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वो 49 िदन........ 
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Index:
1. राख तुझको, पहुँचना उस पार है
2. आज ूेमवार है..
3. जंगल म लोकतंऽ!
4. मु बई! अजब तेरा यार है.
5. आम आदमी तो आम होता है...
6. ॅ ाचार ज़ र है..
7. ॅ क संसद मे अब नो एंश !!!
8. जब चुनाव आ जाते ह…
9. अिभम यु फसा चब यूह म...
10.ये चीज़ है पॉिलिट स
11.अजब तेरे शहर का दःतूर हो गया
12.अब समर मे उतरना होगा
13.झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ
14. या चौरासी साल लगेगे, चौरासी के
इंसाफ़ को..
15.आप को चंदा कौन िदया
16.सैफई म उ सव भार है
17.वो 49 िदन, बहुत याद आएगे...
18.सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह
बनाएगे
19.खच बता रहे ह िक इनकम बुलंद है..
20.कँमीर खलोना है
21.इधर कु आ उधर खाई है
22.हाँ, म अनािकःट हूँ!!
23. नौ सौ चूहे खा ब ली हज को चली
24.अबक बार आप है
25.कांमेिसयो तुम कमाल करते हो..
26.जब ॅ तंऽ का ॅ ूशासक……..
27.आप तो बुरा मान गये
28.क मत तो चुकानी पड़ेगी...
29. ज़द ना करो...
30.कौन तु हारा बाप है ???
31.म तु हे यार य दूँ???
32.हमार कोिशश जार रहगीं
33.कमाल हो गया..
34.के जर वाल तो पागल है
35.िफर सोमनाथ पे ख़तरा है..
36.ये खाँसी बड़े काम क है ये खाँसी
37.ये तो होना ह था..
38.हम भी चुप और तुम भी चुप...
39.ओम जय िशंदे देवा! जय िशंदे देवा!!!
40.फे कु जी, तुम बहुत पछताओगे.......
41.फे कु तेरे राज मे........
42.ूाइम िमिनःटर जेल म...
43.राजा ने िसंहासन छोड़ा है
44.बुरा ना मानो होली है
45.खबर बेचना मेरा धंधा….
46.बनारस को अयो या बनाना पड़ेगा…
47.तुम क्या गये, सब सूना कर गये...
48.ये तो ग़लत बात है.... 
49.काशी तुम ना पाओगे
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आपने या िकया अर व द जी .....
जब रात गहर , पथ िदखाते, जुगनू! मुझे तुम चाँद जी,
कमल खलाते सूरज कोई, भँवरे को मकरंद जी,
सिदय से सूखी इस धरा को, मेघ क तुम बूँद जी,
हम डूबत को कोई ितनका , आ खर उ मीद जी,
तुझे ढूँढ़ता चैनल बदल, अखबार के प ने पलट जी,
चाहे तुझे, चाहूँ उसे, तुझसे अलग, लगते गलत जी,
देखता हूँ बस तु हे, आँख खुली ह बंद जी,
बस तेर धुन, तेरा नशा, ना और मन को पसंद जी,
पढ़ा CA , पर बन क व म, रच रहा हूँ छँद जी,
हाल अपना पागल - सा, "आपने" या िकया अर व द जी.
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राख तुझको, पहुँचना उस पार है
हौसल के हाथ म, व ास क पतवार है,
जलती िचता क लकिड़य से , नॉव अब तैयार है,
आग पानी म लगा , म चीरता जाता अँधेरा,
गर ना रहूँ म, राख तुझको, पहुँचना उस पार है.
सच-झूठ का बाजार बंधु ! हंस - सा िचंतन करो ,
पीयूष भी है, जहर भी, बन देव तुम मंथन करो ,
"आम" ह पर नाम सुन , ह खास थर-थर कांपते,
यह राघव, यह माधव, पहचान अिभन दन करो.
िसर पे कफ़न ितरंगी उनको , तू दागी खाक से रोके गा ?
भाड़े के काले झंड से, तूफ़ानो का ख़ मोडेगा ?
िगर के ओ नरभ ी गीदड़! , तेरे घर मे शेर दहाड़ रहा,
दम है तो िफर सामने आ, या कह दे हमसे ना होगा.
मल के दलदल मे धसे गढ़े, अब आसमान पे थूकगे ?
टुकड़ पे पलते कु े अब, या ऐरावत पे भ के गे ?
हम नीलकं ठ! िसःटम मंथन कर, सारे वष को पी लगे,
हो पथ बाधाएँ िसंधु-सी, हम राम! वाण से सोखेगे.
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आज ूेमवार है..
कभी म मी का, कभी पापा का, कभी दोःत का, कभी गोँत का,
कभी गणेश, शंकरजी का, तो कभी शिन-मनी का वार है,
पर आज तो प पू चहक उठा , आज यार का योहार है..
बाग-बगीचे भरे पड़े, देखो ूेमी-जोड़ो से,
कभी पद मे बसने वाला, यार नाचता रोडो पे,
नौ मह ने बाद इसके , बाल िदवस का उपहार है...
हर कु े का िदन बहुत सुना, अब हर रँते का िदन होता है
या यार हमारा अवसरवाद , मौको पे जगता-सोता है
यार अहसास है या कोई मौसमी यापार है...
इतराते इठलाते िफरते, जनक ूेयसी पास है,
उदास कोई, है दूर ूेिमका, कह जार अभी तलाश है,
हम तो शाद शुदा, हर िदन ह हमारा सोमवार है...
ूेयसी का आिलंगन बहुत हुआ, देखो! या देश क हालत है,
धम-ूेम के नाम पे नफ़रत , दंगो पे िसयासत लानत है,
युवा! तेरे ूेम पे, देश का भी कु छ अिधकार है....
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जंगल म लोकतंऽ!
जंगलराज बहुत रहा, अब लोकतंऽ को लायगे,
कौन हो राजा, िकसक स ा, ये चुनाव बतलायगे,
हुई घोषणा िफर चुनाव क , नेताओं क नींद घट ,
जाित ,धम के आधार पर, पशुओं क आबाद बँट ,
गध और कौओं क िगनती, बाक पशुओं पर भार है,
उ ह लुभाने तरह-तरह के , पकवान क तैयार है,
गध ने बोझ बहुत उठाया, अब ये भी दौड़ लगायेगे,
कोयल तुम तो बहुत गा चुक , अब कौए कू -कू गायगे,
ूकृ ित के अ याय पर कभी पुरख पे ऊँ गली उठ ,
जानवर को भी मानव-सा , दजा देने क पहल उठ ,
घोड़े बैठे घास खा रहे, कोयल अमराई म मौन,
गध और कौओं क चाँद , ये भीड़तंऽ है अफलातून.
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मु बई! अजब तेरा यार है.
तुझको बाँह म भरने को, हर सपने का िदल मचलाता,
मोिहनी! तेरा स मोहन , पास बुलाता , म बंध जाता,
र मायानगर ! गजब तेरा मायाजाल है....
भीड़-भाड़ बस भाग-दौड़, घड क सुई से करता होड़,
चलना ह बस एक येय, वैरागी! सब बंधन तोड़,
आदमी जैसे बनता औजार है...
ये ऊं ची-ऊं ची इमारत, ये समंदर क शो खयाँ,
ये शेयर बाज़ार क सु खयां, ये िसतार क सरगिमयाँ,
सब खुशफहिमय का संसार है...
सब रँते-नाते अपनापन, खुिशयाँ, बेिफब ,पागलपन,
ठिगनी!! कु छ देकर तूँ , िकतना कु छ ले लेती है,
कागज़ के गुलाब और काँट का उपहार है...
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आम आदमी तो आम होता है...
कभी गुःसा तो यार कभी,सच-झूठ का कारोबार कभी ,
प रवार और रोजी-रोट , इनका सारा संसार यह ,
आजकल ख़बर म, ूायः गुमनाम ह होता है....
कु छ गलती, कु छ किमयां तो, सब सवा अरब म पाओगे,
गर ये नह ं,ऐसा नह ं तो, और बेहतर कहाँ से लाओगे?
यहाँ "आम" ह िमलगे बाबूजी! "राम" तो बैकु ठ म होता है....
कोई बनावट यहाँ नह ं, जैसे िदखते बस वैसे ह,
हम ऐसे-वैसे-जैसे ह, पर बलकु ल तेरे जैसे ह,
हमारे दाग िदखते य ह, ये हमपे इ जाम है....
ये अलग लोग, ये अलग सोच, कोई अलग ह इनका देश रहा,
गूंगी इन महल क द वार,अब कहने-सुनने या शेष रहा,
अपन का दद बाँटना तो, अपन का काम होता है....
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ॅ ाचार ज़ र है..
नादान है जो शोर मचाते, ॅ ाचार िमटाएगे,
ये ज़ रया गर चला गया, तो फं ड कहाँ से आएगे,
कै से ये भीड़, सभाएँ होगी, व ापन लोक-लुभावन होगे,
ःवस-खाते, तबा, तामझाम, बंगला, गाड़ , चमचे होगे,
कोई शौक नह मजबूर है. ॅ ाचार ज़ र है.....
 
खेती, पानी, राशन,िश ा, ःवाः य, सुर ा, रोज़गार,
रोड़े, रेल, पुल, ःकू ल , उ ोग, धंधे, शेयर बाज़ार,
इन सब कामो को करने का, इसके कं धो पर ह भार ,
कह िमठाई, कह दलाली, कह तो है ये िश ाचार,
वकास क हर एक कहानी, इसके बना अधूर है. ॅ ाचार ज़ र है.....
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ॅ क संसद मे अब नो एंश !!!
मुखड़े छोड़ो, मु ा पकड़ो, और मु ा बस ॅ ाचार है,
मुखड़े तो आते-जाते ह, झूठा इनका यार है,
ॅ ाचार मु होगी, अब सार कं श .
ॅ क संसद मे अब नो एंश !!!
गर बदला चेहरा, पर तंऽ नह , तो हािसल या कर पाओगे,
पाँच साल का इंतज़ार, पल-पल िफर पछताओगे,
अरे! मनमोहन- से ईमानदार क , यहाँ डूब गयी सार िडमी.
ॅ क संसद मे अब नो एंश !!!
ना भेदभाव पद,धन,बल का , सबको याय, स मान िमले,
है सरल वकास क प रभाषा, जहाँ सबको अवसर समान िमले,
फे कू जी! अब बस ! वकास के , चाँद तार क बब .
ॅ क संसद मे अब नो एंश !!!
िकसको या िमलता, हम या पाते, राजा कौन, कौन सरकार,
छोड़ो ये सब, आओ िमलकर, एक बात को हो तैयार,
अपनी वोट से कोई ॅ , ना पहुचे िद ली.
ॅ क संसद मे अब नो एंश !!!
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जब चुनाव आ जाते ह…
तेरे आने क आहट सुन, पतझड़ सावन हो जाते ह,
ईद का चाँद जमीन पे उतरा , ूायः िक़ःसो मे ह सुन पाते ह,
साँप बल से बाहर आते, िगरिगट के रंग बदल जाते ह,
जनके चरण को खोजा अब तक, उनको चरण मे पाते ह.
या िकया और या कर दगे, लंबी फे ह रःत सुनाते ह,
हाथ मे इनके चंदा, सूरज, िदन मे तारे िदखलाते ह,
सबसे लेकर कु छ को देकर, दानवीर कहलाते ह,
चम कार है इस चुनाव का, कं स कृ ंण बन जाते ह.
चमच क तो चाँद होती, भूखे बरयानी खाते ह,
दा , नोट क वषा से, वो समाजवाद फै लाते ह,
हम वह , वकास के व ापन, ट वी वालो को चमकाते ह,
िधक ये जनता! िधक ये जनता, नेता िफर जीत के आ जाते ह.
 
 
 
12 
 
अिभम यु फसा चब यूह म...
सुन ललकार शऽुओ क , इसका मन भी है मचलाया,
लाज बचाने देश क अपने, बालक ने है श उठाया,
ये सा जश है षडयंऽ कोई, सब बड़े-बडो ने समझाया,
साहस , दुःसाहस क पतली, रेखा को इसने आज िमटाया,
ूाणो का भय पीछे छू टा, संक प एक बस शेष रहे,
कु ल का गौरव ना खोने दूँगा , जब तक अंितम साँस रहे,
देखो! िघरा शऽुओं मे, है लहुलुहान पर लड़ता जाता,
कोई मारे भाला सीने मे, कोई पीछे से छु र भ कता,
चोतरफ़ा से बाणो क वषा, सब कवच भेदती जाती है,
ूितपल मृ यु-सुंदर अपने, पास खींचती जाती है,
तुम आज मूकदश ! भ वंय को, या जबाब दे पाओगे,
युग -युग तक या िफर, कोई अिभम यु पा जाओगे,
समय शेष है उठो वीर!, आओ िमलकर श उठाएँ,
लड़े ूाण जब तक तन मे, एक नया इितहास रचाएँ. 
 
 
 
 
 
 
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ये चीज़ है पॉिलिट स ये चीज़ है पॉिलिट स
क चड़ कािलख का खेल हुए, सब गोरे काले िम स,
क पल, सिचन सब आउट दनादन भ जी मारे िस स,
बन-पूंजी का िनवेश बड़े िदन रात ना कोई रःक,
हार-जीत बस आँख-िमचोली, हर लेयर ह है िफ स,
व ान ग णत सब फै ल हुई, ना चले इकॉनोिम स,
ये कला बड़ आसान िक़ इसमे, बस करना सबके बूट िल स ,
िचपक रहो कु स से तुम, चाहे िकतने खाओ िक स,
मेहनत स चाई दूर हटो , है ःवागत डट िश स,
"आप" आए व ास जगा, बदलेगी ये पॉिलिट स,
ना नज़र लगे फलो-फू लो, यह हमार वश- वश.
ये चीज़ है पॉिलिट स ये चीज़ है पॉिलिट स....
14 
 
अजब तेरे शहर का दःतूर हो गया
लुटेरे शहर के , ईमान के , मंिदर म बैठे पुज रहे,
मेरा एक चोर को बस चोर कहना , कसूर हो गया.
चंदा , सूरज , प रयाँ ले लो, लो इंिधनुष के रंग सभी,
सपने बेचते - बेचते वो , हक कत से दूर हो गया.
ये उसूल या दगे , िसवा गर बी , गुमनामी के ,
चायवाला ईमान बेचके , मशहूर हो गया.
कोई मारता ना मरता , ये फलसफा पढ़के ,
खून के खेल को योगी, मंजूर हो गया.
दौलत क चमक है, या पॉिलश का हुनर,
कांच का मामूली टुकड़ा, आज कोिहनूर हो गया.
वो सेहरा, वो शहनाई, वो जीत-ओ-ज का मंजर,
"आप" क नजर या लगी, सपना चूर हो गया. 
 
 
 
 
 
 
 
15 
 
 
अब समर मे उतरना होगा
या जीवन के उ ेँय यह , खाना पीना और सो जाना,
प रवार, पढ़ाई, रोज़गार, अपनी दुिनया मे खो जाना,
देश क चचा, देश क िचंता, देशूेम बस मन-रंजन,
देश क दशा बदलने िमऽो!, सोच क िदशा को बदलना होगा l अब समर..
मूऽ वसजन बहुत हुआ पु !, ूाण-सृजन अब करना होगा,
लाल लहू क गम से अब, िहमिग र को भी बहना होगा,
धृतरा सर खे राजा ह, है हर नु कड़ पर चीर हरण,
हाथ मे चब सुदशन ले, अब तु हे कृ ंण बनना होगा l अब समर..
अभी नह तो कभी नह , इस युग- ण क पहचान करो,
ये रा -सृजन का पथ दुंकर, तुम भी कु छ ौम-दान करो,
जीवन का मू य चुकाने का, यह ःव णम अवसर आया है,
इितहास रचे ह बहुत ने , तुझे भ वंय रचना होगा l अब समर..
16 
 
झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ
झाड़ू हर घर म रहती , आम खास म भेद ना करती,
है िदखने म सहज-सरल पर, कू ड़े पर बजली सी िगरती,
ये बड़े काम क चीज है बाबू! तुम भी इसको घर लाओ.
झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ
ऊँ चे छ पर क धूल ह या मकड़जाल क चूल ह ,
चले िनरंतर बना थके , चाहे िकतनी भी ूितकू ल ह ,
ये समाजवाद क पाठशाला, कु छ समझो कु छ समझाओ.
झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ
घर भरा गंदगी बदबू से, म छर बीमार फै लाएं,
अपने घर को सुथरा करने, है इ तजार, कब मेहतर आय,
उठो अमु! आलस छोडो, झाड़ू पकड़ो ना शमाओ.
झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ
ये बँधी हुयी पर सधी हुयी, िकसी कोने म पड़ रहे,
कत य के पथ पर बढ़ती, पल-पल अपनी मौत सहे,
खुद िमटकर और क सेवा, झाड़ू का स देश सुनाओ.
झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ
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या चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को..
लाख चौरासी योिन मे, दंगो क फाइल भटक रह ,
दजनो किमशन, जाँच सिमित, जाँच कहा पर अटक रह ,
िकतने किमशन और लगेगे, इस एक घटना क जाँच को.
या चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को..
देश के िदल िद ली मे ह तो, हझतो नरसंहार हुआ,
या औरत या ब चे, देखो! लाश का अंबार हुआ,
और िकतने सबूत लगेगे, सा बत करने पाप को.
या चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को..
क ल हज़ार खुलेआम, पर काितल ना एक िमला,
िधक! याय और ये याय यःथा, अंधे- बहरो का कािफला,
लगे तीस साल और िकतने, माइ लॉड!! लगेगे आपको.
या चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को..
18 
 
आप को चंदा कौन िदया
आतंकवाद, न सल, बीमार , भुखमर , अिश ा, रोज़गार,
मिहला सुर ा, सांूदाियकता, समःयाओ का है अंबार,
पर सबसे िचंता का ूश ्न आज िक, आप को चंदा कौन िदया.
2G, CWG, आदश, कोल, मनरेगा, वासा, बोफोस ,
इन घोटालो क जॉच ज़ र , जार है जार ह रहेगी,
पर सबसे पहले ये जाँच ज़ र , आप को चंदा कौन िदया.
देश- वदेश से काला पीला, और ने अरबो हिथयाया,
ज मिदन िग ट, कह पाट फं ड, िकसी ने हझता नाम बताया,
अजी! अथ यःथा ख़तरे मे िक , आप को चंदा कौन िदया.
लाख के स कोट मे सड़ रहे, याय माँगते जूते िघस रहे,
कु छ अपने हालत के हाथो, कु छ वक ल क फ स से मर रहे,
पर पहले िनणय ये होना है िक, आप को चंदा कौन िदया.
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सैफई म उ सव भार है
सीबीआई से िमली लीन िचट, पता- पुऽ खूबई हषाये,
ध यवाद देकर िद ली को , ली लखनऊ क सवार है. सैफई म..
अिधक आय तकलीफदेह , अफसरो ! खच का यतन करो,
राज काज से ऊबा मन , अब मनोरंजन क बार है. सैफई म..
महलो से है मंच सजाये , मु बई से अिभनेता आये,
छ पन भोग पकवान बनवाये , जोर क तैयार है. सैफई म..
सैफई ःवग-नगर सी हो रह , सोम-सुरा क वषा हो रह ,
उवशी के ठुमक से गम िफ़ज़ा , ज़ीरो िडमी पे भार है. सैफई म..
लंदन , पे रस सब फे ल हुए, नोट के या खेल हुए,
चकाच धती चमक यहाँ, UP सार अंिधयार है. सैफई म..
दंग से बेघर डरे हुए, लोगो का या हाल िकया,
35 ब चो क मौत क वजह, ठ ड नह ं सरकार है. सैफई म..
पर कु छ को मजा नह ं आया, देशी क चर नह ं भाया,
उनका दजन भर देश का, ःटड टूर अभी जार है. सैफई म..
बेटा नेता, बहुएँ नेता, भाई और भतीजे नेता,
समाजवाद के डॉ टरो को, खानदानी बीमार है. सैफई म..
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वो 49 िदन, बहुत याद आएगे...
वो जनता क मज़ पे स ा मे आना,
आम आदमी का आसमान छू जाना,
वो मेशो से तेरा, ताजपोशी को आना,
वो राम-लीला मैदान का मंज़र सुहाना,
वो सपनो क दुिनया हक़ कत मे आना,
वो आँखो क नमी, ह ठ का मुःकु राना,
कभी तो हंसाएँगे , कभी तो लाएँगे. वो 49 िदन..
ग़र बो का बजली और पानी पा जाना,
वो अफ़सर , लालब ी का गुल हो जाना,
वो ॅ के कु नबे मे हड़कं प लाना,
वो सद क रात मे रोडो पे सोना,
वो ज़द तेर , कलयुग मे, राम-राज लाना,
छू कर जड़-चेतना को, अिह या बनाना,
मसीहा तेरे क रँमाई नुःखे , नीम हक म भी अपनायेगे. वो 49 िदन..
वो कॉंमेस भाजप का आपस मे िमलना,
रंगे हाथ पे कमल कागज के खलना,
उसूल पे तेरा, महल छोड़ जाना,
व ास िकतना िक, बहुमत से आना,
ना भूले ना भूलेगे तेरा जमाना,
हरेक ह ठ पे है , आज तेरा तराना,
इंतज़ार है, बेकरार सब, "आप' कब आएगे. वो 49 िदन..
सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह बनाएगे
म नह िकसी देवालय मे, ना ढूढो मुझे िहमालय मे,
21 
 
म बसता हर तृण - कण मे, ना खोजो वन- वेद-पुराणो मे,
राम! तेर सब बाते स ची, पर सच से हम या पाएगे.
सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह बनाएगे.
म रहा स य के साथ सदा, बस याय-धम पथ अपनाए,
मयादा पु षो म कहते, ूाण जाए पर वचन ना जाए,
मेर झूठ सौगंधे खाकर, या रामभ कहलाएगे.
सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह बनाएगे.
म ूेम क जी वत ूितमा, मनु-पशु मे भेद नह जाना,
मेरे नाम पे बंद करो अब, मेरे ब चो मे जहर बाँटना,
राम को छलने वाले बोलो! राम-रा य या लाएगे.
सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह बनाएगे.
नह ज मु-म ं अवतार ध , कभी मथुरा कभी अयो या मे,
मंिदर के शोल ने बदली, जंदा कौमे मरघट मे,
नह चािहये मंिदर हम, वैकुं ठ मे ह वौाम करेगे.
सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह बनाएगे.
बहुत हुआ अब राम! सुनो सच, तू शौक नह मजबूर है,
ये चुनाव-सागर है गहरा, तेरे नाम क नाव ज़ र है,
एक बार स ा पाने दो, तुमको िफर सतयुग मे पहुचाएगे.
सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह बनाएगे.
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खच बता रहे ह िक इनकम बुलंद है..
ये लालिकले से मंच सजे, ये रेल-बसो का तामझाम,
लाख क लाई भीड़, और खाने पीने के इंतज़ाम,
पूछो! ये शो ूायो जत करने वाला, कौन अमीरचंद है? खच बता..
प पू पापा बनने िनकले, नयी सोच नयी बात है,
बासी कड़ उबाल मारती, रॅटा रटाया पाठ है,
500 करोड़ लगेगे सा बत करने , िक प पू अ लमंद है? खच बता..
कु े- सा जो काम कराकर, तनउवाह बाँटने को रोएंगे,
माँगे-माँगे भीख ना देते, बनमांगे य चंदा देगे?
खुली ितजोर आपक खाितर, य हमको मु ठ बंद है? खच बता..
रोट , कपड़ा, मकान क िचंता, मे जीवन को िघसता जाता,
कभी मंद , कभी महगाई से, आम आदमी पसता जाता,
पर इनका धंधा तेज वश ्व क , अथ यवःथा मंद है. खच बता..
हम देशी, देशी अंदाज हमारा, देशी अपना संसार है,
पर वदेशी कं ध पे इनके , मेक- ओवर का भार है,
ना आम, ये ऊँ चे लोग ह बाबू!! ऊँ ची इनक पसंद है. खच बता..
23 
 
कँमीर खलोना है
जैसा िदल चाहा वैसा खेला, चाबी से ह चलना है.
आज़ाद से इसके िहःसे मे, बस रोना-धोना है.
कँमीर तो भगा िदए, अब जनमत संमह होना है.
ःपेशल ःटेटस का मतलब, या सौतेला होना है.
अपनी सेना बबर िदखती, जय-जय आतंक सेना है.
है ःवग! इसे हर रात मगर, डर के साये मे सोना है.
भर जहर अलगाववाद का, स ा का खेल िघनोना है.
भारत ना जाने दद तेरा, बस नेताओं ने जाना है.
अरे इनक भी तकलीफ़ वह , जो बाक भारत का रोना है.
कँमीर तुझे अब िनणय करना, पाना या बस खोना है.
बनना है गुजरात तुझे, या तािलबान िफर होना है.
कँमीर खलोना है.
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इधर कु आ उधर खाई है
बजा बगुल, आरंभ यु , वीरो ने श सभाले है,
दोनो सेनाए सजी हुई, िनणय क घड़ अब आई है.
कह तो अनुभव क बरसात, कह दुहाई यौवन क ,
कोई वकास क तान छेड़ता, कह सांूदाियकता छाई है.
या िकया और या कर देगे, ऊँ चे मंच से गरज रहे,
दोनो ने अनिगन वाद क , बन-डोर पतंग उड़ाई है.
कोई बालक ौंगार कर रहा, पुरख क परछाई मे,
िकसी ने औरत क जासूसी मे, सार पोलीस लगाई है.
दशक गये पर दोनो से, दंगो के दाग नह जाते,
करोड़ के इंपोटड पाउडर से, प पू-फे कू क पुताई है.
सकु नी बैठे ह सजे धजे, कह ॅ क भरमार है,
2G, कोल, आदश,CWG, कोई ताबूत, तहलका लाई है.
मन दु वधा मे ःत ध शू य, ःमृितय मे खो जाता है,
िकस और जाऊं या ठहर जाऊं , इधर कु आ उधर खाई है.
दुभा य आज सार निदयो को, इन दो सागर मे ह िमलना,
पर उ मीदो के घुड़सवार ने, हाथी, साइिकल भी चलाई है.
एक दल का बहुमत पा जाना, बस िमथक, नह स चाई है,
करो भरोसा आज आप पर, ये अ छाई क लड़ाई है.
मत सोचो! मेहनत बेकार जाएगी, आप कहा तक पहुँच पाएगी,
पग-पग, पल-पल बढ़के ह तो, सबने मं ज़ल पाई है.
 
25 
 
हाँ, म अनािकःट हूँ!!
अबलाओं के आँसू से, िद ली का िदल जब सुख हो रहा,
गुिड़या, दािमनी के िक़ःसो से, सब देश शम मे डूब रहा,
पुिलस ूशासन मूक-बिधर, दुशासन बेखौफ़ खड़े,
चीर-िोपद लूट जाने दूं , ना राजा म धृतरा हूँ.
हाँ, म अनािकःट हूँ!!
जन-सेवा ह रा धम, क़ानून, याय, सं वधान है,
लोकतंऽ का ूाण यह , ये ह भारत िनमाण है,
जन-सेवा से वमुख खड़ा, वो तंऽ ॅ , सरकार िनक मी,
जन-सेवा के नूतन पथ सृजता, कोई कहे पथ-ॅ हूँ.
हाँ, म अनािकःट हूँ!!
ज़द है जब तक ूाण रहे, जन-िहत मे संघष क गा.
संसद मे कभी सड़क पे आके , ॅ ो!! तुम पर वार क गा,
पद लोभी होगे और कोई, सरकार िगरे तो िगर जाए,
िसर नह झुका है, नह झुके गा, हाँ! म ज दु हूँ.
26 
 
नौ सौ चूहे खा ब ली हज को चली
अब तक जो पैसे-पॉवर क , आँखो पे प ट बाँधे थे,
िद ली क जनता क दहाड़ से, उन अंधो क आँख खुली.
जनता हा-हाकार मचाती, कानो मे जूँ भी ना रगती,
इन बहर सरकारो मे, जनता-दरबार क सेल चली.
जंग जीत महलो मे सोते, 5 साल िफर कौन ूजा,
इन "ग जनी" सरकारो को, अब याद आए पानी- बजली.
कोई टोल- बूथ है तोड़ रहा, कह आ म- दाह क है धमक ,
कह पे धरना, कह ूदशन, जन-सेवा क अब होड़ चली.
जन क नीित, जन का नेता, सभी दल मे ख़ािलबली,
मॅफलर, ःवेटर सपने मे िदखते, खाद क पतलून खुली.
ना कोई सभा का तामझाम, ना कोई मेक-ओवर का खचा,
मीिडया मे अपनी ःटोर , फोकट मे िदन-रात चली.
स ा क दलाली से अपनी, जो रोज़ी-रोट चला रहे,
अब "ॅ ाचार िमटाएगे", बोले कौआ कोयल बोली है.
आप-जाप क माला रॅट रहे, सब जन देखादेखी कर रहे.
झाड़ू पहुचेगी संसद मे, ये चचा है गली-गली.
27 
 
अबक बार आप है
 
हम युवा ह अनुभवह न सह , कु छ तौर-तर के अलग सह ,
ज़ुबान हमार त ख़ सह , पर िनयत हमार साफ है. अबक बार ..
ॅ ाचार जड़ तक फै ला, बड़े-बडो का मन है डोला..
सार उलझन का सबब यह , सब तकलीफो का बाप है. अबक बार ..
रावण एक, अनेक प मे, सीताओ को छलने आया,
सावधान! है वेष के शर , पर चलता िफरता पाप है. अबक बार ..
बजली राशन पुिलस ूशासन, िश ा रोज़गार िनमाण,
इसक हद से कोई ना छू टा, या यूपी या गुजरात है. अबक बार ..
ऊँ चे मंचो से ःवराज के , लैशन लाख को पढ़ा रहे,
ूथम पं मे येिदयुर पा, बंगा , बाबूराम ह. अबक बार ..
जनता के मु े धूल खा रहे, नाम का ह धमाल है,
जय- जयकार कह ं राहुल, कह नमो-नमो का जाप है. अबक बार ..
आम आदमी खूँटे पे पूरे, तंऽ मे ॅ ाचार है,
या फ़क कौन है चोर, कौन िफर, चोरो का सरदार है. अबक बार ..
दोनो ने दशको राज िकया, एक िद ली एक गुजरात िलया,
जनता जैसी वैसी ह रह , हुए VVIP आप है. अबक बार ..
लोकतंऽ का समर सामने, तीन माह बस शेष ह..
आज "आप" को सा बत करना, हममे भी कु छ बात है. अबक बार ..
इक दल का बहुमत पा जाना, सरकार बनाना सपना है..
गठबंधन युग क स चाई, माने ना माने आप ह. अबक बार ..
है ल ्य दूर ये शंका छोड़ो , बस "पचास" का यतन करो..
लालिकले से गजगी झाड़ू, ई र अपने साथ है. अबक बार ..
28 
 
कांमेिसयो तुम कमाल करते हो..
िकतना लूटा िकतना खाया, इन पछले पंिह साल मे,
तुमको पाकर या- या खोया, इन पछले पंिह साल मे,
थोड़ा आराम- वराम करो!! िद ली के जनमत का स मान करो!!
पंिह िदन क सरकार से, िकतने सवाल करते हो.
कांमेिसयो तुम कमाल करते हो.
लुट रह अःमते खुले-आम, चौतरफ़ा जंगलराज है,
जनिहत मे रोड़ पर राजा, लोकत ऽ शमसार है,
पुिलस-ूशासन क सब चाबी, खुद क जेबो मे रखकर,
दािनश मिहला का रेप यो हुआ? हमसे सवाल करते हो.
कांमेिसयो तुम कमाल करते हो.
बन माँगे बना बताए ह , बन-शत समथन भेज िदया
ललकारा अपने वचन िनभाने, अःवीकृ ित को "कायर" इ ज़ाम िदया
जन-मत रखने िनज-मन मारा, वीरो-वत चुनौती ःवीकार िकया
अब धूल हट CWG फाइल से, इतनी हलचल, इतना यो डरते हो?
कांमेिसयो तुम कमाल करते हो.
29 
 
जब ॅ तंऽ का ॅ ूशासक……..
जब ॅ तंऽ का ॅ ूशासक, सब हदे पार कर जाता है,
कभी दुशासन, कभी क स बन चीर ूजा का हर जाता है,
रावण एक अनेक मुखो से, जनता को छलता जाता है,
तब देव कभी तो कृ ंण, राम , अर वंद कभी बन आ जाता है.
िदन-रात िघसे तब वरला कोई, IIT, IRS बन पाता है,
िकतनी आँखो के िकतने सपने, स मुख अपने पाता है,
पद का तवा, माल-मलाई, मधुमय भ वष ्य ललचाता है,
पर भारत माँ क क ण - कराह सुन, व ल िनज-मन को पाता है,
अपनो क आशाओ, पथ-बाधाओं को, जो वीर! लाँघता जाता है.
एक रा बस एक येय, सवःव यौछावर कर जाता है,
िनंदा- ःतुित, यश- आलोचन से, दूर िनकलता जाता है,
याग, तपःया, िढता से जो, पग-पग बढ़ता जाता है,
खुद को खुद मे पघलाये, तब कोई अर वंद बन पता है.
30 
 
आप तो बुरा मान गये
चेहरा या देखा अपना,
जनाब!आईने से रार ठIन गये.
तःवीर मेर देख बड़बड़ाते ह,
हुजूर क असिलयत जो हम जान गये.
एक सवाल चंदे का या पूछा,
तोप-तलवार हम पे तान गये.
ठहरा क ल का मंज़र इन आँखो मे,
एक अरसा हुआ वो इंसान गये.
ये नफ़रत, ये सौतेलापन यो है,
हम भी उसी मा क संतान हुए.
लहू से खींचते िफरते लक रे,
देशूेमी हो यI तािलबान हुए.
ये दौलत ये शान-ओ-शौकत,
सब बेकार है, ईमान गये.
नाम था, कभी पहचान भी थी,
या हुआ क आदमी सामान हुए
दद ह दद है हर िकःसे मे,
िसतमगर ! या तेरे अहसान हुए.
हालात यूँ िकए पैदा नाखुदा ने मेरे,
जंदगी मु ँकल, ज़हर आसान हुए.
तर क के तेरे चच सब तरफ,
िमला बस उनको, जन पर आप मेहरबान हुए.
सौदागर!अलग पहचान तेर हर गली-मोह ले मे,
कह शैतान कह आप भगवान हुए
31 
 
क मत तो चुकानी पड़ेगी...
गाँधी जैसो ने अपमान सहे, मंडेला दशको जेल रहे,
भगतिसंह फाँसी पे झूले, बोस देश से दूर रहे,
तुम कौन? स य पे, ह रशचंद को, यहाँ ग गवाँनी पड़ेगी.
मत वचिलत हो, यहाँ बड़े-बड़ ने, गाली-गोली खाई ह,
देश,स य के महाय मे, अपनी आहूती चढ़ाई है,
काजल क कोठर मे आए हो, तो कु छ कािलख भी लगवानी पड़ेगी.
राजनीित कोई गहरा दलदल, बन-डूबे पार उतरना मु ँकल,
थके अके ला, छायाएँ छल, बाधाएँ पथ रोक पल-पल,
लआमी कमल हाथ ले पथ मे, नाना- प मे छेड़खानी करेगी.
कमयोगी! तेर पार , कई शतक पर भार होगी,
नायक! तेर ये लघुकथा, कई सुपरिहट से यार होगी,
मृ यु पे जो ज मनाती, या सुंदर उस सरकार क जंदगानी रहेगी.
32 
 
ज़द ना करो...
ये जन-सेवा घरबार छोड़, घड़ क सुई से करते होड़,
गये चुनाव, होश मे आओ, अब छोड़ो भी ये भागदौड़,
पाँच साल आराम करो. ज़द ना करो…
राजयोग बड़े पु य से पाते, ूभु क इ छा का मान करो,
बेिफ़ब रहो! स ा-सुंदर के , अधर का रस पान करो,
प लक को राम-राम करो. ज़द ना करो...
राजा होकर खाक छानते, य िद ली क गिलय क ,
औरो से सीखो, य खाते, रातो को मार सिदय क ,
राजा हो राजा से काम करो. ज़द ना करो...
वलेन (नेता) के रोल मे हो, ह रो का ना काम करो,
अपने पागलपन से पूर , बरादर को ना बदनाम करो,
कौओं मे बैठो तो कांव-कांव करो. ज़द ना करो....
सब खाते तो तुम भी खाओ, य ? औरो को नज़र लगाते हो,
और का अरे! हक़ छ नकर, बोलो तुम या पाते हो,
कभी चोर क दुआएँ भी ःवीकार करो. ज़द ना करो....
33 
 
कौन तु हारा बाप है ???
अख़बार का बकना बहुत सुना , अब ख़बरे बेची जाती ह,
लाभ-हािन से इस कठपुतली क , अब डोरे खीची जाती है,
कौन खड़ा पद के पीछे, िकसका ये आलाप है ???
कौन तु हारा बाप है ???.
सनी के कपड़े, सलमान के लॅफडे, कह पे सास बहू के झगड़े,
नाम खबर का, ना खबर नाम क , बेहूदा कॉमेड के तड़के ,
लोकतंऽ का ःतंभ है या लोकतंऽ पे ौाप है???
कौन तु हारा बाप है???
अपना यायालय, खुद ह जज, खुद के सबूत, खुद क दलील,
बन शायल, झट-पट इंसाफ़, ना कोई गवाह ना कोई वक ल,
ओ च रऽ-सिटिफके ट दाता! झाँक िगरेबान, तूँ खुद िकसका पाप है???
कौन तु हारा बाप है???
तुम हो कौन? जो ू पूछते, ये पावर बस हमने पाई है
सच-झूठ से छलती जन-मन को, अिभय क दुहाई है
ओर को िहटलर कहने वाली, तू ह स ची खाप है???
कौन तु हारा बाप है???
34 
 
म तु हे यार य दूँ???
या बोलो तुम दे पाओगे, जीवन के ऐश-ओ-आराम,
बँगला, गाड़ , पया, तबा, और मेरे अनिगन शौक तमाम,
अपने सपनो का संसार तु हे य दूँ??? म तु हे..
माना हूँ म यार क देवी, यार बाँटना मेरा काम,
सारे लआमीचंद ह पाते, मेर बाह मे वौाम,
अरे फट चर! तुझे अपने अधर क पुकार य दूँ??? म तु हे..
म मीिडया बदनाम सह , तूँ अ छाई का अवतार सह ,
ये कलयुग है राम! यहाँ, नामुमिकन है सीताएँ िमलना,
तेर नेक िनयत पे, अपनी िनयती य वार दूँ??? म तु हे..
ख़याल जाने दे, मेरा साथ पाने, संग मेरे घर बसाने का,
मेरा शौक, मेरा पेशा है, सबके संग वफ़ा िनभाने का,
बस तुझे ह खुशखब रय का प रवार य दूं??? म तु हे..
 
 
35 
 
हमार कोिशश जार रहगीं
अब पा ह गये हो कु स , जो जनता क नादानी से,
चैन ना पाओगे पल को, ये ऊँ ट-सी सवार रहेगी.
िकतने भी तुम काम करो, बदनाम तु हे हम कर देगे,
हमारे हर- एक क कािलख, तेर सार सफे द पे भार पड़ेगी.
चले त ऽ को चंगा करने, हमार रोज़ी-रोट छलने,
सेहत बगड़ जाएगी बाबू!, लंबी अपनी बीमार चलेगी.
तुम हो कौन, कहाँ से आए, स ा के गुण ना तुमने पाए,
ये स ा हम दो क जो , कभी उनक कभी अपनी बार रहेगी.
कभी सोमनाथ, कभी िससोिदया, कभी भूषण, राखी पर थुके गे,
िद ली आपके साथ सह , पर मीिडया सार हमार रहेगी.
हमने दशको मे नह िकया, वो चंद िदन मे कर डाला,
इस रझतार से कब तक हमको , दफ़नाने क तैयार चलेगी.
तु हे िगराना शौक नह , मजबूर वजूद बचाने क ,
जंदगी क ये ज ोजहद, जार है जार ह रहेगी.
36 
 
कमाल हो गया..
जायज़ खरब क कजमाफ , साइिकल, लॅपटॉप, राशन,
अपने गुण गाते व ापन , वो वोटो पे बॅटते आर ण,
ग़र ब ने मुझत पानी या पया, शोर है, देश कगाल हो गया.
वकास क दौड़ मे फे कू ! देखो, िकतने तुमसे आगे ह,
कु पोषण, अिश ा, र तखोर , कु त के क चे धागे ह,
िद ली का जाप करते-करते, गुजरात का ख़याल खो गया.
अपना एक वभाग बता जहाँ, बन-िदए काम हो पाता है,
गर, दूध गणेश नह पीते, तो दूध कहाँ िफर जाता है,
चायवाला हेली-का टर मे कै से, बड़ा सवाल हो गया.
जैनो का था िगरनार कभी, अब दशन को मोहताज हुए,
डर के साए मे कौमे ह, औरंगजेब के राज हुए,
तेरा शहर, िदल का ग़र ब, कागज पे खुशहाल हो गया.
37 
 
के जर वाल तो पागल है
देखो ! ये पागल या चाहता है.
सिदयो से सु चेतना को, िनज ास से जगाना चाहता है,
घोर अमावस घना ितिमर, िनज-र जला िमटाना चाहता है,
धम जाित के दो-छोरो को, ूेम-ःनेह से िमलाना चाहता है,
राजनीित के गंदे क चड़ मे, कमल खलाना चाहता है,
युगो से शो षत, दबे कु चलो को, याय-स मान िदलाना चाहता है,
मौन! मानो गूंगी जनता को, आवाज़ िदलाना चाहता है,
बहर यवःथा को , मधुर गीत सुनाना चाहता है,
ज म से अंधो को, हरे- भरे बाग िदखाना चाहता है,
नोटो क थाप पे नाचती खबरांगनाओ से, ये आिशक़! वफ़ा चाहता है,
नासमझ! अबोध बालक है, चाँद धरती पे लाना चाहता है,
अपने इरादो क कँती से, समंदर पार करना चाहता है,
काली ःयाह मे रंगे तंऽ को, ेत-मन से चमकाना चाहता है,
िहमालय से वःतृत ॅ ाचार को, झाड़ू से हटाना चाहता है,
राजा हो रंक-सा रात भर, ठंड मे रोड पे कपकपाना चाहता है,
महलो का ये अिधकार होकर, झोपड़ क गुड-रोट खाना चाहता है,
ःवराज का नारा डेकर, राजवँष को ललकारना चाहता ह,
संसद क बंद-द वार मे क़ै द जनतंऽ को, चौराहे पर लाना चाहता है,
रा -ूेम के पागलपन मे, रा -िोह कहलाना चाहता है.
देखो ! ये पागल या चाहता है.
38 
 
िफर सोमनाथ पे ख़तरा है..
नाम मे भारत, काम मे भारत, िदल, ज़ुबान, ज़ बात मे भारत,
ये भारत-गौरव खंिडत करने, िफर कोई िफरंगी उतरा है.
िफर सोमनाथ पे ख़तरा है.
छोड़ो बु ु खड़क (ट वी) को तुम, अब आओ खड़क गाँव चले,
सच आँखो से ओझल होता, झूठ - झूठ का कोहरा है.
िफर सोमनाथ पे ख़तरा है.
जो स य िदखाया जाता है, वो स य सदैव नह होता,
इन स य- ूयो क सरःवती पे, लआमी का असर गहरा है.
िफर सोमनाथ पे ख़तरा है.
ये िनंदा, अपयश, आलोचन, ये भारत- गौरव क दुहाईयाँ,
ये सब ूायो जत कायबम, चेहरो के पीछे चेहरा है.
िफर सोमनाथ पे ख़तरा है.
CWG पे जब वश ्व हंसा, असमटे लूट तब मौन रहे,
नार - गौरव के ठेके दारो , ये माप-दंड तो दोहरा है.
िफर सोमनाथ पे ख़तरा है.
भाषा क सीमा वो जाने, भाषा ह जनका ॄेड-बटर,
हम कमयोगी! कत य करे, ठाने तो सम दर कतरा है.
िफर सोमनाथ पे ख़तरा है..
भूले हमसे भी बहुत हुई, पर िनयत मे अपनी खोट नह ,
शीश झुकाकर मा माँगते, मा-िनवेदन मेरा है.
िफर सोमनाथ पे ख़तरा है.
39 
 
ये खाँसी बड़े काम क है ये खाँसी
गािफल सोत को सजग करे ये, चोर क अब फाँसी है ये खाँसी.
देशी गोर से मु कराने, ये ह रानी झाँसी है ये खाँसी.
बड़ का घर मे मान बचाती, मयादा क मौसी है ये खाँसी.
ॅ पर चंड बन िगरती, भले जन क दासी है ये खाँसी.
अहंकार रावण का हरने , ये हनुमान गदा-सी है ये खाँसी.
जो अंदर वो बाहर िदखती, पारदश दपण-सी है ये खाँसी.
ये चुनाव का मु ा बन गयी, मुझको आती हाँसी है ये खाँसी.
फे कु जी! कु छ और बताओ, ये बात तो बासी है ये खाँसी.
"के जी" रण-ूण पर डटे रहो, जब तक तन मे जाँ-सी है ये खाँसी.
40 
 
ये तो होना ह था..
गाँधी गूँगे, नेह बहरे, तब भगत को फाँसी होना ह था,
धृतरा सर खे राजा ह , तो चीरहरण िफर होना ह था,
सो रहे देश के लाल अगर, भारत माँ को िफर गौरव खोना ह था,
हर तरफ क ल खाने चलते, बकरे क माँ को रोना ह था,
यह तासीर, यह तालीम थी उसक , दंगो के दाग भी खून से धोना ह था,
मन आ ख़र ऊब ह गया इन खलोनो से, स ा का खेल िघनोना ह था,
बड़ रोचक रह , पर िफ म थी, इंटरवल तो होना ह था,
मेरा अंजाम मेरे अंदाज से जुदा नह , खून का सह ,बुलबुला था, फ़ना तो होना ह था,
कब तक लाश को ढोता िफरता, जंदगी को आजमाना भी था,
म तारा, टूटा तेर खाितर, तेर मुराद को िफर पूरा होना ह था,
मेरे जाने का गम ना कर मेरे दोःत, ये बाजी थी, कु छ पाने, कु छ खोना भी था.
41 
 
हम भी चुप और तुम भी चुप...
पूण रा य का दजा दो, ये लंबी माँग हमार है,
लाओ ःवराज बापू का सपना, जनलोकपाल ज़ र है,
बल पर वोिटंग क जब बात चली,हम भी चुप और तुम भी चुप.
नार , संक पो क रेल चली, लगता भार तैयार है,
ॅ ाचार भगाना है, ये लंबी बीमार ह,
इंजे सन लगने क जब बार आई, हम भी चुप और तुम भी चुप.
ये ूदेश ूायो जत ूोमाम नह , मजबूर क मजबूर है,
दंगे देश पे दाग ह, ये दाग िमटाने ज़ र ह,
दोषी को दंिडत करने मे, हम भी चुप और तुम भी चुप.
वादे हमने भी बहुत िकए, वादे तुमको भी करने देगे,
हमने कभी कु छ नह िकया तो और को य करने दगे,
कोई जुगनू िनकला, रात उजली करने , ना कौए चुप, ना कु े चुप.
हम भी चुप और तुम भी चुप..
42 
 
ओम जय िशंदे देवा! जय िशंदे देवा!!!
होम िमिनःटर पदवी, पोलीस करे सेवा..ओमजय..
कॉ ःटेबल से लेकर, पद मु यमंऽी पाया,
क माता जी क सेवा, सेवा-फल पाया,
भए गवनर, ऊजा और गृह मंऽालय पाया. ओम जय..
आदश मे लेत िलयो, ूभु ह ला हो भार .
नह िडगे तुम तिनक ूभु!, था कोलाहल भार  . ओम जय..
कोलगेट पे शोर मचा, तुम बोफ़ोस उठा लाए,
कहा क भूलेगी जनता इसको भी, ये लंबी बीमार  . ओम जय..
दािमनी का जब रेप हुआ, तब तुम िशव- प धरा,
िद ली पोलीस से कहकर, लाठ वॉटर के नन चलवाया . ओम जय..
 
अपने िद य ान से तुमने, आतंक अ डे जाने,
RSS- भाजप भेद बखाने, जग का ॅम िमटायो . ओम जय..
कोई उ ंड-दुःसाहसी ूभु! घर तेरे प थर उछलायो,
ण भर मे तुम दजन, पोलीस-िनल बन करवायो . ओम जय..
िद ली मे िनत रेप, क ल, गुंडई नशा छायो,
मु यमंऽी सड़को पे िफर भी, पोलीस तिनक ना घबरायो,
मावा तु हे चढ़ावे, तुमरो आशीवाद पायो . ओम जय..
ूभु! आपक जय जय, तुम शासन सदा जयवंत रहो,
ये पागल बकते, बकने दो, तुम बैकुं ठ मे मःत रहो . ओम जय..
43 
 
फे कु जी, तुम बहुत पछताओगे.......
वो लालिकले से मंच सजाना,
रेल, बसो से भीड़ जुटाना,
सपने देखना और लोगो को भी िदखाना,
सच - झूठ का सब भेद िमटाना,
वो तेरा सब तरफ चाय क चौपाल लगाना,
और चाय बेचके , हवाई जहाज़ मे उड़ जाना,
धुएँ के गुबार हो, आसमान मे खो जाओगे..
वो तेरा दंगो से मुँह फे र जाना,
अटल जी का राजधम याद िदलाना,
पाट के पतामह आडवाणी का िदल दुखाना,
मुरली मनोहर को बनारस से भगाना,
के शुभाई, हरेन पां या का बेवईत जाना,
ख़ौफ़ से चुप रखना, ना माने तो िमटा देना,
दुख िदए ह और को, तो तुम कै से बच पाओगे..
गैस क बड़ क़ मत पे, मौन-ोत धरना,
अदानी से रँतो पे , साँप सूंघ जाना,
CAG क रपोट को, सा जश, झूठा कहना,
लोकायु ना लाने, कोट मे लड़ना,
सज़ा पाए "बाबू" का मंऽी रहना,
मुठभेड़ के बाद"शाह" को िसरमाथे बठाना,
ज़रा श ल तो देखो आईने मे, तुम राम-राज लाओगे ?
गैर क औरत क जासूसी मे पूर पुिलस लगाना,
वो रोिमयोिग र, वो िछछोरापन, अपने को ॄ चार बतलाना,
अपनी बीवी को छोड़ िहमालय भाग जाना,
वो करन थापर के इंटर यू से भाग जाना,
वो छ पन इंच क छाती फु लाना,
अर वंद क दहाड़ पे गुफा मे भाग जाना,
मेरे कागज के शेर, कागजॉ पे ह रह जाओगे..
44 
 
फे कु तेरे राज मे........
दागी खाक , दंगाई मंऽी, ह ॅ मःत तेरे राम-राज मे,
भाईचारा जी जाता गर, कु छ खचा होता इलाज मे,
अपनी को छोड़, गैर के पीछे, रोिमयो!, या रखा इस अंदाज मे,
करतूते ऐसी, कु छ शम करो, य अकड़ है इस आवाज़ मे,
ह जमाख़ोर यारे, तो या, सरकार चली गयी याज मे,
ये मंहगाई, उसपे र तखोर , कोढ़ हो गयी खाज मे,
कज़ा इतना, अब या वकास , सब पूंजी चली गयी याज मे,
वकास क और िमशाल कहाँ, चायवाला उड़े जहाज़ मे,
ज़रा CAG क रपोट पलट, िकतने छेद ह तेरे ताज मे,
गुण गाते िफरते जस वकास के , ढूढू तेरे घर आज मे.
45 
 
ूाइम िमिनःटर जेल म...
आधी आबाद दहशत के , साये मे डर-मर िससक रह ,
जंदा लाश क बदबू आती, तेर A.C. रेल म.
भूत ूेत बन बदला लगे , जो तेर शह पे क ल हुए,
बाबू! तेरे भी हाथ रंगे ह, दंगो के खूनी खेल म.
छोड़ अपनी नार यिभचार !, परनार क जासूसी,
ये आदत, ये िछछोरापन, फसोगे िकसी िदन मु ँकल म.
कोई अरब पित, कोई खरबपित, कोई व पित बनने िनकला,
वकास क देखो! सेल लग गयी, इन चोरो के मेल म.
फकू ज़ी! सच सच बतलाओ, ये हेिलकॉ टर कै से उड़ते ह,
चाय बेचके , गैस बेचके , या उड़ते ह तेल म.
46 
 
राजा ने िसंहासन छोड़ा है
कठपुतले को ताज िदया , परदे के पीछे से राज िकया,
कभी अबला थीं, अब व पित, और के कं धो से िशकार िकया,
तुमने छोडा तो याग क देवी , हमने छोडा तो भगोड़ा है.
स ा सुंदर को वरने को , िकसका मन रह पाता है,
इसक बाँह के मोहपाश म , हर कोई बंध जाता है,
जसको सब पाने तरस रहे , वैरागी! तूने य छोड़ा है.
खा-पी के चांडाल चौकड़ , हर चैनल पर भ क रह ,
खुद नाकारा, कु छ करने वाल को, पानी पी-पी कोस रह ,
पहचानो ये आम – राम , जद पे िशव-धनु तोडा है.
है जाित-धम पे बँटवारा, दंग क भभक आग कह ं,
कह ं गर बी , कह ं भुखमर , वकास क बंदर-बाँट कह ं,
िदल म िद ली ले, काला घोडा, देश बचाने दौड़ा है.
47 
 
बुरा ना मानो होली है
कोई रंग तो कोई गुलाल िलए, कोई काला कोई लाल िलए,
अपने रंग म रंगने िनकली, अलम तो की टोली है..
बेरंग भी अब रंगीन हुए, नीरस भी नमकीन हुए,
िदन म तारो के दशर्न, जब भाँग द ूध म घोली है..
रंग के क्या खेल हुए, काले गोर के मेल हुए,
उजले तन भी मैले िदखते, रंगो की आँख-िमचौली है..
ब चे, बूढ़े सब िमल देखो! ाचार की होली जलाते,
देश ेम की िपचकारी, घर-घर ितरंगी रंगोली है...
48 
 
खबर बेचना मेरा धंधा….
अिभ का वरदान पा, ये होिलका हुलसा रही है,
क यप के पा इशारे, ाद को झुलसा रही है,
सुन! राख हो जायेगी तूँ, उन क यप के साथ ही ,
नर प इन नारायण को, थर् क्य उकसा रही है.
खबर बेचना मेरा धंधा, मुझको भी लाभ कमाना है,
सबके जैसे, सबसे पहले, सबसे आगे जाना है,
ओ लोकतं के चौथे खम्भे! उनमे तुझमे अंतर है,
पैसे के साथ तुझे लोगो का, िव ास भी बचाना है.
49 
 
बनारस को अयो या बनाना पड़ेगा…
संत साधु बुलाओ , कारसेवा कराओ , िफर कोई ढाँचा िगराना पड़ेगा.
िवकास का हवामहल ना ठहरेगा यादा , वो पुराना पतरा ही आजमाना पड़ेगा.
बनी िकतनी रामायण राम पर , अबकी महाभारत बनाना पड़ेगा.
बहुत राम आराम तुमने िकया अब , ज़ रत है वैकुं ठ से आना पड़ेगा.
ना जाने पहुचेगी िगनती कहाँ तक , िचता की लकिड़य को जुटाना पड़ेगा.
दिरंदे ने दंगो के द तक जो दे दी , घाट को ख़ूं से नहाना पड़ेगा.
सूख से गये ह कुछ जख्म िदल के , िफर से वो काँटा चुभाना पड़ेगा.
िचंगारी ढूढो दबी राख से तुम , देश पूरा िफर से जलाना पड़ेगा.
भूख से लड़ते-लड़ते जो भूले थे अब तक , उ हे याद मज़हब िदलाना पड़ेगा.
लाश के ढेर पे बैठ कर के िफर , गीत जय का कोई गुनगुनाना पड़ेगा
50 
 
तुम क्या गये, सब सूना कर गये...
वो अहसास, वो सपने, वो खुशनुमा मंज़र क्या हुए
सब कुछ वीराना कर गये
तेरी आहट से उठता हूँ, तेरी याद से रुकता हूँ
आदमी था , कोई िखलौना कर गये
िकतने इ ज़ाम, िकतनी नफ़रत मेरी खाितर,
मेरी सारी शिख्सयत को, िघनौना कर गये
ना चैन से जीऊँ पल भर, ना मरना नसीब हो,
पागलो सा हाल!, जाने क्या जाद ू-टोना कर गये
रंज बहुत है िदल को, तेरे यूँ छोड़कर जाने का,
भले आदमी थे, मजबूिरय का िबछोना बन गये
पलके खुली की खुली ह, तेरे आने की उम्मीद मे,
लौटने का अपने, वादा जो मुझसे कर गये.
51 
 
ये तो ग़लत बात है....
राम राज्य की माला रटते, शक्ल देखकर ल ू ब ॅटते,
समाजवाद के वचन, िवकास की बंदरबाँट है.
ह जहाँ, वह की बात करेग, बहुरुिपयो से वेष धरगे,
पगड़ी को हाँ पर टोपी को ना, ये कै सा रा वाद है.
वो राज्य बंद, वो रेल रोकना, कही आगज़नी, कही तोड़फोड़,
उनका तांडव लोकतं , मेरा मौन धरना उत्पात है.
चेहरे इनके अलग भले, पर काम सभी का एक है,
िमलकर चुप रहकर देश लूटते, वे िश , के जरी अनािकर् ट है.
52 
 
काशी तुम ना पाओगे….
महादेव की नगरी मे तुम, हर-हर मोदी बोल रहे,
लयदेव के धीरज को तुम, वोट-तुला पर तौल रहे,
ि ने ी के तांडव से, अिभमानी! भ म हो जाओगे .
िकतनी खुश थी तुमको पा, ये सोच की तुमने मुझे वरा,
क्या मेरे प्यार मे कमी रही, जो भायी तुमको वडोदरा,
दो के चक्कर मे रहोगे, तो दोनो को हार जाओगे.
मेरा ेम वही पाएगा, जो मेरा, बस मेरा होगा,
मुझको ही बस प्यार करेगा, मेरा जीवन-साथी होगा,
तुम्हे तो बस रात का साथ चािहए, सुबह छोड़ जाओगे.
म काशी, सौहादर् मूितर्, भोलापन मन भाया है,
तेरी सोच वभाव अलग , कोई अलग ही तेरी माया है,
छिलए! मेरी कुं डली से, एक गुण भी ना िमला पाओगे .

Wo 49 din

  • 1.
  • 2.
    2    Index: 1. राख तुझको,पहुँचना उस पार है 2. आज ूेमवार है.. 3. जंगल म लोकतंऽ! 4. मु बई! अजब तेरा यार है. 5. आम आदमी तो आम होता है... 6. ॅ ाचार ज़ र है.. 7. ॅ क संसद मे अब नो एंश !!! 8. जब चुनाव आ जाते ह… 9. अिभम यु फसा चब यूह म... 10.ये चीज़ है पॉिलिट स 11.अजब तेरे शहर का दःतूर हो गया 12.अब समर मे उतरना होगा 13.झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ 14. या चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को.. 15.आप को चंदा कौन िदया 16.सैफई म उ सव भार है 17.वो 49 िदन, बहुत याद आएगे... 18.सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह बनाएगे 19.खच बता रहे ह िक इनकम बुलंद है.. 20.कँमीर खलोना है 21.इधर कु आ उधर खाई है 22.हाँ, म अनािकःट हूँ!! 23. नौ सौ चूहे खा ब ली हज को चली 24.अबक बार आप है 25.कांमेिसयो तुम कमाल करते हो.. 26.जब ॅ तंऽ का ॅ ूशासक…….. 27.आप तो बुरा मान गये 28.क मत तो चुकानी पड़ेगी... 29. ज़द ना करो... 30.कौन तु हारा बाप है ??? 31.म तु हे यार य दूँ??? 32.हमार कोिशश जार रहगीं 33.कमाल हो गया.. 34.के जर वाल तो पागल है 35.िफर सोमनाथ पे ख़तरा है.. 36.ये खाँसी बड़े काम क है ये खाँसी 37.ये तो होना ह था.. 38.हम भी चुप और तुम भी चुप... 39.ओम जय िशंदे देवा! जय िशंदे देवा!!! 40.फे कु जी, तुम बहुत पछताओगे....... 41.फे कु तेरे राज मे........ 42.ूाइम िमिनःटर जेल म... 43.राजा ने िसंहासन छोड़ा है 44.बुरा ना मानो होली है 45.खबर बेचना मेरा धंधा…. 46.बनारस को अयो या बनाना पड़ेगा… 47.तुम क्या गये, सब सूना कर गये... 48.ये तो ग़लत बात है....  49.काशी तुम ना पाओगे
  • 3.
    3    आपने या िकयाअर व द जी ..... जब रात गहर , पथ िदखाते, जुगनू! मुझे तुम चाँद जी, कमल खलाते सूरज कोई, भँवरे को मकरंद जी, सिदय से सूखी इस धरा को, मेघ क तुम बूँद जी, हम डूबत को कोई ितनका , आ खर उ मीद जी, तुझे ढूँढ़ता चैनल बदल, अखबार के प ने पलट जी, चाहे तुझे, चाहूँ उसे, तुझसे अलग, लगते गलत जी, देखता हूँ बस तु हे, आँख खुली ह बंद जी, बस तेर धुन, तेरा नशा, ना और मन को पसंद जी, पढ़ा CA , पर बन क व म, रच रहा हूँ छँद जी, हाल अपना पागल - सा, "आपने" या िकया अर व द जी.
  • 4.
    4    राख तुझको, पहुँचनाउस पार है हौसल के हाथ म, व ास क पतवार है, जलती िचता क लकिड़य से , नॉव अब तैयार है, आग पानी म लगा , म चीरता जाता अँधेरा, गर ना रहूँ म, राख तुझको, पहुँचना उस पार है. सच-झूठ का बाजार बंधु ! हंस - सा िचंतन करो , पीयूष भी है, जहर भी, बन देव तुम मंथन करो , "आम" ह पर नाम सुन , ह खास थर-थर कांपते, यह राघव, यह माधव, पहचान अिभन दन करो. िसर पे कफ़न ितरंगी उनको , तू दागी खाक से रोके गा ? भाड़े के काले झंड से, तूफ़ानो का ख़ मोडेगा ? िगर के ओ नरभ ी गीदड़! , तेरे घर मे शेर दहाड़ रहा, दम है तो िफर सामने आ, या कह दे हमसे ना होगा. मल के दलदल मे धसे गढ़े, अब आसमान पे थूकगे ? टुकड़ पे पलते कु े अब, या ऐरावत पे भ के गे ? हम नीलकं ठ! िसःटम मंथन कर, सारे वष को पी लगे, हो पथ बाधाएँ िसंधु-सी, हम राम! वाण से सोखेगे.
  • 5.
    5    आज ूेमवार है.. कभीम मी का, कभी पापा का, कभी दोःत का, कभी गोँत का, कभी गणेश, शंकरजी का, तो कभी शिन-मनी का वार है, पर आज तो प पू चहक उठा , आज यार का योहार है.. बाग-बगीचे भरे पड़े, देखो ूेमी-जोड़ो से, कभी पद मे बसने वाला, यार नाचता रोडो पे, नौ मह ने बाद इसके , बाल िदवस का उपहार है... हर कु े का िदन बहुत सुना, अब हर रँते का िदन होता है या यार हमारा अवसरवाद , मौको पे जगता-सोता है यार अहसास है या कोई मौसमी यापार है... इतराते इठलाते िफरते, जनक ूेयसी पास है, उदास कोई, है दूर ूेिमका, कह जार अभी तलाश है, हम तो शाद शुदा, हर िदन ह हमारा सोमवार है... ूेयसी का आिलंगन बहुत हुआ, देखो! या देश क हालत है, धम-ूेम के नाम पे नफ़रत , दंगो पे िसयासत लानत है, युवा! तेरे ूेम पे, देश का भी कु छ अिधकार है....
  • 6.
    6    जंगल म लोकतंऽ! जंगलराजबहुत रहा, अब लोकतंऽ को लायगे, कौन हो राजा, िकसक स ा, ये चुनाव बतलायगे, हुई घोषणा िफर चुनाव क , नेताओं क नींद घट , जाित ,धम के आधार पर, पशुओं क आबाद बँट , गध और कौओं क िगनती, बाक पशुओं पर भार है, उ ह लुभाने तरह-तरह के , पकवान क तैयार है, गध ने बोझ बहुत उठाया, अब ये भी दौड़ लगायेगे, कोयल तुम तो बहुत गा चुक , अब कौए कू -कू गायगे, ूकृ ित के अ याय पर कभी पुरख पे ऊँ गली उठ , जानवर को भी मानव-सा , दजा देने क पहल उठ , घोड़े बैठे घास खा रहे, कोयल अमराई म मौन, गध और कौओं क चाँद , ये भीड़तंऽ है अफलातून.
  • 7.
    7    मु बई! अजबतेरा यार है. तुझको बाँह म भरने को, हर सपने का िदल मचलाता, मोिहनी! तेरा स मोहन , पास बुलाता , म बंध जाता, र मायानगर ! गजब तेरा मायाजाल है.... भीड़-भाड़ बस भाग-दौड़, घड क सुई से करता होड़, चलना ह बस एक येय, वैरागी! सब बंधन तोड़, आदमी जैसे बनता औजार है... ये ऊं ची-ऊं ची इमारत, ये समंदर क शो खयाँ, ये शेयर बाज़ार क सु खयां, ये िसतार क सरगिमयाँ, सब खुशफहिमय का संसार है... सब रँते-नाते अपनापन, खुिशयाँ, बेिफब ,पागलपन, ठिगनी!! कु छ देकर तूँ , िकतना कु छ ले लेती है, कागज़ के गुलाब और काँट का उपहार है...
  • 8.
    8    आम आदमी तोआम होता है... कभी गुःसा तो यार कभी,सच-झूठ का कारोबार कभी , प रवार और रोजी-रोट , इनका सारा संसार यह , आजकल ख़बर म, ूायः गुमनाम ह होता है.... कु छ गलती, कु छ किमयां तो, सब सवा अरब म पाओगे, गर ये नह ं,ऐसा नह ं तो, और बेहतर कहाँ से लाओगे? यहाँ "आम" ह िमलगे बाबूजी! "राम" तो बैकु ठ म होता है.... कोई बनावट यहाँ नह ं, जैसे िदखते बस वैसे ह, हम ऐसे-वैसे-जैसे ह, पर बलकु ल तेरे जैसे ह, हमारे दाग िदखते य ह, ये हमपे इ जाम है.... ये अलग लोग, ये अलग सोच, कोई अलग ह इनका देश रहा, गूंगी इन महल क द वार,अब कहने-सुनने या शेष रहा, अपन का दद बाँटना तो, अपन का काम होता है....
  • 9.
    9    ॅ ाचार ज़र है.. नादान है जो शोर मचाते, ॅ ाचार िमटाएगे, ये ज़ रया गर चला गया, तो फं ड कहाँ से आएगे, कै से ये भीड़, सभाएँ होगी, व ापन लोक-लुभावन होगे, ःवस-खाते, तबा, तामझाम, बंगला, गाड़ , चमचे होगे, कोई शौक नह मजबूर है. ॅ ाचार ज़ र है.....   खेती, पानी, राशन,िश ा, ःवाः य, सुर ा, रोज़गार, रोड़े, रेल, पुल, ःकू ल , उ ोग, धंधे, शेयर बाज़ार, इन सब कामो को करने का, इसके कं धो पर ह भार , कह िमठाई, कह दलाली, कह तो है ये िश ाचार, वकास क हर एक कहानी, इसके बना अधूर है. ॅ ाचार ज़ र है.....
  • 10.
    10    ॅ क संसदमे अब नो एंश !!! मुखड़े छोड़ो, मु ा पकड़ो, और मु ा बस ॅ ाचार है, मुखड़े तो आते-जाते ह, झूठा इनका यार है, ॅ ाचार मु होगी, अब सार कं श . ॅ क संसद मे अब नो एंश !!! गर बदला चेहरा, पर तंऽ नह , तो हािसल या कर पाओगे, पाँच साल का इंतज़ार, पल-पल िफर पछताओगे, अरे! मनमोहन- से ईमानदार क , यहाँ डूब गयी सार िडमी. ॅ क संसद मे अब नो एंश !!! ना भेदभाव पद,धन,बल का , सबको याय, स मान िमले, है सरल वकास क प रभाषा, जहाँ सबको अवसर समान िमले, फे कू जी! अब बस ! वकास के , चाँद तार क बब . ॅ क संसद मे अब नो एंश !!! िकसको या िमलता, हम या पाते, राजा कौन, कौन सरकार, छोड़ो ये सब, आओ िमलकर, एक बात को हो तैयार, अपनी वोट से कोई ॅ , ना पहुचे िद ली. ॅ क संसद मे अब नो एंश !!!
  • 11.
    11    जब चुनाव आजाते ह… तेरे आने क आहट सुन, पतझड़ सावन हो जाते ह, ईद का चाँद जमीन पे उतरा , ूायः िक़ःसो मे ह सुन पाते ह, साँप बल से बाहर आते, िगरिगट के रंग बदल जाते ह, जनके चरण को खोजा अब तक, उनको चरण मे पाते ह. या िकया और या कर दगे, लंबी फे ह रःत सुनाते ह, हाथ मे इनके चंदा, सूरज, िदन मे तारे िदखलाते ह, सबसे लेकर कु छ को देकर, दानवीर कहलाते ह, चम कार है इस चुनाव का, कं स कृ ंण बन जाते ह. चमच क तो चाँद होती, भूखे बरयानी खाते ह, दा , नोट क वषा से, वो समाजवाद फै लाते ह, हम वह , वकास के व ापन, ट वी वालो को चमकाते ह, िधक ये जनता! िधक ये जनता, नेता िफर जीत के आ जाते ह.      
  • 12.
    12    अिभम यु फसाचब यूह म... सुन ललकार शऽुओ क , इसका मन भी है मचलाया, लाज बचाने देश क अपने, बालक ने है श उठाया, ये सा जश है षडयंऽ कोई, सब बड़े-बडो ने समझाया, साहस , दुःसाहस क पतली, रेखा को इसने आज िमटाया, ूाणो का भय पीछे छू टा, संक प एक बस शेष रहे, कु ल का गौरव ना खोने दूँगा , जब तक अंितम साँस रहे, देखो! िघरा शऽुओं मे, है लहुलुहान पर लड़ता जाता, कोई मारे भाला सीने मे, कोई पीछे से छु र भ कता, चोतरफ़ा से बाणो क वषा, सब कवच भेदती जाती है, ूितपल मृ यु-सुंदर अपने, पास खींचती जाती है, तुम आज मूकदश ! भ वंय को, या जबाब दे पाओगे, युग -युग तक या िफर, कोई अिभम यु पा जाओगे, समय शेष है उठो वीर!, आओ िमलकर श उठाएँ, लड़े ूाण जब तक तन मे, एक नया इितहास रचाएँ.             
  • 13.
    13      ये चीज़ हैपॉिलिट स ये चीज़ है पॉिलिट स क चड़ कािलख का खेल हुए, सब गोरे काले िम स, क पल, सिचन सब आउट दनादन भ जी मारे िस स, बन-पूंजी का िनवेश बड़े िदन रात ना कोई रःक, हार-जीत बस आँख-िमचोली, हर लेयर ह है िफ स, व ान ग णत सब फै ल हुई, ना चले इकॉनोिम स, ये कला बड़ आसान िक़ इसमे, बस करना सबके बूट िल स , िचपक रहो कु स से तुम, चाहे िकतने खाओ िक स, मेहनत स चाई दूर हटो , है ःवागत डट िश स, "आप" आए व ास जगा, बदलेगी ये पॉिलिट स, ना नज़र लगे फलो-फू लो, यह हमार वश- वश. ये चीज़ है पॉिलिट स ये चीज़ है पॉिलिट स....
  • 14.
    14    अजब तेरे शहरका दःतूर हो गया लुटेरे शहर के , ईमान के , मंिदर म बैठे पुज रहे, मेरा एक चोर को बस चोर कहना , कसूर हो गया. चंदा , सूरज , प रयाँ ले लो, लो इंिधनुष के रंग सभी, सपने बेचते - बेचते वो , हक कत से दूर हो गया. ये उसूल या दगे , िसवा गर बी , गुमनामी के , चायवाला ईमान बेचके , मशहूर हो गया. कोई मारता ना मरता , ये फलसफा पढ़के , खून के खेल को योगी, मंजूर हो गया. दौलत क चमक है, या पॉिलश का हुनर, कांच का मामूली टुकड़ा, आज कोिहनूर हो गया. वो सेहरा, वो शहनाई, वो जीत-ओ-ज का मंजर, "आप" क नजर या लगी, सपना चूर हो गया.               
  • 15.
    15      अब समर मेउतरना होगा या जीवन के उ ेँय यह , खाना पीना और सो जाना, प रवार, पढ़ाई, रोज़गार, अपनी दुिनया मे खो जाना, देश क चचा, देश क िचंता, देशूेम बस मन-रंजन, देश क दशा बदलने िमऽो!, सोच क िदशा को बदलना होगा l अब समर.. मूऽ वसजन बहुत हुआ पु !, ूाण-सृजन अब करना होगा, लाल लहू क गम से अब, िहमिग र को भी बहना होगा, धृतरा सर खे राजा ह, है हर नु कड़ पर चीर हरण, हाथ मे चब सुदशन ले, अब तु हे कृ ंण बनना होगा l अब समर.. अभी नह तो कभी नह , इस युग- ण क पहचान करो, ये रा -सृजन का पथ दुंकर, तुम भी कु छ ौम-दान करो, जीवन का मू य चुकाने का, यह ःव णम अवसर आया है, इितहास रचे ह बहुत ने , तुझे भ वंय रचना होगा l अब समर..
  • 16.
    16    झाड़ू चलाओ ,बेईमान भगाओ झाड़ू हर घर म रहती , आम खास म भेद ना करती, है िदखने म सहज-सरल पर, कू ड़े पर बजली सी िगरती, ये बड़े काम क चीज है बाबू! तुम भी इसको घर लाओ. झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ ऊँ चे छ पर क धूल ह या मकड़जाल क चूल ह , चले िनरंतर बना थके , चाहे िकतनी भी ूितकू ल ह , ये समाजवाद क पाठशाला, कु छ समझो कु छ समझाओ. झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ घर भरा गंदगी बदबू से, म छर बीमार फै लाएं, अपने घर को सुथरा करने, है इ तजार, कब मेहतर आय, उठो अमु! आलस छोडो, झाड़ू पकड़ो ना शमाओ. झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ ये बँधी हुयी पर सधी हुयी, िकसी कोने म पड़ रहे, कत य के पथ पर बढ़ती, पल-पल अपनी मौत सहे, खुद िमटकर और क सेवा, झाड़ू का स देश सुनाओ. झाड़ू चलाओ , बेईमान भगाओ
  • 17.
    17    या चौरासी साललगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को.. लाख चौरासी योिन मे, दंगो क फाइल भटक रह , दजनो किमशन, जाँच सिमित, जाँच कहा पर अटक रह , िकतने किमशन और लगेगे, इस एक घटना क जाँच को. या चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को.. देश के िदल िद ली मे ह तो, हझतो नरसंहार हुआ, या औरत या ब चे, देखो! लाश का अंबार हुआ, और िकतने सबूत लगेगे, सा बत करने पाप को. या चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को.. क ल हज़ार खुलेआम, पर काितल ना एक िमला, िधक! याय और ये याय यःथा, अंधे- बहरो का कािफला, लगे तीस साल और िकतने, माइ लॉड!! लगेगे आपको. या चौरासी साल लगेगे, चौरासी के इंसाफ़ को..
  • 18.
    18    आप को चंदाकौन िदया आतंकवाद, न सल, बीमार , भुखमर , अिश ा, रोज़गार, मिहला सुर ा, सांूदाियकता, समःयाओ का है अंबार, पर सबसे िचंता का ूश ्न आज िक, आप को चंदा कौन िदया. 2G, CWG, आदश, कोल, मनरेगा, वासा, बोफोस , इन घोटालो क जॉच ज़ र , जार है जार ह रहेगी, पर सबसे पहले ये जाँच ज़ र , आप को चंदा कौन िदया. देश- वदेश से काला पीला, और ने अरबो हिथयाया, ज मिदन िग ट, कह पाट फं ड, िकसी ने हझता नाम बताया, अजी! अथ यःथा ख़तरे मे िक , आप को चंदा कौन िदया. लाख के स कोट मे सड़ रहे, याय माँगते जूते िघस रहे, कु छ अपने हालत के हाथो, कु छ वक ल क फ स से मर रहे, पर पहले िनणय ये होना है िक, आप को चंदा कौन िदया.
  • 19.
    19    सैफई म उसव भार है सीबीआई से िमली लीन िचट, पता- पुऽ खूबई हषाये, ध यवाद देकर िद ली को , ली लखनऊ क सवार है. सैफई म.. अिधक आय तकलीफदेह , अफसरो ! खच का यतन करो, राज काज से ऊबा मन , अब मनोरंजन क बार है. सैफई म.. महलो से है मंच सजाये , मु बई से अिभनेता आये, छ पन भोग पकवान बनवाये , जोर क तैयार है. सैफई म.. सैफई ःवग-नगर सी हो रह , सोम-सुरा क वषा हो रह , उवशी के ठुमक से गम िफ़ज़ा , ज़ीरो िडमी पे भार है. सैफई म.. लंदन , पे रस सब फे ल हुए, नोट के या खेल हुए, चकाच धती चमक यहाँ, UP सार अंिधयार है. सैफई म.. दंग से बेघर डरे हुए, लोगो का या हाल िकया, 35 ब चो क मौत क वजह, ठ ड नह ं सरकार है. सैफई म.. पर कु छ को मजा नह ं आया, देशी क चर नह ं भाया, उनका दजन भर देश का, ःटड टूर अभी जार है. सैफई म.. बेटा नेता, बहुएँ नेता, भाई और भतीजे नेता, समाजवाद के डॉ टरो को, खानदानी बीमार है. सैफई म..
  • 20.
    20    वो 49 िदन,बहुत याद आएगे... वो जनता क मज़ पे स ा मे आना, आम आदमी का आसमान छू जाना, वो मेशो से तेरा, ताजपोशी को आना, वो राम-लीला मैदान का मंज़र सुहाना, वो सपनो क दुिनया हक़ कत मे आना, वो आँखो क नमी, ह ठ का मुःकु राना, कभी तो हंसाएँगे , कभी तो लाएँगे. वो 49 िदन.. ग़र बो का बजली और पानी पा जाना, वो अफ़सर , लालब ी का गुल हो जाना, वो ॅ के कु नबे मे हड़कं प लाना, वो सद क रात मे रोडो पे सोना, वो ज़द तेर , कलयुग मे, राम-राज लाना, छू कर जड़-चेतना को, अिह या बनाना, मसीहा तेरे क रँमाई नुःखे , नीम हक म भी अपनायेगे. वो 49 िदन.. वो कॉंमेस भाजप का आपस मे िमलना, रंगे हाथ पे कमल कागज के खलना, उसूल पे तेरा, महल छोड़ जाना, व ास िकतना िक, बहुमत से आना, ना भूले ना भूलेगे तेरा जमाना, हरेक ह ठ पे है , आज तेरा तराना, इंतज़ार है, बेकरार सब, "आप' कब आएगे. वो 49 िदन.. सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह बनाएगे म नह िकसी देवालय मे, ना ढूढो मुझे िहमालय मे,
  • 21.
    21    म बसता हरतृण - कण मे, ना खोजो वन- वेद-पुराणो मे, राम! तेर सब बाते स ची, पर सच से हम या पाएगे. सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह बनाएगे. म रहा स य के साथ सदा, बस याय-धम पथ अपनाए, मयादा पु षो म कहते, ूाण जाए पर वचन ना जाए, मेर झूठ सौगंधे खाकर, या रामभ कहलाएगे. सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह बनाएगे. म ूेम क जी वत ूितमा, मनु-पशु मे भेद नह जाना, मेरे नाम पे बंद करो अब, मेरे ब चो मे जहर बाँटना, राम को छलने वाले बोलो! राम-रा य या लाएगे. सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह बनाएगे. नह ज मु-म ं अवतार ध , कभी मथुरा कभी अयो या मे, मंिदर के शोल ने बदली, जंदा कौमे मरघट मे, नह चािहये मंिदर हम, वैकुं ठ मे ह वौाम करेगे. सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह बनाएगे. बहुत हुआ अब राम! सुनो सच, तू शौक नह मजबूर है, ये चुनाव-सागर है गहरा, तेरे नाम क नाव ज़ र है, एक बार स ा पाने दो, तुमको िफर सतयुग मे पहुचाएगे. सौगंध राम क खाते ह, हम मंिदर वह बनाएगे.
  • 22.
    22    खच बता रहेह िक इनकम बुलंद है.. ये लालिकले से मंच सजे, ये रेल-बसो का तामझाम, लाख क लाई भीड़, और खाने पीने के इंतज़ाम, पूछो! ये शो ूायो जत करने वाला, कौन अमीरचंद है? खच बता.. प पू पापा बनने िनकले, नयी सोच नयी बात है, बासी कड़ उबाल मारती, रॅटा रटाया पाठ है, 500 करोड़ लगेगे सा बत करने , िक प पू अ लमंद है? खच बता.. कु े- सा जो काम कराकर, तनउवाह बाँटने को रोएंगे, माँगे-माँगे भीख ना देते, बनमांगे य चंदा देगे? खुली ितजोर आपक खाितर, य हमको मु ठ बंद है? खच बता.. रोट , कपड़ा, मकान क िचंता, मे जीवन को िघसता जाता, कभी मंद , कभी महगाई से, आम आदमी पसता जाता, पर इनका धंधा तेज वश ्व क , अथ यवःथा मंद है. खच बता.. हम देशी, देशी अंदाज हमारा, देशी अपना संसार है, पर वदेशी कं ध पे इनके , मेक- ओवर का भार है, ना आम, ये ऊँ चे लोग ह बाबू!! ऊँ ची इनक पसंद है. खच बता..
  • 23.
    23    कँमीर खलोना है जैसािदल चाहा वैसा खेला, चाबी से ह चलना है. आज़ाद से इसके िहःसे मे, बस रोना-धोना है. कँमीर तो भगा िदए, अब जनमत संमह होना है. ःपेशल ःटेटस का मतलब, या सौतेला होना है. अपनी सेना बबर िदखती, जय-जय आतंक सेना है. है ःवग! इसे हर रात मगर, डर के साये मे सोना है. भर जहर अलगाववाद का, स ा का खेल िघनोना है. भारत ना जाने दद तेरा, बस नेताओं ने जाना है. अरे इनक भी तकलीफ़ वह , जो बाक भारत का रोना है. कँमीर तुझे अब िनणय करना, पाना या बस खोना है. बनना है गुजरात तुझे, या तािलबान िफर होना है. कँमीर खलोना है.
  • 24.
    24    इधर कु आउधर खाई है बजा बगुल, आरंभ यु , वीरो ने श सभाले है, दोनो सेनाए सजी हुई, िनणय क घड़ अब आई है. कह तो अनुभव क बरसात, कह दुहाई यौवन क , कोई वकास क तान छेड़ता, कह सांूदाियकता छाई है. या िकया और या कर देगे, ऊँ चे मंच से गरज रहे, दोनो ने अनिगन वाद क , बन-डोर पतंग उड़ाई है. कोई बालक ौंगार कर रहा, पुरख क परछाई मे, िकसी ने औरत क जासूसी मे, सार पोलीस लगाई है. दशक गये पर दोनो से, दंगो के दाग नह जाते, करोड़ के इंपोटड पाउडर से, प पू-फे कू क पुताई है. सकु नी बैठे ह सजे धजे, कह ॅ क भरमार है, 2G, कोल, आदश,CWG, कोई ताबूत, तहलका लाई है. मन दु वधा मे ःत ध शू य, ःमृितय मे खो जाता है, िकस और जाऊं या ठहर जाऊं , इधर कु आ उधर खाई है. दुभा य आज सार निदयो को, इन दो सागर मे ह िमलना, पर उ मीदो के घुड़सवार ने, हाथी, साइिकल भी चलाई है. एक दल का बहुमत पा जाना, बस िमथक, नह स चाई है, करो भरोसा आज आप पर, ये अ छाई क लड़ाई है. मत सोचो! मेहनत बेकार जाएगी, आप कहा तक पहुँच पाएगी, पग-पग, पल-पल बढ़के ह तो, सबने मं ज़ल पाई है.  
  • 25.
    25    हाँ, म अनािकःटहूँ!! अबलाओं के आँसू से, िद ली का िदल जब सुख हो रहा, गुिड़या, दािमनी के िक़ःसो से, सब देश शम मे डूब रहा, पुिलस ूशासन मूक-बिधर, दुशासन बेखौफ़ खड़े, चीर-िोपद लूट जाने दूं , ना राजा म धृतरा हूँ. हाँ, म अनािकःट हूँ!! जन-सेवा ह रा धम, क़ानून, याय, सं वधान है, लोकतंऽ का ूाण यह , ये ह भारत िनमाण है, जन-सेवा से वमुख खड़ा, वो तंऽ ॅ , सरकार िनक मी, जन-सेवा के नूतन पथ सृजता, कोई कहे पथ-ॅ हूँ. हाँ, म अनािकःट हूँ!! ज़द है जब तक ूाण रहे, जन-िहत मे संघष क गा. संसद मे कभी सड़क पे आके , ॅ ो!! तुम पर वार क गा, पद लोभी होगे और कोई, सरकार िगरे तो िगर जाए, िसर नह झुका है, नह झुके गा, हाँ! म ज दु हूँ.
  • 26.
    26    नौ सौ चूहेखा ब ली हज को चली अब तक जो पैसे-पॉवर क , आँखो पे प ट बाँधे थे, िद ली क जनता क दहाड़ से, उन अंधो क आँख खुली. जनता हा-हाकार मचाती, कानो मे जूँ भी ना रगती, इन बहर सरकारो मे, जनता-दरबार क सेल चली. जंग जीत महलो मे सोते, 5 साल िफर कौन ूजा, इन "ग जनी" सरकारो को, अब याद आए पानी- बजली. कोई टोल- बूथ है तोड़ रहा, कह आ म- दाह क है धमक , कह पे धरना, कह ूदशन, जन-सेवा क अब होड़ चली. जन क नीित, जन का नेता, सभी दल मे ख़ािलबली, मॅफलर, ःवेटर सपने मे िदखते, खाद क पतलून खुली. ना कोई सभा का तामझाम, ना कोई मेक-ओवर का खचा, मीिडया मे अपनी ःटोर , फोकट मे िदन-रात चली. स ा क दलाली से अपनी, जो रोज़ी-रोट चला रहे, अब "ॅ ाचार िमटाएगे", बोले कौआ कोयल बोली है. आप-जाप क माला रॅट रहे, सब जन देखादेखी कर रहे. झाड़ू पहुचेगी संसद मे, ये चचा है गली-गली.
  • 27.
    27    अबक बार आपहै   हम युवा ह अनुभवह न सह , कु छ तौर-तर के अलग सह , ज़ुबान हमार त ख़ सह , पर िनयत हमार साफ है. अबक बार .. ॅ ाचार जड़ तक फै ला, बड़े-बडो का मन है डोला.. सार उलझन का सबब यह , सब तकलीफो का बाप है. अबक बार .. रावण एक, अनेक प मे, सीताओ को छलने आया, सावधान! है वेष के शर , पर चलता िफरता पाप है. अबक बार .. बजली राशन पुिलस ूशासन, िश ा रोज़गार िनमाण, इसक हद से कोई ना छू टा, या यूपी या गुजरात है. अबक बार .. ऊँ चे मंचो से ःवराज के , लैशन लाख को पढ़ा रहे, ूथम पं मे येिदयुर पा, बंगा , बाबूराम ह. अबक बार .. जनता के मु े धूल खा रहे, नाम का ह धमाल है, जय- जयकार कह ं राहुल, कह नमो-नमो का जाप है. अबक बार .. आम आदमी खूँटे पे पूरे, तंऽ मे ॅ ाचार है, या फ़क कौन है चोर, कौन िफर, चोरो का सरदार है. अबक बार .. दोनो ने दशको राज िकया, एक िद ली एक गुजरात िलया, जनता जैसी वैसी ह रह , हुए VVIP आप है. अबक बार .. लोकतंऽ का समर सामने, तीन माह बस शेष ह.. आज "आप" को सा बत करना, हममे भी कु छ बात है. अबक बार .. इक दल का बहुमत पा जाना, सरकार बनाना सपना है.. गठबंधन युग क स चाई, माने ना माने आप ह. अबक बार .. है ल ्य दूर ये शंका छोड़ो , बस "पचास" का यतन करो.. लालिकले से गजगी झाड़ू, ई र अपने साथ है. अबक बार ..
  • 28.
    28    कांमेिसयो तुम कमालकरते हो.. िकतना लूटा िकतना खाया, इन पछले पंिह साल मे, तुमको पाकर या- या खोया, इन पछले पंिह साल मे, थोड़ा आराम- वराम करो!! िद ली के जनमत का स मान करो!! पंिह िदन क सरकार से, िकतने सवाल करते हो. कांमेिसयो तुम कमाल करते हो. लुट रह अःमते खुले-आम, चौतरफ़ा जंगलराज है, जनिहत मे रोड़ पर राजा, लोकत ऽ शमसार है, पुिलस-ूशासन क सब चाबी, खुद क जेबो मे रखकर, दािनश मिहला का रेप यो हुआ? हमसे सवाल करते हो. कांमेिसयो तुम कमाल करते हो. बन माँगे बना बताए ह , बन-शत समथन भेज िदया ललकारा अपने वचन िनभाने, अःवीकृ ित को "कायर" इ ज़ाम िदया जन-मत रखने िनज-मन मारा, वीरो-वत चुनौती ःवीकार िकया अब धूल हट CWG फाइल से, इतनी हलचल, इतना यो डरते हो? कांमेिसयो तुम कमाल करते हो.
  • 29.
    29    जब ॅ तंऽका ॅ ूशासक…….. जब ॅ तंऽ का ॅ ूशासक, सब हदे पार कर जाता है, कभी दुशासन, कभी क स बन चीर ूजा का हर जाता है, रावण एक अनेक मुखो से, जनता को छलता जाता है, तब देव कभी तो कृ ंण, राम , अर वंद कभी बन आ जाता है. िदन-रात िघसे तब वरला कोई, IIT, IRS बन पाता है, िकतनी आँखो के िकतने सपने, स मुख अपने पाता है, पद का तवा, माल-मलाई, मधुमय भ वष ्य ललचाता है, पर भारत माँ क क ण - कराह सुन, व ल िनज-मन को पाता है, अपनो क आशाओ, पथ-बाधाओं को, जो वीर! लाँघता जाता है. एक रा बस एक येय, सवःव यौछावर कर जाता है, िनंदा- ःतुित, यश- आलोचन से, दूर िनकलता जाता है, याग, तपःया, िढता से जो, पग-पग बढ़ता जाता है, खुद को खुद मे पघलाये, तब कोई अर वंद बन पता है.
  • 30.
    30    आप तो बुरामान गये चेहरा या देखा अपना, जनाब!आईने से रार ठIन गये. तःवीर मेर देख बड़बड़ाते ह, हुजूर क असिलयत जो हम जान गये. एक सवाल चंदे का या पूछा, तोप-तलवार हम पे तान गये. ठहरा क ल का मंज़र इन आँखो मे, एक अरसा हुआ वो इंसान गये. ये नफ़रत, ये सौतेलापन यो है, हम भी उसी मा क संतान हुए. लहू से खींचते िफरते लक रे, देशूेमी हो यI तािलबान हुए. ये दौलत ये शान-ओ-शौकत, सब बेकार है, ईमान गये. नाम था, कभी पहचान भी थी, या हुआ क आदमी सामान हुए दद ह दद है हर िकःसे मे, िसतमगर ! या तेरे अहसान हुए. हालात यूँ िकए पैदा नाखुदा ने मेरे, जंदगी मु ँकल, ज़हर आसान हुए. तर क के तेरे चच सब तरफ, िमला बस उनको, जन पर आप मेहरबान हुए. सौदागर!अलग पहचान तेर हर गली-मोह ले मे, कह शैतान कह आप भगवान हुए
  • 31.
    31    क मत तोचुकानी पड़ेगी... गाँधी जैसो ने अपमान सहे, मंडेला दशको जेल रहे, भगतिसंह फाँसी पे झूले, बोस देश से दूर रहे, तुम कौन? स य पे, ह रशचंद को, यहाँ ग गवाँनी पड़ेगी. मत वचिलत हो, यहाँ बड़े-बड़ ने, गाली-गोली खाई ह, देश,स य के महाय मे, अपनी आहूती चढ़ाई है, काजल क कोठर मे आए हो, तो कु छ कािलख भी लगवानी पड़ेगी. राजनीित कोई गहरा दलदल, बन-डूबे पार उतरना मु ँकल, थके अके ला, छायाएँ छल, बाधाएँ पथ रोक पल-पल, लआमी कमल हाथ ले पथ मे, नाना- प मे छेड़खानी करेगी. कमयोगी! तेर पार , कई शतक पर भार होगी, नायक! तेर ये लघुकथा, कई सुपरिहट से यार होगी, मृ यु पे जो ज मनाती, या सुंदर उस सरकार क जंदगानी रहेगी.
  • 32.
    32    ज़द ना करो... येजन-सेवा घरबार छोड़, घड़ क सुई से करते होड़, गये चुनाव, होश मे आओ, अब छोड़ो भी ये भागदौड़, पाँच साल आराम करो. ज़द ना करो… राजयोग बड़े पु य से पाते, ूभु क इ छा का मान करो, बेिफ़ब रहो! स ा-सुंदर के , अधर का रस पान करो, प लक को राम-राम करो. ज़द ना करो... राजा होकर खाक छानते, य िद ली क गिलय क , औरो से सीखो, य खाते, रातो को मार सिदय क , राजा हो राजा से काम करो. ज़द ना करो... वलेन (नेता) के रोल मे हो, ह रो का ना काम करो, अपने पागलपन से पूर , बरादर को ना बदनाम करो, कौओं मे बैठो तो कांव-कांव करो. ज़द ना करो.... सब खाते तो तुम भी खाओ, य ? औरो को नज़र लगाते हो, और का अरे! हक़ छ नकर, बोलो तुम या पाते हो, कभी चोर क दुआएँ भी ःवीकार करो. ज़द ना करो....
  • 33.
    33    कौन तु हाराबाप है ??? अख़बार का बकना बहुत सुना , अब ख़बरे बेची जाती ह, लाभ-हािन से इस कठपुतली क , अब डोरे खीची जाती है, कौन खड़ा पद के पीछे, िकसका ये आलाप है ??? कौन तु हारा बाप है ???. सनी के कपड़े, सलमान के लॅफडे, कह पे सास बहू के झगड़े, नाम खबर का, ना खबर नाम क , बेहूदा कॉमेड के तड़के , लोकतंऽ का ःतंभ है या लोकतंऽ पे ौाप है??? कौन तु हारा बाप है??? अपना यायालय, खुद ह जज, खुद के सबूत, खुद क दलील, बन शायल, झट-पट इंसाफ़, ना कोई गवाह ना कोई वक ल, ओ च रऽ-सिटिफके ट दाता! झाँक िगरेबान, तूँ खुद िकसका पाप है??? कौन तु हारा बाप है??? तुम हो कौन? जो ू पूछते, ये पावर बस हमने पाई है सच-झूठ से छलती जन-मन को, अिभय क दुहाई है ओर को िहटलर कहने वाली, तू ह स ची खाप है??? कौन तु हारा बाप है???
  • 34.
    34    म तु हेयार य दूँ??? या बोलो तुम दे पाओगे, जीवन के ऐश-ओ-आराम, बँगला, गाड़ , पया, तबा, और मेरे अनिगन शौक तमाम, अपने सपनो का संसार तु हे य दूँ??? म तु हे.. माना हूँ म यार क देवी, यार बाँटना मेरा काम, सारे लआमीचंद ह पाते, मेर बाह मे वौाम, अरे फट चर! तुझे अपने अधर क पुकार य दूँ??? म तु हे.. म मीिडया बदनाम सह , तूँ अ छाई का अवतार सह , ये कलयुग है राम! यहाँ, नामुमिकन है सीताएँ िमलना, तेर नेक िनयत पे, अपनी िनयती य वार दूँ??? म तु हे.. ख़याल जाने दे, मेरा साथ पाने, संग मेरे घर बसाने का, मेरा शौक, मेरा पेशा है, सबके संग वफ़ा िनभाने का, बस तुझे ह खुशखब रय का प रवार य दूं??? म तु हे..    
  • 35.
    35    हमार कोिशश जाररहगीं अब पा ह गये हो कु स , जो जनता क नादानी से, चैन ना पाओगे पल को, ये ऊँ ट-सी सवार रहेगी. िकतने भी तुम काम करो, बदनाम तु हे हम कर देगे, हमारे हर- एक क कािलख, तेर सार सफे द पे भार पड़ेगी. चले त ऽ को चंगा करने, हमार रोज़ी-रोट छलने, सेहत बगड़ जाएगी बाबू!, लंबी अपनी बीमार चलेगी. तुम हो कौन, कहाँ से आए, स ा के गुण ना तुमने पाए, ये स ा हम दो क जो , कभी उनक कभी अपनी बार रहेगी. कभी सोमनाथ, कभी िससोिदया, कभी भूषण, राखी पर थुके गे, िद ली आपके साथ सह , पर मीिडया सार हमार रहेगी. हमने दशको मे नह िकया, वो चंद िदन मे कर डाला, इस रझतार से कब तक हमको , दफ़नाने क तैयार चलेगी. तु हे िगराना शौक नह , मजबूर वजूद बचाने क , जंदगी क ये ज ोजहद, जार है जार ह रहेगी.
  • 36.
    36    कमाल हो गया.. जायज़खरब क कजमाफ , साइिकल, लॅपटॉप, राशन, अपने गुण गाते व ापन , वो वोटो पे बॅटते आर ण, ग़र ब ने मुझत पानी या पया, शोर है, देश कगाल हो गया. वकास क दौड़ मे फे कू ! देखो, िकतने तुमसे आगे ह, कु पोषण, अिश ा, र तखोर , कु त के क चे धागे ह, िद ली का जाप करते-करते, गुजरात का ख़याल खो गया. अपना एक वभाग बता जहाँ, बन-िदए काम हो पाता है, गर, दूध गणेश नह पीते, तो दूध कहाँ िफर जाता है, चायवाला हेली-का टर मे कै से, बड़ा सवाल हो गया. जैनो का था िगरनार कभी, अब दशन को मोहताज हुए, डर के साए मे कौमे ह, औरंगजेब के राज हुए, तेरा शहर, िदल का ग़र ब, कागज पे खुशहाल हो गया.
  • 37.
    37    के जर वालतो पागल है देखो ! ये पागल या चाहता है. सिदयो से सु चेतना को, िनज ास से जगाना चाहता है, घोर अमावस घना ितिमर, िनज-र जला िमटाना चाहता है, धम जाित के दो-छोरो को, ूेम-ःनेह से िमलाना चाहता है, राजनीित के गंदे क चड़ मे, कमल खलाना चाहता है, युगो से शो षत, दबे कु चलो को, याय-स मान िदलाना चाहता है, मौन! मानो गूंगी जनता को, आवाज़ िदलाना चाहता है, बहर यवःथा को , मधुर गीत सुनाना चाहता है, ज म से अंधो को, हरे- भरे बाग िदखाना चाहता है, नोटो क थाप पे नाचती खबरांगनाओ से, ये आिशक़! वफ़ा चाहता है, नासमझ! अबोध बालक है, चाँद धरती पे लाना चाहता है, अपने इरादो क कँती से, समंदर पार करना चाहता है, काली ःयाह मे रंगे तंऽ को, ेत-मन से चमकाना चाहता है, िहमालय से वःतृत ॅ ाचार को, झाड़ू से हटाना चाहता है, राजा हो रंक-सा रात भर, ठंड मे रोड पे कपकपाना चाहता है, महलो का ये अिधकार होकर, झोपड़ क गुड-रोट खाना चाहता है, ःवराज का नारा डेकर, राजवँष को ललकारना चाहता ह, संसद क बंद-द वार मे क़ै द जनतंऽ को, चौराहे पर लाना चाहता है, रा -ूेम के पागलपन मे, रा -िोह कहलाना चाहता है. देखो ! ये पागल या चाहता है.
  • 38.
    38    िफर सोमनाथ पेख़तरा है.. नाम मे भारत, काम मे भारत, िदल, ज़ुबान, ज़ बात मे भारत, ये भारत-गौरव खंिडत करने, िफर कोई िफरंगी उतरा है. िफर सोमनाथ पे ख़तरा है. छोड़ो बु ु खड़क (ट वी) को तुम, अब आओ खड़क गाँव चले, सच आँखो से ओझल होता, झूठ - झूठ का कोहरा है. िफर सोमनाथ पे ख़तरा है. जो स य िदखाया जाता है, वो स य सदैव नह होता, इन स य- ूयो क सरःवती पे, लआमी का असर गहरा है. िफर सोमनाथ पे ख़तरा है. ये िनंदा, अपयश, आलोचन, ये भारत- गौरव क दुहाईयाँ, ये सब ूायो जत कायबम, चेहरो के पीछे चेहरा है. िफर सोमनाथ पे ख़तरा है. CWG पे जब वश ्व हंसा, असमटे लूट तब मौन रहे, नार - गौरव के ठेके दारो , ये माप-दंड तो दोहरा है. िफर सोमनाथ पे ख़तरा है. भाषा क सीमा वो जाने, भाषा ह जनका ॄेड-बटर, हम कमयोगी! कत य करे, ठाने तो सम दर कतरा है. िफर सोमनाथ पे ख़तरा है.. भूले हमसे भी बहुत हुई, पर िनयत मे अपनी खोट नह , शीश झुकाकर मा माँगते, मा-िनवेदन मेरा है. िफर सोमनाथ पे ख़तरा है.
  • 39.
    39    ये खाँसी बड़ेकाम क है ये खाँसी गािफल सोत को सजग करे ये, चोर क अब फाँसी है ये खाँसी. देशी गोर से मु कराने, ये ह रानी झाँसी है ये खाँसी. बड़ का घर मे मान बचाती, मयादा क मौसी है ये खाँसी. ॅ पर चंड बन िगरती, भले जन क दासी है ये खाँसी. अहंकार रावण का हरने , ये हनुमान गदा-सी है ये खाँसी. जो अंदर वो बाहर िदखती, पारदश दपण-सी है ये खाँसी. ये चुनाव का मु ा बन गयी, मुझको आती हाँसी है ये खाँसी. फे कु जी! कु छ और बताओ, ये बात तो बासी है ये खाँसी. "के जी" रण-ूण पर डटे रहो, जब तक तन मे जाँ-सी है ये खाँसी.
  • 40.
    40    ये तो होनाह था.. गाँधी गूँगे, नेह बहरे, तब भगत को फाँसी होना ह था, धृतरा सर खे राजा ह , तो चीरहरण िफर होना ह था, सो रहे देश के लाल अगर, भारत माँ को िफर गौरव खोना ह था, हर तरफ क ल खाने चलते, बकरे क माँ को रोना ह था, यह तासीर, यह तालीम थी उसक , दंगो के दाग भी खून से धोना ह था, मन आ ख़र ऊब ह गया इन खलोनो से, स ा का खेल िघनोना ह था, बड़ रोचक रह , पर िफ म थी, इंटरवल तो होना ह था, मेरा अंजाम मेरे अंदाज से जुदा नह , खून का सह ,बुलबुला था, फ़ना तो होना ह था, कब तक लाश को ढोता िफरता, जंदगी को आजमाना भी था, म तारा, टूटा तेर खाितर, तेर मुराद को िफर पूरा होना ह था, मेरे जाने का गम ना कर मेरे दोःत, ये बाजी थी, कु छ पाने, कु छ खोना भी था.
  • 41.
    41    हम भी चुपऔर तुम भी चुप... पूण रा य का दजा दो, ये लंबी माँग हमार है, लाओ ःवराज बापू का सपना, जनलोकपाल ज़ र है, बल पर वोिटंग क जब बात चली,हम भी चुप और तुम भी चुप. नार , संक पो क रेल चली, लगता भार तैयार है, ॅ ाचार भगाना है, ये लंबी बीमार ह, इंजे सन लगने क जब बार आई, हम भी चुप और तुम भी चुप. ये ूदेश ूायो जत ूोमाम नह , मजबूर क मजबूर है, दंगे देश पे दाग ह, ये दाग िमटाने ज़ र ह, दोषी को दंिडत करने मे, हम भी चुप और तुम भी चुप. वादे हमने भी बहुत िकए, वादे तुमको भी करने देगे, हमने कभी कु छ नह िकया तो और को य करने दगे, कोई जुगनू िनकला, रात उजली करने , ना कौए चुप, ना कु े चुप. हम भी चुप और तुम भी चुप..
  • 42.
    42    ओम जय िशंदेदेवा! जय िशंदे देवा!!! होम िमिनःटर पदवी, पोलीस करे सेवा..ओमजय.. कॉ ःटेबल से लेकर, पद मु यमंऽी पाया, क माता जी क सेवा, सेवा-फल पाया, भए गवनर, ऊजा और गृह मंऽालय पाया. ओम जय.. आदश मे लेत िलयो, ूभु ह ला हो भार . नह िडगे तुम तिनक ूभु!, था कोलाहल भार  . ओम जय.. कोलगेट पे शोर मचा, तुम बोफ़ोस उठा लाए, कहा क भूलेगी जनता इसको भी, ये लंबी बीमार  . ओम जय.. दािमनी का जब रेप हुआ, तब तुम िशव- प धरा, िद ली पोलीस से कहकर, लाठ वॉटर के नन चलवाया . ओम जय..   अपने िद य ान से तुमने, आतंक अ डे जाने, RSS- भाजप भेद बखाने, जग का ॅम िमटायो . ओम जय.. कोई उ ंड-दुःसाहसी ूभु! घर तेरे प थर उछलायो, ण भर मे तुम दजन, पोलीस-िनल बन करवायो . ओम जय.. िद ली मे िनत रेप, क ल, गुंडई नशा छायो, मु यमंऽी सड़को पे िफर भी, पोलीस तिनक ना घबरायो, मावा तु हे चढ़ावे, तुमरो आशीवाद पायो . ओम जय.. ूभु! आपक जय जय, तुम शासन सदा जयवंत रहो, ये पागल बकते, बकने दो, तुम बैकुं ठ मे मःत रहो . ओम जय..
  • 43.
    43    फे कु जी,तुम बहुत पछताओगे....... वो लालिकले से मंच सजाना, रेल, बसो से भीड़ जुटाना, सपने देखना और लोगो को भी िदखाना, सच - झूठ का सब भेद िमटाना, वो तेरा सब तरफ चाय क चौपाल लगाना, और चाय बेचके , हवाई जहाज़ मे उड़ जाना, धुएँ के गुबार हो, आसमान मे खो जाओगे.. वो तेरा दंगो से मुँह फे र जाना, अटल जी का राजधम याद िदलाना, पाट के पतामह आडवाणी का िदल दुखाना, मुरली मनोहर को बनारस से भगाना, के शुभाई, हरेन पां या का बेवईत जाना, ख़ौफ़ से चुप रखना, ना माने तो िमटा देना, दुख िदए ह और को, तो तुम कै से बच पाओगे.. गैस क बड़ क़ मत पे, मौन-ोत धरना, अदानी से रँतो पे , साँप सूंघ जाना, CAG क रपोट को, सा जश, झूठा कहना, लोकायु ना लाने, कोट मे लड़ना, सज़ा पाए "बाबू" का मंऽी रहना, मुठभेड़ के बाद"शाह" को िसरमाथे बठाना, ज़रा श ल तो देखो आईने मे, तुम राम-राज लाओगे ? गैर क औरत क जासूसी मे पूर पुिलस लगाना, वो रोिमयोिग र, वो िछछोरापन, अपने को ॄ चार बतलाना, अपनी बीवी को छोड़ िहमालय भाग जाना, वो करन थापर के इंटर यू से भाग जाना, वो छ पन इंच क छाती फु लाना, अर वंद क दहाड़ पे गुफा मे भाग जाना, मेरे कागज के शेर, कागजॉ पे ह रह जाओगे..
  • 44.
    44    फे कु तेरेराज मे........ दागी खाक , दंगाई मंऽी, ह ॅ मःत तेरे राम-राज मे, भाईचारा जी जाता गर, कु छ खचा होता इलाज मे, अपनी को छोड़, गैर के पीछे, रोिमयो!, या रखा इस अंदाज मे, करतूते ऐसी, कु छ शम करो, य अकड़ है इस आवाज़ मे, ह जमाख़ोर यारे, तो या, सरकार चली गयी याज मे, ये मंहगाई, उसपे र तखोर , कोढ़ हो गयी खाज मे, कज़ा इतना, अब या वकास , सब पूंजी चली गयी याज मे, वकास क और िमशाल कहाँ, चायवाला उड़े जहाज़ मे, ज़रा CAG क रपोट पलट, िकतने छेद ह तेरे ताज मे, गुण गाते िफरते जस वकास के , ढूढू तेरे घर आज मे.
  • 45.
    45    ूाइम िमिनःटर जेलम... आधी आबाद दहशत के , साये मे डर-मर िससक रह , जंदा लाश क बदबू आती, तेर A.C. रेल म. भूत ूेत बन बदला लगे , जो तेर शह पे क ल हुए, बाबू! तेरे भी हाथ रंगे ह, दंगो के खूनी खेल म. छोड़ अपनी नार यिभचार !, परनार क जासूसी, ये आदत, ये िछछोरापन, फसोगे िकसी िदन मु ँकल म. कोई अरब पित, कोई खरबपित, कोई व पित बनने िनकला, वकास क देखो! सेल लग गयी, इन चोरो के मेल म. फकू ज़ी! सच सच बतलाओ, ये हेिलकॉ टर कै से उड़ते ह, चाय बेचके , गैस बेचके , या उड़ते ह तेल म.
  • 46.
    46    राजा ने िसंहासनछोड़ा है कठपुतले को ताज िदया , परदे के पीछे से राज िकया, कभी अबला थीं, अब व पित, और के कं धो से िशकार िकया, तुमने छोडा तो याग क देवी , हमने छोडा तो भगोड़ा है. स ा सुंदर को वरने को , िकसका मन रह पाता है, इसक बाँह के मोहपाश म , हर कोई बंध जाता है, जसको सब पाने तरस रहे , वैरागी! तूने य छोड़ा है. खा-पी के चांडाल चौकड़ , हर चैनल पर भ क रह , खुद नाकारा, कु छ करने वाल को, पानी पी-पी कोस रह , पहचानो ये आम – राम , जद पे िशव-धनु तोडा है. है जाित-धम पे बँटवारा, दंग क भभक आग कह ं, कह ं गर बी , कह ं भुखमर , वकास क बंदर-बाँट कह ं, िदल म िद ली ले, काला घोडा, देश बचाने दौड़ा है.
  • 47.
    47    बुरा ना मानोहोली है कोई रंग तो कोई गुलाल िलए, कोई काला कोई लाल िलए, अपने रंग म रंगने िनकली, अलम तो की टोली है.. बेरंग भी अब रंगीन हुए, नीरस भी नमकीन हुए, िदन म तारो के दशर्न, जब भाँग द ूध म घोली है.. रंग के क्या खेल हुए, काले गोर के मेल हुए, उजले तन भी मैले िदखते, रंगो की आँख-िमचौली है.. ब चे, बूढ़े सब िमल देखो! ाचार की होली जलाते, देश ेम की िपचकारी, घर-घर ितरंगी रंगोली है...
  • 48.
    48    खबर बेचना मेराधंधा…. अिभ का वरदान पा, ये होिलका हुलसा रही है, क यप के पा इशारे, ाद को झुलसा रही है, सुन! राख हो जायेगी तूँ, उन क यप के साथ ही , नर प इन नारायण को, थर् क्य उकसा रही है. खबर बेचना मेरा धंधा, मुझको भी लाभ कमाना है, सबके जैसे, सबसे पहले, सबसे आगे जाना है, ओ लोकतं के चौथे खम्भे! उनमे तुझमे अंतर है, पैसे के साथ तुझे लोगो का, िव ास भी बचाना है.
  • 49.
    49    बनारस को अयोया बनाना पड़ेगा… संत साधु बुलाओ , कारसेवा कराओ , िफर कोई ढाँचा िगराना पड़ेगा. िवकास का हवामहल ना ठहरेगा यादा , वो पुराना पतरा ही आजमाना पड़ेगा. बनी िकतनी रामायण राम पर , अबकी महाभारत बनाना पड़ेगा. बहुत राम आराम तुमने िकया अब , ज़ रत है वैकुं ठ से आना पड़ेगा. ना जाने पहुचेगी िगनती कहाँ तक , िचता की लकिड़य को जुटाना पड़ेगा. दिरंदे ने दंगो के द तक जो दे दी , घाट को ख़ूं से नहाना पड़ेगा. सूख से गये ह कुछ जख्म िदल के , िफर से वो काँटा चुभाना पड़ेगा. िचंगारी ढूढो दबी राख से तुम , देश पूरा िफर से जलाना पड़ेगा. भूख से लड़ते-लड़ते जो भूले थे अब तक , उ हे याद मज़हब िदलाना पड़ेगा. लाश के ढेर पे बैठ कर के िफर , गीत जय का कोई गुनगुनाना पड़ेगा
  • 50.
    50    तुम क्या गये,सब सूना कर गये... वो अहसास, वो सपने, वो खुशनुमा मंज़र क्या हुए सब कुछ वीराना कर गये तेरी आहट से उठता हूँ, तेरी याद से रुकता हूँ आदमी था , कोई िखलौना कर गये िकतने इ ज़ाम, िकतनी नफ़रत मेरी खाितर, मेरी सारी शिख्सयत को, िघनौना कर गये ना चैन से जीऊँ पल भर, ना मरना नसीब हो, पागलो सा हाल!, जाने क्या जाद ू-टोना कर गये रंज बहुत है िदल को, तेरे यूँ छोड़कर जाने का, भले आदमी थे, मजबूिरय का िबछोना बन गये पलके खुली की खुली ह, तेरे आने की उम्मीद मे, लौटने का अपने, वादा जो मुझसे कर गये.
  • 51.
    51    ये तो ग़लतबात है.... राम राज्य की माला रटते, शक्ल देखकर ल ू ब ॅटते, समाजवाद के वचन, िवकास की बंदरबाँट है. ह जहाँ, वह की बात करेग, बहुरुिपयो से वेष धरगे, पगड़ी को हाँ पर टोपी को ना, ये कै सा रा वाद है. वो राज्य बंद, वो रेल रोकना, कही आगज़नी, कही तोड़फोड़, उनका तांडव लोकतं , मेरा मौन धरना उत्पात है. चेहरे इनके अलग भले, पर काम सभी का एक है, िमलकर चुप रहकर देश लूटते, वे िश , के जरी अनािकर् ट है.
  • 52.
    52    काशी तुम नापाओगे…. महादेव की नगरी मे तुम, हर-हर मोदी बोल रहे, लयदेव के धीरज को तुम, वोट-तुला पर तौल रहे, ि ने ी के तांडव से, अिभमानी! भ म हो जाओगे . िकतनी खुश थी तुमको पा, ये सोच की तुमने मुझे वरा, क्या मेरे प्यार मे कमी रही, जो भायी तुमको वडोदरा, दो के चक्कर मे रहोगे, तो दोनो को हार जाओगे. मेरा ेम वही पाएगा, जो मेरा, बस मेरा होगा, मुझको ही बस प्यार करेगा, मेरा जीवन-साथी होगा, तुम्हे तो बस रात का साथ चािहए, सुबह छोड़ जाओगे. म काशी, सौहादर् मूितर्, भोलापन मन भाया है, तेरी सोच वभाव अलग , कोई अलग ही तेरी माया है, छिलए! मेरी कुं डली से, एक गुण भी ना िमला पाओगे .