भगवान शिव के १२
ज्योशिशलिंग
सोमनाथ मंशिर , गुजराथ
भारत क
े 12 सबसे पवित्र ज्योततर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर गुजरात राज्य में अरब
सागर क
े तट पर भव्यता से खडा है ।
कहा जाता है कक इस मंदिर का तनमााण मूल रूप से सोमा ने चंद्रमा भगिान द्िारा भगिान
र्िि की तपस्या और पूजा-अचाना में करिाया था, जजन्होंने उन पर श्राप दिया था।
1025 में गाजीनी क
े मुहम्मि जैसे कई आक्रमणकाररयों द्िारा तोडफोड और कई बार
नष्ट कर दिया गया और बाि में 12 9 6में एलाउडिन द्िारा, ितामान संरचना को एक बार
कफर से बनाया गया, इस बार मूल स्थान में एक सर्मतत द्िारा जजसे स्ितंत्रता क
े बाि
तनयुक्त ककया गया था।
मंदिर को एक बार सोने और चांिी से सजाया गया था, लेककन क
े िल पत्थर ही इसे सुंिरता
प्रिर्िात करने क
े र्लए रहता है। बालकनी िाले गर्लयारे क
े अिकािों में नटराज का क्षत-
विक्षत रूप, नृत्य र्िि पाया जा सकता है।
मशललकाजुुन
मजललकाजुान आंध्र प्रिेि राज्य में श्री िैला नामक पिात पर कृ ष्ण निी क
े तट पर
जस्थत है।
ककले की िीिारें 6 मीटर ऊ
ं ची इस प्राचीन मंदिर को संलग्न करते हैं।
मंदिर पूिा का सामना करता है, द्रविड िैली में बनाया गया था। क
ें द्र मंिपम में कई
खंभे हैं जजनमें नादिक
े श्िर की एक वििाल मूतताहै।
वििाल आंगनों और कई मूततायों और स्मारकों क
े साथ, मंदिर की मूततायां पत्थर में
महान दहंिू महाकाव्यों-रामायण महाभारत से महाकाव्यों का िणान करती हैं ।
पत्थर तरािने की आखखरी फोटो में मादटान ग्रे क
े सौजन्य से र्िि और िेिी िजक्त का
नाग रूप दिखाया गया है ।
महाकालेश्वर ,उज्जैन
यह ज्योततर्लिंग क्षक्षप्रा निी क
े िादहने ककनारे महाकाल िन द्िारा
उज्जैन में जस्थत है।
मंदिर प्रांगण में र्िखर का प्रभुत्ि है जो आकाि में बढ़ते हैं।
िहां पांच स्तरों, चार जमीन से ऊपर और एक भूर्मगत, पीतल क
े लैंप
क
े साथ जलाया जाता है ।
अंततम फोटो अपने रूप में र्िि की है, जो "मृत्यु का िासक"
महाकालेश्िर है।
ओंकारेश्वर
यह ज्योततर्लिंग ओंकारेश्िर क
े पवित्र द्िीप पर नमािा निी पर जस्थत
है।
मंदिर क
े सफ
े ि गुंबि का तनमााण नरम साबुन पत्थर से ककया गया है,
जो मंदिर क
े ऊपरी दहस्सों और पत्थर की छत पर जदटल नक्कािी
प्रिर्िात करता है।
स्तंभों क
े साथ र्संिूर जो हलकों, बहुभुज और िगों में नक्कािीिार हैं
मंदिर को घेरते हैं।
टािर या र्िरखर नागा िैली में बनाया गया था और इसमें 5 परतें होती
हैं, जजनमें से प्रत्येक एक अलग िेिता का प्रतततनधित्ि करती है।
वैद्यनाथ
यह ज्योततर्लिंग बबहार क
े िेिगढ़ में जस्थत है।
मंदिर पररसर में बाईस अन्य मंदिर हैं।
आंगन पत्थर की िीिारों से तघरा हुआ है और मुख्य
मंदिर में कई वििाल खंभे हैं।
र्िि र्ििर्लंग की चोटी थोडी टूटी हुई है, ककं ििंती है कक
यह िूर तछल गया था जब रािण इसे उखाडने की
कोर्िि की ।
शभमािंकर
यह ज्योततर्लिंग महाराष्र क
े पुना जजले क
े भुिनधगरी
नामक गांि में जस्थत है।
नगाडा िैली में बना यह मंदिर भीमािंकर िन्य जीि
अभयारण्य क
े घने जंगल से तघरा हुआ है।
इसक
े अलािा मंदिर क
े अंिर पाया भव्य नक्कािी कर
रहे हैं।
रामेश्वरम
यह ज्योततर्लिंग द्िीप रामेश्िरम क
े पूिी ककनारे जस्थत है,
भारतीय प्रायद्िीप क
े चरम िक्षक्षण-पूिी बबंिुपर।
मंदिर की संरचना, जो अपने 1200 वििाल स्तंभों क
े र्लए
जानी जाने िाली है, में कई अन्य िेिी-िेिताओं क
े र्लए
र्मनी मंदिरों क
े साथ तीन पराकरम और कई मंिप हैं।
नागेश्वर
गुजरात क
े नागेश्िर मंदिर का ितामान में जीणोद्िार
ककया जा रहा है, यह छवि मंदिर क
े ऊपरी दहस्से को
दिखाती है।
इसका तनमााण मूल रूप से नगाडा िैली में अपने
िानिार 'र्िखर'(स्टीपलस) और समरन्स (वपरार्मि
छत) क
े साथ ककया गया था जो जमीन से 110 फीट
की ऊ
ं चाई तक पहुंचता है।
कािी शवश्वनाथ
यह ज्योततर्लिंग उत्तर प्रिेि क
े कासी विश्िनाथर में
जस्थत है। ककं ििंती क
े अनुसार, प्रभु ने स्ियं इस
स्थान को अपना िाही तनिास घोवित ककया।
मुगल आक्रमण क
े पररणामस्िरूप मूल मंदिर नष्ट
हो गया था।
इसे 18 िीं िताब्िी में खंगाला गया था, जजसमें 1 9िीं
िताब्िी में र्िखर पर सोने की चढ़ाना जोडा गया था।
शिम्बके श्वर
यह ज्योततर्लिंग महाराष्र क
े त्र्यंबक
े श्िर में जस्थत है।
मंदिर का तनमााण िास्तुकला की नगाडा िैली में ककया गया था।
यह एक वििाल पत्थर की िीिार से तघरा हुआ है और कई मूततायों से सजी
है।
आज की संरचना पेििा बालाजी बाजीराि द्िारा 18िीं िताब्िी क
े िौरान
ककए गए पुनतनामााण का पररणाम है।
गभागृह टॉिर को एक वििाल अमाका और एक सुनहरे कलि क
े साथ ताज
पहनाया जाता है।
अंिर आपको भगिान र्िि का िाहन र्मलेगा, जजसे नंिी कहा जाता है।
के िारनाथ
यह ज्योततर्लिंग उत्तर प्रिेि क
े घरिाल जजले में जस्थत
दहमालय पिात में जस्थत है।
ऐसा माना जाता है कक यह मंदिर बहुत प्राचीन है,
जजसका सदियों से जीणोद्िार होता है।
प्रिेि द्िार पर नंिी की प्रततमा दिव्य बैल है।
मंदिर क
े अंिरूनी कई उत्तम नक्कािी से भरे हुए हैं।
घृणेश्वर
यह ज्योततर्लिंग महाराष्र में एलोरा गुफाओं क
े पास
िेिधगरी में जस्थत है।
18 िीं िताब्िी क
े प्राचीन मंदिर का तनमााण
अदहलयाभाई होलकर ने ककया था, जजन्होंने अन्य
मंदिरों का भी पुनतनामााण ककया था।
यह र्िि मंदिर समृद्ि है, जजसमें लाल बलुआ पत्थर
में सुंिर नक्कािी और उत्तम िास्तुकला है।

भगवान शिव के १२ ज्योतिर्लिंग

  • 1.
    भगवान शिव के१२ ज्योशिशलिंग
  • 2.
    सोमनाथ मंशिर ,गुजराथ भारत क े 12 सबसे पवित्र ज्योततर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर गुजरात राज्य में अरब सागर क े तट पर भव्यता से खडा है । कहा जाता है कक इस मंदिर का तनमााण मूल रूप से सोमा ने चंद्रमा भगिान द्िारा भगिान र्िि की तपस्या और पूजा-अचाना में करिाया था, जजन्होंने उन पर श्राप दिया था। 1025 में गाजीनी क े मुहम्मि जैसे कई आक्रमणकाररयों द्िारा तोडफोड और कई बार नष्ट कर दिया गया और बाि में 12 9 6में एलाउडिन द्िारा, ितामान संरचना को एक बार कफर से बनाया गया, इस बार मूल स्थान में एक सर्मतत द्िारा जजसे स्ितंत्रता क े बाि तनयुक्त ककया गया था। मंदिर को एक बार सोने और चांिी से सजाया गया था, लेककन क े िल पत्थर ही इसे सुंिरता प्रिर्िात करने क े र्लए रहता है। बालकनी िाले गर्लयारे क े अिकािों में नटराज का क्षत- विक्षत रूप, नृत्य र्िि पाया जा सकता है।
  • 3.
    मशललकाजुुन मजललकाजुान आंध्र प्रिेिराज्य में श्री िैला नामक पिात पर कृ ष्ण निी क े तट पर जस्थत है। ककले की िीिारें 6 मीटर ऊ ं ची इस प्राचीन मंदिर को संलग्न करते हैं। मंदिर पूिा का सामना करता है, द्रविड िैली में बनाया गया था। क ें द्र मंिपम में कई खंभे हैं जजनमें नादिक े श्िर की एक वििाल मूतताहै। वििाल आंगनों और कई मूततायों और स्मारकों क े साथ, मंदिर की मूततायां पत्थर में महान दहंिू महाकाव्यों-रामायण महाभारत से महाकाव्यों का िणान करती हैं । पत्थर तरािने की आखखरी फोटो में मादटान ग्रे क े सौजन्य से र्िि और िेिी िजक्त का नाग रूप दिखाया गया है ।
  • 4.
    महाकालेश्वर ,उज्जैन यह ज्योततर्लिंगक्षक्षप्रा निी क े िादहने ककनारे महाकाल िन द्िारा उज्जैन में जस्थत है। मंदिर प्रांगण में र्िखर का प्रभुत्ि है जो आकाि में बढ़ते हैं। िहां पांच स्तरों, चार जमीन से ऊपर और एक भूर्मगत, पीतल क े लैंप क े साथ जलाया जाता है । अंततम फोटो अपने रूप में र्िि की है, जो "मृत्यु का िासक" महाकालेश्िर है।
  • 5.
    ओंकारेश्वर यह ज्योततर्लिंग ओंकारेश्िरक े पवित्र द्िीप पर नमािा निी पर जस्थत है। मंदिर क े सफ े ि गुंबि का तनमााण नरम साबुन पत्थर से ककया गया है, जो मंदिर क े ऊपरी दहस्सों और पत्थर की छत पर जदटल नक्कािी प्रिर्िात करता है। स्तंभों क े साथ र्संिूर जो हलकों, बहुभुज और िगों में नक्कािीिार हैं मंदिर को घेरते हैं। टािर या र्िरखर नागा िैली में बनाया गया था और इसमें 5 परतें होती हैं, जजनमें से प्रत्येक एक अलग िेिता का प्रतततनधित्ि करती है।
  • 6.
    वैद्यनाथ यह ज्योततर्लिंग बबहारक े िेिगढ़ में जस्थत है। मंदिर पररसर में बाईस अन्य मंदिर हैं। आंगन पत्थर की िीिारों से तघरा हुआ है और मुख्य मंदिर में कई वििाल खंभे हैं। र्िि र्ििर्लंग की चोटी थोडी टूटी हुई है, ककं ििंती है कक यह िूर तछल गया था जब रािण इसे उखाडने की कोर्िि की ।
  • 7.
    शभमािंकर यह ज्योततर्लिंग महाराष्रक े पुना जजले क े भुिनधगरी नामक गांि में जस्थत है। नगाडा िैली में बना यह मंदिर भीमािंकर िन्य जीि अभयारण्य क े घने जंगल से तघरा हुआ है। इसक े अलािा मंदिर क े अंिर पाया भव्य नक्कािी कर रहे हैं।
  • 8.
    रामेश्वरम यह ज्योततर्लिंग द्िीपरामेश्िरम क े पूिी ककनारे जस्थत है, भारतीय प्रायद्िीप क े चरम िक्षक्षण-पूिी बबंिुपर। मंदिर की संरचना, जो अपने 1200 वििाल स्तंभों क े र्लए जानी जाने िाली है, में कई अन्य िेिी-िेिताओं क े र्लए र्मनी मंदिरों क े साथ तीन पराकरम और कई मंिप हैं।
  • 9.
    नागेश्वर गुजरात क े नागेश्िरमंदिर का ितामान में जीणोद्िार ककया जा रहा है, यह छवि मंदिर क े ऊपरी दहस्से को दिखाती है। इसका तनमााण मूल रूप से नगाडा िैली में अपने िानिार 'र्िखर'(स्टीपलस) और समरन्स (वपरार्मि छत) क े साथ ककया गया था जो जमीन से 110 फीट की ऊ ं चाई तक पहुंचता है।
  • 10.
    कािी शवश्वनाथ यह ज्योततर्लिंगउत्तर प्रिेि क े कासी विश्िनाथर में जस्थत है। ककं ििंती क े अनुसार, प्रभु ने स्ियं इस स्थान को अपना िाही तनिास घोवित ककया। मुगल आक्रमण क े पररणामस्िरूप मूल मंदिर नष्ट हो गया था। इसे 18 िीं िताब्िी में खंगाला गया था, जजसमें 1 9िीं िताब्िी में र्िखर पर सोने की चढ़ाना जोडा गया था।
  • 11.
    शिम्बके श्वर यह ज्योततर्लिंगमहाराष्र क े त्र्यंबक े श्िर में जस्थत है। मंदिर का तनमााण िास्तुकला की नगाडा िैली में ककया गया था। यह एक वििाल पत्थर की िीिार से तघरा हुआ है और कई मूततायों से सजी है। आज की संरचना पेििा बालाजी बाजीराि द्िारा 18िीं िताब्िी क े िौरान ककए गए पुनतनामााण का पररणाम है। गभागृह टॉिर को एक वििाल अमाका और एक सुनहरे कलि क े साथ ताज पहनाया जाता है। अंिर आपको भगिान र्िि का िाहन र्मलेगा, जजसे नंिी कहा जाता है।
  • 12.
    के िारनाथ यह ज्योततर्लिंगउत्तर प्रिेि क े घरिाल जजले में जस्थत दहमालय पिात में जस्थत है। ऐसा माना जाता है कक यह मंदिर बहुत प्राचीन है, जजसका सदियों से जीणोद्िार होता है। प्रिेि द्िार पर नंिी की प्रततमा दिव्य बैल है। मंदिर क े अंिरूनी कई उत्तम नक्कािी से भरे हुए हैं।
  • 13.
    घृणेश्वर यह ज्योततर्लिंग महाराष्रमें एलोरा गुफाओं क े पास िेिधगरी में जस्थत है। 18 िीं िताब्िी क े प्राचीन मंदिर का तनमााण अदहलयाभाई होलकर ने ककया था, जजन्होंने अन्य मंदिरों का भी पुनतनामााण ककया था। यह र्िि मंदिर समृद्ि है, जजसमें लाल बलुआ पत्थर में सुंिर नक्कािी और उत्तम िास्तुकला है।