SARDAR PATEL AYURVEDICMEDICAL
COLLEGE & HOSPITAL,BALAGHAT
GUIDED BY:-
Dr. Sachin Mendhe Sir
Dr. Ashwini Makadi Mam
By:Rushikesh A.Naik
[B.A.M.S 2nd Year]
2.
* छर्दिनिग्रहण महाकषाय*
“जम्ब्वाम्रपल्लवमातुलुङ्गाम्बलबदरदाडिमयवषष्टिकोशीर
मृल्लाजा इनत दशेमानि छर्दिनिग्रहणानि भवष्तत (२८);”
1]. जामुि की पत्ती 6]. यव
2]. आम की पत्ती 7]. साठी चावल
3]. बबजौरा िीबू 8]. खस
4]. बेर 9]. ममट्िी
5]. अिार 10]. धाि का लावा
•दोषकमि :- बत्रदोषहर
➢संनथानिक कमि- शोथहर एवं रोपण करता है।
➢ िािीसंनथाि - बलप्रद्र और मेध्य है ।
➢ पाचिसंनथाि - फल रुचचवधिक, दीपि, तृटणानिग्रहण एवं ग्राही है।
➢ रक्तवहसंनथाि - यह हृद्य और शोणणतनथापि है।
➢ मूत्रवहसंनथाि- यह मूत्रल है।
➢ प्रजििसंनथाि - यह शुक्रवधिि है ।
➢ तापक्रम - यह ज्वरघ्ि है।
➢ सात्मीकरण - यह बल्य है।
(1) दाडिमत्वक् चूणिको तक्र क
े साथ रक्ताशि में देते हैं।
(2) आम, अजीणि, अशि और ववबतध में दाडिम का नित्य सेवि करिा चार्हए।
(3) अिारदािा और ममश्री की चििी मुख में रखिे से अरुचच िटि होती है,
(4) अिार त्वक् का सूक्ष्मचूणि उपदंशक्षत में लाभकारी है।
(5) मुखगत रक्तस्राव में दाडिमफल त्वक् चूणि को मधु क
े साथ
चाििा चार्हए ।
•आमनयक प्रयोग :-
10.
➢ दाडिमफल नवरसअम्बल रस से छर्दि में उपयोगी है।
➢ अम्बल रस से उदाि वायु का शमि होता है।
➢ हृद्य कमि से छर्दि निग्रहण कायि होता है।
•छर्दिनिग्रहण कायि:-
➢ उटण वीयि होिे क
े कारण द्रव पदाथि का शोषण कर
छर्दि को उत्पति िही होिे देता |
➢ ग्राही होिे से भी द्रव का शोषण करता है |
➢ ष्निग्ध गुण से छर्दि होिे क
े पश्चात तृटणा को दूर
करता है|