स्व. जयपाल ससिंहपटले : पोवारी सासहत्य का सपतामह
स्व. जयपाल ससिंह पटले : पोवारी सासहत्य का सपतामह
पोवारी साहित्य का
हपतामि स्व. श्री जयपाल हसिंि
जी पटले को जनम बालाघाट
हिला की वाराहसवनी तिसील
का सालेटेका गाव मा हिनािंक
१७/०७/१९३५ मा भयो िोतो।
ओनकी प्रारम्भिक पढ़ाई
हलखाई बालाघाट हिला मा
भयी।बरस १९५६ मा उनना
हबलासपुर लक़ इलेम्भरिहियन
मा आई टी आई का प्रहिक्षन
लेयकन मिाराष्ट्ि हवि् युत् मण्डल मा १९९३ वरी नौकरी करीन।
उनको हिरियमा पोवार समाज को प्रहत लगत हपरम िोतो।
पोवार(पिंवार) समाज की मातृभाषा पोवारी भाषा को सिंरक्षन् अन सिंवर्धन
लाई उनना, "मायबोली पोवारी बचाओ" अहभयान की िुरुवात करकन
हवलुप्त िोन की कगार परा उभी यन भाषा ला नवजीवन िेनको भगीरथ
काम करीन।
पिंवार समाज की प्रहतहित वाहषधक पहिका, "पिंवार भारती" का
सन २००१ को अिंक मा ओनको येक लेख प्रकाहित भयो िोतो। यन लेख मा
उनना पोवारी बोली का जतन लाई समाजलक़ आह्वान करी िोहतन। यन
लेखमा स्व. पटले जी को द्वारा रहचत पोवारी मा चिंि लाइन िोती-
पोवारी बोली की पुकार
आपलोच घर मा मी भई गई पराई गा।
नािनािंग रव्हन की मोरो पर पारी आ गई गा ।।
आपलोच घर मा (1)
2.
स्व. जयपाल ससिंहपटले : पोवारी सासहत्य का सपतामह
बुढ़गी माताराम मोला मान लक बोल सेत।
जवान माय-बहिन कर्ी-कर्ीच बोल सेत ।।
जवान बेटा-बेटी मोरी िासीच उडावसेत ।
िरम लका मी िोय जासू लाल-पीवरीगा ।। अपलोच घर मा..
मोठागन आवन की जब मी सोचू सू ।
भाउ ना िािाजी ला िेखकन डरासू ।।
मोठािंगन मािारा -मेन्द्रा की गोिी आयकखेन ।।
डर को मायाध मी िोय जासू घामघयानी गा। अपलोच घर मा...
मोरा आपराच मोला डरावन लग्या सेती।
आपलाच मोरोलक िुहुर परान लग्या सेती ।।
हिन्दी अना मराठी मा सब बोलन लाग्या सेती...
२००१ मा प्रकाहित यव कहवता मा आपरी मातृभाषा की म्भथथहत
हिस रिी से की कसो आता पोवारी बोलन वाला कम िोय रिी सेती। येको
बाि स्व. जयपाल हसिंि िी ना पोवारी भाषा बचावन लाई आपरो बच्यो
जीवनला अपधन कर िेईन। उनना पोवारी भाषा मा छः ि मिाग्रन्थ की रचना
करीसेती अना सातवो ग्रन्थ का प्रकािन ओनकी बेटी को द्वारा जल्दी िोय
रिी से।
स्व. जयपाल जी की पोवारी भाषा मा पहिली हकताब, २००६ मा
"पिंवार गाथा" प्रकाहित भयी। ओनकी राष्ट्ि सिंत तुकढ़ोजी मिाराज को प्रहत
अथाि आथथा िोती अना स्व. पटले जी न ओनको मिाग्रन्थ, "ग्राम गीता" का
पोवारी सिंस्करण २००९ मा प्रकाहित करीन। तसच आिरणीय जयपालहसिंि
िी न सनातनी हिन्िू र्रम को प्रचार-प्रसार आपरो साहित्य को माध्यम लक़
खुप करीसेती । उनना सन २०१२ मा गोस्वामी तुलसीिास िी द्वारा रहचत,
रामचररत मानस परा आर्ाररत पोवारी सिंस्करण, "गीत रामायण" मिाग्रन्थ
3.
स्व. जयपाल ससिंहपटले : पोवारी सासहत्य का सपतामह
की रचना करीन। तसच २०१४ मा उनना "श्रीमि भगवतगीता सार" का
पोवारी सिंस्करण हलखकन, समाज ला समहपधत करीन।
स्व. जयपाल हसिंि जी द्वारा कहवता सिंग्रि, सन २०१० मा "पोवारी
गीत गिंगा" को अना सन २०१५ मा "राजा भोज गीतािंजली" को प्रकािन
भयो। ओनकी कई रचना को प्रकािन पि-पहिका इनमा भयो िोतो। जीवन
का आम्भखर बेरा वरी ओनकी कलम कबीच निी रुकी। उनकी प्रेरणा लक़
२०१८ मा पोवारी साहित्य मण्डल की थथापना भयी। तसच पोवारी बोली को
प्रहत जन जन ला जाग्रत कर युवा वगध ला प्रोत्सािन िेन लाई श्री सी पटले िी,
इहतिासकार द्वारा "पोवारी भाषाहवि क्ािंहत" की िुरुवात भयी। २०२० मा
"पोवार इहतिास, साहित्य अना उत्कषध समूि" को द्वारा "राष्ट्ि ीय पोवारी
साहित्य अना सामाहजक उत्कषध सिंथथा" को गठन भयो। राष्ट्ि ीय पोवारी
साहित्य अना सामाहजक उत्कषध सिंथथा द्वारा प्रकाहित पहिका, "पोवारी
उत्कषध" का हवमोचन स्व. जयपाल हसिंि जी पटले जी को िाथ लक़ िोन को
सौभाग्य भेटयोिं िोतो। "पोवारी उत्कषध" पहिका, असी प्रथम पहिका िोती जो
पूणध रूप लक पोवारी भाषा मा छत्तीस क
ु र पोवार समाज की सिंस्क
ृ हत अना
समाजोत्थान लाई समहपधत िोती। अम्भखल भारतीय क्षहिय पिंवार/पोवार की
अहर्क
ृ त सिंथथा पोवारी साहित्य अना सािंस्क
ृ हतक उत्कषध को द्वारा समाज का
आराध्य मिाराजा भोज का जनमहिवस को अवसर परा प्रथम "राष्ट्ि ीय
पोवारी साहित्य सम्मलेन" का िर बरस आयोजन करन की िुरुवात भयी ।
स्व. जयपाल हसिंि िी को द्वारा पहिलो राष्ट्ि ीय पोवारी साहित्य सम्मलेन का
उि् घाटन कर यन कायधक्म की गररमा बढ़ाइन।
स्व. जयपाल हसिंि जी समाज का कई सिंगठना इनको सिंग भी जुडी
िोहतन। उनना पिंवार युवक सिंगठन, नागपुर मा सिंगठन सहचव(१९८५-९६)
अना मिासहचव(१९९६-९९) को पि परा रिकन समाज सेवा का काम
कररसेत्। अम्भखल भारतीय क्षहिय पिंवार मिासभा मा वय १९९५ लक़ १९९९
वरी सिसहचव को पि परा रिकन समाज का कायध करीन। पोवार समाज
का कायध को अलावा स्व. पटले िी ना सवधसमाज कल्याण का बी करीसेन।
१९८३ लक़ १९९३ वरी तािंहिक कामगार सिंघ मा मिासहचव बी रिीन।
4.
स्व. जयपाल ससिंहपटले : पोवारी सासहत्य का सपतामह
उनको द्वारा पोवारी साहित्य मा हियो अभूतपूवध योगिान को
कारन उनला "पोवारी साहित्य का हपतामि" कविनो िी हियािा सिी रिें।
पोवारी भाषा मा उनको साहित्य ना यन भाषा की समृम्भि अना हवकास मा
मील का पत्थर साहबत भयी से।
अि समाज कई साहित्यकार पोवारी भाषा मा अनेक हवर्ा मा
साहित्य सृजन का काम कर रिी सेती। अम्भखल भारतीय क्षहिय पोवार/पिंवार
मिासिंघ की साहिम्भत्यक िाखा, पोवारी साहित्य अना सािंस्क
ृ हतक उत्कषध
आिरणीय स्व. जयपाल जी पटले को पोवारी उत्थान का स्वप्न ला पूरा
करनलाई पुरो मनोयोग लक़ जुटी से। तसच समाज का कई सिंगठना अना
समूि अि पोवारी भाषा ला बचावन लाई जुटी सेती।
स्व. जयपाल हसिंि िी ना सेवाहनवृत्ती को उपरािंत पुरो जीवन जीवन
पोवार समाज अना पोवारी भाषा का उत्थान अहपधत कर िेईन। नागपुर मा
उनको हनवास थथान पोवारी सार्ना का मिंहिर िोतो। इतकन लक़ उनना
कबी पैिल त् कबी सायहकल को सफर करकन मध्यभारत मा पोवार समाज
मा आपरी भाषा अना सिंस्क
ृ हत को प्रहत हपरम अना मान जगावान का काम
करीन। स्व. जयपाल हसिंि पटले िी ना आपरी कलम ला पोवारी सिंस्क
ृ हत
अना भाषा का उत्थान लाई खुप चलाइन अना येतरा मिाग्रन्थ की रचना कर
पोवारी साहित्य ला नवो हिखर पर लेय गयीन।
पोवारी को सिंग हििंिी अना मराठी मा बी उनना लेखन का कायध
करी िोहतन। उनको जीवन सािगी का मूरत िोतो। सािगी का जीवन अना
उच्च हबचार को सिंग समाज का सािंस्क
ृ हतक अना सामाहजक उत्थान, यव
प्रेरणा सबको लाई युगो युगो तक अहवरत रिे, असो हबस्वास से।
माय सरस्वती को पुि अना पोवारी भाषा का हपतामि जयपाल
हसिंि िी ना हिनािंक ०४/०८/२०२१ ला यन िुहनया ला अलहविा किकन
स्वगधलोक मा गमन करीन। आम्ही आपरी मायबोली पोवारी अना समाज की
सिंस्क
ृ हत ला सब हमलकन सिंरहक्षत अना सिंवहर्धत करबीन तब यव उनको प्रहत
सच्ची श्रिािंजहल िोये।
✍ऋसि सबसेन, बालाघाट