वो 49 Ǒदन........ 
केजी तेरा भूत न उतरे मेरे सर से, 
उनÛचास कȧ याद न जाये मेरे Ǒदल से, 
सब सपनो मɅ खोये पर, Ǒदãलȣ अब तक जाग रहȣ, 
पूँछ रहȣ है कब आओगे एजी ͩफर से.
आपने Èया ͩकया अरͪवÛद जी ..... 
जब रात गहरȣ, पथ Ǒदखाते, जुगन!ू मुझ ेतुम चाँद जी, 
कमल ͨखलाते सूरज कोई, भँवरे को मकरंद जी, 
सǑदयɉ से सूखी इस धरा को, मेघ कȧ तुम बूँद जी, 
हम डूबतɉ को कोई Ǔतनका , आͨखरȣ उàमीद जी, 
तुझ ेढूँढ़ता चैनल बदल, अखबार के पÛने पलट जी, 
चाहे तुझ,े चाहू ँउसे, तुझस ेअलग, लगते गलत जी, 
देखता हू ँबस तुàह,े आँखɅ खुलȣ हɉ बंद जी, 
बस तेरȣ धुन, तेरा नशा, ना और मन को पसंद जी, 
पढ़ा CA , पर बन कͪव मɇ, रच रहा हू ँछँद जी, 
हाल अपना पागलɉ - सा, "आपने" Èया ͩकया अरͪवÛद जी.
मेरȣ बात - 
तेरा हर Ǿप भाता है, तेरा हर रंग भाता है, 
मेरे हर छंद को अरͪवंद त ूँͩकतना लुभाता है. 
वष[ 2014 के आरàभ मɅ Ǒदãलȣ के चुनावी नतीजɉ के आने के साथ हȣ राजनैǓतक ĐांǓत 
के नूतन अÚयाय का आरàभ हुआ. अंतस कȧ तहɉ मɅ पड़ी हुयी ͬचर आकां¢ाएं सजीव सी 
हो पड़ी थी एवं शूÛय सी पड़ी सàभावनाओं ने यथाथ[ के धरातल पर पग रख Ǒदए थे. 
मेरे मन ने भी अंगड़ाइयां लȣ और ͪवचारɉ कȧ अनवरत Įृंखला नूतन कͪवता-पुçपɉ मɅ 
पãलͪवत होती रहȣ. Ĥèतुत संकलन “वो 49 Ǒदन" ǒबखरे हुए कͪवता पुçपɉ को माला मɅ 
गूंथन ेका Ĥयास है.. 
इन कͪवताओं मɅ मɇने वत[मान मɅ Ĥचͧलत राजनैǓतक पǐरǺæयɉ पर अपनी समझ को 
लेखांͩकत ͩकया है. यह åयिÈतयɉ कȧ Ǔनंदा-èतुǓत ना होकर एक ͪवचार कȧ समी¢ा है 
Èयɉͩक åयिÈत आते जाते रहते हɇ वे िजतनी तेजी से आशा का संचार करते हɇ उससे 
कहȣं अͬधक गǓत से Ǔनराशा फैलाते हɇ. बहुधा åयिÈतयɉ मɅ मानवोͬचत कͧमयाँ पायी जा 
सकती हɇ, गलǓतयɉ कȧ संभावनाएं रहती हɇ, पर ͪवचार शाæवत होता है.. 
ये सभी रचनाएँ मुंबई लोकल मɅ ऑͩफस से घर जाने के अंतराल मɅ ͧलखी गयी. समय 
कȧ कमी ने कई èथानो पर ͪवचारɉ के èवतंğ Ĥवाह व शÞद चयन को संकुͬचत ͩकया, 
िजसके ͧलए मɇ ıदय से ¢मा Ĥाथȸ हू.ँ 
आशा है आपको ये Ĥयास ǽͬचकर लगेगा.... 
Amit Kumar Jain 
woh49din.aap@gmail.com
1. वो 49 Ǒदन, बहुत याद आएगे. 
2. आम आदमी तो आम होता है... 
3. 1. ħçटाचार ज़Ǿरȣ है.. 
4. ħçटɉ कवो ȧ संसद 49 मे Ǒदन, अब बहुत नो एंĚȣयाद !!! 
आएगे. 
5. जब चुनाव आ जाते ह… 
ɇ6. अͧभमÛयु फसा चĐåयूह म... 
Ʌ7. ये चीज़ है पॉͧलǑटÈस 
8. अजब तेरे शहर का दèतूर हो गया 
9. अब समर मे उतरना होगा 
10. झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ 
11. Èया चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को.. 
12. आप को चंदा कौन Ǒदया 
13. खचȶ बता रहे हɇ ͩक इनकम बुलंद है.. 
14. Ǔनण[य कȧ घड़ी अब आई है 
15. हाँ, म ɇअनाͩक[èट हू!ँ! 
16. नौ सौ चूहे खा ǒबãलȣ हज को चलȣ 
17. अबकȧ बारȣ आप है 
18. कांĒेͧसयो तुम कमाल करते हो.. 
19. जब ħçट तंğ का ħçट Ĥशासक 
20. आप तो बुरा मान गये 
21. कȧमत तो चुकानी पड़ेगी... 
22. िज़द ना करो 
23. कौन तुàहारा बाप है ??? 
24. म ɇतुàह ेÜयार Èयɉ द?ूँ?? 
25. हमारȣ कोͧशशɅ जारȣ रहɅगीं 
26. कमाल हो गया.. 
27. केजरȣवाल तो पागल है 
28. ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है.. 
29. ये खाँसी बड़े काम कȧ है ये खाँसी 
30. ये तो होना हȣ था.. 
31. हम भी चुप और तुम भी चुप 
32. Ĥाइम ͧमǓनèटर जेल म... 
Ʌ33. राजा ने ͧसंहासन छोड़ा है 
34. खबर बेचना मेरा धंधा…. 
35. Ǒदãलȣ को अयोÚया बनाना पड़ेगा… 
36. तुम Èया गये, सब सूना कर गये... 
37. ये तो ग़लत बात है.... 
38. सच ͩकसको अÍछा लगता है 
39. Èया सचमुच हम आजाद हुय े 
40. Ǒदल हȣ अपनी कमजोरȣ है, Ǒदल हȣ अपनी ताकत है 
41. ͩकसी का ज़मीन,ͩकसी का आसमाँ पे Ǒहसाब होगा 
42. कैस ेमान ूँअपराध है, भोला ħçटाचार 
43. दो मɅ से कुछ एक यार होगा 
44. कहाँ रहे तुम नंदलाला 
45. ħçटɉ से मुÈत अपना, भारत हमɅ बनाना 
46. म ɇअभी हारा नहȣ ंहू ँ 
47. मेरȣ हार से हाͧसल Èया कर पाओगे 
48. अब आम आदमी जागा है 
49. अबकȧ बार मोदȣ सरकार 
50. अÍछे Ǒदन आने वाले हɇ 
51. भारत माँ का कौन भला 
52. ͪवकास चाǑहए तो ħçटाचार भी होगा 
53. ये कैसा ͪवकास है 
54. सारे सपने टूट गए 
55. ͩकसके महल सजाने 
56. अÍछे Ǒदन आ गए 
57. म ɇसीता हू,ँ तुम राम बनो 
58. अजब-गजब ये सàमोहन 
59. कहाँ गये वे "अटल" 
60. छÜपन छाती खरगोश हुए 
61. सरकार जहाँ सरकार वहȣं है 
62. दो Ǒदन चले अढ़ाई कोस 
63. नाम बडे और दश[न छोटे 
64. सब बदला और तुम भी बदले 
65. Èया रहा बाकȧ जो तुमको जीतना है 
66. ͪवप¢ हमɅ पसंद नहȣं 
67. ये ǐरæता Èया कहलाता है 
68. तुमस ेदूर कहा ँजाऊँगा 
69. Èया हार मेरȣ हार है 
70. लड़ रहा त ूँजंग मेरȣ 
71. तुम कहते हो वो बहुत बुरा है 
72. Èया कह तेरा मान बढाऊँ 
73. जज ͪवलेन हो गये 
74. इस गुͫडया का नाम मीͫडया 
75. मेरȣ भूल को भूल जाओ ͪĤये 
76. इतनी तैयारȣ करना है 
77. अÛना कब तक मौन रहोगे 
78. RTI कुछ खास है 
79. आप"को अपना ͪवæवास चाǑहये 
80. भारत माँ के लाल बहादुर 
81. Ǒदãलȣ माँगे केजरȣवाल 
82. ͪवͪवध
वो 49 Ǒदन, बहुत याद आएगे... 
वो जनता कȧ मज़ȸ पे स×ता मे आना, 
आम आदमी का आसमान छू जाना, 
वो मेĚो से तेरा, ताजपोशी को आना, 
वो राम-लȣला मैदान का मंज़र सुहाना, 
वो सपनो कȧ दुǓनया हक़ȧकत मे आना, 
वो आँखो कȧ नमी, हɉठɉ का मुèकुराना, 
कभी तो हंसाएँगे , कभी तो ǽलाएँगे. वो 49 Ǒदन.. 
ग़रȣबो का ǒबजलȣ और पानी पा जाना, 
वो अफ़सरȣ, लालब×ती का गुल हो जाना, 
वो ħçटɉ के कुनबे मे हड़कंप लाना, 
वो सदȹ कȧ रातɉ मे रोडो पे सोना, 
वो िज़द तेरȣ, कलयुग मे, राम-राज लाना, 
छूकर जड़-चेतना को, अǑहãया बनाना, 
मसीहा तेरे कǐरæमाई नुèख े, नीम हकȧम भी अपनायेग.े वो 49 Ǒदन.. 
वो कॉंĒेस भाजप का आपस मे ͧमलना, 
रंगे हाथ पे कमल कागज के ͨखलना, 
उसूलɉ पे तेरा, महल छोड़ जाना, 
ͪवæवास ͩकतना ͩक, बहुमत से आना, 
ना भूल ेना भूलेग ेतेरा जमाना, 
हरेक हɉठ पे है , आज तेरा तराना, 
इंतज़ार है, बेकरार सब, "आप' कब आएगे. वो 49 Ǒदन..
आम आदमी तो आम होता है... 
कभी गुèसा तो Üयार कभी,सच-झूठ का कारोबार कभी , 
पǐरवार और रोजी-रोटȣ, इनका सारा संसार यहȣ, 
आजकल ख़बरɉ मɅ, Ĥायः गुमनाम हȣ होता है.... 
कुछ गलती, कुछ कͧमयां तो, सब सवा अरब मɅ पाओगे, 
गर ये नहȣं,ऐसा नहȣं तो, और बेहतर कहाँ से लाओगे? 
यहाँ "आम" हȣ ͧमलɅगे बाबूजी! "राम" तो बैकुÖठ मɅ होता है.... 
कोई बनावट यहाँ नहȣं, जैसे Ǒदखते बस वैसे हɇ, 
हम ऐसे-वैसे-जैसे हɇ, पर ǒबलकुल तेरे जैसे हɇ, 
हमारे दाग Ǒदखते Èयɉ हɇ, ये हमपे इãजाम है.... 
ये अलग लोग, ये अलग सोच, कोई अलग हȣ इनका देश रहा, 
गूंगी इन महलɉ कȧ दȣवारɅ,अब कहने-सुनन ेÈया शेष रहा, 
अपनɉ का दद[ बाँटना तो, अपनɉ का काम होता है....
ħçटाचार ज़Ǿरȣ है.. 
नादान है जो शोर मचाते, ħçटाचार ͧमटाएगे, 
ये ज़ǐरया गर चला गया, तो फंड कहाँ से आएगे, 
कैसे ये भीड़, सभाएँ होगी, ͪव£ापन लोक-लुभावन होगे, 
िèवस-खाते, ǽतबा, तामझाम, बंगला, गाड़ी, चमचे होगे, 
कोई शौक नहȣ मजबूरȣ है. ħçटाचार ज़Ǿरȣ है..... 
खेती, पानी, राशन,ͧश¢ा, èवाèØय, सुर¢ा, रोज़गार, 
रोड़े, रेलɅ, पुल, èकूलɅ , उɮयोग, धंधे, शेयर बाज़ार, 
इन सब कामो को करने का, इसके कंधो पर हȣ भार , 
कहȣ ͧमठाई, कहȣ दलालȣ, कहȣ तो है ये ͧशçटाचार, 
ͪवकास कȧ हर एक कहानी, इसके ǒबना अधूरȣ है. ħçटाचार ज़Ǿरȣ है.....
ħçटɉ कȧ संसद मे अब नो एंĚȣ!!! 
मुखड़ ेछोड़ो, मुƧा पकड़ो, और मुƧा बस ħçटाचार है, 
मुखड़ ेतो आत-ेजात ेहɇ, झूठा इनका Üयार है, 
ħçटाचार मुÈत होगी, अब सारȣ कंĚȣ. 
ħçटɉ कȧ संसद मे अब नो एंĚȣ!!! 
गर बदला चेहरा, पर तंğ नहȣ, तो हाͧसल Èया कर पाओगे, 
पाँच साल का इंतज़ार, पल-पल ͩफर पछताओगे, 
अरे! मनमोहन- से ईमानदार कȧ, यहाँ डूब गयी सारȣ ͫडĒी. 
ħçटɉ कȧ संसद मे अब नो एंĚȣ!!! 
ना भेदभाव पद,धन,बल का , सबको Ûयाय, सàमान ͧमले, 
है सरल ͪवकास कȧ पǐरभाषा, जहाँ सबको अवसर समान ͧमले, 
फेकू जी! अब बस ! ͪवकास के, चाँद तारɉ कȧ ǒबĐȧ. 
ħçटɉ कȧ संसद मे अब नो एंĚȣ!!! 
ͩकसको Èया ͧमलता, हम Èया पाते, राजा कौन, कौन सरकार, 
छोड़ो ये सब, आओ ͧमलकर, एक बात को हो तैयार, 
अपनी वोट से कोई ħçट, ना पहुच ेǑदãलȣ. 
ħçटɉ कȧ संसद मे अब नो एंĚȣ!!!
जब चुनाव आ जाते हɇ… 
तेरे आने कȧ आहट सुन, पतझड़ सावन हो जाते हɇ, 
ईद का चाँद जमीन पे उतरा , Ĥायः ͩक़èसो मे हȣ सुन पाते हɇ, 
साँप ǒबलɉ से बाहर आते, ͬगरͬगट के रंग बदल जाते हɇ, 
िजनके चरणɉ को खोजा अब तक, उनको चरणɉ मे पाते हɇ. 
Èया ͩकया और Èया कर दɅगे, लंबी फेहǐरèत सुनात ेहɇ, 
हाथ मे इनके चंदा, सूरज, Ǒदन मे तारे Ǒदखलाते हɇ, 
सबसे लेकर कुछ को देकर, दानवीर कहलाते हɇ, 
चम×कार है इस चुनाव का, कंस कृçण बन जाते हɇ. 
चमचɉ कȧ तो चाँदȣ होती, भूख ेǒबरयानी खात ेहɇ, 
दाǾ, नोटɉ कȧ वषा[ से, वो समाजवाद फैलाते हɇ, 
हम वहȣU, ͪवकास के ͪव£ापन, टȣवी को चमकाते हɇ, 
ͬधक ये जनता ऐसे नेता, ͩफर ͩफर जीत के आ जाते हɇ.
अͧभमÛयु फसा चĐåयूह मɅ... 
सुन ललकार शğुओ कȧ, इसका मन भी है मचलाया, 
लाज बचाने देश कȧ अपने, बालक ने है शèğ उठाया, 
ये सािजश है षडयंğ कोई, सब बड़े-बडो ने समझाया, 
साहस , दुèसाहस कȧ पतलȣ, रेखा को इसने आज ͧमटाया, 
Ĥाणो का भय पीछे छूटा, संकãप एक बस शेष रहे, 
कुल का गौरव ना खोने दूँगा , जब तक अंǓतम साँस रहे, 
देखो! Ǔघरा शğुओ ंमे, है लहुलुहान पर लड़ता जाता, 
कोई मारे भाला सीने मे, कोई पीछे से छुरȣ भɉकता, 
चोतरफ़ा से बाणो कȧ वषा[, सब कवच भेदती जाती है, 
ĤǓतपल मृ×य-ुसुंदरȣ अपने, पास खींचती जाती है, 
तुम आज मूकदशȸ ! भͪवçय को, Èया जबाब दे पाओगे, 
युगɉ-युगɉ तक Èया ͩफर, कोई अͧभमÛयु पा जाओगे, 
समय शेष है उठो वीर!, आओ ͧमलकर शèğ उठाएँ, 
लड़े Ĥाण जब तक तन मे, एक नया इǓतहास रचाएँ.
ये चीज़ है पॉͧलǑटÈस ये चीज़ है पॉͧलǑटÈस 
कȧचड़ काͧलख का खेल हुए, सब गोरे काले ͧमÈस, 
कͪपल, सͬचन सब आउट दनादन भÏजी मारे ͧसÈस, 
ǒबन-पूंजी का Ǔनवेश बड़े Ǒदन रात ना कोई ǐरèक, 
हार-जीत बस आँख-ͧमचोलȣ, हर Üलेयर हȣ है ͩफÈस, 
ͪव£ान गͨणत सब फैल हुई, ना चले इकॉनोͧमÈस, 
ये कला बड़ी आसान ͩक़ इसमे, बस करना सबके बूट ͧलÈस , 
ͬचपक रहो कुसȸ से तुम, चाहे ͩकतने खाओ ͩकÈस, 
मेहनत सÍचाई दूर हटो , है èवागत डटȹ ǑĚÈस, 
"आप" आए ͪवæवास जगा, बदलेगी ये पॉͧलǑटÈस, 
ना नज़र लगे फलो-फूलो, यहȣ हमारȣ ͪवश-ͪवश. 
ये चीज़ है पॉͧलǑटÈस ये चीज़ है पॉͧलǑटÈस....
अजब तेरे शहर का दèतूर हो गया 
लुटेरे शहर के , ईमान के , मंǑदर मɅ बैठे पुज रहे, 
मेरा एक चोर को बस चोर कहना , कसूर हो गया. 
चंदा , सूरज , पǐरयाँ ले लो, लो इंġधनुष के रंग सभी, 
सपने बेचते - बेचते वो , हकȧकत से दूर हो गया. 
ये उसूल Èया दɅगे , ͧसवा गरȣबी , गुमनामी के, 
चायवाला ईमान बेचके, मशहूर हो गया. 
कोई मारता ना मरता , ये फलसफा पढ़के, 
खून के खेल को योगी, मंजूर हो गया. 
दौलत कȧ चमक है, या पॉͧलश का हुनर, 
कांच का मामूलȣ टुकड़ा, आज कोǑहनूर हो गया.
अब समर मे उतरना होगा 
Èया जीवन के उƧेæय यहȣ, खाना पीना और सो जाना, 
पǐरवार, पढ़ाई, रोज़गार, अपनी दुǓनया मे खो जाना, 
देश कȧ चचा[, देश कȧ ͬचंता, देशĤेम बस मन-रंजन, 
देश कȧ दशा बदलने ͧमğो!, सोच कȧ Ǒदशा को बदलना होगा l अब समर.. 
मूğ ͪवसज[न बहुत हुआ पुǽ!, Ĥाण-सृजन अब करना होगा, 
लाल लहू कȧ गमȸ से अब, Ǒहमͬगǐर को भी बहना होगा, 
धृतराçĚ सरȣखे राजा हɇ, है हर नुÈकड़ पर चीर हरण, 
हाथɉ मे चĐ सुदश[न ले, अब तुàह ेकृçण बनना होगा l अब समर.. 
अभी नहȣ तो कभी नहȣ, इस युग-¢ण कȧ पहचान करो, 
ये राçĚ-सृजन का पथ दुçकर, तुम भी कुछ Įम-दान करो, 
जीवन का मूãय चुकान ेका, यह èवͨण[म अवसर आया है, 
इǓतहास रच ेहɇ बहुतɉ ने , तुझ ेभͪवçय रचना होगा l अब समर..
झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ 
झाड़ू हर घर मɅ रहती , आम खास मɅ भेद ना करती, 
है Ǒदखने मɅ सहज-सरल पर, कूड़ ेपर ǒबजलȣ सी ͬगरती, 
ये बड़े काम कȧ चीज है बाबू! तुम भी इसको घर लाओ. 
झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ 
ऊँच ेछÜपर कȧ धूल Ʌहɉ या मकड़जाल कȧ चूल Ʌहɉ, 
चले Ǔनरंतर ǒबना थके, चाहे ͩकतनी भी ĤǓतकूलɅ हɉ, 
ये समाजवाद कȧ पाठशाला, कुछ समझो कुछ समझाओ. 
झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ 
घर भरा गंदगी बदबू से, मÍछर बीमारȣ फैलाएं, 
अपने घर को सुथरा करने, है इÛतजार, कब मेहतर आयɅ, 
उठो अमु! आलस छोडो, झाड़ू पकड़ो ना शमा[ओ. 
झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ 
ये बँधी हुयी पर सधी हुयी, ͩकसी कोने मɅ पड़ी रहे, 
कत[åयɉ के पथ पर बढ़ती, पल-पल अपनी मौत सहे, 
खुद ͧमटकर औरɉ कȧ सेवा, झाड़ू का सÛदेश सुनाओ. 
झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ
Èया चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को.. 
लाख चौरासी योǓन मे, दंगो कȧ फाइल भटक रहȣ, 
दज[नो कͧमशन, जाँच सͧमǓत, जाँच कहा पर अटक रहȣ, 
ͩकतने कͧमशन और लगेगे, इस एक घटना कȧ जाँच को. 
Èया चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को.. 
देश के Ǒदल Ǒदãलȣ मे हȣ तो, हāतो नरसंहार हुआ, 
Èया औरत Èया बÍचे, देखो! लाशɉ का अंबार हुआ, 
और ͩकतने सबूत लगेगे, साǒबत करने पाप को. 
Èया चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को.. 
क×ल हज़ारɉ खुलेआम, पर काǓतल ना एक ͧमला, 
ͬधक! Ûयाय और ये Ûयाय åयèथा, अंधे- बहरो का काͩफला, 
लगे तीस साल और ͩकतने, माइ लॉड[!! लगेगे आपको. 
Èया चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को..
आप को चंदा कौन Ǒदया 
आतंकवाद, नÈसल, बीमारȣ, भुखमरȣ, अͧश¢ा, रोज़गार, 
मǑहला सुर¢ा, सांĤदाǓयकता, समèयाओ का है अंबार, 
पर सबस ेͬचंता का Ĥशन् आज ͩक, आप को चंदा कौन Ǒदया. 
2G, CWG, आदश[, कोल, मनरेगा, वाĜा, बोफोस[ , 
इन घोटालो कȧ जॉच ज़Ǿरȣ, जारȣ है जारȣ हȣ रहेगी, 
पर सबसे पहले ये जाँच ज़Ǿरȣ, आप को चंदा कौन Ǒदया. 
देश-ͪवदेश से काला पीला, औरɉ ने अरबो हͬथयाया, 
जÛमǑदन ͬगÝट, कहȣ पाटȹ फंड, ͩकसी ने हāता नाम बताया, 
अजी! अथ[åयèथा ख़तरे मे ͩक , आप को चंदा कौन Ǒदया. 
लाखɉ केस कोट[ मे सड़ रहे, Ûयाय माँगते जूत ेǓघस रहे, 
कुछ अपने हालात के हाथो, कुछ वकȧल कȧ फȧस से मर रहे, 
पर पहले Ǔनण[य ये होना है ͩक, आप को चंदा कौन Ǒदया.
खचȶ बता रहे हɇ ͩक इनकम बुलंद है.. 
ये लालͩकले से मंच सजे, ये रेल-बसो का तामझाम, 
लाखɉ कȧ लाई भीड़, और खाने पीने के इंतज़ाम, 
पूछो! ये शो Ĥायोिजत करने वाला, कौन अमीरचंद है? खचȶ बता.. 
पÜपू पापा बनने Ǔनकले, नयी सोच नयी बात है, 
बासी कड़ी उबाल मारती, रॅटा रटाया पाठ है, 
500 करोड़ लगेगे साǒबत करने , ͩक पÜपू अÈलमंद है? खचȶ बता.. 
कु×ते- सा जो काम कराकर, तनíवाह बाँटने को रोएंगे, 
माँगे-माँगे भीख ना देते, ǒबनमांगे Èयɉ चंदा देगे? 
खुलȣ Ǔतजोरȣ आपकȧ खाǓतर, Èयɉ हमको मु͡ी बंद है? खचȶ बता.. 
रोटȣ, कपड़ा, मकान कȧ ͬचंता, मे जीवन को Ǔघसता जाता, 
कभी मंदȣ, कभी मɅहगाई से, आम आदमी ͪपसता जाता, 
पर इनका धंधा तेज ͪवæव कȧ, अथ[åयवèथा मंद है. खचȶ बता.. 
हम देशी, देशी अंदाज हमारा, देशी अपना संसार है, 
पर ͪवदेशी कंधɉ पे इनके, मेक- ओवर का भार है, 
ना आम, ये ऊँचे लोग हɇ बाबू!! ऊँची इनकȧ पसंद है. खचȶ बता..
Ǔनण[य कȧ घड़ी अब आई है 
बजा ǒबगुल, आरंभ युƨ, वीरो ने शèğ सभाले है, 
दोनो सेनाए सजी हुई, Ǔनण[य कȧ घड़ी अब आई है. 
कहȣ तो अनुभव कȧ बरसातɅ, कहȣ दुहाई यौवन कȧ, 
कोई ͪवकास कȧ तान छेड़ता, कहȣ सांĤदाǓयकता छाई है. 
Èया ͩकया और Èया कर देगे, ऊँचे मंचɉ से गरज रहे, 
दोनो ने अनͬगन वादɉ कȧ, ǒबन-डोर पतंग उड़ाई है. 
दशक गये पर दोनो से, दंगो के दाग नहȣ जाते, 
करोड़ɉ के इंपोटȶड पाउडर से, पÜपू-फेकू कȧ पुताई है. 
मन दुͪवधा मे èतÞध शूÛय, èमृǓतयɉ मे खो जाता है, 
ͩकस और जाऊं या ठहर जाऊं, इधर कुआ उधर खाई है. 
मत सोचो! मेहनत बेकार जाएगी, आप कहाँ तक पहुँच पाएगी, 
पग-पग, पल-पल बढ़के हȣ तो, सबने मंिज़ल पाई है.
हा,ँ म ɇअनाͩक[èट हू!ँ! 
अबलाओ ंके आँस ूसे, Ǒदãलȣ का Ǒदल जब सुख [हो रहा, 
गुͫड़या, दाͧमनी के ͩक़èसो से, सब देश शम[ मे डूब रहा, 
पुͧलस Ĥशासन मूक-बͬधर, दुशासन बेखौफ़ खड़े, 
चीर-ġोपदȣ लूट जान ेद ूं, ना राजा म ɇधृतराçĚ हू.ँ 
हा,ँ म ɇअनाͩक[èट हू!ँ! 
जन-सेवा हȣ राçटधम[, क़ानून, Ûयाय, संͪवधान है, 
लोकतंğ का Ĥाण यहȣ, ये हȣ भारत Ǔनमा[ण है, 
जन-सेवा से ͪवमुख खड़ा, वो तंğ ħçट, सरकार Ǔनकàमी, 
जन-सेवा के नूतन पथ सृजता, कोई कहे पथ-ħçट हू.ँ 
हा,ँ म ɇअनाͩक[èट हू!ँ! 
िज़द है जब तक Ĥाण रहे, जन-Ǒहत मे संघष [कǾगा. 
संसद मे कभी सड़क पे आके, ħçटो!! तुम पर वार कǾगा, 
पद लोभी होगे और कोई, सरकार ͬगरे तो ͬगर जाए, 
ͧसर नहȣ झुका है, नहȣ झुकेगा, हा!ँ मɅ िजƧी दुçट हू.ँ 
हा,ँ म ɇअनाͩक[èट हू!ँ!
नौ सौ चूहे खा ǒबãलȣ हज को चलȣ 
अब तक जो पैसे-पॉवर कȧ , आँखो पे प͠ी बाँधे थे, 
Ǒदãलȣ कȧ जनता कȧ दहाड़ से, उन अंधो कȧ आँख खुलȣ. 
जनता हा-हाकार मचाती, कानो मे ज ूँभी ना रɅगती, 
इन बहरȣ सरकारो मे, जनता-दरबार कȧ सेल चलȣ. 
जंग जीत महलो मे सोते, 5 साल ͩफर कौन Ĥजा, 
इन "गिजनी" सरकारो को, अब याद आए पानी-ǒबजलȣ. 
कोई टोल- बूथ है तोड़ रहा, कहȣ आ×म- दाह कȧ है धमकȧ, 
कहȣ पे धरना, कहȣ Ĥदश[न, जन-सेवा कȧ अब होड़ चलȣ. 
जन कȧ नीǓत, जन का नेता, सभी दलɉ मे ख़ाͧलबलȣ, 
मॅफलर, èवेटर सपने मे Ǒदखते, खादȣ कȧ पतलून खुलȣ. 
ना कोई सभा का तामझाम, ना कोई मेक-ओवर का खचा[, 
मीͫडया मे अपनी èटोरȣ, फोकट मे Ǒदन-रात चलȣ. 
स×ता कȧ दलालȣ से अपनी, जो रोज़ी-रोटȣ चला रहे, 
अब "ħçटाचार ͧमटाएगे", बोले कौआ कोयल बोलȣ . 
आप-जाप कȧ माला रॅट रहे, सब जन देखादेखी कर रहे. 
झाड़ू पहुचेगी संसद मे, ये चचा[ है गलȣ-गलȣ.
अबकȧ बारȣ आप है 
हम युवा हɇ अनुभवहȣन सहȣ, कुछ तौर-तरȣके अलग सहȣ, 
ज़ुबान हमारȣ तãख़ सहȣ, पर Ǔनयत हमारȣ साफ है. अबकȧ बारȣ .. 
ħçटाचार जड़ɉ तक फैला, बड़े-बडो का मन है डोला.. 
सारȣ उलझन का सबब यहȣ, सब तकलȣफो का बाप है. अबकȧ बारȣ .. 
रावण एक, अनेक Ǿप मे, सीताओ को छलने आया, 
सावधान! है वेष केशरȣ, पर चलता ͩफरता पाप है. अबकȧ बारȣ .. 
ǒबजलȣ राशन पुͧलस Ĥशासन, ͧश¢ा रोज़गार Ǔनमा[ण, 
इसकȧ हद से कोई ना छूटा, Èया यूपी Èया गुजरात है. अबकȧ बारȣ .. 
ऊँचे मंचो से èवराज के, लैशन लाखɉ को पढ़ा रहे, 
Ĥथम पंिÈत मे येǑदयुरÜपा, बंगाǽ, बाबूराम हɇ. अबकȧ बारȣ.. 
जनता के मुƧ ेधूल खा रहे, नामɉ का हȣ धमाल है, 
जय- जयकार कहȣं राहुल, कहȣ नमो-नमो का जाप है. अबकȧ बारȣ .. 
आम आदमी खूँटे पे पूरे, तंğ मे ħçटाचार है, 
Èया फ़क[ कौन है चोर, कौन ͩफर, चोरो का सरदार है. अबकȧ बारȣ .. 
दोनो ने दशको राज ͩकया, एक Ǒदãलȣ एक गुजरात ͧलया, 
जनता जैसी वैसी हȣ रहȣ, हुए VVIP आप है. अबकȧ बारȣ .. 
लोकतंğ का समर सामने, तीन माह बस शेष हɇ.. 
आज "आप" को साǒबत करना, हममे भी कुछ बात है. अबकȧ बारȣ ..
कांĒेͧसयो तुम कमाल करते हो.. 
ͩकतना लूटा ͩकतना खाया, इन ͪपछले पंġह सालɉ मे, 
तुमको पाकर Èया-Èया खोया, इन ͪपछले पंġह सालɉ मे, 
थोड़ा आराम- ͪवराम करो!! Ǒदãलȣ के जनमत का सàमान करो!! 
पंġह Ǒदन कȧ सरकारɉ से, ͩकतने सवाल करते हो. 
कांĒेͧसयो तुम कमाल करते हो. 
लुट रहȣ अèमत ेखुल-ेआम, चौतरफ़ा जंगलराज है, 
जनǑहत मे रोड़ɉ पर राजा, लोकतÛğ शम[सार है, 
पुͧलस-Ĥशासन कȧ सब चाबी, खुद कȧ जेबो मे रखकर, 
दाǓनश मǑहला का रेप Èयो हुआ? हमसे सवाल करते हो. 
कांĒेͧसयो तुम कमाल करते हो. 
ǒबन माँगे ǒबना बताए हȣ, ǒबन-शत[ समथ[न भेज Ǒदया 
ललकारा अपने वचन Ǔनभाने, अèवीकृǓत को "कायर" इãज़ाम Ǒदया 
जन-मत रखने Ǔनज-मन मारा, वीरो-वत चुनौती èवीकार ͩकया 
अब धूल हटȣ CWG फाइल से, इतनी हलचल, इतना Èयो डरते हो? 
कांĒेͧसयो तुम कमाल करते हो.
जब ħçट तंğ का ħçट Ĥशासक…….. 
जब ħçट तंğ का ħçट Ĥशासक, सब हदे पार कर जाता है, 
कभी दुशासन, कभी कÛस बन चीर Ĥजा का हर जाता है, 
रावण एक अनेक मुखो से, जनता को छलता जाता है, 
तब देव कभी तो कृçण, राम , अरͪवंद कभी बन आ जाता है. 
Ǒदन-रात Ǔघसे तब ͪवरला कोई, IIT, IRS बन पाता है, 
ͩकतनी आँखो के ͩकतने सपने, सàमुख अपने पाता है, 
पद का ǽतवा, माल-मलाई, मधुमय भͪवषय् ललचाता है, 
पर भारत माँ कȧ कǾण - कराह सुन, ͪवéवल Ǔनज-मन को पाता है, 
अपनो कȧ आशाओ, पथ-बाधाओं को, जो वीर! लाँघता जाता है. 
एक राçĚ बस एक Úयेय, सव[èव Ûयौछावर कर जाता है, 
Ǔनंदा- èतुǓत, यश- आलोचन से, दूर Ǔनकलता जाता है, 
×याग, तपèया, ġढता से जो, पग-पग बढ़ता जाता है, 
खुद को खुद मे ͪपघलाये, तब कोई अरͪवंद बन पता है.
आप तो बुरा मान गये 
चेहरा Èया देखा अपना, 
जनाब!आईने से रार ठान गये. 
तèवीर मेरȣ देख बड़बड़ाते हɇ, 
हुजूर कȧ असͧलयत जो हम जान गये. 
एक सवाल चंदे का Èया पूछा, 
तोप-तलवारɅ हम पे तान गये. 
ये नफ़रतɅ, ये सौतेलापन Èयो है, 
हम भी उसी माँ कȧ संतान हुए. 
लहू से खींचते ͩफरते लकȧरे, 
देशĤेमी हो या ताͧलबान हुए. 
ये दौलत ये शान-ओ-शौकत, 
सब बेकार है, ईमान गये. 
नाम था, कभी पहचान भी थी, 
Èया हुआ कȧ आदमी सामान हुए 
दद[ हȣ दद[ है हर ͩकèसे मे, 
ͧसतमगर ! Èया तेरे अहसान हुए. 
तरÈकȧ के तेरे चचȶ सब तरफ, 
ͧमला बस उनको, िजन पर आप मेहरबान हुए. 
सौदागर!अलग पहचान तेरȣ हर गलȣ-मोहãले मे, 
कहȣ शैतान कहȣ आप भगवान हुए
कȧमत तो चुकानी पड़ेगी... 
गाँधी जैसो ने अपमान सहे, मंडेला दशको जेल रहे, 
भगतͧसंह फाँसी पे झूल,े बोस देश से दूर रहे, 
तुम कौन? स×य पे, हǐरशचंद को, यहाँ गƧी गवाँनी पड़ेगी. 
मत ͪवचͧलत हो, यहाँ बड़े-बड़ɉ ने, गालȣ-गोलȣ खाई हɇ, 
देश,स×य के महाय£ मे, अपनी आहूती चढ़ाई है, 
काजल कȧ कोठरȣ मे आए हो, तो कुछ काͧलख भी लगवानी पड़ेगी. 
राजनीǓत कोई गहरा दलदल, ǒबन-डूबे पार उतरना मुिæकल, 
थके अकेला, छायाएँ छल, बाधाएँ पथ रोकɅ पल-पल, 
लêमी कमल हाथ ले पथ मे, नाना-Ǿपɉ मे छेड़खानी करेगी. 
कम[योगी! तेरȣ पारȣ, कई शतकɉ पर भारȣ होगी, 
नायक! तेरȣ ये लघुकथा, कई सुपरǑहटɉ से Üयारȣ होगी, 
मृ×य ुपे जो जæन मनाती, Èया सुंदर उस सरकार कȧ िजंदगानी रहेगी.
िज़द ना करो... 
ये जन-सेवा घरबार छोड़, घड़ी कȧ सुई से करते होड़, 
गये चुनाव, होश मे आओ, अब छोड़ो भी ये भागदौड़, 
पाँच साल आराम करो. िज़द ना करो… 
राजयोग बड़े पुÖय से पाते, Ĥभु कȧ इÍछा का मान करो, 
बेͩफ़Đ रहो! स×ता-सुंदरȣ के, अधरɉ का रस पान करो, 
पिÞलक को राम-राम करो. िज़द ना करो... 
राजा होकर खाक छानते, Èयɉ Ǒदãलȣ कȧ गͧलयɉ कȧ, 
औरो से सीखो, Èयɉ खाते, रातो को मार सǑद[यɉ कȧ, 
राजा हो राजा से काम करो. िज़द ना करो... 
ͪवलेन (नेता) के रोल मे हो, हȣरो का ना काम करो, 
अपने पागलपन से पूरȣ, ǒबरादरȣ को ना बदनाम करो, 
कौओं मे बैठो तो कांव-कांव करो. िज़द ना करो.... 
सब खाते तो तुम भी खाओ, Èयɉ? औरो को नज़र लगाते हो, 
औरɉ का अरे! हक़ छȤनकर, बोलो तुम Èया पाते हो, 
कभी चोरɉ कȧ दुआए ँभी èवीकार करो. िज़द ना करो....
कौन तुàहारा बाप है ??? 
अख़बार का ǒबकना बहुत सुना , अब ख़बरे बेची जाती हɇ, 
लाभ-हाǓन से इस कठपुतलȣ कȧ, अब डोरे खीची जाती है, 
कौन खड़ा पदȶ के पीछे, ͩकसका ये आलाप है ??? 
कौन तुàहारा बाप है ??? 
सनी के कपड़े, सलमान के लॅफडे, कहȣ पे सास बहू के झगड़े, 
नाम खबर का, ना खबर नाम कȧ, बेहूदा कॉमेडी के तड़के, 
लोकतंğ का èतंभ है या लोकतंğ पे Įाप है??? 
कौन तुàहारा बाप है??? 
अपना Ûयायालय, खुद हȣ जज, खुद के सबूत, खुद कȧ दलȣल, 
ǒबन Ěायल, झट-पट इंसाफ़, ना कोई गवाह ना कोई वकȧल, 
ओ चǐरğ-सǑट[ͩफकेट दाता! झाँक ͬगरेबान, त ूँखुद ͩकसका पाप है??? 
कौन तुàहारा बाप है??? 
तुम हो कौन? जो Ĥæन पूछत,े ये पावर बस हमन ेपाई है 
सच-झूठ से छलती जन-मन को, अͧभयिÈत कȧ दुहाई है 
ओरɉ को Ǒहटलर कहने वालȣ, तू हȣ सÍची खाप है??? 
कौन तुàहारा बाप है???
म ɇतुàह ेÜयार Èयɉ द?ूँ?? 
Èया बोलो तुम दे पाओगे, जीवन के ऐश-ओ-आराम, 
बँगला, गाड़ी, ǽपया, ǽतबा, और मेरे अनͬगन शौक तमाम, 
अपन ेसपनो का संसार तुàह ेÈयɉ द?ूँ?? म ɇतुàह.े. 
माना हू ँम ɇÜयार कȧ देवी, Üयार बाँटना मेरा काम, 
सारे लêमीचंद हɇ पाते, मेरȣ बाहɉ मे ͪवĮाम, 
अरे फटȣचर! तुझ ेअपन ेअधरɉ कȧ पुकार Èयɉ द?ूँ?? म ɇतुàह.े. 
म ɇमीͫडया बदनाम सहȣ, त ूँअÍछाई का अवतार सहȣ, 
ये कलयुग है राम! यहाँ, नामुमͩकन है सीताएँ ͧमलना, 
तेरȣ नेक Ǔनयत पे, अपनी Ǔनयती Èयɉ वार द?ूँ?? म ɇतुàह.े. 
ख़याल जाने दे, मेरा साथ पाने, संग मेरे घर बसाने का, 
मेरा शौक, मेरा पेशा है, सबके संग वफ़ा Ǔनभाने का, 
बस तुझ ेहȣ खुशखबǐरयɉ का पǐरवार Èयɉ द?ूं?? म ɇतुàह.े.
हमारȣ कोͧशशɅ जारȣ रहɅगीं 
अब पा हȣ गये हो कुसȸ, जो जनता कȧ नादानी से, 
चैन ना पाओगे पल को, ये ऊँट-सी सवारȣ रहेगी. 
ͩकतने भी तुम काम करो, बदनाम तुàह ेहम कर देगे, 
हमारे हर- एक कȧ काͧलख, तेरȣ सारȣ सफेदȣ पे भारȣ पड़ेगी. 
चले तÛğ को चंगा करने, हमारȣ रोज़ी-रोटȣ छलने, 
सेहत ǒबगड़ जाएगी बाबू!, लंबी अपनी बीमारȣ चलेगी. 
तुम हो कौन, कहा ँसे आए, स×ता के गुण ना तुमन ेपाए, 
ये स×ता हम दो कȧ जोǾ, कभी उनकȧ कभी अपनी बारȣ रहेगी. 
कभी सोमनाथ, कभी ͧससोǑदया, कभी भूषण, राखी पर थुकेग,े 
Ǒदãलȣ आपके साथ सहȣ, पर मीͫडया सारȣ हमारȣ रहेगी. 
हमने दशको मे नहȣ ͩकया, वो चंद Ǒदनɉ मे कर डाला, 
इस रāतार से कब तक हमको , दफ़नाने कȧ तैयारȣ चलेगी. 
तुàह ेͬगराना शौक नहȣ, मजबूरȣ वजूद बचान ेकȧ, 
िजंदगी कȧ ये जƧोजहद, जारȣ है जारȣ हȣ रहेगी.
कमाल हो गया.. 
जायज़ खरबɉ कȧ कज[माफȧ, साइͩकल, लॅपटॉप, राशन, 
अपने गुण गाते ͪव£ापन , वो वोटो पे बॅटते आर¢ण, 
ग़रȣब ने मुāत पानी Èया ͪपया, शोर है, देश कʠगाल हो गया. 
ͪवकास कȧ दौड़ मे फेकू! देखो, ͩकतने तुमस ेआगे हɇ, 
कुपोषण, अͧश¢ा, ǐरæवतखोरȣ, कुतȶ के कÍचे धागे हɇ, 
तेरा शहर Ǒदल का ग़रȣब, कागज पे खुशहाल हो गया. 
अपना एक ͪवभाग बता जहाँ, ǒबन-Ǒदए काम हो पाता है, 
गर, दूध गणेश नहȣ पीते, तो दूध कहाँ ͩफर जाता है, 
चायवाला हेलȣ-काÜटर मे कैसे, बड़ा सवाल हो गया.
केजरȣवाल तो पागल है 
देखो ! ये पागल Èया चाहता है. 
सǑदयो से सुÜत चेतना को, Ǔनज æवास से जगाना चाहता है, 
घोर अमावस घना Ǔतͧमर, Ǔनज-रÈत जला ͧमटाना चाहता है, 
धम[ जाǓत के दो-छोरो को, Ĥेम-èनेह से ͧमलाना चाहता है, 
राजनीǓत के गंदे कȧचड़ मे, कमल ͨखलाना चाहता है, 
युगो से शोͪषत, दबे कुचलो को, Ûयाय-सàमान Ǒदलाना चाहता है, 
मौन! मानो गूंगी जनता को, आवाज़ Ǒदलाना चाहता है, 
बहरȣ åयवèथा को , मधुर गीत सुनाना चाहता है, 
जÛम से अंधो को, हरे- भरे बाग Ǒदखाना चाहता है, 
नोटो कȧ थाप पे नाचती खबरांगनाओ से, ये आͧशक़! वफ़ा चाहता है, 
नासमझ! अबोध बालक है, चाँद धरती पे लाना चाहता है, 
अपने इरादो कȧ कæती से, समंदर पार करना चाहता है, 
कालȣ èयाहȣ मे रंगे तंğ को, æवेत-मन से चमकाना चाहता है, 
Ǒहमालय से ͪवèतृत ħçटाचार को, झाड़ू से हटाना चाहता है, 
राजा हो रंक-सा रात भर, ठंड मे रोड पे कपकपाना चाहता है, 
èवराज का नारा देकर, राजवँषɉ को ललकारना चाहता हɇ, 
संसद कȧ बंद-दȣवारɉ मे क़ैद जनतंğ को, चौराहे पर लाना चाहता है, 
राçट-Ĥेम के पागलपन मे, राçट-ġोहȣ कहलाना चाहता है. 
देखो ! ये पागल Èया चाहता है.
ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है.. 
नाम मे भारत, काम मे भारत, Ǒदल, ज़ुबान, ज़Ïबात मे भारत, 
ये भारत-गौरव खंͫडत करने, ͩफर कोई ͩफरंगी उतरा है. 
ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है. 
छोड़ो बुƨ ुͨखड़कȧ (टȣवी) को तुम, अब आओ ͨखड़कȧ गाँव चल,े 
सच आँखो से ओझल होता, झूठ - झूठ का कोहरा है. 
ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है. 
जो स×य Ǒदखाया जाता है, वो स×य सदैव नहȣ होता, 
इन स×य-ͪĤयो कȧ सरèवती पे, लêमी का असर गहरा है. 
ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है. 
ये Ǔनंदा, अपयश, आलोचन, ये भारत- गौरव कȧ दुहाईया,ँ 
ये सब Ĥायोिजत काय[Đम, चेहरो के पीछे चेहरा है. 
ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है. 
CWG पे जब ͪवæव हंसा, असमटे लूटȣ तब मौन रहे, 
नारȣ- गौरव के ठेकेदारो , ये माप-दंड तो दोहरा है. 
ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है. 
भाषा कȧ सीमा वो जाने, भाषा हȣ िजनका Ħेड-बटर, 
हम कम[योगी! कत[åय करे, ठाने तो समÛदर कतरा है. 
ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है..
ये खाँसी बड़े काम कȧ है ये खाँसी 
गाͩफल सोतɉ को सजग करे ये, चोरɉ कȧ अब फाँसी है ये खाँसी. 
देशी गोरɉ से मुÈत कराने, ये हȣ रानी झाँसी है ये खाँसी. 
बड़ɉ का घर मे मान बचाती, मया[दा कȧ मौसी है ये खाँसी. 
ħçटɉ पर चंडी बन ͬगरती, भले जनɉ कȧ दासी है ये खाँसी. 
अहंकार रावण का हरने , ये हनुमान गदा-सी है ये खाँसी. 
जो अंदर वो बाहर Ǒदखती, पारदशȸ दप[ण-सी है ये खाँसी. 
ये चुनाव का मुƧा बन गयी, मुझको आती हाँसी है ये खाँसी. 
फेकुजी! कुछ और बताओ, ये बातɅ तो बासी है ये खाँसी. 
"केजी" रण-Ĥण पर डटे रहो, जब तक तन मे जाँ-सी है ये खाँसी.
ये तो होना हȣ था.. 
गाँधी गूँग,े नेहǾ बहरे, तब भगत को फाँसी होना हȣ था, 
धृतराçĚ सरȣखे राजा हɉ, तो चीरहरण ͩफर होना हȣ था, 
सो रहे देश के लाल अगर, भारत माँ को ͩफर गौरव खोना हȣ था, 
हर तरफ क×ल खाने चलते, बकरे कȧ माँ को रोना हȣ था, 
यहȣ तासीर, यहȣ तालȣम थी उसकȧ, दंगो के दाग भी खून से धोना हȣ था, 
मन आͨख़र ऊब हȣ गया इन ͨखलोनो से, स×ता का खेल Ǔघनोना हȣ था, 
बड़ी रोचक रहȣ, पर ͩफãम थी, इंटरवल तो होना हȣ था, 
मेरा अंजाम मेरे अंदाज से जुदा नहȣ, खून का बुलबुला था, फ़ना तो होना हȣ था, 
कब तक लाशɉ को ढोता ͩफरता, िजंदगी को आजमाना भी था, 
मɇ तारा, टूटा तेरȣ खाǓतर, तेरȣ मुराद को ͩफर पूरा होना हȣ था, 
मेरे जाने का गम ना कर मेरे दोèत, ये बाजी थी, कुछ पाने, कुछ खोना भी था.
हम भी चुप और तुम भी चुप... 
पूण [राÏय का दजा[ दो, ये लंबी माँग हमारȣ है, 
लाओ èवराज बापू का सपना, जनलोकपाल ज़Ǿरȣ है, 
ǒबल पर वोǑटंग कȧ जब बात चलȣ,हम भी चुप और तुम भी चुप. 
नारɉ, संकãपो कȧ रेल चलȣ, लगता भारȣ तैयारȣ है, 
ħçटाचार भगाना है, ये लंबी बीमारȣ हɇ, 
इंजेÈसन लगने कȧ जब बारȣ आई, हम भी चुप और तुम भी चुप. 
ये Ĥदेश Ĥायोिजत ĤोĒाम नहȣ, मजबूरɉ कȧ मजबूरȣ है, 
दंगे देश पे दाग हɇ, ये दाग ͧमटाने ज़Ǿरȣ हɇ, 
दोषी को दंͫडत करने मे, हम भी चुप और तुम भी चुप. 
वादे हमने भी बहुत ͩकए, वादे तुमको भी करने देगे, 
हमने कभी कुछ नहȣ ͩकया तो औरɉ को Èयɉ करने दɅगे, 
कोई जुगन ूǓनकला, रातɅ उजलȣ करन े, ना कौए चुप, ना कु×त ेचुप. 
हम भी चुप और तुम भी चुप..
Ĥाइम ͧमǓनèटर जेल मɅ... 
आधी आबादȣ दहशत के, साये मे डर-मर ͧससक रहȣ, 
िजंदा लाशɉ कȧ बदबू आती, तेरȣ A.C. रेल मɅ. 
भूत Ĥेत बन बदला लɅगे , जो तेरȣ शह पे क×ल हुए, 
बाबू! तेरे भी हाथ रंगे हɇ, दंगो के खूनी खेल मɅ. 
कोई अरब पǓत, कोई खरबपǓत, कोई ͪवæवपǓत बनने Ǔनकला, 
ͪवकास कȧ देखो! सेल लग गयी, इन चोरो के मेल मɅ. 
फɅकूज़ी! सच सच बतलाओ, ये हेͧलकॉÜटर कैसे उड़ते हɇ, 
चाय बेचके, गैस बेचके, या उड़ते हɇ तेल मɅ.
राजा ने ͧसंहासन छोड़ा है 
कठपुतल ेको ताज Ǒदया , परदे के पीछे स ेराज ͩकया, 
कभी अबला थीं, अब ͪवæवपǓत, औरɉ के कंधो से ͧशकार ͩकया, 
तुमन ेछोडा तो ×याग कȧ देवी , हमन ेछोडा तो भगोड़ा है. 
स×ता सुंदरȣ को वरने को , ͩकसका मन रह पाता है, 
इसकȧ बाँहɉ के मोहपाश मɅ , हर कोई बंध जाता है, 
िजसको सब पान ेतरस रहे , वैरागी! तून ेÈयɉ छोड़ा है. 
खा-पी के चांडाल चौकड़ी , हर चैनल पर भɉक रहȣ, 
खुद नाकारा, कुछ करने वालɉ को, पानी पी-पी कोस रहȣ, 
पहचानो ये आम – राम , िजद पे ͧशव-धनु तोडा है. 
है जाǓत-धम[ पे बँटवारा, दंगɉ कȧ भभकȧ आग कहȣं, 
कहȣं गरȣबी , कहȣं भुखमरȣ , ͪवकास कȧ बंदर-बाँट कहȣं, 
Ǒदल मɅ Ǒदãलȣ ले, काला घोडा, देश बचाने दौड़ा है.
खबर बेचना मेरा धंधा…. 
अͧभåयिÈत का वरदान पा, ये होͧलका हुलसा रहȣ ह,ै 
कæयपɉ के पा इशारे, Ĥéलाद को झुलसा रहȣ ह,ै 
सुन! राख हो जायेगी त,ूँ उन कæयपɉ के साथ हȣ, 
नर Ǿप इन नारायणɉ को, åयथ[ Èयɉ उकसा रहȣ है. 
खबर बेचना मेरा धंधा, मुझको भी लाभ कमाना ह,ै 
सबके जैसे, सबसे पहले, सबसे आगे जाना है, 
ओ लोकतंğ के चौथे खàभ!े उनमे तुझमे अंतर ह,ै 
पैसे के साथ तुझे लोगो का, ͪवæवास भी बचाना है.
Ǒदãलȣ को अयोÚया बनाना पड़ेगा 
संत साधु बुला, कारसेवा कराओ, ͩफर कोई ढाँचा ͬगराना पड़ेगा. 
ͪवकास का गुबार ना ठहरेगा óयादा, पɇतरा वोहȣ आजमाना पड़ेगा. 
बनी ͩकतनी रामायणɅ राम पर, अबकȧ महाभारत बनाना पड़ेगा. 
सूख से गये हɇ कुछ जÉम Ǒदल के, ͩफर से वो काँटा चुभाना पड़ेगा. 
ͬचंगारȣ ढूढो दबी राख से तुम, देश पूरा ͩफर से जलाना पड़ेगा. 
भूख से लड़त-ेलड़ते जो भूले थे अबतक, उÛहे याद मज़हब Ǒदलाना पड़ेगा. 
लाश के ढेर पे बैठ कर के ͩफर, गीत जय का कोई गुनगुनाना पड़ेगा.
तुम Èया गय,े सब सूना कर गय े 
वो अहसास, वो सपने, वो खुशनुमा मंज़र Èया हुए 
सब कुछ वीराना कर गये 
तेरȣ आहट से उठता हू,ँ तेरȣ यादɉ से ǽकता ह ूँ 
आदमी था , कोई ͨखलौना कर गये 
ͩकतने इãज़ाम, ͩकतनी नफ़रतɅ मेरȣ खाǓतर, 
मेरȣ सारȣ शिÉसयत को, Ǔघनौना कर गये 
ना चैन से जीऊँ पल भर, ना मरना नसीब हो, 
पागलो सा हाल!, जाने Èया जाद-ूटोना कर गय े 
रंज बहुत है Ǒदल को, तेरे यूँ छोड़कर जाने का, 
भले आदमी थे, मजबूǐरयɉ का ǒबछोना बन गय े 
पलके खुलȣ कȧ खुलȣ ह,ɇ तेरे आने कȧ उàमीद म,े 
लौटने का अपन,े वादा जो मुझसे कर गय.े
ये तो ग़लत बात है 
राम राÏय कȧ माला रटते, शÈल देखकर लɬडू बॅटते, 
समाजवाद के Ĥवचन, ͪवकास कȧ बंदरबाँट है. 
हɉ जहाँ, वहȣं कȧ बात करेगɅ, बहुǽͪपयो से वेष धरɅग,े 
पगड़ी को हाँ, टोपी को ना, ये कैसा राçĚवाद है. 
वो राÏय बंद, वो रेल रोकना, कहȣ आगज़नी, कहȣ तोड़फोड़, 
उनका तांडव लोकतंğ, मेरा धरना उ×पात है. 
चेहरे इनके अलग भले, पर काम सभी का एक है, 
ͧमलकर लूटɅ वे ͧशçट कहावɅ, केजरȣ अनाͩक[èट है.
सच ͩकसको अÍछा लगता है.. 
सपनɉ कȧ दुǓनयाँ के आग,े हर सच फȧका पडता है, 
बहलावɉ से, बहकावɉ से, जन-गण-मन हȣ छलता है. 
Ĥाणɉ का कुछ मोल नहȣं पर, प×थर पथ-पथ पुजता ह,ै 
दाǾ लेने को लाइन यहाँ, पर दूध घरɉघर ͩफरता है. 
कभी सीता तो कभी हǐरæचंġ, कब झूठ परȣ¢ा देता ह,ै 
ıदयɉ मɅ वो, होठɉ पर वो, सच पुèतकघर मɅ सोता ह.ै 
भूखा बचपन तèवीरɉ म,Ʌ ͧमͧलयन डालर का ǒबकता है, 
आͨखर मन बुƨु समझ गया, जो Ǒदखता है वो ǒबकता है.
Èया सचमुच हम आजाद हुय.े.. 
जो अपना था वो गवाँ Ǒदया, अँĒेजी के अनुवाद हुय..े 
वसुधैव कुटुंब नहȣं अब तो, घर-घर दंगा-फसाद हुय.े. 
बस माँ बǑहनɉ का िजĐ रह,े Èया अपने संवाद हुय.े. 
भारत का गौरव गौण हुआ, नेता बस िजंदाबाद हुय.े. 
सबके सूरज चमके जग म,Ʌ हम तारɉ से अवसाद हुय.े. 
हर साख पे उãलु बैठ गय,े गुलशन सारे बबा[द हुय.े. 
सोने कȧ ͬचͫडया के घर मɅ, फाँको पर वादͪववाद हुय.े 
उन अमर शहȣदɉ के खूँ स,े बस अजगर हȣ आबाद हुय.े
Ǒदल हȣ अपनी कमजोरȣ है, Ǒदल हȣ अपनी ताकत है... 
सच कȧ हालत Èयɉ शम[सार, उन स×यͪĤयɉ पे लानत है, 
मन मानवता के कण[धार कȧ, ǓनिçĐयता से आहत है, 
अÛयायɉ को चुप सहना ना, कुछ कहना अपनी आदत है, 
अपने जÉमɉ कȧ èयाहȣ हȣ, अपने जÉमɉ कȧ राहत है. 
जब भी Ǒदमाग- Ǒदल टकराएँ, Ǒदल जीते बस ये चाहत है, 
Ǒदल कहता म ɇवो राह चल,ूँ सब ͪवपदाओ ंका èवागत है, 
खोया-पाया सब कुछ Ǒदल से, इस Ǒदमाग कȧ बèती मɅ, 
Ǒदल हȣ अपनी कमजोरȣ है, Ǒदल हȣ अपनी ताकत है.
ͩकसी का ज़मीन,ͩकसी का आसमाँ पे Ǒहसाब होगा.. 
ͩकसी का ज़मीन, ͩकसी का आसमाँ पे Ǒहसाब होगा, 
भगवान को Üयारा ये सारा, ǽतबा - ओ - ǽआब होगा, 
गैर के जो हक़ हɇ मारे, Èया तेरा पूरा कोई Éवाब होगा, 
कबाबɉ के शौकȧन! तू खुद, कभी ͩकसी थालȣ का कबाब होगा, 
Ǔछपाने से कभी Ǔछपते हɇ, टपकते खून के कतरे, 
नकाबपोश काǓतल! त ूँभी, एक Ǒदन खुलȣ ͩकताब होगा. 
रातɅ कब रोक पायीं सुबह को, रोशन ये आफ़ताब होगा, 
झूमɅगी दुǓनया िजसके नश ेमɅ, अंगूर! त ूँवो शराब होगा, 
तेरा वìत हȣ बाजीगर!, सब सवालɉ का एक जवाब होगा, 
तेरा गुनेहगार भी दȣवानɉ-सा , तेरे दȣदार को बेताब होगा, 
दȣवार पे ͧलखी इबारत, चीखती है सुन जरा! 
Ǒदलɉ का है आज जो, कभी देश का भी नवाब होगा.
कैसे मानूँ अपराध ह,ै भोला ħçटाचार?? 
ना चीखɉ कȧ आहटɅ, ना रÈतɉ कȧ धार, 
कैसे मानूँ अपराध ह,ै भोला ħçटाचार. 
पǐरĮम का ĤǓतफल कहो, सेवा का स×कार, 
सबकȧ राजी खुशी स,े चलता ये åयवहार. 
अàमा अपराधी नहȣं, ͧसèटम कȧ बनी ͧशकार, 
ħçट सभी बस दिÖडत एक, Èया इसका आधार. 
िजसका धन लूटा वो जनता, जब चुनती बारàबार, 
जनमत के अपमान का, जज को Èया अͬधकार.
दो मɅ से कुछ एक यार होगा.. 
दो मɅ से कुछ एक यार होगा.. 
ͪवकास या ͩफर ħçटाचार होगा. 
एक हȣ होता है Ǒदल का दरवाजा, 
या तो Üयार या ͩफर åयापार होगा. 
कोई और सूरत हȣ नहȣं सेहत कȧ, 
आदमी तंदुǾèत नहȣ,ं तो बीमार होगा. 
कब तक ढɉयɅगɅ ये नापाक ǐरæते, 
अब हाथ ͧमलɅगे या यãगार होगा. 
सोचा हुज़ूर लायɅग, ेअपनɅ भी अÍछे Ǒदन, 
Èया खबर थी बस भाषण हȣ शानदार होगा.
कहाँ रहे तुम नंदलाला 
आधे आमदार अपने को, अपराधी खुद बता रह,े 
ह×या रेप डकैती अपनी, शपथपğ पे जता रहे . 
चंदा देकर Ǒटकट पा गये, शकुनी बाजी सजा रहे, 
नोटɉ से वोटɉ को लेकर, लोकतंğ को लजा रहे. 
सोचो तुमने एक नोट म,Ʌ अपना अͧभमान गवाँ डाला, 
इतनी सèती हुई आबǾ, मोल ले सका इक Üयाला, 
है जवाब जब पूँछेगा, ये Ĥæन समय आने वाला, 
अͧभमÛयु जब मरा युƨ मɅ , कहाँ रहे तुम नंदलाला.
ħçटɉ से मुÈत अपना, भारत हमɅ बनाना 
ना छÜपन कȧ छाती, ना छͧलये का वादा, 
बस नेक है नीयत और , फौलाद का इरादा . 
देखा जो देश लुटत,े तǽणाइयɉ को घुटत,े 
कोसा बहुत, करɅ कुछ, तब मन नɅ मेरे ठाना. 
बस बोलते थे जब तक, कहलाते थे ͪवचारक, 
कथनी को करने Ǔनकले, दुæमन हुआ जमान.ा 
मत वÈत करो जाया, कȧचड़ उछालने मɅ, 
मुझको हȣ पाओगे तुम, हर एक आईने मɅ. 
है एक अपना मकसद, है एक हȣ तराना, 
ħçटɉ से मुÈत अपना, भारत हमɅ बनाना.
म ɇअभी हारा नहȣ ंहू!ँ 
ये कǑठन पथ, खुद चुना है, कोई बेचारा नहȣ ंहू,ँ 
पव[तɉ का गव [तोड़ू,ँ नीर कȧ धारा वहȣ हू,ँ 
Ǔनबल कȧ उस आश मɅ, ͪवæवास मɅ हȣ म ɇकहȣ ंहू,ँ 
भागा कहा?ँ? देखो तुàहारȣ, छाǓतयɉ पर म ɇयहȣ ंहू.ँ 
चोट खा èवर से ͩफǾँ म,ɇ कोई इकतारा नहȣ ंहू,ँ 
करोड़ɉ कȧ दुआए ँसंग , अभी बेसहारा नहȣ ंहू,ँ 
मɇ टूटकर ǒबखǾँगा तब, हाँ! हार मɇ मानूँगा तब, 
Ǒदल से तुम जब ये कहोगे, म ɇतुàहारा भी नहȣ ंहू.ँ
मेरȣ हार से हाͧसल Èया कर पाओगे? 
ǒबखरकर गर ͬगरा भी, जो ये ͧसतारा फलक से, 
उàमीद कȧ लहरɉ को तुम, साǑहल कोई पा जाओगे? 
गलǓतयाँ मुझम ेतुझ,े Ǒदखती बहुत, पर ये बता, 
माँस के पुतल ेमɅ Èया, भगवान तुम पा जाओगे? 
हɇ सवाल िजतने जेहन मɅ, उठतीं हɇ िजतनी उँगͧलयाँ, 
आईने के सामने जा, सब सबक पा जाओगे. 
म ɇठहर जाऊँ अगर त,ूँ मुझस ेएक वादा करे, 
ये लड़ाई मुझस ेबेहतर, अंजाम तक पहुँचाओग.े
अब आम आदमी जागा है….. 
नेताओं को देश सɋप, बेͩफ़Đ नींद मे सोया था, 
देश और अपने भͪवçय के, मधुमय सपनɉ मे खोया था, 
भारत माँ का Đंदन सुन, ǒबन-भोर नींद से जागा है.. 
जब आँख खुलȣ तो देखा कȧ, र¢क भ¢क बन लूट रहे, 
Ûयाय, स×य, मया[दा सब कुछ, रेत महल से टूट रहे, 
तार-तार तन-वसन हुए, माğ शेष कुछ धागा है.. 
ǒबãलȣ दूध पे पहरा देती, चाबुक बंदर के हाथो मे, 
पूजा कȧ थालȣ कु×ता चाटे ,Ǔतलक गधɉ के माथो मे, 
गाये ǒबन-चारे के मरती, जंगल-तंğ अभागा है.. 
बस बहुत हुआ अब और नहȣ, संकãप ǿदय मे लाया है, 
बÍचे बूढ़े सबने ͧमलकर, झाड़ू को शèğ बनाया है, 
आम आदमी कȧ सेना आई , ठग- दल डरकर भागा है..
अबकȧ बार मोदȣ सरकार… 
अदानी, अàबानी कȧ होगी जय-जयकार, 
एंǑटला से चलाएंगे, देश का कारोबार. 
ͪवकास होगा उनका, जो तेरे चुनाव के साहूकार, 
चोरɉ के साथ ͧमलकर, ये ͧमटायɅगे ħçटाचार. 
कालाधन ͪवदेशी Ǔनवेश का धरेगा अवतार, 
सटोǐरयɉ कȧ चाँदȣ, चमकेगा शेयर बाजार. 
दंगो के दǐरंदे, पाएँगे पुरèकार, 
खून कȧ èयाहȣ से, रंगɅगे अखबार. 
मीͫडया मुग़ल के, लगɅगे दरबार, 
हाँ जी! हाँ जी! करɅगे चाटुकार. 
Èया नीǓत, Èया ͪवͬध कȧ दरकार, 
Ĥभु के वचन तो èवयं मɅ मंğोÍचार. 
गांधी के नोटɉ पे, हɉगे इनके ͬचğहार, 
भारत सरकार कहलायेगी, अब मोदȣ सरकार.
अÍछे Ǒदन आने वाले हɇ. 
नभ से तो अमृत बरसेगा, पर कुछ आँगन हȣ भीगɅगे, 
इंġदेव के ये छȤंटे, बस कमल ͨखलाने वाले हɇ. 
जो पहले भूखɉ मरते थे, वो अब भी मरने वाले हɇ 
सबका साथ सबका ͪवकास, बस Ǒदल बहलाने वाले हɇ. 
मज़हब हȣ अपनी रोज़ी-रोटȣ, बस ͪवकास कȧ ख़ालɅ हɇ 
अरे ! Èयɉ कर टोपी पहनेगे, हम टोपी पहनाने वाले हɇ. 
भɉदूजी! अपनी अकल लगाओ, वादɉ, Ǒदखाओं पे ना जाओ, 
तुमको लगता है सब चायवाले, हवाई-जहाज़ उड़ाने वाले हɇ?
भारत माँ का कौन भला 
भारत माँ का कौन भला, जय नारɉ से, गुणगानɉ से, 
ͩकतने Ǒदन भूख ेपेट भरɅगे, घी-शÈकर के पकवानɉ से, 
जय का गौरव तब पाओगे, जब कुछ करके Ǒदखलाओगे, 
वना[ पुèतकघर भरे पड़े हɇ, पǐरयɉ के अफ़सानɉ से. 
अƫुत अवसर ͧमला तुàहɅ, अपना सूरज चमकाने का, 
सǑदयɉ से मुरझ ेकमलɉ कȧ, पंखुड़ीया ँसहलान ेका, 
पर, पद साथ[क होगा तब हȣ, जब एक Úयेय एकलåय रहे, 
पावन-पुनीत भारत-भू से, भय-ħçटाचार ͧमटाने का.
ͪवकास चाǑहए तो ħçटाचार भी होगा….. 
ͪवकास चाǑहए तो ħçटाचार भी होगा, 
भले लोग ͧमलɅगे तो ͧशçटाचार भी होगा, 
अपनी पाटȹ मɅ तो बस, कॉàबो मील है, 
खीर चाǑहए तो करेले का आचार भी होगा. 
घर खरȣदोगे तो लȣवरेज भी होगा, 
कुछ करोगे तो कवरेज भी होगा, 
बुƨ ूहɇ, ħçटाचार पे भɋकन ेवाले, 
अरे! नल खुलेगा तो लȣकेज भी होगा. 
ħçटाचार के साथ ͪवकास करɅगे, 
जनता के सौ के पचास करɅगे, 
फूटे घड़े से पानी भर-भर के, 
आपकȧ मेहनत का स×यानाश करɅगे.
ये कैसा ͪवकास है?? 
ǽपया रंग -ओ-शÈल बदल, डालर, यूरो का èवांग रचाता, 
ͪवæव ħमण कर काला धन अपना, ͪवदेशी Ǔनवेश बन वाͪपस आता, 
सɅसेÈस कȧ छलांगे बस, सटोǐरयɉ का खेल- ͪवलास है. 
ये कैसा ͪवकास है?? 
Ǒदन-रात करɅ मेहनत और तुमको, टैÈस समय पर चुका रहे, 
सौ दे वाͪपस पÍचीस पाते, बाकȧ जेबɉ मे समा रहे, 
सौ का पÍचीस हो जाना, हमारȣ मेहनत का स×यानाश है. 
ये कैसा ͪवकास है?? 
छȤनी ज़मीन, मरते ͩकसान, कृͪष ͪवकास कȧ बात करɅ, 
हǐरत ĐांǓत के जनक आज हम, अÛन-दाल आयात करɅ, 
अपनो से छȤन, ओरɉ-गोरɉ को देना, यहȣ हमारा इǓतहास है. 
ये कैसा ͪवकास है?? 
अब ħçटाचारȣ जेल भरɅगे, सौ के सौ देश के काम लगɅगे, 
उɮयोग, ͩकसान, åयापारȣ, जनता, ͧमलजुलकर खुशहाल बनɅगे, 
बदलेगी ͪवकास कȧ पǐरभाषा, ये हमारा ͪवæवास है. 
ये कैसा ͪवकास है??
सारे सपने टूट गए... 
सारȣ रात तो संग रहे, 
पर Ǒदन आते हȣ छूट गए. 
आये थे कुछ देने, जाते, 
मेरȣ भी गठरȣ लूट गए. 
तुमन ेमुँह फेरा, जग Ǿठा, 
आँसू आँखɉ से फूट गए. 
ͩकसको द ूँम ɇदोष Ĥभ ुभी, 
ͧमटटȣ के थे टूट गए.
ͩकसके महल सजाने…. 
ͩकसके महल सजाने, हमारे घरɉदे तोड़ देते हो, 
ͩकसके समंदर भरने, हमारा पसीना Ǔनचोड़ लेते हो, 
कलयुगी कण[! कुछ Ǒदया भी, तो मंहगाई दे दȣ !! 
गर जीने नहȣं देना तो, जान Èयɉ छोड़ देते हो. 
मँहगाई के कोड़ɉ से, कई घाव गहरे छोड़ देते हो, 
यहाँ गरȣब कम हɇ जो उÛहɅ हजारɉ करोड़ देते हो, 
छͧलये! Èया Ěेलर, Èया फȧचर है तेरȣ ͩफãम का, 
चाँद तारे Ǒदखा, जेब कȧ, दुअÛनी भी गपोड़ लेते हो.
अÍछे Ǒदन आ गए.. 
कालेधन वाले बाबा, जमीन मɅ समा गए, 
ͪवदेशी खातɉ कȧ सूची, बंद तालɉ को थमा गए. 
रेप - चÛद मंğी, बासी कड़ी को गरमा गए, 
ͧश¢ा माता कȧ ͧश¢ा पे, ͧशशु भी शरमा गए. 
ͪवदेशी Ǔनवेश के ͪवरोधी, डालरɉ पे लुभा गए, 
ǐरटेल पे लड़ते-लड़ते, ͩफरंगी ͧमसाइलɅ चुभा गए. 
सटोǐरयɉ कȧ चाँदȣ, जमाखोरɉ को मजा आ गए, 
घूस जस कȧ तस हȣ रहȣ, मंहगाई कȧ सजा पा गए.
म ɇसीता हू,ँ तुम राम बनो….. 
हम बसते गंगा लहरɉ पर, हमको लहरɅ Ǒदखलाते हो, 
हर-हर मोदȣ के नारɉ से, ͧशव का धीरज आजमाते हो, 
सौदागर! सब जाने छल तेरा, अब ͩकसको तुम भरमाते हो, 
गर, मेरे बनने आए थे, तो उसके घर Èयɉ जाते हो. 
तुम मेरे हो, बस मेरे ये, अͧभमान अĮु बन झरता है, 
ͩकस-ͩकस को रोकू समझाऊं, जग हँसता, ताने कसता है, 
म ɇसीता हू,ँ तुम राम बनो, दो दो तो रावण करता है, 
दो नावɉ से कहो! कौन, कब, सागर पार उतरता है.
अजब-गजब ये सàमोहन…… 
दस हजार करोड़ के ͪव£ापन, उड़न खटोलɉ से देश ħमण, 
रेल , बसɉ से भींड़ जुटा, है शहर - शहर ĥȧ मनोरंजन, 
जादूगर का खेल अनोखा, उगते आम हथेलȣ पर, 
आँखɉदेखा Èया स×य सदा , अजब-गजब ये सàमोहन. 
चौतरफा Ĥायोिजत कोलाहल , सच झूठ का पदा[ ओझल होता, 
है भीड़ जहाँ , Èया वहȣं स×य, मन शंकाओं मɅ बोͨझल होता, 
कंकण तट पर हȣ पाओगे, मोती चाहो तो मारो गोता, 
अरे! स×य अमोल नहȣं होता, यǑद इसको पाना आसाँ होता.
कहाँ गये वे "अटल".. 
कहाँ गये वे "अटल" िजÛहɉने पाटȹ को सींचा, 
कहाँ गये वे लालकृçण िजन, रघुरथ को खींचा, 
कहाँ मुरलȣ, जसवंत,सु-समा, और भाजप सारȣ, 
भगवा सेना हाइजेक ͩकये, दो गुÏजु åयापारȣ. 
सǑदयɉ के संबंधɉ पर, स×ता सुख भारȣ, 
राम तो पहले ठगे गये, ͧशव-सेना कȧ बारȣ, 
रÈतͪĤयɉ के रंगमहल भी, रÈतɉ के हɉगे, 
भगवानɉ के नहȣं हुए, Èया भÈतɉ के होगे.
छÜपन छाती खरगोश हुए… 
अÍछा हुआ आप आय,े दोनɉ के नंबर बन गय,े 
अपने अपने मुãक म,Ʌ दोनɉ ͧसकंदर बन गय,े 
भारत माँ के आँचल का, जो àलेÍछ èपश[न करते हɇ, 
ͧसर काटे िजनने वीरɉ के, उनका अͧभनंदन करते हɇ, 
कहाँ गयी वह ͧसंह गज[ना, तरकश Èयɉ खामोश हुए, 
Ĝेगन का डर या डालर, छÜपन छाती खरगोश हुए.
सरकार जहाँ सरकार वहȣं है… 
दरबारȣ दरबार वहȣं हɇ, खबरɉ का संसार वहȣं है, 
स×ता का Įँगार वहȣं है , लोकतंğ का सार वहȣं है. 
कठपुतले तÉती लटकाय,े तÉतɉ के अͬधकार कहȣं ह,ɇ 
हɇ एक, अनेक Ǿप मɅ Ǒदखते, माया के आधार यहȣ हɇ. 
भÈतɉ के भरतार कहȣं हɇ, शेषनाग अवतार कहȣं हɇ, 
उàमीदɉ के उडनखटोले, Ĥलयदेव के ƨार कहȣं हɇ.
दो Ǒदन चले अढ़ाई कोस.. 
ǐरæवतखोरȣ का भूत देश म,Ʌ बेतालɉ सा भटक रहा, 
जोकपाल का पैनल जाने, ͩकस फाइल मɅ लटक रहा, 
सरकार तुàहारȣ ͩकसका दोष? दो Ǒदन चले अढ़ाई कोस. 
दूध कȧ कȧमत बढती जाती, फल कȧ खुशबू आती जाती, 
सÞजी कȧ Èया बात कǾँ,धǓनया भी अब आँख Ǒदखाती, 
भाषण से भूख करे संतोष ? दो Ǒदन चले अढ़ाई कोस. 
नेता, बाबू कȧ साँठगाँठ स,े सेठ Ǔतजोरȣ भरते जात,े 
बुलेट Ěेन के चæमे स,े वो चौतरफा हǐरयालȣ पाते, 
ͪवकास के वाǐरस सफेदपोश..दो Ǒदन चले अढ़ाई कोस.
नाम बडे और दश[न छोटे.. 
भारत से ħçटाचार भगायɅ, भाषण लंबे, नीयत के टोटे. 
छÜपन कȧ छाती, िजगर के छोटे, घर मɅ घूमɅ साँप ǒबलौट.े 
हो काला धन या एफडीआई, हम हɇ ǒबन पɇदȣ के लोटे. 
है वहȣ तंğ , है वहȣ मंğ , है Ǿह वहȣ, बदले मुखौटे. 
होता ͪवकास बस मँहगाई का, सटोǐरये बस होते मोटे. 
अÍछे Ǒदन तो ͧमले नहȣं, अब वाͪपस बुƨ घर को लौटे.
सब बदला और तुम भी बदले...... 
चेहरे बदले, सेहरे बदले, èवग[-ɮवार के पहरे बदले 
ना बाबू कȧ मौजɅ और, ना नेता गूँग-ेबहरे बदल.े 
भूखा बचपन, घुटता यौवन, मरते ͩकसान, लुटती अबला, 
ना मँहगाई के मंजर बदल,े ना दुæमन के खंजर बदल.े 
तÉत ͧमला शहजादे बदले, वादे और इरादे बदले, 
स×ता मद मɅ चूर पड,े ना सुर ना भèमासुर बदल.े 
वो बदले, उनके Ǒदन बदले, ǽतबा ǽपया गाडी बँगले, 
ना काले Ǒदन अपने बदले, ना रातɉ के सपने बदले
Èया रहा बाकȧ जो तुमको जीतना है. 
भर तो दȣ झोलȣ तुàहारȣ Üयार स,े 
और ͩकतना इन Ǒदलɉ को रȣतना है. 
दशक बीते तकते तकते राह सुख कȧ, 
और ͩकतने युगɉ को अब बीतना है. 
Èयɉ ͩफर रहे मेरे ͧसकंदर दरबदर, 
Èया रहा बाकȧ जो तुमको जीतना है.
ͪवप¢ हमɅ पसंद नहȣं. 
सहȣ गलत कȧ बात हȣ नहȣं, 
बस, ͪवप¢ हमɅ पसंद नहȣं. 
गैर या ͩफर अपने करɅ, 
अपना ͪवरोध रजामंद नहȣं. 
èवाथ[ के हɇ सब संबंध अपन,े 
अपने ͧसवा कोई भरोसेमंद नहȣं. 
आईने हȣ आईने हɇ, अपने चारɉ ओर, 
हमसे बढ़कर कोई खुदपसंद नहȣ.ं
ये ǐरæता Èया कहलाता है... 
देखे दल-दल, पाया बस छल, थक-मन अब तुझको पाता है, 
बहुत पीया खारा जल अब मन, पीने पीयूष मचलाता है, 
ͩकतना रोकूँ ये मन पागल, ǒबन-डोर. उड़ा सा जाता है, 
बैचेनी के सबब तुàहȣ, और चैन तुàहȣ ंमे पाता है, 
तेरे सपने, मेरे सपने, सब एकमेक से पाता है, 
धरती अंबर का ͧमलन जहाँ, वो ͯ¢Ǔतज अहो! पा जाता है, 
सब ǐरæतɉ कȧ पǐरभाषाओं को, मन आज लाँघता जाता है, 
कभी सौ पचास भाते थे पर अब, उनÛचास (49) हȣ भाता है.
तुमसे दूर कहाँ जाऊँगा….. 
जÉम गहरा Ǒदया पर, ǒबन तेरे ना रह पाऊँगा, 
बस तुàहारा हू,ँ तुमस ेदूर कहा ँजाऊँगा. 
तूफा ँथ ेराह रोके, Ǔनकला था जब म ɇघर स े, 
फौलाद के इरादे, थपेड़ɉ से ना रोका जाऊँगा. 
बहुत दूर ले आयी है, मेरȣ दȣवानगी मुझको , 
मंिजलɅ करȣब हɇ, अब ना लौट पाऊँगा. 
ये सािजश है तुàह Ʌबहलान ेमुझ ेआजमान ेकȧ, 
तुम वार करते जाना, मɇ सहता जाऊँगा. 
मɇने Ǒदल मɅ अपने, Èया रखा है तेरȣ खाǓतर, 
कभी तो मɇ तुàहɅ, समझा पाऊँगा. 
म ɇरहू ँना रहू,ँ रहɅ ये गीत सदा, 
तेरȣ आवाज मɅ हȣ, मɇ भी गुनगुनाऊँगा.
Èया हार मेरȣ हार है? 
Èयɉ हो उदास, Ǔनराश मन!,ͬगनता कभी कोई Üयार है? 
Èयɉ थके पग, जब सामने, संघष[ का संसार है? 
ये शोर, सÛनाटा सभी, ठहराव हɇ, मंिजल नहȣं, 
Èया ͧसरɉ कȧ ͬगनǓतयाँ हȣ, बस समर का सार है? 
ना खुदा , हू ँइंसान तुमसा, कͧमयाँ रहɅ हजार है, 
दो Üयार या गालȣ तुàहारा, हू ँतुàह Ʌअͬधकार है, 
मेरे ͬगरने कȧ राह तकते, ऐ फ़ǐरæते! ये बता, 
गर जीत मेरȣ है तेरȣ, Èया हार मेरȣ हार है?
लड़ रहा त ूँजंग मेरȣ… 
लड़ रहा त ूँजंग मेरȣ, शांǓत को हुड़दंग तेरȣ, 
अपन ेलहू से भर रहा, तèवीर त ूँबेरंग मेरȣ, 
चला आँधी से बचाने, लडखडाती पतंग मेरȣ, 
खुद माँगकर भरता अरे!, झोलȣ रहȣ जो तंग मेरȣ. 
तेरे हाथ का èपश[ पाकर, झूमती मृदंग मेरȣ, 
त ूँरͪव कȧ ͩकरणɅ अहो! जगमग अँधेरȣ सुरंग मेरȣ, 
त ूँजीतता म ɇनाँचता, हुयी आसमानी उमंग मेरȣ, 
लगता है जɇस ेजुड़ गयी हो, ǓनयǓत भी, तेरे संग मेरȣ 
( मृदंग - ढोलक )
तुम कहते हो वो बहुत बुरा ह.ै. 
अपने साहस संकãपɉ से, इक अदने ने इǓतहास बनाया, 
तुमने उसको भगवान बना,मानवता का पǐरहास बनाया, 
आसमान सी उàमीदɉ पर,मानव कब कौन खरा उतरा है. 
तुम कहते हो वो बहुत बुरा ह. ै 
तुम कहते हो शनैः शनैः, इतनी जãदȣ Èया है भाई, 
िजतनी लँबी बीमारȣ है, उतनी लँबी चले दवाई, 
ͩफर एक बात का उ×तर दो, अͧभमÛयु ͩकसͧलये मरा ह.ै 
तुम कहते हो वो बहुत बुरा ह. ै 
ħçटाचार रगɉ मɅ बहता, भारत के तन-मन मɅ रहता, 
तन से खून अलग कर दूँग,ा देखो! Èया ये पागल कहता, 
एक बार मɅ ख×म करो ये, पूरे भारत पे खतरा ह.ै 
तमु कहते हो वो बहुत बुरा ह. ै
Èया कह तेरा मान बढाऊँ ? 
वो अरͪवÛद कलंͩकत ͩकंतु, एक दाग ना तुझमɅ पाऊँ, 
सूरज को Èया दȣप बताऊँ, दप[ण को दप[ण Ǒदखलाऊँ, 
शÞद-शूÛय सा शÞदकोष ͩकं ,गागर मɅ सागर भर पाऊँ, 
मेरे जीवन आदश[ कहो म,ɇ Èया कह तेरा मान बढाऊँ. 
िजन आँखɉ के सपनɉ मɅ म,ɇ अपना èवͨण[म भारत पाऊँ, 
अनुपम साहस के सàमुख, अचलɉ को भी ͪवचͧलत पाऊँ, 
कल गायेगा गौरव िजसका, उसकȧ गाथा आज सुनाऊँ, 
जो जÛमजयंती कहलायेगा,वो जÛमǑदवस मɇ आज मनाऊँ
जज ͪवलेन हो गये 
जयाजी हȣरोइन जज ͪवलेन हो गये, 
मगरमÍछɉ के समंदर से नैन हो गये, 
हैरान सा हूँ मुãक कȧ इस तरÈकȧ पर, 
Ěेन से सèते अब एरोÜलेन हो गये. 
पɇट पे चɬडी चढा ये सुपरमैन हो गय,े 
सच कǑठन था तो फरेब के फैन हो गये, 
Þलेक के बीस लाख हरेक को बाँटने वाले, 
चोरɉ का नाम पूँछने बस पर बेचैन हो गय.े
इस गुͫडया का नाम मीͫडया 
इस गुͫडया का नाम मीͫडया, चाबी से हȣ चलती है, 
टȣवी चैनल अखबारɉ से, लोगɉ कȧ राय बदलती है, 
पाँच Ǿपे मɅ सवा अरब को, झटपट गोरा करती है, 
ये रȣझे सरकार बने , Ǿठे तो कोरा करती है. 
नाम करे, गुमनाम करे, बदनाम करे मनमाने है, 
नेता सब अͧभनेता डरते, ताकत को पहचाने हɇ, 
वफा माँगते नादाँ इसकȧ, ͩफतरत से अनजाने हɇ, 
रखɅ जेब मɅ इसकȧ चाबी, लêमीचंद सयाने हɇ.
मेरȣ भूल को भूल जाओ ͪĤय!े 
मेरȣ भूल को भूल जाओ ͪĤय!े 
मुझे भूलकर कैसे रह पाओग.े 
अपने अहं के Ǒहमालय से पूँछɉ, 
Ĥेम कȧ आँच कबतक सह पाओगे. 
Ǿठने मनाने कȧ, करɅ दोनɉ कोͧशश, 
मɇ हारा भी तो, तुम Èया जय पाओग.े 
Èयɉ नहȣं लौट पाया, वो मेहमान Ǒदल का, 
कोई पूँछेगा जब, ͩकतना कह पाओगे.
इतनी तैयारȣ करना है 
रणभेरȣ कȧ आहट है, ͩफर अपनी कमरɅ कसना है, 
कुछ पल के पǐरĮम से जाने, ͩकतने जीवन हँसना है, 
इस स×यĤेम के महाय£ मɅ, आहूǓत बन जलना है, 
सेवा, संकãप, समप[ण से, ͧलखे इǓतहास बदलना है 
नहȣं पता पैसɉ कȧ आँधी, ͩकन वेगɉ से आयेगी, 
नहȣं पता बदरंग मीͫडया, Èया Èया èवाँग रचायेगी, 
तंğ सभी, षडयंğ सभी, सब हथकंडे अपनायेगी, 
नहȣं पता स×ता पाने, स×ती ͩकतना ͬगर जायेगी. 
इसͧलये सुनो हे वीर तुàहɅ, इतनी तैयारȣ करना है, 
इस मायाजल से उफनाते, सागर को पार उतरना है, 
अपने पौǽष से अजेय के, माथɉ पर बल पडना है, 
हो ͬच×त प͠ दोनɉ मɅ जय, कुछ ऐसी कुæती लडना है.
अÛना कब तक मौन रहोगे ? 
अÛना कब तक मौन रहोगे, समरजयी हुँकार भरो, 
Ǔघरा शğु मɅ तेरा लाडला, ͧशवधनु कȧ टंकार करो, 
Èयɉ असहाय आज अͧभमÛयु,ĤाणͪĤय था तुàहɅ कभी, 
गर वो हारा तुम भी हारोगे, हे गुǾǿदय ͪवचार करो. 
जो शुभͬचंतक थ ेजहरबुझ,े वो तीर Ǒदलɉ पर छोड़ गये, 
थे èवाथɟ के संबंधी सारे, स×ता को मुख मोड गये, 
बस एक अकेला तेरे पथ पर, अͪवचल Ǔनèपृह डटे हुए, 
आओ गाँधी पथ Ǒदखला Èयɉ, हमसे नाता तोड़ गये. 
तेरा होकर भी ना होना सपना लगता है, 
ǒबन तेरे य ूँतÛहा लड़ना ͩकतना खलता है, 
तेरा दȣपक तूफा ंमɅ तेरȣ, राहɅ तकता है, 
आओ गाँधी भगत को, तेरȣ आवæयकता है.
RTI कुछ खास है 
वैसे कानून पचास सहȣ, 
पर RTI कुछ खास है, 
गडबͫडयɉ का चुगलखोर, 
सुशासन का ͪवæवास है, 
पारदͧश[ता का Êलास यहȣ, 
पदɟ का पदा[फाश है, 
अͬधकारɉ का अहसास कहȣं, 
कत[åयɉ का आभास है, 
रावण! अब अपने ͧसर ͬगनले, 
Ħéमाèğ हमारे पास है...
"आप"को अपना ͪवæवास चाǑहये, 
"आप"को अपना ͪवæवास चाǑहये, 
वहȣ जीवटता का अहसास चाǑहये, 
आम बहुत हɇ अब कुछ खास चाǑहये, 
शÞदसĨाट! कहाँ हो? पास आइये. 
साथ अपने ͩफर वहȣ उãलास लाइये, 
सुर मोǑहनी से शğुओ ंपर पाश डाͧलए, 
समरनायक! अधूरȣ है ǒबन तुàहारे ͪवजयगाथा, 
सुकुमार! संग अरͪवÛद के जयरास गाईये
भारत माँ के लाल बहादुर. (the real hero of AAM Aadmi) 
कद छोटा åयिÈत×व Ǒहमालय, भारत के अͧभमान हो, 
भारत माँ के लाल बहादुर, Ǻढ़ता के ĤǓतमान हो, 
तेरा मंğ ͪवæव मɅ गूँज,े जय जवान जय ͩकसान हो, 
हर माँ यह वर माँगे उसके भी, तुझ जैसी संतान हो. 
कहȣं पे गाँधी कहȣं गोडसे, ͩकसी ने जेपी नेहǾ पाये, 
लोहपुǽष सरदार कहȣं पर, अंबेडकर Ǒदलɉ पर छाये, 
कहȣं लोǑहया कȧ लोरȣ पर मेरे मन को तुम हȣ भाये, 
भारत माँ के लाल बहादुर, मेरे Ǒहèसे मɅ तुम आये..
Ǒदãलȣ माँगे केजरȣवाल 
Ǒदãलȣ का तुम Ʌसुनाऊँ हाल, ǒबजलȣ मँहगी पानी बदहाल, 
सडकɅ , èकूलɅ, खèताहाल, बीमार पड़े सब अèपताल, 
सèती सÞजी ना सèती दाल, जमाखोरȣ का फैला जाल, 
ǐरæवतखोरȣ ने ͩकया कमाल, अफसर, नेता मालामाल, 
िजसने बदलȣ सबकȧ चाल, और कौन वो माई का लाल, 
वो उनÛचास Ǒदन पाँचɉ साल, Ǒदãलȣ माँगे केजरȣवाल
ͪवͪवध……. 
उन प×थरɉ के बीच ये, हȣरा चमकना चाǑहए, 
गूँज सुनकर दȣमकɉ के, Ǒदल दहलना चाǑहए, 
इǓतहास कȧ नगरȣ मɅ ͩफर, इǓतहास बनना चाǑहए, 
कुछ भी हो अरͪवÛद को, संसद पहुँचना चाǑहए. 
जब वìत वो ठहरा नहȣं, ये वìत Èया थम पायेगा 
सूरज Ǔछपा जो बादलɉ मɅ, ͩफर Ǔनकलकर आएगा, 
इन उफनते सागरɉ कȧ, हकȧकत मालूम हो, 
इक हाथ जो डाला नहȣं ͩक, तहɉ को छू जायेगा. 
भÈतɉ को तकलȣफ बहुत है, सर खाते सवालɉ से, 
सागर िजतना खून छलकता, छोटे -छोटे छालɉ से, 
£ानचंद समझाते हमको, लȣलाधर कȧ अƫुत लȣला, 
अÍछे Ǒदन बहकर ǓनकलɅगɅ, मँहगाई के नालɉ से. 
मरघट के सÛनाटɉ से, जीवन कȧ हलचल अÍछȤ है. 
गंदे नालɉ के ठहरावɉ से, गंगा उÍछृंखल अÍछȤ है. 
मनमोहन, शीला, लालू के, दशकɉ के लàबे अंͬधयारɉ से, 
कुछ Ǒदन नभ मɅ चमकȧ वो, तारɉ कȧ ͨझलͧमल अÍछȤ है. 
कुछ तो अजब बात है, "आप"कȧ इस आग मɅ 
वरना कहो शोले बुझान,े समंदर कब भागते हɇ
नवजातɉ के मुँह दूध नहȣं, खरबɉ खाते ये ͪव£ापन, 
जो आसमान मɅ उड़ा पसीना, कालाधन बन बरसा तेरे आँगन, 
देश का सौदा कर डाला Èया, देश कȧ सेवा कȧ खाǓतर, 
ͩकतने आँसू काफ़ȧ होगे, चंदाखोरɉ का चुकन ेऋण. 
कभी सुना था देश कȧ खाǓतर, जो अपना लहू बहाएँगे, 
आँधी-तूफ़ा ँमे अͫडग रहे, वो भारत-पुğ कहाएँग,े 
देश के ठेकेदारɉ ने बदलȣ, देश Ĥेम कȧ पǐरभाषा, 
कमल का कȧचड़, मुँह मलकर हȣ, अब देशभÈत बन पाएँगे. 
Èयɉ लहू से ͩफर रंगना Ǔतरंगा है? 
हर मज[ कȧ दवा बस दंगा है? 
ͧसयासत! अचूक तीर हɇ तेरȣ तरकश मɅ, 
कभी राम थे, अब माँ गंगा है. 
तेरȣ नेक Ǔनयत को चाहा, आदत अपनी, अहसान नहȣं, 
जग टȣसे, पर म ɇजान ूँत,ूँ इÛसाँ हȣ है, भगवान नहȣ,ं 
है Üयार नहȣ ंये बुखार कȧ पल-पल, थमा[मीटर से माप,ूँ 
सौदागर ! ये गलत पता है, Ǒदल अपना तो सामान नहȣं 
भारत मंगल से भी मंगल, मूरत "माया" "सरदारɉ" कȧ? 
जीवन भूल,े जड़ को गढन,े Èया मंशा है सरकारɉ कȧ? 
ͪवकͧसत देश नहȣं बनवाते , Èयɉ èमारक ऊँचे-ऊँचे, 
Èया महापुǽष सब यहȣं हुए, या कमी उÛहɅ दȣनारɉ कȧ?
अèसी Ǒहंदू , बीस मुसलमा,ँ सरल गͨणत है वोटɉ का, 
यह रामबाण जबजब चलता , खून छलकता चोटɉ का, 
कभी बाबरȣ, कभी तो गंगा, लविजहाद, कæमीर कभी, 
कहते ͪवकास बस ताऊ है, हम ǒबन पɇदȣ के लोटɉ का. 
बाबूजी Ǒदल से ͧलखने म,े सब सुख[ ͧसयाहȣ लगती ह,ै 
इस दȣपक कȧ लɋ दȣवानी, खाͧलस घी से हȣ जलती है, 
मेरȣ हर पँिÈत के ǿद से, तेरȣ झंकार Ǔनकलती है, 
सोचा! तुझसे कुछ अलग ͧलख,ूँ पर कलम नहȣ ये चलती है. 
कब वत[मान पहचान सका, इǓतहासɉ के वीरɉ को, 
पथħçट हुए सबजग कहता, नवपथ गढते पथगीरɉ को, 
ͩकन चæमɉ से देख रहे, इन भारत कȧ तकदȣरɉ को, 
हाँथ सɇकत ेसमझ कोयला , बुƨ ुकल के हȣरɉ को. 
महादेव के ͧसर चढ़ बोलȣ, Ǒहमालयɉ कȧ गोद मɅ खेलȣ, 
देवɉ ने भी पूजा िजसको, जगती कȧ वो माँ अलबेलȣ, 
नǑदयɉ कȧ इस रानी ने बस, अपनɉ कȧ अनदेखी झेलȣ, 
सबका मल हर मो¢ कराते, गँगा हो गयी ͩकतनी मैलȣ. 
सीमा पर ͧसयासत के वो प¢ मɅ नहȣं, 
ħçटाचार अब अजु[न के ल¢ मɅ नहȣं, 
बदल हȣ डालो इस खेल के सब Ǿल Èयɉͩक, 
साǑहब अब प¢ मɅ हɇ, ͪवप¢ मɅ नहȣ.
हौसलɉ के हाथ मɅ, ͪवæवास कȧ पतवार है, 
जलती ͬचता कȧ लकͫड़यɉ से , नॉव अब तैयार है, 
आग पानी मɅ लगा , मɇ चीरता जाता अँधेरा, 
गर ना रहू ँम,ɇ राख तुझको, पहुँचना उस पार है. 
सच-झूठ का बाजार बंधु ! हंस - सा ͬचंतन करो , 
पीयूष भी है, जहर भी, बन देव तुम मंथन करो , 
"आम" हɇ पर नाम सुन , हɇ खास थर-थर कांपते, 
यहȣ राघव, यहȣ माधव, पहचान अͧभनÛदन करो. 
मल के दलदल मे धसे गढ़े, अब आसमान पे थूकɅग े? 
टुकड़ɉ पे पलते कु×ते अब, Èया ऐरावत पे भɉकेगे ? 
हम नीलकंठ! ͧसèटम मंथन कर, सारे ͪवष को पी लɅगे, 
हो पथ बाधाएँ ͧसंध-ुसी, हम राम! वाण स ेसोखेगे. 
केजी! तुम तो बहुत बोलते हो, 
िèवस के सब राज खोलते हो, 
राजɉ के रंग मɅ भंग घोलते हो, 
बने खेल पे रायता ढोलते हो, 
पाया कहाँ ये िजगर कुछ तो बोलो, 
समंदर मɅ आके तहɅ तौलते हो.
ऍमसीडी मɅ चल रहȣ, भाजापा कȧ लूट, 
रँगे हाँथ पकडे गए, करते फोटो शूट, 
करते फोटो शूट झूठ कȧ झाड़ू पकड, े 
सात साल के बाहर आये सारे लफड़े, 
ͧश¢ा èवाèØय सफाई सड़कɅ रामभरोसे, 
बेशमɟ ͩफर वोट माँगते हो ͩकस मुँह स.े 
इक हवाहवाई लालͩकला, इक अनशन जंतरमंतर है, 
भÈतɉ का भगवान तो कोई, भूखɉ का पैगंबर ह,ै 
मीठा कुआ कोई तो कोई, मीलɉ फैला समÛदर है, 
इक गͧलयɉ का हȣरो दूजा, ͩफãमɉ का धरͧमंदर ह.ै 
मनमोहन के दौर से, कुछ ऐसा फैला रोग, 
जब पीएम मुँह खोलते, तालȣ पीटɅ लोग, 
तालȣ पीटɅ लोग,भूलकर सुधबुध सारȣ, 
सबको सपन ेबेच रहा, गुÏज ुåयापारȣ, 
बोले ऐसे बोल , सभी जनमन को भाते, 
सेãसमेन से खुशी-खुशी, सब जेब कटाते. 
काले धन के कȧचड़ से, अपनी छͪव चमकाओगे, 
ǒबके हुए इन सवȶ से तुम, जनता को भरमाओगे, 
िजन आँखो ने उनंचास Ǒदन, सच का सावन देख ͧलया, 
अरे मदारȣ! कैसे उनको, पदɟ से छल पाओगे.
ǒबना दुãहे के बारात कैसे सजेगी, 
Ĝाईवर के ǒबना कार कैसे चलेगी, 
अरे एक टȣम नहȣं बनती ǒबना कÜतान के, 
कहो कैसे अपनी Ǒदãलȣ सरकार बनेगी.. 
हǐरæचंġ के वंशज देखो, ͩकन चोरɉ से ͧमले हुए, 
कालेधन के कȧचड़ मɅ, राçĚकमल सब ͨखले हुए, 
कहाँ गई वे बेदȣ, बाबा, और कागज के कन[ल जनरल 
बकते कभी नहȣं थकते, Èयɉ अबकȧ मुखडे ͧसले हुए. 
बोलो Èया बस तुम अÍछे, सब तुमको अÍछा करना ह,ै 
सवा अरब का देश Įेçठ , Èया दो हाथɉ से बनना है, 
तुम भी अÍछे वो भी अÍछा, दोनɉ को अÍछा करने दो, 
देश Ǒदया तुमको उसको, Ǒदãलȣ का भाÊय बदलने दो. 
जहाँ है नीचाई औरɉ कȧ, बेशक रÝतारɅ पाओगे, 
जो हार चुके सबकुछ अपना, उनपर जयकारɅ पाओगे, 
दावा है मेरा हे अजेय, जब इस गͧलयारे आओगे, 
हȣरे के सàमुख तेजहȣन, अपनी तलवारɅ पाओगे. 
लो हमहȣं ͩफर आज Ǒदãलȣ कȧ ͩफजा मɅ छा गये, 
सब तीर मारɅ ओट से हम सामने टकरा गए, 
जो सूरमा थे पा खबर ͩफर आज Èयɉ घबरा गए, 
अरे झुÖड मɅ गीदड़ लड़Ʌ कोई शेर हो तो लाओ जी, 
Èया जीत पाओगे मुझ ेजब युƨ स ेकतरा गये.
दो पाटɉ मɅ ͪपसने को, अबकȧ Ǒदãलȣ मजबूर नहȣं, 
कोई ऐरा-गैरा भर सकता, इस माथे का ͧसÛदूर नहȣं 
तुम हो शौहरत के ͧशखर मगर मɇ भी इतनी मजबूर नहȣं, 
बाप देखकर ǒबǑटया वरदɅ, अब वैसा दèतूर नहȣं. 
भारतीय ͩĐकेट कंĚोल बोड[ (BCCI) - एक Ǔतͧलèम 
बेट-बाल सब जकड ͧलया, ͩĐकेट के ठेकेदारɉ नɅ, 
धम[ कभी था अब धंधा, कर डाला इन गƧारɉ नɅ, 
सवा अरब के देशĤेम से, खेल Ǔघनɉना खेल रहे, 
ͩĐकेट का क ख ना जानɅ, स͠ा भावɉ को खोल रहे, 
कुछ लोगɉ के हाथɉ मɅ, लो सारा भारत थमा Ǒदया. 
चीयरलȣडरɅ नाँच Ǒदखाती, खेल तमाशा बना Ǒदया, 
ͧश¢ाͪवभाग मɅ चपरासी कȧ भतȸ के ͧलए आवेदन देने वाले पढ़े ͧलखे नौजवान कȧ दुͪवधा-: 
ͧश¢ामंğी कȧ ͧश¢ा फजȸ, देखी; तब जागी खुदगजȸ, 
शम[शार हो चपरासी ने, बाͪपस लȣ भतȸ कȧ अजȸ. 
कहने लगा भूख सह लूँगा, कुछ Ǒदन ǒबना जॉब रह लूँगा, 
िजनसे Ïयादा पढ़ा-ͧलखा हू,ँकैसे उनको "सर" कह दूँग.ा 
# Delhidialogue # 
कौन सुनेगा ͩकसको सुनाय,Ʌ दूर हो चलȣ ये उलझन है, 
करने से सब कुछ हो सकता, ͪवæवासी अब मेरा मन है, 
जंतरमंतर पर आज Ǒदलɉ के, कहन ेसुनन ेका हȣ Ǒदन है, 
ͧमलकर सोचɅ हो कैसे बेहतर, Ǒदãलȣ तुमको आमंğण है.
िजनका पौǽष थका वोहȣ, औरɉ कȧ करनी खाते हɇ, 
अपने आज से हारे हȣ, बीते कल के गुण गाते हɇ, 
अपने मुँह कȧ काͧलख मँजने, राखɉ को सहलाते हɇ, 
होकर बेपदा[ पदɟ पर, गाँधी नेहǾ Ǒदखलाते हɇ 
िजनका पौǽष थका वोहȣ, औरɉ कȧ करनी खाते हɇ, 
अपने आज से हारे हȣ, अपने अतीत को गाते हɇ, 
अपने मुँह कȧ काͧलख मँजने, राखɉ को सहलाते हɇ, 
होकर बेपदा[ पदɟ पर, गाँधी नेहǾ Ǒदखलाते हɇ. 
कई माँओं कȧ मौत बन गयी, रमन सींग कȧ नसबंदȣ 
छह-छह सौ मɅ मोल लȣ गयीं, चलती ͩफरती आनंदȣ, 
लêय आंकड़ɉ को छूने का, छूट गया है सचमुच पर 
लाल रंग से Ǔनखर गई, देखो ͪवकास कȧ बासुंदȣ. 
अब इãमी जी बेइãम हुɃ, वेदȣजी एक Ǔतͧलèम हुɃ, 
बाबा कȧ दाढ़ȣ मɅ Ǔतनका,Èया Ěेलर थे Èया ͩफãम हुɃ. 
जǽरȣ नहȣं कȧ हर सवाल का जवाब हो, 
हम लाजवाब हɇ, तुम लाजवाब हो..

Wo 49 din final

  • 1.
    वो 49 Ǒदन........ केजी तेरा भूत न उतरे मेरे सर से, उनÛचास कȧ याद न जाये मेरे Ǒदल से, सब सपनो मɅ खोये पर, Ǒदãलȣ अब तक जाग रहȣ, पूँछ रहȣ है कब आओगे एजी ͩफर से.
  • 2.
    आपने Èया ͩकयाअरͪवÛद जी ..... जब रात गहरȣ, पथ Ǒदखाते, जुगन!ू मुझ ेतुम चाँद जी, कमल ͨखलाते सूरज कोई, भँवरे को मकरंद जी, सǑदयɉ से सूखी इस धरा को, मेघ कȧ तुम बूँद जी, हम डूबतɉ को कोई Ǔतनका , आͨखरȣ उàमीद जी, तुझ ेढूँढ़ता चैनल बदल, अखबार के पÛने पलट जी, चाहे तुझ,े चाहू ँउसे, तुझस ेअलग, लगते गलत जी, देखता हू ँबस तुàह,े आँखɅ खुलȣ हɉ बंद जी, बस तेरȣ धुन, तेरा नशा, ना और मन को पसंद जी, पढ़ा CA , पर बन कͪव मɇ, रच रहा हू ँछँद जी, हाल अपना पागलɉ - सा, "आपने" Èया ͩकया अरͪवÛद जी.
  • 3.
    मेरȣ बात - तेरा हर Ǿप भाता है, तेरा हर रंग भाता है, मेरे हर छंद को अरͪवंद त ूँͩकतना लुभाता है. वष[ 2014 के आरàभ मɅ Ǒदãलȣ के चुनावी नतीजɉ के आने के साथ हȣ राजनैǓतक ĐांǓत के नूतन अÚयाय का आरàभ हुआ. अंतस कȧ तहɉ मɅ पड़ी हुयी ͬचर आकां¢ाएं सजीव सी हो पड़ी थी एवं शूÛय सी पड़ी सàभावनाओं ने यथाथ[ के धरातल पर पग रख Ǒदए थे. मेरे मन ने भी अंगड़ाइयां लȣ और ͪवचारɉ कȧ अनवरत Įृंखला नूतन कͪवता-पुçपɉ मɅ पãलͪवत होती रहȣ. Ĥèतुत संकलन “वो 49 Ǒदन" ǒबखरे हुए कͪवता पुçपɉ को माला मɅ गूंथन ेका Ĥयास है.. इन कͪवताओं मɅ मɇने वत[मान मɅ Ĥचͧलत राजनैǓतक पǐरǺæयɉ पर अपनी समझ को लेखांͩकत ͩकया है. यह åयिÈतयɉ कȧ Ǔनंदा-èतुǓत ना होकर एक ͪवचार कȧ समी¢ा है Èयɉͩक åयिÈत आते जाते रहते हɇ वे िजतनी तेजी से आशा का संचार करते हɇ उससे कहȣं अͬधक गǓत से Ǔनराशा फैलाते हɇ. बहुधा åयिÈतयɉ मɅ मानवोͬचत कͧमयाँ पायी जा सकती हɇ, गलǓतयɉ कȧ संभावनाएं रहती हɇ, पर ͪवचार शाæवत होता है.. ये सभी रचनाएँ मुंबई लोकल मɅ ऑͩफस से घर जाने के अंतराल मɅ ͧलखी गयी. समय कȧ कमी ने कई èथानो पर ͪवचारɉ के èवतंğ Ĥवाह व शÞद चयन को संकुͬचत ͩकया, िजसके ͧलए मɇ ıदय से ¢मा Ĥाथȸ हू.ँ आशा है आपको ये Ĥयास ǽͬचकर लगेगा.... Amit Kumar Jain woh49din.aap@gmail.com
  • 4.
    1. वो 49Ǒदन, बहुत याद आएगे. 2. आम आदमी तो आम होता है... 3. 1. ħçटाचार ज़Ǿरȣ है.. 4. ħçटɉ कवो ȧ संसद 49 मे Ǒदन, अब बहुत नो एंĚȣयाद !!! आएगे. 5. जब चुनाव आ जाते ह… ɇ6. अͧभमÛयु फसा चĐåयूह म... Ʌ7. ये चीज़ है पॉͧलǑटÈस 8. अजब तेरे शहर का दèतूर हो गया 9. अब समर मे उतरना होगा 10. झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ 11. Èया चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को.. 12. आप को चंदा कौन Ǒदया 13. खचȶ बता रहे हɇ ͩक इनकम बुलंद है.. 14. Ǔनण[य कȧ घड़ी अब आई है 15. हाँ, म ɇअनाͩक[èट हू!ँ! 16. नौ सौ चूहे खा ǒबãलȣ हज को चलȣ 17. अबकȧ बारȣ आप है 18. कांĒेͧसयो तुम कमाल करते हो.. 19. जब ħçट तंğ का ħçट Ĥशासक 20. आप तो बुरा मान गये 21. कȧमत तो चुकानी पड़ेगी... 22. िज़द ना करो 23. कौन तुàहारा बाप है ??? 24. म ɇतुàह ेÜयार Èयɉ द?ूँ?? 25. हमारȣ कोͧशशɅ जारȣ रहɅगीं 26. कमाल हो गया.. 27. केजरȣवाल तो पागल है 28. ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है.. 29. ये खाँसी बड़े काम कȧ है ये खाँसी 30. ये तो होना हȣ था.. 31. हम भी चुप और तुम भी चुप 32. Ĥाइम ͧमǓनèटर जेल म... Ʌ33. राजा ने ͧसंहासन छोड़ा है 34. खबर बेचना मेरा धंधा…. 35. Ǒदãलȣ को अयोÚया बनाना पड़ेगा… 36. तुम Èया गये, सब सूना कर गये... 37. ये तो ग़लत बात है.... 38. सच ͩकसको अÍछा लगता है 39. Èया सचमुच हम आजाद हुय े 40. Ǒदल हȣ अपनी कमजोरȣ है, Ǒदल हȣ अपनी ताकत है 41. ͩकसी का ज़मीन,ͩकसी का आसमाँ पे Ǒहसाब होगा 42. कैस ेमान ूँअपराध है, भोला ħçटाचार 43. दो मɅ से कुछ एक यार होगा 44. कहाँ रहे तुम नंदलाला 45. ħçटɉ से मुÈत अपना, भारत हमɅ बनाना 46. म ɇअभी हारा नहȣ ंहू ँ 47. मेरȣ हार से हाͧसल Èया कर पाओगे 48. अब आम आदमी जागा है 49. अबकȧ बार मोदȣ सरकार 50. अÍछे Ǒदन आने वाले हɇ 51. भारत माँ का कौन भला 52. ͪवकास चाǑहए तो ħçटाचार भी होगा 53. ये कैसा ͪवकास है 54. सारे सपने टूट गए 55. ͩकसके महल सजाने 56. अÍछे Ǒदन आ गए 57. म ɇसीता हू,ँ तुम राम बनो 58. अजब-गजब ये सàमोहन 59. कहाँ गये वे "अटल" 60. छÜपन छाती खरगोश हुए 61. सरकार जहाँ सरकार वहȣं है 62. दो Ǒदन चले अढ़ाई कोस 63. नाम बडे और दश[न छोटे 64. सब बदला और तुम भी बदले 65. Èया रहा बाकȧ जो तुमको जीतना है 66. ͪवप¢ हमɅ पसंद नहȣं 67. ये ǐरæता Èया कहलाता है 68. तुमस ेदूर कहा ँजाऊँगा 69. Èया हार मेरȣ हार है 70. लड़ रहा त ूँजंग मेरȣ 71. तुम कहते हो वो बहुत बुरा है 72. Èया कह तेरा मान बढाऊँ 73. जज ͪवलेन हो गये 74. इस गुͫडया का नाम मीͫडया 75. मेरȣ भूल को भूल जाओ ͪĤये 76. इतनी तैयारȣ करना है 77. अÛना कब तक मौन रहोगे 78. RTI कुछ खास है 79. आप"को अपना ͪवæवास चाǑहये 80. भारत माँ के लाल बहादुर 81. Ǒदãलȣ माँगे केजरȣवाल 82. ͪवͪवध
  • 5.
    वो 49 Ǒदन,बहुत याद आएगे... वो जनता कȧ मज़ȸ पे स×ता मे आना, आम आदमी का आसमान छू जाना, वो मेĚो से तेरा, ताजपोशी को आना, वो राम-लȣला मैदान का मंज़र सुहाना, वो सपनो कȧ दुǓनया हक़ȧकत मे आना, वो आँखो कȧ नमी, हɉठɉ का मुèकुराना, कभी तो हंसाएँगे , कभी तो ǽलाएँगे. वो 49 Ǒदन.. ग़रȣबो का ǒबजलȣ और पानी पा जाना, वो अफ़सरȣ, लालब×ती का गुल हो जाना, वो ħçटɉ के कुनबे मे हड़कंप लाना, वो सदȹ कȧ रातɉ मे रोडो पे सोना, वो िज़द तेरȣ, कलयुग मे, राम-राज लाना, छूकर जड़-चेतना को, अǑहãया बनाना, मसीहा तेरे कǐरæमाई नुèख े, नीम हकȧम भी अपनायेग.े वो 49 Ǒदन.. वो कॉंĒेस भाजप का आपस मे ͧमलना, रंगे हाथ पे कमल कागज के ͨखलना, उसूलɉ पे तेरा, महल छोड़ जाना, ͪवæवास ͩकतना ͩक, बहुमत से आना, ना भूल ेना भूलेग ेतेरा जमाना, हरेक हɉठ पे है , आज तेरा तराना, इंतज़ार है, बेकरार सब, "आप' कब आएगे. वो 49 Ǒदन..
  • 6.
    आम आदमी तोआम होता है... कभी गुèसा तो Üयार कभी,सच-झूठ का कारोबार कभी , पǐरवार और रोजी-रोटȣ, इनका सारा संसार यहȣ, आजकल ख़बरɉ मɅ, Ĥायः गुमनाम हȣ होता है.... कुछ गलती, कुछ कͧमयां तो, सब सवा अरब मɅ पाओगे, गर ये नहȣं,ऐसा नहȣं तो, और बेहतर कहाँ से लाओगे? यहाँ "आम" हȣ ͧमलɅगे बाबूजी! "राम" तो बैकुÖठ मɅ होता है.... कोई बनावट यहाँ नहȣं, जैसे Ǒदखते बस वैसे हɇ, हम ऐसे-वैसे-जैसे हɇ, पर ǒबलकुल तेरे जैसे हɇ, हमारे दाग Ǒदखते Èयɉ हɇ, ये हमपे इãजाम है.... ये अलग लोग, ये अलग सोच, कोई अलग हȣ इनका देश रहा, गूंगी इन महलɉ कȧ दȣवारɅ,अब कहने-सुनन ेÈया शेष रहा, अपनɉ का दद[ बाँटना तो, अपनɉ का काम होता है....
  • 7.
    ħçटाचार ज़Ǿरȣ है.. नादान है जो शोर मचाते, ħçटाचार ͧमटाएगे, ये ज़ǐरया गर चला गया, तो फंड कहाँ से आएगे, कैसे ये भीड़, सभाएँ होगी, ͪव£ापन लोक-लुभावन होगे, िèवस-खाते, ǽतबा, तामझाम, बंगला, गाड़ी, चमचे होगे, कोई शौक नहȣ मजबूरȣ है. ħçटाचार ज़Ǿरȣ है..... खेती, पानी, राशन,ͧश¢ा, èवाèØय, सुर¢ा, रोज़गार, रोड़े, रेलɅ, पुल, èकूलɅ , उɮयोग, धंधे, शेयर बाज़ार, इन सब कामो को करने का, इसके कंधो पर हȣ भार , कहȣ ͧमठाई, कहȣ दलालȣ, कहȣ तो है ये ͧशçटाचार, ͪवकास कȧ हर एक कहानी, इसके ǒबना अधूरȣ है. ħçटाचार ज़Ǿरȣ है.....
  • 8.
    ħçटɉ कȧ संसदमे अब नो एंĚȣ!!! मुखड़ ेछोड़ो, मुƧा पकड़ो, और मुƧा बस ħçटाचार है, मुखड़ ेतो आत-ेजात ेहɇ, झूठा इनका Üयार है, ħçटाचार मुÈत होगी, अब सारȣ कंĚȣ. ħçटɉ कȧ संसद मे अब नो एंĚȣ!!! गर बदला चेहरा, पर तंğ नहȣ, तो हाͧसल Èया कर पाओगे, पाँच साल का इंतज़ार, पल-पल ͩफर पछताओगे, अरे! मनमोहन- से ईमानदार कȧ, यहाँ डूब गयी सारȣ ͫडĒी. ħçटɉ कȧ संसद मे अब नो एंĚȣ!!! ना भेदभाव पद,धन,बल का , सबको Ûयाय, सàमान ͧमले, है सरल ͪवकास कȧ पǐरभाषा, जहाँ सबको अवसर समान ͧमले, फेकू जी! अब बस ! ͪवकास के, चाँद तारɉ कȧ ǒबĐȧ. ħçटɉ कȧ संसद मे अब नो एंĚȣ!!! ͩकसको Èया ͧमलता, हम Èया पाते, राजा कौन, कौन सरकार, छोड़ो ये सब, आओ ͧमलकर, एक बात को हो तैयार, अपनी वोट से कोई ħçट, ना पहुच ेǑदãलȣ. ħçटɉ कȧ संसद मे अब नो एंĚȣ!!!
  • 9.
    जब चुनाव आजाते हɇ… तेरे आने कȧ आहट सुन, पतझड़ सावन हो जाते हɇ, ईद का चाँद जमीन पे उतरा , Ĥायः ͩक़èसो मे हȣ सुन पाते हɇ, साँप ǒबलɉ से बाहर आते, ͬगरͬगट के रंग बदल जाते हɇ, िजनके चरणɉ को खोजा अब तक, उनको चरणɉ मे पाते हɇ. Èया ͩकया और Èया कर दɅगे, लंबी फेहǐरèत सुनात ेहɇ, हाथ मे इनके चंदा, सूरज, Ǒदन मे तारे Ǒदखलाते हɇ, सबसे लेकर कुछ को देकर, दानवीर कहलाते हɇ, चम×कार है इस चुनाव का, कंस कृçण बन जाते हɇ. चमचɉ कȧ तो चाँदȣ होती, भूख ेǒबरयानी खात ेहɇ, दाǾ, नोटɉ कȧ वषा[ से, वो समाजवाद फैलाते हɇ, हम वहȣU, ͪवकास के ͪव£ापन, टȣवी को चमकाते हɇ, ͬधक ये जनता ऐसे नेता, ͩफर ͩफर जीत के आ जाते हɇ.
  • 10.
    अͧभमÛयु फसा चĐåयूहमɅ... सुन ललकार शğुओ कȧ, इसका मन भी है मचलाया, लाज बचाने देश कȧ अपने, बालक ने है शèğ उठाया, ये सािजश है षडयंğ कोई, सब बड़े-बडो ने समझाया, साहस , दुèसाहस कȧ पतलȣ, रेखा को इसने आज ͧमटाया, Ĥाणो का भय पीछे छूटा, संकãप एक बस शेष रहे, कुल का गौरव ना खोने दूँगा , जब तक अंǓतम साँस रहे, देखो! Ǔघरा शğुओ ंमे, है लहुलुहान पर लड़ता जाता, कोई मारे भाला सीने मे, कोई पीछे से छुरȣ भɉकता, चोतरफ़ा से बाणो कȧ वषा[, सब कवच भेदती जाती है, ĤǓतपल मृ×य-ुसुंदरȣ अपने, पास खींचती जाती है, तुम आज मूकदशȸ ! भͪवçय को, Èया जबाब दे पाओगे, युगɉ-युगɉ तक Èया ͩफर, कोई अͧभमÛयु पा जाओगे, समय शेष है उठो वीर!, आओ ͧमलकर शèğ उठाएँ, लड़े Ĥाण जब तक तन मे, एक नया इǓतहास रचाएँ.
  • 11.
    ये चीज़ हैपॉͧलǑटÈस ये चीज़ है पॉͧलǑटÈस कȧचड़ काͧलख का खेल हुए, सब गोरे काले ͧमÈस, कͪपल, सͬचन सब आउट दनादन भÏजी मारे ͧसÈस, ǒबन-पूंजी का Ǔनवेश बड़े Ǒदन रात ना कोई ǐरèक, हार-जीत बस आँख-ͧमचोलȣ, हर Üलेयर हȣ है ͩफÈस, ͪव£ान गͨणत सब फैल हुई, ना चले इकॉनोͧमÈस, ये कला बड़ी आसान ͩक़ इसमे, बस करना सबके बूट ͧलÈस , ͬचपक रहो कुसȸ से तुम, चाहे ͩकतने खाओ ͩकÈस, मेहनत सÍचाई दूर हटो , है èवागत डटȹ ǑĚÈस, "आप" आए ͪवæवास जगा, बदलेगी ये पॉͧलǑटÈस, ना नज़र लगे फलो-फूलो, यहȣ हमारȣ ͪवश-ͪवश. ये चीज़ है पॉͧलǑटÈस ये चीज़ है पॉͧलǑटÈस....
  • 12.
    अजब तेरे शहरका दèतूर हो गया लुटेरे शहर के , ईमान के , मंǑदर मɅ बैठे पुज रहे, मेरा एक चोर को बस चोर कहना , कसूर हो गया. चंदा , सूरज , पǐरयाँ ले लो, लो इंġधनुष के रंग सभी, सपने बेचते - बेचते वो , हकȧकत से दूर हो गया. ये उसूल Èया दɅगे , ͧसवा गरȣबी , गुमनामी के, चायवाला ईमान बेचके, मशहूर हो गया. कोई मारता ना मरता , ये फलसफा पढ़के, खून के खेल को योगी, मंजूर हो गया. दौलत कȧ चमक है, या पॉͧलश का हुनर, कांच का मामूलȣ टुकड़ा, आज कोǑहनूर हो गया.
  • 13.
    अब समर मेउतरना होगा Èया जीवन के उƧेæय यहȣ, खाना पीना और सो जाना, पǐरवार, पढ़ाई, रोज़गार, अपनी दुǓनया मे खो जाना, देश कȧ चचा[, देश कȧ ͬचंता, देशĤेम बस मन-रंजन, देश कȧ दशा बदलने ͧमğो!, सोच कȧ Ǒदशा को बदलना होगा l अब समर.. मूğ ͪवसज[न बहुत हुआ पुǽ!, Ĥाण-सृजन अब करना होगा, लाल लहू कȧ गमȸ से अब, Ǒहमͬगǐर को भी बहना होगा, धृतराçĚ सरȣखे राजा हɇ, है हर नुÈकड़ पर चीर हरण, हाथɉ मे चĐ सुदश[न ले, अब तुàह ेकृçण बनना होगा l अब समर.. अभी नहȣ तो कभी नहȣ, इस युग-¢ण कȧ पहचान करो, ये राçĚ-सृजन का पथ दुçकर, तुम भी कुछ Įम-दान करो, जीवन का मूãय चुकान ेका, यह èवͨण[म अवसर आया है, इǓतहास रच ेहɇ बहुतɉ ने , तुझ ेभͪवçय रचना होगा l अब समर..
  • 14.
    झाड़ू चलाओ ,बेईमान भगाओ झाड़ू हर घर मɅ रहती , आम खास मɅ भेद ना करती, है Ǒदखने मɅ सहज-सरल पर, कूड़ ेपर ǒबजलȣ सी ͬगरती, ये बड़े काम कȧ चीज है बाबू! तुम भी इसको घर लाओ. झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ ऊँच ेछÜपर कȧ धूल Ʌहɉ या मकड़जाल कȧ चूल Ʌहɉ, चले Ǔनरंतर ǒबना थके, चाहे ͩकतनी भी ĤǓतकूलɅ हɉ, ये समाजवाद कȧ पाठशाला, कुछ समझो कुछ समझाओ. झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ घर भरा गंदगी बदबू से, मÍछर बीमारȣ फैलाएं, अपने घर को सुथरा करने, है इÛतजार, कब मेहतर आयɅ, उठो अमु! आलस छोडो, झाड़ू पकड़ो ना शमा[ओ. झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ ये बँधी हुयी पर सधी हुयी, ͩकसी कोने मɅ पड़ी रहे, कत[åयɉ के पथ पर बढ़ती, पल-पल अपनी मौत सहे, खुद ͧमटकर औरɉ कȧ सेवा, झाड़ू का सÛदेश सुनाओ. झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ
  • 15.
    Èया चौरासी साललगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को.. लाख चौरासी योǓन मे, दंगो कȧ फाइल भटक रहȣ, दज[नो कͧमशन, जाँच सͧमǓत, जाँच कहा पर अटक रहȣ, ͩकतने कͧमशन और लगेगे, इस एक घटना कȧ जाँच को. Èया चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को.. देश के Ǒदल Ǒदãलȣ मे हȣ तो, हāतो नरसंहार हुआ, Èया औरत Èया बÍचे, देखो! लाशɉ का अंबार हुआ, और ͩकतने सबूत लगेगे, साǒबत करने पाप को. Èया चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को.. क×ल हज़ारɉ खुलेआम, पर काǓतल ना एक ͧमला, ͬधक! Ûयाय और ये Ûयाय åयèथा, अंधे- बहरो का काͩफला, लगे तीस साल और ͩकतने, माइ लॉड[!! लगेगे आपको. Èया चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को..
  • 16.
    आप को चंदाकौन Ǒदया आतंकवाद, नÈसल, बीमारȣ, भुखमरȣ, अͧश¢ा, रोज़गार, मǑहला सुर¢ा, सांĤदाǓयकता, समèयाओ का है अंबार, पर सबस ेͬचंता का Ĥशन् आज ͩक, आप को चंदा कौन Ǒदया. 2G, CWG, आदश[, कोल, मनरेगा, वाĜा, बोफोस[ , इन घोटालो कȧ जॉच ज़Ǿरȣ, जारȣ है जारȣ हȣ रहेगी, पर सबसे पहले ये जाँच ज़Ǿरȣ, आप को चंदा कौन Ǒदया. देश-ͪवदेश से काला पीला, औरɉ ने अरबो हͬथयाया, जÛमǑदन ͬगÝट, कहȣ पाटȹ फंड, ͩकसी ने हāता नाम बताया, अजी! अथ[åयèथा ख़तरे मे ͩक , आप को चंदा कौन Ǒदया. लाखɉ केस कोट[ मे सड़ रहे, Ûयाय माँगते जूत ेǓघस रहे, कुछ अपने हालात के हाथो, कुछ वकȧल कȧ फȧस से मर रहे, पर पहले Ǔनण[य ये होना है ͩक, आप को चंदा कौन Ǒदया.
  • 17.
    खचȶ बता रहेहɇ ͩक इनकम बुलंद है.. ये लालͩकले से मंच सजे, ये रेल-बसो का तामझाम, लाखɉ कȧ लाई भीड़, और खाने पीने के इंतज़ाम, पूछो! ये शो Ĥायोिजत करने वाला, कौन अमीरचंद है? खचȶ बता.. पÜपू पापा बनने Ǔनकले, नयी सोच नयी बात है, बासी कड़ी उबाल मारती, रॅटा रटाया पाठ है, 500 करोड़ लगेगे साǒबत करने , ͩक पÜपू अÈलमंद है? खचȶ बता.. कु×ते- सा जो काम कराकर, तनíवाह बाँटने को रोएंगे, माँगे-माँगे भीख ना देते, ǒबनमांगे Èयɉ चंदा देगे? खुलȣ Ǔतजोरȣ आपकȧ खाǓतर, Èयɉ हमको मु͡ी बंद है? खचȶ बता.. रोटȣ, कपड़ा, मकान कȧ ͬचंता, मे जीवन को Ǔघसता जाता, कभी मंदȣ, कभी मɅहगाई से, आम आदमी ͪपसता जाता, पर इनका धंधा तेज ͪवæव कȧ, अथ[åयवèथा मंद है. खचȶ बता.. हम देशी, देशी अंदाज हमारा, देशी अपना संसार है, पर ͪवदेशी कंधɉ पे इनके, मेक- ओवर का भार है, ना आम, ये ऊँचे लोग हɇ बाबू!! ऊँची इनकȧ पसंद है. खचȶ बता..
  • 18.
    Ǔनण[य कȧ घड़ीअब आई है बजा ǒबगुल, आरंभ युƨ, वीरो ने शèğ सभाले है, दोनो सेनाए सजी हुई, Ǔनण[य कȧ घड़ी अब आई है. कहȣ तो अनुभव कȧ बरसातɅ, कहȣ दुहाई यौवन कȧ, कोई ͪवकास कȧ तान छेड़ता, कहȣ सांĤदाǓयकता छाई है. Èया ͩकया और Èया कर देगे, ऊँचे मंचɉ से गरज रहे, दोनो ने अनͬगन वादɉ कȧ, ǒबन-डोर पतंग उड़ाई है. दशक गये पर दोनो से, दंगो के दाग नहȣ जाते, करोड़ɉ के इंपोटȶड पाउडर से, पÜपू-फेकू कȧ पुताई है. मन दुͪवधा मे èतÞध शूÛय, èमृǓतयɉ मे खो जाता है, ͩकस और जाऊं या ठहर जाऊं, इधर कुआ उधर खाई है. मत सोचो! मेहनत बेकार जाएगी, आप कहाँ तक पहुँच पाएगी, पग-पग, पल-पल बढ़के हȣ तो, सबने मंिज़ल पाई है.
  • 19.
    हा,ँ म ɇअनाͩक[èटहू!ँ! अबलाओ ंके आँस ूसे, Ǒदãलȣ का Ǒदल जब सुख [हो रहा, गुͫड़या, दाͧमनी के ͩक़èसो से, सब देश शम[ मे डूब रहा, पुͧलस Ĥशासन मूक-बͬधर, दुशासन बेखौफ़ खड़े, चीर-ġोपदȣ लूट जान ेद ूं, ना राजा म ɇधृतराçĚ हू.ँ हा,ँ म ɇअनाͩक[èट हू!ँ! जन-सेवा हȣ राçटधम[, क़ानून, Ûयाय, संͪवधान है, लोकतंğ का Ĥाण यहȣ, ये हȣ भारत Ǔनमा[ण है, जन-सेवा से ͪवमुख खड़ा, वो तंğ ħçट, सरकार Ǔनकàमी, जन-सेवा के नूतन पथ सृजता, कोई कहे पथ-ħçट हू.ँ हा,ँ म ɇअनाͩक[èट हू!ँ! िज़द है जब तक Ĥाण रहे, जन-Ǒहत मे संघष [कǾगा. संसद मे कभी सड़क पे आके, ħçटो!! तुम पर वार कǾगा, पद लोभी होगे और कोई, सरकार ͬगरे तो ͬगर जाए, ͧसर नहȣ झुका है, नहȣ झुकेगा, हा!ँ मɅ िजƧी दुçट हू.ँ हा,ँ म ɇअनाͩक[èट हू!ँ!
  • 20.
    नौ सौ चूहेखा ǒबãलȣ हज को चलȣ अब तक जो पैसे-पॉवर कȧ , आँखो पे प͠ी बाँधे थे, Ǒदãलȣ कȧ जनता कȧ दहाड़ से, उन अंधो कȧ आँख खुलȣ. जनता हा-हाकार मचाती, कानो मे ज ूँभी ना रɅगती, इन बहरȣ सरकारो मे, जनता-दरबार कȧ सेल चलȣ. जंग जीत महलो मे सोते, 5 साल ͩफर कौन Ĥजा, इन "गिजनी" सरकारो को, अब याद आए पानी-ǒबजलȣ. कोई टोल- बूथ है तोड़ रहा, कहȣ आ×म- दाह कȧ है धमकȧ, कहȣ पे धरना, कहȣ Ĥदश[न, जन-सेवा कȧ अब होड़ चलȣ. जन कȧ नीǓत, जन का नेता, सभी दलɉ मे ख़ाͧलबलȣ, मॅफलर, èवेटर सपने मे Ǒदखते, खादȣ कȧ पतलून खुलȣ. ना कोई सभा का तामझाम, ना कोई मेक-ओवर का खचा[, मीͫडया मे अपनी èटोरȣ, फोकट मे Ǒदन-रात चलȣ. स×ता कȧ दलालȣ से अपनी, जो रोज़ी-रोटȣ चला रहे, अब "ħçटाचार ͧमटाएगे", बोले कौआ कोयल बोलȣ . आप-जाप कȧ माला रॅट रहे, सब जन देखादेखी कर रहे. झाड़ू पहुचेगी संसद मे, ये चचा[ है गलȣ-गलȣ.
  • 21.
    अबकȧ बारȣ आपहै हम युवा हɇ अनुभवहȣन सहȣ, कुछ तौर-तरȣके अलग सहȣ, ज़ुबान हमारȣ तãख़ सहȣ, पर Ǔनयत हमारȣ साफ है. अबकȧ बारȣ .. ħçटाचार जड़ɉ तक फैला, बड़े-बडो का मन है डोला.. सारȣ उलझन का सबब यहȣ, सब तकलȣफो का बाप है. अबकȧ बारȣ .. रावण एक, अनेक Ǿप मे, सीताओ को छलने आया, सावधान! है वेष केशरȣ, पर चलता ͩफरता पाप है. अबकȧ बारȣ .. ǒबजलȣ राशन पुͧलस Ĥशासन, ͧश¢ा रोज़गार Ǔनमा[ण, इसकȧ हद से कोई ना छूटा, Èया यूपी Èया गुजरात है. अबकȧ बारȣ .. ऊँचे मंचो से èवराज के, लैशन लाखɉ को पढ़ा रहे, Ĥथम पंिÈत मे येǑदयुरÜपा, बंगाǽ, बाबूराम हɇ. अबकȧ बारȣ.. जनता के मुƧ ेधूल खा रहे, नामɉ का हȣ धमाल है, जय- जयकार कहȣं राहुल, कहȣ नमो-नमो का जाप है. अबकȧ बारȣ .. आम आदमी खूँटे पे पूरे, तंğ मे ħçटाचार है, Èया फ़क[ कौन है चोर, कौन ͩफर, चोरो का सरदार है. अबकȧ बारȣ .. दोनो ने दशको राज ͩकया, एक Ǒदãलȣ एक गुजरात ͧलया, जनता जैसी वैसी हȣ रहȣ, हुए VVIP आप है. अबकȧ बारȣ .. लोकतंğ का समर सामने, तीन माह बस शेष हɇ.. आज "आप" को साǒबत करना, हममे भी कुछ बात है. अबकȧ बारȣ ..
  • 22.
    कांĒेͧसयो तुम कमालकरते हो.. ͩकतना लूटा ͩकतना खाया, इन ͪपछले पंġह सालɉ मे, तुमको पाकर Èया-Èया खोया, इन ͪपछले पंġह सालɉ मे, थोड़ा आराम- ͪवराम करो!! Ǒदãलȣ के जनमत का सàमान करो!! पंġह Ǒदन कȧ सरकारɉ से, ͩकतने सवाल करते हो. कांĒेͧसयो तुम कमाल करते हो. लुट रहȣ अèमत ेखुल-ेआम, चौतरफ़ा जंगलराज है, जनǑहत मे रोड़ɉ पर राजा, लोकतÛğ शम[सार है, पुͧलस-Ĥशासन कȧ सब चाबी, खुद कȧ जेबो मे रखकर, दाǓनश मǑहला का रेप Èयो हुआ? हमसे सवाल करते हो. कांĒेͧसयो तुम कमाल करते हो. ǒबन माँगे ǒबना बताए हȣ, ǒबन-शत[ समथ[न भेज Ǒदया ललकारा अपने वचन Ǔनभाने, अèवीकृǓत को "कायर" इãज़ाम Ǒदया जन-मत रखने Ǔनज-मन मारा, वीरो-वत चुनौती èवीकार ͩकया अब धूल हटȣ CWG फाइल से, इतनी हलचल, इतना Èयो डरते हो? कांĒेͧसयो तुम कमाल करते हो.
  • 23.
    जब ħçट तंğका ħçट Ĥशासक…….. जब ħçट तंğ का ħçट Ĥशासक, सब हदे पार कर जाता है, कभी दुशासन, कभी कÛस बन चीर Ĥजा का हर जाता है, रावण एक अनेक मुखो से, जनता को छलता जाता है, तब देव कभी तो कृçण, राम , अरͪवंद कभी बन आ जाता है. Ǒदन-रात Ǔघसे तब ͪवरला कोई, IIT, IRS बन पाता है, ͩकतनी आँखो के ͩकतने सपने, सàमुख अपने पाता है, पद का ǽतवा, माल-मलाई, मधुमय भͪवषय् ललचाता है, पर भारत माँ कȧ कǾण - कराह सुन, ͪवéवल Ǔनज-मन को पाता है, अपनो कȧ आशाओ, पथ-बाधाओं को, जो वीर! लाँघता जाता है. एक राçĚ बस एक Úयेय, सव[èव Ûयौछावर कर जाता है, Ǔनंदा- èतुǓत, यश- आलोचन से, दूर Ǔनकलता जाता है, ×याग, तपèया, ġढता से जो, पग-पग बढ़ता जाता है, खुद को खुद मे ͪपघलाये, तब कोई अरͪवंद बन पता है.
  • 24.
    आप तो बुरामान गये चेहरा Èया देखा अपना, जनाब!आईने से रार ठान गये. तèवीर मेरȣ देख बड़बड़ाते हɇ, हुजूर कȧ असͧलयत जो हम जान गये. एक सवाल चंदे का Èया पूछा, तोप-तलवारɅ हम पे तान गये. ये नफ़रतɅ, ये सौतेलापन Èयो है, हम भी उसी माँ कȧ संतान हुए. लहू से खींचते ͩफरते लकȧरे, देशĤेमी हो या ताͧलबान हुए. ये दौलत ये शान-ओ-शौकत, सब बेकार है, ईमान गये. नाम था, कभी पहचान भी थी, Èया हुआ कȧ आदमी सामान हुए दद[ हȣ दद[ है हर ͩकèसे मे, ͧसतमगर ! Èया तेरे अहसान हुए. तरÈकȧ के तेरे चचȶ सब तरफ, ͧमला बस उनको, िजन पर आप मेहरबान हुए. सौदागर!अलग पहचान तेरȣ हर गलȣ-मोहãले मे, कहȣ शैतान कहȣ आप भगवान हुए
  • 25.
    कȧमत तो चुकानीपड़ेगी... गाँधी जैसो ने अपमान सहे, मंडेला दशको जेल रहे, भगतͧसंह फाँसी पे झूल,े बोस देश से दूर रहे, तुम कौन? स×य पे, हǐरशचंद को, यहाँ गƧी गवाँनी पड़ेगी. मत ͪवचͧलत हो, यहाँ बड़े-बड़ɉ ने, गालȣ-गोलȣ खाई हɇ, देश,स×य के महाय£ मे, अपनी आहूती चढ़ाई है, काजल कȧ कोठरȣ मे आए हो, तो कुछ काͧलख भी लगवानी पड़ेगी. राजनीǓत कोई गहरा दलदल, ǒबन-डूबे पार उतरना मुिæकल, थके अकेला, छायाएँ छल, बाधाएँ पथ रोकɅ पल-पल, लêमी कमल हाथ ले पथ मे, नाना-Ǿपɉ मे छेड़खानी करेगी. कम[योगी! तेरȣ पारȣ, कई शतकɉ पर भारȣ होगी, नायक! तेरȣ ये लघुकथा, कई सुपरǑहटɉ से Üयारȣ होगी, मृ×य ुपे जो जæन मनाती, Èया सुंदर उस सरकार कȧ िजंदगानी रहेगी.
  • 26.
    िज़द ना करो... ये जन-सेवा घरबार छोड़, घड़ी कȧ सुई से करते होड़, गये चुनाव, होश मे आओ, अब छोड़ो भी ये भागदौड़, पाँच साल आराम करो. िज़द ना करो… राजयोग बड़े पुÖय से पाते, Ĥभु कȧ इÍछा का मान करो, बेͩफ़Đ रहो! स×ता-सुंदरȣ के, अधरɉ का रस पान करो, पिÞलक को राम-राम करो. िज़द ना करो... राजा होकर खाक छानते, Èयɉ Ǒदãलȣ कȧ गͧलयɉ कȧ, औरो से सीखो, Èयɉ खाते, रातो को मार सǑद[यɉ कȧ, राजा हो राजा से काम करो. िज़द ना करो... ͪवलेन (नेता) के रोल मे हो, हȣरो का ना काम करो, अपने पागलपन से पूरȣ, ǒबरादरȣ को ना बदनाम करो, कौओं मे बैठो तो कांव-कांव करो. िज़द ना करो.... सब खाते तो तुम भी खाओ, Èयɉ? औरो को नज़र लगाते हो, औरɉ का अरे! हक़ छȤनकर, बोलो तुम Èया पाते हो, कभी चोरɉ कȧ दुआए ँभी èवीकार करो. िज़द ना करो....
  • 27.
    कौन तुàहारा बापहै ??? अख़बार का ǒबकना बहुत सुना , अब ख़बरे बेची जाती हɇ, लाभ-हाǓन से इस कठपुतलȣ कȧ, अब डोरे खीची जाती है, कौन खड़ा पदȶ के पीछे, ͩकसका ये आलाप है ??? कौन तुàहारा बाप है ??? सनी के कपड़े, सलमान के लॅफडे, कहȣ पे सास बहू के झगड़े, नाम खबर का, ना खबर नाम कȧ, बेहूदा कॉमेडी के तड़के, लोकतंğ का èतंभ है या लोकतंğ पे Įाप है??? कौन तुàहारा बाप है??? अपना Ûयायालय, खुद हȣ जज, खुद के सबूत, खुद कȧ दलȣल, ǒबन Ěायल, झट-पट इंसाफ़, ना कोई गवाह ना कोई वकȧल, ओ चǐरğ-सǑट[ͩफकेट दाता! झाँक ͬगरेबान, त ूँखुद ͩकसका पाप है??? कौन तुàहारा बाप है??? तुम हो कौन? जो Ĥæन पूछत,े ये पावर बस हमन ेपाई है सच-झूठ से छलती जन-मन को, अͧभयिÈत कȧ दुहाई है ओरɉ को Ǒहटलर कहने वालȣ, तू हȣ सÍची खाप है??? कौन तुàहारा बाप है???
  • 28.
    म ɇतुàह ेÜयारÈयɉ द?ूँ?? Èया बोलो तुम दे पाओगे, जीवन के ऐश-ओ-आराम, बँगला, गाड़ी, ǽपया, ǽतबा, और मेरे अनͬगन शौक तमाम, अपन ेसपनो का संसार तुàह ेÈयɉ द?ूँ?? म ɇतुàह.े. माना हू ँम ɇÜयार कȧ देवी, Üयार बाँटना मेरा काम, सारे लêमीचंद हɇ पाते, मेरȣ बाहɉ मे ͪवĮाम, अरे फटȣचर! तुझ ेअपन ेअधरɉ कȧ पुकार Èयɉ द?ूँ?? म ɇतुàह.े. म ɇमीͫडया बदनाम सहȣ, त ूँअÍछाई का अवतार सहȣ, ये कलयुग है राम! यहाँ, नामुमͩकन है सीताएँ ͧमलना, तेरȣ नेक Ǔनयत पे, अपनी Ǔनयती Èयɉ वार द?ूँ?? म ɇतुàह.े. ख़याल जाने दे, मेरा साथ पाने, संग मेरे घर बसाने का, मेरा शौक, मेरा पेशा है, सबके संग वफ़ा Ǔनभाने का, बस तुझ ेहȣ खुशखबǐरयɉ का पǐरवार Èयɉ द?ूं?? म ɇतुàह.े.
  • 29.
    हमारȣ कोͧशशɅ जारȣरहɅगीं अब पा हȣ गये हो कुसȸ, जो जनता कȧ नादानी से, चैन ना पाओगे पल को, ये ऊँट-सी सवारȣ रहेगी. ͩकतने भी तुम काम करो, बदनाम तुàह ेहम कर देगे, हमारे हर- एक कȧ काͧलख, तेरȣ सारȣ सफेदȣ पे भारȣ पड़ेगी. चले तÛğ को चंगा करने, हमारȣ रोज़ी-रोटȣ छलने, सेहत ǒबगड़ जाएगी बाबू!, लंबी अपनी बीमारȣ चलेगी. तुम हो कौन, कहा ँसे आए, स×ता के गुण ना तुमन ेपाए, ये स×ता हम दो कȧ जोǾ, कभी उनकȧ कभी अपनी बारȣ रहेगी. कभी सोमनाथ, कभी ͧससोǑदया, कभी भूषण, राखी पर थुकेग,े Ǒदãलȣ आपके साथ सहȣ, पर मीͫडया सारȣ हमारȣ रहेगी. हमने दशको मे नहȣ ͩकया, वो चंद Ǒदनɉ मे कर डाला, इस रāतार से कब तक हमको , दफ़नाने कȧ तैयारȣ चलेगी. तुàह ेͬगराना शौक नहȣ, मजबूरȣ वजूद बचान ेकȧ, िजंदगी कȧ ये जƧोजहद, जारȣ है जारȣ हȣ रहेगी.
  • 30.
    कमाल हो गया.. जायज़ खरबɉ कȧ कज[माफȧ, साइͩकल, लॅपटॉप, राशन, अपने गुण गाते ͪव£ापन , वो वोटो पे बॅटते आर¢ण, ग़रȣब ने मुāत पानी Èया ͪपया, शोर है, देश कʠगाल हो गया. ͪवकास कȧ दौड़ मे फेकू! देखो, ͩकतने तुमस ेआगे हɇ, कुपोषण, अͧश¢ा, ǐरæवतखोरȣ, कुतȶ के कÍचे धागे हɇ, तेरा शहर Ǒदल का ग़रȣब, कागज पे खुशहाल हो गया. अपना एक ͪवभाग बता जहाँ, ǒबन-Ǒदए काम हो पाता है, गर, दूध गणेश नहȣ पीते, तो दूध कहाँ ͩफर जाता है, चायवाला हेलȣ-काÜटर मे कैसे, बड़ा सवाल हो गया.
  • 31.
    केजरȣवाल तो पागलहै देखो ! ये पागल Èया चाहता है. सǑदयो से सुÜत चेतना को, Ǔनज æवास से जगाना चाहता है, घोर अमावस घना Ǔतͧमर, Ǔनज-रÈत जला ͧमटाना चाहता है, धम[ जाǓत के दो-छोरो को, Ĥेम-èनेह से ͧमलाना चाहता है, राजनीǓत के गंदे कȧचड़ मे, कमल ͨखलाना चाहता है, युगो से शोͪषत, दबे कुचलो को, Ûयाय-सàमान Ǒदलाना चाहता है, मौन! मानो गूंगी जनता को, आवाज़ Ǒदलाना चाहता है, बहरȣ åयवèथा को , मधुर गीत सुनाना चाहता है, जÛम से अंधो को, हरे- भरे बाग Ǒदखाना चाहता है, नोटो कȧ थाप पे नाचती खबरांगनाओ से, ये आͧशक़! वफ़ा चाहता है, नासमझ! अबोध बालक है, चाँद धरती पे लाना चाहता है, अपने इरादो कȧ कæती से, समंदर पार करना चाहता है, कालȣ èयाहȣ मे रंगे तंğ को, æवेत-मन से चमकाना चाहता है, Ǒहमालय से ͪवèतृत ħçटाचार को, झाड़ू से हटाना चाहता है, राजा हो रंक-सा रात भर, ठंड मे रोड पे कपकपाना चाहता है, èवराज का नारा देकर, राजवँषɉ को ललकारना चाहता हɇ, संसद कȧ बंद-दȣवारɉ मे क़ैद जनतंğ को, चौराहे पर लाना चाहता है, राçट-Ĥेम के पागलपन मे, राçट-ġोहȣ कहलाना चाहता है. देखो ! ये पागल Èया चाहता है.
  • 32.
    ͩफर सोमनाथ पेख़तरा है.. नाम मे भारत, काम मे भारत, Ǒदल, ज़ुबान, ज़Ïबात मे भारत, ये भारत-गौरव खंͫडत करने, ͩफर कोई ͩफरंगी उतरा है. ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है. छोड़ो बुƨ ुͨखड़कȧ (टȣवी) को तुम, अब आओ ͨखड़कȧ गाँव चल,े सच आँखो से ओझल होता, झूठ - झूठ का कोहरा है. ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है. जो स×य Ǒदखाया जाता है, वो स×य सदैव नहȣ होता, इन स×य-ͪĤयो कȧ सरèवती पे, लêमी का असर गहरा है. ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है. ये Ǔनंदा, अपयश, आलोचन, ये भारत- गौरव कȧ दुहाईया,ँ ये सब Ĥायोिजत काय[Đम, चेहरो के पीछे चेहरा है. ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है. CWG पे जब ͪवæव हंसा, असमटे लूटȣ तब मौन रहे, नारȣ- गौरव के ठेकेदारो , ये माप-दंड तो दोहरा है. ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है. भाषा कȧ सीमा वो जाने, भाषा हȣ िजनका Ħेड-बटर, हम कम[योगी! कत[åय करे, ठाने तो समÛदर कतरा है. ͩफर सोमनाथ पे ख़तरा है..
  • 33.
    ये खाँसी बड़ेकाम कȧ है ये खाँसी गाͩफल सोतɉ को सजग करे ये, चोरɉ कȧ अब फाँसी है ये खाँसी. देशी गोरɉ से मुÈत कराने, ये हȣ रानी झाँसी है ये खाँसी. बड़ɉ का घर मे मान बचाती, मया[दा कȧ मौसी है ये खाँसी. ħçटɉ पर चंडी बन ͬगरती, भले जनɉ कȧ दासी है ये खाँसी. अहंकार रावण का हरने , ये हनुमान गदा-सी है ये खाँसी. जो अंदर वो बाहर Ǒदखती, पारदशȸ दप[ण-सी है ये खाँसी. ये चुनाव का मुƧा बन गयी, मुझको आती हाँसी है ये खाँसी. फेकुजी! कुछ और बताओ, ये बातɅ तो बासी है ये खाँसी. "केजी" रण-Ĥण पर डटे रहो, जब तक तन मे जाँ-सी है ये खाँसी.
  • 34.
    ये तो होनाहȣ था.. गाँधी गूँग,े नेहǾ बहरे, तब भगत को फाँसी होना हȣ था, धृतराçĚ सरȣखे राजा हɉ, तो चीरहरण ͩफर होना हȣ था, सो रहे देश के लाल अगर, भारत माँ को ͩफर गौरव खोना हȣ था, हर तरफ क×ल खाने चलते, बकरे कȧ माँ को रोना हȣ था, यहȣ तासीर, यहȣ तालȣम थी उसकȧ, दंगो के दाग भी खून से धोना हȣ था, मन आͨख़र ऊब हȣ गया इन ͨखलोनो से, स×ता का खेल Ǔघनोना हȣ था, बड़ी रोचक रहȣ, पर ͩफãम थी, इंटरवल तो होना हȣ था, मेरा अंजाम मेरे अंदाज से जुदा नहȣ, खून का बुलबुला था, फ़ना तो होना हȣ था, कब तक लाशɉ को ढोता ͩफरता, िजंदगी को आजमाना भी था, मɇ तारा, टूटा तेरȣ खाǓतर, तेरȣ मुराद को ͩफर पूरा होना हȣ था, मेरे जाने का गम ना कर मेरे दोèत, ये बाजी थी, कुछ पाने, कुछ खोना भी था.
  • 35.
    हम भी चुपऔर तुम भी चुप... पूण [राÏय का दजा[ दो, ये लंबी माँग हमारȣ है, लाओ èवराज बापू का सपना, जनलोकपाल ज़Ǿरȣ है, ǒबल पर वोǑटंग कȧ जब बात चलȣ,हम भी चुप और तुम भी चुप. नारɉ, संकãपो कȧ रेल चलȣ, लगता भारȣ तैयारȣ है, ħçटाचार भगाना है, ये लंबी बीमारȣ हɇ, इंजेÈसन लगने कȧ जब बारȣ आई, हम भी चुप और तुम भी चुप. ये Ĥदेश Ĥायोिजत ĤोĒाम नहȣ, मजबूरɉ कȧ मजबूरȣ है, दंगे देश पे दाग हɇ, ये दाग ͧमटाने ज़Ǿरȣ हɇ, दोषी को दंͫडत करने मे, हम भी चुप और तुम भी चुप. वादे हमने भी बहुत ͩकए, वादे तुमको भी करने देगे, हमने कभी कुछ नहȣ ͩकया तो औरɉ को Èयɉ करने दɅगे, कोई जुगन ूǓनकला, रातɅ उजलȣ करन े, ना कौए चुप, ना कु×त ेचुप. हम भी चुप और तुम भी चुप..
  • 36.
    Ĥाइम ͧमǓनèटर जेलमɅ... आधी आबादȣ दहशत के, साये मे डर-मर ͧससक रहȣ, िजंदा लाशɉ कȧ बदबू आती, तेरȣ A.C. रेल मɅ. भूत Ĥेत बन बदला लɅगे , जो तेरȣ शह पे क×ल हुए, बाबू! तेरे भी हाथ रंगे हɇ, दंगो के खूनी खेल मɅ. कोई अरब पǓत, कोई खरबपǓत, कोई ͪवæवपǓत बनने Ǔनकला, ͪवकास कȧ देखो! सेल लग गयी, इन चोरो के मेल मɅ. फɅकूज़ी! सच सच बतलाओ, ये हेͧलकॉÜटर कैसे उड़ते हɇ, चाय बेचके, गैस बेचके, या उड़ते हɇ तेल मɅ.
  • 37.
    राजा ने ͧसंहासनछोड़ा है कठपुतल ेको ताज Ǒदया , परदे के पीछे स ेराज ͩकया, कभी अबला थीं, अब ͪवæवपǓत, औरɉ के कंधो से ͧशकार ͩकया, तुमन ेछोडा तो ×याग कȧ देवी , हमन ेछोडा तो भगोड़ा है. स×ता सुंदरȣ को वरने को , ͩकसका मन रह पाता है, इसकȧ बाँहɉ के मोहपाश मɅ , हर कोई बंध जाता है, िजसको सब पान ेतरस रहे , वैरागी! तून ेÈयɉ छोड़ा है. खा-पी के चांडाल चौकड़ी , हर चैनल पर भɉक रहȣ, खुद नाकारा, कुछ करने वालɉ को, पानी पी-पी कोस रहȣ, पहचानो ये आम – राम , िजद पे ͧशव-धनु तोडा है. है जाǓत-धम[ पे बँटवारा, दंगɉ कȧ भभकȧ आग कहȣं, कहȣं गरȣबी , कहȣं भुखमरȣ , ͪवकास कȧ बंदर-बाँट कहȣं, Ǒदल मɅ Ǒदãलȣ ले, काला घोडा, देश बचाने दौड़ा है.
  • 38.
    खबर बेचना मेराधंधा…. अͧभåयिÈत का वरदान पा, ये होͧलका हुलसा रहȣ ह,ै कæयपɉ के पा इशारे, Ĥéलाद को झुलसा रहȣ ह,ै सुन! राख हो जायेगी त,ूँ उन कæयपɉ के साथ हȣ, नर Ǿप इन नारायणɉ को, åयथ[ Èयɉ उकसा रहȣ है. खबर बेचना मेरा धंधा, मुझको भी लाभ कमाना ह,ै सबके जैसे, सबसे पहले, सबसे आगे जाना है, ओ लोकतंğ के चौथे खàभ!े उनमे तुझमे अंतर ह,ै पैसे के साथ तुझे लोगो का, ͪवæवास भी बचाना है.
  • 39.
    Ǒदãलȣ को अयोÚयाबनाना पड़ेगा संत साधु बुला, कारसेवा कराओ, ͩफर कोई ढाँचा ͬगराना पड़ेगा. ͪवकास का गुबार ना ठहरेगा óयादा, पɇतरा वोहȣ आजमाना पड़ेगा. बनी ͩकतनी रामायणɅ राम पर, अबकȧ महाभारत बनाना पड़ेगा. सूख से गये हɇ कुछ जÉम Ǒदल के, ͩफर से वो काँटा चुभाना पड़ेगा. ͬचंगारȣ ढूढो दबी राख से तुम, देश पूरा ͩफर से जलाना पड़ेगा. भूख से लड़त-ेलड़ते जो भूले थे अबतक, उÛहे याद मज़हब Ǒदलाना पड़ेगा. लाश के ढेर पे बैठ कर के ͩफर, गीत जय का कोई गुनगुनाना पड़ेगा.
  • 40.
    तुम Èया गय,ेसब सूना कर गय े वो अहसास, वो सपने, वो खुशनुमा मंज़र Èया हुए सब कुछ वीराना कर गये तेरȣ आहट से उठता हू,ँ तेरȣ यादɉ से ǽकता ह ूँ आदमी था , कोई ͨखलौना कर गये ͩकतने इãज़ाम, ͩकतनी नफ़रतɅ मेरȣ खाǓतर, मेरȣ सारȣ शिÉसयत को, Ǔघनौना कर गये ना चैन से जीऊँ पल भर, ना मरना नसीब हो, पागलो सा हाल!, जाने Èया जाद-ूटोना कर गय े रंज बहुत है Ǒदल को, तेरे यूँ छोड़कर जाने का, भले आदमी थे, मजबूǐरयɉ का ǒबछोना बन गय े पलके खुलȣ कȧ खुलȣ ह,ɇ तेरे आने कȧ उàमीद म,े लौटने का अपन,े वादा जो मुझसे कर गय.े
  • 41.
    ये तो ग़लतबात है राम राÏय कȧ माला रटते, शÈल देखकर लɬडू बॅटते, समाजवाद के Ĥवचन, ͪवकास कȧ बंदरबाँट है. हɉ जहाँ, वहȣं कȧ बात करेगɅ, बहुǽͪपयो से वेष धरɅग,े पगड़ी को हाँ, टोपी को ना, ये कैसा राçĚवाद है. वो राÏय बंद, वो रेल रोकना, कहȣ आगज़नी, कहȣ तोड़फोड़, उनका तांडव लोकतंğ, मेरा धरना उ×पात है. चेहरे इनके अलग भले, पर काम सभी का एक है, ͧमलकर लूटɅ वे ͧशçट कहावɅ, केजरȣ अनाͩक[èट है.
  • 42.
    सच ͩकसको अÍछालगता है.. सपनɉ कȧ दुǓनयाँ के आग,े हर सच फȧका पडता है, बहलावɉ से, बहकावɉ से, जन-गण-मन हȣ छलता है. Ĥाणɉ का कुछ मोल नहȣं पर, प×थर पथ-पथ पुजता ह,ै दाǾ लेने को लाइन यहाँ, पर दूध घरɉघर ͩफरता है. कभी सीता तो कभी हǐरæचंġ, कब झूठ परȣ¢ा देता ह,ै ıदयɉ मɅ वो, होठɉ पर वो, सच पुèतकघर मɅ सोता ह.ै भूखा बचपन तèवीरɉ म,Ʌ ͧमͧलयन डालर का ǒबकता है, आͨखर मन बुƨु समझ गया, जो Ǒदखता है वो ǒबकता है.
  • 43.
    Èया सचमुच हमआजाद हुय.े.. जो अपना था वो गवाँ Ǒदया, अँĒेजी के अनुवाद हुय..े वसुधैव कुटुंब नहȣं अब तो, घर-घर दंगा-फसाद हुय.े. बस माँ बǑहनɉ का िजĐ रह,े Èया अपने संवाद हुय.े. भारत का गौरव गौण हुआ, नेता बस िजंदाबाद हुय.े. सबके सूरज चमके जग म,Ʌ हम तारɉ से अवसाद हुय.े. हर साख पे उãलु बैठ गय,े गुलशन सारे बबा[द हुय.े. सोने कȧ ͬचͫडया के घर मɅ, फाँको पर वादͪववाद हुय.े उन अमर शहȣदɉ के खूँ स,े बस अजगर हȣ आबाद हुय.े
  • 44.
    Ǒदल हȣ अपनीकमजोरȣ है, Ǒदल हȣ अपनी ताकत है... सच कȧ हालत Èयɉ शम[सार, उन स×यͪĤयɉ पे लानत है, मन मानवता के कण[धार कȧ, ǓनिçĐयता से आहत है, अÛयायɉ को चुप सहना ना, कुछ कहना अपनी आदत है, अपने जÉमɉ कȧ èयाहȣ हȣ, अपने जÉमɉ कȧ राहत है. जब भी Ǒदमाग- Ǒदल टकराएँ, Ǒदल जीते बस ये चाहत है, Ǒदल कहता म ɇवो राह चल,ूँ सब ͪवपदाओ ंका èवागत है, खोया-पाया सब कुछ Ǒदल से, इस Ǒदमाग कȧ बèती मɅ, Ǒदल हȣ अपनी कमजोरȣ है, Ǒदल हȣ अपनी ताकत है.
  • 45.
    ͩकसी का ज़मीन,ͩकसीका आसमाँ पे Ǒहसाब होगा.. ͩकसी का ज़मीन, ͩकसी का आसमाँ पे Ǒहसाब होगा, भगवान को Üयारा ये सारा, ǽतबा - ओ - ǽआब होगा, गैर के जो हक़ हɇ मारे, Èया तेरा पूरा कोई Éवाब होगा, कबाबɉ के शौकȧन! तू खुद, कभी ͩकसी थालȣ का कबाब होगा, Ǔछपाने से कभी Ǔछपते हɇ, टपकते खून के कतरे, नकाबपोश काǓतल! त ूँभी, एक Ǒदन खुलȣ ͩकताब होगा. रातɅ कब रोक पायीं सुबह को, रोशन ये आफ़ताब होगा, झूमɅगी दुǓनया िजसके नश ेमɅ, अंगूर! त ूँवो शराब होगा, तेरा वìत हȣ बाजीगर!, सब सवालɉ का एक जवाब होगा, तेरा गुनेहगार भी दȣवानɉ-सा , तेरे दȣदार को बेताब होगा, दȣवार पे ͧलखी इबारत, चीखती है सुन जरा! Ǒदलɉ का है आज जो, कभी देश का भी नवाब होगा.
  • 46.
    कैसे मानूँ अपराधह,ै भोला ħçटाचार?? ना चीखɉ कȧ आहटɅ, ना रÈतɉ कȧ धार, कैसे मानूँ अपराध ह,ै भोला ħçटाचार. पǐरĮम का ĤǓतफल कहो, सेवा का स×कार, सबकȧ राजी खुशी स,े चलता ये åयवहार. अàमा अपराधी नहȣं, ͧसèटम कȧ बनी ͧशकार, ħçट सभी बस दिÖडत एक, Èया इसका आधार. िजसका धन लूटा वो जनता, जब चुनती बारàबार, जनमत के अपमान का, जज को Èया अͬधकार.
  • 47.
    दो मɅ सेकुछ एक यार होगा.. दो मɅ से कुछ एक यार होगा.. ͪवकास या ͩफर ħçटाचार होगा. एक हȣ होता है Ǒदल का दरवाजा, या तो Üयार या ͩफर åयापार होगा. कोई और सूरत हȣ नहȣं सेहत कȧ, आदमी तंदुǾèत नहȣ,ं तो बीमार होगा. कब तक ढɉयɅगɅ ये नापाक ǐरæते, अब हाथ ͧमलɅगे या यãगार होगा. सोचा हुज़ूर लायɅग, ेअपनɅ भी अÍछे Ǒदन, Èया खबर थी बस भाषण हȣ शानदार होगा.
  • 48.
    कहाँ रहे तुमनंदलाला आधे आमदार अपने को, अपराधी खुद बता रह,े ह×या रेप डकैती अपनी, शपथपğ पे जता रहे . चंदा देकर Ǒटकट पा गये, शकुनी बाजी सजा रहे, नोटɉ से वोटɉ को लेकर, लोकतंğ को लजा रहे. सोचो तुमने एक नोट म,Ʌ अपना अͧभमान गवाँ डाला, इतनी सèती हुई आबǾ, मोल ले सका इक Üयाला, है जवाब जब पूँछेगा, ये Ĥæन समय आने वाला, अͧभमÛयु जब मरा युƨ मɅ , कहाँ रहे तुम नंदलाला.
  • 49.
    ħçटɉ से मुÈतअपना, भारत हमɅ बनाना ना छÜपन कȧ छाती, ना छͧलये का वादा, बस नेक है नीयत और , फौलाद का इरादा . देखा जो देश लुटत,े तǽणाइयɉ को घुटत,े कोसा बहुत, करɅ कुछ, तब मन नɅ मेरे ठाना. बस बोलते थे जब तक, कहलाते थे ͪवचारक, कथनी को करने Ǔनकले, दुæमन हुआ जमान.ा मत वÈत करो जाया, कȧचड़ उछालने मɅ, मुझको हȣ पाओगे तुम, हर एक आईने मɅ. है एक अपना मकसद, है एक हȣ तराना, ħçटɉ से मुÈत अपना, भारत हमɅ बनाना.
  • 50.
    म ɇअभी हारानहȣ ंहू!ँ ये कǑठन पथ, खुद चुना है, कोई बेचारा नहȣ ंहू,ँ पव[तɉ का गव [तोड़ू,ँ नीर कȧ धारा वहȣ हू,ँ Ǔनबल कȧ उस आश मɅ, ͪवæवास मɅ हȣ म ɇकहȣ ंहू,ँ भागा कहा?ँ? देखो तुàहारȣ, छाǓतयɉ पर म ɇयहȣ ंहू.ँ चोट खा èवर से ͩफǾँ म,ɇ कोई इकतारा नहȣ ंहू,ँ करोड़ɉ कȧ दुआए ँसंग , अभी बेसहारा नहȣ ंहू,ँ मɇ टूटकर ǒबखǾँगा तब, हाँ! हार मɇ मानूँगा तब, Ǒदल से तुम जब ये कहोगे, म ɇतुàहारा भी नहȣ ंहू.ँ
  • 51.
    मेरȣ हार सेहाͧसल Èया कर पाओगे? ǒबखरकर गर ͬगरा भी, जो ये ͧसतारा फलक से, उàमीद कȧ लहरɉ को तुम, साǑहल कोई पा जाओगे? गलǓतयाँ मुझम ेतुझ,े Ǒदखती बहुत, पर ये बता, माँस के पुतल ेमɅ Èया, भगवान तुम पा जाओगे? हɇ सवाल िजतने जेहन मɅ, उठतीं हɇ िजतनी उँगͧलयाँ, आईने के सामने जा, सब सबक पा जाओगे. म ɇठहर जाऊँ अगर त,ूँ मुझस ेएक वादा करे, ये लड़ाई मुझस ेबेहतर, अंजाम तक पहुँचाओग.े
  • 52.
    अब आम आदमीजागा है….. नेताओं को देश सɋप, बेͩफ़Đ नींद मे सोया था, देश और अपने भͪवçय के, मधुमय सपनɉ मे खोया था, भारत माँ का Đंदन सुन, ǒबन-भोर नींद से जागा है.. जब आँख खुलȣ तो देखा कȧ, र¢क भ¢क बन लूट रहे, Ûयाय, स×य, मया[दा सब कुछ, रेत महल से टूट रहे, तार-तार तन-वसन हुए, माğ शेष कुछ धागा है.. ǒबãलȣ दूध पे पहरा देती, चाबुक बंदर के हाथो मे, पूजा कȧ थालȣ कु×ता चाटे ,Ǔतलक गधɉ के माथो मे, गाये ǒबन-चारे के मरती, जंगल-तंğ अभागा है.. बस बहुत हुआ अब और नहȣ, संकãप ǿदय मे लाया है, बÍचे बूढ़े सबने ͧमलकर, झाड़ू को शèğ बनाया है, आम आदमी कȧ सेना आई , ठग- दल डरकर भागा है..
  • 53.
    अबकȧ बार मोदȣसरकार… अदानी, अàबानी कȧ होगी जय-जयकार, एंǑटला से चलाएंगे, देश का कारोबार. ͪवकास होगा उनका, जो तेरे चुनाव के साहूकार, चोरɉ के साथ ͧमलकर, ये ͧमटायɅगे ħçटाचार. कालाधन ͪवदेशी Ǔनवेश का धरेगा अवतार, सटोǐरयɉ कȧ चाँदȣ, चमकेगा शेयर बाजार. दंगो के दǐरंदे, पाएँगे पुरèकार, खून कȧ èयाहȣ से, रंगɅगे अखबार. मीͫडया मुग़ल के, लगɅगे दरबार, हाँ जी! हाँ जी! करɅगे चाटुकार. Èया नीǓत, Èया ͪवͬध कȧ दरकार, Ĥभु के वचन तो èवयं मɅ मंğोÍचार. गांधी के नोटɉ पे, हɉगे इनके ͬचğहार, भारत सरकार कहलायेगी, अब मोदȣ सरकार.
  • 54.
    अÍछे Ǒदन आनेवाले हɇ. नभ से तो अमृत बरसेगा, पर कुछ आँगन हȣ भीगɅगे, इंġदेव के ये छȤंटे, बस कमल ͨखलाने वाले हɇ. जो पहले भूखɉ मरते थे, वो अब भी मरने वाले हɇ सबका साथ सबका ͪवकास, बस Ǒदल बहलाने वाले हɇ. मज़हब हȣ अपनी रोज़ी-रोटȣ, बस ͪवकास कȧ ख़ालɅ हɇ अरे ! Èयɉ कर टोपी पहनेगे, हम टोपी पहनाने वाले हɇ. भɉदूजी! अपनी अकल लगाओ, वादɉ, Ǒदखाओं पे ना जाओ, तुमको लगता है सब चायवाले, हवाई-जहाज़ उड़ाने वाले हɇ?
  • 55.
    भारत माँ काकौन भला भारत माँ का कौन भला, जय नारɉ से, गुणगानɉ से, ͩकतने Ǒदन भूख ेपेट भरɅगे, घी-शÈकर के पकवानɉ से, जय का गौरव तब पाओगे, जब कुछ करके Ǒदखलाओगे, वना[ पुèतकघर भरे पड़े हɇ, पǐरयɉ के अफ़सानɉ से. अƫुत अवसर ͧमला तुàहɅ, अपना सूरज चमकाने का, सǑदयɉ से मुरझ ेकमलɉ कȧ, पंखुड़ीया ँसहलान ेका, पर, पद साथ[क होगा तब हȣ, जब एक Úयेय एकलåय रहे, पावन-पुनीत भारत-भू से, भय-ħçटाचार ͧमटाने का.
  • 56.
    ͪवकास चाǑहए तोħçटाचार भी होगा….. ͪवकास चाǑहए तो ħçटाचार भी होगा, भले लोग ͧमलɅगे तो ͧशçटाचार भी होगा, अपनी पाटȹ मɅ तो बस, कॉàबो मील है, खीर चाǑहए तो करेले का आचार भी होगा. घर खरȣदोगे तो लȣवरेज भी होगा, कुछ करोगे तो कवरेज भी होगा, बुƨ ूहɇ, ħçटाचार पे भɋकन ेवाले, अरे! नल खुलेगा तो लȣकेज भी होगा. ħçटाचार के साथ ͪवकास करɅगे, जनता के सौ के पचास करɅगे, फूटे घड़े से पानी भर-भर के, आपकȧ मेहनत का स×यानाश करɅगे.
  • 57.
    ये कैसा ͪवकासहै?? ǽपया रंग -ओ-शÈल बदल, डालर, यूरो का èवांग रचाता, ͪवæव ħमण कर काला धन अपना, ͪवदेशी Ǔनवेश बन वाͪपस आता, सɅसेÈस कȧ छलांगे बस, सटोǐरयɉ का खेल- ͪवलास है. ये कैसा ͪवकास है?? Ǒदन-रात करɅ मेहनत और तुमको, टैÈस समय पर चुका रहे, सौ दे वाͪपस पÍचीस पाते, बाकȧ जेबɉ मे समा रहे, सौ का पÍचीस हो जाना, हमारȣ मेहनत का स×यानाश है. ये कैसा ͪवकास है?? छȤनी ज़मीन, मरते ͩकसान, कृͪष ͪवकास कȧ बात करɅ, हǐरत ĐांǓत के जनक आज हम, अÛन-दाल आयात करɅ, अपनो से छȤन, ओरɉ-गोरɉ को देना, यहȣ हमारा इǓतहास है. ये कैसा ͪवकास है?? अब ħçटाचारȣ जेल भरɅगे, सौ के सौ देश के काम लगɅगे, उɮयोग, ͩकसान, åयापारȣ, जनता, ͧमलजुलकर खुशहाल बनɅगे, बदलेगी ͪवकास कȧ पǐरभाषा, ये हमारा ͪवæवास है. ये कैसा ͪवकास है??
  • 58.
    सारे सपने टूटगए... सारȣ रात तो संग रहे, पर Ǒदन आते हȣ छूट गए. आये थे कुछ देने, जाते, मेरȣ भी गठरȣ लूट गए. तुमन ेमुँह फेरा, जग Ǿठा, आँसू आँखɉ से फूट गए. ͩकसको द ूँम ɇदोष Ĥभ ुभी, ͧमटटȣ के थे टूट गए.
  • 59.
    ͩकसके महल सजाने…. ͩकसके महल सजाने, हमारे घरɉदे तोड़ देते हो, ͩकसके समंदर भरने, हमारा पसीना Ǔनचोड़ लेते हो, कलयुगी कण[! कुछ Ǒदया भी, तो मंहगाई दे दȣ !! गर जीने नहȣं देना तो, जान Èयɉ छोड़ देते हो. मँहगाई के कोड़ɉ से, कई घाव गहरे छोड़ देते हो, यहाँ गरȣब कम हɇ जो उÛहɅ हजारɉ करोड़ देते हो, छͧलये! Èया Ěेलर, Èया फȧचर है तेरȣ ͩफãम का, चाँद तारे Ǒदखा, जेब कȧ, दुअÛनी भी गपोड़ लेते हो.
  • 60.
    अÍछे Ǒदन आगए.. कालेधन वाले बाबा, जमीन मɅ समा गए, ͪवदेशी खातɉ कȧ सूची, बंद तालɉ को थमा गए. रेप - चÛद मंğी, बासी कड़ी को गरमा गए, ͧश¢ा माता कȧ ͧश¢ा पे, ͧशशु भी शरमा गए. ͪवदेशी Ǔनवेश के ͪवरोधी, डालरɉ पे लुभा गए, ǐरटेल पे लड़ते-लड़ते, ͩफरंगी ͧमसाइलɅ चुभा गए. सटोǐरयɉ कȧ चाँदȣ, जमाखोरɉ को मजा आ गए, घूस जस कȧ तस हȣ रहȣ, मंहगाई कȧ सजा पा गए.
  • 61.
    म ɇसीता हू,ँतुम राम बनो….. हम बसते गंगा लहरɉ पर, हमको लहरɅ Ǒदखलाते हो, हर-हर मोदȣ के नारɉ से, ͧशव का धीरज आजमाते हो, सौदागर! सब जाने छल तेरा, अब ͩकसको तुम भरमाते हो, गर, मेरे बनने आए थे, तो उसके घर Èयɉ जाते हो. तुम मेरे हो, बस मेरे ये, अͧभमान अĮु बन झरता है, ͩकस-ͩकस को रोकू समझाऊं, जग हँसता, ताने कसता है, म ɇसीता हू,ँ तुम राम बनो, दो दो तो रावण करता है, दो नावɉ से कहो! कौन, कब, सागर पार उतरता है.
  • 62.
    अजब-गजब ये सàमोहन…… दस हजार करोड़ के ͪव£ापन, उड़न खटोलɉ से देश ħमण, रेल , बसɉ से भींड़ जुटा, है शहर - शहर ĥȧ मनोरंजन, जादूगर का खेल अनोखा, उगते आम हथेलȣ पर, आँखɉदेखा Èया स×य सदा , अजब-गजब ये सàमोहन. चौतरफा Ĥायोिजत कोलाहल , सच झूठ का पदा[ ओझल होता, है भीड़ जहाँ , Èया वहȣं स×य, मन शंकाओं मɅ बोͨझल होता, कंकण तट पर हȣ पाओगे, मोती चाहो तो मारो गोता, अरे! स×य अमोल नहȣं होता, यǑद इसको पाना आसाँ होता.
  • 63.
    कहाँ गये वे"अटल".. कहाँ गये वे "अटल" िजÛहɉने पाटȹ को सींचा, कहाँ गये वे लालकृçण िजन, रघुरथ को खींचा, कहाँ मुरलȣ, जसवंत,सु-समा, और भाजप सारȣ, भगवा सेना हाइजेक ͩकये, दो गुÏजु åयापारȣ. सǑदयɉ के संबंधɉ पर, स×ता सुख भारȣ, राम तो पहले ठगे गये, ͧशव-सेना कȧ बारȣ, रÈतͪĤयɉ के रंगमहल भी, रÈतɉ के हɉगे, भगवानɉ के नहȣं हुए, Èया भÈतɉ के होगे.
  • 64.
    छÜपन छाती खरगोशहुए… अÍछा हुआ आप आय,े दोनɉ के नंबर बन गय,े अपने अपने मुãक म,Ʌ दोनɉ ͧसकंदर बन गय,े भारत माँ के आँचल का, जो àलेÍछ èपश[न करते हɇ, ͧसर काटे िजनने वीरɉ के, उनका अͧभनंदन करते हɇ, कहाँ गयी वह ͧसंह गज[ना, तरकश Èयɉ खामोश हुए, Ĝेगन का डर या डालर, छÜपन छाती खरगोश हुए.
  • 65.
    सरकार जहाँ सरकारवहȣं है… दरबारȣ दरबार वहȣं हɇ, खबरɉ का संसार वहȣं है, स×ता का Įँगार वहȣं है , लोकतंğ का सार वहȣं है. कठपुतले तÉती लटकाय,े तÉतɉ के अͬधकार कहȣं ह,ɇ हɇ एक, अनेक Ǿप मɅ Ǒदखते, माया के आधार यहȣ हɇ. भÈतɉ के भरतार कहȣं हɇ, शेषनाग अवतार कहȣं हɇ, उàमीदɉ के उडनखटोले, Ĥलयदेव के ƨार कहȣं हɇ.
  • 66.
    दो Ǒदन चलेअढ़ाई कोस.. ǐरæवतखोरȣ का भूत देश म,Ʌ बेतालɉ सा भटक रहा, जोकपाल का पैनल जाने, ͩकस फाइल मɅ लटक रहा, सरकार तुàहारȣ ͩकसका दोष? दो Ǒदन चले अढ़ाई कोस. दूध कȧ कȧमत बढती जाती, फल कȧ खुशबू आती जाती, सÞजी कȧ Èया बात कǾँ,धǓनया भी अब आँख Ǒदखाती, भाषण से भूख करे संतोष ? दो Ǒदन चले अढ़ाई कोस. नेता, बाबू कȧ साँठगाँठ स,े सेठ Ǔतजोरȣ भरते जात,े बुलेट Ěेन के चæमे स,े वो चौतरफा हǐरयालȣ पाते, ͪवकास के वाǐरस सफेदपोश..दो Ǒदन चले अढ़ाई कोस.
  • 67.
    नाम बडे औरदश[न छोटे.. भारत से ħçटाचार भगायɅ, भाषण लंबे, नीयत के टोटे. छÜपन कȧ छाती, िजगर के छोटे, घर मɅ घूमɅ साँप ǒबलौट.े हो काला धन या एफडीआई, हम हɇ ǒबन पɇदȣ के लोटे. है वहȣ तंğ , है वहȣ मंğ , है Ǿह वहȣ, बदले मुखौटे. होता ͪवकास बस मँहगाई का, सटोǐरये बस होते मोटे. अÍछे Ǒदन तो ͧमले नहȣं, अब वाͪपस बुƨ घर को लौटे.
  • 68.
    सब बदला औरतुम भी बदले...... चेहरे बदले, सेहरे बदले, èवग[-ɮवार के पहरे बदले ना बाबू कȧ मौजɅ और, ना नेता गूँग-ेबहरे बदल.े भूखा बचपन, घुटता यौवन, मरते ͩकसान, लुटती अबला, ना मँहगाई के मंजर बदल,े ना दुæमन के खंजर बदल.े तÉत ͧमला शहजादे बदले, वादे और इरादे बदले, स×ता मद मɅ चूर पड,े ना सुर ना भèमासुर बदल.े वो बदले, उनके Ǒदन बदले, ǽतबा ǽपया गाडी बँगले, ना काले Ǒदन अपने बदले, ना रातɉ के सपने बदले
  • 69.
    Èया रहा बाकȧजो तुमको जीतना है. भर तो दȣ झोलȣ तुàहारȣ Üयार स,े और ͩकतना इन Ǒदलɉ को रȣतना है. दशक बीते तकते तकते राह सुख कȧ, और ͩकतने युगɉ को अब बीतना है. Èयɉ ͩफर रहे मेरे ͧसकंदर दरबदर, Èया रहा बाकȧ जो तुमको जीतना है.
  • 70.
    ͪवप¢ हमɅ पसंदनहȣं. सहȣ गलत कȧ बात हȣ नहȣं, बस, ͪवप¢ हमɅ पसंद नहȣं. गैर या ͩफर अपने करɅ, अपना ͪवरोध रजामंद नहȣं. èवाथ[ के हɇ सब संबंध अपन,े अपने ͧसवा कोई भरोसेमंद नहȣं. आईने हȣ आईने हɇ, अपने चारɉ ओर, हमसे बढ़कर कोई खुदपसंद नहȣ.ं
  • 71.
    ये ǐरæता Èयाकहलाता है... देखे दल-दल, पाया बस छल, थक-मन अब तुझको पाता है, बहुत पीया खारा जल अब मन, पीने पीयूष मचलाता है, ͩकतना रोकूँ ये मन पागल, ǒबन-डोर. उड़ा सा जाता है, बैचेनी के सबब तुàहȣ, और चैन तुàहȣ ंमे पाता है, तेरे सपने, मेरे सपने, सब एकमेक से पाता है, धरती अंबर का ͧमलन जहाँ, वो ͯ¢Ǔतज अहो! पा जाता है, सब ǐरæतɉ कȧ पǐरभाषाओं को, मन आज लाँघता जाता है, कभी सौ पचास भाते थे पर अब, उनÛचास (49) हȣ भाता है.
  • 72.
    तुमसे दूर कहाँजाऊँगा….. जÉम गहरा Ǒदया पर, ǒबन तेरे ना रह पाऊँगा, बस तुàहारा हू,ँ तुमस ेदूर कहा ँजाऊँगा. तूफा ँथ ेराह रोके, Ǔनकला था जब म ɇघर स े, फौलाद के इरादे, थपेड़ɉ से ना रोका जाऊँगा. बहुत दूर ले आयी है, मेरȣ दȣवानगी मुझको , मंिजलɅ करȣब हɇ, अब ना लौट पाऊँगा. ये सािजश है तुàह Ʌबहलान ेमुझ ेआजमान ेकȧ, तुम वार करते जाना, मɇ सहता जाऊँगा. मɇने Ǒदल मɅ अपने, Èया रखा है तेरȣ खाǓतर, कभी तो मɇ तुàहɅ, समझा पाऊँगा. म ɇरहू ँना रहू,ँ रहɅ ये गीत सदा, तेरȣ आवाज मɅ हȣ, मɇ भी गुनगुनाऊँगा.
  • 73.
    Èया हार मेरȣहार है? Èयɉ हो उदास, Ǔनराश मन!,ͬगनता कभी कोई Üयार है? Èयɉ थके पग, जब सामने, संघष[ का संसार है? ये शोर, सÛनाटा सभी, ठहराव हɇ, मंिजल नहȣं, Èया ͧसरɉ कȧ ͬगनǓतयाँ हȣ, बस समर का सार है? ना खुदा , हू ँइंसान तुमसा, कͧमयाँ रहɅ हजार है, दो Üयार या गालȣ तुàहारा, हू ँतुàह Ʌअͬधकार है, मेरे ͬगरने कȧ राह तकते, ऐ फ़ǐरæते! ये बता, गर जीत मेरȣ है तेरȣ, Èया हार मेरȣ हार है?
  • 74.
    लड़ रहा तूँजंग मेरȣ… लड़ रहा त ूँजंग मेरȣ, शांǓत को हुड़दंग तेरȣ, अपन ेलहू से भर रहा, तèवीर त ूँबेरंग मेरȣ, चला आँधी से बचाने, लडखडाती पतंग मेरȣ, खुद माँगकर भरता अरे!, झोलȣ रहȣ जो तंग मेरȣ. तेरे हाथ का èपश[ पाकर, झूमती मृदंग मेरȣ, त ूँरͪव कȧ ͩकरणɅ अहो! जगमग अँधेरȣ सुरंग मेरȣ, त ूँजीतता म ɇनाँचता, हुयी आसमानी उमंग मेरȣ, लगता है जɇस ेजुड़ गयी हो, ǓनयǓत भी, तेरे संग मेरȣ ( मृदंग - ढोलक )
  • 75.
    तुम कहते होवो बहुत बुरा ह.ै. अपने साहस संकãपɉ से, इक अदने ने इǓतहास बनाया, तुमने उसको भगवान बना,मानवता का पǐरहास बनाया, आसमान सी उàमीदɉ पर,मानव कब कौन खरा उतरा है. तुम कहते हो वो बहुत बुरा ह. ै तुम कहते हो शनैः शनैः, इतनी जãदȣ Èया है भाई, िजतनी लँबी बीमारȣ है, उतनी लँबी चले दवाई, ͩफर एक बात का उ×तर दो, अͧभमÛयु ͩकसͧलये मरा ह.ै तुम कहते हो वो बहुत बुरा ह. ै ħçटाचार रगɉ मɅ बहता, भारत के तन-मन मɅ रहता, तन से खून अलग कर दूँग,ा देखो! Èया ये पागल कहता, एक बार मɅ ख×म करो ये, पूरे भारत पे खतरा ह.ै तमु कहते हो वो बहुत बुरा ह. ै
  • 76.
    Èया कह तेरामान बढाऊँ ? वो अरͪवÛद कलंͩकत ͩकंतु, एक दाग ना तुझमɅ पाऊँ, सूरज को Èया दȣप बताऊँ, दप[ण को दप[ण Ǒदखलाऊँ, शÞद-शूÛय सा शÞदकोष ͩकं ,गागर मɅ सागर भर पाऊँ, मेरे जीवन आदश[ कहो म,ɇ Èया कह तेरा मान बढाऊँ. िजन आँखɉ के सपनɉ मɅ म,ɇ अपना èवͨण[म भारत पाऊँ, अनुपम साहस के सàमुख, अचलɉ को भी ͪवचͧलत पाऊँ, कल गायेगा गौरव िजसका, उसकȧ गाथा आज सुनाऊँ, जो जÛमजयंती कहलायेगा,वो जÛमǑदवस मɇ आज मनाऊँ
  • 77.
    जज ͪवलेन होगये जयाजी हȣरोइन जज ͪवलेन हो गये, मगरमÍछɉ के समंदर से नैन हो गये, हैरान सा हूँ मुãक कȧ इस तरÈकȧ पर, Ěेन से सèते अब एरोÜलेन हो गये. पɇट पे चɬडी चढा ये सुपरमैन हो गय,े सच कǑठन था तो फरेब के फैन हो गये, Þलेक के बीस लाख हरेक को बाँटने वाले, चोरɉ का नाम पूँछने बस पर बेचैन हो गय.े
  • 78.
    इस गुͫडया कानाम मीͫडया इस गुͫडया का नाम मीͫडया, चाबी से हȣ चलती है, टȣवी चैनल अखबारɉ से, लोगɉ कȧ राय बदलती है, पाँच Ǿपे मɅ सवा अरब को, झटपट गोरा करती है, ये रȣझे सरकार बने , Ǿठे तो कोरा करती है. नाम करे, गुमनाम करे, बदनाम करे मनमाने है, नेता सब अͧभनेता डरते, ताकत को पहचाने हɇ, वफा माँगते नादाँ इसकȧ, ͩफतरत से अनजाने हɇ, रखɅ जेब मɅ इसकȧ चाबी, लêमीचंद सयाने हɇ.
  • 79.
    मेरȣ भूल कोभूल जाओ ͪĤय!े मेरȣ भूल को भूल जाओ ͪĤय!े मुझे भूलकर कैसे रह पाओग.े अपने अहं के Ǒहमालय से पूँछɉ, Ĥेम कȧ आँच कबतक सह पाओगे. Ǿठने मनाने कȧ, करɅ दोनɉ कोͧशश, मɇ हारा भी तो, तुम Èया जय पाओग.े Èयɉ नहȣं लौट पाया, वो मेहमान Ǒदल का, कोई पूँछेगा जब, ͩकतना कह पाओगे.
  • 80.
    इतनी तैयारȣ करनाहै रणभेरȣ कȧ आहट है, ͩफर अपनी कमरɅ कसना है, कुछ पल के पǐरĮम से जाने, ͩकतने जीवन हँसना है, इस स×यĤेम के महाय£ मɅ, आहूǓत बन जलना है, सेवा, संकãप, समप[ण से, ͧलखे इǓतहास बदलना है नहȣं पता पैसɉ कȧ आँधी, ͩकन वेगɉ से आयेगी, नहȣं पता बदरंग मीͫडया, Èया Èया èवाँग रचायेगी, तंğ सभी, षडयंğ सभी, सब हथकंडे अपनायेगी, नहȣं पता स×ता पाने, स×ती ͩकतना ͬगर जायेगी. इसͧलये सुनो हे वीर तुàहɅ, इतनी तैयारȣ करना है, इस मायाजल से उफनाते, सागर को पार उतरना है, अपने पौǽष से अजेय के, माथɉ पर बल पडना है, हो ͬच×त प͠ दोनɉ मɅ जय, कुछ ऐसी कुæती लडना है.
  • 81.
    अÛना कब तकमौन रहोगे ? अÛना कब तक मौन रहोगे, समरजयी हुँकार भरो, Ǔघरा शğु मɅ तेरा लाडला, ͧशवधनु कȧ टंकार करो, Èयɉ असहाय आज अͧभमÛयु,ĤाणͪĤय था तुàहɅ कभी, गर वो हारा तुम भी हारोगे, हे गुǾǿदय ͪवचार करो. जो शुभͬचंतक थ ेजहरबुझ,े वो तीर Ǒदलɉ पर छोड़ गये, थे èवाथɟ के संबंधी सारे, स×ता को मुख मोड गये, बस एक अकेला तेरे पथ पर, अͪवचल Ǔनèपृह डटे हुए, आओ गाँधी पथ Ǒदखला Èयɉ, हमसे नाता तोड़ गये. तेरा होकर भी ना होना सपना लगता है, ǒबन तेरे य ूँतÛहा लड़ना ͩकतना खलता है, तेरा दȣपक तूफा ंमɅ तेरȣ, राहɅ तकता है, आओ गाँधी भगत को, तेरȣ आवæयकता है.
  • 82.
    RTI कुछ खासहै वैसे कानून पचास सहȣ, पर RTI कुछ खास है, गडबͫडयɉ का चुगलखोर, सुशासन का ͪवæवास है, पारदͧश[ता का Êलास यहȣ, पदɟ का पदा[फाश है, अͬधकारɉ का अहसास कहȣं, कत[åयɉ का आभास है, रावण! अब अपने ͧसर ͬगनले, Ħéमाèğ हमारे पास है...
  • 83.
    "आप"को अपना ͪवæवासचाǑहये, "आप"को अपना ͪवæवास चाǑहये, वहȣ जीवटता का अहसास चाǑहये, आम बहुत हɇ अब कुछ खास चाǑहये, शÞदसĨाट! कहाँ हो? पास आइये. साथ अपने ͩफर वहȣ उãलास लाइये, सुर मोǑहनी से शğुओ ंपर पाश डाͧलए, समरनायक! अधूरȣ है ǒबन तुàहारे ͪवजयगाथा, सुकुमार! संग अरͪवÛद के जयरास गाईये
  • 84.
    भारत माँ केलाल बहादुर. (the real hero of AAM Aadmi) कद छोटा åयिÈत×व Ǒहमालय, भारत के अͧभमान हो, भारत माँ के लाल बहादुर, Ǻढ़ता के ĤǓतमान हो, तेरा मंğ ͪवæव मɅ गूँज,े जय जवान जय ͩकसान हो, हर माँ यह वर माँगे उसके भी, तुझ जैसी संतान हो. कहȣं पे गाँधी कहȣं गोडसे, ͩकसी ने जेपी नेहǾ पाये, लोहपुǽष सरदार कहȣं पर, अंबेडकर Ǒदलɉ पर छाये, कहȣं लोǑहया कȧ लोरȣ पर मेरे मन को तुम हȣ भाये, भारत माँ के लाल बहादुर, मेरे Ǒहèसे मɅ तुम आये..
  • 85.
    Ǒदãलȣ माँगे केजरȣवाल Ǒदãलȣ का तुम Ʌसुनाऊँ हाल, ǒबजलȣ मँहगी पानी बदहाल, सडकɅ , èकूलɅ, खèताहाल, बीमार पड़े सब अèपताल, सèती सÞजी ना सèती दाल, जमाखोरȣ का फैला जाल, ǐरæवतखोरȣ ने ͩकया कमाल, अफसर, नेता मालामाल, िजसने बदलȣ सबकȧ चाल, और कौन वो माई का लाल, वो उनÛचास Ǒदन पाँचɉ साल, Ǒदãलȣ माँगे केजरȣवाल
  • 86.
    ͪवͪवध……. उन प×थरɉके बीच ये, हȣरा चमकना चाǑहए, गूँज सुनकर दȣमकɉ के, Ǒदल दहलना चाǑहए, इǓतहास कȧ नगरȣ मɅ ͩफर, इǓतहास बनना चाǑहए, कुछ भी हो अरͪवÛद को, संसद पहुँचना चाǑहए. जब वìत वो ठहरा नहȣं, ये वìत Èया थम पायेगा सूरज Ǔछपा जो बादलɉ मɅ, ͩफर Ǔनकलकर आएगा, इन उफनते सागरɉ कȧ, हकȧकत मालूम हो, इक हाथ जो डाला नहȣं ͩक, तहɉ को छू जायेगा. भÈतɉ को तकलȣफ बहुत है, सर खाते सवालɉ से, सागर िजतना खून छलकता, छोटे -छोटे छालɉ से, £ानचंद समझाते हमको, लȣलाधर कȧ अƫुत लȣला, अÍछे Ǒदन बहकर ǓनकलɅगɅ, मँहगाई के नालɉ से. मरघट के सÛनाटɉ से, जीवन कȧ हलचल अÍछȤ है. गंदे नालɉ के ठहरावɉ से, गंगा उÍछृंखल अÍछȤ है. मनमोहन, शीला, लालू के, दशकɉ के लàबे अंͬधयारɉ से, कुछ Ǒदन नभ मɅ चमकȧ वो, तारɉ कȧ ͨझलͧमल अÍछȤ है. कुछ तो अजब बात है, "आप"कȧ इस आग मɅ वरना कहो शोले बुझान,े समंदर कब भागते हɇ
  • 87.
    नवजातɉ के मुँहदूध नहȣं, खरबɉ खाते ये ͪव£ापन, जो आसमान मɅ उड़ा पसीना, कालाधन बन बरसा तेरे आँगन, देश का सौदा कर डाला Èया, देश कȧ सेवा कȧ खाǓतर, ͩकतने आँसू काफ़ȧ होगे, चंदाखोरɉ का चुकन ेऋण. कभी सुना था देश कȧ खाǓतर, जो अपना लहू बहाएँगे, आँधी-तूफ़ा ँमे अͫडग रहे, वो भारत-पुğ कहाएँग,े देश के ठेकेदारɉ ने बदलȣ, देश Ĥेम कȧ पǐरभाषा, कमल का कȧचड़, मुँह मलकर हȣ, अब देशभÈत बन पाएँगे. Èयɉ लहू से ͩफर रंगना Ǔतरंगा है? हर मज[ कȧ दवा बस दंगा है? ͧसयासत! अचूक तीर हɇ तेरȣ तरकश मɅ, कभी राम थे, अब माँ गंगा है. तेरȣ नेक Ǔनयत को चाहा, आदत अपनी, अहसान नहȣं, जग टȣसे, पर म ɇजान ूँत,ूँ इÛसाँ हȣ है, भगवान नहȣ,ं है Üयार नहȣ ंये बुखार कȧ पल-पल, थमा[मीटर से माप,ूँ सौदागर ! ये गलत पता है, Ǒदल अपना तो सामान नहȣं भारत मंगल से भी मंगल, मूरत "माया" "सरदारɉ" कȧ? जीवन भूल,े जड़ को गढन,े Èया मंशा है सरकारɉ कȧ? ͪवकͧसत देश नहȣं बनवाते , Èयɉ èमारक ऊँचे-ऊँचे, Èया महापुǽष सब यहȣं हुए, या कमी उÛहɅ दȣनारɉ कȧ?
  • 88.
    अèसी Ǒहंदू ,बीस मुसलमा,ँ सरल गͨणत है वोटɉ का, यह रामबाण जबजब चलता , खून छलकता चोटɉ का, कभी बाबरȣ, कभी तो गंगा, लविजहाद, कæमीर कभी, कहते ͪवकास बस ताऊ है, हम ǒबन पɇदȣ के लोटɉ का. बाबूजी Ǒदल से ͧलखने म,े सब सुख[ ͧसयाहȣ लगती ह,ै इस दȣपक कȧ लɋ दȣवानी, खाͧलस घी से हȣ जलती है, मेरȣ हर पँिÈत के ǿद से, तेरȣ झंकार Ǔनकलती है, सोचा! तुझसे कुछ अलग ͧलख,ूँ पर कलम नहȣ ये चलती है. कब वत[मान पहचान सका, इǓतहासɉ के वीरɉ को, पथħçट हुए सबजग कहता, नवपथ गढते पथगीरɉ को, ͩकन चæमɉ से देख रहे, इन भारत कȧ तकदȣरɉ को, हाँथ सɇकत ेसमझ कोयला , बुƨ ुकल के हȣरɉ को. महादेव के ͧसर चढ़ बोलȣ, Ǒहमालयɉ कȧ गोद मɅ खेलȣ, देवɉ ने भी पूजा िजसको, जगती कȧ वो माँ अलबेलȣ, नǑदयɉ कȧ इस रानी ने बस, अपनɉ कȧ अनदेखी झेलȣ, सबका मल हर मो¢ कराते, गँगा हो गयी ͩकतनी मैलȣ. सीमा पर ͧसयासत के वो प¢ मɅ नहȣं, ħçटाचार अब अजु[न के ल¢ मɅ नहȣं, बदल हȣ डालो इस खेल के सब Ǿल Èयɉͩक, साǑहब अब प¢ मɅ हɇ, ͪवप¢ मɅ नहȣ.
  • 89.
    हौसलɉ के हाथमɅ, ͪवæवास कȧ पतवार है, जलती ͬचता कȧ लकͫड़यɉ से , नॉव अब तैयार है, आग पानी मɅ लगा , मɇ चीरता जाता अँधेरा, गर ना रहू ँम,ɇ राख तुझको, पहुँचना उस पार है. सच-झूठ का बाजार बंधु ! हंस - सा ͬचंतन करो , पीयूष भी है, जहर भी, बन देव तुम मंथन करो , "आम" हɇ पर नाम सुन , हɇ खास थर-थर कांपते, यहȣ राघव, यहȣ माधव, पहचान अͧभनÛदन करो. मल के दलदल मे धसे गढ़े, अब आसमान पे थूकɅग े? टुकड़ɉ पे पलते कु×ते अब, Èया ऐरावत पे भɉकेगे ? हम नीलकंठ! ͧसèटम मंथन कर, सारे ͪवष को पी लɅगे, हो पथ बाधाएँ ͧसंध-ुसी, हम राम! वाण स ेसोखेगे. केजी! तुम तो बहुत बोलते हो, िèवस के सब राज खोलते हो, राजɉ के रंग मɅ भंग घोलते हो, बने खेल पे रायता ढोलते हो, पाया कहाँ ये िजगर कुछ तो बोलो, समंदर मɅ आके तहɅ तौलते हो.
  • 90.
    ऍमसीडी मɅ चलरहȣ, भाजापा कȧ लूट, रँगे हाँथ पकडे गए, करते फोटो शूट, करते फोटो शूट झूठ कȧ झाड़ू पकड, े सात साल के बाहर आये सारे लफड़े, ͧश¢ा èवाèØय सफाई सड़कɅ रामभरोसे, बेशमɟ ͩफर वोट माँगते हो ͩकस मुँह स.े इक हवाहवाई लालͩकला, इक अनशन जंतरमंतर है, भÈतɉ का भगवान तो कोई, भूखɉ का पैगंबर ह,ै मीठा कुआ कोई तो कोई, मीलɉ फैला समÛदर है, इक गͧलयɉ का हȣरो दूजा, ͩफãमɉ का धरͧमंदर ह.ै मनमोहन के दौर से, कुछ ऐसा फैला रोग, जब पीएम मुँह खोलते, तालȣ पीटɅ लोग, तालȣ पीटɅ लोग,भूलकर सुधबुध सारȣ, सबको सपन ेबेच रहा, गुÏज ुåयापारȣ, बोले ऐसे बोल , सभी जनमन को भाते, सेãसमेन से खुशी-खुशी, सब जेब कटाते. काले धन के कȧचड़ से, अपनी छͪव चमकाओगे, ǒबके हुए इन सवȶ से तुम, जनता को भरमाओगे, िजन आँखो ने उनंचास Ǒदन, सच का सावन देख ͧलया, अरे मदारȣ! कैसे उनको, पदɟ से छल पाओगे.
  • 91.
    ǒबना दुãहे केबारात कैसे सजेगी, Ĝाईवर के ǒबना कार कैसे चलेगी, अरे एक टȣम नहȣं बनती ǒबना कÜतान के, कहो कैसे अपनी Ǒदãलȣ सरकार बनेगी.. हǐरæचंġ के वंशज देखो, ͩकन चोरɉ से ͧमले हुए, कालेधन के कȧचड़ मɅ, राçĚकमल सब ͨखले हुए, कहाँ गई वे बेदȣ, बाबा, और कागज के कन[ल जनरल बकते कभी नहȣं थकते, Èयɉ अबकȧ मुखडे ͧसले हुए. बोलो Èया बस तुम अÍछे, सब तुमको अÍछा करना ह,ै सवा अरब का देश Įेçठ , Èया दो हाथɉ से बनना है, तुम भी अÍछे वो भी अÍछा, दोनɉ को अÍछा करने दो, देश Ǒदया तुमको उसको, Ǒदãलȣ का भाÊय बदलने दो. जहाँ है नीचाई औरɉ कȧ, बेशक रÝतारɅ पाओगे, जो हार चुके सबकुछ अपना, उनपर जयकारɅ पाओगे, दावा है मेरा हे अजेय, जब इस गͧलयारे आओगे, हȣरे के सàमुख तेजहȣन, अपनी तलवारɅ पाओगे. लो हमहȣं ͩफर आज Ǒदãलȣ कȧ ͩफजा मɅ छा गये, सब तीर मारɅ ओट से हम सामने टकरा गए, जो सूरमा थे पा खबर ͩफर आज Èयɉ घबरा गए, अरे झुÖड मɅ गीदड़ लड़Ʌ कोई शेर हो तो लाओ जी, Èया जीत पाओगे मुझ ेजब युƨ स ेकतरा गये.
  • 92.
    दो पाटɉ मɅͪपसने को, अबकȧ Ǒदãलȣ मजबूर नहȣं, कोई ऐरा-गैरा भर सकता, इस माथे का ͧसÛदूर नहȣं तुम हो शौहरत के ͧशखर मगर मɇ भी इतनी मजबूर नहȣं, बाप देखकर ǒबǑटया वरदɅ, अब वैसा दèतूर नहȣं. भारतीय ͩĐकेट कंĚोल बोड[ (BCCI) - एक Ǔतͧलèम बेट-बाल सब जकड ͧलया, ͩĐकेट के ठेकेदारɉ नɅ, धम[ कभी था अब धंधा, कर डाला इन गƧारɉ नɅ, सवा अरब के देशĤेम से, खेल Ǔघनɉना खेल रहे, ͩĐकेट का क ख ना जानɅ, स͠ा भावɉ को खोल रहे, कुछ लोगɉ के हाथɉ मɅ, लो सारा भारत थमा Ǒदया. चीयरलȣडरɅ नाँच Ǒदखाती, खेल तमाशा बना Ǒदया, ͧश¢ाͪवभाग मɅ चपरासी कȧ भतȸ के ͧलए आवेदन देने वाले पढ़े ͧलखे नौजवान कȧ दुͪवधा-: ͧश¢ामंğी कȧ ͧश¢ा फजȸ, देखी; तब जागी खुदगजȸ, शम[शार हो चपरासी ने, बाͪपस लȣ भतȸ कȧ अजȸ. कहने लगा भूख सह लूँगा, कुछ Ǒदन ǒबना जॉब रह लूँगा, िजनसे Ïयादा पढ़ा-ͧलखा हू,ँकैसे उनको "सर" कह दूँग.ा # Delhidialogue # कौन सुनेगा ͩकसको सुनाय,Ʌ दूर हो चलȣ ये उलझन है, करने से सब कुछ हो सकता, ͪवæवासी अब मेरा मन है, जंतरमंतर पर आज Ǒदलɉ के, कहन ेसुनन ेका हȣ Ǒदन है, ͧमलकर सोचɅ हो कैसे बेहतर, Ǒदãलȣ तुमको आमंğण है.
  • 93.
    िजनका पौǽष थकावोहȣ, औरɉ कȧ करनी खाते हɇ, अपने आज से हारे हȣ, बीते कल के गुण गाते हɇ, अपने मुँह कȧ काͧलख मँजने, राखɉ को सहलाते हɇ, होकर बेपदा[ पदɟ पर, गाँधी नेहǾ Ǒदखलाते हɇ िजनका पौǽष थका वोहȣ, औरɉ कȧ करनी खाते हɇ, अपने आज से हारे हȣ, अपने अतीत को गाते हɇ, अपने मुँह कȧ काͧलख मँजने, राखɉ को सहलाते हɇ, होकर बेपदा[ पदɟ पर, गाँधी नेहǾ Ǒदखलाते हɇ. कई माँओं कȧ मौत बन गयी, रमन सींग कȧ नसबंदȣ छह-छह सौ मɅ मोल लȣ गयीं, चलती ͩफरती आनंदȣ, लêय आंकड़ɉ को छूने का, छूट गया है सचमुच पर लाल रंग से Ǔनखर गई, देखो ͪवकास कȧ बासुंदȣ. अब इãमी जी बेइãम हुɃ, वेदȣजी एक Ǔतͧलèम हुɃ, बाबा कȧ दाढ़ȣ मɅ Ǔतनका,Èया Ěेलर थे Èया ͩफãम हुɃ. जǽरȣ नहȣं कȧ हर सवाल का जवाब हो, हम लाजवाब हɇ, तुम लाजवाब हो..