vkxeu fof/k ,oa fuxeu
fof/k
¼ Inductive Method & Deductive
Method)
शोध-निर्देशक शोधार्थी
डॉ. प्रतीक जकताप श्रीमाि पवि क
ु मार नतरोलकर
:i js[kk
• आगमन विवि – अर्थ एिं स्वरूप
• आगमन विवि क
े गुण
• आगमन विवि क
े दोष
• वनगमन विवि
• 1) सामान्य वनयमों का प्रस्तुतीकरण
• 2) सम्बन्ोंकी स्र्ापना
• 3) उदाहरणों द्वारा परीक्षण
• वनगमन विवि क
े गुण
• वनगमन विवि क
े दोष
• आगमन तर्ा वनगमन विवियोंमें अन्तर
आगमि नवनध – अर्थथ एवं स्वरूप
• आगमि नवनध उस नवनध को कहते हैं नजसमें नवशेष तथ्ों तर्था घटिाओं क
े निरीक्षण तर्था
नवश्लेषण द्वारा सामान्य नियमों अर्थवा नसद्धान्ों का निमाथण नकया जाता हैं। इस नवनध में
ज्ञात से अज्ञात की ओर, नवनशष्ट से सामान्य की ओर तर्था मूतथ से अमूतथ की ओर िामक
नशक्षण सूत्ों का प्रयोग नकया जाता हैं।
• र्दुसरे शब्ों में, इस नवनध का प्रयोग करते समय नशक्षक बालकों क
े सामिे पहले उन्ीं क
े
अिुभव क्षेत् से नवनभन्न उर्दाहरणों सम्बन्ध में निरीक्षण, परीक्षण तर्था ध्यािपूवथक सोच नवचार
करक
े सामान्य नियम अर्थवा नसद्धान् निकलवाता है। इस प्रकार आगमि नवनध में नवनशष्ट
उर्दाहरणों द्वारा बालकों को सामान्यीकरण अर्थवा सामान्य नियमों को निकलवािे क
े नलए
प्रोत्सानहत नकया जाता हैं।
• उर्दाहरण क
े नलये व्याकरण पढाते समय बालकों क
े सामिे नवनभन्न व्यक्तियों, वस्तुओं
तर्था स्र्थािों एवं गुणों क
े अिेक उर्दाहरण प्रस्तुत करक
े नवश्लेषण द्वारा यह सामान्य
नियम निकलवाया जा सकता हैं नक नकसी व्यक्ति, वस्तु तर्था स्र्थाि एवं गुण को संज्ञा
कहते हैं।
• नजस प्रकार आगमि नवनध का प्रयोग नहन्दी में नकया जा सकता हैं, उसी प्रकार इस
नवनध को इनतहास, भूगोल, गनणत, िागररक शास्त्रा तर्था अर्थथशास्त्र आनर्द अिेक नवषयों
क
े नशक्षण में भी सफलतापूवथक प्रयोग नकया जा सकता है। आगमि नवनध में नशक्षण
क्रम को निम्ननलक्तित सोपािों में बााँटा जाता हैं-
• उर्दाहरणों का प्रस्तुतीकरण – इस सोपाि में बालकों क
े सामिे एक ही प्रकार क
े अिेक
उर्दाहरण प्रस्तुत नकये जाते हैं।
• नवश्लेषण – इस सोपाि में प्रस्तुत नकये हुए उर्दाहरणों का बालकों से निरीक्षण कराया
जाता है। तत्पश्चात् नशक्षक बालकों से नवश्लेषणात्मक प्रश्न पूछता है अन् में उन्ें
उर्दाहरणों में से सामान्य तत्ों की िोज करक
े एक ही पररणाम पर पहुाँचिे क
े नलए
प्रोत्सानहत नकया जाता है।
• परीक्षण – इस सोपाि में बालको द्वारा निकाले हुये सामान्य नियमों की नवनभन्‍
ि
उर्दाहरणों द्वारा परीक्षा की जाती हैं।
आगमन विवि क
े गुण
• आगमि नवनध क
े निम्ननलक्तित गुण हैं:-
• आगमि नवनध द्वारा बालकों को िवीि ज्ञाि क
े िोजिे का प्रनशक्षण नमत्ता है। यह
परीक्षण उन्ें जीवि में िये- िये तथ्ों को िोज निकालिे क
े नलये सर्दैव प्रेररत करता
रहता है। अतः यह नवनध नशक्षण की एक मिोवैज्ञानिक नवनध है।
• आगमि नवनध में ज्ञात से अज्ञात की और तर्था सरल से जनटल की और चलकर मूतथ
उर्दाहरणों द्वारा बालकों सैसा मान्य नियम निकलवाये जाते है। इससे वै सनक्रय तर्था
प्रसन्‍
ि रहते है। ज्ञािाजथि हेतु उिकी रुनच निरन्र बिी रहती है एवं उिमें रचिात्मक
नचन्ि, आत्म नवश्वास आनर्द अिेक गुण नवकनसत हो जाते हैं।
• आगमि नवनध में ज्ञाि प्राप्त करते हुए बालक को सीििे क
े प्रत्येक स्तर को पार करिा
पड़ता है। इससे नशक्षण प्रभावशाली बि जाता है।
• इस नवनध में बालक उर्दाहरणों का नवश्लेषण करते हुए सामान्य नियम स्वयं निकाल लेते
हैं। इससे उिका मािनस क नवकास सरलतापूवथक हो जाता है।
• इस नवनध द्वारा प्राप्त नकया हुआ ज्ञाि स्वयं बालकों का िोजा हुआ ज्ञाि होता है। अतः
ऐसा ज्ञाि उिक
े मक्तस्तष्क का स्र्थायी अंग बि जाता हैं |
• यह नवनध व्यावहाररक जीवि क
े नलये अत्यन् लाभप्रर्द है। अत: यह नवनध एक प्राक
ृ नतक
नवनध हैं।
• आगमि नवनध क
े निम्ननलक्तित र्दोष हैं:-
• इस नवनध द्वारा सीििे में शक्ति तर्था समय र्दोिों अनधक लगते हैं।
• यह नवनध छोटे बालकों क
े नलये उपयुि िहीं है। इिका प्रयोग क
े वल बडे और वह भी
बुक्तद्धमाि बालक ही कर सकते हैं। सामान्य बुक्तद्ध वाले बालक तो प्रायः प्रनतभाशाली
बालकों द्वारा निकाले हुये सामान्य नियमों को आाँि मीचक कर स्वीकार कर लेते हैं।
• आगमि नवनध द्वारा सीिते हुये यनर्द बालक नकसी अशुद्ध सामान्य नियम की ओर पहुाँच जायें
तो उन्ें सत्य की ओर लािे में अिेक कनििाइयों का सामिा करिा पड़ता है।
• आगमि नवनध द्वारा क
े वल सामान्य नियमों की िोज ही की जा सकती है अत: इस नवनध
द्वारा प्रत्येक नवषय की नशक्षा िहीं र्दी जा सकती।
• यह नवनध स्वयं में अपूणथ है। इसक
े द्वारा िोजे हुये सत्य की परि करिे क
े नलये निगमि
नवनध आवश्यक हैं।
आगमन विवि क
े दोष
वनगमन विवि
नशक्षण की निगमि नवनध उस नवनध को कहते हैं नजसमें सामान्य से नवनशष्ट अर्थवा सामान्य नियम से नवनशष्ट उर्दाहरण की
ओर बढा जाता है। इस प्रकार निगमि नवनध आगमि नवनध क
े नबल्क
ु ल नवपरीत है। इस नवनध का प्रयोग करते समय
नशक्षक बालकों क
े सामिे पहले नकसी सामान्य नियम को प्रस्तुत करता है। तत्पश्चात उस नियम की सत्यता को प्रमानणत
करिे क
े नलए नवनभन्‍
ि उर्दाहरणों का प्रयोग करता है।
कहिे का तात्पयथ यह है नक निगमि नवनध में नवनभन्‍
ि प्रयोगों तर्था उर्दाहरणों क
े माध्यम से नकसी सामान्य नियम की
सत्यता को नसद्ध करवाया जाता है। उर्दाहरण क
े नलये, नवज्ञाि की नशक्षा र्देते समय बालकों से नकसी भी सामान्य नियम
को अिेक प्रयोगों द्वारा नसद्ध कराया जा सकता है। नजस प्रकार इस नवनध का प्रयोग नवज्ञाि क
े नशक्षण में नकया जा सकता
है उसी प्रकार इसका प्रयोग सामानजक नवज्ञाि, व्याकरण, अंकगनणत तर्था ज्यानमनत आनर्द अन्य नवषयों क
े नशक्षण में भी
सफलतापूवथक नकया जा सकता है। निगमि नवनध में निम्ननलक्तित सोपाि होते हैं:-
1) सामान्य नियमों का प्रस्तुतीकरण
इस सोपाि में नशक्षक बालकों क
े सामिे सामान्य नियमों को क्रमपूवथक प्रस्तुत करता है।
2) सम्बन्धों की स्र्थापिा
इस सोपाि में नवश्लेषण की प्रनक्रया आरम्भ होती है। र्दू सरे शब्ों में, नशक्षक प्रस्तुत नकये हुये
नियमों क
े अन्दर तक
थ युकत सम्बन्धों का निरुपण करता है।
3) उर्दाहरणों द्वारा परीक्षण
इस सोपाि में सामान्य नियमों की परीक्षा करिे क
े नलये नवनभि्ि उर्दाहरणों को ढूाँढा जाता है।
र्दू सरे शब्ों में, सामान्य नियमों का नवनभि्ि पररक्तस्र्थनतयों में प्रयोग नकया जाता है नजससे सत्यता
का िीक िीक परीक्षण हो जाये।
निगमि नवनध क
े निम्ननलक्तित गुण हैं:-
•यह नवनध प्रत्येक नवषय को पढािे क
े नलये उपयुि हैं।
•निगमि नवनध द्वारा बालक शुद्ध नियमों की जािकारी प्राप्त करते हैं, उन्ें अशुद्ध नियमों को
जाििे का कोई अवसर िहीं नमलता।
•इस नवनध द्वारा कक्षा क
े सभी बालकों को एक ही समय में पढाया जा सकता है।
•इस नवनध क
े प्रयोग से समय तर्था शक्ति र्दोिों की बचत होती है।
•निगमि नवनध में नशक्षक बिे बिाये नियमों को बालकों क
े सामिे प्रस्तुत करता है। अतः इस
नवनध में नशक्षक का कायथ अत्यन् सरल हैं।
वनगमन विवि क
े गुण
निगमि नवनध क
े निम्ननलक्तित र्दोष हैं:-
•निगमि नवनध में बालकों को नशक्षक द्वारा बिाया हुआ नियम अर्थवा नर्दया हुआ ज्ञाि हर हालात
में स्वीकार करिा पड़ता है।
•निगमि नवनध आगमि नवनध से नबल्क
ु ल उल्टी हैं। इस नवनध मैं सामान्य से नवनशष्ट की और,
अज्ञात से ज्ञात की और तर्था अमूतथ से मूतथ की और चलिा पड़ता हैं। इस दृनष्ट से यह नवनध नशक्षण
की अमिोवैज्ञानिक नवनध हैं।
•यह नवनध नियमों अर्थवा नसद्धान्ों को बलपूवथक रटिे क
ें नलये बाध्य करती है। पररणामस्वरूप
बालक पाि में कोई रूनच िही लेते ।
वनगमन विवि क
े दोष
•इस नवनध से बालकों को अपिे निजी प्रयासों द्वारा ज्ञाि को िोजिे का कोई अवसर िहीं नमलता
हैं। इससे उिमें से मािनसक र्दासता नवकनसत हो जाती हैं।
•बालकों में रचिात्मक प्रवृनत होती हैं। अतः वे वस्तुओं को बिािे, नबगाड़िे अर्थवा तोड़िे फोड़िे में
रुनच लेते हैं। पर निगमि नवनध क
े वल अमूतथ नचन्ि पर ही बल र्देती है। इससे बालकों की
रचिात्मक शक्तियााँ अनवकनसत ही रह जाती है।
•निगमि नवनध द्वारा रटा हुआ ज्ञाि बालकों क
े मक्तस्तष्क का स्र्थायी अंग िही बिता।
उपयुथि र्दोषों को र्देिते हुए हम इस निष्कषथ पर आते हैं नक निगमि नवनध से आगमि नवनध द्वारा
िोजे हुए नियमों अर्थवा नसद्धान्ों का प्रयोग अभ्यास बहुत अच्छा कराया जा सकता है।
आगमि और निगमि र्दोिों नवनधयों क
े उपयुथि अन्र पर प्रकाश डालिे से स्पष्ट हो जाता है नक
र्दोिों नवनधयााँ एक र्दू सरे क
े िीक नवपरीत है। आगमि नवनध से सामान्य नियमों अर्थवा नसद्धान्ों
का प्रनतपार्दि होता है तर्था निगमि नवनध से प्रनतपानर्दत नियमों का नवनशष्ट उर्दाहरणों द्वारा
सत्यता नसद्ध कराई जाती है।
उि र्दोिों नवनधयों में से नकसी एक ही नवनध क
े प्रयोग से नशक्षण में सफलता िहीं नमल सकती।
इसका कारण यह है नक बालकों को वास्तनवक ज्ञाि र्देिे क
े नलये जहााँ एक और आगमि नवनध
द्वारा सामान्य नियमों का प्रनतपार्दि करािा आवश्यक है वहााँ र्दू सरी ओर निगमि नवनध क
े द्वारा
प्रनतपानर्दत नियमों की सत्यता का प्रमानणत करािा भी आवश्यक है। अत: अच्छा यही हैं नक
पहले आगमि नवनध द्वारा सामान्य नियमों की िोज कराई जाये तत्पश्चात निगमि नवनध क
े द्वारा
िोजे हुये नियमों की सत्यता प्रमानणत कराई जाये। इस प्रकार सफल नशक्षण क
े नलये र्दोिों ही
नवनधयों का यर्था समय उनचत प्रयोग करिा परम आवश्यक है।
आगमन तर्ा वनगमन विवियों में अन्तर
आगमि तर्था निगमि र्दोिों नवनधयों में कोई नवरोध िही हैं। र्दोिों नवनधयााँ एक र्दू सरे की
पूरक है। अतः र्दोिों नवनधयों का समन्वय आवश्यक हैं। प्रनसद्ध नशक्षाशास्त्री हरबाटथ की
पंच पर्द प्रणाली में भी हमें आगमि तर्था निगमि र्दोिों नवनधयों का समन्वय स्पष्ट रुप से
नर्दिाई पड़ता है।
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Inductive & Deductive Method Presentation .pptx

  • 1.
    vkxeu fof/k ,oafuxeu fof/k ¼ Inductive Method & Deductive Method) शोध-निर्देशक शोधार्थी डॉ. प्रतीक जकताप श्रीमाि पवि क ु मार नतरोलकर
  • 2.
    :i js[kk • आगमनविवि – अर्थ एिं स्वरूप • आगमन विवि क े गुण • आगमन विवि क े दोष • वनगमन विवि • 1) सामान्य वनयमों का प्रस्तुतीकरण • 2) सम्बन्ोंकी स्र्ापना • 3) उदाहरणों द्वारा परीक्षण • वनगमन विवि क े गुण • वनगमन विवि क े दोष • आगमन तर्ा वनगमन विवियोंमें अन्तर
  • 3.
    आगमि नवनध –अर्थथ एवं स्वरूप • आगमि नवनध उस नवनध को कहते हैं नजसमें नवशेष तथ्ों तर्था घटिाओं क े निरीक्षण तर्था नवश्लेषण द्वारा सामान्य नियमों अर्थवा नसद्धान्ों का निमाथण नकया जाता हैं। इस नवनध में ज्ञात से अज्ञात की ओर, नवनशष्ट से सामान्य की ओर तर्था मूतथ से अमूतथ की ओर िामक नशक्षण सूत्ों का प्रयोग नकया जाता हैं। • र्दुसरे शब्ों में, इस नवनध का प्रयोग करते समय नशक्षक बालकों क े सामिे पहले उन्ीं क े अिुभव क्षेत् से नवनभन्न उर्दाहरणों सम्बन्ध में निरीक्षण, परीक्षण तर्था ध्यािपूवथक सोच नवचार करक े सामान्य नियम अर्थवा नसद्धान् निकलवाता है। इस प्रकार आगमि नवनध में नवनशष्ट उर्दाहरणों द्वारा बालकों को सामान्यीकरण अर्थवा सामान्य नियमों को निकलवािे क े नलए प्रोत्सानहत नकया जाता हैं।
  • 4.
    • उर्दाहरण क ेनलये व्याकरण पढाते समय बालकों क े सामिे नवनभन्न व्यक्तियों, वस्तुओं तर्था स्र्थािों एवं गुणों क े अिेक उर्दाहरण प्रस्तुत करक े नवश्लेषण द्वारा यह सामान्य नियम निकलवाया जा सकता हैं नक नकसी व्यक्ति, वस्तु तर्था स्र्थाि एवं गुण को संज्ञा कहते हैं। • नजस प्रकार आगमि नवनध का प्रयोग नहन्दी में नकया जा सकता हैं, उसी प्रकार इस नवनध को इनतहास, भूगोल, गनणत, िागररक शास्त्रा तर्था अर्थथशास्त्र आनर्द अिेक नवषयों क े नशक्षण में भी सफलतापूवथक प्रयोग नकया जा सकता है। आगमि नवनध में नशक्षण क्रम को निम्ननलक्तित सोपािों में बााँटा जाता हैं-
  • 5.
    • उर्दाहरणों काप्रस्तुतीकरण – इस सोपाि में बालकों क े सामिे एक ही प्रकार क े अिेक उर्दाहरण प्रस्तुत नकये जाते हैं। • नवश्लेषण – इस सोपाि में प्रस्तुत नकये हुए उर्दाहरणों का बालकों से निरीक्षण कराया जाता है। तत्पश्चात् नशक्षक बालकों से नवश्लेषणात्मक प्रश्न पूछता है अन् में उन्ें उर्दाहरणों में से सामान्य तत्ों की िोज करक े एक ही पररणाम पर पहुाँचिे क े नलए प्रोत्सानहत नकया जाता है। • परीक्षण – इस सोपाि में बालको द्वारा निकाले हुये सामान्य नियमों की नवनभन्‍ ि उर्दाहरणों द्वारा परीक्षा की जाती हैं।
  • 6.
    आगमन विवि क ेगुण • आगमि नवनध क े निम्ननलक्तित गुण हैं:- • आगमि नवनध द्वारा बालकों को िवीि ज्ञाि क े िोजिे का प्रनशक्षण नमत्ता है। यह परीक्षण उन्ें जीवि में िये- िये तथ्ों को िोज निकालिे क े नलये सर्दैव प्रेररत करता रहता है। अतः यह नवनध नशक्षण की एक मिोवैज्ञानिक नवनध है। • आगमि नवनध में ज्ञात से अज्ञात की और तर्था सरल से जनटल की और चलकर मूतथ उर्दाहरणों द्वारा बालकों सैसा मान्य नियम निकलवाये जाते है। इससे वै सनक्रय तर्था प्रसन्‍ ि रहते है। ज्ञािाजथि हेतु उिकी रुनच निरन्र बिी रहती है एवं उिमें रचिात्मक नचन्ि, आत्म नवश्वास आनर्द अिेक गुण नवकनसत हो जाते हैं।
  • 7.
    • आगमि नवनधमें ज्ञाि प्राप्त करते हुए बालक को सीििे क े प्रत्येक स्तर को पार करिा पड़ता है। इससे नशक्षण प्रभावशाली बि जाता है। • इस नवनध में बालक उर्दाहरणों का नवश्लेषण करते हुए सामान्य नियम स्वयं निकाल लेते हैं। इससे उिका मािनस क नवकास सरलतापूवथक हो जाता है। • इस नवनध द्वारा प्राप्त नकया हुआ ज्ञाि स्वयं बालकों का िोजा हुआ ज्ञाि होता है। अतः ऐसा ज्ञाि उिक े मक्तस्तष्क का स्र्थायी अंग बि जाता हैं | • यह नवनध व्यावहाररक जीवि क े नलये अत्यन् लाभप्रर्द है। अत: यह नवनध एक प्राक ृ नतक नवनध हैं।
  • 8.
    • आगमि नवनधक े निम्ननलक्तित र्दोष हैं:- • इस नवनध द्वारा सीििे में शक्ति तर्था समय र्दोिों अनधक लगते हैं। • यह नवनध छोटे बालकों क े नलये उपयुि िहीं है। इिका प्रयोग क े वल बडे और वह भी बुक्तद्धमाि बालक ही कर सकते हैं। सामान्य बुक्तद्ध वाले बालक तो प्रायः प्रनतभाशाली बालकों द्वारा निकाले हुये सामान्य नियमों को आाँि मीचक कर स्वीकार कर लेते हैं। • आगमि नवनध द्वारा सीिते हुये यनर्द बालक नकसी अशुद्ध सामान्य नियम की ओर पहुाँच जायें तो उन्ें सत्य की ओर लािे में अिेक कनििाइयों का सामिा करिा पड़ता है। • आगमि नवनध द्वारा क े वल सामान्य नियमों की िोज ही की जा सकती है अत: इस नवनध द्वारा प्रत्येक नवषय की नशक्षा िहीं र्दी जा सकती। • यह नवनध स्वयं में अपूणथ है। इसक े द्वारा िोजे हुये सत्य की परि करिे क े नलये निगमि नवनध आवश्यक हैं। आगमन विवि क े दोष
  • 9.
    वनगमन विवि नशक्षण कीनिगमि नवनध उस नवनध को कहते हैं नजसमें सामान्य से नवनशष्ट अर्थवा सामान्य नियम से नवनशष्ट उर्दाहरण की ओर बढा जाता है। इस प्रकार निगमि नवनध आगमि नवनध क े नबल्क ु ल नवपरीत है। इस नवनध का प्रयोग करते समय नशक्षक बालकों क े सामिे पहले नकसी सामान्य नियम को प्रस्तुत करता है। तत्पश्चात उस नियम की सत्यता को प्रमानणत करिे क े नलए नवनभन्‍ ि उर्दाहरणों का प्रयोग करता है। कहिे का तात्पयथ यह है नक निगमि नवनध में नवनभन्‍ ि प्रयोगों तर्था उर्दाहरणों क े माध्यम से नकसी सामान्य नियम की सत्यता को नसद्ध करवाया जाता है। उर्दाहरण क े नलये, नवज्ञाि की नशक्षा र्देते समय बालकों से नकसी भी सामान्य नियम को अिेक प्रयोगों द्वारा नसद्ध कराया जा सकता है। नजस प्रकार इस नवनध का प्रयोग नवज्ञाि क े नशक्षण में नकया जा सकता है उसी प्रकार इसका प्रयोग सामानजक नवज्ञाि, व्याकरण, अंकगनणत तर्था ज्यानमनत आनर्द अन्य नवषयों क े नशक्षण में भी सफलतापूवथक नकया जा सकता है। निगमि नवनध में निम्ननलक्तित सोपाि होते हैं:-
  • 10.
    1) सामान्य नियमोंका प्रस्तुतीकरण इस सोपाि में नशक्षक बालकों क े सामिे सामान्य नियमों को क्रमपूवथक प्रस्तुत करता है। 2) सम्बन्धों की स्र्थापिा इस सोपाि में नवश्लेषण की प्रनक्रया आरम्भ होती है। र्दू सरे शब्ों में, नशक्षक प्रस्तुत नकये हुये नियमों क े अन्दर तक थ युकत सम्बन्धों का निरुपण करता है। 3) उर्दाहरणों द्वारा परीक्षण इस सोपाि में सामान्य नियमों की परीक्षा करिे क े नलये नवनभि्ि उर्दाहरणों को ढूाँढा जाता है। र्दू सरे शब्ों में, सामान्य नियमों का नवनभि्ि पररक्तस्र्थनतयों में प्रयोग नकया जाता है नजससे सत्यता का िीक िीक परीक्षण हो जाये।
  • 11.
    निगमि नवनध क ेनिम्ननलक्तित गुण हैं:- •यह नवनध प्रत्येक नवषय को पढािे क े नलये उपयुि हैं। •निगमि नवनध द्वारा बालक शुद्ध नियमों की जािकारी प्राप्त करते हैं, उन्ें अशुद्ध नियमों को जाििे का कोई अवसर िहीं नमलता। •इस नवनध द्वारा कक्षा क े सभी बालकों को एक ही समय में पढाया जा सकता है। •इस नवनध क े प्रयोग से समय तर्था शक्ति र्दोिों की बचत होती है। •निगमि नवनध में नशक्षक बिे बिाये नियमों को बालकों क े सामिे प्रस्तुत करता है। अतः इस नवनध में नशक्षक का कायथ अत्यन् सरल हैं। वनगमन विवि क े गुण
  • 12.
    निगमि नवनध क ेनिम्ननलक्तित र्दोष हैं:- •निगमि नवनध में बालकों को नशक्षक द्वारा बिाया हुआ नियम अर्थवा नर्दया हुआ ज्ञाि हर हालात में स्वीकार करिा पड़ता है। •निगमि नवनध आगमि नवनध से नबल्क ु ल उल्टी हैं। इस नवनध मैं सामान्य से नवनशष्ट की और, अज्ञात से ज्ञात की और तर्था अमूतथ से मूतथ की और चलिा पड़ता हैं। इस दृनष्ट से यह नवनध नशक्षण की अमिोवैज्ञानिक नवनध हैं। •यह नवनध नियमों अर्थवा नसद्धान्ों को बलपूवथक रटिे क ें नलये बाध्य करती है। पररणामस्वरूप बालक पाि में कोई रूनच िही लेते । वनगमन विवि क े दोष
  • 13.
    •इस नवनध सेबालकों को अपिे निजी प्रयासों द्वारा ज्ञाि को िोजिे का कोई अवसर िहीं नमलता हैं। इससे उिमें से मािनसक र्दासता नवकनसत हो जाती हैं। •बालकों में रचिात्मक प्रवृनत होती हैं। अतः वे वस्तुओं को बिािे, नबगाड़िे अर्थवा तोड़िे फोड़िे में रुनच लेते हैं। पर निगमि नवनध क े वल अमूतथ नचन्ि पर ही बल र्देती है। इससे बालकों की रचिात्मक शक्तियााँ अनवकनसत ही रह जाती है। •निगमि नवनध द्वारा रटा हुआ ज्ञाि बालकों क े मक्तस्तष्क का स्र्थायी अंग िही बिता। उपयुथि र्दोषों को र्देिते हुए हम इस निष्कषथ पर आते हैं नक निगमि नवनध से आगमि नवनध द्वारा िोजे हुए नियमों अर्थवा नसद्धान्ों का प्रयोग अभ्यास बहुत अच्छा कराया जा सकता है।
  • 14.
    आगमि और निगमिर्दोिों नवनधयों क े उपयुथि अन्र पर प्रकाश डालिे से स्पष्ट हो जाता है नक र्दोिों नवनधयााँ एक र्दू सरे क े िीक नवपरीत है। आगमि नवनध से सामान्य नियमों अर्थवा नसद्धान्ों का प्रनतपार्दि होता है तर्था निगमि नवनध से प्रनतपानर्दत नियमों का नवनशष्ट उर्दाहरणों द्वारा सत्यता नसद्ध कराई जाती है। उि र्दोिों नवनधयों में से नकसी एक ही नवनध क े प्रयोग से नशक्षण में सफलता िहीं नमल सकती। इसका कारण यह है नक बालकों को वास्तनवक ज्ञाि र्देिे क े नलये जहााँ एक और आगमि नवनध द्वारा सामान्य नियमों का प्रनतपार्दि करािा आवश्यक है वहााँ र्दू सरी ओर निगमि नवनध क े द्वारा प्रनतपानर्दत नियमों की सत्यता का प्रमानणत करािा भी आवश्यक है। अत: अच्छा यही हैं नक पहले आगमि नवनध द्वारा सामान्य नियमों की िोज कराई जाये तत्पश्चात निगमि नवनध क े द्वारा िोजे हुये नियमों की सत्यता प्रमानणत कराई जाये। इस प्रकार सफल नशक्षण क े नलये र्दोिों ही नवनधयों का यर्था समय उनचत प्रयोग करिा परम आवश्यक है। आगमन तर्ा वनगमन विवियों में अन्तर
  • 15.
    आगमि तर्था निगमिर्दोिों नवनधयों में कोई नवरोध िही हैं। र्दोिों नवनधयााँ एक र्दू सरे की पूरक है। अतः र्दोिों नवनधयों का समन्वय आवश्यक हैं। प्रनसद्ध नशक्षाशास्त्री हरबाटथ की पंच पर्द प्रणाली में भी हमें आगमि तर्था निगमि र्दोिों नवनधयों का समन्वय स्पष्ट रुप से नर्दिाई पड़ता है।
  • 16.