मैं कौन हूँ व कहा से आया हूँ आइये जरा गंभीरता से विचार करे मैं कौन व कहाँ से आया हूँ और कहा जाना है ?मैं पवित्र आत्मा चौरासी लाख योनिओं में भटकते -भटकते अपने पुण्य कर्मो के उदय होने पर इस दुर्लभ मनुष्य योनी में आया और मुझे मोक्ष जाना हैं/
जैन धर्म केअनर्ोल सूत्र:
र्ैं कौन हूूँ व कहा से आया हूूँ आइये जरा गंभीरता से ववचार करे र्ैं कौन व कहाूँ से आया हूूँ और कहा
जाना है ?र्ैं पववत्र आत्र्ा चौरासी लाख योननओं र्ें भटकते -भटकते अपने पुण्य कर्ो के उदय होने
पर इस दुलमभ र्नुष्य योनी र्ें आया और र्ुझे र्ोक्ष जाना हैं/ र्नुष्य योनी र्ें ही क्या होता हैं ? ससर्म
इसी योनी से ही जीव र्ोक्ष पा सकता हैं,यहाूँ तक की देवताओ को भी र्ोक्ष पाने के सलए र्नुष्य योनी
र्ें आकर पुण्य कर्म करने पड़ते हैं,तब ही वो र्ोक्ष पा सकते हैं / क्या र्नुष्य ससर्म पूजा- पाठ
आराधना एवं परोपकार के कायम करके र्ोक्ष पा सकता हैं ? "नहीं" इन सबसे धन - दौलत,वैभव यहाूँ
तक की देव पद भी पाया जा सकता हैं,परन्तु र्ोक्ष पद नहीं हर्ें र्ोक्ष र्ागम र्ें जाने के सलए क्या
करना होगा ? राग -द्वेष को तजकर,र्न -वचन और काया से हर सर्य ससर्म अपने को देखकर
चचंतन करना और जो कसर्या अपने र्ें नजर आये उन्हें दूर करना ही सबसे सरल उपाए हैं,लेककन यह
बबना गुरु के संभव नहीं हैं /