धात्वन्तरेषु यााः सप्तकलााः संपररकीवतितााः ।
तास्वेक
ै कामवतक्रम्य िेगं प्रक
ु रुते विषम् ।।(सु.क. 4/40)
अर्ाित् धात्वाशयान्तरमयािाा
की जो सात कलाएँ िवणित की
गयी हैं उनमें एक-एक का
आश्रय लेकर विष क
े सात
'िेग' होते हैं।
रस, रक्त, मांस, मेा आवा सात धातुएँ हैं। इनमें से प्रत्येक धातु क
े बीच में
एक-एक कला होती है। विष क्रम से इन धातुओं में प्रिेश करता है। एक
धातु से ाू सरी धातु में प्रविष्ट होने क
े क्रम में उसे इन धातुओं क
े मध्य
कलाओं से होकर गुजरना पड़ता है। इसमें क
ु छ समय लगता है। जब-
जब विष एक धातु से ाू सरी धातु में प्रविष्ट होकर उसको ाू वषत करता है,
तब-तब विष का एक िेग उठता है।
विष-िेग की परिभाषा
4.
िेगान्ति (Vegantara)
येनान्तरेण तुकलां कालकल्पं विनवि वह।
समीरणेनोह्यमानं तिु िेगान्तरं स्मृतम्।। (सु.क. 4/41)
िायु से प्रेररत हुआ विष एक धातु से ाू सरी धातु में
प्रविष्ट होते समय धातुओं क
े मध्य स्थर्त कला को
पार करने में वजतना समय लगता है, उसे
'िेगान्तर' कहते हैं।
5.
विवभन्न आचार्यों क
ेमतानुसाि िेग ोंकी सोंख्या
आचार्यय चिक मतेन आचार्यय सुश्रुत मतेन
मनुष्ों में 8 7
पशुओं में 4 4
पवियों में 3 3
6.
आचार्यय चिक नेिेग ोंक
े सामान्य लक्षण ोंका वनरूपण किते हुए
कहा है –
तृष्णामोहान्तहषिप्रसेकिमर्ुक्लमा ििन्त्याद्ये।
िेगे रसप्राोषाासृक्प्राोषावाद्वतीये तु।।
िैिर्ण्िभ्रमिेपर्ुमूर्च्ाि जृम्ांगवचवमवचमातमकााः।
ाुष्टवपवितािृतीये मण्डलकण्ड
ू श्वयर्ुकोठााः।।
िातावाजाितुर्े ााहर्च्द्यंगशूलमूर्च्ािद्यााः।
नीलााीनां तमसि ाशिनं पञ्चमे िेगे।।
षष्ठे वहक्का, िंगाः स्कन्धस्य तु सप्तमेऽष्टमे मरणम्।
(च.वच. 23/18-21)
मानि
प्रावणर्य ोंमें
िेग ोंक
े
सामान्य
लक्षण
(Symptoms of
Poison Vegas -
Among Human
Beings)
7.
प्रर्म िेगक
े लिण पहले िेग में
रस धातु की विक
ृ वत से:
• तृष्णा (thirst)
• मोह (आंवशक संज्ञाहीनता) (stupor)
• ान्तहषि (increased sensitivity of teeth)
• प्रसेक (profuse salivation)
• िमन (vomiting)
• क्लम (सुस्ती) (fatigue) आवा क
े लिण
प्रकट होते हैं।
वद्वतीय िेग क
े लिण ाू सरे िेग में
रक्त की विक
ृ वत हो जाने से :
• शरीर में वििणिता (discoloration)
• भ्रम (vertigo)
• िेपर्ु (tremors)
• मृर्च्ा (fainting)
• जृम्ा (excessive yawning)
• सारे अंगों में चुनचुनाहर (generalized
tingling sensation)
• तमक श्वास (asthma)
8.
तृतीय िेगक
े लिण तीसरे िेग में
मांस धातु की विक
ृ वत से
• शरीर में मण्डल अर्ाित गोल-
गोल चकिे उिर आना
(urticaria)
• कण्ड
ू (itching)
• श्वयर्ु (swelling).
• कोठ (skin rashes) आवा
लिण प्रकट होते हैं |
चतुर्ि िेग क
े लिण चौर्े िेग में
िातावा ाोषों क
े अवधक क
ु वपत हो
जाने क
े कारण :
• ााह (burning sensation)
• छवाि (vomiting)
• अंगों में शूल (malaise)
• मूर्च्ाि (fainting) आवा
लिण उत्पन्न होते हैं।
9.
पञ्चम िेगक
े लिण - पाँचिें िेग में
दृवष्टमण्डलों क
े ाू वषत हो जाने से :
• कोई िी िस्तु नील िणि (bluish colored) की
ाीखती है तर्ा
• तम:प्रिेश (black-outs) होने लगता है।
षष्ठ िेग क
े लिण –
• छठे िेग में (मृत्युसूचक) वहक्का
(hiccups) आना प्रारम् हो जाती
हैं।
सप्तम िेग क
े लिण –
• स्कन्धिंग (drooping
shoulders) हो जाता है।
अष्टम िेग क
े लिण –
• प्राणी की मृत्यु (death) हो
जाती है।
प्रर्म िेगक
े लिण मनुष्ों में थर्ािर
विष की विषाक्तािथर्ा क
े 'प्रर्म िेग'
में :
• जीि श्याििणि (bluish discoloration) और
• जकड़ाहट (stiffiness) से युक्त हो जाती है|
• मूर्च्ाि (Fainting)
• श्वास (dyspnea) होते हैं।
वद्वतीय िेग क
े लिण –
• कम्प (tremors)
• अंगों में शैवर्ल्य (laxity)
• ााह (burning sensation)
• गले में पीड़ा (throat pain)
• आमाशय में पहुँचने पर विष से
हृायप्राेश में िेाना (pain in
cardiac region) होने लगती है।
12.
तृतीय िेग क
ेलिण –
• तालुशोष (dryness of palate)
• आमाशय में तीव्र शूल (severe
abdominal pain)
• नेत्ों में वििणिता (discoloration),
हरापन (greenish discoloration तर्ा
(edema) हो जाती है।
चतुर्ि िेग क
े लिण-
इसमें पक्वाशय और आमाशय में पहुंचने पर विष से :
• सूचीिेधित् िेाना (pricking pain)
• वहक्का (hiccup)
• कास (cough)
• आंतों में गुड़गुड़ाहट (borborgymi)
• वशर में िारीपन (heaviness of head)
13.
पञ्चम िेगक
े लिण –
• कफ का स्राि (secretion of mucus)
• वििणिता (pallor)
• सस्न्धशूल (arthralgia)
• सििाोषप्रकोप
• पक्वाशय में िेाना (lower abdominal pain)
षष्ठ िेग क
े
लिण-
• बुस्िविभ्रंश
(stupor)
• तीव्र अवतसार
(profuse diarrhea)
सप्तम िेग क
े लिण - कन्ये (shoulders), पीठ (back)
और कमर (waist) का टू टना (pain) तर्ा श्वासािरोध
(dyspnea) होते हैं।
प्रर्म िेगक
े लिण पहले िेग में
• जीि में कालापन (blackishness of tongue)
• स्तब्धता (अकड़न) (stiffness)
• बेहोशी (fainting)
• घबडाहर (anxiety)
• क्लम (confusion)
• िमन (vomiting) आने लगती हैं।
वद्वतीय िेग क
े लिण
• क
ं पकपी (tremors) का होना
• पसीना (sweating)
• शरीर में जलन (burning sensation)
• गले में पोड़ा (throat pain) होना लिण
होते हैं
• जब विष आमाशय में पहुँच जाता है
cardiac region) होती है।
तृतीय िेग क
े लिण
• तालु सूखने लगता है (dryness of palate) वजसक
े कारण
रोगी को प्यास (thirst) लगती है
• आमाशय में असा शूल (severe abdominal pain)
• आंखे ाुबिल हो जाती हैं अर्ाित् कम वाखाई ाेने लगता (loss
of visual acuity)
• नेत्गोलक हरे वाखाई ाेते हैं (greenish discoloration of
eyes) तर्ा आँखों पर सूजन (orbital edema) ही जाती
है।यवा विष का प्रिाि पार पड़ गया तो
• सुई चुिने कीसीपी (pricking pain)
• वहक्का (वहयको) (hiccups)
• काम (खाँची (cough)) तर्ा
• अंतवड़यों में गुड़गुड़हर (borborgymi) लगती है।
16.
चतुर्ि िेगक
े लिण इसमें :
• वशर प्राेश में अत्यन्त िारीपन (heaviness of head region) का
अनुिि होने लगता है।
पञ्चम िेग क
े लिण –
• मुख से वनरन्तर लार का चूना (profuse
salivation)
• शरीर का विशेषकर मुखमण्डल का िणि विक
ृ त
हो जाता है (loss of complexion)
• पिो (जोड़-जोड़ों में फटने की जैसी पीड़ा का होना
(breaking pain in the joints)
• िात आवा तोनों ाोषों का प्रक
ु वपत होना
• मनाशय में पीड़ा (colic) होना ये लिण होते हैं।
षष्ठ िेग क
े लिण इसमें
• बेहोशी (fainting)
• बार बार अवतसार (ास्त) (diarrhea) होते
हैं।
सप्तम िेग क
े लिण –
• कन्धे (shoulders), पीठ (back) और
कवटप्राेश (waist) टू ट (severe pain/
dislocation) जाते हैं|
• रोगी मर (death) जाता है।
17.
पशु पवक्षर्य ोंमेंिेग ोंक
े सामान्य लक्षण
(Symptoms of Poison Vegas Among Animals
and Birds)
पशुओों में िेग क
े लक्षण (Symptoms of poison vegas among animals)
आचार्यय चिक मतेन(च.वच. 23/22)
सीात्याद्ये भ्रमवत च, चतुष्पाो िेपते, तताः शून्याः।
मन्दाहारो वियते श्वासेन वह चतुर्ििेगे तु ।।
• प्रर्म िेग क
े लिण - पशुओं में प्रर्म िेग में
1. शरीर में पीड़ा (malaise) होती है और 2. चक्कर (vertigo) आने लगते हैं।
18.
वद्वतीय िेगक
े लिण –
ाू सरे िेग में रोगी कॉपने (tremors) लगता है।
तृतीय िेग क
े लिण –
• वनस्ियता (loss of movements) और
• िोजन क
े प्रवत उाासीन (anorexia) हो जाता है।
चतुर्ि िेग क
े लिण –
श्वास की गवत में िृस्ि (dyspnea) होकर मृत्यु (death) |
19.
पवक्षर्य ों मेंिेग क
े लक्षण (Symptoms of poison vegas
among birds)
आचायि चरक मतेन
ध्यार्यवत विहगः प्रथमे िेगे, प्रभ्राम्यवत वितीर्ये तु।
स्रस्ाोंगश्च तृतीर्ये विषिेगे र्यावत पञ्चत्वम् ।। (च.वच. 23/23)
• प्रर्म िेग क
े लिण- पिी प्रर्म िेग में उवद्वग्न (restless) हो जाता है।
• वद्वतीय िेग क
े लिण - ाू सरे में पिी चक्कर (incoherent motion) लगाने लगता है।
• तृतीय िेग क
े लिण - तीसरे िेग में पिी क
े समस्त अंग-प्रत्यंग ढीले पड़ जाते हैं (laxity of body-parts) और िह पञ्चत्व
(death) को प्राप्त हो जाता है ।