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गुरुत्ल कामालरम द्राया प्रस्तुत भाप्तवक ई-ऩत्रत्रका                                   नलम्फय- 2012




 »   स्पटिक श्रीमॊ त्र का ऩू ज न                   »    ऩाॊ च मॊ त्र वे धन की कभी को कयदं …

 »   वद्ऱ श्री का चभत्काय                          »    धन प्राप्तद्ऱ शे तु वात द रलब रक्ष्भी वाधना
                                                                                  ु

 »   रक्ष्भी का प्तचस्थामी प्तनलाव तीन द रलब ...
                                         ु         »    रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु वात द रलब लस्तु एॊ
                                                                                       ु


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गुरुत्ल ज्मोप्ततऴ ऩत्रत्रका                    ई- जन्भ ऩत्रत्रका
नलम्फय 2012

                                    अत्माधुप्तनक ज्मोप्ततऴ ऩद्धप्तत द्राया
वॊऩादक
प्तचॊतन जोळी
वॊऩकल
गुरुत्ल ज्मोप्ततऴ त्रलबाग             उत्कृ द्श बत्रलष्मलाणी क वाथ
                                                              े
गुरुत्ल कामालरम
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ऩत्रत्रका प्रस्तुप्तत
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प्तचॊतन जोळी,                                 100+ Pages
स्लस्स्तक.ऎन.जोळी
पोिो ग्राटपक्व
                                          टशॊ दी/ English भं भूल्म भात्र 750/-
प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक आिल
शभाये भुख्म वशमोगी                            GURUTVA KARYALAY
स्लस्स्तक.ऎन.जोळी (स्लस्स्तक
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दीऩोत्वल अथालत दीऩालरी ऩलल को ऩुयातन कार वे शी बायतलऴल भं ज्मोप्ततऩलल क रुऩ भं भनामा जाता शं । फिे ़ -
                                                                                                     े
                              फिे ़ भशानगयं वे रेकय छोिे वे छोिे गालं भं बी धनी वे रेकय गयीफ वे गयीफ व्मत्रि की चौखि बी इव ऩालन
                              ऩलल क अलवय ऩय दीऩक की ऩॊत्रिमं क जगभगा उठती शं । दीऩालरी क टदन अभालस्मा …4
                                   े                          े                         े

                              …4
                             एवी ऩौयास्णक भान्मता शं टक धन तेयव क टदन धनलॊतयी नाभक दे लता अभृत करळ क वाथ
                                                                 े                                  े
                             वागय भॊथन वे उत्ऩन्न शुए थे। धनलॊतयी धन, स्लास्थम ल आमु क अप्तधऩप्तत दे लता शं ।
                                                                                            े
                             धनलॊतयी को दे लं क लैध ल प्तचटकत्वक क रुऩ भं जाना जाता शं । …6
                                               े                  े
                                                            दीऩालरी त्रलळेऴ भं ऩढे ़
                                           त्रलळेऴ भं                                           दीऩालरी त्रलळेऴ 
 वलल कामल प्तवत्रद्ध         धन तेयव ळुब भुशूतल (11-नलम्फय-2012)                        7     स्पटिक श्रीमॊत्र का ऩूजन                            10
                             दीऩालरी ऩूजन भुशूत(13-नलम्फय-2012)
                                               ल                                        8     वद्ऱ श्री का चभत्काय                                12
    कलच …55                  त्रलप्तबन्न रक्ष्भी भॊत्र                                  13    दीऩालरी भशत्ल.. वॊऩूणल रक्ष्भी ऩूजन                 14
                             रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु कयं याप्तळ भॊत्र का जऩ            39    रक्ष्भी का प्तचस्थामी प्तनलाव तीन दरब...
                                                                                                                                 ु ल              30
                             वुख-स्भृत्रद्ध चाशते शं ऋण(कजल)कफरे औय कफदे                46    ऩाॊच मॊत्र वे धन की कभी को कयदं …                   34
                             दीऩालरी भं रक्ष्भी-गणेळ आयाधना का भशत्ल                    48    धन प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब रक्ष्भी वाधनाएॊ
                                                                                                                       ु ल                        36
                             दीऩालरी वे जुिी रक्ष्भी कथा                                56    रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब लस्तुएॊ
                                                                                                                            ु ल                   43
गणेळ रक्ष्भी मॊत्र.113       धनतेयव टक अनोखी कथा                                        57              शभाये उत्ऩाद 
                             जफ रक्ष्भीजी को प्तभरी वजा?                                63    बाग्म रक्ष्भी टदब्फी                                 8
                             रक्ष्भीजी क स्लगल रोक जाने टक कथा
                                        े                                               65    दगाल फीवा मॊत्र
                                                                                               ु                                                   9
                             धनप्राप्तद्ऱ औय वुख वभृत्रद्ध क प्तरमे लास्तु प्तवद्धाॊत
                                                            े                           66    भॊत्रप्तवद्ध स्पटिक श्री मॊत्र                      11
                             दे लउठनी एकादळी व्रत कथा                                   67    वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच                             55
नलयत्न जटित श्रीमॊत्र..93
                             दरयद्रता वे भुत्रि क ळीघ्र प्रबाली उऩाम
                                                 े                                      69    वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रका                          29
                             दीऩ जराने का धाप्तभलक भशत्ल क्मा शं ?                      74    द्रादळ भशा मॊत्र                                    89
  त्रलप्तबन्न रक्ष्भी        धनत्रमोदळी ऩय मभ-दीऩदान अकारभृत्मु वे…                           ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र एलॊ ळप्तन तैप्ततवा मॊत्र      92
                                                                                        77
     मॊत्र …96               धनत्रमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं टकमा जाता शं ?                 79    श्री शनुभान मॊत्र                                   94
                             रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क वयर उऩाम
                                                 े                                      82    त्रलप्तबन्न दे लता एलॊ काभना ऩूप्ततल मॊत्र वूप्तच   95

                                स्थामी औय अन्म रेख                                      त्रलप्तबन्न दे ली एलॊ रक्ष्भी मॊत्र वूप्तच          96
                             वॊऩादकीम                                                    4    भॊत्र प्तवद्ध रूद्राष                               98
                             भाप्तवक याप्तळ पर                                          104 श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र / कलच                           99
    याप्तळ यत्न…97           नलम्फय 2102 भाप्तवक ऩॊचाॊग                                 108 याभ यषा मॊत्र                                         100
                             नलम्फय-2012 भाप्तवक व्रत-ऩलल-त्मौशाय                       110 जैन धभलक त्रलप्तळद्श मॊत्र
                                                                                                    े                                             101
                             नलम्फय 2102 -त्रलळेऴ मोग                                   116 घॊिाकणल भशालीय वलल प्तवत्रद्ध भशामॊत्र                102
                             दै प्तनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान ताप्तरका                     116 अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलच                               102
                             टदन-यात क चौघटिमे
                                      े                                                 117 याळी यत्न एलॊ उऩयत्न                                  102
 भॊत्र प्तवद्ध रूद्राष …98
                             टदन-यात टक शोया - वूमोदम वे वूमालस्त तक                    118 वलल योगनाळक मॊत्र/                                    120
                             ग्रश चरन नलम्फय -2012                                      119 भॊत्र प्तवद्ध कलच
अभोद्य भशाभृत्मुजम
                ॊ
                                                                                                                                                  122
                             वूचना                                                      127 YANTRA LIST                                           123
   कलच …103                  शभाया उद्दे श्म                                            129 GEM STONE                                             125
त्रप्रम आस्त्भम

            फॊध/ फटशन
               ु

                          जम गुरुदे ल
                  दीऩोत्वल अथालत दीऩालरी ऩलल को ऩुयातन कार वे शी बायतलऴल भं ज्मोप्ततऩलल क रुऩ भं भनामा जाता
                                                                                         े
शं । फिे -फिे ़ भशानगयं वे रेकय छोिे वे छोिे गालं भं बी धनी वे रेकय गयीफ वे गयीफ व्मत्रि की चौखि बी इव ऩालन
         ़
ऩलल क अलवय ऩय दीऩक की ऩॊत्रिमं क जगभगा उठती शं । दीऩालरी क टदन अभालस्मा शोने क कायण इव टदन वकर
     े                          े                         े                   े
रोक भं चायं ओय अॊधकाय परा शोता शं , रेटकन भनुष्म को अॊधकाय ऩवॊद नशीॊ शं , इव प्तरए लशॉ उववे भुकाफरा कयने
                       ै
क उद्दे श्म वे अऩने घय-दकान आटद स्थानं ऩय दीऩं की ऩॊत्रिमं भं वजाकय अॊधेये को दय बगाने का वाथलक प्रमाव
 े                      ु                                                      ू
कयता शं ।

         क्मंकी, प्रकाळ का शभाये जीलन भं फशुत भशत्ल शं , इव भशत्ल वे शय व्मत्रि बरी बाप्तत ऩरयप्तचत शं । शभायी बायप्ततम
वॊस्कृ प्तत क धाप्तभलक कामलक्रभ भं बी अस्ग्न का त्रलळेऴ भशत्ल शं । एलॊ अस्ग्न प्रकाळ का प्रप्ततक शं जो मस, शलन, त्रललाश, वॊस्काय
             े
जेवे अन्म धाप्तभलक कभलकाॊिो भं त्रफना अस्ग्न क त्रफना वॊऩन्न शोना अवॊबल वा प्रप्ततत शोता शं । इवी कायण बायप्ततम वभ्मताओॊ भं
                                              े
अस्ग्न को दे ल कशा गमा शं । अस्ग्न को दे लता भनकय उवका ऩूजन टकमा जाता शं । क्मोटक एवा भाना जाता शं , टक मटद अस्ग्न
दे ल क्रोप्तधत शोजामे तो फिे -फिे भशरं ल ऊचे-ऊचे बलनं को धूरभं उिादे औय याख फनादे ।
                                          ॊ   ॊ

         इव प्तरमे प्रकाळ का ऩूजन कय उन्शं ळाॊत यखने का प्रमाव टकमा जाता शं । शभाये प्रभुख धभल ग्रॊथो भं एक ऋग्लेद का वलल
प्रथभ भॊत्र शी प्रकाळ वे ळुरू शोता शै ।

भॊत्र:

                                    प्रकाळभीरे ऩुयोटशतॊ मसस्म दे लभृस्त्लजभ ्। शोतायॊ यत्नधातभभ ्॥
बालाथल:- वललप्रथभ आयाधन टकए जाने लारे, मस को प्रकाप्तळत कयने लारे, ऋतुओॊ क अनुवाय मस वम्ऩाटदत कयने लारे, दे लताओॊ
                                                                          े
का आह्वान कयने लारे तथा धन प्रदान कयने लारं भं वललश्रद्ष अस्ग्न दे लता की भं स्तुप्तत कयता शूॊ।
                                                     े


         अन्म ऩौयास्णक भान्मताओॊ क अनुळाय ऩुयातन कार भं दीऩालरी ऩलल को "रोकोत्वल" क रुऩ भं भनामा जाता
                                  े                                                े
था। रेटकन आज दीऩालरी ऩलल की भुख्मत् दो प्रभुख त्रलळेऴता दे खने को प्तभरती शं । एक शं , दीऩं की जगभगाशि वे
अॊधकायको दय कयना औय दवयी शै , लैबल एलॊ वुख-वभृत्रद्ध की दे ली भाॉ भशारक्ष्भी क ऩूजन का आमोजन।
          ू          ू                                                        े

         दीऩालरी क टदन दे ली रक्ष्भी, गणेळ, वयस्लती, कफेय आटद का ऩूजन कयने का त्रलधान शै ।
                  े                                   ु                                                     क्मोटक दे ली रक्ष्भी
की उत्ऩत्ती दीऩालरी क टदन भानी जाती शं औय ळास्त्रोि लणल शं धन की दे ली रक्ष्भी शं औय धन क दे लता कफेय शं ,
                     े                                                                   े        ु
स्जनक प्रवन्न शोने वे भनुष्म को धन, वभृत्रद्ध एलॊ ऐद्वमल प्राद्ऱ शोता शं । भाॊ रक्ष्भी चॊचर शं । अथालत रक्ष्भी जी लश एक
     े
                                                  े                      ु                     ु
जगश टिकती नशीॊ शै । टकव प्रकाय रक्ष्भी का आगभन आऩक घय भं शो औय स्जदॊ गी द्ख, दरयद्र, कद्शो वे छि कय
खुप्तळमं वे बय जाए उववे जुिे यशस्मो को बायतीम ऋत्रऴ भुप्तनमं ने खोज प्तनकारा शं । मश बी एक प्रभुख कायण शं की
दीऩालरी का ऩलल भनामा जाता शं औय रक्ष्भीजी का ऩूजन अचलन टकमा जाता शं ।

         अन्म धाप्तभलक भान्मता शं की श्राद्ध ऩष वे रेकय काप्ततलक भाव की अभालस्मा तक त्रऩतयं को ऩुन् अऩने रोक
भं रोिना शोता शं । ऩरयलाय क रोग त्रऩतयं का आह्वान कयते शं , उनका ऩूजन कय दीऩं वे उनका ऩुन् लाऩव जाने लारा
                           े
अॊप्तधमाया भागल प्रकाप्तळत कयक उन्शं अगरे लऴल तक क प्तरए त्रलदाई दे ते शं ।
                              े                   े
दीऩालरी क वॊफॊध भं बत्रलष्मऩुयाण भं उल्रेख शं की
         े
                                         लस्त्र-ऩुष्ऩै् ळोप्तबतव्मा क्रम-त्रलक्रम-बूभम्।
अथालत ्: आज क टदन धनऩप्तत कफेय का बी ऩूजन शोता शं । टशन्द ू धभलळास्त्रं क अनुवाय कफेय धनऩप्तत शं ।
             े             ु                                             े        ु

       एवा भानाजाता शं की आज क टदन शी दे ली रक्ष्भी का जन्भ शुला था।
                              े


       आज क बौप्ततक मुग भं शय कामल धन क उऩय प्रत्मष मा अप्रत्मष रुऩवे प्तनबलय कयता शं इव प्तरमे प्रत्मेक
           े                           े
व्मत्रि टक मशी इच्छा शोती शं टक उवक ऩाव अऩाय धन दौरत एलॊ जीलन उऩमोगी वायी वुख वुत्रलधाए उप्रब्ध शो जो
                                   े
एक वभृद्ध व्मत्रि क ऩाव भं शोती शं , एलॊ उवकी वभृत्रद्ध एलॊ उन्नप्तत टदन प्रप्ततटदन फढती जाए। स्जन रोगो क ऩाव
                   े                                                                                     े
ऩमालद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त शोती शं उन्शं इच्छा शोती शं उनकी धन-वॊऩत्रत्त टदन दोगुनी यात चौगुनी फढती यशं ओय स्जक ऩाव
                                                                                                         े
ऩमालद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त नशीॊ शं उवकी इच्छा शोती शं , की उवे कभ वे कभ इतनी धन वॊऩत्रत्त प्राद्ऱ शो जामे की उवका जीलन
वुखभम शो।

       रेटकन कछ रोगो को धन, वॊऩत्रत्त एलॊ बौप्ततक वुख-वाधन अऩनी मोग्मता औय भेशनत क अनुळाय प्राद्ऱ शो
              ु                                                                   े
जाता शं । रेटकन फशोत वे रोग एवे शोते शं स्जन्शं कटठन ऩरयश्रभ कयने औय प्तळस्षत शोने क उऩयाॊत बी त्रलळेऴ राब
                                                                                    े
नशीॊ प्तभरता मा अऩने ऩरयश्रभ का उप्तचत भूल्म बी नशीॊ प्राद्ऱ शो ऩाता शं ।

एवे रोगं क प्तरम एलॊ स्जन्शं वयरता वे धन की प्राप्तद्ऱ शं उनकी धन-वॊऩात्रत्त फढ़ती यशे औय भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा
          े
प्राप्तद्ऱ शे तु दीऩालरे त्रलळेऴ अॊक भं धन प्राप्तद्ऱ क वयर उऩामं क वाथ भं, रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु दरब ळीघ्र प्रबाली मॊत्र,
                                                       े           े                                  ु ल
वाभग्रीमाॊ औय ळीघ्र प्रबाली वयर वाधनाओॊ का वॊकरन त्रलप्तबन्न ळास्त्र एलॊ ग्रॊथो भं लस्णलत उल्रेख क आधाय ऩय टकमा
                                                                                                  े
गमा शं । ऩाठको क भागलदळलन एलॊ जानकायी शे तु ऩत्रत्रका क इव अॊक भं कछ त्रलळेऴ प्राबाली भॊत्रो का वॊकरन कयने का
                े                                      े           ु
                                ु
प्रमाव टकमा गमा शं । स्जववे इच्छक फॊधु/फशन त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय अऩने भनोयथो को प्तवद्ध कयने भं वभथल शं।


इव अॊक भं प्रकाप्तळत त्रलप्तबन्न उऩाम, मॊत्र-भॊत्र-तॊत्र, वाधना ल ऩूजा ऩद्धप्तत क त्रलऴम भं वाधक एलॊ
                                                                                 े
त्रलद्रान ऩाठको वे अनुयोध शं , मटद दळालमे गए भॊत्र, स्तोत्र इत्मादी क वॊकरन, प्रभाण ऩढ़ने, वॊऩादन भं,
                                                                     े
टिजाईन भं, िाईऩीॊग भं, त्रप्रॊटिॊ ग भं, प्रकाळन भं कोई त्रुटि यश गई शो, तो उवे स्लमॊ वुधाय रं मा टकवी मोग्म
गुरु मा त्रलद्रान वे वराश त्रलभळल कय रे । क्मोटक त्रलद्रान गुरुजनो एलॊ वाधको क प्तनजी अनुबल त्रलप्तबन्न अनुद्षा
                                                                              े
भं बेद शोने ऩय ऩूजन त्रलप्तध एलॊ जऩ त्रलप्तध भं प्तबन्नता वॊबल शं ।

  आऩका जीलन वुखभम, भॊगरभम शो भाॊ रक्ष्भी की कृ ऩा आऩक ऩरयलाय ऩय
                                                     े
                           फनी यशे । भाॊ भशारक्ष्भी वे मशी प्राथना शं …




                                                                                                        प्तचॊतन जोळी
6                                    नलम्फय 2012




           *****         दीऩालरी त्रलळेऴाॊक वे वॊफॊप्तधत त्रलळेऴ वूचना *****
 ऩत्रत्रका भं प्रकाप्तळत दीऩालरी त्रलळेऴ भं वम्फस्न्धत वबी जानकायीमाॊ गुरुत्ल कामालरम क अप्तधकायं क वाथ
                                                                                        े           े
   शी आयस्षत शं ।
 ऩौयास्णक ग्रॊथो ऩय अत्रलद्वाव यखने लारे व्मत्रि इव अॊक भं उऩरब्ध वबी त्रलऴम को भात्र ऩठन वाभग्री
   वभझ वकते शं ।
 धाप्तभलक त्रलऴम आस्था एलॊ त्रलद्वाव ऩय आधारयत शोने क कायण इव अॊकभं लस्णलत वबी जानकायीमा
                                                      े
   बायप्ततम ग्रॊथो वे प्रेरयत शोकय प्तरखी गई शं ।
 धभल वे वॊफॊप्तधत त्रलऴमो टक वत्मता अथला प्राभास्णकता ऩय टकवी बी प्रकाय टक स्जन्भेदायी कामालरम मा
   वॊऩादक टक नशीॊ शं ।
 इव अॊक भं लस्णलत वॊफॊप्तधत वबी रेख भं लस्णलत भॊत्र, मॊत्र ल प्रमोग टक प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल टक
   स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक टक नशीॊ शं औय ना शीॊ प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल टक स्जन्भेदायी क फाये भं
                                                                                              े
   जानकायी दे ने शे तु कामालरम मा वॊऩादक टकवी बी प्रकाय वे फाध्म शं ।
 धभल वे वॊफॊप्तधत रेखो भं ऩाठक का अऩना त्रलद्वाव शोना आलश्मक शं । टकवी बी व्मत्रि त्रलळेऴ का टकवी बी
   प्रकाय वे इन त्रलऴमो भं त्रलद्वाव कयने ना कयने का अॊप्ततभ प्तनणलम उनका स्लमॊ का शोगा।
 ळास्त्रोि त्रलऴमं वे वॊफॊप्तधत जानकायी ऩय ऩाठक द्राया टकवी बी प्रकाय टक आऩत्ती स्लीकामल नशीॊ शोगी।
 धभल वे वॊफॊप्तधत रेख प्राभास्णक ग्रॊथो, शभाये लऴो क अनुबल एल अनुळधान क आधाय ऩय टदमे गमे शं ।
                                                     े             ॊ    े
 शभ टकवी बी व्मत्रि त्रलळेऴ द्राया धभल वे वॊफॊप्तधत त्रलऴमं ऩय त्रलद्वाव टकए जाने ऩय उवक राब मा नुक्ळान की
                                                                                         े
   स्जन्भेदायी नटशॊ रेते शं । मश स्जन्भेदायी धाप्तभलक त्रलऴमो ऩय त्रलद्वाव कयने लारे मा उवका प्रमोग कयने लारे
   व्मत्रि टक स्लमॊ टक शोगी।
 क्मोटक इन त्रलऴमो भं नैप्ततक भानदॊ िं, वाभास्जक, कानूनी प्तनमभं क स्खराप कोई व्मत्रि मटद नीजी स्लाथल
                                                                   े
   ऩूप्ततल शे तु मशाॊ लस्णलत जानकायी क आधाय ऩय प्रमोग कताल शं अथला धाप्तभलक त्रलऴमो क उऩमोग कयने भे
                                      े                                              े
   त्रुटि यखता शं मा उववे त्रुटि शोती शं तो इव कायण वे प्रप्ततकर अथला त्रलऩरयत ऩरयणाभ प्तभरने बी वॊबल शं ।
                                                               ू
 धाप्तभलक त्रलऴमो वे वॊफॊप्तधत जानकायी को भानकय उववे प्राद्ऱ शोने लारे राब, शानी टक स्जन्भेदायी कामालरम मा
   वॊऩादक टक नशीॊ शं ।
 शभाये द्राया ऩोस्ि टकमे गमे धाप्तभलक त्रलऴमो ऩय आधारयत रेखं भं लस्णलत जानकायी को शभने कई फाय स्लमॊ
   ऩय एलॊ अन्म शभाये फॊधगण ने बी अऩने नीजी जीलन भं अनुबल टकमा शं । स्जस्वे शभ कई फाय धाप्तभलक
                        ु
   त्रलऴमो क वे त्रलळेऴ राब की प्राप्तद्ऱ शुई शं । अप्तधक जानकायी शे तु आऩ कामालरम भं वॊऩक कय वकते शं ।
            े                                                                             ल
                         (वबी त्रललादो कप्तरमे कलर बुलनेद्वय न्मामारम शी भान्म शोगा।
                                        े       े
7                                    नलम्फय 2012




                                 धन तेयव ळुब भुशूतल (11-नलम्फय-2012)
                                                                                                       प्तचॊतन जोळी
        एवी ऩौयास्णक भान्मता शं टक धन तेयव क टदन धनलॊतयी नाभक दे लता अभृत करळ क वाथ वागय भॊथन वे
                                            े                                  े
उत्ऩन्न शुए थे। धनलॊतयी धन, स्लास्थम ल आमु क अप्तधऩप्तत दे लता शं । धनलॊतयी को दे लं क लैध ल प्तचटकत्वक क रुऩ भं
                                            े                                         े                  े
जाना जाता शं ।
        धन तेयव क टदन चाॊदी क फतलन-प्तवक्क खयीदना त्रलळेऴ ळुब शोता शं । क्मोटक ळास्त्रं भं धनलॊतयी दे ल को चॊद्रभा क
                 े           े            े                                                                         े
वभान भाना गमा शं । धन तेयव क धनलॊतयी क ऩूजन वे भानप्तवक ळास्न्त, भन भं वॊतोऴ एल स्लबाल भं वौम्मता का बाल
                            े         े
आता शं । जो रोग अप्तधक वे अप्तधक धन एकत्र कयने टक काभना कयते शं उन्शं धनलॊतयी दे ल टक प्रप्ततटदन आयाधना कयनी
चाटशए। धनतेयव ऩय ऩूजा कयने वे व्मत्रि भं वॊतोऴ, स्लास्थम, वुख ल धन टक त्रलळेऴ प्राप्तद्ऱ शोती शं । स्जन व्मत्रिमं क उत्तभ
                                                                                                                   े
स्लास्थम भं कभी तथा वेशत खयाफ शोने टक आळॊकाएॊ फनी यशती शं उन्शं त्रलळेऴ रुऩ वे इव ळुब टदन भं ऩूजा आयाधना
कयनी चाटशए। धनतेयव भं खयीदायी ळुब भानी जाती शं । रक्ष्भी जी एलॊ गणेळ जी टक चाॊदी टक प्रप्ततभा-प्तवक्को को इव टदन
खरयदना धन प्राप्तद्ऱ एलॊ आप्तथलक उन्नप्तत शे तु श्रेद्ष शोता शं । धनतेयव क टदन बगलान धनलन्तयी वभुद्र वे अभृत करळ रेकय
                                                                          े
प्रकि शुए थे, इवप्तरमे धनतेयव क टदन खाव तौय वे फतलनं टक खयीदायी टक जाती शं । इव टदन स्िीर क फतलन, चाॊदी क
                               े                                                           े             े
फतलन खयीदने वे प्राद्ऱ शोने लारे ळुब परो भं कई गुणा लृत्रद्ध शोने टक वॊबालना फढ़जाती शं ।
धन तेयव ऩूजा भुशूतल
 प्रदोऴ कार 2 घण्िे एलॊ 24 प्तभनि का शोता शं । अऩने ळशय क वूमालस्त वभम अलप्तध वे रेकय अगरे 2 घण्िे 24 प्तभनि
                                                         े
टक वभम अलप्तध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं । अरग- अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार क प्तनधालयण का आधाय वूमोस्त वभम
                                                                        े
क अनुळाय प्तनधालयीत कयना चाटशमे। धनतेयव क टदन प्रदोऴकार भं दीऩदान ल रक्ष्भी ऩूजन कयना ळुब यशता शै ।
 े                                       े
इव लऴल 11 नलम्फय, 2012 (धनतेयव) को बायतीम वभम अनुळाय नई टदल्री भं वॊध्मा वूमालस्त क फाद 05 फज कय 27
                                                                                   े
प्तभप्तनि वे आयम्ब शोकय यात क 07 फजकय 51 प्तभनि तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा। इव वभमा अलप्तध भं स्स्थय रग्न
                             े
(लृऴब) बी भुशुतल वभम भं शोने क कायण घय-ऩरयलाय भं स्थामी रक्ष्भी की प्राप्तद्ऱ शोती शै ।
                              े
        11 नलम्फय, 2012 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न (लृऴब याप्तळ) शो यशा शं , स्स्थय रग्न का वभम वफवे उतभ
भाना जाता शं । धन तेयव क टदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 05:40:47 फजे वे रेकय यात्री
                        े
07:36:14 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार क दौयान वॊध्मा 05:29 फजे वे 07:08 फजे तक ळुब चौघटिमा शोने वे
                                           े
भुशुतल की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं ।
चौघाटिमा भुशूतल
 चर भुशूतल वुफश 08:02 वे 09:23 तक       ळुब भुशूतल दोऩशय 01.26 वे 02:47 तक      अभृत भुशूतल यात 07:08 वे 08:47 तक
 राब भुशूतल वुफश09:23 वे 10:44 तक        ळुब भुशूतल वॊध्मा 05:29 वे 07:08 तक     चर भुशूतल यात 08:47 वे 10:26 तक

ळुब भशूतल का वभम धन तेयव की ऩूजा क प्तरमे त्रलळेऴ ळुब यशे गा। राब भुशूतल ऩूजन कयने वे प्राद्ऱ शोने लारे राबं भं लृत्रद्ध
                                  े
शोती शं । ळुब कार भुशूतल टक ळुबता वे धन, स्लास्थम ल आमु भं लृत्रद्ध शोती शं । वफवे अप्तधक ळुब अभृत कार भं ऩूजा कयने
का शोता शं ।
नोि: उऩयोि लस्णलत वूमालस्त का वभम प्तनयधायण नई टदल्री क अषाॊळ ये खाॊळ क अनुळाय आधुप्तनक ऩद्धप्तत वे टकमा गमा शं । इव
                                                       े               े
त्रलऴम भं त्रलप्तबन्न भत एलॊ वूमालस्त सात कयने का तयीका प्तबन्न शोने क कायण वूमालस्त वभम का प्तनयधायण प्तबन्न शो वकता शं ।
                                                                      े
वूमालस्त वभम का प्तनयधायण स्थाप्तनम वूमालस्त क अनुळाय टश कयना उप्तचत शोगा।
                                              े
8                                         नलम्फय 2012




                               दीऩालरी ऩूजन भुशूतल (13-नलम्फय-2012)
                                                                                                                  प्तचॊतन जोळी
          भाॊ रक्ष्भी टक कृ ऩा प्राद्ऱ कयने शे तु एलॊ उनका स्थामी प्तनलाव शो वक इव उद्दे श्म वे घय-दकान-व्मलवाप्तमक
                                                                               े                    ु
कामालरम भं दीऩालरी क टदन रक्ष्भी ऩूजन शे तु टदन क वफवे ळुब भुशूतल को प्तरमा जाता शं ।
                    े                            े
          इव लऴल दीऩालरी का ऩलल भॊगरलाय, 13 नलम्फय, 201२ भं काप्ततलक भाव टक अभालस्मा वूमोदम कारीन नषत्र
स्लाती ऩयन्तु प्रदोऴकार भं त्रलळाखा नषत्र का कार यशे गा, वौबाग्म मोग भं तथा चन्दभा का भ्रभण तुरा याप्तळ भं
यशे गा। दीऩालरी क टदन अभालस्मा प्ततप्तथ, प्रदोऴ कार, ळुब रग्न ल चौघा़टिमा भुशूतल त्रलळेऴ का अत्माप्तधक भशत्ल शोता शं ।
                 े
          13 नलम्फय 2012, भॊगरलाय क टदन वूमोदमी नषत्र स्लाती, रेटकन टदन 15:06:42 फजे फाद त्रलळाखा नषत्र
                                   े
यशे गा, इव टदन वूमोदमी मोग वौबाग्म यात 23:59:12 फजे फाद ळोबन मोग यशे गा। वूमोदमी कयण ळकप्तन वुफश
                                                                                       ु
07:14:12 फजे ऩद्ळमात चतुष्ऩाद क ऩद्ळमात नाग कयण यशे गा। वूमोदम वे वॊऩूणल टदन चन्द्रभा तुरा याप्तळ भं भ्रभण
                               े
कये गा।
          प्रदोऴ कार 2 घण्िे एलॊ 24 प्तभनि का शोता शं । अऩने ळशय क वूमालस्त वभम अलप्तध वे रेकय अगरे 2 घण्िे
                                                                  े
24 प्तभनि टक वभम अलप्तध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं । अरग- अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार क प्तनधालयण का आधाय
                                                                                  े
वूमोस्त वभम क अनुळाय प्तनधालयीत कयना चाटशमे।
             े
          दीऩालरी प्रदोऴ कार भुशूतल अऩने ळशय क वूमालस्त वभम वे 2 घन्िे 24 प्तभनि तक का वभम ळुब भुशूतल वभम
                                              े
क प्तरमे प्रमोग टकमा जाता शं . इवे प्रदोऴ कार वभम कशा जाता शं । इव लऴल 13 नलम्फय 2012 (दीऩालरी) को
 े
बायतीम वभम अनुळाय नई टदल्री भं वूमालस्त वॊध्मा 05 फज कय 26 प्तभप्तनि ऩय शोगा। वॊध्मा                                05 फज कय 26
प्तभप्तनि वे आयम्ब शोकय यात क 07 फजकय 50 प्तभनि तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा।
                             े
          13 नलम्फय 2012 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न (लृऴब याप्तळ) शो यशा शं , स्स्थय रग्न का वभम वफवे
उतभ भाना जाता शं । टदऩालरी क टदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 17:32:56 फजे वे रेकय यात्री
                            े
19:28:21 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार क दौयान वॊध्मा 07:02 फजे वे 08:36 फजे तक ळुब चौघटिमा शोने
                                           े
वे भुशुतल की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं ।



                                                 बाग्म रक्ष्भी टदब्फी
                               वुख-ळास्न्त-वभृत्रद्ध की प्राप्तद्ऱ क प्तरमे बाग्म रक्ष्भी टदब्फी :- स्जस्वे धन प्रप्तद्ऱ, त्रललाश मोग,
                                                                    े
                               व्माऩाय लृत्रद्ध, लळीकयण, कोिल कचेयी क कामल, बूतप्रेत फाधा, भायण, वम्भोशन, तास्न्त्रक
                                                                     े
                               फाधा, ळत्रु बम, चोय बम जेवी अनेक ऩये ळाप्तनमो वे यषा शोप्तत शै औय घय भे वुख वभृत्रद्ध
                               टक प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै , बाग्म रक्ष्भी टदब्फी भे रघु श्री फ़र, शस्तजोिी (शाथा जोिी), प्तवमाय
                               प्तवन्गी, त्रफस्ल्र नार, ळॊख, कारी-वफ़द-रार गुॊजा, इन्द्र जार, भाम जार, ऩातार तुभिी
                                                                    े
                               जेवी अनेक दरब वाभग्री शोती शै ।
                                          ु ल
                                                            भूल्म:- Rs. 1250, 1900, 2800, 5500, 7300, 10900 भं उप्रब्द्ध
                                       गुरुत्ल कामालरम वॊऩक : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785
                                                           ल
                                                                   c
9                                      नलम्फय 2012



        स्जवभं त्रलळेऴ रूऩ वे श्री गणेळऩूजन, श्री भशारक्ष्भी ऩूजन, कफेय ऩूजन, व्माऩारयक खातं का ऩूजन, दीऩदान एलॊ
                                                                    ु
इव वभम क अॊतगलत अऩने वेलकं को उऩशाय दे ना ळुब यशता शं ।
        े
        इव भुशूतल वभम भं अऩने ऩरयलाय क फिे वदस्मं एलॊ प्तभत्र लगल वे आळीलालद रेना एलॊ उन्शं प्तभठाईमाॊ, लस्त्र ल
                                      े
उऩशाय आटद दे ना बी ळुब यशता शं । त्रलद्रानो क भत वे इव भुशूतल भं ऩरयलाय क फिे वदस्मं एलॊ प्तभत्र लगल वे प्राद्ऱ शोने
                                             े                           े
लारा आळीलालद ळुब परप्रद प्तवद्ध शोता शं । इव भुशूतल वभम भं भॊटदय इत्माटद धभलस्थरो ऩय दान इत्माटद कयना बी
त्रलळेऴ राब दामश एलॊ कल्माणकायी शोता शं ।


दीऩालरी चौघटिमाॊ भुशूतल
दीऩालरी चौघ़टिमा भुशूतल वभम को घय ल ऩरयलाय भं रक्ष्भी ऩूजन कयने क प्तरमे ळुब भाना जाता शं । श्रीभशारक्ष्भी
                                                                 े
ऩूजन एलॊ दीऩालरी का भशाऩलल काप्ततलक कृ ष्ण अभालस्मा भं प्रदोऴ कार एलॊ यात्रत्र वभम भं स्स्थय रग्न वभम भं कयना
ळुब शोता शै रक्ष्भी ऩूजन, दीऩ प्रजलस्ल्रत कयने क प्तरमे प्रदोऴकार भुशूतल वभम शी त्रलळेऴतमा ळुब भाना गमा शं ।
                                                े
रक्ष्भी ऩूजा भुशूतल दीऩालारी क टदन
                              े
       चय भुशूतल टदन भं 09:24 वे 10:44 तक
       राब भुशूतल वुफश भं 10:44 वे 12:05 तक
       अभृत भुशूतल वुफश भं 12:05 वे 01:26 तक
       ळुब भुशूतल दोऩशय भं 02:47 वे 04:07 तक
       राब भुशूतल वॊध्मा भं 07:08 वे यात 08:47 तक
       ळुब भुशूतल यात भं 10:26 वे यात 12:06 तक
नोि: उऩयोि लस्णलत वूमालस्त का वभम प्तनयधायण नई टदल्री क अषाॊळ ये खाॊळ क अनुळाय आधुप्तनक ऩद्धप्तत वे टकमा
                                                       े               े
गमा शं । इव त्रलऴम भं त्रलप्तबन्न भत एलॊ वूमालस्त सात कयने का तयीका प्तबन्न शोने क कायण वूमालस्त वभम का
                                                                                  े
प्तनयधायण प्तबन्न शो वकता शं । वूमालस्त वभम का प्तनयधायण स्थाप्तनम वूमालस्त क अनुळाय टश कयना उप्तचत शोगा।
                                                                             े


                                                   दगाल फीवा मॊत्र
                                                    ु
  ळास्त्रोि भत क अनुळाय दगाल फीवा मॊत्र दबालग्म को दय कय व्मत्रि क वोमे शुले बाग्म को जगाने लारा भाना गमा
                े        ु               ु          ू             े
  शं । दगाल फीवा मॊत्र द्राया व्मत्रि को जीलन भं धन वे वॊफॊप्तधत वॊस्माओॊ भं राब प्राद्ऱ शोता शं । जो व्मत्रि आप्तथलक
        ु
  वभस्मावे ऩये ळान शं, लश व्मत्रि मटद नलयात्रं भं प्राण प्रप्ततत्रद्षत टकमा गमा दगाल फीवा मॊत्र को स्थाप्तद्ऱ कय रेता
                                                                                 ु
  शं , तो उवकी धन, योजगाय एलॊ व्मलवाम वे वॊफॊधी वबी वभस्मं का ळीघ्र शी अॊत शोने रगता शं । नलयात्र क टदनो भं
                                                                                                   े
  प्राण प्रप्ततत्रद्षत दगाल फीवा मॊत्र को अऩने घय-दकान-ओटपव-पक्ियी भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता
                        ु                          ु         ै
  शं , व्मत्रि ळीघ्र शी अऩने व्माऩाय भं लृत्रद्ध एलॊ अऩनी आप्तथलक स्स्थती भं वुधाय शोता दे खंगे। वॊऩूणल प्राण प्रप्ततत्रद्षत
  एलॊ ऩूणल चैतन्म दगाल फीवा मॊत्र को ळुब भुशूतल भं अऩने घय-दकान-ओटपव भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ राब
                   ु                                        ु
  प्राद्ऱ शोता शं ।                                                       भूल्म: Rs.730 वे Rs.10900 तक

                GURUTVA KARYALAY: Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785,
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10                                        नलम्फय 2012




                                            स्पटिक श्रीमॊत्र का ऩूजन
                                                                                                                   प्तचॊतन जोळी

       आज क बौप्ततक मुग भं अथल (धन) जीलन टक भुख्म आलश्मिाओॊ भं वे एक शै । धनाढ्म व्मत्रिओॊ जीलनळैरी को
           े
दे खकय प्रबात्रलत शोते शुले वाधायण व्मटक टक बी काभना शोती शं , टक उवक ऩाव बी इतना धन शो टक लश अऩने जीलन
                                                                     े
भं वभस्त बौप्ततक वुखो को बोग ने भं वभथल शं। एवी स्स्थभं भेशनत, ऩरयश्रभ वे कभाई कयक धन अस्जलत कयने क
                                                                                  े                े
फजाम कछ रोग अल्ऩ वभम भं ज्मादा कभाने टक भानप्तवकता क कायण कबी-कबी गरत तयीक अऩनाते शं ।
      ु                                             े                     ं
       स्जवक पर स्लरुऩ एवे रोग धन का लास्तत्रलक वुख बोगने वे लॊप्तचत यश जाते
            े
शं औय योग, तनाल, भानप्तवक अळाॊप्तत जेवी अन्म वभस्माओॊ वे ग्रस्त शो जाते शं ।
       जशाॊ गरत तयीक वे कभामे शुले धन क कायण वभाज एवे रोगो को शीन बाल
                    ं                  े
वे दे खते शं । जफटक भेशनत, ऩरयश्रभ वे काभामे शुले धन वे स्लमॊ का आत्भत्रलद्वाव
फढता शं एलॊ वभाज भं प्रप्ततद्षा औय भान वम्भान बी वयरता वे प्राद्ऱ शो जाता शं ।
       जो व्मत्रि धाप्तभलक त्रलचाय धायाओॊ वे जुिे शो लश इद्वय भं त्रलद्वाय यखते शुले स्लमॊ टक
भेशनत, ऩरयश्रभ क फर ऩय कभामे शुले धन को टश वच्चा वुख भानते शं । धभल भं आस्था
                े
एलॊ त्रलद्वाव यखने लारे व्मत्रि क प्तरमे भेशनत, ऩरयश्रभ कयने क उऩयाॊत अऩनी आप्तथलक
                                 े                            े
स्स्थभं उन्नप्तत एलॊ रक्ष्भी को स्स्थय कयने शे तु, श्री मॊत्र क ऩूजन का उऩाम अऩनाकय
                                                               े
जीलन भं टकवी बी वुख वे लॊप्तचत नशीॊ यश वकते, उन्शं अऩने जीलन भं कबी धन का
अबाल नशीॊ यशता। उनक वभस्त कामल वुचारु रुऩ वे चरते शं । रक्ष्भी कृ ऩा प्राप्तद्ऱ क
                   े                                                             े
प्तरए श्रीमॊत्र का वयर ऩूजन त्रलधान स्जवे अऩना कय वाधायण व्मत्रि त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । इव भं जया बी वॊळम नशीॊ शं ।

श्रीमॊत्र का ऩूजन यॊ क वे याजा फनाने लारा एलॊ व्मत्रि टक दरयद्रता को दय कयने लारा शं ।
                                                                      ू
      अऩने ऩूजा स्थान भं प्राण-प्रप्ततत्रद्षत श्रीमॊत्र को ऩूजन क प्तरमे स्थात्रऩत कयं । (प्राण-प्रप्ततत्रद्षत श्रीमॊत्र टकवी बी
                                                                  े
       मोग्म त्रलद्रान ब्राह्मण मा मोग्म जानकाय वे प्तवद्ध कयलारे)
      श्री मॊत्र को प्रत्मेक ळुक्रलाय को दध, दशी, ळशद, घी औय ळक्कय (गुि) अथालत ऩॊचाभृत फनाकय स्नान कयामे।
                                           ु
      स्नान क ऩद्ळमात उवे रार कऩिे वे ऩोछ दं ।
              े
      श्री मॊत्र को टकवी चाॊदी मा ताॊफे टक प्रेि भं स्थाऩीत कयं ।
      श्री मॊत्र क नीचे 5 रुऩमे मा 10 रुऩमे का नोि यखदं । (5,10 रुऩमे का प्तवक्का नशीॊ)
                   े
      श्री मॊत्र स्थात्रऩत कयने लारी प्रेि भं श्रीमॊत्र ऩय स्पटिक टक भारा को चायं ओय घुभाते शुले स्थात्रऩत कयं ।
      श्री मॊत्र क उऩय भौरी का िु किा 3-5 फाय घुभाते शुले अत्रऩत कयं ।
                   े                                            ल
      श्री मॊत्र क उऩय वुखा अद्श गॊध प्तछिक।
                   े                        ं
      मटद वॊबल शो तो रार ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं । (कभर, भॊदाय(जावूद) मा गुराफ शो तो उत्तभ)
                                     ल
      धूऩ-दीऩ इत्मादी वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं ।
      उऩयोि त्रलधन प्रप्तत ळुक्रलाय कयं एलॊ अन्म टदन कलर धूऩ-दीऩ कयं ।
                                                       े
      टकवी एक रक्ष्भी भॊत्र का एक भारा भॊत्र जऩ कयं । श्रीवूि, अद्श रक्ष्भी स्तोत्र इत्मादी का ऩाठ कयं मटद ऩाठ कयने भं आऩ
       अवभथल शोतो फाजाय भं श्रीवूि, अद्श रक्ष्भी इत्मादी स्तोत्र टक कवेि वीिी प्तभरती शं उवका श्रलण कयं ।
                                                                     े
11                                        नलम्फय 2012



           ऩूजा भं जाने-अनजाने शुई गरती क प्तरए रक्ष्भीजी का स्भयण कयते शुले षभा भाॊगकय वुख, वौबाग्म औय वभृत्रद्ध
                                          े
            टक काभना कयं ।
           प्रप्तत ळुक्रलाय उऩयोि ऩूजन कयने वे जीलन भं टकवी बी प्रकाय का आप्तथलक वॊकि नशीॊ आता।
           मदी आप्तथलक वॊकि वे ऩये ळान शं तो श्री मॊत्र क ऩूजन वे वभस्त प्रकाय क आप्तथलक वॊकि धीये -धीये दय शो जाते शं ।
                                                          े                      े                         ू
नोि: श्री मॊत्र क क नीचे यखा शुला नोि प्रप्तत एक-दो भाव भं एक फाय टकवी दे ली भॊदीय भं बेि कय दं । (राब प्राद्ऱ शोने ऩय फदरे)
                 े े
           प्रथन फाय यखा शुला नोि श्री मॊत्र क ऩूजन वे राब शोने क फाद शी फदरे। राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने तक नोि को यखे यशं ।
                                               े                  े
           राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने क ऩद्ळमात प्रप्तत भाश भं एक फाये प्रप्ततऩदा(एकभ) को ऩुयाना नोि फदर कय नमे नोि यखं।
                                        े
           जेवे-जेवे राब प्राद्ऱ शोने रगे आऩ क अनुकर कामल शो ने रगे तो नोि टक यकभ फढाते यशं । अप्तधक राब प्राद्ऱ शोता शं ।
                                               े    ू

उदाशण: मटद ऩशरे 5 रुऩमे का नोि यखा शं तो उस्वे राब शोने क ऩद्ळमात नोि फदरते शुले 10 रुऩमे का नोि यखे। 10 रुऩमे का
                                                         े
नोि यखने वे राब शोने क ऩद्ळमात नोि फदरते शुले 20 रुऩमे का नोि यखे। इवी प्रकाय नोि को फदते यशं इस्वे अप्तधक राब प्राद्ऱ
                      े
शोता शं ।
अप्तधक राब प्राप्तद्ऱ शे तु वाभान्म प्तनमभ:
ऩूजन क टदन ब्रह्मचमल का ऩारन कयं ।
      े
ऩूजन क टदन वुगॊप्तधत तेर, ऩयफ्मूभ, इत्र का प्रमोग कयने वे फचे।
      े
त्रफना प्माज-रशवून का ळाकाशायी बोजन ग्रशण कयं । ळुक्रलाय वपद प्तभद्षान बोजन भं ग्रशण कयं ।
                                                           े



                                             भॊत्र प्तवद्ध स्पटिक श्री मॊत्र
     "श्री मॊत्र" वफवे भशत्लऩूणल एलॊ ळत्रिळारी मॊत्र शै । "श्री मॊत्र" को मॊत्र याज कशा जाता शै क्मोटक मश अत्मन्त ळुब फ़रदमी मॊत्र शै ।
 जो न कलर दवये मन्त्रो वे अप्तधक वे अप्तधक राब दे ने भे वभथल शै एलॊ वॊवाय क शय व्मत्रि क प्तरए पामदे भॊद वात्रफत शोता शै । ऩूणल
       े   ू                                                               े            े
 प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि "श्री मॊत्र" स्जव व्मत्रि क घय भे शोता शै उवक प्तरमे "श्री मॊत्र" अत्मन्त फ़रदामी प्तवद्ध शोता शै
                                                                     े                 े
 उवक दळलन भात्र वे अन-प्तगनत राब एलॊ वुख की प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । "श्री मॊत्र" भे वभाई अटद्रतीम एलॊ अद्रश्म ळत्रि भनुष्म की
    े
 वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे वभथल शोप्तत शै । स्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय प्तनयाळा दय शोकय लश भनुष्म
                                                                                            ू
 अवफ़रता वे वफ़रता टक औय प्तनयन्तय गप्तत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे वभस्त बौप्ततक वुखो टक प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । "श्री मॊत्र"
 भनुष्म जीलन भं उत्ऩन्न शोने लारी वभस्मा-फाधा एलॊ नकायात्भक उजाल को दय कय वकायत्भक उजाल का प्तनभालण कयने भे वभथल
                                                                     ू
 शै । "श्री मॊत्र" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय क स्थान ऩय स्थात्रऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फस्न्धत ऩये ळाप्तन भे न्मुनता
                                               े
 आप्तत शै ल वुख-वभृत्रद्ध, ळाॊप्तत एलॊ ऐद्वमल टक प्रप्तद्ऱ शोती शै ।
      गुरुत्ल कामालरम भे "श्री मॊत्र" 12 ग्राभ वे 2250 Gram (2.25Kg) तक टक वाइज भे उप्रब्ध शै
 .



                                                                                  भूल्म:- प्रप्तत ग्राभ Rs. 10.50 वे Rs.28.00
                                                  GURUTVA KARYALAY
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12                                       नलम्फय 2012




                                               वद्ऱ श्री का चभत्काय
                                                                                                                     प्तचॊतन जोळी

         दीऩालरी क टदन फशी-खाते क ऩूजन क वभम फशी-खाते भं उऩयोि क्रभभं रार यॊ ग की करभ म ऩेन वे श्री
                  े              े      े
प्तरखे। ऩशरे एक फाय श्री प्तरखे, टपय दो फाय श्री श्री प्तरखे, टपय तीन फाय श्री श्री श्री, इव प्रकाय क्रभ को फढाते जाए
आखीय भं वात फाय श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री प्तरखे, वद्ऱश्री क नीचे
                                                                     े
अऩने ईद्श का नाभ प्तरखे मा ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ् प्तरखे। टपय धुऩ-                श्री
दीऩ, ऩुष्ऩ आटद वे उवका ऩूजन कयं ।                                            श्री              श्री
         उि प्रमोग कयने वे आनेलारा नमा लऴल व्मलवाम भं आप्तथलक
द्रत्रद्श वे वुख, वभृत्रद्ध रेकय आमेगा औय अत्माप्तधक राबदामक यशे गा।         श्री श्री श्री
         स्जन रोगो क ऩाव रक्ष्भी (धन) स्स्थय नशीॊ यशता। रक्ष्भी आने
                    े                                                        श्री श्री श्री श्री
वे ऩूलल जाने को तत्ऩय शोती शं । उन्शं अऩनी जेफ भं मा भनीऩवल भं एक
स्पद कागज ऩय उऩयोि तयीक वे श्री प्तरख कय यखना चाटशए। वद्ऱ श्री
   े                   े                                                     श्री श्री श्री श्री श्री
प्तरखने वे रक्ष्भी रम्फे वभम तक स्स्थय यशने क मोग फनते शं लश नमे
                                             े                               श्री श्री श्री श्री श्री श्री
स्रोत वे धन राब क बी प्रफर मोग फनते शं । (अद्शगॊध की स्माशी
                 े
फनाकय अनाय की करभ वे प्तरखना अप्तत उत्तभ यशता शं ।)                          श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री
        उि तयीक वे वद्ऱ श्री को अऩनी अरभायी, गल्रा (कळ फोक्ळ)
                े                                     ै                               ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ्
         मा धन यखने क स्थान ऩय कभकभ मा अद्शगॊध वे अऩने दाशीने
                     े          ु ु
         शाथ की अनाप्तभका उॊ गरी वे प्तरखने ऩय बी मश अत्माप्तधक राबप्रद यशता शं ।
        उि तयीक वे वद्ऱ श्री को चाॊटद मा वोने क ऩत्तय ऩय मॊत्र स्लरुऩ बी फनामा वकता शं । ताॊफे चाॊदी क ऩत्तय भं
                े                               े                                                      े
         फनाते वभम ध्मान यखे की ऩत्तय की वतश ऩय श्री उऩय की ओय उबयी शुई शो, नीचे की ओय खुदी शुई न शं।
        वद्ऱ श्री की जगश ऩय अनेक रोग श्री मा रक्ष्भी भॊत्र का उच्चायण कयते शुए, अऩनी अरभायी, गल्रा (कळ
                                                                                                      ै
         फोक्ळ) आटद धन यखने क स्थान ऩय अनाभीका उॊ गरी वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । कई दकानदाय मा व्मलवामीक
                             े                                                       ु
         स्थानो ऩय बी उि तयीक वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । वद्ऱ श्री वे भाॊ रक्ष्भीजी प्रवन्न शोती शं । क्मोकी श्री का वयर
                             े
         अथल शं वुख वभृत्रद्ध-वॊऩन्नता।

                                                          रक्ष्भी मॊत्र
श्री मॊत्र (रक्ष्भी मॊत्र)                भशारक्ष्भमै फीज मॊत्र                     लैबल रक्ष्भी मॊत्र
श्री मॊत्र (भॊत्र यटशत)                   भशारक्ष्भी फीवा मॊत्र                     कनक धाया मॊत्र
श्री मॊत्र (वॊऩूणल भॊत्र वटशत)            रक्ष्भी दामक प्तवद्ध फीवा मॊत्र           श्री श्री मॊत्र (रप्तरता भशात्रत्रऩुय वुन्दमै
श्री मॊत्र (फीवा मॊत्र)                   रक्ष्भी दाता फीवा मॊत्र                   श्री भशारक्ष्भमं श्री भशामॊत्र)
श्री मॊत्र श्री वूि मॊत्र                 रक्ष्भी फीवा मॊत्र                        अॊकात्भक फीवा मॊत्र
श्री मॊत्र (कभल ऩृद्षीम)
             ु                            रक्ष्भी गणेळ मॊत्र                        ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊत्र ऩूजन मॊत्र
मॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक शे तु वॊऩक कयं । GURUTVA KARYALAY, Call us: 91+ 9338213418, 91+ 9238328785
       े                           ल
13                                    नलम्फय 2012




                                                    त्रलप्तबन्न रक्ष्भी भॊत्र
                                                                                                             प्तचॊतन जोळी
भॊत्र :
     1. ॐ श्री भशारक्ष्म्मै नभ्। (Om Shree Mahalakshmai Namah)
     2. श्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ कभरे कभरारमे। (Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye)
     3. श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ कभरलाप्तवन्मै स्लाशा । (Shreem Hreem Kleem Aim Kamalavasinyai Swaha)
     4. ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै नभ्। (Hreem Shreem Kleem Mahalakshmai Namah)
     5. ॐ श्रीॊ प्तश्रमै नभ्। (Om Shreem Shriyai Namah)
     6. ॐ ह्री श्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ भशारक्ष्भी भभ गृशे धनॊ ऩूयम ऩूयम प्तचॊतामै दयम दयम स्लाशा ।
                                                                                               ू   ू
           (Om Hreem Shreem Kreem Shreem Kreem Kleem Shreem Mahalakshmi Mam Gruhe Dhanam
           Pooraya Pooraya Chintayai Dooraya Dooraya Swaha)
     7. धन राब एलॊ वभृत्रद्ध भॊत्र
           ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ त्रत्रबुलन भशारक्ष्म्मै अस्भाॊक दारयद्र्म नाळम प्रचुय धन दे टश दे टश क्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ ॐ ।
           (Om Shreem Hreem Kleem Tribhuvan Mahalakshmai Asmank Daridray Nashay Prachur Dhan Dehi
           Dehi Kleem Hreem Shreem Om)
     8. अषम धन प्राप्तद्ऱ भॊत्र

            ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ वं ॐ ह्रीॊ क ए ई र ह्रीॊ श व क श र ह्रीॊ वकर ह्रीॊ वं ऐॊ क्रीॊ ह्रीॊ श्री ॐ ।
           (Om Shreem Hreem Kleem Aim Soum Om Hreem Ka Ae Ee La Hreem Ha Sa Ka Ha La Hreem Sakal
           Hreem Soum Aim Kleem Hreem Shreem Om)
कवे कयं भॊत्र जाऩ :-
 ै

धनतेयव मा दीऩालरी क टदन वॊकल्ऩ रेकय प्रात्कार स्नान कयक ऩूलल मा उत्तय टदळा टक औय भुख
                   े                                   े                                                 कयक रक्ष्भी टक भूप्ततल
                                                                                                            े
मा प्तचत्र की ऩॊचोऩचाय मा दषोऩचाय मा ऴोड्ऴोऩचाय वे ऩूजा कयं ।

           ळुद्ध-ऩत्रलत्र आवन ग्रशण कय स्पटिक टक भारा वे भॊत्र का जाऩ १,५,७,११ भारा जाऩ ऩूणल कय अऩने कामल उद्दे श्म टक
ऩूप्ततल शे तु भाॊ रक्ष्भी वे प्राथना कयं ।
                                                      अप्तधकस्म अप्तधक परभ ्।
                                                                      ॊ


जऩ        स्जतना   अप्तधक     शो   वके       उतना   अच्छा   शै ।   मटद   भॊत्र   अप्तधक   फाय   जाऩ    कय     वकं     तो    श्रेद्ष।
प्रप्ततटदन स्नान इत्माटदवे ळुद्ध शोकय उऩयोि टकवी एक रक्ष्भी भॊत्र का जाऩ 108 दाने टक भारा वे कभ वे कभ एक
भारा जाऩ अलश्म कयना चाटशए।
उऩयोि भॊत्र क त्रलप्तध-त्रलधान क अनुवाय जाऩ कयने वे भाॊ रक्ष्भी टक कृ ऩा वे व्मत्रि को धन की प्राप्तद्ऱ शोती शै औय
             े                  े
प्तनधलनता का प्तनलायण शोता शै ।
14                                                 नलम्फय 2012




                       दीऩालरी का भशत्ल औय वॊऩूणल ळास्त्रोि रक्ष्भी ऩूजन
                                                               स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, ऩॊ.श्री बगलानदाव त्रत्रलेदी जी, वॊदीऩ ळभाल
        दीऩोत्वल अथालत दीऩालरी ऩलल को ऩुयातन कार                                  एवा भानाजाता शं की आज क टदन शी दे ली
                                                                                                         े
वे शी बायतलऴल भं ज्मोप्ततऩलल क रुऩ भं भनामा जाता शं ।
                              े                                         रक्ष्भी का जन्भ शुला था।
फिे ़-फिे ़ भशानगयं वे रेकय छोिे वे छोिे गालं भं बी
धनी वे रेकय गयीफ वे गयीफ व्मत्रि की चौखि बी इव                          ळास्त्रं भं दे ली भशारक्ष्भी टक उत्ऩत्रत्त वे वॊफॊप्तधत
ऩालन ऩलल क अलवय ऩय दीऩक की ऩॊत्रिमं क जगभगा
          े                          े                                  त्रलप्तबन्न भत शं
उठती शं । दीऩालरी क टदन अभालस्मा शोने क कायण इव
                   े                   े
                                                                                  त्रलप्तबन्न धभल ळास्त्रो भं रक्ष्भी टक उत्ऩत्रत्त के
टदन वकर रोक भं चायं ओय अॊधकाय परा शोता शं ,
                               ै
                                                                        त्रलऴम भं अनेक कथाएॊ उल्रेस्खत शं । उन प्राचीन कथाओॊ
रेटकन भनुष्म को अॊधकाय ऩवॊद नशीॊ शं , इव प्तरए लशॉ
                                                                        भं वभुद्र भॊथन क दौयान भाॊ भशारक्ष्भी टक उत्ऩत्रत्त भानी
                                                                                        े
उववे भुकाफरा कयने क उद्दे श्म वे अऩने घय-दकान आटद
                   े                      ु
                                                                        जाती शं । त्रलप्तबन्न ग्रॊथो भं रक्ष्भी एलॊ वभुद्र भॊथन टक
स्थानं ऩय दीऩं की ऩॊत्रिमं भं वजाकय अॊधेये को दय
                                               ू
                                                                        कथाओॊ भं अॊतय दे खने को प्तभरता शं । ऩयॊ तु भूरत् वफ
बगाने का वाथलक प्रमाव कयता शं ।
                                                                        कथाओॊ भं अॊतय शोने क उऩयाॊत बी अप्तधकतय वभान शं ।
                                                                                            े
        ऩौयास्णक भान्मताओॊ क अनुळाय ऩुयातन कार भं
                            े
                                                                        प्रजाऩत्म कल्ऩ क अनुळाय:
                                                                                        े
दीऩालरी ऩलल को "रोकोत्वल" क रुऩ भं भनामा जाता
                           े
                                                                                  बगलान ब्रह्मा ने रुद्र रूऩ को शी स्लमॊबु भनु औय
था। रेटकन आज दीऩालरी ऩलल की भुख्मत् दो प्रभुख
                                                                        स्त्री रूऩ भं वतरूऩा को प्रकि टकमा औय उवक फाद
                                                                                                                 े
त्रलळेऴता     दे खने   को    प्तभरती   शं ।   एक    शं ,   दीऩं   की
                                                                        त्रप्रमव्रत उत्तानऩाद, प्रवूप्तत औय आकप्तत नाभ टक वॊतानं
                                                                                                              ू
जगभगाशि वे अॊधकायको दय कयना औय दवयी शै , लैबल
                     ू          ू
                                                                        को जन्भ टदमा। टपय आकप्तत का त्रललाश रुप्तच वे औय
                                                                                            ू
एलॊ वुख-वभृत्रद्ध की दे ली भाॉ भशारक्ष्भी क ऩूजन का
                                           े
                                                                        प्रवूप्तत का त्रललाश दष वे टकमा गमा। दष ने प्रवूप्तत वे
आमोजन।
                                                                        24 कन्माओॊ को जन्भ टदमा। इवक नाभ श्रद्धा, रक्ष्भी,
                                                                                                    े
        धाप्तभलक भान्मताओॊ क अनुळाय दीऩालरी क टदन
                            े                े
                                                                        ऩुत्रद्श, धुप्तत, तुत्रद्श, भेधा, टक्रमा, फुत्रद्ध, रज्जा, लऩु, ळास्न्त, ऋत्रद्ध,
घय-दकान आटद स्थानं क अराला अन्म वाललजप्तनक
    ु               े
                                                                        औय कीप्ततल इत्मादी शं ।
स्थानं ऩय बी दीऩकं की ऩॊत्रिमाॉ यखने का त्रलधान शं ।
        एवी भान्मता शं की श्राद्ध ऩष वे रेकय काप्ततलक                   त्रलष्णु ऩुयाण क अनुळाय:
                                                                                        े
भाव की अभालस्मा तक त्रऩतयं को ऩुन् अऩने रोक भं                                    एक फाय घूभते शुए दलालवा ने अऩरूऩा त्रलद्याधयी क
                                                                                                    ु                            े
रोिना शोता शं । ऩरयलाय क रोग त्रऩतयं का आह्वान कयते
                        े                                               ऩाव एक फशुत वुन्दय भारा दे खी। लश वुगस्न्धत भारा
शं , उनका ऩूजन कय दीऩं वे उनका ऩुन् लाऩव जाने                           थी। ऋत्रऴ ने उव भारा को अऩने जिाओॊ ऩय धायण
लारा अॊप्तधमाया भागल प्रकाप्तळत कयक उन्शं अगरे लऴल तक
                                   े                                    कयने क प्तरए भाॊगा औय प्राद्ऱ कय प्तरमा। दलालवा ने वोचा
                                                                              े                                   ु
क प्तरए त्रलदाई दे ते शं ।
 े                                                                      टक मश भारा प्रेभ क कायण, उवे प्राद्ऱ कय ले काभातुय
                                                                                          े
दीऩालरी क वॊफॊध भं बत्रलष्मऩुयाण भं उल्रेख शं की
         े                                                              शो उठे शं , ले अऩने काभ क आलेग को योकने क प्तरए
                                                                                                 े               े
            लस्त्र-ऩुष्ऩै् ळोप्तबतव्मा क्रम-त्रलक्रम-बूभम्।             इधय-उधय घूभते-घूभते स्लगल रोक ऩशुॊचे। लशाॊ उन्शंने
अथालत ्: आज क टदन धनऩप्तत कफेय का बी ऩूजन शोता
             े             ु                                            अऩने प्तवय वे भारा शिाकय इन्द्र को दे दी। इन्द्र ने उव
शं । टशन्द ू धभलळास्त्रं क अनुवाय कफेय धनऩप्तत शं ।
                          े        ु                                    भारा को ऐयालत क गरे भं िार टदमा औय ऐयालत वे
                                                                                       े
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लश भारा धयती ऩय प्तगय गई औय ऩैयं वे कचर गई।
                                     ु                                  उन वफको एकत्र यखकय दे लताओॊ ने ऩुन: फिे लेग
दलालवा ने जफ मश दे खा टक उवकी भारा की मश दगप्तत
 ु                                        ु ल                    वे वभुद्र भॊथन आयम्ब टकमा। इव फाय क भॊथन वे यत्नं
                                                                                                    े
शुई तो लश क्रोप्तधत शुए औय उन्शंने इन्द्र को श्रीशीन शोने        भं वफवे उत्तभ यत्न कौस्तुब प्रकि शुआ, जो वूमभण्िर क
                                                                                                             ल      े
का ळाऩ टदमा। जफ इन्द्र ने मश वुना तो बमबीत शोकय                  वभान ऩयभ कास्न्तभान था। लश अऩने प्रकाळ वे तीनं
ऋत्रऴ क ऩाव आमे ऩय उनका ळाऩ रौि नशीॊ वकता था।
       े                                                         रोकं को प्रकाप्तळत कय यशा था। दे लताओॊ ने प्तचॊताभस्ण
इवी ळाऩ क कायण अवुयं ने इन्द्र औय दे लताओॊ को
         े                                                       को आगे यखकय कौस्तुब का दळलन टकमा औय उवे
स्लगल वे फाशय प्तनकार टदमा। दे लता ब्रह्मा जी की ळयण भं          बगलान त्रलष्णु की वेला भं बंि कय टदमा। तदनन्तय,
गमे औय उनवे अऩने कद्श क त्रलऴम भं कशा।
                       े                                         प्तचन्ताभस्ण को भध्म भं यखकय दे लताओॊ औय दै त्मं ने
       ब्रह्मा जी दे लताओॊ को रेकय त्रलष्णु क ऩाव गमे
                                             े                   ऩुन: वभुद्र को भथना आयम्ब टकमा। ले वबी फर भं
औय उनवे वायी फात कशी तफ त्रलष्णु ने दे लताओॊ को                  फढ़े -चढ़े थे औय फाय-फाय गजलना कय यशे थे। अफ की फाय
दानल वे वुरश कयक वभुद्र भॊथन कयने की वराश दी
                े                                                उवे भथे जाते शुए वभुद्र वे उच्चै:श्रला नाभक अद्व प्रकि
औय स्लमॊ बी वशामता का आद्वावन टदमा। उन्शंने                      शुआ। लश वभस्त अद्वजाप्तत भं एक अद्भत यत्न था। उवक
                                                                                                    ु             े
फतामा टक वभुद्र भॊथन वे उन्शं रक्ष्भी औय अभृत ऩुन्               फाद गज जाप्तत भं यत्न बूत ऐयालत प्रकि शुआ। उवके
प्राद्ऱ शोगा। अभृत ऩीकय ले अजय औय अभय शो जाएॊगे।                 वाथ द्वेतलणल क चौवठ शाथी औय थे। ऐयालत क चाय
                                                                               े                        े
दे लताओॊ ने बगलान त्रलष्णु की फात वुनकय वभुद्र भॊथन              दाॉत फाशय प्तनकरे शुए थे औय भस्तक वे भद की धाया
का आमोजन टकमा। उन्शंने अनेक औऴप्तधमाॊ एकत्रत्रत की               फश यशी थी। इन वफको बी भध्म भं स्थात्रऩत कयक ले
                                                                                                            े
औय वभुद्र भं िारी। टपय भॊथन टकमा गमा।                            वफ ऩुन: वभुद्र भथने रगे। उव वभम उव वभुद्र वे
       भॊथन क प्तरमे जाते शुए वभुद्र क चायं ओय फिे
             े                        े                          भटदया, बाॉग, काकिाप्तवॊगी, रशवुन, गाजय,            अत्मप्तधक
जोय की आलाज उठ यशी थी। इव फाय क भॊथन वे
                               े                                 उन्भादकायक धतूय तथा ऩुष्कय आटद फशुत-वी लस्तुएॉ
दे लकामं की प्तवत्रद्ध क प्तरमे वाषात ् वुयप्तब काभधेनु प्रकि
                        े                                        प्रकि शुईं। इन वफको बी वभुद्र क टकनाये एक स्थान ऩय
                                                                                                े
शुईं। उन्शं कारे, द्वेत, ऩीरे, शये तथा रार यॊ ग की वैकिं         यख टदमा गमा। तत्ऩद्ळात ले श्रेद्ष दे लता औय दानल ऩुन:
गौएॉ घेये शुए थीॊ। उव वभम ऋत्रऴमं ने फिे शऴल भं बयकय             ऩशरे की शी बाॉप्तत वभुद्र-भॊथन कयने रगे। अफ की फाय
दे लताओॊ औय दै त्मं वे काभधेनु क प्तरमे माचन की औय
                                े                                वभुद्र वे वम्ऩूणल दळं टदळाओॊ भं टदव्म प्रकाळ व्माद्ऱ शो
कशा आऩ वफ रोग प्तभरकय प्तबन्न-प्तबन्न गोत्रलारे                  गमा उव टदव्म प्रकाळ वे दे ली भशारक्ष्भी प्रकि शुईं।
ब्राह्मणं को काभधेनु वटशत इन वम्ऩूणल गौओॊ का दान                 इवप्तरए रक्ष्भी को वभुद्र की ऩुत्री क रूऩ भं जाना जाता शै ।
                                                                                                      े
अलश्म कयं । ऋत्रऴमं क माचना कयने ऩय दे लताओॊ औय
                     े                                                  भशारक्ष्भी ने दे लता, दानल, भानल वम्ऩूणल प्रास्णमं
दै त्मं ने बगलान ् ळॊकय की प्रवन्नता क प्तरमे ले वफ
                                      े                          की ओय दृत्रद्शऩात टकमा। भाता भशारक्ष्भी की कृ ऩा-दृत्रद्श
गौएॉ दान कय दीॊ तथा मस कभं भं बरी-बाॉप्तत भन को                  ऩाकय वम्ऩूणल दे लता उवी वभम ऩुन् श्रीवम्ऩन्न शो गमे।
रगाने लारे उन ऩयभ भॊगरभम भशात्भा ऋत्रऴमं ने उन                   ले तत्कार याज्माप्तधकायी क ळुब रषणं वे वम्ऩन्न
                                                                                           े
गौओॊ का दान स्लीकाय टकमा। तत्ऩद्ळात वफ रोग फिे                   टदखामी दे ने रगे।
जोळ भं आकय षीयवागय को भथने रगे। तफ वभुद्र वे                     रक्ष्भी की उत्ऩत्रत्त
कल्ऩलृष, ऩारयजात, आभ का लृष औय वन्तान- मे चाय                           वृत्रद्श यचना क त्रलऴम भं सान प्राद्ऱ कयते शुले
                                                                                       े
टदव्म लृष प्रकि शुए।                                             बीष्भ ने ऩुरस्त्म ऋत्रऴ वे प्रद्ल टकमा ऋत्रऴ श्रेद्ष, रक्ष्भी
                                                                 की उत्ऩत्रत्त क त्रलऴम भं आऩ भुझे त्रलस्ताय वे फताइए।
                                                                                े
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क्मंटक इव त्रलऴम भं कथा अनेक शं । मश वुनकय                         कयं । कछ त्रलद्रानो का भत शं की प्तवॊदय वे मटद रक्ष्भीजी
                                                                          ु                              ू
ऩुरस्त्म ऋत्रऴ फोरे टक भशत्रऴल बृगु टक ऩत्नी ख्माप्तत के           का फीज भॊत्र अॊटकत कयना अप्तत राबप्रद शोता शं ।
गबल वे एक त्रत्ररोकवुन्दयी कन्मा उत्ऩन्न शुई। लश                   क्मोकी, प्राम् घयं एलॊ व्मलवामीक स्थानं ऩय ॐ, श्री,
वभस्त ळुब रषणं वे वुळोप्तबत थी। इवप्तरए उवका                       स्लस्स्तक, ळुब-राब एलॊ रयत्रद्ध-प्तवत्रद्ध प्तरखा शुला वबी ने
नाभ रक्ष्भी यखा गमा।                                               दे खा शी शोगा! रक्ष्भी ऩूजन क वभम घय क वबी
                                                                                                े        े
        ऩौयास्णक     कथा        औय    भान्मताओॊ   के     अनुळाय    वदस्मं को वाथ प्तभरकय ऩूणल श्रद्धा वे दे ली भशारक्ष्भी
रक्ष्भी, चन्द्रभा आटद वबी यत्न की उत्ऩत्रत्त वभुद्र भॊथन           का ऩूजन कयना चाटशए।
क दौयान शुई थी, रेटकन वभुद्र-भॊथन की प्तनस्द्ळत प्ततप्तथ
 े                                                                 दे ली भशारक्ष्भी की ऩूजा चाशे आऩ स्लमॊ कययशे शो मा
का लणलन धभलळास्त्रं भं नशीॊ शं । इव प्तरमे एवी भान्मता             टकवी त्रलद्रान ऩॊटित वे कयला यशे शो, ऩूजा ऩूणल त्रलप्तध-
शं की बगलान श्रीयाभ ने आज शी क टदन याज्मायोशण
                              े                                    त्रलधान वे कयं । जल्दी-जल्दी ऩूजा खत्भ कयने का त्रलधान
उत्वल भनामा था औय तफ वे वभग्र अमोध्मा नगयी                         ळास्त्रोि भत वे बी लस्जलत शं । क्मोकी कलर लऴल भं एक
                                                                                                          े
दीऩं क प्रकाळ वे जगभगा उठी। (बत्रलष्म ऩुयाण)
      े                                                            फाय शी वशी रेटकन ऩूणल त्रलप्तध-त्रलधान वे शी दे ली रक्ष्भी
        दीऩालरी क टदन घय क वबी वदस्मको प्रात्
                 े        े                                        की ऩूजा कयनी चाटशए।
जल्दी   उठकय       प्रपस्ल्रत
                       ु         भन    वे   घय,   दकान
                                                   ु      आटद      मटद आऩने ऩशरे वे कोई रक्ष्भी मॊत्र जैवे  श्री मॊत्र
व्मलवामीक स्थानं की वाप-वपाई कयक उवे ळुद्ध जरवे
                                े                                  (रक्ष्भी मॊत्र)  श्री मॊत्र (भॊत्र यटशत) श्री मॊत्र (वॊऩूणल
धो रेना चाटशए। व्मलवामीक स्थान ऩय नमे लस्त्र, गादी                 भॊत्र वटशत) श्री मॊत्र (फीवा मॊत्र) श्री मॊत्र श्री
आटद वे ऩुयाने कलय आटद शिाकय नमे रगादे (मटद नमे                     वूि मॊत्र श्री मॊत्र (कभल ऩृद्षीम) श्री रषभी कफेय
                                                                                            ु                        ु
रेने का वाभर्थमल न शो तो उवे आगे वे धो कय स्लच्छ                   धनाकऴलण          मॊत्र    आकस्स्भक                    धन             प्राप्तद्ऱ   मॊत्र
कय वुखारे), व्मलवामे वे वॊफॊप्तधत नमे फशी-खाता आटद                 भशारक्ष्भमै            फीज      मॊत्र       भशारक्ष्भी               फीवा       मॊत्र
को स्थात्रऩत कयना चाटशमे। त्रलद्रानो क भतानुळाय कळ
                                      े          ै                 रक्ष्भी दामक प्तवद्ध फीवा मॊत्र रक्ष्भी दाता फीवा
फॉक्व, फशी-खाता, तुरा, रेखनी, आटद का ककभ वे
                                      ुॊ ु                         मॊत्र   रक्ष्भी         फीवा        मॊत्र     रक्ष्भी              गणेळ         मॊत्र
स्लस्स्तक फनाकय ऩूजन कयना चाटशए उव ऩय शल्दी का                     कनक धाया मॊत्र लैबल रक्ष्भी मॊत्र (भशान प्तवत्रद्ध
घोर फनाकय छीॊिे रगाने चाटशमे। ळास्त्रोि त्रलधान वे                 दामक श्री भशारक्ष्भी मॊत्र) श्री श्री मॊत्र (रप्तरता
रक्ष्भी ऩूजन कलर स्स्थय रग्न भं की वॊऩन्न कयना
              े                                                    भशात्रत्रऩुय    वुन्दमै        श्री       भशारक्ष्भमं           श्री          भशामॊत्र)
चाटशए। दीऩालरी क टदन भं प्राम् वाॊम कार भं ऩूजन
                े                                                  अॊकात्भक फीवा मॊत्र ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊत्र ऩूजन
शे तु स्स्थय रग्न भं लृऴब रग्न एलॊ यात्री कार भं प्तवॊश            मॊत्र धनदा मॊत्र शो एलॊ मटद आऩक ऩाव कोई जैन
                                                                                                    े
रग्न शोता शं । इव प्तरए उि रग्नं भं शी भाॉ रक्ष्भी का              मॊत्र शं जैवे     श्री ऩद्मालती मॊत्र श्री ऩद्मालती फीवा
ऩूजन वलल श्रेद्ष भाना जाता शं ।                                    मॊत्र   श्री       ऩाद्वलऩद्मालती           ह्रंकाय   मॊत्र      ऩद्मालती
        दीऩालरी क टदन प्रात् स्नानाटद प्तनत्म कभल वे
                 े                                                 व्माऩाय लृत्रद्ध मॊत्र श्री मॊत्र श्री रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ औय
प्तनलृत्त शोकय एक प्तभट्िी क ऩात्र भं प्तवॊदय को घी क
                            े               ू        े             व्माऩाय लधलक मॊत्र श्री रक्ष्भीकय मॊत्र रक्ष्भी
वाथ प्तभराकय उवका रेऩ फनारे, टपय उववे अऩने ऩूजा                    प्राप्तद्ऱ मॊत्र शो तो आऩ उव मॊत्र को स्थात्रऩत कय उवका
स्थान, घय क भुख्म द्राय मा व्मलवामीक स्थान ऩय ॐ,
           े                                                       धूऩ-दीऩ-नैलेद्य आटद वे ऩूजन कय वकते शं । मटद आऩके
श्रीॊ, श्री, स्लस्स्तक, ळुब-राब, रयत्रद्ध-प्तवत्रद्ध आटद अऩनी      ऩाव कोई बी रक्ष्भी मॊत्र उऩल्फध नशीॊ शो, तो आऩ
श्रद्धा एलॊ त्रलद्वाव वे भाॊगप्तरक प्तचन्श मा ळब्दं को अॊटकत       गुरुत्ल कामालरम द्राया प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ
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लतलभान वभम भं भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत मॊत्र प्राद्ऱ कयने         ऩत्रलत्र कयण:-
भं अवभथल शो तो, आऩ वद्ऱश्री मॊत्र का प्तनभालण कयरं,                         दे ली ऩूजन शे तु ऩूजन शे तु ऩूलल मा उत्तय टदळा श्रेद्ष शोती शं । इव
औय जफ आऩका वाभर्थमल शो जामे तफ आऩ अऩनी                                      प्तरए उत्तय मा ऩूलल दे ळा की औय भुख कयक वफवे ऩशरे शाथ
                                                                                                                   े

आलश्मिा क अनुळाय रक्ष्भी मॊत्र प्राद्ऱ कय वकते शं ।
         े                                                                  भं जर रेकय आचभन, ऩत्रलत्रीधायण, भाजलन ल प्राणामाभ कयके
                                                                            ऩूजन वाभग्री एलॊ स्लमॊ क ऊऩय इव भॊत्र का उच्चायण कयते
                                                                                                    े
                                                                            शुले जर प्तछिक।
                                                                                          ं
त्रलळेऴ नोि:
         मटद आऩक ऩाव ऩशरे वे अप्तबभॊत्रत्रत मा प्राण-
                 े                                                                      ॐ अऩत्रलत्र् ऩत्रलत्रं ला वलाललस्थाॊ गतोऽत्रऩ ला।
          प्रप्ततत्रद्षत मॊत्र उऩरब्ध शो तो उवकी कलर धूऩ-दीऩ वे
                                                  े                                     म् स्भये त ् ऩुण्ियीकाषॊ व फाह्याभ्मन्तय् ळुप्तच्॥
          शी ऩूजा कयं , उव मॊत्र की ऩुन् प्राण-प्रप्ततद्षा मा उवे           अथालत ्: भनुष्म अऩत्रलत्र शो मा ऩत्रलत्र मानी लश चाशे टकवी बी
          अप्तबभॊत्रत्रत कयलाने की आलश्मिा नशीॊ शोती।                       दळा भं शो, जो कभर जैवे आॊखो लारे बगलान श्री त्रलष्णु का
         गुरुत्ल कामालरम द्राया उऩल्फध कयलामे गमे वबी मॊत्र                स्भयण कयता शं लश फाशय औय बीतय वबी ओय वे ळुद्ध शो

          ऩूणत् ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो
             ल                                                              जाता शं ।
                                                                            आवन ळुत्रद्ध औय स्लस्स्त-ऩाठ कय कयते शुले शाथ भं जर-
          द्राया प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि शोते शं ,
                                                                            अषत आटद रेकय ऩूजन का वॊकल्ऩ कयं ।
          शभाये मशाॊ वे उऩरब्ध कयलामे गमे मॊत्र ऩूणत्
                                                   ल
          अखॊटित एलॊ ळुद्ध धातु भं प्तनप्तभलत शोते शं ।
                                                                            वॊकल्ऩ:-
         रक्ष्भी ऩूजन क वभम प्राण-प्रप्ततत्रद्षत मॊत्रं को भाॉ
                        े
                                                                            ॐ         त्रलष्णु्       भावोत्तभं       भावे        काप्ततलकभावे         कृ ष्णऩषे
          रक्ष्भी की प्रप्ततभा मा प्तचत्र क वभीऩ स्थात्रऩत कय
                                           े
                                                                            ऩुण्मामाभभालास्मामाॊ प्ततथौ लावये ............(लाय का नाभ रे),
          उवका ऩूजन टकमा जा वकता शं । रेटकन मॊत्र की                        (अऩने गोत्र का उच्चायण कयं ) गोत्रोत्ऩन्न: (अऩने नाभ का
          अरगवे ऩूजा मा प्राण-प्रप्ततद्षा, भॊत्र जऩ इत्माटद नशीॊ            उच्चायण क वाथ भं अशॊ रगामे) जोळीअशॊ (जैवे ळभालअशॊ ,
                                                                                     े
          कयना चाटशमे।                                                      लभालअशॊ ,         गुद्ऱाअशॊ    इत्माटद)    श्रुप्ततस्भृप्तत   ऩुयाणोि      परप्राप्तद्ऱ
                                                                            काभनामा             सातासात        काप्तमकलाप्तचक               भानप्तवक      वकर
वबी ऩाठको क भागलदळलन शे तु श्री रक्ष्भी जी का
           े
                                                                            ऩाऩप्तनलृत्रत्त       ऩूलक
                                                                                                     ल ॊ     स्स्थयरक्ष्भीप्राद्ऱमे       श्रीभशारक्ष्भीप्रीत्मथं
वॊऩणल ऩूजन त्रलधान टदमा जा यशा शं ।
   ू                                                                        भशारक्ष्भीऩूजनॊ           कफेयादीनाॊ
                                                                                                       ु              च      ऩूजनॊ        करयष्मे।    तदड्त्लेन
                                                                            गौयीगणऩत्माटदऩूजनॊ च करयष्मे।
रक्ष्भी ऩूजा:                                                               अथालत ्: शे बगलान ् त्रलष्णु आज काप्ततलक भाव, कृ ष्ण ऩष की
                                                                            ऩुण्म अभालस्मा अभुख लाय (ऩूजन क टदन क लाय का नाभ
                                                                                                           े     े
ऩूजन वाभग्री:                                                               रं) को भं... (अऩना नाभ) भेये त्रऩता (अऩने त्रऩता का नाभ
योरी, भौरी, रंग, ऩान, वुऩायी, धूऩ, कऩूय, अगयफत्ती, अषत
                                      ल                                     रं) स्जनका भं ऩुत्र शूॊ अऩने ऩुण्मं क कायण जो सात-असात
                                                                                                                 े
(वाफुत चालर), गुि, धप्तनमा, ऋतुपर, जौ, गेशूॉ, िू फ, ऩुष्ऩ,                  राब को प्राद्ऱ कयने क प्तरए, स्स्थय रक्ष्भी प्राद्ऱ कयने क प्तरमे
                                                                                                 े                                    े
ऩुष्ऩभारा, चन्दन, प्तवन्दय, दीऩक, रूई, प्रवाद, नारयमर,
                         ू                                                  भं मश रक्ष्भी ऩूजन कय यशा शूॉ ।
वलोऴप्तध, ऩॊचयत्न, मसोऩलीत, ऩॊचाभृत, ळुद्ध जर, खीर, भजीठ,
वपद लस्त्र, रार लस्त्र, परेर, रक्ष्भी जील एलॊ गणेळ जी का
  े                      ु                                                  उि वॊकल्ऩ को ऩढ़कय जर, अषत आटद को गणेळजी के
प्तचत्र     मा   ऩाना,   चौकी    (फाजौि),    करळ,      घी,   कभरऩुष्ऩ,      वभीऩ छोि दे । टपय गणेळजी का ऩूजन कयं ।
इरामची, भाप्तचव, दस्षणा शे तु नकदी, चॉॊदी क प्तवक्क,
                                           े       े                        गणेळ ऩूजन वे ऩशरे नमी प्रप्ततभा को त्रलप्तधलत प्राण-प्रप्ततद्षा
फशीखाता, करभ तथा दलात इत्माटद आलश्मक वाभग्रीमाॊ।                            कयं ।
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प्रप्ततद्षा:-                                                                         मे बूता त्रलनकतालयस्ते नद्शन्तु प्तळलासमा।'
प्रप्ततद्षा शे तु फामं शाथ भं अषत रेकय इव भॊत्र का उचायण               इव भॊत्र वे दळं टदळाओॊ भं त्रऩरा वयवं प्तछिक स्जवेव
                                                                                                                   े
कयते शुए दाटशने शाथ वे उन अषतं को गणेळजी की प्रप्ततभा                  वभस्त बूत प्रेत फाधाओॊ का प्तनलायण शोता शै
ऩय चढा़ते जामे..
                                                                       स्लस्ती लाचन:-
ॐ भनो जूप्ततजुऴताभाज्मस्म फृशस्ऩप्ततमलसप्तभभॊ तनोत्लरयद्शॊ मस
              ल
वप्तभभॊ दधातु।                                                                 स्लस्स्त न इन्द्रो लृद्धश्रला: स्लस्स्त न: ऩूऴा त्रलद्वलेदा:।
                     त्रलद्वे दे लाव इश भादमन्ताभोम्प्रप्ततद्ष।।           स्लस्स्तनस्ता यषो अरयद्शनेप्तभ: स्लस्स्त नो फृशस्ऩप्ततदधात॥
                                                                                                                                 ल
          ॐ अस्मै प्राणा: प्रप्ततद्षन्तु अस्मै प्राणा: षयन्तु च।       इव क फाद श्री गणेळ जी क भॊगर ऩाठ कयना चाटशए जो की
                                                                           े                  े
                   अस्मै दे लत्लभचालमै भाभशे प्तत च कद्ळन।।            इव प्रकाय शै
उि त्रलप्तधवे प्रप्ततद्षा कय श्रीगणेळजी का ऴोिळोऩचाय ऩूजन कयं ।
                                                                       गणेळ जी का भॊगर ऩाठ:-
तत्ऩद्ळमात ऴोिवभातृका (वोरश दे त्रलमं का) नलग्रश ल करळ
ऩूजन कयं । तत्ऩद्ळमात भुख्म ऩूजन क रुऩ भं दे ली बगलती भाॉ
                                  े                                                    वुभखद्ळैकदन्तद्ळ कत्रऩरो गजकणलक:।
                                                                                          ु
भशारक्ष्भी का ऩूजन कयं ।                                                              रम्फोदयद्ळ त्रलकिो त्रलघ्रनाळो त्रलनामक:॥

ऴोिळोऩचाय गणेळ ऩूजन                                                                   धूम्रकतुगणाध्मषो बारचन्द्रो गजानन:।
                                                                                            े  ल
                                                                                      द्राद्रळैताप्तन नाभाप्तन म: ऩठे च्छे णुमादत्रऩ॥
ऩत्रलत्र कयण:-                                                                         त्रलद्यायम्बे त्रललाशे च प्रलेळे प्तनगलभे तथा।
                                                                                      वॊग्राभे वॊकिे चैल त्रलघ्रस्तस्म न जामते॥
वफवे ऩशरे ऩूजन वाभग्री ल गणेळ प्रप्ततभा मा प्तचत्रका ऩत्रलत्र
                                                                       एकाग्रप्तचन शोकय गणेळ का ध्मान कयना चाटशए
कयण कयं
                  अऩत्रलत्र् ऩत्रलत्रो ला वलाललस्थाॊ गतो त्रऩ ला।      श्री गणेळ का ध्मान कयं :-
                म् स्भये त ् ऩुण्ियीकाषॊ व फाह्याभ्मन्तय् ळुप्तच्॥
                                                                       गजाननॊ         बूतगणाटद            वेत्रलतभ ्      कत्रऩत्थ       जम्फूपर
इव भॊत्र वे ळयीय औय ऩूजन वाभग्री ऩय जर छीिं इवे अॊदय
फाशय औय फशाय दोनं ळुद्ध शो जाता शै                                     चारुबषणभ। उभावुतभ ् ळोक त्रलनाळ कायकभ ् नभाप्तभ त्रलघ्नेद्वय
                                                                               ्
                                                                       ऩाद ऩॊकजभ॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् गणेळॊ
                                                                                ्
आचभन:-
                                                                       ध्मामाप्तभ भॊत्र का उच्चायण कयं ।
                       ॐ कळलाम नभ: ॐ नायामण नभ:
                          े                                            आह्वानॊ:-
                                 ॐ भध्लामे नभ:                         इव भॊत्र वे श्री गणेळ का आशलान कये मा भन शी भन भं श्री गणेळ
                         शस्तो प्रषल्म शप्तळकळम नभ :
                                            ल े                        जी को ऩधायने क प्तरमे त्रलनप्तत कयं । शाथभं अषत रेकय आशलान
                                                                                     े
आवान वुत्रद्ध:-                                                        कयं ।
                                                                                    आगच्छ बगलन्दे ल स्थाने चात्र स्स्थयो बल
            ॐ ऩृर्थली त्लमा धृता रोका दे त्रल त्ल त्रलद्गणुनाधृता्।
                                                                                   मालत्ऩूजाॊ करयष्माप्तभ तालत्लॊ वस्न्नधौ बल।।
                  त्ल च धायम भा दे त्रल ऩत्रलत्र करू च आवनभ॥
                                                  ु        ्
                                                                                       ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ्
                                                                       गणेळॊ ध्मामाप्तभ भॊत्र का उच्चायण कयक अषते िारदं .....
                                                                                                            े
यषा भॊत्र:-                                                            इव भॊत्र वे श्री गणेळ की भूप्ततल मा प्रप्ततभा ऩय शल्दी मा
                                                                       कभकभ वे यॊ गे चारल िारं। मटद प्रप्ततभा क प्रशरे वे प्राण-
                                                                        ु ु                                    े
                   अऩक्राभन्तु बूताप्तन त्रऩळाचा् वललतो टदळा।
                                                                       प्रप्ततद्षा शो गई शं तो आलश्मिा नशीॊ शं तफ कलर वुऩायी ऩय
                                                                                                                   े
                        वलेऴाभलयोधेन ब्रह्मकभल वभायबे।
                                                                       शी चारल िारं।
                  अऩवऩलन्तु ते बूता् मे बूता् बूप्तभवॊस्स्थता्।
19                                               नलम्फय 2012



स्भयण:-                                                                    ऩाद्यॊ:-
              शाथभं ऩुष्ऩ रेकय श्री गणेळजी का स्भयण कयं ।                                 उष्णोदक प्तनभलरॊ च वलल वौगन्ध वॊमतभ ्।
                                                                                                 ॊ                         ु
                नभस्तस्भै गणेळाम वलल त्रलध्न त्रलनाप्तळने॥                                  ऩाद प्रषारनाथालम दत्तॊ ते प्रप्ततगृह्यताभ ्॥
                   कामालयॊबेऴु वलेऴु ऩूस्जतो म् वुयैयत्रऩ।                 ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ऩाद्यॊ वभऩलमाप्तभ॥
                  वुभखद्ळैक दॊ तद्ळ कत्रऩरो गजकणलक्॥
                     ु                                                     अघ्मं:-
                 रॊफोदयद्ळ त्रलकिो त्रलघ्ननाळो त्रलनामक्।                  आचभनीभं जर, पर, पर, चॊदन, अषत, दस्षणा इत्माटद शाथ भं
                                                                                        ू
                 धुम्रकतुय ् गणाध्मषो बारचॊद्रो गजानन॥
                       े                                                   यख कय प्तनम्न भॊत्र का उच्चायण कयं ...
                द्रादळैताप्तन नाभाप्तन म् ऩठे च्छणु मादऽत्रऩ॥
                                                 ृ                                          अध्मल गृशाण दे लेळ गॊध ऩुष्ऩषतै् वश।
                   त्रलद्यायॊ बे त्रललाशे च प्रलेळे प्तनगलभे तथा।                          करुणा करु भं दे ल गृशाणाध्मै् नभोस्तुते॥
                                                                                                  ु
                वॊग्राभे वॊकिे चैल त्रलघ्नस्तस्म न जामते॥                      ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् अघ्मं वभऩलमाप्तभ भॊत्र का
                  ळुक्राॊफय धयॊ दे लॊ ळप्तळलणं चतुबजभ ्।
                                                   ुल                                 उच्चायण कयक अध्मल की वाभग्रीमा अत्रऩलत कयदं ।
                                                                                                 े
                प्रवन्न लदनॊ ध्मामेत ् वलल त्रलघ्नोऩळाॊतमे॥                आचभन:-
               जऩेद् गणऩप्तत स्तोत्रॊ ऴस्ड्बभालवे परॊ रबेत ्।              वलल तीथल वभामुि वुगप्तध प्तनभलर जरभ ्।
                                                                                          ॊ   ॊ
                  वॊलत्वये ण प्तवत्रद्धॊ च रबते नात्र वॊळम्॥
                     ॊ                                                     आचम्मताॊ भमा दत्तॊ गृशीत्ला ऩयभेद्वयॊ ॥
                   लक्रतुि भशाकाम वूमकोटि वभ प्रब।
                         ॊ           ल                                     ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् आचभनॊ वभऩलमाप्तभ॥
                  प्तनत्रलघ्नॊ करु भे दे ल वलल कामेऴु वललदा॥
                          ल     ु
               अप्तबस्प्वताथल प्तवद्धध्मथं ऩूस्जतो म् वुयावुयै्।           स्नानॊ:-
                 वलल त्रलघ्न शयस्तस्भै गणाप्तधऩतमे नभ्॥                                     गॊगा च मभुना ये ला तुगबद्रा वयस्लप्तत।
                                                                                                                 ॊ
            त्रलघ्नेद्वयाम लयदाम वुयत्रप्रमाम रॊफोदयाम वकराम                                कालेयी वटशता नद्य् वद्य् स्नाथलभत्रऩता॥
                                                                                                                                ल
              जगस्त्धताम। नागाननाम श्रुप्ततमस त्रलबुत्रऴताम                    ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् स्नानॊ वभऩलमाप्तभ भॊत्र का
                    गौयीवुताम गणनाथ नभो नभस्ते॥                                                उच्चायण कयते शुले स्नान कयामे।
        ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् गणेळॊ स्भयाप्तभ भॊत्र
                    का उच्चायण कयक ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं
                                  े                                        ऩॊचाभृत स्नान:-
                                                                           तत ऩद्ळमात ऩॊचाभृत वे क्रभळ् दध, दशी, घी, ळशद, ळक्कय वे
                                                                                                         ू
ऴोिळोऩचाय गणऩतीऩूजन:-                                                      स्नान कया कय ळुद्धजर मा गॊगाजर वे उि भॊत्र वे ऩुन् स्लच्छ
              अस्मै प्राण् प्रप्ततद्षन्तु अस्मै प्राणा् षयन्तु च।          कयरे। तत ऩद्ळमात ळुद्ध लस्त्र वे ऩोछ कय प्रप्ततत्रद्षत कयं ।
                  अस्मै दे लतभचीमल भाभशे प्तत च कद्ळन॥
                                                                           दध स्नान:-
                                                                            ू
आवनॊ:-
आवन वभत्रऩलत कयं । मटद ऩशरे वे लस्त्र त्रफछामा शुला शं तो उव                                काभधेनु वभुत्ऩनॊ वलेऴाॊ जीलन ऩयभ ्।

स्थान ऩय शल्दी मा कभकभ वे यॊ गे अषत िारकय ऩुष्ऩ अत्रऩलत
                   ु ु                                                                     ऩालनॊ मस शे तद्ळ ऩम: स्नानाथलभत्रऩलतभ ्॥
                                                                                                        ु

कयं ।                                                                      इव क स्थान ऩय ऩम् स्नानभ ् वभऩलमाप्तभ गॊ गणेळाम नभ् का
                                                                               े

                यम्मॊ वुळोबनॊ टदव्मॊ वलल वौख्म कयॊ ळुबभ ्।                 उच्चायण कये तथा ऩम् क स्थान ऩय दध कशं , दशीॊ कशं , धृतभ ्
                                                                                                े          ू

                    आवनॊ च भमादत्तॊ गृशाण ऩयभेद्वय॥                        कशं , भधु कशं , ळकया कशं क स्नान कयामे।
                                                                                             ल       े

    ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् आवनॊ वभऩलमाप्तभ॥                              ऩमवस्तु वभुद्भूतॊ भधुयाम्रॊ ळप्तळप्रबभ।
                                                                                                                                  ्
मटद द्ऴोक ऩढने भं कटठनाई शो तो आवन वभऩालप्तभ श्री गॊ गणेळाम                               दध्मानीतॊ भमा दे ल स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ॥
                                                                                                                                     ्
नभ् का उच्चायण कयते शुले गणेळ जी क चयण धोमे।
                                  े                                                          नलनीतवभुत्ऩन्नॊ वललवतोऴकायकभ।
                                                                                                                 ॊ       ्
                                                                                         घृतॊ तुभ्मॊ प्रदास्माप्तभ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ॥
                                                                                                                                           ्
20                                             नलम्फय 2012



                 तरु ऩुष्ऩ वभुत्ऩन्नॊ वुस्लादु भधुयॊ भधु ।                                       भमा प्तनलेटदता बक्त्मा गृशाण ऩयभेद्वरय॥
               तेज् ऩुत्रद्शकयॊ टदव्मॊ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ॥
                                                               ्                     ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् अषतान ् वभऩलमाप्तभ॥
                  इषुवायवभुद्भूताॊ ळकयाॊ ऩुत्रद्शदाॊ ळुबाभ।
                                     ल                    ्                      ऩुष्ऩ:-
               भराऩशारयकाॊ टदव्मॊ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ॥
                                                          ्                      ततऩद्ळमात ऩुष्ऩ भारा आटद चढामे।
                  ऩमो दप्तध धृत चैल भधु च ळकयामुतभ ्।
                                            ल                                                  भाल्मादीप्तन वुगन्धीप्तन भारत्मादीप्तन लै प्रबो।
               ऩॊचाभृत भमानीतॊ वनानाथल प्रप्ततघृशमताभ॥                                            भमा नीताप्तन ऩुष्ऩास्ण गृशाण ऩयभेद्वय॥
लस्त्रॊ:-                                                                            ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ऩुष्ऩास्ण वभऩलमाप्तभ॥
ऩॊचाभृत स्नान क फाद स्लच्छ कय क लस्त्र ऩशनामे मा वभत्रऩत
               े               े                       ल                         दलाल:-
                                                                                  ू
कयं ।                                                                            ततऩद्ळमात दलाल चढामे।
                                                                                            ू
               वलल बूऴाटदक वौम्मे रोकरज्जा प्तनलायणे ।
                          े                                                                       दलाल कयान्वश रयतान भृतन्भॊगर प्रदान।
                                                                                                   ु
                भमोऩऩाटदते तुभ्मॊ लाववी प्रप्ततगृशीताभ ् ॥                                         आनी ताॊस्तल ऩूजाथल गृशाण ऩयभेद्वय॥
   ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् लस्त्रोऩलस्त्रे वभऩलमाप्तभ॥             ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् दलांकयान वभऩलमाप्तभ॥
                                                                                                                                ू ु
                                                                                 आबूऴण:-
मसोऩलीत:-
                                                                                 ततऩद्ळमात आबूऴण चढामे।
ततऩद्ळमात प्तनम्न भॊत्र वे मसोऩलीत ऩशनामे
                                                                                               अरॊकायान्भशाटदव्मान्नानायतन त्रलप्तनप्तभतान।
                                                                                                                                       ल
                   नलप्तभस्तॊतप्तबमुि त्रत्रगुणॊ दे लताभमॊ।
                              ु
                                                                                                     गृशाण दे ल-दे लेळ प्रवीद ऩयभेद्वय॥
                   वऩफीतॊ भमा दत्तॊ गृशाण ऩयभेद्वयभ ्॥
                                                                                     ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् आबूऴण वभऩलमाप्तभ॥
   ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् मसोऩत्रलतॊ वभऩलमाप्तभ॥
                                                                                 इत्र:-

चॊदन:-                                                                           ततऩद्ळमात इत्र अथालत ् वुगप्तधत तेर चढामे।
                                                                                                           ॊ
                                                                                                  चम्ऩकाळो लकरॊ भारती भोगयाटदप्तब्।
                                                                                                             ु
ततऩद्ळमात रार चॊदन चढामे।
                                                                                               लाप्तवतॊ स्स्नग्ध तावेरु तैरॊ चारु प्रगृशमातभ ्॥
               श्रीखण्ि चन्दन टदव्मॊ कळयाटद वुभनीशयभ ्।
                                      े
                                                                                       ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् तैरभ ् वभऩलमाप्तभ॥
    त्रलरेऩनॊ वुश्रद्ष चन्दनॊ प्रप्ततगृशमतभ ्॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री
                    गणेळाम नभ् ककभॊ वभऩलमाप्तभ॥
                                ुॊ ु
                                                                                 धूऩ:-
ककभ:-
 ुॊ ुॊ
                                                                                 ततऩद्ळमात धूऩ आटद जरामे।
ततऩद्ळमात ककभ अलीय-गुरार चढामे।
           ुॊ ुॊ
                                                                                                  लनस्ऩप्तत यवोद्भूतो गॊधाढ्मो गॊध उत्तभ्।
               ककभ काभना टदव्मॊ काभना काभ वॊबलभ ्।
                ुॊ ुॊ
                                                                                                 आध्नम वलल दे लानाॊ धूऩोमॊ प्रप्ततगृह्यताभ ्॥
                  ककभ नाप्तचतो दे ल गृशाण ऩयभेद्वयभ ्॥
                   ुॊ ुॊ    ल
                                                                                          ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् धूऩॊ वभऩलमाप्तभ॥
      ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ककभॊ वभऩलमाप्तभ॥
                                                 ुॊ ु
                                                                                 दीऩ:-
प्तवॊदय:-
      ू
                                                                                 ततऩद्ळमात दीऩ आटद जरामे।
ततऩद्ळमात प्तवॊदय चढामे।
                ू
                                                                                             आज्मेन लप्ततना मुि लटिना च प्रमोस्जतभ ् भमा।
                                                                                                         ल     ॊ
                 प्तवॊदयॊ ळोबनॊ यि वौबाग्मॊ वुखलधलनभ ्।
                       ू          ॊ
                                                                                                  दीऩॊ गृशाण दे लेळ त्रेरोक्म प्ततप्तभयाऩश॥।
                  ळुबदॊ काभदॊ चैल प्तवॊदयॊ प्रप्ततगृशमताभ।
                                        ू
                                                                                           ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् दीऩॊ दळलमाप्तभ॥
        ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् प्तवॊदयॊ वभऩलमाप्तभ॥
                                                        ू
                                                                                 नैलेद्य:-
अषत:-
                                                                                 ततऩद्ळमात नैलेद्य अत्रऩत कयं ।
                                                                                                        ल
ततऩद्ळमात शल्दी मा ककभ वे यॊ गे अषत चढामे।
                    ुॊ ुॊ
                                                                                                  ळकया खॊिखाद्याप्तन दप्तधषीय घृताप्तन च।
                                                                                                    ल
                 अषताद्ळ वुयश्रेद्ष ककभािा् वुळोप्तबता्।
                                     ुॊ ु
                                                                                                 आशायॊ बक्ष्मॊ बोज्मॊ च गृशाण गणनामक।
21                                             नलम्फय 2012



      ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् नैलेद्यॊ प्तनलेदमाप्तभ॥    आयती:-
                                                                           नीयाजन-आयती प्रगि कय उवभं चॊदन-ऩुष्ऩ रगामे
ततऩद्ळमात नैलेद्य ऩय जर प्तछिक।
                              े
                                                                           कऩुय प्रज्लप्तरत कयं ।
                            गॊ गणऩतमे नभ्
                                                                                          चॊद्राटदत्मौ च धयस्ण त्रलद्युदस्ग्न त्लभेल च।
                                                                                        त्लभेल वलल ज्मोप्ततत्रऴ आतॉक्मॊ प्रप्ततगृह्यताभ ्॥
ततऩद्ळमात इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले ऩाॊच फाय बोजन
                                                                                       कऩुय ऩूयेण भनोशये ण वुलणल ऩात्रान्तय वॊस्स्थतेन।
                                                                                          ल
कयामे.....
           ॐ प्राणाम नभ्। ॐ अऩानाम नभ्। ॐ व्मानाम नभ्।
                                                                                       प्रटदद्ऱबावा वशगतेन नीयाजनॊ ते ऩरयत कयोप्तभ।

                  ॐ उदानाम नभ्। ॐ वभानाम नभ्।                                   ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् नीयाजनॊ वभऩलमाप्तभ।

ततऩद्ळमात इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले जर अत्रऩलत कयं ।
                                                                                                   ॥श्री गणेळ आयप्तत॥
भध्मे ऩानीमॊ वभऩलमाप्तभ।
                                                                                             जम गणेळ जम गणेळ जम गणेळ दे ला
टपय वे उि भॊत्र का ऩाॊच फाय उच्चायण कयते शुले ऩाॊच फाय बोजन
                                                                                            जम गणेळ जम गणेळ जम गणेळ दे ला.
कयामे....
                                                                                       भाता जाकी ऩायलती त्रऩता भशादे ला॥ जम गणेळ.....
ततऩद्ळमात इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले तीन फाय जर अत्रऩलत                                      एकदन्त दमालन्त चायबुजाधायी
कयं ....
                                                                                     भाथे ऩय प्ततरक वोशे भूवे की वलायी॥ जम गणेळ.....
               ॐ गणेळाम नभ् उत्तय ऩोऴणॊ वभऩलमाप्तभ।
                                                                                                ऩान चढ़े पर चढ़े औय चढ़े भेला
              ॐ गणेळाम नभ् शस्त प्रषारनॊ वभऩलमाप्तभ।
               ॐ गणेळाम नभ् भुख प्रषारनॊ वभऩलमाप्तभ।                                रड्िु अन का बोग रगे वन्त कयं वेला॥ जम गणेळ.....
                                                                                              अॊधे को आॉख दे त कोटढ़न को कामा
शाथ वे बोजन की गॊध दय कयने शे तु चॊदनमुि ऩानी अत्रऩलत कयं ।
                    ू                                                                  फाॉझन को ऩुत्र दे त प्तनधलन को भामा॥ जम गणेळ.....
ॐ गणेळाम नभ् कयोद्रतलनाथे गॊधॊ वभऩलमाप्तभ.
                                                                                            ' वूय' श्माभ ळयण आए वपर कीजे वेला

भुख ळुत्रद्ध शे तु ऩान-वुऩायी इरामची औय रलॊग अत्रऩत कयं ।
                                                  ल                                 जम गणेळ जम गणेळ जम गणेळ दे ला॥ जम गणेळ.....
                 एरारलंग वॊमि ऩुगीपरॊ वभस्न्लतभ,्
                            ु ॊ
                 ताॊफरॊ च भमा दत्तॊ गृशाण गणनामक.
                     ु                                                     आयती क चायो औय जर घुभामे टपय गणेळजी को आयती टदखामे
                                                                                 े
  ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् भुखलावॊ वभऩलमाप्तभ।            खुद आयती रेकय शाथ धोरे।


दस्षणा:-                                                                   टपय दोनो शाथकी अॊजप्तरभं ऩुष्ऩ रेकय ऩुष्ऩाॊजप्तर दं ।

ततऩद्ळमात दस्षणा अत्रऩत कयं ।
                      ल                                                                    नाना वुगधी ऩुष्ऩास्ण ऋतुकारोद्भलाप्तन च।
                                                                                                   ॊ

                टशयण्म गबल गबलस्थॊ शे भफीजॊ त्रलबालवो।                                       ऩुष्ऩाॊजप्तर प्रदानेन प्रवीद गणनामक।

               अनॊत ऩूण्म परदभत् ळाॊप्ततॊ प्रमच्छ भे॥।                          ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ऩुष्ऩाॊजप्तर वभऩलमाप्तभ।

   ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् दस्षणाॊ वभऩलमाप्तभ।
                                                                           प्राथलना:
                                                                                       त्रलघ्नेद्वयाम लयदाम वुयत्रप्रमाम रॊफोदयाम वकराम
प्रदस्षणा:-
                                                                               जगत्रद्धताम। नागाननाम श्रुप्ततमस त्रलबुत्रऴताम गौयीवुताम गणनाथ
ततऩद्ळमात प्रदस्षणा कयं ।
                                                                               नभो नभस्ते। बिाप्ततनाळन ऩयाम गणेद्वयाम वलेद्वयाम ळुबदाम
                                                                                                  ल
             माप्तन काप्तन च ऩाऩाप्तन जन्भान्तय कृ ताप्तन च।
                                                                               वुयेद्वयाम। त्रलद्याधयाम त्रलकिाम च लाभनाम बत्रि प्रवन्न लयदाम
               ताप्तन वलालस्ण नश्मन्तु प्रदस्षणा ऩदे ऩदे ।
                                                                                                         नभो नभस्ते।
    ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् प्रदस्षणाॊ कयोप्तभ।
22                                          नलम्फय 2012



नभस्काय:                                                                      ऩुष्ऩ औय अषत वे कयं । अन्म कोद्षकं भं भॊत्र उच्चारयत कयते
                   रॊफोदय नभस्तुभ्मॊ वतत भोदक त्रप्रम।                        शुए आह्वान कयं ।
                  प्तनत्रलघ्नॊ करु भे दे ल वलल कामेऴु वललदा।
                          ल     ु
                                                                              भातृकाओॊ का आह्वान एलॊ स्थाऩना भॊत्र :-
 ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् नभस्कायान ् वभऩलमाप्तभ।
                                                                              इव भॊत्रं भं ऴोिळभातृकाओॊ का आह्वान कयं ..

त्रलळेऴ अध्मल:                                                                ॐ गणऩतमे नभ्। गणऩप्ततभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥

आचभनी भं जर, चालर, पर, पर, चॊदन दस्षणा आटद अध्मल भं
                    ू                                                         ॐ गौमै नभ्। गौयीभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥१॥
रे                                                                            ॐ ऩद्मामै नभ्। ॐ ऩद्मालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥२॥
                  यष यष गणाध्मष यष त्रेरोक्म यषक।                             ॐ ळच्मै नभ्। ळचीभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ॥३॥
                 बिनाभ बमॊकताल त्राता बलबलाणललात ्॥                           ॐ भेधामै नभ्। भेधाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥४॥
                 परेन पप्तरतॊ तोमॊ परेन पप्तरतॊ धनभ ्।
                                                                              ॐ वात्रलत्र्मै नभ्। वात्रलत्रीभालाशमाप्तभ स्थाऩमाप्तभ ॥५॥
               परास्मघ्मं प्रदानेन ऩूणाल वन्तु भनोयथा्॥
                                                                              ॐ त्रलजमामै नभ्। त्रलजमाभालाशमाभ, स्थाऩमाप्तभ ॥६॥
     ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् त्रलळेऴाघ्मं वभऩलमाप्तभ।
षभाऩन:                                                                        ॐ जमामै नभ्। जमाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥७॥

               आह्वानॊ न जानाप्तभ न जानाप्तभ त्रलवजलनभ ्।                     ॐ दे लवेनामै नभ्। दे लवेनाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥८॥

                ऩूजाॊ चैल न जानाप्तभ षभस्ल गणनामक॥                            ॐ स्लधामै नभ्। स्लधाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥९॥
      ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् षभाऩनॊ वभऩलमाप्तभ॥            ॐ स्लाशामै नभ्। स्लाशाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥१०॥
         अनमा ऩूज्मा प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळ् त्रप्रमताभ ्॥         ॐ भातृभ्मोनभ्। भातृ् आलाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥११॥
                                                                              ॐ रोकभातृभ्मो नभ्। रोकभातृ् आलाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ॥१२॥
ऴोिळभातृका ऩूजन
                                                                              ॐ धृत्मै नभ्। धृप्ततभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥१३॥
ऴोिळभातृकाओॊ की स्थाऩना शे तु पळल ऩय वोरश कोद्शकं का
                                                                              ॐ ऩुष्ट्मै नभ्। ऩुत्रद्शभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥१४॥
चौकोय भॊिर फनामे।
ऩस्द्ळभ टदळा वे ऩूलल टदळा की ओय क्रभळ् भातृकाओॊ की                            ॐ तुष्ट्मै नभ्। तुत्रद्शभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ॥१५॥

स्थाऩना कयं । प्रत्मेक कोद्षक भं यि अषत, जौ मा गेशूॉ यखं।                     ॐ आत्भन् करदे लतामै नभ्। आत्भन् करदे ताभालाशमाप्तभ,
                                                                                        ु                      ु
ऩशरे कोद्षक भं गौयी का आह्वान कये । रेटकन गौयी क आह्वान
                                                े                             स्थाऩमाप्तभ ॥१६॥
वे ऩशरे बगलान गणेळ का आह्वान कयं । गणेळ का आह्वान                             इव भॊत्र द्राया ऴोिळभातृकाओॊ का आह्वान, स्थाऩना कयं -
                                                                                        ॐ भनोजूप्ततजुऴताभाज्मस्मफृशस्ऩप्ततमलसप्तभभन्तनी
                                                                                                     ल
                                          ऩूलल
                                                                                              त्लरयद्शॊमसठल वप्तभभॊदधातु॥ त्रलद्वेदेलाव इश
          आत्भन् करदे लता
                  ु           रोकभातय्             दे लवेना         भेधा                                भादमन्ताभोऽम्प्रप्ततद्ष॥
                 16               12                  8                 4           अषत छोिते शुए भातृका-भॊिर की प्रप्ततद्षा कयं ।
 उ             तुत्रद्श्        भातय्               जमा             ळची      द            “ॐ गणेळवटशतगौमालटदऴोिळभातृकाभ्मो नभ्”
 त्त             15               11                  7                 3    स्ष    इव भॊत्र वे ऩॊचोऩचाय ऩूजन कयं । नैलेद्य भं गुि तथा घी
               ऩुत्रद्श्        स्लाशा             त्रलजमा          ऩद्मा
  य                                                                          ण      का नेलद्य रगामे ।
                                                                                          ै
                 14               10                  6                 2
                                                                                    प्राथलना :-
               धृप्तत्          स्लधा              वात्रलत्री   गणेळ-गौयी
                                                                                         ॐ गणेळ वटशतगौमालटद ऴोिळभातृकाभ्मो नभ्।
                 13               9                   5                 1
                                                                                    अनमा ऩूजमा गणेळवटशत गौमालटदऴोिळभातय् प्रीमन्ताभ,्
                                         ऩस्द्ळभ
                                                                                    न भभ ।
23                                              नलम्फय 2012



इव भॊत्र क वाथ अषत अत्रऩत कयने क फाद नभस्काय कयं
          े             ल       े                                          प्राथलना :-
औय टपय इव भॊत्र का उच्चायण कयं -
                 गौयी ऩद्मा ळची भेधा वात्रलत्री त्रलजमा जमा ।                               जऩाकवुभवॊकाळॊ काश्मऩेमॊ भशद्युप्ततभ ्।
                                                                                                ु
                 दे लवेना स्लधा स्लाशा भातयो रोकभातय् ॥                             तभोऽरयॊ वललऩाऩघ्नॊ प्रणतोऽस्स्भ टदलाकयभ ् ॥१॥
                  धृप्तत् ऩुत्रद्शस्तथा तुत्रद्शयात्भन् करदे लता ।
                                                         ु                                 दप्तध ळॊख तुऴायाबॊ षीयोदाणलल वॊबलभ ्।
                 गणेळेनाप्तधका ह्येता लृद्धौ ऩूज्माद्ळ ऴोिळ् ॥                      नभाप्तभ ळप्तळनॊ वोभॊ ळम्बो् भुकि बूऴणभ ्॥२॥
                                                                                                                   ु
                                                                                           धयणी गबल वॊबतॊ त्रलद्युत्कास्न्तवभप्रबभ ्।
                                                                                                       ू
भातृकाऩूजन क ऩद्ळमात नलग्रश ऩूजन कयं ।
            े
                                                                                     कभायॊ ळत्रि शस्तॊ च भॊगरॊ प्रणभाम्मशभ ्॥३॥
                                                                                      ु
                                                                                           त्रप्रमॊगकप्तरकाश्माभॊ रूऩेणाप्रप्ततभॊ फुधभ ्।
                                                                                                    ु
नलग्रश ऩूजन
                                                                                     वौम्मॊ वौम्मगुणोऩेतॊ तॊ फुधॊ प्रणभाम्मशभ ्॥४॥
            नलग्रश-ऩूजन क प्तरए नलग्रश फीवा मन्त्र अथला
                         े
                                                                                         दे लानाॊ च ऋऴीणाॊ च गुरुॊ काञ्चन वॊप्तनबभ ्।
नलग्रश भॊिर की स्थाऩना रार लस्त्र ऩय अषत क ऊऩय कयं ।
                                          े
                                                                                     फुत्रद्धबूतॊ त्रत्ररोकळॊ तॊ नभाप्तभ फृशस्ऩप्ततभ ्॥५॥
                                                                                                           े
ऩशरे ग्रशं का आह्वान कयक उनकी स्थाऩना की जाती शै । फाएॉ
                        े
                                                                                          टशभ कन्द भृणाराबॊ दै त्मानाॊ ऩयभॊ गुरुभ ्।
                                                                                               ु
शाथ भं अषत रेकय इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुए दाएॉ शाथ
                                                                                         वलल ळास्त्र प्रलिायॊ बागललॊ प्रणभाम्मशभ ्॥६॥
वे अषत अत्रऩलत कयते शुए ग्रशं का आह्वान कयं ।
                                                                                            नीराॊजन वभाबावॊ यत्रलऩुत्रॊ मभाग्रजभ ्।
प्राथलना एलॊ स्थाऩना भॊत्र :
                                                                                         छामाभातलण्िवॊबतॊ तॊ नभाप्तभ ळनैद्ळयभ ्॥७॥
                                                                                                       ू
  ॐ ब्रह्मा भुयारयस्स्त्रऩुयान्तकायी बानु् ळळी बूप्तभवतो फुधश्च ।
                                                                                           अधलकामॊ भशालीमं चन्द्राटदत्म त्रलभदल नभ ्।
    गुरुश्च ळुक्र् ळप्तन याशुकतल् वलेग्रशा् ळाॊप्ततकया बलन्तु ॥
                              े
                                                                                     प्तवॊटशका गबल वॊबतॊ तॊ याशुॊ प्रणभाम्मशभ ्॥८॥
                                                                                                      ू
           वूम् ळौमलभथेन्दरुच्चऩदलीभ ् वन्भॊगरभ ् भॊगर्।
              ल           ु
                                                                                          ऩराळ ऩुष्ऩ वॊकाळॊ तायका ग्रश भस्तकभ ्।
      वद्बत्रद्धभ ् च फुधो गुरुद्ळ गुरुताभ ् ळुक्र वुखभ ् ळॊ ळप्तन् ।
          ु
                                                                                         यौद्रॊ यौद्रात्भक घोयॊ तॊ कतुॊ प्रणभाम्मशभ ्॥९॥
                                                                                                          ॊ         े
            याशुफालशुफरॊ कयोतु वततभ ् कतु् करस्मोन्नप्ततभ ्
                                       े    ु
                                                                                     इप्तत व्माव भुखोद् गीतॊ म् ऩठे त ् वुवभाटशत्।
       प्तनत्मभ ् प्रीप्ततकया बलन्तु भभ ते वलेऽनकरा ग्रशा् ॥
                                                 ू
                                                                                 टदला ला मटद ला यात्रौ त्रलघ्न ळास्न्त् बत्रलष्मप्तत॥१०॥
आह्वान :
                                                                                     नय नायी नृऩाणाॊ च बलेद् द्स्लप्न नाळनभ ्।
                                                                                                              ु
इव भॊत्र वे नलग्रशं का आह्वान कयक उनका ऩूजन कयं :
                                 े
                                                                                     ऐद्वमं अतुरॊ तेऴाभ ् आयोग्मॊ ऩुत्रद्श लधलनभ ्॥११॥
        अस्स्भन नलग्रशभॊिरे आलाटशता् वूमालटदनलग्रशा दे ला्
                                                                                         गृश नषत्रजा् ऩीिा स्तस्कयास्ग्न वभुद्भला्।
                          वुप्रप्ततत्रद्षता लयदा बलन्तु ।
                                                                                 ता् वलाल् प्रळभॊ मास्न्त व्मावो ब्रू ते न वॊळम्॥१२॥
प्रप्ततद्षा :-
                                                                                   ॥ इप्तत श्रीव्माव त्रलयप्तचतॊ नलग्रशस्तोत्रॊ वॊऩणभ ् ॥
                                                                                                                                   ू ल
शाथ भं अषत रेकय इव भॊत्र वे का उच्चायण कय उवे नलग्रश
                                                                           करळ ऩूजन(लरुण ऩूजन )
भॊिर भं प्रप्ततद्षा क प्तरए अत्रऩलत कयं ।
                     े
   ॐ भनो जूप्ततजुऴताभाज्मस्म फृशस्ऩप्ततमलसप्तभभॊ ततनोत्लरयद्शॊ
                 ल                                                                  करळ स्थात्रऩत कयने शे तु रकिी की चौकी ऩय अद्शदर

                              मसॊ वप्तभभॊ दधातु।                           कभर फनाकय उव ऩय धान्म(गेशूॉ) त्रफछा दं । करळ (करळ

                   त्रलद्वे दे लाव इश भादमन्ताभोऽम्प्रप्ततद्ष ॥            शे तु प्तभट्िी अथला ताॊफे का रोिा रं) ऩय योरी वे स्लास्स्तक

ऩूजन:-                                                                     का प्तचन्श फनाकय रोिे ऩय तीन धागे लारी भौरी (नािाछिी़,
                                                                           कराला, ऩॊचयॊ गी धागा ) रऩेिं ल धान्म ऩय करळ यखकय जर
तत्ऩद्ळात इव भॊत्र क वाथ नलग्रशं का ऩॊचोऩचाय ऩूजन कयं -
                    े
                                                                           वे बय दं एलॊ उवभं चॊदन, दफ, ऩाॉच ऩत्ते (फयगद, गूरय,
                                                                                                    ू
   “गॊधऩुष्ऩधूऩदीऩनैलद्याटदनी वभऩलमाभी”
                     े                                 कशकय गॊध, ऩुष्ऩ,
                                                                           ऩीऩर, आभ, ऩाकि अथला ऩान क ऩत्ते), कळा एलॊ गौळारा
                                                                                                    े         ु
                        धूऩ, दीऩ, नैलेद्य अत्रऩलत कयं ।
                                                                           आटद की प्तभट्िी, वुऩायी, ऩॊचयत्न (मथाळत्रि) ल द्रव्म छोि दं ।
                                                                           नारयमर ऩय रार कऩिा रऩेिकय, चालर वे बये एक ऩूणल ऩात्र
24                                               नलम्फय 2012



को करळ ऩय स्थात्रऩत कय उव ऩय नारयमर यख दं । शाथ                                         त्रलद्वे दे लाव इश भादमन्ताभोम्प्रप्ततद्ष।।
जोिकय करळ भं लरुण दे लता का आह्वान कयं :-                                        ॐ अस्मै प्राणा: प्रप्ततद्षन्तु अस्मै प्राणा: षयन्तु च।
स्थाऩना :-                                                                             अस्मै दे लत्लभचालमै भाभशे प्तत च कद्ळन।।
करळ भं जर बयकय प्तनम्न भॊत्र का उच्चायण कयं :-                          इत्माटद ळास्त्रोि भॊत्रं का उचायण कय प्राण-प्रप्ततद्षा कयं ।
                                                                        ध्मान:-
  ॐ लरुणस्मोत्तम्बनभप्तव लरुणस्म स्कम्बवजलनी स्थो लरुणस्म।
ऋतवदन्मप्तव लरुणस्म ऋतवदन्भप्तव लरुणस्म ऋतवदनभा वीद॥                    तत्ऩद्ळमात शाथ भं ऩुष्म रेकय इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले
                                                                        रक्ष्भी दे ली का ध्मान कयं ..
आह्वान :-
                                                                                   मा वा ऩद्मावनस्था त्रलऩुरकटितिी ऩद्मऩत्रामताषी,
ततऩद्ळमात वुऩायी औय ऩॊच यत्न आटद जर करळ भं िार दं । इवके
                                                                                   गम्बीयालतलनाप्तबस्तनबयनप्तभता ळुभ्रलस्त्रोत्तयीमा ।
फाद करळ ऩय चालर का ऩात्र यखकय रार लस्त्र वे रऩेिा नारयमर
                                                                               मा रक्ष्भीटदल व्मरूऩैभस्णगणखप्तचतै् स्नात्रऩता शे भकम्बै्
                                                                                                     ल                             ु
यखना दे । अफ लरुण दे लता का स्भयण कयते शुए आह्वान कयं -
                                                                               वा प्तनत्मॊ ऩद्मशस्ता भभ लवतु गृशे वललभाॊगल्ममुिा ॥
 ॐ बूबल् स्ल् बो लरुण इशागच्छ, इशप्ततद्ष, स्थाऩमाप्तभ ऩूजमाप्तभ च।
      ुल
                                                                                      ॐ टशयण्मलणां शरयणॉ वुलणलयजतस्त्रजाभ ् ।
ध्मान ल प्राथलना :-
                                                                                    चन्द्राॊ टशयण्भमी रक्ष्भीॊ जातलेदो भ आ लश ॥
ततऩद्ळमात करळ ऩय वफ दे लताओॊ का ध्मान कयं एलॊ चॊदन,
                                                                                ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ध्मानाथे ऩुष्ऩास्ण वभऩलमाप्तभ ।
अषत, धूऩ, दीऩ, नैलेद्य अत्रऩलत कय ऩूजन कयं । इव भॊत्र का
                                                                             (ध्मान क प्तरए शाथ भं प्तरमे शुले ऩुष्ऩ दे ली को अत्रऩलत कयं ।)
                                                                                     े
उच्चायण कयं :-                                                          आह्वान:-
  करळस्म भुखे त्रलष्णु् कठे रुद्र् वभाप्तश्रत् । भूरे त्लस्म स्थतो
                         ॊ                                              तत्ऩद्ळमात शाथ भं ऩुष्म रेकय इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले
   ब्रह्मा भध्मे भातृगणा् स्भृता् ॥ कषौ तु वागया् वले, वद्ऱद्रीऩा
                                     ु                                  रक्ष्भी दे ली का आह्वान कयं ..
         लवुधया् । अजुनी गोभती चैल चॊद्रबागा वयस्लती ॥
            ॊ         ल                                                      वललरोकस्म जननीॊ वललवौख्मप्रदाप्तमनीभ ् ।वललदेलभमीभीळाॊ
    कालेयी कृ ष्णलेणी च गॊगा चैल भशानदी । ताद्ऱी गोदालयी चैल                       दे लीभालाशमाम्मशभ ् ॥ ॐ ताॊ भ आ लश जातलेदो
भाशे न्द्री नभलदा तथा ॥ नदाद्ळ त्रलत्रलधा जाता नद्य् वलालस्तथाऩया् ।    रक्ष्भीभनऩगाप्तभनीभ। मस्माॊ टशयण्मॊ त्रलन्दे मॊ गाभद्वॊ ऩुरुऴानशभ ्॥
                                                                                           ्
     ऩृप्तथव्माॊ मान तीथालप्तन करळस्ताप्तन ताप्तन लै् ॥ वले वभुद्रा्          ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। भशारक्ष्भीभालाशमाप्तभ, आलाशनाथे
       वरयतस्तीथमालप्तन जरदा नदा् । आमान्तु भभ काभस्म                                             ऩुष्ऩास्ण वभऩलमाप्तभ ।
        दरयतषमकायका् ॥ ॐ अऩाॊ ऩतमे लरुणाम नभ् । ॐ
         ु                                                                  (आह्वान क प्तरए शाथ भं प्तरमे शुले ऩुष्ऩ दे ली को अत्रऩलत कयं ।)
                                                                                     े
                      लरुणाद्यालाटशत दे लताभ्मो नभ्।
वभऩलण :-                                                                आवन :-
"कृ तेन अनेन ऩूजनेन करळे लरुणाद्यालाटशतदे लता् प्रीमन्ताॊ न             तत्ऩद्ळमात शाथ भं कभर ऩुष्म मा अन्म रेकय इव भॊत्र का
भभ।"                                                                    उच्चायण कयं ..
                                                                                        तद्ऱकाॊचनलणालबॊ भुिाभस्णत्रलयास्जतभ ् ।
रक्ष्भी ऩूजन                                                                           अभरॊ कभरॊ टदव्मभावनॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥
ऩूजन वे ऩूलल नमी रक्ष्भी प्रप्ततभा तथा द्रव्मरक्ष्भी की                              ॐ अद्वऩूलां यथभध्माॊ शस्स्तनादप्रभोटदनीभ ् ।
प्राणप्रप्ततद्षा कयं :-                                                                 प्तश्रमॊ दे लीभुऩह्वमे श्रीभाल दे ली जुऴताभ ् ॥
प्रप्ततद्षा शे तु फामं शाथ भं अषत रेकय इव भॊत्र का उचायण                              ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। आवनॊ वभऩलमाप्तभ ।
कयते शुए दाटशने शाथ वे उन अषतं को रक्ष्भीजी की प्रप्ततभा                    (आवन क प्तरए शाथ भं प्तरमे शुले ऩुष्ऩ दे ली को अत्रऩलत कयं ।)
                                                                                  े

ऩय चढा़ते जामे..                                                        ऩाद्य :-

           ॐ भनो जूप्ततजुऴताभाज्मस्म फृशस्ऩप्ततमलसप्तभभॊ
                         ल                                              तत्ऩद्ळमात चन्दन ऩुष्ऩाटद मुि जर रेकय इव भॊत्र का

                      तनोत्लरयद्शॊ मस वप्तभभॊ दधातु।                    उच्चायण कयं ..
25                                              नलम्फय 2012



               गॊगाटदतीथलवम्बूतॊ गन्धऩुष्ऩाटदप्तबमुतभ ् ।
                                                   ल                           (गाम क कच्चे दध वे स्नान कयामे, ऩुन् ळुद्ध जर वे स्नान कयामे।)
                                                                                     े       ू

              ऩाद्यॊ ददाम्मशॊ दे त्रल गृशाणाळु नभोऽस्तुते ॥
ॐ काॊ वोस्स्भताॊ टशयण्मप्राकायाभाद्रां ज्लरन्तीॊ तृद्ऱाॊ तऩलमन्तीभ।
                                                                  ्      दप्तधस्नान :-
              ऩद्मेस्स्थताॊ ऩद्मलणां ताप्तभशोऩह्वमे प्तश्रमभ ् ॥              ऩमवस्तु वभुद्भूतॊ भधुयाम्रॊ ळप्तळप्रबभ ् । दध्मानीतॊ भमा दे त्रल
           ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ऩादमो् ऩाद्यॊ वभऩलमाप्तभ ।                    स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ दप्तधक्राव्णो अकारयऴॊ स्जष्णोयद्वस्म
  (ऩाद्य शे तु शाथ भं प्तरमे शुले चन्दन ऩुष्ऩटदमुि जर अत्रऩलत कयं ।)           लास्जन् वुयप्तब नो भुखा कयत्प्र ण आमूत्रऴ तारयऴत ् । ॐ
अघ्मल :-                                                                        भशारक्ष्म्मै नभ्। दप्तधस्नानॊ वभऩलमाप्तभ। दप्तधस्नानान्ते
तत्ऩद्ळमात अद्शगन्धप्तभप्तश्रत जर रेकय इव भॊत्र का उच्चायण                                      ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ ।
कयं ..                                                                              (दशी वे स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।)
                 अद्शगन्धवभामुि स्लणलऩात्रप्रऩूरयतभ ् ।
                               ॊ
             अघ्मं गृशाण भद्दतॊ भशारस्क्ष्भ नभोऽस्तु ते ॥                घृत स्नान :-
ॐ चन्द्राॊ प्रबावाॊ मळवा ज्लरन्तीॊ प्तश्रमॊ रोक दे लजुद्शाभुदायाभ ् ।
                                               े                              नलनीतवभुत्ऩन्नॊ वललवतोऴकायकभ ् । घृतॊ तुभ्मॊ प्रदास्माप्तभ
                                                                                                  ॊ
     ताॊ ऩद्मनीभीॊ ळयणॊ प्रऩद्येऽअरक्ष्भीभे नश्मताॊ त्लाॊ लृणे ॥                 स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ घृतॊ घृतऩालन् त्रऩफत लवाॊ
            ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। शस्तमोयघ्मं वभऩलमाप्तभ ।                       लवाऩालन् त्रऩफतान्तरयषस्म शत्रलयप्तव स्लाशा । टदळ् प्रटदळ
         (अद्शगॊध प्तभप्तश्रत जर को दे ली क शाथं ऩय वभत्रऩलत कयं ।)
                                           े                                 आटदळो त्रलटदळ उटद्दळो टदग्भ्म् स्लाशा ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्।
                                                                         घृतस्नानॊ वभऩलमाप्तभ । घृतस्नानान्ते ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ।
आचभन :-
                                                                                 (घृत [घी] स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।)
तत्ऩद्ळमात आचभन क प्तरए जर रेकय इव भॊत्र का उच्चायण
                 े
कयं ..
                                                                         भधु स्नान :-
            वललरोकस्म मा ळत्रिब्रह्मत्रलष्ण्लाटदप्तब् स्तुता ।
                                                                                तरुऩुष्ऩवभुद्भूतॊ वुस्लादु भधुयॊ भधु । तेज् ऩुत्रद्शकयॊ टदव्मॊ
             ददाम्माचभनभ ् तस्मै भशारक्ष्म्मै भनोशयभ ् ॥
                                                                              स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ भधुलाता ऋतामते भधु षयस्न्त
ॐ आटदत्मलणे तऩवोऽप्तध जातो लनस्ऩप्ततस्तल लृषोऽथत्रफल्ल् ।
                                                                                  प्तवन्धल्। भाध्लीनल् वन्त्लोऴधी् ॥ भधु निभुतोऴवो
तस्म पराप्तन तऩवा नुदन्तु भामा अन्तया माद्ळ फाह्या अरक्ष्भी्॥
                                                                               भधुभत्ऩाप्तथलॎ घूॊ यज्। भधु द्यौयस्तु न् त्रऩता॥ भधुभान्नं
                                                                                           ल
         ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। आचभनीमॊ जरॊ वभऩलमाप्तभ ।
                                                                                लनस्ऩप्ततभेधुभाॉऽअस्तु वूम्। भाध्लीगाललो बलॊतु न् ॥ ॐ
                                                                                                          ल
                      (आचभन क प्तरए प्तरमे शुले जर को चढ़ामे।)
                             े
                                                                                 भशारक्ष्म्मै नभ्। भधुस्नानॊ वभऩलमाप्तभ। भधुस्नानन्ते
स्नान:-
                                                                                                ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ ।
तत्ऩद्ळमात स्नान क प्तरए जर रेकय इव भॊत्रका उच्चायण कयं ..
                  े
                                                                                      (ळशद स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।)
भन्दाटकन्मा् वभानीतैशेशभाम्बोरुशलाप्तवतै्। स्नानॊ करुष्ल दे लेप्तळ
                                                   ु
वप्तररैद्ळ वुगस्न्धप्तब्॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। स्नानॊ वभऩलमाप्तभ।
                                                                         ळकया स्नान :-
                                                                           ल
                                           (स्नानीम जर अत्रऩलत कयं ।)
                                                                                          इषुवायवभुद्भूता ळकया ऩुत्रद्शकारयका ।
                                                                                                            ल
               स्नानान्ते आचभनीमॊ जरॊ वभऩलमाप्तभ ।
                                                                                      भराऩशारयका टदव्मा स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥
स्नानक फाद 'ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्' फोरकय आचभन शे तु जर दं ।
      े
                                                                                   ॐ अऩा घूॊ यवभुद्रमवॎ वूमे वन्त घूॊ वभाटशतभ ् ।
दग्ध स्नान :
 ु
                                                                         अऩा घूॊ यवस्म मो यवस्तॊ लो गृह्राम्मुत्तभभुऩमाभगृशीतोऽवीन्द्राम
 काभधेनवभुत्ऩन्नॊ वलेऴाॊ जीलनॊ ऩयभ ् । ऩालनॊ मसशे तद्ळ ऩम्
       ु                                           ु
                                                                                  त्ला जुद्शॊ गृह्राम्मेऴ ते मोप्तनरयन्द्राम त्ला जुद्शतभभ ् ॥
     स्नानाथलभत्रऩलतभ ् ॥ ॐ ऩम् ऩृप्तथव्माॊ ऩम औऴधीऴु ऩमो
                                                                                 ॐ भशारक्ष्म्मै नभ् । ळकयास्नानॊ वभऩलमाप्तभ, ळकया
                                                                                                        ल                      ल
    टदव्मन्तरयषे ऩमो धा् । ऩमस्लती् प्रटदळ् वन्तु भह्यभ ् ॥
                                                                                      स्नानान्ते ऩुन् ळुद्धोदक स्नानॊ वभऩलमाप्तभ ।
            ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्, ऩम् स्नानॊ वभऩलमाप्तभ ।
                                                                                 (ळक्कय वे स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।)
              ऩम् स्नानान्ते ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ ।
26                                                  नलम्फय 2012



ऩॊचाभृत स्नान :-                                                          लस्त्र :-
दध, दशी, घी, ळकय एलॊ ळशद प्तभराकय ऩॊचाभृत फनाएॉ ल
 ू                                                                                      टदव्माम्फयॊ नूतनॊ टश षौभॊ त्लप्ततभनोशयभ ् ।
प्तनम्न भॊत्र वे स्नान कयाएॉ।                                                             दीमभानॊ भमा दे त्रल गृशाण जगदस्म्फक ॥
                                                                                                                             े
                ऩमो दप्तध घृतॊ चैल भधुळकयमास्न्लतभ ् ।
                                        ल                                              ॐ उऩैतु भाॊ दे लवख् कीप्ततद्ळ भस्णना वश ।
                                                                                                                 ल
             ऩॊचाभृतॊ भमानीतॊ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥                            प्रादबतोऽस्स्भ याद्सेऽस्स्भन ् कीप्ततभत्रद्धॊ ददातु भे ॥
                                                                                           ु ूल                            ल ृ
           ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ऩॊचाभृतस्नानॊ वभऩलमाप्तभ,                                   ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। लस्त्रॊ वभऩलमाप्तभ,
            ऩॊचाभृतस्नानान्ते ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ ।                                      आचभनीमॊ जरॊ च वभऩलमाप्तभ ।
       (ऩॊचाभृत स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।)                                     (लस्त्र अत्रऩलत कयं , आचभनीम जर अत्रऩलत कयं ।)
गन्धोदक स्नान :-                                                          उऩलस्त्र :-
                भरमाचरवम्बूतॊ चन्दनागरुवम्बलभ ् ।                                         कचुकीभुऩलस्त्रॊ च नानायत्नै् वभस्न्लतभ ् ।
                                                                                           ॊ
             चन्दनॊ दे लदे लेप्तळ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥                            गृशाण त्लॊ भमा दत्तॊ भॊगरे जगदीद्वरय ॥
       ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। गन्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ ।                                    ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। उऩलस्त्रॊ वभऩलमाप्तभ,
                             (गॊध (चॊदन) मुि जर वे स्नान कयाएॉ।)                               आचभनीमॊ जरॊ च वभऩलमाप्तभ ।
त्रलळेऴ:-                                                                     (कचुकी,अॉप्तगमा आटद उऩलस्त्र चढ़ाएॉ,आचभन क प्तरए जर दं ।)
                                                                                ॊ                                       े
                                                                          भधुऩक :-
                                                                               ल
गन्धोदक         स्नान   के    ऩद्ळमात   श्रीवूि,    ऩुरुऴ   वूि   अथला
वशस्रनाभ आटद वे ऩुष्ऩाचलन मा जर अप्तबऴेक कयक टपय
                                            े                             काॊस्म काॊस्मेन त्रऩटशतो दप्तधभध्लाज्मवॊमत् । भधुऩको भमानीत्
                                                                                                                   ु

ळुद्धोदक स्नान कयामे मटद ऩुष्ऩाचलन मा जर अप्तबऴेक नशीॊ                             ऩूजाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। भधुऩकं

कयना शो तो वीधे ळुद्धोदक स्नान कयामे।)                                                 वभऩलमाप्तभ, आचभनीमॊ जरॊ च वभऩलमाप्तभ ।

अप्तबऴेक शे तु ळुद्ध जर मा दग्ध वे श्रीवूि क ऩाठ क वभम
                                            े     े                             (काॊस्म ऩत्र भं स्स्थत भधुऩक (अथालत वोने चाॊदी क प्तवक्क
                                                                                                            ल                   े       े
                            ु
अखण्ि जरधाया वे स्नान अथालत अप्तबऴक कयामे। अखण्ि                                                                               इत्माटद) अत्रऩलत कयं )

जरधाया शे तु धातु की प्रप्ततभा मा द्रव्मरक्ष्भी श्रेद्ष यशती शं ।         मसोऩलीत :-

अखण्ि जरधाया अप्तबऴेक अरग ऩात्र भं कयना चाटशए।                            श्रीगणेळ, श्रीनायामण आटद दे लता को स्थात्रऩत टकमा शो तो
* प्तभट्िी की प्रप्ततभा शो तो अखण्ि जरधाया वे प्रप्ततभा                   मसोऩत्रलत चढ़ाए, अन्मथा वीधे आबूऴण वे ऩूजन कयं
षप्ततग्रस्त शो वकती शं । श्री वूि इव अॊक भं उऩरब्ध कयामा                       ॐ तस्भादअकला अजामॊत मे क चोबमादत् । गालोश मस्सये
                                                                                         ू             े
गमा शं ।                                                                        तस्भात्तस्भाज्जाता अजालम् ॥ ॐ मसोऩलीतॊ ऩयभॊ ऩत्रलत्रॊ

ळुद्धोदक स्नान :                                                                 प्रजाऩतमेत्वशजॊ ऩुयस्तात ् ॥ आमुष्मभग्र्मॊ प्रप्ततभुञ्च ळुभ्रॊ

             भन्दाटकन्मास्तु मद्रारय वललऩाऩशयॊ ळुबभ ् ।                       मसोऩलीतॊ फरभस्तुतज् । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्, ॐ श्रीगणेळाम
                                                                                               े

           तटददॊ कस्ल्ऩतॊ तुभ्मॊ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥                  नभ्, ॐ बगलते लावुदेलाम नभ् । मसोऩलीतॊ वभऩलमाप्तभ ।

        ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ ।                   (श्रीगणेळ,       श्रीनायामण      आटद      दे लता    कोमसोऩत्रलत        चढ़ामे,

(ळुद्धोदक स्नान क प्तरए गॊगाजर अथला ळुद्ध जर वे दे ली को
                 े                                                        आचभन क प्तरए जर दं ।)
                                                                                े

स्नान कयामे। तदनॊतय प्रप्ततभा का अॊग-प्रोषण(ऩंछना) कयके                   आबूऴण :-

उवे मथास्थान आवान ऩय स्थात्रऩत कयं ।)                                                        यत्नककणलैदमभिाशायाटदकाप्तन च ।
                                                                                                  ॊ    ू ल ु
                                                                                        वुप्रवन्नेन भनवा दत्ताप्तन स्लीकरुष्ल बो् ॥
                                                                                                                        ु
आचभन :-                                                                           ॐ षुस्त्ऩऩावाभराॊ ज्मेद्षाभ-अरक्ष्भीॊ नाळमाम्मशभ ् ।
                                                                                                             ्

तत्ऩद्ळात 'ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्' कशकय आचभनी वे जर                                          अबूप्ततभवभृत्रद्धॊ च वलां प्तनणुद भे गृशात ् ॥
                                                                                                                         ल

अत्रऩलत कयं ।                                                                      ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। नानात्रलधाप्तन किरकिकादीप्तन
                                                                                                                       ुॊ
                                                                                   आबूऴणाप्तन वभऩलमाप्तभ । (आबूऴण वभत्रऩलत कयं ।)
27                                              नलम्फय 2012



गन्ध :-                                                                               ॐ भनव् काभभाकप्ततॊ लाच् वत्मभळीभटश । ऩळूनाॊ
                                                                                                   ू
          श्रीखण्िॊ चन्दनॊ टदव्मॊ गन्धाढ्मॊ वुभनोशयभ ् ।                                      रूऩभन्नस्म भप्तम श्री् श्रमताॊ मळ् ॥
                त्रलरेऩनॊ वुयश्रेद्षे चन्दनॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥                      ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ऩुष्ऩॊ ऩुष्ऩभाराॊ च वभऩलमाप्तभ ।
          ॐ गन्धद्रायाॊ दयाधऴांप्तनत्म ऩुद्शाॊ कयीत्रऴणीभ ् ।
                         ु                                                        (उि भॊत्र का उचायण कय दे ली रक्ष्भी जी को ऩुष्ऩं वे ल ऩुष्ऩ
               ईद्वयीॊ वललबतानाॊ ताप्तभशोऩ ह्वमे प्तश्रमभ ् ॥
                           ू                                                        भाराओॊ वे अरॊकृत कयं । रक्ष्भीजी का ऩूजन कभर क ऩुष्ऩ
                                                                                                                                  े
               ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। गन्धॊ वभऩलमाप्तभ ।                                                                         वे श्रेद्ष भाना जाता शं ।)
       (अनाप्तभका अॊगरी वे कवय प्तभप्तश्रत चन्दन अत्रऩलत कयं ।)
                     ु      े                                                 दलाल :-
                                                                               ू
यि चन्दन :-                                                                                त्रलष्ण्लाटदवललदेलानाॊ त्रप्रमाॊ वललवळोबनाभ ् ।
                                                                                                                                ु
                यिचन्दनवस्म्भश्रॊ ऩारयजातवभुद्भलभ ् ।                                       षीयवागय वम्बूते दलां स्लीकरू वललदा ॥
                                                                                                             ू        ु
              भमा दत्तॊ भशारस्क्ष्भ चन्दनॊ प्रप्ततगृह्यताभ ॥                              ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। दलांकयान ् वभऩलमाप्तभ ।
                                                                                                               ू ु
          ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। यिचन्दनॊ वभऩलमाप्तभ ।                                                   (दलांकय (अथालत ् दफ क अॊकय) अत्रऩलत कयं ।)
                                                                                                        ू ु             ू  े   ु
                            (अनाप्तभका अॊगरी वे यि चॊदन चढ़ाएॉ।)
                                          ु                                   अॊग ऩूजा :-
प्तवन्दय :-
       ू                                                                      तदनॊतय भशारक्ष्भीजी क त्रलप्तबन्न अॊगं का ककभ एलॊ अषत
                                                                                                   े                     ुॊ ु
                प्तवन्दयॊ यिलणं च प्तवन्दयप्ततरकत्रप्रमे ।
                       ू                 ू                                    प्तभप्तश्रत ऩुष्ऩं वे दे ली का एक-एक नाभ रेते शुले अॊगऩूजन कयं
          बक्त्मा दत्तॊ भमा दे त्रल प्तवन्दयॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥
                                           ू                                  ॐ चऩरामै नभ्, ऩादौ ऩूजमाप्तभ। (ऩैयं ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं )
ॐ प्तवन्धोरयल प्राध्लने ळूघनावो लात प्रप्तभम् ऩतमस्न्त मह्वा् ।               ॐ चॊचरामै नभ्, जानुनी ऩूजमाप्तभ। (जानु प्रदे ळ ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं )
                                                                                                                                           ल

घृतस्म धाया अरुऴो न लाजी काद्षा प्तबन्दन्नूप्तभप्तब् त्रऩन्लभान्॥
                                               ल                              ॐ कभरामै नभ्,कटिॊ ऩूजमाप्तभ। (कभय ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं )
                                                                                                                              ल
              ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। प्तवन्दयॊ वभऩलमाप्तभ ।
                                         ू                                    ॐ कात्मामन्मै नभ्,नाप्तबॊ ऩूजमाप्तभ। (नाप्तब ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं )
                                       (दे ली रक्ष्भी को प्तवन्दय चढ़ाएॉ।)
                                                                ू             ॐ जगन्भात्रे नभ्, जठयॊ ऩूजमाप्तभ। (जठय ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं )
                                                                                                                                   ल
ककभ :-
 ुॊ ु                                                                         ॐ त्रलद्वलल्रबामै नभ्, लष्स्थरभ ् ऩूजमाप्तभ । (लषस्थर ऩय

              ककभॊ काभदॊ टदव्मॊ ककभॊ काभरूत्रऩणभ ् ।
               ुॊ ु              ुॊ ु                                         ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं )

              अखण्िकाभवौबाग्मॊ ककभॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥
                                ुॊ ु                                          ॐ कभरलाप्तवन्मै नभ्,शस्तौ ऩूजमाप्तभ। (शाथ ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं )
                                                                                                                                      ल

               ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्, ककभॊ वभऩलमाप्तभ ।
                                    ुॊ ु                                      ॐ ऩद्माननामै नभ्, भुखॊ ऩूजमाप्तभ। (भुख ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं )
                                                                                                                                   ल

                                                      (ककभ अत्रऩलत कयं ।)
                                                        ुॊ ु                  ॐ कभरऩत्राक्ष्मै नभ्, नेत्रत्रमॊ ऩूजमाप्तभ।(तीनं नेत्र ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं )
                                                                                                                                                   ल

ऩुष्ऩवाय :-                                                                   ॐ प्तश्रमै नभ्, प्तळय् ऩूजमाप्तभ । (प्तवय ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं )

          तैराप्तन च वुगन्धीप्तन द्रव्मास्ण त्रलत्रलधाप्तन च ।                ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्, वलांङ्गॊ ऩूजमाप्तभ । (दे ली क वभस्त अॊग
                                                                                                                               े

                भमा दत्ताप्तन रेऩाथं गृशाण ऩयभेद्वरय ॥                        क ऩूजन शे तु ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं )
                                                                               े

 ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। वुगस्न्धततैरॊ ऩुष्ऩवायॊ च वभऩलमाप्तभ ।                   अद्शप्तवत्रद्धऩूजन :-

                    (ऩुष्ऩवाय भं वुगस्न्धत तेर ल इत्र अत्रऩलत कयं ।)          इवक ऩद्ळात दस्षणालतल अथालत ् घिी की टदळा भं आठं
                                                                                 े

अषत :-                                                                        टदळाओॊ भं लस्णलत आठं प्तवत्रद्धमं का ऩूजन ककभ एलॊ अषत
                                                                                                                         ुॊ ु
                                                                              वे दे ली भशारक्ष्भी का ऩूजन कयं -
               अषताद्ळ वुयश्रेद्षे ककभािा् वुळोप्तबता् ।
                                    ुॊ ु
                                                                              1 ॐ अस्णम्ने नभ् (ऩूलल टदळा भं), 2 ॐ भटशम्ने नभ्
              भमा प्तनलेटदता बक्त्मा गृशाण ऩयभेद्वरय ॥
              ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। अषतान ् वभऩलमाप्तभ ।                        (आग्नेम कोण भं), 3 ॐ गरयम्णे नभ् (दस्षण टदळा भं), 4

                               (ककभ वे यॊ गे शुए अषत अत्रऩलत कयं ।)
                                 ुॊ ु                                         ॐ रप्तघम्ने नभ् (नैऋत्म कोण भं), 5 ॐ प्राप्त्मै नभ्
                                                                              (ऩस्द्ळभ टदळा भं), 6 ॐ प्रकाम्मै नभ् (लामव्म कोण भं), 7
ऩुष्ऩ एलॊ ऩुष्ऩभारा :-
                                                                              ॐ ईप्तळतामै नभ् (उत्तय टदळा भं), 8 ॐ लप्तळतामै नभ्(ईळान
          भाल्मादीप्तन वुगन्धीप्तन भारत्मादीप्तन लै प्रबो ।
                                                                              कोण भं) |
              भमानीताप्तन ऩुष्ऩास्ण ऩूजाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥
28                                             नलम्फय 2012



अद्शरक्ष्भी ऩूजन :-                                                                 ळीतरॊ प्तनभलरॊ तोमॊ कऩूयेण वुलाप्तवतभ ् ।
                                                                                                           ल
इवक ऩद्ळात दस्षणालतल अथालत ् घिी की टदळा भं आठं
   े                                                                               आचम्मताॊ जरॊ ह्येतत ् प्रवीद ऩयभेद्वरय ॥
टदळाओॊ भं लस्णलत आठं अद्श रस्क्ष्भमं का ऩूजन कयं ।                            ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। आचभनीमॊ जरॊ वभऩलमाप्तभ ।
    (1) ॐ आद्यरक्ष्म्मै नभ् (2) ॐ त्रलद्यारक्ष्म्मै नभ् (3)                                                    (आचभन क प्तरए जर दं ।)
                                                                                                                      े
          ॐ वौबाग्मरक्ष्म्मै नभ् (4) ॐ अभृतरक्ष्म्मै नभ्
                                                                     ऋतुपर :-
          (5) ॐ काभरक्ष्म्मै नभ् (6) ॐ वत्मरक्ष्म्मै नभ्
                                                                                    परेन पप्तरतॊ वलं त्रैरोक्मॊ वचयाचयभ ् ।
          (7) ॐ बोगरक्ष्म्मै नभ् (8) ॐ मोगरक्ष्म्मै नभ्
                                                                                 तस्भात ् परप्रदानेन ऩूणाल् वन्तु भनोयथा् ॥
धूऩ :-
                                                                         ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। अखण्िऋतुपरॊ वभऩलमाप्तभ, आचभनीमॊ
             लनस्ऩप्ततयवोद्भूतो गन्धाढ्म् वुभनोशय् ।
                                                                                               जरॊ च वभऩलमाप्तभ ।
             आघ्रेम् वललदेलानाॊ धूऩोऽमॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥
                                                                                  (ऋतुपर अत्रऩलत कयं तथा आचभन क प्तरए जर दं ।)
                                                                                                               े
             ॐ कद्दल भेन प्रजा बूता भप्तम वॊबल कदल भ।
            प्तश्रमॊ लावम भं करे भातयॊ ऩद्मभाप्तरनीभ ् ॥
                              ु                                      ताम्फूर एलॊ ऩूगीपर :-
               ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। धूऩभाघ्राऩमाप्तभ ।                               ऩूगीपरॊ भशटद्दव्मॊ नागलल्रीदरैमतभ ् ।
                                                                                                                   ुल
                  (दोनं शाथं वे रक्ष्भीजीको धूऩ आघ्रात्रऩत कयं ।)                   एराचूणालटदवॊमि ताम्फूरॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥
                                                                                                 ु ॊ
दीऩ :-                                                                         ॐ आद्रां म् करयणीॊ मत्रद्शॊ वुलणां शे भभाप्तरनीभ ् ।
                काऩालवलप्ततवमि घृतमुि भनोशयभ ् ।
                           ल ॊ ु ॊ   ॊ                                           वूमां टशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ जातलेदो भ आ लश ॥
                तभोनाळकयॊ दीऩॊ गृशाण ऩयभेद्वरय ॥                            ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। भुखलावाथे ताम्फूरॊ वभऩलमाप्तभ ।
      ॐ आऩ् वृजन्तु स्स्नग्धाप्तन प्तचक्रीत लव भे गृशे।                      (रलॊग, इरामची ल ऩूगीपर(वुऩायी) यखकय ताम्फूर(ऩान)
             प्तन च दे लीॊ भातयॊ प्तश्रमॊ लावम भे करे ॥
                                                   ु                                                                            अत्रऩलत कयं ।)
                ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। दीऩॊ दळलमाप्तभ ।                 दस्षणा :-
                        (रक्ष्भीजीको दीऩक टदखाकय शाथ धो रं।)                         टशयण्मगबलगबलस्थॊ शे भफीजॊ त्रलबालवो् ।
नैलेद्य (वार की धानी वटशत ऩॊचप्तभद्षान्न ल वूखे भेले) :                            अनन्तऩुण्मपरद्धभत् ळास्न्त प्रमच्छ भे ॥
             नैलेद्यॊ गृह्यताॊदेत्रल बक्ष्मबोज्मवभस्न्लतभ ् ।                 ॐ ताॊ भ आ लश जातलेदो रक्ष्भीभनऩगाप्तभनीभ ् ।
          ऴड्यवैयस्न्लतॊ टदव्मॊ रस्क्ष्भ दे त्रल नभोऽस्तु ते ॥           मस्माॊ टशयण्मॊ प्रबूतॊ गालो दास्मोऽद्वान ् त्रलन्दे मॊ ऩुरुऴानशभ ् ॥
         ॐ आद्रां ऩुष्करयणीॊ ऩुत्रद्शॊ त्रऩगराॊ ऩद्मभाप्तरनीभ ् ॥
                                           ॊ                                      ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। दस्षणाॊ वभऩलमाप्तभ ।
          चन्द्राॊ टशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ जातलेदो भ आ लश ॥                              (अऩनी श्रद्धा अनुवाय रक्ष्भीजी को दस्षणा चढ़ामे।)
               ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। नैलेद्यॊ प्तनलेदमाप्तभ,           नीयाजन (आयती) :-
         भध्मे ऩानीमभ,् उत्तयाऩोऽळनाथलभ ् शस्तप्रषारनाथं                           चषुदं वललरोकानाॊ प्ततप्तभयस्म प्तनलायणभ ् ।
                भुखप्रषारनाथं च जरॊ वभऩलमाप्तभ ।                                 आप्ततक्म कस्ल्ऩतॊ बक्त्मा गृशाण ऩयभेद्वरय ॥
                                                                                      ल
               ( रक्ष्भीजी को नैलद्य प्तनलेटदत कय ऩानीम जर एलॊ
                                 े                                                ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। नीयाजनॊ वभऩलमाप्तभ ।
                           शस्तप्रषारन क प्तरए जर अत्रऩलत कयं ।)
                                        े                                                     (आयती कयं तथा जर छोिं ल शाथ धोरे।)


कयोद्रतलन :-                                                         प्रदस्षणा :-
  ॐ भशारक्ष्म्मै नभ् मश कशकय कयोद्रतलन क प्तरए शाथं भं
                                        े                                        माप्तन काप्तन च ऩाऩाप्तन जन्भान्तयकृ ताप्तन च ।
                        चन्दन उऩरेत्रऩत कयं ।                                      ताप्तन वलालस्ण नश्मन्तु प्रदस्षणाॊऩदे ऩदे ॥
                                                                                  ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। प्रदस्षणाॊ वभऩलमाप्तभ ।
आचभन :-
                                                                                                                            (प्रदस्षणा कयं ।)
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प्राथलना :-                                                          ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। प्राथलनाऩूलक नभस्कायान ् वभऩलमाप्तभ ।
                                                                                                    ल ॊ
शाथ जोिकय प्राथना कयं :                                                                (दे ली को प्राथलना कयते शुए नभस्काय कयं ।)
    वुयवुयंद्राटदटकयीिभौत्रिकमुिभ वदा मत्तल ऩादऩॊकजभ ् ।
                             ै ल                  ॊ                वभऩलण :-
  ऩयालयॊ ऩातु लयॊ वुभगरभ ् नभाप्तभ बक्त्मास्खरकाभप्तवद्धमे ॥
                     ॊ                                             ऩूजन क अॊतभं "कृ तेनानेन ऩूजनेन बगलती भशारक्ष्भी दे ली
                                                                         े
              बलाप्तन त्लॊ भशारक्ष्भी् वललकाभप्रदाप्तमनी ।         प्रीमताभ ् न भभ।" इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले वभस्त
       वुऩस्जता प्रवन्ना स्मान्भशारस्क्ष्भ ! नभोऽस्तु ते ॥
          ू                                                        ऩूजन कभल दे ली भशारक्ष्भी को वभत्रऩलत कयते शुले शाथ भं जर
                नभस्ते वललदेलानाॊ लयदावी शरयत्रप्रमे ।             रेकय छोि दं ।
       मा गप्ततस्त्लत्प्रऩन्नानॊ वा भे बूमात ् त्लदचलनात ् ॥

                                                   वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रका
इव भुटद्रका भं भूॊगे को ळुब भुशूतल भं त्रत्रधातु (वुलणल+यजत+ताॊफं) भं जिला कय उवे ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श
तेजस्ली भॊत्रो द्राया वललप्तवत्रद्धदामक फनाने शे तु प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि टकमा जाता शं । इव भुटद्रका को टकवी बी
लगल क व्मत्रि शाथ की टकवी बी उॊ गरी भं धायण कय वकते शं । मशॊ भुटद्रका कबी टकवी बी स्स्थती भं अऩत्रलत्र नशीॊ
     े
शोती। इव प्तरए कबी भुटद्रका को उतायने की आलश्मिा नशीॊ शं । इवे धायण कयने वे व्मत्रि की वभस्माओॊ का वभाधान
शोने रगता शं । धायणकताल को जीलन भं वपरता प्राप्तद्ऱ एलॊ उन्नप्तत क नमे भागल प्रवस्त शोते यशते शं औय जीलन भं
                                                                  े
वबी प्रकाय की प्तवत्रद्धमाॊ बी ळीध्र प्राद्ऱ शोती शं ।                                                   भूल्म भात्र- 6400/-
(नोि: इव भुटद्रका को धायण कयने वे भॊगर ग्रश का कोई फुया प्रबाल वाधक ऩय नशीॊ शोता शं ।)
वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रका क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी क प्तरमे शे तु वम्ऩक कयं ।
                            े                          े                  ल

                                           ऩप्तत-ऩत्नी भं करश प्तनलायण शे तु
मटद ऩरयलायं भं वुख-वुत्रलधा क वभस्त वाधान शोते शुए बी छोिी-छोिी फातो भं ऩप्तत-ऩत्नी क त्रफच भे करश शोता यशता शं ,
                             े                                                       े
तो घय क स्जतने वदस्म शो उन वफक नाभ वे गुरुत्ल कामालरत द्राया ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत
       े                      े
ऩूणल चैतन्म मुि लळीकयण कलच एलॊ गृश करश नाळक टिब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं त्रफना टकवी ऩूजा, त्रलप्तध-
त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ भॊत्र प्तवद्ध ऩप्तत लळीकयण मा ऩत्नी लळीकयण एलॊ गृश करश
नाळक टिब्फी फनलाना चाशते शं , तो वॊऩक आऩ कय वकते शं ।
                                     ल

                                                 100 वे अप्तधक जैन मॊत्र
   शभाये मशाॊ जैन धभल क वबी प्रभुख, दरब एलॊ ळीघ्र प्रबालळारी मॊत्र ताम्र ऩत्र,प्तवरलय (चाॊदी) ओय गोल्ि (वोने) भे उऩरब्ध शं ।
                       े             ु ल
शभाये मशाॊ वबी प्रकाय क मॊत्र कोऩय ताम्र ऩत्र, प्तवरलय (चाॊदी) ओय गोल्ि (वोने) भे फनलाए जाते शै । इवक अराला आऩकी
                       े                                                                             े
आलश्मकता अनुळाय आऩक द्राया प्राद्ऱ (प्तचत्र, मॊत्र, टिज़ाईन) क अनुरुऩ मॊत्र बी फनलाए जाते शै . गुरुत्ल कामालरम द्राया
                   े                                         े
उऩरब्ध कयामे गमे वबी मॊत्र अखॊटित एलॊ 22 गेज ळुद्ध कोऩय(ताम्र ऩत्र)- 99.99 िच ळुद्ध प्तवरलय (चाॊदी) एलॊ 22 कये ि
                                                                                                            े
गोल्ि (वोने) भे फनलाए जाते शै । मॊत्र क त्रलऴम भे अप्तधक जानकायी क प्तरमे शे तु वम्ऩक कयं ।
                                       े                          े                  ल
                                               GURUTVA KARYALAY
           Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785, Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com,
   gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
30                                          नलम्फय 2012




                  शोगा रक्ष्भी का प्तचस्थामी प्तनलाव तीन दरब वाभग्रीमं वे
                                                          ु ल
                                                                                                           प्तचॊतन जोळी
शत्था जोिी्                                                    शत्थाजोिी        का   त्रलळेऴ   प्रमोग    ताॊत्रत्रको   द्धाया   तॊत्र
                                                                  टक्रमाओॊ भं टकमा जाता शै , शत्थाजोिी ळीध्र प्रबाली एलॊ
       शत्था जोिी प्रकृ प्तत की अनभोर दे नं भं वे एक
                                                                  चभत्कायी लस्तु शोने की कायण शी त्रलप्तबन्न तॊत्र ळास्त्र
शं , शत्था जोिी अप्तत दरलब लस्तु भानी जाप्तत शं क्मोकी
                       ु
                                                                  भं शत्थाजोिी क अनेक उऩमोग फतामे गमे शै ।
                                                                                े
मश आवानी वे प्राद्ऱ नशीॊ शोती, शत्था जोिी एक त्रलरुऩा
                                                               त्रलद्रानं का कथन शं की स्जव भनुष्म क ऩाव अवरी
                                                                                                     े
नाभक ऩौधे की टकवी-टकवी जि भं ऩामी जाता शं , वबी
                                                                  प्तवद्ध शत्थाजोिी शोती शै , उवका बाग्म टदन दोगुनी-
जिं भं नशीॊ ऩामी जाती। शत्थाजोिी का आकाय शभाये
                                                                  यात चौगुनी तेजी वे चभकता दे खने प्तभरता शं !
दोनं शाथं क वभान शोता शं , शत्थाजोिी भं दोनो शाथ
           े
                                                               एवी भान्मता शं की स्जव व्मत्रि क ऩाव शत्थाजोिी
                                                                                                े
नीॊचे वे आऩव भं जुिे़ शुले प्रप्ततत शं कई-कई शत्थाजोिी
                                                                  शोती शं उवक स्खराप टकमे गमे वबी झुठे आयोऩ,
                                                                             े
का उऩयी बाग बी आऩवे भं जुिा शोता शै , औय उवके
                                                                  ऴिमॊत्र, िोने-िोिक, ताॊत्रत्रक कभल इत्माटद प्तनष्पर शो
                                                                                    े
उऩयी बाग भं ऩाॊच-ऩाॊच अॊगुरीमं क वभान आकृ प्ततमा
                                े
                                                                  जाते शं , फिे ़ वे फिे ़ ळत्रु का प्रबाल उवक वभष स्षण
                                                                                                              े
टदखाई दे ती शं इव कायण इवे शत्थाजोिी क नाभ वे
                                      े
                                                                  शो जाता शं औय फिे ़ वे फिे ़ ताॊत्रत्रकं की तॊत्र टकमा मे
जाना जाता शं ।
                                                                  प्तनष्पर शो जाते शं । कछ जानकायं का तो मशाॊ तक
                                                                                         ु
       स्जव प्रकाय शत्था जोिी दे खने भं अन्म दरब
                                              ु ल
                                                                  कशना शं मटद कछ त्रलळेऴ भॊत्रं वे प्तवद्ध टक गई
                                                                               ु
प्तचज-लस्तुओॊ की तुरनाभं अद्भत एलॊ फेजोि प्रप्ततत शोती
                             ु
                                                                  शत्थाजोिी को मटद व्मत्रि अऩने ऩाव यखता शं तो
शं ठीक उवी प्रकाय एक प्राभास्णक एलॊ अप्तबभॊत्रत्रत मा
                                                                  उवका फिे ़ वे फिा ळत्रु बी उवक आगे नतभस्त्क शो
                                                                                                े
प्राण-प्रप्ततत्रद्षत शत्था जोिी क आद्ळमलजनक प्रबालं की
                                 े
                                                                  जाता शं ।
तुरना टकवी औय प्तचज-लस्तुओॊ वे नशीॊ शो वकती शं ।
                                                               मटद टकवी व्मत्रि क उऩय उवक त्रलयोप्तध मा ळत्रुओॊ ने
                                                                                  े       े
इवीप्तरमे तो कई वदीॊमं वे भॊत्र, तॊत्र आटद त्रलद्या भं
                                                                  झुठे आयोऩ रगाकय कोिल -कचशयी, भुकदभं इत्माटद भं
शत्थाजोिी अऩना एक भशत्लऩूणल स्थान यखती शै ।
                                                                  पवा टदमा शो तो शत्थाजोिी क प्रबाल वे उवे भुकदभे
                                                                   ॊ                        े
       शत्थाजोिी त्रलप्तबन्न ताॊत्रत्रक प्रमोगं भं काभ आती
                                                                  भं त्रलजम की प्राप्तद्ऱ शोती शं औय उवक ळत्रु लळीबूत
                                                                                                        े
शं , जानकाय त्रलद्रानं का कथन शं की एक प्तवद्ध शत्थाजोिी
                                                                  शो जाते शं ।
को कलर अऩने वाथ यखने भात्र वे शी छोिे -फिे ़ अनेक
    े
                                                               शत्थाजोिी को ऩाव यखने वे याजकीम अथालत वयकायी
वॊकिं का स्लत् शी प्तनलायण शो जाता शं । शत्था जोिी
                                                                  कामो वे जुिे़ छोिे -फिे ़ वबी अप्तधकायी व्मिी के
को अऩने ऩाव यखने वे आकस्स्भक दघिना आटद का
                              ु ल
                                                                  लळीबूत शो जाते शं । मटद कोई वयकायी अप्तधकायी
बम नशीॊ वताता। एवा भाना जाता शं की स्जव भनुष्म
                                                                  त्रफना टकवी कायण आऩको अनामाव शी अऩने ऩद ल
क ऩाव भं शत्था जोिी शोती शं उवक उऩय कोई िोने -
 े                             े
                                                                  वत्ता का पामदा उठाकय आऩको ऩये ळान कय यशा शो
िोिक, ताॊत्रत्रक प्रमोग आटद का प्रबाल नशीॊ शोता शं !
    े
                                                                  मा कद्श दे यशे शो, तो इव भं जयाबीॊ वॊदेश नशीॊ शं टक
 जानकायं क भतानुवाय शत्थाजोिी का प्राप्तद्ऱ स्थान
           े                                                      शत्थाजोिी आऩक प्तरमे याभफाण औऴप्तध क रुऩ भं
                                                                               े                      े
   भुख्मत् बायत, ऩाटकस्तान, ईयान, इयाक, फ्राॊव, जभलनी,            वात्रफत शो वकती शं ! क्मोटक शत्थाजोिी एक अनुबूत
   एप्तळमाई भशाद्रीऩ क प्तनकितभ षेत्रं भं ऩाई जाती शै ।
                      े                                           एलॊ टदव्म लस्तु शं ।
31                                       नलम्फय 2012



 प्तवद्ध की शुई शाथाजोिी को चाॊदी मा स्िीर की टिब्फी                प्तवॊमाय प्तवॊगी्
   भं रंग, इरामची ल प्तवन्दय क वाथ शी टिब्फी को
                           ू  े
                                                                               प्तवॊमाय प्तवॊगी को प्तवमाय प्तवॊघी, गीदिप्तवॊगी बी
   फॊध कय क यखना चाटशए। दै प्तनक ऩूजन क वभम उव
           े                           े
                                                                     कशते शं । जम्फुक अथालत लन्म-ऩळु प्तवमाय क प्तवय ऩय
                                                                                                              े
   टिब्फी को खोरकय, धूऩ-दीऩ टदखाकय उवे फॊधकय दे ना
                                                                     एक प्रकाय की गाॊठ शोती शं उवे शी प्तवॊमाय प्तवॊगी कशा
   चाटशए।
                                                                     जाता शै । शाराॊकी मश गाॊठ शय प्तवमाय क प्तवय ऩय नशीॊ
                                                                                                           े
 शाथाजोिी घय भं शोने वे ऩप्तत-ऩत्नी भं आऩवी प्रेभ
                                                                     शोती टकवी-टकवी प्तवमाय क प्तवय ऩय शी ऩाई जाती शं ।
                                                                                             े
   फढ़ता शं ल दाॊऩत्म वुख भं लृत्रद्ध शोती शं । जीलन के
                                                                     मश फादाभी यॊ ग की भुरामभ फारं वे ढॊ की शोती शं , इवके
   प्रत्मेक षेत्र भं वपरता शे तु शाथाजोिी अचूक उऩाम
                                                                     फीच भं एक छोिा वा वीॊग उऩय की औय उठा शुला शोता
   प्तवद्ध शो वकती शै । स्जव घय भं ऩूणल त्रलप्तध-त्रलधान वे
                                                                     शं । कछ जानकायं का कथन शं की लन्म-जाप्तत क रोग
                                                                           ु                                   े
   अप्तबभॊत्रत्रत मा प्तवद्ध की गई शाथाजोिी का ऩूजन शोता
                                                                     इव तयश क प्तवमाय को खोजते शं उवे ढू ॊ ढकय उवे भायकय
                                                                             े
   शै , उव घय क वदस्म वबी प्रकाय की ऩये ळानीमं वे
               े
                                                                     प्तवमाय प्तवॊगी प्राद्ऱ कयते शं , रेटकन कछ लन्म-जाप्तत क
                                                                                                              ु              े
   वुयस्षत यशते शं , ऩरयलाय की आप्तथलक स्स्थती टदन
                                                                     रोग कलर भये शुले प्तवमाय क प्तवय वे शी प्तवॊगी प्तनकारते
                                                                          े                    े
   प्रप्ततटदन   उन्नत   शोती जाती       शं   औय    व्मत्रि   श्री
                                                                     शै । रेटकन कछ रोगं का भानना शं की जीत्रलत प्तवमाय क
                                                                                 ु                                      े
   वम्ऩन्न फना यशता शै ।
                                                                     प्तवय वे प्तवमाय प्तवॊगी प्तनकार रेते शं औय कछ अॊतयार
                                                                                                                  ु
 प्तवद्ध शाथाजोिी को कोई बी व्मत्रि चाशं लश स्त्री शो
                                                                     क फाद उवक प्तवय ऩय ऩय ऩुन् प्तवमाय प्तवॊगी प्तनकर
                                                                      े       े
   मा ऩुरूऴ चाशे टकवी धभल मा लणल का शो लश वयरता
                                                                     आती शं , इन दोनं भत भं त्रलयोधाबाव दे खने को प्तभरता
   वे ऩूजन कय वकते शं । शाथाजोिी का ऩूजन कयने
                                                                     शं ।
   लारे व्मत्रिमं का व्मत्रित्ल एलॊ प्रबाल अन्म व्मत्रि
                                                                               रेटकन प्तवॊमाय प्तवॊगी त्रलळेऴ रुऩ वे ऩळु तॊत्र ळास्त्र
   की अऩेषा प्तनस्द्ळत रुऩ वे अत्माप्तधक प्रबालळारी
                                                                     भं फशुउऩमोगी लस्तु भानी जाती शं । क्मोकी प्तवमायप्तवॊगी
   शोता शं । शाथाजोिी क त्रलळेऴ प्रमोगं वे ऩूजन कताल
                       े
                                                                     की गाठं       को तॊत्र ळास्त्र भं अदबुत ळत्रिळारी एलॊ
                                                                                                         ु
   व्मत्रि भं त्रलरषण वम्भोशन ळत्रि जाग्रत शो वकती
                                                                     प्रबालळारी भाना जाता शै ।
   शं !
                                                                      एक अप्तबभॊत्रत्रत मा प्तवद्ध टक शुई प्तवमाय प्तवॊगी वे
 प्तवद्ध शाथाजोिी व्मत्रि को बूत-प्रेत, भायण-उच्चािन,
                                                                            वम्भोशन, लळीकयण, धन-वॊऩत्रत्त की प्राप्तद्ऱ एलॊ लृत्रद्ध
   काभण-िू भण इत्माटद उऩद्रलं वे यषा शोती शं । व्मत्रि
                                                                            कयने लारी त्रलरषण ळत्रि शोती शं ।
   की धन-वॊऩत्रत्त भं प्तनस्द्ळत रुऩ वे लृत्रद्ध शोने रगती शं ।
                                                                      मटद मश टकवी प्रकाय वे मश दरब लस्तु प्राद्ऱ शो
                                                                                                 ु ल
   शत्थाजोिी का त्रलप्तधलत ऩूजन कयने वे लाणी क दोऴ
                                              े
                                                                            जामे तो उवे टकवी जानकाय मा त्रलद्रान वे प्तवद्ध
   औय योग नद्श शोते शं । शत्थाजोिी को प्ततजोयी भं यखने
                                                                            कयलारे। प्तवमाय प्तवॊगी प्तवद्र शोने ऩय इवे चाॊदी मा
   वे व्मलवाम स्लत् फढने रगता शं ।
                                                                            स्िीर की टिब्फी भं प्तवॊदय बयकय यखदे । प्तवमाय प्तवॊगी
                                                                                                     ू
 कछ त्रलद्रानं का तो मशाॊ तक कथन शं की शाथाजोिी
   ु
                                                                            क त्रलऴम भं त्रलद्रानो का भत शं की स्जव भनुष्म क
                                                                             े                                              े
   क प्तनमप्तभत ऩूजन एलॊ दळलन वे व्मत्रि का वोमा
    े
                                                                            ऩाय भं प्तवमाय प्तवॊगी शोती शै उवे बत्रलष्म भं घटित
   बाग्म जाग जाता शं , औय उवक त्रफगिे ़ कामल जल्द शी
                             े
                                                                            शोने लारी दघिना अथला ळुब घिनाओॊ की ऩूलल
                                                                                       ु ल
   फनने रगते शै । इवकी ळत्रि को फढ़ाने क प्तरए
                                        े
                                                                            वूचना स्लप्न भं प्राद्ऱ शोती शै । रेटकन अनुबल भं
   शाथाजोिी क वाथ भं प्तवमायप्तवॊगी औय त्रफल्रीनार को
             े
                                                                            आमा शं की मश बत्रलष्म वूचन स्लप्न वबी को नशीॊ
   एक वाथ यखना चाटशए।
                                                                            आते शं टकवी-टकवी व्मत्रि को शी आते शं ।
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 स्जव घय भं प्तवमाय प्तवॊगी का ऩूजन शोता शं उव घय                        प्रकाय वे लश दोऴऩूणल शो तो अवरी शोने क फालजुद
                                                                                                                े
   भं भं वदं ल दे ली भशारक्ष्भी का लाव यशता शं , वभाज                     उवक फार नशीॊ फढ़ते। अत् प्तवमायप्तवॊगी का चमन
                                                                             े
   भं उवक भान-वम्भान भं लृत्रद्ध शोती शं उवका नाभ
         े                                                                ऩूणल वालधानी क वाथ कयं ।
                                                                                        े
   औय मळ चयं टदळाओॊ भं गूॊजता शं । शस्तजोिी के                         प्तवमायप्तवॊगी क फार कबी कािने नशीॊ चाटशमे नाशीॊ
                                                                                        े
   वभान शी प्तवमाय प्तवॊगी वे बी व्मत्रि क छोिे -फिे ़
                                          े                               उववे टकवी प्रकाय        की छे ि-छाि कयनी चाटशए।
   वकर त्रलघ्न एलॊ वॊकिं का नाळ शोता शं , एलॊ व्मत्रि                     प्तवमायप्तवॊगी क फार कािने, जरने षप्ततग्रस्त शोने वे
                                                                                          े
   क उऩय शोने लारे बूत-प्रेत, जाद-िोना आदी प्रबालं वे
    े                            ू                                        उवका ळुब प्रबाल वभाद्ऱ शोने रगता शं ।
   यषा शोती शं औय लाद-त्रललाद इत्माटद भं त्रलजमश्री की                त्रफल्री की नार
   प्राप्तद्ऱ शोती शं ।
                                                                             त्रफल्री जफ फच्चे को जन्भ दे ती शं , तो फच्चं के
 कछ त्रलद्रानो का कथन शं की प्तवमाय प्तवॊगी क ऩूजन
   ु                                          े
                                                                      वाथ-वाथ एक स्झल्री जेवा तयर ऩदाथल फाशय प्तनकरता
   एलॊ दळलन भात्र वे व्मत्रि को जीलन भं रक्ष्भी की
                                                                      शं , स्जवे लश फच्चे दे ने क फाद तुयॊत खा जाती शं । कछ
                                                                                                 े                        ु
   अऩाय कृ ऩा शो शोती। व्मत्रि क घय भं धनलऴाल शोने
                                े
                                                                      जानकाय रोग मा लन्म-जाती क रोग इव त्रफल्री की
                                                                                               े
   वभान व्मलवाम-नौकयी इत्माटद वे आप्तथलक राब की
                                                                      नार को त्रफल्री क खने वे ऩशरे शी लशाॊ वे शिा रेते शं ।
                                                                                       े
   प्राप्तद्ऱ शोती शं । प्तवमाय प्तवॊगी को व्मलामीक स्थान ऩय
                                                                      टपव उवे धूऩ भं वुखा कय उवे त्रलळेऴ प्रमोजनो वे घी
   यखने भात्र वे शी फॊध व्मलवाम क ऩुन् ळुरु शोने क
                                 े                े
                                                                      एलॊ प्तवॊदय द्राया रेऩन टकमा जाता शं । त्रफल्री की इव
                                                                                ू
   मोग      फनने          रगते   शं , भौजुदा   व्मलवामे   भं   टदन
                                                                      स्झल्री को नार कशा जाता शं । जो त्रलळेऴ ताॊत्रत्रक प्रमोगं
   प्रप्ततटदन उन्नत्रत्त शोती यशती शं । अथालत रक्ष्भी फढ़ने
                                                                      भं फशुउऩमोगी प्तवद्ध शोती शं ।
   क वाथ-वाथ स्थाई रक्ष्भी का प्तनलाव शोता शं ।
    े
 प्तवमाय प्तवॊगी वे आकस्स्भक दघिना औय अवाध्म
                               ु ल                                               भॊत्र प्तवद्ध दरब वाभग्री
                                                                                                ु ल
   योग वे बी वुयषा शोती शै । ऩरयलाय भं योग-ळोक का
   नाळ शोता शं , वबी वदस्मं को वतामु की प्राप्तद्ऱ शोती               शत्था जोिी- Rs- 370, 550, 730, 1250, 1450
   शं औय ऩायीलारयक जीलन वुखभम फना यशता शै ।                           प्तवमाय प्तवॊगी- Rs- 370, 550, 730, 1250, 1450
   क्मोटक प्तवमाय प्तवॊगी ळयीय क वुयषा कलच का काभ
                                े                                     त्रफल्री नार- Rs- 370, 550, 730, 1250, 1450
   कयती शै । व्मत्रि को जाने-अॊजाने वकर बमं वे ळीघ्र
                                                                      कारी शल्दी:- 370, 550, 750, 1250, 1450,
   भुत्रि प्तभरती शै । प्तवमाय प्तवॊगी क त्रलळेऴ प्रमोगं वे
                                        े
                                                                      दस्षणालतॉ ळॊख- Rs- 550, 750, 1250, 1900
   कभागल ऩय गमे ऩयस्त्री-ऩयऩुरुऴ क जार भं पवे टकवी
    ु                             े        ॊ
   बी उम्र क स्त्री-ऩुरुऴ को वुधाया जा वकता शं ।
            े                                                         भोप्तत ळॊख- Rs- 550, 750, 1250, 1900
 प्तवमाय प्तवॊगी को प्तवॊदय भं यखना चाटशए, प्तवमायप्तवॊगी
                           ू                                          भामा जार- Rs- 251, 551, 751
   को प्तवॊदय भं यखने वे उवक फार धीये -धीये फढ़ते शं ।
            ू               े                                         इन्द्र जार- Rs- 251, 551, 751
   एवी रोक भान्मता शं टक जैवे प्तवमायप्तवॊगी क फार
                                              े
                                                                      धन लृत्रद्ध शकीक वेि Rs-251(कारी        शल्दी क वाथ Rs-550)
                                                                                                                     े
   फढ़ते शं लैवे ऩरयलाय भं वुख-वभृत्रद्ध फढ़ने रगती शं ।
                                                                      घोिे की नार- Rs.351, 551, 751
   शय प्तवमायप्तवॊगी क फार फढ़ते शं , मशी उवकी ऩशचान
                      े
                                                                                   GURUTVA KARYALAY
   शं , नकरी मा फनालिी प्तवमायप्तवॊगी क फार नशीॊ फढ़ते।
                                       े                                  Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785,
   मटद प्तवमायप्तवॊगी कशीॊ वी िू िी-पिी शो मा टकवी
                                     ू                                       Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in,
                                                                                   gurutva.karyalay@gmail.com
33                                  नलम्फय 2012



त्रलळेऴ उऩाम:                                                                 ऩूजा-ऩाठ   मा    टकवी    त्रलळेऴ   त्रलप्तध-त्रलधान   की
                                                                              आलश्मिा नशीॊ शोती शं । टदन भं एक फाय शी कलर
                                                                                                                       े
 भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत शत्था जोिी, प्तवमाय प्तवॊगी औय
                                                                              धूऩ-अगयफत्रत्त कयने की आलश्मिा शं ।
    त्रफल्री की नार मटद टकवी भनुष्म को वौबाग्म वे
    प्राद्ऱ शो जामे तो उवे टकवी चाॊदी मा स्िीर की टिब्फी                  *** त्रलळेऴ भॊतव्म: त्रलद्रानं क अनुबल भं आमा शं की
                                                                                                          े
    भे प्तवॊदय बयकय यख दं ।
             ू                                                            मटद शाथाजोिी को आऩ अऩने ऩयीप्तचत टकवी त्रलद्रान,
 टपव उवे अऩने घय-दकान-व्मलवामीक स्थान इत्माटद
                   ु                                                      ज्मोप्ततऴी मा टकवी अऩने प्तभत्र-रयश्तेदायकं टदखाना शो तो
    क ऩूजा स्थान, प्ततजोयी मा कव फोक्वॎ इत्माटद भं यख
     े                         ै                                          शाथाजोिी को अऩने ऩूजा स्थान भं यखने वे ऩूलल मा
    दं । प्रप्ततटदन उवे धूऩ-अगयफत्रत्त टदखा कय टिब्फी को                  उवका ऩूजन कयने वे ऩशरे टदखारं , ऩूजन क ऩद्ळमात
                                                                                                                े
    फॊध कय दं । उि त्रलप्तध वे ऩूजन कयने ऩय व्मत्रि को                    नशीॊ टदखानी चाटशए उवे टकवी गोऩनीम स्थान ऩय
    प्तनयॊ तय   वुख-वौबाग्म      की     प्राप्तद्ऱ    शोती   एलॊ   भाॉ    यखदे ना चाटशए, जशाॊ वे लश टकवी ऩरयप्तचत-अऩरयप्तचत मा
    भशारक्ष्भी का प्तनलाव शोता शं । मश एक अनुबूत                          छोिे फच्चे इत्माटद क शाथ भं न रगे। अप्तबभॊत्रत्रत मा
                                                                                              े
    प्रमोग शं , इव प्रमोग वे शभं स्लमॊ एलॊ शभाये वाथ जुिे                 अऩने ऩूजा स्थान भं यखी शुई शाथाजोिी को जो आऩको
    अनेको फॊधु-फशनं को इव उऩाम वे त्रलळेऴ राब की                          पा़मदा कय यशी शो एवी शाथाजोिी को घयक अराला
                                                                                                              े
    प्राप्तद्ऱ शोती आमी शं । क्मोटक इव उऩाम भं दरब
                                                ु ल                       अन्म टकवी फशाय क व्मत्रि को नशीॊ टदखानी चाटशए,
                                                                                          े
    वाभग्रीमं को एक फाय अप्तबभॊत्रत्रत मा प्राण-प्रप्ततत्रद्षत            अन्मथा उवक ळुब प्रबाल भं कभीॊ आने रगती शं ।
                                                                                    े
    शो जाने ऩय व्मत्रि को टकवी प्रकाय क भॊत्र जाऩ,
                                       े




     क्मा आऩक फच्चे कवॊगती क प्तळकाय शं ?
              े       ु      े

     क्मा आऩक फच्चे आऩका कशना नशीॊ भान यशे शं ?
              े

     क्मा आऩक फच्चे घय भं अळाॊप्तत ऩैदा कय यशे शं ?
              े

                                   ु         ु
घय ऩरयलाय भं ळाॊप्तत एलॊ फच्चे को कवॊगती वे छिाने शे तु फच्चे क नाभ वे गुरुत्ल कामालरत
                                                               े
द्राया ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि लळीकयण कलच एलॊ
एव.एन.टिब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा, त्रलप्तध-त्रलधान वे आऩ
त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ तो आऩ भॊत्र प्तवद्ध लळीकयण कलच एलॊ एव.एन.टिब्फी
फनलाना चाशते शं , तो वॊऩक इव कय वकते शं ।
                         ल


                                                     GURUTVA KARYALAY
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34                                         नलम्फय 2012




              ऩाॊच मॊत्र जो अफ दरयद्रता औय धन की कभी को कयदं गे अरत्रलदा
                                                                                                             श्रेमा.ऐव.जोळी
                                                                      दे लता कफेय जी का वफवे प्रबालळारी मॊत्र भाना जाता शं
                                                                              ु
श्री मॊत्र
                                                                      इव मॊत्र क ऩूजन वे अषम धन कोऴ की प्राप्तद्ऱ शोती शं
                                                                                े
          "श्री मॊत्र" वफवे भशत्लऩूणल एलॊ ळत्रिळारी मॊत्र             औय भनुष्म क प्तरए नलीन आम क स्रोत फनते शं ।
                                                                                 े               े
शै । श्री मॊत्र की भटशभा वे वामद शी कोई व्मत्रि असात                  प्रप्ततटदन रक्ष्भीकफेय धन आकऴलण मॊत्र का ऩूजन एलॊ
                                                                                         ु
शोगा क्मोटक "श्री मॊत्र" को मॊत्र याज कशा जाता शै                     दळलन कयने वे व्मत्रि को जीलन भं धन औय ऐद्वमल की
क्मोटक मश अत्मन्त ळुब फ़रदमी मॊत्र शै । श्री मॊत्र                     कबी बी कभी नशीॊ शोती शै । त्रलद्रानं ने अऩने अनुबलं
धनप्राप्तद्ऱ शे तु न कलर दवये मन्त्रो वे अप्तधक वे अप्तधक
                      े   ू                                           भं ऩामा शं की जो भनुष्म अऩने गृशस्थ जीलन भं धन,
राब दे ने भे वभथल शै एलॊ वॊवाय क शय व्मत्रि क प्तरए
                                े            े                        लैबल, ऐद्वमल, वुख-वभृत्रद्ध, व्माऩाय भं वपरता, त्रलदे ळ
पामदे भॊद वात्रफत शोता शै । ऩूणल प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल        राब, याजनीप्तत भं वपरता, नौकयी भं ऩदौस्न्न्त आटद
चैतन्म मुि "श्री मॊत्र" स्जव व्मत्रि क घय भे शोता शै
                                      े                               की काभना यखता शं तो उवक प्तरए श्री रक्ष्भीकफेय धन
                                                                                             े                   ु
उवक प्तरमे "श्री मॊत्र" अत्मन्त फ़रदामी प्तवद्ध शोता शै
   े                                                                  आकऴलण मॊत्र वललश्रऴ मॊत्र शं । भनुष्म को रक्ष्भीकफेय धन
                                                                                        े                              ु
उवक दळलन भात्र वे अन-प्तगनत राब एलॊ वुख की प्राप्तद्ऱ
   े                                                                  आकऴलण मॊत्र क ऩूजन वे जीलन क वबी षेत्र भं वुख-
                                                                                   े              े
शोप्तत शै ।                                                           वभृत्रद्ध एलॊ वौबाग्म की प्राद्ऱ शोने रगती शै ।
          "श्री मॊत्र" भे वभाई अटद्रतीम एलॊ अद्रश्म ळत्रि                     मटद टकवी व्मत्रि को व्माऩाय भं मटद व्माऩाय भं
भनुष्म की वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे                           ऩूणल ऩरयश्रभ एलॊ रगने वे कामल कयने ऩय बी अप्तधक
वभथल शोप्तत शै । स्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय                        राब की प्राप्तद्ऱ नशीॊ शो यशी शो, व्माऩाय भॊदा चर यशा
प्तनयाळा दय शोकय लश भनुष्म अवफ़रता वे वफ़रता टक
          ू                                                           शो मा फाय-फाय राब क स्थान ऩय शाप्तन शो यशी शो तो
                                                                                         े
औय प्तनयन्तय गप्तत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे                       उवे रक्ष्भीकफेय धन आकऴलण मॊत्र को अलश्म अऩने
                                                                                  ु
वभस्त बौप्ततक वुखो टक प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै ।                          व्मलवामीक स्थान ऩय स्थात्रऩत कयना चाटशए। स्जववे
          "श्री मॊत्र" भनुष्म जीलन भं उत्ऩन्न शोने लारी               व्माऩाय भं फाय-फाय शोने लारे घािे मा नुकवान वे ळीघ्र
वभस्मा-फाधा       एलॊ   नकायात्भक      उजाल    को   दय
                                                     ू    कय          शी राब प्राद्ऱ शोने क मोग फनने रगते शं । ।
                                                                                           े
वकायत्भक उजाल का प्तनभालण कयने भे वभथल शै । "श्री
मॊत्र" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय क स्थान ऩय
                                   े
                                                                      गणेळ रक्ष्भी मॊत्र
स्थात्रऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फस्न्धत
                                                                              प्राण-प्रप्ततत्रद्षत गणेळ रक्ष्भी मॊत्र को अऩने घय-
ऩये ळाप्तन भे न्मुनता आप्तत शै ल वुख-वभृत्रद्ध, ळाॊप्तत एलॊ
                                                                      दकान-ओटपव-पक्ियी
                                                                       ु         ै              भं   ऩूजन     स्थान,    गल्रा    मा
ऐद्वमल टक प्रप्तद्ऱ शोती शै । स्पटिक का श्री मॊत्र वललश्रद्ष
                                                         े
                                                                      अरभायी भं स्थात्रऩत कयने व्माऩाय भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ
भाना जाता शं ।
                                                                      शोता शं । मॊत्र क प्रबाल वे बाग्म भं उन्नप्तत, भान-
                                                                                       े
                                                                      प्रप्ततद्षा एलॊ व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं एलॊ आप्तथलक स्स्थभं
रक्ष्भीकफेय धन आकऴलण मॊत्र
        ु
                                                                      वुधाय शोता शं । गणेळ रक्ष्भी मॊत्र को स्थात्रऩत कयने वे
          श्रीमॊत्र को वभस्त प्रकाय क श्रीमॊत्रं भं वललश्रद्ष
                                     े                    े           बगलान गणेळ औय दे ली रक्ष्भी का वॊमुि आळीलालद
भाना गमा शै औय कफेय मॊत्र को दे लताओॊ भं धन क
                ु                            े                        प्राद्ऱ शोता शं । श्री गणेळ रक्ष्भी मॊत्र क प्तनमप्तभत ऩूजन
                                                                                                                 े
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एलॊ दळलन     वे   व्मत्रि   क वकर त्रलध्नं एलॊ द्ख
                             े                  ु                           कफेय मॊत्र धन अप्तधऩप्तत धनेळ कफेय का मॊत्र शै ,
                                                                             ु                             ु
दरयद्रताका नाळ शोता शं । स्जव प्रकाय बगलान गणेळ के                  इव प्तरमे कफेय मॊत्र क प्रबाल वे मषयाज कफेय प्रवन्न
                                                                               ु          े                 ु
नाभ स्भयण औय दळलन भात्र वे व्मत्रि क वकर त्रलघ्नं,
                                    े                               शोकय अतुर वम्ऩत्रत्त का लयदान दे ते शं ।
वॊकि, आटद फाधाओॊ का स्लत् शी नाळ शोता शं , उवी                              धभल ळास्त्रं भं लस्णलत शं रॊकाप्तधऩप्तत यालण ने
प्रकाय दे ली रक्ष्भी क स्भयण औय दळलन भात्र वे व्मत्रि
                      े                                             बगलान भशादे ल वे कफेय मॊत्र प्राद्ऱ कय उवका त्रलप्तध-
                                                                                      ु
का दबालग्म वौबाग्म भं फदर जाता शं उवक वभस्त
    ु                                े                              त्रलधान वे ऩूजन टकमा था, मशी कायण शं की यालण नं
दख् दरयद्रता का स्लत् शी नाळ शोता शं । गणेळ रक्ष्भी
 ु                                                                  दे लाप्तधयाज कफेय को प्रळन्न कय प्तरमा था स्जवक
                                                                                  ु                                े
मॊत्र क ऩूजन वे ऩरयलाय भं वुख-ळाॊप्तत एलॊ वभृत्रद्ध का
       े                                                            कायण शी       उवका याज्म        ऩूणल रुऩ     वे   वभृद्ध   औय
आगभन शोने रगता शं मटश कायण शं गणेळ रक्ष्भी मॊत्र                    लैबलळारी था। कफेय मॊत्र क प्रताऩ वे शी यालणने ऩूयी
                                                                                  ु          े
की भटशभा अऩयॊ ऩाय शं ।                                              रॊका वोने की फनाई थी। इव प्तरए धन-वॊऩत्रत्तकी
                                                                    काभना कयने लारे भनुष्म को कफेय मॊत्र का ऩूजन
                                                                                               ु
कनकधाया मॊत्र                                                       अलश्म कयना चाटशए।
                                                                            रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु उयोि मॊत्र क अराला अन्म मॊत्र
                                                                                                                 े
        आज क बौप्ततक मुग भं शय व्मत्रि अप्ततळीघ्र
            े
                                                                    बी त्रलळेऴ प्रबालळारी शोते शं । स्जव मॊत्रं का मशाॊ
वभृद्ध फनना चाशता शं । कनकधाया मॊत्र टक ऩूजा अचलना
                                                                    वभालेळ नशीॊ टकमा गमा शं अत् उवकी भशत्लता का
कयने वे व्मत्रि क जन्भं जन्भ क ऋण औय दरयद्रता
                 े            े
                                                                    कभ शोना मा लश कभ प्रबाली शं एवा त्रफल्कर नशीॊ शं ,
                                                                                                           ु
वे ळीघ्र भुत्रि प्तभरती शं । मॊत्र क प्रबाल वे व्माऩाय भं
                                    े
                                                                    कलर मशाॊ वभम क अबाल भं एलॊ ऩाठको क ळीघ्र
                                                                     े            े                   े
उन्नप्तत शोती शं , फेयोजगाय को योजगाय प्राप्तद्ऱ शोती शं ।
                                                                    भागलदळलन शे तु कलर अनुबूत मॊत्रं का वभालेळ टकमा
                                                                                    े
कनकधाया मॊत्र अत्मॊत दरब मॊत्रो भं वे एक मॊत्र शं
                      ु ल
                                                                    गमा शं ।
स्जवे भाॊ रक्ष्भी टक प्राप्तद्ऱ शे तु अचूक प्रबाला ळारी भाना
                                                                    त्रलळेऴ वुझाल:
गमा शं ।   कनकधाया मॊत्र को त्रलद्रानो ने स्लमॊप्तवद्ध तथा
                                                                    रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु गुरुत्ल कामलरम भं उऩरब्ध भॊत्र प्तवद्ध
वबी प्रकाय क ऐद्वमल प्रदान कयने भं वभथल भाना शं ।
            े
                                                                    प्राण-प्रप्ततत्रद्षत आकस्स्भक धन प्राप्तद्ऱ मॊत्र, वशस्त्राषी
                                                                    रक्ष्भी आफद्ध मॊत्र, अद्श रक्ष्भी मॊत्र, धनदा मॊत्र इत्मादी
कफेय मॊत्र
 ु
                                                                    त्रलळेऴ मॊत्र एलॊ जैन मॊत्रं भं श्री ऩद्मालती मॊत्र, श्री
        आज क दौय भं शय व्मत्रि की चाशता टक उवक
            े                                 े
                                                                    रक्ष्भीकय मॊत्र इत्माटद बी अत्माप्तधक प्रबालळारी शं
ऩाव अऩाय धन-वॊऩत्रत्त शो। उवक ऩाय दप्तनमा का शय
                             े     ु
                                                                    स्जवका अद्भत प्रबाल एलॊ त्रलळेऴताओॊ क फाये भं भैने
                                                                               ु                         े
ऐळो-आयाभ भौजुद शो, उवे कबी टकवी चीज की कभी
                                                                    “ऩयॊ भ ऩूज्म गुरुदे ल श्री नलप्तनत बाई जोळीजी” वे सात
न शो। एवे रोगो क प्तरमे कफेय मॊत्र एक प्रकाय वे
                े        ु
                                                                    टकमा शं एलॊ स्लमॊ अऩने जीलन भं अनुबल टकमा शं ।
चभत्कायी मॊत्र शै कफेय मॊत्र। कफेय मॊत्र क ऩूजन वे
                   ु           ु          े
                                                                    मटद आऩ धन प्राप्तद्ऱ शे तु मा अन्म टकवी मॊत्र वे
स्लणल राब, यत्न राब, ऩैतक वम्ऩत्ती एलॊ गिे शुए धन
                        ृ
                                                                    वॊफॊप्तधत जानकायी प्राद्ऱ कयना चाशते शो मा आऩके
वे राब प्राप्तद्ऱ टक काभना कयने लारे व्मत्रि क प्तरमे
                                              े
                                                                    बीतय मॊत्रं क त्रलऴम भं टकवी प्रकाय टक कोई स्जसावा
                                                                                 े
कफेय मॊत्र अत्मन्त वपरता दामक शोता शं । एवा
 ु
                                                                    शो तो आऩ प्तनवॊकोच गुरुत्ल कामालरम भं वॊऩक कय
                                                                                                              ल
ळास्त्रोि लचन शं । कफेय मॊत्र क ऩूजन वे एकाप्तधक स्त्रोत्र
                    ु          े
                                                                    अग्रीभ वभम रेकय “गुरुदे ल श्री नलप्तनत बाई जोळीजी”
वे धन का प्राद्ऱ शोकय धन वॊचम शोता शं ।
                                                                    वे वीधे वॊऩक मा पोन ऩय फात कय वकते शं ।
                                                                                ल
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                             धन प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब रक्ष्भी वाधनाएॊ
                                                      ु ल
                                                     प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, ऩॊ.श्री बगलानदाव त्रत्रलेदी जी,
धन रक्ष्भी वाधना
वाधना शे तु वाभग्री:-
भारा: कभरगट्िे की मा स्पटिक की
टदळा: उत्तय
आवन: ऩीरा
लस्त्र: ऩीरा
प्रवाद: दध वे फने प्रवाद का बोग रगामे
         ू

भॊत्र:–
   ॐ श्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भी आगच्छ आगच्छ भभभॊदे प्ततद्ष प्ततद्ष स्लाशा ||
          Om Shreem Shreem Kleem Shreem Lakshmi Aagachchha
             Aagachchha Mamamande Tishtha Tishtha Swaha

त्रलप्तध:–
         मश वाधना टकवी बी ळुक्रलाय को ळुरू टक जा वकती शं , उि भॊत्र का
          11 भारा जऩ 43 टदन तक कयने वे भॊत्र प्तवद्ध शोता शै , रेटकन मटद
          अषम तृतीमा, धन तेयव औय दीऩालरी आदी ळुब भुशूतल शोत तो इवे
          21 टदन कयक प्तवद्ध कय वकते शं ।
                    े
         वाधना शे तु वॊध्मा 7 फजे वे यात 10 फजे तक का वभम श्रेद्ष शोता
          शं । मटद वभम क अनुकरता नशो तो अऩनी वुत्रलधानुवाय वभम चून
                        े    ू
          वकते शं ।
         ऩूजन क वभम ळुद्ध घी का टदऩक जरामे जो वाधना ऩूणल शोने तक जरता यशे औय वुगॊप्तधत अगयलती जरामे
                े
          यखे।
         दे ली रक्ष्भी जी को बोग भं खीय मा घय भं फनी प्तभठाई का बोग रगामे।
         श्री गणेळ जी औय अऩने गुरुदे ल का स्भयण कय वाधना भं वपरता की काभना कयते शुले वाधना कयं ।
         वाधना की वभाप्तद्ऱ लारे टदन भॊत्र का 11 भारा अथालत(1188) फाय शलन कयं , शलन भं घी की आशुती दे । मटद
          टकवी कायण वे आशुप्तत दे ने भं अवभथल शो तो आशुप्तत की वॊख्मा वे दोगुना भॊत्रजाऩ वम्प्ऩन कय वकते शं ।
         इव रक्ष्भी वाधना क प्रबाल वे व्मत्रि क ऩाव टकवी ना टकवी भाध्मभ वे धन आने रगता शं । मश वॊबल नशीॊ
                            े                   े
          की इव वाधना क फाद बी व्मत्रि प्तनधलन यशं ।
                       े
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आप्तथलक राब एलॊ कामलप्तवत्रद्ध शे तु रक्ष्भी भॊत्र वाधना
वाधना शे तु वाभग्री:
भारा: स्पटिक की
टदळा: उत्तय मा ऩूलल
आवन: ऩीरा
लस्त्र: वफ़द
          े
प्रवाद: पर


भॊत्र:
                        ॐ ऐॊ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ शॊ वौ जगत्प्रवूत्मै नभ्।
  Om Aim Hreem Shreem Kleem Ham Sou Jagatprasootyai Namah

त्रलप्तध:
           प्रात्कार स्नानइत्माटद वे प्तनलृत्त शोकय स्लच्छ लस्त्र धायण कय ऩीरे
            आवन ऩय फैठ जामे। रक्ष्भीजी क प्तचत्र मा भूप्ततल को एक रकिी क
                                        े                               े
            चौकी ऩय यखदे ।
           रक्ष्भीजी को धूऩ-दीऩ इत्माटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं , वाधन कार भं
            धूऩ-दीऩ चारु यखं। ऩीरे मा स्लेत पर रक्ष्भीजी को अत्रऩलत कयं ।
                                             ू
            मटद वॊबल शो तो एक पर बी रक्ष्भीजी को अत्रऩलत कयं ।
           टपय उऩयोि भॊत्र की 10 मा 20 भारा जाऩ कयं । भॊत्र की प्तवत्रद्ध शे तु
            कर 25000 जाऩ कयं ।
             ु
           भॊत्र जाऩ ऩूणल शोने क ऩद्ळमात प्रप्ततटदन 1 भारा जऩ जये । इव वाधना को कयने वे वाधक को धनराब शोता शं
                                 े
            औय इस्च्छत कामल भं वपरता प्राद्ऱ शोप्तत शं ( मटद अनुकरता शोतो प्रप्ततटदन 1000, 3000 मा 5000 जाऩ बी कय
                                                                 ू
            वकते शं ।
           जाऩ स्जतना अप्तधक शोगा उतना अप्तधक राब प्तभरेगा। भॊत्र प्तवत्रद्ध 25000 जाऩ ऩूणल शोने क ऩद्ळमात प्रप्ततटदन
                                                                                                   े
            प्तनमभ वे एक प्तनस्द्ळत भात्रा भं शी जाऩ कयं , जऩ वॊख्मा को कभ मा अप्तधक कयने ऩय प्रप्ततकर ऩरयणाभ वॊबल
                                                                                                     ू
            शं ।
           ग्रशण कार, दीऩालरी, शोरी, अक्ष्मतृप्ततमा आटद अफूझ भुशूतल भुशूतल ऩय अप्तधक पर प्राप्तद्ऱ शे तु एलॊ भॊत्र क प्रबाल
                                                                                                                     े
            को फढ़ाने शे तु अप्तधक भात्रा भं जऩ टकमा जा वकता शं , क्मोटक, प्रप्ततटदन टकमे जायशे भॊत्र जऩ टक अऩेषा इन
            अलवयं ऩय प्रप्ततकर ऩरयणाभं की वॊबालना नशीॊ शोती इव प्तरमे इन अलवयं ऩय जऩ अप्तधक वॊख्मा भं टकमे जा
                             ू
            वकते शं ।
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अनुबत भशारक्ष्भी भॊत्र वाधना
    ू
वाधना शे तु वाभग्री:
भारा: कभर गट्िे की मा स्पटिक की
टदळा: उत्तय मा ऩूलल
आवन: ऩीरा
लस्त्र: वफ़द
          े
प्रवाद: पर मा प्तभश्री
भॊत्र:
  ॐ श्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ कभरे कभरारमे प्रवीद प्रवीद श्रीॊ ह्रीॊ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्।
Om Shreem Hreem ShreeM Kamale Kamalalaye Praseeda Praseeda
          Shreem Hreem Om Mahalakshmyai Namah
त्रलप्तध:
काप्ततलक ळुक्र प्रप्ततऩदा वे (मा ग्रशण कार, दीऩालरी, शोरी, अक्ष्मतृप्ततमा आटद
टकवी ळुब भुशूत) वे भॊत्र जाऩ ळुरु कयं । औय एक भाव भं वला राख भॊत्र
              ल
जाऩ ऩूणल कयं । टपय उऩयोि भॊत्र की प्रप्ततटदन 1 भारा जऩ कयं । इव वाधना
वे अत्माप्तधक धन राब शोने क मोग फनने रगते शं । रक्ष्भीजी को धूऩ -दीऩ
                           े
इत्माटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं , वाधन क वभम भं धूऩ-दीऩ चारु यखं।
                                       े
वुगॊप्तधत पर रक्ष्भीजी को अत्रऩत कयं । मटद वॊबल शो तो एक पर मा प्तभश्री
           ू                   ल
बी रक्ष्भीजी को अत्रऩत कयं । भॊत्र जाऩ ऩूणल शोने वे ऩशरे शी वाधक को
                     ल
आप्तथलक राब प्तभरना ळुरु शो जाता शं , इव भं जया बी वॊदेश नशीॊ शं ।


                                                       भॊत्र प्तवद्ध भूॊगा गणेळ
                   भूॊगा गणेळ को त्रलध्नेद्वय औय प्तवत्रद्ध त्रलनामक क रूऩ भं जाना जाता शं । इव क ऩूजन वे जीलन भं वुख
                                                                      े                          े
                   वौबाग्म भं लृत्रद्ध शोती शं ।यि वॊचाय को वॊतुप्तरत कयता शं । भस्स्तष्क को तीव्रता प्रदान कय व्मत्रि को चतुय
                   फनाता शं । फाय-फाय शोने लारे गबलऩात वे फचाल शोता शं । भूॊगा गणेळ वे फुखाय, नऩुॊवकता , वस्न्नऩात औय चेचक
                   जेवे योग भं राब प्राद्ऱ शोता शं ।                               भूल्म Rs: 550 वे Rs: 8200 तक

                                               भॊगर मॊत्र वे ऋण भुत्रि
            भॊगर मॊत्र को जभीन-जामदाद क त्रललादो को शर कयने क काभ भं राब दे ता शं , इव क अप्ततरयि व्मत्रि को
                                       े                     े                          े
ऋण भुत्रि शे तु भॊगर वाधना वे अप्तत ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं ।        त्रललाश आटद भं भॊगरी जातकं क कल्माण क प्तरए
                                                                                                   े        े
भॊगर मॊत्र की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । प्राण प्रप्ततत्रद्षत भॊगर मॊत्र क ऩूजन वे बाग्मोदम, ळयीय भं खून की
                                                                                          े
कभी, गबलऩात वे फचाल, फुखाय, चेचक, ऩागरऩन, वूजन औय घाल, मौन ळत्रि भं लृत्रद्ध, ळत्रु त्रलजम, तॊत्र भॊत्र क दद्श प्रबा, बूत-प्रेत
                                                                                                         े ु
बम, लाशन दघिनाओॊ, शभरा, चोयी इत्मादी वे फचाल शोता शं ।
          ु ल                                                                                    भूल्म भात्र Rs- 730
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ळीघ्र परदामी रक्ष्भी भॊत्र वाधना
वाधना शे तु वाभग्री:
भारा: स्पटिक की
टदळा: उत्तय मा ऩूलल
आवन: ऩीरा
लस्त्र: वफ़द
          े
भॊत्र:
                         ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भी भशारक्ष्भीॊ वलल काभ प्रदे वलल वौबाग्मदाप्तमनी अप्तबभॊत्र
                               प्रमच्छ वलल वललगते वुरुऩे वललदजम त्रलभोप्तचनी ह्रीॊ व् स्लाशा।
                                                             ु ल
             Om Hreem Shreem Lakshmi Mahalakshmim Sarv Kam Prade Sarv Soubhagyadaayinee
            Abhimantra Prayachchha Sarv Sarvagate Surupe Sarvdurjaya Vimochini Hreem Sah Swaha

त्रलप्तध:
प्रप्ततटदन प्तनमप्तभत वभम ऩय भॊत्र जऩ कयं । रकिी की चौकी ऩय रक्ष्भीजी का प्तचत्र स्थात्रऩत कय उवका धूऩ-दीऩ
इत्माटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं , वाधन क वभम भं धूऩ-दीऩ चारु यखं। वुगॊप्तधत पर रक्ष्भीजी को अत्रऩत कयं । 20 टदन
                                       े                                    ू                   ल
भं एक राख जाऩ ऩूणल कयं । जाऩ ऩूणल शोने क ऩद्ळमात प्रप्ततटदन 1 भारा जाऩ कयं । इव वाधना वे वाधन की आप्तथलक
                                        े
स्स्थप्तत भं वुधाय शोने रगता शं , औय उवे भाॉ रक्ष्भी की कृ ऩा वे वुख-वॊऩत्रत्त औय लैबल की प्राप्तद्ऱ शोती शं ।

                              रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु कयं याप्तळ भॊत्र का जऩ
भेऴ : ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भीनायामण नभ्।
लृऴब : ॐ गौऩारामै उत्तय ध्लजाम नभ्।
प्तभथुन : ॐ क्रीॊ कृ ष्णामै नभ्।
कक : ॐ टशयण्मगबालमै अव्मि रूत्रऩणे नभ्।
  ल
प्तवॊश : ॐ क्रीॊ ब्रह्मणे जगदाधायामै नभ्।
कन्मा : ॐ नभो प्रीॊ ऩीताम्फयामै नभ्।
तुरा : ॐ तत्ल प्तनयॊ जनाम तायक याभामै नभ्।
लृस्द्ळक : ॐ नायामणाम वुयप्तवॊशामै नभ्।
धनु : ॐ श्रीॊ दे लकीकृ ष्णाम ऊध्ललऴॊतामै नभ्।
भकय : ॐ श्रीॊ लत्वरामै नभ्।
कब : श्रीॊ उऩेन्द्रामै अच्मुताम नभ्।
 ुॊ
भीन : ॐ क्रीॊ उद्‍ ताम उद्धारयणे नभ्।
                 धृ
याप्तळ भॊत्र क जाऩ कयने वे वबी प्रकाय क कामल भं ळीघ्र वपरता प्राद्ऱ शोती शं । याप्तळ भॊत्र क जाऩ वे व्मत्रि शय
              े                        े                                                    े
प्रकाय क वॊकि वे वुयस्षत यशता शं । व्मत्रि आप्तथलक रूऩ वे ऩूणल वॊऩन्न शो जाता शं ।
        े
40                                            नलम्फय 2012



प्तचॊता भस्ण रक्ष्भी वाधना

वाधना शे तु वाभग्री:
भारा: स्पटिक की
टदळा: ऩस्द्ळभ
आवन: ऩीरा
लस्त्र: वफ़द
          े
प्रवाद: दध वे फने प्रवाद का बोग रगामे
         ू

भॊत्र:
                        ॐ ह्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भी भभ ग्रशभ ् धनऩूय प्तचता दय दय वलाशा !
                                                                                                       ॊ   ू ू
                        Om Hreem Shreem Shreem, Shreem, Shreem Shreem Shreem Shreem
                             Lakshmi Mam Graham Dhanpur Chinta Door Door Swaha

त्रलप्तध:
           श्री गणेळ जी औय अऩने गुरुदे ल का स्भयण कय वाधना भं वपरता की काभना कयते शुले वाधना कयं । ग्रशण
            कार, दीऩालरी, शोरी, अक्ष्मतृप्ततमा आटद अफूझ भुशूतल भं दे ली रक्ष्भी का धूऩ-टदऩ आटद वे ऩूजन कय इव भॊत्र को
            108 फाय जऩ कयक प्तवद्ध कय रे।
                          े
           टपय जफ कोई भशत्लऩूणल व्मलवामीक कामल कयना शो तो तफ उि भॊत्र का ऩुन् 108 फाय जऩ कयक कामल स्थर
                                                                                             े
            ऩय जाने वे व्माऩाय आटद भशत्लऩूणल कामं भं फढो़तयी एलॊ अत्माप्तधक राब की प्राप्तद्ऱ शोती शं ।
           रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क एकाप्तधक स्तोत्र फनने रगंगे औय मटद कोई फेयोजगाय शो व्मत्रि को आभदनी का कोई वाधन
                                े
            नजय नशीॊ आ यशा शो तो बी इव भॊत्र को प्तवद्ध कय वकता शं औय प्तवद्ध कयने क ऩद्ळमात 11 टदन 108 फाय
                                                                                    े
            जऩ कयने वे व्मत्रि को उत्तभ योजगाय की प्राप्तद्ऱ क मोग फनने रगते शै ।
                                                              े
           मटद ऩरयलाय भं कोई न कोई कभी यशती शं मा घय की प्रगप्तत मा उन्नप्तत क भागल प्रवस्त नशीॊ शो ऩायशे शो मा
                                                                               े
            अत्माप्तधक कजल वय ऩय चढ़ गमा शो तो बी इव भॊत्र को प्तवद्ध कय वकते शं ।
           मटद अफूझ भुशूतल क आने वे ऩशरे इव भॊत्र को प्तवद्ध कयने की आलश्मिा मा इच्छा शो तो इव भॊत्र का जाऩ
                             े
            11 टदन तक 108 लाय शय योज जऩने वे बी भॊत्र प्तवद्ध शोता शै ।



                                                        यत्न एलॊ उऩयत्न
  शभाये मशाॊ वबी प्रकाय क यत्न एलॊ उऩयत्न व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शं । ज्मोप्ततऴ कामल वे जुिे़ फधु/फशन ल यत्न
                         े

  व्मलवाम वे जुिे रोगो क प्तरमे त्रलळेऴ भूल्म ऩय यत्न ल अन्म वाभग्रीमा ल अन्म वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं ।
                        े

                           गुरुत्ल कामालरम वॊऩक : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785.
                                               ल
41                        नलम्फय 2012



ऋत्रद्ध-प्तवत्रद्ध प्रद ऩद्मालती वाधना
वाधना शे तु वाभग्री: कवय,
                      े
मॊत्र: भॊत्रप्तवद्ध प्राणप्रप्ततत्रद्षत श्री मॊत्र
भारा: कभर गट्िे की मा स्पटिक की
टदळा: उत्तय
आवन: वफ़द
       े
लस्त्र: वफ़द
          े


भॊत्र:
                      ॐ ऩद्मालती ऩद्मनेत्रे रक्ष्भीदाप्तमनी वलल कामल प्तवत्रद्ध
                                करय करय ॐ ह्रीॊ श्रीॊ ऩद्मालत्मै नभ्।
      Om Padmavati Padmanetre Lakshmidayinee Sarv Karya Siddhi
           Kari Kari Om Hreem Shreem Padmavatyai Namah

त्रलप्तध:
टकवी बी फुधलाय वे भॊत्र जाऩ प्रायॊ ब कयं । रकिी की चौकी ऩय वपद लस्त
                                                             े
त्रफछा कय उव ऩय भॊत्रप्तवद्ध प्राणप्रप्ततत्रद्षत श्री मॊत्र को स्थात्रऩत कयं । मॊत्र को ळुद्ध
जर वे स्नान कयाक, उवऩय कवय रगामे, उवका धूऩ-दीऩ इत्माटद वे त्रलप्तधलत
                े       े
ऩूजन कयं , वाधन क वभम भं धूऩ-दीऩ चारु यखं।
                 े
उि भॊत्र का 5 मा 11 टदनं भं वला राख जऩ कयने वे भॊत्र प्तवद्ध शो जाता शं ।
भॊत्र जाऩ ऩूणल शोने ऩय कलायी कन्माओॊ को बोजन कयामे , मथा ळत्रि वाभर्थमल
                        ुॊ
क अनुळाय बेि भं लस्त्र इत्माटद दं । टपय उव मॊत्र को अगरे टदन अऩने
 े
व्मलवामेक प्रप्ततद्षान मा प्ततजोयी, कळ फोक्व मा ऩूजा स्थान भं स्थात्रऩत कयदे इववे व्मलवामे भेभ त्रलत्रद्ध शोती शं , वभाज
                                     ै
भं चायं औय वाधन का मध कीप्ततल चयं औय परने रगती शं । वाधन टदन प्रप्तत-टदन वभृद्ध शोता जाता शं । जफ तक
                                      ै
मॊत्र वाधन क ऩाव यशे गा तफ-तफ उवे जीलन भं टकवी प्तचज की कभी नशीॊ शोगी।
            े


                                                      ळादी वॊफॊप्तधत वभस्मा
   क्मा आऩक रिक-रिकी टक आऩकी ळादी भं अनालश्मक रूऩ वे त्रलरम्फ शो यशा शं मा उनक लैलाटशक
           े   े                                                              े
   जीलन भं खुप्तळमाॊ कभ शोती जायशी शं औय वभस्मा अप्तधक फढती जायशी शं । एवी स्स्थती शोने ऩय
   अऩने रिक-रिकी टक किरी का अध्ममन अलश्म कयलारे औय उनक लैलाटशक वुख को कभ कयने
           े         ॊु                               े
   लारे दोऴं क प्तनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे जनकायी प्राद्ऱ कयं ।
              े          े       े
                                                     GURUTVA KARYALAY
                                           Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
                                Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
42                                 नलम्फय 2012



रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु घॊिाकणल भशात्रलय वाधना
वाधना शे तु वाभग्री: कवय, चॊदन, लावकऩ, गुराफ पूर
                      े             े
मॊत्र: श्री घॊिाकणल भशात्रलय मॊत्र अथला घॊिाकणल भशात्रलय ऩताका मॊत्र(मटद मॊत्र
की वाभर्थमलता न शो तो घॊिाकणल भशात्रलय जी का प्तचत्र स्थात्रऩत कयरं।)
भारा: भूॊगे की
टदळा: उत्तय
आवन: ऩीरा
लस्त्र: रार ऩीताॊफय
भॊत्र:
                 ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ ठॊ ॐ घण्िाकणल भशालीय रक्ष्भी
                      ऩूयम ऩूयम वुख वौबाग्म करु करु स्लाशा।
                                             ु   ु
 Om Hreem Shreem Kleem Thah Om Ghantakarna Mahaveer Lakshmi
        Pooray Pooray Sukha Soubhagya Kuru Kuru Swaha

त्रलप्तध:
मश वाधना मटद दीऩालरी भं धन त्रमोदळी वे आयॊ ब की जामे तो श्रेद्ष शं मटद
अन्म कार भं ळुरु कयनी ऩिे ़तो टकवी बी गुरुलाय वे इवे आयॊ ब कय वकते शं ।
धन त्रमोदळी (धनतेयव) क टदन उि भॊत्र की 40 भारा, रुऩ चतुदलळी (अथालत
                      े
नयकशया चतुदलळी, नयका चौदव, कारी चतुदलळी, काऱीचौदव,) को 42, दीऩालरी के
टदन 43, भारा जाऩ कयं । मटद अन्म टदन वे आयॊ ब कय यशे शो तो गुरुलाय को
40, ळुक्र लाय को 42 औय ळप्तनलाय को 43 भारा भॊत्र जऩ कयं ।
रकिी की चौकी ऩय वपद लस्त त्रफछा कय उव ऩय भॊत्रप्तवद्ध प्राणप्रप्ततत्रद्षत श्री घॊिाकणल भशात्रलय मॊत्र मा प्तचत्र को
                  े
स्थात्रऩत कयं । ळुद्ध चॊदन औय कवय का वुखा प्तभश्रण
                               े                               (लावकऩ) प्तछिक, मटद मश द्रव्म अप्राद्ऱ शो तो अद्शगॊध
                                                                    े        े
प्तछिक(नोि:द्रव्म कलर वुखा प्तछिक श्री घॊिाकणल भशात्रलय क ऩूजन भं जर प्तभप्तश्रत घोर का प्रमोग न कयं ।), उवका
      े            े             े                       े
धूऩ-दीऩ (ळुद्ध चॊदन धूऩ का प्रमोग श्रेद्ष)इत्माटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं , वाधन क वभम भं धूऩ-दीऩ चारू यखं।
                                                                                 े
वुगॊप्तधत दे ळी रार गुराफ पर क प्राद्ऱ शो जामे तो रगामे अन्मथा ऩीरा, वपद, गुराफी यॊ ग का गुराफ बी रागा वकते शं ।
                           ू  े                                        े
टपय श्री घॊिाकणल भशात्रलय क उऩयोि भॊत्र का ऩूणल श्रद्ध एलॊ प्तनद्षा वे जाऩ कयं । वाधना ऩूणल शोने ऩय श्री घॊिाकणल
                           े
भशात्रलय प्रवन्न शोते शं ळीध्र शी वाधक को रक्ष्भी की प्राप्तद्ऱ क मोग फनने रगते शं । वाधना वॊऩन्न शोने ऩय प्रप्ततटदन
                                                                 े
उि भॊत्र टक 1 भारा जऩ कयं ।
त्रलळेऴ नोि:   श्री घॊिाकणल भशात्रलय का ऩूजन कयने लारे वाधको शे तु भावॊ -भटदया, कवॊग इत्माटद प्तनऴेध शं । अत् भाॊव-
                                                                                 ु
भछरी, ळयाफ इत्माटद का वेलन कयने लारे व्मत्रि कृ प्मा मश प्रमोग न कयं । अन्मथा श्री घॊिाकणल भशात्रलय क प्रकोऩ वे
                                                                                                     े
वाधना का प्रप्ततकर ऩरयणाभ वॊबल शं । श्री घॊिाकणल भशात्रलय इव कप्तरमुग भं ळीघ्र प्रवन्न शोने लारे वाषात दे ल शं , इव
                 ू
भे जयाबी वॊदेश नशीॊ शं । इव वाधना क ऩद्ळमात भावॊ -भटदया, ऩयस्त्री-ऩुरुऴ इत्माटदका वेलन कयने ऩय वाधन द्राया प्तवद्ध
                                   े
टकमा गमा भॊत्र प्रबाल शीन शो जाता शं ।
43                                     नलम्फय 2012




                                 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब लस्तुएॊ
                                                               ु ल
                                                                                   प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी
यि गुॊजा                                                            शोने ऩय उवे उताय कय अऩने ऩूजा वथान भं यखदं ।
       गुॊजा एक दरब लनस्ऩप्तत का फीज शं । तॊत्र ळास्त्र
                 ु ल                                             टकवी भशत्लऩूणल कामल उद्दे श्म की ऩूप्ततल शे तु भॊत्र प्तवद्ध
भं मश एक दरब एलॊ अत्मन्त प्रबालळारी लस्तु भानी
          ु ल                                                       यि गुॊजा क इक्कीव दानं को अऩने वाथ रेकय घय
                                                                              े
जाती शै । गुॊजा प्राम् वपदे , रार ल कारं यगॊ क फीज
                                              े                     वे फाशय प्तनकरे, कामल उद्दे श्म ऩूणल शोने ऩय उवे फशते
स्लरुऩ भं ऩामी जाती शं । त्रलप्तबन्न तॊत्र टक्रमाओॊ भं गुॊजा        जर भं प्रलाटशत कय दं ।
फीज क वाथ-वाथ गुॊजा क जि का बी त्रलळेऴ रुऩ वे
     े               े
प्रमोग टकमा जाता शं ।                                           नाग कळय
                                                                     े
       गुॊजा फीजं का प्रमोग त्रलप्तबन्न कामल उद्दे श्म की               नाग कवय अप्तत ऩत्रलत्र एलॊ उरलब लनस्ऩप्ततमं भं
                                                                             े
ऩूप्ततल शे तु टकमा जाता शं । रार गुॊजा का प्रमोग त्रलळेऴ रुऩ    वे एक भानी जाती शं । इवे नागकद्वय क नाभ वे बी
                                                                                             े     े
वे रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क प्तरमे टकमा जाता शं । रार गुॊजा ऩय
                       े                                        जाना जाता शं । धाप्तभलक भान्मताओॊ भं नाग कळय का
                                                                                                          े
एक कारे यॊ ग का छोिा त्रफॊद ू शोता शं । एवा भाना जाता शं        स्थान प्रभुख लस्तुओॊ अग्रस्त शं । तॊत्र गॊथं भं नाग कळय
                                                                                                                     े
की यि गुॊजा वे घय भं वुख-वभृत्रद्ध की लृत्रद्ध तो शोती शी       क त्रलप्तबन्न प्रमोगं का लणलन प्तभरता शं । धनप्राप्तद्ऱ एलॊ
                                                                 े
शं वाथ शी वाथ भं भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा बी घय ऩय               वुख-वभृत्रद्ध शे तु बी नाग कळय का उऩमोग टकमा जाता शं ।
                                                                                            े
फनी यशती शं ।                                                    चाॊदी (मटद उऩल्फध नशं को अन्म धातु ) की एक
 दीऩालरी क टदन यि गुॊजा क इक्कीव मा ग्मायश
           े              े                                         छोिी वी टिब्फी भं नागकळय को ळशद क वाथ
                                                                                          े          े
   दानं को गॊगा जर वे ऩत्रलत्र कयक ऩूजा स्थान
                                  े                                 प्तभराकय ढ़क्कन रगाकय उवे फॊद कयदं । दीऩालरी की
   यखदे ना चाटशए। ऩूजा क ऩद्ळमात गुॊजा क दानं को
                        े               े                           यात्रत्र भं उवे ऩूजन क फाद भं प्ततजोयी भं यखदे ।
                                                                                          े
   अऩनी प्ततजोयी, कळफोक्व, गल्रे भं रार कऩिे भं
                   ै                                                अगरी दीलारी को उव टिब्फी को खोर कय नागकळय
                                                                                                           े
   फाॊधकय वे टदनं टदन ऩरयलाय की आप्तथलक वभृत्रद्ध                   औय ळशद को फदर दं । एकफाय टिब्फी यखदे ने क फाद
                                                                                                             े
   फढ़ती शं ।                                                       उवे खोरे नशीॊ उवे फॊध शी यशने दे ।
 भॊत्र द्राया प्तवद्ध यि गुॊजा क इक्कीव मा ग्मायश दानं
                                 े                               धन-वभृत्रद्ध की प्राप्तद्ऱ शे तु एक नत्रलन ऩीरे लस्त्र भं
   को अऩने व्मलवाम मा ओटपव भं योकि यखने के                          नागकळय, वाफुत शल्दी, वुऩायी, एक ताॊफे का प्तवक्का,
                                                                        े
   वाथ भं यखने वे धन की कबी कभी नशीॊ शोती औय                        एक ऩाॊच मा दव का प्तवक्का, अषत को एक वाथ कय
   कळ फोक्व कबी खारी नशीॊ यशता, रक्ष्भी जी का
    ै                                                               क उवको कऩिे ़ भं फाॊध दं । टपव उवे धूऩ-दीऩ वे
                                                                     े
   आप्तळलालद फना यशता शं ।                                          ऩूजन कयक अऩनी प्ततजोयी भं यखकय प्रप्ततटदन ऩूजन
                                                                            े
 मटद भॊत्र प्तवद्ध टक शुई यि गुॊजा की भारा को कोई                  क वभम उवे धूऩ दं तो धनराब शोने रगेगा।
                                                                     े
   व्मत्रि गरे भं धायण कताल शं तो लश वललजन लळीकय                 दीऩालरी की यात मा अन्म टकवी ळुब भुशूतल भं
   क वभान प्रबालळारी शोती शं । यि गुॊजा की भारा
    े                                                               नागकळय औय ऩाॊच प्तवक्कं को रेकय उवे ऩूजा स्थान
                                                                        े
   को कलर प्रमोग क वभम मा टकवी भशत्ल ऩूणल कामल
       े          े                                                 ऩय यखदे टपय ऩूजन की वभाप्तद्ऱ क फाद उवे एक
                                                                                                   े
   मा व्मत्रि वे प्तभरते वभम शी धायण कयं , अनालश्म                  ऩीरे कऩिे ़ भं फाॊध कय अऩने व्मलवामीक प्रप्ततद्षान के
44                                       नलम्फय 2012



    गल्रे, प्ततजोयी आटद धन यखने लारे स्थान ऩय यख                   त्रलद्रानं क भतानुळाय प्तवद्ध गोभप्तत चक्र वे त्रलप्तबन्न
                                                                               े
    दं । इव प्रमोग वे व्मत्रि को कबी धन की कभी नशीॊ                भनोकाभनाएॊ वयरता वे ऩूणल की जावकती शं ।
    यशे गी।                                                         दीऩालरी की यात को ऩाॊच भॊत्र प्तवद्ध गोभप्तत चक्र को
 धन प्राप्तद्ऱ क प्तरए क प्तरए वोभलाय मुि ऩूस्णलभा क
                 े       े                           े                 स्थात्रऩत कयक उवका वाषात रक्ष्भी रुऩ भं ऩूजन
                                                                                    े
    टदन प्तळलभॊटदय भं प्तळलप्तरॊग का कच्चे, दघ, दशी, ळशद
                                             ू                         कयने वे उवका त्रलप्तधलत ऩूजन कयने वे व्मत्रि को
    चीनी औय घी अथालत ऩॊचाभृत वे अप्तबऴेक कयं । टपय                     जीलन भं प्तनयॊ तय धन की प्राप्तद्ऱ शोती यशती शं ।
    प्तळलप्तरग का गॊगाजर वे अप्तबऴेक कयं । तत्ऩद्ळमात               दीऩालरी क टदन 11 गोभती चक्र औय 11 ऩीरी
                                                                              े
    ऩाॊच      त्रफल्लऩत्रं   के   वाथ   भं   ऩाॊच   नागकळय
                                                        े    को        कोटिमं दोनं को को एक ऩीरे कऩिे ऩय यख यखकय
    प्तळलप्तरॊग ऩय अत्रऩत कयं । मश टक्रमा प्रप्ततटदन अरगी
                        ल                                              कय ऩूजन कयं । टपय "ऐॊ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ" भॊत्र का ऩाॊच
    ऩूस्णलभा तक प्तनमप्तभत रुऩ वे कयं । अॊप्ततक टदन चढा़ए              भारा कयक उवे कऩिे ़ भं फाॊधकय अऩने प्ततजोयी भं
                                                                               े
    गमे नागकळय एलॊ त्रफल्लऩत्रं भं वे एक त्रफल्लऩत्र एलॊ
            े                                                          स्थात्रऩत कयने वे धन राब की प्राप्तद्ऱ शोती शं ।
    थोिा़ नागकळय घय लाऩव रे आमे उवे अऩनी प्ततजोयी
              े
    भं यखदं । इव प्रमोग वे अत्माप्तधक धनराब की प्राप्तद्ऱ          ऩीरी कौटिमाॊ
    शोती शं ।                                                              ऩौयास्णक कार वे शी कौटिमं को वौबाग्म कायक
                                                                   भानी जाती शं । दे ळ एलॊ त्रलदे ळ की त्रलप्तबन्न वभ्मताओॊ
गोभप्तत चक्र                                                       एलॊ प्राॊतो भं कौटिमं क त्रलप्तबन्न छोि-फिे प्रमोग शोते
                                                                                          े
        गोभप्तत चक्र वभुद्र वे प्राद्ऱ शोने लारी दरब
                                                  ु ल              आमे शं । ऩूयातन कार भं जन प्तवक्को का चरन नशीॊ था
लस्तुओॊ भं वे एक शं । क्मोटक मश आवानी वे प्राद्ऱ नशीॊ              तफ रोग कौटिमं का नगद्दी क रुऩ भं प्रमोग कयते थे।
                                                                                            े
शोता मश एक वपद यॊ गका गोराकाय टदखने भं वीऩ वे
             े                                                     रोग कौटिमं का आदान-प्रदान कयक प्तचज-चस्तु खरयदते
                                                                                                े
प्तभरता-जुरता प्रप्ततत शोता शं । शाराॊकी कई गोभप्तत चक्र           औय फेचते शं ।
ऩूणत् वपद नशीॊ शोती उवक उऩय गेशुलं औय कारे यॊ ग
   ल    े              े                                                   धाप्तभलक भान्मता क अनुळाय वभुद्र वे प्राद्ऱ शोने
                                                                                             े
की ऩरती धायीमा शोती शं , जफ मश धायीमा घीव मा उवे                   लारे वबी लस्तुमे प्राम् रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु ऩूजन भं प्रमुि
ऩोप्तरव टकमा जाता शं तफ मश वपद यॊ ग का नजय आने
                             े                                     शोती शं । कौटिमाॊ बी वभुद्र वे प्राद्ऱ शोता शं औय ऩीरी
रगता शं । इव क उऩय चक्र जैवे आकृ प्ततमा कृ दयप्तत औय
              े                                                    कौटिमाॊ रक्ष्भी की अप्तत त्रप्रम लस्तु शोने वे रक्ष्भी ऩूजन
ऩय ऩाई जाती शं इव प्तरए इवे गोभप्तत चक्र कशते शं ।                 भं इवका त्रलळेऴ भशत्ल शं ।
        धाप्तभलक भान्मता क अनुळाय वभुद्र वे प्राद्ऱ शोने
                          े                                             दीऩालरी की यात भं 11 ऩीरी कौटिमं ऩूजा स्थान
लारे वबी लस्तुमे प्राम् रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु ऩूजन भं प्रमुि            भं यखदं ऩूजन की वभाप्तद्ऱ ऩय उवे अऩने प्ततजोयी
शोती शं । गोभप्तत चक्र बी वभुद्र वे प्राद्ऱ शोता शं औय                     भं गशने इत्माटद क वाथ भं यखदं तो ऩरयलाय भं
                                                                                            े
रक्ष्भी की त्रप्रम लस्तु शोने वे रक्ष्भी ऩूजन भं इवका                      गशने-जेलयात की लृत्रद्ध शोने रगती शं । अगरे लऴल
त्रलळेऴ भशत्ल शं ।                                                         ऩुन्    दीऩालरी    ऩूजन    के    वभम     कौटिमं     को
        ऩुयातन कार वे शी गोभप्तत चक्र को रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ                फदरदे ।
क अरागा अन्म तॊत्र प्रमोगो एलॊ काभना ऩूप्ततल शे तु बी
 े                                                                      दीऩालरी की यात भं 11 ऩीरी कौटिमं को अऩने
इवका त्रलळेऴ रुऩ वे प्रमोग टकमा जाता शं । क्मोटक                           घय मा व्मलवामीक स्थान भं प्ततजोयी भं यखने वे
                                                                           व्माऩाय औय धन की भं लृत्रद्ध शोती शं ।
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शकीक                                                                    स्जव बी घय भं रघु श्रीपर शोता शं लशाॊ वुख-
                                                                            वॊऩन्नता औय लैबल का लाव शोता शं ।
          शकीक एक प्रकाय का उऩयत्न शं , स्जवका उऩमोग
                                                                        मटद रघु श्रीपर को व्मलवामीक स्थान ऩय यखने वे
त्रलप्तबन्न तॊत्र प्रमोग एलॊ धनप्राप्तद्ऱ शे तु त्रलळेऴ रुऩ वे टकमा
                                                                            व्माऩाय भं टदन प्रप्तत टदन उन्नप्तत शोती यशती शं ।
जाता शं । मश एक अत्मॊत प्रबालळारी ऩत्थय भाना जाता शं ।
                                                                        त्रलद्रानो का कथन शं की मटद टकवी व्मत्रि को
शकीक क प्रबालं क त्रलऴम कछ जानकाय त्रलद्रानो का
      े         े        ु
                                                                            वौबाग्म वे 11 रघु श्रीपर प्राद्ऱ शो जामे तो उवके
अनुबल शं की शकीक को मटद कोई व्मत्रि धायण नशीॊ
                                                                            जन्भं-जन्भ की दरयद्रता का अॊत शो जाता शं औय
कयक कलर अऩने वाथ यखता शं तो बी लश अऩना
   े े
                                                                            मटद टकवी व्मत्रि क धय भं 1 रघु श्रीपर का ऩूजन
                                                                                              े
चभत्कायी प्रबाल टदखा शी दे ता शं ।
                                                                            शोता शं लशाॊ वे दख्, दरयद्रता कोवो दय यशती शं ।
                                                                                             ु                  ू
 दीऩालरी क टदन ऩूजान क वभम 21 शकीक को
           े           े
      स्थाऩीत कयदे ऩूजन क ऩद्ळमात उवे दीऩालरी क
                         े                     े                           कारी शल्दी
      टदन शी जभीन भं गाढ़दे ने वे व्मत्रि को प्तनयॊ तय धन                      स्जव प्रकाय वे शल्दी ऩीरे यॊ गी को शोती शं । उवी
      राब शोता यशता शं ।                                               प्रकाय एक दरब जाती की कारे यॊ गकी शल्दी बी ऩाई
                                                                                  ु ल
 भनोकाभना ऩूप्ततल शे तु ग्मायश शकीक ऩत्थय को अऩने                     जाती शं । कारी शल्दी को कृ ष्ण शरयद्रा क नाभ वे जाना
                                                                                                               े
      ऩूजा स्थान ऩय यख कय अरगरे टदन उवे भॊटदय भं                       जाता शं । कारी शल्दी की वुगॊध कऩूय वे प्तभरती-जुरती
      चढाने वे भनोकाभना ळीघ्र ऩूणल शोती शं ।                           शोती शं । कारी शल्दी को भुख्मत् तॊत्र टक्रमाओॊ एलॊ
 दीऩालरी क टदन शकीक भारा वे रक्ष्भी भॊत्र का एक
           े                                                           रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु एक दरलब औऴप्तध भानते शं ।
                                                                                                    ु
      भारा जऩ कयक। भारा को धायण कयने वे दे ली
                 े                                                      स्जव बलन भं भॊत्र प्तवद्ध कारी शल्दी का ऩूजन कयने
      रक्ष्भी की शभंळा कृ ऩाद्रत्रद्श फनी यशती शं । भॊत्र: "ॐ               वे बलन भं धन-वौबाग्म की स्लत् लृत्रद्ध शोने रगती शं ।
      ह्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भी लावुदेलाम नभ्।"                   दीऩालरी क टदन मा अन्म टकवी ळुब भुशूतल भं कारी
                                                                                  े
 रक्ष्भी जी क प्तचत्र को 27 शकीक ऩत्थय क उऩय
              े                          े                                  शल्दी को धूऩ-दीऩ आटद वे ऩूजन कय क अऩनी
                                                                                                             े
      स्थात्रऩत कयने वे व्मत्रि को प्तनस्द्ळत रुऩ वे आप्तथलक                प्ततजोयी मा धन यखने लारे स्थान ऩय यखने वे धन
      राब प्राद्ऱ शोता शं ।                                                 का कबी अबाल नशीॊ यशता शं ।
     रघु श्रीपर
                                                                                    भॊत्र प्तवद्ध दरब वाभग्री
                                                                                                   ु ल
          रघु श्रीपर एक प्रकाय का छोिे                  स्लरुऩ का
                                                                       यि गुॊजा : 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181
नारयमर शोता शं । स्जवक ऊऩय नारयमर क वभान शी
                      े            े
                                                                       गोभप्तत चक्र: 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181
जिाएॊ शोती शं जो कयीफ एक ईच स्जतना फिा़ शोता शं ।
                                                                       ऩीरी कौटिमाॊ: 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181
रघु श्रीपर को नारयमर का रघुरुऩ भाना जाता शं । रघु
                                                                       शकीक: 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181
श्रीपर का प्रमोग त्रलळेऴ रुऩ वे रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु टकमा
जाता शं । क्मोटक रघु श्रीपर भाॊ भशारक्ष्भी का मश त्रप्रम               रघु श्रीपर: 1 नॊग-Rs-111, 11 नॊग-Rs-1111

पर भानाजाता शं औय एवी भान्मता शं की स्जवक ऩाव
                                         े                             नाग कळय: 11 ग्राभ, Rs-111
                                                                            े

रघु श्रीपर शोता शं दे ली रक्ष्भी प्तनस्द्ळत रुऩ वे उव ऩय               कारी शल्दी:- 370, 550, 750, 1250, 1450,

कृ ऩा कयती शं । रघु श्रीपर क ऩूजन वे भाॊ रक्ष्भी स्खॊची
                            े                                                       GURUTVA KARYALAY
                                                                             Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785,
चरी आती शं ।                                                                   Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in,
                                                                                      gurutva.karyalay@gmail.com
 .
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                 वुख-स्भृत्रद्ध क प्तरमे जाने ऋण(कजल) कफ रे औय कफ दे
                                 े
                                                                                                               प्तचॊतन जोळी
        आज क आधुप्तनक मुग भं ऋण अप्तभय-भध्मभ-
            े                                                        अथालत् धन क रेनदे न शे तु भॊगरलाय औय फुधलाय ब़िे
                                                                                े
गयील शय लगल टक शं । आज ज्मादातय व्मत्रि कजल के                       भशत्ल ऩूणल शं । भॊगरलाय को उधाय रेना अळुब शोता शं
भक्कि जार भं उरझा शुआ शं ।              आज कोई व्मत्रि धन            तथा फुधलाय को उधाय दे ना अळुब शोता शं ।
उधाय दे कय योते शुले प्तभरता शं तो कोई धन रेकय ऩछता                         कजल रेने टक आलश्मकता प़ि जामे तो भॊगरलाय
ते शुले आवानी वे प्तभरता शं । 10-20                                                     को    कबी     कजल    नशीॊ    रेना चाटशमे।
लऴल ऩशरे टकवी वे कजाल रेने क प्तरए
                            े                             भॊगर मॊत्र                    भॊगरलाय को प्तरमे उधाय को चुकाने भं
रयस्तेदय-प्तभत्र-वाशुकाय को ढे यं प्तभन्नतं                                             ब़िी कटठनाई आती शं । कजल दे ने टक
कयनी शोती थीॊ ऩय अफ वभम फदर                          वे ऋण भुत्रि                       आलश्मकता प़ि जामे तो फुधलाय को
गमा शं गरी-गरी उधाय दे ने क प्तरमे
                           े                          भॊगर मॊत्र को जभीन-               कजल नशीॊ       दे ना चाटशमे फुधलाय को
फंक लारे रोन/क्रटिि कािल दे ते टपयते
               े                              जामदाद       के   त्रललादो   को    शर     टदमे गमे कजल को प्राद्ऱ कयने भं
यशते शं ।                                     कयने क काभ भं राब दे ता शं ,
                                                    े                                   कटठनाई आती शं ।
        बयतीम ज्मोप्ततऴ भं कजल के             इव क अप्ततरयि व्मत्रि को ऋण
                                                  े                                             मश ज्मोप्ततऴ का एक वयर
रेन-दे न वे वॊफॊधी इन वभस्माओॊ वे             भुत्रि शे तु भॊगर वाधना वे अप्तत          प्तनमभ शं जो वयरता वे माद यखा जा
दय यशने क उऩाम फतरामे शं । ज्मोप्ततऴ
 ू       े                                    ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं ।    त्रललाश    वकता शं औय दै प्तनक जीलन भं उऩमोग
क त्रलळेऴ प्तनमभो को अऩना कय जीलन
 े                                            आटद     भं     भॊगरी     जातकं      के    टकमा जा वकता शं ।
भं कजल वे वॊफॊप्तधत वभस्माओॊ को               कल्माण क प्तरए भॊगर मॊत्र की
                                                      े                                         ज्मोप्ततऴ भत वे भॊगरलाय ऋण
अऩने अनुकर फनामा जा वकता शं ,
         ू                                                                              चुकाने क प्तरए श्रेद्ष शं । फुधलाय धन
                                                                                                े
                                              ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ
व्मलवाम वे जुिे रोगो को व्मलवाम वे                                                      वॊचम(वेत्रलॊग) क वलल श्रेद्ष टदन शं ।
                                                                                                        े
                                              शोता शं ।
वॊफॊप्तधत रेनदे न तो योज कयने ऩिते                                                      फुधलाय को फंक भं धन जभा कयना,
                                                      प्राण प्रप्ततत्रद्षत भॊगर मॊत्र
शं । एवे रोग मटद ज्मोप्ततऴ क प्तवद्धाॊतो
                            े                                                           टफ़क्व टिऩोजीि इत्माटद शे तु श्रेद्ष शं ।
                                              क ऩूजन वे बाग्मोदम, ळयीय भं
                                               े
को अऩना ने धन वे वॊफॊप्तधतत रेन-                                                                मटद कजल रेने टक जरूयत शोतो
                                              खून की कभी, गबलऩात वे फचाल,
दे न अच्छा शोता शं ।                                                                    भॊगरलाय, वूमल वॊक्राॊप्तत का टदन, लृत्रद्ध
                                              फुखाय, चेचक, ऩागरऩन, वूजन
        रेनदे न क फिे
                 े           बुगतान शे तु                                               मोग, स्जव यत्रललाय को शस्त नषत्र शो,
                                              औय घाल, मौन ळत्रि भं लृत्रद्ध, ळत्रु
वभम अलप्तध को ध्मान भं यखते शुले                                                        इन वॊमोग ऩय चाशे टकतनी शी ब़िी
                                              त्रलजम, तॊत्र भॊत्र क दद्श प्रबा, बूत-
                                                                   े ु
अप्तग्रभ एलॊ ऩद्ळमात बुगतान टकमा                                                        जरूयत शो इन टदनं भं ऋण कबी नशीॊ
                                              प्रेत बम, लाशन दघिनाओॊ, शभरा,
                                                              ु ल
जामे तो     त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं ।                                               रेना चाटशमे,      ऋण रेना अगरे टदन
                                              चोयी इत्मादी वे फचाल शोता शं ।            ऩय िार दं ।
रेन-दे न शे तु भुख्म प्तनमभ शं ।                          भूल्म भात्र Rs- 730                   मटद कजल दे ने टक जरूयत शोतो
                                                                                        फुधलाय, कृ त्रत्तका, योटशणी, आद्राल, आद्ऴेऴा,
ऋणे बौभे न ग्रशीमात, न दे मभ ् फुधलावये ।                            उत्तयापाल्गुनी, उत्तयाऴाढ़ा, उत्तयाबाद्रऩद नषत्रं भं, बद्रा,
ऋणच्छे दनभ ् बौभे कमालत,् वॊचमे वोभ नॊदने॥
                   ु                                                 व्मप्ततऩात औय अभालस्मा क वॊमोग ऩय टदमा गमा धन
                                                                                             े
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कबी लाऩव प्राद्ऱ नशीॊ शोता मा धन प्राद्ऱ कयने भं                     इन प्तनमभं को अऩनाकय वाधायण व्मत्रि बी अवाधायण
अत्माप्तधक कटठनाईमा आती शं । , धन प्राप्तद्ऱ शे तु कोिल -            राब प्राद्ऱ कय वकता शं ।
कळ, झग़िे इत्माटदक उऩयाॊत बी धान प्राद्ऱ नशीॊ शोता।
 े                े                                                           मटद    धन      का    कशीॊ    प्तनलेळ   (जभीन-जामदाद,
शभने अऩने अनुबलो भं इव वॊमोग ऩय धन रेने औय                           ळेयभाकि, इन्स्मोयं व, वोना, चाॊटद, त्रलदे ळी भुद्रा, इत्मादी)
                                                                           े
धन दे ने लारे दोनो को ऩये ळानीमाॊ झेरते दे खा गमा शं ।               भं कयना शो तो भॊगरलाय औय फुधलाय क अप्ततरयि अन्म
                                                                                                      े
इव वॊमोग ऩय धन रेने लारे का धन टिकता नशीॊ एलॊ                        लायं का चुनाल कयं । इवक अप्ततरयि ऩुनललवु-स्लाप्तत-
                                                                                            े
उस्की आप्तथलक स्स्थती धन चुकाने रामक नशीॊ यशजाती।                    भृगप्तळया-ये लती-प्तचत्रा-अनुयाधा-त्रलळाखा-ऩुष्म-श्रलण-धप्तनद्षा-
उवे कजल चुकाने शे तु औय कजल रेने टक नौफत आन ऩिती                     ळतप्तबऴा औय अस्द्वनी नषत्रं भं टकमा गमा प्तनलेळ ळुब
शं । इन प्तवद्धाॊतं को अऩना कय जीलन भं अऩनाने वे                     यशता शं । प्तनलेळ चय (भेऴ-कक-तुरा-भकय) रग्नो भं
                                                                                                 ल
फशुत छोिे -ब़िे त्रललादं वे आवानी वे फचा जा वकता शं ।                कयना उत्तभ शोता शं । प्तनलेळ कयने वे ऩूलल मश दे ख रे टक
         क्मोटक आज क वभम भं त्रलऴभ ऩरयस्स्थप्ततमं भं
                    े                                                रग्न वे 8लं बाल भं कोई ग्रश न शो, इव वभम भं टकमा
बी स्जवका रेनदे न अच्छा शोता शं , उवका वभाज भं                       गमा ऩूॊस्ज प्तनलेळ धन को फढ़ाता शं ।
अच्छा प्रबाल फन जाता शं ।

                                               भॊत्र प्तवद्ध भॊगर गणेळ
                            भूॊगा गणेळ को त्रलध्नेद्वय औय प्तवत्रद्ध त्रलनामक क रूऩ भं जाना जाता शं । इव प्तरमे भूॊगा गणेळ ऩूजन क
                                                                               े                                                 े
                            प्तरए अत्मॊत राबकायी शं । गणेळ जो त्रलध्न नाळ एलॊ ळीघ्र पर टक प्राप्तद्ऱ शे तु त्रलळेऴ राबदामी शं ।
                            भूॊगा गणेळ घय एलॊ व्मलवाम भं ऩूजन शे तु स्थात्रऩत कयने वे गणेळजी का आळीलालद ळीघ्र प्राद्ऱ शोता शं ।
                            क्मोटक रार यॊ ग औय रार भूॊगे को ऩत्रलत्र भाना गमा शं । रार भूॊगा ळायीरयक औय
                            भानप्तवक ळत्रिमं का त्रलकाव कयने शे तु त्रलळेऴ वशामक शं । टशॊ वक प्रलृत्रत्त औय गुस्वे को प्तनमॊत्रत्रत कयने
                            शे तु बी भूॊगा गणेळ टक ऩूजा राब प्रद शं । एवी रोकभान्मता शं टक भॊगर गणेळ को स्थात्रऩत कयने वे
                            बगलान गणेळ टक कृ ऩा ळत्रि चोयी, रूि, आग, अकस्भात वे त्रलळेऴ वुयषा प्राद्ऱ शोती शं , स्जस्वे घय भं
                            मा दकान भं उन्नती एलॊ वुयषा शे तु भूॊगा गणेळ स्थात्रऩत टकमा जावकता शं ।
                                ु
                            प्राण प्रप्ततत्रद्षत भूॊगा गणेळ टक स्थाऩना वे बाग्मोदम, ळयीय भं खून की कभी, गबलऩात वे फचाल, फुखाय,
चेचक, ऩागरऩन, वूजन औय घाल, मौन ळत्रि भं लृत्रद्ध, ळत्रु त्रलजम, तॊत्र भॊत्र क दद्श प्रबा, बूत-प्रेत बम, लाशन दघिनाओॊ, शभरा,
                                                                             े ु                              ु ल
चोय, तूपान, आग, त्रफजरी वे फचाल शोता शं । एलॊ जन्भ किरी भं भॊगर ग्रश क ऩीटित शोने ऩय प्तभरने लारे शाप्तनकय प्रबालं वे
                                                    ुॊ                े
भुत्रि प्तभरती शं ।
जो व्मत्रि उऩयोि राब प्राद्ऱ कयना चाशते शं उनक प्तरमे भॊत्र प्तवद्ध भूॊगा गणेळ अत्मप्तधक पामदे भॊद शं ।
                                              े
भूॊगा गणेळ टक प्तनमप्तभत रूऩ वे ऩूजा कयने वे मश अत्मप्तधक प्रबालळारी शोता शं एलॊ इवक ळुब प्रबाल वे वुख वौबाग्म टक प्राप्तद्ऱ
                                                                                    े
शोकय जीलन क वाये वॊकिो का स्लत् प्तनलायण शोजाता शं ।
           े                                                                                         Rs.550 वे Rs.8200 तक

                                          GURUTVA KARYALAY
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                              दीऩालरी भं रक्ष्भी-गणेळ आयाधना का भशत्ल

                                                                                                                    प्तचॊतन जोळी
         बायतीम       धाप्तभलक    एलॊ     वॊस्कृ प्ततक   भान्मता   के    बालाथल: „वुयश्रेद्ष! भंने वफवे ऩशरे तुम्शायी ऩूजा टक शै ,
अनुळाय रक्ष्भीजी क वाथ श्री त्रलष्णु टक ऩूजा शोनी
                  े                                                      अत् लत्व! तुभ वललऩूज्म तथा मोगीन्द्र शो जाओ।‟
चाटशए। टकन्तुॊ दीऩालरी ऩूजन भं भाॊ रक्ष्भी क वाथ
                                            े                            ब्रह्मलैलतल ऩुयाण भं शी एक अन्म प्रवॊगान्तगलत भाता
गणेळजी टक ऩूजा क्मं टक जाती शं ।                                         ऩाललती ने गणेळ भटशभा का फखान कयते शुए ऩयळुयाभ वे
         धन टक दे ली रक्ष्भी शं जो धन, वभृत्रद्ध एलॊ ऐद्वमल              कशा –
प्रदान कयती शं । रेटकन त्रफना फुत्रद्ध क धन, वभृत्रद्ध एलॊ
                                        े
                                                                                 त्लटद्रधॊ रषकोटिॊ च शन्तुॊ ळिो गणेद्वय्।
ऐद्वमल व्मथल शं । इवक ऩीछे भुख्म कायण शं की बगलान श्री
                     े
गणेळ वभस्त त्रलघ्नं को िारने लारे शं , दमा एलॊ कृ ऩा के                        स्जतेस्न्द्रमाणाॊ प्रलयो नटश शस्न्त च भस्षकाभ ्।।

भशावागय शं , एलॊ तीनो रोक क कल्माण शे तु बगलान गणऩप्तत
                           े                                                      तेजवा कृ ष्णतुल्मोऽमॊ कृ ष्णाॊद्ळ गणेद्वय्।
वफ प्रकाय वे मोग्म शं । वभस्त त्रलघ्न फाधाओॊ को दय कयने
                                                 ू                               दे लाद्ळान्मे कृ ष्णकरा् ऩूजास्म ऩुयतस्तत्।।
लारे गणेळ त्रलनामक शं । अत् फुत्रद्ध टक
                                                                                                 (ब्रह्मलैलतलऩु., गणऩप्ततख., 44। 26-
प्राप्तद्ऱ क प्तरमे फुत्रद्ध औय त्रललेक
            े
                                                                                                                                       27)
क अप्तधऩप्तत दे लता गणेळ
 े
का ऩूजन कयने का                                                                                               बालाथल:           स्जतेस्न्द्रम

त्रलधान शं । गणेळजी                                                                                               ऩुरूऴं भं श्रेद्ष गणेळ

वभस्त प्तवत्रद्धमं को                                                                                              तुभभं जैवे राखं-

दे ने   लारे     दे लता                                                                                            कयोिं जन्तुओॊ को

भाना      गमा       शै ।                                                                                           भाय        िारने      की

क्मोटक           वभस्त                                                                                            ळत्रि       शै ;    ऩयन्तु

प्तवत्रद्धमाॉ बगलान गणेळ                                                                                       तुभने भक्खी ऩय बी

भं लाव कयती शं । इव प्तरमे                                                                                  शाथ        नशीॊ          उठामा।

रक्ष्भी जी क वाथ भं श्री
            े                                                                                          श्रीकृ ष्ण क अॊळ वे उत्ऩन्न
                                                                                                                   े

गणेळ जी टक आयाधना आलश्मक शं ।                                                                  शुआ लश गणेळ तेज भं श्रीकृ ष्ण के

ब्रह्मलैलतलऩुयाण भं उल्रेख शं                                                  शी वभान शै । अन्म दे लता श्रीकृ ष्ण की कराएॉ शं ।

बगलान ् त्रलष्णु ने स्लमॊ गणेळ जी को लयदान टदमा टक                       इवीवे इवकी अग्रऩूजा शोती शै ।

                 वलालग्रे तल ऩूजा च भमा दत्ता वुयोत्तभ।                  प्तरॊगऩुयाण क अनुवाय (105। 15-27)
                                                                                      े

               वललऩूज्मद्ळ मोगीन्द्रो बल लत्वेत्मुलाच तभ ्।।             प्तळल ने अऩने ऩुत्र को आळीलालद टदमा टक जो तुम्शायी
                                                                         ऩूजा टकमे त्रफना ऩूजा ऩाठ, अनुद्षान इत्माटद ळुब कभं
                                          (गणऩप्ततखॊ. 13। 2)
                                                                         का अनुद्षान कये गा, उवका भॊगर बी अभॊगर भं ऩरयणत
                                                                         शो जामेगा। जो रोग पर की काभना वे ब्रह्मा, त्रलष्णु,
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इन्द्र अथला अन्म दे लताओॊ की बी ऩूजा कयं गे, टकन्तु                        क वाथ वाथ भं भेयी ऩुत्री क वभान त्रप्रम रयस्ध्ध औय प्तवस्ध्ध जो
                                                                            े                        े
तुम्शायी ऩूजा नशीॊ कयं गे, उन्शं तुभ त्रलघ्नं द्राया फाधा                  क ब्रह्मा जी टक ऩुत्रत्रमाॉ शं , उनवे गणेळजी का त्रललाश कयने का
                                                                            े
ऩशुॉचाओगे।                                                                 लचन दे ती शूॉ । मटद वम्ऩूणल त्रत्ररोकं भं जो व्मत्रि, श्री गणेळ
                                                                           जी टक ऩूजा नशीॊ कये गा लयन उनकी प्तनॊदा कये गा भं उनवे
इव वबी कायण वे भाॊ रक्ष्भी क वाथ भं गणेळजी का
                            े
                                                                           कोवं दय यशूॉगी । जफ बी भेयी ऩूजा शोगी उवक वाथ टशॊ
                                                                                 ू                                  े
ऩूजन कयने का त्रलधान शं । रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क फाद भं उवे स्स्थय
                                              े
                                                                                               गणेळ टक बी ऩूजा अलश्म शोगी।
कयने शे तु फुत्रद्ध टक आलश्मकता शोती शं ।
रक्ष्भी क वाथ गणेळ क ऩूजन वे
         े          े                                                                          अन्म कथा:
वॊफॊध भं अनेकं कथाएॊ प्रचप्तरत शं ।
                                                                                                       प्राप्तचन कार भं एक वॊन्मावी
कछ रोकत्रप्रम कथाएॊ मशा प्रस्तुत शं ।
 ु
                                                                                               ने दे ली रक्ष्भी को किी तऩस्मा द्राया
ळास्त्रोि कथा:                                                                                 प्रवन्न कय क वभस्त वुख वुत्रलधा वे
                                                                                                           े
          त्रलष्णु धाभ भं बगलान त्रलष्णु एलॊ                                                   जीलन व्मतीत कयने का लयदान भाॊगा।
भाता रक्ष्भी त्रलयाजभान शोकय आऩव भं                                                            रक्ष्भी तथास्तु कश कय अॊतध्मालन शो
लातालराऩ कय यशे थे, फात-फात भं अशॊ                                                             गमीॊ। लयदान प्राप्तद्ऱ क फाद वॊन्मावी
                                                                                                                       े
क कायण रक्ष्भी जी फोर उठे टक भं
 े
                                                भॊत्र प्तवद्ध ऩन्ना गणेळ                       लशाॊ क याजदयफाय भं जाकय याजा क
                                                                                                     े                       े
वबी रोक भं वफ वे अप्तधक ऩूजनीम एलॊ                                                             ऩाव ऩशुॊच कय एक झिक भं याजभुकि
                                                                                                                  े         ु
वफवे श्रेद्ष शुॊ। रक्ष्भी जी को इव प्रकाय       बगलान श्री गणेळ फुत्रद्ध औय प्तळषा के
                                                                                               को नीचे प्तगया टदमा। वॊन्मावी का मश
                                                कायक ग्रश फुध क अप्तधऩप्तत दे लता
                                                               े
अऩनी अशॊ वे स्लमॊ टक प्रळॊवा कयते                                                              कामल दे ख कय याजा का चेशया गुस्वे वे
                                                शं । ऩन्ना गणेळ फुध क वकायात्भक
                                                                     े
दे ख बगलान त्रलष्णु जी को अच्छा नशीॊ                                                           रार शो उठा। उवी षण याजा ने दे खा
                                                प्रबाल को फठाता शं एलॊ नकायात्भक
रगा। उनका अशॊ दय कयने क प्तरए उन्शंने
               ू       े                                                                                               ू
                                                                                               टक याजभुकि वे एक त्रफच्छ फाशय
                                                                                                        ु
                                                प्रबाल को कभ           कयता शं ।. ऩन्न
कशा तुभ वलल वॊऩन शोते शुए बी आज तक                                                             प्तनकर यशा शं । मश दे ख याजा क भन
                                                                                                                             े
                                                गणेळ क प्रबाल वे व्माऩाय औय धन
                                                      े
भाॉ का वुख प्राद्ऱ नशीॊ कय ऩाई। इव फात          भं लृत्रद्ध भं लृत्रद्ध शोती शं । फच्चो टक     भं वॊन्मावी क प्रप्तत श्रद्धा बाल जाग
                                                                                                            े
को वुन कय रक्ष्भीजी को फशुत द्खी
                             ु                  ऩढाई शे तु बी त्रलळेऴ पर प्रद शं               गमा, याजाने वॊन्मावी को अऩना भॊत्री
शोगई      औय लो अऩनी ऩीिा          वुनाॊने के   ऩन्ना गणेळ इव क प्रबाल वे फच्चे
                                                               े                               फनने क प्तरए आग्रश टकमा। वॊन्मावी
                                                                                                     े
प्तरमे भाता ऩाललती क ऩाव गमीॊ औय उनवे
                    े                           टक     फुत्रद्ध   कळाग्र
                                                                   ू         शोकय    उवके      तो मशी चाशते थे। वॊन्मावी ने तुयॊत
त्रलनती     टक लो अऩने     ऩुत्र   काप्ततलकम
                                           े    आत्भत्रलद्वाव भं बी त्रलळेऴ लृत्रद्ध शोती
                                                                                               याजा का प्रस्ताल स्लीकाय कय प्तरमा।
औय गणेळजी भं वे टकवे एक ऩुत्र को उनशं           शं । भानप्तवक अळाॊप्तत को कभ कयने भं
                                                                                               वॊन्मावी क ऩयाभळल वे याज कामल
                                                                                                         े
दत्तक ऩुत्र क रूऩ भं प्रदान कय दं ।
             े                                  भदद कयता शं , व्मत्रि द्राया अलळोत्रऴत
                                                                                               वुचारु रुऩ वे चरने रगा।
                                                शयी त्रलटकयण ळाॊती प्रदान कयती शं ,
रक्ष्भीजी टक ऩीिा दे ख कय ऩाललतीजी
                                                व्मत्रि क ळायीय क तॊत्र को प्तनमॊत्रत्रत
                                                         े       े                                     एक       टदन       वॊन्मावी      ने
ने गणेळ जी को रक्ष्भीजी को दत्तक ऩुत्र के
                                                कयती       शं ।   स्जगय,     पपिे , जीब,
                                                                              े                याजदयफाय भं उऩस्स्थत वफको             फाशय
रूऩ भं दे ने का स्लीकाय कय प्तरमा।
                                                भस्स्तष्क औय तॊत्रत्रका तॊत्र इत्माटद योग      प्तनकर जाने को कशा। वॊन्मावी ऩय
ऩाललतीजी वे गणेळ जी को ऩुत्र क रूऩ
                              े
                                                भं वशामक शोते शं । कीभती ऩत्थय                 त्रलद्वाव यखते शुए याजा एलॊ अन्म वफ
ऩाकय रक्ष्भीजी नं शत्रऴलत शोते शुले कशाॊ        भयगज क फने शोते शं ।
                                                      े
                                                                                               दयफायी लशाॊ वे प्तनकर कय एक भैदान
भं अऩनी वबी प्तवत्रद्धमाॊ, वुख अऩने
                                                     Rs.550 वे Rs.8200 तक                      भं ऩशुॊच गमे औय तफ याजभशर टक
ऩुत्र गणेळ जी को प्रदान कयती शूॉ। इव
50                                           नलम्फय 2012



दीलायं ढश गमीॊ। मश द्रश्म दे ख कय याजा टक आस्था                                 कटदमं टक बाॊप्तत कछ टदन गुजायने ऩय वॊन्मावी
                                                                                 ै                ु
वॊन्मावी ऩय ऐवी जभी, टक वभस्त याजकामल उव वॊन्मावी                       का घभॊि उतय गमा। वॊन्मावीने ऩुन् दे ली रक्ष्भी टक
क आदे ळ ऩय शोने रगा। वभम क वाथ वॊन्मावी को
 े                        े                                             आयाधना ळुरू कय दी। रक्ष्भी ने स्लप्न भं उवे दळलन दे ते
स्लमॊ ऩय घभॊि शोने रगा। याजभशर क बीतय बगलान
                                े                                       शुए फतामा, टक तुम्शायी एवी ददलळा गणेळ जी का अऩभान
                                                                                                    ु
गणेळ टक एक भूप्ततल स्थात्रऩत थी। घभॊि भं चूय वॊन्मावी                   कयने टक लजश वे शुई शं । गणेळ फुत्रद्ध क दे लता शं , अत्
                                                                                                               े
ने वेलकं को गणेळ भूप्ततल लशाॊ वे शिाने का आदे ळ टदमा,                   उनको नायाज कयने वे तुम्शायी फुत्रद्ध भ्रद्श शो गमी शं । अफ
क्मंटक उवक त्रलचाय भं लश भूप्ततल याजऩरयवय टक ळोबा
          े                                                             वॊन्मावी ने ऩद्ळाताऩ कयते शुए गणेळ बगलान वे षभा
त्रफगाि यशी थी।                                                         भाॊगी। अगरे टदन याजा ने स्लमॊ लशाॊ ऩशुॊच कय उवे भुि

       अगरे टदन वॊन्मावी ने याजा वे कशा टक लश                           कय टदमा औय ऩुन् भॊत्री ऩद ऩय फशार कय टदमा।

पौयन अऩनी ऩोळाक उताय दं , क्मंटक उवभं नाग शै । याजा                     वॊन्मावी ने गणेळ टक भूप्ततल को ऩूलल स्थान ऩय स्थात्रऩत

को वॊन्मावी ऩय अगाध त्रलद्वाव था। इवप्तरए, दयफारयमं                     कयला टदमा तथा उनक वाथ-वाथ रक्ष्भी टक ऩूजा ळुरू
                                                                                         े
टक ऩयलाश न कयते शुए, उन्शोनं अऩनी ऩोळाक उताय दी,                        टक, ताटक धन एलॊ फुत्रद्ध दोनं वाथ-वाथ यशं । भाना जाता
ऩयॊ तु उवभं वे कोई नाग नशीॊ प्तनकरा। मश दे ख कय याजा                    शं , तबी वे दीलारी ऩय दे ली रक्ष्भी क वाथ गणेळ जी का
                                                                                                             े
को वॊन्मावी ऩय फशुत गुस्वा आमा औय उवे कद भं यखने
                                       ै                                ऩूजन कयने टक प्रथा आयॊ ब शुई।
का आदे ळ दे टदमा।



                                              भॊत्र प्तवद्ध स्पटिक श्री मॊत्र
    "श्री मॊत्र" वफवे भशत्लऩूणल एलॊ ळत्रिळारी मॊत्र शै । "श्री मॊत्र" को मॊत्र याज कशा जाता शै क्मोटक मश अत्मन्त ळुब फ़रदमी
    मॊत्र शै । जो न कलर दवये मन्त्रो वे अप्तधक वे अप्तधक राब दे ने भे वभथल शै एलॊ वॊवाय क शय व्मत्रि क प्तरए पामदे भॊद
                     े   ू                                                               े            े
    वात्रफत शोता शै । ऩूणल प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि "श्री मॊत्र" स्जव व्मत्रि क घय भे शोता शै उवक प्तरमे "श्री मॊत्र"
                                                                                               े                 े
    अत्मन्त फ़रदामी प्तवद्ध शोता शै उवक दळलन भात्र वे अन-प्तगनत राब एलॊ वुख की प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । "श्री मॊत्र" भे वभाई
                                      े
    अटद्रतीम एलॊ अद्रश्म ळत्रि भनुष्म की वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे वभथल शोप्तत शै । स्जस्वे उवका जीलन वे
    शताळा औय प्तनयाळा दय शोकय लश भनुष्म अवफ़रता वे वफ़रता टक औय प्तनयन्तय गप्तत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे
                       ू
    वभस्त बौप्ततक वुखो टक प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । "श्री मॊत्र" भनुष्म जीलन भं उत्ऩन्न शोने लारी वभस्मा-फाधा एलॊ नकायात्भक
    उजाल को दय कय वकायत्भक उजाल का प्तनभालण कयने भे वभथल शै । "श्री मॊत्र" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय क स्थान ऩय
             ू                                                                                         े
    स्थात्रऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फस्न्धत ऩये ळाप्तन भे न्मुनता आप्तत शै ल वुख-वभृत्रद्ध, ळाॊप्तत एलॊ ऐद्वमल टक प्रप्तद्ऱ

    शोती शै । गुरुत्ल कामालरम भे "श्रीमॊत्र" 12 ग्राभ वे 75 ग्राभ तक टक वाइज भे उप्रब्ध शै

                                                                              भूल्म:- प्रप्तत ग्राभ Rs. 10.50 वे Rs.28.00
                                             GURUTVA KARYALAY
                                     Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
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51                                            नलम्फय 2012




                                                    वलल ऐद्वमल प्रद-रक्ष्भी-कलच
श्री भधुवूदन उलाच:-                                               ।।इप्तत श्रीब्रह्मलैलते इन्द्रभ ् प्रप्तत शरयणोऩटदद्शभ ् रक्ष्भीकलचभ ्।।
गृशाण कलचभ ् ळक्र वललद्खत्रलनाळनभ ्।
                      ु                                           (गणऩप्ततखण्ि २२।५-१७)
ऩयभैद्वमलजनक वललळत्रुत्रलभदल नभ ्।।
            ॊ                                                     बालाथल्- भधुवूदन जी फोरे शं इन्द्र ! (रक्ष्भी-प्राप्तद्ऱ क प्तरमे)
                                                                                                                            े
ब्रह्मणे च ऩुया दत्तभ ् वॊवाये च जरप्रुते।                        तुभ मश रक्ष्भीकलच ग्रशण कयो। मश वभस्त द्खं का
                                                                                                         ु
मद् धृत्ला जगताॊ श्रेद्ष् वलैद्वमलमुतो त्रलप्तध्।।                त्रलनाळक, ऩयभ ऐद्वमल का उत्ऩादक औय वम्ऩूणल ळत्रुओॊ का
फबूलुभनल् वले वलैद्वमलमतो मत्।
      ल                ु                                          भदलन कयने लारा शं । ऩूलकार भं जफ वाया वॊवाय जरभग्न शो
                                                                                         ल
वलैद्वमलप्रदस्मास्म कलचस्म ऋत्रऴत्रललप्तध।।                       गमा था, उव वभम भैनं इवे ब्रह्मा को टदमा था। स्जवे धायण
ऩस्ङ्िश्छन्दद्ळ वा दे ली स्लम ऩद्मारमा वुय।                       कयक ब्रह्मा त्रत्ररोकी भं श्रेद्ष औय वम्ऩूणल ऐद्वमं क बागी शुए थे।
                                                                     े                                                 े
प्तवद्धै द्वमलजऩेष्लेल त्रलप्तनमोग् प्रकीप्ततलत।।                 दे लयाज, इव वलैद्वमलप्रद कलच क ब्रह्मा ऋत्रऴ शं , ऩस्ङ्ि छन्द शं ,
                                                                                                े
मद् धृत्ला कलचॊ रोक् वललत्र त्रलजमी बलेत ्।।                      स्लमॊ ऩद्मारमा रक्ष्भी दे ली शं औय प्तवद्धै द्वमल क जऩं भं इवका
                                                                                                                     े
भूर कलच ऩाठ:                                                      त्रलप्तनमोग कशा गमा शं । इव कलच क धायण कयने वे रोग वललत्र
                                                                                                   े
भस्तकभ ् ऩातु भे ऩद्मा कण्ठॊ ऩातु शरयत्रप्रमा।                    त्रलजमी शोते शं ।
नाप्तवकाभ ् ऩातु भे रक्ष्भी् कभरा ऩातु रोचनभ ्।।
                                                                  .


                                                                  ऩद्मालती दे ली भेये भस्तक की यषा कयो। शरयत्रप्रमा कण्ठ की यषा
कळान ् कळलकान्ता च कऩारभ ् कभरारमा।
 े      े                                                         कयो। रक्ष्भी नाप्तवका की यषा कयो। कभरा नेत्र की यषा कयो।
जगत्प्रवूगण्िमुग्भॊ स्कन्धॊ वम्ऩत्प्रदा वदा।।
          ल                                                       कळलकान्ता कळं की, कभरारमा कऩार की, जगज्जननी दोनं
                                                                   े         े
ॐ श्रीॊ कभरलाप्तवन्मै स्लाशा ऩृद्षॊ वदालतु।                       कऩोरं की औय वम्ऩत्प्रदा वदा स्कन्ध की यषा कयो।
ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै स्लाशा लष् वदालतु।।                            ॐ श्रीॊ कभरलाप्तवन्मै स्लाशा-भेये ऩृद्षॊ बाग का वदा ऩारन कयो।
ऩातु श्रीभलभ ककारॊ फाशुमुग्भॊ च ते नभ्।।
              ॊ                                                   ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै स्लाशा - लष्स्थर को वदा वुयस्षत यखे।
ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्म्मै नभ् ऩादौ ऩातु भे वॊततभ ् प्तचयभ ्।        श्री दे ली को नभस्काय शं आऩ भेये ककारॊ तथा दोनं बुजाओॊ को
                                                                                                    ॊ
ॐ ह्रीॊ श्रीॊ नभ् ऩद्मामै स्लाशा ऩातु प्तनतम्फकभ ्।।              फचामे।
ॐ श्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा वलांगॊ ऩातु भे वदा।                   ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्म्मै नभ् - प्तचयकार तक भेये ऩैयं का ऩारन कयो।
ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा भाॊ ऩातु वललत्।।          ॐ ह्रीॊ श्रीॊ नभ् ऩद्मामै स्लाशा - प्तनतम्फ बाग की यषा कयो।
इव भॊत्र क ऩाठ वे भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा प्राद्ऱ शोती शै ।
          े                                                       ॐ श्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा - भेये वलांग की वदा यषा कयो।
परश्रुप्तत:                                                       ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा-वफ ओय वे वदा भेया ऩारन कयो।
इप्तत ते कप्तथतभ ् लत्व वललवम्ऩत्कयभ ् ऩयभ ्।
                                                                  लत्व, इव प्रकाय‍ भंने‍ तुभवे‍ इव‍ वलैद्वमलप्रद‍ नाभक‍ ऩयभोत्कृ द्श‍
 वलैद्वमलप्रदभ ् नाभ कलचभ ् ऩयभाद्भतभ ्।।
                                   ु
                                                                  कलच‍ का‍ लणलन‍ कय‍ टदमा।‍ मश ऩयभ‍ अद्भत‍ कलच‍ वम्ऩूण‍
                                                                                                        ु             ल
गुरुभभ्मच्मल त्रलप्तधलत ् कलचभ ् ळयमेत्तु म्।
                                                                  वम्ऩत्रत्तमं‍को‍दे ने‍ लारा‍शं ।‍जो‍भनुष्म‍त्रलप्तधऩूलक‍गुरु टक अचलना‍
                                                                                                                        ल
कण्ठे ला दस्षणे फाॊशौ व वललत्रलजमी बलेत ्।।
                                                                  कयक‍इव‍कलच‍को‍गरे‍ भं‍ अथला‍दाटशनी‍बुजा‍ऩय‍धायण‍कयता‍
                                                                     े
भशारक्ष्भीगृशभ ् तस्म न जशाप्तत कदाचन।
            ल
                                                                  शं , लश‍वफको‍जीतने लारा‍शो‍जाता‍शं ।‍भशारक्ष्भी‍कबी‍उवक‍घय‍
                                                                                                                         े
तस्म छामेल वततभ ् वा च जन्भप्तन जन्भप्तन।।
                                                                  का‍त्माग‍नशीॊ‍कयती; फस्ल्क‍प्रत्मेक‍जन्भ भं‍छामा‍की‍बाॉप्तत‍वदा‍
इदभ ् कलचभसात्ला बजेल्रक्ष्भीॊ वुभन्दधी्।
                                                                  उवक‍वाथ‍रगी‍यशती‍शं ।‍जो‍भन्दफुत्रद्ध‍इव‍कलच‍को‍त्रफना‍जाने‍
                                                                     े
ळतरषप्रजद्ऱोऽत्रऩ न भन्त्र् प्तवत्रद्धदामक्।।
                                                                  शी रक्ष्भी‍ की‍ बत्रि‍ कयता‍ शं , उवे‍ एक‍ कयोि‍ जऩ‍ कयने‍ ऩय‍ बी‍
                                                                  भन्त्र‍प्तवत्रद्धदामक‍नशीॊ शोता।
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                                                     भशारक्ष्भी कलच
नायामण उलाच                                                        ऩद्मा भाॊ दस्षणे ऩातु नैऋत्माॊ श्रीशरयत्रप्रमा॥१०॥
                                                                                            ल
वलल वम्ऩत्प्रदस्मास्म कलचस्म प्रजाऩप्तत्।                          ऩद्मारमा ऩस्द्ळभे भाॊ लामव्माॊ ऩातु श्री् स्लमभ ्।
ऋत्रऴश्छन्दद्ळ फृशती दे ली ऩद्मारमा स्लमभ ्॥१॥                     उत्तये कभरा ऩातु ऐळान्माॊ प्तवन्धुकन्मका॥११॥
धभालथकाभभोषेऴु त्रलप्तनमोग् प्रकीप्ततलत्।
     ल                                                             नायामणेळी ऩातूध्ललभधो त्रलष्णुत्रप्रमालतु।
ऩुण्मफीजॊ च भशताॊ कलचॊ ऩयभाद्भतभ ्॥२॥
                              ु                                    वॊततॊ वललत् ऩातु त्रलष्णुप्राणाप्तधका भभ॥१२॥
ॐ ह्रीॊ कभरलाप्तवन्मै स्लाशा भे ऩातु भस्तकभ ्।                     इप्तत ते कप्तथतॊ लत्व वललभन्त्रौघत्रलग्रशभ ्।
श्रीॊ भे ऩातु कऩारॊ च रोचने श्रीॊ प्तश्रमै नभ्॥३॥                  वलैद्वमलप्रदॊ नाभ कलचॊ ऩयभाद्भतभ ्॥१३॥
                                                                                                 ु
ॐ श्रीॊ प्तश्रमै स्लाशे प्तत च कणलमुग्भॊ वदालतु।                   वुलणलऩललतॊ दत्त्ला भेरुतुल्मॊ टद्रजातमे।
ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा भे ऩातु                    मत ् परॊ रबते धभॉ कलचेन ततोऽप्तधकभ ्॥१४॥
नाप्तवकाभ ्॥४॥                                                     गुरुभभ्मच्मल त्रलप्तधलत ् कलचॊ धायमेत ् तु म्।
ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै च स्लाशा दन्तॊ वदालतु।                          कण्ठे ला दस्षणे लाशौ व श्रीभान ् प्रप्ततजन्भप्तन॥१५॥
ॐ श्रीॊ कृ ष्णत्रप्रमामै च दन्तयन्ध्रॊ वदालतु॥५॥                   अस्स्त रक्ष्भीगृशे तस्म प्तनद्ळरा ळतऩूरुऴभ ्।
                                                                                  ल
ॐ श्रीॊ नायामणेळामै भभ कण्ठॊ वदालतु।                               दे लेन्द्रै द्ळावुयेन्द्रै द्ळ वोऽत्रध्मो प्तनस्द्ळतॊ बलेत ्॥१६॥
ॐ श्रीॊ कळलकान्तामै भभ स्कन्धॊ वदालतु॥६॥
         े                                                         व वललऩुण्मलान ् धीभान ् वललमसेऴु दीस्षत्।
ॐ श्रीॊ ऩद्मप्तनलाप्तवन्मै स्लाशा नाप्तबॊ वदालतु।                  व स्नात् वललतीथेऴु मस्मेदॊ कलचॊ गरे॥१७॥
ॐ ह्रीॊ श्रीॊ वॊवायभात्रे भभ लष् वदालतु॥७॥                         मस्भै कस्भै न दातव्मॊ रोबभोशबमैयत्रऩ।
ॐ श्रीॊ श्रीॊ कृ ष्णकान्तामै स्लाशा ऩृद्षॊ वदालतु।                 गुरुबिाम प्तळष्माम ळयणाम प्रकाळमेत ्॥१८॥
ॐ ह्रीॊ श्रीॊ प्तश्रमै स्लाशा भभ शस्तौ वदालतु॥८॥                   इदॊ कलचभसात्ला जऩेल्रक्ष्भीॊ जगत्प्वूभ ्।
ॐ श्रीॊ प्तनलावकान्तामै भभ ऩादौ वदालतु।                            कोटिवॊख्मॊ प्रजद्ऱोऽत्रऩ न भन्त्र् वोत्रद्धदामक्॥१९॥
ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ प्तश्रमै स्लाशा वलांगॊ भे वदालतु॥९॥            (गणऩप्ततखण्ि ३८।६४-८२)
प्राच्माॊ ऩातु भशारक्ष्भीयाग्नेय्माॊ कभरारमा।



                                                   नलयत्न जटित श्री मॊत्र
   ळास्त्र लचन क अनुवाय ळुद्ध वुलणल मा यजत भं प्तनप्तभलत श्री मॊत्र क चायं औय मटद नलयत्न जिला ने ऩय मश नलयत्न
                े                                                    े
   जटित श्री मॊत्र कशराता शं । वबी यत्नो को उवक प्तनस्द्ळत स्थान ऩय जि कय रॉकि क रूऩ भं धायण कयने वे
                                               े                             े  े
   व्मत्रि को अनॊत एद्वमल एलॊ रक्ष्भी की प्राप्तद्ऱ शोती शं । व्मत्रि को एवा आबाव शोता शं जैवे भाॊ रक्ष्भी उवक वाथ
                                                                                                              े
   शं । नलग्रश को श्री मॊत्र क वाथ रगाने वे ग्रशं की अळुब दळा का धायण कयने लारे व्मत्रि ऩय प्रबाल नशीॊ शोता
                              े
   शं । गरे भं शोने क कायण मॊत्र ऩत्रलत्र यशता शं एलॊ स्नान कयते वभम इव मॊत्र ऩय स्ऩळल कय जो जर त्रफॊद ु ळयीय
                     े
   को रगते शं , लश गॊगा जर क वभान ऩत्रलत्र शोता शं । इव प्तरमे इवे वफवे तेजस्ली एलॊ परदाप्तम कशजाता शं । जैवे
                            े
   अभृत वे उत्तभ कोई औऴप्तध नशीॊ, उवी प्रकाय रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क प्तरमे श्री मॊत्र वे उत्तभ कोई मॊत्र वॊवाय भं नशीॊ शं
                                                                 े
   एवा ळास्त्रोि लचन शं । इव प्रकाय क नलयत्न जटित श्री मॊत्र गुरूत्ल कामालरम द्राया ळुब भुशूतल भं प्राण प्रप्ततत्रद्षत
                                     े
   कयक फनालाए जाते शं । Rs: 2350, 2800, 3250, 3700, 4600, 5500 वे 10,900 तक
      े
53                                        नलम्फय 2012




                                                                 भशारक्ष्भी स्तुप्तत
नभस्तेस्तु भशाभामे श्री ऩीठे वुयऩूस्जते।                                      भशारक्ष्भी तुम्शं प्रणाभ शं ॥2॥ वफ कछ जानने लारी,
                                                                                                                  ु
ळङ्खचक्रगदाशस्ते भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥१॥                                     वफको लय दे ने लारी, वभस्त दद्शं को बम दे ने लारी एलॊ
                                                                                                         ु
नभस्ते गरुिारूढे कोरावुय बमङ्करय।                                             वफक द:खं को दय कयने लारी, शे दे त्रल भशारक्ष्भी तुम्शं
                                                                                 े ु       ू
वललऩाऩशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥२॥                                    नभस्काय शं ॥3॥ प्तवत्रद्ध, फुत्रद्ध, बोग औय भोष दे ने लारी शे
वललसे वलललयदे वललदद्श बमङ्करय।
                  ु                                                           भॊत्रऩूत बगलप्तत भशारक्ष्भी तुम्शं वदा प्राभ शं ॥4॥ शे
वललद:खशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥३॥
    ु                                                                         दे त्रल! शे आटद-अन्त-यटशत आटदळत्रि ! शे भशे द्वरय! शे
प्तवत्रद्धफुत्रद्धप्रदे दे त्रल बुत्रि भुत्रि प्रदाप्तमप्तन।                  मोग वे प्रकि शुई बगलप्तत भशारक्ष्भी तुम्शं नभस्काय
भन्त्रऩूते वदा दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥४॥                               शं ॥5॥ शे दे त्रल! तुभ स्थूर, वूक्ष्भ एलॊ भशायौद्ररूत्रऩणी शो,
आद्यन्तयटशते दे त्रल आद्यळत्रि भशे द्वरय।                                     भशाळत्रि शो, भशोदया शो औय फिे -फिे ऩाऩं का नाळ
मोगजे मोगवम्बूते भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥५॥                                     कयने लारी शो। शे दे त्रल भशारक्ष्भी तुम्शं नभस्काय शं ॥6॥
स्थूरवूक्ष्भभशायौद्रे भशाळत्रि भशोदये ।                                       शे कभर क आवन ऩय त्रलयाजभान ऩयब्रह्मस्लरूत्रऩणी दे त्रल!
                                                                                      े
भशाऩाऩशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥६॥                                    शे ऩयभेद्वरय! शे जगदम्फ! शे भशारक्ष्भी तुम्शं भेया प्रणाभ
ऩद्मावनस्स्थते दे त्रल ऩयब्रह्म स्लरूत्रऩस्ण।                                 शं ॥7॥ शे दे त्रल तुभ द्वेत लस्त्र धायण कयने लारी औय
ऩयभेप्तळ जगन्भत ् भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥७॥                                    नाना प्रकाय क आबूऴणं वे त्रलबूत्रऴता शो। वम्ऩूणल जगत ्
                                                                                           े
द्वेताम्फयधये दे त्रल नानारङ्कायबूत्रऴते।                                     भं व्माद्ऱ एलॊ अस्खर रोक को जन्भ दे ने लारी शो। शे
जगस्त्व ्थते जगन्भत ् भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥८॥                                भशारक्ष्भी तुम्शं भेया प्रणाभ शं ॥8॥ जो भनुष्म बत्रि
भशारक्ष्म्मद्शक स्तोत्रॊ म: ऩठे द्भत्रि भान्नय्॥
               ॊ                                                              मुि शोकय इव भशारक्ष्म्मद्शक स्तोत्र का वदा ऩाठ कयता
वललप्तवत्रद्धभलाऩनेप्तत याज्मभ ् प्राऩनेप्तत वललदा॥९॥                         शं , लश वायी प्तवत्रद्धमं औय याज्मलैबल को प्राद्ऱ कय वकता
एककारे ऩठे स्न्नत्मभ ् भशाऩाऩत्रलनाळनभ ्।                                     शं ॥9॥ जो प्रप्ततटदन एक वभम ऩाठ कयता शं , उवक फिे -
                                                                                                                           े
टद्रकारॊ म: ऩठे स्न्नत्मभ ् धनधान्मवभस्न्लत॥१०॥                               फिे ऩाऩं का नाळ शो जाता शं । जो दो वभम ऩाठ कयता
त्रत्रकारॊ म: ऩठे स्न्नत्मभ ् भशाळत्रुत्रलनाळनभ ्।                            शं , लश धन-धान्म वे वम्ऩन्न शोता शं ॥10॥ जो प्रप्ततटदन
भशारक्ष्भीबललेस्न्नत्भ ् प्रवन्ना लयदा ळुबा ॥११॥                              तीन कार ऩाठ कयता शं उवक फिे -फिे ळत्रुओॊ का नाळ
                                                                                                     े
|| इप्तत भशारक्ष्भी स्तुप्तत वम्ऩूणल ||                                       शो जाता शं औय उवक ऊऩय कल्माणकारयणी लयदाप्तमनी
                                                                                               े
                                                                              भशारक्ष्भी वदा शी प्रवन्न शोती शं ॥11॥
बालाथल:- इन्द्र फोरे- श्रीऩीठऩय स्स्थत औय दे लताओॊ वे
                                                                              रक्ष्भी जी क इव स्तोत्र की यचना कयने लारे दे लयाज
                                                                                          े
ऩूस्जत शोने लारी शे भशाभामे। तुम्शं नभस्काय शं । शाथ
                                                                              इन्द्र शं ।
भं ळङ्ख, चक्र औय गदा धायण कयने लारी शे भशारक्ष्भी
                                                                              उऩयोि स्तुप्तत का प्रप्ततटदन तीन कार ऩाठ कयता
तुम्शं प्रणाभ शं ॥1॥ गरुिऩय आरूढ शो कोरावुय को बम
                                                                              शै , ळत्रुओॊ का नाळ शोता शं एलॊ उवे जीलन भे वबी
दे ने लारी औय वभस्त ऩाऩं को शयने लारी शे बगलप्तत
                                                                              प्रकाय क वुखो की प्राप्तद्ऱ शोती शे ।
                                                                                      े


                                                   वललजन लळीकयण कलच
                                                               भूल्म भात्र: Rs.1450
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                                                      श्री कनकधाया स्तोत्र
अॊगशये    ऩुरकबूऴण भाश्रमन्ती बृगाॊगनैल भुकराबयणॊ तभारभ।
                                           ु                                                  अॊगीकृ तास्खर त्रलबूप्ततयऩाॊगरीरा
भाॊगल्मदास्तु भभ भॊगरदे लतामा:॥1॥                                                        भुग्ध्मा भुशुत्रललदधती लदनै भुयायै :
प्रेभत्रऩाप्रस्णटशताप्तन गतागताप्तन।            भारा दृळोभलधकय त्रलभशोत्ऩरे मा वा भै प्तश्रमॊ टदळतु वागय
                                                            ु
वम्बलामा:॥2॥                                          त्रलद्वाभये न्द्रऩदत्रलभ्रभदानदषभानन्द शे तु यप्तधक भधुत्रलटद्रऴोत्रऩ।
                                                                                                         ॊ
ईऴस्न्नऴीदतु        भप्तम     षणभीषणाद्धल प्तभन्दोलयोदय           वशोदयप्तभस्न्दयाम:॥3॥           आभीप्तरताषभप्तधगम्म             भुदा
भुकन्दभानन्दकन्दभ
   ु                          प्तनभेऴभनॊगतन्त्रभ ्।       आककय
                                                            े            स्स्थत    कनी    प्तनकऩक्ष्भ     नेत्रॊ   बूत्मै     बलेन्भभ
बुजॊगयामाॊगनामा:॥4॥ फाह्यन्तये भधुस्जत: प्तश्रतकौस्तुबै मा शायालरील शरयनीरभमी त्रलबाप्तत। काभप्रदा
बगलतो       त्रऩ     किाषभारा           कल्माण          बालशतु      भे      कभरारमामा:॥5॥               काराम्फुदाप्तररप्तरतोयप्तव
किबाये धालयाधये
 ै                    स्पयप्तत मा तटिदॊ गनेल ्।
                         ु                                 भातु: वभस्त जगताॊ भशनीम भूप्ततलबद्रास्ण भे टदळतु
बागललनन्दनामा:॥6॥                   प्राद्ऱॊ ऩदॊ प्रथभत: टकर मत्प्रबालान्भाॊगल्म बास्ज: भधुभामप्तन भन्भथेन।
भध्माऩतेत          टदश      भन्थय     भीषणाद्धल       भन्दारवॊ     च       भकयारमकन्मकामा:॥7॥                  दद्याद       दमानुऩलनो
द्रत्रलणाम्फुधायाभ स्स्भबटकचन त्रलशॊ ग प्तळळौ त्रलऴण्ण। दष्कभलधभलभऩनीम प्तचयाम दयॊ नायामण प्रणप्तमनी
                           ॊ                             ु                      ू
नमनाम्फुलाश:॥8॥                  इद्शा त्रलप्तळद्शभतमो त्रऩ मथा ममाद्रलदृद्शमा त्रत्रत्रलद्शऩऩदॊ वुरबॊ रबॊते।                    दृत्रद्श:
प्रशूद्शकभरोदय दीप्तद्ऱ रयद्शाॊ ऩुत्रद्श कृ ऴीद्श भभ ऩुष्कय त्रलद्शयामा:॥9॥                   गीदे लतैप्तत गरुिध्लज बाप्तभनीप्तत
ळाकम्बयीप्तत ळप्तळळेखय लल्रबेप्तत। वृत्रद्श स्स्थप्तत प्ररम कप्तरऴु वॊस्स्थतामै तस्मै
                                                             े                                                     नभस्स्त्र बुलनैक
गुयोस्तरूण्मै ॥10॥ श्रुत्मै नभोस्तु ळुबकभलपर प्रवूत्मै यत्मै नभोस्तु यभणीम गुणाणललामै।                                          ळिमै
नभोस्तु ळतऩात्र प्तनकतानामै ऩुद्शमै नभोस्तु ऩुरूऴोत्तभ लल्रबामै ॥11॥ नभोस्तु नारीक प्तनबाननामै
                     े
नभोस्तु    दग्धौदप्तध
            ु                जन्भ      बूत्मै     ।     नभोस्तु    वोभाभृत         वोदयामै      नभोस्तु      नायामण          लल्रबामै
॥12॥                     वम्ऩतकयास्ण वकरेस्न्द्रम नन्दाप्तन वाम्राज्मदान त्रलबलाप्तन वयोरूशास्ष। त्ल द्रॊ दनाप्तन
दरयता शयणाद्यताप्तन भाभेल भातय प्तनळॊ करमन्तु नान्मभ ् ॥13॥ मत्किाषवभुऩावना त्रलप्तध: वेलकस्म
 ु
कराथल          वम्ऩद:।               वॊतनोप्तत          लचनाॊगभानवॊवत्लाॊ             भुयारयरृदमेद्वयीॊ            बजे          ॥14॥
वयप्तवजप्तनरमे वयोज शस्ते धलरभाॊळकगन्धभाल्मळोबे। बगलप्तत शरयलल्रबे भनोसे त्रत्रबुलनबूप्ततकरय
                                 ु
प्रवीद भह्यभ ् ॥15॥                                            दस्ग्धस्स्तप्तभ:कनकबभुखा ल वृत्रद्शस्ललालटशनी त्रलभरचारू
                                                                                  ॊु
जर प्रुताॊगीभ। प्रातनलभाप्तभ जगताॊ जननीभळेऴ रोकाप्तधनाथ गृटशणी भभृतास्ब्धऩुत्रीभ ् ॥16॥ कभरे
कभराषलल्रबे त्लॊ करुणाऩूयतयाॊ गतैयऩािॊ गै:। अलरोकम भाभ टकचनानाॊ प्रथभॊ ऩात्रभकृ त्रत्रभॊ दमामा :
                                                         ॊ
॥17॥                                                       स्तुलस्न्त मे स्तुप्ततप्तबय बूप्तभयन्लशॊ त्रमीभमीॊ त्रत्रबुलनभातयॊ
यभाभ ्।            गुणाप्तधका          गुरुतयबाग्मबाप्तगनो               बलस्न्त         ते         फुधबात्रलतामा:              ॥18॥
इप्तत श्री कनकधाया स्तोत्रॊ वम्ऩूणभ
                                  ल
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                                           वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच
   स्जव व्मत्रि को राख प्रमत्न औय ऩरयश्रभ कयने क फादबी उवे भनोलाॊप्तछत वपरतामे एलॊ
                                                े
टकमे गमे कामल भं प्तवत्रद्ध (राब)       प्राद्ऱ नशीॊ शोती, उव व्मत्रि को वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच अलश्म
धायण कयना चाटशमे।
   कलच क प्रभुख राब: वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच क द्राया वुख वभृत्रद्ध औय नल ग्रशं क
        े                                     े                                  े
नकायात्भक प्रबाल को ळाॊत कय धायण कयता व्मत्रि क जीलन वे वलल प्रकाय क द:ख-दारयद्र का
                                               े                    े ु
नाळ शो कय वुख-वौबाग्म एलॊ उन्नप्तत प्राप्तद्ऱ शोकय जीलन भे वप्तब प्रकाय क ळुब कामल प्तवद्ध शोते
                                                                         े
शं । स्जवे धायण कयने वे व्मत्रि मटद व्मलवाम कयता शोतो कायोफाय भे लृत्रद्ध शोप्तत शं औय मटद
नौकयी कयता शोतो उवभे उन्नप्तत शोती शं ।

 वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच क वाथ भं वललजन लळीकयण कलच क प्तभरे शोने की लजश वे धायण
                           े                         े
   कताल की फात का दवये व्मत्रिओ ऩय प्रबाल फना यशता शं ।
                   ू
 वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच क वाथ भं अद्श रक्ष्भी कलच क प्तभरे शोने की लजश वे व्मत्रि ऩय वदा
                           े                         े
   भाॊ भशा रक्ष्भी की कृ ऩा एलॊ आळीलालद फना यशता शं । स्जस्वे भाॊ रक्ष्भी क अद्श रुऩ (१)-
                                                                           े
   आटद रक्ष्भी, (२)-धान्म रक्ष्भी, (३)- धैमल रक्ष्भी, (४)-गज रक्ष्भी, (५)-वॊतान रक्ष्भी, (६)-
   त्रलजम रक्ष्भी, (७)-त्रलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो का अळीलालद प्राद्ऱ शोता शं ।

 वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच क वाथ भं तॊत्र यषा कलच क प्तभरे शोने की लजश वे ताॊत्रत्रक फाधाए दय
                           े                      े                                        ू
   शोती शं , वाथ शी नकायात्भक ळत्रिमो का कोइ कप्रबाल धायण कताल व्मत्रि ऩय नशीॊ शोता। इव
                                              ु
   कलच क प्रबाल वे इऴाल-द्रे ऴ यखने लारे व्मत्रिओ द्राया शोने लारे दद्श प्रबालो वे यषा शोती शं ।
        े                                                           ु
    वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच क वाथ भं ळत्रु त्रलजम कलच क प्तभरे शोने की लजश वे ळत्रु वे
                              े                         े
वॊफॊप्तधत वभस्त ऩये ळाप्तनओ वे स्लत् शी छिकाया प्तभर जाता शं । कलच क प्रबाल वे ळत्रु धायण
                                         ु                          े
कताल व्मत्रि का चाशकय कछ नशी त्रफगाि वकते।
                       ु
     अन्म कलच क फाये भे अप्तधक जानकायी क प्तरमे कामालरम भं वॊऩक कये :
               े                        े                      ल
     टकवी व्मत्रि त्रलळेऴ को वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच दे ने नशी दे ना का अॊप्ततभ प्तनणलम शभाये ऩाव वुयस्षत शं ।


                                      GURUTVA KARYALAY
           92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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                      (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
56                                     नलम्फय 2012




                                          दीऩालरी वे जुिी रक्ष्भी कथा
        बायतीम वॊस्कृ प्तत भं दीऩालरी क त्मोशाय टक फिी
                                       े                              रेटकन कटिमा क स्थान ऩय त्रलळारभशर खिा था। स्जवभं
                                                                             ु     े
रोक त्रप्रम कथा प्रचप्तरत शं ।                                        चायं ओय धन-धान्म, यत्न-जेलयात इत्माटद त्रफखये शुए थे।
कथा: एक फाय काप्ततलक भाव की अभालव को रक्ष्भीजी ऩृर्थली                        एवी भान्मता शं टक तबी वे काप्ततलक अभालव
भ्रभण ऩय प्तनकरीॊ। अभालव टक कारी छामा क कायण ऩृर्थली
                                       े                              (दीऩालरी)टक यात को दीऩ जराने की प्रथा चरी आयशी शं ।
क चायं ओय अॊधकाय व्माद्ऱ था। स्जव कायण दे ली रक्ष्भी
 े                                                                    दीऩालरी क यात्री कार भं रोग द्राय खोरकय रक्ष्भीदे ली क
                                                                               े                                            े
यास्ता बूर गईं। रक्ष्भी जी नी प्तनद्ळम टकमा टक यात्रत्र का प्रशय      आगभन टक प्रतीषा कयने टक ऩयॊ ऩया चरी आयशी शं ।
ले भृत्मुरोक भं व्मतीत कय रंगी औय वूमोदम क ऩद्ळात ऩुन्
                                          े                                   क्मोकी रोगो का तत्ऩमल मश शं टक भाॉ रक्ष्भी दे ली
फैकठधाभ रौि जाएॉगी, ऩयॊ तु रक्ष्भी जी ने ऩामा टक ऩृर्थली ऩय
   ुॊ                                                                 स्जव प्रकाय उव लृद्धा ऩय प्रवन्न शुईं उवी प्रकाय वफ ऩय
वबी रोग अऩने-अऩने घयं भं द्राय फॊद कय वो यशे शं ।                     प्रवन्न शं।
        तबी अॊधकाय वे बये ऩृर्थली रोक भं उन्शं एक द्राय               कथा वाय: दीऩालरी टक यात भात्र दीऩ जराने औय द्राय खुरे
खुरा टदखा स्जवभं एक दीऩक टक ज्मोप्तत टिभटिभा यशी थी।                  यखने वे रक्ष्भी जी घय भं प्तनलाव नशीॊ कयती!
रक्ष्भी जी उव प्रकाळ टक ओय ऩशुॊच कय लशाॉ उन्शंने एक लृद्ध                     रक्ष्भी जी त्रलश्राभ कयती शं । क्मंटक दे ली रक्ष्भी तो
भटशरा को चयखा चराते दे खा। लृद्ध भटशरा वे यात्रत्र त्रलश्राभ          चॊचर शं । लश एक स्थान ऩय अस्स्थय नशीॊ यशती। अऩना
की अनुभप्तत भाॉग कय रक्ष्भी जी फुटढ़मा की कटिमा भं रुकीॊ।
                                           ु                          आप्तळऴ दे कय चरीजाती शं । स्जवक पर स्लरुऩ आने लारे लऴल
                                                                                                     े
        लृ ्द्ध भटशरा ने रक्ष्भी जी को त्रलश्राभ क प्तरमे त्रफस्तय
                                                  े                   बल भं भाॊ रक्ष्भी क बि को टकवी प्रकाय क द्ख, दरयद्रता
                                                                                         े                   े ु
प्रदान कय ऩुन: अऩने कामल भं व्मस्त शो गई। चयखा                        एलॊ आप्तथलक वॊकि का वाभना नशीॊ कयना ऩिता।
चराते-चराते लृद्धा की आॉख रग गई। दवये टदन उठने ऩय
               ्                  ू
लृद्ध भटशरा ने ऩामा टक अप्ततप्तथ भटशरा लशाॊ वे जा चुकी शं                                       ***

                                        ऩप्तत-ऩत्नी भं करश प्तनलायण शे तु
   मटद ऩरयलायं भं वुख-वुत्रलधा क वभस्त वाधान शोते शुए बी छोिी-छोिी फातो भं ऩप्तत-ऩत्नी क त्रफच भे करश
                                े                                                       े
   शोता यशता शं , तो घय क स्जतने वदस्म शो उन वफक नाभ वे गुरुत्ल कामालरत द्राया ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान
                         े                      े
   वे भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि लळीकयण कलच एलॊ गृश करश नाळक टिब्फी फनलारे एलॊ
   उवे अऩने घय भं त्रफना टकवी ऩूजा, त्रलप्तध-त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ भॊत्र
   प्तवद्ध ऩप्तत लळीकयण मा ऩत्नी लळीकयण एलॊ गृश करश नाळक टिब्फी फनलाना चाशते शं , तो वॊऩक आऩ
                                                                                         ल
   कय वकते शं ।

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57                                नलम्फय 2012




                                               धनतेयव टक अनोखी कथा
                                                                                                           प्तचॊतन जोळी
बायत       भं     धनतेयव ऩलल वे         वॊफॊप्तघत रोकत्रप्रम   कथा    योळनी की लजश वे उनकी आॊखं चुप्तधमा गईं। इव कायण
                                                                                                  ॊ
प्रचप्तरत शै । ऩुयाने जभाने भं एक याजा टशभ शुए। उनके                  वाॊऩ दवया यास्ता खोजने रगा औय यं गते शुए उव जगश
                                                                            ू
मशाॊ ऩुत्र शुआ, तो उवकी जन्भ-किरी फनलाई गई।
                              ुॊ                                      ऩशुॊच गमा, जशाॊ वोने तथा चाॊदी क प्तवक्क यखे शुए थे।
                                                                                                      े       े
ज्मोप्ततत्रऴमं ने किरी का त्रलद्ऴेऴण कय क कशा टक
                   ुॊ                    े                            िवने का भौका न प्तभरता दे ख, त्रलऴधय बी लशीॊ किरी
                                                                                                                    ुॊ
याजकभाय अऩनी ळादी क चौथे टदन वाॊऩ क कािने
    ु              े               े                                           रगाकय फैठ गमा औय याजकभायी क गाने वुनने
                                                                                                    ु     े
वे भय जाएगा। इव ऩय याजा प्तचॊप्ततत यशने                                             रगा। इवी फीच वूमल दे ल ने दस्तक दी,
रगे। याजकभाय की उम्र 16 वार की शुई, तो
         ु                                                                            मानी वुफश शो गई। मभ दे लता लाऩव
उवकी       ळादी      एक    वुॊदय, वुळीर       औय                                        जा चुक थे। इव तयश याजकभायी ने
                                                                                              े               ु
वभझदाय याजकभायी वे कय दी गई।
           ु                                                                             अऩनी ऩप्तत को भौत क ऩॊजे भं
                                                                                                            े
याजकभायी भाॊ रक्ष्भी की ऩयभ बि
    ु                                                                                                          ु
                                                                                           ऩशुॊचने वे ऩशरे शी छिा प्तरमा। मश
थीॊ। याजकभायी को बी अऩने ऩप्तत
         ु                                                                                  घिना स्जव टदन घिी थी, लश
ऩय आने लारी त्रलऩत्रत्त क त्रलऴम भं
                         े                                                                  धनतेयव का टदन था, इवप्तरए
ऩता चर गमा।                                                                                  इव टदन को 'मभदीऩदान' बी
                                                                                             कशते                        शं ।
याजकभायी कापी दृढ़ इच्छाळत्रि
    ु
                                                                                               इव टदन ऩूयी यात घय क फाशय
                                                                                                                   े
लारी थीॊ। उवने चौथे टदन का
                                                                                              दीऩ जराकय यखते शं ताटक
इॊ तजाय ऩूयी तैमायी क वाथ टकमा।
                     े
                                                                                              भृत्मु क दे लता मभयाज को घय
                                                                                                      े
स्जव यास्ते वे वाॊऩ क आने की
                     े
                                                                                              भं प्रलेळ कयने वे योका जा
आळॊका           थी, लशाॊ   वोने-चाॊदी    के
                                                                                             वक।
                                                                                               े
प्तवक्के    औय       शीये -जलाशयात      आटद
त्रफछा टदए गए। ऩूये घय को योळनी
                                                                                            त्रलष्णु का धनलॊतरय अलताय
वे जगभगा टदमा गमा। कोई बी
                                                                                           धनतेयव वे वॊफॊप्तधत रोगं क फीच
                                                                                                                     े
कोना खारी नशीॊ छोिा गमा अथालत
                                                                                          एक औय कथा बी प्रचप्तरत शं । जफ
वाॊऩ क कभये भं आने क प्तरए कोई
      े             े
                                                                                         वुय औय अवुय प्तभरकय वागय भॊथन
यास्ता अॊधेया नशीॊ छोिा गमा। इतना शी
                                                                                       कय यशे थे, तो कई फशुभूल्म चीजं की
नशीॊ, याजकभायी ने अऩने ऩप्तत को जगाए
          ु
                                                                                     प्राप्तद्ऱ शुई। इनभं वफवे अशभ था अभृत।
यखने क प्तरए उवे ऩशरे कशानी वुनाई औय
      े
                                                                                   मश अभृत करळ धनलॊतरय क शाथं भं था।
                                                                                                        े
टपय गीत गाने रगी।
                                                                          धनलॊतरय को मूॊ तो दे लताओॊ का लैद्य कशते शं , ऩय
                                                                      उनभं बगलान त्रलष्णु का अॊळ बी भौजूद था। धनतेयव के
इवी दौयान जफ भृत्मु क दे लता मभयाज ने वाॊऩ का रूऩ
                     े
                                                                      टदन धनलॊतरय की उत्ऩत्रत्त शोने क कायण शभ धनतेयव
                                                                                                      े
धायण कयक कभये भं प्रलेळ कयने की कोप्तळळ की, तो
        े
                                                                      भनाते शं ।
58                              नलम्फय 2012




                 ॥दारयद्र्म दशन प्तळलस्तोत्रॊ॥
त्रलद्वेद्वयाम नयकाणलल तायणाम कणाभृताम ळप्तळळेखयधायणाम।
                                                                                         भॊत्र प्तवद्ध रूद्राष
कऩूयकास्न्तधलराम जिाधयाम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥१॥
   ल                                ु
                                                                                      एकभुखी रूद्राष-Rs- 1250,2800
गौयीत्रप्रमाम यजनीळकराधयाम कारान्तकाम बुजगाप्तधऩकङ्कणाम।
                                                                                      दो भुखी रूद्राष-Rs- 100,151
गॊगाधयाम गजयाजत्रलभदल नाम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥२॥
                                     ु
                                                                                      तीन भुखी रूद्राष-Rs- 100,151
बत्रित्रप्रमाम बलयोगबमाऩशाम उग्राम दगबलवागयतायणाम।
                                    ु ल
                                                                                      चाय भुखी रूद्राष-Rs- 55,100
ज्मोप्ततभलमाम गुणनाभवुनत्मकाम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥३॥
                       ृ                 ु
                                                                                      ऩॊच भुखी रूद्राष-Rs- 28,55
चभलम्फयाम ळलबस्भत्रलरेऩनाम बारेषणाम भस्णकण्िरभस्ण्िताम।
                                         ु
भॊझीयऩादमुगराम जिाधयाम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥४॥
                                  ु                                                   छश भुखी रूद्राष-Rs- 55,100

ऩञ्चाननाम पस्णयाजत्रलबूऴणाम शे भाॊळुकाम बुलनत्रमभस्ण्िताम।
                                                                                      वात भुखी रूद्राष-Rs- 120,190
आनन्दबूप्तभलयदाम तभोभमाम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥५॥
                                    ु                                                 आठ भुखी रूद्राष-Rs- 820,1250

बानुत्रप्रमाम बलवागयतायणाम कारान्तकाम कभरावनऩूस्जताम।                                 नौ भुखी रूद्राष-Rs- 820,1250
नेत्रत्रमाम ळुबरषण रस्षताम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥६॥
                                      ु                                               दवभुखी रूद्राष-Rs- 1250
याभत्रप्रमाम यघुनाथलयप्रदाम नागत्रप्रमाम नयकाणललतायणाम।                               ग्मायशभुखी रूद्राष-Rs- 1450
ऩुण्मेऴु ऩुण्मबरयताम वुयाप्तचलताम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥७॥
                                             ु
                                                                                      फायश भुखी रूद्राष-Rs- 2350
भुिद्वयाम परदाम गणेद्वयाम गीतत्रप्रमाम लृऴबेद्वयलाशनाम।
   े
                                                                                      तेयश भुखी रूद्राष-Rs- 4600
भातङ्गचभललवनाम भशे द्वयाम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥८॥
                                     ु
                                                                                      चौदश भुखी रूद्राष-Rs- 12500
लप्तवद्षेन कृ तॊ स्तोत्रॊ वललयोगप्तनलायणॊ। वललवॊऩत्कयॊ ळीघ्रॊ ऩुत्रऩौत्राटदलधलनभ ्।
त्रत्रवॊध्मॊ म् ऩठे स्न्नत्मॊ व टश स्लगलभलाप्नुमात ्॥९॥
                                                                                      गौयीळॊकय रूद्राष-Rs- 1900

॥इप्तत लप्तवद्ष त्रलयप्तचतॊ दारयद्र्मदशनप्तळलस्तोत्रॊ वम्ऩूणभ ्॥
                                                            ल                                गुरुत्ल कामालरम:
                                                                                        Bhubaneswar- 751 018, (ORISSA)
पर: एवा ळास्रोि लचन शं जो व्मत्रि श्रद्धा बाल वे तीनोकार                                              INDIA
                                                                                         Call Us: 91+ 9338213418, 91+
वुफश, वॊध्मा एलॊ यात्री क वभम दारयद्र्म दशन प्तळलस्तोत्रॊ का ऩाठ
                         े                                                                        9238328785,
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वॊतान राब प्राद्ऱ शोता शं ।
59                                             नलम्फय 2012




            ऋणभोचक भॊगर स्तोत्र                                         ॥ रक्ष्भी स्तुप्तत-ऩाठ ॥
श्रीगणेळाम नभ्                                            ऩद्मानने ऩप्तद्मप्तन ऩद्म-शस्ते ऩद्म-त्रप्रमे ऩद्म-दरामतास्ष।
                                                          त्रलद्वे-त्रप्रमे त्रलष्णु-भनोनुकरे, त्लत ्-ऩाद-ऩद्मॊ भप्तम
                                                                                           ू
भङ्गरो बूप्तभऩुत्रद्ळ ऋणशताल धनप्रद्।                     वस्न्नधत्स्ल॥
स्स्थयावनो भशाकम् वललकभलत्रलयोधक् ॥१॥                     ऩद्मानने ऩद्म-उरु, ऩद्माषी ऩद्म-वम्बले।
रोटशतो रोटशताषद्ळ वाभगानाॊ कृ ऩाकय्।                      त्लन्भा बजस्ल ऩद्मास्ष, मेन वौख्मॊ रबाम्मशभ ्॥
धयात्भज् कजो बौभो बूप्ततदो बूप्तभनन्दन्॥२॥
          ु                                               अद्व-दाप्तम च गो-दाप्तम, धनदामै भशा-धने।
अङ्गायको मभद्ळैल वललयोगाऩशायक्।                           धनॊ भे जुऴताॊ दे त्रल, वलल-काभाॊद्ळ दे टश भे॥
व्रुद्शे् कतालऽऩशताल च वललकाभपरप्रद्॥३॥                   ऩुत्र-ऩौत्र-धन-धान्मॊ, शस्त्मद्वाटद-गले यथभ ्।
एताप्तन कजनाभप्तन प्तनत्मॊ म् श्रद्धमा ऩठे त ्।
         ु                                                प्रजानाॊ बलप्तत भात्, अमुष्भन्तॊ कयोतु भाभ ्॥
ऋणॊ न जामते तस्म धनॊ ळीघ्रभलाप्नुमात ्॥४॥                 धनभस्ग्नधलनॊ लामुधनॊ वूमो धनॊ लवु्।
                                                                            ल
धयणीगबलवम्बूतॊ त्रलद्युत्कास्न्तवभप्रबभ ्।                धनप्तभन्द्रा लृशस्ऩप्ततललरुणो धनभद्लुते॥
कभायॊ ळत्रिशस्तॊ च भङ्गरॊ प्रणभाम्मशभ ्॥५॥
 ु                                                        लैनतेम वोभॊ त्रऩफ, वोभॊ त्रऩफतु लृत्रशा।
                                                          वोभॊ धनस्म वोप्तभनो, भह्मॊ ददातु वोप्तभप्तन॥
स्तोत्रभङ्गायकस्मैतत्ऩठनीमॊ वदा नृप्तब्।
                                                          न क्रोधो न च भात्वमं, न रोबो नाळुबा भती्।
न तेऴाॊ बौभजा ऩीिा स्लल्ऩाऽत्रऩ बलप्तत क्लप्तचत ्॥६॥
                                                          बलन्ती कृ त-ऩुण्मानाॊ, बिानाॊ श्री-वूि जऩेत ्॥
                                                                                                ॊ
अङ्गायक भशाबाग बगलन्बिलत्वर।
त्लाॊ नभाप्तभ भभाळेऴभृणभाळु त्रलनाळम॥७॥
                                                          त्रलप्तध्-
ऋणयोगाटददारयद्रमॊ मे चान्मे ह्यऩभृत्मल्।
                                                          उि भशा-भन्त्र क तीन ऩाठ प्तनत्म कये । „ऩाठ‟ क फाद
                                                                         े                             े
बमक्रेळभनस्ताऩा नश्मन्तु भभ वललदा॥८॥
                                                          कभर क द्वेत पर, प्ततर, भधु, घी, ळक्कय, फेर-गूदा
                                                               े       ू
अप्ततलक्त्र दयायाध्मल बोगभुि स्जतात्भन्।
             ु
                                                          प्तभराकय फेर की रकिी वे प्तनत्म १०८ फाय शलन कये ।
तुद्शो ददाप्तव वाम्राज्मॊ रुश्िो शयप्तव तत्ख्ळणात ्॥९॥
                                                          ऐवा ६८ टदन कये । इववे भन-लास्ञ्छत धन प्राद्ऱ शोता शै ।
त्रलरयॊ प्तचळक्रत्रलष्णूनाॊ भनुष्माणाॊ तु का कथा।         शलन-भन्त्र्- “ॐ श्रीॊ ह्रीॊ भशा-रक्ष्म्मै वलालबीद्श प्तवत्रद्धदामै
तेन त्लॊ वललवत्त्लेन ग्रशयाजो भशाफर्॥१०॥                  स्लाशा।”

ऩुत्रान्दे टश धनॊ दे टश त्लाभस्स्भ ळयणॊ गत्।
                                                                               द्रादळ भशा मॊत्र
ऋणदारयद्रमद्खेन ळत्रूणाॊ च बमात्तत्॥११॥
           ु
                                                              वबी प्रकाय वे बाग्म लृत्रद्ध एलॊ वुख वभृत्रद्ध शे तु वलल
एप्तबद्रालदळप्तब् द्ऴोकमल् स्तौप्तत च धयावुतभ ्।
                       ै
                                                                श्रेद्ष मॊत्र, शभाये 30 लऴोक अनुबलो द्राया प्तनप्तभलत
                                                                                            े
भशप्ततॊ प्तश्रमभाप्नोप्तत ह्यऩयो धनदो मुला॥१२॥
                                                                 भूल्म: Rs- 1900 वे 8200 तक
॥इप्तत श्री ऋणभोचक भङ्गरस्तोत्रभ ् वम्ऩूनभ ्॥
                                         ल
60                                   नलम्फय 2012




                                           श्री रक्ष्भी चारीवा
॥ दोशा ॥                               रुऩ फदर तशॊ वेला कीन्शा ॥                प्रप्ततटदन ऩाठ कयै भन भाशीॊ ।
भातु रक्ष्भी करय कृ ऩ, कयो ह्र्दम भं   स्लॊम त्रलष्णु जफ नय तनु धाया ।          उन वभ कोई जग भं कशुॊ नाशी ॥
लाव ॥                                  रीन्शे उ अलधऩुयी अलताया ॥                फशुत्रलप्तध क्मा भं कयं फिाई ।
भनोकाभना प्तवद्ध करय, ऩुयलशु भेयी      तफ तुभ प्रगि जनकऩुय भाशीॊ ।              रेम ऩयीषा ध्मान रगाई ॥
आव ॥                                   वेला टकमो ह्र्दम ऩुरकाशीॊ ॥              करय त्रलद्वाव कयं व्रत नेभा ।
॥वोयठा ॥                               अऩनामा तोटश अन्तमालभी ।                  शोम प्तवद्ध उऩजै उय प्रेभा ॥
मशी भोय अयदाव,शाथ जोि त्रलनती          त्रलद्व त्रलटदत त्रत्रबुलन की स्लाभी ॥   जम जम जम रक्ष्भी बालानी ।
करु ।
 ॊ                                     तुभ वभ प्रफर ळत्रि नटशॊ आनी ।            वफ भं व्मात्रऩत शो गुण खानी ॥
वफत्रलप्तध कयौ वुलाव, जम जनप्तन        कशॊ तक भटशभा कशौ फखानी ॥                 तुम्शयो तेज प्रफर जग भाशी ।
जगदॊ त्रफका ॥                          भन क्रभ लचन कयै वेलकाई ।                 तुभ वभ कोउ दमारु कशुॊ नाटशॊ ॥
प्तवॊधु वुता भं वुप्तभयं तोशी ।        भन इस्च्छत लाॊप्तछत पर ऩाई ॥             भोटश अनाथ की वुप्तध अफ रीजै ।
सान फुत्रद्ध त्रलद्या दो भोशी ॥        तस्ज छ्र कऩि औय चतुयाई ।                 वॊकि काटि बत्रि भोटश दीजै ॥
तुभ वभान नटशॊ कोई उऩकायी ।             ऩूजटशॊ त्रलत्रलध बाॊप्तत भन राई ॥        बूर चूक करय षभा शभायी ।
वफ त्रलप्तध ऩुयलशु आव शभायी ॥          औय शार भं कशं फुझाई ।                    दळलन दीजै दळा प्तनशायी ॥
जम जम जगत जनप्तन जगदम्फा ।             जो मश ऩाठ कयै भन राई ॥                   त्रफन दळलन व्माकर अप्तधकायी ।
                                                                                                ु
वफकी तुभ शी शो अलरम्फा ॥               ताको कोई कद्श न शोई ।                    तुभटश अषत द्ख वशते बायी ॥
                                                                                           ु
तुभ शी शो घि घि की लावी ।              भन इस्च्छत ऩालै पर वोई ॥                 नटशॊ भोटशॊ सान फुत्रद्ध शै तन भं ।
त्रलनती मशी शभायी खावी ॥               त्राटश त्राटश जम द्ख प्तनलारयस्ण ।
                                                         ु                      वफ जानत शो अऩने भन भं ॥
जगजननी जम प्तवॊधु कभायी ।
                   ु                   त्रत्रत्रलध ताऩ बल फॊधन शारयस्ण ॥        रुऩ चतुबज कयक धायण ।
                                                                                        ुल   े
दीनन की तुभ शो टशतकायी ॥               जो मश चारीवा ऩढै ऩढालै ।                 कद्श भोय अफ कयशु प्तनलायण ॥
त्रलनलं प्तनत्म तुभटशॊ भशायानी ।       ध्मान रगाकय वुनै वुनालै ॥                कटश प्रकाय भं कयं फिाई ।
                                                                                 े
कृ ऩा कयौ जग जनप्तन बलानी ॥            ताको कोई न योग वतालै ।                   सान फुत्रद्ध भोटश नटशॊ अप्तधकाई ॥
कटश त्रलप्तध स्तुप्तत कयं प्ततशायी ।
 े                                     ऩुत्र आटद धन वम्ऩप्तत ऩालै ॥             ॥ दोशा ॥
वुप्तध रीजै अऩयाध त्रफवायी ॥           ऩुत्रशीन अरु वॊऩप्तत शीना ।              त्राटश त्राटश दख शारयणी,शयो लेप्तग वफ
                                                                                               ु
कृ ऩा दृत्रद्श प्तचतलो भभ ओयी ।        अॊध फप्तधय कोढी अप्तत दीना ।             त्राव।
जगजननी त्रलनती वुन भोयी ॥              त्रलप्र फोराम क ऩाठ कयालै ।
                                                      ै                         जमप्तत जमप्तत जम रक्ष्भी, कयो ळत्रु
सान फुत्रद्ध जम वुख की दाता ।          ळॊका टदर भं कबी न रालै ॥                 का नाळ ॥
वॊकि शयो शभायी भाता ॥                  ऩाठ कयालै टदन चारीवा ।                   याभदाव धरय ध्मान प्तनत, त्रलनम
षीयप्तवॊधु जफ त्रलष्णु भथामो ।         ता ऩय कृ ऩा कयं जो गौयीवा ॥              कयत कय जोय ।
चौदश यत्न प्तवॊधु भं ऩामो ॥            वुख वम्ऩप्तत फशुत वी ऩालै ।              भातु रक्ष्भी दाव ऩय, कयशु दमा की
चौदश यत्न भं तुभ वुखदावी ।             कभी नशीॊ काशू की आलै ॥                   कोय ॥
वेला टकमो प्रबु फप्तन दावी ॥           फायश भाव कयं जो ऩूजा ।
जफ जफ जन्भ जशाॊ प्रबु रीन्शा ।         तेटश वभ धन्म औय नटशॊ दजा ॥
                                                             ू
                                                                                              ***
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                                                                ॥श्री वूि॥
ॐ टशयण्म-लणां शरयणीॊ, वुलणल-यजत-स्त्रजाभ ्। चन्द्राॊ टशयण्मभमीॊ रक्ष्भीॊ, जातलेदो भ आलश॥

ताॊ भ आलश जात-लेदो, रक्ष्भीभनऩ-गाप्तभनीभ ्। मस्माॊ टशयण्मॊ त्रलन्दे मॊ, गाभद्वॊ ऩुरूऴानशभ ्॥

अद्वऩूलां यथ-भध्माॊ, शस्स्त-नाद-प्रभोटदनीभ ्। प्तश्रमॊ दे लीभुऩह्वमे, श्रीभाल दे ली जुऴताभ ्॥

काॊवोऽस्स्भ ताॊ टशयण्म-प्राकायाभाद्राल ज्लरन्तीॊ तृद्ऱाॊ तऩलमन्तीॊ। ऩद्मे स्स्थताॊ ऩद्म-लणां ताप्तभशोऩह्वमे प्तश्रमभ ्॥

चन्द्राॊ प्रबावाॊ मळवा ज्लरन्तीॊ प्तश्रमॊ रोक दे ल-जुद्शाभुदायाभ ्। ताॊ ऩद्म-नेप्तभॊ ळयणभशॊ प्रऩद्ये अरक्ष्भीभे नश्मताॊ त्लाॊ लृणोप्तभ॥
                                             े

आटदत्म-लणे तऩवोऽप्तधजातो लनस्ऩप्ततस्तल लृषोऽष त्रफल्ल्। तस्म पराप्तन तऩवा नुदन्तु भामान्तयामाद्ळ फाह्या अरक्ष्भी्॥

उऩैतु भाॊ दै ल-वख्, कीप्ततलद्ळ भस्णना वश। प्रादबूतोऽस्स्भ याद्सेऽस्स्भन ्, कीप्ततं लृत्रद्धॊ ददातु भे॥
                                               ु ल

षुत ्-त्रऩऩावाऽभरा ज्मेद्षा, अरक्ष्भीनालळमाम्मशभ ्। अबूप्ततभवभृत्रद्धॊ च, वलालन ् प्तनणुद भे गृशात ्॥
                                                                                        ल

गन्ध-द्रायाॊ दयाधऴां, प्तनत्म-ऩुद्शाॊ कयीत्रऴणीभ ्। ईद्वयीॊ वलल-बूतानाॊ, ताप्तभशोऩह्वमे प्तश्रमभ ्॥
              ु
भनव् काभभाकप्ततॊ, लाच् वत्मभळीभटश। ऩळूनाॊ रूऩभन्नस्म, भप्तम श्री् श्रमताॊ मळ्॥
           ू
कदल भेन प्रजा-बूता, भप्तम वम्भ्रभ-कदल भ। प्तश्रमॊ लावम भे करे, भातयॊ ऩद्म-भाप्तरनीभ ्॥
                                                           ु

आऩ् वृजन्तु स्स्नग्धाप्तन, प्तचक्रीत लव भे गृशे। प्तनच-दे ली भातयॊ प्तश्रमॊ लावम भे करे॥
                                                                                     ु

आद्रां ऩुष्करयणीॊ ऩुत्रद्शॊ, वुलणां शे भ-भाप्तरनीभ ्। वूमां टशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ, जातलेदो भभालश॥

आद्रां म् करयणीॊ मत्रद्शॊ, त्रऩॊगराॊ ऩद्म-भाप्तरनीभ ्। चन्द्राॊ टशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ, जातलेदो भभालश॥

ताॊ भ आलश जात-लेदो रक्ष्भीभनऩ-गाप्तभनीभ ्। मस्माॊ टशयण्मॊ प्रबूतॊ गालो दास्मोऽद्वान ् त्रलन्दे मॊ ऩुरूऴानशभ ्॥

म् ळुप्तच् प्रमतो बूत्ला, जुशुमादाज्मभन्लशभ ्। प्तश्रम् ऩॊच-दळचं च, श्री-काभ् वततॊ जऩेत ्॥



                                         धनरक्ष्भी स्तोत्र                                                       अद्श रक्ष्भी कलच
                                                                                                               भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा प्राद्ऱ
   नभो कल्माणदाप्तमक । भशावम्ऩत्प्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥
                    े
                                                                                                               कयने       शे तु      उऩमोगी        प्तवद्ध
   भशाबोगप्रदे दे त्रल भशाकाभप्रऩूरयते । वुखभोषप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥
                                                                                                               शोता       शं ।     स्जस्वे   भाॊ      के
   ब्रह्मरूऩे वदानन्दे वस्च्चदानन्दरूत्रऩणी । धृतप्तवत्रद्धप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥                    आटद रक्ष्भी, धान्म रक्ष्भी,
   उद्यत्वूमप्रकाळाबे उद्यदाटदत्मभण्िरे । प्तळलतत्लप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥
            ल                                                                                                  धैयीम रक्ष्भी, गज रक्ष्भी,
   प्तळलरूऩे प्तळलानन्दे कायणानन्दत्रलग्रशे । त्रलद्ववॊशायरूऩे च धनदामै नभोऽस्तुते॥                            वॊतान              रक्ष्भी,    त्रलजम

   ऩञ्चतत्लस्लरूऩे च ऩञ्चाचायवदायते । वाधकाबीद्शदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥श्रीॊ                             रक्ष्भी, त्रलद्या रक्ष्भी औय
                                                                                                               धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो
   ॐ॥
                                                                                                               का अळीलालद प्राद्ऱ शोता शं ।
   ॐ श्री रप्तरता भशात्रत्रऩुयवुन्दयी ऩयाबट्िारयका ।
   वभेताम श्री चन्द्रभौऱीद्वय ऩयब्रह्मणे नभ्॥जम जम ळङ्कय शय शय ळङ्कय॥
                                                                                                                      भूल्म- Rs: 1250
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                            अद्शरक्ष्भी स्तोत्र                                                    दे लकृ त रक्ष्भी स्तोत्रभ ्
वुभनवलॊटदत वुॊदरय भाधत्रल चॊद्र वशोदरय शे भभमे ।                                          षभस्ल बगलॊत्मल षभाळीरे ऩयात्ऩये ।
भुप्तनगण लॊटदत भोषप्रदाप्तमप्तन भॊजुऱबात्रऴस्ण लेदनुते ॥                                  ळुद्धवत्त्लस्लरूऩे च कोऩाटदऩरयलस्जलते॥
ऩॊकजलाप्तवप्तन दे लवुऩूस्जत वदगुणलत्रऴलस्ण ळाॊप्ततमुते ।                                  उऩभे वललवाध्लीनाॊ दे लीनाॊ दे लऩूस्जते।
जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन आटदरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥1॥                                 त्लमा त्रलना जगत्वलं भृततुल्मॊ च प्तनष्परभ ्॥
अप्तमकप्तर कल्भऴनाप्तळप्तन काप्तभप्तन लैटदकरूत्रऩस्ण लेदभमे ।                             वललवॊऩत्स्लरूऩा त्लॊ वलेऴाॊ वललरूत्रऩणी।
षीयवभुदबल भॊगररूत्रऩस्ण भॊत्रप्तनलाप्तवप्तन भॊत्रनुते ॥                                   यावेद्वमलप्तध दे ली त्लॊ त्लत्करा् वललमोत्रऴत्॥
भॊगरदाप्तमप्तन अॊफुजलाप्तवप्तन दे लगणाप्तश्रत ऩादमुते ।                                   करावे ऩाललती त्लॊ च षीयोदे प्तवन्धुकन्मका।
                                                                                           ै
जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन धान्मरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥2॥                               स्लगे च स्लगलरक्ष्भीस्त्लॊ भत्मलरक्ष्भीद्ळ बूतरे॥
जमलय लस्णलप्तन लैष्णत्रलबागलत्रल भॊत्रस्लरूत्रऩस्ण भॊत्रभमे ।                             लैकठे च भशारक्ष्भीदे लदे ली वयस्लती।
                                                                                             ुॊ
वुयगण ऩूस्जत ळीघ्र परप्रद सानत्रलकाप्तवप्तन ळास्त्रनुते ॥                                 गॊगा च तुरवी त्लॊ च वात्रलत्री ब्रह्मारोकत्॥
बलबमशारयस्ण ऩाऩत्रलभोचप्तन वाधुजनाप्तश्रत ऩादमुते ।                                       कृ ष्णप्राणाप्तधदे ली त्लॊ गोरोक याप्तधका स्लमभ ्।
                                                                                                                          े
जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन धैमरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥3॥
                               ल                                                          यावे यावेद्वयी त्लॊ च लृॊदालन लने- लने॥
जम जम दगप्ततनाप्तळप्तन काप्तभप्तन वललपरप्रद ळास्त्रभमे ।
       ु ल                                                                                कृ ष्णा त्रप्रमा त्लॊ बाॊिीये चॊद्रा चॊदनकानने।
यथगज तुयग ऩदाटदवभानुत ऩरयजनभॊटित रोकनुते ॥                                                त्रलयजा चॊऩकलने ळतळृॊगे च वुॊदयी॥
शरय-शय ब्रह्म वुऩूस्जत वेत्रलत ताऩप्तनलारयस्ण ऩादमुते ।                                   ऩद्मालती ऩद्मलने भारती भारतीलने।
जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन श्री गजरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥4॥                                कददॊ ती कदलने वुळीरा कतकीलने॥
                                                                                           ुॊ      ुॊ           े
अप्तम खगलाटशप्तन भोटशप्तन चटक्रस्ण याग त्रललप्तधलप्तन सानभमे ।                            कदॊ फभारा त्लॊ दे ली कदॊ फकाननेऽत्रऩ च।
गुणगणलारयप्तध रोकटशतैत्रऴस्ण वद्ऱस्लयलय गाननुते ॥                                         याजरक्ष्भी याजगेशे गृशरक्ष्भीगृशे गृशे॥
वकर वुयावुय दे ल भुनीद्वय भानललॊटदत ऩादमुते ।                                             इत्मुक्त्ला दे लता् वलाल भुनमो भनलस्तथा।
जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन वॊतानरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥5॥                                  रूरूदनम्रलदना् ळुष्ककठोद्ष तारुका्॥
                                                                                               ु ल             ॊ
जम कभरावप्तन वदगप्ततदाप्तमप्तन सान त्रलकाप्तवप्तन गानभमे ।                                इप्तत रक्ष्भीस्तलॊ ऩुण्मॊ वललदेल् कृ तॊ ळुबभ ्।
                                                                                                                          ै
अनुटदनभप्तचलत ककभधूवय बूत्रऴतलाप्तवत लाद्यनुते ॥
               ु ुॊ                                                                       म् ऩठे त्प्रातरूत्थाम व लै वलै रबेद् ध्रुलभ ्॥
कनक धया स्तुप्तत लैबल लॊटदत ळॊकय दे प्तळक भान्म ऩते।                                      अबामो रबते बामां त्रलनीताॊ वुवताॊ वतीभ ्।
                                                                                                                        ु
जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन त्रलजमरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥6॥                              वुळीराॊ वुॊदयीॊ यम्माभप्ततवुत्रप्रमलाटदनीभ ्॥
प्रणत वुयेद्वरय बायप्तत बागलत्रल ळोकत्रलनाप्तळप्तन यत्नभमे ।                              ऩुत्रऩौत्रलतीॊ ळुद्धाॊ करजाॊ कोभराॊ लयाभ ्।
                                                                                                                  ु
भस्णभम बूत्रऴत कणलत्रलबूऴण ळाॊप्ततवभालृत शास्मभुखे ॥                                      अऩुत्रो रबते ऩुत्रॊ लैष्णलॊ प्तचयजीत्रलनभ ्॥
नलप्तनप्तध दाप्तमप्तन कप्तरभरशारयस्ण काम्म परप्रद शस्तमुते ।                              ऩयभैद्वमलमुि च त्रलद्यालॊतॊ मळस्स्लनभ ्।
                                                                                                      ॊ
जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन त्रलद्यारस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥7॥                               भ्रद्शयाज्मो रबेद्राज्मॊ भ्रद्शश्रीरलबते प्तश्रमभ ्॥
प्तधप्तभ प्तधप्तभ प्तधभ ् प्तधप्तभ प्तधॊप्तधप्तभ प्तधॊप्तधप्तभ दॊ दप्तब ्नाद वुऩूणभमे ।
                                                                  ु ु             ल       शतफॊधरबेद्बॊधुॊ धनभ्रद्शो धनॊ रबेत ्।
                                                                                               ु ल
घुभघुभ घुॊघुभ घुॊघुभ घुॊघुभ ळॊखप्तननाद वुलाद्यनुते ॥                                      कीप्ततलशीनो रबेत्कीप्ततं प्रप्ततद्षाॊ च रबेद् ध्रुलभ ्॥
लेदऩुयाणेप्तत शाव वुऩूस्जत लैटदकभागल प्रदळलमुते ।                                         वललभॊगरदॊ स्तोत्रॊ ळोकवॊताऩनाळनभ ्।
जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन श्री धनरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥8॥                                शऴालनॊदकयॊ ळद्वद्धभल भोषवुरृत्प्रदभ ्॥
                                                                                          ॥ इप्तत श्रीदे लकृ त रक्ष्भीस्तोत्रॊ वॊऩूणभ ् ॥
                                                                                                                                    ल
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                                   जफ रक्ष्भीजी को प्तभरी वजा?
                                                                                          त्रलजम ठाकुय
      एक टदन बगलान त्रलष्णु औय भाता रक्ष्भी भ्रभण कयने एलॊ भनुष्मं को
दे खने क प्तरमे ऩृर्थली ऩय आमं। टकन्तु भाता रक्ष्भी को भ्रभण शे तु वाथ
        े
राने क कायण बगलान त्रलष्णु ने एक ळतल यखी, औय काशा टक तुभ
      े
उत्तय टदळा टक तयप नशीॊ दे खोगी ।
      भाता रक्ष्भी ने अऩनी वशभप्तत दे दी औय ले ळीघ्र शी ऩृर्थली
ऩय भ्रभण क प्तरमे प्तनकर गमे । ऩृर्थली ऩय चायं औय वुन्दयता
          े
टदख यशी थी औय लशाॉ ऩय फशुत शी ळास्न्त थी । ऩृर्थली का
यभस्णम द्रश्म दे खकय भाता रक्ष्भी को फशोत टश प्रळन्न शुई औय
लश बूर गमी टक बगलान त्रलष्णु ने उनवे क्मा कशा था ।
प्रळन्नता एलॊ उत्वुकता लळ रक्ष्भी जी उत्तय टदळा भं दे खने रगी ।
उत्तय टदळा भं उन्शं ने अत्मॊत खुफवूयत परं का एक फगीचा दे खा
                                       ू
जशाॉ वे फशुत टश वुॊदय खुळफू आ यशी थी । भाता रक्ष्भी त्रफना वोचे
शी उव फगीचे ऩय उतयी औय लशाॉ वे एक पर तोि प्तरमे । बगलान
                                   ू
त्रलष्णु ने जफ मश द्रश्म दे खा तो उन्शंने भाता रक्ष्भी को अऩनी बूर माद
टदराते शुले कशा टक टकवी वे त्रफना ऩूछे कछ बी नशीॊ रेना चाटशमे ।
                                        ु
      इतना कशते शुले बगलान त्रलष्णु टक आॊखो वे आॉवू आ गमे ! भाता रक्ष्भी ने अऩनी बूर स्लीकाय टक औय
बगलान त्रलष्णु वे भापी भाॉगी । तफ बगलान त्रलष्णु फोरे टक तुभने जो बूर टक शं उवक प्तरमे तुम्शं वजा बी बुगतनी
                                                                               े
ऩिे गी । तुभ स्जव पर को उवक भारी वे ऩूछे त्रफना प्तरमा शं अफ तुभ उवी क घय भं 3 वार क प्तरमे लशाॊ काभ
                   ू       े                                          े             े
कयोगी उवकी दे खबार कयोगी । तबी भं तुम्शं फैकण्ि भं लात्रऩव फुराऊगा। भाता रक्ष्भी एक औयत का रुऩ रेकय उव
                                            ु                   ॊ
खेत क भाप्तरक भाधला क ऩाव गमी । लश एक गयीफ तथा फिे ऩरयलाय का भुस्खमा था । उवक वाथ उवकी ऩत्नी, दो
     े               े                                                       े
फेिे औय तीन फेटिमाॊ वफ प्तभरकय एक छोिी वी झोऩिी भं यशते थे । उनक ऩाव वम्ऩत्रत्त क नाभ ऩय प्तवप लशी एक
                                                                े                े            ल
छोिा वा फगीचे का िु किा था । ले उवी वे शी अऩना गुजय-फवय कयता था । भाता रक्ष्भी उवक घय भं गमी तो भाधला
                                                                                  े
ने उन्शं दे खा औय ऩूछा टक लश कौन शं । तफ भाता रक्ष्भी ने कशा टक भेयी दे खबार कयने लारा कोई नशीॊ शं भुझ ऩय
दमा कयो औय भुझे अऩने मशाॉ यशने दो भं आऩका वाया काभ करुॉ गी । भाधल एक दमारु औय उदाय इनवान था रेटकन
लश गयीफ बी था, औय लश जो कभाता था उवभं तो फशुत शी भुस्श्कर वे उवी क घय का खचाल चरता था ऩयन्तु टपय
                                                                  े
बी उवने वोचा टक मटद भेये तीन टक जगश चाय फेटिमाॉ शोती तफ बी तो लश मशाॉ यशती मश वोचकय उवने भाता रक्ष्भी
को अऩने मशाॉ ळयण दे दी औय इव तयश भाता रक्ष्भी तीन वार तक उवक मशाॉ काभ कयती यशी ।
                                                            े
      जैवे शी भाता रक्ष्भी उवक मशाॉ आमी तो उवने एक गाम खयीद री स्जस्वे उवकी कभाई बी फढ़ गमी अफ तो
                              े
उवने कछ जभीन औय जेलय बी खयीद प्तरमे थे औय इव तयश उवने अऩने प्तरमे एक घय औय अच्छे कऩिे खयीदे ।
      ु
तथा अफ शय टकवी क प्तरमे एक अरग वे कभया बी था । इतना वफ प्तभरने ऩय भाधल ने वोचा टक मश वफ कछ भुझे
                े                                                                        ु
इवी औयत (भाता रक्ष्भी) क घय भं प्रलेळ कयने क फाद प्तभरा शं लशी शभाये बाग्म को फदरने लारी शं । 2.5 वार
                        े                   े
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प्तनकरने क फाद भाता रक्ष्भी ने उव नमे घय भं प्रलेळ टकमा औय उनक वाथ एक ऩरयलाय क वदस्म टक तयश यशी
          े                                                   े               े
ऩयन्तु उन्शंने खेत ऩय काभ कयना फॊद नशीॊ टकमा ।
                                                                      उन्शं तो अबी अऩने 6 भशीने औय ऩूये कयने थे। अफ भाता
                                                   रक्ष्भी ने अऩने 3 वार ऩूये कय प्तरमे थी। एक टदन भाधल अऩना काभ खत्भ
                                                       कयक फैरगािी ऩय अऩने घय रौिा तो अऩने दयलाजे ऩय अच्छे यत्न जटित
                                                          े
                                                          ऩोळाक ऩशने तथा अनभोर जेलयं वे वुवस्ज्जत एक खुफवूयत औयत को
                                                            दे खा ।
                                                                                       उवने कशा टक लश कोई औय नशीॊ भाता रक्ष्भी
                                                              शं । तफ भाधल औय उवक घय लारे आद्ळमल चटकत शी यश गमे टक
                                                                                 े
                                                              जो स्त्री शभाये वाथ यश यशी थी लश कोई औय नशीॊ भाता रक्ष्भी स्लमॊ
                                                              थी । इव ऩय उन वबी क नेत्रं वे आॉवू टक धाया फशने रगी औय
                                                                                 े
                                                             भाधला फोरा टक मश क्मा भाॉ शभवे इतना फिा अऩयाध कवे शो गमा
                                                                                                            ै
                                                            । शभने स्लमॊ भाता रक्ष्भी वे शी काभ कयलामा । भाता शभं भाप कय
                                                          दे ना । तफ भाधल फोरा टक शे भाता शभ ऩय दमा कयो । शभभे वे कोई
                                                       बी नशीॊ जानता था टक आऩ भाता रक्ष्भी शं । शे भाता शभं लयदान
                                                    दीस्जमे । शभायी यषा करयमे ।
                                              तफ भाता रक्ष्भी भुस्कयाते शुले फोरी टक शे भाधल तुभ टकवी प्रकाय टक प्तचन्ता
                                                                   ु
भत कयो तुभ एक फशुत शी दमारु इनवान शो औय तुभने भुझे अऩने मशाॉ आवया टदमा शं उन तीन वारं टक भुझे माद
शं भं तुभ रोगं क वाथ एक ऩरयलाय टक तयश यशी शूॉ । इवक फदरे भं भं तुम्शं लयदान दे ती शूॉ टक तुम्शाये ऩाव कबी
                े                                  े
बी धन टक औय खुप्तळमं टक कभी नशीॊ शोगी । तुम्शं लो वाये वुख प्तभरंगे स्जवक तुभ शकदाय शो । इतना कशकय
                                                                         े
रक्ष्भी जी अऩने वोने वे फने शुमे यथ ऩय वलाय शोकय फैकण्ठ रोक चरी गमी । भाता रक्ष्भी ने कशा टक जो रोग
                                                    ु
दमारु, औय वच्चे रृदम लारे शोते शं भं शभेळा लशाॉ प्तनलाव कयती शूॉ । शभं गयीफं टक वेला कयनी चाटशमे ।



                                      क्मा आऩ टकवी वभस्मा वे ग्रस्त शं ?
                            ु
  आऩक ऩाव अऩनी वभस्माओॊ वे छिकाया ऩाने शे तु ऩूजा-अचलना, वाधना, भॊत्र जाऩ इत्माटद कयने का वभम नशीॊ
     े
  शं ? अफ आऩ अऩनी वभस्माओॊ वे फीना टकवी त्रलळेऴ ऩूजा-अचलना, त्रलप्तध-त्रलधान क आऩको अऩने कामल भं
                                                                              े
  वपरता प्राद्ऱ कय वक एलॊ आऩको अऩने जीलन क वभस्त वुखो को प्राद्ऱ कयने का भागल प्राद्ऱ शो वक इव प्तरमे
                     े                    े                                                े
  गुरुत्ल कामालरत द्राया शभाया उद्दे श्म ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो द्राया प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म
  मुि त्रलप्तबन्न प्रकाय क मन्त्र- कलच एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय तक ऩशोचाने का शै ।
                          े                                                   े
                                                             गुरुत्ल कामालरम:
                                        Bhubaneswar- 751 018, (ORISSA) INDIA,
                                       Call Us : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785,
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                               रक्ष्भीजी क स्लगल रोक जाने टक कथा
                                          े

                                                                                                           याकेळ ऩॊिा
       एक फाय की फात शै , याजा फप्तर वभम त्रफताने क प्तरए एकान्त स्थान ऩय गधे का लेळ रेकय प्तछऩे शुए थे। दे लयाज
                                                   े
इन्द्र उनवे प्तभरने क प्तरए जगश-जगश उन्शं ढू ॉ ढ यशे थे।
                     े
       एक टदन इन्द्र ने उन्शं खोज प्तनकारा औय उनक प्तछऩने का कायण जानकय उन्शं कार का भशत्ल फताकय उन्शं
                                                 े
तत्लसान का फोध कयामा।
       तबी याजा फप्तर क ळयीय वे एक टदव्म तेज लारी स्त्री प्तनकरी। उवे दे खकय इन्द्र ने ऩूछा दै त्मयाज! मश स्त्री कौन
                       े
शै ? मश दे ली, भानुष्म अथला आवुयी ळत्रि भं वे कौन-वी ळत्रि शै ?” याजा फप्तर फोरे-“दे लयाज! मे दे ली तीनं ळत्रिमं भं वे
कोई नशीॊ शं ।
       आऩ स्लमॊ इनवे ऩूछ रं। इन्द्र क ऩूछने ऩय ले ळत्रि फोरीॊ दे लेन्द्र! भुझे न तो दै त्मयाज फप्तर जानते शं औय न शी
                                     े
तुभ मा कोई अन्म दे लगण। ऩृर्थली रोक ऩय रोग भुझे आटदकार वे अनेक नाभं वे ऩुकायते शं । श्री, रक्ष्भी आटद भेये
नाभ शं । इन्द्र फोरे दे ली! आऩ इतने वभम वे याजा फप्तर क ऩाव शं रेटकन ऐवा क्मा कायण शै टक आऩ याजा फप्तर को
                                                       े
छोिकय भेयी ओय आ यशी शं ?
       रक्ष्भी फोरीॊ दे लेन्द्र! भुझे भेये स्थान वे कोई बी शिा मा टिगा नशीॊ वकता शै । भं वबी क ऩाव कार क अनुवाय
                                                                                              े         े
आती-जाती यशती शूॉ। जैवा कार का प्रबाल शोता शै भं उतने शी वभम तक उवक ऩाव यशती शूॉ। भं वभम क अनुळाय
                                                                   े                      े
एक को छोिकय दवये क ऩाव प्तनलाव कयती शूॉ।”
             ू    े
       इन्द्र फोरे दे ली! आऩ अवुयं क मशाॉ प्तनलाव क्मं नशीॊ कयतीॊ?” रक्ष्भी फोरीॊ दे लेन्द्र! भेया प्तनलाव लशीॊ शोता शै जशाॉ
                                    े
वत्म एलॊ धभल क अनुवाय कामल शोते शं, व्रत औय दान दे ने क कामल शोते शं।
              े                                        े
       अवुय वत्मलादी थे, ब्राह्मणं की यषा कयते थे, ऩशरे इस्न्द्रमं को लळ भं कय वकते थे, अफ इनक मे गुण नद्श
                                                                                              े
शोते जा यशे शं । अवुय अफ तऩ-उऩलाव नशीॊ कयते, मस, शलन, दान आटद वे इनका कोई वॊफॊध ळेऴ नशीॊ शै ।
       ऩशरे मे योगी, स्स्त्रमं, लृद्धं, दफरं की यषा कयते थे, गुरुजन का आदय कयते थे, रोगं को षभादान दे ते थे।
                                         ु ल
रेटकन अफ अशॊ काय, भोश, रोब, क्रोध, आरस्म, अत्रललेक, काभ आटद ने इनक ळयीय भं जगश फना री शै ।
                                                                  े
       मे रोग ऩळु तो ऩार रेते शं रेटकन उन्शं चाया नशीॊ स्खराते, उनका ऩूया दध प्तनकार रेते शं औय ऩळुओॊ क फच्चे
                                                                           ू                           े
बूख वे चीत्कायते शुए भय जाते शं ।
       मे अऩने फच्चं का रारन-ऩारन कयना बूरते जा यशे शं । इनभं आऩवी बाईचाया वभाद्ऱ शो गमा शै । रूि,
खवोि, शत्मा, व्मप्तबचाय, करश, स्स्त्रमं की ऩप्ततव्रता नद्श कयना शी इनका धभल शो गमा शै । वूमोदम क फाद तक वोने क
                                                                                                े             े
कायण स्नान-ध्मान वे मे त्रलभुख शोते जा यशे शं । इवप्तरए भेया भन इनवे उचि गमा।
       दे लताओॊ का भन अफ धभल भं आवि शो यशा शै । इवप्तरए अफ भं इन्शं छोिकय दे लताओॊ क ऩाव प्तनलाव करूगी।
                                                                                    े              ॉ
भेये वाथ श्रद्धा, आळा, षभा, जमा, ळास्न्त, वॊतप्तत, धृप्तत औय त्रलजप्तत मे आठं दे त्रलमाॉ बी प्तनलाव कयं गी।
       दे लेन्द्र! अफ आऩको सात शो गमा शोगा टक भंने इन्शं क्मं छोिा शै । वाथ शी आऩको इनक अलगुणं का बी सान
                                                                                       े
शो गमा शोगा।” तफ इन्द्र ने रक्ष्भी को प्रणाभ टकमा औय उन्शं आदय वटशत स्लगल रे गए।
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                      धन प्राप्तद्ऱ औय वुख वभृत्रद्ध क प्तरमे लास्तु प्तवद्धाॊत
                                                      े
                                                                                                       प्तचॊतन जोळी
       आज क बौप्ततक मुग भं शय कामल धन क उऩय प्रत्मष मा अप्रत्मष रुऩवे प्तनबलय कयता शं इव प्तरमे प्रत्मेक
           े                           े
व्मत्रि टक मशी इच्छा शोती शं टक उवक ऩाव अऩाय धन दौरत एलॊ जीलन उऩमोगी वायी वुख वुत्रलधाए उप्रब्ध शो जो
                                   े
एक वभृद्ध व्मत्रि क ऩाव भं शोती शं , एलॊ उवकी वभृत्रद्ध एलॊ उन्नप्तत टदन प्रप्ततटदन फढती जाए।
                   े
       आऩ अऩने घय भं धन एलॊ फशुभूल्म आबूऴण, जलाशयात इत्माटद टक वुयषा शे तु अरभायी मा कळ फोक्व यखते शं ,
                                                                                      ै
स्जस्वे धन वुयस्षत यशे          औय उवभे                                        फढ़त शोती यशं । इवक प्तरमे लास्तु वे
                                                                                                  े
वॊफॊप्तधत धन वॊचम शे तु कछ उऩाम।
                         ु
       लास्तु क अनुळाय धन एलॊ
               े                                                                 फशु भूल्म वाभग्री को उत्तय टदळा भं
यखे। उत्तय टदळा भं कफेय का लाव
                    ु                                                            शोता शं । एलॊ कफेय धन क दे लता शं
                                                                                                ु       े
एलॊ उत्तय टदळा ऩय उनका प्रबाल                                                    यशता शं । इव प्तरमे अऩने व्मलवाम
स्थान मा घय भं धन को वुयस्षत                                                     यखने शे तु उत्तय टदळा का चुनाल कयं ।
उत्तय - व्मलवाम स्थान मा घय भं                                                   अरभायी को उत्तय टदळा क कभये भं
                                                                                                       े
उवे   दस्षण    टदळा     की    दीलाय    वे                                        विाकय एवे यखे टक उवका भुख
उत्तय टक तयप यशे मा आऩका भुख                                                     अरभायी खोरते मा फॊध कयते वभम
दस्षण टदळा टक औय यशं । उत्तय टक                                                  औय खुरने लारी अरभायी एलॊ कळ
                                                                                                           ै
फोक्व भं यखे गमे धन एलॊ आबूऴण                                                    टक प्तनयॊ तय लृत्रद्ध शोती यशती शं ।
ऩूलल - ऩूलल टक औय          खुरने    लारी                                         अरभायी एलॊ कळ फोक्व भं धन
                                                                                             ै
यखने वे उवभं फढ़ोतयी शोती यशती                                                   शै ।   रेटकन     उत्तय    को    वलल    श्रेद्ष
भानागमा शं ।
दस्षण - दस्षण टक औय खुरने लारी                                               अरभायी एलॊ कळ फोक्व भं धन यखने वे
                                                                                         ै
धन एलॊ आबूऴण जो शं उवभे भं कभी आजाप्तत शं क्मोटक एवी स्स्थप्तत भे अरभायी मा कळ फोक्व शोने वे आभदनी वे
                                                                             ै
खचाल अप्तधक शोता शं एलॊ वॊचम टकमे गमे धन भं बी कभी आजाती शं । एलॊ व्मत्रि ऩय कजल चढ जाता शं ।
ऩस्द्ळभ - ऩस्द्ळभ टक औय खुरने लारी अरभायी एलॊ कळ फोक्व भं धन एलॊ आबूऴण यखने वे उव घय भे धन किी
                                               ै
भेशनत वे कबी कबाय प्राद्ऱ शोता शं एलॊ टिक ऩाता शं , अन्म था अन्म वॊफॊप्तध मा प्तभत्र लगल वे वशामता वे प्राद्ऱ शोने लारा
धन बी टिकता नशीॊ शं ।


                                               धन लृत्रद्ध टिब्फी
 धन लृत्रद्ध टिब्फी को अऩनी अरभायी, कळ फोक्व, ऩूजा स्थान भं यखने वे धन लृत्रद्ध शोती शं स्जवभं कारी शल्दी,
                                     ै
 रार- ऩीरा-वपद रक्ष्भी कायक शकीक (अकीक), रक्ष्भी कायक स्पटिक यत्न, 3 ऩीरी कौिी, 3 वपद कौिी, गोभती
             े                                                                      े
 चक्र, वपद गुॊजा, यि गुॊजा, कारी गुॊजा, इॊ द्र जार, भामा जार, इत्मादी दरब लस्तुओॊ को ळुब भशुतल भं तेजस्ली
         े                                                             ु ल

 भॊत्र द्राया अप्तबभॊत्रत्रत टकम जाता शं ।                                              भूल्म भात्र Rs-730
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                                       दे लउठनी एकादळी व्रत कथा

                                                                                             स्लस्स्तक.ऎन.जोळी
        दे लउठनी एकादळी टक व्रत कथा टक ऩौयास्णक कथा क अनुळाय टकवी एक याजा क याज्म भं वबी रोग एकादळी का व्रत
                                                     े                     े
यखते थे। एकादळी क टदन याज्म टक प्रजा तथा नौकय-चाकयं वे रेकय ऩळुओॊ तक बोजन भं अन्न नशीॊ टदमा जाता था।
                 े
        एक टदन दवये याज्म का एक व्मत्रि याजा क ऩाव आकय फोरा- भशायाज! कृ ऩा कयक भुझे आऩक मशाॊ काभ ऩय यख रं।
                ू                             े                               े        े
तफ याजा ने उव व्मत्रि क वाभने एक ळतल यखी टक तुम्शं योज खाने को वफ कछ प्तभरेगा, ऩय एकादळी को बोजन भं अन्न नशीॊ
                       े                                           ु
प्तभरेगा।
        उव व्मत्रि ने नौकयी टक रारच भं उव वभम याजा को शाॉ कय दी, ऩय
एकादळी क टदन जफ उवे पराशाय का वाभान टदमा गमा तो लश याजा क
        े                                                े
वाभने जाकय प्तगि-प्तगिाने रगा भशायाज! पराशाय वे भेया ऩेि नशीॊ बये गा।
भं बूखा शी भय जाऊगा। कृ प्मा भुझे बोजन भं अन्न दे दो। याजा ने उवे ळतल
                 ॉ
माद टदराई, ऩय लश अन्न छोिने को याजी नशीॊ शुआ, तफ याजा ने उवे बोजन
भं अन्न टक वाभग्री आटद टदए।
        लश अऩनी टदनचमाल क अनुळाय नदी टकनाये ऩशुॉचा औय स्नान कय
                         े
बोजन ऩकाने रगा। जफ बोजन फन गमा तो लश बगलान को फुराने रगा
आओ बगलान! बोजन तैमाय शं । फुराने ऩय ऩीताम्फय धायण टकए बगलान
चतुबज रूऩ भं आ ऩशुॉचे तथा प्रेभ वे उवक वाथ बोजन कयने रगे। बोजनाटद
    ुल                                े
कयक बगलान अॊतधालन शो गए तथा लश अऩने काभ ऩय चरा गमा।
   े
        ऩॊद्रश टदन फाद अगरी एकादळी को लश याजा वे कशने रगा टक
भशायाज, भुझे दगुना वाभान दीस्जए। उव टदन तो भं बूखा शी यश गमा। याजा ने
              ु
कायण ऩूछा तो उवने फतामा टक शभाये वाथ बगलान बी खाते शं । इवीप्तरए शभ दोनं क प्तरए मे वाभान ऩूया नशीॊ शोता। मश वुनकय
                                                                          े
याजा को फिा आद्ळमल शुआ। याजा फोरे भं नशीॊ भान वकता टक तुम्शाये वाथ बगलान बी खाते शं । भं तो इतना व्रत यखता शूॉ, ऩूजा
कयता शूॉ, ऩय बगलान ने भुझे कबी दळलन नशीॊ टदए।
        याजा टक फात वुनकय लश फोरा- भशायाज! मटद त्रलद्वाव न शो तो वाथ चरकय दे ख रं। याजा एक ऩेि क ऩीछे प्तछऩकय फैठ
                                                                                                े
गमा। उव व्मत्रि ने बोजन फनामा तथा बगलान को ळाभ तक ऩुकायता यशा, ऩयॊ तु बगलान न आए। अॊत भं उवने कशा- शे बगलान!
मटद आऩ नशीॊ आए तो भं नदी भं कदकय प्राण त्माग दॉ गा।
                             ू                  ू
        रेटकन बगलान नशीॊ आए, तफ लश प्राण त्मागने क उद्दे श्म वे नदी टक तयप फढ़ा। प्राण त्मागने का उवका दृढ़ इयादा जान
                                                  े
ळीघ्र शी बगलान ने प्रकि शोकय उवे योक प्तरमा औय वाथ फैठकय बोजन कयने रगे। खा-ऩीकय ले उवे अऩने त्रलभान भं त्रफठाकय
अऩने धाभ रे गए। मश दे ख याजा ने वोचा टक व्रत-उऩलाव वे तफ तक कोई पामदा नशीॊ शोता, जफ तक भन ळुद्ध न शो। इववे याजा
को सान प्तभरा। लश बी भन वे व्रत-उऩलाव कयने रगा औय अॊत भं स्लगल को प्राद्ऱ शुआ।
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दवयी कथा
 ू
        एक याजा था। उवक याज्म भं प्रजा वुखी थी। एकादळी को कोई बी अन्न नशीॊ फेचता था। वबी पराशाय कयते थे। एक फाय
                       े
बगलान ने याजा टक ऩयीषा रेनी चाशी। बगलान ने एक वुॊदयी का रूऩ धायण टकमा तथा विक ऩय फैठ गए। तबी याजा उधय वे
प्तनकरा औय वुॊदयी को दे ख चटकत यश गमा। उवने ऩूछा- शे वुॊदयी! तुभ कौन शो औय इव तयश मशाॉ क्मं फैठी शो?
        तफ वुॊदय स्त्री फने बगलान फोरे- भं प्तनयाप्तश्रता शूॉ। नगय भं भेया कोई जाना-ऩशचाना नशीॊ शं , टकववे वशामता भाॉगू? याजा
उवक रूऩ ऩय भोटशत शो गमा था। लश फोरा- तुभ भेये भशर भं चरकय भेयी यानी फनकय यशो।
   े
        वुॊदयी फोरी- भं तुम्शायी फात भानूॉगी, ऩय तुम्शं याज्म का अप्तधकाय भुझे वंऩना शोगा। याज्म ऩय भेया ऩूणल अप्तधकाय शोगा। भं
जो बी फनाऊगी, तुम्शं खाना शोगा। याजा उवक रूऩ ऩय भोटशत था, अत् उवने उवकी वबी ळतं स्लीकाय कय रीॊ। अगरे टदन
          ॉ                             े
एकादळी थी। यानी ने शुक्भ टदमा टक फाजायं भं अन्म टदनं टक तयश अन्न फेचा जाए। उवने घय भं भाॊव-भछरी आटद ऩकलाए तथा
ऩयोवकय याजा वे खाने क प्तरए कशा। मश दे खकय याजा फोरा-यानी! आज एकादळी शं । भं तो कलर पराशाय शी करूगा। तफ यानी ने
                     े                                                           े              ॉ
ळतल टक माद टदराई औय फोरी- मा तो खाना खाओ, नशीॊ तो भं फिे याजकभाय का प्तवय काि रूॉगी। याजा ने अऩनी स्स्थप्तत फिी यानी
                                                             ु
वे कशी तो फिी यानी फोरी- भशायाज! धभल न छोिं , फिे याजकभाय का प्तवय दे दं । ऩुत्र तो टपय प्तभर जाएगा, ऩय धभल नशीॊ प्तभरेगा।
                                                      ु
        इवी दौयान फिा याजकभाय खेरकय आ गमा। भाॉ टक आॉखं भं आॉवू दे खकय लश योने का कायण ऩूछने रगा तो भाॉ ने उवे
                          ु
वायी लस्तुस्स्थप्तत फता दी। तफ लश फोरा- भं प्तवय दे ने क प्तरए तैमाय शूॉ। त्रऩताजी क धभल टक यषा शोगी, जरूय शोगी।
                                                        े                           े
        याजा द्खी भन वे याजकभाय का प्तवय दे ने को तैमाय शुआ तो यानी क रूऩ वे बगलान त्रलष्णु ने प्रकि शोकय अवरी फात
              ु             ु                                        े
फताई- याजन! तुभ इव कटठन ऩयीषा भं ऩाव शुए। बगलान ने प्रवन्न भन वे याजा वे लय भाॉगने को कशा तो याजा फोरा- आऩका
टदमा वफ कछ शं । शभाया उद्धाय कयं । उवी वभम लशाॉ एक त्रलभान उतया। याजा ने अऩना याज्म ऩुत्र को वंऩ टदमा औय त्रलभान भं
         ु
फैठकय लैकठ धाभ को चरा गमा।
         ुॊ

                                                   श्री शनुभान मॊत्र
ळास्त्रं भं उल्रेख शं की श्री शनुभान जी को बगलान वूमदेल ने ब्रह्मा जी क आदे ळ ऩय शनुभान जी को अऩने तेज का
                                                    ल                  े
वौलाॉ बाग प्रदान कयते शुए आळीलालद प्रदान टकमा था, टक भं शनुभान को वबी ळास्त्र का ऩूणल सान दॉ गा। स्जववे मश
                                                                                             ू
तीनोरोक भं वलल श्रेद्ष लिा शंगे तथा ळास्त्र त्रलद्या भं इन्शं भशायत शाप्तवर शोगी औय इनक वभन फरळारी औय कोई
                                                                                       े
नशीॊ शोगा। जानकायो ने भतानुळाय शनुभान मॊत्र की आयाधना वे ऩुरुऴं की त्रलप्तबन्न फीभारयमं दय शोती शं , इव मॊत्र भं
                                                                                         ू
अद्भत ळत्रि वभाटशत शोने क कायण व्मत्रि की स्लप्न दोऴ, धातु योग, यि दोऴ, लीमल दोऴ, भूछाल, नऩुॊवकता इत्माटद अनेक
    ु                    े
प्रकाय क दोऴो को दय कयने भं अत्मन्त राबकायी शं । अथालत मश मॊत्र ऩौरुऴ को ऩुद्श कयता शं । श्री शनुभान मॊत्र व्मत्रि
        े         ू
को वॊकि, लाद-त्रललाद, बूत-प्रेत, द्यूत टक्रमा, त्रलऴबम, चोय बम, याज्म बम, भायण, वम्भोशन स्तॊबन इत्माटद वे वॊकिो वे
यषा कयता शं औय प्तवत्रद्ध प्रदान कयने भं वषभ शं ।
श्री शनुभान मॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी क प्तरमे गुरुत्ल कामालरम भं वॊऩक कयं ।
                   े                          े                              ल

                                                                                           भूल्म Rs- 730 वे 10900 तक

                                          GURUTVA KARYALAY
                                   Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
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                               दरयद्रता वे भुत्रि क ळीघ्र प्रबाली उऩाम
                                                   े

                                                                                              प्तचॊतन जोळी
         नलम्फय 2010 क अॊक भं प्रकाप्तळत रेख दरयद्रता वे भुत्रि को आऩ वबी ऩाठक फॊध/ फशनो क भागलदळलन शे तु टकव
                      े                                                           ु       े
कायणो वे आती शं प्तनधलनता एलॊ दरयद्रता प्तनलायण क उऩाम का त्रलस्तृत लणलन कयक उव रेख का ऩुन् प्रकाळान टकमा गमा
                                                 े                          े
शं ।


 प्रप्ततटदन दे य उठने वे दरयद्रता आती शं ।
 घय का वाया कचया झािू रगाकय एक कोने भं वभेि कय यखने वे आती शं । कचये को घय वे फाशय पक दं ।
                                                                                     े
 वॊध्मा वभम घयभं दीऩक नशीॊ जराने वे दरयद्रता आती शं ।
 गुरुलाय क टदन फार-दाढीॊ(शजाभत) कािने वे प्तनधलनता आती शं ।
           े
 दीऩ वे अगयफत्ती जराने वे दरयद्रता आती शं । (अगयफत्ती अरग भाप्तचव वे जरामे)
 गुरुलाय क टदन बोजन भं भाॊवाशाय खाने वे दरयद्रता आती शं ।
           े
 गुरुलाय क टदन धोफी को कऩिे धोने क प्तरमे दे ने वे दरयद्रता आती शं ।
           े                       े
 गुरुलाय क टदन ऩीरी प्तभट्िी वे फार धोने वे प्तनधलनता आती शं ।
           े
 वूमालस्त शोने क फाद घय भं झािू रगाने वे घय भं दरयद्रता आती शं ।
                 े
 अद्धल लत्ताकय (अधल गोराकाय) बूखि मा बलन क स्लाप्तभत्ल वे दरयद्रता
         ृ                       ॊ         े
प्राद्ऱ शोती शं ।
 गुरु का टदमा गमे भॊत्र क त्माग कयने वे व्मत्रि दरयद्र शो जाता शं ।
                          े
 गुरु वे कऩि ल प्तभत्र वे चोयी कयने वे दरयद्रता आती शं ।
 कऩिे क आवन ऩय फैठ कय ऩूजा-ऩाठ भॊत्र जऩ अनुद्षान इत्माटद कयने
        े
वे दरयद्रता आती शं ।
 ऩत्थय एलॊ प्तभट्िी क फतलनं भं बोजन कयने वे प्तनधलनता आती शं ।
                      े
 बोजन औय दध को त्रफना ढक यखने वे प्तनधलनता आती शं ।
           ू             े
 घय भं वुफश झािू -फुशायी कयक वाप नशीॊ कयने वे प्तनधलनता आती शं ।
                             े
 इस्न्द्रमं को वॊमभ भं नशीॊ यख कय ऩयस्त्री एलॊ ऩयधन टक काभना कयने वे प्तनधलनता आती शं ।
 इद्वय भं श्रद्धा नशीॊ यखने वे व्मत्रि दरयद्र शो जाता शं ।
 टदन भं अकायण वोने वे घय भं दरयद्रता आती शं ।
 योग वे ऩीटित व्मत्रिमं को वाॊत्लना दे ने क फजाम उऩशाव कयने वे प्तनधलनता आती शं ।
                                            े
 जया-जया फात भं स्खन्न शोने लारे जया-जया फात भं अऩने लचनं वे भुकय ने लारे व्मत्रि दरयद्र शो जाता शं ।
 छर-कऩि औय स्लाथल का आश्रम रेकय, दवयं क ळोऴण का आश्रम रेकय धन प्राद्ऱ कयने वे प्तनधलनता आती शं । उवक
                                   ू    े                                                            े
ऩाव धन आ वकता शै ऩयन्तु उवक ऩाव धन भशारक्ष्भी नशीॊ आ वकती।
                           े
 जूठे भुॉश यशने वे दरयद्रता आती शं ।
70                                 नलम्फय 2012



 भैरे-कचैरे-पिे शुए कऩिे ऩशनने वे प्तनधलनता आती शं ।
        ु     े
 दीन-द्स्खमं को वताने वे प्तनधलनता आती शं ।
       ु
 भाता-त्रऩता क आप्तळलालद नशीॊ रेने वे प्तनधलनता आती शं ।
               े
 धभल, ळास्त्र औय वॊतं टक प्तनॊदा कयने वे व्मत्रि दरयद्र शो जाता शं ।
                     ू
 घी को जूठे शाथ वे छने वे प्तनधलनता आती शं ।
 जूठा शाथ प्तवय ऩय रगाने वे प्तनधलनता आती शं ।
 जूठे भुॉश ळुब लस्तुओॊ का स्ऩळल कयने वे दरयद्रता आती शं ।
 भॊगरलाय को ऋण रेने वे दरयद्रता आती शं ।
 ऩाऩकभल भं यत यशने वे प्तनधलनता आती शं ।
 कठोय-किक लचनो का प्रमोग कयने वे प्तनधलनता आती शं ।
 फिे -फुजुगो का अनादय कयने वे उनकी फात नशीॊ भानने वे प्तनधलनता आती शं ।
 जो स्त्री-ऩुरुऴ अऩने ऩप्तत-ऩत्नी को दफाकय यखने टक इच्छा यखने वे प्तनधलनता आती शं ।
 लावी पक का उऩमोग कयने वे प्तनधलनता आती शं ।
        ू
 दगध मुि स्थान ऩय अप्तधक रोगो क वाथ भं वोने वे प्तनधलनता आती शं ।
   ु ं                          े
 पिा-िू िा आवन का उऩमोग कयने वे प्तनधलनता आती शं ।
 स्भळान टक प्तचता क अॊगाये , अस्स्थ, बस्भ, गाम, कऩाव(रुई), ऩूज्म एलॊ गुरु जन, ब्राह्मण को ऩैय रगाने वे
                    े
प्तनधलनता आती शं ।
 अऩने एक ऩैय को दवये ऩैयवे घीवने वे दफाने वे प्तनधलनता आती शं ।
                  ू
 स्जव जर भं नाखून मा फार प्तगये शं उव जर का वेलन मा स्ऩळल कयने वे प्तनधलनता आती शं ।
 चतुदलळी एलॊ अभालस्मा क टदन ळायीरयक वुख बोगने वे प्तनधलनता आती शं ।
                        े
 त्रफना लस्त्र क वोने वे प्तनधलनता आती शं ।
                 े
 कचया प्तनकारते लि उिने लारी धुक का स्ऩळल ळयीय को शोने वे दरयद्रता आती शं । (झािू रगाते लि वालधानी फयते
जेवे धूर का स्ऩळल आऩक ळयीय को नशं)
                     े
 फैठे-फैठे खुयळी-िे फर-ऩरॊग इत्माटद ऩय त्रफना लजश वे फजाने (ढोर जेवे) वे प्तनधलनता आती शं ।
 अऩने ळयीय ऩय त्रफना लजश वे फजाने (ढोर जेवे) वे प्तनधलनता आती शं ।
 स्नान कयने वे उऩयाॊत ळयीय ऩय तेर रगाने वे प्तनधलनता आती शं । (स्नान वे ऩूलल तेर रगारे)
 अऩने ऩैय टक एिी का भस्तक ऩय स्ऩळल कयने वे प्तनधलनता आती शं ।
 अॊधेये कभये भं वोने वे प्तनधलनता आती शं । (कभये भं थोिी वे योळनी जरुय यखे)
 यात्री कार भे धायण कयने लारे लस्त्र टदन भं धायण कयने वे प्तनधलनता आती शं ।( यात भं एलॊ टदन भं धायण कयने
लारे कऩिे अरग-अरग यखं। टदन क यात भं एलॊ यात क टदन भं कबी नशीॊ ऩशने)
                            े                े
 लावी एलॊ ळुष्क बोजन खाने वे दरयद्रता आती शं ।
 ळुक्रलाय एलॊ अभालस्मा क टदन तेर-गॊध-द्रव्म को ळयीय ऩय रागने वे दरयद्रता आती शं ।
                         े
 अऩने फाएॊ शाथ वे भाता का स्ऩळ कयने वे दरयद्रता आती शं । ( मटद स्ऩळल कये तो दोनो शाथो वे कयं कलर फाएॊ
                                                                                               े
शाथ वे स्ऩळल न कयं ।)
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 अऩत्रलत्र अलस्था भं वूमल-चॊद्र-तायं का दळलन कयने वे प्तनधलनता आती शं ।
 वूमालस्त का दळलन कयने वे प्तनधलनता आती शं ।
 ऩयस्त्री-ऩयऩुरुऴ को नग्न अलस्था भं दे खने वे प्तनधलनता आती शं ।
 ऩय धन,स्त्री, वॊऩत्रत्त टक इच्छा कयने वे दरयद्रता आती शं ।
 नाखून, कािे , खून, प्तभट्िी, कोमरा मा ऩानी वे बूप्तभ ऩय अनालश्मक रेखन-प्तचत्रण कयने वे   दरयद्रता आती शं ।
 स्लमॊ भारा गूॊथ(भारा फना) कय स्लमॊ धायण कयने वे दरयद्रता आती शं ।
 स्लमॊ चॊदन घीव कय स्लमॊ रगाने वे दरयद्रता आती शं । (टकवी औय वे घीवलाकय रगामे)
 ब्राह्मण टक प्तनन्दा कयने वे दरयद्रता आती शं ।
 फेठे-फेठे मा वोते शुए दोनो ऩैयो को त्रफना लजश टशराने-नचाने वे दरयद्रता आती शं ।
 बोजन क फाद तुयॊत दातुन कयने वे दरयद्रता आती शं ।
        े
 अन्म का झुठा अन्न खाने वे दरयद्रता आती शं ।
 अऩने इद्श का त्माग कय अन्म क इद्श भं आस्था यखने वे दरयद्रता आती शं ।
                              े
 ऩय स्त्री-ऩुरुऴ टक वेला कय क अऩने ऩरयलाय क रोगो को कद्श दे ने वे दरयद्रता आती शं ।
                              े             े
 ऩरयश्रभ-ऩुरुऴाथल वे स्खन्न शोने लारे व्मत्रि टक वशामता कयने वे दरयद्रता आती शं ।
 अमोग्म भनुष्म को दान दे न मा वशामता कयने वे दरयद्रता आती शं ।
 प्रप्ततऩदा को गृशायम्ब कयने वे दरयद्रता आती शं ।
 घय का द्राय आध्भात (परा शुआ) शोनेऩय दरयद्रता आती शं ।
                       ू
 भुख्म द्रायक ऊऩय द्राय औय द्रायक वाभने (आभने-वाभने) द्राय शोने वे दरयद्रता आती शं ।
              े                   े
 बलन भं ईळान, आग्नेम ल ऩस्द्ळभभं ऊची औय नैऋत्म नीची बूप्तभ शोने वे दरयद्रता आती शं ।
                                   ॉ
 भुख्म द्रायक वाभने दीलाय मा फालिी शोनेवे दरयद्रता शोती शै ।
              े
 नर वे ऩानी िऩकते यशने वे दरयद्रता आती शं , ऩानी का अऩव्मम शोने वे लरुण दे ल का श्राऩ रगता शं ।
 वॊध्मा वभम बोजन औय ऩढ़ने वे धन नाळ शोता शं ।
 दे ली-दे लताओॊ ऩय चढ़ामे गमे पर मा शाय क वूखने ऩय बी घय भं यकखने वे दरयद्रता आती शं । ( पर-शाय शो टकवी
                                ू         े                                                ू
प्रास्िीक फैग भं बयकय यख दं टपय उवे एक-दो भाश भं फाय इकठ्ठे फशते जर भं त्रलवस्जलत कयदं ।)
 िू िा-पिा पनॉचय, फतलन, काॊच, पिे शुए कऩिे यखने वे दरयद्रता आती शं ।
         ू
 घय टक टदलायो ऩय, पळल ऩय ऩेन, ऩंप्तवर,चाक इत्माटद वे प्तरखना-प्तचत्रकायी कयने वे दरयद्रता आती शं ।



दरयद्रता प्तनलायण क उऩाम
                   े
 प्रप्ततटदन प्रात: जल्दी उठ कय इद्श आयाधना कयने वे दरयद्रता दय शोती शं ।
                                                              ू
 गुरुलाय क टदन घय भं गाम क गोफय का रेऩन आटद कयने वे दरयद्रता दय शोती शं ।
           े               े                                   ू
 गुरुलाय क टदन ऩीरी लस्तु का बोजन कयने वे दरयद्रता दय शोती शं ।
           े                                         ू
 दान-ऩुण्म इत्माटद कभल कयते यशने वे दरयद्रता दय शोती शं ।
                                               ू
 प्राण-प्रप्ततत्रद्षत वात भुखी रुद्राष धायण कयने वे दरयद्रता वे भुत्रि प्तभरती शं ।
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 घय भं प्राण-प्रप्ततत्रद्षत प्राण-प्रप्ततत्रद्षत दस्षणालतॉ ळॊख टक घयभं स्थाऩना वे रक्ष्भी का स्थामी लाव शोता शं , ळत्रुओॊ वे
यषा शोती शै , योग, कण, असानता एलॊ दरयद्रता वे ळीघ्र भुत्रि प्तभरती शं ।
 घय भं प्राण-प्रप्ततत्रद्षत त्रलष्णु ळॊख (द्वेत यॊ ग का ळॊख) स्थात्रऩत कयने वे एलॊ प्तनत्म ऩूजन कयने वे दरयद्रता दय शोती
                                                                                                                   ू
शं ।
 श्री वूि का ऩठन कयने वे बी दरयद्रता वे भुत्रि प्तभरती शं ।
 श्री वूि टक ऋचाओॊ का श्रलण मा ऩठन कयक प्तनमप्तभत शलन कयने वे त्रलप्तबन्न कद्श दय शोकय ऐद्वमल प्राप्तद्ऱ शोती शं ।
                                       े                                         ू
रक्ष्भी जी टक कृ ऩा प्राद्ऱ शोने वे द्ख, दरयद्रता, योग, कद्श, कजल वे स्लत् भुत्रि प्तभरती शं ।
                                     ु
 भान्मता शं टक दीऩालरी क टदन जर भं तथा तेर भं रक्ष्भी का लाव शोता शं । इव प्तरमे दीऩालरी क टदन ळयीय
                         े                                                                 े
ऩय तेर टक भाप्तरळ कयक जर (गॊगा स्नान मा जर भं गॊगाजर जर प्तभराकय) वे स्नान कयने वे दरयद्रता वे भुत्रि
                     े
प्तभरती शं ।
 कनकधाया स्तोत्र क ऩाठ क ऩठन एलॊ श्रलण वे दरयद्रता वे भुत्रि प्तभरती शं ।
                   े     े
 कनकधाया मॊत्र को दरयद्रता का नाळ कयने शे तु याभफाण भाना जाता शं इव प्तरमे कनकधाया मॊत्र टक आयाधना कयने
वे दरयद्रता वे भुत्रि प्तभरती शं ।
 दगाल फीळा मॊत्र क ऩूजन वे बी दरयद्रता का नाळ शोता शं ।
   ु               े
 भाश टक दोनं वॊकि चतुथॉ क प्तनमप्तभत व्रत वे दरयद्रता का नाळ शोता शं ।
                          े
 रक्ष्भी गणेळ मॊत्र क ऩूजन वे दरयद्रता का नाळ शोता शं ।
                      े
 श्रीमॊत्र क ऩूजन वे दरयद्रता का नाळ शोकय बौप्ततक वुख, ळाॊप्तत ल वौबाग्म की प्राप्तद्ऱ शोती शं ।
             े
 ऩायद श्री मॊत्र मा प्तळलप्तरॊग का ऩूजन दरयद्रता वे भुत्रि टदराता शं ।
 रक्ष्भी मॊत्र मा अद्श रक्ष्भी मॊत्र क ऩूजन वे दरयद्रता का नाळ शोता शै ।
                                       े
 याभामण टक प्तनम्न चौऩाइ का ऩाठ कयने वे दरयद्रता का नाळ शोता शं ।
चौऩाइ
                                              अप्ततप्तथ ऩूज्म त्रप्रमतभ ऩुयारय क।
                                                                                े
                                               काभद धन दारयद दलारयक ॥
                                                                   े
 फृशस्ऩप्तत ग्रश का यत्न वुनेरा धायण कयने वे दरयद्रता दय शोती शं ।
                                                        ू
 श्री मॊत्र जटित नलयत्न धायण कयने वे वे दरयद्रता का नाळ शोता शं ।
 दरयद्रता प्तनलायण शे तु आत्भा भं अचर श्रद्धा शो, तो दरयद्र भनुष्म बी धनलान शो जाते शं ।
 कल्ऩलृष मॊत्र क ऩूजन वे दरयद्रता का नाळ शोता शं ।
                 े
 प्रदोऴ व्रत कयने वे ळप्तन वे ऩीटित वभस्माए कभ शोती शं एलॊ दरयद्रता का नाळ शोता शं ।
 आॊगन भं तुरवी का ऩौधा रगा कय उवका ऩूजन वे दरयद्रता दय शोती शं ।
                                                      ू
 ऩीऩर लृष की प्तनत्म तीन फाय ऩरयक्रभा कयने औय जर चढाने ऩय दरयद्रता का नाळ शोता शं ।
 प्तभद्षान अकरे नशीॊ खाकय ऩरयलाय एलॊ प्तभत्र लगल भं फाॊि कय खाने वे दरयद्रता का नाळ शोता शं ।
              े
 ऩीऩर क फने प्तळलप्तरॊग का ऩूजन कयने वे दरयद्रता का प्तनलायण शोता शं ।
        े
 प्तळल ऩॊचाषयी भॊत्र (ॐ नभ् प्तळलाम) का जऩ कयने लारे को दरयद्रता नशी आती शं ।
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 घय क भुख्म द्राय क उऩय अॊदय टक ओय गणेळ प्रप्ततभा मा प्तचत्र रगाने वे घय वे दरयद्रता दय शोकय ऩून् प्रलळ नशीॊ
      े             े                                                                  ू
कयती। ( घय क फाशय रगाने वे दरयद्रता आप्तत शं । मटद फशाय रगाना शो तो इव प्रकाय रगामे जेवे अॊदय फाशाय दोनो
            े
ओय गणेळ जी टक दोनो ऩीठ एक टश स्थान ऩय प्तभरती शं।)
 फुधलाय क टदन वपद कऩिे का झॊिा फना क ऩीऩर क लृष ऩय रगाने वे प्तनधलनता दय शोती शं ।
          े      े                   े      े                           ू
 रक्ष्भी जी क वभष घी का दीऩक रगाने वे प्तनधलनता दय शोती शं ।
              े                                   ू
 प्रप्तत ळुक्रलाय क टदन अळोक लृष क 13 अखॊटित ऩत्ते राकय ळुद्ध जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩिे वे ऩोछकय इन 13 ऩत्तो
                    े              े
का भौरी (कराला) वे तोयण फनाकय घय क भुख्म द्राय ऩय रगाने वे दरयद्रता एलॊ ळत्रु वे भुत्रि प्तभरती शं ।
                                  े


नोि:
जैवे आत्भफर भं श्रद्धा उत्ऩन्न शोते टश कामय व्मत्रि बी ळूयलीय शो जाते शं , प्रभादी एलॊ आरवी व्मत्रि बी उद्यभी शो
जाते शं , भूखल व्मत्रि बी त्रलद्रान शो जाते शं , योगी व्मत्रि बी प्तनयोग शो जाते शं , उवी प्रकाय वे उप्तचत कभल कयने वे दरयद्र
व्मत्रि बी धनलान शो जाते शं ।



              वॊऩूणल प्राणप्रप्ततत्रद्षत 22 गेज ळुद्ध स्िीर भं प्तनप्तभलत अखॊटित

                                       ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र
ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र (स्िीर भं) को तीव्र प्रबालळारी फनाने शे तु ळप्तन की कायक धातु ळुद्ध स्िीर(रोशे )
भं फनामा गमा शं । स्जव क प्रबाल वे वाधक को तत्कार राब प्राद्ऱ शोता शं । मटद जन्भ किरी भं
                        े                                                         ॊु
ळप्तन प्रप्ततकर शोने ऩय व्मत्रि को अनेक कामं भं अवपरता प्राद्ऱ शोती शै , कबी व्मलवाम भं घिा,
              ू
नौकयी भं ऩये ळानी, लाशन दघिना, गृश क्रेळ आटद ऩये ळानीमाॊ फढ़ती जाती शै ऐवी स्स्थप्ततमं भं
                         ु ल
प्राणप्रप्ततत्रद्षत ग्रश ऩीिा प्तनलायक ळप्तन मॊत्र की अऩने को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थाऩना कयने वे
अनेक राब प्तभरते शं । मटद ळप्तन की ढै ़मा मा वाढ़े वाती का वभम शो तो इवे अलश्म ऩूजना चाटशए।
ळप्तनमॊत्र क ऩूजन भात्र वे व्मत्रि को भृत्मु, कजल, कोिल कळ, जोिो का ददल , फात योग तथा रम्फे वभम
            े                                            े
क वबी प्रकाय क योग वे ऩये ळान व्मत्रि क प्तरमे ळप्तन मॊत्र अप्तधक राबकायी शोगा। नौकयी ऩेळा आटद
 े            े                        े
क रोगं को ऩदौन्नप्तत बी ळप्तन द्राया शी प्तभरती शै अत् मश मॊत्र अप्तत उऩमोगी मॊत्र शै स्जवक द्राया
 े                                                                                         े
ळीघ्र शी राब ऩामा जा वकता शै ।                                                                   भूल्म: 1050 वे 8200

                                        GURUTVA KARYALAY
            92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
                               Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
                    Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
              Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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                               दीऩ जराने का धाप्तभलक भशत्ल क्मा शं ?
                                                                                          प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी
                                                                  शोना अवॊबल वा प्रप्ततत शोता शं । इवी कायण बायप्ततम
                                                                  वभ्मताओॊ भं अस्ग्न को दे ल कशा गमा शं ।

                                                                            अस्ग्न को दे लता भनकय उवका ऩूजन टकमा जाता शं ।
                                                                  क्मोटक एवा भाना जाता शं , टक मटद अस्ग्न दे ल क्रोप्तधत शोजामे
                                                                  तो फिे -फिे भशरं ल ऊचे-ऊचे बलनं को धूरभं उिादे औय याख
                                                                                      ॊ   ॊ
                                                                  फनादे ।

                                                                            इव प्तरमे प्रकाळ का ऩूजन कय उन्शं ळाॊत यखने का
                                                                  प्रमाव टकमा जाता शं ।

                                                                  शभाये प्रभुख धभल ग्रॊथो भं एक ऋग्लेद का वलल प्रथभ भॊत्र शी
                                                                  प्रकाळ वे ळुरू शोता शै ।

                                                                  भॊत्र:

                                                                  प्रकाळभीरे         ऩुयोटशतॊ   मसस्म       दे लभृस्त्लजभ ्।   शोतायॊ
        प्रकाळ, तेज ऊजाल क कदयप्तत स्त्रोत शं । ऊजाल क त्रफना
                          े ु                         े           यत्नधातभभ ्॥
भानल जीलन का कोई अस्स्तत्ल नशीॊ शं । वभग्र ब्रह्माॊि भं           बालाथल:- वललप्रथभ आयाधन टकए जाने लारे, मस को प्रकाप्तळत
प्रकाळ ऊजाल का प्रभुख स्त्रोत एक भात्र वूमल शं , उव क अराला
                                                     े            कयने लारे, ऋतुओॊ क अनुवाय मस वम्ऩाटदत कयने लारे,
                                                                                    े
कोई औय प्रभुख स्त्रोत का अस्स्तत्ल नशीॊ शं । मशी कायण शं टक       दे लताओॊ का आह्वान कयने लारे तथा धन प्रदान कयने लारं भं
आज वूमल क तेज वे शी शभाया जीलन वुचारु रुऩ वे प्रकाळभान
         े                                                        वललश्रद्ष अस्ग्न दे लता की भं स्तुप्तत कयता शूॊ।
                                                                        े
शं । लामु भॊिर भं व्माद्ऱ लामुकण (धूर) औय फादर इत्माटद
                                                                            अनाटदकार वे भनुष्म का वफवे फिा ळत्रु अॊधकाय
वबी भं अऩनी चुम्फकीम ळत्रि शोती शं स्जवक कायण वफ एक
                                        े
                                                                  रुऩी असानता यशी शं । इव प्तरमे ऩुयातन कारवे टश
दवये की ओय आकत्रऴलत शोते यशते शं ।
 ू
                                                                  अॊधकाय को दय कयने लारा प्रकाळ भनुष्म का वफवे फिा
                                                                             ू
        इवी आकत्रऴलत शोने क कायण कण एक दवये वे ऩाव
                           े            ू                         प्तभत्र यशा शै ।
आते औय दय शोते यशते शं , स्जवक फर क कायण टश ऊजाल
        ू                     े    े                                        क्मोटक प्रकाळ शभं दे खने की ळत्रि दे ता शं ।
उत्ऩन्न शोती शं । इस्वे उत्ऩन्न शोने लारी उजाल को टश प्रकाळ       लामुभॊिर भं लस्तु टक वशी ऩशचान कयने क प्तरमे प्रकाळ
                                                                                                       े
कशा जाता शं ।                                                     आलश्मक शै ।
        प्रकाळ का शभाये जीलन भं फशुत भशत्ल शं , इव भशत्ल          उऩप्तनऴद भं इवी प्तरमे अॊधकाय वे ज्मोप्तत की ओय जाने
वे शय व्मत्रि बरी बाप्तत लाटकप शं । शभायी बायप्ततम वॊस्कृ प्तत    की काभना की गई शै ।
क धाप्तभलक कामलक्रभ भं बी अस्ग्न का त्रलळेऴ भशत्ल शं । एलॊ
 े                                                                अवतो भा वद्गभम
अस्ग्न प्रकाळ का प्रप्ततक शं जो मस, शलन, त्रललाश, वॊस्काय         तभवो भाॊ ज्मोप्ततगलभम
जेवे अन्म धाप्तभलक कभलकाॊिो भं त्रफना अस्ग्न क त्रफना वॊऩन्न
                                              े                   भृत्मोभाल अभृतॊ गभम
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ळास्त्रो भं अस्ग्न क तीन रूऩं लणलन टकमा गमा
                    े
शं ।
         ऩृर्थली ऩय अस्ग्न, अन्तरयष भं त्रलद्युत औय आकाळ
भं वूम। प्रकाळ क उद्दगभ क त्रलऴम भं कशा गमा शै टक
      ल         े        े
कार क वॊघऴल-भॊथन वे उवका जन्भ शुआ। वूमल टक
     े
अस्ग्न अॊधकाय को प्तभिाता शै , अवुयी ळत्रि को ियाता,
प्रकाळ का आह्वान कयता, प्तचय मुला औय प्राचीन ऩुयोटशत
शै । ऋग्लेद क अनुळाय भशात्रऴल बृगु ऋत्रऴ ने अस्ग्न की
             े
खोज की।
                                                            ऩकाने क आत्रलष्काय क वाथ दीऩ प्तभट्िी का फनने रगा।
                                                                   े            े
अस्ग्न क प्तरमे ऋग्लेद भं कशा गमा शं ।
        े                                                   प्राचीन कार वे धप्तनकं द्राया फिे करात्भक टदमं का
                                                            प्रमोग टकमा जाता था, जो ऩत्थय, धातु, कीभती यत्नं, वोने
अस्ग्नभीऱे ऩुयोटशतॊ (ऋग्लेद)                                औय चाॊदी क शोते थे। मे छोिे फिे वबी आकायं क थे।
                                                                      े                                े

                                                            वभम क वाथ वाथ दीऩ स्तॊब बी प्रचरन भं आए।
                                                                 े
ऋग्लेद
                                                                    याभामण भं उल्रेख प्तभरता शं टक जफ शनुभान
इॊ द्र ज्मोप्तत् अभृतॊ भतेऴु
                                                            रॊका ऩशुॉचे तो उन्शं वुनशये दीऩं को दे ख कय भ्रभ शुआ
वूमांळ वॊबलो दीऩ्
                                                            टक कशीॊ ले स्लगल भं तो नशीॊ आ गए। उन्शं लशाॊ ऩीरे औय
अथालत: वूमल क अॊळ वे दीऩ की उत्ऩत्रत्त शुई।
             े
                                                            जरते शुए स्लणलदीऩ टदखाई टदए।
दीऩ जीलन की ऩत्रलत्रता, बत्रि, अचलना औय आळीलालद
स्लरुऩ भाना जाता शं ।                                               बायतीम ळास्त्रो भे उल्रेख प्तभरता शै , टक अस्ग्न का
                                                            वॊफॊध भनुष्म क जन्भ वे रेकय भयण तक शोता शं । मशी
                                                                          े

         वूमल क अॊळ वे उत्ऩन्न ऩृर्थली की अस्ग्न को स्जव
               े                                            कायण शं शभायी वॊस्कृ प्तत भं त्रलप्तबन्न व्रत-त्मोशाय इत्माटद

ऩात्र भं स्थात्रऩत टकमा गमा उवे आज दीऩक क रूऩ भं
                                         े                  भं दीऩ क भशत्ल शं । दीऩलरी बी शभाये प्रभुख त्मौशायो

शभाये घयं भं ऩूजा जाता शै ।                                 भं वे एक शै , स्जव भं उजाल क प्रप्ततक क रुऩ भं दीऩक
                                                                                        े          े
                                                            जराने टक ऩयॊ ऩया शं ।
ळुबभ कयोप्तत करमाणभ ् आयोग्मभ ् धन वम्ऩदा                           शभाये ळास्त्रं भं दीऩज्मोप्तत टक भटशभा का त्रलस्तृत
ळत्रुफुस्ध्द त्रलनाळाम दीऩज्मोप्तत नभस्तुते ।।              लणलन टकमा गमा शं । ळास्त्रं भं दीऩज्मोप्तत को ऩाऩनाळक,
                                                            ळत्रुओॊ टक लृत्रद्ध योकने लारी, आमु एलॊ आयोग्म प्रदान
अथालत: शभे ळुब, वुन्दय औय कल्माणकायी, आयोग्म औय             कयने लारी शं ।
वॊऩदा को दे ने लारे शे दीऩक टक ज्मोप्तत, शभाये ळत्रं टक
फुत्रद्ध क त्रलनाळ क प्तरए शभ तुम्शं नभस्काय कयते शं ।
          े         े                                       दीऩो ज्मोप्तत् ऩयभ ् ब्रह्म दीऩो ज्मोप्ततजलनादल न्।
                                                            दीऩो शयतु भं ऩाऩभ ् वाध्मदीऩ नभोऽस्तु ते।।

         ऩूयातन कार भं दीऩ का ऩात्र स्पटिक, ऩाऴाण मा        ळुबभ ् कयोतु कल्माणभ ् आयोग्मभ ् वुखवम्ऩदभ ्।

वीऩ का शोता था। कारान्तय भं प्तभट्िी को गढने औय             ळत्रुफुत्रद्धत्रलनाळभ ् च दीऩज्मोप्ततनलभोऽस्तु ते।।
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                                                             ऩाऩ-ताऩ का शयण शोता शै , ळत्रुफुत्रद्ध का ळभन शोता शै
      भान्मता शं टक मटद घय भं दीऩक की रौ ऩूलल
                                                             औय ऩुण्मभम, वुखभम जीलन की लृत्रद्ध शोती शै ।
       टदळा की ओय शो, तो आमु टक लृत्रद्ध कयती शं ।
      दीऩक की रौ ऩस्द्ळभ टदळा की ओय शो, तो द्ख
                                             ु               ऩुरूऴोत्तभ भशात्त्म्म भं दीऩक टक ज्मोप्तत क प्तरमे
                                                                                                        े
       की लृत्रद्ध कयती शं ।
                                                             कशा गमा शं ।
      दीऩक की रौ उत्तय टदळा की ओय शो, तो स्लास्र्थम
                                                               रूषैरक्ष्भी त्रलनाळ्स्मात द्वैतेयन्नषमो बलेत ्
                                                                    ल
       औय प्रवन्नता टक लृत्रद्ध कयती शं ।
                                                             अप्तत यिऴु मुध्दाप्तन भृत्मु्कृ ष्ण प्तळखीऴु च।।
                                                                     े
      दीऩक की रौ दस्षण टदळा की ओय शो, तो शाप्तन
       कयती शं ।                                             अथालत: कोयी ळुष्क (रूखी) ज्मोप्तत रक्ष्भी का नाळ,
                                                             द्वेतज्मोप्तत अन्नषम, अप्तत रार ज्मोप्तत मुद्ध औय कारी
मटद घय भं आऩ दीऩक जरामं तो उवे आऩक घयक उत्तय
                                  े   े
                                                             ज्मोप्तत भृत्मु की द्योतक शोती शं ।
अथला ऩूलल कोने भं शोना चाटशए। दीऩज्मोप्तत क प्रबाल वे
                                           े



                                            कनकधाया मॊत्र
आज क मुग भं शय व्मत्रि अप्ततळीघ्र वभृद्ध फनना चाशता शं । धन प्राप्तद्ऱ शे तु प्राण-प्रप्ततत्रद्षत कनकधाया
    े
मॊत्र क वाभने फैठकय कनकधाया स्तोत्र का ऩाठ कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । इव कनकधाया मॊत्र
       े
टक ऩूजा अचलना कयने वे ऋण औय दरयद्रता वे ळीघ्र भुत्रि प्तभरती शं ।                        व्माऩाय भं उन्नप्तत शोती शं ,
फेयोजगाय को योजगाय प्राप्तद्ऱ शोती शं ।

श्री आटद ळॊकयाचामल द्राया कनकधाया स्तोत्र टक यचना कछ इव प्रकाय टक शं , स्जवक श्रलण एलॊ ऩठन
                                                   ु                        े
कयने वे आव-ऩाव क लामुभॊिर भं त्रलळेऴ अरौटकक टदव्म उजाल उत्ऩन्न शोती शं । टठक उवी प्रकाय वे
                े
कनकधाया मॊत्र अत्मॊत दरब मॊत्रो भं वे एक मॊत्र शं स्जवे भाॊ रक्ष्भी टक प्राप्तद्ऱ शे तु अचूक प्रबाला ळारी
                      ु ल
भाना गमा शं ।        कनकधाया मॊत्र को त्रलद्रानो ने स्लमॊप्तवद्ध तथा वबी प्रकाय क ऐद्वमल प्रदान कयने भं
                                                                                 े
वभथल भाना शं । जगद्गरु ळॊकयाचामल ने दरयद्र ब्राह्मण क घय कनकधाया स्तोत्र क ऩाठ वे स्लणल लऴाल
                    ु                                े                    े
कयाने का उल्रेख ग्रॊथ ळॊकय टदस्ग्लजम भं प्तभरता शं ।
कनकधाया भॊत्र:- ॐ लॊ श्रीॊ लॊ ऐॊ ह्रीॊ-श्रीॊ क्रीॊ कनक धायमै स्लाशा'

                                                                                    भूल्म: Rs.730 वे Rs.8200 तक

अप्तधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं ।
                         ल

                                       GURUTVA KARYALAY
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                 धनत्रमोदळी ऩय मभ-दीऩदान अकारभृत्मु वे फचाता शं ?
                                                                                                       प्तचॊतन जोळी
       धनत्रमोदळी क टदन टकमे जाने लारे कभल भं एक
                   े
भशत्त्लऩूणल कभल मभ क प्तनप्तभत्त टकमा जाने लारा दीऩदान
                    े
शं ।
       टशन्द ू धभल ळास्त्र भं प्तनणलमप्तवन्धु क अॊतगलत
                                               े
प्तनणलमाभृत औय स्कन्दऩुयाण उल्रेख शं टक काप्ततलक कृ ष्ण
त्रमोदळी की वॊध्मा प्रदोऴ कार क वभाम घय वे फाशय
                               े
मभ क प्तनप्तभत्त दीऩदान कयने वे ऩरयलाय भं अकारभृत्मु
    े
का बम दय शोता शं ।
       ू
       ळास्त्रंि भत क अनुळाय मभदे लता बगलान वूमल
                     े
औय भाता वॊसा क ऩुत्र शं । लैलस्लत भनु, अस्द्वनीकभाय
              े                                 ु
एलॊ यै लॊत उनक बाई शं तथा मभुना उनकी फशन शै ।
              े
मभदे ल की वौतेरी भाॉ छामा वे ळप्तन, तऩती, त्रलत्रद्श, वालस्णल
भनु आटद 10 वौतेरे बाई -फशन बी शं । ऩौयास्णक
भान्मता क अनुळाय मभ ळप्तन ग्रश क अप्तधदे लता शं ।
         े                      े
       मभदे लता प्रत्मेक प्राणी क ळुब-अळुब कभं क
                                 े              े
अनुवाय पर दे ने का कामल कयते शं । इवी कायण उन्शं
                                                                 क प्तनप्तभत्त दीऩ औय नैलेद्य वभत्रऩलत कयने ऩय अकार
                                                                  े
मभदे लता को धभलयाज          कशा गमा शं । क्मोटक अऩने
                                                                 भृत्मु का नाळ शोता शं । मश स्लमॊ मभयाज का कथन था।
कतलव्म क प्रप्तत मभदे ल त्रुटि यटशत कामल व्मलस्था की
        े
                                                                        मभदीऩदान कलर प्रदोऴकार भं कयने का त्रलधान
                                                                                  े
स्थाऩना कयते शं । मभदे ल का अऩना अरग वे एक रोक
                                                                 शं । मभदीऩदान क प्तरए प्तभट्िी का एक फिा दीऩक रेकय
                                                                                े
शं , स्जवे उनक नाभ वे शी मभरोक कशा जाता शं ।
              े
                                                                 उवे उवे स्लच्छ जर वे धो रेना चाटशए। टपय स्लच्छ रुई
ऋग्लेद भं उल्रेख शै टक मभरोक भं प्तनयन्तय अनद्वय
                                                                 रेकय दो रम्फी फत्रत्तमॉॊ फना रं।
अथालत ् स्जवका नाळ न शो ऐवी ज्मोप्तत जगभगाती यशती
                                                                        फत्रत्तमाॊ इतनी रम्फी फनामे की दीऩक वे उवके
शं । मभरोक अनद्वय शं औय मभरोक भं कोई भयता नशीॊ
                                                                 दोनं औय क छोय प्तनकरे शुए शो। फत्रत्तमॉॊ को दीऩक भं
                                                                          े
शं ।
                                                                 एक-दवये ऩय इव प्रकाय यखं टक दीऩक क फाशय फत्रत्तमं
                                                                     ू                             े
मभदे लताक स्लरुऩ का लणलन कयते शुले ग्रॊथकायो ने प्तरखा
         े
                                                                 क चाय भुॉश टदखाई दं । अफ दीऩक को प्ततर क तेर वे
                                                                  े                                      े
शं । मभ की आॉखं रार शं , उनक शाथ भं ऩाळ यशता शं ।
                            े
                                                                                          ु
                                                                 बय दं औय वाथ शी उवभं एक छिकी कारे प्ततर बी
इनका ळयीय नीरा शै औय मे दे खने भं उग्र शं । बंवा
                                                                 िार दं ।
इनकी वलायी शं । मे वाषात ् कार शं ।
                                                                        प्रदोऴकार भं इव प्रकाय त्रलप्तध वे तैमाय टकए गए
मभदीऩदान:
                                                                 दीऩक का योरी, अषत एलॊ ऩुष्ऩ वे ऩूजन कयना चाटशए।
मभदीऩदान क त्रलऴम भं स्कन्दऩुयाण भं कशा गमा शै टक
          े
काप्ततलक क कृ ष्णऩष भं त्रमोदळी क प्रदोऴकार भं मभयाज
          े                      े
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तत ऩद्ळात ् घय क भुख्म द्राय ऩय फाशय थोिी वी खीर,
                े                                         ॐ मभदे लाम नभ्। नभस्कायॊ वभऩलमाप्तभ॥
चालर अथला गेशूॉ वे ढे यी फनाकय उवक ऊऩय दीऩक को
                                  े
यखना चाटशए।                                               तत ऩद्ळमात ऩुष्ऩ दीऩक क ऩाव यख दं औय ऩुन् शाथ
                                                                                 े
       दीऩक को ढे यी ऩय स्थात्रऩत कयने वे ऩूलल उवे        भं नैलेद्यॊ क रुऩ भं एक फताळा रं तथा प्तनम्नप्तरस्खत
                                                                       े
प्रज्लप्तरत कय रं औय दस्षण टदळा की ओय दे खते शुए          भन्त्र का उच्चायण कयते शुए उवे दीऩक क वभीऩ शी यख
                                                                                               े
इव भन्त्र का उच्चायण कयते शुए चायभुॉश क दीऩक को
                                       े                  दं ।
खीर, चालर, गेशूॉ आटद की ढे यी क ऊऩय यख दं ।
                               े                          ॐ मभदे लाम नभ्। नैलेद्यॊ प्तनलेदमाप्तभ॥


       भृत्मुना ऩाळदण्िाभ्माॊ कारेन च भमा वश।             तत ऩद्ळमात शाथ भं थोिा वा जर रेकय आचभन के
       त्रमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज् प्रीमताप्तभप्तत॥
                                 ल                        प्तनप्तभत्त प्तनम्नप्तरस्खत भन्त्र का उच्चायण कयते शुए दीऩक
अथालत ्: त्रमोदळी को दीऩदान कयने वे भृत्मु, ऩाळ, दण्ि,    क वभीऩ जर को छोिे ।
                                                           े
कार औय रक्ष्भी क वाथ वूमनॊदन मभ प्रवन्न शं।
                े       ल                                 ॐ मभदे लाम नभ्। आचभनाथे जरॊ वभऩलमाप्तभ॥
उि भन्त्र क उच्चायण क ऩद्ळात ् शाथ भं ऩुष्ऩ रेकय
           े         े
प्तनम्नप्तरस्खत भन्त्र का उच्चायण कयते शुए मभदे ल को      तत ऩद्ळमात ऩुन् मभदे ल को ॐ मभदे लाम नभ्। भन्त्र
दस्षण टदळा भं नभस्काय कयं ।                               का उचायण कयते शुए दस्षण टदळा भं नभस्काय कयं ।




                     अवरी 1 भुखी वे 14 भुखी रुद्राष
गुरुत्ल कामालरम भं वॊऩणल प्राणप्रप्ततत्रद्षत एलॊ अवरी 1 भुखी वे 14 भुखी तक क रुद्राष उऩरब्ध शं ।
                      ू                                                     े
ज्मोप्ततऴ कामल वे जुिे़ फॊध/फशन ल यत्न व्मलवाम वे जुिे रोगो क प्तरमे त्रलळेऴ भूल्म ऩय यत्न, उऩयत्न
                           ु                                 े
मॊत्र, रुद्राष ल अन्म दरब वाभग्रीमाॊ एलॊ अन्म वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं । रुद्राष क त्रलऴम भं अप्तधक
                       ु ल                                                    े
जानकायी क प्तरए कामालरम भं वॊऩक कयं ।
         े                     ल

                                                  त्रलळेऴ मॊत्र
शभायं मशाॊ वबी प्रकाय क मॊत्र वोने-चाॊटद-ताम्फे भं आऩकी आलश्मिा क अनुळाय टकवी बी बाऴा/धभल
                       े                                         े
क मॊत्रो को आऩकी आलश्मक टिजाईन क अनुळाय २२ गेज ळुद्ध ताम्फे भं अखॊटित फनाने की त्रलळेऴ
 े                              े
वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं ।
अप्तधक जानकायी क प्तरए कामालरम भं वॊऩक कयं ।
                े                     ल

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                             धनत्रमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं टकमा जाता शं ?
                                                                                                                        प्तचॊतन जोळी
        ळास्त्रंि भत क अनुळाय धनत्रमोदळी क टकमे जाने
                      े                   े                               रोकलाप्तवमं का कल्माण शोगा। काप्ततलक कृ ष्ण त्रमोदळी को
लारे कभो भं मभदीऩदान को त्रलळेऴ प्रभुखता दी जाती शं ।                     प्रप्ततलऴल प्रदोऴकार     भं   जो अऩने      घय के      दयलाजे    ऩय
रेटकन      धनत्रमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं टकमा जाता शं                       प्तनम्नप्तरस्खत भन्त्र वे उत्तभ दीऩ दे ता शं , लश अऩभृत्मु शोने
इव क ऩीछे छऩी धाप्तभलक भान्मता वे कभ रोग शी ऩयीप्तचत
    े      ु                                                              ऩय बी मशॉॊ रे आने क मोग्म नशीॊ शै ।
                                                                                             े
शंगे!                                                                                 भृत्मुना ऩाश्दण्िाभ्माॊ कारेन च भमा वश।
        टशन्द ू धभल भं टकमे जाने लारी प्रत्मेक व्रत-तमोशाय,                           त्रमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज् प्रीमताप्तभप्तत॥
                                                                                                                ल
उत्वल, ऩूजन त्रलप्तध-त्रलधान, इत्माटद क ऩीछे कोई न कोई
                                       े                                  उवक फाद वे शी अऩभृत्मु अथालत ् अवाभप्तमक भृत्मु वे
                                                                             े
ऩौयास्णक    कथा      अलश्म    जुिी   शोती     शं    ।     इवी   प्रकाय    फचने क उऩाम क रूऩ भं धनत्रमोदळी ऩय मभ क प्तनप्तभत्त
                                                                                े      े                         े
धनत्रमोदळी ऩय मभदीऩदान कयना बी इवी प्रकाय ऩौयास्णक                        दीऩदान एलॊ नैलेद्य वभत्रऩलत कयने का कभल प्रप्ततलऴल टकमा
कथा वे जुिा शुआ शं । स्कन्दऩुयाण भं लैष्णलखण्ि के                         जाता शं ।
अन्तगलत    काप्ततक
                 ल    भाव     भशात्म्म   भं        इववे    वम्फस्न्धत     मभयाज की वबा: मभयाज की वबा का लणलन कयते शुए ग्रॊथ
ऩौयास्णक कथा का वॊस्षद्ऱ उल्रेख टकमा गमा शं ।                             कायं ने प्तरखा शं टक दे लरोक की चाय प्रभुख वबाओॊ भं वे
        ऩौयास्णक कथा क अनुळाय एक फाय मभदत फारकं
                      े                 ू                                 एक शै मभवबा । इव वबा का प्तनभालण त्रलद्वकभाल जी ने
एलॊ मुलाओॊ क प्राण शयते वभम ऩये ळान शो उठे । मभदत को
            े                                   ू                         टकमा था। मभवबा अत्मन्त त्रलळार वबा शै , इवकी 100
फिा द्ख शुआ टक ले फारकं एलॊ मुलाओॊ क प्राण शयने का
     ु                              े                                     मोजन रम्फाई एलॊ 100 मोजन चौिाई शै । इव प्रकाय मश
कामल कयते शं , ऩयन्तु मभदत कयते बी क्मा? उनका कामल शी
                         ू                                                लगालकाय शै । मभवबा का ताऩक्रभ अत्मन्त वुशालना अथालत ्
प्राण शयना शी शं । मभदत अऩने कतलव्म वे ले कवे त्रलभुख
                      ू                    ै                              न तो अप्तधक ळीतर शै औय न शी अप्तधक गभल शै ।
शोते?   मभदत क प्तरए एक औय कतलव्मप्तनद्षा का प्रद्ल था,
           ू  े                                                           मभवबा वबी क भन को अत्मन्त आनन्द दे ने लारी शै ।
                                                                                     े
दवयी ओय स्जन फारक एलॊ मुलाओॊ का प्राण शयकय राते थे ,
 ु                                                                        मभवबा भं न ळोक, न फुढ़ाऩा शै , न बूख शै , न प्माव शै औय
उनक ऩरयजनं क द्ख एलॊ त्रलराऩ को दे खकय स्लमॊ को
   े        े ु                                                           न शी मभवबा भं कोई अत्रप्रम लस्तु शं । इव प्रकाय मभवबा
शोने लारे भानप्तवक क्रेळ का प्रद्ल था। ऐवी स्स्थप्तत भं जफ                द्ख, कद्श एलॊ ऩीिा क कयणं का अबाल यशता शं । मभवबा
                                                                           ु                  े
मभदत फशुत टदन तक यशने रगे, तो त्रललळ शोकय ले अऩने
   ू                                                                      भं दीनता, थकालि अथला प्रप्ततकरता नाभभात्र को बी नशी
                                                                                                       ू
स्लाभी मभयाज क ऩाव ऩशुॉचे औय कशा टक भशायाज आऩक
              े                               े                           शै । मभवबा भं वदै ल ऩत्रत्रत वुगन्ध लारी ऩुष्ऩ भाराएॉ एलॊ
आदे ळ क अनुवाय शभ प्रप्ततटदन लृद्ध, फारक एलॊ मुला
       े                                                                  अन्म कई यम्म लस्तुएॉ त्रलद्यभान यशती शं ।
व्मत्रिमं क प्राण शयकय राते शं , ऩयन्तु जो अऩभृत्मु क
           े                                         े                            मभवबा भं अनेक याजा, ऋत्रऴल औय ब्रह्मत्रऴल मभदे ल
प्तळकाय शोते शं , उन फारक एलॊ मुलाओॊ क प्राण शयते वभम
                                      े                                   की उऩावना कयते यशते शं । ममाप्तत, नशुळ, ऩुरु, कातललीमल,
शभं भानप्तवक क्रेळ शोता शं । उवका कायण मश शै टक
                                                                          अरयद्शनेभी, कृ प्तत, प्तनप्तभ, भान्धाता, प्रतदलन, प्तळत्रल आटद याजा
उनक ऩरयजन अत्माप्तधक त्रलराऩ कयते शं औय स्जववे शभं
   े
                                                                          भृत्मु क उयान्त मशाॊ फैठकय धभलयाज की उऩावना कयते शं ।
                                                                                  े
फशुत अप्तधक द्ख शोता शं । क्मा फारक एलॊ मुलाओॊ को
             ु
                                                                          कठोय तऩस्मा कयने लारे, उत्तभ व्रत का ऩारन कयने लारे
अवाभप्तमक भृत्मु वे छिकाया नशीॊ प्तभर वकता शै ?
                     ु
        मभदत क भुख वे इतना वुनकय धभलयाज फोरे
           ू  े                                                           वत्मलादी, ळान्त, वॊन्मावी तथा अऩने ऩुण्मकभल वे ळुध्द एलॊ

दतगण तुभने फशुत अच्छा प्रद्ल टकमा शं । इववे भृत्मु
 ू                                                                        ऩत्रलत्र भशाऩुरुऴं का शी मभवबा भं प्रलेळ शोता शं ।
80                                         नलम्फय 2012




                                                ळास्त्रोि त्रलधान वे दीऩालरी ऩूजन
                                                                                                              आरोक ळभाल
शभाये धभलळास्त्रो भं काप्ततलक भाव भं दीऩ दान का त्रलळेऴ          अथालत: वभुद्र-भॊथन क वभम षीय वागय वे उत्ऩन्न
                                                                                     े
भशत्ल फतामा गमा शै । दीऩालरी भं दीऩदान का त्रलळेऴ भशत्ल          दे लताओॊ तथा दानलं द्राया नभस्काय टक गई वलल
फतामा शं ।                                                       दे लस्लरूत्रऩणी भाता। आऩको फाय-फाय नभस्काय शं । आऩ भेये
                                                                 द्राया टदमे शुए इव अघ्मल को स्लीकाय कयो।
श्रीऩुष्कयऩुयाण क अनुळाय:
                 े                                               इव टदन ऩूजन क फाद गाम को उिद क फिे स्खरा कय प्राथलना
                                                                              े                े
                                                                 कयने का त्रलधान शं ।
तुरामाभ ् प्ततरतैरेन वामॊकारे वभागते।
                                                                 वुयप्तब त्लॊ जगन्भातदे ली त्रलष्णुऩदे स्स्थता।
आकाळदीऩभ ् मो दद्यान्भावभेकभ ् शरयभ ् प्रप्तत।
                                                                 वललदेलभमे ग्रावॊ भमा दत्तप्तभभॊ ग्रव।।
भशतीभ ् प्तश्रमभाप्नोप्तत रूऩवौबाग्मवम्ऩदभ ्।।
                                                                 तत् वललभमे दे त्रल वललदेलैयरङ्कृ ते।
अथालत: जो व्मत्रि काप्ततलक भाव भं
                                                                 भातभलभाप्तबरात्रऴतॊ वपरॊ करु नस्न्दनी।।
                                                                                           ु
वॊध्मा       वभम             बगलान       श्री
                                                                 अथालत: शे जगदम्फे, शे स्लगल लाप्तवनी दे ली, शे वलल दे लभमी,
शरय(त्रलष्णु) क नाभ वे प्ततर क तेर
               े              े
                                                                              भेये द्राया अत्रऩत इव अन्न को ग्रशण कयो। शे
                                                                                               ल
का दीऩ जराता शं , उवे अतुर                                                          वभस्त दे लताओॊ द्राया अरॊकृत भाता नॊटदनी
रक्ष्भी, रूऩ, वौबाग्म औय वॊऩत्रत्त                                                      भेया भनोयथ ऩूणल कयो।
टक प्राप्तद्ऱ शोती शं ।                                                                 इवक फाद यात्र क वभम इद्श, ब्राह्मण,
                                                                                           े           े
दे लत्रऴल नायदजी क अनुवाय दीऩालरी
                  े                                                                     गौ, घय क लृद्धजनं टक आयती उतायने
                                                                                                े
ऩलल      द्रादळी,         त्रमोदळी,   चतुदलळी,                                          का त्रलधान शं ।
अभालस्मा औय प्रप्ततऩदा तक 5 टदन
                                                                                        त्रमोदळी (धनतेयव)
भनाना चाटशए। दीऩालरी ऩलल प्रत्मेक टदन
                                                                                 काप्ततलक कृ ष्ण त्रमोदळी को धनतेयव क रुऩ भं
                                                                                                                     े
अरग-अरग प्रकाय टक ऩूजा का त्रलधान शं ।
                                                                      भनामा जाता शं । ळास्त्रो भं उल्रेख प्तभरता शं टक
गोलत्व द्रादळी                                                   बगलान धन्लॊतयी ने वभुद्र-भॊथन क दौयान प्रकि शोकय द्खी
                                                                                                े                  ु
काप्ततलक भाव टक द्रादळी को गोलत्व द्रादळी क टदन दध दे ने
                                           े     ू               जनं क योगप्तनलायणाथल आमुलद का प्राकट्म टकमा था।
                                                                      े                   े
लारी गाम को उवक फछिे वटशत स्नान कयाकय लस्त्र ओढ़ा
               े                                                 धनतेयव क टदन वॊध्मा क वभम घय औय आॊगन भं शाथ भं
                                                                         े            े
कय गरे भं ऩुष्ऩभारा ऩशनाना, उवक वीॊग भॉढ़ाना, चॊदन का
                               े                                 जरता शुआ दीऩ रेकय प्तनचे टदमे भॊत्र वे बगलान मभयाज टक
प्ततरक कयना तथा ताॉफे क ऩात्र भं वुगन्ध, अषत, ऩुष्ऩ, प्ततर
                       े                                         प्रवन्नता शे तु इव भॊत्र क वाथ दीऩदान कयने का त्रलधान शं ।
                                                                                           े
औय जर का प्तभश्रण कय प्तनम्न भॊत्र वे गौ क चयणं का
                                          े                      भृत्मुना ऩाळदण्िाभ्माॊ कारेन श्माभमा वश।
प्रषारन कयना चाटशए।                                              त्रमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज् प्रीमताॊ भभ।।
                                                                                           ल
षीयोदाणललवम्बूते वुयावुयनभस्कृ ते।                               अथालत: त्रमोदळी क टदन दीऩदान वे ऩाळ औय दॊ िधायी भृत्मु
                                                                                  े
वललदेलभमे भातगृशाणाघ्मं नभो नभ्।।
              ल                                                  तथा कार क अप्तधऩप्तत दे ल बगलान मभ, दे ली श्माभावटशत
                                                                          े
                                                                 भुझ ऩय प्रवन्न शं।
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नयक चतुदलळी                                                  कयने वे अन्म टदनं की अऩेषा कई गुना अप्तधक राब प्राद्ऱ
काप्ततलक कृ ष्ण चतुदलळी को नयक चतुदलळी क रुऩ भं भनामा
                                        े                    शोता शं । दीऩालरी क टदन ऩशरे वे शी स्लच्छ टकमे गृश को
                                                                                े
जाता शं । इव टदन चतुभखी दीऩ का दान कयने का त्रलधान शं ।
                     ुल                                      वुवस्ज्जत कय बगलान नायामण क वाथ भाॊ रक्ष्भी टक भूप्ततल
                                                                                        े

भान्मता शं , दीऩ दान वे नयक बम वे भुत्रि प्तभरती शं ! नयक    मा प्तचत्र टक स्थाऩना कय उनका त्रलप्तधलत ऩूजन कयने का
                                                             त्रलधान शं ।
चतुदलळी टक यात को एक चाय भुख (चाय फत्ती) लारा दीऩ
जराकय प्तनचे टदमे भॊत्र वे दीऩदान कयने का त्रलधान शं ।
                                                             प्रप्ततऩदा
दत्तो दीऩद्ळतुदलश्माॊ नयकप्रीतमे भमा।                        काप्ततलक ळुक्र प्रप्ततऩदा को अन्नकि टदलव क रुऩ भं भनामा
                                                                                               ू       े

चतुलप्ततवभामुि् वललऩाऩाऩनुत्तमे।।
    ल ल                                                      जाता शं । इव टदन गाम को वजाकय, उनकी ऩूजा कयक प्तनचे
                                                                                                         े

आज चतुदलळी क टदन नयक क अप्तबभानी दे लता टक प्रवन्नता
            े         े                                      टदमे भॊत्र उच्चायण कयने का त्रलधान शं ।

क प्तरए एलॊ वभस्त ऩाऩं क त्रलनाळ क प्तरए भं चाय भुख
 े                      े         े                          रक्ष्भीमाल रोकऩारानाॊ धेनुरूऩेण वॊस्स्थता।

लारा चौभुखा दीऩ अत्रऩत कयता शूॉ।
                     ल                                       घृतॊ लशप्तत मसाथे भभ ऩाऩॊ व्मऩोशतु।।
                                                             अथालत: धेनुरूऩ भं स्स्थत जो रोकऩारं टक वाषात रक्ष्भी शं
दीऩालरी
                                                             तथा जो मस क प्तरए घी दे ती शं , लश गाम भाता भेये ऩाऩं का
                                                                        े
काप्ततलक अभालस्मा को दीऩालरी क रुऩ भं भनामा जाता शं ।
                              े
                                                             नाळ कये ।
इव टदन प्रात् उठकय स्नानाटद वे प्तनलृत्त शोकय जऩ-तऩ



                              अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलच
अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलच ल               उल्रेस्खत अन्म वाभग्रीमं को ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलद्रान
ब्राह्मणो द्राया वला राख भशाभृत्मुजम भॊत्र जऩ एलॊ दळाॊळ शलन द्राया प्तनप्तभलत कलच अत्मॊत
                                  ॊ
प्रबालळारी शोता शं ।


       अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलच
                                                                      अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम
              कलच फनलाने शे तु:
 अऩना नाभ, त्रऩता-भाता का नाभ,                                                    कलच
        गोत्र, एक नमा पोिो बेजे                                       दस्षणा भात्र: 10900

कलच क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी शे तु गुरुत्ल कामालरम भं वॊऩक कयं ।
     े                                                      ल
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                                     रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क वयर उऩाम
                                                         े
                                                                                               प्तचॊतन जोळी
        जो रोग बौप्ततक वुख भृत्रद्ध क कायक श्रीमॊत्र, दस्षणा लप्ततल
                                     े
ळॊख इत्मा आटद घय भं स्थात्रऩत कय ऩूज नशी कय ऩाते अथला इन
लस्तुओॊ को खरयदने भं अवभथल शो लश         रोग इव अनुबूत उऩामोको
को अऩनाकय जीलन भं वुख-वभृत्रद्ध एलॊ ऎद्वमल प्राद्ऱ कय वकते शं ।
   प्रात् उठते शी शस्तदळलन (प्रात् कय दळलनभ ्) कय दोनं शथेप्तरमं
    को 2-3 फाय भुॊश ऩय पयना चाटशमे।
                        े
   जफ बी टकवी कामल वे फाशय प्तनकरे तो घय ऩय आते वभम कछ
                                                      ु
    ना कछ वाथ रेकय शी आए खारी शाथ नशीॊ आए चाशे ऩेि का
        ु
    ऩत्ता-अखफाय मा जीलन जरुयत टक लस्तुएॊ रेकय आमं। (वूमालस्त
    क फाद भं ऩेि क ऩत्ते तोिना शानी कायक शोता शं ।)
     े            े
   धन मा व्माऩाय वे वॊफॊधीत रेन-दे न क खाते ऩय मा ऩत्र व्मलशाय
                                       े
    कयते वभम शल्दी मा कळय रगामं।
                       े
   गल्रे भं, ऩैवे क रेन-दे न वे वॊफॊप्तधत, चैक फुक-ऩावफुक, ऩूॊजी
                    े
    प्तनलेळ वे वॊफॊप्तधत कागजात इत्माटद श्री मॊत्र क वाथ भं यखं।
                                                    े
   प्रप्ततटदन बोजन क प्तरए फनी ऩशरी योिी गाम को स्खरामे।
                     े
   ळुक्रलाय को वपद लस्तुओॊ का दान कयने वे धन मोग फनता शं ।
                  े
   प्रात : कार नाळता कयने वे ऩूलल झािू अलश्म रगामे।
   यात को झूठे फतलन, कचया इत्माटद यवोई भं नशीॊ यखे।
   प्रप्ततटदन वॊध्मा वभम घय ऩय ऩूजा प्तनमत वभम ऩय कये ।
   प्तनमप्तभत रुऩ वे ळप्तनलाय क टदन घय टक वाफ़-वपाई कयं ।
                                े
   रुऩमा ऩैवा धन को थूक रगाकय प्तगनने वे दरयद्रता आती शं ।
   फुधलाय को धन का वॊचम कयं । फंक भं धन जभा कयलाते वभम रक्ष्भी भॊत्र जऩा कये ।
   घय भं टकवी बी दे ली दे लता टक एक वे ज्मादा तस्लीय, भूप्ततल ऩूजा ऩय स्थान नशीॊ यखे।
   जरुयत भॊद व्मत्रि, गरयफो को मथावत्रि भदद कय उन्शं दान इत्माटद वभम-वभम ऩय दे ते यशं ।
   ऩुयानी, यद्दी बॊगाय इत्माटद ळप्तनलाय क टदन घय वे फाशय प्तनकार दे नी चाटशमे औय जो ऩैवा प्तभरे उववे घय क प्तरए
                                          े                                                               े
    स्स्िर क फयतन खरयदना अप्तधक राबप्रद शोता शं । मटद फतलन का भूल्म अप्तधक शो तो उव भं अरग वे ऩैवे जोि
            े
    कय खयीदे जा वकते शं
   ळप्तनलाय क टदन कारे यॊ ग टक लस्तु, स्िीर, रोशा इत्माटद उऩशाय भं नशीॊ रेनी चाटशमे।
              े
   टकवी कमल क प्तरमे जाते वभम खारी ऩेि कबी बी घय वे ना प्तनकरे । कामल भं फाधा त्रलघ्न आते शं , अवपरता
              े
    प्राद्ऱ शोती शं ।
   भॊगरलाय, गुरुलाय, ळप्तनलाय को फार-नाखून नशीॊ कािने चाटशमे।
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   स्स्थय रक्ष्भी टक काभना शे तु रुऩमा-ऩैवा-शीये जलाशयात ऩीरा कऩिा त्रफछाकय मा ऩीरे कऩिे भं रऩेिकय यखं।
   लऴल भं कभ वे कभ एक फाय ऩरयलाय क वाथ तीथल मात्रा अलश्म कयं ।
                                   े
    ऩरयलाय क वाथ टकवी दे ली भंटदय भटशने भं कभ वे कभ एक फाय भं
            े
    अलश्म जामे।
   वूमोदम क वभम मटद घय की छत ऩय कारे प्ततर त्रफखेयने वे घय भं
            े
    वुख वभृत्रद्ध शोती शं ।
   अळोक का ऩेि रगाकय उवको वीॊचने वे धन भं लृत्रद्ध शोती शं ।
   वुफश भुख्म दयलाजे क फाशय वे झािू वे वपाई कयक थोिा ऩानी
                       े                        े
    प्तछिक ने वे घय भं धन टक लृत्रद्ध शोती शं ।
   प्रप्तत वोभलाय, फुधलाय, ळुक्रलाय अळोक लृष क अखॊटित ऩत्ते घयभं
                                               े
    राकय ळुद्ध जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩिे वे ऩोछकय घय भं मा
    व्मलवामीक स्थान ऩय यखने वे धनराब शोता शं ।
   प्रप्तत वोभलाय क टदन अळोक लृष क अखॊटित ऩत्ते राकय ळुद्ध जर मा
                    े              े
    गॊगाजर वे धोकय रार कऩिे वे ऩोछकय दकान भं मा व्मलवामीक
                                      ु
    स्थर ऩय भार वाभान यखने टक जगश ऩय यखने वे व्माऩय भं लृत्रद्ध
    शोती शं ।
   प्रप्तत फुधलाय क टदन अळोक लृष क अखॊटित ऩत्ते राकय ळुद्ध जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩिे वे ऩोछकय
                    े              े
    अरभायी, गल्रे भं मा धन यखने क फक्वे भं यखने वे धन फृत्रद्ध शोती शं ।
                                 े
   अळोक क भूर की जि का एक िु किा ऩूजा घय भं यखने औय योजाना धूऩ-दीऩ वे ऩूजन कयने वे धन टक कभी
          े
    नशीॊ खोती।
   प्ततजोयी क रॉकय भं शभेळा दो फॉक्व यखं। एक भं योजाना कछ रूऩमे यख कय फॊद कय दं , उवभं वे रूऩमे नशीॊ
              े                                          ु
    प्तनकारं मा अत्माप्तधक आलश्मकता शोने ऩय प्तनकारे। दवये फॉक्व भं वे काभ क रेन-दे न क प्तरए रूऩए प्तनकारं।
                                                       ू                    े          े
   प्रप्ततटदन आभदनी का करेक्ळन दवये टदन स्लमॊ क खचे क प्तरमे मा टकवी व्माऩायी को चुकाने शे तु प्तनकारे।
                                 ू              े     े
    आभदनी मा करेक्ळन को कभ वे कभ 24 घॊिे क फाद शी खचल क प्तरमे प्तनकारने वे अत्माप्तधक धन राब शोता शं ।
                                          े            े
   जो रोग नौकयी रयते शं लश बी अऩना ऩैवा फंक भं आने क मा घय भं राने क 24 घॊिे क फाद शी खचल क प्तरमे
                                                     े               े         े            े
    प्तनकारने वे अत्माप्तधक धन राब शोता शं ।

                                        प्तळषा वे वॊफॊप्तधत वभस्मा
क्मा आऩक रिक-रिकी की ऩढाई भं अनालश्मक रूऩ वे फाधा-त्रलघ्न मा रुकालिे शो यशी शं ? फच्चो को अऩने ऩूणल ऩरयश्रभ
        े   े
एलॊ भेशनत का उप्तचत पर नशीॊ प्तभर यशा? अऩने रिक-रिकी की किरी का त्रलस्तृत अध्ममन अलश्म कयलारे औय
                                               े         ुॊ
उनक त्रलद्या अध्ममन भं आनेलारी रुकालि एलॊ दोऴो क कायण एलॊ उन दोऴं क प्तनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे
   े                                            े                  े          े       े
जनकायी प्राद्ऱ कयं ।
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                           दीऩालरी क टदन कवे कयं फशीखाता तुरा ऩूजन?
                                    े     ै
                                                                                                          प्तचॊतन जोळी
        टशन्द ू धभल भं ऩॊचभशा ऩलल दीऩालरी ऩय व्मलवाम          तदऩयान्त योरी, ऩुष्ऩ आटद वे ॐ रेखनीस्थामै दे व्मै
                                                                ु
कामल वे जुिे रोग गणेळ ऩूजन, रक्ष्भी ऩूजन, कफेय
                                           ु                  नभ्। का उच्चायण कयते शुए ऩूजन कयं । भन्त्र फोरते
ऩूजन, आटद ऩूजनो क वाथ-वाथ अऩने व्मलवाम वे जुिे
                 े                                            शुए ऩूजन कयं । ऩूजन क ऩद्ळमात प्तनम्नप्तरस्खत भन्त्र वे
                                                                                   े
टशवाफ-टकताफ यखने शे तु शय लऴल दीऩालरी ऩय फशी-खाता,            शाथ जोिकय प्राथलना कये ।
तुरा (तयाजू), रेखनी (करभ) आटदका ऩूजन बी कयते                          ळास्त्राणाॊ व्मलशायाणाॊ त्रलद्यानाभाप्नुमाद्यत्।
शं ।                                                                अतस्त्लाॊ ऩूजप्तमष्माप्तभ भभ शस्ते स्स्थया बल॥
        वललप्रथभ व्मलवामीक स्थान क भुख्मद्राय क दोनं
                                  े            े              फशीखाता ऩूजन्
ओय की टदलाय ऩय प्तवन्दय वे ळुब-राब औय ॐ औय
                      ू                                       दीऩालरी क टदन व्मलवाम वे जुिे रोग नए फशीखातं का
                                                                       े
स्लस्स्तक        क प्तचि अॊटकत कयं । ऩद्ळमात इन ळुब प्तचिं
                  े                                           ळुबायम्ब कयते शं । ऩूजन शे तु नए फशीखाते रेकय उन्शं
का योरी, ऩुष्ऩ आटद वे ऩूजन कयं । ऩूजन के                            ळुद्ध जर क छीॊिे दे कय ऩत्रलत्र कय रं। फशीखातं को
                                                                              े
वभम ॐ दे शरीत्रलनामकाम नभ्। भॊत्र जा                                        रार लस्त्र त्रफछाकय तथा उव ऩय अषत एलॊ
उच्चायण कयं ।                                                                  ऩुष्ऩ िारकय स्थात्रऩत कयं । फशीखाते के
अफ क्रभळ दलात अथालत (Inkstand),                                                   प्रथभ ऩृद्ष ऩय वललप्रथभ उऩय रार
फशीखाता, तुरा (तयाजू) आटद का                                                       करभ मा ऩेन वे श्री गणेळाम नभ्।
ऩूजन कयना चाटशए।                                                                    प्तरखे ऩद्ळमात स्लस्स्तक का प्तचि
दलात        का     ऩूजन:    दलात    को                                              चॊदन अथला योरी वे फनाएॉ। ऩद्ळमात
भशाकारी का रूऩ भाना जाता शं ।                                                       अऩने इद्श दे ली-दे लता का नाभ प्तरख
वललप्रथभ नई स्माशीमुि दलात को                                                      वकते शं । मटद फशी खातो ऩय वद्ऱ श्री
ळुद्ध जर क छीिं दे कय ऩत्रलत्र कय रे,
          े                                                                      प्तरखा जाए तो बी आने लारे लऴल बय
उवक फाद उवक भुख ऩय भौरी फॉॊध दं ।
   े       े                                                                 क प्तरमे आप्तथलक द्रत्रद्श वे राबदामक यशता
                                                                              े
दलात को चौकी ऩय थोिे वे ऩुष्ऩ औय अषत                                   शं । (वद्ऱ श्री प्तरखने की त्रलप्तध गुरुत्ल ज्मोप्ततऴ
िारकय स्थात्रऩत कय दं । दलात का योरी, ऩुष्ऩ आटद वे            भाप्तवक ऩत्रत्रका भं ऩृद्ष वॊख्मा ऩय दी गई शं ।
भशाकारी क भन्त्र ॐ श्रीभशारक्ष्भै नभ्। का उच्चायण
         े                                                    ऩद्ळमात फशीखाते का योरी, ऩुष्ऩ आटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन
कयते शुए ऩूजन कयं । ऩूजन क ऩद्ळमात इव प्रकाय प्राथलना
                          े                                   कयना चाटशए। ऩूजन क वभम ॐ श्रीवयस्लत्मै नभ् भन्त्र
                                                                                े
कये ।
                                                              का उच्चायण कयं ।
            काप्तरक त्लॊ जगन्भातभलप्तवरूऩेण लतलवे।
                   े
                                                              तुरा का ऩूजन्
        उत्ऩन्ना त्लॊ च रोकानाॊ व्मलशायप्रप्तवद्धमे॥
                                                              वललप्रथभ तयाजू को ळुद्ध कय रेना चाटशए। तदऩयान्त उव
                                                                                                       ु
रेखनी ऩूजन्
दीऩालरी क टदन नमी रेखनी मा ऩेन को ळुद्ध जर वे
         े                                                    ऩय योरी वे स्लस्स्तक का प्तचि फनाएॉ। उव ऩय भौरी

धोकय तथा उव ऩय भौरी फॉॊधकय रक्ष्भीऩूजन की चौकी                फॉॊध दं तथा ॐ तुराप्तधद्षातृदेलतामै नभ्। उच्चायण कयते
ऩय कछ अषत एलॊ ऩुष्ऩ िारकय स्थात्रऩत कय दं ।
    ु                                                         शुए योरी, ऩुष्ऩ आटद वे तयाजू का ऩूजन कयं ।
85                                  नलम्फय 2012




                                                श्री धनलॊतरय व्रत कथा
                                                                                        प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी

प्रथभ अध्माम
       वनकाटदक भुप्तनमं ने वूत जी वे कशा-शे वूत                   शं । कोई पोिे , प्तगल्िी, प्रेग आटद वे मुि वस्न्नऩात योग
भशाभुने! आऩने बगलान ् धनलॊतरय की ऩूजा-त्रलप्तध का                 औय प्रभेशाटद योगं वे घेये गमे शं । इव प्रकाय रोग अनेक
त्रलस्ताय ऩूलक लणलन टकमा, टकन्तु इवे वुनने ऩय बी शभं
             ल                                                    योगं वे ग्रस्त औय द्खी शं । उन्शं दे खकय भुझे फिा द्ख
                                                                                     ु                               ु
तृप्तद्ऱ नशीॊ शुई। अत् श्री धनलॊतरय का भाशात्म्म अप्तधक           शुआ औय फायम्फाय भंने प्तचन्ता की। भंने वोचा टक मे
त्रलस्ताय वे फताइए।                                               रोग कवे नीयोग शंगे औय प्रवन्न शंगे ? इवी प्तचन्ता वे
                                                                       ै
       भुप्तनश्रेद्ष   वुत   जी   ने   कशा-शे   भुप्तनमं!   आऩ    भन भं व्माकर शोकय भं आऩकी ळयण भं आमा शूॉ।
                                                                             ु
ऩाऩत्रलनाप्तळनी कथा को वुप्तनए। इव कथा को वुनने वे                       शे त्रलद्वात्भन ् ळयणागत बूम्माटद रोकं की आऩ
वबी योगं का नाळ शोता शं :                                         यषा कीस्जमे। त्रैरोक्म भं आऩक अप्ततरयि इनका कोई
                                                                                               े
       एक वभम नायद जी वबी रोगं क कल्माण की
                                े                                 यषक नशीॊ शं ।
इच्छा वे वभुद्र द्रीऩ ऩललत वटशत वम्ऩूणल ऩृर्थली का भ्रभण                 बगलान ् श्री त्रलष्णु नायद जी क उि लचनं को
                                                                                                        े
कय यशे थे। लशाॉ उन्शंने वबी रोगं को त्रलत्रलध योगं वे             वुनकय गम्बीय लाणी वे फोरे-शे भुने आऩ बम न
द्खी दे खा। मश दे खकय नायद जी प्तचस्न्तत शुए औय लशाॉ
 ु                                                                कीस्जमे। भं ‘आटद धनलॊतरय’ इन्द्र वे आमुलद प्राद्ऱ कय
                                                                                                          े
वे स्लगल जा ऩशुॉचे। स्लगल भं इन्द्र आटद दे लता बी योगी            ऩुन् अलताय रेकय वबी रोकं को नीयोग करुॉ गा। भं
शो यशे थे। मश दे खकय नायद जी की प्तचन्ता औय फढ़                   काप्ततलक भाव, कृ ष्ण ऩष, त्रमोदळी, गुरुलाय, शस्त नषत्र के
गई। प्तचन्ता कयते शुए ले लैकण्ठ भं ऩशुॉचे।
                            ु
                                                                  वभम अलताय रेकय ‘आमुलद’ का उद्धाय करुॉ गा। इवभं
                                                                                      े
       लैकण्ठ भं नायद जी ने ळॊख चक्र अभृत करळ
          ु
                                                                  वन्दे श न कयो।
धायी औय अबम शस्त धनलॊतरय त्रलष्णु को दे खा। श्री
(रक्ष्भी), बू (ऩृर्थली) औय नीरा दे ली उनकी चयण वेला
                                                                  टद्रतीम अध्माम:
कय यशी थी। ऐवे भशात्भा धनलॊतरय रुऩी श्री त्रलष्णु को
                                                                         बगलान ् त्रलष्णु क उि लचनं को वुनकय नायद
                                                                                           े
नायद जी ने बत्रि ऩूलक प्रणाभ टकमा औय शाथ जोिकय
                    ल
                                                                  भुप्तन अप्तत प्रवन्न शुए औय शऴल वे फोरे-शे बगलन ् आऩ
उनकी स्तुप्तत कयने रगे।
                                                                  ‘धनलॊतरय ऩूजा’ की त्रलप्तध फताइए। ‘धनलॊतरय ऩूजा भं
       श्री नायद जी फोरे-शे दे लं क दे ल जगन्नाथ बिं
                                   े
ऩय दमा कयने लारे दीनफन्धु दमावागय जगत ् की यषा भं                 कौन वा ध्मान मा त्रलधान टकमा जाए ? उवका प्तनमभ
तत्ऩय आऩ भुझे ळयणागत जानकय वन्तुद्श कीस्जए।                       क्मा शं ? उवका पर क्मा शं ? टकव वभम, टकवने उव
       शे बगलन ् भंने ऩृर्थली आटद वबी रोकं भं ऩमलिन               ऩूजा को टकमा शं ? ऩूजा भं क्मा क्मा चीजं चाटशए ? शे
टकमा औय लशाॉ क प्तनलावी जनं को नाना योगं वे द्खी
              े                              ु                    दे ल दे लेद्वय रोकं ऩय अनुग्रश कयने की इच्छा वे कृ ऩा
ऩामा। टकवी को ज्लय ने प्तगयामा शं , तो टकवी को याज                ऩूलक मश वफ भुझे फताइए। श्री बगलान ् ने कशा- शे भुने
                                                                     ल
मक्ष्भा ने धय दफामा। कोई अप्ततवाय, द्वाव, खाॉवी,वॊग्रशणी          तुभने रोकोऩकाय की इच्छा वे ऩूछा शं । अतएल तुभवे
औय ऩाण्िु योगाटद वे ऩीटित शं । कोई लातयोगं वे ऩीटित               ‘ऩाऩनाप्तळनी, योगनाप्तळनी कथा’ कशता शूॉ।
86                                        नलम्फय 2012



        धनगुद्ऱ याजा क प्तनप्तभत्त काप्ततलक कृ ष्ण त्रमोदळी
                      े                                                              बयद्राज भुप्तन ने कशा-शे याजन ् तुम्शाया लृत्तान्त
गुरुलाय शस्त नषत्र क वभम भं यात्रत्र क प्रथभ प्रशय भं
                    े                 े                                      भंने जान प्तरमा। तुभ अप्तत ळीघ्र भशात्रलष्णु धनलॊतरय की
गुद्ऱ धन क वभान ‘धनलॊतरय’ नाभ वे अलतीणल शोता शूॉ।
          े                                                                  ळयण भं जाओ। भनुष्म उनक दळलन भात्र वे घोय दस्तय
                                                                                                   े                   ु
अतएल लश टदन वॊवाय भं ‘धनत्रमोदळी’ (धनतेयव) नाभ                               योगं वे भुि शो जाता शं । याजा ने बयद्राज भुप्तन वे उि
                                                                             फात वुनकय उनवे ऩूछा-शे भशात्भन ् आऩ कृ ऩा कय उनकी
वे प्रप्तवद्ध शोगा। मश प्ततप्तथ वबी काभनाओॊ को दे ने लारी
                                                                             आयाधना त्रलप्तध भुझे बरी-बाॉप्तत फताइए। ऋत्रऴ बयद्राज ने
शं ।
                                                                             कशा-शे भशाबाग याजन ् उव त्रलप्तध को भं कशता शूॉ,
        नायद जी ने ऩूछा- शे बगलन ् कृ ऩमा त्रलस्ताय ऩूलक
                                                       ल
                                                                             वालधान प्तचत्त वे वुप्तनए।
फताइए टक फि फागी धनगुद्ऱ कशाॉ शुआ औय आऩक दळलन
                                        े
की प्राप्तद्ऱ क प्तरए उवने कौनवा व्रत टकमा था औय शे
               े                                                                     काप्ततलक कृ ष्ण त्रमोदळी क ळुब टदन, प्रात् कार
                                                                                                               े

दमावागय नायामण उवने आऩका ऩूजन क्मं टकमा था?                                  उठकय ळौच-भुख भाजलन आटद वे प्तनलृत्त शोकय स्नान
                                                                             कये । ळुद्ध लस्त्र आटद धायण कय गुरु वे प्राद्ऱ उऩदे ळानुवाय
        श्री बगलान ् ने कशा- ऩशरे अलन्तीऩुय (उज्जैन) भं
                                                                             बगलान ् धनलॊतरय का ध्मान कये । प्तनम्न भन्त्र ऩढ़कय व्रत
‘धनगुद्ऱ’ नाभक याजा धभलभागल वे प्रजा का ऩारन कयने
                                                                             का प्रायम्ब कये :
लारा शुआ था। लश वबी रोगं का प्माया, उदायप्तचत्त था।                                  करयष्माप्तभ व्रतॊ दे ल त्लद् बिस्त्लत ् ऩयामण्।
उवे षमयोग शो गमा। उववे लश टदन-यात ऩीटित शोने                                 प्तश्रमॊ दे टश जमॊ दे टश, आयोग्मॊ दे टश भे प्रबो
रगा। ऩीिा की प्तनलृत्रत्त क प्तरए उवने जऩ, शोभ, नाना
                           े
                                                                                     अथालत ् शे दे ल भं आऩका बि शूॉ, आऩ भं प्तचत्त
प्रकाय की औऴप्तधमाॉ की, ऩयन्तु नीयोग न शुआ। तफ लश
                                                                             रगाकय आऩका व्रत करुॉ गा। आऩ भुझे रक्ष्भी दीस्जए,
स्खन्न शोकय त्रलराऩ कयने रगा।
                                                                             त्रलजम दीस्जए, आयोग्म दीस्जए।
        याजा     की     स्त्री   त्रत्ररोक   भं   प्रप्तवद्ध, ऩप्ततव्रता,
                                                                                     दे ल     धनलॊतरय     वे   उि      प्राथलना   कय,   उनकी
वदाचारयणी थी। उवने बी ऩप्तत क भॊगर की आकाॊषा वे
                             े
                                                                             ऴोिळोऩचाय वे ऩूजा कये । ऩूजा कयने क फाद तेयश धागं
                                                                                                                े
अनेक प्तनमभ, उऩलाव आटद टकए, ऩय इववे बी याजा
                                                                             का वूत्र रेकय तेयश गाॉठ लारा ‘दोयक’ फनाए। इव ‘दोयक’
नीयोग न शुआ औय अन्त भं लश स्त्री बी अतीवाय योग वे
                                                                             की बत्रिऩूलक ऩूजा कये औय प्तनम्न भन्त्र ऩढ़कय ऩुरुऴं क
                                                                                        ल                                          े
योप्तगणी शो गई। शे भुने उव याजा वे उव ऩप्ततव्रता स्त्री के
                                                                             दाटशने शाथ भं तथा स्स्त्रमं क फाॉएॉ शाथ भं फाॉधे:
                                                                                                          े
ऩाॉच ऩुत्र शुए। ले क्रभळ् आभलात, प्रीशा, कद्ष, खाॉवी औय
                                          ु
                                                                                            धन्लन्तये भशाबाग जयायोगप्तनलायक।
                                    ु
द्वाव वे ऩीटित शुए। उनको बी योग वे छिकाया न
                                                                                        दोयरुऩेण भाॊ ऩाटश, वकिु म्फॊ दमाप्तनधे॥
                                                                                                             ु
प्तभरा। याजा औय यानी अऩने ऩुत्रं को योगातल दे खकय
                                                                                      आप्तधव्माप्तधजया भृत्मु बमादस्भादशप्तनळभ ्।
                                                                                                                            ल
अत्मन्त द्खी शुए।
         ु
                                                                                        ऩीड्मभानॊ दे लदे ल यष भाॊ ळयणागतभ ्॥
        स्त्री-ऩुत्रं को योग क वागय वे भुि कयाने की
                              े
                                                                             अथालत ्-शे धन्लन्तये शे भशाबाग आऩ जया (फुढाऩा) औय
इच्छा वे प्तचस्न्तत याजा घोय लन को चरा गमा। लन भं
                                                                             योग क प्तभिाने लारे शं । इवप्तरए शे दमाप्तनधे आऩ इव
                                                                                  े
याजा ने भशाभुप्तन ‘बयद्राज’ को फैठे दे खा। याजा ने उन्शं
                                                                             वूत्ररुऩ वे वकिु म्फ भेयी यषा कीस्जमे। भं टदन-यात आप्तध
                                                                                           ु
बत्रिऩूलक
        ल      प्रणाभ    टकमा       औय       अऩना     द्ख
                                                       ु       फतामा।
                                                                             (भानप्तवक द्ख) औय व्माप्तध (योग), जया (फुढाऩा) तथा
                                                                                        ु
भशाभुप्तन बयद्राज वे याजा ने योग-कद्श प्तनलायण शे तु उऩाम
                                                                             भृत्मु क बम वे त्रस्त शो यशा शूॉ। शे दे ल-दे ल
                                                                                     े                                              ळयण भं
ऩूछा।
                                                                             आए शुए भेयी अफ आऩ यषा कयं । वूत्र फन्धन क फाद
                                                                                                                      े
87                                    नलम्फय 2012



‘दे ल दे ल धनलॊतरय’ को बत्रि ऩूलक ‘अघ्मल’ प्तनलेदन कये ।
                                ल                                    धन्लन्तये नभस्तुभ्मॊ, नभो ब्रह्माण्ि नामक।
अघ्मल प्रदान कयने का भन्त्र इव प्रकाय शं :                              वुयावुयायाप्तधताॊघ्रे, नभो लेदैक गोचय ।
          जातो रोक टशताथालम, आमुलदाप्तबलृद्धमे।
                                 े                                    आमुलद स्लरुऩाम, नभस्ते जगदात्भने॥१॥
                                                                          े
          जया भयण नाळाम, भानलानाॊ टशताम च॥                              प्रऩन्नॊ ऩाटश दे लेळ जगदानन्द दामक।
          दद्शानाॊ प्तनधनामाम, जात्त धन्लन्तये प्रबो।
           ु                                                          दमा प्तनधे भशा दे ल त्राटश भाभऩयाप्तधनभ ्।
          गृशाणाघ्मं भमा दत्तॊ, दे ल दे ल कृ ऩा कय॥                जन्भ भृत्मु जयायोगै्, ऩीटितॊ वकिु स्म्फनभ ्॥२॥
                                                                                                  ु

अथालत ्- शे दे ल दे ल, दमा कायी धनलॊतरय! आऩ रोकाऩकाय         अथालत ्- शे धन्लन्तये ब्रह्माण्ि नामक आऩको नभस्काय!

क प्तरए, आमुलद की अप्तबलृत्रद्ध क प्तनप्तभत्त, भनुष्मं क
 े           े                   े                      े    आमुलद स्लरुऩ जगत ् क अन्तमालभी आऩको नभस्काय। शे
                                                                 े               े

टशत तथा जया भयण का नाळ कयने क प्तरए अलतरयत
                             े                               जगत ् क वुखदामी दे ल दे ल दमा वागय, भशा दे ल आऩ
                                                                    े

शुए शं । भं आऩको अघ्मल प्रदान कयता शूॉ। इवे स्लीकाय          भुझ ळयणागत अऩयाधी की यषा कयं । भं किु म्फ वटशत
                                                                                                ु
कीस्जए।                                                      जन्भ भृत्मु जया आटद योगं वे ऩीटित शूॉ।
       अघ्मल प्रदान कयने क फाद ब्राह्मण को फामन दान
                          े                                          बगलान ् धनलॊतरय ने मश स्तुप्तत वुनकय भेघ

कये । फामन दान क प्तरए गेशूॉ क आिे भं दध, घी िारकय
                े             े        ू                     गजलन क वभान गम्बीय लाणी वे भुस्कयाते शुए कशा-शे
                                                                   े                         ु
                                                             भशा याज ठीक शं , ठीक शं , भं तुम्शायी स्तुप्तत वे प्रवन्न
ऩकाए। ऩकने ऩय ळक्कय िारे। कवय, कऩूय, इरामची,
                           े
                                                             शूॉ। अफ शभवे लय भाॉग रो।
रंग, जात्रलत्री िारकय इव प्तवद्ध नैलेद्य को बगलान ् को
                                                                     याजा फोरे-शे दे ल मटद आऩ प्रवन्न शं , तो वफवे
अत्रऩत कये । आधा प्रवाद लेदस ब्राह्मण को अत्रऩलत कये
     ल
                                                             ऩशरे स्त्री ऩुत्रं वटशत भुझे आयोग्म दीस्जए।
औय आधा स्त्री ऩुत्राटद वटशत स्लमॊ प्रवाद स्लरुऩ ग्रशण
                                                                     मश प्राथलना वुनकय बगलान ् ने कशा-याजन ् तुभने
कये । शे याजन ् इव त्रलप्तध वे व्रत कयने वे वाषात ्
धनलॊतरय स्लमॊ प्रकि शोकय तुम्शाया अबीद्श प्तवद्ध कयं गे।     जो प्राथलना की शं , लश ऩूणल शोगी। इवक अप्ततरयि बी भं
                                                                                                  े

इतनी कथा वुनाकय बयद्राज भुप्तन ने त्रलश्राभ प्तरमा।          लय दे ता शूॉ। उवे वालधान शोकय वुनो :

तृतीम अध्माम:                                                        तुभने स्जव प्रकाय मश व्रत टकमा शं । इवी तयश

       वूत जी फोरे-शे भुप्तन लयं याजा धनगुद्ऱ ने भुप्तन      जो व्रत कयं गे, उनको आयोग्म प्रदान कय भं उन्शं अऩनी

की आसा ऩाकय उनक कशे अनुवाय तेयश लऴल ऩमलन्त
               े                                             स्स्थय बत्रि दॉ गा।
                                                                             ू
बत्रि ऩूलक व्रत टकमा।
         ल                                                           वूत    जी     फोरे-बगलान ् धनलॊतरय      मश    कशकय
       एक टदन व्रत वभाप्तद्ऱ क अलवय ऩय वाषात ्
                              े                              अन्तधालन शो गए औय याजा धनगुद्ऱ अऩनी ऩुयी भं रौि
धनलॊतरय प्रकि शुए। याजा ने वाद्शाॊग प्रणाभ कय उनकी           गमा। याजा प्तनत्म स्त्री-ऩुत्रं वटशत अभृत ऩास्ण धनलॊतरय
स्तुप्तत की। बत्रि ऩूलक की गई स्तुप्तत स्लीकाय कय
                      ल                                      की स्तुप्तत कयने रगा। उवने ऩृर्थली रोक भं नाना प्रकाय

बगलान ् धनलॊतरय ने कशा-शे याजन ् अफ तुभ ियो भत,              क वुख बोगे औय अन्त भं बगलान ् धनलॊतरय की कृ ऩा वे
                                                              े

तुम्शाया भॊगर शोगा। तुभ शभवे लय भाॉगो। याजा ने मश            भोष ऩद प्राद्ऱ टकमा। इव प्रकाय भंने तुभ रोगं को

वुनकय उन्शं ऩुन् वाद्शाॊग प्रणाभ टकमा औय उनकी स्तुप्तत       बगलान ् धनलॊतरय की जन्भोत्वल कथा वुनाई। इवके

की :                                                         वुनने वे वबी ऩाऩं का नाळ शोता शं ।
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                                    वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रका
इव भुटद्रका भं भूॊगे को ळुब भुशूतल भं त्रत्रधातु (वुलणल+यजत+ताॊफ) भं जिला कय उवे ळास्त्रोि त्रलप्तध-
                                                                ं
त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो द्राया वललप्तवत्रद्धदामक फनाने शे तु प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि टकमा
जाता शं । इव भुटद्रका को टकवी बी लगल क व्मत्रि शाथ की टकवी बी उॊ गरी भं धायण कय वकते शं ।
                                      े
मशॊ भुटद्रका कबी टकवी बी स्स्थती भं अऩत्रलत्र नशीॊ शोती। इव प्तरए कबी भुटद्रका को उतायने की
आलश्मिा नशीॊ शं । इवे धायण कयने वे व्मत्रि की वभस्माओॊ का वभाधान शोने रगता शं । धायणकताल
को जीलन भं वपरता प्राप्तद्ऱ एलॊ उन्नप्तत क नमे भागल प्रवस्त शोते यशते शं औय जीलन भं वबी प्रकाय
                                          े
की प्तवत्रद्धमाॊ बी ळीध्र प्राद्ऱ शोती शं ।                                                  भूल्म भात्र- 6400/-
(नोि: इव भुटद्रका को धायण कयने वे भॊगर ग्रश का कोई फुया प्रबाल वाधक ऩय नशीॊ शोता शं ।)
वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रका क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी क प्तरमे शे तु वम्ऩक कयं ।
                            े                          े                  ल

                                     ऩप्तत-ऩत्नी भं करश प्तनलायण शे तु
मटद ऩरयलायं भं वुख-वुत्रलधा क वभस्त वाधान शोते शुए बी छोिी-छोिी फातो भं ऩप्तत-ऩत्नी क त्रफच भे करश शोता यशता शं ,
                             े                                                       े
तो घय क स्जतने वदस्म शो उन वफक नाभ वे गुरुत्ल कामालरत द्राया ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत
       े                      े
ऩूणल चैतन्म मुि लळीकयण कलच एलॊ गृश करश नाळक टिब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं त्रफना टकवी ऩूजा, त्रलप्तध-
त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ भॊत्र प्तवद्ध ऩप्तत लळीकयण मा ऩत्नी लळीकयण एलॊ गृश करश
नाळक टिब्फी फनलाना चाशते शं , तो वॊऩक आऩ कय वकते शं ।
                                     ल


                                 100 वे अप्तधक जैन मॊत्र
        शभाये मशाॊ जैन धभल क वबी प्रभुख, दरब एलॊ ळीघ्र प्रबालळारी मॊत्र ताम्र ऩत्र,
                            े             ु ल
                              प्तवरलय (चाॊदी) ओय गोल्ि (वोने) भे उऩरब्ध शं ।
शभाये मशाॊ वबी प्रकाय क मॊत्र कोऩय ताम्र ऩत्र, प्तवरलय (चाॊदी) ओय गोल्ि (वोने) भे फनलाए जाते शै । इवक
                       े                                                                             े
अराला आऩकी आलश्मकता अनुळाय आऩक द्राया प्राद्ऱ (प्तचत्र, मॊत्र, टिज़ाईन) क अनुरुऩ मॊत्र बी फनलाए
                              े                                         े
जाते शै . गुरुत्ल कामालरम द्राया उऩरब्ध कयामे गमे वबी मॊत्र अखॊटित एलॊ 22 गेज ळुद्ध कोऩय(ताम्र
ऩत्र)- 99.99 िच ळुद्ध प्तवरलय (चाॊदी) एलॊ 22 कये ि गोल्ि (वोने) भे फनलाए जाते शै । मॊत्र क त्रलऴम भे
                                              े                                           े
अप्तधक जानकायी क प्तरमे शे तु वम्ऩक कयं ।
                े                  ल
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                                          द्रादळ भशा मॊत्र
मॊत्र को अप्तत प्राप्तचन एलॊ दरब मॊत्रो क वॊकरन वे शभाये लऴो क अनुवॊधान
                              ु ल        े                    े
द्राया फनामा गमा शं ।
     ऩयभ दरब लळीकयण मॊत्र,
           ु ल                                       वशस्त्राषी रक्ष्भी आफद्ध मॊत्र
     बाग्मोदम मॊत्र                                 आकस्स्भक धन प्राप्तद्ऱ मॊत्र
     भनोलाॊप्तछत कामल प्तवत्रद्ध मॊत्र              ऩूणल ऩौरुऴ प्राप्तद्ऱ काभदे ल मॊत्र
     याज्म फाधा प्तनलृत्रत्त मॊत्र                  योग प्तनलृत्रत्त मॊत्र
     गृशस्थ वुख मॊत्र                               वाधना प्तवत्रद्ध मॊत्र
     ळीघ्र त्रललाश वॊऩन्न गौयी अनॊग मॊत्र           ळत्रु दभन मॊत्र

उऩयोि वबी मॊत्रो को द्रादळ भशा मॊत्र क रुऩ भं ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे भॊत्र प्तवद्ध ऩूणल
                                      े
प्राणप्रप्ततत्रद्षत एलॊ चैतन्म मुि टकमे जाते शं । स्जवे स्थाऩीत कय त्रफना टकवी ऩूजा अचलना-
त्रलप्तध त्रलधान त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं ।

    क्मा आऩक फच्चे कवॊगती क प्तळकाय शं ?
             े       ु      े

    क्मा आऩक फच्चे आऩका कशना नशीॊ भान यशे शं ?
             े

    क्मा आऩक फच्चे घय भं अळाॊप्तत ऩैदा कय यशे शं ?
             े

                                   ु         ु
घय ऩरयलाय भं ळाॊप्तत एलॊ फच्चे को कवॊगती वे छिाने शे तु फच्चे क नाभ वे गुरुत्ल कामालरत
                                                               े
द्राया ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि लळीकयण कलच एलॊ
एव.एन.टिब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा, त्रलप्तध-त्रलधान वे आऩ
त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ तो आऩ भॊत्र प्तवद्ध लळीकयण कलच एलॊ एव.एन.टिब्फी
फनलाना चाशते शं , तो वॊऩक इव कय वकते शं ।
                         ल


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                          92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA,
            BHUBNESWAR-751018, (ORISSA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
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           वॊऩूणल प्राणप्रप्ततत्रद्षत 22 गेज ळुद्ध स्िीर भं प्तनप्तभलत अखॊटित

                                ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र
ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र (स्िीर भं) को तीव्र प्रबालळारी फनाने शे तु ळप्तन की कायक धातु ळुद्ध स्िीर(रोशे )
भं फनामा गमा शं । स्जव क प्रबाल वे वाधक को तत्कार राब प्राद्ऱ शोता शं । मटद जन्भ किरी भं
                        े                                                         ॊु
ळप्तन प्रप्ततकर शोने ऩय व्मत्रि को अनेक कामं भं अवपरता प्राद्ऱ शोती शै , कबी व्मलवाम भं घिा,
              ू
नौकयी भं ऩये ळानी, लाशन दघिना, गृश क्रेळ आटद ऩये ळानीमाॊ फढ़ती जाती शै ऐवी स्स्थप्ततमं भं
                         ु ल
प्राणप्रप्ततत्रद्षत ग्रश ऩीिा प्तनलायक ळप्तन मॊत्र की अऩने को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थाऩना कयने वे
अनेक राब प्तभरते शं । मटद ळप्तन की ढै ़मा मा वाढ़े वाती का वभम शो तो इवे अलश्म ऩूजना चाटशए।
ळप्तनमॊत्र क ऩूजन भात्र वे व्मत्रि को भृत्मु, कजल, कोिल कळ, जोिो का ददल , फात योग तथा रम्फे वभम
            े                                            े
क वबी प्रकाय क योग वे ऩये ळान व्मत्रि क प्तरमे ळप्तन मॊत्र अप्तधक राबकायी शोगा। नौकयी ऩेळा आटद
 े            े                        े
क रोगं को ऩदौन्नप्तत बी ळप्तन द्राया शी प्तभरती शै अत् मश मॊत्र अप्तत उऩमोगी मॊत्र शै स्जवक द्राया
 े                                                                                         े
ळीघ्र शी राब ऩामा जा वकता शै ।                                                 भूल्म: 1050 वे 8200


                                वॊऩूणल प्राणप्रप्ततत्रद्षत
           22 गेज ळुद्ध स्िीर भं प्तनप्तभलत अखॊटित

                     ळप्तन तैप्ततवा मॊत्र
ळप्तनग्रश वे वॊफॊप्तधत ऩीिा क प्तनलायण शे तु त्रलळेऴ राबकायी मॊत्र।
                             े
                                                                                भूल्म: 550 वे 8200

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         नलयत्न जटित श्री मॊत्र
                                                   ळास्त्र लचन क अनुवाय ळुद्ध वुलणल मा यजत
                                                                े
                                                   भं प्तनप्तभलत श्री मॊत्र क चायं औय मटद नलयत्न
                                                                             े
                                                   जिला ने ऩय मश नलयत्न जटित श्री मॊत्र
                                                   कशराता शं । वबी यत्नो को उवक प्तनस्द्ळत
                                                                               े
                                                   स्थान ऩय जि कय रॉकि क रूऩ भं धायण
                                                                     े  े
                                                   कयने वे व्मत्रि को अनॊत एद्वमल एलॊ रक्ष्भी
                                                   की प्राप्तद्ऱ शोती शं । व्मत्रि को एवा आबाव
                                                   शोता शं जैवे भाॊ रक्ष्भी उवक वाथ शं ।
                                                                               े
                                                   नलग्रश को श्री मॊत्र क वाथ रगाने वे ग्रशं
                                                                         े
                                                   की अळुब दळा का धायणकयने लारे व्मत्रि
                                                   ऩय प्रबाल नशीॊ शोता शं ।

गरे भं शोने क कायण मॊत्र ऩत्रलत्र यशता शं एलॊ स्नान कयते वभम इव मॊत्र ऩय स्ऩळल कय जो
             े
जर त्रफॊद ु ळयीय को रगते शं , लश गॊगा जर क वभान ऩत्रलत्र शोता शं । इव प्तरमे इवे वफवे
                                          े
तेजस्ली एलॊ परदाप्तम कशजाता शं । जैवे अभृत वे उत्तभ कोई औऴप्तध नशीॊ, उवी प्रकाय रक्ष्भी
प्राप्तद्ऱ क प्तरमे श्री मॊत्र वे उत्तभ कोई मॊत्र वॊवाय भं नशीॊ शं एवा ळास्त्रोि लचन शं । इव प्रकाय क
            े                                                                                        े
नलयत्न जटित श्री मॊत्र गुरूत्ल कामालरम द्राया ळुब भुशूतल भं प्राण प्रप्ततत्रद्षत कयक फनालाए जाते
                                                                                    े
शं । Rs: 2350, 2800, 3250, 3700, 4600, 5500 वे 10,900 तक
अप्तधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं ।
                         ल

                                 GURUTVA KARYALAY
           92/3BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
                              Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
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94                                    नलम्फय 2012




                          भॊत्र प्तवद्ध लाशन दघिना नाळक भारुप्तत मॊत्र
                                              ु ल
        ऩौयास्णक ग्रॊथो भं उल्रेख शं की भशाबायत क मुद्ध क वभम अजुन क यथ क अग्रबाग ऩय भारुप्तत ध्लज एलॊ
                                                 े       े       ल  े    े
भारुप्तत मन्त्र रगा शुआ था। इवी मॊत्र क प्रबाल क कायण वॊऩूणल मुद्ध क दौयान शज़ायं-राखं प्रकाय क आग्नेम अस्त्र-
                                       े        े                   े                         े
ळस्त्रं का प्रशाय शोने क फाद बी अजुन का यथ जया बी षप्ततग्रस्त नशीॊ शुआ। बगलान श्री कृ ष्ण भारुप्तत मॊत्र क इव
                        े          ल                                                                      े
अद्भत यशस्म को जानते थे टक स्जव यथ मा लाशन की यषा स्लमॊ श्री भारुप्तत नॊदन कयते शं, लश दघिनाग्रस्त कवे शो
    ु                                                                                   ु ल         ै
वकता शं । लश यथ मा लाशन तो लामुलेग वे, प्तनफालप्तधत रुऩ वे अऩने रक्ष्म ऩय त्रलजम ऩतका रशयाता शुआ ऩशुॊचेगा।
इवी प्तरमे श्री कृ ष्ण नं अजुन क यथ ऩय श्री भारुप्तत मॊत्र को अॊटकत कयलामा था।
                             ल  े
       स्जन रोगं क स्किय, काय, फव, ट्रक इत्माटद लाशन फाय-फाय दघिना ग्रस्त शो यशे शो!, अनालश्मक लाशन को
                  े   ू                                       ु ल
नुषान शो यशा शं! उन्शं शानी एलॊ दघिना वे यषा क उद्दे श्म वे अऩने लाशन ऩय भॊत्र प्तवद्ध श्री भारुप्तत मॊत्र अलश्म
                                 ु ल          े
रगाना चाटशए। जो रोग ट्रान्स्ऩोटिं ग (ऩरयलशन) क व्मलवाम वे जुिे शं उनको श्रीभारुप्तत मॊत्र को अऩने लाशन भं अलश्म
                                              े
स्थात्रऩत कयना चाटशए, क्मोटक, इवी व्मलवाम वे जुिे वैकिं रोगं का अनुबल यशा शं की श्री भारुप्तत मॊत्र को स्थात्रऩत
कयने वे उनक लाशन अप्तधक टदन तक अनालश्मक खचो वे एलॊ दघिनाओॊ वे वुयस्षत यशे शं । शभाया स्लमॊका एलॊ अन्म
           े                                        ु ल
त्रलद्रानो का अनुबल यशा शं , की स्जन रोगं ने श्री भारुप्तत मॊत्र अऩने लाशन ऩय रगामा शं , उन रोगं क लाशन फिी वे
                                                                                                  े
फिी दघिनाओॊ वे वुयस्षत यशते शं । उनक लाशनो को कोई त्रलळेऴ नुक्ळान इत्माटद नशीॊ शोता शं औय नाशीॊ अनालश्मक
     ु ल                            े
रुऩ वे उवभं खयाफी आप्तत शं ।
लास्तु प्रमोग भं भारुप्तत मॊत्र: मश भारुप्तत नॊदन श्री शनुभान जी का मॊत्र शै । मटद कोई जभीन त्रफक नशीॊ यशी शो, मा उव
ऩय कोई लाद-त्रललाद शो, तो इच्छा क अनुरूऩ लशॉ जभीन उप्तचत भूल्म ऩय त्रफक जामे इव प्तरमे इव भारुप्तत मॊत्र का
                                 े
प्रमोग टकमा जा वकता शं । इव भारुप्तत मॊत्र क प्रमोग वे जभीन ळीघ्र त्रफक जाएगी मा त्रललादभुि शो जाएगी। इव प्तरमे
                                            े
मश मॊत्र दोशयी ळत्रि वे मुि शै ।
भारुप्तत मॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी क प्तरमे गुरुत्ल कामालरम भं वॊऩक कयं । भूल्म Rs- 255 वे 10900 तक
                े                          े                              ल

श्री शनुभान मॊत्र        ळास्त्रं भं उल्रेख शं की श्री शनुभान जी को बगलान वूमदेल ने ब्रह्मा जी क आदे ळ ऩय शनुभान
                                                                             ल                  े
जी को अऩने तेज का वौलाॉ बाग प्रदान कयते शुए आळीलालद प्रदान टकमा था, टक भं शनुभान को वबी ळास्त्र का ऩूणल
सान दॉ गा। स्जववे मश तीनोरोक भं वलल श्रेद्ष लिा शंगे तथा ळास्त्र त्रलद्या भं इन्शं भशायत शाप्तवर शोगी औय इनक
       ू                                                                                                    े
वभन फरळारी औय कोई नशीॊ शोगा। जानकायो ने भतानुळाय शनुभान मॊत्र की आयाधना वे ऩुरुऴं की त्रलप्तबन्न फीभारयमं
दय शोती शं , इव मॊत्र भं अद्भत ळत्रि वभाटशत शोने क कायण व्मत्रि की स्लप्न दोऴ, धातु योग, यि दोऴ, लीमल दोऴ, भूछाल,
 ू                           ु                    े
नऩुॊवकता इत्माटद अनेक प्रकाय क दोऴो को दय कयने भं अत्मन्त राबकायी शं । अथालत मश मॊत्र ऩौरुऴ को ऩुद्श कयता
                              े         ू
शं । श्री शनुभान मॊत्र व्मत्रि को वॊकि, लाद-त्रललाद, बूत-प्रेत, द्यूत टक्रमा, त्रलऴबम, चोय बम, याज्म बम, भायण, वम्भोशन
स्तॊबन इत्माटद वे वॊकिो वे यषा कयता शं औय प्तवत्रद्ध प्रदान कयने भं वषभ शं ।
श्री शनुभान मॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी क प्तरमे गुरुत्ल कामालरम भं वॊऩक कयं । भूल्म Rs- 730 वे 10900 तक
                   े                          े                              ल

                                      GURUTVA KARYALAY
                            92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA,
              BHUBNESWAR-751018, (ORISSA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
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                                                             त्रलप्तबन्न दे लताओॊ क मॊत्र
                                                                                   े
गणेळ मॊत्र                                            भशाभृत्मुजम मॊत्र
                                                               ॊ                                                 याभ यषा मॊत्र याज
गणेळ मॊत्र (वॊऩणल फीज भॊत्र वटशत)
               ू                                      भशाभृत्मुजम कलच मॊत्र
                                                               ॊ                                                 याभ मॊत्र
गणेळ प्तवद्ध मॊत्र                                    भशाभृत्मुजम ऩूजन मॊत्र
                                                               ॊ                                                 द्रादळाषय त्रलष्णु भॊत्र ऩूजन मॊत्र
एकाषय गणऩप्तत मॊत्र                                   भशाभृत्मुॊजम मुि प्तळल खप्ऩय भाशा प्तळल मॊत्र              त्रलष्णु फीवा मॊत्र
शरयद्रा गणेळ मॊत्र                                    प्तळल ऩॊचाषयी मॊत्र                                        गरुि ऩूजन मॊत्र
कफेय मॊत्र
 ु                                                    प्तळल मॊत्र                                                प्तचॊताभणी मॊत्र याज
श्री द्रादळाषयी रुद्र ऩूजन मॊत्र                      अटद्रतीम वललकाम्म प्तवत्रद्ध प्तळल मॊत्र                   प्तचॊताभणी मॊत्र
दत्तात्रम मॊत्र                                       नृप्तवॊश ऩूजन मॊत्र                                        स्लणालकऴलणा बैयल मॊत्र
दत्त मॊत्र                                            ऩॊचदे ल मॊत्र                                              शनुभान ऩूजन मॊत्र
आऩदद्धायण फिु क बैयल मॊत्र
   ु                                                  वॊतान गोऩार मॊत्र                                          शनुभान मॊत्र
फिु क मॊत्र                                           श्री कृ ष्ण अद्शाषयी भॊत्र ऩूजन मॊत्र                      वॊकि भोचन मॊत्र
व्मॊकिे ळ मॊत्र                                       कृ ष्ण फीवा मॊत्र                                          लीय वाधन ऩूजन मॊत्र
कातललीमालजन ऩूजन मॊत्र
          ुल                                          वलल काभ प्रद बैयल मॊत्र                                    दस्षणाभूप्ततल ध्मानभ ् मॊत्र

                                      भनोकाभना ऩूप्ततल एलॊ कद्श प्तनलायण शे तु त्रलळेऴ मॊत्र
व्माऩाय लृत्रद्ध कायक मॊत्र                           अभृत तत्ल वॊजीलनी कामा कल्ऩ मॊत्र                          त्रम ताऩंवे भुत्रि दाता फीवा मॊत्र
व्माऩाय लृत्रद्ध मॊत्र                                त्रलजमयाज ऩॊचदळी मॊत्र                                     भधुभेश प्तनलायक मॊत्र
व्माऩाय लधलक मॊत्र                                    त्रलद्यामळ त्रलबूप्तत याज वम्भान प्रद प्तवद्ध फीवा मॊत्र   ज्लय प्तनलायण मॊत्र
व्माऩायोन्नप्तत कायी प्तवद्ध मॊत्र                    वम्भान दामक मॊत्र                                          योग कद्श दरयद्रता नाळक मॊत्र
बाग्म लधलक मॊत्र                                      वुख ळाॊप्तत दामक मॊत्र                                     योग प्तनलायक मॊत्र
स्लस्स्तक मॊत्र                                       फारा मॊत्र                                                 तनाल भुि फीवा मॊत्र
वलल कामल फीवा मॊत्र                                   फारा यषा मॊत्र                                             त्रलद्युत भानव मॊत्र
कामल प्तवत्रद्ध मॊत्र                                 गबल स्तम्बन मॊत्र                                          गृश करश नाळक मॊत्र
वुख वभृत्रद्ध मॊत्र                                   ऩुत्र प्राप्तद्ऱ मॊत्र                                     करेळ शयण फत्रत्तवा मॊत्र
वलल रयत्रद्ध प्तवत्रद्ध प्रद मॊत्र                    प्रवूता बम नाळक मॊत्र                                      लळीकयण मॊत्र
वलल वुख दामक ऩंवटठमा मॊत्र                            प्रवल-कद्शनाळक ऩॊचदळी मॊत्र                                भोटशप्तन लळीकयण मॊत्र
ऋत्रद्ध प्तवत्रद्ध दाता मॊत्र                         ळाॊप्तत गोऩार मॊत्र                                        कणल त्रऩळाचनी लळीकयण मॊत्र
वलल प्तवत्रद्ध मॊत्र                                  त्रत्रळूर फीळा मॊत्र                                       लातालरी स्तम्बन मॊत्र
वाफय प्तवत्रद्ध मॊत्र                                 ऩॊचदळी मॊत्र (फीवा मॊत्र मुि चायं प्रकायक)
                                                                                               े                 लास्तु मॊत्र
ळाफयी मॊत्र                                           फेकायी प्तनलायण मॊत्र                                      श्री भत्स्म मॊत्र
प्तवद्धाश्रभ मॊत्र                                    ऴोिळी मॊत्र                                                लाशन दघिना नाळक मॊत्र
                                                                                                                       ु ल
ज्मोप्ततऴ तॊत्र सान त्रलसान प्रद प्तवद्ध फीवा मॊत्र   अिवटठमा मॊत्र                                              प्रेत-फाधा नाळक मॊत्र
ब्रह्माण्ि वाफय प्तवत्रद्ध मॊत्र                      अस्वीमा मॊत्र                                              बूतादी व्माप्तधशयण मॊत्र
कण्िप्तरनी प्तवत्रद्ध मॊत्र
 ु                                                    ऋत्रद्ध कायक मॊत्र                                         कद्श प्तनलायक प्तवत्रद्ध फीवा मॊत्र
क्रास्न्त औय श्रीलधलक चंतीवा मॊत्र                    भन लाॊप्तछत कन्मा प्राप्तद्ऱ मॊत्र                         बम नाळक मॊत्र
श्री षेभ कल्माणी प्तवत्रद्ध भशा मॊत्र                 त्रललाशकय मॊत्र                                            स्लप्न बम प्तनलायक मॊत्र
96                                                नलम्फय 2012



सान दाता भशा मॊत्र                                            रग्न त्रलघ्न प्तनलायक मॊत्र                           कदृत्रद्श नाळक मॊत्र
                                                                                                                     ु
कामा कल्ऩ मॊत्र                                               रग्न मोग मॊत्र                                        श्री ळत्रु ऩयाबल मॊत्र
दीधालमु अभृत तत्ल वॊजीलनी मॊत्र                               दरयद्रता त्रलनाळक मॊत्र                               ळत्रु दभनाणलल ऩूजन मॊत्र

                                                               भॊत्र प्तवद्ध त्रलळेऴ दै ली मॊत्र वूप्तच
आद्य ळत्रि दगाल फीवा मॊत्र (अॊफाजी फीवा मॊत्र)
            ु                                                                             वयस्लती मॊत्र
भशान ळत्रि दगाल मॊत्र (अॊफाजी मॊत्र)
            ु                                                                             वद्ऱवती भशामॊत्र(वॊऩणल फीज भॊत्र वटशत)
                                                                                                              ू
नल दगाल मॊत्र
    ु                                                                                     कारी मॊत्र
नलाणल मॊत्र (चाभुिा मॊत्र)
                 ॊ                                                                        श्भळान कारी ऩूजन मॊत्र
नलाणल फीवा मॊत्र                                                                          दस्षण कारी ऩूजन मॊत्र
चाभुिा फीवा मॊत्र ( नलग्रश मुि)
    ॊ                                                                                     वॊकि भोप्तचनी काप्तरका प्तवत्रद्ध मॊत्र
त्रत्रळूर फीवा मॊत्र                                                                      खोटिमाय मॊत्र
फगरा भुखी मॊत्र                                                                           खोटिमाय फीवा मॊत्र
फगरा भुखी ऩूजन मॊत्र                                                                      अन्नऩूणाल ऩूजा मॊत्र
याज याजेद्वयी लाॊछा कल्ऩरता मॊत्र                                                         एकाॊषी श्रीपर मॊत्र

                                                             भॊत्र प्तवद्ध त्रलळेऴ रक्ष्भी मॊत्र वूप्तच
श्री मॊत्र (रक्ष्भी मॊत्र)                                                                भशारक्ष्भमै फीज मॊत्र
श्री मॊत्र (भॊत्र यटशत)                                                                   भशारक्ष्भी फीवा मॊत्र
श्री मॊत्र (वॊऩणल भॊत्र वटशत)
               ू                                                                          रक्ष्भी दामक प्तवद्ध फीवा मॊत्र
श्री मॊत्र (फीवा मॊत्र)                                                                   रक्ष्भी दाता फीवा मॊत्र
श्री मॊत्र श्री वूि मॊत्र                                                                 रक्ष्भी गणेळ मॊत्र
श्री मॊत्र (कभल ऩृद्षीम)
             ु                                                                            ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊत्र ऩूजन मॊत्र
रक्ष्भी फीवा मॊत्र                                                                        कनक धाया मॊत्र
श्री श्री मॊत्र (श्रीश्री रप्तरता भशात्रत्रऩुय वुन्दमै श्री भशारक्ष्भमं श्री भशामॊत्र)    लैबल रक्ष्भी मॊत्र (भशान प्तवत्रद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊत्र)
अॊकात्भक फीवा मॊत्र
            ताम्र ऩत्र ऩय वुलणल ऩोरीव                                     ताम्र ऩत्र ऩय यजत ऩोरीव                                    ताम्र ऩत्र ऩय
                  (Gold Plated)                                                 (Silver Plated)                                      (Copper)
          वाईज                              भूल्म                        वाईज                     भूल्म                     वाईज                     भूल्म
         1” X 1”                           460                          1” X 1”                    370                     1” X 1”                    255
         2” X 2”                          820                           2” X 2”                    640                     2” X 2”                    460
         3” X 3”                          1650                          3” X 3”                   1090                     3” X 3”                    730
         4” X 4”                          2350                          4” X 4”                   1650                     4” X 4”                   1090
         6” X 6”                          3600                          6” X 6”                   2800                     6” X 6”                   1900
         9” X 9”                          6400                          9” X 9”                   5100                     9” X 9”                   3250
        12” X12”                          10800                        12” X12”                   8200                    12” X12”                   6400
मॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं ।
       े                                   ल
                                                                   GURUTVA KARYALAY
                                                   Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
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                      Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
97                                                नलम्फय 2012




                                                                    याप्तळ यत्न
       भेऴ याप्तळ:       लृऴब याप्तळ:              प्तभथुन याप्तळ:             कक याप्तळ:
                                                                                 ल                     प्तवॊश याप्तळ:           कन्मा याप्तळ:
          भूगा
            ॊ                     शीया                   ऩन्ना                     भोती                    भाणेक                      ऩन्ना




       Red Coral              Diamond            Green Emerald             Naturel Pearl                Ruby                  Green Emerald
                              (Special)                                     (Special)                (Old Berma)
       (Special)                                      (Special)                                       (Special)                    (Special)
 5.25" Rs. 1050          10 cent    Rs. 4100     5.25" Rs. 9100           5.25"      Rs. 910       2.25"    Rs.   12500       5.25" Rs. 9100
 6.25" Rs. 1250          20 cent    Rs. 8200     6.25" Rs. 12500          6.25"      Rs. 1250      3.25"    Rs.   15500       6.25" Rs. 12500
 7.25" Rs. 1450          30 cent    Rs. 12500    7.25" Rs. 14500          7.25"      Rs. 1450      4.25"    Rs.   28000       7.25" Rs. 14500
 8.25" Rs. 1800          40 cent    Rs. 18500    8.25" Rs. 19000          8.25"      Rs. 1900      5.25"    Rs.   46000       8.25" Rs. 19000
 9.25" Rs. 2100          50 cent    Rs. 23500    9.25" Rs. 23000          9.25"      Rs. 2300      6.25"    Rs.   82000       9.25" Rs. 23000
 10.25" Rs. 2800                                 10.25" Rs. 28000         10.25"     Rs. 2800                                 10.25" Rs. 28000
                         All Diamond are Full
 ** All Weight In Rati                            ** All Weight In Rati    ** All Weight In Rati    ** All Weight In Rati      ** All Weight In Rati
                             White Colour.

       तुरा याप्तळ:        लृस्द्ळक याप्तळ:          धनु याप्तळ:               भकय याप्तळ:             कब याप्तळ:
                                                                                                        ॊु                       भीन याप्तळ:
          शीया                    भूगा
                                    ॊ                  ऩुखयाज                    नीरभ                      नीरभ                     ऩुखयाज




       Diamond               Red Coral              Y.Sapphire                  B.Sapphire              B.Sapphire               Y.Sapphire
       (Special)
                              (Special)               (Special)                 (Special)                (Special)                 (Special)
10 cent    Rs. 4100      5.25" Rs. 1050          5.25" Rs. 30000          5.25" Rs. 30000          5.25" Rs. 30000            5.25" Rs. 30000
20 cent    Rs. 8200      6.25" Rs. 1250          6.25" Rs. 37000          6.25" Rs. 37000          6.25" Rs. 37000            6.25" Rs. 37000
30 cent    Rs. 12500     7.25" Rs. 1450          7.25" Rs. 55000          7.25" Rs. 55000          7.25" Rs. 55000            7.25" Rs. 55000
40 cent    Rs. 18500     8.25" Rs. 1800          8.25" Rs. 73000          8.25" Rs. 73000          8.25" Rs. 73000            8.25" Rs. 73000
50 cent    Rs. 23500     9.25" Rs. 2100          9.25" Rs. 91000          9.25" Rs. 91000          9.25" Rs. 91000            9.25" Rs. 91000
                         10.25" Rs. 2800         10.25" Rs.108000         10.25" Rs.108000         10.25" Rs.108000           10.25" Rs.108000
 All Diamond are Full
                         ** All Weight In Rati   ** All Weight In Rati    ** All Weight In Rati    ** All Weight In Rati      ** All Weight In Rati
     White Colour.

* उऩमोि लजन औय भूल्म वे अप्तधक औय कभ लजन औय भूल्म क यत्न एलॊ उऩयत्न बी शभाये मशा व्माऩायी भूल्म ऩय उप्रब्ध
                                                   े
शं ।

                                                 GURUTVA KARYALAY
                 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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98                                      नलम्फय 2012




                                                 भॊत्र प्तवद्ध रूद्राष
                                            Rate In                                                   Rate In
          Rudraksh List                                             Rudraksh List
                                         Indian Rupee                                              Indian Rupee
एकभुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा)          2800, 5500         आठ भुखी रूद्राष (नेऩार)               820,1250
एकभुखी रूद्राष (नेऩार)                  750,1050, 1250, आठ भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा)          1900
दो भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय)    30,50,75           नौ भुखी रूद्राष (नेऩार)               910,1250
दो भुखी रूद्राष (नेऩार)                 50,100,            नौ भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा)       2050
दो भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा)         450,1250           दव भुखी रूद्राष (नेऩार)               1050,1250
तीन भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय)   30,50,75,          दव भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा)       2100
तीन भुखी रूद्राष (नेऩार)                50,100,            ग्मायश भुखी रूद्राष (नेऩार)           1450,
तीन भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा)        450,1250,          ग्मायश भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा)   2750,
चाय भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय)   25,55,75,          फायश भुखी रूद्राष (नेऩार)             2350,
चाय भुखी रूद्राष (नेऩार)                50,100,            फायश भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा)     2750,
ऩॊच भुखी रूद्राष (नेऩार)                25,55,             तेयश भुखी रूद्राष (नेऩार)             4500,5500
ऩॊच भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा)        225, 550,          तेयश भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा)     6400,
छश भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय)    25,55,75,          चौदश भुखी रूद्राष (नेऩार)             10500, 12500
छश भुखी रूद्राष (नेऩार)                 50,100,            चौदश भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा)     14500
वात भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय)   75, 155,           गौयीळॊकय रूद्राष                      1900
वात भुखी रूद्राष (नेऩार)                225, 450,          गणेळ रुद्राष (नेऩार)                  730
वात भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा)        1250               गणेळ रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा)          820
 रुद्राष क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं ।
          े                                   ल
                                           GURUTVA KARYALAY,
           92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA),
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                                         भॊत्र प्तवद्ध दरब वाभग्री
                                                        ु ल
  शत्था जोिी- Rs- 370                     घोिे की नार- Rs.351                     भामा जार- Rs- 251
  प्तवमाय प्तवॊगी- Rs- 370                दस्षणालतॉ ळॊख- Rs- 550                  इन्द्र जार- Rs- 251
  त्रफल्री नार- Rs- 370                   भोप्तत ळॊख- Rs- 550                     धन लृत्रद्ध शकीक वेि Rs-251
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99                                             नलम्फय 2012




                                                 श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र
       टकवी बी व्मत्रि का जीलन तफ आवान फन जाता शं जफ उवक चायं औय का भाशोर उवक अनुरुऩ उवक लळ
                                                        े                    े          े
भं शं। जफ कोई व्मत्रि का आकऴलण दवयो क उऩय एक चुम्फकीम प्रबाल िारता शं , तफ
                                ु    े                                                                रोग उवकी वशामता एलॊ
वेला शे तु तत्ऩय शोते शै औय उवक प्राम् वबी कामल त्रफना अप्तधक कद्श ल ऩये ळानी वे वॊऩन्न शो जाते शं । आज क
                               े                                                                         े
बौप्ततकता लाटद मुग भं शय व्मत्रि क प्तरमे दवयो को अऩनी औय खीचने शे तु एक प्रबालळाप्तर चुफकत्ल को कामभ
                                  े        ू                                            ॊ
यखना अप्तत आलश्मक शो जाता शं । आऩका आकऴलण औय व्मत्रित्ल आऩक चायो ओय वे रोगं को आकत्रऴलत कये इव
                                                           े
प्तरमे वयर उऩाम शं , श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र। क्मोटक बगलान श्री कृ ष्ण एक अरौटकल एलॊ टदलम चुॊफकीम व्मत्रित्ल के
धनी थे। इवी कायण वे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र क ऩूजन एलॊ दळलन वे आकऴलक व्मत्रित्ल प्राद्ऱ शोता शं ।
                                           े
       श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र क वाथ व्मत्रिको दृढ़ इच्छा ळत्रि एलॊ उजाल प्राद्ऱ
                              े
शोती शं , स्जस्वे व्मत्रि शभेळा एक बीि भं शभेळा आकऴलण का कद्र यशता शं ।
                                                          ं
                                                                                         श्रीकृ ष्ण फीवा कलच
       मटद टकवी व्मत्रि को अऩनी प्रप्ततबा ल आत्भत्रलद्वाव क स्तय भं लृत्रद्ध,
                                                           े
अऩने प्तभत्रो ल ऩरयलायजनो क त्रफच भं रयश्तो भं वुधाय कयने की ईच्छा शोती
                           े                                                          श्रीकृ ष्ण   फीवा     कलच        को     कलर
                                                                                                                               े

शं उनक प्तरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र का ऩूजन एक वयर ल वुरब भाध्मभ
      े                                                                               त्रलळेऴ ळुब भुशुतल भं प्तनभालण टकमा

वात्रफत शो वकता शं ।                                                                  जाता शं । कलच को त्रलद्रान कभलकाॊिी

       श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र ऩय अॊटकत ळत्रिळारी त्रलळेऴ ये खाएॊ, फीज भॊत्र एलॊ        ब्राशभणं द्राया ळुब भुशुतल भं ळास्त्रोि

अॊको वे व्मत्रि को अद्धद्भत आॊतरयक ळत्रिमाॊ प्राद्ऱ शोती शं जो व्मत्रि को             त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो
                          ु
वफवे आगे एलॊ वबी षेत्रो भं अग्रस्णम फनाने भं वशामक प्तवद्ध शोती शं ।                  द्राया प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म

       श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र क ऩूजन ल प्तनमप्तभत दळलन क भाध्मभ वे बगलान
                              े                        े                              मुि कयक प्तनभालण टकमा जाता शं ।
                                                                                             े

श्रीकृ ष्ण का आळीलालद प्राद्ऱ कय वभाज भं स्लमॊ का अटद्रतीम स्थान स्थात्रऩत कयं ।      स्जव क पर स्लरुऩ धायण कयता
                                                                                            े

       श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र अरौटकक ब्रह्माॊिीम उजाल का वॊचाय कयता शं , जो            व्मत्रि को ळीघ्र ऩूणल राब प्राद्ऱ शोता

एक प्राकृ त्रत्त भाध्मभ वे व्मत्रि क बीतय वद्दबालना, वभृत्रद्ध, वपरता, उत्तभ
                                    े                                                 शं । कलच को गरे भं धायण कयने

स्लास्र्थम, मोग औय ध्मान क प्तरमे एक ळत्रिळारी भाध्मभ शं !
                          े                                                           वे लशॊ अत्मॊत प्रबाल ळारी शोता

       श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र क ऩूजन वे व्मत्रि क वाभास्जक भान-वम्भान ल
                               े                 े                                    शं । गरे भं धायण कयने वे कलच

        ऩद-प्रप्ततद्षा भं लृत्रद्ध शोती शं ।                                          शभेळा रृदम क ऩाव यशता शं स्जस्वे
                                                                                                  े

       त्रलद्रानो क भतानुळाय श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र क भध्मबाग ऩय ध्मान मोग
                    े                                े                                व्मत्रि ऩय उवका राब अप्तत तीव्र

        कटद्रत कयने वे व्मत्रि टक चेतना ळत्रि जाग्रत शोकय ळीघ्र उच्च स्तय
         ं                                                                            एलॊ ळीघ्र सात शोने रगता शं ।

        को प्राद्ऱशोती शं ।                                                                                  भूरम भात्र: 1900

       जो ऩुरुऴं औय भटशरा अऩने वाथी ऩय अऩना प्रबाल िारना चाशते शं औय उन्शं अऩनी औय आकत्रऴलत कयना
        चाशते शं । उनक प्तरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र उत्तभ उऩाम प्तवद्ध शो वकता शं ।
                      े
       ऩप्तत-ऩत्नी भं आऩवी प्रभ की लृत्रद्ध औय वुखी दाम्ऩत्म जीलन क प्तरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र राबदामी शोता शं ।
                                                                    े
                                                                       भूल्म:- Rs. 730 वे Rs. 10900 तक उप्रब्द्ध
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100                                नलम्फय 2012




                                         याभ यषा मॊत्र
याभ यषा मॊत्र वबी बम, फाधाओॊ वे भुत्रि ल कामो भं वपरता प्राप्तद्ऱ शे तु उत्तभ मॊत्र शं । स्जवक प्रमोग
                                                                                              े

वे धन राब शोता शं ल व्मत्रि का वलांगी त्रलकाय शोकय उवे वुख-वभृत्रद्ध, भानवम्भान की प्राप्तद्ऱ शोती

शं । याभ यषा मॊत्र वबी प्रकाय क अळुब प्रबाल को दय कय व्मत्रि को जीलन की वबी प्रकाय की
                               े                ू
कटठनाइमं वे यषा कयता शं । त्रलद्रानो क भत वे जो व्मत्रि बगलान याभ क बि शं मा श्री
                                      े                            े

शनुभानजी क बि शं उन्शं अऩने प्तनलाव स्थान, व्मलवामीक स्थान ऩय याभ यषा मॊत्र को अलश्म
          े

स्थाऩीत कयना चाटशमे स्जववे आने लारे वॊकिो वे यषा शो उनका जीलन वुखभम व्मतीत शो वके

एलॊ उनकी वभस्त आटद बौप्ततक ल आध्मास्त्भक भनोकाभनाएॊ ऩूणल शो वक।
                                                              े




    ताम्र ऩत्र ऩय वुलणल ऩोरीव          ताम्र ऩत्र ऩय यजत ऩोरीव                  ताम्र ऩत्र ऩय
          (Gold Plated)                     (Silver Plated)                        (Copper)

    वाईज                भूल्म         वाईज                    भूल्म       वाईज                  भूल्म
   1” X 1”             460           1” X 1”                  370        1” X 1”                255
   2” X 2”             820           2” X 2”                  640        2” X 2”                460
   3” X 3”            1650           3” X 3”                  1090       3” X 3”                730
   4” X 4”            2350           4” X 4”                  1650       4” X 4”                1090
   6” X 6”            3600           6” X 6”                  2800       6” X 6”                1900
   9” X 9”            6400           9” X 9”                  5100       9” X 9”                3250
  12” X12”            10800         12” X12”                  8200      12” X12”                6400
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101                                                 नलम्फय 2012




                                          जैन धभलक त्रलप्तळद्श मॊत्रो की वूची
                                                  े
श्री चौफीव तीथंकयका भशान प्रबात्रलत चभत्कायी मॊत्र            श्री एकाषी नारयमेय मॊत्र
श्री चोफीव तीथंकय मॊत्र                                       वललतो बद्र मॊत्र
कल्ऩलृष मॊत्र                                                 वलल वॊऩत्रत्तकय मॊत्र
प्तचॊताभणी ऩाद्वलनाथ मॊत्र                                    वललकामल-वलल भनोकाभना प्तवत्रद्धअ मॊत्र (१३० वललतोबद्र मॊत्र)
प्तचॊताभणी मॊत्र (ऩंवटठमा मॊत्र)                              ऋत्रऴ भॊिर मॊत्र
प्तचॊताभणी चक्र मॊत्र                                         जगदलल्रब कय मॊत्र
श्री चक्रद्वयी मॊत्र
        े                                                     ऋत्रद्ध प्तवत्रद्ध भनोकाभना भान वम्भान प्राप्तद्ऱ मॊत्र
श्री घॊिाकणल भशालीय मॊत्र                                     ऋत्रद्ध प्तवत्रद्ध वभृत्रद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊत्र
श्री घॊिाकणल भशालीय वलल प्तवत्रद्ध भशामॊत्र                   त्रलऴभ त्रलऴ प्तनग्रश कय मॊत्र
(अनुबल प्तवद्ध वॊऩणल श्री घॊिाकणल भशालीय ऩतका मॊत्र)
                  ू
श्री ऩद्मालती मॊत्र                                           षुद्रो ऩद्रल प्तननालळन मॊत्र
श्री ऩद्मालती फीवा मॊत्र                                      फृशच्चक्र मॊत्र
श्री ऩाद्वलऩद्मालती ह्रंकाय मॊत्र                             लॊध्मा ळब्दाऩश मॊत्र
ऩद्मालती व्माऩाय लृत्रद्ध मॊत्र                               भृतलत्वा दोऴ प्तनलायण मॊत्र
श्री धयणेन्द्र ऩद्मालती मॊत्र                                 काॊक लॊध्मादोऴ प्तनलायण मॊत्र
श्री ऩाद्वलनाथ ध्मान मॊत्र                                    फारग्रश ऩीिा प्तनलायण मॊत्र
श्री ऩाद्वलनाथ प्रबुका मॊत्र                                  रधुदेल कर मॊत्र
                                                                      ु
बिाभय मॊत्र (गाथा नॊफय १ वे ४४ तक)                            नलगाथात्भक उलवग्गशयॊ स्तोत्रका त्रलप्तळद्श मॊत्र
भस्णबद्र मॊत्र                                                उलवग्गशयॊ मॊत्र
श्री मॊत्र                                                    श्री ऩॊच भॊगर भशाश्रृत स्कध मॊत्र
                                                                                        ॊ
श्री रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ औय व्माऩाय लधलक मॊत्र                 ह्रीॊकाय भम फीज भॊत्र
श्री रक्ष्भीकय मॊत्र                                          लधलभान त्रलद्या ऩट्ि मॊत्र
रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ मॊत्र                                      त्रलद्या मॊत्र
भशात्रलजम मॊत्र                                               वौबाग्मकय मॊत्र
त्रलजमयाज मॊत्र                                               िाटकनी, ळाटकनी, बम प्तनलायक मॊत्र
त्रलजम ऩतका मॊत्र                                             बूताटद प्तनग्रश कय मॊत्र
त्रलजम मॊत्र                                                  ज्लय प्तनग्रश कय मॊत्र
प्तवद्धचक्र भशामॊत्र                                          ळाटकनी प्तनग्रश कय मॊत्र
दस्षण भुखाम ळॊख मॊत्र                                         आऩत्रत्त प्तनलायण मॊत्र
दस्षण भुखाम मॊत्र                                             ळत्रुभख स्तॊबन मॊत्र
                                                                    ु
मॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं ।
       े                                   ल
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102                                   नलम्फय 2012




                                                    घॊिाकणल भशालीय वलल प्तवत्रद्ध भशामॊत्र को स्थाऩीत
                                            कयने वे वाधक की वलल भनोकाभनाएॊ ऩूणल शोती शं । वलल
                                            प्रकाय क योग बूत-प्रेत आटद उऩद्रल वे यषण शोता शं ।
                                                    े
                                            जशयीरे औय टशॊ वक प्राणीॊ वे वॊफप्तधत बम दय शोते शं ।
                                                                           ॊ         ू
                                            अस्ग्न बम, चोयबम आटद दय शोते शं ।
                                                                  ू
                                                    दद्श ल अवुयी ळत्रिमं वे उत्ऩन्न शोने लारे बम
                                                     ु
                                            वे मॊत्र क प्रबाल वे दय शो जाते शं ।
                                                      े           ू
                                                    मॊत्र क ऩूजन वे वाधक को धन, वुख, वभृत्रद्ध,
                                                           े
                                            ऎद्वमल, वॊतत्रत्त-वॊऩत्रत्त आटद की प्राप्तद्ऱ शोती शं । वाधक की
                                            वबी प्रकाय की वास्त्लक इच्छाओॊ की ऩूप्ततल शोती शं ।
                                                    मटद टकवी ऩरयलाय मा ऩरयलाय क वदस्मो ऩय
                                                                               े
                                            लळीकयण, भायण,          उच्चािन इत्माटद जाद-िोने लारे
                                                                                      ू
                                            प्रमोग टकमे गमं शोतो इव मॊत्र क प्रबाल वे स्लत् नद्श
                                                                           े
                                            शो जाते शं औय बत्रलष्म भं मटद कोई प्रमोग कयता शं तो
                                            यषण शोता शं ।
                                                    कछ जानकायो क श्री घॊिाकणल भशालीय ऩतका
                                                     ु          े
                                            मॊत्र वे जुिे अद्धद्भत अनुबल यशे शं । मटद घय भं श्री
                                                                 ु
                                            घॊिाकणल भशालीय ऩतका मॊत्र स्थात्रऩत टकमा शं औय मटद
                                            कोई इऴाल, रोब, भोश मा ळत्रुतालळ मटद अनुप्तचत कभल
कयक टकवी बी उद्दे श्म वे वाधक को ऩये ळान कयने का प्रमाव कयता शं तो मॊत्र क प्रबाल वे वॊऩणल
   े                                                                      े             ू
ऩरयलाय का यषण तो शोता शी शं , कबी-कबी ळत्रु क द्राया टकमा गमा अनुप्तचत कभल ळत्रु ऩय शी उऩय
                                             े
उरि लाय शोते दे खा शं ।                                  भूल्म:- Rs. 1650 वे Rs. 10900 तक उप्रब्द्ध
                    वॊऩक कयं । GURUTVA KARYALAY
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103                                नलम्फय 2012




                         अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलच
अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलच ल     उल्रेस्खत अन्म वाभग्रीमं को ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलद्रान
ब्राह्मणो द्राया वला राख भशाभृत्मुजम भॊत्र जऩ एलॊ दळाॊळ शलन द्राया प्तनप्तभलत कलच अत्मॊत
                                  ॊ
प्रबालळारी शोता शं ।


      अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलच
                                                         अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम
            कलच फनलाने शे तु:
 अऩना नाभ, त्रऩता-भाता का नाभ,                                      कलच
       गोत्र, एक नमा पोिो बेजे                           दस्षणा भात्र: 10900


                              याळी यत्न एलॊ उऩयत्न

                                                              त्रलळेऴ मॊत्र

                                                शभायं मशाॊ वबी प्रकाय क मॊत्र वोने-चाॊटद-
                                                                       े
                                                ताम्फे भं आऩकी आलश्मिा क अनुळाय
                                                                        े
                                                टकवी बी बाऴा/धभल क मॊत्रो को आऩकी
                                                                  े
                                                आलश्मक टिजाईन क अनुळाय २२ गेज
                                                               े
                                                ळुद्ध ताम्फे भं अखॊटित फनाने की त्रलळेऴ
       वबी वाईज एलॊ भूल्म ल क्लाप्तरटि के
                                                वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं ।
     अवरी नलयत्न एलॊ उऩयत्न बी उऩरब्ध शं ।
शभाये मशाॊ वबी प्रकाय क यत्न एलॊ उऩयत्न व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शं । ज्मोप्ततऴ कामल वे जुिे़
                       े
फधु/फशन ल यत्न व्मलवाम वे जुिे रोगो क प्तरमे त्रलळेऴ भूल्म ऩय यत्न ल अन्म वाभग्रीमा ल अन्म
                                     े
वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं ।
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                                               भाप्तवक याप्तळ पर

                                                                                                         प्तचॊतन जोळी
भेऴ: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : कुछ रुकालिो क फाद भं व्मलवाम भं धन राब प्राद्ऱ शोगा। नौकयी-व्मलवाम भं उस्म्भद
                                        े
                                 वे कभ धन राब की प्राप्तद्ऱ शो वकती शं । आऩकी भशत्ल ऩूणल व्मलवाप्तमक मात्रा स्थप्तगत
                                 शो वकती। आऩको भानप्तवक अस्स्थयता का अनुबल शो वकता शं । आत्भ त्रलद्वाव वे आगे
                                 फढते यशने का प्रमाव कयं । त्रलयोधी एलॊ ळत्रु ऩष वे ऩये ळानी शो वकती शं ।

                                 16 वे 30 नलम्फय 2012 : अत्माप्तधक ऩरयश्रभ औय भेशनत वे आऩ वपरता प्राद्ऱ कय
                                 वकते शं । आऩकी राऩयलाशी आऩको रॊफे वभम का नुक्ळान कय वकती शं । वभाज भं
                                 अऩना नाभ औय प्रप्ततद्षा फनाए यखने क प्तरमे त्रलळेऴ ध्मान यखना चाटशमे। बूप्तभ-बलन वे
                                                                    े
                                 वॊफॊप्तधअ भाभरो भं प्तचॊता यश वकती शं । इव अलप्तध क दौयान अऩने स्लबाल भं
                                                                                    े
प्तचिप्तचिा ऩन आवकता शं । अऩने क्रोध ऩय प्तनमॊत्रण यखे।

लृऴब: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : दै प्तनक वुख-वाधनो भं लृत्रद्ध शोगी स्जव कायण खचल फढ़ वकता शं । उच्च अप्तधकायी एलॊ
वशकभॉ क कामल ऩये ळानीमं वॊबल शं । ऩूॊस्ज प्तनलेळ शे तु वभम उत्तभ नशीॊ शं अत् भशत्लऩूणल प्तनणलमो को स्थप्तगत कयने
       े
का प्रमाव कयं । लाणी ऩय प्तनमॊत्रण यखे अऩने त्रप्रम ऩात्र वे रयश्ते त्रफगि वकते शं । खाने- ऩीने का ध्मान यखे स्लास्र्थम
नयभ शो वकता शै ।

16 वे 30 नलम्फय 2012 : भानप्तवक प्रन्नता फढे गी। आऩक वाथलक प्रमावो वे आप्तथलक स्स्थप्तत प्रफर शोगी। चर-अचर
                                                    े
वॊऩत्रत्त वे वॊफॊप्तधत कामं भं राब प्राद्ऱ शो वकता शं । मश वभम गुद्ऱ त्रलयोधी-ळत्रुओॊ ऩय त्रलजम प्राद्ऱ कयने क प्तरए श्रेद्ष
                                                                                                              े
वात्रफत शोगा। ऩरयलाय औय रयश्तेदायं वे आस्त्भमता क अनुबल भं कभी यश वकती शं । व्मम ऩय प्तनमन्त्रण यखने वे राब
                                                 े
प्राद्ऱ शोगा।

                                 प्तभथुन: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : अऩने कामलषेत्र वे आऩ त्रलळेऴ धनराब प्राद्ऱ कयने भं
                                 वपर यशं गे। ऩूॊस्ज प्तनलेळ वे वॊफॊप्तधत कामो भं त्रलळेऴ वपरता प्राद्ऱ कय वकते शं ।
                                 रेटकन ऩारयलारयक रयश्तं क प्तरए वभम थोिा प्रप्ततकर शो वकता शं । इव प्तरए ऩरयलाय
                                                         े                       ू
                                 क रोगो क वाथ व्मलशाय कळर यशने का प्रमाव कयं । अऩने क्रोध ऩय प्तनमॊत्रण यखं।
                                  े      े             ू
                                 त्रप्रमजनो वे लाद-त्रललाद क कायण कद्श उठाना ऩि वकता शं ।
                                                            े

                                 16 वे 30 नलम्फय 2012 : आकस्स्भक धन राब प्राद्ऱ शोगा। नौकयी-व्मलवाम क कामं
                                                                                                     े
                                 भं आऩको त्रलळेऴ वपरता प्राद्ऱ शोगी। मटद आऩ अत्रललाटशत शं तो त्रललाश क फॊधन भं
                                                                                                      े
जल्द शी फॊध वकते शं । आऩक ऩद-प्रप्ततद्षा भं लृत्रद्ध शोगी। अनालश्मक खचो ऩय प्तनमॊत्रण कयने का प्रमाव कयं । आऩका
                         े
कोई ऩरयजन स्लास्र्थम वॊफॊप्तधत ऩये ळानी वे ग्रस्त शो वकता शं इव प्तरए उप्तचत ध्मान यखने का प्रमाव कयं ।
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कक: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : आऩकी व्मलवामीक मात्राएॊ आप्तथलक द्दत्रद्श वे राबप्रद शो वकती शं । आऩका स्लास्र्थम
  ल
उत्तभ यशे गा। आप्तथलक स्स्थप्तत भं वुधाय शोगा। बूप्तभ-बलन इत्माटद भं ऩूॊस्जप्तनलेळ कयने
क प्तरए वभम उत्तभ प्तवद्ध शो वकता शं । ऩरयलाय भं टकवी वदस्म क स्जद्दी स्लबाल क
 े                                                           े                े
कायण आऩक ऩरयलाय भं भानप्तवक अळाॊप्तत का भाशोर शो वकता शै ।
        े

16 वे 30 नलम्फय 2012 : आऩको कामलषेत्र भं अऩनी भेशनत वे आऩ वपरता औय
धनराब प्राद्ऱ कय वकते शं । आऩको वाझेदायी क प्रस्ताल प्राद्ऱ शो वकते शं । जो आऩक
                                          े                                    े
प्तरए राबदाम शो वकता शं । ऩरयलाय क टकवी वदस्म क स्लास्र्थम की प्रप्ततकरता वे
                                  े            े                      ू
आऩकी भानप्तवक ऩये ळानी फढ़ वकती शं । आऩक जीलन वाथी का व्मलशाय आऩक प्रप्तत
                                        े                        े
उदावीन शो वकता शं ।

प्तवॊश: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : अऩने कामलषेत्र भं वपरता क प्तरए मश वभम उत्तभ वात्रफत शो वकता शं । आऩको कोई
                                                       े

                               भशत्लऩूणल ऩद प्राद्ऱ शो वकता शं । त्रलयोधी एलॊ ळत्रु ऩष ऩयास्त शंगे। वॊतान वे वॊफॊप्तधत
                               कामो भं बी वपरता प्राद्ऱ शो वकती शं । दयस्थ मात्राएॊ कयनी ऩि वकती शं ।
                                                                      ू
                               जीलनवाथी का भनोनुकर व्मलशाय आऩक प्तचत्त की प्रवन्नता भं लृत्रद्ध कयने लारा
                                                 ू            े
                               यशे गा।

                               16 वे 30 नलम्फय 2012 : बूप्तभ-बलन वे वॊफॊप्तधत कामो वे आऩको आप्तथक राब प्राद्ऱ
                                                                                                ल
                               शोने क मोग शं । ऩरयलाय भं टकवी वदस्म क स्जद्दी स्लबाल क कायण ऩरयलाय भं अळाॊप्तत
                                     े                               े                े
                               का भाशोर शो वकता शै । आऩको ळुब वभाचाय की प्राप्तद्ऱ शो वकती शं । आम वे व्मम
अप्तधक शोने क मोग फन यशे शं । प्रेभ वॊफॊप्तधत भाभरं भं कोई ऩये ळानी शो वकती शं । वॊमभ भं यशने का प्रमाव कयं ।
             े

कन्मा: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : नमे रोगो की प्तभत्रता वे कामलषेत्र भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ
शोने क मोग शं । फिे ़-फुजुगो वे उप्तचत व्मलशाय फनाए यखं अन्मथा रयश्ते त्रफगि वकते
      े
शं औय ऩरयलाय का भाशौर तनालऩूणल शो वकता शं । आऩका खानऩान उत्तभ यशे गा।
वाभास्जक भान-वम्भान औय ऩद-प्रप्ततद्षा भं लृत्रद्ध शोगी। जीलन वाथी वे रयश्तो भं
भधुयता आएगी।

16 वे 30 नलम्फय 2012 : कामलषेत्र क प्राम् आऩक वबी कामल वुचारु रुऩ वे ऩूणल
                                  े          े
शंगे।   बूप्तभ- बलन-लाशन क क्रम-त्रलक्रम वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं । ळत्रुओॊ ऩय आऩका
                          े
प्रबाल यशे गा। आऩक त्रलयोधी एलॊ ळत्रु ऩष ऩयास्त शंगे। ऩरयलाय क रोगो क वाथ व्मलशाय कळर यशने का प्रमाव कयं ।
                  े                                           े      े             ू
मटद आऩ अत्रललाटशत शं तो त्रललाश क फॊधन भं जल्द शी फॊध वकते शं । आऩक बौप्ततक वुख वाधनो भं लृत्रद्ध शोगी।
                                 े                                 े
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तुरा: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : नौकयी-व्मलवाम भं आऩको इच्छा वे अप्तधक प्रगप्तत प्राद्ऱ शोगी। आऩक भशत्ल ऩूणल कामो
                                                                                            े

                               भं अप्ततरयि वालधानी यखनी चाटशमे अन्मथा कछ कामो भं नुक्ळान शो वकता शै । भशत्ल
                                                                       ु
                               क कामो क प्तरमे आऩको कजल रेना ऩि वकता शं जो राब प्रद प्तवद्ध शो वकता शं ।
                                े      े
                               ऩरयलाय औय प्तभत्रं का वशमोग प्राद्ऱ शोगा। दाॊऩत्म वुख भं लृत्रद्ध शोगी।

                               16 वे 30 नलम्फय 2012 : भशत्ल ऩूणल कामो को स्स्थगीत कयना मा टकवी औय को दे ना
                               नुक्ळान दे श शो वकता शं । खचल आलश्मिा वे अप्तधक शो वकता शं खचल ऩय प्तनमॊत्रण
                               कयने का प्रमाव कयं । मटद आऩ अत्रललाटशत शं तो त्रललाश क उत्तभ मोग फन यशे
                                                                                     े
                               शं । कामल टक व्मस्तता क कायण त्रलश्राभ का अबाल यशे गा। अप्तधक वभम अऩने जीलन
                                                      े
वाथी क वाथ त्रफताने का प्रमाव कये ।
      े

लृस्द्ळक: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : नौकयी, व्मलास्म भं आकस्स्भक धनप्राप्तद्ऱ शोने के

ळुब वॊकत शं , स्जस्वे आप्तथलक स्स्थती भं वुधाय शोगा। भशत्लऩूणल कामो को कयने भं आऩ
       े
वपर शंगे। वाभास्जक भान-वम्भान औय ऩद-प्रप्ततद्षा भं लृत्रद्ध शोगी। व्मलवाप्तमक मात्रा
राबदामक प्तवद्ध शोगी। नमे रोगो की प्तभत्रता वे राब प्राद्ऱ कय वकते शं । जीलन वाथी वे
वशमोग प्राद्ऱ शोगा। ळुब वभाचाय टक प्राप्तद्ऱ शो वकती शं ।

16 वे 30 नलम्फय 2012 : बूप्तभ-बलन क क्रम त्रलक्रम वे धन राब शोगा। स्लास्र्थम
                                   े
वॊफॊप्तधत वभस्मा शो वकती शं अत् अऩनी वेशत का त्रलळेऴ ध्मान यखे। ऋण दे ने वे फचं
अन्मथा धन की ऩुन् प्राप्तद्ऱ भं त्रलरॊफ शो वकता शं । ऩरयजनो एलॊ इद्श प्तभत्रं क वशमोग वे आऩकी प्रवन्नता भं लृत्रद्ध
                                                                               े
शोगी। मटद आऩ अत्रललाटशत शं तो त्रललाश क उत्तभ मोग फन यशे शं । दाॊऩत्म वुख भं लृत्रद्ध शोगी।
                                       े

धनु: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : अऩने वॊप्तचत धन वे ऩूॊस्ज प्तनलेळ कय राब प्राद्ऱ कय वकते शै । व्मलवाम वे वॊफॊप्तधत का
                                कामं वे जुिे रोगो की प्रप्तवत्रद्ध का तेजी वे त्रलस्ताय शोगा। ळत्रु ऩष वे वालधान यशं
                                आऩ ऩय झूठे आयोऩ रग वकते शै ।       त्रलऩयीत प्तरॊग क प्रप्तत आऩका आकऴलण अप्तधक
                                                                                    े                            यशे गा।
                                स्लास्र्थम वाभान्मत् उत्तभ यशे गा। जीलन वाथी वे वशमोग प्राद्ऱ शोगा। ळुब वभाचाय टक
                                प्राप्तद्ऱ शो वकती शं ।

                                16 वे 30 नलम्फय 2012 : अत्माप्तधक बागदौि क कायण आऩको उजाल ल उवाश की कभी
                                                                          े
                                भशवूव शो वकती शं । व्मलवाप्तमक मात्रा राबदामक प्तवद्ध शोगी। मटद आऩ अत्रललाटशत शं
                                तो त्रललाश क उत्तभ मोग फन यशे शं । ऩरयलाय क टकवी वदस्मक वाथ भं भतबेद वॊबल
                                            े                              े           े
शं । अऩनेखाने-ऩीने का त्रलळेऴ ध्मान यखे अन्मथा आऩका का स्लास्र्थम नयभ शो वकता शै ।
107                                       नलम्फय 2012



भकय: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : टकमे गमे ऩूॊस्ज प्तनलेळ द्राया आकस्स्भक धन प्राप्तद्ऱ क मोग फन यशे शै । आऩको बूप्तभ-
                                                                                  े

                                  बलन-लाशन वे वॊफॊप्तधत भाभरो वे बी धन राब प्राद्ऱ शो वकता शं । कामलषेत्र भं आऩको
                                 भनोनुकर राब प्राद्ऱ शोगा। आऩक वाभास्जक भान-वम्भान औय ऩद-प्रप्ततद्षा भं लृत्रद्ध
                                       ू                      े
                                 शोगी। प्रेभ वॊफॊप्तधत भाभरो भं अनफन शो वकती शं । आऩका आध्मास्त्भक जीलन उच्च
                                 स्तय का शो वकता शं ।

                                 16 वे 30 नलम्फय 2012 : मटद आऩ नौकयी भं शं तो वशकभॉमं क फीच भं अऩने कामल
                                                                                       े
                                 का अच्छा प्रदळलन कयने भं वभथल शंगे। आऩक बौप्ततक वुख-वाधनो भं लृत्रद्ध शोगी।
                                                                        े
                                 ऩरयलाय क टकवी वदस्मा का स्लास्र्थम प्तचॊता का त्रलऴम शो वकता शं । भौवभ क फदराल
                                         े                                                               े
वे ऩरयलाय क टकवी वदस्म का स्लास्र्थम प्राबात्रलत शो वकता शं । अत्रललाश शै तो त्रललाश फॊधन भं फॊधने क मोग फन यशे
           े                                                                                        े
शं ।

कब: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : आप्तथलक ऩष वाभान्म वे उत्तभ यशे गा। अऩने भशत्ल
 ॊु
ऩूणल कामो भं अप्ततरयि वालधानी फयते अन्मथा फने फनाए कामल त्रफगि वकते शं ।
आऩकी रुप्तच इद्श आयाधना भं अप्तधक शो वकती शं । प्रेभ वॊफॊप्तधत भाभरो क प्तरए वभम
                                                                      े
प्तभराझुरा वात्रफत शो वकता शं । अऩने खाने- ऩीने का ध्मान यखे अन्मथा आऩका
का स्लास्र्थम नयभ शो वकता शै ।

16 वे 30 नलम्फय 2012 : नौकयी-व्मलवाम भं टकमे गमे प्रमावो वे ऩूणल वपरता प्राद्ऱ
शोगी। ळत्रु एलॊ त्रलयोधी ऩष वे ऩये ळानी वॊबल शं । ऩरयलाय की वुख -ळास्न्त को फनामे यखने
का प्रमाव कयं । वभाज भं आऩका भान एलॊ प्रप्ततद्षा फढने क अच्छे मोग फन यशे शं । इद्श प्तभत्रं कवशमोग वे नमे प्तभत्र फन
                                                       े                                     े
वकते शं । आऩका आध्मास्त्भक जीलन उच्च स्तय का शो वकता शं ।

भीन: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : कामलषेत्र भं वभम उताय-चढ़ाल लारा शो वकता शै । नौकयी-व्मलवाम भं ऩरयश्रभ एलॊ
                                 भेशनत क उऩयाॊत वे धनराब प्राद्ऱ शोगा। बायी भात्रा भं ऩूॊस्ज प्तनलेळ मा बूप्तभ-बलन वे
                                        े
                                 वॊफॊप्तधअ भाभरो भं वतक यशे अन्मथा बायी नुक्ळान शो वकता शं । अऩने खाने-
                                                       ल
                                 ऩीने का ध्मान यखे अन्मथा आऩका का स्लास्र्थम नयभ शो वकता शै । प्रेभ वॊफॊप्तधत भाभरो
                                 भं वपरता प्राद्ऱ शोगी।

                                 16 वे 30 नलम्फय 2012 : कछ रुकालिो क फाद भं व्मलवाम भं धन राब प्राद्ऱ शोगा।
                                                         ु          े
                                 वभाज      भं    आऩके     नाभ-प्रप्ततद्षा फनाए   यखने क प्तरमे त्रलळेऴ
                                                                                       े                 ध्मान     यखना
चाटशमे। आऩको बूप्तभ-बलन वे वॊफॊप्तधअ भाभरो भं प्तचॊता यश वकती शं । ऩरयलाय भं भाॊगप्तरक कामल शो वकते शं एलॊ ळुब
वभाचाय टक प्राप्तद्ऱ शो वकती शं । मटद आऩ अत्रललाटशत शं तो त्रललाश क फॊधन भं जल्द शी फॊध वकते शं ।
                                                                   े
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                                               नलम्फय 2012 भाप्तवक ऩॊचाॊग
                                                                                                                                       चॊद्र
टद    लाय      भाश      ऩष       प्ततप्तथ   वभाप्तद्ऱ           नषत्र   वभाप्तद्ऱ       मोग    वभाप्तद्ऱ       कयण       वभाप्तद्ऱ             वभाप्तद्ऱ
                                                                                                                                      याप्तळ

1    गुरु    काप्ततलक   कृ ष्ण तृतीमा       32:59:30
                                                        कृ प्ततका       08:23:53
                                                                                    लरयमान     17:40:45
                                                                                                           लस्णज        19:37:57
                                                                                                                                     लृऴ       -


2    ळुक्र   काप्ततलक   कृ ष्ण तृतीमा       08:59:17
                                                        योटशस्ण         11:33:02
                                                                                    ऩरयग्रश    18:43:21
                                                                                                           त्रलत्रद्श   08:59:17
                                                                                                                                     लृऴ       25:07:00


3    ळप्तन   काप्ततलक   कृ ष्ण चतुथॉ        11:40:20
                                                        भृगप्तळया       14:39:24
                                                                                    प्तळल      19:40:20
                                                                                                           फारल         11:40:20
                                                                                                                                     प्तभथुन   -


4    यत्रल   काप्ततलक   कृ ष्ण ऩॊचभी        14:07:19
                                                        आद्रा           17:31:41
                                                                                    प्तवद्ध    20:26:04
                                                                                                           तैप्ततर      14:07:19
                                                                                                                                     प्तभथुन   -


5    वोभ     काप्ततलक   कृ ष्ण ऴद्षी        16:09:56
                                                        ऩुनललवु         20:00:33
                                                                                    वाध्म      20:50:15
                                                                                                           लस्णज        16:09:56
                                                                                                                                     प्तभथुन   13:26:00


6    भॊगर काप्ततलक      कृ ष्ण वद्ऱभी       17:36:56
                                                        ऩुष्म           21:53:48
                                                                                    ळुब        20:47:15
                                                                                                           फल           17:36:56
                                                                                                                                     ककल       -


7    फुध     काप्ततलक   कृ ष्ण अद्शभी       18:22:41
                                                        आद्ऴेऴा         23:04:52
                                                                                    ळुक्र      20:11:26
                                                                                                           कौरल         18:22:41
                                                                                                                                     ककल       23:05:00


8    गुरु    काप्ततलक   कृ ष्ण नलभी         18:19:42
                                                        भघा             23:29:04
                                                                                    ब्रह्म     18:57:12
                                                                                                           गय           18:19:42
                                                                                                                                     प्तवॊश    -


9    ळुक्र   काप्ततलक   कृ ष्ण दळभी         17:27:58
                                                        ऩूलालपाल्गुनी   23:05:28
                                                                                    इन्द्र     17:04:31
                                                                                                           त्रलत्रद्श   17:27:58
                                                                                                                                     प्तवॊश    28:52:00


10 ळप्तन     काप्ततलक   कृ ष्ण एकादळी 15:49:21 उत्तयापाल्गुनी           21:56:51
                                                                                    लैधप्तत
                                                                                       ृ       14:35:17
                                                                                                           फारल         15:49:21
                                                                                                                                     कन्मा     -


11 यत्रल     काप्ततलक   कृ ष्ण द्रादळी      13:28:34
                                                        शस्त            20:07:57
                                                                                    त्रलऴकब
                                                                                          ुॊ   11:32:19
                                                                                                           तैप्ततर      13:28:34
                                                                                                                                     कन्मा     -


12 वोभ       काप्ततलक   कृ ष्ण त्रमोदळी 10:34:02 प्तचत्रा               17:49:02
                                                                                    प्रीप्तत   08:00:17
                                                                                                           लस्णज        10:34:02
                                                                                                                                     कन्मा     07:02:00


13 भॊगर काप्ततलक        कृ ष्ण चतुदलळी      07:14:12
                                                        स्लाती          15:06:42
                                                                                    वौबाग्म    23:59:12
                                                                                                           ळकप्तन
                                                                                                             ु          07:14:12
                                                                                                                                     तुरा      -


14 फुध       काप्ततलक   ळुक्र प्रप्ततऩदा    23:56:14
                                                        त्रलळाखा        12:13:06
                                                                                    ळोबन       19:44:59
                                                                                                           टकस्तुघ्न 13:47:48        तुरा      06:57:00


15 गुरु      काप्ततलक   ळुक्र टद्रतीमा      20:19:31
                                                        अनुयाधा         09:18:35
                                                                                    अप्ततगॊि   15:31:43
                                                                                                           फारल         10:07:20
                                                                                                                                     लृस्द्ळक 30:31:00

16 ळुक्र     काप्ततलक   ळुक्र तृतीमा        16:55:56
                                                        भूर             28:03:26
                                                                                    वुकभाल     11:27:49
                                                                                                           गय           16:55:56
                                                                                                                                     धनु       -


17 ळप्तन     काप्ततलक   ळुक्र चतुथॉ         13:54:52
                                                        ऩूलालऴाढ़       26:02:22
                                                                                    धृप्तत     07:41:44
                                                                                                           त्रलत्रद्श   13:54:52
                                                                                                                                     धनु       -


18 यत्रल     काप्ततलक   ळुक्र ऩॊचभी         11:24:43
                                                        उत्तयाऴाढ़      24:35:02
                                                                                    गॊि        25:24:43
                                                                                                           फारल         11:24:43
                                                                                                                                     धनु       07:36:00


19 वोभ       काप्ततलक   ळुक्र ऴद्षी         09:31:09
                                                        श्रलण           23:47:05
                                                                                    लृत्रद्ध   23:02:05
                                                                                                           तैप्ततर      09:31:09
                                                                                                                                     भकय       -


20 भॊगर काप्ततलक        ळुक्र वद्ऱभी        08:21:38
                                                        धप्तनद्षा       23:42:15
                                                                                    ध्रुल      21:14:08
                                                                                                           लस्णज        08:21:38
                                                                                                                                     भकय       11:39:00
109                                                 नलम्फय 2012



21 फुध     काप्ततलक   ळुक्र अद्शभी      07:54:18
                                                   ळतप्तबऴा        24:20:33
                                                                              व्माघात      20:00:52
                                                                                                      फल           07:54:18
                                                                                                                              कब
                                                                                                                               ुॊ   -


22 गुरु    काप्ततलक   ळुक्र नलभी        08:10:06
                                                   ऩूलालबाद्रऩद    25:39:10
                                                                              शऴलण         19:19:29
                                                                                                      कौरल         08:10:06
                                                                                                                              कब
                                                                                                                               ुॊ   19:16:00


23 ळुक्र   काप्ततलक   ळुक्र दळभी        09:07:09
                                                   उत्तयाबाद्रऩद   27:31:32
                                                                              लज्र         19:08:05
                                                                                                      गय           09:07:09
                                                                                                                              भीन   -


24 ळप्तन   काप्ततलक   ळुक्र एकादळी 10:39:49 ये लप्तत               29:54:49
                                                                              प्तवत्रद्ध   19:19:12
                                                                                                      त्रलत्रद्श   10:39:49
                                                                                                                              भीन   29:54:00


25 यत्रल   काप्ततलक   ळुक्र द्रादळी     12:39:41
                                                   अस्द्वनी        32:38:45
                                                                              व्मप्ततऩात 19:50:56 फारल             12:39:41
                                                                                                                              भेऴ   -


26 वोभ     काप्ततलक   ळुक्र त्रमोदळी 15:00:10 अस्द्वनी             08:37:40
                                                                              लरयमान       20:36:43
                                                                                                      तैप्ततर      15:00:10
                                                                                                                              भेऴ   -


27 भॊगर काप्ततलक      ळुक्र चतुदलळी     17:34:42
                                                   बयणी            11:35:38
                                                                              ऩरयग्रश      21:30:57
                                                                                                      लस्णज        17:34:42
                                                                                                                              भेऴ   18:22:00


28 फुध     काप्ततलक   ळुक्र ऩूस्णलभा    20:16:44
                                                   कृ प्ततका       14:42:03
                                                                              प्तळल        22:29:51
                                                                                                      त्रलत्रद्श   06:56:06
                                                                                                                              लृऴ   -


29 गुरु    भागलळीऴल कृ ष्ण प्रप्ततऩदा   22:57:50
                                                   योटशस्ण         17:48:27
                                                                              प्तवद्ध      23:27:50
                                                                                                      फारल         09:37:12
                                                                                                                              लृऴ   -


30 ळुक्र   भागलळीऴल कृ ष्ण टद्रतीमा     25:32:21
                                                   भृगप्तळया       20:51:06
                                                                              वाध्म        24:21:06
                                                                                                      तैप्ततर      12:16:25
                                                                                                                              लृऴ   -




                                                    ळप्तन ऩीिा प्तनलायक
           वॊऩूणल प्राणप्रप्ततत्रद्षत 22 गेज ळुद्ध स्िीर भं प्तनप्तभलत अखॊटित ऩौरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र
ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र (स्िीर भं) को तीव्र प्रबालळारी फनाने शे तु ळप्तन की कायक धातु ळुद्ध स्िीर(रोशे ) भं
फनामा गमा शं । स्जव क प्रबाल वे वाधक को तत्कार राब प्राद्ऱ शोता शं । मटद जन्भ किरी भं ळप्तन प्रप्ततकर
                     े                                                         ुॊ                   ू
शोने ऩय व्मत्रि को अनेक कामं भं अवपरता प्राद्ऱ शोती शै , कबी व्मलवाम भं घिा, नौकयी भं ऩये ळानी, लाशन
दघिना, गृश क्रेळ आटद ऩये ळानीमाॊ फढ़ती जाती शै ऐवी स्स्थप्ततमं भं प्राणप्रप्ततत्रद्षत ग्रश ऩीिा प्तनलायक ळप्तन
 ु ल
मॊत्र की अऩने को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थाऩना कयने वे अनेक राब प्तभरते शं । मटद ळप्तन की ढै ़मा मा
वाढ़े वाती का वभम शो तो इवे अलश्म ऩूजना चाटशए। ळप्तनमॊत्र क ऩूजन भात्र वे व्मत्रि को भृत्मु, कजल,
                                                           े
कोिल कळ, जोिो का ददल , फात योग तथा रम्फे वभम क वबी प्रकाय क योग वे ऩये ळान व्मत्रि क प्तरमे ळप्तन
      े                                       े            े                        े
मॊत्र अप्तधक राबकायी शोगा। नौकयी ऩेळा आटद क रोगं को ऩदौन्नप्तत बी ळप्तन द्राया शी प्तभरती शै अत् मश
                                           े
मॊत्र अप्तत उऩमोगी मॊत्र शै स्जवक द्राया ळीघ्र शी राब ऩामा जा वकता शै ।
                                 े
                                                                                                                   भूल्म: 1050 वे 8200
                                             GURUTVA KARYALAY
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110                                          नलम्फय 2012




                                  नलम्फय-2012 भाप्तवक व्रत-ऩलल-त्मौशाय
टद      लाय   भाश        ऩष        प्ततप्तथ   वभाप्तद्ऱ                              प्रभुख व्रत-त्मोशाय

1    गुरु     काप्ततलक   कृ ष्ण    तृतीमा     32:59:30    -

2    ळुक्र    काप्ततलक   कृ ष्ण    तृतीमा     08:59:17    वॊकद्शी श्रीगणेळ चतुथॉ व्रत (चॊ.उ.या.8:07), कयलाचौथ व्रतोत्वल,

3    ळप्तन    काप्ततलक   कृ ष्ण    चतुथॉ      11:40:20    दळयथ चतुथॉ (ऩ.फॊगार)

4    यत्रल    काप्ततलक   कृ ष्ण    ऩॊचभी      14:07:19    -

5    वोभ      काप्ततलक   कृ ष्ण    ऴद्षी      16:09:56    लैधप्तत भशाऩात वामॊ 5:34 वे यात्रत्र 1:21 फजे तक
                                                             ृ

                                                          काराद्शभी व्रत, कयाद्शभी (भशायाद्स), अशोई अद्शभी व्रत, फशुराद्शभी,
6    भॊगर     काप्ततलक   कृ ष्ण    वद्ऱभी     17:36:56
                                                          दाम्ऩत्माद्शभी व्रत

7    फुध      काप्ततलक   कृ ष्ण    अद्शभी     18:22:41    अशोई अद्शभी (ऩॊजाफ), श्रीयाधाकण्ि अद्शभी
                                                                                        ु

8    गुरु     काप्ततलक   कृ ष्ण    नलभी       18:19:42    -

9    ळुक्र    काप्ततलक   कृ ष्ण    दळभी       17:27:58    -

10   ळप्तन    काप्ततलक   कृ ष्ण    एकादळी 15:49:21        यभा (यम्बा) एकादळी व्रत, गोलत्व द्रादळी (गौ-फछिा फायव) व्रत

                                                          धनत्रमोदळी, धनतेयव, धन्लन्तरय जमॊती, प्रदोऴ व्रत, काभेद्वयी
11   यत्रल    काप्ततलक   कृ ष्ण    द्रादळी    13:28:34
                                                          जमॊती, गोत्रत्रयात्र प्रायॊ ब, मभऩॊचक-दीऩदान प्रायॊ ब

                                                          भाप्तवक प्तळलयात्रत्र व्रत(प्तळल चतुदलळी), नयकशया चतुदलळी (नयका
                                                          चौदव), कारी चतुदलळी, काऱीचौदव, श्रीशनुभान जमॊती, भाॉ धूभालती
12   वोभ      काप्ततलक   कृ ष्ण    त्रमोदळी 10:34:02
                                                          जमॊती (ताॊत्रत्रक ऩॊचाॊगानुवाय), मभ तऩलण, रुऩचतुदलळी (यात्रत्र के
                                                          अॊप्ततभ प्रशय भं अभ्मॊग स्नान)

                                                          दीऩालरी, दीऩोत्वल, श्रीगणेळ-रक्ष्भी-कफेय का ऩूजन, रक्ष्भी ऩूजा,
                                                                                               ु
                                                          कभरा भशात्रलद्या जमॊती, काप्ततलकी अभालस्मा, गौयी-कदाय व्रत
                                                                                                            े
13   भॊगर     काप्ततलक   कृ ष्ण    चतुदलळी    07:14:12    (द.बा.), श्रीभशालीय स्लाभी प्तनलालण उत्वल (जैन), स्लाभी याभतीथल
                                                          की जन्भप्ततप्तथ एलॊ ऩुण्मप्ततप्तथ, दमानॊद स्भृप्तत टदलव, बौभलती
                                                          अभालव,
111                                              नलम्फय 2012



                                                        अन्नकि, गोलद्धल न ऩूजन, फप्तर ऩूजा, गो वॊलधलन वद्ऱाश प्रायॊ ब,
                                                             ू
                                                        गुजयाती वम्लत्वय 2069 प्रायॊ ब, बगलान भशालीय प्तनलालण वम्लत ्
14   फुध     काप्ततलक   ळुक्र   प्रप्ततऩदा   23:56:14
                                                        2539 प्रायॊ ब, नेऩारी वॊलत ् 1133 प्रायॊ ब, टशॊ गोि मुद्ध, ऩॊ. नेशरू
                                                        जमॊती, फारटदलव

                                                        बइमा दज, बाई फीज, नलीन चॊद्र दळलन, मभटद्रतीमा स्नान, प्तचत्रगुद्ऱ
                                                              ू
15   गुरु    काप्ततलक   ळुक्र   टद्रतीमा     20:19:31   ऩूजन, त्रलद्वकभाल ऩूजन, फग्लारी (उत्तयाखण्ि), मभऩॊचक वभाद्ऱ,
                                                        लृस्द्ळक वॊक्रास्न्त ळेऴ यात्रत्र 5.38 फजे,

                                                        त्रलद्वाप्तभत्र जमॊती, लृस्द्ळक-वॊक्रास्न्त क स्नान ल दान का ऩुण्मकार
                                                                                                     े
16   ळुक्र   काप्ततलक   ळुक्र   तृतीमा       16:55:56   वूमोदम वे भध्माि तक, ऩूजा-वॊकल्ऩ शे तु उऩमुि शे भन्त ऋतु
                                                        प्रायॊ ब, इस्राभी टशजयी वन ् 1434 ळुरू (भुव.)

                                                        लयदत्रलनामक       चतुथॉ      व्रत     (चॊ.उ.या.9.8),,       दलालगणऩप्तत
                                                                                                                     ू              व्रत,
                                                        भशाव्मप्ततऩात प्रात: 5:51 वे वामॊ 4:42 फजे तक, रारा राजऩत
17   ळप्तन   काप्ततलक   ळुक्र   चतुथॉ        13:54:52
                                                        याम फप्तरदान टदलव, वूमऴद्षी व्रत प्रायॊ ब (प्तभप्तथराॊचर), 3 टदन की
                                                                              ल
                                                        छठऩूजा ळुरू- नशाम खाम

                                                        वौबाग्म       ऩॊचभी,   राब        ऩॊचभी,    राब     ऩाॊचभ,    ऩाण्िल      ऩॊचभी,
18   यत्रल   काप्ततलक   ळुक्र   ऩॊचभी        11:24:43   सानऩॊचभी (जैन), स्कन्दऴद्षी व्रत, छठऩूजा का दवया टदन-खयना
                                                                                                     ू
                                                        (त्रफशाय-झायखण्ि)

                                                        वूमऴद्षी व्रत-प्रप्ततशायऴद्षी व्रत (प्तभप्तथराॊचर), िारा छठ (काळी),
                                                           ल
19   वोभ     काप्ततलक   ळुक्र   ऴद्षी        09:31:09   छठऩूजा का भुख्म टदन वामॊकार वूमालस्त क वभम वूमदेलको
                                                                                              े       ल
                                                        प्रथभ अध्म, यानी रक्ष्भीफाई जमॊती, इॊ टदया गाॊधी जमॊती

                                                        प्रात: उदीमभान वूमको टद्रतीम अध्मलदान, छठव्रत का ऩायण, वाभा
                                                                          ल
20   भॊगर    काप्ततलक   ळुक्र   वद्ऱभी       08:21:38   ऩूजा   ळुरू    (प्तभप्तथराॊचर),     जगद्धात्री   ऩूजा   3    टदन   (ऩ.फॊगार),
                                                        वशस्राजुन जमॊती, वॊत जरायाभ जमॊती,
                                                                ल

                                                        गोऩाद्शभी (ब्रज), गोऩार अद्शभी (जम्भू-कश्भीय), श्रीदगालद्शभी व्रत,
                                                                                                            ु
21   फुध     काप्ततलक   ळुक्र   अद्शभी       07:54:18
                                                        श्रीअन्नऩूणालद्शभी व्रत, फुधाद्शभी ऩलल प्रात: 7:54 फजे तक

                                                        अषमनलभी व्रत, आॊलरा नलभी ऩूजन, भाॉ कष्भाण्ि नलभी, अनरा
                                                                                            ू
22   गुरु    काप्ततलक   ळुक्र   नलभी         08:10:06
                                                        नलभी (ओिीवा), वत्ममुगाटद प्ततप्तथ, श्रीशॊ व बगलान एलॊ वनकाटद
112                                                नलम्फय 2012



                                                                   जमॊती, लेद वॊस्थाऩना भशोत्वल, जगद्धात्री नलभी भशाऩूजा (ऩ.फॊगार),
                                                                   त्रलष्णु त्रत्रयात्र प्रतायॊ ब,

23    ळुक्र       काप्ततलक     ळुक्र      दळभी         09:07:09    आळा दळभी, कळलध रीरा भशोत्वल (भथुया),
                                                                              ॊ

                                                                   श्रीशरय प्रफोप्तधनी एकादळी, दे लउठनी               ग्मायव, दे ल      उठी     अग्मायव,
                                                                   दे लोत्थान उत्वल, ईख-यव प्राळन, त्रलष्णु त्रत्रयात्र ऩूण, चातुभालव व्रत
                                                                                                                           ल
24    ळप्तन       काप्ततलक     ळुक्र      एकादळी 10:39:49
                                                                   प्तनमभ वभाद्ऱ, बीष्भऩॊचक प्रायॊ ब, तुरवी त्रललाश, वॊत नाभदे ल जमॊती,
                                                                   कारीदाव जमॊती, श्रीगुरु तेगफशादय फप्तरदान टदलव,
                                                                                                  ु

                                                                   प्रदोऴ व्रत, दाभोदय द्रादळी (ब्रज), श्माभफाफा द्रादळी, गरुि द्रादळी
25    यत्रल       काप्ततलक     ळुक्र      द्रादळी      12:39:41
                                                                   (ओिीवा), भत्स्म द्रादळी, भेरा खािू श्माभ (याज.),

                                                                   लैकण्ठ चतुदलळी व्रत, भशाप्तनळीथकार भं भशात्रलष्णु ऩूजा, यात्रत्र क अॊप्ततभ
                                                                      ु                                                              े
26    वोभ         काप्ततलक     ळुक्र      त्रमोदळी 15:00:10        प्रशय भं अरुणोदमकार भं भस्णटकणका-स्नान (काळी), अधलयात्रत्र भं
                                                                                                ल
                                                                   शरय-शय प्तभरन (उज्जप्तमनी), त्रलद्याऩप्तत स्भृप्तत टदलव

                                                                   लैकठ चतुदलळी, श्रीकाळीत्रलद्वनाथ प्रप्ततद्षा टदलव (लायाणवी), बयणी दीऩभ ्
                                                                      ुॊ
27    भॊगर        काप्ततलक     ळुक्र      चतुदलळी      17:34:42
                                                                   (द.बा.),

                                                                   स्नान-दान-व्रत शे तु उत्तभ कृ त्रत्तका नषत्रमुता काप्ततलकी ऩूस्णलभा, श्रीगुरु
                                                                   नानकदे ल जमॊती, दे ल-दीऩालरी, दे ल दीलाऱी, प्तनम्फाकालचामल जमॊती 5109
28    फुध         काप्ततलक     ळुक्र      ऩूस्णलभा     20:16:44    लीॊ, तुरवी त्रललाशोत्वल वभाद्ऱ, बीष्भ ऩॊचक ऩूण, वाभा-त्रलवजलन
                                                                                                                 ल
                                                                   (प्तभप्तथराॊचर), ऩुष्कय भेरा (याज.), काप्ततलक-स्नान वभाद्ऱ, काप्ततलकम-
                                                                                                                                       े
                                                                   दळलन

29    गुरु        भागलळीऴल     कृ ष्ण     प्रप्ततऩदा   22:57:50    गोऩ भाव प्रायॊ ब, कात्मामनी भाप्तवक ऩूजा ळुरू, योटशणी व्रत

30    ळुक्र       भागलळीऴल     कृ ष्ण     टद्रतीमा     25:32:21    -



                                              क्मा आऩ टकवी वभस्मा वे ग्रस्त शं ?
                           ु
 आऩक ऩाव अऩनी वभस्माओॊ वे छिकाया ऩाने शे तु ऩूजा-अचलना, वाधना, भॊत्र जाऩ इत्माटद कयने का वभम नशीॊ शं ?
    े
 अफ आऩ अऩनी वभस्माओॊ वे फीना टकवी त्रलळेऴ ऩूजा-अचलना, त्रलप्तध-त्रलधान क आऩको अऩने कामल भं वपरता प्राद्ऱ
                                                                        े
 कय वक एलॊ आऩको अऩने जीलन क वभस्त वुखो को प्राद्ऱ कयने का भागल प्राद्ऱ शो वक इव प्तरमे गुरुत्ल कामालरत
      े                    े                                                े
 द्राया शभाया उद्दे श्म ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो द्राया प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि त्रलप्तबन्न प्रकाय के
 मन्त्र- कलच एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय तक ऩशोचाने का शै । गुरुत्ल कामालरम भं वम्ऩक कयं :
                                                    े                                              ल
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                                                गणेळ रक्ष्भी मॊत्र
प्राण-प्रप्ततत्रद्षत गणेळ रक्ष्भी मॊत्र को अऩने घय-दकान-ओटपव-पक्ियी भं ऩूजन स्थान, गल्रा मा अरभायी भं स्थात्रऩत
                                                    ु         ै
कयने व्माऩाय भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । मॊत्र क प्रबाल वे बाग्म भं उन्नप्तत, भान-प्रप्ततद्षा एलॊ
                                                     े                                                   व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती
शं एलॊ आप्तथलक स्स्थभं वुधाय शोता शं । गणेळ रक्ष्भी मॊत्र को स्थात्रऩत कयने वे बगलान गणेळ औय दे ली रक्ष्भी का
वॊमुि आळीलालद प्राद्ऱ शोता शं ।                                                            Rs.730 वे Rs.10900 तक

                                          भॊगर मॊत्र वे ऋण भुत्रि
भॊगर मॊत्र को जभीन-जामदाद क त्रललादो को शर कयने क काभ भं राब दे ता शं , इव क अप्ततरयि व्मत्रि को ऋण
                           े                     े                          े
भुत्रि शे तु भॊगर वाधना वे अप्तत ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं ।    त्रललाश आटद भं भॊगरी जातकं क कल्माण क प्तरए भॊगर
                                                                                            े        े
मॊत्र की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । प्राण प्रप्ततत्रद्षत भॊगर मॊत्र क ऩूजन वे बाग्मोदम, ळयीय भं खून की
                                                                                     े
कभी, गबलऩात वे फचाल, फुखाय, चेचक, ऩागरऩन, वूजन औय घाल, मौन ळत्रि भं लृत्रद्ध, ळत्रु त्रलजम, तॊत्र भॊत्र क दद्श प्रबा,
                                                                                                         े ु
बूत-प्रेत बम, लाशन दघिनाओॊ, शभरा, चोयी इत्मादी वे फचाल शोता शं ।
                    ु ल                                                                            भूल्म भात्र Rs- 730

                                                        कफेय मॊत्र
                                                         ु
कफेय मॊत्र क ऩूजन वे स्लणल राब, यत्न राब, ऩैतक वम्ऩत्ती एलॊ गिे शुए धन वे राब प्राप्तद्ऱ टक काभना कयने लारे
 ु          े                                ृ
व्मत्रि क प्तरमे कफेय मॊत्र अत्मन्त वपरता दामक शोता शं । एवा ळास्त्रोि लचन शं । कफेय मॊत्र क ऩूजन वे एकाप्तधक
         े        ु                                                              ु          े
स्त्रोत्र वे धन का प्राद्ऱ शोकय धन वॊचम शोता शं ।




    ताम्र ऩत्र ऩय वुलणल ऩोरीव                 ताम्र ऩत्र ऩय यजत ऩोरीव                              ताम्र ऩत्र ऩय
            (Gold Plated)                            (Silver Plated)                                 (Copper)
     वाईज                    भूल्म            वाईज                     भूल्म              वाईज                     भूल्म
     1” X 1”                 460              1” X 1”                   370              1” X 1”                    255
     2” X 2”                 820              2” X 2”                   640              2” X 2”                    460
     3” X 3”                1650              3” X 3”                  1090              3” X 3”                    730
     4” X 4”                2350              4” X 4”                  1650              4” X 4”                   1090
     6” X 6”                3600              6” X 6”                  2800              6” X 6”                   1900
     9” X 9”                6400              9” X 9”                  5100              9” X 9”                   3250
    12” X12”                10800            12” X12”                  8200             12” X12”                   6400

                                        GURUTVA KARYALAY
               92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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114                                       नलम्फय 2012




                                            नलयत्न जटित श्री मॊत्र
ळास्त्र लचन क अनुवाय ळुद्ध वुलणल मा यजत भं प्तनप्तभलत श्री मॊत्र क चायं औय मटद नलयत्न जिला ने ऩय मश नलयत्न
             े                                                    े
जटित श्री मॊत्र कशराता शं । वबी यत्नो को उवक प्तनस्द्ळत स्थान ऩय जि कय रॉकि क रूऩ भं धायण कयने वे व्मत्रि को
                                            े                             े  े
अनॊत एद्वमल एलॊ रक्ष्भी की प्राप्तद्ऱ शोती शं । व्मत्रि को एवा आबाव शोता शं जैवे भाॊ रक्ष्भी उवक वाथ शं । नलग्रश को
                                                                                                े
श्री मॊत्र क वाथ रगाने वे ग्रशं की अळुब दळा का धायण कयने लारे व्मत्रि ऩय प्रबाल नशीॊ शोता शं । गरे भं शोने क
            े                                                                                               े
कायण मॊत्र ऩत्रलत्र यशता शं एलॊ स्नान कयते वभम इव मॊत्र ऩय स्ऩळल कय जो जर त्रफॊद ु ळयीय को रगते शं , लश गॊगा
जर क वभान ऩत्रलत्र शोता शं । इव प्तरमे इवे वफवे तेजस्ली एलॊ परदाप्तम कशजाता शं । जैवे अभृत वे उत्तभ कोई
    े
औऴप्तध नशीॊ, उवी प्रकाय रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क प्तरमे श्री मॊत्र वे उत्तभ कोई मॊत्र वॊवाय भं नशीॊ शं एवा ळास्त्रोि लचन शं । इव
                                            े
प्रकाय क नलयत्न जटित श्री मॊत्र गुरूत्ल कामालरम द्राया ळुब भुशूतल भं प्राण प्रप्ततत्रद्षत कयक फनालाए जाते शं ।
        े                                                                                    े


                                                  अद्श रक्ष्भी कलच
अद्श रक्ष्भी कलच को धायण कयने वे व्मत्रि ऩय वदा भाॊ भशा रक्ष्भी की कृ ऩा एलॊ आळीलालद फना
यशता शं । स्जस्वे भाॊ रक्ष्भी क अद्श रुऩ (१)-आटद रक्ष्भी, (२)-धान्म रक्ष्भी, (३)-धैयीम रक्ष्भी, (४)-
                               े
गज रक्ष्भी, (५)-वॊतान रक्ष्भी, (६)-त्रलजम रक्ष्भी, (७)-त्रलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी
रुऩो का स्लत् अळीलालद प्राद्ऱ शोता शं ।                                                          भूल्म भात्र: Rs-1250

                                      भॊत्र प्तवद्ध व्माऩाय लृत्रद्ध कलच
व्माऩाय लृत्रद्ध कलच व्माऩाय क ळीघ्र उन्नप्तत क प्तरए उत्तभ शं । चाशं कोई बी व्माऩाय शो अगय उवभं राब क स्थान ऩय
                              े                े                                                      े
फाय-फाय शाप्तन शो यशी शं । टकवी प्रकाय वे व्माऩाय भं फाय-फाय फाॊधा उत्ऩन्न शो यशी शो! तो वॊऩूणल प्राण प्रप्ततत्रद्षत भॊत्र
प्तवद्ध ऩूणल चैतन्म मुि व्माऩात लृत्रद्ध मॊत्र को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थात्रऩत कयने वे ळीघ्र शी व्माऩाय लृत्रद्ध एलॊ
प्तनतन्तय राब प्राद्ऱ शोता शं ।                                                         भूल्म भात्र: Rs.730 & 1050

                                                      भॊगर मॊत्र
(त्रत्रकोण) भॊगर मॊत्र को जभीन-जामदाद क त्रललादो को शर कयने क काभ भं राब दे ता शं , इव क अप्ततरयि व्मत्रि को
                                       े                     े                          े
ऋण भुत्रि शे तु भॊगर वाधना वे अप्तत ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं । त्रललाश आटद भं भॊगरी जातकं क कल्माण क प्तरए
                                                                                            े        े
भॊगर मॊत्र की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं ।                                        भूल्म भात्र Rs- 730


                                        GURUTVA KARYALAY
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115                                                नलम्फय 2012




                                                      त्रललाश वॊफॊप्तधत वभस्मा
क्मा आऩक रिक-रिकी टक आऩकी ळादी भं अनालश्मक रूऩ वे त्रलरम्फ शो यशा शं मा उनक लैलाटशक जीलन भं खुप्तळमाॊ कभ
        े   े                                                              े
शोती जायशी शं औय वभस्मा अप्तधक फढती जायशी शं । एवी स्स्थती शोने ऩय अऩने रिक-रिकी टक किरी का अध्ममन
                                                                           े         ुॊ
अलश्म कयलारे औय उनक लैलाटशक वुख को कभ कयने लारे दोऴं क प्तनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे जनकायी प्राद्ऱ
                   े                                  े          े       े
कयं ।


                                                   प्तळषा वे वॊफॊप्तधत वभस्मा
क्मा आऩक रिक-रिकी की ऩढाई भं अनालश्मक रूऩ वे फाधा-त्रलघ्न मा रुकालिे शो यशी शं ? फच्चो को अऩने ऩूणल ऩरयश्रभ
        े   े
एलॊ भेशनत का उप्तचत पर नशीॊ प्तभर यशा? अऩने रिक-रिकी की किरी का त्रलस्तृत अध्ममन अलश्म कयलारे औय
                                               े         ुॊ
उनक त्रलद्या अध्ममन भं आनेलारी रुकालि एलॊ दोऴो क कायण एलॊ उन दोऴं क प्तनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे
   े                                            े                  े          े       े
जनकायी प्राद्ऱ कयं ।

                                      क्मा आऩ टकवी वभस्मा वे ग्रस्त शं ?
                          ु
आऩक ऩाव अऩनी वभस्माओॊ वे छिकाया ऩाने शे तु ऩूजा-अचलना, वाधना, भॊत्र जाऩ इत्माटद कयने का वभम नशीॊ शं ?
   े
अफ आऩ अऩनी वभस्माओॊ वे फीना टकवी त्रलळेऴ ऩूजा-अचलना, त्रलप्तध-त्रलधान क आऩको अऩने कामल भं वपरता प्राद्ऱ
                                                                       े
कय वक एलॊ आऩको अऩने जीलन क वभस्त वुखो को प्राद्ऱ कयने का भागल प्राद्ऱ शो वक इव प्तरमे गुरुत्ल कामालरत
     े                    े                                                े
द्राया शभाया उद्दे श्म ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो द्राया प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि त्रलप्तबन्न प्रकाय के
मन्त्र- कलच एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय तक ऩशोचाने का शं ।
                                                   े

                                             ज्मोप्ततऴ वॊफॊप्तधत त्रलळेऴ ऩयाभळल
ज्मोप्तत त्रलसान, अॊक ज्मोप्ततऴ, लास्तु एलॊ आध्मास्त्भक सान वं वॊफॊप्तधत त्रलऴमं भं शभाये 30 लऴो वे अप्तधक लऴल के
अनुबलं क वाथ ज्मोप्ततव वे जुिे नमे-नमे वॊळोधन क आधाय ऩय आऩ अऩनी शय वभस्मा क वयर वभाधान प्राद्ऱ कय
        े                                      े                           े
वकते शं ।
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                                                                   ओनेक्व
  जो व्मत्रि ऩन्ना धायण कयने भे अवभथल शो उन्शं फुध ग्रश क उऩयत्न ओनेक्व को धायण कयना चाटशए।
                                                         े
  उच्च प्तळषा प्राप्तद्ऱ शे तु औय स्भयण ळत्रि क त्रलकाव शे तु ओनेक्व यत्न की अॊगूठी को दामं शाथ की वफवे छोिी
                                               े
  उॊ गरी मा रॉकि फनला कय गरे भं धायण कयं । ओनेक्व यत्न धायण कयने वे त्रलद्या-फुत्रद्ध की प्राप्तद्ऱ शो शोकय स्भयण
               े
  ळत्रि का त्रलकाव शोता शं ।
116                                              नलम्फय 2012



                                               नलम्फय 2012 -त्रलळेऴ मोग
                                                      कामल प्तवत्रद्ध मोग
    5       वामॊ 7:59 वे यातबय                                19            वूमोदम वे यात्रत्र 11:46 तक
    6       यात्रत्र 9:53 वे यातबय                            23/24         यात्रत्र 3:31 वे वूमोदम तक
    11      वूमोदम वे यात्रत्र 8:07 तक                        25            वम्ऩूणल टदन-यात
    14      टदन 12:12 वे 15 नलॊफय को प्रात: 9:18 तक           27            टदन 11:35 वे यात्रत्रऩमलन्त
    18      वूमोदम वे यात्रत्र 12:33 तक                       28            वूमोदम वे टदन-यात

                                                         अभृत मोग
    11      वूमोदम वे यात्रत्र 8:07 तक                        23/24         यात्रत्र 3:31 वे वूमोदम तक

    14      टदन 12:12 वे यातबय

              त्रत्रऩुष्कय मोग (तीन गुना) मोग                                   टद्रऩुष्कय (दोगुना पर) मोग
    10      टदन 3:48 वे यात्रत्र 9:55 तक                      20            वूमोदम वे प्रात: 8:20 तक

                                                      त्रलघ्नकायक बद्रा
    1       वामॊ 7:37 वे 2 नलॊफय को को प्रात: 8:58 तक         16/17         यात्रत्र 3:24 वे टदन 1:54 तक
    5       वामॊ 4:09 वे 6 नलॊफय को प्रात: 4:53तक             20            प्रात: 8:20 वे यात्रत्र 8:06 तक
    9       प्रात: 5:53 वे वामॊ 5:27 तक                       23            यात्रत्र 9:52 वे 24 नलॊफय को प्रात: 10:38 तक
    12      प्रात: 10:33 वे यात्रत्र 8:53 तक                  27            वामॊ 5:34 वे 28 नलॊफय को प्रात: 6:54 तक


मोग पर :
   कामल प्तवत्रद्ध मोग भे टकमे गमे ळुब कामल भे प्तनस्द्ळत वपरता प्राद्ऱ शोती शं , एवा ळास्त्रोि लचन शं ।
   त्रत्रऩुष्कय मोग भं टकमे गमे ळुब कामो का राब तीन गुना शोता शं । एवा ळास्त्रोि लचन शं ।
   टद्रऩुष्कय मोग भं टकमे गमे ळुब कामो का राब दोगुना शोता शं । एवा ळास्त्रोि लचन शं ।
   ळास्त्रोि भत वे त्रलघ्नकायक बद्रा मा बद्रा मोग भं ळुब कामल कयना लस्जलत शं ।

                      दै प्तनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान ताप्तरका
                                     गुप्तरक कार (ळुब)      मभ कार (अळुब)                याशु कार (अळुब)
                      लाय                वभम अलप्तध            वभम अलप्तध                   वभम अलप्तध
                      यत्रललाय       03:00 वे 04:30          12:00 वे 01:30              04:30 वे 06:00
                      वोभलाय         01:30 वे 03:00          10:30 वे 12:00              07:30 वे 09:00
                      भॊगरलाय        12:00 वे 01:30          09:00 वे 10:30              03:00 वे 04:30
                      फुधलाय         10:30 वे 12:00          07:30 वे 09:00              12:00 वे 01:30
                      गुरुलाय        09:00 वे 10:30          06:00 वे 07:30              01:30 वे 03:00
                      ळुक्रलाय       07:30 वे 09:00         03:00 वे 04:30               10:30 वे 12:00
                      ळप्तनलाय       06:00 वे 07:30         01:30 वे 03:00               09:00 वे 10:30
117                                              नलम्फय 2012



                                                                 टदन क चौघटिमे
                                                                      े
                  वभम                       यत्रललाय   वोभलाय        भॊगरलाय फुधलाय गुरुलाय              ळुक्रलाय    ळप्तनलाय

                  06:00 वे 07:30            उद्रे ग    अभृत          योग           राब        ळुब        चर          कार
                  07:30 वे 09:00            चर         कार           उद्रे ग       अभृत       योग        राब         ळुब
                  09:00 वे 10:30            राब        ळुब           चर            कार        उद्रे ग    अभृत        योग
                  10:30 वे 12:00            अभृत       योग           राब           ळुब        चर         कार         उद्रे ग
                  12:00 वे 01:30            कार        उद्रे ग       अभृत          योग        राब        ळुब         चर
                  01:30 वे 03:00            ळुब        चर            कार           उद्रे ग    अभृत       योग         राब
                  03:00 वे 04:30            योग        राब           ळुब           चर         कार        उद्रे ग     अभृत
                  04:30 वे 06:00            उद्रे ग    अभृत          योग           राब        ळुब        चर          कार


                                                                 यात क चौघटिमे
                                                                      े
                  वभम                       यत्रललाय    वोभलाय       भॊगरलाय        फुधलाय गुरुलाय        ळुक्रलाय    ळप्तनलाय

                  06:00 वे 07:30            ळुब         चर           कार            उद्रे ग    अभृत       योग         राब
                  07:30 वे 09:00            अभृत        योग          राब            ळुब        चर         कार         उद्रे ग
                  09:00 वे 10:30            चर          कार          उद्रे ग        अभृत       योग        राब         ळुब
                  10:30 वे 12:00            योग         राब          ळुब            चर         कार        उद्रे ग     अभृत
                  12:00 वे 01:30            कार         उद्रे ग      अभृत           योग        राब        ळुब         चर
                  01:30 वे 03:00            राब         ळुब          चर             कार        उद्रे ग    अभृत        योग
                  03:00 वे 04:30            उद्रे ग     अभृत         योग            राब        ळुब        चर          कार
                  04:30 वे 06:00            ळुब         चर           कार            उद्रे ग    अभृत       योग         राब
       ळास्त्रोि भत क अनुळाय मटद टकवी बी कामल का प्रायॊ ब ळुब भुशूतल मा ळुब वभम ऩय टकमा जामे तो कामल भं वपरता
                     े
प्राद्ऱ शोने टक वॊबालना ज्मादा प्रफर शो जाती शं । इव प्तरमे दै प्तनक ळुब वभम चौघटिमा दे खकय प्राद्ऱ टकमा जा वकता शं ।
नोि: प्राम् टदन औय यात्रत्र क चौघटिमे टक प्तगनती क्रभळ् वूमोदम औय वूमालस्त वे टक जाती शं । प्रत्मेक चौघटिमे टक अलप्तध 1
                             े
घॊिा 30 प्तभप्तनि अथालत िे ढ़ घॊिा शोती शं । वभम क अनुवाय चौघटिमे को ळुबाळुब तीन बागं भं फाॊिा जाता शं , जो क्रभळ् ळुब,
                                                  े
भध्मभ औय अळुब शं ।

                     चौघटिमे क स्लाभी ग्रश
                              े                                                     * शय कामल क प्तरमे ळुब/अभृत/राब का
                                                                                               े
ळुब चौघटिमा             भध्मभ चौघटिमा                  अळुब चौघटिमा                 चौघटिमा उत्तभ भाना जाता शं ।
चौघटिमा स्लाभी ग्रश     चौघटिमा स्लाभी ग्रश            चौघटिमा       स्लाभी ग्रश
ळुब        गुरु         चय          ळुक्र              उद्बे ग       वूमल           * शय कामल क प्तरमे चर/कार/योग/उद्रे ग
                                                                                               े
अभृत       चॊद्रभा                                     कार           ळप्तन          का चौघटिमा उप्तचत नशीॊ भाना जाता।
राब        फुध                                         योग           भॊगर
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                              टदन टक शोया - वूमोदम वे वूमालस्त तक
    लाय               1.घॊ    2.घॊ     3.घॊ    4.घॊ     5.घॊ     6.घॊ     7.घॊ    8.घॊ    9.घॊ    10.घॊ 11.घॊ 12.घॊ

    यत्रललाय          वूमल    ळुक्र    फुध      चॊद्र   ळप्तन    गुरु     भॊगर    वूमल    ळुक्र   फुध        चॊद्र   ळप्तन
    वोभलाय            चॊद्र   ळप्तन    गुरु    भॊगर वूमल         ळुक्र    फुध     चॊद्र   ळप्तन   गुरु      भॊगर     वूमल
    भॊगरलाय          भॊगर     वूमल     ळुक्र    फुध     चॊद्र    ळप्तन    गुरु    भॊगर    वूमल    ळुक्र      फुध     चॊद्र
    फुधलाय            फुध     चॊद्र   ळप्तन     गुरु भॊगर वूमल            ळुक्र   फुध     चॊद्र   ळप्तन      गुरु    भॊगर
    गुरुलाय           गुरु    भॊगर     वूमल    ळुक्र    फुध      चॊद्र    ळप्तन   गुरु    भॊगर    वूमल       ळुक्र   फुध
    ळुक्रलाय          ळुक्र   फुध      चॊद्र   ळप्तन    गुरु भॊगर         वूमल    ळुक्र   फुध     चॊद्र     ळप्तन    गुरु
    ळप्तनलाय         ळप्तन    गुरु    भॊगर     वूमल     ळुक्र    फुध      चॊद्र   ळप्तन   गुरु    भॊगर       वूमल    ळुक्र

                               यात टक शोया – वूमालस्त वे वूमोदम तक
    यत्रललाय          गुरु    भॊगर     वूमल    ळुक्र    फुध      चॊद्र    ळप्तन   गुरु    भॊगर    वूमल       ळुक्र   फुध
    वोभलाय            ळुक्र   फुध      चॊद्र   ळप्तन    गुरु भॊगर         वूमल    ळुक्र   फुध     चॊद्र     ळप्तन    गुरु
    भॊगरलाय          ळप्तन    गुरु    भॊगर     वूमल     ळुक्र    फुध      चॊद्र   ळप्तन   गुरु    भॊगर       वूमल    ळुक्र
    फुधलाय            वूमल    ळुक्र    फुध      चॊद्र   ळप्तन    गुरु     भॊगर    वूमल    ळुक्र   फुध        चॊद्र   ळप्तन
    गुरुलाय           चॊद्र   ळप्तन    गुरु    भॊगर वूमल         ळुक्र    फुध     चॊद्र   ळप्तन   गुरु      भॊगर     वूमल
    ळुक्रलाय         भॊगर     वूमल     ळुक्र    फुध     चॊद्र    ळप्तन    गुरु    भॊगर    वूमल    ळुक्र      फुध     चॊद्र
    ळप्तनलाय          फुध     चॊद्र   ळप्तन     गुरु भॊगर वूमल            ळुक्र   फुध     चॊद्र   ळप्तन      गुरु    भॊगर
शोया भुशूतल को कामल प्तवत्रद्ध क प्तरए ऩूणल परदामक एलॊ अचूक भाना जाता शं , टदन-यात क २४ घॊिं भं ळुब-अळुब वभम
                                े                                                   े
को वभम वे ऩूलल सात कय अऩने कामल प्तवत्रद्ध क प्तरए प्रमोग कयना चाटशमे।
                                            े

त्रलद्रानो क भत वे इस्च्छत कामल प्तवत्रद्ध क प्तरए ग्रश वे वॊफॊप्तधत शोया का चुनाल कयने वे त्रलळेऴ राब
            े                               े
प्राद्ऱ शोता शं ।
     वूमल टक शोया वयकायी कामो क प्तरमे उत्तभ शोती शं ।
                                े
     चॊद्रभा टक शोया वबी कामं क प्तरमे उत्तभ शोती शं ।
                                े
     भॊगर टक शोया कोिल -कचेयी क कामं क प्तरमे उत्तभ शोती शं ।
                                े      े
     फुध टक शोया त्रलद्या-फुत्रद्ध अथालत ऩढाई क प्तरमे उत्तभ शोती शं ।
                                                े
     गुरु टक शोया धाप्तभलक कामल एलॊ त्रललाश क प्तरमे उत्तभ शोती शं ।
                                              े
     ळुक्र टक शोया मात्रा क प्तरमे उत्तभ शोती शं ।
                            े
     ळप्तन टक शोया धन-द्रव्म वॊफॊप्तधत कामल क प्तरमे उत्तभ शोती शं ।
                                              े
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                                                  ग्रश चरन नलम्फय -2012
Day   Sun        Mon        Ma         Me          Jup        Ven        Sat        Rah        Ket         Ua        Nep        Plu
 1    06:14:55   01:08:34   07:23:55   07:08:04    01:21:05   05:10:08   06:09:06   07:01:58   01:01:58   11:11:17   10:06:20   08:13:24

 2    06:15:55   01:20:21   07:24:40   07:08:42    01:21:00   05:11:21   06:09:13   07:01:59   01:01:59   11:11:15   10:06:20   08:13:25

 3    06:16:55   02:02:09   07:25:24   07:09:14    01:20:55   05:12:34   06:09:20   07:02:01   01:02:01   11:11:13   10:06:20   08:13:26

 4    06:17:56   02:14:00   07:26:09   07:09:40    01:20:49   05:13:47   06:09:27   07:02:02   01:02:02   11:11:12   10:06:20   08:13:28

 5    06:18:56   02:25:59   07:26:53   07:09:59    01:20:43   05:15:00   06:09:34   07:02:03   01:02:03   11:11:10   10:06:19   08:13:29

 6    06:19:56   03:08:11   07:27:38   07:10:11    01:20:37   05:16:13   06:09:42   07:02:04   01:02:04   11:11:08   10:06:19   08:13:30

 7    06:20:56   03:20:39   07:28:22   07:10:15    01:20:31   05:17:27   06:09:49   07:02:04   01:02:04   11:11:06   10:06:19   08:13:32

 8    06:21:56   04:03:28   07:29:07   07:10:10    01:20:25   05:18:40   06:09:56   07:02:04   01:02:04   11:11:05   10:06:19   08:13:33

 9    06:22:56   04:16:41   07:29:52   07:09:56    01:20:18   05:19:53   06:10:03   07:02:03   01:02:03   11:11:03   10:06:19   08:13:35

10    06:23:57   05:00:22   08:00:37   07:09:32    01:20:12   05:21:07   06:10:10   07:02:02   01:02:02   11:11:01   10:06:19   08:13:36

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                                         वलल योगनाळक मॊत्र/कलच
       भनुष्म अऩने जीलन क त्रलप्तबन्न वभम ऩय टकवी ना टकवी वाध्म मा अवाध्म योग वे ग्रस्त शोता शं ।
                         े
उप्तचत उऩचाय वे ज्मादातय वाध्म योगो वे तो भुत्रि प्तभर जाती शं , रेटकन कबी-कबी वाध्म योग शोकय बी
अवाध्म शोजाते शं , मा कोइ अवाध्म योग वे ग्रप्तवत शोजाते शं । शजायो राखो रुऩमे खचल कयने ऩय बी अप्तधक
राब प्राद्ऱ नशीॊ शो ऩाता। िॉक्िय द्राया टदजाने लारी दलाईमा अल्ऩ वभम क प्तरमे कायगय वात्रफत शोती शं , एवी
                                                                     े
स्स्थती भं राब प्राप्तद्ऱ क प्तरमे व्मत्रि एक िॉक्िय वे दवये िॉक्िय क चक्कय रगाने को फाध्म शो जाता शं ।
                           े                             ू           े
       बायतीम ऋऴीमोने अऩने मोग वाधना क प्रताऩ वे योग ळाॊप्तत शे तु त्रलप्तबन्न आमुलय औऴधो क अप्ततरयि
                                      े                                            े       े
मॊत्र, भॊत्र एलॊ तॊत्र का उल्रेख अऩने ग्रॊथो भं कय भानल जीलन को राब प्रदान कयने का वाथलक प्रमाव शजायो
लऴल ऩूलल टकमा था। फुत्रद्धजीलो क भत वे जो व्मत्रि जीलनबय अऩनी टदनचमाल ऩय प्तनमभ, वॊमभ यख कय आशाय
                                े
ग्रशण कयता शं , एवे व्मत्रि को त्रलप्तबन्न योग वे ग्रप्तवत शोने की वॊबालना कभ शोती शं । रेटकन आज के
फदरते मुग भं एवे व्मत्रि बी बमॊकय योग वे ग्रस्त शोते टदख जाते शं । क्मोटक वभग्र वॊवाय कार क अधीन
                                                                                           े
शं । एलॊ भृत्मु प्तनस्द्ळत शं स्जवे त्रलधाता क अराला औय कोई िार नशीॊ वकता, रेटकन योग शोने टक स्स्थती भं
                                              े
व्मत्रि योग दय कयने का प्रमाव तो अलश्म कय वकता शं । इव प्तरमे मॊत्र भॊत्र एलॊ तॊत्र क कळर जानकाय वे
             ू                                                                       े ु
मोग्म भागलदळलन रेकय व्मत्रि योगो वे भुत्रि ऩाने का मा उवक प्रबालो को कभ कयने का प्रमाव बी अलश्म
                                                         े
कय वकता शं ।
       ज्मोप्ततऴ त्रलद्या क कळर जानकय बी कार ऩुरुऴकी गणना कय अनेक योगो क अनेको यशस्म को
                           े ु                                          े
उजागय कय वकते शं । ज्मोप्ततऴ ळास्त्र क भाध्मभ वे योग क भूरको ऩकिने भे वशमोग प्तभरता शं , जशा
                                      े               े
आधुप्तनक प्तचटकत्वा ळास्त्र अषभ शोजाता शं लशा ज्मोप्ततऴ ळास्त्र द्राया योग क भूर(जि) को ऩकि कय उवका
                                                                            े
प्तनदान कयना राबदामक एलॊ उऩामोगी प्तवद्ध शोता शं ।
       शय व्मत्रि भं रार यॊ गकी कोप्तळकाए ऩाइ जाती शं , स्जवका प्तनमभीत त्रलकाव क्रभ फद्ध तयीक वे शोता
                                                                                              े
यशता शं । जफ इन कोप्तळकाओ क क्रभ भं ऩरयलतलन शोता शै मा त्रलखॊटिन शोता शं तफ व्मत्रि क ळयीय भं
                           े                                                         े
स्लास्र्थम वॊफॊधी त्रलकायो उत्ऩन्न शोते शं । एलॊ इन कोप्तळकाओ का वॊफॊध नल ग्रशो क वाथ शोता शं । स्जस्वे योगो
                                                                                 े
क शोने क कायण व्मत्रि क जन्भाॊग वे दळा-भशादळा एलॊ ग्रशो टक गोचय स्स्थती वे प्राद्ऱ शोता शं ।
 े      े              े
       वलल योग प्तनलायण कलच एलॊ भशाभृत्मुॊजम मॊत्र क भाध्मभ वे व्मत्रि क जन्भाॊग भं स्स्थत कभजोय एलॊ
                                                    े                   े
ऩीटित ग्रशो क अळुब प्रबाल को कभ कयने का कामल वयरता ऩूलक टकमा जावकता शं । जेवे शय व्मत्रि को
             े                                        ल
ब्रह्माॊि टक उजाल एलॊ ऩृर्थली का गुरुत्लाकऴलण फर प्रबालीत कताल शं टठक उवी प्रकाय कलच एलॊ मॊत्र क भाध्मभ
                                                                                                े
वे ब्रह्माॊि टक उजाल क वकायात्भक प्रबाल वे व्मत्रि को वकायात्भक उजाल प्राद्ऱ शोती शं स्जस्वे योग क प्रबाल
                      े                                                                           े
को कभ कय योग भुि कयने शे तु वशामता प्तभरती शं ।
       योग प्तनलायण शे तु भशाभृत्मुॊजम भॊत्र एलॊ मॊत्र का फिा भशत्ल शं । स्जस्वे टशन्द ू वॊस्कृ प्तत का प्राम् शय
व्मत्रि भशाभृत्मुॊजम भॊत्र वे ऩरयप्तचत शं ।
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कलच क राब :
     े
 एवा ळास्त्रोि लचन शं स्जव घय भं भशाभृत्मुॊजम मॊत्र स्थात्रऩत शोता शं लशा प्तनलाव कताल शो नाना प्रकाय
   टक आप्तध-व्माप्तध-उऩाप्तध वे यषा शोती शं ।
 ऩूणल प्राण प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि वलल योग प्तनलायण कलच टकवी बी उम्र एलॊ जाप्तत धभल क रोग
                                                                                                  े
   चाशे स्त्री शो मा ऩुरुऴ धायण कय वकते शं ।
 जन्भाॊगभं अनेक प्रकायक खयाफ मोगो औय खयाफ ग्रशो टक प्रप्ततकरता वे योग उतऩन्न शोते शं ।
                        े                                   ू
 कछ योग वॊक्रभण वे शोते शं एलॊ कछ योग खान-ऩान टक अप्तनमप्तभतता औय अळुद्धतावे उत्ऩन्न शोते शं ।
   ु                             ु
   कलच एलॊ मॊत्र द्राया एवे अनेक प्रकाय क खयाफ मोगो को नद्श कय, स्लास्र्थम राब औय ळायीरयक यषण प्राद्ऱ
                                         े
   कयने शे तु वलल योगनाळक कलच एलॊ मॊत्र वलल उऩमोगी शोता शं ।
 आज क बौप्ततकता लादी आधुप्तनक मुगभे अनेक एवे योग शोते शं , स्जवका उऩचाय ओऩये ळन औय दलावे बी
      े
   कटठन शो जाता शं । कछ योग एवे शोते शं स्जवे फताने भं रोग टशचटकचाते शं ळयभ अनुबल कयते शं एवे
                      ु
   योगो को योकने शे तु एलॊ उवक उऩचाय शे तु वलल योगनाळक कलच एलॊ मॊत्र राबादाप्तम प्तवद्ध शोता शं ।
                              े
 प्रत्मेक व्मत्रि टक जेवे-जेवे आमु फढती शं लैवे-लवै उवक ळयीय टक ऊजाल कभ शोती जाती शं । स्जवक वाथ
                                                        े                                    े
   अनेक प्रकाय क त्रलकाय ऩैदा शोने रगते शं एवी स्स्थती भं उऩचाय शे तु वललयोगनाळक कलच एलॊ मॊत्र परप्रद
                े
   शोता शं ।
 स्जव घय भं त्रऩता-ऩुत्र, भाता-ऩुत्र, भाता-ऩुत्री, मा दो बाई एक टश नषत्रभे जन्भ रेते शं , तफ उवकी भाता
   क प्तरमे अप्तधक कद्शदामक स्स्थती शोती शं । उऩचाय शे तु भशाभृत्मुॊजम मॊत्र परप्रद शोता शं ।
    े
 स्जव व्मत्रि का जन्भ ऩरयप्तध मोगभे शोता शं उन्शे शोने लारे भृत्मु तुल्म कद्श एलॊ शोने लारे योग, प्तचॊता भं
   उऩचाय शे तु वलल योगनाळक कलच एलॊ मॊत्र ळुब परप्रद शोता शं ।

   नोि:- ऩूणल प्राण प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि वलल योग प्तनलायण कलच एलॊ मॊत्र क फाये भं अप्तधक
                                                                                       े
   जानकायी शे तु वॊऩक कयं ।
                     ल


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                                                      भॊत्र प्तवद्ध कलच
भॊत्र प्तवद्ध कलच को त्रलळेऴ प्रमोजन भं उऩमोग क प्तरए औय ळीघ्र प्रबाल ळारी फनाने क प्तरए तेजस्ली भॊत्रो द्राया
                                               े                                  े
ळुब भशूतल भं ळुब टदन को तैमाय टकमे जाते शं . अरग-अरग कलच तैमाय कयने कप्तरए अरग-अरग तयश क
                                                                     े                  े
भॊत्रो का प्रमोग टकमा जाता शं .

    क्मं चुने भॊत्र प्तवद्ध कलच?
    उऩमोग भं आवान कोई प्रप्ततफन्ध नशीॊ
    कोई त्रलळेऴ प्तनप्तत-प्तनमभ नशीॊ
    कोई फुया प्रबाल नशीॊ
    कलच क फाये भं अप्तधक जानकायी शे तु
          े

                                                भॊत्र प्तवद्ध कलच वूप्तच
वलल कामल प्तवत्रद्ध          4600/-   ऋण भुत्रि                       910/-    त्रलघ्न फाधा प्तनलायण             550/-
वलल जन लळीकयण                1450/-   धन प्राप्तद्ऱ                   820/-    नज़य यषा                           550/-
अद्श रक्ष्भी                 1250/-   तॊत्र यषा                       730/-    दबालग्म नाळक
                                                                                ु                                460/-
वॊतान प्राप्तद्ऱ             1250/-   ळत्रु त्रलजम                    730/-    * लळीकयण (२-३ व्मत्रिक प्तरए)
                                                                                                     े          1050/-
स्ऩे- व्माऩय लृत्रद्ध        1050/-   त्रललाश फाधा प्तनलायण           730/-    * ऩत्नी लळीकयण                    640/-
कामल प्तवत्रद्ध              1050/-   व्माऩय लृत्रद्ध                 730/--   * ऩप्तत लळीकयण                    640/-
आकस्स्भक धन प्राप्तद्ऱ       1050/-   वलल योग प्तनलायण                730/-    वयस्लती (कषा +10 क प्तरए)
                                                                                                 े               550/-
नलग्रश ळाॊप्तत                910/-   भस्स्तष्क ऩृत्रद्श लधलक         640/-    वयस्लती (कषा 10 तकक प्तरए)
                                                                                                  े              460/-
बूप्तभ राब                    910/-   काभना ऩूप्ततल                   640/-    * लळीकयण ( 1 व्मत्रि क प्तरए)
                                                                                                     े           640/-
काभ दे ल                      910/-   त्रलयोध नाळक                    640/-    योजगाय प्राप्तद्ऱ                 550/-
ऩदं उन्नप्तत                  910/-   योजगाय लृत्रद्ध                 730/-
*कलच भात्र ळुब कामल मा उद्दे श्म क प्तरमे
                                  े

                                         GURUTVA KARYALAY
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                           (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)

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123                                नलम्फय 2012



                             GURUTVA KARYALAY
                       YANTRA LIST                                     EFFECTS
                    Our Splecial Yantra
 1   12 – YANTRA SET                                 For all Family Troubles
 2   VYAPAR VRUDDHI YANTRA                           For Business Development
 3   BHOOMI LABHA YANTRA                             For Farming Benefits
 4   TANTRA RAKSHA YANTRA                            For Protection Evil Sprite
 5   AAKASMIK DHAN PRAPTI YANTRA                     For Unexpected Wealth Benefits
 6   PADOUNNATI YANTRA                               For Getting Promotion
 7   RATNE SHWARI YANTRA                             For Benefits of Gems & Jewellery
 8   BHUMI PRAPTI YANTRA                             For Land Obtained
 9   GRUH PRAPTI YANTRA                              For Ready Made House
10   KAILASH DHAN RAKSHA YANTRA                                                -

                     Shastrokt Yantra

11   AADHYA SHAKTI AMBAJEE(DURGA) YANTRA             Blessing of Durga
12   BAGALA MUKHI YANTRA (PITTAL)                    Win over Enemies
13   BAGALA MUKHI POOJAN YANTRA (PITTAL)             Blessing of Bagala Mukhi
14   BHAGYA VARDHAK YANTRA                           For Good Luck
15   BHAY NASHAK YANTRA                              For Fear Ending
16   CHAMUNDA BISHA YANTRA (Navgraha Yukta)          Blessing of Chamunda & Navgraha
17   CHHINNAMASTA POOJAN YANTRA                      Blessing of Chhinnamasta
18   DARIDRA VINASHAK YANTRA                         For Poverty Ending
19   DHANDA POOJAN YANTRA                            For Good Wealth
20   DHANDA YAKSHANI YANTRA                          For Good Wealth
21   GANESH YANTRA (Sampurna Beej Mantra)            Blessing of Lord Ganesh
22   GARBHA STAMBHAN YANTRA                          For Pregnancy Protection
23   GAYATRI BISHA YANTRA                            Blessing of Gayatri
24   HANUMAN YANTRA                                  Blessing of Lord Hanuman
25   JWAR NIVARAN YANTRA                             For Fewer Ending
     JYOTISH TANTRA GYAN VIGYAN PRAD SHIDDHA BISHA
26   YANTRA
                                                     For Astrology & Spritual Knowlage
27   KALI YANTRA                                     Blessing of Kali
28   KALPVRUKSHA YANTRA                              For Fullfill your all Ambition
29   KALSARP YANTRA (NAGPASH YANTRA)                 Destroyed negative effect of Kalsarp Yoga
30   KANAK DHARA YANTRA                              Blessing of Maha Lakshami
31   KARTVIRYAJUN POOJAN YANTRA                                                  -
32   KARYA SHIDDHI YANTRA                            For Successes in work
33       SARVA KARYA SHIDDHI YANTRA                 For Successes in all work
34   KRISHNA BISHA YANTRA                            Blessing of Lord Krishna
35   KUBER YANTRA                                    Blessing of Kuber (Good wealth)
36   LAGNA BADHA NIVARAN YANTRA                      For Obstaele Of marriage
37   LAKSHAMI GANESH YANTRA                          Blessing of Lakshami & Ganesh
38   MAHA MRUTYUNJAY YANTRA                          For Good Health
39   MAHA MRUTYUNJAY POOJAN YANTRA                   Blessing of Shiva
40   MANGAL YANTRA ( TRIKON 21 BEEJ MANTRA)          For Fullfill your all Ambition
41   MANO VANCHHIT KANYA PRAPTI YANTRA               For Marriage with choice able Girl
42   NAVDURGA YANTRA                                 Blessing of Durga
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                             YANTRA LIST                                               EFFECTS


43    NAVGRAHA SHANTI YANTRA                                         For good effect of 9 Planets
44    NAVGRAHA YUKTA BISHA YANTRA                                    For good effect of 9 Planets
45        SURYA YANTRA                                              Good effect of Sun
46        CHANDRA YANTRA                                            Good effect of Moon
47        MANGAL YANTRA                                             Good effect of Mars
48        BUDHA YANTRA                                              Good effect of Mercury
49        GURU YANTRA (BRUHASPATI YANTRA)                           Good effect of Jyupiter
50        SUKRA YANTRA                                              Good effect of Venus
51        SHANI YANTRA (COPER & STEEL)                              Good effect of Saturn
52        RAHU YANTRA                                               Good effect of Rahu
53        KETU YANTRA                                               Good effect of Ketu
54    PITRU DOSH NIVARAN YANTRA                                      For Ancestor Fault Ending
55    PRASAW KASHT NIVARAN YANTRA                                    For Pregnancy Pain Ending
56    RAJ RAJESHWARI VANCHA KALPLATA YANTRA                          For Benefits of State & Central Gov
57    RAM YANTRA                                                     Blessing of Ram
58    RIDDHI SHIDDHI DATA YANTRA                                     Blessing of Riddhi-Siddhi
59    ROG-KASHT DARIDRATA NASHAK YANTRA                              For Disease- Pain- Poverty Ending
60    SANKAT MOCHAN YANTRA                                           For Trouble Ending
61    SANTAN GOPAL YANTRA                                            Blessing Lorg Krishana For child acquisition
62    SANTAN PRAPTI YANTRA                                           For child acquisition
63    SARASWATI YANTRA                                               Blessing of Sawaswati (For Study & Education)
64    SHIV YANTRA                                                    Blessing of Shiv
                                                                     Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth &
 65 SHREE YANTRA (SAMPURNA BEEJ MANTRA)                              Peace
 66 SHREE YANTRA SHREE SUKTA YANTRA                                  Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth
 67 SWAPNA BHAY NIVARAN YANTRA                                       For Bad Dreams Ending
 68 VAHAN DURGHATNA NASHAK YANTRA                                    For Vehicle Accident Ending
     VAIBHAV LAKSHMI YANTRA (MAHA SHIDDHI DAYAK SHREE                Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & All
 69 MAHALAKSHAMI YANTRA)                                             Successes
 70  VASTU YANTRA                                                    For Bulding Defect Ending
 71 VIDHYA YASH VIBHUTI RAJ SAMMAN PRAD BISHA YANTRA                 For Education- Fame- state Award Winning
 72 VISHNU BISHA YANTRA                                              Blessing of Lord Vishnu (Narayan)
 73 VASI KARAN YANTRA                                                Attraction For office Purpose
 74      MOHINI VASI KARAN YANTRA                                   Attraction For Female
 75      PATI VASI KARAN YANTRA                                     Attraction For Husband
 76      PATNI VASI KARAN YANTRA                                    Attraction For Wife
 77      VIVAH VASHI KARAN YANTRA                                   Attraction For Marriage Purpose
Yantra Available @:- Rs- 255, 370, 460, 550, 640, 730, 820, 910, 1250, 1850, 2300, 2800 and Above…..


                                      GURUTVA KARYALAY
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  NAME OF GEM STONE                                    GENERAL        MEDIUM FINE    FINE         SUPER FINE           SPECIAL
  Emerald                                  (ऩन्ना)        200.00         500.00      1200.00 1900.00               2800.00 & above
  Yellow Sapphire                      (ऩुखयाज)           550.00        1200.00      1900.00 2800.00               4600.00 & above
  Blue Sapphire                            (नीरभ)         550.00        1200.00      1900.00 2800.00               4600.00 & above
  White Sapphire          (वफ़द ऩुखयाज)
                                  े                       550.00        1200.00      1900.00 2800.00               4600.00 & above
  Bangkok Black Blue(फंकोक नीरभ)                          100.00         150.00       200.00   500.00              1000.00 & above
  Ruby                                  (भास्णक)          100.00         190.00       370.00   730.00              1900.00 & above
  Ruby Berma                  (फभाल भास्णक)              5500.00        6400.00      8200.00 10000.00             21000.00 & above
  Speenal           (नयभ भास्णक/रारिी)                    300.00         600.00      1200.00 2100.00               3200.00 & above
  Pearl                                     (भोप्तत)       30.00          60.00        90.00   120.00               280.00 & above
  Red Coral (4 यप्तत तक) (रार भूॊगा)                       75.00          90.00        12.00   180.00               280.00 & above
  Red Coral (4 यप्तत वे उऩय)( रार भूॊगा)                  120.00         150.00       190.00   280.00               550.00 & above
  White Coral                    (वफ़द भूॊगा)
                                         े                 20.00          28.00        42.00    51.00                 90.00 & above
  Cat’s Eye                       (रशवुप्तनमा)             25.00          45.00        90.00   120.00               190.00 & above
  Cat’s Eye Orissa (उटिवा रशवुप्तनमा)                     460.00         640.00      1050.00 2800.00               5500.00 & above
  Gomed                                    (गोभेद)         15.00          27.00        60.00    90.00               120.00 & above
  Gomed CLN               (प्तवरोनी गोभेद)                300.00         410.00       640.00 1800.00               2800.00 & above
  Zarakan                               (जयकन)            350.00         450.00       550.00   640.00               910.00 & above
  Aquamarine                               (फेरुज)        210.00         320.00       410.00   550.00               730.00 & above
  Lolite                                    (नीरी)         50.00         120.00       230.00   390.00               500.00 & above
  Turquoise                            (टफ़योजा)            15.00          30.00        45.00    60.00                 90.00 & above
  Golden Topaz                         (वुनशरा)            15.00          30.00        45.00    60.00                 90.00 & above
  Real Topaz (उटिवा ऩुखयाज/िोऩज)                           60.00         120.00       280.00   460.00               640.00 & above
  Blue Topaz                  (नीरा िोऩज)                  60.00          90.00       120.00   280.00               460.00 & above
  White Topaz              (वफ़द िोऩज)
                                    े                      60.00          90.00       120.00   240.00                410.00& above
  Amethyst                               (किे रा)          20.00          30.00        45.00    60.00               120.00 & above
  Opal                                      (उऩर)          30.00          45.00        90.00   120.00               190.00 & above
  Garnet                                (गायनेि)           30.00          45.00        90.00   120.00               190.00 & above
  Tourmaline                          (तुभरीन)
                                             ल            120.00         140.00       190.00   300.00               730.00 & above
  Star Ruby              (वुमकान्त भस्ण)
                               ल                           45.00          75.00        90.00   120.00               190.00 & above
  Black Star                   (कारा स्िाय)                15.00          30.00        45.00    60.00               100.00 & above
  Green Onyx                           (ओनेक्व)            09.00          12.00        15.00    19.00                 25.00 & above
  Real Onyx                            (ओनेक्व)            60.00          90.00       120.00   190.00               280.00 & above
  Lapis                                (राजललत)            15.00          25.00        30.00    45.00                 55.00 & above
  Moon Stone            (चन्द्रकान्त भस्ण)                 12.00          21.00        30.00    45.00               100.00 & above
  Rock Crystal                         (स्फ़टिक)            09.00          12.00        15.00    30.00                 45.00 & above
  Kidney Stone                (दाना टफ़यॊ गी)               09.00          11.00        15.00    19.00                 21.00 & above
  Tiger Eye                 (िाइगय स्िोन)                  03.00          05.00        10.00    15.00                 21.00 & above
  Jade                                   (भयगच)            12.00          19.00        23.00    27.00                 45.00 & above
  Sun Stone                   (वन प्तवताया)                12.00          19.00        23.00    27.00                 45.00 & above
                                                           50.00         100.00        200.00   370.00              460.00 & above
  Diamond                                   (शीया)      (Per Cent )    (Per Cent )   (PerCent )    (Per Cent)                 (Per Cent )
  (.05 to .20 Cent )
Note : Bangkok (Black) Blue for Shani, not good in looking but mor effective, Blue Topaz not Sapphire This Color of Sky Blue, For Venus
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                      BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION
      We are mostly engaged in spreading the ancient knowledge of Astrology, Numerology, Vastu and Spiritual
Science in the modern context, across the world.
      Our research and experiments on the basic principals of various ancient sciences for the use of common man.
exhaustive guide lines exhibited in the original Sanskrit texts

BOOK APPOINTMENT PHONE/ CHAT CONSULTATION
        Please book an appointment with Our expert Astrologers for an internet chart . We would require your birth
details and basic area of questions so that our expert can be ready and give you rapid replied. You can indicate the
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How Does it work Phone/Chat Consultation
This is a unique service of GURUATVA KARYALAY where we offer you the option of having a personalized
discussion with our expert astrologers. There is no limit on the number of question although time is of
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    We send you a Chat URL / ID to visit at the designated time of the appointment
    You would need to refer your Booking number before the chat is initiated
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    We recommend 25 minutes when you need to consult for one persona Only and usually the time is
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    For more than these questions or one birth charts we would recommend 60/45 minutes Phone/chat
       is recommended
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In special cases we don't have the time available about your Specific Questions We will taken some time for
properly Analysis your birth chart and we get back with an alternate or ask you for an alternate.
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                                                            वूचना
 ऩत्रत्रका भं प्रकाप्तळत वबी रेख ऩत्रत्रका क अप्तधकायं क वाथ शी आयस्षत शं ।
                                             े           े

 रेख प्रकाप्तळत शोना का भतरफ मश कतई नशीॊ टक कामालरम मा वॊऩादक बी इन त्रलचायो वे वशभत शं।

 नास्स्तक/ अत्रलद्वावु व्मत्रि भात्र ऩठन वाभग्री वभझ वकते शं ।

 ऩत्रत्रका भं प्रकाप्तळत टकवी बी नाभ, स्थान मा घिना का उल्रेख मशाॊ टकवी बी व्मत्रि त्रलळेऴ मा टकवी बी स्थान मा
   घिना वे कोई वॊफॊध नशीॊ शं ।

 प्रकाप्तळत रेख ज्मोप्ततऴ, अॊक ज्मोप्ततऴ, लास्तु, भॊत्र, मॊत्र, तॊत्र, आध्मास्त्भक सान ऩय आधारयत शोने क कायण
                                                                                                        े
   मटद टकवी क रेख, टकवी बी नाभ, स्थान मा घिना का टकवी क लास्तत्रलक जीलन वे भेर शोता शं तो मश भात्र
             े                                         े
   एक वॊमोग शं ।

 प्रकाप्तळत वबी रेख बायप्ततम आध्मास्त्भक ळास्त्रं वे प्रेरयत शोकय प्तरमे जाते शं । इव कायण इन त्रलऴमो टक
   वत्मता अथला प्राभास्णकता ऩय टकवी बी प्रकाय टक स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक टक नशीॊ शं ।

 अन्म रेखको द्राया प्रदान टकमे गमे रेख/प्रमोग टक प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल टक स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक
   टक नशीॊ शं । औय नाशीॊ रेखक क ऩते टठकाने क फाये भं जानकायी दे ने शे तु कामालरम मा वॊऩादक टकवी बी
                               े            े
   प्रकाय वे फाध्म शं ।

 ज्मोप्ततऴ, अॊक ज्मोप्ततऴ, लास्तु, भॊत्र, मॊत्र, तॊत्र, आध्मास्त्भक सान ऩय आधारयत रेखो भं ऩाठक का अऩना
   त्रलद्वाव शोना आलश्मक शं । टकवी बी व्मत्रि त्रलळेऴ को टकवी बी प्रकाय वे इन त्रलऴमो भं त्रलद्वाव कयने ना कयने
   का अॊप्ततभ प्तनणलम स्लमॊ का शोगा।

 ऩाठक द्राया टकवी बी प्रकाय टक आऩत्ती स्लीकामल नशीॊ शोगी।

 शभाये द्राया ऩोस्ि टकमे गमे वबी रेख शभाये लऴो क अनुबल एलॊ अनुळॊधान क आधाय ऩय प्तरखे शोते शं । शभ टकवी बी व्मत्रि
                                                 े                    े
   त्रलळेऴ द्राया प्रमोग टकमे जाने लारे भॊत्र- मॊत्र मा अन्म प्रमोग मा उऩामोकी स्जन्भेदायी नटशॊ रेते शं ।

 मश स्जन्भेदायी भॊत्र-मॊत्र मा अन्म प्रमोग मा उऩामोको कयने लारे व्मत्रि टक स्लमॊ टक शोगी। क्मोटक इन त्रलऴमो भं नैप्ततक
   भानदॊ िं, वाभास्जक, कानूनी प्तनमभं क स्खराप कोई व्मत्रि मटद नीजी स्लाथल ऩूप्ततल शे तु प्रमोग कताल शं अथला प्रमोग
                                       े
   क कयने भे त्रुटि शोने ऩय प्रप्ततकर ऩरयणाभ वॊबल शं ।
    े                               ू

 शभाये द्राया ऩोस्ि टकमे गमे वबी भॊत्र-मॊत्र मा उऩाम शभने वैकिोफाय स्लमॊ ऩय एलॊ अन्म शभाये फॊधगण ऩय प्रमोग टकमे शं
                                                                                               ु
   स्जस्वे शभे शय प्रमोग मा भॊत्र-मॊत्र मा उऩामो द्राया प्तनस्द्ळत वपरता प्राद्ऱ शुई शं ।

 ऩाठकं टक भाॊग ऩय एक टश रेखका ऩून् प्रकाळन कयने का अप्तधकाय यखता शं । ऩाठकं को एक रेख क ऩून्
                                                                                        े
   प्रकाळन वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं ।

 अप्तधक जानकायी शे तु आऩ कामालरम भं वॊऩक कय वकते शं ।
                                         ल

                              (वबी त्रललादो कप्तरमे कलर बुलनेद्वय न्मामारम शी भान्म शोगा।)
                                             े       े
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                            गुरुत्ल ज्मोप्ततऴ ऩत्रत्रका नलम्फय -2012
वॊऩादक

प्तचॊतन जोळी
वॊऩकल
गुरुत्ल ज्मोप्ततऴ त्रलबाग

गुरुत्ल कामालरम
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INDIA

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129                                            नलम्फय 2012




                                                          शभाया उद्दे श्म
त्रप्रम आस्त्भम

             फॊध/ फटशन
                ु

                         जम गुरुदे ल

        जशाॉ आधुप्तनक त्रलसान वभाद्ऱ शो जाता शं । लशाॊ आध्मास्त्भक सान प्रायॊ ब शो जाता शं , बौप्ततकता का आलयण ओढे व्मत्रि
जीलन भं शताळा औय प्तनयाळा भं फॊध जाता शं , औय उवे अऩने जीलन भं गप्ततळीर शोने क प्तरए भागल प्राद्ऱ नशीॊ शो ऩाता क्मोटक
                                                                              े
बालनाए टश बलवागय शं , स्जवभे भनुष्म की वपरता औय अवपरता प्तनटशत शं । उवे ऩाने औय वभजने का वाथलक प्रमाव शी श्रेद्षकय
वपरता शं । वपरता को प्राद्ऱ कयना आऩ का बाग्म शी नशीॊ अप्तधकाय शं । ईवी प्तरमे शभायी ळुब काभना वदै ल आऩ क वाथ शं । आऩ
                                                                                                        े
अऩने कामल-उद्दे श्म एलॊ अनुकरता शे तु मॊत्र, ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न औय दरब भॊत्र ळत्रि वे ऩूणल प्राण-प्रप्ततत्रद्षत प्तचज लस्तु का शभंळा
                            ू                                         ु ल
प्रमोग कये जो १००% परदामक शो। ईवी प्तरमे शभाया उद्दे श्म मशीॊ शे की ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो द्राया प्तवद्ध
प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि वबी प्रकाय क मन्त्र- कलच एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय तक ऩशोचाने का शं ।
                                                 े                                                   े


                                        वूमल की टकयणे उव घय भं प्रलेळ कयाऩाती शं ।
                                              जीव घय क स्खिकी दयलाजे खुरे शं।
                                                      े




                                            GURUTVA KARYALAY
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130   नलम्फय 2012




NOV
2012

GURUTVA JYOTISH NOV-2012

  • 1.
    Font Help >>http://gurutvajyotish.blogspot.com गुरुत्ल कामालरम द्राया प्रस्तुत भाप्तवक ई-ऩत्रत्रका नलम्फय- 2012 » स्पटिक श्रीमॊ त्र का ऩू ज न » ऩाॊ च मॊ त्र वे धन की कभी को कयदं … » वद्ऱ श्री का चभत्काय » धन प्राप्तद्ऱ शे तु वात द रलब रक्ष्भी वाधना ु » रक्ष्भी का प्तचस्थामी प्तनलाव तीन द रलब ... ु » रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु वात द रलब लस्तु एॊ ु NON PROFIT PUBLICATION
  • 2.
    FREE E CIRCULAR गुरुत्ल ज्मोप्ततऴ ऩत्रत्रका ई- जन्भ ऩत्रत्रका नलम्फय 2012 अत्माधुप्तनक ज्मोप्ततऴ ऩद्धप्तत द्राया वॊऩादक प्तचॊतन जोळी वॊऩकल गुरुत्ल ज्मोप्ततऴ त्रलबाग उत्कृ द्श बत्रलष्मलाणी क वाथ े गुरुत्ल कामालरम 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, १००+ ऩेज भं प्रस्तुत (ORISSA) INDIA पोन 91+9338213418, 91+9238328785, E HOROSCOPE ईभेर gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Create By Advanced लेफ www.gurutvakaryalay.com http://gk.yolasite.com/ Astrology www.gurutvakaryalay.blogspot.com/ ऩत्रत्रका प्रस्तुप्तत Excellent Prediction प्तचॊतन जोळी, 100+ Pages स्लस्स्तक.ऎन.जोळी पोिो ग्राटपक्व टशॊ दी/ English भं भूल्म भात्र 750/- प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक आिल शभाये भुख्म वशमोगी GURUTVA KARYALAY स्लस्स्तक.ऎन.जोळी (स्लस्स्तक BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 वोफ्िे क इस्न्िमा प्तर) Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  • 3.
    दीऩोत्वल अथालत दीऩालरीऩलल को ऩुयातन कार वे शी बायतलऴल भं ज्मोप्ततऩलल क रुऩ भं भनामा जाता शं । फिे ़ - े फिे ़ भशानगयं वे रेकय छोिे वे छोिे गालं भं बी धनी वे रेकय गयीफ वे गयीफ व्मत्रि की चौखि बी इव ऩालन ऩलल क अलवय ऩय दीऩक की ऩॊत्रिमं क जगभगा उठती शं । दीऩालरी क टदन अभालस्मा …4 े े े …4 एवी ऩौयास्णक भान्मता शं टक धन तेयव क टदन धनलॊतयी नाभक दे लता अभृत करळ क वाथ े े वागय भॊथन वे उत्ऩन्न शुए थे। धनलॊतयी धन, स्लास्थम ल आमु क अप्तधऩप्तत दे लता शं । े धनलॊतयी को दे लं क लैध ल प्तचटकत्वक क रुऩ भं जाना जाता शं । …6 े े दीऩालरी त्रलळेऴ भं ऩढे ़  त्रलळेऴ भं   दीऩालरी त्रलळेऴ  वलल कामल प्तवत्रद्ध धन तेयव ळुब भुशूतल (11-नलम्फय-2012) 7 स्पटिक श्रीमॊत्र का ऩूजन 10 दीऩालरी ऩूजन भुशूत(13-नलम्फय-2012) ल 8 वद्ऱ श्री का चभत्काय 12 कलच …55 त्रलप्तबन्न रक्ष्भी भॊत्र 13 दीऩालरी भशत्ल.. वॊऩूणल रक्ष्भी ऩूजन 14 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु कयं याप्तळ भॊत्र का जऩ 39 रक्ष्भी का प्तचस्थामी प्तनलाव तीन दरब... ु ल 30 वुख-स्भृत्रद्ध चाशते शं ऋण(कजल)कफरे औय कफदे 46 ऩाॊच मॊत्र वे धन की कभी को कयदं … 34 दीऩालरी भं रक्ष्भी-गणेळ आयाधना का भशत्ल 48 धन प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब रक्ष्भी वाधनाएॊ ु ल 36 दीऩालरी वे जुिी रक्ष्भी कथा 56 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब लस्तुएॊ ु ल 43 गणेळ रक्ष्भी मॊत्र.113 धनतेयव टक अनोखी कथा 57  शभाये उत्ऩाद  जफ रक्ष्भीजी को प्तभरी वजा? 63 बाग्म रक्ष्भी टदब्फी 8 रक्ष्भीजी क स्लगल रोक जाने टक कथा े 65 दगाल फीवा मॊत्र ु 9 धनप्राप्तद्ऱ औय वुख वभृत्रद्ध क प्तरमे लास्तु प्तवद्धाॊत े 66 भॊत्रप्तवद्ध स्पटिक श्री मॊत्र 11 दे लउठनी एकादळी व्रत कथा 67 वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच 55 नलयत्न जटित श्रीमॊत्र..93 दरयद्रता वे भुत्रि क ळीघ्र प्रबाली उऩाम े 69 वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रका 29 दीऩ जराने का धाप्तभलक भशत्ल क्मा शं ? 74 द्रादळ भशा मॊत्र 89 त्रलप्तबन्न रक्ष्भी धनत्रमोदळी ऩय मभ-दीऩदान अकारभृत्मु वे… ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र एलॊ ळप्तन तैप्ततवा मॊत्र 92 77 मॊत्र …96 धनत्रमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं टकमा जाता शं ? 79 श्री शनुभान मॊत्र 94 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क वयर उऩाम े 82 त्रलप्तबन्न दे लता एलॊ काभना ऩूप्ततल मॊत्र वूप्तच 95  स्थामी औय अन्म रेख  त्रलप्तबन्न दे ली एलॊ रक्ष्भी मॊत्र वूप्तच 96 वॊऩादकीम 4 भॊत्र प्तवद्ध रूद्राष 98 भाप्तवक याप्तळ पर 104 श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र / कलच 99 याप्तळ यत्न…97 नलम्फय 2102 भाप्तवक ऩॊचाॊग 108 याभ यषा मॊत्र 100 नलम्फय-2012 भाप्तवक व्रत-ऩलल-त्मौशाय 110 जैन धभलक त्रलप्तळद्श मॊत्र े 101 नलम्फय 2102 -त्रलळेऴ मोग 116 घॊिाकणल भशालीय वलल प्तवत्रद्ध भशामॊत्र 102 दै प्तनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान ताप्तरका 116 अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलच 102 टदन-यात क चौघटिमे े 117 याळी यत्न एलॊ उऩयत्न 102 भॊत्र प्तवद्ध रूद्राष …98 टदन-यात टक शोया - वूमोदम वे वूमालस्त तक 118 वलल योगनाळक मॊत्र/ 120 ग्रश चरन नलम्फय -2012 119 भॊत्र प्तवद्ध कलच अभोद्य भशाभृत्मुजम ॊ 122 वूचना 127 YANTRA LIST 123 कलच …103 शभाया उद्दे श्म 129 GEM STONE 125
  • 4.
    त्रप्रम आस्त्भम फॊध/ फटशन ु जम गुरुदे ल दीऩोत्वल अथालत दीऩालरी ऩलल को ऩुयातन कार वे शी बायतलऴल भं ज्मोप्ततऩलल क रुऩ भं भनामा जाता े शं । फिे -फिे ़ भशानगयं वे रेकय छोिे वे छोिे गालं भं बी धनी वे रेकय गयीफ वे गयीफ व्मत्रि की चौखि बी इव ऩालन ़ ऩलल क अलवय ऩय दीऩक की ऩॊत्रिमं क जगभगा उठती शं । दीऩालरी क टदन अभालस्मा शोने क कायण इव टदन वकर े े े े रोक भं चायं ओय अॊधकाय परा शोता शं , रेटकन भनुष्म को अॊधकाय ऩवॊद नशीॊ शं , इव प्तरए लशॉ उववे भुकाफरा कयने ै क उद्दे श्म वे अऩने घय-दकान आटद स्थानं ऩय दीऩं की ऩॊत्रिमं भं वजाकय अॊधेये को दय बगाने का वाथलक प्रमाव े ु ू कयता शं । क्मंकी, प्रकाळ का शभाये जीलन भं फशुत भशत्ल शं , इव भशत्ल वे शय व्मत्रि बरी बाप्तत ऩरयप्तचत शं । शभायी बायप्ततम वॊस्कृ प्तत क धाप्तभलक कामलक्रभ भं बी अस्ग्न का त्रलळेऴ भशत्ल शं । एलॊ अस्ग्न प्रकाळ का प्रप्ततक शं जो मस, शलन, त्रललाश, वॊस्काय े जेवे अन्म धाप्तभलक कभलकाॊिो भं त्रफना अस्ग्न क त्रफना वॊऩन्न शोना अवॊबल वा प्रप्ततत शोता शं । इवी कायण बायप्ततम वभ्मताओॊ भं े अस्ग्न को दे ल कशा गमा शं । अस्ग्न को दे लता भनकय उवका ऩूजन टकमा जाता शं । क्मोटक एवा भाना जाता शं , टक मटद अस्ग्न दे ल क्रोप्तधत शोजामे तो फिे -फिे भशरं ल ऊचे-ऊचे बलनं को धूरभं उिादे औय याख फनादे । ॊ ॊ इव प्तरमे प्रकाळ का ऩूजन कय उन्शं ळाॊत यखने का प्रमाव टकमा जाता शं । शभाये प्रभुख धभल ग्रॊथो भं एक ऋग्लेद का वलल प्रथभ भॊत्र शी प्रकाळ वे ळुरू शोता शै । भॊत्र: प्रकाळभीरे ऩुयोटशतॊ मसस्म दे लभृस्त्लजभ ्। शोतायॊ यत्नधातभभ ्॥ बालाथल:- वललप्रथभ आयाधन टकए जाने लारे, मस को प्रकाप्तळत कयने लारे, ऋतुओॊ क अनुवाय मस वम्ऩाटदत कयने लारे, दे लताओॊ े का आह्वान कयने लारे तथा धन प्रदान कयने लारं भं वललश्रद्ष अस्ग्न दे लता की भं स्तुप्तत कयता शूॊ। े अन्म ऩौयास्णक भान्मताओॊ क अनुळाय ऩुयातन कार भं दीऩालरी ऩलल को "रोकोत्वल" क रुऩ भं भनामा जाता े े था। रेटकन आज दीऩालरी ऩलल की भुख्मत् दो प्रभुख त्रलळेऴता दे खने को प्तभरती शं । एक शं , दीऩं की जगभगाशि वे अॊधकायको दय कयना औय दवयी शै , लैबल एलॊ वुख-वभृत्रद्ध की दे ली भाॉ भशारक्ष्भी क ऩूजन का आमोजन। ू ू े दीऩालरी क टदन दे ली रक्ष्भी, गणेळ, वयस्लती, कफेय आटद का ऩूजन कयने का त्रलधान शै । े ु क्मोटक दे ली रक्ष्भी की उत्ऩत्ती दीऩालरी क टदन भानी जाती शं औय ळास्त्रोि लणल शं धन की दे ली रक्ष्भी शं औय धन क दे लता कफेय शं , े े ु स्जनक प्रवन्न शोने वे भनुष्म को धन, वभृत्रद्ध एलॊ ऐद्वमल प्राद्ऱ शोता शं । भाॊ रक्ष्भी चॊचर शं । अथालत रक्ष्भी जी लश एक े े ु ु जगश टिकती नशीॊ शै । टकव प्रकाय रक्ष्भी का आगभन आऩक घय भं शो औय स्जदॊ गी द्ख, दरयद्र, कद्शो वे छि कय खुप्तळमं वे बय जाए उववे जुिे यशस्मो को बायतीम ऋत्रऴ भुप्तनमं ने खोज प्तनकारा शं । मश बी एक प्रभुख कायण शं की दीऩालरी का ऩलल भनामा जाता शं औय रक्ष्भीजी का ऩूजन अचलन टकमा जाता शं । अन्म धाप्तभलक भान्मता शं की श्राद्ध ऩष वे रेकय काप्ततलक भाव की अभालस्मा तक त्रऩतयं को ऩुन् अऩने रोक भं रोिना शोता शं । ऩरयलाय क रोग त्रऩतयं का आह्वान कयते शं , उनका ऩूजन कय दीऩं वे उनका ऩुन् लाऩव जाने लारा े
  • 5.
    अॊप्तधमाया भागल प्रकाप्तळतकयक उन्शं अगरे लऴल तक क प्तरए त्रलदाई दे ते शं । े े दीऩालरी क वॊफॊध भं बत्रलष्मऩुयाण भं उल्रेख शं की े लस्त्र-ऩुष्ऩै् ळोप्तबतव्मा क्रम-त्रलक्रम-बूभम्। अथालत ्: आज क टदन धनऩप्तत कफेय का बी ऩूजन शोता शं । टशन्द ू धभलळास्त्रं क अनुवाय कफेय धनऩप्तत शं । े ु े ु एवा भानाजाता शं की आज क टदन शी दे ली रक्ष्भी का जन्भ शुला था। े आज क बौप्ततक मुग भं शय कामल धन क उऩय प्रत्मष मा अप्रत्मष रुऩवे प्तनबलय कयता शं इव प्तरमे प्रत्मेक े े व्मत्रि टक मशी इच्छा शोती शं टक उवक ऩाव अऩाय धन दौरत एलॊ जीलन उऩमोगी वायी वुख वुत्रलधाए उप्रब्ध शो जो े एक वभृद्ध व्मत्रि क ऩाव भं शोती शं , एलॊ उवकी वभृत्रद्ध एलॊ उन्नप्तत टदन प्रप्ततटदन फढती जाए। स्जन रोगो क ऩाव े े ऩमालद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त शोती शं उन्शं इच्छा शोती शं उनकी धन-वॊऩत्रत्त टदन दोगुनी यात चौगुनी फढती यशं ओय स्जक ऩाव े ऩमालद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त नशीॊ शं उवकी इच्छा शोती शं , की उवे कभ वे कभ इतनी धन वॊऩत्रत्त प्राद्ऱ शो जामे की उवका जीलन वुखभम शो। रेटकन कछ रोगो को धन, वॊऩत्रत्त एलॊ बौप्ततक वुख-वाधन अऩनी मोग्मता औय भेशनत क अनुळाय प्राद्ऱ शो ु े जाता शं । रेटकन फशोत वे रोग एवे शोते शं स्जन्शं कटठन ऩरयश्रभ कयने औय प्तळस्षत शोने क उऩयाॊत बी त्रलळेऴ राब े नशीॊ प्तभरता मा अऩने ऩरयश्रभ का उप्तचत भूल्म बी नशीॊ प्राद्ऱ शो ऩाता शं । एवे रोगं क प्तरम एलॊ स्जन्शं वयरता वे धन की प्राप्तद्ऱ शं उनकी धन-वॊऩात्रत्त फढ़ती यशे औय भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा े प्राप्तद्ऱ शे तु दीऩालरे त्रलळेऴ अॊक भं धन प्राप्तद्ऱ क वयर उऩामं क वाथ भं, रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु दरब ळीघ्र प्रबाली मॊत्र, े े ु ल वाभग्रीमाॊ औय ळीघ्र प्रबाली वयर वाधनाओॊ का वॊकरन त्रलप्तबन्न ळास्त्र एलॊ ग्रॊथो भं लस्णलत उल्रेख क आधाय ऩय टकमा े गमा शं । ऩाठको क भागलदळलन एलॊ जानकायी शे तु ऩत्रत्रका क इव अॊक भं कछ त्रलळेऴ प्राबाली भॊत्रो का वॊकरन कयने का े े ु ु प्रमाव टकमा गमा शं । स्जववे इच्छक फॊधु/फशन त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय अऩने भनोयथो को प्तवद्ध कयने भं वभथल शं। इव अॊक भं प्रकाप्तळत त्रलप्तबन्न उऩाम, मॊत्र-भॊत्र-तॊत्र, वाधना ल ऩूजा ऩद्धप्तत क त्रलऴम भं वाधक एलॊ े त्रलद्रान ऩाठको वे अनुयोध शं , मटद दळालमे गए भॊत्र, स्तोत्र इत्मादी क वॊकरन, प्रभाण ऩढ़ने, वॊऩादन भं, े टिजाईन भं, िाईऩीॊग भं, त्रप्रॊटिॊ ग भं, प्रकाळन भं कोई त्रुटि यश गई शो, तो उवे स्लमॊ वुधाय रं मा टकवी मोग्म गुरु मा त्रलद्रान वे वराश त्रलभळल कय रे । क्मोटक त्रलद्रान गुरुजनो एलॊ वाधको क प्तनजी अनुबल त्रलप्तबन्न अनुद्षा े भं बेद शोने ऩय ऩूजन त्रलप्तध एलॊ जऩ त्रलप्तध भं प्तबन्नता वॊबल शं । आऩका जीलन वुखभम, भॊगरभम शो भाॊ रक्ष्भी की कृ ऩा आऩक ऩरयलाय ऩय े फनी यशे । भाॊ भशारक्ष्भी वे मशी प्राथना शं … प्तचॊतन जोळी
  • 6.
    6 नलम्फय 2012 ***** दीऩालरी त्रलळेऴाॊक वे वॊफॊप्तधत त्रलळेऴ वूचना *****  ऩत्रत्रका भं प्रकाप्तळत दीऩालरी त्रलळेऴ भं वम्फस्न्धत वबी जानकायीमाॊ गुरुत्ल कामालरम क अप्तधकायं क वाथ े े शी आयस्षत शं ।  ऩौयास्णक ग्रॊथो ऩय अत्रलद्वाव यखने लारे व्मत्रि इव अॊक भं उऩरब्ध वबी त्रलऴम को भात्र ऩठन वाभग्री वभझ वकते शं ।  धाप्तभलक त्रलऴम आस्था एलॊ त्रलद्वाव ऩय आधारयत शोने क कायण इव अॊकभं लस्णलत वबी जानकायीमा े बायप्ततम ग्रॊथो वे प्रेरयत शोकय प्तरखी गई शं ।  धभल वे वॊफॊप्तधत त्रलऴमो टक वत्मता अथला प्राभास्णकता ऩय टकवी बी प्रकाय टक स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक टक नशीॊ शं ।  इव अॊक भं लस्णलत वॊफॊप्तधत वबी रेख भं लस्णलत भॊत्र, मॊत्र ल प्रमोग टक प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल टक स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक टक नशीॊ शं औय ना शीॊ प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल टक स्जन्भेदायी क फाये भं े जानकायी दे ने शे तु कामालरम मा वॊऩादक टकवी बी प्रकाय वे फाध्म शं ।  धभल वे वॊफॊप्तधत रेखो भं ऩाठक का अऩना त्रलद्वाव शोना आलश्मक शं । टकवी बी व्मत्रि त्रलळेऴ का टकवी बी प्रकाय वे इन त्रलऴमो भं त्रलद्वाव कयने ना कयने का अॊप्ततभ प्तनणलम उनका स्लमॊ का शोगा।  ळास्त्रोि त्रलऴमं वे वॊफॊप्तधत जानकायी ऩय ऩाठक द्राया टकवी बी प्रकाय टक आऩत्ती स्लीकामल नशीॊ शोगी।  धभल वे वॊफॊप्तधत रेख प्राभास्णक ग्रॊथो, शभाये लऴो क अनुबल एल अनुळधान क आधाय ऩय टदमे गमे शं । े ॊ े  शभ टकवी बी व्मत्रि त्रलळेऴ द्राया धभल वे वॊफॊप्तधत त्रलऴमं ऩय त्रलद्वाव टकए जाने ऩय उवक राब मा नुक्ळान की े स्जन्भेदायी नटशॊ रेते शं । मश स्जन्भेदायी धाप्तभलक त्रलऴमो ऩय त्रलद्वाव कयने लारे मा उवका प्रमोग कयने लारे व्मत्रि टक स्लमॊ टक शोगी।  क्मोटक इन त्रलऴमो भं नैप्ततक भानदॊ िं, वाभास्जक, कानूनी प्तनमभं क स्खराप कोई व्मत्रि मटद नीजी स्लाथल े ऩूप्ततल शे तु मशाॊ लस्णलत जानकायी क आधाय ऩय प्रमोग कताल शं अथला धाप्तभलक त्रलऴमो क उऩमोग कयने भे े े त्रुटि यखता शं मा उववे त्रुटि शोती शं तो इव कायण वे प्रप्ततकर अथला त्रलऩरयत ऩरयणाभ प्तभरने बी वॊबल शं । ू  धाप्तभलक त्रलऴमो वे वॊफॊप्तधत जानकायी को भानकय उववे प्राद्ऱ शोने लारे राब, शानी टक स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक टक नशीॊ शं ।  शभाये द्राया ऩोस्ि टकमे गमे धाप्तभलक त्रलऴमो ऩय आधारयत रेखं भं लस्णलत जानकायी को शभने कई फाय स्लमॊ ऩय एलॊ अन्म शभाये फॊधगण ने बी अऩने नीजी जीलन भं अनुबल टकमा शं । स्जस्वे शभ कई फाय धाप्तभलक ु त्रलऴमो क वे त्रलळेऴ राब की प्राप्तद्ऱ शुई शं । अप्तधक जानकायी शे तु आऩ कामालरम भं वॊऩक कय वकते शं । े ल (वबी त्रललादो कप्तरमे कलर बुलनेद्वय न्मामारम शी भान्म शोगा। े े
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    7 नलम्फय 2012 धन तेयव ळुब भुशूतल (11-नलम्फय-2012)  प्तचॊतन जोळी एवी ऩौयास्णक भान्मता शं टक धन तेयव क टदन धनलॊतयी नाभक दे लता अभृत करळ क वाथ वागय भॊथन वे े े उत्ऩन्न शुए थे। धनलॊतयी धन, स्लास्थम ल आमु क अप्तधऩप्तत दे लता शं । धनलॊतयी को दे लं क लैध ल प्तचटकत्वक क रुऩ भं े े े जाना जाता शं । धन तेयव क टदन चाॊदी क फतलन-प्तवक्क खयीदना त्रलळेऴ ळुब शोता शं । क्मोटक ळास्त्रं भं धनलॊतयी दे ल को चॊद्रभा क े े े े वभान भाना गमा शं । धन तेयव क धनलॊतयी क ऩूजन वे भानप्तवक ळास्न्त, भन भं वॊतोऴ एल स्लबाल भं वौम्मता का बाल े े आता शं । जो रोग अप्तधक वे अप्तधक धन एकत्र कयने टक काभना कयते शं उन्शं धनलॊतयी दे ल टक प्रप्ततटदन आयाधना कयनी चाटशए। धनतेयव ऩय ऩूजा कयने वे व्मत्रि भं वॊतोऴ, स्लास्थम, वुख ल धन टक त्रलळेऴ प्राप्तद्ऱ शोती शं । स्जन व्मत्रिमं क उत्तभ े स्लास्थम भं कभी तथा वेशत खयाफ शोने टक आळॊकाएॊ फनी यशती शं उन्शं त्रलळेऴ रुऩ वे इव ळुब टदन भं ऩूजा आयाधना कयनी चाटशए। धनतेयव भं खयीदायी ळुब भानी जाती शं । रक्ष्भी जी एलॊ गणेळ जी टक चाॊदी टक प्रप्ततभा-प्तवक्को को इव टदन खरयदना धन प्राप्तद्ऱ एलॊ आप्तथलक उन्नप्तत शे तु श्रेद्ष शोता शं । धनतेयव क टदन बगलान धनलन्तयी वभुद्र वे अभृत करळ रेकय े प्रकि शुए थे, इवप्तरमे धनतेयव क टदन खाव तौय वे फतलनं टक खयीदायी टक जाती शं । इव टदन स्िीर क फतलन, चाॊदी क े े े फतलन खयीदने वे प्राद्ऱ शोने लारे ळुब परो भं कई गुणा लृत्रद्ध शोने टक वॊबालना फढ़जाती शं । धन तेयव ऩूजा भुशूतल प्रदोऴ कार 2 घण्िे एलॊ 24 प्तभनि का शोता शं । अऩने ळशय क वूमालस्त वभम अलप्तध वे रेकय अगरे 2 घण्िे 24 प्तभनि े टक वभम अलप्तध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं । अरग- अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार क प्तनधालयण का आधाय वूमोस्त वभम े क अनुळाय प्तनधालयीत कयना चाटशमे। धनतेयव क टदन प्रदोऴकार भं दीऩदान ल रक्ष्भी ऩूजन कयना ळुब यशता शै । े े इव लऴल 11 नलम्फय, 2012 (धनतेयव) को बायतीम वभम अनुळाय नई टदल्री भं वॊध्मा वूमालस्त क फाद 05 फज कय 27 े प्तभप्तनि वे आयम्ब शोकय यात क 07 फजकय 51 प्तभनि तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा। इव वभमा अलप्तध भं स्स्थय रग्न े (लृऴब) बी भुशुतल वभम भं शोने क कायण घय-ऩरयलाय भं स्थामी रक्ष्भी की प्राप्तद्ऱ शोती शै । े 11 नलम्फय, 2012 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न (लृऴब याप्तळ) शो यशा शं , स्स्थय रग्न का वभम वफवे उतभ भाना जाता शं । धन तेयव क टदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 05:40:47 फजे वे रेकय यात्री े 07:36:14 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार क दौयान वॊध्मा 05:29 फजे वे 07:08 फजे तक ळुब चौघटिमा शोने वे े भुशुतल की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं । चौघाटिमा भुशूतल  चर भुशूतल वुफश 08:02 वे 09:23 तक   ळुब भुशूतल दोऩशय 01.26 वे 02:47 तक  अभृत भुशूतल यात 07:08 वे 08:47 तक  राब भुशूतल वुफश09:23 वे 10:44 तक  ळुब भुशूतल वॊध्मा 05:29 वे 07:08 तक  चर भुशूतल यात 08:47 वे 10:26 तक ळुब भशूतल का वभम धन तेयव की ऩूजा क प्तरमे त्रलळेऴ ळुब यशे गा। राब भुशूतल ऩूजन कयने वे प्राद्ऱ शोने लारे राबं भं लृत्रद्ध े शोती शं । ळुब कार भुशूतल टक ळुबता वे धन, स्लास्थम ल आमु भं लृत्रद्ध शोती शं । वफवे अप्तधक ळुब अभृत कार भं ऩूजा कयने का शोता शं । नोि: उऩयोि लस्णलत वूमालस्त का वभम प्तनयधायण नई टदल्री क अषाॊळ ये खाॊळ क अनुळाय आधुप्तनक ऩद्धप्तत वे टकमा गमा शं । इव े े त्रलऴम भं त्रलप्तबन्न भत एलॊ वूमालस्त सात कयने का तयीका प्तबन्न शोने क कायण वूमालस्त वभम का प्तनयधायण प्तबन्न शो वकता शं । े वूमालस्त वभम का प्तनयधायण स्थाप्तनम वूमालस्त क अनुळाय टश कयना उप्तचत शोगा। े
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    8 नलम्फय 2012 दीऩालरी ऩूजन भुशूतल (13-नलम्फय-2012)  प्तचॊतन जोळी भाॊ रक्ष्भी टक कृ ऩा प्राद्ऱ कयने शे तु एलॊ उनका स्थामी प्तनलाव शो वक इव उद्दे श्म वे घय-दकान-व्मलवाप्तमक े ु कामालरम भं दीऩालरी क टदन रक्ष्भी ऩूजन शे तु टदन क वफवे ळुब भुशूतल को प्तरमा जाता शं । े े इव लऴल दीऩालरी का ऩलल भॊगरलाय, 13 नलम्फय, 201२ भं काप्ततलक भाव टक अभालस्मा वूमोदम कारीन नषत्र स्लाती ऩयन्तु प्रदोऴकार भं त्रलळाखा नषत्र का कार यशे गा, वौबाग्म मोग भं तथा चन्दभा का भ्रभण तुरा याप्तळ भं यशे गा। दीऩालरी क टदन अभालस्मा प्ततप्तथ, प्रदोऴ कार, ळुब रग्न ल चौघा़टिमा भुशूतल त्रलळेऴ का अत्माप्तधक भशत्ल शोता शं । े 13 नलम्फय 2012, भॊगरलाय क टदन वूमोदमी नषत्र स्लाती, रेटकन टदन 15:06:42 फजे फाद त्रलळाखा नषत्र े यशे गा, इव टदन वूमोदमी मोग वौबाग्म यात 23:59:12 फजे फाद ळोबन मोग यशे गा। वूमोदमी कयण ळकप्तन वुफश ु 07:14:12 फजे ऩद्ळमात चतुष्ऩाद क ऩद्ळमात नाग कयण यशे गा। वूमोदम वे वॊऩूणल टदन चन्द्रभा तुरा याप्तळ भं भ्रभण े कये गा। प्रदोऴ कार 2 घण्िे एलॊ 24 प्तभनि का शोता शं । अऩने ळशय क वूमालस्त वभम अलप्तध वे रेकय अगरे 2 घण्िे े 24 प्तभनि टक वभम अलप्तध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं । अरग- अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार क प्तनधालयण का आधाय े वूमोस्त वभम क अनुळाय प्तनधालयीत कयना चाटशमे। े दीऩालरी प्रदोऴ कार भुशूतल अऩने ळशय क वूमालस्त वभम वे 2 घन्िे 24 प्तभनि तक का वभम ळुब भुशूतल वभम े क प्तरमे प्रमोग टकमा जाता शं . इवे प्रदोऴ कार वभम कशा जाता शं । इव लऴल 13 नलम्फय 2012 (दीऩालरी) को े बायतीम वभम अनुळाय नई टदल्री भं वूमालस्त वॊध्मा 05 फज कय 26 प्तभप्तनि ऩय शोगा। वॊध्मा 05 फज कय 26 प्तभप्तनि वे आयम्ब शोकय यात क 07 फजकय 50 प्तभनि तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा। े 13 नलम्फय 2012 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न (लृऴब याप्तळ) शो यशा शं , स्स्थय रग्न का वभम वफवे उतभ भाना जाता शं । टदऩालरी क टदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 17:32:56 फजे वे रेकय यात्री े 19:28:21 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार क दौयान वॊध्मा 07:02 फजे वे 08:36 फजे तक ळुब चौघटिमा शोने े वे भुशुतल की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं । बाग्म रक्ष्भी टदब्फी वुख-ळास्न्त-वभृत्रद्ध की प्राप्तद्ऱ क प्तरमे बाग्म रक्ष्भी टदब्फी :- स्जस्वे धन प्रप्तद्ऱ, त्रललाश मोग, े व्माऩाय लृत्रद्ध, लळीकयण, कोिल कचेयी क कामल, बूतप्रेत फाधा, भायण, वम्भोशन, तास्न्त्रक े फाधा, ळत्रु बम, चोय बम जेवी अनेक ऩये ळाप्तनमो वे यषा शोप्तत शै औय घय भे वुख वभृत्रद्ध टक प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै , बाग्म रक्ष्भी टदब्फी भे रघु श्री फ़र, शस्तजोिी (शाथा जोिी), प्तवमाय प्तवन्गी, त्रफस्ल्र नार, ळॊख, कारी-वफ़द-रार गुॊजा, इन्द्र जार, भाम जार, ऩातार तुभिी े जेवी अनेक दरब वाभग्री शोती शै । ु ल भूल्म:- Rs. 1250, 1900, 2800, 5500, 7300, 10900 भं उप्रब्द्ध गुरुत्ल कामालरम वॊऩक : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 ल c
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    9 नलम्फय 2012 स्जवभं त्रलळेऴ रूऩ वे श्री गणेळऩूजन, श्री भशारक्ष्भी ऩूजन, कफेय ऩूजन, व्माऩारयक खातं का ऩूजन, दीऩदान एलॊ ु इव वभम क अॊतगलत अऩने वेलकं को उऩशाय दे ना ळुब यशता शं । े इव भुशूतल वभम भं अऩने ऩरयलाय क फिे वदस्मं एलॊ प्तभत्र लगल वे आळीलालद रेना एलॊ उन्शं प्तभठाईमाॊ, लस्त्र ल े उऩशाय आटद दे ना बी ळुब यशता शं । त्रलद्रानो क भत वे इव भुशूतल भं ऩरयलाय क फिे वदस्मं एलॊ प्तभत्र लगल वे प्राद्ऱ शोने े े लारा आळीलालद ळुब परप्रद प्तवद्ध शोता शं । इव भुशूतल वभम भं भॊटदय इत्माटद धभलस्थरो ऩय दान इत्माटद कयना बी त्रलळेऴ राब दामश एलॊ कल्माणकायी शोता शं । दीऩालरी चौघटिमाॊ भुशूतल दीऩालरी चौघ़टिमा भुशूतल वभम को घय ल ऩरयलाय भं रक्ष्भी ऩूजन कयने क प्तरमे ळुब भाना जाता शं । श्रीभशारक्ष्भी े ऩूजन एलॊ दीऩालरी का भशाऩलल काप्ततलक कृ ष्ण अभालस्मा भं प्रदोऴ कार एलॊ यात्रत्र वभम भं स्स्थय रग्न वभम भं कयना ळुब शोता शै रक्ष्भी ऩूजन, दीऩ प्रजलस्ल्रत कयने क प्तरमे प्रदोऴकार भुशूतल वभम शी त्रलळेऴतमा ळुब भाना गमा शं । े रक्ष्भी ऩूजा भुशूतल दीऩालारी क टदन े  चय भुशूतल टदन भं 09:24 वे 10:44 तक  राब भुशूतल वुफश भं 10:44 वे 12:05 तक  अभृत भुशूतल वुफश भं 12:05 वे 01:26 तक  ळुब भुशूतल दोऩशय भं 02:47 वे 04:07 तक  राब भुशूतल वॊध्मा भं 07:08 वे यात 08:47 तक  ळुब भुशूतल यात भं 10:26 वे यात 12:06 तक नोि: उऩयोि लस्णलत वूमालस्त का वभम प्तनयधायण नई टदल्री क अषाॊळ ये खाॊळ क अनुळाय आधुप्तनक ऩद्धप्तत वे टकमा े े गमा शं । इव त्रलऴम भं त्रलप्तबन्न भत एलॊ वूमालस्त सात कयने का तयीका प्तबन्न शोने क कायण वूमालस्त वभम का े प्तनयधायण प्तबन्न शो वकता शं । वूमालस्त वभम का प्तनयधायण स्थाप्तनम वूमालस्त क अनुळाय टश कयना उप्तचत शोगा। े दगाल फीवा मॊत्र ु ळास्त्रोि भत क अनुळाय दगाल फीवा मॊत्र दबालग्म को दय कय व्मत्रि क वोमे शुले बाग्म को जगाने लारा भाना गमा े ु ु ू े शं । दगाल फीवा मॊत्र द्राया व्मत्रि को जीलन भं धन वे वॊफॊप्तधत वॊस्माओॊ भं राब प्राद्ऱ शोता शं । जो व्मत्रि आप्तथलक ु वभस्मावे ऩये ळान शं, लश व्मत्रि मटद नलयात्रं भं प्राण प्रप्ततत्रद्षत टकमा गमा दगाल फीवा मॊत्र को स्थाप्तद्ऱ कय रेता ु शं , तो उवकी धन, योजगाय एलॊ व्मलवाम वे वॊफॊधी वबी वभस्मं का ळीघ्र शी अॊत शोने रगता शं । नलयात्र क टदनो भं े प्राण प्रप्ततत्रद्षत दगाल फीवा मॊत्र को अऩने घय-दकान-ओटपव-पक्ियी भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता ु ु ै शं , व्मत्रि ळीघ्र शी अऩने व्माऩाय भं लृत्रद्ध एलॊ अऩनी आप्तथलक स्स्थती भं वुधाय शोता दे खंगे। वॊऩूणल प्राण प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म दगाल फीवा मॊत्र को ळुब भुशूतल भं अऩने घय-दकान-ओटपव भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ राब ु ु प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म: Rs.730 वे Rs.10900 तक GURUTVA KARYALAY: Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785, Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    10 नलम्फय 2012 स्पटिक श्रीमॊत्र का ऩूजन  प्तचॊतन जोळी आज क बौप्ततक मुग भं अथल (धन) जीलन टक भुख्म आलश्मिाओॊ भं वे एक शै । धनाढ्म व्मत्रिओॊ जीलनळैरी को े दे खकय प्रबात्रलत शोते शुले वाधायण व्मटक टक बी काभना शोती शं , टक उवक ऩाव बी इतना धन शो टक लश अऩने जीलन े भं वभस्त बौप्ततक वुखो को बोग ने भं वभथल शं। एवी स्स्थभं भेशनत, ऩरयश्रभ वे कभाई कयक धन अस्जलत कयने क े े फजाम कछ रोग अल्ऩ वभम भं ज्मादा कभाने टक भानप्तवकता क कायण कबी-कबी गरत तयीक अऩनाते शं । ु े ं स्जवक पर स्लरुऩ एवे रोग धन का लास्तत्रलक वुख बोगने वे लॊप्तचत यश जाते े शं औय योग, तनाल, भानप्तवक अळाॊप्तत जेवी अन्म वभस्माओॊ वे ग्रस्त शो जाते शं । जशाॊ गरत तयीक वे कभामे शुले धन क कायण वभाज एवे रोगो को शीन बाल ं े वे दे खते शं । जफटक भेशनत, ऩरयश्रभ वे काभामे शुले धन वे स्लमॊ का आत्भत्रलद्वाव फढता शं एलॊ वभाज भं प्रप्ततद्षा औय भान वम्भान बी वयरता वे प्राद्ऱ शो जाता शं । जो व्मत्रि धाप्तभलक त्रलचाय धायाओॊ वे जुिे शो लश इद्वय भं त्रलद्वाय यखते शुले स्लमॊ टक भेशनत, ऩरयश्रभ क फर ऩय कभामे शुले धन को टश वच्चा वुख भानते शं । धभल भं आस्था े एलॊ त्रलद्वाव यखने लारे व्मत्रि क प्तरमे भेशनत, ऩरयश्रभ कयने क उऩयाॊत अऩनी आप्तथलक े े स्स्थभं उन्नप्तत एलॊ रक्ष्भी को स्स्थय कयने शे तु, श्री मॊत्र क ऩूजन का उऩाम अऩनाकय े जीलन भं टकवी बी वुख वे लॊप्तचत नशीॊ यश वकते, उन्शं अऩने जीलन भं कबी धन का अबाल नशीॊ यशता। उनक वभस्त कामल वुचारु रुऩ वे चरते शं । रक्ष्भी कृ ऩा प्राप्तद्ऱ क े े प्तरए श्रीमॊत्र का वयर ऩूजन त्रलधान स्जवे अऩना कय वाधायण व्मत्रि त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । इव भं जया बी वॊळम नशीॊ शं । श्रीमॊत्र का ऩूजन यॊ क वे याजा फनाने लारा एलॊ व्मत्रि टक दरयद्रता को दय कयने लारा शं । ू  अऩने ऩूजा स्थान भं प्राण-प्रप्ततत्रद्षत श्रीमॊत्र को ऩूजन क प्तरमे स्थात्रऩत कयं । (प्राण-प्रप्ततत्रद्षत श्रीमॊत्र टकवी बी े मोग्म त्रलद्रान ब्राह्मण मा मोग्म जानकाय वे प्तवद्ध कयलारे)  श्री मॊत्र को प्रत्मेक ळुक्रलाय को दध, दशी, ळशद, घी औय ळक्कय (गुि) अथालत ऩॊचाभृत फनाकय स्नान कयामे। ु  स्नान क ऩद्ळमात उवे रार कऩिे वे ऩोछ दं । े  श्री मॊत्र को टकवी चाॊदी मा ताॊफे टक प्रेि भं स्थाऩीत कयं ।  श्री मॊत्र क नीचे 5 रुऩमे मा 10 रुऩमे का नोि यखदं । (5,10 रुऩमे का प्तवक्का नशीॊ) े  श्री मॊत्र स्थात्रऩत कयने लारी प्रेि भं श्रीमॊत्र ऩय स्पटिक टक भारा को चायं ओय घुभाते शुले स्थात्रऩत कयं ।  श्री मॊत्र क उऩय भौरी का िु किा 3-5 फाय घुभाते शुले अत्रऩत कयं । े ल  श्री मॊत्र क उऩय वुखा अद्श गॊध प्तछिक। े ं  मटद वॊबल शो तो रार ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं । (कभर, भॊदाय(जावूद) मा गुराफ शो तो उत्तभ) ल  धूऩ-दीऩ इत्मादी वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं ।  उऩयोि त्रलधन प्रप्तत ळुक्रलाय कयं एलॊ अन्म टदन कलर धूऩ-दीऩ कयं । े  टकवी एक रक्ष्भी भॊत्र का एक भारा भॊत्र जऩ कयं । श्रीवूि, अद्श रक्ष्भी स्तोत्र इत्मादी का ऩाठ कयं मटद ऩाठ कयने भं आऩ अवभथल शोतो फाजाय भं श्रीवूि, अद्श रक्ष्भी इत्मादी स्तोत्र टक कवेि वीिी प्तभरती शं उवका श्रलण कयं । े
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    11 नलम्फय 2012  ऩूजा भं जाने-अनजाने शुई गरती क प्तरए रक्ष्भीजी का स्भयण कयते शुले षभा भाॊगकय वुख, वौबाग्म औय वभृत्रद्ध े टक काभना कयं ।  प्रप्तत ळुक्रलाय उऩयोि ऩूजन कयने वे जीलन भं टकवी बी प्रकाय का आप्तथलक वॊकि नशीॊ आता।  मदी आप्तथलक वॊकि वे ऩये ळान शं तो श्री मॊत्र क ऩूजन वे वभस्त प्रकाय क आप्तथलक वॊकि धीये -धीये दय शो जाते शं । े े ू नोि: श्री मॊत्र क क नीचे यखा शुला नोि प्रप्तत एक-दो भाव भं एक फाय टकवी दे ली भॊदीय भं बेि कय दं । (राब प्राद्ऱ शोने ऩय फदरे) े े  प्रथन फाय यखा शुला नोि श्री मॊत्र क ऩूजन वे राब शोने क फाद शी फदरे। राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने तक नोि को यखे यशं । े े  राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने क ऩद्ळमात प्रप्तत भाश भं एक फाये प्रप्ततऩदा(एकभ) को ऩुयाना नोि फदर कय नमे नोि यखं। े  जेवे-जेवे राब प्राद्ऱ शोने रगे आऩ क अनुकर कामल शो ने रगे तो नोि टक यकभ फढाते यशं । अप्तधक राब प्राद्ऱ शोता शं । े ू उदाशण: मटद ऩशरे 5 रुऩमे का नोि यखा शं तो उस्वे राब शोने क ऩद्ळमात नोि फदरते शुले 10 रुऩमे का नोि यखे। 10 रुऩमे का े नोि यखने वे राब शोने क ऩद्ळमात नोि फदरते शुले 20 रुऩमे का नोि यखे। इवी प्रकाय नोि को फदते यशं इस्वे अप्तधक राब प्राद्ऱ े शोता शं । अप्तधक राब प्राप्तद्ऱ शे तु वाभान्म प्तनमभ: ऩूजन क टदन ब्रह्मचमल का ऩारन कयं । े ऩूजन क टदन वुगॊप्तधत तेर, ऩयफ्मूभ, इत्र का प्रमोग कयने वे फचे। े त्रफना प्माज-रशवून का ळाकाशायी बोजन ग्रशण कयं । ळुक्रलाय वपद प्तभद्षान बोजन भं ग्रशण कयं । े भॊत्र प्तवद्ध स्पटिक श्री मॊत्र "श्री मॊत्र" वफवे भशत्लऩूणल एलॊ ळत्रिळारी मॊत्र शै । "श्री मॊत्र" को मॊत्र याज कशा जाता शै क्मोटक मश अत्मन्त ळुब फ़रदमी मॊत्र शै । जो न कलर दवये मन्त्रो वे अप्तधक वे अप्तधक राब दे ने भे वभथल शै एलॊ वॊवाय क शय व्मत्रि क प्तरए पामदे भॊद वात्रफत शोता शै । ऩूणल े ू े े प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि "श्री मॊत्र" स्जव व्मत्रि क घय भे शोता शै उवक प्तरमे "श्री मॊत्र" अत्मन्त फ़रदामी प्तवद्ध शोता शै े े उवक दळलन भात्र वे अन-प्तगनत राब एलॊ वुख की प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । "श्री मॊत्र" भे वभाई अटद्रतीम एलॊ अद्रश्म ळत्रि भनुष्म की े वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे वभथल शोप्तत शै । स्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय प्तनयाळा दय शोकय लश भनुष्म ू अवफ़रता वे वफ़रता टक औय प्तनयन्तय गप्तत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे वभस्त बौप्ततक वुखो टक प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । "श्री मॊत्र" भनुष्म जीलन भं उत्ऩन्न शोने लारी वभस्मा-फाधा एलॊ नकायात्भक उजाल को दय कय वकायत्भक उजाल का प्तनभालण कयने भे वभथल ू शै । "श्री मॊत्र" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय क स्थान ऩय स्थात्रऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फस्न्धत ऩये ळाप्तन भे न्मुनता े आप्तत शै ल वुख-वभृत्रद्ध, ळाॊप्तत एलॊ ऐद्वमल टक प्रप्तद्ऱ शोती शै । गुरुत्ल कामालरम भे "श्री मॊत्र" 12 ग्राभ वे 2250 Gram (2.25Kg) तक टक वाइज भे उप्रब्ध शै . भूल्म:- प्रप्तत ग्राभ Rs. 10.50 वे Rs.28.00 GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    12 नलम्फय 2012 वद्ऱ श्री का चभत्काय  प्तचॊतन जोळी दीऩालरी क टदन फशी-खाते क ऩूजन क वभम फशी-खाते भं उऩयोि क्रभभं रार यॊ ग की करभ म ऩेन वे श्री े े े प्तरखे। ऩशरे एक फाय श्री प्तरखे, टपय दो फाय श्री श्री प्तरखे, टपय तीन फाय श्री श्री श्री, इव प्रकाय क्रभ को फढाते जाए आखीय भं वात फाय श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री प्तरखे, वद्ऱश्री क नीचे े अऩने ईद्श का नाभ प्तरखे मा ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ् प्तरखे। टपय धुऩ- श्री दीऩ, ऩुष्ऩ आटद वे उवका ऩूजन कयं । श्री श्री उि प्रमोग कयने वे आनेलारा नमा लऴल व्मलवाम भं आप्तथलक द्रत्रद्श वे वुख, वभृत्रद्ध रेकय आमेगा औय अत्माप्तधक राबदामक यशे गा। श्री श्री श्री स्जन रोगो क ऩाव रक्ष्भी (धन) स्स्थय नशीॊ यशता। रक्ष्भी आने े श्री श्री श्री श्री वे ऩूलल जाने को तत्ऩय शोती शं । उन्शं अऩनी जेफ भं मा भनीऩवल भं एक स्पद कागज ऩय उऩयोि तयीक वे श्री प्तरख कय यखना चाटशए। वद्ऱ श्री े े श्री श्री श्री श्री श्री प्तरखने वे रक्ष्भी रम्फे वभम तक स्स्थय यशने क मोग फनते शं लश नमे े श्री श्री श्री श्री श्री श्री स्रोत वे धन राब क बी प्रफर मोग फनते शं । (अद्शगॊध की स्माशी े फनाकय अनाय की करभ वे प्तरखना अप्तत उत्तभ यशता शं ।) श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री  उि तयीक वे वद्ऱ श्री को अऩनी अरभायी, गल्रा (कळ फोक्ळ) े ै ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ् मा धन यखने क स्थान ऩय कभकभ मा अद्शगॊध वे अऩने दाशीने े ु ु शाथ की अनाप्तभका उॊ गरी वे प्तरखने ऩय बी मश अत्माप्तधक राबप्रद यशता शं ।  उि तयीक वे वद्ऱ श्री को चाॊटद मा वोने क ऩत्तय ऩय मॊत्र स्लरुऩ बी फनामा वकता शं । ताॊफे चाॊदी क ऩत्तय भं े े े फनाते वभम ध्मान यखे की ऩत्तय की वतश ऩय श्री उऩय की ओय उबयी शुई शो, नीचे की ओय खुदी शुई न शं।  वद्ऱ श्री की जगश ऩय अनेक रोग श्री मा रक्ष्भी भॊत्र का उच्चायण कयते शुए, अऩनी अरभायी, गल्रा (कळ ै फोक्ळ) आटद धन यखने क स्थान ऩय अनाभीका उॊ गरी वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । कई दकानदाय मा व्मलवामीक े ु स्थानो ऩय बी उि तयीक वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । वद्ऱ श्री वे भाॊ रक्ष्भीजी प्रवन्न शोती शं । क्मोकी श्री का वयर े अथल शं वुख वभृत्रद्ध-वॊऩन्नता। रक्ष्भी मॊत्र श्री मॊत्र (रक्ष्भी मॊत्र) भशारक्ष्भमै फीज मॊत्र लैबल रक्ष्भी मॊत्र श्री मॊत्र (भॊत्र यटशत) भशारक्ष्भी फीवा मॊत्र कनक धाया मॊत्र श्री मॊत्र (वॊऩूणल भॊत्र वटशत) रक्ष्भी दामक प्तवद्ध फीवा मॊत्र श्री श्री मॊत्र (रप्तरता भशात्रत्रऩुय वुन्दमै श्री मॊत्र (फीवा मॊत्र) रक्ष्भी दाता फीवा मॊत्र श्री भशारक्ष्भमं श्री भशामॊत्र) श्री मॊत्र श्री वूि मॊत्र रक्ष्भी फीवा मॊत्र अॊकात्भक फीवा मॊत्र श्री मॊत्र (कभल ऩृद्षीम) ु रक्ष्भी गणेळ मॊत्र ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊत्र ऩूजन मॊत्र मॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक शे तु वॊऩक कयं । GURUTVA KARYALAY, Call us: 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 े ल
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    13 नलम्फय 2012 त्रलप्तबन्न रक्ष्भी भॊत्र  प्तचॊतन जोळी भॊत्र : 1. ॐ श्री भशारक्ष्म्मै नभ्। (Om Shree Mahalakshmai Namah) 2. श्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ कभरे कभरारमे। (Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye) 3. श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ कभरलाप्तवन्मै स्लाशा । (Shreem Hreem Kleem Aim Kamalavasinyai Swaha) 4. ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै नभ्। (Hreem Shreem Kleem Mahalakshmai Namah) 5. ॐ श्रीॊ प्तश्रमै नभ्। (Om Shreem Shriyai Namah) 6. ॐ ह्री श्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ भशारक्ष्भी भभ गृशे धनॊ ऩूयम ऩूयम प्तचॊतामै दयम दयम स्लाशा । ू ू (Om Hreem Shreem Kreem Shreem Kreem Kleem Shreem Mahalakshmi Mam Gruhe Dhanam Pooraya Pooraya Chintayai Dooraya Dooraya Swaha) 7. धन राब एलॊ वभृत्रद्ध भॊत्र ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ त्रत्रबुलन भशारक्ष्म्मै अस्भाॊक दारयद्र्म नाळम प्रचुय धन दे टश दे टश क्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ ॐ । (Om Shreem Hreem Kleem Tribhuvan Mahalakshmai Asmank Daridray Nashay Prachur Dhan Dehi Dehi Kleem Hreem Shreem Om) 8. अषम धन प्राप्तद्ऱ भॊत्र ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ वं ॐ ह्रीॊ क ए ई र ह्रीॊ श व क श र ह्रीॊ वकर ह्रीॊ वं ऐॊ क्रीॊ ह्रीॊ श्री ॐ । (Om Shreem Hreem Kleem Aim Soum Om Hreem Ka Ae Ee La Hreem Ha Sa Ka Ha La Hreem Sakal Hreem Soum Aim Kleem Hreem Shreem Om) कवे कयं भॊत्र जाऩ :- ै धनतेयव मा दीऩालरी क टदन वॊकल्ऩ रेकय प्रात्कार स्नान कयक ऩूलल मा उत्तय टदळा टक औय भुख े े कयक रक्ष्भी टक भूप्ततल े मा प्तचत्र की ऩॊचोऩचाय मा दषोऩचाय मा ऴोड्ऴोऩचाय वे ऩूजा कयं । ळुद्ध-ऩत्रलत्र आवन ग्रशण कय स्पटिक टक भारा वे भॊत्र का जाऩ १,५,७,११ भारा जाऩ ऩूणल कय अऩने कामल उद्दे श्म टक ऩूप्ततल शे तु भाॊ रक्ष्भी वे प्राथना कयं । अप्तधकस्म अप्तधक परभ ्। ॊ जऩ स्जतना अप्तधक शो वके उतना अच्छा शै । मटद भॊत्र अप्तधक फाय जाऩ कय वकं तो श्रेद्ष। प्रप्ततटदन स्नान इत्माटदवे ळुद्ध शोकय उऩयोि टकवी एक रक्ष्भी भॊत्र का जाऩ 108 दाने टक भारा वे कभ वे कभ एक भारा जाऩ अलश्म कयना चाटशए। उऩयोि भॊत्र क त्रलप्तध-त्रलधान क अनुवाय जाऩ कयने वे भाॊ रक्ष्भी टक कृ ऩा वे व्मत्रि को धन की प्राप्तद्ऱ शोती शै औय े े प्तनधलनता का प्तनलायण शोता शै ।
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    14 नलम्फय 2012 दीऩालरी का भशत्ल औय वॊऩूणल ळास्त्रोि रक्ष्भी ऩूजन  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, ऩॊ.श्री बगलानदाव त्रत्रलेदी जी, वॊदीऩ ळभाल दीऩोत्वल अथालत दीऩालरी ऩलल को ऩुयातन कार एवा भानाजाता शं की आज क टदन शी दे ली े वे शी बायतलऴल भं ज्मोप्ततऩलल क रुऩ भं भनामा जाता शं । े रक्ष्भी का जन्भ शुला था। फिे ़-फिे ़ भशानगयं वे रेकय छोिे वे छोिे गालं भं बी धनी वे रेकय गयीफ वे गयीफ व्मत्रि की चौखि बी इव ळास्त्रं भं दे ली भशारक्ष्भी टक उत्ऩत्रत्त वे वॊफॊप्तधत ऩालन ऩलल क अलवय ऩय दीऩक की ऩॊत्रिमं क जगभगा े े त्रलप्तबन्न भत शं उठती शं । दीऩालरी क टदन अभालस्मा शोने क कायण इव े े त्रलप्तबन्न धभल ळास्त्रो भं रक्ष्भी टक उत्ऩत्रत्त के टदन वकर रोक भं चायं ओय अॊधकाय परा शोता शं , ै त्रलऴम भं अनेक कथाएॊ उल्रेस्खत शं । उन प्राचीन कथाओॊ रेटकन भनुष्म को अॊधकाय ऩवॊद नशीॊ शं , इव प्तरए लशॉ भं वभुद्र भॊथन क दौयान भाॊ भशारक्ष्भी टक उत्ऩत्रत्त भानी े उववे भुकाफरा कयने क उद्दे श्म वे अऩने घय-दकान आटद े ु जाती शं । त्रलप्तबन्न ग्रॊथो भं रक्ष्भी एलॊ वभुद्र भॊथन टक स्थानं ऩय दीऩं की ऩॊत्रिमं भं वजाकय अॊधेये को दय ू कथाओॊ भं अॊतय दे खने को प्तभरता शं । ऩयॊ तु भूरत् वफ बगाने का वाथलक प्रमाव कयता शं । कथाओॊ भं अॊतय शोने क उऩयाॊत बी अप्तधकतय वभान शं । े ऩौयास्णक भान्मताओॊ क अनुळाय ऩुयातन कार भं े प्रजाऩत्म कल्ऩ क अनुळाय: े दीऩालरी ऩलल को "रोकोत्वल" क रुऩ भं भनामा जाता े बगलान ब्रह्मा ने रुद्र रूऩ को शी स्लमॊबु भनु औय था। रेटकन आज दीऩालरी ऩलल की भुख्मत् दो प्रभुख स्त्री रूऩ भं वतरूऩा को प्रकि टकमा औय उवक फाद े त्रलळेऴता दे खने को प्तभरती शं । एक शं , दीऩं की त्रप्रमव्रत उत्तानऩाद, प्रवूप्तत औय आकप्तत नाभ टक वॊतानं ू जगभगाशि वे अॊधकायको दय कयना औय दवयी शै , लैबल ू ू को जन्भ टदमा। टपय आकप्तत का त्रललाश रुप्तच वे औय ू एलॊ वुख-वभृत्रद्ध की दे ली भाॉ भशारक्ष्भी क ऩूजन का े प्रवूप्तत का त्रललाश दष वे टकमा गमा। दष ने प्रवूप्तत वे आमोजन। 24 कन्माओॊ को जन्भ टदमा। इवक नाभ श्रद्धा, रक्ष्भी, े धाप्तभलक भान्मताओॊ क अनुळाय दीऩालरी क टदन े े ऩुत्रद्श, धुप्तत, तुत्रद्श, भेधा, टक्रमा, फुत्रद्ध, रज्जा, लऩु, ळास्न्त, ऋत्रद्ध, घय-दकान आटद स्थानं क अराला अन्म वाललजप्तनक ु े औय कीप्ततल इत्मादी शं । स्थानं ऩय बी दीऩकं की ऩॊत्रिमाॉ यखने का त्रलधान शं । एवी भान्मता शं की श्राद्ध ऩष वे रेकय काप्ततलक त्रलष्णु ऩुयाण क अनुळाय: े भाव की अभालस्मा तक त्रऩतयं को ऩुन् अऩने रोक भं एक फाय घूभते शुए दलालवा ने अऩरूऩा त्रलद्याधयी क ु े रोिना शोता शं । ऩरयलाय क रोग त्रऩतयं का आह्वान कयते े ऩाव एक फशुत वुन्दय भारा दे खी। लश वुगस्न्धत भारा शं , उनका ऩूजन कय दीऩं वे उनका ऩुन् लाऩव जाने थी। ऋत्रऴ ने उव भारा को अऩने जिाओॊ ऩय धायण लारा अॊप्तधमाया भागल प्रकाप्तळत कयक उन्शं अगरे लऴल तक े कयने क प्तरए भाॊगा औय प्राद्ऱ कय प्तरमा। दलालवा ने वोचा े ु क प्तरए त्रलदाई दे ते शं । े टक मश भारा प्रेभ क कायण, उवे प्राद्ऱ कय ले काभातुय े दीऩालरी क वॊफॊध भं बत्रलष्मऩुयाण भं उल्रेख शं की े शो उठे शं , ले अऩने काभ क आलेग को योकने क प्तरए े े लस्त्र-ऩुष्ऩै् ळोप्तबतव्मा क्रम-त्रलक्रम-बूभम्। इधय-उधय घूभते-घूभते स्लगल रोक ऩशुॊचे। लशाॊ उन्शंने अथालत ्: आज क टदन धनऩप्तत कफेय का बी ऩूजन शोता े ु अऩने प्तवय वे भारा शिाकय इन्द्र को दे दी। इन्द्र ने उव शं । टशन्द ू धभलळास्त्रं क अनुवाय कफेय धनऩप्तत शं । े ु भारा को ऐयालत क गरे भं िार टदमा औय ऐयालत वे े
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    15 नलम्फय 2012 लश भारा धयती ऩय प्तगय गई औय ऩैयं वे कचर गई। ु उन वफको एकत्र यखकय दे लताओॊ ने ऩुन: फिे लेग दलालवा ने जफ मश दे खा टक उवकी भारा की मश दगप्तत ु ु ल वे वभुद्र भॊथन आयम्ब टकमा। इव फाय क भॊथन वे यत्नं े शुई तो लश क्रोप्तधत शुए औय उन्शंने इन्द्र को श्रीशीन शोने भं वफवे उत्तभ यत्न कौस्तुब प्रकि शुआ, जो वूमभण्िर क ल े का ळाऩ टदमा। जफ इन्द्र ने मश वुना तो बमबीत शोकय वभान ऩयभ कास्न्तभान था। लश अऩने प्रकाळ वे तीनं ऋत्रऴ क ऩाव आमे ऩय उनका ळाऩ रौि नशीॊ वकता था। े रोकं को प्रकाप्तळत कय यशा था। दे लताओॊ ने प्तचॊताभस्ण इवी ळाऩ क कायण अवुयं ने इन्द्र औय दे लताओॊ को े को आगे यखकय कौस्तुब का दळलन टकमा औय उवे स्लगल वे फाशय प्तनकार टदमा। दे लता ब्रह्मा जी की ळयण भं बगलान त्रलष्णु की वेला भं बंि कय टदमा। तदनन्तय, गमे औय उनवे अऩने कद्श क त्रलऴम भं कशा। े प्तचन्ताभस्ण को भध्म भं यखकय दे लताओॊ औय दै त्मं ने ब्रह्मा जी दे लताओॊ को रेकय त्रलष्णु क ऩाव गमे े ऩुन: वभुद्र को भथना आयम्ब टकमा। ले वबी फर भं औय उनवे वायी फात कशी तफ त्रलष्णु ने दे लताओॊ को फढ़े -चढ़े थे औय फाय-फाय गजलना कय यशे थे। अफ की फाय दानल वे वुरश कयक वभुद्र भॊथन कयने की वराश दी े उवे भथे जाते शुए वभुद्र वे उच्चै:श्रला नाभक अद्व प्रकि औय स्लमॊ बी वशामता का आद्वावन टदमा। उन्शंने शुआ। लश वभस्त अद्वजाप्तत भं एक अद्भत यत्न था। उवक ु े फतामा टक वभुद्र भॊथन वे उन्शं रक्ष्भी औय अभृत ऩुन् फाद गज जाप्तत भं यत्न बूत ऐयालत प्रकि शुआ। उवके प्राद्ऱ शोगा। अभृत ऩीकय ले अजय औय अभय शो जाएॊगे। वाथ द्वेतलणल क चौवठ शाथी औय थे। ऐयालत क चाय े े दे लताओॊ ने बगलान त्रलष्णु की फात वुनकय वभुद्र भॊथन दाॉत फाशय प्तनकरे शुए थे औय भस्तक वे भद की धाया का आमोजन टकमा। उन्शंने अनेक औऴप्तधमाॊ एकत्रत्रत की फश यशी थी। इन वफको बी भध्म भं स्थात्रऩत कयक ले े औय वभुद्र भं िारी। टपय भॊथन टकमा गमा। वफ ऩुन: वभुद्र भथने रगे। उव वभम उव वभुद्र वे भॊथन क प्तरमे जाते शुए वभुद्र क चायं ओय फिे े े भटदया, बाॉग, काकिाप्तवॊगी, रशवुन, गाजय, अत्मप्तधक जोय की आलाज उठ यशी थी। इव फाय क भॊथन वे े उन्भादकायक धतूय तथा ऩुष्कय आटद फशुत-वी लस्तुएॉ दे लकामं की प्तवत्रद्ध क प्तरमे वाषात ् वुयप्तब काभधेनु प्रकि े प्रकि शुईं। इन वफको बी वभुद्र क टकनाये एक स्थान ऩय े शुईं। उन्शं कारे, द्वेत, ऩीरे, शये तथा रार यॊ ग की वैकिं यख टदमा गमा। तत्ऩद्ळात ले श्रेद्ष दे लता औय दानल ऩुन: गौएॉ घेये शुए थीॊ। उव वभम ऋत्रऴमं ने फिे शऴल भं बयकय ऩशरे की शी बाॉप्तत वभुद्र-भॊथन कयने रगे। अफ की फाय दे लताओॊ औय दै त्मं वे काभधेनु क प्तरमे माचन की औय े वभुद्र वे वम्ऩूणल दळं टदळाओॊ भं टदव्म प्रकाळ व्माद्ऱ शो कशा आऩ वफ रोग प्तभरकय प्तबन्न-प्तबन्न गोत्रलारे गमा उव टदव्म प्रकाळ वे दे ली भशारक्ष्भी प्रकि शुईं। ब्राह्मणं को काभधेनु वटशत इन वम्ऩूणल गौओॊ का दान इवप्तरए रक्ष्भी को वभुद्र की ऩुत्री क रूऩ भं जाना जाता शै । े अलश्म कयं । ऋत्रऴमं क माचना कयने ऩय दे लताओॊ औय े भशारक्ष्भी ने दे लता, दानल, भानल वम्ऩूणल प्रास्णमं दै त्मं ने बगलान ् ळॊकय की प्रवन्नता क प्तरमे ले वफ े की ओय दृत्रद्शऩात टकमा। भाता भशारक्ष्भी की कृ ऩा-दृत्रद्श गौएॉ दान कय दीॊ तथा मस कभं भं बरी-बाॉप्तत भन को ऩाकय वम्ऩूणल दे लता उवी वभम ऩुन् श्रीवम्ऩन्न शो गमे। रगाने लारे उन ऩयभ भॊगरभम भशात्भा ऋत्रऴमं ने उन ले तत्कार याज्माप्तधकायी क ळुब रषणं वे वम्ऩन्न े गौओॊ का दान स्लीकाय टकमा। तत्ऩद्ळात वफ रोग फिे टदखामी दे ने रगे। जोळ भं आकय षीयवागय को भथने रगे। तफ वभुद्र वे रक्ष्भी की उत्ऩत्रत्त कल्ऩलृष, ऩारयजात, आभ का लृष औय वन्तान- मे चाय वृत्रद्श यचना क त्रलऴम भं सान प्राद्ऱ कयते शुले े टदव्म लृष प्रकि शुए। बीष्भ ने ऩुरस्त्म ऋत्रऴ वे प्रद्ल टकमा ऋत्रऴ श्रेद्ष, रक्ष्भी की उत्ऩत्रत्त क त्रलऴम भं आऩ भुझे त्रलस्ताय वे फताइए। े
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    16 नलम्फय 2012 क्मंटक इव त्रलऴम भं कथा अनेक शं । मश वुनकय कयं । कछ त्रलद्रानो का भत शं की प्तवॊदय वे मटद रक्ष्भीजी ु ू ऩुरस्त्म ऋत्रऴ फोरे टक भशत्रऴल बृगु टक ऩत्नी ख्माप्तत के का फीज भॊत्र अॊटकत कयना अप्तत राबप्रद शोता शं । गबल वे एक त्रत्ररोकवुन्दयी कन्मा उत्ऩन्न शुई। लश क्मोकी, प्राम् घयं एलॊ व्मलवामीक स्थानं ऩय ॐ, श्री, वभस्त ळुब रषणं वे वुळोप्तबत थी। इवप्तरए उवका स्लस्स्तक, ळुब-राब एलॊ रयत्रद्ध-प्तवत्रद्ध प्तरखा शुला वबी ने नाभ रक्ष्भी यखा गमा। दे खा शी शोगा! रक्ष्भी ऩूजन क वभम घय क वबी े े ऩौयास्णक कथा औय भान्मताओॊ के अनुळाय वदस्मं को वाथ प्तभरकय ऩूणल श्रद्धा वे दे ली भशारक्ष्भी रक्ष्भी, चन्द्रभा आटद वबी यत्न की उत्ऩत्रत्त वभुद्र भॊथन का ऩूजन कयना चाटशए। क दौयान शुई थी, रेटकन वभुद्र-भॊथन की प्तनस्द्ळत प्ततप्तथ े दे ली भशारक्ष्भी की ऩूजा चाशे आऩ स्लमॊ कययशे शो मा का लणलन धभलळास्त्रं भं नशीॊ शं । इव प्तरमे एवी भान्मता टकवी त्रलद्रान ऩॊटित वे कयला यशे शो, ऩूजा ऩूणल त्रलप्तध- शं की बगलान श्रीयाभ ने आज शी क टदन याज्मायोशण े त्रलधान वे कयं । जल्दी-जल्दी ऩूजा खत्भ कयने का त्रलधान उत्वल भनामा था औय तफ वे वभग्र अमोध्मा नगयी ळास्त्रोि भत वे बी लस्जलत शं । क्मोकी कलर लऴल भं एक े दीऩं क प्रकाळ वे जगभगा उठी। (बत्रलष्म ऩुयाण) े फाय शी वशी रेटकन ऩूणल त्रलप्तध-त्रलधान वे शी दे ली रक्ष्भी दीऩालरी क टदन घय क वबी वदस्मको प्रात् े े की ऩूजा कयनी चाटशए। जल्दी उठकय प्रपस्ल्रत ु भन वे घय, दकान ु आटद मटद आऩने ऩशरे वे कोई रक्ष्भी मॊत्र जैवे  श्री मॊत्र व्मलवामीक स्थानं की वाप-वपाई कयक उवे ळुद्ध जरवे े (रक्ष्भी मॊत्र)  श्री मॊत्र (भॊत्र यटशत) श्री मॊत्र (वॊऩूणल धो रेना चाटशए। व्मलवामीक स्थान ऩय नमे लस्त्र, गादी भॊत्र वटशत) श्री मॊत्र (फीवा मॊत्र) श्री मॊत्र श्री आटद वे ऩुयाने कलय आटद शिाकय नमे रगादे (मटद नमे वूि मॊत्र श्री मॊत्र (कभल ऩृद्षीम) श्री रषभी कफेय ु ु रेने का वाभर्थमल न शो तो उवे आगे वे धो कय स्लच्छ धनाकऴलण मॊत्र आकस्स्भक धन प्राप्तद्ऱ मॊत्र कय वुखारे), व्मलवामे वे वॊफॊप्तधत नमे फशी-खाता आटद भशारक्ष्भमै फीज मॊत्र भशारक्ष्भी फीवा मॊत्र को स्थात्रऩत कयना चाटशमे। त्रलद्रानो क भतानुळाय कळ े ै रक्ष्भी दामक प्तवद्ध फीवा मॊत्र रक्ष्भी दाता फीवा फॉक्व, फशी-खाता, तुरा, रेखनी, आटद का ककभ वे ुॊ ु मॊत्र रक्ष्भी फीवा मॊत्र रक्ष्भी गणेळ मॊत्र स्लस्स्तक फनाकय ऩूजन कयना चाटशए उव ऩय शल्दी का कनक धाया मॊत्र लैबल रक्ष्भी मॊत्र (भशान प्तवत्रद्ध घोर फनाकय छीॊिे रगाने चाटशमे। ळास्त्रोि त्रलधान वे दामक श्री भशारक्ष्भी मॊत्र) श्री श्री मॊत्र (रप्तरता रक्ष्भी ऩूजन कलर स्स्थय रग्न भं की वॊऩन्न कयना े भशात्रत्रऩुय वुन्दमै श्री भशारक्ष्भमं श्री भशामॊत्र) चाटशए। दीऩालरी क टदन भं प्राम् वाॊम कार भं ऩूजन े अॊकात्भक फीवा मॊत्र ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊत्र ऩूजन शे तु स्स्थय रग्न भं लृऴब रग्न एलॊ यात्री कार भं प्तवॊश मॊत्र धनदा मॊत्र शो एलॊ मटद आऩक ऩाव कोई जैन े रग्न शोता शं । इव प्तरए उि रग्नं भं शी भाॉ रक्ष्भी का मॊत्र शं जैवे श्री ऩद्मालती मॊत्र श्री ऩद्मालती फीवा ऩूजन वलल श्रेद्ष भाना जाता शं । मॊत्र श्री ऩाद्वलऩद्मालती ह्रंकाय मॊत्र ऩद्मालती दीऩालरी क टदन प्रात् स्नानाटद प्तनत्म कभल वे े व्माऩाय लृत्रद्ध मॊत्र श्री मॊत्र श्री रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ औय प्तनलृत्त शोकय एक प्तभट्िी क ऩात्र भं प्तवॊदय को घी क े ू े व्माऩाय लधलक मॊत्र श्री रक्ष्भीकय मॊत्र रक्ष्भी वाथ प्तभराकय उवका रेऩ फनारे, टपय उववे अऩने ऩूजा प्राप्तद्ऱ मॊत्र शो तो आऩ उव मॊत्र को स्थात्रऩत कय उवका स्थान, घय क भुख्म द्राय मा व्मलवामीक स्थान ऩय ॐ, े धूऩ-दीऩ-नैलेद्य आटद वे ऩूजन कय वकते शं । मटद आऩके श्रीॊ, श्री, स्लस्स्तक, ळुब-राब, रयत्रद्ध-प्तवत्रद्ध आटद अऩनी ऩाव कोई बी रक्ष्भी मॊत्र उऩल्फध नशीॊ शो, तो आऩ श्रद्धा एलॊ त्रलद्वाव वे भाॊगप्तरक प्तचन्श मा ळब्दं को अॊटकत गुरुत्ल कामालरम द्राया प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ
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    17 नलम्फय 2012 लतलभान वभम भं भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत मॊत्र प्राद्ऱ कयने ऩत्रलत्र कयण:- भं अवभथल शो तो, आऩ वद्ऱश्री मॊत्र का प्तनभालण कयरं, दे ली ऩूजन शे तु ऩूजन शे तु ऩूलल मा उत्तय टदळा श्रेद्ष शोती शं । इव औय जफ आऩका वाभर्थमल शो जामे तफ आऩ अऩनी प्तरए उत्तय मा ऩूलल दे ळा की औय भुख कयक वफवे ऩशरे शाथ े आलश्मिा क अनुळाय रक्ष्भी मॊत्र प्राद्ऱ कय वकते शं । े भं जर रेकय आचभन, ऩत्रलत्रीधायण, भाजलन ल प्राणामाभ कयके ऩूजन वाभग्री एलॊ स्लमॊ क ऊऩय इव भॊत्र का उच्चायण कयते े शुले जर प्तछिक। ं त्रलळेऴ नोि:  मटद आऩक ऩाव ऩशरे वे अप्तबभॊत्रत्रत मा प्राण- े ॐ अऩत्रलत्र् ऩत्रलत्रं ला वलाललस्थाॊ गतोऽत्रऩ ला। प्रप्ततत्रद्षत मॊत्र उऩरब्ध शो तो उवकी कलर धूऩ-दीऩ वे े म् स्भये त ् ऩुण्ियीकाषॊ व फाह्याभ्मन्तय् ळुप्तच्॥ शी ऩूजा कयं , उव मॊत्र की ऩुन् प्राण-प्रप्ततद्षा मा उवे अथालत ्: भनुष्म अऩत्रलत्र शो मा ऩत्रलत्र मानी लश चाशे टकवी बी अप्तबभॊत्रत्रत कयलाने की आलश्मिा नशीॊ शोती। दळा भं शो, जो कभर जैवे आॊखो लारे बगलान श्री त्रलष्णु का  गुरुत्ल कामालरम द्राया उऩल्फध कयलामे गमे वबी मॊत्र स्भयण कयता शं लश फाशय औय बीतय वबी ओय वे ळुद्ध शो ऩूणत् ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो ल जाता शं । आवन ळुत्रद्ध औय स्लस्स्त-ऩाठ कय कयते शुले शाथ भं जर- द्राया प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि शोते शं , अषत आटद रेकय ऩूजन का वॊकल्ऩ कयं । शभाये मशाॊ वे उऩरब्ध कयलामे गमे मॊत्र ऩूणत् ल अखॊटित एलॊ ळुद्ध धातु भं प्तनप्तभलत शोते शं । वॊकल्ऩ:-  रक्ष्भी ऩूजन क वभम प्राण-प्रप्ततत्रद्षत मॊत्रं को भाॉ े ॐ त्रलष्णु् भावोत्तभं भावे काप्ततलकभावे कृ ष्णऩषे रक्ष्भी की प्रप्ततभा मा प्तचत्र क वभीऩ स्थात्रऩत कय े ऩुण्मामाभभालास्मामाॊ प्ततथौ लावये ............(लाय का नाभ रे), उवका ऩूजन टकमा जा वकता शं । रेटकन मॊत्र की (अऩने गोत्र का उच्चायण कयं ) गोत्रोत्ऩन्न: (अऩने नाभ का अरगवे ऩूजा मा प्राण-प्रप्ततद्षा, भॊत्र जऩ इत्माटद नशीॊ उच्चायण क वाथ भं अशॊ रगामे) जोळीअशॊ (जैवे ळभालअशॊ , े कयना चाटशमे। लभालअशॊ , गुद्ऱाअशॊ इत्माटद) श्रुप्ततस्भृप्तत ऩुयाणोि परप्राप्तद्ऱ काभनामा सातासात काप्तमकलाप्तचक भानप्तवक वकर वबी ऩाठको क भागलदळलन शे तु श्री रक्ष्भी जी का े ऩाऩप्तनलृत्रत्त ऩूलक ल ॊ स्स्थयरक्ष्भीप्राद्ऱमे श्रीभशारक्ष्भीप्रीत्मथं वॊऩणल ऩूजन त्रलधान टदमा जा यशा शं । ू भशारक्ष्भीऩूजनॊ कफेयादीनाॊ ु च ऩूजनॊ करयष्मे। तदड्त्लेन गौयीगणऩत्माटदऩूजनॊ च करयष्मे। रक्ष्भी ऩूजा: अथालत ्: शे बगलान ् त्रलष्णु आज काप्ततलक भाव, कृ ष्ण ऩष की ऩुण्म अभालस्मा अभुख लाय (ऩूजन क टदन क लाय का नाभ े े ऩूजन वाभग्री: रं) को भं... (अऩना नाभ) भेये त्रऩता (अऩने त्रऩता का नाभ योरी, भौरी, रंग, ऩान, वुऩायी, धूऩ, कऩूय, अगयफत्ती, अषत ल रं) स्जनका भं ऩुत्र शूॊ अऩने ऩुण्मं क कायण जो सात-असात े (वाफुत चालर), गुि, धप्तनमा, ऋतुपर, जौ, गेशूॉ, िू फ, ऩुष्ऩ, राब को प्राद्ऱ कयने क प्तरए, स्स्थय रक्ष्भी प्राद्ऱ कयने क प्तरमे े े ऩुष्ऩभारा, चन्दन, प्तवन्दय, दीऩक, रूई, प्रवाद, नारयमर, ू भं मश रक्ष्भी ऩूजन कय यशा शूॉ । वलोऴप्तध, ऩॊचयत्न, मसोऩलीत, ऩॊचाभृत, ळुद्ध जर, खीर, भजीठ, वपद लस्त्र, रार लस्त्र, परेर, रक्ष्भी जील एलॊ गणेळ जी का े ु उि वॊकल्ऩ को ऩढ़कय जर, अषत आटद को गणेळजी के प्तचत्र मा ऩाना, चौकी (फाजौि), करळ, घी, कभरऩुष्ऩ, वभीऩ छोि दे । टपय गणेळजी का ऩूजन कयं । इरामची, भाप्तचव, दस्षणा शे तु नकदी, चॉॊदी क प्तवक्क, े े गणेळ ऩूजन वे ऩशरे नमी प्रप्ततभा को त्रलप्तधलत प्राण-प्रप्ततद्षा फशीखाता, करभ तथा दलात इत्माटद आलश्मक वाभग्रीमाॊ। कयं ।
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    18 नलम्फय 2012 प्रप्ततद्षा:- मे बूता त्रलनकतालयस्ते नद्शन्तु प्तळलासमा।' प्रप्ततद्षा शे तु फामं शाथ भं अषत रेकय इव भॊत्र का उचायण इव भॊत्र वे दळं टदळाओॊ भं त्रऩरा वयवं प्तछिक स्जवेव े कयते शुए दाटशने शाथ वे उन अषतं को गणेळजी की प्रप्ततभा वभस्त बूत प्रेत फाधाओॊ का प्तनलायण शोता शै ऩय चढा़ते जामे.. स्लस्ती लाचन:- ॐ भनो जूप्ततजुऴताभाज्मस्म फृशस्ऩप्ततमलसप्तभभॊ तनोत्लरयद्शॊ मस ल वप्तभभॊ दधातु। स्लस्स्त न इन्द्रो लृद्धश्रला: स्लस्स्त न: ऩूऴा त्रलद्वलेदा:। त्रलद्वे दे लाव इश भादमन्ताभोम्प्रप्ततद्ष।। स्लस्स्तनस्ता यषो अरयद्शनेप्तभ: स्लस्स्त नो फृशस्ऩप्ततदधात॥ ल ॐ अस्मै प्राणा: प्रप्ततद्षन्तु अस्मै प्राणा: षयन्तु च। इव क फाद श्री गणेळ जी क भॊगर ऩाठ कयना चाटशए जो की े े अस्मै दे लत्लभचालमै भाभशे प्तत च कद्ळन।। इव प्रकाय शै उि त्रलप्तधवे प्रप्ततद्षा कय श्रीगणेळजी का ऴोिळोऩचाय ऩूजन कयं । गणेळ जी का भॊगर ऩाठ:- तत्ऩद्ळमात ऴोिवभातृका (वोरश दे त्रलमं का) नलग्रश ल करळ ऩूजन कयं । तत्ऩद्ळमात भुख्म ऩूजन क रुऩ भं दे ली बगलती भाॉ े वुभखद्ळैकदन्तद्ळ कत्रऩरो गजकणलक:। ु भशारक्ष्भी का ऩूजन कयं । रम्फोदयद्ळ त्रलकिो त्रलघ्रनाळो त्रलनामक:॥ ऴोिळोऩचाय गणेळ ऩूजन धूम्रकतुगणाध्मषो बारचन्द्रो गजानन:। े ल द्राद्रळैताप्तन नाभाप्तन म: ऩठे च्छे णुमादत्रऩ॥ ऩत्रलत्र कयण:- त्रलद्यायम्बे त्रललाशे च प्रलेळे प्तनगलभे तथा। वॊग्राभे वॊकिे चैल त्रलघ्रस्तस्म न जामते॥ वफवे ऩशरे ऩूजन वाभग्री ल गणेळ प्रप्ततभा मा प्तचत्रका ऩत्रलत्र एकाग्रप्तचन शोकय गणेळ का ध्मान कयना चाटशए कयण कयं अऩत्रलत्र् ऩत्रलत्रो ला वलाललस्थाॊ गतो त्रऩ ला। श्री गणेळ का ध्मान कयं :- म् स्भये त ् ऩुण्ियीकाषॊ व फाह्याभ्मन्तय् ळुप्तच्॥ गजाननॊ बूतगणाटद वेत्रलतभ ् कत्रऩत्थ जम्फूपर इव भॊत्र वे ळयीय औय ऩूजन वाभग्री ऩय जर छीिं इवे अॊदय फाशय औय फशाय दोनं ळुद्ध शो जाता शै चारुबषणभ। उभावुतभ ् ळोक त्रलनाळ कायकभ ् नभाप्तभ त्रलघ्नेद्वय ् ऩाद ऩॊकजभ॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् गणेळॊ ् आचभन:- ध्मामाप्तभ भॊत्र का उच्चायण कयं । ॐ कळलाम नभ: ॐ नायामण नभ: े आह्वानॊ:- ॐ भध्लामे नभ: इव भॊत्र वे श्री गणेळ का आशलान कये मा भन शी भन भं श्री गणेळ शस्तो प्रषल्म शप्तळकळम नभ : ल े जी को ऩधायने क प्तरमे त्रलनप्तत कयं । शाथभं अषत रेकय आशलान े आवान वुत्रद्ध:- कयं । आगच्छ बगलन्दे ल स्थाने चात्र स्स्थयो बल ॐ ऩृर्थली त्लमा धृता रोका दे त्रल त्ल त्रलद्गणुनाधृता्। मालत्ऩूजाॊ करयष्माप्तभ तालत्लॊ वस्न्नधौ बल।। त्ल च धायम भा दे त्रल ऩत्रलत्र करू च आवनभ॥ ु ् ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् गणेळॊ ध्मामाप्तभ भॊत्र का उच्चायण कयक अषते िारदं ..... े यषा भॊत्र:- इव भॊत्र वे श्री गणेळ की भूप्ततल मा प्रप्ततभा ऩय शल्दी मा कभकभ वे यॊ गे चारल िारं। मटद प्रप्ततभा क प्रशरे वे प्राण- ु ु े अऩक्राभन्तु बूताप्तन त्रऩळाचा् वललतो टदळा। प्रप्ततद्षा शो गई शं तो आलश्मिा नशीॊ शं तफ कलर वुऩायी ऩय े वलेऴाभलयोधेन ब्रह्मकभल वभायबे। शी चारल िारं। अऩवऩलन्तु ते बूता् मे बूता् बूप्तभवॊस्स्थता्।
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    19 नलम्फय 2012 स्भयण:- ऩाद्यॊ:- शाथभं ऩुष्ऩ रेकय श्री गणेळजी का स्भयण कयं । उष्णोदक प्तनभलरॊ च वलल वौगन्ध वॊमतभ ्। ॊ ु नभस्तस्भै गणेळाम वलल त्रलध्न त्रलनाप्तळने॥ ऩाद प्रषारनाथालम दत्तॊ ते प्रप्ततगृह्यताभ ्॥ कामालयॊबेऴु वलेऴु ऩूस्जतो म् वुयैयत्रऩ। ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ऩाद्यॊ वभऩलमाप्तभ॥ वुभखद्ळैक दॊ तद्ळ कत्रऩरो गजकणलक्॥ ु अघ्मं:- रॊफोदयद्ळ त्रलकिो त्रलघ्ननाळो त्रलनामक्। आचभनीभं जर, पर, पर, चॊदन, अषत, दस्षणा इत्माटद शाथ भं ू धुम्रकतुय ् गणाध्मषो बारचॊद्रो गजानन॥ े यख कय प्तनम्न भॊत्र का उच्चायण कयं ... द्रादळैताप्तन नाभाप्तन म् ऩठे च्छणु मादऽत्रऩ॥ ृ अध्मल गृशाण दे लेळ गॊध ऩुष्ऩषतै् वश। त्रलद्यायॊ बे त्रललाशे च प्रलेळे प्तनगलभे तथा। करुणा करु भं दे ल गृशाणाध्मै् नभोस्तुते॥ ु वॊग्राभे वॊकिे चैल त्रलघ्नस्तस्म न जामते॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् अघ्मं वभऩलमाप्तभ भॊत्र का ळुक्राॊफय धयॊ दे लॊ ळप्तळलणं चतुबजभ ्। ुल उच्चायण कयक अध्मल की वाभग्रीमा अत्रऩलत कयदं । े प्रवन्न लदनॊ ध्मामेत ् वलल त्रलघ्नोऩळाॊतमे॥ आचभन:- जऩेद् गणऩप्तत स्तोत्रॊ ऴस्ड्बभालवे परॊ रबेत ्। वलल तीथल वभामुि वुगप्तध प्तनभलर जरभ ्। ॊ ॊ वॊलत्वये ण प्तवत्रद्धॊ च रबते नात्र वॊळम्॥ ॊ आचम्मताॊ भमा दत्तॊ गृशीत्ला ऩयभेद्वयॊ ॥ लक्रतुि भशाकाम वूमकोटि वभ प्रब। ॊ ल ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् आचभनॊ वभऩलमाप्तभ॥ प्तनत्रलघ्नॊ करु भे दे ल वलल कामेऴु वललदा॥ ल ु अप्तबस्प्वताथल प्तवद्धध्मथं ऩूस्जतो म् वुयावुयै्। स्नानॊ:- वलल त्रलघ्न शयस्तस्भै गणाप्तधऩतमे नभ्॥ गॊगा च मभुना ये ला तुगबद्रा वयस्लप्तत। ॊ त्रलघ्नेद्वयाम लयदाम वुयत्रप्रमाम रॊफोदयाम वकराम कालेयी वटशता नद्य् वद्य् स्नाथलभत्रऩता॥ ल जगस्त्धताम। नागाननाम श्रुप्ततमस त्रलबुत्रऴताम ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् स्नानॊ वभऩलमाप्तभ भॊत्र का गौयीवुताम गणनाथ नभो नभस्ते॥ उच्चायण कयते शुले स्नान कयामे। ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् गणेळॊ स्भयाप्तभ भॊत्र का उच्चायण कयक ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं े ऩॊचाभृत स्नान:- तत ऩद्ळमात ऩॊचाभृत वे क्रभळ् दध, दशी, घी, ळशद, ळक्कय वे ू ऴोिळोऩचाय गणऩतीऩूजन:- स्नान कया कय ळुद्धजर मा गॊगाजर वे उि भॊत्र वे ऩुन् स्लच्छ अस्मै प्राण् प्रप्ततद्षन्तु अस्मै प्राणा् षयन्तु च। कयरे। तत ऩद्ळमात ळुद्ध लस्त्र वे ऩोछ कय प्रप्ततत्रद्षत कयं । अस्मै दे लतभचीमल भाभशे प्तत च कद्ळन॥ दध स्नान:- ू आवनॊ:- आवन वभत्रऩलत कयं । मटद ऩशरे वे लस्त्र त्रफछामा शुला शं तो उव काभधेनु वभुत्ऩनॊ वलेऴाॊ जीलन ऩयभ ्। स्थान ऩय शल्दी मा कभकभ वे यॊ गे अषत िारकय ऩुष्ऩ अत्रऩलत ु ु ऩालनॊ मस शे तद्ळ ऩम: स्नानाथलभत्रऩलतभ ्॥ ु कयं । इव क स्थान ऩय ऩम् स्नानभ ् वभऩलमाप्तभ गॊ गणेळाम नभ् का े यम्मॊ वुळोबनॊ टदव्मॊ वलल वौख्म कयॊ ळुबभ ्। उच्चायण कये तथा ऩम् क स्थान ऩय दध कशं , दशीॊ कशं , धृतभ ् े ू आवनॊ च भमादत्तॊ गृशाण ऩयभेद्वय॥ कशं , भधु कशं , ळकया कशं क स्नान कयामे। ल े ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् आवनॊ वभऩलमाप्तभ॥ ऩमवस्तु वभुद्भूतॊ भधुयाम्रॊ ळप्तळप्रबभ। ् मटद द्ऴोक ऩढने भं कटठनाई शो तो आवन वभऩालप्तभ श्री गॊ गणेळाम दध्मानीतॊ भमा दे ल स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ॥ ् नभ् का उच्चायण कयते शुले गणेळ जी क चयण धोमे। े नलनीतवभुत्ऩन्नॊ वललवतोऴकायकभ। ॊ ् घृतॊ तुभ्मॊ प्रदास्माप्तभ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ॥ ्
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    20 नलम्फय 2012 तरु ऩुष्ऩ वभुत्ऩन्नॊ वुस्लादु भधुयॊ भधु । भमा प्तनलेटदता बक्त्मा गृशाण ऩयभेद्वरय॥ तेज् ऩुत्रद्शकयॊ टदव्मॊ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ॥ ् ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् अषतान ् वभऩलमाप्तभ॥ इषुवायवभुद्भूताॊ ळकयाॊ ऩुत्रद्शदाॊ ळुबाभ। ल ् ऩुष्ऩ:- भराऩशारयकाॊ टदव्मॊ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ॥ ् ततऩद्ळमात ऩुष्ऩ भारा आटद चढामे। ऩमो दप्तध धृत चैल भधु च ळकयामुतभ ्। ल भाल्मादीप्तन वुगन्धीप्तन भारत्मादीप्तन लै प्रबो। ऩॊचाभृत भमानीतॊ वनानाथल प्रप्ततघृशमताभ॥ भमा नीताप्तन ऩुष्ऩास्ण गृशाण ऩयभेद्वय॥ लस्त्रॊ:- ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ऩुष्ऩास्ण वभऩलमाप्तभ॥ ऩॊचाभृत स्नान क फाद स्लच्छ कय क लस्त्र ऩशनामे मा वभत्रऩत े े ल दलाल:- ू कयं । ततऩद्ळमात दलाल चढामे। ू वलल बूऴाटदक वौम्मे रोकरज्जा प्तनलायणे । े दलाल कयान्वश रयतान भृतन्भॊगर प्रदान। ु भमोऩऩाटदते तुभ्मॊ लाववी प्रप्ततगृशीताभ ् ॥ आनी ताॊस्तल ऩूजाथल गृशाण ऩयभेद्वय॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् लस्त्रोऩलस्त्रे वभऩलमाप्तभ॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् दलांकयान वभऩलमाप्तभ॥ ू ु आबूऴण:- मसोऩलीत:- ततऩद्ळमात आबूऴण चढामे। ततऩद्ळमात प्तनम्न भॊत्र वे मसोऩलीत ऩशनामे अरॊकायान्भशाटदव्मान्नानायतन त्रलप्तनप्तभतान। ल नलप्तभस्तॊतप्तबमुि त्रत्रगुणॊ दे लताभमॊ। ु गृशाण दे ल-दे लेळ प्रवीद ऩयभेद्वय॥ वऩफीतॊ भमा दत्तॊ गृशाण ऩयभेद्वयभ ्॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् आबूऴण वभऩलमाप्तभ॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् मसोऩत्रलतॊ वभऩलमाप्तभ॥ इत्र:- चॊदन:- ततऩद्ळमात इत्र अथालत ् वुगप्तधत तेर चढामे। ॊ चम्ऩकाळो लकरॊ भारती भोगयाटदप्तब्। ु ततऩद्ळमात रार चॊदन चढामे। लाप्तवतॊ स्स्नग्ध तावेरु तैरॊ चारु प्रगृशमातभ ्॥ श्रीखण्ि चन्दन टदव्मॊ कळयाटद वुभनीशयभ ्। े ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् तैरभ ् वभऩलमाप्तभ॥ त्रलरेऩनॊ वुश्रद्ष चन्दनॊ प्रप्ततगृशमतभ ्॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ककभॊ वभऩलमाप्तभ॥ ुॊ ु धूऩ:- ककभ:- ुॊ ुॊ ततऩद्ळमात धूऩ आटद जरामे। ततऩद्ळमात ककभ अलीय-गुरार चढामे। ुॊ ुॊ लनस्ऩप्तत यवोद्भूतो गॊधाढ्मो गॊध उत्तभ्। ककभ काभना टदव्मॊ काभना काभ वॊबलभ ्। ुॊ ुॊ आध्नम वलल दे लानाॊ धूऩोमॊ प्रप्ततगृह्यताभ ्॥ ककभ नाप्तचतो दे ल गृशाण ऩयभेद्वयभ ्॥ ुॊ ुॊ ल ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् धूऩॊ वभऩलमाप्तभ॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ककभॊ वभऩलमाप्तभ॥ ुॊ ु दीऩ:- प्तवॊदय:- ू ततऩद्ळमात दीऩ आटद जरामे। ततऩद्ळमात प्तवॊदय चढामे। ू आज्मेन लप्ततना मुि लटिना च प्रमोस्जतभ ् भमा। ल ॊ प्तवॊदयॊ ळोबनॊ यि वौबाग्मॊ वुखलधलनभ ्। ू ॊ दीऩॊ गृशाण दे लेळ त्रेरोक्म प्ततप्तभयाऩश॥। ळुबदॊ काभदॊ चैल प्तवॊदयॊ प्रप्ततगृशमताभ। ू ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् दीऩॊ दळलमाप्तभ॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् प्तवॊदयॊ वभऩलमाप्तभ॥ ू नैलेद्य:- अषत:- ततऩद्ळमात नैलेद्य अत्रऩत कयं । ल ततऩद्ळमात शल्दी मा ककभ वे यॊ गे अषत चढामे। ुॊ ुॊ ळकया खॊिखाद्याप्तन दप्तधषीय घृताप्तन च। ल अषताद्ळ वुयश्रेद्ष ककभािा् वुळोप्तबता्। ुॊ ु आशायॊ बक्ष्मॊ बोज्मॊ च गृशाण गणनामक।
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    21 नलम्फय 2012 ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् नैलेद्यॊ प्तनलेदमाप्तभ॥ आयती:- नीयाजन-आयती प्रगि कय उवभं चॊदन-ऩुष्ऩ रगामे ततऩद्ळमात नैलेद्य ऩय जर प्तछिक। े कऩुय प्रज्लप्तरत कयं । गॊ गणऩतमे नभ् चॊद्राटदत्मौ च धयस्ण त्रलद्युदस्ग्न त्लभेल च। त्लभेल वलल ज्मोप्ततत्रऴ आतॉक्मॊ प्रप्ततगृह्यताभ ्॥ ततऩद्ळमात इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले ऩाॊच फाय बोजन कऩुय ऩूयेण भनोशये ण वुलणल ऩात्रान्तय वॊस्स्थतेन। ल कयामे..... ॐ प्राणाम नभ्। ॐ अऩानाम नभ्। ॐ व्मानाम नभ्। प्रटदद्ऱबावा वशगतेन नीयाजनॊ ते ऩरयत कयोप्तभ। ॐ उदानाम नभ्। ॐ वभानाम नभ्। ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् नीयाजनॊ वभऩलमाप्तभ। ततऩद्ळमात इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले जर अत्रऩलत कयं । ॥श्री गणेळ आयप्तत॥ भध्मे ऩानीमॊ वभऩलमाप्तभ। जम गणेळ जम गणेळ जम गणेळ दे ला टपय वे उि भॊत्र का ऩाॊच फाय उच्चायण कयते शुले ऩाॊच फाय बोजन जम गणेळ जम गणेळ जम गणेळ दे ला. कयामे.... भाता जाकी ऩायलती त्रऩता भशादे ला॥ जम गणेळ..... ततऩद्ळमात इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले तीन फाय जर अत्रऩलत एकदन्त दमालन्त चायबुजाधायी कयं .... भाथे ऩय प्ततरक वोशे भूवे की वलायी॥ जम गणेळ..... ॐ गणेळाम नभ् उत्तय ऩोऴणॊ वभऩलमाप्तभ। ऩान चढ़े पर चढ़े औय चढ़े भेला ॐ गणेळाम नभ् शस्त प्रषारनॊ वभऩलमाप्तभ। ॐ गणेळाम नभ् भुख प्रषारनॊ वभऩलमाप्तभ। रड्िु अन का बोग रगे वन्त कयं वेला॥ जम गणेळ..... अॊधे को आॉख दे त कोटढ़न को कामा शाथ वे बोजन की गॊध दय कयने शे तु चॊदनमुि ऩानी अत्रऩलत कयं । ू फाॉझन को ऩुत्र दे त प्तनधलन को भामा॥ जम गणेळ..... ॐ गणेळाम नभ् कयोद्रतलनाथे गॊधॊ वभऩलमाप्तभ. ' वूय' श्माभ ळयण आए वपर कीजे वेला भुख ळुत्रद्ध शे तु ऩान-वुऩायी इरामची औय रलॊग अत्रऩत कयं । ल जम गणेळ जम गणेळ जम गणेळ दे ला॥ जम गणेळ..... एरारलंग वॊमि ऩुगीपरॊ वभस्न्लतभ,् ु ॊ ताॊफरॊ च भमा दत्तॊ गृशाण गणनामक. ु आयती क चायो औय जर घुभामे टपय गणेळजी को आयती टदखामे े ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् भुखलावॊ वभऩलमाप्तभ। खुद आयती रेकय शाथ धोरे। दस्षणा:- टपय दोनो शाथकी अॊजप्तरभं ऩुष्ऩ रेकय ऩुष्ऩाॊजप्तर दं । ततऩद्ळमात दस्षणा अत्रऩत कयं । ल नाना वुगधी ऩुष्ऩास्ण ऋतुकारोद्भलाप्तन च। ॊ टशयण्म गबल गबलस्थॊ शे भफीजॊ त्रलबालवो। ऩुष्ऩाॊजप्तर प्रदानेन प्रवीद गणनामक। अनॊत ऩूण्म परदभत् ळाॊप्ततॊ प्रमच्छ भे॥। ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् ऩुष्ऩाॊजप्तर वभऩलमाप्तभ। ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् दस्षणाॊ वभऩलमाप्तभ। प्राथलना: त्रलघ्नेद्वयाम लयदाम वुयत्रप्रमाम रॊफोदयाम वकराम प्रदस्षणा:- जगत्रद्धताम। नागाननाम श्रुप्ततमस त्रलबुत्रऴताम गौयीवुताम गणनाथ ततऩद्ळमात प्रदस्षणा कयं । नभो नभस्ते। बिाप्ततनाळन ऩयाम गणेद्वयाम वलेद्वयाम ळुबदाम ल माप्तन काप्तन च ऩाऩाप्तन जन्भान्तय कृ ताप्तन च। वुयेद्वयाम। त्रलद्याधयाम त्रलकिाम च लाभनाम बत्रि प्रवन्न लयदाम ताप्तन वलालस्ण नश्मन्तु प्रदस्षणा ऩदे ऩदे । नभो नभस्ते। ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् प्रदस्षणाॊ कयोप्तभ।
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    22 नलम्फय 2012 नभस्काय: ऩुष्ऩ औय अषत वे कयं । अन्म कोद्षकं भं भॊत्र उच्चारयत कयते रॊफोदय नभस्तुभ्मॊ वतत भोदक त्रप्रम। शुए आह्वान कयं । प्तनत्रलघ्नॊ करु भे दे ल वलल कामेऴु वललदा। ल ु भातृकाओॊ का आह्वान एलॊ स्थाऩना भॊत्र :- ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् नभस्कायान ् वभऩलमाप्तभ। इव भॊत्रं भं ऴोिळभातृकाओॊ का आह्वान कयं .. त्रलळेऴ अध्मल: ॐ गणऩतमे नभ्। गणऩप्ततभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥ आचभनी भं जर, चालर, पर, पर, चॊदन दस्षणा आटद अध्मल भं ू ॐ गौमै नभ्। गौयीभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥१॥ रे ॐ ऩद्मामै नभ्। ॐ ऩद्मालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥२॥ यष यष गणाध्मष यष त्रेरोक्म यषक। ॐ ळच्मै नभ्। ळचीभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ॥३॥ बिनाभ बमॊकताल त्राता बलबलाणललात ्॥ ॐ भेधामै नभ्। भेधाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥४॥ परेन पप्तरतॊ तोमॊ परेन पप्तरतॊ धनभ ्। ॐ वात्रलत्र्मै नभ्। वात्रलत्रीभालाशमाप्तभ स्थाऩमाप्तभ ॥५॥ परास्मघ्मं प्रदानेन ऩूणाल वन्तु भनोयथा्॥ ॐ त्रलजमामै नभ्। त्रलजमाभालाशमाभ, स्थाऩमाप्तभ ॥६॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् त्रलळेऴाघ्मं वभऩलमाप्तभ। षभाऩन: ॐ जमामै नभ्। जमाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥७॥ आह्वानॊ न जानाप्तभ न जानाप्तभ त्रलवजलनभ ्। ॐ दे लवेनामै नभ्। दे लवेनाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥८॥ ऩूजाॊ चैल न जानाप्तभ षभस्ल गणनामक॥ ॐ स्लधामै नभ्। स्लधाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥९॥ ॐ प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळाम नभ् षभाऩनॊ वभऩलमाप्तभ॥ ॐ स्लाशामै नभ्। स्लाशाभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥१०॥ अनमा ऩूज्मा प्तवत्रद्धफुत्रद्ध वटशत श्री गणेळ् त्रप्रमताभ ्॥ ॐ भातृभ्मोनभ्। भातृ् आलाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥११॥ ॐ रोकभातृभ्मो नभ्। रोकभातृ् आलाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ॥१२॥ ऴोिळभातृका ऩूजन ॐ धृत्मै नभ्। धृप्ततभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥१३॥ ऴोिळभातृकाओॊ की स्थाऩना शे तु पळल ऩय वोरश कोद्शकं का ॐ ऩुष्ट्मै नभ्। ऩुत्रद्शभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ ॥१४॥ चौकोय भॊिर फनामे। ऩस्द्ळभ टदळा वे ऩूलल टदळा की ओय क्रभळ् भातृकाओॊ की ॐ तुष्ट्मै नभ्। तुत्रद्शभालाशमाप्तभ, स्थाऩमाप्तभ॥१५॥ स्थाऩना कयं । प्रत्मेक कोद्षक भं यि अषत, जौ मा गेशूॉ यखं। ॐ आत्भन् करदे लतामै नभ्। आत्भन् करदे ताभालाशमाप्तभ, ु ु ऩशरे कोद्षक भं गौयी का आह्वान कये । रेटकन गौयी क आह्वान े स्थाऩमाप्तभ ॥१६॥ वे ऩशरे बगलान गणेळ का आह्वान कयं । गणेळ का आह्वान इव भॊत्र द्राया ऴोिळभातृकाओॊ का आह्वान, स्थाऩना कयं - ॐ भनोजूप्ततजुऴताभाज्मस्मफृशस्ऩप्ततमलसप्तभभन्तनी ल ऩूलल त्लरयद्शॊमसठल वप्तभभॊदधातु॥ त्रलद्वेदेलाव इश आत्भन् करदे लता ु रोकभातय् दे लवेना भेधा भादमन्ताभोऽम्प्रप्ततद्ष॥ 16 12 8 4 अषत छोिते शुए भातृका-भॊिर की प्रप्ततद्षा कयं । उ तुत्रद्श् भातय् जमा ळची द “ॐ गणेळवटशतगौमालटदऴोिळभातृकाभ्मो नभ्” त्त 15 11 7 3 स्ष इव भॊत्र वे ऩॊचोऩचाय ऩूजन कयं । नैलेद्य भं गुि तथा घी ऩुत्रद्श् स्लाशा त्रलजमा ऩद्मा य ण का नेलद्य रगामे । ै 14 10 6 2 प्राथलना :- धृप्तत् स्लधा वात्रलत्री गणेळ-गौयी ॐ गणेळ वटशतगौमालटद ऴोिळभातृकाभ्मो नभ्। 13 9 5 1 अनमा ऩूजमा गणेळवटशत गौमालटदऴोिळभातय् प्रीमन्ताभ,् ऩस्द्ळभ न भभ ।
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    23 नलम्फय 2012 इव भॊत्र क वाथ अषत अत्रऩत कयने क फाद नभस्काय कयं े ल े प्राथलना :- औय टपय इव भॊत्र का उच्चायण कयं - गौयी ऩद्मा ळची भेधा वात्रलत्री त्रलजमा जमा । जऩाकवुभवॊकाळॊ काश्मऩेमॊ भशद्युप्ततभ ्। ु दे लवेना स्लधा स्लाशा भातयो रोकभातय् ॥ तभोऽरयॊ वललऩाऩघ्नॊ प्रणतोऽस्स्भ टदलाकयभ ् ॥१॥ धृप्तत् ऩुत्रद्शस्तथा तुत्रद्शयात्भन् करदे लता । ु दप्तध ळॊख तुऴायाबॊ षीयोदाणलल वॊबलभ ्। गणेळेनाप्तधका ह्येता लृद्धौ ऩूज्माद्ळ ऴोिळ् ॥ नभाप्तभ ळप्तळनॊ वोभॊ ळम्बो् भुकि बूऴणभ ्॥२॥ ु धयणी गबल वॊबतॊ त्रलद्युत्कास्न्तवभप्रबभ ्। ू भातृकाऩूजन क ऩद्ळमात नलग्रश ऩूजन कयं । े कभायॊ ळत्रि शस्तॊ च भॊगरॊ प्रणभाम्मशभ ्॥३॥ ु त्रप्रमॊगकप्तरकाश्माभॊ रूऩेणाप्रप्ततभॊ फुधभ ्। ु नलग्रश ऩूजन वौम्मॊ वौम्मगुणोऩेतॊ तॊ फुधॊ प्रणभाम्मशभ ्॥४॥ नलग्रश-ऩूजन क प्तरए नलग्रश फीवा मन्त्र अथला े दे लानाॊ च ऋऴीणाॊ च गुरुॊ काञ्चन वॊप्तनबभ ्। नलग्रश भॊिर की स्थाऩना रार लस्त्र ऩय अषत क ऊऩय कयं । े फुत्रद्धबूतॊ त्रत्ररोकळॊ तॊ नभाप्तभ फृशस्ऩप्ततभ ्॥५॥ े ऩशरे ग्रशं का आह्वान कयक उनकी स्थाऩना की जाती शै । फाएॉ े टशभ कन्द भृणाराबॊ दै त्मानाॊ ऩयभॊ गुरुभ ्। ु शाथ भं अषत रेकय इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुए दाएॉ शाथ वलल ळास्त्र प्रलिायॊ बागललॊ प्रणभाम्मशभ ्॥६॥ वे अषत अत्रऩलत कयते शुए ग्रशं का आह्वान कयं । नीराॊजन वभाबावॊ यत्रलऩुत्रॊ मभाग्रजभ ्। प्राथलना एलॊ स्थाऩना भॊत्र : छामाभातलण्िवॊबतॊ तॊ नभाप्तभ ळनैद्ळयभ ्॥७॥ ू ॐ ब्रह्मा भुयारयस्स्त्रऩुयान्तकायी बानु् ळळी बूप्तभवतो फुधश्च । अधलकामॊ भशालीमं चन्द्राटदत्म त्रलभदल नभ ्। गुरुश्च ळुक्र् ळप्तन याशुकतल् वलेग्रशा् ळाॊप्ततकया बलन्तु ॥ े प्तवॊटशका गबल वॊबतॊ तॊ याशुॊ प्रणभाम्मशभ ्॥८॥ ू वूम् ळौमलभथेन्दरुच्चऩदलीभ ् वन्भॊगरभ ् भॊगर्। ल ु ऩराळ ऩुष्ऩ वॊकाळॊ तायका ग्रश भस्तकभ ्। वद्बत्रद्धभ ् च फुधो गुरुद्ळ गुरुताभ ् ळुक्र वुखभ ् ळॊ ळप्तन् । ु यौद्रॊ यौद्रात्भक घोयॊ तॊ कतुॊ प्रणभाम्मशभ ्॥९॥ ॊ े याशुफालशुफरॊ कयोतु वततभ ् कतु् करस्मोन्नप्ततभ ् े ु इप्तत व्माव भुखोद् गीतॊ म् ऩठे त ् वुवभाटशत्। प्तनत्मभ ् प्रीप्ततकया बलन्तु भभ ते वलेऽनकरा ग्रशा् ॥ ू टदला ला मटद ला यात्रौ त्रलघ्न ळास्न्त् बत्रलष्मप्तत॥१०॥ आह्वान : नय नायी नृऩाणाॊ च बलेद् द्स्लप्न नाळनभ ्। ु इव भॊत्र वे नलग्रशं का आह्वान कयक उनका ऩूजन कयं : े ऐद्वमं अतुरॊ तेऴाभ ् आयोग्मॊ ऩुत्रद्श लधलनभ ्॥११॥ अस्स्भन नलग्रशभॊिरे आलाटशता् वूमालटदनलग्रशा दे ला् गृश नषत्रजा् ऩीिा स्तस्कयास्ग्न वभुद्भला्। वुप्रप्ततत्रद्षता लयदा बलन्तु । ता् वलाल् प्रळभॊ मास्न्त व्मावो ब्रू ते न वॊळम्॥१२॥ प्रप्ततद्षा :- ॥ इप्तत श्रीव्माव त्रलयप्तचतॊ नलग्रशस्तोत्रॊ वॊऩणभ ् ॥ ू ल शाथ भं अषत रेकय इव भॊत्र वे का उच्चायण कय उवे नलग्रश करळ ऩूजन(लरुण ऩूजन ) भॊिर भं प्रप्ततद्षा क प्तरए अत्रऩलत कयं । े ॐ भनो जूप्ततजुऴताभाज्मस्म फृशस्ऩप्ततमलसप्तभभॊ ततनोत्लरयद्शॊ ल करळ स्थात्रऩत कयने शे तु रकिी की चौकी ऩय अद्शदर मसॊ वप्तभभॊ दधातु। कभर फनाकय उव ऩय धान्म(गेशूॉ) त्रफछा दं । करळ (करळ त्रलद्वे दे लाव इश भादमन्ताभोऽम्प्रप्ततद्ष ॥ शे तु प्तभट्िी अथला ताॊफे का रोिा रं) ऩय योरी वे स्लास्स्तक ऩूजन:- का प्तचन्श फनाकय रोिे ऩय तीन धागे लारी भौरी (नािाछिी़, कराला, ऩॊचयॊ गी धागा ) रऩेिं ल धान्म ऩय करळ यखकय जर तत्ऩद्ळात इव भॊत्र क वाथ नलग्रशं का ऩॊचोऩचाय ऩूजन कयं - े वे बय दं एलॊ उवभं चॊदन, दफ, ऩाॉच ऩत्ते (फयगद, गूरय, ू “गॊधऩुष्ऩधूऩदीऩनैलद्याटदनी वभऩलमाभी” े कशकय गॊध, ऩुष्ऩ, ऩीऩर, आभ, ऩाकि अथला ऩान क ऩत्ते), कळा एलॊ गौळारा े ु धूऩ, दीऩ, नैलेद्य अत्रऩलत कयं । आटद की प्तभट्िी, वुऩायी, ऩॊचयत्न (मथाळत्रि) ल द्रव्म छोि दं । नारयमर ऩय रार कऩिा रऩेिकय, चालर वे बये एक ऩूणल ऩात्र
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    24 नलम्फय 2012 को करळ ऩय स्थात्रऩत कय उव ऩय नारयमर यख दं । शाथ त्रलद्वे दे लाव इश भादमन्ताभोम्प्रप्ततद्ष।। जोिकय करळ भं लरुण दे लता का आह्वान कयं :- ॐ अस्मै प्राणा: प्रप्ततद्षन्तु अस्मै प्राणा: षयन्तु च। स्थाऩना :- अस्मै दे लत्लभचालमै भाभशे प्तत च कद्ळन।। करळ भं जर बयकय प्तनम्न भॊत्र का उच्चायण कयं :- इत्माटद ळास्त्रोि भॊत्रं का उचायण कय प्राण-प्रप्ततद्षा कयं । ध्मान:- ॐ लरुणस्मोत्तम्बनभप्तव लरुणस्म स्कम्बवजलनी स्थो लरुणस्म। ऋतवदन्मप्तव लरुणस्म ऋतवदन्भप्तव लरुणस्म ऋतवदनभा वीद॥ तत्ऩद्ळमात शाथ भं ऩुष्म रेकय इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले रक्ष्भी दे ली का ध्मान कयं .. आह्वान :- मा वा ऩद्मावनस्था त्रलऩुरकटितिी ऩद्मऩत्रामताषी, ततऩद्ळमात वुऩायी औय ऩॊच यत्न आटद जर करळ भं िार दं । इवके गम्बीयालतलनाप्तबस्तनबयनप्तभता ळुभ्रलस्त्रोत्तयीमा । फाद करळ ऩय चालर का ऩात्र यखकय रार लस्त्र वे रऩेिा नारयमर मा रक्ष्भीटदल व्मरूऩैभस्णगणखप्तचतै् स्नात्रऩता शे भकम्बै् ल ु यखना दे । अफ लरुण दे लता का स्भयण कयते शुए आह्वान कयं - वा प्तनत्मॊ ऩद्मशस्ता भभ लवतु गृशे वललभाॊगल्ममुिा ॥ ॐ बूबल् स्ल् बो लरुण इशागच्छ, इशप्ततद्ष, स्थाऩमाप्तभ ऩूजमाप्तभ च। ुल ॐ टशयण्मलणां शरयणॉ वुलणलयजतस्त्रजाभ ् । ध्मान ल प्राथलना :- चन्द्राॊ टशयण्भमी रक्ष्भीॊ जातलेदो भ आ लश ॥ ततऩद्ळमात करळ ऩय वफ दे लताओॊ का ध्मान कयं एलॊ चॊदन, ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ध्मानाथे ऩुष्ऩास्ण वभऩलमाप्तभ । अषत, धूऩ, दीऩ, नैलेद्य अत्रऩलत कय ऩूजन कयं । इव भॊत्र का (ध्मान क प्तरए शाथ भं प्तरमे शुले ऩुष्ऩ दे ली को अत्रऩलत कयं ।) े उच्चायण कयं :- आह्वान:- करळस्म भुखे त्रलष्णु् कठे रुद्र् वभाप्तश्रत् । भूरे त्लस्म स्थतो ॊ तत्ऩद्ळमात शाथ भं ऩुष्म रेकय इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले ब्रह्मा भध्मे भातृगणा् स्भृता् ॥ कषौ तु वागया् वले, वद्ऱद्रीऩा ु रक्ष्भी दे ली का आह्वान कयं .. लवुधया् । अजुनी गोभती चैल चॊद्रबागा वयस्लती ॥ ॊ ल वललरोकस्म जननीॊ वललवौख्मप्रदाप्तमनीभ ् ।वललदेलभमीभीळाॊ कालेयी कृ ष्णलेणी च गॊगा चैल भशानदी । ताद्ऱी गोदालयी चैल दे लीभालाशमाम्मशभ ् ॥ ॐ ताॊ भ आ लश जातलेदो भाशे न्द्री नभलदा तथा ॥ नदाद्ळ त्रलत्रलधा जाता नद्य् वलालस्तथाऩया् । रक्ष्भीभनऩगाप्तभनीभ। मस्माॊ टशयण्मॊ त्रलन्दे मॊ गाभद्वॊ ऩुरुऴानशभ ्॥ ् ऩृप्तथव्माॊ मान तीथालप्तन करळस्ताप्तन ताप्तन लै् ॥ वले वभुद्रा् ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। भशारक्ष्भीभालाशमाप्तभ, आलाशनाथे वरयतस्तीथमालप्तन जरदा नदा् । आमान्तु भभ काभस्म ऩुष्ऩास्ण वभऩलमाप्तभ । दरयतषमकायका् ॥ ॐ अऩाॊ ऩतमे लरुणाम नभ् । ॐ ु (आह्वान क प्तरए शाथ भं प्तरमे शुले ऩुष्ऩ दे ली को अत्रऩलत कयं ।) े लरुणाद्यालाटशत दे लताभ्मो नभ्। वभऩलण :- आवन :- "कृ तेन अनेन ऩूजनेन करळे लरुणाद्यालाटशतदे लता् प्रीमन्ताॊ न तत्ऩद्ळमात शाथ भं कभर ऩुष्म मा अन्म रेकय इव भॊत्र का भभ।" उच्चायण कयं .. तद्ऱकाॊचनलणालबॊ भुिाभस्णत्रलयास्जतभ ् । रक्ष्भी ऩूजन अभरॊ कभरॊ टदव्मभावनॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ऩूजन वे ऩूलल नमी रक्ष्भी प्रप्ततभा तथा द्रव्मरक्ष्भी की ॐ अद्वऩूलां यथभध्माॊ शस्स्तनादप्रभोटदनीभ ् । प्राणप्रप्ततद्षा कयं :- प्तश्रमॊ दे लीभुऩह्वमे श्रीभाल दे ली जुऴताभ ् ॥ प्रप्ततद्षा शे तु फामं शाथ भं अषत रेकय इव भॊत्र का उचायण ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। आवनॊ वभऩलमाप्तभ । कयते शुए दाटशने शाथ वे उन अषतं को रक्ष्भीजी की प्रप्ततभा (आवन क प्तरए शाथ भं प्तरमे शुले ऩुष्ऩ दे ली को अत्रऩलत कयं ।) े ऩय चढा़ते जामे.. ऩाद्य :- ॐ भनो जूप्ततजुऴताभाज्मस्म फृशस्ऩप्ततमलसप्तभभॊ ल तत्ऩद्ळमात चन्दन ऩुष्ऩाटद मुि जर रेकय इव भॊत्र का तनोत्लरयद्शॊ मस वप्तभभॊ दधातु। उच्चायण कयं ..
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    25 नलम्फय 2012 गॊगाटदतीथलवम्बूतॊ गन्धऩुष्ऩाटदप्तबमुतभ ् । ल (गाम क कच्चे दध वे स्नान कयामे, ऩुन् ळुद्ध जर वे स्नान कयामे।) े ू ऩाद्यॊ ददाम्मशॊ दे त्रल गृशाणाळु नभोऽस्तुते ॥ ॐ काॊ वोस्स्भताॊ टशयण्मप्राकायाभाद्रां ज्लरन्तीॊ तृद्ऱाॊ तऩलमन्तीभ। ् दप्तधस्नान :- ऩद्मेस्स्थताॊ ऩद्मलणां ताप्तभशोऩह्वमे प्तश्रमभ ् ॥ ऩमवस्तु वभुद्भूतॊ भधुयाम्रॊ ळप्तळप्रबभ ् । दध्मानीतॊ भमा दे त्रल ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ऩादमो् ऩाद्यॊ वभऩलमाप्तभ । स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ दप्तधक्राव्णो अकारयऴॊ स्जष्णोयद्वस्म (ऩाद्य शे तु शाथ भं प्तरमे शुले चन्दन ऩुष्ऩटदमुि जर अत्रऩलत कयं ।) लास्जन् वुयप्तब नो भुखा कयत्प्र ण आमूत्रऴ तारयऴत ् । ॐ अघ्मल :- भशारक्ष्म्मै नभ्। दप्तधस्नानॊ वभऩलमाप्तभ। दप्तधस्नानान्ते तत्ऩद्ळमात अद्शगन्धप्तभप्तश्रत जर रेकय इव भॊत्र का उच्चायण ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ । कयं .. (दशी वे स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।) अद्शगन्धवभामुि स्लणलऩात्रप्रऩूरयतभ ् । ॊ अघ्मं गृशाण भद्दतॊ भशारस्क्ष्भ नभोऽस्तु ते ॥ घृत स्नान :- ॐ चन्द्राॊ प्रबावाॊ मळवा ज्लरन्तीॊ प्तश्रमॊ रोक दे लजुद्शाभुदायाभ ् । े नलनीतवभुत्ऩन्नॊ वललवतोऴकायकभ ् । घृतॊ तुभ्मॊ प्रदास्माप्तभ ॊ ताॊ ऩद्मनीभीॊ ळयणॊ प्रऩद्येऽअरक्ष्भीभे नश्मताॊ त्लाॊ लृणे ॥ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ घृतॊ घृतऩालन् त्रऩफत लवाॊ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। शस्तमोयघ्मं वभऩलमाप्तभ । लवाऩालन् त्रऩफतान्तरयषस्म शत्रलयप्तव स्लाशा । टदळ् प्रटदळ (अद्शगॊध प्तभप्तश्रत जर को दे ली क शाथं ऩय वभत्रऩलत कयं ।) े आटदळो त्रलटदळ उटद्दळो टदग्भ्म् स्लाशा ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। घृतस्नानॊ वभऩलमाप्तभ । घृतस्नानान्ते ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ। आचभन :- (घृत [घी] स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।) तत्ऩद्ळमात आचभन क प्तरए जर रेकय इव भॊत्र का उच्चायण े कयं .. भधु स्नान :- वललरोकस्म मा ळत्रिब्रह्मत्रलष्ण्लाटदप्तब् स्तुता । तरुऩुष्ऩवभुद्भूतॊ वुस्लादु भधुयॊ भधु । तेज् ऩुत्रद्शकयॊ टदव्मॊ ददाम्माचभनभ ् तस्मै भशारक्ष्म्मै भनोशयभ ् ॥ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ भधुलाता ऋतामते भधु षयस्न्त ॐ आटदत्मलणे तऩवोऽप्तध जातो लनस्ऩप्ततस्तल लृषोऽथत्रफल्ल् । प्तवन्धल्। भाध्लीनल् वन्त्लोऴधी् ॥ भधु निभुतोऴवो तस्म पराप्तन तऩवा नुदन्तु भामा अन्तया माद्ळ फाह्या अरक्ष्भी्॥ भधुभत्ऩाप्तथलॎ घूॊ यज्। भधु द्यौयस्तु न् त्रऩता॥ भधुभान्नं ल ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। आचभनीमॊ जरॊ वभऩलमाप्तभ । लनस्ऩप्ततभेधुभाॉऽअस्तु वूम्। भाध्लीगाललो बलॊतु न् ॥ ॐ ल (आचभन क प्तरए प्तरमे शुले जर को चढ़ामे।) े भशारक्ष्म्मै नभ्। भधुस्नानॊ वभऩलमाप्तभ। भधुस्नानन्ते स्नान:- ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ । तत्ऩद्ळमात स्नान क प्तरए जर रेकय इव भॊत्रका उच्चायण कयं .. े (ळशद स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।) भन्दाटकन्मा् वभानीतैशेशभाम्बोरुशलाप्तवतै्। स्नानॊ करुष्ल दे लेप्तळ ु वप्तररैद्ळ वुगस्न्धप्तब्॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। स्नानॊ वभऩलमाप्तभ। ळकया स्नान :- ल (स्नानीम जर अत्रऩलत कयं ।) इषुवायवभुद्भूता ळकया ऩुत्रद्शकारयका । ल स्नानान्ते आचभनीमॊ जरॊ वभऩलमाप्तभ । भराऩशारयका टदव्मा स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ स्नानक फाद 'ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्' फोरकय आचभन शे तु जर दं । े ॐ अऩा घूॊ यवभुद्रमवॎ वूमे वन्त घूॊ वभाटशतभ ् । दग्ध स्नान : ु अऩा घूॊ यवस्म मो यवस्तॊ लो गृह्राम्मुत्तभभुऩमाभगृशीतोऽवीन्द्राम काभधेनवभुत्ऩन्नॊ वलेऴाॊ जीलनॊ ऩयभ ् । ऩालनॊ मसशे तद्ळ ऩम् ु ु त्ला जुद्शॊ गृह्राम्मेऴ ते मोप्तनरयन्द्राम त्ला जुद्शतभभ ् ॥ स्नानाथलभत्रऩलतभ ् ॥ ॐ ऩम् ऩृप्तथव्माॊ ऩम औऴधीऴु ऩमो ॐ भशारक्ष्म्मै नभ् । ळकयास्नानॊ वभऩलमाप्तभ, ळकया ल ल टदव्मन्तरयषे ऩमो धा् । ऩमस्लती् प्रटदळ् वन्तु भह्यभ ् ॥ स्नानान्ते ऩुन् ळुद्धोदक स्नानॊ वभऩलमाप्तभ । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्, ऩम् स्नानॊ वभऩलमाप्तभ । (ळक्कय वे स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।) ऩम् स्नानान्ते ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ ।
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    26 नलम्फय 2012 ऩॊचाभृत स्नान :- लस्त्र :- दध, दशी, घी, ळकय एलॊ ळशद प्तभराकय ऩॊचाभृत फनाएॉ ल ू टदव्माम्फयॊ नूतनॊ टश षौभॊ त्लप्ततभनोशयभ ् । प्तनम्न भॊत्र वे स्नान कयाएॉ। दीमभानॊ भमा दे त्रल गृशाण जगदस्म्फक ॥ े ऩमो दप्तध घृतॊ चैल भधुळकयमास्न्लतभ ् । ल ॐ उऩैतु भाॊ दे लवख् कीप्ततद्ळ भस्णना वश । ल ऩॊचाभृतॊ भमानीतॊ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ प्रादबतोऽस्स्भ याद्सेऽस्स्भन ् कीप्ततभत्रद्धॊ ददातु भे ॥ ु ूल ल ृ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ऩॊचाभृतस्नानॊ वभऩलमाप्तभ, ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। लस्त्रॊ वभऩलमाप्तभ, ऩॊचाभृतस्नानान्ते ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ । आचभनीमॊ जरॊ च वभऩलमाप्तभ । (ऩॊचाभृत स्नान कयामं, टपय ळुद्ध जर वे स्नान कयामं।) (लस्त्र अत्रऩलत कयं , आचभनीम जर अत्रऩलत कयं ।) गन्धोदक स्नान :- उऩलस्त्र :- भरमाचरवम्बूतॊ चन्दनागरुवम्बलभ ् । कचुकीभुऩलस्त्रॊ च नानायत्नै् वभस्न्लतभ ् । ॊ चन्दनॊ दे लदे लेप्तळ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ गृशाण त्लॊ भमा दत्तॊ भॊगरे जगदीद्वरय ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। गन्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। उऩलस्त्रॊ वभऩलमाप्तभ, (गॊध (चॊदन) मुि जर वे स्नान कयाएॉ।) आचभनीमॊ जरॊ च वभऩलमाप्तभ । त्रलळेऴ:- (कचुकी,अॉप्तगमा आटद उऩलस्त्र चढ़ाएॉ,आचभन क प्तरए जर दं ।) ॊ े भधुऩक :- ल गन्धोदक स्नान के ऩद्ळमात श्रीवूि, ऩुरुऴ वूि अथला वशस्रनाभ आटद वे ऩुष्ऩाचलन मा जर अप्तबऴेक कयक टपय े काॊस्म काॊस्मेन त्रऩटशतो दप्तधभध्लाज्मवॊमत् । भधुऩको भमानीत् ु ळुद्धोदक स्नान कयामे मटद ऩुष्ऩाचलन मा जर अप्तबऴेक नशीॊ ऩूजाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। भधुऩकं कयना शो तो वीधे ळुद्धोदक स्नान कयामे।) वभऩलमाप्तभ, आचभनीमॊ जरॊ च वभऩलमाप्तभ । अप्तबऴेक शे तु ळुद्ध जर मा दग्ध वे श्रीवूि क ऩाठ क वभम े े (काॊस्म ऩत्र भं स्स्थत भधुऩक (अथालत वोने चाॊदी क प्तवक्क ल े े ु अखण्ि जरधाया वे स्नान अथालत अप्तबऴक कयामे। अखण्ि इत्माटद) अत्रऩलत कयं ) जरधाया शे तु धातु की प्रप्ततभा मा द्रव्मरक्ष्भी श्रेद्ष यशती शं । मसोऩलीत :- अखण्ि जरधाया अप्तबऴेक अरग ऩात्र भं कयना चाटशए। श्रीगणेळ, श्रीनायामण आटद दे लता को स्थात्रऩत टकमा शो तो * प्तभट्िी की प्रप्ततभा शो तो अखण्ि जरधाया वे प्रप्ततभा मसोऩत्रलत चढ़ाए, अन्मथा वीधे आबूऴण वे ऩूजन कयं षप्ततग्रस्त शो वकती शं । श्री वूि इव अॊक भं उऩरब्ध कयामा ॐ तस्भादअकला अजामॊत मे क चोबमादत् । गालोश मस्सये ू े गमा शं । तस्भात्तस्भाज्जाता अजालम् ॥ ॐ मसोऩलीतॊ ऩयभॊ ऩत्रलत्रॊ ळुद्धोदक स्नान : प्रजाऩतमेत्वशजॊ ऩुयस्तात ् ॥ आमुष्मभग्र्मॊ प्रप्ततभुञ्च ळुभ्रॊ भन्दाटकन्मास्तु मद्रारय वललऩाऩशयॊ ळुबभ ् । मसोऩलीतॊ फरभस्तुतज् । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्, ॐ श्रीगणेळाम े तटददॊ कस्ल्ऩतॊ तुभ्मॊ स्नानाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ नभ्, ॐ बगलते लावुदेलाम नभ् । मसोऩलीतॊ वभऩलमाप्तभ । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩलमाप्तभ । (श्रीगणेळ, श्रीनायामण आटद दे लता कोमसोऩत्रलत चढ़ामे, (ळुद्धोदक स्नान क प्तरए गॊगाजर अथला ळुद्ध जर वे दे ली को े आचभन क प्तरए जर दं ।) े स्नान कयामे। तदनॊतय प्रप्ततभा का अॊग-प्रोषण(ऩंछना) कयके आबूऴण :- उवे मथास्थान आवान ऩय स्थात्रऩत कयं ।) यत्नककणलैदमभिाशायाटदकाप्तन च । ॊ ू ल ु वुप्रवन्नेन भनवा दत्ताप्तन स्लीकरुष्ल बो् ॥ ु आचभन :- ॐ षुस्त्ऩऩावाभराॊ ज्मेद्षाभ-अरक्ष्भीॊ नाळमाम्मशभ ् । ् तत्ऩद्ळात 'ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्' कशकय आचभनी वे जर अबूप्ततभवभृत्रद्धॊ च वलां प्तनणुद भे गृशात ् ॥ ल अत्रऩलत कयं । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। नानात्रलधाप्तन किरकिकादीप्तन ुॊ आबूऴणाप्तन वभऩलमाप्तभ । (आबूऴण वभत्रऩलत कयं ।)
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    27 नलम्फय 2012 गन्ध :- ॐ भनव् काभभाकप्ततॊ लाच् वत्मभळीभटश । ऩळूनाॊ ू श्रीखण्िॊ चन्दनॊ टदव्मॊ गन्धाढ्मॊ वुभनोशयभ ् । रूऩभन्नस्म भप्तम श्री् श्रमताॊ मळ् ॥ त्रलरेऩनॊ वुयश्रेद्षे चन्दनॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। ऩुष्ऩॊ ऩुष्ऩभाराॊ च वभऩलमाप्तभ । ॐ गन्धद्रायाॊ दयाधऴांप्तनत्म ऩुद्शाॊ कयीत्रऴणीभ ् । ु (उि भॊत्र का उचायण कय दे ली रक्ष्भी जी को ऩुष्ऩं वे ल ऩुष्ऩ ईद्वयीॊ वललबतानाॊ ताप्तभशोऩ ह्वमे प्तश्रमभ ् ॥ ू भाराओॊ वे अरॊकृत कयं । रक्ष्भीजी का ऩूजन कभर क ऩुष्ऩ े ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। गन्धॊ वभऩलमाप्तभ । वे श्रेद्ष भाना जाता शं ।) (अनाप्तभका अॊगरी वे कवय प्तभप्तश्रत चन्दन अत्रऩलत कयं ।) ु े दलाल :- ू यि चन्दन :- त्रलष्ण्लाटदवललदेलानाॊ त्रप्रमाॊ वललवळोबनाभ ् । ु यिचन्दनवस्म्भश्रॊ ऩारयजातवभुद्भलभ ् । षीयवागय वम्बूते दलां स्लीकरू वललदा ॥ ू ु भमा दत्तॊ भशारस्क्ष्भ चन्दनॊ प्रप्ततगृह्यताभ ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। दलांकयान ् वभऩलमाप्तभ । ू ु ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। यिचन्दनॊ वभऩलमाप्तभ । (दलांकय (अथालत ् दफ क अॊकय) अत्रऩलत कयं ।) ू ु ू े ु (अनाप्तभका अॊगरी वे यि चॊदन चढ़ाएॉ।) ु अॊग ऩूजा :- प्तवन्दय :- ू तदनॊतय भशारक्ष्भीजी क त्रलप्तबन्न अॊगं का ककभ एलॊ अषत े ुॊ ु प्तवन्दयॊ यिलणं च प्तवन्दयप्ततरकत्रप्रमे । ू ू प्तभप्तश्रत ऩुष्ऩं वे दे ली का एक-एक नाभ रेते शुले अॊगऩूजन कयं बक्त्मा दत्तॊ भमा दे त्रल प्तवन्दयॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ू ॐ चऩरामै नभ्, ऩादौ ऩूजमाप्तभ। (ऩैयं ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं ) ॐ प्तवन्धोरयल प्राध्लने ळूघनावो लात प्रप्तभम् ऩतमस्न्त मह्वा् । ॐ चॊचरामै नभ्, जानुनी ऩूजमाप्तभ। (जानु प्रदे ळ ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं ) ल घृतस्म धाया अरुऴो न लाजी काद्षा प्तबन्दन्नूप्तभप्तब् त्रऩन्लभान्॥ ल ॐ कभरामै नभ्,कटिॊ ऩूजमाप्तभ। (कभय ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं ) ल ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। प्तवन्दयॊ वभऩलमाप्तभ । ू ॐ कात्मामन्मै नभ्,नाप्तबॊ ऩूजमाप्तभ। (नाप्तब ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं ) (दे ली रक्ष्भी को प्तवन्दय चढ़ाएॉ।) ू ॐ जगन्भात्रे नभ्, जठयॊ ऩूजमाप्तभ। (जठय ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं ) ल ककभ :- ुॊ ु ॐ त्रलद्वलल्रबामै नभ्, लष्स्थरभ ् ऩूजमाप्तभ । (लषस्थर ऩय ककभॊ काभदॊ टदव्मॊ ककभॊ काभरूत्रऩणभ ् । ुॊ ु ुॊ ु ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं ) अखण्िकाभवौबाग्मॊ ककभॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ुॊ ु ॐ कभरलाप्तवन्मै नभ्,शस्तौ ऩूजमाप्तभ। (शाथ ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं ) ल ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्, ककभॊ वभऩलमाप्तभ । ुॊ ु ॐ ऩद्माननामै नभ्, भुखॊ ऩूजमाप्तभ। (भुख ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं ) ल (ककभ अत्रऩलत कयं ।) ुॊ ु ॐ कभरऩत्राक्ष्मै नभ्, नेत्रत्रमॊ ऩूजमाप्तभ।(तीनं नेत्र ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं ) ल ऩुष्ऩवाय :- ॐ प्तश्रमै नभ्, प्तळय् ऩूजमाप्तभ । (प्तवय ऩय ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं ) तैराप्तन च वुगन्धीप्तन द्रव्मास्ण त्रलत्रलधाप्तन च । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्, वलांङ्गॊ ऩूजमाप्तभ । (दे ली क वभस्त अॊग े भमा दत्ताप्तन रेऩाथं गृशाण ऩयभेद्वरय ॥ क ऩूजन शे तु ऩुष्ऩ अत्रऩलत कयं ) े ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। वुगस्न्धततैरॊ ऩुष्ऩवायॊ च वभऩलमाप्तभ । अद्शप्तवत्रद्धऩूजन :- (ऩुष्ऩवाय भं वुगस्न्धत तेर ल इत्र अत्रऩलत कयं ।) इवक ऩद्ळात दस्षणालतल अथालत ् घिी की टदळा भं आठं े अषत :- टदळाओॊ भं लस्णलत आठं प्तवत्रद्धमं का ऩूजन ककभ एलॊ अषत ुॊ ु वे दे ली भशारक्ष्भी का ऩूजन कयं - अषताद्ळ वुयश्रेद्षे ककभािा् वुळोप्तबता् । ुॊ ु 1 ॐ अस्णम्ने नभ् (ऩूलल टदळा भं), 2 ॐ भटशम्ने नभ् भमा प्तनलेटदता बक्त्मा गृशाण ऩयभेद्वरय ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। अषतान ् वभऩलमाप्तभ । (आग्नेम कोण भं), 3 ॐ गरयम्णे नभ् (दस्षण टदळा भं), 4 (ककभ वे यॊ गे शुए अषत अत्रऩलत कयं ।) ुॊ ु ॐ रप्तघम्ने नभ् (नैऋत्म कोण भं), 5 ॐ प्राप्त्मै नभ् (ऩस्द्ळभ टदळा भं), 6 ॐ प्रकाम्मै नभ् (लामव्म कोण भं), 7 ऩुष्ऩ एलॊ ऩुष्ऩभारा :- ॐ ईप्तळतामै नभ् (उत्तय टदळा भं), 8 ॐ लप्तळतामै नभ्(ईळान भाल्मादीप्तन वुगन्धीप्तन भारत्मादीप्तन लै प्रबो । कोण भं) | भमानीताप्तन ऩुष्ऩास्ण ऩूजाथं प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥
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    28 नलम्फय 2012 अद्शरक्ष्भी ऩूजन :- ळीतरॊ प्तनभलरॊ तोमॊ कऩूयेण वुलाप्तवतभ ् । ल इवक ऩद्ळात दस्षणालतल अथालत ् घिी की टदळा भं आठं े आचम्मताॊ जरॊ ह्येतत ् प्रवीद ऩयभेद्वरय ॥ टदळाओॊ भं लस्णलत आठं अद्श रस्क्ष्भमं का ऩूजन कयं । ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। आचभनीमॊ जरॊ वभऩलमाप्तभ । (1) ॐ आद्यरक्ष्म्मै नभ् (2) ॐ त्रलद्यारक्ष्म्मै नभ् (3) (आचभन क प्तरए जर दं ।) े ॐ वौबाग्मरक्ष्म्मै नभ् (4) ॐ अभृतरक्ष्म्मै नभ् ऋतुपर :- (5) ॐ काभरक्ष्म्मै नभ् (6) ॐ वत्मरक्ष्म्मै नभ् परेन पप्तरतॊ वलं त्रैरोक्मॊ वचयाचयभ ् । (7) ॐ बोगरक्ष्म्मै नभ् (8) ॐ मोगरक्ष्म्मै नभ् तस्भात ् परप्रदानेन ऩूणाल् वन्तु भनोयथा् ॥ धूऩ :- ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। अखण्िऋतुपरॊ वभऩलमाप्तभ, आचभनीमॊ लनस्ऩप्ततयवोद्भूतो गन्धाढ्म् वुभनोशय् । जरॊ च वभऩलमाप्तभ । आघ्रेम् वललदेलानाॊ धूऩोऽमॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ (ऋतुपर अत्रऩलत कयं तथा आचभन क प्तरए जर दं ।) े ॐ कद्दल भेन प्रजा बूता भप्तम वॊबल कदल भ। प्तश्रमॊ लावम भं करे भातयॊ ऩद्मभाप्तरनीभ ् ॥ ु ताम्फूर एलॊ ऩूगीपर :- ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। धूऩभाघ्राऩमाप्तभ । ऩूगीपरॊ भशटद्दव्मॊ नागलल्रीदरैमतभ ् । ुल (दोनं शाथं वे रक्ष्भीजीको धूऩ आघ्रात्रऩत कयं ।) एराचूणालटदवॊमि ताम्फूरॊ प्रप्ततगृह्यताभ ् ॥ ु ॊ दीऩ :- ॐ आद्रां म् करयणीॊ मत्रद्शॊ वुलणां शे भभाप्तरनीभ ् । काऩालवलप्ततवमि घृतमुि भनोशयभ ् । ल ॊ ु ॊ ॊ वूमां टशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ जातलेदो भ आ लश ॥ तभोनाळकयॊ दीऩॊ गृशाण ऩयभेद्वरय ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। भुखलावाथे ताम्फूरॊ वभऩलमाप्तभ । ॐ आऩ् वृजन्तु स्स्नग्धाप्तन प्तचक्रीत लव भे गृशे। (रलॊग, इरामची ल ऩूगीपर(वुऩायी) यखकय ताम्फूर(ऩान) प्तन च दे लीॊ भातयॊ प्तश्रमॊ लावम भे करे ॥ ु अत्रऩलत कयं ।) ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। दीऩॊ दळलमाप्तभ । दस्षणा :- (रक्ष्भीजीको दीऩक टदखाकय शाथ धो रं।) टशयण्मगबलगबलस्थॊ शे भफीजॊ त्रलबालवो् । नैलेद्य (वार की धानी वटशत ऩॊचप्तभद्षान्न ल वूखे भेले) : अनन्तऩुण्मपरद्धभत् ळास्न्त प्रमच्छ भे ॥ नैलेद्यॊ गृह्यताॊदेत्रल बक्ष्मबोज्मवभस्न्लतभ ् । ॐ ताॊ भ आ लश जातलेदो रक्ष्भीभनऩगाप्तभनीभ ् । ऴड्यवैयस्न्लतॊ टदव्मॊ रस्क्ष्भ दे त्रल नभोऽस्तु ते ॥ मस्माॊ टशयण्मॊ प्रबूतॊ गालो दास्मोऽद्वान ् त्रलन्दे मॊ ऩुरुऴानशभ ् ॥ ॐ आद्रां ऩुष्करयणीॊ ऩुत्रद्शॊ त्रऩगराॊ ऩद्मभाप्तरनीभ ् ॥ ॊ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। दस्षणाॊ वभऩलमाप्तभ । चन्द्राॊ टशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ जातलेदो भ आ लश ॥ (अऩनी श्रद्धा अनुवाय रक्ष्भीजी को दस्षणा चढ़ामे।) ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। नैलेद्यॊ प्तनलेदमाप्तभ, नीयाजन (आयती) :- भध्मे ऩानीमभ,् उत्तयाऩोऽळनाथलभ ् शस्तप्रषारनाथं चषुदं वललरोकानाॊ प्ततप्तभयस्म प्तनलायणभ ् । भुखप्रषारनाथं च जरॊ वभऩलमाप्तभ । आप्ततक्म कस्ल्ऩतॊ बक्त्मा गृशाण ऩयभेद्वरय ॥ ल ( रक्ष्भीजी को नैलद्य प्तनलेटदत कय ऩानीम जर एलॊ े ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। नीयाजनॊ वभऩलमाप्तभ । शस्तप्रषारन क प्तरए जर अत्रऩलत कयं ।) े (आयती कयं तथा जर छोिं ल शाथ धोरे।) कयोद्रतलन :- प्रदस्षणा :- ॐ भशारक्ष्म्मै नभ् मश कशकय कयोद्रतलन क प्तरए शाथं भं े माप्तन काप्तन च ऩाऩाप्तन जन्भान्तयकृ ताप्तन च । चन्दन उऩरेत्रऩत कयं । ताप्तन वलालस्ण नश्मन्तु प्रदस्षणाॊऩदे ऩदे ॥ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। प्रदस्षणाॊ वभऩलमाप्तभ । आचभन :- (प्रदस्षणा कयं ।)
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    29 नलम्फय 2012 प्राथलना :- ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। प्राथलनाऩूलक नभस्कायान ् वभऩलमाप्तभ । ल ॊ शाथ जोिकय प्राथना कयं : (दे ली को प्राथलना कयते शुए नभस्काय कयं ।) वुयवुयंद्राटदटकयीिभौत्रिकमुिभ वदा मत्तल ऩादऩॊकजभ ् । ै ल ॊ वभऩलण :- ऩयालयॊ ऩातु लयॊ वुभगरभ ् नभाप्तभ बक्त्मास्खरकाभप्तवद्धमे ॥ ॊ ऩूजन क अॊतभं "कृ तेनानेन ऩूजनेन बगलती भशारक्ष्भी दे ली े बलाप्तन त्लॊ भशारक्ष्भी् वललकाभप्रदाप्तमनी । प्रीमताभ ् न भभ।" इव भॊत्र का उच्चायण कयते शुले वभस्त वुऩस्जता प्रवन्ना स्मान्भशारस्क्ष्भ ! नभोऽस्तु ते ॥ ू ऩूजन कभल दे ली भशारक्ष्भी को वभत्रऩलत कयते शुले शाथ भं जर नभस्ते वललदेलानाॊ लयदावी शरयत्रप्रमे । रेकय छोि दं । मा गप्ततस्त्लत्प्रऩन्नानॊ वा भे बूमात ् त्लदचलनात ् ॥ वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रका इव भुटद्रका भं भूॊगे को ळुब भुशूतल भं त्रत्रधातु (वुलणल+यजत+ताॊफं) भं जिला कय उवे ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो द्राया वललप्तवत्रद्धदामक फनाने शे तु प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि टकमा जाता शं । इव भुटद्रका को टकवी बी लगल क व्मत्रि शाथ की टकवी बी उॊ गरी भं धायण कय वकते शं । मशॊ भुटद्रका कबी टकवी बी स्स्थती भं अऩत्रलत्र नशीॊ े शोती। इव प्तरए कबी भुटद्रका को उतायने की आलश्मिा नशीॊ शं । इवे धायण कयने वे व्मत्रि की वभस्माओॊ का वभाधान शोने रगता शं । धायणकताल को जीलन भं वपरता प्राप्तद्ऱ एलॊ उन्नप्तत क नमे भागल प्रवस्त शोते यशते शं औय जीलन भं े वबी प्रकाय की प्तवत्रद्धमाॊ बी ळीध्र प्राद्ऱ शोती शं । भूल्म भात्र- 6400/- (नोि: इव भुटद्रका को धायण कयने वे भॊगर ग्रश का कोई फुया प्रबाल वाधक ऩय नशीॊ शोता शं ।) वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रका क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी क प्तरमे शे तु वम्ऩक कयं । े े ल ऩप्तत-ऩत्नी भं करश प्तनलायण शे तु मटद ऩरयलायं भं वुख-वुत्रलधा क वभस्त वाधान शोते शुए बी छोिी-छोिी फातो भं ऩप्तत-ऩत्नी क त्रफच भे करश शोता यशता शं , े े तो घय क स्जतने वदस्म शो उन वफक नाभ वे गुरुत्ल कामालरत द्राया ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत े े ऩूणल चैतन्म मुि लळीकयण कलच एलॊ गृश करश नाळक टिब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं त्रफना टकवी ऩूजा, त्रलप्तध- त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ भॊत्र प्तवद्ध ऩप्तत लळीकयण मा ऩत्नी लळीकयण एलॊ गृश करश नाळक टिब्फी फनलाना चाशते शं , तो वॊऩक आऩ कय वकते शं । ल 100 वे अप्तधक जैन मॊत्र शभाये मशाॊ जैन धभल क वबी प्रभुख, दरब एलॊ ळीघ्र प्रबालळारी मॊत्र ताम्र ऩत्र,प्तवरलय (चाॊदी) ओय गोल्ि (वोने) भे उऩरब्ध शं । े ु ल शभाये मशाॊ वबी प्रकाय क मॊत्र कोऩय ताम्र ऩत्र, प्तवरलय (चाॊदी) ओय गोल्ि (वोने) भे फनलाए जाते शै । इवक अराला आऩकी े े आलश्मकता अनुळाय आऩक द्राया प्राद्ऱ (प्तचत्र, मॊत्र, टिज़ाईन) क अनुरुऩ मॊत्र बी फनलाए जाते शै . गुरुत्ल कामालरम द्राया े े उऩरब्ध कयामे गमे वबी मॊत्र अखॊटित एलॊ 22 गेज ळुद्ध कोऩय(ताम्र ऩत्र)- 99.99 िच ळुद्ध प्तवरलय (चाॊदी) एलॊ 22 कये ि े गोल्ि (वोने) भे फनलाए जाते शै । मॊत्र क त्रलऴम भे अप्तधक जानकायी क प्तरमे शे तु वम्ऩक कयं । े े ल GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785, Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    30 नलम्फय 2012 शोगा रक्ष्भी का प्तचस्थामी प्तनलाव तीन दरब वाभग्रीमं वे ु ल  प्तचॊतन जोळी शत्था जोिी्  शत्थाजोिी का त्रलळेऴ प्रमोग ताॊत्रत्रको द्धाया तॊत्र टक्रमाओॊ भं टकमा जाता शै , शत्थाजोिी ळीध्र प्रबाली एलॊ शत्था जोिी प्रकृ प्तत की अनभोर दे नं भं वे एक चभत्कायी लस्तु शोने की कायण शी त्रलप्तबन्न तॊत्र ळास्त्र शं , शत्था जोिी अप्तत दरलब लस्तु भानी जाप्तत शं क्मोकी ु भं शत्थाजोिी क अनेक उऩमोग फतामे गमे शै । े मश आवानी वे प्राद्ऱ नशीॊ शोती, शत्था जोिी एक त्रलरुऩा  त्रलद्रानं का कथन शं की स्जव भनुष्म क ऩाव अवरी े नाभक ऩौधे की टकवी-टकवी जि भं ऩामी जाता शं , वबी प्तवद्ध शत्थाजोिी शोती शै , उवका बाग्म टदन दोगुनी- जिं भं नशीॊ ऩामी जाती। शत्थाजोिी का आकाय शभाये यात चौगुनी तेजी वे चभकता दे खने प्तभरता शं ! दोनं शाथं क वभान शोता शं , शत्थाजोिी भं दोनो शाथ े  एवी भान्मता शं की स्जव व्मत्रि क ऩाव शत्थाजोिी े नीॊचे वे आऩव भं जुिे़ शुले प्रप्ततत शं कई-कई शत्थाजोिी शोती शं उवक स्खराप टकमे गमे वबी झुठे आयोऩ, े का उऩयी बाग बी आऩवे भं जुिा शोता शै , औय उवके ऴिमॊत्र, िोने-िोिक, ताॊत्रत्रक कभल इत्माटद प्तनष्पर शो े उऩयी बाग भं ऩाॊच-ऩाॊच अॊगुरीमं क वभान आकृ प्ततमा े जाते शं , फिे ़ वे फिे ़ ळत्रु का प्रबाल उवक वभष स्षण े टदखाई दे ती शं इव कायण इवे शत्थाजोिी क नाभ वे े शो जाता शं औय फिे ़ वे फिे ़ ताॊत्रत्रकं की तॊत्र टकमा मे जाना जाता शं । प्तनष्पर शो जाते शं । कछ जानकायं का तो मशाॊ तक ु स्जव प्रकाय शत्था जोिी दे खने भं अन्म दरब ु ल कशना शं मटद कछ त्रलळेऴ भॊत्रं वे प्तवद्ध टक गई ु प्तचज-लस्तुओॊ की तुरनाभं अद्भत एलॊ फेजोि प्रप्ततत शोती ु शत्थाजोिी को मटद व्मत्रि अऩने ऩाव यखता शं तो शं ठीक उवी प्रकाय एक प्राभास्णक एलॊ अप्तबभॊत्रत्रत मा उवका फिे ़ वे फिा ळत्रु बी उवक आगे नतभस्त्क शो े प्राण-प्रप्ततत्रद्षत शत्था जोिी क आद्ळमलजनक प्रबालं की े जाता शं । तुरना टकवी औय प्तचज-लस्तुओॊ वे नशीॊ शो वकती शं ।  मटद टकवी व्मत्रि क उऩय उवक त्रलयोप्तध मा ळत्रुओॊ ने े े इवीप्तरमे तो कई वदीॊमं वे भॊत्र, तॊत्र आटद त्रलद्या भं झुठे आयोऩ रगाकय कोिल -कचशयी, भुकदभं इत्माटद भं शत्थाजोिी अऩना एक भशत्लऩूणल स्थान यखती शै । पवा टदमा शो तो शत्थाजोिी क प्रबाल वे उवे भुकदभे ॊ े शत्थाजोिी त्रलप्तबन्न ताॊत्रत्रक प्रमोगं भं काभ आती भं त्रलजम की प्राप्तद्ऱ शोती शं औय उवक ळत्रु लळीबूत े शं , जानकाय त्रलद्रानं का कथन शं की एक प्तवद्ध शत्थाजोिी शो जाते शं । को कलर अऩने वाथ यखने भात्र वे शी छोिे -फिे ़ अनेक े  शत्थाजोिी को ऩाव यखने वे याजकीम अथालत वयकायी वॊकिं का स्लत् शी प्तनलायण शो जाता शं । शत्था जोिी कामो वे जुिे़ छोिे -फिे ़ वबी अप्तधकायी व्मिी के को अऩने ऩाव यखने वे आकस्स्भक दघिना आटद का ु ल लळीबूत शो जाते शं । मटद कोई वयकायी अप्तधकायी बम नशीॊ वताता। एवा भाना जाता शं की स्जव भनुष्म त्रफना टकवी कायण आऩको अनामाव शी अऩने ऩद ल क ऩाव भं शत्था जोिी शोती शं उवक उऩय कोई िोने - े े वत्ता का पामदा उठाकय आऩको ऩये ळान कय यशा शो िोिक, ताॊत्रत्रक प्रमोग आटद का प्रबाल नशीॊ शोता शं ! े मा कद्श दे यशे शो, तो इव भं जयाबीॊ वॊदेश नशीॊ शं टक  जानकायं क भतानुवाय शत्थाजोिी का प्राप्तद्ऱ स्थान े शत्थाजोिी आऩक प्तरमे याभफाण औऴप्तध क रुऩ भं े े भुख्मत् बायत, ऩाटकस्तान, ईयान, इयाक, फ्राॊव, जभलनी, वात्रफत शो वकती शं ! क्मोटक शत्थाजोिी एक अनुबूत एप्तळमाई भशाद्रीऩ क प्तनकितभ षेत्रं भं ऩाई जाती शै । े एलॊ टदव्म लस्तु शं ।
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    31 नलम्फय 2012  प्तवद्ध की शुई शाथाजोिी को चाॊदी मा स्िीर की टिब्फी प्तवॊमाय प्तवॊगी् भं रंग, इरामची ल प्तवन्दय क वाथ शी टिब्फी को ू े प्तवॊमाय प्तवॊगी को प्तवमाय प्तवॊघी, गीदिप्तवॊगी बी फॊध कय क यखना चाटशए। दै प्तनक ऩूजन क वभम उव े े कशते शं । जम्फुक अथालत लन्म-ऩळु प्तवमाय क प्तवय ऩय े टिब्फी को खोरकय, धूऩ-दीऩ टदखाकय उवे फॊधकय दे ना एक प्रकाय की गाॊठ शोती शं उवे शी प्तवॊमाय प्तवॊगी कशा चाटशए। जाता शै । शाराॊकी मश गाॊठ शय प्तवमाय क प्तवय ऩय नशीॊ े  शाथाजोिी घय भं शोने वे ऩप्तत-ऩत्नी भं आऩवी प्रेभ शोती टकवी-टकवी प्तवमाय क प्तवय ऩय शी ऩाई जाती शं । े फढ़ता शं ल दाॊऩत्म वुख भं लृत्रद्ध शोती शं । जीलन के मश फादाभी यॊ ग की भुरामभ फारं वे ढॊ की शोती शं , इवके प्रत्मेक षेत्र भं वपरता शे तु शाथाजोिी अचूक उऩाम फीच भं एक छोिा वा वीॊग उऩय की औय उठा शुला शोता प्तवद्ध शो वकती शै । स्जव घय भं ऩूणल त्रलप्तध-त्रलधान वे शं । कछ जानकायं का कथन शं की लन्म-जाप्तत क रोग ु े अप्तबभॊत्रत्रत मा प्तवद्ध की गई शाथाजोिी का ऩूजन शोता इव तयश क प्तवमाय को खोजते शं उवे ढू ॊ ढकय उवे भायकय े शै , उव घय क वदस्म वबी प्रकाय की ऩये ळानीमं वे े प्तवमाय प्तवॊगी प्राद्ऱ कयते शं , रेटकन कछ लन्म-जाप्तत क ु े वुयस्षत यशते शं , ऩरयलाय की आप्तथलक स्स्थती टदन रोग कलर भये शुले प्तवमाय क प्तवय वे शी प्तवॊगी प्तनकारते े े प्रप्ततटदन उन्नत शोती जाती शं औय व्मत्रि श्री शै । रेटकन कछ रोगं का भानना शं की जीत्रलत प्तवमाय क ु े वम्ऩन्न फना यशता शै । प्तवय वे प्तवमाय प्तवॊगी प्तनकार रेते शं औय कछ अॊतयार ु  प्तवद्ध शाथाजोिी को कोई बी व्मत्रि चाशं लश स्त्री शो क फाद उवक प्तवय ऩय ऩय ऩुन् प्तवमाय प्तवॊगी प्तनकर े े मा ऩुरूऴ चाशे टकवी धभल मा लणल का शो लश वयरता आती शं , इन दोनं भत भं त्रलयोधाबाव दे खने को प्तभरता वे ऩूजन कय वकते शं । शाथाजोिी का ऩूजन कयने शं । लारे व्मत्रिमं का व्मत्रित्ल एलॊ प्रबाल अन्म व्मत्रि रेटकन प्तवॊमाय प्तवॊगी त्रलळेऴ रुऩ वे ऩळु तॊत्र ळास्त्र की अऩेषा प्तनस्द्ळत रुऩ वे अत्माप्तधक प्रबालळारी भं फशुउऩमोगी लस्तु भानी जाती शं । क्मोकी प्तवमायप्तवॊगी शोता शं । शाथाजोिी क त्रलळेऴ प्रमोगं वे ऩूजन कताल े की गाठं को तॊत्र ळास्त्र भं अदबुत ळत्रिळारी एलॊ ु व्मत्रि भं त्रलरषण वम्भोशन ळत्रि जाग्रत शो वकती प्रबालळारी भाना जाता शै । शं !  एक अप्तबभॊत्रत्रत मा प्तवद्ध टक शुई प्तवमाय प्तवॊगी वे  प्तवद्ध शाथाजोिी व्मत्रि को बूत-प्रेत, भायण-उच्चािन, वम्भोशन, लळीकयण, धन-वॊऩत्रत्त की प्राप्तद्ऱ एलॊ लृत्रद्ध काभण-िू भण इत्माटद उऩद्रलं वे यषा शोती शं । व्मत्रि कयने लारी त्रलरषण ळत्रि शोती शं । की धन-वॊऩत्रत्त भं प्तनस्द्ळत रुऩ वे लृत्रद्ध शोने रगती शं ।  मटद मश टकवी प्रकाय वे मश दरब लस्तु प्राद्ऱ शो ु ल शत्थाजोिी का त्रलप्तधलत ऩूजन कयने वे लाणी क दोऴ े जामे तो उवे टकवी जानकाय मा त्रलद्रान वे प्तवद्ध औय योग नद्श शोते शं । शत्थाजोिी को प्ततजोयी भं यखने कयलारे। प्तवमाय प्तवॊगी प्तवद्र शोने ऩय इवे चाॊदी मा वे व्मलवाम स्लत् फढने रगता शं । स्िीर की टिब्फी भं प्तवॊदय बयकय यखदे । प्तवमाय प्तवॊगी ू  कछ त्रलद्रानं का तो मशाॊ तक कथन शं की शाथाजोिी ु क त्रलऴम भं त्रलद्रानो का भत शं की स्जव भनुष्म क े े क प्तनमप्तभत ऩूजन एलॊ दळलन वे व्मत्रि का वोमा े ऩाय भं प्तवमाय प्तवॊगी शोती शै उवे बत्रलष्म भं घटित बाग्म जाग जाता शं , औय उवक त्रफगिे ़ कामल जल्द शी े शोने लारी दघिना अथला ळुब घिनाओॊ की ऩूलल ु ल फनने रगते शै । इवकी ळत्रि को फढ़ाने क प्तरए े वूचना स्लप्न भं प्राद्ऱ शोती शै । रेटकन अनुबल भं शाथाजोिी क वाथ भं प्तवमायप्तवॊगी औय त्रफल्रीनार को े आमा शं की मश बत्रलष्म वूचन स्लप्न वबी को नशीॊ एक वाथ यखना चाटशए। आते शं टकवी-टकवी व्मत्रि को शी आते शं ।
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    32 नलम्फय 2012  स्जव घय भं प्तवमाय प्तवॊगी का ऩूजन शोता शं उव घय प्रकाय वे लश दोऴऩूणल शो तो अवरी शोने क फालजुद े भं भं वदं ल दे ली भशारक्ष्भी का लाव यशता शं , वभाज उवक फार नशीॊ फढ़ते। अत् प्तवमायप्तवॊगी का चमन े भं उवक भान-वम्भान भं लृत्रद्ध शोती शं उवका नाभ े ऩूणल वालधानी क वाथ कयं । े औय मळ चयं टदळाओॊ भं गूॊजता शं । शस्तजोिी के  प्तवमायप्तवॊगी क फार कबी कािने नशीॊ चाटशमे नाशीॊ े वभान शी प्तवमाय प्तवॊगी वे बी व्मत्रि क छोिे -फिे ़ े उववे टकवी प्रकाय की छे ि-छाि कयनी चाटशए। वकर त्रलघ्न एलॊ वॊकिं का नाळ शोता शं , एलॊ व्मत्रि प्तवमायप्तवॊगी क फार कािने, जरने षप्ततग्रस्त शोने वे े क उऩय शोने लारे बूत-प्रेत, जाद-िोना आदी प्रबालं वे े ू उवका ळुब प्रबाल वभाद्ऱ शोने रगता शं । यषा शोती शं औय लाद-त्रललाद इत्माटद भं त्रलजमश्री की त्रफल्री की नार प्राप्तद्ऱ शोती शं । त्रफल्री जफ फच्चे को जन्भ दे ती शं , तो फच्चं के  कछ त्रलद्रानो का कथन शं की प्तवमाय प्तवॊगी क ऩूजन ु े वाथ-वाथ एक स्झल्री जेवा तयर ऩदाथल फाशय प्तनकरता एलॊ दळलन भात्र वे व्मत्रि को जीलन भं रक्ष्भी की शं , स्जवे लश फच्चे दे ने क फाद तुयॊत खा जाती शं । कछ े ु अऩाय कृ ऩा शो शोती। व्मत्रि क घय भं धनलऴाल शोने े जानकाय रोग मा लन्म-जाती क रोग इव त्रफल्री की े वभान व्मलवाम-नौकयी इत्माटद वे आप्तथलक राब की नार को त्रफल्री क खने वे ऩशरे शी लशाॊ वे शिा रेते शं । े प्राप्तद्ऱ शोती शं । प्तवमाय प्तवॊगी को व्मलामीक स्थान ऩय टपव उवे धूऩ भं वुखा कय उवे त्रलळेऴ प्रमोजनो वे घी यखने भात्र वे शी फॊध व्मलवाम क ऩुन् ळुरु शोने क े े एलॊ प्तवॊदय द्राया रेऩन टकमा जाता शं । त्रफल्री की इव ू मोग फनने रगते शं , भौजुदा व्मलवामे भं टदन स्झल्री को नार कशा जाता शं । जो त्रलळेऴ ताॊत्रत्रक प्रमोगं प्रप्ततटदन उन्नत्रत्त शोती यशती शं । अथालत रक्ष्भी फढ़ने भं फशुउऩमोगी प्तवद्ध शोती शं । क वाथ-वाथ स्थाई रक्ष्भी का प्तनलाव शोता शं । े  प्तवमाय प्तवॊगी वे आकस्स्भक दघिना औय अवाध्म ु ल भॊत्र प्तवद्ध दरब वाभग्री ु ल योग वे बी वुयषा शोती शै । ऩरयलाय भं योग-ळोक का नाळ शोता शं , वबी वदस्मं को वतामु की प्राप्तद्ऱ शोती शत्था जोिी- Rs- 370, 550, 730, 1250, 1450 शं औय ऩायीलारयक जीलन वुखभम फना यशता शै । प्तवमाय प्तवॊगी- Rs- 370, 550, 730, 1250, 1450 क्मोटक प्तवमाय प्तवॊगी ळयीय क वुयषा कलच का काभ े त्रफल्री नार- Rs- 370, 550, 730, 1250, 1450 कयती शै । व्मत्रि को जाने-अॊजाने वकर बमं वे ळीघ्र कारी शल्दी:- 370, 550, 750, 1250, 1450, भुत्रि प्तभरती शै । प्तवमाय प्तवॊगी क त्रलळेऴ प्रमोगं वे े दस्षणालतॉ ळॊख- Rs- 550, 750, 1250, 1900 कभागल ऩय गमे ऩयस्त्री-ऩयऩुरुऴ क जार भं पवे टकवी ु े ॊ बी उम्र क स्त्री-ऩुरुऴ को वुधाया जा वकता शं । े भोप्तत ळॊख- Rs- 550, 750, 1250, 1900  प्तवमाय प्तवॊगी को प्तवॊदय भं यखना चाटशए, प्तवमायप्तवॊगी ू भामा जार- Rs- 251, 551, 751 को प्तवॊदय भं यखने वे उवक फार धीये -धीये फढ़ते शं । ू े इन्द्र जार- Rs- 251, 551, 751 एवी रोक भान्मता शं टक जैवे प्तवमायप्तवॊगी क फार े धन लृत्रद्ध शकीक वेि Rs-251(कारी शल्दी क वाथ Rs-550) े फढ़ते शं लैवे ऩरयलाय भं वुख-वभृत्रद्ध फढ़ने रगती शं । घोिे की नार- Rs.351, 551, 751 शय प्तवमायप्तवॊगी क फार फढ़ते शं , मशी उवकी ऩशचान े GURUTVA KARYALAY शं , नकरी मा फनालिी प्तवमायप्तवॊगी क फार नशीॊ फढ़ते। े Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, मटद प्तवमायप्तवॊगी कशीॊ वी िू िी-पिी शो मा टकवी ू Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
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    33 नलम्फय 2012 त्रलळेऴ उऩाम: ऩूजा-ऩाठ मा टकवी त्रलळेऴ त्रलप्तध-त्रलधान की आलश्मिा नशीॊ शोती शं । टदन भं एक फाय शी कलर े  भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत शत्था जोिी, प्तवमाय प्तवॊगी औय धूऩ-अगयफत्रत्त कयने की आलश्मिा शं । त्रफल्री की नार मटद टकवी भनुष्म को वौबाग्म वे प्राद्ऱ शो जामे तो उवे टकवी चाॊदी मा स्िीर की टिब्फी *** त्रलळेऴ भॊतव्म: त्रलद्रानं क अनुबल भं आमा शं की े भे प्तवॊदय बयकय यख दं । ू मटद शाथाजोिी को आऩ अऩने ऩयीप्तचत टकवी त्रलद्रान,  टपव उवे अऩने घय-दकान-व्मलवामीक स्थान इत्माटद ु ज्मोप्ततऴी मा टकवी अऩने प्तभत्र-रयश्तेदायकं टदखाना शो तो क ऩूजा स्थान, प्ततजोयी मा कव फोक्वॎ इत्माटद भं यख े ै शाथाजोिी को अऩने ऩूजा स्थान भं यखने वे ऩूलल मा दं । प्रप्ततटदन उवे धूऩ-अगयफत्रत्त टदखा कय टिब्फी को उवका ऩूजन कयने वे ऩशरे टदखारं , ऩूजन क ऩद्ळमात े फॊध कय दं । उि त्रलप्तध वे ऩूजन कयने ऩय व्मत्रि को नशीॊ टदखानी चाटशए उवे टकवी गोऩनीम स्थान ऩय प्तनयॊ तय वुख-वौबाग्म की प्राप्तद्ऱ शोती एलॊ भाॉ यखदे ना चाटशए, जशाॊ वे लश टकवी ऩरयप्तचत-अऩरयप्तचत मा भशारक्ष्भी का प्तनलाव शोता शं । मश एक अनुबूत छोिे फच्चे इत्माटद क शाथ भं न रगे। अप्तबभॊत्रत्रत मा े प्रमोग शं , इव प्रमोग वे शभं स्लमॊ एलॊ शभाये वाथ जुिे अऩने ऩूजा स्थान भं यखी शुई शाथाजोिी को जो आऩको अनेको फॊधु-फशनं को इव उऩाम वे त्रलळेऴ राब की पा़मदा कय यशी शो एवी शाथाजोिी को घयक अराला े प्राप्तद्ऱ शोती आमी शं । क्मोटक इव उऩाम भं दरब ु ल अन्म टकवी फशाय क व्मत्रि को नशीॊ टदखानी चाटशए, े वाभग्रीमं को एक फाय अप्तबभॊत्रत्रत मा प्राण-प्रप्ततत्रद्षत अन्मथा उवक ळुब प्रबाल भं कभीॊ आने रगती शं । े शो जाने ऩय व्मत्रि को टकवी प्रकाय क भॊत्र जाऩ, े  क्मा आऩक फच्चे कवॊगती क प्तळकाय शं ? े ु े  क्मा आऩक फच्चे आऩका कशना नशीॊ भान यशे शं ? े  क्मा आऩक फच्चे घय भं अळाॊप्तत ऩैदा कय यशे शं ? े ु ु घय ऩरयलाय भं ळाॊप्तत एलॊ फच्चे को कवॊगती वे छिाने शे तु फच्चे क नाभ वे गुरुत्ल कामालरत े द्राया ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि लळीकयण कलच एलॊ एव.एन.टिब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा, त्रलप्तध-त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ तो आऩ भॊत्र प्तवद्ध लळीकयण कलच एलॊ एव.एन.टिब्फी फनलाना चाशते शं , तो वॊऩक इव कय वकते शं । ल GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com
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    34 नलम्फय 2012 ऩाॊच मॊत्र जो अफ दरयद्रता औय धन की कभी को कयदं गे अरत्रलदा  श्रेमा.ऐव.जोळी दे लता कफेय जी का वफवे प्रबालळारी मॊत्र भाना जाता शं ु श्री मॊत्र इव मॊत्र क ऩूजन वे अषम धन कोऴ की प्राप्तद्ऱ शोती शं े "श्री मॊत्र" वफवे भशत्लऩूणल एलॊ ळत्रिळारी मॊत्र औय भनुष्म क प्तरए नलीन आम क स्रोत फनते शं । े े शै । श्री मॊत्र की भटशभा वे वामद शी कोई व्मत्रि असात प्रप्ततटदन रक्ष्भीकफेय धन आकऴलण मॊत्र का ऩूजन एलॊ ु शोगा क्मोटक "श्री मॊत्र" को मॊत्र याज कशा जाता शै दळलन कयने वे व्मत्रि को जीलन भं धन औय ऐद्वमल की क्मोटक मश अत्मन्त ळुब फ़रदमी मॊत्र शै । श्री मॊत्र कबी बी कभी नशीॊ शोती शै । त्रलद्रानं ने अऩने अनुबलं धनप्राप्तद्ऱ शे तु न कलर दवये मन्त्रो वे अप्तधक वे अप्तधक े ू भं ऩामा शं की जो भनुष्म अऩने गृशस्थ जीलन भं धन, राब दे ने भे वभथल शै एलॊ वॊवाय क शय व्मत्रि क प्तरए े े लैबल, ऐद्वमल, वुख-वभृत्रद्ध, व्माऩाय भं वपरता, त्रलदे ळ पामदे भॊद वात्रफत शोता शै । ऩूणल प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल राब, याजनीप्तत भं वपरता, नौकयी भं ऩदौस्न्न्त आटद चैतन्म मुि "श्री मॊत्र" स्जव व्मत्रि क घय भे शोता शै े की काभना यखता शं तो उवक प्तरए श्री रक्ष्भीकफेय धन े ु उवक प्तरमे "श्री मॊत्र" अत्मन्त फ़रदामी प्तवद्ध शोता शै े आकऴलण मॊत्र वललश्रऴ मॊत्र शं । भनुष्म को रक्ष्भीकफेय धन े ु उवक दळलन भात्र वे अन-प्तगनत राब एलॊ वुख की प्राप्तद्ऱ े आकऴलण मॊत्र क ऩूजन वे जीलन क वबी षेत्र भं वुख- े े शोप्तत शै । वभृत्रद्ध एलॊ वौबाग्म की प्राद्ऱ शोने रगती शै । "श्री मॊत्र" भे वभाई अटद्रतीम एलॊ अद्रश्म ळत्रि मटद टकवी व्मत्रि को व्माऩाय भं मटद व्माऩाय भं भनुष्म की वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे ऩूणल ऩरयश्रभ एलॊ रगने वे कामल कयने ऩय बी अप्तधक वभथल शोप्तत शै । स्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय राब की प्राप्तद्ऱ नशीॊ शो यशी शो, व्माऩाय भॊदा चर यशा प्तनयाळा दय शोकय लश भनुष्म अवफ़रता वे वफ़रता टक ू शो मा फाय-फाय राब क स्थान ऩय शाप्तन शो यशी शो तो े औय प्तनयन्तय गप्तत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे उवे रक्ष्भीकफेय धन आकऴलण मॊत्र को अलश्म अऩने ु वभस्त बौप्ततक वुखो टक प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । व्मलवामीक स्थान ऩय स्थात्रऩत कयना चाटशए। स्जववे "श्री मॊत्र" भनुष्म जीलन भं उत्ऩन्न शोने लारी व्माऩाय भं फाय-फाय शोने लारे घािे मा नुकवान वे ळीघ्र वभस्मा-फाधा एलॊ नकायात्भक उजाल को दय ू कय शी राब प्राद्ऱ शोने क मोग फनने रगते शं । । े वकायत्भक उजाल का प्तनभालण कयने भे वभथल शै । "श्री मॊत्र" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय क स्थान ऩय े गणेळ रक्ष्भी मॊत्र स्थात्रऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फस्न्धत प्राण-प्रप्ततत्रद्षत गणेळ रक्ष्भी मॊत्र को अऩने घय- ऩये ळाप्तन भे न्मुनता आप्तत शै ल वुख-वभृत्रद्ध, ळाॊप्तत एलॊ दकान-ओटपव-पक्ियी ु ै भं ऩूजन स्थान, गल्रा मा ऐद्वमल टक प्रप्तद्ऱ शोती शै । स्पटिक का श्री मॊत्र वललश्रद्ष े अरभायी भं स्थात्रऩत कयने व्माऩाय भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ भाना जाता शं । शोता शं । मॊत्र क प्रबाल वे बाग्म भं उन्नप्तत, भान- े प्रप्ततद्षा एलॊ व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं एलॊ आप्तथलक स्स्थभं रक्ष्भीकफेय धन आकऴलण मॊत्र ु वुधाय शोता शं । गणेळ रक्ष्भी मॊत्र को स्थात्रऩत कयने वे श्रीमॊत्र को वभस्त प्रकाय क श्रीमॊत्रं भं वललश्रद्ष े े बगलान गणेळ औय दे ली रक्ष्भी का वॊमुि आळीलालद भाना गमा शै औय कफेय मॊत्र को दे लताओॊ भं धन क ु े प्राद्ऱ शोता शं । श्री गणेळ रक्ष्भी मॊत्र क प्तनमप्तभत ऩूजन े
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    35 नलम्फय 2012 एलॊ दळलन वे व्मत्रि क वकर त्रलध्नं एलॊ द्ख े ु कफेय मॊत्र धन अप्तधऩप्तत धनेळ कफेय का मॊत्र शै , ु ु दरयद्रताका नाळ शोता शं । स्जव प्रकाय बगलान गणेळ के इव प्तरमे कफेय मॊत्र क प्रबाल वे मषयाज कफेय प्रवन्न ु े ु नाभ स्भयण औय दळलन भात्र वे व्मत्रि क वकर त्रलघ्नं, े शोकय अतुर वम्ऩत्रत्त का लयदान दे ते शं । वॊकि, आटद फाधाओॊ का स्लत् शी नाळ शोता शं , उवी धभल ळास्त्रं भं लस्णलत शं रॊकाप्तधऩप्तत यालण ने प्रकाय दे ली रक्ष्भी क स्भयण औय दळलन भात्र वे व्मत्रि े बगलान भशादे ल वे कफेय मॊत्र प्राद्ऱ कय उवका त्रलप्तध- ु का दबालग्म वौबाग्म भं फदर जाता शं उवक वभस्त ु े त्रलधान वे ऩूजन टकमा था, मशी कायण शं की यालण नं दख् दरयद्रता का स्लत् शी नाळ शोता शं । गणेळ रक्ष्भी ु दे लाप्तधयाज कफेय को प्रळन्न कय प्तरमा था स्जवक ु े मॊत्र क ऩूजन वे ऩरयलाय भं वुख-ळाॊप्तत एलॊ वभृत्रद्ध का े कायण शी उवका याज्म ऩूणल रुऩ वे वभृद्ध औय आगभन शोने रगता शं मटश कायण शं गणेळ रक्ष्भी मॊत्र लैबलळारी था। कफेय मॊत्र क प्रताऩ वे शी यालणने ऩूयी ु े की भटशभा अऩयॊ ऩाय शं । रॊका वोने की फनाई थी। इव प्तरए धन-वॊऩत्रत्तकी काभना कयने लारे भनुष्म को कफेय मॊत्र का ऩूजन ु कनकधाया मॊत्र अलश्म कयना चाटशए। रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु उयोि मॊत्र क अराला अन्म मॊत्र े आज क बौप्ततक मुग भं शय व्मत्रि अप्ततळीघ्र े बी त्रलळेऴ प्रबालळारी शोते शं । स्जव मॊत्रं का मशाॊ वभृद्ध फनना चाशता शं । कनकधाया मॊत्र टक ऩूजा अचलना वभालेळ नशीॊ टकमा गमा शं अत् उवकी भशत्लता का कयने वे व्मत्रि क जन्भं जन्भ क ऋण औय दरयद्रता े े कभ शोना मा लश कभ प्रबाली शं एवा त्रफल्कर नशीॊ शं , ु वे ळीघ्र भुत्रि प्तभरती शं । मॊत्र क प्रबाल वे व्माऩाय भं े कलर मशाॊ वभम क अबाल भं एलॊ ऩाठको क ळीघ्र े े े उन्नप्तत शोती शं , फेयोजगाय को योजगाय प्राप्तद्ऱ शोती शं । भागलदळलन शे तु कलर अनुबूत मॊत्रं का वभालेळ टकमा े कनकधाया मॊत्र अत्मॊत दरब मॊत्रो भं वे एक मॊत्र शं ु ल गमा शं । स्जवे भाॊ रक्ष्भी टक प्राप्तद्ऱ शे तु अचूक प्रबाला ळारी भाना त्रलळेऴ वुझाल: गमा शं । कनकधाया मॊत्र को त्रलद्रानो ने स्लमॊप्तवद्ध तथा रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु गुरुत्ल कामलरम भं उऩरब्ध भॊत्र प्तवद्ध वबी प्रकाय क ऐद्वमल प्रदान कयने भं वभथल भाना शं । े प्राण-प्रप्ततत्रद्षत आकस्स्भक धन प्राप्तद्ऱ मॊत्र, वशस्त्राषी रक्ष्भी आफद्ध मॊत्र, अद्श रक्ष्भी मॊत्र, धनदा मॊत्र इत्मादी कफेय मॊत्र ु त्रलळेऴ मॊत्र एलॊ जैन मॊत्रं भं श्री ऩद्मालती मॊत्र, श्री आज क दौय भं शय व्मत्रि की चाशता टक उवक े े रक्ष्भीकय मॊत्र इत्माटद बी अत्माप्तधक प्रबालळारी शं ऩाव अऩाय धन-वॊऩत्रत्त शो। उवक ऩाय दप्तनमा का शय े ु स्जवका अद्भत प्रबाल एलॊ त्रलळेऴताओॊ क फाये भं भैने ु े ऐळो-आयाभ भौजुद शो, उवे कबी टकवी चीज की कभी “ऩयॊ भ ऩूज्म गुरुदे ल श्री नलप्तनत बाई जोळीजी” वे सात न शो। एवे रोगो क प्तरमे कफेय मॊत्र एक प्रकाय वे े ु टकमा शं एलॊ स्लमॊ अऩने जीलन भं अनुबल टकमा शं । चभत्कायी मॊत्र शै कफेय मॊत्र। कफेय मॊत्र क ऩूजन वे ु ु े मटद आऩ धन प्राप्तद्ऱ शे तु मा अन्म टकवी मॊत्र वे स्लणल राब, यत्न राब, ऩैतक वम्ऩत्ती एलॊ गिे शुए धन ृ वॊफॊप्तधत जानकायी प्राद्ऱ कयना चाशते शो मा आऩके वे राब प्राप्तद्ऱ टक काभना कयने लारे व्मत्रि क प्तरमे े बीतय मॊत्रं क त्रलऴम भं टकवी प्रकाय टक कोई स्जसावा े कफेय मॊत्र अत्मन्त वपरता दामक शोता शं । एवा ु शो तो आऩ प्तनवॊकोच गुरुत्ल कामालरम भं वॊऩक कय ल ळास्त्रोि लचन शं । कफेय मॊत्र क ऩूजन वे एकाप्तधक स्त्रोत्र ु े अग्रीभ वभम रेकय “गुरुदे ल श्री नलप्तनत बाई जोळीजी” वे धन का प्राद्ऱ शोकय धन वॊचम शोता शं । वे वीधे वॊऩक मा पोन ऩय फात कय वकते शं । ल
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    36 नलम्फय 2012 धन प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब रक्ष्भी वाधनाएॊ ु ल  प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, ऩॊ.श्री बगलानदाव त्रत्रलेदी जी, धन रक्ष्भी वाधना वाधना शे तु वाभग्री:- भारा: कभरगट्िे की मा स्पटिक की टदळा: उत्तय आवन: ऩीरा लस्त्र: ऩीरा प्रवाद: दध वे फने प्रवाद का बोग रगामे ू भॊत्र:– ॐ श्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भी आगच्छ आगच्छ भभभॊदे प्ततद्ष प्ततद्ष स्लाशा || Om Shreem Shreem Kleem Shreem Lakshmi Aagachchha Aagachchha Mamamande Tishtha Tishtha Swaha त्रलप्तध:–  मश वाधना टकवी बी ळुक्रलाय को ळुरू टक जा वकती शं , उि भॊत्र का 11 भारा जऩ 43 टदन तक कयने वे भॊत्र प्तवद्ध शोता शै , रेटकन मटद अषम तृतीमा, धन तेयव औय दीऩालरी आदी ळुब भुशूतल शोत तो इवे 21 टदन कयक प्तवद्ध कय वकते शं । े  वाधना शे तु वॊध्मा 7 फजे वे यात 10 फजे तक का वभम श्रेद्ष शोता शं । मटद वभम क अनुकरता नशो तो अऩनी वुत्रलधानुवाय वभम चून े ू वकते शं ।  ऩूजन क वभम ळुद्ध घी का टदऩक जरामे जो वाधना ऩूणल शोने तक जरता यशे औय वुगॊप्तधत अगयलती जरामे े यखे।  दे ली रक्ष्भी जी को बोग भं खीय मा घय भं फनी प्तभठाई का बोग रगामे।  श्री गणेळ जी औय अऩने गुरुदे ल का स्भयण कय वाधना भं वपरता की काभना कयते शुले वाधना कयं ।  वाधना की वभाप्तद्ऱ लारे टदन भॊत्र का 11 भारा अथालत(1188) फाय शलन कयं , शलन भं घी की आशुती दे । मटद टकवी कायण वे आशुप्तत दे ने भं अवभथल शो तो आशुप्तत की वॊख्मा वे दोगुना भॊत्रजाऩ वम्प्ऩन कय वकते शं ।  इव रक्ष्भी वाधना क प्रबाल वे व्मत्रि क ऩाव टकवी ना टकवी भाध्मभ वे धन आने रगता शं । मश वॊबल नशीॊ े े की इव वाधना क फाद बी व्मत्रि प्तनधलन यशं । े
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    37 नलम्फय 2012 आप्तथलक राब एलॊ कामलप्तवत्रद्ध शे तु रक्ष्भी भॊत्र वाधना वाधना शे तु वाभग्री: भारा: स्पटिक की टदळा: उत्तय मा ऩूलल आवन: ऩीरा लस्त्र: वफ़द े प्रवाद: पर भॊत्र: ॐ ऐॊ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ शॊ वौ जगत्प्रवूत्मै नभ्। Om Aim Hreem Shreem Kleem Ham Sou Jagatprasootyai Namah त्रलप्तध:  प्रात्कार स्नानइत्माटद वे प्तनलृत्त शोकय स्लच्छ लस्त्र धायण कय ऩीरे आवन ऩय फैठ जामे। रक्ष्भीजी क प्तचत्र मा भूप्ततल को एक रकिी क े े चौकी ऩय यखदे ।  रक्ष्भीजी को धूऩ-दीऩ इत्माटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं , वाधन कार भं धूऩ-दीऩ चारु यखं। ऩीरे मा स्लेत पर रक्ष्भीजी को अत्रऩलत कयं । ू मटद वॊबल शो तो एक पर बी रक्ष्भीजी को अत्रऩलत कयं ।  टपय उऩयोि भॊत्र की 10 मा 20 भारा जाऩ कयं । भॊत्र की प्तवत्रद्ध शे तु कर 25000 जाऩ कयं । ु  भॊत्र जाऩ ऩूणल शोने क ऩद्ळमात प्रप्ततटदन 1 भारा जऩ जये । इव वाधना को कयने वे वाधक को धनराब शोता शं े औय इस्च्छत कामल भं वपरता प्राद्ऱ शोप्तत शं ( मटद अनुकरता शोतो प्रप्ततटदन 1000, 3000 मा 5000 जाऩ बी कय ू वकते शं ।  जाऩ स्जतना अप्तधक शोगा उतना अप्तधक राब प्तभरेगा। भॊत्र प्तवत्रद्ध 25000 जाऩ ऩूणल शोने क ऩद्ळमात प्रप्ततटदन े प्तनमभ वे एक प्तनस्द्ळत भात्रा भं शी जाऩ कयं , जऩ वॊख्मा को कभ मा अप्तधक कयने ऩय प्रप्ततकर ऩरयणाभ वॊबल ू शं ।  ग्रशण कार, दीऩालरी, शोरी, अक्ष्मतृप्ततमा आटद अफूझ भुशूतल भुशूतल ऩय अप्तधक पर प्राप्तद्ऱ शे तु एलॊ भॊत्र क प्रबाल े को फढ़ाने शे तु अप्तधक भात्रा भं जऩ टकमा जा वकता शं , क्मोटक, प्रप्ततटदन टकमे जायशे भॊत्र जऩ टक अऩेषा इन अलवयं ऩय प्रप्ततकर ऩरयणाभं की वॊबालना नशीॊ शोती इव प्तरमे इन अलवयं ऩय जऩ अप्तधक वॊख्मा भं टकमे जा ू वकते शं ।
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    38 नलम्फय 2012 अनुबत भशारक्ष्भी भॊत्र वाधना ू वाधना शे तु वाभग्री: भारा: कभर गट्िे की मा स्पटिक की टदळा: उत्तय मा ऩूलल आवन: ऩीरा लस्त्र: वफ़द े प्रवाद: पर मा प्तभश्री भॊत्र: ॐ श्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ कभरे कभरारमे प्रवीद प्रवीद श्रीॊ ह्रीॊ ॐ भशारक्ष्म्मै नभ्। Om Shreem Hreem ShreeM Kamale Kamalalaye Praseeda Praseeda Shreem Hreem Om Mahalakshmyai Namah त्रलप्तध: काप्ततलक ळुक्र प्रप्ततऩदा वे (मा ग्रशण कार, दीऩालरी, शोरी, अक्ष्मतृप्ततमा आटद टकवी ळुब भुशूत) वे भॊत्र जाऩ ळुरु कयं । औय एक भाव भं वला राख भॊत्र ल जाऩ ऩूणल कयं । टपय उऩयोि भॊत्र की प्रप्ततटदन 1 भारा जऩ कयं । इव वाधना वे अत्माप्तधक धन राब शोने क मोग फनने रगते शं । रक्ष्भीजी को धूऩ -दीऩ े इत्माटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं , वाधन क वभम भं धूऩ-दीऩ चारु यखं। े वुगॊप्तधत पर रक्ष्भीजी को अत्रऩत कयं । मटद वॊबल शो तो एक पर मा प्तभश्री ू ल बी रक्ष्भीजी को अत्रऩत कयं । भॊत्र जाऩ ऩूणल शोने वे ऩशरे शी वाधक को ल आप्तथलक राब प्तभरना ळुरु शो जाता शं , इव भं जया बी वॊदेश नशीॊ शं । भॊत्र प्तवद्ध भूॊगा गणेळ भूॊगा गणेळ को त्रलध्नेद्वय औय प्तवत्रद्ध त्रलनामक क रूऩ भं जाना जाता शं । इव क ऩूजन वे जीलन भं वुख े े वौबाग्म भं लृत्रद्ध शोती शं ।यि वॊचाय को वॊतुप्तरत कयता शं । भस्स्तष्क को तीव्रता प्रदान कय व्मत्रि को चतुय फनाता शं । फाय-फाय शोने लारे गबलऩात वे फचाल शोता शं । भूॊगा गणेळ वे फुखाय, नऩुॊवकता , वस्न्नऩात औय चेचक जेवे योग भं राब प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म Rs: 550 वे Rs: 8200 तक भॊगर मॊत्र वे ऋण भुत्रि भॊगर मॊत्र को जभीन-जामदाद क त्रललादो को शर कयने क काभ भं राब दे ता शं , इव क अप्ततरयि व्मत्रि को े े े ऋण भुत्रि शे तु भॊगर वाधना वे अप्तत ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं । त्रललाश आटद भं भॊगरी जातकं क कल्माण क प्तरए े े भॊगर मॊत्र की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । प्राण प्रप्ततत्रद्षत भॊगर मॊत्र क ऩूजन वे बाग्मोदम, ळयीय भं खून की े कभी, गबलऩात वे फचाल, फुखाय, चेचक, ऩागरऩन, वूजन औय घाल, मौन ळत्रि भं लृत्रद्ध, ळत्रु त्रलजम, तॊत्र भॊत्र क दद्श प्रबा, बूत-प्रेत े ु बम, लाशन दघिनाओॊ, शभरा, चोयी इत्मादी वे फचाल शोता शं । ु ल भूल्म भात्र Rs- 730
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    39 नलम्फय 2012 ळीघ्र परदामी रक्ष्भी भॊत्र वाधना वाधना शे तु वाभग्री: भारा: स्पटिक की टदळा: उत्तय मा ऩूलल आवन: ऩीरा लस्त्र: वफ़द े भॊत्र: ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भी भशारक्ष्भीॊ वलल काभ प्रदे वलल वौबाग्मदाप्तमनी अप्तबभॊत्र प्रमच्छ वलल वललगते वुरुऩे वललदजम त्रलभोप्तचनी ह्रीॊ व् स्लाशा। ु ल Om Hreem Shreem Lakshmi Mahalakshmim Sarv Kam Prade Sarv Soubhagyadaayinee Abhimantra Prayachchha Sarv Sarvagate Surupe Sarvdurjaya Vimochini Hreem Sah Swaha त्रलप्तध: प्रप्ततटदन प्तनमप्तभत वभम ऩय भॊत्र जऩ कयं । रकिी की चौकी ऩय रक्ष्भीजी का प्तचत्र स्थात्रऩत कय उवका धूऩ-दीऩ इत्माटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं , वाधन क वभम भं धूऩ-दीऩ चारु यखं। वुगॊप्तधत पर रक्ष्भीजी को अत्रऩत कयं । 20 टदन े ू ल भं एक राख जाऩ ऩूणल कयं । जाऩ ऩूणल शोने क ऩद्ळमात प्रप्ततटदन 1 भारा जाऩ कयं । इव वाधना वे वाधन की आप्तथलक े स्स्थप्तत भं वुधाय शोने रगता शं , औय उवे भाॉ रक्ष्भी की कृ ऩा वे वुख-वॊऩत्रत्त औय लैबल की प्राप्तद्ऱ शोती शं । रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु कयं याप्तळ भॊत्र का जऩ भेऴ : ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भीनायामण नभ्। लृऴब : ॐ गौऩारामै उत्तय ध्लजाम नभ्। प्तभथुन : ॐ क्रीॊ कृ ष्णामै नभ्। कक : ॐ टशयण्मगबालमै अव्मि रूत्रऩणे नभ्। ल प्तवॊश : ॐ क्रीॊ ब्रह्मणे जगदाधायामै नभ्। कन्मा : ॐ नभो प्रीॊ ऩीताम्फयामै नभ्। तुरा : ॐ तत्ल प्तनयॊ जनाम तायक याभामै नभ्। लृस्द्ळक : ॐ नायामणाम वुयप्तवॊशामै नभ्। धनु : ॐ श्रीॊ दे लकीकृ ष्णाम ऊध्ललऴॊतामै नभ्। भकय : ॐ श्रीॊ लत्वरामै नभ्। कब : श्रीॊ उऩेन्द्रामै अच्मुताम नभ्। ुॊ भीन : ॐ क्रीॊ उद्‍ ताम उद्धारयणे नभ्। धृ याप्तळ भॊत्र क जाऩ कयने वे वबी प्रकाय क कामल भं ळीघ्र वपरता प्राद्ऱ शोती शं । याप्तळ भॊत्र क जाऩ वे व्मत्रि शय े े े प्रकाय क वॊकि वे वुयस्षत यशता शं । व्मत्रि आप्तथलक रूऩ वे ऩूणल वॊऩन्न शो जाता शं । े
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    40 नलम्फय 2012 प्तचॊता भस्ण रक्ष्भी वाधना वाधना शे तु वाभग्री: भारा: स्पटिक की टदळा: ऩस्द्ळभ आवन: ऩीरा लस्त्र: वफ़द े प्रवाद: दध वे फने प्रवाद का बोग रगामे ू भॊत्र: ॐ ह्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भी भभ ग्रशभ ् धनऩूय प्तचता दय दय वलाशा ! ॊ ू ू Om Hreem Shreem Shreem, Shreem, Shreem Shreem Shreem Shreem Lakshmi Mam Graham Dhanpur Chinta Door Door Swaha त्रलप्तध:  श्री गणेळ जी औय अऩने गुरुदे ल का स्भयण कय वाधना भं वपरता की काभना कयते शुले वाधना कयं । ग्रशण कार, दीऩालरी, शोरी, अक्ष्मतृप्ततमा आटद अफूझ भुशूतल भं दे ली रक्ष्भी का धूऩ-टदऩ आटद वे ऩूजन कय इव भॊत्र को 108 फाय जऩ कयक प्तवद्ध कय रे। े  टपय जफ कोई भशत्लऩूणल व्मलवामीक कामल कयना शो तो तफ उि भॊत्र का ऩुन् 108 फाय जऩ कयक कामल स्थर े ऩय जाने वे व्माऩाय आटद भशत्लऩूणल कामं भं फढो़तयी एलॊ अत्माप्तधक राब की प्राप्तद्ऱ शोती शं ।  रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क एकाप्तधक स्तोत्र फनने रगंगे औय मटद कोई फेयोजगाय शो व्मत्रि को आभदनी का कोई वाधन े नजय नशीॊ आ यशा शो तो बी इव भॊत्र को प्तवद्ध कय वकता शं औय प्तवद्ध कयने क ऩद्ळमात 11 टदन 108 फाय े जऩ कयने वे व्मत्रि को उत्तभ योजगाय की प्राप्तद्ऱ क मोग फनने रगते शै । े  मटद ऩरयलाय भं कोई न कोई कभी यशती शं मा घय की प्रगप्तत मा उन्नप्तत क भागल प्रवस्त नशीॊ शो ऩायशे शो मा े अत्माप्तधक कजल वय ऩय चढ़ गमा शो तो बी इव भॊत्र को प्तवद्ध कय वकते शं ।  मटद अफूझ भुशूतल क आने वे ऩशरे इव भॊत्र को प्तवद्ध कयने की आलश्मिा मा इच्छा शो तो इव भॊत्र का जाऩ े 11 टदन तक 108 लाय शय योज जऩने वे बी भॊत्र प्तवद्ध शोता शै । यत्न एलॊ उऩयत्न शभाये मशाॊ वबी प्रकाय क यत्न एलॊ उऩयत्न व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शं । ज्मोप्ततऴ कामल वे जुिे़ फधु/फशन ल यत्न े व्मलवाम वे जुिे रोगो क प्तरमे त्रलळेऴ भूल्म ऩय यत्न ल अन्म वाभग्रीमा ल अन्म वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं । े गुरुत्ल कामालरम वॊऩक : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785. ल
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    41 नलम्फय 2012 ऋत्रद्ध-प्तवत्रद्ध प्रद ऩद्मालती वाधना वाधना शे तु वाभग्री: कवय, े मॊत्र: भॊत्रप्तवद्ध प्राणप्रप्ततत्रद्षत श्री मॊत्र भारा: कभर गट्िे की मा स्पटिक की टदळा: उत्तय आवन: वफ़द े लस्त्र: वफ़द े भॊत्र: ॐ ऩद्मालती ऩद्मनेत्रे रक्ष्भीदाप्तमनी वलल कामल प्तवत्रद्ध करय करय ॐ ह्रीॊ श्रीॊ ऩद्मालत्मै नभ्। Om Padmavati Padmanetre Lakshmidayinee Sarv Karya Siddhi Kari Kari Om Hreem Shreem Padmavatyai Namah त्रलप्तध: टकवी बी फुधलाय वे भॊत्र जाऩ प्रायॊ ब कयं । रकिी की चौकी ऩय वपद लस्त े त्रफछा कय उव ऩय भॊत्रप्तवद्ध प्राणप्रप्ततत्रद्षत श्री मॊत्र को स्थात्रऩत कयं । मॊत्र को ळुद्ध जर वे स्नान कयाक, उवऩय कवय रगामे, उवका धूऩ-दीऩ इत्माटद वे त्रलप्तधलत े े ऩूजन कयं , वाधन क वभम भं धूऩ-दीऩ चारु यखं। े उि भॊत्र का 5 मा 11 टदनं भं वला राख जऩ कयने वे भॊत्र प्तवद्ध शो जाता शं । भॊत्र जाऩ ऩूणल शोने ऩय कलायी कन्माओॊ को बोजन कयामे , मथा ळत्रि वाभर्थमल ुॊ क अनुळाय बेि भं लस्त्र इत्माटद दं । टपय उव मॊत्र को अगरे टदन अऩने े व्मलवामेक प्रप्ततद्षान मा प्ततजोयी, कळ फोक्व मा ऩूजा स्थान भं स्थात्रऩत कयदे इववे व्मलवामे भेभ त्रलत्रद्ध शोती शं , वभाज ै भं चायं औय वाधन का मध कीप्ततल चयं औय परने रगती शं । वाधन टदन प्रप्तत-टदन वभृद्ध शोता जाता शं । जफ तक ै मॊत्र वाधन क ऩाव यशे गा तफ-तफ उवे जीलन भं टकवी प्तचज की कभी नशीॊ शोगी। े ळादी वॊफॊप्तधत वभस्मा क्मा आऩक रिक-रिकी टक आऩकी ळादी भं अनालश्मक रूऩ वे त्रलरम्फ शो यशा शं मा उनक लैलाटशक े े े जीलन भं खुप्तळमाॊ कभ शोती जायशी शं औय वभस्मा अप्तधक फढती जायशी शं । एवी स्स्थती शोने ऩय अऩने रिक-रिकी टक किरी का अध्ममन अलश्म कयलारे औय उनक लैलाटशक वुख को कभ कयने े ॊु े लारे दोऴं क प्तनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे जनकायी प्राद्ऱ कयं । े े े GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    42 नलम्फय 2012 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु घॊिाकणल भशात्रलय वाधना वाधना शे तु वाभग्री: कवय, चॊदन, लावकऩ, गुराफ पूर े े मॊत्र: श्री घॊिाकणल भशात्रलय मॊत्र अथला घॊिाकणल भशात्रलय ऩताका मॊत्र(मटद मॊत्र की वाभर्थमलता न शो तो घॊिाकणल भशात्रलय जी का प्तचत्र स्थात्रऩत कयरं।) भारा: भूॊगे की टदळा: उत्तय आवन: ऩीरा लस्त्र: रार ऩीताॊफय भॊत्र: ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ ठॊ ॐ घण्िाकणल भशालीय रक्ष्भी ऩूयम ऩूयम वुख वौबाग्म करु करु स्लाशा। ु ु Om Hreem Shreem Kleem Thah Om Ghantakarna Mahaveer Lakshmi Pooray Pooray Sukha Soubhagya Kuru Kuru Swaha त्रलप्तध: मश वाधना मटद दीऩालरी भं धन त्रमोदळी वे आयॊ ब की जामे तो श्रेद्ष शं मटद अन्म कार भं ळुरु कयनी ऩिे ़तो टकवी बी गुरुलाय वे इवे आयॊ ब कय वकते शं । धन त्रमोदळी (धनतेयव) क टदन उि भॊत्र की 40 भारा, रुऩ चतुदलळी (अथालत े नयकशया चतुदलळी, नयका चौदव, कारी चतुदलळी, काऱीचौदव,) को 42, दीऩालरी के टदन 43, भारा जाऩ कयं । मटद अन्म टदन वे आयॊ ब कय यशे शो तो गुरुलाय को 40, ळुक्र लाय को 42 औय ळप्तनलाय को 43 भारा भॊत्र जऩ कयं । रकिी की चौकी ऩय वपद लस्त त्रफछा कय उव ऩय भॊत्रप्तवद्ध प्राणप्रप्ततत्रद्षत श्री घॊिाकणल भशात्रलय मॊत्र मा प्तचत्र को े स्थात्रऩत कयं । ळुद्ध चॊदन औय कवय का वुखा प्तभश्रण े (लावकऩ) प्तछिक, मटद मश द्रव्म अप्राद्ऱ शो तो अद्शगॊध े े प्तछिक(नोि:द्रव्म कलर वुखा प्तछिक श्री घॊिाकणल भशात्रलय क ऩूजन भं जर प्तभप्तश्रत घोर का प्रमोग न कयं ।), उवका े े े े धूऩ-दीऩ (ळुद्ध चॊदन धूऩ का प्रमोग श्रेद्ष)इत्माटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयं , वाधन क वभम भं धूऩ-दीऩ चारू यखं। े वुगॊप्तधत दे ळी रार गुराफ पर क प्राद्ऱ शो जामे तो रगामे अन्मथा ऩीरा, वपद, गुराफी यॊ ग का गुराफ बी रागा वकते शं । ू े े टपय श्री घॊिाकणल भशात्रलय क उऩयोि भॊत्र का ऩूणल श्रद्ध एलॊ प्तनद्षा वे जाऩ कयं । वाधना ऩूणल शोने ऩय श्री घॊिाकणल े भशात्रलय प्रवन्न शोते शं ळीध्र शी वाधक को रक्ष्भी की प्राप्तद्ऱ क मोग फनने रगते शं । वाधना वॊऩन्न शोने ऩय प्रप्ततटदन े उि भॊत्र टक 1 भारा जऩ कयं । त्रलळेऴ नोि: श्री घॊिाकणल भशात्रलय का ऩूजन कयने लारे वाधको शे तु भावॊ -भटदया, कवॊग इत्माटद प्तनऴेध शं । अत् भाॊव- ु भछरी, ळयाफ इत्माटद का वेलन कयने लारे व्मत्रि कृ प्मा मश प्रमोग न कयं । अन्मथा श्री घॊिाकणल भशात्रलय क प्रकोऩ वे े वाधना का प्रप्ततकर ऩरयणाभ वॊबल शं । श्री घॊिाकणल भशात्रलय इव कप्तरमुग भं ळीघ्र प्रवन्न शोने लारे वाषात दे ल शं , इव ू भे जयाबी वॊदेश नशीॊ शं । इव वाधना क ऩद्ळमात भावॊ -भटदया, ऩयस्त्री-ऩुरुऴ इत्माटदका वेलन कयने ऩय वाधन द्राया प्तवद्ध े टकमा गमा भॊत्र प्रबाल शीन शो जाता शं ।
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    43 नलम्फय 2012 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु वात दरब लस्तुएॊ ु ल  प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी यि गुॊजा शोने ऩय उवे उताय कय अऩने ऩूजा वथान भं यखदं । गुॊजा एक दरब लनस्ऩप्तत का फीज शं । तॊत्र ळास्त्र ु ल  टकवी भशत्लऩूणल कामल उद्दे श्म की ऩूप्ततल शे तु भॊत्र प्तवद्ध भं मश एक दरब एलॊ अत्मन्त प्रबालळारी लस्तु भानी ु ल यि गुॊजा क इक्कीव दानं को अऩने वाथ रेकय घय े जाती शै । गुॊजा प्राम् वपदे , रार ल कारं यगॊ क फीज े वे फाशय प्तनकरे, कामल उद्दे श्म ऩूणल शोने ऩय उवे फशते स्लरुऩ भं ऩामी जाती शं । त्रलप्तबन्न तॊत्र टक्रमाओॊ भं गुॊजा जर भं प्रलाटशत कय दं । फीज क वाथ-वाथ गुॊजा क जि का बी त्रलळेऴ रुऩ वे े े प्रमोग टकमा जाता शं । नाग कळय े गुॊजा फीजं का प्रमोग त्रलप्तबन्न कामल उद्दे श्म की नाग कवय अप्तत ऩत्रलत्र एलॊ उरलब लनस्ऩप्ततमं भं े ऩूप्ततल शे तु टकमा जाता शं । रार गुॊजा का प्रमोग त्रलळेऴ रुऩ वे एक भानी जाती शं । इवे नागकद्वय क नाभ वे बी े े वे रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क प्तरमे टकमा जाता शं । रार गुॊजा ऩय े जाना जाता शं । धाप्तभलक भान्मताओॊ भं नाग कळय का े एक कारे यॊ ग का छोिा त्रफॊद ू शोता शं । एवा भाना जाता शं स्थान प्रभुख लस्तुओॊ अग्रस्त शं । तॊत्र गॊथं भं नाग कळय े की यि गुॊजा वे घय भं वुख-वभृत्रद्ध की लृत्रद्ध तो शोती शी क त्रलप्तबन्न प्रमोगं का लणलन प्तभरता शं । धनप्राप्तद्ऱ एलॊ े शं वाथ शी वाथ भं भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा बी घय ऩय वुख-वभृत्रद्ध शे तु बी नाग कळय का उऩमोग टकमा जाता शं । े फनी यशती शं ।  चाॊदी (मटद उऩल्फध नशं को अन्म धातु ) की एक  दीऩालरी क टदन यि गुॊजा क इक्कीव मा ग्मायश े े छोिी वी टिब्फी भं नागकळय को ळशद क वाथ े े दानं को गॊगा जर वे ऩत्रलत्र कयक ऩूजा स्थान े प्तभराकय ढ़क्कन रगाकय उवे फॊद कयदं । दीऩालरी की यखदे ना चाटशए। ऩूजा क ऩद्ळमात गुॊजा क दानं को े े यात्रत्र भं उवे ऩूजन क फाद भं प्ततजोयी भं यखदे । े अऩनी प्ततजोयी, कळफोक्व, गल्रे भं रार कऩिे भं ै अगरी दीलारी को उव टिब्फी को खोर कय नागकळय े फाॊधकय वे टदनं टदन ऩरयलाय की आप्तथलक वभृत्रद्ध औय ळशद को फदर दं । एकफाय टिब्फी यखदे ने क फाद े फढ़ती शं । उवे खोरे नशीॊ उवे फॊध शी यशने दे ।  भॊत्र द्राया प्तवद्ध यि गुॊजा क इक्कीव मा ग्मायश दानं े  धन-वभृत्रद्ध की प्राप्तद्ऱ शे तु एक नत्रलन ऩीरे लस्त्र भं को अऩने व्मलवाम मा ओटपव भं योकि यखने के नागकळय, वाफुत शल्दी, वुऩायी, एक ताॊफे का प्तवक्का, े वाथ भं यखने वे धन की कबी कभी नशीॊ शोती औय एक ऩाॊच मा दव का प्तवक्का, अषत को एक वाथ कय कळ फोक्व कबी खारी नशीॊ यशता, रक्ष्भी जी का ै क उवको कऩिे ़ भं फाॊध दं । टपव उवे धूऩ-दीऩ वे े आप्तळलालद फना यशता शं । ऩूजन कयक अऩनी प्ततजोयी भं यखकय प्रप्ततटदन ऩूजन े  मटद भॊत्र प्तवद्ध टक शुई यि गुॊजा की भारा को कोई क वभम उवे धूऩ दं तो धनराब शोने रगेगा। े व्मत्रि गरे भं धायण कताल शं तो लश वललजन लळीकय  दीऩालरी की यात मा अन्म टकवी ळुब भुशूतल भं क वभान प्रबालळारी शोती शं । यि गुॊजा की भारा े नागकळय औय ऩाॊच प्तवक्कं को रेकय उवे ऩूजा स्थान े को कलर प्रमोग क वभम मा टकवी भशत्ल ऩूणल कामल े े ऩय यखदे टपय ऩूजन की वभाप्तद्ऱ क फाद उवे एक े मा व्मत्रि वे प्तभरते वभम शी धायण कयं , अनालश्म ऩीरे कऩिे ़ भं फाॊध कय अऩने व्मलवामीक प्रप्ततद्षान के
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    44 नलम्फय 2012 गल्रे, प्ततजोयी आटद धन यखने लारे स्थान ऩय यख त्रलद्रानं क भतानुळाय प्तवद्ध गोभप्तत चक्र वे त्रलप्तबन्न े दं । इव प्रमोग वे व्मत्रि को कबी धन की कभी नशीॊ भनोकाभनाएॊ वयरता वे ऩूणल की जावकती शं । यशे गी।  दीऩालरी की यात को ऩाॊच भॊत्र प्तवद्ध गोभप्तत चक्र को  धन प्राप्तद्ऱ क प्तरए क प्तरए वोभलाय मुि ऩूस्णलभा क े े े स्थात्रऩत कयक उवका वाषात रक्ष्भी रुऩ भं ऩूजन े टदन प्तळलभॊटदय भं प्तळलप्तरॊग का कच्चे, दघ, दशी, ळशद ू कयने वे उवका त्रलप्तधलत ऩूजन कयने वे व्मत्रि को चीनी औय घी अथालत ऩॊचाभृत वे अप्तबऴेक कयं । टपय जीलन भं प्तनयॊ तय धन की प्राप्तद्ऱ शोती यशती शं । प्तळलप्तरग का गॊगाजर वे अप्तबऴेक कयं । तत्ऩद्ळमात  दीऩालरी क टदन 11 गोभती चक्र औय 11 ऩीरी े ऩाॊच त्रफल्लऩत्रं के वाथ भं ऩाॊच नागकळय े को कोटिमं दोनं को को एक ऩीरे कऩिे ऩय यख यखकय प्तळलप्तरॊग ऩय अत्रऩत कयं । मश टक्रमा प्रप्ततटदन अरगी ल कय ऩूजन कयं । टपय "ऐॊ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ" भॊत्र का ऩाॊच ऩूस्णलभा तक प्तनमप्तभत रुऩ वे कयं । अॊप्ततक टदन चढा़ए भारा कयक उवे कऩिे ़ भं फाॊधकय अऩने प्ततजोयी भं े गमे नागकळय एलॊ त्रफल्लऩत्रं भं वे एक त्रफल्लऩत्र एलॊ े स्थात्रऩत कयने वे धन राब की प्राप्तद्ऱ शोती शं । थोिा़ नागकळय घय लाऩव रे आमे उवे अऩनी प्ततजोयी े भं यखदं । इव प्रमोग वे अत्माप्तधक धनराब की प्राप्तद्ऱ ऩीरी कौटिमाॊ शोती शं । ऩौयास्णक कार वे शी कौटिमं को वौबाग्म कायक भानी जाती शं । दे ळ एलॊ त्रलदे ळ की त्रलप्तबन्न वभ्मताओॊ गोभप्तत चक्र एलॊ प्राॊतो भं कौटिमं क त्रलप्तबन्न छोि-फिे प्रमोग शोते े गोभप्तत चक्र वभुद्र वे प्राद्ऱ शोने लारी दरब ु ल आमे शं । ऩूयातन कार भं जन प्तवक्को का चरन नशीॊ था लस्तुओॊ भं वे एक शं । क्मोटक मश आवानी वे प्राद्ऱ नशीॊ तफ रोग कौटिमं का नगद्दी क रुऩ भं प्रमोग कयते थे। े शोता मश एक वपद यॊ गका गोराकाय टदखने भं वीऩ वे े रोग कौटिमं का आदान-प्रदान कयक प्तचज-चस्तु खरयदते े प्तभरता-जुरता प्रप्ततत शोता शं । शाराॊकी कई गोभप्तत चक्र औय फेचते शं । ऩूणत् वपद नशीॊ शोती उवक उऩय गेशुलं औय कारे यॊ ग ल े े धाप्तभलक भान्मता क अनुळाय वभुद्र वे प्राद्ऱ शोने े की ऩरती धायीमा शोती शं , जफ मश धायीमा घीव मा उवे लारे वबी लस्तुमे प्राम् रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु ऩूजन भं प्रमुि ऩोप्तरव टकमा जाता शं तफ मश वपद यॊ ग का नजय आने े शोती शं । कौटिमाॊ बी वभुद्र वे प्राद्ऱ शोता शं औय ऩीरी रगता शं । इव क उऩय चक्र जैवे आकृ प्ततमा कृ दयप्तत औय े कौटिमाॊ रक्ष्भी की अप्तत त्रप्रम लस्तु शोने वे रक्ष्भी ऩूजन ऩय ऩाई जाती शं इव प्तरए इवे गोभप्तत चक्र कशते शं । भं इवका त्रलळेऴ भशत्ल शं । धाप्तभलक भान्मता क अनुळाय वभुद्र वे प्राद्ऱ शोने े  दीऩालरी की यात भं 11 ऩीरी कौटिमं ऩूजा स्थान लारे वबी लस्तुमे प्राम् रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु ऩूजन भं प्रमुि भं यखदं ऩूजन की वभाप्तद्ऱ ऩय उवे अऩने प्ततजोयी शोती शं । गोभप्तत चक्र बी वभुद्र वे प्राद्ऱ शोता शं औय भं गशने इत्माटद क वाथ भं यखदं तो ऩरयलाय भं े रक्ष्भी की त्रप्रम लस्तु शोने वे रक्ष्भी ऩूजन भं इवका गशने-जेलयात की लृत्रद्ध शोने रगती शं । अगरे लऴल त्रलळेऴ भशत्ल शं । ऩुन् दीऩालरी ऩूजन के वभम कौटिमं को ऩुयातन कार वे शी गोभप्तत चक्र को रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ फदरदे । क अरागा अन्म तॊत्र प्रमोगो एलॊ काभना ऩूप्ततल शे तु बी े  दीऩालरी की यात भं 11 ऩीरी कौटिमं को अऩने इवका त्रलळेऴ रुऩ वे प्रमोग टकमा जाता शं । क्मोटक घय मा व्मलवामीक स्थान भं प्ततजोयी भं यखने वे व्माऩाय औय धन की भं लृत्रद्ध शोती शं ।
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    45 नलम्फय 2012 शकीक  स्जव बी घय भं रघु श्रीपर शोता शं लशाॊ वुख- वॊऩन्नता औय लैबल का लाव शोता शं । शकीक एक प्रकाय का उऩयत्न शं , स्जवका उऩमोग  मटद रघु श्रीपर को व्मलवामीक स्थान ऩय यखने वे त्रलप्तबन्न तॊत्र प्रमोग एलॊ धनप्राप्तद्ऱ शे तु त्रलळेऴ रुऩ वे टकमा व्माऩाय भं टदन प्रप्तत टदन उन्नप्तत शोती यशती शं । जाता शं । मश एक अत्मॊत प्रबालळारी ऩत्थय भाना जाता शं ।  त्रलद्रानो का कथन शं की मटद टकवी व्मत्रि को शकीक क प्रबालं क त्रलऴम कछ जानकाय त्रलद्रानो का े े ु वौबाग्म वे 11 रघु श्रीपर प्राद्ऱ शो जामे तो उवके अनुबल शं की शकीक को मटद कोई व्मत्रि धायण नशीॊ जन्भं-जन्भ की दरयद्रता का अॊत शो जाता शं औय कयक कलर अऩने वाथ यखता शं तो बी लश अऩना े े मटद टकवी व्मत्रि क धय भं 1 रघु श्रीपर का ऩूजन े चभत्कायी प्रबाल टदखा शी दे ता शं । शोता शं लशाॊ वे दख्, दरयद्रता कोवो दय यशती शं । ु ू  दीऩालरी क टदन ऩूजान क वभम 21 शकीक को े े स्थाऩीत कयदे ऩूजन क ऩद्ळमात उवे दीऩालरी क े े कारी शल्दी टदन शी जभीन भं गाढ़दे ने वे व्मत्रि को प्तनयॊ तय धन स्जव प्रकाय वे शल्दी ऩीरे यॊ गी को शोती शं । उवी राब शोता यशता शं । प्रकाय एक दरब जाती की कारे यॊ गकी शल्दी बी ऩाई ु ल  भनोकाभना ऩूप्ततल शे तु ग्मायश शकीक ऩत्थय को अऩने जाती शं । कारी शल्दी को कृ ष्ण शरयद्रा क नाभ वे जाना े ऩूजा स्थान ऩय यख कय अरगरे टदन उवे भॊटदय भं जाता शं । कारी शल्दी की वुगॊध कऩूय वे प्तभरती-जुरती चढाने वे भनोकाभना ळीघ्र ऩूणल शोती शं । शोती शं । कारी शल्दी को भुख्मत् तॊत्र टक्रमाओॊ एलॊ  दीऩालरी क टदन शकीक भारा वे रक्ष्भी भॊत्र का एक े रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु एक दरलब औऴप्तध भानते शं । ु भारा जऩ कयक। भारा को धायण कयने वे दे ली े  स्जव बलन भं भॊत्र प्तवद्ध कारी शल्दी का ऩूजन कयने रक्ष्भी की शभंळा कृ ऩाद्रत्रद्श फनी यशती शं । भॊत्र: "ॐ वे बलन भं धन-वौबाग्म की स्लत् लृत्रद्ध शोने रगती शं । ह्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भी लावुदेलाम नभ्।"  दीऩालरी क टदन मा अन्म टकवी ळुब भुशूतल भं कारी े  रक्ष्भी जी क प्तचत्र को 27 शकीक ऩत्थय क उऩय े े शल्दी को धूऩ-दीऩ आटद वे ऩूजन कय क अऩनी े स्थात्रऩत कयने वे व्मत्रि को प्तनस्द्ळत रुऩ वे आप्तथलक प्ततजोयी मा धन यखने लारे स्थान ऩय यखने वे धन राब प्राद्ऱ शोता शं । का कबी अबाल नशीॊ यशता शं । रघु श्रीपर भॊत्र प्तवद्ध दरब वाभग्री ु ल रघु श्रीपर एक प्रकाय का छोिे स्लरुऩ का यि गुॊजा : 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181 नारयमर शोता शं । स्जवक ऊऩय नारयमर क वभान शी े े गोभप्तत चक्र: 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181 जिाएॊ शोती शं जो कयीफ एक ईच स्जतना फिा़ शोता शं । ऩीरी कौटिमाॊ: 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181 रघु श्रीपर को नारयमर का रघुरुऩ भाना जाता शं । रघु शकीक: 11 नॊग-Rs-111, 21 नॊग Rs-181 श्रीपर का प्रमोग त्रलळेऴ रुऩ वे रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ शे तु टकमा जाता शं । क्मोटक रघु श्रीपर भाॊ भशारक्ष्भी का मश त्रप्रम रघु श्रीपर: 1 नॊग-Rs-111, 11 नॊग-Rs-1111 पर भानाजाता शं औय एवी भान्मता शं की स्जवक ऩाव े नाग कळय: 11 ग्राभ, Rs-111 े रघु श्रीपर शोता शं दे ली रक्ष्भी प्तनस्द्ळत रुऩ वे उव ऩय कारी शल्दी:- 370, 550, 750, 1250, 1450, कृ ऩा कयती शं । रघु श्रीपर क ऩूजन वे भाॊ रक्ष्भी स्खॊची े GURUTVA KARYALAY Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, चरी आती शं । Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com .
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    46 नलम्फय 2012 वुख-स्भृत्रद्ध क प्तरमे जाने ऋण(कजल) कफ रे औय कफ दे े  प्तचॊतन जोळी आज क आधुप्तनक मुग भं ऋण अप्तभय-भध्मभ- े अथालत् धन क रेनदे न शे तु भॊगरलाय औय फुधलाय ब़िे े गयील शय लगल टक शं । आज ज्मादातय व्मत्रि कजल के भशत्ल ऩूणल शं । भॊगरलाय को उधाय रेना अळुब शोता शं भक्कि जार भं उरझा शुआ शं । आज कोई व्मत्रि धन तथा फुधलाय को उधाय दे ना अळुब शोता शं । उधाय दे कय योते शुले प्तभरता शं तो कोई धन रेकय ऩछता कजल रेने टक आलश्मकता प़ि जामे तो भॊगरलाय ते शुले आवानी वे प्तभरता शं । 10-20 को कबी कजल नशीॊ रेना चाटशमे। लऴल ऩशरे टकवी वे कजाल रेने क प्तरए े भॊगर मॊत्र भॊगरलाय को प्तरमे उधाय को चुकाने भं रयस्तेदय-प्तभत्र-वाशुकाय को ढे यं प्तभन्नतं ब़िी कटठनाई आती शं । कजल दे ने टक कयनी शोती थीॊ ऩय अफ वभम फदर वे ऋण भुत्रि आलश्मकता प़ि जामे तो फुधलाय को गमा शं गरी-गरी उधाय दे ने क प्तरमे े भॊगर मॊत्र को जभीन- कजल नशीॊ दे ना चाटशमे फुधलाय को फंक लारे रोन/क्रटिि कािल दे ते टपयते े जामदाद के त्रललादो को शर टदमे गमे कजल को प्राद्ऱ कयने भं यशते शं । कयने क काभ भं राब दे ता शं , े कटठनाई आती शं । बयतीम ज्मोप्ततऴ भं कजल के इव क अप्ततरयि व्मत्रि को ऋण े मश ज्मोप्ततऴ का एक वयर रेन-दे न वे वॊफॊधी इन वभस्माओॊ वे भुत्रि शे तु भॊगर वाधना वे अप्तत प्तनमभ शं जो वयरता वे माद यखा जा दय यशने क उऩाम फतरामे शं । ज्मोप्ततऴ ू े ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं । त्रललाश वकता शं औय दै प्तनक जीलन भं उऩमोग क त्रलळेऴ प्तनमभो को अऩना कय जीलन े आटद भं भॊगरी जातकं के टकमा जा वकता शं । भं कजल वे वॊफॊप्तधत वभस्माओॊ को कल्माण क प्तरए भॊगर मॊत्र की े ज्मोप्ततऴ भत वे भॊगरलाय ऋण अऩने अनुकर फनामा जा वकता शं , ू चुकाने क प्तरए श्रेद्ष शं । फुधलाय धन े ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ व्मलवाम वे जुिे रोगो को व्मलवाम वे वॊचम(वेत्रलॊग) क वलल श्रेद्ष टदन शं । े शोता शं । वॊफॊप्तधत रेनदे न तो योज कयने ऩिते फुधलाय को फंक भं धन जभा कयना, प्राण प्रप्ततत्रद्षत भॊगर मॊत्र शं । एवे रोग मटद ज्मोप्ततऴ क प्तवद्धाॊतो े टफ़क्व टिऩोजीि इत्माटद शे तु श्रेद्ष शं । क ऩूजन वे बाग्मोदम, ळयीय भं े को अऩना ने धन वे वॊफॊप्तधतत रेन- मटद कजल रेने टक जरूयत शोतो खून की कभी, गबलऩात वे फचाल, दे न अच्छा शोता शं । भॊगरलाय, वूमल वॊक्राॊप्तत का टदन, लृत्रद्ध फुखाय, चेचक, ऩागरऩन, वूजन रेनदे न क फिे े बुगतान शे तु मोग, स्जव यत्रललाय को शस्त नषत्र शो, औय घाल, मौन ळत्रि भं लृत्रद्ध, ळत्रु वभम अलप्तध को ध्मान भं यखते शुले इन वॊमोग ऩय चाशे टकतनी शी ब़िी त्रलजम, तॊत्र भॊत्र क दद्श प्रबा, बूत- े ु अप्तग्रभ एलॊ ऩद्ळमात बुगतान टकमा जरूयत शो इन टदनं भं ऋण कबी नशीॊ प्रेत बम, लाशन दघिनाओॊ, शभरा, ु ल जामे तो त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । रेना चाटशमे, ऋण रेना अगरे टदन चोयी इत्मादी वे फचाल शोता शं । ऩय िार दं । रेन-दे न शे तु भुख्म प्तनमभ शं । भूल्म भात्र Rs- 730 मटद कजल दे ने टक जरूयत शोतो फुधलाय, कृ त्रत्तका, योटशणी, आद्राल, आद्ऴेऴा, ऋणे बौभे न ग्रशीमात, न दे मभ ् फुधलावये । उत्तयापाल्गुनी, उत्तयाऴाढ़ा, उत्तयाबाद्रऩद नषत्रं भं, बद्रा, ऋणच्छे दनभ ् बौभे कमालत,् वॊचमे वोभ नॊदने॥ ु व्मप्ततऩात औय अभालस्मा क वॊमोग ऩय टदमा गमा धन े
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    47 नलम्फय 2012 कबी लाऩव प्राद्ऱ नशीॊ शोता मा धन प्राद्ऱ कयने भं इन प्तनमभं को अऩनाकय वाधायण व्मत्रि बी अवाधायण अत्माप्तधक कटठनाईमा आती शं । , धन प्राप्तद्ऱ शे तु कोिल - राब प्राद्ऱ कय वकता शं । कळ, झग़िे इत्माटदक उऩयाॊत बी धान प्राद्ऱ नशीॊ शोता। े े मटद धन का कशीॊ प्तनलेळ (जभीन-जामदाद, शभने अऩने अनुबलो भं इव वॊमोग ऩय धन रेने औय ळेयभाकि, इन्स्मोयं व, वोना, चाॊटद, त्रलदे ळी भुद्रा, इत्मादी) े धन दे ने लारे दोनो को ऩये ळानीमाॊ झेरते दे खा गमा शं । भं कयना शो तो भॊगरलाय औय फुधलाय क अप्ततरयि अन्म े इव वॊमोग ऩय धन रेने लारे का धन टिकता नशीॊ एलॊ लायं का चुनाल कयं । इवक अप्ततरयि ऩुनललवु-स्लाप्तत- े उस्की आप्तथलक स्स्थती धन चुकाने रामक नशीॊ यशजाती। भृगप्तळया-ये लती-प्तचत्रा-अनुयाधा-त्रलळाखा-ऩुष्म-श्रलण-धप्तनद्षा- उवे कजल चुकाने शे तु औय कजल रेने टक नौफत आन ऩिती ळतप्तबऴा औय अस्द्वनी नषत्रं भं टकमा गमा प्तनलेळ ळुब शं । इन प्तवद्धाॊतं को अऩना कय जीलन भं अऩनाने वे यशता शं । प्तनलेळ चय (भेऴ-कक-तुरा-भकय) रग्नो भं ल फशुत छोिे -ब़िे त्रललादं वे आवानी वे फचा जा वकता शं । कयना उत्तभ शोता शं । प्तनलेळ कयने वे ऩूलल मश दे ख रे टक क्मोटक आज क वभम भं त्रलऴभ ऩरयस्स्थप्ततमं भं े रग्न वे 8लं बाल भं कोई ग्रश न शो, इव वभम भं टकमा बी स्जवका रेनदे न अच्छा शोता शं , उवका वभाज भं गमा ऩूॊस्ज प्तनलेळ धन को फढ़ाता शं । अच्छा प्रबाल फन जाता शं । भॊत्र प्तवद्ध भॊगर गणेळ भूॊगा गणेळ को त्रलध्नेद्वय औय प्तवत्रद्ध त्रलनामक क रूऩ भं जाना जाता शं । इव प्तरमे भूॊगा गणेळ ऩूजन क े े प्तरए अत्मॊत राबकायी शं । गणेळ जो त्रलध्न नाळ एलॊ ळीघ्र पर टक प्राप्तद्ऱ शे तु त्रलळेऴ राबदामी शं । भूॊगा गणेळ घय एलॊ व्मलवाम भं ऩूजन शे तु स्थात्रऩत कयने वे गणेळजी का आळीलालद ळीघ्र प्राद्ऱ शोता शं । क्मोटक रार यॊ ग औय रार भूॊगे को ऩत्रलत्र भाना गमा शं । रार भूॊगा ळायीरयक औय भानप्तवक ळत्रिमं का त्रलकाव कयने शे तु त्रलळेऴ वशामक शं । टशॊ वक प्रलृत्रत्त औय गुस्वे को प्तनमॊत्रत्रत कयने शे तु बी भूॊगा गणेळ टक ऩूजा राब प्रद शं । एवी रोकभान्मता शं टक भॊगर गणेळ को स्थात्रऩत कयने वे बगलान गणेळ टक कृ ऩा ळत्रि चोयी, रूि, आग, अकस्भात वे त्रलळेऴ वुयषा प्राद्ऱ शोती शं , स्जस्वे घय भं मा दकान भं उन्नती एलॊ वुयषा शे तु भूॊगा गणेळ स्थात्रऩत टकमा जावकता शं । ु प्राण प्रप्ततत्रद्षत भूॊगा गणेळ टक स्थाऩना वे बाग्मोदम, ळयीय भं खून की कभी, गबलऩात वे फचाल, फुखाय, चेचक, ऩागरऩन, वूजन औय घाल, मौन ळत्रि भं लृत्रद्ध, ळत्रु त्रलजम, तॊत्र भॊत्र क दद्श प्रबा, बूत-प्रेत बम, लाशन दघिनाओॊ, शभरा, े ु ु ल चोय, तूपान, आग, त्रफजरी वे फचाल शोता शं । एलॊ जन्भ किरी भं भॊगर ग्रश क ऩीटित शोने ऩय प्तभरने लारे शाप्तनकय प्रबालं वे ुॊ े भुत्रि प्तभरती शं । जो व्मत्रि उऩयोि राब प्राद्ऱ कयना चाशते शं उनक प्तरमे भॊत्र प्तवद्ध भूॊगा गणेळ अत्मप्तधक पामदे भॊद शं । े भूॊगा गणेळ टक प्तनमप्तभत रूऩ वे ऩूजा कयने वे मश अत्मप्तधक प्रबालळारी शोता शं एलॊ इवक ळुब प्रबाल वे वुख वौबाग्म टक प्राप्तद्ऱ े शोकय जीलन क वाये वॊकिो का स्लत् प्तनलायण शोजाता शं । े Rs.550 वे Rs.8200 तक GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
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    48 नलम्फय 2012 दीऩालरी भं रक्ष्भी-गणेळ आयाधना का भशत्ल  प्तचॊतन जोळी बायतीम धाप्तभलक एलॊ वॊस्कृ प्ततक भान्मता के बालाथल: „वुयश्रेद्ष! भंने वफवे ऩशरे तुम्शायी ऩूजा टक शै , अनुळाय रक्ष्भीजी क वाथ श्री त्रलष्णु टक ऩूजा शोनी े अत् लत्व! तुभ वललऩूज्म तथा मोगीन्द्र शो जाओ।‟ चाटशए। टकन्तुॊ दीऩालरी ऩूजन भं भाॊ रक्ष्भी क वाथ े ब्रह्मलैलतल ऩुयाण भं शी एक अन्म प्रवॊगान्तगलत भाता गणेळजी टक ऩूजा क्मं टक जाती शं । ऩाललती ने गणेळ भटशभा का फखान कयते शुए ऩयळुयाभ वे धन टक दे ली रक्ष्भी शं जो धन, वभृत्रद्ध एलॊ ऐद्वमल कशा – प्रदान कयती शं । रेटकन त्रफना फुत्रद्ध क धन, वभृत्रद्ध एलॊ े त्लटद्रधॊ रषकोटिॊ च शन्तुॊ ळिो गणेद्वय्। ऐद्वमल व्मथल शं । इवक ऩीछे भुख्म कायण शं की बगलान श्री े गणेळ वभस्त त्रलघ्नं को िारने लारे शं , दमा एलॊ कृ ऩा के स्जतेस्न्द्रमाणाॊ प्रलयो नटश शस्न्त च भस्षकाभ ्।। भशावागय शं , एलॊ तीनो रोक क कल्माण शे तु बगलान गणऩप्तत े तेजवा कृ ष्णतुल्मोऽमॊ कृ ष्णाॊद्ळ गणेद्वय्। वफ प्रकाय वे मोग्म शं । वभस्त त्रलघ्न फाधाओॊ को दय कयने ू दे लाद्ळान्मे कृ ष्णकरा् ऩूजास्म ऩुयतस्तत्।। लारे गणेळ त्रलनामक शं । अत् फुत्रद्ध टक (ब्रह्मलैलतलऩु., गणऩप्ततख., 44। 26- प्राप्तद्ऱ क प्तरमे फुत्रद्ध औय त्रललेक े 27) क अप्तधऩप्तत दे लता गणेळ े का ऩूजन कयने का बालाथल: स्जतेस्न्द्रम त्रलधान शं । गणेळजी ऩुरूऴं भं श्रेद्ष गणेळ वभस्त प्तवत्रद्धमं को तुभभं जैवे राखं- दे ने लारे दे लता कयोिं जन्तुओॊ को भाना गमा शै । भाय िारने की क्मोटक वभस्त ळत्रि शै ; ऩयन्तु प्तवत्रद्धमाॉ बगलान गणेळ तुभने भक्खी ऩय बी भं लाव कयती शं । इव प्तरमे शाथ नशीॊ उठामा। रक्ष्भी जी क वाथ भं श्री े श्रीकृ ष्ण क अॊळ वे उत्ऩन्न े गणेळ जी टक आयाधना आलश्मक शं । शुआ लश गणेळ तेज भं श्रीकृ ष्ण के ब्रह्मलैलतलऩुयाण भं उल्रेख शं शी वभान शै । अन्म दे लता श्रीकृ ष्ण की कराएॉ शं । बगलान ् त्रलष्णु ने स्लमॊ गणेळ जी को लयदान टदमा टक इवीवे इवकी अग्रऩूजा शोती शै । वलालग्रे तल ऩूजा च भमा दत्ता वुयोत्तभ। प्तरॊगऩुयाण क अनुवाय (105। 15-27) े वललऩूज्मद्ळ मोगीन्द्रो बल लत्वेत्मुलाच तभ ्।। प्तळल ने अऩने ऩुत्र को आळीलालद टदमा टक जो तुम्शायी ऩूजा टकमे त्रफना ऩूजा ऩाठ, अनुद्षान इत्माटद ळुब कभं (गणऩप्ततखॊ. 13। 2) का अनुद्षान कये गा, उवका भॊगर बी अभॊगर भं ऩरयणत शो जामेगा। जो रोग पर की काभना वे ब्रह्मा, त्रलष्णु,
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    49 नलम्फय 2012 इन्द्र अथला अन्म दे लताओॊ की बी ऩूजा कयं गे, टकन्तु क वाथ वाथ भं भेयी ऩुत्री क वभान त्रप्रम रयस्ध्ध औय प्तवस्ध्ध जो े े तुम्शायी ऩूजा नशीॊ कयं गे, उन्शं तुभ त्रलघ्नं द्राया फाधा क ब्रह्मा जी टक ऩुत्रत्रमाॉ शं , उनवे गणेळजी का त्रललाश कयने का े ऩशुॉचाओगे। लचन दे ती शूॉ । मटद वम्ऩूणल त्रत्ररोकं भं जो व्मत्रि, श्री गणेळ जी टक ऩूजा नशीॊ कये गा लयन उनकी प्तनॊदा कये गा भं उनवे इव वबी कायण वे भाॊ रक्ष्भी क वाथ भं गणेळजी का े कोवं दय यशूॉगी । जफ बी भेयी ऩूजा शोगी उवक वाथ टशॊ ू े ऩूजन कयने का त्रलधान शं । रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क फाद भं उवे स्स्थय े गणेळ टक बी ऩूजा अलश्म शोगी। कयने शे तु फुत्रद्ध टक आलश्मकता शोती शं । रक्ष्भी क वाथ गणेळ क ऩूजन वे े े अन्म कथा: वॊफॊध भं अनेकं कथाएॊ प्रचप्तरत शं । प्राप्तचन कार भं एक वॊन्मावी कछ रोकत्रप्रम कथाएॊ मशा प्रस्तुत शं । ु ने दे ली रक्ष्भी को किी तऩस्मा द्राया ळास्त्रोि कथा: प्रवन्न कय क वभस्त वुख वुत्रलधा वे े त्रलष्णु धाभ भं बगलान त्रलष्णु एलॊ जीलन व्मतीत कयने का लयदान भाॊगा। भाता रक्ष्भी त्रलयाजभान शोकय आऩव भं रक्ष्भी तथास्तु कश कय अॊतध्मालन शो लातालराऩ कय यशे थे, फात-फात भं अशॊ गमीॊ। लयदान प्राप्तद्ऱ क फाद वॊन्मावी े क कायण रक्ष्भी जी फोर उठे टक भं े भॊत्र प्तवद्ध ऩन्ना गणेळ लशाॊ क याजदयफाय भं जाकय याजा क े े वबी रोक भं वफ वे अप्तधक ऩूजनीम एलॊ ऩाव ऩशुॊच कय एक झिक भं याजभुकि े ु वफवे श्रेद्ष शुॊ। रक्ष्भी जी को इव प्रकाय बगलान श्री गणेळ फुत्रद्ध औय प्तळषा के को नीचे प्तगया टदमा। वॊन्मावी का मश कायक ग्रश फुध क अप्तधऩप्तत दे लता े अऩनी अशॊ वे स्लमॊ टक प्रळॊवा कयते कामल दे ख कय याजा का चेशया गुस्वे वे शं । ऩन्ना गणेळ फुध क वकायात्भक े दे ख बगलान त्रलष्णु जी को अच्छा नशीॊ रार शो उठा। उवी षण याजा ने दे खा प्रबाल को फठाता शं एलॊ नकायात्भक रगा। उनका अशॊ दय कयने क प्तरए उन्शंने ू े ू टक याजभुकि वे एक त्रफच्छ फाशय ु प्रबाल को कभ कयता शं ।. ऩन्न कशा तुभ वलल वॊऩन शोते शुए बी आज तक प्तनकर यशा शं । मश दे ख याजा क भन े गणेळ क प्रबाल वे व्माऩाय औय धन े भाॉ का वुख प्राद्ऱ नशीॊ कय ऩाई। इव फात भं लृत्रद्ध भं लृत्रद्ध शोती शं । फच्चो टक भं वॊन्मावी क प्रप्तत श्रद्धा बाल जाग े को वुन कय रक्ष्भीजी को फशुत द्खी ु ऩढाई शे तु बी त्रलळेऴ पर प्रद शं गमा, याजाने वॊन्मावी को अऩना भॊत्री शोगई औय लो अऩनी ऩीिा वुनाॊने के ऩन्ना गणेळ इव क प्रबाल वे फच्चे े फनने क प्तरए आग्रश टकमा। वॊन्मावी े प्तरमे भाता ऩाललती क ऩाव गमीॊ औय उनवे े टक फुत्रद्ध कळाग्र ू शोकय उवके तो मशी चाशते थे। वॊन्मावी ने तुयॊत त्रलनती टक लो अऩने ऩुत्र काप्ततलकम े आत्भत्रलद्वाव भं बी त्रलळेऴ लृत्रद्ध शोती याजा का प्रस्ताल स्लीकाय कय प्तरमा। औय गणेळजी भं वे टकवे एक ऩुत्र को उनशं शं । भानप्तवक अळाॊप्तत को कभ कयने भं वॊन्मावी क ऩयाभळल वे याज कामल े दत्तक ऩुत्र क रूऩ भं प्रदान कय दं । े भदद कयता शं , व्मत्रि द्राया अलळोत्रऴत वुचारु रुऩ वे चरने रगा। शयी त्रलटकयण ळाॊती प्रदान कयती शं , रक्ष्भीजी टक ऩीिा दे ख कय ऩाललतीजी व्मत्रि क ळायीय क तॊत्र को प्तनमॊत्रत्रत े े एक टदन वॊन्मावी ने ने गणेळ जी को रक्ष्भीजी को दत्तक ऩुत्र के कयती शं । स्जगय, पपिे , जीब, े याजदयफाय भं उऩस्स्थत वफको फाशय रूऩ भं दे ने का स्लीकाय कय प्तरमा। भस्स्तष्क औय तॊत्रत्रका तॊत्र इत्माटद योग प्तनकर जाने को कशा। वॊन्मावी ऩय ऩाललतीजी वे गणेळ जी को ऩुत्र क रूऩ े भं वशामक शोते शं । कीभती ऩत्थय त्रलद्वाव यखते शुए याजा एलॊ अन्म वफ ऩाकय रक्ष्भीजी नं शत्रऴलत शोते शुले कशाॊ भयगज क फने शोते शं । े दयफायी लशाॊ वे प्तनकर कय एक भैदान भं अऩनी वबी प्तवत्रद्धमाॊ, वुख अऩने Rs.550 वे Rs.8200 तक भं ऩशुॊच गमे औय तफ याजभशर टक ऩुत्र गणेळ जी को प्रदान कयती शूॉ। इव
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    50 नलम्फय 2012 दीलायं ढश गमीॊ। मश द्रश्म दे ख कय याजा टक आस्था कटदमं टक बाॊप्तत कछ टदन गुजायने ऩय वॊन्मावी ै ु वॊन्मावी ऩय ऐवी जभी, टक वभस्त याजकामल उव वॊन्मावी का घभॊि उतय गमा। वॊन्मावीने ऩुन् दे ली रक्ष्भी टक क आदे ळ ऩय शोने रगा। वभम क वाथ वॊन्मावी को े े आयाधना ळुरू कय दी। रक्ष्भी ने स्लप्न भं उवे दळलन दे ते स्लमॊ ऩय घभॊि शोने रगा। याजभशर क बीतय बगलान े शुए फतामा, टक तुम्शायी एवी ददलळा गणेळ जी का अऩभान ु गणेळ टक एक भूप्ततल स्थात्रऩत थी। घभॊि भं चूय वॊन्मावी कयने टक लजश वे शुई शं । गणेळ फुत्रद्ध क दे लता शं , अत् े ने वेलकं को गणेळ भूप्ततल लशाॊ वे शिाने का आदे ळ टदमा, उनको नायाज कयने वे तुम्शायी फुत्रद्ध भ्रद्श शो गमी शं । अफ क्मंटक उवक त्रलचाय भं लश भूप्ततल याजऩरयवय टक ळोबा े वॊन्मावी ने ऩद्ळाताऩ कयते शुए गणेळ बगलान वे षभा त्रफगाि यशी थी। भाॊगी। अगरे टदन याजा ने स्लमॊ लशाॊ ऩशुॊच कय उवे भुि अगरे टदन वॊन्मावी ने याजा वे कशा टक लश कय टदमा औय ऩुन् भॊत्री ऩद ऩय फशार कय टदमा। पौयन अऩनी ऩोळाक उताय दं , क्मंटक उवभं नाग शै । याजा वॊन्मावी ने गणेळ टक भूप्ततल को ऩूलल स्थान ऩय स्थात्रऩत को वॊन्मावी ऩय अगाध त्रलद्वाव था। इवप्तरए, दयफारयमं कयला टदमा तथा उनक वाथ-वाथ रक्ष्भी टक ऩूजा ळुरू े टक ऩयलाश न कयते शुए, उन्शोनं अऩनी ऩोळाक उताय दी, टक, ताटक धन एलॊ फुत्रद्ध दोनं वाथ-वाथ यशं । भाना जाता ऩयॊ तु उवभं वे कोई नाग नशीॊ प्तनकरा। मश दे ख कय याजा शं , तबी वे दीलारी ऩय दे ली रक्ष्भी क वाथ गणेळ जी का े को वॊन्मावी ऩय फशुत गुस्वा आमा औय उवे कद भं यखने ै ऩूजन कयने टक प्रथा आयॊ ब शुई। का आदे ळ दे टदमा। भॊत्र प्तवद्ध स्पटिक श्री मॊत्र "श्री मॊत्र" वफवे भशत्लऩूणल एलॊ ळत्रिळारी मॊत्र शै । "श्री मॊत्र" को मॊत्र याज कशा जाता शै क्मोटक मश अत्मन्त ळुब फ़रदमी मॊत्र शै । जो न कलर दवये मन्त्रो वे अप्तधक वे अप्तधक राब दे ने भे वभथल शै एलॊ वॊवाय क शय व्मत्रि क प्तरए पामदे भॊद े ू े े वात्रफत शोता शै । ऩूणल प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि "श्री मॊत्र" स्जव व्मत्रि क घय भे शोता शै उवक प्तरमे "श्री मॊत्र" े े अत्मन्त फ़रदामी प्तवद्ध शोता शै उवक दळलन भात्र वे अन-प्तगनत राब एलॊ वुख की प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । "श्री मॊत्र" भे वभाई े अटद्रतीम एलॊ अद्रश्म ळत्रि भनुष्म की वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे वभथल शोप्तत शै । स्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय प्तनयाळा दय शोकय लश भनुष्म अवफ़रता वे वफ़रता टक औय प्तनयन्तय गप्तत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे ू वभस्त बौप्ततक वुखो टक प्राप्तद्ऱ शोप्तत शै । "श्री मॊत्र" भनुष्म जीलन भं उत्ऩन्न शोने लारी वभस्मा-फाधा एलॊ नकायात्भक उजाल को दय कय वकायत्भक उजाल का प्तनभालण कयने भे वभथल शै । "श्री मॊत्र" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय क स्थान ऩय ू े स्थात्रऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फस्न्धत ऩये ळाप्तन भे न्मुनता आप्तत शै ल वुख-वभृत्रद्ध, ळाॊप्तत एलॊ ऐद्वमल टक प्रप्तद्ऱ शोती शै । गुरुत्ल कामालरम भे "श्रीमॊत्र" 12 ग्राभ वे 75 ग्राभ तक टक वाइज भे उप्रब्ध शै भूल्म:- प्रप्तत ग्राभ Rs. 10.50 वे Rs.28.00 GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com
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    51 नलम्फय 2012 वलल ऐद्वमल प्रद-रक्ष्भी-कलच श्री भधुवूदन उलाच:- ।।इप्तत श्रीब्रह्मलैलते इन्द्रभ ् प्रप्तत शरयणोऩटदद्शभ ् रक्ष्भीकलचभ ्।। गृशाण कलचभ ् ळक्र वललद्खत्रलनाळनभ ्। ु (गणऩप्ततखण्ि २२।५-१७) ऩयभैद्वमलजनक वललळत्रुत्रलभदल नभ ्।। ॊ बालाथल्- भधुवूदन जी फोरे शं इन्द्र ! (रक्ष्भी-प्राप्तद्ऱ क प्तरमे) े ब्रह्मणे च ऩुया दत्तभ ् वॊवाये च जरप्रुते। तुभ मश रक्ष्भीकलच ग्रशण कयो। मश वभस्त द्खं का ु मद् धृत्ला जगताॊ श्रेद्ष् वलैद्वमलमुतो त्रलप्तध्।। त्रलनाळक, ऩयभ ऐद्वमल का उत्ऩादक औय वम्ऩूणल ळत्रुओॊ का फबूलुभनल् वले वलैद्वमलमतो मत्। ल ु भदलन कयने लारा शं । ऩूलकार भं जफ वाया वॊवाय जरभग्न शो ल वलैद्वमलप्रदस्मास्म कलचस्म ऋत्रऴत्रललप्तध।। गमा था, उव वभम भैनं इवे ब्रह्मा को टदमा था। स्जवे धायण ऩस्ङ्िश्छन्दद्ळ वा दे ली स्लम ऩद्मारमा वुय। कयक ब्रह्मा त्रत्ररोकी भं श्रेद्ष औय वम्ऩूणल ऐद्वमं क बागी शुए थे। े े प्तवद्धै द्वमलजऩेष्लेल त्रलप्तनमोग् प्रकीप्ततलत।। दे लयाज, इव वलैद्वमलप्रद कलच क ब्रह्मा ऋत्रऴ शं , ऩस्ङ्ि छन्द शं , े मद् धृत्ला कलचॊ रोक् वललत्र त्रलजमी बलेत ्।। स्लमॊ ऩद्मारमा रक्ष्भी दे ली शं औय प्तवद्धै द्वमल क जऩं भं इवका े भूर कलच ऩाठ: त्रलप्तनमोग कशा गमा शं । इव कलच क धायण कयने वे रोग वललत्र े भस्तकभ ् ऩातु भे ऩद्मा कण्ठॊ ऩातु शरयत्रप्रमा। त्रलजमी शोते शं । नाप्तवकाभ ् ऩातु भे रक्ष्भी् कभरा ऩातु रोचनभ ्।। . ऩद्मालती दे ली भेये भस्तक की यषा कयो। शरयत्रप्रमा कण्ठ की यषा कळान ् कळलकान्ता च कऩारभ ् कभरारमा। े े कयो। रक्ष्भी नाप्तवका की यषा कयो। कभरा नेत्र की यषा कयो। जगत्प्रवूगण्िमुग्भॊ स्कन्धॊ वम्ऩत्प्रदा वदा।। ल कळलकान्ता कळं की, कभरारमा कऩार की, जगज्जननी दोनं े े ॐ श्रीॊ कभरलाप्तवन्मै स्लाशा ऩृद्षॊ वदालतु। कऩोरं की औय वम्ऩत्प्रदा वदा स्कन्ध की यषा कयो। ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै स्लाशा लष् वदालतु।। ॐ श्रीॊ कभरलाप्तवन्मै स्लाशा-भेये ऩृद्षॊ बाग का वदा ऩारन कयो। ऩातु श्रीभलभ ककारॊ फाशुमुग्भॊ च ते नभ्।। ॊ ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै स्लाशा - लष्स्थर को वदा वुयस्षत यखे। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्म्मै नभ् ऩादौ ऩातु भे वॊततभ ् प्तचयभ ्। श्री दे ली को नभस्काय शं आऩ भेये ककारॊ तथा दोनं बुजाओॊ को ॊ ॐ ह्रीॊ श्रीॊ नभ् ऩद्मामै स्लाशा ऩातु प्तनतम्फकभ ्।। फचामे। ॐ श्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा वलांगॊ ऩातु भे वदा। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्म्मै नभ् - प्तचयकार तक भेये ऩैयं का ऩारन कयो। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा भाॊ ऩातु वललत्।। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ नभ् ऩद्मामै स्लाशा - प्तनतम्फ बाग की यषा कयो। इव भॊत्र क ऩाठ वे भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा प्राद्ऱ शोती शै । े ॐ श्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा - भेये वलांग की वदा यषा कयो। परश्रुप्तत: ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा-वफ ओय वे वदा भेया ऩारन कयो। इप्तत ते कप्तथतभ ् लत्व वललवम्ऩत्कयभ ् ऩयभ ्। लत्व, इव प्रकाय‍ भंने‍ तुभवे‍ इव‍ वलैद्वमलप्रद‍ नाभक‍ ऩयभोत्कृ द्श‍ वलैद्वमलप्रदभ ् नाभ कलचभ ् ऩयभाद्भतभ ्।। ु कलच‍ का‍ लणलन‍ कय‍ टदमा।‍ मश ऩयभ‍ अद्भत‍ कलच‍ वम्ऩूण‍ ु ल गुरुभभ्मच्मल त्रलप्तधलत ् कलचभ ् ळयमेत्तु म्। वम्ऩत्रत्तमं‍को‍दे ने‍ लारा‍शं ।‍जो‍भनुष्म‍त्रलप्तधऩूलक‍गुरु टक अचलना‍ ल कण्ठे ला दस्षणे फाॊशौ व वललत्रलजमी बलेत ्।। कयक‍इव‍कलच‍को‍गरे‍ भं‍ अथला‍दाटशनी‍बुजा‍ऩय‍धायण‍कयता‍ े भशारक्ष्भीगृशभ ् तस्म न जशाप्तत कदाचन। ल शं , लश‍वफको‍जीतने लारा‍शो‍जाता‍शं ।‍भशारक्ष्भी‍कबी‍उवक‍घय‍ े तस्म छामेल वततभ ् वा च जन्भप्तन जन्भप्तन।। का‍त्माग‍नशीॊ‍कयती; फस्ल्क‍प्रत्मेक‍जन्भ भं‍छामा‍की‍बाॉप्तत‍वदा‍ इदभ ् कलचभसात्ला बजेल्रक्ष्भीॊ वुभन्दधी्। उवक‍वाथ‍रगी‍यशती‍शं ।‍जो‍भन्दफुत्रद्ध‍इव‍कलच‍को‍त्रफना‍जाने‍ े ळतरषप्रजद्ऱोऽत्रऩ न भन्त्र् प्तवत्रद्धदामक्।। शी रक्ष्भी‍ की‍ बत्रि‍ कयता‍ शं , उवे‍ एक‍ कयोि‍ जऩ‍ कयने‍ ऩय‍ बी‍ भन्त्र‍प्तवत्रद्धदामक‍नशीॊ शोता।
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    52 नलम्फय 2012 भशारक्ष्भी कलच नायामण उलाच ऩद्मा भाॊ दस्षणे ऩातु नैऋत्माॊ श्रीशरयत्रप्रमा॥१०॥ ल वलल वम्ऩत्प्रदस्मास्म कलचस्म प्रजाऩप्तत्। ऩद्मारमा ऩस्द्ळभे भाॊ लामव्माॊ ऩातु श्री् स्लमभ ्। ऋत्रऴश्छन्दद्ळ फृशती दे ली ऩद्मारमा स्लमभ ्॥१॥ उत्तये कभरा ऩातु ऐळान्माॊ प्तवन्धुकन्मका॥११॥ धभालथकाभभोषेऴु त्रलप्तनमोग् प्रकीप्ततलत्। ल नायामणेळी ऩातूध्ललभधो त्रलष्णुत्रप्रमालतु। ऩुण्मफीजॊ च भशताॊ कलचॊ ऩयभाद्भतभ ्॥२॥ ु वॊततॊ वललत् ऩातु त्रलष्णुप्राणाप्तधका भभ॥१२॥ ॐ ह्रीॊ कभरलाप्तवन्मै स्लाशा भे ऩातु भस्तकभ ्। इप्तत ते कप्तथतॊ लत्व वललभन्त्रौघत्रलग्रशभ ्। श्रीॊ भे ऩातु कऩारॊ च रोचने श्रीॊ प्तश्रमै नभ्॥३॥ वलैद्वमलप्रदॊ नाभ कलचॊ ऩयभाद्भतभ ्॥१३॥ ु ॐ श्रीॊ प्तश्रमै स्लाशे प्तत च कणलमुग्भॊ वदालतु। वुलणलऩललतॊ दत्त्ला भेरुतुल्मॊ टद्रजातमे। ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा भे ऩातु मत ् परॊ रबते धभॉ कलचेन ततोऽप्तधकभ ्॥१४॥ नाप्तवकाभ ्॥४॥ गुरुभभ्मच्मल त्रलप्तधलत ् कलचॊ धायमेत ् तु म्। ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै च स्लाशा दन्तॊ वदालतु। कण्ठे ला दस्षणे लाशौ व श्रीभान ् प्रप्ततजन्भप्तन॥१५॥ ॐ श्रीॊ कृ ष्णत्रप्रमामै च दन्तयन्ध्रॊ वदालतु॥५॥ अस्स्त रक्ष्भीगृशे तस्म प्तनद्ळरा ळतऩूरुऴभ ्। ल ॐ श्रीॊ नायामणेळामै भभ कण्ठॊ वदालतु। दे लेन्द्रै द्ळावुयेन्द्रै द्ळ वोऽत्रध्मो प्तनस्द्ळतॊ बलेत ्॥१६॥ ॐ श्रीॊ कळलकान्तामै भभ स्कन्धॊ वदालतु॥६॥ े व वललऩुण्मलान ् धीभान ् वललमसेऴु दीस्षत्। ॐ श्रीॊ ऩद्मप्तनलाप्तवन्मै स्लाशा नाप्तबॊ वदालतु। व स्नात् वललतीथेऴु मस्मेदॊ कलचॊ गरे॥१७॥ ॐ ह्रीॊ श्रीॊ वॊवायभात्रे भभ लष् वदालतु॥७॥ मस्भै कस्भै न दातव्मॊ रोबभोशबमैयत्रऩ। ॐ श्रीॊ श्रीॊ कृ ष्णकान्तामै स्लाशा ऩृद्षॊ वदालतु। गुरुबिाम प्तळष्माम ळयणाम प्रकाळमेत ्॥१८॥ ॐ ह्रीॊ श्रीॊ प्तश्रमै स्लाशा भभ शस्तौ वदालतु॥८॥ इदॊ कलचभसात्ला जऩेल्रक्ष्भीॊ जगत्प्वूभ ्। ॐ श्रीॊ प्तनलावकान्तामै भभ ऩादौ वदालतु। कोटिवॊख्मॊ प्रजद्ऱोऽत्रऩ न भन्त्र् वोत्रद्धदामक्॥१९॥ ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ प्तश्रमै स्लाशा वलांगॊ भे वदालतु॥९॥ (गणऩप्ततखण्ि ३८।६४-८२) प्राच्माॊ ऩातु भशारक्ष्भीयाग्नेय्माॊ कभरारमा। नलयत्न जटित श्री मॊत्र ळास्त्र लचन क अनुवाय ळुद्ध वुलणल मा यजत भं प्तनप्तभलत श्री मॊत्र क चायं औय मटद नलयत्न जिला ने ऩय मश नलयत्न े े जटित श्री मॊत्र कशराता शं । वबी यत्नो को उवक प्तनस्द्ळत स्थान ऩय जि कय रॉकि क रूऩ भं धायण कयने वे े े े व्मत्रि को अनॊत एद्वमल एलॊ रक्ष्भी की प्राप्तद्ऱ शोती शं । व्मत्रि को एवा आबाव शोता शं जैवे भाॊ रक्ष्भी उवक वाथ े शं । नलग्रश को श्री मॊत्र क वाथ रगाने वे ग्रशं की अळुब दळा का धायण कयने लारे व्मत्रि ऩय प्रबाल नशीॊ शोता े शं । गरे भं शोने क कायण मॊत्र ऩत्रलत्र यशता शं एलॊ स्नान कयते वभम इव मॊत्र ऩय स्ऩळल कय जो जर त्रफॊद ु ळयीय े को रगते शं , लश गॊगा जर क वभान ऩत्रलत्र शोता शं । इव प्तरमे इवे वफवे तेजस्ली एलॊ परदाप्तम कशजाता शं । जैवे े अभृत वे उत्तभ कोई औऴप्तध नशीॊ, उवी प्रकाय रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क प्तरमे श्री मॊत्र वे उत्तभ कोई मॊत्र वॊवाय भं नशीॊ शं े एवा ळास्त्रोि लचन शं । इव प्रकाय क नलयत्न जटित श्री मॊत्र गुरूत्ल कामालरम द्राया ळुब भुशूतल भं प्राण प्रप्ततत्रद्षत े कयक फनालाए जाते शं । Rs: 2350, 2800, 3250, 3700, 4600, 5500 वे 10,900 तक े
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    53 नलम्फय 2012 भशारक्ष्भी स्तुप्तत नभस्तेस्तु भशाभामे श्री ऩीठे वुयऩूस्जते। भशारक्ष्भी तुम्शं प्रणाभ शं ॥2॥ वफ कछ जानने लारी, ु ळङ्खचक्रगदाशस्ते भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥१॥ वफको लय दे ने लारी, वभस्त दद्शं को बम दे ने लारी एलॊ ु नभस्ते गरुिारूढे कोरावुय बमङ्करय। वफक द:खं को दय कयने लारी, शे दे त्रल भशारक्ष्भी तुम्शं े ु ू वललऩाऩशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥२॥ नभस्काय शं ॥3॥ प्तवत्रद्ध, फुत्रद्ध, बोग औय भोष दे ने लारी शे वललसे वलललयदे वललदद्श बमङ्करय। ु भॊत्रऩूत बगलप्तत भशारक्ष्भी तुम्शं वदा प्राभ शं ॥4॥ शे वललद:खशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥३॥ ु दे त्रल! शे आटद-अन्त-यटशत आटदळत्रि ! शे भशे द्वरय! शे प्तवत्रद्धफुत्रद्धप्रदे दे त्रल बुत्रि भुत्रि प्रदाप्तमप्तन। मोग वे प्रकि शुई बगलप्तत भशारक्ष्भी तुम्शं नभस्काय भन्त्रऩूते वदा दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥४॥ शं ॥5॥ शे दे त्रल! तुभ स्थूर, वूक्ष्भ एलॊ भशायौद्ररूत्रऩणी शो, आद्यन्तयटशते दे त्रल आद्यळत्रि भशे द्वरय। भशाळत्रि शो, भशोदया शो औय फिे -फिे ऩाऩं का नाळ मोगजे मोगवम्बूते भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥५॥ कयने लारी शो। शे दे त्रल भशारक्ष्भी तुम्शं नभस्काय शं ॥6॥ स्थूरवूक्ष्भभशायौद्रे भशाळत्रि भशोदये । शे कभर क आवन ऩय त्रलयाजभान ऩयब्रह्मस्लरूत्रऩणी दे त्रल! े भशाऩाऩशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥६॥ शे ऩयभेद्वरय! शे जगदम्फ! शे भशारक्ष्भी तुम्शं भेया प्रणाभ ऩद्मावनस्स्थते दे त्रल ऩयब्रह्म स्लरूत्रऩस्ण। शं ॥7॥ शे दे त्रल तुभ द्वेत लस्त्र धायण कयने लारी औय ऩयभेप्तळ जगन्भत ् भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥७॥ नाना प्रकाय क आबूऴणं वे त्रलबूत्रऴता शो। वम्ऩूणल जगत ् े द्वेताम्फयधये दे त्रल नानारङ्कायबूत्रऴते। भं व्माद्ऱ एलॊ अस्खर रोक को जन्भ दे ने लारी शो। शे जगस्त्व ्थते जगन्भत ् भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥८॥ भशारक्ष्भी तुम्शं भेया प्रणाभ शं ॥8॥ जो भनुष्म बत्रि भशारक्ष्म्मद्शक स्तोत्रॊ म: ऩठे द्भत्रि भान्नय्॥ ॊ मुि शोकय इव भशारक्ष्म्मद्शक स्तोत्र का वदा ऩाठ कयता वललप्तवत्रद्धभलाऩनेप्तत याज्मभ ् प्राऩनेप्तत वललदा॥९॥ शं , लश वायी प्तवत्रद्धमं औय याज्मलैबल को प्राद्ऱ कय वकता एककारे ऩठे स्न्नत्मभ ् भशाऩाऩत्रलनाळनभ ्। शं ॥9॥ जो प्रप्ततटदन एक वभम ऩाठ कयता शं , उवक फिे - े टद्रकारॊ म: ऩठे स्न्नत्मभ ् धनधान्मवभस्न्लत॥१०॥ फिे ऩाऩं का नाळ शो जाता शं । जो दो वभम ऩाठ कयता त्रत्रकारॊ म: ऩठे स्न्नत्मभ ् भशाळत्रुत्रलनाळनभ ्। शं , लश धन-धान्म वे वम्ऩन्न शोता शं ॥10॥ जो प्रप्ततटदन भशारक्ष्भीबललेस्न्नत्भ ् प्रवन्ना लयदा ळुबा ॥११॥ तीन कार ऩाठ कयता शं उवक फिे -फिे ळत्रुओॊ का नाळ े || इप्तत भशारक्ष्भी स्तुप्तत वम्ऩूणल || शो जाता शं औय उवक ऊऩय कल्माणकारयणी लयदाप्तमनी े भशारक्ष्भी वदा शी प्रवन्न शोती शं ॥11॥ बालाथल:- इन्द्र फोरे- श्रीऩीठऩय स्स्थत औय दे लताओॊ वे रक्ष्भी जी क इव स्तोत्र की यचना कयने लारे दे लयाज े ऩूस्जत शोने लारी शे भशाभामे। तुम्शं नभस्काय शं । शाथ इन्द्र शं । भं ळङ्ख, चक्र औय गदा धायण कयने लारी शे भशारक्ष्भी उऩयोि स्तुप्तत का प्रप्ततटदन तीन कार ऩाठ कयता तुम्शं प्रणाभ शं ॥1॥ गरुिऩय आरूढ शो कोरावुय को बम शै , ळत्रुओॊ का नाळ शोता शं एलॊ उवे जीलन भे वबी दे ने लारी औय वभस्त ऩाऩं को शयने लारी शे बगलप्तत प्रकाय क वुखो की प्राप्तद्ऱ शोती शे । े वललजन लळीकयण कलच भूल्म भात्र: Rs.1450
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    54 नलम्फय 2012 श्री कनकधाया स्तोत्र अॊगशये ऩुरकबूऴण भाश्रमन्ती बृगाॊगनैल भुकराबयणॊ तभारभ। ु अॊगीकृ तास्खर त्रलबूप्ततयऩाॊगरीरा भाॊगल्मदास्तु भभ भॊगरदे लतामा:॥1॥ भुग्ध्मा भुशुत्रललदधती लदनै भुयायै : प्रेभत्रऩाप्रस्णटशताप्तन गतागताप्तन। भारा दृळोभलधकय त्रलभशोत्ऩरे मा वा भै प्तश्रमॊ टदळतु वागय ु वम्बलामा:॥2॥ त्रलद्वाभये न्द्रऩदत्रलभ्रभदानदषभानन्द शे तु यप्तधक भधुत्रलटद्रऴोत्रऩ। ॊ ईऴस्न्नऴीदतु भप्तम षणभीषणाद्धल प्तभन्दोलयोदय वशोदयप्तभस्न्दयाम:॥3॥ आभीप्तरताषभप्तधगम्म भुदा भुकन्दभानन्दकन्दभ ु प्तनभेऴभनॊगतन्त्रभ ्। आककय े स्स्थत कनी प्तनकऩक्ष्भ नेत्रॊ बूत्मै बलेन्भभ बुजॊगयामाॊगनामा:॥4॥ फाह्यन्तये भधुस्जत: प्तश्रतकौस्तुबै मा शायालरील शरयनीरभमी त्रलबाप्तत। काभप्रदा बगलतो त्रऩ किाषभारा कल्माण बालशतु भे कभरारमामा:॥5॥ काराम्फुदाप्तररप्तरतोयप्तव किबाये धालयाधये ै स्पयप्तत मा तटिदॊ गनेल ्। ु भातु: वभस्त जगताॊ भशनीम भूप्ततलबद्रास्ण भे टदळतु बागललनन्दनामा:॥6॥ प्राद्ऱॊ ऩदॊ प्रथभत: टकर मत्प्रबालान्भाॊगल्म बास्ज: भधुभामप्तन भन्भथेन। भध्माऩतेत टदश भन्थय भीषणाद्धल भन्दारवॊ च भकयारमकन्मकामा:॥7॥ दद्याद दमानुऩलनो द्रत्रलणाम्फुधायाभ स्स्भबटकचन त्रलशॊ ग प्तळळौ त्रलऴण्ण। दष्कभलधभलभऩनीम प्तचयाम दयॊ नायामण प्रणप्तमनी ॊ ु ू नमनाम्फुलाश:॥8॥ इद्शा त्रलप्तळद्शभतमो त्रऩ मथा ममाद्रलदृद्शमा त्रत्रत्रलद्शऩऩदॊ वुरबॊ रबॊते। दृत्रद्श: प्रशूद्शकभरोदय दीप्तद्ऱ रयद्शाॊ ऩुत्रद्श कृ ऴीद्श भभ ऩुष्कय त्रलद्शयामा:॥9॥ गीदे लतैप्तत गरुिध्लज बाप्तभनीप्तत ळाकम्बयीप्तत ळप्तळळेखय लल्रबेप्तत। वृत्रद्श स्स्थप्तत प्ररम कप्तरऴु वॊस्स्थतामै तस्मै े नभस्स्त्र बुलनैक गुयोस्तरूण्मै ॥10॥ श्रुत्मै नभोस्तु ळुबकभलपर प्रवूत्मै यत्मै नभोस्तु यभणीम गुणाणललामै। ळिमै नभोस्तु ळतऩात्र प्तनकतानामै ऩुद्शमै नभोस्तु ऩुरूऴोत्तभ लल्रबामै ॥11॥ नभोस्तु नारीक प्तनबाननामै े नभोस्तु दग्धौदप्तध ु जन्भ बूत्मै । नभोस्तु वोभाभृत वोदयामै नभोस्तु नायामण लल्रबामै ॥12॥ वम्ऩतकयास्ण वकरेस्न्द्रम नन्दाप्तन वाम्राज्मदान त्रलबलाप्तन वयोरूशास्ष। त्ल द्रॊ दनाप्तन दरयता शयणाद्यताप्तन भाभेल भातय प्तनळॊ करमन्तु नान्मभ ् ॥13॥ मत्किाषवभुऩावना त्रलप्तध: वेलकस्म ु कराथल वम्ऩद:। वॊतनोप्तत लचनाॊगभानवॊवत्लाॊ भुयारयरृदमेद्वयीॊ बजे ॥14॥ वयप्तवजप्तनरमे वयोज शस्ते धलरभाॊळकगन्धभाल्मळोबे। बगलप्तत शरयलल्रबे भनोसे त्रत्रबुलनबूप्ततकरय ु प्रवीद भह्यभ ् ॥15॥ दस्ग्धस्स्तप्तभ:कनकबभुखा ल वृत्रद्शस्ललालटशनी त्रलभरचारू ॊु जर प्रुताॊगीभ। प्रातनलभाप्तभ जगताॊ जननीभळेऴ रोकाप्तधनाथ गृटशणी भभृतास्ब्धऩुत्रीभ ् ॥16॥ कभरे कभराषलल्रबे त्लॊ करुणाऩूयतयाॊ गतैयऩािॊ गै:। अलरोकम भाभ टकचनानाॊ प्रथभॊ ऩात्रभकृ त्रत्रभॊ दमामा : ॊ ॥17॥ स्तुलस्न्त मे स्तुप्ततप्तबय बूप्तभयन्लशॊ त्रमीभमीॊ त्रत्रबुलनभातयॊ यभाभ ्। गुणाप्तधका गुरुतयबाग्मबाप्तगनो बलस्न्त ते फुधबात्रलतामा: ॥18॥ इप्तत श्री कनकधाया स्तोत्रॊ वम्ऩूणभ ल
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    55 नलम्फय 2012 वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच स्जव व्मत्रि को राख प्रमत्न औय ऩरयश्रभ कयने क फादबी उवे भनोलाॊप्तछत वपरतामे एलॊ े टकमे गमे कामल भं प्तवत्रद्ध (राब) प्राद्ऱ नशीॊ शोती, उव व्मत्रि को वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच अलश्म धायण कयना चाटशमे। कलच क प्रभुख राब: वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच क द्राया वुख वभृत्रद्ध औय नल ग्रशं क े े े नकायात्भक प्रबाल को ळाॊत कय धायण कयता व्मत्रि क जीलन वे वलल प्रकाय क द:ख-दारयद्र का े े ु नाळ शो कय वुख-वौबाग्म एलॊ उन्नप्तत प्राप्तद्ऱ शोकय जीलन भे वप्तब प्रकाय क ळुब कामल प्तवद्ध शोते े शं । स्जवे धायण कयने वे व्मत्रि मटद व्मलवाम कयता शोतो कायोफाय भे लृत्रद्ध शोप्तत शं औय मटद नौकयी कयता शोतो उवभे उन्नप्तत शोती शं ।  वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच क वाथ भं वललजन लळीकयण कलच क प्तभरे शोने की लजश वे धायण े े कताल की फात का दवये व्मत्रिओ ऩय प्रबाल फना यशता शं । ू  वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच क वाथ भं अद्श रक्ष्भी कलच क प्तभरे शोने की लजश वे व्मत्रि ऩय वदा े े भाॊ भशा रक्ष्भी की कृ ऩा एलॊ आळीलालद फना यशता शं । स्जस्वे भाॊ रक्ष्भी क अद्श रुऩ (१)- े आटद रक्ष्भी, (२)-धान्म रक्ष्भी, (३)- धैमल रक्ष्भी, (४)-गज रक्ष्भी, (५)-वॊतान रक्ष्भी, (६)- त्रलजम रक्ष्भी, (७)-त्रलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो का अळीलालद प्राद्ऱ शोता शं ।  वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच क वाथ भं तॊत्र यषा कलच क प्तभरे शोने की लजश वे ताॊत्रत्रक फाधाए दय े े ू शोती शं , वाथ शी नकायात्भक ळत्रिमो का कोइ कप्रबाल धायण कताल व्मत्रि ऩय नशीॊ शोता। इव ु कलच क प्रबाल वे इऴाल-द्रे ऴ यखने लारे व्मत्रिओ द्राया शोने लारे दद्श प्रबालो वे यषा शोती शं । े ु  वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच क वाथ भं ळत्रु त्रलजम कलच क प्तभरे शोने की लजश वे ळत्रु वे े े वॊफॊप्तधत वभस्त ऩये ळाप्तनओ वे स्लत् शी छिकाया प्तभर जाता शं । कलच क प्रबाल वे ळत्रु धायण ु े कताल व्मत्रि का चाशकय कछ नशी त्रफगाि वकते। ु अन्म कलच क फाये भे अप्तधक जानकायी क प्तरमे कामालरम भं वॊऩक कये : े े ल टकवी व्मत्रि त्रलळेऴ को वलल कामल प्तवत्रद्ध कलच दे ने नशी दे ना का अॊप्ततभ प्तनणलम शभाये ऩाव वुयस्षत शं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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    56 नलम्फय 2012 दीऩालरी वे जुिी रक्ष्भी कथा बायतीम वॊस्कृ प्तत भं दीऩालरी क त्मोशाय टक फिी े रेटकन कटिमा क स्थान ऩय त्रलळारभशर खिा था। स्जवभं ु े रोक त्रप्रम कथा प्रचप्तरत शं । चायं ओय धन-धान्म, यत्न-जेलयात इत्माटद त्रफखये शुए थे। कथा: एक फाय काप्ततलक भाव की अभालव को रक्ष्भीजी ऩृर्थली एवी भान्मता शं टक तबी वे काप्ततलक अभालव भ्रभण ऩय प्तनकरीॊ। अभालव टक कारी छामा क कायण ऩृर्थली े (दीऩालरी)टक यात को दीऩ जराने की प्रथा चरी आयशी शं । क चायं ओय अॊधकाय व्माद्ऱ था। स्जव कायण दे ली रक्ष्भी े दीऩालरी क यात्री कार भं रोग द्राय खोरकय रक्ष्भीदे ली क े े यास्ता बूर गईं। रक्ष्भी जी नी प्तनद्ळम टकमा टक यात्रत्र का प्रशय आगभन टक प्रतीषा कयने टक ऩयॊ ऩया चरी आयशी शं । ले भृत्मुरोक भं व्मतीत कय रंगी औय वूमोदम क ऩद्ळात ऩुन् े क्मोकी रोगो का तत्ऩमल मश शं टक भाॉ रक्ष्भी दे ली फैकठधाभ रौि जाएॉगी, ऩयॊ तु रक्ष्भी जी ने ऩामा टक ऩृर्थली ऩय ुॊ स्जव प्रकाय उव लृद्धा ऩय प्रवन्न शुईं उवी प्रकाय वफ ऩय वबी रोग अऩने-अऩने घयं भं द्राय फॊद कय वो यशे शं । प्रवन्न शं। तबी अॊधकाय वे बये ऩृर्थली रोक भं उन्शं एक द्राय कथा वाय: दीऩालरी टक यात भात्र दीऩ जराने औय द्राय खुरे खुरा टदखा स्जवभं एक दीऩक टक ज्मोप्तत टिभटिभा यशी थी। यखने वे रक्ष्भी जी घय भं प्तनलाव नशीॊ कयती! रक्ष्भी जी उव प्रकाळ टक ओय ऩशुॊच कय लशाॉ उन्शंने एक लृद्ध रक्ष्भी जी त्रलश्राभ कयती शं । क्मंटक दे ली रक्ष्भी तो भटशरा को चयखा चराते दे खा। लृद्ध भटशरा वे यात्रत्र त्रलश्राभ चॊचर शं । लश एक स्थान ऩय अस्स्थय नशीॊ यशती। अऩना की अनुभप्तत भाॉग कय रक्ष्भी जी फुटढ़मा की कटिमा भं रुकीॊ। ु आप्तळऴ दे कय चरीजाती शं । स्जवक पर स्लरुऩ आने लारे लऴल े लृ ्द्ध भटशरा ने रक्ष्भी जी को त्रलश्राभ क प्तरमे त्रफस्तय े बल भं भाॊ रक्ष्भी क बि को टकवी प्रकाय क द्ख, दरयद्रता े े ु प्रदान कय ऩुन: अऩने कामल भं व्मस्त शो गई। चयखा एलॊ आप्तथलक वॊकि का वाभना नशीॊ कयना ऩिता। चराते-चराते लृद्धा की आॉख रग गई। दवये टदन उठने ऩय ् ू लृद्ध भटशरा ने ऩामा टक अप्ततप्तथ भटशरा लशाॊ वे जा चुकी शं *** ऩप्तत-ऩत्नी भं करश प्तनलायण शे तु मटद ऩरयलायं भं वुख-वुत्रलधा क वभस्त वाधान शोते शुए बी छोिी-छोिी फातो भं ऩप्तत-ऩत्नी क त्रफच भे करश े े शोता यशता शं , तो घय क स्जतने वदस्म शो उन वफक नाभ वे गुरुत्ल कामालरत द्राया ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान े े वे भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि लळीकयण कलच एलॊ गृश करश नाळक टिब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं त्रफना टकवी ऩूजा, त्रलप्तध-त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ भॊत्र प्तवद्ध ऩप्तत लळीकयण मा ऩत्नी लळीकयण एलॊ गृश करश नाळक टिब्फी फनलाना चाशते शं , तो वॊऩक आऩ ल कय वकते शं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    57 नलम्फय 2012 धनतेयव टक अनोखी कथा  प्तचॊतन जोळी बायत भं धनतेयव ऩलल वे वॊफॊप्तघत रोकत्रप्रम कथा योळनी की लजश वे उनकी आॊखं चुप्तधमा गईं। इव कायण ॊ प्रचप्तरत शै । ऩुयाने जभाने भं एक याजा टशभ शुए। उनके वाॊऩ दवया यास्ता खोजने रगा औय यं गते शुए उव जगश ू मशाॊ ऩुत्र शुआ, तो उवकी जन्भ-किरी फनलाई गई। ुॊ ऩशुॊच गमा, जशाॊ वोने तथा चाॊदी क प्तवक्क यखे शुए थे। े े ज्मोप्ततत्रऴमं ने किरी का त्रलद्ऴेऴण कय क कशा टक ुॊ े िवने का भौका न प्तभरता दे ख, त्रलऴधय बी लशीॊ किरी ुॊ याजकभाय अऩनी ळादी क चौथे टदन वाॊऩ क कािने ु े े रगाकय फैठ गमा औय याजकभायी क गाने वुनने ु े वे भय जाएगा। इव ऩय याजा प्तचॊप्ततत यशने रगा। इवी फीच वूमल दे ल ने दस्तक दी, रगे। याजकभाय की उम्र 16 वार की शुई, तो ु मानी वुफश शो गई। मभ दे लता लाऩव उवकी ळादी एक वुॊदय, वुळीर औय जा चुक थे। इव तयश याजकभायी ने े ु वभझदाय याजकभायी वे कय दी गई। ु अऩनी ऩप्तत को भौत क ऩॊजे भं े याजकभायी भाॊ रक्ष्भी की ऩयभ बि ु ु ऩशुॊचने वे ऩशरे शी छिा प्तरमा। मश थीॊ। याजकभायी को बी अऩने ऩप्तत ु घिना स्जव टदन घिी थी, लश ऩय आने लारी त्रलऩत्रत्त क त्रलऴम भं े धनतेयव का टदन था, इवप्तरए ऩता चर गमा। इव टदन को 'मभदीऩदान' बी कशते शं । याजकभायी कापी दृढ़ इच्छाळत्रि ु इव टदन ऩूयी यात घय क फाशय े लारी थीॊ। उवने चौथे टदन का दीऩ जराकय यखते शं ताटक इॊ तजाय ऩूयी तैमायी क वाथ टकमा। े भृत्मु क दे लता मभयाज को घय े स्जव यास्ते वे वाॊऩ क आने की े भं प्रलेळ कयने वे योका जा आळॊका थी, लशाॊ वोने-चाॊदी के वक। े प्तवक्के औय शीये -जलाशयात आटद त्रफछा टदए गए। ऩूये घय को योळनी त्रलष्णु का धनलॊतरय अलताय वे जगभगा टदमा गमा। कोई बी धनतेयव वे वॊफॊप्तधत रोगं क फीच े कोना खारी नशीॊ छोिा गमा अथालत एक औय कथा बी प्रचप्तरत शं । जफ वाॊऩ क कभये भं आने क प्तरए कोई े े वुय औय अवुय प्तभरकय वागय भॊथन यास्ता अॊधेया नशीॊ छोिा गमा। इतना शी कय यशे थे, तो कई फशुभूल्म चीजं की नशीॊ, याजकभायी ने अऩने ऩप्तत को जगाए ु प्राप्तद्ऱ शुई। इनभं वफवे अशभ था अभृत। यखने क प्तरए उवे ऩशरे कशानी वुनाई औय े मश अभृत करळ धनलॊतरय क शाथं भं था। े टपय गीत गाने रगी। धनलॊतरय को मूॊ तो दे लताओॊ का लैद्य कशते शं , ऩय उनभं बगलान त्रलष्णु का अॊळ बी भौजूद था। धनतेयव के इवी दौयान जफ भृत्मु क दे लता मभयाज ने वाॊऩ का रूऩ े टदन धनलॊतरय की उत्ऩत्रत्त शोने क कायण शभ धनतेयव े धायण कयक कभये भं प्रलेळ कयने की कोप्तळळ की, तो े भनाते शं ।
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    58 नलम्फय 2012 ॥दारयद्र्म दशन प्तळलस्तोत्रॊ॥ त्रलद्वेद्वयाम नयकाणलल तायणाम कणाभृताम ळप्तळळेखयधायणाम। भॊत्र प्तवद्ध रूद्राष कऩूयकास्न्तधलराम जिाधयाम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥१॥ ल ु एकभुखी रूद्राष-Rs- 1250,2800 गौयीत्रप्रमाम यजनीळकराधयाम कारान्तकाम बुजगाप्तधऩकङ्कणाम। दो भुखी रूद्राष-Rs- 100,151 गॊगाधयाम गजयाजत्रलभदल नाम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥२॥ ु तीन भुखी रूद्राष-Rs- 100,151 बत्रित्रप्रमाम बलयोगबमाऩशाम उग्राम दगबलवागयतायणाम। ु ल चाय भुखी रूद्राष-Rs- 55,100 ज्मोप्ततभलमाम गुणनाभवुनत्मकाम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥३॥ ृ ु ऩॊच भुखी रूद्राष-Rs- 28,55 चभलम्फयाम ळलबस्भत्रलरेऩनाम बारेषणाम भस्णकण्िरभस्ण्िताम। ु भॊझीयऩादमुगराम जिाधयाम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥४॥ ु छश भुखी रूद्राष-Rs- 55,100 ऩञ्चाननाम पस्णयाजत्रलबूऴणाम शे भाॊळुकाम बुलनत्रमभस्ण्िताम। वात भुखी रूद्राष-Rs- 120,190 आनन्दबूप्तभलयदाम तभोभमाम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥५॥ ु आठ भुखी रूद्राष-Rs- 820,1250 बानुत्रप्रमाम बलवागयतायणाम कारान्तकाम कभरावनऩूस्जताम। नौ भुखी रूद्राष-Rs- 820,1250 नेत्रत्रमाम ळुबरषण रस्षताम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥६॥ ु दवभुखी रूद्राष-Rs- 1250 याभत्रप्रमाम यघुनाथलयप्रदाम नागत्रप्रमाम नयकाणललतायणाम। ग्मायशभुखी रूद्राष-Rs- 1450 ऩुण्मेऴु ऩुण्मबरयताम वुयाप्तचलताम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥७॥ ु फायश भुखी रूद्राष-Rs- 2350 भुिद्वयाम परदाम गणेद्वयाम गीतत्रप्रमाम लृऴबेद्वयलाशनाम। े तेयश भुखी रूद्राष-Rs- 4600 भातङ्गचभललवनाम भशे द्वयाम दारयद्र्म द्खदशनाम नभ् प्तळलाम॥८॥ ु चौदश भुखी रूद्राष-Rs- 12500 लप्तवद्षेन कृ तॊ स्तोत्रॊ वललयोगप्तनलायणॊ। वललवॊऩत्कयॊ ळीघ्रॊ ऩुत्रऩौत्राटदलधलनभ ्। त्रत्रवॊध्मॊ म् ऩठे स्न्नत्मॊ व टश स्लगलभलाप्नुमात ्॥९॥ गौयीळॊकय रूद्राष-Rs- 1900 ॥इप्तत लप्तवद्ष त्रलयप्तचतॊ दारयद्र्मदशनप्तळलस्तोत्रॊ वम्ऩूणभ ्॥ ल गुरुत्ल कामालरम: Bhubaneswar- 751 018, (ORISSA) पर: एवा ळास्रोि लचन शं जो व्मत्रि श्रद्धा बाल वे तीनोकार INDIA Call Us: 91+ 9338213418, 91+ वुफश, वॊध्मा एलॊ यात्री क वभम दारयद्र्म दशन प्तळलस्तोत्रॊ का ऩाठ े 9238328785, E-mail Us:- कयते उनक दख एलॊ वलल योग का प्तनलायण शोकय उवे, वॊऩत्रत्त एलॊ े ु gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, वॊतान राब प्राद्ऱ शोता शं ।
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    59 नलम्फय 2012 ऋणभोचक भॊगर स्तोत्र ॥ रक्ष्भी स्तुप्तत-ऩाठ ॥ श्रीगणेळाम नभ् ऩद्मानने ऩप्तद्मप्तन ऩद्म-शस्ते ऩद्म-त्रप्रमे ऩद्म-दरामतास्ष। त्रलद्वे-त्रप्रमे त्रलष्णु-भनोनुकरे, त्लत ्-ऩाद-ऩद्मॊ भप्तम ू भङ्गरो बूप्तभऩुत्रद्ळ ऋणशताल धनप्रद्। वस्न्नधत्स्ल॥ स्स्थयावनो भशाकम् वललकभलत्रलयोधक् ॥१॥ ऩद्मानने ऩद्म-उरु, ऩद्माषी ऩद्म-वम्बले। रोटशतो रोटशताषद्ळ वाभगानाॊ कृ ऩाकय्। त्लन्भा बजस्ल ऩद्मास्ष, मेन वौख्मॊ रबाम्मशभ ्॥ धयात्भज् कजो बौभो बूप्ततदो बूप्तभनन्दन्॥२॥ ु अद्व-दाप्तम च गो-दाप्तम, धनदामै भशा-धने। अङ्गायको मभद्ळैल वललयोगाऩशायक्। धनॊ भे जुऴताॊ दे त्रल, वलल-काभाॊद्ळ दे टश भे॥ व्रुद्शे् कतालऽऩशताल च वललकाभपरप्रद्॥३॥ ऩुत्र-ऩौत्र-धन-धान्मॊ, शस्त्मद्वाटद-गले यथभ ्। एताप्तन कजनाभप्तन प्तनत्मॊ म् श्रद्धमा ऩठे त ्। ु प्रजानाॊ बलप्तत भात्, अमुष्भन्तॊ कयोतु भाभ ्॥ ऋणॊ न जामते तस्म धनॊ ळीघ्रभलाप्नुमात ्॥४॥ धनभस्ग्नधलनॊ लामुधनॊ वूमो धनॊ लवु्। ल धयणीगबलवम्बूतॊ त्रलद्युत्कास्न्तवभप्रबभ ्। धनप्तभन्द्रा लृशस्ऩप्ततललरुणो धनभद्लुते॥ कभायॊ ळत्रिशस्तॊ च भङ्गरॊ प्रणभाम्मशभ ्॥५॥ ु लैनतेम वोभॊ त्रऩफ, वोभॊ त्रऩफतु लृत्रशा। वोभॊ धनस्म वोप्तभनो, भह्मॊ ददातु वोप्तभप्तन॥ स्तोत्रभङ्गायकस्मैतत्ऩठनीमॊ वदा नृप्तब्। न क्रोधो न च भात्वमं, न रोबो नाळुबा भती्। न तेऴाॊ बौभजा ऩीिा स्लल्ऩाऽत्रऩ बलप्तत क्लप्तचत ्॥६॥ बलन्ती कृ त-ऩुण्मानाॊ, बिानाॊ श्री-वूि जऩेत ्॥ ॊ अङ्गायक भशाबाग बगलन्बिलत्वर। त्लाॊ नभाप्तभ भभाळेऴभृणभाळु त्रलनाळम॥७॥ त्रलप्तध्- ऋणयोगाटददारयद्रमॊ मे चान्मे ह्यऩभृत्मल्। उि भशा-भन्त्र क तीन ऩाठ प्तनत्म कये । „ऩाठ‟ क फाद े े बमक्रेळभनस्ताऩा नश्मन्तु भभ वललदा॥८॥ कभर क द्वेत पर, प्ततर, भधु, घी, ळक्कय, फेर-गूदा े ू अप्ततलक्त्र दयायाध्मल बोगभुि स्जतात्भन्। ु प्तभराकय फेर की रकिी वे प्तनत्म १०८ फाय शलन कये । तुद्शो ददाप्तव वाम्राज्मॊ रुश्िो शयप्तव तत्ख्ळणात ्॥९॥ ऐवा ६८ टदन कये । इववे भन-लास्ञ्छत धन प्राद्ऱ शोता शै । त्रलरयॊ प्तचळक्रत्रलष्णूनाॊ भनुष्माणाॊ तु का कथा। शलन-भन्त्र्- “ॐ श्रीॊ ह्रीॊ भशा-रक्ष्म्मै वलालबीद्श प्तवत्रद्धदामै तेन त्लॊ वललवत्त्लेन ग्रशयाजो भशाफर्॥१०॥ स्लाशा।” ऩुत्रान्दे टश धनॊ दे टश त्लाभस्स्भ ळयणॊ गत्। द्रादळ भशा मॊत्र ऋणदारयद्रमद्खेन ळत्रूणाॊ च बमात्तत्॥११॥ ु वबी प्रकाय वे बाग्म लृत्रद्ध एलॊ वुख वभृत्रद्ध शे तु वलल एप्तबद्रालदळप्तब् द्ऴोकमल् स्तौप्तत च धयावुतभ ्। ै श्रेद्ष मॊत्र, शभाये 30 लऴोक अनुबलो द्राया प्तनप्तभलत े भशप्ततॊ प्तश्रमभाप्नोप्तत ह्यऩयो धनदो मुला॥१२॥ भूल्म: Rs- 1900 वे 8200 तक ॥इप्तत श्री ऋणभोचक भङ्गरस्तोत्रभ ् वम्ऩूनभ ्॥ ल
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    60 नलम्फय 2012 श्री रक्ष्भी चारीवा ॥ दोशा ॥ रुऩ फदर तशॊ वेला कीन्शा ॥ प्रप्ततटदन ऩाठ कयै भन भाशीॊ । भातु रक्ष्भी करय कृ ऩ, कयो ह्र्दम भं स्लॊम त्रलष्णु जफ नय तनु धाया । उन वभ कोई जग भं कशुॊ नाशी ॥ लाव ॥ रीन्शे उ अलधऩुयी अलताया ॥ फशुत्रलप्तध क्मा भं कयं फिाई । भनोकाभना प्तवद्ध करय, ऩुयलशु भेयी तफ तुभ प्रगि जनकऩुय भाशीॊ । रेम ऩयीषा ध्मान रगाई ॥ आव ॥ वेला टकमो ह्र्दम ऩुरकाशीॊ ॥ करय त्रलद्वाव कयं व्रत नेभा । ॥वोयठा ॥ अऩनामा तोटश अन्तमालभी । शोम प्तवद्ध उऩजै उय प्रेभा ॥ मशी भोय अयदाव,शाथ जोि त्रलनती त्रलद्व त्रलटदत त्रत्रबुलन की स्लाभी ॥ जम जम जम रक्ष्भी बालानी । करु । ॊ तुभ वभ प्रफर ळत्रि नटशॊ आनी । वफ भं व्मात्रऩत शो गुण खानी ॥ वफत्रलप्तध कयौ वुलाव, जम जनप्तन कशॊ तक भटशभा कशौ फखानी ॥ तुम्शयो तेज प्रफर जग भाशी । जगदॊ त्रफका ॥ भन क्रभ लचन कयै वेलकाई । तुभ वभ कोउ दमारु कशुॊ नाटशॊ ॥ प्तवॊधु वुता भं वुप्तभयं तोशी । भन इस्च्छत लाॊप्तछत पर ऩाई ॥ भोटश अनाथ की वुप्तध अफ रीजै । सान फुत्रद्ध त्रलद्या दो भोशी ॥ तस्ज छ्र कऩि औय चतुयाई । वॊकि काटि बत्रि भोटश दीजै ॥ तुभ वभान नटशॊ कोई उऩकायी । ऩूजटशॊ त्रलत्रलध बाॊप्तत भन राई ॥ बूर चूक करय षभा शभायी । वफ त्रलप्तध ऩुयलशु आव शभायी ॥ औय शार भं कशं फुझाई । दळलन दीजै दळा प्तनशायी ॥ जम जम जगत जनप्तन जगदम्फा । जो मश ऩाठ कयै भन राई ॥ त्रफन दळलन व्माकर अप्तधकायी । ु वफकी तुभ शी शो अलरम्फा ॥ ताको कोई कद्श न शोई । तुभटश अषत द्ख वशते बायी ॥ ु तुभ शी शो घि घि की लावी । भन इस्च्छत ऩालै पर वोई ॥ नटशॊ भोटशॊ सान फुत्रद्ध शै तन भं । त्रलनती मशी शभायी खावी ॥ त्राटश त्राटश जम द्ख प्तनलारयस्ण । ु वफ जानत शो अऩने भन भं ॥ जगजननी जम प्तवॊधु कभायी । ु त्रत्रत्रलध ताऩ बल फॊधन शारयस्ण ॥ रुऩ चतुबज कयक धायण । ुल े दीनन की तुभ शो टशतकायी ॥ जो मश चारीवा ऩढै ऩढालै । कद्श भोय अफ कयशु प्तनलायण ॥ त्रलनलं प्तनत्म तुभटशॊ भशायानी । ध्मान रगाकय वुनै वुनालै ॥ कटश प्रकाय भं कयं फिाई । े कृ ऩा कयौ जग जनप्तन बलानी ॥ ताको कोई न योग वतालै । सान फुत्रद्ध भोटश नटशॊ अप्तधकाई ॥ कटश त्रलप्तध स्तुप्तत कयं प्ततशायी । े ऩुत्र आटद धन वम्ऩप्तत ऩालै ॥ ॥ दोशा ॥ वुप्तध रीजै अऩयाध त्रफवायी ॥ ऩुत्रशीन अरु वॊऩप्तत शीना । त्राटश त्राटश दख शारयणी,शयो लेप्तग वफ ु कृ ऩा दृत्रद्श प्तचतलो भभ ओयी । अॊध फप्तधय कोढी अप्तत दीना । त्राव। जगजननी त्रलनती वुन भोयी ॥ त्रलप्र फोराम क ऩाठ कयालै । ै जमप्तत जमप्तत जम रक्ष्भी, कयो ळत्रु सान फुत्रद्ध जम वुख की दाता । ळॊका टदर भं कबी न रालै ॥ का नाळ ॥ वॊकि शयो शभायी भाता ॥ ऩाठ कयालै टदन चारीवा । याभदाव धरय ध्मान प्तनत, त्रलनम षीयप्तवॊधु जफ त्रलष्णु भथामो । ता ऩय कृ ऩा कयं जो गौयीवा ॥ कयत कय जोय । चौदश यत्न प्तवॊधु भं ऩामो ॥ वुख वम्ऩप्तत फशुत वी ऩालै । भातु रक्ष्भी दाव ऩय, कयशु दमा की चौदश यत्न भं तुभ वुखदावी । कभी नशीॊ काशू की आलै ॥ कोय ॥ वेला टकमो प्रबु फप्तन दावी ॥ फायश भाव कयं जो ऩूजा । जफ जफ जन्भ जशाॊ प्रबु रीन्शा । तेटश वभ धन्म औय नटशॊ दजा ॥ ू ***
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    61 नलम्फय 2012 ॥श्री वूि॥ ॐ टशयण्म-लणां शरयणीॊ, वुलणल-यजत-स्त्रजाभ ्। चन्द्राॊ टशयण्मभमीॊ रक्ष्भीॊ, जातलेदो भ आलश॥ ताॊ भ आलश जात-लेदो, रक्ष्भीभनऩ-गाप्तभनीभ ्। मस्माॊ टशयण्मॊ त्रलन्दे मॊ, गाभद्वॊ ऩुरूऴानशभ ्॥ अद्वऩूलां यथ-भध्माॊ, शस्स्त-नाद-प्रभोटदनीभ ्। प्तश्रमॊ दे लीभुऩह्वमे, श्रीभाल दे ली जुऴताभ ्॥ काॊवोऽस्स्भ ताॊ टशयण्म-प्राकायाभाद्राल ज्लरन्तीॊ तृद्ऱाॊ तऩलमन्तीॊ। ऩद्मे स्स्थताॊ ऩद्म-लणां ताप्तभशोऩह्वमे प्तश्रमभ ्॥ चन्द्राॊ प्रबावाॊ मळवा ज्लरन्तीॊ प्तश्रमॊ रोक दे ल-जुद्शाभुदायाभ ्। ताॊ ऩद्म-नेप्तभॊ ळयणभशॊ प्रऩद्ये अरक्ष्भीभे नश्मताॊ त्लाॊ लृणोप्तभ॥ े आटदत्म-लणे तऩवोऽप्तधजातो लनस्ऩप्ततस्तल लृषोऽष त्रफल्ल्। तस्म पराप्तन तऩवा नुदन्तु भामान्तयामाद्ळ फाह्या अरक्ष्भी्॥ उऩैतु भाॊ दै ल-वख्, कीप्ततलद्ळ भस्णना वश। प्रादबूतोऽस्स्भ याद्सेऽस्स्भन ्, कीप्ततं लृत्रद्धॊ ददातु भे॥ ु ल षुत ्-त्रऩऩावाऽभरा ज्मेद्षा, अरक्ष्भीनालळमाम्मशभ ्। अबूप्ततभवभृत्रद्धॊ च, वलालन ् प्तनणुद भे गृशात ्॥ ल गन्ध-द्रायाॊ दयाधऴां, प्तनत्म-ऩुद्शाॊ कयीत्रऴणीभ ्। ईद्वयीॊ वलल-बूतानाॊ, ताप्तभशोऩह्वमे प्तश्रमभ ्॥ ु भनव् काभभाकप्ततॊ, लाच् वत्मभळीभटश। ऩळूनाॊ रूऩभन्नस्म, भप्तम श्री् श्रमताॊ मळ्॥ ू कदल भेन प्रजा-बूता, भप्तम वम्भ्रभ-कदल भ। प्तश्रमॊ लावम भे करे, भातयॊ ऩद्म-भाप्तरनीभ ्॥ ु आऩ् वृजन्तु स्स्नग्धाप्तन, प्तचक्रीत लव भे गृशे। प्तनच-दे ली भातयॊ प्तश्रमॊ लावम भे करे॥ ु आद्रां ऩुष्करयणीॊ ऩुत्रद्शॊ, वुलणां शे भ-भाप्तरनीभ ्। वूमां टशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ, जातलेदो भभालश॥ आद्रां म् करयणीॊ मत्रद्शॊ, त्रऩॊगराॊ ऩद्म-भाप्तरनीभ ्। चन्द्राॊ टशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ, जातलेदो भभालश॥ ताॊ भ आलश जात-लेदो रक्ष्भीभनऩ-गाप्तभनीभ ्। मस्माॊ टशयण्मॊ प्रबूतॊ गालो दास्मोऽद्वान ् त्रलन्दे मॊ ऩुरूऴानशभ ्॥ म् ळुप्तच् प्रमतो बूत्ला, जुशुमादाज्मभन्लशभ ्। प्तश्रम् ऩॊच-दळचं च, श्री-काभ् वततॊ जऩेत ्॥ धनरक्ष्भी स्तोत्र अद्श रक्ष्भी कलच भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा प्राद्ऱ नभो कल्माणदाप्तमक । भशावम्ऩत्प्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ े कयने शे तु उऩमोगी प्तवद्ध भशाबोगप्रदे दे त्रल भशाकाभप्रऩूरयते । वुखभोषप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ शोता शं । स्जस्वे भाॊ के ब्रह्मरूऩे वदानन्दे वस्च्चदानन्दरूत्रऩणी । धृतप्तवत्रद्धप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ आटद रक्ष्भी, धान्म रक्ष्भी, उद्यत्वूमप्रकाळाबे उद्यदाटदत्मभण्िरे । प्तळलतत्लप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ ल धैयीम रक्ष्भी, गज रक्ष्भी, प्तळलरूऩे प्तळलानन्दे कायणानन्दत्रलग्रशे । त्रलद्ववॊशायरूऩे च धनदामै नभोऽस्तुते॥ वॊतान रक्ष्भी, त्रलजम ऩञ्चतत्लस्लरूऩे च ऩञ्चाचायवदायते । वाधकाबीद्शदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥श्रीॊ रक्ष्भी, त्रलद्या रक्ष्भी औय धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो ॐ॥ का अळीलालद प्राद्ऱ शोता शं । ॐ श्री रप्तरता भशात्रत्रऩुयवुन्दयी ऩयाबट्िारयका । वभेताम श्री चन्द्रभौऱीद्वय ऩयब्रह्मणे नभ्॥जम जम ळङ्कय शय शय ळङ्कय॥ भूल्म- Rs: 1250
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    62 नलम्फय 2012 अद्शरक्ष्भी स्तोत्र दे लकृ त रक्ष्भी स्तोत्रभ ् वुभनवलॊटदत वुॊदरय भाधत्रल चॊद्र वशोदरय शे भभमे । षभस्ल बगलॊत्मल षभाळीरे ऩयात्ऩये । भुप्तनगण लॊटदत भोषप्रदाप्तमप्तन भॊजुऱबात्रऴस्ण लेदनुते ॥ ळुद्धवत्त्लस्लरूऩे च कोऩाटदऩरयलस्जलते॥ ऩॊकजलाप्तवप्तन दे लवुऩूस्जत वदगुणलत्रऴलस्ण ळाॊप्ततमुते । उऩभे वललवाध्लीनाॊ दे लीनाॊ दे लऩूस्जते। जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन आटदरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥1॥ त्लमा त्रलना जगत्वलं भृततुल्मॊ च प्तनष्परभ ्॥ अप्तमकप्तर कल्भऴनाप्तळप्तन काप्तभप्तन लैटदकरूत्रऩस्ण लेदभमे । वललवॊऩत्स्लरूऩा त्लॊ वलेऴाॊ वललरूत्रऩणी। षीयवभुदबल भॊगररूत्रऩस्ण भॊत्रप्तनलाप्तवप्तन भॊत्रनुते ॥ यावेद्वमलप्तध दे ली त्लॊ त्लत्करा् वललमोत्रऴत्॥ भॊगरदाप्तमप्तन अॊफुजलाप्तवप्तन दे लगणाप्तश्रत ऩादमुते । करावे ऩाललती त्लॊ च षीयोदे प्तवन्धुकन्मका। ै जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन धान्मरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥2॥ स्लगे च स्लगलरक्ष्भीस्त्लॊ भत्मलरक्ष्भीद्ळ बूतरे॥ जमलय लस्णलप्तन लैष्णत्रलबागलत्रल भॊत्रस्लरूत्रऩस्ण भॊत्रभमे । लैकठे च भशारक्ष्भीदे लदे ली वयस्लती। ुॊ वुयगण ऩूस्जत ळीघ्र परप्रद सानत्रलकाप्तवप्तन ळास्त्रनुते ॥ गॊगा च तुरवी त्लॊ च वात्रलत्री ब्रह्मारोकत्॥ बलबमशारयस्ण ऩाऩत्रलभोचप्तन वाधुजनाप्तश्रत ऩादमुते । कृ ष्णप्राणाप्तधदे ली त्लॊ गोरोक याप्तधका स्लमभ ्। े जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन धैमरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥3॥ ल यावे यावेद्वयी त्लॊ च लृॊदालन लने- लने॥ जम जम दगप्ततनाप्तळप्तन काप्तभप्तन वललपरप्रद ळास्त्रभमे । ु ल कृ ष्णा त्रप्रमा त्लॊ बाॊिीये चॊद्रा चॊदनकानने। यथगज तुयग ऩदाटदवभानुत ऩरयजनभॊटित रोकनुते ॥ त्रलयजा चॊऩकलने ळतळृॊगे च वुॊदयी॥ शरय-शय ब्रह्म वुऩूस्जत वेत्रलत ताऩप्तनलारयस्ण ऩादमुते । ऩद्मालती ऩद्मलने भारती भारतीलने। जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन श्री गजरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥4॥ कददॊ ती कदलने वुळीरा कतकीलने॥ ुॊ ुॊ े अप्तम खगलाटशप्तन भोटशप्तन चटक्रस्ण याग त्रललप्तधलप्तन सानभमे । कदॊ फभारा त्लॊ दे ली कदॊ फकाननेऽत्रऩ च। गुणगणलारयप्तध रोकटशतैत्रऴस्ण वद्ऱस्लयलय गाननुते ॥ याजरक्ष्भी याजगेशे गृशरक्ष्भीगृशे गृशे॥ वकर वुयावुय दे ल भुनीद्वय भानललॊटदत ऩादमुते । इत्मुक्त्ला दे लता् वलाल भुनमो भनलस्तथा। जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन वॊतानरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥5॥ रूरूदनम्रलदना् ळुष्ककठोद्ष तारुका्॥ ु ल ॊ जम कभरावप्तन वदगप्ततदाप्तमप्तन सान त्रलकाप्तवप्तन गानभमे । इप्तत रक्ष्भीस्तलॊ ऩुण्मॊ वललदेल् कृ तॊ ळुबभ ्। ै अनुटदनभप्तचलत ककभधूवय बूत्रऴतलाप्तवत लाद्यनुते ॥ ु ुॊ म् ऩठे त्प्रातरूत्थाम व लै वलै रबेद् ध्रुलभ ्॥ कनक धया स्तुप्तत लैबल लॊटदत ळॊकय दे प्तळक भान्म ऩते। अबामो रबते बामां त्रलनीताॊ वुवताॊ वतीभ ्। ु जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन त्रलजमरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥6॥ वुळीराॊ वुॊदयीॊ यम्माभप्ततवुत्रप्रमलाटदनीभ ्॥ प्रणत वुयेद्वरय बायप्तत बागलत्रल ळोकत्रलनाप्तळप्तन यत्नभमे । ऩुत्रऩौत्रलतीॊ ळुद्धाॊ करजाॊ कोभराॊ लयाभ ्। ु भस्णभम बूत्रऴत कणलत्रलबूऴण ळाॊप्ततवभालृत शास्मभुखे ॥ अऩुत्रो रबते ऩुत्रॊ लैष्णलॊ प्तचयजीत्रलनभ ्॥ नलप्तनप्तध दाप्तमप्तन कप्तरभरशारयस्ण काम्म परप्रद शस्तमुते । ऩयभैद्वमलमुि च त्रलद्यालॊतॊ मळस्स्लनभ ्। ॊ जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन त्रलद्यारस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥7॥ भ्रद्शयाज्मो रबेद्राज्मॊ भ्रद्शश्रीरलबते प्तश्रमभ ्॥ प्तधप्तभ प्तधप्तभ प्तधभ ् प्तधप्तभ प्तधॊप्तधप्तभ प्तधॊप्तधप्तभ दॊ दप्तब ्नाद वुऩूणभमे । ु ु ल शतफॊधरबेद्बॊधुॊ धनभ्रद्शो धनॊ रबेत ्। ु ल घुभघुभ घुॊघुभ घुॊघुभ घुॊघुभ ळॊखप्तननाद वुलाद्यनुते ॥ कीप्ततलशीनो रबेत्कीप्ततं प्रप्ततद्षाॊ च रबेद् ध्रुलभ ्॥ लेदऩुयाणेप्तत शाव वुऩूस्जत लैटदकभागल प्रदळलमुते । वललभॊगरदॊ स्तोत्रॊ ळोकवॊताऩनाळनभ ्। जम जम शे भधुवूदन काप्तभप्तन श्री धनरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥8॥ शऴालनॊदकयॊ ळद्वद्धभल भोषवुरृत्प्रदभ ्॥ ॥ इप्तत श्रीदे लकृ त रक्ष्भीस्तोत्रॊ वॊऩूणभ ् ॥ ल
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    63 नलम्फय 2012 जफ रक्ष्भीजी को प्तभरी वजा?  त्रलजम ठाकुय एक टदन बगलान त्रलष्णु औय भाता रक्ष्भी भ्रभण कयने एलॊ भनुष्मं को दे खने क प्तरमे ऩृर्थली ऩय आमं। टकन्तु भाता रक्ष्भी को भ्रभण शे तु वाथ े राने क कायण बगलान त्रलष्णु ने एक ळतल यखी, औय काशा टक तुभ े उत्तय टदळा टक तयप नशीॊ दे खोगी । भाता रक्ष्भी ने अऩनी वशभप्तत दे दी औय ले ळीघ्र शी ऩृर्थली ऩय भ्रभण क प्तरमे प्तनकर गमे । ऩृर्थली ऩय चायं औय वुन्दयता े टदख यशी थी औय लशाॉ ऩय फशुत शी ळास्न्त थी । ऩृर्थली का यभस्णम द्रश्म दे खकय भाता रक्ष्भी को फशोत टश प्रळन्न शुई औय लश बूर गमी टक बगलान त्रलष्णु ने उनवे क्मा कशा था । प्रळन्नता एलॊ उत्वुकता लळ रक्ष्भी जी उत्तय टदळा भं दे खने रगी । उत्तय टदळा भं उन्शं ने अत्मॊत खुफवूयत परं का एक फगीचा दे खा ू जशाॉ वे फशुत टश वुॊदय खुळफू आ यशी थी । भाता रक्ष्भी त्रफना वोचे शी उव फगीचे ऩय उतयी औय लशाॉ वे एक पर तोि प्तरमे । बगलान ू त्रलष्णु ने जफ मश द्रश्म दे खा तो उन्शंने भाता रक्ष्भी को अऩनी बूर माद टदराते शुले कशा टक टकवी वे त्रफना ऩूछे कछ बी नशीॊ रेना चाटशमे । ु इतना कशते शुले बगलान त्रलष्णु टक आॊखो वे आॉवू आ गमे ! भाता रक्ष्भी ने अऩनी बूर स्लीकाय टक औय बगलान त्रलष्णु वे भापी भाॉगी । तफ बगलान त्रलष्णु फोरे टक तुभने जो बूर टक शं उवक प्तरमे तुम्शं वजा बी बुगतनी े ऩिे गी । तुभ स्जव पर को उवक भारी वे ऩूछे त्रफना प्तरमा शं अफ तुभ उवी क घय भं 3 वार क प्तरमे लशाॊ काभ ू े े े कयोगी उवकी दे खबार कयोगी । तबी भं तुम्शं फैकण्ि भं लात्रऩव फुराऊगा। भाता रक्ष्भी एक औयत का रुऩ रेकय उव ु ॊ खेत क भाप्तरक भाधला क ऩाव गमी । लश एक गयीफ तथा फिे ऩरयलाय का भुस्खमा था । उवक वाथ उवकी ऩत्नी, दो े े े फेिे औय तीन फेटिमाॊ वफ प्तभरकय एक छोिी वी झोऩिी भं यशते थे । उनक ऩाव वम्ऩत्रत्त क नाभ ऩय प्तवप लशी एक े े ल छोिा वा फगीचे का िु किा था । ले उवी वे शी अऩना गुजय-फवय कयता था । भाता रक्ष्भी उवक घय भं गमी तो भाधला े ने उन्शं दे खा औय ऩूछा टक लश कौन शं । तफ भाता रक्ष्भी ने कशा टक भेयी दे खबार कयने लारा कोई नशीॊ शं भुझ ऩय दमा कयो औय भुझे अऩने मशाॉ यशने दो भं आऩका वाया काभ करुॉ गी । भाधल एक दमारु औय उदाय इनवान था रेटकन लश गयीफ बी था, औय लश जो कभाता था उवभं तो फशुत शी भुस्श्कर वे उवी क घय का खचाल चरता था ऩयन्तु टपय े बी उवने वोचा टक मटद भेये तीन टक जगश चाय फेटिमाॉ शोती तफ बी तो लश मशाॉ यशती मश वोचकय उवने भाता रक्ष्भी को अऩने मशाॉ ळयण दे दी औय इव तयश भाता रक्ष्भी तीन वार तक उवक मशाॉ काभ कयती यशी । े जैवे शी भाता रक्ष्भी उवक मशाॉ आमी तो उवने एक गाम खयीद री स्जस्वे उवकी कभाई बी फढ़ गमी अफ तो े उवने कछ जभीन औय जेलय बी खयीद प्तरमे थे औय इव तयश उवने अऩने प्तरमे एक घय औय अच्छे कऩिे खयीदे । ु तथा अफ शय टकवी क प्तरमे एक अरग वे कभया बी था । इतना वफ प्तभरने ऩय भाधल ने वोचा टक मश वफ कछ भुझे े ु इवी औयत (भाता रक्ष्भी) क घय भं प्रलेळ कयने क फाद प्तभरा शं लशी शभाये बाग्म को फदरने लारी शं । 2.5 वार े े
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    64 नलम्फय 2012 प्तनकरने क फाद भाता रक्ष्भी ने उव नमे घय भं प्रलेळ टकमा औय उनक वाथ एक ऩरयलाय क वदस्म टक तयश यशी े े े ऩयन्तु उन्शंने खेत ऩय काभ कयना फॊद नशीॊ टकमा । उन्शं तो अबी अऩने 6 भशीने औय ऩूये कयने थे। अफ भाता रक्ष्भी ने अऩने 3 वार ऩूये कय प्तरमे थी। एक टदन भाधल अऩना काभ खत्भ कयक फैरगािी ऩय अऩने घय रौिा तो अऩने दयलाजे ऩय अच्छे यत्न जटित े ऩोळाक ऩशने तथा अनभोर जेलयं वे वुवस्ज्जत एक खुफवूयत औयत को दे खा । उवने कशा टक लश कोई औय नशीॊ भाता रक्ष्भी शं । तफ भाधल औय उवक घय लारे आद्ळमल चटकत शी यश गमे टक े जो स्त्री शभाये वाथ यश यशी थी लश कोई औय नशीॊ भाता रक्ष्भी स्लमॊ थी । इव ऩय उन वबी क नेत्रं वे आॉवू टक धाया फशने रगी औय े भाधला फोरा टक मश क्मा भाॉ शभवे इतना फिा अऩयाध कवे शो गमा ै । शभने स्लमॊ भाता रक्ष्भी वे शी काभ कयलामा । भाता शभं भाप कय दे ना । तफ भाधल फोरा टक शे भाता शभ ऩय दमा कयो । शभभे वे कोई बी नशीॊ जानता था टक आऩ भाता रक्ष्भी शं । शे भाता शभं लयदान दीस्जमे । शभायी यषा करयमे । तफ भाता रक्ष्भी भुस्कयाते शुले फोरी टक शे भाधल तुभ टकवी प्रकाय टक प्तचन्ता ु भत कयो तुभ एक फशुत शी दमारु इनवान शो औय तुभने भुझे अऩने मशाॉ आवया टदमा शं उन तीन वारं टक भुझे माद शं भं तुभ रोगं क वाथ एक ऩरयलाय टक तयश यशी शूॉ । इवक फदरे भं भं तुम्शं लयदान दे ती शूॉ टक तुम्शाये ऩाव कबी े े बी धन टक औय खुप्तळमं टक कभी नशीॊ शोगी । तुम्शं लो वाये वुख प्तभरंगे स्जवक तुभ शकदाय शो । इतना कशकय े रक्ष्भी जी अऩने वोने वे फने शुमे यथ ऩय वलाय शोकय फैकण्ठ रोक चरी गमी । भाता रक्ष्भी ने कशा टक जो रोग ु दमारु, औय वच्चे रृदम लारे शोते शं भं शभेळा लशाॉ प्तनलाव कयती शूॉ । शभं गयीफं टक वेला कयनी चाटशमे । क्मा आऩ टकवी वभस्मा वे ग्रस्त शं ? ु आऩक ऩाव अऩनी वभस्माओॊ वे छिकाया ऩाने शे तु ऩूजा-अचलना, वाधना, भॊत्र जाऩ इत्माटद कयने का वभम नशीॊ े शं ? अफ आऩ अऩनी वभस्माओॊ वे फीना टकवी त्रलळेऴ ऩूजा-अचलना, त्रलप्तध-त्रलधान क आऩको अऩने कामल भं े वपरता प्राद्ऱ कय वक एलॊ आऩको अऩने जीलन क वभस्त वुखो को प्राद्ऱ कयने का भागल प्राद्ऱ शो वक इव प्तरमे े े े गुरुत्ल कामालरत द्राया शभाया उद्दे श्म ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो द्राया प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि त्रलप्तबन्न प्रकाय क मन्त्र- कलच एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय तक ऩशोचाने का शै । े े गुरुत्ल कामालरम: Bhubaneswar- 751 018, (ORISSA) INDIA, Call Us : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785, E-mail Us:- gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: http://gk.yolasite.com/ ,http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    65 नलम्फय 2012 रक्ष्भीजी क स्लगल रोक जाने टक कथा े  याकेळ ऩॊिा एक फाय की फात शै , याजा फप्तर वभम त्रफताने क प्तरए एकान्त स्थान ऩय गधे का लेळ रेकय प्तछऩे शुए थे। दे लयाज े इन्द्र उनवे प्तभरने क प्तरए जगश-जगश उन्शं ढू ॉ ढ यशे थे। े एक टदन इन्द्र ने उन्शं खोज प्तनकारा औय उनक प्तछऩने का कायण जानकय उन्शं कार का भशत्ल फताकय उन्शं े तत्लसान का फोध कयामा। तबी याजा फप्तर क ळयीय वे एक टदव्म तेज लारी स्त्री प्तनकरी। उवे दे खकय इन्द्र ने ऩूछा दै त्मयाज! मश स्त्री कौन े शै ? मश दे ली, भानुष्म अथला आवुयी ळत्रि भं वे कौन-वी ळत्रि शै ?” याजा फप्तर फोरे-“दे लयाज! मे दे ली तीनं ळत्रिमं भं वे कोई नशीॊ शं । आऩ स्लमॊ इनवे ऩूछ रं। इन्द्र क ऩूछने ऩय ले ळत्रि फोरीॊ दे लेन्द्र! भुझे न तो दै त्मयाज फप्तर जानते शं औय न शी े तुभ मा कोई अन्म दे लगण। ऩृर्थली रोक ऩय रोग भुझे आटदकार वे अनेक नाभं वे ऩुकायते शं । श्री, रक्ष्भी आटद भेये नाभ शं । इन्द्र फोरे दे ली! आऩ इतने वभम वे याजा फप्तर क ऩाव शं रेटकन ऐवा क्मा कायण शै टक आऩ याजा फप्तर को े छोिकय भेयी ओय आ यशी शं ? रक्ष्भी फोरीॊ दे लेन्द्र! भुझे भेये स्थान वे कोई बी शिा मा टिगा नशीॊ वकता शै । भं वबी क ऩाव कार क अनुवाय े े आती-जाती यशती शूॉ। जैवा कार का प्रबाल शोता शै भं उतने शी वभम तक उवक ऩाव यशती शूॉ। भं वभम क अनुळाय े े एक को छोिकय दवये क ऩाव प्तनलाव कयती शूॉ।” ू े इन्द्र फोरे दे ली! आऩ अवुयं क मशाॉ प्तनलाव क्मं नशीॊ कयतीॊ?” रक्ष्भी फोरीॊ दे लेन्द्र! भेया प्तनलाव लशीॊ शोता शै जशाॉ े वत्म एलॊ धभल क अनुवाय कामल शोते शं, व्रत औय दान दे ने क कामल शोते शं। े े अवुय वत्मलादी थे, ब्राह्मणं की यषा कयते थे, ऩशरे इस्न्द्रमं को लळ भं कय वकते थे, अफ इनक मे गुण नद्श े शोते जा यशे शं । अवुय अफ तऩ-उऩलाव नशीॊ कयते, मस, शलन, दान आटद वे इनका कोई वॊफॊध ळेऴ नशीॊ शै । ऩशरे मे योगी, स्स्त्रमं, लृद्धं, दफरं की यषा कयते थे, गुरुजन का आदय कयते थे, रोगं को षभादान दे ते थे। ु ल रेटकन अफ अशॊ काय, भोश, रोब, क्रोध, आरस्म, अत्रललेक, काभ आटद ने इनक ळयीय भं जगश फना री शै । े मे रोग ऩळु तो ऩार रेते शं रेटकन उन्शं चाया नशीॊ स्खराते, उनका ऩूया दध प्तनकार रेते शं औय ऩळुओॊ क फच्चे ू े बूख वे चीत्कायते शुए भय जाते शं । मे अऩने फच्चं का रारन-ऩारन कयना बूरते जा यशे शं । इनभं आऩवी बाईचाया वभाद्ऱ शो गमा शै । रूि, खवोि, शत्मा, व्मप्तबचाय, करश, स्स्त्रमं की ऩप्ततव्रता नद्श कयना शी इनका धभल शो गमा शै । वूमोदम क फाद तक वोने क े े कायण स्नान-ध्मान वे मे त्रलभुख शोते जा यशे शं । इवप्तरए भेया भन इनवे उचि गमा। दे लताओॊ का भन अफ धभल भं आवि शो यशा शै । इवप्तरए अफ भं इन्शं छोिकय दे लताओॊ क ऩाव प्तनलाव करूगी। े ॉ भेये वाथ श्रद्धा, आळा, षभा, जमा, ळास्न्त, वॊतप्तत, धृप्तत औय त्रलजप्तत मे आठं दे त्रलमाॉ बी प्तनलाव कयं गी। दे लेन्द्र! अफ आऩको सात शो गमा शोगा टक भंने इन्शं क्मं छोिा शै । वाथ शी आऩको इनक अलगुणं का बी सान े शो गमा शोगा।” तफ इन्द्र ने रक्ष्भी को प्रणाभ टकमा औय उन्शं आदय वटशत स्लगल रे गए।
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    66 नलम्फय 2012 धन प्राप्तद्ऱ औय वुख वभृत्रद्ध क प्तरमे लास्तु प्तवद्धाॊत े  प्तचॊतन जोळी आज क बौप्ततक मुग भं शय कामल धन क उऩय प्रत्मष मा अप्रत्मष रुऩवे प्तनबलय कयता शं इव प्तरमे प्रत्मेक े े व्मत्रि टक मशी इच्छा शोती शं टक उवक ऩाव अऩाय धन दौरत एलॊ जीलन उऩमोगी वायी वुख वुत्रलधाए उप्रब्ध शो जो े एक वभृद्ध व्मत्रि क ऩाव भं शोती शं , एलॊ उवकी वभृत्रद्ध एलॊ उन्नप्तत टदन प्रप्ततटदन फढती जाए। े आऩ अऩने घय भं धन एलॊ फशुभूल्म आबूऴण, जलाशयात इत्माटद टक वुयषा शे तु अरभायी मा कळ फोक्व यखते शं , ै स्जस्वे धन वुयस्षत यशे औय उवभे फढ़त शोती यशं । इवक प्तरमे लास्तु वे े वॊफॊप्तधत धन वॊचम शे तु कछ उऩाम। ु लास्तु क अनुळाय धन एलॊ े फशु भूल्म वाभग्री को उत्तय टदळा भं यखे। उत्तय टदळा भं कफेय का लाव ु शोता शं । एलॊ कफेय धन क दे लता शं ु े एलॊ उत्तय टदळा ऩय उनका प्रबाल यशता शं । इव प्तरमे अऩने व्मलवाम स्थान मा घय भं धन को वुयस्षत यखने शे तु उत्तय टदळा का चुनाल कयं । उत्तय - व्मलवाम स्थान मा घय भं अरभायी को उत्तय टदळा क कभये भं े उवे दस्षण टदळा की दीलाय वे विाकय एवे यखे टक उवका भुख उत्तय टक तयप यशे मा आऩका भुख अरभायी खोरते मा फॊध कयते वभम दस्षण टदळा टक औय यशं । उत्तय टक औय खुरने लारी अरभायी एलॊ कळ ै फोक्व भं यखे गमे धन एलॊ आबूऴण टक प्तनयॊ तय लृत्रद्ध शोती यशती शं । ऩूलल - ऩूलल टक औय खुरने लारी अरभायी एलॊ कळ फोक्व भं धन ै यखने वे उवभं फढ़ोतयी शोती यशती शै । रेटकन उत्तय को वलल श्रेद्ष भानागमा शं । दस्षण - दस्षण टक औय खुरने लारी अरभायी एलॊ कळ फोक्व भं धन यखने वे ै धन एलॊ आबूऴण जो शं उवभे भं कभी आजाप्तत शं क्मोटक एवी स्स्थप्तत भे अरभायी मा कळ फोक्व शोने वे आभदनी वे ै खचाल अप्तधक शोता शं एलॊ वॊचम टकमे गमे धन भं बी कभी आजाती शं । एलॊ व्मत्रि ऩय कजल चढ जाता शं । ऩस्द्ळभ - ऩस्द्ळभ टक औय खुरने लारी अरभायी एलॊ कळ फोक्व भं धन एलॊ आबूऴण यखने वे उव घय भे धन किी ै भेशनत वे कबी कबाय प्राद्ऱ शोता शं एलॊ टिक ऩाता शं , अन्म था अन्म वॊफॊप्तध मा प्तभत्र लगल वे वशामता वे प्राद्ऱ शोने लारा धन बी टिकता नशीॊ शं । धन लृत्रद्ध टिब्फी धन लृत्रद्ध टिब्फी को अऩनी अरभायी, कळ फोक्व, ऩूजा स्थान भं यखने वे धन लृत्रद्ध शोती शं स्जवभं कारी शल्दी, ै रार- ऩीरा-वपद रक्ष्भी कायक शकीक (अकीक), रक्ष्भी कायक स्पटिक यत्न, 3 ऩीरी कौिी, 3 वपद कौिी, गोभती े े चक्र, वपद गुॊजा, यि गुॊजा, कारी गुॊजा, इॊ द्र जार, भामा जार, इत्मादी दरब लस्तुओॊ को ळुब भशुतल भं तेजस्ली े ु ल भॊत्र द्राया अप्तबभॊत्रत्रत टकम जाता शं । भूल्म भात्र Rs-730
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    67 नलम्फय 2012 दे लउठनी एकादळी व्रत कथा  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी दे लउठनी एकादळी टक व्रत कथा टक ऩौयास्णक कथा क अनुळाय टकवी एक याजा क याज्म भं वबी रोग एकादळी का व्रत े े यखते थे। एकादळी क टदन याज्म टक प्रजा तथा नौकय-चाकयं वे रेकय ऩळुओॊ तक बोजन भं अन्न नशीॊ टदमा जाता था। े एक टदन दवये याज्म का एक व्मत्रि याजा क ऩाव आकय फोरा- भशायाज! कृ ऩा कयक भुझे आऩक मशाॊ काभ ऩय यख रं। ू े े े तफ याजा ने उव व्मत्रि क वाभने एक ळतल यखी टक तुम्शं योज खाने को वफ कछ प्तभरेगा, ऩय एकादळी को बोजन भं अन्न नशीॊ े ु प्तभरेगा। उव व्मत्रि ने नौकयी टक रारच भं उव वभम याजा को शाॉ कय दी, ऩय एकादळी क टदन जफ उवे पराशाय का वाभान टदमा गमा तो लश याजा क े े वाभने जाकय प्तगि-प्तगिाने रगा भशायाज! पराशाय वे भेया ऩेि नशीॊ बये गा। भं बूखा शी भय जाऊगा। कृ प्मा भुझे बोजन भं अन्न दे दो। याजा ने उवे ळतल ॉ माद टदराई, ऩय लश अन्न छोिने को याजी नशीॊ शुआ, तफ याजा ने उवे बोजन भं अन्न टक वाभग्री आटद टदए। लश अऩनी टदनचमाल क अनुळाय नदी टकनाये ऩशुॉचा औय स्नान कय े बोजन ऩकाने रगा। जफ बोजन फन गमा तो लश बगलान को फुराने रगा आओ बगलान! बोजन तैमाय शं । फुराने ऩय ऩीताम्फय धायण टकए बगलान चतुबज रूऩ भं आ ऩशुॉचे तथा प्रेभ वे उवक वाथ बोजन कयने रगे। बोजनाटद ुल े कयक बगलान अॊतधालन शो गए तथा लश अऩने काभ ऩय चरा गमा। े ऩॊद्रश टदन फाद अगरी एकादळी को लश याजा वे कशने रगा टक भशायाज, भुझे दगुना वाभान दीस्जए। उव टदन तो भं बूखा शी यश गमा। याजा ने ु कायण ऩूछा तो उवने फतामा टक शभाये वाथ बगलान बी खाते शं । इवीप्तरए शभ दोनं क प्तरए मे वाभान ऩूया नशीॊ शोता। मश वुनकय े याजा को फिा आद्ळमल शुआ। याजा फोरे भं नशीॊ भान वकता टक तुम्शाये वाथ बगलान बी खाते शं । भं तो इतना व्रत यखता शूॉ, ऩूजा कयता शूॉ, ऩय बगलान ने भुझे कबी दळलन नशीॊ टदए। याजा टक फात वुनकय लश फोरा- भशायाज! मटद त्रलद्वाव न शो तो वाथ चरकय दे ख रं। याजा एक ऩेि क ऩीछे प्तछऩकय फैठ े गमा। उव व्मत्रि ने बोजन फनामा तथा बगलान को ळाभ तक ऩुकायता यशा, ऩयॊ तु बगलान न आए। अॊत भं उवने कशा- शे बगलान! मटद आऩ नशीॊ आए तो भं नदी भं कदकय प्राण त्माग दॉ गा। ू ू रेटकन बगलान नशीॊ आए, तफ लश प्राण त्मागने क उद्दे श्म वे नदी टक तयप फढ़ा। प्राण त्मागने का उवका दृढ़ इयादा जान े ळीघ्र शी बगलान ने प्रकि शोकय उवे योक प्तरमा औय वाथ फैठकय बोजन कयने रगे। खा-ऩीकय ले उवे अऩने त्रलभान भं त्रफठाकय अऩने धाभ रे गए। मश दे ख याजा ने वोचा टक व्रत-उऩलाव वे तफ तक कोई पामदा नशीॊ शोता, जफ तक भन ळुद्ध न शो। इववे याजा को सान प्तभरा। लश बी भन वे व्रत-उऩलाव कयने रगा औय अॊत भं स्लगल को प्राद्ऱ शुआ।
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    68 नलम्फय 2012 दवयी कथा ू एक याजा था। उवक याज्म भं प्रजा वुखी थी। एकादळी को कोई बी अन्न नशीॊ फेचता था। वबी पराशाय कयते थे। एक फाय े बगलान ने याजा टक ऩयीषा रेनी चाशी। बगलान ने एक वुॊदयी का रूऩ धायण टकमा तथा विक ऩय फैठ गए। तबी याजा उधय वे प्तनकरा औय वुॊदयी को दे ख चटकत यश गमा। उवने ऩूछा- शे वुॊदयी! तुभ कौन शो औय इव तयश मशाॉ क्मं फैठी शो? तफ वुॊदय स्त्री फने बगलान फोरे- भं प्तनयाप्तश्रता शूॉ। नगय भं भेया कोई जाना-ऩशचाना नशीॊ शं , टकववे वशामता भाॉगू? याजा उवक रूऩ ऩय भोटशत शो गमा था। लश फोरा- तुभ भेये भशर भं चरकय भेयी यानी फनकय यशो। े वुॊदयी फोरी- भं तुम्शायी फात भानूॉगी, ऩय तुम्शं याज्म का अप्तधकाय भुझे वंऩना शोगा। याज्म ऩय भेया ऩूणल अप्तधकाय शोगा। भं जो बी फनाऊगी, तुम्शं खाना शोगा। याजा उवक रूऩ ऩय भोटशत था, अत् उवने उवकी वबी ळतं स्लीकाय कय रीॊ। अगरे टदन ॉ े एकादळी थी। यानी ने शुक्भ टदमा टक फाजायं भं अन्म टदनं टक तयश अन्न फेचा जाए। उवने घय भं भाॊव-भछरी आटद ऩकलाए तथा ऩयोवकय याजा वे खाने क प्तरए कशा। मश दे खकय याजा फोरा-यानी! आज एकादळी शं । भं तो कलर पराशाय शी करूगा। तफ यानी ने े े ॉ ळतल टक माद टदराई औय फोरी- मा तो खाना खाओ, नशीॊ तो भं फिे याजकभाय का प्तवय काि रूॉगी। याजा ने अऩनी स्स्थप्तत फिी यानी ु वे कशी तो फिी यानी फोरी- भशायाज! धभल न छोिं , फिे याजकभाय का प्तवय दे दं । ऩुत्र तो टपय प्तभर जाएगा, ऩय धभल नशीॊ प्तभरेगा। ु इवी दौयान फिा याजकभाय खेरकय आ गमा। भाॉ टक आॉखं भं आॉवू दे खकय लश योने का कायण ऩूछने रगा तो भाॉ ने उवे ु वायी लस्तुस्स्थप्तत फता दी। तफ लश फोरा- भं प्तवय दे ने क प्तरए तैमाय शूॉ। त्रऩताजी क धभल टक यषा शोगी, जरूय शोगी। े े याजा द्खी भन वे याजकभाय का प्तवय दे ने को तैमाय शुआ तो यानी क रूऩ वे बगलान त्रलष्णु ने प्रकि शोकय अवरी फात ु ु े फताई- याजन! तुभ इव कटठन ऩयीषा भं ऩाव शुए। बगलान ने प्रवन्न भन वे याजा वे लय भाॉगने को कशा तो याजा फोरा- आऩका टदमा वफ कछ शं । शभाया उद्धाय कयं । उवी वभम लशाॉ एक त्रलभान उतया। याजा ने अऩना याज्म ऩुत्र को वंऩ टदमा औय त्रलभान भं ु फैठकय लैकठ धाभ को चरा गमा। ुॊ श्री शनुभान मॊत्र ळास्त्रं भं उल्रेख शं की श्री शनुभान जी को बगलान वूमदेल ने ब्रह्मा जी क आदे ळ ऩय शनुभान जी को अऩने तेज का ल े वौलाॉ बाग प्रदान कयते शुए आळीलालद प्रदान टकमा था, टक भं शनुभान को वबी ळास्त्र का ऩूणल सान दॉ गा। स्जववे मश ू तीनोरोक भं वलल श्रेद्ष लिा शंगे तथा ळास्त्र त्रलद्या भं इन्शं भशायत शाप्तवर शोगी औय इनक वभन फरळारी औय कोई े नशीॊ शोगा। जानकायो ने भतानुळाय शनुभान मॊत्र की आयाधना वे ऩुरुऴं की त्रलप्तबन्न फीभारयमं दय शोती शं , इव मॊत्र भं ू अद्भत ळत्रि वभाटशत शोने क कायण व्मत्रि की स्लप्न दोऴ, धातु योग, यि दोऴ, लीमल दोऴ, भूछाल, नऩुॊवकता इत्माटद अनेक ु े प्रकाय क दोऴो को दय कयने भं अत्मन्त राबकायी शं । अथालत मश मॊत्र ऩौरुऴ को ऩुद्श कयता शं । श्री शनुभान मॊत्र व्मत्रि े ू को वॊकि, लाद-त्रललाद, बूत-प्रेत, द्यूत टक्रमा, त्रलऴबम, चोय बम, याज्म बम, भायण, वम्भोशन स्तॊबन इत्माटद वे वॊकिो वे यषा कयता शं औय प्तवत्रद्ध प्रदान कयने भं वषभ शं । श्री शनुभान मॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी क प्तरमे गुरुत्ल कामालरम भं वॊऩक कयं । े े ल भूल्म Rs- 730 वे 10900 तक GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Our Web: www.gurutvakaryalay.com http://gk.yolasite.com/ www.gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    69 नलम्फय 2012 दरयद्रता वे भुत्रि क ळीघ्र प्रबाली उऩाम े  प्तचॊतन जोळी नलम्फय 2010 क अॊक भं प्रकाप्तळत रेख दरयद्रता वे भुत्रि को आऩ वबी ऩाठक फॊध/ फशनो क भागलदळलन शे तु टकव े ु े कायणो वे आती शं प्तनधलनता एलॊ दरयद्रता प्तनलायण क उऩाम का त्रलस्तृत लणलन कयक उव रेख का ऩुन् प्रकाळान टकमा गमा े े शं ।  प्रप्ततटदन दे य उठने वे दरयद्रता आती शं ।  घय का वाया कचया झािू रगाकय एक कोने भं वभेि कय यखने वे आती शं । कचये को घय वे फाशय पक दं । े  वॊध्मा वभम घयभं दीऩक नशीॊ जराने वे दरयद्रता आती शं ।  गुरुलाय क टदन फार-दाढीॊ(शजाभत) कािने वे प्तनधलनता आती शं । े  दीऩ वे अगयफत्ती जराने वे दरयद्रता आती शं । (अगयफत्ती अरग भाप्तचव वे जरामे)  गुरुलाय क टदन बोजन भं भाॊवाशाय खाने वे दरयद्रता आती शं । े  गुरुलाय क टदन धोफी को कऩिे धोने क प्तरमे दे ने वे दरयद्रता आती शं । े े  गुरुलाय क टदन ऩीरी प्तभट्िी वे फार धोने वे प्तनधलनता आती शं । े  वूमालस्त शोने क फाद घय भं झािू रगाने वे घय भं दरयद्रता आती शं । े  अद्धल लत्ताकय (अधल गोराकाय) बूखि मा बलन क स्लाप्तभत्ल वे दरयद्रता ृ ॊ े प्राद्ऱ शोती शं ।  गुरु का टदमा गमे भॊत्र क त्माग कयने वे व्मत्रि दरयद्र शो जाता शं । े  गुरु वे कऩि ल प्तभत्र वे चोयी कयने वे दरयद्रता आती शं ।  कऩिे क आवन ऩय फैठ कय ऩूजा-ऩाठ भॊत्र जऩ अनुद्षान इत्माटद कयने े वे दरयद्रता आती शं ।  ऩत्थय एलॊ प्तभट्िी क फतलनं भं बोजन कयने वे प्तनधलनता आती शं । े  बोजन औय दध को त्रफना ढक यखने वे प्तनधलनता आती शं । ू े  घय भं वुफश झािू -फुशायी कयक वाप नशीॊ कयने वे प्तनधलनता आती शं । े  इस्न्द्रमं को वॊमभ भं नशीॊ यख कय ऩयस्त्री एलॊ ऩयधन टक काभना कयने वे प्तनधलनता आती शं ।  इद्वय भं श्रद्धा नशीॊ यखने वे व्मत्रि दरयद्र शो जाता शं ।  टदन भं अकायण वोने वे घय भं दरयद्रता आती शं ।  योग वे ऩीटित व्मत्रिमं को वाॊत्लना दे ने क फजाम उऩशाव कयने वे प्तनधलनता आती शं । े  जया-जया फात भं स्खन्न शोने लारे जया-जया फात भं अऩने लचनं वे भुकय ने लारे व्मत्रि दरयद्र शो जाता शं ।  छर-कऩि औय स्लाथल का आश्रम रेकय, दवयं क ळोऴण का आश्रम रेकय धन प्राद्ऱ कयने वे प्तनधलनता आती शं । उवक ू े े ऩाव धन आ वकता शै ऩयन्तु उवक ऩाव धन भशारक्ष्भी नशीॊ आ वकती। े  जूठे भुॉश यशने वे दरयद्रता आती शं ।
  • 70.
    70 नलम्फय 2012  भैरे-कचैरे-पिे शुए कऩिे ऩशनने वे प्तनधलनता आती शं । ु े  दीन-द्स्खमं को वताने वे प्तनधलनता आती शं । ु  भाता-त्रऩता क आप्तळलालद नशीॊ रेने वे प्तनधलनता आती शं । े  धभल, ळास्त्र औय वॊतं टक प्तनॊदा कयने वे व्मत्रि दरयद्र शो जाता शं । ू  घी को जूठे शाथ वे छने वे प्तनधलनता आती शं ।  जूठा शाथ प्तवय ऩय रगाने वे प्तनधलनता आती शं ।  जूठे भुॉश ळुब लस्तुओॊ का स्ऩळल कयने वे दरयद्रता आती शं ।  भॊगरलाय को ऋण रेने वे दरयद्रता आती शं ।  ऩाऩकभल भं यत यशने वे प्तनधलनता आती शं ।  कठोय-किक लचनो का प्रमोग कयने वे प्तनधलनता आती शं ।  फिे -फुजुगो का अनादय कयने वे उनकी फात नशीॊ भानने वे प्तनधलनता आती शं ।  जो स्त्री-ऩुरुऴ अऩने ऩप्तत-ऩत्नी को दफाकय यखने टक इच्छा यखने वे प्तनधलनता आती शं ।  लावी पक का उऩमोग कयने वे प्तनधलनता आती शं । ू  दगध मुि स्थान ऩय अप्तधक रोगो क वाथ भं वोने वे प्तनधलनता आती शं । ु ं े  पिा-िू िा आवन का उऩमोग कयने वे प्तनधलनता आती शं ।  स्भळान टक प्तचता क अॊगाये , अस्स्थ, बस्भ, गाम, कऩाव(रुई), ऩूज्म एलॊ गुरु जन, ब्राह्मण को ऩैय रगाने वे े प्तनधलनता आती शं ।  अऩने एक ऩैय को दवये ऩैयवे घीवने वे दफाने वे प्तनधलनता आती शं । ू  स्जव जर भं नाखून मा फार प्तगये शं उव जर का वेलन मा स्ऩळल कयने वे प्तनधलनता आती शं ।  चतुदलळी एलॊ अभालस्मा क टदन ळायीरयक वुख बोगने वे प्तनधलनता आती शं । े  त्रफना लस्त्र क वोने वे प्तनधलनता आती शं । े  कचया प्तनकारते लि उिने लारी धुक का स्ऩळल ळयीय को शोने वे दरयद्रता आती शं । (झािू रगाते लि वालधानी फयते जेवे धूर का स्ऩळल आऩक ळयीय को नशं) े  फैठे-फैठे खुयळी-िे फर-ऩरॊग इत्माटद ऩय त्रफना लजश वे फजाने (ढोर जेवे) वे प्तनधलनता आती शं ।  अऩने ळयीय ऩय त्रफना लजश वे फजाने (ढोर जेवे) वे प्तनधलनता आती शं ।  स्नान कयने वे उऩयाॊत ळयीय ऩय तेर रगाने वे प्तनधलनता आती शं । (स्नान वे ऩूलल तेर रगारे)  अऩने ऩैय टक एिी का भस्तक ऩय स्ऩळल कयने वे प्तनधलनता आती शं ।  अॊधेये कभये भं वोने वे प्तनधलनता आती शं । (कभये भं थोिी वे योळनी जरुय यखे)  यात्री कार भे धायण कयने लारे लस्त्र टदन भं धायण कयने वे प्तनधलनता आती शं ।( यात भं एलॊ टदन भं धायण कयने लारे कऩिे अरग-अरग यखं। टदन क यात भं एलॊ यात क टदन भं कबी नशीॊ ऩशने) े े  लावी एलॊ ळुष्क बोजन खाने वे दरयद्रता आती शं ।  ळुक्रलाय एलॊ अभालस्मा क टदन तेर-गॊध-द्रव्म को ळयीय ऩय रागने वे दरयद्रता आती शं । े  अऩने फाएॊ शाथ वे भाता का स्ऩळ कयने वे दरयद्रता आती शं । ( मटद स्ऩळल कये तो दोनो शाथो वे कयं कलर फाएॊ े शाथ वे स्ऩळल न कयं ।)
  • 71.
    71 नलम्फय 2012  अऩत्रलत्र अलस्था भं वूमल-चॊद्र-तायं का दळलन कयने वे प्तनधलनता आती शं ।  वूमालस्त का दळलन कयने वे प्तनधलनता आती शं ।  ऩयस्त्री-ऩयऩुरुऴ को नग्न अलस्था भं दे खने वे प्तनधलनता आती शं ।  ऩय धन,स्त्री, वॊऩत्रत्त टक इच्छा कयने वे दरयद्रता आती शं ।  नाखून, कािे , खून, प्तभट्िी, कोमरा मा ऩानी वे बूप्तभ ऩय अनालश्मक रेखन-प्तचत्रण कयने वे दरयद्रता आती शं ।  स्लमॊ भारा गूॊथ(भारा फना) कय स्लमॊ धायण कयने वे दरयद्रता आती शं ।  स्लमॊ चॊदन घीव कय स्लमॊ रगाने वे दरयद्रता आती शं । (टकवी औय वे घीवलाकय रगामे)  ब्राह्मण टक प्तनन्दा कयने वे दरयद्रता आती शं ।  फेठे-फेठे मा वोते शुए दोनो ऩैयो को त्रफना लजश टशराने-नचाने वे दरयद्रता आती शं ।  बोजन क फाद तुयॊत दातुन कयने वे दरयद्रता आती शं । े  अन्म का झुठा अन्न खाने वे दरयद्रता आती शं ।  अऩने इद्श का त्माग कय अन्म क इद्श भं आस्था यखने वे दरयद्रता आती शं । े  ऩय स्त्री-ऩुरुऴ टक वेला कय क अऩने ऩरयलाय क रोगो को कद्श दे ने वे दरयद्रता आती शं । े े  ऩरयश्रभ-ऩुरुऴाथल वे स्खन्न शोने लारे व्मत्रि टक वशामता कयने वे दरयद्रता आती शं ।  अमोग्म भनुष्म को दान दे न मा वशामता कयने वे दरयद्रता आती शं ।  प्रप्ततऩदा को गृशायम्ब कयने वे दरयद्रता आती शं ।  घय का द्राय आध्भात (परा शुआ) शोनेऩय दरयद्रता आती शं । ू  भुख्म द्रायक ऊऩय द्राय औय द्रायक वाभने (आभने-वाभने) द्राय शोने वे दरयद्रता आती शं । े े  बलन भं ईळान, आग्नेम ल ऩस्द्ळभभं ऊची औय नैऋत्म नीची बूप्तभ शोने वे दरयद्रता आती शं । ॉ  भुख्म द्रायक वाभने दीलाय मा फालिी शोनेवे दरयद्रता शोती शै । े  नर वे ऩानी िऩकते यशने वे दरयद्रता आती शं , ऩानी का अऩव्मम शोने वे लरुण दे ल का श्राऩ रगता शं ।  वॊध्मा वभम बोजन औय ऩढ़ने वे धन नाळ शोता शं ।  दे ली-दे लताओॊ ऩय चढ़ामे गमे पर मा शाय क वूखने ऩय बी घय भं यकखने वे दरयद्रता आती शं । ( पर-शाय शो टकवी ू े ू प्रास्िीक फैग भं बयकय यख दं टपय उवे एक-दो भाश भं फाय इकठ्ठे फशते जर भं त्रलवस्जलत कयदं ।)  िू िा-पिा पनॉचय, फतलन, काॊच, पिे शुए कऩिे यखने वे दरयद्रता आती शं । ू  घय टक टदलायो ऩय, पळल ऩय ऩेन, ऩंप्तवर,चाक इत्माटद वे प्तरखना-प्तचत्रकायी कयने वे दरयद्रता आती शं । दरयद्रता प्तनलायण क उऩाम े  प्रप्ततटदन प्रात: जल्दी उठ कय इद्श आयाधना कयने वे दरयद्रता दय शोती शं । ू  गुरुलाय क टदन घय भं गाम क गोफय का रेऩन आटद कयने वे दरयद्रता दय शोती शं । े े ू  गुरुलाय क टदन ऩीरी लस्तु का बोजन कयने वे दरयद्रता दय शोती शं । े ू  दान-ऩुण्म इत्माटद कभल कयते यशने वे दरयद्रता दय शोती शं । ू  प्राण-प्रप्ततत्रद्षत वात भुखी रुद्राष धायण कयने वे दरयद्रता वे भुत्रि प्तभरती शं ।
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    72 नलम्फय 2012  घय भं प्राण-प्रप्ततत्रद्षत प्राण-प्रप्ततत्रद्षत दस्षणालतॉ ळॊख टक घयभं स्थाऩना वे रक्ष्भी का स्थामी लाव शोता शं , ळत्रुओॊ वे यषा शोती शै , योग, कण, असानता एलॊ दरयद्रता वे ळीघ्र भुत्रि प्तभरती शं ।  घय भं प्राण-प्रप्ततत्रद्षत त्रलष्णु ळॊख (द्वेत यॊ ग का ळॊख) स्थात्रऩत कयने वे एलॊ प्तनत्म ऩूजन कयने वे दरयद्रता दय शोती ू शं ।  श्री वूि का ऩठन कयने वे बी दरयद्रता वे भुत्रि प्तभरती शं ।  श्री वूि टक ऋचाओॊ का श्रलण मा ऩठन कयक प्तनमप्तभत शलन कयने वे त्रलप्तबन्न कद्श दय शोकय ऐद्वमल प्राप्तद्ऱ शोती शं । े ू रक्ष्भी जी टक कृ ऩा प्राद्ऱ शोने वे द्ख, दरयद्रता, योग, कद्श, कजल वे स्लत् भुत्रि प्तभरती शं । ु  भान्मता शं टक दीऩालरी क टदन जर भं तथा तेर भं रक्ष्भी का लाव शोता शं । इव प्तरमे दीऩालरी क टदन ळयीय े े ऩय तेर टक भाप्तरळ कयक जर (गॊगा स्नान मा जर भं गॊगाजर जर प्तभराकय) वे स्नान कयने वे दरयद्रता वे भुत्रि े प्तभरती शं ।  कनकधाया स्तोत्र क ऩाठ क ऩठन एलॊ श्रलण वे दरयद्रता वे भुत्रि प्तभरती शं । े े  कनकधाया मॊत्र को दरयद्रता का नाळ कयने शे तु याभफाण भाना जाता शं इव प्तरमे कनकधाया मॊत्र टक आयाधना कयने वे दरयद्रता वे भुत्रि प्तभरती शं ।  दगाल फीळा मॊत्र क ऩूजन वे बी दरयद्रता का नाळ शोता शं । ु े  भाश टक दोनं वॊकि चतुथॉ क प्तनमप्तभत व्रत वे दरयद्रता का नाळ शोता शं । े  रक्ष्भी गणेळ मॊत्र क ऩूजन वे दरयद्रता का नाळ शोता शं । े  श्रीमॊत्र क ऩूजन वे दरयद्रता का नाळ शोकय बौप्ततक वुख, ळाॊप्तत ल वौबाग्म की प्राप्तद्ऱ शोती शं । े  ऩायद श्री मॊत्र मा प्तळलप्तरॊग का ऩूजन दरयद्रता वे भुत्रि टदराता शं ।  रक्ष्भी मॊत्र मा अद्श रक्ष्भी मॊत्र क ऩूजन वे दरयद्रता का नाळ शोता शै । े  याभामण टक प्तनम्न चौऩाइ का ऩाठ कयने वे दरयद्रता का नाळ शोता शं । चौऩाइ अप्ततप्तथ ऩूज्म त्रप्रमतभ ऩुयारय क। े काभद धन दारयद दलारयक ॥ े  फृशस्ऩप्तत ग्रश का यत्न वुनेरा धायण कयने वे दरयद्रता दय शोती शं । ू  श्री मॊत्र जटित नलयत्न धायण कयने वे वे दरयद्रता का नाळ शोता शं ।  दरयद्रता प्तनलायण शे तु आत्भा भं अचर श्रद्धा शो, तो दरयद्र भनुष्म बी धनलान शो जाते शं ।  कल्ऩलृष मॊत्र क ऩूजन वे दरयद्रता का नाळ शोता शं । े  प्रदोऴ व्रत कयने वे ळप्तन वे ऩीटित वभस्माए कभ शोती शं एलॊ दरयद्रता का नाळ शोता शं ।  आॊगन भं तुरवी का ऩौधा रगा कय उवका ऩूजन वे दरयद्रता दय शोती शं । ू  ऩीऩर लृष की प्तनत्म तीन फाय ऩरयक्रभा कयने औय जर चढाने ऩय दरयद्रता का नाळ शोता शं ।  प्तभद्षान अकरे नशीॊ खाकय ऩरयलाय एलॊ प्तभत्र लगल भं फाॊि कय खाने वे दरयद्रता का नाळ शोता शं । े  ऩीऩर क फने प्तळलप्तरॊग का ऩूजन कयने वे दरयद्रता का प्तनलायण शोता शं । े  प्तळल ऩॊचाषयी भॊत्र (ॐ नभ् प्तळलाम) का जऩ कयने लारे को दरयद्रता नशी आती शं ।
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    73 नलम्फय 2012  घय क भुख्म द्राय क उऩय अॊदय टक ओय गणेळ प्रप्ततभा मा प्तचत्र रगाने वे घय वे दरयद्रता दय शोकय ऩून् प्रलळ नशीॊ े े ू कयती। ( घय क फाशय रगाने वे दरयद्रता आप्तत शं । मटद फशाय रगाना शो तो इव प्रकाय रगामे जेवे अॊदय फाशाय दोनो े ओय गणेळ जी टक दोनो ऩीठ एक टश स्थान ऩय प्तभरती शं।)  फुधलाय क टदन वपद कऩिे का झॊिा फना क ऩीऩर क लृष ऩय रगाने वे प्तनधलनता दय शोती शं । े े े े ू  रक्ष्भी जी क वभष घी का दीऩक रगाने वे प्तनधलनता दय शोती शं । े ू  प्रप्तत ळुक्रलाय क टदन अळोक लृष क 13 अखॊटित ऩत्ते राकय ळुद्ध जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩिे वे ऩोछकय इन 13 ऩत्तो े े का भौरी (कराला) वे तोयण फनाकय घय क भुख्म द्राय ऩय रगाने वे दरयद्रता एलॊ ळत्रु वे भुत्रि प्तभरती शं । े नोि: जैवे आत्भफर भं श्रद्धा उत्ऩन्न शोते टश कामय व्मत्रि बी ळूयलीय शो जाते शं , प्रभादी एलॊ आरवी व्मत्रि बी उद्यभी शो जाते शं , भूखल व्मत्रि बी त्रलद्रान शो जाते शं , योगी व्मत्रि बी प्तनयोग शो जाते शं , उवी प्रकाय वे उप्तचत कभल कयने वे दरयद्र व्मत्रि बी धनलान शो जाते शं । वॊऩूणल प्राणप्रप्ततत्रद्षत 22 गेज ळुद्ध स्िीर भं प्तनप्तभलत अखॊटित ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र (स्िीर भं) को तीव्र प्रबालळारी फनाने शे तु ळप्तन की कायक धातु ळुद्ध स्िीर(रोशे ) भं फनामा गमा शं । स्जव क प्रबाल वे वाधक को तत्कार राब प्राद्ऱ शोता शं । मटद जन्भ किरी भं े ॊु ळप्तन प्रप्ततकर शोने ऩय व्मत्रि को अनेक कामं भं अवपरता प्राद्ऱ शोती शै , कबी व्मलवाम भं घिा, ू नौकयी भं ऩये ळानी, लाशन दघिना, गृश क्रेळ आटद ऩये ळानीमाॊ फढ़ती जाती शै ऐवी स्स्थप्ततमं भं ु ल प्राणप्रप्ततत्रद्षत ग्रश ऩीिा प्तनलायक ळप्तन मॊत्र की अऩने को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थाऩना कयने वे अनेक राब प्तभरते शं । मटद ळप्तन की ढै ़मा मा वाढ़े वाती का वभम शो तो इवे अलश्म ऩूजना चाटशए। ळप्तनमॊत्र क ऩूजन भात्र वे व्मत्रि को भृत्मु, कजल, कोिल कळ, जोिो का ददल , फात योग तथा रम्फे वभम े े क वबी प्रकाय क योग वे ऩये ळान व्मत्रि क प्तरमे ळप्तन मॊत्र अप्तधक राबकायी शोगा। नौकयी ऩेळा आटद े े े क रोगं को ऩदौन्नप्तत बी ळप्तन द्राया शी प्तभरती शै अत् मश मॊत्र अप्तत उऩमोगी मॊत्र शै स्जवक द्राया े े ळीघ्र शी राब ऩामा जा वकता शै । भूल्म: 1050 वे 8200 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    74 नलम्फय 2012 दीऩ जराने का धाप्तभलक भशत्ल क्मा शं ?  प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी शोना अवॊबल वा प्रप्ततत शोता शं । इवी कायण बायप्ततम वभ्मताओॊ भं अस्ग्न को दे ल कशा गमा शं । अस्ग्न को दे लता भनकय उवका ऩूजन टकमा जाता शं । क्मोटक एवा भाना जाता शं , टक मटद अस्ग्न दे ल क्रोप्तधत शोजामे तो फिे -फिे भशरं ल ऊचे-ऊचे बलनं को धूरभं उिादे औय याख ॊ ॊ फनादे । इव प्तरमे प्रकाळ का ऩूजन कय उन्शं ळाॊत यखने का प्रमाव टकमा जाता शं । शभाये प्रभुख धभल ग्रॊथो भं एक ऋग्लेद का वलल प्रथभ भॊत्र शी प्रकाळ वे ळुरू शोता शै । भॊत्र: प्रकाळभीरे ऩुयोटशतॊ मसस्म दे लभृस्त्लजभ ्। शोतायॊ प्रकाळ, तेज ऊजाल क कदयप्तत स्त्रोत शं । ऊजाल क त्रफना े ु े यत्नधातभभ ्॥ भानल जीलन का कोई अस्स्तत्ल नशीॊ शं । वभग्र ब्रह्माॊि भं बालाथल:- वललप्रथभ आयाधन टकए जाने लारे, मस को प्रकाप्तळत प्रकाळ ऊजाल का प्रभुख स्त्रोत एक भात्र वूमल शं , उव क अराला े कयने लारे, ऋतुओॊ क अनुवाय मस वम्ऩाटदत कयने लारे, े कोई औय प्रभुख स्त्रोत का अस्स्तत्ल नशीॊ शं । मशी कायण शं टक दे लताओॊ का आह्वान कयने लारे तथा धन प्रदान कयने लारं भं आज वूमल क तेज वे शी शभाया जीलन वुचारु रुऩ वे प्रकाळभान े वललश्रद्ष अस्ग्न दे लता की भं स्तुप्तत कयता शूॊ। े शं । लामु भॊिर भं व्माद्ऱ लामुकण (धूर) औय फादर इत्माटद अनाटदकार वे भनुष्म का वफवे फिा ळत्रु अॊधकाय वबी भं अऩनी चुम्फकीम ळत्रि शोती शं स्जवक कायण वफ एक े रुऩी असानता यशी शं । इव प्तरमे ऩुयातन कारवे टश दवये की ओय आकत्रऴलत शोते यशते शं । ू अॊधकाय को दय कयने लारा प्रकाळ भनुष्म का वफवे फिा ू इवी आकत्रऴलत शोने क कायण कण एक दवये वे ऩाव े ू प्तभत्र यशा शै । आते औय दय शोते यशते शं , स्जवक फर क कायण टश ऊजाल ू े े क्मोटक प्रकाळ शभं दे खने की ळत्रि दे ता शं । उत्ऩन्न शोती शं । इस्वे उत्ऩन्न शोने लारी उजाल को टश प्रकाळ लामुभॊिर भं लस्तु टक वशी ऩशचान कयने क प्तरमे प्रकाळ े कशा जाता शं । आलश्मक शै । प्रकाळ का शभाये जीलन भं फशुत भशत्ल शं , इव भशत्ल उऩप्तनऴद भं इवी प्तरमे अॊधकाय वे ज्मोप्तत की ओय जाने वे शय व्मत्रि बरी बाप्तत लाटकप शं । शभायी बायप्ततम वॊस्कृ प्तत की काभना की गई शै । क धाप्तभलक कामलक्रभ भं बी अस्ग्न का त्रलळेऴ भशत्ल शं । एलॊ े अवतो भा वद्गभम अस्ग्न प्रकाळ का प्रप्ततक शं जो मस, शलन, त्रललाश, वॊस्काय तभवो भाॊ ज्मोप्ततगलभम जेवे अन्म धाप्तभलक कभलकाॊिो भं त्रफना अस्ग्न क त्रफना वॊऩन्न े भृत्मोभाल अभृतॊ गभम
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    75 नलम्फय 2012 ळास्त्रो भं अस्ग्न क तीन रूऩं लणलन टकमा गमा े शं । ऩृर्थली ऩय अस्ग्न, अन्तरयष भं त्रलद्युत औय आकाळ भं वूम। प्रकाळ क उद्दगभ क त्रलऴम भं कशा गमा शै टक ल े े कार क वॊघऴल-भॊथन वे उवका जन्भ शुआ। वूमल टक े अस्ग्न अॊधकाय को प्तभिाता शै , अवुयी ळत्रि को ियाता, प्रकाळ का आह्वान कयता, प्तचय मुला औय प्राचीन ऩुयोटशत शै । ऋग्लेद क अनुळाय भशात्रऴल बृगु ऋत्रऴ ने अस्ग्न की े खोज की। ऩकाने क आत्रलष्काय क वाथ दीऩ प्तभट्िी का फनने रगा। े े अस्ग्न क प्तरमे ऋग्लेद भं कशा गमा शं । े प्राचीन कार वे धप्तनकं द्राया फिे करात्भक टदमं का प्रमोग टकमा जाता था, जो ऩत्थय, धातु, कीभती यत्नं, वोने अस्ग्नभीऱे ऩुयोटशतॊ (ऋग्लेद) औय चाॊदी क शोते थे। मे छोिे फिे वबी आकायं क थे। े े वभम क वाथ वाथ दीऩ स्तॊब बी प्रचरन भं आए। े ऋग्लेद याभामण भं उल्रेख प्तभरता शं टक जफ शनुभान इॊ द्र ज्मोप्तत् अभृतॊ भतेऴु रॊका ऩशुॉचे तो उन्शं वुनशये दीऩं को दे ख कय भ्रभ शुआ वूमांळ वॊबलो दीऩ् टक कशीॊ ले स्लगल भं तो नशीॊ आ गए। उन्शं लशाॊ ऩीरे औय अथालत: वूमल क अॊळ वे दीऩ की उत्ऩत्रत्त शुई। े जरते शुए स्लणलदीऩ टदखाई टदए। दीऩ जीलन की ऩत्रलत्रता, बत्रि, अचलना औय आळीलालद स्लरुऩ भाना जाता शं । बायतीम ळास्त्रो भे उल्रेख प्तभरता शै , टक अस्ग्न का वॊफॊध भनुष्म क जन्भ वे रेकय भयण तक शोता शं । मशी े वूमल क अॊळ वे उत्ऩन्न ऩृर्थली की अस्ग्न को स्जव े कायण शं शभायी वॊस्कृ प्तत भं त्रलप्तबन्न व्रत-त्मोशाय इत्माटद ऩात्र भं स्थात्रऩत टकमा गमा उवे आज दीऩक क रूऩ भं े भं दीऩ क भशत्ल शं । दीऩलरी बी शभाये प्रभुख त्मौशायो शभाये घयं भं ऩूजा जाता शै । भं वे एक शै , स्जव भं उजाल क प्रप्ततक क रुऩ भं दीऩक े े जराने टक ऩयॊ ऩया शं । ळुबभ कयोप्तत करमाणभ ् आयोग्मभ ् धन वम्ऩदा शभाये ळास्त्रं भं दीऩज्मोप्तत टक भटशभा का त्रलस्तृत ळत्रुफुस्ध्द त्रलनाळाम दीऩज्मोप्तत नभस्तुते ।। लणलन टकमा गमा शं । ळास्त्रं भं दीऩज्मोप्तत को ऩाऩनाळक, ळत्रुओॊ टक लृत्रद्ध योकने लारी, आमु एलॊ आयोग्म प्रदान अथालत: शभे ळुब, वुन्दय औय कल्माणकायी, आयोग्म औय कयने लारी शं । वॊऩदा को दे ने लारे शे दीऩक टक ज्मोप्तत, शभाये ळत्रं टक फुत्रद्ध क त्रलनाळ क प्तरए शभ तुम्शं नभस्काय कयते शं । े े दीऩो ज्मोप्तत् ऩयभ ् ब्रह्म दीऩो ज्मोप्ततजलनादल न्। दीऩो शयतु भं ऩाऩभ ् वाध्मदीऩ नभोऽस्तु ते।। ऩूयातन कार भं दीऩ का ऩात्र स्पटिक, ऩाऴाण मा ळुबभ ् कयोतु कल्माणभ ् आयोग्मभ ् वुखवम्ऩदभ ्। वीऩ का शोता था। कारान्तय भं प्तभट्िी को गढने औय ळत्रुफुत्रद्धत्रलनाळभ ् च दीऩज्मोप्ततनलभोऽस्तु ते।।
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    76 नलम्फय 2012 ऩाऩ-ताऩ का शयण शोता शै , ळत्रुफुत्रद्ध का ळभन शोता शै  भान्मता शं टक मटद घय भं दीऩक की रौ ऩूलल औय ऩुण्मभम, वुखभम जीलन की लृत्रद्ध शोती शै । टदळा की ओय शो, तो आमु टक लृत्रद्ध कयती शं ।  दीऩक की रौ ऩस्द्ळभ टदळा की ओय शो, तो द्ख ु ऩुरूऴोत्तभ भशात्त्म्म भं दीऩक टक ज्मोप्तत क प्तरमे े की लृत्रद्ध कयती शं । कशा गमा शं ।  दीऩक की रौ उत्तय टदळा की ओय शो, तो स्लास्र्थम रूषैरक्ष्भी त्रलनाळ्स्मात द्वैतेयन्नषमो बलेत ् ल औय प्रवन्नता टक लृत्रद्ध कयती शं । अप्तत यिऴु मुध्दाप्तन भृत्मु्कृ ष्ण प्तळखीऴु च।। े  दीऩक की रौ दस्षण टदळा की ओय शो, तो शाप्तन कयती शं । अथालत: कोयी ळुष्क (रूखी) ज्मोप्तत रक्ष्भी का नाळ, द्वेतज्मोप्तत अन्नषम, अप्तत रार ज्मोप्तत मुद्ध औय कारी मटद घय भं आऩ दीऩक जरामं तो उवे आऩक घयक उत्तय े े ज्मोप्तत भृत्मु की द्योतक शोती शं । अथला ऩूलल कोने भं शोना चाटशए। दीऩज्मोप्तत क प्रबाल वे े कनकधाया मॊत्र आज क मुग भं शय व्मत्रि अप्ततळीघ्र वभृद्ध फनना चाशता शं । धन प्राप्तद्ऱ शे तु प्राण-प्रप्ततत्रद्षत कनकधाया े मॊत्र क वाभने फैठकय कनकधाया स्तोत्र का ऩाठ कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । इव कनकधाया मॊत्र े टक ऩूजा अचलना कयने वे ऋण औय दरयद्रता वे ळीघ्र भुत्रि प्तभरती शं । व्माऩाय भं उन्नप्तत शोती शं , फेयोजगाय को योजगाय प्राप्तद्ऱ शोती शं । श्री आटद ळॊकयाचामल द्राया कनकधाया स्तोत्र टक यचना कछ इव प्रकाय टक शं , स्जवक श्रलण एलॊ ऩठन ु े कयने वे आव-ऩाव क लामुभॊिर भं त्रलळेऴ अरौटकक टदव्म उजाल उत्ऩन्न शोती शं । टठक उवी प्रकाय वे े कनकधाया मॊत्र अत्मॊत दरब मॊत्रो भं वे एक मॊत्र शं स्जवे भाॊ रक्ष्भी टक प्राप्तद्ऱ शे तु अचूक प्रबाला ळारी ु ल भाना गमा शं । कनकधाया मॊत्र को त्रलद्रानो ने स्लमॊप्तवद्ध तथा वबी प्रकाय क ऐद्वमल प्रदान कयने भं े वभथल भाना शं । जगद्गरु ळॊकयाचामल ने दरयद्र ब्राह्मण क घय कनकधाया स्तोत्र क ऩाठ वे स्लणल लऴाल ु े े कयाने का उल्रेख ग्रॊथ ळॊकय टदस्ग्लजम भं प्तभरता शं । कनकधाया भॊत्र:- ॐ लॊ श्रीॊ लॊ ऐॊ ह्रीॊ-श्रीॊ क्रीॊ कनक धायमै स्लाशा' भूल्म: Rs.730 वे Rs.8200 तक अप्तधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं । ल GURUTVA KARYALAY 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    77 नलम्फय 2012 धनत्रमोदळी ऩय मभ-दीऩदान अकारभृत्मु वे फचाता शं ?  प्तचॊतन जोळी धनत्रमोदळी क टदन टकमे जाने लारे कभल भं एक े भशत्त्लऩूणल कभल मभ क प्तनप्तभत्त टकमा जाने लारा दीऩदान े शं । टशन्द ू धभल ळास्त्र भं प्तनणलमप्तवन्धु क अॊतगलत े प्तनणलमाभृत औय स्कन्दऩुयाण उल्रेख शं टक काप्ततलक कृ ष्ण त्रमोदळी की वॊध्मा प्रदोऴ कार क वभाम घय वे फाशय े मभ क प्तनप्तभत्त दीऩदान कयने वे ऩरयलाय भं अकारभृत्मु े का बम दय शोता शं । ू ळास्त्रंि भत क अनुळाय मभदे लता बगलान वूमल े औय भाता वॊसा क ऩुत्र शं । लैलस्लत भनु, अस्द्वनीकभाय े ु एलॊ यै लॊत उनक बाई शं तथा मभुना उनकी फशन शै । े मभदे ल की वौतेरी भाॉ छामा वे ळप्तन, तऩती, त्रलत्रद्श, वालस्णल भनु आटद 10 वौतेरे बाई -फशन बी शं । ऩौयास्णक भान्मता क अनुळाय मभ ळप्तन ग्रश क अप्तधदे लता शं । े े मभदे लता प्रत्मेक प्राणी क ळुब-अळुब कभं क े े अनुवाय पर दे ने का कामल कयते शं । इवी कायण उन्शं क प्तनप्तभत्त दीऩ औय नैलेद्य वभत्रऩलत कयने ऩय अकार े मभदे लता को धभलयाज कशा गमा शं । क्मोटक अऩने भृत्मु का नाळ शोता शं । मश स्लमॊ मभयाज का कथन था। कतलव्म क प्रप्तत मभदे ल त्रुटि यटशत कामल व्मलस्था की े मभदीऩदान कलर प्रदोऴकार भं कयने का त्रलधान े स्थाऩना कयते शं । मभदे ल का अऩना अरग वे एक रोक शं । मभदीऩदान क प्तरए प्तभट्िी का एक फिा दीऩक रेकय े शं , स्जवे उनक नाभ वे शी मभरोक कशा जाता शं । े उवे उवे स्लच्छ जर वे धो रेना चाटशए। टपय स्लच्छ रुई ऋग्लेद भं उल्रेख शै टक मभरोक भं प्तनयन्तय अनद्वय रेकय दो रम्फी फत्रत्तमॉॊ फना रं। अथालत ् स्जवका नाळ न शो ऐवी ज्मोप्तत जगभगाती यशती फत्रत्तमाॊ इतनी रम्फी फनामे की दीऩक वे उवके शं । मभरोक अनद्वय शं औय मभरोक भं कोई भयता नशीॊ दोनं औय क छोय प्तनकरे शुए शो। फत्रत्तमॉॊ को दीऩक भं े शं । एक-दवये ऩय इव प्रकाय यखं टक दीऩक क फाशय फत्रत्तमं ू े मभदे लताक स्लरुऩ का लणलन कयते शुले ग्रॊथकायो ने प्तरखा े क चाय भुॉश टदखाई दं । अफ दीऩक को प्ततर क तेर वे े े शं । मभ की आॉखं रार शं , उनक शाथ भं ऩाळ यशता शं । े ु बय दं औय वाथ शी उवभं एक छिकी कारे प्ततर बी इनका ळयीय नीरा शै औय मे दे खने भं उग्र शं । बंवा िार दं । इनकी वलायी शं । मे वाषात ् कार शं । प्रदोऴकार भं इव प्रकाय त्रलप्तध वे तैमाय टकए गए मभदीऩदान: दीऩक का योरी, अषत एलॊ ऩुष्ऩ वे ऩूजन कयना चाटशए। मभदीऩदान क त्रलऴम भं स्कन्दऩुयाण भं कशा गमा शै टक े काप्ततलक क कृ ष्णऩष भं त्रमोदळी क प्रदोऴकार भं मभयाज े े
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    78 नलम्फय 2012 तत ऩद्ळात ् घय क भुख्म द्राय ऩय फाशय थोिी वी खीर, े ॐ मभदे लाम नभ्। नभस्कायॊ वभऩलमाप्तभ॥ चालर अथला गेशूॉ वे ढे यी फनाकय उवक ऊऩय दीऩक को े यखना चाटशए। तत ऩद्ळमात ऩुष्ऩ दीऩक क ऩाव यख दं औय ऩुन् शाथ े दीऩक को ढे यी ऩय स्थात्रऩत कयने वे ऩूलल उवे भं नैलेद्यॊ क रुऩ भं एक फताळा रं तथा प्तनम्नप्तरस्खत े प्रज्लप्तरत कय रं औय दस्षण टदळा की ओय दे खते शुए भन्त्र का उच्चायण कयते शुए उवे दीऩक क वभीऩ शी यख े इव भन्त्र का उच्चायण कयते शुए चायभुॉश क दीऩक को े दं । खीर, चालर, गेशूॉ आटद की ढे यी क ऊऩय यख दं । े ॐ मभदे लाम नभ्। नैलेद्यॊ प्तनलेदमाप्तभ॥ भृत्मुना ऩाळदण्िाभ्माॊ कारेन च भमा वश। तत ऩद्ळमात शाथ भं थोिा वा जर रेकय आचभन के त्रमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज् प्रीमताप्तभप्तत॥ ल प्तनप्तभत्त प्तनम्नप्तरस्खत भन्त्र का उच्चायण कयते शुए दीऩक अथालत ्: त्रमोदळी को दीऩदान कयने वे भृत्मु, ऩाळ, दण्ि, क वभीऩ जर को छोिे । े कार औय रक्ष्भी क वाथ वूमनॊदन मभ प्रवन्न शं। े ल ॐ मभदे लाम नभ्। आचभनाथे जरॊ वभऩलमाप्तभ॥ उि भन्त्र क उच्चायण क ऩद्ळात ् शाथ भं ऩुष्ऩ रेकय े े प्तनम्नप्तरस्खत भन्त्र का उच्चायण कयते शुए मभदे ल को तत ऩद्ळमात ऩुन् मभदे ल को ॐ मभदे लाम नभ्। भन्त्र दस्षण टदळा भं नभस्काय कयं । का उचायण कयते शुए दस्षण टदळा भं नभस्काय कयं । अवरी 1 भुखी वे 14 भुखी रुद्राष गुरुत्ल कामालरम भं वॊऩणल प्राणप्रप्ततत्रद्षत एलॊ अवरी 1 भुखी वे 14 भुखी तक क रुद्राष उऩरब्ध शं । ू े ज्मोप्ततऴ कामल वे जुिे़ फॊध/फशन ल यत्न व्मलवाम वे जुिे रोगो क प्तरमे त्रलळेऴ भूल्म ऩय यत्न, उऩयत्न ु े मॊत्र, रुद्राष ल अन्म दरब वाभग्रीमाॊ एलॊ अन्म वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं । रुद्राष क त्रलऴम भं अप्तधक ु ल े जानकायी क प्तरए कामालरम भं वॊऩक कयं । े ल त्रलळेऴ मॊत्र शभायं मशाॊ वबी प्रकाय क मॊत्र वोने-चाॊटद-ताम्फे भं आऩकी आलश्मिा क अनुळाय टकवी बी बाऴा/धभल े े क मॊत्रो को आऩकी आलश्मक टिजाईन क अनुळाय २२ गेज ळुद्ध ताम्फे भं अखॊटित फनाने की त्रलळेऴ े े वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं । अप्तधक जानकायी क प्तरए कामालरम भं वॊऩक कयं । े ल GURUTVA KARYALAY 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    79 नलम्फय 2012 धनत्रमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं टकमा जाता शं ?  प्तचॊतन जोळी ळास्त्रंि भत क अनुळाय धनत्रमोदळी क टकमे जाने े े रोकलाप्तवमं का कल्माण शोगा। काप्ततलक कृ ष्ण त्रमोदळी को लारे कभो भं मभदीऩदान को त्रलळेऴ प्रभुखता दी जाती शं । प्रप्ततलऴल प्रदोऴकार भं जो अऩने घय के दयलाजे ऩय रेटकन धनत्रमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं टकमा जाता शं प्तनम्नप्तरस्खत भन्त्र वे उत्तभ दीऩ दे ता शं , लश अऩभृत्मु शोने इव क ऩीछे छऩी धाप्तभलक भान्मता वे कभ रोग शी ऩयीप्तचत े ु ऩय बी मशॉॊ रे आने क मोग्म नशीॊ शै । े शंगे! भृत्मुना ऩाश्दण्िाभ्माॊ कारेन च भमा वश। टशन्द ू धभल भं टकमे जाने लारी प्रत्मेक व्रत-तमोशाय, त्रमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज् प्रीमताप्तभप्तत॥ ल उत्वल, ऩूजन त्रलप्तध-त्रलधान, इत्माटद क ऩीछे कोई न कोई े उवक फाद वे शी अऩभृत्मु अथालत ् अवाभप्तमक भृत्मु वे े ऩौयास्णक कथा अलश्म जुिी शोती शं । इवी प्रकाय फचने क उऩाम क रूऩ भं धनत्रमोदळी ऩय मभ क प्तनप्तभत्त े े े धनत्रमोदळी ऩय मभदीऩदान कयना बी इवी प्रकाय ऩौयास्णक दीऩदान एलॊ नैलेद्य वभत्रऩलत कयने का कभल प्रप्ततलऴल टकमा कथा वे जुिा शुआ शं । स्कन्दऩुयाण भं लैष्णलखण्ि के जाता शं । अन्तगलत काप्ततक ल भाव भशात्म्म भं इववे वम्फस्न्धत मभयाज की वबा: मभयाज की वबा का लणलन कयते शुए ग्रॊथ ऩौयास्णक कथा का वॊस्षद्ऱ उल्रेख टकमा गमा शं । कायं ने प्तरखा शं टक दे लरोक की चाय प्रभुख वबाओॊ भं वे ऩौयास्णक कथा क अनुळाय एक फाय मभदत फारकं े ू एक शै मभवबा । इव वबा का प्तनभालण त्रलद्वकभाल जी ने एलॊ मुलाओॊ क प्राण शयते वभम ऩये ळान शो उठे । मभदत को े ू टकमा था। मभवबा अत्मन्त त्रलळार वबा शै , इवकी 100 फिा द्ख शुआ टक ले फारकं एलॊ मुलाओॊ क प्राण शयने का ु े मोजन रम्फाई एलॊ 100 मोजन चौिाई शै । इव प्रकाय मश कामल कयते शं , ऩयन्तु मभदत कयते बी क्मा? उनका कामल शी ू लगालकाय शै । मभवबा का ताऩक्रभ अत्मन्त वुशालना अथालत ् प्राण शयना शी शं । मभदत अऩने कतलव्म वे ले कवे त्रलभुख ू ै न तो अप्तधक ळीतर शै औय न शी अप्तधक गभल शै । शोते? मभदत क प्तरए एक औय कतलव्मप्तनद्षा का प्रद्ल था, ू े मभवबा वबी क भन को अत्मन्त आनन्द दे ने लारी शै । े दवयी ओय स्जन फारक एलॊ मुलाओॊ का प्राण शयकय राते थे , ु मभवबा भं न ळोक, न फुढ़ाऩा शै , न बूख शै , न प्माव शै औय उनक ऩरयजनं क द्ख एलॊ त्रलराऩ को दे खकय स्लमॊ को े े ु न शी मभवबा भं कोई अत्रप्रम लस्तु शं । इव प्रकाय मभवबा शोने लारे भानप्तवक क्रेळ का प्रद्ल था। ऐवी स्स्थप्तत भं जफ द्ख, कद्श एलॊ ऩीिा क कयणं का अबाल यशता शं । मभवबा ु े मभदत फशुत टदन तक यशने रगे, तो त्रललळ शोकय ले अऩने ू भं दीनता, थकालि अथला प्रप्ततकरता नाभभात्र को बी नशी ू स्लाभी मभयाज क ऩाव ऩशुॉचे औय कशा टक भशायाज आऩक े े शै । मभवबा भं वदै ल ऩत्रत्रत वुगन्ध लारी ऩुष्ऩ भाराएॉ एलॊ आदे ळ क अनुवाय शभ प्रप्ततटदन लृद्ध, फारक एलॊ मुला े अन्म कई यम्म लस्तुएॉ त्रलद्यभान यशती शं । व्मत्रिमं क प्राण शयकय राते शं , ऩयन्तु जो अऩभृत्मु क े े मभवबा भं अनेक याजा, ऋत्रऴल औय ब्रह्मत्रऴल मभदे ल प्तळकाय शोते शं , उन फारक एलॊ मुलाओॊ क प्राण शयते वभम े की उऩावना कयते यशते शं । ममाप्तत, नशुळ, ऩुरु, कातललीमल, शभं भानप्तवक क्रेळ शोता शं । उवका कायण मश शै टक अरयद्शनेभी, कृ प्तत, प्तनप्तभ, भान्धाता, प्रतदलन, प्तळत्रल आटद याजा उनक ऩरयजन अत्माप्तधक त्रलराऩ कयते शं औय स्जववे शभं े भृत्मु क उयान्त मशाॊ फैठकय धभलयाज की उऩावना कयते शं । े फशुत अप्तधक द्ख शोता शं । क्मा फारक एलॊ मुलाओॊ को ु कठोय तऩस्मा कयने लारे, उत्तभ व्रत का ऩारन कयने लारे अवाभप्तमक भृत्मु वे छिकाया नशीॊ प्तभर वकता शै ? ु मभदत क भुख वे इतना वुनकय धभलयाज फोरे ू े वत्मलादी, ळान्त, वॊन्मावी तथा अऩने ऩुण्मकभल वे ळुध्द एलॊ दतगण तुभने फशुत अच्छा प्रद्ल टकमा शं । इववे भृत्मु ू ऩत्रलत्र भशाऩुरुऴं का शी मभवबा भं प्रलेळ शोता शं ।
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    80 नलम्फय 2012 ळास्त्रोि त्रलधान वे दीऩालरी ऩूजन  आरोक ळभाल शभाये धभलळास्त्रो भं काप्ततलक भाव भं दीऩ दान का त्रलळेऴ अथालत: वभुद्र-भॊथन क वभम षीय वागय वे उत्ऩन्न े भशत्ल फतामा गमा शै । दीऩालरी भं दीऩदान का त्रलळेऴ भशत्ल दे लताओॊ तथा दानलं द्राया नभस्काय टक गई वलल फतामा शं । दे लस्लरूत्रऩणी भाता। आऩको फाय-फाय नभस्काय शं । आऩ भेये द्राया टदमे शुए इव अघ्मल को स्लीकाय कयो। श्रीऩुष्कयऩुयाण क अनुळाय: े इव टदन ऩूजन क फाद गाम को उिद क फिे स्खरा कय प्राथलना े े कयने का त्रलधान शं । तुरामाभ ् प्ततरतैरेन वामॊकारे वभागते। वुयप्तब त्लॊ जगन्भातदे ली त्रलष्णुऩदे स्स्थता। आकाळदीऩभ ् मो दद्यान्भावभेकभ ् शरयभ ् प्रप्तत। वललदेलभमे ग्रावॊ भमा दत्तप्तभभॊ ग्रव।। भशतीभ ् प्तश्रमभाप्नोप्तत रूऩवौबाग्मवम्ऩदभ ्।। तत् वललभमे दे त्रल वललदेलैयरङ्कृ ते। अथालत: जो व्मत्रि काप्ततलक भाव भं भातभलभाप्तबरात्रऴतॊ वपरॊ करु नस्न्दनी।। ु वॊध्मा वभम बगलान श्री अथालत: शे जगदम्फे, शे स्लगल लाप्तवनी दे ली, शे वलल दे लभमी, शरय(त्रलष्णु) क नाभ वे प्ततर क तेर े े भेये द्राया अत्रऩत इव अन्न को ग्रशण कयो। शे ल का दीऩ जराता शं , उवे अतुर वभस्त दे लताओॊ द्राया अरॊकृत भाता नॊटदनी रक्ष्भी, रूऩ, वौबाग्म औय वॊऩत्रत्त भेया भनोयथ ऩूणल कयो। टक प्राप्तद्ऱ शोती शं । इवक फाद यात्र क वभम इद्श, ब्राह्मण, े े दे लत्रऴल नायदजी क अनुवाय दीऩालरी े गौ, घय क लृद्धजनं टक आयती उतायने े ऩलल द्रादळी, त्रमोदळी, चतुदलळी, का त्रलधान शं । अभालस्मा औय प्रप्ततऩदा तक 5 टदन त्रमोदळी (धनतेयव) भनाना चाटशए। दीऩालरी ऩलल प्रत्मेक टदन काप्ततलक कृ ष्ण त्रमोदळी को धनतेयव क रुऩ भं े अरग-अरग प्रकाय टक ऩूजा का त्रलधान शं । भनामा जाता शं । ळास्त्रो भं उल्रेख प्तभरता शं टक गोलत्व द्रादळी बगलान धन्लॊतयी ने वभुद्र-भॊथन क दौयान प्रकि शोकय द्खी े ु काप्ततलक भाव टक द्रादळी को गोलत्व द्रादळी क टदन दध दे ने े ू जनं क योगप्तनलायणाथल आमुलद का प्राकट्म टकमा था। े े लारी गाम को उवक फछिे वटशत स्नान कयाकय लस्त्र ओढ़ा े धनतेयव क टदन वॊध्मा क वभम घय औय आॊगन भं शाथ भं े े कय गरे भं ऩुष्ऩभारा ऩशनाना, उवक वीॊग भॉढ़ाना, चॊदन का े जरता शुआ दीऩ रेकय प्तनचे टदमे भॊत्र वे बगलान मभयाज टक प्ततरक कयना तथा ताॉफे क ऩात्र भं वुगन्ध, अषत, ऩुष्ऩ, प्ततर े प्रवन्नता शे तु इव भॊत्र क वाथ दीऩदान कयने का त्रलधान शं । े औय जर का प्तभश्रण कय प्तनम्न भॊत्र वे गौ क चयणं का े भृत्मुना ऩाळदण्िाभ्माॊ कारेन श्माभमा वश। प्रषारन कयना चाटशए। त्रमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज् प्रीमताॊ भभ।। ल षीयोदाणललवम्बूते वुयावुयनभस्कृ ते। अथालत: त्रमोदळी क टदन दीऩदान वे ऩाळ औय दॊ िधायी भृत्मु े वललदेलभमे भातगृशाणाघ्मं नभो नभ्।। ल तथा कार क अप्तधऩप्तत दे ल बगलान मभ, दे ली श्माभावटशत े भुझ ऩय प्रवन्न शं।
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    81 नलम्फय 2012 नयक चतुदलळी कयने वे अन्म टदनं की अऩेषा कई गुना अप्तधक राब प्राद्ऱ काप्ततलक कृ ष्ण चतुदलळी को नयक चतुदलळी क रुऩ भं भनामा े शोता शं । दीऩालरी क टदन ऩशरे वे शी स्लच्छ टकमे गृश को े जाता शं । इव टदन चतुभखी दीऩ का दान कयने का त्रलधान शं । ुल वुवस्ज्जत कय बगलान नायामण क वाथ भाॊ रक्ष्भी टक भूप्ततल े भान्मता शं , दीऩ दान वे नयक बम वे भुत्रि प्तभरती शं ! नयक मा प्तचत्र टक स्थाऩना कय उनका त्रलप्तधलत ऩूजन कयने का त्रलधान शं । चतुदलळी टक यात को एक चाय भुख (चाय फत्ती) लारा दीऩ जराकय प्तनचे टदमे भॊत्र वे दीऩदान कयने का त्रलधान शं । प्रप्ततऩदा दत्तो दीऩद्ळतुदलश्माॊ नयकप्रीतमे भमा। काप्ततलक ळुक्र प्रप्ततऩदा को अन्नकि टदलव क रुऩ भं भनामा ू े चतुलप्ततवभामुि् वललऩाऩाऩनुत्तमे।। ल ल जाता शं । इव टदन गाम को वजाकय, उनकी ऩूजा कयक प्तनचे े आज चतुदलळी क टदन नयक क अप्तबभानी दे लता टक प्रवन्नता े े टदमे भॊत्र उच्चायण कयने का त्रलधान शं । क प्तरए एलॊ वभस्त ऩाऩं क त्रलनाळ क प्तरए भं चाय भुख े े े रक्ष्भीमाल रोकऩारानाॊ धेनुरूऩेण वॊस्स्थता। लारा चौभुखा दीऩ अत्रऩत कयता शूॉ। ल घृतॊ लशप्तत मसाथे भभ ऩाऩॊ व्मऩोशतु।। अथालत: धेनुरूऩ भं स्स्थत जो रोकऩारं टक वाषात रक्ष्भी शं दीऩालरी तथा जो मस क प्तरए घी दे ती शं , लश गाम भाता भेये ऩाऩं का े काप्ततलक अभालस्मा को दीऩालरी क रुऩ भं भनामा जाता शं । े नाळ कये । इव टदन प्रात् उठकय स्नानाटद वे प्तनलृत्त शोकय जऩ-तऩ अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलच अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलच ल उल्रेस्खत अन्म वाभग्रीमं को ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलद्रान ब्राह्मणो द्राया वला राख भशाभृत्मुजम भॊत्र जऩ एलॊ दळाॊळ शलन द्राया प्तनप्तभलत कलच अत्मॊत ॊ प्रबालळारी शोता शं । अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलच अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलच फनलाने शे तु: अऩना नाभ, त्रऩता-भाता का नाभ, कलच गोत्र, एक नमा पोिो बेजे दस्षणा भात्र: 10900 कलच क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी शे तु गुरुत्ल कामालरम भं वॊऩक कयं । े ल GURUTVA KARYALAY 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    82 नलम्फय 2012 रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क वयर उऩाम े  प्तचॊतन जोळी जो रोग बौप्ततक वुख भृत्रद्ध क कायक श्रीमॊत्र, दस्षणा लप्ततल े ळॊख इत्मा आटद घय भं स्थात्रऩत कय ऩूज नशी कय ऩाते अथला इन लस्तुओॊ को खरयदने भं अवभथल शो लश रोग इव अनुबूत उऩामोको को अऩनाकय जीलन भं वुख-वभृत्रद्ध एलॊ ऎद्वमल प्राद्ऱ कय वकते शं ।  प्रात् उठते शी शस्तदळलन (प्रात् कय दळलनभ ्) कय दोनं शथेप्तरमं को 2-3 फाय भुॊश ऩय पयना चाटशमे। े  जफ बी टकवी कामल वे फाशय प्तनकरे तो घय ऩय आते वभम कछ ु ना कछ वाथ रेकय शी आए खारी शाथ नशीॊ आए चाशे ऩेि का ु ऩत्ता-अखफाय मा जीलन जरुयत टक लस्तुएॊ रेकय आमं। (वूमालस्त क फाद भं ऩेि क ऩत्ते तोिना शानी कायक शोता शं ।) े े  धन मा व्माऩाय वे वॊफॊधीत रेन-दे न क खाते ऩय मा ऩत्र व्मलशाय े कयते वभम शल्दी मा कळय रगामं। े  गल्रे भं, ऩैवे क रेन-दे न वे वॊफॊप्तधत, चैक फुक-ऩावफुक, ऩूॊजी े प्तनलेळ वे वॊफॊप्तधत कागजात इत्माटद श्री मॊत्र क वाथ भं यखं। े  प्रप्ततटदन बोजन क प्तरए फनी ऩशरी योिी गाम को स्खरामे। े  ळुक्रलाय को वपद लस्तुओॊ का दान कयने वे धन मोग फनता शं । े  प्रात : कार नाळता कयने वे ऩूलल झािू अलश्म रगामे।  यात को झूठे फतलन, कचया इत्माटद यवोई भं नशीॊ यखे।  प्रप्ततटदन वॊध्मा वभम घय ऩय ऩूजा प्तनमत वभम ऩय कये ।  प्तनमप्तभत रुऩ वे ळप्तनलाय क टदन घय टक वाफ़-वपाई कयं । े  रुऩमा ऩैवा धन को थूक रगाकय प्तगनने वे दरयद्रता आती शं ।  फुधलाय को धन का वॊचम कयं । फंक भं धन जभा कयलाते वभम रक्ष्भी भॊत्र जऩा कये ।  घय भं टकवी बी दे ली दे लता टक एक वे ज्मादा तस्लीय, भूप्ततल ऩूजा ऩय स्थान नशीॊ यखे।  जरुयत भॊद व्मत्रि, गरयफो को मथावत्रि भदद कय उन्शं दान इत्माटद वभम-वभम ऩय दे ते यशं ।  ऩुयानी, यद्दी बॊगाय इत्माटद ळप्तनलाय क टदन घय वे फाशय प्तनकार दे नी चाटशमे औय जो ऩैवा प्तभरे उववे घय क प्तरए े े स्स्िर क फयतन खरयदना अप्तधक राबप्रद शोता शं । मटद फतलन का भूल्म अप्तधक शो तो उव भं अरग वे ऩैवे जोि े कय खयीदे जा वकते शं  ळप्तनलाय क टदन कारे यॊ ग टक लस्तु, स्िीर, रोशा इत्माटद उऩशाय भं नशीॊ रेनी चाटशमे। े  टकवी कमल क प्तरमे जाते वभम खारी ऩेि कबी बी घय वे ना प्तनकरे । कामल भं फाधा त्रलघ्न आते शं , अवपरता े प्राद्ऱ शोती शं ।  भॊगरलाय, गुरुलाय, ळप्तनलाय को फार-नाखून नशीॊ कािने चाटशमे।
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    83 नलम्फय 2012  स्स्थय रक्ष्भी टक काभना शे तु रुऩमा-ऩैवा-शीये जलाशयात ऩीरा कऩिा त्रफछाकय मा ऩीरे कऩिे भं रऩेिकय यखं।  लऴल भं कभ वे कभ एक फाय ऩरयलाय क वाथ तीथल मात्रा अलश्म कयं । े ऩरयलाय क वाथ टकवी दे ली भंटदय भटशने भं कभ वे कभ एक फाय भं े अलश्म जामे।  वूमोदम क वभम मटद घय की छत ऩय कारे प्ततर त्रफखेयने वे घय भं े वुख वभृत्रद्ध शोती शं ।  अळोक का ऩेि रगाकय उवको वीॊचने वे धन भं लृत्रद्ध शोती शं ।  वुफश भुख्म दयलाजे क फाशय वे झािू वे वपाई कयक थोिा ऩानी े े प्तछिक ने वे घय भं धन टक लृत्रद्ध शोती शं ।  प्रप्तत वोभलाय, फुधलाय, ळुक्रलाय अळोक लृष क अखॊटित ऩत्ते घयभं े राकय ळुद्ध जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩिे वे ऩोछकय घय भं मा व्मलवामीक स्थान ऩय यखने वे धनराब शोता शं ।  प्रप्तत वोभलाय क टदन अळोक लृष क अखॊटित ऩत्ते राकय ळुद्ध जर मा े े गॊगाजर वे धोकय रार कऩिे वे ऩोछकय दकान भं मा व्मलवामीक ु स्थर ऩय भार वाभान यखने टक जगश ऩय यखने वे व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं ।  प्रप्तत फुधलाय क टदन अळोक लृष क अखॊटित ऩत्ते राकय ळुद्ध जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩिे वे ऩोछकय े े अरभायी, गल्रे भं मा धन यखने क फक्वे भं यखने वे धन फृत्रद्ध शोती शं । े  अळोक क भूर की जि का एक िु किा ऩूजा घय भं यखने औय योजाना धूऩ-दीऩ वे ऩूजन कयने वे धन टक कभी े नशीॊ खोती।  प्ततजोयी क रॉकय भं शभेळा दो फॉक्व यखं। एक भं योजाना कछ रूऩमे यख कय फॊद कय दं , उवभं वे रूऩमे नशीॊ े ु प्तनकारं मा अत्माप्तधक आलश्मकता शोने ऩय प्तनकारे। दवये फॉक्व भं वे काभ क रेन-दे न क प्तरए रूऩए प्तनकारं। ू े े  प्रप्ततटदन आभदनी का करेक्ळन दवये टदन स्लमॊ क खचे क प्तरमे मा टकवी व्माऩायी को चुकाने शे तु प्तनकारे। ू े े आभदनी मा करेक्ळन को कभ वे कभ 24 घॊिे क फाद शी खचल क प्तरमे प्तनकारने वे अत्माप्तधक धन राब शोता शं । े े  जो रोग नौकयी रयते शं लश बी अऩना ऩैवा फंक भं आने क मा घय भं राने क 24 घॊिे क फाद शी खचल क प्तरमे े े े े प्तनकारने वे अत्माप्तधक धन राब शोता शं । प्तळषा वे वॊफॊप्तधत वभस्मा क्मा आऩक रिक-रिकी की ऩढाई भं अनालश्मक रूऩ वे फाधा-त्रलघ्न मा रुकालिे शो यशी शं ? फच्चो को अऩने ऩूणल ऩरयश्रभ े े एलॊ भेशनत का उप्तचत पर नशीॊ प्तभर यशा? अऩने रिक-रिकी की किरी का त्रलस्तृत अध्ममन अलश्म कयलारे औय े ुॊ उनक त्रलद्या अध्ममन भं आनेलारी रुकालि एलॊ दोऴो क कायण एलॊ उन दोऴं क प्तनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे े े े े े जनकायी प्राद्ऱ कयं । GURUTVA KARYALAY Call Us - 9338213418, 9238328785, Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Visit Us: www.gurutvakaryalay.com http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com
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    84 नलम्फय 2012 दीऩालरी क टदन कवे कयं फशीखाता तुरा ऩूजन? े ै  प्तचॊतन जोळी टशन्द ू धभल भं ऩॊचभशा ऩलल दीऩालरी ऩय व्मलवाम तदऩयान्त योरी, ऩुष्ऩ आटद वे ॐ रेखनीस्थामै दे व्मै ु कामल वे जुिे रोग गणेळ ऩूजन, रक्ष्भी ऩूजन, कफेय ु नभ्। का उच्चायण कयते शुए ऩूजन कयं । भन्त्र फोरते ऩूजन, आटद ऩूजनो क वाथ-वाथ अऩने व्मलवाम वे जुिे े शुए ऩूजन कयं । ऩूजन क ऩद्ळमात प्तनम्नप्तरस्खत भन्त्र वे े टशवाफ-टकताफ यखने शे तु शय लऴल दीऩालरी ऩय फशी-खाता, शाथ जोिकय प्राथलना कये । तुरा (तयाजू), रेखनी (करभ) आटदका ऩूजन बी कयते ळास्त्राणाॊ व्मलशायाणाॊ त्रलद्यानाभाप्नुमाद्यत्। शं । अतस्त्लाॊ ऩूजप्तमष्माप्तभ भभ शस्ते स्स्थया बल॥ वललप्रथभ व्मलवामीक स्थान क भुख्मद्राय क दोनं े े फशीखाता ऩूजन् ओय की टदलाय ऩय प्तवन्दय वे ळुब-राब औय ॐ औय ू दीऩालरी क टदन व्मलवाम वे जुिे रोग नए फशीखातं का े स्लस्स्तक क प्तचि अॊटकत कयं । ऩद्ळमात इन ळुब प्तचिं े ळुबायम्ब कयते शं । ऩूजन शे तु नए फशीखाते रेकय उन्शं का योरी, ऩुष्ऩ आटद वे ऩूजन कयं । ऩूजन के ळुद्ध जर क छीॊिे दे कय ऩत्रलत्र कय रं। फशीखातं को े वभम ॐ दे शरीत्रलनामकाम नभ्। भॊत्र जा रार लस्त्र त्रफछाकय तथा उव ऩय अषत एलॊ उच्चायण कयं । ऩुष्ऩ िारकय स्थात्रऩत कयं । फशीखाते के अफ क्रभळ दलात अथालत (Inkstand), प्रथभ ऩृद्ष ऩय वललप्रथभ उऩय रार फशीखाता, तुरा (तयाजू) आटद का करभ मा ऩेन वे श्री गणेळाम नभ्। ऩूजन कयना चाटशए। प्तरखे ऩद्ळमात स्लस्स्तक का प्तचि दलात का ऩूजन: दलात को चॊदन अथला योरी वे फनाएॉ। ऩद्ळमात भशाकारी का रूऩ भाना जाता शं । अऩने इद्श दे ली-दे लता का नाभ प्तरख वललप्रथभ नई स्माशीमुि दलात को वकते शं । मटद फशी खातो ऩय वद्ऱ श्री ळुद्ध जर क छीिं दे कय ऩत्रलत्र कय रे, े प्तरखा जाए तो बी आने लारे लऴल बय उवक फाद उवक भुख ऩय भौरी फॉॊध दं । े े क प्तरमे आप्तथलक द्रत्रद्श वे राबदामक यशता े दलात को चौकी ऩय थोिे वे ऩुष्ऩ औय अषत शं । (वद्ऱ श्री प्तरखने की त्रलप्तध गुरुत्ल ज्मोप्ततऴ िारकय स्थात्रऩत कय दं । दलात का योरी, ऩुष्ऩ आटद वे भाप्तवक ऩत्रत्रका भं ऩृद्ष वॊख्मा ऩय दी गई शं । भशाकारी क भन्त्र ॐ श्रीभशारक्ष्भै नभ्। का उच्चायण े ऩद्ळमात फशीखाते का योरी, ऩुष्ऩ आटद वे त्रलप्तधलत ऩूजन कयते शुए ऩूजन कयं । ऩूजन क ऩद्ळमात इव प्रकाय प्राथलना े कयना चाटशए। ऩूजन क वभम ॐ श्रीवयस्लत्मै नभ् भन्त्र े कये । का उच्चायण कयं । काप्तरक त्लॊ जगन्भातभलप्तवरूऩेण लतलवे। े तुरा का ऩूजन् उत्ऩन्ना त्लॊ च रोकानाॊ व्मलशायप्रप्तवद्धमे॥ वललप्रथभ तयाजू को ळुद्ध कय रेना चाटशए। तदऩयान्त उव ु रेखनी ऩूजन् दीऩालरी क टदन नमी रेखनी मा ऩेन को ळुद्ध जर वे े ऩय योरी वे स्लस्स्तक का प्तचि फनाएॉ। उव ऩय भौरी धोकय तथा उव ऩय भौरी फॉॊधकय रक्ष्भीऩूजन की चौकी फॉॊध दं तथा ॐ तुराप्तधद्षातृदेलतामै नभ्। उच्चायण कयते ऩय कछ अषत एलॊ ऩुष्ऩ िारकय स्थात्रऩत कय दं । ु शुए योरी, ऩुष्ऩ आटद वे तयाजू का ऩूजन कयं ।
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    85 नलम्फय 2012 श्री धनलॊतरय व्रत कथा  प्तचॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी प्रथभ अध्माम वनकाटदक भुप्तनमं ने वूत जी वे कशा-शे वूत शं । कोई पोिे , प्तगल्िी, प्रेग आटद वे मुि वस्न्नऩात योग भशाभुने! आऩने बगलान ् धनलॊतरय की ऩूजा-त्रलप्तध का औय प्रभेशाटद योगं वे घेये गमे शं । इव प्रकाय रोग अनेक त्रलस्ताय ऩूलक लणलन टकमा, टकन्तु इवे वुनने ऩय बी शभं ल योगं वे ग्रस्त औय द्खी शं । उन्शं दे खकय भुझे फिा द्ख ु ु तृप्तद्ऱ नशीॊ शुई। अत् श्री धनलॊतरय का भाशात्म्म अप्तधक शुआ औय फायम्फाय भंने प्तचन्ता की। भंने वोचा टक मे त्रलस्ताय वे फताइए। रोग कवे नीयोग शंगे औय प्रवन्न शंगे ? इवी प्तचन्ता वे ै भुप्तनश्रेद्ष वुत जी ने कशा-शे भुप्तनमं! आऩ भन भं व्माकर शोकय भं आऩकी ळयण भं आमा शूॉ। ु ऩाऩत्रलनाप्तळनी कथा को वुप्तनए। इव कथा को वुनने वे शे त्रलद्वात्भन ् ळयणागत बूम्माटद रोकं की आऩ वबी योगं का नाळ शोता शं : यषा कीस्जमे। त्रैरोक्म भं आऩक अप्ततरयि इनका कोई े एक वभम नायद जी वबी रोगं क कल्माण की े यषक नशीॊ शं । इच्छा वे वभुद्र द्रीऩ ऩललत वटशत वम्ऩूणल ऩृर्थली का भ्रभण बगलान ् श्री त्रलष्णु नायद जी क उि लचनं को े कय यशे थे। लशाॉ उन्शंने वबी रोगं को त्रलत्रलध योगं वे वुनकय गम्बीय लाणी वे फोरे-शे भुने आऩ बम न द्खी दे खा। मश दे खकय नायद जी प्तचस्न्तत शुए औय लशाॉ ु कीस्जमे। भं ‘आटद धनलॊतरय’ इन्द्र वे आमुलद प्राद्ऱ कय े वे स्लगल जा ऩशुॉचे। स्लगल भं इन्द्र आटद दे लता बी योगी ऩुन् अलताय रेकय वबी रोकं को नीयोग करुॉ गा। भं शो यशे थे। मश दे खकय नायद जी की प्तचन्ता औय फढ़ काप्ततलक भाव, कृ ष्ण ऩष, त्रमोदळी, गुरुलाय, शस्त नषत्र के गई। प्तचन्ता कयते शुए ले लैकण्ठ भं ऩशुॉचे। ु वभम अलताय रेकय ‘आमुलद’ का उद्धाय करुॉ गा। इवभं े लैकण्ठ भं नायद जी ने ळॊख चक्र अभृत करळ ु वन्दे श न कयो। धायी औय अबम शस्त धनलॊतरय त्रलष्णु को दे खा। श्री (रक्ष्भी), बू (ऩृर्थली) औय नीरा दे ली उनकी चयण वेला टद्रतीम अध्माम: कय यशी थी। ऐवे भशात्भा धनलॊतरय रुऩी श्री त्रलष्णु को बगलान ् त्रलष्णु क उि लचनं को वुनकय नायद े नायद जी ने बत्रि ऩूलक प्रणाभ टकमा औय शाथ जोिकय ल भुप्तन अप्तत प्रवन्न शुए औय शऴल वे फोरे-शे बगलन ् आऩ उनकी स्तुप्तत कयने रगे। ‘धनलॊतरय ऩूजा’ की त्रलप्तध फताइए। ‘धनलॊतरय ऩूजा भं श्री नायद जी फोरे-शे दे लं क दे ल जगन्नाथ बिं े ऩय दमा कयने लारे दीनफन्धु दमावागय जगत ् की यषा भं कौन वा ध्मान मा त्रलधान टकमा जाए ? उवका प्तनमभ तत्ऩय आऩ भुझे ळयणागत जानकय वन्तुद्श कीस्जए। क्मा शं ? उवका पर क्मा शं ? टकव वभम, टकवने उव शे बगलन ् भंने ऩृर्थली आटद वबी रोकं भं ऩमलिन ऩूजा को टकमा शं ? ऩूजा भं क्मा क्मा चीजं चाटशए ? शे टकमा औय लशाॉ क प्तनलावी जनं को नाना योगं वे द्खी े ु दे ल दे लेद्वय रोकं ऩय अनुग्रश कयने की इच्छा वे कृ ऩा ऩामा। टकवी को ज्लय ने प्तगयामा शं , तो टकवी को याज ऩूलक मश वफ भुझे फताइए। श्री बगलान ् ने कशा- शे भुने ल मक्ष्भा ने धय दफामा। कोई अप्ततवाय, द्वाव, खाॉवी,वॊग्रशणी तुभने रोकोऩकाय की इच्छा वे ऩूछा शं । अतएल तुभवे औय ऩाण्िु योगाटद वे ऩीटित शं । कोई लातयोगं वे ऩीटित ‘ऩाऩनाप्तळनी, योगनाप्तळनी कथा’ कशता शूॉ।
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    86 नलम्फय 2012 धनगुद्ऱ याजा क प्तनप्तभत्त काप्ततलक कृ ष्ण त्रमोदळी े बयद्राज भुप्तन ने कशा-शे याजन ् तुम्शाया लृत्तान्त गुरुलाय शस्त नषत्र क वभम भं यात्रत्र क प्रथभ प्रशय भं े े भंने जान प्तरमा। तुभ अप्तत ळीघ्र भशात्रलष्णु धनलॊतरय की गुद्ऱ धन क वभान ‘धनलॊतरय’ नाभ वे अलतीणल शोता शूॉ। े ळयण भं जाओ। भनुष्म उनक दळलन भात्र वे घोय दस्तय े ु अतएल लश टदन वॊवाय भं ‘धनत्रमोदळी’ (धनतेयव) नाभ योगं वे भुि शो जाता शं । याजा ने बयद्राज भुप्तन वे उि फात वुनकय उनवे ऩूछा-शे भशात्भन ् आऩ कृ ऩा कय उनकी वे प्रप्तवद्ध शोगा। मश प्ततप्तथ वबी काभनाओॊ को दे ने लारी आयाधना त्रलप्तध भुझे बरी-बाॉप्तत फताइए। ऋत्रऴ बयद्राज ने शं । कशा-शे भशाबाग याजन ् उव त्रलप्तध को भं कशता शूॉ, नायद जी ने ऩूछा- शे बगलन ् कृ ऩमा त्रलस्ताय ऩूलक ल वालधान प्तचत्त वे वुप्तनए। फताइए टक फि फागी धनगुद्ऱ कशाॉ शुआ औय आऩक दळलन े की प्राप्तद्ऱ क प्तरए उवने कौनवा व्रत टकमा था औय शे े काप्ततलक कृ ष्ण त्रमोदळी क ळुब टदन, प्रात् कार े दमावागय नायामण उवने आऩका ऩूजन क्मं टकमा था? उठकय ळौच-भुख भाजलन आटद वे प्तनलृत्त शोकय स्नान कये । ळुद्ध लस्त्र आटद धायण कय गुरु वे प्राद्ऱ उऩदे ळानुवाय श्री बगलान ् ने कशा- ऩशरे अलन्तीऩुय (उज्जैन) भं बगलान ् धनलॊतरय का ध्मान कये । प्तनम्न भन्त्र ऩढ़कय व्रत ‘धनगुद्ऱ’ नाभक याजा धभलभागल वे प्रजा का ऩारन कयने का प्रायम्ब कये : लारा शुआ था। लश वबी रोगं का प्माया, उदायप्तचत्त था। करयष्माप्तभ व्रतॊ दे ल त्लद् बिस्त्लत ् ऩयामण्। उवे षमयोग शो गमा। उववे लश टदन-यात ऩीटित शोने प्तश्रमॊ दे टश जमॊ दे टश, आयोग्मॊ दे टश भे प्रबो रगा। ऩीिा की प्तनलृत्रत्त क प्तरए उवने जऩ, शोभ, नाना े अथालत ् शे दे ल भं आऩका बि शूॉ, आऩ भं प्तचत्त प्रकाय की औऴप्तधमाॉ की, ऩयन्तु नीयोग न शुआ। तफ लश रगाकय आऩका व्रत करुॉ गा। आऩ भुझे रक्ष्भी दीस्जए, स्खन्न शोकय त्रलराऩ कयने रगा। त्रलजम दीस्जए, आयोग्म दीस्जए। याजा की स्त्री त्रत्ररोक भं प्रप्तवद्ध, ऩप्ततव्रता, दे ल धनलॊतरय वे उि प्राथलना कय, उनकी वदाचारयणी थी। उवने बी ऩप्तत क भॊगर की आकाॊषा वे े ऴोिळोऩचाय वे ऩूजा कये । ऩूजा कयने क फाद तेयश धागं े अनेक प्तनमभ, उऩलाव आटद टकए, ऩय इववे बी याजा का वूत्र रेकय तेयश गाॉठ लारा ‘दोयक’ फनाए। इव ‘दोयक’ नीयोग न शुआ औय अन्त भं लश स्त्री बी अतीवाय योग वे की बत्रिऩूलक ऩूजा कये औय प्तनम्न भन्त्र ऩढ़कय ऩुरुऴं क ल े योप्तगणी शो गई। शे भुने उव याजा वे उव ऩप्ततव्रता स्त्री के दाटशने शाथ भं तथा स्स्त्रमं क फाॉएॉ शाथ भं फाॉधे: े ऩाॉच ऩुत्र शुए। ले क्रभळ् आभलात, प्रीशा, कद्ष, खाॉवी औय ु धन्लन्तये भशाबाग जयायोगप्तनलायक। ु द्वाव वे ऩीटित शुए। उनको बी योग वे छिकाया न दोयरुऩेण भाॊ ऩाटश, वकिु म्फॊ दमाप्तनधे॥ ु प्तभरा। याजा औय यानी अऩने ऩुत्रं को योगातल दे खकय आप्तधव्माप्तधजया भृत्मु बमादस्भादशप्तनळभ ्। ल अत्मन्त द्खी शुए। ु ऩीड्मभानॊ दे लदे ल यष भाॊ ळयणागतभ ्॥ स्त्री-ऩुत्रं को योग क वागय वे भुि कयाने की े अथालत ्-शे धन्लन्तये शे भशाबाग आऩ जया (फुढाऩा) औय इच्छा वे प्तचस्न्तत याजा घोय लन को चरा गमा। लन भं योग क प्तभिाने लारे शं । इवप्तरए शे दमाप्तनधे आऩ इव े याजा ने भशाभुप्तन ‘बयद्राज’ को फैठे दे खा। याजा ने उन्शं वूत्ररुऩ वे वकिु म्फ भेयी यषा कीस्जमे। भं टदन-यात आप्तध ु बत्रिऩूलक ल प्रणाभ टकमा औय अऩना द्ख ु फतामा। (भानप्तवक द्ख) औय व्माप्तध (योग), जया (फुढाऩा) तथा ु भशाभुप्तन बयद्राज वे याजा ने योग-कद्श प्तनलायण शे तु उऩाम भृत्मु क बम वे त्रस्त शो यशा शूॉ। शे दे ल-दे ल े ळयण भं ऩूछा। आए शुए भेयी अफ आऩ यषा कयं । वूत्र फन्धन क फाद े
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    87 नलम्फय 2012 ‘दे ल दे ल धनलॊतरय’ को बत्रि ऩूलक ‘अघ्मल’ प्तनलेदन कये । ल धन्लन्तये नभस्तुभ्मॊ, नभो ब्रह्माण्ि नामक। अघ्मल प्रदान कयने का भन्त्र इव प्रकाय शं : वुयावुयायाप्तधताॊघ्रे, नभो लेदैक गोचय । जातो रोक टशताथालम, आमुलदाप्तबलृद्धमे। े आमुलद स्लरुऩाम, नभस्ते जगदात्भने॥१॥ े जया भयण नाळाम, भानलानाॊ टशताम च॥ प्रऩन्नॊ ऩाटश दे लेळ जगदानन्द दामक। दद्शानाॊ प्तनधनामाम, जात्त धन्लन्तये प्रबो। ु दमा प्तनधे भशा दे ल त्राटश भाभऩयाप्तधनभ ्। गृशाणाघ्मं भमा दत्तॊ, दे ल दे ल कृ ऩा कय॥ जन्भ भृत्मु जयायोगै्, ऩीटितॊ वकिु स्म्फनभ ्॥२॥ ु अथालत ्- शे दे ल दे ल, दमा कायी धनलॊतरय! आऩ रोकाऩकाय अथालत ्- शे धन्लन्तये ब्रह्माण्ि नामक आऩको नभस्काय! क प्तरए, आमुलद की अप्तबलृत्रद्ध क प्तनप्तभत्त, भनुष्मं क े े े े आमुलद स्लरुऩ जगत ् क अन्तमालभी आऩको नभस्काय। शे े े टशत तथा जया भयण का नाळ कयने क प्तरए अलतरयत े जगत ् क वुखदामी दे ल दे ल दमा वागय, भशा दे ल आऩ े शुए शं । भं आऩको अघ्मल प्रदान कयता शूॉ। इवे स्लीकाय भुझ ळयणागत अऩयाधी की यषा कयं । भं किु म्फ वटशत ु कीस्जए। जन्भ भृत्मु जया आटद योगं वे ऩीटित शूॉ। अघ्मल प्रदान कयने क फाद ब्राह्मण को फामन दान े बगलान ् धनलॊतरय ने मश स्तुप्तत वुनकय भेघ कये । फामन दान क प्तरए गेशूॉ क आिे भं दध, घी िारकय े े ू गजलन क वभान गम्बीय लाणी वे भुस्कयाते शुए कशा-शे े ु भशा याज ठीक शं , ठीक शं , भं तुम्शायी स्तुप्तत वे प्रवन्न ऩकाए। ऩकने ऩय ळक्कय िारे। कवय, कऩूय, इरामची, े शूॉ। अफ शभवे लय भाॉग रो। रंग, जात्रलत्री िारकय इव प्तवद्ध नैलेद्य को बगलान ् को याजा फोरे-शे दे ल मटद आऩ प्रवन्न शं , तो वफवे अत्रऩत कये । आधा प्रवाद लेदस ब्राह्मण को अत्रऩलत कये ल ऩशरे स्त्री ऩुत्रं वटशत भुझे आयोग्म दीस्जए। औय आधा स्त्री ऩुत्राटद वटशत स्लमॊ प्रवाद स्लरुऩ ग्रशण मश प्राथलना वुनकय बगलान ् ने कशा-याजन ् तुभने कये । शे याजन ् इव त्रलप्तध वे व्रत कयने वे वाषात ् धनलॊतरय स्लमॊ प्रकि शोकय तुम्शाया अबीद्श प्तवद्ध कयं गे। जो प्राथलना की शं , लश ऩूणल शोगी। इवक अप्ततरयि बी भं े इतनी कथा वुनाकय बयद्राज भुप्तन ने त्रलश्राभ प्तरमा। लय दे ता शूॉ। उवे वालधान शोकय वुनो : तृतीम अध्माम: तुभने स्जव प्रकाय मश व्रत टकमा शं । इवी तयश वूत जी फोरे-शे भुप्तन लयं याजा धनगुद्ऱ ने भुप्तन जो व्रत कयं गे, उनको आयोग्म प्रदान कय भं उन्शं अऩनी की आसा ऩाकय उनक कशे अनुवाय तेयश लऴल ऩमलन्त े स्स्थय बत्रि दॉ गा। ू बत्रि ऩूलक व्रत टकमा। ल वूत जी फोरे-बगलान ् धनलॊतरय मश कशकय एक टदन व्रत वभाप्तद्ऱ क अलवय ऩय वाषात ् े अन्तधालन शो गए औय याजा धनगुद्ऱ अऩनी ऩुयी भं रौि धनलॊतरय प्रकि शुए। याजा ने वाद्शाॊग प्रणाभ कय उनकी गमा। याजा प्तनत्म स्त्री-ऩुत्रं वटशत अभृत ऩास्ण धनलॊतरय स्तुप्तत की। बत्रि ऩूलक की गई स्तुप्तत स्लीकाय कय ल की स्तुप्तत कयने रगा। उवने ऩृर्थली रोक भं नाना प्रकाय बगलान ् धनलॊतरय ने कशा-शे याजन ् अफ तुभ ियो भत, क वुख बोगे औय अन्त भं बगलान ् धनलॊतरय की कृ ऩा वे े तुम्शाया भॊगर शोगा। तुभ शभवे लय भाॉगो। याजा ने मश भोष ऩद प्राद्ऱ टकमा। इव प्रकाय भंने तुभ रोगं को वुनकय उन्शं ऩुन् वाद्शाॊग प्रणाभ टकमा औय उनकी स्तुप्तत बगलान ् धनलॊतरय की जन्भोत्वल कथा वुनाई। इवके की : वुनने वे वबी ऩाऩं का नाळ शोता शं ।
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    88 नलम्फय 2012 वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रका इव भुटद्रका भं भूॊगे को ळुब भुशूतल भं त्रत्रधातु (वुलणल+यजत+ताॊफ) भं जिला कय उवे ळास्त्रोि त्रलप्तध- ं त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो द्राया वललप्तवत्रद्धदामक फनाने शे तु प्राण-प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि टकमा जाता शं । इव भुटद्रका को टकवी बी लगल क व्मत्रि शाथ की टकवी बी उॊ गरी भं धायण कय वकते शं । े मशॊ भुटद्रका कबी टकवी बी स्स्थती भं अऩत्रलत्र नशीॊ शोती। इव प्तरए कबी भुटद्रका को उतायने की आलश्मिा नशीॊ शं । इवे धायण कयने वे व्मत्रि की वभस्माओॊ का वभाधान शोने रगता शं । धायणकताल को जीलन भं वपरता प्राप्तद्ऱ एलॊ उन्नप्तत क नमे भागल प्रवस्त शोते यशते शं औय जीलन भं वबी प्रकाय े की प्तवत्रद्धमाॊ बी ळीध्र प्राद्ऱ शोती शं । भूल्म भात्र- 6400/- (नोि: इव भुटद्रका को धायण कयने वे भॊगर ग्रश का कोई फुया प्रबाल वाधक ऩय नशीॊ शोता शं ।) वललप्तवत्रद्धदामक भुटद्रका क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी क प्तरमे शे तु वम्ऩक कयं । े े ल ऩप्तत-ऩत्नी भं करश प्तनलायण शे तु मटद ऩरयलायं भं वुख-वुत्रलधा क वभस्त वाधान शोते शुए बी छोिी-छोिी फातो भं ऩप्तत-ऩत्नी क त्रफच भे करश शोता यशता शं , े े तो घय क स्जतने वदस्म शो उन वफक नाभ वे गुरुत्ल कामालरत द्राया ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत े े ऩूणल चैतन्म मुि लळीकयण कलच एलॊ गृश करश नाळक टिब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं त्रफना टकवी ऩूजा, त्रलप्तध- त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ भॊत्र प्तवद्ध ऩप्तत लळीकयण मा ऩत्नी लळीकयण एलॊ गृश करश नाळक टिब्फी फनलाना चाशते शं , तो वॊऩक आऩ कय वकते शं । ल 100 वे अप्तधक जैन मॊत्र शभाये मशाॊ जैन धभल क वबी प्रभुख, दरब एलॊ ळीघ्र प्रबालळारी मॊत्र ताम्र ऩत्र, े ु ल प्तवरलय (चाॊदी) ओय गोल्ि (वोने) भे उऩरब्ध शं । शभाये मशाॊ वबी प्रकाय क मॊत्र कोऩय ताम्र ऩत्र, प्तवरलय (चाॊदी) ओय गोल्ि (वोने) भे फनलाए जाते शै । इवक े े अराला आऩकी आलश्मकता अनुळाय आऩक द्राया प्राद्ऱ (प्तचत्र, मॊत्र, टिज़ाईन) क अनुरुऩ मॊत्र बी फनलाए े े जाते शै . गुरुत्ल कामालरम द्राया उऩरब्ध कयामे गमे वबी मॊत्र अखॊटित एलॊ 22 गेज ळुद्ध कोऩय(ताम्र ऩत्र)- 99.99 िच ळुद्ध प्तवरलय (चाॊदी) एलॊ 22 कये ि गोल्ि (वोने) भे फनलाए जाते शै । मॊत्र क त्रलऴम भे े े अप्तधक जानकायी क प्तरमे शे तु वम्ऩक कयं । े ल GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: www.gurutvakaryalay.com www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    89 नलम्फय 2012 द्रादळ भशा मॊत्र मॊत्र को अप्तत प्राप्तचन एलॊ दरब मॊत्रो क वॊकरन वे शभाये लऴो क अनुवॊधान ु ल े े द्राया फनामा गमा शं ।  ऩयभ दरब लळीकयण मॊत्र, ु ल  वशस्त्राषी रक्ष्भी आफद्ध मॊत्र  बाग्मोदम मॊत्र  आकस्स्भक धन प्राप्तद्ऱ मॊत्र  भनोलाॊप्तछत कामल प्तवत्रद्ध मॊत्र  ऩूणल ऩौरुऴ प्राप्तद्ऱ काभदे ल मॊत्र  याज्म फाधा प्तनलृत्रत्त मॊत्र  योग प्तनलृत्रत्त मॊत्र  गृशस्थ वुख मॊत्र  वाधना प्तवत्रद्ध मॊत्र  ळीघ्र त्रललाश वॊऩन्न गौयी अनॊग मॊत्र  ळत्रु दभन मॊत्र उऩयोि वबी मॊत्रो को द्रादळ भशा मॊत्र क रुऩ भं ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे भॊत्र प्तवद्ध ऩूणल े प्राणप्रप्ततत्रद्षत एलॊ चैतन्म मुि टकमे जाते शं । स्जवे स्थाऩीत कय त्रफना टकवी ऩूजा अचलना- त्रलप्तध त्रलधान त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं ।  क्मा आऩक फच्चे कवॊगती क प्तळकाय शं ? े ु े  क्मा आऩक फच्चे आऩका कशना नशीॊ भान यशे शं ? े  क्मा आऩक फच्चे घय भं अळाॊप्तत ऩैदा कय यशे शं ? े ु ु घय ऩरयलाय भं ळाॊप्तत एलॊ फच्चे को कवॊगती वे छिाने शे तु फच्चे क नाभ वे गुरुत्ल कामालरत े द्राया ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे भॊत्र प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि लळीकयण कलच एलॊ एव.एन.टिब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा, त्रलप्तध-त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मटद आऩ तो आऩ भॊत्र प्तवद्ध लळीकयण कलच एलॊ एव.एन.टिब्फी फनलाना चाशते शं , तो वॊऩक इव कय वकते शं । ल GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    90 नलम्फय 2012 Buy and View Product Online Visit. www.gurutvakaryalay.com
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    92 नलम्फय 2012 वॊऩूणल प्राणप्रप्ततत्रद्षत 22 गेज ळुद्ध स्िीर भं प्तनप्तभलत अखॊटित ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र (स्िीर भं) को तीव्र प्रबालळारी फनाने शे तु ळप्तन की कायक धातु ळुद्ध स्िीर(रोशे ) भं फनामा गमा शं । स्जव क प्रबाल वे वाधक को तत्कार राब प्राद्ऱ शोता शं । मटद जन्भ किरी भं े ॊु ळप्तन प्रप्ततकर शोने ऩय व्मत्रि को अनेक कामं भं अवपरता प्राद्ऱ शोती शै , कबी व्मलवाम भं घिा, ू नौकयी भं ऩये ळानी, लाशन दघिना, गृश क्रेळ आटद ऩये ळानीमाॊ फढ़ती जाती शै ऐवी स्स्थप्ततमं भं ु ल प्राणप्रप्ततत्रद्षत ग्रश ऩीिा प्तनलायक ळप्तन मॊत्र की अऩने को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थाऩना कयने वे अनेक राब प्तभरते शं । मटद ळप्तन की ढै ़मा मा वाढ़े वाती का वभम शो तो इवे अलश्म ऩूजना चाटशए। ळप्तनमॊत्र क ऩूजन भात्र वे व्मत्रि को भृत्मु, कजल, कोिल कळ, जोिो का ददल , फात योग तथा रम्फे वभम े े क वबी प्रकाय क योग वे ऩये ळान व्मत्रि क प्तरमे ळप्तन मॊत्र अप्तधक राबकायी शोगा। नौकयी ऩेळा आटद े े े क रोगं को ऩदौन्नप्तत बी ळप्तन द्राया शी प्तभरती शै अत् मश मॊत्र अप्तत उऩमोगी मॊत्र शै स्जवक द्राया े े ळीघ्र शी राब ऩामा जा वकता शै । भूल्म: 1050 वे 8200 वॊऩूणल प्राणप्रप्ततत्रद्षत 22 गेज ळुद्ध स्िीर भं प्तनप्तभलत अखॊटित ळप्तन तैप्ततवा मॊत्र ळप्तनग्रश वे वॊफॊप्तधत ऩीिा क प्तनलायण शे तु त्रलळेऴ राबकायी मॊत्र। े भूल्म: 550 वे 8200 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    93 नलम्फय 2012 नलयत्न जटित श्री मॊत्र ळास्त्र लचन क अनुवाय ळुद्ध वुलणल मा यजत े भं प्तनप्तभलत श्री मॊत्र क चायं औय मटद नलयत्न े जिला ने ऩय मश नलयत्न जटित श्री मॊत्र कशराता शं । वबी यत्नो को उवक प्तनस्द्ळत े स्थान ऩय जि कय रॉकि क रूऩ भं धायण े े कयने वे व्मत्रि को अनॊत एद्वमल एलॊ रक्ष्भी की प्राप्तद्ऱ शोती शं । व्मत्रि को एवा आबाव शोता शं जैवे भाॊ रक्ष्भी उवक वाथ शं । े नलग्रश को श्री मॊत्र क वाथ रगाने वे ग्रशं े की अळुब दळा का धायणकयने लारे व्मत्रि ऩय प्रबाल नशीॊ शोता शं । गरे भं शोने क कायण मॊत्र ऩत्रलत्र यशता शं एलॊ स्नान कयते वभम इव मॊत्र ऩय स्ऩळल कय जो े जर त्रफॊद ु ळयीय को रगते शं , लश गॊगा जर क वभान ऩत्रलत्र शोता शं । इव प्तरमे इवे वफवे े तेजस्ली एलॊ परदाप्तम कशजाता शं । जैवे अभृत वे उत्तभ कोई औऴप्तध नशीॊ, उवी प्रकाय रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क प्तरमे श्री मॊत्र वे उत्तभ कोई मॊत्र वॊवाय भं नशीॊ शं एवा ळास्त्रोि लचन शं । इव प्रकाय क े े नलयत्न जटित श्री मॊत्र गुरूत्ल कामालरम द्राया ळुब भुशूतल भं प्राण प्रप्ततत्रद्षत कयक फनालाए जाते े शं । Rs: 2350, 2800, 3250, 3700, 4600, 5500 वे 10,900 तक अप्तधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं । ल GURUTVA KARYALAY 92/3BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    94 नलम्फय 2012 भॊत्र प्तवद्ध लाशन दघिना नाळक भारुप्तत मॊत्र ु ल ऩौयास्णक ग्रॊथो भं उल्रेख शं की भशाबायत क मुद्ध क वभम अजुन क यथ क अग्रबाग ऩय भारुप्तत ध्लज एलॊ े े ल े े भारुप्तत मन्त्र रगा शुआ था। इवी मॊत्र क प्रबाल क कायण वॊऩूणल मुद्ध क दौयान शज़ायं-राखं प्रकाय क आग्नेम अस्त्र- े े े े ळस्त्रं का प्रशाय शोने क फाद बी अजुन का यथ जया बी षप्ततग्रस्त नशीॊ शुआ। बगलान श्री कृ ष्ण भारुप्तत मॊत्र क इव े ल े अद्भत यशस्म को जानते थे टक स्जव यथ मा लाशन की यषा स्लमॊ श्री भारुप्तत नॊदन कयते शं, लश दघिनाग्रस्त कवे शो ु ु ल ै वकता शं । लश यथ मा लाशन तो लामुलेग वे, प्तनफालप्तधत रुऩ वे अऩने रक्ष्म ऩय त्रलजम ऩतका रशयाता शुआ ऩशुॊचेगा। इवी प्तरमे श्री कृ ष्ण नं अजुन क यथ ऩय श्री भारुप्तत मॊत्र को अॊटकत कयलामा था। ल े स्जन रोगं क स्किय, काय, फव, ट्रक इत्माटद लाशन फाय-फाय दघिना ग्रस्त शो यशे शो!, अनालश्मक लाशन को े ू ु ल नुषान शो यशा शं! उन्शं शानी एलॊ दघिना वे यषा क उद्दे श्म वे अऩने लाशन ऩय भॊत्र प्तवद्ध श्री भारुप्तत मॊत्र अलश्म ु ल े रगाना चाटशए। जो रोग ट्रान्स्ऩोटिं ग (ऩरयलशन) क व्मलवाम वे जुिे शं उनको श्रीभारुप्तत मॊत्र को अऩने लाशन भं अलश्म े स्थात्रऩत कयना चाटशए, क्मोटक, इवी व्मलवाम वे जुिे वैकिं रोगं का अनुबल यशा शं की श्री भारुप्तत मॊत्र को स्थात्रऩत कयने वे उनक लाशन अप्तधक टदन तक अनालश्मक खचो वे एलॊ दघिनाओॊ वे वुयस्षत यशे शं । शभाया स्लमॊका एलॊ अन्म े ु ल त्रलद्रानो का अनुबल यशा शं , की स्जन रोगं ने श्री भारुप्तत मॊत्र अऩने लाशन ऩय रगामा शं , उन रोगं क लाशन फिी वे े फिी दघिनाओॊ वे वुयस्षत यशते शं । उनक लाशनो को कोई त्रलळेऴ नुक्ळान इत्माटद नशीॊ शोता शं औय नाशीॊ अनालश्मक ु ल े रुऩ वे उवभं खयाफी आप्तत शं । लास्तु प्रमोग भं भारुप्तत मॊत्र: मश भारुप्तत नॊदन श्री शनुभान जी का मॊत्र शै । मटद कोई जभीन त्रफक नशीॊ यशी शो, मा उव ऩय कोई लाद-त्रललाद शो, तो इच्छा क अनुरूऩ लशॉ जभीन उप्तचत भूल्म ऩय त्रफक जामे इव प्तरमे इव भारुप्तत मॊत्र का े प्रमोग टकमा जा वकता शं । इव भारुप्तत मॊत्र क प्रमोग वे जभीन ळीघ्र त्रफक जाएगी मा त्रललादभुि शो जाएगी। इव प्तरमे े मश मॊत्र दोशयी ळत्रि वे मुि शै । भारुप्तत मॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी क प्तरमे गुरुत्ल कामालरम भं वॊऩक कयं । भूल्म Rs- 255 वे 10900 तक े े ल श्री शनुभान मॊत्र ळास्त्रं भं उल्रेख शं की श्री शनुभान जी को बगलान वूमदेल ने ब्रह्मा जी क आदे ळ ऩय शनुभान ल े जी को अऩने तेज का वौलाॉ बाग प्रदान कयते शुए आळीलालद प्रदान टकमा था, टक भं शनुभान को वबी ळास्त्र का ऩूणल सान दॉ गा। स्जववे मश तीनोरोक भं वलल श्रेद्ष लिा शंगे तथा ळास्त्र त्रलद्या भं इन्शं भशायत शाप्तवर शोगी औय इनक ू े वभन फरळारी औय कोई नशीॊ शोगा। जानकायो ने भतानुळाय शनुभान मॊत्र की आयाधना वे ऩुरुऴं की त्रलप्तबन्न फीभारयमं दय शोती शं , इव मॊत्र भं अद्भत ळत्रि वभाटशत शोने क कायण व्मत्रि की स्लप्न दोऴ, धातु योग, यि दोऴ, लीमल दोऴ, भूछाल, ू ु े नऩुॊवकता इत्माटद अनेक प्रकाय क दोऴो को दय कयने भं अत्मन्त राबकायी शं । अथालत मश मॊत्र ऩौरुऴ को ऩुद्श कयता े ू शं । श्री शनुभान मॊत्र व्मत्रि को वॊकि, लाद-त्रललाद, बूत-प्रेत, द्यूत टक्रमा, त्रलऴबम, चोय बम, याज्म बम, भायण, वम्भोशन स्तॊबन इत्माटद वे वॊकिो वे यषा कयता शं औय प्तवत्रद्ध प्रदान कयने भं वषभ शं । श्री शनुभान मॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी क प्तरमे गुरुत्ल कामालरम भं वॊऩक कयं । भूल्म Rs- 730 वे 10900 तक े े ल GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    95 नलम्फय 2012 त्रलप्तबन्न दे लताओॊ क मॊत्र े गणेळ मॊत्र भशाभृत्मुजम मॊत्र ॊ याभ यषा मॊत्र याज गणेळ मॊत्र (वॊऩणल फीज भॊत्र वटशत) ू भशाभृत्मुजम कलच मॊत्र ॊ याभ मॊत्र गणेळ प्तवद्ध मॊत्र भशाभृत्मुजम ऩूजन मॊत्र ॊ द्रादळाषय त्रलष्णु भॊत्र ऩूजन मॊत्र एकाषय गणऩप्तत मॊत्र भशाभृत्मुॊजम मुि प्तळल खप्ऩय भाशा प्तळल मॊत्र त्रलष्णु फीवा मॊत्र शरयद्रा गणेळ मॊत्र प्तळल ऩॊचाषयी मॊत्र गरुि ऩूजन मॊत्र कफेय मॊत्र ु प्तळल मॊत्र प्तचॊताभणी मॊत्र याज श्री द्रादळाषयी रुद्र ऩूजन मॊत्र अटद्रतीम वललकाम्म प्तवत्रद्ध प्तळल मॊत्र प्तचॊताभणी मॊत्र दत्तात्रम मॊत्र नृप्तवॊश ऩूजन मॊत्र स्लणालकऴलणा बैयल मॊत्र दत्त मॊत्र ऩॊचदे ल मॊत्र शनुभान ऩूजन मॊत्र आऩदद्धायण फिु क बैयल मॊत्र ु वॊतान गोऩार मॊत्र शनुभान मॊत्र फिु क मॊत्र श्री कृ ष्ण अद्शाषयी भॊत्र ऩूजन मॊत्र वॊकि भोचन मॊत्र व्मॊकिे ळ मॊत्र कृ ष्ण फीवा मॊत्र लीय वाधन ऩूजन मॊत्र कातललीमालजन ऩूजन मॊत्र ुल वलल काभ प्रद बैयल मॊत्र दस्षणाभूप्ततल ध्मानभ ् मॊत्र भनोकाभना ऩूप्ततल एलॊ कद्श प्तनलायण शे तु त्रलळेऴ मॊत्र व्माऩाय लृत्रद्ध कायक मॊत्र अभृत तत्ल वॊजीलनी कामा कल्ऩ मॊत्र त्रम ताऩंवे भुत्रि दाता फीवा मॊत्र व्माऩाय लृत्रद्ध मॊत्र त्रलजमयाज ऩॊचदळी मॊत्र भधुभेश प्तनलायक मॊत्र व्माऩाय लधलक मॊत्र त्रलद्यामळ त्रलबूप्तत याज वम्भान प्रद प्तवद्ध फीवा मॊत्र ज्लय प्तनलायण मॊत्र व्माऩायोन्नप्तत कायी प्तवद्ध मॊत्र वम्भान दामक मॊत्र योग कद्श दरयद्रता नाळक मॊत्र बाग्म लधलक मॊत्र वुख ळाॊप्तत दामक मॊत्र योग प्तनलायक मॊत्र स्लस्स्तक मॊत्र फारा मॊत्र तनाल भुि फीवा मॊत्र वलल कामल फीवा मॊत्र फारा यषा मॊत्र त्रलद्युत भानव मॊत्र कामल प्तवत्रद्ध मॊत्र गबल स्तम्बन मॊत्र गृश करश नाळक मॊत्र वुख वभृत्रद्ध मॊत्र ऩुत्र प्राप्तद्ऱ मॊत्र करेळ शयण फत्रत्तवा मॊत्र वलल रयत्रद्ध प्तवत्रद्ध प्रद मॊत्र प्रवूता बम नाळक मॊत्र लळीकयण मॊत्र वलल वुख दामक ऩंवटठमा मॊत्र प्रवल-कद्शनाळक ऩॊचदळी मॊत्र भोटशप्तन लळीकयण मॊत्र ऋत्रद्ध प्तवत्रद्ध दाता मॊत्र ळाॊप्तत गोऩार मॊत्र कणल त्रऩळाचनी लळीकयण मॊत्र वलल प्तवत्रद्ध मॊत्र त्रत्रळूर फीळा मॊत्र लातालरी स्तम्बन मॊत्र वाफय प्तवत्रद्ध मॊत्र ऩॊचदळी मॊत्र (फीवा मॊत्र मुि चायं प्रकायक) े लास्तु मॊत्र ळाफयी मॊत्र फेकायी प्तनलायण मॊत्र श्री भत्स्म मॊत्र प्तवद्धाश्रभ मॊत्र ऴोिळी मॊत्र लाशन दघिना नाळक मॊत्र ु ल ज्मोप्ततऴ तॊत्र सान त्रलसान प्रद प्तवद्ध फीवा मॊत्र अिवटठमा मॊत्र प्रेत-फाधा नाळक मॊत्र ब्रह्माण्ि वाफय प्तवत्रद्ध मॊत्र अस्वीमा मॊत्र बूतादी व्माप्तधशयण मॊत्र कण्िप्तरनी प्तवत्रद्ध मॊत्र ु ऋत्रद्ध कायक मॊत्र कद्श प्तनलायक प्तवत्रद्ध फीवा मॊत्र क्रास्न्त औय श्रीलधलक चंतीवा मॊत्र भन लाॊप्तछत कन्मा प्राप्तद्ऱ मॊत्र बम नाळक मॊत्र श्री षेभ कल्माणी प्तवत्रद्ध भशा मॊत्र त्रललाशकय मॊत्र स्लप्न बम प्तनलायक मॊत्र
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    96 नलम्फय 2012 सान दाता भशा मॊत्र रग्न त्रलघ्न प्तनलायक मॊत्र कदृत्रद्श नाळक मॊत्र ु कामा कल्ऩ मॊत्र रग्न मोग मॊत्र श्री ळत्रु ऩयाबल मॊत्र दीधालमु अभृत तत्ल वॊजीलनी मॊत्र दरयद्रता त्रलनाळक मॊत्र ळत्रु दभनाणलल ऩूजन मॊत्र भॊत्र प्तवद्ध त्रलळेऴ दै ली मॊत्र वूप्तच आद्य ळत्रि दगाल फीवा मॊत्र (अॊफाजी फीवा मॊत्र) ु वयस्लती मॊत्र भशान ळत्रि दगाल मॊत्र (अॊफाजी मॊत्र) ु वद्ऱवती भशामॊत्र(वॊऩणल फीज भॊत्र वटशत) ू नल दगाल मॊत्र ु कारी मॊत्र नलाणल मॊत्र (चाभुिा मॊत्र) ॊ श्भळान कारी ऩूजन मॊत्र नलाणल फीवा मॊत्र दस्षण कारी ऩूजन मॊत्र चाभुिा फीवा मॊत्र ( नलग्रश मुि) ॊ वॊकि भोप्तचनी काप्तरका प्तवत्रद्ध मॊत्र त्रत्रळूर फीवा मॊत्र खोटिमाय मॊत्र फगरा भुखी मॊत्र खोटिमाय फीवा मॊत्र फगरा भुखी ऩूजन मॊत्र अन्नऩूणाल ऩूजा मॊत्र याज याजेद्वयी लाॊछा कल्ऩरता मॊत्र एकाॊषी श्रीपर मॊत्र भॊत्र प्तवद्ध त्रलळेऴ रक्ष्भी मॊत्र वूप्तच श्री मॊत्र (रक्ष्भी मॊत्र) भशारक्ष्भमै फीज मॊत्र श्री मॊत्र (भॊत्र यटशत) भशारक्ष्भी फीवा मॊत्र श्री मॊत्र (वॊऩणल भॊत्र वटशत) ू रक्ष्भी दामक प्तवद्ध फीवा मॊत्र श्री मॊत्र (फीवा मॊत्र) रक्ष्भी दाता फीवा मॊत्र श्री मॊत्र श्री वूि मॊत्र रक्ष्भी गणेळ मॊत्र श्री मॊत्र (कभल ऩृद्षीम) ु ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊत्र ऩूजन मॊत्र रक्ष्भी फीवा मॊत्र कनक धाया मॊत्र श्री श्री मॊत्र (श्रीश्री रप्तरता भशात्रत्रऩुय वुन्दमै श्री भशारक्ष्भमं श्री भशामॊत्र) लैबल रक्ष्भी मॊत्र (भशान प्तवत्रद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊत्र) अॊकात्भक फीवा मॊत्र ताम्र ऩत्र ऩय वुलणल ऩोरीव ताम्र ऩत्र ऩय यजत ऩोरीव ताम्र ऩत्र ऩय (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) वाईज भूल्म वाईज भूल्म वाईज भूल्म 1” X 1” 460 1” X 1” 370 1” X 1” 255 2” X 2” 820 2” X 2” 640 2” X 2” 460 3” X 3” 1650 3” X 3” 1090 3” X 3” 730 4” X 4” 2350 4” X 4” 1650 4” X 4” 1090 6” X 6” 3600 6” X 6” 2800 6” X 6” 1900 9” X 9” 6400 9” X 9” 5100 9” X 9” 3250 12” X12” 10800 12” X12” 8200 12” X12” 6400 मॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं । े ल GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    97 नलम्फय 2012 याप्तळ यत्न भेऴ याप्तळ: लृऴब याप्तळ: प्तभथुन याप्तळ: कक याप्तळ: ल प्तवॊश याप्तळ: कन्मा याप्तळ: भूगा ॊ शीया ऩन्ना भोती भाणेक ऩन्ना Red Coral Diamond Green Emerald Naturel Pearl Ruby Green Emerald (Special) (Special) (Old Berma) (Special) (Special) (Special) (Special) 5.25" Rs. 1050 10 cent Rs. 4100 5.25" Rs. 9100 5.25" Rs. 910 2.25" Rs. 12500 5.25" Rs. 9100 6.25" Rs. 1250 20 cent Rs. 8200 6.25" Rs. 12500 6.25" Rs. 1250 3.25" Rs. 15500 6.25" Rs. 12500 7.25" Rs. 1450 30 cent Rs. 12500 7.25" Rs. 14500 7.25" Rs. 1450 4.25" Rs. 28000 7.25" Rs. 14500 8.25" Rs. 1800 40 cent Rs. 18500 8.25" Rs. 19000 8.25" Rs. 1900 5.25" Rs. 46000 8.25" Rs. 19000 9.25" Rs. 2100 50 cent Rs. 23500 9.25" Rs. 23000 9.25" Rs. 2300 6.25" Rs. 82000 9.25" Rs. 23000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs. 28000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs. 28000 All Diamond are Full ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati White Colour. तुरा याप्तळ: लृस्द्ळक याप्तळ: धनु याप्तळ: भकय याप्तळ: कब याप्तळ: ॊु भीन याप्तळ: शीया भूगा ॊ ऩुखयाज नीरभ नीरभ ऩुखयाज Diamond Red Coral Y.Sapphire B.Sapphire B.Sapphire Y.Sapphire (Special) (Special) (Special) (Special) (Special) (Special) 10 cent Rs. 4100 5.25" Rs. 1050 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 20 cent Rs. 8200 6.25" Rs. 1250 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 30 cent Rs. 12500 7.25" Rs. 1450 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 40 cent Rs. 18500 8.25" Rs. 1800 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 50 cent Rs. 23500 9.25" Rs. 2100 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 All Diamond are Full ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati White Colour. * उऩमोि लजन औय भूल्म वे अप्तधक औय कभ लजन औय भूल्म क यत्न एलॊ उऩयत्न बी शभाये मशा व्माऩायी भूल्म ऩय उप्रब्ध े शं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    98 नलम्फय 2012 भॊत्र प्तवद्ध रूद्राष Rate In Rate In Rudraksh List Rudraksh List Indian Rupee Indian Rupee एकभुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा) 2800, 5500 आठ भुखी रूद्राष (नेऩार) 820,1250 एकभुखी रूद्राष (नेऩार) 750,1050, 1250, आठ भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा) 1900 दो भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय) 30,50,75 नौ भुखी रूद्राष (नेऩार) 910,1250 दो भुखी रूद्राष (नेऩार) 50,100, नौ भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा) 2050 दो भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा) 450,1250 दव भुखी रूद्राष (नेऩार) 1050,1250 तीन भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय) 30,50,75, दव भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा) 2100 तीन भुखी रूद्राष (नेऩार) 50,100, ग्मायश भुखी रूद्राष (नेऩार) 1450, तीन भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा) 450,1250, ग्मायश भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा) 2750, चाय भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय) 25,55,75, फायश भुखी रूद्राष (नेऩार) 2350, चाय भुखी रूद्राष (नेऩार) 50,100, फायश भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा) 2750, ऩॊच भुखी रूद्राष (नेऩार) 25,55, तेयश भुखी रूद्राष (नेऩार) 4500,5500 ऩॊच भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा) 225, 550, तेयश भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा) 6400, छश भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय) 25,55,75, चौदश भुखी रूद्राष (नेऩार) 10500, 12500 छश भुखी रूद्राष (नेऩार) 50,100, चौदश भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा) 14500 वात भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय) 75, 155, गौयीळॊकय रूद्राष 1900 वात भुखी रूद्राष (नेऩार) 225, 450, गणेळ रुद्राष (नेऩार) 730 वात भुखी रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा) 1250 गणेळ रूद्राष (इन्िोनेप्तळमा) 820 रुद्राष क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं । े ल GURUTVA KARYALAY, 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA), Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, भॊत्र प्तवद्ध दरब वाभग्री ु ल शत्था जोिी- Rs- 370 घोिे की नार- Rs.351 भामा जार- Rs- 251 प्तवमाय प्तवॊगी- Rs- 370 दस्षणालतॉ ळॊख- Rs- 550 इन्द्र जार- Rs- 251 त्रफल्री नार- Rs- 370 भोप्तत ळॊख- Rs- 550 धन लृत्रद्ध शकीक वेि Rs-251 GURUTVA KARYALAY Call Us: 91 + 9338213418, 91 + 9238328785, Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
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    99 नलम्फय 2012 श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र टकवी बी व्मत्रि का जीलन तफ आवान फन जाता शं जफ उवक चायं औय का भाशोर उवक अनुरुऩ उवक लळ े े े भं शं। जफ कोई व्मत्रि का आकऴलण दवयो क उऩय एक चुम्फकीम प्रबाल िारता शं , तफ ु े रोग उवकी वशामता एलॊ वेला शे तु तत्ऩय शोते शै औय उवक प्राम् वबी कामल त्रफना अप्तधक कद्श ल ऩये ळानी वे वॊऩन्न शो जाते शं । आज क े े बौप्ततकता लाटद मुग भं शय व्मत्रि क प्तरमे दवयो को अऩनी औय खीचने शे तु एक प्रबालळाप्तर चुफकत्ल को कामभ े ू ॊ यखना अप्तत आलश्मक शो जाता शं । आऩका आकऴलण औय व्मत्रित्ल आऩक चायो ओय वे रोगं को आकत्रऴलत कये इव े प्तरमे वयर उऩाम शं , श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र। क्मोटक बगलान श्री कृ ष्ण एक अरौटकल एलॊ टदलम चुॊफकीम व्मत्रित्ल के धनी थे। इवी कायण वे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र क ऩूजन एलॊ दळलन वे आकऴलक व्मत्रित्ल प्राद्ऱ शोता शं । े श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र क वाथ व्मत्रिको दृढ़ इच्छा ळत्रि एलॊ उजाल प्राद्ऱ े शोती शं , स्जस्वे व्मत्रि शभेळा एक बीि भं शभेळा आकऴलण का कद्र यशता शं । ं श्रीकृ ष्ण फीवा कलच मटद टकवी व्मत्रि को अऩनी प्रप्ततबा ल आत्भत्रलद्वाव क स्तय भं लृत्रद्ध, े अऩने प्तभत्रो ल ऩरयलायजनो क त्रफच भं रयश्तो भं वुधाय कयने की ईच्छा शोती े श्रीकृ ष्ण फीवा कलच को कलर े शं उनक प्तरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र का ऩूजन एक वयर ल वुरब भाध्मभ े त्रलळेऴ ळुब भुशुतल भं प्तनभालण टकमा वात्रफत शो वकता शं । जाता शं । कलच को त्रलद्रान कभलकाॊिी श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र ऩय अॊटकत ळत्रिळारी त्रलळेऴ ये खाएॊ, फीज भॊत्र एलॊ ब्राशभणं द्राया ळुब भुशुतल भं ळास्त्रोि अॊको वे व्मत्रि को अद्धद्भत आॊतरयक ळत्रिमाॊ प्राद्ऱ शोती शं जो व्मत्रि को त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो ु वफवे आगे एलॊ वबी षेत्रो भं अग्रस्णम फनाने भं वशामक प्तवद्ध शोती शं । द्राया प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र क ऩूजन ल प्तनमप्तभत दळलन क भाध्मभ वे बगलान े े मुि कयक प्तनभालण टकमा जाता शं । े श्रीकृ ष्ण का आळीलालद प्राद्ऱ कय वभाज भं स्लमॊ का अटद्रतीम स्थान स्थात्रऩत कयं । स्जव क पर स्लरुऩ धायण कयता े श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र अरौटकक ब्रह्माॊिीम उजाल का वॊचाय कयता शं , जो व्मत्रि को ळीघ्र ऩूणल राब प्राद्ऱ शोता एक प्राकृ त्रत्त भाध्मभ वे व्मत्रि क बीतय वद्दबालना, वभृत्रद्ध, वपरता, उत्तभ े शं । कलच को गरे भं धायण कयने स्लास्र्थम, मोग औय ध्मान क प्तरमे एक ळत्रिळारी भाध्मभ शं ! े वे लशॊ अत्मॊत प्रबाल ळारी शोता  श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र क ऩूजन वे व्मत्रि क वाभास्जक भान-वम्भान ल े े शं । गरे भं धायण कयने वे कलच ऩद-प्रप्ततद्षा भं लृत्रद्ध शोती शं । शभेळा रृदम क ऩाव यशता शं स्जस्वे े  त्रलद्रानो क भतानुळाय श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र क भध्मबाग ऩय ध्मान मोग े े व्मत्रि ऩय उवका राब अप्तत तीव्र कटद्रत कयने वे व्मत्रि टक चेतना ळत्रि जाग्रत शोकय ळीघ्र उच्च स्तय ं एलॊ ळीघ्र सात शोने रगता शं । को प्राद्ऱशोती शं । भूरम भात्र: 1900  जो ऩुरुऴं औय भटशरा अऩने वाथी ऩय अऩना प्रबाल िारना चाशते शं औय उन्शं अऩनी औय आकत्रऴलत कयना चाशते शं । उनक प्तरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र उत्तभ उऩाम प्तवद्ध शो वकता शं । े  ऩप्तत-ऩत्नी भं आऩवी प्रभ की लृत्रद्ध औय वुखी दाम्ऩत्म जीलन क प्तरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊत्र राबदामी शोता शं । े भूल्म:- Rs. 730 वे Rs. 10900 तक उप्रब्द्ध GURUTVA KARYALAY Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
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    100 नलम्फय 2012 याभ यषा मॊत्र याभ यषा मॊत्र वबी बम, फाधाओॊ वे भुत्रि ल कामो भं वपरता प्राप्तद्ऱ शे तु उत्तभ मॊत्र शं । स्जवक प्रमोग े वे धन राब शोता शं ल व्मत्रि का वलांगी त्रलकाय शोकय उवे वुख-वभृत्रद्ध, भानवम्भान की प्राप्तद्ऱ शोती शं । याभ यषा मॊत्र वबी प्रकाय क अळुब प्रबाल को दय कय व्मत्रि को जीलन की वबी प्रकाय की े ू कटठनाइमं वे यषा कयता शं । त्रलद्रानो क भत वे जो व्मत्रि बगलान याभ क बि शं मा श्री े े शनुभानजी क बि शं उन्शं अऩने प्तनलाव स्थान, व्मलवामीक स्थान ऩय याभ यषा मॊत्र को अलश्म े स्थाऩीत कयना चाटशमे स्जववे आने लारे वॊकिो वे यषा शो उनका जीलन वुखभम व्मतीत शो वके एलॊ उनकी वभस्त आटद बौप्ततक ल आध्मास्त्भक भनोकाभनाएॊ ऩूणल शो वक। े ताम्र ऩत्र ऩय वुलणल ऩोरीव ताम्र ऩत्र ऩय यजत ऩोरीव ताम्र ऩत्र ऩय (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) वाईज भूल्म वाईज भूल्म वाईज भूल्म 1” X 1” 460 1” X 1” 370 1” X 1” 255 2” X 2” 820 2” X 2” 640 2” X 2” 460 3” X 3” 1650 3” X 3” 1090 3” X 3” 730 4” X 4” 2350 4” X 4” 1650 4” X 4” 1090 6” X 6” 3600 6” X 6” 2800 6” X 6” 1900 9” X 9” 6400 9” X 9” 5100 9” X 9” 3250 12” X12” 10800 12” X12” 8200 12” X12” 6400 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    101 नलम्फय 2012 जैन धभलक त्रलप्तळद्श मॊत्रो की वूची े श्री चौफीव तीथंकयका भशान प्रबात्रलत चभत्कायी मॊत्र श्री एकाषी नारयमेय मॊत्र श्री चोफीव तीथंकय मॊत्र वललतो बद्र मॊत्र कल्ऩलृष मॊत्र वलल वॊऩत्रत्तकय मॊत्र प्तचॊताभणी ऩाद्वलनाथ मॊत्र वललकामल-वलल भनोकाभना प्तवत्रद्धअ मॊत्र (१३० वललतोबद्र मॊत्र) प्तचॊताभणी मॊत्र (ऩंवटठमा मॊत्र) ऋत्रऴ भॊिर मॊत्र प्तचॊताभणी चक्र मॊत्र जगदलल्रब कय मॊत्र श्री चक्रद्वयी मॊत्र े ऋत्रद्ध प्तवत्रद्ध भनोकाभना भान वम्भान प्राप्तद्ऱ मॊत्र श्री घॊिाकणल भशालीय मॊत्र ऋत्रद्ध प्तवत्रद्ध वभृत्रद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊत्र श्री घॊिाकणल भशालीय वलल प्तवत्रद्ध भशामॊत्र त्रलऴभ त्रलऴ प्तनग्रश कय मॊत्र (अनुबल प्तवद्ध वॊऩणल श्री घॊिाकणल भशालीय ऩतका मॊत्र) ू श्री ऩद्मालती मॊत्र षुद्रो ऩद्रल प्तननालळन मॊत्र श्री ऩद्मालती फीवा मॊत्र फृशच्चक्र मॊत्र श्री ऩाद्वलऩद्मालती ह्रंकाय मॊत्र लॊध्मा ळब्दाऩश मॊत्र ऩद्मालती व्माऩाय लृत्रद्ध मॊत्र भृतलत्वा दोऴ प्तनलायण मॊत्र श्री धयणेन्द्र ऩद्मालती मॊत्र काॊक लॊध्मादोऴ प्तनलायण मॊत्र श्री ऩाद्वलनाथ ध्मान मॊत्र फारग्रश ऩीिा प्तनलायण मॊत्र श्री ऩाद्वलनाथ प्रबुका मॊत्र रधुदेल कर मॊत्र ु बिाभय मॊत्र (गाथा नॊफय १ वे ४४ तक) नलगाथात्भक उलवग्गशयॊ स्तोत्रका त्रलप्तळद्श मॊत्र भस्णबद्र मॊत्र उलवग्गशयॊ मॊत्र श्री मॊत्र श्री ऩॊच भॊगर भशाश्रृत स्कध मॊत्र ॊ श्री रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ औय व्माऩाय लधलक मॊत्र ह्रीॊकाय भम फीज भॊत्र श्री रक्ष्भीकय मॊत्र लधलभान त्रलद्या ऩट्ि मॊत्र रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ मॊत्र त्रलद्या मॊत्र भशात्रलजम मॊत्र वौबाग्मकय मॊत्र त्रलजमयाज मॊत्र िाटकनी, ळाटकनी, बम प्तनलायक मॊत्र त्रलजम ऩतका मॊत्र बूताटद प्तनग्रश कय मॊत्र त्रलजम मॊत्र ज्लय प्तनग्रश कय मॊत्र प्तवद्धचक्र भशामॊत्र ळाटकनी प्तनग्रश कय मॊत्र दस्षण भुखाम ळॊख मॊत्र आऩत्रत्त प्तनलायण मॊत्र दस्षण भुखाम मॊत्र ळत्रुभख स्तॊबन मॊत्र ु मॊत्र क त्रलऴम भं अप्तधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं । े ल GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    102 नलम्फय 2012 घॊिाकणल भशालीय वलल प्तवत्रद्ध भशामॊत्र को स्थाऩीत कयने वे वाधक की वलल भनोकाभनाएॊ ऩूणल शोती शं । वलल प्रकाय क योग बूत-प्रेत आटद उऩद्रल वे यषण शोता शं । े जशयीरे औय टशॊ वक प्राणीॊ वे वॊफप्तधत बम दय शोते शं । ॊ ू अस्ग्न बम, चोयबम आटद दय शोते शं । ू दद्श ल अवुयी ळत्रिमं वे उत्ऩन्न शोने लारे बम ु वे मॊत्र क प्रबाल वे दय शो जाते शं । े ू मॊत्र क ऩूजन वे वाधक को धन, वुख, वभृत्रद्ध, े ऎद्वमल, वॊतत्रत्त-वॊऩत्रत्त आटद की प्राप्तद्ऱ शोती शं । वाधक की वबी प्रकाय की वास्त्लक इच्छाओॊ की ऩूप्ततल शोती शं । मटद टकवी ऩरयलाय मा ऩरयलाय क वदस्मो ऩय े लळीकयण, भायण, उच्चािन इत्माटद जाद-िोने लारे ू प्रमोग टकमे गमं शोतो इव मॊत्र क प्रबाल वे स्लत् नद्श े शो जाते शं औय बत्रलष्म भं मटद कोई प्रमोग कयता शं तो यषण शोता शं । कछ जानकायो क श्री घॊिाकणल भशालीय ऩतका ु े मॊत्र वे जुिे अद्धद्भत अनुबल यशे शं । मटद घय भं श्री ु घॊिाकणल भशालीय ऩतका मॊत्र स्थात्रऩत टकमा शं औय मटद कोई इऴाल, रोब, भोश मा ळत्रुतालळ मटद अनुप्तचत कभल कयक टकवी बी उद्दे श्म वे वाधक को ऩये ळान कयने का प्रमाव कयता शं तो मॊत्र क प्रबाल वे वॊऩणल े े ू ऩरयलाय का यषण तो शोता शी शं , कबी-कबी ळत्रु क द्राया टकमा गमा अनुप्तचत कभल ळत्रु ऩय शी उऩय े उरि लाय शोते दे खा शं । भूल्म:- Rs. 1650 वे Rs. 10900 तक उप्रब्द्ध वॊऩक कयं । GURUTVA KARYALAY ल Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    103 नलम्फय 2012 अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलच अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलच ल उल्रेस्खत अन्म वाभग्रीमं को ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलद्रान ब्राह्मणो द्राया वला राख भशाभृत्मुजम भॊत्र जऩ एलॊ दळाॊळ शलन द्राया प्तनप्तभलत कलच अत्मॊत ॊ प्रबालळारी शोता शं । अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलच अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलच फनलाने शे तु: अऩना नाभ, त्रऩता-भाता का नाभ, कलच गोत्र, एक नमा पोिो बेजे दस्षणा भात्र: 10900 याळी यत्न एलॊ उऩयत्न त्रलळेऴ मॊत्र शभायं मशाॊ वबी प्रकाय क मॊत्र वोने-चाॊटद- े ताम्फे भं आऩकी आलश्मिा क अनुळाय े टकवी बी बाऴा/धभल क मॊत्रो को आऩकी े आलश्मक टिजाईन क अनुळाय २२ गेज े ळुद्ध ताम्फे भं अखॊटित फनाने की त्रलळेऴ वबी वाईज एलॊ भूल्म ल क्लाप्तरटि के वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं । अवरी नलयत्न एलॊ उऩयत्न बी उऩरब्ध शं । शभाये मशाॊ वबी प्रकाय क यत्न एलॊ उऩयत्न व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शं । ज्मोप्ततऴ कामल वे जुिे़ े फधु/फशन ल यत्न व्मलवाम वे जुिे रोगो क प्तरमे त्रलळेऴ भूल्म ऩय यत्न ल अन्म वाभग्रीमा ल अन्म े वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    104 नलम्फय 2012 भाप्तवक याप्तळ पर  प्तचॊतन जोळी भेऴ: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : कुछ रुकालिो क फाद भं व्मलवाम भं धन राब प्राद्ऱ शोगा। नौकयी-व्मलवाम भं उस्म्भद े वे कभ धन राब की प्राप्तद्ऱ शो वकती शं । आऩकी भशत्ल ऩूणल व्मलवाप्तमक मात्रा स्थप्तगत शो वकती। आऩको भानप्तवक अस्स्थयता का अनुबल शो वकता शं । आत्भ त्रलद्वाव वे आगे फढते यशने का प्रमाव कयं । त्रलयोधी एलॊ ळत्रु ऩष वे ऩये ळानी शो वकती शं । 16 वे 30 नलम्फय 2012 : अत्माप्तधक ऩरयश्रभ औय भेशनत वे आऩ वपरता प्राद्ऱ कय वकते शं । आऩकी राऩयलाशी आऩको रॊफे वभम का नुक्ळान कय वकती शं । वभाज भं अऩना नाभ औय प्रप्ततद्षा फनाए यखने क प्तरमे त्रलळेऴ ध्मान यखना चाटशमे। बूप्तभ-बलन वे े वॊफॊप्तधअ भाभरो भं प्तचॊता यश वकती शं । इव अलप्तध क दौयान अऩने स्लबाल भं े प्तचिप्तचिा ऩन आवकता शं । अऩने क्रोध ऩय प्तनमॊत्रण यखे। लृऴब: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : दै प्तनक वुख-वाधनो भं लृत्रद्ध शोगी स्जव कायण खचल फढ़ वकता शं । उच्च अप्तधकायी एलॊ वशकभॉ क कामल ऩये ळानीमं वॊबल शं । ऩूॊस्ज प्तनलेळ शे तु वभम उत्तभ नशीॊ शं अत् भशत्लऩूणल प्तनणलमो को स्थप्तगत कयने े का प्रमाव कयं । लाणी ऩय प्तनमॊत्रण यखे अऩने त्रप्रम ऩात्र वे रयश्ते त्रफगि वकते शं । खाने- ऩीने का ध्मान यखे स्लास्र्थम नयभ शो वकता शै । 16 वे 30 नलम्फय 2012 : भानप्तवक प्रन्नता फढे गी। आऩक वाथलक प्रमावो वे आप्तथलक स्स्थप्तत प्रफर शोगी। चर-अचर े वॊऩत्रत्त वे वॊफॊप्तधत कामं भं राब प्राद्ऱ शो वकता शं । मश वभम गुद्ऱ त्रलयोधी-ळत्रुओॊ ऩय त्रलजम प्राद्ऱ कयने क प्तरए श्रेद्ष े वात्रफत शोगा। ऩरयलाय औय रयश्तेदायं वे आस्त्भमता क अनुबल भं कभी यश वकती शं । व्मम ऩय प्तनमन्त्रण यखने वे राब े प्राद्ऱ शोगा। प्तभथुन: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : अऩने कामलषेत्र वे आऩ त्रलळेऴ धनराब प्राद्ऱ कयने भं वपर यशं गे। ऩूॊस्ज प्तनलेळ वे वॊफॊप्तधत कामो भं त्रलळेऴ वपरता प्राद्ऱ कय वकते शं । रेटकन ऩारयलारयक रयश्तं क प्तरए वभम थोिा प्रप्ततकर शो वकता शं । इव प्तरए ऩरयलाय े ू क रोगो क वाथ व्मलशाय कळर यशने का प्रमाव कयं । अऩने क्रोध ऩय प्तनमॊत्रण यखं। े े ू त्रप्रमजनो वे लाद-त्रललाद क कायण कद्श उठाना ऩि वकता शं । े 16 वे 30 नलम्फय 2012 : आकस्स्भक धन राब प्राद्ऱ शोगा। नौकयी-व्मलवाम क कामं े भं आऩको त्रलळेऴ वपरता प्राद्ऱ शोगी। मटद आऩ अत्रललाटशत शं तो त्रललाश क फॊधन भं े जल्द शी फॊध वकते शं । आऩक ऩद-प्रप्ततद्षा भं लृत्रद्ध शोगी। अनालश्मक खचो ऩय प्तनमॊत्रण कयने का प्रमाव कयं । आऩका े कोई ऩरयजन स्लास्र्थम वॊफॊप्तधत ऩये ळानी वे ग्रस्त शो वकता शं इव प्तरए उप्तचत ध्मान यखने का प्रमाव कयं ।
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    105 नलम्फय 2012 कक: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : आऩकी व्मलवामीक मात्राएॊ आप्तथलक द्दत्रद्श वे राबप्रद शो वकती शं । आऩका स्लास्र्थम ल उत्तभ यशे गा। आप्तथलक स्स्थप्तत भं वुधाय शोगा। बूप्तभ-बलन इत्माटद भं ऩूॊस्जप्तनलेळ कयने क प्तरए वभम उत्तभ प्तवद्ध शो वकता शं । ऩरयलाय भं टकवी वदस्म क स्जद्दी स्लबाल क े े े कायण आऩक ऩरयलाय भं भानप्तवक अळाॊप्तत का भाशोर शो वकता शै । े 16 वे 30 नलम्फय 2012 : आऩको कामलषेत्र भं अऩनी भेशनत वे आऩ वपरता औय धनराब प्राद्ऱ कय वकते शं । आऩको वाझेदायी क प्रस्ताल प्राद्ऱ शो वकते शं । जो आऩक े े प्तरए राबदाम शो वकता शं । ऩरयलाय क टकवी वदस्म क स्लास्र्थम की प्रप्ततकरता वे े े ू आऩकी भानप्तवक ऩये ळानी फढ़ वकती शं । आऩक जीलन वाथी का व्मलशाय आऩक प्रप्तत े े उदावीन शो वकता शं । प्तवॊश: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : अऩने कामलषेत्र भं वपरता क प्तरए मश वभम उत्तभ वात्रफत शो वकता शं । आऩको कोई े भशत्लऩूणल ऩद प्राद्ऱ शो वकता शं । त्रलयोधी एलॊ ळत्रु ऩष ऩयास्त शंगे। वॊतान वे वॊफॊप्तधत कामो भं बी वपरता प्राद्ऱ शो वकती शं । दयस्थ मात्राएॊ कयनी ऩि वकती शं । ू जीलनवाथी का भनोनुकर व्मलशाय आऩक प्तचत्त की प्रवन्नता भं लृत्रद्ध कयने लारा ू े यशे गा। 16 वे 30 नलम्फय 2012 : बूप्तभ-बलन वे वॊफॊप्तधत कामो वे आऩको आप्तथक राब प्राद्ऱ ल शोने क मोग शं । ऩरयलाय भं टकवी वदस्म क स्जद्दी स्लबाल क कायण ऩरयलाय भं अळाॊप्तत े े े का भाशोर शो वकता शै । आऩको ळुब वभाचाय की प्राप्तद्ऱ शो वकती शं । आम वे व्मम अप्तधक शोने क मोग फन यशे शं । प्रेभ वॊफॊप्तधत भाभरं भं कोई ऩये ळानी शो वकती शं । वॊमभ भं यशने का प्रमाव कयं । े कन्मा: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : नमे रोगो की प्तभत्रता वे कामलषेत्र भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोने क मोग शं । फिे ़-फुजुगो वे उप्तचत व्मलशाय फनाए यखं अन्मथा रयश्ते त्रफगि वकते े शं औय ऩरयलाय का भाशौर तनालऩूणल शो वकता शं । आऩका खानऩान उत्तभ यशे गा। वाभास्जक भान-वम्भान औय ऩद-प्रप्ततद्षा भं लृत्रद्ध शोगी। जीलन वाथी वे रयश्तो भं भधुयता आएगी। 16 वे 30 नलम्फय 2012 : कामलषेत्र क प्राम् आऩक वबी कामल वुचारु रुऩ वे ऩूणल े े शंगे। बूप्तभ- बलन-लाशन क क्रम-त्रलक्रम वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं । ळत्रुओॊ ऩय आऩका े प्रबाल यशे गा। आऩक त्रलयोधी एलॊ ळत्रु ऩष ऩयास्त शंगे। ऩरयलाय क रोगो क वाथ व्मलशाय कळर यशने का प्रमाव कयं । े े े ू मटद आऩ अत्रललाटशत शं तो त्रललाश क फॊधन भं जल्द शी फॊध वकते शं । आऩक बौप्ततक वुख वाधनो भं लृत्रद्ध शोगी। े े
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    106 नलम्फय 2012 तुरा: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : नौकयी-व्मलवाम भं आऩको इच्छा वे अप्तधक प्रगप्तत प्राद्ऱ शोगी। आऩक भशत्ल ऩूणल कामो े भं अप्ततरयि वालधानी यखनी चाटशमे अन्मथा कछ कामो भं नुक्ळान शो वकता शै । भशत्ल ु क कामो क प्तरमे आऩको कजल रेना ऩि वकता शं जो राब प्रद प्तवद्ध शो वकता शं । े े ऩरयलाय औय प्तभत्रं का वशमोग प्राद्ऱ शोगा। दाॊऩत्म वुख भं लृत्रद्ध शोगी। 16 वे 30 नलम्फय 2012 : भशत्ल ऩूणल कामो को स्स्थगीत कयना मा टकवी औय को दे ना नुक्ळान दे श शो वकता शं । खचल आलश्मिा वे अप्तधक शो वकता शं खचल ऩय प्तनमॊत्रण कयने का प्रमाव कयं । मटद आऩ अत्रललाटशत शं तो त्रललाश क उत्तभ मोग फन यशे े शं । कामल टक व्मस्तता क कायण त्रलश्राभ का अबाल यशे गा। अप्तधक वभम अऩने जीलन े वाथी क वाथ त्रफताने का प्रमाव कये । े लृस्द्ळक: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : नौकयी, व्मलास्म भं आकस्स्भक धनप्राप्तद्ऱ शोने के ळुब वॊकत शं , स्जस्वे आप्तथलक स्स्थती भं वुधाय शोगा। भशत्लऩूणल कामो को कयने भं आऩ े वपर शंगे। वाभास्जक भान-वम्भान औय ऩद-प्रप्ततद्षा भं लृत्रद्ध शोगी। व्मलवाप्तमक मात्रा राबदामक प्तवद्ध शोगी। नमे रोगो की प्तभत्रता वे राब प्राद्ऱ कय वकते शं । जीलन वाथी वे वशमोग प्राद्ऱ शोगा। ळुब वभाचाय टक प्राप्तद्ऱ शो वकती शं । 16 वे 30 नलम्फय 2012 : बूप्तभ-बलन क क्रम त्रलक्रम वे धन राब शोगा। स्लास्र्थम े वॊफॊप्तधत वभस्मा शो वकती शं अत् अऩनी वेशत का त्रलळेऴ ध्मान यखे। ऋण दे ने वे फचं अन्मथा धन की ऩुन् प्राप्तद्ऱ भं त्रलरॊफ शो वकता शं । ऩरयजनो एलॊ इद्श प्तभत्रं क वशमोग वे आऩकी प्रवन्नता भं लृत्रद्ध े शोगी। मटद आऩ अत्रललाटशत शं तो त्रललाश क उत्तभ मोग फन यशे शं । दाॊऩत्म वुख भं लृत्रद्ध शोगी। े धनु: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : अऩने वॊप्तचत धन वे ऩूॊस्ज प्तनलेळ कय राब प्राद्ऱ कय वकते शै । व्मलवाम वे वॊफॊप्तधत का कामं वे जुिे रोगो की प्रप्तवत्रद्ध का तेजी वे त्रलस्ताय शोगा। ळत्रु ऩष वे वालधान यशं आऩ ऩय झूठे आयोऩ रग वकते शै । त्रलऩयीत प्तरॊग क प्रप्तत आऩका आकऴलण अप्तधक े यशे गा। स्लास्र्थम वाभान्मत् उत्तभ यशे गा। जीलन वाथी वे वशमोग प्राद्ऱ शोगा। ळुब वभाचाय टक प्राप्तद्ऱ शो वकती शं । 16 वे 30 नलम्फय 2012 : अत्माप्तधक बागदौि क कायण आऩको उजाल ल उवाश की कभी े भशवूव शो वकती शं । व्मलवाप्तमक मात्रा राबदामक प्तवद्ध शोगी। मटद आऩ अत्रललाटशत शं तो त्रललाश क उत्तभ मोग फन यशे शं । ऩरयलाय क टकवी वदस्मक वाथ भं भतबेद वॊबल े े े शं । अऩनेखाने-ऩीने का त्रलळेऴ ध्मान यखे अन्मथा आऩका का स्लास्र्थम नयभ शो वकता शै ।
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    107 नलम्फय 2012 भकय: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : टकमे गमे ऩूॊस्ज प्तनलेळ द्राया आकस्स्भक धन प्राप्तद्ऱ क मोग फन यशे शै । आऩको बूप्तभ- े बलन-लाशन वे वॊफॊप्तधत भाभरो वे बी धन राब प्राद्ऱ शो वकता शं । कामलषेत्र भं आऩको भनोनुकर राब प्राद्ऱ शोगा। आऩक वाभास्जक भान-वम्भान औय ऩद-प्रप्ततद्षा भं लृत्रद्ध ू े शोगी। प्रेभ वॊफॊप्तधत भाभरो भं अनफन शो वकती शं । आऩका आध्मास्त्भक जीलन उच्च स्तय का शो वकता शं । 16 वे 30 नलम्फय 2012 : मटद आऩ नौकयी भं शं तो वशकभॉमं क फीच भं अऩने कामल े का अच्छा प्रदळलन कयने भं वभथल शंगे। आऩक बौप्ततक वुख-वाधनो भं लृत्रद्ध शोगी। े ऩरयलाय क टकवी वदस्मा का स्लास्र्थम प्तचॊता का त्रलऴम शो वकता शं । भौवभ क फदराल े े वे ऩरयलाय क टकवी वदस्म का स्लास्र्थम प्राबात्रलत शो वकता शं । अत्रललाश शै तो त्रललाश फॊधन भं फॊधने क मोग फन यशे े े शं । कब: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : आप्तथलक ऩष वाभान्म वे उत्तभ यशे गा। अऩने भशत्ल ॊु ऩूणल कामो भं अप्ततरयि वालधानी फयते अन्मथा फने फनाए कामल त्रफगि वकते शं । आऩकी रुप्तच इद्श आयाधना भं अप्तधक शो वकती शं । प्रेभ वॊफॊप्तधत भाभरो क प्तरए वभम े प्तभराझुरा वात्रफत शो वकता शं । अऩने खाने- ऩीने का ध्मान यखे अन्मथा आऩका का स्लास्र्थम नयभ शो वकता शै । 16 वे 30 नलम्फय 2012 : नौकयी-व्मलवाम भं टकमे गमे प्रमावो वे ऩूणल वपरता प्राद्ऱ शोगी। ळत्रु एलॊ त्रलयोधी ऩष वे ऩये ळानी वॊबल शं । ऩरयलाय की वुख -ळास्न्त को फनामे यखने का प्रमाव कयं । वभाज भं आऩका भान एलॊ प्रप्ततद्षा फढने क अच्छे मोग फन यशे शं । इद्श प्तभत्रं कवशमोग वे नमे प्तभत्र फन े े वकते शं । आऩका आध्मास्त्भक जीलन उच्च स्तय का शो वकता शं । भीन: 1 वे 15 नलम्फय 2012 : कामलषेत्र भं वभम उताय-चढ़ाल लारा शो वकता शै । नौकयी-व्मलवाम भं ऩरयश्रभ एलॊ भेशनत क उऩयाॊत वे धनराब प्राद्ऱ शोगा। बायी भात्रा भं ऩूॊस्ज प्तनलेळ मा बूप्तभ-बलन वे े वॊफॊप्तधअ भाभरो भं वतक यशे अन्मथा बायी नुक्ळान शो वकता शं । अऩने खाने- ल ऩीने का ध्मान यखे अन्मथा आऩका का स्लास्र्थम नयभ शो वकता शै । प्रेभ वॊफॊप्तधत भाभरो भं वपरता प्राद्ऱ शोगी। 16 वे 30 नलम्फय 2012 : कछ रुकालिो क फाद भं व्मलवाम भं धन राब प्राद्ऱ शोगा। ु े वभाज भं आऩके नाभ-प्रप्ततद्षा फनाए यखने क प्तरमे त्रलळेऴ े ध्मान यखना चाटशमे। आऩको बूप्तभ-बलन वे वॊफॊप्तधअ भाभरो भं प्तचॊता यश वकती शं । ऩरयलाय भं भाॊगप्तरक कामल शो वकते शं एलॊ ळुब वभाचाय टक प्राप्तद्ऱ शो वकती शं । मटद आऩ अत्रललाटशत शं तो त्रललाश क फॊधन भं जल्द शी फॊध वकते शं । े
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    108 नलम्फय 2012 नलम्फय 2012 भाप्तवक ऩॊचाॊग चॊद्र टद लाय भाश ऩष प्ततप्तथ वभाप्तद्ऱ नषत्र वभाप्तद्ऱ मोग वभाप्तद्ऱ कयण वभाप्तद्ऱ वभाप्तद्ऱ याप्तळ 1 गुरु काप्ततलक कृ ष्ण तृतीमा 32:59:30 कृ प्ततका 08:23:53 लरयमान 17:40:45 लस्णज 19:37:57 लृऴ - 2 ळुक्र काप्ततलक कृ ष्ण तृतीमा 08:59:17 योटशस्ण 11:33:02 ऩरयग्रश 18:43:21 त्रलत्रद्श 08:59:17 लृऴ 25:07:00 3 ळप्तन काप्ततलक कृ ष्ण चतुथॉ 11:40:20 भृगप्तळया 14:39:24 प्तळल 19:40:20 फारल 11:40:20 प्तभथुन - 4 यत्रल काप्ततलक कृ ष्ण ऩॊचभी 14:07:19 आद्रा 17:31:41 प्तवद्ध 20:26:04 तैप्ततर 14:07:19 प्तभथुन - 5 वोभ काप्ततलक कृ ष्ण ऴद्षी 16:09:56 ऩुनललवु 20:00:33 वाध्म 20:50:15 लस्णज 16:09:56 प्तभथुन 13:26:00 6 भॊगर काप्ततलक कृ ष्ण वद्ऱभी 17:36:56 ऩुष्म 21:53:48 ळुब 20:47:15 फल 17:36:56 ककल - 7 फुध काप्ततलक कृ ष्ण अद्शभी 18:22:41 आद्ऴेऴा 23:04:52 ळुक्र 20:11:26 कौरल 18:22:41 ककल 23:05:00 8 गुरु काप्ततलक कृ ष्ण नलभी 18:19:42 भघा 23:29:04 ब्रह्म 18:57:12 गय 18:19:42 प्तवॊश - 9 ळुक्र काप्ततलक कृ ष्ण दळभी 17:27:58 ऩूलालपाल्गुनी 23:05:28 इन्द्र 17:04:31 त्रलत्रद्श 17:27:58 प्तवॊश 28:52:00 10 ळप्तन काप्ततलक कृ ष्ण एकादळी 15:49:21 उत्तयापाल्गुनी 21:56:51 लैधप्तत ृ 14:35:17 फारल 15:49:21 कन्मा - 11 यत्रल काप्ततलक कृ ष्ण द्रादळी 13:28:34 शस्त 20:07:57 त्रलऴकब ुॊ 11:32:19 तैप्ततर 13:28:34 कन्मा - 12 वोभ काप्ततलक कृ ष्ण त्रमोदळी 10:34:02 प्तचत्रा 17:49:02 प्रीप्तत 08:00:17 लस्णज 10:34:02 कन्मा 07:02:00 13 भॊगर काप्ततलक कृ ष्ण चतुदलळी 07:14:12 स्लाती 15:06:42 वौबाग्म 23:59:12 ळकप्तन ु 07:14:12 तुरा - 14 फुध काप्ततलक ळुक्र प्रप्ततऩदा 23:56:14 त्रलळाखा 12:13:06 ळोबन 19:44:59 टकस्तुघ्न 13:47:48 तुरा 06:57:00 15 गुरु काप्ततलक ळुक्र टद्रतीमा 20:19:31 अनुयाधा 09:18:35 अप्ततगॊि 15:31:43 फारल 10:07:20 लृस्द्ळक 30:31:00 16 ळुक्र काप्ततलक ळुक्र तृतीमा 16:55:56 भूर 28:03:26 वुकभाल 11:27:49 गय 16:55:56 धनु - 17 ळप्तन काप्ततलक ळुक्र चतुथॉ 13:54:52 ऩूलालऴाढ़ 26:02:22 धृप्तत 07:41:44 त्रलत्रद्श 13:54:52 धनु - 18 यत्रल काप्ततलक ळुक्र ऩॊचभी 11:24:43 उत्तयाऴाढ़ 24:35:02 गॊि 25:24:43 फारल 11:24:43 धनु 07:36:00 19 वोभ काप्ततलक ळुक्र ऴद्षी 09:31:09 श्रलण 23:47:05 लृत्रद्ध 23:02:05 तैप्ततर 09:31:09 भकय - 20 भॊगर काप्ततलक ळुक्र वद्ऱभी 08:21:38 धप्तनद्षा 23:42:15 ध्रुल 21:14:08 लस्णज 08:21:38 भकय 11:39:00
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    109 नलम्फय 2012 21 फुध काप्ततलक ळुक्र अद्शभी 07:54:18 ळतप्तबऴा 24:20:33 व्माघात 20:00:52 फल 07:54:18 कब ुॊ - 22 गुरु काप्ततलक ळुक्र नलभी 08:10:06 ऩूलालबाद्रऩद 25:39:10 शऴलण 19:19:29 कौरल 08:10:06 कब ुॊ 19:16:00 23 ळुक्र काप्ततलक ळुक्र दळभी 09:07:09 उत्तयाबाद्रऩद 27:31:32 लज्र 19:08:05 गय 09:07:09 भीन - 24 ळप्तन काप्ततलक ळुक्र एकादळी 10:39:49 ये लप्तत 29:54:49 प्तवत्रद्ध 19:19:12 त्रलत्रद्श 10:39:49 भीन 29:54:00 25 यत्रल काप्ततलक ळुक्र द्रादळी 12:39:41 अस्द्वनी 32:38:45 व्मप्ततऩात 19:50:56 फारल 12:39:41 भेऴ - 26 वोभ काप्ततलक ळुक्र त्रमोदळी 15:00:10 अस्द्वनी 08:37:40 लरयमान 20:36:43 तैप्ततर 15:00:10 भेऴ - 27 भॊगर काप्ततलक ळुक्र चतुदलळी 17:34:42 बयणी 11:35:38 ऩरयग्रश 21:30:57 लस्णज 17:34:42 भेऴ 18:22:00 28 फुध काप्ततलक ळुक्र ऩूस्णलभा 20:16:44 कृ प्ततका 14:42:03 प्तळल 22:29:51 त्रलत्रद्श 06:56:06 लृऴ - 29 गुरु भागलळीऴल कृ ष्ण प्रप्ततऩदा 22:57:50 योटशस्ण 17:48:27 प्तवद्ध 23:27:50 फारल 09:37:12 लृऴ - 30 ळुक्र भागलळीऴल कृ ष्ण टद्रतीमा 25:32:21 भृगप्तळया 20:51:06 वाध्म 24:21:06 तैप्ततर 12:16:25 लृऴ - ळप्तन ऩीिा प्तनलायक वॊऩूणल प्राणप्रप्ततत्रद्षत 22 गेज ळुद्ध स्िीर भं प्तनप्तभलत अखॊटित ऩौरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र ऩुरुऴाकाय ळप्तन मॊत्र (स्िीर भं) को तीव्र प्रबालळारी फनाने शे तु ळप्तन की कायक धातु ळुद्ध स्िीर(रोशे ) भं फनामा गमा शं । स्जव क प्रबाल वे वाधक को तत्कार राब प्राद्ऱ शोता शं । मटद जन्भ किरी भं ळप्तन प्रप्ततकर े ुॊ ू शोने ऩय व्मत्रि को अनेक कामं भं अवपरता प्राद्ऱ शोती शै , कबी व्मलवाम भं घिा, नौकयी भं ऩये ळानी, लाशन दघिना, गृश क्रेळ आटद ऩये ळानीमाॊ फढ़ती जाती शै ऐवी स्स्थप्ततमं भं प्राणप्रप्ततत्रद्षत ग्रश ऩीिा प्तनलायक ळप्तन ु ल मॊत्र की अऩने को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थाऩना कयने वे अनेक राब प्तभरते शं । मटद ळप्तन की ढै ़मा मा वाढ़े वाती का वभम शो तो इवे अलश्म ऩूजना चाटशए। ळप्तनमॊत्र क ऩूजन भात्र वे व्मत्रि को भृत्मु, कजल, े कोिल कळ, जोिो का ददल , फात योग तथा रम्फे वभम क वबी प्रकाय क योग वे ऩये ळान व्मत्रि क प्तरमे ळप्तन े े े े मॊत्र अप्तधक राबकायी शोगा। नौकयी ऩेळा आटद क रोगं को ऩदौन्नप्तत बी ळप्तन द्राया शी प्तभरती शै अत् मश े मॊत्र अप्तत उऩमोगी मॊत्र शै स्जवक द्राया ळीघ्र शी राब ऩामा जा वकता शै । े भूल्म: 1050 वे 8200 GURUTVA KARYALAY BHUBNESWAR-751018, (ORISSA), Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Our Website : www.gurutvakaryalay.com Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
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    110 नलम्फय 2012 नलम्फय-2012 भाप्तवक व्रत-ऩलल-त्मौशाय टद लाय भाश ऩष प्ततप्तथ वभाप्तद्ऱ प्रभुख व्रत-त्मोशाय 1 गुरु काप्ततलक कृ ष्ण तृतीमा 32:59:30 - 2 ळुक्र काप्ततलक कृ ष्ण तृतीमा 08:59:17 वॊकद्शी श्रीगणेळ चतुथॉ व्रत (चॊ.उ.या.8:07), कयलाचौथ व्रतोत्वल, 3 ळप्तन काप्ततलक कृ ष्ण चतुथॉ 11:40:20 दळयथ चतुथॉ (ऩ.फॊगार) 4 यत्रल काप्ततलक कृ ष्ण ऩॊचभी 14:07:19 - 5 वोभ काप्ततलक कृ ष्ण ऴद्षी 16:09:56 लैधप्तत भशाऩात वामॊ 5:34 वे यात्रत्र 1:21 फजे तक ृ काराद्शभी व्रत, कयाद्शभी (भशायाद्स), अशोई अद्शभी व्रत, फशुराद्शभी, 6 भॊगर काप्ततलक कृ ष्ण वद्ऱभी 17:36:56 दाम्ऩत्माद्शभी व्रत 7 फुध काप्ततलक कृ ष्ण अद्शभी 18:22:41 अशोई अद्शभी (ऩॊजाफ), श्रीयाधाकण्ि अद्शभी ु 8 गुरु काप्ततलक कृ ष्ण नलभी 18:19:42 - 9 ळुक्र काप्ततलक कृ ष्ण दळभी 17:27:58 - 10 ळप्तन काप्ततलक कृ ष्ण एकादळी 15:49:21 यभा (यम्बा) एकादळी व्रत, गोलत्व द्रादळी (गौ-फछिा फायव) व्रत धनत्रमोदळी, धनतेयव, धन्लन्तरय जमॊती, प्रदोऴ व्रत, काभेद्वयी 11 यत्रल काप्ततलक कृ ष्ण द्रादळी 13:28:34 जमॊती, गोत्रत्रयात्र प्रायॊ ब, मभऩॊचक-दीऩदान प्रायॊ ब भाप्तवक प्तळलयात्रत्र व्रत(प्तळल चतुदलळी), नयकशया चतुदलळी (नयका चौदव), कारी चतुदलळी, काऱीचौदव, श्रीशनुभान जमॊती, भाॉ धूभालती 12 वोभ काप्ततलक कृ ष्ण त्रमोदळी 10:34:02 जमॊती (ताॊत्रत्रक ऩॊचाॊगानुवाय), मभ तऩलण, रुऩचतुदलळी (यात्रत्र के अॊप्ततभ प्रशय भं अभ्मॊग स्नान) दीऩालरी, दीऩोत्वल, श्रीगणेळ-रक्ष्भी-कफेय का ऩूजन, रक्ष्भी ऩूजा, ु कभरा भशात्रलद्या जमॊती, काप्ततलकी अभालस्मा, गौयी-कदाय व्रत े 13 भॊगर काप्ततलक कृ ष्ण चतुदलळी 07:14:12 (द.बा.), श्रीभशालीय स्लाभी प्तनलालण उत्वल (जैन), स्लाभी याभतीथल की जन्भप्ततप्तथ एलॊ ऩुण्मप्ततप्तथ, दमानॊद स्भृप्तत टदलव, बौभलती अभालव,
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    111 नलम्फय 2012 अन्नकि, गोलद्धल न ऩूजन, फप्तर ऩूजा, गो वॊलधलन वद्ऱाश प्रायॊ ब, ू गुजयाती वम्लत्वय 2069 प्रायॊ ब, बगलान भशालीय प्तनलालण वम्लत ् 14 फुध काप्ततलक ळुक्र प्रप्ततऩदा 23:56:14 2539 प्रायॊ ब, नेऩारी वॊलत ् 1133 प्रायॊ ब, टशॊ गोि मुद्ध, ऩॊ. नेशरू जमॊती, फारटदलव बइमा दज, बाई फीज, नलीन चॊद्र दळलन, मभटद्रतीमा स्नान, प्तचत्रगुद्ऱ ू 15 गुरु काप्ततलक ळुक्र टद्रतीमा 20:19:31 ऩूजन, त्रलद्वकभाल ऩूजन, फग्लारी (उत्तयाखण्ि), मभऩॊचक वभाद्ऱ, लृस्द्ळक वॊक्रास्न्त ळेऴ यात्रत्र 5.38 फजे, त्रलद्वाप्तभत्र जमॊती, लृस्द्ळक-वॊक्रास्न्त क स्नान ल दान का ऩुण्मकार े 16 ळुक्र काप्ततलक ळुक्र तृतीमा 16:55:56 वूमोदम वे भध्माि तक, ऩूजा-वॊकल्ऩ शे तु उऩमुि शे भन्त ऋतु प्रायॊ ब, इस्राभी टशजयी वन ् 1434 ळुरू (भुव.) लयदत्रलनामक चतुथॉ व्रत (चॊ.उ.या.9.8),, दलालगणऩप्तत ू व्रत, भशाव्मप्ततऩात प्रात: 5:51 वे वामॊ 4:42 फजे तक, रारा राजऩत 17 ळप्तन काप्ततलक ळुक्र चतुथॉ 13:54:52 याम फप्तरदान टदलव, वूमऴद्षी व्रत प्रायॊ ब (प्तभप्तथराॊचर), 3 टदन की ल छठऩूजा ळुरू- नशाम खाम वौबाग्म ऩॊचभी, राब ऩॊचभी, राब ऩाॊचभ, ऩाण्िल ऩॊचभी, 18 यत्रल काप्ततलक ळुक्र ऩॊचभी 11:24:43 सानऩॊचभी (जैन), स्कन्दऴद्षी व्रत, छठऩूजा का दवया टदन-खयना ू (त्रफशाय-झायखण्ि) वूमऴद्षी व्रत-प्रप्ततशायऴद्षी व्रत (प्तभप्तथराॊचर), िारा छठ (काळी), ल 19 वोभ काप्ततलक ळुक्र ऴद्षी 09:31:09 छठऩूजा का भुख्म टदन वामॊकार वूमालस्त क वभम वूमदेलको े ल प्रथभ अध्म, यानी रक्ष्भीफाई जमॊती, इॊ टदया गाॊधी जमॊती प्रात: उदीमभान वूमको टद्रतीम अध्मलदान, छठव्रत का ऩायण, वाभा ल 20 भॊगर काप्ततलक ळुक्र वद्ऱभी 08:21:38 ऩूजा ळुरू (प्तभप्तथराॊचर), जगद्धात्री ऩूजा 3 टदन (ऩ.फॊगार), वशस्राजुन जमॊती, वॊत जरायाभ जमॊती, ल गोऩाद्शभी (ब्रज), गोऩार अद्शभी (जम्भू-कश्भीय), श्रीदगालद्शभी व्रत, ु 21 फुध काप्ततलक ळुक्र अद्शभी 07:54:18 श्रीअन्नऩूणालद्शभी व्रत, फुधाद्शभी ऩलल प्रात: 7:54 फजे तक अषमनलभी व्रत, आॊलरा नलभी ऩूजन, भाॉ कष्भाण्ि नलभी, अनरा ू 22 गुरु काप्ततलक ळुक्र नलभी 08:10:06 नलभी (ओिीवा), वत्ममुगाटद प्ततप्तथ, श्रीशॊ व बगलान एलॊ वनकाटद
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    112 नलम्फय 2012 जमॊती, लेद वॊस्थाऩना भशोत्वल, जगद्धात्री नलभी भशाऩूजा (ऩ.फॊगार), त्रलष्णु त्रत्रयात्र प्रतायॊ ब, 23 ळुक्र काप्ततलक ळुक्र दळभी 09:07:09 आळा दळभी, कळलध रीरा भशोत्वल (भथुया), ॊ श्रीशरय प्रफोप्तधनी एकादळी, दे लउठनी ग्मायव, दे ल उठी अग्मायव, दे लोत्थान उत्वल, ईख-यव प्राळन, त्रलष्णु त्रत्रयात्र ऩूण, चातुभालव व्रत ल 24 ळप्तन काप्ततलक ळुक्र एकादळी 10:39:49 प्तनमभ वभाद्ऱ, बीष्भऩॊचक प्रायॊ ब, तुरवी त्रललाश, वॊत नाभदे ल जमॊती, कारीदाव जमॊती, श्रीगुरु तेगफशादय फप्तरदान टदलव, ु प्रदोऴ व्रत, दाभोदय द्रादळी (ब्रज), श्माभफाफा द्रादळी, गरुि द्रादळी 25 यत्रल काप्ततलक ळुक्र द्रादळी 12:39:41 (ओिीवा), भत्स्म द्रादळी, भेरा खािू श्माभ (याज.), लैकण्ठ चतुदलळी व्रत, भशाप्तनळीथकार भं भशात्रलष्णु ऩूजा, यात्रत्र क अॊप्ततभ ु े 26 वोभ काप्ततलक ळुक्र त्रमोदळी 15:00:10 प्रशय भं अरुणोदमकार भं भस्णटकणका-स्नान (काळी), अधलयात्रत्र भं ल शरय-शय प्तभरन (उज्जप्तमनी), त्रलद्याऩप्तत स्भृप्तत टदलव लैकठ चतुदलळी, श्रीकाळीत्रलद्वनाथ प्रप्ततद्षा टदलव (लायाणवी), बयणी दीऩभ ् ुॊ 27 भॊगर काप्ततलक ळुक्र चतुदलळी 17:34:42 (द.बा.), स्नान-दान-व्रत शे तु उत्तभ कृ त्रत्तका नषत्रमुता काप्ततलकी ऩूस्णलभा, श्रीगुरु नानकदे ल जमॊती, दे ल-दीऩालरी, दे ल दीलाऱी, प्तनम्फाकालचामल जमॊती 5109 28 फुध काप्ततलक ळुक्र ऩूस्णलभा 20:16:44 लीॊ, तुरवी त्रललाशोत्वल वभाद्ऱ, बीष्भ ऩॊचक ऩूण, वाभा-त्रलवजलन ल (प्तभप्तथराॊचर), ऩुष्कय भेरा (याज.), काप्ततलक-स्नान वभाद्ऱ, काप्ततलकम- े दळलन 29 गुरु भागलळीऴल कृ ष्ण प्रप्ततऩदा 22:57:50 गोऩ भाव प्रायॊ ब, कात्मामनी भाप्तवक ऩूजा ळुरू, योटशणी व्रत 30 ळुक्र भागलळीऴल कृ ष्ण टद्रतीमा 25:32:21 - क्मा आऩ टकवी वभस्मा वे ग्रस्त शं ? ु आऩक ऩाव अऩनी वभस्माओॊ वे छिकाया ऩाने शे तु ऩूजा-अचलना, वाधना, भॊत्र जाऩ इत्माटद कयने का वभम नशीॊ शं ? े अफ आऩ अऩनी वभस्माओॊ वे फीना टकवी त्रलळेऴ ऩूजा-अचलना, त्रलप्तध-त्रलधान क आऩको अऩने कामल भं वपरता प्राद्ऱ े कय वक एलॊ आऩको अऩने जीलन क वभस्त वुखो को प्राद्ऱ कयने का भागल प्राद्ऱ शो वक इव प्तरमे गुरुत्ल कामालरत े े े द्राया शभाया उद्दे श्म ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो द्राया प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि त्रलप्तबन्न प्रकाय के मन्त्र- कलच एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय तक ऩशोचाने का शै । गुरुत्ल कामालरम भं वम्ऩक कयं : े ल
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    113 नलम्फय 2012 गणेळ रक्ष्भी मॊत्र प्राण-प्रप्ततत्रद्षत गणेळ रक्ष्भी मॊत्र को अऩने घय-दकान-ओटपव-पक्ियी भं ऩूजन स्थान, गल्रा मा अरभायी भं स्थात्रऩत ु ै कयने व्माऩाय भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । मॊत्र क प्रबाल वे बाग्म भं उन्नप्तत, भान-प्रप्ततद्षा एलॊ े व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं एलॊ आप्तथलक स्स्थभं वुधाय शोता शं । गणेळ रक्ष्भी मॊत्र को स्थात्रऩत कयने वे बगलान गणेळ औय दे ली रक्ष्भी का वॊमुि आळीलालद प्राद्ऱ शोता शं । Rs.730 वे Rs.10900 तक भॊगर मॊत्र वे ऋण भुत्रि भॊगर मॊत्र को जभीन-जामदाद क त्रललादो को शर कयने क काभ भं राब दे ता शं , इव क अप्ततरयि व्मत्रि को ऋण े े े भुत्रि शे तु भॊगर वाधना वे अप्तत ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं । त्रललाश आटद भं भॊगरी जातकं क कल्माण क प्तरए भॊगर े े मॊत्र की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । प्राण प्रप्ततत्रद्षत भॊगर मॊत्र क ऩूजन वे बाग्मोदम, ळयीय भं खून की े कभी, गबलऩात वे फचाल, फुखाय, चेचक, ऩागरऩन, वूजन औय घाल, मौन ळत्रि भं लृत्रद्ध, ळत्रु त्रलजम, तॊत्र भॊत्र क दद्श प्रबा, े ु बूत-प्रेत बम, लाशन दघिनाओॊ, शभरा, चोयी इत्मादी वे फचाल शोता शं । ु ल भूल्म भात्र Rs- 730 कफेय मॊत्र ु कफेय मॊत्र क ऩूजन वे स्लणल राब, यत्न राब, ऩैतक वम्ऩत्ती एलॊ गिे शुए धन वे राब प्राप्तद्ऱ टक काभना कयने लारे ु े ृ व्मत्रि क प्तरमे कफेय मॊत्र अत्मन्त वपरता दामक शोता शं । एवा ळास्त्रोि लचन शं । कफेय मॊत्र क ऩूजन वे एकाप्तधक े ु ु े स्त्रोत्र वे धन का प्राद्ऱ शोकय धन वॊचम शोता शं । ताम्र ऩत्र ऩय वुलणल ऩोरीव ताम्र ऩत्र ऩय यजत ऩोरीव ताम्र ऩत्र ऩय (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) वाईज भूल्म वाईज भूल्म वाईज भूल्म 1” X 1” 460 1” X 1” 370 1” X 1” 255 2” X 2” 820 2” X 2” 640 2” X 2” 460 3” X 3” 1650 3” X 3” 1090 3” X 3” 730 4” X 4” 2350 4” X 4” 1650 4” X 4” 1090 6” X 6” 3600 6” X 6” 2800 6” X 6” 1900 9” X 9” 6400 9” X 9” 5100 9” X 9” 3250 12” X12” 10800 12” X12” 8200 12” X12” 6400 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
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    114 नलम्फय 2012 नलयत्न जटित श्री मॊत्र ळास्त्र लचन क अनुवाय ळुद्ध वुलणल मा यजत भं प्तनप्तभलत श्री मॊत्र क चायं औय मटद नलयत्न जिला ने ऩय मश नलयत्न े े जटित श्री मॊत्र कशराता शं । वबी यत्नो को उवक प्तनस्द्ळत स्थान ऩय जि कय रॉकि क रूऩ भं धायण कयने वे व्मत्रि को े े े अनॊत एद्वमल एलॊ रक्ष्भी की प्राप्तद्ऱ शोती शं । व्मत्रि को एवा आबाव शोता शं जैवे भाॊ रक्ष्भी उवक वाथ शं । नलग्रश को े श्री मॊत्र क वाथ रगाने वे ग्रशं की अळुब दळा का धायण कयने लारे व्मत्रि ऩय प्रबाल नशीॊ शोता शं । गरे भं शोने क े े कायण मॊत्र ऩत्रलत्र यशता शं एलॊ स्नान कयते वभम इव मॊत्र ऩय स्ऩळल कय जो जर त्रफॊद ु ळयीय को रगते शं , लश गॊगा जर क वभान ऩत्रलत्र शोता शं । इव प्तरमे इवे वफवे तेजस्ली एलॊ परदाप्तम कशजाता शं । जैवे अभृत वे उत्तभ कोई े औऴप्तध नशीॊ, उवी प्रकाय रक्ष्भी प्राप्तद्ऱ क प्तरमे श्री मॊत्र वे उत्तभ कोई मॊत्र वॊवाय भं नशीॊ शं एवा ळास्त्रोि लचन शं । इव े प्रकाय क नलयत्न जटित श्री मॊत्र गुरूत्ल कामालरम द्राया ळुब भुशूतल भं प्राण प्रप्ततत्रद्षत कयक फनालाए जाते शं । े े अद्श रक्ष्भी कलच अद्श रक्ष्भी कलच को धायण कयने वे व्मत्रि ऩय वदा भाॊ भशा रक्ष्भी की कृ ऩा एलॊ आळीलालद फना यशता शं । स्जस्वे भाॊ रक्ष्भी क अद्श रुऩ (१)-आटद रक्ष्भी, (२)-धान्म रक्ष्भी, (३)-धैयीम रक्ष्भी, (४)- े गज रक्ष्भी, (५)-वॊतान रक्ष्भी, (६)-त्रलजम रक्ष्भी, (७)-त्रलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो का स्लत् अळीलालद प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म भात्र: Rs-1250 भॊत्र प्तवद्ध व्माऩाय लृत्रद्ध कलच व्माऩाय लृत्रद्ध कलच व्माऩाय क ळीघ्र उन्नप्तत क प्तरए उत्तभ शं । चाशं कोई बी व्माऩाय शो अगय उवभं राब क स्थान ऩय े े े फाय-फाय शाप्तन शो यशी शं । टकवी प्रकाय वे व्माऩाय भं फाय-फाय फाॊधा उत्ऩन्न शो यशी शो! तो वॊऩूणल प्राण प्रप्ततत्रद्षत भॊत्र प्तवद्ध ऩूणल चैतन्म मुि व्माऩात लृत्रद्ध मॊत्र को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थात्रऩत कयने वे ळीघ्र शी व्माऩाय लृत्रद्ध एलॊ प्तनतन्तय राब प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म भात्र: Rs.730 & 1050 भॊगर मॊत्र (त्रत्रकोण) भॊगर मॊत्र को जभीन-जामदाद क त्रललादो को शर कयने क काभ भं राब दे ता शं , इव क अप्ततरयि व्मत्रि को े े े ऋण भुत्रि शे तु भॊगर वाधना वे अप्तत ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं । त्रललाश आटद भं भॊगरी जातकं क कल्माण क प्तरए े े भॊगर मॊत्र की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म भात्र Rs- 730 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    115 नलम्फय 2012 त्रललाश वॊफॊप्तधत वभस्मा क्मा आऩक रिक-रिकी टक आऩकी ळादी भं अनालश्मक रूऩ वे त्रलरम्फ शो यशा शं मा उनक लैलाटशक जीलन भं खुप्तळमाॊ कभ े े े शोती जायशी शं औय वभस्मा अप्तधक फढती जायशी शं । एवी स्स्थती शोने ऩय अऩने रिक-रिकी टक किरी का अध्ममन े ुॊ अलश्म कयलारे औय उनक लैलाटशक वुख को कभ कयने लारे दोऴं क प्तनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे जनकायी प्राद्ऱ े े े े कयं । प्तळषा वे वॊफॊप्तधत वभस्मा क्मा आऩक रिक-रिकी की ऩढाई भं अनालश्मक रूऩ वे फाधा-त्रलघ्न मा रुकालिे शो यशी शं ? फच्चो को अऩने ऩूणल ऩरयश्रभ े े एलॊ भेशनत का उप्तचत पर नशीॊ प्तभर यशा? अऩने रिक-रिकी की किरी का त्रलस्तृत अध्ममन अलश्म कयलारे औय े ुॊ उनक त्रलद्या अध्ममन भं आनेलारी रुकालि एलॊ दोऴो क कायण एलॊ उन दोऴं क प्तनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे े े े े े जनकायी प्राद्ऱ कयं । क्मा आऩ टकवी वभस्मा वे ग्रस्त शं ? ु आऩक ऩाव अऩनी वभस्माओॊ वे छिकाया ऩाने शे तु ऩूजा-अचलना, वाधना, भॊत्र जाऩ इत्माटद कयने का वभम नशीॊ शं ? े अफ आऩ अऩनी वभस्माओॊ वे फीना टकवी त्रलळेऴ ऩूजा-अचलना, त्रलप्तध-त्रलधान क आऩको अऩने कामल भं वपरता प्राद्ऱ े कय वक एलॊ आऩको अऩने जीलन क वभस्त वुखो को प्राद्ऱ कयने का भागल प्राद्ऱ शो वक इव प्तरमे गुरुत्ल कामालरत े े े द्राया शभाया उद्दे श्म ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो द्राया प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि त्रलप्तबन्न प्रकाय के मन्त्र- कलच एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय तक ऩशोचाने का शं । े ज्मोप्ततऴ वॊफॊप्तधत त्रलळेऴ ऩयाभळल ज्मोप्तत त्रलसान, अॊक ज्मोप्ततऴ, लास्तु एलॊ आध्मास्त्भक सान वं वॊफॊप्तधत त्रलऴमं भं शभाये 30 लऴो वे अप्तधक लऴल के अनुबलं क वाथ ज्मोप्ततव वे जुिे नमे-नमे वॊळोधन क आधाय ऩय आऩ अऩनी शय वभस्मा क वयर वभाधान प्राद्ऱ कय े े े वकते शं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com ओनेक्व जो व्मत्रि ऩन्ना धायण कयने भे अवभथल शो उन्शं फुध ग्रश क उऩयत्न ओनेक्व को धायण कयना चाटशए। े उच्च प्तळषा प्राप्तद्ऱ शे तु औय स्भयण ळत्रि क त्रलकाव शे तु ओनेक्व यत्न की अॊगूठी को दामं शाथ की वफवे छोिी े उॊ गरी मा रॉकि फनला कय गरे भं धायण कयं । ओनेक्व यत्न धायण कयने वे त्रलद्या-फुत्रद्ध की प्राप्तद्ऱ शो शोकय स्भयण े ळत्रि का त्रलकाव शोता शं ।
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    116 नलम्फय 2012 नलम्फय 2012 -त्रलळेऴ मोग कामल प्तवत्रद्ध मोग 5 वामॊ 7:59 वे यातबय 19 वूमोदम वे यात्रत्र 11:46 तक 6 यात्रत्र 9:53 वे यातबय 23/24 यात्रत्र 3:31 वे वूमोदम तक 11 वूमोदम वे यात्रत्र 8:07 तक 25 वम्ऩूणल टदन-यात 14 टदन 12:12 वे 15 नलॊफय को प्रात: 9:18 तक 27 टदन 11:35 वे यात्रत्रऩमलन्त 18 वूमोदम वे यात्रत्र 12:33 तक 28 वूमोदम वे टदन-यात अभृत मोग 11 वूमोदम वे यात्रत्र 8:07 तक 23/24 यात्रत्र 3:31 वे वूमोदम तक 14 टदन 12:12 वे यातबय त्रत्रऩुष्कय मोग (तीन गुना) मोग टद्रऩुष्कय (दोगुना पर) मोग 10 टदन 3:48 वे यात्रत्र 9:55 तक 20 वूमोदम वे प्रात: 8:20 तक त्रलघ्नकायक बद्रा 1 वामॊ 7:37 वे 2 नलॊफय को को प्रात: 8:58 तक 16/17 यात्रत्र 3:24 वे टदन 1:54 तक 5 वामॊ 4:09 वे 6 नलॊफय को प्रात: 4:53तक 20 प्रात: 8:20 वे यात्रत्र 8:06 तक 9 प्रात: 5:53 वे वामॊ 5:27 तक 23 यात्रत्र 9:52 वे 24 नलॊफय को प्रात: 10:38 तक 12 प्रात: 10:33 वे यात्रत्र 8:53 तक 27 वामॊ 5:34 वे 28 नलॊफय को प्रात: 6:54 तक मोग पर :  कामल प्तवत्रद्ध मोग भे टकमे गमे ळुब कामल भे प्तनस्द्ळत वपरता प्राद्ऱ शोती शं , एवा ळास्त्रोि लचन शं ।  त्रत्रऩुष्कय मोग भं टकमे गमे ळुब कामो का राब तीन गुना शोता शं । एवा ळास्त्रोि लचन शं ।  टद्रऩुष्कय मोग भं टकमे गमे ळुब कामो का राब दोगुना शोता शं । एवा ळास्त्रोि लचन शं ।  ळास्त्रोि भत वे त्रलघ्नकायक बद्रा मा बद्रा मोग भं ळुब कामल कयना लस्जलत शं । दै प्तनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान ताप्तरका गुप्तरक कार (ळुब) मभ कार (अळुब) याशु कार (अळुब) लाय वभम अलप्तध वभम अलप्तध वभम अलप्तध यत्रललाय 03:00 वे 04:30 12:00 वे 01:30 04:30 वे 06:00 वोभलाय 01:30 वे 03:00 10:30 वे 12:00 07:30 वे 09:00 भॊगरलाय 12:00 वे 01:30 09:00 वे 10:30 03:00 वे 04:30 फुधलाय 10:30 वे 12:00 07:30 वे 09:00 12:00 वे 01:30 गुरुलाय 09:00 वे 10:30 06:00 वे 07:30 01:30 वे 03:00 ळुक्रलाय 07:30 वे 09:00 03:00 वे 04:30 10:30 वे 12:00 ळप्तनलाय 06:00 वे 07:30 01:30 वे 03:00 09:00 वे 10:30
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    117 नलम्फय 2012 टदन क चौघटिमे े वभम यत्रललाय वोभलाय भॊगरलाय फुधलाय गुरुलाय ळुक्रलाय ळप्तनलाय 06:00 वे 07:30 उद्रे ग अभृत योग राब ळुब चर कार 07:30 वे 09:00 चर कार उद्रे ग अभृत योग राब ळुब 09:00 वे 10:30 राब ळुब चर कार उद्रे ग अभृत योग 10:30 वे 12:00 अभृत योग राब ळुब चर कार उद्रे ग 12:00 वे 01:30 कार उद्रे ग अभृत योग राब ळुब चर 01:30 वे 03:00 ळुब चर कार उद्रे ग अभृत योग राब 03:00 वे 04:30 योग राब ळुब चर कार उद्रे ग अभृत 04:30 वे 06:00 उद्रे ग अभृत योग राब ळुब चर कार यात क चौघटिमे े वभम यत्रललाय वोभलाय भॊगरलाय फुधलाय गुरुलाय ळुक्रलाय ळप्तनलाय 06:00 वे 07:30 ळुब चर कार उद्रे ग अभृत योग राब 07:30 वे 09:00 अभृत योग राब ळुब चर कार उद्रे ग 09:00 वे 10:30 चर कार उद्रे ग अभृत योग राब ळुब 10:30 वे 12:00 योग राब ळुब चर कार उद्रे ग अभृत 12:00 वे 01:30 कार उद्रे ग अभृत योग राब ळुब चर 01:30 वे 03:00 राब ळुब चर कार उद्रे ग अभृत योग 03:00 वे 04:30 उद्रे ग अभृत योग राब ळुब चर कार 04:30 वे 06:00 ळुब चर कार उद्रे ग अभृत योग राब ळास्त्रोि भत क अनुळाय मटद टकवी बी कामल का प्रायॊ ब ळुब भुशूतल मा ळुब वभम ऩय टकमा जामे तो कामल भं वपरता े प्राद्ऱ शोने टक वॊबालना ज्मादा प्रफर शो जाती शं । इव प्तरमे दै प्तनक ळुब वभम चौघटिमा दे खकय प्राद्ऱ टकमा जा वकता शं । नोि: प्राम् टदन औय यात्रत्र क चौघटिमे टक प्तगनती क्रभळ् वूमोदम औय वूमालस्त वे टक जाती शं । प्रत्मेक चौघटिमे टक अलप्तध 1 े घॊिा 30 प्तभप्तनि अथालत िे ढ़ घॊिा शोती शं । वभम क अनुवाय चौघटिमे को ळुबाळुब तीन बागं भं फाॊिा जाता शं , जो क्रभळ् ळुब, े भध्मभ औय अळुब शं । चौघटिमे क स्लाभी ग्रश े * शय कामल क प्तरमे ळुब/अभृत/राब का े ळुब चौघटिमा भध्मभ चौघटिमा अळुब चौघटिमा चौघटिमा उत्तभ भाना जाता शं । चौघटिमा स्लाभी ग्रश चौघटिमा स्लाभी ग्रश चौघटिमा स्लाभी ग्रश ळुब गुरु चय ळुक्र उद्बे ग वूमल * शय कामल क प्तरमे चर/कार/योग/उद्रे ग े अभृत चॊद्रभा कार ळप्तन का चौघटिमा उप्तचत नशीॊ भाना जाता। राब फुध योग भॊगर
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    118 नलम्फय 2012 टदन टक शोया - वूमोदम वे वूमालस्त तक लाय 1.घॊ 2.घॊ 3.घॊ 4.घॊ 5.घॊ 6.घॊ 7.घॊ 8.घॊ 9.घॊ 10.घॊ 11.घॊ 12.घॊ यत्रललाय वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन वोभलाय चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल भॊगरलाय भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र फुधलाय फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर गुरुलाय गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध ळुक्रलाय ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु ळप्तनलाय ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र यात टक शोया – वूमालस्त वे वूमोदम तक यत्रललाय गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध वोभलाय ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगरलाय ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुधलाय वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरुलाय चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्रलाय भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तनलाय फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर वूमल ळुक्र फुध चॊद्र ळप्तन गुरु भॊगर शोया भुशूतल को कामल प्तवत्रद्ध क प्तरए ऩूणल परदामक एलॊ अचूक भाना जाता शं , टदन-यात क २४ घॊिं भं ळुब-अळुब वभम े े को वभम वे ऩूलल सात कय अऩने कामल प्तवत्रद्ध क प्तरए प्रमोग कयना चाटशमे। े त्रलद्रानो क भत वे इस्च्छत कामल प्तवत्रद्ध क प्तरए ग्रश वे वॊफॊप्तधत शोया का चुनाल कयने वे त्रलळेऴ राब े े प्राद्ऱ शोता शं ।  वूमल टक शोया वयकायी कामो क प्तरमे उत्तभ शोती शं । े  चॊद्रभा टक शोया वबी कामं क प्तरमे उत्तभ शोती शं । े  भॊगर टक शोया कोिल -कचेयी क कामं क प्तरमे उत्तभ शोती शं । े े  फुध टक शोया त्रलद्या-फुत्रद्ध अथालत ऩढाई क प्तरमे उत्तभ शोती शं । े  गुरु टक शोया धाप्तभलक कामल एलॊ त्रललाश क प्तरमे उत्तभ शोती शं । े  ळुक्र टक शोया मात्रा क प्तरमे उत्तभ शोती शं । े  ळप्तन टक शोया धन-द्रव्म वॊफॊप्तधत कामल क प्तरमे उत्तभ शोती शं । े
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    119 नलम्फय 2012 ग्रश चरन नलम्फय -2012 Day Sun Mon Ma Me Jup Ven Sat Rah Ket Ua Nep Plu 1 06:14:55 01:08:34 07:23:55 07:08:04 01:21:05 05:10:08 06:09:06 07:01:58 01:01:58 11:11:17 10:06:20 08:13:24 2 06:15:55 01:20:21 07:24:40 07:08:42 01:21:00 05:11:21 06:09:13 07:01:59 01:01:59 11:11:15 10:06:20 08:13:25 3 06:16:55 02:02:09 07:25:24 07:09:14 01:20:55 05:12:34 06:09:20 07:02:01 01:02:01 11:11:13 10:06:20 08:13:26 4 06:17:56 02:14:00 07:26:09 07:09:40 01:20:49 05:13:47 06:09:27 07:02:02 01:02:02 11:11:12 10:06:20 08:13:28 5 06:18:56 02:25:59 07:26:53 07:09:59 01:20:43 05:15:00 06:09:34 07:02:03 01:02:03 11:11:10 10:06:19 08:13:29 6 06:19:56 03:08:11 07:27:38 07:10:11 01:20:37 05:16:13 06:09:42 07:02:04 01:02:04 11:11:08 10:06:19 08:13:30 7 06:20:56 03:20:39 07:28:22 07:10:15 01:20:31 05:17:27 06:09:49 07:02:04 01:02:04 11:11:06 10:06:19 08:13:32 8 06:21:56 04:03:28 07:29:07 07:10:10 01:20:25 05:18:40 06:09:56 07:02:04 01:02:04 11:11:05 10:06:19 08:13:33 9 06:22:56 04:16:41 07:29:52 07:09:56 01:20:18 05:19:53 06:10:03 07:02:03 01:02:03 11:11:03 10:06:19 08:13:35 10 06:23:57 05:00:22 08:00:37 07:09:32 01:20:12 05:21:07 06:10:10 07:02:02 01:02:02 11:11:01 10:06:19 08:13:36 11 06:24:57 05:14:30 08:01:21 07:08:59 01:20:05 05:22:20 06:10:17 07:02:02 01:02:02 11:11:00 10:06:19 08:13:38 12 06:25:57 05:29:03 08:02:06 07:08:15 01:19:58 05:23:34 06:10:24 07:02:01 01:02:01 11:10:58 10:06:19 08:13:39 13 06:26:58 06:13:57 08:02:51 07:07:21 01:19:51 05:24:48 06:10:31 07:02:00 01:02:00 11:10:57 10:06:19 08:13:41 14 06:27:58 06:29:04 08:03:37 07:06:19 01:19:44 05:26:01 06:10:39 07:02:00 01:02:00 11:10:55 10:06:19 08:13:42 15 06:28:59 07:14:16 08:04:22 07:05:09 01:19:37 05:27:15 06:10:46 07:02:00 01:02:00 11:10:54 10:06:19 08:13:44 16 06:29:59 07:29:21 08:05:07 07:03:53 01:19:30 05:28:29 06:10:53 07:02:00 01:02:00 11:10:53 10:06:19 08:13:46 17 07:01:00 08:14:13 08:05:52 07:02:33 01:19:22 05:29:43 06:11:00 07:02:01 01:02:01 11:10:51 10:06:19 08:13:47 18 07:02:00 08:28:44 08:06:37 07:01:12 01:19:15 06:00:57 06:11:07 07:02:01 01:02:01 11:10:50 10:06:19 08:13:49 19 07:03:01 09:12:51 08:07:23 06:29:52 01:19:07 06:02:11 06:11:13 07:02:01 01:02:01 11:10:49 10:06:20 08:13:51 20 07:04:01 09:26:33 08:08:08 06:28:36 01:19:00 06:03:25 06:11:20 07:02:00 01:02:00 11:10:48 10:06:20 08:13:52 21 07:05:02 10:09:50 08:08:54 06:27:27 01:18:52 06:04:39 06:11:27 07:02:00 01:02:00 11:10:47 10:06:20 08:13:54 22 07:06:03 10:22:44 08:09:39 06:26:27 01:18:44 06:05:53 06:11:34 07:02:01 01:02:01 11:10:46 10:06:21 08:13:56 23 07:07:03 11:05:20 08:10:25 06:25:36 01:18:36 06:07:07 06:11:41 07:02:01 01:02:01 11:10:45 10:06:21 08:13:58 24 07:08:04 11:17:40 08:11:11 06:24:56 01:18:28 06:08:21 06:11:48 07:02:02 01:02:02 11:10:44 10:06:21 08:14:00 25 07:09:04 11:29:48 08:11:56 06:24:29 01:18:20 06:09:36 06:11:54 07:02:02 01:02:02 11:10:43 10:06:22 08:14:01 26 07:10:05 00:11:46 08:12:42 06:24:12 01:18:12 06:10:50 06:12:01 07:02:03 01:02:03 11:10:42 10:06:22 08:14:03 27 07:11:06 00:23:39 08:13:28 06:24:07 01:18:04 06:12:04 06:12:08 07:02:04 01:02:04 11:10:41 10:06:23 08:14:05 28 07:12:07 01:05:28 08:14:14 06:24:13 01:17:56 06:13:18 06:12:14 07:02:04 01:02:04 11:10:40 10:06:23 08:14:07 29 07:13:07 01:17:16 08:15:00 06:24:29 01:17:48 06:14:33 06:12:21 07:02:03 01:02:03 11:10:39 10:06:24 08:14:09 30 07:14:08 01:29:05 08:15:46 06:24:54 01:17:40 06:15:47 06:12:28 07:02:02 01:02:02 11:10:39 10:06:25 08:14:11
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    120 नलम्फय 2012 वलल योगनाळक मॊत्र/कलच भनुष्म अऩने जीलन क त्रलप्तबन्न वभम ऩय टकवी ना टकवी वाध्म मा अवाध्म योग वे ग्रस्त शोता शं । े उप्तचत उऩचाय वे ज्मादातय वाध्म योगो वे तो भुत्रि प्तभर जाती शं , रेटकन कबी-कबी वाध्म योग शोकय बी अवाध्म शोजाते शं , मा कोइ अवाध्म योग वे ग्रप्तवत शोजाते शं । शजायो राखो रुऩमे खचल कयने ऩय बी अप्तधक राब प्राद्ऱ नशीॊ शो ऩाता। िॉक्िय द्राया टदजाने लारी दलाईमा अल्ऩ वभम क प्तरमे कायगय वात्रफत शोती शं , एवी े स्स्थती भं राब प्राप्तद्ऱ क प्तरमे व्मत्रि एक िॉक्िय वे दवये िॉक्िय क चक्कय रगाने को फाध्म शो जाता शं । े ू े बायतीम ऋऴीमोने अऩने मोग वाधना क प्रताऩ वे योग ळाॊप्तत शे तु त्रलप्तबन्न आमुलय औऴधो क अप्ततरयि े े े मॊत्र, भॊत्र एलॊ तॊत्र का उल्रेख अऩने ग्रॊथो भं कय भानल जीलन को राब प्रदान कयने का वाथलक प्रमाव शजायो लऴल ऩूलल टकमा था। फुत्रद्धजीलो क भत वे जो व्मत्रि जीलनबय अऩनी टदनचमाल ऩय प्तनमभ, वॊमभ यख कय आशाय े ग्रशण कयता शं , एवे व्मत्रि को त्रलप्तबन्न योग वे ग्रप्तवत शोने की वॊबालना कभ शोती शं । रेटकन आज के फदरते मुग भं एवे व्मत्रि बी बमॊकय योग वे ग्रस्त शोते टदख जाते शं । क्मोटक वभग्र वॊवाय कार क अधीन े शं । एलॊ भृत्मु प्तनस्द्ळत शं स्जवे त्रलधाता क अराला औय कोई िार नशीॊ वकता, रेटकन योग शोने टक स्स्थती भं े व्मत्रि योग दय कयने का प्रमाव तो अलश्म कय वकता शं । इव प्तरमे मॊत्र भॊत्र एलॊ तॊत्र क कळर जानकाय वे ू े ु मोग्म भागलदळलन रेकय व्मत्रि योगो वे भुत्रि ऩाने का मा उवक प्रबालो को कभ कयने का प्रमाव बी अलश्म े कय वकता शं । ज्मोप्ततऴ त्रलद्या क कळर जानकय बी कार ऩुरुऴकी गणना कय अनेक योगो क अनेको यशस्म को े ु े उजागय कय वकते शं । ज्मोप्ततऴ ळास्त्र क भाध्मभ वे योग क भूरको ऩकिने भे वशमोग प्तभरता शं , जशा े े आधुप्तनक प्तचटकत्वा ळास्त्र अषभ शोजाता शं लशा ज्मोप्ततऴ ळास्त्र द्राया योग क भूर(जि) को ऩकि कय उवका े प्तनदान कयना राबदामक एलॊ उऩामोगी प्तवद्ध शोता शं । शय व्मत्रि भं रार यॊ गकी कोप्तळकाए ऩाइ जाती शं , स्जवका प्तनमभीत त्रलकाव क्रभ फद्ध तयीक वे शोता े यशता शं । जफ इन कोप्तळकाओ क क्रभ भं ऩरयलतलन शोता शै मा त्रलखॊटिन शोता शं तफ व्मत्रि क ळयीय भं े े स्लास्र्थम वॊफॊधी त्रलकायो उत्ऩन्न शोते शं । एलॊ इन कोप्तळकाओ का वॊफॊध नल ग्रशो क वाथ शोता शं । स्जस्वे योगो े क शोने क कायण व्मत्रि क जन्भाॊग वे दळा-भशादळा एलॊ ग्रशो टक गोचय स्स्थती वे प्राद्ऱ शोता शं । े े े वलल योग प्तनलायण कलच एलॊ भशाभृत्मुॊजम मॊत्र क भाध्मभ वे व्मत्रि क जन्भाॊग भं स्स्थत कभजोय एलॊ े े ऩीटित ग्रशो क अळुब प्रबाल को कभ कयने का कामल वयरता ऩूलक टकमा जावकता शं । जेवे शय व्मत्रि को े ल ब्रह्माॊि टक उजाल एलॊ ऩृर्थली का गुरुत्लाकऴलण फर प्रबालीत कताल शं टठक उवी प्रकाय कलच एलॊ मॊत्र क भाध्मभ े वे ब्रह्माॊि टक उजाल क वकायात्भक प्रबाल वे व्मत्रि को वकायात्भक उजाल प्राद्ऱ शोती शं स्जस्वे योग क प्रबाल े े को कभ कय योग भुि कयने शे तु वशामता प्तभरती शं । योग प्तनलायण शे तु भशाभृत्मुॊजम भॊत्र एलॊ मॊत्र का फिा भशत्ल शं । स्जस्वे टशन्द ू वॊस्कृ प्तत का प्राम् शय व्मत्रि भशाभृत्मुॊजम भॊत्र वे ऩरयप्तचत शं ।
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    121 नलम्फय 2012 कलच क राब : े  एवा ळास्त्रोि लचन शं स्जव घय भं भशाभृत्मुॊजम मॊत्र स्थात्रऩत शोता शं लशा प्तनलाव कताल शो नाना प्रकाय टक आप्तध-व्माप्तध-उऩाप्तध वे यषा शोती शं ।  ऩूणल प्राण प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि वलल योग प्तनलायण कलच टकवी बी उम्र एलॊ जाप्तत धभल क रोग े चाशे स्त्री शो मा ऩुरुऴ धायण कय वकते शं ।  जन्भाॊगभं अनेक प्रकायक खयाफ मोगो औय खयाफ ग्रशो टक प्रप्ततकरता वे योग उतऩन्न शोते शं । े ू  कछ योग वॊक्रभण वे शोते शं एलॊ कछ योग खान-ऩान टक अप्तनमप्तभतता औय अळुद्धतावे उत्ऩन्न शोते शं । ु ु कलच एलॊ मॊत्र द्राया एवे अनेक प्रकाय क खयाफ मोगो को नद्श कय, स्लास्र्थम राब औय ळायीरयक यषण प्राद्ऱ े कयने शे तु वलल योगनाळक कलच एलॊ मॊत्र वलल उऩमोगी शोता शं ।  आज क बौप्ततकता लादी आधुप्तनक मुगभे अनेक एवे योग शोते शं , स्जवका उऩचाय ओऩये ळन औय दलावे बी े कटठन शो जाता शं । कछ योग एवे शोते शं स्जवे फताने भं रोग टशचटकचाते शं ळयभ अनुबल कयते शं एवे ु योगो को योकने शे तु एलॊ उवक उऩचाय शे तु वलल योगनाळक कलच एलॊ मॊत्र राबादाप्तम प्तवद्ध शोता शं । े  प्रत्मेक व्मत्रि टक जेवे-जेवे आमु फढती शं लैवे-लवै उवक ळयीय टक ऊजाल कभ शोती जाती शं । स्जवक वाथ े े अनेक प्रकाय क त्रलकाय ऩैदा शोने रगते शं एवी स्स्थती भं उऩचाय शे तु वललयोगनाळक कलच एलॊ मॊत्र परप्रद े शोता शं ।  स्जव घय भं त्रऩता-ऩुत्र, भाता-ऩुत्र, भाता-ऩुत्री, मा दो बाई एक टश नषत्रभे जन्भ रेते शं , तफ उवकी भाता क प्तरमे अप्तधक कद्शदामक स्स्थती शोती शं । उऩचाय शे तु भशाभृत्मुॊजम मॊत्र परप्रद शोता शं । े  स्जव व्मत्रि का जन्भ ऩरयप्तध मोगभे शोता शं उन्शे शोने लारे भृत्मु तुल्म कद्श एलॊ शोने लारे योग, प्तचॊता भं उऩचाय शे तु वलल योगनाळक कलच एलॊ मॊत्र ळुब परप्रद शोता शं । नोि:- ऩूणल प्राण प्रप्ततत्रद्षत एलॊ ऩूणल चैतन्म मुि वलल योग प्तनलायण कलच एलॊ मॊत्र क फाये भं अप्तधक े जानकायी शे तु वॊऩक कयं । ल Declaration Notice  We do not accept liability for any out of date or incorrect information.  We will not be liable for your any indirect consequential loss, loss of profit,  If you will cancel your order for any article we can not any amount will be refunded or Exchange.  We are keepers of secrets. We honour our clients' rights to privacy and will release no information about our any other clients' transactions with us.  Our ability lies in having learned to read the subtle spiritual energy, Yantra, mantra and promptings of the natural and spiritual world.  Our skill lies in communicating clearly and honestly with each client.  Our all kawach, yantra and any other article are prepared on the Principle of Positiv energy, our Article dose not produce any bad energy. Our Goal  Here Our goal has The classical Method-Legislation with Proved by specific with fiery chants prestigious full consciousness (Puarn Praan Pratisthit) Give miraculous powers & Good effect All types of Yantra, Kavach, Rudraksh, preciouse and semi preciouse Gems stone deliver on your door step.
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    122 नलम्फय 2012 भॊत्र प्तवद्ध कलच भॊत्र प्तवद्ध कलच को त्रलळेऴ प्रमोजन भं उऩमोग क प्तरए औय ळीघ्र प्रबाल ळारी फनाने क प्तरए तेजस्ली भॊत्रो द्राया े े ळुब भशूतल भं ळुब टदन को तैमाय टकमे जाते शं . अरग-अरग कलच तैमाय कयने कप्तरए अरग-अरग तयश क े े भॊत्रो का प्रमोग टकमा जाता शं .  क्मं चुने भॊत्र प्तवद्ध कलच?  उऩमोग भं आवान कोई प्रप्ततफन्ध नशीॊ  कोई त्रलळेऴ प्तनप्तत-प्तनमभ नशीॊ  कोई फुया प्रबाल नशीॊ  कलच क फाये भं अप्तधक जानकायी शे तु े भॊत्र प्तवद्ध कलच वूप्तच वलल कामल प्तवत्रद्ध 4600/- ऋण भुत्रि 910/- त्रलघ्न फाधा प्तनलायण 550/- वलल जन लळीकयण 1450/- धन प्राप्तद्ऱ 820/- नज़य यषा 550/- अद्श रक्ष्भी 1250/- तॊत्र यषा 730/- दबालग्म नाळक ु 460/- वॊतान प्राप्तद्ऱ 1250/- ळत्रु त्रलजम 730/- * लळीकयण (२-३ व्मत्रिक प्तरए) े 1050/- स्ऩे- व्माऩय लृत्रद्ध 1050/- त्रललाश फाधा प्तनलायण 730/- * ऩत्नी लळीकयण 640/- कामल प्तवत्रद्ध 1050/- व्माऩय लृत्रद्ध 730/-- * ऩप्तत लळीकयण 640/- आकस्स्भक धन प्राप्तद्ऱ 1050/- वलल योग प्तनलायण 730/- वयस्लती (कषा +10 क प्तरए) े 550/- नलग्रश ळाॊप्तत 910/- भस्स्तष्क ऩृत्रद्श लधलक 640/- वयस्लती (कषा 10 तकक प्तरए) े 460/- बूप्तभ राब 910/- काभना ऩूप्ततल 640/- * लळीकयण ( 1 व्मत्रि क प्तरए) े 640/- काभ दे ल 910/- त्रलयोध नाळक 640/- योजगाय प्राप्तद्ऱ 550/- ऩदं उन्नप्तत 910/- योजगाय लृत्रद्ध 730/- *कलच भात्र ळुब कामल मा उद्दे श्म क प्तरमे े GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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    123 नलम्फय 2012 GURUTVA KARYALAY YANTRA LIST EFFECTS Our Splecial Yantra 1 12 – YANTRA SET For all Family Troubles 2 VYAPAR VRUDDHI YANTRA For Business Development 3 BHOOMI LABHA YANTRA For Farming Benefits 4 TANTRA RAKSHA YANTRA For Protection Evil Sprite 5 AAKASMIK DHAN PRAPTI YANTRA For Unexpected Wealth Benefits 6 PADOUNNATI YANTRA For Getting Promotion 7 RATNE SHWARI YANTRA For Benefits of Gems & Jewellery 8 BHUMI PRAPTI YANTRA For Land Obtained 9 GRUH PRAPTI YANTRA For Ready Made House 10 KAILASH DHAN RAKSHA YANTRA - Shastrokt Yantra 11 AADHYA SHAKTI AMBAJEE(DURGA) YANTRA Blessing of Durga 12 BAGALA MUKHI YANTRA (PITTAL) Win over Enemies 13 BAGALA MUKHI POOJAN YANTRA (PITTAL) Blessing of Bagala Mukhi 14 BHAGYA VARDHAK YANTRA For Good Luck 15 BHAY NASHAK YANTRA For Fear Ending 16 CHAMUNDA BISHA YANTRA (Navgraha Yukta) Blessing of Chamunda & Navgraha 17 CHHINNAMASTA POOJAN YANTRA Blessing of Chhinnamasta 18 DARIDRA VINASHAK YANTRA For Poverty Ending 19 DHANDA POOJAN YANTRA For Good Wealth 20 DHANDA YAKSHANI YANTRA For Good Wealth 21 GANESH YANTRA (Sampurna Beej Mantra) Blessing of Lord Ganesh 22 GARBHA STAMBHAN YANTRA For Pregnancy Protection 23 GAYATRI BISHA YANTRA Blessing of Gayatri 24 HANUMAN YANTRA Blessing of Lord Hanuman 25 JWAR NIVARAN YANTRA For Fewer Ending JYOTISH TANTRA GYAN VIGYAN PRAD SHIDDHA BISHA 26 YANTRA For Astrology & Spritual Knowlage 27 KALI YANTRA Blessing of Kali 28 KALPVRUKSHA YANTRA For Fullfill your all Ambition 29 KALSARP YANTRA (NAGPASH YANTRA) Destroyed negative effect of Kalsarp Yoga 30 KANAK DHARA YANTRA Blessing of Maha Lakshami 31 KARTVIRYAJUN POOJAN YANTRA - 32 KARYA SHIDDHI YANTRA For Successes in work 33  SARVA KARYA SHIDDHI YANTRA For Successes in all work 34 KRISHNA BISHA YANTRA Blessing of Lord Krishna 35 KUBER YANTRA Blessing of Kuber (Good wealth) 36 LAGNA BADHA NIVARAN YANTRA For Obstaele Of marriage 37 LAKSHAMI GANESH YANTRA Blessing of Lakshami & Ganesh 38 MAHA MRUTYUNJAY YANTRA For Good Health 39 MAHA MRUTYUNJAY POOJAN YANTRA Blessing of Shiva 40 MANGAL YANTRA ( TRIKON 21 BEEJ MANTRA) For Fullfill your all Ambition 41 MANO VANCHHIT KANYA PRAPTI YANTRA For Marriage with choice able Girl 42 NAVDURGA YANTRA Blessing of Durga
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    124 नलम्फय 2012 YANTRA LIST EFFECTS 43 NAVGRAHA SHANTI YANTRA For good effect of 9 Planets 44 NAVGRAHA YUKTA BISHA YANTRA For good effect of 9 Planets 45  SURYA YANTRA Good effect of Sun 46  CHANDRA YANTRA Good effect of Moon 47  MANGAL YANTRA Good effect of Mars 48  BUDHA YANTRA Good effect of Mercury 49  GURU YANTRA (BRUHASPATI YANTRA) Good effect of Jyupiter 50  SUKRA YANTRA Good effect of Venus 51  SHANI YANTRA (COPER & STEEL) Good effect of Saturn 52  RAHU YANTRA Good effect of Rahu 53  KETU YANTRA Good effect of Ketu 54 PITRU DOSH NIVARAN YANTRA For Ancestor Fault Ending 55 PRASAW KASHT NIVARAN YANTRA For Pregnancy Pain Ending 56 RAJ RAJESHWARI VANCHA KALPLATA YANTRA For Benefits of State & Central Gov 57 RAM YANTRA Blessing of Ram 58 RIDDHI SHIDDHI DATA YANTRA Blessing of Riddhi-Siddhi 59 ROG-KASHT DARIDRATA NASHAK YANTRA For Disease- Pain- Poverty Ending 60 SANKAT MOCHAN YANTRA For Trouble Ending 61 SANTAN GOPAL YANTRA Blessing Lorg Krishana For child acquisition 62 SANTAN PRAPTI YANTRA For child acquisition 63 SARASWATI YANTRA Blessing of Sawaswati (For Study & Education) 64 SHIV YANTRA Blessing of Shiv Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & 65 SHREE YANTRA (SAMPURNA BEEJ MANTRA) Peace 66 SHREE YANTRA SHREE SUKTA YANTRA Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth 67 SWAPNA BHAY NIVARAN YANTRA For Bad Dreams Ending 68 VAHAN DURGHATNA NASHAK YANTRA For Vehicle Accident Ending VAIBHAV LAKSHMI YANTRA (MAHA SHIDDHI DAYAK SHREE Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & All 69 MAHALAKSHAMI YANTRA) Successes 70 VASTU YANTRA For Bulding Defect Ending 71 VIDHYA YASH VIBHUTI RAJ SAMMAN PRAD BISHA YANTRA For Education- Fame- state Award Winning 72 VISHNU BISHA YANTRA Blessing of Lord Vishnu (Narayan) 73 VASI KARAN YANTRA Attraction For office Purpose 74  MOHINI VASI KARAN YANTRA Attraction For Female 75  PATI VASI KARAN YANTRA Attraction For Husband 76  PATNI VASI KARAN YANTRA Attraction For Wife 77  VIVAH VASHI KARAN YANTRA Attraction For Marriage Purpose Yantra Available @:- Rs- 255, 370, 460, 550, 640, 730, 820, 910, 1250, 1850, 2300, 2800 and Above….. GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 09338213418, 09238328785 Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- chintan_n_joshi@yahoo.co.in, gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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    125 नलम्फय 2012 GURUTVA KARYALAY NAME OF GEM STONE GENERAL MEDIUM FINE FINE SUPER FINE SPECIAL Emerald (ऩन्ना) 200.00 500.00 1200.00 1900.00 2800.00 & above Yellow Sapphire (ऩुखयाज) 550.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above Blue Sapphire (नीरभ) 550.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above White Sapphire (वफ़द ऩुखयाज) े 550.00 1200.00 1900.00 2800.00 4600.00 & above Bangkok Black Blue(फंकोक नीरभ) 100.00 150.00 200.00 500.00 1000.00 & above Ruby (भास्णक) 100.00 190.00 370.00 730.00 1900.00 & above Ruby Berma (फभाल भास्णक) 5500.00 6400.00 8200.00 10000.00 21000.00 & above Speenal (नयभ भास्णक/रारिी) 300.00 600.00 1200.00 2100.00 3200.00 & above Pearl (भोप्तत) 30.00 60.00 90.00 120.00 280.00 & above Red Coral (4 यप्तत तक) (रार भूॊगा) 75.00 90.00 12.00 180.00 280.00 & above Red Coral (4 यप्तत वे उऩय)( रार भूॊगा) 120.00 150.00 190.00 280.00 550.00 & above White Coral (वफ़द भूॊगा) े 20.00 28.00 42.00 51.00 90.00 & above Cat’s Eye (रशवुप्तनमा) 25.00 45.00 90.00 120.00 190.00 & above Cat’s Eye Orissa (उटिवा रशवुप्तनमा) 460.00 640.00 1050.00 2800.00 5500.00 & above Gomed (गोभेद) 15.00 27.00 60.00 90.00 120.00 & above Gomed CLN (प्तवरोनी गोभेद) 300.00 410.00 640.00 1800.00 2800.00 & above Zarakan (जयकन) 350.00 450.00 550.00 640.00 910.00 & above Aquamarine (फेरुज) 210.00 320.00 410.00 550.00 730.00 & above Lolite (नीरी) 50.00 120.00 230.00 390.00 500.00 & above Turquoise (टफ़योजा) 15.00 30.00 45.00 60.00 90.00 & above Golden Topaz (वुनशरा) 15.00 30.00 45.00 60.00 90.00 & above Real Topaz (उटिवा ऩुखयाज/िोऩज) 60.00 120.00 280.00 460.00 640.00 & above Blue Topaz (नीरा िोऩज) 60.00 90.00 120.00 280.00 460.00 & above White Topaz (वफ़द िोऩज) े 60.00 90.00 120.00 240.00 410.00& above Amethyst (किे रा) 20.00 30.00 45.00 60.00 120.00 & above Opal (उऩर) 30.00 45.00 90.00 120.00 190.00 & above Garnet (गायनेि) 30.00 45.00 90.00 120.00 190.00 & above Tourmaline (तुभरीन) ल 120.00 140.00 190.00 300.00 730.00 & above Star Ruby (वुमकान्त भस्ण) ल 45.00 75.00 90.00 120.00 190.00 & above Black Star (कारा स्िाय) 15.00 30.00 45.00 60.00 100.00 & above Green Onyx (ओनेक्व) 09.00 12.00 15.00 19.00 25.00 & above Real Onyx (ओनेक्व) 60.00 90.00 120.00 190.00 280.00 & above Lapis (राजललत) 15.00 25.00 30.00 45.00 55.00 & above Moon Stone (चन्द्रकान्त भस्ण) 12.00 21.00 30.00 45.00 100.00 & above Rock Crystal (स्फ़टिक) 09.00 12.00 15.00 30.00 45.00 & above Kidney Stone (दाना टफ़यॊ गी) 09.00 11.00 15.00 19.00 21.00 & above Tiger Eye (िाइगय स्िोन) 03.00 05.00 10.00 15.00 21.00 & above Jade (भयगच) 12.00 19.00 23.00 27.00 45.00 & above Sun Stone (वन प्तवताया) 12.00 19.00 23.00 27.00 45.00 & above 50.00 100.00 200.00 370.00 460.00 & above Diamond (शीया) (Per Cent ) (Per Cent ) (PerCent ) (Per Cent) (Per Cent ) (.05 to .20 Cent ) Note : Bangkok (Black) Blue for Shani, not good in looking but mor effective, Blue Topaz not Sapphire This Color of Sky Blue, For Venus
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    126 नलम्फय 2012 BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION We are mostly engaged in spreading the ancient knowledge of Astrology, Numerology, Vastu and Spiritual Science in the modern context, across the world. Our research and experiments on the basic principals of various ancient sciences for the use of common man. exhaustive guide lines exhibited in the original Sanskrit texts BOOK APPOINTMENT PHONE/ CHAT CONSULTATION Please book an appointment with Our expert Astrologers for an internet chart . We would require your birth details and basic area of questions so that our expert can be ready and give you rapid replied. You can indicate the area of question in the special comments box. In case you want more than one person reading, then please mention in the special comment box . We shall confirm before we set the appointment. Please choose from : PHONE/ CHAT CONSULTATION Consultation 30 Min.: RS. 1250/-* Consultation 45 Min.: RS. 1900/-* Consultation 60 Min.: RS. 2500/-* *While booking the appointment in Addvance How Does it work Phone/Chat Consultation This is a unique service of GURUATVA KARYALAY where we offer you the option of having a personalized discussion with our expert astrologers. There is no limit on the number of question although time is of consideration. Once you request for the consultation, with a suggestion as to your convenient time we get back with a confirmation whether the time is available for consultation or not.  We send you a Phone Number at the designated time of the appointment  We send you a Chat URL / ID to visit at the designated time of the appointment  You would need to refer your Booking number before the chat is initiated  Please remember it takes about 1-2 minutes before the chat process is initiated.  Once the chat is initiated you can commence asking your questions and clarifications  We recommend 25 minutes when you need to consult for one persona Only and usually the time is sufficient for 3-5 questions depending on the timing questions that are put.  For more than these questions or one birth charts we would recommend 60/45 minutes Phone/chat is recommended  Our expert is assisted by our technician and so chatting & typing is not a bottle neck In special cases we don't have the time available about your Specific Questions We will taken some time for properly Analysis your birth chart and we get back with an alternate or ask you for an alternate. All the time mentioned is Indian Standard Time which is + 5.30 hr ahead of G.M.T. Many clients prefer the chat so that many questions that come up during a personal discussion can be answered right away. BOOKING FOR PHONE/ CHAT CONSULTATION PLEASE CONTECT GURUTVA KARYALAY Call Us:- 91+9338213418, 91+9238328785. Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com, chintan_n_joshi@yahoo.co.in,
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    127 नलम्फय 2012 वूचना  ऩत्रत्रका भं प्रकाप्तळत वबी रेख ऩत्रत्रका क अप्तधकायं क वाथ शी आयस्षत शं । े े  रेख प्रकाप्तळत शोना का भतरफ मश कतई नशीॊ टक कामालरम मा वॊऩादक बी इन त्रलचायो वे वशभत शं।  नास्स्तक/ अत्रलद्वावु व्मत्रि भात्र ऩठन वाभग्री वभझ वकते शं ।  ऩत्रत्रका भं प्रकाप्तळत टकवी बी नाभ, स्थान मा घिना का उल्रेख मशाॊ टकवी बी व्मत्रि त्रलळेऴ मा टकवी बी स्थान मा घिना वे कोई वॊफॊध नशीॊ शं ।  प्रकाप्तळत रेख ज्मोप्ततऴ, अॊक ज्मोप्ततऴ, लास्तु, भॊत्र, मॊत्र, तॊत्र, आध्मास्त्भक सान ऩय आधारयत शोने क कायण े मटद टकवी क रेख, टकवी बी नाभ, स्थान मा घिना का टकवी क लास्तत्रलक जीलन वे भेर शोता शं तो मश भात्र े े एक वॊमोग शं ।  प्रकाप्तळत वबी रेख बायप्ततम आध्मास्त्भक ळास्त्रं वे प्रेरयत शोकय प्तरमे जाते शं । इव कायण इन त्रलऴमो टक वत्मता अथला प्राभास्णकता ऩय टकवी बी प्रकाय टक स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक टक नशीॊ शं ।  अन्म रेखको द्राया प्रदान टकमे गमे रेख/प्रमोग टक प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल टक स्जन्भेदायी कामालरम मा वॊऩादक टक नशीॊ शं । औय नाशीॊ रेखक क ऩते टठकाने क फाये भं जानकायी दे ने शे तु कामालरम मा वॊऩादक टकवी बी े े प्रकाय वे फाध्म शं ।  ज्मोप्ततऴ, अॊक ज्मोप्ततऴ, लास्तु, भॊत्र, मॊत्र, तॊत्र, आध्मास्त्भक सान ऩय आधारयत रेखो भं ऩाठक का अऩना त्रलद्वाव शोना आलश्मक शं । टकवी बी व्मत्रि त्रलळेऴ को टकवी बी प्रकाय वे इन त्रलऴमो भं त्रलद्वाव कयने ना कयने का अॊप्ततभ प्तनणलम स्लमॊ का शोगा।  ऩाठक द्राया टकवी बी प्रकाय टक आऩत्ती स्लीकामल नशीॊ शोगी।  शभाये द्राया ऩोस्ि टकमे गमे वबी रेख शभाये लऴो क अनुबल एलॊ अनुळॊधान क आधाय ऩय प्तरखे शोते शं । शभ टकवी बी व्मत्रि े े त्रलळेऴ द्राया प्रमोग टकमे जाने लारे भॊत्र- मॊत्र मा अन्म प्रमोग मा उऩामोकी स्जन्भेदायी नटशॊ रेते शं ।  मश स्जन्भेदायी भॊत्र-मॊत्र मा अन्म प्रमोग मा उऩामोको कयने लारे व्मत्रि टक स्लमॊ टक शोगी। क्मोटक इन त्रलऴमो भं नैप्ततक भानदॊ िं, वाभास्जक, कानूनी प्तनमभं क स्खराप कोई व्मत्रि मटद नीजी स्लाथल ऩूप्ततल शे तु प्रमोग कताल शं अथला प्रमोग े क कयने भे त्रुटि शोने ऩय प्रप्ततकर ऩरयणाभ वॊबल शं । े ू  शभाये द्राया ऩोस्ि टकमे गमे वबी भॊत्र-मॊत्र मा उऩाम शभने वैकिोफाय स्लमॊ ऩय एलॊ अन्म शभाये फॊधगण ऩय प्रमोग टकमे शं ु स्जस्वे शभे शय प्रमोग मा भॊत्र-मॊत्र मा उऩामो द्राया प्तनस्द्ळत वपरता प्राद्ऱ शुई शं ।  ऩाठकं टक भाॊग ऩय एक टश रेखका ऩून् प्रकाळन कयने का अप्तधकाय यखता शं । ऩाठकं को एक रेख क ऩून् े प्रकाळन वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं ।  अप्तधक जानकायी शे तु आऩ कामालरम भं वॊऩक कय वकते शं । ल (वबी त्रललादो कप्तरमे कलर बुलनेद्वय न्मामारम शी भान्म शोगा।) े े
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    128 नलम्फय 2012 FREE E CIRCULAR गुरुत्ल ज्मोप्ततऴ ऩत्रत्रका नलम्फय -2012 वॊऩादक प्तचॊतन जोळी वॊऩकल गुरुत्ल ज्मोप्ततऴ त्रलबाग गुरुत्ल कामालरम 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA पोन 91+9338213418, 91+9238328785 ईभेर gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, लेफ www.gurutvakaryalay.com http://gk.yolasite.com/ http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    129 नलम्फय 2012 शभाया उद्दे श्म त्रप्रम आस्त्भम फॊध/ फटशन ु जम गुरुदे ल जशाॉ आधुप्तनक त्रलसान वभाद्ऱ शो जाता शं । लशाॊ आध्मास्त्भक सान प्रायॊ ब शो जाता शं , बौप्ततकता का आलयण ओढे व्मत्रि जीलन भं शताळा औय प्तनयाळा भं फॊध जाता शं , औय उवे अऩने जीलन भं गप्ततळीर शोने क प्तरए भागल प्राद्ऱ नशीॊ शो ऩाता क्मोटक े बालनाए टश बलवागय शं , स्जवभे भनुष्म की वपरता औय अवपरता प्तनटशत शं । उवे ऩाने औय वभजने का वाथलक प्रमाव शी श्रेद्षकय वपरता शं । वपरता को प्राद्ऱ कयना आऩ का बाग्म शी नशीॊ अप्तधकाय शं । ईवी प्तरमे शभायी ळुब काभना वदै ल आऩ क वाथ शं । आऩ े अऩने कामल-उद्दे श्म एलॊ अनुकरता शे तु मॊत्र, ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न औय दरब भॊत्र ळत्रि वे ऩूणल प्राण-प्रप्ततत्रद्षत प्तचज लस्तु का शभंळा ू ु ल प्रमोग कये जो १००% परदामक शो। ईवी प्तरमे शभाया उद्दे श्म मशीॊ शे की ळास्त्रोि त्रलप्तध-त्रलधान वे त्रलप्तळद्श तेजस्ली भॊत्रो द्राया प्तवद्ध प्राण-प्रप्ततत्रद्षत ऩूणल चैतन्म मुि वबी प्रकाय क मन्त्र- कलच एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय तक ऩशोचाने का शं । े े वूमल की टकयणे उव घय भं प्रलेळ कयाऩाती शं । जीव घय क स्खिकी दयलाजे खुरे शं। े GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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    130 नलम्फय 2012 NOV 2012