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गुरुत्ल कामाारम द्राया प्रस्तुत भासवक ई-ऩत्रिका                       अक्टू फय- 2011




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                       गुरुत्ल ज्मोसतऴ ऩत्रिका अक्टू फय 2011
वॊऩादक                 सिॊतन जोळी
                       गुरुत्ल ज्मोसतऴ त्रलबाग

वॊऩका                  गुरुत्ल कामाारम
                       92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA,
                       BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA
पोन                    91+9338213418, 91+9238328785,
                       gurutva.karyalay@gmail.com,
ईभेर                   gurutva_karyalay@yahoo.in,

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लेफ                    http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/

ऩत्रिका प्रस्तुसत      सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी
पोटो ग्राफपक्व         सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक आटा
शभाये भुख्म वशमोगी स्लस्स्तक.ऎन.जोळी (स्लस्स्तक वोफ्टे क इस्डडमा सर)




            ई- जडभ ऩत्रिका                        E HOROSCOPE
      अत्माधुसनक ज्मोसतऴ ऩद्धसत द्राया
                                                 Create By Advanced Astrology
         उत्कृ द्श बत्रलष्मलाणी क वाथ
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                                GURUTVA KARYALAY
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अनुक्रभ
                                नलयाि त्रलळेऴ                                                              दीऩालरी
नलयाि भं भाॊ दगाा क नलरुऩं फक उऩावना कल्माणकायी शं
              ु    े                                               6         धन तेयव ळुब भुशूता (24 अक्तफय, 2011)
                                                                                                       ू                                        47
भाॊ दगाा की उऩावना क्मं की जाती शं ?
     ु                                                             7         दीऩालरी ऩूजन भुशूता (26-अक्तफय-2011)
                                                                                                        ू                                       48
ळायदीम नलयाि व्रत वे वुख वौबाग्म की प्रासद्ऱ शोती शं               8         रक्ष्भी प्रासद्ऱ शे तु कयं यासळ भॊि का जऩ                          53
कवे कयं नलयाि व्रत?
 ै                                                                 9         रक्ष्भी प्रासद्ऱ क वयर उऩाम
                                                                                               े                                                54
दे ली आयाधना वे असबद्श कामो की सवत्रद्ध शे तु                      11        रक्ष्भी भॊि                                                        56
आस्द्वन नलयात्रि घट स्थाऩना भुशूता, त्रलसध-त्रलधान                 12        दीऩ जराने का भशत्ल क्मा शं ?                                       63
वयर त्रलसध-त्रलधान वे ळायदीम नलयाि व्रत उऩावना                     13        धनिमोदळी ऩय मभ-दीऩदान अकारभृत्मु को दय कयता शं
                                                                                                                  ू                             66
नलयाि स्ऩेळर घट स्थाऩना त्रलसध                                     14        धनिमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं फकमा जाता शं ?                           68
नलाणा भॊि वे शोती शं नलग्रश ळाॊसत                                  18        दीऩालरी क फदन कवे कयं फशीखाता तुरा ऩूजन?
                                                                                      े     ै                                                   69
दगााद्शाषय भडि वाधना
 ु                                                                 22        दीऩालरी का भशत्ल औय रक्ष्भी ऩूजन त्रलसध                            70
कभायी ऩूजन वे वकर भनोयथ सवद्ध शोते शं ।
 ु                                                                 23        श्री धनलॊतरय व्रत कथा                                              71
भाता क 52 ळत्रक्त ऩीठ
      े                                                            26        वद्ऱ श्री का िभत्काय                                               74
नलाणा भडि वाधना                                                    20        स्पफटक श्रीमॊि का ऩूजन                                             75

                                                                  भॊि एलॊ स्तोि
दगाा िारीवा
 ु                                 32   बलाडमद्शकभ,्                    36   दगााद्शकभ,्
                                                                              ु                               35    श्री वूक्त                   82
श्रीकृ ष्ण कृ त दे ली स्तुसत,      33   षभा-प्राथाना,                   36   वला ऐद्वमा प्रद-रक्ष्भी-कलि      77    धनरक्ष्भी स्तोि              82
ऋग्लेदोक्त दे ली वूक्तभ,्          33   दगााद्शोत्तय ळतनाभ स्तोिभ,्
                                         ु                              37   भशारक्ष्भी कलि                   78    अद्शरक्ष्भी स्तोि            83
वप्तश्र्लरोकी दगाा,
               ु                   34   त्रलद्वॊबयी स्तुसत,             38   भशारक्ष्भी स्तुसत                79    दे लकृ त रक्ष्भी स्तोिभ ्    83
दगाा आयती,
 ु                                 34   भफशऴावुयभफदा सनस्तोिभ,्         39   श्री कनकधाया स्तोि               80
सवद्धकस्जकास्तोिभ,्
      ुॊ                           35   गुद्ऱ वद्ऱळती,                  41   श्री रक्ष्भी िारीवा              81

                                                                  शभाये उत्ऩाद
दगाा फीवा मॊि
 ु                                 6    ळादी वॊफॊसधत वभस्मा             37   अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलि          60    कनकधाया मॊि                  80

भॊि सवद्ध दै ली मॊि वूसि           10 भॊि सवद्ध गणेळ मॊि                49   याळी यत्न एलॊ उऩयत्न             60    यासळ यत्न                    88

भॊिसवद्ध रक्ष्भी मॊिवूसि           10 भॊगर मॊि वे ऋण भुत्रक्त           50   श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि/ कलि         61    भॊि सवद्ध वाभग्री            94

गणेळ रक्ष्भी मॊि                   13 भॊि सवद्ध दरब वाभग्री
                                                 ु ा                    55   याभ यषा मॊि                      62    वला योगनाळक मॊि/             101

बाग्म रक्ष्भी फदब्फी               17 वला कामा सवत्रद्ध कलि             57   भॊि सवद्ध रूद्राष                65    भॊि सवद्ध कलि                103

द्रादळ भशा मॊि                     21 जैन धभाके त्रलसळद्श मॊिो वूिी 58       भॊिसवद्ध स्पफटक श्री मॊि         67    YANTRA                       104

घॊटाकणा भशालीय वला सवत्रद्ध भशामॊि                                      59   रक्ष्भी मॊि                      74    GEMS STONE                   106

                                                              स्थामी औय अडम रेख
वॊऩादकीम                                                           4         अक्टू फय-2011 भासवक व्रत-ऩला-त्मौशाय                               91
ऩसत-ऩत्नी भं करश सनलायण शे तु                                      22        अक्टू फय 2011 -त्रलळेऴ मोग                                         97
ळयद ऩूस्णाभा (11-अक्टू फय-2011)                                    44        दै सनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान तासरका                                 97
कोजागयी ऩूस्णाभा (11-अक्टू फय-2011)                                45        फदन-यात क िौघफडमे
                                                                                      े                                                         98
दलाा ऩूजनभं यखे वालधासनमाॊ
 ु                                                                 45        फदन-यात फक शोया - वूमोदम वे वूमाास्त तक                            99
कयला िौथ व्रत (15-अक्टू फय-2011)                                   46        ग्रश िरन अक्टू फय -2011                                            100
नमे कऩडे औय ज्मोसतऴ                                                50        वूिना                                                              108
भासवक यासळ पर                                                      84        शभाया उद्दे श्म                                                    110
अक्टू फय 2011 भासवक ऩॊिाॊग                                         89
वॊऩादकीम
त्रप्रम आस्त्भम

         फॊध/ फफशन
            ु

                       जम गुरुदे ल

फशडद ु ऩयॊ ऩया भं दे ली को त्रलसबडन रूऩं वे जाना औय ऩूजा जाता शं ।

                                  ॐ जमॊती भॊगरा कारी बद्रकारी कऩासरनी।
                                 दगाा षभा सळला धािी स्लाशा स्लधा नभोऽस्तुते॥
                                  ु

    बालाथा: जमॊती, भॊगरा, कारी, बद्रकारी, कऩासरनी, दगाा, षभा, सळला धािी औय स्लधा क नाभं वे प्रसवद्ध
                                                    ु                             े
                                     जगदम्फा दे ली। आऩको भेया नभस्काय शं ।

                                        नभो दे व्मै भशादे व्मै सळलामै वततॊ नभ:।
                                     नभ: प्रकृ त्मै बद्रामै सनमता: प्रणता: स्भताभ ्॥
अथाात: दे ली को नभस्काय शं , भशादे ली को नभस्काय शं । भशादे ली सळला को वलादा नभस्काय शं । प्रकृ सत एलॊ बद्रा को भेया
प्रणाभ शं । शभ रोग सनमभऩूलक दे ली जगदम्फा को नभस्काय कयते शं ।
                          ा


       ळास्त्रोक्त लणान शं की दे ली दगाा क उक्त भॊि का स्भयण कय प्राथाना कयने भाि वे दे ली प्रवडन शोकय अऩने
                                     ु    े
बक्तं की इच्छा ऩूणा कयती शं । वभस्त दे ल गण स्जनकी स्तुसत प्राथना कयते शं । भाॉ दगाा अऩने बक्तो की यषा कय उन
                                                                                 ु
ऩय कृ ऩा द्रद्शी लऴााती शं औय उवको उडनती क सळखय ऩय जाने का भागा प्रवस्त कयती शं । इव सरमे ईद्वय भं
                                          े
श्रद्धा त्रलद्वाय यखने लारे वबी भनुष्म को दे ली की ळयण भं जाकय दे ली वे सनभार रृदम वे प्राथाना कयनी िाफशमे।

भाॊ जगदम्फा की कृ ऩा प्रासद्ऱ शे तु नलयािी त्रलळेऴ राब प्रदान कयने लारी शं । क्मोफक नलयाि को आद्य् ळत्रक्त की
उऩावना का भशाऩला भाना गमा शं । दे ली बागलत क आठलं स्कध भं दे ली उऩावना का त्रलस्ताय वे लणान फकमा गमा शै ।
                                            े        ॊ

भाकण्डे मऩुयाण क अॊतगात दे ली भाशात्म्म भं उल्रेख शं की स्लमॊ भाॊ जगदम्फा का लिन शं ... की
   ा            े

                                        ळयत्कारे भशाऩूजा फक्रमतेमा िलात्रऴकी।
                                                                          ा
                                     तस्माॊभभैतडभाशात्म्मॊश्रत्लाबत्रक्तवभस्डलत:॥
                                                             ु
                                       वलााफाधात्रलसनभुक्तोधनधाडमवुतास्डलत:।
                                                       ा
                                        भनुष्मोभत्प्रवादे नबत्रलष्मसतन वॊळम:॥
अथाात् ळयद ऋतु क नलयािभं जफ भेयी लात्रऴाक भशाऩूजा शोती शं , उव कार भं जो भनुष्म भेये भाशात्म्म
                े
(दगाावद्ऱळती) को बत्रक्तऩूलकवुनेगा, लश भनुष्म भेये प्रवाद वे वफ फाधाओॊ वे भुक्त शोकय धन-धाडम एलॊ ऩुि वे वम्ऩडन
  ु                        ा
शो जामेगा।
भाॊ दगाा की कृ ऩा प्रासद्ऱ शे तु त्रलसबडन ळास्त्र एलॊ ग्रॊथो भं त्रलसबडन भॊिं का उल्रेख फकमा गमा शं । ऩाठको क
     ु                                                                                                       े
भागादळान एलॊ जानकायी शे तु ऩत्रिका क इव अॊक भं कछ त्रलळेऴ प्राबाली भॊिो का वॊकरन कयने का प्रमाव
                                    े           ु
फकमा गमा शं । इव अॊक भं करळ स्थाऩना वे वॊफॊसधत लणान बी फकमा गमा शं । स्जववे इच्छक फॊधु/फशन
                                                                                ु
त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय अऩने भनोयथो को सवद्ध कयने भं वभथा शं।




       दीऩालरी को फशडद ू धभा भं ऩॊिभशा ऩला क रुऩ भं भनामा जाता शं । ऩॊिभशा ऩला को वबी जगश ऩय
                                            े
त्रलळेऴ प्रकाय की ऩूजाएॊ की जाती शं । उव भं त्रलळेऴ रुऩ वे भाॊ रक्ष्भी की ऩूजा की जाती शं । क्मोकी, ऩुयातन
कार वे शी धन प्रासद्ऱ की इच्छा प्राम वबी व्मत्रक्तमं भं यशी शं ।

       कछ रोगो को धन, वॊऩत्रत्त एलॊ बौसतक वुख-वाधन अऩनी मोग्मता औय भेशनत क अनुळाय प्राद्ऱ शो
        ु                                                                 े
जाता शं । रेफकन फशोत वे रोग एवे शोते शं स्जडशं कफठन ऩरयश्रभ कयने औय सळस्षत शोने क उऩयाॊत बी त्रलळेऴ
                                                                                 े
राब नशीॊ सभरता मा अऩने ऩरयश्रभ का उसित भूल्म बी नशीॊ प्राद्ऱ शो ऩाता शं ।

       स्जन रोगो क ऩाव ऩमााद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त शोती शं उडशं इच्छा शोती शं उनकी धन-वॊऩत्रत्त फदन दोगुनी यात
                  े
िौगुनी फढती यशं ओय स्जक ऩाव ऩमााद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त नशीॊ शं उवकी इच्छा शोती शं , की उवे कभ वे कभ इतनी
                       े
धन वॊऩत्रत्त प्राद्ऱ शो जामे की उवका जीलन वुखभम शो।

       फशडद ु ऩॊिाॊग क अनुळाय कासताक की अभालव को दीऩालरी भनाई जाती शं । इव फदन दे ली रक्ष्भी, गणेळ,
                      े
वयस्लती, कफेय की ऩूजन कयने का त्रलधान शै ।
          ु                                     क्मोफक दे ली रक्ष्भी की उत्ऩत्ती दीऩालरी क फदन भानी जाती शं
                                                                                          े
औय ळास्त्रोक्त लणा शं धन की दे ली रक्ष्भी शं औय धन क दे लता कफेय शं , स्जनक प्रवडन शोने वे भनुष्म को
                                                    े        ु             े
धन, वभृत्रद्ध एलॊ ऐद्वमा प्राद्ऱ शोता शं । भाॊ रक्ष्भी िॊिर शं । अथाात रक्ष्भी जी लश एक जगश फटकती नशीॊ शै ।
फकव प्रकाय रक्ष्भी का आगभन आऩक घय भं शो औय स्जदॊ गी द्ख, दरयद्र, कद्शो वे छट कय खुसळमं वे बय
                              े                      ु                     ु
जाए उववे जुडे यशस्मो को बायतीम ऋत्रऴ भुसनमं ने खोज सनकारा शं । मश बी एक प्रभुख कायण शं की
दीऩालरी का ऩला भनामा जाता शं औय रक्ष्भीजी का ऩूजन अिान फकमा जाता शं ।

       क्मोफक लेद फशॊ दओॊ धभा क प्रािीनतभ धासभाक ग्रॊथ शं । लेदो को शभायी प्रािीन बायतीम वॊस्कृ सत क
                       ु       े                                                                    े
भूल्मलान बॊडाय भाने जाते शं । स्जवे शभाये त्रलद्रान ऋत्रऴ-भुसनमं ने लऴो तक सिॊतन-भनन अध्ममन कय इव
वृत्रद्श क अद्भद यशस्मं की जानकायी इव लेद क रुऩ भं वॊग्रफशत की शं । स्जववे भनुष्म वभझ कय अऩने जीलन
          े    ु                           े
की शय वभस्माओॊ का शर सनकार वक।
                             े




                                                                                               सिॊतन जोळी
6                                               अक्टू फय 2011




                  नलयाि भं भाॊ दगाा क नलरुऩं फक उऩावना कल्माणकायी शं
                                ु    े

                                                                                                                सिॊतन जोळी
         भाॊ दगाा क नलरुऩं की उऩावना सनम्न भॊिं क द्राया की
              ु    े                             े                5. स्कडदभाता

जाती शै . प्रथभ फदन ळैरऩुिी की एलॊ क्रभळ् भाॊ दगाा क नलरुऩं
                                               ु    े             सवॊशावनगता सनत्मॊ ऩद्भासश्रतकयद्रमा ।
की उऩावना की जाती शै ।                                            ळुबदास्तु वदा दे ली स्कडदभाता मळस्स्लनी ॥
                                                                  6. कात्मामनी
१. ळैरऩुिी २. ब्रह्मिारयणी ३. िडद्रघण्टा ४. कष्भाण्डा ५.
                                             ू
                                                                  िडद्रशावोज्लरकया ळादा रलयलाशना ।
                                                                                        ू
स्कडदभाता ६. कात्मामनी ७. कारयात्रि ८. भशागौयी ९.
                                                                  कात्मामनी ळुबॊ दद्याद्दे ली दानलघासतनी
सवत्रद्धदािी
                                                                  7. कारयात्रि
1.ळैरऩुिी
                                                                  एकलेणी जऩाकणाऩूया नग्ना खयास्स्थता ।
लडदे लास्छछतराबाम िडद्राधाकृतळेखयाभ ् ।
                                                                  रम्फोद्षी कस्णाकाकणॉ तैराभ्मक्तळयीरयणी ॥
लृऴारुढाॊ ळूरधयाॊ ळैरऩुिीॊ मळस्स्लनीभ ् ॥
                                                                  लाभऩादोल्रवल्रोशरताकण्टकबूऴणा ।
2. ब्रह्मिारयणी
                                                                  लधानभूधध्लजा कृ ष्णा कारयात्रिबामङ्कयी ॥
                                                                         ा
दधाना कयऩद्भाभ्माभषभाराकभण्डरू ।
                                                                  8. भशागौयी
दे ली प्रवीदतु भसम ब्रह्मिारयण्मनुत्तभा ॥
                                                                  द्वेते लृऴे वभारुढा द्वेताम्फयधया ळुसि् ।
3. िडद्रघण्टा
                                                                  भशागौयी ळुबॊ दद्याडभशादे लप्रभोददा ॥
त्रऩण्डजप्रलयारुढा िण्डकोऩास्त्रकमुता ।
                                 ै ा
                                                                  9. सवत्रद्धदािी
प्रवादॊ तनुते भह्याॊ िडद्रघण्टे सत त्रलश्रुता ॥
                                                                  सवद्धगडधलामषाद्यैयवुयैयभयै यत्रऩ ।
4. कष्भाण्डा
    ू
                                                                  वेव्मभाना वदा बूमात ् सवत्रद्धदा सवत्रद्धदासमनी ॥
वुयावम्ऩूणकरळॊ रुसधयाप्रुतभेल ि ।
          ा
दधाना शस्तऩद्भाभ्माॊ कष्भाण्डा ळुबदास्तु भे ॥
                      ू


                                                    दगाा फीवा मॊि
                                                     ु
  ळास्त्रोक्त भत क अनुळाय दगाा फीवा मॊि दबााग्म को दय कय व्मत्रक्त क वोमे शुले बाग्म को जगाने लारा भाना
                  े        ु             ु          ू               े
  गमा शं । दगाा फीवा मॊि द्राया व्मत्रक्त को जीलन भं धन वे वॊफॊसधत वॊस्माओॊ भं राब प्राद्ऱ शोता शं । जो व्मत्रक्त
            ु
  आसथाक वभस्मावे ऩये ळान शं, लश व्मत्रक्त मफद नलयािं भं प्राण प्रसतत्रद्षत फकमा गमा दगाा फीवा मॊि को स्थासद्ऱ
                                                                                     ु
  कय रेता शं , तो उवकी धन, योजगाय एलॊ व्मलवाम वे वॊफॊधी वबी वभस्मं का ळीघ्र शी अॊत शोने रगता शं । नलयाि
  क फदनो भं प्राण प्रसतत्रद्षत दगाा फीवा मॊि को अऩने घय-दकान-ओफपव-पक्टयी भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ
   े                            ु                        ु         ै
  राब प्राद्ऱ शोता शं , व्मत्रक्त ळीघ्र शी अऩने व्माऩाय भं लृत्रद्ध एलॊ अऩनी आसथाक स्स्थती भं वुधाय शोता दे खंगे।
  वॊऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतडम दगाा फीवा मॊि को ळुब भुशूता भं अऩने घय-दकान-ओफपव भं स्थात्रऩत
                                            ु                                      ु
  कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं ।                                  भूल्म: Rs.550 वे Rs.8200 तक
7                                            अक्टू फय 2011




                                    भाॊ दगाा की उऩावना क्मं की जाती शं ?
                                         ु
                                                                                                                    सिॊतन जोळी
              नभो दे व्मै भशादे व्मै सळलामै वततॊ नभ:।                   इव भॊि क जऩ वे भाॉ फक ळयणागती प्राद्ऱ शोती शं ।
                                                                                े
           नभ: प्रकृ त्मै बद्रामै सनमता: प्रणता: स्भताभ ्॥              स्जस्वे भनुष्म क जडभ-जडभ क ऩाऩं का नाळ शोता शै ।
                                                                                        े         े
अथाात: दे ली को नभस्काय शं , भशादे ली को नभस्काय शं ।                   भाॊ जननी वृत्रद्श फक आफद, अॊत औय भध्म शं ।
भशादे ली सळला को वलादा नभस्काय शं । प्रकृ सत एलॊ बद्रा को भेया
                                                                        दे ली वे प्राथाना कयं –
प्रणाभ शं । शभ रोग सनमभऩूलक दे ली जगदम्फा को नभस्काय
                          ा
                                                                                       ळयणागत-दीनाता-ऩरयिाण-ऩयामणे
कयते शं ।
                                                                                    वलास्मासतंशये दे त्रल नायामस्ण नभोऽस्तुते॥
उऩयोक्त भॊि वे दे ली दगाा का स्भयण कय प्राथाना कयने भाि वे
                      ु
                                                                        अथाात: ळयण भं आए शुए दीनं एलॊ ऩीस्िडतं की यषा भं वॊरग्न
दे ली प्रवडन शोकय अऩने बक्तं की इच्छा ऩूणा कयती शं । वभस्त
                                                                        यशने लारी तथा वफ फक ऩीड़ा दय कयने लारी नायामणी दे ली
                                                                                                   ू
दे ल गण स्जनकी स्तुसत प्राथना कयते शं । भाॉ दगाा अऩने बक्तो
                                             ु
                                                                        आऩको नभस्काय शै ।
की यषा कय उन ऩय कृ ऩा द्रद्शी लऴााती शं औय उवको उडनती
क सळखय ऩय जाने का भागा प्रवस्त कयती शं । इव सरमे
 े                                                                         योगानळेऴानऩशॊ सव तुद्शा रूद्शा तु काभान वकरानबीद्शान ्।
ईद्वय भं श्रद्धा त्रलद्वाय यखने लारे वबी भनुष्म को दे ली की             त्लाभासश्रतानाॊ न त्रलऩडनयाणाॊ त्लाभासश्रता शाश्रमताॊ प्रमास्डत।
ळयण भं जाकय दे ली वे सनभार रृदम वे प्राथाना कयनी िाफशमे।                अथाात् दे ली आऩ प्रवडन शोने ऩय वफ योगं को नद्श कय दे ती
                                                                        शो औय कत्रऩत शोने ऩय भनोलाॊसछत वबी काभनाओॊ का नाळ
                                                                               ु
       दे ली प्रऩडनासताशये प्रवीद प्रवीद भातजागतोsस्खरस्म।
                                                                        कय दे ती शो। जो रोग तुम्शायी ळयण भं जा िुक शै । उनको
                                                                                                                  े
       ऩवीद त्रलद्वेतरय ऩाफश त्रलद्वॊ त्लभीद्ळयी दे ली ियाियस्म।
                                                                        त्रलऩत्रत्त आती शी नशीॊ। तुम्शायी ळयण भं गए शुए भनुष्म दवयं
                                                                                                                                ू
अथाात: ळयणागत फक ऩीड़ा दय कयने लारी दे ली आऩ शभ ऩय
                        ू
                                                                        को ळयण दे ने लारे शो जाते शं ।
प्रवडन शं। वॊऩूणा जगत भाता प्रवडन शं। त्रलद्वेद्वयी दे ली त्रलद्व
फक यषा कयो। दे ली आऩ फश एक भाि ियािय जगत फक                                          वलाफाधाप्रळभनॊ िेरोक्मस्मास्खरेद्वयी।
असधद्वयी शो।                                                                        एलभेल त्लमा कामाभस्मध्दै रयत्रलनाळनभ ्।
                                                                        अथाात् शे वलेद्वयी आऩ तीनं रोकं फक वभस्त फाधाओॊ को
               वलाभॊगर-भाॊगल्मे सळलेवलााथवासधक ।
                                         ा    े
                                                                        ळाॊत कयो औय शभाये वबी ळिुओॊ का नाळ कयती यशो।
            ळयण्मे िमम्फक गौरय नायामस्ण नभोऽस्तुते॥
                         े
             वृत्रद्शस्स्थसत त्रलनाळानाॊ ळत्रक्तबूते वनातसन।                          ळाॊसतकभास्ण वलाि तथा द:स्लप्रदळाने।
                                                                                                            ु
              गुणाश्रमे गुणभमे नायामस्ण नभोऽस्तुते॥                                ग्रशऩीडावु िोग्रावु भशात्भमॊ ळणुमात्भभ।
अथाात: शे दे ली नायामणी आऩ वफ प्रकाय का भॊगर प्रदान                     अथाात् वलाि ळाॊसत कभा भं, फुये स्लप्न फदखाई दे ने ऩय तथा
कयने लारी भॊगरभमी शो। कल्माण दासमनी सळला शो। वफ                         ग्रश जसनत ऩीड़ा उऩस्स्थत शोने ऩय भाशात्म्म श्रलण कयना
ऩुरूऴाथं को सवद्ध कयने लारी ळयणा गतलत्वरा तीन नेिं                      िाफशए। इववे वफ ऩीड़ाएॉ ळाॊत औय दय शो जाती शं ।
                                                                                                        ू
लारी गौयी शो, आऩको नभस्काय शं । आऩ वृत्रद्श का ऩारन औय                  मफश कायण शं वशस्त्रमुगं वे भाॊ बगलती जगतजननी दगाा
                                                                                                                      ु
वॊशाय कयने लारी ळत्रक्तबूता वनातनी दे ली, आऩ गुणं का                    की उऩावना प्रसत लऴा लवॊत, आस्द्वन एलॊ गुद्ऱ नलयािी भं
आधाय तथा वलागुणभमी शो। नायामणी दे ली तुम्शं नभस्काय                     त्रलळेऴ रुऩ वे कयने का त्रलधान फशडद ु धभा ग्रॊथो भं शं ।
शै ।
                                                                                                    ***
8                                              अक्टू फय 2011




                      ळायदीम नलयाि व्रत वे वुख वौबाग्म की प्रासद्ऱ शोती शं

                                                                                                             सिॊतन जोळी
        नलयाि को ळत्रक्त की उऩावना का भशाऩला भाना गमा           जो व्मत्रक्त दगाावद्ऱळतीक भूर वॊस्कृ त भं ऩाठ कयने भं
                                                                              ु          े
शं । भाकण्डे मऩुयाण क अनुळाय दे ली भाशात्म्म भं स्लमॊ भाॊ
        ा            े                                          अवभथा शं तो उव व्मत्रक्त को वद्ऱद्ऴोकी दगाा को ऩढने वे
                                                                                                        ु
जगदम्फा का लिन शं -।                                            राब प्राद्ऱ शोता शं । क्मोफक वात द्ऴोकं लारे इव स्तोि भं

ळयत्कारे भशाऩूजा फक्रमतेमा िलात्रऴकी।
                                  ा                             श्रीदगाावद्ऱळती का वाय वभामा शुला शं ।
                                                                     ु

तस्माॊभभैतडभाशात्म्मॊश्रत्लाबत्रक्तवभस्डलत:॥
                        ु                                       जो व्मत्रक्त वद्ऱद्ऴोकी दगाा का बी न कय वक लश कलर
                                                                                         ु                े    े
                                                                नलााण भॊि का असधकासधक जऩ कयं ।
वलााफाधात्रलसनभुक्तोधनधाडमवुतास्डलत:।
                ा
भनुष्मोभत्प्रवादे नबत्रलष्मसतन वॊळम:॥                           दे ली क ऩूजन क वभम इव भॊि का जऩ कये ।
                                                                       े      े

अथाात् ळयद ऋतु क नलयािभं
                े                                                                         जमडती भङ्गराकारी बद्रकारी
जफ भेयी लात्रऴाक भशाऩूजा शोती                                                             कऩासरनी।
शं , उव कार भं जो भनुष्म भेये                                                             दगाा षभा सळला धािी स्लाशा
                                                                                           ु
भाशात्म्म      (दगाावद्ऱळती)
                 ु              को                                                        स्लधानभोऽस्तुते॥
बत्रक्तऩूलकवुनेगा, लश भनुष्म भेये
          ा
                                                                                          दे ली वे प्राथाना कयं -
प्रवाद वे वफ फाधाओॊ वे भुक्त
शोकय धन-धाडम एलॊ ऩुि वे
वम्ऩडन शो जामेगा।                                                                         त्रलधेफशदे त्रल कल्माणॊत्रलधेफशऩयभाॊ -
                                                                                          सश्रमभ ्।रूऩॊदेफशजमॊदेफशमळोदे फशफद्र
        नलयाि भं दगाावद्ऱळती
                  ु
                                                                                          ऴोजफश॥
को ऩढने मा          वुनने वे दे ली
अत्मडत प्रवडन शोती शं          एवा                                                        अथाात्      शे     दे त्रल! आऩ    भेया
ळास्त्रोक्त लिन शं । वद्ऱळती का                                                           कल्माण कयो। भुझे श्रेद्ष वम्ऩत्रत्त
ऩाठ उवकी भूर बाऴा वॊस्कृ त भं                                                             प्रदान कयो। भुझे रूऩ दो, जम दो,
कयने ऩय शी ऩूणा प्रबाली शोता शं ।                                                         मळ     दो    औय       भेये   काभ-क्रोध
                                                                                          इत्माफद ळिुओॊ का नाळ कयो।
        व्मत्रक्त               को
श्रीदगाावद्ऱळती को बगलती दगाा
     ु                    ु
का शी स्लरूऩ वभझना िाफशए।                                                                 त्रलद्रानो क भतानुळाय वम्ऩूणा
                                                                                                      े
ऩाठ कयने वे ऩूला श्रीदगाावद्ऱळती फक ऩुस्तक का इव भॊि वे
                      ु                                         नलयािव्रत का ऩारन कयने भं जो रोगं अवभथा शो लश
ऩॊिोऩिायऩूजन कयं -                                              नलयाि क वात यािी,ऩाॊि यािी, दं यािी औय एक यािी
                                                                       े
                                                                का व्रत कयक बी त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । नलयाि
                                                                           े
नभोदे व्मैभशादे व्मैसळलामैवततॊनभ:।
                                                                भं नलदगाा की उऩावना कयने वे नलग्रशं का प्रकोऩ स्लत्
                                                                      ु
नभ:प्रकृ त्मैबद्रामैसनमता:प्रणता:स्भताभ ्॥
                                                                ळाॊत शो जाता शं ।
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                                            कवे कयं नलयाि व्रत?
                                             ै
                                                                                               स्लस्स्तक.ऎन.जोळी
       नल फदनं तक िरने लारे इव ऩला ऩय शभ व्रत यखकय भाॊ क नौ अरग-अरग रूऩ की ऩूजा की जाती शं । इव दौयान घय भं
                                                        े
फकमा जाने लारा त्रलसधलत शलन बी स्लास््म क सरए अत्मॊत राबप्रद शं । शलन वे आस्त्भक ळाॊसत औय लातालयण फक ळुत्रद्ध क
                                         े                                                                     े
अराला घय नकायात्भक ळत्रक्तमं का नाळ शो कय वकायात्भक ळत्रक्तमो का प्रलेळ शोता शं ।

नलयाि व्रत

नलयाि भं नल याि वे रेकय वात यािी,ऩाॊि यािी, दं यािी औय एक यािी व्रत कयने का बी त्रलधान शं ।
नलयाि व्रत क धासभाक भशत्ल क अराला लैसासनक भशत्ल शं , जो स्लास््म की दृत्रद्श वे कापी राबदामक शोता शं । व्रत कयने वे
            े              े
ळयीय भं िुस्ती-पतॉ फनी यशती शं । योजाना कामा कयने लारे ऩािन तॊि को बी व्रत क फदन आयाभ सभरता शं । फच्िे, फुजुग,
                ु                                                           े                                ा
फीभाय, गबालती भफशरा को नलयाि व्रत का नशीॊ यखना िाफशए।

नलयाि व्रत वे वॊफॊसधत उऩमोगी वुझाल

      व्रत क दौयान असधक वभम भौन धायण कयं ।
             े

      व्रत क ळुरुआत भं बूख कापी रगती शं । ऐवे भं नीॊफू ऩानी त्रऩमा जा वकता शै । इववे बूख को सनमॊत्रित यखने भं भदद
             े
       सभरेगी।

      जशा तक वॊबल शो सनजारा उऩलाव न यखं। इववे ळयीय भं ऩानी फक कभी शो जाती शं औय अऩसळद्श ऩदाथा ळयीय क फाशय
                                                                                                     े
       नशीॊ आ ऩाते। इववे ऩेट भं जरन, कब्ज, वॊक्रभण, ऩेळाफ भं जरन जैवी कई वभस्माएॊ ऩैदा शो वकती शं ।

      एक वाथ खूफ वाया ऩानी ऩीने क फजाए फदन भं कई फाय नीॊफू ऩानी त्रऩएॊ।
                                  े

      ज्मादातय रोगो को उऩलाव भं अक्वय कब्ज की सळकामत शो जाती शं । इवसरए व्रत ळुरू कयने क ऩशरे त्रिपरा, आॊलरा,
                                                                                         े
       ऩारक का वूऩ मा कये रे क यव इत्माफद ऩदाथो का वेलन कयं । इववे ऩेट वाप यशता शै ।
                              े

      व्रत क दौयान िाम, कापी का वेलन कापी फढ़ जाता शै । इव ऩय सनमॊिण यखं।
             े

व्रत क दौयान कौनवे खाद्य ऩदाथा ग्रशण कयं ?
      े

            व्रत भं अडन का वेलन लस्जात शं । स्जव कायण ळयीय भं ऊजाा की कभी शो जाती शं ।

            अनाज फक जगश परं ल वस्ब्जमं का वेलन फकमा जा वकता शं । इववे ळयीय को जरुयी ऊजाा सभरती शं ।

            वुफश क वभम आरू को फ्राई कयक खामा जा वकता शं । आरू भं काफोशाइड्रे ट प्रिुय भािा भं शोता शै । इव सरए आरू
                   े                    े
             खाने वे ळयीय को ताकत सभरती शै ।

            वुफश एक सगराव दध त्रऩरं। दोऩशय क वभम पर मा जूव रं। ळाभ को िाम ऩी वकते शं ।
                            ू                े

            कई रोग व्रत भं एक फाय शी बोजन कयते शं । ऐवे भं एक सनस्द्ळत अॊतयार ऩय पर खा वकते शं । यात क खाने भं सवॊघाड़े
                                                                                                       े
             क आटे वे फने ऩकलान खा वकते शं ।
              े
10                                          अक्टू फय 2011




                                       भॊि सवद्ध त्रलळेऴ दै ली मॊि वूसि
आद्य ळत्रक्त दगाा फीवा मॊि (अॊफाजी फीवा मॊि)
              ु                                                    वयस्लती मॊि
भशान ळत्रक्त दगाा मॊि (अॊफाजी मॊि)
              ु                                                    वद्ऱवती भशामॊि(वॊऩूणा फीज भॊि वफशत)
नल दगाा मॊि
    ु                                                              कारी मॊि
नलाणा मॊि (िाभुॊडा मॊि)                                            श्भळान कारी ऩूजन मॊि
नलाणा फीवा मॊि                                                     दस्षण कारी ऩूजन मॊि
िाभुॊडा फीवा मॊि ( नलग्रश मुक्त)                                   वॊकट भोसिनी कासरका सवत्रद्ध मॊि
त्रिळूर फीवा मॊि                                                   खोफडमाय मॊि
फगरा भुखी मॊि                                                      खोफडमाय फीवा मॊि
फगरा भुखी ऩूजन मॊि                                                 अडनऩूणाा ऩूजा मॊि
याज याजेद्वयी लाॊछा कल्ऩरता मॊि                                    एकाॊषी श्रीपर मॊि

                                       भॊि सवद्ध त्रलळेऴ रक्ष्भी मॊि वूसि
श्री मॊि (रक्ष्भी मॊि)                                             भशारक्ष्भमै फीज मॊि
श्री मॊि (भॊि यफशत)                                                भशारक्ष्भी फीवा मॊि
श्री मॊि (वॊऩूणा भॊि वफशत)                                         रक्ष्भी दामक सवद्ध फीवा मॊि
श्री मॊि (फीवा मॊि)                                                रक्ष्भी दाता फीवा मॊि
श्री मॊि श्री वूक्त मॊि                                            रक्ष्भी गणेळ मॊि
श्री मॊि (कभा ऩृद्षीम)
           ु                                                       ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊि ऩूजन मॊि
रक्ष्भी फीवा मॊि                                                   कनक धाया मॊि
श्री श्री मॊि (श्री श्री रसरता भशात्रिऩुय वुडदमै श्री              लैबल रक्ष्भी मॊि (भशान सवत्रद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊि)
भशारक्ष्भमं श्री भशा मॊि)
अॊकात्भक फीवा मॊि
         ताम्र ऩि ऩय वुलणा ऩोरीव                        ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीव                          ताम्र ऩि ऩय
               (Gold Plated)                                  (Silver Plated)                          (Copper)
        वाईज                   भूल्म                वाईज                 भूल्म                वाईज                   भूल्म
       2” X 2”                 640                 2” X 2”                460                2” X 2”                  370
       3” X 3”                1250                 3” X 3”                820                3” X 3”                  550
       4” X 4”                1850                 4” X 4”               1250                4” X 4”                  820
       6” X 6”                2700                 6” X 6”               2100                6” X 6”                 1450
       9” X 9”                4600                 9” X 9”               3700                9” X 9”                 2450
      12” X12”                8200                12” X12”               6400               12” X12”                 4600
मॊि क त्रलऴम भं असधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं ।
     े                                 ा
                                                GURUTVA KARYALAY
                                      Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
                          Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
               Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
11                                 अक्टू फय 2011




                             दे ली आयाधना वे असबद्श कामो की सवत्रद्ध शे तु
                                                                                                  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी
दे ली बागलत क आठलं स्कध भं दे ली उऩावना का त्रलस्ताय वे लणान शै । दे ली का ऩूजन-अिान-उऩावना-वाधना इत्माफद क
             े        ॊ                                                                                    े
ऩद्ळमात दान दे ने ऩय भनुष्म क सरमे रोक औय ऩयरोक दोनं वुख दे ने लारे शोते शं ।
                             े

      प्रसतऩदा सतसथ क फदन दे ली का ऴोडळेऩिाय वे ऩूजन कयक नैलेद्य क रूऩ भं दे ली को गाम का घृत (घी) अऩाण कयना
                      े                                  े         े
       िाफशए। भाॊ को ियणं िढ़ामे गमे घृत को ब्राम्शणं भं फाॊटने वे योगं वे भुत्रक्त सभरती शै ।
      फद्रतीमा सतसथ क फदन दे ली को िीनी का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। िीनी का बोग रागाने वे व्मत्रक्त दीघाजीली
                      े
       शोता शं ।
      तृतीमा सतसथ क फदन दे ली को दध का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। दध का बोग रागाने वे व्मत्रक्त को दखं वे
                    े              ू                               ू                                ु
       भुत्रक्त सभरती शं ।
      ितुथॉ सतसथ क फदन दे ली को भारऩुआ बोग रगाकय दान कयना िाफशए। भारऩुए का बोग रागाने वे व्मत्रक्त फक
                   े
       त्रलऩत्रत्त का नाळ शोता शं ।
      ऩॊिभी सतसथ क फदन दे ली को करे का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। करे का बोग रागाने वे व्मत्रक्त फक फुत्रद्ध,
                   े              े                                े
       त्रललेक का त्रलकाव शोता शं । व्मत्रक्त क ऩरयलायीकवुख वभृत्रद्ध भं लृत्रद्ध शोती शं ।
                                               े
      ऴद्षी सतसथ क फदन दे ली को भधु (ळशद, भशु, भध) का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। भधु का बोग रागाने वे
                   े
       व्मत्रक्त को वुॊदय स्लरूऩ फक प्रासद्ऱ शोती शं ।
      वद्ऱभी सतसथ क फदन दे ली को गुड़ का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। गुड़ का बोग रागाने वे व्मत्रक्त क वभस्त
                    े                                                                                े
       ळोक दय शोते शं ।
            ू
      अद्शभी सतसथ क फदन दे ली को श्रीपर (नारयमर) का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। गुड़ का बोग रागाने वे
                    े
       व्मत्रक्त क वॊताऩ दय शोते शं ।
                  े       ू
      नलभी सतसथ क फदन दे ली को धान क राले का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। धान क राले का बोग रागाने वे
                  े                  े                                       े
       व्मत्रक्त क रोक औय ऩयरोक का वुख प्राद्ऱ शोता शं ।
                  े


                              त्रलसबडन दे ली की प्रवडनता क सरमे गामिी भॊि
                                                          े
   दगाा गामिी : ॐ सगरयजामे त्रलधभशे , सळलत्रप्रमाम धीभफश तडनो दगाा :प्रिोदमात।
    ु                                                          ु
   रक्ष्भी गामिी : ॐ भशाराक्ष्भमे त्रलधभशे , त्रलष्णु त्रप्रमाम धीभफश तडनो रक्ष्भी:प्रिोदमात।
   याधा गामिी : ॐ लृऴ बानु: जामै त्रलधभशे , फक्रस्रप्रमाम धीभफश तडनो याधा :प्रिोदमात।
   तुरवी गामिी : ॐ श्री तुल्स्मे त्रलधभशे , त्रलद्लुत्रप्रमाम धीभफश तडनो लृॊदा: प्रिोदमात।
   वीता गामिी : ॐ जनक नॊफदडमे त्रलधभशे बुसभजाम धीभफश तडनो वीता :प्रिोदमात।
   शॊ वा गामिी : ॐ ऩयम्नडवाम त्रलधभशे , भशा शॊ वाम धीभफश तडनो शॊ व: प्रिोदमात।
   वयस्लती गामिी : ॐ लाग दे व्मै त्रलधभशे काभ याज्मा धीभफश तडनो वयस्लती :प्रिोदमात।
   ऩृ्ली गामिी : ॐ ऩृ्ली दे व्मै त्रलधभशे वशस्र भूयतमै धीभफश तडनो ऩृ्ली :प्रिोदमात।
12                                              अक्टू फय 2011




         आस्द्वन नलयात्रि घट स्थाऩना भुशूत, त्रलसध-त्रलधान (28 सवतम्फय 2011)
                                          ा

                                                                                                 स्लस्स्तक.ऎन.जोळी
        आस्द्वन ळुक्र प्रसतऩदा अथाात नलयािी का ऩशरा       करळ स्थाऩना शे तु ळुब भुशूता
फदन। इवी फदन वे शी आस्द्वनी नलयाि का प्रायॊ ब शोता               राब भुशूता वुफश 06:12 वे 07:42 तक
शं । जो अस्द्वन ळुक्र नलभी को वभाद्ऱ शोते शं , इन नौ             अभृत भुशूता वुफश 07:42 वे 09:12 तक
फदनं दे त्रल दगाा की त्रलळेऴ आयाधना कयने का त्रलधान
              ु                                                  ळुब भुशूता वुफश 10:42 वे 12:12 तक
शभाये ळास्त्रो भं फतामा गमा शं । ऩयॊ तु इव लऴा तृसतमा     क भुशूता घट स्थाऩना का श्रेद्ष भुशूता यशं गे।
                                                           े
सतथी का षम शोने क कायण नलयाि नौ फदन की जगश
                 े                                                घट स्थाऩना शे तु वलाप्रथभ स्नान इत्माफद के
आठ फदनो क शंगे।
         े                                                ऩद्ळमात गाम क गोफय वे ऩूजा स्थर का रेऩन कयना
                                                                       े
        ऩायॊ ऩरयक ऩद्धसत क अनुळाव नलयात्रि क ऩशरे
                          े                 े             िाफशए। घट स्थाऩना शे तु ळुद्ध सभट्टी वे लेदी का सनभााण
फदन घट अथाात करळ की स्थाऩना कयने का त्रलधान शं ।          कयना िाफशए, फपय उवभं जौ औय गेशूॊ फोएॊ तथा उव ऩय
इव करळ भं ज्लाये (अथाात जौ औय गेशूॊ ) फोमा जाता शै ।      अऩनी इच्छा क अनुवाय सभट्टी, ताॊफे, िाॊदी मा वोने का
                                                                      े
घट स्थाऩनकी ळास्त्रोक्त त्रलसध इव प्रकाय शं ।             करळ स्थात्रऩत कयना िाफशए।
घट स्थाऩना आस्द्वन प्रसतऩदा क फदन फक जाती
                             े                                              मफद ऩूणा त्रलसध-त्रलधान वे घट स्थाऩना
शं ।                                                                     कयना शो तो ऩॊिाॊग ऩूजन (अथाात गणेळ-
घट     स्थाऩना    शे तु   सििा   नषि    औय                                  अॊत्रफका,           लरुण,               ऴोडळभातृका,
लैधसतमोग को लस्जात भाना गमा शं ।
   ृ                                                                          वद्ऱघृतभातृका, नलग्रश आफद दे लं का
(सििा नषि 28 सवतॊफय 2011 को                                                    ऩूजन) तथा ऩुण्माशलािन (भॊिंच्िाय)
दोऩशय 01:37:33 फजे वे रग यशा                                                   त्रलद्रान    ब्राह्मण    द्राया     कयाएॊ      अथला
शं ।) घट स्थाऩना भं सििा नषि को                                                अभथाता शो, तो स्लमॊ कयं ।
सनऴेध    भाना     गमा     शं ।   अत्   घट                                                  ऩद्ळमात        दे ली          की    भूसता
स्थाऩना इववे ऩूला कयना ळुब शोता                                                स्थात्रऩत     कयं       तथा       दे ली    प्रसतभाका
शं ।                                                                         ऴोडळोऩिायऩूलक ऩूजन कयं । इवक फाद
                                                                                         ा               े
        त्रलद्रनो क भत वे इव लऴा ळुक्र
                   े                                                       श्रीदगाावद्ऱळती का वॊऩुट अथला वाधायण
                                                                                ु
प्रसतऩदा वे ळुरू शोने लारे ळायदीम नलयाि भं                             ऩाठ कयना िाफशए। ऩाठ की ऩूणााशुसत क फदन
                                                                                                         े

वूमोदमी नषि शस्त नषि यशे गा। शस्त नषि को ऩूजन             दळाॊळ शलन अथला दळाॊळ ऩाठ कयना िाफशए।
                                                                  घट स्थाऩना क वाथ दीऩक की स्थाऩना बी की
                                                                              े
शे तु उत्तभ भाना जाता शं । शं । इव सरमे वूमोदम वे 6.12
                                                          जाती शै । ऩूजा क वभम घी का दीऩक जराएॊ तथा उवका
                                                                          े
फजे क फाद वे शी करळ (घट) की स्थाऩना कयना
     े
                                                          गॊध, िालर, ल ऩुष्ऩ वे ऩूजन कयना िाफशए।
ळुबदामक यशे गा।
                                                          ऩूजन क वभम इव भॊि का जऩ कयं -
                                                                े
        मफद ऎवे मोग फन यशे शो, तो घट स्थाऩना
                                                                    बो दीऩ ब्रह्मरूऩस्त्लॊ ह्यडधकायसनलायक।
दोऩशय भं असबस्जत भुशूता मा अडम ळुब भुशूता भं कयना
                                                                   इभाॊ भमा कृ ताॊ ऩूजाॊ गृह्रॊस्तेज: प्रलधाम।।
उत्तभ यशता शं ।
13                                       अक्टू फय 2011




                        वयर त्रलसध-त्रलधान वे ळायदीम नलयाि व्रत उऩावना

                                                                                                         सिॊतन जोळी
        आस्द्वन ळुक्र प्रसतऩदा, फुधलाय, 28 सवतॊफय को            ऩुष्ऩ।
ळायदीम नलयाि आयॊ ब शो यशे शं । नलयाि भं भाॊ दगाा दे ली का
                                             ु                  नलयाि व्रत:
आह्लान, स्थाऩना ल ऩूजन का वभम प्रात:कार शोता शं ।               नलयाि का व्रत वबी लगा क बक्तो क सरए उत्तभ शोता शै । मफद
                                                                                       े       े
इवीसरए फद्रस्लबाल कडमा रग्न भं घट स्थाऩना का वभम                कोई बक्त नौ फदन तक व्रत न यख वक तो दो-यािी क व्रत
                                                                                               ं            े
प्रात: 7.39 तक वलाश्रद्ष शै ।
                     े            इवक असतरयक्त िय रग्न क
                                     े                  े       अलश्म कयने िाफशमे अथाात ऩशरा औय अॊसतभ नलयाि का व्रत
िौघस्िडए अथला असबस्जत कार भं बी घट स्थाऩना की जा                कयना उऩमुक्त शोता शं ।
वकती शै । ळायदीम नलयाि दे ली उऩावना क सरए असधक असत
                                     े                          वयर ऩूजन त्रलसध:
उत्तभ भाना गमा शै ।                                             वलाप्रथभ बक्त श्री गणेळजी का आह्लान कयने क फाद अऩनी
                                                                                                          े
        जो बक्त नलयाि क दौयान दे त्रल का ळास्त्रोक्त त्रलसध-
                       े                                        करदे ली का ऩूजन कयना िाफशमे। उवक फाद भाता बगलती का
                                                                 ु                              े
त्रलधान वे ऩूजन कयना िाशं , उडशं नलयाि क एक फदन ऩूला
                                        े                       ऩूजन अऩने कर की ऩयॊ ऩया क अनुवाय कयना िाफशमे।
                                                                           ु             े
वबी ऩूजन वाभग्री को एकत्रित कय रेना िाफशमे।                     नलयाि भं दगाा वद्ऱळती का ऩाठ ऩूणा ऩाठ कयना असत उत्तभ
                                                                          ु
        स्जव स्थान ऩय भाॊ बगलती को स्थात्रऩत कयना शो            शोता शं ।
लशाॊ भॊडऩ फनाने क सरमे उव स्थान को वभतर फनारे, उव
                 े
स्थान मा बूसभको सभट्टी मा गाम क गोफय वे रीऩकय बूसभ
                               े                                                        गणेळ रक्ष्भी मॊि
का ळुत्रद्धकयण कय रं।
        त्रलद्रानो क भत अनुळाय प्रसतभा स्थात्रऩत कयने शे तु
                    े
भॊडऩ नौ शाथ रॊफा औय वात शाथ िौड़ा फनाने का ळास्त्रोक्त
त्रलधान शै । भॊडऩ फनाकय उवे त्रलसबडन ळृॊगाय वाभग्री वे
वुवस्ज्जत कयं । भाॊ बगलती की प्रसतभा स्थात्रऩत कयने के
सरए भॊडऩ क भध्मभ भं िाय शाथ रॊफी औय एक शाथ ऊिी लेदी
          े                                 ॊ
फनारं। उव लेदी ऩय ये ळभी रार लस्त्र त्रफछारे।
दे ली प्रसतभा शे तु भाॊ बगलती की प्रसतभा िाय बुजा लारी एलॊ
                                                                    प्राण-प्रसतत्रद्षत गणेळ रक्ष्भी मॊि को अऩने घय-दकान-
                                                                                                                    ु
सवॊश ऩय वलायी फकमे शुए शो लैवी शी प्रसतभा स्थात्रऩत कयना
                                                                    ओफपव-पक्टयी भं ऩूजन स्थान, गल्रा मा अरभायी
                                                                          ै
उत्तभ शोता शं । इव क ऩीछे का आध्मास्त्भक सवद्धाॊत शोता शं
                    े
                                                                    भं स्थात्रऩत कयने व्माऩाय भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता
की बक्त की िायं फदळाओॊ वे वुयषा शो वक औय उवे वभस्त
                                     े
                                                                    शं । मॊि क प्रबाल वे बाग्म भं उडनसत, भान-प्रसतद्षा
                                                                              े
प्रकाय क वुख-वभृत्रद्ध ल ळाॊसत प्राद्ऱ शो।
        े
                                                                    एलॊ व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं एलॊ आसथाक स्स्थभं वुधाय
        करळ स्थाऩीत कयने शे तु भॊि उच्िायण कयते शुए
                                                                    शोता शं । गणेळ रक्ष्भी मॊि को स्थात्रऩत कयने वे
तीथा स्थरं क जर का आह्लान कय करळ की स्थाऩना कयनी
            े
                                                                    बगलान गणेळ औय दे ली रक्ष्भी का वॊमुक्त आळीलााद
िाफशमे।शलन लेदी त्रिकोण फनाएॊ औय उवऩय जुआये उगाएॊ।
ऩूजन वाभग्री: िॊदन, अगरू, कऩूय, कभर, अळोक, वुगॊसधत
                                                                    प्राद्ऱ शोता शं ।        Rs.550 वे Rs.8200 तक
14                                              अक्टू फय 2011




                                  नलयाि स्ऩेळर घट स्थाऩना त्रलसध
                                                                                      स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, त्रलजम ठाकुय
दगाा ऩूजन वाभग्री-
 ु                                                             तत ऩद्ळमात शाथ धोकय, ऩुन: आवन ळुत्रद्ध भॊि का
कराला    (भौरी,   यषा    वूि), योरी, सवॊदय, १
                                         ू           श्रीपर    उच्िायण कयं :-
(नारयमर), अषत (त्रफना टू टे िालर), रार लस्त्र, वगॊसधत              ॐ ऩृ्ली त्लमाधृता रोका दे त्रल त्मलॊ त्रलष्णुनाधृता।
पर- भारा, 5 ऩान क ऩत्ते , 5 वुऩायी, रंग, करळ, करळ
 ू               े                                                       त्लॊ ि धायमभाॊ दे त्रल ऩत्रलिॊ करु िावनभ ्॥
                                                                                                         ु
शे तु आभ क ऩल्रल, रकडीि की िौकी, वसभधा, शलन कण्ड,
          े                                  ु
                                                               ळुत्रद्ध कयण औय आिभन क ऩद्ळमात िॊदन रगाना
                                                                                     े
शलन वाभग्री, कभर गट्टे , ऩॊिाभृत ( दध, दशी, घी, ळशद,
                                    ू
                                                               िाफशए।
ळकया(िीनी) ), पर, सभठाई, ऊन का आवन, वाफूत शल्दी,
  ा
                                                               अनासभका उॊ गरी वे श्रीखॊड िॊदन रगाते शुए इव भॊि का
अगयफत्ती, इि, घी, दीऩक, आयती की थारी, कळा, यक्त िॊदन,
                                       ु
                                                               उच्िायण कयं :-
द्ळेत िॊदन (श्रीखॊड िॊदन), जौ, सतर, वुलणा गणेळ ल दगाा
                                                  ु
                                                                         िडदनस्म भशत्ऩुण्मभ ् ऩत्रलिॊ ऩाऩनाळनभ,्
की प्रसतभा 2 (वुलणा उप्रब्ध न शो तो ऩीतर, कई रोग
                                                                        आऩदाॊ शयते सनत्मभ ् रक्ष्भी सतद्षतु वलादा।
सभट्टी की प्रसतभा वे ऩूजन कयते शं ।), आबूऴण ल श्रृगाय
                                                 ॊ
वाभग्री, ऩॊिभेला, ऩॊिसभठाई, रूई इत्माफद,                       ऩॊिोऩिाय ऩूजन कयने क ऩद्ळमात वॊकल्ऩ कयना िाफशएॊ।
                                                                                   े
                                                               वॊकल्ऩ भं ऩुष्ऩ, पर, वुऩायी, ऩान, िाॊदी का सवक्का, श्रीपर
दगाा ऩूजन वे ऩूला िौकी को ळुद्ध कयक श्रृगाय कयक
 ु                                 े   ॊ       े
                                                               (नारयमर), सभठाई, भेला, आफद वबी वाभग्री थोड़ी-थोड़ी
िौकी वजारं।
                                                               भािा भं रेकय वॊकल्ऩ भॊि का उच्िायण कयं :-
तत ऩद्ळमात रार कऩडे का आवन त्रफछाकय गणऩसत एलॊ                  ॥ वॊकल्ऩ लाक्म॥
दगाा भाता की प्रसतभाक वम्भुख फैठ जाए।
 ु                   े                                         शरय ॐ तत्वत l नभ् ऩयभात्भने श्री ऩुयाण ऩुरुऴोत्तभाम
                                                               श्री भद बगलते भशा ऩुरुऴस्म त्रलष्णो यासामा प्रलता भान

तत ऩद्ळमात आवन को इव भॊि वे ळुत्रद्ध कयण कयं :                 स्माद्य ब्राह्मणं फद्रतीम प्रशयाद्रे श्रीद्वेत्लायाश कारे लै   लस्तल
                                                               -भडलडतये        अस्श्त्लस्श्तत्भे कल्मुगे कसर प्रथभ ियणे जम्फू
      ॐ अऩत्रलि : ऩत्रलिोला वलाालस्थाॊ गतोऽत्रऩला।
                                                               द्रीऩे बयत खण्ड बायत लऴे आमाा लतांडतगात दे ळैक ऩुण्म
     म: स्भये त ् ऩुण्डयीकाषॊ व फाह्याभ्मडतय: ळुसि:॥
                                                               षेि ऴत्रद्श वम्लस्तायाणाॊ भध्मे 'अभुक ' नासभन वॊलत्वये
                                                               'अभुक ' अमने 'अभुक 'िुतौ .अभुक भावे 'अभुक ऩषे
इन भॊिं का उच्िायण कयते शुए अऩने ऊऩय तथा आवन
                                                               .अभुक सतथौ अभुक नषिे ,अभुक मोग 'अभुक 'लावये
ऩय 3-3 फाय कळा मा ऩुष्ऩाफद वे छीॊटं रगामं।
            ु
                                                               'अभुक यासळस्मे वूमे, बौभं, फुधे, गुयौ, ळुक्र, ळनौ, याशौ,
                                                                                                          े
                                                               कतौ एलॊ गुण त्रलसळद्शामा सतथौ 'अभुक' गोिोत्ऩडने 'अभुक
                                                                े
तत ऩद्ळमात आिभन कयं :
                                                               'नास्म्न ळभाा (लभाा इत्माफद ) वकरऩाऩषमऩूलक वलाारयद्श
                                                                                                        ा ॊ
                    ॐ कळलाम नभ:
                       े                                       ळाॊसतसनसभत्तॊ     वलाभॊगरकाभनमा          श्रुसतस्भृत्मोक्तपरप्राप्त्मथं
                   ॐ नायामण नभ:                                भनेस्प्वत कामा सवद्धमथं श्री दगाा ऩूजनॊ ि अशॊ करयष्मे।
                                                                                             ु
                    ॐ भध्लामे नभ:                              तत्ऩूलाागॊत्लेन    सनत्रलाघ्नताऩूलक
                                                                                                 ा       कामा      सवद्धमथं     मथा
                   ॐ गोत्रलडदाम नभ्                            सभसरतोऩिाये गणऩसत ऩूजनॊ करयष्मे।
15                                        अक्टू फय 2011



त्रलळेऴ वुझाल: उक्त वॊकल्ऩ लाक्म भं जशाॉ-जशाॉ 'अभुक'                 तत ऩद्ळमात प्रकाय श्रीखॊड िॊदन फोरकय श्रीखॊड िॊदन
ळब्द आमा शै , लशाॉ क्रभळ: लताभान वॊलत्वय, अमन, रुतु,                 रगाएॊ,
भॉव, ऩष, सतसथ, नषि, मोग, वूमााफद की याळी तथा                         तत ऩद्ळमात सवडदय िढ़ाएॊ "इदॊ सवडदयाबयणॊ रेऩनभ ् ॐ
                                                                                    ू                 ू
अऩने गोि, अऩनी याळी एलॊ अऩने नाभ का उच्िायण                          श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्,
कयना िाफशए।                                                          तत ऩद्ळमात दलाा औय त्रलल्फऩि बी गणेळ जी को िढ़ाएॊ।
                                                                                 ू

गणऩसत ऩूजन:-                                                         ऩूजन क ऩद्ळमात गणेळ जी को बोग अत्रऩत कयं :
                                                                           े                            ा                        ॐ
बायतीम ळास्त्रोक्त ऩयॊ ऩया क अनुळाय फकवी बी ऩूजा भं
                            े                                        श्री   सवत्रद्ध   त्रलनामकाम   नभ् इदॊ   नानात्रलसध   नैलेद्यासन
वलाप्रथभ गणेळ जी की ऩूजा की जाती शं ।                                वभऩामासभ, सभद्शान अत्रऩात कयने क सरए भॊि- ळकया
                                                                                                     े           ा
शाथ भं ऩुष्ऩ रेकय बगलान गणेळ का ध्मान कयं ।                          खण्ड खाद्यासन दसध षीय घृतासन ि, आशायो बक्ष्म बोज्मॊ
गजाननम्बूतगणाफदवेत्रलतॊ कत्रऩत्थ जम्फू परिारुबषणभ ्।                 गृह्यताॊ गणनामक।
उभावुतॊ ळोक त्रलनाळकायक नभासभ त्रलघ्नेद्वयऩादऩॊकजभ ्।
                       ॊ
                                                                     प्रवाद अत्रऩत कयने क ऩद्ळमात आिभन कयामं,
                                                                                 ा       े                                       इदॊ
तत ऩद्ळमात आलाशन कयं : आह्लान शे तु शाथ भं अषत                       आिभनीमॊ ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्, तत ऩद्ळमात
रेकय इव भॊि का उच्िायण कयं :-                                        ऩान वुऩायी िढ़ामं- ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्
            आगच्छ दे ल दे लेळ, गौयीऩुि त्रलनामक।                     ताम्फूरॊ वभऩामासभ, तत ऩद्ळमात पर रेकय गणऩसत ऩय
              तलऩूजा कयोभद्य, अिसतद्ष ऩयभेद्वय॥                      िढ़ाएॊ ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् परॊ वभऩामासभ,
ॐ    श्री   सवत्रद्ध   त्रलनामकाम   नभ्   इशागच्छ     इश    सतद्ष    तत ऩद्ळमात दस्षणा यखते शुले इव भॊि का उच्िायण कयं
उच्िायण कयते शुए अषत को गणेळ जी ऩय िढाि दं ।                         ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् द्रव्म दस्षणाॊ वभऩामासभ,
                                                                     तत ऩद्ळमात त्रलऴभ वॊख्मा (1,3,5,7,9,11,21 आफद) भं
सनम्न भॊिो का उच्िायण कयते शुले वॊफॊसधत लस्तु श्री
                                                                     दीऩक जराकय सनयाजन अथाात आयसत कयं औय बगलान
गणेळ जी को अत्रऩत कयं ।
                ा
                                                                     की आयती गामं। तत ऩद्ळमात शाथ भं पर रेकय गणेळ
                                                                                                      ू
शाथ भं पर रेकय ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् आवनॊ
        ू
                                                                     जी को अत्रऩात कयं , तत ऩद्ळमात तीन प्रदस्षणा कयं ।
वभऩामासभ,
तत ऩद्ळमात अघाा भं जर रेकय फोरं ॐ श्री सवत्रद्ध                      इवी प्रकाय वे अडम वबी दे लताओॊ का ऩूजन कयं । गणेळ
त्रलनामकाम नभ् अघ्मं वभऩामासभ,                                       क स्थान स्जव दे लता की ऩूजा कयनी शो ऩय उव दे लता
                                                                      े
तत     ऩद्ळमात         आिभनीम-स्नानीमॊ     ॐ   श्री   सवत्रद्ध       क नाभ का उच्िायण कयं ।
                                                                      े
त्रलनामकाम नभ् आिभनीमॊ वभऩामासभ,
तत ऩद्ळमात लस्त्र रेकय ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्                करळ ऩूजन:-
लस्त्रॊ वभऩामासभ,                                                    घड़े अथला रोटे ऩय कराला (भौसर) फाॊधकय करळ के
तत ऩद्ळमात मसोऩलीत-ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्                    ऊऩय आभ का ऩल्रल यखं। करळ भं वुऩायी, अषत, भुद्रा
मसोऩलीतॊ वभऩामासभ,                                                   यखं, दलाा, नारयमर ऩय लस्त्र रऩेट कय करळ ऩय स्थात्रऩत
                                                                           ू
तत ऩद्ळमात ऩुनयािभनीमभ ्, ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम                 कयं ,शाथ भं अषत औय ऩुष्ऩ रेकय लरूण दे लता का करळ
नभ् यक्त िॊदन रगाएॊ: इदभ यक्त िॊदनभ ् रेऩनभ ् ॐ श्री                 भं आलाशन कयं ।
सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्,
16                                                अक्टू फय 2011



ॐ       त्तत्लामासभ         ब्रह्मणा     लडदभानस्तदाळास्ते       तत ऩद्ळमात आिभन दं - ळुद्धोदकस्नानाडते आिभनीमॊ
मजभानोशत्रलासब:। अशे डभानोलरुणेश फोध्मुरुळॊ वभानऽआमु:            जरॊ वभऩामासभ।
प्रभोऴी:। अस्स्भन करळे लरुणॊ वाॊगॊ वऩरयलायॊ वामुध                तत ऩद्ळमात लस्त्र अत्रऩत कयं -- श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै
                                                                                        ा                       ु
वळत्रक्तकभालाशमासभ, ॐ बूबल: स्ल: बो लरुण इशागच्छ
                         ुा                                      नभ:।    लस्त्रॊ   वभऩामासभ       ॥     लस्त्राडते   आिभनीमॊ       जरॊ
इशसतद्ष। स्थाऩमासभ ऩूजमासभ।                                      वभऩामासभ।
                                                                 तत ऩद्ळमात वौबाग्म वूिि अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै
                                                                                              ा
तत ऩद्ळमात स्जव प्रकाय गणेळ जी की ऩूजा की शै उवी                 दगाादेव्मै नभ:। वौबाग्म वूिॊ वभऩामासभ ॥
                                                                  ु
प्रकाय लरूण दे लता की त्रलसधलत ऩूजा कयं ।                        तत ऩद्ळमात िडदन अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै
                                                                                      ा                      ु
दगाा ऩूजन:
 ु                                                               नभ:। िडदनॊ वभऩामासभ ॥
दगाा ऩूजन शे तु वफवे ऩशरे भाता दगाा का ध्मान कयं :
 ु                              ु                                तत     ऩद्ळमात     शरयद्रािूणा       अत्रऩत
                                                                                                           ा     कयं -   श्रीजगदम्फामै
       वला भॊगर भागॊल्मे सळले वलााथा वासधक ।
                                          े                      दगाादेव्मै नभ:। शरयद्राॊ वभऩामासभ ॥
                                                                  ु
       ळयण्मेिमस्म्फक गौयी नायामणी नभोस्तुते ॥
                     े                                           तत ऩद्ळमात ककभ अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै
                                                                             ुॊ ु    ा                      ु
                                                                 नभ:। ककभ वभऩामासभ ॥
                                                                       ुॊ ु
तत ऩद्ळमात आलाशन कयं :                                           तत ऩद्ळमात सवडदय अत्रऩात कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै
                                                                                ू                              ु
                श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:।
                               ु                                 नभ:। सवडदयॊ वभऩामासभ ॥
                                                                          ू
                    दगाादेलीभालाशमासभ॥
                     ु                                           तत ऩद्ळमात कज्जर अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै
                                                                                       ा                      ु
तत ऩद्ळमात पर अत्रऩात कयते शुए उच्िायण कयं ।
            ू                                                    नभ:। कज्जरॊ वभऩामासभ ॥
श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। आवानाथे ऩुष्ऩास्ण वभऩामा
               ु                                                 तत ऩद्ळमात दलााकय अत्रऩात कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै
                                                                             ू ुॊ                               ु
सभ॥                                                              नभ:। दलााकयासन वभऩामासभ ॥
                                                                       ू ुॊ
तत ऩद्ळमात अघ्मा दं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:।
                                     ु                           तत ऩद्ळमात आबूऴण अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै
                                                                                       ा                      ु
शस्तमो: अघ्मं वभऩामासभ॥                                          नभ:। आबूऴणासन वभऩामासभ ॥
तत ऩद्ळमात आिभन अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै
                     ा                      ु                    तत     ऩद्ळमात     ऩुष्ऩभारा         अत्रऩत
                                                                                                           ा     कयं -   श्रीजगदम्फामै
नभ:। आिभनॊ वभऩामासभ॥                                             दगाादेव्मै नभ:। ऩुष्ऩभारा वभऩामासभ ॥
                                                                  ु
तत ऩद्ळमात स्नान कयाएॊ- श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:।
                                       ु                         तत ऩद्ळमात धूऩ रगाएॊ- श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:।
                                                                                                      ु
स्नानाथं जरॊ वभऩामासभ॥                                           धूऩभाघ्राऩमासभ॥
तत ऩद्ळमात स्नानाॊग आिभन- स्नानाडते ऩुनयािभनीमॊ                  तत ऩद्ळमात दीऩ जराएॊ- श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:।
                                                                                                      ु
जरॊ वभऩामासभ।                                                    दीऩॊ दळामासभ॥
तत    ऩद्ळमात     ऩॊिाभृत    स्नान     कयाएॊ-   श्रीजगदम्फामै    तत ऩद्ळमात नैलेद्य अत्रऩत कयं -
                                                                                         ा                     श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै
                                                                                                                              ु
दगाादेव्मै नभ:। ऩॊिाभृतस्नानॊ वभऩामासभ॥
 ु                                                               नभ:। नैलेद्यॊ सनलेदमासभ॥
तत    ऩद्ळमात     गडधोदक-स्नान         कयाएॊ-   श्रीजगदम्फामै    तत ऩद्ळमात जर अत्रऩात कयं - नैलेद्याडते त्रिफायॊ आिभनीम
दगाादेव्मै नभ:। गडधोदकस्नानॊ वभऩामासभ॥
 ु                                                               जरॊ वभऩामासभ।
तत ऩद्ळमात ळुद्धोदक स्नान कयाएॊ-                श्रीजगदम्फामै    तत ऩद्ळमात पर अत्रऩत कयं -
                                                                                    ा                          श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै
                                                                                                                              ु
दगाादेव्मै नभ:। ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩामासभ॥
 ु                                                               नभ:। परासन वभऩामासभ॥
17                                              अक्टू फय 2011



तत ऩद्ळमात ताम्फूर अत्रऩात कयं -       श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै
                                                      ु              भमा ऩॊिाळीतेयसधकभऩनीते तु लमसव ।
नभ:। ताम्फूरॊ वभऩामासभ॥                                              इदानीॊ िेडभातस्तल कृ ऩा नात्रऩ बत्रलता
तत ऩद्ळमात दस्षणा दं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। द
                                      ु                              सनयारम्फो रम्फोदय जनसन क मासभ ळयण ्॥5॥
                                                                                             ॊ
स्षणाॊ वभऩामासभ॥                                                     द्वऩाको जल्ऩाको बलसत भधुऩाकोऩभसगया
तत ऩद्ळमात आयती कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:।
                                     ु                               सनयातॊको यॊ को त्रलशयसत सियॊ कोफटकनक् ।
                                                                                                         ै
आयासताक वभऩामासभ॥
       ॊ                                                             तलाऩणे कणे त्रलळसत भनुलणे परसभदॊ

ऩूजन भं शुई िुफट क सनलायण शे तु षभा प्राथना कयं ।
                  े                                                  जन् को जानीते जनसन जऩनीमॊ जऩत्रलधौ ॥6॥

षभा प्राथाना                                                         सिताबस्भारेऩो गयरभळनॊ फदक्ऩटधयो
                                                                     जटाधायी कण्ठे बुजगऩतशायी ऩळुऩसत् ।
न भॊिॊ नोमॊिॊ तदत्रऩ ि न जाने स्तुसतभशो
                                                                     कऩारी बूतेळो बजसत जगदीळैकऩदलीॊ
न िाह्लानॊ ध्मानॊ तदत्रऩ ि न जाने स्तुसतकथा्।
                                                                     बलासन त्लत्ऩास्णग्रशणऩरयऩाटीपरसभदभ ् ॥7॥
न जाने भुद्रास्ते तदत्रऩ ि न जाने त्रलरऩनॊ
                                                                     न भोषस्माकाॊषा बलत्रलबल लाॊछात्रऩिनभे
ऩयॊ जाने भातस्त्लदनुवयणॊ क्रेळशयणभ ्॥1॥
                                                                     न त्रलसानाऩेषा ळसळभुस्ख वुखेच्छात्रऩ न ऩुन् ।
त्रलधेयसानेन द्रत्रलणत्रलयशे णारवतमा
                                                                     अतस्त्लाॊ वॊमािे जनसन जननॊ मातु भभ लै
त्रलधेमाळक्मत्लात्तल ियणमोमाा च्मुसतयबूत ् ।
                                                                     भृडाणी रुद्राणी सळलसळल बलानीसत जऩत् ॥8॥
तदे तत्षतव्मॊ जनसन वकरोद्धारयस्ण सळले
                                                                     नायासधतासव त्रलसधना त्रलत्रलधोऩिायै ्
कऩुिो जामेत क्लसिदत्रऩ कभाता न बलसत ॥2॥
 ु                      ु
                                                                     फक रूषसिॊतन ऩयै नकृतॊ लिोसब् ।
                                                                       ॊ              ा
ऩृसथव्माॊ ऩुिास्ते जनसन फशल् वस्डत वयरा्
                                                                     श्माभे त्लभेल मफद फकिन भय्मनाथे
                                                                                         ॊ
ऩयॊ तेऴाॊ भध्मे त्रलयरतयरोऽशॊ तल वुत् ।
                                                                     धत्वे कृ ऩाभुसितभम्फ ऩयॊ तलैल ॥9॥
भदीमोऽमॊत्माग् वभुसितसभदॊ नो तल सळले
                                                                     आऩत्वु भग्न् स्भयणॊ त्लदीमॊ कयोसभ दगे करुणाणालेसळ ।
                                                                                                        ु
कऩुिो जामेत ् क्लसिदत्रऩ कभाता न बलसत ॥3॥
 ु                        ु
                                                                     नैतच्छठत्लॊ भभ बालमेथा् षुधातृऴाताा जननीॊ स्भयस्डत॥10॥
जगडभातभाातस्तल ियणवेला न यसिता
                                                                     जगदॊ फ त्रलसििभि फक ऩरयऩूणा करुणास्स्त सिडभसम ।
                                                                                        ॊ
न ला दत्तॊ दे त्रल द्रत्रलणभत्रऩ बूमस्तल भमा ।
                                                                     अऩयाधऩयॊ ऩयालृतॊ नफश भातावभुऩेषते वुतभ ् ॥11 ॥
तथात्रऩत्लॊ स्नेशॊ भसम सनरुऩभॊ मत्प्रकरुऴे
                                      ु
                                                                     भत्वभ् ऩातकी नास्स्तऩाऩघ्नी त्लत्वभा नफश ।
कऩुिो जामेत क्लसिदऩ कभाता न बलसत ॥4॥
 ु                   ु
                                                                     एलॊ सात्ला भशादे त्रलमथामोग्मॊ तथा करु ॥12॥
                                                                                                         ु
ऩरयत्मक्तादे ला त्रलत्रलधत्रलसधवेलाकरतमा
                                    ु


                                                   बाग्म रक्ष्भी फदब्फी
                               वुख-ळास्डत-वभृत्रद्ध की प्रासद्ऱ क सरमे बाग्म रक्ष्भी फदब्फी :- स्जस्वे धन प्रसद्ऱ, त्रललाश मोग, व्माऩाय
                                                                 े
                               लृत्रद्ध, लळीकयण, कोटा किेयी क कामा, बूतप्रेत फाधा, भायण, वम्भोशन, तास्डिक फाधा, ळिु बम,
                                                             े
                               िोय बम जेवी अनेक ऩये ळासनमो वे यषा शोसत शै औय घय भे वुख वभृत्रद्ध फक प्रासद्ऱ शोसत शै , बाग्म
                               रक्ष्भी फदब्फी भे रघु श्री फ़र, शस्तजोडी (शाथा जोडी), सवमाय सवडगी, त्रफस्ल्र नार, ळॊख, कारी-
                               वफ़द-रार गुॊजा, इडद्र जार, भाम जार, ऩातार तुभडी जेवी अनेक दरब वाभग्री शोती शै ।
                                 े                                                       ु ा
                                                                                      भूल्म:- Rs. 910 वे Rs. 8200 तक उप्रब्द्ध
                                       गुरुत्ल कामाारम वॊऩक : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785
                                                           ा
                                                                   c
18                                       अक्टू फय 2011




                                  नलाणा भॊि वे शोती शं नलग्रश ळाॊसत
                                                                                                       सिॊतन जोळी
       दगाा ऩूजा ळत्रक्त उऩावना का भशाऩला शं । ळायदीम
        ु
नलयाि क फदनो भं ग्रशं क दष्प्रबाल वे फिने क सरए
       े               े ु                 े
भाॊ दगाा की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शै ।
     ु
ळत्रक्त एलॊ बत्रक्त क वाथ वाॊवारयक वुखं को दे ने क सरए
                     े                            े
लताभान वभम भं मफद कोई दे लता शै । तो लश एक भाि
दे ली दगाा शी शं । वाभाडमतमा वभस्त दे ली-दे लता शी ऩूजा
       ु
का अच्छा ऩरयणाभ दे ते शं ।
शभाये धभा ळास्त्रं क अनुळाय:
                    े
                     'करौ िण्डी त्रलनामकौ’
अथाात् कसरमुग भं दगाा एलॊ गणेळ फश ऩूणा एलॊ तत्कार
                  ु
पर दे ने लारे शं ।
ताॊत्रिक ग्रडथं क अनुळाय:
                 े
 नौयत्निण्डीखेटाद्ळ जाता सनसधनानढलाद्ऱोनढलगुण्ठ दे व्मा।
अथाात् नौ यत्न, नौ ग्रशं फक ऩीड़ा वे भुत्रक्त, नौ सनसध फक
प्रासद्ऱ, नौ दगाा क अनुद्षान वे वलाथा वम्बल शै । इवका
              ु    े
तत्ऩमा शं फक नलदगाा नलग्रशं क सरए शी प्रलसतात शुईं शं ।
                ु            े                                अवुयं वे रेकय भनुष्मं भं फकवी बी प्रकायका वॊकट शोने

       ज्मोसतऴ फक द्रद्शी भं नलग्रश वॊफॊसधत ऩीड़ा एलॊ         ऩय

दै ली आऩदाओॊ वे भुत्रक्त प्राद्ऱ कयने का वयर वाधन दे ली       वभस्त रोक भं भाॊ दगाा फक अयाधना कयने का प्रिरन
                                                                                ु
फक आयाधना शं । मफद जडभ कडरी भं िॊडार मोग, दरयद्र
                        ुॊ                                    िरा आयशा शं ।       क्मोफक भाॊ दगाा ने वबी दे ल-दानल-
                                                                                              ु
मोग, ग्रशण मोग, त्रलऴ मोग, कारवऩा एलॊ भाॊगसरक दोऴ,            अवुय-भनुष्म वबी प्राणी भाि का उद्धाय फकमा शं ।
एलॊ अडमाडम मोग अथला दोऴ एवे शं , स्जस्वे व्मत्रक्त                   इवसरमे फकवी बी प्रकाय क जाद-टोना, योग, बम,
                                                                                            े   ू
जीलन बय अथक ऩरयश्रभ कयने क उऩयाॊत बी द्ख
                          े           ु                       बूत, त्रऩळाच्ि, डाफकनी, ळाफकनी आफद वे भुत्रक्त फक प्रासद्ऱ
बोगता यशता शं । स्जवकी ळाॊसत वॊबलत् अडम फकवी                  क सरमे भाॊ दगाा फक त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजा-अिाना वलादा
                                                               े          ु
ऩूजा, अिाना, वाधना, यत्न एलॊ अडम उऩामो वे वयरता वे            परदामक यशीॊ शै ।
नशीॊ शोती शं । अथला ऩूणा ग्रश ऩीडाए ळाॊत      नशीॊ शो ऩाती           दगाा दखं का नाळ कयने लारी शं । इवसरए
                                                                      ु    ु
शं । एवी स्स्थती भं आफद ळत्रक्त भाॊ बगलती दगाा क नल
                                           ु    े             नलयात्रि क फदनो भं जफ उनकी ऩूजा ऩूणा श्रद्धा औय
                                                                        े
रुऩो फक आयाधना वे व्मत्रक्त वयरता वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ
                                                              त्रलद्वाव वे फक जाती शं , तो भाॊ दगाा फक प्रभुख नौ
                                                                                                ु
कय वकता शं ।
                                                              ळत्रक्तमाॉ जाग्रत शो जाती शं , स्जववे नलं ग्रशं को
       बगलान याभ ने बी इवक प्रबाल वे प्रबात्रलत
                          े
                                                              सनमॊत्रित कयती शं , स्जववे ग्रशं वे प्राद्ऱ शोने लारे असनद्श
शोकय अऩनी दळ अथला आठ नशीॊ फस्ल्क नलधा बत्रक्त का
                                                              प्रबाल वे यषा शोकय ग्रश जनीत ऩीडाएॊ ळाॊत शो जाती शं ।
शी उऩदे ळ फदमा शै । अनाफद कार वे फक दे लता, दानल,
19                                      अक्टू फय 2011



दगाा फक नल ळत्रक्त को जाग्रत कयने शे तु ळास्त्रं भं नलाणा
 ु                                                           6. नलाणा भॊि का ऴद्ष फीज भॊि डा शं , डा वे छठे नलयाि
भॊि का जाऩ कयने का त्रलधान शं ।                                  को दगाा फक छठी ळत्रक्त कात्मामनी फक उऩावना फक
                                                                     ु
नल का अथाात नौ एलॊ अणा का अथाात अषय शोता शं ।                    जाती शं । स्जव भं ळुक्र ग्रश को सनमॊत्रित कयने लारी
(नल+अणा= नलाणा) इवी कायण नलाणा नल अषयं लारा                      ळत्रक्त वभाई शुई शं ।
प्रबाली भॊि शं ।                                             7. नलाणा भॊि का वद्ऱभ फीज भॊि मै शं , मै वे वातलं
नलाणा भॊि                                                        नलयाि को दगाा फक वद्ऱभ ळत्रक्त कारयात्रि फक
                                                                           ु
                   ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुॊडामै त्रलच्िे             उऩावना फक जाती शं । स्जव भं ळसन ग्रश को सनमॊत्रित
नल अषयं लारे इव अद्भत नलाणा भॊि क शय अषय भं
                    ु            े                               कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं ।
दे ली दगाा फक एक-एक ळत्रक्त वभामी शुई शं , स्जव का
       ु                                                     8. नलाणा भॊि का अद्शभ फीज भॊि त्रल शं , त्रल वे आठलं
वॊफॊध एक-एक ग्रशं वे शं ।                                        नलयाि को दगाा फक अद्शभ
                                                                           ु                       ळत्रक्त भशागौयी फक
1. नलाणा भॊि का प्रथभ फीज भॊि ऐॊ शं , ऐॊ वे प्रथभ                उऩावना फक जाती शं । स्जव भं याशु ग्रश को सनमॊत्रित
    नलयाि को दगाा फक प्रथभ ळत्रक्त ळैर ऩुिी फक
              ु                                                  कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं ।
    उऩावना फक जाती शं । स्जव भं वूमा ग्रश को सनमॊत्रित       9. नलाणा भॊि का नलभ फीज भॊि िै शं , िै वे नलभं
    कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं ।                              नलयाि को दगाा फक नलभ ळत्रक्त सवत्रद्धदािी फक
                                                                           ु
2. नलाणा भॊि का फद्रतीम फीज भॊि ह्रीॊ शं , ह्रीॊ वे दवये
                                                     ू           उऩावना फक जाती शं । स्जव भं कतु ग्रश को सनमॊत्रित
                                                                                              े
    नलयाि को दगाा फक फद्रतीम ळत्रक्त ब्रह्मिारयणी फक
              ु                                                  कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं ।
    उऩावना फक जाती शं । स्जव भं िॊद्र ग्रश को सनमॊत्रित      इव नलाणा भॊि दगाा फक नलो ळत्रक्तमाॉ व्मत्रक्त को धभा, अथा,
                                                                           ु
    कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं ।                          काभ औय भोष इन िाय फक प्रासद्ऱ भं बी वशामक सवद्ध
3. नलाणा भॊि का तृतीम फीज भॊि क्रीॊ शं , क्रीॊ वे तीवये      शोती                                                   शं ।
    नलयाि को दगाा फक तृतीम ळत्रक्त िॊद्रघॊटा फक उऩावना
              ु                                              जऩ त्रलधान
    फक जाती शं । स्जव भं भॊगर ग्रश को सनमॊत्रित कयने         प्रसतफदन स्नान इत्माफदवे ळुद्ध शोकय नलाणा भॊि का जाऩ
    लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं ।                               108 दाने फक भारा वे कभ वे कभ तीन भारा जाऩ
4. नलाणा भॊि का ितुथा फीज भॊि िा शं , िा वे िौथे             अलश्म कयना िाफशए।
    नलयाि को दगाा फक ितुथा ळत्रक्त कष्भाण्डा फक
              ु                     ू                        दगाा वद्ऱळती क अनुळाय
                                                              ु            े
    उऩावना फक जाती शं । स्जव भं फुध ग्रश को सनमॊत्रित        नलाणा भॊि क नौ अषयं भॊि क ऩशरे ॐ अषय जोड़कय
                                                                        े             े
    कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं ।                          बी कय वकते शं ॐ रगाने वे बी मश नलाणा भॊि के
5. नलाणा भॊि का ऩॊिभ फीज भॊि भुॊ शं , भुॊ वे ऩाॉिले          वभान फश परदामक सवद्ध शोता शं । इवभं रेव भाि बी
    नलयाि को दगाा फक ऩॊिभ ळत्रक्त स्कदभाता फक
              ु                      ॊ                       वॊदेश नशीॊ शं । अत् भाॊ बगलती दगाा फक कृ ऩा प्रासद्ऱ एलॊ
                                                                                            ु
    उऩावना फक जाती शं । स्जव भं फृशस्ऩसत ग्रश को             नलग्रशो क दष्प्रबालो वे यषा प्रासद्ऱ शे तु नलाणा भॊि का
                                                                      े ु
    सनमॊत्रित कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं ।                जाऩ ऩूणा सनद्षा एलॊ श्रद्धा वे कय वकते शं ।



         अऩनी रार फकताफ कडरी वे उऩिाय जासनमे
                         ुॊ
                                                       भाि RS:- 450
20                                      अक्टू फय 2011




                                              नलाणा भडि वाधना
                                                                                                           सिॊतन जोळी
                                                                  कयक फैठना िाफशए। फायश राख भडि जऩने वे मश कामा
                                                                     े
नलाणा भडि वाधना
                                                                  सवद्ध शोता शं ।
त्रलसनमोग्-
                                                                  नलाणा भोशन भडि:
ॐ अस्म श्री नलाणा भॊिस्म ब्रह्मा त्रलष्णु भशे द्वया ऋत्रऴ्,
                                                                  ॐ क्रीॊ क्रीॊ ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे (अभुक)
                                                                                                                          ॊ
गामत्र्मुस्ष्णगनुद्शुबश्छॊ दाॊसव,   भशाकारी         भशारक्ष्भी
                                                                  क्रीॊ क्रीॊ भोशनभ ् करु करु क्रीॊ क्रीॊ स्लाशा।
                                                                                       ु   ु
भशावयस्लत्म् दे लता्, नॊदजा ळाकबयी बीभा् ळक्तम्,
                               ुॊ
                                                                                             ***
यक्तदॊ सतका दगाा भ्राभमो फीजासन, ह्रं कीरकभ ्, अस्ग्नलामु
             ु
                                                                  नलाणा उच्िाटन भडि:
वूमाास्तत्लासन, कामा सनदे ळ जऩे त्रलसनमोग।
                                                                  नलाणा उच्िाटन भडि क िौफीव राख जऩ कयने का
                                                                                     े
नलाणा भडि:
                                                                  त्रलधान शं । इवभं तीन कओॊ का जऩ ताम्रकरळ भं रेकय
                                                                                         ु
            ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे॥                 यखना िाफशए औय उवी जर वे सनत्म स्नान कयना
नलाणा बेद भडि:                                                    िाफशए। इव प्रमोग को ऩूला फदळा की तयप भुशॊ कयके
ळास्त्रं भं नलाणा भडि को अऩने आऩ भं अत्मडत सवद्ध                  जऩ कयना िाफशए। जऩ क सरए रार लस्त्र का आवन
                                                                                     े
एलॊ प्रबालमुक्त भाना गमा शं । नलाणा भडि को भडि औय                 त्रफछाना िाफशए ल वाधक को बी रार यॊ ग क लस्त्र धायण
                                                                                                        े
तडि दोनो भं वभान रुऩ वे प्रमोग फकमा जाता शं ।                     कयने िाफशए। इव प्रमोग को फीव फदनो भं वॊऩडन कयने
नलाणा भडि क ळीघ्र प्रबात्रल प्रमोग आऩक भागादळान शे तु
           े                          े                           का त्रलधान शं । िौफीव राख भडि जऩ कयने वे मश कामा
फदमे जायशे शं ।                                                   सवद्ध शोता शं ।
                                                                  नलाणा उच्िाटन भडि:
िेतालनी:                                                          ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे (अभुक) पट् उच्िाटनॊ
                                                                                                            ॊ
नलाणा भडि का प्रमोग असत वालधानी वे एलॊ मोग्म गुरु,                करु करु स्लाशा।
                                                                   ु   ु
त्रलद्रान ब्राह्मण अथला जानकाय की वराश वे कयना
                                                                                              ***
िाफशए।                                                            नलाणा लळीकयण भडि:
                                                                  इव प्रमोग को फीव फदनो भं वॊऩडन कयने का त्रलधान शं ।
नलाणा भोशन भडि:
                                                                  नदी, ताराफ मा कएॊ क जर वे स्नान कयक वाधक को
                                                                                 ु   े               े
नलाणा भोशन भडि क फायश राख जऩ कयने का त्रलधान
                े                                                 दस्षण फदळा की तयप भुॊश कयक फैठना िाफशए। तथा
                                                                                            े
शं । इव प्रमोग को कयने शे तु वात कओॊ मा नफदमं का
                                  ु                               वपद आवन त्रफछाना िाफशए औय वपद लस्त्र धायण
                                                                    े                         े
जर ताम्रकरळ भं रेकय उवभं आभ क ऩत्ते डारकय
                             े                                    कयने िाफशए। फीव राख भडि जऩ कयने वे मश कामा
सनत्म उवी ऩानी वे स्नान कयना िाफशए। रराट ऩय ऩीरे                  सवद्ध शोता शं ।
िडदन का सतरक कयना िाफशए औय ळयीय ऩय ऩीरे यॊ ग                      नलाणा लळीकयण भडि:
क लस्त्र शी धायण कयने िाफशए औय ऩीरे यॊ ग क आवन
 े                                        े                       लऴट् ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे (अभुक) लऴट् भे लश्मॊ
                                                                                                               ॊ
का प्रमोग कयना िाफशए। वाधक को ऩस्द्ळभ की तयप भुॊश                 करु करु स्लाशा।
                                                                   ु   ु
21                                           अक्टू फय 2011



नलाणा स्तॊबन भडि:                                                 नलाणा त्रलद्रे ऴण भडि:
इव प्रमोग भं वाधक को ऩूला फदळा की तयप भुॊश कयके                   ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै (अभुक) त्रलद्रे ऴणॊ करु करु
                                                                                                   ॊ               ु   ु
फैठना िाफशए। तथा बूये यॊ ग का आवन त्रफछाना िाफशए।                 स्लाशा।
वोरश राख भडि जऩ कयने वे मश कामा सवद्ध शोता शं ।                   नलाणा भशाभडि:
नलाणा स्तॊबन भडि:                                                 इव भडि क उच्िायण भाि वे दे ली भाॊ प्रवडन शोती शं ।
                                                                          े
ॐ ठॊ ठॊ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे (अभुक) ह्रीॊ लािॊ
                                                ॊ                 मश वॊऩूणा नलाणा भशाभॊि शं ।
भुखॊ ऩदॊ स्तॊबम ह्रीॊ स्जह्लाॊ कीरम ह्रीॊ फुत्रद्धॊ त्रलनाळम      नलाणा भशाभडि:
त्रलनाळम ह्रीॊ ॐ ठॊ ठॊ स्लाशा।                                    ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ भशादगे नलाषयी नलदगे नलास्त्भक
                                                                                       ु            ु           े
                             ***                                  नलिॊडी भशाभामे भशाभोशे भशामोग सनद्रे जमे भधुकटब
                                                                                                               ै
नलाणा त्रलद्रे ऴण भडि:                                            त्रलद्रात्रलस्ण भफशऴावुय भफदा सन धूम्र रोिन वॊशॊिी िॊडभुॊड
इव प्रमोग भं वाधक को उत्तय फदळा की तयप भुॊश कयके                  त्रलनासळनी यक्त फीजाॊतक सनळुॊब ध्लॊसवसन ळुॊब दऩास्घ्न
                                                                                         े
फैठना िाफशए। तथा कारे यॊ ग का आवन त्रफछाना िाफशए।                 दे त्रल अद्शादळ फाशुक कऩार खट्लाॊग ळूर खड्ग खेटक
                                                                                       े
इव प्रमोग को फीव फदन भं वॊऩडन कयने का त्रलधान शं ।                धारयस्ण सछडन भस्तक धारयस्ण रुसधय भाॊव बोस्जनी
तेयश राख भडि जऩ कयने वे मश कामा सवद्ध शोता शं ।                   वभस्त बूत प्रेताफद मोग ध्लॊसवसन ब्रह्मेडद्राफद स्तुते दे त्रल
वाधना क दौयान जर भं सतर डारकय स्नान कयना
       े                                                          भाॊ यष यष भभ ् ळिून ् नाळम ह्रीॊ पट् ह्रूॊ पट् ॐ ऐॊ ह्रीॊ
िाफशए।                                                            क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे॥




                                                   द्रादळ भशा मॊि
  मॊि को असत प्रासिन एलॊ दरब मॊिो क वॊकरन वे शभाये लऴो क अनुवॊधान द्राया फनामा गमा शं ।
                          ु ा      े                    े
       ऩयभ दरब लळीकयण मॊि,
             ु ा                                                     वशस्त्राषी रक्ष्भी आफद्ध मॊि
       बाग्मोदम मॊि                                                 आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ मॊि
       भनोलाॊसछत कामा सवत्रद्ध मॊि                                  ऩूणा ऩौरुऴ प्रासद्ऱ काभदे ल मॊि
       याज्म फाधा सनलृत्रत्त मॊि                                    योग सनलृत्रत्त मॊि
       गृशस्थ वुख मॊि                                               वाधना सवत्रद्ध मॊि
       ळीघ्र त्रललाश वॊऩडन गौयी अनॊग मॊि                            ळिु दभन मॊि

  उऩयोक्त वबी मॊिो को द्रादळ भशा मॊि क रुऩ भं ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे भॊि सवद्ध ऩूणा प्राणप्रसतत्रद्षत एलॊ िैतडम मुक्त
                                      े
  फकमे जाते शं । स्जवे स्थाऩीत कय त्रफना फकवी ऩूजा अिाना-त्रलसध त्रलधान त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं ।

                                        GURUTVA KARYALAY
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                         Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
22                                        अक्टू फय 2011




         ऩसत-ऩत्नी भं करश सनलायण शे तु
                                                                  दगााद्शाषय भडि वाधना
                                                                   ु
        मफद ऩरयलायं भं वुख वुत्रलधा क वभस्त वाधान
                                     े
                                                                                    स्लस्स्तक.ऎन.जोळी
शोते शुए बी छोटी-छोटी फातो भं ऩसत-ऩत्नी क त्रफि भे
                                         े                    ळास्त्रं भं दगााद्शाषय भडि को अत्मडत
                                                                           ु
करश शोता यशता शं , तो सनम्न भॊि का जाऩ कयने वे                गोऩनीम औय सवत्रद्धदामक भाना गमा शं ।
                                                              दगााद्शाषय भडि क फायं भं ळास्त्रोक्त लणान शं
                                                               ु              े
ऩसत-ऩत्नी क त्रफिभं ळाॊसत का लातालयण फनेगा
           े


भॊि -
                                                                        वाषात ् सवत्रद्धप्रदो भॊिो
                                                                         दगाामा् कसरनाळन्।
                                                                          ु
धॊ सधॊ धुभ धुजते ऩत्नी लाॊ लीॊ फूभ लास्ग्धद्वरय। क्र क्रीॊ
              ा                                    ॊ
क्र कासरका दे ली ळॊ ऴीभ ळूॊ भं ळुबभ करु॥
  ॊू                                 ु                        अद्शाषयो अद्श सवत्रद्धळो गोऩनीमो फदगॊफयै ्।
                                                              ॐ अस्म श्री दगााद्शाषय भॊिस्म भशे द्वय
                                                                           ु
मफद ऩत्नी मश प्रमोग कय यशी शं तो ऩत्नी की जगश                 ऋत्रऴ्, श्री दगााद्शाषयास्त्भका दे लता, दॊ ु
                                                                            ु
                                                              फीजभ ्,ह्रीॊ ळत्रक्त, ॐ कीरकाम नभ् इसत
ऩसत ळब्द का उच्िायण कये
                                                              फदगफॊध्, धभााथा काभ भोषाथे जऩे
                                                              त्रलसनमोग्।
प्रमोग त्रलसध –                                               ध्मान:
                                                                    दलाासनबाॊ त्रिनमनाॊ त्रलरवस्त्कयीटाॊ
                                                                     ू
       प्रात् स्नान इत्मादी वे सनलृत्त शो कय क दगाा
                                               े ू                  ळॊखाब्जख्डग ळय खेटक िाऩान ्।
        मा भाॊ कारी दे ली क सिि ऩय रार ऩुष्ऩ बेटा
                           े                                        वॊतजानी ि दघतीॊ भफशऴावनस्थाॊ
                                                                    दगाा नलायकर ऩीठगताॊ बजेशभ ्।
                                                                     ु        ु
        कय धूऩ-दीऩ जरा क सवद्ध स्पफटक भारा वे 21
                        े
        फदन तक 108 फाय जाऩ कये राबा प्राद्ऱ शोता शं ।         दगााद्शाषय भडि :
                                                               ु
       ळीध्र राब प्रासद्ऱ शे तु प्रमोग कयने वे ऩूला भाॊ के               ॐ ह्रीॊ दॊ ु दगाामै नभ:॥
                                                                                        ु
                                                              पर:
        भॊफदय भं अऩनी वभथाता क अनुळाय अथा मा
                              े
                                                              उक्त भडि क एक राख जऩ कयने वे मश
                                                                        े
        लस्त्र बेट कयं ।                                      भडि सवद्ध शोता शं । इव भडि भं अद्भत
                                                                                                ु
       राब प्रासद्ऱ क ऩद्ळमात भारा को जर प्रलाश कय दं ।
                      े                                       ळत्रक्त शं । लाक् सवत्रद्ध, वॊतान प्रासद्ऱ, ळिु ऩय
                                                              त्रलजम, ऋण-योग आफद ऩीडाि वे भुत्रक्त प्राद्ऱ
                                                              शोती शं औय व्मत्रक्त को जीलन भं वॊऩूणा
मफद आऩ इव प्रमोग त्रलसध कयने भं अवभथा शं ?, तो आऩ             वुखं की प्रासद्ऱ शो इव क सरमे मश भडि
                                                                                      े
शभवे वॊऩक कय अडम उऩाम जान वकते शं ।
         ा                                                    अिूक एलॊ सवत्रद्धदामक शं ।
23                                            अक्टू फय 2011




                            कभायी ऩूजन वे वकर भनोयथ सवद्ध शोते शं ।
                             ु
                                                                                            सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी
       कभायी-ऩूजा वे भाॉ बगलती असत प्रवडन शोती शं
        ु                                                                     अधभ कल्ऩ: एक, दो, तीन औय िाय लऴा की
औय वाधक क वकर भनोयथ सवद्ध कयती शं ।
         े                                                                     कडमा क ऩूजन वे अधभ कल्ऩ शोता शं ।
                                                                                     े
   त्रलद्रानो क भत वे कभायी ऩूजा भं फकवी बी प्रकाय
               े       ु
का जासत बेद नशीॊ भाना जाता शै । ळास्त्रोक्त भत वे                        त्रलद्रानो क भत वे नलयाि भं कभारय कडमाओॊ क
                                                                                     े                ु            े
ब्राह्मण, षत्रिम, लैश्म ल ळुद्र इन िायं लणं की कभारयमं
                                                ु                    ऩूजन का अत्मासधक भशत्त्ल शै ।
की ऩूजा फकमा जावकता शं । िायं लणं की कभारयमं की
                                      ु                                        क्मोफक ळास्त्रोक्त त्रलधान वे कभारय कडमाएॊ भाॉ का
                                                                                                              ु
ऩूजा वे वाधक को         सबडन-सबडन पर की प्रासद्ऱ शोती शं ।           प्रत्मष स्लरुऩ शोती शं । इव सरए कभारय कडमाओॊ का
                                                                                                      ु
भेरु तडि भं उल्रेस्खत शै फक                                          ऩूजन दे ली भाॉ क वभान कयना कल्माण कायी शोता शै ।
                                                                                     े
      ब्राह्मण कभायी: क ऩूजन वे वाधक को वला इद्श
                 ु      े                                            प्रसतऩदा वे नलभी तक कभारय कडमाओॊ को दगाा स्लरुऩ
                                                                                          ु               ु
       परो की प्रासद्ऱ शोती शं ।                                     भानकय ऩूजन कयना अत्मासधक कल्माण कायी शोता शं ।
      षत्रिम कभायी: क ऩूजन वे वाधक को मळ की
               ु      े                                              मफद कोई वाधक प्रसतफदन कभायी ऩूजन नशीॊ कय वकता
                                                                                            ु
       प्रासद्ऱ शोती शं ।                                            शो, तो उनको अद्शभी मा नलभी को कभायी ऩूजन अलश्म
                                                                                                    ु
      लैश्म कभायी: क ऩूजन वे वाधक को धन की
              ु      े                                               कयना िाफशए।
       प्रासद्ऱ शोती शं ।                                                      कभायी-ऩूजा भं बगलान श्री गणेळ औय फटु क क
                                                                                ु                                      े
      ळूद्र कभायी: क ऩूजन वे वाधक की वॊतान को
              ु      े                                               वाथ वात, ऩाॉि, तीन मा एक कभायी की ऩूजा कयनी
                                                                                               ु
       राब शोता शै ।                                                 िाफशए। गणेळ औय फटु क की ऩूजा क सरए छोटे रड़कं
                                                                                                   े
स्कडद-ऩुयाण      भं    उल्रेस्खत   शै   फक   त्रलऩत्रत्त-कार   भं    को रेना िाफशए। आवन त्रफछाकय ऩशरे गणेळ, फपय
अडत्मजा-कभायी का ऩूजन कयना िाफशए।
         ु                                                           फटु क, उवक फाद कभायी ऩूजन कयना िाफशए।
                                                                               े     ु
       सळल कभायी-ऩूजा भं शे म औय काभ-फुत्रद्ध असनद्श-
            ु                                                                  गणेळजी की ऩूजा क सरए ‘ॐ गॊ गणेळाम नभ्’
                                                                                               े
कायक शोती शै । अत् वालधान शोकय कभायी-पजा कयनी
                                ु     ु                              भडि वे ऩाद्य, अघ्मा, गडध, दीऩ, लस्त्र-नैलेद्य आफद वे
िाफशए। माभर तडि भं उल्रेस्खत शै फक दो लऴा वे ऊऩय                     ऩूजा कये । फटु क की ऩूजा क सरए ‘ॐ लॊ लटु काम नभ्’
                                                                                               े
की कभायी का ऩूजन धभा लैधासनक शं , क्मंफक एक-लऴा
    ु                                                                भडि वे ऩाद्य, अघ्मा, गडध, दीऩ, लस्त्र-नैलेद्य आफद वे
वे कभ की कभायी की गडध, ऩुष्ऩ, लस्त्र औय नैलेद्य क
          ु                                      े                   ऩूजा कये ।
प्रसत रुसि नशीॊ शोती।                                                          कभायी ऩूजन क सरए ऩशरे दोनं शाथं भं ऩुष्ऩ
                                                                                ु          े
       अडम धभा ग्रडथं भं एक लऴा वे ऴोडळ (वोरश)                       रेकय प्राथाना कये ।
लऴा तक की कडमा कं सबडन-सबडन दे ली कशी गई शं ।                                मथा-भडिाषय-भमीॊ रक्ष्भीॊ, भातृणाॊ रुऩ-धारयणीॊ।
लाडलानरीम तडि: भं कभायी ऩूजन
                   ु                     शे तु उल्रेस्खत शै फक                नल-दगाास्त्भकाॊ वाषात ्, कडमाभालाशमाम्भशॊ ॥
                                                                                  ु
      उत्तभ कल्ऩ: वात, आठ औय नौ लऴा की कडमा के                               जगत ्-ऩूज्मे जगद्-लडद्ये, वला-ळत्रक्त-स्लरुत्रऩस्ण।
       ऩूजन वे उत्तभ कल्ऩ शोता शं ।                                            ऩूजाॊ गृशाण कौभारय जगडभातनाभोऽस्तु ते॥
      भध्मभ कल्ऩ: ऩाॉि, छ् औय दव लऴा की कडमा                                  उक्त प्राथाना कयक शाथ भं सरए ऩुष्ऩं को कभायी
                                                                                                े                      ु
       क ऩूजन वे भध्मभ कल्ऩ शोता शं ।
        े                                                            क ियणं ऩय यखकय प्रणाभ कये ।
                                                                      े
24                                          अक्टू फय 2011



        तत ऩद्ळमात ॐ कभामै नभ् भडि वे ऩाद्य,
                      ु                                           गॊ गणऩतमे नभ् ताम्फूरॊ वभऩामासभ।
अघ्मा, गडध, दीऩ, लस्त्र-नैलेद्य आफद वे त्रलसधलत ऩूजन              गॊ गणऩतमे नभ् दस्षणाॊ वभऩामासभ।
कये ।                                                             बगलान श्रीगणेळ का ऩूजन कयने क ऩद्ळात ् लटु क का
                                                                                               े
        तत    ऩद्ळमात     वफ      कडमाओॊ    को   ऩुष्ऩ    भारा    ऩूजन कयं ।
ऩशनाकय बोजन कयाए। जफ ले बरी प्रकाय वॊतुद्श शो
जाएॉ, तफ उनका शाथ भुॉश धुराकय उनक शाथ भं दस्षणा
                                 े                                लटु क ऩूजन कयं :
प्रदान कयं औय उडशं प्रणाभ कयं ।                                   ॐ लॊ लटु काम नभ् भडि वे बगलान लटु क का ऩूजन
                                                                  कये ।
त्रलसधलत कभायी ऩूजन
          ु                                                       मथा-
कभायी ऩूजन एक सवद्ध प्रमोग शै । वबी प्रकाय की
 ु                                                                ॐ लॊ लटु काम नभ् ऩादमो् ऩाद्यॊ वभऩामासभ।
काभनाओॊ की ऩूणता इव ऩूजन द्राया वम्बल शै ।
              ा                                                   ॐ लॊ लटु काम नभ् सळयसव अघ्मं वभऩामासभ।
ऩूजन शे तु वला प्रथभ वॊकल्ऩ कये ।                                 ॐ लॊ लटु काम नभ् गडधाषतॊ वभऩामासभ।
मथा:                                                              ॐ लॊ लटु काम नभ् ऩुष्ऩॊ वभऩामासभ।
ॐ तत ् वत ्। अद्यैतस्म ब्रह्मणोऽफि फद्रतीम प्रशयाधे, श्री         ॐ लॊ लटु काम नभ् धूऩॊ घ्राऩमासभ।

द्वेत-लायाश-कल्ऩे,     जम्फु-द्रीऩे,   बयत-खण्डे ,       अभुक-    ॐ लॊ लटु काम नभ् दीऩॊ दळामासभ।
                                                                  ॐ लॊ लटु काम नभ् नैलेद्यॊ वभऩामासभ।
प्रदे ळाडतगाते, अभुक     ऩुण्म-षेिे, कसरमुगे, कसर-प्रथभ-
                                                                  ॐ लॊ लटु काम नभ् आिभनीमॊ वभऩामासभ।
ियणे, अभुक-नाभ-वम्लत्वये , अभुक-भावे, अभुक-ऩषे,
                                                                  ॐ लॊ लटु काम नभ् ताम्फूरॊ वभऩामासभ।
अभुक-सतथौ, अभुक-लावये , अभुक-गोिोत्ऩडनो, अभुक-                    ॐ लॊ लटु काम नभ् दस्षणाॊ वभऩामासभ।
नाभ-ळभााऽशॊ (लभााऽशॊ , दावोऽशॊ ला), वलााऩत ् ळास्डत-ऩूलक
                                                       ा          लटु क का ऩूजन कयने क ऩद्ळमात कभायी ऩूजन कयं ।
                                                                                      े         ु
भभाबीद्श-सवद्धमे,    गणेळ-लटु काफद-वफशताॊ        कभायी-ऩूजाॊ
                                                  ु
                                                                  कभायी ऩूजन:
                                                                   ु
करयष्मे।
तत ऩद्ळमात                                                        कभायी क ऩैय धोकय उवे श्रद्धा ऩूलक अऩने वम्भुख
                                                                   ु     े                        ा

गणेळ ऩूजन कयं :                                                   आवन ऩय फैठाए। फपय दोनं शाथ जोड़कय बत्रक्त ऩूलक
                                                                                                               ा
                                                                  ध्मान कये ।
गॊ गणऩतमे नभ् भडि वे बगलान ् गणेळ का ऩूजन कये ।
                                                                  मथा-
मथा:
                                                                  फार-रुऩाॊ       ि        िैरोक्म-वुडदयीॊ              लय-लस्णानीभ ्।
गॊ गणऩतमे नभ् ऩादमो् ऩाद्यॊ वभऩामासभ।
गॊ गणऩतमे नभ् सळयसव अघ्मं वभऩामासभ।                               नानारॊकाय-नम्राॊगीॊ,   बद्र-त्रलद्या-प्रकासळनीभ ्।।     िारु-शास्माॊ

गॊ गणऩतमे नभ् गडधाषतॊ वभऩामासभ।                                   भशाऽऽनडद-रृदमाॊ                 सिडतमे                     ळुबाभ ्।।
गॊ गणऩतमे नभ् ऩुष्ऩॊ वभऩामासभ।                                    अथाात ्: फार-स्लरुऩलारी, त्रिरोक-वुडदयी, श्रेद्ष लणालारी,
गॊ गणऩतमे नभ् धूऩॊ घ्राऩमासभ।                                     त्रलत्रलध प्रकाय क आबूऴणं वे वुवस्ज्जत शोने वे त्रलनम्र
                                                                                    े
गॊ गणऩतमे नभ् दीऩॊ दळामासभ।                                       ळयीयलारी, कल्माण-कारयणी त्रलद्या को प्रकट कयनेलारी,
गॊ गणऩतमे नभ् नैलेद्यॊ वभऩामासभ।                                  वुडदय शॉ वी शॉ वनेलारी, ऩयभानडद वे मुक्त रृदमलारी
गॊ गणऩतमे नभ् आिभनीमॊ वभऩामासभ।
                                                                  कल्माणकारयणी कभायी दे ली का भं ध्मान कयता शूॉ।
                                                                                ु
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ध्मान कयने क फाद इव भडि को श्रद्धाऩूलक ऩढ़कय
            े                        ा                                                    लनदगाा
                                                                                             ु              ि          भातङ्गी                    भतङ्गभुसनऩूस्जता                 ॥७॥
आलाशन कये -                                                                               ब्राह्मी    भाशे द्वयी           िैडद्री         कौभायी             लैष्णली        तथा        ।
        ॐ भडिाषय भमीॊ रक्ष्भीॊ, भातृणाॊ रुऩ-धारयणीभ ्।                                    िाभुण्डा         िैल         लायाशी             रक्ष्भीद्ळ          ऩुरुऴाकृ सत्            ॥८॥

         नल-दगाास्त्भकाॊ वाषात,् कडमाभालाशमाम्मशभ ्॥
             ु                                                                            त्रलभरोत्कत्रऴणी
                                                                                                        ा              साना            फक्रमा        सनत्मा         ि      फुत्रद्धदा   ।
                                                                                          फशुरा            फशुरप्रेभा                    वलालाशन                  लाशना               ॥९॥
अथाात ्: भडिाषयं वे वॊमुक्ता, रक्ष्भी-स्लरुऩा, भातृकाओॊ का
                                                                                          सनळुम्बळुम्बशननी                                      भफशऴावुयभफदा नी                         ।
रुऩ धायण कयने लारी, वाषात ् नल-दगाा-स्लरुऩा कडमा दे ली
                                ु
                                                                                          भधुकटबशडिी
                                                                                              ै                            ि              िण्डभुण्डत्रलनासळनी                      ॥१०॥
का भं आलाशन कयता शूॉ।
                                                                                          वलाावुयत्रलनाळा                       ि                  वलादानलघासतनी                        ।
आलाशन कयने क फाद, वम्भुख उऩस्स्थत कभायी का ऩाद्य,
            े                      ु
                                                                                          वलाळास्त्रभमी             वत्मा                वलाास्त्रधारयणी              तथा          ॥११॥
अघ्मा, गडधाषत ्, ऩुष्ऩ, धूऩ, दीऩ, नैलेद्य, आिभन, ताम्फूर एलॊ
                                                                                          अनेकळस्त्रशस्ता                  ि              अनेकास्त्रस्म               धारयणी            ।
दस्षणा आफद उऩिायं वे ऩूजन कये ।
                                                                                          कभायी
                                                                                           ु           िैककडमा                 ि         कळोयी
                                                                                                                                          ै               मुलती       मसत्         ॥१२॥
कभायी का ऩूजन कयने क फाद सनम्न भडि ऩढ़ते शुए प्रणाभ
 ु                  े
                                                                                          अप्रौढा          िैल         प्रौढा            ि          लृद्धभाता           फरप्रदा         ।
कये -
                                                                                          भशोदयी             भुक्तकळी
                                                                                                                   े                     घोयरूऩा              भशाफरा               ॥१३॥
         जगद्-लडद्ये, जगत ्-ऩूज्मे, वला-ळत्रक्त-स्लरुत्रऩस्ण।
                                                                                          अस्ग्नज्लारा                 यौद्रभुखी                  कारयात्रिस्तऩस्स्लनी                  ।
           ऩूजाॊ गृशाण कौभारय जगडभातनाभोऽस्तु ते॥
                                                                                          नायामणी            बद्रकारी                 त्रलष्णुभामा             जरोदयी              ॥१४॥
अथाात ्:        शे     त्रलद्व-लडद्ये,        वॊवाय-ऩूज्मे,       वला-ळत्रक्त-स्लरुऩे
                                                                                          सळलदती
                                                                                              ू              कयारी                   ि            अनडता              ऩयभेद्वयी          ।
कौभारय दे त्रल, भेयी ऩूजा स्लीकय करयए। शे जगदम्फ,                                         कात्मामनी             ि      वात्रलिी                प्रत्मषा       ब्रह्मलाफदनी         ॥१५॥
आऩको नभस्काय। कभायी-ऩूजा क फाद श्रीदगाा अद्शोत्तय
               ु          े         ु                                                     म          इदॊ            प्रऩठे स्डनत्मॊ                 दगाानाभळताद्शकभ ्
                                                                                                                                                     ु                                  ।
ळतनाभ स्तोि का ऩाठ कये ।                                                                  नावाध्मॊ         त्रलद्यते       दे त्रल       त्रिऴु      रोकऴु
                                                                                                                                                        े           ऩालासत         ॥१६॥
              ॥दगााद्शोत्तयळतनाभस्तोिॊ (त्रलद्ववायतडि )॥
                ु                                                                         धनॊ        धाडमॊ          वुतॊ        जामाॊ             शमॊ      शस्स्तनभेल             ि     ।

ईद्वय उलाि:                                                                               ितुलगं
                                                                                              ा        तथा          िाडते            रबेडभुत्रक्त
                                                                                                                                                ॊ         ि     ळाद्वतीभ ् ॥१७॥
                                                                                          कभायीॊ
                                                                                           ु           ऩूजसमत्ला               तु         ध्मात्ला         दे लीॊ       वुयेद्वयीभ ्    ।
ळतनाभ                  प्रलक्ष्मासभ            ळृणुष्ल           कभरानने             ।
                                                                                          ऩूजमेत ्         ऩयमा            बक्त्मा               ऩठे डनाभळताद्शकभ ्                ॥१८॥
मस्म          प्रवादभािेण            दगाा
                                      ु         प्रीता      बलेत ्         वती     ॥१॥
                                                                                          तस्म          सवत्रद्धबालेद्               दे त्रल        वलै्            वुयलयै यत्रऩ        ।
ॐ        वती          वाध्ली         बलप्रीता        बलानी           बलभोिनी         ।
                                                                                          याजानो        दावताॊ             मास्डत              याज्मसश्रमभलाप्नुमात ्              ॥१९॥
आमाा          दगाा
               ु        जमा          िाद्या      त्रिनेिा     ळूरधारयणी            ॥२॥
                                                                                          गोयोिनारक्तककङ्कभेल
                                                                                                       ु ु                                      सवडधूयकऩूयभधुिमेण
                                                                                                                                                         ा                              ।
त्रऩनाकधारयणी                सििा              िण्डघण्टा            भशातऩा्          ।
                                                                                          त्रलसरख्ममडिॊ त्रलसधनात्रलसधसो बलेत्वदाधायमतेऩुयारय्॥२०॥
भनो           फुत्रद्धयशॊ काया       सित्तरूऩा           सिता        सिसत्         ॥३॥
                                                                                          बौभालास्मासनळाभग्रे                        िडद्रे             ळतसबऴाॊ             गते         ।
वलाभडिभमी                  वत्ता            वत्मानडद              स्लरूत्रऩणी        ।
                                                                                          त्रलसरख्म प्रऩठे त ् स्तोिॊ व बलेत ् वॊऩदाॊ ऩदभ ् ॥२१॥
अनडता           बात्रलनी         बाव्मा        बव्माबव्मा        वदागसत्           ॥४॥
                                                                                          ॥इसत श्री त्रलद्ववायतडिे दगााद्शोत्तयळतनाभस्तोिॊ वभाद्ऱभ ्॥
                                                                                                                    ु
ळाम्बली              दे लभाता        ि         सिडता        यत्नत्रप्रमा     वदा     ।
वलात्रलद्या             दषकडमा                  दषमसत्रलनासळनी                   ॥५॥      त्रलळेऴ्- उऩमुक्त त्रलसध वे ‘कभायी ऩूजा’ भाव भं एक फाय
                                                                                                        ा               ु

अऩणाानेकलणाा                     ि             ऩाटरा            ऩाटरालती             ।    कयना त्रलळेऴ राबदामक शोता शं । कभारयमाॉ त्रलऴभ-वॊख्मक
                                                                                                                          ु

ऩट्टाम्फय               ऩयीधाना                करभछजीययस्छजनी                      ॥६॥    1, 3, 5, 7.... शोनी िाफशए।
अभेमत्रलक्रभा                क्रया
                               ु               वुडदयी           वुयवुडदयी            ।
26                                            अक्टू फय 2011




                                          भाता क 52 ळत्रक्त ऩीठ
                                                े
                                                                                     सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी
       दष प्रजाऩसत की कई ऩुत्रिमाॊ थी। वबी ऩुत्रिमाॊ        षभता यखते थे। ले वती क प्रेभ भं खो गए, फेवुध शो
                                                                                  े
गुणलती थीॊ ऩयॊ तु वती दष की वबी ऩुत्रिमं भं वफवे            गए।
अरौफकक थीॊ। इव सरमे वतीने फाल्म अलस्था भं शी कई                        बगलान सळल ने उडभत फक बाॊसत वती क जरे
                                                                                                       े
ऐवे अरौफकक आद्ळमा िसरत कयने लारे कामा कय फदखाए              शुए ळयीय को कधे ऩय यख ले वबी फदळाओॊ भं भ्रभण
                                                                         ॊ
थे, स्जडशं दे खकय दष को बी आद्ळमा शोता था।                  कयने       रगे।   वृत्रद्श   व्माकर
                                                                                              ु   शो   उठी   बमानक    वॊकट
       जफ वती त्रललाश मोग्म शोगई, तो वती का त्रललाश         उऩस्स्थत दे खकय वृत्रद्श क ऩारक बगलान त्रलष्णु आगे
                                                                                      े
बगलान सळल क वाथ कय फदमा। वती कराळ भं जाकय
           े                  ै                             फढ़े । उडशं ने बगलान सळल फक फेवुधी भं अऩने िक्र वे
बगलान सळल क वाथ यशने रगीॊ। बगलान सळल क दष
           े                          े                     वती क एक-एक अॊग को काट-काट कय सगयाने रगे।
                                                                 े
क दाभाद थे, फकतु एक ऐवी घटना घटीत शोगई स्जवक
 े            ॊ                             े               धयती ऩय इक्मालन स्थानं भं वती क अॊग कट-कटकय
                                                                                           े
कायण दष क ह्रदम भं बगलान सळल क प्रसत फैय औय
         े                    े                             सगये । जफ वती क वाये अॊग कट कय सगय गए, तो
                                                                           े
त्रलयोध बाल ऩैदा शो गमा। बगलान सळल क प्रसत फैय औय
                                    े                       बगलान सळल ऩुन् अऩने आऩ भं लाऩव आए। फपय ऩुन्
त्रलयोध बाल ऩैदा शो गमा।                                    वृत्रद्श क वाये कामा िरने रगे।
                                                                      े

       एक फाय वती क त्रऩता ने फशोत फडे मस का
                   े                                                   धयती ऩय स्जन इक्मालन स्थानं भं वती क अॊग
                                                                                                           े
आमोजन फकमा शं । वभस्त दे लता औय दे लाॊगनाएॊ उवी             कट-कटकय सगये थे, ले शी स्थान आज ळत्रक्त                  ऩीठ के
मस भं वस्म्भसरत शो यशे थे। रेफकन दष ने सळलजी औय             स्थान भाने जाते शं । आज बी उन स्थानं भं वती का
वती को नशीॊ फुरामा था। रेफकन दे ली वती ने सळलजी वे          ऩूजन शोता शं , उऩावना शोती शं ।
अनुयोध फकमा क ले अऩने त्रऩता क मशाॊ शोने लारे मस
             े                े                             त्रलसबडन ळास्त्रो एलॊ ऩुयाणं भं ळत्रक्त ऩीठं फक वॊख्मा के
क अलवय ऩय जाना िाशती शं । बगलान सळल क भना
 े                                   े                          लणान भं सबडनता शं ।
कयने क फाद बी वती जी क अनुयोध क कायण सळल ने
      े               े        े
                                                            तॊििूड़ा भस्ण भं 52 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं ।
उडशं ऩीशय जाने की अनुभसत दे दी।
                                                            श्रीभद्दे लीबागलत भं 108 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा
       ऩीशय जाने ऩय घय भं वतीवे फकवी ने बी
                                                                शं ।
प्रेभऩूलक लातााराऩ नशीॊ फकमा। कछ दे य औय दषने बाॊसत
        ा                      ु
बाॊसत वे सळलजी का अऩभान फकमा स्जस्वे दखी शोकय               दे ली गीता भं 72 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं ।
                                      ु
वतीजी अस्ग्नकड भं कद गई मश वभािाय
             ुॊ    ू                       बगलान सळल        दे लीऩुयाण भं 51 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं ।
क कानं भं बी ऩड़ा। ले प्रिॊड आॊधी की बाॊसत कनखर
 े                                                           कासरकाऩुयाण भं 26 ळत्रक्तऩीठं का उल्रेख फकमा शं ।
जा ऩशुॊिे। वती क जरे शुए ळयीय को दे खकय बगलान
                े                                            सळलिरयि भं 51 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं ।
सळल ने अऩने आऩको बूर गए। वती क प्रेभ औय उनकी
                              े                              दगाा ळद्ऱवती भं 52 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा
                                                               ु
बत्रक्त ने ळॊकय क भन को व्माकर कय फदमा। उन ळॊकय
                 े           ु                                  शं ।
क भन को व्माकर कय फदमा स्जडशंने काभ ऩय बी
 े           ु                                               दे ली क भुख्म अॊगं-प्रत्मॊगं फक गणना भं प्रभुख 51 ळत्रक्त
                                                                     े
त्रलजम प्राद्ऱ फक थी औय जो वायी वृत्रद्श को नद्श कयने की        ऩीठ भाने जाते शं ।
27                                      अक्टू फय 2011



वाधायत:                                                          6.त्रिऩुयभासरनी (जारॊधय)

51 ळत्रक्त ऩीठ भाने जाते शं । तॊििूड़ाभस्ण भं रगबग 52 ळत्रक्त    ऩॊजाफ क जारॊधय भं छालनी क सनकट दे ली तराफ क
                                                                        े                 े                 े
ऩीठं क फाये भं फतामा गमा शै । प्रस्तुत शै तॊििूड़ाभस्ण की
      े                                                          फकनाये स्स्थत शं भाॉ त्रिऩुयभासरनी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का
तासरका।                                                          फामाॉ     लष    (स्तन)   सगया   था।    इवकी     ळत्रक्त   को
                                                                 त्रिऩुयभासरनी कशा जाता शं औय बैयल को बीऴण कशा
1.फशॊ गराज                                                       जाता शं ।
कयािी वे थोडी दय उत्तय ऩूला भं
               ू                       फशॊ गुरा मा फशॊ गराज
                                                                 7.जमदगाा (लैद्यनाथ)
                                                                      ु
ळत्रक्तऩीठ स्स्थत शं , मशाॉ भाता का ब्रह्मयॊ ध (सवय) सगया था।
                                                                 झायखॊड क दे लघय भं स्स्थत लैद्यनाथधाभ भं स्स्थत शं भाॉ
                                                                         े
इवकी ळत्रक्त को कोटयी मा कोट्टलीळा कशा जाता शं औय
                                                                 जमदगाा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का रृदम सगया था। इवकी
                                                                    ु
बैयल को बीभरोिन कशा जाता शं ।
                                                                 ळत्रक्त को जम दगाा कशा जाता शं औय बैयल को लैद्यनाथ
                                                                                ु

2.ळकयये
    ा          (कयलीय)                                           कशा जाता शं ।

ऩाफकस्तान भं कयािी वुक्कय स्टे ळन क सनकट स्स्थत शं
                                   े
                                                                     8.भशाभामा (नेऩार)
ळकयये ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की आॉख सगयी थी। इवकी
  ा
                                                                 नेऩार भं ऩळुऩसतनाथ भॊफदय क सनकट स्स्थत शै गुजये द्वयी
                                                                                           े
ळत्रक्त को भफशऴावुयभफदा नी कशा जाता शं औय बैयल को
                                                                 भॊफदय जशाॉ स्स्थत शं भाॉ भशसळया ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता के
क्रोसधळ कशा जाता शं ।
                                                                 दोनं घुटने (जानु) सगये थे। इवकी ळत्रक्त को भशसळया

3.वुगॊध- वुनॊदा                                                  (भशाभामा) कशा जाता शं औय बैयल को कऩारी कशा
                                                                 जाता शं ।
फाॊग्रादे ळ भं सळकायऩुय, फरयवर वे थोडी दय वंध नदी क
                                        ू          े
फकनाये स्स्थत शं भाॉ वुगॊध ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की
                                                                 9.दाषामणी (भानव)
नासवका सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को वुनॊदा कशा जाता शं
                                                                 सतब्फत स्स्थत कराळ भानवयोलय क भानवा क सनकट
                                                                                ै             े       े
औय बैयल को त्र्मॊफक कशा जाता शं ।
                                                                 एक ऩाऴाण सळरा ऩय स्स्थत शं भाॉ दाषामणी ळत्रक्तऩीठ,

4.भशाभामा (कश्भीय)                                               मशाॉ भाता का दामाॉ शाथ सगया था। इवकी ळत्रक्त को
                                                                 दाषामनी कशा जाता शं औय बैयल अभय कशा जाता शं ।
बायत क कश्भीय भं ऩशरगाॉल क सनकट स्स्थत शं भाॉ
      े                   े
भशाभामा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का गरा सगया था। इवकी
                                                                 10. त्रलयजा (उड़ीवा)
ळत्रक्त   को    भशाभामा   कशा   जाता   शं   औय    बैयल    को
                                                                 बायतीम प्रदे ळ उड़ीवा क त्रलयाज भं उत्कर भं स्स्थत शं
                                                                                        े
त्रिवॊध्मेद्वय कशा जाता शं ।
                                                                 भाॉ त्रलयजा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ ऩय भाता की नासब सगयी थी।

5.ज्लाराभुखी- सवत्रद्धदा (अॊत्रफका)                              इवकी ळत्रक्त को त्रलभरा कशा जाता शं औय बैयल को
                                                                 जगडनाथ कशा जाता शं ।
बायत क फशभािर प्रदे ळ क काॊगड़ा भं स्स्थत शं भाॉ
      े                े
ज्लाराभुखी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की जीब सगयी थी।
                                                                 11.गॊडकी
इवकी ळत्रक्त को सवत्रद्धदा (अॊत्रफका) कशा जाता शं औय
                                                                 नेऩार भं गॊडकी नदी क तट ऩय ऩोखया नाभक स्थान ऩय
                                                                                     े
बैयल को उडभत्त कशा जाता शं ।
                                                                 स्स्थत भुत्रक्तनाथ भॊफदय भं स्स्थत शं भाॉ गॊडकी ळत्रक्तऩीठ,
                                                                 मशाॉ भाता का भस्तक मा गॊडस्थर अथाात कनऩटी सगयी
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थी। इवकी ळत्रक्त को गण्डकी िण्डी कशा जाता शं औय                  था। इवकी ळत्रक्त को भ्राभयी कशा जाता शं औय बैयल को
बैयल िक्रऩास्ण कशा जाता शं ।                                     अॊफय औय बैयलेद्वय कशा जाता शं ।

12.फशु रा                                                        17.काभाख्मा (काभसगरय)
बायतीम प्रदे ळ ऩस्द्ळभ फॊगार वे लधाभान स्जरा वे थोडी             बायतीम प्रदे ळ अवभ क गुलाशाटी स्जरे क काभसगरय षेि
                                                                                     े                े
दय कटु आ कतुग्राभ क सनकट अजेम नदी तट ऩय स्स्थत
 ू        े        े                                             भं स्स्थत नीराॊिर ऩलात क काभाख्मा स्थान ऩय स्स्थत
                                                                                         े
फाशुर स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ फशुरा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता         शं भाॉ   काभाख्मा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ   भाता का मोसन बाग
का फामाॉ शाथ सगया था। इवकी ळत्रक्त को दे ली फाशुरा               सगया था। इवकी ळत्रक्त को काभाख्मा कशा जाता शं औय
कशा जाता शं औय बैयल को बीरुक कशा जाता शं ।                       बैयल को उभानॊद कशा जाता शं ।

13.भाॊगल्म िॊफद्रका                                              18.रसरता (प्रमाग)
बायतीम प्रदे ळ ऩस्द्ळभ फॊगार भं लधाभान स्जरे क सनकट
                                              े                  बायतीम याज्म उत्तयप्रदे ळ क इराशफाद ळशय (प्रमाग) क
                                                                                            े                      े
गुस्कय स्टे ळन वे उज्जमनी नाभक स्थान ऩय स्स्थत शं
     ु                                                           वॊगभ तट ऩय स्स्थत शं भाॉ रसरता ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ       भाता
भाॉ भॊगर िॊफद्रका         ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की दामीॊ कराई    की शाथ की अॉगुरी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को रसरता
सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को भॊगर िॊफद्रका कशा जाता शं               कशा जाता शं औय बैयल को बल कशा जाता शं ।
औय बैयल को कत्रऩराॊफय कशा जाता शं ।
                                                                 19.जमॊती
14.त्रिऩुय वुॊदयी (त्रिऩुया)                                     फाॊग्रादे ळ क सवल्शै ट स्जरे क जमॊतीमा ऩयगना क
                                                                              े                े               े
बायत प्रदे ळ त्रिऩुया क उदयऩुय क सनकट याधाफकळोयऩुय
                       े        े                                बोयबोग गाॉल काराजोय क खावी ऩलात ऩय स्स्थत शं भाॉ
                                                                                      े
गाॉल क भाताफाढ़ी ऩलात सळखय ऩय स्स्थत शं भाॉ त्रिऩुय
      े                                                          जमॊती ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की फामीॊ जॊघा सगयी थी।
वुॊदयी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का दामाॉ ऩैय सगया था। इवकी          इवकी ळत्रक्त को जमॊती कशा जाता शं औय बैयल को
ळत्रक्त को त्रिऩुय वुॊदयी कशा जाता शं औय बैयल को त्रिऩुयेळ       क्रभदीद्वय कशा जाता शं ।
कशा जाता शं ।
                                                                 20.मुगाद्या (बूतधािी)
15.बलानी (िट्टर)                                                 ऩस्द्ळभ फॊगार क लधाभान स्जरे क खीयग्राभ स्स्थत
                                                                                े              े
फाॊग्रादे ळ भं सिट्टागंग (िटगाॉल) स्जरा क वीताकड
                                         े     ुॊ                जुगाड्मा (मुगाद्या) स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ बूतधािी
स्टे ळन क सनकट िॊद्रनाथ ऩलात सळखय छिार (िट्टर मा
         े                                                       ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क दाएॉ ऩैय का अॉगूठा सगया था।
                                                                                        े
िशर) ऩय स्स्थत शं भाॉ बलानी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ        भाता की      इवकी ळत्रक्त को बूतधािी कशा जाता शं औय बैयल को
दामीॊ बुजा सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को बलानी कशा जाता               षीय खॊडक कशा जाता शं ।
शं औय बैयल को िॊद्रळेखय कशा जाता शं ।
                                                                 21.कासरका (कारीऩीठ)
16.भ्राभयी (त्रिस्रोता)                                          कोरकाता     के   कारीघाट    ऩय   स्स्थत   शं   भाॉ कासरका
बायतीम प्रदे ळ ऩस्द्ळभ फॊगार क जरऩाइगुड़ी क फोडा
                              े            े                     ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क फाएॉ ऩैय का अॉगूठा सगया था।
                                                                                        े
भॊडर क वारफाढ़ी ग्राभ स्स्थत त्रिस्रोत स्थान ऩय स्स्थत
      े                                                          इवकी ळत्रक्त को कासरका कशा जाता शं औय बैयल को
शं भाॉ      भ्राभयी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का फामाॉ ऩैय सगया      नकळीर कशा जाता शं ।
                                                                   ु
29                                    अक्टू फय 2011



22.त्रलभरा- फकयीट (बुलनेळी)
                                                             28.दे लगबाा (काॊिी)
ऩस्द्ळभ फॊगार क भुळॉदाफाद स्जरा क रारफाग कोटा योड
               े                 े
                                                             ऩस्द्ळभ फॊगार क फीयबुभ स्जरा क फोरायऩुय स्टे ळन क
                                                                            े              े                  े
स्टे ळन क फकयीटकोण ग्राभ क सनकट स्स्थत शं भाॉ
         े                े
                                                             उत्तय ऩूला स्स्थत कोऩई नदी तट ऩय स्स्थत शं भाॉ दे लगबाा
त्रलभरा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का भुकट सगया था। इवकी
                                    ु
                                                             ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की अस्स्थ सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को
ळत्रक्त को त्रलभरा कशा जाता शं औय बैयल को वॊलत्ता कशा
                                                             दे लगबाा कशा जाता शं औय बैयल को रुरु कशा जाता शं ।
जाता शं ।

23.त्रलळाराषी (लायाणवी)                                      29.दे ली कारी (कारभाधल)

उत्तयप्रदे ळ क काळी भं भस्णकस्णाक घाट ऩय स्स्थत शं भाॉ
              े                                              भध्मप्रदे ळ क अभयकटक क कारभाधल स्स्थत ळोन नदी
                                                                          े    ॊ   े

त्रलळाराषी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क कान क भस्णजड़ीत
                                  े     े                    तट क ऩाव स्स्थत शं भाॉ कारी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का
                                                                 े

कडर सगये थे। इवकी ळत्रक्त को त्रलळाराषी भस्णकणॉ कशा
 ुॊ                                                          फामाॉ सनतॊफ सगया था जशाॉ एक गुपा शै । इवकी ळत्रक्त को

जाता शं औय बैयल को कार बैयल कशा जाता शं ।                    कारी कशा जाता शं औय बैयल को असवताॊग कशा जाता
                                                             शं ।
24.वलााणी (कडमाश्रभ)
तसभर नाडु क कडमाश्रभ भं बद्रकारी भॊफदय (कभायी
           े                             ु                   30.नभादा (ळोणदे ळ-ळोणाषी)
भॊफदय) भं स्स्थत शं भाॉ वलााणी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का      भध्मप्रदे ळ क अभयकटक स्स्थत नभादा क उद्गभ ऩय
                                                                          े    ॊ                े
ऩीठ अथाात ऩृद्ष बाग सगया था। इवकी ळत्रक्त को वलााणी          ळोणदे ळ स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ नभादा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ
कशा जाता शं औय बैयल को सनसभऴ कशा जाता शं ।                   भाता का दामाॉ सनतॊफ सगया था। इवकी ळत्रक्त को नभादा
                                                             कशा जाता शं औय बैयल को बद्रवेन कशा जाता शं ।
25.वात्रलिी (करुषेि)
              ु
शरयमाणा क करुषेि भं स्स्थत शं भाॉ वात्रलिी ळत्रक्तऩीठ,
         े ु                                                 31.सळलानी (याभसगरय)
मशाॉ भाता की एड़ी (गुल्प) सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को           उत्तयप्रदे ळ क झाॉवी-भस्णकऩुय ये रले स्टे ळन सििकट क
                                                                           े                                  ू  े
वात्रलिी कशा जाता शं औय बैयल को स्थाणु कशा जाता शं ।         ऩाव याभसगरय स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ सळलानी ळत्रक्तऩीठ,
                                                             मशाॉ भाता का दामाॉ लष सगया था। इवकी ळत्रक्त को
26. गामिी (भस्णदे त्रलक)                                     सळलानी कशा जाता शं औय बैयल को िॊड कशा जाता शं ।
अजभेय क सनकट ऩुष्कय क भस्णफडध स्थान क गामिी
       े             े               े
ऩलात ऩय स्स्थत शं भाॉ गामिी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क दो
                                                   े         32.उभा (लृॊदालन)
भस्णफॊध सगये थे। इवकी ळत्रक्त को गामिी कशा जाता शं           उत्तयप्रदे ळ क भथुया क सनकट लृॊदालन क बूतेद्वय स्थान
                                                                           े       े              े
औय बैयल को वलाानॊद कशा जाता शं ।                             ऩय स्स्थत शं भाॉ उभा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क गुच्छ कशा
                                                                                                         े
                                                             जाता शं औय िूड़ाभस्ण सगये थे। इवकी ळत्रक्त को उभा
27.भशारक्ष्भी (श्री ळैर)                                     कशा जाता शं औय बैयल को बूतेळ कशा जाता शं ।
फाॊग्रादे ळ क सवल्शै ट स्जरे क उत्तय-ऩूला भं जैनऩुय गाॉल
             े                े                                        फकवी बी प्रकाय की वभस्मा के
क ऩाव ळैर नाभक स्थान ऩय
 े                               स्स्थत शं भाॉ भशारक्ष्भी
                                                                           वभाधान शे तु वॊऩक कयं ।
                                                                                            ा
ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का गरा (ग्रीला) सगया था। इवकी
ळत्रक्त को भशारक्ष्भी कशा जाता शं       औय     बैयल को
                                                                      GURUTVA KARYALAY
                                                             Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
ळम्फयानॊद कशा जाता शं ।
30                                        अक्टू फय 2011



33.नायामणी (ळुसि)                                            कऩासरनी (बीभरूऩ) कशा जाता शं औय बैयल को ळलाानॊद
तसभरनाडु      के    कडमाकभायी-सतरुलनॊतऩुयभ
                         ु                    भागा    ऩय     कशा जाता शं ।
ळुसितीथाभ सळल भॊफदय शै , जशाॉ ऩय स्स्थत शं भाॉ नायामणी
                                                             38.प्रबाव- िॊद्रबागा
ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की ऊऩयी दॊ त (ऊध्लादॊत) सगये थे।
                                                             गुजयात क जूनागढ़ स्जरे भं स्स्थत वोभनाथ भॊफदय क
                                                                     े                                      े
इवकी ळत्रक्त को नायामणी कशा जाता शं औय बैयल को
                                                             सनकट लेयालर स्टे ळन क सनकट प्रबाव षेि भं स्स्थत शं
                                                                                  े
वॊशाय कशा जाता शं ।
                                                             भाॉ िॊद्रबागा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का उदय सगया था।
34.लायाशी (ऩॊिवागय)                                          इवकी ळत्रक्त को िॊद्रबागा कशा जाता शं औय बैयल को
शरयद्राय क वभीऩ ऩॊिकड भशावागय ऩय स्स्थत शं भाॉ
          े         ुॊ                                       लक्रतुॊड कशा जाता शं ।
लायाशी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की सनिरे दॊ त (अधोदॊ त)
                                                             39.अलॊसत (बैयलऩलात)
सगये थे। इवकी ळत्रक्त को लयाशी कशा जाता शं औय बैयल
                                                             भध्मप्रदे ळ क उज्जैन नगय भं सळप्रा नदी क तट क ऩाव
                                                                          े                          े    े
को भशारुद्र कशा जाता शं । (नोट: फशभािर प्रदे ळ के
                                                             बैयल ऩलात ऩय स्स्थत शं भाॉ अलॊसत ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता
काॊगड़ा भं बी दे ली को लायाशी ळत्रक्तऩीठ क रुऩ भं ऩूजा
                                          े
                                                             क ओद्ष सगये थे। इवकी ळत्रक्त को अलॊसत कशा जाता शं
                                                              े
जाता शं ।)
                                                             औय बैयल को रम्फकणा कशा जाता शं ।
35.अऩणाा (कयतोमातट)
                                                             40.भ्राभयी (जनस्थान)
फाॊग्रादे ळ क ळेयऩुय फागुया स्टे ळन वे थोडी दय बलानीऩुय
             े                               ू
                                                             भशायाद्स क नासवक नगय स्स्थत गोदालयी नदी घाटी
                                                                       े
गाॉल क ऩाय कयतोमा तट स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ अऩणाा
      े
                                                             स्स्थत जनस्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ भ्राभयी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ
ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की ऩामर (तल्ऩ) सगयी थी। इवकी
                                                             भाता की ठोड़ी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को भ्राभयी कशा
ळत्रक्त को अऩाण कशा जाता शं औय बैयल को लाभन कशा
                                                             जाता शं औय बैयल शै त्रलकृ ताष।
जाता शं ।
                                                             41.त्रलद्वभात्रिका (वलाळैर स्थान)
36.श्रीवुॊदयी (श्रीऩलात)
                                                             आॊध्रप्रदे ळ क याजाभुॊद्री षेि स्स्थत कोफटसरॊगेद्वय भॊफदय क
                                                                           े                                            े
कश्भीय क रद्दाख षेि क ऩलात ऩय स्स्थत शं भाॉ श्री
        े            े
                                                             ऩाव वलाळैर स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ यफकनी ळत्रक्तऩीठ,
वुॊदयी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क दाएॉ ऩैय की ऩामर सगयी
                              े
                                                             मशाॉ भाता क लाभ गॊड (गार) सगये थे। इवकी ळत्रक्त को
                                                                        े
थी। इवकी ळत्रक्त को श्रीवुॊदयी कशा जाता शं औय बैयल को        याफकनी कशा जाता शं औय बैयल को लत्वनाबभ कशते शं '
वुॊदयानॊद कशा जाता शं । (नोट: दवयी भाडमता अनुवाय
                               ू
                                                             42.त्रलद्वेद्वयी (गोदालयीतीय)
आॊध्रप्रदे ळ क कनूर स्जरे क श्रीळैरभ स्थान ऩय दस्षण
              े ु ा        े
                                                             गोदालयी नदी क तट ऩय कब्फुयरा कोफट सतथा क सनकट
                                                                          े       ु                  े
गुल्प अथाात दाएॉ ऩैय की एड़ी सगयी थी। )
                                                             स्थर ऩय स्स्थत शं भाॉ त्रलद्वेद्वयी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ मशाॉ भाता
                                                             क दस्षण गॊड सगये थे। इवकी ळत्रक्त को त्रलद्वेद्वयी कशा
                                                              े
37.कऩासरनी (त्रलबाऴ)
                                                             जाता शं औय बैयल को दॊ डऩास्ण कशा जाता शं ।
ऩस्द्ळभ फॊगार क स्जरा ऩूलॉ भेफदनीऩुय क ऩाव ताभरुक
               े                      े
                                                                 यासळ यत्न एलॊ उऩयत्न धायण कयने शे तु वॊऩक कयं ।
                                                                                                          ा
स्स्थत त्रलबाऴ स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ कऩासरनी ळत्रक्तऩीठ,
मशाॉ भाता की फामीॊ एड़ी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को
                                                                      GURUTVA KARYALAY
                                                                 Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
31                                        अक्टू फय 2011



43.कभायी (यत्नालरी)
    ु                                                     (भन:) सगया था। इवकी ळत्रक्त को भफशऴभफदा नी कशा

फॊगार क शुगरी स्जरे क खानाकर कृ ष्णानगय भागा ऩय
       े             े     ु                              जाता शं औय बैयल को लक्रनाथ कशा जाता शं ।

यत्नालरी स्स्थत यत्नाकय नदी क तट ऩय स्स्थत शं भाॉ
                             े
                                                          48.मळोये द्वयी (मळोय)
कभायी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का दामाॉ स्कध सगया था।
 ु                                      ॊ
                                                          फाॊग्रादे ळ क खुरना स्जरा क ईद्वयीऩुय क मळोय स्थान
                                                                       े             े           े
इवकी ळत्रक्त को कभायी कशा जाता शं औय बैयल को सळल
                 ु
                                                          ऩय स्स्थत शं भाॉ मळोये द्वयी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ   भाता क शाथ
                                                                                                                े
कशा जाता शं ।
                                                          औय ऩैय सगये (ऩास्णऩद्म) थे। इवकी ळत्रक्त को मळोये द्वयी
44.उभा-भशादे ली (सभसथरा)                                  कशा जाता शं औय बैयल को िण्ड कशा जाता शं ।

बायत-नेऩार वीभा ऩय जनकऩुय ये रले स्टे ळन क सनकट
                                          े
                                                          49.पल्रया (अट्टाशाव)
                                                              ु
सभसथरा भं स्स्थत शं भाॉ उभा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ   भाता का
                                                          ऩस्द्ळभ फॊगरा क राबऩुय स्टे ळन वे दो फकभी दय
                                                                         े                           ू
फामाॉ स्कध सगया था। इवकी ळत्रक्त को उभा कशा जाता शं
         ॊ
                                                          अट्टशाव स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ पल्रया ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ
                                                                                          ु
औय बैयल को भशोदय कशा जाता शं ।
                                                          भाता क ओद्ष सगये थे। इवकी ळत्रक्त को पल्रया कशा
                                                                े                               ु

45.कासरका तायाऩीठ (नरशाटी)                                जाता शं औय बैयल को त्रलद्वेळ कशा जाता शं ।

ऩस्द्ळभ फॊगार क लीयबूभ स्जरे क नरशाफट स्टे ळन क
               े              े                े
                                                          50.नॊफदनी (नॊदीऩूय)
सनकट नरशाटी भं स्स्थत शं भाॉ कासरका दे ली ळत्रक्तऩीठ,
                                                          ऩस्द्ळभ फॊगार क लीयबूभ स्जरे क वंसथमा ये रले स्टे ळन
                                                                         े              े
मशाॉ   भाता क ऩैय की शड्डी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को
             े
                                                          नॊदीऩुय स्स्थत िायदीलायी भं फयगद क लृष क वभीऩ
                                                                                            े     े
कासरका दे ली कशा जाता शं औय बैयल को मोगेळ कशा             स्स्थत शं भाॉ नॊफदनी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का गरे का शाय
जाता शं ।                                                 सगया था। इवकी ळत्रक्त को नॊफदनी कशा जाता शं औय
                                                          बैयल को नॊफदकद्वय कशा जाता शं ।
                                                                       े
46.जमदगाा (कणााट)
      ु
                                                          51.इॊ द्राषी (श्रीरॊका)
कनााट भं जमदगाा नाभ वे प्रसवद्ध स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ
            ु
                                                          श्रीरॊका भं त्रिॊकोभारी भं स्स्थत शं भाॉ इॊ द्राषी ळत्रक्तऩीठ,
जमदगाा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ
   ु                        भाता क दोनं कान सगये थे।
                                  े
                                                          मशाॉ भाता की ऩामर सगयी थी (त्रिॊकोभारी भं प्रसवद्ध
इवकी ळत्रक्त को जमदगाा कशा जाता शं औय बैयल को
                   ु
                                                          त्रिकोणेद्वय भॊफदय क सनकट)। इवकी ळत्रक्त को इॊ द्राषी
                                                                              े
असबरु कशा जाता शं ।
                                                          कशा जाता शं औय बैयल को याषवेद्वय कशा जाता शं ।

47.भफशऴभफदा नी (लक्रद्वय)
                   े                                      52.त्रलयाट- अॊत्रफका
ऩस्द्ळभ फॊगार क लीयबूभ स्जरे क दफयाजऩुय स्टे ळन वे
               े              े ु                         याजस्थान भं जमऩुय वे थोडी दय उत्तय भं लैयाट गाॊल भं
                                                                                     ू
वात फकभी दय लक्रद्वय भं ऩाऩशय नदी क तट ऩय स्स्थत
          ू    े                   े                      स्स्थत शं भाॉ अॊत्रफका ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क ऩैय की
                                                                                                        े

शं भाॉ भफशऴभफदा नी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ   भाता का भ्रूभध्म    अॉगुरी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को अॊत्रफका कशा जाता शं
                                                          औय बैयल को अभृत कशा जाता शं ।
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                                                  ॥दगाा िारीवा॥
                                                    ु
नभो नभो दगे वुख कयनी।
         ु                               भफशभा असभत नजात फखानी॥१४॥       ध्माले तुम्शं जो नय भन राई।
नभो नभो दगे द्ख शयनी ॥१॥
         ु   ु                           भातॊगी अरु धूभालसत भाता।                      ु
                                                                         जडभ-भयण ताकौ छफट जाई॥२८॥
सनयॊ काय शै ज्मोसत तुम्शायी।             बुलनेद्वयी फगरा वुख दाता॥१५॥    जोगी वुय भुसन कशत ऩुकायी।
सतशूॉ रोक परी उस्जमायी ॥२॥
           ै                                                             मोगन शो त्रफन ळत्रक्त तुम्शायी॥२९॥
                                         श्री बैयल ताया जग तारयणी।
ळसळ रराट भुख भशात्रलळारा।                                                ळॊकय आिायज तऩ कीनो।
                                         सछडनबारबल द्खसनलारयणी॥१६॥
                                                    ु
नेि रार बृकफट त्रलकयारा ॥३॥
           ु                                                             काभअरु क्रोधजीसत वफ रीनो॥३०॥
                                         कशरय लाशन वोश बलानी।
                                          े
रूऩ भातु को असधक वुशाले।
                                         राॊगुय लीय िरत अगलानी॥१७॥       सनसळफदन ध्मान धयो ळॊकय को।
दयळकयत जन असत वुखऩाले ॥४॥
                                         कय भं खप्ऩय खड्ग त्रलयाजै।      काशुकार नफशॊ वुसभयो तुभको॥३१॥
तुभ वॊवाय ळत्रक्त रै कीना।
                                         जाको दे ख कार डय बाजै॥१८॥       ळत्रक्त रूऩ का भयभ न ऩामो।
ऩारन शे तु अडन धन दीना ॥५॥
                                         वोशै अस्त्र औय त्रिळूरा।        ळत्रक्त गई तफ भन ऩसछतामो॥३२॥
अडनऩूणाा शुई जग ऩारा।                    जाते उठत ळिु फशम ळूरा॥१९॥       ळयणागत शुई कीसता फखानी।
तुभ शी आफद वुडदयी फारा ॥६॥               नगयकोट भं तुम्शीॊ त्रलयाजत।     जम जम जम जगदम्फबलानी॥३३॥
प्ररमकार वफ नाळन शायी।                   सतशुॉरोक भं डॊ का फाजत॥२०॥      बई प्रवडन आफद जगदम्फा।
तुभ गौयी सळलळॊकय प्मायी ॥७॥                                              दई ळत्रक्त नफशॊ कीन त्रलरम्फा॥३४॥
                                         ळुम्ब सनळुम्ब दानल तुभ भाये ।
सळल मोगी तुम्शये गुण गालं।                                               भोको भातु कद्श असत घेयो।
                                         यक्तफीज ळॊखन वॊशाये ॥२१॥
ब्रह्मा त्रलष्णु तुम्शं सनत ध्मालं ॥८॥                                   तुभ त्रफन कौन शयै द्ख भेयो॥३५॥
                                                                                            ु
                                         भफशऴावुय नृऩ असत असबभानी।
रूऩ वयस्लती को तुभ धाया।
                                                                         आळा तृष्णा सनऩट वतालं।
                                         जेफश अघ बाय भशी अकरानी॥२२॥
                                                           ु
दे वुफुत्रद्ध ऋत्रऴ भुसनन उफाया ॥९॥
                                                                         भोश भदाफदक वफ त्रफनळालं॥३६॥
                                         रूऩ कयार कासरका धाया।
धयमो रूऩ नयसवॊश को अम्फा।
                                                                         ळिु नाळ कीजै भशायानी।
                                         वेन वफशत तुभ सतफश वॊशाया॥२३॥
ऩयगट बई पाड़कय खम्फा ॥१०॥
                                                                         वुसभयं इकसित तुम्शं बलानी॥३७॥
                                         ऩयी गाढ़ वडतन ऩय जफ जफ।
                                                                         कयो कृ ऩा शे भातु दमारा।
यषा करय प्रह्ऱाद फिामो।                  बईवशाम भातु तुभ तफ तफ॥२४॥
                                                                         ऋत्रद्ध-सवत्रद्ध दै कयशु सनशारा।३८॥
फशयण्माष को स्लगा ऩठामो॥११॥              अभयऩुयी अरु फावल रोका।
                                                                         जफ रसग स्जऊ दमा पर ऩाऊ।
                                                                                    ॉ          ॉ
रक्ष्भी रूऩ धयो जग भाशीॊ।                तफ भफशभा वफ यशं अळोका॥२५॥
                                                                         तुम्शयो मळ भं वदा वुनाऊ॥३९॥
                                                                                                ॉ
श्री नायामण अॊग वभाशीॊ॥१२॥
                                         ज्लारा भं शै ज्मोसत तुम्शायी।   श्री दगाा िारीवा जो कोई गालै।
                                                                               ु
षीयसवडधु भं कयत त्रलरावा।
                                         तुम्शं वदा ऩूजं नय-नायी॥२६॥     वफ वुख बोग ऩयभऩद ऩालै॥४०॥
दमासवडधु दीजै भन आवा॥१३॥
                                         प्रेभ बत्रक्त वे जो मळ गालं।    दोशा: दे लीदाव ळयण सनज जानी।
फशॊ गराज भं तुम्शीॊ बलानी।
                                         द्ख दारयद्र सनकट नफशॊ आलं॥२७॥
                                          ु                              कयशु कृ ऩा जगदम्फ बलानी॥
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                                               श्रीकृ ष्ण कृ त दे ली स्तुसत
        नलयाि भं श्रद्धा औय प्रेभऩूलक भशाळत्रक्त बगलती दे ली की ऩूजा-उऩावना कयने वे मश सनगुण स्लरूऩा दे ली ऩृ्ली क वभस्त
                                    ा                                                      ा                      े
जीलं ऩय दमा कयक स्लमॊ शी वगुणबाल को प्राद्ऱ शोकय ब्रह्मा, त्रलष्णु औय भशे ळ रूऩ वे उत्ऩत्रत्त, ऩारन औय वॊशाय कामा कयती शं ।
               े

श्रीकृ ष्ण उलाि
त्लभेल वलाजननी भूरप्रकृ सतयीद्वयी। त्लभेलाद्या वृत्रद्शत्रलधौ स्लेच्छमा त्रिगुणास्त्भका॥१॥
कामााथे वगुणा त्लॊ ि लस्तुतो सनगुणा स्लमभ ्। ऩयब्रह्मास्लरूऩा त्लॊ वत्मा सनत्मा वनातनी॥२॥
                                 ा
तेज्स्लरूऩा ऩयभा बक्तानुग्रशत्रलग्रशा। वलास्लरूऩा वलेळा वलााधाया ऩयात्ऩय॥३॥
वलाफीजस्लरूऩा ि वलाऩूज्मा सनयाश्रमा। वलासा वलातोबद्रा वलाभॊगरभॊगरा॥४॥
अथाात् आऩ त्रलद्वजननी भूर प्रकृ सत ईद्वयी शो, आऩ वृत्रद्श की उत्ऩत्रत्त क वभम आद्याळत्रक्त क रूऩ भं त्रलयाजभान यशती शो औय
                                                                         े                  े
स्लेच्छा वे त्रिगुणास्त्भका फन जाती शो।

मद्यत्रऩ लस्तुत् आऩ स्लमॊ सनगुण शो तथात्रऩ प्रमोजनलळ वगुण शो जाती शो। आऩ ऩयब्रह्म स्लरूऩ, वत्म, सनत्म एलॊ वनातनी शो।
                              ा

ऩयभ तेजस्लरूऩ औय बक्तं ऩय अनुग्रश कयने आऩ ळयीय धायण कयती शं। आऩ वलास्लरूऩा, वलेद्वयी, वलााधाय एलॊ ऩयात्ऩय शो। आऩ
वलााफीजस्लरूऩ, वलाऩूज्मा एलॊ आश्रमयफशत शो। आऩ वलास, वलाप्रकाय वे भॊगर कयने लारी एलॊ वला भॊगरं फक बी भॊगर शो।



                                                  ऋग्लेदोक्त दे ली वूक्तभ ्
अशसभत्मद्शिास्म वूक्त स्म लागाम्बृणी ऋत्रऴ: वस्च्ित्वुखात्भक: वलागत: ऩयभात्भा दे लता,
फद्रतीमामा ऋिो जगती, सळद्शानाॊ त्रिद्शु ऩ ् छडद:, दे लीभाशात्म्म ऩाठे त्रलसनमोग्।
ध्मानभ ्
सवॊशस्था ळसळळेखया भयकतप्रख्मैद्ळतुसबाबजै: ळङ्खॊ िक्रधनु:ळयाॊद्ळ दधती नेिस्स्त्रसब: ळोसबता।
                                      ुा                                ै
आभुक्ताङ्गदशायकङ्कणयणत्काछिीयणडनूऩुया दगाा दगसतशारयणी बलतु नो यत्नोल्रवत्कण्डरा॥
                                       ु    ु ा                           ु


दे लीवूक्तभ ्
अशॊ रुद्रे सबलावुसबद्ळयाम्मशभाफदत्मैरुत त्रलद्वदे लै्। अशॊ सभिालरुणोबा त्रफबम्माशसभडद्राग्नी अशभसश्र ्लनोबा॥१॥
अशॊ वोभभाशनवॊ त्रफबम्माशॊ त्लद्शायभुत ऩूऴणॊ बगभ ्। अशॊ दधासभ द्रत्रलणॊ शत्रलष्भते वुप्राव्मे मजभानाम वुडलते॥२॥
अशॊ याद्सी वॊगभनी लवूनाॊ सिफकतुऴी प्रथभा मस्समानाभ ्। ताॊ भा दे ला व्मदधु: ऩुरुिा बूरयस्थािाॊ बूय्र्मालेळमडतीभ ्॥३॥
भमावो अडनभत्रत्त मोत्रलऩश्मसत म: प्रास्णसत मईश्रृणोत्मुक्त भ ्। अभडतलो भाॊ तउऩ स्षमस्डत श्रुसधश्रुत श्रत्रद्धलॊ ते लदासभ॥४॥
अशभेल स्लमसभदॊ लदासभ जुद्शॊ दे लेसबरुत भानुऴेसब्। मॊ काभमे तॊ तभुग्रॊ कृ णोसभ तॊ ब्रह्माणॊ तभृत्रऴॊ तॊ वुभेधाभ ्॥५॥
अशॊ रुद्राम धनुया तनोसभ ब्रह्मफद्रऴे ळयले शडतला उ। अशॊ जनाम वभदॊ कृ णोम्मशॊ द्यालाऩृसथलीआत्रललेळ॥६॥
अशॊ वुले त्रऩतयभस्म भूधडभभ मोसनयप्स्लडत: वभुद्रे। ततो त्रल सतद्षे बुलनानु त्रलद्वोताभूॊ द्याॊ लष्भाणोऩ स्ऩळसभ॥७॥
                       ा
अशभेल लात इल प्रलाम्मायबभाणा बुलनासन त्रलद्वा। ऩयो फदला ऩय एना ऩृसथव्मैतालती भफशना वॊफबूल॥८॥
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                        वप्तश्र्लरोकी दगाा
                                       ु                                                     दगाा आयती
                                                                                              ु
दे त्रल त्लॊ बक्तवुरबे वलाकामात्रलधासमनी।                                 जम अम्फे गौयी भैमा जम श्माभा गौयी।
करौ फश कामासवद्धमथाभुऩामॊ ब्रूफश मित्॥                                    तुभको सनवफदन ध्मालत शरय ब्रम्शा सळलयी॥१॥
दे ल उलाि:                                                                भाॊग सवॊदय त्रलयाजत टीको भृगभदको।
                                                                                   ू
श्रृणु दे ल प्रलक्ष्मासभ करौ वलेद्शवाधनभ।
                                        ्                                 उज्जलर वे दोऊ नैना िडद्रलदन नीको॥२॥
भमा तलैल स्नेशेनाप्मम्फास्तुसत् प्रकाश्मते॥
                                                                          कनक वभान करेलय यक्ताम्फय याजे।
त्रलसनमोग्
                                                                          यक्त ऩुष्ऩ गर भारा कण्ठन ऩय वाजे॥३॥
ॐ अस्म श्री दगाावद्ऱद्ऴोकीस्तोिभडिस्म
             ु
                                                                          कशरय लाशन याजत खड्ग खप्ऩय धायी।
                                                                           े
नायामण ऋत्रऴ् अनुद्शऩछडद्,
                     ्
                                                                          वुय नय भुसन जन वेलत सतनक द्ख शायी॥४॥
                                                                                                  े ु
श्रीभह्मकारी भशारक्ष्भी भशावयस्लत्मो दे लता्,
श्रीदगााप्रीत्मथं वद्ऱद्ऴोकीदगााऩाठे त्रलसनमोग्।
     ु                       ु                                            कानन कडर ळोसबत नावाग्रे भोती।
                                                                                ुॊ

ॐ सासननाभत्रऩ िेताॊसव दे ली बगलती फशवा।                                   कोफटक िॊद्र फदलाकय याजत वभ ज्मोसत॥५॥

फरादाकृ ष्म भोशाम भशाभामा प्रमच्छसत॥                                      ळुॊब सनळॊबु त्रलदाये भफशऴावुयधाती।
                                                                          धूम्रत्रलरोिन नैना सनळफदन भदभाती॥६॥
दगे स्भृता शयसव बीसतभळेऴजडतो्
 ु
स्लस्थै् स्भृता भसतभतील ळुबाॊ ददासव।                                      िण्ड भुण्ड वॊशाये ळोस्णत फीज शये ।
                                                                          भधु कटब दोउ भाये वुय बमशीन कये ॥७॥
                                                                               ै
दारयद्रमद्खबमशारयस्ण त्लदडमा
         ु
                                                                          ब्रम्शाणी रुद्राणी तुभ कभरायानी।
वलोऩकायकयणाम वदाद्रा सित्ता॥
                                                                          आगभ सनगभ फखानी तुभ सळल ऩटयानी॥८॥
वलाभॊगरभॊगल्मे सळले वलााथवासधक।
                         ा    े
ळयण्मे त्र्मम्फक गौरय नायामस्ण नभोऽस्तुते॥
                े                                                         िौवॊठ मोसगनी गालत नृत्म कयत बैरुॉ।

ळयणागतदीनाताऩरयिाणऩयामणे।                                                 फाजत तार भृदॊगा अरु डभरुॉ ॥९॥
वलास्मासताशये दे त्रल नायामस्ण नभोऽस्तुते॥                                तुभ शी जग की भाता तुभ शी शो बयता।

वलास्लरूऩे वलेळे वलाळत्रक्तवभस्डलते।                                      बक्तन की द्खशताा वुख वम्ऩत्रत्त कताा॥१०॥
                                                                                    ु
बमेभ्मस्त्राफश नो दे त्रल दगे दे त्रल नभोऽस्तुते॥
                           ु                                              बुजा िाय असत ळोसबत लय भुद्रा धायी।
                                                                          भनलाॊस्च्छत पर ऩाले वेलत नय नायी॥११॥
योगानळोऴानऩशॊ सव तुद्शा रूद्शा तु काभान ् वकरानबीद्शान।
                                                      ्
त्लाभासश्रतानाॊ न त्रलऩडनयाणाॊ त्लाभासश्रता ह्माश्रमताॊ प्रमास्डत॥        किन थार त्रलयाजत अगय कऩुय फात्ती।
                                                                           ॊ
                                                                          श्री भार कतु भं याजत कोफट यतन ज्मोती॥१२॥
                                                                                    े
वलााफाधाप्रळभनॊ िैरोक्मस्मास्खरेश्र्ललरय।
एलभेल त्लमा कामाभस्मद्रै रयत्रलनाळनभ॥
                                    ्                                     भाॉ अम्फे जी की आयती जो कोई नय गामे।
                                                                          कशत सळलानॊद स्लाभी वुख वॊऩत्रत्त ऩामे॥१३॥
॥ इसत श्रीवद्ऱद्ऴोकी दगाा वॊऩूणभ ् ॥
                      ु        ा
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                                                     ॥ सवद्धकस्जकास्तोिभ ् ॥
                                                             ुॊ
सळल उलाि                                                                    ऐॊकायी वृत्रद्शरूऩामै ह्रीॊकायी प्रसतऩासरका।
ळृणु दे त्रल प्रलक्ष्मासभ कस्जकास्तोिभुत्तभभ।
                           ुॊ               ्                               क्रीॊकायी काभरूत्रऩण्मै फीजरूऩे नभोऽस्तु ते॥३॥
मेन भडिप्रबालेण िण्डीजाऩ् ळुबो बलेत॥१॥
                                   ्                                        िाभुण्डा िण्डघाती ि मैकायी लयदासमनी॥४॥
न कलिॊ नागारास्तोिॊ कीरक न यशस्मकभ।
                        ॊ         ्                                         त्रलच्िे िाबमदा सनत्मॊ नभस्ते भॊिरूत्रऩस्ण।
न वूक्त नात्रऩ ध्मानॊ ि न डमावो न ि लािानभ॥२॥
      ॊ                                   ्                                 धाॊ धीॊ धूॊ धूजटे् ऩत्नी लाॊ लीॊ लूॊ लागधीद्वयी॥५॥
                                                                                           ा
कस्जकाऩाठभािेण दगााऩाठपरॊ रबेत।
 ुॊ             ु             ्                                             क्राॊ क्रीॊ क्र कासरका दे त्रल ळाॊ ळीॊ ळूॊ भे ळुबॊ करु॥६॥
                                                                                          ूॊ                                    ु
असत गुह्यतयॊ दे त्रल दे लानाभत्रऩ दरबभ॥३॥
                                   ु ा ्                                    शुॊ शुॊ शुॊकायरूत्रऩण्मै जॊ जॊ जॊ जम्बनाफदनी।
गोऩनीमॊ प्रमत्नेन स्लमोसनरयल ऩालासत।                                        भ्राॊ भ्रीॊ भ्रूॊ बैयली बद्रे बलाडमै ते नभो नभ्
भायणॊ भोशनॊ लश्मॊ स्तम्बनोच्िाटनाफदकभ।
                                     ्                                      अॊ क िॊ टॊ तॊ ऩॊ मॊ ळॊ लीॊ दॊ ु ऐॊ लीॊ शॊ षॊ॥७॥
                                                                                ॊ
ऩाठभािेण वॊसवद्धमेत ् कस्जकास्तोिभुत्तभभ॥४॥
                       ुॊ               ्                                   सधजाग्रॊ सधजाग्रॊ िोटम िोटम दीद्ऱॊ करु करु स्लाशा॥
                                                                                                                ु   ु
अथ भॊि                                                                      ऩाॊ ऩीॊ ऩूॊ ऩालाती ऩूणाा खाॊ खीॊ खूॊ खेियी तथा ॥८॥
ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे। ॐ ग्रं शुॊ क्रीॊ जूॊ व्               वाॊ वीॊ वूॊ वद्ऱळती दे व्मा भॊिसवत्रद्धॊ करुष्ल भे॥
                                                                                                                      ु
ज्लारम ज्लारम ज्लर ज्लर प्रज्लर प्रज्लर ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ                      इदॊ तु कस्जकास्तोिॊ भॊिजागसताशेतले।
                                                                                    ुॊ
िाभुण्डामै त्रलच्िे ज्लर शॊ वॊ रॊ षॊ पट् स्लाशा                             अबक्त नैल दातव्मॊ गोत्रऩतॊ यष ऩालासत॥
                                                                                े
इसत भॊि्                                                                    मस्तु कस्जकमा दे त्रल शीनाॊ वद्ऱळतीॊ ऩठे त।
                                                                                   ुॊ                                 ्
नभस्ते रुद्ररूत्रऩण्मै नभस्ते भधुभफदासन।                                    न तस्म जामते सवत्रद्धययण्मे योदनॊ मथा॥
नभ् कटबशारयण्मै नभस्ते भफशऴाफदा सन॥१॥
     ै
                                                                            । इसत श्री कस्जकास्तोिभ ् वॊऩणभ ् ।
                                                                                        ुॊ               ू ा
नभस्ते ळुम्बशडत्र्मै ि सनळुम्बावुयघासतसन।
जाग्रतॊ फश भशादे त्रल जऩॊ सवद्धॊ करुष्ल भे॥२॥
                                  ु

                                                                दगााद्शकभ ्
                                                                 ु
दगे ऩये सळ ळुबदे सळ ऩयात्ऩये सळ।
 ु                                                ऩूज्मे भशालृऴबलाफशसन भॊगरेसळ।                       भोषेऽस्स्थये त्रिऩुयवुडदरयऩाटरेसळ।
लडद्ये भशे ळदसमतेकरुणाणालसळ।
                         े                        ऩद्मे फदगम्फरय भशे द्वरय काननेसळ।                   भाशे द्वरय त्रिनमने प्रफरे भखेसळ।
स्तुत्मे स्लधे वकरताऩशये वुयेसळ।                  यम्मेधये वकरदे लनुते गमेसळ।                         तृष्णे तयॊ सगस्ण फरे गसतदे ध्रुलेसळ।
कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥१॥
              ु                                   कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩा रसरतेऽस्खरेसळ॥४॥
                                                                ु                                     कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥७॥
                                                                                                                    ु
फदव्मे नुते श्रुसतळतैत्रलाभरे बलेसळ।              श्रद्धे वुयाऽवुयनुते वकरे जरेसळ।                    त्रलद्वम्बये वकरदे त्रलफदते जमेसळ।
कडदऩादायळतमुडदरय भाधलेसळ।                         गॊगे सगयीळदसमते गणनामकसळ।
                                                                        े                             त्रलडध्मस्स्थते ळसळभुस्ख षणदे दमेसळ।
भेधे सगयीळतनमे सनमते सळलेसळ।                      दषे स्भळानसनरमे वुयनामकसळ।
                                                                         े                            भात् वयोजनमने यसवक स्भये सळ।
                                                                                                                        े
कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥२॥
              ु                                   कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥५॥
                                                                ु                                     कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥८॥
                                                                                                                    ु
यावेद्वरय प्रणतताऩशये करेसळ।
                       ु                          ताये कृ ऩाद्रा नमने भधुकटबेसळ।
                                                                          ै                           दगााद्शक ऩठसत म् प्रमत् प्रबाते
                                                                                                       ु      ॊ
धभात्रप्रमे बमशये लयदाग्रगेसळ।                    त्रलद्येद्वये द्वरय मभे सनखराषये सळ।                वलााथदॊ शरयशयाफदनुताॊ लये ण्माभ।
                                                                                                           ा                         ्
लाग्दे लते त्रलसधनुते कभरावनेसळ।                  ऊजे ितु्स्तसन वनातसन भुक्तकसळ।
                                                                             े                        दगां वुऩज्म भफशताॊ त्रलत्रलधोऩिायै ्
                                                                                                       ु      ू
कृ ष्णस्तुतेकरु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥३॥
             ु                                    कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतऽस्खरेसळ॥६॥
                                                                ु                                     प्राप्नोसत लाॊसछतपरॊ न सियाडभनुष्म्॥९॥

                                                                                                      ॥ इसत श्री दगााद्शक वम्ऩूणभ ् ॥
                                                                                                                  ु      ॊ      ा
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                                              ॥ बलाडमद्शकभ ् ॥
न तातो न भाता न फडधुना दाता                                   ककभॉ कवॊगी कफुत्रद्ध कदाव्
                                                               ु    ु     ु         ु
न ऩुिो न ऩुिी न बृत्मो न बताा।                                करािायशीन् कदािायरीन्।
                                                               ु
न जामा न त्रलद्या न लृत्रत्तभाभैल                             कदृत्रद्श् कलाक्मप्रफॊध् वदाऽश
                                                               ु          ु
गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥१॥                          गसतस्त्ल गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥५॥

बलाब्धालऩाये भशाद्खबीरु्
                 ु                                            प्रजेळॊ यभेळॊ भशे ळॊ वुयेळॊ
ऩऩात प्रकाभी प्ररोबी प्रभत्त्।                                फदनेळॊ सनळीथेद्वयॊ ला कदासित।
                                                                                          ्
कवॊवाय-ऩाळ-प्रफद्ध् वदाऽशॊ
 ु                                                            न जानासभ िाऽडमत ् वदाऽशॊ ळयण्मे
गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥२॥                          गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥६॥

न जानासभ दानॊ न ि ध्मान-मोगॊ                                  त्रललादे त्रलऴादे प्रभादे प्रलावे
न जानासभ तॊि न ि स्तोि-भडिभ।
                           ्                                  जरे िाऽनरे ऩलाते ळिुभध्मे।
न जानासभ ऩूजाॊ न ि डमावमोगॊ                                   अयण्मे ळयण्मे वदा भाॊ प्रऩाफश
गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥३॥                          गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥७॥

न जानासभ ऩुण्मॊ न जानासन तीथं                                 अनाथो दरयद्रो जया-योगमुक्तो
न जानासभ भुत्रक्त रमॊ ला कदासित।
                ॊ              ्                              भशाषीणदीन् वदा जाड्मलक्ि्।
न जानासभ बत्रक्त व्रतॊ लाऽत्रऩ भात-                           त्रलऩत्तौ प्रत्रलद्श् प्रणद्श् वदाऽशॊ
गासतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥४॥                         गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥८॥

                                                              ॥ इसत श्रीबलाडमद्शक वॊऩूणभ ् ॥
                                                                                 ॊ     ा


                                                  षभा-प्राथाना
            अऩयाधवशस्त्रास्ण फक्रमडतेऽशसनाळॊ भमा। दावोऽमसभसत भाॊ भत्ला षभस्ल ऩयभेद्वरय॥१॥
         आलाशनॊ न जानासभ न जानासभ त्रलवजानभ ्। ऩूजाॊ िैल न जानासभ षम्मताॊ ऩयभेद्वरय॥२॥
              भडिशीनॊ फक्रमाशीनॊ बत्रक्तशीनॊ वुयेद्वरय। मत्ऩूस्जतॊ भमा दे त्रल ऩरयऩूणा तदस्तु भे॥३॥
          अऩयाधळतॊ कृ त्ला जगदम्फेसत िोच्िये त ्। माॊ गसतॊ वभलाऩनेसत न ताॊ ब्रह्मादम: वुया्॥४॥
         वाऩयाधोऽस्स्भ ळयणॊ प्राद्ऱस्त्लाॊ जगदस्म्फक। इदानीभनुकम्प्मोऽशॊ मथेच्छसव तथा करु॥५॥
                                                    े                                  ु
          असानाफद्रस्भृतेभ्रराडत्मा मडडमूनभसधक कृ तभ ्। तत्वला षम्मताॊ दे त्रल प्रवीद ऩयभेद्वरय॥६॥
                                              ॊ
            काभेद्वरय जगडभात: वस्च्िदानडदत्रलग्रशे । गृशाणािाासभभाॊ प्रीत्मा प्रवीद ऩयभेद्वरय॥७॥
          गुह्यासतगुह्यगोप्िी त्लॊ गृशाणास्भत्कृ तॊ जऩभ ्। सवत्रद्धबालतु भे दे त्रल त्लत्प्रवादात्वुयेद्वरय॥८॥
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                                            दगााद्शोत्तय ळतनाभ स्तोिभ ्
                                             ु
ळतनाभ प्रलक्ष्मासभ ळृणुष्ल कभरानने।                         अनेकळस्त्रशस्ता ि अनेकास्त्रस्म धारयणी।
मस्म प्रवादभािेण दगाा प्रीता बलेत ् वती॥१॥
                  ु                                         कभायी िैककडमा ि कळोयी मुलती मसत्॥१२॥
                                                             ु               ै
वती वाध्ली बलप्रीता बलानी बलभोिनी।                          अप्रौढा िैल प्रौढा ि लृद्धभाता फरप्रदा।
आमाा दगाा जमा िाद्या त्रिनेिा ळूरधारयणी॥२॥
      ु                                                     भशोदयी भुक्त कळी घोयरूऩा भशाफरा॥१३॥
                                                                          े
त्रऩनाकधारयणी सििा िण्डघण्टा भशातऩा्।                       अस्ग्नज्लारा यौद्रभुखी कारयात्रिस्तऩस्स्लनी।
भनो फुत्रद्धयशॊ काया सित्तरूऩा सिता सिसत्॥३॥                नायामणी बद्रकारी त्रलष्णुभामा जरोदयी॥१४॥
वलाभडिभमी वत्ता वत्मानडदस्लरूत्रऩणी।                        सळलदती कयारी ि अनडता ऩयभेद्वयी।
                                                                ू
अनडता बात्रलनी बाव्मा बव्माबव्मा वदागसत्॥४॥                 कात्मामनी ि वात्रलिी प्रत्मषा ब्रह्मलाफदनी॥१५॥
ळाम्बली दे लभाता ि सिडता यत्नत्रप्रमा वदा।                  म इदॊ प्रऩठे स्डनत्मॊ दगाानाभळताद्शकभ ्।
                                                                                   ु
वलात्रलद्या दषकडमा दषमसत्रलनासळनी॥५॥                        नावाध्मॊ त्रलद्यते दे त्रल त्रिऴु रोकऴु ऩालासत॥१६॥
                                                                                                 े
अऩणाानेकलणाा ि ऩाटरा ऩाटरालती।                              धनॊ धाडमॊ वुतॊ जामाॊ शमॊ शस्स्तनभेल ि।
ऩट्टाम्फयऩयीधाना करभछजीययस्छजनी॥६॥                          ितुलगा तथा िाडते रबेडभुत्रक्त ि ळाद्वतीभ ्॥१७॥
                                                                ा                       ॊ
अभेमत्रलक्रभा क्रया वुडदयी वुयवुडदयी।
                ू                                           कभायीॊ ऩूजसमत्ला तु ध्मात्ला दे लीॊ वुयेद्वयीभ ्।
                                                             ु
लनदगाा ि भातङ्गी भतङ्गभुसनऩूस्जता॥७॥
   ु                                                        ऩूजमेत ् ऩयमा बक्त्मा ऩठे डनाभळताद्शकभ ्॥१८॥
ब्राह्मी भाशे द्वयी िैडद्री कौभायी लैष्णली तथा।             तस्म सवत्रद्धबालेद् दे त्रल वलै: वुयलयै यत्रऩ।
िाभुण्डा िैल लायाशी रक्ष्भीद्ळ ऩुरुऴाकृ सत्॥८॥              याजानो दावताॊ मास्डत याज्मसश्रमभलाऩनुमात ्॥१९॥
त्रलभरोत्कत्रऴणी साना फक्रमा सनत्मा ि फुत्रद्धदा।
              ा                                             गोयोिनारक्त ककङ्कभेन सवडदयकऩूयभधुिमेण।
                                                                          ु ु        ू   ा
फशुरा फशुरप्रेभा वलालाशनलाशना॥९॥                            त्रलसरख्म मडिॊ त्रलसधना त्रलसधसो बलेत ् वदा धायमते
सनळुम्बळुम्बशननी भफशऴावुयभफदा नी।                           ऩुयारय्॥२०॥
भधुकटबशडिी ि िण्डभुण्डत्रलनासळनी॥१०॥
    ै                                                       बौभालास्मासनळाभग्रे िडद्रे ळतसबऴाॊ गते।
वलाावुयत्रलनाळा ि वलादानलघासतनी।                            त्रलसरख्म प्रऩठे त ् स्तोिॊ व बलेत ् वम्ऩदाॊ ऩदभ ्॥२१॥
वलाळास्त्रभमी वत्मा वलाास्त्रधारयणी तथा॥११॥



                                                  ळादी वॊफॊसधत वभस्मा
   क्मा आऩक रडक-रडकी फक आऩकी ळादी भं अनालश्मक रूऩ वे त्रलरम्फ शो यशा शं मा उनक लैलाफशक जीलन भं खुसळमाॊ कभ
           े   े                                                              े
   शोती जायशी शं औय वभस्मा असधक फढती जायशी शं । एवी स्स्थती शोने ऩय अऩने रडक-रडकी फक कडरी का
                                                                            े         ुॊ
   अध्ममन अलश्म कयलारे औय उनक लैलाफशक वुख को कभ कयने लारे दोऴं क सनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे
                             े                                  े        े       े
   जनकायी प्राद्ऱ कयं ।
                                            GURUTVA KARYALAY
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38                                       अक्टू फय 2011




                                          त्रलद्वॊबयी स्तुसत
        त्रलद्वॊबयी स्तुसत भूर रुऩवे गुजयाती भं लल्रब बट्ट द्राया सरखी गई शं । स्लस्स्तक.ऎन.जोळी

त्रलद्वॊबयी अस्खर त्रलद्वतणी जनेता।                  ये ये बलानी फशु बूर थई ज भायी।
त्रलद्या धयी लदनभाॊ लवजो त्रलधाता॥                   आ स्जॊदगी थई भने असतळे अकायी॥
दफुत्रद्ध दय कयी वद्दफुत्रद्ध आऩो।
 ु ा       ु                                         दोऴो प्रजासऱ वधऱा तल छाऩ छाऩो।
भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥१॥
                       ु                             भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥७॥
                                                                            ु


बूरो ऩफड बलयने बटक बलानी।
                  ुॊ                                 खारी न कोइ स्थऱ छे त्रलण आऩ धायो।
वुझे नफश रगीय कोइ फदळा जलानी॥                        ब्रह्माॊडभाॊ अणु-अणु भशीॊ लाव तायो॥
बावे बमॊकय लऱी भनना उताऩो।                           ळत्रक्त न भाऩ गणला अगस्णत भाऩो।
भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥२॥
                       ु                             भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥८॥
                                                                            ु


आ यॊ कने उगयला नथी कोइ आयो।                          ऩाऩो प्रऩॊि कयला फधी यीते ऩूयो।
        ु
जडभाॊध छ जननी शु ग्रशी शाथ तायो॥                     खोटो खयो बगलती ऩण शुॊ तभायो॥
ना ळुॊ वुणो बगलती सळळुना त्रलराऩो।                   जाडमाॊधकाय कयी दय वुफुत्रद्ध स्थाऩो।
                                                                     ू
भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥३॥
                       ु                             भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥९॥
                                                                            ु


भा कभा जडभ कथनी कयताॊ त्रलिारु।                      ळीखे वुणे यसवक छॊ द ज एक सित्ते।
आ वृत्रद्शभाॊ तुज त्रलना नथी कोइ भारु॥               तेना थकी त्रित्रलध ताऩ टऱे खसिते॥
कोने कशुॊ कठण काऱ तणो फऱाऩो।                         फुत्रद्ध त्रलळेऴ जगदॊ फ तणा प्रताऩो।
भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥४॥
                       ु                             भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥१०॥
                                                                            ु


शुॊ काभ क्रोध भध भोश थकी बये रो।                     श्री वदगुरु ळयनभाॊ यशीने मजुॊ छॊु ।
आडॊ फये असत धणो भद्थी छकरो॥
                        े                                                          ु
                                                     यात्रि फदने बगलती तुजने बजुॊ छ॥
दोऴो फधा दय कयी भाप ऩाऩो।
          ू                                          वदबक्त वेलक तणा ऩरयताऩ िाऩो।
भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥५॥
                       ु                             भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥११॥
                                                                            ु


ना ळास्त्रना श्रलणनु ऩम्ऩान ऩीधु।                    अॊतय त्रलऴे असधक उसभा थताॊ बलानी।
ना भॊि क स्तुसत कथा नथी काइ कीधु॥
        े                                            गाऊ स्तुसत तल फऱे नभीने भृडानी॥
श्रद्धा धयी नथी कमाा तल नाभ जाऩो।                    वॊवायना वकऱ योग वभूऱ काऩो।
भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥६॥
                       ु                             भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥१२॥
                                                                            ु
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                                                              भफशऴावुयभफदा सनस्तोिभ ्
||बगलतीऩद्यऩुष्ऩाॊजसरस्तोि भफशऴावुयभफदा सनस्तोिभ ् ||                                     लासवसन शावयते सळखरय सळयोभस्ण तुङ्ग फशभारम ळृॊग
 श्री त्रिऩुयवुडदमै नभ् ||                                                                सनजारम भध्मगते | भधु भधुये भधु कटब गॊस्जसन कटब
                                                                                                                          ै           ै
बगलती        बगलत्ऩदऩङ्कजॊ               भ्रभयबूतवुयावुयवेत्रलतभ ्                  |     बॊस्जसन        यावयते       जम      जम      शे      भफशऴावुयभफदा सन
वुजनभानवशॊ वऩरयस्तुतॊ कभरमाऽभरमा सनबृतॊ बजे ||१||                                         यम्मकऩफदा सन           ळैरवुते    ||३||||९||       असम      ळतखण्ड
ते उबे असबलडदे ऽशॊ त्रलघ्नेळकरदै लते | नयनागाननस्त्लेको
                             ु                                                            त्रलखस्ण्डत रुण्ड त्रलतुस्ण्डत ळुण्ड गजासधऩते रयऩु गज गण्ड
नयसवॊश नभोऽस्तुते ||२|| शरयगुरुऩदऩद्मॊ ळुद्धऩद्येऽनुयागाद्                                त्रलदायण िण्ड ऩयाक्रभ ळुण्ड भृगासधऩते | सनज बुज दण्ड
त्रलगतऩयभबागे वस्डनधामादये ण | तदनुिरय कयोसभ प्रीतमे                                      सनऩासतत खण्ड त्रलऩासतत भुण्ड बटासधऩते जम जम शे
बत्रक्तबाजाॊ बगलसत ऩदऩद्मे ऩद्यऩुष्ऩाछजसरॊ ते ||३|| कनैते
                                                     े                                    भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||४||||१०|| असम
यसिता् कतो न सनफशता् ळुम्बादमो दभदा् कनैते तल
        ु                       ु ा   े                                                   यण दभद ळिु लधोफदत दधय सनजाय ळत्रक्तबृते ितुय त्रलिाय
                                                                                              ु ा            ु ा
ऩासरता इसत फश तत ् प्रद्ले फकभािक्ष्भशे | ब्रह्माद्या अत्रऩ                               धुयीण     भशासळल         दतकृ त
                                                                                                                    ू        प्रभथासधऩते      |   दरयत
                                                                                                                                                   ु       दयीश
                                                                                                                                                            ु
ळॊफकता्      स्लत्रलऴमे       मस्मा्           प्रवादालसध            प्रीता       वा      दयाळम
                                                                                           ु             दभसत
                                                                                                          ु ा      दानलदत
                                                                                                                        ू      कृ ताॊतभते     जम      जम      शे
भफशऴावुयप्रभसथनीच््द्यादलद्यासन                भे     ||४||        ऩातु       श्रीस्तु    भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||५||||११|| असम
ितुबुजा फकभु ितुफााशोभाशौजाडबुजान ् धत्तेऽद्शादळधा फश
     ा                                                                                    ळयणागत          लैरय    लधूलय     लीय लयाबम        दामकये   त्रिबुलन
कायणगुणाडकामे                 गुणायम्बका्                      |               वत्मॊ      भस्तक ळूर त्रलयोसध सळयोसध कृ ताभर ळूरकये | दसभदसभ
                                                                                                                                      ु  ु
फदक्ऩसतदस्डतवॊख्मबुजबृच्छम्बु्                        स्लय्म्बू्               स्लमॊ      ताभय दॊ दसबनाद भशो भुखयीकृ त सतग्भकये जम जम शे
                                                                                                  ु ु
धाभैकप्रसतऩत्तमे        फकभथला         ऩातुॊ        दळाद्शौ     फदळ्          ||५||       भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||६||||१२|| असम
प्रीत्माऽद्शादळवॊसभतेऴु मुगऩद्द्रीऩेऴु दातुॊ लयान ् िातुॊ ला                              सनज शुॉकृसत भाि सनयाकृ त धूम्र त्रलरोिन धूम्र ळते वभय
बमतो त्रफबत्रऴा बगलत्मद्शादळैतान ् बुजान ् | मद्राऽद्शादळधा                               त्रलळोत्रऴत ळोस्णत फीज वभुद्भल ळोस्णत फीज रते | सळल
बुजाॊस्तु त्रफबृत् कारी वयस्लत्मुबे भीसरत्लैकसभशानमो्                                     सळल ळुॊब सनळुॊब भशाशल तत्रऩात बूत त्रऩळाियते जम जम
प्रथसमतुॊ वा त्लॊ यभे यषभाभ ् ||६|| असम सगरयनॊफदसन                                        शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||७||||१३||
नॊफदतभेफदसन        त्रलद्वत्रलनोफदसन       नॊदनुते            सगरयलय          त्रलॊध्म    धनुयनु वॊग यणषणवॊग ऩरयस्पय दॊ ग नटत्कटक कनक
                                                                                                                   ु             े
सळयोसधसनलासवसन त्रलष्णुत्रलरासवसन स्जष्णुनुते | बगलसत शे                                  त्रऩळॊग ऩृऴत्क सनऴॊग यवद्भट ळृॊग शतालटु क | कृ त
                                                                                                                                   े
सळसतकण्ठकटु ॊ त्रफसन बूरय कटु ॊ त्रफसन बूरय कृ ते जम जम शे
         ु                 ु                                                              ितुयङ्ग फरस्षसत यङ्ग घटद्बशुयङ्ग यटद्बटु क जम जम शे
                                                                                                                                    े
भफशऴावुयभफदा सन           यम्मकऩफदा सन              ळैरवुते          ||१||||७||           भफशऴावुयभफदा सन            यम्मकऩफदा सन          ळैरवुते       ||१४||
वुयलयलत्रऴास्ण          दधयधत्रऴास्ण
                         ु ा                    दभुखभत्रऴास्ण
                                                 ु ा                          शऴायते      वुयररनाततथेसमतथेसमतथासबनमोत्तयनृत्मयते
त्रिबुलनऩोत्रऴस्ण ळॊकयतोत्रऴस्ण फकस्ल्फऴभोत्रऴस्ण घोऴयते |                                शावत्रलरावशुरावभसम                प्रणताताजनेऽसभतप्रेभबये            |
दनुज      सनयोत्रऴस्ण      फदसतवुत         योत्रऴस्ण          दभद
                                                               ु ा        ळोत्रऴस्ण       सधसभफकटसधक्कटसधकटसधसभध्लसनघोयभृदॊगसननादयते                        जम
सवडधुवुते जम जम शे                भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन                            जम        शे      भफशऴावुयभफदा सन         यम्मकऩफदा सन         ळैरवुते
ळैरवुते ||२||||८|| असम जगदॊ फ भदॊ फ कदॊ फ लनत्रप्रम                                       ||८||||१५|| जम जम जप्म जमेजम ळब्द ऩयस्तुसत
40                                                     अक्टू फय 2011



तत्ऩय त्रलद्वनुते झण झण स्झस्छजसभ स्झॊकृत नूऩुय सवॊस्जत                         वशस्रकयै कनुते कृ त वुयतायक वङ्गयतायक वङ्गयतायक
भोफशत बूतऩते | नफटत नटाधा नटीनट नामक नाफटत                                      वूनुवुते | वुयथ वभासध वभानवभासध वभासधवभासध
नाट्म            वुगानयते     जम          जम       शे     भफशऴावुयभफदा सन       वुजातयते जम जम शे                  भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन
यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||९||||१६|| असम वुभन् वुभन्                                ळैरवुते ||१६||||२३|| ऩदकभरॊ करुणासनरमे लरयलस्मसत
वुभन् वुभन् वुभनोशय काॊसतमुते सश्रत यजनी यजनी                                   मोऽनुफदनॊ     व         सळले       असम          कभरे              कभरासनरमे
यजनी यजनी यजनीकय लक्िलृते | वुनमन त्रलभ्रभय भ्रभय                               कभरासनरम्           व     कथॊ      न         बलेत ्      |        तल      ऩदभेल
भ्रभय भ्रभय भ्रभयासधऩते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन                                ऩयॊ ऩदसभत्मनुळीरमतो भभ फक न सळले जम जम शे
                                                                                                         ॊ
यम्मकऩफदा सन            ळैरवुते        ||१०||||१७||       वफशत       भशाशल      भफशऴावुयभफदा सन         यम्मकऩफदा सन          ळैरवुते            ||१७||||२४||
भल्रभ            तस्ल्रक    भस्ल्रत       यल्रक         भल्रयते     त्रलयसित    कनकरवत्कर सवडधु जरैयनु सवस्छिनुते गुण यङ्गबुलॊ
लस्ल्रक ऩस्ल्रक भस्ल्रक स्झस्ल्रक सबस्ल्रक लगा लृते |                           बजसत व फक न ळिीकि कब तटी ऩरययॊ ब वुखानुबलभ ्
                                                                                         ॊ      ु  ॊु
सवतकृ त            पस्ल्रवभुल्र
                    ु                    सवतारुण         तल्रज       ऩल्रल      | तल ियणॊ ळयणॊ कयलास्ण नताभयलास्ण सनलासव सळलॊ
वल्रसरते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन                                  जम     जम     शे    भफशऴावुयभफदा सन            यम्मकऩफदा सन              ळैरवुते
ळैरवुते ||११||||१८|| अत्रलयर गण्ड गरडभद भेदय भत्त
                                           ु                                    ||१८||||२५|| तल त्रलभरेडदकरॊ लदनेडदभरॊ वकरॊ ननु
                                                                                                         ु ु       ु
भतङ्गज याजऩते त्रिबुलन बूऴण बूत करासनसध रूऩ                                     करमते
                                                                                 ू          फकभु         ऩुरुशूत       ऩुयीडदभुखी
                                                                                                                             ु                    वुभुखीसबयवौ
ऩमोसनसध याजवुते | असम वुद तीजन रारवभानव भोशन                                    त्रलभुखीफक्रमते | भभ तु भतॊ सळलनाभधने बलती कृ ऩमा
भडभथ              याजवुते    जम           जम      शे      भफशऴावुयभफदा सन       फकभुत फक्रमते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन
यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१२||||१९|| कभर दराभर कोभर                                ळैरवुते ||१९||||२६|| असम भसम दीनदमारुतमा कृ ऩमैल
काॊसत            कराकसरताभर              बाररते          वकर         त्रलराव    त्लमा बत्रलतव्मभुभे असम जगतो जननी कृ ऩमासव मथासव
करासनरमक्रभ कसर िरत्कर शॊ व करे | असरकर
             े               ु        ु                                         तथाऽनुसभतासवयते                |       मदसितभि
                                                                                                                         ु                             बलत्मुयरय
वङ्कर कलरम भण्डर भौसरसभरद्भकरासर करे जम जम
    ु  ु                    ु     ु                                             करुतादरुताऩभऩाकरुते
                                                                                 ु    ु        ु               जम      जम         शे         भफशऴावुयभफदा सन
शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१३||||२०||                            यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||२०||||२७|| स्तुसतसभतस्स्तसभत्
कय भुयरी यल लीस्जत कस्जत रस्ज्जत कोफकर भछजुभते
                    ू                                                           वुवभासधना      सनमभतोऽमभतोऽनुफदनॊ                      ऩठे त ्     |     ऩयभमा
सभसरत ऩुसरडद भनोशय गुस्छजत यॊ स्जतळैर सनकछजगते |
                                         ु                                      यभमात्रऩ    सनऴेव्मते     ऩरयजनोऽरयजनोऽत्रऩ                   ि     तॊ    बजेत ्
सनजगुण बूत भशाळफयीगण वद्गण वॊबत कसरतरे जम
                         ु    ृ  े                                              ||२८|| यभमसत फकर कऴास्तेऴु सित्तॊ नयाणाभलयजलय
जम          शे       भफशऴावुयभफदा सन           यम्मकऩफदा सन         ळैरवुते     मस्भाद्राभकृ ष्ण्       कलीनाभ ्         |       अकृ त             वुकृसतगम्मॊ
||१४||||२१|| कफटतट ऩीत दकर त्रलसिि भमूखसतयस्कृ त
                        ु ू                                                     यम्मऩद्दै कशम्मं स्तलनभलनशे तुॊ प्रीतमे त्रलद्वभातु् ||२९||
िॊद्र रुिे प्रणत वुयावुय भौसरभस्णस्पय दॊ ळुर वडनख िॊद्र
                                    ु                                           इडदयम्मो भुशुत्रफाडदयम्मो भुशुत्रफाडदयम्मो मत् वोऽनलद्य्
                                                                                   ु                ु                ु
रुिे    |        स्जत   कनकािर           भौसरऩदोस्जात       सनबाय     कजय
                                                                       ुॊ       स्भृत् | श्रीऩते् वूनूना कारयतो मोऽधुना त्रलद्वभातु् ऩदे
कबकिे
 ुॊ ु            जम     जम        शे   भफशऴावुयभफदा सन       यम्मकऩफदा सन       ऩद्यऩुष्ऩाछजसर् ||३०||
ळैरवुते ||१५||||२२|| त्रलस्जत वशस्रकयै क वशस्रकयै क                             || इसत श्रीबगलतीऩद्यऩुष्ऩाछजसरस्तोिभ ् ||
41                                                         अक्टू फय 2011




                                                                       गुद्ऱ वद्ऱळती
                                                                                                                       स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, आरोक ळभाा

          वॊऩूणा श्री दगाा वद्ऱळती क भॊिो का ऩाठ कयने वे
                       ु            े                                               कस्छजका स्तोि भूर-ऩाठ
                                                                                     ु
वाधक को जो पर प्राद्ऱ शोता शै , लैवा शी कल्माणकायी                                  नभस्ते रुद्र-रूऩामै, नभस्ते भधु-भफदा सन।
पर प्रदान कयने लारा गुद्ऱ वद्ऱळती क भॊिो का ऩाठ शं ।
                                   े                                                नभस्ते कटबायी ि, नभस्ते भफशऴावसन॥
                                                                                            ै
          गुद्ऱ वद्ऱळती भं असधकतय भॊि फीजं क शोने वे
                                            े
                                                                                    नभस्ते ळुम्बशॊ िेसत, सनळुम्बावुय-घासतसन।
मश वाधकं क सरए अभोघ पर प्रदान कयने भं वभथा
          े
                                                                                    जाग्रतॊ फश भशा-दे त्रल जऩ-सवत्रद्धॊ करुष्ल भे॥
                                                                                                                         ु
शं ।
                                                                                    ऐॊ-कायी वृत्रद्शरूऩामै ह्रीॊकायी प्रसत-ऩासरका॥
गुद्ऱ वद्ऱळती क ऩाठ का क्रभ इव प्रकाय शं ।
               े
                                                                                    क्रीॊ-कायी काभरूत्रऩण्मै फीजरूऩा नभोऽस्तु ते।
          प्रायम्ब        भं    कस्छजका
                                 ु                स्तोि     उवके     फाद   गुद्ऱ
वद्ऱळती उवक ऩद्ळमात स्तलन का ऩाठ कये ।
           े                                                                        िाभुण्डा िण्ड-घाती ि मं-कायी लय-दासमनी॥
                                                                                    त्रलच्िे नोऽबमदा सनत्मॊ नभस्ते भॊिरूत्रऩस्ण॥
                               कस्छजका-स्तोि
                                ु
                                                                                    धाॊ धीॊ धूॊ धूजटेऩात्नी लाॊ लीॊ लागेद्वयी तथा।
                                                                                                   ा
ऩूल-ऩीफठका-ईद्वय उलाि:
   ा
                                                                                    क्राॊ क्रीॊ श्रीॊ भे ळुबॊ करु, ऐॊ ॐ ऐॊ यष वलादा।।
                                                                                                               ु
श्रृणु         दे त्रल,        प्रलक्ष्मासभ          कस्छजका-भडिभुत्तभभ ्।
                                                      ु
                                                                                    ॐ ॐ ॐ-काय-रुऩामै, ज्राॊ-ज्राॊ ज्रम्बार-नाफदनी।
मेन       भडिप्रबालेन                  िण्डीजाऩॊ          ळुबभ ्      बलेत ्॥१॥
                                                                                    क्राॊ क्रीॊ क्र कासरका दे त्रल, ळाॊ ळीॊ ळूॊ भे ळुबॊ करु॥
                                                                                                  ूॊ                                     ु
न        लभा          नागारा-स्तोिॊ              कीरकॊ          न   यशस्मकभ ्।
                                                                                    ह्रूॊ ह्रूॊ ह्रूॊ-कायरूत्रऩण्मै ज्रॊ ज्रॊ ज्रम्बार-नाफदनी।
न वूक्तभ ् नात्रऩ ध्मानभ ् ि न डमावभ ् ि न िािानभ ्॥२॥
कस्छजका-ऩाठ-भािेण
 ु                                              दगाा-ऩाठ-परॊ
                                                 ु                      रबेत ्।     भ्राॊ भ्रीॊ भ्रूॊ बैयली बद्रे बलासन ते नभो नभ्॥7॥
असत         गुह्यतभभ ्                दे त्रल    दे लानाभत्रऩ       दराबभ ्॥३॥
                                                                     ु              भडि:
गोऩनीमभ ्                 प्रमत्नेन             स्ल-मोसन-लच्ि          ऩालासत।      अॊ क िॊ टॊ तॊ ऩॊ मॊ ळॊ त्रफडदयात्रलबाल, आत्रलबाल, शॊ वॊ रॊ षॊ
                                                                                        ॊ                        ु
भायणभ ्           भोशनभ ्             लश्मभ ्       स्तम्बनोच्िाटनाफदकभ ्।          भसम जाग्रम-जाग्रम, िोटम-िोटम दीद्ऱॊ करु करु स्लाशा॥
                                                                                                                         ु   ु
ऩाठ-भािेण                   वॊसवत्रद्ध्            कस्छजकाभडिभुत्तभभ ्॥४॥
                                                    ु                               ऩाॊ   ऩीॊ     ऩूॊ    ऩालाती       ऩूणाा, खाॊ        खीॊ    खूॊ   खेियी तथा॥
अथ भडि:                                                                             म्राॊ म्रीॊ म्रूॊ दीव्मती ऩूणाा, कस्छजकामै नभो नभ्॥
                                                                                                                      ु
ॐ द्ऴं दॉ ु क्रीॊ क्रं जुॊ व् ज्लरमोज्ज्लर ज्लर प्रज्लर-                            वाॊ         वीॊ       वद्ऱळती-सवत्रद्धॊ ,           करुष्ल
                                                                                                                                         ु            जऩ-भाित्॥
प्रज्लर प्रफर-प्रफर शॊ वॊ रॊ षॊ पट् स्लाशा                                          इदॊ         तु        कस्छजका-स्तोिॊ
                                                                                                           ु                            भॊि-जार-ग्रशाॊ        त्रप्रमे।
इसत भडि:                                                                            अबक्त
                                                                                        े            ि     न         दातव्मॊ,      गोऩमेत ्          वलादा   श्रृणु॥
इव कस्छजका भडि का दव फाय जऩ कयना िाफशए। इवी
    ु                                                                               कस्जका-त्रलफशतॊ
                                                                                     ुॊ                           दे त्रल       मस्तु         वद्ऱळतीॊ       ऩठे त ्।
प्रकाय स्तल-ऩाठ क अडत भं ऩुन् इव भडि का दव फाय जऩ
                 े                                                                  न तस्म जामते सवत्रद्धॊ , अयण्मे रुदनॊ मथा॥

कय कस्छजका स्तोि का ऩाठ कयना िाफशए।
    ु                                                                               ॥इसत श्रीरुद्रमाभरे गौयीतॊिे सळलऩालातीवॊलादे
                                                                                    कस्जकास्तोिॊ वॊऩूणभ ्॥
                                                                                     ुॊ               ा
42                                                अक्टू फय 2011



                                  गुद्ऱ-वद्ऱळती                             वलांगे      यक्त-धाया-भथन-कय-लये ,        लज्र-दण्डे     नभस्ते॥६॥

ॐ ब्रीॊ-ब्रीॊ-ब्रीॊ लेणु-शस्ते, स्तुत-वुय-फटु कशां गणेळस्म भाता।
                                               ै
                                                                            ॐ क्राॊ क्रीॊ क्र लाभ-नसभते, गगन गड-गडे गुह्य-मोसन-स्लरुऩे।
                                                                                            ूॊ
स्लानडदे             नडद-रुऩे, अनशत-सनयते, भुत्रक्तदे     भुत्रक्त-भागे॥
                                                                            लज्राॊगे,         लज्र-शस्ते,   वुय-ऩसत-लयदे ,      भत्त-भातॊग-रुढे ॥
शॊ व् वोशॊ त्रलळारे, लरम-गसत-शवे, सवद्ध-दे ली वभस्ता।
                                                                            स्लस्तेजे, ळुद्ध-दे शे, रर-रर-रसरते, छे फदते             ऩाळ-जारे।
शीॊ-शीॊ-शीॊ सवद्ध-रोक, कि-रुसि-त्रलऩुरे, लीय-बद्रे नभस्ते॥१॥
                     े
                                                                            फकण्डल्माकाय-रुऩे, लृऴ लृऴब-ध्लजे, ऐस्डद्र भातनाभस्ते॥७॥

ॐ शीॊकायोच्िायमडती, भभ शयसत बमॊ, िण्ड-भुण्डौ प्रिण्डे ।
                                                                            ॐ     शुॉ   शुॉ     शुॊकाय-नादे , त्रलऴभलळ-कये , मष-लैतार-नाथे।
खाॊ-खाॊ-खाॊ खड्ग-ऩाणे, ध्रक-ध्रक ध्रफकते, उग्र-रुऩे स्लरुऩे॥
                                                                            वु-सवद्धमथे वु-सवद्धै ्, ठठ-ठठ-ठठठ्, वला-बषे प्रिण्डे ॥
शुॉ-शुॉ     शुॉकाॊय-नादे , गगन-बुत्रल-तरे, व्मात्रऩनी      व्मोभ-रुऩे।
                                                                            जूॊ व् वं ळास्डत-कभेऽभृत-भृत-शये , सन्वभेवॊ वभुद्रे।
शॊ -शॊ शॊ काय-नादे , वुय-गण-नसभते, िण्ड-रुऩे              नभस्ते॥२॥
                                                                            दे त्रल, त्लॊ वाधकानाॊ, बल-बल लयदे , बद्र-कारी नभस्ते॥८॥

ऐॊ रोक कीतामडती, भभ शयतु बमॊ, याषवान ् शडमभाने।
      े                                                                     ब्रह्माणी लैष्णली त्लॊ, त्लभसव फशुिया, त्लॊ लयाश-स्लरुऩा।

घ्राॊ-घ्राॊ-घ्राॊ     घोय-रुऩे,    घघ-घघ-घफटते,   घघाये     घोय-याले॥       त्लॊ ऐडद्री त्लॊ कफेयी, त्लभसव ि जननी, त्लॊ कभायी भशे डद्री॥
                                                                                              ु                          ु

सनभांवे             काक-जॊघे, घसवत-नख-नखा, धूम्र-नेिे त्रि-नेिे।            ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊकाय-बूते, त्रलतर-तर-तरे, बू-तरे स्लगा-भागे।

शस्ताब्जे ळूर-भुण्डे , कर-कर ककरे, सवद्ध-शस्ते नभस्ते॥३॥
                        ु  ु   ु                                            ऩातारे ळैर-श्रृगे, शरय-शय-बुलने, सवद्ध-िण्डी नभस्ते॥९॥
                                                                                          ॊ


ॐ क्रीॊ-क्रीॊ-क्रीॊ ऐॊ कभायी, कश-कश-भस्खरे, कोफकरेनानुयागे।
                        ु      ु  ु                                         शॊ रॊ षॊ ळौस्ण्ड-रुऩे, ळसभत बल-बमे, वला-त्रलघ्नाडत-त्रलघ्ने।

भुद्रा-वॊस-त्रि-ये खा, करु-करु वततॊ, श्री भशा-भारय गुह्ये॥
                        ु   ु                                               गाॊ गीॊ गूॊ गं ऴडॊ गे, गगन-गसत-गते, सवत्रद्धदे सवद्ध-वाध्मे॥

तेजाॊगे         सवत्रद्ध-नाथे, भन-ऩलन-िरे, नैल          आसा-सनधाने।         लॊ क्र भुद्रा फशभाॊळोप्राशवसत-लदने, त्र्मषये
                                                                                 ॊ                                                 नवं सननादे ।

ऐॊकाये यात्रि-भध्मे, स्लत्रऩत-ऩळु-जने, ति काडते नभस्ते॥४॥                   शाॊ शूॊ गाॊ गीॊ गणेळी, गज-भुख-जननी, त्लाॊ भशे ळीॊ नभासभ॥१०॥


ॐ व्राॊ-व्रीॊ-व्रूॊ व्रं कत्रलत्ले, दशन-ऩुय-गते रुस्क्भ-रुऩेण िक्र।
                                                                 े          स्तलन
त्रि्-ळक्तमा, मुक्त-लणााफदक, कय-नसभते, दाफदलॊ ऩूल-लणे॥
                                                 ा                          मा दे ली खड्ग-शस्ता, वकर-जन-ऩदा, व्मात्रऩनी त्रलळऽल-दगाा।
                                                                                                                                 ु
ह्रीॊ-स्थाने काभ-याजे, ज्लर-ज्लर ज्लसरते, कोसळसन कोळ-ऩिे।                   श्माभाॊगी ळुक्र-ऩाळास्ब्द जगण-गस्णता, ब्रह्म-दे शाधा-लावा॥
स्लच्छडदे कद्श-नाळे, वुय-लय-लऩुऴे, गुह्य-भुण्डे नभस्ते॥५॥                   सानानाॊ वाधमडती, सतसभय-त्रलयफशता, सान-फदव्म-प्रफोधा।

                                                                            वा दे ली, फदव्म-भूसताप्रदशतु दरयतॊ, भुण्ड-िण्डे प्रिण्डे ॥१॥
                                                                                                    ा     ु
ॐ घ्राॊ-घ्रीॊ-घ्रूॊ घोय-तुण्डे , घघ-घघ घघघे घघायाडमाफ्घ्र-घोऴे।

ह्रीॊ क्रीॊ द्रॊ ू द्रोछि-िक्र, यय-यय-यसभते, वला-साने प्रधाने॥
                             े                                              ॐ शाॊ शीॊ शूॊ लभा-मुक्त, ळल-गभन-गसतबॉऴणे बीभ-लक्िे।
                                                                                                  े
द्रीॊ तीथेऴु ि ज्मेद्षे, जुग-जुग जजुगे म्रीॊ ऩदे कार-भुण्डे ।               क्राॊ क्रीॊ क्र क्रोध-भूसतात्रलाकृत-स्तन-भुखे, यौद्र-दॊ द्सा-कयारे॥
                                                                                          ूॊ
43                                            अक्टू फय 2011



क क ककार-धायी भ्रभसद्ऱ, जगफददॊ बषमडती ग्रवडती-
 ॊ ॊ ॊ                                                                  त्र्मैरोक्मॊ लश्म-कायी, प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥८॥
                                                                                                         ु

शुॊकायोच्िायमडती         प्रदशतु   दरयतॊ, भुण्ड-िण्डे
                                    ु                   प्रिण्डे ॥२॥
                                                                        लडदे       दण्ड-प्रिण्डा    डभरु-फडसभ-फडभा, घण्ट टॊ काय-नादे ।
ॐ ह्राॊ ह्रीॊ शूॊ रुद्र-रुऩे, त्रिबुलन-नसभते, ऩाळ-शस्ते त्रि-नेिे।
                                                                        नृत्मडती ताण्डलैऴा थथ-थइ त्रलबलैसनाभरा भडि-भारा॥
                                                                                                            ा
याॊ यीॊ रुॊ     यॊ गे फकरे फकसरत यला, ळूर-शस्ते प्रिण्डे ॥
                                                                        रुषौ कषौ लशडती, खय-खरयता यला िासिासन प्रेत-भारा।
                                                                              ु
राॊ रीॊ रूॊ रम्फ-स्जह्ले शवसत, कश-कशा ळुद्ध-घोयाट्ट-शावै्।
                                                                        उच्िैस्तैद्ळाट्टशावै, शश शसवत यला, िभा-भुण्डा प्रिण्डे ॥९॥
ककारी कार-यात्रि् प्रदशतु दरयतॊ, भुण्ड-िण्डे प्रिण्डे ॥३॥
 ॊ                         ु
                                                                        ॐ त्लॊ ब्राह्मी त्लॊ ि यौद्री व ि सळस्ख-गभना त्लॊ ि दे ली कभायी।
                                                                                                                                   ु
ॐ घ्राॊ घ्रीॊ घ्रूॊ घोय-रुऩे घघ-घघ-घफटते घघायायाल घोये ।
                                                                        त्लॊ िक्री िक्र-शावा घुय-घुरयत यला, त्लॊ लयाश-स्लरुऩा॥
सनभाॉवे       ळुष्क-जॊघे    त्रऩफसत   नय-लवा     धूम्र-धूम्रामभाने॥
                                                                        यौद्रे त्लॊ िभा-भुण्डा वकर-बुत्रल-तरे वॊस्स्थते स्लगा-भागे।
ॐ द्राॊ द्रीॊ द्रॊ ू द्रालमडती, वकर-बुत्रल-तरे, मष-गडधला-नागान ्।
                                                                        ऩातारे ळैर-श्रृगे शरय-शय-नसभते दे त्रल िण्डी नभस्ते॥१०॥
                                                                                      ॊ
षाॊ षीॊ षूॊ षोबमडती प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥४॥
                             ु
                                                                        यष त्लॊ भुण्ड-धायी सगरय-गुश-त्रललये            सनझाये ऩलाते ला।
ॐ भ्राॊ भ्रीॊ भ्रूॊ बद्र-कारी, शरय-शय-नसभते, रुद्र-भूते त्रलकणे।
                                                                        वॊग्राभे ळिु-भध्मे त्रलळ त्रलऴभ-त्रलऴे वॊकटे कस्त्वते ला॥
                                                                                                                      ु
िडद्राफदत्मौ ि कणौ, ळसळ-भुकट-सळयो लेत्रद्षताॊ कतु-भाराभ ्॥
                           ु                   े
                                                                        व्माघ्रे िौये ि वऩेऽप्मुदसध-बुत्रल-तरे लफि-भध्मे ि दग।
                                                                                                                            ु े
स्त्रक् -वला-िोयगेडद्रा ळसळ-कयण-सनबा तायका् शाय-कण्ठे ।
                                                                        यषेत ् वा फदव्म-भूसता् प्रदशतु दरयतॊ भुण्ड-िण्डे प्रिण्डे ॥११॥
                                                                                                        ु
वा दे ली फदव्म-भूसता्, प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥५॥
                                ु

ॐ खॊ-खॊ-खॊ खड्ग-शस्ते, लय-कनक-सनबे वूम-कास्डत-स्लतेजा।
                                      ा
                                                                        इत्मेलॊ फीज-भडिै् स्तलनभसत-सळलॊ ऩातक-व्मासध-नाळनभ ्।
त्रलद्युज्ज्लारालरीनाॊ, बल-सनसळत          भशा-कत्रिका दस्षणेन॥
                                                   ा
                                                                        प्रत्मषॊ     फदव्म-रुऩॊ    ग्रश-गण-भथनॊ     भदा नॊ ळाफकनीनाभ ्॥
लाभे      शस्ते    कऩारॊ,      लय-त्रलभर-वुया-ऩूरयतॊ    धायमडती।
                                                                        इत्मेलॊ     लेद-लेद्यॊ    वकर-बम-शयॊ      भडि-ळत्रक्तद्ळ सनत्मभ ्।
वा दे ली फदव्म-भूसता् प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥६॥
                               ु
                                                                        भॊिाणाॊ स्तोिक म् ऩठसत व रबते प्रासथाताॊ भडि-सवत्रद्धभ ्॥१२॥
                                                                                      ॊ

ॐ शुॉ शुॉ पट् कार-यािीॊ ऩुय-वुय-भथनीॊ धूम्र-भायी कभायी।
                                                  ु                     िॊ-िॊ-िॊ िडद्र-शावा ििभ िभ-िभा िातुयी सित्त-कळी।
                                                                                                                     े

ह्राॊ ह्रीॊ ह्रूॊ शस्डत दद्शान ् कसरत फकर-फकरा ळब्द अट्टाट्टशावे॥
                         ु                                              मॊ-मॊ-मॊ मोग-भामा जनसन जग-फशता मोसगनी मोग-रुऩा॥

शा-शा बूत-प्रबूते, फकर-फकसरत-भुखा, कीरमडती ग्रवडती।                     डॊ -डॊ -डॊ डाफकनीनाॊ डभरुक-वफशता दोर फशण्डोर फडम्बा।

शुॊकायोच्िायमडती         प्रदशतु   दरयतॊ िण्ड-भुण्डे
                                    ु                   प्रिण्डे ॥७॥    यॊ -यॊ -यॊ यक्त-लस्त्रा वयसवज-नमना ऩातु भाॊ दे त्रल दगाा॥१३॥
                                                                                                                             ु


ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ कऩारीॊ ऩरयजन-वफशता िस्ण्ड िाभुण्डा-सनत्मे।              ऩत्रिका वे वॊफॊसधत आऩक वुझाल एलॊ प्रसतफक्रमा शभं
                                                                                                  े
                                                                                                 ***
यॊ -यॊ    यॊ काय-ळब्दे     ळसळ-कय-धलरे        कार-कटे
                                                   ू        दयडते॥
                                                             ु              अलश्म बेजने का कद्श कयं ।स्जववे ऩत्रिका को औय
शुॉ शुॉ शुॊकाय-कारय वुय-गण-नसभते, कार-कायी त्रलकायी।                        फेशतय फनामा जावक एलॊ अडम फॊधु/फशनो को
                                                                                            े
                                                                            असधक वे असधक राब प्राद्ऱ शो वक।
                                                                                                          े                  वॊऩादक
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                                   ळयद ऩूस्णाभा (11-अक्टू फय-2011)
                                                                                                  सिॊतन जोळी
       फशॊ द ू ऩॊिाॊग क अनुवाय ऩूये लऴा भं फायश ऩूस्णाभा
                       े
आती शं । ऩूस्णाभा क फदन िॊद्रभा अऩने ऩूणा आकाय भं
                   े
शोता शै । ऩूस्णाभा ऩय िॊद्रभा का अतुल्म वंदमा दे खते शी
फनता शै । त्रलद्रानो क अनुवाय ऩूस्णाभा क फदन िॊद्रभा ऩूणा
                      े                 े
आकाय भं शोने क कायण लऴा भं आने लारी वबी ऩूस्णाभा
              े
ऩला क वभान शं । रेफकन इन वबी ऩूस्णाभा भं आस्द्वन
     े
भाव फक ऩूस्णाभा वफवे श्रेद्ष भानी गई शै । मश ऩूस्णाभा
ळयद ऋतु भं आने क कायण इवे ळयद ऩूस्णाभा बी कशते
                े
शं । ळयद ऋतु की इव ऩूस्णाभा को ऩूणा िॊद्र का अस्द्वनी
नषि वे वॊमोग शोता शै । अस्द्वनी जो नषि क्रभ भं प्रथभ
नषि शं , स्जवक स्लाभी अस्द्वनीकभाय शै ।
              े                ु                                    एक वाशुकाय क दो ऩुत्रिमाॉ थी। दोनो ऩुत्रिमाॉ ळयद
                                                                                े
       कथा क अनुळाय च्मलन ऋत्रऴ को आयोग्म का
            े                                                ऩुस्णाभा का व्रत यखती थी। ऩयडतु फडी ऩुिी ऩूया व्रत
ऩाठ औय औऴसध का सान अस्द्वनीकभायं ने शी फदमा था।
                            ु                                कयती थी औय छोटी ऩुिी अधुया व्रत कयती थी। ऩरयणाभ
मशी सान आज शजायं लऴा फाद बी शभाये ऩाव अनभोर                  मश शुआ फक छोटी ऩुिी की वडतान ऩैदा शोते शी भय
धयोशय क रूऩ भं वॊसित शै । अस्द्वनीकभाय आयोग्म क
       े                           ु           े             जाती थी। उवने ऩॊफडतो वे इवका कायण ऩूछा तो उडशोने
स्लाभी शं औय ऩूणा िॊद्रभा अभृत का स्रोत। मशी कायण शै         फतामा की तुभ ऩूस्णाभा का अधूया व्रत कयती थी स्जवके
फक ऐवा भाना जाता शै फक इव ऩूस्णाभा को ब्रह्माॊड वे           कायण तुम्शायी वडतान ऩैदा शोते शी भय जाती शं । ऩूस्णाभा
अभृत की लऴाा शोती शै ।                                       का ऩुया त्रलसधऩुलाक कयने वे तुम्शायी वडतान जीत्रलत यश
खीय का बोग                                                   वकती शं । उवने ऩॊसतडतो फक वराश ऩय ऩूस्णाभा का ऩूया
       ळयद ऩूस्णाभा की यात भं गाम क दध वे फनी
                                   े ू                       व्रत त्रलसधऩूलक फकमा। उवक रडका शुआ ऩयडतु ळीघ्र शी
                                                                           ा          े
खीय को िॊद्रभा फक िाॊदनी भं यखकय उवे प्रवाद-स्लरूऩ           भय गमा । उवने रडक को रकडी क ऩट्टे ऩय सरटाकय
                                                                              े         े
ग्रशण फकमा जाता शै । ऩूस्णाभा की िाॊदनी भं 'अभृत' का         ऊऩय वे कऩडा ढक फदमा। फपय फडी फशन को फुराकय
अॊळ शोता शै , इव सरमे भाडमता मश शै फक ऐवा कयने वे            राई औय फैठने क सरए लशी ऩट्टा दे फदमा। फडी फशन
                                                                           े
िॊद्रभा की अभृत की फूॊदं बोजन भं आ जाती शं स्जवका            जफ ऩीढे ऩय फैठने रगी जो उवका घाघया फच्िे का छू
वेलन कयने वे वबी प्रकाय की फीभारयमाॊ आफद दय शो
                                          ू                                    ु
                                                             गमा, फच्िा घाघया छते शी योने रगा। फडी फशन फोरी
जाती शं । आमुलद क ग्रॊथं भं बी इवकी िाॊदनी क
              े  े                          े                तुभ भुझे करक रगाना िाशती थी। भेये फैठने वे मश भय
                                                                       ॊ
औऴधीम भशत्ल का लणान सभरता शै । यखकय दध वे फनी
                                     ू                       जाता तफ छोटी फशन फोरी मश तो ऩशरे वे भया शुआ
खीय को िाॊदनी क भं अवाध्म योगं की दलाएॊ स्खराई
               े                                             था। तेये शी बाग्म वे मश ऩुन् जीत्रलत शो गमा शं । तेये
जाती शै ।                                                    ऩुण्म वे शी मश अबी जीत्रलत शुआ शं । उवक फाद वे ळयद
                                                                                                    े
ळयद ऩूस्णाभा की कथा:                                         ऩुस्णाभा का ऩूया व्रत कयने का प्रिरन िर सनकरा।
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                                 कोजागयी ऩूस्णाभा (11-अक्टू फय-2011)
                                                                                                  सिॊतन जोळी
       आस्द्वन भाव की ऩूस्णाभा को 'कोजागय व्रत' यखा जाता शं । इव सरमे इव ऩूस्णाभा को कोजागयी ऩूस्णाभा बी कशा
जाता शै ।
       इव फदन व्मत्रक्त त्रलसधऩूलाक स्नान कयक व्रत-उऩलाव यखने का त्रलधान शं । इव फदन श्रद्धा बाल वे ताॉफे मा सभट्टी
                                             े
क करळ ऩय लस्त्र वे ढॉ की शुई स्लणाभमी रक्ष्भी की प्रसतभा को स्थात्रऩत फकमा जाता शं । फपय रक्ष्भी जी फक सबडन-
 े
सबडन उऩिायं वे ऩूज-अिाना कयने का त्रलधान शं । वामॊकार भं िडद्रोदम शोने ऩय वोने , िाॉदी अथला सभट्टी क घी वे
                                                                                                    े
बये शुए दीऩक जराने फक ऩयॊ ऩया शं ।
       इव फदन घी सभसश्रत खीय को ऩािं भं डारकय उवे िडद्रभा की िाॉदनी भं यखा जाता शं । एक प्रशय (३ घॊटे) खीय
को िाॉदनी भं यखनेक फाद भं उवे रक्ष्भीजी को वायी खीय अऩाण फक जाती शं । तत्ऩद्ळात बत्रक्तऩूलक वास्त्लक ब्राह्मणं
                  े                                                                       ा
को खीय का बोजन कयाएॉ औय उनक वाथ शी भाॊगसरक गीत गाकय तथा भॊगरभम कामा कयते शुए यात्रि जागयण फकमा
                           े
जाता शं ।
       भाडमता शं फक ऩूस्णाभा फक भध्मयात्रि भं दे ली भशारक्ष्भी अऩने शाथो भं लय औय अबम लयदान सरए बूरोक भं
त्रलियती शं । इव फदन जो बक्तजन जाग यशा शोता शं उवे भाता रक्ष्भी धन-वॊऩत्रत्त प्रदान कयती शं ।




                                     दलाा ऩूजन भं यखे वालधासनमाॊ
                                      ु
             भाता दगाा की ऩूजा कयने लारे वाधकं को उऩावना वॊफॊधी इन फातं का ध्मान यखना राबदामक
                    ु
               यशता शं ।
               त्रलद्रानो क भत भं ळास्त्रोक्त त्रलधान वे एक शी घय भं तीन ळत्रक्तमं की ऩूजा कयना लस्जात शं ।
                           े
             दे लीऩीठ ऩय लाद्य-ळशनाई का लादन नशीॊ कयं ।
             बगलती दगाा का आह्लान त्रफल्ल ऩि, त्रफल्ल ळाखा मा त्रिळूर ऩय शी फकमा जाना िाफशए।
                     ु
             दे ली दगाा को कलर रार कनेय औय वुगॊसधत ऩुष्ऩ असत त्रप्रम शं । इव सरमे आयाधना भं वुगॊसधत
                     ु       े
               ऩुष्ऩ शी रं।
             नलयाि भं करळ की स्थाऩना कलर फदन भं कयनी िाफशए।
                                       े
             भाॊ बगलती की प्रसतभा शभेळा रार लस्त्र वे त्रफयाजीत यशे ।
             दे ली को बी रार यॊ ग की िुनयी िढाएॊ।
               नलयाि भं नलाणा भॊि जऩ दे ली भाॊ क वाभने रार आवन ऩय फैठकय रार िॊदन की भारा वे कयना
                                                े
               राब प्रद शोता शं ।
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                                 कयला िौथ व्रत (15-अक्टू फय-2011)
                                                                                                        सिॊतन जोळी
         कासताक भाव फक ितुथॉ क फदन त्रललाफशत भफशराओॊ
                              े                               प्रकट कय फदमा। तफ श्रीकृ ष्ण ने द्रोऩदी को कयलािौथ व्रत
द्राया कयला िौथ का व्रत फकमा जाता शै । कयला का अथाात          कयने का त्रलधान फतामा। द्रोऩदी ने श्रीकृ ष्ण वे व्रत का
सभट्टी क जर-ऩाि फक ऩूजा कय िॊद्रभा को अध्मा दे ने का
        े                                                     त्रलसध-त्रलधान जान कय व्रत फकम औय उवे व्रत का पर
भशत्ल शं । इवीसरए मश व्रत कयला िौथ नाभ वे जाना जाता           सभरा, अजुन वकळर ऩलात ऩय तऩस्मा ऩूयी कय ळीघ्र रौट
                                                                       ा   ु
शं ।   इव फदन ऩत्नी अऩने ऩसत की दीघाामु क सरमे
                                         े                    आए।
भॊगरकाभना औय स्लमॊ क अखॊड वौबाग्म यशने फक
                    े                                         ऩूजन-त्रलसध:         कयला िौथ क फदन ब्रह्म भुशूता भं उठ कय
                                                                                             े
काभना कयती शं । कयला िौथ क ऩूये फदन ऩत्नी द्राया उऩलाव
                          े                                   स्नान क स्लच्छ कऩडे ऩशन कय कयला की ऩूजा-आयाधना
                                                                     े
यखा जाता शं । इव फदन यात्रि को जफ आकाळ भं िॊद्रम उदम          कय उवक वाथ
                                                                    े                  सळल-ऩालाती फक ऩूजा का     त्रलधान शं ।
वे ऩूला वोरश वृॊगाय कय िॊद्र सनकरने फक प्रसतषा कयती           क्मोफक भाता ऩालाती नं कफठन तऩस्मा कय क सळलजी को
                                                                                                    े
शं । व्रत का वभाऩन िॊद्रभा को अध्मा दे ने क वाथ शी उवे
                                           े                  प्राद्ऱ कय अखॊड वौबाग्म प्राद्ऱ फकमा था। इव सरमे सळल-
छरनी वे दे खा जाता शं , उवक फाद ऩसत क ियण स्ऩळा कय
                           े         े                        ऩालाती फक ऩूजा फक जाती शं ।
उनवे आळीलााद प्राद्ऱ कयती शं । ऐवी भाडमता शै फक इव व्रत को
                                                              कयला िौथ क फदन िॊद्रभा फक ऩूजा का धासभाक औय ज्मोसतऴ
                                                                        े
कयने वे भफशराएॊ अखॊड वौबाग्मलती शोती शं , उवका ऩसत
                                                              दोनं शी द्रत्रद्श वे भशत्ल शै ।
दीघाामु शोता शं ।
                                                              छाॊदोग्म उऩसनऴद् क अनुळाय जो िॊद्रभा भं ऩुरुऴरूऩी ब्रह्मा फक
                                                                                े
         मफद इव व्रत को ऩारन कयने लारी ऩत्नी अऩने
                                                              उऩावना कयता शै , उवक वाये ऩाऩ नद्श शो जाते शं , उवे जीलन
                                                                                  े
ऩसत क प्रसत भमाादा वे, त्रलनम्रता वे, वभऩाण क बाल वे यशे
     े                                       े
                                                              भं फकवी प्रकाय का कद्श नशीॊ शोता। उवे रॊफी औय ऩूणा आमु फक
औय ऩसत बी अऩने वभस्त कताव्म एलॊ धभा का ऩारन
                                                              प्रासद्ऱ शोती शं ।
वुिारु रुऩ वे ऩारन कयं , तो एवे दॊ ऩत्रत्त क जीलन भं
                                            े
                                                              ज्मोसतऴ दृत्रद्श वे िॊद्रभा भन का कायक दे लता शं । अत् िॊद्रभा
वबी वुख-वभृत्रद्ध वे बया जाता शं ।
                                                              िॊद्रभा फक ऩूजा कयने वे भन की िॊिरता ऩय सनमॊत्रित यशता
कथा : एवी भाडमता शं , फक बगलान श्रीकृ ष्ण ने द्रोऩदी को
                                                              शं । िॊद्रभा क ळुब शोने ऩय वे भन प्रवडनता यशता शं औय
                                                                            े
मश व्रत का भशत्ल फतामा था। ऩाॊडलं क लनलाव क दौयान
                                   े       े
                                                              भन वे अळुद्ध त्रलिाय दय शोकय भन भं ळुब त्रलिाय
                                                                                    ू
अजुन तऩ कयने क सरए इॊ द्रनीर ऩलात ऩय िरे गए। फशुत फदन
   ा          े
                                                              उत्ऩडन शोते शं । क्मोफक ळुब त्रलिाय शी भनुष्म को अच्छे
फीत जाने क फाद बी जफ अजुन नशीॊ रौटे तो द्रोऩदी को सिॊता
          े             ा
                                                              कभा कयने शे तु प्रेरयत कयते शं । स्लमॊ क द्राया फकमे गई
                                                                                                      े
शोने रगी। जफ श्रीकृ ष्ण ने द्रोऩदी को सिॊसतत दे खा तो पौयन
                                                              गरती मा एलॊ अऩने दोऴं का स्भयण कय ऩसत, वाव-ववुय
सिॊता का कायण वभझ गए। फपय बी श्रीकृ ष्ण ने द्रोऩदी वे
                                                              औय फुजुगो क ियणस्ऩळा इवी बाल क वाथ कयं फक इव वार
                                                                         े                  े
कायण ऩूछा तो उवने मश सिॊता का कायण श्रीकृ ष्ण क वाभने
                                               े
                                                              मे गरसतमाॊ फपय नशीॊ शं।
47                                          अक्टू फय 2011




                                  धन तेयव ळुब भुशूता (24 अक्तफय, 2011)
                                                            ू
                                                                                                                   सिॊतन जोळी
एवी ऩौयास्णक भाडमता शं फक धन तेयव क फदन धनलॊतयी
                                   े                                  इव लऴा 24 अक्तफय, 2011 (धनतेयव) को बायतीम वभम
                                                                                   ू
नाभक दे लता अभृत करळ क वाथ वागय भॊथन वे उत्ऩडन शुए
                      े                                               अनुळाय नई फदल्री भं वॊध्मा वूमाास्त क फाद 05 फज कय
                                                                                                           े
थे। धनलॊतयी धन, स्लास्थम ल आमु क असधऩसत दे लता शं ।
                                े                                     44 सभसनट वे आयम्ब शोकय यात क 08 फजकय 06 सभनट
                                                                                                  े
धनलॊतयी को दे लं क लैध ल सिफकत्वक क रुऩ भं जाना जाता
                  े                े                                  तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा। इव वभमा अलसध भं
शं ।                                                                  स्स्थय रग्न       (लृऴब) बी भुशुता वभम भं शोने क कायण
                                                                                                                      े
धन तेयव क फदन िाॊदी क फतान-सवक्क खयीदना त्रलळेऴ ळुब
         े           े          े                                     घय-ऩरयलाय भं स्थामी रक्ष्भी की प्रासद्ऱ शोती शै ।
शोता शं । क्मोफक ळास्त्रं भं धनलॊतयी दे ल को िॊद्रभा क वभान
                                                      े                           24 अक्तफय, 2011 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न
                                                                                        ू
भाना गमा शं । धन तेयव क धनलॊतयी क ऩूजन वे भानसवक
                       े         े                                    (लृऴब यासळ) शो यशा शं , स्स्थय रग्न का वभम वफवे उतभ
ळास्डत, भन भं वॊतोऴ एल स्लबाल भं वौम्मता का बाल आता शं ।              भाना जाता शं । धन तेयव क फदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय
                                                                                              े
जो रोग असधक वे असधक धन एकि कयने फक काभना कयते शं                      रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 06:54:31 फजे वे रेकय यािी
उडशं धनलॊतयी दे ल फक प्रसतफदन आयाधना कयनी िाफशए।                      08:49:46 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार क दौयान
                                                                                                                 े
धनतेयव ऩय ऩूजा कयने वे व्मत्रक्त भं वॊतोऴ, स्लास्थम, वुख ल            वॊध्मा 05:49 फजे वे 07:22 फजे तक िर िौघफडमा शोने
धन फक त्रलळेऴ प्रासद्ऱ शोती शं । स्जन व्मत्रक्तमं क उत्तभ स्लास्थम
                                                   े                  वे भुशुता की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं ।
भं कभी तथा वेशत खयाफ शोने फक आळॊकाएॊ फनी यशती शं उडशं                 िौघाफडमा भुशूता
त्रलळेऴ रुऩ वे इव ळुब फदन भं ऩूजा आयाधना कयनी िाफशए।                       अभृत भुशूता वुफश 06:10 वे 07:37 तक
धनतेयव भं खयीदायी ळुब भानी जाती शं । रक्ष्भी जी एलॊ गणेळ                   ळुब भुशूता वुफश 09.04 वे 10:32 तक
जी फक िाॊदी फक प्रसतभा-सवक्को को इव फदन खरयदना धन                                िर भुशूता दोऩशय 01:34 वे 02:58 तक
प्रासद्ऱ एलॊ आसथाक उडनसत शे तु श्रेद्ष शोता शं । धनतेयव क फदन
                                                         े                       राब भुशूता दोऩशय 02:58 वे 04:24 तक
बगलान धनलडतयी वभुद्र वे अभृत करळ रेकय प्रकट शुए थे,                              अभृत भुशूता दोऩशय 04:24 वे 05:49 तक
इवसरमे धनतेयव क फदन खाव तौय वे फतानं फक खयीदायी फक
               े                                                           िर भुशूता वॊध्मा 05:49 वे 07:22 तक
जाती शं । इव फदन स्टीर क फतान, िाॊदी क फतान खयीदने वे
                        े             े                                          राब भुशूता यािी 10:27 वे 12:00 तक
प्राद्ऱ शोने लारे ळुब परो भं कई गुणा लृत्रद्ध शोने फक वॊबालना         ळुब भशूता का वभम धन तेयव की ऩूजा क सरमे त्रलळेऴ ळुब
                                                                                                        े
फढ़जाती शं ।                                                          यशे गा। राब भुशूता ऩूजन कयने वे प्राद्ऱ शोने लारे राबं भं लृत्रद्ध
धन तेयव ऩूजा भुशूता                                                   शोती शं । ळुब कार भुशूता फक ळुबता वे धन, स्लास्थम ल आमु भं
  प्रदोऴ कार 2 घण्टे एलॊ 24 सभनट का शोता शं । अऩने                    लृत्रद्ध शोती शं । वफवे असधक ळुब अभृत कार भं ऩूजा कयने का
ळशय क वूमाास्त वभम अलसध वे रेकय अगरे 2 घण्टे 24
     े                                                                शोता शं ।
सभनट फक वभम अलसध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं ।                         नोट: उऩयोक्त लस्णात वूमाास्त का वभम सनयधायण नई फदल्री

अरग- अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार क सनधाायण का आधाय
                             े                                        क अषाॊळ ये खाॊळ क अनुळाय आधुसनक ऩद्धसत वे फकमा गमा
                                                                       े               े

वूमोस्त वभम क अनुळाय सनधाायीत कयना िाफशमे। धनतेयव
             े                                                        शं । इव त्रलऴम भं त्रलसबडन भत एलॊ वूमाास्त सात कयने का
                                                                      तयीका सबडन शोने क कायण वूमाास्त वभम का सनयधायण
                                                                                       े
क फदन प्रदोऴकार भं दीऩदान ल रक्ष्भी ऩूजन कयना ळुब
 े
                                                                      सबडन शो वकता शं । वूमाास्त वभम का सनयधायण स्थासनम
यशता शै ।
                                                                      वूमाास्त क अनुळाय फश कयना उसित शोगा।
                                                                                े
48                                       अक्टू फय 2011




                                  दीऩालरी ऩूजन भुशूता (26-अक्तफय-2011)
                                                             ू

                                                                                                       सिॊतन जोळी
          भाॊ रक्ष्भी फक कृ ऩा प्राद्ऱ कयने शे तु एलॊ उनका स्थामी सनलाव शो वक इव उद्दे श्म वे घय-दकान-व्मलवासमक कामाारम भं
                                                                             े                    ु
दीऩालरी क फदन रक्ष्भी ऩूजन शे तु फदन क वफवे ळुब भुशूता को सरमा जाता शं . इव लऴा दीऩालरी का ऩला फुधलाय , 26 अक्तफय,
         े                            े                                                                       ू
2011 भं कासताक भाव फक अभालस्मा, सििा एलॊ स्लासत नषि भं, प्रीती मोग भं भनामा जामेगा. दीऩालरी क फदन अभालस्मा
                                                                                             े
सतसथ, प्रदोऴ कार, ळुब रग्न ल िौघािफडमा भुशूता त्रलळेऴ का अत्मासधक भशत्ल शोता शं ।
          26 अक्तफय, 2011 क फदन वूमोदमी नषि सििा, रेफकन यािी 09:43:33 फजे फाद स्लाती नषि यशे गा, इव फदन
                ू          े
वूमोदमी मोग त्रलष्कब वॊध्मा 06:29:37 फजे फाद प्रीसत मोग यशे गा। वूमोदमी कयण ितुष्ऩाद दोऩशय 03:19:36 फजे
                   ुॊ
ऩद्ळमात नाग कयण यशे गा। वूमोदम क वभम िडद्रभा कडमा यासळ भं दोऩशय 11:16:00 फजे तुरा यासळ भं भ्रभण
                                े
कये गा।
          प्रदोऴ कार 2 घण्टे एलॊ 24 सभनट का शोता शं । अऩने ळशय क वूमाास्त वभम अलसध वे रेकय अगरे 2 घण्टे 24 सभनट फक
                                                                े
वभम अलसध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं । अरग- अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार क सनधाायण का आधाय वूमोस्त वभम क
                                                                   े                             े
अनुळाय सनधाायीत कयना िाफशमे।
          दीऩालरी प्रदोऴ कार भुशूता अऩने ळशय क वूमाास्त वभम वे 2 घडटे 24 सभनट तक का वभम ळुब भुशूता वभम क सरमे
                                              े                                                         े
प्रमोग फकमा जाता शं . इवे प्रदोऴ कार वभम कशा जाता शं । इव लऴा 26 अक्तफय, 2011 (दीऩालरी) को बायतीम वभम
                                                                    ू
अनुळाय नई फदल्री भं वूमाास्त वॊध्मा 05 फज कय 42 सभसनट ऩय शोगा। वॊध्मा 05 फज कय 42 सभसनट वे आयम्ब शोकय
यात क 08 फजकय 06 सभनट तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा।
     े
          26 अक्तफय, 2011 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न (लृऴब यासळ) शो यशा शं , स्स्थय रग्न का वभम वफवे उतभ
                ू
भाना जाता शं । फदऩालरी क फदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 06:46:37 फजे वे रेकय यािी
                        े
08:42:04 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार क दौयान वॊध्मा 07:20 फजे वे 08:58 फजे तक ळुब िौघफडमा शोने
                                           े
वे भुशुता की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं ।
          स्जवभं त्रलळेऴ रूऩ वे श्री गणेळऩूजन, श्री भशारक्ष्भी ऩूजन, कफेय ऩूजन, व्माऩारयक खातं का ऩूजन, दीऩदान एलॊ इव
                                                                      ु
वभम क अॊतगात अऩने वेलकं को उऩशाय दे ना ळुब यशता शं ।
     े
          इव भुशूता वभम भं अऩने ऩरयलाय क फडे वदस्मं एलॊ सभि लगा वे आळीलााद रेना एलॊ उडशं सभठाईमाॊ, लस्त्र ल उऩशाय
                                        े
आफद दे ना बी ळुब यशता शं । त्रलद्रानो क भत वे इव भुशूता भं ऩरयलाय क फडे वदस्मं एलॊ सभि लगा वे प्राद्ऱ शोने लारा आळीलााद
                                       े                           े
ळुब परप्रद सवद्ध शोता शं । इव भुशूता वभम भं भॊफदय इत्माफद धभास्थरो ऩय दान इत्माफद कयना बी त्रलळेऴ राब दामश एलॊ
कल्माणकायी शोता शं ।
.
दीऩालरी िौघफडमाॊ भुशूता
दीऩालरी िौघ़फडमा भुशूता वभम को घय ल ऩरयलाय भं रक्ष्भी ऩूजन कयने क सरमे ळुब भाना जाता शै . श्रीभशारक्ष्भी ऩूजन एलॊ
                                                                 े
दीऩालरी का भशाऩला कासताक कृ ष्ण अभालस्मा भं प्रदोऴ कार एलॊ यात्रि वभम भं स्स्थय रग्न वभम भं कयना ळुब शोता शै रक्ष्भी
ऩूजन, दीऩ प्रजलस्ल्रत कयने क सरमे प्रदोऴकार भुशूता वभम शी त्रलळेऴतमा ळुब भाना गमा शै .
                            े
49                                अक्टू फय 2011




रक्ष्भी ऩूजा भुशूता दीऩालारी क फदन 
                              े
       राब भुशूता वुफश भं  वे  तक
       अभृत भुशूता वुफश भं  वे  तक
       ळुब भुशूता दोऩशय भं  वे  तक 
       िय भुशूता दोऩशय भं  वे  तक
       राब भुशूता दोऩशय भं  वे वॊध्मा 
       ळुब भुशूता वॊध्मा भं    वे  तक
       ळुब भुशूता वॊध्मा भं    वे  तक
       अभृत भुशूता यात भं  वे  तक 
       िय भुशूता यात भं वे यात तक
नोट: उऩयोक्त लस्णात वूमाास्त का वभम सनयधायण नई फदल्री क अषाॊळ ये खाॊळ क अनुळाय आधुसनक ऩद्धसत वे फकमा
                                                       े               े
गमा शं । इव त्रलऴम भं त्रलसबडन भत एलॊ वूमाास्त सात कयने का तयीका सबडन शोने क कायण वूमाास्त वभम का
                                                                            े
सनयधायण सबडन शो वकता शं । वूमाास्त वभम का सनयधायण स्थासनम वूमाास्त क अनुळाय फश कयना उसित शोगा।
                                                                    े




                                    भॊि सवद्ध गणेळ मॊि
 गणेळ मॊि                                                 रक्ष्भी गणेळ मॊि एकाषय
 गणेळ मॊि              (वॊऩूणा फीज भॊि वफशत)              गणऩसत मॊि
 गणेळ सवद्ध मॊि                                           शरयद्रा गणेळ मॊि
       ताम्र ऩि ऩय वुलणा ऩोरीव               ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीव                   ताम्र ऩि ऩय
             (Gold Plated)                         (Silver Plated)                   (Copper)
         वाईज               भूल्म            वाईज              भूल्म           वाईज                भूल्म
        2” X 2”             640             2” X 2”             460           2” X 2”               370
        3” X 3”            1250             3” X 3”             820           3” X 3”               550
        4” X 4”            1850             4” X 4”            1250           4” X 4”               820
        6” X 6”            2700             6” X 6”            2100           6” X 6”              1450
        9” X 9”            4600             9” X 9”            3700           9” X 9”              2450
       12” X12”            8200            12” X12”            6400          12” X12”              4600

                                        GURUTVA KARYALAY
              92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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50                                  अक्टू फय 2011




                                              नमे कऩडे औय ज्मोसतऴ
                                                                                                   सिॊतन जोळी
        ज्मोसतऴ क अनुळाय कछ त्रलळेऴ नषिो भं नए
                 े        ु                                    योफशणी (स्लाभी-िॊद्रभा):
कऩड़े ऩशने वे इवका ळुब पर प्राद्ऱ शोता शं , एलॊ कछ
                                                 ु             योफशणी नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फकवी बी स्त्रोत वे
नषिो भं नए कऩड़े ऩशनने वे स्लास््म, आसथाक ऩये ळासन             अत्मासधक धनराब क मोग फनता शं ।
                                                                               े
इत्माफद वभस्माए उत्ऩडन शोती शं ।
                                                               भृगसळया (स्लाभी-भॊगर):
        नमे कऩड़े धायण कयने शे तु अस्द्वनी, योफशणी, ऩुष्म,
                                                               भृगसळया नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे उन कऩडो क जल्द
                                                                                                        े
सििा, ऩूनलावु, उत्तय पाल्गुसन, शस्त, त्रलळाखा, अनुयाधा,
                                                               खयाफ शोने की वॊबालना ये शती शं ।
उत्तयऴाढ, धसनद्षा, उत्तय बाद्रऩद, ये लसत, ळुब भाने गमे शं ।
अस्द्वनी (स्लाभी-कतु):
                  े
                                                               आद्रा (स्लाभी-याशू):
अस्द्वनी नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फकवी बी दोस्त मा
                                                               आद्रा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे धन नाळ की आळॊका
रयश्तेदाय क द्राया उऩशाय प्राद्ऱ शोता शं ।
           े
                                                               ये शती शं ।

बयणी (स्लाभी-ळुक्र):
                                                               ऩूनलावु (स्लाभी-गुरू ):
बयणी नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे इव
                                                               ऩूनलावु नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे अस्लीकृ सत मा
नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फदनाभी शोने की आळॊका
                                                               भानसवक िावदी जेसव कफठनाई का वाभना कयना ऩडता
असधक ये शती शं ।
कृ सतका (स्लाभी-वूम):
                   ा                                           शं ।
कृ सतका नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे इव
नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे घय मा व्मलाम क स्थान ऩय
                                      े                        ऩुष्म (स्लाभी-ळसन ):

अस्ग्न बम फना यशता शं । शं ।                                   ऩुष्म नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फकवी बी स्रोत द्राया
                                                               उच्ि स्तय का धन राब शोने का मोग फनता शं ।

     भॊगर मॊि वे ऋण भुत्रक्त
                                                               आळरेऴा (स्लाभी-फुध):
ऋण भुत्रक्त शे तु भॊगर वाधना का प्रमोग असत
                                                               आळरेऴा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिे इव नषि भं
राब प्रद शोता शं ।            कजा क दरदर भं पवे
                                   े
                                                               नए कऩड़े ऩशने वे कऩड़े क नाळ शोने की वॊबालना शोती
                                                                                       े
व्मत्रक्तमं क सरमे कजा वे भुत्रक्त प्राद्ऱ कयने शे तु
             े
                                                               शं ।
ळास्त्रोक्त त्रलधान वे उत्तभ उऩाम शोता शं भॊगर
                                                               भघा (स्लाभी-कतु):
                                                                            े
वाधना का प्रमोग जो त्रलळेऴ राब प्रदान कयने                     भघा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे इव
लारा शोता शं । भॊगर वाधना का प्रमोग कोई बी                     नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे जीलन भी उडनसत शे तु
व्मत्रक्त वयरता कय वकता वे कयक ळीघ्र राब
                              े                                कफठनाई उतऩडन शोती शं ।

प्राद्ऱ कय वकता शं । Rs.550 वे Rs.8200 तक
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ऩूलाा पारगुसन (स्लाभी-ळुक्र):                                 ऩूलााऴाढ़ा (स्लाभी-ळुक्र):
ऩूलाा पारगुसन नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे             ऩूलााऴाढ़ा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे इव
इव नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फशोत वायी ऩये ळासनमं               नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे स्लास््म वभस्मा शोकय योग
वे वम्भुखीन शोना ऩडता शं ।                                    उत्ऩडन शोते शं ।

उत्तय पाल्गुसन (स्लाभी-वूम):
                          ा                                   उत्तयाऴाढ़ा (स्लाभी-वूम):
                                                                                     ा
उत्तय पाल्गुसन नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे आभदनी भं               उत्तयाऴाढ़ा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे वफक वाथ भे
                                                                                                     े
लृत्रद्ध शोकय जीलन भं उडनसत प्राद्ऱ शोती शं ।                 अच्छे वम्फडध त्रलकसवत शोते शं ।

शस्त (स्लाभी-िॊद्रभा):                                        श्रलण (स्लाभी-िॊद्रभा):
शस्त नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे बाग्म एलॊ धन की                  श्रलण नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिे इव नषि भं नए
लृत्रद्ध शोकय वबी प्रकाय की वुख वुत्रलधा प्राद्ऱ शोती शं ।    कऩड़े ऩशने वे आॊखो वे वॊफॊसधत वभस्मा उत्ऩडन शोती
                                                              शं ।
सििा (स्लाभी-भॊगर):
सििा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे रयश्तेदाय मा सभि लगा             धसनद्षा (स्लाभी-भॊगर):
वे अडम कऩड़े उऩशाय भं सभरते शं ।                              धसनद्षा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे नौकयी व्मलवाम भं
                                                              नमे आम क स्त्रोत का मोग फनते शं ।
                                                                      े
स्लाती (स्लाभी-याशू):
स्लाती नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे सभि लगा द्राया उत्तभ           ळतसबऴा (स्लाभी-याशू):
उऩशाय की प्रासद्ऱ शोती शं ।                                   ळतसबऴा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिे क्मोफक इस्व
                                                              नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे त्रलऴ मा फकवी स्जल जॊतु के
त्रलळाखा (स्लाभी-गुरू):
                                                              काटने का बम ये शता शं ।
त्रलळाखा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे रयश्तेदाय एलॊ सभि
लगा द्राया प्रसवत्रद्ध क मोग प्रफर शोते शं ।
                        े                                     ऩूलाा बाद्रऩद (स्लाभी-गुरू):
                                                              ऩूलाा बाद्रऩद नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे
अनुयाधा (स्लाभी-ळसन):
                                                              मे इव नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे स्लमॊ क सरमे
                                                                                                   े
अनुयाधा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे नमे दोस्त एलॊ
                                                              शासनकायक शोता शं ।
वशकभॉ वं राब प्राद्ऱ शोता शं ।
                                                              उत्तय बाद्रऩद (स्लाभी-ळसन):
ज्मेद्षा (स्लाभी-फुध):
                                                              उत्तय बाद्रऩद भे मफद आऩका जडभ शुला शं तो आऩकी
ज्मेद्षा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फकवी बी स्त्रोत वे
                                                              वॊतान को इव नषि भं नए कऩड़े नशीॊ ऩशना ने िाफशमे
उत्तभ धन की प्रासद्ऱ शोती शं ।
                                                              नशीॊ तो उनक सरमे शासनकायक शं ।
                                                                         े

भूरा (स्लाभी-कतु):
              े
                                                              ये लती (स्लाभी-फुध):
भूरा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिे िाफशमे इव नषि
                                                              यलती नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे एकासधक स्त्रोत वे धन
भं नए कऩड़े ऩशने वे कऩड़ो का त्रलनाळ ळीघ्र शो जाता
                                                              राब प्राद्ऱ शोता शं ।
शं ।
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                                            ळास्त्रोक्त त्रलधान वे दीऩालरी ऩूजन
                                                                                                         आरोक ळभाा
शभाये धभाळास्त्रो भं कासताक भाव भं दीऩ दान का त्रलळेऴ          अथाात: वभुद्र-भॊथन क वभम षीय वागय वे उत्ऩडन
                                                                                   े
भशत्ल फतामा गमा शै । दीऩालरी भं दीऩदान का त्रलळेऴ भशत्ल        दे लताओॊ तथा दानलं द्राया नभस्काय फक गई वला
फतामा शं ।                                                     दे लस्लरूत्रऩणी भाता। आऩको फाय-फाय नभस्काय शं । आऩ भेये
                                                               द्राया फदमे शुए इव अघ्मा को स्लीकाय कयो।
श्रीऩुष्कयऩुयाण क अनुळाय:
                 े                                             इव फदन ऩूजन क फाद गाम को उड़द क फड़े स्खरा कय प्राथाना
                                                                            े                 े
                                                               कयने का त्रलधान शं ।
तुरामाभ ् सतरतैरेन वामॊकारे वभागते।
                                                               वुयसब त्लॊ जगडभातदे ली त्रलष्णुऩदे स्स्थता।
आकाळदीऩभ ् मो दद्याडभावभेकभ ् शरयभ ् प्रसत।
                                                               वलादेलभमे ग्रावॊ भमा दत्तसभभॊ ग्रव।।
भशतीभ ् सश्रमभाप्नोसत रूऩवौबाग्मवम्ऩदभ ्।।
                                                               तत् वलाभमे दे त्रल वलादेलैयरङ्कृ ते।
अथाात: जो व्मत्रक्त कासताक भाव भं
                                                               भातभाभासबरात्रऴतॊ वपरॊ करु नस्डदनी।।
                                                                                       ु
वॊध्मा       वभम          बगलान      श्री
                                                               अथाात: शे जगदम्फे, शे स्लगा लासवनी दे ली, शे वला दे लभमी,
शरय(त्रलष्णु) क नाभ वे सतर क तेर
               े            े
                                                                            भेये द्राया अत्रऩत इव अडन को ग्रशण कयो। शे
                                                                                             ा
का दीऩ जराता शं , उवे अतुर                                                       वभस्त दे लताओॊ द्राया अरॊकृत भाता नॊफदनी
रक्ष्भी, रूऩ, वौबाग्म औय वॊऩत्रत्त                                                    भेया भनोयथ ऩूणा कयो।
फक प्रासद्ऱ शोती शं ।                                                                 इवक फाद याि क वभम इद्श, ब्राह्मण,
                                                                                         े         े
दे लत्रऴा नायदजी क अनुवाय दीऩालरी
                  े                                                                   गौ, घय क लृद्धजनं फक आयती उतायने
                                                                                              े
ऩला      द्रादळी,       िमोदळी,   ितुदाळी,                                            का त्रलधान शं ।
अभालस्मा औय प्रसतऩदा तक 5 फदन
                                                                                      िमोदळी (धनतेयव)
भनाना िाफशए। दीऩालरी ऩला प्रत्मेक फदन
                                                                              कासताक कृ ष्ण िमोदळी को धनतेयव क रुऩ भं
                                                                                                              े
अरग-अरग प्रकाय फक ऩूजा का त्रलधान शं ।
                                                                    भनामा जाता शं । ळास्त्रो भं उल्रेख सभरता शं फक
गोलत्व द्रादळी                                                 बगलान धडलॊतयी ने वभुद्र-भॊथन क दौयान प्रकट शोकय द्खी
                                                                                             े                  ु
कासताक भाव फक द्रादळी को गोलत्व द्रादळी क फदन दध दे ने
                                         े     ू               जनं क योगसनलायणाथा आमुलद का प्राकट्म फकमा था।
                                                                    े                 े
लारी गाम को उवक फछड़े वफशत स्नान कयाकय लस्त्र ओढ़ा
               े                                               धनतेयव क फदन वॊध्मा क वभम घय औय आॊगन भं शाथ भं
                                                                       े            े
कय गरे भं ऩुष्ऩभारा ऩशनाना, उवक वीॊग भॉढ़ाना, िॊदन का
                               े                               जरता शुआ दीऩ रेकय सनिे फदमे भॊि वे बगलान मभयाज फक
सतरक कयना तथा ताॉफे क ऩाि भं वुगडध, अषत, ऩुष्ऩ, सतर
                     े                                         प्रवडनता शे तु इव भॊि क वाथ दीऩदान कयने का त्रलधान शं ।
                                                                                      े
औय जर का सभश्रण कय सनम्न भॊि वे गौ क ियणं का
                                    े                          भृत्मुना ऩाळदण्डाभ्माॊ कारेन श्माभमा वश।
प्रषारन कयना िाफशए।                                            िमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज् प्रीमताॊ भभ।।
                                                                                       ा
षीयोदाणालवम्बूते वुयावुयनभस्कृ ते।                             अथाात: िमोदळी क फदन दीऩदान वे ऩाळ औय दॊ डधायी भृत्मु
                                                                              े
वलादेलभमे भातगृशाणाघ्मं नभो नभ्।।
              ा                                                तथा कार क असधऩसत दे ल बगलान मभ, दे ली श्माभावफशत
                                                                        े
                                                               भुझ ऩय प्रवडन शं।
53                                       अक्टू फय 2011



नयक ितुदाळी                                                 कयने वे अडम फदनं की अऩेषा कई गुना असधक राब प्राद्ऱ
कासताक कृ ष्ण ितुदाळी को नयक ितुदाळी क रुऩ भं भनामा
                                      े                     शोता शं । दीऩालरी क फदन ऩशरे वे शी स्लच्छ फकमे गृश को
                                                                               े
जाता शं । इव फदन ितुभखी दीऩ का दान कयने का त्रलधान शं ।
                     ुा                                     वुवस्ज्जत कय बगलान नायामण क वाथ भाॊ रक्ष्भी फक भूसता
                                                                                       े

भाडमता शं , दीऩ दान वे नयक बम वे भुत्रक्त सभरती शं ! नयक    मा सिि फक स्थाऩना कय उनका त्रलसधलत ऩूजन कयने का
                                                            त्रलधान शं ।
ितुदाळी फक यात को एक िाय भुख (िाय फत्ती) लारा दीऩ
जराकय सनिे फदमे भॊि वे दीऩदान कयने का त्रलधान शं ।
                                                            प्रसतऩदा
दत्तो दीऩद्ळतुदाश्माॊ नयकप्रीतमे भमा।                       कासताक ळुक्र प्रसतऩदा को अडनकट फदलव क रुऩ भं भनामा
                                                                                         ू       े

ितुलसतावभामुक्त् वलाऩाऩाऩनुत्तमे।।
    ा                                                       जाता शं । इव फदन गाम को वजाकय, उनकी ऩूजा कयक सनिे
                                                                                                        े

आज ितुदाळी क फदन नयक क असबभानी दे लता फक प्रवडनता
            े         े                                     फदमे भॊि उच्िायण कयने का त्रलधान शं ।

क सरए एलॊ वभस्त ऩाऩं क त्रलनाळ क सरए भं िाय भुख
 े                    े         े                           रक्ष्भीमाा रोकऩारानाॊ धेनुरूऩेण वॊस्स्थता।

लारा िौभुखा दीऩ अत्रऩत कयता शूॉ।
                     ा                                      घृतॊ लशसत मसाथे भभ ऩाऩॊ व्मऩोशतु।।
                                                            अथाात: धेनुरूऩ भं स्स्थत जो रोकऩारं फक वाषात रक्ष्भी शं
दीऩालरी
                                                            तथा जो मस क सरए घी दे ती शं , लश गाम भाता भेये ऩाऩं का
                                                                       े
कासताक अभालस्मा को दीऩालरी क रुऩ भं भनामा जाता शं ।
                            े
                                                            नाळ कये ।
इव फदन प्रात् उठकय स्नानाफद वे सनलृत्त शोकय जऩ-तऩ


                               रक्ष्भी प्रासद्ऱ शे तु कयं यासळ भॊि का जऩ
भेऴ : ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भीनायामण नभ्।
लृऴब : ॐ गौऩारामै उत्तय ध्लजाम नभ्।
सभथुन : ॐ क्रीॊ कृ ष्णामै नभ्।
कक : ॐ फशयण्मगबाामै अव्मक्त रूत्रऩणे नभ्।
  ा
सवॊश : ॐ क्रीॊ ब्रह्मणे जगदाधायामै नभ्।
कडमा : ॐ नभो प्रीॊ ऩीताम्फयामै नभ्।
तुरा : ॐ तत्ल सनयॊ जनाम तायक याभामै नभ्।
लृस्द्ळक : ॐ नायामणाम वुयसवॊशामै नभ्।
धनु : ॐ श्रीॊ दे लकीकृ ष्णाम ऊध्लाऴॊतामै नभ्।
भकय : ॐ श्रीॊ लत्वरामै नभ्।
कब : श्रीॊ उऩेडद्रामै अच्मुताम नभ्।
 ॊु
भीन : ॐ क्रीॊ उद्‍ ताम उद्धारयणे नभ्।
                 धृ
यासळ भॊि क जाऩ कयने वे वबी प्रकाय क कामा भं ळीघ्र वपरता प्राद्ऱ शोती शं ।
          े                        े
यासळ भॊि क जाऩ वे व्मत्रक्त शय प्रकाय क वॊकट वे वुयस्षत यशता शं । व्मत्रक्त आसथाक रूऩ वे ऩूणा
          े                            े
वॊऩडन शो जाता शं ।
54                                     अक्टू फय 2011




                                         रक्ष्भी प्रासद्ऱ क वयर उऩाम
                                                           े
                                                                                               सिॊतन जोळी
        जो रोग बौसतक वुख भृत्रद्ध क कायक श्रीमॊि, दस्षणा लसता
                                   े
ळॊख इत्मा आफद घय भं स्थात्रऩत कय ऩूज नशी कय ऩाते अथला इन
लस्तुओॊ को खरयदने भं अवभथा शो लश उऩामोको को अऩनाकय जीलन
भं वुख-वभृत्रद्ध एलॊ ऎद्वमा प्राद्ऱ कय वकते शं ।
   प्रात् उठते शी शस्तदळान (प्रात् कय दळानभ ्) कय दोनं शथेसरमं
    को 2-3 फाय भुॊश ऩय पयना िाफशमे।
                        े
   जफ बी फकवी कामा वे फाशय सनकरे तो घय ऩय आते वभम कछ
                                                    ु
    ना कछ वाथ रेकय शी आए खारी शाथ नशीॊ आए िाशे ऩेड का
        ु
    ऩत्ता-अखफाय मा जीलन जरुयत फक लस्तुएॊ रेकय आमं। (वूमाास्त
    क फाद भं ऩेड क ऩत्ते तोडना शानी कायक शोता शं ।)
     े            े
   धन मा व्माऩाय वे वॊफॊधीत रेन-दे न क खाते ऩय मा ऩि व्मलशाय
                                       े
    कयते वभम शल्दी मा कळय रगामं।
                       े
   गल्रे भं, ऩैवे क रेन-दे न वे वॊफॊसधत, िैक फुक-ऩावफुक, ऩूॊजी
                    े
    सनलेळ वे वॊफॊसधत कागजात इत्माफद श्री मॊि क वाथ भं यखं।
                                              े
   प्रसतफदन बोजन क सरए फनी ऩशरी योटी गाम को स्खरामे।
                   े
   ळुक्रलाय को वपद लस्तुओॊ का दान कयने वे धन मोग फनता शं ।
                  े
   प्रात : कार नाळता कयने वे ऩूला झाडू अलश्म रगामे।
   यात को झूठे फतान, किया इत्माफद यवोई भं नशीॊ यखे।
   प्रसतफदन वॊध्मा वभम घय ऩय ऩूजा सनमत वभम ऩय कये ।
   सनमसभत रुऩ वे ळसनलाय क फदन घय फक वाफ़-वपाई कयं ।
                          े
   रुऩमा ऩैवा धन को थूक रगाकय सगनने वे दरयद्रता आती शं ।
   फुधलाय को धन का वॊिम कयं । फंक भं धन जभा कयलाते वभम रक्ष्भी भॊि जऩा कये ।
   घय भं फकवी बी दे ली दे लता फक एक वे ज्मादा तस्लीय,भूसता ऩूजा स्थान नशीॊ यखे।
   जरुयत भॊद व्मत्रक्त, गरयफो को मथावत्रक्त भदद कय उडशं दान इत्माफद वभम-वभम ऩय दे ते यशं ।
   ऩुयानी, यद्दी बॊगाय इत्माफद ळसनलाय क फदन घय वे फाशय सनकार दे नी िाफशमे।
                                        े
   ळसनलाय क फदन कारे यॊ ग फक लस्तु, स्टीर, रोशा इत्माफद उऩशाय भं नशीॊ रेनी िाफशमे।
            े
   फकवी कमा क सरमे जाते वभम खारी ऩेट कबी बी घय वे ना सनकरे । कामा भं फाधा त्रलघ्न आते शं , अवपरता
              े
    प्राद्ऱ शोती शं ।
   भॊगरलाय, गुरुलाय, ळसनलाय को फार-नाखून नशीॊ काटने िाफशमे।
   स्स्थय रक्ष्भी फक काभना शे तु रुऩमा-ऩैवा-शीये जलाशयात ऩीरा कऩडा त्रफछाकय मा ऩीरे कऩडे भं रऩेटकय यखं।
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    लऴा भं कभ वे कभ एक फाय ऩरयलाय क वाथ तीथा मािा अलश्म
                                    े
     कयं । ऩरयलाय क वाथ फकवी दे ली भंफदय भफशने भं कभ वे कभ
                   े
     एक फाय भं अलश्म जामे।
    वूमोदम क वभम मफद घय की छत ऩय कारे सतर त्रफखेयने वे
             े
     घय भं वुख वभृत्रद्ध शोती शं ।
    अळोक का ऩेड़ रगाकय उवको वीॊिने वे धन भं लृत्रद्ध शोती शं ।
    वुफश भुख्म दयलाजे क फाशय वे झाडू वे वपाई कयक थोडा ऩानी
                        े                        े
     सछड़क ने वे घय भं धन फक लृत्रद्ध शोती शं ।
    प्रसत वोभलाय, फुधलाय, ळुक्रलाय अळोक लृष क अखॊफडत ऩत्ते
                                              े
     घयभं राकय ळुद्ध जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩडे वे
     ऩोछकय घय भं मा व्मलवामीक स्थान ऩय यखने वे धनराब
     शोता शं ।
    प्रसत वोभलाय क फदन अळोक लृष क अखॊफडत ऩत्ते राकय ळुद्ध
                   े              े
     जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩडे वे ऩोछकय दकान भं मा
                                             ु
     व्मलवामीक स्थर ऩय भार वाभान यखने फक जगश ऩय यखने वे
     व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं ।
    प्रसत फुधलाय क फदन अळोक लृष क अखॊफडत ऩत्ते राकय ळुद्ध जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩडे वे ऩोछकय
                   े              े
     अरभायी, गल्रे भं मा धन यखने क फक्वे भं यखने वे धन फृत्रद्ध शोती शं ।
                                  े
    अळोक क भूर की जड़ का एक टु कड़ा ऩूजा घय भं यखने औय योजाना धूऩ-दीऩ वे ऩूजन कयने वे धन फक कभी
           े
     नशीॊ खोती।
    सतजोयी क रॉकय भं शभेळा दो फॉक्व यखं। एक भं योजाना कछ रूऩमे यख कय फॊद कय दं , उवभं वे रूऩमे नशीॊ
             े                                          ु
     सनकारं मा अत्मासधक आलश्मकता शोने ऩय सनकारे। दवये फॉक्व भं वे काभ क रेन-दे न क सरए रूऩए सनकारं।
                                                  ू                    े          े
    प्रसतफदन आभदनी का करेक्ळन दवये फदन स्लमॊ क खिे क सरमे मा फकवी व्माऩायी को िुकाने शे तु सनकारे।
                                ू              े     े
     आभदनी मा करेक्ळन को कभ वे कभ 24 घॊटे क फाद शी खिा क सरमे सनकारने वे अत्मासधक धन राब शोता शं ।
                                           े            े
    जो रोग नौकयी रयते शं लश बी अऩना ऩैवा फंक भं आने क मा घय भं राने क 24 घॊटे क फाद शी खिा क सरमे
                                                      े               े         े            े
     सनकारने वे अत्मासधक धन राब शोता शं ।


                                         भॊि सवद्ध दरब वाभग्री
                                                    ु ा
    शत्था जोडी- Rs- 370                   घोडे की नार- Rs.351               भामा जार- Rs- 251
    सवमाय सवॊगी- Rs- 370                  दस्षणालतॉ ळॊख- Rs- 550            इडद्र जार- Rs- 251
    त्रफल्री नार- Rs- 370                 भोसत ळॊख- Rs- 550                 धन लृत्रद्ध शकीक वेट Rs-251

                                                  गुरुत्ल कामाारम:
                                    Call Us : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785,
                       E-mail Us:- gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
56                                         अक्टू फय 2011




                                                      रक्ष्भी भॊि
                                                                                                         सिॊतन जोळी
भॊि :
    1. ॐ श्री भशारक्ष्म्मै नभ्।
    2. श्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ कभरे कभरारमे।
    3. श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ कभरलासवडमै स्लाशा ।
    4. ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै नभ्।
    5. ॐ श्रीॊ सश्रमै नभ्।
    6. ॐ ह्री श्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ भशारक्ष्भी भभ गृशे धनॊ ऩूयम ऩूयम सिॊतामै दयम दयम स्लाशा ।
                                                                                            ू   ू
    7. धन राब एलॊ वभृत्रद्ध भॊि
        ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ त्रिबुलन भशारक्ष्म्मै अस्भाॊक दारयद्र्म नाळम प्रिुय धन दे फश दे फश क्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ ॐ ।
    8. अषम धन प्रासद्ऱ भॊि

          ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ वं ॐ ह्रीॊ क ए ई र ह्रीॊ श व क श र ह्रीॊ वकर ह्रीॊ वं ऐॊ क्रीॊ ह्रीॊ श्री ॐ ।

कवे कयं भॊि जाऩ :-
 ै

धनतेयव मा दीऩालरी क फदन वॊकल्ऩ रेकय प्रात्कार स्नान कयक ऩूला मा उत्तय फदळा फक औय भुख
                   े                                   े                                             कयक रक्ष्भी फक भूसता
                                                                                                        े
मा सिि की ऩॊिोऩिाय मा दषोऩिाय मा ऴोड्ऴोऩिाय वे ऩूजा कयं ।



        ळुद्ध-ऩत्रलि आवन ग्रशण कय स्पफटक फक भारा वे भॊि का जाऩ १,५,७,११ भारा जाऩ ऩूणा कय अऩने कामा उद्दे श्म फक
ऩूसता शे तु भाॊ रक्ष्भी वे प्राथना कयं ।

असधकस्म असधक परभ ्।
            ॊ
जऩ स्जतना असधक शो वक उतना अच्छा शै । मफद भॊि असधक फाय जाऩ कय वक तो श्रेद्ष।
                    े                                          ं


प्रसतफदन स्नान इत्माफदवे ळुद्ध शोकय उऩयोक्त फकवी एक रक्ष्भी भॊि का जाऩ 108 दाने फक भारा वे कभ वे कभ एक
भारा जाऩ अलश्म कयना िाफशए।



उऩयोक्त भॊि क त्रलसध-त्रलधान क अनुवाय जाऩ कयने वे भाॊ रक्ष्भी फक कृ ऩा वे व्मत्रक्त को धन की प्रासद्ऱ शोती शै औय
             े                े
सनधानता का सनलायण शोता शै ।
57                                   अक्टू फय 2011




                                      वला कामा सवत्रद्ध कलि
स्जव व्मत्रक्त को राख प्रमत्न औय ऩरयश्रभ कयने क फादबी उवे भनोलाॊसछत वपरतामे एलॊ फकमे गमे कामा
                                               े
भं सवत्रद्ध (राब) प्राद्ऱ नशीॊ शोती, उव व्मत्रक्त को वला कामा सवत्रद्ध कलि अलश्म धायण कयना िाफशमे।

कलि क प्रभुख राब: वला कामा सवत्रद्ध कलि क द्राया वुख वभृत्रद्ध औय नल ग्रशं क नकायात्भक प्रबाल को
     े                                   े                                  े
ळाॊत कय धायण कयता व्मत्रक्त क जीलन वे वला प्रकाय क द:ख-दारयद्र का नाळ शो कय वुख-वौबाग्म एलॊ
                             े                    े ु
उडनसत प्रासद्ऱ शोकय जीलन भे वसब प्रकाय क ळुब कामा सवद्ध शोते शं । स्जवे धायण कयने वे व्मत्रक्त मफद
                                        े
व्मलवाम कयता शोतो कायोफाय भे लृत्रद्ध शोसत शं औय मफद नौकयी कयता शोतो उवभे उडनसत शोती शं ।


    वला कामा सवत्रद्ध कलि क वाथ भं वलाजन लळीकयण कलि क सभरे शोने की लजश वे धायण कयता
                            े                         े
      की फात का दवये व्मत्रक्तओ ऩय प्रबाल फना यशता शं ।
                 ू
    वला कामा सवत्रद्ध कलि क वाथ भं अद्श रक्ष्भी कलि क सभरे शोने की लजश वे व्मत्रक्त ऩय भाॊ भशा
                            े                         े
      वदा रक्ष्भी की कृ ऩा एलॊ आळीलााद फना यशता शं । स्जस्वे भाॊ रक्ष्भी क अद्श रुऩ (१)-आफद
                                                                          े
      रक्ष्भी, (२)-धाडम रक्ष्भी, (३)-धैयीम रक्ष्भी, (४)-गज रक्ष्भी, (५)-वॊतान रक्ष्भी, (६)-त्रलजम
      रक्ष्भी, (७)-त्रलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो का अळीलााद प्राद्ऱ शोता शं ।

    वला कामा सवत्रद्ध कलि क वाथ भं तॊि यषा कलि क सभरे शोने की लजश वे ताॊत्रिक फाधाए दय
                            े                    े                                    ू
      शोती शं , वाथ शी नकायत्भन ळत्रक्तमो का कोइ कप्रबाल धायण कताा व्मत्रक्त ऩय नशीॊ शोता। इव
                                                  ु
      कलि क प्रबाल वे इऴाा-द्रे ऴ यखने लारे व्मत्रक्तओ द्राया शोने लारे दद्श प्रबालो वे यषाशोती शं ।
           े                                                             ु
    वला कामा सवत्रद्ध कलि क वाथ भं ळिु त्रलजम कलि क सभरे शोने की लजश वे ळिु वे वॊफॊसधत
                            े                       े
      वभस्त ऩये ळासनओ वे स्लत् शी छटकाया सभर जाता शं । कलि क प्रबाल वे ळिु धायण कताा
                                   ु                        े
      व्मत्रक्त का िाशकय कछ नशी त्रफगड वकते।
                          ु

अडम कलि क फाये भे असधक जानकायी क सरमे कामाारम भं वॊऩक कये :
         े                      े                    ा

फकवी व्मत्रक्त त्रलळेऴ को वला कामा सवत्रद्ध कलि दे ने नशी दे ना का अॊसतभ सनणाम शभाये ऩाव वुयस्षत शं ।

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                   (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
58                                                अक्टू फय 2011




                                       जैन धभाक त्रलसळद्श मॊिो की वूिी
                                               े
श्री िौफीव तीथंकयका भशान प्रबात्रलत िभत्कायी मॊि          श्री एकाषी नारयमेय मॊि
श्री िोफीव तीथंकय मॊि                                     वलातो बद्र मॊि
कल्ऩलृष मॊि                                               वला वॊऩत्रत्तकय मॊि
सिॊताभणी ऩाद्वानाथ मॊि                                    वलाकामा-वला भनोकाभना सवत्रद्धअ मॊि (१३० वलातोबद्र मॊि)
सिॊताभणी मॊि (ऩंवफठमा मॊि)                                ऋत्रऴ भॊडर मॊि
सिॊताभणी िक्र मॊि                                         जगदलल्रब कय मॊि
श्री िक्रद्वयी मॊि
        े                                                 ऋत्रद्ध सवत्रद्ध भनोकाभना भान वम्भान प्रासद्ऱ मॊि
श्री घॊटाकणा भशालीय मॊि                                   ऋत्रद्ध सवत्रद्ध वभृत्रद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊि
श्री घॊटाकणा भशालीय वला सवत्रद्ध भशामॊि                   त्रलऴभ त्रलऴ सनग्रश कय मॊि
(अनुबल सवद्ध वॊऩणा श्री घॊटाकणा भशालीय ऩतका मॊि)
                ू
श्री ऩद्मालती मॊि                                         षुद्रो ऩद्रल सननााळन मॊि
श्री ऩद्मालती फीवा मॊि                                    फृशच्िक्र मॊि
श्री ऩाद्वाऩद्मालती ह्रंकाय मॊि                           लॊध्मा ळब्दाऩश मॊि
ऩद्मालती व्माऩाय लृत्रद्ध मॊि                             भृतलत्वा दोऴ सनलायण मॊि
श्री धयणेडद्र ऩद्मालती मॊि                                काॊक लॊध्मादोऴ सनलायण मॊि
श्री ऩाद्वानाथ ध्मान मॊि                                  फारग्रश ऩीडा सनलायण मॊि
श्री ऩाद्वानाथ प्रबुका मॊि                                रधुदेल कर मॊि
                                                                  ु
बक्ताभय मॊि (गाथा नॊफय १ वे ४४ तक)                        नलगाथात्भक उलवग्गशयॊ स्तोिका त्रलसळद्श मॊि
भस्णबद्र मॊि                                              उलवग्गशयॊ मॊि
श्री मॊि                                                  श्री ऩॊि भॊगर भशाश्रृत स्कध मॊि
                                                                                    ॊ
श्री रक्ष्भी प्रासद्ऱ औय व्माऩाय लधाक मॊि                 ह्रीॊकाय भम फीज भॊि
श्री रक्ष्भीकय मॊि                                        लधाभान त्रलद्या ऩट्ट मॊि
रक्ष्भी प्रासद्ऱ मॊि                                      त्रलद्या मॊि
भशात्रलजम मॊि                                             वौबाग्मकय मॊि
त्रलजमयाज मॊि                                             डाफकनी, ळाफकनी, बम सनलायक मॊि
त्रलजम ऩतका मॊि                                           बूताफद सनग्रश कय मॊि
त्रलजम मॊि                                                ज्लय सनग्रश कय मॊि
सवद्धिक्र भशामॊि                                          ळाफकनी सनग्रश कय मॊि
दस्षण भुखाम ळॊख मॊि                                       आऩत्रत्त सनलायण मॊि
दस्षण भुखाम मॊि                                           ळिुभख स्तॊबन मॊि
                                                              ु
मॊि क त्रलऴम भं असधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं ।
     े                                 ा
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59                                    अक्टू फय 2011




                                                     घॊटाकणा भशालीय वला सवत्रद्ध भशामॊि को स्थाऩीत
                                             कयने वे वाधक की वला भनोकाभनाएॊ ऩूणा शोती शं । वला
                                             प्रकाय क योग बूत-प्रेत आफद उऩद्रल वे यषण शोता शं ।
                                                     े
                                             जशयीरे औय फशॊ वक प्राणीॊ वे वॊफसधत बम दय शोते शं ।
                                                                            ॊ       ू
                                             अस्ग्न बम, िोयबम आफद दय शोते शं ।
                                                                   ू
                                                     दद्श ल अवुयी ळत्रक्तमं वे उत्ऩडन शोने लारे बम
                                                      ु
                                             वे मॊि क प्रबाल वे दय शो जाते शं ।
                                                     े           ू
                                                     मॊि क ऩूजन वे वाधक को धन, वुख, वभृत्रद्ध,
                                                          े
                                             ऎद्वमा, वॊतत्रत्त-वॊऩत्रत्त आफद की प्रासद्ऱ शोती शं । वाधक की
                                             वबी प्रकाय की वास्त्लक इच्छाओॊ की ऩूसता शोती शं ।
                                                     मफद फकवी ऩरयलाय मा ऩरयलाय क वदस्मो ऩय
                                                                                े
                                             लळीकयण, भायण,         उच्िाटन इत्माफद जाद-टोने लारे
                                                                                      ू
                                             प्रमोग फकमे गमं शोतो इव मॊि क प्रबाल वे स्लत् नद्श
                                                                          े
                                             शो जाते शं औय बत्रलष्म भं मफद कोई प्रमोग कयता शं तो
                                             यषण शोता शं ।
                                                     कछ जानकायो क श्री घॊटाकणा भशालीय ऩतका
                                                      ु          े
                                             मॊि वे जुडे अद्द्भत अनुबल यशे शं । मफद घय भं श्री
                                                               ु
                                             घॊटाकणा भशालीय ऩतका मॊि स्थात्रऩत फकमा शं औय मफद
                                             कोई इऴाा, रोब, भोश मा ळिुतालळ मफद अनुसित कभा
कयक फकवी बी उद्दे श्म वे वाधक को ऩये ळान कयने का प्रमाव कयता शं तो मॊि क प्रबाल वे वॊऩणा
   े                                                                    े             ू
ऩरयलाय का यषण तो शोता शी शं , कबी-कबी ळिु क द्राया फकमा गमा अनुसित कभा ळिु ऩय शी उऩय
                                           े
उरट लाय शोते दे खा शं ।                                    भूल्म:- Rs. 1450 वे Rs. 8200 तक उप्रब्द्ध
                    वॊऩक कयं । GURUTVA KARYALAY
                         ा
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60                                  अक्टू फय 2011




                         अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलि
अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलि ल     उल्रेस्खत अडम वाभग्रीमं को ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे त्रलद्रान
ब्राह्मणो द्राया वला राख भशाभृत्मुजम भॊि जऩ एलॊ दळाॊळ शलन द्राया सनसभात कलि अत्मॊत
                                  ॊ
प्रबालळारी शोता शं ।


      अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलि
                                                         अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम
            कलि फनलाने शे तु:
 अऩना नाभ, त्रऩता-भाता का नाभ,                                     कलि
       गोि, एक नमा पोटो बेजे                            दस्षणा भाि: 10900


                             याळी यत्न एलॊ उऩयत्न

                                                              त्रलळेऴ मॊि

                                               शभायं मशाॊ वबी प्रकाय क मॊि वोने-िाॊफद-
                                                                      े
                                               ताम्फे भं आऩकी आलश्मक्ता क अनुळाय
                                                                         े
                                               फकवी बी बाऴा/धभा क मॊिो को आऩकी
                                                                 े
                                               आलश्मक फडजाईन क अनुळाय २२ गेज
                                                              े
                                               ळुद्ध ताम्फे भं अखॊफडत फनाने की त्रलळेऴ
       वबी वाईज एलॊ भूल्म ल क्लासरफट के
                                               वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं ।
     अवरी नलयत्न एलॊ उऩयत्न बी उऩरब्ध शै ।
शभाये मशाॊ वबी प्रकाय क यत्न एलॊ उऩयत्न व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शं । ज्मोसतऴ कामा वे जुडेि
                       े
फधु/फशन ल यत्न व्मलवाम वे जुडे रोगो क सरमे त्रलळेऴ भूल्म ऩय यत्न ल अडम वाभग्रीमा ल अडम
                                     े
वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं ।
                             GURUTVA KARYALAY
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61                                           अक्टू फय 2011




                                               श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि
       फकवी बी व्मत्रक्त का जीलन तफ आवान फन जाता शं जफ उवक िायं औय का भाशोर उवक अनुरुऩ उवक लळ
                                                          े                    े          े
भं शं। जफ कोई व्मत्रक्त का आकऴाण दवयो क उऩय एक िुम्फकीम प्रबाल डारता शं , तफ
                                  ु    े                                                         रोग उवकी वशामता एलॊ
वेला शे तु तत्ऩय शोते शै औय उवक प्राम् वबी कामा त्रफना असधक कद्श ल ऩये ळानी वे वॊऩडन शो जाते शं । आज क
                               े                                                                      े
बौसतकता लाफद मुग भं शय व्मत्रक्त क सरमे दवयो को अऩनी औय खीिने शे तु एक प्रबालळासर िुफकत्ल को कामभ
                                  े      ू                                          ॊ
यखना असत आलश्मक शो जाता शं । आऩका आकऴाण औय व्मत्रक्तत्ल आऩक िायो ओय वे रोगं को आकत्रऴात कये इव
                                                           े
सरमे वयर उऩाम शं , श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि। क्मोफक बगलान श्री कृ ष्ण एक अरौफकल एलॊ फदलम िुॊफकीम व्मत्रक्तत्ल के
धनी थे। इवी कायण वे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि क ऩूजन एलॊ दळान वे आकऴाक व्मत्रक्तत्ल प्राद्ऱ शोता शं ।
                                         े
       श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि क वाथ व्मत्रक्तको दृढ़ इच्छा ळत्रक्त एलॊ उजाा प्राद्ऱ
                            े
शोती शं , स्जस्वे व्मत्रक्त शभेळा एक बीड भं शभेळा आकऴाण का कद्र यशता शं ।
                                                            ं
                                                                                      श्रीकृ ष्ण फीवा कलि
       मफद फकवी व्मत्रक्त को अऩनी प्रसतबा ल आत्भत्रलद्वाव क स्तय भं लृत्रद्ध,
                                                           े
अऩने सभिो ल ऩरयलायजनो क त्रफि भं रयश्तो भं वुधाय कयने की ईच्छा शोती
                       े                                                           श्रीकृ ष्ण   फीवा   कलि      को    कलर
                                                                                                                       े

शं उनक सरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि का ऩूजन एक वयर ल वुरब भाध्मभ
      े                                                                            त्रलळेऴ ळुब भुशुता भं सनभााण फकमा

वात्रफत शो वकता शं ।                                                               जाता शं । कलि को त्रलद्रान कभाकाॊडी

       श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि ऩय अॊफकत ळत्रक्तळारी त्रलळेऴ ये खाएॊ, फीज भॊि एलॊ       ब्राशभणं द्राया ळुब भुशुता भं ळास्त्रोक्त

अॊको वे व्मत्रक्त को अद्द्भत आॊतरयक ळत्रक्तमाॊ प्राद्ऱ शोती शं जो व्मत्रक्त को     त्रलसध-त्रलधान वे त्रलसळद्श तेजस्ली भॊिो
                           ु
वफवे आगे एलॊ वबी षेिो भं अग्रस्णम फनाने भं वशामक सवद्ध शोती शं ।                   द्राया सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम

       श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि क ऩूजन ल सनमसभत दळान क भाध्मभ वे बगलान
                            े                    े                                 मुक्त कयक सनभााण फकमा जाता शं ।
                                                                                            े

श्रीकृ ष्ण का आळीलााद प्राद्ऱ कय वभाज भं स्लमॊ का अफद्रतीम स्थान स्थात्रऩत कयं ।   स्जव क पर स्लरुऩ धायण कयता
                                                                                         े

       श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि अरौफकक ब्रह्माॊडीम उजाा का वॊिाय कयता शं , जो           व्मत्रक्त को ळीघ्र ऩूणा राब प्राद्ऱ शोता

एक प्राकृ त्रत्त भाध्मभ वे व्मत्रक्त क बीतय वद्दबालना, वभृत्रद्ध, वपरता, उत्तभ
                                      े                                            शं । कलि को गरे भं धायण कयने

स्लास््म, मोग औय ध्मान क सरमे एक ळत्रक्तळारी भाध्मभ शं !
                        े                                                          वे लशॊ अत्मॊत प्रबाल ळारी शोता

       श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि क ऩूजन वे व्मत्रक्त क वाभास्जक भान-वम्भान ल
                             े                   े                                 शं । गरे भं धायण कयने वे कलि

        ऩद-प्रसतद्षा भं लृत्रद्ध शोती शं ।                                         शभेळा रृदम क ऩाव यशता शं स्जस्वे
                                                                                               े

       त्रलद्रानो क भतानुळाय श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि क भध्मबाग ऩय ध्मान मोग
                    े                              े                               व्मत्रक्त ऩय उवका राब असत तीव्र

        कफद्रत कयने वे व्मत्रक्त फक िेतना ळत्रक्त जाग्रत शोकय ळीघ्र उच्ि स्तय
         ं                                                                         एलॊ ळीघ्र सात शोने रगता शं ।

        को प्राद्ऱशोती शं ।                                                                            भूरम भाि: 1900

       जो ऩुरुऴं औय भफशरा अऩने वाथी ऩय अऩना प्रबाल डारना िाशते शं औय उडशं अऩनी औय आकत्रऴात कयना
        िाशते शं । उनक सरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि उत्तभ उऩाम सवद्ध शो वकता शं ।
                      े
       ऩसत-ऩत्नी भं आऩवी प्रभ की लृत्रद्ध औय वुखी दाम्ऩत्म जीलन क सरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि राबदामी शोता शं ।
                                                                  े
                                                                         भूल्म:- Rs. 550 वे Rs. 8200 तक उप्रब्द्ध
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62                                   अक्टू फय 2011




                                             याभ यषा मॊि
याभ यषा मॊि वबी बम, फाधाओॊ वे भुत्रक्त ल कामो भं वपरता प्रासद्ऱ शे तु उत्तभ मॊि शं । स्जवक प्रमोग
                                                                                          े

वे धन राब शोता शं ल व्मत्रक्त का वलांगी त्रलकाय शोकय उवे वुख-वभृत्रद्ध, भानवम्भान की प्रासद्ऱ शोती

शं । याभ यषा मॊि वबी प्रकाय क अळुब प्रबाल को दय कय व्मत्रक्त को जीलन की वबी प्रकाय की
                             े                ू
कफठनाइमं वे यषा कयता शं । त्रलद्रानो क भत वे जो व्मत्रक्त बगलान याभ क बक्त शं मा श्री
                                      े                              े

शनुभानजी क बक्त शं उडशं अऩने सनलाव स्थान, व्मलवामीक स्थान ऩय याभ यषा मॊि को अलश्म
          े

स्थाऩीत कयना िाफशमे स्जववे आने लारे वॊकटो वे यषा शो उनका जीलन वुखभम व्मतीत शो वके

एलॊ उनकी वभस्त आफद बौसतक ल आध्मास्त्भक भनोकाभनाएॊ ऩूणा शो वक।
                                                            े




    ताम्र ऩि ऩय वुलणा ऩोरीव                ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीव                         ताम्र ऩि ऩय
              (Gold Plated)                         (Silver Plated)                       (Copper)

    वाईज                      भूल्म       वाईज                        भूल्म    वाईज                    भूल्म
    2” X 2”                    640        2” X 2”                     460      2” X 2”                 370
    3” X 3”                   1250        3” X 3”                     820      3” X 3”                 550
    4” X 4”                   1850        4” X 4”                     1250     4” X 4”                 820
    6” X 6”                   2700        6” X 6”                     2100     6” X 6”                 1450
    9” X 9”                   4600        9” X 9”                     3700     9” X 9”                 2450
   12” X12”                   8200       12” X12”                     6400    12” X12”                 4600

                                      GURUTVA KARYALAY
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63                                          अक्टू फय 2011




                                      दीऩ जराने का भशत्ल क्मा शं ?
                                                                                     सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी
                                                               शोना अवॊबल वा प्रसतत शोता शं । इवी कायण बायसतम
                                                               वभ्मताओॊ भं अस्ग्न को दे ल कशा गमा शं ।

                                                                         अस्ग्न को दे लता भनकय उवका ऩूजन फकमा जाता शं ।
                                                               क्मोफक एवा भाना जाता शं , फक मफद अस्ग्न दे ल क्रोसधत शोजामे
                                                               तो फड़े -फड़े भशरं ल ऊिे-ऊिे बलनं को धूरभं उडादे औय याख
                                                                                     ॊ   ॊ
                                                               फनादे ।

                                                                         इव सरमे प्रकाळ का ऩूजन कय उडशं ळाॊत यखने का
                                                               प्रमाव फकमा जाता शं ।

                                                               शभाये प्रभुख धभा ग्रॊथो भं एक ऋग्लेद का वला प्रथभ भॊि शी
                                                               प्रकाळ वे ळुरू शोता शै ।

                                                               भॊि:

                                                               प्रकाळभीरे      ऩुयोफशतॊ    मसस्म       दे लभृस्त्लजभ ्।   शोतायॊ
       प्रकाळ, तेज ऊजाा क कदयसत स्त्रोत शं । ऊजाा क त्रफना
                         े ु                       े           यत्नधातभभ ्॥
भानल जीलन का कोई अस्स्तत्ल नशीॊ शं । वभग्र ब्रह्माॊड भं        बालाथा:- वलाप्रथभ आयाधन फकए जाने लारे, मस को प्रकासळत
प्रकाळ ऊजाा का प्रभुख स्त्रोत एक भाि वूमा शं , उव क अराला
                                                   े           कयने लारे, ऋतुओॊ क अनुवाय मस वम्ऩाफदत कयने लारे,
                                                                                 े
कोई औय प्रभुख स्त्रोत का अस्स्तत्ल नशीॊ शं । मशी कायण शं फक    दे लताओॊ का आह्लान कयने लारे तथा धन प्रदान कयने लारं भं
आज वूमा क तेज वे शी शभाया जीलन वुिारु रुऩ वे प्रकाळभान
         े                                                     वलाश्रद्ष अस्ग्न दे लता की भं स्तुसत कयता शूॊ।
                                                                     े
शं । लामु भॊडर भं व्माद्ऱ लामुकण (धूर) औय फादर इत्माफद
                                                                         अनाफदकार वे भनुष्म का वफवे फड़ा ळिु अॊधकाय
वबी भं अऩनी िुम्फकीम ळत्रक्त शोती शं स्जवक कायण वफ एक
                                          े
                                                               रुऩी असानता यशी शं । इव सरमे ऩुयातन कारवे फश
दवये की ओय आकत्रऴात शोते यशते शं ।
 ू
                                                               अॊधकाय को दय कयने लारा प्रकाळ भनुष्म का वफवे फड़ा
                                                                          ू
       इवी आकत्रऴात शोने क कायण कण एक दवये वे ऩाव
                          े            ू                       सभि यशा शै ।
आते औय दय शोते यशते शं , स्जवक फर क कायण फश ऊजाा
        ू                     े    े                                     क्मोफक प्रकाळ शभं दे खने की ळत्रक्त दे ता शं ।
उत्ऩडन शोती शं । इस्वे उत्ऩडन शोने लारी उजाा को फश प्रकाळ      लामुभॊडर भं लस्तु फक वशी ऩशिान कयने क सरमे प्रकाळ
                                                                                                    े
कशा जाता शं ।                                                  आलश्मक शै ।
       प्रकाळ का शभाये जीलन भं फशुत भशत्ल शं , इव भशत्ल        उऩसनऴद भं इवी सरमे अॊधकाय वे ज्मोसत की ओय जाने
वे शय व्मत्रक्त बरी बासत लाफकप शं । शभायी बायसतम वॊस्कृ सत     की काभना की गई शै ।
क धासभाक कामाक्रभ भं बी अस्ग्न का त्रलळेऴ भशत्ल शं । एलॊ
 े                                                             अवतो भा वद्गभम
अस्ग्न प्रकाळ का प्रसतक शं जो मस, शलन, त्रललाश, वॊस्काय        तभवो भाॊ ज्मोसतगाभम
जेवे अडम धासभाक कभाकाॊडो भं त्रफना अस्ग्न क त्रफना वॊऩडन
                                           े                   भृत्मोभाा अभृतॊ गभम
64                                        अक्टू फय 2011



ळास्त्रो भं अस्ग्न क तीन रूऩं लणान फकमा गमा
                    े
शं ।
         ऩृ्ली ऩय अस्ग्न, अडतरयष भं त्रलद्युत औय आकाळ
भं वूम। प्रकाळ क उद्दगभ क त्रलऴम भं कशा गमा शै फक
      ा         े        े
कार क वॊघऴा-भॊथन वे उवका जडभ शुआ। वूमा फक
     े
अस्ग्न अॊधकाय को सभटाता शै , अवुयी ळत्रक्त को डयाता,
प्रकाळ का आह्लान कयता, सिय मुला औय प्रािीन ऩुयोफशत
शै । ऋग्लेद क अनुळाय भशात्रऴा बृगु ऋत्रऴ ने अस्ग्न की
             े
खोज की।
                                                         ऩकाने क आत्रलष्काय क वाथ दीऩ सभट्टी का फनने रगा।
                                                                े            े
अस्ग्न क सरमे ऋग्लेद भं कशा गमा शं ।
        े                                                प्रािीन कार वे धसनकं द्राया फड़े करात्भक फदमं का
                                                         प्रमोग फकमा जाता था, जो ऩत्थय, धातु, कीभती यत्नं, वोने
अस्ग्नभीऱे ऩुयोफशतॊ (ऋग्लेद)                             औय िाॊदी क शोते थे। मे छोटे फड़े वबी आकायं क थे।
                                                                   े                                 े

                                                         वभम क वाथ वाथ दीऩ स्तॊब बी प्रिरन भं आए।
                                                              े
ऋग्लेद
                                                                 याभामण भं उल्रेख सभरता शं फक जफ शनुभान
इॊ द्र ज्मोसत् अभृतॊ भतेऴु
                                                         रॊका ऩशुॉिे तो उडशं वुनशये दीऩं को दे ख कय भ्रभ शुआ
वूमांळ वॊबलो दीऩ्
                                                         फक कशीॊ ले स्लगा भं तो नशीॊ आ गए। उडशं लशाॊ ऩीरे औय
अथाात: वूमा क अॊळ वे दीऩ की उत्ऩत्रत्त शुई।
             े
                                                         जरते शुए स्लणादीऩ फदखाई फदए।
दीऩ जीलन की ऩत्रलिता, बत्रक्त, अिाना औय आळीलााद
स्लरुऩ भाना जाता शं ।                                            बायतीम ळास्त्रो भे उल्रेख सभरता शै , फक अस्ग्न का
                                                         वॊफॊध भनुष्म क जडभ वे रेकय भयण तक शोता शं । मशी
                                                                       े

         वूमा क अॊळ वे उत्ऩडन ऩृ्ली की अस्ग्न को स्जव
               े                                         कायण शं शभायी वॊस्कृ सत भं त्रलसबडन व्रत-त्मोशाय इत्माफद

ऩाि भं स्थात्रऩत फकमा गमा उवे आज दीऩक क रूऩ भं
                                       े                 भं दीऩ क भशत्ल शं । दीऩलरी बी शभाये प्रभुख त्मौशायो

शभाये घयं भं ऩूजा जाता शै ।                              भं वे एक शै , स्जव भं उजाा क प्रसतक क रुऩ भं दीऩक
                                                                                     े        े
                                                         जराने फक ऩयॊ ऩया शं ।
ळुबभ कयोसत करमाणभ ् आयोग्मभ ् धन वम्ऩदा                          शभाये ळास्त्रं भं दीऩज्मोसत फक भफशभा का त्रलस्तृत
ळिुफुस्ध्द त्रलनाळाम दीऩज्मोसत नभस्तुते ।।               लणान फकमा गमा शं । ळास्त्रं भं दीऩज्मोसत को ऩाऩनाळक,
                                                         ळिुओॊ फक लृत्रद्ध योकने लारी, आमु एलॊ आयोग्म प्रदान
अथाात: शभे ळुब, वुडदय औय कल्माणकायी, आयोग्म औय           कयने लारी शं ।
वॊऩदा को दे ने लारे शे दीऩक फक ज्मोसत, शभाये ळिं फक
फुत्रद्ध क त्रलनाळ क सरए शभ तुम्शं नभस्काय कयते शं ।
          े         े                                    दीऩो ज्मोसत् ऩयभ ् ब्रह्म दीऩो ज्मोसतजानादा न्।
                                                         दीऩो शयतु भं ऩाऩभ ् वाध्मदीऩ नभोऽस्तु ते।।

         ऩूयातन कार भं दीऩ का ऩाि स्पफटक, ऩाऴाण मा       ळुबभ ् कयोतु कल्माणभ ् आयोग्मभ ् वुखवम्ऩदभ ्।

वीऩ का शोता था। काराडतय भं सभट्टी को गढने औय             ळिुफुत्रद्धत्रलनाळभ ् ि दीऩज्मोसतनाभोऽस्तु ते।।
65                                          अक्टू फय 2011



                                                             ऩाऩ-ताऩ का शयण शोता शै , ळिुफुत्रद्ध का ळभन शोता शै
      भाडमता शं फक मफद घय भं दीऩक की रौ ऩूला
                                                             औय ऩुण्मभम, वुखभम जीलन की लृत्रद्ध शोती शै ।
       फदळा की ओय शो, तो आमु फक लृत्रद्ध कयती शं ।
      दीऩक की रौ ऩस्द्ळभ फदळा की ओय शो, तो द्ख
                                             ु               ऩुरूऴोत्तभ भशात्त्म्म भं दीऩक फक ज्मोसत क सरमे
                                                                                                      े
       की लृत्रद्ध कयती शं ।
                                                             कशा गमा शं ।
      दीऩक की रौ उत्तय फदळा की ओय शो, तो स्लास््म
                                                                रूषैरक्ष्भी त्रलनाळ्स्मात द्वैतेयडनषमो बलेत ्
                                                                     ा
       औय प्रवडनता फक लृत्रद्ध कयती शं ।
                                                             असत यक्तऴु मुध्दासन भृत्मु्कृ ष्ण सळखीऴु ि।।
                                                                    े
      दीऩक की रौ दस्षण फदळा की ओय शो, तो शासन
       कयती शं ।                                             अथाात: कोयी ळुष्क (रूखी) ज्मोसत रक्ष्भी का नाळ,
                                                             द्वेतज्मोसत अडनषम, असत रार ज्मोसत मुद्ध औय कारी
मफद घय भं आऩ दीऩक जरामं तो उवे आऩक घयक उत्तय
                                  े   े
                                                             ज्मोसत भृत्मु की द्योतक शोती शं ।
अथला ऩूला कोने भं शोना िाफशए। दीऩज्मोसत क प्रबाल वे
                                         े

                                                भॊि सवद्ध रूद्राष
                                              Rate In                                                     Rate In
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                                           Indian Rupee                                                Indian Rupee
 एकभुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा)             2800, 5500         आठ भुखी रूद्राष (नेऩार)                  820,1250
 एकभुखी रूद्राष (नेऩार)                  750,1050, 1250,    आठ भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा)             1900
 दो भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय)    30,50,75           नौ भुखी रूद्राष (नेऩार)                  910,1250
 दो भुखी रूद्राष (नेऩार)                 50,100,            नौ भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा)             2050
 दो भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा)            450,1250           दव भुखी रूद्राष (नेऩार)                  1050,1250
 तीन भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय)   30,50,75,          दव भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा)             2100
 तीन भुखी रूद्राष (नेऩार)                50,100,            ग्मायश भुखी रूद्राष (नेऩार)              1250,
 तीन भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा)           450,1250,          ग्मायश भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा)         2750,
 िाय भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय)   25,55,75,          फायश भुखी रूद्राष (नेऩार)                1900,
 िाय भुखी रूद्राष (नेऩार)                50,100,            फायश भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा)           2750,
 ऩॊि भुखी रूद्राष (नेऩार)                25,55,             तेयश भुखी रूद्राष (नेऩार)                3500, 4500,
 ऩॊि भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा)           225, 550,          तेयश भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा)           6400,
 छश भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय)    25,55,75,          िौदश भुखी रूद्राष (नेऩार)                10500
 छश भुखी रूद्राष (नेऩार)                 50,100,            िौदश भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा)           14500
 वात भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय)   75, 155,           गौयीळॊकय रूद्राष                         1450
 वात भुखी रूद्राष (नेऩार)                225, 450,          गणेळ रुद्राष (नेऩार)                     550
 वात भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा)           1250               गणेळ रूद्राष (इडडोनेसळमा)                750
  रुद्राष क त्रलऴम भं असधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं । GURUTVA KARYALAY,
           े                                 ा
                                  Call us: 91 +9338213418, 91+9238328785
66                                  अक्टू फय 2011




                धनिमोदळी ऩय मभ-दीऩदान अकारभृत्मु को दय कयता शं ?
                                                     ू
                                                                                                   सिॊतन जोळी
       धनिमोदळी क फदन फकमे जाने लारे कभा भं एक
                 े
भशत्त्लऩूणा कभा मभ क सनसभत्त फकमा जाने लारा दीऩदान
                    े
शं ।
       फशडद ू धभा ळास्त्र भं सनणामसवडधु क अॊतगात
                                         े
सनणामाभृत औय स्कडदऩुयाण उल्रेख शं फक कासताक कृ ष्ण
िमोदळी की वॊध्मा प्रदोऴ कार क वभाम घय वे फाशय
                             े
मभ क सनसभत्त दीऩदान कयने वे ऩरयलाय भं अकारभृत्मु
    े
का बम दय शोता शं ।
       ू
       ळास्त्रंक्त भत क अनुळाय मभदे लता बगलान वूमा
                       े
औय भाता वॊसा क ऩुि शं । लैलस्लत भनु, अस्द्वनीकभाय
              े                               ु
एलॊ यै लॊत उनक बाई शं तथा मभुना उनकी फशन शै ।
              े
मभदे ल की वौतेरी भाॉ छामा वे ळसन, तऩती, त्रलत्रद्श, वालस्णा
भनु आफद 10 वौतेरे बाई -फशन बी शं । ऩौयास्णक
भाडमता क अनुळाय मभ ळसन ग्रश क असधदे लता शं ।
        े                    े
       मभदे लता प्रत्मेक प्राणी क ळुब-अळुब कभं क
                                 े              े
अनुवाय पर दे ने का कामा कयते शं । इवी कायण उडशं
                                                               क सनसभत्त दीऩ औय नैलेद्य वभत्रऩात कयने ऩय अकार
                                                                े
मभदे लता को धभायाज         कशा गमा शं । क्मोफक अऩने
                                                               भृत्मु का नाळ शोता शं । मश स्लमॊ मभयाज का कथन था।
कताव्म क प्रसत मभदे ल िुफट यफशत कामा व्मलस्था की
        े
                                                                      मभदीऩदान कलर प्रदोऴकार भं कयने का त्रलधान
                                                                                े
स्थाऩना कयते शं । मभदे ल का अऩना अरग वे एक रोक
                                                               शं । मभदीऩदान क सरए सभट्टी का एक फड़ा दीऩक रेकय
                                                                              े
शं , स्जवे उनक नाभ वे शी मभरोक कशा जाता शं ।
              े
                                                               उवे उवे स्लच्छ जर वे धो रेना िाफशए। फपय स्लच्छ रुई
ऋग्लेद भं उल्रेख शै फक मभरोक भं सनयडतय अनद्वय
                                                               रेकय दो रम्फी फत्रत्तमॉॊ फना रं।
अथाात ् स्जवका नाळ न शो ऐवी ज्मोसत जगभगाती यशती
                                                                      फत्रत्तमाॊ इतनी रम्फी फनामे की दीऩक वे उवके
शं । मभरोक अनद्वय शं औय मभरोक भं कोई भयता नशीॊ
                                                               दोनं औय क छोय सनकरे शुए शो। फत्रत्तमॉॊ को दीऩक भं
                                                                        े
शं ।
                                                               एक-दवये ऩय इव प्रकाय यखं फक दीऩक क फाशय फत्रत्तमं
                                                                   ू                             े
मभदे लताक स्लरुऩ का लणान कयते शुले ग्रॊथकायो ने सरखा
         े
                                                               क िाय भुॉश फदखाई दं । अफ दीऩक को सतर क तेर वे
                                                                े                                    े
शं । मभ की आॉखं रार शं , उनक शाथ भं ऩाळ यशता शं ।
                            े
                                                                                        ु
                                                               बय दं औय वाथ शी उवभं एक छटकी कारे सतर बी
इनका ळयीय नीरा शै औय मे दे खने भं उग्र शं । बंवा
                                                               डार दं ।
इनकी वलायी शं । मे वाषात ् कार शं ।
                                                                      प्रदोऴकार भं इव प्रकाय त्रलसध वे तैमाय फकए गए
मभदीऩदान:
                                                               दीऩक का योरी, अषत एलॊ ऩुष्ऩ वे ऩूजन कयना िाफशए।
मभदीऩदान क त्रलऴम भं स्कडदऩुयाण भं कशा गमा शै फक
          े
कासताक क कृ ष्णऩष भं िमोदळी क प्रदोऴकार भं मभयाज
        े                    े
67                                           अक्टू फय 2011



तत ऩद्ळात ् घय क भुख्म द्राय ऩय फाशय थोड़ी वी खीर,
                े                                                 ॐ मभदे लाम नभ्। नभस्कायॊ वभऩामासभ॥
िालर अथला गेशूॉ वे ढे यी फनाकय उवक ऊऩय दीऩक को
                                  े
यखना िाफशए।                                                       तत ऩद्ळमात ऩुष्ऩ दीऩक क ऩाव यख दं औय ऩुन् शाथ
                                                                                         े
         दीऩक को ढे यी ऩय स्थात्रऩत कयने वे ऩूला उवे              भं नैलेद्यॊ क रुऩ भं एक फताळा रं तथा सनम्नसरस्खत
                                                                               े
प्रज्लसरत कय रं औय दस्षण फदळा की ओय दे खते शुए                    भडि का उच्िायण कयते शुए उवे दीऩक क वभीऩ शी यख
                                                                                                    े
इव भडि का उच्िायण कयते शुए िायभुॉश क दीऩक को
                                    े                             दं ।
खीर, िालर, गेशूॉ आफद की ढे यी क ऊऩय यख दं ।
                               े                                  ॐ मभदे लाम नभ्। नैलेद्यॊ सनलेदमासभ॥


         भृत्मुना ऩाळदण्डाभ्माॊ कारेन ि भमा वश।                   तत ऩद्ळमात शाथ भं थोड़ा वा जर रेकय आिभन के
          िमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज् प्रीमतासभसत॥
                                  ा                               सनसभत्त सनम्नसरस्खत भडि का उच्िायण कयते शुए दीऩक
अथाात ्: िमोदळी को दीऩदान कयने वे भृत्मु, ऩाळ, दण्ड,              क वभीऩ जर को छोड़े ।
                                                                   े
कार औय रक्ष्भी क वाथ वूमनॊदन मभ प्रवडन शं।
                े       ा                                         ॐ मभदे लाम नभ्। आिभनाथे जरॊ वभऩामासभ॥
उक्त भडि क उच्िायण क ऩद्ळात ् शाथ भं ऩुष्ऩ रेकय
          े         े
सनम्नसरस्खत भडि का उच्िायण कयते शुए मभदे ल को                     तत ऩद्ळमात ऩुन् मभदे ल को ॐ मभदे लाम नभ्। भडि
दस्षण फदळा भं नभस्काय कयं ।                                       का उिायण कयते शुए दस्षण फदळा भं नभस्काय कयं ।




                                           भॊि सवद्ध स्पफटक श्री मॊि
     "श्री मॊि" वफवे भशत्लऩूणा एलॊ ळत्रक्तळारी मॊि शै । "श्री मॊि" को मॊि याज कशा जाता शै क्मोफक मश अत्मडत ळुब फ़रदमी
 मॊि शै । जो न कलर दवये मडिो वे असधक वे असधक राब दे ने भे वभथा शै एलॊ वॊवाय क शय व्मत्रक्त क सरए पामदे भॊद
                े   ू                                                        े              े
 वात्रफत शोता शै । ऩूणा प्राण-प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतडम मुक्त "श्री मॊि" स्जव व्मत्रक्त क घय भे शोता शै उवक सरमे "श्री मॊि"
                                                                                           े                 े
 अत्मडत फ़रदामी सवद्ध शोता शै उवक दळान भाि वे अन-सगनत राब एलॊ वुख की प्रासद्ऱ शोसत शै । "श्री मॊि" भे वभाई
                                े
 अफद्रसतम एलॊ अद्रश्म ळत्रक्त भनुष्म की वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे वभथा शोसत शै । स्जस्वे उवका जीलन वे
 शताळा औय सनयाळा दय शोकय लश भनुष्म अवफ़रता वे वफ़रता फक औय सनयडतय गसत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन
                  ू
 भे वभस्त बौसतक वुखो फक प्रासद्ऱ शोसत शै । "श्री मॊि" भनुष्म जीलन भं उत्ऩडन शोने लारी वभस्मा-फाधा एलॊ
 नकायात्भक उजाा को दय कय वकायत्भक उजाा का सनभााण कयने भे वभथा शै । "श्री मॊि" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय क
                    ू                                                                                     े
 स्थान ऩय स्थात्रऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फस्डधत ऩये ळासन भे डमुनता आसत शै ल वुख-वभृत्रद्ध, ळाॊसत एलॊ

 ऐद्वमा फक प्रसद्ऱ शोती शै । गुरुत्ल   कामाारम भे "श्री मॊि" 12 ग्राभ वे 75 ग्राभ तक फक वाइज भे उप्रब्ध शै
 .



                                                                         भूल्म:- प्रसत ग्राभ Rs. 8.20 वे Rs.28.00
                                          GURUTVA KARYALAY
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68                                       अक्टू फय 2011




                            धनिमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं फकमा जाता शं ?
                                                                                                                   सिॊतन जोळी
        ळास्त्रंक्त भत क अनुळाय धनिमोदळी क फकमे जाने
                        े                 े                              रोकलासवमं का कल्माण शोगा। कासताक कृ ष्ण िमोदळी को
लारे कभो भं मभदीऩदान को त्रलळेऴ प्रभुखता दी जाती शं ।                    प्रसतलऴा प्रदोऴकार     भं   जो अऩने    घय क दयलाजे
                                                                                                                    े            ऩय
रेफकन      धनिमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं फकमा जाता शं                        सनम्नसरस्खत भडि वे उत्तभ दीऩ दे ता शं , लश अऩभृत्मु शोने
इव क ऩीछे छऩी धासभाक भाडमता वे कभ रोग शी ऩयीसित
    े      ु                                                             ऩय बी मशॉॊ रे आने क मोग्म नशीॊ शै ।
                                                                                            े
शंगे!                                                                                भृत्मुना ऩाश्दण्डाभ्माॊ कारेन ि भमा वश।
        फशडद ू धभा भं फकमे जाने लारी प्रत्मेक व्रत-तमोशाय,                           िमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज् प्रीमतासभसत॥
                                                                                                             ा
उत्वल, ऩूजन त्रलसध-त्रलधान, इत्माफद क ऩीछे कोई न कोई
                                     े                                   उवक फाद वे शी अऩभृत्मु अथाात ् अवाभसमक भृत्मु वे
                                                                            े
ऩौयास्णक    कथा     अलश्म    जुड़ी   शोती    शं    ।     इवी   प्रकाय    फिने क उऩाम क रूऩ भं धनिमोदळी ऩय मभ क सनसभत्त
                                                                               े      े                       े
धनिमोदळी ऩय मभदीऩदान कयना बी इवी प्रकाय ऩौयास्णक                         दीऩदान एलॊ नैलेद्य वभत्रऩात कयने का कभा प्रसतलऴा फकमा
कथा वे जुड़ा शुआ शं । स्कडदऩुयाण भं लैष्णलखण्ड के                        जाता शं ।
अडतगात     कासताक    भाव     भशात्म्म   भं        इववे    वम्फस्डधत      मभयाज की वबा: मभयाज की वबा का लणान कयते शुए ग्रॊथ
ऩौयास्णक कथा का वॊस्षद्ऱ उल्रेख फकमा गमा शं ।                            कायं ने सरखा शं फक दे लरोक की िाय प्रभुख वबाओॊ भं वे
        ऩौयास्णक कथा क अनुळाय एक फाय मभदत फारकं
                      े                 ू                                एक शै मभवबा । इव वबा का सनभााण त्रलद्वकभाा जी ने
एलॊ मुलाओॊ क प्राण शयते वभम ऩये ळान शो उठे । मभदत को
            े                                   ू                        फकमा था। मभवबा अत्मडत त्रलळार वबा शै , इवकी 100
फड़ा द्ख शुआ फक ले फारकं एलॊ मुलाओॊ क प्राण शयने का
      ु                              े                                   मोजन रम्फाई एलॊ 100 मोजन िौड़ाई शै । इव प्रकाय मश
कामा कयते शं , ऩयडतु मभदत कयते बी क्मा? उनका कामा शी
                        ू                                                लगााकाय शै । मभवबा का ताऩक्रभ अत्मडत वुशालना अथाात ्
प्राण शयना शी शं । मभदत अऩने कताव्म वे ले कवे त्रलभुख
                      ू                    ै                             न तो असधक ळीतर शै औय न शी असधक गभा शै ।
शोते?   मभदत क सरए एक औय कताव्मसनद्षा का प्रद्ल था,
           ू  े                                                          मभवबा वबी क भन को अत्मडत आनडद दे ने लारी शै ।
                                                                                    े
दवयी ओय स्जन फारक एलॊ मुलाओॊ का प्राण शयकय राते थे,
 ु                                                                       मभवबा भं न ळोक, न फुढ़ाऩा शै , न बूख शै , न प्माव शै औय
उनक ऩरयजनं क द्ख एलॊ त्रलराऩ को दे खकय स्लमॊ को
   े        े ु                                                          न शी मभवबा भं कोई अत्रप्रम लस्तु शं । इव प्रकाय मभवबा
शोने लारे भानसवक क्रेळ का प्रद्ल था। ऐवी स्स्थसत भं जफ                   द्ख, कद्श एलॊ ऩीड़ा क कयणं का अबाल यशता शं । मभवबा
                                                                          ु                   े
मभदत फशुत फदन तक यशने रगे, तो त्रललळ शोकय ले अऩने
   ू                                                                     भं दीनता, थकालट अथला प्रसतकरता नाभभाि को बी नशी
                                                                                                    ू
स्लाभी मभयाज क ऩाव ऩशुॉिे औय कशा फक भशायाज आऩक
              े                               े                          शै । मभवबा भं वदै ल ऩत्रित वुगडध लारी ऩुष्ऩ भाराएॉ एलॊ
आदे ळ क अनुवाय शभ प्रसतफदन लृद्ध, फारक एलॊ मुला
       े                                                                 अडम कई यम्म लस्तुएॉ त्रलद्यभान यशती शं ।
व्मत्रक्तमं क प्राण शयकय राते शं , ऩयडतु जो अऩभृत्मु क
             े                                        े                          मभवबा भं अनेक याजा, ऋत्रऴा औय ब्रह्मत्रऴा मभदे ल
सळकाय शोते शं , उन फारक एलॊ मुलाओॊ क प्राण शयते वभम
                                    े                                    की उऩावना कयते यशते शं । ममासत, नशुळ, ऩुरु, कातालीमा,
शभं भानसवक क्रेळ शोता शं । उवका कायण मश शै फक
                                                                         अरयद्शनेभी, कृ सत, सनसभ, भाडधाता, प्रतदान, सळत्रल आफद याजा
उनक ऩरयजन अत्मासधक त्रलराऩ कयते शं औय स्जववे शभं
   े
                                                                         भृत्मु क उयाडत मशाॊ फैठकय धभायाज की उऩावना कयते शं ।
                                                                                 े
फशुत असधक द्ख शोता शं । क्मा फारक एलॊ मुलाओॊ को
           ु
                                                                         कठोय तऩस्मा कयने लारे, उत्तभ व्रत का ऩारन कयने लारे
अवाभसमक भृत्मु वे छटकाया नशीॊ सभर वकता शै ?
                   ु
        मभदत क भुख वे इतना वुनकय धभायाज फोरे
           ू  े                                                          वत्मलादी, ळाडत, वॊडमावी तथा अऩने ऩुण्मकभा वे ळुध्द एलॊ

दतगण तुभने फशुत अच्छा प्रद्ल फकमा शं । इववे भृत्मु
 ू                                                                       ऩत्रलि भशाऩुरुऴं का शी मभवबा भं प्रलेळ शोता शं ।
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                           दीऩालरी क फदन कवे कयं फशीखाता तुरा ऩूजन?
                                    े     ै
                                                                                                      सिॊतन जोळी
        फशडद ू धभा भं ऩॊिभशा ऩला दीऩालरी ऩय व्मलवाम       तदऩयाडत योरी, ऩुष्ऩ आफद वे ॐ रेखनीस्थामै दे व्मै
                                                            ु
कामा वे जुडे रोग गणेळ ऩूजन, रक्ष्भी ऩूजन, कफेय
                                           ु              नभ्। का उच्िायण कयते शुए ऩूजन कयं । भडि फोरते
ऩूजन, आफद ऩूजनो क वाथ-वाथ अऩने व्मलवाम वे जुडे
                 े                                        शुए ऩूजन कयं । ऩूजन क ऩद्ळमात सनम्नसरस्खत भडि वे
                                                                               े
फशवाफ-फकताफ यखने शे तु शय लऴा दीऩालरी ऩय फशी-खाता,        शाथ जोड़कय प्राथाना कये ।
तुरा (तयाजू), रेखनी (करभ) आफदका ऩूजन बी कयते                      ळास्त्राणाॊ व्मलशायाणाॊ त्रलद्यानाभाप्नुमाद्यत्।
शं ।                                                           अतस्त्लाॊ ऩूजसमष्मासभ भभ शस्ते स्स्थया बल॥
        वलाप्रथभ व्मलवामीक स्थान क भुख्मद्राय क दोनं
                                  े            े          फशीखाता ऩूजन्
ओय की फदलाय ऩय सवडदय वे ळुब-राब औय ॐ औय
                   ू                                      दीऩालरी क फदन व्मलवाम वे जुडे रोग नए फशीखातं का
                                                                   े
स्लस्स्तक        क सिि अॊफकत कयं । ऩद्ळमात इन ळुब सििं
                  े                                       ळुबायम्ब कयते शं । ऩूजन शे तु नए फशीखाते रेकय उडशं
का योरी, ऩुष्ऩ आफद वे ऩूजन कयं । ऩूजन के                       ळुद्ध जर क छीॊटे दे कय ऩत्रलि कय रं। फशीखातं को
                                                                         े
वभम ॐ दे शरीत्रलनामकाम नभ्। भॊि जा                                     रार लस्त्र त्रफछाकय तथा उव ऩय अषत एलॊ
उच्िायण कयं ।                                                              ऩुष्ऩ डारकय स्थात्रऩत कयं । फशीखाते के
अफ क्रभळ दलात अथाात (Inkstand),                                               प्रथभ ऩृद्ष ऩय वलाप्रथभ उऩय रार
फशीखाता, तुरा (तयाजू) आफद का                                                   करभ मा ऩेन वे श्री गणेळाम नभ्।
ऩूजन कयना िाफशए।                                                               सरखे ऩद्ळमात स्लस्स्तक का सिि
दलात        का     ऩूजन:   दलात   को                                           िॊदन अथला योरी वे फनाएॉ। ऩद्ळमात
भशाकारी का रूऩ भाना जाता शं ।                                                  अऩने इद्श दे ली-दे लता का नाभ सरख
वलाप्रथभ नई स्माशीमुक्त दलात को                                                वकते शं । मफद फशी खातो ऩय वद्ऱ श्री
ळुद्ध जर क छीटं दे कय ऩत्रलि कय रे,
          े                                                                  सरखा जाए तो बी आने लारे लऴा बय
उवक फाद उवक भुख ऩय भौरी फॉॊध दं ।
   े       े                                                             क सरमे आसथाक द्रत्रद्श वे राबदामक यशता
                                                                          े
दलात को िौकी ऩय थोड़े वे ऩुष्ऩ औय अषत                             शं । (वद्ऱ श्री सरखने की त्रलसध गुरुत्ल ज्मोसतऴ
डारकय स्थात्रऩत कय दं । दलात का योरी, ऩुष्ऩ आफद वे        भासवक ऩत्रिका भं ऩृद्ष वॊख्मा ऩय दी गई शं ।
भशाकारी क भडि ॐ श्रीभशारक्ष्भै नभ्। का उच्िायण
         े                                                ऩद्ळमात फशीखाते का योरी, ऩुष्ऩ आफद वे त्रलसधलत ऩूजन
कयते शुए ऩूजन कयं । ऩूजन क ऩद्ळमात इव प्रकाय प्राथाना
                          े                               कयना िाफशए। ऩूजन क वभम ॐ श्रीवयस्लत्मै नभ् भडि
                                                                            े
कये ।
                                                          का उच्िायण कयं ।
            कासरक त्लॊ जगडभातभासवरूऩेण लतावे।
                 े
                                                          तुरा का ऩूजन्
        उत्ऩडना त्लॊ ि रोकानाॊ व्मलशायप्रसवद्धमे॥
                                                          वलाप्रथभ तयाजू को ळुद्ध कय रेना िाफशए। तदऩयाडत उव
                                                                                                   ु
रेखनी ऩूजन्
दीऩालरी क फदन नमी रेखनी मा ऩेन को ळुद्ध जर वे
         े                                                ऩय योरी वे स्लस्स्तक का सिि फनाएॉ। उव ऩय भौरी

धोकय तथा उव ऩय भौरी फॉॊधकय रक्ष्भीऩूजन की िौकी            फॉॊध दं तथा ॐ तुरासधद्षातृदेलतामै नभ्। उच्िायण कयते
ऩय कछ अषत एलॊ ऩुष्ऩ डारकय स्थात्रऩत कय दं ।
    ु                                                     शुए योरी, ऩुष्ऩ आफद वे तयाजू का ऩूजन कयं ।
70                                            अक्टू फय 2011




                            दीऩालरी का भशत्ल औय रक्ष्भी ऩूजन त्रलसध

                                                                                  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, आरोक ळभाा
         प्रासिन कार वे फश बायतीम वॊस्कृ सत भं अनेक          दलाा, द्रव्म आफद रेकय गणेळ, भशारक्ष्भी, कफेय आफद दे ली-
                                                              ू                                       ु
ऩला-त्मौशाय भनाए जाते शं । इन त्मौशायं भं कासताक भाव         दे लताओॊ क त्रलसधलत ऩूजन का वॊकल्ऩ कयं । वलाप्रथभ
                                                                       े
फक अभालस्मा को दीऩालरी का त्रलळेऴ भशत्ल शं । क्मोफक          गणेळ     औय      रक्ष्भी   का    ऩूजन     कयं ।   उवके   ऩद्ळमात
दीऩालरी खुसळमं का त्मौशाय शं । दीऩालरी क फदन
                                        े                    ऴोडळभातृका ऩूजन ल नलग्रश ऩूजन कय अडम दे ली-
बगलान गणेळ ल रक्ष्भी क ऩूजन का त्रलळेऴ भशत्ल शं ।
                      े                                      दे लताओॊ का ऩूजन कयं ।
इव फदन गणेळ जी फक ऩूजा वे ऋत्रद्ध-सवत्रद्ध फक प्रासद्ऱ       दीऩक ऩूजन : दीऩक जीलन वे असान रुऩी अॊधकाय को
शोती शं एलॊ रक्ष्भी जी क ऩूजन वे धन, लैबल, वुख, वॊऩत्रत्त
                        े                                    दय कय जीलन भं सान क प्रकाळ का प्रतीक शं । दीऩक
                                                                                े
                                                              ू
फक प्रासद्ऱ शोती शं । दीऩालरी क फदन फकमे जाने लारे भॊि-
                               े                             को इद्वय का तेजस्ली रूऩ भान कय इवकी ऩूजा कयनी
मॊि-तॊि का प्रमोग अत्मसधक प्रबाली भाना जाता शं ।             िाफशए। ऩूजा कयते वभम अॊत्कयण भं ऩूणा श्रद्धा एलॊ ळुद्ध
दीऩालरी अथाात् दीऩकं फक भारा।           दीऩालरी क फदन
                                                 े           बालना     यखनी      िाफशए।      दीऩालरी    के     फदन ऩारयलारयक
प्रत्मेक व्मलवाम-नौकयी वे जुडे व्मत्रक्त अऩने व्मलामीक       ऩयॊ ऩयाओॊ क अनुवाय सतर क तेर क वात, ग्मायश,
                                                                        े            े     े
स्थान एलॊ घय ऩय भाॊ रक्ष्भी का त्रलसधलत ऩूजन कय धन           इक्कीव अथला इनवे असधक दीऩक प्रज्लसरत कयक एक
                                                                                                     े
फक दे ली रक्ष्भी वे वुख-वभृत्रद्ध फक काभना कयते शं ।         थारी भं यखकय कय ऩूजन कयने का त्रलधान शं ।
ऩूजन वाभग्री : भशारक्ष्भी ऩूजन भं कवय, कभकभ, िालर,
                                   े    ू ू                           उऩयोक्त ऩूजन क ऩद्ळमात घय फक भफशराएॊ अऩने
                                                                                    े
ऩान, वुऩायी, पर, पर, दध, फताळे, सवॊदय, भेले, ळशद,
                  ू   ू             ू                        शाथ वे वोने-िाॊदी क आबूऴण इत्माफद वुशाग फक वॊऩूणा
                                                                                े
सभठाइमाॊ, दशी, गॊगाजर, धूऩ, अगयफत्रत्तमाॊ, दीऩक, रुई,        वाभग्रीमाॊ रेकय भाॊ रक्ष्भी को अत्रऩत कयदं । अगरे फदन
                                                                                                 ा
कराला(भौरी), नारयमर औय ताॊफे का करळ।                         स्नान इत्माफद क ऩद्ळमात त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन क फाद
                                                                            े                                े
ऩूजन त्रलसध : बूसभ को गॊगाजर इत्मादी वे ळुद्ध कयके           आबूऴण एलॊ वुशाग फक वाभग्री को भाॊ रक्ष्भी का प्रवाद
नलग्रश मॊि फनाएॊ। मॊि क वाथ शी ताॊफे क करळ भं
                       े              े                      वभजकय स्लमॊ प्रमोग कयं । एवा कयने वे भाॊ रक्ष्भी फक
गॊगाजर, दध, दशी, ळशद, वुऩायी, रंग आफद डारकय करळ
         ू                                                   कृ ऩा वदा फनी यशती शै । जीलन भं वपरता एलॊ आसथाक
को रार कऩड़े वे ढककय एक जटा मुक्त नारयमर भौरी                स्स्थसत भं उडनसत क सरए सवॊश रग्न अथला स्स्थय रग्न
                                                                               े
वे फाॊधकय यख दं । नलग्रश मॊि क ऩाव िाॊदी का सवक्का
                              े                              का िुनाल कय श्रीवूक्त, कनकधाया स्तोि का ऩाठ कयं ।
औय रक्ष्भी गणेळ फक प्रसतभा स्थात्रऩत कय ऩॊिाभृत वे                    दीऩालरी ऩूजन क वभम गणेळ एलॊ रक्ष्भी क
                                                                                    े                      े
स्नान कयाकय स्लच्छ रार कऩड़े वे ऩोछ कय रक्ष्भी               वाथ त्रलष्णु जी का ऩूजन अलश्म कयं स्जस्वे घयभं स्स्थय
गणेळ को िॊदन, अषत अत्रऩत कयक पर-पर आफद
                       ा    े    ू                           रक्ष्भी का सनलाव शो वक। रक्ष्भी जी क दाफशनी ओय
                                                                                   े             े
अत्रऩत कयं औय प्रसतभा क दाफशनी ओय ळुद्ध घी का एक
     ा                 े                                     त्रलष्णु जी औय फाईं ओय गणेळ जी फक स्थाऩना कयनी
दीऩक एलॊ फाई औय तेर (सभठे तेर) का एक दीऩक                    िाफशए।    स्स्थय रक्ष्भी फक काभना शे तु दस्षणालतॉ ळॊख,
जराएॊ।                                                       भोती ळॊख, गोभती िक्र इत्माफद को ळास्त्रं भं रक्ष्भी के
ऩत्रलि आवन ऩय फैठकय स्लस्स्त लािन कयं । गणेळ जी              वशोदय बाई भाना गमा शं । इन दरब लस्तुओॊ फक
                                                                                         ु ा
का स्भयण कय अऩने दाफशने शाथ भं गॊध, अषत, ऩुष्ऩ,              स्थाऩना कयने वे रक्ष्भी जी प्रवडन शोती शं ।
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                                              श्री धनलॊतरय व्रत कथा
                                                                                    सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी

प्रथभ अध्माम
       वनकाफदक भुसनमं ने वूत जी वे कशा-शे वूत                 शं । कोई पोड़े , सगल्टी, प्रेग आफद वे मुक्त वस्डनऩात योग

भशाभुने! आऩने बगलान ् धनलॊतरय की ऩूजा-त्रलसध का               औय प्रभेशाफद योगं वे घेये गमे शं । इव प्रकाय रोग अनेक

त्रलस्ताय ऩूलक लणान फकमा, फकडतु इवे वुनने ऩय बी शभं
             ा                                                योगं वे ग्रस्त औय द्खी शं । उडशं दे खकय भुझे फड़ा द्ख
                                                                                 ु                               ु

तृसद्ऱ नशीॊ शुई। अत् श्री धनलॊतरय का भाशात्म्म असधक           शुआ औय फायम्फाय भंने सिडता की। भंने वोिा फक मे

त्रलस्ताय वे फताइए।                                           रोग कवे नीयोग शंगे औय प्रवडन शंगे ? इवी सिडता वे
                                                                   ै

       भुसनश्रेद्ष   वुत   जी   ने   कशा-शे   भुसनमं!   आऩ    भन भं व्माकर शोकय भं आऩकी ळयण भं आमा शूॉ।
                                                                         ु
ऩाऩत्रलनासळनी कथा को वुसनए। इव कथा को वुनने वे                       शे त्रलद्वात्भन ् ळयणागत बूम्माफद रोकं की आऩ
वबी योगं का नाळ शोता शं :                                     यषा कीस्जमे। िैरोक्म भं आऩक असतरयक्त इनका कोई
                                                                                         े
       एक वभम नायद जी वबी रोगं क कल्माण की
                                े                             यषक नशीॊ शं ।
इच्छा वे वभुद्र द्रीऩ ऩलात वफशत वम्ऩूणा ऩृ्ली का भ्रभण               बगलान ् श्री त्रलष्णु नायद जी क उक्त लिनं को
                                                                                                    े
कय यशे थे। लशाॉ उडशंने वबी रोगं को त्रलत्रलध योगं वे          वुनकय गम्बीय लाणी वे फोरे-शे भुने आऩ बम न
द्खी दे खा। मश दे खकय नायद जी सिस्डतत शुए औय लशाॉ
 ु                                                            कीस्जमे। भं ‘आफद धनलॊतरय’ इडद्र वे आमुलद प्राद्ऱ कय
                                                                                                     े
वे स्लगा जा ऩशुॉि। स्लगा भं इडद्र आफद दे लता बी योगी
                 े                                            ऩुन् अलताय रेकय वबी रोकं को नीयोग करुॉ गा। भं
शो यशे थे। मश दे खकय नायद जी की सिडता औय फढ़                  कासताक भाव, कृ ष्ण ऩष, िमोदळी, गुरुलाय, शस्त नषि के
गई। सिडता कयते शुए ले लैकण्ठ भं ऩशुॉिे।
                         ु                                    वभम अलताय रेकय ‘आमुलद’ का उद्धाय करुॉ गा। इवभं
                                                                                  े
       लैकण्ठ भं नायद जी ने ळॊख िक्र अभृत करळ
          ु
                                                              वडदे श न कयो।
धायी औय अबम शस्त धनलॊतरय त्रलष्णु को दे खा। श्री
(रक्ष्भी), बू (ऩृ्ली) औय नीरा दे ली उनकी ियण वेला
                                                              फद्रतीम अध्माम:
कय यशी थी। ऐवे भशात्भा धनलॊतरय रुऩी श्री त्रलष्णु को
                                                                     बगलान ् त्रलष्णु क उक्त लिनं को वुनकय नायद
                                                                                       े
नायद जी ने बत्रक्त ऩूलक प्रणाभ फकमा औय शाथ जोड़कय
                      ा
                                                              भुसन असत प्रवडन शुए औय शऴा वे फोरे-शे बगलन ् आऩ
उनकी स्तुसत कयने रगे।
                                                              ‘धनलॊतरय ऩूजा’ की त्रलसध फताइए। ‘धनलॊतरय ऩूजा भं
       श्री नायद जी फोरे-शे दे लं क दे ल जगडनाथ बक्तं
                                   े
ऩय दमा कयने लारे दीनफडधु दमावागय जगत ् की यषा भं              कौन वा ध्मान मा त्रलधान फकमा जाए ? उवका सनमभ

तत्ऩय आऩ भुझे ळयणागत जानकय वडतुद्श कीस्जए।                    क्मा शं ? उवका पर क्मा शं ? फकव वभम, फकवने उव
       शे बगलन ् भंने ऩृ्ली आफद वबी रोकं भं ऩमाटन             ऩूजा को फकमा शं ? ऩूजा भं क्मा क्मा िीजं िाफशए ? शे
फकमा औय लशाॉ क सनलावी जनं को नाना योगं वे द्खी
              े                            ु                  दे ल दे लेद्वय रोकं ऩय अनुग्रश कयने की इच्छा वे कृ ऩा
ऩामा। फकवी को ज्लय ने सगयामा शं , तो फकवी को याज              ऩूलक मश वफ भुझे फताइए। श्री बगलान ् ने कशा- शे भुने
                                                                 ा
मक्ष्भा ने धय दफामा। कोई असतवाय, द्वाव, खाॉवी,वॊग्रशणी        तुभने रोकोऩकाय की इच्छा वे ऩूछा शं । अतएल तुभवे
औय ऩाण्डु योगाफद वे ऩीफड़त शं । कोई लातयोगं वे ऩीफड़त         ‘ऩाऩनासळनी, योगनासळनी कथा’ कशता शूॉ।
72                                          अक्टू फय 2011



        धनगुद्ऱ याजा क सनसभत्त कासताक कृ ष्ण िमोदळी
                      े                                                        बयद्राज भुसन ने कशा-शे याजन ् तुम्शाया लृत्ताडत
गुरुलाय शस्त नषि क वभम भं यात्रि क प्रथभ प्रशय भं
                  े               े                                    भंने जान सरमा। तुभ असत ळीघ्र भशात्रलष्णु धनलॊतरय की
गुद्ऱ धन क वभान ‘धनलॊतरय’ नाभ वे अलतीणा शोता शूॉ।
          े                                                            ळयण भं जाओ। भनुष्म उनक दळान भाि वे घोय दस्तय
                                                                                             े                 ु
अतएल लश फदन वॊवाय भं ‘धनिमोदळी’ (धनतेयव) नाभ                           योगं वे भुक्त शो जाता शं । याजा ने बयद्राज भुसन वे उक्त
                                                                       फात वुनकय उनवे ऩूछा-शे भशात्भन ् आऩ कृ ऩा कय उनकी
वे प्रसवद्ध शोगा। मश सतसथ वबी काभनाओॊ को दे ने लारी
                                                                       आयाधना त्रलसध भुझे बरी-बाॉसत फताइए। ऋत्रऴ बयद्राज ने
शं ।
                                                                       कशा-शे भशाबाग याजन ् उव त्रलसध को भं कशता शूॉ,
        नायद जी ने ऩूछा- शे बगलन ् कृ ऩमा त्रलस्ताय ऩूलक
                                                       ा
                                                                       वालधान सित्त वे वुसनए।
फताइए फक फड़ फागी धनगुद्ऱ कशाॉ शुआ औय आऩक दळान
                                         े
की प्रासद्ऱ क सरए उवने कौनवा व्रत फकमा था औय शे
             े                                                                 कासताक कृ ष्ण िमोदळी क ळुब फदन, प्रात् कार
                                                                                                     े

दमावागय नायामण उवने आऩका ऩूजन क्मं फकमा था?                            उठकय ळौि-भुख भाजान आफद वे सनलृत्त शोकय स्नान
                                                                       कये । ळुद्ध लस्त्र आफद धायण कय गुरु वे प्राद्ऱ उऩदे ळानुवाय
        श्री बगलान ् ने कशा- ऩशरे अलडतीऩुय (उज्जैन) भं
                                                                       बगलान ् धनलॊतरय का ध्मान कये । सनम्न भडि ऩढ़कय व्रत
‘धनगुद्ऱ’ नाभक याजा धभाभागा वे प्रजा का ऩारन कयने
                                                                       का प्रायम्ब कये :
लारा शुआ था। लश वबी रोगं का प्माया, उदायसित्त था।                              करयष्मासभ व्रतॊ दे ल त्लद् बक्तस्त्लत ् ऩयामण्।
उवे षमयोग शो गमा। उववे लश फदन-यात ऩीफड़त शोने                          सश्रमॊ दे फश जमॊ दे फश, आयोग्मॊ दे फश भे प्रबो
रगा। ऩीड़ा की सनलृत्रत्त क सरए उवने जऩ, शोभ, नाना
                          े
                                                                               अथाात ् शे दे ल भं आऩका बक्त शूॉ, आऩ भं सित्त
प्रकाय की औऴसधमाॉ की, ऩयडतु नीयोग न शुआ। तफ लश
                                                                       रगाकय आऩका व्रत करुॉ गा। आऩ भुझे रक्ष्भी दीस्जए,
स्खडन शोकय त्रलराऩ कयने रगा।
                                                                       त्रलजम दीस्जए, आयोग्म दीस्जए।
        याजा     की     स्त्री   त्रिरोक   भं   प्रसवद्ध, ऩसतव्रता,
                                                                               दे ल    धनलॊतरय     वे   उक्त   प्राथाना   कय,   उनकी
वदािारयणी थी। उवने बी ऩसत क भॊगर की आकाॊषा वे
                           े
                                                                       ऴोडळोऩिाय वे ऩूजा कये । ऩूजा कयने क फाद तेयश धागं
                                                                                                          े
अनेक सनमभ, उऩलाव आफद फकए, ऩय इववे बी याजा
                                                                       का वूि रेकय तेयश गाॉठ लारा ‘दोयक’ फनाए। इव ‘दोयक’
नीयोग न शुआ औय अडत भं लश स्त्री बी अतीवाय योग वे
                                                                       की बत्रक्तऩूलक ऩूजा कये औय सनम्न भडि ऩढ़कय ऩुरुऴं क
                                                                                    ा                                     े
योसगणी शो गई। शे भुने उव याजा वे उव ऩसतव्रता स्त्री के
                                                                       दाफशने शाथ भं तथा स्स्त्रमं क फाॉएॉ शाथ भं फाॉधे:
                                                                                                    े
ऩाॉि ऩुि शुए। ले क्रभळ् आभलात, प्रीशा, कद्ष, खाॉवी औय
                                        ु
                                                                                      धडलडतये भशाबाग जयायोगसनलायक।
                                     ु
द्वाव वे ऩीफड़त शुए। उनको बी योग वे छटकाया न
                                                                                  दोयरुऩेण भाॊ ऩाफश, वकटु म्फॊ दमासनधे॥
                                                                                                       ु
सभरा। याजा औय यानी अऩने ऩुिं को योगाता दे खकय
                                                                               आसधव्मासधजया भृत्मु बमादस्भादशसनाळभ ्।
अत्मडत द्खी शुए।
        ु
                                                                                  ऩीड्मभानॊ दे लदे ल यष भाॊ ळयणागतभ ्॥
        स्त्री-ऩुिं को योग क वागय वे भुक्त कयाने की
                            े
                                                                       अथाात ्-शे धडलडतये शे भशाबाग आऩ जया (फुढाऩा) औय
इच्छा वे सिस्डतत याजा घोय लन को िरा गमा। लन भं
                                                                       योग क सभटाने लारे शं । इवसरए शे दमासनधे आऩ इव
                                                                            े
याजा ने भशाभुसन ‘बयद्राज’ को फैठे दे खा। याजा ने उडशं
                                                                       वूिरुऩ वे वकटु म्फ भेयी यषा कीस्जमे। भं फदन-यात आसध
                                                                                   ु
बत्रक्तऩूलक
          ा    प्रणाभ    फकमा      औय      अऩना    द्ख
                                                    ु      फतामा।
                                                                       (भानसवक द्ख) औय व्मासध (योग), जया (फुढाऩा) तथा
                                                                                ु
भशाभुसन बयद्राज वे याजा ने योग-कद्श सनलायण शे तु उऩाम
                                                                       भृत्मु क बम वे िस्त शो यशा शूॉ। शे दे ल-दे ल
                                                                               े                                            ळयण भं
ऩूछा।
                                                                       आए शुए भेयी अफ आऩ यषा कयं । वूि फडधन क फाद
                                                                                                             े
73                                       अक्टू फय 2011



‘दे ल दे ल धनलॊतरय’ को बत्रक्त ऩूलक ‘अघ्मा’ सनलेदन कये ।
                                  ा                                  धडलडतये नभस्तुभ्मॊ, नभो ब्रह्माण्ड नामक।
अघ्मा प्रदान कयने का भडि इव प्रकाय शं :                                 वुयावुयायासधताॊघ्रे, नभो लेदैक गोिय ।
          जातो रोक फशताथााम, आमुलदासबलृद्धमे।
                                 े                                    आमुलद स्लरुऩाम, नभस्ते जगदात्भने॥१॥
                                                                          े
          जया भयण नाळाम, भानलानाॊ फशताम ि॥                              प्रऩडनॊ ऩाफश दे लेळ जगदानडद दामक।
          दद्शानाॊ सनधनामाम, जात्त धडलडतये प्रबो।
           ु                                                          दमा सनधे भशा दे ल िाफश भाभऩयासधनभ ्।
          गृशाणाघ्मं भमा दत्तॊ, दे ल दे ल कृ ऩा कय॥               जडभ भृत्मु जयायोगै्, ऩीफड़तॊ वकटु स्म्फनभ ्॥२॥
                                                                                                 ु

अथाात ्- शे दे ल दे ल, दमा कायी धनलॊतरय! आऩ रोकाऩकाय        अथाात ्- शे धडलडतये ब्रह्माण्ड नामक आऩको नभस्काय!

क सरए, आमुलद की असबलृत्रद्ध क सनसभत्त, भनुष्मं क
 े         े                 े                  े           आमुलद स्लरुऩ जगत ् क अडतमााभी आऩको नभस्काय। शे
                                                                े               े

फशत तथा जया भयण का नाळ कयने क सरए अलतरयत
                             े                              जगत ् क वुखदामी दे ल दे ल दमा वागय, भशा दे ल आऩ
                                                                   े

शुए शं । भं आऩको अघ्मा प्रदान कयता शूॉ। इवे स्लीकाय         भुझ ळयणागत अऩयाधी की यषा कयं । भं कटु म्फ वफशत
                                                                                               ु
कीस्जए।                                                     जडभ भृत्मु जया आफद योगं वे ऩीफड़त शूॉ।
       अघ्मा प्रदान कयने क फाद ब्राह्मण को फामन दान
                          े                                          बगलान ् धनलॊतरय ने मश स्तुसत वुनकय भेघ

कये । फामन दान क सरए गेशूॉ क आटे भं दध, घी डारकय
                े           े        ू                      गजान क वभान गम्बीय लाणी वे भुस्कयाते शुए कशा-शे
                                                                  े                         ु
                                                            भशा याज ठीक शं , ठीक शं , भं तुम्शायी स्तुसत वे प्रवडन
ऩकाए। ऩकने ऩय ळक्कय डारे। कवय, कऩूय, इरामिी,
                           े
                                                            शूॉ। अफ शभवे लय भाॉग रो।
रंग, जात्रलिी डारकय इव सवद्ध नैलेद्य को बगलान ् को
                                                                     याजा फोरे-शे दे ल मफद आऩ प्रवडन शं , तो वफवे
अत्रऩत कये । आधा प्रवाद लेदस ब्राह्मण को अत्रऩात कये
     ा
                                                            ऩशरे स्त्री ऩुिं वफशत भुझे आयोग्म दीस्जए।
औय आधा स्त्री ऩुिाफद वफशत स्लमॊ प्रवाद स्लरुऩ ग्रशण
                                                                     मश प्राथाना वुनकय बगलान ् ने कशा-याजन ् तुभने
कये । शे याजन ् इव त्रलसध वे व्रत कयने वे वाषात ्
धनलॊतरय स्लमॊ प्रकट शोकय तुम्शाया अबीद्श सवद्ध कयं गे।      जो प्राथाना की शं , लश ऩूणा शोगी। इवक असतरयक्त बी भं
                                                                                                 े

इतनी कथा वुनाकय बयद्राज भुसन ने त्रलश्राभ सरमा।             लय दे ता शूॉ। उवे वालधान शोकय वुनो :

तृतीम अध्माम:                                                        तुभने स्जव प्रकाय मश व्रत फकमा शं । इवी तयश

       वूत जी फोरे-शे भुसन लयं याजा धनगुद्ऱ ने भुसन         जो व्रत कयं गे, उनको आयोग्म प्रदान कय भं उडशं अऩनी

की आसा ऩाकय उनक कशे अनुवाय तेयश लऴा ऩमाडत
               े                                            स्स्थय बत्रक्त दॉ गा।
                                                                              ू
बत्रक्त ऩूलक व्रत फकमा।
           ा                                                         वूत    जी      फोरे-बगलान ् धनलॊतरय   मश   कशकय
       एक फदन व्रत वभासद्ऱ क अलवय ऩय वाषात ्
                            े                               अडतधाान शो गए औय याजा धनगुद्ऱ अऩनी ऩुयी भं रौट
धनलॊतरय प्रकट शुए। याजा ने वाद्शाॊग प्रणाभ कय उनकी          गमा। याजा सनत्म स्त्री-ऩुिं वफशत अभृत ऩास्ण धनलॊतरय
स्तुसत की। बत्रक्त ऩूलक की गई स्तुसत स्लीकाय कय
                      ा                                     की स्तुसत कयने रगा। उवने ऩृ्ली रोक भं नाना प्रकाय

बगलान ् धनलॊतरय ने कशा-शे याजन ् अफ तुभ डयो भत,             क वुख बोगे औय अडत भं बगलान ् धनलॊतरय की कृ ऩा वे
                                                             े

तुम्शाया भॊगर शोगा। तुभ शभवे लय भाॉगो। याजा ने मश           भोष ऩद प्राद्ऱ फकमा। इव प्रकाय भंने तुभ रोगं को

वुनकय उडशं ऩुन् वाद्शाॊग प्रणाभ फकमा औय उनकी स्तुसत         बगलान ् धनलॊतरय की जडभोत्वल कथा वुनाई। इवके

की :                                                        वुनने वे वबी ऩाऩं का नाळ शोता शं ।
74                                         अक्टू फय 2011




                                             वद्ऱ श्री का िभत्काय
                                                                                                                  सिॊतन जोळी

         दीऩालरी क फदन फशी-खाते क ऩूजन क वभम फशी-खाते भं उऩयोक्त क्रभभं रार यॊ ग की करभ म ऩेन वे श्री
                  े              े      े
सरखे। ऩशरे एक फाय श्री सरखे, फपय दो फाय श्री श्री सरखे, फपय तीन फाय श्री श्री श्री, इव प्रकाय क्रभ को फढाते जाए
आखीय भं वात फाय श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री सरखे, वद्ऱश्री क नीिे
                                                                   े
अऩने ईद्श का नाभ सरखे मा ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ् सरखे। फपय धुऩ-                   श्री
दीऩ, ऩुष्ऩ आफद वे उवका ऩूजन कयं ।                                           श्री             श्री
         उक्त प्रमोग कयने वे आनेलारा नमा लऴा व्मलवाम भं आसथाक
द्रत्रद्श वे वुख, वभृत्रद्ध रेकय आमेगा औय अत्मासधक राबदामक यशे गा।          श्री श्री श्री
         स्जन रोगो क ऩाव रक्ष्भी (धन) स्स्थय नशीॊ यशता। रक्ष्भी आने
                    े                                                       श्री श्री श्री श्री
वे ऩूला जाने को तत्ऩय शोती शं । उडशं अऩनी जेफ भं मा भनीऩवा भं एक
स्पद कागज ऩय उऩयोक्त तयीक वे श्री सरख कय यखना िाफशए। वद्ऱ श्री
   े                     े                                                  श्री श्री श्री श्री श्री
सरखने वे रक्ष्भी रम्फे वभम तक स्स्थय यशने क मोग फनते शं लश नमे
                                           े                                श्री श्री श्री श्री श्री श्री
स्रोत वे धन राब क बी प्रफर मोग फनते शं । (अद्शगॊध की स्माशी
                 े
फनाकय अनाय की करभ वे सरखना असत उत्तभ यशता शं ।)                             श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री
        उक्त तयीक वे वद्ऱ श्री को अऩनी अरभायी, गल्रा (कळ फोक्ळ)
                  े                                     ै                            ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ्
         मा धन यखने क स्थान ऩय कभकभ मा अद्शगॊध वे अऩने दाशीने
                     े          ु ु
         शाथ की अनासभका उॊ गरी वे सरखने ऩय बी मश अत्मासधक राबप्रद यशता शं ।
        उक्त तयीक वे वद्ऱ श्री को िाॊफद मा वोने क ऩत्तय ऩय मॊि स्लरुऩ बी फनामा वकता शं । ताॊफे िाॊदी क ऩत्तय भं
                  े                               े                                                    े
         फनाते वभम ध्मान यखे की ऩत्तय की वतश ऩय श्री उऩय की ओय उबयी शुई शो, नीिे की ओय खुदी शुई न शं।
        वद्ऱ श्री की जगश ऩय अनेक रोग श्री मा रक्ष्भी भॊि का उच्िायण कयते शुए, अऩनी अरभायी, गल्रा (कळ
                                                                                                    ै
         फोक्ळ) आफद धन यखने क स्थान ऩय अनाभीका उॊ गरी वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । कई दकानदाय मा व्मलवामीक
                             े                                                       ु
         स्थानो ऩय बी उक्त तयीक वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । वद्ऱ श्री वे भाॊ रक्ष्भीजी प्रवडन शोती शं । क्मोकी श्री का वयर
                               े
         अथा शं वुख वभृत्रद्ध-वॊऩडनता।

                                                       रक्ष्भी मॊि
श्री मॊि (रक्ष्भी मॊि)                   भशारक्ष्भमै फीज मॊि                       लैबल रक्ष्भी मॊि
श्री मॊि (भॊि यफशत)                      भशारक्ष्भी फीवा मॊि                       कनक धाया मॊि
श्री मॊि (वॊऩणा भॊि वफशत)
             ू                           रक्ष्भी दामक सवद्ध फीवा मॊि               श्री श्री मॊि (रसरता भशात्रिऩुय वुडदमै
श्री मॊि (फीवा मॊि)                      रक्ष्भी दाता फीवा मॊि                     श्री भशारक्ष्भमं श्री भशामॊि)
श्री मॊि श्री वूक्त मॊि                  रक्ष्भी फीवा मॊि                          अॊकात्भक फीवा मॊि
श्री मॊि (कभा ऩृद्षीम)
           ु                             रक्ष्भी गणेळ मॊि                          ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊि ऩूजन मॊि
मॊि क त्रलऴम भं असधक शे तु वॊऩक कयं । GURUTVA KARYALAY, Call us: 91+ 9338213418, 91+ 9238328785
     े                         ा
75                                         अक्टू फय 2011




                                           स्पफटक श्रीमॊि का ऩूजन
                                                                                                               सिॊतन जोळी

       आज क बौसतक मुग भं अथा (धन) जीलन फक भुख्म आलश्मक्ताओॊ भं वे एक शै । धनाढ्म व्मत्रक्तओॊ जीलनळैरी को
           े
दे खकय प्रबात्रलत शोते शुले वाधायण व्मफक फक बी काभना शोती शं , फक उवक ऩाव बी इतना धन शो फक लश अऩने जीलन
                                                                     े
भं वभस्त बौसतक वुखो को बोग ने भं वभथा शं। एवी स्स्थभं भेशनत, ऩरयश्रभ वे कभाई कयक धन अस्जात कयने क
                                                                                े                े
फजाम कछ रोग अल्ऩ वभम भं ज्मादा कभाने फक भानसवकता क कायण कबी-कबी गरत तयीक अऩनाते शं ।
      ु                                           े                     ं
       स्जवक पर स्लरुऩ एवे रोग धन का लास्तत्रलक वुख बोगने वे लॊसित यश जाते शं औय योग, तनाल, भानसवक
            े
अळाॊसत जेवी अडम वभस्माओॊ वे ग्रस्त शो जाते शं ।
       जशाॊ गरत तयीक वे कभामे शुले धन क कायण वभाज एवे रोगो को शीन बाल वे दे खते शं । जफफक भेशनत,
                    ं                  े
ऩरयश्रभ वे काभामे शुले धन वे स्लमॊ का आत्भत्रलद्वाव फढता शं एलॊ वभाज भं
प्रसतद्षा औय भान वम्भान बी वयरता वे प्राद्ऱ शो जाता शं ।
       जो व्मत्रक्त धासभाक त्रलिाय धायाओॊ वे जुडे शो लश इद्वय भं त्रलद्वाय यखते शुले
स्लमॊ फक भेशनत, ऩरयश्रभ क फर ऩय कभामे शुले धन को फश वच्िा वुख
                         े
भानते शं । धभा भं आस्था एलॊ त्रलद्वाव यखने लारे व्मत्रक्त क सरमे भेशनत, ऩरयश्रभ
                                                           े
कयने क उऩयाॊत अऩनी आसथाक स्स्थभं उडनसत एलॊ रक्ष्भी को स्स्थय कयने
      े
शे त, श्री मॊि क ऩूजन का उऩाम अऩनाकय जीलन भं फकवी बी वुख वे
    ु           े
लॊसित नशीॊ यश वकते, उडशं अऩने जीलन भं कबी धन का अबाल नशीॊ यशता।
उनक वभस्त कामा वुिारु रुऩ वे िरते शं । रक्ष्भी कृ ऩा प्रासद्ऱ क सरए श्रीमॊि
   े                                                           े
का वयर ऩूजन त्रलधान स्जवे अऩना कय वाधायण व्मत्रक्त त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय
वकते शं । इव भं जया बी वॊळम नशीॊ शं ।


श्रीमॊि का ऩूजन यॊ क वे याजा फनाने लारा एलॊ व्मत्रक्त फक दरयद्रता
को दय कयने लारा शं ।
    ू

      अऩने ऩूजा स्थान भं प्राण-प्रसतत्रद्षत श्रीमॊि को ऩूजन क सरमे स्थात्रऩत कयं । (प्राण-प्रसतत्रद्षत श्रीमॊि फकवी बी
                                                              े
       मोग्म त्रलद्रान ब्राह्मण मा मोग्म जानकाय वे सवद्ध कयलारे)
      श्री मॊि को प्रत्मेक ळुक्रलाय को दध, दशी, ळशद, घी औय ळक्कय (गुड़) अथाात ऩॊिाभृत फनाकय स्नान कयामे।
                                         ु
      स्नान क ऩद्ळमात उवे रार कऩडे वे ऩोछ दं ।
              े
      श्री मॊि को फकवी िाॊदी मा ताॊफे फक प्रेट भं स्थाऩीत कयं ।
      श्री मॊि क नीिे 5 रुऩमे मा 10 रुऩमे का नोट यखदं । (5,10 रुऩमे का सवक्का नशीॊ)
                 े
      श्री मॊि स्थात्रऩत कयने लारी प्रेट भं श्रीमॊि ऩय स्पफटक फक भारा को िायं ओय घुभाते शुले स्थात्रऩत कयं ।
      श्री मॊि क उऩय भौरी का टु कडा 3-5 फाय घुभाते शुले अत्रऩत कयं ।
                 े                                            ा
      श्री मॊि क उऩय वुखा अद्श गॊध सछडक।
                 े                      ं
76                                          अक्टू फय 2011



           मफद वॊबल शो तो रार ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं । (कभर, भॊदाय(जावूद) मा गुराफ शो तो उत्तभ)
                                          ा
           धूऩ-दीऩ इत्मादी वे त्रलसधलत ऩूजन कयं ।
           उऩयोक्त त्रलधन प्रसत ळुक्रलाय कयं एलॊ अडम फदन कलर धूऩ-दीऩ कयं ।
                                                           े
           फकवी एक रक्ष्भी भॊि का एक भारा भॊि जऩ कयं । श्रीवूक्त, अद्श रक्ष्भी स्तोि इत्मादी का ऩाठ कयं मफद ऩाठ कयने भं आऩ
            अवभथा शोतो फाजाय भं श्रीवूक्त, अद्श रक्ष्भी इत्मादी स्तोि फक कवेट वीडी सभरती शं उवका श्रलण कयं ।
                                                                          े
           ऩूजा भं जाने-अनजाने शुई गरती क सरए रक्ष्भीजी का स्भयण कयते शुले षभा भाॊगकय वुख, वौबाग्म औय वभृत्रद्ध
                                          े
            फक काभना कयं ।
           प्रसत ळुक्रलाय उऩयोक्त ऩूजन कयने वे जीलन भं फकवी बी प्रकाय का आसथाक वॊकट नशीॊ आता।
           मदी आसथाक वॊकट वे ऩये ळान शं तो श्री मॊि क ऩूजन वे वभस्त प्रकाय क आसथाक वॊकट धीये -धीये दय शो जाते शं ।
                                                      े                      े                       ू
नोट: श्री मॊि क क नीिे यखा शुला नोट प्रसत एक-दो भाव भं एक फाय फकवी दे ली भॊदीय भं बेट कय दं । (राब प्राद्ऱ शोने ऩय फदरे)
               े े
           प्रथन फाय यखा शुला नोट श्री मॊि क ऩूजन वे राब शोने क फाद शी फदरे। राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने तक नोट को यखे यशं ।
                                             े                  े
           राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने क ऩद्ळमात प्रसत भाश भं एक फाये प्रसतऩदा(एकभ) को ऩुयाना नोट फदर कय नमे नोट यखं।
                                        े
           जेवे-जेवे राब प्राद्ऱ शोने रगे आऩ क अनुकर कामा शो ने रगे तो नोट फक यकभ फढाते यशं । असधक राब प्राद्ऱ शोता शं ।
                                               े    ू

उदाशण: मफद ऩशरे 5 रुऩमे का नोट यखा शं तो उस्वे राब शोने क ऩद्ळमात नोट फदरते शुले 10 रुऩमे का नोट यखे। 10 रुऩमे का
                                                         े
नोट यखने वे राब शोने क ऩद्ळमात नोट फदरते शुले 20 रुऩमे का नोट यखे। इवी प्रकाय नोट को फदते यशं इस्वे असधक राब प्राद्ऱ
                      े
शोता शं ।
असधक राब प्रासद्ऱ शे तु वाभाडम सनमभ:
ऩूजन क फदन ब्रह्मिमा का ऩारन कयं ।
      े
ऩूजन क फदन वुगॊसधत तेर, ऩयफ्मूभ, इि का प्रमोग कयने वे फिे।
      े
त्रफना प्माज-रशवून का ळाकाशायी बोजन ग्रशण कयं । ळुक्रलाय वपद सभद्षान बोजन भं ग्रशण कयं ।
                                                           े


             क्मा आऩक फच्िे कवॊगती क सळकाय शं ?
                      े       ु      े

             क्मा आऩक फच्िे आऩका कशना नशीॊ भान यशे शं ?
                      े

             क्मा आऩक फच्िे घय भं अळाॊसत ऩैदा कय यशे शं ?
                      े
    घय ऩरयलाय भं ळाॊसत एलॊ फच्िे को कवॊगती वे छडाने शे तु फच्िे क नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्राया
                                     ु         ु                 े
    ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त लळीकयण कलि एलॊ एव.एन.फडब्फी
    फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा, त्रलसध-त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय
    वकते शं । मफद आऩ तो आऩ भॊि सवद्ध लळीकयण कलि एलॊ एव.एन.फडब्फी फनलाना िाशते शं , तो वॊऩका
    इव कय वकते शं ।                                            GURUTVA KARYALAY
                 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
                                 Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
                               Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
77                                             अक्टू फय 2011




                                              वला ऐद्वमा प्रद-रक्ष्भी-कलि
श्री भधुवूदन उलाि:-                                          ।।इसत श्रीब्रह्मलैलते इडद्रभ ् प्रसत शरयणोऩफदद्शभ ् रक्ष्भीकलिभ ्।।
गृशाण कलिभ ् ळक्र वलाद्खत्रलनाळनभ ्।
                      ु                                      (गणऩसतखण्ड २२।५-१७)
ऩयभैद्वमाजनक वलाळिुत्रलभदा नभ ्।।
            ॊ                                                बालाथा्- भधुवूदन जी फोरे शं इडद्र ! (रक्ष्भी प्रासद्ऱ क सरमे) तुभ
                                                                                                                    े
ब्रह्मणे ि ऩुया दत्तभ ् वॊवाये ि जरप्रुते।                   मश रक्ष्भीकलि ग्रशण कयो। मश वभस्त द्खं का त्रलनाळक,
                                                                                                ु
मद् धृत्ला जगताॊ श्रेद्ष् वलैद्वमामुतो त्रलसध्।।             ऩयभ ऐद्वमा का उत्ऩादक औय वम्ऩूणा ळिुओॊ का भदान कयने
फबूलुभनल् वले वलैद्वमामतो मत्।
      ा                ु                                     लारा शं । ऩूलकार भं जफ वाया वॊवाय जरभग्न शो गमा था, उव
                                                                          ा
वलैद्वमाप्रदस्मास्म कलिस्म ऋत्रऴत्रलासध।।                    वभम भैनं इवे ब्रह्मा को फदमा था। स्जवे धायण कयक ब्रह्मा
                                                                                                            े
ऩस्ङ्क्तश्छडदद्ळ वा दे ली स्लम ऩद्मारमा वुय।                 त्रिरोकी भं श्रेद्ष औय वम्ऩूणा ऐद्वमं क बागी शुए थे। दे लयाज, इव
                                                                                                    े
सवद्धै द्वमाजऩेष्लेल त्रलसनमोग् प्रकीसतात।।                  वलैद्वमाप्रद कलि क ब्रह्मा ऋत्रऴ शं , ऩस्ङ्क्त छडद शं , स्लमॊ ऩद्मारमा
                                                                               े
मद् धृत्ला कलिॊ रोक् वलाि त्रलजमी बलेत ्।।                   रक्ष्भी दे ली शं औय सवद्धै द्वमा क जऩं भं इवका त्रलसनमोग कशा
                                                                                               े
भूर कलि ऩाठ:                                                 गमा शं । इव कलि क धायण कयने वे रोग वलाि त्रलजमी शोते शं ।
                                                                              े
भस्तकभ ् ऩातु भे ऩद्मा कण्ठॊ ऩातु शरयत्रप्रमा।
                                                             .


                                                             ऩद्मालती दे ली भेये भस्तक की यषा कयो। शरयत्रप्रमा कण्ठ की यषा
नासवकाभ ् ऩातु भे रक्ष्भी् कभरा ऩातु रोिनभ ्।।               कयो। रक्ष्भी नासवका की यषा कयो। कभरा नेि की यषा कयो।
कळान ् कळलकाडता ि कऩारभ ् कभरारमा।
 े      े                                                    कळलकाडता कळं की, कभरारमा कऩार की, जगज्जननी दोनं
                                                              े        े
जगत्प्रवूगण्डमुग्भॊ स्कडधॊ वम्ऩत्प्रदा वदा।।
          ा                                                  कऩोरं की औय वम्ऩत्प्रदा वदा स्कडध की यषा कयो।
ॐ श्रीॊ कभरलासवडमै स्लाशा ऩृद्षॊ वदालतु।                     ॐ श्रीॊ कभरलासवडमै स्लाशा भेये ऩृद्षॊ बाग का वदा ऩारन कयो।
ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै स्लाशा लष् वदालतु।।                       ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै स्लाशा: लष्स्थर को वदा वुयस्षत यखे।
ऩातु श्रीभाभ ककारॊ फाशुमुग्भॊ ि ते नभ्।।
              ॊ                                              श्री दे ली को नभस्काय शं :आऩ भेये ककारॊ तथा दोनं बुजाओॊ को
                                                                                                ॊ
ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्म्मै नभ् ऩादौ ऩातु भे वॊततभ ् सियभ ्।     फिामे।
ॐ ह्रीॊ श्रीॊ नभ् ऩद्मामै स्लाशा ऩातु सनतम्फकभ ्।।           ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्म्मै नभ् सियकार तक भेये ऩैयं का ऩारन कयो।
ॐ श्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा वलांगॊ ऩातु भे वदा।              ॐ ह्रीॊ श्रीॊ नभ् ऩद्मामै स्लाशा- सनतम्फ बाग की यषा कयो।
ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा भाॊ ऩातु वलात्।।     ॐ श्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा- भेये वलांग की वदा यषा कयो।
इव भॊि क ऩाठ वे भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा प्राद्ऱ शोती शै ।
        े                                                    ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा- वफ ओय वे वदा भेया ऩारन
परश्रुसत:                                                    कयो।
इसत ते कसथतभ ् लत्व वलावम्ऩत्कयभ ् ऩयभ ्।
                                                             लत्व, इव प्रकाय‍ भंने‍ तुभवे‍ इव‍ वलैद्वमाप्रद‍ नाभक‍ ऩयभोत्कृ द्श‍
वलैद्वमाप्रदभ ् नाभ कलिभ ् ऩयभाद्भतभ ्।।
                                  ु
                                                             कलि‍ का‍ लणान‍ कय‍ फदमा।‍ मश ऩयभ‍ अद्भत‍ कलि‍ वम्ऩूण‍
                                                                                                   ु             ा
गुरुभभ्मच्मा त्रलसधलत ् कलिभ ् ळयमेत्तु म्।
                                                             वम्ऩत्रत्तमं‍को‍दे ने‍ लारा‍शं ।‍जो‍भनुष्म‍त्रलसधऩूलक‍गुरु फक अिाना‍
                                                                                                                 ा
कण्ठे ला दस्षणे फाॊशौ व वलात्रलजमी बलेत ्।।
                                                             कयक‍इव‍कलि‍को‍गरे‍ भं‍ अथला‍दाफशनी‍बुजा‍ऩय‍धायण‍कयता‍
                                                                े
भशारक्ष्भीगृशभ ् तस्म न जशासत कदािन।
            ा
                                                             शं , लश‍वफको‍जीतने लारा‍शो‍जाता‍शं ।‍भशारक्ष्भी‍कबी‍उवक‍घय‍
                                                                                                                    े
तस्म छामेल वततभ ् वा ि जडभसन जडभसन।।
                                                             का‍त्माग‍नशीॊ‍कयती; फस्ल्क‍प्रत्मेक‍जडभ भं‍छामा‍की‍बाॉसत‍वदा‍
इदभ ् कलिभसात्ला बजेल्रक्ष्भीॊ वुभडदधी्।
                                                             उवक‍वाथ‍रगी‍यशती‍शं ।‍जो‍भडदफुत्रद्ध‍इव‍कलि‍को‍त्रफना‍जाने‍
                                                                े
ळतरषप्रजद्ऱोऽत्रऩ न भडि् सवत्रद्धदामक्।।
                                                             शी रक्ष्भी‍ की‍ बत्रक्त‍ कयता‍ शं , उवे‍ एक‍ कयोड़‍ जऩ‍ कयने‍ ऩय‍ बी‍
                                                             भडि‍सवत्रद्धदामक‍नशीॊ शोता।
78                                               अक्टू फय 2011




                                                    भशारक्ष्भी कलि
नायामण उलाि                                                     ऩद्मा भाॊ दस्षणे ऩातु नैऋत्माॊ श्रीशरयत्रप्रमा॥१०॥
                                                                                         ा
वला वम्ऩत्प्रदस्मास्म कलिस्म प्रजाऩसत्।                         ऩद्मारमा ऩस्द्ळभे भाॊ लामव्माॊ ऩातु श्री् स्लमभ ्।
ऋत्रऴश्छडदद्ळ फृशती दे ली ऩद्मारमा स्लमभ ्॥१॥                   उत्तये कभरा ऩातु ऐळाडमाॊ सवडधुकडमका॥११॥
धभााथकाभभोषेऴु त्रलसनमोग् प्रकीसतात्।
     ा                                                          नायामणेळी ऩातूध्लाभधो त्रलष्णुत्रप्रमालतु।
ऩुण्मफीजॊ ि भशताॊ कलिॊ ऩयभाद्भतभ ्॥२॥
                              ु                                 वॊततॊ वलात् ऩातु त्रलष्णुप्राणासधका भभ॥१२॥
ॐ ह्रीॊ कभरलासवडमै स्लाशा भे ऩातु भस्तकभ ्।                     इसत ते कसथतॊ लत्व वलाभडिौघत्रलग्रशभ ्।
श्रीॊ भे ऩातु कऩारॊ ि रोिने श्रीॊ सश्रमै नभ्॥३॥                 वलैद्वमाप्रदॊ नाभ कलिॊ ऩयभाद्भतभ ्॥१३॥
                                                                                              ु
ॐ श्रीॊ सश्रमै स्लाशे सत ि कणामुग्भॊ वदालतु।                    वुलणाऩलातॊ दत्त्ला भेरुतुल्मॊ फद्रजातमे।
ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा भे ऩातु नासवकाभ ्॥४॥    मत ् परॊ रबते धभॉ कलिेन ततोऽसधकभ ्॥१४॥
ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै ि स्लाशा दडतॊ वदालतु।                        गुरुभभ्मच्मा त्रलसधलत ् कलिॊ धायमेत ् तु म्।
ॐ श्रीॊ कृ ष्णत्रप्रमामै ि दडतयडध्रॊ वदालतु॥५॥                  कण्ठे ला दस्षणे लाशौ व श्रीभान ् प्रसतजडभसन॥१५॥
ॐ श्रीॊ नायामणेळामै भभ कण्ठॊ वदालतु।                            अस्स्त रक्ष्भीगृशे तस्म सनद्ळरा ळतऩूरुऴभ ्।
                                                                               ा
ॐ श्रीॊ कळलकाडतामै भभ स्कडधॊ वदालतु॥६॥
         े                                                      दे लेडद्रै द्ळावुयेडद्रै द्ळ वोऽिध्मो सनस्द्ळतॊ बलेत ्॥१६॥
ॐ श्रीॊ ऩद्मसनलासवडमै स्लाशा नासबॊ वदालतु।                      व वलाऩुण्मलान ् धीभान ् वलामसेऴु दीस्षत्।
ॐ ह्रीॊ श्रीॊ वॊवायभािे भभ लष् वदालतु॥७॥                        व स्नात् वलातीथेऴु मस्मेदॊ कलिॊ गरे॥१७॥
ॐ श्रीॊ श्रीॊ कृ ष्णकाडतामै स्लाशा ऩृद्षॊ वदालतु।               मस्भै कस्भै न दातव्मॊ रोबभोशबमैयत्रऩ।
ॐ ह्रीॊ श्रीॊ सश्रमै स्लाशा भभ शस्तौ वदालतु॥८॥                  गुरुबक्ताम सळष्माम ळयणाम प्रकाळमेत ्॥१८॥
ॐ श्रीॊ सनलावकाडतामै भभ ऩादौ वदालतु।                            इदॊ कलिभसात्ला जऩेल्रक्ष्भीॊ जगत्प्वूभ ्।
ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ सश्रमै स्लाशा वलांगॊ भे वदालतु॥९॥           कोफटवॊख्मॊ प्रजद्ऱोऽत्रऩ न भडि् वोत्रद्धदामक्॥१९॥
प्राच्माॊ ऩातु भशारक्ष्भीयाग्नेय्माॊ कभरारमा।                       (गणऩसतखण्ड ३८।६४-८२)




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79                                           अक्टू फय 2011




                                                              भशारक्ष्भी स्तुसत
नभस्तेस्तु भशाभामे श्री ऩीठे वुयऩूस्जते।                                  वफको लय दे ने लारी, वभस्त दद्शं को बम दे ने लारी एलॊ
                                                                                                     ु
ळङ्खिक्रगदाशस्ते भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥१॥                                 वफक द:खं को दय कयने लारी, शे दे त्रल भशारक्ष्भी तुम्शं
                                                                             े ु       ू
नभस्ते गरुडारूढे कोरावुय बमङ्करय।                                         नभस्काय शं ॥3॥ सवत्रद्ध, फुत्रद्ध, बोग औय भोष दे ने लारी शे
वलाऩाऩशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥२॥                                भॊिऩूत बगलसत भशारक्ष्भी तुम्शं वदा प्राभ शं ॥4॥ शे
वलासे वलालयदे वलादद्श बमङ्करय।
                  ु                                                       दे त्रल! शे आफद-अडत-यफशत आफदळत्रक्त ! शे भशे द्वरय! शे
वलाद:खशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥३॥
    ु                                                                     मोग वे प्रकट शुई बगलसत भशारक्ष्भी तुम्शं नभस्काय
सवत्रद्धफुत्रद्धप्रदे दे त्रल बुत्रक्त भुत्रक्त प्रदासमसन।                शं ॥5॥ शे दे त्रल! तुभ स्थूर, वूक्ष्भ एलॊ भशायौद्ररूत्रऩणी शो,
भडिऩूते वदा दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥४॥                              भशाळत्रक्त शो, भशोदया शो औय फडे -फडे ऩाऩं का नाळ
आद्यडतयफशते दे त्रल आद्यळत्रक्त भशे द्वरय।                                कयने लारी शो। शे दे त्रल भशारक्ष्भी तुम्शं नभस्काय शं ॥6॥
मोगजे मोगवम्बूते भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥५॥                                 शे कभर क आवन ऩय त्रलयाजभान ऩयब्रह्मस्लरूत्रऩणी दे त्रल!
                                                                                  े
स्थूरवूक्ष्भभशायौद्रे भशाळत्रक्त भशोदये ।                                 शे ऩयभेद्वरय! शे जगदम्फ! शे भशारक्ष्भी तुम्शं भेया प्रणाभ
भशाऩाऩशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥६॥                                शं ॥7॥ शे दे त्रल तुभ द्वेत लस्त्र धायण कयने लारी औय
ऩद्मावनस्स्थते दे त्रल ऩयब्रह्म स्लरूत्रऩस्ण।                             नाना प्रकाय क आबूऴणं वे त्रलबूत्रऴता शो। वम्ऩूणा जगत ्
                                                                                       े
ऩयभेसळ जगडभत ् भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥७॥                                   भं व्माद्ऱ एलॊ अस्खर रोक को जडभ दे ने लारी शो। शे
द्वेताम्फयधये दे त्रल नानारङ्कायबूत्रऴते।                                 भशारक्ष्भी तुम्शं भेया प्रणाभ शं ॥8॥ जो भनुष्म बत्रक्त
जगस्त्व ्थते जगडभत ् भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥८॥                             मुक्त शोकय इव भशारक्ष्म्मद्शक स्तोि का वदा ऩाठ कयता
भशारक्ष्म्मद्शक स्तोिॊ म: ऩठे द्भत्रक्त भाडनय्॥
               ॊ                                                          शं , लश वायी सवत्रद्धमं औय याज्मलैबल को प्राद्ऱ कय वकता
वलासवत्रद्धभलाऩनेसत याज्मभ ् प्राऩनेसत वलादा॥९॥                           शं ॥9॥ जो प्रसतफदन एक वभम ऩाठ कयता शं , उवक फडे -
                                                                                                                     े
एककारे ऩठे स्डनत्मभ ् भशाऩाऩत्रलनाळनभ ्।                                  फडे ऩाऩं का नाळ शो जाता शं । जो दो वभम ऩाठ कयता
फद्रकारॊ म: ऩठे स्डनत्मभ ् धनधाडमवभस्डलत॥१०॥                              शं , लश धन-धाडम वे वम्ऩडन शोता शं ॥10॥ जो प्रसतफदन
त्रिकारॊ म: ऩठे स्डनत्मभ ् भशाळिुत्रलनाळनभ ्।                             तीन कार ऩाठ कयता शं उवक फडे -फडे ळिुओॊ का नाळ
                                                                                                 े
भशारक्ष्भीबालेस्डनत्भ ् प्रवडना लयदा ळुबा ॥११॥                            शो जाता शं औय उवक ऊऩय कल्माणकारयणी लयदासमनी
                                                                                           े
|| इसत भशारक्ष्भी स्तुसत वम्ऩूणा ||                                       भशारक्ष्भी वदा शी प्रवडन शोती शं ॥11॥
                                                                          रक्ष्भी जी क इव स्तोि की यिना कयने लारे दे लयाज
                                                                                      े
बालाथा:- इडद्र फोरे- श्रीऩीठऩय स्स्थत औय दे लताओॊ वे
                                                                          इडद्र शं ।
ऩूस्जत शोने लारी शे भशाभामे। तुम्शं नभस्काय शं । शाथ
भं ळङ्ख, िक्र औय गदा धायण कयने लारी शे भशारक्ष्भी                         उऩयोक्त स्तुसत का प्रसतफदन तीन कार ऩाठ कयता
तुम्शं प्रणाभ शं ॥1॥ गरुडऩय आरूढ शो कोरावुय को बम                         शै , ळिुओॊ का नाळ शोता शं एलॊ उवे जीलन भे वबी
दे ने लारी औय वभस्त ऩाऩं को शयने लारी शे बगलसत                            प्रकाय क वुखो की प्रासद्ऱ शोती शे ।
                                                                                  े
भशारक्ष्भी तुम्शं प्रणाभ शं ॥2॥ वफ कछ जानने लारी,
                                    ु


                                                   वलाजन लळीकयण कलि
                                                             भूल्म भाि: Rs.1050
80                                                         अक्टू फय 2011




                                                              श्री कनकधाया स्तोि
अॊगशये      ऩुरकबूऴण         भाश्रमडती        बृगाॊगनैल       भुकराबयणॊ
                                                                 ु                    तभारभ।         अॊगीकृ तास्खर          त्रलबूसतयऩाॊगरीरा        भाॊगल्मदास्तु          भभ
भॊगरदे लतामा:॥1॥                            भुग्ध्मा भुशुत्रलादधती लदनै भुयायै : प्रेभिऩाप्रस्णफशतासन गतागतासन। भारा दृळोभाधुकय त्रलभशोत्ऩरे मा वा भै
सश्रमॊ फदळतु वागय वम्बलामा:॥2॥                                       त्रलद्वाभये डद्रऩदत्रलभ्रभदानदषभानडद शे तु यसधक भधुत्रलफद्रऴोत्रऩ।
                                                                                                                    ॊ                                      ईऴस्डनऴीदतु भसम
षणभीषणाद्धा सभडदोलयोदय वशोदयसभस्डदयाम:॥3॥                 आभीसरताषभसधगम्म भुदा भुकडदभानडदकडदभ सनभेऴभनॊगतडिभ ्। आककय स्स्थत कनी
                                                                                  ु                              े
सनकऩक्ष्भ नेिॊ बूत्मै बलेडभभ बुजॊगयामाॊगनामा:॥4॥ फाह्यडतये भधुस्जत: सश्रतकौस्तुबै मा शायालरील शरयनीरभमी त्रलबासत। काभप्रदा बगलतो त्रऩ
कटाषभारा कल्माण बालशतु भे कभरारमामा:॥5॥ काराम्फुदासररसरतोयसव कटबाये धाायाधये स्पयसत मा तफडदॊ गनेल ्। भातु: वभस्त जगताॊ
                                                              ै                 ु
भशनीम भूसताबद्रास्ण भे फदळतु बागालनडदनामा:॥6॥                  प्राद्ऱॊ ऩदॊ प्रथभत: फकर मत्प्रबालाडभाॊगल्म बास्ज: भधुभामसन भडभथेन। भध्माऩतेत फदश
भडथय      भीषणाद्धा    भडदारवॊ       ि      भकयारमकडमकामा:॥7॥                दद्याद    दमानुऩलनो       द्रत्रलणाम्फुधायाभ     स्स्भबफकिन
                                                                                                                                      ॊ         त्रलशॊ ग     सळळौ      त्रलऴण्ण।
दष्कभाधभाभऩनीम सियाम दयॊ नायामण प्रणसमनी नमनाम्फुलाश:॥8॥
 ु                    ू                                                                इद्शा त्रलसळद्शभतमो त्रऩ मथा ममाद्रा दृद्शमा त्रित्रलद्शऩऩदॊ वुरबॊ रबॊते। दृत्रद्श:
प्रशूद्शकभरोदय दीसद्ऱ रयद्शाॊ ऩुत्रद्श कृ ऴीद्श भभ ऩुष्कय त्रलद्शयामा:॥9॥      गीदे लतैसत गरुड़ध्लज बासभनीसत ळाकम्बयीसत ळसळळेखय लल्रबेसत। वृत्रद्श स्स्थसत
प्ररम कसरऴु वॊस्स्थतामै तस्मै
       े                             नभस्स्त्र बुलनैक गुयोस्तरूण्मै ॥10॥ श्रुत्मै नभोस्तु ळुबकभापर प्रवूत्मै यत्मै नभोस्तु यभणीम गुणाणालामै। ळक्तमै
नभोस्तु ळतऩाि सनकतानामै ऩुद्शमै नभोस्तु ऩुरूऴोत्तभ लल्रबामै ॥11॥ नभोस्तु नारीक सनबाननामै नभोस्तु दग्धौदसध जडभ बूत्मै । नभोस्तु
                 े                                                                                ु
वोभाभृत वोदयामै नभोस्तु नायामण लल्रबामै ॥12॥                                वम्ऩतकयास्ण वकरेस्डद्रम नडदासन वाम्राज्मदान त्रलबलासन वयोरूशास्ष। त्ल द्रॊ दनासन
दरयता शयणाद्यतासन भाभेल
 ु                                भातय      सनळॊ   करमडतु       नाडमभ ्       ॥13॥         मत्कटाषवभुऩावना        त्रलसध:     वेलकस्म     कराथा        वम्ऩद:।         वॊतनोसत
लिनाॊगभानवॊवत्लाॊ       भुयारयरृदमेद्वयीॊ   बजे    ॥14॥      वयसवजसनरमे           वयोज       शस्ते   धलरभाॊळुकगडधभाल्मळोबे।              बगलसत             शरयलल्रबे     भनोसे
त्रिबुलनबूसतकरय प्रवीद भह्यभ ् ॥15॥ दस्ग्धस्स्तसभ:कनकबभुखा ल वृत्रद्शस्ललााफशनी त्रलभरिारू जर प्रुताॊगीभ। प्रातनाभासभ जगताॊ जननीभळेऴ
                                                     ुॊ
रोकासधनाथ गृफशणी भभृतास्ब्धऩुिीभ ् ॥16॥ कभरे कभराषलल्रबे त्लॊ करुणाऩूयतयाॊ गतैयऩाड़ॊ गै:। अलरोकम भाभ फकिनानाॊ प्रथभॊ ऩािभकृ त्रिभॊ
                                                                                                       ॊ
दमामा : ॥17॥ स्तुलस्डत मे स्तुसतसबय बूसभयडलशॊ िमीभमीॊ त्रिबुलनभातयॊ यभाभ ्।                            गुणासधका गुरुतयबाग्मबासगनो बलस्डत ते फुधबात्रलतामा:
॥18॥इसत श्री कनकधाया स्तोिॊ वम्ऩूणभ
                                  ा



                                                                   कनकधाया मॊि
आज क मुग भं शय व्मत्रक्त असतळीघ्र वभृद्ध फनना िाशता शं । धन प्रासद्ऱ शे तु प्राण-प्रसतत्रद्षत कनकधाया मॊि क वाभने
    े                                                                                                      े
फैठकय कनकधाया स्तोि का ऩाठ कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । इव कनकधाया मॊि फक ऩूजा अिाना कयने वे ऋण
औय दरयद्रता वे ळीघ्र भुत्रक्त सभरती शं ।                   व्माऩाय भं उडनसत शोती शं , फेयोजगाय को योजगाय प्रासद्ऱ शोती शं ।श्री आफद
ळॊकयािामा द्राया कनकधाया स्तोि फक यिना कछ इव प्रकाय फक शं , स्जवक श्रलण एलॊ ऩठन कयने वे आव-ऩाव क
                                        ु                        े                              े
लामुभॊडर भं त्रलळेऴ अरौफकक फदव्म उजाा उत्ऩडन शोती शं । फठक उवी प्रकाय वे कनकधाया मॊि अत्मॊत दरब मॊिो भं वे
                                                                                             ु ा
एक मॊि शं स्जवे भाॊ रक्ष्भी फक प्रासद्ऱ शे तु अिूक प्रबाला ळारी भाना गमा शं ।

कनकधाया मॊि को त्रलद्रानो ने स्लमॊसवद्ध तथा वबी प्रकाय क ऐद्वमा प्रदान कयने भं वभथा भाना शं । जगद्गरु ळॊकयािामा ने
                                                        े                                          ु
दरयद्र ब्राह्मण क घय कनकधाया स्तोि क ऩाठ वे स्लणा लऴाा कयाने का उल्रेख ग्रॊथ ळॊकय फदस्ग्लजम भं सभरता शं ।
                 े                  े

कनकधाया भॊि:- ॐ लॊ श्रीॊ लॊ ऐॊ ह्रीॊ-श्रीॊ क्रीॊ कनक धायमै स्लाशा'

                                                                                                                     भूल्म: Rs.550 वे Rs.8200 तक

                                                               गुरुत्ल कामाारम वॊऩक :
                                                                                   ा
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                                           श्री रक्ष्भी िारीवा
॥ दोशा ॥                               रुऩ फदर तशॊ वेला कीडशा ॥               प्रसतफदन ऩाठ कयै भन भाशीॊ ।
भातु रक्ष्भी करय कृ ऩ, कयो ह्र्दम भं   स्लॊम त्रलष्णु जफ नय तनु धाया ।        उन वभ कोई जग भं कशुॊ नाशी ॥
लाव ॥                                  रीडशे उ अलधऩुयी अलताया ॥               फशुत्रलसध क्मा भं कयं फडाई ।
भनोकाभना सवद्ध करय, ऩुयलशु भेयी        तफ तुभ प्रगट जनकऩुय भाशीॊ ।            रेम ऩयीषा ध्मान रगाई ॥
आव ॥                                   वेला फकमो ह्र्दम ऩुरकाशीॊ ॥            करय त्रलद्वाव कयं व्रत नेभा ।
॥वोयठा ॥                               अऩनामा तोफश अडतमााभी ।                 शोम सवद्ध उऩजै उय प्रेभा ॥
मशी भोय अयदाव,शाथ जोड त्रलनती          त्रलद्व त्रलफदत त्रिबुलन की स्लाभी ॥   जम जम जम रक्ष्भी बालानी ।
करु ।
 ॊ                                     तुभ वभ प्रफर ळत्रक्त नफशॊ आनी ।        वफ भं व्मात्रऩत शो गुण खानी ॥
वफत्रलसध कयौ वुलाव, जम जनसन            कशॊ तक भफशभा कशौ फखानी ॥               तुम्शयो तेज प्रफर जग भाशी ।
जगदॊ त्रफका ॥                          भन क्रभ लिन कयै वेलकाई ।               तुभ वभ कोउ दमारु कशुॊ नाफशॊ ॥
सवॊधु वुता भं वुसभयं तोशी ।            भन इस्च्छत लाॊसछत पर ऩाई ॥             भोफश अनाथ की वुसध अफ रीजै ।
सान फुत्रद्ध त्रलद्या दो भोशी ॥        तस्ज ्र कऩट औय ितुयाई ।                वॊकट काफट बत्रक्त भोफश दीजै ॥
तुभ वभान नफशॊ कोई उऩकायी ।             ऩूजफशॊ त्रलत्रलध बाॊसत भन राई ॥        बूर िूक करय षभा शभायी ।
वफ त्रलसध ऩुयलशु आव शभायी ॥            औय शार भं कशं फुझाई ।                  दळान दीजै दळा सनशायी ॥
जम जम जगत जनसन जगदम्फा ।               जो मश ऩाठ कयै भन राई ॥                 त्रफन दळान व्माकर असधकायी ।
                                                                                              ु
वफकी तुभ शी शो अलरम्फा ॥               ताको कोई कद्श न शोई ।                  तुभफश अषत द्ख वशते बायी ॥
                                                                                         ु
तुभ शी शो घट घट की लावी ।              भन इस्च्छत ऩालै पर वोई ॥               नफशॊ भोफशॊ सान फुत्रद्ध शै तन भं ।
त्रलनती मशी शभायी खावी ॥               िाफश िाफश जम द्ख सनलारयस्ण ।
                                                     ु                        वफ जानत शो अऩने भन भं ॥
जगजननी जम सवॊधु कभायी ।
                 ु                     त्रित्रलध ताऩ बल फॊधन शारयस्ण ॥        रुऩ ितुबज कयक धायण ।
                                                                                      ुा   े
दीनन की तुभ शो फशतकायी ॥               जो मश िारीवा ऩढै ऩढालै ।               कद्श भोय अफ कयशु सनलायण ॥
त्रलनलं सनत्म तुभफशॊ भशायानी ।         ध्मान रगाकय वुनै वुनालै ॥              कफश प्रकाय भं कयं फडाई ।
                                                                               े
कृ ऩा कयौ जग जनसन बलानी ॥              ताको कोई न योग वतालै ।                 सान फुत्रद्ध भोफश नफशॊ असधकाई ॥
कफश त्रलसध स्तुसत कयं सतशायी ।
 े                                     ऩुि आफद धन वम्ऩसत ऩालै ॥               ॥ दोशा ॥
वुसध रीजै अऩयाध त्रफवायी ॥             ऩुिशीन अरु वॊऩसत शीना ।                िाफश िाफश दख शारयणी,शयो लेसग वफ
                                                                                         ु
कृ ऩा दृत्रद्श सितलो भभ ओयी ।          अॊध फसधय कोढी असत दीना ।               िाव।
जगजननी त्रलनती वुन भोयी ॥              त्रलप्र फोराम क ऩाठ कयालै ।
                                                      ै                       जमसत जमसत जम रक्ष्भी , कयो
सान फुत्रद्ध जम वुख की दाता ।          ळॊका फदर भं कबी न रालै ॥               ळिु का नाळ ॥
वॊकट शयो शभायी भाता ॥                  ऩाठ कयालै फदन िारीवा ।                 याभदाव धरय ध्मान सनत, त्रलनम
षीयसवॊधु जफ त्रलष्णु भथामो ।           ता ऩय कृ ऩा कयं जो गौयीवा ॥            कयत कय जोय ।
िौदश यत्न सवॊधु भं ऩामो ॥              वुख वम्ऩसत फशुत वी ऩालै ।              भातु रक्ष्भी दाव ऩय, कयशु दमा की
िौदश यत्न भं तुभ वुखदावी ।             कभी नशीॊ काशू की आलै ॥                 कोय ॥
वेला फकमो प्रबु फसन दावी ॥             फायश भाव कयं जो ऩूजा ।
जफ जफ जडभ जशाॊ प्रबु रीडशा ।           तेफश वभ धडम औय नफशॊ दजा ॥
                                                            ू
                                                                                            ***
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                                                            ॥श्री वूक्त॥
ॐ फशयण्म-लणां शरयणीॊ, वुलणा-यजत-स्त्रजाभ ्। िडद्राॊ फशयण्मभमीॊ रक्ष्भीॊ, जातलेदो भ आलश॥

ताॊ भ आलश जात-लेदो, रक्ष्भीभनऩ-गासभनीभ ्। मस्माॊ फशयण्मॊ त्रलडदे मॊ, गाभद्वॊ ऩुरूऴानशभ ्॥

अद्वऩूलां यथ-भध्माॊ, शस्स्त-नाद-प्रभोफदनीभ ्। सश्रमॊ दे लीभुऩह्लमे, श्रीभाा दे ली जुऴताभ ्॥

काॊवोऽस्स्भ ताॊ फशयण्म-प्राकायाभाद्राा ज्लरडतीॊ तृद्ऱाॊ तऩामडतीॊ। ऩद्मे स्स्थताॊ ऩद्म-लणां तासभशोऩह्लमे सश्रमभ ्॥

िडद्राॊ प्रबावाॊ मळवा ज्लरडतीॊ सश्रमॊ रोक दे ल-जुद्शाभुदायाभ ्। ताॊ ऩद्म-नेसभॊ ळयणभशॊ प्रऩद्ये अरक्ष्भीभे नश्मताॊ त्लाॊ लृणोसभ॥
                                         े

आफदत्म-लणे तऩवोऽसधजातो लनस्ऩसतस्तल लृषोऽष त्रफल्ल्। तस्म परासन तऩवा नुदडतु भामाडतयामाद्ळ फाह्या अरक्ष्भी्॥

उऩैतु भाॊ दै ल-वख्, कीसताद्ळ भस्णना वश। प्रादबूतोऽस्स्भ याद्सेऽस्स्भन ्, कीसतं लृत्रद्धॊ ददातु भे॥
                                             ु ा

षुत ्-त्रऩऩावाऽभरा ज्मेद्षा, अरक्ष्भीनााळमाम्मशभ ्। अबूसतभवभृत्रद्धॊ ि, वलाान ् सनणुद भे गृशात ्॥
                                                                                    ा

गडध-द्रायाॊ दयाधऴां, सनत्म-ऩुद्शाॊ कयीत्रऴणीभ ्। ईद्वयीॊ वला-बूतानाॊ, तासभशोऩह्लमे सश्रमभ ्॥
             ु
भनव् काभभाकसतॊ, लाि् वत्मभळीभफश। ऩळूनाॊ रूऩभडनस्म, भसम श्री् श्रमताॊ मळ्॥
           ू
कदा भेन प्रजा-बूता, भसम वम्भ्रभ-कदा भ। सश्रमॊ लावम भे करे, भातयॊ ऩद्म-भासरनीभ ्॥
                                                       ु

आऩ् वृजडतु स्स्नग्धासन, सिक्रीत लव भे गृशे। सनि-दे ली भातयॊ सश्रमॊ लावम भे करे॥
                                                                            ु

आद्रां ऩुष्करयणीॊ ऩुत्रद्शॊ, वुलणां शे भ-भासरनीभ ्। वूमां फशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ, जातलेदो भभालश॥

आद्रां म् करयणीॊ मत्रद्शॊ, त्रऩॊगराॊ ऩद्म-भासरनीभ ्। िडद्राॊ फशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ, जातलेदो भभालश॥

ताॊ भ आलश जात-लेदो रक्ष्भीभनऩ-गासभनीभ ्। मस्माॊ फशयण्मॊ प्रबूतॊ गालो दास्मोऽद्वान ् त्रलडदे मॊ ऩुरूऴानशभ ्॥

म् ळुसि् प्रमतो बूत्ला, जुशुमादाज्मभडलशभ ्। सश्रम् ऩॊि-दळिं ि, श्री-काभ् वततॊ जऩेत ्॥



                                     धनरक्ष्भी स्तोि                                                       अद्श रक्ष्भी कलि
  नभो कल्माणदासमक । भशावम्ऩत्प्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥
                 े                                                                                       भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा प्राद्ऱ
  भशाबोगप्रदे दे त्रल भशाकाभप्रऩूरयते । वुखभोषप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥                           कयने       शे तु   उऩमोगी   सवद्ध
  ब्रह्मरूऩे वदानडदे वस्च्िदानडदरूत्रऩणी । धृतसवत्रद्धप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥                   शोता शं । स्जस्वे भाॊ क आफद
                                                                                                                                े

  उद्यत्वूमप्रकाळाबे उद्यदाफदत्मभण्डरे । सळलतत्लप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥
           ा                                                                                             रक्ष्भी, धाडम रक्ष्भी, धैयीम
                                                                                                         रक्ष्भी, गज रक्ष्भी, वॊतान
  सळलरूऩे सळलानडदे कायणानडदत्रलग्रशे । त्रलद्ववॊशायरूऩे ि धनदामै नभोऽस्तुते॥
                                                                                                         रक्ष्भी, त्रलजम रक्ष्भी, त्रलद्या
  ऩछितत्लस्लरूऩे ि ऩछिािायवदायते । वाधकाबीद्शदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥
                                                                                                         रक्ष्भी औय धन रक्ष्भी इन
  श्रीॊ ॐ॥
                                                                                                         वबी रुऩो का अळीलााद प्राद्ऱ
  ॐ श्री रसरता भशात्रिऩुयवुडदयी ऩयाबट्टारयका ।                                                           शोता शं ।
  वभेताम श्री िडद्रभौऱीद्वय ऩयब्रह्मणे नभ्॥जम जम ळङ्कय शय शय ळङ्कय॥
                                                                                                                भूल्म- Rs: 1050
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                     अद्शरक्ष्भी स्तोि                                  दे लकृ त रक्ष्भी स्तोिभ ्
वुभनवलॊफदत वुॊदरय भाधत्रल िॊद्र वशोदरय शे भभमे ।               षभस्ल बगलॊत्मल षभाळीरे ऩयात्ऩये ।
भुसनगण लॊफदत भोषप्रदासमसन भॊजुऱबात्रऴस्ण लेदनुते ॥             ळुद्धवत्त्लस्लरूऩे ि कोऩाफदऩरयलस्जाते॥
ऩॊकजलासवसन दे लवुऩूस्जत वदगुणलत्रऴास्ण ळाॊसतमुते ।             उऩभे वलावाध्लीनाॊ दे लीनाॊ दे लऩूस्जते।
जम जम शे भधुवूदन कासभसन आफदरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥1॥          त्लमा त्रलना जगत्वलं भृततुल्मॊ ि सनष्परभ ्॥
असमकसर कल्भऴनासळसन कासभसन लैफदकरूत्रऩस्ण लेदभमे ।              वलावॊऩत्स्लरूऩा त्लॊ वलेऴाॊ वलारूत्रऩणी।
षीयवभुदबल भॊगररूत्रऩस्ण भॊिसनलासवसन भॊिनुते ॥                  यावेद्वमासध दे ली त्लॊ त्लत्करा् वलामोत्रऴत्॥
भॊगरदासमसन अॊफुजलासवसन दे लगणासश्रत ऩादमुते ।                  करावे ऩालाती त्लॊ ि षीयोदे सवडधुकडमका।
                                                                ै
जम जम शे भधुवूदन कासभसन धाडमरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥2॥         स्लगे ि स्लगारक्ष्भीस्त्लॊ भत्मारक्ष्भीद्ळ बूतरे॥
जमलय लस्णासन लैष्णत्रलबागात्रल भॊिस्लरूत्रऩस्ण भॊिभमे ।        लैकठे ि भशारक्ष्भीदे लदे ली वयस्लती।
                                                                  ुॊ
वुयगण ऩूस्जत ळीघ्र परप्रद सानत्रलकासवसन ळास्त्रनुते ॥          गॊगा ि तुरवी त्लॊ ि वात्रलिी ब्रह्मारोकत्॥
बलबमशारयस्ण ऩाऩत्रलभोिसन वाधुजनासश्रत ऩादमुते ।                कृ ष्णप्राणासधदे ली त्लॊ गोरोक यासधका स्लमभ ्।
                                                                                             े
जम जम शे भधुवूदन कासभसन धैमरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥3॥
                           ा                                   यावे यावेद्वयी त्लॊ ि लृॊदालन लने- लने॥
जम जम दगसतनासळसन कासभसन वलापरप्रद ळास्त्रभमे ।
       ु ा                                                     कृ ष्णा त्रप्रमा त्लॊ बाॊडीये िॊद्रा िॊदनकानने।
यथगज तुयग ऩदाफदवभानुत ऩरयजनभॊफडत रोकनुते ॥                     त्रलयजा िॊऩकलने ळतळृॊगे ि वुॊदयी॥
शरय-शय ब्रह्म वुऩूस्जत वेत्रलत ताऩसनलारयस्ण ऩादमुते ।          ऩद्मालती ऩद्मलने भारती भारतीलने।
जम जम शे भधुवूदन कासभसन श्री गजरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥4॥         कददॊ ती कदलने वुळीरा कतकीलने॥
                                                                ुॊ      ुॊ           े
असम खगलाफशसन भोफशसन िफक्रस्ण याग त्रललसधासन सानभमे ।           कदॊ फभारा त्लॊ दे ली कदॊ फकाननेऽत्रऩ ि।
गुणगणलारयसध रोकफशतैत्रऴस्ण वद्ऱस्लयलय गाननुते ॥                याजरक्ष्भी याजगेशे गृशरक्ष्भीगृशे गृशे॥
वकर वुयावुय दे ल भुनीद्वय भानललॊफदत ऩादमुते ।                  इत्मुक्त्ला दे लता् वलाा भुनमो भनलस्तथा।
जम जम शे भधुवूदन कासभसन वॊतानरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥5॥           रूरूदनम्रलदना् ळुष्ककठोद्ष तारुका्॥
                                                                    ु ा             ॊ
जम कभरावसन वदगसतदासमसन सान त्रलकासवसन गानभमे ।                 इसत रक्ष्भीस्तलॊ ऩुण्मॊ वलादेल् कृ तॊ ळुबभ ्।
                                                                                             ै
अनुफदनभसिात ककभधूवय बूत्रऴतलासवत लाद्यनुते ॥
             ु ुॊ                                              म् ऩठे त्प्रातरूत्थाम व लै वलै रबेद् ध्रुलभ ्॥
कनक धया स्तुसत लैबल लॊफदत ळॊकय दे सळक भाडम ऩते।                अबामो रबते बामां त्रलनीताॊ वुवताॊ वतीभ ्।
                                                                                             ु
जम जम शे भधुवूदन कासभसन त्रलजमरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥6॥       वुळीराॊ वुॊदयीॊ यम्माभसतवुत्रप्रमलाफदनीभ ्॥
प्रणत वुयेद्वरय बायसत बागात्रल ळोकत्रलनासळसन यत्नभमे ।         ऩुिऩौिलतीॊ ळुद्धाॊ करजाॊ कोभराॊ लयाभ ्।
                                                                                   ु
भस्णभम बूत्रऴत कणात्रलबूऴण ळाॊसतवभालृत शास्मभुखे ॥             अऩुिो रबते ऩुिॊ लैष्णलॊ सियजीत्रलनभ ्॥
नलसनसध दासमसन कसरभरशारयस्ण काम्म परप्रद शस्तमुते ।             ऩयभैद्वमामुक्त ि त्रलद्यालॊतॊ मळस्स्लनभ ्।
                                                                            ॊ
जम जम शे भधुवूदन कासभसन त्रलद्यारस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥7॥        भ्रद्शयाज्मो रबेद्राज्मॊ भ्रद्शश्रीराबते सश्रमभ ्॥
सधसभ सधसभ सधभ ् सधसभ सधॊसधसभ सधॊसधसभ दॊ दसब ्नाद वुऩूणभमे ।
                                        ु ु           ा        शतफॊधरबेद्बॊधुॊ धनभ्रद्शो धनॊ रबेत ्।
                                                                    ु ा
घुभघुभ घुॊघुभ घुॊघुभ घुॊघुभ ळॊखसननाद वुलाद्यनुते ॥             कीसताशीनो रबेत्कीसतं प्रसतद्षाॊ ि रबेद् ध्रुलभ ्॥
लेदऩुयाणेसत शाव वुऩूस्जत लैफदकभागा प्रदळामुते ।                वलाभॊगरदॊ स्तोिॊ ळोकवॊताऩनाळनभ ्।
जम जम शे भधुवूदन कासभसन श्री धनरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥8॥         शऴाानॊदकयॊ ळद्वद्धभा भोषवुरृत्प्रदभ ्॥
                                                               ॥ इसत श्रीदे लकृ त रक्ष्भीस्तोिॊ वॊऩूणभ ् ॥
                                                                                                     ा
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                                           भासवक यासळ पर

                                                                                                  सिॊतन जोळी
भेऴ:   1 वे 15 अक्टू फय 2011: व्मलवासमक मािा राबदामक सवद्ध शोगी। आरस्म क कायण आऩक भशत्ल ऩूणा कामा
                                                                        े        े
                              प्राबात्रलत शोव अकते शं वालधानी लते। एक वे असधक आम क स्त्रोत फन वकते शं ।
                                                                                  े
                              आऩकी भानसवक सिडताओॊ भं फढोतयी शोगी। आऩक स्लबाल भं दमा, भृदता ल त्रलनम्रता की
                                                                     े                  ु
                              कभी शो वकती शं । इद्श सभिं क वशमोग वे नमे सभि फन वकते शं । जीलन वाथी वे लाद-
                                                          े
                              त्रललाद कयने वे फिे।

                              16 वे 31 अक्टू फय 2011 : कछ रुकालटो क फाद भं व्मलवाम भं धन राब प्राद्ऱ शोगा।
                                                        ु          े
                              भशत्ल क कामो क सरमे आऩको कजा रेना ऩड वकता शं जो राब प्रद सवद्ध शो वकता
                                     े      े
                              शं । प्रसतमोसगता क कामो भं फुत्रद्धभानी ल ितुयता वे ळीघ्र राब औय वपरता प्राद्ऱ कयं गे।
                                                े
ऩारयलारयक भतबेद शो वकते शं औय आऩक स्लास््म भं सगयालट शो वकती शं । सभि एलॊ इद्श लगा क रोगो ऩय आऩका
                                 े                                                  े
व्मम फढे गा।

लृऴब: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : नौकयी-व्मलवाम भं ऩरयलतान कयने वे फिने का प्रमाव कयं । आऩकी इच्छाओॊ के
त्रलऩयीत फकमे गमे कामो वे राब प्रासद्ऱ क मोग फन यशे शं । स्लास््म फक द्रद्शी वे वभम
                                        े
उत्तभ यश वकता शं । सभिं क वशमोग वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं । भशत्लऩूणा कामो को
                         े
गोऩसनम यखने का प्रमाव कयं । बूसभ-बलन वॊफॊसधत क्रम-त्रलक्रम वे राब प्राद्ऱ शोगा।

15 वे 31 अक्टू फय 2011 : आसथाक स्स्थती भं उताय-िढाल शोने के         मोग फन       यशं शं ।
अऩने वबी कामो को ऩूयी भशे नत एलॊ ईभानदायी वे ऩूया कयने वे राब प्राद्ऱ शोगा।
आऩका भन प्रवडन यशे गा औय आऩकी इच्छा यशे गी फक आऩ ज्मादा वभम अऩने
ऩरयलाय मा इद्श सभि क वाथ भं त्रफताएॊ। दाॊऩत्म जीलन भं गरतपसभमं वे फिना
                    े
िाफशमे। सभि एलॊ सनकट वॊऩफकम वे भतबेद एलॊ धोखा सभर वकता शं ।
                          ा

                              सभथुन: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: ऩूणा ऩरयश्रभ एलॊ कड़ी भेशनत वे आऩक भशत्लऩूणा
                                                                                              े
                              कामा एलॊ मोजनाएॊ ऩूणा शो वकती शं । वयकाय वे वॊफॊसधत कामा भं राब प्राद्ऱ शो वकता
                              शं । नौकयी-व्मलवाम भं उनासत शोगी। ऩरयलाय भं खुसळमो का भाशोर यशे गा औय ऩरयलाय भं
                              फकवी अत्रललाफशत क त्रललाश का मोग फनने रगंगे शं । स्लास््म वुख भं लृत्रद्ध शोगी फपय बी
                                               े
                              खाने- ऩीने का त्रलळेऴ ध्मान यखना फशतकायी यशे गा।

                              16 वे 31 अक्टू फय 2011: एक वे असधक स्त्रोि वे धन राब प्रासद्ऱ क सरमे आऩको नमा
                                                                                             े
                              व्मलवाम/नौकयी प्राद्ऱ शो वकती शं । भशत्ल क कामो क सरमे आऩको कजा रेना ऩड
                                                                        े      े
                              वकता शं जो राब प्रद सवद्ध शो वकता शं । अत्मासधक ऩरयश्रभ औय भेशनत वे आऩ
वपरता प्राद्ऱ कय वकते शं । कामा फक व्मस्तता, अत्मासधक बाग-दौड क कायण आऩको थका वकती शं ।
                                                               े
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कक: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : आऩक आम क स्त्रोत भं अस्स्थयता यश वकती शं । भशत्ल ऩूणाा कामो को स्स्थगीत
  ा                            े    े
कयना मा फकवी औय को दे ना नुक्ळान दे श शो वकता शं । गुद्ऱ त्रलयोसध-ळिुओॊ क कायण
                                                                         े
धन शासन शो वकती शै । ऩारयलायीकी एलॊ सभिो वे रयश्तो भं वूझ-फूझ वे लाणी का प्रमोग
कये अडमथा आऩक फने फनामे रयश्ते त्रफगड वकते शं । नमे रोगो की सभिता वे राब
             े
प्राद्ऱ कय वकते शं ।

16 वे 31 अक्टू फय 2011 : आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ शोने क मोग शं , स्जस्वे आसथाक स्स्थती
                                                    े
भं वुधाय शोगा। नमा व्मलवाम मा नौकयी प्राद्ऱ शो वकती शं मा आऩक कामा षेि भं
                                                             े
नमे फदराल शो वकते शं । कछ रुकालटो क फाद भं व्मलवाम भं धन राब प्राद्ऱ शोगा।
                        ु          े
ळिु ऩष ऩय आऩका दफदफा यशे गा। आऩकी भानसवक सिडताओॊ भं फढोतयी शोगी। आऩक स्लबाल भं दमा, भृदता ल त्रलनम्रता
                                                                    े                  ु
की कभी शो वकती शं ।

सवॊश:      1 वे 15 अक्टू फय 2011: व्मलवाम औय नौकयी भं राब औय ऩदोडनसत क अलवय प्राद्ऱ शंगे। अनालश्मक
                                                                      े
                                भानसवक सिडताओॊ भं फढोतयी शोगी। स्लबाल भं सिड़सिड़ा ऩन आवकता शं । अऩने क्रोध
                                ऩय सनमॊिण यखे। अशॊ बाल क कायण आऩक इद्श सभि-ऩारयलायीक वदस्म आऩवे दयी
                                                        े        े                               ू
                                फना वकते शं । ळिु ऩष वे वालधान यशं आऩ ऩय झूठे आयोऩ रग वकते शं स्जव कायण
                                आऩका ऩद एलॊ प्रसतद्षा खॊफडत शो वकती शं ।

                                16 वे 31 अक्टू फय 2011: भशत्ल क कामो भं त्रलध्न उत्ऩडन शो वकते शै । त्रलध्न-
                                                               े
                                फाधाओॊ वे घफयाएॊ नशीॊ। इव अलसध भं आऩको भानसवक कद्श शै तो ऩमााद्ऱ आयाभ कय
                                रेना िाफशमे। अनािश्मक खिा शोने क कायण ऩये ळानी शो वकती शं । नौकयी-व्मलवाम
                                                                े
भं उडनसत शो वकती शं । लाशन वालधानी वे िरामे मा लाशन वे वालधान यशे आकस्स्भक दघटना शो वकती शं । अऩने
                                                                            ु ा
स्लास््म का ध्मान यस्खए।

कडमा: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: इव अलसध भं आऩको अनुकूर ऩरयणाभ प्राद्ऱ शोगं।
बूसभ- बलन-लाशन क क्रम-त्रलक्रम वे भध्मभ राब प्राद्ऱ शो वकता शं । आऩकी वाभास्जक
                े
प्रसतद्षा औय व्मत्रक्तत्ल क कायण रोग आऩकी प्रळॊवा कय वकते शं ।
                           े                                          आऩक त्रलयोसध एलॊ
                                                                         े
ळिु ऩष इव अलसधभं दफे यशे गं। आऩको नौकयी एलॊ              व्माऩाय क षेि भं वपरता प्राद्ऱ
                                                                  े
शोगी। जीलन वाथी वे आऩको प्रवडना सभरेगी।

16 वे 31 अक्टू फय 2011: भशत्लऩूणा मोजनाओॊ को ळुरू कयने औय सनणाम रेने क सरमे
                                                                      े
वभम उत्तभ वात्रफत शो वकता शं । आऩकी मोजना एलॊ उद्दे श्म वपर शोते दे ख ऩामेगं।
धन वे वॊफॊसधत रेन-दे न शे तु वभम राबप्रद यशे गा। सभि-ऩारयलायीक वदस्मो का वशमोग प्राद्ऱ शोगा। स्लास््म वुख भं
लृत्रद्ध शोगी फपय बी खाने- ऩीने का त्रलळेऴ ध्मान यखना फशतकायी यशे गा। ऩूॊस्ज सनलेळ कय वकते शं ।
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तुरा: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: आकस्स्भक धन राब प्राद्ऱ शोव अकता शं । इव अलसध क दौयान अऩने स्लबाल भं
                                                                            े

                               सिड़सिड़ा ऩन आवकता शं । अऩने क्रोध ऩय सनमॊिण यखे। आलश्मकता वे असधक
                               बोजन आऩक स्लास््म को कभजोय कय वकता शं । ऩरयलाय क वदस्मं क त्रफि त्रलिायं
                                       े                                       े        े
                               भं भतबेद शो वकते शं । जीलन वाथी वे वॊफडध कद्शकायी शो वकते शं वालधान यशे ।

                               16 वे 31 अक्टू फय 2011: ऩूला कार भं फकमे गमे कामा एलॊ रुक शुले कामा वे
                                                                                        े
                               आकस्स्भक धन राब प्राद्ऱ शोगा। छोटी-छोटी वभस्माए आने क उऩयाॊत बी काभमाफी
                                                                                    े
                               प्राद्ऱ शोगी। आऩ अऩने कामा का अच्छा प्रदळान कयने भं वभथा शंगे। आऩकी भानसवक
                               सिडताओॊ भं फढोतयी शोगी। आऩक स्लबाल भं दमा, भृदता ल त्रलनम्रता की कभी शो वकती
                                                          े                  ु
शं । गरत सनणामो क कायण आसथाक ऩष कभजोय शो वकता शं ।
                 े


लृस्द्ळक: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: इव भाश आऩक अॊदय यिनात्भक कामा वपर शो
                                           े

वकते शं । नमा व्मलवाम मा नौकयी प्राद्ऱ शो वकती शं मा आऩक कामा षेि भं नमे
                                                        े
फदराल शो वकते शं । बूसभ- बलन-लाशन क क्रम-त्रलक्रम वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं ।
                                   े
आऩकी भानसवक अस्स्थताय भशत्लऩूणा सनणाम रेने भं त्रलरॊफ कय वकती शं । अनािश्मक
खिा कयने वे फिे अडमथा फडा नुकवान वॊबल शं ।

16 वे 31 अक्टू फय 2011: कामा भं आनेलारी रुकालटो भं बी कभी शोगी औय दयस्थ स्थानं
                                                                   ु
वे धन राब प्राद्ऱ शो वकता शै । कछ रुकालटो क फाद भं व्मलवाम भं धन राब प्राद्ऱ
                                ु          े
शोगा। फकमे गमे ऩूॊस्ज सनलेळ द्राया आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ क मोग फन यशे शै । आलश्मकता वे असधक वॊघऴा कयना ऩड
                                                         े
वकता शै । भानसवक सिडताओॊ भं कभी आमेगी। ऋण रेने वे फिे औय ऩुयाने ऋणं का बुगतान कयने का प्रमाव कये ।

धनु:   1 वे 15 अक्टू फय 2011 : इव अलसध क दौयान फकवी नमी ऩरयमोजना को रेकय भशत्लऩूणा सनणाम रेना आऩकी
                                        े

                             ऩये ळानी फढा वकता शं । थोडे वभम क सरमे नौकयी व्मलवाम भं ऩरयलतान क सनणामो
                                                              े                               े
                             को स्स्थगीत कयने का प्रमाव कये । आऩकी आॊख, ऩेट औय ऩैय भं गॊबीय िोट रग वकती
                             शं वालधानी फते। ऋण क रेन-दे न वे वॊफॊसधत भानसवक सिॊता शो वकती शं ।
                                                 े

                             16 वे 31 अक्टू फय 2011 : कामो भं वालधानी फते आऩकी राऩयलाशी आऩको रॊफे वभम
                             का नुक्ळान दे वकती शं । आऩको कोई कामा अऩनी इच्छाओॊ क त्रलरुद्ध कयना ऩड
                                                                                 े
                             वकता शं । ळिु एलॊ त्रलयोसध ऩष आऩकी ऩये ळासनमाॊ फढा वकते शै । शताळा औय सनयाळा
                             लारे त्रलिायो को फकनाया कय वभम का राब उठाते शुले आगे फढने का प्रमाव कयं ।
दाॊम्ऩत्म जीलन क वुख भं कभी यश वकती शं ।
                े
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भकय: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : इव अलसध भं वालधानी वे फकमे गमे कामो भं आऩको ळुब ऩरयणाभ प्राद्ऱ शंगे
                              स्जस्वे आऩको शय तयप वे राब शी राब सभरेगा। आऩक जोळ एलॊ उत्वाश भं एका-
                                                                           े
                              एक लृत्रद्ध नजय आवकती शं । सभि एलॊ वॊफॊसधओॊ वे फशुभूल्म लस्तु उऩशाय भं प्राद्ऱ कय
                              वकते शं । व्मलवामीक मािाएॊ         राबप्रद शो वकती शं उसिर राब प्राद्ऱ शोगे औय ऩूयाने
                              बूगतान प्राद्ऱ शो वकते शं ।

                              16 वे 31 अक्टू फय 2011: आऩक भशत्लऩूणा कामा एलॊ मोजनाएॊ ऩूणा शोने वे धन राब
                                                         े
                              फक प्रफर वॊबालना शं । स्लास््म फक द्रद्शी वे वभम वाभाडम वे फेशतय वात्रफत शो वकता
                              शं । सभि एलॊ रयश्ते दायं क वाथ अच्छा वभम व्मतीत कय वकते शं । भाता क स्लास््म
                                                        े                                        े
वे वॊफॊसधत सिॊता शो वकती शं । जीलन वाथी का वशमोग प्राद्ऱ शोगा औय आऩवी प्माय फढे गा।


कब: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : ऩूला क अच्छे औय फुये कभा का अलरोकन कय उवभे
 ॊु                               े

वुधाय कयने का प्रमाव कयं । वाभास्जक प्रसतद्षा औय भान-वम्भान भं लृत्रद्ध शो वकती शं ।
नमे रोगो वे सभिता शो वकती शं । आऩक कामा षेि
                                  े                  की रुकालटं थोफड फशुत दय शंगी।
                                                                           ू
कामा फक व्मस्तता, अत्मासधक बाग-दौड क कायण आऩको थकालट शो वकती शं ।
                                    े
अनािश्मक खिा कयने वे फिे अडमथा फडा नुकवान वॊबल शं ।

16 वे 31 अक्टू फय 2011 : इव दौयान आऩको असधकाॊळत् राबदामक औय वकायात्भक
ऩरयणाभ प्राद्ऱ शंगे। मािाएॊ क दौयान कद्श प्रद शो वकती शं । बूसभ- बलन-लाशन क क्रम-
                             े                                             े
त्रलक्रम वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं । ऩरयलाय एलॊ सभिलगा का ऩूणा वशमोग प्राद्ऱ शोगा औय वभम आनॊद ऩूलक त्रफता वकते
                                                                                                 ा
शं । आऩक वाभास्जक कामो क सरमे रोग आऩकी तायीप कयं गे। प्रेभ वम्फडधं भं वपर यशं गे।
        े               े


भीन: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : नई ऩरयमोजना वे वॊफॊसध सनणाम रेना राबप्रद शो वकता शं । ळिु एलॊ त्रलयोसध ऩष वे
त्रललाद वॊबल शं । आऩक द्राया फकमे गमे धासभाक औय आध्मास्त्भक कामा सनस्द्ळत फश उज्लर बत्रलष्म का वॊकत शै ।
                     े                                                                            े
                            वाॊस्कारयक वुखं फक प्रासद्ऱ शोगी। अऩने फुत्रद्ध औय त्रललेक वे अऩने दोऴो को दय कयने का
                                                                                                        ू
                            प्रमाव कयं । जीलन वाथी वे वशमोग प्राद्ऱ शोगा।

                            16 वे 31 अक्टू फय 2011 : व्माऩारयक वाझेदाय औय सभिो वे रेन-दे न भं वालधानी फते
                            धन शानी शो वकती शं । ऩरयलाय औय रयश्तेदायं वे वॊफॊधो भं वुधाय शोगा। त्रलयोसध ऩष को
                            ऩयास्त कय धन राब प्राद्ऱ कय वकते शं ऩय अनालश्मक करश भं ऩडने वे फिना असधक
                            राबप्रद शो वकता शं । अऩनी गरसतओॊ का अलरोकन कय बत्रलष्म फक मोजनाओॊ भं उवे
                            दय कयने का प्रमाव कयं ।
                             ू
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                                                                 यासळ यत्न
   भेऴ यासळ:                लृऴ यासळ:            सभथुन यासळ:                  कक यासळ:
                                                                                ा                    सवॊश यासळ:             कडमा यासळ:
          भूॊगा                   शीया                   ऩडना                     भोती                    भाणेक                     ऩडना




   Red Coral                 Diamond            Green Emerald             Naturel Pearl                   Ruby             Green Emerald
                             (Special)                                     (Special)
                                                                                                       (Old Berma)
    (Special)                                        (Special)                                        (Special)                 (Special)
5.25" Rs. 1050          10 cent    Rs. 4100     5.25" Rs. 9100           5.25"      Rs. 910       2.25" Rs. 12500          5.25" Rs. 9100
6.25" Rs. 1250          20 cent    Rs. 8200     6.25" Rs. 12500          6.25"      Rs. 1250      3.25" Rs. 15500          6.25" Rs. 12500
7.25" Rs. 1450          30 cent    Rs. 12500    7.25" Rs. 14500          7.25"      Rs. 1450      4.25" Rs. 28000          7.25" Rs. 14500
8.25" Rs. 1800          40 cent    Rs. 18500    8.25" Rs. 19000          8.25"      Rs. 1900      5.25" Rs. 46000          8.25" Rs. 19000
9.25" Rs. 2100          50 cent    Rs. 23500    9.25" Rs. 23000          9.25"      Rs. 2300      6.25" Rs. 82000          9.25" Rs. 23000
10.25" Rs. 2800                                 10.25" Rs. 28000         10.25"     Rs. 2800                               10.25" Rs. 28000
                        All Diamond are Full
** All Weight In Rati                            ** All Weight In Rati    ** All Weight In Rati    ** All Weight In Rati    ** All Weight In Rati
                            White Colour.

  तुरा यासळ:             लृस्द्ळक यासळ:            धनु यासळ:               भकय यासळ:                 कब यासळ:
                                                                                                      ुॊ                      भीन यासळ:
          शीया                    भूॊगा                ऩुखयाज                     नीरभ                    नीरभ                    ऩुखयाज




    Diamond                 Red Coral              Y.Sapphire                 B.Sapphire               B.Sapphire             Y.Sapphire
    (Special)
                             (Special)               (Special)                 (Special)                (Special)               (Special)
10 cent    Rs. 4100     5.25" Rs. 1050          5.25" Rs. 30000          5.25" Rs. 30000          5.25" Rs. 30000          5.25" Rs. 30000
20 cent    Rs. 8200     6.25" Rs. 1250          6.25" Rs. 37000          6.25" Rs. 37000          6.25" Rs. 37000          6.25" Rs. 37000
30 cent    Rs. 12500    7.25" Rs. 1450          7.25" Rs. 55000          7.25" Rs. 55000          7.25" Rs. 55000          7.25" Rs. 55000
40 cent    Rs. 18500    8.25" Rs. 1800          8.25" Rs. 73000          8.25" Rs. 73000          8.25" Rs. 73000          8.25" Rs. 73000
50 cent    Rs. 23500    9.25" Rs. 2100          9.25" Rs. 91000          9.25" Rs. 91000          9.25" Rs. 91000          9.25" Rs. 91000
                        10.25" Rs. 2800         10.25" Rs.108000         10.25" Rs.108000         10.25" Rs.108000         10.25" Rs.108000
All Diamond are Full
                        ** All Weight In Rati   ** All Weight In Rati    ** All Weight In Rati    ** All Weight In Rati    ** All Weight In Rati
    White Colour.

* उऩमोक्त लजन औय भूल्म वे असधक औय कभ लजन औय भूल्म क यत्न एलॊ उऩयत्न बी शभाये मशा व्माऩायी भूल्म ऩय
                                                   े
उप्रब्ध शं ।
                                                GURUTVA KARYALAY
                  92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
                                     Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
                          Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
89                                                अक्टू फय 2011




                                            अक्टू फय 2011 भासवक ऩॊिाॊग
                                                                                                                                  िॊद्र
फद    लाय      भाश       ऩष        सतसथ     वभासद्ऱ          नषि        वभासद्ऱ         मोग   वभासद्ऱ        कयण      वभासद्ऱ             वभासद्ऱ
                                                                                                                                  यासळ

1                               ितुथॉ-
     ळसन     आस्द्वन   ळुक्र                24:01:34   अनुयाधा          28:10:57   प्रीसत     21:15:38   फल           13:10:57   लृस्द्ळक -
                                ऩॊिभी

2
     यत्रल   आस्द्वन   ळुक्र    ऴद्षी       22:10:32   जेद्षा           27:12:25   आमुष्भान 18:33:59 कौरल             11:01:10   लृस्द्ळक 27:13:00

3
     वोभ     आस्द्वन   ळुक्र    वद्ऱभी      21:03:34   भूर              26:57:00   वौबाग्म    16:25:08   गय           09:31:42   धनु      -


4
     भॊगर आस्द्वन      ळुक्र    अद्शभी      20:37:51   ऩूलााऴाढ़        27:22:51   ळोबन       14:51:55   त्रलत्रद्श   08:45:21   धनु      -


5
     फुध     आस्द्वन   ळुक्र    नलभी        20:53:23   उत्तयाऴाढ़       28:26:12   असतगॊड     13:50:35   फारल         08:41:12   धनु      09:35:00


6
     गुरु    आस्द्वन   ळुक्र    दळभी        21:43:37   श्रलण            30:01:26   वुकभाा     13:18:19   तैसतर        09:14:34   भकय      -


7
     ळुक्र   आस्द्वन   ळुक्र    एकादळी      23:05:44   धसनद्षा          32:05:44   धृसत       13:09:29   लस्णज        10:21:40   भकय      19:01:00


8
     ळसन     आस्द्वन   ळुक्र    द्रादळी     24:50:21   धसनद्षा          08:05:21   ळूर        13:21:17   फल           11:55:02   कब
                                                                                                                                  ुॊ      -


9
     यत्रल   आस्द्वन   ळुक्र    िमोदळी      26:52:47   ळतसबऴा           10:29:20   गॊड        13:47:09   कौरल         13:49:58   कब
                                                                                                                                  ुॊ      -


10
     वोभ     आस्द्वन   ळुक्र    ितुदाळी     29:10:13   ऩूलााबाद्रऩद     13:09:17   लृत्रद्ध   14:27:05   गय           15:59:54   कब
                                                                                                                                  ुॊ      06:28:00


11
     भॊगर आस्द्वन      ळुक्र    ऩूस्णाभा    31:36:06   उत्तयाबाद्रऩद    16:00:28   ध्रुल      15:14:32   त्रलत्रद्श   18:22:02   भीन      -


12                              ऩूस्णाभा/
     फुध     आस्द्वन   ळुक्र                07:36:40   ये लसत           18:59:10   व्माघात    16:09:29   फल           07:36:40   भीन      18:59:00
                                प्रसतऩदा

13
     गुरु    कासताक    कृ ष्ण   प्रसतऩदा    10:08:11   अस्द्वनी         22:00:41   शऴाण       17:04:26   कौरल         10:08:11   भेऴ      -


14
     ळुक्र   कासताक    कृ ष्ण   फद्रतीमा    12:39:43   बयणी             24:59:24   लज्र       18:00:20   गय           12:39:43   भेऴ      -


15
     ळसन     कासताक    कृ ष्ण   तृतीमा      15:05:37   कृ सतका          27:49:41   सवत्रद्ध   18:50:37   त्रलत्रद्श   15:05:37   भेऴ      07:43:00


16
     यत्रल   कासताक    कृ ष्ण   ितुथॉ       17:17:28   योफशस्ण          30:22:09   व्मसतऩात 19:28:43 फारल             17:17:28   लृऴ      -


17
     वोभ     कासताक    कृ ष्ण   ऩॊिभी       19:06:49   भृगसळया          32:29:19   लरयमान     19:49:01   तैसतर        19:06:49   लृऴ      19:30:00


18
     भॊगर कासताक       कृ ष्ण   ऴद्षी       20:23:22   भृगसळया          08:29:00   ऩरयग्रश    19:44:00   गय           07:49:37   सभथुन -
90                                                 अक्टू फय 2011



19
     फुध       कासताक   कृ ष्ण   वद्ऱभी       20:59:37   आद्रा           09:59:37   सळल        19:08:03   त्रलत्रद्श   08:47:26   सभथुन 28:39:00

20
     गुरु      कासताक   कृ ष्ण   अद्शभी       20:49:56   ऩुनलावु         10:47:07   सवत्रद्ध   17:57:26   फारल         09:01:11   कका      -


21
     ळुक्र     कासताक   कृ ष्ण   नलभी         19:50:34   ऩुष्म           10:47:45   वाध्म      16:06:30   तैसतर        08:27:08   कका      -


22
     ळसन       कासताक   कृ ष्ण   दळभी         18:05:16   अद्ऴेऴा         10:01:31   ळुब        13:38:05   लस्णज        07:03:24   कका      10:01:00


23
     यत्रल     कासताक   कृ ष्ण   एकादळी       15:35:55   भघा             08:31:14   ळुक्र      10:34:59   फारल         15:35:55   सवॊश     -


24
     वोभ       कासताक   कृ ष्ण   द्रादळी      12:32:50   उत्तयापाल्गुनी 27:45:01 ब्रह्म        07:00:57   तैसतर        12:32:50   सवॊश     11:45:00


25                               िमोदळी-
     भॊगर कासताक        कृ ष्ण                09:02:33   शस्त            24:48:30   लैधसत
                                                                                       ृ       22:49:26   लस्णज        09:02:33   कडमा -
                                 ितुदाळी

26
     फुध       कासताक   कृ ष्ण   अभालस्मा 25:25:44 सििा                  21:43:32   त्रलऴकब
                                                                                          ुॊ   18:28:32   ितुष्ऩाद 15:21:02 कडमा 11:16:00

27
     गुरु      कासताक   ळुक्र    प्रसतऩदा     21:41:24   स्लाती          18:44:13   प्रीसत     14:10:28   फकस्तुघ्न 11:32:58 तुरा          -


28
     ळुक्र     कासताक   ळुक्र    फद्रतीमा     18:13:58   त्रलळाखा        15:59:54   आमुष्भान 10:02:43 फारल             07:55:13   तुरा     10:39:00


29
     ळसन       कासताक   ळुक्र    तृतीमा       15:12:47   अनुयाधा         13:41:51   ळोबन       26:51:13   गय           15:12:47   लृस्द्ळक -

30
     यत्रल     कासताक   ळुक्र    ितुथॉ        12:48:10   जेद्षा          11:57:33   असतगॊड     23:59:25   त्रलत्रद्श   12:48:10   लृस्द्ळक 11:58:00

31
     वोभ       कासताक   ळुक्र    ऩॊिभी        11:03:53   भूर             10:54:30   वुकभाा     21:43:15   फारल         11:03:53   धनु      -




              क्मा आऩको उच्ि असधकायी वे ऩये ळानी शं ?
              क्मा आऩकी अऩने वशकभािायी वे अनफन शोती शं ?
              क्मा आऩक असधनस्थ कभािायी आऩकी फात नशी भानते?
                       े
     मफद आऩको अऩने उच्ि असधकायी, वशकभािायी, असधनस्थ कभािायी वे ऩये ळानी शं । आऩक अनूकर कामा नशीॊ कयते मा आऩको
                                                                                े    ु
     कयने नशीॊ दे त? लश आऩकी फात नशीॊ भानतं? त्रफना लजश आऩको ऩये ळान कयते शं ? अन आलश्मक कामा आऩवे कयलाते शं । आऩका
                   े
     प्रभोळन रुकलादे ते शं । उसित कामा कयने ऩय बी आऩक कामा भं नुक्ळ सनकारते शं ? मफद आऩ इवी तयश फक फकवी वभस्मा वे ग्रस्त
                                                     े
     शं तो आऩ उन असधकायी, वशकभॉ, असधनस्थकभॉ मा अडम फकवी व्मत्रक्त त्रलळेऴ क नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्राया ळास्त्रोक्त त्रलसध-
                                                                           े
     त्रलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त लळीकयण कलि एलॊ एव.एन.फडब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय-ओफपव भं
     स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा, त्रलसध-त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मफद आऩ भॊि सवद्ध लळीकयण कलि एलॊ
     एव.एन.फडब्फी फनलाना िाशते शं , तो गुरुत्ल कामाारम भं वॊऩक कयं ।
                                                              ा
                                            Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
91                                                   अक्टू फय 2011




                       अक्टू फय-2011 भासवक व्रत-ऩला-त्मौशाय
फद   लाय     भाश       ऩष      सतसथ          वभासद्ऱ    प्रभुख व्रत-त्मोशाय

                                                        ऩॊिभ नलयाि, उऩाॊग रसरता ऩॊिभी व्रत,
1    ळसन     आस्द्वन   ळुक्र   ितुथॉ-ऩॊिभी   24:01:34


                                                        छठा नलयाि, स्कडद (कभाय) ऴद्षी व्रत, , गजगौयी व्रत,
                                                                           ु
2    यत्रल   आस्द्वन   ळुक्र   ऴद्षी         22:10:32   तऩऴद्षी    (उ), भशात्भा             गाॊधी    जमॊती,     रारफशादय
                                                                                                                       ु
                                                        ळास्त्री जमॊती, अफशॊ वा फदलव,

                                                        वद्ऱभ नलयाि, भाॉ वयस्लती आह्लान, ळायदीम दगााऩजा
                                                                                                 ु   ू
3    वोभ     आस्द्वन   ळुक्र   वद्ऱभी        21:03:34
                                                        (फॊ), ऩत्रिका-प्रलेळ, भशावद्ऱभी व्रत, भशासनळा ऩूजा,

                                                        अद्शभ     नलयाि,          दगाा
                                                                                   ु      अद्शभी व्रत, भशाद्शभी व्रत,
4    भॊगर    आस्द्वन   ळुक्र   अद्शभी        20:37:51   अडनऩूणााद्शभी व्रत, बद्रकारी अद्शभी, वयस्लती ऩूजन,
                                                        वूमसवद्धाडतानुवाय भशासनळा ऩूजन,
                                                           ा

                                                        नलभ नलयाि, दगाा भशानलभी व्रत, दगाा नलभी,
                                                                    ु                  ु
5    फुध     आस्द्वन   ळुक्र   नलभी          20:53:23   वयस्लती त्रलवजान, त्रिळूरनी ऩूजन (सभसथराॊिर),
                                                        एकलीया ऩूजा, नलयाि व्रत ऩूण,
                                                                                   ा

                                                        त्रलजमा दळभी, दळशया, ळभी एलॊ अऩास्जता-ऩूजा,
6    गुरु    आस्द्वन   ळुक्र   दळभी          21:43:37   वीभोल्रॊघन, ळस्त्र ऩूजन, फौद्धालताय दळभी, वाईंफाफा
                                                        भशावभासध फदलव, भाधलािामा जमॊती,

7    ळुक्र   आस्द्वन   ळुक्र   एकादळी        23:05:44   ऩाऩाॊकळा एकादळी व्रत, बयत सभराऩ,
                                                              ु

                                                        ऩद्मनाब        द्रादळी,     श्माभफाफा        द्रादळी,   ऩषलसधानी
8    ळसन     आस्द्वन   ळुक्र   द्रादळी       24:50:21   भशाद्रादळी व्रत, भुळी प्रेभिॊद स्भृसत फदलव, व्मसतऩात
                                                                           ॊ
                                                        भशाऩात प्रात: 10:16 वे फदन 3:19 फजे तक,

9    यत्रल   आस्द्वन   ळुक्र   िमोदळी        26:52:47   प्रदोऴ व्रत,

10   वोभ     आस्द्वन   ळुक्र   ितुदाळी       29:10:13   लायाश ितुदाळी, ियखा फदलव

                                                        ळयद ऩूस्णाभा, त्रलद्यावागय जडभ., भशायाव ऩूस्णाभा,
                                                        कोजासगयी रक्ष्भी ऩूजा, रक्ष्भी एलॊ इडद्र ऩूजन, भशत्रऴा
11   भॊगर    आस्द्वन   ळुक्र   ऩूस्णाभा      31:36:06   लाल्भीफक         जमॊती,          अग्र   भशाकम्ब
                                                                                                    ु           (अग्रोशा),
                                                        श्रीवत्मनायामण            व्रत-कथा,         जमप्रकाळ      नायामण
                                                        जमॊती, कभाय ऩूस्णाभा (उड़ीवा), नलाडन ऩूस्णाभा
                                                                ु

12   फुध     आस्द्वन   ळुक्र   ऩूस्णाभा/     07:36:40   स्नान-दान शे तु उत्तभ आस्द्वनीऩूस्णाभा, शे भडत ऋतु
92                                            अक्टू फय 2011



                               प्रसतऩदा              प्रायॊ ब, कासताक स्नान, आकाळ दीऩ-दान ळुरू, ब्रज-
                                                     ऩरयक्रभा प्रायॊ ब,

                                                     ऩत्रलि कासताक भाव प्रायॊ ब, अळूडम ळमन व्रत, श्रीशरय
13   गुरु    कासताक   कृ ष्ण   प्रसतऩदा   10:08:11   वॊऩणा कासताक भाव ऩूजन,
                                                        ू                                कासताक भाव भं दार
                                                     त्मागं, कृ त्रऴ-बूसभ ऩूजन,

14   ळुक्र   कासताक   कृ ष्ण   फद्रतीमा   12:39:43   -

                                                     वॊकद्शी गणेळ ितुथॉ व्रत, कयलािौथ, कृ ष्णत्रऩॊगाष
15   ळसन     कासताक   कृ ष्ण   तृतीमा     15:05:37
                                                     ितुथॉ, (िॊ.उ. यात्रि 7:46)

16   यत्रल   कासताक   कृ ष्ण   ितुथॉ      17:17:28   त्रलद्व खाद्य फदलव,

                                                     तुरा-वॊक्रास्डत      यात्रि   11.46 फजे, वॊक्रास्डत   का
17   वोभ     कासताक   कृ ष्ण   ऩॊिभी      19:06:49   ऩुण्मकार दोऩशय 12:22 वे वूमाास्त तक, कोफकरा
                                                     ऩॊिभी व्रत (जैन)

18   भॊगर    कासताक   कृ ष्ण   ऴद्षी      20:23:22   -

                                                     श्री याधा अद्शभी, ऩुष्म नषि (प्रात: 6:25), काराद्शभी
19   फुध     कासताक   कृ ष्ण   वद्ऱभी     20:59:37
                                                     व्रत, अशोई अद्शभी, दाम्ऩत्माद्शभी, फशुराद्शभी,

20   गुरु    कासताक   कृ ष्ण   अद्शभी     20:49:56   काराद्शभी व्रत, कयाद्शभी (भशायाद्स)

21   ळुक्र   कासताक   कृ ष्ण   नलभी       19:50:34   लैधसत भशाऩात यात्रि 10:35 वे 3:37 तक,
                                                        ृ

22   ळसन     कासताक   कृ ष्ण   दळभी       18:05:16   -

                                                     यभा (यम्बा) एकादळी व्रत, वूमा वामन लृस्द्ळक भं
23   यत्रल   कासताक   कृ ष्ण   एकादळी     15:35:55
                                                     यात्रि 12:01 फजे, गोलत्व द्रादळी व्रत (गौ-फछड़ा)

                                                     गोत्रियाि प्रायॊ ब, धनिमोदळी (धनतेयव), धडलडतरय
24   वोभ     कासताक   कृ ष्ण   द्रादळी    12:32:50   जमॊती, वोभ-प्रदोऴ व्रत, काभेद्वयी जमॊती, मभऩॊिक
                                                     ळुरू,

                                                     भासवक      सळलयात्रि      व्रत, नयकशया    ितुदाळी, नयक
                               िमोदळी-
25   भॊगर    कासताक   कृ ष्ण              09:02:33   ितुदाळी,     कारी ितुदाळी, रूऩ ितुदाळी, श्रीशनुभान
                               ितुदाळी
                                                     जमॊती, धूभालती जमॊती (ताॊत्रिक ऩॊिाॊग), मभ-तऩाण

                                                     दीऩालरी भशोत्वल, श्रीगणेळ- भशारक्ष्भी -कफेय ऩूजन,
                                                                                             ु
                                                     कभरा भशात्रलद्या जमॊती, कारयात्रि, अद्र्धयात्रि भं
26   फुध     कासताक   कृ ष्ण   अभालस्मा   25:25:44   कारी (श्माभा) ऩूजा, वुखयात्रि-जागयण, स्नान-दान-
                                                     श्राद्ध शे तु उत्तभ कासताकी अभालस्मा, गौयी-कदाय व्रत
                                                                                                 े
                                                     (द.बा.), कौभुदी दीऩभ ् (द.बा.), श्रीभशालीय स्लाभी
93                                            अक्टू फय 2011



                                                                       सनलााणोत्वल-भोष कल्माणक (जैन), उल्का दळान,
                                                                       अभ्मॊग     स्नान, स्लाभी    याभतीथा    की      जडभ     एलॊ
                                                                       ऩुण्मसतसथ, स्लाभी दमानॊद स्भृसत फदलव,

                                                                       अडनकट भशोत्वल, गोलद्धा न ऩूजा, फसर-ऩूजन, वामॊ
                                                                           ू
                                                                       कार गो क्रीड़ा, गो-वॊलधान वद्ऱाश प्रायॊ ब, द्यूत-क्रीड़ा,
27    गुरु      कासताक        ळुक्र      प्रसतऩदा        21:41:24
                                                                       भशालीयस्लाभी सनलााण वम्लत ् 2538 प्रायॊ ब, गुजयाती
                                                                       वॊलत्वय 2068 प्रायॊ ब, नेऩारी वम्लत ् 1132 प्रायॊ ब,

                                                                       नलीन िडद्र-दळान, भ्रातृ फद्रतीमा (बइमादज), मभ
                                                                                                              ू
                                                                       फद्रतीमा    सििगुद्ऱ   ऩूजन, दलात      ऩूजा,    फग्लारी,
28    ळुक्र     कासताक        ळुक्र      फद्रतीमा        18:13:58
                                                                       त्रलद्वकभाा-ऩूजन, मभ ऩॊिक वभाद्ऱ, गौतभ स्लाभी
                                                                       कलर सान,
                                                                        े

29    ळसन       कासताक        ळुक्र      तृतीमा          15:12:47      त्रलद्वासभि जमॊती,

                                                                       लयदत्रलनामक ितुथॉ व्रत, त्रलनामकी ितुथॉ व्रत, दलाा
                                                                                                                      ू
                                                                       गणऩसत व्रत (िॊद्रो.या. 8.57), त्रिफदलवीम वूमऴद्षी व्रत
                                                                                                                   ा
30    यत्रल     कासताक        ळुक्र      ितुथॉ           12:48:10
                                                                       प्रायॊ ब (सभसथराॊिर), छठ ऩूजा ळुरू-नशाम खाम
                                                                       (त्रफशाय-झायखण्ड),

                                                                       वौबाग्म ऩॊिभी, राब ऩॊिभी, ऩाण्डल ऩॊिभी, सान
                                                                       ऩॊिभी      (जैन), छठ    ऩूजा का       दवया
                                                                                                              ू       फदन-खयना
31    वोभ       कासताक         ळुक्र     ऩॊिभी           11:03:53
                                                                       (त्रफशाय-झायखण्ड), स्कडद (कभाय) ऴद्षी व्रत, वयदाय
                                                                                                  ु
                                                                       ऩटे र जमॊती, इॊ फदया स्भृसत फदलव




                              क्मा आऩ फकवी वभस्मा वे ग्रस्त शं ?
आऩक ऩाव अऩनी वभस्माओॊ वे छटकाया ऩाने शे तु ऩूजा-अिाना, वाधना, भॊि जाऩ इत्माफद कयने का
   े                      ु
वभम नशीॊ शं ? अफ आऩ अऩनी वभस्माओॊ वे फीना फकवी त्रलळेऴ ऩूजा-अिाना, त्रलसध-त्रलधान क आऩको
                                                                                   े
अऩने कामा भं वपरता प्राद्ऱ कय वक एलॊ आऩको अऩने जीलन क वभस्त वुखो को प्राद्ऱ कयने का भागा
                                े                    े
प्राद्ऱ शो वक इव सरमे गुरुत्ल कामाारत द्राया शभाया उद्दे श्म ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे त्रलसळद्श तेजस्ली भॊिो द्राया
             े
सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त त्रलसबडन प्रकाय क मडि- कलि एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय
                                                           े                                                े
तक ऩशोिाने का शै ।
                                           GURUTVA KARYALAY
                                   Bhubaneswar- 751 018, (ORISSA) INDIA,
                                  Call Us : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785,
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94                                   अक्टू फय 2011




                                               गणेळ रक्ष्भी मॊि
प्राण-प्रसतत्रद्षत गणेळ रक्ष्भी मॊि को अऩने घय-दकान-ओफपव-पक्टयी भं ऩूजन स्थान, गल्रा मा अरभायी भं स्थात्रऩत
                                                ु         ै
कयने व्माऩाय भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । मॊि क प्रबाल वे बाग्म भं उडनसत, भान-प्रसतद्षा एलॊ
                                                   े                                              व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती
शं एलॊ आसथाक स्स्थभं वुधाय शोता शं । गणेळ रक्ष्भी मॊि को स्थात्रऩत कयने वे बगलान गणेळ औय दे ली रक्ष्भी का
वॊमुक्त आळीलााद प्राद्ऱ शोता शं ।                                                      Rs.550 वे Rs.8200 तक

                                         भॊगर मॊि वे ऋण भुत्रक्त
भॊगर मॊि को जभीन-जामदाद क त्रललादो को शर कयने क काभ भं राब दे ता शं , इव क असतरयक्त व्मत्रक्त को ऋण
                         े                     े                          े
भुत्रक्त शे तु भॊगर वाधना वे असत ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं ।   त्रललाश आफद भं भॊगरी जातकं क कल्माण क सरए भॊगर
                                                                                           े        े
मॊि की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । प्राण प्रसतत्रद्षत भॊगर मॊि क ऩूजन वे बाग्मोदम, ळयीय भं खून की
                                                                               े
कभी, गबाऩात वे फिाल, फुखाय, िेिक, ऩागरऩन, वूजन औय घाल, मौन ळत्रक्त भं लृत्रद्ध, ळिु त्रलजम, तॊि भॊि क दद्श प्रबा,
                                                                                                     े ु
बूत-प्रेत बम, लाशन दघटनाओॊ, शभरा, िोयी इत्मादी वे फिाल शोता शं ।
                    ु ा                                                                      भूल्म भाि Rs- 550

                                                      कफेय मॊि
                                                       ु
कफेय मॊि क ऩूजन वे स्लणा राब, यत्न राब, ऩैतक वम्ऩत्ती एलॊ गड़े शुए धन वे राब प्रासद्ऱ फक काभना कयने लारे
 ु        े                                ृ
व्मत्रक्त क सरमे कफेय मॊि अत्मडत वपरता दामक शोता शं । एवा ळास्त्रोक्त लिन शं । कफेय मॊि क ऩूजन वे एकासधक
           े      ु                                                             ु        े
स्त्रोि वे धन का प्राद्ऱ शोकय धन वॊिम शोता शं ।




    ताम्र ऩि ऩय वुलणा ऩोरीव                  ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीव                           ताम्र ऩि ऩय
            (Gold Plated)                           (Silver Plated)                            (Copper)
      वाईज                   भूल्म           वाईज                     भूल्म         वाईज                   भूल्म
     2” X 2”                 640            2” X 2”                    460         2” X 2”                  370
     3” X 3”                1250            3” X 3”                    820         3” X 3”                  550
     4” X 4”                1850            4” X 4”                   1250         4” X 4”                  820
     6” X 6”                2700            6” X 6”                   2100         6” X 6”                 1450
     9” X 9”                4600            9” X 9”                   3700         9” X 9”                 2450
    12” X12”                8200           12” X12”                   6400        12” X12”                 4600
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95                                        अक्टू फय 2011




                                           नलयत्न जफड़त श्री मॊि
ळास्त्र लिन क अनुवाय ळुद्ध वुलणा मा यजत भं सनसभात श्री मॊि क िायं औय मफद नलयत्न जड़ला ने ऩय मश नलयत्न
             े                                              े
जफड़त श्री मॊि कशराता शं । वबी यत्नो को उवक सनस्द्ळत स्थान ऩय जड़ कय रॉकट क रूऩ भं धायण कयने वे व्मत्रक्त को
                                           े                            े  े
अनॊत एद्वमा एलॊ रक्ष्भी की प्रासद्ऱ शोती शं । व्मत्रक्त को एवा आबाव शोता शं जैवे भाॊ रक्ष्भी उवक वाथ शं । नलग्रश को
                                                                                                े
श्री मॊि क वाथ रगाने वे ग्रशं की अळुब दळा का धायण कयने लारे व्मत्रक्त ऩय प्रबाल नशीॊ शोता शं । गरे भं शोने क
          े                                                                                                 े
कायण मॊि ऩत्रलि यशता शं एलॊ स्नान कयते वभम इव मॊि ऩय स्ऩळा कय जो जर त्रफॊद ु ळयीय को रगते शं , लश गॊगा
जर क वभान ऩत्रलि शोता शं । इव सरमे इवे वफवे तेजस्ली एलॊ परदासम कशजाता शं । जैवे अभृत वे उत्तभ कोई
    े
औऴसध नशीॊ, उवी प्रकाय रक्ष्भी प्रासद्ऱ क सरमे श्री मॊि वे उत्तभ कोई मॊि वॊवाय भं नशीॊ शं एवा ळास्त्रोक्त लिन शं । इव
                                        े
प्रकाय क नलयत्न जफड़त श्री मॊि गुरूत्ल कामाारम द्राया ळुब भुशूता भं प्राण प्रसतत्रद्षत कयक फनालाए जाते शं ।
        े                                                                                 े


                                                अद्श रक्ष्भी कलि
अद्श रक्ष्भी कलि को धायण कयने वे व्मत्रक्त ऩय वदा भाॊ भशा रक्ष्भी की कृ ऩा एलॊ आळीलााद फना
यशता शं । स्जस्वे भाॊ रक्ष्भी क अद्श रुऩ (१)-आफद रक्ष्भी, (२)-धाडम रक्ष्भी, (३)-धैयीम रक्ष्भी, (४)-
                               े
गज रक्ष्भी, (५)-वॊतान रक्ष्भी, (६)-त्रलजम रक्ष्भी, (७)-त्रलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी
रुऩो का स्लत् अळीलााद प्राद्ऱ शोता शं ।                                                       भूल्म भाि: Rs-1050

                                     भॊि सवद्ध व्माऩाय लृत्रद्ध कलि
व्माऩाय लृत्रद्ध कलि व्माऩाय क ळीघ्र उडनसत क सरए उत्तभ शं । िाशं कोई बी व्माऩाय शो अगय उवभं राब क स्थान ऩय
                              े             े                                                    े
फाय-फाय शासन शो यशी शं । फकवी प्रकाय वे व्माऩाय भं फाय-फाय फाॊधा उत्ऩडन शो यशी शो! तो वॊऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत भॊि
सवद्ध ऩूणा िैतडम मुक्त व्माऩात लृत्रद्ध मॊि को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थात्रऩत कयने वे ळीघ्र शी व्माऩाय लृत्रद्ध एलॊ
सनतडतय राब प्राद्ऱ शोता शं ।                                                           भूल्म भाि: Rs.370 & 730

                                                     भॊगर मॊि
(त्रिकोण) भॊगर मॊि को जभीन-जामदाद क त्रललादो को शर कयने क काभ भं राब दे ता शं , इव क असतरयक्त व्मत्रक्त को
                                   े                     े                          े
ऋण भुत्रक्त शे तु भॊगर वाधना वे असत ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं । त्रललाश आफद भं भॊगरी जातकं क कल्माण क सरए
                                                                                            े        े
भॊगर मॊि की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं ।                                       भूल्म भाि Rs- 550


                                       GURUTVA KARYALAY
            92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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96                                                अक्टू फय 2011




                                                  त्रललाश वॊफॊसधत वभस्मा
क्मा आऩक रडक-रडकी फक आऩकी ळादी भं अनालश्मक रूऩ वे त्रलरम्फ शो यशा शं मा उनक लैलाफशक जीलन भं खुसळमाॊ कभ
        े   े                                                              े
शोती जायशी शं औय वभस्मा असधक फढती जायशी शं । एवी स्स्थती शोने ऩय अऩने रडक-रडकी फक कडरी का अध्ममन
                                                                         े         ुॊ
अलश्म कयलारे औय उनक लैलाफशक वुख को कभ कयने लारे दोऴं क सनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे जनकायी प्राद्ऱ
                   े                                  े        े       े
कयं ।


                                               सळषा वे वॊफॊसधत वभस्मा
क्मा आऩक रडक-रडकी की ऩढाई भं अनालश्मक रूऩ वे फाधा-त्रलघ्न मा रुकालटे शो यशी शं ? फच्िो को अऩने ऩूणा ऩरयश्रभ
        े   े
एलॊ भेशनत का उसित पर नशीॊ सभर यशा? अऩने रडक-रडकी की कडरी का त्रलस्तृत अध्ममन अलश्म कयलारे औय
                                           े         ुॊ
उनक त्रलद्या अध्ममन भं आनेलारी रुकालट एलॊ दोऴो क कायण एलॊ उन दोऴं क सनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे
   े                                            े                  े        े       े
जनकायी प्राद्ऱ कयं ।

                                   क्मा आऩ फकवी वभस्मा वे ग्रस्त शं ?
                          ु
आऩक ऩाव अऩनी वभस्माओॊ वे छटकाया ऩाने शे तु ऩूजा-अिाना, वाधना, भॊि जाऩ इत्माफद कयने का वभम नशीॊ शं ?
   े
अफ आऩ अऩनी वभस्माओॊ वे फीना फकवी त्रलळेऴ ऩूजा-अिाना, त्रलसध-त्रलधान क आऩको अऩने कामा भं वपरता प्राद्ऱ
                                                                     े
कय वक एलॊ आऩको अऩने जीलन क वभस्त वुखो को प्राद्ऱ कयने का भागा प्राद्ऱ शो वक इव सरमे गुरुत्ल कामाारत
     े                    े                                                े
द्राया शभाया उद्दे श्म ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे त्रलसळद्श तेजस्ली भॊिो द्राया सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त त्रलसबडन प्रकाय के
मडि- कलि एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय तक ऩशोिाने का शै ।
                                                े

                                          ज्मोसतऴ वॊफॊसधत त्रलळेऴ ऩयाभळा
ज्मोसत त्रलसान, अॊक ज्मोसतऴ, लास्तु एलॊ आध्मास्त्भक सान वं वॊफॊसधत त्रलऴमं भं शभाये 30 लऴो वे असधक लऴा के
अनुबलं क वाथ ज्मोसतव वे जुडे नमे-नमे वॊळोधन क आधाय ऩय आऩ अऩनी शय वभस्मा क वयर वभाधान प्राद्ऱ कय
        े                                    े                           े
वकते शं ।
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                                                                ओनेक्व
   जो व्मत्रक्त ऩडना धायण कयने भे अवभथा शो उडशं फुध ग्रश क उऩयत्न ओनेक्व को धायण कयना िाफशए।
                                                          े
   उच्ि सळषा प्रासद्ऱ शे तु औय स्भयण ळत्रक्त क त्रलकाव शे तु ओनेक्व यत्न की अॊगूठी को दामं शाथ की वफवे छोटी
                                              े
   उॊ गरी मा रॉकट फनला कय गरे भं धायण कयं । ओनेक्व यत्न धायण कयने वे त्रलद्या-फुत्रद्ध की प्रासद्ऱ शो शोकय स्भयण
                े
   ळत्रक्त का त्रलकाव शोता शं ।
97                                          अक्टू फय 2011




                                         अक्टू फय 2011 -त्रलळेऴ मोग
                                                      कामा सवत्रद्ध मोग
      2/3      यात्रि 3:12 वे वूमोदम तक                     17                 वूमोदम वे फदन-यात

      11       वूमोदम वे फदन 3:59 तक                        20                 वूमोदम वे फदन-यात

      13       वूमोदम वे यात्रि 9:59 तक                     28                 फदन 3:59 वे यातबय

      15/16    यात्रि 3:49 वे वूमोदम तक                     30                 फदन 11:56 वे यातबय

                                                          अभृत मोग
      15/16    यात्रि 3:49 वे वूमोदम तक                                        20 प्रात: 10:46 वे फदन-यात

      17       वूमोदम वे फदन-यात

                                                 फद्रऩुष्कय (दोगुना पर) मोग
      8        वूमोदम वे प्रात: 8:04 तक
                                                      गुरु-ऩुष्माभृत मोग
      20       प्रात: 10:46 वे फदन-यात


मोग‍पर‍:
      कामा सवत्रद्ध मोग भे फकमे गमे ळुब कामा भे सनस्द्ळत वपरता प्राद्ऱ शोती शं , एवा ळास्त्रोक्त लिन शं ।
      फद्रऩुष्कय मोग भं फकमे गमे ळुब कामो का राब दोगुना शोता शं । एवा ळास्त्रोक्त लिन शं ।
      गुरु ऩुष्माभृत मोग भं फकमे गमे फकमे गमे ळुब कामा भे ळुब परो की प्रासद्ऱ शोती शं , एवा ळास्त्रोक्त लिन शं ।

                        दै सनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान तासरका
                                        गुसरक कार                 मभ कार                  याशु कार
                                           (ळुब)                      (अळुब)               (अळुब)
                        लाय             वभम अलसध                 वभम अलसध               वभम अलसध
                        यत्रललाय     03:00 वे 04:30           12:00 वे 01:30          04:30 वे 06:00
                        वोभलाय       01:30 वे 03:00           10:30 वे 12:00          07:30 वे 09:00
                        भॊगरलाय      12:00 वे 01:30           09:00 वे 10:30         03:00 वे 04:30
                        फुधलाय       10:30 वे 12:00           07:30 वे 09:00          12:00 वे 01:30
                        गुरुलाय      09:00 वे 10:30           06:00 वे 07:30         01:30 वे 03:00
                        ळुक्रलाय     07:30 वे 09:00          03:00 वे 04:30          10:30 वे 12:00
                        ळसनलाय       06:00 वे 07:30          01:30 वे 03:00          09:00 वे 10:30
98                                                 अक्टू फय 2011




                                                                फदन क िौघफडमे
                                                                     े
                  वभम                      यत्रललाय   वोभलाय        भॊगरलाय फुधलाय गुरुलाय              ळुक्रलाय    ळसनलाय

                  06:00 वे 07:30           उद्रे ग    अभृत          योग           राब        ळुब        िर          कार
                  07:30 वे 09:00           िर         कार           उद्रे ग       अभृत       योग        राब         ळुब
                  09:00 वे 10:30           राब        ळुब           िर            कार        उद्रे ग    अभृत        योग
                  10:30 वे 12:00           अभृत       योग           राब           ळुब        िर         कार         उद्रे ग
                  12:00 वे 01:30           कार        उद्रे ग       अभृत          योग        राब        ळुब         िर
                  01:30 वे 03:00           ळुब        िर            कार           उद्रे ग    अभृत       योग         राब
                  03:00 वे 04:30           योग        राब           ळुब           िर         कार        उद्रे ग     अभृत
                  04:30 वे 06:00           उद्रे ग    अभृत          योग           राब        ळुब        िर          कार


                                                                यात क िौघफडमे
                                                                     े
                  वभम                      यत्रललाय    वोभलाय       भॊगरलाय        फुधलाय गुरुलाय        ळुक्रलाय    ळसनलाय

                  06:00 वे 07:30           ळुब         िर           कार            उद्रे ग    अभृत       योग         राब
                  07:30 वे 09:00           अभृत        योग          राब            ळुब        िर         कार         उद्रे ग
                  09:00 वे 10:30           िर          कार          उद्रे ग        अभृत       योग        राब         ळुब
                  10:30 वे 12:00           योग         राब          ळुब            िर         कार        उद्रे ग     अभृत
                  12:00 वे 01:30           कार         उद्रे ग      अभृत           योग        राब        ळुब         िर
                  01:30 वे 03:00           राब         ळुब          िर             कार        उद्रे ग    अभृत        योग
                  03:00 वे 04:30           उद्रे ग     अभृत         योग            राब        ळुब        िर          कार
                  04:30 वे 06:00           ळुब         िर           कार            उद्रे ग    अभृत       योग         राब
       ळास्त्रोक्त भत क अनुळाय मफद फकवी बी कामा का प्रायॊ ब ळुब भुशूता मा ळुब वभम ऩय फकमा जामे तो कामा भं वपरता
                       े
प्राद्ऱ शोने फक वॊबालना ज्मादा प्रफर शो जाती शं । इव सरमे दै सनक ळुब वभम िौघफड़मा दे खकय प्राद्ऱ फकमा जा वकता शं ।
नोट: प्राम् फदन औय यात्रि क िौघफड़मे फक सगनती क्रभळ् वूमोदम औय वूमाास्त वे फक जाती शं । प्रत्मेक िौघफड़मे फक अलसध 1
                           े
घॊटा 30 सभसनट अथाात डे ढ़ घॊटा शोती शं । वभम क अनुवाय िौघफड़मे को ळुबाळुब तीन बागं भं फाॊटा जाता शं , जो क्रभळ् ळुब,
                                              े
भध्मभ औय अळुब शं ।

                     िौघफडमे क स्लाभी ग्रश
                              े                                                    * शय कामा क सरमे ळुब/अभृत/राब का
                                                                                              े
ळुब िौघफडमा             भध्मभ िौघफडमा                 अळुब िौघफड़मा                िौघफड़मा उत्तभ भाना जाता शं ।
िौघफडमा स्लाभी ग्रश     िौघफडमा स्लाभी ग्रश           िौघफडमा       स्लाभी ग्रश
ळुब        गुरु         िय         ळुक्र              उद्बे ग       वूमा           * शय कामा क सरमे िर/कार/योग/उद्रे ग
                                                                                              े
अभृत       िॊद्रभा                                    कार           ळसन            का िौघफड़मा उसित नशीॊ भाना जाता।
राब        फुध                                        योग           भॊगर
99                                        अक्टू फय 2011




                             फदन फक शोया - वूमोदम वे वूमाास्त तक
    लाय              1.घॊ    2.घॊ     3.घॊ    4.घॊ    5.घॊ     6.घॊ     7.घॊ    8.घॊ    9.घॊ    10.घॊ 11.घॊ 12.घॊ

    यत्रललाय         वूमा    ळुक्र    फुध     िॊद्र   ळसन      गुरु     भॊगर    वूमा    ळुक्र   फुध       िॊद्र   ळसन
    वोभलाय           िॊद्र   ळसन      गुरु    भॊगर वूमा        ळुक्र    फुध     िॊद्र   ळसन     गुरु     भॊगर     वूमा
    भॊगरलाय         भॊगर     वूमा     ळुक्र   फुध     िॊद्र    ळसन      गुरु    भॊगर    वूमा    ळुक्र     फुध     िॊद्र
    फुधलाय           फुध      िॊद्र   ळसन     गुरु भॊगर वूमा            ळुक्र   फुध     िॊद्र   ळसन       गुरु    भॊगर
    गुरुलाय          गुरु    भॊगर     वूमा    ळुक्र   फुध      िॊद्र    ळसन     गुरु    भॊगर    वूमा      ळुक्र   फुध
    ळुक्रलाय         ळुक्र    फुध     िॊद्र   ळसन     गुरु भॊगर         वूमा    ळुक्र   फुध     िॊद्र     ळसन     गुरु
    ळसनलाय           ळसन      गुरु    भॊगर    वूमा    ळुक्र    फुध      िॊद्र   ळसन     गुरु    भॊगर      वूमा    ळुक्र

                               यात फक शोया – वूमाास्त वे वूमोदम तक
    यत्रललाय         गुरु    भॊगर     वूमा    ळुक्र   फुध      िॊद्र    ळसन     गुरु    भॊगर    वूमा      ळुक्र   फुध
    वोभलाय           ळुक्र    फुध     िॊद्र   ळसन     गुरु भॊगर         वूमा    ळुक्र   फुध     िॊद्र     ळसन     गुरु
    भॊगरलाय          ळसन      गुरु    भॊगर    वूमा    ळुक्र    फुध      िॊद्र   ळसन     गुरु    भॊगर      वूमा    ळुक्र
    फुधलाय           वूमा    ळुक्र    फुध     िॊद्र   ळसन      गुरु     भॊगर    वूमा    ळुक्र   फुध       िॊद्र   ळसन
    गुरुलाय          िॊद्र   ळसन      गुरु    भॊगर वूमा        ळुक्र    फुध     िॊद्र   ळसन     गुरु     भॊगर     वूमा
    ळुक्रलाय        भॊगर     वूमा     ळुक्र   फुध     िॊद्र    ळसन      गुरु    भॊगर    वूमा    ळुक्र     फुध     िॊद्र
    ळसनलाय           फुध      िॊद्र   ळसन     गुरु भॊगर वूमा            ळुक्र   फुध     िॊद्र   ळसन       गुरु    भॊगर
शोया भुशूता को कामा सवत्रद्ध क सरए ऩूणा परदामक एलॊ अिूक भाना जाता शं , फदन-यात क २४ घॊटं भं ळुब-अळुब वभम
                              े                                                 े
को वभम वे ऩूला सात कय अऩने कामा सवत्रद्ध क सरए प्रमोग कयना िाफशमे।
                                          े

त्रलद्रानो क भत वे इस्च्छत कामा सवत्रद्ध क सरए ग्रश वे वॊफॊसधत शोया का िुनाल कयने वे त्रलळेऴ राब
            े                             े
प्राद्ऱ शोता शं ।
     वूमा फक शोया वयकायी कामो क सरमे उत्तभ शोती शं ।
                                े
     िॊद्रभा फक शोया वबी कामं क सरमे उत्तभ शोती शं ।
                                े
     भॊगर फक शोया कोटा -किेयी क कामं क सरमे उत्तभ शोती शं ।
                                े      े
     फुध फक शोया त्रलद्या-फुत्रद्ध अथाात ऩढाई क सरमे उत्तभ शोती शं ।
                                                े
     गुरु फक शोया धासभाक कामा एलॊ त्रललाश क सरमे उत्तभ शोती शं ।
                                            े
     ळुक्र फक शोया मािा क सरमे उत्तभ शोती शं ।
                          े
     ळसन फक शोया धन-द्रव्म वॊफॊसधत कामा क सरमे उत्तभ शोती शं ।
                                          े
100                                               अक्टू फय 2011




                                             ग्रश िरन अक्टू फय -2011
Day   Sun        Mon         Ma         Me        Jup        Ven         Sat       Rah         Ket        Ua         Nep         Plu
 1    05:13:27   07:03:08   03:13:10   05:15:09   00:14:42   05:25:43   05:24:35   07:22:48   01:22:48   11:08:21    10:04:31   08:10:54

 2    05:14:26   07:17:26   03:13:45   05:16:54   00:14:36   05:26:58   05:24:42   07:22:46   01:22:46   11:08:18    10:04:30   08:10:55

 3    05:15:25   08:01:18   03:14:21   05:18:38   00:14:30   05:28:12   05:24:49   07:22:46   01:22:46   11:08:16    10:04:29   08:10:55

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 5    05:17:23   08:27:48   03:15:32   05:22:04   00:14:18   06:00:41   05:25:04   07:22:46   01:22:46   11:08:11    10:04:27   08:10:56

 6    05:18:22   09:10:33   03:16:07   05:23:45   00:14:11   06:01:56   05:25:11   07:22:44   01:22:44   11:08:09    10:04:26   08:10:57

 7    05:19:21   09:23:03   03:16:42   05:25:26   00:14:04   06:03:11   05:25:19   07:22:39   01:22:39   11:08:06    10:04:25   08:10:58

 8    05:20:20   10:05:21   03:17:17   05:27:06   00:13:58   06:04:25   05:25:26   07:22:32   01:22:32   11:08:04    10:04:24   08:10:58

 9    05:21:19   10:17:29   03:17:52   05:28:45   00:13:51   06:05:40   05:25:33   07:22:22   01:22:22   11:08:02    10:04:23   08:10:59

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11    05:23:18   11:11:27   03:19:01   06:02:02   00:13:37   06:08:09   05:25:48   07:21:59   01:21:59   11:07:57    10:04:21   08:11:00

12    05:24:17   11:23:20   03:19:36   06:03:38   00:13:29   06:09:24   05:25:55   07:21:48   01:21:48   11:07:55    10:04:20   08:11:01

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20    06:02:13   03:00:27   03:24:08   06:16:09   00:12:28   06:19:20   05:26:54   07:21:25   01:21:25   11:07:37    10:04:13   08:11:08

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                                          वला योगनाळक मॊि/कलि
भनुष्म अऩने जीलन क त्रलसबडन वभम ऩय फकवी ना फकवी वाध्म मा अवाध्म योग वे ग्रस्त शोता शं ।
                  े

उसित उऩिाय वे ज्मादातय वाध्म योगो वे तो भुत्रक्त सभर जाती शं , रेफकन कबी-कबी वाध्म योग शोकय बी अवाध्मा
शोजाते शं , मा कोइ अवाध्म योग वे ग्रसवत शोजाते शं । शजायो राखो रुऩमे खिा कयने ऩय बी असधक राब प्राद्ऱ नशीॊ शो
ऩाता। डॉक्टय द्राया फदजाने लारी दलाईमा अल्ऩ वभम क सरमे कायगय वात्रफत शोती शं , एसव स्स्थती भं राबा प्रासद्ऱ क
                                                 े                                                           े
सरमे व्मत्रक्त एक डॉक्टय वे दवये डॉक्टय क िक्कय रगाने को फाध्म शो जाता शं ।
                             ू           े

       बायतीम ऋऴीमोने अऩने मोग वाधना क प्रताऩ वे योग ळाॊसत शे तु त्रलसबडन आमुलय औऴधो क असतरयक्त मॊि,
                                      े                                       े       े
भॊि एलॊ तॊि उल्रेख अऩने ग्रॊथो भं कय भानल जीलन को राब प्रदान कयने का वाथाक प्रमाव शजायो लऴा ऩूला फकमा था।
फुत्रद्धजीलो क भत वे जो व्मत्रक्त जीलनबय अऩनी फदनिमाा ऩय सनमभ, वॊमभ यख कय आशाय ग्रशण कयता शं , एवे व्मत्रक्त
              े
को त्रलसबडन योग वे ग्रसवत शोने की वॊबालना कभ शोती शं । रेफकन आज क फदरते मुग भं एवे व्मत्रक्त बी बमॊकय योग
                                                                 े
वे ग्रस्त शोते फदख जाते शं । क्मोफक वभग्र वॊवाय कार क अधीन शं । एलॊ भृत्मु सनस्द्ळत शं स्जवे त्रलधाता क अराला
                                                     े                                                 े
औय कोई टार नशीॊ वकता, रेफकन योग शोने फक स्स्थती भं व्मत्रक्त योग दय कयने का प्रमाव तो अलश्म कय वकता शं ।
                                                                  ू
इव सरमे मॊि भॊि एलॊ तॊि क कळर जानकाय वे मोग्म भागादळान रेकय व्मत्रक्त योगो वे भुत्रक्त ऩाने का मा उवक प्रबालो
                         े ु                                                                         े
को कभ कयने का प्रमाव बी अलश्म कय वकता शं ।

       ज्मोसतऴ त्रलद्या क कळर जानकय बी कार ऩुरुऴकी गणना कय अनेक योगो क अनेको यशस्म को उजागय कय
                         े ु                                          े
वकते शं । ज्मोसतऴ ळास्त्र क भाध्मभ वे योग क भूरको ऩकडने भे वशमोग सभरता शं , जशा आधुसनक सिफकत्वा ळास्त्र
                           े               े
अषभ शोजाता शं लशा ज्मोसतऴ ळास्त्र द्राया योग क भूर(जड़) को ऩकड कय उवका सनदान कयना राबदामक एलॊ
                                              े
उऩामोगी सवद्ध शोता शं ।
       शय व्मत्रक्त भं रार यॊ गकी कोसळकाए ऩाइ जाती शं , स्जवका सनमभीत त्रलकाव क्रभ फद्ध तयीक वे शोता यशता शं ।
                                                                                            े
जफ इन कोसळकाओ क क्रभ भं ऩरयलतान शोता शै मा त्रलखॊफडन शोता शं तफ व्मत्रक्त क ळयीय भं स्लास््म वॊफॊधी त्रलकायो
               े                                                           े
उत्ऩडन शोते शं । एलॊ इन कोसळकाओ का वॊफॊध नल ग्रशो क वाथ शोता शं । स्जस्वे योगो क शोने क कायणा व्मत्रक्तक
                                                   े                            े      े                े
जडभाॊग वे दळा-भशादळा एलॊ ग्रशो फक गोिय भं स्स्थती वे प्राद्ऱ शोता शं ।


       वला योग सनलायण कलि एलॊ भशाभृत्मुॊजम मॊि क भाध्मभ वे व्मत्रक्त क जडभाॊग भं स्स्थत कभजोय एलॊ ऩीफडत
                                                े                     े
ग्रशो क अळुब प्रबाल को कभ कयने का कामा वयरता ऩूलक फकमा जावकता शं । जेवे शय व्मत्रक्त को ब्रह्माॊड फक उजाा एलॊ
       े                                        ा
ऩृ्ली का गुरुत्लाकऴाण फर प्रबालीत कताा शं फठक उवी प्रकाय कलि एलॊ मॊि क भाध्मभ वे ब्रह्माॊड फक उजाा क
                                                                      े                             े
वकायात्भक प्रबाल वे व्मत्रक्त को वकायात्भक उजाा प्राद्ऱ शोती शं स्जस्वे योग क प्रबाल को कभ कय योग भुक्त कयने शे तु
                                                                             े
वशामता सभरती शं ।
       योग सनलायण शे तु भशाभृत्मुॊजम भॊि एलॊ मॊि का फडा भशत्ल शं । स्जस्वे फशडद ू वॊस्कृ सत का प्राम् शय व्मत्रक्त
भशाभृत्मुॊजम भॊि वे ऩरयसित शं ।
102                                       अक्टू फय 2011



कलि क राब :
     े
      एवा ळास्त्रोक्त लिन शं स्जव घय भं भशाभृत्मुॊजम मॊि स्थात्रऩत शोता शं लशा सनलाव कताा शो नाना प्रकाय फक
       आसध-व्मासध-उऩासध वे यषा शोती शं ।
      ऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतडम मुक्त वला योग सनलायण कलि फकवी बी उम्र एलॊ जासत धभा क रोग िाशे
                                                                                                  े
       स्त्री शो मा ऩुरुऴ धायण कय वकते शं ।
      जडभाॊगभं अनेक प्रकायक खयाफ मोगो औय खयाफ ग्रशो फक प्रसतकरता वे योग उतऩडन शोते शं ।
                            े                                 ू
      कछ योग वॊक्रभण वे शोते शं एलॊ कछ योग खान-ऩान फक असनमसभतता औय अळुद्धतावे उत्ऩडन शोते शं । कलि
        ु                             ु
       एलॊ मॊि द्राया एवे अनेक प्रकाय क खयाफ मोगो को नद्श कय, स्लास््म राब औय ळायीरयक यषण प्राद्ऱ कयने शे तु
                                       े
       वला योगनाळक कलि एलॊ मॊि वला उऩमोगी शोता शं ।
      आज क बौसतकता लादी आधुसनक मुगभे अनेक एवे योग शोते शं , स्जवका उऩिाय ओऩये ळन औय दलावे बी
           े
       कफठन शो जाता शं । कछ योग एवे शोते शं स्जवे फताने भं रोग फशिफकिाते शं ळयभ अनुबल कयते शं एवे योगो
                          ु
       को योकने शे तु एलॊ उवक उऩिाय शे तु वला योगनाळक कलि एलॊ मॊि राबादासम सवद्ध शोता शं ।
                             े
      प्रत्मेक व्मत्रक्त फक जेवे-जेवे आमु फढती शं लैवे-लवै उवक ळयीय फक ऊजाा शोती जाती शं । स्जवक वाथ अनेक
                                                               े                                 े
       प्रकाय क त्रलकाय ऩैदा शोने रगते शं एवी स्स्थती भं उऩिाय शे तु वलायोगनाळक कलि एलॊ मॊि परप्रद शोता शं ।
               े
      स्जव घय भं त्रऩता-ऩुि, भाता-ऩुि, भाता-ऩुिी, मा दो बाई एक फश नषिभे जडभ रेते शं , तफ उवकी भाता क सरमे
                                                                                                     े
       असधक कद्शदामक स्स्थती शोती शं । उऩिाय शे तु भशाभृत्मुॊजम मॊि परप्रद शोता शं ।
      स्जव व्मत्रक्त का जडभ ऩरयसध मोगभे शोता शं उडशे शोने लारे भृत्मु तुल्म कद्श एलॊ शोने लारे योग, सिॊता भं
       उऩिाय शे तु वला योगनाळक कलि एलॊ मॊि ळुब परप्रद शोता शं ।

नोट:- ऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतडम मुक्त वला योग सनलायण कलि एलॊ मॊि क फाये भं असधक जानकायी शे तु शभ
                                                                               े
वे वॊऩक कयं ।
       ा


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103                                       अक्टू फय 2011




                                              भॊि सवद्ध कलि
भॊि सवद्ध कलि को त्रलळेऴ प्रमोजन भं उऩमोग क सरए औय ळीघ्र प्रबाल ळारी फनाने क सरए तेजस्ली भॊिो द्राया
                                           े                                े
ळुब भशूता भं ळुब फदन को तैमाय फकमे जाते शै . अरग-अरग कलि तैमाय कयने कसरए अरग-अरग तयश क
                                                                     े                े
भॊिो का प्रमोग फकमा जाता शै .

     क्मं िुने भॊि सवद्ध कलि?
     उऩमोग भं आवान कोई प्रसतफडध नशीॊ
     कोई त्रलळेऴ सनसत-सनमभ नशीॊ
     कोई फुया प्रबाल नशीॊ
     कलि क फाये भं असधक जानकायी शे तु
           े

                                                    कलि वूसि
वला कामा सवत्रद्ध कलि - 3700/-       ऋण भुत्रक्त कलि - 730/-              त्रलयोध नाळक कलिा- 550/-
वलाजन लळीकयण कलि - 1050/-*           नलग्रश ळाॊसत कलि- 730/-              लळीकयण कलि- 550/-* (2-3 व्मत्रक्तक सरए)
                                                                                                            े
अद्श रक्ष्भी कलि - 1050/-            तॊि यषा कलि- 730/-                   ऩत्नी लळीकयण कलि - 460/-*
आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ कलि-910/-       ळिु त्रलजम कलि - 640/- *             नज़य यषा कलि - 460/-
बूसभ राब कलि - 910/-                 ऩदं उडनसत कलि- 640/-                 व्माऩय लृत्रद्ध कलि - 370/-
वॊतान प्रासद्ऱ कलि - 910/-           धन प्रासद्ऱ कलि- 640/-               ऩसत लळीकयण कलि - 370/-*
कामा सवत्रद्ध कलि - 910/-            त्रललाश फाधा सनलायण कलि- 640/-       दबााग्म नाळक कलि - 370/-
                                                                           ु
काभ दे ल कलि - 820/-                 भस्स्तष्क ऩृत्रद्श लधाक कलि- 640/-   वयस्लती कलक - 370/- कषा+ 10 क सरए
                                                                                                       े
जगत भोशन कलि -730/-*                 काभना ऩूसता कलि- 550/-               वयस्लती कलक- 280/- कषा 10 तक क सरए
                                                                                                        े
स्ऩे -व्माऩाय लृत्रद्ध कलि - 730/-   त्रलघ्न फाधा सनलायण कलि- 550/-       लळीकयण कलि - 280/-* 1 व्मत्रक्त क सरए
                                                                                                           े

*कलि भाि ळुब कामा मा उद्दे श्म क सरमे
                                े
                                       GURUTVA KARYALAY
             92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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                         (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)

                               (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
104                                   अक्टू फय 2011




                       YANTRA LIST                                     EFFECTS
                    Our Splecial Yantra
 1   12 – YANTRA SET                                 For all Family Troubles
 2   VYAPAR VRUDDHI YANTRA                           For Business Development
 3   BHOOMI LABHA YANTRA                             For Farming Benefits
 4   TANTRA RAKSHA YANTRA                            For Protection Evil Sprite
 5   AAKASMIK DHAN PRAPTI YANTRA                     For Unexpected Wealth Benefits
 6   PADOUNNATI YANTRA                               For Getting Promotion
 7   RATNE SHWARI YANTRA                             For Benefits of Gems & Jewellery
 8   BHUMI PRAPTI YANTRA                             For Land Obtained
 9   GRUH PRAPTI YANTRA                              For Ready Made House
10   KAILASH DHAN RAKSHA YANTRA                                                -

                     Shastrokt Yantra

11   AADHYA SHAKTI AMBAJEE(DURGA) YANTRA             Blessing of Durga
12   BAGALA MUKHI YANTRA (PITTAL)                    Win over Enemies
13   BAGALA MUKHI POOJAN YANTRA (PITTAL)             Blessing of Bagala Mukhi
14   BHAGYA VARDHAK YANTRA                           For Good Luck
15   BHAY NASHAK YANTRA                              For Fear Ending
16   CHAMUNDA BISHA YANTRA (Navgraha Yukta)          Blessing of Chamunda & Navgraha
17   CHHINNAMASTA POOJAN YANTRA                      Blessing of Chhinnamasta
18   DARIDRA VINASHAK YANTRA                         For Poverty Ending
19   DHANDA POOJAN YANTRA                            For Good Wealth
20   DHANDA YAKSHANI YANTRA                          For Good Wealth
21   GANESH YANTRA (Sampurna Beej Mantra)            Blessing of Lord Ganesh
22   GARBHA STAMBHAN YANTRA                          For Pregnancy Protection
23   GAYATRI BISHA YANTRA                            Blessing of Gayatri
24   HANUMAN YANTRA                                  Blessing of Lord Hanuman
25   JWAR NIVARAN YANTRA                             For Fewer Ending
     JYOTISH TANTRA GYAN VIGYAN PRAD SHIDDHA BISHA
26   YANTRA
                                                     For Astrology & Spritual Knowlage
27   KALI YANTRA                                     Blessing of Kali
28   KALPVRUKSHA YANTRA                              For Fullfill your all Ambition
29   KALSARP YANTRA (NAGPASH YANTRA)                 Destroyed negative effect of Kalsarp Yoga
30   KANAK DHARA YANTRA                              Blessing of Maha Lakshami
31   KARTVIRYAJUN POOJAN YANTRA                                                  -
32   KARYA SHIDDHI YANTRA                            For Successes in work
33       SARVA KARYA SHIDDHI YANTRA                 For Successes in all work
34   KRISHNA BISHA YANTRA                            Blessing of Lord Krishna
35   KUBER YANTRA                                    Blessing of Kuber (Good wealth)
36   LAGNA BADHA NIVARAN YANTRA                      For Obstaele Of marriage
37   LAKSHAMI GANESH YANTRA                          Blessing of Lakshami & Ganesh
38   MAHA MRUTYUNJAY YANTRA                          For Good Health
39   MAHA MRUTYUNJAY POOJAN YANTRA                   Blessing of Shiva
40   MANGAL YANTRA ( TRIKON 21 BEEJ MANTRA)          For Fullfill your all Ambition
41   MANO VANCHHIT KANYA PRAPTI YANTRA               For Marriage with choice able Girl
42   NAVDURGA YANTRA                                 Blessing of Durga
105                                                अक्टू फय 2011




                               YANTRA LIST                                                     EFFECTS


43    NAVGRAHA SHANTI YANTRA                                          For good effect of 9 Planets
44    NAVGRAHA YUKTA BISHA YANTRA                                     For good effect of 9 Planets
45        SURYA YANTRA                                               Good effect of Sun
46        CHANDRA YANTRA                                             Good effect of Moon
47        MANGAL YANTRA                                              Good effect of Mars
48        BUDHA YANTRA                                               Good effect of Mercury
49        GURU YANTRA (BRUHASPATI YANTRA)                            Good effect of Jyupiter
50        SUKRA YANTRA                                               Good effect of Venus
51        SHANI YANTRA (COPER & STEEL)                               Good effect of Saturn
52        RAHU YANTRA                                                Good effect of Rahu
53        KETU YANTRA                                                Good effect of Ketu
54    PITRU DOSH NIVARAN YANTRA                                       For Ancestor Fault Ending
55    PRASAW KASHT NIVARAN YANTRA                                     For Pregnancy Pain Ending
56    RAJ RAJESHWARI VANCHA KALPLATA YANTRA                           For Benefits of State & Central Gov
57    RAM YANTRA                                                      Blessing of Ram
58    RIDDHI SHIDDHI DATA YANTRA                                      Blessing of Riddhi-Siddhi
59    ROG-KASHT DARIDRATA NASHAK YANTRA                               For Disease- Pain- Poverty Ending
60    SANKAT MOCHAN YANTRA                                            For Trouble Ending
61    SANTAN GOPAL YANTRA                                             Blessing Lorg Krishana For child acquisition
62    SANTAN PRAPTI YANTRA                                            For child acquisition
63    SARASWATI YANTRA                                                Blessing of Sawaswati (For Study & Education)
64    SHIV YANTRA                                                     Blessing of Shiv
                                                                      Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth &
 65 SHREE YANTRA (SAMPURNA BEEJ MANTRA)                               Peace
 66  SHREE YANTRA SHREE SUKTA YANTRA                                  Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth
 67 SWAPNA BHAY NIVARAN YANTRA                                        For Bad Dreams Ending
 68  VAHAN DURGHATNA NASHAK YANTRA                                    For Vehicle Accident Ending
     VAIBHAV LAKSHMI YANTRA (MAHA SHIDDHI DAYAK SHREE                 Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & All
 69 MAHALAKSHAMI YANTRA)                                              Successes
 70 VASTU YANTRA                                                      For Bulding Defect Ending
 71 VIDHYA YASH VIBHUTI RAJ SAMMAN PRAD BISHA YANTRA                  For Education- Fame- state Award Winning
 72  VISHNU BISHA YANTRA                                              Blessing of Lord Vishnu (Narayan)
 73 VASI KARAN YANTRA                                                 Attraction For office Purpose
 74      MOHINI VASI KARAN YANTRA                                    Attraction For Female
 75      PATI VASI KARAN YANTRA                                      Attraction For Husband
 76      PATNI VASI KARAN YANTRA                                     Attraction For Wife
 77      VIVAH VASHI KARAN YANTRA                                    Attraction For Marriage Purpose
Yantra Available @:- Rs- 190, 280, 370, 460, 550, 640, 730, 820, 910, 1250, 1850, 2300, 2800 and Above…..


                                               GURUTVA KARYALAY
                    92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
                                            Call Us - 09338213418, 09238328785
                             Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
                  Email Us:- chintan_n_joshi@yahoo.co.in, gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
                                    (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
106                                               अक्टू फय 2011



                                                  GURUTVA KARYALAY
  NAME OF GEM STONE                               GENERAL        MEDIUM FINE        FINE        SUPER FINE             SPECIAL
  Emerald                              (ऩडना)        100.00         500.00         1200.00 1900.00                 2800.00 & above
  Yellow Sapphire                  (ऩुखयाज)          370.00         900.00         1500.00 2800.00                 4600.00 & above
  Blue Sapphire                        (नीरभ)        370.00         900.00         1500.00 2800.00                 4600.00 & above
  White Sapphire       (वफ़द ऩुखयाज)
                             े                       370.00         900.00         1500.00 2400.00                 4600.00 & above
  Bangkok Black Blue(फंकोक नीरभ)                      80.00         150.00          200.00   500.00                1000.00 & above
  Ruby                              (भास्णक)          55.00         190.00          370.00   730.00                1900.00 & above
  Ruby Berma             (फभाा भास्णक)              2800.00        3700.00         4500.00 10000.00               21000.00 & above
  Speenal        (नयभ भास्णक/रारडी)                  300.00         600.00         1200.00 2100.00                 3200.00 & above
  Pearl                                 (भोसत)        30.00          60.00           90.00   120.00                 280.00 & above
  Red Coral (4 jrh rd)         (रार भूॊगा)            55.00          75.00           90.00   120.00                 180.00 & above
  Red Coral (4 jrh ls mij) (रार भूॊगा)                90.00         120.00          140.00   180.00                 280.00 & above
  White Coral               (वफ़द भूॊगा)
                                     े                15.00          24.00           33.00    42.00                   51.00 & above
  Cat’s Eye                  (रशवुसनमा)               18.00          27.00           60.00    90.00                 120.00 & above
  Cat’s Eye Orissa (उफडवा रशवुसनमा)                  210.00         410.00          640.00 1800.00                 2800.00 & above
  Gomed                                (गोभेद)        15.00          27.00           60.00    90.00                 120.00 & above
  Gomed CLN            (सवरोनी गोभेद)                300.00         410.00          640.00 1800.00                 2800.00 & above
  Zarakan                           (जयकन)           150.00         230.00          330.00   410.00                 550.00 & above
  Aquamarine                           (फेरुज)       190.00         280.00          370.00   550.00                 730.00 & above
  Lolite                                (नीरी)        50.00         120.00          230.00   390.00                 500.00 & above
  Turquoise                        (फफ़योजा)           15.00          20.00           30.00    45.00                   55.00 & above
  Golden Topaz                     (वुनशरा)           15.00          20.00           30.00    45.00                   55.00 & above
  Real Topaz (उफडवा ऩुखयाज/टोऩज)                      60.00          90.00          120.00   280.00                 460.00 & above
  Blue Topaz             (नीरा टोऩज)                  60.00          90.00          120.00   280.00                 460.00 & above
  White Topaz           (वफ़द टोऩज)
                                े                     50.00          90.00          120.00   240.00                  410.00& above
  Amethyst                           (कटे रा)         15.00          20.00           30.00    45.00                   55.00 & above
  Opal                                  (उऩर)         30.00          45.00           90.00   120.00                 190.00 & above
  Garnet                            (गायनेट)          30.00          45.00           90.00   120.00                 190.00 & above
  Tourmaline                      (तुभरीन)ा          120.00         140.00          190.00   300.00                 730.00 & above
  Star Ruby           (वुमकाडत भस्ण)
                          ा                           45.00          75.00           90.00   120.00                 190.00 & above
  Black Star              (कारा स्टाय)                10.00          20.00           30.00    40.00                   50.00 & above
  Green Onyx                       (ओनेक्व)           09.00          12.00           15.00    19.00                   25.00 & above
  Real Onyx                        (ओनेक्व)           60.00          90.00          120.00   190.00                 280.00 & above
  Lapis                            (राजलात)           15.00          25.00           30.00    45.00                   55.00 & above
  Moon Stone          (िडद्रकाडत भस्ण)                12.00          21.00           30.00    45.00                 100.00 & above
  Rock Crystal                     (स्फ़फटक)           09.00          12.00           15.00    30.00                   45.00 & above
  Kidney Stone           (दाना फफ़यॊ गी)               09.00          11.00           15.00    19.00                   21.00 & above
  Tiger Eye             (टाइगय स्टोन)                 03.00          05.00           10.00    15.00                   21.00 & above
  Jade                               (भयगि)           12.00          19.00           23.00    27.00                   45.00 & above
  Sun Stone              (वन सवताया)                  12.00          19.00           23.00    27.00                   45.00 & above
  Diamond                                (शीया)       50.00         100.00           200.00   370.00                460.00 & above
  (.05 to .20 Cent )                               (Per Cent )    (Per Cent )      (PerCent )     (Per Cent)                  (Per Cent )
Note : Bangkok (Black) Blue for Shani, not good in looking but mor effective, Blue Topaz not Sapphire This Color of Sky Blue, For Venus
                         *** Super fine & Special Quality Not Available Easily. We can try only after getting order
                     fortunately one or two pieces may be available if possible you can tack corres pondence about
107                                      अक्टू फय 2011



                      BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION
      We are mostly engaged in spreading the ancient knowledge of Astrology, Numerology, Vastu and Spiritual
Science in the modern context, across the world.
      Our research and experiments on the basic principals of various ancient sciences for the use of common man.
exhaustive guide lines exhibited in the original Sanskrit texts

BOOK APPOINTMENT PHONE/ CHAT CONSULTATION
        Please book an appointment with Our expert Astrologers for an internet chart . We would require your birth
details and basic area of questions so that our expert can be ready and give you rapid replied. You can indicate the
area of question in the special comments box. In case you want more than one person reading, then please mention
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How Does it work Phone/Chat Consultation
This is a unique service of GURUATVA KARYALAY where we offer you the option of having a personalized
discussion with our expert astrologers. There is no limit on the number of question although time is of
consideration.
Once you request for the consultation, with a suggestion as to your convenient time we get back with a
confirmation whether the time is available for consultation or not.
    We send you a Phone Number at the designated time of the appointment
    We send you a Chat URL / ID to visit at the designated time of the appointment
    You would need to refer your Booking number before the chat is initiated
    Please remember it takes about 1-2 minutes before the chat process is initiated.
    Once the chat is initiated you can commence asking your questions and clarifications
    We recommend 25 minutes when you need to consult for one persona Only and usually the time is
       sufficient for 3-5 questions depending on the timing questions that are put.
    For more than these questions or one birth charts we would recommend 60/45 minutes Phone/chat
       is recommended
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In special cases we don't have the time available about your Specific Questions We will taken some time for
properly Analysis your birth chart and we get back with an alternate or ask you for an alternate.
All the time mentioned is Indian Standard Time which is + 5.30 hr ahead of G.M.T.
Many clients prefer the chat so that many questions that come up during a personal discussion can be
answered right away.
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                                                        वूिना
 ऩत्रिका भं प्रकासळत वबी रेख ऩत्रिका क असधकायं क वाथ शी आयस्षत शं ।
                                       े         े

 रेख प्रकासळत शोना का भतरफ मश कतई नशीॊ फक कामाारम मा वॊऩादक बी इन त्रलिायो वे वशभत शं।

 नास्स्तक/ अत्रलद्वावु व्मत्रक्त भाि ऩठन वाभग्री वभझ वकते शं ।

 ऩत्रिका भं प्रकासळत फकवी बी नाभ, स्थान मा घटना का उल्रेख मशाॊ फकवी बी व्मत्रक्त त्रलळेऴ मा फकवी बी स्थान मा
   घटना वे कोई वॊफॊध नशीॊ शं ।

 प्रकासळत रेख ज्मोसतऴ, अॊक ज्मोसतऴ, लास्तु, भॊि, मॊि, तॊि, आध्मास्त्भक सान ऩय आधारयत शोने क कायण
                                                                                            े
   मफद फकवी क रेख, फकवी बी नाभ, स्थान मा घटना का फकवी क लास्तत्रलक जीलन वे भेर शोता शं तो मश भाि
             े                                         े
   एक वॊमोग शं ।

 प्रकासळत वबी रेख बायसतम आध्मास्त्भक ळास्त्रं वे प्रेरयत शोकय सरमे जाते शं । इव कायण इन त्रलऴमो फक
   वत्मता अथला प्राभास्णकता ऩय फकवी बी प्रकाय फक स्जडभेदायी कामाारम मा वॊऩादक फक नशीॊ शं ।

 अडम रेखको द्राया प्रदान फकमे गमे रेख/प्रमोग फक प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल फक स्जडभेदायी कामाारम मा वॊऩादक
   फक नशीॊ शं । औय नाशीॊ रेखक क ऩते फठकाने क फाये भं जानकायी दे ने शे तु कामाारम मा वॊऩादक फकवी बी
                               े            े
   प्रकाय वे फाध्म शं ।

 ज्मोसतऴ, अॊक ज्मोसतऴ, लास्तु, भॊि, मॊि, तॊि, आध्मास्त्भक सान ऩय आधारयत रेखो भं ऩाठक का अऩना
   त्रलद्वाव शोना आलश्मक शं । फकवी बी व्मत्रक्त त्रलळेऴ को फकवी बी प्रकाय वे इन त्रलऴमो भं त्रलद्वाव कयने ना कयने
   का अॊसतभ सनणाम स्लमॊ का शोगा।

 ऩाठक द्राया फकवी बी प्रकाय फक आऩत्ती स्लीकामा नशीॊ शोगी।

 शभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे वबी रेख शभाये लऴो क अनुबल एलॊ अनुळॊधान क आधाय ऩय सरखे शोते शं । शभ फकवी बी व्मत्रक्त
                                                 े                    े
   त्रलळेऴ द्राया प्रमोग फकमे जाने लारे भॊि- मॊि मा अडम प्रमोग मा उऩामोकी स्जडभेदायी नफशॊ रेते शं ।

 मश स्जडभेदायी भॊि-मॊि मा अडम प्रमोग मा उऩामोको कयने लारे व्मत्रक्त फक स्लमॊ फक शोगी। क्मोफक इन त्रलऴमो भं नैसतक
   भानदॊ डं , वाभास्जक , कानूनी सनमभं क स्खराप कोई व्मत्रक्त मफद नीजी स्लाथा ऩूसता शे तु प्रमोग कताा शं अथला
                                       े
   प्रमोग क कयने भे िुफट शोने ऩय प्रसतकर ऩरयणाभ वॊबल शं ।
           े                           ू

 शभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे वबी भॊि-मॊि मा उऩाम शभने वैकडोफाय स्लमॊ ऩय एलॊ अडम शभाये फॊधगण ऩय प्रमोग फकमे शं
                                                                                          ु
   स्जस्वे शभे शय प्रमोग मा भॊि-मॊि मा उऩामो द्राया सनस्द्ळत वपरता प्राद्ऱ शुई शं ।

 ऩाठकं फक भाॊग ऩय एक फश रेखका ऩून् प्रकाळन कयने का असधकाय यखता शं । ऩाठकं को एक रेख क ऩून्
                                                                                      े
   प्रकाळन वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं ।

 असधक जानकायी शे तु आऩ कामाारम भं वॊऩक कय वकते शं ।
                                       ा

                            (वबी त्रललादो कसरमे कलर बुलनेद्वय डमामारम शी भाडम शोगा।)
                                           े     े
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                                                       शभाया उद्दे श्म
त्रप्रम आस्त्भम

             फॊध/ फफशन
                ु

                         जम गुरुदे ल

        जशाॉ आधुसनक त्रलसान वभाद्ऱ शो जाता शै । लशाॊ आध्मास्त्भक सान प्रायॊ ब शो जाता शै , बौसतकता का आलयण ओढे व्मत्रक्त
जीलन भं शताळा औय सनयाळा भं फॊध जाता शै , औय उवे अऩने जीलन भं गसतळीर शोने क सरए भागा प्राद्ऱ नशीॊ शो ऩाता क्मोफक
                                                                          े
बालनाए फश बलवागय शै , स्जवभे भनुष्म की वपरता औय अवपरता सनफशत शै । उवे ऩाने औय वभजने का वाथाक प्रमाव शी श्रेद्षकय
वपरता शै । वपरता को प्राद्ऱ कयना आऩ का बाग्म शी नशीॊ असधकाय शै । ईवी सरमे शभायी ळुब काभना वदै ल आऩ क वाथ शै । आऩ
                                                                                                    े
अऩने कामा-उद्दे श्म एलॊ अनुकरता शे तु मॊि, ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न औय दरब भॊि ळत्रक्त वे ऩूणा प्राण-प्रसतत्रद्षत सिज लस्तु का शभंळा
                            ू                                       ु ा
प्रमोग कये जो १००% परदामक शो। ईवी सरमे शभाया उद्दे श्म मशीॊ शे की ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे त्रलसळद्श तेजस्ली भॊिो द्राया सवद्ध
प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त वबी प्रकाय क मडि- कलि एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय तक ऩशोिाने का शै ।
                                                े                                                े


                                       वूमा की फकयणे उव घय भं प्रलेळ कयाऩाती शै ।
                                           जीव घय क स्खड़की दयलाजे खुरे शं।
                                                   े




                                          GURUTVA KARYALAY
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111   अक्टू फय 2011




OCT
2011

Gurutva jyotish oct 2011

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  • 2.
    FREE E CIRCULAR गुरुत्ल ज्मोसतऴ ऩत्रिका अक्टू फय 2011 वॊऩादक सिॊतन जोळी गुरुत्ल ज्मोसतऴ त्रलबाग वॊऩका गुरुत्ल कामाारम 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA पोन 91+9338213418, 91+9238328785, gurutva.karyalay@gmail.com, ईभेर gurutva_karyalay@yahoo.in, http://gk.yolasite.com/ लेफ http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/ ऩत्रिका प्रस्तुसत सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी पोटो ग्राफपक्व सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक आटा शभाये भुख्म वशमोगी स्लस्स्तक.ऎन.जोळी (स्लस्स्तक वोफ्टे क इस्डडमा सर) ई- जडभ ऩत्रिका E HOROSCOPE अत्माधुसनक ज्मोसतऴ ऩद्धसत द्राया Create By Advanced Astrology उत्कृ द्श बत्रलष्मलाणी क वाथ े Excellent Prediction १००+ ऩेज भं प्रस्तुत 100+ Pages फशॊ दी/ English भं भूल्म भाि 750/- GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
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    अनुक्रभ नलयाि त्रलळेऴ दीऩालरी नलयाि भं भाॊ दगाा क नलरुऩं फक उऩावना कल्माणकायी शं ु े 6 धन तेयव ळुब भुशूता (24 अक्तफय, 2011) ू 47 भाॊ दगाा की उऩावना क्मं की जाती शं ? ु 7 दीऩालरी ऩूजन भुशूता (26-अक्तफय-2011) ू 48 ळायदीम नलयाि व्रत वे वुख वौबाग्म की प्रासद्ऱ शोती शं 8 रक्ष्भी प्रासद्ऱ शे तु कयं यासळ भॊि का जऩ 53 कवे कयं नलयाि व्रत? ै 9 रक्ष्भी प्रासद्ऱ क वयर उऩाम े 54 दे ली आयाधना वे असबद्श कामो की सवत्रद्ध शे तु 11 रक्ष्भी भॊि 56 आस्द्वन नलयात्रि घट स्थाऩना भुशूता, त्रलसध-त्रलधान 12 दीऩ जराने का भशत्ल क्मा शं ? 63 वयर त्रलसध-त्रलधान वे ळायदीम नलयाि व्रत उऩावना 13 धनिमोदळी ऩय मभ-दीऩदान अकारभृत्मु को दय कयता शं ू 66 नलयाि स्ऩेळर घट स्थाऩना त्रलसध 14 धनिमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं फकमा जाता शं ? 68 नलाणा भॊि वे शोती शं नलग्रश ळाॊसत 18 दीऩालरी क फदन कवे कयं फशीखाता तुरा ऩूजन? े ै 69 दगााद्शाषय भडि वाधना ु 22 दीऩालरी का भशत्ल औय रक्ष्भी ऩूजन त्रलसध 70 कभायी ऩूजन वे वकर भनोयथ सवद्ध शोते शं । ु 23 श्री धनलॊतरय व्रत कथा 71 भाता क 52 ळत्रक्त ऩीठ े 26 वद्ऱ श्री का िभत्काय 74 नलाणा भडि वाधना 20 स्पफटक श्रीमॊि का ऩूजन 75 भॊि एलॊ स्तोि दगाा िारीवा ु 32 बलाडमद्शकभ,् 36 दगााद्शकभ,् ु 35 श्री वूक्त 82 श्रीकृ ष्ण कृ त दे ली स्तुसत, 33 षभा-प्राथाना, 36 वला ऐद्वमा प्रद-रक्ष्भी-कलि 77 धनरक्ष्भी स्तोि 82 ऋग्लेदोक्त दे ली वूक्तभ,् 33 दगााद्शोत्तय ळतनाभ स्तोिभ,् ु 37 भशारक्ष्भी कलि 78 अद्शरक्ष्भी स्तोि 83 वप्तश्र्लरोकी दगाा, ु 34 त्रलद्वॊबयी स्तुसत, 38 भशारक्ष्भी स्तुसत 79 दे लकृ त रक्ष्भी स्तोिभ ् 83 दगाा आयती, ु 34 भफशऴावुयभफदा सनस्तोिभ,् 39 श्री कनकधाया स्तोि 80 सवद्धकस्जकास्तोिभ,् ुॊ 35 गुद्ऱ वद्ऱळती, 41 श्री रक्ष्भी िारीवा 81 शभाये उत्ऩाद दगाा फीवा मॊि ु 6 ळादी वॊफॊसधत वभस्मा 37 अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलि 60 कनकधाया मॊि 80 भॊि सवद्ध दै ली मॊि वूसि 10 भॊि सवद्ध गणेळ मॊि 49 याळी यत्न एलॊ उऩयत्न 60 यासळ यत्न 88 भॊिसवद्ध रक्ष्भी मॊिवूसि 10 भॊगर मॊि वे ऋण भुत्रक्त 50 श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि/ कलि 61 भॊि सवद्ध वाभग्री 94 गणेळ रक्ष्भी मॊि 13 भॊि सवद्ध दरब वाभग्री ु ा 55 याभ यषा मॊि 62 वला योगनाळक मॊि/ 101 बाग्म रक्ष्भी फदब्फी 17 वला कामा सवत्रद्ध कलि 57 भॊि सवद्ध रूद्राष 65 भॊि सवद्ध कलि 103 द्रादळ भशा मॊि 21 जैन धभाके त्रलसळद्श मॊिो वूिी 58 भॊिसवद्ध स्पफटक श्री मॊि 67 YANTRA 104 घॊटाकणा भशालीय वला सवत्रद्ध भशामॊि 59 रक्ष्भी मॊि 74 GEMS STONE 106 स्थामी औय अडम रेख वॊऩादकीम 4 अक्टू फय-2011 भासवक व्रत-ऩला-त्मौशाय 91 ऩसत-ऩत्नी भं करश सनलायण शे तु 22 अक्टू फय 2011 -त्रलळेऴ मोग 97 ळयद ऩूस्णाभा (11-अक्टू फय-2011) 44 दै सनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान तासरका 97 कोजागयी ऩूस्णाभा (11-अक्टू फय-2011) 45 फदन-यात क िौघफडमे े 98 दलाा ऩूजनभं यखे वालधासनमाॊ ु 45 फदन-यात फक शोया - वूमोदम वे वूमाास्त तक 99 कयला िौथ व्रत (15-अक्टू फय-2011) 46 ग्रश िरन अक्टू फय -2011 100 नमे कऩडे औय ज्मोसतऴ 50 वूिना 108 भासवक यासळ पर 84 शभाया उद्दे श्म 110 अक्टू फय 2011 भासवक ऩॊिाॊग 89
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    वॊऩादकीम त्रप्रम आस्त्भम फॊध/ फफशन ु जम गुरुदे ल फशडद ु ऩयॊ ऩया भं दे ली को त्रलसबडन रूऩं वे जाना औय ऩूजा जाता शं । ॐ जमॊती भॊगरा कारी बद्रकारी कऩासरनी। दगाा षभा सळला धािी स्लाशा स्लधा नभोऽस्तुते॥ ु बालाथा: जमॊती, भॊगरा, कारी, बद्रकारी, कऩासरनी, दगाा, षभा, सळला धािी औय स्लधा क नाभं वे प्रसवद्ध ु े जगदम्फा दे ली। आऩको भेया नभस्काय शं । नभो दे व्मै भशादे व्मै सळलामै वततॊ नभ:। नभ: प्रकृ त्मै बद्रामै सनमता: प्रणता: स्भताभ ्॥ अथाात: दे ली को नभस्काय शं , भशादे ली को नभस्काय शं । भशादे ली सळला को वलादा नभस्काय शं । प्रकृ सत एलॊ बद्रा को भेया प्रणाभ शं । शभ रोग सनमभऩूलक दे ली जगदम्फा को नभस्काय कयते शं । ा ळास्त्रोक्त लणान शं की दे ली दगाा क उक्त भॊि का स्भयण कय प्राथाना कयने भाि वे दे ली प्रवडन शोकय अऩने ु े बक्तं की इच्छा ऩूणा कयती शं । वभस्त दे ल गण स्जनकी स्तुसत प्राथना कयते शं । भाॉ दगाा अऩने बक्तो की यषा कय उन ु ऩय कृ ऩा द्रद्शी लऴााती शं औय उवको उडनती क सळखय ऩय जाने का भागा प्रवस्त कयती शं । इव सरमे ईद्वय भं े श्रद्धा त्रलद्वाय यखने लारे वबी भनुष्म को दे ली की ळयण भं जाकय दे ली वे सनभार रृदम वे प्राथाना कयनी िाफशमे। भाॊ जगदम्फा की कृ ऩा प्रासद्ऱ शे तु नलयािी त्रलळेऴ राब प्रदान कयने लारी शं । क्मोफक नलयाि को आद्य् ळत्रक्त की उऩावना का भशाऩला भाना गमा शं । दे ली बागलत क आठलं स्कध भं दे ली उऩावना का त्रलस्ताय वे लणान फकमा गमा शै । े ॊ भाकण्डे मऩुयाण क अॊतगात दे ली भाशात्म्म भं उल्रेख शं की स्लमॊ भाॊ जगदम्फा का लिन शं ... की ा े ळयत्कारे भशाऩूजा फक्रमतेमा िलात्रऴकी। ा तस्माॊभभैतडभाशात्म्मॊश्रत्लाबत्रक्तवभस्डलत:॥ ु वलााफाधात्रलसनभुक्तोधनधाडमवुतास्डलत:। ा भनुष्मोभत्प्रवादे नबत्रलष्मसतन वॊळम:॥ अथाात् ळयद ऋतु क नलयािभं जफ भेयी लात्रऴाक भशाऩूजा शोती शं , उव कार भं जो भनुष्म भेये भाशात्म्म े (दगाावद्ऱळती) को बत्रक्तऩूलकवुनेगा, लश भनुष्म भेये प्रवाद वे वफ फाधाओॊ वे भुक्त शोकय धन-धाडम एलॊ ऩुि वे वम्ऩडन ु ा शो जामेगा।
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    भाॊ दगाा कीकृ ऩा प्रासद्ऱ शे तु त्रलसबडन ळास्त्र एलॊ ग्रॊथो भं त्रलसबडन भॊिं का उल्रेख फकमा गमा शं । ऩाठको क ु े भागादळान एलॊ जानकायी शे तु ऩत्रिका क इव अॊक भं कछ त्रलळेऴ प्राबाली भॊिो का वॊकरन कयने का प्रमाव े ु फकमा गमा शं । इव अॊक भं करळ स्थाऩना वे वॊफॊसधत लणान बी फकमा गमा शं । स्जववे इच्छक फॊधु/फशन ु त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय अऩने भनोयथो को सवद्ध कयने भं वभथा शं। दीऩालरी को फशडद ू धभा भं ऩॊिभशा ऩला क रुऩ भं भनामा जाता शं । ऩॊिभशा ऩला को वबी जगश ऩय े त्रलळेऴ प्रकाय की ऩूजाएॊ की जाती शं । उव भं त्रलळेऴ रुऩ वे भाॊ रक्ष्भी की ऩूजा की जाती शं । क्मोकी, ऩुयातन कार वे शी धन प्रासद्ऱ की इच्छा प्राम वबी व्मत्रक्तमं भं यशी शं । कछ रोगो को धन, वॊऩत्रत्त एलॊ बौसतक वुख-वाधन अऩनी मोग्मता औय भेशनत क अनुळाय प्राद्ऱ शो ु े जाता शं । रेफकन फशोत वे रोग एवे शोते शं स्जडशं कफठन ऩरयश्रभ कयने औय सळस्षत शोने क उऩयाॊत बी त्रलळेऴ े राब नशीॊ सभरता मा अऩने ऩरयश्रभ का उसित भूल्म बी नशीॊ प्राद्ऱ शो ऩाता शं । स्जन रोगो क ऩाव ऩमााद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त शोती शं उडशं इच्छा शोती शं उनकी धन-वॊऩत्रत्त फदन दोगुनी यात े िौगुनी फढती यशं ओय स्जक ऩाव ऩमााद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त नशीॊ शं उवकी इच्छा शोती शं , की उवे कभ वे कभ इतनी े धन वॊऩत्रत्त प्राद्ऱ शो जामे की उवका जीलन वुखभम शो। फशडद ु ऩॊिाॊग क अनुळाय कासताक की अभालव को दीऩालरी भनाई जाती शं । इव फदन दे ली रक्ष्भी, गणेळ, े वयस्लती, कफेय की ऩूजन कयने का त्रलधान शै । ु क्मोफक दे ली रक्ष्भी की उत्ऩत्ती दीऩालरी क फदन भानी जाती शं े औय ळास्त्रोक्त लणा शं धन की दे ली रक्ष्भी शं औय धन क दे लता कफेय शं , स्जनक प्रवडन शोने वे भनुष्म को े ु े धन, वभृत्रद्ध एलॊ ऐद्वमा प्राद्ऱ शोता शं । भाॊ रक्ष्भी िॊिर शं । अथाात रक्ष्भी जी लश एक जगश फटकती नशीॊ शै । फकव प्रकाय रक्ष्भी का आगभन आऩक घय भं शो औय स्जदॊ गी द्ख, दरयद्र, कद्शो वे छट कय खुसळमं वे बय े ु ु जाए उववे जुडे यशस्मो को बायतीम ऋत्रऴ भुसनमं ने खोज सनकारा शं । मश बी एक प्रभुख कायण शं की दीऩालरी का ऩला भनामा जाता शं औय रक्ष्भीजी का ऩूजन अिान फकमा जाता शं । क्मोफक लेद फशॊ दओॊ धभा क प्रािीनतभ धासभाक ग्रॊथ शं । लेदो को शभायी प्रािीन बायतीम वॊस्कृ सत क ु े े भूल्मलान बॊडाय भाने जाते शं । स्जवे शभाये त्रलद्रान ऋत्रऴ-भुसनमं ने लऴो तक सिॊतन-भनन अध्ममन कय इव वृत्रद्श क अद्भद यशस्मं की जानकायी इव लेद क रुऩ भं वॊग्रफशत की शं । स्जववे भनुष्म वभझ कय अऩने जीलन े ु े की शय वभस्माओॊ का शर सनकार वक। े सिॊतन जोळी
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    6 अक्टू फय 2011 नलयाि भं भाॊ दगाा क नलरुऩं फक उऩावना कल्माणकायी शं ु े  सिॊतन जोळी भाॊ दगाा क नलरुऩं की उऩावना सनम्न भॊिं क द्राया की ु े े 5. स्कडदभाता जाती शै . प्रथभ फदन ळैरऩुिी की एलॊ क्रभळ् भाॊ दगाा क नलरुऩं ु े सवॊशावनगता सनत्मॊ ऩद्भासश्रतकयद्रमा । की उऩावना की जाती शै । ळुबदास्तु वदा दे ली स्कडदभाता मळस्स्लनी ॥ 6. कात्मामनी १. ळैरऩुिी २. ब्रह्मिारयणी ३. िडद्रघण्टा ४. कष्भाण्डा ५. ू िडद्रशावोज्लरकया ळादा रलयलाशना । ू स्कडदभाता ६. कात्मामनी ७. कारयात्रि ८. भशागौयी ९. कात्मामनी ळुबॊ दद्याद्दे ली दानलघासतनी सवत्रद्धदािी 7. कारयात्रि 1.ळैरऩुिी एकलेणी जऩाकणाऩूया नग्ना खयास्स्थता । लडदे लास्छछतराबाम िडद्राधाकृतळेखयाभ ् । रम्फोद्षी कस्णाकाकणॉ तैराभ्मक्तळयीरयणी ॥ लृऴारुढाॊ ळूरधयाॊ ळैरऩुिीॊ मळस्स्लनीभ ् ॥ लाभऩादोल्रवल्रोशरताकण्टकबूऴणा । 2. ब्रह्मिारयणी लधानभूधध्लजा कृ ष्णा कारयात्रिबामङ्कयी ॥ ा दधाना कयऩद्भाभ्माभषभाराकभण्डरू । 8. भशागौयी दे ली प्रवीदतु भसम ब्रह्मिारयण्मनुत्तभा ॥ द्वेते लृऴे वभारुढा द्वेताम्फयधया ळुसि् । 3. िडद्रघण्टा भशागौयी ळुबॊ दद्याडभशादे लप्रभोददा ॥ त्रऩण्डजप्रलयारुढा िण्डकोऩास्त्रकमुता । ै ा 9. सवत्रद्धदािी प्रवादॊ तनुते भह्याॊ िडद्रघण्टे सत त्रलश्रुता ॥ सवद्धगडधलामषाद्यैयवुयैयभयै यत्रऩ । 4. कष्भाण्डा ू वेव्मभाना वदा बूमात ् सवत्रद्धदा सवत्रद्धदासमनी ॥ वुयावम्ऩूणकरळॊ रुसधयाप्रुतभेल ि । ा दधाना शस्तऩद्भाभ्माॊ कष्भाण्डा ळुबदास्तु भे ॥ ू दगाा फीवा मॊि ु ळास्त्रोक्त भत क अनुळाय दगाा फीवा मॊि दबााग्म को दय कय व्मत्रक्त क वोमे शुले बाग्म को जगाने लारा भाना े ु ु ू े गमा शं । दगाा फीवा मॊि द्राया व्मत्रक्त को जीलन भं धन वे वॊफॊसधत वॊस्माओॊ भं राब प्राद्ऱ शोता शं । जो व्मत्रक्त ु आसथाक वभस्मावे ऩये ळान शं, लश व्मत्रक्त मफद नलयािं भं प्राण प्रसतत्रद्षत फकमा गमा दगाा फीवा मॊि को स्थासद्ऱ ु कय रेता शं , तो उवकी धन, योजगाय एलॊ व्मलवाम वे वॊफॊधी वबी वभस्मं का ळीघ्र शी अॊत शोने रगता शं । नलयाि क फदनो भं प्राण प्रसतत्रद्षत दगाा फीवा मॊि को अऩने घय-दकान-ओफपव-पक्टयी भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ े ु ु ै राब प्राद्ऱ शोता शं , व्मत्रक्त ळीघ्र शी अऩने व्माऩाय भं लृत्रद्ध एलॊ अऩनी आसथाक स्स्थती भं वुधाय शोता दे खंगे। वॊऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतडम दगाा फीवा मॊि को ळुब भुशूता भं अऩने घय-दकान-ओफपव भं स्थात्रऩत ु ु कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म: Rs.550 वे Rs.8200 तक
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    7 अक्टू फय 2011 भाॊ दगाा की उऩावना क्मं की जाती शं ? ु  सिॊतन जोळी नभो दे व्मै भशादे व्मै सळलामै वततॊ नभ:। इव भॊि क जऩ वे भाॉ फक ळयणागती प्राद्ऱ शोती शं । े नभ: प्रकृ त्मै बद्रामै सनमता: प्रणता: स्भताभ ्॥ स्जस्वे भनुष्म क जडभ-जडभ क ऩाऩं का नाळ शोता शै । े े अथाात: दे ली को नभस्काय शं , भशादे ली को नभस्काय शं । भाॊ जननी वृत्रद्श फक आफद, अॊत औय भध्म शं । भशादे ली सळला को वलादा नभस्काय शं । प्रकृ सत एलॊ बद्रा को भेया दे ली वे प्राथाना कयं – प्रणाभ शं । शभ रोग सनमभऩूलक दे ली जगदम्फा को नभस्काय ा ळयणागत-दीनाता-ऩरयिाण-ऩयामणे कयते शं । वलास्मासतंशये दे त्रल नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ उऩयोक्त भॊि वे दे ली दगाा का स्भयण कय प्राथाना कयने भाि वे ु अथाात: ळयण भं आए शुए दीनं एलॊ ऩीस्िडतं की यषा भं वॊरग्न दे ली प्रवडन शोकय अऩने बक्तं की इच्छा ऩूणा कयती शं । वभस्त यशने लारी तथा वफ फक ऩीड़ा दय कयने लारी नायामणी दे ली ू दे ल गण स्जनकी स्तुसत प्राथना कयते शं । भाॉ दगाा अऩने बक्तो ु आऩको नभस्काय शै । की यषा कय उन ऩय कृ ऩा द्रद्शी लऴााती शं औय उवको उडनती क सळखय ऩय जाने का भागा प्रवस्त कयती शं । इव सरमे े योगानळेऴानऩशॊ सव तुद्शा रूद्शा तु काभान वकरानबीद्शान ्। ईद्वय भं श्रद्धा त्रलद्वाय यखने लारे वबी भनुष्म को दे ली की त्लाभासश्रतानाॊ न त्रलऩडनयाणाॊ त्लाभासश्रता शाश्रमताॊ प्रमास्डत। ळयण भं जाकय दे ली वे सनभार रृदम वे प्राथाना कयनी िाफशमे। अथाात् दे ली आऩ प्रवडन शोने ऩय वफ योगं को नद्श कय दे ती शो औय कत्रऩत शोने ऩय भनोलाॊसछत वबी काभनाओॊ का नाळ ु दे ली प्रऩडनासताशये प्रवीद प्रवीद भातजागतोsस्खरस्म। कय दे ती शो। जो रोग तुम्शायी ळयण भं जा िुक शै । उनको े ऩवीद त्रलद्वेतरय ऩाफश त्रलद्वॊ त्लभीद्ळयी दे ली ियाियस्म। त्रलऩत्रत्त आती शी नशीॊ। तुम्शायी ळयण भं गए शुए भनुष्म दवयं ू अथाात: ळयणागत फक ऩीड़ा दय कयने लारी दे ली आऩ शभ ऩय ू को ळयण दे ने लारे शो जाते शं । प्रवडन शं। वॊऩूणा जगत भाता प्रवडन शं। त्रलद्वेद्वयी दे ली त्रलद्व फक यषा कयो। दे ली आऩ फश एक भाि ियािय जगत फक वलाफाधाप्रळभनॊ िेरोक्मस्मास्खरेद्वयी। असधद्वयी शो। एलभेल त्लमा कामाभस्मध्दै रयत्रलनाळनभ ्। अथाात् शे वलेद्वयी आऩ तीनं रोकं फक वभस्त फाधाओॊ को वलाभॊगर-भाॊगल्मे सळलेवलााथवासधक । ा े ळाॊत कयो औय शभाये वबी ळिुओॊ का नाळ कयती यशो। ळयण्मे िमम्फक गौरय नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ े वृत्रद्शस्स्थसत त्रलनाळानाॊ ळत्रक्तबूते वनातसन। ळाॊसतकभास्ण वलाि तथा द:स्लप्रदळाने। ु गुणाश्रमे गुणभमे नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ ग्रशऩीडावु िोग्रावु भशात्भमॊ ळणुमात्भभ। अथाात: शे दे ली नायामणी आऩ वफ प्रकाय का भॊगर प्रदान अथाात् वलाि ळाॊसत कभा भं, फुये स्लप्न फदखाई दे ने ऩय तथा कयने लारी भॊगरभमी शो। कल्माण दासमनी सळला शो। वफ ग्रश जसनत ऩीड़ा उऩस्स्थत शोने ऩय भाशात्म्म श्रलण कयना ऩुरूऴाथं को सवद्ध कयने लारी ळयणा गतलत्वरा तीन नेिं िाफशए। इववे वफ ऩीड़ाएॉ ळाॊत औय दय शो जाती शं । ू लारी गौयी शो, आऩको नभस्काय शं । आऩ वृत्रद्श का ऩारन औय मफश कायण शं वशस्त्रमुगं वे भाॊ बगलती जगतजननी दगाा ु वॊशाय कयने लारी ळत्रक्तबूता वनातनी दे ली, आऩ गुणं का की उऩावना प्रसत लऴा लवॊत, आस्द्वन एलॊ गुद्ऱ नलयािी भं आधाय तथा वलागुणभमी शो। नायामणी दे ली तुम्शं नभस्काय त्रलळेऴ रुऩ वे कयने का त्रलधान फशडद ु धभा ग्रॊथो भं शं । शै । ***
  • 8.
    8 अक्टू फय 2011 ळायदीम नलयाि व्रत वे वुख वौबाग्म की प्रासद्ऱ शोती शं  सिॊतन जोळी नलयाि को ळत्रक्त की उऩावना का भशाऩला भाना गमा जो व्मत्रक्त दगाावद्ऱळतीक भूर वॊस्कृ त भं ऩाठ कयने भं ु े शं । भाकण्डे मऩुयाण क अनुळाय दे ली भाशात्म्म भं स्लमॊ भाॊ ा े अवभथा शं तो उव व्मत्रक्त को वद्ऱद्ऴोकी दगाा को ऩढने वे ु जगदम्फा का लिन शं -। राब प्राद्ऱ शोता शं । क्मोफक वात द्ऴोकं लारे इव स्तोि भं ळयत्कारे भशाऩूजा फक्रमतेमा िलात्रऴकी। ा श्रीदगाावद्ऱळती का वाय वभामा शुला शं । ु तस्माॊभभैतडभाशात्म्मॊश्रत्लाबत्रक्तवभस्डलत:॥ ु जो व्मत्रक्त वद्ऱद्ऴोकी दगाा का बी न कय वक लश कलर ु े े नलााण भॊि का असधकासधक जऩ कयं । वलााफाधात्रलसनभुक्तोधनधाडमवुतास्डलत:। ा भनुष्मोभत्प्रवादे नबत्रलष्मसतन वॊळम:॥ दे ली क ऩूजन क वभम इव भॊि का जऩ कये । े े अथाात् ळयद ऋतु क नलयािभं े जमडती भङ्गराकारी बद्रकारी जफ भेयी लात्रऴाक भशाऩूजा शोती कऩासरनी। शं , उव कार भं जो भनुष्म भेये दगाा षभा सळला धािी स्लाशा ु भाशात्म्म (दगाावद्ऱळती) ु को स्लधानभोऽस्तुते॥ बत्रक्तऩूलकवुनेगा, लश भनुष्म भेये ा दे ली वे प्राथाना कयं - प्रवाद वे वफ फाधाओॊ वे भुक्त शोकय धन-धाडम एलॊ ऩुि वे वम्ऩडन शो जामेगा। त्रलधेफशदे त्रल कल्माणॊत्रलधेफशऩयभाॊ - सश्रमभ ्।रूऩॊदेफशजमॊदेफशमळोदे फशफद्र नलयाि भं दगाावद्ऱळती ु ऴोजफश॥ को ऩढने मा वुनने वे दे ली अत्मडत प्रवडन शोती शं एवा अथाात् शे दे त्रल! आऩ भेया ळास्त्रोक्त लिन शं । वद्ऱळती का कल्माण कयो। भुझे श्रेद्ष वम्ऩत्रत्त ऩाठ उवकी भूर बाऴा वॊस्कृ त भं प्रदान कयो। भुझे रूऩ दो, जम दो, कयने ऩय शी ऩूणा प्रबाली शोता शं । मळ दो औय भेये काभ-क्रोध इत्माफद ळिुओॊ का नाळ कयो। व्मत्रक्त को श्रीदगाावद्ऱळती को बगलती दगाा ु ु का शी स्लरूऩ वभझना िाफशए। त्रलद्रानो क भतानुळाय वम्ऩूणा े ऩाठ कयने वे ऩूला श्रीदगाावद्ऱळती फक ऩुस्तक का इव भॊि वे ु नलयािव्रत का ऩारन कयने भं जो रोगं अवभथा शो लश ऩॊिोऩिायऩूजन कयं - नलयाि क वात यािी,ऩाॊि यािी, दं यािी औय एक यािी े का व्रत कयक बी त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । नलयाि े नभोदे व्मैभशादे व्मैसळलामैवततॊनभ:। भं नलदगाा की उऩावना कयने वे नलग्रशं का प्रकोऩ स्लत् ु नभ:प्रकृ त्मैबद्रामैसनमता:प्रणता:स्भताभ ्॥ ळाॊत शो जाता शं ।
  • 9.
    9 अक्टू फय 2011 कवे कयं नलयाि व्रत? ै  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी नल फदनं तक िरने लारे इव ऩला ऩय शभ व्रत यखकय भाॊ क नौ अरग-अरग रूऩ की ऩूजा की जाती शं । इव दौयान घय भं े फकमा जाने लारा त्रलसधलत शलन बी स्लास््म क सरए अत्मॊत राबप्रद शं । शलन वे आस्त्भक ळाॊसत औय लातालयण फक ळुत्रद्ध क े े अराला घय नकायात्भक ळत्रक्तमं का नाळ शो कय वकायात्भक ळत्रक्तमो का प्रलेळ शोता शं । नलयाि व्रत नलयाि भं नल याि वे रेकय वात यािी,ऩाॊि यािी, दं यािी औय एक यािी व्रत कयने का बी त्रलधान शं । नलयाि व्रत क धासभाक भशत्ल क अराला लैसासनक भशत्ल शं , जो स्लास््म की दृत्रद्श वे कापी राबदामक शोता शं । व्रत कयने वे े े ळयीय भं िुस्ती-पतॉ फनी यशती शं । योजाना कामा कयने लारे ऩािन तॊि को बी व्रत क फदन आयाभ सभरता शं । फच्िे, फुजुग, ु े ा फीभाय, गबालती भफशरा को नलयाि व्रत का नशीॊ यखना िाफशए। नलयाि व्रत वे वॊफॊसधत उऩमोगी वुझाल  व्रत क दौयान असधक वभम भौन धायण कयं । े  व्रत क ळुरुआत भं बूख कापी रगती शं । ऐवे भं नीॊफू ऩानी त्रऩमा जा वकता शै । इववे बूख को सनमॊत्रित यखने भं भदद े सभरेगी।  जशा तक वॊबल शो सनजारा उऩलाव न यखं। इववे ळयीय भं ऩानी फक कभी शो जाती शं औय अऩसळद्श ऩदाथा ळयीय क फाशय े नशीॊ आ ऩाते। इववे ऩेट भं जरन, कब्ज, वॊक्रभण, ऩेळाफ भं जरन जैवी कई वभस्माएॊ ऩैदा शो वकती शं ।  एक वाथ खूफ वाया ऩानी ऩीने क फजाए फदन भं कई फाय नीॊफू ऩानी त्रऩएॊ। े  ज्मादातय रोगो को उऩलाव भं अक्वय कब्ज की सळकामत शो जाती शं । इवसरए व्रत ळुरू कयने क ऩशरे त्रिपरा, आॊलरा, े ऩारक का वूऩ मा कये रे क यव इत्माफद ऩदाथो का वेलन कयं । इववे ऩेट वाप यशता शै । े  व्रत क दौयान िाम, कापी का वेलन कापी फढ़ जाता शै । इव ऩय सनमॊिण यखं। े व्रत क दौयान कौनवे खाद्य ऩदाथा ग्रशण कयं ? े  व्रत भं अडन का वेलन लस्जात शं । स्जव कायण ळयीय भं ऊजाा की कभी शो जाती शं ।  अनाज फक जगश परं ल वस्ब्जमं का वेलन फकमा जा वकता शं । इववे ळयीय को जरुयी ऊजाा सभरती शं ।  वुफश क वभम आरू को फ्राई कयक खामा जा वकता शं । आरू भं काफोशाइड्रे ट प्रिुय भािा भं शोता शै । इव सरए आरू े े खाने वे ळयीय को ताकत सभरती शै ।  वुफश एक सगराव दध त्रऩरं। दोऩशय क वभम पर मा जूव रं। ळाभ को िाम ऩी वकते शं । ू े  कई रोग व्रत भं एक फाय शी बोजन कयते शं । ऐवे भं एक सनस्द्ळत अॊतयार ऩय पर खा वकते शं । यात क खाने भं सवॊघाड़े े क आटे वे फने ऩकलान खा वकते शं । े
  • 10.
    10 अक्टू फय 2011 भॊि सवद्ध त्रलळेऴ दै ली मॊि वूसि आद्य ळत्रक्त दगाा फीवा मॊि (अॊफाजी फीवा मॊि) ु वयस्लती मॊि भशान ळत्रक्त दगाा मॊि (अॊफाजी मॊि) ु वद्ऱवती भशामॊि(वॊऩूणा फीज भॊि वफशत) नल दगाा मॊि ु कारी मॊि नलाणा मॊि (िाभुॊडा मॊि) श्भळान कारी ऩूजन मॊि नलाणा फीवा मॊि दस्षण कारी ऩूजन मॊि िाभुॊडा फीवा मॊि ( नलग्रश मुक्त) वॊकट भोसिनी कासरका सवत्रद्ध मॊि त्रिळूर फीवा मॊि खोफडमाय मॊि फगरा भुखी मॊि खोफडमाय फीवा मॊि फगरा भुखी ऩूजन मॊि अडनऩूणाा ऩूजा मॊि याज याजेद्वयी लाॊछा कल्ऩरता मॊि एकाॊषी श्रीपर मॊि भॊि सवद्ध त्रलळेऴ रक्ष्भी मॊि वूसि श्री मॊि (रक्ष्भी मॊि) भशारक्ष्भमै फीज मॊि श्री मॊि (भॊि यफशत) भशारक्ष्भी फीवा मॊि श्री मॊि (वॊऩूणा भॊि वफशत) रक्ष्भी दामक सवद्ध फीवा मॊि श्री मॊि (फीवा मॊि) रक्ष्भी दाता फीवा मॊि श्री मॊि श्री वूक्त मॊि रक्ष्भी गणेळ मॊि श्री मॊि (कभा ऩृद्षीम) ु ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊि ऩूजन मॊि रक्ष्भी फीवा मॊि कनक धाया मॊि श्री श्री मॊि (श्री श्री रसरता भशात्रिऩुय वुडदमै श्री लैबल रक्ष्भी मॊि (भशान सवत्रद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊि) भशारक्ष्भमं श्री भशा मॊि) अॊकात्भक फीवा मॊि ताम्र ऩि ऩय वुलणा ऩोरीव ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीव ताम्र ऩि ऩय (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) वाईज भूल्म वाईज भूल्म वाईज भूल्म 2” X 2” 640 2” X 2” 460 2” X 2” 370 3” X 3” 1250 3” X 3” 820 3” X 3” 550 4” X 4” 1850 4” X 4” 1250 4” X 4” 820 6” X 6” 2700 6” X 6” 2100 6” X 6” 1450 9” X 9” 4600 9” X 9” 3700 9” X 9” 2450 12” X12” 8200 12” X12” 6400 12” X12” 4600 मॊि क त्रलऴम भं असधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं । े ा GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
  • 11.
    11 अक्टू फय 2011 दे ली आयाधना वे असबद्श कामो की सवत्रद्ध शे तु  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी दे ली बागलत क आठलं स्कध भं दे ली उऩावना का त्रलस्ताय वे लणान शै । दे ली का ऩूजन-अिान-उऩावना-वाधना इत्माफद क े ॊ े ऩद्ळमात दान दे ने ऩय भनुष्म क सरमे रोक औय ऩयरोक दोनं वुख दे ने लारे शोते शं । े  प्रसतऩदा सतसथ क फदन दे ली का ऴोडळेऩिाय वे ऩूजन कयक नैलेद्य क रूऩ भं दे ली को गाम का घृत (घी) अऩाण कयना े े े िाफशए। भाॊ को ियणं िढ़ामे गमे घृत को ब्राम्शणं भं फाॊटने वे योगं वे भुत्रक्त सभरती शै ।  फद्रतीमा सतसथ क फदन दे ली को िीनी का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। िीनी का बोग रागाने वे व्मत्रक्त दीघाजीली े शोता शं ।  तृतीमा सतसथ क फदन दे ली को दध का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। दध का बोग रागाने वे व्मत्रक्त को दखं वे े ू ू ु भुत्रक्त सभरती शं ।  ितुथॉ सतसथ क फदन दे ली को भारऩुआ बोग रगाकय दान कयना िाफशए। भारऩुए का बोग रागाने वे व्मत्रक्त फक े त्रलऩत्रत्त का नाळ शोता शं ।  ऩॊिभी सतसथ क फदन दे ली को करे का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। करे का बोग रागाने वे व्मत्रक्त फक फुत्रद्ध, े े े त्रललेक का त्रलकाव शोता शं । व्मत्रक्त क ऩरयलायीकवुख वभृत्रद्ध भं लृत्रद्ध शोती शं । े  ऴद्षी सतसथ क फदन दे ली को भधु (ळशद, भशु, भध) का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। भधु का बोग रागाने वे े व्मत्रक्त को वुॊदय स्लरूऩ फक प्रासद्ऱ शोती शं ।  वद्ऱभी सतसथ क फदन दे ली को गुड़ का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। गुड़ का बोग रागाने वे व्मत्रक्त क वभस्त े े ळोक दय शोते शं । ू  अद्शभी सतसथ क फदन दे ली को श्रीपर (नारयमर) का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। गुड़ का बोग रागाने वे े व्मत्रक्त क वॊताऩ दय शोते शं । े ू  नलभी सतसथ क फदन दे ली को धान क राले का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। धान क राले का बोग रागाने वे े े े व्मत्रक्त क रोक औय ऩयरोक का वुख प्राद्ऱ शोता शं । े त्रलसबडन दे ली की प्रवडनता क सरमे गामिी भॊि े दगाा गामिी : ॐ सगरयजामे त्रलधभशे , सळलत्रप्रमाम धीभफश तडनो दगाा :प्रिोदमात। ु ु रक्ष्भी गामिी : ॐ भशाराक्ष्भमे त्रलधभशे , त्रलष्णु त्रप्रमाम धीभफश तडनो रक्ष्भी:प्रिोदमात। याधा गामिी : ॐ लृऴ बानु: जामै त्रलधभशे , फक्रस्रप्रमाम धीभफश तडनो याधा :प्रिोदमात। तुरवी गामिी : ॐ श्री तुल्स्मे त्रलधभशे , त्रलद्लुत्रप्रमाम धीभफश तडनो लृॊदा: प्रिोदमात। वीता गामिी : ॐ जनक नॊफदडमे त्रलधभशे बुसभजाम धीभफश तडनो वीता :प्रिोदमात। शॊ वा गामिी : ॐ ऩयम्नडवाम त्रलधभशे , भशा शॊ वाम धीभफश तडनो शॊ व: प्रिोदमात। वयस्लती गामिी : ॐ लाग दे व्मै त्रलधभशे काभ याज्मा धीभफश तडनो वयस्लती :प्रिोदमात। ऩृ्ली गामिी : ॐ ऩृ्ली दे व्मै त्रलधभशे वशस्र भूयतमै धीभफश तडनो ऩृ्ली :प्रिोदमात।
  • 12.
    12 अक्टू फय 2011 आस्द्वन नलयात्रि घट स्थाऩना भुशूत, त्रलसध-त्रलधान (28 सवतम्फय 2011) ा  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी आस्द्वन ळुक्र प्रसतऩदा अथाात नलयािी का ऩशरा करळ स्थाऩना शे तु ळुब भुशूता फदन। इवी फदन वे शी आस्द्वनी नलयाि का प्रायॊ ब शोता  राब भुशूता वुफश 06:12 वे 07:42 तक शं । जो अस्द्वन ळुक्र नलभी को वभाद्ऱ शोते शं , इन नौ  अभृत भुशूता वुफश 07:42 वे 09:12 तक फदनं दे त्रल दगाा की त्रलळेऴ आयाधना कयने का त्रलधान ु  ळुब भुशूता वुफश 10:42 वे 12:12 तक शभाये ळास्त्रो भं फतामा गमा शं । ऩयॊ तु इव लऴा तृसतमा क भुशूता घट स्थाऩना का श्रेद्ष भुशूता यशं गे। े सतथी का षम शोने क कायण नलयाि नौ फदन की जगश े घट स्थाऩना शे तु वलाप्रथभ स्नान इत्माफद के आठ फदनो क शंगे। े ऩद्ळमात गाम क गोफय वे ऩूजा स्थर का रेऩन कयना े ऩायॊ ऩरयक ऩद्धसत क अनुळाव नलयात्रि क ऩशरे े े िाफशए। घट स्थाऩना शे तु ळुद्ध सभट्टी वे लेदी का सनभााण फदन घट अथाात करळ की स्थाऩना कयने का त्रलधान शं । कयना िाफशए, फपय उवभं जौ औय गेशूॊ फोएॊ तथा उव ऩय इव करळ भं ज्लाये (अथाात जौ औय गेशूॊ ) फोमा जाता शै । अऩनी इच्छा क अनुवाय सभट्टी, ताॊफे, िाॊदी मा वोने का े घट स्थाऩनकी ळास्त्रोक्त त्रलसध इव प्रकाय शं । करळ स्थात्रऩत कयना िाफशए। घट स्थाऩना आस्द्वन प्रसतऩदा क फदन फक जाती े मफद ऩूणा त्रलसध-त्रलधान वे घट स्थाऩना शं । कयना शो तो ऩॊिाॊग ऩूजन (अथाात गणेळ- घट स्थाऩना शे तु सििा नषि औय अॊत्रफका, लरुण, ऴोडळभातृका, लैधसतमोग को लस्जात भाना गमा शं । ृ वद्ऱघृतभातृका, नलग्रश आफद दे लं का (सििा नषि 28 सवतॊफय 2011 को ऩूजन) तथा ऩुण्माशलािन (भॊिंच्िाय) दोऩशय 01:37:33 फजे वे रग यशा त्रलद्रान ब्राह्मण द्राया कयाएॊ अथला शं ।) घट स्थाऩना भं सििा नषि को अभथाता शो, तो स्लमॊ कयं । सनऴेध भाना गमा शं । अत् घट ऩद्ळमात दे ली की भूसता स्थाऩना इववे ऩूला कयना ळुब शोता स्थात्रऩत कयं तथा दे ली प्रसतभाका शं । ऴोडळोऩिायऩूलक ऩूजन कयं । इवक फाद ा े त्रलद्रनो क भत वे इव लऴा ळुक्र े श्रीदगाावद्ऱळती का वॊऩुट अथला वाधायण ु प्रसतऩदा वे ळुरू शोने लारे ळायदीम नलयाि भं ऩाठ कयना िाफशए। ऩाठ की ऩूणााशुसत क फदन े वूमोदमी नषि शस्त नषि यशे गा। शस्त नषि को ऩूजन दळाॊळ शलन अथला दळाॊळ ऩाठ कयना िाफशए। घट स्थाऩना क वाथ दीऩक की स्थाऩना बी की े शे तु उत्तभ भाना जाता शं । शं । इव सरमे वूमोदम वे 6.12 जाती शै । ऩूजा क वभम घी का दीऩक जराएॊ तथा उवका े फजे क फाद वे शी करळ (घट) की स्थाऩना कयना े गॊध, िालर, ल ऩुष्ऩ वे ऩूजन कयना िाफशए। ळुबदामक यशे गा। ऩूजन क वभम इव भॊि का जऩ कयं - े मफद ऎवे मोग फन यशे शो, तो घट स्थाऩना बो दीऩ ब्रह्मरूऩस्त्लॊ ह्यडधकायसनलायक। दोऩशय भं असबस्जत भुशूता मा अडम ळुब भुशूता भं कयना इभाॊ भमा कृ ताॊ ऩूजाॊ गृह्रॊस्तेज: प्रलधाम।। उत्तभ यशता शं ।
  • 13.
    13 अक्टू फय 2011 वयर त्रलसध-त्रलधान वे ळायदीम नलयाि व्रत उऩावना  सिॊतन जोळी आस्द्वन ळुक्र प्रसतऩदा, फुधलाय, 28 सवतॊफय को ऩुष्ऩ। ळायदीम नलयाि आयॊ ब शो यशे शं । नलयाि भं भाॊ दगाा दे ली का ु नलयाि व्रत: आह्लान, स्थाऩना ल ऩूजन का वभम प्रात:कार शोता शं । नलयाि का व्रत वबी लगा क बक्तो क सरए उत्तभ शोता शै । मफद े े इवीसरए फद्रस्लबाल कडमा रग्न भं घट स्थाऩना का वभम कोई बक्त नौ फदन तक व्रत न यख वक तो दो-यािी क व्रत ं े प्रात: 7.39 तक वलाश्रद्ष शै । े इवक असतरयक्त िय रग्न क े े अलश्म कयने िाफशमे अथाात ऩशरा औय अॊसतभ नलयाि का व्रत िौघस्िडए अथला असबस्जत कार भं बी घट स्थाऩना की जा कयना उऩमुक्त शोता शं । वकती शै । ळायदीम नलयाि दे ली उऩावना क सरए असधक असत े वयर ऩूजन त्रलसध: उत्तभ भाना गमा शै । वलाप्रथभ बक्त श्री गणेळजी का आह्लान कयने क फाद अऩनी े जो बक्त नलयाि क दौयान दे त्रल का ळास्त्रोक्त त्रलसध- े करदे ली का ऩूजन कयना िाफशमे। उवक फाद भाता बगलती का ु े त्रलधान वे ऩूजन कयना िाशं , उडशं नलयाि क एक फदन ऩूला े ऩूजन अऩने कर की ऩयॊ ऩया क अनुवाय कयना िाफशमे। ु े वबी ऩूजन वाभग्री को एकत्रित कय रेना िाफशमे। नलयाि भं दगाा वद्ऱळती का ऩाठ ऩूणा ऩाठ कयना असत उत्तभ ु स्जव स्थान ऩय भाॊ बगलती को स्थात्रऩत कयना शो शोता शं । लशाॊ भॊडऩ फनाने क सरमे उव स्थान को वभतर फनारे, उव े स्थान मा बूसभको सभट्टी मा गाम क गोफय वे रीऩकय बूसभ े गणेळ रक्ष्भी मॊि का ळुत्रद्धकयण कय रं। त्रलद्रानो क भत अनुळाय प्रसतभा स्थात्रऩत कयने शे तु े भॊडऩ नौ शाथ रॊफा औय वात शाथ िौड़ा फनाने का ळास्त्रोक्त त्रलधान शै । भॊडऩ फनाकय उवे त्रलसबडन ळृॊगाय वाभग्री वे वुवस्ज्जत कयं । भाॊ बगलती की प्रसतभा स्थात्रऩत कयने के सरए भॊडऩ क भध्मभ भं िाय शाथ रॊफी औय एक शाथ ऊिी लेदी े ॊ फनारं। उव लेदी ऩय ये ळभी रार लस्त्र त्रफछारे। दे ली प्रसतभा शे तु भाॊ बगलती की प्रसतभा िाय बुजा लारी एलॊ प्राण-प्रसतत्रद्षत गणेळ रक्ष्भी मॊि को अऩने घय-दकान- ु सवॊश ऩय वलायी फकमे शुए शो लैवी शी प्रसतभा स्थात्रऩत कयना ओफपव-पक्टयी भं ऩूजन स्थान, गल्रा मा अरभायी ै उत्तभ शोता शं । इव क ऩीछे का आध्मास्त्भक सवद्धाॊत शोता शं े भं स्थात्रऩत कयने व्माऩाय भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता की बक्त की िायं फदळाओॊ वे वुयषा शो वक औय उवे वभस्त े शं । मॊि क प्रबाल वे बाग्म भं उडनसत, भान-प्रसतद्षा े प्रकाय क वुख-वभृत्रद्ध ल ळाॊसत प्राद्ऱ शो। े एलॊ व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं एलॊ आसथाक स्स्थभं वुधाय करळ स्थाऩीत कयने शे तु भॊि उच्िायण कयते शुए शोता शं । गणेळ रक्ष्भी मॊि को स्थात्रऩत कयने वे तीथा स्थरं क जर का आह्लान कय करळ की स्थाऩना कयनी े बगलान गणेळ औय दे ली रक्ष्भी का वॊमुक्त आळीलााद िाफशमे।शलन लेदी त्रिकोण फनाएॊ औय उवऩय जुआये उगाएॊ। ऩूजन वाभग्री: िॊदन, अगरू, कऩूय, कभर, अळोक, वुगॊसधत प्राद्ऱ शोता शं । Rs.550 वे Rs.8200 तक
  • 14.
    14 अक्टू फय 2011 नलयाि स्ऩेळर घट स्थाऩना त्रलसध  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, त्रलजम ठाकुय दगाा ऩूजन वाभग्री- ु तत ऩद्ळमात शाथ धोकय, ऩुन: आवन ळुत्रद्ध भॊि का कराला (भौरी, यषा वूि), योरी, सवॊदय, १ ू श्रीपर उच्िायण कयं :- (नारयमर), अषत (त्रफना टू टे िालर), रार लस्त्र, वगॊसधत ॐ ऩृ्ली त्लमाधृता रोका दे त्रल त्मलॊ त्रलष्णुनाधृता। पर- भारा, 5 ऩान क ऩत्ते , 5 वुऩायी, रंग, करळ, करळ ू े त्लॊ ि धायमभाॊ दे त्रल ऩत्रलिॊ करु िावनभ ्॥ ु शे तु आभ क ऩल्रल, रकडीि की िौकी, वसभधा, शलन कण्ड, े ु ळुत्रद्ध कयण औय आिभन क ऩद्ळमात िॊदन रगाना े शलन वाभग्री, कभर गट्टे , ऩॊिाभृत ( दध, दशी, घी, ळशद, ू िाफशए। ळकया(िीनी) ), पर, सभठाई, ऊन का आवन, वाफूत शल्दी, ा अनासभका उॊ गरी वे श्रीखॊड िॊदन रगाते शुए इव भॊि का अगयफत्ती, इि, घी, दीऩक, आयती की थारी, कळा, यक्त िॊदन, ु उच्िायण कयं :- द्ळेत िॊदन (श्रीखॊड िॊदन), जौ, सतर, वुलणा गणेळ ल दगाा ु िडदनस्म भशत्ऩुण्मभ ् ऩत्रलिॊ ऩाऩनाळनभ,् की प्रसतभा 2 (वुलणा उप्रब्ध न शो तो ऩीतर, कई रोग आऩदाॊ शयते सनत्मभ ् रक्ष्भी सतद्षतु वलादा। सभट्टी की प्रसतभा वे ऩूजन कयते शं ।), आबूऴण ल श्रृगाय ॊ वाभग्री, ऩॊिभेला, ऩॊिसभठाई, रूई इत्माफद, ऩॊिोऩिाय ऩूजन कयने क ऩद्ळमात वॊकल्ऩ कयना िाफशएॊ। े वॊकल्ऩ भं ऩुष्ऩ, पर, वुऩायी, ऩान, िाॊदी का सवक्का, श्रीपर दगाा ऩूजन वे ऩूला िौकी को ळुद्ध कयक श्रृगाय कयक ु े ॊ े (नारयमर), सभठाई, भेला, आफद वबी वाभग्री थोड़ी-थोड़ी िौकी वजारं। भािा भं रेकय वॊकल्ऩ भॊि का उच्िायण कयं :- तत ऩद्ळमात रार कऩडे का आवन त्रफछाकय गणऩसत एलॊ ॥ वॊकल्ऩ लाक्म॥ दगाा भाता की प्रसतभाक वम्भुख फैठ जाए। ु े शरय ॐ तत्वत l नभ् ऩयभात्भने श्री ऩुयाण ऩुरुऴोत्तभाम श्री भद बगलते भशा ऩुरुऴस्म त्रलष्णो यासामा प्रलता भान तत ऩद्ळमात आवन को इव भॊि वे ळुत्रद्ध कयण कयं : स्माद्य ब्राह्मणं फद्रतीम प्रशयाद्रे श्रीद्वेत्लायाश कारे लै लस्तल -भडलडतये अस्श्त्लस्श्तत्भे कल्मुगे कसर प्रथभ ियणे जम्फू ॐ अऩत्रलि : ऩत्रलिोला वलाालस्थाॊ गतोऽत्रऩला। द्रीऩे बयत खण्ड बायत लऴे आमाा लतांडतगात दे ळैक ऩुण्म म: स्भये त ् ऩुण्डयीकाषॊ व फाह्याभ्मडतय: ळुसि:॥ षेि ऴत्रद्श वम्लस्तायाणाॊ भध्मे 'अभुक ' नासभन वॊलत्वये 'अभुक ' अमने 'अभुक 'िुतौ .अभुक भावे 'अभुक ऩषे इन भॊिं का उच्िायण कयते शुए अऩने ऊऩय तथा आवन .अभुक सतथौ अभुक नषिे ,अभुक मोग 'अभुक 'लावये ऩय 3-3 फाय कळा मा ऩुष्ऩाफद वे छीॊटं रगामं। ु 'अभुक यासळस्मे वूमे, बौभं, फुधे, गुयौ, ळुक्र, ळनौ, याशौ, े कतौ एलॊ गुण त्रलसळद्शामा सतथौ 'अभुक' गोिोत्ऩडने 'अभुक े तत ऩद्ळमात आिभन कयं : 'नास्म्न ळभाा (लभाा इत्माफद ) वकरऩाऩषमऩूलक वलाारयद्श ा ॊ ॐ कळलाम नभ: े ळाॊसतसनसभत्तॊ वलाभॊगरकाभनमा श्रुसतस्भृत्मोक्तपरप्राप्त्मथं ॐ नायामण नभ: भनेस्प्वत कामा सवद्धमथं श्री दगाा ऩूजनॊ ि अशॊ करयष्मे। ु ॐ भध्लामे नभ: तत्ऩूलाागॊत्लेन सनत्रलाघ्नताऩूलक ा कामा सवद्धमथं मथा ॐ गोत्रलडदाम नभ् सभसरतोऩिाये गणऩसत ऩूजनॊ करयष्मे।
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    15 अक्टू फय 2011 त्रलळेऴ वुझाल: उक्त वॊकल्ऩ लाक्म भं जशाॉ-जशाॉ 'अभुक' तत ऩद्ळमात प्रकाय श्रीखॊड िॊदन फोरकय श्रीखॊड िॊदन ळब्द आमा शै , लशाॉ क्रभळ: लताभान वॊलत्वय, अमन, रुतु, रगाएॊ, भॉव, ऩष, सतसथ, नषि, मोग, वूमााफद की याळी तथा तत ऩद्ळमात सवडदय िढ़ाएॊ "इदॊ सवडदयाबयणॊ रेऩनभ ् ॐ ू ू अऩने गोि, अऩनी याळी एलॊ अऩने नाभ का उच्िायण श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्, कयना िाफशए। तत ऩद्ळमात दलाा औय त्रलल्फऩि बी गणेळ जी को िढ़ाएॊ। ू गणऩसत ऩूजन:- ऩूजन क ऩद्ळमात गणेळ जी को बोग अत्रऩत कयं : े ा ॐ बायतीम ळास्त्रोक्त ऩयॊ ऩया क अनुळाय फकवी बी ऩूजा भं े श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् इदॊ नानात्रलसध नैलेद्यासन वलाप्रथभ गणेळ जी की ऩूजा की जाती शं । वभऩामासभ, सभद्शान अत्रऩात कयने क सरए भॊि- ळकया े ा शाथ भं ऩुष्ऩ रेकय बगलान गणेळ का ध्मान कयं । खण्ड खाद्यासन दसध षीय घृतासन ि, आशायो बक्ष्म बोज्मॊ गजाननम्बूतगणाफदवेत्रलतॊ कत्रऩत्थ जम्फू परिारुबषणभ ्। गृह्यताॊ गणनामक। उभावुतॊ ळोक त्रलनाळकायक नभासभ त्रलघ्नेद्वयऩादऩॊकजभ ्। ॊ प्रवाद अत्रऩत कयने क ऩद्ळमात आिभन कयामं, ा े इदॊ तत ऩद्ळमात आलाशन कयं : आह्लान शे तु शाथ भं अषत आिभनीमॊ ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्, तत ऩद्ळमात रेकय इव भॊि का उच्िायण कयं :- ऩान वुऩायी िढ़ामं- ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् आगच्छ दे ल दे लेळ, गौयीऩुि त्रलनामक। ताम्फूरॊ वभऩामासभ, तत ऩद्ळमात पर रेकय गणऩसत ऩय तलऩूजा कयोभद्य, अिसतद्ष ऩयभेद्वय॥ िढ़ाएॊ ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् परॊ वभऩामासभ, ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् इशागच्छ इश सतद्ष तत ऩद्ळमात दस्षणा यखते शुले इव भॊि का उच्िायण कयं उच्िायण कयते शुए अषत को गणेळ जी ऩय िढाि दं । ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् द्रव्म दस्षणाॊ वभऩामासभ, तत ऩद्ळमात त्रलऴभ वॊख्मा (1,3,5,7,9,11,21 आफद) भं सनम्न भॊिो का उच्िायण कयते शुले वॊफॊसधत लस्तु श्री दीऩक जराकय सनयाजन अथाात आयसत कयं औय बगलान गणेळ जी को अत्रऩत कयं । ा की आयती गामं। तत ऩद्ळमात शाथ भं पर रेकय गणेळ ू शाथ भं पर रेकय ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् आवनॊ ू जी को अत्रऩात कयं , तत ऩद्ळमात तीन प्रदस्षणा कयं । वभऩामासभ, तत ऩद्ळमात अघाा भं जर रेकय फोरं ॐ श्री सवत्रद्ध इवी प्रकाय वे अडम वबी दे लताओॊ का ऩूजन कयं । गणेळ त्रलनामकाम नभ् अघ्मं वभऩामासभ, क स्थान स्जव दे लता की ऩूजा कयनी शो ऩय उव दे लता े तत ऩद्ळमात आिभनीम-स्नानीमॊ ॐ श्री सवत्रद्ध क नाभ का उच्िायण कयं । े त्रलनामकाम नभ् आिभनीमॊ वभऩामासभ, तत ऩद्ळमात लस्त्र रेकय ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् करळ ऩूजन:- लस्त्रॊ वभऩामासभ, घड़े अथला रोटे ऩय कराला (भौसर) फाॊधकय करळ के तत ऩद्ळमात मसोऩलीत-ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् ऊऩय आभ का ऩल्रल यखं। करळ भं वुऩायी, अषत, भुद्रा मसोऩलीतॊ वभऩामासभ, यखं, दलाा, नारयमर ऩय लस्त्र रऩेट कय करळ ऩय स्थात्रऩत ू तत ऩद्ळमात ऩुनयािभनीमभ ्, ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम कयं ,शाथ भं अषत औय ऩुष्ऩ रेकय लरूण दे लता का करळ नभ् यक्त िॊदन रगाएॊ: इदभ यक्त िॊदनभ ् रेऩनभ ् ॐ श्री भं आलाशन कयं । सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्,
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    16 अक्टू फय 2011 ॐ त्तत्लामासभ ब्रह्मणा लडदभानस्तदाळास्ते तत ऩद्ळमात आिभन दं - ळुद्धोदकस्नानाडते आिभनीमॊ मजभानोशत्रलासब:। अशे डभानोलरुणेश फोध्मुरुळॊ वभानऽआमु: जरॊ वभऩामासभ। प्रभोऴी:। अस्स्भन करळे लरुणॊ वाॊगॊ वऩरयलायॊ वामुध तत ऩद्ळमात लस्त्र अत्रऩत कयं -- श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ा ु वळत्रक्तकभालाशमासभ, ॐ बूबल: स्ल: बो लरुण इशागच्छ ुा नभ:। लस्त्रॊ वभऩामासभ ॥ लस्त्राडते आिभनीमॊ जरॊ इशसतद्ष। स्थाऩमासभ ऩूजमासभ। वभऩामासभ। तत ऩद्ळमात वौबाग्म वूिि अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै ा तत ऩद्ळमात स्जव प्रकाय गणेळ जी की ऩूजा की शै उवी दगाादेव्मै नभ:। वौबाग्म वूिॊ वभऩामासभ ॥ ु प्रकाय लरूण दे लता की त्रलसधलत ऩूजा कयं । तत ऩद्ळमात िडदन अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ा ु दगाा ऩूजन: ु नभ:। िडदनॊ वभऩामासभ ॥ दगाा ऩूजन शे तु वफवे ऩशरे भाता दगाा का ध्मान कयं : ु ु तत ऩद्ळमात शरयद्रािूणा अत्रऩत ा कयं - श्रीजगदम्फामै वला भॊगर भागॊल्मे सळले वलााथा वासधक । े दगाादेव्मै नभ:। शरयद्राॊ वभऩामासभ ॥ ु ळयण्मेिमस्म्फक गौयी नायामणी नभोस्तुते ॥ े तत ऩद्ळमात ककभ अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ुॊ ु ा ु नभ:। ककभ वभऩामासभ ॥ ुॊ ु तत ऩद्ळमात आलाशन कयं : तत ऩद्ळमात सवडदय अत्रऩात कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ू ु श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। ु नभ:। सवडदयॊ वभऩामासभ ॥ ू दगाादेलीभालाशमासभ॥ ु तत ऩद्ळमात कज्जर अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ा ु तत ऩद्ळमात पर अत्रऩात कयते शुए उच्िायण कयं । ू नभ:। कज्जरॊ वभऩामासभ ॥ श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। आवानाथे ऩुष्ऩास्ण वभऩामा ु तत ऩद्ळमात दलााकय अत्रऩात कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ू ुॊ ु सभ॥ नभ:। दलााकयासन वभऩामासभ ॥ ू ुॊ तत ऩद्ळमात अघ्मा दं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। ु तत ऩद्ळमात आबूऴण अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ा ु शस्तमो: अघ्मं वभऩामासभ॥ नभ:। आबूऴणासन वभऩामासभ ॥ तत ऩद्ळमात आिभन अत्रऩत कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ा ु तत ऩद्ळमात ऩुष्ऩभारा अत्रऩत ा कयं - श्रीजगदम्फामै नभ:। आिभनॊ वभऩामासभ॥ दगाादेव्मै नभ:। ऩुष्ऩभारा वभऩामासभ ॥ ु तत ऩद्ळमात स्नान कयाएॊ- श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। ु तत ऩद्ळमात धूऩ रगाएॊ- श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। ु स्नानाथं जरॊ वभऩामासभ॥ धूऩभाघ्राऩमासभ॥ तत ऩद्ळमात स्नानाॊग आिभन- स्नानाडते ऩुनयािभनीमॊ तत ऩद्ळमात दीऩ जराएॊ- श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। ु जरॊ वभऩामासभ। दीऩॊ दळामासभ॥ तत ऩद्ळमात ऩॊिाभृत स्नान कयाएॊ- श्रीजगदम्फामै तत ऩद्ळमात नैलेद्य अत्रऩत कयं - ा श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ु दगाादेव्मै नभ:। ऩॊिाभृतस्नानॊ वभऩामासभ॥ ु नभ:। नैलेद्यॊ सनलेदमासभ॥ तत ऩद्ळमात गडधोदक-स्नान कयाएॊ- श्रीजगदम्फामै तत ऩद्ळमात जर अत्रऩात कयं - नैलेद्याडते त्रिफायॊ आिभनीम दगाादेव्मै नभ:। गडधोदकस्नानॊ वभऩामासभ॥ ु जरॊ वभऩामासभ। तत ऩद्ळमात ळुद्धोदक स्नान कयाएॊ- श्रीजगदम्फामै तत ऩद्ळमात पर अत्रऩत कयं - ा श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ु दगाादेव्मै नभ:। ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩामासभ॥ ु नभ:। परासन वभऩामासभ॥
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    17 अक्टू फय 2011 तत ऩद्ळमात ताम्फूर अत्रऩात कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै ु भमा ऩॊिाळीतेयसधकभऩनीते तु लमसव । नभ:। ताम्फूरॊ वभऩामासभ॥ इदानीॊ िेडभातस्तल कृ ऩा नात्रऩ बत्रलता तत ऩद्ळमात दस्षणा दं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। द ु सनयारम्फो रम्फोदय जनसन क मासभ ळयण ्॥5॥ ॊ स्षणाॊ वभऩामासभ॥ द्वऩाको जल्ऩाको बलसत भधुऩाकोऩभसगया तत ऩद्ळमात आयती कयं - श्रीजगदम्फामै दगाादेव्मै नभ:। ु सनयातॊको यॊ को त्रलशयसत सियॊ कोफटकनक् । ै आयासताक वभऩामासभ॥ ॊ तलाऩणे कणे त्रलळसत भनुलणे परसभदॊ ऩूजन भं शुई िुफट क सनलायण शे तु षभा प्राथना कयं । े जन् को जानीते जनसन जऩनीमॊ जऩत्रलधौ ॥6॥ षभा प्राथाना सिताबस्भारेऩो गयरभळनॊ फदक्ऩटधयो जटाधायी कण्ठे बुजगऩतशायी ऩळुऩसत् । न भॊिॊ नोमॊिॊ तदत्रऩ ि न जाने स्तुसतभशो कऩारी बूतेळो बजसत जगदीळैकऩदलीॊ न िाह्लानॊ ध्मानॊ तदत्रऩ ि न जाने स्तुसतकथा्। बलासन त्लत्ऩास्णग्रशणऩरयऩाटीपरसभदभ ् ॥7॥ न जाने भुद्रास्ते तदत्रऩ ि न जाने त्रलरऩनॊ न भोषस्माकाॊषा बलत्रलबल लाॊछात्रऩिनभे ऩयॊ जाने भातस्त्लदनुवयणॊ क्रेळशयणभ ्॥1॥ न त्रलसानाऩेषा ळसळभुस्ख वुखेच्छात्रऩ न ऩुन् । त्रलधेयसानेन द्रत्रलणत्रलयशे णारवतमा अतस्त्लाॊ वॊमािे जनसन जननॊ मातु भभ लै त्रलधेमाळक्मत्लात्तल ियणमोमाा च्मुसतयबूत ् । भृडाणी रुद्राणी सळलसळल बलानीसत जऩत् ॥8॥ तदे तत्षतव्मॊ जनसन वकरोद्धारयस्ण सळले नायासधतासव त्रलसधना त्रलत्रलधोऩिायै ् कऩुिो जामेत क्लसिदत्रऩ कभाता न बलसत ॥2॥ ु ु फक रूषसिॊतन ऩयै नकृतॊ लिोसब् । ॊ ा ऩृसथव्माॊ ऩुिास्ते जनसन फशल् वस्डत वयरा् श्माभे त्लभेल मफद फकिन भय्मनाथे ॊ ऩयॊ तेऴाॊ भध्मे त्रलयरतयरोऽशॊ तल वुत् । धत्वे कृ ऩाभुसितभम्फ ऩयॊ तलैल ॥9॥ भदीमोऽमॊत्माग् वभुसितसभदॊ नो तल सळले आऩत्वु भग्न् स्भयणॊ त्लदीमॊ कयोसभ दगे करुणाणालेसळ । ु कऩुिो जामेत ् क्लसिदत्रऩ कभाता न बलसत ॥3॥ ु ु नैतच्छठत्लॊ भभ बालमेथा् षुधातृऴाताा जननीॊ स्भयस्डत॥10॥ जगडभातभाातस्तल ियणवेला न यसिता जगदॊ फ त्रलसििभि फक ऩरयऩूणा करुणास्स्त सिडभसम । ॊ न ला दत्तॊ दे त्रल द्रत्रलणभत्रऩ बूमस्तल भमा । अऩयाधऩयॊ ऩयालृतॊ नफश भातावभुऩेषते वुतभ ् ॥11 ॥ तथात्रऩत्लॊ स्नेशॊ भसम सनरुऩभॊ मत्प्रकरुऴे ु भत्वभ् ऩातकी नास्स्तऩाऩघ्नी त्लत्वभा नफश । कऩुिो जामेत क्लसिदऩ कभाता न बलसत ॥4॥ ु ु एलॊ सात्ला भशादे त्रलमथामोग्मॊ तथा करु ॥12॥ ु ऩरयत्मक्तादे ला त्रलत्रलधत्रलसधवेलाकरतमा ु बाग्म रक्ष्भी फदब्फी वुख-ळास्डत-वभृत्रद्ध की प्रासद्ऱ क सरमे बाग्म रक्ष्भी फदब्फी :- स्जस्वे धन प्रसद्ऱ, त्रललाश मोग, व्माऩाय े लृत्रद्ध, लळीकयण, कोटा किेयी क कामा, बूतप्रेत फाधा, भायण, वम्भोशन, तास्डिक फाधा, ळिु बम, े िोय बम जेवी अनेक ऩये ळासनमो वे यषा शोसत शै औय घय भे वुख वभृत्रद्ध फक प्रासद्ऱ शोसत शै , बाग्म रक्ष्भी फदब्फी भे रघु श्री फ़र, शस्तजोडी (शाथा जोडी), सवमाय सवडगी, त्रफस्ल्र नार, ळॊख, कारी- वफ़द-रार गुॊजा, इडद्र जार, भाम जार, ऩातार तुभडी जेवी अनेक दरब वाभग्री शोती शै । े ु ा भूल्म:- Rs. 910 वे Rs. 8200 तक उप्रब्द्ध गुरुत्ल कामाारम वॊऩक : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 ा c
  • 18.
    18 अक्टू फय 2011 नलाणा भॊि वे शोती शं नलग्रश ळाॊसत  सिॊतन जोळी दगाा ऩूजा ळत्रक्त उऩावना का भशाऩला शं । ळायदीम ु नलयाि क फदनो भं ग्रशं क दष्प्रबाल वे फिने क सरए े े ु े भाॊ दगाा की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शै । ु ळत्रक्त एलॊ बत्रक्त क वाथ वाॊवारयक वुखं को दे ने क सरए े े लताभान वभम भं मफद कोई दे लता शै । तो लश एक भाि दे ली दगाा शी शं । वाभाडमतमा वभस्त दे ली-दे लता शी ऩूजा ु का अच्छा ऩरयणाभ दे ते शं । शभाये धभा ळास्त्रं क अनुळाय: े 'करौ िण्डी त्रलनामकौ’ अथाात् कसरमुग भं दगाा एलॊ गणेळ फश ऩूणा एलॊ तत्कार ु पर दे ने लारे शं । ताॊत्रिक ग्रडथं क अनुळाय: े नौयत्निण्डीखेटाद्ळ जाता सनसधनानढलाद्ऱोनढलगुण्ठ दे व्मा। अथाात् नौ यत्न, नौ ग्रशं फक ऩीड़ा वे भुत्रक्त, नौ सनसध फक प्रासद्ऱ, नौ दगाा क अनुद्षान वे वलाथा वम्बल शै । इवका ु े तत्ऩमा शं फक नलदगाा नलग्रशं क सरए शी प्रलसतात शुईं शं । ु े अवुयं वे रेकय भनुष्मं भं फकवी बी प्रकायका वॊकट शोने ज्मोसतऴ फक द्रद्शी भं नलग्रश वॊफॊसधत ऩीड़ा एलॊ ऩय दै ली आऩदाओॊ वे भुत्रक्त प्राद्ऱ कयने का वयर वाधन दे ली वभस्त रोक भं भाॊ दगाा फक अयाधना कयने का प्रिरन ु फक आयाधना शं । मफद जडभ कडरी भं िॊडार मोग, दरयद्र ुॊ िरा आयशा शं । क्मोफक भाॊ दगाा ने वबी दे ल-दानल- ु मोग, ग्रशण मोग, त्रलऴ मोग, कारवऩा एलॊ भाॊगसरक दोऴ, अवुय-भनुष्म वबी प्राणी भाि का उद्धाय फकमा शं । एलॊ अडमाडम मोग अथला दोऴ एवे शं , स्जस्वे व्मत्रक्त इवसरमे फकवी बी प्रकाय क जाद-टोना, योग, बम, े ू जीलन बय अथक ऩरयश्रभ कयने क उऩयाॊत बी द्ख े ु बूत, त्रऩळाच्ि, डाफकनी, ळाफकनी आफद वे भुत्रक्त फक प्रासद्ऱ बोगता यशता शं । स्जवकी ळाॊसत वॊबलत् अडम फकवी क सरमे भाॊ दगाा फक त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजा-अिाना वलादा े ु ऩूजा, अिाना, वाधना, यत्न एलॊ अडम उऩामो वे वयरता वे परदामक यशीॊ शै । नशीॊ शोती शं । अथला ऩूणा ग्रश ऩीडाए ळाॊत नशीॊ शो ऩाती दगाा दखं का नाळ कयने लारी शं । इवसरए ु ु शं । एवी स्स्थती भं आफद ळत्रक्त भाॊ बगलती दगाा क नल ु े नलयात्रि क फदनो भं जफ उनकी ऩूजा ऩूणा श्रद्धा औय े रुऩो फक आयाधना वे व्मत्रक्त वयरता वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ त्रलद्वाव वे फक जाती शं , तो भाॊ दगाा फक प्रभुख नौ ु कय वकता शं । ळत्रक्तमाॉ जाग्रत शो जाती शं , स्जववे नलं ग्रशं को बगलान याभ ने बी इवक प्रबाल वे प्रबात्रलत े सनमॊत्रित कयती शं , स्जववे ग्रशं वे प्राद्ऱ शोने लारे असनद्श शोकय अऩनी दळ अथला आठ नशीॊ फस्ल्क नलधा बत्रक्त का प्रबाल वे यषा शोकय ग्रश जनीत ऩीडाएॊ ळाॊत शो जाती शं । शी उऩदे ळ फदमा शै । अनाफद कार वे फक दे लता, दानल,
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    19 अक्टू फय 2011 दगाा फक नल ळत्रक्त को जाग्रत कयने शे तु ळास्त्रं भं नलाणा ु 6. नलाणा भॊि का ऴद्ष फीज भॊि डा शं , डा वे छठे नलयाि भॊि का जाऩ कयने का त्रलधान शं । को दगाा फक छठी ळत्रक्त कात्मामनी फक उऩावना फक ु नल का अथाात नौ एलॊ अणा का अथाात अषय शोता शं । जाती शं । स्जव भं ळुक्र ग्रश को सनमॊत्रित कयने लारी (नल+अणा= नलाणा) इवी कायण नलाणा नल अषयं लारा ळत्रक्त वभाई शुई शं । प्रबाली भॊि शं । 7. नलाणा भॊि का वद्ऱभ फीज भॊि मै शं , मै वे वातलं नलाणा भॊि नलयाि को दगाा फक वद्ऱभ ळत्रक्त कारयात्रि फक ु ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुॊडामै त्रलच्िे उऩावना फक जाती शं । स्जव भं ळसन ग्रश को सनमॊत्रित नल अषयं लारे इव अद्भत नलाणा भॊि क शय अषय भं ु े कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । दे ली दगाा फक एक-एक ळत्रक्त वभामी शुई शं , स्जव का ु 8. नलाणा भॊि का अद्शभ फीज भॊि त्रल शं , त्रल वे आठलं वॊफॊध एक-एक ग्रशं वे शं । नलयाि को दगाा फक अद्शभ ु ळत्रक्त भशागौयी फक 1. नलाणा भॊि का प्रथभ फीज भॊि ऐॊ शं , ऐॊ वे प्रथभ उऩावना फक जाती शं । स्जव भं याशु ग्रश को सनमॊत्रित नलयाि को दगाा फक प्रथभ ळत्रक्त ळैर ऩुिी फक ु कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । उऩावना फक जाती शं । स्जव भं वूमा ग्रश को सनमॊत्रित 9. नलाणा भॊि का नलभ फीज भॊि िै शं , िै वे नलभं कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । नलयाि को दगाा फक नलभ ळत्रक्त सवत्रद्धदािी फक ु 2. नलाणा भॊि का फद्रतीम फीज भॊि ह्रीॊ शं , ह्रीॊ वे दवये ू उऩावना फक जाती शं । स्जव भं कतु ग्रश को सनमॊत्रित े नलयाि को दगाा फक फद्रतीम ळत्रक्त ब्रह्मिारयणी फक ु कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । उऩावना फक जाती शं । स्जव भं िॊद्र ग्रश को सनमॊत्रित इव नलाणा भॊि दगाा फक नलो ळत्रक्तमाॉ व्मत्रक्त को धभा, अथा, ु कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । काभ औय भोष इन िाय फक प्रासद्ऱ भं बी वशामक सवद्ध 3. नलाणा भॊि का तृतीम फीज भॊि क्रीॊ शं , क्रीॊ वे तीवये शोती शं । नलयाि को दगाा फक तृतीम ळत्रक्त िॊद्रघॊटा फक उऩावना ु जऩ त्रलधान फक जाती शं । स्जव भं भॊगर ग्रश को सनमॊत्रित कयने प्रसतफदन स्नान इत्माफदवे ळुद्ध शोकय नलाणा भॊि का जाऩ लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । 108 दाने फक भारा वे कभ वे कभ तीन भारा जाऩ 4. नलाणा भॊि का ितुथा फीज भॊि िा शं , िा वे िौथे अलश्म कयना िाफशए। नलयाि को दगाा फक ितुथा ळत्रक्त कष्भाण्डा फक ु ू दगाा वद्ऱळती क अनुळाय ु े उऩावना फक जाती शं । स्जव भं फुध ग्रश को सनमॊत्रित नलाणा भॊि क नौ अषयं भॊि क ऩशरे ॐ अषय जोड़कय े े कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । बी कय वकते शं ॐ रगाने वे बी मश नलाणा भॊि के 5. नलाणा भॊि का ऩॊिभ फीज भॊि भुॊ शं , भुॊ वे ऩाॉिले वभान फश परदामक सवद्ध शोता शं । इवभं रेव भाि बी नलयाि को दगाा फक ऩॊिभ ळत्रक्त स्कदभाता फक ु ॊ वॊदेश नशीॊ शं । अत् भाॊ बगलती दगाा फक कृ ऩा प्रासद्ऱ एलॊ ु उऩावना फक जाती शं । स्जव भं फृशस्ऩसत ग्रश को नलग्रशो क दष्प्रबालो वे यषा प्रासद्ऱ शे तु नलाणा भॊि का े ु सनमॊत्रित कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । जाऩ ऩूणा सनद्षा एलॊ श्रद्धा वे कय वकते शं । अऩनी रार फकताफ कडरी वे उऩिाय जासनमे ुॊ भाि RS:- 450
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    20 अक्टू फय 2011 नलाणा भडि वाधना  सिॊतन जोळी कयक फैठना िाफशए। फायश राख भडि जऩने वे मश कामा े नलाणा भडि वाधना सवद्ध शोता शं । त्रलसनमोग्- नलाणा भोशन भडि: ॐ अस्म श्री नलाणा भॊिस्म ब्रह्मा त्रलष्णु भशे द्वया ऋत्रऴ्, ॐ क्रीॊ क्रीॊ ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे (अभुक) ॊ गामत्र्मुस्ष्णगनुद्शुबश्छॊ दाॊसव, भशाकारी भशारक्ष्भी क्रीॊ क्रीॊ भोशनभ ् करु करु क्रीॊ क्रीॊ स्लाशा। ु ु भशावयस्लत्म् दे लता्, नॊदजा ळाकबयी बीभा् ळक्तम्, ुॊ *** यक्तदॊ सतका दगाा भ्राभमो फीजासन, ह्रं कीरकभ ्, अस्ग्नलामु ु नलाणा उच्िाटन भडि: वूमाास्तत्लासन, कामा सनदे ळ जऩे त्रलसनमोग। नलाणा उच्िाटन भडि क िौफीव राख जऩ कयने का े नलाणा भडि: त्रलधान शं । इवभं तीन कओॊ का जऩ ताम्रकरळ भं रेकय ु ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे॥ यखना िाफशए औय उवी जर वे सनत्म स्नान कयना नलाणा बेद भडि: िाफशए। इव प्रमोग को ऩूला फदळा की तयप भुशॊ कयके ळास्त्रं भं नलाणा भडि को अऩने आऩ भं अत्मडत सवद्ध जऩ कयना िाफशए। जऩ क सरए रार लस्त्र का आवन े एलॊ प्रबालमुक्त भाना गमा शं । नलाणा भडि को भडि औय त्रफछाना िाफशए ल वाधक को बी रार यॊ ग क लस्त्र धायण े तडि दोनो भं वभान रुऩ वे प्रमोग फकमा जाता शं । कयने िाफशए। इव प्रमोग को फीव फदनो भं वॊऩडन कयने नलाणा भडि क ळीघ्र प्रबात्रल प्रमोग आऩक भागादळान शे तु े े का त्रलधान शं । िौफीव राख भडि जऩ कयने वे मश कामा फदमे जायशे शं । सवद्ध शोता शं । नलाणा उच्िाटन भडि: िेतालनी: ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे (अभुक) पट् उच्िाटनॊ ॊ नलाणा भडि का प्रमोग असत वालधानी वे एलॊ मोग्म गुरु, करु करु स्लाशा। ु ु त्रलद्रान ब्राह्मण अथला जानकाय की वराश वे कयना *** िाफशए। नलाणा लळीकयण भडि: इव प्रमोग को फीव फदनो भं वॊऩडन कयने का त्रलधान शं । नलाणा भोशन भडि: नदी, ताराफ मा कएॊ क जर वे स्नान कयक वाधक को ु े े नलाणा भोशन भडि क फायश राख जऩ कयने का त्रलधान े दस्षण फदळा की तयप भुॊश कयक फैठना िाफशए। तथा े शं । इव प्रमोग को कयने शे तु वात कओॊ मा नफदमं का ु वपद आवन त्रफछाना िाफशए औय वपद लस्त्र धायण े े जर ताम्रकरळ भं रेकय उवभं आभ क ऩत्ते डारकय े कयने िाफशए। फीव राख भडि जऩ कयने वे मश कामा सनत्म उवी ऩानी वे स्नान कयना िाफशए। रराट ऩय ऩीरे सवद्ध शोता शं । िडदन का सतरक कयना िाफशए औय ळयीय ऩय ऩीरे यॊ ग नलाणा लळीकयण भडि: क लस्त्र शी धायण कयने िाफशए औय ऩीरे यॊ ग क आवन े े लऴट् ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे (अभुक) लऴट् भे लश्मॊ ॊ का प्रमोग कयना िाफशए। वाधक को ऩस्द्ळभ की तयप भुॊश करु करु स्लाशा। ु ु
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    21 अक्टू फय 2011 नलाणा स्तॊबन भडि: नलाणा त्रलद्रे ऴण भडि: इव प्रमोग भं वाधक को ऩूला फदळा की तयप भुॊश कयके ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै (अभुक) त्रलद्रे ऴणॊ करु करु ॊ ु ु फैठना िाफशए। तथा बूये यॊ ग का आवन त्रफछाना िाफशए। स्लाशा। वोरश राख भडि जऩ कयने वे मश कामा सवद्ध शोता शं । नलाणा भशाभडि: नलाणा स्तॊबन भडि: इव भडि क उच्िायण भाि वे दे ली भाॊ प्रवडन शोती शं । े ॐ ठॊ ठॊ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे (अभुक) ह्रीॊ लािॊ ॊ मश वॊऩूणा नलाणा भशाभॊि शं । भुखॊ ऩदॊ स्तॊबम ह्रीॊ स्जह्लाॊ कीरम ह्रीॊ फुत्रद्धॊ त्रलनाळम नलाणा भशाभडि: त्रलनाळम ह्रीॊ ॐ ठॊ ठॊ स्लाशा। ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ भशादगे नलाषयी नलदगे नलास्त्भक ु ु े *** नलिॊडी भशाभामे भशाभोशे भशामोग सनद्रे जमे भधुकटब ै नलाणा त्रलद्रे ऴण भडि: त्रलद्रात्रलस्ण भफशऴावुय भफदा सन धूम्र रोिन वॊशॊिी िॊडभुॊड इव प्रमोग भं वाधक को उत्तय फदळा की तयप भुॊश कयके त्रलनासळनी यक्त फीजाॊतक सनळुॊब ध्लॊसवसन ळुॊब दऩास्घ्न े फैठना िाफशए। तथा कारे यॊ ग का आवन त्रफछाना िाफशए। दे त्रल अद्शादळ फाशुक कऩार खट्लाॊग ळूर खड्ग खेटक े इव प्रमोग को फीव फदन भं वॊऩडन कयने का त्रलधान शं । धारयस्ण सछडन भस्तक धारयस्ण रुसधय भाॊव बोस्जनी तेयश राख भडि जऩ कयने वे मश कामा सवद्ध शोता शं । वभस्त बूत प्रेताफद मोग ध्लॊसवसन ब्रह्मेडद्राफद स्तुते दे त्रल वाधना क दौयान जर भं सतर डारकय स्नान कयना े भाॊ यष यष भभ ् ळिून ् नाळम ह्रीॊ पट् ह्रूॊ पट् ॐ ऐॊ ह्रीॊ िाफशए। क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे॥ द्रादळ भशा मॊि मॊि को असत प्रासिन एलॊ दरब मॊिो क वॊकरन वे शभाये लऴो क अनुवॊधान द्राया फनामा गमा शं । ु ा े े  ऩयभ दरब लळीकयण मॊि, ु ा  वशस्त्राषी रक्ष्भी आफद्ध मॊि  बाग्मोदम मॊि  आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ मॊि  भनोलाॊसछत कामा सवत्रद्ध मॊि  ऩूणा ऩौरुऴ प्रासद्ऱ काभदे ल मॊि  याज्म फाधा सनलृत्रत्त मॊि  योग सनलृत्रत्त मॊि  गृशस्थ वुख मॊि  वाधना सवत्रद्ध मॊि  ळीघ्र त्रललाश वॊऩडन गौयी अनॊग मॊि  ळिु दभन मॊि उऩयोक्त वबी मॊिो को द्रादळ भशा मॊि क रुऩ भं ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे भॊि सवद्ध ऩूणा प्राणप्रसतत्रद्षत एलॊ िैतडम मुक्त े फकमे जाते शं । स्जवे स्थाऩीत कय त्रफना फकवी ऩूजा अिाना-त्रलसध त्रलधान त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    22 अक्टू फय 2011 ऩसत-ऩत्नी भं करश सनलायण शे तु दगााद्शाषय भडि वाधना ु मफद ऩरयलायं भं वुख वुत्रलधा क वभस्त वाधान े  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी शोते शुए बी छोटी-छोटी फातो भं ऩसत-ऩत्नी क त्रफि भे े ळास्त्रं भं दगााद्शाषय भडि को अत्मडत ु करश शोता यशता शं , तो सनम्न भॊि का जाऩ कयने वे गोऩनीम औय सवत्रद्धदामक भाना गमा शं । दगााद्शाषय भडि क फायं भं ळास्त्रोक्त लणान शं ु े ऩसत-ऩत्नी क त्रफिभं ळाॊसत का लातालयण फनेगा े भॊि - वाषात ् सवत्रद्धप्रदो भॊिो दगाामा् कसरनाळन्। ु धॊ सधॊ धुभ धुजते ऩत्नी लाॊ लीॊ फूभ लास्ग्धद्वरय। क्र क्रीॊ ा ॊ क्र कासरका दे ली ळॊ ऴीभ ळूॊ भं ळुबभ करु॥ ॊू ु अद्शाषयो अद्श सवत्रद्धळो गोऩनीमो फदगॊफयै ्। ॐ अस्म श्री दगााद्शाषय भॊिस्म भशे द्वय ु मफद ऩत्नी मश प्रमोग कय यशी शं तो ऩत्नी की जगश ऋत्रऴ्, श्री दगााद्शाषयास्त्भका दे लता, दॊ ु ु फीजभ ्,ह्रीॊ ळत्रक्त, ॐ कीरकाम नभ् इसत ऩसत ळब्द का उच्िायण कये फदगफॊध्, धभााथा काभ भोषाथे जऩे त्रलसनमोग्। प्रमोग त्रलसध – ध्मान: दलाासनबाॊ त्रिनमनाॊ त्रलरवस्त्कयीटाॊ ू  प्रात् स्नान इत्मादी वे सनलृत्त शो कय क दगाा े ू ळॊखाब्जख्डग ळय खेटक िाऩान ्। मा भाॊ कारी दे ली क सिि ऩय रार ऩुष्ऩ बेटा े वॊतजानी ि दघतीॊ भफशऴावनस्थाॊ दगाा नलायकर ऩीठगताॊ बजेशभ ्। ु ु कय धूऩ-दीऩ जरा क सवद्ध स्पफटक भारा वे 21 े फदन तक 108 फाय जाऩ कये राबा प्राद्ऱ शोता शं । दगााद्शाषय भडि : ु  ळीध्र राब प्रासद्ऱ शे तु प्रमोग कयने वे ऩूला भाॊ के ॐ ह्रीॊ दॊ ु दगाामै नभ:॥ ु पर: भॊफदय भं अऩनी वभथाता क अनुळाय अथा मा े उक्त भडि क एक राख जऩ कयने वे मश े लस्त्र बेट कयं । भडि सवद्ध शोता शं । इव भडि भं अद्भत ु  राब प्रासद्ऱ क ऩद्ळमात भारा को जर प्रलाश कय दं । े ळत्रक्त शं । लाक् सवत्रद्ध, वॊतान प्रासद्ऱ, ळिु ऩय त्रलजम, ऋण-योग आफद ऩीडाि वे भुत्रक्त प्राद्ऱ शोती शं औय व्मत्रक्त को जीलन भं वॊऩूणा मफद आऩ इव प्रमोग त्रलसध कयने भं अवभथा शं ?, तो आऩ वुखं की प्रासद्ऱ शो इव क सरमे मश भडि े शभवे वॊऩक कय अडम उऩाम जान वकते शं । ा अिूक एलॊ सवत्रद्धदामक शं ।
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    23 अक्टू फय 2011 कभायी ऩूजन वे वकर भनोयथ सवद्ध शोते शं । ु  सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी कभायी-ऩूजा वे भाॉ बगलती असत प्रवडन शोती शं ु  अधभ कल्ऩ: एक, दो, तीन औय िाय लऴा की औय वाधक क वकर भनोयथ सवद्ध कयती शं । े कडमा क ऩूजन वे अधभ कल्ऩ शोता शं । े त्रलद्रानो क भत वे कभायी ऩूजा भं फकवी बी प्रकाय े ु का जासत बेद नशीॊ भाना जाता शै । ळास्त्रोक्त भत वे त्रलद्रानो क भत वे नलयाि भं कभारय कडमाओॊ क े ु े ब्राह्मण, षत्रिम, लैश्म ल ळुद्र इन िायं लणं की कभारयमं ु ऩूजन का अत्मासधक भशत्त्ल शै । की ऩूजा फकमा जावकता शं । िायं लणं की कभारयमं की ु क्मोफक ळास्त्रोक्त त्रलधान वे कभारय कडमाएॊ भाॉ का ु ऩूजा वे वाधक को सबडन-सबडन पर की प्रासद्ऱ शोती शं । प्रत्मष स्लरुऩ शोती शं । इव सरए कभारय कडमाओॊ का ु भेरु तडि भं उल्रेस्खत शै फक ऩूजन दे ली भाॉ क वभान कयना कल्माण कायी शोता शै । े  ब्राह्मण कभायी: क ऩूजन वे वाधक को वला इद्श ु े प्रसतऩदा वे नलभी तक कभारय कडमाओॊ को दगाा स्लरुऩ ु ु परो की प्रासद्ऱ शोती शं । भानकय ऩूजन कयना अत्मासधक कल्माण कायी शोता शं ।  षत्रिम कभायी: क ऩूजन वे वाधक को मळ की ु े मफद कोई वाधक प्रसतफदन कभायी ऩूजन नशीॊ कय वकता ु प्रासद्ऱ शोती शं । शो, तो उनको अद्शभी मा नलभी को कभायी ऩूजन अलश्म ु  लैश्म कभायी: क ऩूजन वे वाधक को धन की ु े कयना िाफशए। प्रासद्ऱ शोती शं । कभायी-ऩूजा भं बगलान श्री गणेळ औय फटु क क ु े  ळूद्र कभायी: क ऩूजन वे वाधक की वॊतान को ु े वाथ वात, ऩाॉि, तीन मा एक कभायी की ऩूजा कयनी ु राब शोता शै । िाफशए। गणेळ औय फटु क की ऩूजा क सरए छोटे रड़कं े स्कडद-ऩुयाण भं उल्रेस्खत शै फक त्रलऩत्रत्त-कार भं को रेना िाफशए। आवन त्रफछाकय ऩशरे गणेळ, फपय अडत्मजा-कभायी का ऩूजन कयना िाफशए। ु फटु क, उवक फाद कभायी ऩूजन कयना िाफशए। े ु सळल कभायी-ऩूजा भं शे म औय काभ-फुत्रद्ध असनद्श- ु गणेळजी की ऩूजा क सरए ‘ॐ गॊ गणेळाम नभ्’ े कायक शोती शै । अत् वालधान शोकय कभायी-पजा कयनी ु ु भडि वे ऩाद्य, अघ्मा, गडध, दीऩ, लस्त्र-नैलेद्य आफद वे िाफशए। माभर तडि भं उल्रेस्खत शै फक दो लऴा वे ऊऩय ऩूजा कये । फटु क की ऩूजा क सरए ‘ॐ लॊ लटु काम नभ्’ े की कभायी का ऩूजन धभा लैधासनक शं , क्मंफक एक-लऴा ु भडि वे ऩाद्य, अघ्मा, गडध, दीऩ, लस्त्र-नैलेद्य आफद वे वे कभ की कभायी की गडध, ऩुष्ऩ, लस्त्र औय नैलेद्य क ु े ऩूजा कये । प्रसत रुसि नशीॊ शोती। कभायी ऩूजन क सरए ऩशरे दोनं शाथं भं ऩुष्ऩ ु े अडम धभा ग्रडथं भं एक लऴा वे ऴोडळ (वोरश) रेकय प्राथाना कये । लऴा तक की कडमा कं सबडन-सबडन दे ली कशी गई शं । मथा-भडिाषय-भमीॊ रक्ष्भीॊ, भातृणाॊ रुऩ-धारयणीॊ। लाडलानरीम तडि: भं कभायी ऩूजन ु शे तु उल्रेस्खत शै फक नल-दगाास्त्भकाॊ वाषात ्, कडमाभालाशमाम्भशॊ ॥ ु  उत्तभ कल्ऩ: वात, आठ औय नौ लऴा की कडमा के जगत ्-ऩूज्मे जगद्-लडद्ये, वला-ळत्रक्त-स्लरुत्रऩस्ण। ऩूजन वे उत्तभ कल्ऩ शोता शं । ऩूजाॊ गृशाण कौभारय जगडभातनाभोऽस्तु ते॥  भध्मभ कल्ऩ: ऩाॉि, छ् औय दव लऴा की कडमा उक्त प्राथाना कयक शाथ भं सरए ऩुष्ऩं को कभायी े ु क ऩूजन वे भध्मभ कल्ऩ शोता शं । े क ियणं ऩय यखकय प्रणाभ कये । े
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    24 अक्टू फय 2011 तत ऩद्ळमात ॐ कभामै नभ् भडि वे ऩाद्य, ु गॊ गणऩतमे नभ् ताम्फूरॊ वभऩामासभ। अघ्मा, गडध, दीऩ, लस्त्र-नैलेद्य आफद वे त्रलसधलत ऩूजन गॊ गणऩतमे नभ् दस्षणाॊ वभऩामासभ। कये । बगलान श्रीगणेळ का ऩूजन कयने क ऩद्ळात ् लटु क का े तत ऩद्ळमात वफ कडमाओॊ को ऩुष्ऩ भारा ऩूजन कयं । ऩशनाकय बोजन कयाए। जफ ले बरी प्रकाय वॊतुद्श शो जाएॉ, तफ उनका शाथ भुॉश धुराकय उनक शाथ भं दस्षणा े लटु क ऩूजन कयं : प्रदान कयं औय उडशं प्रणाभ कयं । ॐ लॊ लटु काम नभ् भडि वे बगलान लटु क का ऩूजन कये । त्रलसधलत कभायी ऩूजन ु मथा- कभायी ऩूजन एक सवद्ध प्रमोग शै । वबी प्रकाय की ु ॐ लॊ लटु काम नभ् ऩादमो् ऩाद्यॊ वभऩामासभ। काभनाओॊ की ऩूणता इव ऩूजन द्राया वम्बल शै । ा ॐ लॊ लटु काम नभ् सळयसव अघ्मं वभऩामासभ। ऩूजन शे तु वला प्रथभ वॊकल्ऩ कये । ॐ लॊ लटु काम नभ् गडधाषतॊ वभऩामासभ। मथा: ॐ लॊ लटु काम नभ् ऩुष्ऩॊ वभऩामासभ। ॐ तत ् वत ्। अद्यैतस्म ब्रह्मणोऽफि फद्रतीम प्रशयाधे, श्री ॐ लॊ लटु काम नभ् धूऩॊ घ्राऩमासभ। द्वेत-लायाश-कल्ऩे, जम्फु-द्रीऩे, बयत-खण्डे , अभुक- ॐ लॊ लटु काम नभ् दीऩॊ दळामासभ। ॐ लॊ लटु काम नभ् नैलेद्यॊ वभऩामासभ। प्रदे ळाडतगाते, अभुक ऩुण्म-षेिे, कसरमुगे, कसर-प्रथभ- ॐ लॊ लटु काम नभ् आिभनीमॊ वभऩामासभ। ियणे, अभुक-नाभ-वम्लत्वये , अभुक-भावे, अभुक-ऩषे, ॐ लॊ लटु काम नभ् ताम्फूरॊ वभऩामासभ। अभुक-सतथौ, अभुक-लावये , अभुक-गोिोत्ऩडनो, अभुक- ॐ लॊ लटु काम नभ् दस्षणाॊ वभऩामासभ। नाभ-ळभााऽशॊ (लभााऽशॊ , दावोऽशॊ ला), वलााऩत ् ळास्डत-ऩूलक ा लटु क का ऩूजन कयने क ऩद्ळमात कभायी ऩूजन कयं । े ु भभाबीद्श-सवद्धमे, गणेळ-लटु काफद-वफशताॊ कभायी-ऩूजाॊ ु कभायी ऩूजन: ु करयष्मे। तत ऩद्ळमात कभायी क ऩैय धोकय उवे श्रद्धा ऩूलक अऩने वम्भुख ु े ा गणेळ ऩूजन कयं : आवन ऩय फैठाए। फपय दोनं शाथ जोड़कय बत्रक्त ऩूलक ा ध्मान कये । गॊ गणऩतमे नभ् भडि वे बगलान ् गणेळ का ऩूजन कये । मथा- मथा: फार-रुऩाॊ ि िैरोक्म-वुडदयीॊ लय-लस्णानीभ ्। गॊ गणऩतमे नभ् ऩादमो् ऩाद्यॊ वभऩामासभ। गॊ गणऩतमे नभ् सळयसव अघ्मं वभऩामासभ। नानारॊकाय-नम्राॊगीॊ, बद्र-त्रलद्या-प्रकासळनीभ ्।। िारु-शास्माॊ गॊ गणऩतमे नभ् गडधाषतॊ वभऩामासभ। भशाऽऽनडद-रृदमाॊ सिडतमे ळुबाभ ्।। गॊ गणऩतमे नभ् ऩुष्ऩॊ वभऩामासभ। अथाात ्: फार-स्लरुऩलारी, त्रिरोक-वुडदयी, श्रेद्ष लणालारी, गॊ गणऩतमे नभ् धूऩॊ घ्राऩमासभ। त्रलत्रलध प्रकाय क आबूऴणं वे वुवस्ज्जत शोने वे त्रलनम्र े गॊ गणऩतमे नभ् दीऩॊ दळामासभ। ळयीयलारी, कल्माण-कारयणी त्रलद्या को प्रकट कयनेलारी, गॊ गणऩतमे नभ् नैलेद्यॊ वभऩामासभ। वुडदय शॉ वी शॉ वनेलारी, ऩयभानडद वे मुक्त रृदमलारी गॊ गणऩतमे नभ् आिभनीमॊ वभऩामासभ। कल्माणकारयणी कभायी दे ली का भं ध्मान कयता शूॉ। ु
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    25 अक्टू फय 2011 ध्मान कयने क फाद इव भडि को श्रद्धाऩूलक ऩढ़कय े ा लनदगाा ु ि भातङ्गी भतङ्गभुसनऩूस्जता ॥७॥ आलाशन कये - ब्राह्मी भाशे द्वयी िैडद्री कौभायी लैष्णली तथा । ॐ भडिाषय भमीॊ रक्ष्भीॊ, भातृणाॊ रुऩ-धारयणीभ ्। िाभुण्डा िैल लायाशी रक्ष्भीद्ळ ऩुरुऴाकृ सत् ॥८॥ नल-दगाास्त्भकाॊ वाषात,् कडमाभालाशमाम्मशभ ्॥ ु त्रलभरोत्कत्रऴणी ा साना फक्रमा सनत्मा ि फुत्रद्धदा । फशुरा फशुरप्रेभा वलालाशन लाशना ॥९॥ अथाात ्: भडिाषयं वे वॊमुक्ता, रक्ष्भी-स्लरुऩा, भातृकाओॊ का सनळुम्बळुम्बशननी भफशऴावुयभफदा नी । रुऩ धायण कयने लारी, वाषात ् नल-दगाा-स्लरुऩा कडमा दे ली ु भधुकटबशडिी ै ि िण्डभुण्डत्रलनासळनी ॥१०॥ का भं आलाशन कयता शूॉ। वलाावुयत्रलनाळा ि वलादानलघासतनी । आलाशन कयने क फाद, वम्भुख उऩस्स्थत कभायी का ऩाद्य, े ु वलाळास्त्रभमी वत्मा वलाास्त्रधारयणी तथा ॥११॥ अघ्मा, गडधाषत ्, ऩुष्ऩ, धूऩ, दीऩ, नैलेद्य, आिभन, ताम्फूर एलॊ अनेकळस्त्रशस्ता ि अनेकास्त्रस्म धारयणी । दस्षणा आफद उऩिायं वे ऩूजन कये । कभायी ु िैककडमा ि कळोयी ै मुलती मसत् ॥१२॥ कभायी का ऩूजन कयने क फाद सनम्न भडि ऩढ़ते शुए प्रणाभ ु े अप्रौढा िैल प्रौढा ि लृद्धभाता फरप्रदा । कये - भशोदयी भुक्तकळी े घोयरूऩा भशाफरा ॥१३॥ जगद्-लडद्ये, जगत ्-ऩूज्मे, वला-ळत्रक्त-स्लरुत्रऩस्ण। अस्ग्नज्लारा यौद्रभुखी कारयात्रिस्तऩस्स्लनी । ऩूजाॊ गृशाण कौभारय जगडभातनाभोऽस्तु ते॥ नायामणी बद्रकारी त्रलष्णुभामा जरोदयी ॥१४॥ अथाात ्: शे त्रलद्व-लडद्ये, वॊवाय-ऩूज्मे, वला-ळत्रक्त-स्लरुऩे सळलदती ू कयारी ि अनडता ऩयभेद्वयी । कौभारय दे त्रल, भेयी ऩूजा स्लीकय करयए। शे जगदम्फ, कात्मामनी ि वात्रलिी प्रत्मषा ब्रह्मलाफदनी ॥१५॥ आऩको नभस्काय। कभायी-ऩूजा क फाद श्रीदगाा अद्शोत्तय ु े ु म इदॊ प्रऩठे स्डनत्मॊ दगाानाभळताद्शकभ ् ु । ळतनाभ स्तोि का ऩाठ कये । नावाध्मॊ त्रलद्यते दे त्रल त्रिऴु रोकऴु े ऩालासत ॥१६॥ ॥दगााद्शोत्तयळतनाभस्तोिॊ (त्रलद्ववायतडि )॥ ु धनॊ धाडमॊ वुतॊ जामाॊ शमॊ शस्स्तनभेल ि । ईद्वय उलाि: ितुलगं ा तथा िाडते रबेडभुत्रक्त ॊ ि ळाद्वतीभ ् ॥१७॥ कभायीॊ ु ऩूजसमत्ला तु ध्मात्ला दे लीॊ वुयेद्वयीभ ् । ळतनाभ प्रलक्ष्मासभ ळृणुष्ल कभरानने । ऩूजमेत ् ऩयमा बक्त्मा ऩठे डनाभळताद्शकभ ् ॥१८॥ मस्म प्रवादभािेण दगाा ु प्रीता बलेत ् वती ॥१॥ तस्म सवत्रद्धबालेद् दे त्रल वलै् वुयलयै यत्रऩ । ॐ वती वाध्ली बलप्रीता बलानी बलभोिनी । याजानो दावताॊ मास्डत याज्मसश्रमभलाप्नुमात ् ॥१९॥ आमाा दगाा ु जमा िाद्या त्रिनेिा ळूरधारयणी ॥२॥ गोयोिनारक्तककङ्कभेल ु ु सवडधूयकऩूयभधुिमेण ा । त्रऩनाकधारयणी सििा िण्डघण्टा भशातऩा् । त्रलसरख्ममडिॊ त्रलसधनात्रलसधसो बलेत्वदाधायमतेऩुयारय्॥२०॥ भनो फुत्रद्धयशॊ काया सित्तरूऩा सिता सिसत् ॥३॥ बौभालास्मासनळाभग्रे िडद्रे ळतसबऴाॊ गते । वलाभडिभमी वत्ता वत्मानडद स्लरूत्रऩणी । त्रलसरख्म प्रऩठे त ् स्तोिॊ व बलेत ् वॊऩदाॊ ऩदभ ् ॥२१॥ अनडता बात्रलनी बाव्मा बव्माबव्मा वदागसत् ॥४॥ ॥इसत श्री त्रलद्ववायतडिे दगााद्शोत्तयळतनाभस्तोिॊ वभाद्ऱभ ्॥ ु ळाम्बली दे लभाता ि सिडता यत्नत्रप्रमा वदा । वलात्रलद्या दषकडमा दषमसत्रलनासळनी ॥५॥ त्रलळेऴ्- उऩमुक्त त्रलसध वे ‘कभायी ऩूजा’ भाव भं एक फाय ा ु अऩणाानेकलणाा ि ऩाटरा ऩाटरालती । कयना त्रलळेऴ राबदामक शोता शं । कभारयमाॉ त्रलऴभ-वॊख्मक ु ऩट्टाम्फय ऩयीधाना करभछजीययस्छजनी ॥६॥ 1, 3, 5, 7.... शोनी िाफशए। अभेमत्रलक्रभा क्रया ु वुडदयी वुयवुडदयी ।
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    26 अक्टू फय 2011 भाता क 52 ळत्रक्त ऩीठ े  सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी दष प्रजाऩसत की कई ऩुत्रिमाॊ थी। वबी ऩुत्रिमाॊ षभता यखते थे। ले वती क प्रेभ भं खो गए, फेवुध शो े गुणलती थीॊ ऩयॊ तु वती दष की वबी ऩुत्रिमं भं वफवे गए। अरौफकक थीॊ। इव सरमे वतीने फाल्म अलस्था भं शी कई बगलान सळल ने उडभत फक बाॊसत वती क जरे े ऐवे अरौफकक आद्ळमा िसरत कयने लारे कामा कय फदखाए शुए ळयीय को कधे ऩय यख ले वबी फदळाओॊ भं भ्रभण ॊ थे, स्जडशं दे खकय दष को बी आद्ळमा शोता था। कयने रगे। वृत्रद्श व्माकर ु शो उठी बमानक वॊकट जफ वती त्रललाश मोग्म शोगई, तो वती का त्रललाश उऩस्स्थत दे खकय वृत्रद्श क ऩारक बगलान त्रलष्णु आगे े बगलान सळल क वाथ कय फदमा। वती कराळ भं जाकय े ै फढ़े । उडशं ने बगलान सळल फक फेवुधी भं अऩने िक्र वे बगलान सळल क वाथ यशने रगीॊ। बगलान सळल क दष े े वती क एक-एक अॊग को काट-काट कय सगयाने रगे। े क दाभाद थे, फकतु एक ऐवी घटना घटीत शोगई स्जवक े ॊ े धयती ऩय इक्मालन स्थानं भं वती क अॊग कट-कटकय े कायण दष क ह्रदम भं बगलान सळल क प्रसत फैय औय े े सगये । जफ वती क वाये अॊग कट कय सगय गए, तो े त्रलयोध बाल ऩैदा शो गमा। बगलान सळल क प्रसत फैय औय े बगलान सळल ऩुन् अऩने आऩ भं लाऩव आए। फपय ऩुन् त्रलयोध बाल ऩैदा शो गमा। वृत्रद्श क वाये कामा िरने रगे। े एक फाय वती क त्रऩता ने फशोत फडे मस का े धयती ऩय स्जन इक्मालन स्थानं भं वती क अॊग े आमोजन फकमा शं । वभस्त दे लता औय दे लाॊगनाएॊ उवी कट-कटकय सगये थे, ले शी स्थान आज ळत्रक्त ऩीठ के मस भं वस्म्भसरत शो यशे थे। रेफकन दष ने सळलजी औय स्थान भाने जाते शं । आज बी उन स्थानं भं वती का वती को नशीॊ फुरामा था। रेफकन दे ली वती ने सळलजी वे ऩूजन शोता शं , उऩावना शोती शं । अनुयोध फकमा क ले अऩने त्रऩता क मशाॊ शोने लारे मस े े त्रलसबडन ळास्त्रो एलॊ ऩुयाणं भं ळत्रक्त ऩीठं फक वॊख्मा के क अलवय ऩय जाना िाशती शं । बगलान सळल क भना े े लणान भं सबडनता शं । कयने क फाद बी वती जी क अनुयोध क कायण सळल ने े े े तॊििूड़ा भस्ण भं 52 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं । उडशं ऩीशय जाने की अनुभसत दे दी। श्रीभद्दे लीबागलत भं 108 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा ऩीशय जाने ऩय घय भं वतीवे फकवी ने बी शं । प्रेभऩूलक लातााराऩ नशीॊ फकमा। कछ दे य औय दषने बाॊसत ा ु बाॊसत वे सळलजी का अऩभान फकमा स्जस्वे दखी शोकय दे ली गीता भं 72 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं । ु वतीजी अस्ग्नकड भं कद गई मश वभािाय ुॊ ू बगलान सळल दे लीऩुयाण भं 51 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं । क कानं भं बी ऩड़ा। ले प्रिॊड आॊधी की बाॊसत कनखर े  कासरकाऩुयाण भं 26 ळत्रक्तऩीठं का उल्रेख फकमा शं । जा ऩशुॊिे। वती क जरे शुए ळयीय को दे खकय बगलान े  सळलिरयि भं 51 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं । सळल ने अऩने आऩको बूर गए। वती क प्रेभ औय उनकी े  दगाा ळद्ऱवती भं 52 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा ु बत्रक्त ने ळॊकय क भन को व्माकर कय फदमा। उन ळॊकय े ु शं । क भन को व्माकर कय फदमा स्जडशंने काभ ऩय बी े ु  दे ली क भुख्म अॊगं-प्रत्मॊगं फक गणना भं प्रभुख 51 ळत्रक्त े त्रलजम प्राद्ऱ फक थी औय जो वायी वृत्रद्श को नद्श कयने की ऩीठ भाने जाते शं ।
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    27 अक्टू फय 2011 वाधायत: 6.त्रिऩुयभासरनी (जारॊधय) 51 ळत्रक्त ऩीठ भाने जाते शं । तॊििूड़ाभस्ण भं रगबग 52 ळत्रक्त ऩॊजाफ क जारॊधय भं छालनी क सनकट दे ली तराफ क े े े ऩीठं क फाये भं फतामा गमा शै । प्रस्तुत शै तॊििूड़ाभस्ण की े फकनाये स्स्थत शं भाॉ त्रिऩुयभासरनी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का तासरका। फामाॉ लष (स्तन) सगया था। इवकी ळत्रक्त को त्रिऩुयभासरनी कशा जाता शं औय बैयल को बीऴण कशा 1.फशॊ गराज जाता शं । कयािी वे थोडी दय उत्तय ऩूला भं ू फशॊ गुरा मा फशॊ गराज 7.जमदगाा (लैद्यनाथ) ु ळत्रक्तऩीठ स्स्थत शं , मशाॉ भाता का ब्रह्मयॊ ध (सवय) सगया था। झायखॊड क दे लघय भं स्स्थत लैद्यनाथधाभ भं स्स्थत शं भाॉ े इवकी ळत्रक्त को कोटयी मा कोट्टलीळा कशा जाता शं औय जमदगाा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का रृदम सगया था। इवकी ु बैयल को बीभरोिन कशा जाता शं । ळत्रक्त को जम दगाा कशा जाता शं औय बैयल को लैद्यनाथ ु 2.ळकयये ा (कयलीय) कशा जाता शं । ऩाफकस्तान भं कयािी वुक्कय स्टे ळन क सनकट स्स्थत शं े 8.भशाभामा (नेऩार) ळकयये ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की आॉख सगयी थी। इवकी ा नेऩार भं ऩळुऩसतनाथ भॊफदय क सनकट स्स्थत शै गुजये द्वयी े ळत्रक्त को भफशऴावुयभफदा नी कशा जाता शं औय बैयल को भॊफदय जशाॉ स्स्थत शं भाॉ भशसळया ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता के क्रोसधळ कशा जाता शं । दोनं घुटने (जानु) सगये थे। इवकी ळत्रक्त को भशसळया 3.वुगॊध- वुनॊदा (भशाभामा) कशा जाता शं औय बैयल को कऩारी कशा जाता शं । फाॊग्रादे ळ भं सळकायऩुय, फरयवर वे थोडी दय वंध नदी क ू े फकनाये स्स्थत शं भाॉ वुगॊध ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की 9.दाषामणी (भानव) नासवका सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को वुनॊदा कशा जाता शं सतब्फत स्स्थत कराळ भानवयोलय क भानवा क सनकट ै े े औय बैयल को त्र्मॊफक कशा जाता शं । एक ऩाऴाण सळरा ऩय स्स्थत शं भाॉ दाषामणी ळत्रक्तऩीठ, 4.भशाभामा (कश्भीय) मशाॉ भाता का दामाॉ शाथ सगया था। इवकी ळत्रक्त को दाषामनी कशा जाता शं औय बैयल अभय कशा जाता शं । बायत क कश्भीय भं ऩशरगाॉल क सनकट स्स्थत शं भाॉ े े भशाभामा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का गरा सगया था। इवकी 10. त्रलयजा (उड़ीवा) ळत्रक्त को भशाभामा कशा जाता शं औय बैयल को बायतीम प्रदे ळ उड़ीवा क त्रलयाज भं उत्कर भं स्स्थत शं े त्रिवॊध्मेद्वय कशा जाता शं । भाॉ त्रलयजा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ ऩय भाता की नासब सगयी थी। 5.ज्लाराभुखी- सवत्रद्धदा (अॊत्रफका) इवकी ळत्रक्त को त्रलभरा कशा जाता शं औय बैयल को जगडनाथ कशा जाता शं । बायत क फशभािर प्रदे ळ क काॊगड़ा भं स्स्थत शं भाॉ े े ज्लाराभुखी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की जीब सगयी थी। 11.गॊडकी इवकी ळत्रक्त को सवत्रद्धदा (अॊत्रफका) कशा जाता शं औय नेऩार भं गॊडकी नदी क तट ऩय ऩोखया नाभक स्थान ऩय े बैयल को उडभत्त कशा जाता शं । स्स्थत भुत्रक्तनाथ भॊफदय भं स्स्थत शं भाॉ गॊडकी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का भस्तक मा गॊडस्थर अथाात कनऩटी सगयी
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    28 अक्टू फय 2011 थी। इवकी ळत्रक्त को गण्डकी िण्डी कशा जाता शं औय था। इवकी ळत्रक्त को भ्राभयी कशा जाता शं औय बैयल को बैयल िक्रऩास्ण कशा जाता शं । अॊफय औय बैयलेद्वय कशा जाता शं । 12.फशु रा 17.काभाख्मा (काभसगरय) बायतीम प्रदे ळ ऩस्द्ळभ फॊगार वे लधाभान स्जरा वे थोडी बायतीम प्रदे ळ अवभ क गुलाशाटी स्जरे क काभसगरय षेि े े दय कटु आ कतुग्राभ क सनकट अजेम नदी तट ऩय स्स्थत ू े े भं स्स्थत नीराॊिर ऩलात क काभाख्मा स्थान ऩय स्स्थत े फाशुर स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ फशुरा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता शं भाॉ काभाख्मा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का मोसन बाग का फामाॉ शाथ सगया था। इवकी ळत्रक्त को दे ली फाशुरा सगया था। इवकी ळत्रक्त को काभाख्मा कशा जाता शं औय कशा जाता शं औय बैयल को बीरुक कशा जाता शं । बैयल को उभानॊद कशा जाता शं । 13.भाॊगल्म िॊफद्रका 18.रसरता (प्रमाग) बायतीम प्रदे ळ ऩस्द्ळभ फॊगार भं लधाभान स्जरे क सनकट े बायतीम याज्म उत्तयप्रदे ळ क इराशफाद ळशय (प्रमाग) क े े गुस्कय स्टे ळन वे उज्जमनी नाभक स्थान ऩय स्स्थत शं ु वॊगभ तट ऩय स्स्थत शं भाॉ रसरता ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता भाॉ भॊगर िॊफद्रका ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की दामीॊ कराई की शाथ की अॉगुरी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को रसरता सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को भॊगर िॊफद्रका कशा जाता शं कशा जाता शं औय बैयल को बल कशा जाता शं । औय बैयल को कत्रऩराॊफय कशा जाता शं । 19.जमॊती 14.त्रिऩुय वुॊदयी (त्रिऩुया) फाॊग्रादे ळ क सवल्शै ट स्जरे क जमॊतीमा ऩयगना क े े े बायत प्रदे ळ त्रिऩुया क उदयऩुय क सनकट याधाफकळोयऩुय े े बोयबोग गाॉल काराजोय क खावी ऩलात ऩय स्स्थत शं भाॉ े गाॉल क भाताफाढ़ी ऩलात सळखय ऩय स्स्थत शं भाॉ त्रिऩुय े जमॊती ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की फामीॊ जॊघा सगयी थी। वुॊदयी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का दामाॉ ऩैय सगया था। इवकी इवकी ळत्रक्त को जमॊती कशा जाता शं औय बैयल को ळत्रक्त को त्रिऩुय वुॊदयी कशा जाता शं औय बैयल को त्रिऩुयेळ क्रभदीद्वय कशा जाता शं । कशा जाता शं । 20.मुगाद्या (बूतधािी) 15.बलानी (िट्टर) ऩस्द्ळभ फॊगार क लधाभान स्जरे क खीयग्राभ स्स्थत े े फाॊग्रादे ळ भं सिट्टागंग (िटगाॉल) स्जरा क वीताकड े ुॊ जुगाड्मा (मुगाद्या) स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ बूतधािी स्टे ळन क सनकट िॊद्रनाथ ऩलात सळखय छिार (िट्टर मा े ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क दाएॉ ऩैय का अॉगूठा सगया था। े िशर) ऩय स्स्थत शं भाॉ बलानी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की इवकी ळत्रक्त को बूतधािी कशा जाता शं औय बैयल को दामीॊ बुजा सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को बलानी कशा जाता षीय खॊडक कशा जाता शं । शं औय बैयल को िॊद्रळेखय कशा जाता शं । 21.कासरका (कारीऩीठ) 16.भ्राभयी (त्रिस्रोता) कोरकाता के कारीघाट ऩय स्स्थत शं भाॉ कासरका बायतीम प्रदे ळ ऩस्द्ळभ फॊगार क जरऩाइगुड़ी क फोडा े े ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क फाएॉ ऩैय का अॉगूठा सगया था। े भॊडर क वारफाढ़ी ग्राभ स्स्थत त्रिस्रोत स्थान ऩय स्स्थत े इवकी ळत्रक्त को कासरका कशा जाता शं औय बैयल को शं भाॉ भ्राभयी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का फामाॉ ऩैय सगया नकळीर कशा जाता शं । ु
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    29 अक्टू फय 2011 22.त्रलभरा- फकयीट (बुलनेळी) 28.दे लगबाा (काॊिी) ऩस्द्ळभ फॊगार क भुळॉदाफाद स्जरा क रारफाग कोटा योड े े ऩस्द्ळभ फॊगार क फीयबुभ स्जरा क फोरायऩुय स्टे ळन क े े े स्टे ळन क फकयीटकोण ग्राभ क सनकट स्स्थत शं भाॉ े े उत्तय ऩूला स्स्थत कोऩई नदी तट ऩय स्स्थत शं भाॉ दे लगबाा त्रलभरा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का भुकट सगया था। इवकी ु ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की अस्स्थ सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को ळत्रक्त को त्रलभरा कशा जाता शं औय बैयल को वॊलत्ता कशा दे लगबाा कशा जाता शं औय बैयल को रुरु कशा जाता शं । जाता शं । 23.त्रलळाराषी (लायाणवी) 29.दे ली कारी (कारभाधल) उत्तयप्रदे ळ क काळी भं भस्णकस्णाक घाट ऩय स्स्थत शं भाॉ े भध्मप्रदे ळ क अभयकटक क कारभाधल स्स्थत ळोन नदी े ॊ े त्रलळाराषी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क कान क भस्णजड़ीत े े तट क ऩाव स्स्थत शं भाॉ कारी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का े कडर सगये थे। इवकी ळत्रक्त को त्रलळाराषी भस्णकणॉ कशा ुॊ फामाॉ सनतॊफ सगया था जशाॉ एक गुपा शै । इवकी ळत्रक्त को जाता शं औय बैयल को कार बैयल कशा जाता शं । कारी कशा जाता शं औय बैयल को असवताॊग कशा जाता शं । 24.वलााणी (कडमाश्रभ) तसभर नाडु क कडमाश्रभ भं बद्रकारी भॊफदय (कभायी े ु 30.नभादा (ळोणदे ळ-ळोणाषी) भॊफदय) भं स्स्थत शं भाॉ वलााणी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का भध्मप्रदे ळ क अभयकटक स्स्थत नभादा क उद्गभ ऩय े ॊ े ऩीठ अथाात ऩृद्ष बाग सगया था। इवकी ळत्रक्त को वलााणी ळोणदे ळ स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ नभादा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ कशा जाता शं औय बैयल को सनसभऴ कशा जाता शं । भाता का दामाॉ सनतॊफ सगया था। इवकी ळत्रक्त को नभादा कशा जाता शं औय बैयल को बद्रवेन कशा जाता शं । 25.वात्रलिी (करुषेि) ु शरयमाणा क करुषेि भं स्स्थत शं भाॉ वात्रलिी ळत्रक्तऩीठ, े ु 31.सळलानी (याभसगरय) मशाॉ भाता की एड़ी (गुल्प) सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को उत्तयप्रदे ळ क झाॉवी-भस्णकऩुय ये रले स्टे ळन सििकट क े ू े वात्रलिी कशा जाता शं औय बैयल को स्थाणु कशा जाता शं । ऩाव याभसगरय स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ सळलानी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का दामाॉ लष सगया था। इवकी ळत्रक्त को 26. गामिी (भस्णदे त्रलक) सळलानी कशा जाता शं औय बैयल को िॊड कशा जाता शं । अजभेय क सनकट ऩुष्कय क भस्णफडध स्थान क गामिी े े े ऩलात ऩय स्स्थत शं भाॉ गामिी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क दो े 32.उभा (लृॊदालन) भस्णफॊध सगये थे। इवकी ळत्रक्त को गामिी कशा जाता शं उत्तयप्रदे ळ क भथुया क सनकट लृॊदालन क बूतेद्वय स्थान े े े औय बैयल को वलाानॊद कशा जाता शं । ऩय स्स्थत शं भाॉ उभा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क गुच्छ कशा े जाता शं औय िूड़ाभस्ण सगये थे। इवकी ळत्रक्त को उभा 27.भशारक्ष्भी (श्री ळैर) कशा जाता शं औय बैयल को बूतेळ कशा जाता शं । फाॊग्रादे ळ क सवल्शै ट स्जरे क उत्तय-ऩूला भं जैनऩुय गाॉल े े फकवी बी प्रकाय की वभस्मा के क ऩाव ळैर नाभक स्थान ऩय े स्स्थत शं भाॉ भशारक्ष्भी वभाधान शे तु वॊऩक कयं । ा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का गरा (ग्रीला) सगया था। इवकी ळत्रक्त को भशारक्ष्भी कशा जाता शं औय बैयल को GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 ळम्फयानॊद कशा जाता शं ।
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    30 अक्टू फय 2011 33.नायामणी (ळुसि) कऩासरनी (बीभरूऩ) कशा जाता शं औय बैयल को ळलाानॊद तसभरनाडु के कडमाकभायी-सतरुलनॊतऩुयभ ु भागा ऩय कशा जाता शं । ळुसितीथाभ सळल भॊफदय शै , जशाॉ ऩय स्स्थत शं भाॉ नायामणी 38.प्रबाव- िॊद्रबागा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की ऊऩयी दॊ त (ऊध्लादॊत) सगये थे। गुजयात क जूनागढ़ स्जरे भं स्स्थत वोभनाथ भॊफदय क े े इवकी ळत्रक्त को नायामणी कशा जाता शं औय बैयल को सनकट लेयालर स्टे ळन क सनकट प्रबाव षेि भं स्स्थत शं े वॊशाय कशा जाता शं । भाॉ िॊद्रबागा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का उदय सगया था। 34.लायाशी (ऩॊिवागय) इवकी ळत्रक्त को िॊद्रबागा कशा जाता शं औय बैयल को शरयद्राय क वभीऩ ऩॊिकड भशावागय ऩय स्स्थत शं भाॉ े ुॊ लक्रतुॊड कशा जाता शं । लायाशी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की सनिरे दॊ त (अधोदॊ त) 39.अलॊसत (बैयलऩलात) सगये थे। इवकी ळत्रक्त को लयाशी कशा जाता शं औय बैयल भध्मप्रदे ळ क उज्जैन नगय भं सळप्रा नदी क तट क ऩाव े े े को भशारुद्र कशा जाता शं । (नोट: फशभािर प्रदे ळ के बैयल ऩलात ऩय स्स्थत शं भाॉ अलॊसत ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता काॊगड़ा भं बी दे ली को लायाशी ळत्रक्तऩीठ क रुऩ भं ऩूजा े क ओद्ष सगये थे। इवकी ळत्रक्त को अलॊसत कशा जाता शं े जाता शं ।) औय बैयल को रम्फकणा कशा जाता शं । 35.अऩणाा (कयतोमातट) 40.भ्राभयी (जनस्थान) फाॊग्रादे ळ क ळेयऩुय फागुया स्टे ळन वे थोडी दय बलानीऩुय े ू भशायाद्स क नासवक नगय स्स्थत गोदालयी नदी घाटी े गाॉल क ऩाय कयतोमा तट स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ अऩणाा े स्स्थत जनस्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ भ्राभयी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की ऩामर (तल्ऩ) सगयी थी। इवकी भाता की ठोड़ी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को भ्राभयी कशा ळत्रक्त को अऩाण कशा जाता शं औय बैयल को लाभन कशा जाता शं औय बैयल शै त्रलकृ ताष। जाता शं । 41.त्रलद्वभात्रिका (वलाळैर स्थान) 36.श्रीवुॊदयी (श्रीऩलात) आॊध्रप्रदे ळ क याजाभुॊद्री षेि स्स्थत कोफटसरॊगेद्वय भॊफदय क े े कश्भीय क रद्दाख षेि क ऩलात ऩय स्स्थत शं भाॉ श्री े े ऩाव वलाळैर स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ यफकनी ळत्रक्तऩीठ, वुॊदयी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क दाएॉ ऩैय की ऩामर सगयी े मशाॉ भाता क लाभ गॊड (गार) सगये थे। इवकी ळत्रक्त को े थी। इवकी ळत्रक्त को श्रीवुॊदयी कशा जाता शं औय बैयल को याफकनी कशा जाता शं औय बैयल को लत्वनाबभ कशते शं ' वुॊदयानॊद कशा जाता शं । (नोट: दवयी भाडमता अनुवाय ू 42.त्रलद्वेद्वयी (गोदालयीतीय) आॊध्रप्रदे ळ क कनूर स्जरे क श्रीळैरभ स्थान ऩय दस्षण े ु ा े गोदालयी नदी क तट ऩय कब्फुयरा कोफट सतथा क सनकट े ु े गुल्प अथाात दाएॉ ऩैय की एड़ी सगयी थी। ) स्थर ऩय स्स्थत शं भाॉ त्रलद्वेद्वयी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ मशाॉ भाता क दस्षण गॊड सगये थे। इवकी ळत्रक्त को त्रलद्वेद्वयी कशा े 37.कऩासरनी (त्रलबाऴ) जाता शं औय बैयल को दॊ डऩास्ण कशा जाता शं । ऩस्द्ळभ फॊगार क स्जरा ऩूलॉ भेफदनीऩुय क ऩाव ताभरुक े े यासळ यत्न एलॊ उऩयत्न धायण कयने शे तु वॊऩक कयं । ा स्स्थत त्रलबाऴ स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ कऩासरनी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता की फामीॊ एड़ी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
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    31 अक्टू फय 2011 43.कभायी (यत्नालरी) ु (भन:) सगया था। इवकी ळत्रक्त को भफशऴभफदा नी कशा फॊगार क शुगरी स्जरे क खानाकर कृ ष्णानगय भागा ऩय े े ु जाता शं औय बैयल को लक्रनाथ कशा जाता शं । यत्नालरी स्स्थत यत्नाकय नदी क तट ऩय स्स्थत शं भाॉ े 48.मळोये द्वयी (मळोय) कभायी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का दामाॉ स्कध सगया था। ु ॊ फाॊग्रादे ळ क खुरना स्जरा क ईद्वयीऩुय क मळोय स्थान े े े इवकी ळत्रक्त को कभायी कशा जाता शं औय बैयल को सळल ु ऩय स्स्थत शं भाॉ मळोये द्वयी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क शाथ े कशा जाता शं । औय ऩैय सगये (ऩास्णऩद्म) थे। इवकी ळत्रक्त को मळोये द्वयी 44.उभा-भशादे ली (सभसथरा) कशा जाता शं औय बैयल को िण्ड कशा जाता शं । बायत-नेऩार वीभा ऩय जनकऩुय ये रले स्टे ळन क सनकट े 49.पल्रया (अट्टाशाव) ु सभसथरा भं स्स्थत शं भाॉ उभा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का ऩस्द्ळभ फॊगरा क राबऩुय स्टे ळन वे दो फकभी दय े ू फामाॉ स्कध सगया था। इवकी ळत्रक्त को उभा कशा जाता शं ॊ अट्टशाव स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ पल्रया ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ ु औय बैयल को भशोदय कशा जाता शं । भाता क ओद्ष सगये थे। इवकी ळत्रक्त को पल्रया कशा े ु 45.कासरका तायाऩीठ (नरशाटी) जाता शं औय बैयल को त्रलद्वेळ कशा जाता शं । ऩस्द्ळभ फॊगार क लीयबूभ स्जरे क नरशाफट स्टे ळन क े े े 50.नॊफदनी (नॊदीऩूय) सनकट नरशाटी भं स्स्थत शं भाॉ कासरका दे ली ळत्रक्तऩीठ, ऩस्द्ळभ फॊगार क लीयबूभ स्जरे क वंसथमा ये रले स्टे ळन े े मशाॉ भाता क ऩैय की शड्डी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को े नॊदीऩुय स्स्थत िायदीलायी भं फयगद क लृष क वभीऩ े े कासरका दे ली कशा जाता शं औय बैयल को मोगेळ कशा स्स्थत शं भाॉ नॊफदनी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का गरे का शाय जाता शं । सगया था। इवकी ळत्रक्त को नॊफदनी कशा जाता शं औय बैयल को नॊफदकद्वय कशा जाता शं । े 46.जमदगाा (कणााट) ु 51.इॊ द्राषी (श्रीरॊका) कनााट भं जमदगाा नाभ वे प्रसवद्ध स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ ु श्रीरॊका भं त्रिॊकोभारी भं स्स्थत शं भाॉ इॊ द्राषी ळत्रक्तऩीठ, जमदगाा ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ ु भाता क दोनं कान सगये थे। े मशाॉ भाता की ऩामर सगयी थी (त्रिॊकोभारी भं प्रसवद्ध इवकी ळत्रक्त को जमदगाा कशा जाता शं औय बैयल को ु त्रिकोणेद्वय भॊफदय क सनकट)। इवकी ळत्रक्त को इॊ द्राषी े असबरु कशा जाता शं । कशा जाता शं औय बैयल को याषवेद्वय कशा जाता शं । 47.भफशऴभफदा नी (लक्रद्वय) े 52.त्रलयाट- अॊत्रफका ऩस्द्ळभ फॊगार क लीयबूभ स्जरे क दफयाजऩुय स्टे ळन वे े े ु याजस्थान भं जमऩुय वे थोडी दय उत्तय भं लैयाट गाॊल भं ू वात फकभी दय लक्रद्वय भं ऩाऩशय नदी क तट ऩय स्स्थत ू े े स्स्थत शं भाॉ अॊत्रफका ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता क ऩैय की े शं भाॉ भफशऴभफदा नी ळत्रक्तऩीठ, मशाॉ भाता का भ्रूभध्म अॉगुरी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को अॊत्रफका कशा जाता शं औय बैयल को अभृत कशा जाता शं ।
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    32 अक्टू फय 2011 ॥दगाा िारीवा॥ ु नभो नभो दगे वुख कयनी। ु भफशभा असभत नजात फखानी॥१४॥ ध्माले तुम्शं जो नय भन राई। नभो नभो दगे द्ख शयनी ॥१॥ ु ु भातॊगी अरु धूभालसत भाता। ु जडभ-भयण ताकौ छफट जाई॥२८॥ सनयॊ काय शै ज्मोसत तुम्शायी। बुलनेद्वयी फगरा वुख दाता॥१५॥ जोगी वुय भुसन कशत ऩुकायी। सतशूॉ रोक परी उस्जमायी ॥२॥ ै मोगन शो त्रफन ळत्रक्त तुम्शायी॥२९॥ श्री बैयल ताया जग तारयणी। ळसळ रराट भुख भशात्रलळारा। ळॊकय आिायज तऩ कीनो। सछडनबारबल द्खसनलारयणी॥१६॥ ु नेि रार बृकफट त्रलकयारा ॥३॥ ु काभअरु क्रोधजीसत वफ रीनो॥३०॥ कशरय लाशन वोश बलानी। े रूऩ भातु को असधक वुशाले। राॊगुय लीय िरत अगलानी॥१७॥ सनसळफदन ध्मान धयो ळॊकय को। दयळकयत जन असत वुखऩाले ॥४॥ कय भं खप्ऩय खड्ग त्रलयाजै। काशुकार नफशॊ वुसभयो तुभको॥३१॥ तुभ वॊवाय ळत्रक्त रै कीना। जाको दे ख कार डय बाजै॥१८॥ ळत्रक्त रूऩ का भयभ न ऩामो। ऩारन शे तु अडन धन दीना ॥५॥ वोशै अस्त्र औय त्रिळूरा। ळत्रक्त गई तफ भन ऩसछतामो॥३२॥ अडनऩूणाा शुई जग ऩारा। जाते उठत ळिु फशम ळूरा॥१९॥ ळयणागत शुई कीसता फखानी। तुभ शी आफद वुडदयी फारा ॥६॥ नगयकोट भं तुम्शीॊ त्रलयाजत। जम जम जम जगदम्फबलानी॥३३॥ प्ररमकार वफ नाळन शायी। सतशुॉरोक भं डॊ का फाजत॥२०॥ बई प्रवडन आफद जगदम्फा। तुभ गौयी सळलळॊकय प्मायी ॥७॥ दई ळत्रक्त नफशॊ कीन त्रलरम्फा॥३४॥ ळुम्ब सनळुम्ब दानल तुभ भाये । सळल मोगी तुम्शये गुण गालं। भोको भातु कद्श असत घेयो। यक्तफीज ळॊखन वॊशाये ॥२१॥ ब्रह्मा त्रलष्णु तुम्शं सनत ध्मालं ॥८॥ तुभ त्रफन कौन शयै द्ख भेयो॥३५॥ ु भफशऴावुय नृऩ असत असबभानी। रूऩ वयस्लती को तुभ धाया। आळा तृष्णा सनऩट वतालं। जेफश अघ बाय भशी अकरानी॥२२॥ ु दे वुफुत्रद्ध ऋत्रऴ भुसनन उफाया ॥९॥ भोश भदाफदक वफ त्रफनळालं॥३६॥ रूऩ कयार कासरका धाया। धयमो रूऩ नयसवॊश को अम्फा। ळिु नाळ कीजै भशायानी। वेन वफशत तुभ सतफश वॊशाया॥२३॥ ऩयगट बई पाड़कय खम्फा ॥१०॥ वुसभयं इकसित तुम्शं बलानी॥३७॥ ऩयी गाढ़ वडतन ऩय जफ जफ। कयो कृ ऩा शे भातु दमारा। यषा करय प्रह्ऱाद फिामो। बईवशाम भातु तुभ तफ तफ॥२४॥ ऋत्रद्ध-सवत्रद्ध दै कयशु सनशारा।३८॥ फशयण्माष को स्लगा ऩठामो॥११॥ अभयऩुयी अरु फावल रोका। जफ रसग स्जऊ दमा पर ऩाऊ। ॉ ॉ रक्ष्भी रूऩ धयो जग भाशीॊ। तफ भफशभा वफ यशं अळोका॥२५॥ तुम्शयो मळ भं वदा वुनाऊ॥३९॥ ॉ श्री नायामण अॊग वभाशीॊ॥१२॥ ज्लारा भं शै ज्मोसत तुम्शायी। श्री दगाा िारीवा जो कोई गालै। ु षीयसवडधु भं कयत त्रलरावा। तुम्शं वदा ऩूजं नय-नायी॥२६॥ वफ वुख बोग ऩयभऩद ऩालै॥४०॥ दमासवडधु दीजै भन आवा॥१३॥ प्रेभ बत्रक्त वे जो मळ गालं। दोशा: दे लीदाव ळयण सनज जानी। फशॊ गराज भं तुम्शीॊ बलानी। द्ख दारयद्र सनकट नफशॊ आलं॥२७॥ ु कयशु कृ ऩा जगदम्फ बलानी॥
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    33 अक्टू फय 2011 श्रीकृ ष्ण कृ त दे ली स्तुसत नलयाि भं श्रद्धा औय प्रेभऩूलक भशाळत्रक्त बगलती दे ली की ऩूजा-उऩावना कयने वे मश सनगुण स्लरूऩा दे ली ऩृ्ली क वभस्त ा ा े जीलं ऩय दमा कयक स्लमॊ शी वगुणबाल को प्राद्ऱ शोकय ब्रह्मा, त्रलष्णु औय भशे ळ रूऩ वे उत्ऩत्रत्त, ऩारन औय वॊशाय कामा कयती शं । े श्रीकृ ष्ण उलाि त्लभेल वलाजननी भूरप्रकृ सतयीद्वयी। त्लभेलाद्या वृत्रद्शत्रलधौ स्लेच्छमा त्रिगुणास्त्भका॥१॥ कामााथे वगुणा त्लॊ ि लस्तुतो सनगुणा स्लमभ ्। ऩयब्रह्मास्लरूऩा त्लॊ वत्मा सनत्मा वनातनी॥२॥ ा तेज्स्लरूऩा ऩयभा बक्तानुग्रशत्रलग्रशा। वलास्लरूऩा वलेळा वलााधाया ऩयात्ऩय॥३॥ वलाफीजस्लरूऩा ि वलाऩूज्मा सनयाश्रमा। वलासा वलातोबद्रा वलाभॊगरभॊगरा॥४॥ अथाात् आऩ त्रलद्वजननी भूर प्रकृ सत ईद्वयी शो, आऩ वृत्रद्श की उत्ऩत्रत्त क वभम आद्याळत्रक्त क रूऩ भं त्रलयाजभान यशती शो औय े े स्लेच्छा वे त्रिगुणास्त्भका फन जाती शो। मद्यत्रऩ लस्तुत् आऩ स्लमॊ सनगुण शो तथात्रऩ प्रमोजनलळ वगुण शो जाती शो। आऩ ऩयब्रह्म स्लरूऩ, वत्म, सनत्म एलॊ वनातनी शो। ा ऩयभ तेजस्लरूऩ औय बक्तं ऩय अनुग्रश कयने आऩ ळयीय धायण कयती शं। आऩ वलास्लरूऩा, वलेद्वयी, वलााधाय एलॊ ऩयात्ऩय शो। आऩ वलााफीजस्लरूऩ, वलाऩूज्मा एलॊ आश्रमयफशत शो। आऩ वलास, वलाप्रकाय वे भॊगर कयने लारी एलॊ वला भॊगरं फक बी भॊगर शो। ऋग्लेदोक्त दे ली वूक्तभ ् अशसभत्मद्शिास्म वूक्त स्म लागाम्बृणी ऋत्रऴ: वस्च्ित्वुखात्भक: वलागत: ऩयभात्भा दे लता, फद्रतीमामा ऋिो जगती, सळद्शानाॊ त्रिद्शु ऩ ् छडद:, दे लीभाशात्म्म ऩाठे त्रलसनमोग्। ध्मानभ ् सवॊशस्था ळसळळेखया भयकतप्रख्मैद्ळतुसबाबजै: ळङ्खॊ िक्रधनु:ळयाॊद्ळ दधती नेिस्स्त्रसब: ळोसबता। ुा ै आभुक्ताङ्गदशायकङ्कणयणत्काछिीयणडनूऩुया दगाा दगसतशारयणी बलतु नो यत्नोल्रवत्कण्डरा॥ ु ु ा ु दे लीवूक्तभ ् अशॊ रुद्रे सबलावुसबद्ळयाम्मशभाफदत्मैरुत त्रलद्वदे लै्। अशॊ सभिालरुणोबा त्रफबम्माशसभडद्राग्नी अशभसश्र ्लनोबा॥१॥ अशॊ वोभभाशनवॊ त्रफबम्माशॊ त्लद्शायभुत ऩूऴणॊ बगभ ्। अशॊ दधासभ द्रत्रलणॊ शत्रलष्भते वुप्राव्मे मजभानाम वुडलते॥२॥ अशॊ याद्सी वॊगभनी लवूनाॊ सिफकतुऴी प्रथभा मस्समानाभ ्। ताॊ भा दे ला व्मदधु: ऩुरुिा बूरयस्थािाॊ बूय्र्मालेळमडतीभ ्॥३॥ भमावो अडनभत्रत्त मोत्रलऩश्मसत म: प्रास्णसत मईश्रृणोत्मुक्त भ ्। अभडतलो भाॊ तउऩ स्षमस्डत श्रुसधश्रुत श्रत्रद्धलॊ ते लदासभ॥४॥ अशभेल स्लमसभदॊ लदासभ जुद्शॊ दे लेसबरुत भानुऴेसब्। मॊ काभमे तॊ तभुग्रॊ कृ णोसभ तॊ ब्रह्माणॊ तभृत्रऴॊ तॊ वुभेधाभ ्॥५॥ अशॊ रुद्राम धनुया तनोसभ ब्रह्मफद्रऴे ळयले शडतला उ। अशॊ जनाम वभदॊ कृ णोम्मशॊ द्यालाऩृसथलीआत्रललेळ॥६॥ अशॊ वुले त्रऩतयभस्म भूधडभभ मोसनयप्स्लडत: वभुद्रे। ततो त्रल सतद्षे बुलनानु त्रलद्वोताभूॊ द्याॊ लष्भाणोऩ स्ऩळसभ॥७॥ ा अशभेल लात इल प्रलाम्मायबभाणा बुलनासन त्रलद्वा। ऩयो फदला ऩय एना ऩृसथव्मैतालती भफशना वॊफबूल॥८॥
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    34 अक्टू फय 2011 वप्तश्र्लरोकी दगाा ु दगाा आयती ु दे त्रल त्लॊ बक्तवुरबे वलाकामात्रलधासमनी। जम अम्फे गौयी भैमा जम श्माभा गौयी। करौ फश कामासवद्धमथाभुऩामॊ ब्रूफश मित्॥ तुभको सनवफदन ध्मालत शरय ब्रम्शा सळलयी॥१॥ दे ल उलाि: भाॊग सवॊदय त्रलयाजत टीको भृगभदको। ू श्रृणु दे ल प्रलक्ष्मासभ करौ वलेद्शवाधनभ। ् उज्जलर वे दोऊ नैना िडद्रलदन नीको॥२॥ भमा तलैल स्नेशेनाप्मम्फास्तुसत् प्रकाश्मते॥ कनक वभान करेलय यक्ताम्फय याजे। त्रलसनमोग् यक्त ऩुष्ऩ गर भारा कण्ठन ऩय वाजे॥३॥ ॐ अस्म श्री दगाावद्ऱद्ऴोकीस्तोिभडिस्म ु कशरय लाशन याजत खड्ग खप्ऩय धायी। े नायामण ऋत्रऴ् अनुद्शऩछडद्, ् वुय नय भुसन जन वेलत सतनक द्ख शायी॥४॥ े ु श्रीभह्मकारी भशारक्ष्भी भशावयस्लत्मो दे लता्, श्रीदगााप्रीत्मथं वद्ऱद्ऴोकीदगााऩाठे त्रलसनमोग्। ु ु कानन कडर ळोसबत नावाग्रे भोती। ुॊ ॐ सासननाभत्रऩ िेताॊसव दे ली बगलती फशवा। कोफटक िॊद्र फदलाकय याजत वभ ज्मोसत॥५॥ फरादाकृ ष्म भोशाम भशाभामा प्रमच्छसत॥ ळुॊब सनळॊबु त्रलदाये भफशऴावुयधाती। धूम्रत्रलरोिन नैना सनळफदन भदभाती॥६॥ दगे स्भृता शयसव बीसतभळेऴजडतो् ु स्लस्थै् स्भृता भसतभतील ळुबाॊ ददासव। िण्ड भुण्ड वॊशाये ळोस्णत फीज शये । भधु कटब दोउ भाये वुय बमशीन कये ॥७॥ ै दारयद्रमद्खबमशारयस्ण त्लदडमा ु ब्रम्शाणी रुद्राणी तुभ कभरायानी। वलोऩकायकयणाम वदाद्रा सित्ता॥ आगभ सनगभ फखानी तुभ सळल ऩटयानी॥८॥ वलाभॊगरभॊगल्मे सळले वलााथवासधक। ा े ळयण्मे त्र्मम्फक गौरय नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ े िौवॊठ मोसगनी गालत नृत्म कयत बैरुॉ। ळयणागतदीनाताऩरयिाणऩयामणे। फाजत तार भृदॊगा अरु डभरुॉ ॥९॥ वलास्मासताशये दे त्रल नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ तुभ शी जग की भाता तुभ शी शो बयता। वलास्लरूऩे वलेळे वलाळत्रक्तवभस्डलते। बक्तन की द्खशताा वुख वम्ऩत्रत्त कताा॥१०॥ ु बमेभ्मस्त्राफश नो दे त्रल दगे दे त्रल नभोऽस्तुते॥ ु बुजा िाय असत ळोसबत लय भुद्रा धायी। भनलाॊस्च्छत पर ऩाले वेलत नय नायी॥११॥ योगानळोऴानऩशॊ सव तुद्शा रूद्शा तु काभान ् वकरानबीद्शान। ् त्लाभासश्रतानाॊ न त्रलऩडनयाणाॊ त्लाभासश्रता ह्माश्रमताॊ प्रमास्डत॥ किन थार त्रलयाजत अगय कऩुय फात्ती। ॊ श्री भार कतु भं याजत कोफट यतन ज्मोती॥१२॥ े वलााफाधाप्रळभनॊ िैरोक्मस्मास्खरेश्र्ललरय। एलभेल त्लमा कामाभस्मद्रै रयत्रलनाळनभ॥ ् भाॉ अम्फे जी की आयती जो कोई नय गामे। कशत सळलानॊद स्लाभी वुख वॊऩत्रत्त ऩामे॥१३॥ ॥ इसत श्रीवद्ऱद्ऴोकी दगाा वॊऩूणभ ् ॥ ु ा
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    35 अक्टू फय 2011 ॥ सवद्धकस्जकास्तोिभ ् ॥ ुॊ सळल उलाि ऐॊकायी वृत्रद्शरूऩामै ह्रीॊकायी प्रसतऩासरका। ळृणु दे त्रल प्रलक्ष्मासभ कस्जकास्तोिभुत्तभभ। ुॊ ् क्रीॊकायी काभरूत्रऩण्मै फीजरूऩे नभोऽस्तु ते॥३॥ मेन भडिप्रबालेण िण्डीजाऩ् ळुबो बलेत॥१॥ ् िाभुण्डा िण्डघाती ि मैकायी लयदासमनी॥४॥ न कलिॊ नागारास्तोिॊ कीरक न यशस्मकभ। ॊ ् त्रलच्िे िाबमदा सनत्मॊ नभस्ते भॊिरूत्रऩस्ण। न वूक्त नात्रऩ ध्मानॊ ि न डमावो न ि लािानभ॥२॥ ॊ ् धाॊ धीॊ धूॊ धूजटे् ऩत्नी लाॊ लीॊ लूॊ लागधीद्वयी॥५॥ ा कस्जकाऩाठभािेण दगााऩाठपरॊ रबेत। ुॊ ु ् क्राॊ क्रीॊ क्र कासरका दे त्रल ळाॊ ळीॊ ळूॊ भे ळुबॊ करु॥६॥ ूॊ ु असत गुह्यतयॊ दे त्रल दे लानाभत्रऩ दरबभ॥३॥ ु ा ् शुॊ शुॊ शुॊकायरूत्रऩण्मै जॊ जॊ जॊ जम्बनाफदनी। गोऩनीमॊ प्रमत्नेन स्लमोसनरयल ऩालासत। भ्राॊ भ्रीॊ भ्रूॊ बैयली बद्रे बलाडमै ते नभो नभ् भायणॊ भोशनॊ लश्मॊ स्तम्बनोच्िाटनाफदकभ। ् अॊ क िॊ टॊ तॊ ऩॊ मॊ ळॊ लीॊ दॊ ु ऐॊ लीॊ शॊ षॊ॥७॥ ॊ ऩाठभािेण वॊसवद्धमेत ् कस्जकास्तोिभुत्तभभ॥४॥ ुॊ ् सधजाग्रॊ सधजाग्रॊ िोटम िोटम दीद्ऱॊ करु करु स्लाशा॥ ु ु अथ भॊि ऩाॊ ऩीॊ ऩूॊ ऩालाती ऩूणाा खाॊ खीॊ खूॊ खेियी तथा ॥८॥ ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे। ॐ ग्रं शुॊ क्रीॊ जूॊ व् वाॊ वीॊ वूॊ वद्ऱळती दे व्मा भॊिसवत्रद्धॊ करुष्ल भे॥ ु ज्लारम ज्लारम ज्लर ज्लर प्रज्लर प्रज्लर ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ इदॊ तु कस्जकास्तोिॊ भॊिजागसताशेतले। ुॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे ज्लर शॊ वॊ रॊ षॊ पट् स्लाशा अबक्त नैल दातव्मॊ गोत्रऩतॊ यष ऩालासत॥ े इसत भॊि् मस्तु कस्जकमा दे त्रल शीनाॊ वद्ऱळतीॊ ऩठे त। ुॊ ् नभस्ते रुद्ररूत्रऩण्मै नभस्ते भधुभफदासन। न तस्म जामते सवत्रद्धययण्मे योदनॊ मथा॥ नभ् कटबशारयण्मै नभस्ते भफशऴाफदा सन॥१॥ ै । इसत श्री कस्जकास्तोिभ ् वॊऩणभ ् । ुॊ ू ा नभस्ते ळुम्बशडत्र्मै ि सनळुम्बावुयघासतसन। जाग्रतॊ फश भशादे त्रल जऩॊ सवद्धॊ करुष्ल भे॥२॥ ु दगााद्शकभ ् ु दगे ऩये सळ ळुबदे सळ ऩयात्ऩये सळ। ु ऩूज्मे भशालृऴबलाफशसन भॊगरेसळ। भोषेऽस्स्थये त्रिऩुयवुडदरयऩाटरेसळ। लडद्ये भशे ळदसमतेकरुणाणालसळ। े ऩद्मे फदगम्फरय भशे द्वरय काननेसळ। भाशे द्वरय त्रिनमने प्रफरे भखेसळ। स्तुत्मे स्लधे वकरताऩशये वुयेसळ। यम्मेधये वकरदे लनुते गमेसळ। तृष्णे तयॊ सगस्ण फरे गसतदे ध्रुलेसळ। कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥१॥ ु कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩा रसरतेऽस्खरेसळ॥४॥ ु कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥७॥ ु फदव्मे नुते श्रुसतळतैत्रलाभरे बलेसळ। श्रद्धे वुयाऽवुयनुते वकरे जरेसळ। त्रलद्वम्बये वकरदे त्रलफदते जमेसळ। कडदऩादायळतमुडदरय भाधलेसळ। गॊगे सगयीळदसमते गणनामकसळ। े त्रलडध्मस्स्थते ळसळभुस्ख षणदे दमेसळ। भेधे सगयीळतनमे सनमते सळलेसळ। दषे स्भळानसनरमे वुयनामकसळ। े भात् वयोजनमने यसवक स्भये सळ। े कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥२॥ ु कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥५॥ ु कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥८॥ ु यावेद्वरय प्रणतताऩशये करेसळ। ु ताये कृ ऩाद्रा नमने भधुकटबेसळ। ै दगााद्शक ऩठसत म् प्रमत् प्रबाते ु ॊ धभात्रप्रमे बमशये लयदाग्रगेसळ। त्रलद्येद्वये द्वरय मभे सनखराषये सळ। वलााथदॊ शरयशयाफदनुताॊ लये ण्माभ। ा ् लाग्दे लते त्रलसधनुते कभरावनेसळ। ऊजे ितु्स्तसन वनातसन भुक्तकसळ। े दगां वुऩज्म भफशताॊ त्रलत्रलधोऩिायै ् ु ू कृ ष्णस्तुतेकरु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥३॥ ु कृ ष्णस्तुते करु कृ ऩाॊ रसरतऽस्खरेसळ॥६॥ ु प्राप्नोसत लाॊसछतपरॊ न सियाडभनुष्म्॥९॥ ॥ इसत श्री दगााद्शक वम्ऩूणभ ् ॥ ु ॊ ा
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    36 अक्टू फय 2011 ॥ बलाडमद्शकभ ् ॥ न तातो न भाता न फडधुना दाता ककभॉ कवॊगी कफुत्रद्ध कदाव् ु ु ु ु न ऩुिो न ऩुिी न बृत्मो न बताा। करािायशीन् कदािायरीन्। ु न जामा न त्रलद्या न लृत्रत्तभाभैल कदृत्रद्श् कलाक्मप्रफॊध् वदाऽश ु ु गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥१॥ गसतस्त्ल गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥५॥ बलाब्धालऩाये भशाद्खबीरु् ु प्रजेळॊ यभेळॊ भशे ळॊ वुयेळॊ ऩऩात प्रकाभी प्ररोबी प्रभत्त्। फदनेळॊ सनळीथेद्वयॊ ला कदासित। ् कवॊवाय-ऩाळ-प्रफद्ध् वदाऽशॊ ु न जानासभ िाऽडमत ् वदाऽशॊ ळयण्मे गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥२॥ गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥६॥ न जानासभ दानॊ न ि ध्मान-मोगॊ त्रललादे त्रलऴादे प्रभादे प्रलावे न जानासभ तॊि न ि स्तोि-भडिभ। ् जरे िाऽनरे ऩलाते ळिुभध्मे। न जानासभ ऩूजाॊ न ि डमावमोगॊ अयण्मे ळयण्मे वदा भाॊ प्रऩाफश गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥३॥ गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥७॥ न जानासभ ऩुण्मॊ न जानासन तीथं अनाथो दरयद्रो जया-योगमुक्तो न जानासभ भुत्रक्त रमॊ ला कदासित। ॊ ् भशाषीणदीन् वदा जाड्मलक्ि्। न जानासभ बत्रक्त व्रतॊ लाऽत्रऩ भात- त्रलऩत्तौ प्रत्रलद्श् प्रणद्श् वदाऽशॊ गासतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥४॥ गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥८॥ ॥ इसत श्रीबलाडमद्शक वॊऩूणभ ् ॥ ॊ ा षभा-प्राथाना अऩयाधवशस्त्रास्ण फक्रमडतेऽशसनाळॊ भमा। दावोऽमसभसत भाॊ भत्ला षभस्ल ऩयभेद्वरय॥१॥ आलाशनॊ न जानासभ न जानासभ त्रलवजानभ ्। ऩूजाॊ िैल न जानासभ षम्मताॊ ऩयभेद्वरय॥२॥ भडिशीनॊ फक्रमाशीनॊ बत्रक्तशीनॊ वुयेद्वरय। मत्ऩूस्जतॊ भमा दे त्रल ऩरयऩूणा तदस्तु भे॥३॥ अऩयाधळतॊ कृ त्ला जगदम्फेसत िोच्िये त ्। माॊ गसतॊ वभलाऩनेसत न ताॊ ब्रह्मादम: वुया्॥४॥ वाऩयाधोऽस्स्भ ळयणॊ प्राद्ऱस्त्लाॊ जगदस्म्फक। इदानीभनुकम्प्मोऽशॊ मथेच्छसव तथा करु॥५॥ े ु असानाफद्रस्भृतेभ्रराडत्मा मडडमूनभसधक कृ तभ ्। तत्वला षम्मताॊ दे त्रल प्रवीद ऩयभेद्वरय॥६॥ ॊ काभेद्वरय जगडभात: वस्च्िदानडदत्रलग्रशे । गृशाणािाासभभाॊ प्रीत्मा प्रवीद ऩयभेद्वरय॥७॥ गुह्यासतगुह्यगोप्िी त्लॊ गृशाणास्भत्कृ तॊ जऩभ ्। सवत्रद्धबालतु भे दे त्रल त्लत्प्रवादात्वुयेद्वरय॥८॥
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    37 अक्टू फय 2011 दगााद्शोत्तय ळतनाभ स्तोिभ ् ु ळतनाभ प्रलक्ष्मासभ ळृणुष्ल कभरानने। अनेकळस्त्रशस्ता ि अनेकास्त्रस्म धारयणी। मस्म प्रवादभािेण दगाा प्रीता बलेत ् वती॥१॥ ु कभायी िैककडमा ि कळोयी मुलती मसत्॥१२॥ ु ै वती वाध्ली बलप्रीता बलानी बलभोिनी। अप्रौढा िैल प्रौढा ि लृद्धभाता फरप्रदा। आमाा दगाा जमा िाद्या त्रिनेिा ळूरधारयणी॥२॥ ु भशोदयी भुक्त कळी घोयरूऩा भशाफरा॥१३॥ े त्रऩनाकधारयणी सििा िण्डघण्टा भशातऩा्। अस्ग्नज्लारा यौद्रभुखी कारयात्रिस्तऩस्स्लनी। भनो फुत्रद्धयशॊ काया सित्तरूऩा सिता सिसत्॥३॥ नायामणी बद्रकारी त्रलष्णुभामा जरोदयी॥१४॥ वलाभडिभमी वत्ता वत्मानडदस्लरूत्रऩणी। सळलदती कयारी ि अनडता ऩयभेद्वयी। ू अनडता बात्रलनी बाव्मा बव्माबव्मा वदागसत्॥४॥ कात्मामनी ि वात्रलिी प्रत्मषा ब्रह्मलाफदनी॥१५॥ ळाम्बली दे लभाता ि सिडता यत्नत्रप्रमा वदा। म इदॊ प्रऩठे स्डनत्मॊ दगाानाभळताद्शकभ ्। ु वलात्रलद्या दषकडमा दषमसत्रलनासळनी॥५॥ नावाध्मॊ त्रलद्यते दे त्रल त्रिऴु रोकऴु ऩालासत॥१६॥ े अऩणाानेकलणाा ि ऩाटरा ऩाटरालती। धनॊ धाडमॊ वुतॊ जामाॊ शमॊ शस्स्तनभेल ि। ऩट्टाम्फयऩयीधाना करभछजीययस्छजनी॥६॥ ितुलगा तथा िाडते रबेडभुत्रक्त ि ळाद्वतीभ ्॥१७॥ ा ॊ अभेमत्रलक्रभा क्रया वुडदयी वुयवुडदयी। ू कभायीॊ ऩूजसमत्ला तु ध्मात्ला दे लीॊ वुयेद्वयीभ ्। ु लनदगाा ि भातङ्गी भतङ्गभुसनऩूस्जता॥७॥ ु ऩूजमेत ् ऩयमा बक्त्मा ऩठे डनाभळताद्शकभ ्॥१८॥ ब्राह्मी भाशे द्वयी िैडद्री कौभायी लैष्णली तथा। तस्म सवत्रद्धबालेद् दे त्रल वलै: वुयलयै यत्रऩ। िाभुण्डा िैल लायाशी रक्ष्भीद्ळ ऩुरुऴाकृ सत्॥८॥ याजानो दावताॊ मास्डत याज्मसश्रमभलाऩनुमात ्॥१९॥ त्रलभरोत्कत्रऴणी साना फक्रमा सनत्मा ि फुत्रद्धदा। ा गोयोिनारक्त ककङ्कभेन सवडदयकऩूयभधुिमेण। ु ु ू ा फशुरा फशुरप्रेभा वलालाशनलाशना॥९॥ त्रलसरख्म मडिॊ त्रलसधना त्रलसधसो बलेत ् वदा धायमते सनळुम्बळुम्बशननी भफशऴावुयभफदा नी। ऩुयारय्॥२०॥ भधुकटबशडिी ि िण्डभुण्डत्रलनासळनी॥१०॥ ै बौभालास्मासनळाभग्रे िडद्रे ळतसबऴाॊ गते। वलाावुयत्रलनाळा ि वलादानलघासतनी। त्रलसरख्म प्रऩठे त ् स्तोिॊ व बलेत ् वम्ऩदाॊ ऩदभ ्॥२१॥ वलाळास्त्रभमी वत्मा वलाास्त्रधारयणी तथा॥११॥ ळादी वॊफॊसधत वभस्मा क्मा आऩक रडक-रडकी फक आऩकी ळादी भं अनालश्मक रूऩ वे त्रलरम्फ शो यशा शं मा उनक लैलाफशक जीलन भं खुसळमाॊ कभ े े े शोती जायशी शं औय वभस्मा असधक फढती जायशी शं । एवी स्स्थती शोने ऩय अऩने रडक-रडकी फक कडरी का े ुॊ अध्ममन अलश्म कयलारे औय उनक लैलाफशक वुख को कभ कयने लारे दोऴं क सनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे े े े े जनकायी प्राद्ऱ कयं । GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    38 अक्टू फय 2011 त्रलद्वॊबयी स्तुसत त्रलद्वॊबयी स्तुसत भूर रुऩवे गुजयाती भं लल्रब बट्ट द्राया सरखी गई शं । स्लस्स्तक.ऎन.जोळी त्रलद्वॊबयी अस्खर त्रलद्वतणी जनेता। ये ये बलानी फशु बूर थई ज भायी। त्रलद्या धयी लदनभाॊ लवजो त्रलधाता॥ आ स्जॊदगी थई भने असतळे अकायी॥ दफुत्रद्ध दय कयी वद्दफुत्रद्ध आऩो। ु ा ु दोऴो प्रजासऱ वधऱा तल छाऩ छाऩो। भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥१॥ ु भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥७॥ ु बूरो ऩफड बलयने बटक बलानी। ुॊ खारी न कोइ स्थऱ छे त्रलण आऩ धायो। वुझे नफश रगीय कोइ फदळा जलानी॥ ब्रह्माॊडभाॊ अणु-अणु भशीॊ लाव तायो॥ बावे बमॊकय लऱी भनना उताऩो। ळत्रक्त न भाऩ गणला अगस्णत भाऩो। भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥२॥ ु भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥८॥ ु आ यॊ कने उगयला नथी कोइ आयो। ऩाऩो प्रऩॊि कयला फधी यीते ऩूयो। ु जडभाॊध छ जननी शु ग्रशी शाथ तायो॥ खोटो खयो बगलती ऩण शुॊ तभायो॥ ना ळुॊ वुणो बगलती सळळुना त्रलराऩो। जाडमाॊधकाय कयी दय वुफुत्रद्ध स्थाऩो। ू भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥३॥ ु भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥९॥ ु भा कभा जडभ कथनी कयताॊ त्रलिारु। ळीखे वुणे यसवक छॊ द ज एक सित्ते। आ वृत्रद्शभाॊ तुज त्रलना नथी कोइ भारु॥ तेना थकी त्रित्रलध ताऩ टऱे खसिते॥ कोने कशुॊ कठण काऱ तणो फऱाऩो। फुत्रद्ध त्रलळेऴ जगदॊ फ तणा प्रताऩो। भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥४॥ ु भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥१०॥ ु शुॊ काभ क्रोध भध भोश थकी बये रो। श्री वदगुरु ळयनभाॊ यशीने मजुॊ छॊु । आडॊ फये असत धणो भद्थी छकरो॥ े ु यात्रि फदने बगलती तुजने बजुॊ छ॥ दोऴो फधा दय कयी भाप ऩाऩो। ू वदबक्त वेलक तणा ऩरयताऩ िाऩो। भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥५॥ ु भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥११॥ ु ना ळास्त्रना श्रलणनु ऩम्ऩान ऩीधु। अॊतय त्रलऴे असधक उसभा थताॊ बलानी। ना भॊि क स्तुसत कथा नथी काइ कीधु॥ े गाऊ स्तुसत तल फऱे नभीने भृडानी॥ श्रद्धा धयी नथी कमाा तल नाभ जाऩो। वॊवायना वकऱ योग वभूऱ काऩो। भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥६॥ ु भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ख काऩो ॥१२॥ ु
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    39 अक्टू फय 2011 भफशऴावुयभफदा सनस्तोिभ ् ||बगलतीऩद्यऩुष्ऩाॊजसरस्तोि भफशऴावुयभफदा सनस्तोिभ ् || लासवसन शावयते सळखरय सळयोभस्ण तुङ्ग फशभारम ळृॊग श्री त्रिऩुयवुडदमै नभ् || सनजारम भध्मगते | भधु भधुये भधु कटब गॊस्जसन कटब ै ै बगलती बगलत्ऩदऩङ्कजॊ भ्रभयबूतवुयावुयवेत्रलतभ ् | बॊस्जसन यावयते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन वुजनभानवशॊ वऩरयस्तुतॊ कभरमाऽभरमा सनबृतॊ बजे ||१|| यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||३||||९|| असम ळतखण्ड ते उबे असबलडदे ऽशॊ त्रलघ्नेळकरदै लते | नयनागाननस्त्लेको ु त्रलखस्ण्डत रुण्ड त्रलतुस्ण्डत ळुण्ड गजासधऩते रयऩु गज गण्ड नयसवॊश नभोऽस्तुते ||२|| शरयगुरुऩदऩद्मॊ ळुद्धऩद्येऽनुयागाद् त्रलदायण िण्ड ऩयाक्रभ ळुण्ड भृगासधऩते | सनज बुज दण्ड त्रलगतऩयभबागे वस्डनधामादये ण | तदनुिरय कयोसभ प्रीतमे सनऩासतत खण्ड त्रलऩासतत भुण्ड बटासधऩते जम जम शे बत्रक्तबाजाॊ बगलसत ऩदऩद्मे ऩद्यऩुष्ऩाछजसरॊ ते ||३|| कनैते े भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||४||||१०|| असम यसिता् कतो न सनफशता् ळुम्बादमो दभदा् कनैते तल ु ु ा े यण दभद ळिु लधोफदत दधय सनजाय ळत्रक्तबृते ितुय त्रलिाय ु ा ु ा ऩासरता इसत फश तत ् प्रद्ले फकभािक्ष्भशे | ब्रह्माद्या अत्रऩ धुयीण भशासळल दतकृ त ू प्रभथासधऩते | दरयत ु दयीश ु ळॊफकता् स्लत्रलऴमे मस्मा् प्रवादालसध प्रीता वा दयाळम ु दभसत ु ा दानलदत ू कृ ताॊतभते जम जम शे भफशऴावुयप्रभसथनीच््द्यादलद्यासन भे ||४|| ऩातु श्रीस्तु भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||५||||११|| असम ितुबुजा फकभु ितुफााशोभाशौजाडबुजान ् धत्तेऽद्शादळधा फश ा ळयणागत लैरय लधूलय लीय लयाबम दामकये त्रिबुलन कायणगुणाडकामे गुणायम्बका् | वत्मॊ भस्तक ळूर त्रलयोसध सळयोसध कृ ताभर ळूरकये | दसभदसभ ु ु फदक्ऩसतदस्डतवॊख्मबुजबृच्छम्बु् स्लय्म्बू् स्लमॊ ताभय दॊ दसबनाद भशो भुखयीकृ त सतग्भकये जम जम शे ु ु धाभैकप्रसतऩत्तमे फकभथला ऩातुॊ दळाद्शौ फदळ् ||५|| भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||६||||१२|| असम प्रीत्माऽद्शादळवॊसभतेऴु मुगऩद्द्रीऩेऴु दातुॊ लयान ् िातुॊ ला सनज शुॉकृसत भाि सनयाकृ त धूम्र त्रलरोिन धूम्र ळते वभय बमतो त्रफबत्रऴा बगलत्मद्शादळैतान ् बुजान ् | मद्राऽद्शादळधा त्रलळोत्रऴत ळोस्णत फीज वभुद्भल ळोस्णत फीज रते | सळल बुजाॊस्तु त्रफबृत् कारी वयस्लत्मुबे भीसरत्लैकसभशानमो् सळल ळुॊब सनळुॊब भशाशल तत्रऩात बूत त्रऩळाियते जम जम प्रथसमतुॊ वा त्लॊ यभे यषभाभ ् ||६|| असम सगरयनॊफदसन शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||७||||१३|| नॊफदतभेफदसन त्रलद्वत्रलनोफदसन नॊदनुते सगरयलय त्रलॊध्म धनुयनु वॊग यणषणवॊग ऩरयस्पय दॊ ग नटत्कटक कनक ु े सळयोसधसनलासवसन त्रलष्णुत्रलरासवसन स्जष्णुनुते | बगलसत शे त्रऩळॊग ऩृऴत्क सनऴॊग यवद्भट ळृॊग शतालटु क | कृ त े सळसतकण्ठकटु ॊ त्रफसन बूरय कटु ॊ त्रफसन बूरय कृ ते जम जम शे ु ु ितुयङ्ग फरस्षसत यङ्ग घटद्बशुयङ्ग यटद्बटु क जम जम शे े भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१||||७|| भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१४|| वुयलयलत्रऴास्ण दधयधत्रऴास्ण ु ा दभुखभत्रऴास्ण ु ा शऴायते वुयररनाततथेसमतथेसमतथासबनमोत्तयनृत्मयते त्रिबुलनऩोत्रऴस्ण ळॊकयतोत्रऴस्ण फकस्ल्फऴभोत्रऴस्ण घोऴयते | शावत्रलरावशुरावभसम प्रणताताजनेऽसभतप्रेभबये | दनुज सनयोत्रऴस्ण फदसतवुत योत्रऴस्ण दभद ु ा ळोत्रऴस्ण सधसभफकटसधक्कटसधकटसधसभध्लसनघोयभृदॊगसननादयते जम सवडधुवुते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ळैरवुते ||२||||८|| असम जगदॊ फ भदॊ फ कदॊ फ लनत्रप्रम ||८||||१५|| जम जम जप्म जमेजम ळब्द ऩयस्तुसत
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    40 अक्टू फय 2011 तत्ऩय त्रलद्वनुते झण झण स्झस्छजसभ स्झॊकृत नूऩुय सवॊस्जत वशस्रकयै कनुते कृ त वुयतायक वङ्गयतायक वङ्गयतायक भोफशत बूतऩते | नफटत नटाधा नटीनट नामक नाफटत वूनुवुते | वुयथ वभासध वभानवभासध वभासधवभासध नाट्म वुगानयते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन वुजातयते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||९||||१६|| असम वुभन् वुभन् ळैरवुते ||१६||||२३|| ऩदकभरॊ करुणासनरमे लरयलस्मसत वुभन् वुभन् वुभनोशय काॊसतमुते सश्रत यजनी यजनी मोऽनुफदनॊ व सळले असम कभरे कभरासनरमे यजनी यजनी यजनीकय लक्िलृते | वुनमन त्रलभ्रभय भ्रभय कभरासनरम् व कथॊ न बलेत ् | तल ऩदभेल भ्रभय भ्रभय भ्रभयासधऩते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन ऩयॊ ऩदसभत्मनुळीरमतो भभ फक न सळले जम जम शे ॊ यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१०||||१७|| वफशत भशाशल भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१७||||२४|| भल्रभ तस्ल्रक भस्ल्रत यल्रक भल्रयते त्रलयसित कनकरवत्कर सवडधु जरैयनु सवस्छिनुते गुण यङ्गबुलॊ लस्ल्रक ऩस्ल्रक भस्ल्रक स्झस्ल्रक सबस्ल्रक लगा लृते | बजसत व फक न ळिीकि कब तटी ऩरययॊ ब वुखानुबलभ ् ॊ ु ॊु सवतकृ त पस्ल्रवभुल्र ु सवतारुण तल्रज ऩल्रल | तल ियणॊ ळयणॊ कयलास्ण नताभयलास्ण सनलासव सळलॊ वल्रसरते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ळैरवुते ||११||||१८|| अत्रलयर गण्ड गरडभद भेदय भत्त ु ||१८||||२५|| तल त्रलभरेडदकरॊ लदनेडदभरॊ वकरॊ ननु ु ु ु भतङ्गज याजऩते त्रिबुलन बूऴण बूत करासनसध रूऩ करमते ू फकभु ऩुरुशूत ऩुयीडदभुखी ु वुभुखीसबयवौ ऩमोसनसध याजवुते | असम वुद तीजन रारवभानव भोशन त्रलभुखीफक्रमते | भभ तु भतॊ सळलनाभधने बलती कृ ऩमा भडभथ याजवुते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन फकभुत फक्रमते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१२||||१९|| कभर दराभर कोभर ळैरवुते ||१९||||२६|| असम भसम दीनदमारुतमा कृ ऩमैल काॊसत कराकसरताभर बाररते वकर त्रलराव त्लमा बत्रलतव्मभुभे असम जगतो जननी कृ ऩमासव मथासव करासनरमक्रभ कसर िरत्कर शॊ व करे | असरकर े ु ु तथाऽनुसभतासवयते | मदसितभि ु बलत्मुयरय वङ्कर कलरम भण्डर भौसरसभरद्भकरासर करे जम जम ु ु ु ु करुतादरुताऩभऩाकरुते ु ु ु जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१३||||२०|| यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||२०||||२७|| स्तुसतसभतस्स्तसभत् कय भुयरी यल लीस्जत कस्जत रस्ज्जत कोफकर भछजुभते ू वुवभासधना सनमभतोऽमभतोऽनुफदनॊ ऩठे त ् | ऩयभमा सभसरत ऩुसरडद भनोशय गुस्छजत यॊ स्जतळैर सनकछजगते | ु यभमात्रऩ सनऴेव्मते ऩरयजनोऽरयजनोऽत्रऩ ि तॊ बजेत ् सनजगुण बूत भशाळफयीगण वद्गण वॊबत कसरतरे जम ु ृ े ||२८|| यभमसत फकर कऴास्तेऴु सित्तॊ नयाणाभलयजलय जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते मस्भाद्राभकृ ष्ण् कलीनाभ ् | अकृ त वुकृसतगम्मॊ ||१४||||२१|| कफटतट ऩीत दकर त्रलसिि भमूखसतयस्कृ त ु ू यम्मऩद्दै कशम्मं स्तलनभलनशे तुॊ प्रीतमे त्रलद्वभातु् ||२९|| िॊद्र रुिे प्रणत वुयावुय भौसरभस्णस्पय दॊ ळुर वडनख िॊद्र ु इडदयम्मो भुशुत्रफाडदयम्मो भुशुत्रफाडदयम्मो मत् वोऽनलद्य् ु ु ु रुिे | स्जत कनकािर भौसरऩदोस्जात सनबाय कजय ुॊ स्भृत् | श्रीऩते् वूनूना कारयतो मोऽधुना त्रलद्वभातु् ऩदे कबकिे ुॊ ु जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ऩद्यऩुष्ऩाछजसर् ||३०|| ळैरवुते ||१५||||२२|| त्रलस्जत वशस्रकयै क वशस्रकयै क || इसत श्रीबगलतीऩद्यऩुष्ऩाछजसरस्तोिभ ् ||
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    41 अक्टू फय 2011 गुद्ऱ वद्ऱळती  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, आरोक ळभाा वॊऩूणा श्री दगाा वद्ऱळती क भॊिो का ऩाठ कयने वे ु े कस्छजका स्तोि भूर-ऩाठ ु वाधक को जो पर प्राद्ऱ शोता शै , लैवा शी कल्माणकायी नभस्ते रुद्र-रूऩामै, नभस्ते भधु-भफदा सन। पर प्रदान कयने लारा गुद्ऱ वद्ऱळती क भॊिो का ऩाठ शं । े नभस्ते कटबायी ि, नभस्ते भफशऴावसन॥ ै गुद्ऱ वद्ऱळती भं असधकतय भॊि फीजं क शोने वे े नभस्ते ळुम्बशॊ िेसत, सनळुम्बावुय-घासतसन। मश वाधकं क सरए अभोघ पर प्रदान कयने भं वभथा े जाग्रतॊ फश भशा-दे त्रल जऩ-सवत्रद्धॊ करुष्ल भे॥ ु शं । ऐॊ-कायी वृत्रद्शरूऩामै ह्रीॊकायी प्रसत-ऩासरका॥ गुद्ऱ वद्ऱळती क ऩाठ का क्रभ इव प्रकाय शं । े क्रीॊ-कायी काभरूत्रऩण्मै फीजरूऩा नभोऽस्तु ते। प्रायम्ब भं कस्छजका ु स्तोि उवके फाद गुद्ऱ वद्ऱळती उवक ऩद्ळमात स्तलन का ऩाठ कये । े िाभुण्डा िण्ड-घाती ि मं-कायी लय-दासमनी॥ त्रलच्िे नोऽबमदा सनत्मॊ नभस्ते भॊिरूत्रऩस्ण॥ कस्छजका-स्तोि ु धाॊ धीॊ धूॊ धूजटेऩात्नी लाॊ लीॊ लागेद्वयी तथा। ा ऩूल-ऩीफठका-ईद्वय उलाि: ा क्राॊ क्रीॊ श्रीॊ भे ळुबॊ करु, ऐॊ ॐ ऐॊ यष वलादा।। ु श्रृणु दे त्रल, प्रलक्ष्मासभ कस्छजका-भडिभुत्तभभ ्। ु ॐ ॐ ॐ-काय-रुऩामै, ज्राॊ-ज्राॊ ज्रम्बार-नाफदनी। मेन भडिप्रबालेन िण्डीजाऩॊ ळुबभ ् बलेत ्॥१॥ क्राॊ क्रीॊ क्र कासरका दे त्रल, ळाॊ ळीॊ ळूॊ भे ळुबॊ करु॥ ूॊ ु न लभा नागारा-स्तोिॊ कीरकॊ न यशस्मकभ ्। ह्रूॊ ह्रूॊ ह्रूॊ-कायरूत्रऩण्मै ज्रॊ ज्रॊ ज्रम्बार-नाफदनी। न वूक्तभ ् नात्रऩ ध्मानभ ् ि न डमावभ ् ि न िािानभ ्॥२॥ कस्छजका-ऩाठ-भािेण ु दगाा-ऩाठ-परॊ ु रबेत ्। भ्राॊ भ्रीॊ भ्रूॊ बैयली बद्रे बलासन ते नभो नभ्॥7॥ असत गुह्यतभभ ् दे त्रल दे लानाभत्रऩ दराबभ ्॥३॥ ु भडि: गोऩनीमभ ् प्रमत्नेन स्ल-मोसन-लच्ि ऩालासत। अॊ क िॊ टॊ तॊ ऩॊ मॊ ळॊ त्रफडदयात्रलबाल, आत्रलबाल, शॊ वॊ रॊ षॊ ॊ ु भायणभ ् भोशनभ ् लश्मभ ् स्तम्बनोच्िाटनाफदकभ ्। भसम जाग्रम-जाग्रम, िोटम-िोटम दीद्ऱॊ करु करु स्लाशा॥ ु ु ऩाठ-भािेण वॊसवत्रद्ध् कस्छजकाभडिभुत्तभभ ्॥४॥ ु ऩाॊ ऩीॊ ऩूॊ ऩालाती ऩूणाा, खाॊ खीॊ खूॊ खेियी तथा॥ अथ भडि: म्राॊ म्रीॊ म्रूॊ दीव्मती ऩूणाा, कस्छजकामै नभो नभ्॥ ु ॐ द्ऴं दॉ ु क्रीॊ क्रं जुॊ व् ज्लरमोज्ज्लर ज्लर प्रज्लर- वाॊ वीॊ वद्ऱळती-सवत्रद्धॊ , करुष्ल ु जऩ-भाित्॥ प्रज्लर प्रफर-प्रफर शॊ वॊ रॊ षॊ पट् स्लाशा इदॊ तु कस्छजका-स्तोिॊ ु भॊि-जार-ग्रशाॊ त्रप्रमे। इसत भडि: अबक्त े ि न दातव्मॊ, गोऩमेत ् वलादा श्रृणु॥ इव कस्छजका भडि का दव फाय जऩ कयना िाफशए। इवी ु कस्जका-त्रलफशतॊ ुॊ दे त्रल मस्तु वद्ऱळतीॊ ऩठे त ्। प्रकाय स्तल-ऩाठ क अडत भं ऩुन् इव भडि का दव फाय जऩ े न तस्म जामते सवत्रद्धॊ , अयण्मे रुदनॊ मथा॥ कय कस्छजका स्तोि का ऩाठ कयना िाफशए। ु ॥इसत श्रीरुद्रमाभरे गौयीतॊिे सळलऩालातीवॊलादे कस्जकास्तोिॊ वॊऩूणभ ्॥ ुॊ ा
  • 42.
    42 अक्टू फय 2011 गुद्ऱ-वद्ऱळती वलांगे यक्त-धाया-भथन-कय-लये , लज्र-दण्डे नभस्ते॥६॥ ॐ ब्रीॊ-ब्रीॊ-ब्रीॊ लेणु-शस्ते, स्तुत-वुय-फटु कशां गणेळस्म भाता। ै ॐ क्राॊ क्रीॊ क्र लाभ-नसभते, गगन गड-गडे गुह्य-मोसन-स्लरुऩे। ूॊ स्लानडदे नडद-रुऩे, अनशत-सनयते, भुत्रक्तदे भुत्रक्त-भागे॥ लज्राॊगे, लज्र-शस्ते, वुय-ऩसत-लयदे , भत्त-भातॊग-रुढे ॥ शॊ व् वोशॊ त्रलळारे, लरम-गसत-शवे, सवद्ध-दे ली वभस्ता। स्लस्तेजे, ळुद्ध-दे शे, रर-रर-रसरते, छे फदते ऩाळ-जारे। शीॊ-शीॊ-शीॊ सवद्ध-रोक, कि-रुसि-त्रलऩुरे, लीय-बद्रे नभस्ते॥१॥ े फकण्डल्माकाय-रुऩे, लृऴ लृऴब-ध्लजे, ऐस्डद्र भातनाभस्ते॥७॥ ॐ शीॊकायोच्िायमडती, भभ शयसत बमॊ, िण्ड-भुण्डौ प्रिण्डे । ॐ शुॉ शुॉ शुॊकाय-नादे , त्रलऴभलळ-कये , मष-लैतार-नाथे। खाॊ-खाॊ-खाॊ खड्ग-ऩाणे, ध्रक-ध्रक ध्रफकते, उग्र-रुऩे स्लरुऩे॥ वु-सवद्धमथे वु-सवद्धै ्, ठठ-ठठ-ठठठ्, वला-बषे प्रिण्डे ॥ शुॉ-शुॉ शुॉकाॊय-नादे , गगन-बुत्रल-तरे, व्मात्रऩनी व्मोभ-रुऩे। जूॊ व् वं ळास्डत-कभेऽभृत-भृत-शये , सन्वभेवॊ वभुद्रे। शॊ -शॊ शॊ काय-नादे , वुय-गण-नसभते, िण्ड-रुऩे नभस्ते॥२॥ दे त्रल, त्लॊ वाधकानाॊ, बल-बल लयदे , बद्र-कारी नभस्ते॥८॥ ऐॊ रोक कीतामडती, भभ शयतु बमॊ, याषवान ् शडमभाने। े ब्रह्माणी लैष्णली त्लॊ, त्लभसव फशुिया, त्लॊ लयाश-स्लरुऩा। घ्राॊ-घ्राॊ-घ्राॊ घोय-रुऩे, घघ-घघ-घफटते, घघाये घोय-याले॥ त्लॊ ऐडद्री त्लॊ कफेयी, त्लभसव ि जननी, त्लॊ कभायी भशे डद्री॥ ु ु सनभांवे काक-जॊघे, घसवत-नख-नखा, धूम्र-नेिे त्रि-नेिे। ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊकाय-बूते, त्रलतर-तर-तरे, बू-तरे स्लगा-भागे। शस्ताब्जे ळूर-भुण्डे , कर-कर ककरे, सवद्ध-शस्ते नभस्ते॥३॥ ु ु ु ऩातारे ळैर-श्रृगे, शरय-शय-बुलने, सवद्ध-िण्डी नभस्ते॥९॥ ॊ ॐ क्रीॊ-क्रीॊ-क्रीॊ ऐॊ कभायी, कश-कश-भस्खरे, कोफकरेनानुयागे। ु ु ु शॊ रॊ षॊ ळौस्ण्ड-रुऩे, ळसभत बल-बमे, वला-त्रलघ्नाडत-त्रलघ्ने। भुद्रा-वॊस-त्रि-ये खा, करु-करु वततॊ, श्री भशा-भारय गुह्ये॥ ु ु गाॊ गीॊ गूॊ गं ऴडॊ गे, गगन-गसत-गते, सवत्रद्धदे सवद्ध-वाध्मे॥ तेजाॊगे सवत्रद्ध-नाथे, भन-ऩलन-िरे, नैल आसा-सनधाने। लॊ क्र भुद्रा फशभाॊळोप्राशवसत-लदने, त्र्मषये ॊ नवं सननादे । ऐॊकाये यात्रि-भध्मे, स्लत्रऩत-ऩळु-जने, ति काडते नभस्ते॥४॥ शाॊ शूॊ गाॊ गीॊ गणेळी, गज-भुख-जननी, त्लाॊ भशे ळीॊ नभासभ॥१०॥ ॐ व्राॊ-व्रीॊ-व्रूॊ व्रं कत्रलत्ले, दशन-ऩुय-गते रुस्क्भ-रुऩेण िक्र। े स्तलन त्रि्-ळक्तमा, मुक्त-लणााफदक, कय-नसभते, दाफदलॊ ऩूल-लणे॥ ा मा दे ली खड्ग-शस्ता, वकर-जन-ऩदा, व्मात्रऩनी त्रलळऽल-दगाा। ु ह्रीॊ-स्थाने काभ-याजे, ज्लर-ज्लर ज्लसरते, कोसळसन कोळ-ऩिे। श्माभाॊगी ळुक्र-ऩाळास्ब्द जगण-गस्णता, ब्रह्म-दे शाधा-लावा॥ स्लच्छडदे कद्श-नाळे, वुय-लय-लऩुऴे, गुह्य-भुण्डे नभस्ते॥५॥ सानानाॊ वाधमडती, सतसभय-त्रलयफशता, सान-फदव्म-प्रफोधा। वा दे ली, फदव्म-भूसताप्रदशतु दरयतॊ, भुण्ड-िण्डे प्रिण्डे ॥१॥ ा ु ॐ घ्राॊ-घ्रीॊ-घ्रूॊ घोय-तुण्डे , घघ-घघ घघघे घघायाडमाफ्घ्र-घोऴे। ह्रीॊ क्रीॊ द्रॊ ू द्रोछि-िक्र, यय-यय-यसभते, वला-साने प्रधाने॥ े ॐ शाॊ शीॊ शूॊ लभा-मुक्त, ळल-गभन-गसतबॉऴणे बीभ-लक्िे। े द्रीॊ तीथेऴु ि ज्मेद्षे, जुग-जुग जजुगे म्रीॊ ऩदे कार-भुण्डे । क्राॊ क्रीॊ क्र क्रोध-भूसतात्रलाकृत-स्तन-भुखे, यौद्र-दॊ द्सा-कयारे॥ ूॊ
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    43 अक्टू फय 2011 क क ककार-धायी भ्रभसद्ऱ, जगफददॊ बषमडती ग्रवडती- ॊ ॊ ॊ त्र्मैरोक्मॊ लश्म-कायी, प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥८॥ ु शुॊकायोच्िायमडती प्रदशतु दरयतॊ, भुण्ड-िण्डे ु प्रिण्डे ॥२॥ लडदे दण्ड-प्रिण्डा डभरु-फडसभ-फडभा, घण्ट टॊ काय-नादे । ॐ ह्राॊ ह्रीॊ शूॊ रुद्र-रुऩे, त्रिबुलन-नसभते, ऩाळ-शस्ते त्रि-नेिे। नृत्मडती ताण्डलैऴा थथ-थइ त्रलबलैसनाभरा भडि-भारा॥ ा याॊ यीॊ रुॊ यॊ गे फकरे फकसरत यला, ळूर-शस्ते प्रिण्डे ॥ रुषौ कषौ लशडती, खय-खरयता यला िासिासन प्रेत-भारा। ु राॊ रीॊ रूॊ रम्फ-स्जह्ले शवसत, कश-कशा ळुद्ध-घोयाट्ट-शावै्। उच्िैस्तैद्ळाट्टशावै, शश शसवत यला, िभा-भुण्डा प्रिण्डे ॥९॥ ककारी कार-यात्रि् प्रदशतु दरयतॊ, भुण्ड-िण्डे प्रिण्डे ॥३॥ ॊ ु ॐ त्लॊ ब्राह्मी त्लॊ ि यौद्री व ि सळस्ख-गभना त्लॊ ि दे ली कभायी। ु ॐ घ्राॊ घ्रीॊ घ्रूॊ घोय-रुऩे घघ-घघ-घफटते घघायायाल घोये । त्लॊ िक्री िक्र-शावा घुय-घुरयत यला, त्लॊ लयाश-स्लरुऩा॥ सनभाॉवे ळुष्क-जॊघे त्रऩफसत नय-लवा धूम्र-धूम्रामभाने॥ यौद्रे त्लॊ िभा-भुण्डा वकर-बुत्रल-तरे वॊस्स्थते स्लगा-भागे। ॐ द्राॊ द्रीॊ द्रॊ ू द्रालमडती, वकर-बुत्रल-तरे, मष-गडधला-नागान ्। ऩातारे ळैर-श्रृगे शरय-शय-नसभते दे त्रल िण्डी नभस्ते॥१०॥ ॊ षाॊ षीॊ षूॊ षोबमडती प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥४॥ ु यष त्लॊ भुण्ड-धायी सगरय-गुश-त्रललये सनझाये ऩलाते ला। ॐ भ्राॊ भ्रीॊ भ्रूॊ बद्र-कारी, शरय-शय-नसभते, रुद्र-भूते त्रलकणे। वॊग्राभे ळिु-भध्मे त्रलळ त्रलऴभ-त्रलऴे वॊकटे कस्त्वते ला॥ ु िडद्राफदत्मौ ि कणौ, ळसळ-भुकट-सळयो लेत्रद्षताॊ कतु-भाराभ ्॥ ु े व्माघ्रे िौये ि वऩेऽप्मुदसध-बुत्रल-तरे लफि-भध्मे ि दग। ु े स्त्रक् -वला-िोयगेडद्रा ळसळ-कयण-सनबा तायका् शाय-कण्ठे । यषेत ् वा फदव्म-भूसता् प्रदशतु दरयतॊ भुण्ड-िण्डे प्रिण्डे ॥११॥ ु वा दे ली फदव्म-भूसता्, प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥५॥ ु ॐ खॊ-खॊ-खॊ खड्ग-शस्ते, लय-कनक-सनबे वूम-कास्डत-स्लतेजा। ा इत्मेलॊ फीज-भडिै् स्तलनभसत-सळलॊ ऩातक-व्मासध-नाळनभ ्। त्रलद्युज्ज्लारालरीनाॊ, बल-सनसळत भशा-कत्रिका दस्षणेन॥ ा प्रत्मषॊ फदव्म-रुऩॊ ग्रश-गण-भथनॊ भदा नॊ ळाफकनीनाभ ्॥ लाभे शस्ते कऩारॊ, लय-त्रलभर-वुया-ऩूरयतॊ धायमडती। इत्मेलॊ लेद-लेद्यॊ वकर-बम-शयॊ भडि-ळत्रक्तद्ळ सनत्मभ ्। वा दे ली फदव्म-भूसता् प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥६॥ ु भॊिाणाॊ स्तोिक म् ऩठसत व रबते प्रासथाताॊ भडि-सवत्रद्धभ ्॥१२॥ ॊ ॐ शुॉ शुॉ पट् कार-यािीॊ ऩुय-वुय-भथनीॊ धूम्र-भायी कभायी। ु िॊ-िॊ-िॊ िडद्र-शावा ििभ िभ-िभा िातुयी सित्त-कळी। े ह्राॊ ह्रीॊ ह्रूॊ शस्डत दद्शान ् कसरत फकर-फकरा ळब्द अट्टाट्टशावे॥ ु मॊ-मॊ-मॊ मोग-भामा जनसन जग-फशता मोसगनी मोग-रुऩा॥ शा-शा बूत-प्रबूते, फकर-फकसरत-भुखा, कीरमडती ग्रवडती। डॊ -डॊ -डॊ डाफकनीनाॊ डभरुक-वफशता दोर फशण्डोर फडम्बा। शुॊकायोच्िायमडती प्रदशतु दरयतॊ िण्ड-भुण्डे ु प्रिण्डे ॥७॥ यॊ -यॊ -यॊ यक्त-लस्त्रा वयसवज-नमना ऩातु भाॊ दे त्रल दगाा॥१३॥ ु ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ कऩारीॊ ऩरयजन-वफशता िस्ण्ड िाभुण्डा-सनत्मे। ऩत्रिका वे वॊफॊसधत आऩक वुझाल एलॊ प्रसतफक्रमा शभं े *** यॊ -यॊ यॊ काय-ळब्दे ळसळ-कय-धलरे कार-कटे ू दयडते॥ ु अलश्म बेजने का कद्श कयं ।स्जववे ऩत्रिका को औय शुॉ शुॉ शुॊकाय-कारय वुय-गण-नसभते, कार-कायी त्रलकायी। फेशतय फनामा जावक एलॊ अडम फॊधु/फशनो को े असधक वे असधक राब प्राद्ऱ शो वक। े वॊऩादक
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    44 अक्टू फय 2011 ळयद ऩूस्णाभा (11-अक्टू फय-2011)  सिॊतन जोळी फशॊ द ू ऩॊिाॊग क अनुवाय ऩूये लऴा भं फायश ऩूस्णाभा े आती शं । ऩूस्णाभा क फदन िॊद्रभा अऩने ऩूणा आकाय भं े शोता शै । ऩूस्णाभा ऩय िॊद्रभा का अतुल्म वंदमा दे खते शी फनता शै । त्रलद्रानो क अनुवाय ऩूस्णाभा क फदन िॊद्रभा ऩूणा े े आकाय भं शोने क कायण लऴा भं आने लारी वबी ऩूस्णाभा े ऩला क वभान शं । रेफकन इन वबी ऩूस्णाभा भं आस्द्वन े भाव फक ऩूस्णाभा वफवे श्रेद्ष भानी गई शै । मश ऩूस्णाभा ळयद ऋतु भं आने क कायण इवे ळयद ऩूस्णाभा बी कशते े शं । ळयद ऋतु की इव ऩूस्णाभा को ऩूणा िॊद्र का अस्द्वनी नषि वे वॊमोग शोता शै । अस्द्वनी जो नषि क्रभ भं प्रथभ नषि शं , स्जवक स्लाभी अस्द्वनीकभाय शै । े ु एक वाशुकाय क दो ऩुत्रिमाॉ थी। दोनो ऩुत्रिमाॉ ळयद े कथा क अनुळाय च्मलन ऋत्रऴ को आयोग्म का े ऩुस्णाभा का व्रत यखती थी। ऩयडतु फडी ऩुिी ऩूया व्रत ऩाठ औय औऴसध का सान अस्द्वनीकभायं ने शी फदमा था। ु कयती थी औय छोटी ऩुिी अधुया व्रत कयती थी। ऩरयणाभ मशी सान आज शजायं लऴा फाद बी शभाये ऩाव अनभोर मश शुआ फक छोटी ऩुिी की वडतान ऩैदा शोते शी भय धयोशय क रूऩ भं वॊसित शै । अस्द्वनीकभाय आयोग्म क े ु े जाती थी। उवने ऩॊफडतो वे इवका कायण ऩूछा तो उडशोने स्लाभी शं औय ऩूणा िॊद्रभा अभृत का स्रोत। मशी कायण शै फतामा की तुभ ऩूस्णाभा का अधूया व्रत कयती थी स्जवके फक ऐवा भाना जाता शै फक इव ऩूस्णाभा को ब्रह्माॊड वे कायण तुम्शायी वडतान ऩैदा शोते शी भय जाती शं । ऩूस्णाभा अभृत की लऴाा शोती शै । का ऩुया त्रलसधऩुलाक कयने वे तुम्शायी वडतान जीत्रलत यश खीय का बोग वकती शं । उवने ऩॊसतडतो फक वराश ऩय ऩूस्णाभा का ऩूया ळयद ऩूस्णाभा की यात भं गाम क दध वे फनी े ू व्रत त्रलसधऩूलक फकमा। उवक रडका शुआ ऩयडतु ळीघ्र शी ा े खीय को िॊद्रभा फक िाॊदनी भं यखकय उवे प्रवाद-स्लरूऩ भय गमा । उवने रडक को रकडी क ऩट्टे ऩय सरटाकय े े ग्रशण फकमा जाता शै । ऩूस्णाभा की िाॊदनी भं 'अभृत' का ऊऩय वे कऩडा ढक फदमा। फपय फडी फशन को फुराकय अॊळ शोता शै , इव सरमे भाडमता मश शै फक ऐवा कयने वे राई औय फैठने क सरए लशी ऩट्टा दे फदमा। फडी फशन े िॊद्रभा की अभृत की फूॊदं बोजन भं आ जाती शं स्जवका जफ ऩीढे ऩय फैठने रगी जो उवका घाघया फच्िे का छू वेलन कयने वे वबी प्रकाय की फीभारयमाॊ आफद दय शो ू ु गमा, फच्िा घाघया छते शी योने रगा। फडी फशन फोरी जाती शं । आमुलद क ग्रॊथं भं बी इवकी िाॊदनी क े े े तुभ भुझे करक रगाना िाशती थी। भेये फैठने वे मश भय ॊ औऴधीम भशत्ल का लणान सभरता शै । यखकय दध वे फनी ू जाता तफ छोटी फशन फोरी मश तो ऩशरे वे भया शुआ खीय को िाॊदनी क भं अवाध्म योगं की दलाएॊ स्खराई े था। तेये शी बाग्म वे मश ऩुन् जीत्रलत शो गमा शं । तेये जाती शै । ऩुण्म वे शी मश अबी जीत्रलत शुआ शं । उवक फाद वे ळयद े ळयद ऩूस्णाभा की कथा: ऩुस्णाभा का ऩूया व्रत कयने का प्रिरन िर सनकरा।
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    45 अक्टू फय 2011 कोजागयी ऩूस्णाभा (11-अक्टू फय-2011)  सिॊतन जोळी आस्द्वन भाव की ऩूस्णाभा को 'कोजागय व्रत' यखा जाता शं । इव सरमे इव ऩूस्णाभा को कोजागयी ऩूस्णाभा बी कशा जाता शै । इव फदन व्मत्रक्त त्रलसधऩूलाक स्नान कयक व्रत-उऩलाव यखने का त्रलधान शं । इव फदन श्रद्धा बाल वे ताॉफे मा सभट्टी े क करळ ऩय लस्त्र वे ढॉ की शुई स्लणाभमी रक्ष्भी की प्रसतभा को स्थात्रऩत फकमा जाता शं । फपय रक्ष्भी जी फक सबडन- े सबडन उऩिायं वे ऩूज-अिाना कयने का त्रलधान शं । वामॊकार भं िडद्रोदम शोने ऩय वोने , िाॉदी अथला सभट्टी क घी वे े बये शुए दीऩक जराने फक ऩयॊ ऩया शं । इव फदन घी सभसश्रत खीय को ऩािं भं डारकय उवे िडद्रभा की िाॉदनी भं यखा जाता शं । एक प्रशय (३ घॊटे) खीय को िाॉदनी भं यखनेक फाद भं उवे रक्ष्भीजी को वायी खीय अऩाण फक जाती शं । तत्ऩद्ळात बत्रक्तऩूलक वास्त्लक ब्राह्मणं े ा को खीय का बोजन कयाएॉ औय उनक वाथ शी भाॊगसरक गीत गाकय तथा भॊगरभम कामा कयते शुए यात्रि जागयण फकमा े जाता शं । भाडमता शं फक ऩूस्णाभा फक भध्मयात्रि भं दे ली भशारक्ष्भी अऩने शाथो भं लय औय अबम लयदान सरए बूरोक भं त्रलियती शं । इव फदन जो बक्तजन जाग यशा शोता शं उवे भाता रक्ष्भी धन-वॊऩत्रत्त प्रदान कयती शं । दलाा ऩूजन भं यखे वालधासनमाॊ ु  भाता दगाा की ऩूजा कयने लारे वाधकं को उऩावना वॊफॊधी इन फातं का ध्मान यखना राबदामक ु यशता शं । त्रलद्रानो क भत भं ळास्त्रोक्त त्रलधान वे एक शी घय भं तीन ळत्रक्तमं की ऩूजा कयना लस्जात शं । े  दे लीऩीठ ऩय लाद्य-ळशनाई का लादन नशीॊ कयं ।  बगलती दगाा का आह्लान त्रफल्ल ऩि, त्रफल्ल ळाखा मा त्रिळूर ऩय शी फकमा जाना िाफशए। ु  दे ली दगाा को कलर रार कनेय औय वुगॊसधत ऩुष्ऩ असत त्रप्रम शं । इव सरमे आयाधना भं वुगॊसधत ु े ऩुष्ऩ शी रं।  नलयाि भं करळ की स्थाऩना कलर फदन भं कयनी िाफशए। े  भाॊ बगलती की प्रसतभा शभेळा रार लस्त्र वे त्रफयाजीत यशे ।  दे ली को बी रार यॊ ग की िुनयी िढाएॊ। नलयाि भं नलाणा भॊि जऩ दे ली भाॊ क वाभने रार आवन ऩय फैठकय रार िॊदन की भारा वे कयना े राब प्रद शोता शं ।
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    46 अक्टू फय 2011 कयला िौथ व्रत (15-अक्टू फय-2011)  सिॊतन जोळी कासताक भाव फक ितुथॉ क फदन त्रललाफशत भफशराओॊ े प्रकट कय फदमा। तफ श्रीकृ ष्ण ने द्रोऩदी को कयलािौथ व्रत द्राया कयला िौथ का व्रत फकमा जाता शै । कयला का अथाात कयने का त्रलधान फतामा। द्रोऩदी ने श्रीकृ ष्ण वे व्रत का सभट्टी क जर-ऩाि फक ऩूजा कय िॊद्रभा को अध्मा दे ने का े त्रलसध-त्रलधान जान कय व्रत फकम औय उवे व्रत का पर भशत्ल शं । इवीसरए मश व्रत कयला िौथ नाभ वे जाना जाता सभरा, अजुन वकळर ऩलात ऩय तऩस्मा ऩूयी कय ळीघ्र रौट ा ु शं । इव फदन ऩत्नी अऩने ऩसत की दीघाामु क सरमे े आए। भॊगरकाभना औय स्लमॊ क अखॊड वौबाग्म यशने फक े ऩूजन-त्रलसध: कयला िौथ क फदन ब्रह्म भुशूता भं उठ कय े काभना कयती शं । कयला िौथ क ऩूये फदन ऩत्नी द्राया उऩलाव े स्नान क स्लच्छ कऩडे ऩशन कय कयला की ऩूजा-आयाधना े यखा जाता शं । इव फदन यात्रि को जफ आकाळ भं िॊद्रम उदम कय उवक वाथ े सळल-ऩालाती फक ऩूजा का त्रलधान शं । वे ऩूला वोरश वृॊगाय कय िॊद्र सनकरने फक प्रसतषा कयती क्मोफक भाता ऩालाती नं कफठन तऩस्मा कय क सळलजी को े शं । व्रत का वभाऩन िॊद्रभा को अध्मा दे ने क वाथ शी उवे े प्राद्ऱ कय अखॊड वौबाग्म प्राद्ऱ फकमा था। इव सरमे सळल- छरनी वे दे खा जाता शं , उवक फाद ऩसत क ियण स्ऩळा कय े े ऩालाती फक ऩूजा फक जाती शं । उनवे आळीलााद प्राद्ऱ कयती शं । ऐवी भाडमता शै फक इव व्रत को कयला िौथ क फदन िॊद्रभा फक ऩूजा का धासभाक औय ज्मोसतऴ े कयने वे भफशराएॊ अखॊड वौबाग्मलती शोती शं , उवका ऩसत दोनं शी द्रत्रद्श वे भशत्ल शै । दीघाामु शोता शं । छाॊदोग्म उऩसनऴद् क अनुळाय जो िॊद्रभा भं ऩुरुऴरूऩी ब्रह्मा फक े मफद इव व्रत को ऩारन कयने लारी ऩत्नी अऩने उऩावना कयता शै , उवक वाये ऩाऩ नद्श शो जाते शं , उवे जीलन े ऩसत क प्रसत भमाादा वे, त्रलनम्रता वे, वभऩाण क बाल वे यशे े े भं फकवी प्रकाय का कद्श नशीॊ शोता। उवे रॊफी औय ऩूणा आमु फक औय ऩसत बी अऩने वभस्त कताव्म एलॊ धभा का ऩारन प्रासद्ऱ शोती शं । वुिारु रुऩ वे ऩारन कयं , तो एवे दॊ ऩत्रत्त क जीलन भं े ज्मोसतऴ दृत्रद्श वे िॊद्रभा भन का कायक दे लता शं । अत् िॊद्रभा वबी वुख-वभृत्रद्ध वे बया जाता शं । िॊद्रभा फक ऩूजा कयने वे भन की िॊिरता ऩय सनमॊत्रित यशता कथा : एवी भाडमता शं , फक बगलान श्रीकृ ष्ण ने द्रोऩदी को शं । िॊद्रभा क ळुब शोने ऩय वे भन प्रवडनता यशता शं औय े मश व्रत का भशत्ल फतामा था। ऩाॊडलं क लनलाव क दौयान े े भन वे अळुद्ध त्रलिाय दय शोकय भन भं ळुब त्रलिाय ू अजुन तऩ कयने क सरए इॊ द्रनीर ऩलात ऩय िरे गए। फशुत फदन ा े उत्ऩडन शोते शं । क्मोफक ळुब त्रलिाय शी भनुष्म को अच्छे फीत जाने क फाद बी जफ अजुन नशीॊ रौटे तो द्रोऩदी को सिॊता े ा कभा कयने शे तु प्रेरयत कयते शं । स्लमॊ क द्राया फकमे गई े शोने रगी। जफ श्रीकृ ष्ण ने द्रोऩदी को सिॊसतत दे खा तो पौयन गरती मा एलॊ अऩने दोऴं का स्भयण कय ऩसत, वाव-ववुय सिॊता का कायण वभझ गए। फपय बी श्रीकृ ष्ण ने द्रोऩदी वे औय फुजुगो क ियणस्ऩळा इवी बाल क वाथ कयं फक इव वार े े कायण ऩूछा तो उवने मश सिॊता का कायण श्रीकृ ष्ण क वाभने े मे गरसतमाॊ फपय नशीॊ शं।
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    47 अक्टू फय 2011 धन तेयव ळुब भुशूता (24 अक्तफय, 2011) ू  सिॊतन जोळी एवी ऩौयास्णक भाडमता शं फक धन तेयव क फदन धनलॊतयी े इव लऴा 24 अक्तफय, 2011 (धनतेयव) को बायतीम वभम ू नाभक दे लता अभृत करळ क वाथ वागय भॊथन वे उत्ऩडन शुए े अनुळाय नई फदल्री भं वॊध्मा वूमाास्त क फाद 05 फज कय े थे। धनलॊतयी धन, स्लास्थम ल आमु क असधऩसत दे लता शं । े 44 सभसनट वे आयम्ब शोकय यात क 08 फजकय 06 सभनट े धनलॊतयी को दे लं क लैध ल सिफकत्वक क रुऩ भं जाना जाता े े तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा। इव वभमा अलसध भं शं । स्स्थय रग्न (लृऴब) बी भुशुता वभम भं शोने क कायण े धन तेयव क फदन िाॊदी क फतान-सवक्क खयीदना त्रलळेऴ ळुब े े े घय-ऩरयलाय भं स्थामी रक्ष्भी की प्रासद्ऱ शोती शै । शोता शं । क्मोफक ळास्त्रं भं धनलॊतयी दे ल को िॊद्रभा क वभान े 24 अक्तफय, 2011 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न ू भाना गमा शं । धन तेयव क धनलॊतयी क ऩूजन वे भानसवक े े (लृऴब यासळ) शो यशा शं , स्स्थय रग्न का वभम वफवे उतभ ळास्डत, भन भं वॊतोऴ एल स्लबाल भं वौम्मता का बाल आता शं । भाना जाता शं । धन तेयव क फदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय े जो रोग असधक वे असधक धन एकि कयने फक काभना कयते शं रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 06:54:31 फजे वे रेकय यािी उडशं धनलॊतयी दे ल फक प्रसतफदन आयाधना कयनी िाफशए। 08:49:46 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार क दौयान े धनतेयव ऩय ऩूजा कयने वे व्मत्रक्त भं वॊतोऴ, स्लास्थम, वुख ल वॊध्मा 05:49 फजे वे 07:22 फजे तक िर िौघफडमा शोने धन फक त्रलळेऴ प्रासद्ऱ शोती शं । स्जन व्मत्रक्तमं क उत्तभ स्लास्थम े वे भुशुता की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं । भं कभी तथा वेशत खयाफ शोने फक आळॊकाएॊ फनी यशती शं उडशं िौघाफडमा भुशूता त्रलळेऴ रुऩ वे इव ळुब फदन भं ऩूजा आयाधना कयनी िाफशए।  अभृत भुशूता वुफश 06:10 वे 07:37 तक धनतेयव भं खयीदायी ळुब भानी जाती शं । रक्ष्भी जी एलॊ गणेळ  ळुब भुशूता वुफश 09.04 वे 10:32 तक जी फक िाॊदी फक प्रसतभा-सवक्को को इव फदन खरयदना धन  िर भुशूता दोऩशय 01:34 वे 02:58 तक प्रासद्ऱ एलॊ आसथाक उडनसत शे तु श्रेद्ष शोता शं । धनतेयव क फदन े  राब भुशूता दोऩशय 02:58 वे 04:24 तक बगलान धनलडतयी वभुद्र वे अभृत करळ रेकय प्रकट शुए थे,  अभृत भुशूता दोऩशय 04:24 वे 05:49 तक इवसरमे धनतेयव क फदन खाव तौय वे फतानं फक खयीदायी फक े  िर भुशूता वॊध्मा 05:49 वे 07:22 तक जाती शं । इव फदन स्टीर क फतान, िाॊदी क फतान खयीदने वे े े  राब भुशूता यािी 10:27 वे 12:00 तक प्राद्ऱ शोने लारे ळुब परो भं कई गुणा लृत्रद्ध शोने फक वॊबालना ळुब भशूता का वभम धन तेयव की ऩूजा क सरमे त्रलळेऴ ळुब े फढ़जाती शं । यशे गा। राब भुशूता ऩूजन कयने वे प्राद्ऱ शोने लारे राबं भं लृत्रद्ध धन तेयव ऩूजा भुशूता शोती शं । ळुब कार भुशूता फक ळुबता वे धन, स्लास्थम ल आमु भं प्रदोऴ कार 2 घण्टे एलॊ 24 सभनट का शोता शं । अऩने लृत्रद्ध शोती शं । वफवे असधक ळुब अभृत कार भं ऩूजा कयने का ळशय क वूमाास्त वभम अलसध वे रेकय अगरे 2 घण्टे 24 े शोता शं । सभनट फक वभम अलसध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं । नोट: उऩयोक्त लस्णात वूमाास्त का वभम सनयधायण नई फदल्री अरग- अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार क सनधाायण का आधाय े क अषाॊळ ये खाॊळ क अनुळाय आधुसनक ऩद्धसत वे फकमा गमा े े वूमोस्त वभम क अनुळाय सनधाायीत कयना िाफशमे। धनतेयव े शं । इव त्रलऴम भं त्रलसबडन भत एलॊ वूमाास्त सात कयने का तयीका सबडन शोने क कायण वूमाास्त वभम का सनयधायण े क फदन प्रदोऴकार भं दीऩदान ल रक्ष्भी ऩूजन कयना ळुब े सबडन शो वकता शं । वूमाास्त वभम का सनयधायण स्थासनम यशता शै । वूमाास्त क अनुळाय फश कयना उसित शोगा। े
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    48 अक्टू फय 2011 दीऩालरी ऩूजन भुशूता (26-अक्तफय-2011) ू  सिॊतन जोळी भाॊ रक्ष्भी फक कृ ऩा प्राद्ऱ कयने शे तु एलॊ उनका स्थामी सनलाव शो वक इव उद्दे श्म वे घय-दकान-व्मलवासमक कामाारम भं े ु दीऩालरी क फदन रक्ष्भी ऩूजन शे तु फदन क वफवे ळुब भुशूता को सरमा जाता शं . इव लऴा दीऩालरी का ऩला फुधलाय , 26 अक्तफय, े े ू 2011 भं कासताक भाव फक अभालस्मा, सििा एलॊ स्लासत नषि भं, प्रीती मोग भं भनामा जामेगा. दीऩालरी क फदन अभालस्मा े सतसथ, प्रदोऴ कार, ळुब रग्न ल िौघािफडमा भुशूता त्रलळेऴ का अत्मासधक भशत्ल शोता शं । 26 अक्तफय, 2011 क फदन वूमोदमी नषि सििा, रेफकन यािी 09:43:33 फजे फाद स्लाती नषि यशे गा, इव फदन ू े वूमोदमी मोग त्रलष्कब वॊध्मा 06:29:37 फजे फाद प्रीसत मोग यशे गा। वूमोदमी कयण ितुष्ऩाद दोऩशय 03:19:36 फजे ुॊ ऩद्ळमात नाग कयण यशे गा। वूमोदम क वभम िडद्रभा कडमा यासळ भं दोऩशय 11:16:00 फजे तुरा यासळ भं भ्रभण े कये गा। प्रदोऴ कार 2 घण्टे एलॊ 24 सभनट का शोता शं । अऩने ळशय क वूमाास्त वभम अलसध वे रेकय अगरे 2 घण्टे 24 सभनट फक े वभम अलसध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं । अरग- अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार क सनधाायण का आधाय वूमोस्त वभम क े े अनुळाय सनधाायीत कयना िाफशमे। दीऩालरी प्रदोऴ कार भुशूता अऩने ळशय क वूमाास्त वभम वे 2 घडटे 24 सभनट तक का वभम ळुब भुशूता वभम क सरमे े े प्रमोग फकमा जाता शं . इवे प्रदोऴ कार वभम कशा जाता शं । इव लऴा 26 अक्तफय, 2011 (दीऩालरी) को बायतीम वभम ू अनुळाय नई फदल्री भं वूमाास्त वॊध्मा 05 फज कय 42 सभसनट ऩय शोगा। वॊध्मा 05 फज कय 42 सभसनट वे आयम्ब शोकय यात क 08 फजकय 06 सभनट तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा। े 26 अक्तफय, 2011 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न (लृऴब यासळ) शो यशा शं , स्स्थय रग्न का वभम वफवे उतभ ू भाना जाता शं । फदऩालरी क फदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 06:46:37 फजे वे रेकय यािी े 08:42:04 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार क दौयान वॊध्मा 07:20 फजे वे 08:58 फजे तक ळुब िौघफडमा शोने े वे भुशुता की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं । स्जवभं त्रलळेऴ रूऩ वे श्री गणेळऩूजन, श्री भशारक्ष्भी ऩूजन, कफेय ऩूजन, व्माऩारयक खातं का ऩूजन, दीऩदान एलॊ इव ु वभम क अॊतगात अऩने वेलकं को उऩशाय दे ना ळुब यशता शं । े इव भुशूता वभम भं अऩने ऩरयलाय क फडे वदस्मं एलॊ सभि लगा वे आळीलााद रेना एलॊ उडशं सभठाईमाॊ, लस्त्र ल उऩशाय े आफद दे ना बी ळुब यशता शं । त्रलद्रानो क भत वे इव भुशूता भं ऩरयलाय क फडे वदस्मं एलॊ सभि लगा वे प्राद्ऱ शोने लारा आळीलााद े े ळुब परप्रद सवद्ध शोता शं । इव भुशूता वभम भं भॊफदय इत्माफद धभास्थरो ऩय दान इत्माफद कयना बी त्रलळेऴ राब दामश एलॊ कल्माणकायी शोता शं । . दीऩालरी िौघफडमाॊ भुशूता दीऩालरी िौघ़फडमा भुशूता वभम को घय ल ऩरयलाय भं रक्ष्भी ऩूजन कयने क सरमे ळुब भाना जाता शै . श्रीभशारक्ष्भी ऩूजन एलॊ े दीऩालरी का भशाऩला कासताक कृ ष्ण अभालस्मा भं प्रदोऴ कार एलॊ यात्रि वभम भं स्स्थय रग्न वभम भं कयना ळुब शोता शै रक्ष्भी ऩूजन, दीऩ प्रजलस्ल्रत कयने क सरमे प्रदोऴकार भुशूता वभम शी त्रलळेऴतमा ळुब भाना गमा शै . े
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    49 अक्टू फय 2011 रक्ष्भी ऩूजा भुशूता दीऩालारी क फदन  े  राब भुशूता वुफश भं  वे  तक  अभृत भुशूता वुफश भं  वे  तक  ळुब भुशूता दोऩशय भं  वे  तक   िय भुशूता दोऩशय भं  वे  तक  राब भुशूता दोऩशय भं  वे वॊध्मा   ळुब भुशूता वॊध्मा भं  वे  तक  ळुब भुशूता वॊध्मा भं  वे  तक  अभृत भुशूता यात भं  वे  तक   िय भुशूता यात भं वे यात तक नोट: उऩयोक्त लस्णात वूमाास्त का वभम सनयधायण नई फदल्री क अषाॊळ ये खाॊळ क अनुळाय आधुसनक ऩद्धसत वे फकमा े े गमा शं । इव त्रलऴम भं त्रलसबडन भत एलॊ वूमाास्त सात कयने का तयीका सबडन शोने क कायण वूमाास्त वभम का े सनयधायण सबडन शो वकता शं । वूमाास्त वभम का सनयधायण स्थासनम वूमाास्त क अनुळाय फश कयना उसित शोगा। े भॊि सवद्ध गणेळ मॊि गणेळ मॊि रक्ष्भी गणेळ मॊि एकाषय गणेळ मॊि (वॊऩूणा फीज भॊि वफशत) गणऩसत मॊि गणेळ सवद्ध मॊि शरयद्रा गणेळ मॊि ताम्र ऩि ऩय वुलणा ऩोरीव ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीव ताम्र ऩि ऩय (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) वाईज भूल्म वाईज भूल्म वाईज भूल्म 2” X 2” 640 2” X 2” 460 2” X 2” 370 3” X 3” 1250 3” X 3” 820 3” X 3” 550 4” X 4” 1850 4” X 4” 1250 4” X 4” 820 6” X 6” 2700 6” X 6” 2100 6” X 6” 1450 9” X 9” 4600 9” X 9” 3700 9” X 9” 2450 12” X12” 8200 12” X12” 6400 12” X12” 4600 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    50 अक्टू फय 2011 नमे कऩडे औय ज्मोसतऴ  सिॊतन जोळी ज्मोसतऴ क अनुळाय कछ त्रलळेऴ नषिो भं नए े ु योफशणी (स्लाभी-िॊद्रभा): कऩड़े ऩशने वे इवका ळुब पर प्राद्ऱ शोता शं , एलॊ कछ ु योफशणी नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फकवी बी स्त्रोत वे नषिो भं नए कऩड़े ऩशनने वे स्लास््म, आसथाक ऩये ळासन अत्मासधक धनराब क मोग फनता शं । े इत्माफद वभस्माए उत्ऩडन शोती शं । भृगसळया (स्लाभी-भॊगर): नमे कऩड़े धायण कयने शे तु अस्द्वनी, योफशणी, ऩुष्म, भृगसळया नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे उन कऩडो क जल्द े सििा, ऩूनलावु, उत्तय पाल्गुसन, शस्त, त्रलळाखा, अनुयाधा, खयाफ शोने की वॊबालना ये शती शं । उत्तयऴाढ, धसनद्षा, उत्तय बाद्रऩद, ये लसत, ळुब भाने गमे शं । अस्द्वनी (स्लाभी-कतु): े आद्रा (स्लाभी-याशू): अस्द्वनी नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फकवी बी दोस्त मा आद्रा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे धन नाळ की आळॊका रयश्तेदाय क द्राया उऩशाय प्राद्ऱ शोता शं । े ये शती शं । बयणी (स्लाभी-ळुक्र): ऩूनलावु (स्लाभी-गुरू ): बयणी नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे इव ऩूनलावु नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे अस्लीकृ सत मा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फदनाभी शोने की आळॊका भानसवक िावदी जेसव कफठनाई का वाभना कयना ऩडता असधक ये शती शं । कृ सतका (स्लाभी-वूम): ा शं । कृ सतका नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे इव नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे घय मा व्मलाम क स्थान ऩय े ऩुष्म (स्लाभी-ळसन ): अस्ग्न बम फना यशता शं । शं । ऩुष्म नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फकवी बी स्रोत द्राया उच्ि स्तय का धन राब शोने का मोग फनता शं । भॊगर मॊि वे ऋण भुत्रक्त आळरेऴा (स्लाभी-फुध): ऋण भुत्रक्त शे तु भॊगर वाधना का प्रमोग असत आळरेऴा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिे इव नषि भं राब प्रद शोता शं । कजा क दरदर भं पवे े नए कऩड़े ऩशने वे कऩड़े क नाळ शोने की वॊबालना शोती े व्मत्रक्तमं क सरमे कजा वे भुत्रक्त प्राद्ऱ कयने शे तु े शं । ळास्त्रोक्त त्रलधान वे उत्तभ उऩाम शोता शं भॊगर भघा (स्लाभी-कतु): े वाधना का प्रमोग जो त्रलळेऴ राब प्रदान कयने भघा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे इव लारा शोता शं । भॊगर वाधना का प्रमोग कोई बी नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे जीलन भी उडनसत शे तु व्मत्रक्त वयरता कय वकता वे कयक ळीघ्र राब े कफठनाई उतऩडन शोती शं । प्राद्ऱ कय वकता शं । Rs.550 वे Rs.8200 तक
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    51 अक्टू फय 2011 ऩूलाा पारगुसन (स्लाभी-ळुक्र): ऩूलााऴाढ़ा (स्लाभी-ळुक्र): ऩूलाा पारगुसन नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे ऩूलााऴाढ़ा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे इव इव नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फशोत वायी ऩये ळासनमं नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे स्लास््म वभस्मा शोकय योग वे वम्भुखीन शोना ऩडता शं । उत्ऩडन शोते शं । उत्तय पाल्गुसन (स्लाभी-वूम): ा उत्तयाऴाढ़ा (स्लाभी-वूम): ा उत्तय पाल्गुसन नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे आभदनी भं उत्तयाऴाढ़ा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे वफक वाथ भे े लृत्रद्ध शोकय जीलन भं उडनसत प्राद्ऱ शोती शं । अच्छे वम्फडध त्रलकसवत शोते शं । शस्त (स्लाभी-िॊद्रभा): श्रलण (स्लाभी-िॊद्रभा): शस्त नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे बाग्म एलॊ धन की श्रलण नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिे इव नषि भं नए लृत्रद्ध शोकय वबी प्रकाय की वुख वुत्रलधा प्राद्ऱ शोती शं । कऩड़े ऩशने वे आॊखो वे वॊफॊसधत वभस्मा उत्ऩडन शोती शं । सििा (स्लाभी-भॊगर): सििा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे रयश्तेदाय मा सभि लगा धसनद्षा (स्लाभी-भॊगर): वे अडम कऩड़े उऩशाय भं सभरते शं । धसनद्षा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे नौकयी व्मलवाम भं नमे आम क स्त्रोत का मोग फनते शं । े स्लाती (स्लाभी-याशू): स्लाती नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे सभि लगा द्राया उत्तभ ळतसबऴा (स्लाभी-याशू): उऩशाय की प्रासद्ऱ शोती शं । ळतसबऴा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिे क्मोफक इस्व नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे त्रलऴ मा फकवी स्जल जॊतु के त्रलळाखा (स्लाभी-गुरू): काटने का बम ये शता शं । त्रलळाखा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे रयश्तेदाय एलॊ सभि लगा द्राया प्रसवत्रद्ध क मोग प्रफर शोते शं । े ऩूलाा बाद्रऩद (स्लाभी-गुरू): ऩूलाा बाद्रऩद नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे अनुयाधा (स्लाभी-ळसन): मे इव नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे स्लमॊ क सरमे े अनुयाधा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे नमे दोस्त एलॊ शासनकायक शोता शं । वशकभॉ वं राब प्राद्ऱ शोता शं । उत्तय बाद्रऩद (स्लाभी-ळसन): ज्मेद्षा (स्लाभी-फुध): उत्तय बाद्रऩद भे मफद आऩका जडभ शुला शं तो आऩकी ज्मेद्षा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फकवी बी स्त्रोत वे वॊतान को इव नषि भं नए कऩड़े नशीॊ ऩशना ने िाफशमे उत्तभ धन की प्रासद्ऱ शोती शं । नशीॊ तो उनक सरमे शासनकायक शं । े भूरा (स्लाभी-कतु): े ये लती (स्लाभी-फुध): भूरा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिे िाफशमे इव नषि यलती नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे एकासधक स्त्रोत वे धन भं नए कऩड़े ऩशने वे कऩड़ो का त्रलनाळ ळीघ्र शो जाता राब प्राद्ऱ शोता शं । शं ।
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    52 अक्टू फय 2011 ळास्त्रोक्त त्रलधान वे दीऩालरी ऩूजन  आरोक ळभाा शभाये धभाळास्त्रो भं कासताक भाव भं दीऩ दान का त्रलळेऴ अथाात: वभुद्र-भॊथन क वभम षीय वागय वे उत्ऩडन े भशत्ल फतामा गमा शै । दीऩालरी भं दीऩदान का त्रलळेऴ भशत्ल दे लताओॊ तथा दानलं द्राया नभस्काय फक गई वला फतामा शं । दे लस्लरूत्रऩणी भाता। आऩको फाय-फाय नभस्काय शं । आऩ भेये द्राया फदमे शुए इव अघ्मा को स्लीकाय कयो। श्रीऩुष्कयऩुयाण क अनुळाय: े इव फदन ऩूजन क फाद गाम को उड़द क फड़े स्खरा कय प्राथाना े े कयने का त्रलधान शं । तुरामाभ ् सतरतैरेन वामॊकारे वभागते। वुयसब त्लॊ जगडभातदे ली त्रलष्णुऩदे स्स्थता। आकाळदीऩभ ् मो दद्याडभावभेकभ ् शरयभ ् प्रसत। वलादेलभमे ग्रावॊ भमा दत्तसभभॊ ग्रव।। भशतीभ ् सश्रमभाप्नोसत रूऩवौबाग्मवम्ऩदभ ्।। तत् वलाभमे दे त्रल वलादेलैयरङ्कृ ते। अथाात: जो व्मत्रक्त कासताक भाव भं भातभाभासबरात्रऴतॊ वपरॊ करु नस्डदनी।। ु वॊध्मा वभम बगलान श्री अथाात: शे जगदम्फे, शे स्लगा लासवनी दे ली, शे वला दे लभमी, शरय(त्रलष्णु) क नाभ वे सतर क तेर े े भेये द्राया अत्रऩत इव अडन को ग्रशण कयो। शे ा का दीऩ जराता शं , उवे अतुर वभस्त दे लताओॊ द्राया अरॊकृत भाता नॊफदनी रक्ष्भी, रूऩ, वौबाग्म औय वॊऩत्रत्त भेया भनोयथ ऩूणा कयो। फक प्रासद्ऱ शोती शं । इवक फाद याि क वभम इद्श, ब्राह्मण, े े दे लत्रऴा नायदजी क अनुवाय दीऩालरी े गौ, घय क लृद्धजनं फक आयती उतायने े ऩला द्रादळी, िमोदळी, ितुदाळी, का त्रलधान शं । अभालस्मा औय प्रसतऩदा तक 5 फदन िमोदळी (धनतेयव) भनाना िाफशए। दीऩालरी ऩला प्रत्मेक फदन कासताक कृ ष्ण िमोदळी को धनतेयव क रुऩ भं े अरग-अरग प्रकाय फक ऩूजा का त्रलधान शं । भनामा जाता शं । ळास्त्रो भं उल्रेख सभरता शं फक गोलत्व द्रादळी बगलान धडलॊतयी ने वभुद्र-भॊथन क दौयान प्रकट शोकय द्खी े ु कासताक भाव फक द्रादळी को गोलत्व द्रादळी क फदन दध दे ने े ू जनं क योगसनलायणाथा आमुलद का प्राकट्म फकमा था। े े लारी गाम को उवक फछड़े वफशत स्नान कयाकय लस्त्र ओढ़ा े धनतेयव क फदन वॊध्मा क वभम घय औय आॊगन भं शाथ भं े े कय गरे भं ऩुष्ऩभारा ऩशनाना, उवक वीॊग भॉढ़ाना, िॊदन का े जरता शुआ दीऩ रेकय सनिे फदमे भॊि वे बगलान मभयाज फक सतरक कयना तथा ताॉफे क ऩाि भं वुगडध, अषत, ऩुष्ऩ, सतर े प्रवडनता शे तु इव भॊि क वाथ दीऩदान कयने का त्रलधान शं । े औय जर का सभश्रण कय सनम्न भॊि वे गौ क ियणं का े भृत्मुना ऩाळदण्डाभ्माॊ कारेन श्माभमा वश। प्रषारन कयना िाफशए। िमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज् प्रीमताॊ भभ।। ा षीयोदाणालवम्बूते वुयावुयनभस्कृ ते। अथाात: िमोदळी क फदन दीऩदान वे ऩाळ औय दॊ डधायी भृत्मु े वलादेलभमे भातगृशाणाघ्मं नभो नभ्।। ा तथा कार क असधऩसत दे ल बगलान मभ, दे ली श्माभावफशत े भुझ ऩय प्रवडन शं।
  • 53.
    53 अक्टू फय 2011 नयक ितुदाळी कयने वे अडम फदनं की अऩेषा कई गुना असधक राब प्राद्ऱ कासताक कृ ष्ण ितुदाळी को नयक ितुदाळी क रुऩ भं भनामा े शोता शं । दीऩालरी क फदन ऩशरे वे शी स्लच्छ फकमे गृश को े जाता शं । इव फदन ितुभखी दीऩ का दान कयने का त्रलधान शं । ुा वुवस्ज्जत कय बगलान नायामण क वाथ भाॊ रक्ष्भी फक भूसता े भाडमता शं , दीऩ दान वे नयक बम वे भुत्रक्त सभरती शं ! नयक मा सिि फक स्थाऩना कय उनका त्रलसधलत ऩूजन कयने का त्रलधान शं । ितुदाळी फक यात को एक िाय भुख (िाय फत्ती) लारा दीऩ जराकय सनिे फदमे भॊि वे दीऩदान कयने का त्रलधान शं । प्रसतऩदा दत्तो दीऩद्ळतुदाश्माॊ नयकप्रीतमे भमा। कासताक ळुक्र प्रसतऩदा को अडनकट फदलव क रुऩ भं भनामा ू े ितुलसतावभामुक्त् वलाऩाऩाऩनुत्तमे।। ा जाता शं । इव फदन गाम को वजाकय, उनकी ऩूजा कयक सनिे े आज ितुदाळी क फदन नयक क असबभानी दे लता फक प्रवडनता े े फदमे भॊि उच्िायण कयने का त्रलधान शं । क सरए एलॊ वभस्त ऩाऩं क त्रलनाळ क सरए भं िाय भुख े े े रक्ष्भीमाा रोकऩारानाॊ धेनुरूऩेण वॊस्स्थता। लारा िौभुखा दीऩ अत्रऩत कयता शूॉ। ा घृतॊ लशसत मसाथे भभ ऩाऩॊ व्मऩोशतु।। अथाात: धेनुरूऩ भं स्स्थत जो रोकऩारं फक वाषात रक्ष्भी शं दीऩालरी तथा जो मस क सरए घी दे ती शं , लश गाम भाता भेये ऩाऩं का े कासताक अभालस्मा को दीऩालरी क रुऩ भं भनामा जाता शं । े नाळ कये । इव फदन प्रात् उठकय स्नानाफद वे सनलृत्त शोकय जऩ-तऩ रक्ष्भी प्रासद्ऱ शे तु कयं यासळ भॊि का जऩ भेऴ : ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भीनायामण नभ्। लृऴब : ॐ गौऩारामै उत्तय ध्लजाम नभ्। सभथुन : ॐ क्रीॊ कृ ष्णामै नभ्। कक : ॐ फशयण्मगबाामै अव्मक्त रूत्रऩणे नभ्। ा सवॊश : ॐ क्रीॊ ब्रह्मणे जगदाधायामै नभ्। कडमा : ॐ नभो प्रीॊ ऩीताम्फयामै नभ्। तुरा : ॐ तत्ल सनयॊ जनाम तायक याभामै नभ्। लृस्द्ळक : ॐ नायामणाम वुयसवॊशामै नभ्। धनु : ॐ श्रीॊ दे लकीकृ ष्णाम ऊध्लाऴॊतामै नभ्। भकय : ॐ श्रीॊ लत्वरामै नभ्। कब : श्रीॊ उऩेडद्रामै अच्मुताम नभ्। ॊु भीन : ॐ क्रीॊ उद्‍ ताम उद्धारयणे नभ्। धृ यासळ भॊि क जाऩ कयने वे वबी प्रकाय क कामा भं ळीघ्र वपरता प्राद्ऱ शोती शं । े े यासळ भॊि क जाऩ वे व्मत्रक्त शय प्रकाय क वॊकट वे वुयस्षत यशता शं । व्मत्रक्त आसथाक रूऩ वे ऩूणा े े वॊऩडन शो जाता शं ।
  • 54.
    54 अक्टू फय 2011 रक्ष्भी प्रासद्ऱ क वयर उऩाम े  सिॊतन जोळी जो रोग बौसतक वुख भृत्रद्ध क कायक श्रीमॊि, दस्षणा लसता े ळॊख इत्मा आफद घय भं स्थात्रऩत कय ऩूज नशी कय ऩाते अथला इन लस्तुओॊ को खरयदने भं अवभथा शो लश उऩामोको को अऩनाकय जीलन भं वुख-वभृत्रद्ध एलॊ ऎद्वमा प्राद्ऱ कय वकते शं ।  प्रात् उठते शी शस्तदळान (प्रात् कय दळानभ ्) कय दोनं शथेसरमं को 2-3 फाय भुॊश ऩय पयना िाफशमे। े  जफ बी फकवी कामा वे फाशय सनकरे तो घय ऩय आते वभम कछ ु ना कछ वाथ रेकय शी आए खारी शाथ नशीॊ आए िाशे ऩेड का ु ऩत्ता-अखफाय मा जीलन जरुयत फक लस्तुएॊ रेकय आमं। (वूमाास्त क फाद भं ऩेड क ऩत्ते तोडना शानी कायक शोता शं ।) े े  धन मा व्माऩाय वे वॊफॊधीत रेन-दे न क खाते ऩय मा ऩि व्मलशाय े कयते वभम शल्दी मा कळय रगामं। े  गल्रे भं, ऩैवे क रेन-दे न वे वॊफॊसधत, िैक फुक-ऩावफुक, ऩूॊजी े सनलेळ वे वॊफॊसधत कागजात इत्माफद श्री मॊि क वाथ भं यखं। े  प्रसतफदन बोजन क सरए फनी ऩशरी योटी गाम को स्खरामे। े  ळुक्रलाय को वपद लस्तुओॊ का दान कयने वे धन मोग फनता शं । े  प्रात : कार नाळता कयने वे ऩूला झाडू अलश्म रगामे।  यात को झूठे फतान, किया इत्माफद यवोई भं नशीॊ यखे।  प्रसतफदन वॊध्मा वभम घय ऩय ऩूजा सनमत वभम ऩय कये ।  सनमसभत रुऩ वे ळसनलाय क फदन घय फक वाफ़-वपाई कयं । े  रुऩमा ऩैवा धन को थूक रगाकय सगनने वे दरयद्रता आती शं ।  फुधलाय को धन का वॊिम कयं । फंक भं धन जभा कयलाते वभम रक्ष्भी भॊि जऩा कये ।  घय भं फकवी बी दे ली दे लता फक एक वे ज्मादा तस्लीय,भूसता ऩूजा स्थान नशीॊ यखे।  जरुयत भॊद व्मत्रक्त, गरयफो को मथावत्रक्त भदद कय उडशं दान इत्माफद वभम-वभम ऩय दे ते यशं ।  ऩुयानी, यद्दी बॊगाय इत्माफद ळसनलाय क फदन घय वे फाशय सनकार दे नी िाफशमे। े  ळसनलाय क फदन कारे यॊ ग फक लस्तु, स्टीर, रोशा इत्माफद उऩशाय भं नशीॊ रेनी िाफशमे। े  फकवी कमा क सरमे जाते वभम खारी ऩेट कबी बी घय वे ना सनकरे । कामा भं फाधा त्रलघ्न आते शं , अवपरता े प्राद्ऱ शोती शं ।  भॊगरलाय, गुरुलाय, ळसनलाय को फार-नाखून नशीॊ काटने िाफशमे।  स्स्थय रक्ष्भी फक काभना शे तु रुऩमा-ऩैवा-शीये जलाशयात ऩीरा कऩडा त्रफछाकय मा ऩीरे कऩडे भं रऩेटकय यखं।
  • 55.
    55 अक्टू फय 2011  लऴा भं कभ वे कभ एक फाय ऩरयलाय क वाथ तीथा मािा अलश्म े कयं । ऩरयलाय क वाथ फकवी दे ली भंफदय भफशने भं कभ वे कभ े एक फाय भं अलश्म जामे।  वूमोदम क वभम मफद घय की छत ऩय कारे सतर त्रफखेयने वे े घय भं वुख वभृत्रद्ध शोती शं ।  अळोक का ऩेड़ रगाकय उवको वीॊिने वे धन भं लृत्रद्ध शोती शं ।  वुफश भुख्म दयलाजे क फाशय वे झाडू वे वपाई कयक थोडा ऩानी े े सछड़क ने वे घय भं धन फक लृत्रद्ध शोती शं ।  प्रसत वोभलाय, फुधलाय, ळुक्रलाय अळोक लृष क अखॊफडत ऩत्ते े घयभं राकय ळुद्ध जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩडे वे ऩोछकय घय भं मा व्मलवामीक स्थान ऩय यखने वे धनराब शोता शं ।  प्रसत वोभलाय क फदन अळोक लृष क अखॊफडत ऩत्ते राकय ळुद्ध े े जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩडे वे ऩोछकय दकान भं मा ु व्मलवामीक स्थर ऩय भार वाभान यखने फक जगश ऩय यखने वे व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं ।  प्रसत फुधलाय क फदन अळोक लृष क अखॊफडत ऩत्ते राकय ळुद्ध जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩडे वे ऩोछकय े े अरभायी, गल्रे भं मा धन यखने क फक्वे भं यखने वे धन फृत्रद्ध शोती शं । े  अळोक क भूर की जड़ का एक टु कड़ा ऩूजा घय भं यखने औय योजाना धूऩ-दीऩ वे ऩूजन कयने वे धन फक कभी े नशीॊ खोती।  सतजोयी क रॉकय भं शभेळा दो फॉक्व यखं। एक भं योजाना कछ रूऩमे यख कय फॊद कय दं , उवभं वे रूऩमे नशीॊ े ु सनकारं मा अत्मासधक आलश्मकता शोने ऩय सनकारे। दवये फॉक्व भं वे काभ क रेन-दे न क सरए रूऩए सनकारं। ू े े  प्रसतफदन आभदनी का करेक्ळन दवये फदन स्लमॊ क खिे क सरमे मा फकवी व्माऩायी को िुकाने शे तु सनकारे। ू े े आभदनी मा करेक्ळन को कभ वे कभ 24 घॊटे क फाद शी खिा क सरमे सनकारने वे अत्मासधक धन राब शोता शं । े े  जो रोग नौकयी रयते शं लश बी अऩना ऩैवा फंक भं आने क मा घय भं राने क 24 घॊटे क फाद शी खिा क सरमे े े े े सनकारने वे अत्मासधक धन राब शोता शं । भॊि सवद्ध दरब वाभग्री ु ा शत्था जोडी- Rs- 370 घोडे की नार- Rs.351 भामा जार- Rs- 251 सवमाय सवॊगी- Rs- 370 दस्षणालतॉ ळॊख- Rs- 550 इडद्र जार- Rs- 251 त्रफल्री नार- Rs- 370 भोसत ळॊख- Rs- 550 धन लृत्रद्ध शकीक वेट Rs-251 गुरुत्ल कामाारम: Call Us : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785, E-mail Us:- gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    56 अक्टू फय 2011 रक्ष्भी भॊि  सिॊतन जोळी भॊि : 1. ॐ श्री भशारक्ष्म्मै नभ्। 2. श्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ कभरे कभरारमे। 3. श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ कभरलासवडमै स्लाशा । 4. ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै नभ्। 5. ॐ श्रीॊ सश्रमै नभ्। 6. ॐ ह्री श्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ भशारक्ष्भी भभ गृशे धनॊ ऩूयम ऩूयम सिॊतामै दयम दयम स्लाशा । ू ू 7. धन राब एलॊ वभृत्रद्ध भॊि ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ त्रिबुलन भशारक्ष्म्मै अस्भाॊक दारयद्र्म नाळम प्रिुय धन दे फश दे फश क्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ ॐ । 8. अषम धन प्रासद्ऱ भॊि ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ वं ॐ ह्रीॊ क ए ई र ह्रीॊ श व क श र ह्रीॊ वकर ह्रीॊ वं ऐॊ क्रीॊ ह्रीॊ श्री ॐ । कवे कयं भॊि जाऩ :- ै धनतेयव मा दीऩालरी क फदन वॊकल्ऩ रेकय प्रात्कार स्नान कयक ऩूला मा उत्तय फदळा फक औय भुख े े कयक रक्ष्भी फक भूसता े मा सिि की ऩॊिोऩिाय मा दषोऩिाय मा ऴोड्ऴोऩिाय वे ऩूजा कयं । ळुद्ध-ऩत्रलि आवन ग्रशण कय स्पफटक फक भारा वे भॊि का जाऩ १,५,७,११ भारा जाऩ ऩूणा कय अऩने कामा उद्दे श्म फक ऩूसता शे तु भाॊ रक्ष्भी वे प्राथना कयं । असधकस्म असधक परभ ्। ॊ जऩ स्जतना असधक शो वक उतना अच्छा शै । मफद भॊि असधक फाय जाऩ कय वक तो श्रेद्ष। े ं प्रसतफदन स्नान इत्माफदवे ळुद्ध शोकय उऩयोक्त फकवी एक रक्ष्भी भॊि का जाऩ 108 दाने फक भारा वे कभ वे कभ एक भारा जाऩ अलश्म कयना िाफशए। उऩयोक्त भॊि क त्रलसध-त्रलधान क अनुवाय जाऩ कयने वे भाॊ रक्ष्भी फक कृ ऩा वे व्मत्रक्त को धन की प्रासद्ऱ शोती शै औय े े सनधानता का सनलायण शोता शै ।
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    57 अक्टू फय 2011 वला कामा सवत्रद्ध कलि स्जव व्मत्रक्त को राख प्रमत्न औय ऩरयश्रभ कयने क फादबी उवे भनोलाॊसछत वपरतामे एलॊ फकमे गमे कामा े भं सवत्रद्ध (राब) प्राद्ऱ नशीॊ शोती, उव व्मत्रक्त को वला कामा सवत्रद्ध कलि अलश्म धायण कयना िाफशमे। कलि क प्रभुख राब: वला कामा सवत्रद्ध कलि क द्राया वुख वभृत्रद्ध औय नल ग्रशं क नकायात्भक प्रबाल को े े े ळाॊत कय धायण कयता व्मत्रक्त क जीलन वे वला प्रकाय क द:ख-दारयद्र का नाळ शो कय वुख-वौबाग्म एलॊ े े ु उडनसत प्रासद्ऱ शोकय जीलन भे वसब प्रकाय क ळुब कामा सवद्ध शोते शं । स्जवे धायण कयने वे व्मत्रक्त मफद े व्मलवाम कयता शोतो कायोफाय भे लृत्रद्ध शोसत शं औय मफद नौकयी कयता शोतो उवभे उडनसत शोती शं ।  वला कामा सवत्रद्ध कलि क वाथ भं वलाजन लळीकयण कलि क सभरे शोने की लजश वे धायण कयता े े की फात का दवये व्मत्रक्तओ ऩय प्रबाल फना यशता शं । ू  वला कामा सवत्रद्ध कलि क वाथ भं अद्श रक्ष्भी कलि क सभरे शोने की लजश वे व्मत्रक्त ऩय भाॊ भशा े े वदा रक्ष्भी की कृ ऩा एलॊ आळीलााद फना यशता शं । स्जस्वे भाॊ रक्ष्भी क अद्श रुऩ (१)-आफद े रक्ष्भी, (२)-धाडम रक्ष्भी, (३)-धैयीम रक्ष्भी, (४)-गज रक्ष्भी, (५)-वॊतान रक्ष्भी, (६)-त्रलजम रक्ष्भी, (७)-त्रलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो का अळीलााद प्राद्ऱ शोता शं ।  वला कामा सवत्रद्ध कलि क वाथ भं तॊि यषा कलि क सभरे शोने की लजश वे ताॊत्रिक फाधाए दय े े ू शोती शं , वाथ शी नकायत्भन ळत्रक्तमो का कोइ कप्रबाल धायण कताा व्मत्रक्त ऩय नशीॊ शोता। इव ु कलि क प्रबाल वे इऴाा-द्रे ऴ यखने लारे व्मत्रक्तओ द्राया शोने लारे दद्श प्रबालो वे यषाशोती शं । े ु  वला कामा सवत्रद्ध कलि क वाथ भं ळिु त्रलजम कलि क सभरे शोने की लजश वे ळिु वे वॊफॊसधत े े वभस्त ऩये ळासनओ वे स्लत् शी छटकाया सभर जाता शं । कलि क प्रबाल वे ळिु धायण कताा ु े व्मत्रक्त का िाशकय कछ नशी त्रफगड वकते। ु अडम कलि क फाये भे असधक जानकायी क सरमे कामाारम भं वॊऩक कये : े े ा फकवी व्मत्रक्त त्रलळेऴ को वला कामा सवत्रद्ध कलि दे ने नशी दे ना का अॊसतभ सनणाम शभाये ऩाव वुयस्षत शं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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    58 अक्टू फय 2011 जैन धभाक त्रलसळद्श मॊिो की वूिी े श्री िौफीव तीथंकयका भशान प्रबात्रलत िभत्कायी मॊि श्री एकाषी नारयमेय मॊि श्री िोफीव तीथंकय मॊि वलातो बद्र मॊि कल्ऩलृष मॊि वला वॊऩत्रत्तकय मॊि सिॊताभणी ऩाद्वानाथ मॊि वलाकामा-वला भनोकाभना सवत्रद्धअ मॊि (१३० वलातोबद्र मॊि) सिॊताभणी मॊि (ऩंवफठमा मॊि) ऋत्रऴ भॊडर मॊि सिॊताभणी िक्र मॊि जगदलल्रब कय मॊि श्री िक्रद्वयी मॊि े ऋत्रद्ध सवत्रद्ध भनोकाभना भान वम्भान प्रासद्ऱ मॊि श्री घॊटाकणा भशालीय मॊि ऋत्रद्ध सवत्रद्ध वभृत्रद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊि श्री घॊटाकणा भशालीय वला सवत्रद्ध भशामॊि त्रलऴभ त्रलऴ सनग्रश कय मॊि (अनुबल सवद्ध वॊऩणा श्री घॊटाकणा भशालीय ऩतका मॊि) ू श्री ऩद्मालती मॊि षुद्रो ऩद्रल सननााळन मॊि श्री ऩद्मालती फीवा मॊि फृशच्िक्र मॊि श्री ऩाद्वाऩद्मालती ह्रंकाय मॊि लॊध्मा ळब्दाऩश मॊि ऩद्मालती व्माऩाय लृत्रद्ध मॊि भृतलत्वा दोऴ सनलायण मॊि श्री धयणेडद्र ऩद्मालती मॊि काॊक लॊध्मादोऴ सनलायण मॊि श्री ऩाद्वानाथ ध्मान मॊि फारग्रश ऩीडा सनलायण मॊि श्री ऩाद्वानाथ प्रबुका मॊि रधुदेल कर मॊि ु बक्ताभय मॊि (गाथा नॊफय १ वे ४४ तक) नलगाथात्भक उलवग्गशयॊ स्तोिका त्रलसळद्श मॊि भस्णबद्र मॊि उलवग्गशयॊ मॊि श्री मॊि श्री ऩॊि भॊगर भशाश्रृत स्कध मॊि ॊ श्री रक्ष्भी प्रासद्ऱ औय व्माऩाय लधाक मॊि ह्रीॊकाय भम फीज भॊि श्री रक्ष्भीकय मॊि लधाभान त्रलद्या ऩट्ट मॊि रक्ष्भी प्रासद्ऱ मॊि त्रलद्या मॊि भशात्रलजम मॊि वौबाग्मकय मॊि त्रलजमयाज मॊि डाफकनी, ळाफकनी, बम सनलायक मॊि त्रलजम ऩतका मॊि बूताफद सनग्रश कय मॊि त्रलजम मॊि ज्लय सनग्रश कय मॊि सवद्धिक्र भशामॊि ळाफकनी सनग्रश कय मॊि दस्षण भुखाम ळॊख मॊि आऩत्रत्त सनलायण मॊि दस्षण भुखाम मॊि ळिुभख स्तॊबन मॊि ु मॊि क त्रलऴम भं असधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं । े ा GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 59.
    59 अक्टू फय 2011 घॊटाकणा भशालीय वला सवत्रद्ध भशामॊि को स्थाऩीत कयने वे वाधक की वला भनोकाभनाएॊ ऩूणा शोती शं । वला प्रकाय क योग बूत-प्रेत आफद उऩद्रल वे यषण शोता शं । े जशयीरे औय फशॊ वक प्राणीॊ वे वॊफसधत बम दय शोते शं । ॊ ू अस्ग्न बम, िोयबम आफद दय शोते शं । ू दद्श ल अवुयी ळत्रक्तमं वे उत्ऩडन शोने लारे बम ु वे मॊि क प्रबाल वे दय शो जाते शं । े ू मॊि क ऩूजन वे वाधक को धन, वुख, वभृत्रद्ध, े ऎद्वमा, वॊतत्रत्त-वॊऩत्रत्त आफद की प्रासद्ऱ शोती शं । वाधक की वबी प्रकाय की वास्त्लक इच्छाओॊ की ऩूसता शोती शं । मफद फकवी ऩरयलाय मा ऩरयलाय क वदस्मो ऩय े लळीकयण, भायण, उच्िाटन इत्माफद जाद-टोने लारे ू प्रमोग फकमे गमं शोतो इव मॊि क प्रबाल वे स्लत् नद्श े शो जाते शं औय बत्रलष्म भं मफद कोई प्रमोग कयता शं तो यषण शोता शं । कछ जानकायो क श्री घॊटाकणा भशालीय ऩतका ु े मॊि वे जुडे अद्द्भत अनुबल यशे शं । मफद घय भं श्री ु घॊटाकणा भशालीय ऩतका मॊि स्थात्रऩत फकमा शं औय मफद कोई इऴाा, रोब, भोश मा ळिुतालळ मफद अनुसित कभा कयक फकवी बी उद्दे श्म वे वाधक को ऩये ळान कयने का प्रमाव कयता शं तो मॊि क प्रबाल वे वॊऩणा े े ू ऩरयलाय का यषण तो शोता शी शं , कबी-कबी ळिु क द्राया फकमा गमा अनुसित कभा ळिु ऩय शी उऩय े उरट लाय शोते दे खा शं । भूल्म:- Rs. 1450 वे Rs. 8200 तक उप्रब्द्ध वॊऩक कयं । GURUTVA KARYALAY ा Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
  • 60.
    60 अक्टू फय 2011 अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलि अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलि ल उल्रेस्खत अडम वाभग्रीमं को ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे त्रलद्रान ब्राह्मणो द्राया वला राख भशाभृत्मुजम भॊि जऩ एलॊ दळाॊळ शलन द्राया सनसभात कलि अत्मॊत ॊ प्रबालळारी शोता शं । अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलि अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलि फनलाने शे तु: अऩना नाभ, त्रऩता-भाता का नाभ, कलि गोि, एक नमा पोटो बेजे दस्षणा भाि: 10900 याळी यत्न एलॊ उऩयत्न त्रलळेऴ मॊि शभायं मशाॊ वबी प्रकाय क मॊि वोने-िाॊफद- े ताम्फे भं आऩकी आलश्मक्ता क अनुळाय े फकवी बी बाऴा/धभा क मॊिो को आऩकी े आलश्मक फडजाईन क अनुळाय २२ गेज े ळुद्ध ताम्फे भं अखॊफडत फनाने की त्रलळेऴ वबी वाईज एलॊ भूल्म ल क्लासरफट के वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं । अवरी नलयत्न एलॊ उऩयत्न बी उऩरब्ध शै । शभाये मशाॊ वबी प्रकाय क यत्न एलॊ उऩयत्न व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शं । ज्मोसतऴ कामा वे जुडेि े फधु/फशन ल यत्न व्मलवाम वे जुडे रोगो क सरमे त्रलळेऴ भूल्म ऩय यत्न ल अडम वाभग्रीमा ल अडम े वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
  • 61.
    61 अक्टू फय 2011 श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि फकवी बी व्मत्रक्त का जीलन तफ आवान फन जाता शं जफ उवक िायं औय का भाशोर उवक अनुरुऩ उवक लळ े े े भं शं। जफ कोई व्मत्रक्त का आकऴाण दवयो क उऩय एक िुम्फकीम प्रबाल डारता शं , तफ ु े रोग उवकी वशामता एलॊ वेला शे तु तत्ऩय शोते शै औय उवक प्राम् वबी कामा त्रफना असधक कद्श ल ऩये ळानी वे वॊऩडन शो जाते शं । आज क े े बौसतकता लाफद मुग भं शय व्मत्रक्त क सरमे दवयो को अऩनी औय खीिने शे तु एक प्रबालळासर िुफकत्ल को कामभ े ू ॊ यखना असत आलश्मक शो जाता शं । आऩका आकऴाण औय व्मत्रक्तत्ल आऩक िायो ओय वे रोगं को आकत्रऴात कये इव े सरमे वयर उऩाम शं , श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि। क्मोफक बगलान श्री कृ ष्ण एक अरौफकल एलॊ फदलम िुॊफकीम व्मत्रक्तत्ल के धनी थे। इवी कायण वे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि क ऩूजन एलॊ दळान वे आकऴाक व्मत्रक्तत्ल प्राद्ऱ शोता शं । े श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि क वाथ व्मत्रक्तको दृढ़ इच्छा ळत्रक्त एलॊ उजाा प्राद्ऱ े शोती शं , स्जस्वे व्मत्रक्त शभेळा एक बीड भं शभेळा आकऴाण का कद्र यशता शं । ं श्रीकृ ष्ण फीवा कलि मफद फकवी व्मत्रक्त को अऩनी प्रसतबा ल आत्भत्रलद्वाव क स्तय भं लृत्रद्ध, े अऩने सभिो ल ऩरयलायजनो क त्रफि भं रयश्तो भं वुधाय कयने की ईच्छा शोती े श्रीकृ ष्ण फीवा कलि को कलर े शं उनक सरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि का ऩूजन एक वयर ल वुरब भाध्मभ े त्रलळेऴ ळुब भुशुता भं सनभााण फकमा वात्रफत शो वकता शं । जाता शं । कलि को त्रलद्रान कभाकाॊडी श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि ऩय अॊफकत ळत्रक्तळारी त्रलळेऴ ये खाएॊ, फीज भॊि एलॊ ब्राशभणं द्राया ळुब भुशुता भं ळास्त्रोक्त अॊको वे व्मत्रक्त को अद्द्भत आॊतरयक ळत्रक्तमाॊ प्राद्ऱ शोती शं जो व्मत्रक्त को त्रलसध-त्रलधान वे त्रलसळद्श तेजस्ली भॊिो ु वफवे आगे एलॊ वबी षेिो भं अग्रस्णम फनाने भं वशामक सवद्ध शोती शं । द्राया सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि क ऩूजन ल सनमसभत दळान क भाध्मभ वे बगलान े े मुक्त कयक सनभााण फकमा जाता शं । े श्रीकृ ष्ण का आळीलााद प्राद्ऱ कय वभाज भं स्लमॊ का अफद्रतीम स्थान स्थात्रऩत कयं । स्जव क पर स्लरुऩ धायण कयता े श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि अरौफकक ब्रह्माॊडीम उजाा का वॊिाय कयता शं , जो व्मत्रक्त को ळीघ्र ऩूणा राब प्राद्ऱ शोता एक प्राकृ त्रत्त भाध्मभ वे व्मत्रक्त क बीतय वद्दबालना, वभृत्रद्ध, वपरता, उत्तभ े शं । कलि को गरे भं धायण कयने स्लास््म, मोग औय ध्मान क सरमे एक ळत्रक्तळारी भाध्मभ शं ! े वे लशॊ अत्मॊत प्रबाल ळारी शोता  श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि क ऩूजन वे व्मत्रक्त क वाभास्जक भान-वम्भान ल े े शं । गरे भं धायण कयने वे कलि ऩद-प्रसतद्षा भं लृत्रद्ध शोती शं । शभेळा रृदम क ऩाव यशता शं स्जस्वे े  त्रलद्रानो क भतानुळाय श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि क भध्मबाग ऩय ध्मान मोग े े व्मत्रक्त ऩय उवका राब असत तीव्र कफद्रत कयने वे व्मत्रक्त फक िेतना ळत्रक्त जाग्रत शोकय ळीघ्र उच्ि स्तय ं एलॊ ळीघ्र सात शोने रगता शं । को प्राद्ऱशोती शं । भूरम भाि: 1900  जो ऩुरुऴं औय भफशरा अऩने वाथी ऩय अऩना प्रबाल डारना िाशते शं औय उडशं अऩनी औय आकत्रऴात कयना िाशते शं । उनक सरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि उत्तभ उऩाम सवद्ध शो वकता शं । े  ऩसत-ऩत्नी भं आऩवी प्रभ की लृत्रद्ध औय वुखी दाम्ऩत्म जीलन क सरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि राबदामी शोता शं । े भूल्म:- Rs. 550 वे Rs. 8200 तक उप्रब्द्ध GURUTVA KARYALAY Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
  • 62.
    62 अक्टू फय 2011 याभ यषा मॊि याभ यषा मॊि वबी बम, फाधाओॊ वे भुत्रक्त ल कामो भं वपरता प्रासद्ऱ शे तु उत्तभ मॊि शं । स्जवक प्रमोग े वे धन राब शोता शं ल व्मत्रक्त का वलांगी त्रलकाय शोकय उवे वुख-वभृत्रद्ध, भानवम्भान की प्रासद्ऱ शोती शं । याभ यषा मॊि वबी प्रकाय क अळुब प्रबाल को दय कय व्मत्रक्त को जीलन की वबी प्रकाय की े ू कफठनाइमं वे यषा कयता शं । त्रलद्रानो क भत वे जो व्मत्रक्त बगलान याभ क बक्त शं मा श्री े े शनुभानजी क बक्त शं उडशं अऩने सनलाव स्थान, व्मलवामीक स्थान ऩय याभ यषा मॊि को अलश्म े स्थाऩीत कयना िाफशमे स्जववे आने लारे वॊकटो वे यषा शो उनका जीलन वुखभम व्मतीत शो वके एलॊ उनकी वभस्त आफद बौसतक ल आध्मास्त्भक भनोकाभनाएॊ ऩूणा शो वक। े ताम्र ऩि ऩय वुलणा ऩोरीव ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीव ताम्र ऩि ऩय (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) वाईज भूल्म वाईज भूल्म वाईज भूल्म 2” X 2” 640 2” X 2” 460 2” X 2” 370 3” X 3” 1250 3” X 3” 820 3” X 3” 550 4” X 4” 1850 4” X 4” 1250 4” X 4” 820 6” X 6” 2700 6” X 6” 2100 6” X 6” 1450 9” X 9” 4600 9” X 9” 3700 9” X 9” 2450 12” X12” 8200 12” X12” 6400 12” X12” 4600 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    63 अक्टू फय 2011 दीऩ जराने का भशत्ल क्मा शं ?  सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी शोना अवॊबल वा प्रसतत शोता शं । इवी कायण बायसतम वभ्मताओॊ भं अस्ग्न को दे ल कशा गमा शं । अस्ग्न को दे लता भनकय उवका ऩूजन फकमा जाता शं । क्मोफक एवा भाना जाता शं , फक मफद अस्ग्न दे ल क्रोसधत शोजामे तो फड़े -फड़े भशरं ल ऊिे-ऊिे बलनं को धूरभं उडादे औय याख ॊ ॊ फनादे । इव सरमे प्रकाळ का ऩूजन कय उडशं ळाॊत यखने का प्रमाव फकमा जाता शं । शभाये प्रभुख धभा ग्रॊथो भं एक ऋग्लेद का वला प्रथभ भॊि शी प्रकाळ वे ळुरू शोता शै । भॊि: प्रकाळभीरे ऩुयोफशतॊ मसस्म दे लभृस्त्लजभ ्। शोतायॊ प्रकाळ, तेज ऊजाा क कदयसत स्त्रोत शं । ऊजाा क त्रफना े ु े यत्नधातभभ ्॥ भानल जीलन का कोई अस्स्तत्ल नशीॊ शं । वभग्र ब्रह्माॊड भं बालाथा:- वलाप्रथभ आयाधन फकए जाने लारे, मस को प्रकासळत प्रकाळ ऊजाा का प्रभुख स्त्रोत एक भाि वूमा शं , उव क अराला े कयने लारे, ऋतुओॊ क अनुवाय मस वम्ऩाफदत कयने लारे, े कोई औय प्रभुख स्त्रोत का अस्स्तत्ल नशीॊ शं । मशी कायण शं फक दे लताओॊ का आह्लान कयने लारे तथा धन प्रदान कयने लारं भं आज वूमा क तेज वे शी शभाया जीलन वुिारु रुऩ वे प्रकाळभान े वलाश्रद्ष अस्ग्न दे लता की भं स्तुसत कयता शूॊ। े शं । लामु भॊडर भं व्माद्ऱ लामुकण (धूर) औय फादर इत्माफद अनाफदकार वे भनुष्म का वफवे फड़ा ळिु अॊधकाय वबी भं अऩनी िुम्फकीम ळत्रक्त शोती शं स्जवक कायण वफ एक े रुऩी असानता यशी शं । इव सरमे ऩुयातन कारवे फश दवये की ओय आकत्रऴात शोते यशते शं । ू अॊधकाय को दय कयने लारा प्रकाळ भनुष्म का वफवे फड़ा ू इवी आकत्रऴात शोने क कायण कण एक दवये वे ऩाव े ू सभि यशा शै । आते औय दय शोते यशते शं , स्जवक फर क कायण फश ऊजाा ू े े क्मोफक प्रकाळ शभं दे खने की ळत्रक्त दे ता शं । उत्ऩडन शोती शं । इस्वे उत्ऩडन शोने लारी उजाा को फश प्रकाळ लामुभॊडर भं लस्तु फक वशी ऩशिान कयने क सरमे प्रकाळ े कशा जाता शं । आलश्मक शै । प्रकाळ का शभाये जीलन भं फशुत भशत्ल शं , इव भशत्ल उऩसनऴद भं इवी सरमे अॊधकाय वे ज्मोसत की ओय जाने वे शय व्मत्रक्त बरी बासत लाफकप शं । शभायी बायसतम वॊस्कृ सत की काभना की गई शै । क धासभाक कामाक्रभ भं बी अस्ग्न का त्रलळेऴ भशत्ल शं । एलॊ े अवतो भा वद्गभम अस्ग्न प्रकाळ का प्रसतक शं जो मस, शलन, त्रललाश, वॊस्काय तभवो भाॊ ज्मोसतगाभम जेवे अडम धासभाक कभाकाॊडो भं त्रफना अस्ग्न क त्रफना वॊऩडन े भृत्मोभाा अभृतॊ गभम
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    64 अक्टू फय 2011 ळास्त्रो भं अस्ग्न क तीन रूऩं लणान फकमा गमा े शं । ऩृ्ली ऩय अस्ग्न, अडतरयष भं त्रलद्युत औय आकाळ भं वूम। प्रकाळ क उद्दगभ क त्रलऴम भं कशा गमा शै फक ा े े कार क वॊघऴा-भॊथन वे उवका जडभ शुआ। वूमा फक े अस्ग्न अॊधकाय को सभटाता शै , अवुयी ळत्रक्त को डयाता, प्रकाळ का आह्लान कयता, सिय मुला औय प्रािीन ऩुयोफशत शै । ऋग्लेद क अनुळाय भशात्रऴा बृगु ऋत्रऴ ने अस्ग्न की े खोज की। ऩकाने क आत्रलष्काय क वाथ दीऩ सभट्टी का फनने रगा। े े अस्ग्न क सरमे ऋग्लेद भं कशा गमा शं । े प्रािीन कार वे धसनकं द्राया फड़े करात्भक फदमं का प्रमोग फकमा जाता था, जो ऩत्थय, धातु, कीभती यत्नं, वोने अस्ग्नभीऱे ऩुयोफशतॊ (ऋग्लेद) औय िाॊदी क शोते थे। मे छोटे फड़े वबी आकायं क थे। े े वभम क वाथ वाथ दीऩ स्तॊब बी प्रिरन भं आए। े ऋग्लेद याभामण भं उल्रेख सभरता शं फक जफ शनुभान इॊ द्र ज्मोसत् अभृतॊ भतेऴु रॊका ऩशुॉिे तो उडशं वुनशये दीऩं को दे ख कय भ्रभ शुआ वूमांळ वॊबलो दीऩ् फक कशीॊ ले स्लगा भं तो नशीॊ आ गए। उडशं लशाॊ ऩीरे औय अथाात: वूमा क अॊळ वे दीऩ की उत्ऩत्रत्त शुई। े जरते शुए स्लणादीऩ फदखाई फदए। दीऩ जीलन की ऩत्रलिता, बत्रक्त, अिाना औय आळीलााद स्लरुऩ भाना जाता शं । बायतीम ळास्त्रो भे उल्रेख सभरता शै , फक अस्ग्न का वॊफॊध भनुष्म क जडभ वे रेकय भयण तक शोता शं । मशी े वूमा क अॊळ वे उत्ऩडन ऩृ्ली की अस्ग्न को स्जव े कायण शं शभायी वॊस्कृ सत भं त्रलसबडन व्रत-त्मोशाय इत्माफद ऩाि भं स्थात्रऩत फकमा गमा उवे आज दीऩक क रूऩ भं े भं दीऩ क भशत्ल शं । दीऩलरी बी शभाये प्रभुख त्मौशायो शभाये घयं भं ऩूजा जाता शै । भं वे एक शै , स्जव भं उजाा क प्रसतक क रुऩ भं दीऩक े े जराने फक ऩयॊ ऩया शं । ळुबभ कयोसत करमाणभ ् आयोग्मभ ् धन वम्ऩदा शभाये ळास्त्रं भं दीऩज्मोसत फक भफशभा का त्रलस्तृत ळिुफुस्ध्द त्रलनाळाम दीऩज्मोसत नभस्तुते ।। लणान फकमा गमा शं । ळास्त्रं भं दीऩज्मोसत को ऩाऩनाळक, ळिुओॊ फक लृत्रद्ध योकने लारी, आमु एलॊ आयोग्म प्रदान अथाात: शभे ळुब, वुडदय औय कल्माणकायी, आयोग्म औय कयने लारी शं । वॊऩदा को दे ने लारे शे दीऩक फक ज्मोसत, शभाये ळिं फक फुत्रद्ध क त्रलनाळ क सरए शभ तुम्शं नभस्काय कयते शं । े े दीऩो ज्मोसत् ऩयभ ् ब्रह्म दीऩो ज्मोसतजानादा न्। दीऩो शयतु भं ऩाऩभ ् वाध्मदीऩ नभोऽस्तु ते।। ऩूयातन कार भं दीऩ का ऩाि स्पफटक, ऩाऴाण मा ळुबभ ् कयोतु कल्माणभ ् आयोग्मभ ् वुखवम्ऩदभ ्। वीऩ का शोता था। काराडतय भं सभट्टी को गढने औय ळिुफुत्रद्धत्रलनाळभ ् ि दीऩज्मोसतनाभोऽस्तु ते।।
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    65 अक्टू फय 2011 ऩाऩ-ताऩ का शयण शोता शै , ळिुफुत्रद्ध का ळभन शोता शै  भाडमता शं फक मफद घय भं दीऩक की रौ ऩूला औय ऩुण्मभम, वुखभम जीलन की लृत्रद्ध शोती शै । फदळा की ओय शो, तो आमु फक लृत्रद्ध कयती शं ।  दीऩक की रौ ऩस्द्ळभ फदळा की ओय शो, तो द्ख ु ऩुरूऴोत्तभ भशात्त्म्म भं दीऩक फक ज्मोसत क सरमे े की लृत्रद्ध कयती शं । कशा गमा शं ।  दीऩक की रौ उत्तय फदळा की ओय शो, तो स्लास््म रूषैरक्ष्भी त्रलनाळ्स्मात द्वैतेयडनषमो बलेत ् ा औय प्रवडनता फक लृत्रद्ध कयती शं । असत यक्तऴु मुध्दासन भृत्मु्कृ ष्ण सळखीऴु ि।। े  दीऩक की रौ दस्षण फदळा की ओय शो, तो शासन कयती शं । अथाात: कोयी ळुष्क (रूखी) ज्मोसत रक्ष्भी का नाळ, द्वेतज्मोसत अडनषम, असत रार ज्मोसत मुद्ध औय कारी मफद घय भं आऩ दीऩक जरामं तो उवे आऩक घयक उत्तय े े ज्मोसत भृत्मु की द्योतक शोती शं । अथला ऩूला कोने भं शोना िाफशए। दीऩज्मोसत क प्रबाल वे े भॊि सवद्ध रूद्राष Rate In Rate In Rudraksh List Rudraksh List Indian Rupee Indian Rupee एकभुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 2800, 5500 आठ भुखी रूद्राष (नेऩार) 820,1250 एकभुखी रूद्राष (नेऩार) 750,1050, 1250, आठ भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 1900 दो भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय) 30,50,75 नौ भुखी रूद्राष (नेऩार) 910,1250 दो भुखी रूद्राष (नेऩार) 50,100, नौ भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 2050 दो भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 450,1250 दव भुखी रूद्राष (नेऩार) 1050,1250 तीन भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय) 30,50,75, दव भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 2100 तीन भुखी रूद्राष (नेऩार) 50,100, ग्मायश भुखी रूद्राष (नेऩार) 1250, तीन भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 450,1250, ग्मायश भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 2750, िाय भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय) 25,55,75, फायश भुखी रूद्राष (नेऩार) 1900, िाय भुखी रूद्राष (नेऩार) 50,100, फायश भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 2750, ऩॊि भुखी रूद्राष (नेऩार) 25,55, तेयश भुखी रूद्राष (नेऩार) 3500, 4500, ऩॊि भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 225, 550, तेयश भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 6400, छश भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय) 25,55,75, िौदश भुखी रूद्राष (नेऩार) 10500 छश भुखी रूद्राष (नेऩार) 50,100, िौदश भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 14500 वात भुखी रूद्राष (शरयद्राय, याभेद्वय) 75, 155, गौयीळॊकय रूद्राष 1450 वात भुखी रूद्राष (नेऩार) 225, 450, गणेळ रुद्राष (नेऩार) 550 वात भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 1250 गणेळ रूद्राष (इडडोनेसळमा) 750 रुद्राष क त्रलऴम भं असधक जानकायी शे तु वॊऩक कयं । GURUTVA KARYALAY, े ा Call us: 91 +9338213418, 91+9238328785
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    66 अक्टू फय 2011 धनिमोदळी ऩय मभ-दीऩदान अकारभृत्मु को दय कयता शं ? ू  सिॊतन जोळी धनिमोदळी क फदन फकमे जाने लारे कभा भं एक े भशत्त्लऩूणा कभा मभ क सनसभत्त फकमा जाने लारा दीऩदान े शं । फशडद ू धभा ळास्त्र भं सनणामसवडधु क अॊतगात े सनणामाभृत औय स्कडदऩुयाण उल्रेख शं फक कासताक कृ ष्ण िमोदळी की वॊध्मा प्रदोऴ कार क वभाम घय वे फाशय े मभ क सनसभत्त दीऩदान कयने वे ऩरयलाय भं अकारभृत्मु े का बम दय शोता शं । ू ळास्त्रंक्त भत क अनुळाय मभदे लता बगलान वूमा े औय भाता वॊसा क ऩुि शं । लैलस्लत भनु, अस्द्वनीकभाय े ु एलॊ यै लॊत उनक बाई शं तथा मभुना उनकी फशन शै । े मभदे ल की वौतेरी भाॉ छामा वे ळसन, तऩती, त्रलत्रद्श, वालस्णा भनु आफद 10 वौतेरे बाई -फशन बी शं । ऩौयास्णक भाडमता क अनुळाय मभ ळसन ग्रश क असधदे लता शं । े े मभदे लता प्रत्मेक प्राणी क ळुब-अळुब कभं क े े अनुवाय पर दे ने का कामा कयते शं । इवी कायण उडशं क सनसभत्त दीऩ औय नैलेद्य वभत्रऩात कयने ऩय अकार े मभदे लता को धभायाज कशा गमा शं । क्मोफक अऩने भृत्मु का नाळ शोता शं । मश स्लमॊ मभयाज का कथन था। कताव्म क प्रसत मभदे ल िुफट यफशत कामा व्मलस्था की े मभदीऩदान कलर प्रदोऴकार भं कयने का त्रलधान े स्थाऩना कयते शं । मभदे ल का अऩना अरग वे एक रोक शं । मभदीऩदान क सरए सभट्टी का एक फड़ा दीऩक रेकय े शं , स्जवे उनक नाभ वे शी मभरोक कशा जाता शं । े उवे उवे स्लच्छ जर वे धो रेना िाफशए। फपय स्लच्छ रुई ऋग्लेद भं उल्रेख शै फक मभरोक भं सनयडतय अनद्वय रेकय दो रम्फी फत्रत्तमॉॊ फना रं। अथाात ् स्जवका नाळ न शो ऐवी ज्मोसत जगभगाती यशती फत्रत्तमाॊ इतनी रम्फी फनामे की दीऩक वे उवके शं । मभरोक अनद्वय शं औय मभरोक भं कोई भयता नशीॊ दोनं औय क छोय सनकरे शुए शो। फत्रत्तमॉॊ को दीऩक भं े शं । एक-दवये ऩय इव प्रकाय यखं फक दीऩक क फाशय फत्रत्तमं ू े मभदे लताक स्लरुऩ का लणान कयते शुले ग्रॊथकायो ने सरखा े क िाय भुॉश फदखाई दं । अफ दीऩक को सतर क तेर वे े े शं । मभ की आॉखं रार शं , उनक शाथ भं ऩाळ यशता शं । े ु बय दं औय वाथ शी उवभं एक छटकी कारे सतर बी इनका ळयीय नीरा शै औय मे दे खने भं उग्र शं । बंवा डार दं । इनकी वलायी शं । मे वाषात ् कार शं । प्रदोऴकार भं इव प्रकाय त्रलसध वे तैमाय फकए गए मभदीऩदान: दीऩक का योरी, अषत एलॊ ऩुष्ऩ वे ऩूजन कयना िाफशए। मभदीऩदान क त्रलऴम भं स्कडदऩुयाण भं कशा गमा शै फक े कासताक क कृ ष्णऩष भं िमोदळी क प्रदोऴकार भं मभयाज े े
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    67 अक्टू फय 2011 तत ऩद्ळात ् घय क भुख्म द्राय ऩय फाशय थोड़ी वी खीर, े ॐ मभदे लाम नभ्। नभस्कायॊ वभऩामासभ॥ िालर अथला गेशूॉ वे ढे यी फनाकय उवक ऊऩय दीऩक को े यखना िाफशए। तत ऩद्ळमात ऩुष्ऩ दीऩक क ऩाव यख दं औय ऩुन् शाथ े दीऩक को ढे यी ऩय स्थात्रऩत कयने वे ऩूला उवे भं नैलेद्यॊ क रुऩ भं एक फताळा रं तथा सनम्नसरस्खत े प्रज्लसरत कय रं औय दस्षण फदळा की ओय दे खते शुए भडि का उच्िायण कयते शुए उवे दीऩक क वभीऩ शी यख े इव भडि का उच्िायण कयते शुए िायभुॉश क दीऩक को े दं । खीर, िालर, गेशूॉ आफद की ढे यी क ऊऩय यख दं । े ॐ मभदे लाम नभ्। नैलेद्यॊ सनलेदमासभ॥ भृत्मुना ऩाळदण्डाभ्माॊ कारेन ि भमा वश। तत ऩद्ळमात शाथ भं थोड़ा वा जर रेकय आिभन के िमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज् प्रीमतासभसत॥ ा सनसभत्त सनम्नसरस्खत भडि का उच्िायण कयते शुए दीऩक अथाात ्: िमोदळी को दीऩदान कयने वे भृत्मु, ऩाळ, दण्ड, क वभीऩ जर को छोड़े । े कार औय रक्ष्भी क वाथ वूमनॊदन मभ प्रवडन शं। े ा ॐ मभदे लाम नभ्। आिभनाथे जरॊ वभऩामासभ॥ उक्त भडि क उच्िायण क ऩद्ळात ् शाथ भं ऩुष्ऩ रेकय े े सनम्नसरस्खत भडि का उच्िायण कयते शुए मभदे ल को तत ऩद्ळमात ऩुन् मभदे ल को ॐ मभदे लाम नभ्। भडि दस्षण फदळा भं नभस्काय कयं । का उिायण कयते शुए दस्षण फदळा भं नभस्काय कयं । भॊि सवद्ध स्पफटक श्री मॊि "श्री मॊि" वफवे भशत्लऩूणा एलॊ ळत्रक्तळारी मॊि शै । "श्री मॊि" को मॊि याज कशा जाता शै क्मोफक मश अत्मडत ळुब फ़रदमी मॊि शै । जो न कलर दवये मडिो वे असधक वे असधक राब दे ने भे वभथा शै एलॊ वॊवाय क शय व्मत्रक्त क सरए पामदे भॊद े ू े े वात्रफत शोता शै । ऩूणा प्राण-प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतडम मुक्त "श्री मॊि" स्जव व्मत्रक्त क घय भे शोता शै उवक सरमे "श्री मॊि" े े अत्मडत फ़रदामी सवद्ध शोता शै उवक दळान भाि वे अन-सगनत राब एलॊ वुख की प्रासद्ऱ शोसत शै । "श्री मॊि" भे वभाई े अफद्रसतम एलॊ अद्रश्म ळत्रक्त भनुष्म की वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे वभथा शोसत शै । स्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय सनयाळा दय शोकय लश भनुष्म अवफ़रता वे वफ़रता फक औय सनयडतय गसत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन ू भे वभस्त बौसतक वुखो फक प्रासद्ऱ शोसत शै । "श्री मॊि" भनुष्म जीलन भं उत्ऩडन शोने लारी वभस्मा-फाधा एलॊ नकायात्भक उजाा को दय कय वकायत्भक उजाा का सनभााण कयने भे वभथा शै । "श्री मॊि" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय क ू े स्थान ऩय स्थात्रऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फस्डधत ऩये ळासन भे डमुनता आसत शै ल वुख-वभृत्रद्ध, ळाॊसत एलॊ ऐद्वमा फक प्रसद्ऱ शोती शै । गुरुत्ल कामाारम भे "श्री मॊि" 12 ग्राभ वे 75 ग्राभ तक फक वाइज भे उप्रब्ध शै . भूल्म:- प्रसत ग्राभ Rs. 8.20 वे Rs.28.00 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    68 अक्टू फय 2011 धनिमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं फकमा जाता शं ?  सिॊतन जोळी ळास्त्रंक्त भत क अनुळाय धनिमोदळी क फकमे जाने े े रोकलासवमं का कल्माण शोगा। कासताक कृ ष्ण िमोदळी को लारे कभो भं मभदीऩदान को त्रलळेऴ प्रभुखता दी जाती शं । प्रसतलऴा प्रदोऴकार भं जो अऩने घय क दयलाजे े ऩय रेफकन धनिमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं फकमा जाता शं सनम्नसरस्खत भडि वे उत्तभ दीऩ दे ता शं , लश अऩभृत्मु शोने इव क ऩीछे छऩी धासभाक भाडमता वे कभ रोग शी ऩयीसित े ु ऩय बी मशॉॊ रे आने क मोग्म नशीॊ शै । े शंगे! भृत्मुना ऩाश्दण्डाभ्माॊ कारेन ि भमा वश। फशडद ू धभा भं फकमे जाने लारी प्रत्मेक व्रत-तमोशाय, िमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज् प्रीमतासभसत॥ ा उत्वल, ऩूजन त्रलसध-त्रलधान, इत्माफद क ऩीछे कोई न कोई े उवक फाद वे शी अऩभृत्मु अथाात ् अवाभसमक भृत्मु वे े ऩौयास्णक कथा अलश्म जुड़ी शोती शं । इवी प्रकाय फिने क उऩाम क रूऩ भं धनिमोदळी ऩय मभ क सनसभत्त े े े धनिमोदळी ऩय मभदीऩदान कयना बी इवी प्रकाय ऩौयास्णक दीऩदान एलॊ नैलेद्य वभत्रऩात कयने का कभा प्रसतलऴा फकमा कथा वे जुड़ा शुआ शं । स्कडदऩुयाण भं लैष्णलखण्ड के जाता शं । अडतगात कासताक भाव भशात्म्म भं इववे वम्फस्डधत मभयाज की वबा: मभयाज की वबा का लणान कयते शुए ग्रॊथ ऩौयास्णक कथा का वॊस्षद्ऱ उल्रेख फकमा गमा शं । कायं ने सरखा शं फक दे लरोक की िाय प्रभुख वबाओॊ भं वे ऩौयास्णक कथा क अनुळाय एक फाय मभदत फारकं े ू एक शै मभवबा । इव वबा का सनभााण त्रलद्वकभाा जी ने एलॊ मुलाओॊ क प्राण शयते वभम ऩये ळान शो उठे । मभदत को े ू फकमा था। मभवबा अत्मडत त्रलळार वबा शै , इवकी 100 फड़ा द्ख शुआ फक ले फारकं एलॊ मुलाओॊ क प्राण शयने का ु े मोजन रम्फाई एलॊ 100 मोजन िौड़ाई शै । इव प्रकाय मश कामा कयते शं , ऩयडतु मभदत कयते बी क्मा? उनका कामा शी ू लगााकाय शै । मभवबा का ताऩक्रभ अत्मडत वुशालना अथाात ् प्राण शयना शी शं । मभदत अऩने कताव्म वे ले कवे त्रलभुख ू ै न तो असधक ळीतर शै औय न शी असधक गभा शै । शोते? मभदत क सरए एक औय कताव्मसनद्षा का प्रद्ल था, ू े मभवबा वबी क भन को अत्मडत आनडद दे ने लारी शै । े दवयी ओय स्जन फारक एलॊ मुलाओॊ का प्राण शयकय राते थे, ु मभवबा भं न ळोक, न फुढ़ाऩा शै , न बूख शै , न प्माव शै औय उनक ऩरयजनं क द्ख एलॊ त्रलराऩ को दे खकय स्लमॊ को े े ु न शी मभवबा भं कोई अत्रप्रम लस्तु शं । इव प्रकाय मभवबा शोने लारे भानसवक क्रेळ का प्रद्ल था। ऐवी स्स्थसत भं जफ द्ख, कद्श एलॊ ऩीड़ा क कयणं का अबाल यशता शं । मभवबा ु े मभदत फशुत फदन तक यशने रगे, तो त्रललळ शोकय ले अऩने ू भं दीनता, थकालट अथला प्रसतकरता नाभभाि को बी नशी ू स्लाभी मभयाज क ऩाव ऩशुॉिे औय कशा फक भशायाज आऩक े े शै । मभवबा भं वदै ल ऩत्रित वुगडध लारी ऩुष्ऩ भाराएॉ एलॊ आदे ळ क अनुवाय शभ प्रसतफदन लृद्ध, फारक एलॊ मुला े अडम कई यम्म लस्तुएॉ त्रलद्यभान यशती शं । व्मत्रक्तमं क प्राण शयकय राते शं , ऩयडतु जो अऩभृत्मु क े े मभवबा भं अनेक याजा, ऋत्रऴा औय ब्रह्मत्रऴा मभदे ल सळकाय शोते शं , उन फारक एलॊ मुलाओॊ क प्राण शयते वभम े की उऩावना कयते यशते शं । ममासत, नशुळ, ऩुरु, कातालीमा, शभं भानसवक क्रेळ शोता शं । उवका कायण मश शै फक अरयद्शनेभी, कृ सत, सनसभ, भाडधाता, प्रतदान, सळत्रल आफद याजा उनक ऩरयजन अत्मासधक त्रलराऩ कयते शं औय स्जववे शभं े भृत्मु क उयाडत मशाॊ फैठकय धभायाज की उऩावना कयते शं । े फशुत असधक द्ख शोता शं । क्मा फारक एलॊ मुलाओॊ को ु कठोय तऩस्मा कयने लारे, उत्तभ व्रत का ऩारन कयने लारे अवाभसमक भृत्मु वे छटकाया नशीॊ सभर वकता शै ? ु मभदत क भुख वे इतना वुनकय धभायाज फोरे ू े वत्मलादी, ळाडत, वॊडमावी तथा अऩने ऩुण्मकभा वे ळुध्द एलॊ दतगण तुभने फशुत अच्छा प्रद्ल फकमा शं । इववे भृत्मु ू ऩत्रलि भशाऩुरुऴं का शी मभवबा भं प्रलेळ शोता शं ।
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    69 अक्टू फय 2011 दीऩालरी क फदन कवे कयं फशीखाता तुरा ऩूजन? े ै  सिॊतन जोळी फशडद ू धभा भं ऩॊिभशा ऩला दीऩालरी ऩय व्मलवाम तदऩयाडत योरी, ऩुष्ऩ आफद वे ॐ रेखनीस्थामै दे व्मै ु कामा वे जुडे रोग गणेळ ऩूजन, रक्ष्भी ऩूजन, कफेय ु नभ्। का उच्िायण कयते शुए ऩूजन कयं । भडि फोरते ऩूजन, आफद ऩूजनो क वाथ-वाथ अऩने व्मलवाम वे जुडे े शुए ऩूजन कयं । ऩूजन क ऩद्ळमात सनम्नसरस्खत भडि वे े फशवाफ-फकताफ यखने शे तु शय लऴा दीऩालरी ऩय फशी-खाता, शाथ जोड़कय प्राथाना कये । तुरा (तयाजू), रेखनी (करभ) आफदका ऩूजन बी कयते ळास्त्राणाॊ व्मलशायाणाॊ त्रलद्यानाभाप्नुमाद्यत्। शं । अतस्त्लाॊ ऩूजसमष्मासभ भभ शस्ते स्स्थया बल॥ वलाप्रथभ व्मलवामीक स्थान क भुख्मद्राय क दोनं े े फशीखाता ऩूजन् ओय की फदलाय ऩय सवडदय वे ळुब-राब औय ॐ औय ू दीऩालरी क फदन व्मलवाम वे जुडे रोग नए फशीखातं का े स्लस्स्तक क सिि अॊफकत कयं । ऩद्ळमात इन ळुब सििं े ळुबायम्ब कयते शं । ऩूजन शे तु नए फशीखाते रेकय उडशं का योरी, ऩुष्ऩ आफद वे ऩूजन कयं । ऩूजन के ळुद्ध जर क छीॊटे दे कय ऩत्रलि कय रं। फशीखातं को े वभम ॐ दे शरीत्रलनामकाम नभ्। भॊि जा रार लस्त्र त्रफछाकय तथा उव ऩय अषत एलॊ उच्िायण कयं । ऩुष्ऩ डारकय स्थात्रऩत कयं । फशीखाते के अफ क्रभळ दलात अथाात (Inkstand), प्रथभ ऩृद्ष ऩय वलाप्रथभ उऩय रार फशीखाता, तुरा (तयाजू) आफद का करभ मा ऩेन वे श्री गणेळाम नभ्। ऩूजन कयना िाफशए। सरखे ऩद्ळमात स्लस्स्तक का सिि दलात का ऩूजन: दलात को िॊदन अथला योरी वे फनाएॉ। ऩद्ळमात भशाकारी का रूऩ भाना जाता शं । अऩने इद्श दे ली-दे लता का नाभ सरख वलाप्रथभ नई स्माशीमुक्त दलात को वकते शं । मफद फशी खातो ऩय वद्ऱ श्री ळुद्ध जर क छीटं दे कय ऩत्रलि कय रे, े सरखा जाए तो बी आने लारे लऴा बय उवक फाद उवक भुख ऩय भौरी फॉॊध दं । े े क सरमे आसथाक द्रत्रद्श वे राबदामक यशता े दलात को िौकी ऩय थोड़े वे ऩुष्ऩ औय अषत शं । (वद्ऱ श्री सरखने की त्रलसध गुरुत्ल ज्मोसतऴ डारकय स्थात्रऩत कय दं । दलात का योरी, ऩुष्ऩ आफद वे भासवक ऩत्रिका भं ऩृद्ष वॊख्मा ऩय दी गई शं । भशाकारी क भडि ॐ श्रीभशारक्ष्भै नभ्। का उच्िायण े ऩद्ळमात फशीखाते का योरी, ऩुष्ऩ आफद वे त्रलसधलत ऩूजन कयते शुए ऩूजन कयं । ऩूजन क ऩद्ळमात इव प्रकाय प्राथाना े कयना िाफशए। ऩूजन क वभम ॐ श्रीवयस्लत्मै नभ् भडि े कये । का उच्िायण कयं । कासरक त्लॊ जगडभातभासवरूऩेण लतावे। े तुरा का ऩूजन् उत्ऩडना त्लॊ ि रोकानाॊ व्मलशायप्रसवद्धमे॥ वलाप्रथभ तयाजू को ळुद्ध कय रेना िाफशए। तदऩयाडत उव ु रेखनी ऩूजन् दीऩालरी क फदन नमी रेखनी मा ऩेन को ळुद्ध जर वे े ऩय योरी वे स्लस्स्तक का सिि फनाएॉ। उव ऩय भौरी धोकय तथा उव ऩय भौरी फॉॊधकय रक्ष्भीऩूजन की िौकी फॉॊध दं तथा ॐ तुरासधद्षातृदेलतामै नभ्। उच्िायण कयते ऩय कछ अषत एलॊ ऩुष्ऩ डारकय स्थात्रऩत कय दं । ु शुए योरी, ऩुष्ऩ आफद वे तयाजू का ऩूजन कयं ।
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    70 अक्टू फय 2011 दीऩालरी का भशत्ल औय रक्ष्भी ऩूजन त्रलसध  स्लस्स्तक.ऎन.जोळी, आरोक ळभाा प्रासिन कार वे फश बायतीम वॊस्कृ सत भं अनेक दलाा, द्रव्म आफद रेकय गणेळ, भशारक्ष्भी, कफेय आफद दे ली- ू ु ऩला-त्मौशाय भनाए जाते शं । इन त्मौशायं भं कासताक भाव दे लताओॊ क त्रलसधलत ऩूजन का वॊकल्ऩ कयं । वलाप्रथभ े फक अभालस्मा को दीऩालरी का त्रलळेऴ भशत्ल शं । क्मोफक गणेळ औय रक्ष्भी का ऩूजन कयं । उवके ऩद्ळमात दीऩालरी खुसळमं का त्मौशाय शं । दीऩालरी क फदन े ऴोडळभातृका ऩूजन ल नलग्रश ऩूजन कय अडम दे ली- बगलान गणेळ ल रक्ष्भी क ऩूजन का त्रलळेऴ भशत्ल शं । े दे लताओॊ का ऩूजन कयं । इव फदन गणेळ जी फक ऩूजा वे ऋत्रद्ध-सवत्रद्ध फक प्रासद्ऱ दीऩक ऩूजन : दीऩक जीलन वे असान रुऩी अॊधकाय को शोती शं एलॊ रक्ष्भी जी क ऩूजन वे धन, लैबल, वुख, वॊऩत्रत्त े दय कय जीलन भं सान क प्रकाळ का प्रतीक शं । दीऩक े ू फक प्रासद्ऱ शोती शं । दीऩालरी क फदन फकमे जाने लारे भॊि- े को इद्वय का तेजस्ली रूऩ भान कय इवकी ऩूजा कयनी मॊि-तॊि का प्रमोग अत्मसधक प्रबाली भाना जाता शं । िाफशए। ऩूजा कयते वभम अॊत्कयण भं ऩूणा श्रद्धा एलॊ ळुद्ध दीऩालरी अथाात् दीऩकं फक भारा। दीऩालरी क फदन े बालना यखनी िाफशए। दीऩालरी के फदन ऩारयलारयक प्रत्मेक व्मलवाम-नौकयी वे जुडे व्मत्रक्त अऩने व्मलामीक ऩयॊ ऩयाओॊ क अनुवाय सतर क तेर क वात, ग्मायश, े े े स्थान एलॊ घय ऩय भाॊ रक्ष्भी का त्रलसधलत ऩूजन कय धन इक्कीव अथला इनवे असधक दीऩक प्रज्लसरत कयक एक े फक दे ली रक्ष्भी वे वुख-वभृत्रद्ध फक काभना कयते शं । थारी भं यखकय कय ऩूजन कयने का त्रलधान शं । ऩूजन वाभग्री : भशारक्ष्भी ऩूजन भं कवय, कभकभ, िालर, े ू ू उऩयोक्त ऩूजन क ऩद्ळमात घय फक भफशराएॊ अऩने े ऩान, वुऩायी, पर, पर, दध, फताळे, सवॊदय, भेले, ळशद, ू ू ू शाथ वे वोने-िाॊदी क आबूऴण इत्माफद वुशाग फक वॊऩूणा े सभठाइमाॊ, दशी, गॊगाजर, धूऩ, अगयफत्रत्तमाॊ, दीऩक, रुई, वाभग्रीमाॊ रेकय भाॊ रक्ष्भी को अत्रऩत कयदं । अगरे फदन ा कराला(भौरी), नारयमर औय ताॊफे का करळ। स्नान इत्माफद क ऩद्ळमात त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन क फाद े े ऩूजन त्रलसध : बूसभ को गॊगाजर इत्मादी वे ळुद्ध कयके आबूऴण एलॊ वुशाग फक वाभग्री को भाॊ रक्ष्भी का प्रवाद नलग्रश मॊि फनाएॊ। मॊि क वाथ शी ताॊफे क करळ भं े े वभजकय स्लमॊ प्रमोग कयं । एवा कयने वे भाॊ रक्ष्भी फक गॊगाजर, दध, दशी, ळशद, वुऩायी, रंग आफद डारकय करळ ू कृ ऩा वदा फनी यशती शै । जीलन भं वपरता एलॊ आसथाक को रार कऩड़े वे ढककय एक जटा मुक्त नारयमर भौरी स्स्थसत भं उडनसत क सरए सवॊश रग्न अथला स्स्थय रग्न े वे फाॊधकय यख दं । नलग्रश मॊि क ऩाव िाॊदी का सवक्का े का िुनाल कय श्रीवूक्त, कनकधाया स्तोि का ऩाठ कयं । औय रक्ष्भी गणेळ फक प्रसतभा स्थात्रऩत कय ऩॊिाभृत वे दीऩालरी ऩूजन क वभम गणेळ एलॊ रक्ष्भी क े े स्नान कयाकय स्लच्छ रार कऩड़े वे ऩोछ कय रक्ष्भी वाथ त्रलष्णु जी का ऩूजन अलश्म कयं स्जस्वे घयभं स्स्थय गणेळ को िॊदन, अषत अत्रऩत कयक पर-पर आफद ा े ू रक्ष्भी का सनलाव शो वक। रक्ष्भी जी क दाफशनी ओय े े अत्रऩत कयं औय प्रसतभा क दाफशनी ओय ळुद्ध घी का एक ा े त्रलष्णु जी औय फाईं ओय गणेळ जी फक स्थाऩना कयनी दीऩक एलॊ फाई औय तेर (सभठे तेर) का एक दीऩक िाफशए। स्स्थय रक्ष्भी फक काभना शे तु दस्षणालतॉ ळॊख, जराएॊ। भोती ळॊख, गोभती िक्र इत्माफद को ळास्त्रं भं रक्ष्भी के ऩत्रलि आवन ऩय फैठकय स्लस्स्त लािन कयं । गणेळ जी वशोदय बाई भाना गमा शं । इन दरब लस्तुओॊ फक ु ा का स्भयण कय अऩने दाफशने शाथ भं गॊध, अषत, ऩुष्ऩ, स्थाऩना कयने वे रक्ष्भी जी प्रवडन शोती शं ।
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    71 अक्टू फय 2011 श्री धनलॊतरय व्रत कथा  सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी प्रथभ अध्माम वनकाफदक भुसनमं ने वूत जी वे कशा-शे वूत शं । कोई पोड़े , सगल्टी, प्रेग आफद वे मुक्त वस्डनऩात योग भशाभुने! आऩने बगलान ् धनलॊतरय की ऩूजा-त्रलसध का औय प्रभेशाफद योगं वे घेये गमे शं । इव प्रकाय रोग अनेक त्रलस्ताय ऩूलक लणान फकमा, फकडतु इवे वुनने ऩय बी शभं ा योगं वे ग्रस्त औय द्खी शं । उडशं दे खकय भुझे फड़ा द्ख ु ु तृसद्ऱ नशीॊ शुई। अत् श्री धनलॊतरय का भाशात्म्म असधक शुआ औय फायम्फाय भंने सिडता की। भंने वोिा फक मे त्रलस्ताय वे फताइए। रोग कवे नीयोग शंगे औय प्रवडन शंगे ? इवी सिडता वे ै भुसनश्रेद्ष वुत जी ने कशा-शे भुसनमं! आऩ भन भं व्माकर शोकय भं आऩकी ळयण भं आमा शूॉ। ु ऩाऩत्रलनासळनी कथा को वुसनए। इव कथा को वुनने वे शे त्रलद्वात्भन ् ळयणागत बूम्माफद रोकं की आऩ वबी योगं का नाळ शोता शं : यषा कीस्जमे। िैरोक्म भं आऩक असतरयक्त इनका कोई े एक वभम नायद जी वबी रोगं क कल्माण की े यषक नशीॊ शं । इच्छा वे वभुद्र द्रीऩ ऩलात वफशत वम्ऩूणा ऩृ्ली का भ्रभण बगलान ् श्री त्रलष्णु नायद जी क उक्त लिनं को े कय यशे थे। लशाॉ उडशंने वबी रोगं को त्रलत्रलध योगं वे वुनकय गम्बीय लाणी वे फोरे-शे भुने आऩ बम न द्खी दे खा। मश दे खकय नायद जी सिस्डतत शुए औय लशाॉ ु कीस्जमे। भं ‘आफद धनलॊतरय’ इडद्र वे आमुलद प्राद्ऱ कय े वे स्लगा जा ऩशुॉि। स्लगा भं इडद्र आफद दे लता बी योगी े ऩुन् अलताय रेकय वबी रोकं को नीयोग करुॉ गा। भं शो यशे थे। मश दे खकय नायद जी की सिडता औय फढ़ कासताक भाव, कृ ष्ण ऩष, िमोदळी, गुरुलाय, शस्त नषि के गई। सिडता कयते शुए ले लैकण्ठ भं ऩशुॉिे। ु वभम अलताय रेकय ‘आमुलद’ का उद्धाय करुॉ गा। इवभं े लैकण्ठ भं नायद जी ने ळॊख िक्र अभृत करळ ु वडदे श न कयो। धायी औय अबम शस्त धनलॊतरय त्रलष्णु को दे खा। श्री (रक्ष्भी), बू (ऩृ्ली) औय नीरा दे ली उनकी ियण वेला फद्रतीम अध्माम: कय यशी थी। ऐवे भशात्भा धनलॊतरय रुऩी श्री त्रलष्णु को बगलान ् त्रलष्णु क उक्त लिनं को वुनकय नायद े नायद जी ने बत्रक्त ऩूलक प्रणाभ फकमा औय शाथ जोड़कय ा भुसन असत प्रवडन शुए औय शऴा वे फोरे-शे बगलन ् आऩ उनकी स्तुसत कयने रगे। ‘धनलॊतरय ऩूजा’ की त्रलसध फताइए। ‘धनलॊतरय ऩूजा भं श्री नायद जी फोरे-शे दे लं क दे ल जगडनाथ बक्तं े ऩय दमा कयने लारे दीनफडधु दमावागय जगत ् की यषा भं कौन वा ध्मान मा त्रलधान फकमा जाए ? उवका सनमभ तत्ऩय आऩ भुझे ळयणागत जानकय वडतुद्श कीस्जए। क्मा शं ? उवका पर क्मा शं ? फकव वभम, फकवने उव शे बगलन ् भंने ऩृ्ली आफद वबी रोकं भं ऩमाटन ऩूजा को फकमा शं ? ऩूजा भं क्मा क्मा िीजं िाफशए ? शे फकमा औय लशाॉ क सनलावी जनं को नाना योगं वे द्खी े ु दे ल दे लेद्वय रोकं ऩय अनुग्रश कयने की इच्छा वे कृ ऩा ऩामा। फकवी को ज्लय ने सगयामा शं , तो फकवी को याज ऩूलक मश वफ भुझे फताइए। श्री बगलान ् ने कशा- शे भुने ा मक्ष्भा ने धय दफामा। कोई असतवाय, द्वाव, खाॉवी,वॊग्रशणी तुभने रोकोऩकाय की इच्छा वे ऩूछा शं । अतएल तुभवे औय ऩाण्डु योगाफद वे ऩीफड़त शं । कोई लातयोगं वे ऩीफड़त ‘ऩाऩनासळनी, योगनासळनी कथा’ कशता शूॉ।
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    72 अक्टू फय 2011 धनगुद्ऱ याजा क सनसभत्त कासताक कृ ष्ण िमोदळी े बयद्राज भुसन ने कशा-शे याजन ् तुम्शाया लृत्ताडत गुरुलाय शस्त नषि क वभम भं यात्रि क प्रथभ प्रशय भं े े भंने जान सरमा। तुभ असत ळीघ्र भशात्रलष्णु धनलॊतरय की गुद्ऱ धन क वभान ‘धनलॊतरय’ नाभ वे अलतीणा शोता शूॉ। े ळयण भं जाओ। भनुष्म उनक दळान भाि वे घोय दस्तय े ु अतएल लश फदन वॊवाय भं ‘धनिमोदळी’ (धनतेयव) नाभ योगं वे भुक्त शो जाता शं । याजा ने बयद्राज भुसन वे उक्त फात वुनकय उनवे ऩूछा-शे भशात्भन ् आऩ कृ ऩा कय उनकी वे प्रसवद्ध शोगा। मश सतसथ वबी काभनाओॊ को दे ने लारी आयाधना त्रलसध भुझे बरी-बाॉसत फताइए। ऋत्रऴ बयद्राज ने शं । कशा-शे भशाबाग याजन ् उव त्रलसध को भं कशता शूॉ, नायद जी ने ऩूछा- शे बगलन ् कृ ऩमा त्रलस्ताय ऩूलक ा वालधान सित्त वे वुसनए। फताइए फक फड़ फागी धनगुद्ऱ कशाॉ शुआ औय आऩक दळान े की प्रासद्ऱ क सरए उवने कौनवा व्रत फकमा था औय शे े कासताक कृ ष्ण िमोदळी क ळुब फदन, प्रात् कार े दमावागय नायामण उवने आऩका ऩूजन क्मं फकमा था? उठकय ळौि-भुख भाजान आफद वे सनलृत्त शोकय स्नान कये । ळुद्ध लस्त्र आफद धायण कय गुरु वे प्राद्ऱ उऩदे ळानुवाय श्री बगलान ् ने कशा- ऩशरे अलडतीऩुय (उज्जैन) भं बगलान ् धनलॊतरय का ध्मान कये । सनम्न भडि ऩढ़कय व्रत ‘धनगुद्ऱ’ नाभक याजा धभाभागा वे प्रजा का ऩारन कयने का प्रायम्ब कये : लारा शुआ था। लश वबी रोगं का प्माया, उदायसित्त था। करयष्मासभ व्रतॊ दे ल त्लद् बक्तस्त्लत ् ऩयामण्। उवे षमयोग शो गमा। उववे लश फदन-यात ऩीफड़त शोने सश्रमॊ दे फश जमॊ दे फश, आयोग्मॊ दे फश भे प्रबो रगा। ऩीड़ा की सनलृत्रत्त क सरए उवने जऩ, शोभ, नाना े अथाात ् शे दे ल भं आऩका बक्त शूॉ, आऩ भं सित्त प्रकाय की औऴसधमाॉ की, ऩयडतु नीयोग न शुआ। तफ लश रगाकय आऩका व्रत करुॉ गा। आऩ भुझे रक्ष्भी दीस्जए, स्खडन शोकय त्रलराऩ कयने रगा। त्रलजम दीस्जए, आयोग्म दीस्जए। याजा की स्त्री त्रिरोक भं प्रसवद्ध, ऩसतव्रता, दे ल धनलॊतरय वे उक्त प्राथाना कय, उनकी वदािारयणी थी। उवने बी ऩसत क भॊगर की आकाॊषा वे े ऴोडळोऩिाय वे ऩूजा कये । ऩूजा कयने क फाद तेयश धागं े अनेक सनमभ, उऩलाव आफद फकए, ऩय इववे बी याजा का वूि रेकय तेयश गाॉठ लारा ‘दोयक’ फनाए। इव ‘दोयक’ नीयोग न शुआ औय अडत भं लश स्त्री बी अतीवाय योग वे की बत्रक्तऩूलक ऩूजा कये औय सनम्न भडि ऩढ़कय ऩुरुऴं क ा े योसगणी शो गई। शे भुने उव याजा वे उव ऩसतव्रता स्त्री के दाफशने शाथ भं तथा स्स्त्रमं क फाॉएॉ शाथ भं फाॉधे: े ऩाॉि ऩुि शुए। ले क्रभळ् आभलात, प्रीशा, कद्ष, खाॉवी औय ु धडलडतये भशाबाग जयायोगसनलायक। ु द्वाव वे ऩीफड़त शुए। उनको बी योग वे छटकाया न दोयरुऩेण भाॊ ऩाफश, वकटु म्फॊ दमासनधे॥ ु सभरा। याजा औय यानी अऩने ऩुिं को योगाता दे खकय आसधव्मासधजया भृत्मु बमादस्भादशसनाळभ ्। अत्मडत द्खी शुए। ु ऩीड्मभानॊ दे लदे ल यष भाॊ ळयणागतभ ्॥ स्त्री-ऩुिं को योग क वागय वे भुक्त कयाने की े अथाात ्-शे धडलडतये शे भशाबाग आऩ जया (फुढाऩा) औय इच्छा वे सिस्डतत याजा घोय लन को िरा गमा। लन भं योग क सभटाने लारे शं । इवसरए शे दमासनधे आऩ इव े याजा ने भशाभुसन ‘बयद्राज’ को फैठे दे खा। याजा ने उडशं वूिरुऩ वे वकटु म्फ भेयी यषा कीस्जमे। भं फदन-यात आसध ु बत्रक्तऩूलक ा प्रणाभ फकमा औय अऩना द्ख ु फतामा। (भानसवक द्ख) औय व्मासध (योग), जया (फुढाऩा) तथा ु भशाभुसन बयद्राज वे याजा ने योग-कद्श सनलायण शे तु उऩाम भृत्मु क बम वे िस्त शो यशा शूॉ। शे दे ल-दे ल े ळयण भं ऩूछा। आए शुए भेयी अफ आऩ यषा कयं । वूि फडधन क फाद े
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    73 अक्टू फय 2011 ‘दे ल दे ल धनलॊतरय’ को बत्रक्त ऩूलक ‘अघ्मा’ सनलेदन कये । ा धडलडतये नभस्तुभ्मॊ, नभो ब्रह्माण्ड नामक। अघ्मा प्रदान कयने का भडि इव प्रकाय शं : वुयावुयायासधताॊघ्रे, नभो लेदैक गोिय । जातो रोक फशताथााम, आमुलदासबलृद्धमे। े आमुलद स्लरुऩाम, नभस्ते जगदात्भने॥१॥ े जया भयण नाळाम, भानलानाॊ फशताम ि॥ प्रऩडनॊ ऩाफश दे लेळ जगदानडद दामक। दद्शानाॊ सनधनामाम, जात्त धडलडतये प्रबो। ु दमा सनधे भशा दे ल िाफश भाभऩयासधनभ ्। गृशाणाघ्मं भमा दत्तॊ, दे ल दे ल कृ ऩा कय॥ जडभ भृत्मु जयायोगै्, ऩीफड़तॊ वकटु स्म्फनभ ्॥२॥ ु अथाात ्- शे दे ल दे ल, दमा कायी धनलॊतरय! आऩ रोकाऩकाय अथाात ्- शे धडलडतये ब्रह्माण्ड नामक आऩको नभस्काय! क सरए, आमुलद की असबलृत्रद्ध क सनसभत्त, भनुष्मं क े े े े आमुलद स्लरुऩ जगत ् क अडतमााभी आऩको नभस्काय। शे े े फशत तथा जया भयण का नाळ कयने क सरए अलतरयत े जगत ् क वुखदामी दे ल दे ल दमा वागय, भशा दे ल आऩ े शुए शं । भं आऩको अघ्मा प्रदान कयता शूॉ। इवे स्लीकाय भुझ ळयणागत अऩयाधी की यषा कयं । भं कटु म्फ वफशत ु कीस्जए। जडभ भृत्मु जया आफद योगं वे ऩीफड़त शूॉ। अघ्मा प्रदान कयने क फाद ब्राह्मण को फामन दान े बगलान ् धनलॊतरय ने मश स्तुसत वुनकय भेघ कये । फामन दान क सरए गेशूॉ क आटे भं दध, घी डारकय े े ू गजान क वभान गम्बीय लाणी वे भुस्कयाते शुए कशा-शे े ु भशा याज ठीक शं , ठीक शं , भं तुम्शायी स्तुसत वे प्रवडन ऩकाए। ऩकने ऩय ळक्कय डारे। कवय, कऩूय, इरामिी, े शूॉ। अफ शभवे लय भाॉग रो। रंग, जात्रलिी डारकय इव सवद्ध नैलेद्य को बगलान ् को याजा फोरे-शे दे ल मफद आऩ प्रवडन शं , तो वफवे अत्रऩत कये । आधा प्रवाद लेदस ब्राह्मण को अत्रऩात कये ा ऩशरे स्त्री ऩुिं वफशत भुझे आयोग्म दीस्जए। औय आधा स्त्री ऩुिाफद वफशत स्लमॊ प्रवाद स्लरुऩ ग्रशण मश प्राथाना वुनकय बगलान ् ने कशा-याजन ् तुभने कये । शे याजन ् इव त्रलसध वे व्रत कयने वे वाषात ् धनलॊतरय स्लमॊ प्रकट शोकय तुम्शाया अबीद्श सवद्ध कयं गे। जो प्राथाना की शं , लश ऩूणा शोगी। इवक असतरयक्त बी भं े इतनी कथा वुनाकय बयद्राज भुसन ने त्रलश्राभ सरमा। लय दे ता शूॉ। उवे वालधान शोकय वुनो : तृतीम अध्माम: तुभने स्जव प्रकाय मश व्रत फकमा शं । इवी तयश वूत जी फोरे-शे भुसन लयं याजा धनगुद्ऱ ने भुसन जो व्रत कयं गे, उनको आयोग्म प्रदान कय भं उडशं अऩनी की आसा ऩाकय उनक कशे अनुवाय तेयश लऴा ऩमाडत े स्स्थय बत्रक्त दॉ गा। ू बत्रक्त ऩूलक व्रत फकमा। ा वूत जी फोरे-बगलान ् धनलॊतरय मश कशकय एक फदन व्रत वभासद्ऱ क अलवय ऩय वाषात ् े अडतधाान शो गए औय याजा धनगुद्ऱ अऩनी ऩुयी भं रौट धनलॊतरय प्रकट शुए। याजा ने वाद्शाॊग प्रणाभ कय उनकी गमा। याजा सनत्म स्त्री-ऩुिं वफशत अभृत ऩास्ण धनलॊतरय स्तुसत की। बत्रक्त ऩूलक की गई स्तुसत स्लीकाय कय ा की स्तुसत कयने रगा। उवने ऩृ्ली रोक भं नाना प्रकाय बगलान ् धनलॊतरय ने कशा-शे याजन ् अफ तुभ डयो भत, क वुख बोगे औय अडत भं बगलान ् धनलॊतरय की कृ ऩा वे े तुम्शाया भॊगर शोगा। तुभ शभवे लय भाॉगो। याजा ने मश भोष ऩद प्राद्ऱ फकमा। इव प्रकाय भंने तुभ रोगं को वुनकय उडशं ऩुन् वाद्शाॊग प्रणाभ फकमा औय उनकी स्तुसत बगलान ् धनलॊतरय की जडभोत्वल कथा वुनाई। इवके की : वुनने वे वबी ऩाऩं का नाळ शोता शं ।
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    74 अक्टू फय 2011 वद्ऱ श्री का िभत्काय  सिॊतन जोळी दीऩालरी क फदन फशी-खाते क ऩूजन क वभम फशी-खाते भं उऩयोक्त क्रभभं रार यॊ ग की करभ म ऩेन वे श्री े े े सरखे। ऩशरे एक फाय श्री सरखे, फपय दो फाय श्री श्री सरखे, फपय तीन फाय श्री श्री श्री, इव प्रकाय क्रभ को फढाते जाए आखीय भं वात फाय श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री सरखे, वद्ऱश्री क नीिे े अऩने ईद्श का नाभ सरखे मा ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ् सरखे। फपय धुऩ- श्री दीऩ, ऩुष्ऩ आफद वे उवका ऩूजन कयं । श्री श्री उक्त प्रमोग कयने वे आनेलारा नमा लऴा व्मलवाम भं आसथाक द्रत्रद्श वे वुख, वभृत्रद्ध रेकय आमेगा औय अत्मासधक राबदामक यशे गा। श्री श्री श्री स्जन रोगो क ऩाव रक्ष्भी (धन) स्स्थय नशीॊ यशता। रक्ष्भी आने े श्री श्री श्री श्री वे ऩूला जाने को तत्ऩय शोती शं । उडशं अऩनी जेफ भं मा भनीऩवा भं एक स्पद कागज ऩय उऩयोक्त तयीक वे श्री सरख कय यखना िाफशए। वद्ऱ श्री े े श्री श्री श्री श्री श्री सरखने वे रक्ष्भी रम्फे वभम तक स्स्थय यशने क मोग फनते शं लश नमे े श्री श्री श्री श्री श्री श्री स्रोत वे धन राब क बी प्रफर मोग फनते शं । (अद्शगॊध की स्माशी े फनाकय अनाय की करभ वे सरखना असत उत्तभ यशता शं ।) श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री  उक्त तयीक वे वद्ऱ श्री को अऩनी अरभायी, गल्रा (कळ फोक्ळ) े ै ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ् मा धन यखने क स्थान ऩय कभकभ मा अद्शगॊध वे अऩने दाशीने े ु ु शाथ की अनासभका उॊ गरी वे सरखने ऩय बी मश अत्मासधक राबप्रद यशता शं ।  उक्त तयीक वे वद्ऱ श्री को िाॊफद मा वोने क ऩत्तय ऩय मॊि स्लरुऩ बी फनामा वकता शं । ताॊफे िाॊदी क ऩत्तय भं े े े फनाते वभम ध्मान यखे की ऩत्तय की वतश ऩय श्री उऩय की ओय उबयी शुई शो, नीिे की ओय खुदी शुई न शं।  वद्ऱ श्री की जगश ऩय अनेक रोग श्री मा रक्ष्भी भॊि का उच्िायण कयते शुए, अऩनी अरभायी, गल्रा (कळ ै फोक्ळ) आफद धन यखने क स्थान ऩय अनाभीका उॊ गरी वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । कई दकानदाय मा व्मलवामीक े ु स्थानो ऩय बी उक्त तयीक वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । वद्ऱ श्री वे भाॊ रक्ष्भीजी प्रवडन शोती शं । क्मोकी श्री का वयर े अथा शं वुख वभृत्रद्ध-वॊऩडनता। रक्ष्भी मॊि श्री मॊि (रक्ष्भी मॊि) भशारक्ष्भमै फीज मॊि लैबल रक्ष्भी मॊि श्री मॊि (भॊि यफशत) भशारक्ष्भी फीवा मॊि कनक धाया मॊि श्री मॊि (वॊऩणा भॊि वफशत) ू रक्ष्भी दामक सवद्ध फीवा मॊि श्री श्री मॊि (रसरता भशात्रिऩुय वुडदमै श्री मॊि (फीवा मॊि) रक्ष्भी दाता फीवा मॊि श्री भशारक्ष्भमं श्री भशामॊि) श्री मॊि श्री वूक्त मॊि रक्ष्भी फीवा मॊि अॊकात्भक फीवा मॊि श्री मॊि (कभा ऩृद्षीम) ु रक्ष्भी गणेळ मॊि ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊि ऩूजन मॊि मॊि क त्रलऴम भं असधक शे तु वॊऩक कयं । GURUTVA KARYALAY, Call us: 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 े ा
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    75 अक्टू फय 2011 स्पफटक श्रीमॊि का ऩूजन  सिॊतन जोळी आज क बौसतक मुग भं अथा (धन) जीलन फक भुख्म आलश्मक्ताओॊ भं वे एक शै । धनाढ्म व्मत्रक्तओॊ जीलनळैरी को े दे खकय प्रबात्रलत शोते शुले वाधायण व्मफक फक बी काभना शोती शं , फक उवक ऩाव बी इतना धन शो फक लश अऩने जीलन े भं वभस्त बौसतक वुखो को बोग ने भं वभथा शं। एवी स्स्थभं भेशनत, ऩरयश्रभ वे कभाई कयक धन अस्जात कयने क े े फजाम कछ रोग अल्ऩ वभम भं ज्मादा कभाने फक भानसवकता क कायण कबी-कबी गरत तयीक अऩनाते शं । ु े ं स्जवक पर स्लरुऩ एवे रोग धन का लास्तत्रलक वुख बोगने वे लॊसित यश जाते शं औय योग, तनाल, भानसवक े अळाॊसत जेवी अडम वभस्माओॊ वे ग्रस्त शो जाते शं । जशाॊ गरत तयीक वे कभामे शुले धन क कायण वभाज एवे रोगो को शीन बाल वे दे खते शं । जफफक भेशनत, ं े ऩरयश्रभ वे काभामे शुले धन वे स्लमॊ का आत्भत्रलद्वाव फढता शं एलॊ वभाज भं प्रसतद्षा औय भान वम्भान बी वयरता वे प्राद्ऱ शो जाता शं । जो व्मत्रक्त धासभाक त्रलिाय धायाओॊ वे जुडे शो लश इद्वय भं त्रलद्वाय यखते शुले स्लमॊ फक भेशनत, ऩरयश्रभ क फर ऩय कभामे शुले धन को फश वच्िा वुख े भानते शं । धभा भं आस्था एलॊ त्रलद्वाव यखने लारे व्मत्रक्त क सरमे भेशनत, ऩरयश्रभ े कयने क उऩयाॊत अऩनी आसथाक स्स्थभं उडनसत एलॊ रक्ष्भी को स्स्थय कयने े शे त, श्री मॊि क ऩूजन का उऩाम अऩनाकय जीलन भं फकवी बी वुख वे ु े लॊसित नशीॊ यश वकते, उडशं अऩने जीलन भं कबी धन का अबाल नशीॊ यशता। उनक वभस्त कामा वुिारु रुऩ वे िरते शं । रक्ष्भी कृ ऩा प्रासद्ऱ क सरए श्रीमॊि े े का वयर ऩूजन त्रलधान स्जवे अऩना कय वाधायण व्मत्रक्त त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । इव भं जया बी वॊळम नशीॊ शं । श्रीमॊि का ऩूजन यॊ क वे याजा फनाने लारा एलॊ व्मत्रक्त फक दरयद्रता को दय कयने लारा शं । ू  अऩने ऩूजा स्थान भं प्राण-प्रसतत्रद्षत श्रीमॊि को ऩूजन क सरमे स्थात्रऩत कयं । (प्राण-प्रसतत्रद्षत श्रीमॊि फकवी बी े मोग्म त्रलद्रान ब्राह्मण मा मोग्म जानकाय वे सवद्ध कयलारे)  श्री मॊि को प्रत्मेक ळुक्रलाय को दध, दशी, ळशद, घी औय ळक्कय (गुड़) अथाात ऩॊिाभृत फनाकय स्नान कयामे। ु  स्नान क ऩद्ळमात उवे रार कऩडे वे ऩोछ दं । े  श्री मॊि को फकवी िाॊदी मा ताॊफे फक प्रेट भं स्थाऩीत कयं ।  श्री मॊि क नीिे 5 रुऩमे मा 10 रुऩमे का नोट यखदं । (5,10 रुऩमे का सवक्का नशीॊ) े  श्री मॊि स्थात्रऩत कयने लारी प्रेट भं श्रीमॊि ऩय स्पफटक फक भारा को िायं ओय घुभाते शुले स्थात्रऩत कयं ।  श्री मॊि क उऩय भौरी का टु कडा 3-5 फाय घुभाते शुले अत्रऩत कयं । े ा  श्री मॊि क उऩय वुखा अद्श गॊध सछडक। े ं
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    76 अक्टू फय 2011  मफद वॊबल शो तो रार ऩुष्ऩ अत्रऩत कयं । (कभर, भॊदाय(जावूद) मा गुराफ शो तो उत्तभ) ा  धूऩ-दीऩ इत्मादी वे त्रलसधलत ऩूजन कयं ।  उऩयोक्त त्रलधन प्रसत ळुक्रलाय कयं एलॊ अडम फदन कलर धूऩ-दीऩ कयं । े  फकवी एक रक्ष्भी भॊि का एक भारा भॊि जऩ कयं । श्रीवूक्त, अद्श रक्ष्भी स्तोि इत्मादी का ऩाठ कयं मफद ऩाठ कयने भं आऩ अवभथा शोतो फाजाय भं श्रीवूक्त, अद्श रक्ष्भी इत्मादी स्तोि फक कवेट वीडी सभरती शं उवका श्रलण कयं । े  ऩूजा भं जाने-अनजाने शुई गरती क सरए रक्ष्भीजी का स्भयण कयते शुले षभा भाॊगकय वुख, वौबाग्म औय वभृत्रद्ध े फक काभना कयं ।  प्रसत ळुक्रलाय उऩयोक्त ऩूजन कयने वे जीलन भं फकवी बी प्रकाय का आसथाक वॊकट नशीॊ आता।  मदी आसथाक वॊकट वे ऩये ळान शं तो श्री मॊि क ऩूजन वे वभस्त प्रकाय क आसथाक वॊकट धीये -धीये दय शो जाते शं । े े ू नोट: श्री मॊि क क नीिे यखा शुला नोट प्रसत एक-दो भाव भं एक फाय फकवी दे ली भॊदीय भं बेट कय दं । (राब प्राद्ऱ शोने ऩय फदरे) े े  प्रथन फाय यखा शुला नोट श्री मॊि क ऩूजन वे राब शोने क फाद शी फदरे। राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने तक नोट को यखे यशं । े े  राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने क ऩद्ळमात प्रसत भाश भं एक फाये प्रसतऩदा(एकभ) को ऩुयाना नोट फदर कय नमे नोट यखं। े  जेवे-जेवे राब प्राद्ऱ शोने रगे आऩ क अनुकर कामा शो ने रगे तो नोट फक यकभ फढाते यशं । असधक राब प्राद्ऱ शोता शं । े ू उदाशण: मफद ऩशरे 5 रुऩमे का नोट यखा शं तो उस्वे राब शोने क ऩद्ळमात नोट फदरते शुले 10 रुऩमे का नोट यखे। 10 रुऩमे का े नोट यखने वे राब शोने क ऩद्ळमात नोट फदरते शुले 20 रुऩमे का नोट यखे। इवी प्रकाय नोट को फदते यशं इस्वे असधक राब प्राद्ऱ े शोता शं । असधक राब प्रासद्ऱ शे तु वाभाडम सनमभ: ऩूजन क फदन ब्रह्मिमा का ऩारन कयं । े ऩूजन क फदन वुगॊसधत तेर, ऩयफ्मूभ, इि का प्रमोग कयने वे फिे। े त्रफना प्माज-रशवून का ळाकाशायी बोजन ग्रशण कयं । ळुक्रलाय वपद सभद्षान बोजन भं ग्रशण कयं । े  क्मा आऩक फच्िे कवॊगती क सळकाय शं ? े ु े  क्मा आऩक फच्िे आऩका कशना नशीॊ भान यशे शं ? े  क्मा आऩक फच्िे घय भं अळाॊसत ऩैदा कय यशे शं ? े घय ऩरयलाय भं ळाॊसत एलॊ फच्िे को कवॊगती वे छडाने शे तु फच्िे क नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्राया ु ु े ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त लळीकयण कलि एलॊ एव.एन.फडब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा, त्रलसध-त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मफद आऩ तो आऩ भॊि सवद्ध लळीकयण कलि एलॊ एव.एन.फडब्फी फनलाना िाशते शं , तो वॊऩका इव कय वकते शं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    77 अक्टू फय 2011 वला ऐद्वमा प्रद-रक्ष्भी-कलि श्री भधुवूदन उलाि:- ।।इसत श्रीब्रह्मलैलते इडद्रभ ् प्रसत शरयणोऩफदद्शभ ् रक्ष्भीकलिभ ्।। गृशाण कलिभ ् ळक्र वलाद्खत्रलनाळनभ ्। ु (गणऩसतखण्ड २२।५-१७) ऩयभैद्वमाजनक वलाळिुत्रलभदा नभ ्।। ॊ बालाथा्- भधुवूदन जी फोरे शं इडद्र ! (रक्ष्भी प्रासद्ऱ क सरमे) तुभ े ब्रह्मणे ि ऩुया दत्तभ ् वॊवाये ि जरप्रुते। मश रक्ष्भीकलि ग्रशण कयो। मश वभस्त द्खं का त्रलनाळक, ु मद् धृत्ला जगताॊ श्रेद्ष् वलैद्वमामुतो त्रलसध्।। ऩयभ ऐद्वमा का उत्ऩादक औय वम्ऩूणा ळिुओॊ का भदान कयने फबूलुभनल् वले वलैद्वमामतो मत्। ा ु लारा शं । ऩूलकार भं जफ वाया वॊवाय जरभग्न शो गमा था, उव ा वलैद्वमाप्रदस्मास्म कलिस्म ऋत्रऴत्रलासध।। वभम भैनं इवे ब्रह्मा को फदमा था। स्जवे धायण कयक ब्रह्मा े ऩस्ङ्क्तश्छडदद्ळ वा दे ली स्लम ऩद्मारमा वुय। त्रिरोकी भं श्रेद्ष औय वम्ऩूणा ऐद्वमं क बागी शुए थे। दे लयाज, इव े सवद्धै द्वमाजऩेष्लेल त्रलसनमोग् प्रकीसतात।। वलैद्वमाप्रद कलि क ब्रह्मा ऋत्रऴ शं , ऩस्ङ्क्त छडद शं , स्लमॊ ऩद्मारमा े मद् धृत्ला कलिॊ रोक् वलाि त्रलजमी बलेत ्।। रक्ष्भी दे ली शं औय सवद्धै द्वमा क जऩं भं इवका त्रलसनमोग कशा े भूर कलि ऩाठ: गमा शं । इव कलि क धायण कयने वे रोग वलाि त्रलजमी शोते शं । े भस्तकभ ् ऩातु भे ऩद्मा कण्ठॊ ऩातु शरयत्रप्रमा। . ऩद्मालती दे ली भेये भस्तक की यषा कयो। शरयत्रप्रमा कण्ठ की यषा नासवकाभ ् ऩातु भे रक्ष्भी् कभरा ऩातु रोिनभ ्।। कयो। रक्ष्भी नासवका की यषा कयो। कभरा नेि की यषा कयो। कळान ् कळलकाडता ि कऩारभ ् कभरारमा। े े कळलकाडता कळं की, कभरारमा कऩार की, जगज्जननी दोनं े े जगत्प्रवूगण्डमुग्भॊ स्कडधॊ वम्ऩत्प्रदा वदा।। ा कऩोरं की औय वम्ऩत्प्रदा वदा स्कडध की यषा कयो। ॐ श्रीॊ कभरलासवडमै स्लाशा ऩृद्षॊ वदालतु। ॐ श्रीॊ कभरलासवडमै स्लाशा भेये ऩृद्षॊ बाग का वदा ऩारन कयो। ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै स्लाशा लष् वदालतु।। ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै स्लाशा: लष्स्थर को वदा वुयस्षत यखे। ऩातु श्रीभाभ ककारॊ फाशुमुग्भॊ ि ते नभ्।। ॊ श्री दे ली को नभस्काय शं :आऩ भेये ककारॊ तथा दोनं बुजाओॊ को ॊ ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्म्मै नभ् ऩादौ ऩातु भे वॊततभ ् सियभ ्। फिामे। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ नभ् ऩद्मामै स्लाशा ऩातु सनतम्फकभ ्।। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्म्मै नभ् सियकार तक भेये ऩैयं का ऩारन कयो। ॐ श्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा वलांगॊ ऩातु भे वदा। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ नभ् ऩद्मामै स्लाशा- सनतम्फ बाग की यषा कयो। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा भाॊ ऩातु वलात्।। ॐ श्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा- भेये वलांग की वदा यषा कयो। इव भॊि क ऩाठ वे भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा प्राद्ऱ शोती शै । े ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा- वफ ओय वे वदा भेया ऩारन परश्रुसत: कयो। इसत ते कसथतभ ् लत्व वलावम्ऩत्कयभ ् ऩयभ ्। लत्व, इव प्रकाय‍ भंने‍ तुभवे‍ इव‍ वलैद्वमाप्रद‍ नाभक‍ ऩयभोत्कृ द्श‍ वलैद्वमाप्रदभ ् नाभ कलिभ ् ऩयभाद्भतभ ्।। ु कलि‍ का‍ लणान‍ कय‍ फदमा।‍ मश ऩयभ‍ अद्भत‍ कलि‍ वम्ऩूण‍ ु ा गुरुभभ्मच्मा त्रलसधलत ् कलिभ ् ळयमेत्तु म्। वम्ऩत्रत्तमं‍को‍दे ने‍ लारा‍शं ।‍जो‍भनुष्म‍त्रलसधऩूलक‍गुरु फक अिाना‍ ा कण्ठे ला दस्षणे फाॊशौ व वलात्रलजमी बलेत ्।। कयक‍इव‍कलि‍को‍गरे‍ भं‍ अथला‍दाफशनी‍बुजा‍ऩय‍धायण‍कयता‍ े भशारक्ष्भीगृशभ ् तस्म न जशासत कदािन। ा शं , लश‍वफको‍जीतने लारा‍शो‍जाता‍शं ।‍भशारक्ष्भी‍कबी‍उवक‍घय‍ े तस्म छामेल वततभ ् वा ि जडभसन जडभसन।। का‍त्माग‍नशीॊ‍कयती; फस्ल्क‍प्रत्मेक‍जडभ भं‍छामा‍की‍बाॉसत‍वदा‍ इदभ ् कलिभसात्ला बजेल्रक्ष्भीॊ वुभडदधी्। उवक‍वाथ‍रगी‍यशती‍शं ।‍जो‍भडदफुत्रद्ध‍इव‍कलि‍को‍त्रफना‍जाने‍ े ळतरषप्रजद्ऱोऽत्रऩ न भडि् सवत्रद्धदामक्।। शी रक्ष्भी‍ की‍ बत्रक्त‍ कयता‍ शं , उवे‍ एक‍ कयोड़‍ जऩ‍ कयने‍ ऩय‍ बी‍ भडि‍सवत्रद्धदामक‍नशीॊ शोता।
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    78 अक्टू फय 2011 भशारक्ष्भी कलि नायामण उलाि ऩद्मा भाॊ दस्षणे ऩातु नैऋत्माॊ श्रीशरयत्रप्रमा॥१०॥ ा वला वम्ऩत्प्रदस्मास्म कलिस्म प्रजाऩसत्। ऩद्मारमा ऩस्द्ळभे भाॊ लामव्माॊ ऩातु श्री् स्लमभ ्। ऋत्रऴश्छडदद्ळ फृशती दे ली ऩद्मारमा स्लमभ ्॥१॥ उत्तये कभरा ऩातु ऐळाडमाॊ सवडधुकडमका॥११॥ धभााथकाभभोषेऴु त्रलसनमोग् प्रकीसतात्। ा नायामणेळी ऩातूध्लाभधो त्रलष्णुत्रप्रमालतु। ऩुण्मफीजॊ ि भशताॊ कलिॊ ऩयभाद्भतभ ्॥२॥ ु वॊततॊ वलात् ऩातु त्रलष्णुप्राणासधका भभ॥१२॥ ॐ ह्रीॊ कभरलासवडमै स्लाशा भे ऩातु भस्तकभ ्। इसत ते कसथतॊ लत्व वलाभडिौघत्रलग्रशभ ्। श्रीॊ भे ऩातु कऩारॊ ि रोिने श्रीॊ सश्रमै नभ्॥३॥ वलैद्वमाप्रदॊ नाभ कलिॊ ऩयभाद्भतभ ्॥१३॥ ु ॐ श्रीॊ सश्रमै स्लाशे सत ि कणामुग्भॊ वदालतु। वुलणाऩलातॊ दत्त्ला भेरुतुल्मॊ फद्रजातमे। ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा भे ऩातु नासवकाभ ्॥४॥ मत ् परॊ रबते धभॉ कलिेन ततोऽसधकभ ्॥१४॥ ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै ि स्लाशा दडतॊ वदालतु। गुरुभभ्मच्मा त्रलसधलत ् कलिॊ धायमेत ् तु म्। ॐ श्रीॊ कृ ष्णत्रप्रमामै ि दडतयडध्रॊ वदालतु॥५॥ कण्ठे ला दस्षणे लाशौ व श्रीभान ् प्रसतजडभसन॥१५॥ ॐ श्रीॊ नायामणेळामै भभ कण्ठॊ वदालतु। अस्स्त रक्ष्भीगृशे तस्म सनद्ळरा ळतऩूरुऴभ ्। ा ॐ श्रीॊ कळलकाडतामै भभ स्कडधॊ वदालतु॥६॥ े दे लेडद्रै द्ळावुयेडद्रै द्ळ वोऽिध्मो सनस्द्ळतॊ बलेत ्॥१६॥ ॐ श्रीॊ ऩद्मसनलासवडमै स्लाशा नासबॊ वदालतु। व वलाऩुण्मलान ् धीभान ् वलामसेऴु दीस्षत्। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ वॊवायभािे भभ लष् वदालतु॥७॥ व स्नात् वलातीथेऴु मस्मेदॊ कलिॊ गरे॥१७॥ ॐ श्रीॊ श्रीॊ कृ ष्णकाडतामै स्लाशा ऩृद्षॊ वदालतु। मस्भै कस्भै न दातव्मॊ रोबभोशबमैयत्रऩ। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ सश्रमै स्लाशा भभ शस्तौ वदालतु॥८॥ गुरुबक्ताम सळष्माम ळयणाम प्रकाळमेत ्॥१८॥ ॐ श्रीॊ सनलावकाडतामै भभ ऩादौ वदालतु। इदॊ कलिभसात्ला जऩेल्रक्ष्भीॊ जगत्प्वूभ ्। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ सश्रमै स्लाशा वलांगॊ भे वदालतु॥९॥ कोफटवॊख्मॊ प्रजद्ऱोऽत्रऩ न भडि् वोत्रद्धदामक्॥१९॥ प्राच्माॊ ऩातु भशारक्ष्भीयाग्नेय्माॊ कभरारमा। (गणऩसतखण्ड ३८।६४-८२) Full Astrological Analysis Report (With Easy Remedy) Rs-3700  This report for a full astrological analysis of your Birth chart.  Snalysis Report Includeing with Popular Treatises Of Astrology  We are Creat analysis Report Includeing with Different Types of Popular Astrology Treatises and Systems.  We are also Includeing in analysis Report - Vedic astrologi, Lalkitab, bhrigu shastra, varahamihira GURUTVA KARYALAY Bhubaneswar- 751 018, (ORISSA) INDIA, Call Us : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785, E-mail Us:- gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    79 अक्टू फय 2011 भशारक्ष्भी स्तुसत नभस्तेस्तु भशाभामे श्री ऩीठे वुयऩूस्जते। वफको लय दे ने लारी, वभस्त दद्शं को बम दे ने लारी एलॊ ु ळङ्खिक्रगदाशस्ते भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥१॥ वफक द:खं को दय कयने लारी, शे दे त्रल भशारक्ष्भी तुम्शं े ु ू नभस्ते गरुडारूढे कोरावुय बमङ्करय। नभस्काय शं ॥3॥ सवत्रद्ध, फुत्रद्ध, बोग औय भोष दे ने लारी शे वलाऩाऩशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥२॥ भॊिऩूत बगलसत भशारक्ष्भी तुम्शं वदा प्राभ शं ॥4॥ शे वलासे वलालयदे वलादद्श बमङ्करय। ु दे त्रल! शे आफद-अडत-यफशत आफदळत्रक्त ! शे भशे द्वरय! शे वलाद:खशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥३॥ ु मोग वे प्रकट शुई बगलसत भशारक्ष्भी तुम्शं नभस्काय सवत्रद्धफुत्रद्धप्रदे दे त्रल बुत्रक्त भुत्रक्त प्रदासमसन। शं ॥5॥ शे दे त्रल! तुभ स्थूर, वूक्ष्भ एलॊ भशायौद्ररूत्रऩणी शो, भडिऩूते वदा दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥४॥ भशाळत्रक्त शो, भशोदया शो औय फडे -फडे ऩाऩं का नाळ आद्यडतयफशते दे त्रल आद्यळत्रक्त भशे द्वरय। कयने लारी शो। शे दे त्रल भशारक्ष्भी तुम्शं नभस्काय शं ॥6॥ मोगजे मोगवम्बूते भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥५॥ शे कभर क आवन ऩय त्रलयाजभान ऩयब्रह्मस्लरूत्रऩणी दे त्रल! े स्थूरवूक्ष्भभशायौद्रे भशाळत्रक्त भशोदये । शे ऩयभेद्वरय! शे जगदम्फ! शे भशारक्ष्भी तुम्शं भेया प्रणाभ भशाऩाऩशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥६॥ शं ॥7॥ शे दे त्रल तुभ द्वेत लस्त्र धायण कयने लारी औय ऩद्मावनस्स्थते दे त्रल ऩयब्रह्म स्लरूत्रऩस्ण। नाना प्रकाय क आबूऴणं वे त्रलबूत्रऴता शो। वम्ऩूणा जगत ् े ऩयभेसळ जगडभत ् भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥७॥ भं व्माद्ऱ एलॊ अस्खर रोक को जडभ दे ने लारी शो। शे द्वेताम्फयधये दे त्रल नानारङ्कायबूत्रऴते। भशारक्ष्भी तुम्शं भेया प्रणाभ शं ॥8॥ जो भनुष्म बत्रक्त जगस्त्व ्थते जगडभत ् भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥८॥ मुक्त शोकय इव भशारक्ष्म्मद्शक स्तोि का वदा ऩाठ कयता भशारक्ष्म्मद्शक स्तोिॊ म: ऩठे द्भत्रक्त भाडनय्॥ ॊ शं , लश वायी सवत्रद्धमं औय याज्मलैबल को प्राद्ऱ कय वकता वलासवत्रद्धभलाऩनेसत याज्मभ ् प्राऩनेसत वलादा॥९॥ शं ॥9॥ जो प्रसतफदन एक वभम ऩाठ कयता शं , उवक फडे - े एककारे ऩठे स्डनत्मभ ् भशाऩाऩत्रलनाळनभ ्। फडे ऩाऩं का नाळ शो जाता शं । जो दो वभम ऩाठ कयता फद्रकारॊ म: ऩठे स्डनत्मभ ् धनधाडमवभस्डलत॥१०॥ शं , लश धन-धाडम वे वम्ऩडन शोता शं ॥10॥ जो प्रसतफदन त्रिकारॊ म: ऩठे स्डनत्मभ ् भशाळिुत्रलनाळनभ ्। तीन कार ऩाठ कयता शं उवक फडे -फडे ळिुओॊ का नाळ े भशारक्ष्भीबालेस्डनत्भ ् प्रवडना लयदा ळुबा ॥११॥ शो जाता शं औय उवक ऊऩय कल्माणकारयणी लयदासमनी े || इसत भशारक्ष्भी स्तुसत वम्ऩूणा || भशारक्ष्भी वदा शी प्रवडन शोती शं ॥11॥ रक्ष्भी जी क इव स्तोि की यिना कयने लारे दे लयाज े बालाथा:- इडद्र फोरे- श्रीऩीठऩय स्स्थत औय दे लताओॊ वे इडद्र शं । ऩूस्जत शोने लारी शे भशाभामे। तुम्शं नभस्काय शं । शाथ भं ळङ्ख, िक्र औय गदा धायण कयने लारी शे भशारक्ष्भी उऩयोक्त स्तुसत का प्रसतफदन तीन कार ऩाठ कयता तुम्शं प्रणाभ शं ॥1॥ गरुडऩय आरूढ शो कोरावुय को बम शै , ळिुओॊ का नाळ शोता शं एलॊ उवे जीलन भे वबी दे ने लारी औय वभस्त ऩाऩं को शयने लारी शे बगलसत प्रकाय क वुखो की प्रासद्ऱ शोती शे । े भशारक्ष्भी तुम्शं प्रणाभ शं ॥2॥ वफ कछ जानने लारी, ु वलाजन लळीकयण कलि भूल्म भाि: Rs.1050
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    80 अक्टू फय 2011 श्री कनकधाया स्तोि अॊगशये ऩुरकबूऴण भाश्रमडती बृगाॊगनैल भुकराबयणॊ ु तभारभ। अॊगीकृ तास्खर त्रलबूसतयऩाॊगरीरा भाॊगल्मदास्तु भभ भॊगरदे लतामा:॥1॥ भुग्ध्मा भुशुत्रलादधती लदनै भुयायै : प्रेभिऩाप्रस्णफशतासन गतागतासन। भारा दृळोभाधुकय त्रलभशोत्ऩरे मा वा भै सश्रमॊ फदळतु वागय वम्बलामा:॥2॥ त्रलद्वाभये डद्रऩदत्रलभ्रभदानदषभानडद शे तु यसधक भधुत्रलफद्रऴोत्रऩ। ॊ ईऴस्डनऴीदतु भसम षणभीषणाद्धा सभडदोलयोदय वशोदयसभस्डदयाम:॥3॥ आभीसरताषभसधगम्म भुदा भुकडदभानडदकडदभ सनभेऴभनॊगतडिभ ्। आककय स्स्थत कनी ु े सनकऩक्ष्भ नेिॊ बूत्मै बलेडभभ बुजॊगयामाॊगनामा:॥4॥ फाह्यडतये भधुस्जत: सश्रतकौस्तुबै मा शायालरील शरयनीरभमी त्रलबासत। काभप्रदा बगलतो त्रऩ कटाषभारा कल्माण बालशतु भे कभरारमामा:॥5॥ काराम्फुदासररसरतोयसव कटबाये धाायाधये स्पयसत मा तफडदॊ गनेल ्। भातु: वभस्त जगताॊ ै ु भशनीम भूसताबद्रास्ण भे फदळतु बागालनडदनामा:॥6॥ प्राद्ऱॊ ऩदॊ प्रथभत: फकर मत्प्रबालाडभाॊगल्म बास्ज: भधुभामसन भडभथेन। भध्माऩतेत फदश भडथय भीषणाद्धा भडदारवॊ ि भकयारमकडमकामा:॥7॥ दद्याद दमानुऩलनो द्रत्रलणाम्फुधायाभ स्स्भबफकिन ॊ त्रलशॊ ग सळळौ त्रलऴण्ण। दष्कभाधभाभऩनीम सियाम दयॊ नायामण प्रणसमनी नमनाम्फुलाश:॥8॥ ु ू इद्शा त्रलसळद्शभतमो त्रऩ मथा ममाद्रा दृद्शमा त्रित्रलद्शऩऩदॊ वुरबॊ रबॊते। दृत्रद्श: प्रशूद्शकभरोदय दीसद्ऱ रयद्शाॊ ऩुत्रद्श कृ ऴीद्श भभ ऩुष्कय त्रलद्शयामा:॥9॥ गीदे लतैसत गरुड़ध्लज बासभनीसत ळाकम्बयीसत ळसळळेखय लल्रबेसत। वृत्रद्श स्स्थसत प्ररम कसरऴु वॊस्स्थतामै तस्मै े नभस्स्त्र बुलनैक गुयोस्तरूण्मै ॥10॥ श्रुत्मै नभोस्तु ळुबकभापर प्रवूत्मै यत्मै नभोस्तु यभणीम गुणाणालामै। ळक्तमै नभोस्तु ळतऩाि सनकतानामै ऩुद्शमै नभोस्तु ऩुरूऴोत्तभ लल्रबामै ॥11॥ नभोस्तु नारीक सनबाननामै नभोस्तु दग्धौदसध जडभ बूत्मै । नभोस्तु े ु वोभाभृत वोदयामै नभोस्तु नायामण लल्रबामै ॥12॥ वम्ऩतकयास्ण वकरेस्डद्रम नडदासन वाम्राज्मदान त्रलबलासन वयोरूशास्ष। त्ल द्रॊ दनासन दरयता शयणाद्यतासन भाभेल ु भातय सनळॊ करमडतु नाडमभ ् ॥13॥ मत्कटाषवभुऩावना त्रलसध: वेलकस्म कराथा वम्ऩद:। वॊतनोसत लिनाॊगभानवॊवत्लाॊ भुयारयरृदमेद्वयीॊ बजे ॥14॥ वयसवजसनरमे वयोज शस्ते धलरभाॊळुकगडधभाल्मळोबे। बगलसत शरयलल्रबे भनोसे त्रिबुलनबूसतकरय प्रवीद भह्यभ ् ॥15॥ दस्ग्धस्स्तसभ:कनकबभुखा ल वृत्रद्शस्ललााफशनी त्रलभरिारू जर प्रुताॊगीभ। प्रातनाभासभ जगताॊ जननीभळेऴ ुॊ रोकासधनाथ गृफशणी भभृतास्ब्धऩुिीभ ् ॥16॥ कभरे कभराषलल्रबे त्लॊ करुणाऩूयतयाॊ गतैयऩाड़ॊ गै:। अलरोकम भाभ फकिनानाॊ प्रथभॊ ऩािभकृ त्रिभॊ ॊ दमामा : ॥17॥ स्तुलस्डत मे स्तुसतसबय बूसभयडलशॊ िमीभमीॊ त्रिबुलनभातयॊ यभाभ ्। गुणासधका गुरुतयबाग्मबासगनो बलस्डत ते फुधबात्रलतामा: ॥18॥इसत श्री कनकधाया स्तोिॊ वम्ऩूणभ ा कनकधाया मॊि आज क मुग भं शय व्मत्रक्त असतळीघ्र वभृद्ध फनना िाशता शं । धन प्रासद्ऱ शे तु प्राण-प्रसतत्रद्षत कनकधाया मॊि क वाभने े े फैठकय कनकधाया स्तोि का ऩाठ कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । इव कनकधाया मॊि फक ऩूजा अिाना कयने वे ऋण औय दरयद्रता वे ळीघ्र भुत्रक्त सभरती शं । व्माऩाय भं उडनसत शोती शं , फेयोजगाय को योजगाय प्रासद्ऱ शोती शं ।श्री आफद ळॊकयािामा द्राया कनकधाया स्तोि फक यिना कछ इव प्रकाय फक शं , स्जवक श्रलण एलॊ ऩठन कयने वे आव-ऩाव क ु े े लामुभॊडर भं त्रलळेऴ अरौफकक फदव्म उजाा उत्ऩडन शोती शं । फठक उवी प्रकाय वे कनकधाया मॊि अत्मॊत दरब मॊिो भं वे ु ा एक मॊि शं स्जवे भाॊ रक्ष्भी फक प्रासद्ऱ शे तु अिूक प्रबाला ळारी भाना गमा शं । कनकधाया मॊि को त्रलद्रानो ने स्लमॊसवद्ध तथा वबी प्रकाय क ऐद्वमा प्रदान कयने भं वभथा भाना शं । जगद्गरु ळॊकयािामा ने े ु दरयद्र ब्राह्मण क घय कनकधाया स्तोि क ऩाठ वे स्लणा लऴाा कयाने का उल्रेख ग्रॊथ ळॊकय फदस्ग्लजम भं सभरता शं । े े कनकधाया भॊि:- ॐ लॊ श्रीॊ लॊ ऐॊ ह्रीॊ-श्रीॊ क्रीॊ कनक धायमै स्लाशा' भूल्म: Rs.550 वे Rs.8200 तक गुरुत्ल कामाारम वॊऩक : ा 91+ 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    81 अक्टू फय 2011 श्री रक्ष्भी िारीवा ॥ दोशा ॥ रुऩ फदर तशॊ वेला कीडशा ॥ प्रसतफदन ऩाठ कयै भन भाशीॊ । भातु रक्ष्भी करय कृ ऩ, कयो ह्र्दम भं स्लॊम त्रलष्णु जफ नय तनु धाया । उन वभ कोई जग भं कशुॊ नाशी ॥ लाव ॥ रीडशे उ अलधऩुयी अलताया ॥ फशुत्रलसध क्मा भं कयं फडाई । भनोकाभना सवद्ध करय, ऩुयलशु भेयी तफ तुभ प्रगट जनकऩुय भाशीॊ । रेम ऩयीषा ध्मान रगाई ॥ आव ॥ वेला फकमो ह्र्दम ऩुरकाशीॊ ॥ करय त्रलद्वाव कयं व्रत नेभा । ॥वोयठा ॥ अऩनामा तोफश अडतमााभी । शोम सवद्ध उऩजै उय प्रेभा ॥ मशी भोय अयदाव,शाथ जोड त्रलनती त्रलद्व त्रलफदत त्रिबुलन की स्लाभी ॥ जम जम जम रक्ष्भी बालानी । करु । ॊ तुभ वभ प्रफर ळत्रक्त नफशॊ आनी । वफ भं व्मात्रऩत शो गुण खानी ॥ वफत्रलसध कयौ वुलाव, जम जनसन कशॊ तक भफशभा कशौ फखानी ॥ तुम्शयो तेज प्रफर जग भाशी । जगदॊ त्रफका ॥ भन क्रभ लिन कयै वेलकाई । तुभ वभ कोउ दमारु कशुॊ नाफशॊ ॥ सवॊधु वुता भं वुसभयं तोशी । भन इस्च्छत लाॊसछत पर ऩाई ॥ भोफश अनाथ की वुसध अफ रीजै । सान फुत्रद्ध त्रलद्या दो भोशी ॥ तस्ज ्र कऩट औय ितुयाई । वॊकट काफट बत्रक्त भोफश दीजै ॥ तुभ वभान नफशॊ कोई उऩकायी । ऩूजफशॊ त्रलत्रलध बाॊसत भन राई ॥ बूर िूक करय षभा शभायी । वफ त्रलसध ऩुयलशु आव शभायी ॥ औय शार भं कशं फुझाई । दळान दीजै दळा सनशायी ॥ जम जम जगत जनसन जगदम्फा । जो मश ऩाठ कयै भन राई ॥ त्रफन दळान व्माकर असधकायी । ु वफकी तुभ शी शो अलरम्फा ॥ ताको कोई कद्श न शोई । तुभफश अषत द्ख वशते बायी ॥ ु तुभ शी शो घट घट की लावी । भन इस्च्छत ऩालै पर वोई ॥ नफशॊ भोफशॊ सान फुत्रद्ध शै तन भं । त्रलनती मशी शभायी खावी ॥ िाफश िाफश जम द्ख सनलारयस्ण । ु वफ जानत शो अऩने भन भं ॥ जगजननी जम सवॊधु कभायी । ु त्रित्रलध ताऩ बल फॊधन शारयस्ण ॥ रुऩ ितुबज कयक धायण । ुा े दीनन की तुभ शो फशतकायी ॥ जो मश िारीवा ऩढै ऩढालै । कद्श भोय अफ कयशु सनलायण ॥ त्रलनलं सनत्म तुभफशॊ भशायानी । ध्मान रगाकय वुनै वुनालै ॥ कफश प्रकाय भं कयं फडाई । े कृ ऩा कयौ जग जनसन बलानी ॥ ताको कोई न योग वतालै । सान फुत्रद्ध भोफश नफशॊ असधकाई ॥ कफश त्रलसध स्तुसत कयं सतशायी । े ऩुि आफद धन वम्ऩसत ऩालै ॥ ॥ दोशा ॥ वुसध रीजै अऩयाध त्रफवायी ॥ ऩुिशीन अरु वॊऩसत शीना । िाफश िाफश दख शारयणी,शयो लेसग वफ ु कृ ऩा दृत्रद्श सितलो भभ ओयी । अॊध फसधय कोढी असत दीना । िाव। जगजननी त्रलनती वुन भोयी ॥ त्रलप्र फोराम क ऩाठ कयालै । ै जमसत जमसत जम रक्ष्भी , कयो सान फुत्रद्ध जम वुख की दाता । ळॊका फदर भं कबी न रालै ॥ ळिु का नाळ ॥ वॊकट शयो शभायी भाता ॥ ऩाठ कयालै फदन िारीवा । याभदाव धरय ध्मान सनत, त्रलनम षीयसवॊधु जफ त्रलष्णु भथामो । ता ऩय कृ ऩा कयं जो गौयीवा ॥ कयत कय जोय । िौदश यत्न सवॊधु भं ऩामो ॥ वुख वम्ऩसत फशुत वी ऩालै । भातु रक्ष्भी दाव ऩय, कयशु दमा की िौदश यत्न भं तुभ वुखदावी । कभी नशीॊ काशू की आलै ॥ कोय ॥ वेला फकमो प्रबु फसन दावी ॥ फायश भाव कयं जो ऩूजा । जफ जफ जडभ जशाॊ प्रबु रीडशा । तेफश वभ धडम औय नफशॊ दजा ॥ ू ***
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    82 अक्टू फय 2011 ॥श्री वूक्त॥ ॐ फशयण्म-लणां शरयणीॊ, वुलणा-यजत-स्त्रजाभ ्। िडद्राॊ फशयण्मभमीॊ रक्ष्भीॊ, जातलेदो भ आलश॥ ताॊ भ आलश जात-लेदो, रक्ष्भीभनऩ-गासभनीभ ्। मस्माॊ फशयण्मॊ त्रलडदे मॊ, गाभद्वॊ ऩुरूऴानशभ ्॥ अद्वऩूलां यथ-भध्माॊ, शस्स्त-नाद-प्रभोफदनीभ ्। सश्रमॊ दे लीभुऩह्लमे, श्रीभाा दे ली जुऴताभ ्॥ काॊवोऽस्स्भ ताॊ फशयण्म-प्राकायाभाद्राा ज्लरडतीॊ तृद्ऱाॊ तऩामडतीॊ। ऩद्मे स्स्थताॊ ऩद्म-लणां तासभशोऩह्लमे सश्रमभ ्॥ िडद्राॊ प्रबावाॊ मळवा ज्लरडतीॊ सश्रमॊ रोक दे ल-जुद्शाभुदायाभ ्। ताॊ ऩद्म-नेसभॊ ळयणभशॊ प्रऩद्ये अरक्ष्भीभे नश्मताॊ त्लाॊ लृणोसभ॥ े आफदत्म-लणे तऩवोऽसधजातो लनस्ऩसतस्तल लृषोऽष त्रफल्ल्। तस्म परासन तऩवा नुदडतु भामाडतयामाद्ळ फाह्या अरक्ष्भी्॥ उऩैतु भाॊ दै ल-वख्, कीसताद्ळ भस्णना वश। प्रादबूतोऽस्स्भ याद्सेऽस्स्भन ्, कीसतं लृत्रद्धॊ ददातु भे॥ ु ा षुत ्-त्रऩऩावाऽभरा ज्मेद्षा, अरक्ष्भीनााळमाम्मशभ ्। अबूसतभवभृत्रद्धॊ ि, वलाान ् सनणुद भे गृशात ्॥ ा गडध-द्रायाॊ दयाधऴां, सनत्म-ऩुद्शाॊ कयीत्रऴणीभ ्। ईद्वयीॊ वला-बूतानाॊ, तासभशोऩह्लमे सश्रमभ ्॥ ु भनव् काभभाकसतॊ, लाि् वत्मभळीभफश। ऩळूनाॊ रूऩभडनस्म, भसम श्री् श्रमताॊ मळ्॥ ू कदा भेन प्रजा-बूता, भसम वम्भ्रभ-कदा भ। सश्रमॊ लावम भे करे, भातयॊ ऩद्म-भासरनीभ ्॥ ु आऩ् वृजडतु स्स्नग्धासन, सिक्रीत लव भे गृशे। सनि-दे ली भातयॊ सश्रमॊ लावम भे करे॥ ु आद्रां ऩुष्करयणीॊ ऩुत्रद्शॊ, वुलणां शे भ-भासरनीभ ्। वूमां फशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ, जातलेदो भभालश॥ आद्रां म् करयणीॊ मत्रद्शॊ, त्रऩॊगराॊ ऩद्म-भासरनीभ ्। िडद्राॊ फशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ, जातलेदो भभालश॥ ताॊ भ आलश जात-लेदो रक्ष्भीभनऩ-गासभनीभ ्। मस्माॊ फशयण्मॊ प्रबूतॊ गालो दास्मोऽद्वान ् त्रलडदे मॊ ऩुरूऴानशभ ्॥ म् ळुसि् प्रमतो बूत्ला, जुशुमादाज्मभडलशभ ्। सश्रम् ऩॊि-दळिं ि, श्री-काभ् वततॊ जऩेत ्॥ धनरक्ष्भी स्तोि अद्श रक्ष्भी कलि नभो कल्माणदासमक । भशावम्ऩत्प्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ े भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा प्राद्ऱ भशाबोगप्रदे दे त्रल भशाकाभप्रऩूरयते । वुखभोषप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ कयने शे तु उऩमोगी सवद्ध ब्रह्मरूऩे वदानडदे वस्च्िदानडदरूत्रऩणी । धृतसवत्रद्धप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ शोता शं । स्जस्वे भाॊ क आफद े उद्यत्वूमप्रकाळाबे उद्यदाफदत्मभण्डरे । सळलतत्लप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ ा रक्ष्भी, धाडम रक्ष्भी, धैयीम रक्ष्भी, गज रक्ष्भी, वॊतान सळलरूऩे सळलानडदे कायणानडदत्रलग्रशे । त्रलद्ववॊशायरूऩे ि धनदामै नभोऽस्तुते॥ रक्ष्भी, त्रलजम रक्ष्भी, त्रलद्या ऩछितत्लस्लरूऩे ि ऩछिािायवदायते । वाधकाबीद्शदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ रक्ष्भी औय धन रक्ष्भी इन श्रीॊ ॐ॥ वबी रुऩो का अळीलााद प्राद्ऱ ॐ श्री रसरता भशात्रिऩुयवुडदयी ऩयाबट्टारयका । शोता शं । वभेताम श्री िडद्रभौऱीद्वय ऩयब्रह्मणे नभ्॥जम जम ळङ्कय शय शय ळङ्कय॥ भूल्म- Rs: 1050
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    83 अक्टू फय 2011 अद्शरक्ष्भी स्तोि दे लकृ त रक्ष्भी स्तोिभ ् वुभनवलॊफदत वुॊदरय भाधत्रल िॊद्र वशोदरय शे भभमे । षभस्ल बगलॊत्मल षभाळीरे ऩयात्ऩये । भुसनगण लॊफदत भोषप्रदासमसन भॊजुऱबात्रऴस्ण लेदनुते ॥ ळुद्धवत्त्लस्लरूऩे ि कोऩाफदऩरयलस्जाते॥ ऩॊकजलासवसन दे लवुऩूस्जत वदगुणलत्रऴास्ण ळाॊसतमुते । उऩभे वलावाध्लीनाॊ दे लीनाॊ दे लऩूस्जते। जम जम शे भधुवूदन कासभसन आफदरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥1॥ त्लमा त्रलना जगत्वलं भृततुल्मॊ ि सनष्परभ ्॥ असमकसर कल्भऴनासळसन कासभसन लैफदकरूत्रऩस्ण लेदभमे । वलावॊऩत्स्लरूऩा त्लॊ वलेऴाॊ वलारूत्रऩणी। षीयवभुदबल भॊगररूत्रऩस्ण भॊिसनलासवसन भॊिनुते ॥ यावेद्वमासध दे ली त्लॊ त्लत्करा् वलामोत्रऴत्॥ भॊगरदासमसन अॊफुजलासवसन दे लगणासश्रत ऩादमुते । करावे ऩालाती त्लॊ ि षीयोदे सवडधुकडमका। ै जम जम शे भधुवूदन कासभसन धाडमरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥2॥ स्लगे ि स्लगारक्ष्भीस्त्लॊ भत्मारक्ष्भीद्ळ बूतरे॥ जमलय लस्णासन लैष्णत्रलबागात्रल भॊिस्लरूत्रऩस्ण भॊिभमे । लैकठे ि भशारक्ष्भीदे लदे ली वयस्लती। ुॊ वुयगण ऩूस्जत ळीघ्र परप्रद सानत्रलकासवसन ळास्त्रनुते ॥ गॊगा ि तुरवी त्लॊ ि वात्रलिी ब्रह्मारोकत्॥ बलबमशारयस्ण ऩाऩत्रलभोिसन वाधुजनासश्रत ऩादमुते । कृ ष्णप्राणासधदे ली त्लॊ गोरोक यासधका स्लमभ ्। े जम जम शे भधुवूदन कासभसन धैमरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥3॥ ा यावे यावेद्वयी त्लॊ ि लृॊदालन लने- लने॥ जम जम दगसतनासळसन कासभसन वलापरप्रद ळास्त्रभमे । ु ा कृ ष्णा त्रप्रमा त्लॊ बाॊडीये िॊद्रा िॊदनकानने। यथगज तुयग ऩदाफदवभानुत ऩरयजनभॊफडत रोकनुते ॥ त्रलयजा िॊऩकलने ळतळृॊगे ि वुॊदयी॥ शरय-शय ब्रह्म वुऩूस्जत वेत्रलत ताऩसनलारयस्ण ऩादमुते । ऩद्मालती ऩद्मलने भारती भारतीलने। जम जम शे भधुवूदन कासभसन श्री गजरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥4॥ कददॊ ती कदलने वुळीरा कतकीलने॥ ुॊ ुॊ े असम खगलाफशसन भोफशसन िफक्रस्ण याग त्रललसधासन सानभमे । कदॊ फभारा त्लॊ दे ली कदॊ फकाननेऽत्रऩ ि। गुणगणलारयसध रोकफशतैत्रऴस्ण वद्ऱस्लयलय गाननुते ॥ याजरक्ष्भी याजगेशे गृशरक्ष्भीगृशे गृशे॥ वकर वुयावुय दे ल भुनीद्वय भानललॊफदत ऩादमुते । इत्मुक्त्ला दे लता् वलाा भुनमो भनलस्तथा। जम जम शे भधुवूदन कासभसन वॊतानरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥5॥ रूरूदनम्रलदना् ळुष्ककठोद्ष तारुका्॥ ु ा ॊ जम कभरावसन वदगसतदासमसन सान त्रलकासवसन गानभमे । इसत रक्ष्भीस्तलॊ ऩुण्मॊ वलादेल् कृ तॊ ळुबभ ्। ै अनुफदनभसिात ककभधूवय बूत्रऴतलासवत लाद्यनुते ॥ ु ुॊ म् ऩठे त्प्रातरूत्थाम व लै वलै रबेद् ध्रुलभ ्॥ कनक धया स्तुसत लैबल लॊफदत ळॊकय दे सळक भाडम ऩते। अबामो रबते बामां त्रलनीताॊ वुवताॊ वतीभ ्। ु जम जम शे भधुवूदन कासभसन त्रलजमरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥6॥ वुळीराॊ वुॊदयीॊ यम्माभसतवुत्रप्रमलाफदनीभ ्॥ प्रणत वुयेद्वरय बायसत बागात्रल ळोकत्रलनासळसन यत्नभमे । ऩुिऩौिलतीॊ ळुद्धाॊ करजाॊ कोभराॊ लयाभ ्। ु भस्णभम बूत्रऴत कणात्रलबूऴण ळाॊसतवभालृत शास्मभुखे ॥ अऩुिो रबते ऩुिॊ लैष्णलॊ सियजीत्रलनभ ्॥ नलसनसध दासमसन कसरभरशारयस्ण काम्म परप्रद शस्तमुते । ऩयभैद्वमामुक्त ि त्रलद्यालॊतॊ मळस्स्लनभ ्। ॊ जम जम शे भधुवूदन कासभसन त्रलद्यारस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥7॥ भ्रद्शयाज्मो रबेद्राज्मॊ भ्रद्शश्रीराबते सश्रमभ ्॥ सधसभ सधसभ सधभ ् सधसभ सधॊसधसभ सधॊसधसभ दॊ दसब ्नाद वुऩूणभमे । ु ु ा शतफॊधरबेद्बॊधुॊ धनभ्रद्शो धनॊ रबेत ्। ु ा घुभघुभ घुॊघुभ घुॊघुभ घुॊघुभ ळॊखसननाद वुलाद्यनुते ॥ कीसताशीनो रबेत्कीसतं प्रसतद्षाॊ ि रबेद् ध्रुलभ ्॥ लेदऩुयाणेसत शाव वुऩूस्जत लैफदकभागा प्रदळामुते । वलाभॊगरदॊ स्तोिॊ ळोकवॊताऩनाळनभ ्। जम जम शे भधुवूदन कासभसन श्री धनरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥8॥ शऴाानॊदकयॊ ळद्वद्धभा भोषवुरृत्प्रदभ ्॥ ॥ इसत श्रीदे लकृ त रक्ष्भीस्तोिॊ वॊऩूणभ ् ॥ ा
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    84 अक्टू फय 2011 भासवक यासळ पर  सिॊतन जोळी भेऴ: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: व्मलवासमक मािा राबदामक सवद्ध शोगी। आरस्म क कायण आऩक भशत्ल ऩूणा कामा े े प्राबात्रलत शोव अकते शं वालधानी लते। एक वे असधक आम क स्त्रोत फन वकते शं । े आऩकी भानसवक सिडताओॊ भं फढोतयी शोगी। आऩक स्लबाल भं दमा, भृदता ल त्रलनम्रता की े ु कभी शो वकती शं । इद्श सभिं क वशमोग वे नमे सभि फन वकते शं । जीलन वाथी वे लाद- े त्रललाद कयने वे फिे। 16 वे 31 अक्टू फय 2011 : कछ रुकालटो क फाद भं व्मलवाम भं धन राब प्राद्ऱ शोगा। ु े भशत्ल क कामो क सरमे आऩको कजा रेना ऩड वकता शं जो राब प्रद सवद्ध शो वकता े े शं । प्रसतमोसगता क कामो भं फुत्रद्धभानी ल ितुयता वे ळीघ्र राब औय वपरता प्राद्ऱ कयं गे। े ऩारयलारयक भतबेद शो वकते शं औय आऩक स्लास््म भं सगयालट शो वकती शं । सभि एलॊ इद्श लगा क रोगो ऩय आऩका े े व्मम फढे गा। लृऴब: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : नौकयी-व्मलवाम भं ऩरयलतान कयने वे फिने का प्रमाव कयं । आऩकी इच्छाओॊ के त्रलऩयीत फकमे गमे कामो वे राब प्रासद्ऱ क मोग फन यशे शं । स्लास््म फक द्रद्शी वे वभम े उत्तभ यश वकता शं । सभिं क वशमोग वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं । भशत्लऩूणा कामो को े गोऩसनम यखने का प्रमाव कयं । बूसभ-बलन वॊफॊसधत क्रम-त्रलक्रम वे राब प्राद्ऱ शोगा। 15 वे 31 अक्टू फय 2011 : आसथाक स्स्थती भं उताय-िढाल शोने के मोग फन यशं शं । अऩने वबी कामो को ऩूयी भशे नत एलॊ ईभानदायी वे ऩूया कयने वे राब प्राद्ऱ शोगा। आऩका भन प्रवडन यशे गा औय आऩकी इच्छा यशे गी फक आऩ ज्मादा वभम अऩने ऩरयलाय मा इद्श सभि क वाथ भं त्रफताएॊ। दाॊऩत्म जीलन भं गरतपसभमं वे फिना े िाफशमे। सभि एलॊ सनकट वॊऩफकम वे भतबेद एलॊ धोखा सभर वकता शं । ा सभथुन: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: ऩूणा ऩरयश्रभ एलॊ कड़ी भेशनत वे आऩक भशत्लऩूणा े कामा एलॊ मोजनाएॊ ऩूणा शो वकती शं । वयकाय वे वॊफॊसधत कामा भं राब प्राद्ऱ शो वकता शं । नौकयी-व्मलवाम भं उनासत शोगी। ऩरयलाय भं खुसळमो का भाशोर यशे गा औय ऩरयलाय भं फकवी अत्रललाफशत क त्रललाश का मोग फनने रगंगे शं । स्लास््म वुख भं लृत्रद्ध शोगी फपय बी े खाने- ऩीने का त्रलळेऴ ध्मान यखना फशतकायी यशे गा। 16 वे 31 अक्टू फय 2011: एक वे असधक स्त्रोि वे धन राब प्रासद्ऱ क सरमे आऩको नमा े व्मलवाम/नौकयी प्राद्ऱ शो वकती शं । भशत्ल क कामो क सरमे आऩको कजा रेना ऩड े े वकता शं जो राब प्रद सवद्ध शो वकता शं । अत्मासधक ऩरयश्रभ औय भेशनत वे आऩ वपरता प्राद्ऱ कय वकते शं । कामा फक व्मस्तता, अत्मासधक बाग-दौड क कायण आऩको थका वकती शं । े
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    85 अक्टू फय 2011 कक: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : आऩक आम क स्त्रोत भं अस्स्थयता यश वकती शं । भशत्ल ऩूणाा कामो को स्स्थगीत ा े े कयना मा फकवी औय को दे ना नुक्ळान दे श शो वकता शं । गुद्ऱ त्रलयोसध-ळिुओॊ क कायण े धन शासन शो वकती शै । ऩारयलायीकी एलॊ सभिो वे रयश्तो भं वूझ-फूझ वे लाणी का प्रमोग कये अडमथा आऩक फने फनामे रयश्ते त्रफगड वकते शं । नमे रोगो की सभिता वे राब े प्राद्ऱ कय वकते शं । 16 वे 31 अक्टू फय 2011 : आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ शोने क मोग शं , स्जस्वे आसथाक स्स्थती े भं वुधाय शोगा। नमा व्मलवाम मा नौकयी प्राद्ऱ शो वकती शं मा आऩक कामा षेि भं े नमे फदराल शो वकते शं । कछ रुकालटो क फाद भं व्मलवाम भं धन राब प्राद्ऱ शोगा। ु े ळिु ऩष ऩय आऩका दफदफा यशे गा। आऩकी भानसवक सिडताओॊ भं फढोतयी शोगी। आऩक स्लबाल भं दमा, भृदता ल त्रलनम्रता े ु की कभी शो वकती शं । सवॊश: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: व्मलवाम औय नौकयी भं राब औय ऩदोडनसत क अलवय प्राद्ऱ शंगे। अनालश्मक े भानसवक सिडताओॊ भं फढोतयी शोगी। स्लबाल भं सिड़सिड़ा ऩन आवकता शं । अऩने क्रोध ऩय सनमॊिण यखे। अशॊ बाल क कायण आऩक इद्श सभि-ऩारयलायीक वदस्म आऩवे दयी े े ू फना वकते शं । ळिु ऩष वे वालधान यशं आऩ ऩय झूठे आयोऩ रग वकते शं स्जव कायण आऩका ऩद एलॊ प्रसतद्षा खॊफडत शो वकती शं । 16 वे 31 अक्टू फय 2011: भशत्ल क कामो भं त्रलध्न उत्ऩडन शो वकते शै । त्रलध्न- े फाधाओॊ वे घफयाएॊ नशीॊ। इव अलसध भं आऩको भानसवक कद्श शै तो ऩमााद्ऱ आयाभ कय रेना िाफशमे। अनािश्मक खिा शोने क कायण ऩये ळानी शो वकती शं । नौकयी-व्मलवाम े भं उडनसत शो वकती शं । लाशन वालधानी वे िरामे मा लाशन वे वालधान यशे आकस्स्भक दघटना शो वकती शं । अऩने ु ा स्लास््म का ध्मान यस्खए। कडमा: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: इव अलसध भं आऩको अनुकूर ऩरयणाभ प्राद्ऱ शोगं। बूसभ- बलन-लाशन क क्रम-त्रलक्रम वे भध्मभ राब प्राद्ऱ शो वकता शं । आऩकी वाभास्जक े प्रसतद्षा औय व्मत्रक्तत्ल क कायण रोग आऩकी प्रळॊवा कय वकते शं । े आऩक त्रलयोसध एलॊ े ळिु ऩष इव अलसधभं दफे यशे गं। आऩको नौकयी एलॊ व्माऩाय क षेि भं वपरता प्राद्ऱ े शोगी। जीलन वाथी वे आऩको प्रवडना सभरेगी। 16 वे 31 अक्टू फय 2011: भशत्लऩूणा मोजनाओॊ को ळुरू कयने औय सनणाम रेने क सरमे े वभम उत्तभ वात्रफत शो वकता शं । आऩकी मोजना एलॊ उद्दे श्म वपर शोते दे ख ऩामेगं। धन वे वॊफॊसधत रेन-दे न शे तु वभम राबप्रद यशे गा। सभि-ऩारयलायीक वदस्मो का वशमोग प्राद्ऱ शोगा। स्लास््म वुख भं लृत्रद्ध शोगी फपय बी खाने- ऩीने का त्रलळेऴ ध्मान यखना फशतकायी यशे गा। ऩूॊस्ज सनलेळ कय वकते शं ।
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    86 अक्टू फय 2011 तुरा: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: आकस्स्भक धन राब प्राद्ऱ शोव अकता शं । इव अलसध क दौयान अऩने स्लबाल भं े सिड़सिड़ा ऩन आवकता शं । अऩने क्रोध ऩय सनमॊिण यखे। आलश्मकता वे असधक बोजन आऩक स्लास््म को कभजोय कय वकता शं । ऩरयलाय क वदस्मं क त्रफि त्रलिायं े े े भं भतबेद शो वकते शं । जीलन वाथी वे वॊफडध कद्शकायी शो वकते शं वालधान यशे । 16 वे 31 अक्टू फय 2011: ऩूला कार भं फकमे गमे कामा एलॊ रुक शुले कामा वे े आकस्स्भक धन राब प्राद्ऱ शोगा। छोटी-छोटी वभस्माए आने क उऩयाॊत बी काभमाफी े प्राद्ऱ शोगी। आऩ अऩने कामा का अच्छा प्रदळान कयने भं वभथा शंगे। आऩकी भानसवक सिडताओॊ भं फढोतयी शोगी। आऩक स्लबाल भं दमा, भृदता ल त्रलनम्रता की कभी शो वकती े ु शं । गरत सनणामो क कायण आसथाक ऩष कभजोय शो वकता शं । े लृस्द्ळक: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: इव भाश आऩक अॊदय यिनात्भक कामा वपर शो े वकते शं । नमा व्मलवाम मा नौकयी प्राद्ऱ शो वकती शं मा आऩक कामा षेि भं नमे े फदराल शो वकते शं । बूसभ- बलन-लाशन क क्रम-त्रलक्रम वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं । े आऩकी भानसवक अस्स्थताय भशत्लऩूणा सनणाम रेने भं त्रलरॊफ कय वकती शं । अनािश्मक खिा कयने वे फिे अडमथा फडा नुकवान वॊबल शं । 16 वे 31 अक्टू फय 2011: कामा भं आनेलारी रुकालटो भं बी कभी शोगी औय दयस्थ स्थानं ु वे धन राब प्राद्ऱ शो वकता शै । कछ रुकालटो क फाद भं व्मलवाम भं धन राब प्राद्ऱ ु े शोगा। फकमे गमे ऩूॊस्ज सनलेळ द्राया आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ क मोग फन यशे शै । आलश्मकता वे असधक वॊघऴा कयना ऩड े वकता शै । भानसवक सिडताओॊ भं कभी आमेगी। ऋण रेने वे फिे औय ऩुयाने ऋणं का बुगतान कयने का प्रमाव कये । धनु: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : इव अलसध क दौयान फकवी नमी ऩरयमोजना को रेकय भशत्लऩूणा सनणाम रेना आऩकी े ऩये ळानी फढा वकता शं । थोडे वभम क सरमे नौकयी व्मलवाम भं ऩरयलतान क सनणामो े े को स्स्थगीत कयने का प्रमाव कये । आऩकी आॊख, ऩेट औय ऩैय भं गॊबीय िोट रग वकती शं वालधानी फते। ऋण क रेन-दे न वे वॊफॊसधत भानसवक सिॊता शो वकती शं । े 16 वे 31 अक्टू फय 2011 : कामो भं वालधानी फते आऩकी राऩयलाशी आऩको रॊफे वभम का नुक्ळान दे वकती शं । आऩको कोई कामा अऩनी इच्छाओॊ क त्रलरुद्ध कयना ऩड े वकता शं । ळिु एलॊ त्रलयोसध ऩष आऩकी ऩये ळासनमाॊ फढा वकते शै । शताळा औय सनयाळा लारे त्रलिायो को फकनाया कय वभम का राब उठाते शुले आगे फढने का प्रमाव कयं । दाॊम्ऩत्म जीलन क वुख भं कभी यश वकती शं । े
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    87 अक्टू फय 2011 भकय: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : इव अलसध भं वालधानी वे फकमे गमे कामो भं आऩको ळुब ऩरयणाभ प्राद्ऱ शंगे स्जस्वे आऩको शय तयप वे राब शी राब सभरेगा। आऩक जोळ एलॊ उत्वाश भं एका- े एक लृत्रद्ध नजय आवकती शं । सभि एलॊ वॊफॊसधओॊ वे फशुभूल्म लस्तु उऩशाय भं प्राद्ऱ कय वकते शं । व्मलवामीक मािाएॊ राबप्रद शो वकती शं उसिर राब प्राद्ऱ शोगे औय ऩूयाने बूगतान प्राद्ऱ शो वकते शं । 16 वे 31 अक्टू फय 2011: आऩक भशत्लऩूणा कामा एलॊ मोजनाएॊ ऩूणा शोने वे धन राब े फक प्रफर वॊबालना शं । स्लास््म फक द्रद्शी वे वभम वाभाडम वे फेशतय वात्रफत शो वकता शं । सभि एलॊ रयश्ते दायं क वाथ अच्छा वभम व्मतीत कय वकते शं । भाता क स्लास््म े े वे वॊफॊसधत सिॊता शो वकती शं । जीलन वाथी का वशमोग प्राद्ऱ शोगा औय आऩवी प्माय फढे गा। कब: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : ऩूला क अच्छे औय फुये कभा का अलरोकन कय उवभे ॊु े वुधाय कयने का प्रमाव कयं । वाभास्जक प्रसतद्षा औय भान-वम्भान भं लृत्रद्ध शो वकती शं । नमे रोगो वे सभिता शो वकती शं । आऩक कामा षेि े की रुकालटं थोफड फशुत दय शंगी। ू कामा फक व्मस्तता, अत्मासधक बाग-दौड क कायण आऩको थकालट शो वकती शं । े अनािश्मक खिा कयने वे फिे अडमथा फडा नुकवान वॊबल शं । 16 वे 31 अक्टू फय 2011 : इव दौयान आऩको असधकाॊळत् राबदामक औय वकायात्भक ऩरयणाभ प्राद्ऱ शंगे। मािाएॊ क दौयान कद्श प्रद शो वकती शं । बूसभ- बलन-लाशन क क्रम- े े त्रलक्रम वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं । ऩरयलाय एलॊ सभिलगा का ऩूणा वशमोग प्राद्ऱ शोगा औय वभम आनॊद ऩूलक त्रफता वकते ा शं । आऩक वाभास्जक कामो क सरमे रोग आऩकी तायीप कयं गे। प्रेभ वम्फडधं भं वपर यशं गे। े े भीन: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : नई ऩरयमोजना वे वॊफॊसध सनणाम रेना राबप्रद शो वकता शं । ळिु एलॊ त्रलयोसध ऩष वे त्रललाद वॊबल शं । आऩक द्राया फकमे गमे धासभाक औय आध्मास्त्भक कामा सनस्द्ळत फश उज्लर बत्रलष्म का वॊकत शै । े े वाॊस्कारयक वुखं फक प्रासद्ऱ शोगी। अऩने फुत्रद्ध औय त्रललेक वे अऩने दोऴो को दय कयने का ू प्रमाव कयं । जीलन वाथी वे वशमोग प्राद्ऱ शोगा। 16 वे 31 अक्टू फय 2011 : व्माऩारयक वाझेदाय औय सभिो वे रेन-दे न भं वालधानी फते धन शानी शो वकती शं । ऩरयलाय औय रयश्तेदायं वे वॊफॊधो भं वुधाय शोगा। त्रलयोसध ऩष को ऩयास्त कय धन राब प्राद्ऱ कय वकते शं ऩय अनालश्मक करश भं ऩडने वे फिना असधक राबप्रद शो वकता शं । अऩनी गरसतओॊ का अलरोकन कय बत्रलष्म फक मोजनाओॊ भं उवे दय कयने का प्रमाव कयं । ू
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    88 अक्टू फय 2011 यासळ यत्न भेऴ यासळ: लृऴ यासळ: सभथुन यासळ: कक यासळ: ा सवॊश यासळ: कडमा यासळ: भूॊगा शीया ऩडना भोती भाणेक ऩडना Red Coral Diamond Green Emerald Naturel Pearl Ruby Green Emerald (Special) (Special) (Old Berma) (Special) (Special) (Special) (Special) 5.25" Rs. 1050 10 cent Rs. 4100 5.25" Rs. 9100 5.25" Rs. 910 2.25" Rs. 12500 5.25" Rs. 9100 6.25" Rs. 1250 20 cent Rs. 8200 6.25" Rs. 12500 6.25" Rs. 1250 3.25" Rs. 15500 6.25" Rs. 12500 7.25" Rs. 1450 30 cent Rs. 12500 7.25" Rs. 14500 7.25" Rs. 1450 4.25" Rs. 28000 7.25" Rs. 14500 8.25" Rs. 1800 40 cent Rs. 18500 8.25" Rs. 19000 8.25" Rs. 1900 5.25" Rs. 46000 8.25" Rs. 19000 9.25" Rs. 2100 50 cent Rs. 23500 9.25" Rs. 23000 9.25" Rs. 2300 6.25" Rs. 82000 9.25" Rs. 23000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs. 28000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs. 28000 All Diamond are Full ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati White Colour. तुरा यासळ: लृस्द्ळक यासळ: धनु यासळ: भकय यासळ: कब यासळ: ुॊ भीन यासळ: शीया भूॊगा ऩुखयाज नीरभ नीरभ ऩुखयाज Diamond Red Coral Y.Sapphire B.Sapphire B.Sapphire Y.Sapphire (Special) (Special) (Special) (Special) (Special) (Special) 10 cent Rs. 4100 5.25" Rs. 1050 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 5.25" Rs. 30000 20 cent Rs. 8200 6.25" Rs. 1250 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 6.25" Rs. 37000 30 cent Rs. 12500 7.25" Rs. 1450 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 7.25" Rs. 55000 40 cent Rs. 18500 8.25" Rs. 1800 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 8.25" Rs. 73000 50 cent Rs. 23500 9.25" Rs. 2100 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 9.25" Rs. 91000 10.25" Rs. 2800 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 10.25" Rs.108000 All Diamond are Full ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati ** All Weight In Rati White Colour. * उऩमोक्त लजन औय भूल्म वे असधक औय कभ लजन औय भूल्म क यत्न एलॊ उऩयत्न बी शभाये मशा व्माऩायी भूल्म ऩय े उप्रब्ध शं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,
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    89 अक्टू फय 2011 अक्टू फय 2011 भासवक ऩॊिाॊग िॊद्र फद लाय भाश ऩष सतसथ वभासद्ऱ नषि वभासद्ऱ मोग वभासद्ऱ कयण वभासद्ऱ वभासद्ऱ यासळ 1 ितुथॉ- ळसन आस्द्वन ळुक्र 24:01:34 अनुयाधा 28:10:57 प्रीसत 21:15:38 फल 13:10:57 लृस्द्ळक - ऩॊिभी 2 यत्रल आस्द्वन ळुक्र ऴद्षी 22:10:32 जेद्षा 27:12:25 आमुष्भान 18:33:59 कौरल 11:01:10 लृस्द्ळक 27:13:00 3 वोभ आस्द्वन ळुक्र वद्ऱभी 21:03:34 भूर 26:57:00 वौबाग्म 16:25:08 गय 09:31:42 धनु - 4 भॊगर आस्द्वन ळुक्र अद्शभी 20:37:51 ऩूलााऴाढ़ 27:22:51 ळोबन 14:51:55 त्रलत्रद्श 08:45:21 धनु - 5 फुध आस्द्वन ळुक्र नलभी 20:53:23 उत्तयाऴाढ़ 28:26:12 असतगॊड 13:50:35 फारल 08:41:12 धनु 09:35:00 6 गुरु आस्द्वन ळुक्र दळभी 21:43:37 श्रलण 30:01:26 वुकभाा 13:18:19 तैसतर 09:14:34 भकय - 7 ळुक्र आस्द्वन ळुक्र एकादळी 23:05:44 धसनद्षा 32:05:44 धृसत 13:09:29 लस्णज 10:21:40 भकय 19:01:00 8 ळसन आस्द्वन ळुक्र द्रादळी 24:50:21 धसनद्षा 08:05:21 ळूर 13:21:17 फल 11:55:02 कब ुॊ - 9 यत्रल आस्द्वन ळुक्र िमोदळी 26:52:47 ळतसबऴा 10:29:20 गॊड 13:47:09 कौरल 13:49:58 कब ुॊ - 10 वोभ आस्द्वन ळुक्र ितुदाळी 29:10:13 ऩूलााबाद्रऩद 13:09:17 लृत्रद्ध 14:27:05 गय 15:59:54 कब ुॊ 06:28:00 11 भॊगर आस्द्वन ळुक्र ऩूस्णाभा 31:36:06 उत्तयाबाद्रऩद 16:00:28 ध्रुल 15:14:32 त्रलत्रद्श 18:22:02 भीन - 12 ऩूस्णाभा/ फुध आस्द्वन ळुक्र 07:36:40 ये लसत 18:59:10 व्माघात 16:09:29 फल 07:36:40 भीन 18:59:00 प्रसतऩदा 13 गुरु कासताक कृ ष्ण प्रसतऩदा 10:08:11 अस्द्वनी 22:00:41 शऴाण 17:04:26 कौरल 10:08:11 भेऴ - 14 ळुक्र कासताक कृ ष्ण फद्रतीमा 12:39:43 बयणी 24:59:24 लज्र 18:00:20 गय 12:39:43 भेऴ - 15 ळसन कासताक कृ ष्ण तृतीमा 15:05:37 कृ सतका 27:49:41 सवत्रद्ध 18:50:37 त्रलत्रद्श 15:05:37 भेऴ 07:43:00 16 यत्रल कासताक कृ ष्ण ितुथॉ 17:17:28 योफशस्ण 30:22:09 व्मसतऩात 19:28:43 फारल 17:17:28 लृऴ - 17 वोभ कासताक कृ ष्ण ऩॊिभी 19:06:49 भृगसळया 32:29:19 लरयमान 19:49:01 तैसतर 19:06:49 लृऴ 19:30:00 18 भॊगर कासताक कृ ष्ण ऴद्षी 20:23:22 भृगसळया 08:29:00 ऩरयग्रश 19:44:00 गय 07:49:37 सभथुन -
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    90 अक्टू फय 2011 19 फुध कासताक कृ ष्ण वद्ऱभी 20:59:37 आद्रा 09:59:37 सळल 19:08:03 त्रलत्रद्श 08:47:26 सभथुन 28:39:00 20 गुरु कासताक कृ ष्ण अद्शभी 20:49:56 ऩुनलावु 10:47:07 सवत्रद्ध 17:57:26 फारल 09:01:11 कका - 21 ळुक्र कासताक कृ ष्ण नलभी 19:50:34 ऩुष्म 10:47:45 वाध्म 16:06:30 तैसतर 08:27:08 कका - 22 ळसन कासताक कृ ष्ण दळभी 18:05:16 अद्ऴेऴा 10:01:31 ळुब 13:38:05 लस्णज 07:03:24 कका 10:01:00 23 यत्रल कासताक कृ ष्ण एकादळी 15:35:55 भघा 08:31:14 ळुक्र 10:34:59 फारल 15:35:55 सवॊश - 24 वोभ कासताक कृ ष्ण द्रादळी 12:32:50 उत्तयापाल्गुनी 27:45:01 ब्रह्म 07:00:57 तैसतर 12:32:50 सवॊश 11:45:00 25 िमोदळी- भॊगर कासताक कृ ष्ण 09:02:33 शस्त 24:48:30 लैधसत ृ 22:49:26 लस्णज 09:02:33 कडमा - ितुदाळी 26 फुध कासताक कृ ष्ण अभालस्मा 25:25:44 सििा 21:43:32 त्रलऴकब ुॊ 18:28:32 ितुष्ऩाद 15:21:02 कडमा 11:16:00 27 गुरु कासताक ळुक्र प्रसतऩदा 21:41:24 स्लाती 18:44:13 प्रीसत 14:10:28 फकस्तुघ्न 11:32:58 तुरा - 28 ळुक्र कासताक ळुक्र फद्रतीमा 18:13:58 त्रलळाखा 15:59:54 आमुष्भान 10:02:43 फारल 07:55:13 तुरा 10:39:00 29 ळसन कासताक ळुक्र तृतीमा 15:12:47 अनुयाधा 13:41:51 ळोबन 26:51:13 गय 15:12:47 लृस्द्ळक - 30 यत्रल कासताक ळुक्र ितुथॉ 12:48:10 जेद्षा 11:57:33 असतगॊड 23:59:25 त्रलत्रद्श 12:48:10 लृस्द्ळक 11:58:00 31 वोभ कासताक ळुक्र ऩॊिभी 11:03:53 भूर 10:54:30 वुकभाा 21:43:15 फारल 11:03:53 धनु -  क्मा आऩको उच्ि असधकायी वे ऩये ळानी शं ?  क्मा आऩकी अऩने वशकभािायी वे अनफन शोती शं ?  क्मा आऩक असधनस्थ कभािायी आऩकी फात नशी भानते? े मफद आऩको अऩने उच्ि असधकायी, वशकभािायी, असधनस्थ कभािायी वे ऩये ळानी शं । आऩक अनूकर कामा नशीॊ कयते मा आऩको े ु कयने नशीॊ दे त? लश आऩकी फात नशीॊ भानतं? त्रफना लजश आऩको ऩये ळान कयते शं ? अन आलश्मक कामा आऩवे कयलाते शं । आऩका े प्रभोळन रुकलादे ते शं । उसित कामा कयने ऩय बी आऩक कामा भं नुक्ळ सनकारते शं ? मफद आऩ इवी तयश फक फकवी वभस्मा वे ग्रस्त े शं तो आऩ उन असधकायी, वशकभॉ, असधनस्थकभॉ मा अडम फकवी व्मत्रक्त त्रलळेऴ क नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्राया ळास्त्रोक्त त्रलसध- े त्रलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त लळीकयण कलि एलॊ एव.एन.फडब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय-ओफपव भं स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा, त्रलसध-त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मफद आऩ भॊि सवद्ध लळीकयण कलि एलॊ एव.एन.फडब्फी फनलाना िाशते शं , तो गुरुत्ल कामाारम भं वॊऩक कयं । ा Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
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    91 अक्टू फय 2011 अक्टू फय-2011 भासवक व्रत-ऩला-त्मौशाय फद लाय भाश ऩष सतसथ वभासद्ऱ प्रभुख व्रत-त्मोशाय ऩॊिभ नलयाि, उऩाॊग रसरता ऩॊिभी व्रत, 1 ळसन आस्द्वन ळुक्र ितुथॉ-ऩॊिभी 24:01:34 छठा नलयाि, स्कडद (कभाय) ऴद्षी व्रत, , गजगौयी व्रत, ु 2 यत्रल आस्द्वन ळुक्र ऴद्षी 22:10:32 तऩऴद्षी (उ), भशात्भा गाॊधी जमॊती, रारफशादय ु ळास्त्री जमॊती, अफशॊ वा फदलव, वद्ऱभ नलयाि, भाॉ वयस्लती आह्लान, ळायदीम दगााऩजा ु ू 3 वोभ आस्द्वन ळुक्र वद्ऱभी 21:03:34 (फॊ), ऩत्रिका-प्रलेळ, भशावद्ऱभी व्रत, भशासनळा ऩूजा, अद्शभ नलयाि, दगाा ु अद्शभी व्रत, भशाद्शभी व्रत, 4 भॊगर आस्द्वन ळुक्र अद्शभी 20:37:51 अडनऩूणााद्शभी व्रत, बद्रकारी अद्शभी, वयस्लती ऩूजन, वूमसवद्धाडतानुवाय भशासनळा ऩूजन, ा नलभ नलयाि, दगाा भशानलभी व्रत, दगाा नलभी, ु ु 5 फुध आस्द्वन ळुक्र नलभी 20:53:23 वयस्लती त्रलवजान, त्रिळूरनी ऩूजन (सभसथराॊिर), एकलीया ऩूजा, नलयाि व्रत ऩूण, ा त्रलजमा दळभी, दळशया, ळभी एलॊ अऩास्जता-ऩूजा, 6 गुरु आस्द्वन ळुक्र दळभी 21:43:37 वीभोल्रॊघन, ळस्त्र ऩूजन, फौद्धालताय दळभी, वाईंफाफा भशावभासध फदलव, भाधलािामा जमॊती, 7 ळुक्र आस्द्वन ळुक्र एकादळी 23:05:44 ऩाऩाॊकळा एकादळी व्रत, बयत सभराऩ, ु ऩद्मनाब द्रादळी, श्माभफाफा द्रादळी, ऩषलसधानी 8 ळसन आस्द्वन ळुक्र द्रादळी 24:50:21 भशाद्रादळी व्रत, भुळी प्रेभिॊद स्भृसत फदलव, व्मसतऩात ॊ भशाऩात प्रात: 10:16 वे फदन 3:19 फजे तक, 9 यत्रल आस्द्वन ळुक्र िमोदळी 26:52:47 प्रदोऴ व्रत, 10 वोभ आस्द्वन ळुक्र ितुदाळी 29:10:13 लायाश ितुदाळी, ियखा फदलव ळयद ऩूस्णाभा, त्रलद्यावागय जडभ., भशायाव ऩूस्णाभा, कोजासगयी रक्ष्भी ऩूजा, रक्ष्भी एलॊ इडद्र ऩूजन, भशत्रऴा 11 भॊगर आस्द्वन ळुक्र ऩूस्णाभा 31:36:06 लाल्भीफक जमॊती, अग्र भशाकम्ब ु (अग्रोशा), श्रीवत्मनायामण व्रत-कथा, जमप्रकाळ नायामण जमॊती, कभाय ऩूस्णाभा (उड़ीवा), नलाडन ऩूस्णाभा ु 12 फुध आस्द्वन ळुक्र ऩूस्णाभा/ 07:36:40 स्नान-दान शे तु उत्तभ आस्द्वनीऩूस्णाभा, शे भडत ऋतु
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    92 अक्टू फय 2011 प्रसतऩदा प्रायॊ ब, कासताक स्नान, आकाळ दीऩ-दान ळुरू, ब्रज- ऩरयक्रभा प्रायॊ ब, ऩत्रलि कासताक भाव प्रायॊ ब, अळूडम ळमन व्रत, श्रीशरय 13 गुरु कासताक कृ ष्ण प्रसतऩदा 10:08:11 वॊऩणा कासताक भाव ऩूजन, ू कासताक भाव भं दार त्मागं, कृ त्रऴ-बूसभ ऩूजन, 14 ळुक्र कासताक कृ ष्ण फद्रतीमा 12:39:43 - वॊकद्शी गणेळ ितुथॉ व्रत, कयलािौथ, कृ ष्णत्रऩॊगाष 15 ळसन कासताक कृ ष्ण तृतीमा 15:05:37 ितुथॉ, (िॊ.उ. यात्रि 7:46) 16 यत्रल कासताक कृ ष्ण ितुथॉ 17:17:28 त्रलद्व खाद्य फदलव, तुरा-वॊक्रास्डत यात्रि 11.46 फजे, वॊक्रास्डत का 17 वोभ कासताक कृ ष्ण ऩॊिभी 19:06:49 ऩुण्मकार दोऩशय 12:22 वे वूमाास्त तक, कोफकरा ऩॊिभी व्रत (जैन) 18 भॊगर कासताक कृ ष्ण ऴद्षी 20:23:22 - श्री याधा अद्शभी, ऩुष्म नषि (प्रात: 6:25), काराद्शभी 19 फुध कासताक कृ ष्ण वद्ऱभी 20:59:37 व्रत, अशोई अद्शभी, दाम्ऩत्माद्शभी, फशुराद्शभी, 20 गुरु कासताक कृ ष्ण अद्शभी 20:49:56 काराद्शभी व्रत, कयाद्शभी (भशायाद्स) 21 ळुक्र कासताक कृ ष्ण नलभी 19:50:34 लैधसत भशाऩात यात्रि 10:35 वे 3:37 तक, ृ 22 ळसन कासताक कृ ष्ण दळभी 18:05:16 - यभा (यम्बा) एकादळी व्रत, वूमा वामन लृस्द्ळक भं 23 यत्रल कासताक कृ ष्ण एकादळी 15:35:55 यात्रि 12:01 फजे, गोलत्व द्रादळी व्रत (गौ-फछड़ा) गोत्रियाि प्रायॊ ब, धनिमोदळी (धनतेयव), धडलडतरय 24 वोभ कासताक कृ ष्ण द्रादळी 12:32:50 जमॊती, वोभ-प्रदोऴ व्रत, काभेद्वयी जमॊती, मभऩॊिक ळुरू, भासवक सळलयात्रि व्रत, नयकशया ितुदाळी, नयक िमोदळी- 25 भॊगर कासताक कृ ष्ण 09:02:33 ितुदाळी, कारी ितुदाळी, रूऩ ितुदाळी, श्रीशनुभान ितुदाळी जमॊती, धूभालती जमॊती (ताॊत्रिक ऩॊिाॊग), मभ-तऩाण दीऩालरी भशोत्वल, श्रीगणेळ- भशारक्ष्भी -कफेय ऩूजन, ु कभरा भशात्रलद्या जमॊती, कारयात्रि, अद्र्धयात्रि भं 26 फुध कासताक कृ ष्ण अभालस्मा 25:25:44 कारी (श्माभा) ऩूजा, वुखयात्रि-जागयण, स्नान-दान- श्राद्ध शे तु उत्तभ कासताकी अभालस्मा, गौयी-कदाय व्रत े (द.बा.), कौभुदी दीऩभ ् (द.बा.), श्रीभशालीय स्लाभी
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    93 अक्टू फय 2011 सनलााणोत्वल-भोष कल्माणक (जैन), उल्का दळान, अभ्मॊग स्नान, स्लाभी याभतीथा की जडभ एलॊ ऩुण्मसतसथ, स्लाभी दमानॊद स्भृसत फदलव, अडनकट भशोत्वल, गोलद्धा न ऩूजा, फसर-ऩूजन, वामॊ ू कार गो क्रीड़ा, गो-वॊलधान वद्ऱाश प्रायॊ ब, द्यूत-क्रीड़ा, 27 गुरु कासताक ळुक्र प्रसतऩदा 21:41:24 भशालीयस्लाभी सनलााण वम्लत ् 2538 प्रायॊ ब, गुजयाती वॊलत्वय 2068 प्रायॊ ब, नेऩारी वम्लत ् 1132 प्रायॊ ब, नलीन िडद्र-दळान, भ्रातृ फद्रतीमा (बइमादज), मभ ू फद्रतीमा सििगुद्ऱ ऩूजन, दलात ऩूजा, फग्लारी, 28 ळुक्र कासताक ळुक्र फद्रतीमा 18:13:58 त्रलद्वकभाा-ऩूजन, मभ ऩॊिक वभाद्ऱ, गौतभ स्लाभी कलर सान, े 29 ळसन कासताक ळुक्र तृतीमा 15:12:47 त्रलद्वासभि जमॊती, लयदत्रलनामक ितुथॉ व्रत, त्रलनामकी ितुथॉ व्रत, दलाा ू गणऩसत व्रत (िॊद्रो.या. 8.57), त्रिफदलवीम वूमऴद्षी व्रत ा 30 यत्रल कासताक ळुक्र ितुथॉ 12:48:10 प्रायॊ ब (सभसथराॊिर), छठ ऩूजा ळुरू-नशाम खाम (त्रफशाय-झायखण्ड), वौबाग्म ऩॊिभी, राब ऩॊिभी, ऩाण्डल ऩॊिभी, सान ऩॊिभी (जैन), छठ ऩूजा का दवया ू फदन-खयना 31 वोभ कासताक ळुक्र ऩॊिभी 11:03:53 (त्रफशाय-झायखण्ड), स्कडद (कभाय) ऴद्षी व्रत, वयदाय ु ऩटे र जमॊती, इॊ फदया स्भृसत फदलव क्मा आऩ फकवी वभस्मा वे ग्रस्त शं ? आऩक ऩाव अऩनी वभस्माओॊ वे छटकाया ऩाने शे तु ऩूजा-अिाना, वाधना, भॊि जाऩ इत्माफद कयने का े ु वभम नशीॊ शं ? अफ आऩ अऩनी वभस्माओॊ वे फीना फकवी त्रलळेऴ ऩूजा-अिाना, त्रलसध-त्रलधान क आऩको े अऩने कामा भं वपरता प्राद्ऱ कय वक एलॊ आऩको अऩने जीलन क वभस्त वुखो को प्राद्ऱ कयने का भागा े े प्राद्ऱ शो वक इव सरमे गुरुत्ल कामाारत द्राया शभाया उद्दे श्म ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे त्रलसळद्श तेजस्ली भॊिो द्राया े सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त त्रलसबडन प्रकाय क मडि- कलि एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय े े तक ऩशोिाने का शै । GURUTVA KARYALAY Bhubaneswar- 751 018, (ORISSA) INDIA, Call Us : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785, E-mail Us:- gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Visit Us: http://gk.yolasite.com/ ,http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    94 अक्टू फय 2011 गणेळ रक्ष्भी मॊि प्राण-प्रसतत्रद्षत गणेळ रक्ष्भी मॊि को अऩने घय-दकान-ओफपव-पक्टयी भं ऩूजन स्थान, गल्रा मा अरभायी भं स्थात्रऩत ु ै कयने व्माऩाय भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । मॊि क प्रबाल वे बाग्म भं उडनसत, भान-प्रसतद्षा एलॊ े व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं एलॊ आसथाक स्स्थभं वुधाय शोता शं । गणेळ रक्ष्भी मॊि को स्थात्रऩत कयने वे बगलान गणेळ औय दे ली रक्ष्भी का वॊमुक्त आळीलााद प्राद्ऱ शोता शं । Rs.550 वे Rs.8200 तक भॊगर मॊि वे ऋण भुत्रक्त भॊगर मॊि को जभीन-जामदाद क त्रललादो को शर कयने क काभ भं राब दे ता शं , इव क असतरयक्त व्मत्रक्त को ऋण े े े भुत्रक्त शे तु भॊगर वाधना वे असत ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं । त्रललाश आफद भं भॊगरी जातकं क कल्माण क सरए भॊगर े े मॊि की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । प्राण प्रसतत्रद्षत भॊगर मॊि क ऩूजन वे बाग्मोदम, ळयीय भं खून की े कभी, गबाऩात वे फिाल, फुखाय, िेिक, ऩागरऩन, वूजन औय घाल, मौन ळत्रक्त भं लृत्रद्ध, ळिु त्रलजम, तॊि भॊि क दद्श प्रबा, े ु बूत-प्रेत बम, लाशन दघटनाओॊ, शभरा, िोयी इत्मादी वे फिाल शोता शं । ु ा भूल्म भाि Rs- 550 कफेय मॊि ु कफेय मॊि क ऩूजन वे स्लणा राब, यत्न राब, ऩैतक वम्ऩत्ती एलॊ गड़े शुए धन वे राब प्रासद्ऱ फक काभना कयने लारे ु े ृ व्मत्रक्त क सरमे कफेय मॊि अत्मडत वपरता दामक शोता शं । एवा ळास्त्रोक्त लिन शं । कफेय मॊि क ऩूजन वे एकासधक े ु ु े स्त्रोि वे धन का प्राद्ऱ शोकय धन वॊिम शोता शं । ताम्र ऩि ऩय वुलणा ऩोरीव ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीव ताम्र ऩि ऩय (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) वाईज भूल्म वाईज भूल्म वाईज भूल्म 2” X 2” 640 2” X 2” 460 2” X 2” 370 3” X 3” 1250 3” X 3” 820 3” X 3” 550 4” X 4” 1850 4” X 4” 1250 4” X 4” 820 6” X 6” 2700 6” X 6” 2100 6” X 6” 1450 9” X 9” 4600 9” X 9” 3700 9” X 9” 2450 12” X12” 8200 12” X12” 6400 12” X12” 4600 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
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    95 अक्टू फय 2011 नलयत्न जफड़त श्री मॊि ळास्त्र लिन क अनुवाय ळुद्ध वुलणा मा यजत भं सनसभात श्री मॊि क िायं औय मफद नलयत्न जड़ला ने ऩय मश नलयत्न े े जफड़त श्री मॊि कशराता शं । वबी यत्नो को उवक सनस्द्ळत स्थान ऩय जड़ कय रॉकट क रूऩ भं धायण कयने वे व्मत्रक्त को े े े अनॊत एद्वमा एलॊ रक्ष्भी की प्रासद्ऱ शोती शं । व्मत्रक्त को एवा आबाव शोता शं जैवे भाॊ रक्ष्भी उवक वाथ शं । नलग्रश को े श्री मॊि क वाथ रगाने वे ग्रशं की अळुब दळा का धायण कयने लारे व्मत्रक्त ऩय प्रबाल नशीॊ शोता शं । गरे भं शोने क े े कायण मॊि ऩत्रलि यशता शं एलॊ स्नान कयते वभम इव मॊि ऩय स्ऩळा कय जो जर त्रफॊद ु ळयीय को रगते शं , लश गॊगा जर क वभान ऩत्रलि शोता शं । इव सरमे इवे वफवे तेजस्ली एलॊ परदासम कशजाता शं । जैवे अभृत वे उत्तभ कोई े औऴसध नशीॊ, उवी प्रकाय रक्ष्भी प्रासद्ऱ क सरमे श्री मॊि वे उत्तभ कोई मॊि वॊवाय भं नशीॊ शं एवा ळास्त्रोक्त लिन शं । इव े प्रकाय क नलयत्न जफड़त श्री मॊि गुरूत्ल कामाारम द्राया ळुब भुशूता भं प्राण प्रसतत्रद्षत कयक फनालाए जाते शं । े े अद्श रक्ष्भी कलि अद्श रक्ष्भी कलि को धायण कयने वे व्मत्रक्त ऩय वदा भाॊ भशा रक्ष्भी की कृ ऩा एलॊ आळीलााद फना यशता शं । स्जस्वे भाॊ रक्ष्भी क अद्श रुऩ (१)-आफद रक्ष्भी, (२)-धाडम रक्ष्भी, (३)-धैयीम रक्ष्भी, (४)- े गज रक्ष्भी, (५)-वॊतान रक्ष्भी, (६)-त्रलजम रक्ष्भी, (७)-त्रलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो का स्लत् अळीलााद प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म भाि: Rs-1050 भॊि सवद्ध व्माऩाय लृत्रद्ध कलि व्माऩाय लृत्रद्ध कलि व्माऩाय क ळीघ्र उडनसत क सरए उत्तभ शं । िाशं कोई बी व्माऩाय शो अगय उवभं राब क स्थान ऩय े े े फाय-फाय शासन शो यशी शं । फकवी प्रकाय वे व्माऩाय भं फाय-फाय फाॊधा उत्ऩडन शो यशी शो! तो वॊऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत भॊि सवद्ध ऩूणा िैतडम मुक्त व्माऩात लृत्रद्ध मॊि को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थात्रऩत कयने वे ळीघ्र शी व्माऩाय लृत्रद्ध एलॊ सनतडतय राब प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म भाि: Rs.370 & 730 भॊगर मॊि (त्रिकोण) भॊगर मॊि को जभीन-जामदाद क त्रललादो को शर कयने क काभ भं राब दे ता शं , इव क असतरयक्त व्मत्रक्त को े े े ऋण भुत्रक्त शे तु भॊगर वाधना वे असत ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं । त्रललाश आफद भं भॊगरी जातकं क कल्माण क सरए े े भॊगर मॊि की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म भाि Rs- 550 GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    96 अक्टू फय 2011 त्रललाश वॊफॊसधत वभस्मा क्मा आऩक रडक-रडकी फक आऩकी ळादी भं अनालश्मक रूऩ वे त्रलरम्फ शो यशा शं मा उनक लैलाफशक जीलन भं खुसळमाॊ कभ े े े शोती जायशी शं औय वभस्मा असधक फढती जायशी शं । एवी स्स्थती शोने ऩय अऩने रडक-रडकी फक कडरी का अध्ममन े ुॊ अलश्म कयलारे औय उनक लैलाफशक वुख को कभ कयने लारे दोऴं क सनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे जनकायी प्राद्ऱ े े े े कयं । सळषा वे वॊफॊसधत वभस्मा क्मा आऩक रडक-रडकी की ऩढाई भं अनालश्मक रूऩ वे फाधा-त्रलघ्न मा रुकालटे शो यशी शं ? फच्िो को अऩने ऩूणा ऩरयश्रभ े े एलॊ भेशनत का उसित पर नशीॊ सभर यशा? अऩने रडक-रडकी की कडरी का त्रलस्तृत अध्ममन अलश्म कयलारे औय े ुॊ उनक त्रलद्या अध्ममन भं आनेलारी रुकालट एलॊ दोऴो क कायण एलॊ उन दोऴं क सनलायण क उऩामो क फाय भं त्रलस्ताय वे े े े े े जनकायी प्राद्ऱ कयं । क्मा आऩ फकवी वभस्मा वे ग्रस्त शं ? ु आऩक ऩाव अऩनी वभस्माओॊ वे छटकाया ऩाने शे तु ऩूजा-अिाना, वाधना, भॊि जाऩ इत्माफद कयने का वभम नशीॊ शं ? े अफ आऩ अऩनी वभस्माओॊ वे फीना फकवी त्रलळेऴ ऩूजा-अिाना, त्रलसध-त्रलधान क आऩको अऩने कामा भं वपरता प्राद्ऱ े कय वक एलॊ आऩको अऩने जीलन क वभस्त वुखो को प्राद्ऱ कयने का भागा प्राद्ऱ शो वक इव सरमे गुरुत्ल कामाारत े े े द्राया शभाया उद्दे श्म ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे त्रलसळद्श तेजस्ली भॊिो द्राया सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त त्रलसबडन प्रकाय के मडि- कलि एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय तक ऩशोिाने का शै । े ज्मोसतऴ वॊफॊसधत त्रलळेऴ ऩयाभळा ज्मोसत त्रलसान, अॊक ज्मोसतऴ, लास्तु एलॊ आध्मास्त्भक सान वं वॊफॊसधत त्रलऴमं भं शभाये 30 लऴो वे असधक लऴा के अनुबलं क वाथ ज्मोसतव वे जुडे नमे-नमे वॊळोधन क आधाय ऩय आऩ अऩनी शय वभस्मा क वयर वभाधान प्राद्ऱ कय े े े वकते शं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com ओनेक्व जो व्मत्रक्त ऩडना धायण कयने भे अवभथा शो उडशं फुध ग्रश क उऩयत्न ओनेक्व को धायण कयना िाफशए। े उच्ि सळषा प्रासद्ऱ शे तु औय स्भयण ळत्रक्त क त्रलकाव शे तु ओनेक्व यत्न की अॊगूठी को दामं शाथ की वफवे छोटी े उॊ गरी मा रॉकट फनला कय गरे भं धायण कयं । ओनेक्व यत्न धायण कयने वे त्रलद्या-फुत्रद्ध की प्रासद्ऱ शो शोकय स्भयण े ळत्रक्त का त्रलकाव शोता शं ।
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    97 अक्टू फय 2011 अक्टू फय 2011 -त्रलळेऴ मोग कामा सवत्रद्ध मोग 2/3 यात्रि 3:12 वे वूमोदम तक 17 वूमोदम वे फदन-यात 11 वूमोदम वे फदन 3:59 तक 20 वूमोदम वे फदन-यात 13 वूमोदम वे यात्रि 9:59 तक 28 फदन 3:59 वे यातबय 15/16 यात्रि 3:49 वे वूमोदम तक 30 फदन 11:56 वे यातबय अभृत मोग 15/16 यात्रि 3:49 वे वूमोदम तक 20 प्रात: 10:46 वे फदन-यात 17 वूमोदम वे फदन-यात फद्रऩुष्कय (दोगुना पर) मोग 8 वूमोदम वे प्रात: 8:04 तक गुरु-ऩुष्माभृत मोग 20 प्रात: 10:46 वे फदन-यात मोग‍पर‍:  कामा सवत्रद्ध मोग भे फकमे गमे ळुब कामा भे सनस्द्ळत वपरता प्राद्ऱ शोती शं , एवा ळास्त्रोक्त लिन शं ।  फद्रऩुष्कय मोग भं फकमे गमे ळुब कामो का राब दोगुना शोता शं । एवा ळास्त्रोक्त लिन शं ।  गुरु ऩुष्माभृत मोग भं फकमे गमे फकमे गमे ळुब कामा भे ळुब परो की प्रासद्ऱ शोती शं , एवा ळास्त्रोक्त लिन शं । दै सनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान तासरका गुसरक कार मभ कार याशु कार (ळुब) (अळुब) (अळुब) लाय वभम अलसध वभम अलसध वभम अलसध यत्रललाय 03:00 वे 04:30 12:00 वे 01:30 04:30 वे 06:00 वोभलाय 01:30 वे 03:00 10:30 वे 12:00 07:30 वे 09:00 भॊगरलाय 12:00 वे 01:30 09:00 वे 10:30 03:00 वे 04:30 फुधलाय 10:30 वे 12:00 07:30 वे 09:00 12:00 वे 01:30 गुरुलाय 09:00 वे 10:30 06:00 वे 07:30 01:30 वे 03:00 ळुक्रलाय 07:30 वे 09:00 03:00 वे 04:30 10:30 वे 12:00 ळसनलाय 06:00 वे 07:30 01:30 वे 03:00 09:00 वे 10:30
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    98 अक्टू फय 2011 फदन क िौघफडमे े वभम यत्रललाय वोभलाय भॊगरलाय फुधलाय गुरुलाय ळुक्रलाय ळसनलाय 06:00 वे 07:30 उद्रे ग अभृत योग राब ळुब िर कार 07:30 वे 09:00 िर कार उद्रे ग अभृत योग राब ळुब 09:00 वे 10:30 राब ळुब िर कार उद्रे ग अभृत योग 10:30 वे 12:00 अभृत योग राब ळुब िर कार उद्रे ग 12:00 वे 01:30 कार उद्रे ग अभृत योग राब ळुब िर 01:30 वे 03:00 ळुब िर कार उद्रे ग अभृत योग राब 03:00 वे 04:30 योग राब ळुब िर कार उद्रे ग अभृत 04:30 वे 06:00 उद्रे ग अभृत योग राब ळुब िर कार यात क िौघफडमे े वभम यत्रललाय वोभलाय भॊगरलाय फुधलाय गुरुलाय ळुक्रलाय ळसनलाय 06:00 वे 07:30 ळुब िर कार उद्रे ग अभृत योग राब 07:30 वे 09:00 अभृत योग राब ळुब िर कार उद्रे ग 09:00 वे 10:30 िर कार उद्रे ग अभृत योग राब ळुब 10:30 वे 12:00 योग राब ळुब िर कार उद्रे ग अभृत 12:00 वे 01:30 कार उद्रे ग अभृत योग राब ळुब िर 01:30 वे 03:00 राब ळुब िर कार उद्रे ग अभृत योग 03:00 वे 04:30 उद्रे ग अभृत योग राब ळुब िर कार 04:30 वे 06:00 ळुब िर कार उद्रे ग अभृत योग राब ळास्त्रोक्त भत क अनुळाय मफद फकवी बी कामा का प्रायॊ ब ळुब भुशूता मा ळुब वभम ऩय फकमा जामे तो कामा भं वपरता े प्राद्ऱ शोने फक वॊबालना ज्मादा प्रफर शो जाती शं । इव सरमे दै सनक ळुब वभम िौघफड़मा दे खकय प्राद्ऱ फकमा जा वकता शं । नोट: प्राम् फदन औय यात्रि क िौघफड़मे फक सगनती क्रभळ् वूमोदम औय वूमाास्त वे फक जाती शं । प्रत्मेक िौघफड़मे फक अलसध 1 े घॊटा 30 सभसनट अथाात डे ढ़ घॊटा शोती शं । वभम क अनुवाय िौघफड़मे को ळुबाळुब तीन बागं भं फाॊटा जाता शं , जो क्रभळ् ळुब, े भध्मभ औय अळुब शं । िौघफडमे क स्लाभी ग्रश े * शय कामा क सरमे ळुब/अभृत/राब का े ळुब िौघफडमा भध्मभ िौघफडमा अळुब िौघफड़मा िौघफड़मा उत्तभ भाना जाता शं । िौघफडमा स्लाभी ग्रश िौघफडमा स्लाभी ग्रश िौघफडमा स्लाभी ग्रश ळुब गुरु िय ळुक्र उद्बे ग वूमा * शय कामा क सरमे िर/कार/योग/उद्रे ग े अभृत िॊद्रभा कार ळसन का िौघफड़मा उसित नशीॊ भाना जाता। राब फुध योग भॊगर
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    99 अक्टू फय 2011 फदन फक शोया - वूमोदम वे वूमाास्त तक लाय 1.घॊ 2.घॊ 3.घॊ 4.घॊ 5.घॊ 6.घॊ 7.घॊ 8.घॊ 9.घॊ 10.घॊ 11.घॊ 12.घॊ यत्रललाय वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन वोभलाय िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा भॊगरलाय भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र फुधलाय फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर गुरुलाय गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ळुक्रलाय ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु ळसनलाय ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र यात फक शोया – वूमाास्त वे वूमोदम तक यत्रललाय गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध वोभलाय ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगरलाय ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुधलाय वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरुलाय िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्रलाय भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसनलाय फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर शोया भुशूता को कामा सवत्रद्ध क सरए ऩूणा परदामक एलॊ अिूक भाना जाता शं , फदन-यात क २४ घॊटं भं ळुब-अळुब वभम े े को वभम वे ऩूला सात कय अऩने कामा सवत्रद्ध क सरए प्रमोग कयना िाफशमे। े त्रलद्रानो क भत वे इस्च्छत कामा सवत्रद्ध क सरए ग्रश वे वॊफॊसधत शोया का िुनाल कयने वे त्रलळेऴ राब े े प्राद्ऱ शोता शं ।  वूमा फक शोया वयकायी कामो क सरमे उत्तभ शोती शं । े  िॊद्रभा फक शोया वबी कामं क सरमे उत्तभ शोती शं । े  भॊगर फक शोया कोटा -किेयी क कामं क सरमे उत्तभ शोती शं । े े  फुध फक शोया त्रलद्या-फुत्रद्ध अथाात ऩढाई क सरमे उत्तभ शोती शं । े  गुरु फक शोया धासभाक कामा एलॊ त्रललाश क सरमे उत्तभ शोती शं । े  ळुक्र फक शोया मािा क सरमे उत्तभ शोती शं । े  ळसन फक शोया धन-द्रव्म वॊफॊसधत कामा क सरमे उत्तभ शोती शं । े
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    100 अक्टू फय 2011 ग्रश िरन अक्टू फय -2011 Day Sun Mon Ma Me Jup Ven Sat Rah Ket Ua Nep Plu 1 05:13:27 07:03:08 03:13:10 05:15:09 00:14:42 05:25:43 05:24:35 07:22:48 01:22:48 11:08:21 10:04:31 08:10:54 2 05:14:26 07:17:26 03:13:45 05:16:54 00:14:36 05:26:58 05:24:42 07:22:46 01:22:46 11:08:18 10:04:30 08:10:55 3 05:15:25 08:01:18 03:14:21 05:18:38 00:14:30 05:28:12 05:24:49 07:22:46 01:22:46 11:08:16 10:04:29 08:10:55 4 05:16:24 08:14:44 03:14:56 05:20:21 00:14:24 05:29:27 05:24:57 07:22:47 01:22:47 11:08:13 10:04:28 08:10:56 5 05:17:23 08:27:48 03:15:32 05:22:04 00:14:18 06:00:41 05:25:04 07:22:46 01:22:46 11:08:11 10:04:27 08:10:56 6 05:18:22 09:10:33 03:16:07 05:23:45 00:14:11 06:01:56 05:25:11 07:22:44 01:22:44 11:08:09 10:04:26 08:10:57 7 05:19:21 09:23:03 03:16:42 05:25:26 00:14:04 06:03:11 05:25:19 07:22:39 01:22:39 11:08:06 10:04:25 08:10:58 8 05:20:20 10:05:21 03:17:17 05:27:06 00:13:58 06:04:25 05:25:26 07:22:32 01:22:32 11:08:04 10:04:24 08:10:58 9 05:21:19 10:17:29 03:17:52 05:28:45 00:13:51 06:05:40 05:25:33 07:22:22 01:22:22 11:08:02 10:04:23 08:10:59 10 05:22:19 10:29:31 03:18:26 06:00:24 00:13:44 06:06:54 05:25:41 07:22:11 01:22:11 11:07:59 10:04:22 08:11:00 11 05:23:18 11:11:27 03:19:01 06:02:02 00:13:37 06:08:09 05:25:48 07:21:59 01:21:59 11:07:57 10:04:21 08:11:00 12 05:24:17 11:23:20 03:19:36 06:03:38 00:13:29 06:09:24 05:25:55 07:21:48 01:21:48 11:07:55 10:04:20 08:11:01 13 05:25:16 00:05:11 03:20:10 06:05:15 00:13:22 06:10:38 05:26:02 07:21:38 01:21:38 11:07:52 10:04:19 08:11:02 14 05:26:16 00:17:02 03:20:44 06:06:50 00:13:15 06:11:53 05:26:10 07:21:31 01:21:31 11:07:50 10:04:18 08:11:03 15 05:27:15 00:28:54 03:21:19 06:08:25 00:13:07 06:13:07 05:26:17 07:21:26 01:21:26 11:07:48 10:04:17 08:11:04 16 05:28:15 01:10:50 03:21:53 06:09:59 00:12:59 06:14:22 05:26:24 07:21:23 01:21:23 11:07:46 10:04:16 08:11:05 17 05:29:14 01:22:53 03:22:27 06:11:32 00:12:52 06:15:37 05:26:32 07:21:22 01:21:22 11:07:44 10:04:15 08:11:05 18 06:00:14 02:05:08 03:23:01 06:13:05 00:12:44 06:16:51 05:26:39 07:21:23 01:21:23 11:07:41 10:04:15 08:11:06 19 06:01:13 02:17:37 03:23:34 06:14:37 00:12:36 06:18:06 05:26:46 07:21:24 01:21:24 11:07:39 10:04:14 08:11:07 20 06:02:13 03:00:27 03:24:08 06:16:09 00:12:28 06:19:20 05:26:54 07:21:25 01:21:25 11:07:37 10:04:13 08:11:08 21 06:03:12 03:13:41 03:24:42 06:17:40 00:12:20 06:20:35 05:27:01 07:21:24 01:21:24 11:07:35 10:04:13 08:11:09 22 06:04:12 03:27:22 03:25:15 06:19:10 00:12:12 06:21:50 05:27:08 07:21:22 01:21:22 11:07:33 10:04:12 08:11:10 23 06:05:12 04:11:31 03:25:48 06:20:40 00:12:04 06:23:04 05:27:16 07:21:18 01:21:18 11:07:31 10:04:11 08:11:12 24 06:06:12 04:26:08 03:26:21 06:22:09 00:11:56 06:24:19 05:27:23 07:21:12 01:21:12 11:07:29 10:04:11 08:11:13 25 06:07:11 05:11:06 03:26:54 06:23:37 00:11:48 06:25:34 05:27:30 07:21:05 01:21:05 11:07:27 10:04:10 08:11:14 26 06:08:11 05:26:19 03:27:27 06:25:05 00:11:40 06:26:48 05:27:37 07:20:58 01:20:58 11:07:25 10:04:10 08:11:15 27 06:09:11 06:11:36 03:28:00 06:26:32 00:11:32 06:28:03 05:27:45 07:20:53 01:20:53 11:07:23 10:04:09 08:11:16 28 06:10:11 06:26:46 03:28:33 06:27:59 00:11:24 06:29:17 05:27:52 07:20:49 01:20:49 11:07:21 10:04:09 08:11:17 29 06:11:11 07:11:40 03:29:05 06:29:25 00:11:16 07:00:32 05:27:59 07:20:47 01:20:47 11:07:19 10:04:08 08:11:19 30 06:12:11 07:26:10 03:29:37 07:00:50 00:11:07 07:01:47 05:28:06 07:20:46 01:20:46 11:07:17 10:04:08 08:11:20 31 06:13:11 08:10:13 04:00:09 07:02:14 00:10:59 07:03:01 05:28:14 07:20:47 01:20:47 11:07:15 10:04:08 08:11:21
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    101 अक्टू फय 2011 वला योगनाळक मॊि/कलि भनुष्म अऩने जीलन क त्रलसबडन वभम ऩय फकवी ना फकवी वाध्म मा अवाध्म योग वे ग्रस्त शोता शं । े उसित उऩिाय वे ज्मादातय वाध्म योगो वे तो भुत्रक्त सभर जाती शं , रेफकन कबी-कबी वाध्म योग शोकय बी अवाध्मा शोजाते शं , मा कोइ अवाध्म योग वे ग्रसवत शोजाते शं । शजायो राखो रुऩमे खिा कयने ऩय बी असधक राब प्राद्ऱ नशीॊ शो ऩाता। डॉक्टय द्राया फदजाने लारी दलाईमा अल्ऩ वभम क सरमे कायगय वात्रफत शोती शं , एसव स्स्थती भं राबा प्रासद्ऱ क े े सरमे व्मत्रक्त एक डॉक्टय वे दवये डॉक्टय क िक्कय रगाने को फाध्म शो जाता शं । ू े बायतीम ऋऴीमोने अऩने मोग वाधना क प्रताऩ वे योग ळाॊसत शे तु त्रलसबडन आमुलय औऴधो क असतरयक्त मॊि, े े े भॊि एलॊ तॊि उल्रेख अऩने ग्रॊथो भं कय भानल जीलन को राब प्रदान कयने का वाथाक प्रमाव शजायो लऴा ऩूला फकमा था। फुत्रद्धजीलो क भत वे जो व्मत्रक्त जीलनबय अऩनी फदनिमाा ऩय सनमभ, वॊमभ यख कय आशाय ग्रशण कयता शं , एवे व्मत्रक्त े को त्रलसबडन योग वे ग्रसवत शोने की वॊबालना कभ शोती शं । रेफकन आज क फदरते मुग भं एवे व्मत्रक्त बी बमॊकय योग े वे ग्रस्त शोते फदख जाते शं । क्मोफक वभग्र वॊवाय कार क अधीन शं । एलॊ भृत्मु सनस्द्ळत शं स्जवे त्रलधाता क अराला े े औय कोई टार नशीॊ वकता, रेफकन योग शोने फक स्स्थती भं व्मत्रक्त योग दय कयने का प्रमाव तो अलश्म कय वकता शं । ू इव सरमे मॊि भॊि एलॊ तॊि क कळर जानकाय वे मोग्म भागादळान रेकय व्मत्रक्त योगो वे भुत्रक्त ऩाने का मा उवक प्रबालो े ु े को कभ कयने का प्रमाव बी अलश्म कय वकता शं । ज्मोसतऴ त्रलद्या क कळर जानकय बी कार ऩुरुऴकी गणना कय अनेक योगो क अनेको यशस्म को उजागय कय े ु े वकते शं । ज्मोसतऴ ळास्त्र क भाध्मभ वे योग क भूरको ऩकडने भे वशमोग सभरता शं , जशा आधुसनक सिफकत्वा ळास्त्र े े अषभ शोजाता शं लशा ज्मोसतऴ ळास्त्र द्राया योग क भूर(जड़) को ऩकड कय उवका सनदान कयना राबदामक एलॊ े उऩामोगी सवद्ध शोता शं । शय व्मत्रक्त भं रार यॊ गकी कोसळकाए ऩाइ जाती शं , स्जवका सनमभीत त्रलकाव क्रभ फद्ध तयीक वे शोता यशता शं । े जफ इन कोसळकाओ क क्रभ भं ऩरयलतान शोता शै मा त्रलखॊफडन शोता शं तफ व्मत्रक्त क ळयीय भं स्लास््म वॊफॊधी त्रलकायो े े उत्ऩडन शोते शं । एलॊ इन कोसळकाओ का वॊफॊध नल ग्रशो क वाथ शोता शं । स्जस्वे योगो क शोने क कायणा व्मत्रक्तक े े े े जडभाॊग वे दळा-भशादळा एलॊ ग्रशो फक गोिय भं स्स्थती वे प्राद्ऱ शोता शं । वला योग सनलायण कलि एलॊ भशाभृत्मुॊजम मॊि क भाध्मभ वे व्मत्रक्त क जडभाॊग भं स्स्थत कभजोय एलॊ ऩीफडत े े ग्रशो क अळुब प्रबाल को कभ कयने का कामा वयरता ऩूलक फकमा जावकता शं । जेवे शय व्मत्रक्त को ब्रह्माॊड फक उजाा एलॊ े ा ऩृ्ली का गुरुत्लाकऴाण फर प्रबालीत कताा शं फठक उवी प्रकाय कलि एलॊ मॊि क भाध्मभ वे ब्रह्माॊड फक उजाा क े े वकायात्भक प्रबाल वे व्मत्रक्त को वकायात्भक उजाा प्राद्ऱ शोती शं स्जस्वे योग क प्रबाल को कभ कय योग भुक्त कयने शे तु े वशामता सभरती शं । योग सनलायण शे तु भशाभृत्मुॊजम भॊि एलॊ मॊि का फडा भशत्ल शं । स्जस्वे फशडद ू वॊस्कृ सत का प्राम् शय व्मत्रक्त भशाभृत्मुॊजम भॊि वे ऩरयसित शं ।
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    102 अक्टू फय 2011 कलि क राब : े  एवा ळास्त्रोक्त लिन शं स्जव घय भं भशाभृत्मुॊजम मॊि स्थात्रऩत शोता शं लशा सनलाव कताा शो नाना प्रकाय फक आसध-व्मासध-उऩासध वे यषा शोती शं ।  ऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतडम मुक्त वला योग सनलायण कलि फकवी बी उम्र एलॊ जासत धभा क रोग िाशे े स्त्री शो मा ऩुरुऴ धायण कय वकते शं ।  जडभाॊगभं अनेक प्रकायक खयाफ मोगो औय खयाफ ग्रशो फक प्रसतकरता वे योग उतऩडन शोते शं । े ू  कछ योग वॊक्रभण वे शोते शं एलॊ कछ योग खान-ऩान फक असनमसभतता औय अळुद्धतावे उत्ऩडन शोते शं । कलि ु ु एलॊ मॊि द्राया एवे अनेक प्रकाय क खयाफ मोगो को नद्श कय, स्लास््म राब औय ळायीरयक यषण प्राद्ऱ कयने शे तु े वला योगनाळक कलि एलॊ मॊि वला उऩमोगी शोता शं ।  आज क बौसतकता लादी आधुसनक मुगभे अनेक एवे योग शोते शं , स्जवका उऩिाय ओऩये ळन औय दलावे बी े कफठन शो जाता शं । कछ योग एवे शोते शं स्जवे फताने भं रोग फशिफकिाते शं ळयभ अनुबल कयते शं एवे योगो ु को योकने शे तु एलॊ उवक उऩिाय शे तु वला योगनाळक कलि एलॊ मॊि राबादासम सवद्ध शोता शं । े  प्रत्मेक व्मत्रक्त फक जेवे-जेवे आमु फढती शं लैवे-लवै उवक ळयीय फक ऊजाा शोती जाती शं । स्जवक वाथ अनेक े े प्रकाय क त्रलकाय ऩैदा शोने रगते शं एवी स्स्थती भं उऩिाय शे तु वलायोगनाळक कलि एलॊ मॊि परप्रद शोता शं । े  स्जव घय भं त्रऩता-ऩुि, भाता-ऩुि, भाता-ऩुिी, मा दो बाई एक फश नषिभे जडभ रेते शं , तफ उवकी भाता क सरमे े असधक कद्शदामक स्स्थती शोती शं । उऩिाय शे तु भशाभृत्मुॊजम मॊि परप्रद शोता शं ।  स्जव व्मत्रक्त का जडभ ऩरयसध मोगभे शोता शं उडशे शोने लारे भृत्मु तुल्म कद्श एलॊ शोने लारे योग, सिॊता भं उऩिाय शे तु वला योगनाळक कलि एलॊ मॊि ळुब परप्रद शोता शं । नोट:- ऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतडम मुक्त वला योग सनलायण कलि एलॊ मॊि क फाये भं असधक जानकायी शे तु शभ े वे वॊऩक कयं । ा Declaration Notice  We do not accept liability for any out of date or incorrect information.  We will not be liable for your any indirect consequential loss, loss of profit,  If you will cancel your order for any article we can not any amount will be refunded or Exchange.  We are keepers of secrets. We honour our clients' rights to privacy and will release no information about our any other clients' transactions with us.  Our ability lies in having learned to read the subtle spiritual energy, Yantra, mantra and promptings of the natural and spiritual world.  Our skill lies in communicating clearly and honestly with each client.  Our all kawach, yantra and any other article are prepared on the Principle of Positiv energy, our Article dose not produce any bad energy. Our Goal  Here Our goal has The classical Method-Legislation with Proved by specific with fiery chants prestigious full consciousness (Puarn Praan Pratisthit) Give miraculous powers & Good effect All types of Yantra, Kavach, Rudraksh, preciouse and semi preciouse Gems stone deliver on your door step.
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    103 अक्टू फय 2011 भॊि सवद्ध कलि भॊि सवद्ध कलि को त्रलळेऴ प्रमोजन भं उऩमोग क सरए औय ळीघ्र प्रबाल ळारी फनाने क सरए तेजस्ली भॊिो द्राया े े ळुब भशूता भं ळुब फदन को तैमाय फकमे जाते शै . अरग-अरग कलि तैमाय कयने कसरए अरग-अरग तयश क े े भॊिो का प्रमोग फकमा जाता शै .  क्मं िुने भॊि सवद्ध कलि?  उऩमोग भं आवान कोई प्रसतफडध नशीॊ  कोई त्रलळेऴ सनसत-सनमभ नशीॊ  कोई फुया प्रबाल नशीॊ  कलि क फाये भं असधक जानकायी शे तु े कलि वूसि वला कामा सवत्रद्ध कलि - 3700/- ऋण भुत्रक्त कलि - 730/- त्रलयोध नाळक कलिा- 550/- वलाजन लळीकयण कलि - 1050/-* नलग्रश ळाॊसत कलि- 730/- लळीकयण कलि- 550/-* (2-3 व्मत्रक्तक सरए) े अद्श रक्ष्भी कलि - 1050/- तॊि यषा कलि- 730/- ऩत्नी लळीकयण कलि - 460/-* आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ कलि-910/- ळिु त्रलजम कलि - 640/- * नज़य यषा कलि - 460/- बूसभ राब कलि - 910/- ऩदं उडनसत कलि- 640/- व्माऩय लृत्रद्ध कलि - 370/- वॊतान प्रासद्ऱ कलि - 910/- धन प्रासद्ऱ कलि- 640/- ऩसत लळीकयण कलि - 370/-* कामा सवत्रद्ध कलि - 910/- त्रललाश फाधा सनलायण कलि- 640/- दबााग्म नाळक कलि - 370/- ु काभ दे ल कलि - 820/- भस्स्तष्क ऩृत्रद्श लधाक कलि- 640/- वयस्लती कलक - 370/- कषा+ 10 क सरए े जगत भोशन कलि -730/-* काभना ऩूसता कलि- 550/- वयस्लती कलक- 280/- कषा 10 तक क सरए े स्ऩे -व्माऩाय लृत्रद्ध कलि - 730/- त्रलघ्न फाधा सनलायण कलि- 550/- लळीकयण कलि - 280/-* 1 व्मत्रक्त क सरए े *कलि भाि ळुब कामा मा उद्दे श्म क सरमे े GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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    104 अक्टू फय 2011 YANTRA LIST EFFECTS Our Splecial Yantra 1 12 – YANTRA SET For all Family Troubles 2 VYAPAR VRUDDHI YANTRA For Business Development 3 BHOOMI LABHA YANTRA For Farming Benefits 4 TANTRA RAKSHA YANTRA For Protection Evil Sprite 5 AAKASMIK DHAN PRAPTI YANTRA For Unexpected Wealth Benefits 6 PADOUNNATI YANTRA For Getting Promotion 7 RATNE SHWARI YANTRA For Benefits of Gems & Jewellery 8 BHUMI PRAPTI YANTRA For Land Obtained 9 GRUH PRAPTI YANTRA For Ready Made House 10 KAILASH DHAN RAKSHA YANTRA - Shastrokt Yantra 11 AADHYA SHAKTI AMBAJEE(DURGA) YANTRA Blessing of Durga 12 BAGALA MUKHI YANTRA (PITTAL) Win over Enemies 13 BAGALA MUKHI POOJAN YANTRA (PITTAL) Blessing of Bagala Mukhi 14 BHAGYA VARDHAK YANTRA For Good Luck 15 BHAY NASHAK YANTRA For Fear Ending 16 CHAMUNDA BISHA YANTRA (Navgraha Yukta) Blessing of Chamunda & Navgraha 17 CHHINNAMASTA POOJAN YANTRA Blessing of Chhinnamasta 18 DARIDRA VINASHAK YANTRA For Poverty Ending 19 DHANDA POOJAN YANTRA For Good Wealth 20 DHANDA YAKSHANI YANTRA For Good Wealth 21 GANESH YANTRA (Sampurna Beej Mantra) Blessing of Lord Ganesh 22 GARBHA STAMBHAN YANTRA For Pregnancy Protection 23 GAYATRI BISHA YANTRA Blessing of Gayatri 24 HANUMAN YANTRA Blessing of Lord Hanuman 25 JWAR NIVARAN YANTRA For Fewer Ending JYOTISH TANTRA GYAN VIGYAN PRAD SHIDDHA BISHA 26 YANTRA For Astrology & Spritual Knowlage 27 KALI YANTRA Blessing of Kali 28 KALPVRUKSHA YANTRA For Fullfill your all Ambition 29 KALSARP YANTRA (NAGPASH YANTRA) Destroyed negative effect of Kalsarp Yoga 30 KANAK DHARA YANTRA Blessing of Maha Lakshami 31 KARTVIRYAJUN POOJAN YANTRA - 32 KARYA SHIDDHI YANTRA For Successes in work 33  SARVA KARYA SHIDDHI YANTRA For Successes in all work 34 KRISHNA BISHA YANTRA Blessing of Lord Krishna 35 KUBER YANTRA Blessing of Kuber (Good wealth) 36 LAGNA BADHA NIVARAN YANTRA For Obstaele Of marriage 37 LAKSHAMI GANESH YANTRA Blessing of Lakshami & Ganesh 38 MAHA MRUTYUNJAY YANTRA For Good Health 39 MAHA MRUTYUNJAY POOJAN YANTRA Blessing of Shiva 40 MANGAL YANTRA ( TRIKON 21 BEEJ MANTRA) For Fullfill your all Ambition 41 MANO VANCHHIT KANYA PRAPTI YANTRA For Marriage with choice able Girl 42 NAVDURGA YANTRA Blessing of Durga
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    105 अक्टू फय 2011 YANTRA LIST EFFECTS 43 NAVGRAHA SHANTI YANTRA For good effect of 9 Planets 44 NAVGRAHA YUKTA BISHA YANTRA For good effect of 9 Planets 45  SURYA YANTRA Good effect of Sun 46  CHANDRA YANTRA Good effect of Moon 47  MANGAL YANTRA Good effect of Mars 48  BUDHA YANTRA Good effect of Mercury 49  GURU YANTRA (BRUHASPATI YANTRA) Good effect of Jyupiter 50  SUKRA YANTRA Good effect of Venus 51  SHANI YANTRA (COPER & STEEL) Good effect of Saturn 52  RAHU YANTRA Good effect of Rahu 53  KETU YANTRA Good effect of Ketu 54 PITRU DOSH NIVARAN YANTRA For Ancestor Fault Ending 55 PRASAW KASHT NIVARAN YANTRA For Pregnancy Pain Ending 56 RAJ RAJESHWARI VANCHA KALPLATA YANTRA For Benefits of State & Central Gov 57 RAM YANTRA Blessing of Ram 58 RIDDHI SHIDDHI DATA YANTRA Blessing of Riddhi-Siddhi 59 ROG-KASHT DARIDRATA NASHAK YANTRA For Disease- Pain- Poverty Ending 60 SANKAT MOCHAN YANTRA For Trouble Ending 61 SANTAN GOPAL YANTRA Blessing Lorg Krishana For child acquisition 62 SANTAN PRAPTI YANTRA For child acquisition 63 SARASWATI YANTRA Blessing of Sawaswati (For Study & Education) 64 SHIV YANTRA Blessing of Shiv Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & 65 SHREE YANTRA (SAMPURNA BEEJ MANTRA) Peace 66 SHREE YANTRA SHREE SUKTA YANTRA Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth 67 SWAPNA BHAY NIVARAN YANTRA For Bad Dreams Ending 68 VAHAN DURGHATNA NASHAK YANTRA For Vehicle Accident Ending VAIBHAV LAKSHMI YANTRA (MAHA SHIDDHI DAYAK SHREE Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & All 69 MAHALAKSHAMI YANTRA) Successes 70 VASTU YANTRA For Bulding Defect Ending 71 VIDHYA YASH VIBHUTI RAJ SAMMAN PRAD BISHA YANTRA For Education- Fame- state Award Winning 72 VISHNU BISHA YANTRA Blessing of Lord Vishnu (Narayan) 73 VASI KARAN YANTRA Attraction For office Purpose 74  MOHINI VASI KARAN YANTRA Attraction For Female 75  PATI VASI KARAN YANTRA Attraction For Husband 76  PATNI VASI KARAN YANTRA Attraction For Wife 77  VIVAH VASHI KARAN YANTRA Attraction For Marriage Purpose Yantra Available @:- Rs- 190, 280, 370, 460, 550, 640, 730, 820, 910, 1250, 1850, 2300, 2800 and Above….. GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 09338213418, 09238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- chintan_n_joshi@yahoo.co.in, gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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    106 अक्टू फय 2011 GURUTVA KARYALAY NAME OF GEM STONE GENERAL MEDIUM FINE FINE SUPER FINE SPECIAL Emerald (ऩडना) 100.00 500.00 1200.00 1900.00 2800.00 & above Yellow Sapphire (ऩुखयाज) 370.00 900.00 1500.00 2800.00 4600.00 & above Blue Sapphire (नीरभ) 370.00 900.00 1500.00 2800.00 4600.00 & above White Sapphire (वफ़द ऩुखयाज) े 370.00 900.00 1500.00 2400.00 4600.00 & above Bangkok Black Blue(फंकोक नीरभ) 80.00 150.00 200.00 500.00 1000.00 & above Ruby (भास्णक) 55.00 190.00 370.00 730.00 1900.00 & above Ruby Berma (फभाा भास्णक) 2800.00 3700.00 4500.00 10000.00 21000.00 & above Speenal (नयभ भास्णक/रारडी) 300.00 600.00 1200.00 2100.00 3200.00 & above Pearl (भोसत) 30.00 60.00 90.00 120.00 280.00 & above Red Coral (4 jrh rd) (रार भूॊगा) 55.00 75.00 90.00 120.00 180.00 & above Red Coral (4 jrh ls mij) (रार भूॊगा) 90.00 120.00 140.00 180.00 280.00 & above White Coral (वफ़द भूॊगा) े 15.00 24.00 33.00 42.00 51.00 & above Cat’s Eye (रशवुसनमा) 18.00 27.00 60.00 90.00 120.00 & above Cat’s Eye Orissa (उफडवा रशवुसनमा) 210.00 410.00 640.00 1800.00 2800.00 & above Gomed (गोभेद) 15.00 27.00 60.00 90.00 120.00 & above Gomed CLN (सवरोनी गोभेद) 300.00 410.00 640.00 1800.00 2800.00 & above Zarakan (जयकन) 150.00 230.00 330.00 410.00 550.00 & above Aquamarine (फेरुज) 190.00 280.00 370.00 550.00 730.00 & above Lolite (नीरी) 50.00 120.00 230.00 390.00 500.00 & above Turquoise (फफ़योजा) 15.00 20.00 30.00 45.00 55.00 & above Golden Topaz (वुनशरा) 15.00 20.00 30.00 45.00 55.00 & above Real Topaz (उफडवा ऩुखयाज/टोऩज) 60.00 90.00 120.00 280.00 460.00 & above Blue Topaz (नीरा टोऩज) 60.00 90.00 120.00 280.00 460.00 & above White Topaz (वफ़द टोऩज) े 50.00 90.00 120.00 240.00 410.00& above Amethyst (कटे रा) 15.00 20.00 30.00 45.00 55.00 & above Opal (उऩर) 30.00 45.00 90.00 120.00 190.00 & above Garnet (गायनेट) 30.00 45.00 90.00 120.00 190.00 & above Tourmaline (तुभरीन)ा 120.00 140.00 190.00 300.00 730.00 & above Star Ruby (वुमकाडत भस्ण) ा 45.00 75.00 90.00 120.00 190.00 & above Black Star (कारा स्टाय) 10.00 20.00 30.00 40.00 50.00 & above Green Onyx (ओनेक्व) 09.00 12.00 15.00 19.00 25.00 & above Real Onyx (ओनेक्व) 60.00 90.00 120.00 190.00 280.00 & above Lapis (राजलात) 15.00 25.00 30.00 45.00 55.00 & above Moon Stone (िडद्रकाडत भस्ण) 12.00 21.00 30.00 45.00 100.00 & above Rock Crystal (स्फ़फटक) 09.00 12.00 15.00 30.00 45.00 & above Kidney Stone (दाना फफ़यॊ गी) 09.00 11.00 15.00 19.00 21.00 & above Tiger Eye (टाइगय स्टोन) 03.00 05.00 10.00 15.00 21.00 & above Jade (भयगि) 12.00 19.00 23.00 27.00 45.00 & above Sun Stone (वन सवताया) 12.00 19.00 23.00 27.00 45.00 & above Diamond (शीया) 50.00 100.00 200.00 370.00 460.00 & above (.05 to .20 Cent ) (Per Cent ) (Per Cent ) (PerCent ) (Per Cent) (Per Cent ) Note : Bangkok (Black) Blue for Shani, not good in looking but mor effective, Blue Topaz not Sapphire This Color of Sky Blue, For Venus *** Super fine & Special Quality Not Available Easily. We can try only after getting order fortunately one or two pieces may be available if possible you can tack corres pondence about
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    107 अक्टू फय 2011 BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION We are mostly engaged in spreading the ancient knowledge of Astrology, Numerology, Vastu and Spiritual Science in the modern context, across the world. Our research and experiments on the basic principals of various ancient sciences for the use of common man. exhaustive guide lines exhibited in the original Sanskrit texts BOOK APPOINTMENT PHONE/ CHAT CONSULTATION Please book an appointment with Our expert Astrologers for an internet chart . We would require your birth details and basic area of questions so that our expert can be ready and give you rapid replied. You can indicate the area of question in the special comments box. In case you want more than one person reading, then please mention in the special comment box . We shall confirm before we set the appointment. Please choose from : PHONE/ CHAT CONSULTATION Consultation 30 Min.: RS. 1250/-* Consultation 45 Min.: RS. 1900/-* Consultation 60 Min.: RS. 2500/-* *While booking the appointment in Addvance How Does it work Phone/Chat Consultation This is a unique service of GURUATVA KARYALAY where we offer you the option of having a personalized discussion with our expert astrologers. There is no limit on the number of question although time is of consideration. Once you request for the consultation, with a suggestion as to your convenient time we get back with a confirmation whether the time is available for consultation or not.  We send you a Phone Number at the designated time of the appointment  We send you a Chat URL / ID to visit at the designated time of the appointment  You would need to refer your Booking number before the chat is initiated  Please remember it takes about 1-2 minutes before the chat process is initiated.  Once the chat is initiated you can commence asking your questions and clarifications  We recommend 25 minutes when you need to consult for one persona Only and usually the time is sufficient for 3-5 questions depending on the timing questions that are put.  For more than these questions or one birth charts we would recommend 60/45 minutes Phone/chat is recommended  Our expert is assisted by our technician and so chatting & typing is not a bottle neck In special cases we don't have the time available about your Specific Questions We will taken some time for properly Analysis your birth chart and we get back with an alternate or ask you for an alternate. All the time mentioned is Indian Standard Time which is + 5.30 hr ahead of G.M.T. Many clients prefer the chat so that many questions that come up during a personal discussion can be answered right away. BOOKING FOR PHONE/ CHAT CONSULTATION PLEASE CONTECT GURUTVA KARYALAY Call Us:- 91+9338213418, 91+9238328785. Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com, chintan_n_joshi@yahoo.co.in,
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    108 अक्टू फय 2011 वूिना  ऩत्रिका भं प्रकासळत वबी रेख ऩत्रिका क असधकायं क वाथ शी आयस्षत शं । े े  रेख प्रकासळत शोना का भतरफ मश कतई नशीॊ फक कामाारम मा वॊऩादक बी इन त्रलिायो वे वशभत शं।  नास्स्तक/ अत्रलद्वावु व्मत्रक्त भाि ऩठन वाभग्री वभझ वकते शं ।  ऩत्रिका भं प्रकासळत फकवी बी नाभ, स्थान मा घटना का उल्रेख मशाॊ फकवी बी व्मत्रक्त त्रलळेऴ मा फकवी बी स्थान मा घटना वे कोई वॊफॊध नशीॊ शं ।  प्रकासळत रेख ज्मोसतऴ, अॊक ज्मोसतऴ, लास्तु, भॊि, मॊि, तॊि, आध्मास्त्भक सान ऩय आधारयत शोने क कायण े मफद फकवी क रेख, फकवी बी नाभ, स्थान मा घटना का फकवी क लास्तत्रलक जीलन वे भेर शोता शं तो मश भाि े े एक वॊमोग शं ।  प्रकासळत वबी रेख बायसतम आध्मास्त्भक ळास्त्रं वे प्रेरयत शोकय सरमे जाते शं । इव कायण इन त्रलऴमो फक वत्मता अथला प्राभास्णकता ऩय फकवी बी प्रकाय फक स्जडभेदायी कामाारम मा वॊऩादक फक नशीॊ शं ।  अडम रेखको द्राया प्रदान फकमे गमे रेख/प्रमोग फक प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल फक स्जडभेदायी कामाारम मा वॊऩादक फक नशीॊ शं । औय नाशीॊ रेखक क ऩते फठकाने क फाये भं जानकायी दे ने शे तु कामाारम मा वॊऩादक फकवी बी े े प्रकाय वे फाध्म शं ।  ज्मोसतऴ, अॊक ज्मोसतऴ, लास्तु, भॊि, मॊि, तॊि, आध्मास्त्भक सान ऩय आधारयत रेखो भं ऩाठक का अऩना त्रलद्वाव शोना आलश्मक शं । फकवी बी व्मत्रक्त त्रलळेऴ को फकवी बी प्रकाय वे इन त्रलऴमो भं त्रलद्वाव कयने ना कयने का अॊसतभ सनणाम स्लमॊ का शोगा।  ऩाठक द्राया फकवी बी प्रकाय फक आऩत्ती स्लीकामा नशीॊ शोगी।  शभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे वबी रेख शभाये लऴो क अनुबल एलॊ अनुळॊधान क आधाय ऩय सरखे शोते शं । शभ फकवी बी व्मत्रक्त े े त्रलळेऴ द्राया प्रमोग फकमे जाने लारे भॊि- मॊि मा अडम प्रमोग मा उऩामोकी स्जडभेदायी नफशॊ रेते शं ।  मश स्जडभेदायी भॊि-मॊि मा अडम प्रमोग मा उऩामोको कयने लारे व्मत्रक्त फक स्लमॊ फक शोगी। क्मोफक इन त्रलऴमो भं नैसतक भानदॊ डं , वाभास्जक , कानूनी सनमभं क स्खराप कोई व्मत्रक्त मफद नीजी स्लाथा ऩूसता शे तु प्रमोग कताा शं अथला े प्रमोग क कयने भे िुफट शोने ऩय प्रसतकर ऩरयणाभ वॊबल शं । े ू  शभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे वबी भॊि-मॊि मा उऩाम शभने वैकडोफाय स्लमॊ ऩय एलॊ अडम शभाये फॊधगण ऩय प्रमोग फकमे शं ु स्जस्वे शभे शय प्रमोग मा भॊि-मॊि मा उऩामो द्राया सनस्द्ळत वपरता प्राद्ऱ शुई शं ।  ऩाठकं फक भाॊग ऩय एक फश रेखका ऩून् प्रकाळन कयने का असधकाय यखता शं । ऩाठकं को एक रेख क ऩून् े प्रकाळन वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं ।  असधक जानकायी शे तु आऩ कामाारम भं वॊऩक कय वकते शं । ा (वबी त्रललादो कसरमे कलर बुलनेद्वय डमामारम शी भाडम शोगा।) े े
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    109 अक्टू फय 2011 FREE E CIRCULAR गुरुत्ल ज्मोसतऴ ऩत्रिका अक्टू फय -2011 वॊऩादक सिॊतन जोळी वॊऩका गुरुत्ल ज्मोसतऴ त्रलबाग गुरुत्ल कामाारम 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA पोन 91+9338213418, 91+9238328785 ईभेर gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in, लेफ http://gk.yolasite.com/ http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/
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    110 अक्टू फय 2011 शभाया उद्दे श्म त्रप्रम आस्त्भम फॊध/ फफशन ु जम गुरुदे ल जशाॉ आधुसनक त्रलसान वभाद्ऱ शो जाता शै । लशाॊ आध्मास्त्भक सान प्रायॊ ब शो जाता शै , बौसतकता का आलयण ओढे व्मत्रक्त जीलन भं शताळा औय सनयाळा भं फॊध जाता शै , औय उवे अऩने जीलन भं गसतळीर शोने क सरए भागा प्राद्ऱ नशीॊ शो ऩाता क्मोफक े बालनाए फश बलवागय शै , स्जवभे भनुष्म की वपरता औय अवपरता सनफशत शै । उवे ऩाने औय वभजने का वाथाक प्रमाव शी श्रेद्षकय वपरता शै । वपरता को प्राद्ऱ कयना आऩ का बाग्म शी नशीॊ असधकाय शै । ईवी सरमे शभायी ळुब काभना वदै ल आऩ क वाथ शै । आऩ े अऩने कामा-उद्दे श्म एलॊ अनुकरता शे तु मॊि, ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न औय दरब भॊि ळत्रक्त वे ऩूणा प्राण-प्रसतत्रद्षत सिज लस्तु का शभंळा ू ु ा प्रमोग कये जो १००% परदामक शो। ईवी सरमे शभाया उद्दे श्म मशीॊ शे की ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे त्रलसळद्श तेजस्ली भॊिो द्राया सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त वबी प्रकाय क मडि- कलि एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩक घय तक ऩशोिाने का शै । े े वूमा की फकयणे उव घय भं प्रलेळ कयाऩाती शै । जीव घय क स्खड़की दयलाजे खुरे शं। े GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) Call Us - 9338213418, 9238328785 Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/ Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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    111 अक्टू फय 2011 OCT 2011