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शारीररक शशक्षा
अध्याय-2: ओलम्पिक आंदोलन
2
(1)
ओलम्पिक आंदोलन
02
ओलंपिक्स का इतिहास:-
प्राचीन समय में लगभग 776 ईसा पूर्व ग्रीस में ‘ ओल्मपपया नाम की जगह पर ईश्वर ज्यूस की
याद में धार्ममक उत्सर् मनाते थे। जजसमें सभी ग्रीस र्ासी एक जगह एकत्रित होकर अपनी एकता
और प्रततभा का प्रदर्वन करते थे।
इन खेलों का पुनः प्रर्तवन का श्रेय फाांस क
े पैरी, बी.डी . कोबरटीन को जाता है। इनक
े कठोर
पररश्रम की र्जह से ही आधुतनक ओलांपपक सांभर् हो सक
े इसीजलये इन्हें आधुतनक ओलांपपक खेलों
का जन्मदाता भी कहा जाता है।
सन् 1896 में एथेन्स ( ग्रीस ) में पहली बार आधुतनक ओलांपपक आयोजजत कराये गये। तब अब
तक हर चार साल बाद इन खेनों का आयोजन होता हैं।
िैराओलंपिक्स:-
पैराजलम्पिक खेल ओलांपपक खेलों क
े समानान्तर खेले जाते हैं। पैराजलम्पिक खेल अांतरावष्ट्र ीय
ओलांपपक सममतत ( IOC ) द्वारा मान्यता प्राप्त हैं जजनमें बौजिक वर्कलाांग एथलीट्स र्ाममल होते हैं
िैराशलम्पिक खेल:-
प्रथम र्रद ऋतु क
े पैराजलम्पिक खेल 1876 में स्वीडन में आयोजजत ककए गए थे। ये प्रथम
पैराजलम्पिक खेल थे जजनमें बहुश्रेजियों क
े वर्कलाांग एथलीटों ने भाग जलया। र्रद ऋतु क
े खेल
उसी र्र्व ही खेले जाते हैं जजस र्र्व ग्रीष्मकाल क
े खेल खेले जाते हैं।
पैराजलम्पिक खेलों में भाग लेने र्ाले एथलीटों की सांख्या रोम में 1960 क
े खेलों में 400 थी जो कक
बीजजिंग क
े 2008 क
े खेलों में बढ़कर 3900 हो गयी।
पैराजलम्पिक खेलों क
े प्रभुत्व में आने से पहले र्ारीररक रूप से अपांग एथलीट्स ओलांपपक खेलों में
भाग लेते थे। प्रथम अमधकाररक पैराजलम्पिक खेल 1960 में रोम में खेले गए जजनमें 23 देर्ों से
400 एथलीटों ने भाग जलया। ये खेल सबसे पहले क
े र्ल व्हील चेयर र्ाले एथलीटों क
े जलए ही होते
थे।
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ओलम्पिक आंदोलन
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तिशेष ओलंपिक्स:-
स्पेर्ल ओलांपपक भारत एक गैर – सरकारी सांस्था है जो कक ओलांपपक खेलों क
े साथ – साथ राज्य
स्तर, राष्ट्र ीय स्तर क
े खेलों का आयोजन करती है। इस सांस्था में प्रजर्क्षकों तथा कोचों की उपयुक्त
सांख्या है तथा सभी राज्यों क
ें द्र र्ाससत प्रदेर्ों क
े एथलीटों, वर्कलाांग एथलीटों को प्रजर्क्षि एर्ां
कोमचिंग देती है।
इस सांस्था का मुख्य ध्येय वर्श्व में सभी र्गों क
े लोगों को प्रेररत करना है ताकक र्े अपने खुले कदमाग
में वर्श्व क
े प्रततभासांपन्न वर्कलाांग लोगों / एथलीटरें को समानता की कसौटी से परखें।
स्पेशल ओलंपिक काययक्रम:- स्पेर्ल ओलांपपक कायवक्रम में पांजीकरि 2001 में इांकडया टरस्ट
एक्ट, 1882 क
े अांतगवत हुआ जजसमें 21671 पांजीक
ृ त एथलीट्स हैं तथा ओलांपपक प्रकार क
े
एमथलेटटक एर्ां खेल कायवक्रमों क
े जलए अांतरावष्ट्र ीय ओलांपपक कमेटी ( IOC ) द्वारा मान्यता प्राप्त है।
स्पेर्ल ओलांपपक, भारत क
े सांचालन हेतु अांतरावष्ट्र ीय कमेटी द्वारा मान्यता प्राप्त है। भारत सरकार
क
े युर्ा मामलों एर्ां खेल मांिालय ने सन् 2006 में भारत में प्रततभासांपन्न अपांग लोगों क
े खेल
वर्कास क
े जलए . ‘ स्पेर्ल ओलांपपक भारत ‘ को प्राथममकता क
े आधार पर मान्यता दी है। एक
अनुमान क
े अनुसार भारत में इस श्रेिी क
े अांतगवत लगभग 30 ममजलयन लोग आते हैं।
स्पेशल ओलंपिक क
े कायय:-
स्पेर्ल ओलांपपक भारत का ममर्न, एक बडे स्तर पर र्र्व क
े तीन सौ पैंसठ कदन प्रततभासांपन्न
वर्कलाांग ( intelectural disables ) बच्चों एर्ां युर्ाओां को ओलपपिंक खेल प्रजर्क्षि उपलब्ध
कराना है तथा इन्हीां से सांबांमधत एथलेटटक प्रततस्पधाव करर्ाना है ताकक अपांग बच्चों / युर्ाओां /
एथलीटों को उनकी र्ारीररक पुत्रष्ट् को वर्कससत करने क
े बराबर तथा लगातार अर्सर ममलें।
भारत क
े सभी राज्यों तथा क
े न्द्रर्ाससत प्रदेर्ों क
े 671 जजलों में खेल प्रजर्क्षि तथा प्रततस्पधावएँ
उपलब्ध करर्ाता हैं। ये ओलांपपक्स अन्तरावष्ट्रीय वर्र्ेर् ओलांपपक कमेटी क
े अन्तवगत आते है जो कक
IOC से पांजीक
ृ त हैं। ये ओलम्पिक्स र्ीतकालीन एर्ां ग्रीष्मकालीन ओलांपपक्स क
े मध्य में हर 4
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ओलम्पिक आंदोलन
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साल बाद आयोजजत होता है। प्रथम वर्र्ेर् ओलांपपक्स 20 जुलाई 1968 में जर्कागो में आयोजजत
हुए।
ओलंपिक प्रिीक:-
बैरेन- पैयरी – डी कॉबरटीन द्वारा रमचत और कडजाइन ककया हुआ एक प्रतीक है। यह सफ
े द ससल्क
क
े कपडे पर बने पाँच र्ृत ( छल्ले ) हैं जो आपस में जुडे हुए है। यह पाँच रांग क
े र्ृत पाँच महाद्वीपों
को प्रदर्शर्त करते हैं और सारे सांसार से आने र्ाले खखलाकडयों को जो ओलांपपक में भाग लेते हैं यह
र्ृत नीला, काला, लाल, पीला, और हरे रांग क
े होते हैं। जो क्रमर्ः अमेररका, अकिका, आस्टरेजलया,
एजर्या र् यूरोप महाद्वीप को दर्ावता है।
ओलंपिक मोटो:-
ओलांपपक मोटो लेटटन क
े तीन र्ब्दो से बना है:-
1. CITIUS ( साईटटयस ) तेज दौडना
2. ALTIUS ( आलटटयस ) ऊँ चा क
ू दना
3. FORTIUS ( फोरटटयस ) तेज फ
े कना
ओलंपिक आदशय:-
ओलांपपक खेलो में जीतना उतना आर्श्यक नहीां है, जजतना आर्श्यक है ‘ भाग ‘ लेना। जीर्न में
सबसे बडी बात ‘ भाग ‘ लेना नहीां है, ‘ सांघर्व है। सबसे महत्वपूिव बात ‘ जीत ‘ की कामना करना
नहीां, बम्पल्क अच्छी तरह लडना है।
ओलंपिक शिथ:-
ओलांपपक खेलों क
े प्रारांभ में आयोजन करने र्ाले देर् का प्रतततनमध सभी खखलाकडयों की तरफ से
झांडा पकडे हुए र्पथ लेता है तथा सभी खखलाडी अपना दायाँ हाथ उठाकर उसक
े बाद र्पथ को
दोहराते हैं। ” हम र्पथ लेते हैं कक हम ओलांपपक खेलों की स्पधाव में र्फादारी, वर्तनमयों का पालन
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करते हुए, जो उन्हें तनयांत्रित करते हैं, तबना नर्ीली दर्ाओां का प्रयोग ककए हुए, खेलों क
े गौरर् क
े
जलए र् अपने राष्ट्र क
े सम्मान क
े जलए सच्ची खेल भार्ना से इन खेलों में भागीदारी लेंगे।
ओलंपिक क
े उद्देश्य:-
• प्रततयोमगताओां में तनष्ठा, भाईचारा और टीम भार्ना जागृत करना।
• वर्श्व क
े सभी राष्ट्रों का ध्यान र्ारीररक जर्क्षा क
े कायवक्रमों क
े मूल्यों को समझाने क
े जलये।
• युर्ाओां क
े व्यक्तक्तत्व, चररि, नागररकता क
े गुिों का वर्कास करना।
• अांतरावष्ट्रीय मैिी भार्ना र् र्ाम्पन्त र् वर्कास करना।
• खखलाकडयों में अच्छी आदतों का तनमावि करना, ताकक र्े खुर्हाल और स्वस्थ्य जीर्न तबता
सक
े ।
ओलंपिक मूल्य:-
यकद हम ओलांपपक खेलों क
े उद्देश्यों की तरफ देखें तो पता चलता है कक डी, कोबरटीन ओलांपपक
खेलों क
े द्वारा मूल्य को वर्कससत करना चाहता थे। ओलांपपक आन्दोलन क
े द्वारा तनम्नजलखखत
मूल्यों को वर्कससत ककया जा सकता है
ममत्रिा:-
ओलांपपक आन्दोलन ऐसे कई अर्सर प्रदान करते हैं जजनक
े द्वारा न क
े र्ल खखलाकडयों बम्पल्क राष्ट्र
क
े मध्य भी मैिी वर्कससत होती है। ओलांपपक खेलों में भाग लेने क
े जलए अलग – अलग देर्ों क
े
खखलाडी आते हैं। जब र्े आपस में ममलते हैं तो ममिा बन जाते हैं। जब दो देर्ों क
े बीच आपस में
तनार् चल रहा होता है, तब भी ओलांपपक खेलों क
े द्वारा र्े एक – दूसरे क
े तनकट आते हैं। ऐसे
चीन का एक उदाहरि भी है ” पपगपाँग कडप्लोमेसी ‘ क
े कारि लांबे समय क
े बाद चीन ने ओलांपपक
खेल में भाग जलया। इसजलए कहा जाता है कक ओलांपपक खेल ममिता की भार्ना वर्कससत करते
हैं।
भाईचारा:-
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ओलांपपक आन्दोलन से भाईचारे को बढ़ाने में भी मदद ममलती है। जब अलग – अलग राष्ट्र क
े
खखलाडी खेलने आते हैं, आपस में ममलते हैं, एक – दूसरे क
े साथ ममल – जुलकर रहते हैं, उनमें
एकता की भार्ना आ जाती है। यह खखलाकडयों में राष्ट्र ों की तरह ही सामांजस्य पैदा करता है।
ननष्पक्ष खेल:-
ओलांपपक खेल तनष्पक्षतापूर्वक खेलों क
े अर्सरों को बढ़ाते हैं। ये खेल न्याय पर आधाररत होते हैं,
इसजलए प्रत्येक खखलाडी तथा टीम क
े साथ न्याय होना चाटहए। हर टीम पर तनयमों र् वर्तनयमों
को तनष्पक्ष रूप से लागू करना चाटहए। ककसी टीम तथा खखलाडी की तरफ ककसी प्रकार का झुकार्
नहीां करना चाटहए। खेल अमधकाररयों की कथनी र् करनी एक होनी चाटहए। ” तनयमों में रहो या
बाहर हो जाओ ” जैसे नारों का प्रयोग करना चाटहए।
भेदभाि से मुक्ति:-
कोबरटीन द्वारा सुझाए गए उद्देश्यों में यह कहा गया है कक जातत, नस्ल र् धमव क
े आधार पर ककसी
प्रकार का भेदभार् नहीां होगा। ओलांपपक खेल भेदभार् से मुक्तक्त क
े गुि को बढ़ार्ा देते हैं, क्योंकक
इस प्रततयोमगता में अलग – अलग देर्ों, धमों, सांस्क
ृ ततयों तथा जाततयों से सांबांध रखने र्ाले
खखलाडी भाग लेते हैं। उनक
े साथ कोई भेदभार् नहीां ककया जाता। प्रततयोमगता में भाग लेने आए
खखलाडी अपने व्यक्तक्तगत भेद भी भूल जाते हैं तथा ओलांपपक मूल्यों को बढ़ार्ा देने में सहयोग
करते हैं। हालाांकक अपर्ाद हमेर्ा होते हैं, जैसे सन् 1972 क
े म्यूतनख ओलांपपक खेलों में 11
इजरायली खखलाकडयों को मौत क
े घाट उतार कदया गया था। सन् 1936 में बर्शलन ओलांपपक में
जैन्सी ओर्न्स में चार स्विव पदक प्राप्त ककए थे लेककन नस्ली भेदभार् क
े कारि अडोल्फ टहटलर
ने उन्हें सम्मातनत करने से इांकार कर कदया था। इन खेलों क
े प्रतत क
ु छ देर्ों क
े अपने तनजी स्वाथव
भी हैं ताकक र्े स्वयां को ससि कर सक
ें कक र्े दूसरे देर्ों की अपेक्षा बहुत आगे हैं। लेककन यह नहीां
कहा जा सकता है कक मूल्यों को वर्कससत करने में ओलांपपक आन्दोलन फ
े ल हो चुका है। हमें
ओलांपपक आन्दोलन की तरफ सकारात्मक सोच रखनी होगी, ताकक ओलांपपक क
े द्वारा इन मूल्यों
को वर्कससत ककया जा सक
े ।
उत्क
ृ ष्टिा:-
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ओलम्पिक आंदोलन
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यह मूल्य प्रत्येक व्यक्तक्त को खेल मैदान पर या मैदान क
े बाहर भी अपना अच्छा प्रदर्वन कदखाने क
े
जलए प्रोत्साटहत करता है।
आदर:-
ओलांपपक का यह मूल्य प्रततभामगयों को खखलाडीपन की भार्ना को प्रदर्शर्त करने क
े जलए प्रेररत
करता है प्रत्येक खखलाडी को अपना र् अपने र्रीर का आदर करना चाटहए। ककसी भी डरग्स र्
नर्ीले पदाथों का सेर्न नहीां करना चाटहए, साथ ही खेल क
े तनयमों, प्रततद्वांपद्वयों ( वर्रोमधयों )
र् र्ातार्रि का भी आदर करना चाटहए।
मूल्यों क
े बारे में ममत्रिा, भाईचारा, ननष्पक्ष खेल या भेदभाि से मुक्ति:-
यह कहा जा सकता है कक ओलांपपक आांदोलन इन मूल्यों क
े वर्कास में महत्त्वपूिव भूममका तनभाता
है लेककन ओलांपपक खेलों का एक नकरात्मक पहलू भी है, जो देखने में आया है। ऐसा प्रतीत होता
है कक डी . कोबरटीन क
े सपने साकार होते प्रतीत नहीां हो रहे। ओलांपपक खेलों में क
ु छ देर् इसजलए
भाग लेते हैं ताकक र्े स्वयां को यह ससि कर सक
ें कक र्े सबसे ऊपर हैं और दूसरे देर्ों से बहुत आगे
हैं। इन मूल्यों क
े जलए यह भी एक झटका था, जब 1980 क
े मास्को ओलांपपक र् 1984 क
े लॉस
एन्जिजलस ओलांपपक्स में वर्श्व क
े क
ु छ देर्ों ने बटहष्कार ककया था। उपरोक्त मूल्यों को वर्कससत
करने में ओलांपपक फ
े ल हो चुका है। हमें ओलांपपक आांदोलन की तरफ सकारात्मक अमभर्ृजि रखनी
चाटहए, ताकक इन मूल्यों को वर्कससत ककया जा सक
े ।
अन्तरायष्टर ीय ओलंपिक संघ:-
ओलांपपक खेलों को पुनावजीवर्त करने क
े उद्देश्य से 23 जून 1894, ई . को पपयरे बैरन डी. कोबरटीन
क
े द्वारा अन्तरावष्ट्रीय ओलांपपक सांघ की स्थापना की गई। इस सांघ का मुख्य उद्देश्य आांदोलन का
वर्स्तार तथा आधुतनक ओलांपपक खेलों का आयोजन करना था। आज अांतरावष्ट्रीय ओलांपपक सममतत
की आधुतनक ओलांपपक खेलों की गर्ार्ननग बॉडी हैं।
अांतरावष्ट्रीय ओलांपपक सांघ का मुख्यालय ( लोसाने ) स्वस्वटजरलैंड में है। इस सममतत में 105 सकक्रय
सदस्य तथा 32 मानद सदस्य होते हैं।
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अांतरावष्ट्रीय ओलांपपक सममतत, प्रबन्धक सममततयों, खखलाकडयों राष्ट्र ीय ओलांपपक सममततयों,
अांतरावष्ट्रीय खेल सांघों, तथा सांयुक्त राष्ट्र जैसी अनेक सांस्थाओां क
े साथ ममलकर कायव करती है।
अांतरावष्ट्रीय सममतत में वर्मभन्न देर्ों क
े सदस्य र्ाममल होते हैं जो तनम्नजलखखत प्रकार से है।
प्रशासननक बोर्य:-
अांतरावष्ट्रीय ओलांपपक सांघ क
े वर्मभन्न देर्ों से सदस्य र्ाममल होते हैं। र्तवमान में इसक
े 15 सदस्य
हैं, जजनमें एक अध्यक्ष चार उपाध्यक्ष तथा दस कायवकारी सदस्य होते हैं।
प्रधान ( President ):- अांतरावष्ट्र ीय ओलांपपक सांघ क
े प्रधान का तनर्ावचन सांघ क
े सदस्यों द्वारा
ककया जाता है। प्रधान का तनर्ावचन आठ र्र्व की अर्मध तक क
े जलए ककया जाता है। इस अर्मध
को क
े र्ल एक बार चार साल क
े जलए बढ़ाया जाता है।
उि – प्रधान ( उिाध्यक्ष ) ( Vice – President ):- अांतरावष्ट्र ीय ओलांपपक सांघ में चार उप –
प्रधान होते हैं ये सांघ क
े सदस्यों क
े द्वारा तनर्ावमचत ककए जाते हैं। इसका तनर्ावचन चार र्र्व की
अर्मध क
े जलए ककया जाता है
काययकारी बोर्य:- अांतरावष्ट्रीय ओलांपपक सांघ क
े कायवकारी बोडव का चुनार् सांघ क
े वर्मभन्न सदस्य
देर्ों द्वारा गुप्त मतदान क
े आधार पर ककया जाता है। कायवकारी बोडव, अांतरावष्ट्र ीय सांघ की व्यर्स्था
तथा इसक
े कायों क
े प्रबन्धन क
े जलए उिरदायी होता है।
अंिरायष्टर ीय ओलंपिक सममति क
े मुख्य कायय या भूममका:-
• ओलांपपक खेलों क
े आयोजन स्थल का तनिवय लेना।
• खेल कायवक्रमों क
े सांयोजन और खेलों में मेजबान देर्ों का चुनार् करने क
े साथ – साथ नए
सदस्यों का चुनार् करना।
• प्रततयोमगताओां क
े जलए मौजलक तनयमों का तनधावरि भी इसी सममतत क
े द्वारा ककया जाता
है।
• खेल सांस्थाओां को बढ़ार्ा देना तथा उनकी सहायता करना।
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• खेलों में नैततकता क
े साथ – साथ खेलों क
े माध्यम से युर्ाओां को जर्क्षा प्रदान करने में
सहायता तथा प्रोत्साटहत करना।
• वर्मभन्न सांस्थाओां द्वारा खखलाकडयों क
े सामाजजक एर्ां व्यर्साय क
े भवर्ष्य एर्ां कल्याि क
े
प्रयासों को बढ़ार्ा देना।
• ओलांपपक आांदोलन को प्रभावर्त करने र्ाले ककसी भी प्रकार क
े भेदभार् या पक्षपात क
े वर्रुि
कायवर्ाही करना।
• खेलक
ू द क
े साथ सांस्क
ृ तत और जर्क्षा को सांयुक्त करने क
े प्रयासों को प्रोत्साटहत करना।
• खेलों क
े सभी स्तरों पर मटहलाओां को आगे बढ़ाने में उनकी सहायता तथा प्रोत्साटहत देना।
• खेलों की सुरक्षा तथा एकता को मजबूत करने क
े जलए कायवर्ाही करना।
• डोपपिंग क
े वर्रुि सांघर्व करना।
• खेलों क
े वर्कास को प्रोत्साटहत करना।
• खखलाकडयों तथा खेलों का राजनीततकरि अथर्ा व्यापाररक र्ोर्ि न होने देना।
नोट:- अांतरावष्ट्र ीय ओलांपपक सांघ, प्रत्येक चार र्र्व की अर्मध क
े पश्चात ग्रीष्मकालीन तथा
र्ीतकालीन, आधुतनक ओलांपपक खेल तथा युर्ा ओलांपपक खेलों का आयोजन करता है।
भारिीय ओलंपिक संघ ( सममति ):-
भारतीय ओलांपपक एसोससएर्न की स्थापना सन् 1927 में हुई थी। सर दोराबाजी टाटा इस
एसोजर्यन क
े सांस्थापक प्रधान र् डॉ . नोहरेन महासमचर् बने। सर दोराबाजी टाटा अन्तरावष्ट्र ीय
ओलांपपक सममतत क
े प्रथम सदस्य तनयुक्त हुए थे। भारतीय ओलांपपक एसोससएर्न क
े पदामधकाररयों
का चुनार् प्रत्येक चार र्र्व बाद होता है।
इस सममतत में एक प्रधान, 9 उप – प्रधान, 6 सह – समचर्, एक महासमचर्, एक मानद कोर्ाध्यक्ष
होता है। इसक
े अलार्ा राज्य ओलांपपक सममतत क
े प्रतततनमध तथा राष्ट्रीय खेल सममतत क
े 12
प्रतततनमध र्ाममल होते हैं। क
ु छ समय पश्चात् सर दोराबाजी टाटा जी ने अध्यक्ष पद से त्याग – पि
दे कदया। इसक
े पश्चात् पटटयाला क
े महाराजा श्री भूपेन्द्र ससिंह जी ने अध्यक्ष का पदभार सांभाला।
2
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भारत ने पहली बार सन् 1928 में एम्स्स्टरडम ओलांपपक खेलों में भाग जलया और हॉकी का स्विवपदक
जीता, तब से भारतीय ओलांपपक सांघ, ओलांपपक आांदोलन क
े जलए सकक्रय रूप से कायव कर रहा है।
भारतीय ओलांपपक सांघ, ओलांपपक खेलों तथा अन्य क्षेिीय प्रततयोमगताओां, जैसे - एजर्यन खेल
तथा कॉमनर्ेल्थस खेल आकद में प्रततयोमगयों को भाग लेने तथा उनकी तैयारी करर्ाने क
े जलए भी
उिरदायी है। अन्य सांस्थाएँ इस कायव में भारतीय ओलांपपक सममतत की सहायता करती हैं।
भारिीय ओलंपिक एसोमसएशन क
े उद्देश्यों:-
• ओलांपपक आांदोलन को बढ़ार्ा देनातथा खेलों का वर्कास करना।
• अांतरावष्ट्रीय ओलांपपक सममतत तथा भारतीय ओलांपपक सममतत क
े जलए तनयमों तथा वर्तनयमों
को लागू करना।
• अगर कोई खेल सांघ अजर्ष्ट् व्यर्हार करता है, तो उसक
े वर्रुि कायवर्ाही करना।
• ओलांपपक खेलों में भाग लेने र्ाली भारतीय टीमों क
े जलए राष्ट्र ीय खेल सांघ से खचव र्हन हेतु
वर्िीय सहायता लेना।
• राष्ट्र क
े युर्ाओां की र्ारीररक, नैततक र् साांस्क
ृ ततक जर्क्षा को बढ़ार्ा देना तथा प्रोत्साटहत
करना ताकक युर्ाओां क
े चररिा का वर्कास ककया जा सक
े ।
• सरकारी सांगठन होना तथा ओलांपपक से सांबांमधत सभी वर्र्यों पर तनयांिि रखना।
• राज्य ओलांपपक सममतत तथा राष्ट्र ीय खेल सममतत को खेलों की स्वीक
ृ तत देना, उनकी पूरे
साल की ररपोटव तथा खचव आकद का वर्र्रि जरूरी है। ये सभी सूचनाएँ भारतीय ओलांपपक
एसोजर्एर्न क
े पास जमा होनी चाटहए।
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• ओलांपपक खेलों में भाग लेने क
े जलए चयतनत प्रततभामगयों का नाम सुझाना।
• भारत सरकार तथा अन्य राष्ट्रीय सांस्थाओां क
े बीच तालमेल बनाए रखना।
• राष्ट्रीय खेल सांगठनों की सहायता से टीमों क
े चयन पर तनयांििीखना तथा खेलों का प्रजर्क्षि
देना, जो टीमें अन्तरावष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतततनमधत्व करती हों।
• ओलांपपक झांडे का प्रयोग करने एर्ां वर्र्ेर्ामधकारी की रक्षा करना।
• राष्ट्रीय एर्ां अन्तरावष्ट्र ीय खेलों का आयोजन करर्ाना।
• खेल प्रततयोमगताओां में जातत, धमव, रांग तथा क्षेिा क
े भेदभार् को ममटाना।
• अांतरावष्ट्रीय ओलांपपक सममतत क
े र्र्ल्व एांटी – डोपपिंग एजेंसी ( र्ाडा ) को लागू करना।
भारिीय ओलंपिक संघ क
े कायय:-
1. ओलांपपक आांदोलन को बढ़ार्ा देना।
2. राष्ट्रीय एर्ां अन्तरावष्ट्र ीय स्तर पर सभी प्रकार क
े खेलो का आयोजन करना।
3. ओलांपपक खेलों में भाग लेने र्ाले खखलाकडयों का नाम सुझाना र् उन्हें समथवन देना।
4. सभी सांस्थानों र् भारत सरकार क
े बीच तालमेल बनाए रखना। राज्यों क
े वर्मभन्न खेलों पर
तनयन्त्रि रखने र्ाली राज्य सांस्थाओां, राज्य ओलांपपक सांस्थाओांतथा राष्ट्र ीय सांस्थाओांमें सांबांध
स्थापपत करना।
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कक्षा 11 शारीरिक शिक्षा, अध्याय-2: "ओलंपिक आंदोलन"

  • 1.
    Best Notes HINDI MEDIUM का 11 शारीिरक िशक्षा 100% updated as per 2023-24 curriculum. Quick Revision, tips, notes & mind maps. To the point Answers Easily Understandable & effective language. For Session 2024-25 Artham Resource Material
  • 2.
  • 3.
    2 (1) ओलम्पिक आंदोलन 02 ओलंपिक्स काइतिहास:- प्राचीन समय में लगभग 776 ईसा पूर्व ग्रीस में ‘ ओल्मपपया नाम की जगह पर ईश्वर ज्यूस की याद में धार्ममक उत्सर् मनाते थे। जजसमें सभी ग्रीस र्ासी एक जगह एकत्रित होकर अपनी एकता और प्रततभा का प्रदर्वन करते थे। इन खेलों का पुनः प्रर्तवन का श्रेय फाांस क े पैरी, बी.डी . कोबरटीन को जाता है। इनक े कठोर पररश्रम की र्जह से ही आधुतनक ओलांपपक सांभर् हो सक े इसीजलये इन्हें आधुतनक ओलांपपक खेलों का जन्मदाता भी कहा जाता है। सन् 1896 में एथेन्स ( ग्रीस ) में पहली बार आधुतनक ओलांपपक आयोजजत कराये गये। तब अब तक हर चार साल बाद इन खेनों का आयोजन होता हैं। िैराओलंपिक्स:- पैराजलम्पिक खेल ओलांपपक खेलों क े समानान्तर खेले जाते हैं। पैराजलम्पिक खेल अांतरावष्ट्र ीय ओलांपपक सममतत ( IOC ) द्वारा मान्यता प्राप्त हैं जजनमें बौजिक वर्कलाांग एथलीट्स र्ाममल होते हैं िैराशलम्पिक खेल:- प्रथम र्रद ऋतु क े पैराजलम्पिक खेल 1876 में स्वीडन में आयोजजत ककए गए थे। ये प्रथम पैराजलम्पिक खेल थे जजनमें बहुश्रेजियों क े वर्कलाांग एथलीटों ने भाग जलया। र्रद ऋतु क े खेल उसी र्र्व ही खेले जाते हैं जजस र्र्व ग्रीष्मकाल क े खेल खेले जाते हैं। पैराजलम्पिक खेलों में भाग लेने र्ाले एथलीटों की सांख्या रोम में 1960 क े खेलों में 400 थी जो कक बीजजिंग क े 2008 क े खेलों में बढ़कर 3900 हो गयी। पैराजलम्पिक खेलों क े प्रभुत्व में आने से पहले र्ारीररक रूप से अपांग एथलीट्स ओलांपपक खेलों में भाग लेते थे। प्रथम अमधकाररक पैराजलम्पिक खेल 1960 में रोम में खेले गए जजनमें 23 देर्ों से 400 एथलीटों ने भाग जलया। ये खेल सबसे पहले क े र्ल व्हील चेयर र्ाले एथलीटों क े जलए ही होते थे।
  • 4.
    2 (2) ओलम्पिक आंदोलन 02 तिशेष ओलंपिक्स:- स्पेर्लओलांपपक भारत एक गैर – सरकारी सांस्था है जो कक ओलांपपक खेलों क े साथ – साथ राज्य स्तर, राष्ट्र ीय स्तर क े खेलों का आयोजन करती है। इस सांस्था में प्रजर्क्षकों तथा कोचों की उपयुक्त सांख्या है तथा सभी राज्यों क ें द्र र्ाससत प्रदेर्ों क े एथलीटों, वर्कलाांग एथलीटों को प्रजर्क्षि एर्ां कोमचिंग देती है। इस सांस्था का मुख्य ध्येय वर्श्व में सभी र्गों क े लोगों को प्रेररत करना है ताकक र्े अपने खुले कदमाग में वर्श्व क े प्रततभासांपन्न वर्कलाांग लोगों / एथलीटरें को समानता की कसौटी से परखें। स्पेशल ओलंपिक काययक्रम:- स्पेर्ल ओलांपपक कायवक्रम में पांजीकरि 2001 में इांकडया टरस्ट एक्ट, 1882 क े अांतगवत हुआ जजसमें 21671 पांजीक ृ त एथलीट्स हैं तथा ओलांपपक प्रकार क े एमथलेटटक एर्ां खेल कायवक्रमों क े जलए अांतरावष्ट्र ीय ओलांपपक कमेटी ( IOC ) द्वारा मान्यता प्राप्त है। स्पेर्ल ओलांपपक, भारत क े सांचालन हेतु अांतरावष्ट्र ीय कमेटी द्वारा मान्यता प्राप्त है। भारत सरकार क े युर्ा मामलों एर्ां खेल मांिालय ने सन् 2006 में भारत में प्रततभासांपन्न अपांग लोगों क े खेल वर्कास क े जलए . ‘ स्पेर्ल ओलांपपक भारत ‘ को प्राथममकता क े आधार पर मान्यता दी है। एक अनुमान क े अनुसार भारत में इस श्रेिी क े अांतगवत लगभग 30 ममजलयन लोग आते हैं। स्पेशल ओलंपिक क े कायय:- स्पेर्ल ओलांपपक भारत का ममर्न, एक बडे स्तर पर र्र्व क े तीन सौ पैंसठ कदन प्रततभासांपन्न वर्कलाांग ( intelectural disables ) बच्चों एर्ां युर्ाओां को ओलपपिंक खेल प्रजर्क्षि उपलब्ध कराना है तथा इन्हीां से सांबांमधत एथलेटटक प्रततस्पधाव करर्ाना है ताकक अपांग बच्चों / युर्ाओां / एथलीटों को उनकी र्ारीररक पुत्रष्ट् को वर्कससत करने क े बराबर तथा लगातार अर्सर ममलें। भारत क े सभी राज्यों तथा क े न्द्रर्ाससत प्रदेर्ों क े 671 जजलों में खेल प्रजर्क्षि तथा प्रततस्पधावएँ उपलब्ध करर्ाता हैं। ये ओलांपपक्स अन्तरावष्ट्रीय वर्र्ेर् ओलांपपक कमेटी क े अन्तवगत आते है जो कक IOC से पांजीक ृ त हैं। ये ओलम्पिक्स र्ीतकालीन एर्ां ग्रीष्मकालीन ओलांपपक्स क े मध्य में हर 4
  • 5.
    2 (3) ओलम्पिक आंदोलन 02 साल बादआयोजजत होता है। प्रथम वर्र्ेर् ओलांपपक्स 20 जुलाई 1968 में जर्कागो में आयोजजत हुए। ओलंपिक प्रिीक:- बैरेन- पैयरी – डी कॉबरटीन द्वारा रमचत और कडजाइन ककया हुआ एक प्रतीक है। यह सफ े द ससल्क क े कपडे पर बने पाँच र्ृत ( छल्ले ) हैं जो आपस में जुडे हुए है। यह पाँच रांग क े र्ृत पाँच महाद्वीपों को प्रदर्शर्त करते हैं और सारे सांसार से आने र्ाले खखलाकडयों को जो ओलांपपक में भाग लेते हैं यह र्ृत नीला, काला, लाल, पीला, और हरे रांग क े होते हैं। जो क्रमर्ः अमेररका, अकिका, आस्टरेजलया, एजर्या र् यूरोप महाद्वीप को दर्ावता है। ओलंपिक मोटो:- ओलांपपक मोटो लेटटन क े तीन र्ब्दो से बना है:- 1. CITIUS ( साईटटयस ) तेज दौडना 2. ALTIUS ( आलटटयस ) ऊँ चा क ू दना 3. FORTIUS ( फोरटटयस ) तेज फ े कना ओलंपिक आदशय:- ओलांपपक खेलो में जीतना उतना आर्श्यक नहीां है, जजतना आर्श्यक है ‘ भाग ‘ लेना। जीर्न में सबसे बडी बात ‘ भाग ‘ लेना नहीां है, ‘ सांघर्व है। सबसे महत्वपूिव बात ‘ जीत ‘ की कामना करना नहीां, बम्पल्क अच्छी तरह लडना है। ओलंपिक शिथ:- ओलांपपक खेलों क े प्रारांभ में आयोजन करने र्ाले देर् का प्रतततनमध सभी खखलाकडयों की तरफ से झांडा पकडे हुए र्पथ लेता है तथा सभी खखलाडी अपना दायाँ हाथ उठाकर उसक े बाद र्पथ को दोहराते हैं। ” हम र्पथ लेते हैं कक हम ओलांपपक खेलों की स्पधाव में र्फादारी, वर्तनमयों का पालन
  • 6.
    2 (4) ओलम्पिक आंदोलन 02 करते हुए,जो उन्हें तनयांत्रित करते हैं, तबना नर्ीली दर्ाओां का प्रयोग ककए हुए, खेलों क े गौरर् क े जलए र् अपने राष्ट्र क े सम्मान क े जलए सच्ची खेल भार्ना से इन खेलों में भागीदारी लेंगे। ओलंपिक क े उद्देश्य:- • प्रततयोमगताओां में तनष्ठा, भाईचारा और टीम भार्ना जागृत करना। • वर्श्व क े सभी राष्ट्रों का ध्यान र्ारीररक जर्क्षा क े कायवक्रमों क े मूल्यों को समझाने क े जलये। • युर्ाओां क े व्यक्तक्तत्व, चररि, नागररकता क े गुिों का वर्कास करना। • अांतरावष्ट्रीय मैिी भार्ना र् र्ाम्पन्त र् वर्कास करना। • खखलाकडयों में अच्छी आदतों का तनमावि करना, ताकक र्े खुर्हाल और स्वस्थ्य जीर्न तबता सक े । ओलंपिक मूल्य:- यकद हम ओलांपपक खेलों क े उद्देश्यों की तरफ देखें तो पता चलता है कक डी, कोबरटीन ओलांपपक खेलों क े द्वारा मूल्य को वर्कससत करना चाहता थे। ओलांपपक आन्दोलन क े द्वारा तनम्नजलखखत मूल्यों को वर्कससत ककया जा सकता है ममत्रिा:- ओलांपपक आन्दोलन ऐसे कई अर्सर प्रदान करते हैं जजनक े द्वारा न क े र्ल खखलाकडयों बम्पल्क राष्ट्र क े मध्य भी मैिी वर्कससत होती है। ओलांपपक खेलों में भाग लेने क े जलए अलग – अलग देर्ों क े खखलाडी आते हैं। जब र्े आपस में ममलते हैं तो ममिा बन जाते हैं। जब दो देर्ों क े बीच आपस में तनार् चल रहा होता है, तब भी ओलांपपक खेलों क े द्वारा र्े एक – दूसरे क े तनकट आते हैं। ऐसे चीन का एक उदाहरि भी है ” पपगपाँग कडप्लोमेसी ‘ क े कारि लांबे समय क े बाद चीन ने ओलांपपक खेल में भाग जलया। इसजलए कहा जाता है कक ओलांपपक खेल ममिता की भार्ना वर्कससत करते हैं। भाईचारा:-
  • 7.
    2 (5) ओलम्पिक आंदोलन 02 ओलांपपक आन्दोलनसे भाईचारे को बढ़ाने में भी मदद ममलती है। जब अलग – अलग राष्ट्र क े खखलाडी खेलने आते हैं, आपस में ममलते हैं, एक – दूसरे क े साथ ममल – जुलकर रहते हैं, उनमें एकता की भार्ना आ जाती है। यह खखलाकडयों में राष्ट्र ों की तरह ही सामांजस्य पैदा करता है। ननष्पक्ष खेल:- ओलांपपक खेल तनष्पक्षतापूर्वक खेलों क े अर्सरों को बढ़ाते हैं। ये खेल न्याय पर आधाररत होते हैं, इसजलए प्रत्येक खखलाडी तथा टीम क े साथ न्याय होना चाटहए। हर टीम पर तनयमों र् वर्तनयमों को तनष्पक्ष रूप से लागू करना चाटहए। ककसी टीम तथा खखलाडी की तरफ ककसी प्रकार का झुकार् नहीां करना चाटहए। खेल अमधकाररयों की कथनी र् करनी एक होनी चाटहए। ” तनयमों में रहो या बाहर हो जाओ ” जैसे नारों का प्रयोग करना चाटहए। भेदभाि से मुक्ति:- कोबरटीन द्वारा सुझाए गए उद्देश्यों में यह कहा गया है कक जातत, नस्ल र् धमव क े आधार पर ककसी प्रकार का भेदभार् नहीां होगा। ओलांपपक खेल भेदभार् से मुक्तक्त क े गुि को बढ़ार्ा देते हैं, क्योंकक इस प्रततयोमगता में अलग – अलग देर्ों, धमों, सांस्क ृ ततयों तथा जाततयों से सांबांध रखने र्ाले खखलाडी भाग लेते हैं। उनक े साथ कोई भेदभार् नहीां ककया जाता। प्रततयोमगता में भाग लेने आए खखलाडी अपने व्यक्तक्तगत भेद भी भूल जाते हैं तथा ओलांपपक मूल्यों को बढ़ार्ा देने में सहयोग करते हैं। हालाांकक अपर्ाद हमेर्ा होते हैं, जैसे सन् 1972 क े म्यूतनख ओलांपपक खेलों में 11 इजरायली खखलाकडयों को मौत क े घाट उतार कदया गया था। सन् 1936 में बर्शलन ओलांपपक में जैन्सी ओर्न्स में चार स्विव पदक प्राप्त ककए थे लेककन नस्ली भेदभार् क े कारि अडोल्फ टहटलर ने उन्हें सम्मातनत करने से इांकार कर कदया था। इन खेलों क े प्रतत क ु छ देर्ों क े अपने तनजी स्वाथव भी हैं ताकक र्े स्वयां को ससि कर सक ें कक र्े दूसरे देर्ों की अपेक्षा बहुत आगे हैं। लेककन यह नहीां कहा जा सकता है कक मूल्यों को वर्कससत करने में ओलांपपक आन्दोलन फ े ल हो चुका है। हमें ओलांपपक आन्दोलन की तरफ सकारात्मक सोच रखनी होगी, ताकक ओलांपपक क े द्वारा इन मूल्यों को वर्कससत ककया जा सक े । उत्क ृ ष्टिा:-
  • 8.
    2 (6) ओलम्पिक आंदोलन 02 यह मूल्यप्रत्येक व्यक्तक्त को खेल मैदान पर या मैदान क े बाहर भी अपना अच्छा प्रदर्वन कदखाने क े जलए प्रोत्साटहत करता है। आदर:- ओलांपपक का यह मूल्य प्रततभामगयों को खखलाडीपन की भार्ना को प्रदर्शर्त करने क े जलए प्रेररत करता है प्रत्येक खखलाडी को अपना र् अपने र्रीर का आदर करना चाटहए। ककसी भी डरग्स र् नर्ीले पदाथों का सेर्न नहीां करना चाटहए, साथ ही खेल क े तनयमों, प्रततद्वांपद्वयों ( वर्रोमधयों ) र् र्ातार्रि का भी आदर करना चाटहए। मूल्यों क े बारे में ममत्रिा, भाईचारा, ननष्पक्ष खेल या भेदभाि से मुक्ति:- यह कहा जा सकता है कक ओलांपपक आांदोलन इन मूल्यों क े वर्कास में महत्त्वपूिव भूममका तनभाता है लेककन ओलांपपक खेलों का एक नकरात्मक पहलू भी है, जो देखने में आया है। ऐसा प्रतीत होता है कक डी . कोबरटीन क े सपने साकार होते प्रतीत नहीां हो रहे। ओलांपपक खेलों में क ु छ देर् इसजलए भाग लेते हैं ताकक र्े स्वयां को यह ससि कर सक ें कक र्े सबसे ऊपर हैं और दूसरे देर्ों से बहुत आगे हैं। इन मूल्यों क े जलए यह भी एक झटका था, जब 1980 क े मास्को ओलांपपक र् 1984 क े लॉस एन्जिजलस ओलांपपक्स में वर्श्व क े क ु छ देर्ों ने बटहष्कार ककया था। उपरोक्त मूल्यों को वर्कससत करने में ओलांपपक फ े ल हो चुका है। हमें ओलांपपक आांदोलन की तरफ सकारात्मक अमभर्ृजि रखनी चाटहए, ताकक इन मूल्यों को वर्कससत ककया जा सक े । अन्तरायष्टर ीय ओलंपिक संघ:- ओलांपपक खेलों को पुनावजीवर्त करने क े उद्देश्य से 23 जून 1894, ई . को पपयरे बैरन डी. कोबरटीन क े द्वारा अन्तरावष्ट्रीय ओलांपपक सांघ की स्थापना की गई। इस सांघ का मुख्य उद्देश्य आांदोलन का वर्स्तार तथा आधुतनक ओलांपपक खेलों का आयोजन करना था। आज अांतरावष्ट्रीय ओलांपपक सममतत की आधुतनक ओलांपपक खेलों की गर्ार्ननग बॉडी हैं। अांतरावष्ट्रीय ओलांपपक सांघ का मुख्यालय ( लोसाने ) स्वस्वटजरलैंड में है। इस सममतत में 105 सकक्रय सदस्य तथा 32 मानद सदस्य होते हैं।
  • 9.
    2 (7) ओलम्पिक आंदोलन 02 अांतरावष्ट्रीय ओलांपपकसममतत, प्रबन्धक सममततयों, खखलाकडयों राष्ट्र ीय ओलांपपक सममततयों, अांतरावष्ट्रीय खेल सांघों, तथा सांयुक्त राष्ट्र जैसी अनेक सांस्थाओां क े साथ ममलकर कायव करती है। अांतरावष्ट्रीय सममतत में वर्मभन्न देर्ों क े सदस्य र्ाममल होते हैं जो तनम्नजलखखत प्रकार से है। प्रशासननक बोर्य:- अांतरावष्ट्रीय ओलांपपक सांघ क े वर्मभन्न देर्ों से सदस्य र्ाममल होते हैं। र्तवमान में इसक े 15 सदस्य हैं, जजनमें एक अध्यक्ष चार उपाध्यक्ष तथा दस कायवकारी सदस्य होते हैं। प्रधान ( President ):- अांतरावष्ट्र ीय ओलांपपक सांघ क े प्रधान का तनर्ावचन सांघ क े सदस्यों द्वारा ककया जाता है। प्रधान का तनर्ावचन आठ र्र्व की अर्मध तक क े जलए ककया जाता है। इस अर्मध को क े र्ल एक बार चार साल क े जलए बढ़ाया जाता है। उि – प्रधान ( उिाध्यक्ष ) ( Vice – President ):- अांतरावष्ट्र ीय ओलांपपक सांघ में चार उप – प्रधान होते हैं ये सांघ क े सदस्यों क े द्वारा तनर्ावमचत ककए जाते हैं। इसका तनर्ावचन चार र्र्व की अर्मध क े जलए ककया जाता है काययकारी बोर्य:- अांतरावष्ट्रीय ओलांपपक सांघ क े कायवकारी बोडव का चुनार् सांघ क े वर्मभन्न सदस्य देर्ों द्वारा गुप्त मतदान क े आधार पर ककया जाता है। कायवकारी बोडव, अांतरावष्ट्र ीय सांघ की व्यर्स्था तथा इसक े कायों क े प्रबन्धन क े जलए उिरदायी होता है। अंिरायष्टर ीय ओलंपिक सममति क े मुख्य कायय या भूममका:- • ओलांपपक खेलों क े आयोजन स्थल का तनिवय लेना। • खेल कायवक्रमों क े सांयोजन और खेलों में मेजबान देर्ों का चुनार् करने क े साथ – साथ नए सदस्यों का चुनार् करना। • प्रततयोमगताओां क े जलए मौजलक तनयमों का तनधावरि भी इसी सममतत क े द्वारा ककया जाता है। • खेल सांस्थाओां को बढ़ार्ा देना तथा उनकी सहायता करना।
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    2 (8) ओलम्पिक आंदोलन 02 • खेलोंमें नैततकता क े साथ – साथ खेलों क े माध्यम से युर्ाओां को जर्क्षा प्रदान करने में सहायता तथा प्रोत्साटहत करना। • वर्मभन्न सांस्थाओां द्वारा खखलाकडयों क े सामाजजक एर्ां व्यर्साय क े भवर्ष्य एर्ां कल्याि क े प्रयासों को बढ़ार्ा देना। • ओलांपपक आांदोलन को प्रभावर्त करने र्ाले ककसी भी प्रकार क े भेदभार् या पक्षपात क े वर्रुि कायवर्ाही करना। • खेलक ू द क े साथ सांस्क ृ तत और जर्क्षा को सांयुक्त करने क े प्रयासों को प्रोत्साटहत करना। • खेलों क े सभी स्तरों पर मटहलाओां को आगे बढ़ाने में उनकी सहायता तथा प्रोत्साटहत देना। • खेलों की सुरक्षा तथा एकता को मजबूत करने क े जलए कायवर्ाही करना। • डोपपिंग क े वर्रुि सांघर्व करना। • खेलों क े वर्कास को प्रोत्साटहत करना। • खखलाकडयों तथा खेलों का राजनीततकरि अथर्ा व्यापाररक र्ोर्ि न होने देना। नोट:- अांतरावष्ट्र ीय ओलांपपक सांघ, प्रत्येक चार र्र्व की अर्मध क े पश्चात ग्रीष्मकालीन तथा र्ीतकालीन, आधुतनक ओलांपपक खेल तथा युर्ा ओलांपपक खेलों का आयोजन करता है। भारिीय ओलंपिक संघ ( सममति ):- भारतीय ओलांपपक एसोससएर्न की स्थापना सन् 1927 में हुई थी। सर दोराबाजी टाटा इस एसोजर्यन क े सांस्थापक प्रधान र् डॉ . नोहरेन महासमचर् बने। सर दोराबाजी टाटा अन्तरावष्ट्र ीय ओलांपपक सममतत क े प्रथम सदस्य तनयुक्त हुए थे। भारतीय ओलांपपक एसोससएर्न क े पदामधकाररयों का चुनार् प्रत्येक चार र्र्व बाद होता है। इस सममतत में एक प्रधान, 9 उप – प्रधान, 6 सह – समचर्, एक महासमचर्, एक मानद कोर्ाध्यक्ष होता है। इसक े अलार्ा राज्य ओलांपपक सममतत क े प्रतततनमध तथा राष्ट्रीय खेल सममतत क े 12 प्रतततनमध र्ाममल होते हैं। क ु छ समय पश्चात् सर दोराबाजी टाटा जी ने अध्यक्ष पद से त्याग – पि दे कदया। इसक े पश्चात् पटटयाला क े महाराजा श्री भूपेन्द्र ससिंह जी ने अध्यक्ष का पदभार सांभाला।
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    2 (9) ओलम्पिक आंदोलन 02 भारत नेपहली बार सन् 1928 में एम्स्स्टरडम ओलांपपक खेलों में भाग जलया और हॉकी का स्विवपदक जीता, तब से भारतीय ओलांपपक सांघ, ओलांपपक आांदोलन क े जलए सकक्रय रूप से कायव कर रहा है। भारतीय ओलांपपक सांघ, ओलांपपक खेलों तथा अन्य क्षेिीय प्रततयोमगताओां, जैसे - एजर्यन खेल तथा कॉमनर्ेल्थस खेल आकद में प्रततयोमगयों को भाग लेने तथा उनकी तैयारी करर्ाने क े जलए भी उिरदायी है। अन्य सांस्थाएँ इस कायव में भारतीय ओलांपपक सममतत की सहायता करती हैं। भारिीय ओलंपिक एसोमसएशन क े उद्देश्यों:- • ओलांपपक आांदोलन को बढ़ार्ा देनातथा खेलों का वर्कास करना। • अांतरावष्ट्रीय ओलांपपक सममतत तथा भारतीय ओलांपपक सममतत क े जलए तनयमों तथा वर्तनयमों को लागू करना। • अगर कोई खेल सांघ अजर्ष्ट् व्यर्हार करता है, तो उसक े वर्रुि कायवर्ाही करना। • ओलांपपक खेलों में भाग लेने र्ाली भारतीय टीमों क े जलए राष्ट्र ीय खेल सांघ से खचव र्हन हेतु वर्िीय सहायता लेना। • राष्ट्र क े युर्ाओां की र्ारीररक, नैततक र् साांस्क ृ ततक जर्क्षा को बढ़ार्ा देना तथा प्रोत्साटहत करना ताकक युर्ाओां क े चररिा का वर्कास ककया जा सक े । • सरकारी सांगठन होना तथा ओलांपपक से सांबांमधत सभी वर्र्यों पर तनयांिि रखना। • राज्य ओलांपपक सममतत तथा राष्ट्र ीय खेल सममतत को खेलों की स्वीक ृ तत देना, उनकी पूरे साल की ररपोटव तथा खचव आकद का वर्र्रि जरूरी है। ये सभी सूचनाएँ भारतीय ओलांपपक एसोजर्एर्न क े पास जमा होनी चाटहए।
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    2 (10) ओलम्पिक आंदोलन 02 • ओलांपपकखेलों में भाग लेने क े जलए चयतनत प्रततभामगयों का नाम सुझाना। • भारत सरकार तथा अन्य राष्ट्रीय सांस्थाओां क े बीच तालमेल बनाए रखना। • राष्ट्रीय खेल सांगठनों की सहायता से टीमों क े चयन पर तनयांििीखना तथा खेलों का प्रजर्क्षि देना, जो टीमें अन्तरावष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतततनमधत्व करती हों। • ओलांपपक झांडे का प्रयोग करने एर्ां वर्र्ेर्ामधकारी की रक्षा करना। • राष्ट्रीय एर्ां अन्तरावष्ट्र ीय खेलों का आयोजन करर्ाना। • खेल प्रततयोमगताओां में जातत, धमव, रांग तथा क्षेिा क े भेदभार् को ममटाना। • अांतरावष्ट्रीय ओलांपपक सममतत क े र्र्ल्व एांटी – डोपपिंग एजेंसी ( र्ाडा ) को लागू करना। भारिीय ओलंपिक संघ क े कायय:- 1. ओलांपपक आांदोलन को बढ़ार्ा देना। 2. राष्ट्रीय एर्ां अन्तरावष्ट्र ीय स्तर पर सभी प्रकार क े खेलो का आयोजन करना। 3. ओलांपपक खेलों में भाग लेने र्ाले खखलाकडयों का नाम सुझाना र् उन्हें समथवन देना। 4. सभी सांस्थानों र् भारत सरकार क े बीच तालमेल बनाए रखना। राज्यों क े वर्मभन्न खेलों पर तनयन्त्रि रखने र्ाली राज्य सांस्थाओां, राज्य ओलांपपक सांस्थाओांतथा राष्ट्र ीय सांस्थाओांमें सांबांध स्थापपत करना।
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