वर्ण
 1.सुमित बाजार गया |
2.भरत फल लाया।
इन दोनों वाक्यो को बोल कर पढ़िए हि बोलने क
े मलए ध्वनन का प्रयोग
करते हैं। हि मलखने क
े मलए मलपप का प्रयोग करते हैं। यह दोनों वाक्य
तीन-तीन शब्दों क
े योग से बनी है |
जैसे- 1. सुमित,बाजार,गया
2.भरत ,फल, लाया
इन दोनों वाक्यों क
े प्रत्येक शब्द िें कई ध्वननयााँ है।
1.सुमित = स+उ+ि+इ+त+अ
2.बाजार= ब+आ+ज+आ+र+अ
3.गया = ग+अ+य+आ
4.भरत= भ+अ+र+अ+त
5.फल = फ़+अ+ल+ अ
6.लाया= ल+आ+य+आ
इन उपयुुक्त ध्वनन क
े और ऐसे
छोटे-छोटे खंड नह ं हो सकते, जजन
पर पवचार ककया जा सक
े , इसमलए
ढहंद व्याकरण िें यह वणु कहलाते
हैं।
वर्ण की परिभाषा
भाषा की सबसे छोट इकाई
जजसक
े ओर टुकडे नह ं ककए जा
सकते, उसे वणु कहते हैं।
वर्णमाला की परिभाषा
वणों क
े ननजचचत और क्रिबद्ध सिूह को
वणुिाला कहते हैं।
वर्ण क
े भेद
स्वि
स्वर वे वणु होते है जो ककसी भी अन्य वणु की सहायता
क
े बबना बोले जाते है| ये संख्या िे 11(ग्यारह) होता है|
इनक
े उच्चारण िे िुाँह से हवा बबना ककसी रुकावट क
े
बाहर आती है|
स्वि क
े भेद
स्वर क
े तीन भेद होता है:
1.ह्रस्व स्वर
2.द र्ु स्वर
2.प्लुत स्वर
ह्रस्व स्वि
ये िूल स्वर भी कहलाते है|इनक
े उच्चारण िें बहुत कि
सिय लगता है|
जैसे- अ, इ,उ,ऋ
दीर्ण स्वि
जजन स्वर क
े उच्चारण िें ह्रस्व स्वर से भी
दोगुना सिय लगता है,वे द र्ु स्वर कहलाते
है|
जैसे- आ,ई,ऐ, ए, ओ,औ
द र्ु स्वर संख्या िें 7(सात) होते है।
प्लुत स्वि
जजन स्वरों क
े उच्चारण िें ह्रस्व स्वर से नतगुना
सिय लगता है, वह प्लुत स्वर कहलाते हैं। प्राय:
ये देर से बुलाने क
े मलए प्रयुक्त ककए जाते हैं।
मलखते सिय उसे स्वर क
े आगे(३) यह चचन्ह
लगा ढदया जाता है जजसका अमभप्राय नतगुना
सिय होता है।
जैसे - ओ३ि!,हे राि३!
व्यंजन
व्यंजन वे वणु है जो स्वरों की सहायता से ह बोले
जाते हैं।
जैसे- क+अ=क, ख+अ=ख
इनकी संख्या 33 है। इनक
े उच्चारण िें हवा िुंह
िें कह ं ना कह ं टकरा कर बाहर ननकलती है।
व्यंजन क
े भेद
व्यंजन क
े तीन भेद होते हैं:
1.स्पशु व्यंजन
2. अन्त:स्थ
3.ऊष्ि
स्पर्ण व्यंजन
इस व्यंजन िें 'क 'से लेकर ‘प' तक पांच वगु आते
हैं।
अन्त:स्थ व्यंजन
यह क
े वल चार है।
ये क
े वल चार है-य, र,ल,व
उष्म व्यंजन
ये क
े वल चार है।
श,ष,स,ह
संयुक्त व्यंजन
 जब दो व्यंजनों का उच्चारण एक साथ हो जजसिें पहला व्यंजन
स्वर रढहत और दूसरा व्यंजन स्वर सढहत होता है तो उसे संयुक्त
व्यंजन कहते हैं।
संयुक्ताक्षि व्यंजन
 जब दो अलग-अलग व्यंजनों को मिलाकर नया शब्द का ननिाुण होता
है तो वह संयुक्ताक्षर व्यंजन कहलाता है।इसका पहला व्यंजन स्वर रढहत
व दूसरा व्यंजन स्वर सढहत होता है।
द्ववत्व व्यंजन
जब एक जैसे दो व्यंजन एक साथ
आते हैं तो वे द्पवत्व व्यंजन कहलाते
हैं।
हहंदी वर्णमाला में तीन अन्य वर्ण है। यह स्वि क
े बाद ललखे तो
जाते हैं लेककन स्वि नहीं कहलाते है औि ना ही व्यंजन कहलाते
हैं। इन्हें 'अयोगवाह' कहा जाता है ।जो ननम्न प्रकाि:
1.अनुस्वाि-प्रत्येक व्यंजन वगण का अंनतम पांचवा वर्ण 'अनुस्वाि'
होता है। इसका (.)प्रयोग क
े रूप में ककया जाता है ।
जैसे -चंचल, क
ं गन ,तंत्र
2. अनुनालसक-जजस स्वि क
े उच्चािर् में हवा नाक व मुंह से ननकले
उसे 'अनुनालसक 'कहते हैं। जैसे - आँख, हँस, चाँद, फाँसी
3.ववसगण- इसका उच्चािर्' ह' क
े समान होता है। इसका प्रयोग (:) क
े
रूप में ककया जाता है। जैसे - अतः, प्रातः ,पुनः
Varn,SVAR,VYANJAN

Varn,SVAR,VYANJAN

  • 2.
  • 3.
     1.सुमित बाजारगया | 2.भरत फल लाया। इन दोनों वाक्यो को बोल कर पढ़िए हि बोलने क े मलए ध्वनन का प्रयोग करते हैं। हि मलखने क े मलए मलपप का प्रयोग करते हैं। यह दोनों वाक्य तीन-तीन शब्दों क े योग से बनी है | जैसे- 1. सुमित,बाजार,गया 2.भरत ,फल, लाया इन दोनों वाक्यों क े प्रत्येक शब्द िें कई ध्वननयााँ है। 1.सुमित = स+उ+ि+इ+त+अ 2.बाजार= ब+आ+ज+आ+र+अ 3.गया = ग+अ+य+आ 4.भरत= भ+अ+र+अ+त 5.फल = फ़+अ+ल+ अ 6.लाया= ल+आ+य+आ
  • 4.
    इन उपयुुक्त ध्वननक े और ऐसे छोटे-छोटे खंड नह ं हो सकते, जजन पर पवचार ककया जा सक े , इसमलए ढहंद व्याकरण िें यह वणु कहलाते हैं।
  • 5.
    वर्ण की परिभाषा भाषाकी सबसे छोट इकाई जजसक े ओर टुकडे नह ं ककए जा सकते, उसे वणु कहते हैं।
  • 6.
    वर्णमाला की परिभाषा वणोंक े ननजचचत और क्रिबद्ध सिूह को वणुिाला कहते हैं।
  • 7.
  • 8.
    स्वि स्वर वे वणुहोते है जो ककसी भी अन्य वणु की सहायता क े बबना बोले जाते है| ये संख्या िे 11(ग्यारह) होता है| इनक े उच्चारण िे िुाँह से हवा बबना ककसी रुकावट क े बाहर आती है|
  • 9.
    स्वि क े भेद स्वरक े तीन भेद होता है: 1.ह्रस्व स्वर 2.द र्ु स्वर 2.प्लुत स्वर
  • 10.
    ह्रस्व स्वि ये िूलस्वर भी कहलाते है|इनक े उच्चारण िें बहुत कि सिय लगता है| जैसे- अ, इ,उ,ऋ
  • 11.
    दीर्ण स्वि जजन स्वरक े उच्चारण िें ह्रस्व स्वर से भी दोगुना सिय लगता है,वे द र्ु स्वर कहलाते है| जैसे- आ,ई,ऐ, ए, ओ,औ द र्ु स्वर संख्या िें 7(सात) होते है।
  • 12.
    प्लुत स्वि जजन स्वरोंक े उच्चारण िें ह्रस्व स्वर से नतगुना सिय लगता है, वह प्लुत स्वर कहलाते हैं। प्राय: ये देर से बुलाने क े मलए प्रयुक्त ककए जाते हैं। मलखते सिय उसे स्वर क े आगे(३) यह चचन्ह लगा ढदया जाता है जजसका अमभप्राय नतगुना सिय होता है। जैसे - ओ३ि!,हे राि३!
  • 13.
    व्यंजन व्यंजन वे वणुहै जो स्वरों की सहायता से ह बोले जाते हैं। जैसे- क+अ=क, ख+अ=ख इनकी संख्या 33 है। इनक े उच्चारण िें हवा िुंह िें कह ं ना कह ं टकरा कर बाहर ननकलती है।
  • 14.
    व्यंजन क े भेद व्यंजनक े तीन भेद होते हैं: 1.स्पशु व्यंजन 2. अन्त:स्थ 3.ऊष्ि
  • 15.
    स्पर्ण व्यंजन इस व्यंजनिें 'क 'से लेकर ‘प' तक पांच वगु आते हैं।
  • 16.
    अन्त:स्थ व्यंजन यह क ेवल चार है। ये क े वल चार है-य, र,ल,व
  • 17.
    उष्म व्यंजन ये क ेवल चार है। श,ष,स,ह
  • 18.
    संयुक्त व्यंजन  जबदो व्यंजनों का उच्चारण एक साथ हो जजसिें पहला व्यंजन स्वर रढहत और दूसरा व्यंजन स्वर सढहत होता है तो उसे संयुक्त व्यंजन कहते हैं।
  • 19.
    संयुक्ताक्षि व्यंजन  जबदो अलग-अलग व्यंजनों को मिलाकर नया शब्द का ननिाुण होता है तो वह संयुक्ताक्षर व्यंजन कहलाता है।इसका पहला व्यंजन स्वर रढहत व दूसरा व्यंजन स्वर सढहत होता है।
  • 20.
    द्ववत्व व्यंजन जब एकजैसे दो व्यंजन एक साथ आते हैं तो वे द्पवत्व व्यंजन कहलाते हैं।
  • 21.
    हहंदी वर्णमाला मेंतीन अन्य वर्ण है। यह स्वि क े बाद ललखे तो जाते हैं लेककन स्वि नहीं कहलाते है औि ना ही व्यंजन कहलाते हैं। इन्हें 'अयोगवाह' कहा जाता है ।जो ननम्न प्रकाि: 1.अनुस्वाि-प्रत्येक व्यंजन वगण का अंनतम पांचवा वर्ण 'अनुस्वाि' होता है। इसका (.)प्रयोग क े रूप में ककया जाता है । जैसे -चंचल, क ं गन ,तंत्र 2. अनुनालसक-जजस स्वि क े उच्चािर् में हवा नाक व मुंह से ननकले उसे 'अनुनालसक 'कहते हैं। जैसे - आँख, हँस, चाँद, फाँसी 3.ववसगण- इसका उच्चािर्' ह' क े समान होता है। इसका प्रयोग (:) क े रूप में ककया जाता है। जैसे - अतः, प्रातः ,पुनः