उस्ताद बिस्स्मल्ला खा़ाँ(अंग्रेजी: Bismillah Khan,
जन्ि: 21 िार्च, 1916 - िृत्यु: 21
अगमत, 2006) हहन्दुमतान के प्रख्यात शहनाई वादक
थे। उनका जन्ि डुिरा़ाँव, बिहार िें हुआ था।
सन् 2001 िें उन्हें भारत के सवोच्र् सम्िान भारत
रत्न से सम्िाननत ककया गया।
वह तीसरे भारतीय संगीतकार थे स्जन्हें भारत रत्न से
सम्िाननत ककया गया है।
बिस्मिल्लाह खान ,दुिरांव िें 21 िार्च 1913 को
हुआ था उत्तरी भारत िें बिहार। उन्होंने कहा कक के
दूसरे पुत्र थे Bachaie खान और Mitthan । उनके
िाता-वपता शुरू ककया था उनके पहले जन्िे साथ
कववता के मलए उसे Qamaruddin नामित िेटे
Shamshuddin । हालांकक, उनके दादा रसूल िख्श
खान , भोजपुर की अदालत की शहनाई िामटर कहा,
" बिस्मिल्ला !" (" अल्लाह के नाि पर !") पर उसे
और की दृस्टट उसके िाद वह इस से जाना जाने लगा
नाि ।
8.
छह साल कीउम्र िें वह वाराणसी ले जाया गया। वह प्राप्त
उनके र्ार्ा , देर अली िख्श ' Vilayatu ' के तहत अपने
प्रमशक्षण , वाराणसी के ववश्वनाथ िंहदर से जुडी एक शहनाई
खखलाडी। बिहार सरकार, एक संग्रहालय की मथापना का
प्रमताव ककया गया है एक Life-sized के एक टाउन हॉल व
पुमतकालय और मथापना दुिरांव िें उसकी birthplace पर
प्रनतिा ।
अपने पूवचजों अदालत संगीतकार थे और िें खेलने के मलए
इमतेिाल अि िें भोजपुर की ररयासतों िें Naqqar खाना
बिहार। उनके वपता की अदालत िें एक शहनाई खखलाडी थे
दुिरांव एमटेट , बिहार के िहाराजा के शव प्रसाद मसंह ।
एक पववत्र मशयािुस्मलि हालांकक , वह कई तरह, यह
भी था की परवाह ककए बिना धिच की भारतीय
संगीतकारों , के एक भक्त सरमवती ज्ञान और कला
की देवी , और अक्सर प्रमसद्ध सहहत हहंदू िंहदरों ,
पर खेला नदी के तट पर वाराणसी िें ववश्वनाथ
िंहदर, गंगा । उन्होंने यह भी आध्यास्त्िक गुरु प्रेि के
मलए प्रदशचन रावत ।
बिस्मिल्लाह खान शायदअके ले ही स्जम्िेदार था
शहनाई एक प्रमसद्ध शामत्रीय वाद्य िनाने के
मलए । वह भारतीय संगीत के कें द्र मतर के मलए
शहनाई लाया कलकत्ता िें अखखल भारतीय
संगीत सम्िेलन िें अपने संगीत कायचक्रि के
साथ 1937 िें वह लगभग होने के साथ जिा
ककया गया वह और शहनाई के रूप िें साधन
पर एकाधधकार लगभग सिानाथी ।
खान के िादमवतंत्र िेहतरीन संगीतकारों िें से एक
है भारतीय शामत्रीय संगीत और का सिसे अच्छा
उदाहरण िें से एक भारत िें हहंदू -िुस्मलि एकता
। वह करने के मलए शहनाई खेला दुननया भर िें
दशचकों । वह इतना सिवपचत होने के मलए जाना
जाता था उसकी कला के रूप िें के रूप िें वह
शहनाई करने के मलए भेजा है कक उसकी िेगि
(उदूच िें पत्नी) के िाद उनकी पत्नी की िृत्यु हो
गई । उनकी िृत्यु पर , एक सम्िान के रूप िें ,
उसकी शहनाई उसके साथ दफनाया गया था। वह
था के िाध्यि से शांनत और प्यार के प्रसार के िारे
िें उनकी दृस्टट के मलए जाना जाता है संगीत ।
खान हदल्ली केलाल पर प्रदशचन की दुलचभ सम्िान था
यह भी 1947 िें उन्होंने भारत की आजादी की पूवच
संध्या पर ककला राग Kafi भारत की पूवच संध्या पर
लाल ककले से प्रदशचन ककया पहला गणतंत्र हदवस
सिारोह , 26 जनवरी 1950 । उनके गायन भारत की
मवतंत्रता की एक सांमकृ नतक हहमसा िन गया था
दूरदशचन हर पर प्रसाररत हदवस सिारोह , 15 अगमत
को वषच। प्रधानिंत्री के भाषण के िाद पुरानी हदल्ली
दूरदशचन िें लाल ककला ( लाल ककला, ) से शहनाई
वादक द्वारा एक जीने के प्रदशचन का प्रसारण होगा।
पंडडत नेहरू के सिय से हदनांककत यह परंपरा ।
खान कफल्िों केसाथ एक संक्षक्षप्त संिंध था। वह
खेला कन्नड िें अपन्ना की राजकु िार की भूमिका के
मलए शहनाई कफल्ि Sanaadi अपन्ना । उन्होंने कहा
कक Jalsaghar िें अमभनय ककया , एक कफल्ि
सत्यजीत रे द्वारा और गूंज िें शहनाई की आवाज
प्रदान की Uthi शहनाई (1959) । प्रमसद्घ ननदेशक
गौति घोष ननदेमशत अिेस्िंग Meel Se Mulaqat , के
िारे िें एक वृत्तधर्त्र खान का जीवन। 1967 की
कफल्ि मनातक िें , वहा़ाँ एक है पोमटर ववज्ञापन "
बिस्मिल्ला खान और सात संगीतकारों " िकच ले,
कै मलफोननचया के एक व्यमत सडक पर।
खान शायद हीकभी छात्रों को मवीकार कर मलया।
उन्होंने सोर्ा कक यहद वह यह उपयोगी नहीं होगा
अपने ज्ञान साझा करने के मलए सक्षि होगा यह
के वल अपने छात्रों को एक छोटे से ज्ञान देना होगा।
कु छ उनके अनुयानययों के एस Ballesh , के साथ ही
खान के शामिल अपने िेटों, नास्जि हुसैन और नैयर
हुसैन ।
17 अगमत 2006को, खान िीिार मलया गया
था और िें भती कराया हेररटेज अमपताल,
इलाज के मलए वाराणसी । वह िर गया 21
अगमत 2006 को र्ार हदनों के िाद होने के
कारण एक हृदय की धगरफ्तारी के मलए ।
उन्होंने कहा कक पांर् िेहटयों, तीन िेटे और एक
से िर् गया है पोते और िहान पोते की िडी
संख्या है, और उनके दत्तक िेटी डॉ सोिा घोष
(प्रमसद्ध हहन्दुमतानी shastriya संगीत
प्रनतपादक)
29.
भारत सरकार नेराटरीय के एक हदन
घोवषत उनकी िृत्यु पर शोक । एक
के साथ-साथ उसका शरीर शहनाई
की Fatemain कबिमतान िें दफनाया
गया 21 तोपों की सलािी के साथ
एक नीि के पेड के नीर्े पुराने
वाराणसी भारतीय सेना से ।
संगीत नाटक अकादिी, नई
हदल्ली, ' उमताद की शुरूआत
उनके सम्िान िें 2007 िें
बिस्मिल्लाह खान युवा
पुरमकार ' , । यह संगीत ,
रंगिंर् के क्षेत्र िें युवा
कलाकारों को हदया जाता है
और नृत्य ।
बिस्मिल्लाह खान सेडॉक्टरेट की िानद
था-
िनारस हहंदू ववश्वववद्यालय, वाराणसी
ववश्व भारती ववश्वववद्यालय शांनत
ननके तन
47.
दूसरों के अंतगचतननम्नमलखखत-
-भारत के तत्कालीन प्रधानिंत्री द्वारा आिंबत्रत ककया
गया था
पंडडत जवाहर लाल नेहरू पर पहले शहनाई खेलने के मलए
हदल्ली के लाल िें मवतंत्रता हदवस (15 अगमत 1947)
ककले।
-िॉस्न्रयल िें ववश्व प्रदशचनी िें भाग मलया
-कान कला िहोत्सव िें भाग मलया
-ओसाका व्यापार िेले िें भाग मलया
-अपने 80 वें जन्िहदन के ववश्व संगीत से िनाया गया
न्यूयॉकच िें संमथान
48.
नाि = ववक्रानतरॉय
कक्षा = दसवीं. धारा ='स'.
ववषय = हहन्दी.
मकू ल = के न्द्रीय ववद्यालया िी.ई.जी, पुणे – 06.