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नपुंसकता का करे
अचूक नस्खे से
ईलाज
नाररयल कामोत्तेजक है। वीयय को गाढा करता है।
अुंकररत गेहूुंओुं को बिना पकायें ही खाऐुं। स्वाद के
ललए गड़ या ककशलमश लमलाकर खा सकते हैं। इन
अुंकररत गेहूुंओुं में ववटालमन ´ई` लमलता है। यह
नपुंसकता और िाुंझपन में लाभकारी है।
हीुंग को शहद के साथ पीसकर लशश्न या ललुंग पर
लेप करने से वीयय ज्यादा देर तक रुकता है और
सुंभोग करने में आुंनद लमलता है।
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मालकाुंगनी के तेल को पान के पत्ते पर लगा कर
रात में लशशन (ललुंग) पर लपेटकर सो जाऐुं और
2 ग्राम िीजों को दूध खीर के साथ सिह - शाम
सेवन करने से लाभ लमलता है।
छआरों के अन्दर की गठली ननकाल कर उनमें
आक का दूध भर दे, किर इनके ऊपर आटा लपेट
कर पकायें, ऊपर का आटा जल जाने पर छआरों
को पीसकर मटर जैसी गोललयाुं िना लें, राबि के
समय 1 - 2 गोली खाकर तथा दूध पीने से
स्तम्भन होता है।
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आक की छाया सूखी जड़ के 20 ग्राम चूर्य को 500 लमली
लीटर दूध में उिालकर दही जमाकर घी तैयार करें, इसके
सेवन से नामदी दूर होती है।
आक का दूध असली मध और गाय का घी, समभाग 4 - 5
घुंटे खरल कर शीशी में भरकर रख लें, इन्री की सीवन
और सपारी को िचाकर इसकी धीरे धीरे माललश करें और
ऊपर से खाने का पान और एरण्ड का पत्ता िाुंध दें, इस
प्रकार सात ददन माललश करें। किर 15 ददन छोड़कर पन:
माललश करने से लशश्न के समस्त रोंगों में लाभ होता है।
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मलहठी का पीसा हआ चूर्य 10 ग्राम, घी और शहद
में लमलाकर चाटने से और ऊपर से लमस्री लमले गमय
गमय दूध पीने से नपुंसकता में लाभ होता है।
जटामाुंसी, सोठ, जायिल और लौंग। सिको समान
मािा में लेकर पीस लें। 1 - 1 चम्मच की मािा में
ददन में 3 िार खाऐुं।
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आधा चम्मच काकड़ालसुंगी कोष का िारीक चूर्य एक कप
दूध के साथ सिह - शाम सेवन कराते रहने से कछ हफ्ते में
नपुंसकता में पूरा लाभ लमलेगा।
कलौंजी के तेल को लशश्न व कमर पर ननयलमत रूप से सिह
- शाम कछ हफ्तों तक माललश करते रहने से यह रोग दूर हो
जायेगा।
सिे द कनेर की 10 ग्राम जड़ को पीसकर 20 ग्राम वनस्पनत
घी में पकायें। किर ठुंड़ा करके जमने पर इसे लशश्न पर सिह
- शाम लगाने से नपुंसकता में आराम लमलता है।
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सिे द कनेर की 10 ग्राम जड़ को पीसकर 20 ग्राम वनस्पनत
घी में पकायें। किर ठुंड़ा करके जमने पर इसे लशश्न पर सिह
- शाम लगाने से नपुंसकता में आराम लमलता है।
रोगी के ललुंग पर पान के पत्ते िाुंधने से और पान के पत्ते पर
मालकाुंगनी का तेल 10 िूुंद लगाकर ददन में 2 से 3 िार
कछ ददन खाने से नपुंसकता दूर होती है। इस प्रयोग के
दौरान दूध, घी का अधधक मािा में सेवन जारी रखें।
ध्वज भुंग रोग में पान को चिाने से और रोगी के ललुंग पर
िाुंधने से लाभ होता है। घी में कपूर को नघसकर लशशन
(पेननस) के ऊपर माललश करें।
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प्रयोग रोज़ कछ हफ्ते तक करें।
नोट : खटाई और िादीयक्त समान ना खाऐुं। औषधध खाने के
साथ दूध और घी का प्रयोग ज्यादा करें।
ध्यान रहे -आयवेददक धचककत्सक से ववचार - ववमशय ज़रूर
कर ले।
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नपुंसकता का करे अचूक नुस्खे से ईलाज

  • 1.
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  • 2.
    नाररयल कामोत्तेजक है।वीयय को गाढा करता है। अुंकररत गेहूुंओुं को बिना पकायें ही खाऐुं। स्वाद के ललए गड़ या ककशलमश लमलाकर खा सकते हैं। इन अुंकररत गेहूुंओुं में ववटालमन ´ई` लमलता है। यह नपुंसकता और िाुंझपन में लाभकारी है। हीुंग को शहद के साथ पीसकर लशश्न या ललुंग पर लेप करने से वीयय ज्यादा देर तक रुकता है और सुंभोग करने में आुंनद लमलता है। Elzac Herbals Visit us at : www.elzac.in or www.elzacherbal.com
  • 3.
    मालकाुंगनी के तेलको पान के पत्ते पर लगा कर रात में लशशन (ललुंग) पर लपेटकर सो जाऐुं और 2 ग्राम िीजों को दूध खीर के साथ सिह - शाम सेवन करने से लाभ लमलता है। छआरों के अन्दर की गठली ननकाल कर उनमें आक का दूध भर दे, किर इनके ऊपर आटा लपेट कर पकायें, ऊपर का आटा जल जाने पर छआरों को पीसकर मटर जैसी गोललयाुं िना लें, राबि के समय 1 - 2 गोली खाकर तथा दूध पीने से स्तम्भन होता है। Elzac Herbals Visit us at : www.elzac.in or www.elzacherbal.com
  • 4.
    Elzac Herbals Visit usat : www.elzac.in or www.elzacherbal.com आक की छाया सूखी जड़ के 20 ग्राम चूर्य को 500 लमली लीटर दूध में उिालकर दही जमाकर घी तैयार करें, इसके सेवन से नामदी दूर होती है। आक का दूध असली मध और गाय का घी, समभाग 4 - 5 घुंटे खरल कर शीशी में भरकर रख लें, इन्री की सीवन और सपारी को िचाकर इसकी धीरे धीरे माललश करें और ऊपर से खाने का पान और एरण्ड का पत्ता िाुंध दें, इस प्रकार सात ददन माललश करें। किर 15 ददन छोड़कर पन: माललश करने से लशश्न के समस्त रोंगों में लाभ होता है।
  • 5.
    Elzac Herbals Visit usat : www.elzac.in or www.elzacherbal.com मलहठी का पीसा हआ चूर्य 10 ग्राम, घी और शहद में लमलाकर चाटने से और ऊपर से लमस्री लमले गमय गमय दूध पीने से नपुंसकता में लाभ होता है। जटामाुंसी, सोठ, जायिल और लौंग। सिको समान मािा में लेकर पीस लें। 1 - 1 चम्मच की मािा में ददन में 3 िार खाऐुं।
  • 6.
    Elzac Herbals Visit usat : www.elzac.in or www.elzacherbal.com आधा चम्मच काकड़ालसुंगी कोष का िारीक चूर्य एक कप दूध के साथ सिह - शाम सेवन कराते रहने से कछ हफ्ते में नपुंसकता में पूरा लाभ लमलेगा। कलौंजी के तेल को लशश्न व कमर पर ननयलमत रूप से सिह - शाम कछ हफ्तों तक माललश करते रहने से यह रोग दूर हो जायेगा। सिे द कनेर की 10 ग्राम जड़ को पीसकर 20 ग्राम वनस्पनत घी में पकायें। किर ठुंड़ा करके जमने पर इसे लशश्न पर सिह - शाम लगाने से नपुंसकता में आराम लमलता है।
  • 7.
    Elzac Herbals Visit usat : www.elzac.in or www.elzacherbal.com सिे द कनेर की 10 ग्राम जड़ को पीसकर 20 ग्राम वनस्पनत घी में पकायें। किर ठुंड़ा करके जमने पर इसे लशश्न पर सिह - शाम लगाने से नपुंसकता में आराम लमलता है। रोगी के ललुंग पर पान के पत्ते िाुंधने से और पान के पत्ते पर मालकाुंगनी का तेल 10 िूुंद लगाकर ददन में 2 से 3 िार कछ ददन खाने से नपुंसकता दूर होती है। इस प्रयोग के दौरान दूध, घी का अधधक मािा में सेवन जारी रखें। ध्वज भुंग रोग में पान को चिाने से और रोगी के ललुंग पर िाुंधने से लाभ होता है। घी में कपूर को नघसकर लशशन (पेननस) के ऊपर माललश करें।
  • 8.
    Elzac Herbals Visit usat : www.elzac.in or www.elzacherbal.com प्रयोग रोज़ कछ हफ्ते तक करें। नोट : खटाई और िादीयक्त समान ना खाऐुं। औषधध खाने के साथ दूध और घी का प्रयोग ज्यादा करें। ध्यान रहे -आयवेददक धचककत्सक से ववचार - ववमशय ज़रूर कर ले। पोस्ट पसुंद आई हो तो शेयर करके आगे िढाइये.||
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