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महाराष्ट्रस्य प्रथमा महहला शिक्षिका सावित्री बाई फु ले नामधेय
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१८४८ िमे खिस्िाब्िे
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ज्योतिबामहोियेन सह
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साहहत्यरचनया अवि सावित्री महहयिे। िस्या:
काव्यसड़्ग्लनव्द्यं ििषिे ‘काव्यफु ले’
‘सुबोधरत्नाकर’ चेति। िारििेिे
महहलोत्थानस्य...
आिाय = लेकर
प्रस्ििण्डान् = ित्थर के टुकड़ो को
सविनोिम ् = हँसी मजाक
आलिन्िी = बाि करिी हुई
अजायि = िैिा हुई
अशिहहिौ = कहे ...
सोढुम ् = सहने में
उत्िीड़ड़िानाम् = सिाए गए का
अश्ांिम ् = बबना थके हुए
महहयिे = बढ़-चढ़कर हैं
िधबध्िम ् = कवििा के रूि में
ग...
उनकी कु छ कवििाएं तननन शलखिि हे।:-
1
ज्ञान नहीं विद्या नहीं,उसे अस्जषि करने की स्जज्ञासा नहीं
बुद्धध होकर िी जो उस िर चले ...
2
काम करना है जो आज, उसे अब कर ित्काल।
जो करना है िोिहर में, उसे कर अब आकार।
कु छ िणों के बाि का कायष,अिी करो िूरा ज़ोर लगा...
Savitri bai fule.सावित्री बाई फुले।
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Savitri bai fule.सावित्री बाई फुले।

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eleventh chapter of the NCERT sanskrit textbook of class 8th.
आठवि कक्षा की एनसीईआरटी की संस्कृत की पुस्तक का एकादसवा पाठ।

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Savitri bai fule.सावित्री बाई फुले।

  1. 1. महाराष्ट्रस्य प्रथमा महहला शिक्षिका सावित्री बाई फु ले नामधेय अस्स्ि। जनिरी मासस्य िृिीय हििसे १८३१ िमे खिस्िाब्िे महाराष्ट्रस्य नायगाि-नस्नन स्थाने सावित्री अजायि। त्स्यााः मािा लक्ष्मीबाई वििा च िंडोजी इति अशिहहिौ। नििर्षिेिीया सा ज्योतिबा फु ले महोियेन िररणीिा। सोअवि ििानीं त्रयोिििर्षकल्िाः एि आसीि्। यिोहह साः स्त्रीशििायााः प्रबलाः समथषकाः असीि् अिाः सवित्रयााः मनशस स्स्थिा अध्ययनशिलार्ा उत्सं प्राप्िििी। इिाः िरं सा साग्रहम आड़्ग्लिार्ाया अवि अध्ययनं कृ ििािी।
  2. 2. १८४८ िमे खिस्िाब्िे िुणे नगरे सावित्री ज्योतिबामहोियेन सह कान्यानां कृ िे प्रिेिस्य प्रथमं विद्यालयमं आरिि। ििानीं सा के िलम् सप्ििििर्ीया असीि् १८५१ िमे खिस्िाब्िे अस्िृश्यत्िाि् तिरस्कृ िस्य समुिायस्य बाशलकानां कृ िे िृथक्िया िया अिराः विद्यालयाः प्रारब्धाः।
  3. 3. साहहत्यरचनया अवि सावित्री महहयिे। िस्या: काव्यसड़्ग्लनव्द्यं ििषिे ‘काव्यफु ले’ ‘सुबोधरत्नाकर’ चेति। िारििेिे महहलोत्थानस्य गहनािबोधाय सावित्रीमहोिया: जीिनचररिम् अिश्यम् अध्येिाव्यम्।
  4. 4. आिाय = लेकर प्रस्ििण्डान् = ित्थर के टुकड़ो को सविनोिम ् = हँसी मजाक आलिन्िी = बाि करिी हुई अजायि = िैिा हुई अशिहहिौ = कहे गये है
  5. 5. सोढुम ् = सहने में उत्िीड़ड़िानाम् = सिाए गए का अश्ांिम ् = बबना थके हुए महहयिे = बढ़-चढ़कर हैं िधबध्िम ् = कवििा के रूि में गहनािबोधाय = गहराई से समाजने (गहन+अिबोधाय) के शलए
  6. 6. उनकी कु छ कवििाएं तननन शलखिि हे।:- 1 ज्ञान नहीं विद्या नहीं,उसे अस्जषि करने की स्जज्ञासा नहीं बुद्धध होकर िी जो उस िर चले नहीं,उसे इंसान कहे क्या? िे िो ईश्िर बबना काम ककए बैठे बबठाए िाट िर ढ़ोर डगर िी एसा किी करिा नहीं स्जसका कोई विचार-अस्िार नहीं,उसे इंसान कहे क्या? िूसरों की मिि ना करे सेिा त्याग िया माया ममिा आहि स्जसके िास ये सद्गुण नहीं,उसे इंसान कहे क्या? ििु ििी,बंिर आिमी जन्म मृत्यु सबको ही इस बाि का ज्ञान स्जसे नहीं,उसे इंसान कहे क्या?
  7. 7. 2 काम करना है जो आज, उसे अब कर ित्काल। जो करना है िोिहर में, उसे कर अब आकार। कु छ िणों के बाि का कायष,अिी करो िूरा ज़ोर लगाकर। हो गया कायष समाप्ि या नहीं,मौि नहीं िूछिी आकार। (सावित्रीबाई फु ले की यह कवििाएं मराठी िार्ा के प्रशसद्ध कवि िेिर ििार द्िारा मराठी से हहन्िी में अनूहिि है) इनके अतिररक्ि सावित्रीबाई फु ले की और कई सारी कवििाएं प्रशसद्ध है

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