श्चजनको सान भेंरूचच शै , ईश्वयत्ल क प्रकाळ भें जो जीते शैं, उनको कछ कयक स्लगु भें
े ु े
जाकय वुख रेने की इच्छा नश ॊ। नक क द्ख क बम वे ऩीक्तड़त शोकय कछ कयना नश ॊ। ले तो
ु े ु े ु
वभझते शैं कक वफ भेये श अॊग शै । दामाॉ शाथ फामें की वेला कय रे तो र्कमा अलबभान कये औय
फामाॉ शाथ दादशने शाथ की वेला कय रे तो र्कमा फदरा चाशे गा ? ऩैय चरकय ळय य को कश ॊ ऩशुॉचा
दे तो र्कमा अलबभान कयें गे औय भश्चस्तष्क वाये ळय य क लरए अच्छा ननणुम रे तो र्कमा अऩेषा
े
कये गा ? वफ अॊग लबन्न लबन्न ददखते शैं, कपय बी शैं तो वबी एक ळय य क श ।
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ऐवे श वफ जानतमाॉ, वफ वभाज, वफ दे ळ लबन्न-लबन्न ददखते शैं, ले वत्म नश ॊ शैं।
जानतलाद वत्म नश ॊ शै । स्त्री औय ऩरूऴ वत्म नश ॊ शै । फाऩ औय फेटा वत्म नश ॊ शै । फेटा औय
ु
फाऩ, ऩरूऴ औय स्त्री, जानत औय उऩजानत तो कलर तयॊ गें शैं। वत्म तो उनभें चैतन्मस्लरूऩ
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जरयालळ श शै ।
ॐ....ॐ...ॐ.... नायामण... नायामण....नायामण....
नायामण का भतरफ शै ऩणु चैतन्म... याभ श याभ... आनन्द...।
ू
तुझभें याभ भुझभें याभ वफभें याभ वभामा शै ।
कय रो वबी वे प्माय जगत भें कोई नश ॊ ऩयामा शै ।।
ॐ....ॐ....ॐ....
शे द्ख दे ने लारे रोग औय शे द्ख क प्रवॊग ! शे वुख दे ने लारे रोग औय वुख क प्रवॊग
ु ु े े
! तुभ दोनों की खफ कृऩा शुई। दोनों ने भुझे मश सानरूऩी पर दे ददमा कक वुख बी वच्चा नश ॊ
ू
औय द्ख बी वच्चा नश ॊ। वुख दे ने लारा बी वच्चा नश ॊ औय द्ख दे नेलारा बी वच्चा नश ॊ।
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वुख औय द्ख दे ने लारों क भन की तयॊ गें श थीॊ। भन की तयॊ गों का आधाय भेया चैतन्म
ु े
आत्भदे ल लशाॉ बी ऩूणु का ऩूणु था। ॐ....ॐ.....ॐ..... नायामण.... नायामण.... नायामण....।
ददव्म आनन्द.....। भधय आनन्द.... ! ऩयभानन्द.... ! ननवलुकाय आनन्द....! ननयन्जन
ु
आनन्द...! ॐ.....ॐ.....ॐ....
नय-नाय भें फवा शुआ... वुखी-द्खी भें फवा शुआ... अऩने ऩयामे भें छऩा शुआ ऩयभात्भा
ु ु
भें छऩा शुआ बी शै , जादशय बी शै .... अन्नत शै ... ननवलुकाय शै .... ननयॊ जन शै ....।
ु
ऐवी बूर दननमाॉ क अन्दय वाफूत कयणी कयता तू।
ु े
ऐवो खेर यच्मो भेये दाता ज्मों दे खूॉ ला तू को तू।।
कीड़ी भें नानो फन फैठो शाथी भें तू भोटो र्कमूॉ ?
फन भशालत ने भाथे फेठो शौंकणलारो तू को तू।।
दाता भें दाता फन फैठो लबखाय क बेऱो तू।
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रे झोऱी ने भागण रागो दे लालाऱो दाता तू।।
चोयों भें तू चोय फन फेठो फदभाळों क बेऱो तू।
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कय चोय ने बागण रागो ऩकड़ने लाऱो तू को तू।।
37.
नय नाय भेंएक वलयाजे दननमाॉ भें दो ददखे र्कमूॉ।
ु
फन फारक ने योला रागो याखणलाऱो तू को तू।।
जर थर भें तू श वलयाजे जॊत बूत क बेऱो तू।
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कशत कफीय वुनो बाई वाधो गुरू बी फन क फेठो तू।।
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वलळार उदचध की जरयालळ भें बॉलय बी तू श शै औय तयॊ ग बी तू श शै । फुरफुरे बी तू
श शै औय जर क टकयाने वे फनने लार पन बी तू श शै । जर भें ऩैदा शोने लार ळैलार बी तू
े े
श शै ।
अनक्रभ
ु
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
आश्चस्तक का जीलन-दळुन
नाश्चस्तक रोगों ने बगलान को नश ॊ दे खा, नश ॊ जाना, इवलरए ले बगलान को नश ॊ भानते।
आश्चस्तक रोग बगलान को भानते तो शैं, रेककन ले बी अऩने रृदम भें फैठे शुए बगलान का आदय
नश ॊ कयते। याभतीथु कशा कयते थे् "मे रोग बगलान को, खदातारा को वातलें आवभान भें
ु
श्चस्थत भानते शैं। कभ-वे-कभ खदातारा ऩय इतनी तो दमा कयो कक वातलें आवभान भें उवको
ु
कश ॊ ठण्ड न रग जाम !
बगलान कलर गौरोक भें , वाकत भें , लैकण्ठ भें मा लळलरोक भें श नश ॊ शै , अवऩतु ले तो
े े ु
वलुि ओतप्रोत अनॊत-अनॊत ब्रह्माण्डों भें परे शैं। ले श बगलान तुम्शाया आत्भा शोकय फैठे शैं।
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कल्ऩना कयो कक दशभारम जैवा ळर्ककय का एक फड़ा ऩशाड़ शै । ळर्ककय क इव ऩूये
े
दशभारम को एक चीॊट जानना चाशे तो घूभते घूभते मुग फीत जाम। अगय मुक्ति आ जाम, लश
ऩशाड़ ऩश जशाॉ खड़ी शै , लश ॊ ळर्ककय को चख रे तो उवी वभम लश ॊ ऩय उवको ळर्ककय क वाये
े
दशभारम का वाषात्काय शो जाम।
शभाय लवत्त ऐदशक जगत भें वुख खोजती शै । लश भत्मु क फाद स्लगु भें , लैकण्ठ भें मा
ृ ृ े ु
लळलरोक भें जाकय वुखी शोने की कल्ऩना भें उरझती शै । इव उरझन वे शटकय लवत्त जशाॉ वे
ृ
उठती शै , लश ॊ अऩने अचधिान को जान रे तो स्लमॊ वुखस्लरूऩ शो जाम। जशाॉ लश खड़ी शै , लश ॊ
उवकी मािा ऩूय शो जाम। 'लशाॉ जाऊ... मश ऩा रॉ ू.... लश कय रॉ ू.... तो वुखी शो जाऊ....' मश जो
ॉ ॉ
भन भें कल्ऩना घवी शै , असान घवा शै , इव असान को आत्भसान वे लभटाकय जील जफ अऩने-
ु ु
आऩ भें जाग जाता शै तो ऩणु वख का औय ऩणु ननबुमता का अनबल शो जाता शै । ननबीक
ू ु ू ु
वलचाय कयने वे श ननबीकता का अनबल शो जाता शै । भक्ति का वलचाय कयने वे श अऩने भि
ु ु ु
स्लबाल का अनबल शोता शै । द्ख फन्धन औय बम क वलचाय कयने वे अऩनी शानन शोती शै ।
ु ु े
38.
शभाये भन भेंअदबुत ळक्ति शै । भन की कल्ऩनाओॊ वे श शभ वॊवाय भें उरझते शैं। जील
वदा चचश्चन्तत-बमबीत यशता शै कक भेया मश शो जामगा तो र्कमा शोगा... लश शो जामगा तो र्कमा
शोगा....? ऐवी कल्ऩना कयक द्खी र्कमों शोना ? वदा ननश्चिन्त यशना चादशए औय ऐवा वोचना
े ु
चादशए कक भेया कबी कछ त्रफगड़ नश ॊ वकता।
ु
आदभी जैवा बीतय वोचता शै , लैवी श आत्भा उवक ळय य क इदु -चगदु फनती शै , परती शै । फाह्य
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लातालयण वे श वजातीम वॊस्कायों को बी आकवऴुत कयती शै । आऩ भुक्ति क वलचाय कयते शो तो
े
भक्ति का आन्दोरन औय आबा फनती शै । भि ऩरूऴों क वलचाय आऩको वशमोग कयते शैं। आऩ
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बम औय फन्धन क वलचाय कयते शो तो आऩकी आबा लैवी श फनती शै । अगय आऩ घणा क
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वलचाय कयते शो, चोय औय डकती क वलचाय कयते शो लश आबा चोयों औय डकतों को चोय
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डकती क लरए आभॊत्रित कयती शै । आऩकी आबा वन्दय औय वशालनी शै तो उवी प्रकाय की
ै े ु ु
आबा औय वलचाय आऩकी औय णखॊच जाते शैं।
भेये ऩाव एक जेफकतया आमा। अऩनी ब्रेड तोड़कय भेये ऩैयों भें यख द औय शाथ जोड़कय
फोरा् "स्लाभी जी ! आऩ आळीलाुद दो कक भुझे रयर्कळा लभर जाम औय भैं अच्छा धन्धा करू।
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आऩक वत्वॊग भें आमा तफ वे ननिम ककमा कक अफ ऩाऩ का धन्धा नश ॊ करूगा।"
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"र्कमा धन्धा कयता था ?"
"जेफकतया था।"
"अफ तो छोड़ ददमा शै न ?"
"शाॉ स्लाभी जी !"
"अच्छा... अफ वच फताओ कक तुभको कवे ऩता चरता शै कक ककवी व्मक्ति क ऩाव ऩैवे
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शैं ?"
"स्लाभी जी ! मश तो वीधी वी फात शै । श्चजनक ऩाव ऩैवे शोते शैं, उनका शाथ फाय-फाय
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जेफ ऩय जाता शै । ले बमबीत यशते शैं कक जेफ कश ॊ कट न जाम... कट न जाम...। शभे इववे
आभॊिण लभर जाता शै कक मश ॊ ब्रेड घुभाना चादशए।"
दवया एक रड़का आता था ऩारनऩुय वे। अभदालाद आश्रभ भें आने क लरए उवने ट्रे न
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का ऩाव ननकरलामा था। उवने भुझवे कशा कक् "स्लाभी जी ! भैं शभेळा अभदालाद आता जाता
शूॉ, कबी भेय दटकट चेक नश ॊ शोता। रेककन श्चजव ददन भैं ऩाव घय ऩय बूर आता शूॉ मा ऩाव की
अलचध ऩूय शो जाती शै , तबी ट .ट .ई. भेया चेककॊग कयते शैं औय भैं पव जाता शूॉ। भुझे फड़ा
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आिमु शोता शै कक मे रोग मोग, ध्मान आदद तो कछ कयते नश , लवगये ट ऩीते शैं। उनको कवे
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ऩता चर जाता शै कक आज भेये ऩाव 'ऩाव' नश ॊ शै मा उवकी ताय ख खत्भ शो चकी शै ?"
ु
भैंने उवे वभझामा् "ट .ट .ई. को तो ऩता नश ॊ चरता शै रेककन तेये को ऩता शोता शै कक
'आज भैं ऩाव बूर गमा शूॉ।' तेये चचत्त भें डय यशता शै कक, 'लश कश ॊ ऩूछ न रें .... ऩकड़ न रें।'
39.
तेये इन वलचायोकी आबा तेये इदु चगदु फनती शै औय ट .ट .ई. को आभॊत्रित कयती शै कक इवकी
तराळी रो।"
तुम्शाये वलचायों का ऐवा चभत्कारयक प्रबाल ऩड़ता शै । तुभ जफ आश्चत्भक वलचाय कयते शो,
तफ वलुव्माऩक ईश्वयतवल भें , गुरूतवल भें जो आत्भा की भुिता शै , लश तुम्शें वशाम कयती शै ।
तुभ जफ द्ख, बम, फन्धन क वलचाय कयते शो, तफ लातालयण भें जो शल्क वलचाय परे शुए शैं,
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ले तुम्शें घेय रेते शैं औय तुभ अचधकाचधक चगयते श चरे जाते शो।
'भैं वलश्वात्भा शूॉ.... भेया जन्भ नश .... भेय भत्मु नश ॊ...' इव प्रकाय का जो चचन्तन कयता
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शै , लश अऩने ळद्ध 'भैं' भें जाग जाता शै । तम्शाया भन एक कल्ऩलष शै । फन्धन क वलचाय कयने
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वे अन्त्कयण फन्ध जाता शै । अगय तभ अऩने को फन्धनलारा भानते शो तो तभ ककव फात वे
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फॉधे शो ? रूऩमों वे फॉधे शो ? रूऩमे तो ककतने आमे औय चरे गमे। तभ अगय रूऩमों वे फॉधे शोते
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तो तभ बी चरे जाते। लभिों वे फॉधे शो ? कई लभि फचऩन भें आमे, ककळोयालस्था भें आमे औय
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जलानी भें आमे, फीत गमे। आज ले नश ॊ शैं। कोई नश ॊ... कोई नश ... वफ त्रफखय गमे। कऩड़ों वे
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फॉधे शो ? फचऩन वे रेकय आज तक तुभने कई कऩड़े फदर ददमे। घय वे फॉधे शो ? नश ॊ। लास्तल
भें तुभ ककवी चीज वे फॉधे नश ॊ शो। अऩनी भदशभा तुभ नश ॊ जानते, अऩनी भुिता को तुभ नश ॊ
जानते, इवलरए चचत्त क पयने क वाथ तुभ जुड़ जाते शो औय फॉध जाते शो।
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ककवी याजा ने वॊत कफीय वे प्राथुना की कक् "आऩ कृऩा कयक भुझे वॊवाय फन्धन वे
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छड़ाओ।"
ु
कफीय जी ने कशा् "आऩ तो धालभुक शो... शय योज ऩॊक्तडत वे कथा कयलाते शो, वुनते
शो..."
"शाॉ भशायाज ! कथा तो ऩॊक्तडत जी वुनाते शैं, वलचध-वलधान फताते शैं, रेककन अबी तक
भुझे बगलान क दळुन नश ॊ शुए शैं... अऩनी भुिता का अनुबल नश ॊ शुआ। आऩ कृऩा कयें ।"
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"अच्छा भैं कथा क लि आ जाऊगा।"
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वभम ऩाकय कफीय जी लशाॉ ऩशुॉच गमे, जशाॉ याजा ऩॊक्तडत जी वे कथा वुन यशा था। याजा
उठकय खड़ा शो गमा र्कमोंकक उवे कफीय जी वे कछ रेना थ। कफीय जी का बी अऩना
ु
आध्माश्चत्भक प्रबाल था। ले फोरे्
"याजन ! अगय कछ ऩाना शै तो आऩको भेय आसा का ऩारन कयना ऩड़ेगा।"
ु
"शाॉ भशायाज !"
"भैं तख्त ऩय फैठूॉगा। लजीय को फोर दो कक भेय आसा का ऩारन कये ।"
याजा ने लजीय को वूचना दे द कक अबी मे कफीय जी याजा शै । ले जैवा कशें , लैवा
कयना।
40.
कफीय जी कशाकक एक खम्बे क वाथ याजा को फाॉधो औय दवये खम्बे क वाथ ऩॊक्तडत
े ू े
जी को फाॉधो। याजा ने वभझ लरमा कक इवभें अलश्म कोई यशस्म शोगा। लजीय को इळाया ककमा
कक आसा का ऩारन शो। दोनों को दो खम्बों वे फाॉध ददमा गमा। कफीय जी ऩॊक्तडत वे कशने रगे्
"दे खो, याजा वाशफ तुम्शाये श्रोता शैं। ले फॉधे शुए शैं, उन्शें तुभ खोर दो।"
"भशायाज ! भैं स्लमॊ फॉधा शुआ शूॉ। उन्शें कवे खोरॉ ू ?"
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कफीय जी ने याजा वे कशा् "मे ऩॊक्तडत जी तुम्शाये ऩुयोदशत शैं। ले फॉधे शुए शैं। उन्शें खोर
दो।"
"भशायाज ! भैं स्लमॊ फॉधा शुआ शूॉ, उन्शें कवे खोरॉ ू ?"
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कफीय जी ने वभझामा्
फॉधे को फॉधा लभरे छटे कौन उऩाम।
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वेला कय ननफुन्ध की ऩर भें दे छड़ाम।।
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'जो ऩॊक्तडत खद स्थर 'भैं'
ु ू फॉधा शै , वक्ष्भ 'भैं' भें फॉधा शै , उवको फोरते शो कक भझे
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बगलान क दळुन कया दो ? स्थर औय वूक्ष्भ अशॊ वे जो छटे शैं, ऐवे ननफुन्ध ब्रह्मलेत्ता की वेला
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कयक उन्शें रयझा दो तो फेड़ा ऩाय शो जाम। ले तुम्शें उऩदे ळ दे कय ऩर भें छड़ा दें गे।"
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भानो, कोई बगलान आ बी जाम तुम्शाये वाभने, रेककन जफ तक आत्भसानी गुरू का
सान नश ॊ लभरेगा, तफ तक वफ फॊधन नश ॊ कटें गे। आनन्द आमगा, ऩुण्म फढें गे, ऩय आत्भसान
की कजी क त्रफना जील ननफुन्ध नश ॊ शोगा।
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दमोधन औय ळकनन ने श्रीकृष्ण क दळुन ककमे थे। ईश्वय प्रानप्त की रगन न शोने क
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कायण उन्शोंने पामदा नश ॊ उठामा। भशालीय को कई रोगों ने दे खा था, भुशम्भद क वाथ कई
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रोग यशते थे। जीवव जफ क्रॉव ऩय चढामे जा यशे थे औय उनक शाथों ऩय कीरें ठोंक जा यशे थे
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तो कई रोग दे ख यशे थे।
वॊत बगलॊत क दळुन औय वाश्चन्नध्म का ऩूया राब तफ शोगा जफ उनका आत्भसानऩयक
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उऩदे ळ वुनकय आऩ ननबुम तवल भें अऩने भैं की श्चस्थनत कयें गे। इवक लरए चादशए उत्कण्ठा..
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इवक लरए श्चजसावा... इवक लरमे चादशए वदगुरूओॊ का कृऩा प्रवाद, प्राप्त शो ऐवा आचयण औय
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व्मलशाय।
गुरूओॊ का सान मश शै कक तुभ ननबीकता क वलचाय कयो। ननबीकता लश नश ॊ, जो दवयों
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का ळोऴण कये । जो दवयों का ळोऴण कयता शै , दवयों को डयाता शै , लश स्लमॊ बमबीत यशता शै ।
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न आऩ बमबीत शो औय न दवयों को बमबीत कयो। आऩ ननबुम यशो औय दवयों को ननबुम
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फनाओ। आऩ ननद्वु न्द्व फनो औय दवयों को ननद्वु न्द्व तवल भें रे जाओ। आऩ जो फाॉटोगे, लश लाऩव
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लभरेगा। आऩ ननबुमता क वलचाय कयो। अऩने ननबुमस्लरूऩ की ओय ननगाश यखो।
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वुनी शै एक कशानी। एक ब्रह्मलेत्ता वूपी पकीय अऩने प्माये लळष्म क वाथ कश ॊ जा यशे
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थे। यास्ते भें फदढमा भाशौर दे खा... खरा आकाळ.... ळाॊत लातालयण.... ननजुन लन का एकाॊत
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41.
स्थान.... फैठ गमेध्मान भें । कछ वभम फीता। ऩाव क बमानक जॊगर भें ळेय दशाड़ने रगा।
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फाफाजी तो वभाचध भें थे, रेककन चेरा जी तो थय-थय काॉऩने रगे। ळेय की आलाज नजद क आने
रगी।
चेरा जी चढ गमे ऩेड़ ऩय। ळेय आकय गुरूजी क अॊगों को वॉूघता शुआ आगे चरा गमा।
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कछ वभम फीता। गुरूजी ध्मान वे जागे। चेरा बी नीचे उतया। काॉऩ यशा था। अबी बी। गुरूजी
ु
फोरे्
"र्कमा शुआ ?"
"गरूजी ! ळेय आमा था। आऩको वॉघकय चरा गमा।"
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अफ दोनों आगे चरने रगे। इतने भें गरूजी को भच्छय ने काटा। गरूजी ने 'आशा...'
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कयक भच्छय को उड़ामा। चेरा फोरा्
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"जफ ळेय आमा तो आऩ चऩचाऩ फैठे यशे औय भच्छय ने काटा तो...."
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गरूजी ने कशा् "जफ ळेय आमा तफ भैं अऩने ळद्ध "भैं" भें था। अफ भेय लवत्त इव शाड़-
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भाॊव क दे श भें आ गई शै , इवलरए भच्छय ने काटा तो बी आश ननकर यश शै ।"
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एक फाफाजी कथा कय यशे थे। जोयों का आॉधी तूपान चरने रगा। श्रोता रोग बाग खड़े
शुए र्कमोंकक छऩड़े क दटन खड़खड़ा यशे थे, कश ॊ चगय न जामें ! जशाॉ ऩर्कका ळेड था, लशाॉ वफ
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रोग चरे गमे। थोड़ी दे य क फाद तूपान रूक गमा। वफ लाऩव आमे। फाफाजी अऩने आवन ऩय
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ननिर वलयाजभान थे।
"फाफाजी ! तुभ बी बागे, शभ बी बागे। तुभ बी आय.वी.वी. क ळेड क नीचे बागे औय भैं
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अऩने ळुद्ध 'भैं' भें बागा, इवलरए ननबुम शो गमा।"
अत् जफ जफ डय रगे, तफ अऩने ळुद्ध 'भैं' की ओय बाग जाओ। शो-शोकय र्कमा शोगा ?
भैं ननबीक शूॉ। ॐ....ॐ.....ॐ..... भैं अभय आत्भा शूॉ....शरय.... ॐ....ॐ....ॐ....।
भौत क वभम शाम-शाम कयक डयोगे तो गड़फड़ शो जामगी... भौत त्रफगड़ जामगी। भौत
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को बी वुधयना शै । भौत तो आमेगी श । चाशे ककतनी बी वुयषाएॉ कय रो। भौत आमे तफ
वोचो... वभझो भैं ननबीक शूॉ। भौत भेय नश ॊ शोगी, ळय य की शोगी। ळय य की भौत को दे खना
शै । जैवे ळय य क कोट, ऩेन्ट, ळटु को दे खते शैं, ऐवे ळय य की भौत को बी दे ख वकते शैं। जो
े
भौत क वभम वालधान शो जाम, ननबीक शो जामे, उवकी दफाया कबी भौत नश ॊ शोती। लश अभय
े ु
आत्भा भें जग जाता शै । मश काभ तो अलश्म कयना शै । दवया काभ शो चाशे न शो, चर जामगा।
ू
अनुक्रभ
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
42.
भधु वॊचम
असान को लभटाओ
जफ-जफ द्ख शो, ऩये ळानी शो, बम शो, तफ वभझ रेना कक मश असान की उऩज शै ।
ु
कश ॊ न कश ॊ नावभझी को ऩकड़ा शै , इवलरए द्ख शोता शै । वलकाय उठे तो वभझ रो कक
ु
नावभझी शै , इवलरए फश गमे शो वलकाय भें । कपय फशते श न यशो, वालधान शो जाओ। वलकायों ने
वफक लवखा ददमा कक इवभें कोई वाय नश ॊ। ऩये ळानी क लवलाम औय कछ नश ॊ शै । भोश ने लवखा
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ददमा कक इवभें भुवीफत क लवलाम औय कछ नश ॊ शै ।
े ु
काभ ळाश्वत नश ॊ शै , याभ ळाश्वत शै । काभ आमा औय गमा, रेककन याभ तो ऩशरे बी था,
अफ बी शै औय फाद भें बी यशे गा। अऩने याभ स्लबाल को जानो.... अऩने ळाॊत स्लबाल को
जानो... अऩने अभय स्लबाल को जानो, अऩने चचदघन चैतन्म याभ को जानो। उव याभ को
जाननेलारा याभ वे अरग नश ॊ यशता। लश याभभम शो जाता शै ।
अनक्रभ
ु
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
करयए ननत वत्वॊग को....
वॊगदोऴ जैवी फुय चीज वॊवाय भें औय कोई नश ॊ शै । बीड़-बाड़ भें , वलकाय रोगों क फीच
े
यशना अच्छा नश ॊ। एकान्त भें यशना चादशए मा बगलान की भस्ती भें भस्त यशने लारे उच्च
कोदट क वाधकों क फीच यशना चादशए। ले वाधक भशवूव कयते शैं कक अफ इश्चन्िमों क प्रदे ळ भें
े े े
ज्मादा घूभना, जीना अच्छा नश ॊ रगता। इश्चन्िमातीत आत्भबाल भें श वच्चा वुख शै । जान लरमा
कक वॊवाय क कीचड़ भें कोई वाय नश ॊ, जान लरमा कक तयॊ ग फनकय ककनायों वे टकयाने भें कोई
े
वाय नश ... अफ तो भुझे जरयालळ भें श , आत्भानन्द क भशावागय भें श अच्छा रगता शै । अफ
ॊ े
तो ऐवा रगता शै कक्
"लभर जाम कोई ऩीय पकीय ऩशुॉचा दे बल ऩाय....।"
अनक्रभ
ु
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
वालधान.....!
अनुबली आदभी प्रकृनत की एकाध थप्ऩड़ वे चेत जाता शै औय नश ॊ चेतेगा तो दवय
ू
लभरेगी, तीवय लभरेगी। वॊवाय भें थप्ऩड़ भाय-भयकय प्रकृनत तुम्शें ऩयभात्भा भें ऩशुॉचाना चाशती
शै । वभझकय ऩशुॉचना शै तो तुम्शें शॉवते-खेरते शुए ऩशुॉचा दे ने क लरए लश प्रकृनत दे ली तैमाय शै ।
े
43.
अगय नश ॊभानते शो, वॊवाय भें भोश भभता कयते शो तो भोश-भभता की चीजें छ नकय, थप्ऩड़ें
भायकय बी तुम्शें जगाने क लरए लश प्रकृनत दे ली वकक्रम शै । लश शै तो आणखय ऩयभात्भा की श
े
आह्लाददनी ळक्ति। लश तुम्शाय ळिु नश ॊ शै , ळुबचचन्तक शै ।
अनुक्रभ
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
तर्कमुताभ.... भा कतर्कमाुताभ ्
् ु
आजकर क ककवी नाश्चस्तक वुधायक की ऩढ -लरखी रड़की ककवी वत्वॊग क घय ळाद
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कयक गई। वाव ने कशा्
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"फशू ! चरो भॊददय भें दे लदळुन कयें ।"
"शाॉ शाॉ....कबी चरेंगे। आज तो भुझे वऩर्कचय दे खने जाना शै ।2
फेट दे लदळुन कयो तो जीलन का कल्माण शोले। वऩर्कचयों वे तो आॉखों की ळक्ति षीण
शोती शै । फन्द चथमेटयों भें ऐवे लैवे रोगों क श्वावोच्छालाव, अऩानलामु, फदफू की अळुवद्ध प्रचय
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भािा भें शोती शै । अळाॊनत औय वलराव क लामब्रेळन अऩना अॊत्कयण भलरन कयते शैं।"
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"भाता जी ! आऩ चचन्ता भत कयो। शभें तो भजा आता शै । आऩ भॊददय भें जाओ। भैं
ऩयवों-तयवों आऩक वाथ चरॉ ूगी। आज तो....।"
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इव प्रकाय वाव जी को टारते-टारते आणखय उव वुधायक क ऩरयलाय वे आमी शुई
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आधननक रड़की ने एक ददन वावजी क वाथ भॊददय जाना कफूर ककमा। उवने अऩने नाज
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नखयों वे ऩनत को लळ कय लरमा था औय वाव को फेलकप भानती थी।
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बगलान ने अर्कर तो द शै रेककन बिों को फेलकप भाननेलार जो अर्कर शै , लश दे य
ू
वलेय नष्ट शो जाती शै । तक ठ क शै , रेककन कतक कयक बि की श्रद्धा तोड़ना अथला कतक
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कयक अऩने वलऴम वलकायों को ऩोवना, बक्ति औय वदाचाय क भागु को छोड़ दे ना, मश तो ऩूये
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त्रफगाड़ की ननळानी शै ।
नाश्चस्तक वधायक क घय भें ऩनऩी शुई लश पळनेफर रड़की शाय-ळॊगाय वे दे श को वजाकय
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भॊददय भें गई। भॊददय का द्वाय आते श लश चीखी।
"भैं भय गई ये ... भझे फचाओ.... फचाओ... फड़ा डय रगता शै !"
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वाव ने ऩछा् "आणखय र्कमा शुआ ?"
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"भझे फशुत डय रगता शै । भैं अॊदय नश ॊ आ वकती। भझे घय रे चरो। भेया ददर धड़कता
ु ु
शै ... भेया तन काॉऩता शै ।"
"अये ! फोर तो वश , शै र्कमा ?"
"लश दे खो, भॊददय क द्वाय ऩय दो-दो ळेय भॉुश पाड़कय खड़े शैं। भैं कवे अॊदय जाऊगी ?"
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44.
वाव ने कशा्"फेट ! मे दो ळेय शैं, रेककन ऩत्थय क शैं। मे काटें गे नश ... कछ नश ॊ
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कयें गे।"
लश रड़की अकड़कय फोर ् "जफ ऩत्थय क ळेय कछ नश ॊ कयें गे तो भॊददय भें तुम्शाया
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ऩत्थय का बगलान बी र्कमा कये गा ?"
उव ऩढ लरखी भूखु स्त्री ने तक तो दे ददमा औय बोरे-बारे रोगों को रगेगा कक फात तो
ु
वच्ची शै । ऩत्थय क लवॊश काटते नश , कछ कयते नश ॊ तो ऩत्थय क बगलान र्कमा दें गे ? जफ मे
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भायें गे नश ॊ तो ले बगलान वॉलायें गे बी नश ॊ। उव कतक कयने लार रड़की को ऩता नश ॊ कक
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ऩत्थय क लवॊश त्रफठाने की औय बगलान की भनतु प्रनतित कयने की प्रेयणा श्चजन ऋवऴमों ने द शै ,
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ले ऋवऴ-भशवऴु-भनीवऴमों की दृवष्ट ककतनी भशान औय लैसाननक थी ! ऩत्थय की प्रनतभा भें शभ
बगलदबाल कयते शैं तो शभाया चचत्त बगलदाकाय शोता शै । ऩत्थय की प्रनतभा भें बगलद बाल शभाये
चचत्त का ननभाुण कयता शै , चैतन्म क प्रवाद भें जागने का यास्ता फनाता शै ।
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भनतुऩजा कयते-कयते, ऩयभात्भा क गीत गाते-गाते भीया ऩयभ चैतन्म भें जाग गई थी।
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आणखय उव भूनतु भें वभा गई थी। गौयाॊग वभा गमे थे जगन्नाथजी क श्रीवलग्रश भें । एक ककवान
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की रड़की नयो श्रीनाथ जी क आगे दध धयती थी। श्रीनाथ जी उवक शाथ वे दध रेकय ऩीते थे।
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थी तो लश बी भूनतु।
तुम्शाये अन्त्कयण भें ककतनी ळक्ति नछऩी शुई शै ! भूनतु बी तुभवे फोर वकती शै । इतनी
तो तुम्शाये चचत्त भें ळक्ति शै औय चचत्त क अचधिान भें तो अनॊत-अनॊत ब्रह्माण्ड वलरलवत शो यशे
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शैं। मश सान जगाने क लरए भॊददय का दे लदळुन प्रायॊ लबक कषा शै । बरे फार भॊददय शै , कपय बी
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अच्छा श शै ।
उव भूखु रड़की वे कशना चादशए् "जफ तू चरचचि दे खकय शॉ वती शै , नाचती शै , योती शै ,
शाराॉकक प्राश्चस्टक की ऩट्टी क लवलाम कछ बी नश ॊ शै , कपय बी आशा..... अदबुत... कशकय तू
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उछरती यशती शै । ऩयदे ऩय तो कछ नश ॊ, वचभुच भें गुन्डा नश , ऩुलरव नश ... ऩुलरव क कऩड़े
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ऩशन कय अलबनम ककम शै । रयलाल्लय बी वच्ची नश ॊ शोती। कपय बी गोर भायते शैं, ककवी को
शथकक्तड़माॉ रगती शैं, डाक डाका डारकय बागता शै , उवक ऩीछे ऩुलरव की गाक्तड़माॉ दौड़ती शैं।
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ड्रामलय स्टे रयॊग घुभाते शैं..... ॐऽऽऽऽ.....ॐ, तफ तुभ वीट ऩय फैठे-फैठे घूभते शो कक नश ॊ घूभते
शो ? जफकक ऩदे ऩय प्रकाळ क चचिों क अराला कछ नश ॊ शै ।
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ऐवा झठ चरचचि का भाशौर बी तुम्शाये ददर को औय फदन को घुभा दे ता शै तो ऋवऴमों
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क सान औय उनक द्वाया प्रचलरत भूनतुऩूजा बिों क रृदमों को बाल वे, प्राथुना वे, ऩयभात्भ-प्रेभ
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वे बय इवभें र्कमा आिमु शै ?
ब्रह्मलेत्ता ऋवऴ-भशवऴुमों द्वाया यचचत ळास्त्रों क अनुवाय भॊिानुिानऩूलक वलचधवदशत भॊददय भें
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बगलान की भूनतु स्थावऩत की जाती शै । कपय लेदोि-ळास्त्रोि वलचध क अनुवाय प्राण-प्रनतिा शोती
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शै । लशाॉ वाध-वॊत-भशात्भा आते जाते शैं। भनतु भें बगलदबाल क वॊकल्ऩ को दशयाते शैं। शजायों-
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45.
शजायों बि अऩनीबक्ति-बालना को अभूतु तवल का आनन्द लभर जाम, तो इवभें र्कमा वन्दे श शै
?
फड़े फड़े भकानों भें यशने लारे वबी रोग वश भाने भें फड़े नश ॊ शोते। फड़ी-फड़ी कब्रों के
अन्दय वड़ा गरा भाॊव औय फदफू शोती शै , त्रफच्छ औय फैर्कट रयमा श शोते शैं। फड़ी गाक्तड़मों भें
ू
घूभने आदभी फड़ा नश ॊ शोती, फड़ी कवी ऩय ऩशुॉचने वे बी लश फड़ा नश ॊ शोता। अगय फड़े वे फड़े
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ऩयभात्भा क नाते लश वेला कयता शै , उवक नाते श अगय फॊगरे भें प्रायब्ध लेग वे यशता शै तो
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कोई आऩवत्त नश ॊ। रेककन इन चीजों क द्वाया जो ऩयभेश्वय का घात कयक अऩने अशॊ को ऩोवता
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शै , लश फड़ा नश ॊ कशा जाता।
ऐवा ऐवा श फड़ा कम्मुननस्ट आदभी था। लश भानता था कक बगलान आदद कछ नश ॊ
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शोते। लश अऩने-आऩको कछ वलळेऴ व्मक्ति भानता था। उवक ऩाव तकळक्ति थी, श्चजवका उऩमोग
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कयक लश श्रद्धारु बिों की श्रद्धा तोड़ने की शयकतें फेखटक ककमा कयता था। ऩयन्तु फड़े-वे-फड़े
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वलश्वननमन्ता वलश्वेश्वय की र रा अनूठ शै । ककव आदभी को कवे भोड़ना, लश जानता शै ।
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उव कम्मुननस्ट का एक रड़का था। लश अच्छे वॊग भें यशता था। उवका लभि उवे ककवी
भशात्भा क वत्वॊग भें रे गमा। फचऩन वे श उवक चचत्त भें अच्छे वाश्चवलक वॊस्काय ऩड़ चक थे।
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उवे बक्ति, वत्वॊग, कीतुन, दे लदळुन भें यव आता था। फेटा ऩूया आश्चस्तक था औय फाऩ ऩूया
नाश्चस्तक। धीये -धीये लश वदबागी फेटा फड़ा शुआ।
एक ददन फाऩ ने उवे डाॉटा् "वत्वॊग, भॊददय आदद भें जाकय तू वभम र्कमों खयाफ कयता शै
? बगलान जैवी कोई चीज शै श नश ॊ। मश तो वाध, भशायाज, भुल्रा, भौरली औय ऩादरयमों ने
ु
अऩना धन्धा चराने क लरए एक प्रकाय की धभ भचा द शै , फाकी बगलान शै नश ॊ।"
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ऩुि ने कशा् "वऩताजी ! कोई चीज फनी शुई शोती शै तो जरूय उवका कोई फनाने लारा बी
शोता शै । ऐवे श इतनी फड़ी दननमाॉ शै तो जरूय उवका कोई फनाने लारा बी शोगा।"
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वऩता ने कशा् "जा, ऩागर कश ॊ का। गभी औय गनत वे मश वाया वलश्व फन जाता शै । जैवे
गभी वे ऩानी लाष्ऩीबत शुआ, फादरों भें गनत शुई औय कपय कश ॊ जाकय फयवे।
ू
दशभारम भें फप थी। उवे वमु की गभी लभर । फप वऩघर । कपय उवभें गनत आई। लश
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ऩानी गॊगा शोकय वभि भें जा लभरा। इव प्रकाय गभी औय गनत व मश वाय दननमाॉ फनी शै ।
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जैवे घड़ी क अरग-अरग ऩजे लभरा ददमे। उवको वेर वे जोड़ ददमा। गभी लभर । उवक
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काॉटों भें गनत आई। घड़ी वभम त्रफताने रगी। घॊट बी फजने रगी। खद घभती बी शै , फोरती बी
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शै औय वभम त्रफताकय रोगों को दौड़ाती बी शै । कौन वा बगलान शै इव दननमाॉ भें ? छोड़ो मश
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वाया ऩागरऩन। गभी औय गनत वे श मश वॊवाय फन गमा औय चर यशा शै ।"
वभम शोने ऩय रड़का स्कर भें गमा। जो वाधक शोता शै , लश कयने भें वालधान औय
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शोने भें प्रवन्न यशता शै । उवक स्लबाल भें मश स्लाबावलक श आ जाता शै । इव प्रकाय श्चजवका
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चचत्त वाश्चवलक श्रद्धा वे मुि यशता शै , उवभें ळाश्चन्त औय ददळावूचक वशज श आ जाती शै ।
46.
रड़क ने एककागज लरमा। उव ऩय वुन्दय वुशालना चचि फनामा औय स्कर वे आकय
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वऩता क कभये भें लश चचि यख ददमा। वऩताजी दफ्तय वे रौटे तो चचि दे खकय उनकी वलचचि
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खोऩड़ी भें बी आनन्द औय आिमु क बाल उबयने रगे। ऩूछा्
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"भेये कभये भें मश चचि ककवने यखा शै ?"
"वऩता जी ! भैंने यखा शै ।" फेटे ने कशा।
"ककवने फनामा शै ?"
"मश फनामा ककवी ने बी नश ॊ शै ।"
"तो मश फना कवे ?"
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"वऩता जी ! स्कर भें कागज का रयभ (श्चजस्ता) ऩड़ा था। उवभें वे एक कागज गनत ळक्ति
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वे उड़कय भेज ऩय आ गमा। स्माश भेज ऩय ऩड़ी थी, जो गभी ळक्ति वे कागज ऩय ढुर गमी।
इव प्रकाय गभी औय गनत ळक्ति दोनों लभर गई तो शो गमा चचि तैमाय।"
वऩता गयज उठा् "तू भझे भखु फनाता शै ? गनत ळक्ति वे रयभ भें वे कागज भेज ऩय आ
ु ू
जाम, गभी ळक्ति वे स्माश दलात भें वे कागज ऩय ढुर ऩड़े औय ऐवा वुन्दय चचि अऩने-आऩ
फन जाम, मश अवॊबल शै । तूने, तेये दोस्त ने मा तेये भास्टय ने, ककवी ने तो मश चचि फनामा श
शोगा।"
"नश ॊ नश ॊ वऩता जी ! इव चचि को फनाने लारा कोई नश ॊ शै ।
मश वफ फेलकपों की फात शै । गभी औय गनत वे श मश फना शै । रयभ भें वे कागज आ
ू
गमा औय दलात वे स्माश आ गई भेज ऩय। गभी औय गनत की भुराकात शोते श चचि फन
गमा।"
"मश अवॊबल शै ।" वऩता गुयाुकय फोरा।
"जफ एक चाय ऩैवे का चचि अऩने आऩ फनना अवॊबल शै तो मश चचि-वलचचि ब्रह्माण्ड
बगलान क फनाने क लवलाम कवे वॊबल शो वकता शै ?
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जो रोग कशते शैं कक ईश्वय नश ॊ शै उनको धन्मलाद दे दो उनकी पारतू खोजफीन के
ऩरयश्रभ क लरए। ले वलळेऴ प्रकाय क भूखु शैं। ईश्वय नश ॊ शै ऐवा लश आदभी कश वकता शै ,
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श्चजवने ईश्वय की खोज क लरए चौदश बुलन छान भाये शों, ऩर्थली क कण-कण की, अणु-ऩयभात्भा
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की जाॉच कय र शो, अतर, वलतर, तरातर, यवातर,ऩातार आदद वफ रोक-रोकान्तय जाॉच
लरमे शों, जो ववष्ट क आदद भें शो औय ववष्ट क अॊत क फाद बी यशा शो। इव प्रकाय वलु कार
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औय वलु दे ळ भें जाॉच कयक श कोई ननणुम कय वकता शै कक ईश्वय शै मा नश ॊ। ववष्ट की आदद
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भें भाने ववष्ट की उत्ऩवत्त वे ऩशरे उवका शोना वॊबल नश ॊ, ववष्ट का अॊत उवने दे खा नश ॊ, दे खेगा
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बी नश ॊ र्कमोंकक ववष्ट क अॊत क ऩशरे श उवका अॊत शो जामगा। ऩचाव-ऩचशत्तय लऴु की
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उम्रलारा ऐवा आदभी कश दे कक 'ईश्वय नश ॊ शै ' तो मश कशाॉ की फुवद्धभानी शै ?
47.
'गभी औय गनतवे वफ फन गमा शै ' मश आऩकी भान्मता बूर बूरैमा भें बटकी शुई शै ।
मश घड़ी जो चर यश शै उवक ऩुजे बी ककवी ने फनामे शैं, वेर बी ककवी ने फनामा शै । ऩुजों को
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जोड़ने लारा औय वेर रगाने लारा बी तो कोई अलश्म शै । उवको बी वत्ता दे ने लारा ईश्वय शै ,
ऩयभात्भा शै ।"
एक अच्छा चचिकाय प्रबातकार भें घूभने गमा। प्राकृनतक वौन्दमु का फड़ा चशे ता था।
प्रकृनत क वुन्दय भनोयम्म दृश्मों को अऩनी चचिकरा भें उतयता था।
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वमोदम शो यशा था... वलळार भैदान भें शरयमार छाई शुई थी। दय-वदय वशालनी ऩशाड़ी
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ददख यश थी। कर-कर, छर-छर आलाज कयती नद फश यश थी। प्रकृनत-प्रेभी कराकाय की करा
जाग उठ । उव भनबालन दृश्म का वॊदय चचि फना ददमा। कपय वोचा्
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'इव वन्नाटे भें प्रकृनत क वॊदय दृश्म को दे खने लारा तो भैं मशाॉ शूॉ रेककन इव चचि भें
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दृश्म दे खने लारा कोई नश ॊ शै । दृश्म का दृष्टा तो शोना श चादशए।' उवने दवया चचि फनामा,
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श्चजवभें दृश्म को दे खने लारा दृष्टा बी चचत्रित ककमा। कपय वोचा् 'वॊदय दृश्म को दे खता शुआ दृष्टा
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तो चचि भें आ गमा रेककन इव दृश्म औय दृष्टा क चचि को दे खने लारा भैं यश गमा। इव चचि
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का बी दृष्टा शोना चादशए। अत् उवने तीवया चचि फनामा श्चजवभें दृश्म को दे खने लारा दृष्टा औय
उन दोनों को दे खने लारा दवया दृष्टा बी था। कपय वोचा कक इन तीनों को दे खने लारा जो शै ,
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लश इव चचि भें नश ॊ शै । उवे बी चचत्रित कयना चादशए।
अफ उवक वलचायों
े भें गड़फड़ फढ गई। दवये दृष्टा को दे खने लारा तीवया, तीवये को
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दे खने लारा चौथा, चौथे को दे खने लारा ऩाॉचलाॉ... इव प्रकाय शजायों-शजायों दृष्टा क चचि फनेंगे,
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उनको बी दे खने लारा दृष्टा फाकी यश जामेगा।
श्चजववे वफ ददखता शै लश दृष्टा, वाषी तो अवॊग का अवॊग श यश जाता शै । चाॉद-लवताये ,
दरयमा, दरयमा क ककनाये , ऩर्थली, ग्रश, नषि, वूमु आदद वफ दृश्मों को, दृश्म दे खने लार इश्चन्िमों
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को, भन को, भन क वॊकल्ऩ-वलकल्ऩों को, फुवद्ध को, वुख-द्ख को दे खने लारा कौन शै ? भैं शूॉ।
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इव 'भैं' का लाश्चस्तक स्लरूऩ खोज लरमा जाम, 'भैं' की लास्तवलक ऩशचान शो जाम तो मोगी का
मोग लवद्ध शो जाम, तऩस्ली का तऩ वपर शो जाम, सानी का अऩना स्लरूऩ प्रकट शो जाम।
मश बी दे ख लश बी दे ख....
दे खत दे खत ऐवा दे ख.
लभट जाम धोखा यश जाम एक।
अनुक्रभ
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
48.
आश्चस्तक औय नाश्चस्तक
आश्चस्तक औय नाश्चस्तक भें पक मश शै कक आश्चस्तक एक ईश्वय की ळयण रेता शै औय
ु
अऩनी आलश्मकता ऩूय कयता शै जफकक नाश्चस्तक अनेक ऩदाथों की आलश्मकता भशवूव कयता
शै । अऩनी इच्छाएॉ ऩूय कयते-कयते कई जन्भ फीत जाते शैं, वददमाॉ वभाप्त शो जाती शैं।
आलश्मकता तो आलश्मक तवल की शै औय इच्छाएॉ भन की दावता वे ऩैदा शोती शैं।
आश्चस्तक एक ऩयभात्भा की ळयण रेता शै औय नाश्चस्तक शजाय-शजाय लस्तुओॊ की ळयण रेता शै ।
नन्वशाम की वशाम शै बगलद् ळयण, बोगी का मोग शै बगलद ळयण, दफर का फर शै
ु ु
बगलद ळयण, ननयाधाय का आधाय शै बगलदळयण। द्वन्द्वी का द्वन्द्वातीत जीलन शै बगलद् ळयण !
चचॊनतत की चचॊता का ननलायण शै बगलद् ळयण। फुवद्धळून्म की फुवद्ध का प्रकाळ शै बगलद् ळयण।
फुवद्धभानों की फुवद्ध का अशॊ काय उतायने लारा भॊि शै बगलद् ळयण।
सानी क सान भें ननिा उव बगलत्तवल भें शोती शै । उव तवल भें जफ ननिा शोती शै तफ
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मोगी का मोग परता शै , तऩस्ली का तऩ परता शै , जऩी का जऩ वाथुक शोता शै ।
जील श्चजतना-श्चजतना ईभानदाय वे, वच्चाई वे उव बगलत ् ळयण को ग्रशण कयता शै ,
उतना-उतना लश वपर शोता जाता शै । बगलद् ळयण श्चजतना-श्चजतना छटता जाता शै , उतना-उतना
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उवक चचत्त भें फोझा फढता जाता शै ।
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अवॊख्म चचत्त श्चजव चैतन्म वे पयपया यशे शैं, उव चैतन्म लऩु ऩयभात्भा क ळयणागत कोई
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जील ककवी बी बाल वे शोता शै तो लश जील आत्भप्रेयणा वे, आत्भप्रकाळ वे औय आत्भवशाम वे
कट रे भागों वे, फीशड़ जॊगरों वे वपर मािा कयक अऩना जीलन धन्म कय रेता शै । श्चजवक
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जीलन भें बगलदळयण नश ॊ शै , लश अऩने फाशुफर वे, अऩने तऩोफर वे, अऩने चचत्तफर वे, अऩनी
चाऩरूवी वे मा अऩने औय कोई तुच्छ फरों वे वुखी यशने का मत्न तो कयता शै फेचाया प्राणी
रेककन उवे वुख चाय कदभ दय श बावता शै । इच्छाऩूनतु का षणणक शऴु उवे आ जाता शै , कपय
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इच्छाएॉ बी अचधकाचधक बड़कती जाती शैं। इच्छा ऩनतु कयते कयते जीलन ऩये शोते चरे जाते शैं
ू ू
उव प्राणी क।
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आश्चस्तक की आलश्मकताएॉ शोती शैं औय नाश्चस्तक की इच्छाएॉ शोती शैं। आलश्मकता एक
शोती शै ननत्म जीलन की, ननत्म तनप्त की, ननत्म सान की, ननत्म तवल की। मश भनष्म की
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आलश्मकता शै औय इच्छा भन का वलरावशै ।
शभ रोग भन क वलराव को श्चजतना ऩोवते यशते शैं, उतना शभ बीतय वे खोखरे शो जाते
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शै । अऩना व्मक्तिगत खचु फढाने वे अशॊ की ऩुवष्ट शोती शै । व्मक्तिगत खचु घटाने वे आत्भफर की
ऩुवष्ट शोती शै । अऩनी व्मक्तिगत वेला अऩने आऩ कयने वे आश्चत्भक ळक्ति का वलकाव शोता शै ।
दवयों वे व्मक्तिगत वेला रेने वे अशॊ गत वुख की भ्राॊती शोती शै
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अनुक्रभ
49.
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वुख-द्ख वे राब उठाओ
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वुख अगय अऩने भें पवाता शै तो लश द्ख बी खतयनाक शै । द्ख अगय उद्वे ग औय
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आलेळ दे कय फदशभुख फनाता शै , गरत प्रलवत्त भें घवीटता शै तो लश ऩाऩ का पर शै । द्ख अगय
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वत्वॊग भें रे जाता शै तो लश द्ख ऩुण्म का पर शै । लश ऩुण्मलभचश्रत ऩुण्म शै ।
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श्चजवका ळुद्ध ऩुण्म शोता शै , लश ळुद्ध वुख भें आता शै । श्चजवका ळुद्ध ऩुण्म शोता शै , उवको
द्ख बी ऩयभ वुख क द्वाय ऩय रे जाता शै । ऩुण्म अगय ऩाऩलभचश्रत शै तो वुख बी वलकाय खड्डों
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भें चगयता शै औय द्ख बी आलेळ की गशय खाइमों भें चगयाता शै ।
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ऩुण्मात्भा वुख वे बी पामदा उठाते शैं औय द्ख वे बी पामदा उठाते शैं। ऩाऩात्भा द्ख
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वे ज्मादा द्खी शोते शैं औय वुख भें बी बवलष्म क लरए फड़ा द्ख फनाने की कचेष्टा कयते शैं।
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इवलरए ऩयभात्भा को प्माय कयते शुए ऩुण्मात्भा शोते जाओ। ऩयभात्भा क नाते कभु कयते
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शुए ऩुण्मात्भा शोते जाओ। ऩयभात्भा अऩना आऩा शै , ऐवा सान फढाते शुए भशात्भा शोते जाओ।
लस्त्र गेरूए फनाकय भशात्भा शोने को भैं नश ॊ कशता। एक आदभी अऩने आऩको वलऴम-
वलराव मा वलकाय भें , ळय य क वुखों भें खचु यशा शै । लश गरत याश ऩय शै । उवका बवलष्म
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द्खद औय अन्धकाय शोगा। दवया आदभी वफ कछ छोड़कय ननजुन जॊगर भें यशता शै , अऩने
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ळय य को वुखाता शै , भन को तऩाता शै । 'वॊवाय भें खयाफ शै , भामाजार शै .... मश ऐवा शै ... लश
ऐवा शै .... इनवे फचो....' ऐवा कयक जो त्रफल्कर त्माग कयता शै ... त्माग... त्माग... त्माग.. सान
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वदशत त्माग नश ॊ फश्चल्क एक धाया भें फशता चरा जाता शै , लश बी गरत यास्ते की मािा कयता
शै ।
फुवद्धभान तो लश शै जो वफ भें वफ शोकय फैठा शै उव ऩय ननगाश डारे, भोश-भभता का
त्माग कये , वॊकीणुता का त्माग कये , अशॊ काय का त्माग कये , उद्वे ग औय आलेळ का त्माग कये ,
वलऴम वलकायों का त्माग कये । ऐवा त्माग तफ लवद्ध शोगा, जफ आत्भसान की ननगाशों वे दे खोगे,
ब्रह्मसान की ननगाशों वे दे खोगे।
अनक्रभ
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अनन्म मोग वाधो
ऐवी कोई फॉूद नश ॊ जो जर वे लबन्न शो। ऐवा कोई जील नश ॊ जो ऩयभात्भा वे लबन्न
शो। ऐवी कोई तयॊ ग नश ॊ जो त्रफना ऩानी क यश वक। ऐवा कोई भनुष्म नश ॊ जो चैतन्म ऩयभात्भा
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क त्रफना यश वक।
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50.
वफ घट भेयावाॉईमा खार घट न कोम।
फलरशाय ला घट की जा घट ऩयगट शोम।।
छऩे शुए तुम्शाये ऩयभात्भा को अनन्म बाल वे, अनन्म मोग वे प्रकट कयने क लरए तत्ऩय
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शो जाओ। चारू व्मलशाय भें वालधान शो जाओ कक असान की ऩतें कश ॊ फढ तो नश ॊ यश शैं !
असान की ऩतों को शटाते जाओ..... शटाते जाओ। अन्म अन्म भें जो अनन्म ददख यशा शै उवभें
वजगताऩलक प्रनतवित शोते जाओ।
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अनन्माश्चिन्तमन्तो भाॊ मे जना् ऩमुऩावते।
तेऴाॊ ननत्मालबमुिानाॊ मोगषेभॊ लशाम्मशभ ्।।
'जो अनन्म प्रेभी बि जन ननयन्तय चचन्तन कयते शुए भझ ऩयभेश्वय को ननष्काभ बाल वे
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बजते शैं, उन ननत्म-ननयन्तय भेया बालऩणु चचन्तन कयने लारे ऩरूऴों का मोगषेभ भैं स्लमॊ लशन
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कयता शूॉ।'
(बगलद् गीता् 9.22)
(ऩूज्म फाऩू क वत्वॊग प्रलचन वे)
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अनुक्रभ