मलिक मुहम्मद जयसीकी पद्मावत
दरशल पद्मावत एक सुफी रचना है।
मललक मुहम्मद जयसी ननर्ुुण प्रेमश्री शाखे के एक प्रधान कवव है।
उनका जन्म उत्तर प्रदेश के जयस नामक स्थान में हुआ था।
उनके वपता एक छोटा ज़मीनंदार - मल्ललक राजे अश्रफ थे ।
ऐसा माना जाता है कक इनहे अमेठी के राजा का संग्रक्षणप्राप्त था।
पद्मावत, अखरावत, आखरी कलाम, कहरनामा, चचत्ररेखा आदी इनके प्रलसद्धग्रन्थ है।
जयसी की भाषा अवधी थी।
उन्होंने अपनी कववता में मुख्यत: दोहा, चौपाई आदी में छंदो का प्रयोर् ककया है।
जयसी का पद्मावत एक प्रकार का रूपक है जो आत्मा से परमात्मा की लमलन की कथा
कहता है।
शाश्वत सुंदरी रानी पद्मवती लसंहल द्वीप की के राजा की पुत्री थी ।
पद्लमनी का अथु है कमल जैसी ।
नानयका भेद में पद्लमनी नानयका ही सवुश्रेष्ठ मानी जानत है।
उसके तोते का नाम हहरामन था।
एक हदन एक बहेललये ने उस फसाकर एकब्राह्मण को उसे बेच हदया, ल्जसने उसे
चचट्टोड के राजा रतन लसंह राजपूत को बेच हदया।
उस तोते से पद्लमनी के अद्भुत सौंदयु का वणुन सुनने के बाद , इसे प्राप्त करने के ललए
राजा ने कई जंर्लों और समुद्रों को पार ककया और अंततः लसंहलला द्वीप पहुंचा ।
अंत में कई कहठनाइयों का सामना करने के बाद राजा रतन लसंह ने पद्मवती से वववाह
ककया ।
कु छ हदनों के बाद, राजा रतन सेन ने एक पंडडत नामक राघब चेतन को अपने राज्य से
झूठ बोलने के ललए ननवाुलसत कर हदया ।
राघव चेतन ने सुलतान अलाउद्दीन खखलजी को पद्मवती की सुंदरता की अत्यचधक
प्रशंसा की ।
पद्मवती को प्राप्त करने के ललए अलाउद्दीन ने चचट्टोड पर हमला कर हदया ।
2.
इतने हदनों तकमुल्श्कल से लड़ने के बाद भी न जीतने के कारण, अलाउद्दीन ने दोस्ती
का प्रस्तावभेजा, लेककन जब राजा रतन सेन बाहर आए तो उन्होंने उन्हें बंदी बना हदया ।
अपने पनत को बचाने के ललए पद्मवती अपने मंत्रत्रयों - र्ोरा और बादल के साथ
सोलह सौ सैननकों को डोली में त्रबठा कर हदलली र्यी ।
राजपूत राजा रतन सेन को लोकर भार् र्ए ।
जब राजा रतन सेन हदलली में जेल में था, कु म्भलनर्र के राजा देवपाल ने रानी
पाद्मवती को भी शादी का प्रस्तावहदया ।
यह सुनने के बाद रतन सेन ने देवपाल पर हमला ककया और लड़ाई में देवपाल को मार
हदया लेककन वह भी घायल हो र्या था और घर पहुंचने के बाद वह भी मर र्या ।
पद्मवती और रतन की पत्नी पहली पत्नी नार्मनत ने जोहर ककया ।
अलाउद्दीन भी चचट्टोड तक पहुंचे थे लेककन पहले से बहुत देर हो चुकी थी और उन्हें
लसफु राख ही लमल ।
पद्मवती पर बहुत सी धारावाहहक बनाई र्ई थीं लेककन सबसे सुंदर, वास्तववकता और
जीवंत के करीब थी श्याम बेनेर्ल की “भारत एक खोज”।
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ववशेष धन्यवाद - डॉ आलोक शुक्ला