1
अध्याय -1
शीत युद्ध का दौर
by
Dr. Sushma Singh (Core Academic Unit DoE GNCT of Delhi)
पाठ के अंत में हम जान पाएगे:
शीत युद्ध से अभिप्राय विश्ि की दो महाशक्ततयों अमरीका ि िूतपूिव सोवियत संघ के बीच व्याप्त
उन कटु संबन्धो के इततहास से है जो तनाि, िय ईष्या पर आधाररत था । दूसरे विश्ि युद्ध के
बाद 1945 – 1991 के मध्य इन दोनों महाशक्ततयों के बीच शीत युद्ध का दौर चला और विश्ि
दो गुटों में बँट गया । यह दोनों के मध्य विचारात्मक तथा राजनैततक संघर्व था ।
1. प्रथम विश्ि युद्ध – 1914 -1918
2. द्वितीय विश्ि युद्ध – 1939 -1945
द्वितीय विश्ि युद्ध के बाद से अब तक की िैक्श्िक घटनाओं का अध्ययन समकालीन विश्ि
राजनीतत के विर्य हैं ।
3. द्वितीय विश्ि युद्ध के गुट
1. भमत्र राष्र – सोवियत संघ, फ्ांस, ब्रिटेन, संयुतत राज्य अमेररका
2. धुरी राष्र -जमवनी, जापान, इटली ।
द्वितीय विश्ि युद्ध की समाक्प्त के पश्चात दो महाशक्ततयों का उदय हुआ ।
1. प्रथम विश्ि युद्ध – 1914 -1918
2. द्वितीय विश्ि युद्ध – 1939 -1945
3. द्वितीय विश्ि युद्ध के गुट
4. महाशक्ततयों को छोटे देशों से लाभ
5. शीत युद्ध के दायरे
6. दो ध्रुिीयता को चुनौती
7. भारत और शीत युद्ध
8. शस्त्र ननयंरण संधधयााँ
2
पूंजीिादी विचारधारा का प्रतततनधधत्ि करने िाले संयुतत राज्य अमेररका और समाजिादी विचारधारा
के सोवियत संघ का ।
अपने प्रिाि को बढ़ाने के भलए दोनों ही महाशक्ततयों ने देशों के साथ संधधयाँ की ।
अपना प्रिाि क्षेत्र बढ़ाते हुए तथा उनसे प्राप्त अन्य लािों को देखते हुए महाशक्ततयाँ छोटे देशों
को साथ रखना चाहती थी ।
छोटे देश िी सुरक्षा, हधथयार और आधथवक मदद की दृक्ष्ट से रतत रंक्जत युद्ध के स्थान पर
प्रततद्क्व्न्दता तथा तनाि की क्स्थतत बनी रही । क्जसे शीत युद्ध कहा गया ।
4. महाशक्ततयों को छोटे देशों से लाभ
1. छोटे देशों की प्राकृ ततक संसाधन प्राप्त करना ।
2. सैन्य ठिकाने स्थावपत करना ।
3. आधथवक सहायता प्राप्त करना ।
4. िू -क्षेत्र ( ताकक महाशक्ततयाँ अपने हधथयारों और सेना का संचालन कर सके ।
5. शीत युद्ध के दायरे
1. 1948 में बभलवन की नाके बंदी
2. 1954 – 1975 में कोररया संकट
3. 1956 – हंगरी में सोवियत संघ का हस्तक्षेप
4. 1962 – तयूबा भमसाइल संकट
सैन्य संधध संगठन
अमरीका
NATO (1949) नॉथथ अटलांटटक संधध संधठन
SEATO (1954) दक्षिणी पूिी एशशया संधध संगठन
CENTO (1955) मध्य संधध संगठन
सोवियत संघ
िारसा पैतट (1955)
3
6. दो ध्रुिीयता को चुनौती
गुट तनरपेक्ष आंदोलन एभशया और अफ्ीका के नि स्ितंत्र राष्रों के समक्ष अपनी स्ितन्त्रता एिं
प्रिुसत्ता को बनाए रखने का तीसरा विकल्प था – गुट तनरपेक्ष आंदोलन में शाभमल हो जाना ।
गुट तनरपेक्ष आंदोलन का पहला सम्मेलन 1961 में बेलग्रेड (यूगोस्लाविया की राजधानी) में हुआ
। क्जसकी नींि 1955 में एफ़्रो एभशयाई सम्मेलन में रखी गई ( िाडुग सम्मेलन ) इस आंदोलन
के संस्थापक देश ि नेता थे –
क्रम संख्या संस्थापक नेता संस्थापक देश
1 प. जिाहर लाल नेहरू िारत
2 कनवल नाभसर भमस्र
3 डा. सुकर्णों इन्डोनेभशया
4 माशवल टीटो यूगोस्लाविया
5 िामे एनक्रू मा घाना
17 िें गुटतनरपेक्ष भशखर सम्मेलन का आयोजन िेनेजुएला के ‘िागावररता द्िीप मेन भसतंबर ,
2016 को ककया गया । ितवमान में इस आंदोलन के सदस्यों की संख्या 120 हैं । साथ ही साथ
ितवमान से इसके 17 देश तथा 10 अंतरावष्रीय संगिन पयविेक्षक हैं इस भशखर सम्मेलन में
आंतकिाद , संयुतत राष्र सुधार, पक्श्चम एभशया की क्स्थतत, संयुतत राष्र शांतत अभियानों,
जलिायु पररितवन, सत्तत विकास शरर्णाथी समस्या और परमार्णु तनशस्त्रीकरर्ण जैसे मुद्दों पर
चचाव हुई । 18 िां NAM सम्मेलन का आयोजन अजरबेजान में 2019 में होना तय हुआ हैं ।
नि अंतरावष्रीय आधथवक व्यिस्था (N.I.E.O.) 1972 में U.N.O. के व्यापार एिं विकास आंदोलन
(UNCTAD) में विकास के भलए एक नई व्यापार नीतत का प्रस्ताि ककया गया ताकक धनी देशों
दािरा नि स्ितंत्र गरीब देशों का शोर्र्ण न हो सके । टुिार्डवस अ न्यू रेड पाभलसी फॉर डेिलेपमेंट
(विकास के भलए नई व्यापाररक नीतत की ओर) एक ररपोटव प्रस्तुत की गई ।
7. भारत और शीत युद्ध
शीतयुद्ध के दौरान िारत ने नि स्ितंत्र देशों का नेतृत्ि ककया अपने राष्रीय ठहतों को पूरा
ककया । और दोनों महाशक्ततयों के मतिेद को िी दूर करने का प्रयास ककया ।
4
8. शस्त्र ननयंरण संधधयााँ
1 L.T.B.T. (सीभमत परमार्णु परीक्षर्ण संधध) 5 अगस्त 1963
2 S.A.L.T. (सामररक अस्त्र पररसीमन िाताव) 1. 26 मई 1972
2. 18 जून 1972
3 S.T.A.R.T.(सामररक अस्त्र न्यूनीकरर्ण संधध) 1. 31 जुलाई 1991
2. 3 जनिरी 1993
4 N.P.T. (परमार्णु अप्रसार संधध ) 1 जुलाई 1968
-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------

Chapter 1 xii pol science

  • 1.
    1 अध्याय -1 शीत युद्धका दौर by Dr. Sushma Singh (Core Academic Unit DoE GNCT of Delhi) पाठ के अंत में हम जान पाएगे: शीत युद्ध से अभिप्राय विश्ि की दो महाशक्ततयों अमरीका ि िूतपूिव सोवियत संघ के बीच व्याप्त उन कटु संबन्धो के इततहास से है जो तनाि, िय ईष्या पर आधाररत था । दूसरे विश्ि युद्ध के बाद 1945 – 1991 के मध्य इन दोनों महाशक्ततयों के बीच शीत युद्ध का दौर चला और विश्ि दो गुटों में बँट गया । यह दोनों के मध्य विचारात्मक तथा राजनैततक संघर्व था । 1. प्रथम विश्ि युद्ध – 1914 -1918 2. द्वितीय विश्ि युद्ध – 1939 -1945 द्वितीय विश्ि युद्ध के बाद से अब तक की िैक्श्िक घटनाओं का अध्ययन समकालीन विश्ि राजनीतत के विर्य हैं । 3. द्वितीय विश्ि युद्ध के गुट 1. भमत्र राष्र – सोवियत संघ, फ्ांस, ब्रिटेन, संयुतत राज्य अमेररका 2. धुरी राष्र -जमवनी, जापान, इटली । द्वितीय विश्ि युद्ध की समाक्प्त के पश्चात दो महाशक्ततयों का उदय हुआ । 1. प्रथम विश्ि युद्ध – 1914 -1918 2. द्वितीय विश्ि युद्ध – 1939 -1945 3. द्वितीय विश्ि युद्ध के गुट 4. महाशक्ततयों को छोटे देशों से लाभ 5. शीत युद्ध के दायरे 6. दो ध्रुिीयता को चुनौती 7. भारत और शीत युद्ध 8. शस्त्र ननयंरण संधधयााँ
  • 2.
    2 पूंजीिादी विचारधारा काप्रतततनधधत्ि करने िाले संयुतत राज्य अमेररका और समाजिादी विचारधारा के सोवियत संघ का । अपने प्रिाि को बढ़ाने के भलए दोनों ही महाशक्ततयों ने देशों के साथ संधधयाँ की । अपना प्रिाि क्षेत्र बढ़ाते हुए तथा उनसे प्राप्त अन्य लािों को देखते हुए महाशक्ततयाँ छोटे देशों को साथ रखना चाहती थी । छोटे देश िी सुरक्षा, हधथयार और आधथवक मदद की दृक्ष्ट से रतत रंक्जत युद्ध के स्थान पर प्रततद्क्व्न्दता तथा तनाि की क्स्थतत बनी रही । क्जसे शीत युद्ध कहा गया । 4. महाशक्ततयों को छोटे देशों से लाभ 1. छोटे देशों की प्राकृ ततक संसाधन प्राप्त करना । 2. सैन्य ठिकाने स्थावपत करना । 3. आधथवक सहायता प्राप्त करना । 4. िू -क्षेत्र ( ताकक महाशक्ततयाँ अपने हधथयारों और सेना का संचालन कर सके । 5. शीत युद्ध के दायरे 1. 1948 में बभलवन की नाके बंदी 2. 1954 – 1975 में कोररया संकट 3. 1956 – हंगरी में सोवियत संघ का हस्तक्षेप 4. 1962 – तयूबा भमसाइल संकट सैन्य संधध संगठन अमरीका NATO (1949) नॉथथ अटलांटटक संधध संधठन SEATO (1954) दक्षिणी पूिी एशशया संधध संगठन CENTO (1955) मध्य संधध संगठन सोवियत संघ िारसा पैतट (1955)
  • 3.
    3 6. दो ध्रुिीयताको चुनौती गुट तनरपेक्ष आंदोलन एभशया और अफ्ीका के नि स्ितंत्र राष्रों के समक्ष अपनी स्ितन्त्रता एिं प्रिुसत्ता को बनाए रखने का तीसरा विकल्प था – गुट तनरपेक्ष आंदोलन में शाभमल हो जाना । गुट तनरपेक्ष आंदोलन का पहला सम्मेलन 1961 में बेलग्रेड (यूगोस्लाविया की राजधानी) में हुआ । क्जसकी नींि 1955 में एफ़्रो एभशयाई सम्मेलन में रखी गई ( िाडुग सम्मेलन ) इस आंदोलन के संस्थापक देश ि नेता थे – क्रम संख्या संस्थापक नेता संस्थापक देश 1 प. जिाहर लाल नेहरू िारत 2 कनवल नाभसर भमस्र 3 डा. सुकर्णों इन्डोनेभशया 4 माशवल टीटो यूगोस्लाविया 5 िामे एनक्रू मा घाना 17 िें गुटतनरपेक्ष भशखर सम्मेलन का आयोजन िेनेजुएला के ‘िागावररता द्िीप मेन भसतंबर , 2016 को ककया गया । ितवमान में इस आंदोलन के सदस्यों की संख्या 120 हैं । साथ ही साथ ितवमान से इसके 17 देश तथा 10 अंतरावष्रीय संगिन पयविेक्षक हैं इस भशखर सम्मेलन में आंतकिाद , संयुतत राष्र सुधार, पक्श्चम एभशया की क्स्थतत, संयुतत राष्र शांतत अभियानों, जलिायु पररितवन, सत्तत विकास शरर्णाथी समस्या और परमार्णु तनशस्त्रीकरर्ण जैसे मुद्दों पर चचाव हुई । 18 िां NAM सम्मेलन का आयोजन अजरबेजान में 2019 में होना तय हुआ हैं । नि अंतरावष्रीय आधथवक व्यिस्था (N.I.E.O.) 1972 में U.N.O. के व्यापार एिं विकास आंदोलन (UNCTAD) में विकास के भलए एक नई व्यापार नीतत का प्रस्ताि ककया गया ताकक धनी देशों दािरा नि स्ितंत्र गरीब देशों का शोर्र्ण न हो सके । टुिार्डवस अ न्यू रेड पाभलसी फॉर डेिलेपमेंट (विकास के भलए नई व्यापाररक नीतत की ओर) एक ररपोटव प्रस्तुत की गई । 7. भारत और शीत युद्ध शीतयुद्ध के दौरान िारत ने नि स्ितंत्र देशों का नेतृत्ि ककया अपने राष्रीय ठहतों को पूरा ककया । और दोनों महाशक्ततयों के मतिेद को िी दूर करने का प्रयास ककया ।
  • 4.
    4 8. शस्त्र ननयंरणसंधधयााँ 1 L.T.B.T. (सीभमत परमार्णु परीक्षर्ण संधध) 5 अगस्त 1963 2 S.A.L.T. (सामररक अस्त्र पररसीमन िाताव) 1. 26 मई 1972 2. 18 जून 1972 3 S.T.A.R.T.(सामररक अस्त्र न्यूनीकरर्ण संधध) 1. 31 जुलाई 1991 2. 3 जनिरी 1993 4 N.P.T. (परमार्णु अप्रसार संधध ) 1 जुलाई 1968 -----------------------------------------------------------------------------------------------------------------