इलेक्‍ट्रोत्रिदोषग्राफी के उपयोग

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Uses of Electrotridoshagraphy in medicine and in Ayurveda

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इलेक्‍ट्रोत्रिदोषग्राफी के उपयोग

  1. 1. आयुरस्‍कैन : इलेक्‍ट्रोत्रिदोषग्राफी [ ई 0 टी 0 जी 0] के उपयोग प्रस्‍तुतकर्ता : डा 0 देशबन्‍धु बाजपेयी कनक पालीथेरेपी क्‍लीनिक एवं रिसर्च संस्‍थान 67;70, भूसाटोली रोड , बरतन बाजार , कानपुर – 208001, यू 0 पी 0, इंडिया E-mail:drdbbajpai@hotmail.com
  2. 2. ई 0 टी 0 जी 0 के उपयोग -1 <ul><li>त्रिदोष </li></ul><ul><li>त्रिदोष भेद </li></ul><ul><li>सप्‍तधातु </li></ul><ul><li>मल </li></ul><ul><li>ओज </li></ul><ul><li>अग्नि </li></ul><ul><li>आयुर्वेद के उक्‍त मौलिक सिद्धान्‍तों के अलावा अन्‍य बहुत सी जानकारियों की शरीर में उपस्थिति बताता है </li></ul>
  3. 3. पिछली स्‍लाइड के विवरण <ul><li>पिछली स्‍लाइड के विवरणों को जाननें के लिये निम्‍न स्‍लाइड प्रेजेंटेशन को देंखें </li></ul><ul><li>1- “ आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्‍त” </li></ul><ul><li>2- “Ayurveda : Basic Principles & Fundamentals” </li></ul>
  4. 4. ई 0 टी 0 जी 0 के उपयोग - 2 <ul><li>आयुर्वेदिक मत के अनुसार रोग निदान </li></ul><ul><li>रोग निदान से प्राप्‍त जानकारी लेकर तदानुसार आयुर्वेदिक दवाओं और पथ्‍य , परहेज इत्‍यादि का र्निधारण </li></ul><ul><li>रोग निदान , दोषादि निदान का स्‍पष्‍ट होंनें से चिकित्‍सा कार्य में शीघ्र और अचूक सफलता </li></ul>
  5. 5. ई 0 टी 0 जी 0 के उपयोग -3 <ul><li>आयुर्वेदिक रिसर्च और आयुर्वेदिक अनुसन्‍धान के क्षेत्र में विश्‍व की पहली और अकेली हाई - टेक </li></ul><ul><li>आयुर्वेदिक मौलिक सिद्धान्‍त ज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य के लिये असंख्‍य और असीमित संभावनायें </li></ul><ul><li>आयुर्वेदीय रोग निदान की पुष्टि के लिये अनन्‍त संभावनायें </li></ul>
  6. 6. ई 0 टी 0 जी 0 के उपयोग -4 <ul><li>आयुर्वेदिक दवाओं के शरीर में प्रभाव का अध्‍ययन इस तकनीक द्वारा कर सकते हैं </li></ul>
  7. 7. ई 0 टी 0 जी 0 के उपयोग -5 <ul><li>यह तकनीक पूरे शरीर का इलेक्ट्रिकल स्‍कैन करती है यानी विद्युतीय परीक्षण करती है अत : यह पता चल जाता है कि मानव शरीर का कौन सा अंग रोगी है </li></ul>
  8. 8. ई 0 टी 0 जी 0 उपयोग :6 <ul><li>आ‍ र्थिक रूप से यह तकनीक सस्‍ती है </li></ul><ul><li>डाक्‍टरों के लिये प्रारम्भिक और एडवान्‍स लेवल के परीक्षण दवाखानें में या अस्‍पताल में या मरीज के घर या किसी भी स्‍थान पर किये जा सकते हैं </li></ul>
  9. 9. ई 0 टी 0 जी 0 उपयोग -7 <ul><li>शरीर के अन्‍दर व्‍याप्‍त बहुत सी तकलीफों का पता रक्‍त परीक्षण , अल्‍ट्रासाउन्‍ड , एक्‍सरे , एमआरआई , सीटीस्‍कैन इत्‍यादि से नहीं पता चल पाता है । आयुर्वेद की इस विकसित की गयी तकनीक से तमाम बीमारियों का पता चल जाता है जिससे सम्‍पूर्ण शरीर का इलाज करनें में बहुत सहायता मिलती है </li></ul>
  10. 10. ई 0 टी 0 जी 0 के उपयोग - 8 <ul><li>असाध्‍य रोग , कष्‍टसाध्‍य , पूरे जीवन तक चलनें वाले रोगियों की स्‍वास्‍थ्‍य दशा की मा‍नीटरिंग करके ऐसे रोंगों से पीडित रोगियो स्‍वस्‍थ्‍य दशा में लानें के प्रयास इस तकनीक द्वारा किये जा सकते हैं </li></ul>
  11. 11. ई 0 टी 0 जी 0 उपयोग -9 <ul><li>यह तकनीक सभी चिकित्‍सकों के लिये उपयोगी है , चाहे वे किसी भी चिकित्‍साविधि से चिकित्‍सा कार्य कर रहे हों </li></ul>
  12. 12. समयानुकूल परिवर्तन <ul><li>इस स्‍लाइड शो में समय समय पर परिवर्तन होते रहते है । </li></ul><ul><li>परिवर्तनों के लिये लगातार हो रहे अनुसंधान कार्य से सभी लोगों को अवगत कराना है </li></ul>
  13. 13. धन्‍यवाद <ul><li>आपका इस स्‍लाइड शो में आनें का धन्‍यवाद </li></ul><ul><li>आयुर्वेद की हमारी अन्‍य वेवसाइट देखें </li></ul><ul><li>http://www.etgind.wordpress.com </li></ul><ul><li>http://www.ayurvedaintro.wordpress.com </li></ul><ul><li>http://www.electrotridoshagraphy.wordpress.com </li></ul><ul><li>http://slideshare.net/drdbbajpai </li></ul><ul><li>http://youtube.com/drdbbajpai </li></ul>

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