5+
1 Hindi Debates


okn&fookn
"वषय सूची

वप   श ा म आर ण क नी त                                                            03

प    ब ते का बोझ ब च क उ न त म साधक                                               04

वप   ब ते का बोझ ब च क उ न त म बाधक                                               05

प    "व$याथ' जीवन म राजनी त छा* को पथ ,-ट कर दे ती है                             07

वप   "व$याथ' जीवन म राजनी त छा* को पथ ,-ट कर दे ती है                             09

वप   नरं तर होता सरल6करण श ा का तर 7गरा रहा है                                    10

प    पुर कार क होड़ ने भर-टाचार को बढावा >दया ह                                    12

वप   पुर कार क होड़ ने भर-टाचार को बढावा >दया ह                                    13

प    मानव जाती क ती@ ग त से उ न त ह6 उसक "वनाश का कारन है
                                        े                                         15

वप   मानव जाती क ती@ ग त से उ न त ह6 उसक "वनाश का कारन है
                                        े                                         16

प    फा ट फ़ड ने जीवन शैल6 को आसान बना >दया है
           ू                                                                      17

वप   फा ट फ़ड ने जीवन शैल6 को आसान बना >दया है
           ू                                                                      19


प    सदन क राय म म>हलाओं का नौकर6 करना पHरवार क लए उपयुJत है
                                               े                                  21

वप   सदन क राय म म>हलाओं का नौकर6 करना पHरवार क लए उपयुJत है
                                               े                                  23


प    भारतीय सं कृ त "वदे शय को Lभा"वत कर रह6 है                                   25

वप   भारतीय सं कृ त "वदे शय को Lभा"वत कर रह6 है                                   27


प    "वदे श म बसने क चाह हर भारतीय का Mवाब                                        29


वप   "वदे श म बसने क चाह हर भारतीय का Mवाब                                        31


प    युवा-अव था फलो भर6 ह तो Lोड-अव था जीवन संघषQ-रत और वदाव था पSचाताप से पHरपूणQ 33
                 ू                                       ृ




                                                  www.kalpanadubey.com          Page 1
"वषय सूची


वप   युवा-अव था फलो भर6 ह तो Lोड-अव था जीवन संघषQ-रत और वदाव था पSचाताप से पHरपूणQ 35
                 ू                                       ृ

प    चापलूसी करो आगे बढो                                                          36

वप   चापलूसी करो आगे बढो                                                          37

प    पुर कृत                                                                      38

वप   पुर कृत                                                                      40


प    दो त -दो त न रहा                                                             42


वप   दो त -दो त न रहा                                                             44


प    सुLीम कोटQ क फसले से ब चे उUंड हो रहे ह
                 े ै                                                              46


वप   सुLीम कोटQ क फसले से ब चे उUंड हो रहे ह
                 े ै                                                              48




                                                  www.kalpanadubey.com          Page 2
वप                                  श ा म आर ण क नी त

     श ा का ल य है यि त का बौ क, सामािजक आ थक एवम आ याि मक वकास, अथात यि त का सवागीण
      वकास #कसी भी दे श का भ व'य उसक व)या थय* क +ान -तर पर 0नभर करता है | रा'1 क उ थान क लए व2व
                                    े          े                                े       े
     -तर पर 30त -पधा क लए कवल सा र नाग5रक रा'1 का 30त 0न ध व नह6ं कर सकता उसक लए व+ान,
                      े    े                                                 े
     तकनीक8, च#क क8य उ:च सं-थान करते ह;| हम मानते ह; #क श ा पर सबका अ धकार ह; और होना भी चा>हए
     पर?तु उ:च श ा सं-थान* मA समान अ धकार* क8 दहाई दे कर #कसी 0नCन बो क -तर क छाE को कवल
                                               ु                             े        े
     इस लए -थान दे ना #क वह समाज क एक व श'ट वग से सCब?ध रखता है , कहाँ तक उ चत है |
                                  े


                               "अ वल अJला नर उपाया, कदरत क सब बंदे |
                                           ू         ु    े

                             एक नूर ते सब जग उपLया, कौन भले कौन मंदे |"

     हम सभी बंदे परमा माक एक नर क8 दA न ह; परं तु वभाजन क उपाय हमने -वयं #कए ह; |अंMेज भारत को
                         े    ू                          े
     वभािजत कर गए थे िजसका प5रणाम हमे आज तक भुगतना पड़ रहा है | -वतंEता क इतने वष बाद भी
                                                                        े
     हमारे अपने ह6 नेता श ा का अथ और उPे2य भुला कर उसे जा0त क आधार पर वभािजत करना चाह रहे
                                                             े
     ह;| श ा आज राजनै0तक तंE क 0न>हत -वाथQ क8 ब ल चढ़ाई जा रह6 है | अभी हमारे दे श क कई प5रवार*
                              े                                                    े
     क वे आंशू भी नह6ं सूख पाए ह; जो मंडल कमीशन क8 आग मA सैकड़* वTया थयो क आ मदाह क कारण
      े                                                                  े        े
     बहे थे| अब सरकार नए Uबल क8 आग सलगाने मA लग गई| वै2वीकरण क िजस दौर से हम आज गुजर रहे
                                    ु                         े
     ह;| इसमA हमA भारतीय* क8 योVयता और +ान क -तर को व2व क सम
                                            े            े                       पेश करते ह;| म; अपने मE* से
     पूछना चाहती हूँ #क #कसी बौ क Wि'ट से कमजोर ब:चे को उ:च श ा सं-थान* मA आर ण क कारण
                                                                                 े
     3वेश दे कर हम #कस 3कार क भारत को व2व क सम
                             े             े                   3-तत करने क8 कामना कर रहे ह; ! आर ण का
                                                                  ु
     होना इस कारण भी 0नरथक स होता है #क पछले कई वषX से चल6 आ रह6 आर ण क8 नी0त क चलते
                                                                               े
     कछ खास प5रवार सामा?य वग से अ धक संप?न हो गए ह; वडंवना यह है #क आर ण क8 नी0त का लाभ
      ु
     भी इ?हA ह6 मलेगा | श ा सं-थान* मA रं ग, लंग, जा0त आ>द का कोई मह व नह6 होता, उ?हA तो चा>हए
     योVयता | योVयता क8 कोई जा0त नह6 होती | चाहे अमीर हो गर6व, सवण हो 0नCन वण, वTया क मं>दर मA
                                                                                     े
     वह6 3वेश ले सकता है ,जो इसक8 कसौट6 पर खरा उतरे | -वत?Eता से अब तक सिCवधान मA अनेक सुधार
     आ चक ह;, अब आव2यकता है आर ण क8 नी0त मA सुधार करने क8| आर ण आ थक Wि'ट से कमजोर
        ु े
     वग का होना चा>हए न #क बौ क Yप से कमजोर वग का |िजस 3कार कमजोर Zटो क8 नीव पर आल6शान
     इमारत खड़ी नह6ं क8जा सकती ठक उसी 3कार उ:च श ा भी इसक आभाव मA असCभव है |आर ण क8
                                                         े
     यह नी0त भेद भाव पैदा कर रह6 है | दरकार को चा>हए #क वह आ थक सहायता दे कर पछड़े वग को आगे
     बढ़ाए .उ?हA सु वधाएँ दे िजससे वे सCमान क साथ आगे बढ़ सक | अंत मA ,म; यह6 कहना चाहूंगी #क #कसी
                                            े             A
     अपा>हज यि त को दौड़ मA शा मल करवाने क लए सह6 यि त क पैर कटवाना कहाँ तक उ चत है |
                                         े             े

                                       .......................................



                                                           www.kalpanadubey.com                       Page 3
प                    ब ते का बोझ ब च क उ न त म साधक

                               'आने वाले सुंदर कल क8 त-वीर ह; ब:चे,
                               उLLवल उ?नत दे श क8 तकद6र ह; ब:चे'

    जी हाँ, आज क ब:चे कल का भ व'य ह; आज का ब:चा कल का नाग5रक बनता है ब:च* क8 परव5रश
                े
    ,उनका रहन सहन -सहन उनक8 श ा का दे श क भ व'य पर सीधा असर पड़ता है जैसे -जैसे युग बदल
                                         े
    रहा है वैसे -वैसे ब:च* क8 परव5रश ,रहन -सहन और श ा मA भी प5रवतन हो रहे ह; त^ती से क_यटर का
                                                                                      ं ू
    युग आ गया है ब:च* क8 श ा मA भी बढो तर6 हुई और श ा का -तर ऊचा होता गया
                                                              ँ

    िजस तरह समाज मA आध0नकता क साथ पुराने र60त -5रवाज कभी -कभी बीच मA अंगडाइयां लेकर अपनी
                      ु      े
    उपि-थ0त जता दे ती ह; उसी तरह कछ लोग आध0नक श ा को बोझ बता कर 3ग0त मA बाधक बन रहे ह;
                                  ु       ु
    वा-त वकता तो यह है #क माता - पता , श क ब:च* को ब-ते क िजस Yप से अवगत करायAगे ,वे उसे
                                                         े
    वह6 समझAगे अब ये उनक उपर 0नभर है #क वे ब-ते को बोझ बनाते ह; या िजCमेदार6 ?बचपन ह6 वह
                        े
    पडाव होता है जहाँ से ब:चे क यि त व और जीवन का -वYप आरCभ होता है जब ब:चा अपनी #कताबA
                               े
    ब-ते मA डाल कर व)यालय जाता है तो वह उसका बोझ नह6 अ पतु उसमA उसक यि त व क8 परछाZ
                                                                   े
    ,उसक मां-बाप क सपन* को साकार करने का सामान, समाज क 30त िजCमेदार6 का सफर नामा होता है
        े         े                                   े
    माता - पता का यह सोचना #क ब:चा इतना भार6ब-ता कसे उटाएगाअपने ब:चे को कमजोर बनाने क8
                                                  ै
    नी0त है , उनका लाड -_यार ह6 उसक8 3ग0त मA बाधक बनता है य>द ब:चे को ब-ता भार6 लगता है तो
    उसका समाधान भी है 30त >दन 3योग होने वाल6 प-तक* व)यालय मA संM>हत करक रखA इससे
                                              ु                        े
    प-तक* का बोझ भी कम होगा और उनका रखरखाव भी ट6क होगा
     ु
    एक तरफ तो माता - पता ब:च* को आध0नक बनाने का 3य न करते ह; ,#फ़र पढाई मA आध0नकता और
                                   ु                                        ु
    बदावेका वरोध य*? याद रeखए अ धक +ान क लए +ान क fोत भी अ धक ह*गे, कम +ान क fोत
                                        े        े                          े
    से ब:चे आगे कसे बढ़ पाएंगे 3ाचीन काल मA जब व)याथg गhकल मA जाते थे श ा क साथ -साथ उ?हA
                 ै                                    ु ु                 े
    गह काय भी सखाए जाते थे जंगल से लकडी काटना, पानी भरना आ>द भगवान jी कृ'ण और jी राम ने
     ृ
    भी ये काय #कए थे इ0तहास गवाह है #क वे महान पुYष हुए लकkडय* क ग तर uताए तो संसार क8
                                                                े
    वपदाएँ सर पर धर ल6ं, पानी भरा तो संसार क8 वपदाओं को हर >दया

    मेहनत का बोझ ह6 मनु'य को सफल और महान बनता है ब:चे को ब-ते क बोझ से डराकर कमजोर नह6
                                                               े
    बिJक अपनी िजCमेदा5रय* का एहसास कराकर कल का शवाजी, राणा3ताप, ऐ .पी .जी .अnदलकलाम
                                                                              ु
    बनाने का य न क8िजए हर पीडी अगल6 पीडी से यह6 कहती है -...
    'हम लाए ह; तूफ़ान से क2ती 0नकाल क इस दे श को रखना मेरे ब:चो संभाल क '
                                    े                                 े
    दे श को आने वाले तूफान* से तभी बचाया जा सकता है जब हमारे बाजू और कधे मजबत ह* उन पर
                                                                      ं     ू
    व)या धन बोझ नह6 बिJक गांडीव हो
                                     .......................................



                                                         www.kalpanadubey.com        Page 4
ब ते का बोझ ब च क उ न त म बाधक
वप


                        "बार -बार आती है मझको मधर यादयाद बचपन तेर6
                                          ु     ु

                         गया, ले गया, तू जीवन क8 सबसे म-त खशी मेर6 "
                                                           ु

 बचपन भी #कतना? सफ़ तीन -चार साल .....बस इधर -कल का ब-ता पीठ पर चढा चड़ाऔर उधर
                                              ू
 बचपन eखसका ....... य* हुआ मेरे साथ ऐसा .......? कभी सोचा है आपने .....माता - पता ने
 .......अ भभावक* ने ....सरकार ने .......? #कसी ने भी नह6 सोचा उ?हA तो एक पढा - लखा नाग5रक
 चा>हए यह दे खने क8 उ?हA आव2यकता ह6 नह6 #क #क भ व'य का नाग5रक कसे पढ़ रहा है ?......कसे जी
                                                               ै                    ै
 रहा है ? बचपन क8 नाजक उo मA ह6 मजदर क8 तरह पीठ पर ब-ता लाद लाद >दया और हांक >दया
                     ु             ू
 -कल क8 ओर जहाँ भेड़ बक5रय* क8 तरह ब:चे क ा hपी बाढ़े बाढे मA भर >दए गए |
   ू

 और .............ब:चा रोता रहा ....रोता रहा .........0छन गए eखलौने ....0छन गया बचपन आगया ब-ता
 .......आ गयी #कताबA ....और ढे र सारा पाpयqम | क ा पांच और वषय दस ....२० #कताबA और २०
 कॉ पयां, दस पाpय पु-तक, दस अuयास पु-तक छोट6 सी जान,छोटा सा शर6र ,भोला मि-त'क और भा
                       A               A
 र6 ब-ता |

 इस भार6 ब-ते ने हमारा बचपन ह6 छन लया खेलने का व त नह6 मलता, शैता0नयाँ करने क लए भी
                                                                              े
 समय का आभाव है जब कभी क ा मA अ या पका क आने से पहले कछ शरारत करते भी ह; तो उनक
                                        े             ु                        े
 आते ह6 डाट खाते ह; पहले अनुशासन पर ले चर सुनते ह; #फ़र पाठ पर .....सब कछ इतना घुल मल जाता
                                                                       ु
 है #क न पाठ समझ आता है न अनुशासन

 समय का मह व सभी समझाते ह; -समय पर काय करो ,समय का सदपयोग करो अब आप ह6 दे eखये मेर6
                                                     ु
 समय सा5रणी -७.३० से १.३० तक -कल मA अथात ६घ?ते -कल मA ,३घ?ते -कल आने -जाने और तैयार
                               ू                 ू             ू
 होने क ४ घंटे -कल का होम वक अथात गह काय क आधा घंटा मE* से बात करने क य*#क होमवक
       े         ू                 ृ      े                          े
 भूल जाता हूँ आधा घंटा ट6.वी .दे खने का ९घ?ता सोने क लए अब आप ह6 बताईए #क म; कब -खातापीता
                                                    े
 हूँ इस 30तयो गता क लए भी बंक मार कर आया हूँ
                   े
 क ा ५ तक तो सरकार क8 मेहरवानी से पास होता गया जब क ा ६ मA आया तब होश >ठकाने आए #क
 मझे तो कछ भी नह6 आता इस ब-ते क बोझ ने न मझे पढ़ने >दया न खेलने ह6 बस इसे लादे रहने क8
  ु      ु                     े          ु
 आदत हो गयी है इसक Uबना मझे अधरापन लगता है यह मेर6 पीठ का साथी बन गया है मझे नीद भी
                  े      ु    ू
 तभी आती है जब मCमी पीठ पर वजन रखती है
 एक ब:चे का सCपण वकास तभी हो सकता है जब वह -व:छं द वातावरण मA पले- bआढे ब:चे क8 पढाई
               ू



                                                www.kalpanadubey.com                  Page 5
क लए आव2यकता है 3ाकृ0तक सौ?दय से प5रपूण वातावरण क8 ,जहाँ पानी क8 कलकल सुने तो
 े
प~ य* क8 चहचहाहट भी समझे, जहाँ हवा क8 सरसराहट होऔर फल* क8 महक हो ,ब:च* क8
                                                    ू
eखलeखलाहट हो 3कृ0त क नजद6क ह6 वह जीवन क8 पढाई पढे िजससे वह संसार और सि'ट से प5र चत
                    े                                                ृ
हो ,उसक8 स?दरता से YबY हो
          ु
आज क बोeझल वातावरण मA , 30तयो गताओं क8 होड़ मA वह कह6 दब सा गया है आज ब:चे पर सफ़
    े
ब-ते का ह6 बोझ नह6 है , उस पर माता - पता क8 आकाँ ाओं का बोझ भी है अ भभावक* क सामािजक
                                                                            े
-तर को बढाने का उ तर दा0य व भी है इन सब को उसका बाल मन संभाल नह6 पाताऔर वह आगे बढ़ने
क8 अप ा मौत को गले लगाना jेयकर समझने लगता ह6
30त>दन अख़बार* मA दरदशन क व भ?न चैनल* मA इससे सCबि?धत समाचार आते ह6 रहते ह; कह6ं कोई
                  ू     े
ब:चा फल होने पर ऊची इमारत* से छलांग लगा दे ता है तो कोई पंखे से लटक जाता है कोई जहर खा
      े          ँ
लेता है तो कोई रे ल क8 पट5रयां नाप लेता है ब:चे का जीवन समा_त हो जाता है माता - पता जीते हुए भी
मद€ क समान हो जाते ह; ,ले#कन श ा नी0त बनाने वाल* क कान* पर जंू नह6ं रA गती इन हालात* पर न वे
 ु े                                              े
 यान दे ते ह; न सरकार
श ा का उPे2य होना चा>हए ब:चे का चा5रUEक वकास करना जो आज #कताबी बातA रह गZ ह; चार*
ओर छाए •'टाचार ब:चे क जीवन को 0नराशा और हताशा से भर >दया है वह 0नि2चत ह6 नह6 कर पाता
                     े
#क #कस रा-ते पर चले
यह सच है #क वह #कताब* क बोझ क चाबुक से वह अपना रा-ता जJद6 तै कर लेता है ,ले#कन हो सकता
                       े     े
है #क वह मंिजल से पहले ह6 दम तोड़ दे इस लए म; अनुरोध करता हूँ #क इस ओर कछ साथक कदम
                                                                       ु
उठाए जांए िजससे ब:चे का चहुमुखी वकास हो वह सफ़ +ान क8 मशीन बन कर न रह जाए ब-ते के
बोझ को आप +ान क8 अ धकता समझने क8 भूल न करA -


                                मेरा शर6र बोझ से दहरा हुआ होगा
                                                  ु
                           म; सजदे मA नह6ं था, तुCहे धोखा हुआ होगा "

                                   .......................................




                                                       www.kalpanadubey.com           Page 6
प                      व याथ# जीवन म राजनी त छा& को पथ ()ट कर दे ती है


                                       'हम लाए ह; तूफान से #क2ती क,
                                                                  े

                                   इस दे श को रखना मेरे ब:चो संभाल क '
                                                                    े

    ये पंि तयाँ उनअमर शह6द*क8 ओर कह6 से गयी ह; िज?ह*ने अपना सव-व ब लदान करक भारत को
                                                                           े
    आजाद6 >दलाई उ?ह*ने सोचा था #क हम अपने दे श वा सय* को एक आजाद दे श दे कर जा रहे ह; आगे
    आने वाल6 पीडी इस दे श को संभालेगी तथा दे श को उ?न0त कमाग पर ले जायेगी|
                                                         े

         या सच मA यह6 हो रहा है ? या हम उन शह6द* क8 भावना पर खरे उतरे ह; ? नह6ं ..........आज समाज
    क8 हालत दे ख कर डर लगने लगता है आए >दन व भ?न 3कार क घोटाले -कभी चारा घोटाला ,कभी
                                                       े
    चीनी घोटाला, कभी बोफोस घोटाला 0नत नएनए घोटाल* ने नेराजनी0त को •'टता क8 चरम सीमा तक
    पहुंचा >दया है नेताओं क8 मनमानी ने ,उनक लालच ने ,उनक8 अंधी ताकत* क 3भाव ने व)या थय* को
                                           े                          े
    भी इस दलदल क8 ओर मग E'णा क8 भां0त आक षत #कया है व)या थय* क8 नासमझी नेताओक का म
                             ृ                                                       े
    आतीं ह; वे अपना उJलू सीधा करने क लए छाE* को भ व'य क सुनहरे सपने >दखा कर उनका दYपयोग
                                    े                  े                          ु
    करते ह; |

    कोलेज* मA होने वाले इले शन इस बात का 3माण है #क आज यवा वग राजनी0त पर लाख* Yपये खच
                                                        ु
    करता है और करोड* बनता है स य तो यह है #क राजनी0त क बहाने वह कटनी0त सीखता है कब, कसे,
                                                      े          ू                   ै
    #कसे ब लब ल का बकरा बनाया जाए, सCप0त को कसे हडपा जाए, यह6 सब सीख कर वह अपनी बु
                                             ै
    और शि त का दYप योग करता है व)याथg प5रषद मA चने जाने पर उनका जीवन कछ ह6 >दन* मA बदल
                ु                               ु                     ु
    जाता है |



    चमचमाती गाkडयां और Uबना मेहनत क मले hपय* से िज?दगी गलत राह पर चल पडती है चमचे छाप
                                   े
    लोग* का साथ उ?हA दCभी और अहं कार6 बना दे ता है ये इले शन उ?हA साम, दाम, दं ड, भेद सभी नी0तयां
     सखा दे ता है वे छाE जीवन मA ह6 गुंडा गद‚ मA महारथ हा सल कर लेते ह;



    स य तो यह है #क राजनी0त का अथ मनमानी या शि त का 3दशन नह6ं है अ पतु 0न-वाथ भावना,
    0न'प        वचार और ?याय का साथ दे ना है पर?तु अफ़सोस क8 बात है #क आज यह6 बातA असCभव हो गZ
    ह;



    महोदय, आज छाE जीवन श ा हे तु होना चा>हए वे पहले -वयं को योVय बनाएं तब काय          ेE मA 3वेश
    करA य*#क अधरा +ान अ+ानता से भी भयानक होता है अंत मA युवा मE* से यह6 कहना चाहूँगा #क
               ु


                                                     www.kalpanadubey.com                 Page 7
अपने ल य को पहचानो, राजनी0त क लए जीवन मA और भी मौक मलA गे नेता बनो तो दे श क8 भलाई क
                             े                    े                                 े
लए न #क -वाथ क लए एक पढा - लखा
              े

यि त ह6 एक -व-थ और उ?नत दे श बना सकता है अत; व)याथg जीवन का सदपयोग करो और अपने
                                                              ु
जीवन को राजनै0तक 3पंच* से पथ •'ट होने से बचाओ

                                बात है सीधी मतलब दो,
                                समझो और समझाने दो
                                अभी क:चा है मेरा र-ता,
                               इस पथ को और सजाने दो,
                                बदल दं गा त-वीर दे श क8,
                                       ू
                                   मझे पढ़ कर आने दो
                                    ु

                               .......................................




                                                   www.kalpanadubey.com      Page 8
व याथ# जीवन म राजनी त, छा& को पथ ( त कर दे ती है
वप
                              भला -बुरा न जग मA कोई कहलाता है
                             भीतर का ह6 दोष, बाहर नजर आता है ,
                            #कसी को क8चड़ मA कमल >दखाई दे ता है ,
                             #कसी को चाँद मA भी दाग नजर आता है
 आज सCपूण व2व लोकतंE क8 ओर बढ़ रहा है य*#क लोकतंE ह6 #कसी भी दे श अथवा समाज क8
 3ग0त क लए 0नतांत आव2यक है इसी से समाजवाद क8 -थापना होती है लोकतंE क8 र ा क लए
       े                                                                   े
 अनेकानेक नेताओं ने कवानी द6 है चंƒशेखर आजाद ,भगत संह ,सुख दे व ,राजगh यहाँ तक #क jीमती
                     ु                                               ु
 इं>दरा गांधी ने छाE जीवन से ह6 राजनी0त मA Y च लेनी आरCभ कर द6 थी राजनी0त क गुन सीखने क
                                                                           े           े
 लए सकदर ने अर-तु को ,च?ƒग_त मौय ने चाण य को अपना गh बनाया राजनी0त क अनेक चतर
      ं                   ु                        ु                े       ु
 eखलाkड़य* ने संसार का नेत ृ व #कया ,सह6 >दशा द6 और माग दशन #कया
 सरकार ने भी मतदान क8 उo २१ से घटा कर १८ कर द6 छाE जीवन मA राजनी0त का कवल वह6 वरोधी है
                                                                       े
 जो लोकतंE क वरोधी ह; य>द छाE जीवन से राजनी0त न सीखी जाए तो राजनी0त सीखने क8 सह6 उo
            े
  या है ?राजनी0त मA पनपा •'टाचार भी इस बात का सा य है #क आज -कल राजनी0त मA कम लोग
 Y च ले रहे ह; जो आगे चल कर बेहद खतरनाक हो सकता है
 इसे Y च कर बनाया जाए ,30तयोगी बनाया जाए ,अ?यथा व2व लोकतंE खतरे मA पड़ जाएगा और
 राजत?E अथवा तानाशाह6 से व2व मंच पर हा -हा कार मच जाएगा कछ लोग ह6 3ग0त शील ,अ…†नीय
                                                         ु
 और 3ेरक ह*गे राजनी0त और लोकतंE एक दसरे क परक ह; दे श 3ेम क8 भावना से ओत 3ोत अनुभव
                                    ु    े ू
 अथवा कछ सीखने क8 भावना और कछ कर गुजरने क8 यह6 सह6 उo है व2व मA इस बात क अनेक
       ु                    ु                                           े
 उदाहरन ह; #क छाE जीवन राजनी0त न सीखने वाले लोग नौ सeखए ह6 रहते है
 वतमान समय को अ भशा पत करने वाले लोग आतंकवाद ,भाई -भतीजावाद एवं समाज मA पैदा होने
 वाल6 अनेक या धय* को ज?म दे ते ह; य*#क इ?ह*ने कभी भी 0नय मत कोई सीख ,+ान ,अनुशासन
 और सहनशीलता सीखी ह6 नह6|आज हमारे पास अ:छे डॉ टर ,वै+ा0नक ,3शासक उपलnध ह; ,कमी है
 तो कवल अ:छे नेताओं क8 िजनक आभाव मA हमारा जनतंE खतरे मA है आज राजनी0त मA -व-थ ,सुंदर
     े                     े
 , श'ट आचरण क8 कमी है आए >दन संसद मA होने वाले अशोभनीय आचरण हमA इस बात क लए 3े5रत
                                                                        े
 करते ह; #क आज व)यल* मA अ:छे नेता बनाने का भी कोस शा मल #कया जन चा>हए िजससे रा'1 को
 युवा ,होनहार ,30तभाशाल6 और आदशमय कणधार मल सक ,तभी रा'1 का भ व'य सुखमय और
                                             े
 उLLवल हो सकगा कबीरदास ने कहा है _
            े



                           "आचर6 सब ज मला, वचार6 मला न कोय
                            को>ट आचर6 बा5रये, जो एक वचार6 होय"
                                  .......................................



                                                  www.kalpanadubey.com            Page 9
नरं तर होता सरल0करण श ा का तर 1गरा रहा है
वप
                              "अभी तो सहर है , जरा सुबह तो होने दो,
                            अभी तो आगाज है , अंजाम य* सोचने लगे"
 >दन ब >दन श ा का बदलता -वYप अपने साथ कईकई ववाद लेकर आता है आर ण का ,कभी
 पर6 ाओं का ,कभी भाषा का एसा ह6 एक ववाद हमार6 आज क8क8 वाद ववाद 30तयो गता का शीषक
 बन कर हमारे सCमुख आया है #क 0नरं तर होता सरल6करण श ा का -तर गरा रहा है jोताओ ,म; इस
 बात से कतई कतई सहमत नह6 हूँ बदलाव तो 0नय0त का 0नयम है ,#फ़र हर सद6 मA मA कोई न कोई
 बदलाव तो होता ह6 है ले#कन िजस बदलाव को समाज मा?यता दे ,जो सबक >हत क लए हो ,उसे
                                                              े     े
 नकारना य* ?




 हर चीज क दो पहलू लू होते ह; मन'य क8 3व0त यह6 रह6 है #क वह गलत चीज को जJद6 Mहण करता है
         े                     ु       ृ
 इस लए आव2यक है #क सह6 hख को व-तार से जाना जाए सरल6करण से हमA अनेक लाभ हुए ह; -
     व)या थय* क8 पढाई मA Y च बढ़ना | जो व)याथg श ा ज>टल होने क कारण ण श ा से जी चराते थे
                                                             े                  ु
 ,अब उनका पढाई मA मन लगाने लगा है उनमA 30त-पधा करने का उ साह भी जाMत हुआ गा है
 पढना आसान होगया है ,यह जानकर Mामीण भी आगे आएँगे वे पढाई मA अपनी Y च >दखाएंगे ,िजससे
 सा रता का 3चार भी बढे गा और आ थक       ेE मA उ?न0त भी होगी सरल6करण क अंतगत पाpयqम मA
                                                                     े
 अनेक सुधार #कए गएिजससे व)याथg को पढ़ने मA सु वधा हुई उन पर पढाई बोझ न पडे िजससे वे
 उदासीन हो जाएँ उदासीनता क कारण कछ व)याथg अपनी जीवन ल6ला समा_त कर लेते ह; ,या पढाई
                          े      ु
 छोड़ कर गलत रा-ते पर भटक कर अपना जीवन तथा अपने अ भभावक* क8 उCमीदे दांव पर लगा दे ते ह;
 य>द सरल6करण न होता तो रामायण और महाभारत जैसे M?थ सं-कृत मA ह6 पढे जाते तो सबक8 समझ
 मA न आते #कतने ह6 आयुव>दक नु-ख* ,शा-E* से हम अप5र चत ह6 रह जाते
                       €
 सरल6करण से बेरोजगार6 क8 सम-या भी कछ हद तक हल होगी ७०% अंक लाने वाले व)याथg ८०-
                                   ु
 ९०%अंक से उ तीण ह*गे और नौकर6 क अवसर बढA गे
                                े
 आप ह6 बताईए सरल6करण क इतने लाभ होने क बावजद उसे नकारना कहाँ क8 समझदार6 है ? य* कछ
                      े               े    ू                                     ु
 लोग श ा क -तर का बहाना बना कर व)या थय* पर मायूसी और परे शा0नय* का बोझ डालना चाहते ह;
          े
 ?कछ लोग नह6 चाहते #क आज का व)याथg आ म व2वास क बल पर िज?दगी मA आगे बढे वे आज क
   ु                                          े                               े
 युग मA भी लक8र क फक8र बने बैठे ह; मेरे वप ी मE का कहना #क सरल6करण से व)याथg मेहनती
                 े
 नह6 रहे ,गलत है मE सरल6करण तो एक डोर है िजसक सहारे व)याथg जीवन मA आगे बढ़ सकता है
                                             े
 आज क इस तेज र‡तार क युग मA सरल6करण व)याथg क लए वह मे1ो -रे ल है िजसक सहारे उसका
     े              े                       े                        े
 जीवन सरलता ,सुगमता से अपनी मंिजल 3ा_त कर सकता है |

 आज हमारा दे श हर     ेE मA 3ग0तशील है #फ़र श ा के    ेE मA य* पछडे? य* वह6 क से कमल पर



                                                www.kalpanadubey.com             Page 10
अटक रहA ,क से कमयोगी भी होता है स:चा कमयोगी वह6 होता है जो सरल6करण को अपनी वैसाखी नह6
   े
अ पतु अपना नया ह थयार बना कर कम ेE मA वजय 3ा_त करे |गीता का उपदे श भी यह6 कहता है #क
कम करो ,फल क8 इ:छा मत करो |
सरल6करण क8 इस नई नी0त क साथ ह6 हम नए युग से जुड़ सकगे
                       े                          A
                            "आज पुरानी जंजीर* को तोड़ चक ह;
                                                      ु े
                            य* दे खA उस मंिजल को जो छोड़ चक ह;
                                                         ु े
                          नया दौर है , नई उमंगे, अब है नई कहानी
                       युग बदला, बदलेगी नी0त, बदल6 र60त परानी "        ु
                               .......................................




                                               www.kalpanadubey.com          Page 11
पुर कार क होड़ ने भर)टाचार को बढावा 7दया ह
प
                                          उथल6 होती जा रह6 है ,
                                            आदमी क8 आ मा,
                                          यह6 ह; वेह सम-या जो,
                                        सबसे अ धक कचो)ती है .



    भ'टाचार पर-कार* क8 दे न बन गया यो#क आज उसक8 0नय0त मA फक आ गया है . हर वह चीज़ वेह 3ा_त
             ु
    कर लेना चाहता है िजसक वह योVय नह6 है . इसक लए वहसाम,- दाम, दं द-भेड़ #कसी का भी पयQग करने
                         े                    े                   ु
    क लए -वतंE है . हर यि त इसबदती 30तयो गता क8 और वैसे ह6 बढता जा रहा है जैसे पतंगे शमा क8
     े
    और बड़ते है और अपने पंखो को जला बैठते ह; . . एकाध ह6 पतंगा ऐसा होता है जो शमा का सामना कर
    सक.
      े

    आज eखलाड़ी शि त-वधक दवाइयो का 3 योग कर या ग़लत तर6का अपना कर इन 30तयो गताओ को
    जीतना चाहते ह;. नतीजा अपमान और शम को ओड़ना पड़ता ह;.

    एक कहावत ह; “हर चमक8ल6 वा-तु सोना नह6 होती “ यह6 चमक यि त को गुमराहकर दे ती है इसका
    मु^या कारन है – आ म –vishwas और ƒण 0न2चय क8 कमी . य>द यि त को अपने ऊपर व2वास हो
    तो और उसक मन मA Wढ़ता हो तो ये चमकते मैडल -वयम उसक पास आ जायAगे .
             े                                       े

    आज भ'टाचार क8 मार झेल रहा समाज इस बात क8 3ेरणा दे ता है Uबना ग़लत ता-ताअपनाए काम हो ह6
    नह6 सकता. इसी सोच ने लोगो को भर'टाचार क रा-ते पर धकलाहै .इसमे सहायक बनी है बदती
                                           े           े
    30तयो गता और बड़ते पुर-कार .

    आज कला, सा>ह य, व+ान आ>द क लए भी व भन ् पुर-कार* क8 घोषणा क8 जातीहै . #कतने उ चत
                              े
     यि त इ?हA 3ा_त करते ह; ?आए >दन होने वाले वरोध इस बात को 3माeणत करते ह; #क कह6ं न कह6ं
    कछ गडबड है | व2व -तर पर ये 30तयो गताएँ पारदशg होती ह; ,इस लए 30तयोगी गलत काम करते
     ु
    पकड़े जाते ह; |

                                      .......................................




                                                          www.kalpanadubey.com         Page 12
पुर कार क होड़ ने भर)टाचार को बढावा 7दया ह
वप
 पर-कार #कसी यि त क यि त व को , कायQ को , रचनाओ को , शैल6 को 0नखारने का काय करता है . दसरे शnद*
  ु                े                                                                   ु
 मA कहू तो मA कह सकती हु क8 पर-कार #कसी यि त को उसक अ:छे कायQ क लए 3ो साहन -वhप >दया जाता ह;.
                             ु                     े           े
 सदन क मत से ये पर-कार ह6 भर'टाचार का कारन ह;. मA इसे सरासर ग़लत मानती हु . . पर-कार तो यि त मA
      े          ु                                                            ु
 -व-थ 30तयो गता क8 भावना जगाते ह;. य>द ऐसा न होता तो पर-कार* क8 पड़ती समा_त हो गई होती. आज
                                                      ु
 पर-कार* क8 सीमा घर, प5रवार और रा'1 तक ह6 स मत नह6 है . ये सीमाओं को लाँघ चुक ह;. चाहे ये खेलो मA मलने
  ु                                                                          े
 वाले पर-कार हो, या श ा , सा>ह य, व+ानं या समाज सेवा से सCभं>दत हो. इन पर-कार* ने यि त को व2व
       ु                                                                ु
 -टार पर लाकर खड़ा कर >दया है . इन पर-कार* क 30त लोगो क8 चाहत #कतनी अ धक हो गई है और उसक लए इन
                                   ु       े                                           े
 पर-कार* को 3ा_त करना उनका उPे2य बन गया है .
  ु

 शाि?त, व+ानं. सा>ह य और अथशा-E पर मलने वाले नोबल –पर-कार ने यि त को रा'1 का ह6 नह6 बिJक
                                                    ु
     व2व का सवjे'ट -थान 3दान #कया ह;. सोभाVयशाल6 है वे लोग िज?हA ये पर-कार मले ह;. इस पर-कार क8 कामना
                                                                     ु                 ु
 करना और इसक लए पयटन करना , अपराध तो नह6. अपराध तो तब होगा जब लोगो को इससे वं चत कर >दया
            े
 जाएगा. खेलो क शेEो मA ओलं पक मA मैडल 3ा_त करना हर eखलाड़ी का सपना होता है . इसक लए पयटन करना ,
              े                                                                े
     या ग़लत है . ..

 लोग चाँद और सरज मA क मया दे ख लेते ह;. उजा का -तोE सय भी लोगो को भीषण गमg से तपा दे ता ह;. सखे का
              ू                                      ू                                       ू
 कारन बनता है . इसका मतलब यह तो नह6 क8 सय का मह व कम हो जाएगा. शीतल चांदनी और शाि?त दे ने वाला
                                        ू
 चाँद भी लोगो को 0नगाह* मA कलं#कत है . इससे उसक8 शीतलता मA कमी नह6 आती. यह6 मेरा मानना है क8 भ'टाचार
 का सहारा लेकर इन पर-कार* को द ू षत न #कया जाए . पर-कार यि त क8 30तभा को दशाते ह;. उसे मान, सCमान,
                   ु                              ु
 यश, धन, क80त उसे सब 3दान करते ह;. #फ़र उसे भ'टाचार का कारन मानना कहाँ तक उ चत है

 •'टाचार पनप रहा है - लोगो क8 0नय0त मA , उनक8 सोच मA , उनक8 भावना मA , उनक कायQ मA , यव-था मA , -वाथ मA .
                                                                          े
 और इसक लए कलं#कत #कया जा रहा है पर-कार* को. यह सच है क8 इन पर-कार* को 3ा_त करने मA यि त अ>द-
       े                          ु                          ु
 चोट6 का जोर लगा दे ते ह;..साथ ह6 कछ ग़लत ह कदो को भी अपनाते ह;. अतः. आज जhरत है चु-त-दh-त रहने क8 .
                                   ु        ं                                         ु
 इस •'टाचार Yपी धुन से बचने क8 अ?यथा यह धुन एक >दन सारे मैडल सारे पर-कार चाट कर जाएगा.
                                                                   ु

 मेरे सा थयो ने •'टाचार क8 बहुत सी misaale पेश क8 है . . या कह6 भी यह स होता है क8 •'टाचार क प:छे
                                                                                            े
 पर-कार* का हाथ ह; . पर-कार तो उस Œव तारे क8 तरह है जो ि-थर रहकर सब को >दशा >दखाते ह;. सबक8 योVयता
  ु                   ु            ु
 का मा_द?द होते ह;.
        ु

 यह सच है क8 पर-कार सफ़ एक मैडल या 3श सत पाE नह6 होता , वह यश , धन , समान का सचक और व-तारक
              ु                                                              ू
 होता ह;. , यह6 लालच , यह6 पाने क8 चाहत ह6 तो यि त को क:छ कर गजरने क8 3ेरणा दे ती है . यह अलग बात ह; क8
                                                       ु      ु
 लोग इसे ग़लत ढं ग से 3ा_त करने क8 को शश करते ह;. इसे आप •'टाचार कहना चाहे तो कह सकते ह;.

 ह6रे क8 अगर चमक Lयादा ह; , क8मत Lयादा है तो इसमे ह6रे का या दोष . . 3ाचीन काल से ह6 पर-कार* का 3चालन
                                                                                      ु
 रहा ह; . raaja -महाराजा 3सन होकर पर-कार >दया करते थे. आज पर-कार* का Yप बदल गया है , उनका 3चालन
                                   ु                       ु




                                                     www.kalpanadubey.com                      Page 13
नह6 बदला बिJक उनक8 सं^या और शेE बाद गए है . यह बात ये पमा0नत करती है क8 पर-कार* का परभाव >दन-
                                                                         ु
30त>दन बढता जा रहा है . अब यह अलग बात है क8 सम?ƒ मंथन से #कसी को अमत मलता है तो #कसी को वष .
                                              ु                    ृ
अथात #कसी को पर-कार मलता है तो #कसी को •'टाचार का अपमान.
              ु

•'टाचार वषबेल क8 तरह होता है . जो सफ़ वनाश करता है ----------- सफ़ वनाश .

•'टाचार यव-था मA या_त ह;., •-ताचार सोच मA या_त ह; , इ'या , )वेष , और -वाथ मA या_त ह;. य>द शी• ह6
इन भावनाओ पर 0नयंतरण न #कया गया तो 0न2चय ह6 यह •'टाचार hपी wishbale इ?हे भी अपने घेरे मA लपेट
लAगी.

अभी ओलं पक मA हमA सफ़ एक मैडल मला . हम सभी को 0नराशा हुई यो#क हम सभी इसक लए पयाfत थे . कह6
                                                                       े
कछ कमी रह गई. य>द भ'टाचार से मैडल मलते तो हमA अव2य ह6 कछ तो मैडल और मल ह6 गए होते यो#क
 ु                                                     ु
•'टाचार मA तो हमारा दे श काफ़8 आगे ह;.




                      काश/------ऐसा होता तो हम भी कछ और पुर-कार पा जाते..
                                                   ु

                                        .......................................




                                                            www.kalpanadubey.com         Page 14
मानव जाती क8 तीŽ ग0त से उ?न0त ह6 उसक वनाश का कारन है
                                                       े
प
                                  ‘कह रहा यह सां य र व ढलता हुआ,
                                   यो सदा चढ़ कर उतरना है अटल ,
                                  फल चढ़ तh क शखर पर हं स >दया ,
                                   ु        े
                                    अंत मA तो धल का आँचल मदल.’
                                               ु          ृ ु


    सCपूण जगत इस बात से प5र चत है क8 ज?म , वकास और म ृ यु शा2वत है , अटलहै , ले#कन इस
    शा2वता मA तीŽता तब और भी Lयादा आ जाती है जब वकास औरउ?न0त क8 ग0त तेज हो जाती है .
    िजतनी तीŽ ग0त से चलA गे उतनी ह6 जJद6 मंिजलको 3ा_त करA गे-------. मंिजल 3ा_त होने पर मनु'य* के
    वचार* मA प5रवतन आता है .यह प5रवतन दो3 कार का होता है . १-इस भो0तक शर6र को भो0तक साधन*
    से सखपहुचाने क8 लालसा और २-आदमी क8 चेतना को बदलने क8 लालसा. व+ानं मनु'य*क सख –
        ु                                                                    े ु
    साधन* पर यान दे ता है तो धरम मन'य क8 चेतना पर . व+ान तीŽ ग0त से उ?न0त करता है िजसका
                                   ु
    सहारा मानव जाती ने लया है . वेह तीŽ ग0त से वजय क8और बढता है और वजय क उ?माद से भोग-
                                                                        े
    वलास क8 और मुड़ता है . नै0तकता और मानवीय मJय* से गर जाता है . और यह6 से उसका पतन 3hCभ
                                             ू
    हो जाता है .

    गाँधी –जी ने कहा -भोग और वलास से सजन नह6 होता , तप – याग क साथ ह6 सजन का 5र2ता है . भोग
                                      ृ                       े        ृ
    – वलास का रा-ता तो पतन क8 मंिजल तक पहुचने क लए अ भश_त है .
                                               े

    रोम और उनां का वकास िजस तीŽ ग0त से हुआ उतनी ह6 तीŽ ग0त से वनाश हुआ .इस तीŽता मA एक
    अवगण यह भी नज़र आता है क8 तीŽता मA सोच क8, उसकद'3भाव* को न समझ पाने क8 , सावधा0नय*
        ु                                         े ु
    क8,सावधा0नय* क8 कमी रह जाती है |कहा गया है "जJद6 का काम िज?न का " अथात उसमA गहन
    च?तन क8 कमी होती है | इस लए तीŽ ग0त से #कया गया वकास जJद6 ह6 वनाश क कगार पर पहुंच
                                                                       े
    जाता है |

                          ताश क प त* का महल िजतनी जJद6 बनता है उतनी...
                               े

                                      .......................................




                                                          www.kalpanadubey.com          Page 15
मानव जाती क ती8 ग त से उ न त ह0 उसक वनाश का कारन है
                                                े
वप

 तीŽ ग0त से क8 गई उ?न0त 3ग0त का सचक है । धीरे -धीरे क8 गई उ?न0त , उ?न0त नह6 प5रवतन
                                 ू
 कहलाती है । जो समय क8 ग0त क साथ होना 0नि2चत है । मानव जाती ने जब प5रवतन का बीडा उठाया है
                            े
 अपने को उ?न0त क शखर पर पहुचाया है । यह उसक8 सोच और कमठता का ह6 प5रणाम है । तीŽ ग0त
                े
 से ह6 उ?न0त क8 जा सकती है यो#क धीरे -धीरे क8 गई उ?न0त से उसमे अवन0त क त व अपने पैर फला
                                                                      े              ै
 लेते है । यह मनो- व+ा0नक स य है क8 मानव उ?न0त क8 और उतनी जJद6 अMसर नह6 होता िजतनी
 जJद6 अवन0त क8 और । समय भी धीरे नह6 चलता वह 0नरं तर आगे बढता रहता है । समय क साथ
                                                                            े
 चलना उ?न0त है । आज मनु'य क8 आयु इतनी कम है क8 वेह सोच - वचार* मA समय बरबाद नह6 कर
 सकता।

 #कसी भी काय क8 इPा इस बात मA नह6 है क8 वेह #कतनी दे र मA हुआ । बिJक इसमे क8 वेह #कतनी जJद6
 हुआ . तीŽ ग0त से उ?न0त पतन का कारण नह6। पतन है मन'य क8 सोच . मन'य भो0तक वाद क8 और
                                                     ु           ु
 बाद गया है . उसने नै0तक मJय* का याग कर >दया है . और यह6 उसक पतन का करना है . ओशो ने कहा
                          ू                                 े
 है – भो0तक सख का सबसे मह वपण योगदान यह है क8 वेह अ0नवाय Yप से ववाद क8 और ले जाता है ।
             ु              ू
 यह6 मानव जाती क वनाश क कारन है ।
                े      े

 मनु'य ने व+ानं से, व)युत से , और उजा से #कतनी 3ग0त क8 है । #कसी से छपी नह6। ये मानव जाती
                                                                     ु
 क लए वरदान है । वनाश क लए उतरदायी है - मनु'य क8 -वाथQ और भोग ल_सा क8 3 व0तया , दसरो
  े                    े                                                         ु
 क अ धकार* क हनन क8 आदत, अंहकार क8 भावना , और अकCदयता । ये 3 व0तया वनाश क कारन है ।
  े         े                                                            े
 इ?हे बढावा दे ती है -स ता और सCप? ता । सता और सCप? ता उस पानी क सामान होती है जो नौका क
                                                                े                       े
 बहार रहता है तो नौका को शि त पदान करता है और उसक तैरने का साधन बनता है #कंतु जब यह6 पानी
                                                 े
 नौका क अ?दर आ जाए तो नौका क डूबने का कारन भी बनता है ।
       े                    े

 3ग0त से तो मनु'य ने 3क0त और अलौ#कक स ता क रह-य* से भी परदा उठा >दया है ।
                                          े


                                   .......................................




                                                       www.kalpanadubey.com        Page 16
फा ट फ़ड ने जीवन शैल0 को आसान बना 7दया है
प                              ू



                      कम फा-ट -----------------गो फा-ट ------------------दो फा-ट ---


    आज क8 जीवन शैल6 ह6 यह6 है –सब कछ फा-ट । इस भागम-भाग क8 िजंदगी को य>द#कसी ने आसान
                                   ु
    #कया है तो वह है फा-ट –फ़ड अथात जJद6 तैयार हो जाने वालाभोजन । भोजन भी वह जो ताजा और
                            ू
    -वा-•यवधक भी हो । हा वेह, यह6 है आज आसन फा-ट- फ़ड िजसने हमार6 िजंदगी को सुकन >दया है ।
                                                   ू                          ू
    अ?य था भूखे रहकर कब का युवा –वग अि?तम साँसे गन रहा होता ।

    आज क_यटर का युग है । हर काय भी उसी ग0त से हो रहा है । सच मा0नए आज #कसको फसत है जो आज
        ं ू                                                                  ु
    खाना भी कोई आराम से खा सक । बनाने क8 तो कौन सोचे ।सुबह उठकर ज़रा बहार झाँक कर तो दे eखये --
                             े
    ----सूय क8 #करन* क आगमन से पूव ह6लोग बस* क इि?तज़ार मA खड़े होते ह; । ब:चे -कल बैग लए बस
                      े                       े                                ू
    क इि?तज़ार मA 0नंद6आंख* से हाथ मA पकड़ा स;ड - वच खाते नज़र आएंगे । स;ड- वच जायAगे . या करे
     े
    .स;ड वच , बेग€र, मVगी आ>द खा)य पदाथQ ने ह6 तो उ?हA सहारा >दया है । आज #कस माँ को इतनी फसत
                                                                                           ु
    है क8 जो सुबह उठकर परांठे भी बनाए और -वयम भी काम पर 0नकले । वह भीइंसान है कोई मशीन नह6 ।
    और---आप तो जानते ह6 है क8 -वा-•य क लए परांठे #कतने अ-व-•य- करक है . वजन भी बढाते है और
                                      े
    बीमा5रय*को भी आमंEण भी दे ते है . ऐसे मA एक ह6 सहारा है फा-ट –फ़ड .
                                                                   ू

    यथानाम तथो गुन: . फा-ट फ़ड यानी जJद6 तैयार होने वाला ,जJद6 खाए जाने वाला खाTय पदाथ | जो
                            ू
    कह6ं भी ,कभी भी ,कसे भी खाया जा सक | न _लेट क8 जYरत ,न कटोर6 क8 ,न चCमच क8 |एक पेपर
                      ै               े
    नैप#कन ह6 पया_त है |#कतना अ:छा है यह भोजन ,न हाथ गंदे न कपड़े गंदे |

    म; आज भी याद करता हूँ वे >दन जब दल -चावल या सnजी -रोट6 खाते समय कछ न कछ कपड* पर गर
                                                                     ु    ु
    ह6 जाता

    कभी हाथ पीले कभी कपड़े पीले हो जाते ,कभी -कभी कौपी #कताब* पर भी यह रं ग >दखाई दे ने लगता |#फर
    माँ का असर मझ पर |#कतनी मसीबत थी कछ भी खाना और कह6ं ले जाना |
                ु            ु        ु

    फा-ट फ़ड ने हमार6 >दन चया को फा-ट बना >दया है ,बस यूँ समझो चाट मंगनी -पट शाद6 अथात थोड़े ह6
          ू
    समय मA खाना तैयार |चाहे जब बनाए और खाएँ |

    एक जमाना था जब घर क8 म>हलाएँ अ धकतर समय #क चन मA ह6 Uबताती थी ,उनक हाथ* से कपड* से
                                                                      े
    मसाल* क8 खशबु आती ह6 रहती थी |
              ु




                                                     www.kalpanadubey.com              Page 17
आज माँ भी खश और म; भी खश |माँ को रसोई मA खतना नह6 पड़ता और हम भी पारCप5रक खाने से बच
           ु           ु
जाते |

आज म>हलाए रसोई को छोड़ आगे बढ़ चक8 है , उनक हाथ* मA पु-तक और फाएले
                              ु          े             े

                               .......................................




                                                   www.kalpanadubey.com     Page 18
फा ट फ़ड ने जीवन शैल0 को आसान बना 7दया है
                            ू
वप
                                "बदले-बदले से आसार नज़र आते है ,

                               अब तो जगह-जगह मुझे फा-ट-फ़ड खाते
                                                        ू
                                        बीमार नज़र आते है ।"

 ये फा-ट फ़ड । इ?होने तो हमार6 जीवन शैल6 को ह6 बदल डाला है । बदल या, न'ट ह6 कर डाला
          ू
 है । भारतीय खान -पान क8 शैल6 को पथ-•'ट ह6 कर डाला है । दर कर >दया है यवाओ को ममता क8 ठं डी
                                                         ू             ु
 छाओ से ।

 कहते है क8 >दलो क रा-ते पेट से होकर जाते है । माँ ब:चे को दलारती है , पचकारती है ,तब उसे अपने हाथो
                  े                                         ु           ु
 से बना -वा>द'ट, -वछ मखन वाला परांठा eखलाती है । पर?तु अब ब:चा मांगता है मैगी िजसमे सवाय
 मैदा क और मसाल* क कछ नह6 । भला पैकट मA बंद चीज* मA माँ क8 ममता कसे समाएगी।
       े          े ु              े                             ै

 हमारा दे श कृ'ण भगवन का दे श है । जहाँ उ?हA माखन-चोर भी कहा जाता है । वह मटक8 से माखन और
 दह6 चरा-चरा कर खाते थे पर?तु अब कृ'ण क8 धरती पर ब:चे खा रहे है - पLजा, बगर, नुडJस । ये कसी
      ु   ु                                                                              ै
 जीवन -शैल6 है । जहाँ आराम से बैठकर खाने का समय नह6 है । पहले ज़माने मA पुरा प5रवार बैठ कर
 आराम से भोजन खाता था ।िजससे उनका आपसी 3ेम बढता था ।

 पर?तु आज फा-ट-फ़ड क कारन युवा पीडी घर का खाना खाने से कतराती है । औरकामकाजी पुYष और
                ू  े
 म>हलाये भी हJका-फJका खाक-कर चले जाते है और #फ़र कट6नमA खाते है फा-ट-फ़ड।
                  ु                              ;                   ू


 हाँ | जीवन तो आसन हो गया है यो#क रसोई घर मA कम समय दे ना पड़ता है ।पर?तुमेरे मE । पूवg और
 पि:छमी सuयता का सं-कार6 अ?तर य>द अ धक है तो वह हमार6रसोई और भोजन -शैल6 क कारन।
                                                                         े
 भारतीय प5रवार रसोई घर को मि?दर मानते है ।उसक -वाद और पेट को ति_त घर क भोजन से ह6 मलती
                                             े                ृ       े
 है ।


 फा-ट-फ़ड से नु सान भी झेलने पड़ते है । जhh नह6 क8 बहार का खाना हमेशा साफ़ ह6 हो । ऐसा न होने
       ू
 पर पेट ख़राब हो जाता है । बासी खाना खाने पर फ़ड-पोइ स0नंग होजाती है अथात खाना वष- वाट हो
                                             ू
 जाता है । िजतने का खाना नह6 होता उससे Lयादा डॉ टर को दे ना पड़ता है । और जान क लाले पड़ जाते है
                                                                              े
 वो अलग। हमारा दे श तो व भन ् 3ांतीय -पकवान* का दे श है । यहाँ व भन ् 3 कार क यंजन बनते है ।
                                                                             े
 हमA अपने दे श को फा-ट-फ़ड का गुलाम होने से बचाना है । यो#क पेट और िज यहा आपसी शEु है । जीभ
                        ू




                                                  www.kalpanadubey.com                    Page 19
सफ़ -वाद मांगती है और पेट ति_त । -वाद लालची है और ति_तमो
                          ृ                       ृ                      लालच को छोड़ो और त'णा को
                                                                                          ृ
अ?न क अमत से त_त करो ।
     े  ृ     ृ




                               यह समझो और समझाओ,
                              फा-ट -फ़ड से ख़द को बचाओ,
                                     ू     ु
                                   भई दाल-रोट6 खाओ,
                                      3भु क गुन गाओ.
                                              े
                               .......................................




                                                   www.kalpanadubey.com                     Page 20
सदन क राय म म7हलाओं का नौकर0 करना प@रवार क लए उपयुBत है
                                                          े
प
                                      क7ह व1ध रचो नार0 जग मा7ह
                                       े


                                         पराधीन सपनेहु सुख नह0

    स>दय* से नार6 ने द-ताक8 िजंदगी जी है । बचपन मA पता क अधीन रहना पड़ा ,तो युवा -अव-था मA प0त
                                                        े
    क अधीन व ् वदा-अव-था मA पुE क अधीन। यह दासता उसे आ थक Yप से 0नभर न होने क कारन भोगनी
     े          ृ                े                                           े
    पड़ी । इतनी लCबी गुलामी तो #कसी गुलाम ने भी नह6 सह6 होगी। आज २१ व शताnद6 मA जाकर नार6 ने
    -वतंEता क8 साँस ल6 है । वह आ थक Yप से -वतंE हुई है । उसक8 इस -वतंEता से न सफ़ उसे सुख मला
    है बिJक सCपूण प5रवार सुख का अनुभव कर रहा है । ब:चे अपनी मनमानी कर सकते है तो बजुग भी
                                                                                  ु
    आराम क8 िजंदगी जी रहे है ।

    -Eी मA भगवान ् ने धय, याग का भाव इतना भरा है क8 उसने कभी अपने सुख का यान नह6 रखा िजतना
    प5रवार का । प5रवार का सुख ह6 उसका अपना सुख है । आ थक Yप से संपन माँ ह6 ब:चो क अरमानो को
                                                                                 े
    पुरा करती है । प5रवार क लए सुख का साधन जुटती है । तो साथ ह6 प0त को आ थक भागीदार6 करक
                           े                                                            े
    प5रवार क भोझ को ध*ने मA सहायक होती है
            े

    शY मA कछ शेE* मA ह6 म>हलाये काय कर रह6 थी ले#कन आज कोई भी शेE ऐसा नह6 है िजसमे नार6 ने
     ु     ु
    अपनी योVयता से अपना स का न जमाया हो। आज वह श ा, च#क सा, व+ानं तक0नक8 मA ह6 नह6 ,
    सेना , वायु सेना गोताखोर भी है । तो अ?त5र   मA भी अपने कदम रख चक8 है ।
                                                                   ु

    नार6 दे खने मA िजतनी कोमल होती है उतनी ह6 उसक8 मान सक शि त अ धक होती है । वह प0त क साथ
                                                                                      े
    चलने मA गव महसूस करती है । ब:चो क पालन पोषण को भी वह गव से करती है । सCपूण सि'ट को ममता
                                     े                                          ृ
    और _यार का पाठ पदाने वाल6 नार6 ने ह थयार उठाने से भी परहे ज नह6 #कया । यवसाय क शेE मA जहाँ
                                                                                  े
    भी उ?ह*ने कदम रखा उसे _यार , -नेह , शाल6नता और -वछता से मंkडत कर >दया है ।

    आज लोग वहां काम करना पसंद करते है जहाँ क8 मु^या-3बंधक म>हला हो। ऐसे -थान पर यव-था तो
    अ:छ होती ह6 है और उसमे नार6 ज0नत _यार और -नेह क8 ग5रमा भी होती है । नार6 व भन ् शेE* मA काय
    कर रह6 है ले#कन उसका 3य शेE प5रवार ह6 है जहाँ वह वा सJय से ,_यार से, ममता से प5रवार को
    सींचती है । जब कभी आ थक तंगी होती है तब िजतनी तड़प , िजतना दद नार6 को होता है उतना #कसी को
    नह6 होता । खशी क8 बात यह है क8 वह आ थक Wि'ट से समथ है । नौकर6 करक वह इतनी समथ हो गई है
                ु                                                    े
    क8 प5रवार को आ थक तंगी से बचा लेती है । इससे उसका आ म- व2वास बढता है । और समाज मA
    सCमान मलता है । समाज ने उसक8 योVयता से लाभ उठाया है । इससे समाज और रा'1 का उ थान हुआ
    है .




                                                     www.kalpanadubey.com              Page 21
कोई भी प5रवार तभी आध0नक समय मA सुख और सCपनता से रह सकता है जब प0त प नी दोन* काय
                    ु
करते हो। बदती मंहगाई और भौ0तकवाद क8 बदती मार मA आज नौकर6 करना अ0नवाय हो गया है । समथ
नार6 ह6 आगे बाद सकती है और समाज को आगे बड़ा सकती है । और प5रवार को आगे बड़ा सकती है .

आध0नक समय मA म>हलाओं क 30त होने वाले अ याचार* ने >हला कर रख >दया है । कह6 दहे ज़ क लए
  ु                   े                                                          े
उ?हA जलाया जाता है तो कह6 ब:चे न होने पर घर से 0नकाल >दया जाता है । कह6 मार-पीट कर घायल कर
>दया जाता है । तो कह6 उसे मान सक यातनाएँ दे कर उसे आहात #कया जाता है । ऐसे हालातो मA नार6
नौकर6 नह6 करे गी तो उसका जीवन नरक बन जाएगा । वह डर- डर ठोकरे खाने क लए मजबूर हो जायेगी
                                                                   े
। अततः मA यह कहना चाहूंगी क8 आज क युग मA नौकर6 करना नार6 क लए अ0नवाय है । इससे प5रवार
                                 े                        े
संभलता है Uबगड़ता नह6।

                                   .......................................




                                                       www.kalpanadubey.com          Page 22
सदन क राय म म7हलाओ का नौकर0 करना प@रवार क लया उपुBत ह
                                                       े
वप
                         नार6 तुम कवल jदा हो, व2वास रजत नभ पग तल मA
                                   े

                             पयष -तोE सी बहा करो, जीवन क संदर तल मA
                               ू                        े ु


 भारत क8 नार6 का नाम सुनते ह6 हमारे सामने 3ेम, कhना, दया , याग और सेवा-समपण क8 म0त अं#कत
                                                                                ू
 हो जाती है । नार6 क यि त व मA कोमलता और स?दरता का संगम होता है । वह तक क8 जगह भावना से
                    े                     ु
 जीती है । इस लए इसमे दया कhना, ममता , याग क गुन अ धक होते है । नार6 वह शि त है जो यि त
                                            े
 को जनम दे कर उसका पालन-पोषण करती है । और उसे जीवन-संघष हे तु शि त-संप?न बनाती है ।
 प5रवार को सखी बनाने क लए नौकर6 करने से म>हलाय* का शार65रक और मान सक शोषण हो रहा है ।
            ु         े
 जहाँ म>हलाये >दन-30त>दन आ थक-3ग0त कर रह6 है वाह6 अपने आप को खतरनाक ज़ंग मA उतार रह6 है ।
 वह ऐसे चq यूह मA 3वेश कर चक8 है जहाँ से 0नकला नह6 जा सकता । ससक- ससक कर दम तोड़ना ह6
                           ु
 अि?तम स य है ।

 नार6 -वतंEा क नाम पर वह दासता क दलदल मA फसती जा रह6 है । पहले क8 िजCमेदार6 तो उस पर है ह6
              े                 े         ं
 या0न प5रवार क8 दे ख- भाल , ब:चो का पालन पोषण क8 िजCमेदार6 तो है ह6 ,ऊपर से आ थक िजCमेदार6
 भी उसी क क?ध* पर दे द6 गई है । थोड़े मंहगे व-E* और दो चार आभु2नो क8 जंजीरे उसने -वयम सहष
         े
 पहन ल6 है । वह खश है या नह6 अब वह 0नणय भी उसक हाथ मA नह6 रहा । नौकर6 क कारन ह6 वह अपन*
                 ु                            े                        े
 से भी दर होती जा रह6 है । ब:चे आज शशु-शालाओं मA जा रहे है तो वद वद-आjम* मA । जहाँ अपनी-
        ू                                                      ृ ृ
 अपनी 0नय0त क सभी कोस रहे है और नार6 च प ता कर बेबस* क आंसू बहाती जा रह6 है । ना नौकर6
             े                                        े
 छोड़ पाती है , न ब:चे , और ना प5रवार । इसी कारन म>हलाय* का मान सक -शार65रक संतुलन Uबगड़
 जाता है ।
 पहले जहाँ नार6 क8 हर तरफ़ इतनी 3ग0त नह6 थी वहां पर इतने अपराध नह6 थे । जैसे-जैसे नार6 क8 हर
     ेE मA 3ग0त क8 सीमा बदती जा रह6 है वैसे-वैसे अपराध क8 सीमा बदती जा रह6 है । म>हलाय* क लए
                                                                                         े
 #कतने ह6 असुर ा क )वार खल जाते है । नौकर6 करते हुए भी उसक मन मA असुर ा का डर जhर बैठा
                  े      ु                                े
 रहता है । उनका शोषण हर जगह होता है । कह6 शार65रक , कह6 मान सक, तो कह6 आ थक । आए >दन
 घ>टत घटनायेइस बात का 3मान है क8 म>हलाये आज काय शेE मA #कतनी असुर~ त और मजबूर है .
 नौकर6 क कारन आज म>हलाये अपने नैस गक सौ?दय को खो बैठ है । अब उसमे न वह कोमलता रह6 है ,
        े
 न नoता और न ह6 भोला सौ?दय। यह सच है क8 सैकडो लड़#कया सौ?दय प0तयो गताओं मA भाग लेती है ।
 ये सब उनक शार65रक सौ?दय को ह6 दे खते है जो व भन ् स‘दय 3साधन* पर >टका होता है । आज उसक8
          े
 ग5रमा और अि-मता का लोप होता जा रहा है । अंधाधंध बदती भौ0तकवा>दता ने -Eी को गुमराह कर >दया
                                               ु
 है । उसका सौ?दय Uबकाऊ होता गया है । कह6 व+ापन* मA नज़र आती है तो कह6 उ सवो क रं गारं ग काय -
                                                                            े
 कCभो मA । लोगो का नज़5रया ह6 आज बदल गया है । -Eी जाती को वे सफ़ -Eी Yप मA ह6 दे खते है । उसे
  ु



                                                 www.kalpanadubey.com                  Page 23
3शासक, डॉ टर या इंिज0नयर का औदा तो बाद मA ह6 मलता है । ब:चो मA बड़ते मनोरोग -और
आ मह याएं उनक8 प5रव5रश क8 और इशारा करती है । माता का कोमल -नेह भरा -पश या पैसो क लए
                                                                                े
काय करने वाल6 आया दे सकती है । सं-कार तो वलु_त होते जा रहे है । अकलेपन को व भन ् मा यमो से
                                                                  े
दर करने मA लगा ब:चा बचपन क8 उमर मA ह6 बड़ा हो जाता है । इसका 3 य
 ू                                                                          3भाव समाज क मा यम से
                                                                                       े
ह6 दे खा जा सकता है । आज क8 सजी संवर6 आध0नक नार6 प5रवार से दर होती जा रह6 है । प5रवार उसक
                                        ु                   ू                            े
लए बोझ बन गया है । कायकार6 म>हला से एक सुघड़ गहणी क8 अपे ा करना ह6 ग़लत है यो#क वह भी
                                             ृ
हाड-मांस क8 बनी हुई है ।#कसी -ट6ल या लोह पदाथ क8 नह6। 3ाचीन-काल से ह6 प5रवार कल एक अंग
बहार काम करता था तो एक अंग घर पर। अतः प5रवार मA संतलन बना रहता था। अब य>द सय-उदय होते
                                                   ु                       ू
ह6 घर मA ता ला लग जाए तो कहाँ प5रवार , कहाँ घर । वह तो सफ एक वjाम -थल बन कर रह जाता है
|अत:य>द प5रवार चा>हए तो नौकर6 से छटकारा पाना होगा |कहागया भी है -कछ पाने क लए कछ खोना
                                  ु                               ु       े    ु
भी पड़ता है |
                                  .......................................




                                                      www.kalpanadubey.com               Page 24
भारतीय सं कृ त वदे शय को Dभा वत कर रह0 है
प

                                     िजस दे श मA बहती मधु क8 धारा ,
                                       जहाँ होता पतरो का आदर ,
                                         िजस दे श मA वीर-जवान ,
                                          अपनी धरती को _यार,
                                          वह दे श है >हंद-तान ,
                                                         ु
                                          वह दे श है >हंद-तान,
                                                         ु




    सभी 3ाणी अपनी जनम भू म को जान से Lयदा _यार करते ह; । तभी तो उसे -वदे श क8 हर वा-तु मA
    सौ?दय नज़र आता है । हमार6 सं-कृ0त ह6 भारतीयता का बोध कराती है । सं-कृ0त दे श क8 अंतर –आ मा
    होती है । इसी क कारन दे श क सं-कार* का आचार – वचार का बोध होता है । िजनक आधार पर वे अपने
                   े           े                                            े
    सामािजक आदशQ का 0नमाण करता ह;।

    भारतीय सं-कृ0त गंगा क8 धारा क सामान है िजसमे बहुत सी धाराए मलकर एक सी हो जाती है । भारत
                                 े
    तो ऐसा चमन है िजसमे व भन ् परकार क8 बो लया , जा0तय* धमQ क फल eखले ह; । िजनक8 खशबू, रं ग
                                                             े ू                  ु
    और आकषण इतना अ धक है क8 लोग इनसे परभा वत हुए Uबना नह6 रहते ।

    अगर हम अतीत मA झांक कर दे खे तो हमार6 सं-कृ0त क बारे मA जान कर उसे दे खने आए और भारत क8
                                                   े
    सं-कृ0त से उसे _यार हो गया। इसी कारन उ?ह*ने हमारे दे श से मसाल* का यापार शुY #कया । मगर ये
    दःख क8 बात है क8 उ?ह*ने हमारे _यार और सCमान का फायदा उठाया। और हमारे दे श को धोखा >दया ।
     ु
    हमA गुलाम बनाया और हमारा शोषण #कया ।

    हम -टे ?स क प5रवार को दे खते तो हमA आ2चय होता है क8 िजस औरत क प0त और बेटो को िज?दा जला
               े                                                 े
    >दया #फ़र भी jी म0त -टे ?स ने इस दे श से दर होना उ चत नह6 समझा । उ?हA हमार6 सं-कृत से लगाव है ।
                                             ू
    कछ लोगो क जघ?य कृ य ने भी उ?हA नह6 >हलाया उनका यह कदम सराहनीय है ।
     ु       े

    मदर टे रेसा क8 बात करे जो युगो-ला वया क8 थी । अपना दे श छोड़कर भारत आई और यहाँ वह ‘ मदर’
    कहलाई । लोग कहते है क8 वह यहाँ गर6बी दे खकर आई थी , पर मA आपसे एक 3शनपछती हु क8 गर6बी
                                                                          ू
    कहाँ नह6 है ? हक8कत यह है क8 यहाँ क लोगो को _यार ,सCमान और अपनेपन ने उ?हA यहाँ से जाने नह6
                                       े
    >दया।

    हमार6 3ाचीन इमारत* को दे खने क लए िजतने वदे शी आते ह; उतने >ह?द-तानी नह6 । यो#क ये इमारते
                                  े                                ु
    सफ़ इमारते नह6 है बिJक ये हमार6 सं-कृ0त को बताने वाल6 साकार अ भलेख है इनसे हमार6 सोच ,


                                                    www.kalpanadubey.com                 Page 25
हमारा रहन –सहन , हमारा अचार- वचार झलकता है ।

अंत मA मA यह6 कहना चाहूंगी क8 हमारा दे श महान सं-कृ0त से गौरवाि?वत है । इस लए 3ाचीन काल से
आज तक लोग यहाँ eखचे चले आते है ।

फादर बुJक , भ गनी 0नवे>दता , का मल बुJक , आ>द ऐसे नाम है जो हमार6 सं-कृ0त क8 ग5रमा को
         े                             े
दशाते ह;।
शायद इस लए कहाँ गया है –


                                भारत जैसी सं-कृ0त कह6 नह6 ,
                                   भारत जैसा _यार कह6 नह6.
                                       भारत मA आओगे तो
                                   यह6 क होकर रह जायोगे.
                                        े

                                   .......................................




                                                       www.kalpanadubey.com         Page 26
भारतीय सं कृ त वदे शय को Dभा वत कर रह0 है
वप
                              “उननो, मfयो, hमा, सब मट गए जहाँ से,
                                बाक8 अभी तक है नामो-0नशा हमारा.”



 बड़े ह6 सौभाVय और गव क8 बात ह; क8 भारतीय सं-कृ0त 3ाचीन काल से सCपरण व2व मA सवjे'ट रह6.
                                                                 ु
 व2व ने उसका लोहा माना और उसे -वीकार #कया. #फ़र चाहे वह अमे5रका क8 भ गनी 0नवे>दता हो या
 Yस क ताJ-तॉय.
     े


 ले#कन आज ये बात कहाँ?. आज हमार6 सं-कृ0त अपना अि-त व ह6 खोती जा रह6 है . ऐसे मA या यह
 उ चत होगा क8 इसी सं-कृ0त से आज वदे शी 3भा वत हो. मA इससे UबJकल सहमत नह6 हु.
                                                              ु


 अगर आज दो-चार वदे शी भारत मA आकर “हरे राम हरे कृ'ण “कर रहे है तो इसका मतलब यह नह6 क8
 वह भारतीय सं-कृ0त से 3भा वत है . 3भा वत वे तब ह*गे जब दो-चार नह6 बिJक उनका परा दे श “हरे राम
                                                                             ु
 हरे कृ'ण” करे . हमारे र6ती 5रवाजो क8 इLजत करे , हमारे सं-कार* को समझे.


 आज हमारे यवा अपने दे श और सं-कृ0त को भलकर वदे शी रं ग मA यो रं गते जा रहे है . #फ़र चाहे वह भाषा
           ु                           ू
 हो या सं-कृ0त.


 हमारे भारतीय जाते तो धोती –kurte मA ह; और आते पA ट शट मA . आप मुझे ह6 दे ख ल6िजये मेर6 टाई, मेर6
 -कट, और मेर6 शट . या ये भारतीय सं-कृत का 3भाव है .?


 सभी जानते ह; क8 न जाने #कतने भारतीय वदे शो मA जाकर बस चक ह;. और ना जाने #कतने जाने क8
                                                        ु े
 तैयार6 मA है . या वे वहां पर भारतीय –sanskriti का 3चार करने क लए रह रहे ह;. नह6, वे वहां क8
                                                              े
 चकाच*ध , रे हान-सेहन और पहनावे से 3भा वत हो कर रह रहे ह;. पर?तु कोई वदे शी अब भारत मA आकर
     यो नह6 बस रहा . आज वदे शी यहाँ आकर -वयम हमारे रं ग मA नह6 रं गता पर?तु हमार6 गर6ब जनता को
 थोडी सु वधाए दे कर गुमराह करते ह;.


 वदे शी कप0नय* का आगमन हमार6 सं-कृ0त क कारन नह6 है . वे हमारे दे श मA सफ़ यवसाय कर रहे ह; .
         ं                            े
 हमार6 सं-कृ0त से तो वे 3भा वत तब भी नह6 हुए थे -वत?Eता से 0तन सो वष पहले ई-ट इंkडया कपनी क
                                                                                      ं    े
 Yप मA वे हमारे दे श मA यापार करने आए थे . वे -वाथg थे और आज भी है . 3 य     परमान ये ह; क8 वे यहाँ




                                                   www.kalpanadubey.com                    Page 27
आकर हमार6 सं-कृ0त को धारण नह6 कर रहे बिJक हमारा शोषण कर रहे ह; . और अपनी सं-कृ0त को यहाँ
फला रहे ह;. कछ ह6 >दन* मA यह व2बले हमारे दे श मA फल जायेगी.
 ै           ु


आज गल6-गल6 मA खले कॉल-सAटर इस बात का परमान है . रात –raat भर जागकर हमारे यवा भारतीय
               ु                                                          ु
अपने दे श क लए नह6 बिJक दसरे दे शो क लए काय करते ह;. उनका रे हान-सेहन , भाष , सं-कृ0त आ>द
           े             ु          े
भी उ?ह6 दे शो क अनुकल होती चल6 जाती ह;.
               े    ू


वदे शय* क साथ हमारे दर- यवहार ने आज व2व क सामने हमA शमसार कर >दया है . वदे शी म>हला
         े           ू                   े
अ धकार6 क साथ बला कार क8 घटना ने आज हमA कलं#कत कर >दया ह; . हमारे यवा वदे श मA सफ़
         े                                                         ु
^या0त अिजत नह6 कर रहे बिJक अपने काले कारनामो से हमार6 सं-कृ0त को बदनाम कर रहे है . वदे श मA
कोहल6 ने वदे शी लड़क8 क साथ बला कार और ह या करक -वदे श का नाम #कतना गराया ह;. ये सभी
                      े                       े
जानते ह;. .


सं-कृ0त कोई वा-तु नह6 है िजसे सर पर उठा कर ऊचा रखा जा सक . यह तो हमारे यवहार से, हमारे
                                            ँ           े
कायQ से , हमारे आचरण से ह6 पJल वत होती है . नै0तक –patan ने ह6 हमार6 सं-कृ0त को सती पहुंचाई ह;.
वदे शी 3यातको क साथ लट और ह या क8 खबरे आए >दन आती रहती ह; . या कोई ऐसे माहोल मA हमारे
               े     ु
सं-कृ0त को अपनाने क8 >हCमत करे गा.


आज अव2यकता है आ म- चंतन क8 . हम वचार करे क8 ऐसा यो हो रहा है ? हम या और कोण से
कदम उठाये िजससे हमार6 सं-कृ0त पुनः उ:च -थान 3ा_त कर सक .
                                                      े



                                 “ हम कोण थे और या हो गए ,
                                        और या ह*गे अभी,
                                   आओ वचारे आज मलकर,
                                         ये सम-याए सभी.”

हम सभी संकJप ले क8 हम अपनी सं-कृ0त को अ ुन रखA गे और शान से कहA गे- सारे जहाँ से अ:छा
>हंद-तान हमारा.
    ु

                                    .......................................



                                                        www.kalpanadubey.com           Page 28
वदे श म बसने क चाह हर भारतीय का Eवाब
प
                               मेरा जूता है जापानी ये पतलून एि?Vल2-तानी,
                              सर पे लाल टोपी hसी, #फ़र भी >दल है >ह?द-तानी’
                                                                    ु



    मेरा मतलब है क8 वदे श मA बसने से कोई भी यि त दे श-ƒोह6 नह6 हो जाता. उसका >दल तो हमेशा दे श के
    लए धड़कता है . और वह आजीवन उसक8 3ग0त क8 कामना करता ह;. वदे श मA बस जाना अपने सपनो को
    साकार करने क लए आव2य क है . , जो उ चत ह6 नह6 सरहनीय है .
                े

    _लेटो, अर-तु, ताJ-तॉय, मA कवर, आ>द व2व क यि त है . इ?हे सीमओं मA नह6 बाँधा जा सकता.
                               ै            े
    सूरदास, कबीर, तुलसी, जायसी आ>द आज व2व मA छाये हुए है . इनक8 30तभा #कसी क8 धरोहर नह6.
    भारतीय अपनी 30तभा क बल पर व2व मA छाये हुआ है
                       े
    हमारे दे श क ना जाने #कतने लोग वदे श मA बस कर हमारे दे श का नाम रोशन कर रहे ह;. हमारे परधन-मंEी
                े
    ने परवासी भारतीय* से अपने दे श मA धन लगाने क8 इ:छा य त क8 है . ये वदे शी धन को भारत मA लेन
    का एक सरल और अ:छा3यQग है .

    jी ल मी म तल अपनी मेहनत से वदे श मA बस कर भारत क ‘UबJगेटस’ बन गए.
                                                    े

    भारत क8 आ थक ि-थ0त अ:छ न होने क कारन लोग वदे श जाते ह;. वे अपनी आ थक ि-थ0त क साथ-
                                    े                                            े
    साथ सामािजक ि-थ0त को भी उचा कर लेते ह;. वे वदे श यो न जाए? वहां कामयाबी उनक कदम चमती
                                                                               े     ू
    ह;. यो उ?हA गर6बो और बेरोजगार6 क8 िजंदगी िज?नी चा>हए जब#क वदे श मA कामयाब होने क अनेक
                                                                                    े
    अवसर होते ह;.


    भारत क8 बेरोजगार6 का कोई अंत नह6 ह; . श ा क शेE मA भी आर ण है . यवसाय क और नौक5रय* क
                                               े                           े            े
    शेE मA आर ण क8 सम-या ने पड़े लखे लोगो को वदे श जाने क लए मजबर भी #कया ह;. यो#क अपने
                                                        े      ू
    दे श मA हालत कछ ऐसे ह;-
                  ु


                                   “कभी घोडो को भी नह6 मलती घांस”
                                      कभी गधे भी खाते ह; चवन3ाश”



    •'टाचार और भाई-भतीजावाद से आज हालत ये ह; क8 यहाँ 5र2वतखोर और •'ट लोग ह6 कामयाब होते
    ह;. हमारे यहाँ 30तभा का सCमान नह6 होता. हर 30तभावान यि त क8 पहचान वदे श मA जाकर हो गई ह;.




                                                    www.kalpanadubey.com                  Page 29
कJपना चावला अगर भारत मA होती तो अ?त5र              क8 उ:चा0यया कभी नह6 नाप पाती. क.व ्. रमन जी को
नोबल 3ज़े वदे श जाने पर मला. यहाँ तक क8 मोहनदास करमचंद जी को पहचान भी अ’8का जाकर
मल6.

ऐसा कौन सा यि त होगा जो अपनी 30तभा को और यि त व को 0नखारने का मौका छोड़कर गर6बी मA
िजंदगी जीना चाहे गा.

आज 30तभा पJयाँ क8 सम-या एक वकराल सम-या बनती जा रह6 ह;. इसका मु^य कारन यह है क8 यहाँ
30तभावान यि तय* क वकास क उ चत साधन उपलnध नह6 ह;. लोगो मA 30तभा ह;, कछ कर गुजरने क8
                 े      े                                           ु
भावना है . तो वे वदे श यो ना जाए.

वदे श मA बसने से उनक यि त व क8 पहचान होती ह;. धन –yash सभी कछ मलता ह;… तो लोगो को
                    े                                       ु
ऐतराज़ यो? हर यि त जीवन मA उचा0ययन चना चाहता ह;. महँ कायQ से जीवन को साथक करना
                                   ु
चाहता ह; तो दे श को दहाई दे कर उनक8 उड़ान को रोकने का अ धकार #कसी को नह6ं.
                     ु

^वाब दे खना युवाओ का काय ह;., धम ह;. उ?हA साकार करने मA ह6 उनक जीवन क8 साथकता ह;. तो ^वाब
                                                              े
दे eखये और उ?हA स च करने क8 को शश क8िजये..

                                    .......................................




                                                        www.kalpanadubey.com             Page 30
वदे श म बसने क चाह हर भारतीय का Eवाब
वप
                                     “जो भरा नह6 है भावो से,
                                   बहती िजसमे रस-धार नह6,
                                    वह “दय नह6 वह प थर है ,
                                   िजसमे -वदे श का _यार नह6’



 हमारे नवयुवको मA वदे श मA जाने क8 इ:छा >दन-30त>दन बलवती होती जा रह6 है . .अपने दे श क 30त
                                                                                      े
 आ-था, कमठता, और चंता क भाव वलु_त हो रहे है . ऐसा लगता है जैसे श~ त यि तय* को न अपने
                       े
 दे श क 30त आ-था रह6 है और न दे शवा सय* क 30त . “ दय पाषण हो गया है . िजसमे न कोई चेतना है
       े                                 े
 और न ह6 अपने –पराये क8 पहचान.

 हम पलते-बड़ते तो अपनी माE-भू म मA है और जब कछ करने का समय आता है तो इसे छोड़कर चल दे ते
                                            ु
 ह;. हमारे च#क सक,अ भयंता वदे शो का hख करते जा रहे ह;.

 अगर वदे श जाने का म^य कारन पैसा और बदती सख-सु वधाओ का आनंद है तो नह6 चा>हए हमA ऐसा
                    ु                     ु
 आनंद जो हमार6 माE-भू म क लए रा-ते का प थर साUबत हो.
                         े

 चाहे वदे शो मA #कतने ह6 डॉलर कम ले उस रा'1 क लए आप दसरे दज€ क नाग5रक ह6 रहA गे. वह अ धकार
                                             े       ु        े
 और व2वास कभी नह6 मलेगा जो अपने दे श मA मलता है .

 सोने क8 चkडया कहा जाने वाला रा'1 #फ़र उसे 3ा_त करने हे तु अMसर ह;. हमारे दे श मA आज ऐसी
 सु वधाए मौजद है जो नवयवको को उLजवल भ व'य दे ने क8
            ू          ु                                  मता रखते ह;. उनक8 योVयता का सCमान
 करते ह;. भारत व2व क8 ऐसी उभरती शि त ह; जो 0नजी      ेE क8 कप0नय* मA काम करने वालो को वदे शो
                                                            ं
 क8 तलना मA कह6 अ धक वेतन भी दे रह6 है . #फ़र वदे शो मA बसने क8 या अ शाकता. है . जहाँ न होल6 क
     ु                                                                                       े
 रं ग है और न ह6 काग क गीत. िजतनी -वतंEता हमA अपने दे श मA मल सकती है . वदे शी नाग5रक हमेशा
                      े
 ) वट6 jेणी मA आते ह;.

 अरे !---इस दे श मA तो अपने लोग ह; . , अपनापन ह;. . यहाँ का अनूठा 3ाकर0तक सौ?दय ह; , एक अनोखी
 सं-कृ0त ह;. जो हमA व2व क सभी दे शो से अलग पहचान >दलाती है . या कोई दे श भारत जैसा हो सकता
                         े
 ह;.


                                   “फला मनोहर गर6 >हमालय
                                     ै
                                       और गंगाजल कहाँ,




                                                www.kalpanadubey.com                  Page 31
सवQ:च दे शो से अ धक,
                                    #कस दे श का उ कष ह;,
                                 उसका, क8 जो ऋ ष-भू म ह;,
                                    वह कौन ? भारतवष ह;.




अब बस --------बहु त हो चक8 दसरो क8 सेवा और उनक8 उ?न0त. अब हमA अपने दे श का सतारा बलंद
                        ु   ु                                                     ु
करना ह;. और अब वह व त आ गया है जब हमA अपने रा'1 को आ थक सामािजक और राजनै0तक शेE मA
एक अलग पहचान >दलानी है .

3ाचीन काल मA जो हमारा अि-त व था वाह6 #फ़र 3ा_त करना है , यह कछ मुि2कल काय नह6 है .
                                                            ु
अ शाकता है एक >ƒड-संकJप और इचा-शि त क8 यो#क हम उ?ह6 पवजो क8 संतान है िज?ह*ने ने व2व
                                                     ू
मA भारत क8 पहचान कराई थी.




                        “ वह6 है र त ,वह6 है दे श वह6 सहस, वैसा ह6 +ान
                   वह6 ह; शाि?त, वह6 है शि त, वह6 है हम >द य-आचाय संतान
                      िजए तो सदा इसक लए , य ह6 अ भमान रहे यह हष ,
                                    े
                       0नछावर कर दे हम सव-व , हमारा _यारा भारतवष,
                                   हमारा _यारा भारत वष |

                                  .......................................




                                                      www.kalpanadubey.com          Page 32
यवा-अव था फलो भर0 ह तो Dोड-अव था जीवन संघषI-रत और वदाव था
                  ु         ू                                       ृ
प                                            पKचाताप से प@रपणI
                                                            ू

    युवा-अव-था फलो से भर6 ह; तो 3ोदाव-था जीवन संघषरत और वदाव-था प-चाव-था से प5रपण । यह
                ू                                        ृ                      ू
    एक वा य आज क समाज को सCपूण झांक8 को 3-तुत कर दे ता ह;। आध0नक समय मA समाज मA या_त
                े                                            ु
    कठा , Vलानी , दःख , अवसाद सब कछ झलक पड़ता है । आज का यवा वग ) वग-• मत है इस लए
     ंु            ु              ु                      ु
    गल0तय* पर गल0तया करता चला जा रहा है । घर और -कल मA उसे 0नरं तर इमानदार6, _यार, -नेह और
                                                  ू
    अ>हंसा का पाठ पदाया जाता है । उ:च आदशQ क8 बातA क8 जाती ह;। और इनका भोला मि-त'क इन बातो
    को Mहण भी कर लेता ह;। और भ व'य क सुनहरे भ व'य क सपने संजोने लगता ह;। ले#कन जब यह6
                                    े              े
    बालक यवा बन कर समाज मA कछ करना चाहता ह; तो सब कछ उसे उJटा नज़र आता ह;। िजन आदशQ को
          ु                 ु                      ु
    लेकर वह यवा हुआ उसका वा-त वकता मA कह6 नामो-0नशाँ नह6 मलता।
             ु



    इमानदार6, 0न'ठा, कत य क8 बातA उसे यथाथ क धरातल पर सत यु गी नज़र आते ह; और वह भटका हुआ
                                            े
    सा -चोराहे पर -वयम को पाता ह;। कहाँ जाए? #कधर जाए? या करे ? कछ समझ नह6 पाता, और #फ़र
                                                                 ु
    शुY होता है उसक सदं तो और आज क •'टाचार6 माहोल मA जीवन क8 जPो-जे•हद । कभी वह स य और
                   े              े
    0न'ठां का सहारा लेकर जीवन भर संघष करता रहता है । कभी भर'टाचार को अपना कर Vलानी का
    अनुभव करता ह;। जो मान सक अशां0त का कारन बनता ह; । अब वह नए सरे से िजंदगी क8 शुhआत
    करता ह;। वडCबना दे eखये क8 वह िजन आदशQ को लेकर बड़ा हुआ है उ?ह6 का याग कर वह >दन-
    30त>दन उ–?खाल बनता चला जाता है और वह नह6 समझ पाटा क8 या ग़लत है और या ठक है ।
    िजसे वह मानना चाहता है उसे समाज नह6 मानता । इस लए वह भ व'य क8 चंता छोड़ सफ़ आज मA
    व2वास करने लगता है ।
    यह6 से वह -वाथg बन कर सख-भोग क8 लालसा मA गल0तय* क भरमार मA फस जाता है । जीवन क लए
                           ु                         े          ं                 े
    संघष करते-करते वह 3ोदाव-था मA कब पहुँच जाता है पता ह6 नह6 लगता । सभी उतरदा0य व मुह फलाये
                                                                                        ै
    उसक सामने व भन ् Yप* मA खड़े होते ह; । िजसे सलझाने क लए उसे कठोर 3य न करने पड़ते ह;। वह
       े                                        ु      े
    कह6 पE का दा0य व तो कह6 पता का दा0य व पण करने क लए संघष-रट रहता ह; । यह संघष तब तक
         ु                                 ू       े
    जार6 रहता है जब तक वह थक कर चर-चर नह6 हो जाता ।
                                 ू ू




    जीवन क अि?तम पड़ाव मA उसे लगता ह; क8 उसका जीवन यथ गया यो#क ना तो वह अपने ढं ग से जी
          े
    सका न द0नया क ढं ग से। न मन क8 शाि?त पा सका न तन क8 । तब प2चाताप का एक अटूट सल सला
           ु     े
    शुY होता ह; यो#क अभी तक उसे न 'माया मल6 न राम' ।
    कहाँ जाता है जैसा करोगे , वैसा भरोगे । युवाव-था क8 गल0तय* का फल 3ोदाव-था मA भुगतना पड़ता ह;।
    और उससे उपजी Vलानी और कठा उ?हA 3ायि2चत क लए मजबर करती ह;.
                           ंु               े      ू


                                                  www.kalpanadubey.com                 Page 33
आज समाज का हर 3ाणी चाहे वह ब:चा हो , जवान हो या बुदा हो वह असंतु'ट और भो^लाया सा नज़र
आता ह;। भौ0तकवाद ने उसे कह6 का नह6 छोड़ा । यि त सुख क साधन जुटाने मA इतना जुटा है क8 वह
                                                    े
सा य को भी भूल गया है । यह6 इन भूलो का , संघषQ का और 3ायि2चत का मूल कारन है । कबीर ने कहा है -

                              ' जवानी नींद भर सोया, बुडापा दे ख कर रो या ।
सच है संघषQ क बाद जब कछ हा सल नह6 होता तो रोना ह6 आता है ।
             े        ु
                               .......................................




                                                      www.kalpanadubey.com           Page 34
यवा-अव था फलो भर0 ह तो Dोड-अव था जीवन संघषI-रत और वदाव था
                ु         ू                                       ृ
वप                                             पKचाताप से प@रपणI
                                                              ू

 कौन कहता है क8 युवाव-था भू लो भर6 है ? यह तो कछ क>ठत लोगो क8 शरारत जान पड़ती है । आज क
                                               ु  ंु                                  े
 युवा वग का जीवनभूलो से भरा नह6 है वह तो 3योग* से भरा है । उ साह, उमंग और आशाओ से भर6
 िजंदगी मA वह सब कछ भोग लेना चाहता ह;। जीवन को अपने ढं ग से जीने क8 लालसा #कसमे नह6 होती है ।
                  ु
 जीवन उसका, अपना वह जैसे चाहे वैसे िजए इसक लए वह संघष भी करता है ।
                                          े




 आज का युवा-वग पहले से कह6 Lयादा समझदार और यथाथवाद6 है । वह आदशQ क खा?दर मA नह6
                                                                  े
 यथाथ क8 जमीन पर जीना चाहता है । वह ऊगल6 पकड़ कर चलने वाला बालक नह6 हाथ पकड़ कर सहारा
                                     ँ
 दे ने वाला युवक है । जो -वयम नह6 िजयेगा वह दसरो को सहारा या दे गा ? वह -वयम अपने साहस से
                                             ु
 ऐसा रा-ता चनता ह; जहाँ फल होते ह;, कांटे नह6 । अपने जीवन क व भन ् अनुभव* से सीखता हुआ वह
            ु            ु                                 े
 आगे बढता ह; । वह #कसी क बताये रा-ते पर न चल कर -वयम अपना रा-ता चुनता है । जब यह6 यवा
                        े                                                          ु
 अपनी 3ोदाव-था मA पहुँचता ह; तो यह संघषQ का नह6 जीवन क8 व भन ् चनो0तय* का का सामना करता है
                                                                ु
 |यह चनौती उसे संघष नह6ंजीवन क8 पणता लगती है ।िजसे वह लाख परे शा0नय* क बाद भी पाने का
      ु                            ू                                   े
 3य न करता है . ऐसे वद का जीवन िजसने अपनी इ:छा अनुसार िजया हो वह 3या श चत नह6
                     ृ
 करता।बिJक उपलिnधय*पर 3स?न होता है |

 समाज को ऐसे बुजुगQ को पुर-कृत करना चा>हए जो वदाव-था को उल लास से भरते है . ऐसा वाह6 यि त
                                              ृ
 कर सकते है जो ‘#कया सो गया आगे क8 सु ध ले ‘ क सधांत को मानते हो.|
                                              े

 आज क युवक को साम-दाम , दं द-भेद सभी नी0तय* का +ान है यह6 कारन है क8 वेह कह6 मात नह6 खता .
     े                     ु
 0न0त , धरम , 0न'ठां जैसे मोधारे ह थयार* का वेह सहारा नह6 लेता इस लए वेह न संघष करता है और न
 ह6 और न प2चाताप . मनु'य को समय क साथ चलना चा>हए. नह6 तो समय उसे पीछे छोड़ जाएगा.
                                 े

 आज का युवा वग भगवान ् –कृ 'ण क वचन* का पालन करता नज़र आता है . ‘ कम—ये वाि?धकारा-तु माँ
                               े
 फलेषु कदाचनः ‘ वेह फल क8 इ:छा नह6 करता . जो मलता है उसे अपनी बु              से , बल से अपने अनुकल
                                                                                                  ू
 बना लेता है . और जब अनुकल बना लया तो प2चाताप ह6 कसा ? #फ़र तो आनंद है , परम आनंद.|
                         ू                        ै

 आज का वद परलोक क8 चंता नह6 करता बिJक इस लोक मA मरते दम तक सq8य भू मका अदा करता
        ृ
 नज़र आता है . वह +ान और अनुभव* का अपार भ—डार होता है . उसे प2चाताप कसा ? वह तो समाज क8
                                                                    ै
 अमूJय –0न ध होता है . शाि?त और संतोष का साकार Yप होता है . प2चाताप होता है उ?हA जो इ?हे
 पहचान नह6 पाते.|

                                    .......................................




                                                        www.kalpanadubey.com               Page 35
चापलूसी करो आगे बढो
प
    २१वी सद6 मA हर कोई एक दसरे से आगे बढ़ने क8 होड़ मA लगा रहता है हर कोई #कसी भी तरह आगे बढ़ना
                           ू
    चाहता है चाहे पैर पकड़ने पडA या ग ला | ऊचाई या वाहवाह6 #कसे पसंद नह6, इसक लए थोड़ी सी चापलूसी
                                           ँ                                े
    करने मA हज ह6 या है ? आज -कल मंह मA राम बगल मA छर6 लए कौन नह6 घूमता? आज चापलूसी कौन
                                   ु                ु
    नह6 करता ?हम सभी अपना काम 0नकलवाने क लए थोड़ी सी चापलूसी तो करते ह6 ह; कोई नेताओं क8
                                        े
    चापलूसी करता है तो कोई अ यापक* क8 कोई वक8ल* क8 तो कोई अ धकार6य* क8

    आज कल चापलूसी ब?दक से भी बढ़ कर ह थयार है जो काम ब?दक क8 नोक पर भी नह6 हो सकता
                     ू                                 ू
    वहचापलूसी    ण भर मA कर दे ती है 32न उठता है #क आeख़र चापलूसी है या? #कसी भी यि त क8
    इतनी झूठ 3शंसा करना िजसका वह हकदार नह6, चापलूसी कहलाता है चापलूसी मA कोई तीर नह6ं चलाने
    पड़ते बस इसक लए हमार6 जीभ hपी तलवार ह6 काफ8 है जो सामने वाले क >दल को भेद दे ती है और उसे
               े                                                 े
    हमार6 बात ,मानने क लए मजबूर कर दे यह6 चापलूसी का क5र2मा है
                      े
    चापलूसी करने क फायदे भी बहुत ह; जहाँ hपय* से काम हो, वहाँ चापलूसी से ह6 काम बन जाता है कोई
                  े
    सफा5रश करवानी है तो चापलूसी से अ:छा न-खा नह6ं कछ नाम कमाना है तो आव2यक है आज हमारे
                                         ु         ु
    दे श मA चापलूसी का ह6 बोलवाला है आज क युग मA मेहनत और योVयता क साथ -साथ चापलूसी भी
                                         े                        े
    आव2यक है सफलता क8 सीडी चढ़ने क लए चापलूसी इसक इसक इसक सहारा है Uबना इसक मेहनत
                                 े              े   े   े                 े
    और का व लयत पानी भरते नजर आते ह;
    आज लोग अपने बौस को म-का लगा कर खश रखते ह; इसक लए कछ उपहार* का ,फल* का ,घर म; बनी
                                    ु            े    ु
    व-तुओं का , मठाई का 3योग करना आव2यक है कछ और बातA भी याद रखनी जYर6 है ,जैसे -बौस का
                                            ु
    ज?म >दन ,शाद6 क8 साल गरह ,उनक8 पसंद -नापसंद ,ब:च* का ज?म >दन इनक अ0त5र त तीज -
                                                                    े
     योहार* पर उपहार* क8 सौगात* से वह म खन लगता है क8 आप भी उसक8 चकनाहट दे ख कर है रान रह
    जाएँगे आपको य>द मेर6 बात पर व2वास न हो तो आजमा कर दे ख ल6िजए मौज क8िजए और हमार6 कॉम
    म; शा मल हो जाईए |
                                       .......................................




                                                           www.kalpanadubey.com          Page 36
चापलूसी करो आगे बढो
वप
                            'उ)यमेन ह6 स) य?ते कायाeण न मनोथ€,
                           न>ह 3 वशि?त सु_त-य संह -य मुखे मगा '
                                                           ृ

 िजस 3कार बलशाल6 शेर क मुख मA जानवर -वयम नह6 घसते, उसे इसक लए -वयम 3य न करना
                      े                       ु           े
 पड़ता है हम मनु'य होकर -वयं अपने बल पर काय न करक य>द चापलूसी का सहारा लेते ह; ,यह 0न2चय
                                                े
 ह6 शमनाक है सि'ट क 3ारCभ से लेकर आजतक मनु'य ने जो भी वकास #कया है ,वह सब उसक प5रjम
              ृ    े                                                         े
 क8 दे न है
 आज वडCबना यह है #क वह चापलूसी से पदौ?न0त 3ा_त करक बहुत खश है पर?तु याद रeखए यह खशी
                                                  े      ु                       ु
 थोड़े >दन* क8 मेहमान है एस 3कार क लोग 0नंदा क पाE बनते ह; वे अपनी नजर* मA ह6 गर जाते ह; उनका
                                 े           े
 च5रE, यि त व ,एवं बु   •'ट हो जाती है मग E'णा वश मनु'य इसक चंगुल मA फसता ह6 जा रहा है
                                        ृ                  े          ं
 क लयुग मA चापलूसी ,माया क8 तरह या_त है
 चापलूसी, •'टाचार क8 जननी है हमA ऐसे दलदल मA धकलती है , जहाँ यि त व ह6 न'ट हो जाता है अपने
                                               े
 फसले हम -वम नह6 ले सकते काय करने क8को खोकर हम परमुखापे ी बन जाते ह; अत:चापलूसी याग
  ै
 कर प5रjम करA हम सक?दर महनत और लVन से ह6 बन सकते ह; महानता 3ा_त होती है -संघष, आ म -
 व2वास और कठोर साधना से अपने -वाथ क लए दसरे का हक मत मारो ,चापलूसी करक धोखेबाज मत
                                   े    ु                             े
 बनो, गPार मत बनो
                                ऐ इंसान तू इतना खदगज न बन,
                                                 ु
                             उथ जाए प5रjम और मेहनत से भरोसा,
                                 तू इतना मतलब पर-त न बन,
                                मल जाएंगी खाक मA सार6 हसरतA ,
                                  अ^लाक इंसान क8 कƒ कर,
                                       े
                                ऐ इंसान तू इतना खदगज न बन'
                                                 ु


 कम क8 jे'टता से ह6 भारत क सपत* ने भारत का 0नमाण #कया है , इसक8 र ा करते हुए आगे बढ़ना
                          े  ू
 चा>हए कृ'ण का कम लो, गांधी का स˜ाव, वनोबा का याग तभी जीवन साथक होगा, सफल होगा,
 अनकरणीय होगा |
   ु
                                   .......................................




                                                       www.kalpanadubey.com         Page 37
पुर कृत
प
    मA आप सभी से पूछना चाहती हु क8 २१ व शताnद6 मA भारत क8 नार6 को अबला समझना कहाँ तक उ चत
    है । आज क8 नार6 शि त और    मता #कसी से छपी नह6 है । आगे ने कहा है - दो-दो माEाए लेकर है नर से
                                            ु
    भार6 नार6




    नार6 दो-दो माEाए कारन करने माE से ह6 नर से बड़कर नह6 है वरन अपने सहज , -वभा वक गण* से ह6
                                                                                   ु
    बड़ी होती है । आज नार6 नर क साथ कधे से क?धा मला कर चल रह6 है । नार6 आज अपने प5रवार को
                              े     ं
    _यार क साथ-२ आ थक सहयोग पदान कर रह6 है । नार6 समाज क व भन ् शेEो मA कदम बड़ा रह6 है । कभी
          े                                             े
    अ भशाप समझी जाने वाल6 अनपद नार6 आज श~ त होकर अपने माता- पता और प0त क लए आ थक
                                                                        े
    सहयोग का वरदान बनी हुई है । तो या नोकर6 करना प5रवार क लए उपयु त है ।
                                                         े




    आ थक-ि-थ0त ह6 प5रवार का आधार होती है । प0त प नी का एक-दसरे को सहयोग दे ना आव2यक है ।
                                                           ु
    व ध क8 वडCबना को कोई नह6 जानता ,कल या होगा कोई नह6 जानता । य>द नार6 अकल6 रह जाती है
                                                                          े
    तो वह बेचार6 नह6 होती है बिJक वह अपनी योVयता क बल पर ना कवल अपने-आप को संभालती है
                                                  े          े
    बिJक अपने प5रवार को भी संभाल लेती है । य>द उसक पास नौकर6 न हो तो कौन उसक8 मदद करे गा ? ये
                                                  े
    समाज,ये द0नया या आप या आप ? कोई नह6 ----एक नौकर6 ह6 उसक8 मदद कर सकती है ।
             ु




    नौकर6 क कारन औरत को -वतंE यि त व मला है । अब वह प5रवार को चलने मA बराबर क8 सहयो गनी
           े
    है । अब उसक8 पहचान प0त क Yप मA नह6 बिJक असल मायन* मA जीवन सं गनी क Yप मA वक सत हुई
                                े                                           े
    है । नार6 क नौकर6 मA आने से समाज क8 शि त दो गुनी बाद गई है । कायालय* क8 यव-था भी सुधर6 है ।
               े
    उनक ब:चे पहले से Lयादा -वावलंबी हो जाते है । अपने उतरदा0य व को भी वे अ:छ तरह संभालने लगे
       े
    है । आज कोई ऐसा शेE नह6 जहाँ -Eी क8 पहुंच न हो। अपने घर क8 eखड़क8 से औरत िजस चाँद को दे खा
    करती थी आज चाँद पर पहुचने क8 को शश मA लगी है ।

    नार6 कोमलकांत होने क साथ-साथ अपने -वभाव मA अ धक कमठ और सहनशील होती है । उसमे धैय
                        े
    अ धक होता है । तभी वह प5रवार 0नमाण क साथ- साथ रा'1 0नमाण कायQ मA भी पुhषो से अ धक
                                        े
    सहायक होने मA समथ है ।




                                      “ नार6 जीवन झूले क8 तरह



                                                   www.kalpanadubey.com                   Page 38
इस पार कभी उस पार कभी
                               कभी फल arpan #कए भि त क
                                    ू                 े
                                 हांथ* मA भी है तलवार कभी


आध0नक काल से ह6 नह6 3ाचीन काल से ह6 नार6 ने अपनी शि त और
  ु                                                                        मता का 3दशन करना शुY कर
>दया है । या आप भल गए है रानी ल मी को , इं>दरा गाँधी को, और गागQ को । इन नामो को कोई नह6
                 ू
भल सकता भगवन शव ने भी ह6 कहा है – “ शि त Uबना तो शव भी शव है ”.
 ू
नौकर6 से नार6 मA आ म व2वास बड़ा है । िजसक कारन उसे शोषण का शकार नह6 बनाया नह6 जा सकता
                                        े
है । अब उस पर दहे ज़ लेन का दबाव नह6 डाला जा सकता। वह अपने प5रवार का जीवन सुखद और संपन
बनती है । अतः मA कह सकती हु क8 नार6 का नौकर6 करना प5रवार क लए >हतकर है ।
                                                          े



                       “ नार6 तो शि त -वhप , आ मा क8 अमर कला है ,
                        इसक बल पर तो सारे , जग का य हार चला है ,
                           े


                                 .......................................




                                                     www.kalpanadubey.com                  Page 39
पुर कृत
वप
                              आंख* मA जलन, सींने मA तूफान सा य* है ?
                              इस शहर मA हर श^स परे शान सा य* है ?
                    आप सभी से मA ये पूछना चाहती हु क8 वह ब:चा य* रो रहा है ?
                                    वह बुदा यि त चप य* है ?
                                                  ु
                                 वह #कशोर य* qो धत हो रहा है ?
                                   वह यि त चडा य* रहा है ?
                                     वह औरत रो य* रह6 है ?


 ववाह को धा मक अन'ठान मानने वाले दे श मA य* बढ़ रहे है तालाक , य* बढ़ रहे है वद-आjम ? य*
                 ु                                                          ृ
 बढ़ रह6 है शशु-शालाए ?

 कोई नह6 बताता----। -वाथ-वश सभी अनजान बने हुए है । मA बताती हु प5रवार क8 धर6 मानी जाने वाल6
                                                                          ु
 औरत ने प5रवार को नकार कर बहार जगह बना ल6 है । एक उ:च -थान 3ा_त कर लया है । आ थक
 ि-थ0त से मजबत यह औरत आज पुYष से कधे से क?धा मला कर चल रह6 है । सCमान और गव ने उसक
             ू                    ं                                               े
 माथे को ऊचा उठा लया है । मु-कराते चेहरे यह बताते है क8 सब खश है । प0त भी , पE भी और प5रवार
          ँ                   ु                             ु                ु
 भी।

 ले#कन ज़रा इनक >हरदय मA झांक कर दे eखये उसमे सस#कया और पछतावे क अि त5र त कछ नह6
              े                                                े          ु
 मलेगा । कभी उस माँ को दे खा है जो दध पीने वाले को आँचल से उठा कर Uब-तर पर लटा दे । और वह
                                    ू
 ब:चा चीखे मारता रहे । रोते ब:चे को माँ क8 बो तल थमा कर आँचल संभालती माँ को दे खा है ।

 बंद दरवाजे का टला खोलते हुए ब:चे को दे eखये । जहाँ मु-कराती हुई माँ नह6 । खल6 सोच -सोच करता
                                                        ु
 कर उसक इि?तज़ार मA होता है । टे बल पर सुबह का खाना बना दे ख कर उसक8 भूख ह6 गायब हो जाती है
       े
 ।सवेरे का बना खाना दे ख कर उसे आक षत नह6 करता । तरस गए है आज ब:चे इस सुगि?धत महक के
 लए जो उ?हA eखंच कर तरफ़ ले आती थी। भख क लए टो0नक का काम करने वाले मसाल* क8 सुगंध पता
                                    ू  े
 नह6 कहाँ चल6 गई। कहाँ गई वह मेर6 माँ िजसक आँचल से आचार क8 खशबू आती थी । मंहगे पर‡यूम भी
                                          े                 ु
 हमA वह संति'ट नह6 दे पाते।
           ु

 न?हे नादाँ ब:चो से इस नौकर6 ने उनसे उनक8 माँ चीन ल6 है । थक8 हुई शाम को घर मA कदम रखने वाल6
 माँ ब:चो को या दे प0त है । उसका तन-मन >दन-भर क8 थकान से चर हो रहा हो होता है । पता नह6 वह
                                                          ू
 #कस-#कस क अशल6ल यंVय सुनकर आई होती है । यो#क अब शाल6नता और सोCयता तो कह6 नज़र
          े
 नह6 आती है । औरत को 0नCन Wि'ट से दे खने वाला पुYष जब उ?हA अपने साथ दे खता है तो ह6न भावना से




                                                 www.kalpanadubey.com                    Page 40
M सत होकर उल-जुलूल ताने कसने से बाज़ नह6 आता है । जब वह घर आती है तो ब:चो क उदास चेहरे
                                                                          े
उसे अ?दर तक >हला दे ते है ।




और ब:चे ---जैसा कछ भोजन गले से 0नचे उतार कर तेTय -बेर क साथ सोने को मजबर हो जाते है ।थक8
                 ु                                     े               ू
हुई माँ क पास लोर6 सुनाने तक का न समय होता है और न शि त। या तेTय-बेर ब:चे को माँ क शर6र
         े                                                                        े
क8 गमाहट दे सकता है ? या उसक भयभीत “दय को सा वना दे सकता है ? नह6 न । आप ऐसे ब:चो से
                                े
भ व'य मA या उCमीद कर सकते है ? आयो और कhच मA पले ब:चे माँ क8 ममता को समझने मA असमथ
होते है । उ?हA तो सफ़ माता- पता क )वारा उपलnध कराये गए साधन और समान रह जाते है । िजस रोते -
                                े
Uबलखते ब:चे को माँ का सहारा न मले उस जैसा अभागा तो कोई हो ह6 नह6 सकता। औरत क8 नौकर6 ने
काल -चq क8 ग0त बड़ा द6 है । सुबह जJद6 उठाना है यो#क काम पर जाना है । रात को जJद6 सोना है
 यो#क काम पर जाना है । कह6 बहार भी जाओ तो जJद6 वापस आना है यो#क काम पर जाना है । खाना
भी जJद6 खाना है यो#क काम पर जाना है । हर काय मA जJद6 । लगता है जैसे सुब नौकर6 क प:छे भाग
                                                                               े
रहे है । नौकर6 ह6 आज िजंदगी बन गई है और सब कछ पीछे छट गया है , छटा जा रहा है ।
                                            ु       ु           ु




प5रवार क वद हमेशा घबराए से है रान से रहते है । यो#क ना #कसी को उनक8 दे ख-भाल करने का समय है
        े ृ
और न ह6 उनसे बात करने का । िजन ब:चो क लए उ?ह*ने सCपण जीवन लगा >दया , उनसे ह6 बोल
                                     े             ू
सुनने को तरसते है । वद आjम* क8 बदती हुई सं^या इस बात का परमं है क8 आज वह प5रवार का
                     ृ
उपे~ त अंग बन गए है । कहते है क8 हर सफल यि त क पीछे #कसी म>हला का हाथ होता है । आज
                                              े
म>हला -वयं उसक साथ चल पड़ी है । प5रस0त थया बदल गई है । आज पुYष उस संतुि'ट को 3ा_त नह6
              े
कर पा रहा जो उसे अपनी सफलता पर 3ा_त होनी चा>हए। प नी क 30त इ'या का भाव बढता जा रहा है ।
                                                      े
_यार और -नेह , अपनापन और समान , )वेष क भाव मA बदल जाता है , प5रणाम ----तालाक । रा-ते ---
                                      े
अलग-अलग । टूट गया बंधन , टूट गए 5र2ते , Uबखर गया प5रवार ----बात गए ब:चे ।

3q0त ने औरत को बड़ा ह6 नाजुक , कोमल , सोCय और सुंदर बनाया है । आज तरस गई है आँखे उस Yप-
सौ?दय को दे खने क लए जो पहले होता था । सोलह-jगार से मंkडत , आभु2नो से सुसिजत नार6 को
                 े                           ंृ
दे खने क लए । िजसक8 चाल मA झनक, िजसक8 बात मA खनक , िजसक भाव मA लचीला -सौ?दय था।
        े
नौकर6 क बहनेऔरत से उसक8 ममता, _यार , -नेह, अपनापन , लLजा , शील-सौ?दय मत चनीये। कहते
       े
है कछ पाने क लए कछ खोना पड़ता है । सोच कर दे eखये नौकर6 करने से औरत ने या खोया या पाया
    ु       े    ु
है । म; समझती हु क8
                                      .......................................



                                                    www.kalpanadubey.com           Page 41
दो त -दो त न रहा
प

                                       आपने आज का अखबार पढ़ा
                                        कल ् क मु^या समाचार पढे .
                                              े
                                              या सन-सनी दे खा.
                                    गुडगाँव ए क एक -कल मA या हुआ?
                                                     ू
                                               यो हो गए चप?
                                                         ु


     य* उतर आई 0नराशा आपक8 आंख* मA ? कारन / सप'ट है . ये सुब घटनाये उन दो-त* क8 द-ता बयां
    करती है जो हमारा आज वाद- ववाद 30तयो गता का वषय है . दो-त-दो-त न रहा . आए >दन घटने वाल6
    इन घटनाओ ने मEो से व2वास उठा >दया है . पता नह6 कौन सा दो-त कब द2मन बन जाए. कभी कोई
                                                                   ु
    दो-त थोड़े से धन क लए ह6 #कसी अपने दो-त को मौत क8 नींद सुला दे ता है . तो कभी दो-त मJक ह6
                     े
    #कसी अपने मE का अपहरण कर उसक माता- पता को गुमराह कर उनसे पैसे वसूलते है . जरा सी कहा
                                े
    सुनी पर ह6 गुडगाँव मA ह6 एक दो-त ने दसरे दो-त को गोल6 मार द6.
                                         ु

    आज व)यालय व)या का आलय नह6 आतंक का अ™डा बनते जा रहे ह;. माता –pita कब अपने ब:चे से
    वं चत हो जाए वेह नह6 जानते जब र क ह6 भ क बन जाए तो #कस पर भरोसा करे , #कस पर नह6. पता
    नह6 वे >दन कहाँ गए जब एक मE दसरे मE क8 परे शानी को अपनी परे शानी समझता था . उसका दःख
                                 ु                                                    ु
    अपना दःख बन जाता था वे कहा0नया वे #क-से जो दाद6- नानी से सुना करते थे वे कह6 लु_त हो गए. है .
          ु
    कहाँ मलA गे अब सुदामा –krishan से दो-त , कहाँ मलA गे अब कारन –दयQधन से मE.
                                                                   ु

    कहा जाता है जो वप0त मA साथ दे वाह6 स:चा मE होता है . ले#कन जब मE ह6 वप0त का कारन बन जाए
    तो उसे या कहे आज तो मE सफ़ मतलब क रह गए है . जब तक उनक8 -वाथ – स
                                    े                                              होती रहती है तब
    तक ह6 मEता रहती है #फ़र वे गर गट क8 तरह अपना रं ग बदल लेते है . आप सफ़ अ-चाय से दे खते रह
    जाते है . और यह6 कहते रह जाते ह; “ पता नह6 इसे या हो गया है . “

    जब दो-त* क Uबच -वाथ क8 भावना आ जाती है तो दो-त- दो-त नह6 रहता दो-त ह6 या उस भावना पर
              े
    तो सारे 5र2ते ख़ म हो जाते ह;. इ'या का भाव जब पनपने लगता है तो दो-त द2मन नज़र आने लगता है .
                                                                        ु
    दो-त ह6 सबसे बड़ा द2मन बन जाता है . उसक8 जान ले लेना , उसका धन हड़प लेना , उसक घर वालो को
                      ु                                                         े
    गुमराह कर दे ना ह6 उनका काम रह गया है .
    ]30त>दन बदलते इन हालातो ने दो-त* पर से व2वास ह6 हटा >दया है . यद प यह सच है क8 Uबना दो-त के
    जीवन बड़ा ह6 नीरस और बेजान होता है . ले#कन दो-ती क नाम पर आ-तीन मA स‘प डालने से अ:छा तो है
                                                     े
    Uबना दो-त क रह जन.
               े



                                                      www.kalpanadubey.com                Page 42
कहाँ से लाये ऐसे दो-त जो _यार करA , सCमान करे , सलाह करे , ग़लत रा-ते पर चलने से रोक , जो साथ दे
                                                                                   े
और जीवन भर दो-ती 0नभाए . नह6 मलता न ऐसा कोई ? य* हुआ ऐसा -------? यो#क दो-त-दो-त न
रहा
                                    .......................................




                                                       www.kalpanadubey.com            Page 43
दो त -दो त न रहा
वप
                                   " यह >दन न कभी हम भूल पायAगे
                            तुCहार6 दो-ती क Uबना हम जी नह6 पायAगे
                                           े
                                   याद आएँगी सफ़ तुCहर6 ह6 बातA
                                   यह6 शnद होठो पर लेकर जायAगे”

यह हम सभी जानते ह; क8 हमारे जीवन मA दो-त क8 #कतनी अहम ् भू मका होती है । दो-ती एक एहसास है
िजसे हम महसूस करते ह;। हमA इन बातो को साUबत करने क लए #कसी और उदाहरण क8 आवशकता नह6
                                                  े
है । य>द हम -वयम क जीवन मA झांक कर दे खे तो पायAगे क8 हम दो-त क Uबना #कतना अधरापन महसूस
                  े                                            े             ू
करते ह;। दो-ती बहुत क8मती होती है । इससे ग़लत फि•मयो क8 वजह से नह6 खोना चा>हए यो#क स:चा
                                              े
दो-त पाना बड़ा मुि2कल होता है ।

आज ऐसे भी दो-त ह; जो -वाथप0त क लए दो-ती करते ह;। वह दो-त शnद क8 मा मकता को और उसक
                          ू   े                                                  े
मह व को नह6 समझते ह;। स:चा दो-त तो हर वप0त मA साथ दे ता ह;। कहा भी गया है “ वप0त कसोट6
जो कसे ते ह6 सांचे मीत”

दो-त* को #कसी क कहने मA आकर मत दर करो , यो#क कछ लोग तो अ:छा मE मल जाने से भी जलते
               े                ू             ु
ह;। इधर क8 उधर लगाते ह;। और गल फ•मीय पैदा करते ह;। स:चा दो-त तो कड़वी दवाई क8 तरह होता
                                े
ह;। िजसक8 कड़वी बात मA भी मठास होती है । िजस परकार छ तीस यंजन बनाना पर भी य>द उसमे
नमक न हो तो वह फ8का लगता ह;। उसी परकार एक दो-त क Uबना जीवन नीरस लगता है । जो बातA हम
                                                े
अपने माता- पता , भाई –ब>हन से नह6 कह सकते उसका राजदार तो मE ह6 हो सकता है । स:ची दो-ती
संसार मA सबसे बड़ी दौलत होती है । स:चा मE वाह6 जो अपने मE क8 बात ग_त रखे। जो अपने दो-त को
                                                                 ु
धोखा दे ता है या वह स:चा दो-त हो सकता है । #कसी एक क8 गलती क8 सजा हम सबको नह6 दे सकते
है ।

कृ'ण-सुदामा क8 दो-ती क8 मसाल आज भी द6 जाती ह;. दो-ती मA मान –सCमान , आ मर –गर6ब , जाती
–पाती का भेदभाव नह6 होता दो-ती मA चल, दख विजत है । याद रeखये क8 थोडी सी खšास पड़ते ह6 िजस
                                       ु
तरह दध फट जाता ह; उसी तरह थोड़ा सा जूठ भी हमार6 मEता को तोड़ सकता ह;।
     ू

 मEता को तोड़ना बहुत आसन है और बनाये रखना उतना ह6 क>ठन । इस लए मEो मEता को 0नभाना
 सख* और िजंदगी मA इसका लु फ़ उठाओ। अंत मA यह6 कहना चाहूंगी –

                                   “ मुझे चाँद सतार* से या लेना
                                 मझे इस द0नया क8 बहारो से या लेना
                                  ु      ु




                                                 www.kalpanadubey.com             Page 44
दो-ती सलामत हो तुCहर6 –हमार6
मुझे ज?नत क नजरो से या लेना “
                   े
     .......................................




                      www.kalpanadubey.com     Page 45
सुDीम कोटI क फसले से ब चे उLंड हो रहे ह
                                              े ै
प
                                   वह ब:चा क ा मA सगरे ट य* पी रहा है ?
                                    अरे क ा मA इतना शोर य* हो रहा है ?
                                         अ यापक परे शान य* है ?
                                       व)यालय मA पु लस य* आई है ?



    म; बताती हूँ ..... ये इ क8सवीं सद6 क व)याथg ह; इ?हे सु3ीम कोट ने श क* क दं ड से बचाकर -वतंE
                                        े                                  े
    और शि तशाल6 बनाया है

    महोदय इस क_यटर युग मA व)याथg क8 सोच भी क_यटर क8 तरह हो गयी है हर काय वे अपनी आयु से
              ं ू                           ं ू
    एक कदम आगे बढ़ कर करना चाहते ह; वे समझते ह; #क वे अपना अ:छा -बरा समझने लगे ह; अत:उ?हA
                                                                 ु
    कछ समझाया न जाए वे २१वी सद6 क व)याथg ह; १९वी सद6 क अ यापक* का अ धकार न थोपा जाए इसे
     ु                           े                    े
    वे एक पीडी का अंतर मानते ह;

    अ यापक* का अपमान करना आज आम घटना हो गयी है िजसका 3भाव प5रवार* पर भी >दखाई दे ता है
    कोई अपने माता - पता को घर से 0नकलता है तो कोई उनक साथ अभƒ यवहार करता है जब पौधे ह6
                                                     े
    अ:छे न ह*गे त* फसल अ:छ कसे होगी आज जब अ यापक क सर पर नौकर6 बचाने क8 तलवार टांग द6
                             ै                     े
    गयी है त* ब:चे उPंड य* न ह*गे ब:चे त* ब?दर क8 तरह होते ह; उ?हA अनुशा सत करने क लए लकडी
                                                                                  े
    नह6ं होगी त* अनुशासन कसे होगा ?
                          ै

    महोदय, स>दय* से र60त चल6 आ रह6 है #क एक बद म-त हाथी को महावत ह6 अपने अंकश )वारा
                                                                            ु
    0नयि?Eत करता है महावत िजतना तजुव€कार होगा हाथी को उतना ह6 0नयि?Eत कर लेगा ता#क वह
    #कसी क8 हा0न न कर सक इसी तरह व)या थय* को भी अनुशा सत करने क लए दं ड एवं भय क8
                        े                                      े
    आव2यकता है 3चीन काल से चल6 गुh श'य परCपरा धीरे -धीरे लु_त होती जा रह6 सु3ीम कोट ने इसे
    वनाश क कगार तक पहुंचा >दया है िजस तरह रोगी शर6र क लए कडवी दवाई क साथ -साथ शJय
          े                                          े              े
    च#क सा क8 भी आव2यकता होती है उसी 3कार उPंड ब:च* को सुधारनेक लए दं ड क8 आव2यकता होती
                                                               े
    है जहाँ समझाने से बात न बने वहां भय से काम काय जाता है श क का कत य ब:चे का चहुँमुखी
    वकास करना होता है उसक लए उसे कछ भी य* न करना पड़े
                         े        ु

    महोदय बढ़ई जब लकडी से कोई सामान बनता है तबउस पर तीखे -नक8ले औजार* से वार करता है उसक
                                                          ु                            े
    इ?ह6ं वार* से एक साधारण लकडी संदर Yप लेकर बाजार* मA ऊचे दामो पर Uबकती है उसी तरह व)याथg
                                   ु                     ँ
    एक ल कड़ है और श क अपने व)याथg को सुधारने क लए हर तरह से काय करता है ता#क वह एक
                                              े
    अ:छा नाग5रक बने




                                                     www.kalpanadubey.com                Page 46
उदं डता से #कसी का भला नह6ं हुआ है 3ाचीन काल क कस रावण शशुपाल क अंत से कौन प5र चत नह6ं
                                              े ं              े
है ? >हटलर मुसो लनी, सPाम हुसैन का अंत भी सुखद न था क व)याथg का भ व'य या होगा; यह
                                                     े
चंतनीय है सु3ीम कोट क फसले ने ब:च* क8 उदं डता को वह बढावा >दया है #क उसे रोकना असCभव
                     े ै
3तीत होने लगा है इस फसले हो पुन:: वचार करने क8 आव2यकता है अ?यथा भ व'य या होगा यह 32न
                     ै
भयावह है अंत मA मA यह6 कहना चाहती हूँ


                            "हम कौन थे या होगये और या ह*गे अभी

                          आओं वचारA आज मलकर ये सम-याएँ सभी "
                                    .......................................




                                                        www.kalpanadubey.com    Page 47
सुDीम कोटI क फसले से ब चे उLंड हो रहे ह
                                        े ै
वप
                                    रोको न न>दय* को बाँध से,
                                     कलकल कर क बहने दो,
                                              े
                                     खले गगन मA ब:च* को,
                                      ु
                                       खले पंख* से उड़ने दो,
                                        ु
                                    ब:चे तो ह; फल* क8 यार6,
                                                ू
                                 इन फल* को म-त हवा मA उड़ने दो
                                     ू

 0नणायक गण म; इस बात से सहमत नह6 हूँ #क ब:चे उदं ड हो रहे ह; भारत वह दे श है जहाँ नेहY जैसे महान
 पुYष हुए जो ब:च* से बेहद _यार करते थे इस लए इस दे श क कानून का ब:च* क प
                                                      े               े       मA 0नणय करना
 उ चत है
 महोदय बदलते समय क साथ साथ सब कछ बदल रहा है आज अ यापक और ब:च* का सCब?ध गh -
                  े            ु                                        ु
 श'य का नह6 अ पतु मEता का भी माना जाता है हर सCब?ध क8 कछ सीमाएं होती ह; पर?तु आज कछ
                                                       ु                          ु
 श क इन सीमाओं को पार करक व)या थय* क साथ द ु यवहार करने लगे ह; िजससे इन व)या थय* क
                         े          े                                             े
 भ व'य पर ह6 नह6 अ पतु उनक शार65रक और मान सक पटल पर भी 3भाव पड़ता है
                          े

 आए >दन हम श क* क hƒ Yप क उदाहरन दे ख रहे ह; कभी श क #कसी क8 बाजु तोड़ दे ते ह; तो कह6
                 े       े
 व)याथg को अपमा0नत करक आ म ह या तक क लए मजबूर कर दे ते ह; कछ >दन* पहले ह6 एक श क
                      े             े                      ु
 क8 सजा का 0घनौना Yप दे खने को मला जब माE छ: वष क8 ब:ची को Mह-काय न करने पर उसे 0नव-E
 करक अपमा0नत #कया गया प5रणाम -वYप वह इतना डर गयी #क वह व)यालय क नाम से ह6 घबराने
    े                                                          े
 लगी या यह उ चत है ?
 महोदय श क वह दपण है जो व)याथg को सह6 -गलत क8 पहचान कराता है , उसक य#कत व को
                                                                  े
 संवारता है , भ व'य का उ तरा धकार6 बनाता है पर?तु य>द वह दपण -वयं ह6 Uबगडा और धधला होगा तो
                                                                               ंु
 दसरे का यि त व या 0नखरे गा?
  ु
 कCहार #कतने _यार से मšी गँूथ कर #फ़र उसे चाक पर चदाता है और अपने कोमल -पश से वतन* को
  ु
 आकार दे ता है ठक वैसे ह6 अ यापक भी _यार से व)याथg को संवारता है न #क कठोरता से | सु3ीम कोट
 क फसले को हमA सहम0त दे नी चा>हए, ले#कन यह यान भी रखना होगा #क व)याथg को गलत राह मA
  े ै
 भटकने से रोकने क लए वनoता और सहजता का रा-ता अपनाना चा>हए हम गौतम और गांधी क दे श
                 े                                                          े
 वासी ह; संयम हर मुि-कल से लड़ने का ह थयार था, है और रहे गा
 ब:चे आने वाले कल का भ व'य ह; जब भ व'य ह6 सहमा हुआ होगा तो दे श क8 उ?न0त कसे होगी हमे तो
                                                                          ै
 मु-कराता हुआ उLLवल भ व'य चा>हए
                           नाया सवेरा आने दो ,#करण* से #करने मलने दो
                            नव ऋतू क आगमन मA नव क*पलA eखलने दो
                                    े




                                                 www.kalpanadubey.com                  Page 48
3ेम भाव क मंद -मंद झ*क* को तुम बहने दो
         े
न?हA -न?हA फल* को झटको न, महकने दो
               ू
       .......................................




                       www.kalpanadubey.com      Page 49

Hindi debates

  • 1.
  • 2.
    "वषय सूची वप श ा म आर ण क नी त 03 प ब ते का बोझ ब च क उ न त म साधक 04 वप ब ते का बोझ ब च क उ न त म बाधक 05 प "व$याथ' जीवन म राजनी त छा* को पथ ,-ट कर दे ती है 07 वप "व$याथ' जीवन म राजनी त छा* को पथ ,-ट कर दे ती है 09 वप नरं तर होता सरल6करण श ा का तर 7गरा रहा है 10 प पुर कार क होड़ ने भर-टाचार को बढावा >दया ह 12 वप पुर कार क होड़ ने भर-टाचार को बढावा >दया ह 13 प मानव जाती क ती@ ग त से उ न त ह6 उसक "वनाश का कारन है े 15 वप मानव जाती क ती@ ग त से उ न त ह6 उसक "वनाश का कारन है े 16 प फा ट फ़ड ने जीवन शैल6 को आसान बना >दया है ू 17 वप फा ट फ़ड ने जीवन शैल6 को आसान बना >दया है ू 19 प सदन क राय म म>हलाओं का नौकर6 करना पHरवार क लए उपयुJत है े 21 वप सदन क राय म म>हलाओं का नौकर6 करना पHरवार क लए उपयुJत है े 23 प भारतीय सं कृ त "वदे शय को Lभा"वत कर रह6 है 25 वप भारतीय सं कृ त "वदे शय को Lभा"वत कर रह6 है 27 प "वदे श म बसने क चाह हर भारतीय का Mवाब 29 वप "वदे श म बसने क चाह हर भारतीय का Mवाब 31 प युवा-अव था फलो भर6 ह तो Lोड-अव था जीवन संघषQ-रत और वदाव था पSचाताप से पHरपूणQ 33 ू ृ www.kalpanadubey.com Page 1
  • 3.
    "वषय सूची वप युवा-अव था फलो भर6 ह तो Lोड-अव था जीवन संघषQ-रत और वदाव था पSचाताप से पHरपूणQ 35 ू ृ प चापलूसी करो आगे बढो 36 वप चापलूसी करो आगे बढो 37 प पुर कृत 38 वप पुर कृत 40 प दो त -दो त न रहा 42 वप दो त -दो त न रहा 44 प सुLीम कोटQ क फसले से ब चे उUंड हो रहे ह े ै 46 वप सुLीम कोटQ क फसले से ब चे उUंड हो रहे ह े ै 48 www.kalpanadubey.com Page 2
  • 4.
    वप श ा म आर ण क नी त श ा का ल य है यि त का बौ क, सामािजक आ थक एवम आ याि मक वकास, अथात यि त का सवागीण वकास #कसी भी दे श का भ व'य उसक व)या थय* क +ान -तर पर 0नभर करता है | रा'1 क उ थान क लए व2व े े े े -तर पर 30त -पधा क लए कवल सा र नाग5रक रा'1 का 30त 0न ध व नह6ं कर सकता उसक लए व+ान, े े े तकनीक8, च#क क8य उ:च सं-थान करते ह;| हम मानते ह; #क श ा पर सबका अ धकार ह; और होना भी चा>हए पर?तु उ:च श ा सं-थान* मA समान अ धकार* क8 दहाई दे कर #कसी 0नCन बो क -तर क छाE को कवल ु े े इस लए -थान दे ना #क वह समाज क एक व श'ट वग से सCब?ध रखता है , कहाँ तक उ चत है | े "अ वल अJला नर उपाया, कदरत क सब बंदे | ू ु े एक नूर ते सब जग उपLया, कौन भले कौन मंदे |" हम सभी बंदे परमा माक एक नर क8 दA न ह; परं तु वभाजन क उपाय हमने -वयं #कए ह; |अंMेज भारत को े ू े वभािजत कर गए थे िजसका प5रणाम हमे आज तक भुगतना पड़ रहा है | -वतंEता क इतने वष बाद भी े हमारे अपने ह6 नेता श ा का अथ और उPे2य भुला कर उसे जा0त क आधार पर वभािजत करना चाह रहे े ह;| श ा आज राजनै0तक तंE क 0न>हत -वाथQ क8 ब ल चढ़ाई जा रह6 है | अभी हमारे दे श क कई प5रवार* े े क वे आंशू भी नह6ं सूख पाए ह; जो मंडल कमीशन क8 आग मA सैकड़* वTया थयो क आ मदाह क कारण े े े बहे थे| अब सरकार नए Uबल क8 आग सलगाने मA लग गई| वै2वीकरण क िजस दौर से हम आज गुजर रहे ु े ह;| इसमA हमA भारतीय* क8 योVयता और +ान क -तर को व2व क सम े े पेश करते ह;| म; अपने मE* से पूछना चाहती हूँ #क #कसी बौ क Wि'ट से कमजोर ब:चे को उ:च श ा सं-थान* मA आर ण क कारण े 3वेश दे कर हम #कस 3कार क भारत को व2व क सम े े 3-तत करने क8 कामना कर रहे ह; ! आर ण का ु होना इस कारण भी 0नरथक स होता है #क पछले कई वषX से चल6 आ रह6 आर ण क8 नी0त क चलते े कछ खास प5रवार सामा?य वग से अ धक संप?न हो गए ह; वडंवना यह है #क आर ण क8 नी0त का लाभ ु भी इ?हA ह6 मलेगा | श ा सं-थान* मA रं ग, लंग, जा0त आ>द का कोई मह व नह6 होता, उ?हA तो चा>हए योVयता | योVयता क8 कोई जा0त नह6 होती | चाहे अमीर हो गर6व, सवण हो 0नCन वण, वTया क मं>दर मA े वह6 3वेश ले सकता है ,जो इसक8 कसौट6 पर खरा उतरे | -वत?Eता से अब तक सिCवधान मA अनेक सुधार आ चक ह;, अब आव2यकता है आर ण क8 नी0त मA सुधार करने क8| आर ण आ थक Wि'ट से कमजोर ु े वग का होना चा>हए न #क बौ क Yप से कमजोर वग का |िजस 3कार कमजोर Zटो क8 नीव पर आल6शान इमारत खड़ी नह6ं क8जा सकती ठक उसी 3कार उ:च श ा भी इसक आभाव मA असCभव है |आर ण क8 े यह नी0त भेद भाव पैदा कर रह6 है | दरकार को चा>हए #क वह आ थक सहायता दे कर पछड़े वग को आगे बढ़ाए .उ?हA सु वधाएँ दे िजससे वे सCमान क साथ आगे बढ़ सक | अंत मA ,म; यह6 कहना चाहूंगी #क #कसी े A अपा>हज यि त को दौड़ मA शा मल करवाने क लए सह6 यि त क पैर कटवाना कहाँ तक उ चत है | े े ....................................... www.kalpanadubey.com Page 3
  • 5.
    ब ते का बोझ ब च क उ न त म साधक 'आने वाले सुंदर कल क8 त-वीर ह; ब:चे, उLLवल उ?नत दे श क8 तकद6र ह; ब:चे' जी हाँ, आज क ब:चे कल का भ व'य ह; आज का ब:चा कल का नाग5रक बनता है ब:च* क8 परव5रश े ,उनका रहन सहन -सहन उनक8 श ा का दे श क भ व'य पर सीधा असर पड़ता है जैसे -जैसे युग बदल े रहा है वैसे -वैसे ब:च* क8 परव5रश ,रहन -सहन और श ा मA भी प5रवतन हो रहे ह; त^ती से क_यटर का ं ू युग आ गया है ब:च* क8 श ा मA भी बढो तर6 हुई और श ा का -तर ऊचा होता गया ँ िजस तरह समाज मA आध0नकता क साथ पुराने र60त -5रवाज कभी -कभी बीच मA अंगडाइयां लेकर अपनी ु े उपि-थ0त जता दे ती ह; उसी तरह कछ लोग आध0नक श ा को बोझ बता कर 3ग0त मA बाधक बन रहे ह; ु ु वा-त वकता तो यह है #क माता - पता , श क ब:च* को ब-ते क िजस Yप से अवगत करायAगे ,वे उसे े वह6 समझAगे अब ये उनक उपर 0नभर है #क वे ब-ते को बोझ बनाते ह; या िजCमेदार6 ?बचपन ह6 वह े पडाव होता है जहाँ से ब:चे क यि त व और जीवन का -वYप आरCभ होता है जब ब:चा अपनी #कताबA े ब-ते मA डाल कर व)यालय जाता है तो वह उसका बोझ नह6 अ पतु उसमA उसक यि त व क8 परछाZ े ,उसक मां-बाप क सपन* को साकार करने का सामान, समाज क 30त िजCमेदार6 का सफर नामा होता है े े े माता - पता का यह सोचना #क ब:चा इतना भार6ब-ता कसे उटाएगाअपने ब:चे को कमजोर बनाने क8 ै नी0त है , उनका लाड -_यार ह6 उसक8 3ग0त मA बाधक बनता है य>द ब:चे को ब-ता भार6 लगता है तो उसका समाधान भी है 30त >दन 3योग होने वाल6 प-तक* व)यालय मA संM>हत करक रखA इससे ु े प-तक* का बोझ भी कम होगा और उनका रखरखाव भी ट6क होगा ु एक तरफ तो माता - पता ब:च* को आध0नक बनाने का 3य न करते ह; ,#फ़र पढाई मA आध0नकता और ु ु बदावेका वरोध य*? याद रeखए अ धक +ान क लए +ान क fोत भी अ धक ह*गे, कम +ान क fोत े े े से ब:चे आगे कसे बढ़ पाएंगे 3ाचीन काल मA जब व)याथg गhकल मA जाते थे श ा क साथ -साथ उ?हA ै ु ु े गह काय भी सखाए जाते थे जंगल से लकडी काटना, पानी भरना आ>द भगवान jी कृ'ण और jी राम ने ृ भी ये काय #कए थे इ0तहास गवाह है #क वे महान पुYष हुए लकkडय* क ग तर uताए तो संसार क8 े वपदाएँ सर पर धर ल6ं, पानी भरा तो संसार क8 वपदाओं को हर >दया मेहनत का बोझ ह6 मनु'य को सफल और महान बनता है ब:चे को ब-ते क बोझ से डराकर कमजोर नह6 े बिJक अपनी िजCमेदा5रय* का एहसास कराकर कल का शवाजी, राणा3ताप, ऐ .पी .जी .अnदलकलाम ु बनाने का य न क8िजए हर पीडी अगल6 पीडी से यह6 कहती है -... 'हम लाए ह; तूफ़ान से क2ती 0नकाल क इस दे श को रखना मेरे ब:चो संभाल क ' े े दे श को आने वाले तूफान* से तभी बचाया जा सकता है जब हमारे बाजू और कधे मजबत ह* उन पर ं ू व)या धन बोझ नह6 बिJक गांडीव हो ....................................... www.kalpanadubey.com Page 4
  • 6.
    ब ते काबोझ ब च क उ न त म बाधक वप "बार -बार आती है मझको मधर यादयाद बचपन तेर6 ु ु गया, ले गया, तू जीवन क8 सबसे म-त खशी मेर6 " ु बचपन भी #कतना? सफ़ तीन -चार साल .....बस इधर -कल का ब-ता पीठ पर चढा चड़ाऔर उधर ू बचपन eखसका ....... य* हुआ मेरे साथ ऐसा .......? कभी सोचा है आपने .....माता - पता ने .......अ भभावक* ने ....सरकार ने .......? #कसी ने भी नह6 सोचा उ?हA तो एक पढा - लखा नाग5रक चा>हए यह दे खने क8 उ?हA आव2यकता ह6 नह6 #क #क भ व'य का नाग5रक कसे पढ़ रहा है ?......कसे जी ै ै रहा है ? बचपन क8 नाजक उo मA ह6 मजदर क8 तरह पीठ पर ब-ता लाद लाद >दया और हांक >दया ु ू -कल क8 ओर जहाँ भेड़ बक5रय* क8 तरह ब:चे क ा hपी बाढ़े बाढे मA भर >दए गए | ू और .............ब:चा रोता रहा ....रोता रहा .........0छन गए eखलौने ....0छन गया बचपन आगया ब-ता .......आ गयी #कताबA ....और ढे र सारा पाpयqम | क ा पांच और वषय दस ....२० #कताबA और २० कॉ पयां, दस पाpय पु-तक, दस अuयास पु-तक छोट6 सी जान,छोटा सा शर6र ,भोला मि-त'क और भा A A र6 ब-ता | इस भार6 ब-ते ने हमारा बचपन ह6 छन लया खेलने का व त नह6 मलता, शैता0नयाँ करने क लए भी े समय का आभाव है जब कभी क ा मA अ या पका क आने से पहले कछ शरारत करते भी ह; तो उनक े ु े आते ह6 डाट खाते ह; पहले अनुशासन पर ले चर सुनते ह; #फ़र पाठ पर .....सब कछ इतना घुल मल जाता ु है #क न पाठ समझ आता है न अनुशासन समय का मह व सभी समझाते ह; -समय पर काय करो ,समय का सदपयोग करो अब आप ह6 दे eखये मेर6 ु समय सा5रणी -७.३० से १.३० तक -कल मA अथात ६घ?ते -कल मA ,३घ?ते -कल आने -जाने और तैयार ू ू ू होने क ४ घंटे -कल का होम वक अथात गह काय क आधा घंटा मE* से बात करने क य*#क होमवक े ू ृ े े भूल जाता हूँ आधा घंटा ट6.वी .दे खने का ९घ?ता सोने क लए अब आप ह6 बताईए #क म; कब -खातापीता े हूँ इस 30तयो गता क लए भी बंक मार कर आया हूँ े क ा ५ तक तो सरकार क8 मेहरवानी से पास होता गया जब क ा ६ मA आया तब होश >ठकाने आए #क मझे तो कछ भी नह6 आता इस ब-ते क बोझ ने न मझे पढ़ने >दया न खेलने ह6 बस इसे लादे रहने क8 ु ु े ु आदत हो गयी है इसक Uबना मझे अधरापन लगता है यह मेर6 पीठ का साथी बन गया है मझे नीद भी े ु ू तभी आती है जब मCमी पीठ पर वजन रखती है एक ब:चे का सCपण वकास तभी हो सकता है जब वह -व:छं द वातावरण मA पले- bआढे ब:चे क8 पढाई ू www.kalpanadubey.com Page 5
  • 7.
    क लए आव2यकताहै 3ाकृ0तक सौ?दय से प5रपूण वातावरण क8 ,जहाँ पानी क8 कलकल सुने तो े प~ य* क8 चहचहाहट भी समझे, जहाँ हवा क8 सरसराहट होऔर फल* क8 महक हो ,ब:च* क8 ू eखलeखलाहट हो 3कृ0त क नजद6क ह6 वह जीवन क8 पढाई पढे िजससे वह संसार और सि'ट से प5र चत े ृ हो ,उसक8 स?दरता से YबY हो ु आज क बोeझल वातावरण मA , 30तयो गताओं क8 होड़ मA वह कह6 दब सा गया है आज ब:चे पर सफ़ े ब-ते का ह6 बोझ नह6 है , उस पर माता - पता क8 आकाँ ाओं का बोझ भी है अ भभावक* क सामािजक े -तर को बढाने का उ तर दा0य व भी है इन सब को उसका बाल मन संभाल नह6 पाताऔर वह आगे बढ़ने क8 अप ा मौत को गले लगाना jेयकर समझने लगता ह6 30त>दन अख़बार* मA दरदशन क व भ?न चैनल* मA इससे सCबि?धत समाचार आते ह6 रहते ह; कह6ं कोई ू े ब:चा फल होने पर ऊची इमारत* से छलांग लगा दे ता है तो कोई पंखे से लटक जाता है कोई जहर खा े ँ लेता है तो कोई रे ल क8 पट5रयां नाप लेता है ब:चे का जीवन समा_त हो जाता है माता - पता जीते हुए भी मद€ क समान हो जाते ह; ,ले#कन श ा नी0त बनाने वाल* क कान* पर जंू नह6ं रA गती इन हालात* पर न वे ु े े यान दे ते ह; न सरकार श ा का उPे2य होना चा>हए ब:चे का चा5रUEक वकास करना जो आज #कताबी बातA रह गZ ह; चार* ओर छाए •'टाचार ब:चे क जीवन को 0नराशा और हताशा से भर >दया है वह 0नि2चत ह6 नह6 कर पाता े #क #कस रा-ते पर चले यह सच है #क वह #कताब* क बोझ क चाबुक से वह अपना रा-ता जJद6 तै कर लेता है ,ले#कन हो सकता े े है #क वह मंिजल से पहले ह6 दम तोड़ दे इस लए म; अनुरोध करता हूँ #क इस ओर कछ साथक कदम ु उठाए जांए िजससे ब:चे का चहुमुखी वकास हो वह सफ़ +ान क8 मशीन बन कर न रह जाए ब-ते के बोझ को आप +ान क8 अ धकता समझने क8 भूल न करA - मेरा शर6र बोझ से दहरा हुआ होगा ु म; सजदे मA नह6ं था, तुCहे धोखा हुआ होगा " ....................................... www.kalpanadubey.com Page 6
  • 8.
    व याथ# जीवन म राजनी त छा& को पथ ()ट कर दे ती है 'हम लाए ह; तूफान से #क2ती क, े इस दे श को रखना मेरे ब:चो संभाल क ' े ये पंि तयाँ उनअमर शह6द*क8 ओर कह6 से गयी ह; िज?ह*ने अपना सव-व ब लदान करक भारत को े आजाद6 >दलाई उ?ह*ने सोचा था #क हम अपने दे श वा सय* को एक आजाद दे श दे कर जा रहे ह; आगे आने वाल6 पीडी इस दे श को संभालेगी तथा दे श को उ?न0त कमाग पर ले जायेगी| े या सच मA यह6 हो रहा है ? या हम उन शह6द* क8 भावना पर खरे उतरे ह; ? नह6ं ..........आज समाज क8 हालत दे ख कर डर लगने लगता है आए >दन व भ?न 3कार क घोटाले -कभी चारा घोटाला ,कभी े चीनी घोटाला, कभी बोफोस घोटाला 0नत नएनए घोटाल* ने नेराजनी0त को •'टता क8 चरम सीमा तक पहुंचा >दया है नेताओं क8 मनमानी ने ,उनक लालच ने ,उनक8 अंधी ताकत* क 3भाव ने व)या थय* को े े भी इस दलदल क8 ओर मग E'णा क8 भां0त आक षत #कया है व)या थय* क8 नासमझी नेताओक का म ृ े आतीं ह; वे अपना उJलू सीधा करने क लए छाE* को भ व'य क सुनहरे सपने >दखा कर उनका दYपयोग े े ु करते ह; | कोलेज* मA होने वाले इले शन इस बात का 3माण है #क आज यवा वग राजनी0त पर लाख* Yपये खच ु करता है और करोड* बनता है स य तो यह है #क राजनी0त क बहाने वह कटनी0त सीखता है कब, कसे, े ू ै #कसे ब लब ल का बकरा बनाया जाए, सCप0त को कसे हडपा जाए, यह6 सब सीख कर वह अपनी बु ै और शि त का दYप योग करता है व)याथg प5रषद मA चने जाने पर उनका जीवन कछ ह6 >दन* मA बदल ु ु ु जाता है | चमचमाती गाkडयां और Uबना मेहनत क मले hपय* से िज?दगी गलत राह पर चल पडती है चमचे छाप े लोग* का साथ उ?हA दCभी और अहं कार6 बना दे ता है ये इले शन उ?हA साम, दाम, दं ड, भेद सभी नी0तयां सखा दे ता है वे छाE जीवन मA ह6 गुंडा गद‚ मA महारथ हा सल कर लेते ह; स य तो यह है #क राजनी0त का अथ मनमानी या शि त का 3दशन नह6ं है अ पतु 0न-वाथ भावना, 0न'प वचार और ?याय का साथ दे ना है पर?तु अफ़सोस क8 बात है #क आज यह6 बातA असCभव हो गZ ह; महोदय, आज छाE जीवन श ा हे तु होना चा>हए वे पहले -वयं को योVय बनाएं तब काय ेE मA 3वेश करA य*#क अधरा +ान अ+ानता से भी भयानक होता है अंत मA युवा मE* से यह6 कहना चाहूँगा #क ु www.kalpanadubey.com Page 7
  • 9.
    अपने ल यको पहचानो, राजनी0त क लए जीवन मA और भी मौक मलA गे नेता बनो तो दे श क8 भलाई क े े े लए न #क -वाथ क लए एक पढा - लखा े यि त ह6 एक -व-थ और उ?नत दे श बना सकता है अत; व)याथg जीवन का सदपयोग करो और अपने ु जीवन को राजनै0तक 3पंच* से पथ •'ट होने से बचाओ बात है सीधी मतलब दो, समझो और समझाने दो अभी क:चा है मेरा र-ता, इस पथ को और सजाने दो, बदल दं गा त-वीर दे श क8, ू मझे पढ़ कर आने दो ु ....................................... www.kalpanadubey.com Page 8
  • 10.
    व याथ# जीवनम राजनी त, छा& को पथ ( त कर दे ती है वप भला -बुरा न जग मA कोई कहलाता है भीतर का ह6 दोष, बाहर नजर आता है , #कसी को क8चड़ मA कमल >दखाई दे ता है , #कसी को चाँद मA भी दाग नजर आता है आज सCपूण व2व लोकतंE क8 ओर बढ़ रहा है य*#क लोकतंE ह6 #कसी भी दे श अथवा समाज क8 3ग0त क लए 0नतांत आव2यक है इसी से समाजवाद क8 -थापना होती है लोकतंE क8 र ा क लए े े अनेकानेक नेताओं ने कवानी द6 है चंƒशेखर आजाद ,भगत संह ,सुख दे व ,राजगh यहाँ तक #क jीमती ु ु इं>दरा गांधी ने छाE जीवन से ह6 राजनी0त मA Y च लेनी आरCभ कर द6 थी राजनी0त क गुन सीखने क े े लए सकदर ने अर-तु को ,च?ƒग_त मौय ने चाण य को अपना गh बनाया राजनी0त क अनेक चतर ं ु ु े ु eखलाkड़य* ने संसार का नेत ृ व #कया ,सह6 >दशा द6 और माग दशन #कया सरकार ने भी मतदान क8 उo २१ से घटा कर १८ कर द6 छाE जीवन मA राजनी0त का कवल वह6 वरोधी है े जो लोकतंE क वरोधी ह; य>द छाE जीवन से राजनी0त न सीखी जाए तो राजनी0त सीखने क8 सह6 उo े या है ?राजनी0त मA पनपा •'टाचार भी इस बात का सा य है #क आज -कल राजनी0त मA कम लोग Y च ले रहे ह; जो आगे चल कर बेहद खतरनाक हो सकता है इसे Y च कर बनाया जाए ,30तयोगी बनाया जाए ,अ?यथा व2व लोकतंE खतरे मA पड़ जाएगा और राजत?E अथवा तानाशाह6 से व2व मंच पर हा -हा कार मच जाएगा कछ लोग ह6 3ग0त शील ,अ…†नीय ु और 3ेरक ह*गे राजनी0त और लोकतंE एक दसरे क परक ह; दे श 3ेम क8 भावना से ओत 3ोत अनुभव ु े ू अथवा कछ सीखने क8 भावना और कछ कर गुजरने क8 यह6 सह6 उo है व2व मA इस बात क अनेक ु ु े उदाहरन ह; #क छाE जीवन राजनी0त न सीखने वाले लोग नौ सeखए ह6 रहते है वतमान समय को अ भशा पत करने वाले लोग आतंकवाद ,भाई -भतीजावाद एवं समाज मA पैदा होने वाल6 अनेक या धय* को ज?म दे ते ह; य*#क इ?ह*ने कभी भी 0नय मत कोई सीख ,+ान ,अनुशासन और सहनशीलता सीखी ह6 नह6|आज हमारे पास अ:छे डॉ टर ,वै+ा0नक ,3शासक उपलnध ह; ,कमी है तो कवल अ:छे नेताओं क8 िजनक आभाव मA हमारा जनतंE खतरे मA है आज राजनी0त मA -व-थ ,सुंदर े े , श'ट आचरण क8 कमी है आए >दन संसद मA होने वाले अशोभनीय आचरण हमA इस बात क लए 3े5रत े करते ह; #क आज व)यल* मA अ:छे नेता बनाने का भी कोस शा मल #कया जन चा>हए िजससे रा'1 को युवा ,होनहार ,30तभाशाल6 और आदशमय कणधार मल सक ,तभी रा'1 का भ व'य सुखमय और े उLLवल हो सकगा कबीरदास ने कहा है _ े "आचर6 सब ज मला, वचार6 मला न कोय को>ट आचर6 बा5रये, जो एक वचार6 होय" ....................................... www.kalpanadubey.com Page 9
  • 11.
    नरं तर होतासरल0करण श ा का तर 1गरा रहा है वप "अभी तो सहर है , जरा सुबह तो होने दो, अभी तो आगाज है , अंजाम य* सोचने लगे" >दन ब >दन श ा का बदलता -वYप अपने साथ कईकई ववाद लेकर आता है आर ण का ,कभी पर6 ाओं का ,कभी भाषा का एसा ह6 एक ववाद हमार6 आज क8क8 वाद ववाद 30तयो गता का शीषक बन कर हमारे सCमुख आया है #क 0नरं तर होता सरल6करण श ा का -तर गरा रहा है jोताओ ,म; इस बात से कतई कतई सहमत नह6 हूँ बदलाव तो 0नय0त का 0नयम है ,#फ़र हर सद6 मA मA कोई न कोई बदलाव तो होता ह6 है ले#कन िजस बदलाव को समाज मा?यता दे ,जो सबक >हत क लए हो ,उसे े े नकारना य* ? हर चीज क दो पहलू लू होते ह; मन'य क8 3व0त यह6 रह6 है #क वह गलत चीज को जJद6 Mहण करता है े ु ृ इस लए आव2यक है #क सह6 hख को व-तार से जाना जाए सरल6करण से हमA अनेक लाभ हुए ह; - व)या थय* क8 पढाई मA Y च बढ़ना | जो व)याथg श ा ज>टल होने क कारण ण श ा से जी चराते थे े ु ,अब उनका पढाई मA मन लगाने लगा है उनमA 30त-पधा करने का उ साह भी जाMत हुआ गा है पढना आसान होगया है ,यह जानकर Mामीण भी आगे आएँगे वे पढाई मA अपनी Y च >दखाएंगे ,िजससे सा रता का 3चार भी बढे गा और आ थक ेE मA उ?न0त भी होगी सरल6करण क अंतगत पाpयqम मA े अनेक सुधार #कए गएिजससे व)याथg को पढ़ने मA सु वधा हुई उन पर पढाई बोझ न पडे िजससे वे उदासीन हो जाएँ उदासीनता क कारण कछ व)याथg अपनी जीवन ल6ला समा_त कर लेते ह; ,या पढाई े ु छोड़ कर गलत रा-ते पर भटक कर अपना जीवन तथा अपने अ भभावक* क8 उCमीदे दांव पर लगा दे ते ह; य>द सरल6करण न होता तो रामायण और महाभारत जैसे M?थ सं-कृत मA ह6 पढे जाते तो सबक8 समझ मA न आते #कतने ह6 आयुव>दक नु-ख* ,शा-E* से हम अप5र चत ह6 रह जाते € सरल6करण से बेरोजगार6 क8 सम-या भी कछ हद तक हल होगी ७०% अंक लाने वाले व)याथg ८०- ु ९०%अंक से उ तीण ह*गे और नौकर6 क अवसर बढA गे े आप ह6 बताईए सरल6करण क इतने लाभ होने क बावजद उसे नकारना कहाँ क8 समझदार6 है ? य* कछ े े ू ु लोग श ा क -तर का बहाना बना कर व)या थय* पर मायूसी और परे शा0नय* का बोझ डालना चाहते ह; े ?कछ लोग नह6 चाहते #क आज का व)याथg आ म व2वास क बल पर िज?दगी मA आगे बढे वे आज क ु े े युग मA भी लक8र क फक8र बने बैठे ह; मेरे वप ी मE का कहना #क सरल6करण से व)याथg मेहनती े नह6 रहे ,गलत है मE सरल6करण तो एक डोर है िजसक सहारे व)याथg जीवन मA आगे बढ़ सकता है े आज क इस तेज र‡तार क युग मA सरल6करण व)याथg क लए वह मे1ो -रे ल है िजसक सहारे उसका े े े े जीवन सरलता ,सुगमता से अपनी मंिजल 3ा_त कर सकता है | आज हमारा दे श हर ेE मA 3ग0तशील है #फ़र श ा के ेE मA य* पछडे? य* वह6 क से कमल पर www.kalpanadubey.com Page 10
  • 12.
    अटक रहA ,कसे कमयोगी भी होता है स:चा कमयोगी वह6 होता है जो सरल6करण को अपनी वैसाखी नह6 े अ पतु अपना नया ह थयार बना कर कम ेE मA वजय 3ा_त करे |गीता का उपदे श भी यह6 कहता है #क कम करो ,फल क8 इ:छा मत करो | सरल6करण क8 इस नई नी0त क साथ ह6 हम नए युग से जुड़ सकगे े A "आज पुरानी जंजीर* को तोड़ चक ह; ु े य* दे खA उस मंिजल को जो छोड़ चक ह; ु े नया दौर है , नई उमंगे, अब है नई कहानी युग बदला, बदलेगी नी0त, बदल6 र60त परानी " ु ....................................... www.kalpanadubey.com Page 11
  • 13.
    पुर कार कहोड़ ने भर)टाचार को बढावा 7दया ह प उथल6 होती जा रह6 है , आदमी क8 आ मा, यह6 ह; वेह सम-या जो, सबसे अ धक कचो)ती है . भ'टाचार पर-कार* क8 दे न बन गया यो#क आज उसक8 0नय0त मA फक आ गया है . हर वह चीज़ वेह 3ा_त ु कर लेना चाहता है िजसक वह योVय नह6 है . इसक लए वहसाम,- दाम, दं द-भेड़ #कसी का भी पयQग करने े े ु क लए -वतंE है . हर यि त इसबदती 30तयो गता क8 और वैसे ह6 बढता जा रहा है जैसे पतंगे शमा क8 े और बड़ते है और अपने पंखो को जला बैठते ह; . . एकाध ह6 पतंगा ऐसा होता है जो शमा का सामना कर सक. े आज eखलाड़ी शि त-वधक दवाइयो का 3 योग कर या ग़लत तर6का अपना कर इन 30तयो गताओ को जीतना चाहते ह;. नतीजा अपमान और शम को ओड़ना पड़ता ह;. एक कहावत ह; “हर चमक8ल6 वा-तु सोना नह6 होती “ यह6 चमक यि त को गुमराहकर दे ती है इसका मु^या कारन है – आ म –vishwas और ƒण 0न2चय क8 कमी . य>द यि त को अपने ऊपर व2वास हो तो और उसक मन मA Wढ़ता हो तो ये चमकते मैडल -वयम उसक पास आ जायAगे . े े आज भ'टाचार क8 मार झेल रहा समाज इस बात क8 3ेरणा दे ता है Uबना ग़लत ता-ताअपनाए काम हो ह6 नह6 सकता. इसी सोच ने लोगो को भर'टाचार क रा-ते पर धकलाहै .इसमे सहायक बनी है बदती े े 30तयो गता और बड़ते पुर-कार . आज कला, सा>ह य, व+ान आ>द क लए भी व भन ् पुर-कार* क8 घोषणा क8 जातीहै . #कतने उ चत े यि त इ?हA 3ा_त करते ह; ?आए >दन होने वाले वरोध इस बात को 3माeणत करते ह; #क कह6ं न कह6ं कछ गडबड है | व2व -तर पर ये 30तयो गताएँ पारदशg होती ह; ,इस लए 30तयोगी गलत काम करते ु पकड़े जाते ह; | ....................................... www.kalpanadubey.com Page 12
  • 14.
    पुर कार कहोड़ ने भर)टाचार को बढावा 7दया ह वप पर-कार #कसी यि त क यि त व को , कायQ को , रचनाओ को , शैल6 को 0नखारने का काय करता है . दसरे शnद* ु े ु मA कहू तो मA कह सकती हु क8 पर-कार #कसी यि त को उसक अ:छे कायQ क लए 3ो साहन -वhप >दया जाता ह;. ु े े सदन क मत से ये पर-कार ह6 भर'टाचार का कारन ह;. मA इसे सरासर ग़लत मानती हु . . पर-कार तो यि त मA े ु ु -व-थ 30तयो गता क8 भावना जगाते ह;. य>द ऐसा न होता तो पर-कार* क8 पड़ती समा_त हो गई होती. आज ु पर-कार* क8 सीमा घर, प5रवार और रा'1 तक ह6 स मत नह6 है . ये सीमाओं को लाँघ चुक ह;. चाहे ये खेलो मA मलने ु े वाले पर-कार हो, या श ा , सा>ह य, व+ानं या समाज सेवा से सCभं>दत हो. इन पर-कार* ने यि त को व2व ु ु -टार पर लाकर खड़ा कर >दया है . इन पर-कार* क 30त लोगो क8 चाहत #कतनी अ धक हो गई है और उसक लए इन ु े े पर-कार* को 3ा_त करना उनका उPे2य बन गया है . ु शाि?त, व+ानं. सा>ह य और अथशा-E पर मलने वाले नोबल –पर-कार ने यि त को रा'1 का ह6 नह6 बिJक ु व2व का सवjे'ट -थान 3दान #कया ह;. सोभाVयशाल6 है वे लोग िज?हA ये पर-कार मले ह;. इस पर-कार क8 कामना ु ु करना और इसक लए पयटन करना , अपराध तो नह6. अपराध तो तब होगा जब लोगो को इससे वं चत कर >दया े जाएगा. खेलो क शेEो मA ओलं पक मA मैडल 3ा_त करना हर eखलाड़ी का सपना होता है . इसक लए पयटन करना , े े या ग़लत है . .. लोग चाँद और सरज मA क मया दे ख लेते ह;. उजा का -तोE सय भी लोगो को भीषण गमg से तपा दे ता ह;. सखे का ू ू ू कारन बनता है . इसका मतलब यह तो नह6 क8 सय का मह व कम हो जाएगा. शीतल चांदनी और शाि?त दे ने वाला ू चाँद भी लोगो को 0नगाह* मA कलं#कत है . इससे उसक8 शीतलता मA कमी नह6 आती. यह6 मेरा मानना है क8 भ'टाचार का सहारा लेकर इन पर-कार* को द ू षत न #कया जाए . पर-कार यि त क8 30तभा को दशाते ह;. उसे मान, सCमान, ु ु यश, धन, क80त उसे सब 3दान करते ह;. #फ़र उसे भ'टाचार का कारन मानना कहाँ तक उ चत है •'टाचार पनप रहा है - लोगो क8 0नय0त मA , उनक8 सोच मA , उनक8 भावना मA , उनक कायQ मA , यव-था मA , -वाथ मA . े और इसक लए कलं#कत #कया जा रहा है पर-कार* को. यह सच है क8 इन पर-कार* को 3ा_त करने मA यि त अ>द- े ु ु चोट6 का जोर लगा दे ते ह;..साथ ह6 कछ ग़लत ह कदो को भी अपनाते ह;. अतः. आज जhरत है चु-त-दh-त रहने क8 . ु ं ु इस •'टाचार Yपी धुन से बचने क8 अ?यथा यह धुन एक >दन सारे मैडल सारे पर-कार चाट कर जाएगा. ु मेरे सा थयो ने •'टाचार क8 बहुत सी misaale पेश क8 है . . या कह6 भी यह स होता है क8 •'टाचार क प:छे े पर-कार* का हाथ ह; . पर-कार तो उस Œव तारे क8 तरह है जो ि-थर रहकर सब को >दशा >दखाते ह;. सबक8 योVयता ु ु ु का मा_द?द होते ह;. ु यह सच है क8 पर-कार सफ़ एक मैडल या 3श सत पाE नह6 होता , वह यश , धन , समान का सचक और व-तारक ु ू होता ह;. , यह6 लालच , यह6 पाने क8 चाहत ह6 तो यि त को क:छ कर गजरने क8 3ेरणा दे ती है . यह अलग बात ह; क8 ु ु लोग इसे ग़लत ढं ग से 3ा_त करने क8 को शश करते ह;. इसे आप •'टाचार कहना चाहे तो कह सकते ह;. ह6रे क8 अगर चमक Lयादा ह; , क8मत Lयादा है तो इसमे ह6रे का या दोष . . 3ाचीन काल से ह6 पर-कार* का 3चालन ु रहा ह; . raaja -महाराजा 3सन होकर पर-कार >दया करते थे. आज पर-कार* का Yप बदल गया है , उनका 3चालन ु ु www.kalpanadubey.com Page 13
  • 15.
    नह6 बदला बिJकउनक8 सं^या और शेE बाद गए है . यह बात ये पमा0नत करती है क8 पर-कार* का परभाव >दन- ु 30त>दन बढता जा रहा है . अब यह अलग बात है क8 सम?ƒ मंथन से #कसी को अमत मलता है तो #कसी को वष . ु ृ अथात #कसी को पर-कार मलता है तो #कसी को •'टाचार का अपमान. ु •'टाचार वषबेल क8 तरह होता है . जो सफ़ वनाश करता है ----------- सफ़ वनाश . •'टाचार यव-था मA या_त ह;., •-ताचार सोच मA या_त ह; , इ'या , )वेष , और -वाथ मA या_त ह;. य>द शी• ह6 इन भावनाओ पर 0नयंतरण न #कया गया तो 0न2चय ह6 यह •'टाचार hपी wishbale इ?हे भी अपने घेरे मA लपेट लAगी. अभी ओलं पक मA हमA सफ़ एक मैडल मला . हम सभी को 0नराशा हुई यो#क हम सभी इसक लए पयाfत थे . कह6 े कछ कमी रह गई. य>द भ'टाचार से मैडल मलते तो हमA अव2य ह6 कछ तो मैडल और मल ह6 गए होते यो#क ु ु •'टाचार मA तो हमारा दे श काफ़8 आगे ह;. काश/------ऐसा होता तो हम भी कछ और पुर-कार पा जाते.. ु ....................................... www.kalpanadubey.com Page 14
  • 16.
    मानव जाती क8तीŽ ग0त से उ?न0त ह6 उसक वनाश का कारन है े प ‘कह रहा यह सां य र व ढलता हुआ, यो सदा चढ़ कर उतरना है अटल , फल चढ़ तh क शखर पर हं स >दया , ु े अंत मA तो धल का आँचल मदल.’ ु ृ ु सCपूण जगत इस बात से प5र चत है क8 ज?म , वकास और म ृ यु शा2वत है , अटलहै , ले#कन इस शा2वता मA तीŽता तब और भी Lयादा आ जाती है जब वकास औरउ?न0त क8 ग0त तेज हो जाती है . िजतनी तीŽ ग0त से चलA गे उतनी ह6 जJद6 मंिजलको 3ा_त करA गे-------. मंिजल 3ा_त होने पर मनु'य* के वचार* मA प5रवतन आता है .यह प5रवतन दो3 कार का होता है . १-इस भो0तक शर6र को भो0तक साधन* से सखपहुचाने क8 लालसा और २-आदमी क8 चेतना को बदलने क8 लालसा. व+ानं मनु'य*क सख – ु े ु साधन* पर यान दे ता है तो धरम मन'य क8 चेतना पर . व+ान तीŽ ग0त से उ?न0त करता है िजसका ु सहारा मानव जाती ने लया है . वेह तीŽ ग0त से वजय क8और बढता है और वजय क उ?माद से भोग- े वलास क8 और मुड़ता है . नै0तकता और मानवीय मJय* से गर जाता है . और यह6 से उसका पतन 3hCभ ू हो जाता है . गाँधी –जी ने कहा -भोग और वलास से सजन नह6 होता , तप – याग क साथ ह6 सजन का 5र2ता है . भोग ृ े ृ – वलास का रा-ता तो पतन क8 मंिजल तक पहुचने क लए अ भश_त है . े रोम और उनां का वकास िजस तीŽ ग0त से हुआ उतनी ह6 तीŽ ग0त से वनाश हुआ .इस तीŽता मA एक अवगण यह भी नज़र आता है क8 तीŽता मA सोच क8, उसकद'3भाव* को न समझ पाने क8 , सावधा0नय* ु े ु क8,सावधा0नय* क8 कमी रह जाती है |कहा गया है "जJद6 का काम िज?न का " अथात उसमA गहन च?तन क8 कमी होती है | इस लए तीŽ ग0त से #कया गया वकास जJद6 ह6 वनाश क कगार पर पहुंच े जाता है | ताश क प त* का महल िजतनी जJद6 बनता है उतनी... े ....................................... www.kalpanadubey.com Page 15
  • 17.
    मानव जाती कती8 ग त से उ न त ह0 उसक वनाश का कारन है े वप तीŽ ग0त से क8 गई उ?न0त 3ग0त का सचक है । धीरे -धीरे क8 गई उ?न0त , उ?न0त नह6 प5रवतन ू कहलाती है । जो समय क8 ग0त क साथ होना 0नि2चत है । मानव जाती ने जब प5रवतन का बीडा उठाया है े अपने को उ?न0त क शखर पर पहुचाया है । यह उसक8 सोच और कमठता का ह6 प5रणाम है । तीŽ ग0त े से ह6 उ?न0त क8 जा सकती है यो#क धीरे -धीरे क8 गई उ?न0त से उसमे अवन0त क त व अपने पैर फला े ै लेते है । यह मनो- व+ा0नक स य है क8 मानव उ?न0त क8 और उतनी जJद6 अMसर नह6 होता िजतनी जJद6 अवन0त क8 और । समय भी धीरे नह6 चलता वह 0नरं तर आगे बढता रहता है । समय क साथ े चलना उ?न0त है । आज मनु'य क8 आयु इतनी कम है क8 वेह सोच - वचार* मA समय बरबाद नह6 कर सकता। #कसी भी काय क8 इPा इस बात मA नह6 है क8 वेह #कतनी दे र मA हुआ । बिJक इसमे क8 वेह #कतनी जJद6 हुआ . तीŽ ग0त से उ?न0त पतन का कारण नह6। पतन है मन'य क8 सोच . मन'य भो0तक वाद क8 और ु ु बाद गया है . उसने नै0तक मJय* का याग कर >दया है . और यह6 उसक पतन का करना है . ओशो ने कहा ू े है – भो0तक सख का सबसे मह वपण योगदान यह है क8 वेह अ0नवाय Yप से ववाद क8 और ले जाता है । ु ू यह6 मानव जाती क वनाश क कारन है । े े मनु'य ने व+ानं से, व)युत से , और उजा से #कतनी 3ग0त क8 है । #कसी से छपी नह6। ये मानव जाती ु क लए वरदान है । वनाश क लए उतरदायी है - मनु'य क8 -वाथQ और भोग ल_सा क8 3 व0तया , दसरो े े ु क अ धकार* क हनन क8 आदत, अंहकार क8 भावना , और अकCदयता । ये 3 व0तया वनाश क कारन है । े े े इ?हे बढावा दे ती है -स ता और सCप? ता । सता और सCप? ता उस पानी क सामान होती है जो नौका क े े बहार रहता है तो नौका को शि त पदान करता है और उसक तैरने का साधन बनता है #कंतु जब यह6 पानी े नौका क अ?दर आ जाए तो नौका क डूबने का कारन भी बनता है । े े 3ग0त से तो मनु'य ने 3क0त और अलौ#कक स ता क रह-य* से भी परदा उठा >दया है । े ....................................... www.kalpanadubey.com Page 16
  • 18.
    फा ट फ़डने जीवन शैल0 को आसान बना 7दया है प ू कम फा-ट -----------------गो फा-ट ------------------दो फा-ट --- आज क8 जीवन शैल6 ह6 यह6 है –सब कछ फा-ट । इस भागम-भाग क8 िजंदगी को य>द#कसी ने आसान ु #कया है तो वह है फा-ट –फ़ड अथात जJद6 तैयार हो जाने वालाभोजन । भोजन भी वह जो ताजा और ू -वा-•यवधक भी हो । हा वेह, यह6 है आज आसन फा-ट- फ़ड िजसने हमार6 िजंदगी को सुकन >दया है । ू ू अ?य था भूखे रहकर कब का युवा –वग अि?तम साँसे गन रहा होता । आज क_यटर का युग है । हर काय भी उसी ग0त से हो रहा है । सच मा0नए आज #कसको फसत है जो आज ं ू ु खाना भी कोई आराम से खा सक । बनाने क8 तो कौन सोचे ।सुबह उठकर ज़रा बहार झाँक कर तो दे eखये -- े ----सूय क8 #करन* क आगमन से पूव ह6लोग बस* क इि?तज़ार मA खड़े होते ह; । ब:चे -कल बैग लए बस े े ू क इि?तज़ार मA 0नंद6आंख* से हाथ मA पकड़ा स;ड - वच खाते नज़र आएंगे । स;ड- वच जायAगे . या करे े .स;ड वच , बेग€र, मVगी आ>द खा)य पदाथQ ने ह6 तो उ?हA सहारा >दया है । आज #कस माँ को इतनी फसत ु है क8 जो सुबह उठकर परांठे भी बनाए और -वयम भी काम पर 0नकले । वह भीइंसान है कोई मशीन नह6 । और---आप तो जानते ह6 है क8 -वा-•य क लए परांठे #कतने अ-व-•य- करक है . वजन भी बढाते है और े बीमा5रय*को भी आमंEण भी दे ते है . ऐसे मA एक ह6 सहारा है फा-ट –फ़ड . ू यथानाम तथो गुन: . फा-ट फ़ड यानी जJद6 तैयार होने वाला ,जJद6 खाए जाने वाला खाTय पदाथ | जो ू कह6ं भी ,कभी भी ,कसे भी खाया जा सक | न _लेट क8 जYरत ,न कटोर6 क8 ,न चCमच क8 |एक पेपर ै े नैप#कन ह6 पया_त है |#कतना अ:छा है यह भोजन ,न हाथ गंदे न कपड़े गंदे | म; आज भी याद करता हूँ वे >दन जब दल -चावल या सnजी -रोट6 खाते समय कछ न कछ कपड* पर गर ु ु ह6 जाता कभी हाथ पीले कभी कपड़े पीले हो जाते ,कभी -कभी कौपी #कताब* पर भी यह रं ग >दखाई दे ने लगता |#फर माँ का असर मझ पर |#कतनी मसीबत थी कछ भी खाना और कह6ं ले जाना | ु ु ु फा-ट फ़ड ने हमार6 >दन चया को फा-ट बना >दया है ,बस यूँ समझो चाट मंगनी -पट शाद6 अथात थोड़े ह6 ू समय मA खाना तैयार |चाहे जब बनाए और खाएँ | एक जमाना था जब घर क8 म>हलाएँ अ धकतर समय #क चन मA ह6 Uबताती थी ,उनक हाथ* से कपड* से े मसाल* क8 खशबु आती ह6 रहती थी | ु www.kalpanadubey.com Page 17
  • 19.
    आज माँ भीखश और म; भी खश |माँ को रसोई मA खतना नह6 पड़ता और हम भी पारCप5रक खाने से बच ु ु जाते | आज म>हलाए रसोई को छोड़ आगे बढ़ चक8 है , उनक हाथ* मA पु-तक और फाएले ु े े ....................................... www.kalpanadubey.com Page 18
  • 20.
    फा ट फ़डने जीवन शैल0 को आसान बना 7दया है ू वप "बदले-बदले से आसार नज़र आते है , अब तो जगह-जगह मुझे फा-ट-फ़ड खाते ू बीमार नज़र आते है ।" ये फा-ट फ़ड । इ?होने तो हमार6 जीवन शैल6 को ह6 बदल डाला है । बदल या, न'ट ह6 कर डाला ू है । भारतीय खान -पान क8 शैल6 को पथ-•'ट ह6 कर डाला है । दर कर >दया है यवाओ को ममता क8 ठं डी ू ु छाओ से । कहते है क8 >दलो क रा-ते पेट से होकर जाते है । माँ ब:चे को दलारती है , पचकारती है ,तब उसे अपने हाथो े ु ु से बना -वा>द'ट, -वछ मखन वाला परांठा eखलाती है । पर?तु अब ब:चा मांगता है मैगी िजसमे सवाय मैदा क और मसाल* क कछ नह6 । भला पैकट मA बंद चीज* मA माँ क8 ममता कसे समाएगी। े े ु े ै हमारा दे श कृ'ण भगवन का दे श है । जहाँ उ?हA माखन-चोर भी कहा जाता है । वह मटक8 से माखन और दह6 चरा-चरा कर खाते थे पर?तु अब कृ'ण क8 धरती पर ब:चे खा रहे है - पLजा, बगर, नुडJस । ये कसी ु ु ै जीवन -शैल6 है । जहाँ आराम से बैठकर खाने का समय नह6 है । पहले ज़माने मA पुरा प5रवार बैठ कर आराम से भोजन खाता था ।िजससे उनका आपसी 3ेम बढता था । पर?तु आज फा-ट-फ़ड क कारन युवा पीडी घर का खाना खाने से कतराती है । औरकामकाजी पुYष और ू े म>हलाये भी हJका-फJका खाक-कर चले जाते है और #फ़र कट6नमA खाते है फा-ट-फ़ड। ु ; ू हाँ | जीवन तो आसन हो गया है यो#क रसोई घर मA कम समय दे ना पड़ता है ।पर?तुमेरे मE । पूवg और पि:छमी सuयता का सं-कार6 अ?तर य>द अ धक है तो वह हमार6रसोई और भोजन -शैल6 क कारन। े भारतीय प5रवार रसोई घर को मि?दर मानते है ।उसक -वाद और पेट को ति_त घर क भोजन से ह6 मलती े ृ े है । फा-ट-फ़ड से नु सान भी झेलने पड़ते है । जhh नह6 क8 बहार का खाना हमेशा साफ़ ह6 हो । ऐसा न होने ू पर पेट ख़राब हो जाता है । बासी खाना खाने पर फ़ड-पोइ स0नंग होजाती है अथात खाना वष- वाट हो ू जाता है । िजतने का खाना नह6 होता उससे Lयादा डॉ टर को दे ना पड़ता है । और जान क लाले पड़ जाते है े वो अलग। हमारा दे श तो व भन ् 3ांतीय -पकवान* का दे श है । यहाँ व भन ् 3 कार क यंजन बनते है । े हमA अपने दे श को फा-ट-फ़ड का गुलाम होने से बचाना है । यो#क पेट और िज यहा आपसी शEु है । जीभ ू www.kalpanadubey.com Page 19
  • 21.
    सफ़ -वाद मांगतीहै और पेट ति_त । -वाद लालची है और ति_तमो ृ ृ लालच को छोड़ो और त'णा को ृ अ?न क अमत से त_त करो । े ृ ृ यह समझो और समझाओ, फा-ट -फ़ड से ख़द को बचाओ, ू ु भई दाल-रोट6 खाओ, 3भु क गुन गाओ. े ....................................... www.kalpanadubey.com Page 20
  • 22.
    सदन क रायम म7हलाओं का नौकर0 करना प@रवार क लए उपयुBत है े प क7ह व1ध रचो नार0 जग मा7ह े पराधीन सपनेहु सुख नह0 स>दय* से नार6 ने द-ताक8 िजंदगी जी है । बचपन मA पता क अधीन रहना पड़ा ,तो युवा -अव-था मA प0त े क अधीन व ् वदा-अव-था मA पुE क अधीन। यह दासता उसे आ थक Yप से 0नभर न होने क कारन भोगनी े ृ े े पड़ी । इतनी लCबी गुलामी तो #कसी गुलाम ने भी नह6 सह6 होगी। आज २१ व शताnद6 मA जाकर नार6 ने -वतंEता क8 साँस ल6 है । वह आ थक Yप से -वतंE हुई है । उसक8 इस -वतंEता से न सफ़ उसे सुख मला है बिJक सCपूण प5रवार सुख का अनुभव कर रहा है । ब:चे अपनी मनमानी कर सकते है तो बजुग भी ु आराम क8 िजंदगी जी रहे है । -Eी मA भगवान ् ने धय, याग का भाव इतना भरा है क8 उसने कभी अपने सुख का यान नह6 रखा िजतना प5रवार का । प5रवार का सुख ह6 उसका अपना सुख है । आ थक Yप से संपन माँ ह6 ब:चो क अरमानो को े पुरा करती है । प5रवार क लए सुख का साधन जुटती है । तो साथ ह6 प0त को आ थक भागीदार6 करक े े प5रवार क भोझ को ध*ने मA सहायक होती है े शY मA कछ शेE* मA ह6 म>हलाये काय कर रह6 थी ले#कन आज कोई भी शेE ऐसा नह6 है िजसमे नार6 ने ु ु अपनी योVयता से अपना स का न जमाया हो। आज वह श ा, च#क सा, व+ानं तक0नक8 मA ह6 नह6 , सेना , वायु सेना गोताखोर भी है । तो अ?त5र मA भी अपने कदम रख चक8 है । ु नार6 दे खने मA िजतनी कोमल होती है उतनी ह6 उसक8 मान सक शि त अ धक होती है । वह प0त क साथ े चलने मA गव महसूस करती है । ब:चो क पालन पोषण को भी वह गव से करती है । सCपूण सि'ट को ममता े ृ और _यार का पाठ पदाने वाल6 नार6 ने ह थयार उठाने से भी परहे ज नह6 #कया । यवसाय क शेE मA जहाँ े भी उ?ह*ने कदम रखा उसे _यार , -नेह , शाल6नता और -वछता से मंkडत कर >दया है । आज लोग वहां काम करना पसंद करते है जहाँ क8 मु^या-3बंधक म>हला हो। ऐसे -थान पर यव-था तो अ:छ होती ह6 है और उसमे नार6 ज0नत _यार और -नेह क8 ग5रमा भी होती है । नार6 व भन ् शेE* मA काय कर रह6 है ले#कन उसका 3य शेE प5रवार ह6 है जहाँ वह वा सJय से ,_यार से, ममता से प5रवार को सींचती है । जब कभी आ थक तंगी होती है तब िजतनी तड़प , िजतना दद नार6 को होता है उतना #कसी को नह6 होता । खशी क8 बात यह है क8 वह आ थक Wि'ट से समथ है । नौकर6 करक वह इतनी समथ हो गई है ु े क8 प5रवार को आ थक तंगी से बचा लेती है । इससे उसका आ म- व2वास बढता है । और समाज मA सCमान मलता है । समाज ने उसक8 योVयता से लाभ उठाया है । इससे समाज और रा'1 का उ थान हुआ है . www.kalpanadubey.com Page 21
  • 23.
    कोई भी प5रवारतभी आध0नक समय मA सुख और सCपनता से रह सकता है जब प0त प नी दोन* काय ु करते हो। बदती मंहगाई और भौ0तकवाद क8 बदती मार मA आज नौकर6 करना अ0नवाय हो गया है । समथ नार6 ह6 आगे बाद सकती है और समाज को आगे बड़ा सकती है । और प5रवार को आगे बड़ा सकती है . आध0नक समय मA म>हलाओं क 30त होने वाले अ याचार* ने >हला कर रख >दया है । कह6 दहे ज़ क लए ु े े उ?हA जलाया जाता है तो कह6 ब:चे न होने पर घर से 0नकाल >दया जाता है । कह6 मार-पीट कर घायल कर >दया जाता है । तो कह6 उसे मान सक यातनाएँ दे कर उसे आहात #कया जाता है । ऐसे हालातो मA नार6 नौकर6 नह6 करे गी तो उसका जीवन नरक बन जाएगा । वह डर- डर ठोकरे खाने क लए मजबूर हो जायेगी े । अततः मA यह कहना चाहूंगी क8 आज क युग मA नौकर6 करना नार6 क लए अ0नवाय है । इससे प5रवार े े संभलता है Uबगड़ता नह6। ....................................... www.kalpanadubey.com Page 22
  • 24.
    सदन क रायम म7हलाओ का नौकर0 करना प@रवार क लया उपुBत ह े वप नार6 तुम कवल jदा हो, व2वास रजत नभ पग तल मA े पयष -तोE सी बहा करो, जीवन क संदर तल मA ू े ु भारत क8 नार6 का नाम सुनते ह6 हमारे सामने 3ेम, कhना, दया , याग और सेवा-समपण क8 म0त अं#कत ू हो जाती है । नार6 क यि त व मA कोमलता और स?दरता का संगम होता है । वह तक क8 जगह भावना से े ु जीती है । इस लए इसमे दया कhना, ममता , याग क गुन अ धक होते है । नार6 वह शि त है जो यि त े को जनम दे कर उसका पालन-पोषण करती है । और उसे जीवन-संघष हे तु शि त-संप?न बनाती है । प5रवार को सखी बनाने क लए नौकर6 करने से म>हलाय* का शार65रक और मान सक शोषण हो रहा है । ु े जहाँ म>हलाये >दन-30त>दन आ थक-3ग0त कर रह6 है वाह6 अपने आप को खतरनाक ज़ंग मA उतार रह6 है । वह ऐसे चq यूह मA 3वेश कर चक8 है जहाँ से 0नकला नह6 जा सकता । ससक- ससक कर दम तोड़ना ह6 ु अि?तम स य है । नार6 -वतंEा क नाम पर वह दासता क दलदल मA फसती जा रह6 है । पहले क8 िजCमेदार6 तो उस पर है ह6 े े ं या0न प5रवार क8 दे ख- भाल , ब:चो का पालन पोषण क8 िजCमेदार6 तो है ह6 ,ऊपर से आ थक िजCमेदार6 भी उसी क क?ध* पर दे द6 गई है । थोड़े मंहगे व-E* और दो चार आभु2नो क8 जंजीरे उसने -वयम सहष े पहन ल6 है । वह खश है या नह6 अब वह 0नणय भी उसक हाथ मA नह6 रहा । नौकर6 क कारन ह6 वह अपन* ु े े से भी दर होती जा रह6 है । ब:चे आज शशु-शालाओं मA जा रहे है तो वद वद-आjम* मA । जहाँ अपनी- ू ृ ृ अपनी 0नय0त क सभी कोस रहे है और नार6 च प ता कर बेबस* क आंसू बहाती जा रह6 है । ना नौकर6 े े छोड़ पाती है , न ब:चे , और ना प5रवार । इसी कारन म>हलाय* का मान सक -शार65रक संतुलन Uबगड़ जाता है । पहले जहाँ नार6 क8 हर तरफ़ इतनी 3ग0त नह6 थी वहां पर इतने अपराध नह6 थे । जैसे-जैसे नार6 क8 हर ेE मA 3ग0त क8 सीमा बदती जा रह6 है वैसे-वैसे अपराध क8 सीमा बदती जा रह6 है । म>हलाय* क लए े #कतने ह6 असुर ा क )वार खल जाते है । नौकर6 करते हुए भी उसक मन मA असुर ा का डर जhर बैठा े ु े रहता है । उनका शोषण हर जगह होता है । कह6 शार65रक , कह6 मान सक, तो कह6 आ थक । आए >दन घ>टत घटनायेइस बात का 3मान है क8 म>हलाये आज काय शेE मA #कतनी असुर~ त और मजबूर है . नौकर6 क कारन आज म>हलाये अपने नैस गक सौ?दय को खो बैठ है । अब उसमे न वह कोमलता रह6 है , े न नoता और न ह6 भोला सौ?दय। यह सच है क8 सैकडो लड़#कया सौ?दय प0तयो गताओं मA भाग लेती है । ये सब उनक शार65रक सौ?दय को ह6 दे खते है जो व भन ् स‘दय 3साधन* पर >टका होता है । आज उसक8 े ग5रमा और अि-मता का लोप होता जा रहा है । अंधाधंध बदती भौ0तकवा>दता ने -Eी को गुमराह कर >दया ु है । उसका सौ?दय Uबकाऊ होता गया है । कह6 व+ापन* मA नज़र आती है तो कह6 उ सवो क रं गारं ग काय - े कCभो मA । लोगो का नज़5रया ह6 आज बदल गया है । -Eी जाती को वे सफ़ -Eी Yप मA ह6 दे खते है । उसे ु www.kalpanadubey.com Page 23
  • 25.
    3शासक, डॉ टरया इंिज0नयर का औदा तो बाद मA ह6 मलता है । ब:चो मA बड़ते मनोरोग -और आ मह याएं उनक8 प5रव5रश क8 और इशारा करती है । माता का कोमल -नेह भरा -पश या पैसो क लए े काय करने वाल6 आया दे सकती है । सं-कार तो वलु_त होते जा रहे है । अकलेपन को व भन ् मा यमो से े दर करने मA लगा ब:चा बचपन क8 उमर मA ह6 बड़ा हो जाता है । इसका 3 य ू 3भाव समाज क मा यम से े ह6 दे खा जा सकता है । आज क8 सजी संवर6 आध0नक नार6 प5रवार से दर होती जा रह6 है । प5रवार उसक ु ू े लए बोझ बन गया है । कायकार6 म>हला से एक सुघड़ गहणी क8 अपे ा करना ह6 ग़लत है यो#क वह भी ृ हाड-मांस क8 बनी हुई है ।#कसी -ट6ल या लोह पदाथ क8 नह6। 3ाचीन-काल से ह6 प5रवार कल एक अंग बहार काम करता था तो एक अंग घर पर। अतः प5रवार मA संतलन बना रहता था। अब य>द सय-उदय होते ु ू ह6 घर मA ता ला लग जाए तो कहाँ प5रवार , कहाँ घर । वह तो सफ एक वjाम -थल बन कर रह जाता है |अत:य>द प5रवार चा>हए तो नौकर6 से छटकारा पाना होगा |कहागया भी है -कछ पाने क लए कछ खोना ु ु े ु भी पड़ता है | ....................................... www.kalpanadubey.com Page 24
  • 26.
    भारतीय सं कृत वदे शय को Dभा वत कर रह0 है प िजस दे श मA बहती मधु क8 धारा , जहाँ होता पतरो का आदर , िजस दे श मA वीर-जवान , अपनी धरती को _यार, वह दे श है >हंद-तान , ु वह दे श है >हंद-तान, ु सभी 3ाणी अपनी जनम भू म को जान से Lयदा _यार करते ह; । तभी तो उसे -वदे श क8 हर वा-तु मA सौ?दय नज़र आता है । हमार6 सं-कृ0त ह6 भारतीयता का बोध कराती है । सं-कृ0त दे श क8 अंतर –आ मा होती है । इसी क कारन दे श क सं-कार* का आचार – वचार का बोध होता है । िजनक आधार पर वे अपने े े े सामािजक आदशQ का 0नमाण करता ह;। भारतीय सं-कृ0त गंगा क8 धारा क सामान है िजसमे बहुत सी धाराए मलकर एक सी हो जाती है । भारत े तो ऐसा चमन है िजसमे व भन ् परकार क8 बो लया , जा0तय* धमQ क फल eखले ह; । िजनक8 खशबू, रं ग े ू ु और आकषण इतना अ धक है क8 लोग इनसे परभा वत हुए Uबना नह6 रहते । अगर हम अतीत मA झांक कर दे खे तो हमार6 सं-कृ0त क बारे मA जान कर उसे दे खने आए और भारत क8 े सं-कृ0त से उसे _यार हो गया। इसी कारन उ?ह*ने हमारे दे श से मसाल* का यापार शुY #कया । मगर ये दःख क8 बात है क8 उ?ह*ने हमारे _यार और सCमान का फायदा उठाया। और हमारे दे श को धोखा >दया । ु हमA गुलाम बनाया और हमारा शोषण #कया । हम -टे ?स क प5रवार को दे खते तो हमA आ2चय होता है क8 िजस औरत क प0त और बेटो को िज?दा जला े े >दया #फ़र भी jी म0त -टे ?स ने इस दे श से दर होना उ चत नह6 समझा । उ?हA हमार6 सं-कृत से लगाव है । ू कछ लोगो क जघ?य कृ य ने भी उ?हA नह6 >हलाया उनका यह कदम सराहनीय है । ु े मदर टे रेसा क8 बात करे जो युगो-ला वया क8 थी । अपना दे श छोड़कर भारत आई और यहाँ वह ‘ मदर’ कहलाई । लोग कहते है क8 वह यहाँ गर6बी दे खकर आई थी , पर मA आपसे एक 3शनपछती हु क8 गर6बी ू कहाँ नह6 है ? हक8कत यह है क8 यहाँ क लोगो को _यार ,सCमान और अपनेपन ने उ?हA यहाँ से जाने नह6 े >दया। हमार6 3ाचीन इमारत* को दे खने क लए िजतने वदे शी आते ह; उतने >ह?द-तानी नह6 । यो#क ये इमारते े ु सफ़ इमारते नह6 है बिJक ये हमार6 सं-कृ0त को बताने वाल6 साकार अ भलेख है इनसे हमार6 सोच , www.kalpanadubey.com Page 25
  • 27.
    हमारा रहन –सहन, हमारा अचार- वचार झलकता है । अंत मA मA यह6 कहना चाहूंगी क8 हमारा दे श महान सं-कृ0त से गौरवाि?वत है । इस लए 3ाचीन काल से आज तक लोग यहाँ eखचे चले आते है । फादर बुJक , भ गनी 0नवे>दता , का मल बुJक , आ>द ऐसे नाम है जो हमार6 सं-कृ0त क8 ग5रमा को े े दशाते ह;। शायद इस लए कहाँ गया है – भारत जैसी सं-कृ0त कह6 नह6 , भारत जैसा _यार कह6 नह6. भारत मA आओगे तो यह6 क होकर रह जायोगे. े ....................................... www.kalpanadubey.com Page 26
  • 28.
    भारतीय सं कृत वदे शय को Dभा वत कर रह0 है वप “उननो, मfयो, hमा, सब मट गए जहाँ से, बाक8 अभी तक है नामो-0नशा हमारा.” बड़े ह6 सौभाVय और गव क8 बात ह; क8 भारतीय सं-कृ0त 3ाचीन काल से सCपरण व2व मA सवjे'ट रह6. ु व2व ने उसका लोहा माना और उसे -वीकार #कया. #फ़र चाहे वह अमे5रका क8 भ गनी 0नवे>दता हो या Yस क ताJ-तॉय. े ले#कन आज ये बात कहाँ?. आज हमार6 सं-कृ0त अपना अि-त व ह6 खोती जा रह6 है . ऐसे मA या यह उ चत होगा क8 इसी सं-कृ0त से आज वदे शी 3भा वत हो. मA इससे UबJकल सहमत नह6 हु. ु अगर आज दो-चार वदे शी भारत मA आकर “हरे राम हरे कृ'ण “कर रहे है तो इसका मतलब यह नह6 क8 वह भारतीय सं-कृ0त से 3भा वत है . 3भा वत वे तब ह*गे जब दो-चार नह6 बिJक उनका परा दे श “हरे राम ु हरे कृ'ण” करे . हमारे र6ती 5रवाजो क8 इLजत करे , हमारे सं-कार* को समझे. आज हमारे यवा अपने दे श और सं-कृ0त को भलकर वदे शी रं ग मA यो रं गते जा रहे है . #फ़र चाहे वह भाषा ु ू हो या सं-कृ0त. हमारे भारतीय जाते तो धोती –kurte मA ह; और आते पA ट शट मA . आप मुझे ह6 दे ख ल6िजये मेर6 टाई, मेर6 -कट, और मेर6 शट . या ये भारतीय सं-कृत का 3भाव है .? सभी जानते ह; क8 न जाने #कतने भारतीय वदे शो मA जाकर बस चक ह;. और ना जाने #कतने जाने क8 ु े तैयार6 मA है . या वे वहां पर भारतीय –sanskriti का 3चार करने क लए रह रहे ह;. नह6, वे वहां क8 े चकाच*ध , रे हान-सेहन और पहनावे से 3भा वत हो कर रह रहे ह;. पर?तु कोई वदे शी अब भारत मA आकर यो नह6 बस रहा . आज वदे शी यहाँ आकर -वयम हमारे रं ग मA नह6 रं गता पर?तु हमार6 गर6ब जनता को थोडी सु वधाए दे कर गुमराह करते ह;. वदे शी कप0नय* का आगमन हमार6 सं-कृ0त क कारन नह6 है . वे हमारे दे श मA सफ़ यवसाय कर रहे ह; . ं े हमार6 सं-कृ0त से तो वे 3भा वत तब भी नह6 हुए थे -वत?Eता से 0तन सो वष पहले ई-ट इंkडया कपनी क ं े Yप मA वे हमारे दे श मA यापार करने आए थे . वे -वाथg थे और आज भी है . 3 य परमान ये ह; क8 वे यहाँ www.kalpanadubey.com Page 27
  • 29.
    आकर हमार6 सं-कृ0तको धारण नह6 कर रहे बिJक हमारा शोषण कर रहे ह; . और अपनी सं-कृ0त को यहाँ फला रहे ह;. कछ ह6 >दन* मA यह व2बले हमारे दे श मA फल जायेगी. ै ु आज गल6-गल6 मA खले कॉल-सAटर इस बात का परमान है . रात –raat भर जागकर हमारे यवा भारतीय ु ु अपने दे श क लए नह6 बिJक दसरे दे शो क लए काय करते ह;. उनका रे हान-सेहन , भाष , सं-कृ0त आ>द े ु े भी उ?ह6 दे शो क अनुकल होती चल6 जाती ह;. े ू वदे शय* क साथ हमारे दर- यवहार ने आज व2व क सामने हमA शमसार कर >दया है . वदे शी म>हला े ू े अ धकार6 क साथ बला कार क8 घटना ने आज हमA कलं#कत कर >दया ह; . हमारे यवा वदे श मA सफ़ े ु ^या0त अिजत नह6 कर रहे बिJक अपने काले कारनामो से हमार6 सं-कृ0त को बदनाम कर रहे है . वदे श मA कोहल6 ने वदे शी लड़क8 क साथ बला कार और ह या करक -वदे श का नाम #कतना गराया ह;. ये सभी े े जानते ह;. . सं-कृ0त कोई वा-तु नह6 है िजसे सर पर उठा कर ऊचा रखा जा सक . यह तो हमारे यवहार से, हमारे ँ े कायQ से , हमारे आचरण से ह6 पJल वत होती है . नै0तक –patan ने ह6 हमार6 सं-कृ0त को सती पहुंचाई ह;. वदे शी 3यातको क साथ लट और ह या क8 खबरे आए >दन आती रहती ह; . या कोई ऐसे माहोल मA हमारे े ु सं-कृ0त को अपनाने क8 >हCमत करे गा. आज अव2यकता है आ म- चंतन क8 . हम वचार करे क8 ऐसा यो हो रहा है ? हम या और कोण से कदम उठाये िजससे हमार6 सं-कृ0त पुनः उ:च -थान 3ा_त कर सक . े “ हम कोण थे और या हो गए , और या ह*गे अभी, आओ वचारे आज मलकर, ये सम-याए सभी.” हम सभी संकJप ले क8 हम अपनी सं-कृ0त को अ ुन रखA गे और शान से कहA गे- सारे जहाँ से अ:छा >हंद-तान हमारा. ु ....................................... www.kalpanadubey.com Page 28
  • 30.
    वदे श मबसने क चाह हर भारतीय का Eवाब प मेरा जूता है जापानी ये पतलून एि?Vल2-तानी, सर पे लाल टोपी hसी, #फ़र भी >दल है >ह?द-तानी’ ु मेरा मतलब है क8 वदे श मA बसने से कोई भी यि त दे श-ƒोह6 नह6 हो जाता. उसका >दल तो हमेशा दे श के लए धड़कता है . और वह आजीवन उसक8 3ग0त क8 कामना करता ह;. वदे श मA बस जाना अपने सपनो को साकार करने क लए आव2य क है . , जो उ चत ह6 नह6 सरहनीय है . े _लेटो, अर-तु, ताJ-तॉय, मA कवर, आ>द व2व क यि त है . इ?हे सीमओं मA नह6 बाँधा जा सकता. ै े सूरदास, कबीर, तुलसी, जायसी आ>द आज व2व मA छाये हुए है . इनक8 30तभा #कसी क8 धरोहर नह6. भारतीय अपनी 30तभा क बल पर व2व मA छाये हुआ है े हमारे दे श क ना जाने #कतने लोग वदे श मA बस कर हमारे दे श का नाम रोशन कर रहे ह;. हमारे परधन-मंEी े ने परवासी भारतीय* से अपने दे श मA धन लगाने क8 इ:छा य त क8 है . ये वदे शी धन को भारत मA लेन का एक सरल और अ:छा3यQग है . jी ल मी म तल अपनी मेहनत से वदे श मA बस कर भारत क ‘UबJगेटस’ बन गए. े भारत क8 आ थक ि-थ0त अ:छ न होने क कारन लोग वदे श जाते ह;. वे अपनी आ थक ि-थ0त क साथ- े े साथ सामािजक ि-थ0त को भी उचा कर लेते ह;. वे वदे श यो न जाए? वहां कामयाबी उनक कदम चमती े ू ह;. यो उ?हA गर6बो और बेरोजगार6 क8 िजंदगी िज?नी चा>हए जब#क वदे श मA कामयाब होने क अनेक े अवसर होते ह;. भारत क8 बेरोजगार6 का कोई अंत नह6 ह; . श ा क शेE मA भी आर ण है . यवसाय क और नौक5रय* क े े े शेE मA आर ण क8 सम-या ने पड़े लखे लोगो को वदे श जाने क लए मजबर भी #कया ह;. यो#क अपने े ू दे श मA हालत कछ ऐसे ह;- ु “कभी घोडो को भी नह6 मलती घांस” कभी गधे भी खाते ह; चवन3ाश” •'टाचार और भाई-भतीजावाद से आज हालत ये ह; क8 यहाँ 5र2वतखोर और •'ट लोग ह6 कामयाब होते ह;. हमारे यहाँ 30तभा का सCमान नह6 होता. हर 30तभावान यि त क8 पहचान वदे श मA जाकर हो गई ह;. www.kalpanadubey.com Page 29
  • 31.
    कJपना चावला अगरभारत मA होती तो अ?त5र क8 उ:चा0यया कभी नह6 नाप पाती. क.व ्. रमन जी को नोबल 3ज़े वदे श जाने पर मला. यहाँ तक क8 मोहनदास करमचंद जी को पहचान भी अ’8का जाकर मल6. ऐसा कौन सा यि त होगा जो अपनी 30तभा को और यि त व को 0नखारने का मौका छोड़कर गर6बी मA िजंदगी जीना चाहे गा. आज 30तभा पJयाँ क8 सम-या एक वकराल सम-या बनती जा रह6 ह;. इसका मु^य कारन यह है क8 यहाँ 30तभावान यि तय* क वकास क उ चत साधन उपलnध नह6 ह;. लोगो मA 30तभा ह;, कछ कर गुजरने क8 े े ु भावना है . तो वे वदे श यो ना जाए. वदे श मA बसने से उनक यि त व क8 पहचान होती ह;. धन –yash सभी कछ मलता ह;… तो लोगो को े ु ऐतराज़ यो? हर यि त जीवन मA उचा0ययन चना चाहता ह;. महँ कायQ से जीवन को साथक करना ु चाहता ह; तो दे श को दहाई दे कर उनक8 उड़ान को रोकने का अ धकार #कसी को नह6ं. ु ^वाब दे खना युवाओ का काय ह;., धम ह;. उ?हA साकार करने मA ह6 उनक जीवन क8 साथकता ह;. तो ^वाब े दे eखये और उ?हA स च करने क8 को शश क8िजये.. ....................................... www.kalpanadubey.com Page 30
  • 32.
    वदे श मबसने क चाह हर भारतीय का Eवाब वप “जो भरा नह6 है भावो से, बहती िजसमे रस-धार नह6, वह “दय नह6 वह प थर है , िजसमे -वदे श का _यार नह6’ हमारे नवयुवको मA वदे श मA जाने क8 इ:छा >दन-30त>दन बलवती होती जा रह6 है . .अपने दे श क 30त े आ-था, कमठता, और चंता क भाव वलु_त हो रहे है . ऐसा लगता है जैसे श~ त यि तय* को न अपने े दे श क 30त आ-था रह6 है और न दे शवा सय* क 30त . “ दय पाषण हो गया है . िजसमे न कोई चेतना है े े और न ह6 अपने –पराये क8 पहचान. हम पलते-बड़ते तो अपनी माE-भू म मA है और जब कछ करने का समय आता है तो इसे छोड़कर चल दे ते ु ह;. हमारे च#क सक,अ भयंता वदे शो का hख करते जा रहे ह;. अगर वदे श जाने का म^य कारन पैसा और बदती सख-सु वधाओ का आनंद है तो नह6 चा>हए हमA ऐसा ु ु आनंद जो हमार6 माE-भू म क लए रा-ते का प थर साUबत हो. े चाहे वदे शो मA #कतने ह6 डॉलर कम ले उस रा'1 क लए आप दसरे दज€ क नाग5रक ह6 रहA गे. वह अ धकार े ु े और व2वास कभी नह6 मलेगा जो अपने दे श मA मलता है . सोने क8 चkडया कहा जाने वाला रा'1 #फ़र उसे 3ा_त करने हे तु अMसर ह;. हमारे दे श मA आज ऐसी सु वधाए मौजद है जो नवयवको को उLजवल भ व'य दे ने क8 ू ु मता रखते ह;. उनक8 योVयता का सCमान करते ह;. भारत व2व क8 ऐसी उभरती शि त ह; जो 0नजी ेE क8 कप0नय* मA काम करने वालो को वदे शो ं क8 तलना मA कह6 अ धक वेतन भी दे रह6 है . #फ़र वदे शो मA बसने क8 या अ शाकता. है . जहाँ न होल6 क ु े रं ग है और न ह6 काग क गीत. िजतनी -वतंEता हमA अपने दे श मA मल सकती है . वदे शी नाग5रक हमेशा े ) वट6 jेणी मA आते ह;. अरे !---इस दे श मA तो अपने लोग ह; . , अपनापन ह;. . यहाँ का अनूठा 3ाकर0तक सौ?दय ह; , एक अनोखी सं-कृ0त ह;. जो हमA व2व क सभी दे शो से अलग पहचान >दलाती है . या कोई दे श भारत जैसा हो सकता े ह;. “फला मनोहर गर6 >हमालय ै और गंगाजल कहाँ, www.kalpanadubey.com Page 31
  • 33.
    सवQ:च दे शोसे अ धक, #कस दे श का उ कष ह;, उसका, क8 जो ऋ ष-भू म ह;, वह कौन ? भारतवष ह;. अब बस --------बहु त हो चक8 दसरो क8 सेवा और उनक8 उ?न0त. अब हमA अपने दे श का सतारा बलंद ु ु ु करना ह;. और अब वह व त आ गया है जब हमA अपने रा'1 को आ थक सामािजक और राजनै0तक शेE मA एक अलग पहचान >दलानी है . 3ाचीन काल मA जो हमारा अि-त व था वाह6 #फ़र 3ा_त करना है , यह कछ मुि2कल काय नह6 है . ु अ शाकता है एक >ƒड-संकJप और इचा-शि त क8 यो#क हम उ?ह6 पवजो क8 संतान है िज?ह*ने ने व2व ू मA भारत क8 पहचान कराई थी. “ वह6 है र त ,वह6 है दे श वह6 सहस, वैसा ह6 +ान वह6 ह; शाि?त, वह6 है शि त, वह6 है हम >द य-आचाय संतान िजए तो सदा इसक लए , य ह6 अ भमान रहे यह हष , े 0नछावर कर दे हम सव-व , हमारा _यारा भारतवष, हमारा _यारा भारत वष | ....................................... www.kalpanadubey.com Page 32
  • 34.
    यवा-अव था फलोभर0 ह तो Dोड-अव था जीवन संघषI-रत और वदाव था ु ू ृ प पKचाताप से प@रपणI ू युवा-अव-था फलो से भर6 ह; तो 3ोदाव-था जीवन संघषरत और वदाव-था प-चाव-था से प5रपण । यह ू ृ ू एक वा य आज क समाज को सCपूण झांक8 को 3-तुत कर दे ता ह;। आध0नक समय मA समाज मA या_त े ु कठा , Vलानी , दःख , अवसाद सब कछ झलक पड़ता है । आज का यवा वग ) वग-• मत है इस लए ंु ु ु ु गल0तय* पर गल0तया करता चला जा रहा है । घर और -कल मA उसे 0नरं तर इमानदार6, _यार, -नेह और ू अ>हंसा का पाठ पदाया जाता है । उ:च आदशQ क8 बातA क8 जाती ह;। और इनका भोला मि-त'क इन बातो को Mहण भी कर लेता ह;। और भ व'य क सुनहरे भ व'य क सपने संजोने लगता ह;। ले#कन जब यह6 े े बालक यवा बन कर समाज मA कछ करना चाहता ह; तो सब कछ उसे उJटा नज़र आता ह;। िजन आदशQ को ु ु ु लेकर वह यवा हुआ उसका वा-त वकता मA कह6 नामो-0नशाँ नह6 मलता। ु इमानदार6, 0न'ठा, कत य क8 बातA उसे यथाथ क धरातल पर सत यु गी नज़र आते ह; और वह भटका हुआ े सा -चोराहे पर -वयम को पाता ह;। कहाँ जाए? #कधर जाए? या करे ? कछ समझ नह6 पाता, और #फ़र ु शुY होता है उसक सदं तो और आज क •'टाचार6 माहोल मA जीवन क8 जPो-जे•हद । कभी वह स य और े े 0न'ठां का सहारा लेकर जीवन भर संघष करता रहता है । कभी भर'टाचार को अपना कर Vलानी का अनुभव करता ह;। जो मान सक अशां0त का कारन बनता ह; । अब वह नए सरे से िजंदगी क8 शुhआत करता ह;। वडCबना दे eखये क8 वह िजन आदशQ को लेकर बड़ा हुआ है उ?ह6 का याग कर वह >दन- 30त>दन उ–?खाल बनता चला जाता है और वह नह6 समझ पाटा क8 या ग़लत है और या ठक है । िजसे वह मानना चाहता है उसे समाज नह6 मानता । इस लए वह भ व'य क8 चंता छोड़ सफ़ आज मA व2वास करने लगता है । यह6 से वह -वाथg बन कर सख-भोग क8 लालसा मA गल0तय* क भरमार मA फस जाता है । जीवन क लए ु े ं े संघष करते-करते वह 3ोदाव-था मA कब पहुँच जाता है पता ह6 नह6 लगता । सभी उतरदा0य व मुह फलाये ै उसक सामने व भन ् Yप* मA खड़े होते ह; । िजसे सलझाने क लए उसे कठोर 3य न करने पड़ते ह;। वह े ु े कह6 पE का दा0य व तो कह6 पता का दा0य व पण करने क लए संघष-रट रहता ह; । यह संघष तब तक ु ू े जार6 रहता है जब तक वह थक कर चर-चर नह6 हो जाता । ू ू जीवन क अि?तम पड़ाव मA उसे लगता ह; क8 उसका जीवन यथ गया यो#क ना तो वह अपने ढं ग से जी े सका न द0नया क ढं ग से। न मन क8 शाि?त पा सका न तन क8 । तब प2चाताप का एक अटूट सल सला ु े शुY होता ह; यो#क अभी तक उसे न 'माया मल6 न राम' । कहाँ जाता है जैसा करोगे , वैसा भरोगे । युवाव-था क8 गल0तय* का फल 3ोदाव-था मA भुगतना पड़ता ह;। और उससे उपजी Vलानी और कठा उ?हA 3ायि2चत क लए मजबर करती ह;. ंु े ू www.kalpanadubey.com Page 33
  • 35.
    आज समाज काहर 3ाणी चाहे वह ब:चा हो , जवान हो या बुदा हो वह असंतु'ट और भो^लाया सा नज़र आता ह;। भौ0तकवाद ने उसे कह6 का नह6 छोड़ा । यि त सुख क साधन जुटाने मA इतना जुटा है क8 वह े सा य को भी भूल गया है । यह6 इन भूलो का , संघषQ का और 3ायि2चत का मूल कारन है । कबीर ने कहा है - ' जवानी नींद भर सोया, बुडापा दे ख कर रो या । सच है संघषQ क बाद जब कछ हा सल नह6 होता तो रोना ह6 आता है । े ु ....................................... www.kalpanadubey.com Page 34
  • 36.
    यवा-अव था फलोभर0 ह तो Dोड-अव था जीवन संघषI-रत और वदाव था ु ू ृ वप पKचाताप से प@रपणI ू कौन कहता है क8 युवाव-था भू लो भर6 है ? यह तो कछ क>ठत लोगो क8 शरारत जान पड़ती है । आज क ु ंु े युवा वग का जीवनभूलो से भरा नह6 है वह तो 3योग* से भरा है । उ साह, उमंग और आशाओ से भर6 िजंदगी मA वह सब कछ भोग लेना चाहता ह;। जीवन को अपने ढं ग से जीने क8 लालसा #कसमे नह6 होती है । ु जीवन उसका, अपना वह जैसे चाहे वैसे िजए इसक लए वह संघष भी करता है । े आज का युवा-वग पहले से कह6 Lयादा समझदार और यथाथवाद6 है । वह आदशQ क खा?दर मA नह6 े यथाथ क8 जमीन पर जीना चाहता है । वह ऊगल6 पकड़ कर चलने वाला बालक नह6 हाथ पकड़ कर सहारा ँ दे ने वाला युवक है । जो -वयम नह6 िजयेगा वह दसरो को सहारा या दे गा ? वह -वयम अपने साहस से ु ऐसा रा-ता चनता ह; जहाँ फल होते ह;, कांटे नह6 । अपने जीवन क व भन ् अनुभव* से सीखता हुआ वह ु ु े आगे बढता ह; । वह #कसी क बताये रा-ते पर न चल कर -वयम अपना रा-ता चुनता है । जब यह6 यवा े ु अपनी 3ोदाव-था मA पहुँचता ह; तो यह संघषQ का नह6 जीवन क8 व भन ् चनो0तय* का का सामना करता है ु |यह चनौती उसे संघष नह6ंजीवन क8 पणता लगती है ।िजसे वह लाख परे शा0नय* क बाद भी पाने का ु ू े 3य न करता है . ऐसे वद का जीवन िजसने अपनी इ:छा अनुसार िजया हो वह 3या श चत नह6 ृ करता।बिJक उपलिnधय*पर 3स?न होता है | समाज को ऐसे बुजुगQ को पुर-कृत करना चा>हए जो वदाव-था को उल लास से भरते है . ऐसा वाह6 यि त ृ कर सकते है जो ‘#कया सो गया आगे क8 सु ध ले ‘ क सधांत को मानते हो.| े आज क युवक को साम-दाम , दं द-भेद सभी नी0तय* का +ान है यह6 कारन है क8 वेह कह6 मात नह6 खता . े ु 0न0त , धरम , 0न'ठां जैसे मोधारे ह थयार* का वेह सहारा नह6 लेता इस लए वेह न संघष करता है और न ह6 और न प2चाताप . मनु'य को समय क साथ चलना चा>हए. नह6 तो समय उसे पीछे छोड़ जाएगा. े आज का युवा वग भगवान ् –कृ 'ण क वचन* का पालन करता नज़र आता है . ‘ कम—ये वाि?धकारा-तु माँ े फलेषु कदाचनः ‘ वेह फल क8 इ:छा नह6 करता . जो मलता है उसे अपनी बु से , बल से अपने अनुकल ू बना लेता है . और जब अनुकल बना लया तो प2चाताप ह6 कसा ? #फ़र तो आनंद है , परम आनंद.| ू ै आज का वद परलोक क8 चंता नह6 करता बिJक इस लोक मA मरते दम तक सq8य भू मका अदा करता ृ नज़र आता है . वह +ान और अनुभव* का अपार भ—डार होता है . उसे प2चाताप कसा ? वह तो समाज क8 ै अमूJय –0न ध होता है . शाि?त और संतोष का साकार Yप होता है . प2चाताप होता है उ?हA जो इ?हे पहचान नह6 पाते.| ....................................... www.kalpanadubey.com Page 35
  • 37.
    चापलूसी करो आगेबढो प २१वी सद6 मA हर कोई एक दसरे से आगे बढ़ने क8 होड़ मA लगा रहता है हर कोई #कसी भी तरह आगे बढ़ना ू चाहता है चाहे पैर पकड़ने पडA या ग ला | ऊचाई या वाहवाह6 #कसे पसंद नह6, इसक लए थोड़ी सी चापलूसी ँ े करने मA हज ह6 या है ? आज -कल मंह मA राम बगल मA छर6 लए कौन नह6 घूमता? आज चापलूसी कौन ु ु नह6 करता ?हम सभी अपना काम 0नकलवाने क लए थोड़ी सी चापलूसी तो करते ह6 ह; कोई नेताओं क8 े चापलूसी करता है तो कोई अ यापक* क8 कोई वक8ल* क8 तो कोई अ धकार6य* क8 आज कल चापलूसी ब?दक से भी बढ़ कर ह थयार है जो काम ब?दक क8 नोक पर भी नह6 हो सकता ू ू वहचापलूसी ण भर मA कर दे ती है 32न उठता है #क आeख़र चापलूसी है या? #कसी भी यि त क8 इतनी झूठ 3शंसा करना िजसका वह हकदार नह6, चापलूसी कहलाता है चापलूसी मA कोई तीर नह6ं चलाने पड़ते बस इसक लए हमार6 जीभ hपी तलवार ह6 काफ8 है जो सामने वाले क >दल को भेद दे ती है और उसे े े हमार6 बात ,मानने क लए मजबूर कर दे यह6 चापलूसी का क5र2मा है े चापलूसी करने क फायदे भी बहुत ह; जहाँ hपय* से काम हो, वहाँ चापलूसी से ह6 काम बन जाता है कोई े सफा5रश करवानी है तो चापलूसी से अ:छा न-खा नह6ं कछ नाम कमाना है तो आव2यक है आज हमारे ु ु दे श मA चापलूसी का ह6 बोलवाला है आज क युग मA मेहनत और योVयता क साथ -साथ चापलूसी भी े े आव2यक है सफलता क8 सीडी चढ़ने क लए चापलूसी इसक इसक इसक सहारा है Uबना इसक मेहनत े े े े े और का व लयत पानी भरते नजर आते ह; आज लोग अपने बौस को म-का लगा कर खश रखते ह; इसक लए कछ उपहार* का ,फल* का ,घर म; बनी ु े ु व-तुओं का , मठाई का 3योग करना आव2यक है कछ और बातA भी याद रखनी जYर6 है ,जैसे -बौस का ु ज?म >दन ,शाद6 क8 साल गरह ,उनक8 पसंद -नापसंद ,ब:च* का ज?म >दन इनक अ0त5र त तीज - े योहार* पर उपहार* क8 सौगात* से वह म खन लगता है क8 आप भी उसक8 चकनाहट दे ख कर है रान रह जाएँगे आपको य>द मेर6 बात पर व2वास न हो तो आजमा कर दे ख ल6िजए मौज क8िजए और हमार6 कॉम म; शा मल हो जाईए | ....................................... www.kalpanadubey.com Page 36
  • 38.
    चापलूसी करो आगेबढो वप 'उ)यमेन ह6 स) य?ते कायाeण न मनोथ€, न>ह 3 वशि?त सु_त-य संह -य मुखे मगा ' ृ िजस 3कार बलशाल6 शेर क मुख मA जानवर -वयम नह6 घसते, उसे इसक लए -वयम 3य न करना े ु े पड़ता है हम मनु'य होकर -वयं अपने बल पर काय न करक य>द चापलूसी का सहारा लेते ह; ,यह 0न2चय े ह6 शमनाक है सि'ट क 3ारCभ से लेकर आजतक मनु'य ने जो भी वकास #कया है ,वह सब उसक प5रjम ृ े े क8 दे न है आज वडCबना यह है #क वह चापलूसी से पदौ?न0त 3ा_त करक बहुत खश है पर?तु याद रeखए यह खशी े ु ु थोड़े >दन* क8 मेहमान है एस 3कार क लोग 0नंदा क पाE बनते ह; वे अपनी नजर* मA ह6 गर जाते ह; उनका े े च5रE, यि त व ,एवं बु •'ट हो जाती है मग E'णा वश मनु'य इसक चंगुल मA फसता ह6 जा रहा है ृ े ं क लयुग मA चापलूसी ,माया क8 तरह या_त है चापलूसी, •'टाचार क8 जननी है हमA ऐसे दलदल मA धकलती है , जहाँ यि त व ह6 न'ट हो जाता है अपने े फसले हम -वम नह6 ले सकते काय करने क8को खोकर हम परमुखापे ी बन जाते ह; अत:चापलूसी याग ै कर प5रjम करA हम सक?दर महनत और लVन से ह6 बन सकते ह; महानता 3ा_त होती है -संघष, आ म - व2वास और कठोर साधना से अपने -वाथ क लए दसरे का हक मत मारो ,चापलूसी करक धोखेबाज मत े ु े बनो, गPार मत बनो ऐ इंसान तू इतना खदगज न बन, ु उथ जाए प5रjम और मेहनत से भरोसा, तू इतना मतलब पर-त न बन, मल जाएंगी खाक मA सार6 हसरतA , अ^लाक इंसान क8 कƒ कर, े ऐ इंसान तू इतना खदगज न बन' ु कम क8 jे'टता से ह6 भारत क सपत* ने भारत का 0नमाण #कया है , इसक8 र ा करते हुए आगे बढ़ना े ू चा>हए कृ'ण का कम लो, गांधी का स˜ाव, वनोबा का याग तभी जीवन साथक होगा, सफल होगा, अनकरणीय होगा | ु ....................................... www.kalpanadubey.com Page 37
  • 39.
    पुर कृत प मA आप सभी से पूछना चाहती हु क8 २१ व शताnद6 मA भारत क8 नार6 को अबला समझना कहाँ तक उ चत है । आज क8 नार6 शि त और मता #कसी से छपी नह6 है । आगे ने कहा है - दो-दो माEाए लेकर है नर से ु भार6 नार6 नार6 दो-दो माEाए कारन करने माE से ह6 नर से बड़कर नह6 है वरन अपने सहज , -वभा वक गण* से ह6 ु बड़ी होती है । आज नार6 नर क साथ कधे से क?धा मला कर चल रह6 है । नार6 आज अपने प5रवार को े ं _यार क साथ-२ आ थक सहयोग पदान कर रह6 है । नार6 समाज क व भन ् शेEो मA कदम बड़ा रह6 है । कभी े े अ भशाप समझी जाने वाल6 अनपद नार6 आज श~ त होकर अपने माता- पता और प0त क लए आ थक े सहयोग का वरदान बनी हुई है । तो या नोकर6 करना प5रवार क लए उपयु त है । े आ थक-ि-थ0त ह6 प5रवार का आधार होती है । प0त प नी का एक-दसरे को सहयोग दे ना आव2यक है । ु व ध क8 वडCबना को कोई नह6 जानता ,कल या होगा कोई नह6 जानता । य>द नार6 अकल6 रह जाती है े तो वह बेचार6 नह6 होती है बिJक वह अपनी योVयता क बल पर ना कवल अपने-आप को संभालती है े े बिJक अपने प5रवार को भी संभाल लेती है । य>द उसक पास नौकर6 न हो तो कौन उसक8 मदद करे गा ? ये े समाज,ये द0नया या आप या आप ? कोई नह6 ----एक नौकर6 ह6 उसक8 मदद कर सकती है । ु नौकर6 क कारन औरत को -वतंE यि त व मला है । अब वह प5रवार को चलने मA बराबर क8 सहयो गनी े है । अब उसक8 पहचान प0त क Yप मA नह6 बिJक असल मायन* मA जीवन सं गनी क Yप मA वक सत हुई े े है । नार6 क नौकर6 मA आने से समाज क8 शि त दो गुनी बाद गई है । कायालय* क8 यव-था भी सुधर6 है । े उनक ब:चे पहले से Lयादा -वावलंबी हो जाते है । अपने उतरदा0य व को भी वे अ:छ तरह संभालने लगे े है । आज कोई ऐसा शेE नह6 जहाँ -Eी क8 पहुंच न हो। अपने घर क8 eखड़क8 से औरत िजस चाँद को दे खा करती थी आज चाँद पर पहुचने क8 को शश मA लगी है । नार6 कोमलकांत होने क साथ-साथ अपने -वभाव मA अ धक कमठ और सहनशील होती है । उसमे धैय े अ धक होता है । तभी वह प5रवार 0नमाण क साथ- साथ रा'1 0नमाण कायQ मA भी पुhषो से अ धक े सहायक होने मA समथ है । “ नार6 जीवन झूले क8 तरह www.kalpanadubey.com Page 38
  • 40.
    इस पार कभीउस पार कभी कभी फल arpan #कए भि त क ू े हांथ* मA भी है तलवार कभी आध0नक काल से ह6 नह6 3ाचीन काल से ह6 नार6 ने अपनी शि त और ु मता का 3दशन करना शुY कर >दया है । या आप भल गए है रानी ल मी को , इं>दरा गाँधी को, और गागQ को । इन नामो को कोई नह6 ू भल सकता भगवन शव ने भी ह6 कहा है – “ शि त Uबना तो शव भी शव है ”. ू नौकर6 से नार6 मA आ म व2वास बड़ा है । िजसक कारन उसे शोषण का शकार नह6 बनाया नह6 जा सकता े है । अब उस पर दहे ज़ लेन का दबाव नह6 डाला जा सकता। वह अपने प5रवार का जीवन सुखद और संपन बनती है । अतः मA कह सकती हु क8 नार6 का नौकर6 करना प5रवार क लए >हतकर है । े “ नार6 तो शि त -वhप , आ मा क8 अमर कला है , इसक बल पर तो सारे , जग का य हार चला है , े ....................................... www.kalpanadubey.com Page 39
  • 41.
    पुर कृत वप आंख* मA जलन, सींने मA तूफान सा य* है ? इस शहर मA हर श^स परे शान सा य* है ? आप सभी से मA ये पूछना चाहती हु क8 वह ब:चा य* रो रहा है ? वह बुदा यि त चप य* है ? ु वह #कशोर य* qो धत हो रहा है ? वह यि त चडा य* रहा है ? वह औरत रो य* रह6 है ? ववाह को धा मक अन'ठान मानने वाले दे श मA य* बढ़ रहे है तालाक , य* बढ़ रहे है वद-आjम ? य* ु ृ बढ़ रह6 है शशु-शालाए ? कोई नह6 बताता----। -वाथ-वश सभी अनजान बने हुए है । मA बताती हु प5रवार क8 धर6 मानी जाने वाल6 ु औरत ने प5रवार को नकार कर बहार जगह बना ल6 है । एक उ:च -थान 3ा_त कर लया है । आ थक ि-थ0त से मजबत यह औरत आज पुYष से कधे से क?धा मला कर चल रह6 है । सCमान और गव ने उसक ू ं े माथे को ऊचा उठा लया है । मु-कराते चेहरे यह बताते है क8 सब खश है । प0त भी , पE भी और प5रवार ँ ु ु ु भी। ले#कन ज़रा इनक >हरदय मA झांक कर दे eखये उसमे सस#कया और पछतावे क अि त5र त कछ नह6 े े ु मलेगा । कभी उस माँ को दे खा है जो दध पीने वाले को आँचल से उठा कर Uब-तर पर लटा दे । और वह ू ब:चा चीखे मारता रहे । रोते ब:चे को माँ क8 बो तल थमा कर आँचल संभालती माँ को दे खा है । बंद दरवाजे का टला खोलते हुए ब:चे को दे eखये । जहाँ मु-कराती हुई माँ नह6 । खल6 सोच -सोच करता ु कर उसक इि?तज़ार मA होता है । टे बल पर सुबह का खाना बना दे ख कर उसक8 भूख ह6 गायब हो जाती है े ।सवेरे का बना खाना दे ख कर उसे आक षत नह6 करता । तरस गए है आज ब:चे इस सुगि?धत महक के लए जो उ?हA eखंच कर तरफ़ ले आती थी। भख क लए टो0नक का काम करने वाले मसाल* क8 सुगंध पता ू े नह6 कहाँ चल6 गई। कहाँ गई वह मेर6 माँ िजसक आँचल से आचार क8 खशबू आती थी । मंहगे पर‡यूम भी े ु हमA वह संति'ट नह6 दे पाते। ु न?हे नादाँ ब:चो से इस नौकर6 ने उनसे उनक8 माँ चीन ल6 है । थक8 हुई शाम को घर मA कदम रखने वाल6 माँ ब:चो को या दे प0त है । उसका तन-मन >दन-भर क8 थकान से चर हो रहा हो होता है । पता नह6 वह ू #कस-#कस क अशल6ल यंVय सुनकर आई होती है । यो#क अब शाल6नता और सोCयता तो कह6 नज़र े नह6 आती है । औरत को 0नCन Wि'ट से दे खने वाला पुYष जब उ?हA अपने साथ दे खता है तो ह6न भावना से www.kalpanadubey.com Page 40
  • 42.
    M सत होकरउल-जुलूल ताने कसने से बाज़ नह6 आता है । जब वह घर आती है तो ब:चो क उदास चेहरे े उसे अ?दर तक >हला दे ते है । और ब:चे ---जैसा कछ भोजन गले से 0नचे उतार कर तेTय -बेर क साथ सोने को मजबर हो जाते है ।थक8 ु े ू हुई माँ क पास लोर6 सुनाने तक का न समय होता है और न शि त। या तेTय-बेर ब:चे को माँ क शर6र े े क8 गमाहट दे सकता है ? या उसक भयभीत “दय को सा वना दे सकता है ? नह6 न । आप ऐसे ब:चो से े भ व'य मA या उCमीद कर सकते है ? आयो और कhच मA पले ब:चे माँ क8 ममता को समझने मA असमथ होते है । उ?हA तो सफ़ माता- पता क )वारा उपलnध कराये गए साधन और समान रह जाते है । िजस रोते - े Uबलखते ब:चे को माँ का सहारा न मले उस जैसा अभागा तो कोई हो ह6 नह6 सकता। औरत क8 नौकर6 ने काल -चq क8 ग0त बड़ा द6 है । सुबह जJद6 उठाना है यो#क काम पर जाना है । रात को जJद6 सोना है यो#क काम पर जाना है । कह6 बहार भी जाओ तो जJद6 वापस आना है यो#क काम पर जाना है । खाना भी जJद6 खाना है यो#क काम पर जाना है । हर काय मA जJद6 । लगता है जैसे सुब नौकर6 क प:छे भाग े रहे है । नौकर6 ह6 आज िजंदगी बन गई है और सब कछ पीछे छट गया है , छटा जा रहा है । ु ु ु प5रवार क वद हमेशा घबराए से है रान से रहते है । यो#क ना #कसी को उनक8 दे ख-भाल करने का समय है े ृ और न ह6 उनसे बात करने का । िजन ब:चो क लए उ?ह*ने सCपण जीवन लगा >दया , उनसे ह6 बोल े ू सुनने को तरसते है । वद आjम* क8 बदती हुई सं^या इस बात का परमं है क8 आज वह प5रवार का ृ उपे~ त अंग बन गए है । कहते है क8 हर सफल यि त क पीछे #कसी म>हला का हाथ होता है । आज े म>हला -वयं उसक साथ चल पड़ी है । प5रस0त थया बदल गई है । आज पुYष उस संतुि'ट को 3ा_त नह6 े कर पा रहा जो उसे अपनी सफलता पर 3ा_त होनी चा>हए। प नी क 30त इ'या का भाव बढता जा रहा है । े _यार और -नेह , अपनापन और समान , )वेष क भाव मA बदल जाता है , प5रणाम ----तालाक । रा-ते --- े अलग-अलग । टूट गया बंधन , टूट गए 5र2ते , Uबखर गया प5रवार ----बात गए ब:चे । 3q0त ने औरत को बड़ा ह6 नाजुक , कोमल , सोCय और सुंदर बनाया है । आज तरस गई है आँखे उस Yप- सौ?दय को दे खने क लए जो पहले होता था । सोलह-jगार से मंkडत , आभु2नो से सुसिजत नार6 को े ंृ दे खने क लए । िजसक8 चाल मA झनक, िजसक8 बात मA खनक , िजसक भाव मA लचीला -सौ?दय था। े नौकर6 क बहनेऔरत से उसक8 ममता, _यार , -नेह, अपनापन , लLजा , शील-सौ?दय मत चनीये। कहते े है कछ पाने क लए कछ खोना पड़ता है । सोच कर दे eखये नौकर6 करने से औरत ने या खोया या पाया ु े ु है । म; समझती हु क8 ....................................... www.kalpanadubey.com Page 41
  • 43.
    दो त -दोत न रहा प आपने आज का अखबार पढ़ा कल ् क मु^या समाचार पढे . े या सन-सनी दे खा. गुडगाँव ए क एक -कल मA या हुआ? ू यो हो गए चप? ु य* उतर आई 0नराशा आपक8 आंख* मA ? कारन / सप'ट है . ये सुब घटनाये उन दो-त* क8 द-ता बयां करती है जो हमारा आज वाद- ववाद 30तयो गता का वषय है . दो-त-दो-त न रहा . आए >दन घटने वाल6 इन घटनाओ ने मEो से व2वास उठा >दया है . पता नह6 कौन सा दो-त कब द2मन बन जाए. कभी कोई ु दो-त थोड़े से धन क लए ह6 #कसी अपने दो-त को मौत क8 नींद सुला दे ता है . तो कभी दो-त मJक ह6 े #कसी अपने मE का अपहरण कर उसक माता- पता को गुमराह कर उनसे पैसे वसूलते है . जरा सी कहा े सुनी पर ह6 गुडगाँव मA ह6 एक दो-त ने दसरे दो-त को गोल6 मार द6. ु आज व)यालय व)या का आलय नह6 आतंक का अ™डा बनते जा रहे ह;. माता –pita कब अपने ब:चे से वं चत हो जाए वेह नह6 जानते जब र क ह6 भ क बन जाए तो #कस पर भरोसा करे , #कस पर नह6. पता नह6 वे >दन कहाँ गए जब एक मE दसरे मE क8 परे शानी को अपनी परे शानी समझता था . उसका दःख ु ु अपना दःख बन जाता था वे कहा0नया वे #क-से जो दाद6- नानी से सुना करते थे वे कह6 लु_त हो गए. है . ु कहाँ मलA गे अब सुदामा –krishan से दो-त , कहाँ मलA गे अब कारन –दयQधन से मE. ु कहा जाता है जो वप0त मA साथ दे वाह6 स:चा मE होता है . ले#कन जब मE ह6 वप0त का कारन बन जाए तो उसे या कहे आज तो मE सफ़ मतलब क रह गए है . जब तक उनक8 -वाथ – स े होती रहती है तब तक ह6 मEता रहती है #फ़र वे गर गट क8 तरह अपना रं ग बदल लेते है . आप सफ़ अ-चाय से दे खते रह जाते है . और यह6 कहते रह जाते ह; “ पता नह6 इसे या हो गया है . “ जब दो-त* क Uबच -वाथ क8 भावना आ जाती है तो दो-त- दो-त नह6 रहता दो-त ह6 या उस भावना पर े तो सारे 5र2ते ख़ म हो जाते ह;. इ'या का भाव जब पनपने लगता है तो दो-त द2मन नज़र आने लगता है . ु दो-त ह6 सबसे बड़ा द2मन बन जाता है . उसक8 जान ले लेना , उसका धन हड़प लेना , उसक घर वालो को ु े गुमराह कर दे ना ह6 उनका काम रह गया है . ]30त>दन बदलते इन हालातो ने दो-त* पर से व2वास ह6 हटा >दया है . यद प यह सच है क8 Uबना दो-त के जीवन बड़ा ह6 नीरस और बेजान होता है . ले#कन दो-ती क नाम पर आ-तीन मA स‘प डालने से अ:छा तो है े Uबना दो-त क रह जन. े www.kalpanadubey.com Page 42
  • 44.
    कहाँ से लायेऐसे दो-त जो _यार करA , सCमान करे , सलाह करे , ग़लत रा-ते पर चलने से रोक , जो साथ दे े और जीवन भर दो-ती 0नभाए . नह6 मलता न ऐसा कोई ? य* हुआ ऐसा -------? यो#क दो-त-दो-त न रहा ....................................... www.kalpanadubey.com Page 43
  • 45.
    दो त -दोत न रहा वप " यह >दन न कभी हम भूल पायAगे तुCहार6 दो-ती क Uबना हम जी नह6 पायAगे े याद आएँगी सफ़ तुCहर6 ह6 बातA यह6 शnद होठो पर लेकर जायAगे” यह हम सभी जानते ह; क8 हमारे जीवन मA दो-त क8 #कतनी अहम ् भू मका होती है । दो-ती एक एहसास है िजसे हम महसूस करते ह;। हमA इन बातो को साUबत करने क लए #कसी और उदाहरण क8 आवशकता नह6 े है । य>द हम -वयम क जीवन मA झांक कर दे खे तो पायAगे क8 हम दो-त क Uबना #कतना अधरापन महसूस े े ू करते ह;। दो-ती बहुत क8मती होती है । इससे ग़लत फि•मयो क8 वजह से नह6 खोना चा>हए यो#क स:चा े दो-त पाना बड़ा मुि2कल होता है । आज ऐसे भी दो-त ह; जो -वाथप0त क लए दो-ती करते ह;। वह दो-त शnद क8 मा मकता को और उसक ू े े मह व को नह6 समझते ह;। स:चा दो-त तो हर वप0त मA साथ दे ता ह;। कहा भी गया है “ वप0त कसोट6 जो कसे ते ह6 सांचे मीत” दो-त* को #कसी क कहने मA आकर मत दर करो , यो#क कछ लोग तो अ:छा मE मल जाने से भी जलते े ू ु ह;। इधर क8 उधर लगाते ह;। और गल फ•मीय पैदा करते ह;। स:चा दो-त तो कड़वी दवाई क8 तरह होता े ह;। िजसक8 कड़वी बात मA भी मठास होती है । िजस परकार छ तीस यंजन बनाना पर भी य>द उसमे नमक न हो तो वह फ8का लगता ह;। उसी परकार एक दो-त क Uबना जीवन नीरस लगता है । जो बातA हम े अपने माता- पता , भाई –ब>हन से नह6 कह सकते उसका राजदार तो मE ह6 हो सकता है । स:ची दो-ती संसार मA सबसे बड़ी दौलत होती है । स:चा मE वाह6 जो अपने मE क8 बात ग_त रखे। जो अपने दो-त को ु धोखा दे ता है या वह स:चा दो-त हो सकता है । #कसी एक क8 गलती क8 सजा हम सबको नह6 दे सकते है । कृ'ण-सुदामा क8 दो-ती क8 मसाल आज भी द6 जाती ह;. दो-ती मA मान –सCमान , आ मर –गर6ब , जाती –पाती का भेदभाव नह6 होता दो-ती मA चल, दख विजत है । याद रeखये क8 थोडी सी खšास पड़ते ह6 िजस ु तरह दध फट जाता ह; उसी तरह थोड़ा सा जूठ भी हमार6 मEता को तोड़ सकता ह;। ू मEता को तोड़ना बहुत आसन है और बनाये रखना उतना ह6 क>ठन । इस लए मEो मEता को 0नभाना सख* और िजंदगी मA इसका लु फ़ उठाओ। अंत मA यह6 कहना चाहूंगी – “ मुझे चाँद सतार* से या लेना मझे इस द0नया क8 बहारो से या लेना ु ु www.kalpanadubey.com Page 44
  • 46.
    दो-ती सलामत होतुCहर6 –हमार6 मुझे ज?नत क नजरो से या लेना “ े ....................................... www.kalpanadubey.com Page 45
  • 47.
    सुDीम कोटI कफसले से ब चे उLंड हो रहे ह े ै प वह ब:चा क ा मA सगरे ट य* पी रहा है ? अरे क ा मA इतना शोर य* हो रहा है ? अ यापक परे शान य* है ? व)यालय मA पु लस य* आई है ? म; बताती हूँ ..... ये इ क8सवीं सद6 क व)याथg ह; इ?हे सु3ीम कोट ने श क* क दं ड से बचाकर -वतंE े े और शि तशाल6 बनाया है महोदय इस क_यटर युग मA व)याथg क8 सोच भी क_यटर क8 तरह हो गयी है हर काय वे अपनी आयु से ं ू ं ू एक कदम आगे बढ़ कर करना चाहते ह; वे समझते ह; #क वे अपना अ:छा -बरा समझने लगे ह; अत:उ?हA ु कछ समझाया न जाए वे २१वी सद6 क व)याथg ह; १९वी सद6 क अ यापक* का अ धकार न थोपा जाए इसे ु े े वे एक पीडी का अंतर मानते ह; अ यापक* का अपमान करना आज आम घटना हो गयी है िजसका 3भाव प5रवार* पर भी >दखाई दे ता है कोई अपने माता - पता को घर से 0नकलता है तो कोई उनक साथ अभƒ यवहार करता है जब पौधे ह6 े अ:छे न ह*गे त* फसल अ:छ कसे होगी आज जब अ यापक क सर पर नौकर6 बचाने क8 तलवार टांग द6 ै े गयी है त* ब:चे उPंड य* न ह*गे ब:चे त* ब?दर क8 तरह होते ह; उ?हA अनुशा सत करने क लए लकडी े नह6ं होगी त* अनुशासन कसे होगा ? ै महोदय, स>दय* से र60त चल6 आ रह6 है #क एक बद म-त हाथी को महावत ह6 अपने अंकश )वारा ु 0नयि?Eत करता है महावत िजतना तजुव€कार होगा हाथी को उतना ह6 0नयि?Eत कर लेगा ता#क वह #कसी क8 हा0न न कर सक इसी तरह व)या थय* को भी अनुशा सत करने क लए दं ड एवं भय क8 े े आव2यकता है 3चीन काल से चल6 गुh श'य परCपरा धीरे -धीरे लु_त होती जा रह6 सु3ीम कोट ने इसे वनाश क कगार तक पहुंचा >दया है िजस तरह रोगी शर6र क लए कडवी दवाई क साथ -साथ शJय े े े च#क सा क8 भी आव2यकता होती है उसी 3कार उPंड ब:च* को सुधारनेक लए दं ड क8 आव2यकता होती े है जहाँ समझाने से बात न बने वहां भय से काम काय जाता है श क का कत य ब:चे का चहुँमुखी वकास करना होता है उसक लए उसे कछ भी य* न करना पड़े े ु महोदय बढ़ई जब लकडी से कोई सामान बनता है तबउस पर तीखे -नक8ले औजार* से वार करता है उसक ु े इ?ह6ं वार* से एक साधारण लकडी संदर Yप लेकर बाजार* मA ऊचे दामो पर Uबकती है उसी तरह व)याथg ु ँ एक ल कड़ है और श क अपने व)याथg को सुधारने क लए हर तरह से काय करता है ता#क वह एक े अ:छा नाग5रक बने www.kalpanadubey.com Page 46
  • 48.
    उदं डता से#कसी का भला नह6ं हुआ है 3ाचीन काल क कस रावण शशुपाल क अंत से कौन प5र चत नह6ं े ं े है ? >हटलर मुसो लनी, सPाम हुसैन का अंत भी सुखद न था क व)याथg का भ व'य या होगा; यह े चंतनीय है सु3ीम कोट क फसले ने ब:च* क8 उदं डता को वह बढावा >दया है #क उसे रोकना असCभव े ै 3तीत होने लगा है इस फसले हो पुन:: वचार करने क8 आव2यकता है अ?यथा भ व'य या होगा यह 32न ै भयावह है अंत मA मA यह6 कहना चाहती हूँ "हम कौन थे या होगये और या ह*गे अभी आओं वचारA आज मलकर ये सम-याएँ सभी " ....................................... www.kalpanadubey.com Page 47
  • 49.
    सुDीम कोटI कफसले से ब चे उLंड हो रहे ह े ै वप रोको न न>दय* को बाँध से, कलकल कर क बहने दो, े खले गगन मA ब:च* को, ु खले पंख* से उड़ने दो, ु ब:चे तो ह; फल* क8 यार6, ू इन फल* को म-त हवा मA उड़ने दो ू 0नणायक गण म; इस बात से सहमत नह6 हूँ #क ब:चे उदं ड हो रहे ह; भारत वह दे श है जहाँ नेहY जैसे महान पुYष हुए जो ब:च* से बेहद _यार करते थे इस लए इस दे श क कानून का ब:च* क प े े मA 0नणय करना उ चत है महोदय बदलते समय क साथ साथ सब कछ बदल रहा है आज अ यापक और ब:च* का सCब?ध गh - े ु ु श'य का नह6 अ पतु मEता का भी माना जाता है हर सCब?ध क8 कछ सीमाएं होती ह; पर?तु आज कछ ु ु श क इन सीमाओं को पार करक व)या थय* क साथ द ु यवहार करने लगे ह; िजससे इन व)या थय* क े े े भ व'य पर ह6 नह6 अ पतु उनक शार65रक और मान सक पटल पर भी 3भाव पड़ता है े आए >दन हम श क* क hƒ Yप क उदाहरन दे ख रहे ह; कभी श क #कसी क8 बाजु तोड़ दे ते ह; तो कह6 े े व)याथg को अपमा0नत करक आ म ह या तक क लए मजबूर कर दे ते ह; कछ >दन* पहले ह6 एक श क े े ु क8 सजा का 0घनौना Yप दे खने को मला जब माE छ: वष क8 ब:ची को Mह-काय न करने पर उसे 0नव-E करक अपमा0नत #कया गया प5रणाम -वYप वह इतना डर गयी #क वह व)यालय क नाम से ह6 घबराने े े लगी या यह उ चत है ? महोदय श क वह दपण है जो व)याथg को सह6 -गलत क8 पहचान कराता है , उसक य#कत व को े संवारता है , भ व'य का उ तरा धकार6 बनाता है पर?तु य>द वह दपण -वयं ह6 Uबगडा और धधला होगा तो ंु दसरे का यि त व या 0नखरे गा? ु कCहार #कतने _यार से मšी गँूथ कर #फ़र उसे चाक पर चदाता है और अपने कोमल -पश से वतन* को ु आकार दे ता है ठक वैसे ह6 अ यापक भी _यार से व)याथg को संवारता है न #क कठोरता से | सु3ीम कोट क फसले को हमA सहम0त दे नी चा>हए, ले#कन यह यान भी रखना होगा #क व)याथg को गलत राह मA े ै भटकने से रोकने क लए वनoता और सहजता का रा-ता अपनाना चा>हए हम गौतम और गांधी क दे श े े वासी ह; संयम हर मुि-कल से लड़ने का ह थयार था, है और रहे गा ब:चे आने वाले कल का भ व'य ह; जब भ व'य ह6 सहमा हुआ होगा तो दे श क8 उ?न0त कसे होगी हमे तो ै मु-कराता हुआ उLLवल भ व'य चा>हए नाया सवेरा आने दो ,#करण* से #करने मलने दो नव ऋतू क आगमन मA नव क*पलA eखलने दो े www.kalpanadubey.com Page 48
  • 50.
    3ेम भाव कमंद -मंद झ*क* को तुम बहने दो े न?हA -न?हA फल* को झटको न, महकने दो ू ....................................... www.kalpanadubey.com Page 49