हिन्दी
प्यारे बच्चों, आज की कक्षा में आपका स्वागत िै
प्रस्तुतकर्त्ाा
श्याम सुोंदर दास
प्रहिहक्षत स्नातक हिक्षक हिन्दी
जवािर नवचदय हवद्यालय , पेखुबेला
ऊना , हिमाचल प्रदेि
सोंपक
ा सूत्र – 8219881981
कहवता
प्रस्तुतीकरण
प्यारे बच्चों आज हम आपक
े समक्ष एक कविता
लेकर उपस्थित हुए है वजसक
े बारे में हम पहले आप से पूिव ज्ञान से
सोंबस्ित चचाव करेंगे पूिव ज्ञान से आप स्वयों ही कविता क
े शीर्वक तक
पहुुँच जाएों गे ।
प्रश्न-1 आप खेल क
े मैदान में जाकर
क्या करते हैं ?
उत्तर-1 हम खेल खेलते हैं।
प्रश्न-2 आप कौन–कौन से खेल
खेलते हैं ?
उत्तर-2 कबड्डी,खच-खच,विक
े ट आवद।
प्रश्न-3 आपने सड़क पर या गली में
क्या कचई खेल देखा है,अगर देखा है
तच कौन- कौन सा ?
उत्तर-3 मदारी का खेल,जादू का खेल
आवद।
प्रश्न-4 क्या राजथिान का खेल वकसी
ने देखा हैं,उस खेल का क्या नाम है ?
उत्तर-4 श्रीमान जी,मैंने देखा है,
उसका नाम कठपुतली है।
कठपुतली
कठपुतली भिानीप्रसाद वमश्र
कठपुतली
गुस्से से उबली
बचली- ये धागे
क्यचों हैं मेरे आगे पीछे
मुझे तचड़ दच ,
मुझे मेरे पाुँिचों पर छचड़ दच ।
शब्दािव
कठपुतली- दू सरचों क
े इशारचों पर नाचनेिाली
गुस्से से उबली- बहुत गुस्सा हुई
पााँवचों पर छचड़ दच- स्वतोंत्र रहने दच।
सप्रसोंग व्याख्या
प्रसोंग- प्रस्तुत पोंस्ियाुँ हमारी पाठय पुस्तक िसोंत भाग-2 से
भिानीप्रसाद वमश्र द्वारा रवचत ‘कठपुतली’ नामक कविता से
अितररत हैं । इस काव्याोंश में कवि ने डचररयचों से बोंधी एक
कठपुतली क
े स्वतोंत्र हचने की इच्छा प्रकट की है।
व्याख्या- कवि कहता है वक दू सरचों क
े इशारे पर नाचने िाली
कठपुतली एक वदन अपनी गुलामी कच देखकर बहुत गुस्से में
आकर कहने लगी वक मेरे शरीर क
े आगे-पीछे ये धागे क्यचों बाुँध
रखे हैं। तुम इन्हें तचड़ दच अिावत स्वतोंत्र कर दच। मुझे मेरे पाोंिचों पर
स्वतन्त्र हचकर चलने दच।
कविताोंश
सुनकर बचली और-और
कठपुतवलयाुँ
वक हाुँ,
बहुत वदन हुए
हमें अपने मन क
े छों द छु ए।
शब्दािव
और-और- अन्य सभी
मन क
े छों द- मन क
े भाि, मन की खुशी
व्याख्या
इन पोंस्ियचों में कवि कहता है वक एक कठ् पुतली क
े स्वतोंत्र हचने
की इच्छा सुनकर अन्य सभी कठपुतवलयाों कहने लगी वक हमने
बहुत वदनचों से अपने मन की बात नहीों की । हमने अपने मन की
इच्छाओों कच दबा रखा हैं।
कविताोंश
मगर .....
पहली कठपुतली सचचने लगी
ये क
ै सी इच्छा
मेरे मन में जागी ?
शब्दािव
मगर- परोंतु,वकन्तु
जगी- जागी है।
व्याख्या
व्याख्या- कवि कहता है वक अन्य कठपुतवलयचों क
े स्वतोंत्र हचने की
इच्छा देखकर पहली कठपुतली सचचने लगी, यह मेरे मन में क
ै सी
इच्छा जगी है ? अब िह सबकी विम्मेदारी क
े बारे में सचचने लगी
िी वक क्या स्वतोंत्र हचकर सब खुश रह पाएुँ गी ? क्या िे मन चाहा
जीिन जी पाएुँ गी ? क्या उनका यह कदम ठीक हचगा ?
मूल्ाोंकन- तुमने क्या सीोंखा ?
प्रश्न-1 कठपुतली वकस कारण गुस्से से उबल पड़ी ?
प्रश्न-2 कठपुतली की मुख्य इच्छा क्या िी ?
प्रश्न-3 कठपुतली कविता क
े कवि का नाम बताइए ।
प्रश्न-4 कठपुतली क
े मन में क्या जाग उठी ?
प्रश्न-5 कौन सी कठपुतली सचचने लगी ?
गृहकायव
प्रश्न-1 पहली कठपुतली की बात दू सरी कठपुतवलयचों कच क
ै सी लगी
?
प्रश्न-2 कठपुतवलयचों ने बहुत वदन से वकसक
े छों द नहीोंछु ए ?
प्रश्न-3 कठपुतली कच गुस्सा क्यचों आया ?
प्रश्न-4 कठपुतली आिादी क्यचों चाहती िी ?
प्रश्न-5 कठपुतली वकस राज्य से सोंबस्ित है ?
पुनरािृवत्त
प्रश्न-1 कौन सी कठपुतली सचचने लगी ?
प्रश्न-2 कठपुतली कविता वकस कवि की रचना है ?
प्रश्न-3 कठपुतली की मुख्य इच्छा क्या िी ?
प्रश्न-4 कठपुतली अपने पाुँि पर खड़ी क्यचों नहीोंहच पाती ?
प्रश्न-5 कठपुतली शब्द वकतने शब्दचों से वमलकर बना हैं ?
आभार
कठपुतली पावर पॉइोंट कहवता ध्यानपूवाक ग्रिण करने क
े
हलए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद |
िुभकामनाओों सहित:-
श्याम सुोंदर दास,प्रहिहक्षत स्नातक हिक्षक (हिन्दी)
जवािर नवचदय हवद्यालय,पेखुबेला
ऊना,
हिमाचल प्रदेि ।

पाठ 4 कठपुतली 1.pptx

Editor's Notes