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प्रस्तुतिकरण संचार उपकरण हैं जिनका उपयोग प्रदर्शन, व्याख्यान, रिपोर्ट और बहुत कु छ के रूप में किया
जा सकता है। इसे ज्यादातर दर्शकों के सामने पेश किया जाता है।
3.
विषय
प्रस्तुतिकरण संचार उपकरणहैं जिनका उपयोग प्रदर्शन, व्याख्यान, रिपोर्ट और बहुत कु छ के रूप में किया
जा सकता है। इसे ज्यादातर दर्शकों के सामने पेश किया जाता है।
नेताजी के बारे में
कार्य अनुभव
उद्दे श्य
नेताजी का योगदान
व्यक्तिगत कौशल
समापन
की तालिका
4.
का परिचय
नेताजी
जन्म कीतारीख और समय: 23 जनवरी
1897, कटक
पूरा नाम: सुभाष चंद्र बोस
राष्ट्रीयता: भारतीय
माता-पिता: जानकीनाथ बोस, प्रभावती देवी
शिक्षा: स्कॉटिश चर्च कॉलेज (1919), प्रेसीडेंसी
युनिवर्सिटी, ज़्यादा
5.
‘तुम मुझे खूनदो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा’।
आजाद हिन्द फौज के संस्थापक
प्रसिद्ध संवाद
‘सफलता हमेशा असफलता के स्
तंभ पर
खड़ी होती है’।
जो अपनी ताकत पर भरोसा करते हैं,
वो आगे बढ़ते हैं और उधार की ताकत वाले
घायल हो जाते हैं।
6.
उद्देश्य
वे आजाद हिंदफौज के नाम से एक मजबूत सेना बनाते
हैं। ब्रिटिश सरकार के खिलाफ। वे हमारे देश को स्वतंत्र
करना चाहते थे। वे हमारे देश में शासन करने वाले
किसी को पसंद नहीं करते हैं l
7.
Alfredo Torres
कौशल
व्यक्तिगत
सुभाष चंद्रबोस को असाधारण नेतृत्व कौशल और एक
करिश्माई वक्ता के साथ सबसे प्रभावशाली स्वतंत्रता
सेनानी माना जाता है। उनके प्रसिद्ध नारे हैं 'तुम मुझे खून
दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा', 'जय हिंद' और 'दिल्ली चलो'।
उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन किया और भारत के
स्वतंत्रता संग्राम में कई योगदान दिए।
8.
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
शिक्षा– मैट्रिक(1912-13), इंटरमिडिएट (1915), बी. ए.
आनर्स (1919), भारतीय प्रशासनिक सेवा (1920-21)
विद्यालय– रेवेंशॉव कॉलेजिएट (1909-13), प्रेजिडेंसी
कॉलेज (1915), स्कॉटिश चर्च कॉलेज (1919), कें ब्रिज
विश्वविद्यालय (1920-21)
9.
अनुभव
1920 में उन्होंनेसिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन
अप्रैल 1921 में, भारत में राष्ट्रवादी उथल-पुथल को सुनने के
बाद, उन्होंने अपनी उम्मीदवारी से इस्तीफा दे दिया और
भारत वापस आ गए। अपने पूरे करियर के दौरान, विशेष
रूप से अपने शुरुआती चरणों में, उन्हें एक बड़े भाई, शरत
चंद्र बोस (1889-1950), एक धनी कलकत्ता वकील और
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस पार्टी के रूप में भी जाना
जाता है) राजनेता द्वारा आर्थिक और भावनात्मक रूप से
समर्थन दिया गया था।
कार्य
10.
नेताजी का योगदान
अपनेवतन भारत को अंग्रेजी दासता से मुक्त करवाने के लिए
असंख्य जाने - अनजाने देशभक्तों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया
और जीवनभर अनेक असनीय यातनाएं , कष्ट व प्रताड़नाएं झेलीं। देश
में ऐसे असंख्य शूरवीर देशभक्त बलिदानी हुए , जिनके अथक संघर्ष ,
अनंत त्याग , अटू ट निश्चय और अनूठे शौर्य की बदौलत स्वतंत्रता का
सूर्योदय संभव हो सका। ऐसे ही महान पराक्रमी , सच्चे देशभक्त और
स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी के रूप में नेताजी सुभाष चन्द्र
बोस का नाम इतिहास के पन्नों पर स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है।
11.
1921 में भारतमें बढ़ती राजनीतिक
गतिविधियों का समाचार पाकर बोस ने
अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और शीघ्र
भारत लौट आए। सिविल सर्विस छोड़ने के
बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़
गए। सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी के
अहिंसा के विचारों से सहमत नहीं थे।
वास्तव में महात्मा गांधी उदार दल का नेतृत्व
करते थे , वहीं सुभाष चंद्र बोस जोशीले
क्रांतिकारी दल के प्रिय थे। महात्मा गाँधी
और सुभाष चंद्र बोस के विचार भिन्न - भिन्न
थे लेकिन वे यह अच्छी तरह जानते थे कि
महात्मा गाँधी और उनका मकसद एक है ,
यानी देश की आजादी। सबसे पहले गाँधीजी
को राष्ट्रपिता कह कर नेताजी ने ही संबोधित
किया था।
12.
नेताजी की मृत्यु
18अगस्त 1945 को उनके अतिभारित जापानी विमान
दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। यह दुर्घटना जापान अधिकृ त
फोर्मोसा (वर्तमान ताइवान) में हुई थी। उसमें नेताजी
मृत्यु से सुरक्षित बच गये थे या नहीं, इसके बारे में कु छ
भी स्पष्ट नहीं है।