PRESENTER
Dr. Shruthi Panambur
Final year PG scholar
Dept of PG studies in Ayurveda Samhita and
Siddhanta
Sri Sri College of Ayurvedic Science & Research
hospital
DEPARTMENTAL SEMINAR
GUIDED BY
Dr. Sri Nagesh K.A
Professor & HOD
Dept of PG studies in Ayurveda Samhita
and Siddhanta
Sri Sri College of Ayurvedic Science &
Research hospital
1
A Review on कामला
CONTENT
1. INTRODUCTION
2. REVIEW OF LITERATURE
3. DISCUSSION
4. CONCLUSION
2
INTRODUCTION
• In todays era fast food has become most popular which are
mainly spicy and deep fried.
• By this most of the times it leads to improper nutrition and
cause weakness and tiredness, later it gets diagnosed as
kamala.
• Kamala is specific condition where in yellowish discoloration
occurs in skin, eyes, urine, nails etc and it is co related to
jaundice
• It has been reported that annual incidence of 2.76per 1000
population suffer from jaundice
• Kamala is among pittaja nanathmaja vyadhi and a
raktapradoshaja vyadhi.
3
REVIEW OF LITERATURE
REFERENCES
निरुक्ति
Synonyms of कामल
निदाि
पूर्वरूप
संप्राक्ति
संप्राक्ति घटक
कामल भेद
रूप
साध्या असाध्या
निनकत्सा सूत्र
पथ्य
4
REFERENCES
संहित स्थान अध्याय
चरक संहित हचहकत्सा स्थान 16
सुश्रुत संहित उत्तर तन्त्र 44
अष्टाङ्ग हृदय
हनदान स्थान, हचहकत्सा
स्थान
13, 16
अष्टाङ्ग संग्रि
हनदान स्थान, हचहकत्सा
स्थान
13,18
5
हनरुक्ति
•कामि् लानि इनि कामला
• अत्र कामलेनि कामशब्दोऽयं साधारणशब्दनर्शेषात्स्वल्पे
भक्त्ताद्यनभलाषे प्रर्िविे, िं लािीनि कामला॥(हाराणिन्द्र)
6
Synonyms of कामला
7
हनदान
• पाण्डुरोगी िु योऽत्यर्थं नपतलानि निषेर्िे|(ch.chi.16/34)
• यो ह्यामयान्ते सहसाऽन्नमम्लमद्यादपथ्यानि ि िस्य नपतम् ||(su.u.44/11)
• नपतं कट्वम्लिीक्ष्णोष्णपटुक्रोधनर्दानहनभिः।
शरन्मध्याह्नरात्र्यधवनर्दाहसमयेषु ि॥(A.H.Ni.1/16)
आिार काल मानहसक भाव
सिसा अन्नं अम्ल,
मद्य.
कटु,अम्ल,पटु,
तीक्ष्ण, हवदाहि,
हवदािसमयेषु
शरत्, मध्याह्न,
अर्ध राहि
क्रोर्
8
पूवधरूप
• िस्य नलङ्ग
ं भनर्ष्यििः|
हृदयस्पन्दिं रौक्ष्यं स्वेदाभार्िः श्रमस्तर्था||(ch.chi.16/12)
• त्वक्स्फोटिं ष्ठीर्िगात्रसादौ मृद्भक्षणं प्रेक्षणक
ू टशोर्थिः |
नर्ण्मूत्रपीित्वमर्थानर्पाको भनर्ष्यिस्तस्य पुरिःसरानण |(su.u.44/5)
• प्राग्रूपमस्य हृदयस्पन्दिं रूक्षिा त्वनि।
अरुनििः पीिमूत्रत्वं स्वेदाभार्ोऽल्पर्नह्निा॥ सादिः श्रमो...(a.h.ni.13/8)
9
संप्राक्ति
कामला
पाण्डु अर्स्र्था
पाण्डु रोग+
नपतला निदाि
indipendent
नपतोल्बण
10
संप्राक्ति
• दोषािः नपतप्रधािास्तु यस्य क
ु प्यक्तन्त धािुषु|(ch.chi.16/4)
• समुदीणं यदा नपतं हृदये समर्क्तस्र्थिम्|
र्ायुिा बनलिा नक्षिं सम्प्राप्य धमिीदवश|
प्रपन्नं क
े र्लं देहं त्वङ्ांसान्तरमानश्रिम्||
प्रदू ष्य कफर्ािासृक्त्वङ्ांसानि करोनि िि्|
पाण्डुहाररद्रहररिाि् र्णावि् बहुनर्धांस्त्वनि||
स पाण्डुरोग इत्युििः ...|(ch.chi.16/9-11)
• पाण्डुरोगी िु योऽत्यर्थं नपतलानि निषेर्िे|
िस्य नपतमसृग्ांसं दग्ध्वा रोगाय कल्पिे||(ch.chi.16/34)
11
संप्राक्ति
र्ायुि
12
निदाि
नपत प्रधाि नत्रदोष प्रकोप
हृदय
समर्क्तस्र्थि
अस्रुक
् मांसं
दग्ध्व
संप्राप्य
धमनिदवश
प्रपन्नं क
े र्लं देहं त्वङ्ांसान्तर
मानश्रिम्
प्रदू ष्य कफर्ािासृक्त्वङ्ांसानि पाण्डुरोग
निदाि
कामला
संप्राक्ति घटक
दोष हपत्त
दू ष्य रि, मांस
अहर्ष्ठान 1. कोष्ठ, 2. शाख
स्रोत्तस् रिवि, रसवि, मांसवि
स्रोतोदुहष्ट
अहतप्रवृहत्त, संग,
हवमागधगमन
13
कामला भेद
Types of कामल C.S S.S A.H M.N SHA. BH.P
कोष्टाहश्रत कामला     
शाकाहश्रत कामला     
क
ु म्भ कामला      
िलीमक      



14
रूप
• हाररद्रिेत्रिः स भृशं हाररद्रत्वङ
् िखािििः|
रिपीिशक
ृ न्मूत्रो भेकर्णो हिेक्तन्द्रयिः||
दाहानर्पाकदौबवल्यसदिारुनिकनषवििः|(ch.chi.16/35)
• करोनि पाण्डुं र्दिं नर्शेषाि् पूर्ेररिौ िक्तन्द्रबलक्षयौ ि |(su.u.44/10)
िाररद्र-नेि, नख, आनन,
त्वक
्
रिपीत- शक
ृ न्मूिो
भेकवणो- शक
ृ न्मूिो
पाण्ुं वदनं
ितेक्तिय, दाि, अहवपाक,
दौर्धल्य, सदन, अरुहच,
कहषधतः, ति, र्लक्षय
15
भेद
• कामला बहुनपतैषा कोष्ठशाखाश्रया मिा||
कालान्तराि् खरीभूिा क
ृ च्छ्
र ा स्याि् क
ु म्भकामला|
(ch.chi.16/36)
र्हुहपत्त- कोष्ठ आश्रय- मिास्रोत्तस्
र्हुहपत्त- शाखाश्रया- रसरिाहद
कालान्तरात् खरीभूता - क
ु म्भकामला
16
शाखाश्रया
• निलनपष्टनिभं यस्तु र्िविः सृजनि कामली||
श्लेष्मणा रुद्धमागं िि् नपतं कफहरैजवयेि्|
रूक्षशीिगुरुस्वादुव्यायामैर्ेगनिग्रहैिः||
कफसम्मूक्तच्छ्व िो र्ायुिः स्र्थािाि् नपतं नक्षपेद्बली|
हाररद्रिेत्रमूत्रत्वक
् श्वेिर्िावस्तदा िरिः||
भर्ेि् साटोपनर्ष्टम्भो गुरुणा हृदयेि ि|
दौबवल्याल्पानिपाश्वावनिवनहक्काश्वासारुनिज्वरैिः||
क्रमेणाल्पेऽिुसज्येि नपते शाखासमानश्रिे|(ch.chi.16/125-127)
17
श्लेष्मणा रुद्ध
मागं िि् नपतं
निलनपष्टनिभं
र्िविः
िलीमक
• यदा िु पाण्डोर्वणविः स्याद्धररिश्यार्पीिकिः||
बलोत्साहक्षयस्तन्द्रा मन्द्रानित्वं मृदुज्वरिः|
स्त्रीष्वहषोऽङ्गमदवश्च श्वासस्तृष्णाऽरुनिर्भ्वमिः||
हलीमक
ं िदा िस्य नर्द्यादनिलनपतििः|(ch.chi.16/132,133)
वणध- िररत, श्याव, पीत
क्षय-र्लोत्साि, तिा,
मिाहि, मृदुज्वर,
स्त्रीष्विषध, अङ्गमदध,
श्वास, तृष्ण, अरुहच,
भ्रम,
अनिल नपत
18
भेद
19
ज्वर अङ्गमदव संिाप
साद नभन्न र्िवस्
र्भ्म बनहरन्तस्क पीिि
क्षय पण्डु िेत्र, िेत्र रोग
साध्या असाध्या
• क
ृ ष्णपीिशक
ृ न्मूत्रो भृशं शूिश्च मािर्िः||
सरिानक्षमुखच्छ्नदवनर्ण्मूत्रो यश्च िाम्यनि|
दाहारुनििृषािाहिन्द्रामोहसमक्तिििः||
िष्टानिसञ्ज्ञिः नक्षप्रं नह कामलार्ाि् नर्पद्यिे|(ch.chi.16/37-38)
क
ृ
च्छ्
र
ा
साध्या
क
ु म्भकामला
असाध्या
क
ृ ष्णपीिशक
ृ न्मू
त्रो…..
िष्टानिसञ्ज्ञिः
20
हचहकत्सा सूि
• संशोध्यो मृदुनभक्तस्तिैिः कामली िु नर्रेििैिः|
िाभ्ां संशुद्धकोष्ठाभ्ां पथ्यान्यन्नानि दापयेि्|(ch.chi.16/40)
• कामली मृदुनभिः नििैिः िु नर्रेििैिः संशोध्यिः। िाभ्ां संशुद्धकोष्ठाभ्ां पथ्यानि
अन्नानि दापयेि्|
मृदुहभ:
हतितः
कामली
संशोध्य
हवरेचनतः
संशुद्धकोष्ठा पथ्यान्यन्ना
21
हवरेचन द्रव्य
• गोमूत्रक्तिन्न हरीिकी
• आरग्वध, नबल्वपत्र, नत्रकटु िूणव, इक्षु रस, नर्दारकन्द स्वरस or आमलनक
स्वरस
• ½ पल- दक्तन्त कल्क, 1-गुड= शीि जल
• नत्रर्ृि् कल्क with नत्रफला क्वार्थ
• नत्रफला or गुड
ू च्या or दाव्याव or निम्ब रसम् – शीिं + मधु – प्राििः
22
घृत
• पञ्चगव्यं महानििं कल्याणकमर्थानप र्ा|
स्नेहिार्थं घृिं दद्याि् कामलापाण्डुरोनगणे||(ch.chi.16/43)
पञ्चगव्यं
मिाहतिं
कल्याणक
23
घृत
• पुराणसनपवषिः प्रस्र्थो द्राक्षाधवप्रस्र्थसानधििः|
कामलागुल्मपाण्ड्र्निवज्वरमेहोदरापहिः||
इनि द्राक्षाघृिम्|(ch.chi.16/52)
• हररद्रानत्रफलानिम्बबलामधुकसानधिम्|
सक्षीरं मानहषं सनपविः कामलाहरमुतमम्||
इनि हररद्रानदघृिम्|(ch.chi.16/53)
• गोमूत्रे निगुणे दाव्याविः कल्काक्षियसानधििः|
दाव्याविः पञ्चपलक्वार्थे कल्क
े कालीयक
े परिः||
मानहषाि् सनपवषिः प्रस्र्थिः पूर्विः पूर्े परे परिः||(ch.chi.16/54)
द्राक्षाघृतम्
िररद्राहदघृतम्
दाव्याध घृत
24
चूणध & वहट
• नवायसचूणधम् -त्र्यूषणनत्रफलामुस्तनर्डङ्गनित्रकािः समािः|
िर्ायोरजसो भागास्तच्चूणं क्षौद्रसनपवषा||
भक्षयेि् पाण्डुहृद्रोगक
ु ष्ठाशविःकामलापहम्|
िर्ायसनमदं िूणं क
ृ ष्णात्रेयेण भानषिम्||
इनि िर्ायसिूणवम्|(ch.chi.16/70-71)
• वहट- प्रर्थम मण्ड
ू र र्नट, नििीय मण्ड
ू र र्नट
• लेि - योगराज – मधु, दाव्यावनद लेह, धात्र्यर्लेह(हलीमक)
• अन्य योग- दार्ीत्वक
् नत्रफला व्योषं नर्डङ्गमयसो रजिः|
मधुसनपवयुविं नलह्याि् कामलापाण्डुरोगर्ाि्||
िुल्या अयोरजिःपथ्याहररद्रािः क्षौद्रसनपवषा|
िूनणविािः कामली नलह्याद् गुडक्षौद्रेण र्ाऽभयािः||
नत्रफला िे हररद्रे ि कटुरोनहण्ययोरजिः|
िूनणविं क्षौद्रसनपवभ्ां स लेहिः कामलापहिः||(ch.chi.16/97-99)
• अररष्ट -गौडाररष्ट, बीजकाररष्ट, धात्र्यररष्ट
25
शाखाश्रया हचहकत्सा
• बनहवनिनतररदक्षाणां रूक्षाम्लैिः कटुक
ै रसैिः||
शुष्कमूलककौलत्थैयूवषैश्चान्नानि भोजयेि्|
मािुलुङ्गरसं क्षौद्रनपप्पलीमररिाक्तििम्||
सिागरं नपबेि् नपतं िर्थाऽस्यैनि स्वमाशयम्|(ch.chi.16/128-129)
कटुिीक्ष्णोष्णलर्णैभृवशाम्लैश्चाप्युपक्रमिः||
आनपतरागाच्छ्क
ृ िो र्ायोश्चाप्रशमाद्भर्ेि्|
स्वस्र्थािमागिे नपते पुरीषे नपतरनििे||
निर्ृतोपद्रर्स्य स्याि् पूर्विः कामनलको नर्नधिः|(ch.chi.16/130-131)
26
िलीमक हचहकत्सा
• गुड
ू िीस्वरसक्षीरसानधिं मानहषं घृिम्||
स नपबेक्तरिर्ृिां नस्नग्धो रसेिामलकस्य िु|
नर्ररिो मधुरप्रायं भजेि् नपतानिलापहम्||
द्राक्षालेहं ि पूर्ोिं सपींनष मधुरानण ि|
यापिाि् क्षीरबस्तींश्च शीलयेत्सािुर्ासिाि्||
मािीकाररष्टयोगांश्च नपबेद् युक्त्याऽनिर्ृद्धये|
कानसक
ं िाभयालेहं नपप्पलीं मधुक
ं बलाम्||
पयसा ि प्रयुिीि यर्थादोषं यर्थाबलम्| (ch.chi.16134-138)
27
शमन औषहर्
र्क्ति
हवरेचन
पथ्य
•शालीि् सयर्गोधूमाि् पुराणाि् यूषसंनहिाि्|
मुद्गाढकीमसूरैश्च जाङ्गलैश्च रसैनहविैिः| (ch.chi.41)
पुराणा शाली, यर्, गोधूम
यूष- मुद्गा, आढनक, मसूर
जाङ्गल रस
लघु पञ्चमूल जल, मृिीक रस, आमलनक रस for पाि and भोजि
शाकानश्रि कामला-बनहव निनतरर दक्षाणां मांस(रूक्ष, अम्ल, कटु रस), शुष्क मूलक, क
ु लर्थ
यूष, मािुलुङ्ग स्वरस- मधु, नपप्पनल, मररि, िागर, कटु, िीक्ष्ण, उष्ण, लर्ण, अम्ल रस युि
आहार
28
अपथ्य
• All नपतल आहार नर्हार.
• Like कटु उष्ण िीक्ष्ण आहार,
• आिप सेर्ि, नदर्ास्वप्न etc नर्हार
• क्रोध
29
DISCUSSION
• What is the difference between पाण्ु and कामला ?
• एिेि कामलादीिां सञ्ज्ञािां नर्नशष्टार्स्र्थानर्षयत्वानिनशष्टत्वं, पयावयत्वं पाण्डुरो
गत्वापररत्यागाि्|(su.u.44/11. Dalhana)
30
• Is पाण्ु रोग संप्राक्ति is necessary to get कामला?
• भर्ेक्तितोल्बणस्यासौ पाण्डुरोगादृिेऽनप ि॥(a.h.ni.13/17)
• र्क्ष्यानम नलङ्गान्यर्थ कामलायािः |
यो ह्यामयान्ते सहसाऽन्नमम्लमद्यादपथ्यानि ि िस्य नपतम् |
करोनि पाण्डुं र्दिं नर्शेषाि् पूर्ेररिौ िक्तन्द्रबलक्षयौ ि |(su.u.44/11)
31
• Is स्नेि स्वेद पूवध हवरेचन or direct हवरेचन is recommended in
कामला?
• In कोष्टशाकानश्रि कामला doshas are already in koshta so can
go directly with virechana and then to take out shakhashritha
dosha snehana purva virechana in done.
32
33
CONCLUSION
• Charaka describe that kamala is a predominant stage of pandu.
• Sushrutha considered kamala synonym of pandu and considers as
vishishtavasta of pandu.
• Kamala has its samprapthi that is predominance of pitta and
involvement of raktha and mamsa dhatu.
• Main line of treatment is virechana in koshtashritha kamala.
• In shakashritha, pitta koshta gamana is important so pitta vridhi is
done by katu amla ushna etc dravyas and then virechana in done.
• Chikitsa is done seeing bala and dosha of the patient.
Thank You!
someone@example.com
34
व्याकरण
हवशेष
आदौ हभषक
् क
ु याधत् कमधहभः वमन आहदहभः
पद आहदः हभषक
् कमधन् वमनं आहदः
हलङ्ग पुक्तिङ्ग पुक्तिङ्ग नपुंसक नपुंसक पुक्तिङ्ग
हवभक्ति सिहम प्रथम तृतीय तृतीय
वचन
एकवचन एकवचन
र्हुवचन
र्हुवचन
र्ातु
डुदाञ्-
दाने(देना)
हञभी-
भये(डर
ना)
टुक
ृ ञ्-
करणे
(करना)
टुक
ृ ञ्-
करणे
(करना)
उहिरणे
(वमन िोन)
डुदाञ्-
दाने(देना)
पद सुर्न्त सुर्न्त निङ्गन्त सुर्न्त सुर्न्त सुर्न्त
35
Guide
Step 3
Step 2
Step 1
36

Kamala (jaundice) by Dr. Shruthi Panambur

  • 1.
    PRESENTER Dr. Shruthi Panambur Finalyear PG scholar Dept of PG studies in Ayurveda Samhita and Siddhanta Sri Sri College of Ayurvedic Science & Research hospital DEPARTMENTAL SEMINAR GUIDED BY Dr. Sri Nagesh K.A Professor & HOD Dept of PG studies in Ayurveda Samhita and Siddhanta Sri Sri College of Ayurvedic Science & Research hospital 1 A Review on कामला
  • 2.
    CONTENT 1. INTRODUCTION 2. REVIEWOF LITERATURE 3. DISCUSSION 4. CONCLUSION 2
  • 3.
    INTRODUCTION • In todaysera fast food has become most popular which are mainly spicy and deep fried. • By this most of the times it leads to improper nutrition and cause weakness and tiredness, later it gets diagnosed as kamala. • Kamala is specific condition where in yellowish discoloration occurs in skin, eyes, urine, nails etc and it is co related to jaundice • It has been reported that annual incidence of 2.76per 1000 population suffer from jaundice • Kamala is among pittaja nanathmaja vyadhi and a raktapradoshaja vyadhi. 3
  • 4.
    REVIEW OF LITERATURE REFERENCES निरुक्ति Synonymsof कामल निदाि पूर्वरूप संप्राक्ति संप्राक्ति घटक कामल भेद रूप साध्या असाध्या निनकत्सा सूत्र पथ्य 4
  • 5.
    REFERENCES संहित स्थान अध्याय चरकसंहित हचहकत्सा स्थान 16 सुश्रुत संहित उत्तर तन्त्र 44 अष्टाङ्ग हृदय हनदान स्थान, हचहकत्सा स्थान 13, 16 अष्टाङ्ग संग्रि हनदान स्थान, हचहकत्सा स्थान 13,18 5
  • 6.
    हनरुक्ति •कामि् लानि इनिकामला • अत्र कामलेनि कामशब्दोऽयं साधारणशब्दनर्शेषात्स्वल्पे भक्त्ताद्यनभलाषे प्रर्िविे, िं लािीनि कामला॥(हाराणिन्द्र) 6
  • 7.
  • 8.
    हनदान • पाण्डुरोगी िुयोऽत्यर्थं नपतलानि निषेर्िे|(ch.chi.16/34) • यो ह्यामयान्ते सहसाऽन्नमम्लमद्यादपथ्यानि ि िस्य नपतम् ||(su.u.44/11) • नपतं कट्वम्लिीक्ष्णोष्णपटुक्रोधनर्दानहनभिः। शरन्मध्याह्नरात्र्यधवनर्दाहसमयेषु ि॥(A.H.Ni.1/16) आिार काल मानहसक भाव सिसा अन्नं अम्ल, मद्य. कटु,अम्ल,पटु, तीक्ष्ण, हवदाहि, हवदािसमयेषु शरत्, मध्याह्न, अर्ध राहि क्रोर् 8
  • 9.
    पूवधरूप • िस्य नलङ्ग ंभनर्ष्यििः| हृदयस्पन्दिं रौक्ष्यं स्वेदाभार्िः श्रमस्तर्था||(ch.chi.16/12) • त्वक्स्फोटिं ष्ठीर्िगात्रसादौ मृद्भक्षणं प्रेक्षणक ू टशोर्थिः | नर्ण्मूत्रपीित्वमर्थानर्पाको भनर्ष्यिस्तस्य पुरिःसरानण |(su.u.44/5) • प्राग्रूपमस्य हृदयस्पन्दिं रूक्षिा त्वनि। अरुनििः पीिमूत्रत्वं स्वेदाभार्ोऽल्पर्नह्निा॥ सादिः श्रमो...(a.h.ni.13/8) 9
  • 10.
  • 11.
    संप्राक्ति • दोषािः नपतप्रधािास्तुयस्य क ु प्यक्तन्त धािुषु|(ch.chi.16/4) • समुदीणं यदा नपतं हृदये समर्क्तस्र्थिम्| र्ायुिा बनलिा नक्षिं सम्प्राप्य धमिीदवश| प्रपन्नं क े र्लं देहं त्वङ्ांसान्तरमानश्रिम्|| प्रदू ष्य कफर्ािासृक्त्वङ्ांसानि करोनि िि्| पाण्डुहाररद्रहररिाि् र्णावि् बहुनर्धांस्त्वनि|| स पाण्डुरोग इत्युििः ...|(ch.chi.16/9-11) • पाण्डुरोगी िु योऽत्यर्थं नपतलानि निषेर्िे| िस्य नपतमसृग्ांसं दग्ध्वा रोगाय कल्पिे||(ch.chi.16/34) 11
  • 12.
    संप्राक्ति र्ायुि 12 निदाि नपत प्रधाि नत्रदोषप्रकोप हृदय समर्क्तस्र्थि अस्रुक ् मांसं दग्ध्व संप्राप्य धमनिदवश प्रपन्नं क े र्लं देहं त्वङ्ांसान्तर मानश्रिम् प्रदू ष्य कफर्ािासृक्त्वङ्ांसानि पाण्डुरोग निदाि कामला
  • 13.
    संप्राक्ति घटक दोष हपत्त दूष्य रि, मांस अहर्ष्ठान 1. कोष्ठ, 2. शाख स्रोत्तस् रिवि, रसवि, मांसवि स्रोतोदुहष्ट अहतप्रवृहत्त, संग, हवमागधगमन 13
  • 14.
    कामला भेद Types ofकामल C.S S.S A.H M.N SHA. BH.P कोष्टाहश्रत कामला      शाकाहश्रत कामला      क ु म्भ कामला       िलीमक          14
  • 15.
    रूप • हाररद्रिेत्रिः सभृशं हाररद्रत्वङ ् िखािििः| रिपीिशक ृ न्मूत्रो भेकर्णो हिेक्तन्द्रयिः|| दाहानर्पाकदौबवल्यसदिारुनिकनषवििः|(ch.chi.16/35) • करोनि पाण्डुं र्दिं नर्शेषाि् पूर्ेररिौ िक्तन्द्रबलक्षयौ ि |(su.u.44/10) िाररद्र-नेि, नख, आनन, त्वक ् रिपीत- शक ृ न्मूिो भेकवणो- शक ृ न्मूिो पाण्ुं वदनं ितेक्तिय, दाि, अहवपाक, दौर्धल्य, सदन, अरुहच, कहषधतः, ति, र्लक्षय 15
  • 16.
    भेद • कामला बहुनपतैषाकोष्ठशाखाश्रया मिा|| कालान्तराि् खरीभूिा क ृ च्छ् र ा स्याि् क ु म्भकामला| (ch.chi.16/36) र्हुहपत्त- कोष्ठ आश्रय- मिास्रोत्तस् र्हुहपत्त- शाखाश्रया- रसरिाहद कालान्तरात् खरीभूता - क ु म्भकामला 16
  • 17.
    शाखाश्रया • निलनपष्टनिभं यस्तुर्िविः सृजनि कामली|| श्लेष्मणा रुद्धमागं िि् नपतं कफहरैजवयेि्| रूक्षशीिगुरुस्वादुव्यायामैर्ेगनिग्रहैिः|| कफसम्मूक्तच्छ्व िो र्ायुिः स्र्थािाि् नपतं नक्षपेद्बली| हाररद्रिेत्रमूत्रत्वक ् श्वेिर्िावस्तदा िरिः|| भर्ेि् साटोपनर्ष्टम्भो गुरुणा हृदयेि ि| दौबवल्याल्पानिपाश्वावनिवनहक्काश्वासारुनिज्वरैिः|| क्रमेणाल्पेऽिुसज्येि नपते शाखासमानश्रिे|(ch.chi.16/125-127) 17 श्लेष्मणा रुद्ध मागं िि् नपतं निलनपष्टनिभं र्िविः
  • 18.
    िलीमक • यदा िुपाण्डोर्वणविः स्याद्धररिश्यार्पीिकिः|| बलोत्साहक्षयस्तन्द्रा मन्द्रानित्वं मृदुज्वरिः| स्त्रीष्वहषोऽङ्गमदवश्च श्वासस्तृष्णाऽरुनिर्भ्वमिः|| हलीमक ं िदा िस्य नर्द्यादनिलनपतििः|(ch.chi.16/132,133) वणध- िररत, श्याव, पीत क्षय-र्लोत्साि, तिा, मिाहि, मृदुज्वर, स्त्रीष्विषध, अङ्गमदध, श्वास, तृष्ण, अरुहच, भ्रम, अनिल नपत 18
  • 19.
    भेद 19 ज्वर अङ्गमदव संिाप सादनभन्न र्िवस् र्भ्म बनहरन्तस्क पीिि क्षय पण्डु िेत्र, िेत्र रोग
  • 20.
    साध्या असाध्या • क ृष्णपीिशक ृ न्मूत्रो भृशं शूिश्च मािर्िः|| सरिानक्षमुखच्छ्नदवनर्ण्मूत्रो यश्च िाम्यनि| दाहारुनििृषािाहिन्द्रामोहसमक्तिििः|| िष्टानिसञ्ज्ञिः नक्षप्रं नह कामलार्ाि् नर्पद्यिे|(ch.chi.16/37-38) क ृ च्छ् र ा साध्या क ु म्भकामला असाध्या क ृ ष्णपीिशक ृ न्मू त्रो….. िष्टानिसञ्ज्ञिः 20
  • 21.
    हचहकत्सा सूि • संशोध्योमृदुनभक्तस्तिैिः कामली िु नर्रेििैिः| िाभ्ां संशुद्धकोष्ठाभ्ां पथ्यान्यन्नानि दापयेि्|(ch.chi.16/40) • कामली मृदुनभिः नििैिः िु नर्रेििैिः संशोध्यिः। िाभ्ां संशुद्धकोष्ठाभ्ां पथ्यानि अन्नानि दापयेि्| मृदुहभ: हतितः कामली संशोध्य हवरेचनतः संशुद्धकोष्ठा पथ्यान्यन्ना 21
  • 22.
    हवरेचन द्रव्य • गोमूत्रक्तिन्नहरीिकी • आरग्वध, नबल्वपत्र, नत्रकटु िूणव, इक्षु रस, नर्दारकन्द स्वरस or आमलनक स्वरस • ½ पल- दक्तन्त कल्क, 1-गुड= शीि जल • नत्रर्ृि् कल्क with नत्रफला क्वार्थ • नत्रफला or गुड ू च्या or दाव्याव or निम्ब रसम् – शीिं + मधु – प्राििः 22
  • 23.
    घृत • पञ्चगव्यं महानििंकल्याणकमर्थानप र्ा| स्नेहिार्थं घृिं दद्याि् कामलापाण्डुरोनगणे||(ch.chi.16/43) पञ्चगव्यं मिाहतिं कल्याणक 23
  • 24.
    घृत • पुराणसनपवषिः प्रस्र्थोद्राक्षाधवप्रस्र्थसानधििः| कामलागुल्मपाण्ड्र्निवज्वरमेहोदरापहिः|| इनि द्राक्षाघृिम्|(ch.chi.16/52) • हररद्रानत्रफलानिम्बबलामधुकसानधिम्| सक्षीरं मानहषं सनपविः कामलाहरमुतमम्|| इनि हररद्रानदघृिम्|(ch.chi.16/53) • गोमूत्रे निगुणे दाव्याविः कल्काक्षियसानधििः| दाव्याविः पञ्चपलक्वार्थे कल्क े कालीयक े परिः|| मानहषाि् सनपवषिः प्रस्र्थिः पूर्विः पूर्े परे परिः||(ch.chi.16/54) द्राक्षाघृतम् िररद्राहदघृतम् दाव्याध घृत 24
  • 25.
    चूणध & वहट •नवायसचूणधम् -त्र्यूषणनत्रफलामुस्तनर्डङ्गनित्रकािः समािः| िर्ायोरजसो भागास्तच्चूणं क्षौद्रसनपवषा|| भक्षयेि् पाण्डुहृद्रोगक ु ष्ठाशविःकामलापहम्| िर्ायसनमदं िूणं क ृ ष्णात्रेयेण भानषिम्|| इनि िर्ायसिूणवम्|(ch.chi.16/70-71) • वहट- प्रर्थम मण्ड ू र र्नट, नििीय मण्ड ू र र्नट • लेि - योगराज – मधु, दाव्यावनद लेह, धात्र्यर्लेह(हलीमक) • अन्य योग- दार्ीत्वक ् नत्रफला व्योषं नर्डङ्गमयसो रजिः| मधुसनपवयुविं नलह्याि् कामलापाण्डुरोगर्ाि्|| िुल्या अयोरजिःपथ्याहररद्रािः क्षौद्रसनपवषा| िूनणविािः कामली नलह्याद् गुडक्षौद्रेण र्ाऽभयािः|| नत्रफला िे हररद्रे ि कटुरोनहण्ययोरजिः| िूनणविं क्षौद्रसनपवभ्ां स लेहिः कामलापहिः||(ch.chi.16/97-99) • अररष्ट -गौडाररष्ट, बीजकाररष्ट, धात्र्यररष्ट 25
  • 26.
    शाखाश्रया हचहकत्सा • बनहवनिनतररदक्षाणांरूक्षाम्लैिः कटुक ै रसैिः|| शुष्कमूलककौलत्थैयूवषैश्चान्नानि भोजयेि्| मािुलुङ्गरसं क्षौद्रनपप्पलीमररिाक्तििम्|| सिागरं नपबेि् नपतं िर्थाऽस्यैनि स्वमाशयम्|(ch.chi.16/128-129) कटुिीक्ष्णोष्णलर्णैभृवशाम्लैश्चाप्युपक्रमिः|| आनपतरागाच्छ्क ृ िो र्ायोश्चाप्रशमाद्भर्ेि्| स्वस्र्थािमागिे नपते पुरीषे नपतरनििे|| निर्ृतोपद्रर्स्य स्याि् पूर्विः कामनलको नर्नधिः|(ch.chi.16/130-131) 26
  • 27.
    िलीमक हचहकत्सा • गुड ूिीस्वरसक्षीरसानधिं मानहषं घृिम्|| स नपबेक्तरिर्ृिां नस्नग्धो रसेिामलकस्य िु| नर्ररिो मधुरप्रायं भजेि् नपतानिलापहम्|| द्राक्षालेहं ि पूर्ोिं सपींनष मधुरानण ि| यापिाि् क्षीरबस्तींश्च शीलयेत्सािुर्ासिाि्|| मािीकाररष्टयोगांश्च नपबेद् युक्त्याऽनिर्ृद्धये| कानसक ं िाभयालेहं नपप्पलीं मधुक ं बलाम्|| पयसा ि प्रयुिीि यर्थादोषं यर्थाबलम्| (ch.chi.16134-138) 27 शमन औषहर् र्क्ति हवरेचन
  • 28.
    पथ्य •शालीि् सयर्गोधूमाि् पुराणाि्यूषसंनहिाि्| मुद्गाढकीमसूरैश्च जाङ्गलैश्च रसैनहविैिः| (ch.chi.41) पुराणा शाली, यर्, गोधूम यूष- मुद्गा, आढनक, मसूर जाङ्गल रस लघु पञ्चमूल जल, मृिीक रस, आमलनक रस for पाि and भोजि शाकानश्रि कामला-बनहव निनतरर दक्षाणां मांस(रूक्ष, अम्ल, कटु रस), शुष्क मूलक, क ु लर्थ यूष, मािुलुङ्ग स्वरस- मधु, नपप्पनल, मररि, िागर, कटु, िीक्ष्ण, उष्ण, लर्ण, अम्ल रस युि आहार 28
  • 29.
    अपथ्य • All नपतलआहार नर्हार. • Like कटु उष्ण िीक्ष्ण आहार, • आिप सेर्ि, नदर्ास्वप्न etc नर्हार • क्रोध 29
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    DISCUSSION • What isthe difference between पाण्ु and कामला ? • एिेि कामलादीिां सञ्ज्ञािां नर्नशष्टार्स्र्थानर्षयत्वानिनशष्टत्वं, पयावयत्वं पाण्डुरो गत्वापररत्यागाि्|(su.u.44/11. Dalhana) 30
  • 31.
    • Is पाण्ुरोग संप्राक्ति is necessary to get कामला? • भर्ेक्तितोल्बणस्यासौ पाण्डुरोगादृिेऽनप ि॥(a.h.ni.13/17) • र्क्ष्यानम नलङ्गान्यर्थ कामलायािः | यो ह्यामयान्ते सहसाऽन्नमम्लमद्यादपथ्यानि ि िस्य नपतम् | करोनि पाण्डुं र्दिं नर्शेषाि् पूर्ेररिौ िक्तन्द्रबलक्षयौ ि |(su.u.44/11) 31
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    • Is स्नेिस्वेद पूवध हवरेचन or direct हवरेचन is recommended in कामला? • In कोष्टशाकानश्रि कामला doshas are already in koshta so can go directly with virechana and then to take out shakhashritha dosha snehana purva virechana in done. 32
  • 33.
    33 CONCLUSION • Charaka describethat kamala is a predominant stage of pandu. • Sushrutha considered kamala synonym of pandu and considers as vishishtavasta of pandu. • Kamala has its samprapthi that is predominance of pitta and involvement of raktha and mamsa dhatu. • Main line of treatment is virechana in koshtashritha kamala. • In shakashritha, pitta koshta gamana is important so pitta vridhi is done by katu amla ushna etc dravyas and then virechana in done. • Chikitsa is done seeing bala and dosha of the patient.
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    व्याकरण हवशेष आदौ हभषक ् क ुयाधत् कमधहभः वमन आहदहभः पद आहदः हभषक ् कमधन् वमनं आहदः हलङ्ग पुक्तिङ्ग पुक्तिङ्ग नपुंसक नपुंसक पुक्तिङ्ग हवभक्ति सिहम प्रथम तृतीय तृतीय वचन एकवचन एकवचन र्हुवचन र्हुवचन र्ातु डुदाञ्- दाने(देना) हञभी- भये(डर ना) टुक ृ ञ्- करणे (करना) टुक ृ ञ्- करणे (करना) उहिरणे (वमन िोन) डुदाञ्- दाने(देना) पद सुर्न्त सुर्न्त निङ्गन्त सुर्न्त सुर्न्त सुर्न्त 35
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