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विज्ञान
अध्याय-6: ऊत्तक
(1)
ऊत्तक
06
पादप उत्तक
एक ही प्रकार की संरचना और कार्य करने वाले कोशिकाओं क
े समूह को उत्तक कहते हैं|
मुख्य व िंदु:
• एक कोशिकीर् जीवों में, सभी मौशलक कार्य एक ही कोशिका द्वारा ककर्े जाते हैं| उदाहरण
क
े शलए अमीबा में एक ही कोशिका द्वारा गतत, भोजन लेने की किर्ा, श्वसन किर्ा और
उत्सजयन किर्ा संपन्न की जाती है|
• बहुकोशिकीर् जीवों में लाखों कोशिकाएँ होती हैं| इनमें से अधिकतर कोशिकाएँ क
ु छ ही
कार्ों को संपन्न करने में सक्षम होती हैं| इन जीवों में धभन्न-धभन्न कार्ों को करने क
े शलए
धभन्न-धभन्न कोशिकाओं का समूह होता हैं|
• बहुकोशिकीर् जीवों में श्रम ववभाजन होता हैं|
• िरीर क
े अन्दर ऐसी कोशिकाएँ जो एक तरह क
े कार्ों को करने में दक्ष होती है, सदैव एक
समूह में होती हैं|
• एक ही संरचना वाले कोशिकाओं का वह समूह जो िरीर क
े ककसी तनशित स्थान ववशिष्ट
कार्य करते है उत्तक कहलाते हैं|
मनुष्य में:
माांसपेशिय कोशिकाएँ: इसक
े संक
ु चन एवं प्रसार से िरीर में गतत होती है|
तांविका कोशिकाएँ: र्ह संवेदनाओंको मस्तिष्क तक पहुँचाता है और मस्तिष्क से संदेिों को िरीर
क
े एनी भागों तक लाता हैं|
रक्त कोशिकाएँ: र्ह ऑक्सीजन, भोजन, हारमोंस तथा अपशिष्ट पदाथों का वहन करता हैं|
पौिों में:
संवहन उतक भोजन एवं जल का चालन पौिे क
े एक भाग से दुसरे भाग तक करते हैं|
उत्तक (Tissue): एक ही प्रकार की संरचना और कार्य करने वाले कोशिकाओं क
े समूह
को उत्तक कहते हैं|
(2)
ऊत्तक
06
पादप उतक (Plant Tissues):
(i) पौिे स्तस्थर होते हैं - वे गतत नहीं करते हैं| क्योंकक र्े अपना भोजन एक स्थान पर स्तस्थर रह क
े
ही प्रकािसंश्लेषण की किर्ा द्वारा प्राप्त कर लेते हैं|
(ii) उनक
े अधिकांि उतक सहारा देने वाले होते है तथा पौिों को संरचनात्मक िक्ति प्रदान करते
हैं|
(iii) अधिकांि पादप ऊतक मृत होते हैं| र्े मृत ऊतक जीववत उतकों क
े समान ही र्ांत्रिक िक्ति
प्रदान करते हैं तथा उन्हें कम अनुरक्षण की आवश्यकता होती है|
(iv) पौिों में वृशि क
ु छ क्षेिों में ही ससधमत रहती है|
(v) पौिों में क
ु छ ऊतक जीवन भर ववभाशजत होते रहते हैं| र्े ऊतक पौिों क
े क
ु छ तनशित भाग में
ही होते है| जो ऊतक क
े ववभाशजत होने क
े क्षमता पर आिाररत होता है| ववधभन्न प्रकार क
े पादप
उतकों को वृशि र्ा ववभोज्योतक ऊतक और स्थार्ी ऊतक क
े रूप में वगीीक
ृ त ककर्ा जा सकता है|
जांतु ऊतक (Animal Tissues):
(i) दूसरी ओर जंतु भोजन, जोड़ी, और आवास की तलाि में चारों ओर िूमते हैं|
(ii) पौिों क
े तुलना में जंतु अधिक ऊजाय खचय करते है|
(iii) उतकों का अधिकांि भाग जीववत होता है|
(iv) जंतुओं में कोशिकाओं की वृशि एकसमान होती है| इसशलए इनमें ववभाज्य और अववभाज्य
क्षेिों की कोई तनशित सीमा नहीं होती है|
पादपों में उतकों क
े प्रकार (Type of Plant Tissue):
(1) विभज्योतक ऊतक (MERISTEMATIC TISSUE):
पौिों की वृशि क
े वल उनक
े क
ु छ तनशित एवं वविेष भागों में ही होता है| ऐसा ववभाशजत होने वाले
उतकों क
े कारण ही होता है ऐसे ववभाशजत होने वाले ऊतक पौिों क
े वृशि वाले भागों में ही स्तस्थत
होते है| इस प्रकार क
े ऊतक को ववभज्योतक ऊतक कहते है|
विभज्योतक ऊतक का िर्गीकरण (Classification of Meristematic Tissue):
(3)
ऊत्तक
06
(A) िगर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem): िीषयस्थ ववभज्योतक पौिों क
े जड़ एवं तनों क
े
वृशि वाले भाग में ववद्यमान रहता है तथा र्ह उनकी लंबाई में वृशि करता है|
(B) पार्श्ष विभज्योतक (Lateral Meristem): तने की पररधि र्ा मूल में वृशि पाश्वय ववभज्योतक
क
े कारण होती है|
(C) अांतर्विष्ट विभज्योतक (Intercalary meristem): र्ह पशत्तर्ों क
े आिार में र्ा टहनी क
े
पवय (internode) क
े दोनों ओर उपस्तस्थत होते हैं|
विभज्योतक ऊतक क
े र्ुण (Properties Of Meristematic Tissue):
(i) इस ऊतक की कोशिकाएँ अत्यधिक किर्ािील होती हैं|
(ii) उनक
े पास बहुत अधिक कोशिका द्रव्य, पतली कोशिका धभशत्त और स्पष्ट क
े न्द्रक होते हैं|
(iii) उनक
े पास रस्िातनर्ाँ नहीं होती है|
(2) स्थायग ऊतक (PERMANENT TISSUE):
ववभज्योतक ऊतक वृशि कर आगे एक ववशिष्ट कार्य करती हैं और ववभाशजत होने की िक्ति खो
देती है शजसक
े फलस्वरूप वे स्थार्ी ऊतक का तनमायण करती हैं|
(4)
ऊत्तक
06
ववभज्योतक की कोशिकाएँ ववभाशजत होकर ववधभन्न प्रकार क
े स्थार्ी उतकों का तनमायण करती हैं|
पररभार्ा: कोशिकाएँ जो ववभेकदत होकर ववशिष्ट कार्य करती है और आगे ववभाशजत होने की िक्ति
खो देती हैं इस प्रकार की ऊतक को स्थार्ी ऊतक कहते हैं|
विभेदीकरण (Differentiation): उतकों द्वारा ववशिष्ट कार्य करने क
े शलए स्थार्ी रूप और आकार
लेने की किर्ा को ववभेदीकरण कहते हैं|
स्थार्ी ऊतक क
े प्रकार (Type of permanent tissue):
(A) सरल स्थायग ऊतक (Simple permanent tissue):
र्े एक ही प्रकार क
े कोशिकाओं से बने होते हैं जो एक जैसे कदखाई देते हैं इस प्रकार क
े ऊतक को
सरल स्थार्ी ऊतक कहते हैं|
उदाहरण: पैरेंकाइमा, कोलेन्काईमा और स्क
े रेन्काइमा आकद|
सरल स्थायग ऊतक क
े प्रकार (Type of simple permanent tissues):
(1) पैरेंकाइमा (Parenchyma): वे सरल स्थार्ी ऊतक शजसक
े कोशिकाओं की क
ु छ परतें आिारीर्
पैकक
िं ग का तनमायण करती हैं| इन्हें पैरेंकाइमा ऊतक कहते हैं|
र्ुण (Features):
(i) र्ह पतली कोशिका धभशत्त वाली सरल कोशिकाओं का बना होता है|
(ii) र्े जीववत कोशिकाएँ होती है|
(iii) र्े प्रार्: बंिन मुि होती हैं|
(iv) इस प्रकार क
े ऊतक की कोशिकाओं क
े माध्य काफी ररि स्थान पार्ा जाता है|
(v) र्ह ऊतक भोजन का भण्डारण करता है और पौिों को सहार्ता प्रदान करता है|
(vi) जड़ एवं तनों की पैरेंकाइमा पोषक तत्व और जल का भी भण्डारण करती हैं|
पैरेंकाइमा ऊतक क
े प्रकार:
(i) क्लोरेन्काइमा (Chlorenchyma): क
ु छ अन्य पैरेंकाइमा शजनमें क्लोरोकफल पार्ा जाता
है और र्े प्रकािसंश्लेषण की किर्ा करती हैं ऐसे पैरेंकाइमा को क्लोरेन्काइमा कहते हैं|
(5)
ऊत्तक
06
(ii) एरेनकाईमा (Aerenchyma): जलीर् पौिों में पैरेंकाइमा की कोशिकाओं क
े मध्य हवा
की बड़ी गुहहकाएँ (cavities) होती हैं, जो पौिों को तैरने क
े शलए उत्प्लावन बल (Buoyancy)
प्रदान करती हैं| इस प्रकार क
े पैरेंकाइमा को एरेनकाईमा कहते हैं|
(2) कोलेन्काईमा (Collenchyma): This र्ह एक अन्य प्रकार की सरल स्थार्ी ऊतक शजसक
े
कारण पौिों में लचीलापन होता है| र्ह पौिों क
े ववधभन्न भागों जैसे- पत्ती एवं तना में तबना
टूटे हुए लचीलापन लाता है| ऐसे ऊतक को कोलेन्काइमा कहते है|
र्ुण (Features):
(i) र्ह पौिों क
े पत्तीर्ों एवं तनों में लचीलापन लाता है|
(ii) र्ह पौिों को र्ांत्रिक सहार्ता भी प्रदान करता है|
(iii) इस ऊतक की कोशिकाएँ जीववत, लंबी, और अतनर्धमत ढंग से कोनों पर मोटी होती हैं|
(iv) कोशिकाओं क
े बीच कम स्थान होता है|
हम इस ऊतक को एपपडर्ममस क
े नीचे पणयवृत में पा सकते हैं|
(3) स्क
े रेनकाईमा (sclerenchyma): र्ह एक अन्य प्रकार का सरल स्थाई ऊतक है जो पौिों
को कठोर एवं मजबूत बनाता है| इस प्रकार क
े सरल स्थार्ी ऊतक को स्क
े रेन्काइमा कहते है|
उदाहरण: नाररर्ल क
े शछलक
े |
र्े ऊतक तने में, संवहन बण्डल क
े समीप, पत्तों की शिराओं में तथा बीजों और फलों क
े कठोर
शछलक
े में उपस्तस्थत होता है|
र्ुण (Features):
(i) इस ऊतक की कोशिकाएँ मृत होती हैं|
(ii) र्े लंबी एवं पतली होती है क्योंकक इस ऊतक की भीतत शलग्निन क
े कारण मोटी होती है|
(iii) र्े धभशत्तर्ाँ प्रार्: इतनी मोटी होती हैं कक कोशिका क
े भीतर कोई आंतररक स्थान नहीं होता
है|
(iv) र्ह पौिों क
े भागों को मजबूती प्रदान करता है|
(6)
ऊत्तक
06
शलग्निन (Lignin): शलग्निन कोशिकाओं को दृढ बनाने क
े शलए सीमेंट का कार्य करने वाला एक
रासार्तनक पदाथय है|
पैरेंकाइमा, कोलेन्काईमा और स्क्लेरेन्काइमा क
े बीच अंतर:
Differentiation among Parenchyma, collenchymas and Sclerenchyma:
पैरेंकाइमा कोलेन्काईमा स्क्लेरेन्काइमा
1. र्े जीववत कोशिकाएँ होती
हैं|
2. कोशिका धभशत्त पतली होती
हैं|
3. इनकी कोशिकाओं क
े बीच
काफी ररि स्थान होता है|
4. र्ह ऊतक भोजन का
भण्डारण करता है और पौिों
को सहार्ता प्रदान करता है|
1. र्े जीववत कोशिकाएँ
होती हैं|
2. कोशिका धभशत्त मोटी
होती है|
3. अंतरकोशिकीर्
अवकाि उपस्तस्थत
होती है|
4. र्ह पौिों र्ांत्रिक
सहार्ता प्रदान करता
है|
1. र्े मृत कोशिकाएँ होती
हैं|
2. कोशिका धभशत्त मोटी
होती है|
3. अंतरकोशिकीर्
अवकाि अनुपस्तस्थत
होती है|
4. र्ह पौिों क
े भागों को
मजबूती प्रदान करता
है|
एपपडर्ममस (Epidermis)
कोशिकाओं की सबसे बाहरी परत को एपपडर्ममस कहते हैं| समान्यत: र्ह कोशिकाओं की एक परत
की बनी होती हैं| िुष्क स्थानों पर धमलने वाले पौिों में एपपडर्ममस मोटी हो सकती है| क्योंकक
एपीडमयल कोशिकाओं का उत्तरदातर्त्व रक्षा करने का है, अत: इसकी कोशिकाएँ तबना ककसी
अंतकोशिकीर् स्थान क
े अशछन्न परत बनाती हैं| अधिकांि एपीडमयल कोशिकाएँ अपेक्षाक
ृ त चपटी
होती हैं| सामान्यत: उनकी बाह्य तथा पाश्वय धभशत्तर्ाँ उनकी आंतररक धभशत्तर्ों से मोटी होती हैं|
(7)
ऊत्तक
06
र्ुण (Features)
(i) र्ह जल की हातन कम करक
े पादपों की रक्षा करती हैं|
(ii) र्ह पौिे क
े सभी भागों की रक्षा करती है क्योंकक पौिे की पूरी सतह एपपडर्ममस से ढकी रहती
है|
(iii) जड़ों की एपीडमयल कोशिकाएँ पानी को सोंखने का कार्य करती हैं|
(iv) एपीडमयल कोशिका पौिों की बाह्य सतह पर प्रार्: एक मोम जैसी जल प्रततरोिी परत बनाती
है|
(v) र्ह जल प्रततरोिी परत, जल क
े हातन क
े ववरुि र्ांत्रिक आिात तथा परजीवी कवक क
े प्रवेि
से पौिों की रक्षा करती है|
पौधों में एपपडर्ममस का कायष (Functions Of Epidermis in plants):
(i) र्ह जल की हातन कम करक
े पादपों की रक्षा करती हैं|
(ii) र्ह जल प्रततरोिी परत, जल क
े हातन क
े ववरुि र्ांत्रिक आिात तथा परजीवी कवक क
े प्रवेि
से पौिों की रक्षा करती है|
(iii) इसकी जेली जैसी पदाथय जल प्रततरोिी परत का तनमायण करती है|
(iv) जड़ों की एपीडमयल कोशिकाएँ पानी को सोंखने का कार्य करती हैं|
जड़ों में एपपडर्ममस का कायष (Functions of Epidermis in roots)
जड़ों की एपीडमयल कोशिकाएँ पानी को सोंखने का कार्य करती हैं| सािारणत: उनमें बाल जैसे
प्रवियन होते हैं, शजससे जड़ों की क
ु ल अविोषण सतह बढ़ जाती है तथा उनकी पानी सोंखने की
क्षमता में वृशि होती है|
मरुस्थलगय पौधों में एपपडर्ममस की भूममका (Role of Epidermis in Desert Plants):
मरुस्थलीर् पौिों की बाहरी सतह वाले एपपडर्ममस में क्यूटीन नामक रासार्तनक पदाथय ला लेप
होता है जो जल अवरोिक का कार्य करता है| मरुस्थलीर् पौिों को जल की अधिक आवश्यकता
होती है र्ह रासार्तनक पदाथय बाहरी परत से जल क
े ह्रास को रोकता है|
(8)
ऊत्तक
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क्यूटगन (Cutin): र्ह एक रासार्तनक पदाथय है शजसमें जल अवरोिक का गुण होता है| र्ह
मुख्यत: मरुस्थलीर् पौिों की एपपडर्ममस में पार्ा जाता है|
सु ेररन (Suberin): सुबररन एक रासार्तनक पदाथय है जो वृक्ष क
े बाहरी सुरक्षात्मक परत र्ा
वृक्षों क
े छालों में पार्ा जाता है और र्ह इन छालों को जल और वार्ु क
े शलए अभेद बनाता है|
रांध्र (Stomata): पशत्तर्ों की सतह पर बहुत सी ब्बहुत सी छोटी छोटी शछद्र पाए जाते है इन छोटी-
छोटी शछद्रों को रंध्र कहते हैं|
रक्षग कोशिकाएँ: स्टोमेटा को दो वृक्क क
े आकार की कोशिकाएँ घेरे रहती हैं, शजन्हें रक्षी कोशिकाएँ
कहते हैं| र्े कोशिकाएँ वार्ुमंडल से गैसों का आदान-प्रदान करने क
े शलए आवश्यक हैं|
रक्षक परत (Protective Layer): जैसे-जैसे वृक्ष की आर्ु बढती है, उसक
े बाह्य सुरक्षात्मक
उतकों में क
ु छ पररवतयन होता है| एक दुसरे ववभज्योतक की पट्टी ताने क
े एपपडर्ममस का स्थान ले
लेती है| बाहरी सतह की कोशिकाएँ इस सतह से अलग हो जाती हैं| र्ह पौिों पर बहुत परतों वाली
मोटी छल का तनमायण करती हैं|
स्टोमेटा का कायष (Functions of stomata):
(i) वाष्पोत्सजयन की किर्ा भी स्टोमेटा क
े द्वारा होती है|
(ii) गैसों का आदान-प्रदान भी स्टोमेटा क
े द्वारा ही होता हैं|
िाष्पोत्सजषन (Transpiration): Thisजल वाष्प क
े रूप में जल का ह्रास होने की प्रकिर्ा को
वाष्पोत्सजयन कहते हैं|
रक्षग कोशिकाओां का कायष (Function of guard Cells):
रक्षी कोशिकाएँ वार्ुमंडल से गैसों का आदान-प्रदान करने क
े शलए आवश्यक है|
जहटल स्थार्ी ऊतक
(B) जटटल स्थायग ऊतक (Complex permanent Tissue):
जहटल ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से धमलकर बने होते हैं और र्े सभी एक साथ
धमलकर एक इकाई की तरह कार्य करते हैं|
(9)
ऊत्तक
06
उदाहरण: जाइलेम और फ्लोएम आकद|
• र्े दोनों जाइलेम और फ्लोएम संवहन ऊतक हैं और र्े धमलकर संवहन बण्डल का तनमायण
करते हैं|
• र्ह ऊतक बड़े पौिों की एक वविेषता है जो कक उनकों स्थलीर् वातावरण में रहने क
े
अनुक
ू ल बनाती हैं|
1. जाइलेम (Xylem):
जाइलेम एक संवहन ऊतक है और र्ह संवहन बंडल का तनमायण करता हैं| जाइलेम टरेककड्स
(वहहतनका), वाहहका, जाइलेम पैरेंकाइमा और जाइलेम फाइबर से धमलकर बना है|
जाइलेम फ्लोएम क
े साथ धमलकर संवहन बण्डल का तनमायण करता है और पौिों को शलग्निन
कोशिकाओं की उपस्तस्थतत क
े कारण र्ांत्रिक मजबूती प्रदान करता है|
जाइलेम का कायष (Function of xylem):
(i) जाइलेम जड़ों द्वरा धमटटी से प्राप्त खतनज और जल को पौिों क
े अन्य भागों तक पहुँचाता हैं|
(ii) र्ह पौिों में सहारा देने क
े साथ साथ भण्डारण और जड़ों से पोषक तत्व और जल को लंबी दुरी
तक पौिों क
े अन्य भागों तक पहुँचाती है|
(iii) जाइलेम पदाथों को एक ही कदिा में ऊपर की ओर पररवहन करता है|
(iv) र्ह पौिों को र्ांत्रिक मजबूती प्रदान करता हैं|
जाइलेम क
े घटक (Elements of xylem):
(i) टरैककड्स (Tracheids): इसकी संरचना नाशलकाकर होती है और इसक
े द्वारा पानी और खतनज
लवण का उर्ध्ायिर संवहन होता है| र्े मृत होती हैं|
(ii) वाहहका (Vessels): इसकी भी संरचना नाशलकाकर होती है और इसक
े द्वारा पानी और खतनज
लवण का उर्ध्ायिर संवहन होता है| र्े भी मृत होती हैं|
(iii) जाइलेम पैरेंकाइमा (Xylem parenchyma): र्ह भोजन का संग्रहण करता है और र्ह
ककनारे की ओर पानी क
े पाश्वीीर् संवहन में मदद करता है|
(10)
ऊत्तक
06
(iv) जाइलेम फाइबर (Xylem fibres): मुख्यत: पौिों को सहारा देने का कार्य करता है|
मृत कोशिकाएँ (Dead Cells): वाहहका, टरैककड्स और जाइलेम फाइबर|
जगवित कोशिकाएँ (Live cells): जाइलेम पैरेंकाइमा|
• संवहन और नशलकाकार घटक प्रार्: मृत होते हैं|
2. फ्लोएम (Phloem):
फ्लोएम भी एक संवहन ऊतक है और र्ह संवहन बण्डल का तनमायण करता है| फ्लोएम चार प्रकार
क
े घटकों से धमलकर बना है| चालनी नशलका, साथी कोशिकाएँ, फ्लोएम पैरेंकाइमा तथा फ्लोएम
रेिे से धमलकर बना है|
फ्लोएम का कायष (Function of phloem):
(i) फ्लोएम पौिों की पशत्तर्ों में प्रकाि संश्लेषण द्वारा बने भोजन को पौिों क
े अन्य भाग तक
पहुँचाता है|
(ii) फ्लोएम जाइलेम क
े असमान पदाथों को कोशिकाओं में दोनों कदिाओं में गतत करा सकते हैं|
(iii) फ्लोएम का कोई र्ांत्रिक कार्य नहीं है|
फ्लोएम क
े घटक (Elements of phloem):
(i) चालनी नशलका (Sieve tubes): चालनी नशलका शछपद्रत धभशत्त वाली तथा नाशलकाकर
कोशिका होती है| र्े जीववत कोशिकाएँ होती है|
(ii) साथी कोशिकाएँ (Companion cells): र्े जीववत कोशिकाएँ होती है|
(iii) फ्लोएम रेिे (Phloem fibres): र्ह मृत कोशिकाएँ होती है|
(iv) फ्लोएम पैरेंकाइमा (Phloem parenchyma): र्े जीववत कोशिकाएँ होती है|
मृत कोशिकाएँ: फ्लोएम रेिे
जीववत कोशिकाएँ: चालनी नशलका, साथी कोशिकाएँ और फ्लोएम पैरेंकाइमा|
• संवहन कोशिकाएँ जीववत होती है|
(11)
ऊत्तक
06
स्थानाांतरण (Translocation): पौिों क
े पशत्तर्ों से वृशि वाले भाग और संग्रहण वाले अंगों तक
भोजन और पोषक तत्व जैसे िक
य रा और एधमनो अम्ल आकद का पररवहन होता है| पदाथो की इस
प्रकार की गतत को स्थानान्तरण कहते है|
जाइलेम एिां फ्लोएम में अांतर (Differences between xylem and phloem):
जाइलेम फ्लोएम
1. र्ह जल और खतनज का पररवहन करता
है|
2. र्ह पौिों को र्ांत्रिक सहार्ता प्रदान करता
है|
3. जाइलेम संवहन बण्डल क
े क
ें द्र क
े भरता
है|
4. र्ह पदाथों को एक ही कदिा ऊपर की ओर
गतत कराता है|
5. इसकी संवहन और नशलकाकार घटक मृत
होते है|
1. र्ह िक
य रा और एधमनो अम्ल का पररवहन
करता है|
2. र्ह पौिों को र्ांत्रिक सहार्ता प्रदान नहीं
करता है|
3. फ्लोएम संवहन बण्डल क
े बाहरी भाग को
घेरता है|
4. र्ह पदथों को दोनों कदिाओं ऊपर और नीचे
गतत कराता है|
5. इसक
े संवहन कोशिकाएँ जीववत होती है|
जांतु ऊतक (Animal Tissues):
जंतु कोशिकाओं से बने उतकों क
े समूह को जंतु ऊतक कहते है|
र्े चार प्रकार क
े होते हैं|
(1) एपपथेशलर्म ऊतक
(2) संर्ोजी ऊतक
(3) पेिीर् ऊतक
(4) तंत्रिका ऊतक
(1) एपपथेशलयम ऊतक (Epithelium Tissues):
(12)
ऊत्तक
06
जंतु क
े िरीर को ढकने र्ा बाह्य रक्षा प्रदान करने वाले ऊतक एपपथेशलर्म ऊतक कहलाता है|
त्वचा, मुँह, आहारनली, रिवाहहनी नली का अिर, फ
े फड़ें की क
ु पपका, वृक्कीर् नली आकद सभी
एपपथेशलर्म ऊतक से बने होते हैं|
एपपथेशलयम ऊतक का कायष (Functions of Epithelium Tissues):
(i) र्े िरीर क
े अन्दर स्तस्थत बहुत से अंगों और गुहहकाओं (cavities) को ढकते हैं|
(ii) र्े धभन्न-धभन्न प्रकार क
े िारीररक तंिों को एक दुसरे से अलग करने क
े शलए अवरोि का
तनमायण करते है|
(iii) र्े अनवरत (continuous) परत का तनमायण करती है|
(iv) र्ह बाहरी वातावरण और िरीर क
े ववधभन्न अंगो क
े बीच पदाथों क
े आदान-प्रदान में महत्वपूणय
भूधमका तनभाती हैं|
एपपथेशलयम ऊतक क
े र्ुण (Features of Epithelium Tissues):
(i) एपपथेशलर्म ऊतक की कोशिकाएँ एक दुसरे से सटी होती हैं|
(ii) कोशिकाओं क
े बीच काम स्थान होता है|
(iii) िरीर में प्रवेि करने वाला र्ा िरीर से बाहर तनकलने वाला पदाथय एपपथेशलर्म की ककसी
परत से होकर गुजरता है|
(iv) ववधभन्न एपपथेशलर्म उतकों की संरचना धभन्न-धभन्न होती है|
एपपथेशलयम उत्तक क
े प्रकार (Types of Epithelium Tissues):
(1) सरल िल्की एपपथेशलयम (Simple Squamous Epithelium):
कोशिकाओं में रि नशलका अिर र्ा क
ू पपका, जहाँपदाथों का संवहन वरणात्मक पारगम्य झिल्ली
द्वारा होता है, वहाँ पर चपटी एपपथीशलर्मी उत्तक कोशिकाएँ होती हैं। इनको सरल िल्की
एपपथीशलर्म कहते हैं।
(13)
ऊत्तक
06
र्ुण (Properties):
(i) र्े अत्यधिक पतली और चपटी होती हैं तथा कोमल अिर का तनमायण करती हैं।
(ii) आहारनली तथा मुँह का अिर िल्की एपपथीशलर्म से ढका होता है। िरीर का रक्षात्मक
कवच अथायत् त्वचा इन्हीं िल्की एपपथीशलर्म से बनी होती है।
(2) स्तररत िल्की एपपथेशलयम (Stratified Squamous Epithelium): त्वचा की
एपपथीशलर्मी कोशिकाएँ इनको कटने तथा फटने से बचाने क
े शलए कई परतों में व्यवस्तस्थत होती
हैं। चूँकक र्े कई परतों क
े पैटनय में व्यवस्तस्थत होती हैं इसशलए इन एपपथीशलर्म को िररत िल्की
एपपथीशलर्म कहते हैं।
(14)
ऊत्तक
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(3) स्तम्भाकार (पक्षमाभग) एपपथेशलयम (Columnar Epithelium): जहाँ अविोषण और
स्राव होता है, जैसे आँत क
े भीतरी अिर (lining) में, वहाँ लंबी एपपथीशलर्मी कोशिकाएँ मौजूद
होती हैं। इस प्रकार क
े एपपथेशलर्म को पक्षमाभी िंभाकार एपपथेशलर्म कहते है|
कायष (Functions):
(i) र्ह िंभाकार एपपथीशलर्म, एपपथीशलर्मी अवरोि् को पार करने में सहार्ता प्रदान करता है।
(ii) श्वास नली में, िंभाकार एपपथीशलर्मी ऊतक में पक्ष्माभ (Cilia) होते हैं, जो कक एपपथीशलर्मी
उत्तक की कोशिकाओं की सतह पर बाल जैसी रचनाएँ होती हैं। र्े पक्ष्माभ गतत कर सकते हैं
तथा इनकी गतत श्लेष्मा को आगे स्थानांतररत करक
े साफ करने में सहार्ता करती हैं।
(4) घनाकार एपपथगशलयम (Cuboidal Epithelium): र्े एपपथेशलर्म उतक घनाकार होती हैं|
(15)
ऊत्तक
06
कायष (Functions):
(i) घनाकार एपपथीशलर्म वृक्कीर् नली तथा लार ग्रंधथ की नली क
े अिर का तनमायण करता है,
जहाँ र्ह उसे र्ांत्रिक सहारा प्रदान करता है।
(ii) र्े एपपथीशलर्म कोशिकाएँ प्रार्ः ग्रंधथ कोशिका क
े रूप में अततररि वविेषता अर्जजत करती
हैं, जो एपपथीशलर्मी उत्तक की सतह पर पदाथों का स्राव कर सकती हैं।
ग्रांथथल एपपथगशलयम (Grandular Epithelium): कभी-कभी एपपथीशलर्मी ऊतक का क
ु छ
भाग अंदर की ओर मुड़ा होता है तथा एक बहुकोशिक ग्रंधथ का तनमायण करता है। र्ह ग्रंधथल
एपपथीशलर्म कहलाता है।
संर्ोजी उत्तक, पेिीर् उतक और तंत्रिका उतक
सांयोजग उत्तक (connective tissue):
ऐसी कोशिकाएँ शजनकी कोशिकाए आपस में कम जुडी होती है और अंतरकोशिककर् आिािी में
िंसी होती है। संर्ोजी उतक कहलाती हैं| रि , अस्तस्थ और उपास्तस्थ, स्नार्ु और क
ं डरा संर्ोजी
उतक क
े उदाहरण है ।
रक्त (Blood): रि एक संर्ोजी उतक है जो पदाथों क
े संवहन क
े शलए एक माध्यम का कार्य
करता है| र्ह गैसों जैसे ऑक्सीजन और काबयन डाइऑक्साइड आकद, िरीर क
े पचे हुए भोजन,
हाॅमोन और उत्सजीी पदाथों को िरीर क
े एक भाग से दूसरे भाग में संवहन करता है।
प्लाज्मा (Plasma): रि क
े तरल आििााी भाग को प्लाज्मा कहते हैं|
प्लाज्मा में लाल रि कोशिकाएँ (RBC), श्वेत रि कोशिकाएँ (WBC) तथा प्लेटलेट्स तनलंतबत
होते हैं। प्लाज्मा में प्रोटीन, नमक तथा हामोन भी होते हैं।
प्लाज्मा में तीन प्रकार की कोशिकाएँ पाई जाती हैं:
(i) लाल रि कोशिकाएँ (RBC)
(ii) श्वेत रि कोशिकाएँ (WBC)
(iii) प्लेटलेट्स (Platelets)
(16)
ऊत्तक
06
अस्थस्थ (Bone): र्ह भी एक संर्ोजी उतक है|
अस्थस्थ का कायष (The functions of Bone):
(i) र्ह पंजर का तनमायण कर िरीर को आकार प्रदान करती है।
(ii) र्ह मांसपेशिर्ों को सहारा देती है और िरीर क
े मुख्य अंगों को सहारा देती है।
(iii) र्ह ऊतक मजबूत और कठोर होता है।
(iv) अस्तस्थ कोशिकाएँ कठोर आििााी में धंसी होती हैं, जो क
ै क्तिर्म तथा फॉस्फोरस से बनी होती
हैं।
उपास्थस्थ (cartilage): एक अन्य प्रकार का संर्ोजी ऊतक होता है, शजसमें कोशिकाओं क
े बीच
पर्ायप्त स्थान होता है। इसकी ठोस आििााी प्रोटीन और िक
य रा की बनी होती है। उपास्तस्थ नाक,
कान, क
ं ठ और श्वास नली में भी उपस्तस्थत होती है।
(i) र्ह अस्तस्थर्ों क
े जोड़ों को धचकना बनाती है।
(ii) र्ह िरीर क
े क
ु छ वविेष अंगों को जैसे नाक, कान और वक्ष उपास्तस्थ (sternum) को आकार
प्रदान करता है|
स्नायु (Ligament): दो अस्तस्थर्ों को आपस में जोड़ने वाले एक अन्य संर्ोजी उतक शजसे स्नार्ु
कहते है| इसे अस्तस्थ बंिान तंतु भी कहते हैं|
र्ुण (Features):
(i) र्ह ऊतक बहुत लचीला एवं मजबूत होता है।
(ii) स्नार्ु में बहुत कम आििााी होती है।
क
ां डरा (tendon): क
ं डरा भी एक अन्य प्रकार का संर्ोजी ऊतक है, जो अस्तस्थर्ों से मांसपेशिर्ों को
जोड़ता है।
र्ुण (Features):
(i) क
ं डरा मजबूत तथा सीधमत लचीलेपन वाले रेिेदार ऊतक होते हैं।
(ii) र्ह अस्तस्थर्ों से मांसपेशिर्ों को जोड़ता है।
(17)
ऊत्तक
06
एररओलर सांयोजग ऊतक (Areolar connective tissue): एररओलर संर्ोजी ऊतक त्वचा और
मांसपेशिर्ों क
े बीच, रि नशलका क
े चारों ओर तथा नसों और अस्तस्थ मज्जा में पार्ा जाता है।
कायष (functions):
(i) र्ह अंगों क
े भीतर की खाली जगह को भरता है,
(ii) आंतररक अंगों को सहारा प्रदान करता है|
(iii) ऊतकों की मरम्मत में सहार्ता करता है।
िसामय ऊतक (Adipose Tissue): वसा का संग्रह करने वाला वसामर् ऊतक
त्वचा क
े नीचे आंतररक अंगों क
े बीच पार्ा जाता है। इस ऊतक की कोशिकाएँ वसा की गोशलकाओं
से भरी होती हैं। वसा संग्रहहत होने क
े कारण र्ह ऊष्मीर् क
ू चालक का कार्य भी करता है।
पेिगय उत्तक (Muscular Tissue):
पेिीर् उत्तक लंबी कोशिकाओं का बना होता शजसे पेिीर् रेिा भी कहा जाता है जो हमारे िरीर में
गतत कराता है| इन्हें पेिीर् उत्तक कहते है|
पेिीर् उत्तक का कार्य (Functions of Muscular Tissues):
(i) पेिीर् उत्तक
ें हमारे िरीर में गतत कराती हैं|
(ii) र्ह अस्तस्थर्ों को बाँि कर रखता है|
पेशिर्ों में संक
ु चन एवं प्रसार का कारण:
पेशिर्ों में एक वविेष प्रकार का प्रोटीन होता है शजसे ससक
ु ड़ने वाला प्रोटीन कहते है| इसी प्रोटीन क
े
संक
ु चन एवं प्रसार क
े कारण गतत होती है|
एस्थिक पेिग (Voluntary Muscles):
ऐसी पेशिर्ाँ शजन्हें हम अपनी इच्छानुसार गतत करा सकते है र्ा उनकी गतत को रोक सकते हैं|
ऐच्छच्छक पेशिर्ाँ कहलाती है|
क
ां काल पेिग (Skeletal Muscles): ऐच्छच्छक पेशिर्ाँ जो अस्तस्थर्ों से जुडी रहती है और इनमें
गतत कराती है| इन्ही पेशिर्ों को क
ं काली पेशिर्ाँ कहते है|
(18)
ऊत्तक
06
थिकनग पेशियाँ (Smooth Muscles): क
ु छ पेशिर्ाँ शजनकी गतत पर हमारा तनर्ंिण नहीं होता
है, र्े स्वत: गतत करती है| ऐसी पेिी अनैच्छच्छक पेिी होती है जो िरीर क
े क
ु छ अंगों में स्वत: प्रसार
एवं संक
ु चन का काम करते हैं| धचकनी पेशिर्ाँ कहलाती हैं| उदाहरण -
ऐसी पेशिर्ाँ आँख की पलक, मुिवाहहनी, आँत और फ
े फड़ों की श्वासनली आकद में पार्ा जाताहै|
ह्रदय पेशियाँ (Cardiac Muscles):
ह्रदर् पेशिर्ाँ जीवन भर संक
ु चन एवं प्रसार का कार्य करती है, र्े अनैच्छच्छक होती है| इन्हें कार्डडर्क
र्ा ह्रदर् पेिी कहा जाता है|
तांविका उत्तक (Nervous Tissues):
मस्तिष्क, मेरुरज्जु तथा तंत्रिकाएँ एक वविेष प्रकार क
े उतकों से बना होता है शजन्हें तंत्रिका उतक
कहते है|
तांविका उत्तक का कायष (Functions of Nervous Tissues):
(i) र्ह सूचनाओं को पुरे िरीर में एक स्थान से दुसरे स्थान तक पहुँचाती है|
(ii) र्ह पेशिर्ों में गतत कराने में सहार्ता करती है|
(iii) िरीर में उत्पन्न वैद्युत संक
े तों को मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं|
(19)
ऊत्तक
06
NCERT SOLUTIONS
प्रश्न (पृष्ठ सांख्या 77)
प्रश्न 1 ऊतक क्या है?
उत्तर- कोशिकाओं का वह समूह जो सरंचना में समान होती है और ककसी कार्य को एक साथ
धमलकर संपन्न करती है, उत्तक कहलाता है।
जैसे: रि, फ्लोएम, पेिी आकद उत्तक क
े उदाहरण है।
प्रश्न 2 बहुकोशिक जीवों में ऊतकों का क्या उपर्ोग है?
उत्तर- बहुकोशिक जीवों में ऊतक संरचनात्मक िक्ति तथा र्ांत्रिक िक्ति प्रदान करते हैं, श्रम
ववभाजन करते हैं तथा अधिकतम दक्षता क
े साथ कार्य कर सकने क
े शलए एक ववशिष्ट िम में
व्यवस्तस्थत होते हैं।
प्रश्न (पृष्ठ सांख्या 83)
प्रश्न 1 सरल ऊतकों क
े ककतने प्रकार हैं?
उत्तर- सरल ऊतकों क
े तीन प्रकार हैं-
a. मृदूतक
b. स्थूलकोण ऊतक
c. दृढ़ ऊतक।
(20)
ऊत्तक
06
प्रश्न 2 प्ररोह का िीषयस्थ ववभज्योतक कहाँ पार्ा जाता है?
उत्तर- प्ररोह का िीषयस्थ ववभज्योतक जड़ों एवं तनों की वृशि वाले भाग में ववद्यमान रहता है तथा
वह इनकी लंबाई में वृशि करता है।
प्रश्न 3 नाररर्ल का रेिा ककस ऊतक का बना होता है?
उत्तर- नाररर्ल का रेिा स्क
े लेरेनकाइमा उत्तक का बना होता है।
प्रश्न 4 फ्लोएम क
े संघटक कौन-कौन से हैं?
(21)
ऊत्तक
06
उत्तर- फ्लोएम पाँच प्रकार क
े संघटकों-चालनी कोशिका, चालनी नशलका (Sieve tube), साथी
कोशिकाएँ (Companion cells), फ्लोएम पैरेन्काइमा तथा फ्लोएम रेिों (Phloem fibres) से
धमलकर बना।
प्रश्न (पृष्ठ सांख्या 87)
प्रश्न 1 उस ऊतक का नाम बताएँ जो हमारे िरीर में गतत क
े शलए उत्तरदार्ी है।
उत्तर- पेिीर् ऊतक (Muscular Tissue)
प्रश्न 2 न्यूरॉन देखने में क
ै सा लगता है?
उत्तर- तंत्रिका ऊतक की कोशिकाओं को न्यूरॉन कहा जाता है। न्यूरॉन में कोशिकाएँ क
े न्द्रक तथा
साइटोप्लाज्म होते हैं। इससे लम्बे, पतले बालों जैसी िाखाएँ तनकली होती हैं। प्रार्ः प्रत्येक न्यूरॉन
में इस तरह का एक लम्बा प्रविय होता है, शजसे एक्सॉन कहते हैं और बहुत सारी छोटी िाखा वाले
प्रविू को डेन्डराइट्स कहते हैं। एक तंत्रिका कोशिका एक मीटर लम्बी हो सकती है।
प्रश्न 3 हृदर् पेिी क
े तीन लक्षणों को बताएँ।
उत्तर- ह्रदर् पेिी क
े तीन लक्षण तनम्नशलझखत हैं-
• हृदर् की पेशिर्ाँ जीवन भर लर्बि होकर प्रसार एवं संक
ु चन करती रहती हैं।
(22)
ऊत्तक
06
• र्े पेशिर्ाँ अनैच्छच्छक होती है जो तबना थक
े कार्य करती रहती हैं।
• हृदर् की पेिी कोशिकाएँ बेलनाकार, िाखाओं वाली और एक-क
ें द्रकीर् होती हैं।
प्रश्न 4 एररओलर ऊतक क
े क्या कार्य हैं?
उत्तर- एररओलर ऊतक क
े कार्य-
र्ह आंतररक अंगों को सहारा प्रदान करता है।
र्ह अंगों क
े भीतर खाली जगह को भरता है और ऊतकों की मरम्मत में सहार्ता करता है।
अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ सांख्या 87)
प्रश्न 1 ऊतक को पररभापषत करें।
उत्तर- कोशिकाओं का वह समूह जो सरंचना में समान होती है और ककसी कार्य को एक साथ
धमलकर संपन्न करती है, उत्तक कहलाता है।
जैसे: रि, फ्लोएम, पेिी आकद उत्तक क
े उदाहरण है।
प्रश्न 2 ककतने प्रकार क
े तत्व धमलकर जाइलम ऊतक का तनमायण करते हैं? उनक
े नाम बताएँ।
उत्तर- जाइलम ऊतक चार प्रकार क
े तत्व (कोशिकाओं) से धमलकर बने होते हैं-
a. वाहहतनका (जाइलम टैकीड्)
b. वाहहका (Vessels)
c. जाइलम पैरेन्काइमा और
d. जाइलम फाइबर (रेिे) (Xylem fibres)
(23)
ऊत्तक
06
प्रश्न 3 पौिों में सरल ऊतक जहटल ऊतक से ककस प्रकार धभन्न होते हैं?
उत्तर-
क्र. सरल ऊतक जटटल ऊतक
1. इन ऊतकों में क
े वल एक प्रकार की
कोशिकाएँ होती हैं।
र्े ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से
बने होते हैं।
2. इनक
े कोशिकाओं की संरचना
लगभग एक समान होती हैं तथा वे
एक समान कार्य करते हैं।
ववधभन्न प्रकार की कोशिकाएँ अलग-अलग कार्य
करते हैं। उदाहरण क
े शलए- टरैकीड् क
े द्वारा पानी का
संवहन होता है जबकक पैरेन्काइमा भोजन का संग्रह
करता है।
3. सरल ऊतक तीन प्रकार क
े हैं-
पैरेन्काइमा ऊतक, कॉलेन्काइमा
ऊतक, स्क्लेरेन्काइमा ऊतक।
पौिों में जहटल ऊतक दो प्रकार क
े होते हैं- ज़ाइलम
तथा फ़्लोएम।
प्रश्न 4 कोशिका धभशत्त क
े आिार पर पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा और स्क्लेरेन्काइमा क
े बीच भेद
स्पष्ट करें।
उत्तर-
क्र. पैरेन्काइमा
(मृदूतक)
कॉलेन्काइमा (स्थूलकोणोंतक) स्क्क्लेरेन्काइमा (दृढ़ोतक)
(24)
ऊत्तक
06
1. इनकी कोशिका
धभशत्त पतली और
कोशिकाएँ समान
होती है।
इनकी कोशिका धभशत्त ककनारों पर
सेल्यूलोज़ व पैच्छिन क
े जमाव
क
े कारण कठोर है।
इनकी कोशिका धभशत्त शलग्निन
क
े जमने क
े कारण कठोर होती
है।
2. साइटोप्लाज्म
कोशिका द्रव्य सदैव
पार्ा जाता है।
इनमे भी कोशिका द्रव्य पार्ा जाता
है।
इनकी धभशत्त मोटी हो जाती है
अतः सामान्यता र्े कोशिका द्रव्य
से वंधचत होती है।
3. र्े कोशिकाएँ सजीव
होती है।
र्े कोशिकाएँ भी सजीव होती है। र्े कोशिकाएँ सामान्यतर्ा
मृत होती है।
4. इनक
े बीच
अंतराकोशिकीर्
स्थान पार्ा जाता
है।
इनमें अंतराकोशिकीर् स्थान
अनुपस्तस्थत होता है।
इन कोशिकाओं क
े बीच
में अंतराकोशिकीर् स्थान
अनुपस्तस्थत होता है।
प्रश्न 5 रंध्र (Stomata) क
े क्या कार्य हैं?
उत्तर- रंध्र का कार्य (Functions of stomata):
• वाष्पोत्सजयन की किर्ा भी स्टोमेटा क
े द्वारा होती है।
• गैसों का आदान-प्रदान भी स्टोमेटा क
े द्वारा ही होता हैं।
प्रश्न 6 तीनों प्रकार क
े पेिीर् रेिों में धचि बनाकर अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर- तीनो प्रकार क
े पेिीर् रेिो में अन्तर:
(25)
ऊत्तक
06
प्रश्न 7 कार्डडर्क (हृदर्क) पेिी का वविेष कार्य क्या है?
उत्तर- कार्डडर्क पेिी क
े वविेष कार्य-
• हृदर् की पेशिर्ाँ जीवनभर लर्बि होकर प्रसार एवं संक
ु चन करती रहती हैं।
• लर्बि प्रसार और संक
ु चन हृदर् की पग्नपिंग किर्ा में सहार्ता करता है तथा रि संपूणय
िरीर में गतत करता है।
प्रश्न 8 रेझखत, अरेझखत तथा कार्डडर्क (हृदर्क) पेशिर्ों में िरीर में स्तस्थत कार्य और स्थान क
े आिार
पर अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-
क्र. रेखित या ऐस्थिक अरेखित या अनैस्थिक हृदय पेिग
1. इस ऊतक की कोशिकाएँ
लंबी, बेलनाकार तथा
अिाझखत होती हैं।
इस ऊतक की कोशिकाएँ
लंबी, तुक
ुय रूपी व िाझखत होती
हैं।
कोशिकाएँ बेलनाकार तथा िाझखत
होती हैं।
(26)
ऊत्तक
06
2. इस पर हल्क
े व गहरे रंग
क
े बंि एकान्तर िम में
उपस्तस्थत होते हैं।
इन पर कोई बंि नहीं
होते इसीशलए इन्हें अरेझखत
पेिी ऊतक कहते हैं।
इनक
े आरपार बंि बहुत
हल्क
े (कम गहरे) होते हैं।
3. इनमें बहुत सारे क
े न्द्रक
होते हैं जो पेिी क
े बाहर
की ओर स्तस्थत होते हैं।
इन कोशिकाओ क
े
अंदर मध्य भाग में स्तस्थत एक
क
े न्द्रक होता है।
प्रत्येक कोशिका क
े मध्य एक
र्ा कभी-कभी दो क
े न्द्रक भी होते।
होते हैं।
4. र्े पेशिर्ाँ हमारी
इच्छानुसार कार्य करती हैं।
र्े पेशिर्ाँ हमारी इच्छा क
े
अनुसार कार्य नहीं करती हैं।
र्े पेशिर्ाँ भी हमारी इच्छा
क
े अनुसार कार्य नहीं करती हैं।
5. र्े पेशिर्ाँ हपिर्ों क
े साथ
जुड़ी होती हैं और िरीर की
गतत में सहार्ता करती हैं।
र्े पेशिर्ाँ हमारे िरीर क
े
अन्दर आमािर्, मिवाहहनी
आकद अंगों की धभशत्त में होती
हैं।
सामान्य पररस्तस्थतत में
लर्बि संक
ु चन व प्रसार करती हैं
इसी से िरीर में रुधिर का पररवहन
होता है।
प्रश्न 9 न्यूरॉन का एक धचपित धचि बनाएँ।
उत्तर-
प्रश्न 10 तनम्नशलझखत क
े नाम शलखें-
(a) ऊतक जो मुँह क
े भीतर अिर का तनमायण करता है।
(27)
ऊत्तक
06
(b) ऊतक जो मनुष्य की पेशिर्ों को अस्तस्थ से जोड़ता है।
(c) ऊतक जो पौिों में भोजन को संवहन करता है।
(d) ऊतक जो हमारे िरीर में वसा का संचर् करता है।
(e) तरल आिािी सहहत संर्ोजन ऊतक।
(f) मस्तिष्क में स्तस्थत ऊतक।
उत्तर-
(a) सरल िल्की एपपथेशलर्म।
(b) कांडरा।
(c) फ्लोएम।
(d) एकडपोस हटश्यू (वसामर् उत्तक)।
(e) रि।
(f)तंत्रिका उत्तक।
प्रश्न 11 तनम्नशलझखत में ऊतक क
े प्रकार की पहचान करें-
त्वचा, पौिे का वल्क, अस्तस्थ, वृक्कीर् नशलका अिर, संवहन, बंडल।
उत्तर- त्विा- िल्की एपपथीशलर्म ऊतक
पौधे का िल्क- सरल स्थार्ी ऊतक
अस्थस्थ- संर्ोजी ऊतक
िृक्कीय नशलका अस्तर- घनाकार एपपथीशलर्म ऊतक
सांिहन ांडल- जहटल स्थार्ी ऊतक
(28)
ऊत्तक
06
प्रश्न 12 पैरेन्काइमा ऊतक ककस क्षेि में स्तस्थत होते हैं?
उत्तर- पैरेन्काइमा (मृदूतक) पौिों क
े नमय, कोमल, जीववत भागों में पार्े जाते है। र्े भोजन का
भंडारण करने तथा जलीर् पौिों को हल्कापन प्रदान करने का काम भी करते है। अतः पैरेन्काइमा
मुख्यतः पत्ती, फ
ू लों, फलों तथा हरे तनों एवं िाखाओं में पार्े जाते हैं।
प्रश्न 13 पौिों में एपपडर्ममस की क्या भूधमका है?
उत्तर- एपपडर्ममस की तनम्नशलझखत मुख्य भूधमकाएँ हैं-
• पौिों की पूरी सतह एपपडर्ममस से ढकी रहती हैं। र्ह पौिों क
े सभी भागों की रक्षा करती है।
• एपपडमयल कोशिका पौिों की बाह्य सतह पर प्रार्ः एक मोम जैसी जल प्रततरोिी परत बनाती
है। र्ह जल हातन क
े ववरुि र्ांत्रिक आघात तथा परजीवी कवक क
े प्रवेि से पौिों की रक्षा
करती है।
• पत्ती क
े एपपडर्ममस में छोटे-छोटे शछद्र होते हैं, शजन्हें स्टोमेटा (Stomata) कहते हैं। गैसों
का आदान-प्रदान तथा वाष्पोत्सजयन किर्ा इसक
े द्वारा होती है।
• मरुस्थलीर् पौिों की बाहरी सतह वाले एपपडर्ममस में क्यूहटन (एक जल अवरोिक
रासार्तनक पदाथय) होता है जो जल क
े अत्यधिक वाष्पीकरण (वाष्पण) को रोकता है।
• जड़ों की एपीडमयल कोशिकाएँ पानी को सोखने का कार्य करती हैं।
प्रश्न 14 छाल (कॉक
य ) ककस प्रकार सुरक्षा ऊतक क
े रूप में कार्य करता है?
उत्तर- कॉक
य एक सुरक्षा ऊतक की तरह कार्य करता है क्योंकक-
• इसकी कोशिकाएँ मृत होती हैं तथा तबना स्थान छोड़े लगातार परत बनाती हैं।
• इसकी धभशत्त पर सुबेररन जमा होता है जो इसे गैसों क
े आदान-प्रदान में सहार्ता करने र्ोग्य
बनाता है।
(29)
ऊत्तक
06
अतः कॉक
य ऊतकों की अत्यधिक पानी-हातन बाह्य वार्ुमंडल क
े प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करती है।
प्रश्न 15 तनम्न ताशलका को पूणय करें-
उत्तर-
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कक्षा 9 जीव विज्ञान, अध्‍याय 6: "ऊत्तक" (Tissues)

  • 1.
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  • 2.
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    (1) ऊत्तक 06 पादप उत्तक एक हीप्रकार की संरचना और कार्य करने वाले कोशिकाओं क े समूह को उत्तक कहते हैं| मुख्य व िंदु: • एक कोशिकीर् जीवों में, सभी मौशलक कार्य एक ही कोशिका द्वारा ककर्े जाते हैं| उदाहरण क े शलए अमीबा में एक ही कोशिका द्वारा गतत, भोजन लेने की किर्ा, श्वसन किर्ा और उत्सजयन किर्ा संपन्न की जाती है| • बहुकोशिकीर् जीवों में लाखों कोशिकाएँ होती हैं| इनमें से अधिकतर कोशिकाएँ क ु छ ही कार्ों को संपन्न करने में सक्षम होती हैं| इन जीवों में धभन्न-धभन्न कार्ों को करने क े शलए धभन्न-धभन्न कोशिकाओं का समूह होता हैं| • बहुकोशिकीर् जीवों में श्रम ववभाजन होता हैं| • िरीर क े अन्दर ऐसी कोशिकाएँ जो एक तरह क े कार्ों को करने में दक्ष होती है, सदैव एक समूह में होती हैं| • एक ही संरचना वाले कोशिकाओं का वह समूह जो िरीर क े ककसी तनशित स्थान ववशिष्ट कार्य करते है उत्तक कहलाते हैं| मनुष्य में: माांसपेशिय कोशिकाएँ: इसक े संक ु चन एवं प्रसार से िरीर में गतत होती है| तांविका कोशिकाएँ: र्ह संवेदनाओंको मस्तिष्क तक पहुँचाता है और मस्तिष्क से संदेिों को िरीर क े एनी भागों तक लाता हैं| रक्त कोशिकाएँ: र्ह ऑक्सीजन, भोजन, हारमोंस तथा अपशिष्ट पदाथों का वहन करता हैं| पौिों में: संवहन उतक भोजन एवं जल का चालन पौिे क े एक भाग से दुसरे भाग तक करते हैं| उत्तक (Tissue): एक ही प्रकार की संरचना और कार्य करने वाले कोशिकाओं क े समूह को उत्तक कहते हैं|
  • 4.
    (2) ऊत्तक 06 पादप उतक (PlantTissues): (i) पौिे स्तस्थर होते हैं - वे गतत नहीं करते हैं| क्योंकक र्े अपना भोजन एक स्थान पर स्तस्थर रह क े ही प्रकािसंश्लेषण की किर्ा द्वारा प्राप्त कर लेते हैं| (ii) उनक े अधिकांि उतक सहारा देने वाले होते है तथा पौिों को संरचनात्मक िक्ति प्रदान करते हैं| (iii) अधिकांि पादप ऊतक मृत होते हैं| र्े मृत ऊतक जीववत उतकों क े समान ही र्ांत्रिक िक्ति प्रदान करते हैं तथा उन्हें कम अनुरक्षण की आवश्यकता होती है| (iv) पौिों में वृशि क ु छ क्षेिों में ही ससधमत रहती है| (v) पौिों में क ु छ ऊतक जीवन भर ववभाशजत होते रहते हैं| र्े ऊतक पौिों क े क ु छ तनशित भाग में ही होते है| जो ऊतक क े ववभाशजत होने क े क्षमता पर आिाररत होता है| ववधभन्न प्रकार क े पादप उतकों को वृशि र्ा ववभोज्योतक ऊतक और स्थार्ी ऊतक क े रूप में वगीीक ृ त ककर्ा जा सकता है| जांतु ऊतक (Animal Tissues): (i) दूसरी ओर जंतु भोजन, जोड़ी, और आवास की तलाि में चारों ओर िूमते हैं| (ii) पौिों क े तुलना में जंतु अधिक ऊजाय खचय करते है| (iii) उतकों का अधिकांि भाग जीववत होता है| (iv) जंतुओं में कोशिकाओं की वृशि एकसमान होती है| इसशलए इनमें ववभाज्य और अववभाज्य क्षेिों की कोई तनशित सीमा नहीं होती है| पादपों में उतकों क े प्रकार (Type of Plant Tissue): (1) विभज्योतक ऊतक (MERISTEMATIC TISSUE): पौिों की वृशि क े वल उनक े क ु छ तनशित एवं वविेष भागों में ही होता है| ऐसा ववभाशजत होने वाले उतकों क े कारण ही होता है ऐसे ववभाशजत होने वाले ऊतक पौिों क े वृशि वाले भागों में ही स्तस्थत होते है| इस प्रकार क े ऊतक को ववभज्योतक ऊतक कहते है| विभज्योतक ऊतक का िर्गीकरण (Classification of Meristematic Tissue):
  • 5.
    (3) ऊत्तक 06 (A) िगर्षस्थ विभज्योतक(Apical Meristem): िीषयस्थ ववभज्योतक पौिों क े जड़ एवं तनों क े वृशि वाले भाग में ववद्यमान रहता है तथा र्ह उनकी लंबाई में वृशि करता है| (B) पार्श्ष विभज्योतक (Lateral Meristem): तने की पररधि र्ा मूल में वृशि पाश्वय ववभज्योतक क े कारण होती है| (C) अांतर्विष्ट विभज्योतक (Intercalary meristem): र्ह पशत्तर्ों क े आिार में र्ा टहनी क े पवय (internode) क े दोनों ओर उपस्तस्थत होते हैं| विभज्योतक ऊतक क े र्ुण (Properties Of Meristematic Tissue): (i) इस ऊतक की कोशिकाएँ अत्यधिक किर्ािील होती हैं| (ii) उनक े पास बहुत अधिक कोशिका द्रव्य, पतली कोशिका धभशत्त और स्पष्ट क े न्द्रक होते हैं| (iii) उनक े पास रस्िातनर्ाँ नहीं होती है| (2) स्थायग ऊतक (PERMANENT TISSUE): ववभज्योतक ऊतक वृशि कर आगे एक ववशिष्ट कार्य करती हैं और ववभाशजत होने की िक्ति खो देती है शजसक े फलस्वरूप वे स्थार्ी ऊतक का तनमायण करती हैं|
  • 6.
    (4) ऊत्तक 06 ववभज्योतक की कोशिकाएँववभाशजत होकर ववधभन्न प्रकार क े स्थार्ी उतकों का तनमायण करती हैं| पररभार्ा: कोशिकाएँ जो ववभेकदत होकर ववशिष्ट कार्य करती है और आगे ववभाशजत होने की िक्ति खो देती हैं इस प्रकार की ऊतक को स्थार्ी ऊतक कहते हैं| विभेदीकरण (Differentiation): उतकों द्वारा ववशिष्ट कार्य करने क े शलए स्थार्ी रूप और आकार लेने की किर्ा को ववभेदीकरण कहते हैं| स्थार्ी ऊतक क े प्रकार (Type of permanent tissue): (A) सरल स्थायग ऊतक (Simple permanent tissue): र्े एक ही प्रकार क े कोशिकाओं से बने होते हैं जो एक जैसे कदखाई देते हैं इस प्रकार क े ऊतक को सरल स्थार्ी ऊतक कहते हैं| उदाहरण: पैरेंकाइमा, कोलेन्काईमा और स्क े रेन्काइमा आकद| सरल स्थायग ऊतक क े प्रकार (Type of simple permanent tissues): (1) पैरेंकाइमा (Parenchyma): वे सरल स्थार्ी ऊतक शजसक े कोशिकाओं की क ु छ परतें आिारीर् पैकक िं ग का तनमायण करती हैं| इन्हें पैरेंकाइमा ऊतक कहते हैं| र्ुण (Features): (i) र्ह पतली कोशिका धभशत्त वाली सरल कोशिकाओं का बना होता है| (ii) र्े जीववत कोशिकाएँ होती है| (iii) र्े प्रार्: बंिन मुि होती हैं| (iv) इस प्रकार क े ऊतक की कोशिकाओं क े माध्य काफी ररि स्थान पार्ा जाता है| (v) र्ह ऊतक भोजन का भण्डारण करता है और पौिों को सहार्ता प्रदान करता है| (vi) जड़ एवं तनों की पैरेंकाइमा पोषक तत्व और जल का भी भण्डारण करती हैं| पैरेंकाइमा ऊतक क े प्रकार: (i) क्लोरेन्काइमा (Chlorenchyma): क ु छ अन्य पैरेंकाइमा शजनमें क्लोरोकफल पार्ा जाता है और र्े प्रकािसंश्लेषण की किर्ा करती हैं ऐसे पैरेंकाइमा को क्लोरेन्काइमा कहते हैं|
  • 7.
    (5) ऊत्तक 06 (ii) एरेनकाईमा (Aerenchyma):जलीर् पौिों में पैरेंकाइमा की कोशिकाओं क े मध्य हवा की बड़ी गुहहकाएँ (cavities) होती हैं, जो पौिों को तैरने क े शलए उत्प्लावन बल (Buoyancy) प्रदान करती हैं| इस प्रकार क े पैरेंकाइमा को एरेनकाईमा कहते हैं| (2) कोलेन्काईमा (Collenchyma): This र्ह एक अन्य प्रकार की सरल स्थार्ी ऊतक शजसक े कारण पौिों में लचीलापन होता है| र्ह पौिों क े ववधभन्न भागों जैसे- पत्ती एवं तना में तबना टूटे हुए लचीलापन लाता है| ऐसे ऊतक को कोलेन्काइमा कहते है| र्ुण (Features): (i) र्ह पौिों क े पत्तीर्ों एवं तनों में लचीलापन लाता है| (ii) र्ह पौिों को र्ांत्रिक सहार्ता भी प्रदान करता है| (iii) इस ऊतक की कोशिकाएँ जीववत, लंबी, और अतनर्धमत ढंग से कोनों पर मोटी होती हैं| (iv) कोशिकाओं क े बीच कम स्थान होता है| हम इस ऊतक को एपपडर्ममस क े नीचे पणयवृत में पा सकते हैं| (3) स्क े रेनकाईमा (sclerenchyma): र्ह एक अन्य प्रकार का सरल स्थाई ऊतक है जो पौिों को कठोर एवं मजबूत बनाता है| इस प्रकार क े सरल स्थार्ी ऊतक को स्क े रेन्काइमा कहते है| उदाहरण: नाररर्ल क े शछलक े | र्े ऊतक तने में, संवहन बण्डल क े समीप, पत्तों की शिराओं में तथा बीजों और फलों क े कठोर शछलक े में उपस्तस्थत होता है| र्ुण (Features): (i) इस ऊतक की कोशिकाएँ मृत होती हैं| (ii) र्े लंबी एवं पतली होती है क्योंकक इस ऊतक की भीतत शलग्निन क े कारण मोटी होती है| (iii) र्े धभशत्तर्ाँ प्रार्: इतनी मोटी होती हैं कक कोशिका क े भीतर कोई आंतररक स्थान नहीं होता है| (iv) र्ह पौिों क े भागों को मजबूती प्रदान करता है|
  • 8.
    (6) ऊत्तक 06 शलग्निन (Lignin): शलग्निनकोशिकाओं को दृढ बनाने क े शलए सीमेंट का कार्य करने वाला एक रासार्तनक पदाथय है| पैरेंकाइमा, कोलेन्काईमा और स्क्लेरेन्काइमा क े बीच अंतर: Differentiation among Parenchyma, collenchymas and Sclerenchyma: पैरेंकाइमा कोलेन्काईमा स्क्लेरेन्काइमा 1. र्े जीववत कोशिकाएँ होती हैं| 2. कोशिका धभशत्त पतली होती हैं| 3. इनकी कोशिकाओं क े बीच काफी ररि स्थान होता है| 4. र्ह ऊतक भोजन का भण्डारण करता है और पौिों को सहार्ता प्रदान करता है| 1. र्े जीववत कोशिकाएँ होती हैं| 2. कोशिका धभशत्त मोटी होती है| 3. अंतरकोशिकीर् अवकाि उपस्तस्थत होती है| 4. र्ह पौिों र्ांत्रिक सहार्ता प्रदान करता है| 1. र्े मृत कोशिकाएँ होती हैं| 2. कोशिका धभशत्त मोटी होती है| 3. अंतरकोशिकीर् अवकाि अनुपस्तस्थत होती है| 4. र्ह पौिों क े भागों को मजबूती प्रदान करता है| एपपडर्ममस (Epidermis) कोशिकाओं की सबसे बाहरी परत को एपपडर्ममस कहते हैं| समान्यत: र्ह कोशिकाओं की एक परत की बनी होती हैं| िुष्क स्थानों पर धमलने वाले पौिों में एपपडर्ममस मोटी हो सकती है| क्योंकक एपीडमयल कोशिकाओं का उत्तरदातर्त्व रक्षा करने का है, अत: इसकी कोशिकाएँ तबना ककसी अंतकोशिकीर् स्थान क े अशछन्न परत बनाती हैं| अधिकांि एपीडमयल कोशिकाएँ अपेक्षाक ृ त चपटी होती हैं| सामान्यत: उनकी बाह्य तथा पाश्वय धभशत्तर्ाँ उनकी आंतररक धभशत्तर्ों से मोटी होती हैं|
  • 9.
    (7) ऊत्तक 06 र्ुण (Features) (i) र्हजल की हातन कम करक े पादपों की रक्षा करती हैं| (ii) र्ह पौिे क े सभी भागों की रक्षा करती है क्योंकक पौिे की पूरी सतह एपपडर्ममस से ढकी रहती है| (iii) जड़ों की एपीडमयल कोशिकाएँ पानी को सोंखने का कार्य करती हैं| (iv) एपीडमयल कोशिका पौिों की बाह्य सतह पर प्रार्: एक मोम जैसी जल प्रततरोिी परत बनाती है| (v) र्ह जल प्रततरोिी परत, जल क े हातन क े ववरुि र्ांत्रिक आिात तथा परजीवी कवक क े प्रवेि से पौिों की रक्षा करती है| पौधों में एपपडर्ममस का कायष (Functions Of Epidermis in plants): (i) र्ह जल की हातन कम करक े पादपों की रक्षा करती हैं| (ii) र्ह जल प्रततरोिी परत, जल क े हातन क े ववरुि र्ांत्रिक आिात तथा परजीवी कवक क े प्रवेि से पौिों की रक्षा करती है| (iii) इसकी जेली जैसी पदाथय जल प्रततरोिी परत का तनमायण करती है| (iv) जड़ों की एपीडमयल कोशिकाएँ पानी को सोंखने का कार्य करती हैं| जड़ों में एपपडर्ममस का कायष (Functions of Epidermis in roots) जड़ों की एपीडमयल कोशिकाएँ पानी को सोंखने का कार्य करती हैं| सािारणत: उनमें बाल जैसे प्रवियन होते हैं, शजससे जड़ों की क ु ल अविोषण सतह बढ़ जाती है तथा उनकी पानी सोंखने की क्षमता में वृशि होती है| मरुस्थलगय पौधों में एपपडर्ममस की भूममका (Role of Epidermis in Desert Plants): मरुस्थलीर् पौिों की बाहरी सतह वाले एपपडर्ममस में क्यूटीन नामक रासार्तनक पदाथय ला लेप होता है जो जल अवरोिक का कार्य करता है| मरुस्थलीर् पौिों को जल की अधिक आवश्यकता होती है र्ह रासार्तनक पदाथय बाहरी परत से जल क े ह्रास को रोकता है|
  • 10.
    (8) ऊत्तक 06 क्यूटगन (Cutin): र्हएक रासार्तनक पदाथय है शजसमें जल अवरोिक का गुण होता है| र्ह मुख्यत: मरुस्थलीर् पौिों की एपपडर्ममस में पार्ा जाता है| सु ेररन (Suberin): सुबररन एक रासार्तनक पदाथय है जो वृक्ष क े बाहरी सुरक्षात्मक परत र्ा वृक्षों क े छालों में पार्ा जाता है और र्ह इन छालों को जल और वार्ु क े शलए अभेद बनाता है| रांध्र (Stomata): पशत्तर्ों की सतह पर बहुत सी ब्बहुत सी छोटी छोटी शछद्र पाए जाते है इन छोटी- छोटी शछद्रों को रंध्र कहते हैं| रक्षग कोशिकाएँ: स्टोमेटा को दो वृक्क क े आकार की कोशिकाएँ घेरे रहती हैं, शजन्हें रक्षी कोशिकाएँ कहते हैं| र्े कोशिकाएँ वार्ुमंडल से गैसों का आदान-प्रदान करने क े शलए आवश्यक हैं| रक्षक परत (Protective Layer): जैसे-जैसे वृक्ष की आर्ु बढती है, उसक े बाह्य सुरक्षात्मक उतकों में क ु छ पररवतयन होता है| एक दुसरे ववभज्योतक की पट्टी ताने क े एपपडर्ममस का स्थान ले लेती है| बाहरी सतह की कोशिकाएँ इस सतह से अलग हो जाती हैं| र्ह पौिों पर बहुत परतों वाली मोटी छल का तनमायण करती हैं| स्टोमेटा का कायष (Functions of stomata): (i) वाष्पोत्सजयन की किर्ा भी स्टोमेटा क े द्वारा होती है| (ii) गैसों का आदान-प्रदान भी स्टोमेटा क े द्वारा ही होता हैं| िाष्पोत्सजषन (Transpiration): Thisजल वाष्प क े रूप में जल का ह्रास होने की प्रकिर्ा को वाष्पोत्सजयन कहते हैं| रक्षग कोशिकाओां का कायष (Function of guard Cells): रक्षी कोशिकाएँ वार्ुमंडल से गैसों का आदान-प्रदान करने क े शलए आवश्यक है| जहटल स्थार्ी ऊतक (B) जटटल स्थायग ऊतक (Complex permanent Tissue): जहटल ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से धमलकर बने होते हैं और र्े सभी एक साथ धमलकर एक इकाई की तरह कार्य करते हैं|
  • 11.
    (9) ऊत्तक 06 उदाहरण: जाइलेम औरफ्लोएम आकद| • र्े दोनों जाइलेम और फ्लोएम संवहन ऊतक हैं और र्े धमलकर संवहन बण्डल का तनमायण करते हैं| • र्ह ऊतक बड़े पौिों की एक वविेषता है जो कक उनकों स्थलीर् वातावरण में रहने क े अनुक ू ल बनाती हैं| 1. जाइलेम (Xylem): जाइलेम एक संवहन ऊतक है और र्ह संवहन बंडल का तनमायण करता हैं| जाइलेम टरेककड्स (वहहतनका), वाहहका, जाइलेम पैरेंकाइमा और जाइलेम फाइबर से धमलकर बना है| जाइलेम फ्लोएम क े साथ धमलकर संवहन बण्डल का तनमायण करता है और पौिों को शलग्निन कोशिकाओं की उपस्तस्थतत क े कारण र्ांत्रिक मजबूती प्रदान करता है| जाइलेम का कायष (Function of xylem): (i) जाइलेम जड़ों द्वरा धमटटी से प्राप्त खतनज और जल को पौिों क े अन्य भागों तक पहुँचाता हैं| (ii) र्ह पौिों में सहारा देने क े साथ साथ भण्डारण और जड़ों से पोषक तत्व और जल को लंबी दुरी तक पौिों क े अन्य भागों तक पहुँचाती है| (iii) जाइलेम पदाथों को एक ही कदिा में ऊपर की ओर पररवहन करता है| (iv) र्ह पौिों को र्ांत्रिक मजबूती प्रदान करता हैं| जाइलेम क े घटक (Elements of xylem): (i) टरैककड्स (Tracheids): इसकी संरचना नाशलकाकर होती है और इसक े द्वारा पानी और खतनज लवण का उर्ध्ायिर संवहन होता है| र्े मृत होती हैं| (ii) वाहहका (Vessels): इसकी भी संरचना नाशलकाकर होती है और इसक े द्वारा पानी और खतनज लवण का उर्ध्ायिर संवहन होता है| र्े भी मृत होती हैं| (iii) जाइलेम पैरेंकाइमा (Xylem parenchyma): र्ह भोजन का संग्रहण करता है और र्ह ककनारे की ओर पानी क े पाश्वीीर् संवहन में मदद करता है|
  • 12.
    (10) ऊत्तक 06 (iv) जाइलेम फाइबर(Xylem fibres): मुख्यत: पौिों को सहारा देने का कार्य करता है| मृत कोशिकाएँ (Dead Cells): वाहहका, टरैककड्स और जाइलेम फाइबर| जगवित कोशिकाएँ (Live cells): जाइलेम पैरेंकाइमा| • संवहन और नशलकाकार घटक प्रार्: मृत होते हैं| 2. फ्लोएम (Phloem): फ्लोएम भी एक संवहन ऊतक है और र्ह संवहन बण्डल का तनमायण करता है| फ्लोएम चार प्रकार क े घटकों से धमलकर बना है| चालनी नशलका, साथी कोशिकाएँ, फ्लोएम पैरेंकाइमा तथा फ्लोएम रेिे से धमलकर बना है| फ्लोएम का कायष (Function of phloem): (i) फ्लोएम पौिों की पशत्तर्ों में प्रकाि संश्लेषण द्वारा बने भोजन को पौिों क े अन्य भाग तक पहुँचाता है| (ii) फ्लोएम जाइलेम क े असमान पदाथों को कोशिकाओं में दोनों कदिाओं में गतत करा सकते हैं| (iii) फ्लोएम का कोई र्ांत्रिक कार्य नहीं है| फ्लोएम क े घटक (Elements of phloem): (i) चालनी नशलका (Sieve tubes): चालनी नशलका शछपद्रत धभशत्त वाली तथा नाशलकाकर कोशिका होती है| र्े जीववत कोशिकाएँ होती है| (ii) साथी कोशिकाएँ (Companion cells): र्े जीववत कोशिकाएँ होती है| (iii) फ्लोएम रेिे (Phloem fibres): र्ह मृत कोशिकाएँ होती है| (iv) फ्लोएम पैरेंकाइमा (Phloem parenchyma): र्े जीववत कोशिकाएँ होती है| मृत कोशिकाएँ: फ्लोएम रेिे जीववत कोशिकाएँ: चालनी नशलका, साथी कोशिकाएँ और फ्लोएम पैरेंकाइमा| • संवहन कोशिकाएँ जीववत होती है|
  • 13.
    (11) ऊत्तक 06 स्थानाांतरण (Translocation): पौिोंक े पशत्तर्ों से वृशि वाले भाग और संग्रहण वाले अंगों तक भोजन और पोषक तत्व जैसे िक य रा और एधमनो अम्ल आकद का पररवहन होता है| पदाथो की इस प्रकार की गतत को स्थानान्तरण कहते है| जाइलेम एिां फ्लोएम में अांतर (Differences between xylem and phloem): जाइलेम फ्लोएम 1. र्ह जल और खतनज का पररवहन करता है| 2. र्ह पौिों को र्ांत्रिक सहार्ता प्रदान करता है| 3. जाइलेम संवहन बण्डल क े क ें द्र क े भरता है| 4. र्ह पदाथों को एक ही कदिा ऊपर की ओर गतत कराता है| 5. इसकी संवहन और नशलकाकार घटक मृत होते है| 1. र्ह िक य रा और एधमनो अम्ल का पररवहन करता है| 2. र्ह पौिों को र्ांत्रिक सहार्ता प्रदान नहीं करता है| 3. फ्लोएम संवहन बण्डल क े बाहरी भाग को घेरता है| 4. र्ह पदथों को दोनों कदिाओं ऊपर और नीचे गतत कराता है| 5. इसक े संवहन कोशिकाएँ जीववत होती है| जांतु ऊतक (Animal Tissues): जंतु कोशिकाओं से बने उतकों क े समूह को जंतु ऊतक कहते है| र्े चार प्रकार क े होते हैं| (1) एपपथेशलर्म ऊतक (2) संर्ोजी ऊतक (3) पेिीर् ऊतक (4) तंत्रिका ऊतक (1) एपपथेशलयम ऊतक (Epithelium Tissues):
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    (12) ऊत्तक 06 जंतु क े िरीरको ढकने र्ा बाह्य रक्षा प्रदान करने वाले ऊतक एपपथेशलर्म ऊतक कहलाता है| त्वचा, मुँह, आहारनली, रिवाहहनी नली का अिर, फ े फड़ें की क ु पपका, वृक्कीर् नली आकद सभी एपपथेशलर्म ऊतक से बने होते हैं| एपपथेशलयम ऊतक का कायष (Functions of Epithelium Tissues): (i) र्े िरीर क े अन्दर स्तस्थत बहुत से अंगों और गुहहकाओं (cavities) को ढकते हैं| (ii) र्े धभन्न-धभन्न प्रकार क े िारीररक तंिों को एक दुसरे से अलग करने क े शलए अवरोि का तनमायण करते है| (iii) र्े अनवरत (continuous) परत का तनमायण करती है| (iv) र्ह बाहरी वातावरण और िरीर क े ववधभन्न अंगो क े बीच पदाथों क े आदान-प्रदान में महत्वपूणय भूधमका तनभाती हैं| एपपथेशलयम ऊतक क े र्ुण (Features of Epithelium Tissues): (i) एपपथेशलर्म ऊतक की कोशिकाएँ एक दुसरे से सटी होती हैं| (ii) कोशिकाओं क े बीच काम स्थान होता है| (iii) िरीर में प्रवेि करने वाला र्ा िरीर से बाहर तनकलने वाला पदाथय एपपथेशलर्म की ककसी परत से होकर गुजरता है| (iv) ववधभन्न एपपथेशलर्म उतकों की संरचना धभन्न-धभन्न होती है| एपपथेशलयम उत्तक क े प्रकार (Types of Epithelium Tissues): (1) सरल िल्की एपपथेशलयम (Simple Squamous Epithelium): कोशिकाओं में रि नशलका अिर र्ा क ू पपका, जहाँपदाथों का संवहन वरणात्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा होता है, वहाँ पर चपटी एपपथीशलर्मी उत्तक कोशिकाएँ होती हैं। इनको सरल िल्की एपपथीशलर्म कहते हैं।
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    (13) ऊत्तक 06 र्ुण (Properties): (i) र्ेअत्यधिक पतली और चपटी होती हैं तथा कोमल अिर का तनमायण करती हैं। (ii) आहारनली तथा मुँह का अिर िल्की एपपथीशलर्म से ढका होता है। िरीर का रक्षात्मक कवच अथायत् त्वचा इन्हीं िल्की एपपथीशलर्म से बनी होती है। (2) स्तररत िल्की एपपथेशलयम (Stratified Squamous Epithelium): त्वचा की एपपथीशलर्मी कोशिकाएँ इनको कटने तथा फटने से बचाने क े शलए कई परतों में व्यवस्तस्थत होती हैं। चूँकक र्े कई परतों क े पैटनय में व्यवस्तस्थत होती हैं इसशलए इन एपपथीशलर्म को िररत िल्की एपपथीशलर्म कहते हैं।
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    (14) ऊत्तक 06 (3) स्तम्भाकार (पक्षमाभग)एपपथेशलयम (Columnar Epithelium): जहाँ अविोषण और स्राव होता है, जैसे आँत क े भीतरी अिर (lining) में, वहाँ लंबी एपपथीशलर्मी कोशिकाएँ मौजूद होती हैं। इस प्रकार क े एपपथेशलर्म को पक्षमाभी िंभाकार एपपथेशलर्म कहते है| कायष (Functions): (i) र्ह िंभाकार एपपथीशलर्म, एपपथीशलर्मी अवरोि् को पार करने में सहार्ता प्रदान करता है। (ii) श्वास नली में, िंभाकार एपपथीशलर्मी ऊतक में पक्ष्माभ (Cilia) होते हैं, जो कक एपपथीशलर्मी उत्तक की कोशिकाओं की सतह पर बाल जैसी रचनाएँ होती हैं। र्े पक्ष्माभ गतत कर सकते हैं तथा इनकी गतत श्लेष्मा को आगे स्थानांतररत करक े साफ करने में सहार्ता करती हैं। (4) घनाकार एपपथगशलयम (Cuboidal Epithelium): र्े एपपथेशलर्म उतक घनाकार होती हैं|
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    (15) ऊत्तक 06 कायष (Functions): (i) घनाकारएपपथीशलर्म वृक्कीर् नली तथा लार ग्रंधथ की नली क े अिर का तनमायण करता है, जहाँ र्ह उसे र्ांत्रिक सहारा प्रदान करता है। (ii) र्े एपपथीशलर्म कोशिकाएँ प्रार्ः ग्रंधथ कोशिका क े रूप में अततररि वविेषता अर्जजत करती हैं, जो एपपथीशलर्मी उत्तक की सतह पर पदाथों का स्राव कर सकती हैं। ग्रांथथल एपपथगशलयम (Grandular Epithelium): कभी-कभी एपपथीशलर्मी ऊतक का क ु छ भाग अंदर की ओर मुड़ा होता है तथा एक बहुकोशिक ग्रंधथ का तनमायण करता है। र्ह ग्रंधथल एपपथीशलर्म कहलाता है। संर्ोजी उत्तक, पेिीर् उतक और तंत्रिका उतक सांयोजग उत्तक (connective tissue): ऐसी कोशिकाएँ शजनकी कोशिकाए आपस में कम जुडी होती है और अंतरकोशिककर् आिािी में िंसी होती है। संर्ोजी उतक कहलाती हैं| रि , अस्तस्थ और उपास्तस्थ, स्नार्ु और क ं डरा संर्ोजी उतक क े उदाहरण है । रक्त (Blood): रि एक संर्ोजी उतक है जो पदाथों क े संवहन क े शलए एक माध्यम का कार्य करता है| र्ह गैसों जैसे ऑक्सीजन और काबयन डाइऑक्साइड आकद, िरीर क े पचे हुए भोजन, हाॅमोन और उत्सजीी पदाथों को िरीर क े एक भाग से दूसरे भाग में संवहन करता है। प्लाज्मा (Plasma): रि क े तरल आििााी भाग को प्लाज्मा कहते हैं| प्लाज्मा में लाल रि कोशिकाएँ (RBC), श्वेत रि कोशिकाएँ (WBC) तथा प्लेटलेट्स तनलंतबत होते हैं। प्लाज्मा में प्रोटीन, नमक तथा हामोन भी होते हैं। प्लाज्मा में तीन प्रकार की कोशिकाएँ पाई जाती हैं: (i) लाल रि कोशिकाएँ (RBC) (ii) श्वेत रि कोशिकाएँ (WBC) (iii) प्लेटलेट्स (Platelets)
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    (16) ऊत्तक 06 अस्थस्थ (Bone): र्हभी एक संर्ोजी उतक है| अस्थस्थ का कायष (The functions of Bone): (i) र्ह पंजर का तनमायण कर िरीर को आकार प्रदान करती है। (ii) र्ह मांसपेशिर्ों को सहारा देती है और िरीर क े मुख्य अंगों को सहारा देती है। (iii) र्ह ऊतक मजबूत और कठोर होता है। (iv) अस्तस्थ कोशिकाएँ कठोर आििााी में धंसी होती हैं, जो क ै क्तिर्म तथा फॉस्फोरस से बनी होती हैं। उपास्थस्थ (cartilage): एक अन्य प्रकार का संर्ोजी ऊतक होता है, शजसमें कोशिकाओं क े बीच पर्ायप्त स्थान होता है। इसकी ठोस आििााी प्रोटीन और िक य रा की बनी होती है। उपास्तस्थ नाक, कान, क ं ठ और श्वास नली में भी उपस्तस्थत होती है। (i) र्ह अस्तस्थर्ों क े जोड़ों को धचकना बनाती है। (ii) र्ह िरीर क े क ु छ वविेष अंगों को जैसे नाक, कान और वक्ष उपास्तस्थ (sternum) को आकार प्रदान करता है| स्नायु (Ligament): दो अस्तस्थर्ों को आपस में जोड़ने वाले एक अन्य संर्ोजी उतक शजसे स्नार्ु कहते है| इसे अस्तस्थ बंिान तंतु भी कहते हैं| र्ुण (Features): (i) र्ह ऊतक बहुत लचीला एवं मजबूत होता है। (ii) स्नार्ु में बहुत कम आििााी होती है। क ां डरा (tendon): क ं डरा भी एक अन्य प्रकार का संर्ोजी ऊतक है, जो अस्तस्थर्ों से मांसपेशिर्ों को जोड़ता है। र्ुण (Features): (i) क ं डरा मजबूत तथा सीधमत लचीलेपन वाले रेिेदार ऊतक होते हैं। (ii) र्ह अस्तस्थर्ों से मांसपेशिर्ों को जोड़ता है।
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    (17) ऊत्तक 06 एररओलर सांयोजग ऊतक(Areolar connective tissue): एररओलर संर्ोजी ऊतक त्वचा और मांसपेशिर्ों क े बीच, रि नशलका क े चारों ओर तथा नसों और अस्तस्थ मज्जा में पार्ा जाता है। कायष (functions): (i) र्ह अंगों क े भीतर की खाली जगह को भरता है, (ii) आंतररक अंगों को सहारा प्रदान करता है| (iii) ऊतकों की मरम्मत में सहार्ता करता है। िसामय ऊतक (Adipose Tissue): वसा का संग्रह करने वाला वसामर् ऊतक त्वचा क े नीचे आंतररक अंगों क े बीच पार्ा जाता है। इस ऊतक की कोशिकाएँ वसा की गोशलकाओं से भरी होती हैं। वसा संग्रहहत होने क े कारण र्ह ऊष्मीर् क ू चालक का कार्य भी करता है। पेिगय उत्तक (Muscular Tissue): पेिीर् उत्तक लंबी कोशिकाओं का बना होता शजसे पेिीर् रेिा भी कहा जाता है जो हमारे िरीर में गतत कराता है| इन्हें पेिीर् उत्तक कहते है| पेिीर् उत्तक का कार्य (Functions of Muscular Tissues): (i) पेिीर् उत्तक ें हमारे िरीर में गतत कराती हैं| (ii) र्ह अस्तस्थर्ों को बाँि कर रखता है| पेशिर्ों में संक ु चन एवं प्रसार का कारण: पेशिर्ों में एक वविेष प्रकार का प्रोटीन होता है शजसे ससक ु ड़ने वाला प्रोटीन कहते है| इसी प्रोटीन क े संक ु चन एवं प्रसार क े कारण गतत होती है| एस्थिक पेिग (Voluntary Muscles): ऐसी पेशिर्ाँ शजन्हें हम अपनी इच्छानुसार गतत करा सकते है र्ा उनकी गतत को रोक सकते हैं| ऐच्छच्छक पेशिर्ाँ कहलाती है| क ां काल पेिग (Skeletal Muscles): ऐच्छच्छक पेशिर्ाँ जो अस्तस्थर्ों से जुडी रहती है और इनमें गतत कराती है| इन्ही पेशिर्ों को क ं काली पेशिर्ाँ कहते है|
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    (18) ऊत्तक 06 थिकनग पेशियाँ (SmoothMuscles): क ु छ पेशिर्ाँ शजनकी गतत पर हमारा तनर्ंिण नहीं होता है, र्े स्वत: गतत करती है| ऐसी पेिी अनैच्छच्छक पेिी होती है जो िरीर क े क ु छ अंगों में स्वत: प्रसार एवं संक ु चन का काम करते हैं| धचकनी पेशिर्ाँ कहलाती हैं| उदाहरण - ऐसी पेशिर्ाँ आँख की पलक, मुिवाहहनी, आँत और फ े फड़ों की श्वासनली आकद में पार्ा जाताहै| ह्रदय पेशियाँ (Cardiac Muscles): ह्रदर् पेशिर्ाँ जीवन भर संक ु चन एवं प्रसार का कार्य करती है, र्े अनैच्छच्छक होती है| इन्हें कार्डडर्क र्ा ह्रदर् पेिी कहा जाता है| तांविका उत्तक (Nervous Tissues): मस्तिष्क, मेरुरज्जु तथा तंत्रिकाएँ एक वविेष प्रकार क े उतकों से बना होता है शजन्हें तंत्रिका उतक कहते है| तांविका उत्तक का कायष (Functions of Nervous Tissues): (i) र्ह सूचनाओं को पुरे िरीर में एक स्थान से दुसरे स्थान तक पहुँचाती है| (ii) र्ह पेशिर्ों में गतत कराने में सहार्ता करती है| (iii) िरीर में उत्पन्न वैद्युत संक े तों को मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं|
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    (19) ऊत्तक 06 NCERT SOLUTIONS प्रश्न (पृष्ठसांख्या 77) प्रश्न 1 ऊतक क्या है? उत्तर- कोशिकाओं का वह समूह जो सरंचना में समान होती है और ककसी कार्य को एक साथ धमलकर संपन्न करती है, उत्तक कहलाता है। जैसे: रि, फ्लोएम, पेिी आकद उत्तक क े उदाहरण है। प्रश्न 2 बहुकोशिक जीवों में ऊतकों का क्या उपर्ोग है? उत्तर- बहुकोशिक जीवों में ऊतक संरचनात्मक िक्ति तथा र्ांत्रिक िक्ति प्रदान करते हैं, श्रम ववभाजन करते हैं तथा अधिकतम दक्षता क े साथ कार्य कर सकने क े शलए एक ववशिष्ट िम में व्यवस्तस्थत होते हैं। प्रश्न (पृष्ठ सांख्या 83) प्रश्न 1 सरल ऊतकों क े ककतने प्रकार हैं? उत्तर- सरल ऊतकों क े तीन प्रकार हैं- a. मृदूतक b. स्थूलकोण ऊतक c. दृढ़ ऊतक।
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    (20) ऊत्तक 06 प्रश्न 2 प्ररोहका िीषयस्थ ववभज्योतक कहाँ पार्ा जाता है? उत्तर- प्ररोह का िीषयस्थ ववभज्योतक जड़ों एवं तनों की वृशि वाले भाग में ववद्यमान रहता है तथा वह इनकी लंबाई में वृशि करता है। प्रश्न 3 नाररर्ल का रेिा ककस ऊतक का बना होता है? उत्तर- नाररर्ल का रेिा स्क े लेरेनकाइमा उत्तक का बना होता है। प्रश्न 4 फ्लोएम क े संघटक कौन-कौन से हैं?
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    (21) ऊत्तक 06 उत्तर- फ्लोएम पाँचप्रकार क े संघटकों-चालनी कोशिका, चालनी नशलका (Sieve tube), साथी कोशिकाएँ (Companion cells), फ्लोएम पैरेन्काइमा तथा फ्लोएम रेिों (Phloem fibres) से धमलकर बना। प्रश्न (पृष्ठ सांख्या 87) प्रश्न 1 उस ऊतक का नाम बताएँ जो हमारे िरीर में गतत क े शलए उत्तरदार्ी है। उत्तर- पेिीर् ऊतक (Muscular Tissue) प्रश्न 2 न्यूरॉन देखने में क ै सा लगता है? उत्तर- तंत्रिका ऊतक की कोशिकाओं को न्यूरॉन कहा जाता है। न्यूरॉन में कोशिकाएँ क े न्द्रक तथा साइटोप्लाज्म होते हैं। इससे लम्बे, पतले बालों जैसी िाखाएँ तनकली होती हैं। प्रार्ः प्रत्येक न्यूरॉन में इस तरह का एक लम्बा प्रविय होता है, शजसे एक्सॉन कहते हैं और बहुत सारी छोटी िाखा वाले प्रविू को डेन्डराइट्स कहते हैं। एक तंत्रिका कोशिका एक मीटर लम्बी हो सकती है। प्रश्न 3 हृदर् पेिी क े तीन लक्षणों को बताएँ। उत्तर- ह्रदर् पेिी क े तीन लक्षण तनम्नशलझखत हैं- • हृदर् की पेशिर्ाँ जीवन भर लर्बि होकर प्रसार एवं संक ु चन करती रहती हैं।
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    (22) ऊत्तक 06 • र्े पेशिर्ाँअनैच्छच्छक होती है जो तबना थक े कार्य करती रहती हैं। • हृदर् की पेिी कोशिकाएँ बेलनाकार, िाखाओं वाली और एक-क ें द्रकीर् होती हैं। प्रश्न 4 एररओलर ऊतक क े क्या कार्य हैं? उत्तर- एररओलर ऊतक क े कार्य- र्ह आंतररक अंगों को सहारा प्रदान करता है। र्ह अंगों क े भीतर खाली जगह को भरता है और ऊतकों की मरम्मत में सहार्ता करता है। अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ सांख्या 87) प्रश्न 1 ऊतक को पररभापषत करें। उत्तर- कोशिकाओं का वह समूह जो सरंचना में समान होती है और ककसी कार्य को एक साथ धमलकर संपन्न करती है, उत्तक कहलाता है। जैसे: रि, फ्लोएम, पेिी आकद उत्तक क े उदाहरण है। प्रश्न 2 ककतने प्रकार क े तत्व धमलकर जाइलम ऊतक का तनमायण करते हैं? उनक े नाम बताएँ। उत्तर- जाइलम ऊतक चार प्रकार क े तत्व (कोशिकाओं) से धमलकर बने होते हैं- a. वाहहतनका (जाइलम टैकीड्) b. वाहहका (Vessels) c. जाइलम पैरेन्काइमा और d. जाइलम फाइबर (रेिे) (Xylem fibres)
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    (23) ऊत्तक 06 प्रश्न 3 पौिोंमें सरल ऊतक जहटल ऊतक से ककस प्रकार धभन्न होते हैं? उत्तर- क्र. सरल ऊतक जटटल ऊतक 1. इन ऊतकों में क े वल एक प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं। र्े ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं। 2. इनक े कोशिकाओं की संरचना लगभग एक समान होती हैं तथा वे एक समान कार्य करते हैं। ववधभन्न प्रकार की कोशिकाएँ अलग-अलग कार्य करते हैं। उदाहरण क े शलए- टरैकीड् क े द्वारा पानी का संवहन होता है जबकक पैरेन्काइमा भोजन का संग्रह करता है। 3. सरल ऊतक तीन प्रकार क े हैं- पैरेन्काइमा ऊतक, कॉलेन्काइमा ऊतक, स्क्लेरेन्काइमा ऊतक। पौिों में जहटल ऊतक दो प्रकार क े होते हैं- ज़ाइलम तथा फ़्लोएम। प्रश्न 4 कोशिका धभशत्त क े आिार पर पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा और स्क्लेरेन्काइमा क े बीच भेद स्पष्ट करें। उत्तर- क्र. पैरेन्काइमा (मृदूतक) कॉलेन्काइमा (स्थूलकोणोंतक) स्क्क्लेरेन्काइमा (दृढ़ोतक)
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    (24) ऊत्तक 06 1. इनकी कोशिका धभशत्तपतली और कोशिकाएँ समान होती है। इनकी कोशिका धभशत्त ककनारों पर सेल्यूलोज़ व पैच्छिन क े जमाव क े कारण कठोर है। इनकी कोशिका धभशत्त शलग्निन क े जमने क े कारण कठोर होती है। 2. साइटोप्लाज्म कोशिका द्रव्य सदैव पार्ा जाता है। इनमे भी कोशिका द्रव्य पार्ा जाता है। इनकी धभशत्त मोटी हो जाती है अतः सामान्यता र्े कोशिका द्रव्य से वंधचत होती है। 3. र्े कोशिकाएँ सजीव होती है। र्े कोशिकाएँ भी सजीव होती है। र्े कोशिकाएँ सामान्यतर्ा मृत होती है। 4. इनक े बीच अंतराकोशिकीर् स्थान पार्ा जाता है। इनमें अंतराकोशिकीर् स्थान अनुपस्तस्थत होता है। इन कोशिकाओं क े बीच में अंतराकोशिकीर् स्थान अनुपस्तस्थत होता है। प्रश्न 5 रंध्र (Stomata) क े क्या कार्य हैं? उत्तर- रंध्र का कार्य (Functions of stomata): • वाष्पोत्सजयन की किर्ा भी स्टोमेटा क े द्वारा होती है। • गैसों का आदान-प्रदान भी स्टोमेटा क े द्वारा ही होता हैं। प्रश्न 6 तीनों प्रकार क े पेिीर् रेिों में धचि बनाकर अंतर स्पष्ट करें। उत्तर- तीनो प्रकार क े पेिीर् रेिो में अन्तर:
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    (25) ऊत्तक 06 प्रश्न 7 कार्डडर्क(हृदर्क) पेिी का वविेष कार्य क्या है? उत्तर- कार्डडर्क पेिी क े वविेष कार्य- • हृदर् की पेशिर्ाँ जीवनभर लर्बि होकर प्रसार एवं संक ु चन करती रहती हैं। • लर्बि प्रसार और संक ु चन हृदर् की पग्नपिंग किर्ा में सहार्ता करता है तथा रि संपूणय िरीर में गतत करता है। प्रश्न 8 रेझखत, अरेझखत तथा कार्डडर्क (हृदर्क) पेशिर्ों में िरीर में स्तस्थत कार्य और स्थान क े आिार पर अंतर स्पष्ट करें। उत्तर- क्र. रेखित या ऐस्थिक अरेखित या अनैस्थिक हृदय पेिग 1. इस ऊतक की कोशिकाएँ लंबी, बेलनाकार तथा अिाझखत होती हैं। इस ऊतक की कोशिकाएँ लंबी, तुक ुय रूपी व िाझखत होती हैं। कोशिकाएँ बेलनाकार तथा िाझखत होती हैं।
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    (26) ऊत्तक 06 2. इस परहल्क े व गहरे रंग क े बंि एकान्तर िम में उपस्तस्थत होते हैं। इन पर कोई बंि नहीं होते इसीशलए इन्हें अरेझखत पेिी ऊतक कहते हैं। इनक े आरपार बंि बहुत हल्क े (कम गहरे) होते हैं। 3. इनमें बहुत सारे क े न्द्रक होते हैं जो पेिी क े बाहर की ओर स्तस्थत होते हैं। इन कोशिकाओ क े अंदर मध्य भाग में स्तस्थत एक क े न्द्रक होता है। प्रत्येक कोशिका क े मध्य एक र्ा कभी-कभी दो क े न्द्रक भी होते। होते हैं। 4. र्े पेशिर्ाँ हमारी इच्छानुसार कार्य करती हैं। र्े पेशिर्ाँ हमारी इच्छा क े अनुसार कार्य नहीं करती हैं। र्े पेशिर्ाँ भी हमारी इच्छा क े अनुसार कार्य नहीं करती हैं। 5. र्े पेशिर्ाँ हपिर्ों क े साथ जुड़ी होती हैं और िरीर की गतत में सहार्ता करती हैं। र्े पेशिर्ाँ हमारे िरीर क े अन्दर आमािर्, मिवाहहनी आकद अंगों की धभशत्त में होती हैं। सामान्य पररस्तस्थतत में लर्बि संक ु चन व प्रसार करती हैं इसी से िरीर में रुधिर का पररवहन होता है। प्रश्न 9 न्यूरॉन का एक धचपित धचि बनाएँ। उत्तर- प्रश्न 10 तनम्नशलझखत क े नाम शलखें- (a) ऊतक जो मुँह क े भीतर अिर का तनमायण करता है।
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    (27) ऊत्तक 06 (b) ऊतक जोमनुष्य की पेशिर्ों को अस्तस्थ से जोड़ता है। (c) ऊतक जो पौिों में भोजन को संवहन करता है। (d) ऊतक जो हमारे िरीर में वसा का संचर् करता है। (e) तरल आिािी सहहत संर्ोजन ऊतक। (f) मस्तिष्क में स्तस्थत ऊतक। उत्तर- (a) सरल िल्की एपपथेशलर्म। (b) कांडरा। (c) फ्लोएम। (d) एकडपोस हटश्यू (वसामर् उत्तक)। (e) रि। (f)तंत्रिका उत्तक। प्रश्न 11 तनम्नशलझखत में ऊतक क े प्रकार की पहचान करें- त्वचा, पौिे का वल्क, अस्तस्थ, वृक्कीर् नशलका अिर, संवहन, बंडल। उत्तर- त्विा- िल्की एपपथीशलर्म ऊतक पौधे का िल्क- सरल स्थार्ी ऊतक अस्थस्थ- संर्ोजी ऊतक िृक्कीय नशलका अस्तर- घनाकार एपपथीशलर्म ऊतक सांिहन ांडल- जहटल स्थार्ी ऊतक
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    (28) ऊत्तक 06 प्रश्न 12 पैरेन्काइमाऊतक ककस क्षेि में स्तस्थत होते हैं? उत्तर- पैरेन्काइमा (मृदूतक) पौिों क े नमय, कोमल, जीववत भागों में पार्े जाते है। र्े भोजन का भंडारण करने तथा जलीर् पौिों को हल्कापन प्रदान करने का काम भी करते है। अतः पैरेन्काइमा मुख्यतः पत्ती, फ ू लों, फलों तथा हरे तनों एवं िाखाओं में पार्े जाते हैं। प्रश्न 13 पौिों में एपपडर्ममस की क्या भूधमका है? उत्तर- एपपडर्ममस की तनम्नशलझखत मुख्य भूधमकाएँ हैं- • पौिों की पूरी सतह एपपडर्ममस से ढकी रहती हैं। र्ह पौिों क े सभी भागों की रक्षा करती है। • एपपडमयल कोशिका पौिों की बाह्य सतह पर प्रार्ः एक मोम जैसी जल प्रततरोिी परत बनाती है। र्ह जल हातन क े ववरुि र्ांत्रिक आघात तथा परजीवी कवक क े प्रवेि से पौिों की रक्षा करती है। • पत्ती क े एपपडर्ममस में छोटे-छोटे शछद्र होते हैं, शजन्हें स्टोमेटा (Stomata) कहते हैं। गैसों का आदान-प्रदान तथा वाष्पोत्सजयन किर्ा इसक े द्वारा होती है। • मरुस्थलीर् पौिों की बाहरी सतह वाले एपपडर्ममस में क्यूहटन (एक जल अवरोिक रासार्तनक पदाथय) होता है जो जल क े अत्यधिक वाष्पीकरण (वाष्पण) को रोकता है। • जड़ों की एपीडमयल कोशिकाएँ पानी को सोखने का कार्य करती हैं। प्रश्न 14 छाल (कॉक य ) ककस प्रकार सुरक्षा ऊतक क े रूप में कार्य करता है? उत्तर- कॉक य एक सुरक्षा ऊतक की तरह कार्य करता है क्योंकक- • इसकी कोशिकाएँ मृत होती हैं तथा तबना स्थान छोड़े लगातार परत बनाती हैं। • इसकी धभशत्त पर सुबेररन जमा होता है जो इसे गैसों क े आदान-प्रदान में सहार्ता करने र्ोग्य बनाता है।
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    (29) ऊत्तक 06 अतः कॉक य ऊतकोंकी अत्यधिक पानी-हातन बाह्य वार्ुमंडल क े प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करती है। प्रश्न 15 तनम्न ताशलका को पूणय करें- उत्तर-
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    Free and UnlimitedResources: Members enjoy the benefit of accessing an array of educational resources without any cost restrictions. Whether its study materials, teaching aids, or assessment tools, the group offers an abundance of resources tailored to individual needs. This accessibility ensures that educators and students have ample support in their academic endeavors without financial constraints. Instant Access to Educational Content: SOE WhatsApp groups are a platform where teachers can access a wide range of educational content instantly. This includes study materials, notes, sample papers, reference materials, and relevant links shared by group members and moderators. Timely Updates and Reminders: SOE WhatsApp groups serve as a source of timely updates and reminders about important dates, exam schedules, syllabus changes, and academic events. Teachers can stay informed and well-prepared for upcoming assessments and activities. Interactive Learning Environment: Teachers can engage in discussions, ask questions, and seek clarifications within the group, creating an interactive learning environment. This fosters collaboration, peer learning, and knowledge sharing among group members, enhancing understanding and retention of concepts. Access to Expert Guidance: SOE WhatsApp groups are moderated by subject matter experts, teachers, or experienced educators can benefit from their guidance, expertise, and insights on various academic topics, exam strategies, and study techniques. Join the School of Educators WhatsApp Group today and unlock a world of resources, support, and collaboration to take your teaching to new heights. To join, simply click on the group links provided below or send a message to +91-95208-77777 expressing your interest. Together, let's empower ourselves & Our Students and inspire the next generation of learners. Best Regards, Team School of Educators
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    Subject Wise Secondaryand Senior Secondary Groups (IX & X For Teachers Only) Secondary Groups (IX & X) Senior Secondary Groups (XI & XII For Teachers Only) SST Mathematics Science English Hindi-A IT Code-402 Physics Chemistry English Mathematics Economics Biology BST Accountancy History Hindi-B Artificial Intelligence
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    Hindi Core HomeScience Sanskrit Psychology Political Science Painting Vocal Music Comp. Science IP Physical Education APP. Mathematics Legal Studies Entrepreneurship French Teachers Jobs Principal’s Group IIT/NEET Other Important Groups (For Teachers & Principal’s) IT Sociology Hindi Elective Geography Artificial Intelligence
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    Join School ofEducators WhatsApp Groups You will get Pre- Board Papers PDF, Word file, PPT, Lesson Plan, Worksheet, practical tips and Viva questions, reference books, smart content, curriculum, syllabus, marking scheme, toppers answer scripts, revised exam pattern, revised syllabus, Blue Print etc. here . Join Your Subject / Class WhatsApp Group. Kindergarten to Class XII (For Students Only) Class 1 Class 2 Class 3 Class 4 Class 5 Class 6 Class 7 Class 8 Class 9 Class 10 Class 11 (Science) Class 11 (Humanities) Class 11 (Commerce) Class 12 (Commerce) Class 12 (Science) Class 12 (Humanities) Artificial Intelligence (VI TO VIII)
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    Subject Wise Secondaryand Senior Secondary Groups (IX & X For Students Only) Secondary Groups (IX & X) Senior Secondary Groups (XI & XII For Students Only) SST Mathematics Science English Hindi IT Code Physics Chemistry English Mathematics Economics Biology BST Accountancy History Artificial Intelligence
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    Hindi Core HomeScience Sanskrit Psychology Political Science Painting Music Comp. Science IP Physical Education APP. Mathematics Legal Studies Entrepreneurship French IT Sociology Hindi Elective Geography IIT/NEET AI CUET
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    To maximize thebenefits of these WhatsApp groups, follow these guidelines: 1. Share your valuable resources with the group. 2. Help your fellow educators by answering their queries. 3. Watch and engage with shared videos in the group. 4. Distribute WhatsApp group resources among your students. 5. Encourage your colleagues to join these groups. Additional notes: 1. Avoid posting messages between 9 PM and 7 AM. 2. After sharing resources with students, consider deleting outdated data if necessary. 3. It's a NO Nuisance groups, single nuisance and you will be removed. No introductions. No greetings or wish messages. No personal chats or messages. No spam. Or voice calls Share and seek learning resources only. Groups Rules & Regulations: Please only share and request learning resources. For assistance, contact the helpline via WhatsApp: +91-95208-77777.
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    Food Food PreservationBaking Herbal Heritage Khadi Mask Making Mass Media Making of a Graphic Novel Kashmiri Embroidery Embroidery Rockets Satellites Application of Satellites Photography
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    SKILL SUBJECTS ATSECONDARY LEVEL (CLASSES IX – X) Retail Information Technology Security Automotive Introduction To Financial Markets Introduction To Tourism Beauty & Wellness Agriculture Food Production Front Office Operations Banking & Insurance Marketing & Sales Health Care Apparel Multi Media Multi Skill Foundation Course Artificial Intelligence Physical Activity Trainer Data Science Electronics & Hardware (NEW) Design Thinking & Innovation (NEW) Foundation Skills For Sciences (Pharmaceutical & Biotechnology)(NEW)
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    SKILL SUBJECTS ATSR. SEC. LEVEL (CLASSES XI – XII) Retail InformationTechnology Web Application Automotive Financial Markets Management Tourism Beauty & Wellness Agriculture Food Production Front Office Operations Banking Marketing Health Care Insurance Horticulture Typography & Comp. Application Geospatial Technology Electrical Technology Electronic Technology Multi-Media
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    Taxation Cost AccountingOffice Procedures & Practices Shorthand (English) Shorthand (Hindi) Air-Conditioning & Refrigeration Medical Diagnostics Textile Design Design Salesmanship Business Administration Food Nutrition & Dietetics Mass Media Studies Library & Information Science Fashion Studies Applied Mathematics Yoga Early Childhood Care & Education Artificial Intelligence Data Science Physical Activity Trainer(new) Land Transportation Associate (NEW) Electronics & Hardware (NEW) Design Thinking & Innovation (NEW)
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    Join School ofEducators Signal Groups You will get Pre- Board Papers PDF, Word file, PPT, Lesson Plan, Worksheet, practical tips and Viva questions, reference books, smart content, curriculum, syllabus, marking scheme, toppers answer scripts, revised exam pattern, revised syllabus, Blue Print etc. here . Join Your Subject / Class signal Group. Kindergarten to Class XII Class 2 Class 3 Class 4 Class 5 Class 6 Class 7 Class 8 Class 9 Class 10 Class 1 Class 11 (Humanities) Class 11 (Science) Class 11 (Commerce) Class 12 (Science) Class 12 (Humanities) Class 12 (Commerce) Kindergarten Artifical intelligence
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    Subject Wise Secondaryand Senior Secondary Groups IX & X Secondary Groups (IX & X) SST Mathematics Science English Hindi-A IT Code-402 Hindi-B Senior Secondary Groups XI & XII Physics Chemistry English Mathematics Biology Accountancy Economics BST History IT Artifical intelligence
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    Geography Sociology HindiElective Hindi Core Home Science Sanskrit Psychology Political Science Painting Vocal Music Comp. Science IP Physical Education APP. Mathematics Legal Studies Entrepreneurship French Artifical intelligence CUET IIT/NEET
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    Join School ofEducators CBSE Telegram Groups Kindergarten All classes Class 1 Class 2 Class 3 Class 4 Class 5 Class 6 Class 7 Class 8 Class 9 Class 10 Class 11 (Sci) Class 11 (Com) Class 11 (Hum) Class 12 (Sci) Class 12 (Com) Class 12 (Hum) JEE/NEET CUET NDA, OLYMPIAD, NTSE Principal Professional Group Teachers Professional Group Project File Group
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