BA V Sem
Lawsof Adoption
(दत्तक विधि)
By
Prachi Virag Sontakke
2.
प्रस्तावना
• प्राचीन हिन्दूसमाज मे 12 प्रकार क पुत्रों में से एक
• दत्तक पुत्र बनाने की परंपरा क
े उल्लेख प्राचीन काल से प्रा्त
• िैहदक साहित्य में ऐसे उल्लेख जजसमे पुत्र क
े िोते िुए भी दत्तक पुत्र
गोद ललए गए
• िममसूत्र एिं स्मृततयों मे दत्तक का अर्म, उसकी सामाजजक जस्र्तत तर्ा
उसक
े सांपवत्तक अधिकार का गिन वििेचन प्रा्त
• दत्तक पुत्र बनाने की क्रिया को पुत्रीकरण क
े नाम से जाना जाता िै
3.
पुत्रीकरण क
े उद्देश्य
•मुख्यतः ििी उद्देश्य जो पुत्र प्राज्त क
े यर्ा – आध्याजत्मक/िालममक तर्ा लिक्रकक प्रयोजन
• दत्तकचंहिका : दो प्रिान उद्देश्य- वपंड दान संबंिी िालममक लाभ क
े ललए तर्ा नाम एिं
क
ु ल को अविच्छेद रूप से चलाने क
े ललए.
• अ. ल. यादि : मुख्य ध्येय िस्तुतः िमम से बिुत दूर- बबना क्रकसी प्रयास क
े संपवत्त प्रा्त
करना। क्रकसी दररि को शायद िी कोई अपना पुत्र दत्तक क
े रूप मे देने को तैयार िो
यद्यवप उस दररि मे भी आत्मा की रक्षा की भिन उतनी िी प्रबल जजतनी की ितनक
व्यजतत मे.
• बिध्यायन गुह्य सूत्र : पुत्रीकरण क
े समय व्यजतत पुत्र से किता िै क्रक मैं तुझे िन और
संततत क
े ललए ले रिा िूूँ
4.
दत्तक पुत्र लेनेक
े अधिकारी
• हिन्दू पुरुष: क
ुूँ िारे एिं वििुर भी अधिकारी
• सन्यासी एिं नपुंसक निीं ले सकते
• विशेष जस्र्तत में स्त्री: पुत्रिीन व्यजतत की मृत्यु क
े पश्चात गोद लेने का अधिकार
क
े िल उसकी विििा को ??
• विशेष: दत्तक लेने क
े ललए पत्नी की सिमतत लेना आिश्यक निी परंतु बबना पतत
की आज्ञा क
े स्त्री ना गोद ले सकती िै ना गोद क
े ललए अपना पुत्र दे सकती िै
• स्िस्र् शरीर एिं मजस्तष्क
• पुत्र, पित्र, प्रपित्र क
े अभाि मे
• यहद एकमात्र पुत्र अंिा, गूंगा, बिरा, सन्यासी या पततत िो।
• जजसको क
े िल अिैि पुत्र िी िो
• कोढ़ी पुरुष अधिकारी परंतु शूि निीं तयोंक्रक िो पुबत्रकारण प्रक्रिया क
े मंत्र क
े सार्
ििंन निीं कर सकते
• शिनक : ब्राह्मण द्िारा ििन कराकर शूि भी अधिकारी
5.
दत्तक पुत्र देनेक
े अधिकारी
• सािारणतया क
े िल वपता िी अपने पुत्र को दत्तक देने का अधिकारी
• दत्तक लेने क
े ललए पत्नी की सिमतत लेना आिश्यक निी
• याज्ञिल्तय : माता और वपता दोनों िी दत्तक देने क
े अधिकारी। क्रकन्तु यहद
वपता जीवित िै और अपनी बुद्धि का प्रयोग करने मे सक्षम िै तो माता पुत्र
दान निीं कर सकती
• वपता क
े क्रकसी रूप मे अक्षम िोने पर िी माता को अधिकार बशते क्रक वपता ने
उसे ऐसा करने क
े ललए स्पष्ट रूप से मना ना क्रकया िो
• माता वपता क
े अततररतत अन्य क्रकसी को दत्तक देने का अधिकार निीं
6.
दत्तक पुत्र बननेक
े योग्य व्यक्तत
• व्यििारमयूख : क
े िल लड़का िी दत्तक बन सकता िै
• दत्तकमीमांसा : कन्या को भी दत्तक का अधिकारी माना गया िै। प्रमाण:
दशरर् की पुत्री शांता को लोमपाद ने गोद ललया र्ा , पृर्ा जजसे क
ुं तीभोज
ने गोद ललया र्ा
• व्यििारमयूख + क
ु ल्लूकभट्ट : दत्तक पुत्र सजातीय िोना चाहिए
• सजातीय = समान जातत अर्िा समान गुण ?
• संस्कार किस्तुभ : ब्राह्मण क्रकसी िी िणम को गोद ले सकता िै
• सवपंड एिं सगोत्र को असवपंड एिं असगोत्र की तुलना मे दत्तक क
े ललए
िरीयता
• िलशष्ठ + शॉनक + लमताक्षरा : एकलिते पुत्र एिं ज्येष्ठ पुत्र को दत्तक बनाने
का तनषेि
7.
दत्तक की आयु
•शास्त्रकारों में मतभेद
• दत्तकमीमांसा : तीन िषम का बालक- पाूँच िषम से ऊपर क
े बालक का
पुबत्रकारण तनवषद्ि
• काललका पुराण : जजस बालक क
े जातकमम से लेकर चूड़ाकरण तक क
े
सभी संस्कार यहद मूल वपता क
े घर सम्पन्न िुए िो तो िो दत्तक क
े
रूप में ग्रिण निीं क्रकया जा सकता
8.
दत्तक पुत्र बनानेक
े पररणाम
• एक क
ु ल से संबंि विच्छेद : दूसरे से संबंि जुड़ा
• संबंि विच्छेद एिं नए संबंि जुडने की सीमा तनिामरण?
• सामान्य रूप से दत्तक को औरस पुत्र क
े समान िी अधिकार
• मनु : दत्तक अपने जनक वपता क
े गोत्र एिं ररतर् का िरण निीं करता
ना िी उसका वपंड दान कर सकता िै
9.
दत्तक क
े अधिकार
•पुत्र ना िोने पर समान जातीय क्रकसी पुरुष को संकल्प से अपने पुत्र को देने से िि पुत्र
दत्तक बन जाता िै
• दत्तक बनाने / देने / दत्तक की योग्यता संबंिी तनयमािली उपलब्ि
• सामान्य रूप से दत्तक को औरस पुत्र क
े समान िी अधिकार
• मनु : दत्तक अपने जनक वपता क
े गोत्र एिं ररतर् का िरण निीं करता ना िी उसका वपंड
दान कर सकता िै
• गितम : गोत्रभाज पुत्र, ररतर्भाज पुत्रों क
े अभाि में वपता की संपवत्त का ¼ भाग पाते िै
• किहटल्य + कात्यायन : सजातीय गिण पुत्र, औरस पुत्र क
े जन्म क
े बाद 1/3 हिस्सा पाते
िै और असजातीय गिण पुत्र ऐसी जस्र्तत मे क
े िल भोजन-िस्त्र क
े अधिकारी