* छंद *
एक
परिचय
प्रस्तुतत –
बी.डी.स ंह
सिक्षक
िा.उ.मा.वि.उपनी, एिं
श्याम लाल भट्ट
अध्यापक
िा.कन्या.उ.मा.वि.बघिाि
अनुक्रमणिका
 परिचय
 परिभाषा
 अंग
 भाषाप्रकाि
 छंदों की परिभाषा उदाहिि
 ारििी बोध
 अधधगम
 गृह-अभ्या कायय
 न्दभय
परिचय
काव्य
काव्य काव्य काव्य
का का की
स्िरुप ौंदयय आत्मा
छंद अलंकाि ि
परिभाषा
छंद -
कविता में िब्दों के
अनुिा न को छंद कहते है |
अर्ायत
चिि, ििय ,यतत आदद का
ध्यान िखकि की गयी िचना
को छंद कहते है |
छंद के अंग
 छंद के मुख्य अंग तनम्न हैं
-
 1 चरणपद पाद
 2 वणण और मात्रा
 3 संख्या या क्रम
 4 गण
 5 गति
 6 यतिववराम
 7 िुक आदद |
अंग पररचय
१. चरण – प्रायः( चाि) या (छः) चिि
[भाग] होते है
२.वणण– स्िियुक्त ध्ितनििय कहलाती है
मात्रा – ििय या ध्ितन का उच्चािि
काल मात्रा है;
३. संख्या–गिना को मात्रा ंख्या कहतेहै
४ गण – तीन ििों का मूह एक गि
होता है इनकी ंख्या आठ है|
५. गति –छंद के पढने का प्रिाह |
६. यति –पढ़ने पि रुकने का स्र्ान |
७ . िुक –छंद के अंत में मैत्री अक्षि
 प्रकाि – म औि विषम
 प्रकाि – ह्सस्ि (I) औि दीघय (s)
 प्रकाि – ह्सस्ि [I] औि दीघय [s]
 ूत्र – ‘ यमािाराजभानसलगा ’
यगि, मगि .........कु ल आठ |
प्रकाि
 छंद तीन प्रकाि के होते है-
 १.वर्णणक छंद – ििों की गिना
 २.मात्रत्रक छंद– मात्राओं की गिना
 ३.मुक्ि छंद – प्रततबद्ध नहीं
 प्रमुख छंद-
 मासलनी,ब ंततसलका,मंदाक्रांता ....
 चौपाई,दोहा, ोिठा,िोला आदद |
 तनिाला की कविता-जूही की कली
छंदों की परिभाषा –उदाहिि
 चौपाई – यह एक म मात्रत्रक
छंद है इ के प्रत्येक
चिि में ोलह मात्राए
होती हैं |
 दोहा – यह चाि चििों का
विषम मात्रत्रक छंद है
विषम चििों में 13- 13
औि म चििों में11 -11
मात्राए होती है |
 उदाहिि –
जय हनुमान ज्ञान गुि ागि |
I I I I S I S I I I S I I =16
जय कपी ततहु लोक उजागि ||
I I I S I I I S I I S I I =16
 जै े –
श्री गुरु चिि िोज िज, =13
तनज मन मुकु ि ुधाि | =11
बिनहु िघुबि त्रबमल ज ु ,=13
जो दायक फल चाि || =11
=24 मात्राए
ारििी बोध
छंद मात्रा का प्रकार मात्रा
 दोहा अधय म 13,11 =24
 ोिठा अधय म 11,13 =24
 चौपाई म 16
 िोला म 24
 हरिगीततका म 28
 छप्पय विषम 152
अधधगम
 छंद के प्रकाि होते है - 1.......2 .........3............
 चौपाई में मात्रा होती है | अ.13 ब.16 .11

 दोहे में चिि होते है | अ.1 ब. 3 . 4

 गिों की ंख्या होती है | अ. 4 ब. 8 . 6
गृह-अभ्या कायय
 छंद के अंग बताये ?
 गि औि उ का ूत्र सलणखए ?
 दोहा एिं चौपाई की परिभाषा उदाहिि दहत बताइए ?
न्दभय
 http://dwarkaparichay.blogspot.in/2013_10_01_archive.html
 https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A6
 दहंदी निनीत पाठ्यपुस्तक के छंद प्रकिि े
इतत
----------------

छंद एक परिचय

  • 1.
    * छंद * एक परिचय प्रस्तुतत– बी.डी.स ंह सिक्षक िा.उ.मा.वि.उपनी, एिं श्याम लाल भट्ट अध्यापक िा.कन्या.उ.मा.वि.बघिाि
  • 2.
    अनुक्रमणिका  परिचय  परिभाषा अंग  भाषाप्रकाि  छंदों की परिभाषा उदाहिि  ारििी बोध  अधधगम  गृह-अभ्या कायय  न्दभय
  • 3.
    परिचय काव्य काव्य काव्य काव्य काका की स्िरुप ौंदयय आत्मा छंद अलंकाि ि
  • 4.
    परिभाषा छंद - कविता मेंिब्दों के अनुिा न को छंद कहते है | अर्ायत चिि, ििय ,यतत आदद का ध्यान िखकि की गयी िचना को छंद कहते है |
  • 5.
    छंद के अंग छंद के मुख्य अंग तनम्न हैं -  1 चरणपद पाद  2 वणण और मात्रा  3 संख्या या क्रम  4 गण  5 गति  6 यतिववराम  7 िुक आदद |
  • 6.
    अंग पररचय १. चरण– प्रायः( चाि) या (छः) चिि [भाग] होते है २.वणण– स्िियुक्त ध्ितनििय कहलाती है मात्रा – ििय या ध्ितन का उच्चािि काल मात्रा है; ३. संख्या–गिना को मात्रा ंख्या कहतेहै ४ गण – तीन ििों का मूह एक गि होता है इनकी ंख्या आठ है| ५. गति –छंद के पढने का प्रिाह | ६. यति –पढ़ने पि रुकने का स्र्ान | ७ . िुक –छंद के अंत में मैत्री अक्षि  प्रकाि – म औि विषम  प्रकाि – ह्सस्ि (I) औि दीघय (s)  प्रकाि – ह्सस्ि [I] औि दीघय [s]  ूत्र – ‘ यमािाराजभानसलगा ’ यगि, मगि .........कु ल आठ |
  • 7.
    प्रकाि  छंद तीनप्रकाि के होते है-  १.वर्णणक छंद – ििों की गिना  २.मात्रत्रक छंद– मात्राओं की गिना  ३.मुक्ि छंद – प्रततबद्ध नहीं  प्रमुख छंद-  मासलनी,ब ंततसलका,मंदाक्रांता ....  चौपाई,दोहा, ोिठा,िोला आदद |  तनिाला की कविता-जूही की कली
  • 8.
    छंदों की परिभाषा–उदाहिि  चौपाई – यह एक म मात्रत्रक छंद है इ के प्रत्येक चिि में ोलह मात्राए होती हैं |  दोहा – यह चाि चििों का विषम मात्रत्रक छंद है विषम चििों में 13- 13 औि म चििों में11 -11 मात्राए होती है |  उदाहिि – जय हनुमान ज्ञान गुि ागि | I I I I S I S I I I S I I =16 जय कपी ततहु लोक उजागि || I I I S I I I S I I S I I =16  जै े – श्री गुरु चिि िोज िज, =13 तनज मन मुकु ि ुधाि | =11 बिनहु िघुबि त्रबमल ज ु ,=13 जो दायक फल चाि || =11 =24 मात्राए
  • 9.
    ारििी बोध छंद मात्राका प्रकार मात्रा  दोहा अधय म 13,11 =24  ोिठा अधय म 11,13 =24  चौपाई म 16  िोला म 24  हरिगीततका म 28  छप्पय विषम 152
  • 10.
    अधधगम  छंद केप्रकाि होते है - 1.......2 .........3............  चौपाई में मात्रा होती है | अ.13 ब.16 .11   दोहे में चिि होते है | अ.1 ब. 3 . 4   गिों की ंख्या होती है | अ. 4 ब. 8 . 6
  • 11.
    गृह-अभ्या कायय  छंदके अंग बताये ?  गि औि उ का ूत्र सलणखए ?  दोहा एिं चौपाई की परिभाषा उदाहिि दहत बताइए ?
  • 12.
    न्दभय  http://dwarkaparichay.blogspot.in/2013_10_01_archive.html  https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A6 दहंदी निनीत पाठ्यपुस्तक के छंद प्रकिि े
  • 13.