सुदामा एवं श्री कृ ष्ण
हिंदी साहित्य के भक्तिकाल का िवभान
भक्तिकाली युग
सगुण निगुुण
शमाश्रयी कृ ष्णाश्रयी
कबीर सूरदास,
िुलसीदास, कबीरदास
के शवदास दादूदयाल
रोत्तमदास
मीराबाई
ज्ञा ाश्रयी प्रेमाश्रयी
रहिम माललक मुिमद नायसी
कु िुव
मीराबाई संि कबीरदास
िुलसीदास
सूरदास
रोत्तम दास
हिंदी के भक्तिकाली किवयों
में रोत्तमदास का ाम प्रलसद्ध िै I वे कृ ष्ण
काव्यधारा के किव थे I इ की एकमात्र ख्याति
प्राप्ि रच ा ' सुदामा चररि ' िै I इसी करिी
े किव को लोकिप्रयिा िथा ख्याति हदला दी
I इस रच ा में देशन िथा िद्भव शब्दों युति
आम बोलचाल की भाषा े इसे आम आदमी
को पढ े िथा समझ े में मदद की I इसमें
ब्रनभाषा का सौंदयय िथा माधुयय त हिि िै I
कविता परिचय
 इस पाठ में श्रीकृ ष्ण और सुदामा के माध्यम
से सच्ची लमत्रिा का दुबयल उदिारण प्रस्िुि
ककया गया िै I इ की लमत्रिा को सच्ची
लमत्रिा के आदशय रूप में देखा ना सकिा िै I
ऐसी लमत्रिा नो अ ुकरणइय I वत्तयमा के
सन्दभय में यिााँ लमत्रिा और भी मित्वपूणय ब
नािी िै I नब व्यक्ति बुरे समय में अप े
लमत्र को पिचा े से भी इंकार कर देिा िै I
श्री कृ ष्ण े बुरे समय में सुदामा की मदद
करके अप े िी सामा ब ा हदया I
 आज भी कृ ष्ण औि सुदामा भी मैत्री का उदा
ददया जाता है जजस ममलता में अमीि - गिीब ,
उंच - िीच , िगु गत भेदभाि िहीं होते है I
किविा
 सीस पगा झगा ि में , प्रभु ! ना े को
आहि बसे के हि ग्रामा I
 धोिी फटी सी लिी दुपटी ; अरु
पांय उपा ि को हि सामा II
 द्वार खड़े द्िवन दुबयल एक , रह्यो
चककसो बसुधा अलभरामा I
 पूछि दी द्याल को धाम , बिावि
आप ो ाम सुदामा II
शब्दाथय
 झगा - वस्त्र , कु रिा
 के हि - कौ से , ककस
 अरु - और
 पांय - पााँव , पैर
 उप ाि - नूिे सामा - चचह्
 द्िवन - ब्राह्म
 चककसो - चककि िोकर
 बसुधा - धरिी
 अलभरामा - सुन्दरिा
 दी दयल - गरीबो पर दया कर े वाले अथायि
श्रीकृ ष्ण
िवशेष
 ' द्वार खड़ो द्िवन दुबयल एक ' में अ ुप्रास
अलंकर िै I
 काव्यांश रच ा सवैया छंद में िै I
 काव्यांश में ब्रन भाषा का सौंदयय एवं माधुयय
व्याप्ि िै I
अथय ग्रिण सम्बन्धी प्रश्
 किव एवं किविा का ाम ललखखए I
 सुदामा कौ थे ? वे श्रीकृ ष्ण के पास तयों गए
थे ?
 सुदामा ककस िाल में , श्रीकृ ष्ण के पास गए थे ?
 सुदामा वसुधा को चककि िोकर तयों देख रिे थे
?द्वारपाल े श्रीकृ ष्ण को तया बिाया ?
 द्वारपाल े श्रीकृ ष्ण को तया बिाया ?
बिुिवकल्पीय प्रश्
1 . ' प्रभु ! ना को आहि ' किविा की प्रथम पंक्ति में प्रभु
के माध्यम से ककसे सम्बोचधि ककया गया ?
(क) इंद्र भगव को (ख) राम को
(ग) भगवा को ( घ) कृ ष्ण को
2 . सुदामा ककस गााँव के रि े वाले थे ?
(क) ब्रन के (ख) द्वारका के
(ग) काशी के (घ) इ मे से कोई िीं
3. ककसके कारण सुदामा बेिाल िो रिे थे ?
(क) चमय रोग के कारण
(ख) बबवाइ के कारण
(ग) क्षय रोग के कारण
(घ) अक्स्थ रोग के कारण
4 . सुदामा की पत् ी े उपकार स्वरूप पोठली में तया
हदया था ?
उत्तर - चावल
5 . श्री कृ ष्ण े सुदामा द्वारा लाए उपिार को ककस्मे भीगा
िुआ बिाया ?
(क)आमरस (ख)सोमरस
(ग) सुधारस (घ) इ मे से कोई िीं
6. ' वािी पहठयो ठेली ' वािी शब्द ककसके ललए
प्रयुति िुआ िै ?
(क) श्री कृ ष्ण के ललए (ख) रुखाड़ी के ललए
(ग) गोिपयों के ललए (घ) सुदामा की पत् ी के ललए
7. ' घर - घर कर ओड़ि कफरे ' इस पंक्ति में श्रीकृ ष्ण
ककसके ललए ओड़ि करिे िै ?
(क) दूध (ख) दिी
(ग) मतख (घ) घी
8. ' परिाप ' ककस िरि का शब्द िै ?
(क) ित्सम (ख) िद्भव
(ग) देशन (घ) िवदेशी
9 . कृ ष्ण के ललए कौ सा शब्द किविा में
प्रयोग िीं ककया गया ?
(क) मुरलीधर (ख) गोपाल
(ग) करुणात धी (घ) श्याम
धन्यवाद !

Sudama Charit

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    हिंदी साहित्य केभक्तिकाल का िवभान भक्तिकाली युग सगुण निगुुण शमाश्रयी कृ ष्णाश्रयी कबीर सूरदास, िुलसीदास, कबीरदास के शवदास दादूदयाल रोत्तमदास मीराबाई ज्ञा ाश्रयी प्रेमाश्रयी रहिम माललक मुिमद नायसी कु िुव
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    हिंदी के भक्तिकालीकिवयों में रोत्तमदास का ाम प्रलसद्ध िै I वे कृ ष्ण काव्यधारा के किव थे I इ की एकमात्र ख्याति प्राप्ि रच ा ' सुदामा चररि ' िै I इसी करिी े किव को लोकिप्रयिा िथा ख्याति हदला दी I इस रच ा में देशन िथा िद्भव शब्दों युति आम बोलचाल की भाषा े इसे आम आदमी को पढ े िथा समझ े में मदद की I इसमें ब्रनभाषा का सौंदयय िथा माधुयय त हिि िै I
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    कविता परिचय  इसपाठ में श्रीकृ ष्ण और सुदामा के माध्यम से सच्ची लमत्रिा का दुबयल उदिारण प्रस्िुि ककया गया िै I इ की लमत्रिा को सच्ची लमत्रिा के आदशय रूप में देखा ना सकिा िै I ऐसी लमत्रिा नो अ ुकरणइय I वत्तयमा के सन्दभय में यिााँ लमत्रिा और भी मित्वपूणय ब नािी िै I नब व्यक्ति बुरे समय में अप े लमत्र को पिचा े से भी इंकार कर देिा िै I श्री कृ ष्ण े बुरे समय में सुदामा की मदद करके अप े िी सामा ब ा हदया I
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     आज भीकृ ष्ण औि सुदामा भी मैत्री का उदा ददया जाता है जजस ममलता में अमीि - गिीब , उंच - िीच , िगु गत भेदभाि िहीं होते है I
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    किविा  सीस पगाझगा ि में , प्रभु ! ना े को आहि बसे के हि ग्रामा I  धोिी फटी सी लिी दुपटी ; अरु पांय उपा ि को हि सामा II  द्वार खड़े द्िवन दुबयल एक , रह्यो चककसो बसुधा अलभरामा I  पूछि दी द्याल को धाम , बिावि आप ो ाम सुदामा II
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    शब्दाथय  झगा -वस्त्र , कु रिा  के हि - कौ से , ककस  अरु - और  पांय - पााँव , पैर  उप ाि - नूिे सामा - चचह्  द्िवन - ब्राह्म  चककसो - चककि िोकर  बसुधा - धरिी  अलभरामा - सुन्दरिा  दी दयल - गरीबो पर दया कर े वाले अथायि श्रीकृ ष्ण
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    िवशेष  ' द्वारखड़ो द्िवन दुबयल एक ' में अ ुप्रास अलंकर िै I  काव्यांश रच ा सवैया छंद में िै I  काव्यांश में ब्रन भाषा का सौंदयय एवं माधुयय व्याप्ि िै I
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    अथय ग्रिण सम्बन्धीप्रश्  किव एवं किविा का ाम ललखखए I  सुदामा कौ थे ? वे श्रीकृ ष्ण के पास तयों गए थे ?  सुदामा ककस िाल में , श्रीकृ ष्ण के पास गए थे ?  सुदामा वसुधा को चककि िोकर तयों देख रिे थे ?द्वारपाल े श्रीकृ ष्ण को तया बिाया ?  द्वारपाल े श्रीकृ ष्ण को तया बिाया ?
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    बिुिवकल्पीय प्रश् 1 .' प्रभु ! ना को आहि ' किविा की प्रथम पंक्ति में प्रभु के माध्यम से ककसे सम्बोचधि ककया गया ? (क) इंद्र भगव को (ख) राम को (ग) भगवा को ( घ) कृ ष्ण को 2 . सुदामा ककस गााँव के रि े वाले थे ? (क) ब्रन के (ख) द्वारका के (ग) काशी के (घ) इ मे से कोई िीं
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    3. ककसके कारणसुदामा बेिाल िो रिे थे ? (क) चमय रोग के कारण (ख) बबवाइ के कारण (ग) क्षय रोग के कारण (घ) अक्स्थ रोग के कारण 4 . सुदामा की पत् ी े उपकार स्वरूप पोठली में तया हदया था ? उत्तर - चावल
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    5 . श्रीकृ ष्ण े सुदामा द्वारा लाए उपिार को ककस्मे भीगा िुआ बिाया ? (क)आमरस (ख)सोमरस (ग) सुधारस (घ) इ मे से कोई िीं 6. ' वािी पहठयो ठेली ' वािी शब्द ककसके ललए प्रयुति िुआ िै ? (क) श्री कृ ष्ण के ललए (ख) रुखाड़ी के ललए (ग) गोिपयों के ललए (घ) सुदामा की पत् ी के ललए
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    7. ' घर- घर कर ओड़ि कफरे ' इस पंक्ति में श्रीकृ ष्ण ककसके ललए ओड़ि करिे िै ? (क) दूध (ख) दिी (ग) मतख (घ) घी 8. ' परिाप ' ककस िरि का शब्द िै ? (क) ित्सम (ख) िद्भव (ग) देशन (घ) िवदेशी 9 . कृ ष्ण के ललए कौ सा शब्द किविा में प्रयोग िीं ककया गया ? (क) मुरलीधर (ख) गोपाल (ग) करुणात धी (घ) श्याम
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