधक की वला भनोकाभनाएॊ ऩूणा शोती शैं। वला प्रकाय के योग बूत-प्रेत आहद उऩद्रल वे यषण शोता शैं। जशयीरे औय हशॊवक प्राणीॊ वे वॊफॊधधत बम दूय शोते शैं। अत्ग्न बम, ोयबम आहद दूय शोते शैं। दुटट ल अवुयी ळत्क्तमों वे उत्ऩन्न शोने लारे बम वे मॊि के प्रबाल वे दूय शो जाते शैं। मॊि के ऩूजन वे वाधक को धन, वुख, वभृवद्ध, ऎश्लमा, वॊतत्त्त-वॊऩत्त्त आहद की प्रात्प्त शोती शैं। वाधक की वबी प्रकाय की वात्त्लक इच्छाओॊ की ऩूतता शोती शैं। महद फकवी ऩरयलाय मा ऩरयलाय के वदस्मो ऩय लळीकयण, भायण, उच् ाटन इत्माहद जादू-टोने लारे प्रमोग फकमे गमें शोतो इव मॊि के प्रबाल वे स्लत् नटट शो जाते शैं औय बवलटम भें महद कोई प्रमोग कयता शैं तो यषण शोता शैं। कु छ जानकायो के श्री घॊटाकणा भशालीय ऩतका मॊि वे जुडे अद्द्भुत अनुबल यशे शैं। महद घय भें श्री घॊटाकणा भशालीय ऩतका मॊि स्थावऩत फकमा शैं औय महद कोई इऴाा, रोब, भोश मा ळिुतालळ महद अनुध त कभा कयके फकवी बी उद्देश्म वे वाधक को ऩयेळान कयने का प्रमाव कयता शैं तो मॊि के प्रबाल वे वॊऩूणा ऩरयलाय का यषण तो शोता शी शैं, कबी-कबी ळिु के द्वाया फकमा गमा अनुध त कभा ळिु ऩय शी उऩय उरट लाय शोते देखा शैं। भूल्म:- Rs. 2350 से Rs. 12700 तक उप्रब्ि >> Shop Online | Order Now सॊऩका कयें। GURUTVA KARYALAY Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com
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    145 2019 अभोघ भशाभृत्मुॊजमकल अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल ल उल्रेणखत अन्म वाभग्रीमों को ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे वलद्वान ब्राह्भणो द्वाया सवा राख भहाभृत्मुॊजम भॊर जऩ एलॊ दळाॊळ शलन द्वाया तनसभात फकमा जाता शैं इवसरए कल अत्मॊत प्रबालळारी शोता शैं। >> Order Now अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल कल फनलाने शेतु: अऩना नाभ, वऩता-भाता का नाभ, गोि, एक नमा पोटो बेजे याळी यत्न एलॊ उऩयत्न वलळेऴ मॊि शभायें मशाॊ वबी प्रकाय के मॊि वोने- ाॊहद- ताम्फे भें आऩकी आलश्मक्ता के अनुवाय फकवी बी बाऴा/धभा के मॊिो को आऩकी आलश्मक डडजाईन के अनुवाय २२ गेज ळुद्ध ताम्फे भें अखॊडडत फनाने की वलळेऴ वुवलधाएॊ उऩरब्ध शैं। वबी वाईज एलॊ भूल्म ल क्लासरहट के अवरी नलयत्न एलॊ उऩयत्न बी उऩरब्ध शैं। शभाये मशाॊ वबी प्रकाय के यत्न एलॊ उऩयत्न व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शैं। ज्मोततऴ कामा वे जुडे फधु/फशन ल यत्न व्मलवाम वे जुडे रोगो के सरमे वलळेऴ भूल्म ऩय यत्न ल अन्म वाभग्रीमा ल अन्म वुवलधाएॊ उऩरब्ध शैं। GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Shop Online:- www.gurutvakaryalay.com अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कल दक्षषणा भाि: 10900
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    146 2019 अप्रैर 2019-वलळेऴ मोग कामा सववद्ध मोग 07 प्रात: 05:50 वे वुफश 08:05 तक 20 प्रात: 05:40 वे यात 10:18 तक 09 प्रात: 05:48 वे वुफश 09:05 तक 22 प्रात: 05:40 वे वॊध्मा 06:46 तक 10 प्रात: 05:46 वे वुफश 08:51 तक 27 प्रात: 05:37 वे यात 02:40 तक त्ररऩुष्कय मोग (तीनगुना पर दामक ) 20 वॊध्मा अगरे हदन यवल प्रात् 05:37 तक 30 याि 11:26 वे प्रात् 05:28 तक 21 प्रात: 05:37 वे दोऩशय 01:58 तक 14 वे प्रात: 05:21 वे यात 01:02 तक ववघ्नकायक बरा 03 वुफश 10:56 वे याि 11:57 तक (ऩातार) 18 यात 07:26 वे अगरे हदन प्रात् 06:04 तक(ऩातार) 09 प्रात् 01:14 वे वॊध्मा 04:07 तक (स्लगा) 21 यात 11:53 वे अगरे हदन दोऩशय 11:25 तक (स्लगा) 12 दोऩशय 01:24 वे याि 12:53 तक (स्लगा) 25 यात 12:46 वे देय यात 01:40 तक(ऩातार) 15 वॊध्मा 05:46 वे अगरे हदन प्रात् 04:24 तक (ऩृ्ली) 29 प्रात् 08:50 वे याि 10:05 तक (स्लगा) मोग पर :  कामा सववद्ध मोग भे फकमे गमे ळुब कामा भे तनत्श् त वपरता प्राप्त शोती शैं, एवा ळास्िोक्त ल न शैं।  त्रिऩुटकय मोग भें फकमे गमे ळुब कामो का राब तीन गुना शोता शैं। एवा ळास्िोक्त ल न शैं।  यवल-ऩुटमाभृत मोग भे फकमे गमे ळुब कामा भे तनत्श् त ळुब पर प्राप्त शोते शैं, एवा ळास्िोक्त ल न शैं।  ळास्िोंक्त भत वे वलघ्नकायक बद्रा मोग भें ळुब कामा कयना लत्जात शैं। दैतनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान तासरका गुसरक कार (ळुब) मभ कार (अळुब) याशु कार (अळुब) लाय वभम अलधध वभम अलधध वभम अलधध यवललाय 03:00 वे 04:30 12:00 वे 01:30 04:30 वे 06:00 वोभलाय 01:30 वे 03:00 10:30 वे 12:00 07:30 वे 09:00 भॊगरलाय 12:00 वे 01:30 09:00 वे 10:30 03:00 वे 04:30 फुधलाय 10:30 वे 12:00 07:30 वे 09:00 12:00 वे 01:30 गुरुलाय 09:00 वे 10:30 06:00 वे 07:30 01:30 वे 03:00 ळुक्रलाय 07:30 वे 09:00 03:00 वे 04:30 10:30 वे 12:00 ळतनलाय 06:00 वे 07:30 01:30 वे 03:00 09:00 वे 10:30
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    147 2019 हदन केौघडडमे वभम यवललाय वोभलाय भॊगरलाय फुधलाय गुरुलाय ळुक्रलाय ळतनलाय 06:00 वे 07:30 उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ चल काल 07:30 वे 09:00 चल काल उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ 09:00 वे 10:30 लाभ शुभ चल काल उद्वेग अमृि रोग 10:30 वे 12:00 अमृि रोग लाभ शुभ चल काल उद्वेग 12:00 वे 01:30 काल उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ चल 01:30 वे 03:00 शुभ चल काल उद्वेग अमृि रोग लाभ 03:00 वे 04:30 रोग लाभ शुभ चल काल उद्वेग अमृि 04:30 वे 06:00 उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ चल काल यात के ौघडडमे वभम यवललाय वोभलाय भॊगरलाय फुधलाय गुरुलाय ळुक्रलाय ळतनलाय 06:00 वे 07:30 शुभ चल काल उद्वेग अमृि रोग लाभ 07:30 वे 09:00 अमृि रोग लाभ शुभ चल काल उद्वेग 09:00 वे 10:30 चल काल उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ 10:30 वे 12:00 रोग लाभ शुभ चल काल उद्वेग अमृि 12:00 वे 01:30 काल उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ चल 01:30 वे 03:00 लाभ शुभ चल काल उद्वेग अमृि रोग 03:00 वे 04:30 उद्वेग अमृि रोग लाभ शुभ चल काल 04:30 वे 06:00 शुभ चल काल उद्वेग अमृि रोग लाभ ळास्िोक्त भत के अनुवाय महद फकवी बी कामा का प्रायॊब ळुब भुशूता मा ळुब वभम ऩय फकमा जामे तो कामा भें वपरता प्राप्त शोने फक वॊबालना ज्मादा प्रफर शो जाती शैं। इव सरमे दैतनक ळुब वभम ौघडडमा देखकय प्राप्त फकमा जा वकता शैं। नोट: प्राम् हदन औय यात्रि के ौघडडमे फक धगनती क्रभळ् वूमोदम औय वूमाास्त वे फक जाती शैं। प्रत्मेक ौघडडमे फक अलधध 1 घॊटा 30 सभतनट अथाात डेढ़ घॊटा शोती शैं। वभम के अनुवाय ौघडडमे को ळुबाळुब तीन बागों भें फाॊटा जाता शैं, जो क्रभळ् ळुब, भध्मभ औय अळुब शैं। ौघडडमे के स्लाभी ग्रश * शय कामा के सरमे ळुब/अभृत/राब का ौघडडमा उत्तभ भाना जाता शैं। * शय कामा के सरमे र/कार/योग/उद्वेग का ौघडडमा उध त नशीॊ भाना जाता। ळुब ौघडडमा भध्मभ ौघडडमा अळुब ौघडडमा ौघडडमा स्लाभी ग्रश ौघडडमा स्लाभी ग्रश ौघडडमा स्लाभी ग्रश ळुब गुरु य ळुक्र उद्बेग वूमा अभृत ॊद्रभा कार ळतन राब फुध योग भॊगर
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    148 2019 हदन फकशोया - वूमोदम वे वूमाास्त तक लाय 1.घॊ 2.घॊ 3.घॊ 4.घॊ 5.घॊ 6.घॊ 7.घॊ 8.घॊ 9.घॊ 10.घॊ 11.घॊ 12.घॊ यवललाय वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन वोभलाय ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा भॊगरलाय भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र फुधलाय फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर गुरुलाय गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ळुक्रलाय ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु ळतनलाय ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र यात फक शोया – वूमाास्त वे वूमोदम तक यवललाय गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध वोभलाय ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगरलाय ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुधलाय वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरुलाय ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्रलाय भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतनलाय फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ॊद्र ळतन गुरु भॊगर शोया भुशूता को कामा सववद्ध के सरए ऩूणा परदामक एलॊ अ ूक भाना जाता शैं, हदन-यात के २४ घॊटों भें ळुब-अळुब वभम को वभम वे ऩूला सात कय अऩने कामा सववद्ध के सरए प्रमोग कयना ाहशमे। ववद्वानो के भत से इश्छित कामा लसवि के लरए ग्रह से सॊफॊधधत होया का चुनाव कयने से ववशेष राब प्राप्त होता हैं।  वूमा फक शोया वयकायी कामो के सरमे उत्तभ शोती शैं।  ॊद्रभा फक शोया वबी कामों के सरमे उत्तभ शोती शैं।  भॊगर फक शोया कोटा-क ेयी के कामों के सरमे उत्तभ शोती शैं।  फुध फक शोया वलद्या-फुवद्ध अथाात ऩढाई के सरमे उत्तभ शोती शैं।  गुरु फक शोया धासभाक कामा एलॊ वललाश के सरमे उत्तभ शोती शैं।  ळुक्र फक शोया मािा के सरमे उत्तभ शोती शैं।  ळतन फक शोया धन-द्रव्म वॊफॊधधत कामा के सरमे उत्तभ शोती शैं।
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    149 2019 वला योगनाळकमॊि/कल भनुटम अऩने जीलन के वलसबन्न वभम ऩय फकवी ना फकवी वाध्म मा अवाध्म योग वे ग्रस्त शोता शैं। उध त उऩ ाय वे ज्मादातय वाध्म योगो वे तो भुत्क्त सभर जाती शैं, रेफकन कबी-कबी वाध्म योग शोकय बी अवाध्म शोजाते शैं, मा कोइ अवाध्म योग वे ग्रसवत शोजाते शैं। शजायो राखो रुऩमे ख ा कयने ऩय बी अधधक राब प्राप्त नशीॊ शो ऩाता। ड क्टय द्वारा हदजाने लारी दलाईमा अल्ऩ वभम के सरमे कायगय वात्रफत शोती शैं, एवी त्स्थती भें राब प्रात्प्त के सरमे व्मत्क्त एक ड क्टय वे दूवये ड क्टय के क्कय रगाने को फाध्म शो जाता शैं। बायतीम ऋऴीमोने अऩने मोग वाधना के प्रताऩ वे योग ळाॊतत शेतु वलसबन्न आमुलेय औऴधो के अततरयक्त मॊि, भॊि एलॊ तॊि का उल्रेख अऩने ग्रॊथो भें कय भानल जीलन को राब प्रदान कयने का वाथाक प्रमाव शजायो लऴा ऩूला फकमा था। फुवद्धजीलो के भत वे जो व्मत्क्त जीलनबय अऩनी हदन माा ऩय तनमभ, वॊमभ यख कय आशाय ग्रशण कयता शैं, एवे व्मत्क्त को वलसबन्न योग वे ग्रसवत शोने की वॊबालना कभ शोती शैं। रेफकन आज के फदरते मुग भें एवे व्मत्क्त बी बमॊकय योग वे ग्रस्त शोते हदख जाते शैं। क्मोफक वभग्र वॊवाय कार के अधीन शैं। एलॊ भृत्मु तनत्श् त शैं त्जवे वलधाता के अराला औय कोई टार नशीॊ वकता, रेफकन योग शोने फक त्स्थती भें व्मत्क्त योग दूय कयने का प्रमाव तो अलश्म कय वकता शैं। इव सरमे मॊर भॊर एवॊ तॊर के कु ळर जानकाय वे मोग्म भागादळान रेकय व्मत्क्त योगो वे भुत्क्त ऩाने का मा उवके प्रबालो को कभ कयने का प्रमाव बी अलश्म कय वकता शैं। ज्मोततष द्ववद्या के कु ळर जानकय बी कार ऩुरुऴकी गणना कय अनेक योगो के अनेको यशस्म को उजागय कय वकते शैं। ज्मोततऴ ळास्ि के भाध्मभ वे योग के भूरको ऩकडने भे वशमोग सभरता शैं, जशा आधुतनक ध फकत्वा ळास्ि अषभ शोजाता शैं लशा ज्मोततऴ ळास्ि द्वाया योग के भूर(जड) को ऩकड कय उवका तनदान कयना राबदामक एलॊ उऩामोगी सवद्ध शोता शैं। शय व्मत्क्त भें रार यॊगकी कोसळकाए ऩाइ जाती शैं, त्जवका तनमभीत वलकाव क्रभ फद्ध तयीके वे शोता यशता शैं। जफ इन कोसळकाओ के क्रभ भें ऩरयलतान शोता शै मा वलखॊडडन शोता शैं तफ व्मत्क्त के ळयीय भें स्लास््म वॊफॊधी वलकायो उत्ऩन्न शोते शैं। एलॊ इन कोसळकाओ का वॊफॊध नल ग्रशो के वाथ शोता शैं। त्जस्वे योगो के शोने के कायण व्मत्क्त के जन्भाॊग वे दळा-भशादळा एलॊ ग्रशो फक गो य त्स्थती वे प्राप्त शोता शैं। वला योग तनलायण कल एलॊ भशाभृत्मुॊजम मॊि के भाध्मभ वे व्मत्क्त के जन्भाॊग भें त्स्थत कभजोय एलॊ ऩीडडत ग्रशो के अळुब प्रबाल को कभ कयने का कामा वयरता ऩूलाक फकमा जावकता शैं। जेवे शय व्मत्क्त को ब्रह्भाॊड फक उजाा एलॊ ऩृ्ली का गुरुत्लाकऴाण फर प्रबालीत कताा शैं हठक उवी प्रकाय कल एलॊ मॊि के भाध्मभ वे ब्रह्भाॊड फक उजाा के वकायात्भक प्रबाल वे व्मत्क्त को वकायात्भक उजाा प्राप्त शोती शैं त्जस्वे योग के प्रबाल को कभ कय योग भुक्त कयने शेतु वशामता सभरती शैं। योग तनलायण शेतु भशाभृत्मुॊजम भॊि एलॊ मॊि का फडा भशत्ल शैं। त्जस्वे हशन्दू वॊस्कृ तत का प्राम् शय व्मत्क्त भशाभृत्मुॊजम भॊि वे ऩरयध त शैं।
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    150 2019 कवच केराब :  एवा ळास्िोक्त ल न शैं त्जव घय भें भशाभृत्मुॊजम मॊि स्थावऩत शोता शैं लशा तनलाव कताा शो नाना प्रकाय फक आधध-व्माधध-उऩाधध वे यषा शोती शैं।  ऩूणा प्राण प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म मुक्त वला योग तनलायण कल फकवी बी उम्र एलॊ जातत धभा के रोग ाशे स्िी शो मा ऩुरुऴ धायण कय वकते शैं।  जन्भाॊगभें अनेक प्रकायके खयाफ मोगो औय खयाफ ग्रशो फक प्रततकू रता वे योग उतऩन्न शोते शैं।  कु छ योग वॊक्रभण वे शोते शैं एलॊ कु छ योग खान-ऩान फक अतनमसभतता औय अळुद्धतावे उत्ऩन्न शोते शैं। कल एलॊ मॊि द्वाया एवे अनेक प्रकाय के खयाफ मोगो को नटट कय, स्लास््म राब औय ळायीरयक यषण प्राप्त कयने शेतु वला योगनाळक कल एलॊ मॊि वला उऩमोगी शोता शैं।  आज के बौततकता लादी आधुतनक मुगभे अनेक एवे योग शोते शैं, त्जवका उऩ ाय ओऩयेळन औय दलावे बी कहठन शो जाता शैं। कु छ योग एवे शोते शैं त्जवे फताने भें रोग हश फक ाते शैं ळयभ अनुबल कयते शैं एवे योगो को योकने शेतु एलॊ उवके उऩ ाय शेतु वला योगनाळक कल एलॊ मॊि राबादातम सवद्ध शोता शैं।  प्रत्मेक व्मत्क्त फक जेवे-जेवे आमु फढती शैं लैवे-लवै उवके ळयीय फक ऊजाा कभ शोती जाती शैं। त्जवके वाथ अनेक प्रकाय के वलकाय ऩैदा शोने रगते शैं एवी त्स्थती भें उऩ ाय शेतु वलायोगनाळक कल एलॊ मॊि परप्रद शोता शैं।  त्जव घय भें वऩता-ऩुि, भाता-ऩुि, भाता-ऩुिी, मा दो बाई एक हश नषिभे जन्भ रेते शैं, तफ उवकी भाता के सरमे अधधक कटटदामक त्स्थती शोती शैं। उऩ ाय शेतु भशाभृत्मुॊजम मॊि परप्रद शोता शैं।  त्जव व्मत्क्त का जन्भ ऩरयधध मोगभे शोता शैं उन्शे शोने लारे भृत्मु तुल्म कटट एलॊ शोने लारे योग, ध ॊता भें उऩ ाय शेतु वला योगनाळक कल एलॊ मॊि ळुब परप्रद शोता शैं। नोट:- ऩूणा प्राण प्रततत्टठत एलॊ ऩूणा ैतन्म मुक्त वला योग तनलायण कल एलॊ मॊि के फाये भें अधधक जानकायी शेतु वॊऩका कयें। >> Shop Online | Order Now Declaration Notice  We do not accept liability for any out of date or incorrect information.  We will not be liable for your any indirect consequential loss, loss of profit,  If you will cancel your order for any article we can not any amount will be refunded or Exchange.  We are keepers of secrets. We honour our clients' rights to privacy and will release no information about our any other clients' transactions with us.  Our ability lies in having learned to read the subtle spiritual energy, Yantra, mantra and promptings of the natural and spiritual world.  Our skill lies in communicating clearly and honestly with each client.  Our all kawach, yantra and any other article are prepared on the Principle of Positiv energy, our Article dose not produce any bad energy. Our Goal  Here Our goal has The classical Method-Legislation with Proved by specific with fiery chants prestigious full consciousness (Puarn Praan Pratisthit) Give miraculous powers & Good effect All types of Yantra, Kavach, Rudraksh, preciouse and semi preciouse Gems stone deliver on your door step.
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    151 2019 भॊर लसिकवच मंत्र द्वसद्ध कवच को द्ववशेष प्रयोजन में उपयोग के द्वलए और शीघ्र प्रभाव शाली बनाने के द्वलए िेजस्तवी मंत्रो द्वारा शुभ महूित में शुभ ददन को िैयार दकये जािे है । अलग-अलग कवच िैयार करने केद्वलए अलग-अलग िरह के मंत्रो का प्रयोग दकया जािा है ।  क्यों चुने मंत्र द्वसद्ध कवच?  उपयोग में आसान कोई प्रद्विबन्ध नशीॊ  कोई द्ववशेष द्वनद्वि-द्वनयम नहीं  कोई बुरा प्रभाव नहीं भॊर लसि कवच सूधच राज राजेश्वरी कवच Raj Rajeshwari Kawach ………..……………………… 11000 द्ववष्णु बीसा कवच Vishnu Visha Kawach ………..………………………... 2350 अमोघ महामृ्युंजय कवच Amogh Mahamrutyunjay Kawach ……………………. 10900 रामभद्र बीसा कवच Ramabhadra Visha Kawach ………..………………… 2350 दस महाद्ववद्या कवच Dus Mahavidhya Kawach ………..……………………. 7300 कुबेर बीसा कवच Kuber Visha Kawach ………..…………………………. 2350 श्री घंटाकणत महावीर सवत द्वसद्वद्ध प्रद कवच Shri Ghantakarn Mahavir Sarv Siddhi Prad Kawach.. 6400 गरुड बीसा कवच Garud Visha Kawach ………..………………………… 2350 सकल द्वसद्वद्ध प्रद गायत्री कवच Sakal Siddhi Prad Gayatri Kawach …………………... 6400 लक्ष्मी बीसा कवच Lakshmi Visha Kawach ……..…………………………. 2350 नवदुगात शद्वि कवच Navdurga Shakiti Kawach ………..…………………… 6400 ससह बीसा कवच Sinha Visha Kawach ………..…………………………. 2350 रसायन द्वसद्वद्ध कवच Rasayan Siddhi Kawach ………..…………………….. 6400 नवातण बीसा कवच Narvan Visha Kawach ………..……………………….. 2350 पंचदेव शद्वि कवच Pancha Dev Shakti Kawach ………..…………………. 6400 संकट मोद्वचनी काद्वलका द्वसद्वद्ध कवच Sankat Mochinee Kalika Siddhi Kawach ………..…… 2350 सवत कायत द्वसद्वद्ध कवच Sarv Karya Siddhi Kawach ………..………………….. 5500 राम रक्षा कवच Ram Raksha Kawach ………..………………………… 2350 सुवणत लक्ष्मी कवच Suvarn Lakshmi Kawach ………..……………………. 4600 नारायण रक्षा कवच Narayan Raksha Kavach .……………………………... 2350 स्तवणातकषतण भैरव कवच Swarnakarshan Bhairav Kawach ………..…………… 4600 हनुमान रक्षा कवच Hanuman Raksha Kawach ………..………………….. 2350 कालसपत शांद्वि कवच Kalsharp Shanti Kawach ………..…………………….. 3700 भैरव रक्षा कवच Bhairav Raksha Kawach ………………………………. 2350 द्ववलक्षण सकल राज वशीकरण कवच Vilakshan Sakal Raj Vasikaran Kawach ………..…… 3250 शद्वन साड़ेसािी और ढ़ैया कष्ट द्वनवारण कवच Shani Sadesatee aur Dhaiya Kasht Nivaran Kawach ….. 2350 इष्ट द्वसद्वद्ध कवच Isht Siddhi Kawach ………..…………………………… 2800 श्राद्वपि योग द्वनवारण कवच Sharapit Yog Nivaran Kawach ……..………………… 1900 परदेश गमन और लाभ प्राद्वि कवच Pardesh Gaman Aur Labh Prapti Kawach ………...... 2350 द्ववष योग द्वनवारण कवच Vish Yog Nivaran Kawach ……..……………………. 1900 श्रीदुगात बीसा कवच Durga Visha Kawach ………..…………………………. 2350 सवतजन वशीकरण कवच Sarvjan Vashikaran Kawach ……..…………………… 1450 कृ ष्ण बीसा कवच Krushna Bisa Kawach ………..………………………... 2350 द्वसद्वद्ध द्ववनायक कवच Siddhi Vinayak Ganapati Kawach ……..…………….. 1450 अष्ट द्ववनायक कवच Asht Vinayak Kawach ………..………………………... 2350 सकल सम्मान प्राद्वि कवच Sakal Samman Praapti Kawach ……..………………. 1450 आकषतण वृद्वद्ध कवच Aakarshan Vruddhi Kawach ……..…………………… 1450 स्तवप्न भय द्वनवारण कवच Swapna Bhay Nivaran Kawach ……..……………….. 1050
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    152 2019 वशीकरण नाशककवच Vasikaran Nashak Kawach ……..…………………….. 1450 सरस्तविी कवच (कक्षा +10 के द्वलए) Saraswati Kawach (For Class +10) ………………….. 1050 प्रीद्वि नाशक कवच Preeti Nashak Kawach ……..…………………………. 1450 सरस्तविी कवच (कक्षा 10 िकके द्वलए) Saraswati Kawach (For up to Class 10) …………….. 910 चंडाल योग द्वनवारण कवच Chandal Yog Nivaran Kawach ……..………………… 1450 वशीकरण कवच (2-3 व्यद्विके द्वलए) Vashikaran Kawach For (For 2-3 Person) ……………. 1250 ग्रहण योग द्वनवारण कवच Grahan Yog Nivaran Kawach ……..………………….. 1450 पत्नी वशीकरण कवच Patni Vasikaran Kawach ………………………………... 820 मांगद्वलक योग द्वनवारण कवच (कुजा योग ) Magalik Yog Nivaran Kawach (Kuja Yoga) …………. 1450 पद्वि वशीकरण कवच Pati Vasikaran Kawach …………………………………. 820 अष्ट लक्ष्मी कवच Asht Lakshmi Kawach ……..………………………... 1250 वशीकरण कवच ( 1 व्यद्वि के द्वलए) Vashikaran Kawach (For 1 Person) …………………… 820 आकद्वस्तमक धन प्राद्वि कवच Akashmik Dhan Prapti Kawach ……..……………….. 1250 सुदशतन बीसा कवच Sudarshan Visha Kawach ……..…………………...…... 910 स्तपे.व्यापार वृद्वद्ध कवच Special Vyapar Vruddhi Kawach ……..……………… 1250 महा सुदशतन कवच Mahasudarshan Kawach ……..……………...…………. 910 धन प्राद्वि कवच Dhan Prapti Kawach ……..…………………………... 1250 िंत्र रक्षा कवच Tantra Raksha Kawach …………………………………. 910 कायत द्वसद्वद्ध कवच Karya Siddhi Kawach ……..…………………………… 1250 वशीकरण कवच (2-3 व्यद्विके द्वलए) Vashikaran Kawach For (For 2-3 Person) ……………. 1250 भूद्वमलाभ कवच Bhumilabh Kawach ……..……………………………. 1250 पत्नी वशीकरण कवच Patni Vasikaran Kawach ………………………………... 820 नवग्रह शांद्वि कवच Navgrah Shanti Kawach ……..……………………….. 1250 पद्वि वशीकरण कवच Pati Vasikaran Kawach …………………………………. 820 संिान प्राद्वि कवच Santan Prapti Kawach ……..………………………….. 1250 वशीकरण कवच ( 1 व्यद्वि के द्वलए) Vashikaran Kawach (For 1 Person) …………………… 820 कामदेव कवच Kamdev Kawach ……..………………………………. 1250 सुदशतन बीसा कवच Sudarshan Visha Kawach ……..…………………...…... 910 हंस बीसा कवच Hans Visha Kawach ……..…………………………….. 1250 महा सुदशतन कवच Mahasudarshan Kawach ……..……………...…………. 910 पदौन्नद्वि कवच Padounnati Kawach ……..…………………………. 1250 िंत्र रक्षा कवच Tantra Raksha Kawach …………………………………. 910 ऋण / कजत मुद्वि कवच Rin / Karaj Mukti Kawach ……..……………………… 1250 द्वत्रशूल बीसा कवच Trishool Visha Kawach ……..…………………………... 910 शत्रु द्ववजय कवच Shatru Vijay Kawach ………………………………….. 1050 व्यापर वृद्वद्ध कवच Vyapar Vruddhi Kawach ………………………………... 910 द्वववाह बाधा द्वनवारण कवच Vivah Badha Nivaran Kawach ………………………... 1050 सवत रोग द्वनवारण कवच Sarv Rog Nivaran Kawach ……………………………... 910 स्तवद्वस्तिक बीसा कवच Swastik Visha Kawach ……..…………………………. 1050 शारीररक शद्वि वधतक कवच Sharirik Shakti Vardhak Kawach ..……………………... 910 मद्वस्तिष्क पृद्वष्ट वधतक कवच Mastishk Prushti Vardhak Kawach …………………… 820 द्वसद्ध शुक्र कवच Siddha Shukra Kawach …………………………………. 820
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    153 2019 वाणी पृद्वष्टवधतक कवच Vani Prushti Vardhak Kawach ………………………… 820 द्वसद्ध शद्वन कवच Siddha Shani Kawach …………………………………... 820 कामना पूर्ति कवच Kamana Poorti Kawach ………………………………. 820 द्वसद्ध राहु कवच Siddha Rahu Kawach …………………………………… 820 द्ववरोध नाशक कवच Virodh Nashan Kawach ………………………………. 820 द्वसद्ध केिु कवच Siddha Ketu Kawach ……………………………………. 820 द्वसद्ध सूयत कवच Siddha Surya Kawach …………………………………. 820 रोजगार वृद्वद्ध कवच Rojgar Vruddhi Kawach ………………………………… 730 द्वसद्ध चंद्र कवच Siddha Chandra Kawach ……………………………… 820 द्ववघ्न बाधा द्वनवारण कवच Vighna Badha Nivaran Kawah …………………………. 730 द्वसद्ध मंगल कवच (कु जा) Siddha Mangal Kawach (Kuja) ……………………… 820 नज़र रक्षा कवच Najar Raksha Kawah ……………………………………. 730 द्वसद्ध बुध कवच Siddha Bhudh Kawach ………………………………… 820 रोजगार प्राद्वि कवच Rojagar Prapti Kawach …………………………………. 730 द्वसद्ध गुरु कवच Siddha Guru Kawach ………………………………..… 820 दुभातग्य नाशक कवच Durbhagya Nashak ……………………………………… 640 उऩयोक्त कल के अराला अन्म वभस्मा वलळेऴ के वभाधान शेतु एलॊ उद्देश्म ऩूतता शेतु कल का तनभााण फकमा जाता शैं। कल के वलऴम भें अधधक जानकायी शेतु वॊऩका कयें। *कल भाि ळुब कामा मा उद्देश्म के सरमे >> Shop Online | Order Now GURUTVA KARYALAY Call Us - 9338213418, 9238328785, Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and www.gurutvajyotish.com Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
  • 154.
    154 2019 Gemstone PriceList NAME OF GEM STONE GENERAL MEDIUM FINE FINE SUPER FINE SPECIAL Emerald (ऩन्ना) 200.00 500.00 1200.00 1900.00 2800.00 & above Yellow Sapphire (ऩुखयाज) 550.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above Yellow Sapphire Bangkok (फैंकोक ऩुखयाज) 550.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above Blue Sapphire (नीरभ) 550.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above White Sapphire (वफ़े द ऩुखयाज) 1000.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above Bangkok Black Blue(फैंकोक नीरभ) 100.00 150.00 190.00 550.00 1000.00 & above Ruby (भाणणक) 100.00 190.00 370.00 730.00 1900.00 & above Ruby Berma (फभाा भाणणक) 5500.00 6400.00 8200.00 10000.00 21000.00 & above Speenal (नयभ भाणणक/रारडी) 300.00 600.00 1200.00 2100.00 3200.00 & above Pearl (भोतत) 30.00 60.00 90.00 120.00 280.00 & above Red Coral (4 यतत तक) (रार भूॊगा) 125.00 190.00 280.00 370.00 460.00 & above Red Coral (4 यतत वे उऩय)(रार भूॊगा) 190.00 280.00 370.00 460.00 550.00 & above White Coral (वफ़े द भूॊगा) 73.00 100.00 190.00 280.00 460.00 & above Cat’s Eye (रशवुतनमा) 25.00 45.00 90.00 120.00 190.00 & above Cat’s Eye ODISHA(उडडवा रशवुतनमा) 280.00 460.00 730.00 1000.00 1900.00 & above Gomed (गोभेद) 19.00 28.00 45.00 100.00 190.00 & above Gomed CLN (सवरोनी गोभेद) 190.00 280.00 460.00 730.00 1000.00 & above Zarakan (जयकन) 550.00 730.00 820.00 1050.00 1250.00 & above Aquamarine (फेरुज) 210.00 320.00 410.00 550.00 730.00 & above Lolite (नीरी) 50.00 120.00 230.00 390.00 500.00 & above Turquoise (फफ़योजा) 100.00 145.00 190.00 280.00 460.00 & above Golden Topaz (वुनशरा) 28.00 46.00 90.00 120.00 190.00 & above Real Topaz (उडडवा ऩुखयाज/टोऩज) 100.00 190.00 280.00 460.00 640.00 & above Blue Topaz (नीरा टोऩज) 100.00 190.00 280.00 460.00 640.00 & above White Topaz (वफ़े द टोऩज) 60.00 90.00 120.00 240.00 410.00& above Amethyst (कटेरा) 28.00 46.00 90.00 120.00 190.00 & above Opal (उऩर) 28.00 46.00 90.00 190.00 460.00 & above Garnet (गायनेट) 28.00 46.00 90.00 120.00 190.00 & above Tourmaline (तुभारीन) 120.00 140.00 190.00 300.00 730.00 & above Star Ruby (वुमाकान्त भणण) 45.00 75.00 90.00 120.00 190.00 & above Black Star (कारा स्टाय) 15.00 30.00 45.00 60.00 100.00 & above Green Onyx (ओनेक्व) 10.00 19.00 28.00 55.00 100.00 & above Lapis (राजलात) 15.00 28.00 45.00 100.00 190.00 & above Moon Stone ( न्द्रकान्त भणण) 12.00 19.00 28.00 55.00 190.00 & above Rock Crystal (स्फ़हटक) 19.00 46.00 15.00 30.00 45.00 & above Kidney Stone (दाना फफ़यॊगी) 09.00 11.00 15.00 19.00 21.00 & above Tiger Eye (टाइगय स्टोन) 03.00 05.00 10.00 15.00 21.00 & above Jade (भयग ) 12.00 19.00 23.00 27.00 45.00 & above Sun Stone (वन सवताया) 12.00 19.00 23.00 27.00 45.00 & above Note : Bangkok (Black) Blue for Shani, not good in looking but mor effective, Blue Topaz not Sapphire This Color of Sky Blue, For Venus GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) Call Us - 09338213418, 09238328785 Email Us:- chintan_n_joshi@yahoo.co.in, gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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    155 2019 GURUTVA KARYALAY YANTRALIST EFFECTS Our Splecial Yantra 1 12 – YANTRA SET For all Family Troubles 2 VYAPAR VRUDDHI YANTRA For Business Development 3 BHOOMI LABHA YANTRA For Farming Benefits 4 TANTRA RAKSHA YANTRA For Protection Evil Sprite 5 AAKASMIK DHAN PRAPTI YANTRA For Unexpected Wealth Benefits 6 PADOUNNATI YANTRA For Getting Promotion 7 RATNE SHWARI YANTRA For Benefits of Gems & Jewellery 8 BHUMI PRAPTI YANTRA For Land Obtained 9 GRUH PRAPTI YANTRA For Ready Made House 10 KAILASH DHAN RAKSHA YANTRA - Shastrokt Yantra 11 AADHYA SHAKTI AMBAJEE(DURGA) YANTRA Blessing of Durga 12 BAGALA MUKHI YANTRA (PITTAL) Win over Enemies 13 BAGALA MUKHI POOJAN YANTRA (PITTAL) Blessing of Bagala Mukhi 14 BHAGYA VARDHAK YANTRA For Good Luck 15 BHAY NASHAK YANTRA For Fear Ending 16 CHAMUNDA BISHA YANTRA (Navgraha Yukta) Blessing of Chamunda & Navgraha 17 CHHINNAMASTA POOJAN YANTRA Blessing of Chhinnamasta 18 DARIDRA VINASHAK YANTRA For Poverty Ending 19 DHANDA POOJAN YANTRA For Good Wealth 20 DHANDA YAKSHANI YANTRA For Good Wealth 21 GANESH YANTRA (Sampurna Beej Mantra) Blessing of Lord Ganesh 22 GARBHA STAMBHAN YANTRA For Pregnancy Protection 23 GAYATRI BISHA YANTRA Blessing of Gayatri 24 HANUMAN YANTRA Blessing of Lord Hanuman 25 JWAR NIVARAN YANTRA For Fewer Ending 26 JYOTISH TANTRA GYAN VIGYAN PRAD SHIDDHA BISHA YANTRA For Astrology & Spritual Knowlage 27 KALI YANTRA Blessing of Kali 28 KALPVRUKSHA YANTRA For Fullfill your all Ambition 29 KALSARP YANTRA (NAGPASH YANTRA) Destroyed negative effect of Kalsarp Yoga 30 KANAK DHARA YANTRA Blessing of Maha Lakshami 31 KARTVIRYAJUN POOJAN YANTRA - 32 KARYA SHIDDHI YANTRA For Successes in work 33  SARVA KARYA SHIDDHI YANTRA For Successes in all work 34 KRISHNA BISHA YANTRA Blessing of Lord Krishna 35 KUBER YANTRA Blessing of Kuber (Good wealth) 36 LAGNA BADHA NIVARAN YANTRA For Obstaele Of marriage 37 LAKSHAMI GANESH YANTRA Blessing of Lakshami & Ganesh 38 MAHA MRUTYUNJAY YANTRA For Good Health 39 MAHA MRUTYUNJAY POOJAN YANTRA Blessing of Shiva 40 MANGAL YANTRA ( TRIKON 21 BEEJ MANTRA) For Fullfill your all Ambition 41 MANO VANCHHIT KANYA PRAPTI YANTRA For Marriage with choice able Girl 42 NAVDURGA YANTRA Blessing of Durga
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    156 2019 YANTRA LISTEFFECTS 43 NAVGRAHA SHANTI YANTRA For good effect of 9 Planets 44 NAVGRAHA YUKTA BISHA YANTRA For good effect of 9 Planets 45  SURYA YANTRA Good effect of Sun 46  CHANDRA YANTRA Good effect of Moon 47  MANGAL YANTRA Good effect of Mars 48  BUDHA YANTRA Good effect of Mercury 49  GURU YANTRA (BRUHASPATI YANTRA) Good effect of Jyupiter 50  SUKRA YANTRA Good effect of Venus 51  SHANI YANTRA (COPER & STEEL) Good effect of Saturn 52  RAHU YANTRA Good effect of Rahu 53  KETU YANTRA Good effect of Ketu 54 PITRU DOSH NIVARAN YANTRA For Ancestor Fault Ending 55 PRASAW KASHT NIVARAN YANTRA For Pregnancy Pain Ending 56 RAJ RAJESHWARI VANCHA KALPLATA YANTRA For Benefits of State & Central Gov 57 RAM YANTRA Blessing of Ram 58 RIDDHI SHIDDHI DATA YANTRA Blessing of Riddhi-Siddhi 59 ROG-KASHT DARIDRATA NASHAK YANTRA For Disease- Pain- Poverty Ending 60 SANKAT MOCHAN YANTRA For Trouble Ending 61 SANTAN GOPAL YANTRA Blessing Lorg Krishana For child acquisition 62 SANTAN PRAPTI YANTRA For child acquisition 63 SARASWATI YANTRA Blessing of Sawaswati (For Study & Education) 64 SHIV YANTRA Blessing of Shiv 65 SHREE YANTRA (SAMPURNA BEEJ MANTRA) Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & Peace 66 SHREE YANTRA SHREE SUKTA YANTRA Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth 67 SWAPNA BHAY NIVARAN YANTRA For Bad Dreams Ending 68 VAHAN DURGHATNA NASHAK YANTRA For Vehicle Accident Ending 69 VAIBHAV LAKSHMI YANTRA (MAHA SHIDDHI DAYAK SHREE MAHALAKSHAMI YANTRA) Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & All Successes 70 VASTU YANTRA For Bulding Defect Ending 71 VIDHYA YASH VIBHUTI RAJ SAMMAN PRAD BISHA YANTRA For Education- Fame- state Award Winning 72 VISHNU BISHA YANTRA Blessing of Lord Vishnu (Narayan) 73 VASI KARAN YANTRA Attraction For office Purpose 74  MOHINI VASI KARAN YANTRA Attraction For Female 75  PATI VASI KARAN YANTRA Attraction For Husband 76  PATNI VASI KARAN YANTRA Attraction For Wife 77  VIVAH VASHI KARAN YANTRA Attraction For Marriage Purpose Yantra Available @:- Rs- 325 to 12700 and Above….. >> Shop Online | Order Now GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) Call Us - 09338213418, 09238328785 Email Us:- chintan_n_joshi@yahoo.co.in, gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
  • 157.
    157 2019 वू ना ऩत्रिका भें प्रकासळत वबी रेख ऩत्रिका के अधधकायों के वाथ शी आयक्षषत शैं।  रेख प्रकासळत शोना का भतरफ मश कतई नशीॊ फक कामाारम मा वॊऩादक बी इन वल ायो वे वशभत शों।  नात्स्तक/ अवलश्लावु व्मत्क्त भाि ऩठन वाभग्री वभझ वकते शैं।  ऩत्रिका भें प्रकासळत फकवी बी नाभ, स्थान मा घटना का उल्रेख मशाॊ फकवी बी व्मत्क्त वलळेऴ मा फकवी बी स्थान मा घटना वे कोई वॊफॊध नशीॊ शैं।  प्रकासळत रेख ज्मोततऴ, अॊक ज्मोततऴ, लास्तु, भॊि, मॊि, तॊि, आध्मात्त्भक सान ऩय आधारयत शोने के कायण महद फकवी के रेख, फकवी बी नाभ, स्थान मा घटना का फकवी के लास्तवलक जीलन वे भेर शोता शैं तो मश भाि एक वॊमोग शैं।  प्रकासळत वबी रेख बायततम आध्मात्त्भक ळास्िों वे प्रेरयत शोकय सरमे जाते शैं। इव कायण इन वलऴमो फक वत्मता अथला प्राभाणणकता ऩय फकवी बी प्रकाय फक त्जन्भेदायी कामाारम मा वॊऩादक फक नशीॊ शैं।  अन्म रेखको द्वाया प्रदान फकमे गमे रेख/प्रमोग फक प्राभाणणकता एलॊ प्रबाल फक त्जन्भेदायी कामाारम मा वॊऩादक फक नशीॊ शैं। औय नाशीॊ रेखक के ऩते हठकाने के फाये भें जानकायी देने शेतु कामाारम मा वॊऩादक फकवी बी प्रकाय वे फाध्म शैं।  ज्मोततऴ, अॊक ज्मोततऴ, लास्तु, भॊि, मॊि, तॊि, आध्मात्त्भक सान ऩय आधारयत रेखो भें ऩाठक का अऩना वलश्लाव शोना आलश्मक शैं। फकवी बी व्मत्क्त वलळेऴ को फकवी बी प्रकाय वे इन वलऴमो भें वलश्लाव कयने ना कयने का अॊततभ तनणाम स्लमॊ का शोगा।  ऩाठक द्वारा फकवी बी प्रकाय फक आऩत्ती स्लीकामा नशीॊ शोगी।  शभाये द्वारा ऩोस्ट फकमे गमे वबी रेख शभाये लऴो के अनुबल एलॊ अनुळॊधान के आधाय ऩय सरखे शोते शैं। शभ फकवी बी व्मत्क्त वलळेऴ द्वारा प्रमोग फकमे जाने लारे भॊि- मॊि मा अन्म प्रमोग मा उऩामोकी त्जन्भेदायी नहशॊ रेते शैं।  मश त्जन्भेदायी भॊि-मॊि मा अन्म प्रमोग मा उऩामोको कयने लारे व्मत्क्त फक स्लमॊ फक शोगी। क्मोफक इन वलऴमो भें नैततक भानदॊडों, वाभात्जक, कानूनी तनमभों के णखराप कोई व्मत्क्त महद नीजी स्लाथा ऩूतता शेतु प्रमोग कताा शैं अथला प्रमोग के कयने भे िुहट शोने ऩय प्रततकू र ऩरयणाभ वॊबल शैं।  शभाये द्वारा ऩोस्ट फकमे गमे वबी भॊि-मॊि मा उऩाम शभने वैकडोफाय स्लमॊ ऩय एलॊ अन्म शभाये फॊधुगण ऩय प्रमोग फकमे शैं त्जस्वे शभे शय प्रमोग मा भॊि-मॊि मा उऩामो द्वारा तनत्श् त वपरता प्राप्त शुई शैं।  ऩाठकों फक भाॊग ऩय एक हश रेखका ऩून् प्रकाळन कयने का अधधकाय यखता शैं। ऩाठकों को एक रेख के ऩून् प्रकाळन वे राब प्राप्त शो वकता शैं।  अधधक जानकायी शेतु आऩ कामाारम भें वॊऩका कय वकते शैं। (सबी वववादो के लरमे के वर बुवनेववय न्मामारम ही भान्म होगा।)
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    158 2019 FREE E CIRCULAR गुरुत्लज्मोततऴ भासवक ई-ऩत्रिका 2019 वॊऩादक ध ॊतन जोळी वॊऩका गुरुत्ल ज्मोततऴ वलबाग गुरुत्ल कामाारम 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) INDIA पोन 91+9338213418, 91+9238328785 ईभेर gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, लेफ www.gurutvakaryalay.com www.gurutvajyotish.com www.shrigems.com http://gk.yolasite.com/ www.gurutvakaryalay.blogspot.com
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    159 2019 शभाया उद्देश्म वप्रमआत्त्भम फॊधु/ फहशन जम गुरुदेल जशाॉ आधुतनक वलसान वभाप्त शो जाता शैं। लशाॊ आध्मात्त्भक सान प्रायॊब शो जाता शैं, बौततकता का आलयण ओढे व्मत्क्त जीलन भें शताळा औय तनयाळा भें फॊध जाता शैं, औय उवे अऩने जीलन भें गततळीर शोने के सरए भागा प्राप्त नशीॊ शो ऩाता क्मोफक बालनाए हश बलवागय शैं, त्जवभे भनुटम की वपरता औय अवपरता तनहशत शैं। उवे ऩाने औय वभजने का वाथाक प्रमाव शी श्रेटठकय वपरता शैं। वपरता को प्राप्त कयना आऩ का बाग्म शी नशीॊ अधधकाय शैं। ईवी सरमे शभायी ळुब काभना वदैल आऩ के वाथ शैं। आऩ अऩने कामा-उद्देश्म एलॊ अनुकू रता शेतु मॊि, ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न औय दुराब भॊि ळत्क्त वे ऩूणा प्राण- प्रततत्टठत ध ज लस्तु का शभेंळा प्रमोग कये जो १००% परदामक शो। ईवी सरमे शभाया उद्देश्म मशीॊ शे की ळास्िोक्त वलधध-वलधान वे वलसळटट तेजस्ली भॊिो द्वाया सवद्ध प्राण-प्रततत्टठत ऩूणा ैतन्म मुक्त वबी प्रकाय के मन्ि- कल एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩके घय तक ऩशो ाने का शैं। वूमा की फकयणे उव घय भें प्रलेळ कयाऩाती शैं। जीव घय के णखडकी दयलाजे खुरे शों। GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ODISHA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Visit Us: www.gurutvakaryalay.com | www.gurutvajyotish.com | www.gurutvakaryalay.blogspot.com Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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