भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

लंका का ड
ी गणेशाय नमः
ी जानक व लभो वजयते
ी रामच रतमानस
ष ठ सोपान
(लंकाका ड)
लोक
रामं कामा रसे यं भवभयहरणं कालम तेभ संहं
योगी

ं

ानग यं गु ण न धमिजतं नगु णं न वकारम ्।

मायातीतं सु रेशं खलवध नरतं

मवृ दै कदे वं

व दे क दावदातं सर सजनयनं दे वमु व श पम ्।।1।।
शंखे

वाभमतीवसु दरतनु ं शादूलचमा बरं

काल यालकरालभू षणधरं गंगाशशांक यम ्।
काशीशं क लक मषौघशमनं क याणक प मं
ु
नौमी यं ग रजाप तं गु ण न धं क दपहं श करम ्।।2।।
यो ददा त सतां श भु ः कव यम प दुलभम ्।
ै
खलानां द डकृ योऽसौ श करः शं तनोतु मे।।3।।
दो0-लव नमेष परमानु जु ग बरष कलप सर चंड।
भज स न मन ते ह राम को कालु जासु कोदं ड।।
–*–*–
सो0- संधु बचन सु न राम स चव बो ल भु अस कहे उ।
अब बलंबु क ह काम करहु सेतु उतरै कटक ।।
े
ु
सु नहु भानु कल कतु जामवंत कर जो र कह।
ु
े
नाथ नाम तव सेतु नर च ढ़ भव सागर त र हं।।
यह लघु जल ध तरत क त बारा। अस सु न पु न कह पवनक मारा।।
ु
भु ताप बड़वानल भार । सोषेउ थम पयो न ध बार ।।
तब रपु नार

दन जल धारा। भरे उ बहो र भयउ ते हं खारा।।

सु न अ त उक त पवनसु त कर । हरषे क प रघु प त तन हे र ।।
ु
े
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

जामवंत बोले दोउ भाई। नल नील ह सब कथा सु नाई।।
राम ताप सु म र मन माह ं। करहु सेतु यास कछ नाह ं।।
ु
बो ल लए क प नकर बहोर । सकल सु नहु बनती कछ मोर ।।
ु
राम चरन पंकज उर धरहू । कौतु क एक भालु क प करहू ।।
धावहु मकट बकट ब था। आनहु बटप ग र ह क जू था।।
े
सु न क प भालु चले क र हू हा। जय रघु बीर ताप समू हा।।
दो0-अ त उतंग ग र पादप ल ल हं ले हं उठाइ।
आ न दे हं नल नील ह रच हं ते सेतु बनाइ।।1।।
–*–*–
सैल बसाल आ न क प दे ह ं। कदुक इव नल नील ते लेह ं।।
ं
दे ख सेतु अ त सु ंदर रचना। बह स कृ पा न ध बोले बचना।।
परम र य उ तम यह धरनी। म हमा अ मत जाइ न हं बरनी।।
क रहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे दयँ परम कलपना।।
सु न कपीस बहु दूत पठाए। मु नबर सकल बो ल लै आए।।
लंग था प ब धवत क र पू जा। सव समान

य मो ह न दूजा।।

सव ोह मम भगत कहावा। सो नर सपनेहु ँ मो ह न पावा।।
संकर बमु ख भग त चह मोर । सो नारक मू ढ़ म त थोर ।।
दो0-संकर

य मम ोह सव ोह मम दास।

ते नर कर ह कलप भ र धोर नरक महु ँ बास।।2।।
–*–*–
जे रामे वर दरसनु क रह हं। ते तनु तिज मम लोक सध रह हं।।
जो गंगाजलु आ न चढ़ाइ ह। सो साजु य मु ि त नर पाइ ह।।
होइ अकाम जो छल तिज सेइ ह। भग त मो र ते ह संकर दे इ ह।।
मम कृ त सेतु जो दरसनु क रह । सो बनु म भवसागर त रह ।।
राम बचन सब क िजय भाए। मु नबर नज नज आ म आए।।
े
ग रजा रघु प त क यह र ती। संतत कर हं नत पर ीती।।
ै
बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृ पाँ जसु भयउ उजागर।।
बू ड़ हं आन ह बोर हं जेई। भए उपल बो हत सम तेई।।
म हमा यह न जल ध कइ बरनी। पाहन गु न न क पन ्ह कइ करनी।।
दो0= ी रघु बीर ताप ते संधु तरे पाषान।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

ते म तमंद जे राम तिज भज हं जाइ भु आन।।3।।
–*–*–
बाँ ध सेतु अ त सु ढ़ बनावा। दे ख कृ पा न ध क मन भावा।।
े
चल सेन कछ बर न न जाई। गज हं मकट भट समु दाई।।
ु
सेतु बंध ढग च ढ़ रघु राई। चतव कृ पाल संधु बहु ताई।।
दे खन कहु ँ भु क ना कदा। गट भए सब जलचर बृंदा।।
ं
मकर न

नाना झष याला। सत जोजन तन परम बसाला।।

अइसेउ एक त ह ह जे खाह ं। एक ह क डर ते प डेराह ं।।
भु ह बलोक हं टर हं न टारे । मन हर षत सब भए सु खारे ।।
त ह क ओट न दे खअ बार । मगन भए ह र प नहार ।।
चला कटक भु आयसु पाई। को क ह सक क प दल बपु लाई।।
ु
दो0-सेतु बंध भइ भीर अ त क प नभ पंथ उड़ा हं।
अपर जलचरि ह ऊपर च ढ़ च ढ़ पार ह जा हं।।4।।
–*–*–
अस कौतु क बलो क वौ भाई। बहँ स चले कृ पाल रघु राई।।
सेन स हत उतरे रघु बीरा। क ह न जाइ क प जू थप भीरा।।
संधु पार भु डेरा क हा। सकल क प ह कहु ँ आयसु द हा।।
खाहु जाइ फल मू ल सु हाए। सु नत भालु क प जहँ तहँ धाए।।
सब त फरे राम हत लागी। रतु अ क रतु काल ग त यागी।।
ु
खा हं मधु र फल बटप हलाव हं। लंका स मु ख सखर चलाव हं।।
जहँ कहु ँ फरत नसाचर पाव हं। घे र सकल बहु नाच नचाव हं।।
दसनि ह का ट ना सका काना। क ह भु सु जसु दे हं तब जाना।।
िज ह कर नासा कान नपाता। त ह रावन ह कह सब बाता।।
सु नत वन बा र ध बंधाना। दस मु ख बो ल उठा अक लाना।।
ु
दो0-बां यो बन न ध नीर न ध जल ध संधु बार स।
स य तोय न ध कप त उद ध पयो ध नद स।।5।।
ं
–*–*–
नज बकलता बचा र बहोर । बहँ स गयउ ह क र भय भोर ।।
मंदोदर ं सु यो भु आयो। कौतु कह ं पाथो ध बँधायो।।
कर ग ह प त ह भवन नज आनी। बोल परम मनोहर बानी।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

चरन नाइ स अंचलु रोपा। सु नहु बचन पय प रह र कोपा।।
नाथ बय क जे ताह स । बु ध बल स कअ जी त जाह स ।।
तु ह ह रघु प त ह अंतर कसा। खलु ख योत दनकर ह जैसा।।
ै
अ तबल मधु कटभ जे हं मारे । महाबीर द तसु त संघारे ।।
ै
जे हं ब ल बाँ ध सहजभु ज मारा। सोइ अवतरे उ हरन म ह भारा।।
तासु बरोध न क िजअ नाथा। काल करम िजव जाक हाथा।।
दो0-राम ह सौ प जानक नाइ कमल पद माथ।
सु त कहु ँ राज सम प बन जाइ भिजअ रघु नाथ।।6।।
–*–*–
नाथ द नदयाल रघु राई। बाघउ सनमु ख गएँ न खाई।।
चा हअ करन सो सब क र बीते। तु ह सु र असु र चराचर जीते।।
संत कह हं अ स नी त दसानन। चौथपन जाइ ह नृप कानन।।
तासु भजन क िजअ तहँ भता। जो कता पालक संहता।।
सोइ रघु वीर नत अनु रागी। भजहु नाथ ममता सब यागी।।
मु नबर जतनु कर हं जे ह लागी। भू प राजु तिज हो हं बरागी।।
सोइ कोसलधीस रघु राया। आयउ करन तो ह पर दाया।।
ज पय मानहु मोर सखावन। सु जसु होइ तहु ँ पु र अ त पावन।।
दो0-अस क ह नयन नीर भ र ग ह पद क पत गात।
ं
नाथ भजहु रघु नाथ ह अचल होइ अ हवात।।7।।
–*–*–
तब रावन मयसु ता उठाई। कहै लाग खल नज भु ताई।।
सु नु तै

या बृथा भय माना। जग जोधा को मो ह समाना।।

ब न कबेर पवन जम काला। भु ज बल िजतेउँ सकल दगपाला।।
ु
दे व दनु ज नर सब बस मोर। कवन हे तु उपजा भय तोर।।
नाना ब ध ते ह कहे स बु झाई। सभाँ बहो र बैठ सो जाई।।
मंदोदर ं हदयँ अस जाना। काल ब य उपजा अ भमाना।।
सभाँ आइ मं

ह त ह बू झा। करब कवन ब ध रपु स जू झा।।

कह हं स चव सु नु न सचर नाहा। बार बार भु पू छहु काहा।।
कहहु कवन भय क रअ बचारा। नर क प भालु अहार हमारा।।
दो0-सब क बचन वन सु न कह ह त कर जो र।
े
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

न त बरोध न क रअ भु म ं ह म त अ त थो र।।8।।
–*–*–
कह हं स चव सठ ठकरसोहाती। नाथ न पू र आव ए ह भाँती।।
ु
बा र ध ना घ एक क प आवा। तासु च रत मन महु ँ सबु गावा।।
छधा न रह तु ह ह तब काहू । जारत नग कस न ध र खाहू ।।
ु
सु नत नीक आग दुख पावा। स चवन अस मत भु ह सु नावा।।
जे हं बार स बँधायउ हे ला। उतरे उ सेन समेत सु बेला।।
सो भनु मनु ज खाब हम भाई। बचन कह हं सब गाल फलाई।।
ु
तात बचन मम सु नु अ त आदर। ज न मन गु नहु मो ह क र कादर।।
य बानी जे सु न हं जे कहह ं। ऐसे नर नकाय जग अहह ं।।
बचन परम हत सु नत कठोरे । सु न हं जे कह हं ते नर भु थोरे ।।
थम बसीठ पठउ सु नु नीती। सीता दे इ करहु पु न ीती।।
दो0-ना र पाइ फ र जा हं ज तौ न बढ़ाइअ रा र।
ना हं त स मु ख समर म ह तात क रअ ह ठ मा र।।9।।
–*–*–
यह मत ज मानहु भु मोरा। उभय कार सु जसु जग तोरा।।
सु त सन कह दसकठ रसाई। अ स म त सठ क हं तो ह सखाई।।
ं
े
अबह ं ते उर संसय होई। बेनु मू ल सु त भयहु घमोई।।
सु न पतु गरा प ष अ त घोरा। चला भवन क ह बचन कठोरा।।
हत मत तो ह न लागत कस। काल बबस कहु ँ भेषज जैस।।
ै
सं या समय जा न दससीसा। भवन चलेउ नरखत भु ज बीसा।।
लंका सखर उपर आगारा। अ त ब च तहँ होइ अखारा।।
बैठ जाइ तेह मं दर रावन। लागे कं नर गु न गन गावन।।
बाज हं ताल पखाउज बीना। नृ य कर हं अपछरा बीना।।
दो0-सु नासीर सत स रस सो संतत करइ बलास।
परम बल रपु सीस पर त य प सोच न ास।।10।।
–*–*–
इहाँ सु बेल सैल रघु बीरा। उतरे सेन स हत अ त भीरा।।
सखर एक उतंग अ त दे खी। परम र य सम सु
तहँ त

बसेषी।।

कसलय सु मन सु हाए। ल छमन र च नज हाथ डसाए।।
भु

ता पर

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

चर मृदुल मृगछाला। तेह ं आसान आसीन कृ पाला।।

भु कृ त सीस कपीस उछं गा। बाम द हन द स चाप नषंगा।।
दुहु ँ कर कमल सु धारत बाना। कह लंकस मं ल ग काना।।
े
बड़भागी अंगद हनु माना। चरन कमल चापत ब ध नाना।।
भु पाछ ल छमन बीरासन। क ट नषंग कर बान सरासन।।
दो0-ए ह ब ध कृ पा प गु न धाम रामु आसीन।
ध य ते नर ए हं यान जे रहत सदा लयल न।।11(क)।।
पू रब दसा बलो क भु दे खा उ दत मंयक।
कहत सब ह दे खहु स स ह मृगप त स रस असंक।।11(ख)।।
–*–*–
पू रब द स ग रगु हा नवासी। परम ताप तेज बल रासी।।
म त नाग तम कंु भ बदार । स स कसर गगन बन चार ।।
े
बथु रे नभ मु कताहल तारा। न स सु ंदर कर संगारा।।
ु
े
कह भु स स महु ँ मेचकताई। कहहु काह नज नज म त भाई।।
कह सु ग़ीव सु नहु रघु राई। स स महु ँ गट भू म क झाँई।।
ै
मारे उ राहु स स ह कह कोई। उर महँ पर

यामता सोई।।

कोउ कह जब ब ध र त मु ख क हा। सार भाग स स कर ह र ल हा।।
छ सो गट इंद ु उर माह ं। ते ह मग दे खअ नभ प रछाह ं।।
भु कह गरल बंधु स स करा। अ त
े

य नज उर द ह बसेरा।।

बष संजु त कर नकर पसार । जारत बरहवंत नर नार ।।
दो0-कह हनु मंत सु नहु भु स स तु हारा

य दास।

तव मू र त बधु उर बस त सोइ यामता अभास।।12(क)।।
नवा हपारायण।। सातवाँ व ाम
पवन तनय क बचन सु न बहँ से रामु सु जान।
े
दि छन द स अवलो क भु बोले कृ पा नधान।।12(ख)।।
–*–*–
दे खु बभीषन दि छन आसा। घन घंमड दा म न बलासा।।
मधु र मधु र गरजइ घन घोरा। होइ बृि ट ज न उपल कठोरा।।
कहत बभीषन सु नहु कृ पाला। होइ न त ड़त न बा रद माला।।
लंका सखर उपर आगारा। तहँ दसकघर दे ख अखारा।।
ं
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

छ मेघडंबर सर धार । सोइ जनु जलद घटा अ त कार ।।
मंदोदर

वन ताटं का। सोइ भु जनु दा मनी दमंका।।

बाज हं ताल मृदं ग अनू पा। सोइ रव मधु र सु नहु सु रभू पा।।
भु मु सु कान समु झ अ भमाना। चाप चढ़ाइ बान संधाना।।
दो0-छ मु क ट ताटं क तब हते एकह ं बान।
ु
सबक दे खत म ह परे मरमु न कोऊ जान।।13(क)।।
अस कौतु क क र राम सर

बसेउ आइ नषंग।

रावन सभा ससंक सब दे ख महा रसभंग।।13(ख)।।
–*–*–
कप न भू म न म त बसेषा। अ स कछ नयन न दे खा।।
ं
ु
सोच हं सब नज दय मझार । असगु न भयउ भयंकर भार ।।
दसमु ख दे ख सभा भय पाई। बह स बचन कह जु गु त बनाई।।
सरउ गरे संतत सु भ जाह । मु कट परे कस असगु न ताह ।।
ु
सयन करहु नज नज गृह जाई। गवने भवन सकल सर नाई।।
मंदोदर सोच उर बसेऊ। जब ते वनपू र म ह खसेऊ।।
सजल नयन कह जु ग कर जोर । सु नहु ानप त बनती मोर ।।
कत राम बरोध प रहरहू । जा न मनु ज ज न हठ मन धरहू ।।
ं
दो0- ब व प रघु बंस म न करहु बचन ब वासु ।
लोक क पना बेद कर अंग अंग त जासु ।।14।।
–*–*–
पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग ब ामा।।
भृक ट बलास भयंकर काला। नयन दवाकर कच घन माला।।
ु
जासु ान अि वनीकमारा। न स अ
ु

दवस नमेष अपारा।।

वन दसा दस बेद बखानी। मा त वास नगम नज बानी।।
अधर लोभ जम दसन कराला। माया हास बाहु दगपाला।।
आनन अनल अंबु प त जीहा। उतप त पालन लय समीहा।।
रोम रािज अ टादस भारा। अि थ सैल स रता नस जारा।।
उदर उद ध अधगो जातना। जगमय भु का बहु कलपना।।
दो0-अहं कार सव बु

अज मन स स च त महान।

मनु ज बास सचराचर प राम भगवान।।15 क।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

अस बचा र सु नु ानप त भु सन बय

बहाइ।

ी त करहु रघु बीर पद मम अ हवात न जाइ।।15 ख।।
–*–*–
बहँ सा ना र बचन सु न काना। अहो मोह म हमा बलवाना।।
ना र सु भाउ स य सब कहह ं। अवगु न आठ सदा उर रहह ं।।
साहस अनृत चपलता माया। भय अ बबेक असौच अदाया।।
रपु कर प सकल त गावा। अ त बसाल भय मो ह सु नावा।।
सो सब

या सहज बस मोर। समु झ परा साद अब तोर।।

जा नउँ

या तो र चतु राई। ए ह ब ध कहहु मो र भु ताई।।

तव बतकह गू ढ़ मृगलोच न। समु झत सु खद सु नत भय मोच न।।
मंदोद र मन महु ँ अस ठयऊ। पय ह काल बस म त म भयऊ।।
दो0-ए ह ब ध करत बनोद बहु ात गट दसकध।
ं
सहज असंक लंकप त सभाँ गयउ मद अंध।।16(क)।।
सो0-फ लह फरइ न बेत जद प सु धा बरष हं जलद।
ू
मू ख दयँ न चेत ज गु र मल हं बरं च सम।।16(ख)।।
–*–*–
इहाँ ात जागे रघु राई। पू छा मत सब स चव बोलाई।।
कहहु बे ग का क रअ उपाई। जामवंत कह पद स नाई।।
सु नु सब य सकल उर बासी। बु ध बल तेज धम गु न रासी।।
मं कहउँ नज म त अनु सारा। दूत पठाइअ बा लक मारा।।
ु
नीक मं सब क मन माना। अंगद सन कह कृ पा नधाना।।
े
बा लतनय बु ध बल गु न धामा। लंका जाहु तात मम कामा।।
बहु त बु झाइ तु ह ह का कहऊ। परम चतु र म जानत अहऊ।।
ँ
ँ
काजु हमार तासु हत होई। रपु सन करे हु बतकह सोई।।
सो0- भु अ या ध र सीस चरन बं द अंगद उठे उ।
सोइ गु न सागर ईस राम कृ पा जा पर करहु ।।17(क)।।
वयं स सब काज नाथ मो ह आद

दयउ।

अस बचा र जु बराज तन पु ल कत हर षत हयउ।।17(ख)।।
बं द चरन उर ध र भु ताई। अंगद चलेउ सब ह स नाई।।
भु ताप उर सहज असंका। रन बाँकरा बा लसु त बंका।।
ु
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

पु र पैठत रावन कर बेटा। खेलत रहा सो होइ गै भटा।।
बात हं बात करष ब ढ़ आई। जु गल अतु ल बल पु न त नाई।।
ते ह अंगद कहु ँ लात उठाई। ग ह पद पटकउ भू म भवाँई।।
े
न सचर नकर दे ख भट भार । जहँ तहँ चले न सक हं पु कार ।।
एक एक सन मरमु न कहह ं। समु झ तासु बध चु प क र रहह ं।।
भयउ कोलाहल नगर मझार । आवा क प लंका जेह ं जार ।।
अब ध कहा क र ह करतारा। अ त सभीत सब कर हं बचारा।।
बनु पू छ मगु दे हं दखाई। जे ह बलोक सोइ जाइ सु खाई।।
दो0-गयउ सभा दरबार तब सु म र राम पद कज।
ं
संह ठव न इत उत चतव धीर बीर बल पु ंज।।18।।
–*–*–
तु रत नसाचर एक पठावा। समाचार रावन ह जनावा।।
सु नत बहँ स बोला दससीसा। आनहु बो ल कहाँ कर क सा।।
आयसु पाइ दूत बहु धाए। क पकंु जर ह बो ल लै आए।।
अंगद द ख दसानन बस। स हत ान क जल ग र जैस।।
भु जा बटप सर सृंग समाना। रोमावल लता जनु नाना।।
मु ख ना सका नयन अ काना। ग र कदरा खोह अनु माना।।
ं
गयउ सभाँ मन नेक न मु रा। बा लतनय अ तबल बाँकरा।।
ु
ु
उठे सभासद क प कहु ँ दे खी। रावन उर भा

ौध बसेषी।।

दो0-जथा म त गज जू थ महु ँ पंचानन च ल जाइ।
राम ताप सु म र मन बैठ सभाँ स नाइ।।19।।
–*–*–
कह दसकठ कवन त बंदर। म रघु बीर दूत दसकधर।।
ं
ं
मम जनक ह तो ह रह मताई। तव हत कारन आयउँ भाई।।
उ तम कल पु लि त कर नाती। सव बरं च पू जेहु बहु भाँती।।
ु
बर पायहु क हे हु सब काजा। जीतेहु लोकपाल सब राजा।।
नृप अ भमान मोह बस कं बा। ह र आ नहु सीता जगदं बा।।
अब सु भ कहा सु नहु तु ह मोरा। सब अपराध छ म ह भु तोरा।।
दसन गहहु तृन कठ कठार । प रजन स हत संग नज नार ।।
ं
ु
सादर जनकसु ता क र आग। ए ह ब ध चलहु सकल भय याग।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

दो0- नतपाल रघु बंसम न ा ह ा ह अब मो ह।
आरत गरा सु नत भु अभय करै गो तो ह।।20।।
–*–*–
रे क पपोत बोलु संभार । मू ढ़ न जाने ह मो ह सु रार ।।
कहु नज नाम जनक कर भाई। क ह नात मा नऐ मताई।।
े
अंगद नाम बा ल कर बेटा। तास कबहु ँ भई ह भेटा।।
अंगद बचन सु नत सकचाना। रहा बा ल बानर म जाना।।
ु
अंगद तह ं बा ल कर बालक। उपजेहु बंस अनल कल घालक।।
ु
गभ न गयहु यथ तु ह जायहु । नज मु ख तापस दूत कहायहु ।।
अब कहु क सल बा ल कहँ अहई। बहँ स बचन तब अंगद कहई।।
ु
दन दस गएँ बा ल प हं जाई। बू झहु कसल सखा उर लाई।।
े ु
राम बरोध कसल ज स होई। सो सब तो ह सु नाइ ह सोई।।
ु
सु नु सठ भेद होइ मन ताक। ीरघु बीर दय न हं जाक।।
दो0-हम क ल घालक स य तु ह कल पालक दससीस।
ु
ु
अंधउ ब धर न अस कह हं नयन कान तव बीस।।21।
–*–*–
सव बरं च सु र मु न समु दाई। चाहत जासु चरन सेवकाई।।
तासु दूत होइ हम कल बोरा। अइ सहु ँ म त उर बहर न तोरा।।
ु
सु न कठोर बानी क प कर । कहत दसानन नयन तरे र ।।
े
खल तव क ठन बचन सब सहऊ। नी त धम म जानत अहऊ।।
ँ
ँ
कह क प धमसीलता तोर । हमहु ँ सु नी कृ त पर

य चोर ।।

दे खी नयन दूत रखवार । बू ड़ न मरहु धम तधार ।।
कान नाक बनु भ ग न नहार । छमा क ि ह तु ह धम बचार ।।
धमसीलता तव जग जागी। पावा दरसु हमहु ँ बड़भागी।।
दो0-ज न ज प स जड़ जंतु क प सठ बलोक मम बाहु ।
ु
लोकपाल बल बपु ल स स सन हे तु सब राहु ।।22(क)।।
पु न नभ सर मम कर नकर कमलि ह पर क र बास।
सोभत भयउ मराल इव संभु स हत कलास।।22(ख)।।
ै
–*–*–
तु हरे कटक माझ सु नु अंगद। मो सन भ र ह कवन जोधा बद।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

तव भु ना र बरहँ बलह ना। अनु ज तासु दुख दुखी मल ना।।
तु ह सु ीव कल म दोऊ। अनु ज हमार भी अ त सोऊ।।
ू
ु
जामवंत मं ी अ त बू ढ़ा। सो क होइ अब समरा ढ़ा।।
सि प कर्म जान हं नल नीला। है क प एक महा बलसीला।।
आवा थम नग ज हं जारा। सु नत बचन कह बा लकमारा।।
ु
स य बचन कहु न सचर नाहा। साँचेहु ँ क स क ह पु र दाहा।।
रावन नगर अ प क प दहई। सु न अस बचन स य को कहई।।
जो अ त सु भट सराहे हु रावन। सो सु ीव कर लघु धावन।।
े
चलइ बहु त सो बीर न होई। पठवा खब र लेन हम सोई।।
दो0-स य नग क प जारे उ बनु भु आयसु पाइ।
फ र न गयउ सु ीव प हं ते हं भय रहा लु काइ।।23(क)।।
स य कह ह दसकठ सब मो ह न सु न कछ कोह।
ं
ु
कोउ न हमार कटक अस तो सन लरत जो सोह।।23(ख)।।
ी त बरोध समान सन क रअ नी त अ स आ ह।
ज मृगप त बध मेड़ु कि ह भल क कहइ कोउ ता ह।।23(ग)।।
ज य प लघु ता राम कहु ँ तो ह बध बड़ दोष।
तद प क ठन दसकठ सु नु छ जा त कर रोष।।23(घ)।।
ं
ब

उि त धनु बचन सर दय दहे उ रपु क स।

तउ तर सड़ स ह मनहु ँ काढ़त भट दससीस।।23(ङ)।।
जो

हँ स बोलेउ दसमौ ल तब क प कर बड़ गु न एक।

तपालइ तासु हत करइ उपाय अनेक।।23(छ)।।
–*–*–
ध य क स जो नज भु काजा। जहँ तहँ नाचइ प रह र लाजा।।
ना च क द क र लोग रझाई। प त हत करइ धम नपु नाई।।
ू
अंगद वा मभ त तव जाती। भु गु न कस न कह स ए ह भाँती।।
म गु न गाहक परम सु जाना। तव कटु रट न करउँ न हं काना।।
कह क प तव गु न गाहकताई। स य पवनसु त मो ह सु नाई।।
बन बधं स सु त ब ध पु र जारा। तद प न ते हं कछ कृ त अपकारा।।
ु
सोइ बचा र तव कृ त सु हाई। दसकधर म क ि ह ढठाई।।
ं
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

दे खेउँ आइ जो कछ क प भाषा। तु हर लाज न रोष न माखा।।
ु
ज अ स म त पतु खाए क सा। क ह अस बचन हँ सा दससीसा।।
पत ह खाइ खातेउँ पु न तोह । अबह ं समु झ परा कछ मोह ।।
ु
बा ल बमल जस भाजन जानी। हतउँ न तो ह अधम अ भमानी।।
कहु रावन रावन जग कते। म नज वन सु ने सु नु जेते।।
े
ब ल ह िजतन एक गयउ पताला। राखेउ बाँ ध ससु ह हयसाला।।
खेल हं बालक मार हं जाई। दया ला ग ब ल द ह छोड़ाई।।
एक बहो र सहसभु ज दे खा। धाइ धरा िज म जंतु बसेषा।।
कौतु क ला ग भवन लै आवा। सो पु लि त मु न जाइ छोड़ावा।।
दो0-एक कहत मो ह सकच अ त रहा बा ल क काँख।
ु
इ ह महु ँ रावन त कवन स य बद ह तिज माख।।24।।
–*–*–
सु नु सठ सोइ रावन बलसीला। हर ग र जान जासु भु ज ल ला।।
जान उमाप त जासु सु राई। पू जेउँ जे ह सर सु मन चढ़ाई।।
सर सरोज नज करि ह उतार । पू जेउँ अ मत बार

पु रार ।।

भु ज ब म जान हं दगपाला। सठ अजहू ँ िज ह क उर साला।।
जान हं द गज उर क ठनाई। जब जब भरउँ जाइ ब रआई।।
िज ह क दसन कराल न फटे । उर लागत मू लक इव टू टे ।।
े
ू
जासु चलत डोल त इ म धरनी। चढ़त म त गज िज म लघु तरनी।।
सोइ रावन जग ब दत तापी। सु ने ह न वन अल क लापी।।
दो0-ते ह रावन कहँ लघु कह स नर कर कर स बखान।
रे क प बबर खब खल अब जाना तव यान।।25।।
–*–*–
सु न अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभा र अधम अ भमानी।।
सहसबाहु भु ज गहन अपारा। दहन अनल सम जासु कठारा।।
ु
जासु परसु सागर खर धारा। बू ड़े नृप अग नत बहु बारा।।
तासु गब जे ह दे खत भागा। सो नर य दससीस अभागा।।
राम मनु ज कस रे सठ बंगा। ध वी कामु नद पु न गंगा।।
पसु सुरधेनु क पत

खा। अ न दान अ रस पीयू षा।।

बैनतेय खग अ ह सहसानन। चंताम न पु न उपल दसानन।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

सु नु म तमंद लोक बैकंु ठा। लाभ क रघु प त भग त अकंु ठा।।
दो0-सेन स हत तब मान म थ बन उजा र पु र जा र।।
कस रे सठ हनु मान क प गयउ जो तव सु त मा र।।26।।
–*–*–
सु नु रावन प रह र चतु राई। भज स न कृ पा संधु रघु राई।।
जौ खल भए स राम कर ोह ।

म

सक रा ख न तोह ।।

मू ढ़ बृथा ज न मार स गाला। राम बयर अस होइ ह हाला।।
तव सर नकर क प ह क आग। प रह हं धर न राम सर लाग।।
े
ते तव सर कदुक सम नाना। खेलह हं भालु क स चौगाना।।
ं
जब हं समर कोप ह रघु नायक। छ टह हं अ त कराल बहु सायक।।
ु
तब क च ल ह अस गाल तु हारा। अस बचा र भजु राम उदारा।।
सु नत बचन रावन परजरा। जरत महानल जनु घृत परा।।
दो0-कंु भकरन अस बंधु मम सु त

स स ा र।

मोर परा म न हं सु ने ह िजतेउँ चराचर झा र।।27।।
–*–*–
सठ साखामृग जो र सहाई। बाँधा संधु इहइ भु ताई।।
नाघ हं खग अनेक बार सा। सू र न हो हं ते सु नु सब क सा।।
मम भु ज सागर बल जल पू रा। जहँ बू ड़े बहु सु र नर सू रा।।
बीस पयो ध अगाध अपारा। को अस बीर जो पाइ ह पारा।।
दगपाल ह म नीर भरावा। भू प सु जस खल मो ह सु नावा।।
ज पै समर सु भट तव नाथा। पु न पु न कह स जासु गु न गाथा।।
तौ बसीठ पठवत क ह काजा। रपु सन ी त करत न हं लाजा।।
े
हर ग र मथन नरखु मम बाहू । पु न सठ क प नज भु ह सराहू ।।
दो0-सू र कवन रावन स रस वकर का ट जे हं सीस।
हु ने अनल अ त हरष बहु बार सा ख गौर स।।28।।
–*–*–
जरत बलोकउँ जब हं कपाला। ब ध क लखे अंक नज भाला।।
े
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नर क कर आपन बध बाँची। हसेउँ जा न ब ध गरा असाँची।।
सोउ मन समु झ ास न हं मोर। लखा बरं च जरठ म त भोर।।
आन बीर बल सठ मम आग। पु न पु न कह स लाज प त यागे।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

कह अंगद सल ज जग माह ं। रावन तो ह समान कोउ नाह ं।।
लाजवंत तव सहज सु भाऊ। नज मु ख नज गु न कह स न काऊ।।
सर अ सैल कथा चत रह । ताते बार बीस त कह ।।
सो भु जबल राखेउ उर घाल । जीतेहु सहसबाहु ब ल बाल ।।
सु नु म तमंद दे ह अब पू रा। काट सीस क होइअ सू रा।।
इं जा ल कहु क हअ न बीरा। काटइ नज कर सकल सर रा।।
दो0-जर हं पतंग मोह बस भार बह हं खर बृंद।
ते न हं सू र कहाव हं समु झ दे खु म तमंद।।29।।
–*–*–
अब ज न बतबढ़ाव खल करह । सु नु मम बचन मान प रहरह ।।
दसमु ख म न बसीठ ं आयउँ । अस बचा र रघु बीष पठायउँ ।।
बार बार अस कहइ कृ पाला। न हं गजा र जसु बध सृकाला।।
मन महु ँ समु झ बचन भु करे । सहे उँ कठोर बचन सठ तेरे।।
े
ना हं त क र मु ख भंजन तोरा। लै जातेउँ सीत ह बरजोरा।।
जानेउँ तव बल अधम सु रार । सू न ह र आ न ह परनार ।।
त न सचर प त गब बहू ता। म रघु प त सेवक कर दूता।।
ज न राम अपमान ह डरउँ । तो ह दे खत अस कौतु क करऊ।।
ँ
दो0-तो ह पट क म ह सेन ह त चौपट क र तव गाउँ ।
तव जु ब त ह समेत सठ जनकसु त ह लै जाउँ ।।30।।
–*–*–
जौ अस कर तद प न बड़ाई। मु ए ह बध न हं कछ मनु साई।।
ु
कौल कामबस कृ पन बमू ढ़ा। अ त द र अजसी अ त बू ढ़ा।।
सदा रोगबस संतत

ोधी। ब नु बमू ख ु त संत बरोधी।।

तनु पोषक नंदक अघ खानी। जीवन सव सम चौदह ानी।।
अस बचा र खल बधउँ न तोह । अब ज न रस उपजाव स मोह ।।
सु न सकोप कह न सचर नाथा। अधर दसन द स मीजत हाथा।।
रे क प अधम मरन अब चहसी। छोटे बदन बात ब ड़ कहसी।।
कटु ज प स जड़ क प बल जाक। बल ताप बु ध तेज न ताक।।
दो0-अगु न अमान जा न ते ह द ह पता बनबास।
सो दुख अ जु बती बरह पु न न स दन मम ास।।31(क)।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

िज ह क बल कर गब तो ह अइसे मनु ज अनेक।
े
खाह ं नसाचर दवस न स मू ढ़ समु झु तिज टे क।।31(ख)।।
–*–*–
जब ते हं क ह राम क नंदा। ोधवंत अ त भयउ क पंदा।।
ै
ह र हर नंदा सु नइ जो काना। होइ पाप गोघात समाना।।
कटकटान क पकंु जर भार । दुहु भु जदं ड तम क म ह मार ।।
डोलत धर न सभासद खसे। चले भािज भय मा त से।।
गरत सँभा र उठा दसकधर। भू तल परे मु कट अ त सु ंदर।।
ं
ु
कछ ते हं लै नज सरि ह सँवारे । कछ अंगद भु पास पबारे ।।
ु
ु
आवत मु कट दे ख क प भागे। दनह ं लू क परन ब ध लागे।।
ु
क रावन क र कोप चलाए। क लस चा र आवत अ त धाए।।
ु
कह भु हँ स ज न दयँ डेराहू । लू क न अस न कतु न हं राहू ।।
े
ए कर ट दसकधर करे । आवत बा लतनय क ेरे।।
ं
े
े
दो0-तर क पवनसु त कर गहे आ न धरे भु पास।
कौतु क दे ख हं भालु क प दनकर स रस कास।।32(क)।।
उहाँ सको प दसानन सब सन कहत रसाइ।
धरहु क प ह ध र मारहु सु न अंगद मु सु काइ।।32(ख)।।
–*–*–
ए ह ब ध बे ग सू भट सब धावहु । खाहु भालु क प जहँ जहँ पावहु ।।
मकटह न करहु म ह जाई। िजअत धरहु तापस वौ भाई।।
पु न सकोप बोलेउ जु बराजा। गाल बजावत तो ह न लाजा।।
म गर का ट नलज कलघाती। बल बलो क बहर त न हं छाती।।
ु
रे

य चोर कमारग गामी। खल मल रा स मंदम त कामी।।
ु

स यपात ज प स दुबादा। भए स कालबस खल मनु जादा।।
याको फलु पाव हगो आग। बानर भालु चपेटि ह लाग।।
रामु मनु ज बोलत अ स बानी। गर हं न तव रसना अ भमानी।।
ग रह हं रसना संसय नाह ं। सरि ह समेत समर म ह माह ं।।
सो0-सो नर य दसकध बा ल ब यो जे हं एक सर।
ं
बीसहु ँ लोचन अंध धग तव ज म कजा त जड़।।33(क)।।
ु
तब सो नत क यास तृ षत राम सायक नकर।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

तजउँ तो ह ते ह ास कटु ज पक न सचर अधम।।33(ख)।।
मै तव दसन तो रबे लायक। आयसु मो ह न द ह रघु नायक।।
अ स रस हो त दसउ मु ख तोर । लंका ग ह समु महँ बोर ।।
गू ल र फल समान तव लंका। बसहु म य तु ह जंतु असंका।।
म बानर फल खात न बारा। आयसु द ह न राम उदारा।।
जु ग त सु नत रावन मु सु काई। मू ढ़ स ख ह कहँ बहु त झु ठाई।।
बा ल न कबहु ँ गाल अस मारा। म ल तप स ह त भए स लबारा।।
साँचेहु ँ म लबार भु ज बीहा। ज न उपा रउँ तव दस जीहा।।
समु झ राम ताप क प कोपा। सभा माझ पन क र पद रोपा।।
ज मम चरन सक स सठ टार । फर हं रामु सीता म हार ।।
सु नहु सु भट सब कह दससीसा। पद ग ह धर न पछारहु क सा।।
इं जीत आ दक बलवाना। हर ष उठे जहँ तहँ भट नाना।।
झपट हं क र बल बपु ल उपाई। पद न टरइ बैठ हं स नाई।।
पु न उ ठ झपटह ं सु र आराती। टरइ न क स चरन ए ह भाँती।।
पु ष कजोगी िज म उरगार । मोह बटप न हं सक हं उपार ।।
ु
दो0-को ट ह मेघनाद सम सु भट उठे हरषाइ।
झपट हं टरै न क प चरन पु न बैठ हं सर नाइ।।34(क)।।
भू म न छाँडत क प चरन दे खत रपु मद भाग।।
को ट ब न ते संत कर मन िज म नी त न याग।।34(ख)।।
–*–*–
क प बल दे ख सकल हयँ हारे । उठा आपु क प क परचारे ।।
गहत चरन कह बा लक मारा। मम पद गह न तोर उबारा।।
ु
गह स न राम चरन सठ जाई। सु नत फरा मन अ त सक चाई।।
ु
भयउ तेजहत ी सब गई। म य दवस िज म स स सोहई।।
संघासन बैठेउ सर नाई। मानहु ँ संप त सकल गँवाई।।

जगदातमा ानप त रामा। तासु बमु ख क म लह ब ामा।।
उमा राम क भृक ट बलासा। होइ ब व पु न पावइ नासा।।
ु
तृन ते क लस क लस तृन करई। तासु दूत पन कहु क म टरई।।
ु
ु
पु न क प कह नी त ब ध नाना। मान न ता ह कालु नअराना।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

रपु मद म थ भु सु जसु सु नायो। यह क ह च यो बा ल नृप जायो।।
हत न खेत खेलाइ खेलाई। तो ह अब हं का कर बड़ाई।।
थम हं तासु तनय क प मारा। सो सु न रावन भयउ दुखारा।।
जातु धान अंगद पन दे खी। भय याकल सब भए बसेषी।।
ु
दो0- रपु बल धर ष हर ष क प बा लतनय बल पु ंज।
पु लक सर र नयन जल गहे राम पद कज।।35(क)।।
ं
साँझ जा न दसकधर भवन गयउ बलखाइ।
ं
मंदोदर रावन ह बहु र कहा समु झाइ।।(ख)।।
–*–*–
कत समु झ मन तजहु कम तह । सोह न समर तु ह ह रघु प तह ।।
ं
ु
रामानु ज लघु रे ख खचाई। सोउ न हं नाघेहु अ स मनु साई।।
पय तु ह ता ह िजतब सं ामा। जाक दूत कर यह कामा।।
े
े
कौतु क संधु नाघी तव लंका। आयउ क प कहर असंका।।
े
रखवारे ह त ब पन उजारा। दे खत तो ह अ छ ते हं मारा।।
जा र सकल पु र क हे स छारा। कहाँ रहा बल गब तु हारा।।
अब प त मृषा गाल ज न मारहु । मोर कहा कछ दयँ बचारहु ।।
ु
प त रघु प त ह नृप त ज न मानहु । अग जग नाथ अतु ल बल जानहु ।।
बान ताप जान मार चा। तासु कहा न हं माने ह नीचा।।
जनक सभाँ अग नत भू पाला। रहे तु हउ बल अतु ल बसाला।।
भंिज धनु ष जानक बआह । तब सं ाम िजतेहु कन ताह ।।
सु रप त सु त जानइ बल थोरा। राखा िजअत आँ ख ग ह फोरा।।
सू पनखा क ग त तु ह दे खी। तद प दयँ न हं लाज बषेषी।।
ै
दो0-ब ध बराध खर दूषन ह ल लाँ ह यो कबंध।
बा ल एक सर मारयो ते ह जानहु दसकध।।36।।
ं
–*–*–
जे हं जलनाथ बँधायउ हे ला। उतरे भु दल स हत सु बेला।।
का नीक दनकर कल कतू । दूत पठायउ तव हत हे तू ।।
ु
े
सभा माझ जे हं तव बल मथा। क र ब थ महु ँ मृगप त जथा।।
अंगद हनु मत अनु चर जाक। रन बाँकरे बीर अ त बाँक।।
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ते ह कहँ पय पु न पु न नर कहहू । मु धा मान ममता मद बहहू ।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

अहह कत कृ त राम बरोधा। काल बबस मन उपज न बोधा।।
ं
काल दं ड ग ह काहु न मारा। हरइ धम बल बु

बचारा।।

नकट काल जे ह आवत सा । ते ह म होइ तु हा र ह ना ।।
दो0-दुइ सु त मरे दहे उ पु र अजहु ँ पू र पय दे हु ।
कृ पा संधु रघु नाथ भिज नाथ बमल जसु लेहु ।।37।।
–*–*–
ना र बचन सु न ब सख समाना। सभाँ गयउ उ ठ होत बहाना।।
बैठ जाइ संघासन फल । अ त अ भमान ास सब भू ल ।।
ू
इहाँ राम अंगद ह बोलावा। आइ चरन पंकज स नावा।।
अ त आदर सपीप बैठार । बोले बहँ स कृ पाल खरार ।।
बा लतनय कौतु क अ त मोह । तात स य कहु पू छउँ तोह ।।।
रावनु जातु धान कल ट का। भु ज बल अतु ल जासु जग ल का।।
ु
तासु मु क ट तु ह चा र चलाए। कहहु तात कवनी ब ध पाए।।
ु
सु नु सब य नत सु खकार । मु क ट न हो हं भू प गु न चार ।।
ु
साम दान अ दं ड बभेदा। नृप उर बस हं नाथ कह बेदा।।
नी त धम क चरन सु हाए। अस िजयँ जा न नाथ प हं आए।।
े
दो0-धमह न भु पद बमु ख काल बबस दससीस।
ते ह प रह र गु न आए सु नहु कोसलाधीस।।38(((क)।।
परम चतु रता वन सु न बहँ से रामु उदार।
समाचार पु न सब कहे गढ़ क बा लकमार।।38(ख)।।
े
ु
–*–*–
रपु क समाचार जब पाए। राम स चव सब नकट बोलाए।।
े
लंका बाँक चा र दुआरा। क ह ब ध ला गअ करहु बचारा।।
े
े
तब कपीस र छे स बभीषन। सु म र दयँ दनकर कल भू षन।।
ु
क र बचार त ह मं

ढ़ावा। चा र अनी क प कटक बनावा।।
ु

जथाजोग सेनाप त क हे । जू थप सकल बो ल तब ल हे ।।
भु ताप क ह सब समु झाए। सु न क प संघनाद क र धाए।।
हर षत राम चरन सर नाव हं। ग ह ग र सखर बीर सब धाव हं।।
गज हं तज हं भालु कपीसा। जय रघु बीर कोसलाधीसा।।
जानत परम दुग अ त लंका। भु ताप क प चले असंका।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

घटाटोप क र चहु ँ द स घेर । मु ख हं नसान बजावह ं भेर ।।
दो0-जय त राम जय ल छमन जय कपीस सु ीव।
गज हं संघनाद क प भालु महा बल सींव।।39।।
–*–*–
लंकाँ भयउ कोलाहल भार । सु ना दसानन अ त अहँ कार ।।
दे खहु बनर ह क र ढठाई। बहँ स नसाचर सेन बोलाई।।
े
आए क स काल क ेरे। छधावंत सब न सचर मेरे।।
े
ु
अस क ह अ हास सठ क हा। गृह बैठे अहार ब ध द हा।।
सु भट सकल चा रहु ँ द स जाहू । ध र ध र भालु क स सब खाहू ।।
उमा रावन ह अस अ भमाना। िज म ट भ खग सू त उताना।।
चले नसाचर आयसु मागी। ग ह कर भं डपाल बर साँगी।।
तोमर मु दर परसु चंडा। सु ल कृ पान प रघ ग रखंडा।।
िज म अ नोपल नकर नहार । धाव हं सठ खग मांस अहार ।।
च च भंग दुख त ह ह न सू झा। त म धाए मनु जाद अबू झा।।
दो0-नानायु ध सर चाप धर जातु धान बल बीर।
कोट कगू रि ह च ढ़ गए को ट को ट रनधीर।।40।।
ँ
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कोट कगू रि ह सोह हं कसे। मे क सृंग न जनु घन बैसे।।
ँ
ै
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बाज हं ढोल नसान जु झाऊ। सु न धु न होइ भटि ह मन चाऊ।।
बाज हं भे र नफ र अपारा। सु न कादर उर जा हं दरारा।।
दे ख ह जाइ क प ह क ठ ा। अ त बसाल तनु भालु सु भ ा।।
े
धाव हं गन हं न अवघट घाटा। पबत फो र कर हं ग ह बाटा।।
कटकटा हं को ट ह भट गज हं। दसन ओठ काट हं अ त तज हं।।
उत रावन इत राम दोहाई। जय त जय त जय पर लराई।।
न सचर सखर समू ह ढहाव हं। क द धर हं क प फ र चलाव हं।।
ू
े
दो0-ध र कधर खंड चंड ककट भालु गढ़ पर डारह ं।
ु
झपट हं चरन ग ह पट क म ह भिज चलत बहु र पचारह ं।।
–*–*–
अ त तरल त न ताप तरप हं तम क गढ़ च ढ़ च ढ़ गए।
क प भालु च ढ़ मं दर ह जहँ तहँ राम जसु गावत भए।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

दो0-एक एक न सचर ग ह पु न क प चले पराइ।
ु
ु
ऊपर आपु हे ठ भट गर हं धर न पर आइ।।41।।
–*–*–
राम ताप बल क पजू था। मद हं न सचर सु भट ब था।।
चढ़े दुग पु न जहँ तहँ बानर। जय रघु बीर ताप दवाकर।।
चले नसाचर नकर पराई। बल पवन िज म घन समु दाई।।
हाहाकार भयउ पु र भार । रोव हं बालक आतु र नार ।।
सब म ल दे हं रावन ह गार । राज करत ए हं मृ यु हँ कार ।।
नज दल बचल सु नी ते हं काना। फ र सु भट लंकस रसाना।।
े
े
जो रन बमु ख सु ना म काना। सो म हतब कराल कृ पाना।।
सबसु खाइ भोग क र नाना। समर भू म भए ब लभ ाना।।
उ बचन सु न सकल डेराने। चले

ोध क र सु भट लजाने।।

स मु ख मरन बीर क सोभा। तब त ह तजा ान कर लोभा।।
ै
दो0-बहु आयु ध धर सु भट सब भर हं पचा र पचा र।
याक ल कए भालु क प प रघ सू लि ह मार ।।42।।
ु
–*–*–
भय आतु र क प भागन लागे। ज य प उमा जी तह हं आगे।।
कोउ कह कहँ अंगद हनु मंता। कहँ नल नील दु बद बलवंता।।
नज दल बकल सुना हनु माना। पि छम वार रहा बलवाना।।
मेघनाद तहँ करइ लराई। टू ट न वार परम क ठनाई।।
पवनतनय मन भा अ त

ोधा। गजउ बल काल सम जोधा।।

क द लंक गढ़ ऊपर आवा। ग ह ग र मेघनाद कहु ँ धावा।।
ू
भंजेउ रथ सारथी नपाता। ता ह दय महु ँ मारे स लाता।।
दुसर सू त बकल ते ह जाना। यंदन घा ल तु रत गृह आना।।
दो0-अंगद सु ना पवनसु त गढ़ पर गयउ अकल।
े
रन बाँक रा बा लसु त तर क चढ़े उ क प खेल।।43।।
ु
–*–*–
जु ब
ु
वौ बंदर। राम ताप सु म र उर अंतर।।
रावन भवन चढ़े वौ धाई। कर ह कोसलाधीस दोहाई।।
कलस स हत ग ह भवनु ढहावा। दे ख नसाचरप त भय पावा।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

ना र बृंद कर पीट हं छाती। अब दुइ क प आए उतपाती।।
क पल ला क र त ह ह डेराव हं। रामचं कर सु जसु सु नाव हं।।
पु न कर ग ह कचन क खंभा। कहे ि ह क रअ उतपात अरं भा।।
ं
े
गिज परे रपु कटक मझार । लागे मद भु ज बल भार ।।
काहु ह लात चपेटि ह कहू । भजहु न राम ह सो फल लेहू ।।
े
दो0-एक एक स मद हं तो र चलाव हं मु ंड।
रावन आग पर हं ते जनु फट हं द ध कंु ड।।44।।
ू
–*–*–
महा महा मु खआ जे पाव हं। ते पद ग ह भु पास चलाव हं।।
कहइ बभीषनु त ह क नामा। दे हं राम त हहू नज धामा।।
े
खल मनु जाद

वजा मष भोगी। पाव हं ग त जो जाचत जोगी।।

उमा राम मृदु चत क नाकर। बयर भाव सु मरत मो ह न सचर।।
दे हं परम ग त सो िजयँ जानी। अस कृ पाल को कहहु भवानी।।
अस भु सु न न भज हं म यागी। नर म तमंद ते परम अभागी।।
अंगद अ हनु मंत बेसा। क ह दुग अस कह अवधेसा।।
लंकाँ वौ क प सोह हं कस। मथ ह संधु दुइ मंदर जैस।।
ै
दो0-भु ज बल रपु दल दलम ल दे ख दवस कर अंत।
कदे जु गल बगत म आए जहँ भगवंत।।45।।
ू
–*–*–
भु पद कमल सीस त ह नाए। दे ख सु भट रघु प त मन भाए।।
राम कृ पा क र जु गल नहारे । भए बगत म परम सु खारे ।।
गए जा न अंगद हनुमाना। फरे भालु मकट भट नाना।।
जातु धान दोष बल पाई। धाए क र दससीस दोहाई।।
न सचर अनी दे ख क प फरे । जहँ तहँ कटकटाइ भट भरे ।।
वौ दल बल पचा र पचार । लरत सु भट न हं मान हं हार ।।
महाबीर न सचर सब कारे । नाना बरन बल मु ख भारे ।।
सबल जु गल दल समबल जोधा। कौतुक करत लरत क र

ोधा।।

ा बट सरद पयोद घनेरे। लरत मनहु ँ मा त क ेरे।।
े
अ नप अकपन अ अ तकाया। बचलत सेन क ि ह इ ह माया।।
ं
भयउ न मष महँ अ त अँ धयारा। बृि ट होइ

धरोपल छारा।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

दो0-दे ख न बड़ तम दसहु ँ द स क पदल भयउ खभार।
एक ह एक न दे खई जहँ तहँ कर हं पु कार।।46।।
–*–*–
सकल मरमु रघु नायक जाना। लए बो ल अंगद हनु माना।।
समाचार सब क ह समु झाए। सु नत को प क पकंु जर धाए।।
पु न कृ पाल हँ स चाप चढ़ावा। पावक सायक सप द चलावा।।
भयउ कास कतहु ँ तम नाह ं। यान उदयँ िज म संसय जाह ं।।
भालु बल मु ख पाइ कासा। धाए हरष बगत म ासा।।
हनू मान अंगद रन गाजे। हाँक सु नत रजनीचर भाजे।।
भागत पट पटक हं ध र धरनी। कर हं भालु क प अ ु त करनी।।
ग ह पद डार हं सागर माह ं। मकर उरग झष ध र ध र खाह ं।।
दो0-कछ मारे कछ घायल कछ गढ़ चढ़े पराइ।
ु
ु
ु
गज हं भालु बल मु ख रपु दल बल बचलाइ।।47।।
–*–*–
नसा जा न क प चा रउ अनी। आए जहाँ कोसला धनी।।
राम कृ पा क र चतवा सबह । भए बगत म बानर तबह ।।
उहाँ दसानन स चव हँ कारे । सब सन कहे स सु भट जे मारे ।।
आधा कटक क प ह संघारा। कहहु बे ग का क रअ बचारा।।
ु
मा यवंत अ त जरठ नसाचर। रावन मातु पता मं ी बर।।
बोला बचन नी त अ त पावन। सु नहु तात कछ मोर सखावन।।
ु
जब ते तु ह सीता ह र आनी। असगु न हो हं न जा हं बखानी।।
बेद पु रान जासु जसु गायो। राम बमु ख काहु ँ न सु ख पायो।।
दो0- हर या छ ाता स हत मधु कटभ बलवान।
ै
जे ह मारे सोइ अवतरे उ कृ पा संधु भगवान।।48(क)।।
मासपारायण, पचीसवाँ व ाम
काल प खल बन दहन गु नागार घनबोध।
सव बरं च जे ह सेव हं तास कवन बरोध।।48(ख)।।
–*–*–
प रह र बय दे हु बैदेह । भजहु कृ पा न ध परम सनेह ।।
ताक बचन बान सम लागे। क रआ मु ह क र जा ह अभागे।।
े
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

बू ढ़ भए स न त मरतेउँ तोह । अब ज न नयन दे खाव स मोह ।।
ते ह अपने मन अस अनु माना। ब यो चहत ए ह कृ पा नधाना।।
सो उ ठ गयउ कहत दुबादा। तब सकोप बोलेउ घननादा।।
कौतु क ात दे खअहु मोरा। क रहउँ बहु त कह का थोरा।।
सु न सु त बचन भरोसा आवा। ी त समेत अंक बैठावा।।
करत बचार भयउ भनु सारा। लागे क प पु न चहू ँ दुआरा।।
को प क पन ्ह दुघट गढ़ु घेरा। नगर कोलाहलु भयउ घनेरा।।
ब बधायु ध धर न सचर धाए। गढ़ ते पबत सखर ढहाए।।
छं 0-ढाहे मह धर सखर को ट ह ब बध ब ध गोला चले।
घहरात िज म प बपात गजत जनु लय क बादले।।
े
मकट बकट भट जु टत कटत न लटत तन जजर भए।
ग ह सैल ते ह गढ़ पर चलाव हं जहँ सो तहँ न सचर हए।।
दो0-मेघनाद सु न वन अस गढ़ु पु न छका आइ।
उतय बीर दुग त स मु ख च यो बजाइ।।49।।
–*–*–
कहँ कोसलाधीस वौ ाता। ध वी सकल लोक ब याता।।
कहँ नल नील दु बद सु ीवा। अंगद हनू मंत बल सींवा।।
कहाँ बभीषनु ाता ोह । आजु सब ह ह ठ मारउँ ओह ।।
अस क ह क ठन बान संधाने। अ तसय

ोध वन ल ग ताने।।

सर समु ह सो छाड़ै लागा। जनु सप छ धाव हं बहु नागा।।
जहँ तहँ परत दे खअ हं बानर। स मु ख होइ न सक ते ह अवसर।।
े
जहँ तहँ भा ग चले क प र छा। बसर सब ह जु क ईछा।।
ै
सो क प भालु न रन महँ दे खा। क हे स जे ह न ान अवसेषा।।
दो0-दस दस सर सब मारे स परे भू म क प बीर।
संहनाद क र गजा मेघनाद बल धीर।।50।।
–*–*–
दे ख पवनसु त कटक बहाला। ोधवंत जनु धायउ काला।।
महासैल एक तु रत उपारा। अ त रस मेघनाद पर डारा।।
आवत दे ख गयउ नभ सोई। रथ सारथी तु रग सब खोई।।
बार बार पचार हनु माना। नकट न आव मरमु सो जाना।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

रघु प त नकट गयउ घननादा। नाना भाँ त करे स दुबादा।।
अ

स

आयु ध सब डारे । कौतु कह ं भु का ट नवारे ।।

दे ख ताप मू ढ़ ख सआना। करै लाग माया ब ध नाना।।
िज म कोउ करै ग ड़ स खेला। डरपावै ग ह व प सपेला।।
दो0-जासु बल माया बल सव बरं च बड़ छोट।
ता ह दखावइ न सचर नज माया म त खोट।।51।।
–*–*–
नभ च ढ़ बरष बपु ल अंगारा। म ह ते गट हो हं जलधारा।।
नाना भाँ त पसाच पसाची। मा काटु धु न बोल हं नाची।।
ब टा पू य

धर कच हाड़ा। बरषइ कबहु ँ उपल बहु छाड़ा।।

बर ष धू र क हे स अँ धआरा। सू झ न आपन हाथ पसारा।।
क प अकलाने माया दे ख। सब कर मरन बना ए ह लेख।।
ु
कौतु क दे ख राम मु सु काने। भए सभीत सकल क प जाने।।
एक बान काट सब माया। िज म दनकर हर त मर नकाया।।
कृ पा ि ट क प भालु बलोक। भए बल रन रह हं न रोक।।
े
े
दो0-आयसु मा ग राम प हं अंगदा द क प साथ।
ल छमन चले ु

होइ बान सरासन हाथ।।52।।
–*–*–
छतज नयन उर बाहु बसाला। हम ग र नभ तनु कछ एक लाला।।
ु
इहाँ दसानन सु भट पठाए। नाना अ

स

ग ह धाए।।

भू धर नख बटपायु ध धार । धाए क प जय राम पु कार ।।
भरे सकल जो र ह सन जोर । इत उत जय इ छा न हं थोर ।।
मु ठक ह लात ह दात ह काट हं। क प जयसील मा र पु न डाट हं।।
मा मा ध ध ध मा । सीस तो र ग ह भु जा उपा ।।
अ स रव पू र रह नव खंडा। धाव हं जहँ तहँ ं ड चंडा।।
दे ख हं कौतु क नभ सु र बृंदा। कबहु ँ क बसमय कबहु ँ अनंदा।।
दो0- धर गाड़ भ र भ र ज यो ऊपर धू र उड़ाइ।
जनु अँगार रा स ह पर मृतक धू म र यो छाइ।।53।।
–*–*–
घायल बीर बराज हं कसे। कसु मत कं सु क क त जैसे।।
ै
ु
े
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

ल छमन मेघनाद वौ जोधा। भर हं परसपर क र अ त

ोधा।।

एक ह एक सकइ न हं जीती। न सचर छल बल करइ अनीती।।
ोधवंत तब भयउ अनंता। भंजेउ रथ सारथी तु रंता।।
नाना ब ध हार कर सेषा। रा छस भयउ ान अवसेषा।।
रावन सु त नज मन अनु माना। संकठ भयउ ह र ह मम ाना।।
बीरघा तनी छा ड़ स साँगी। तेज पु ंज ल छमन उर लागी।।
मु छा भई सि त क लाग। तब च ल गयउ नकट भय याग।।
े
दो0-मेघनाद सम को ट सत जोधा रहे उठाइ।
जगदाधार सेष क म उठै चले ख सआइ।।54।।
–*–*–
सु नु ग रजा ोधानल जासू । जारइ भु वन चा रदस आसू ।।
सक सं ाम जी त को ताह । सेव हं सु र नर अग जग जाह ।।
यह कौतू हल जानइ सोई। जा पर कृ पा राम क होई।।
ै
सं या भइ फ र वौ बाहनी। लगे सँभारन नज नज अनी।।
यापक

म अिजत भु वने वर। ल छमन कहाँ बू झ क नाकर।।

तब ल ग लै आयउ हनु माना। अनु ज दे ख भु अ त दुख माना।।
जामवंत कह बैद सु षेना। लंकाँ रहइ को पठई लेना।।
ध र लघु प गयउ हनु मंता। आनेउ भवन समेत तु रंता।।
दो0-राम पदार बंद सर नायउ आइ सु षेन।
कहा नाम ग र औषधी जाहु पवनसु त लेन।।55।।
–*–*–
राम चरन सर सज उर राखी। चला भंजन सु त बल भाषी।।
उहाँ दूत एक मरमु जनावा। रावन कालने म गृह आवा।।
दसमु ख कहा मरमु ते हं सु ना। पु न पु न कालने म स धु ना।।
दे खत तु ह ह नग जे हं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा।।
भिज रघु प त क

हत आपना। छाँड़हु नाथ मृषा ज पना।।

नील कज तनु सु ंदर यामा। दयँ राखु लोचना भरामा।।
ं
म त मोर मू ढ़ता यागू । महा मोह न स सू तत जागू ।।
काल याल कर भ छक जोई। सपनेहु ँ समर क जी तअ सोई।।
दो0-सु न दसकठ रसान अ त ते हं मन क ह बचार।
ं
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

राम दूत कर मर ब यह खल रत मल भार।।56।।
–*–*–
अस क ह चला र च स मग माया। सर मं दर बर बाग बनाया।।
मा तसु त दे खा सु भ आ म। मु न ह बू झ जल पय जाइ म।।
रा छस कपट बेष तहँ सोहा। मायाप त दूत ह चह मोहा।।
जाइ पवनसु त नायउ माथा। लाग सो कहै राम गु न गाथा।।
होत महा रन रावन राम हं। िजतह हं राम न संसय या म हं।।
इहाँ भएँ म दे खेउँ भाई। यान ि ट बल मो ह अ धकाई।।
मागा जल ते हं द ह कमंडल। कह क प न हं अघाउँ थोर जल।।
सर म जन क र आतु र आवहु । द छा दे उँ यान जे हं पावहु ।।
दो0-सर पैठत क प पद गहा मकर ं तब अक लान।
ु
मार सो ध र दव ्य तनु चल गगन च ढ़ जान।।57।।
–*–*–
क प तव दरस भइउँ न पापा। मटा तात मु नबर कर सापा।।
मु न न होइ यह न सचर घोरा। मानहु स य बचन क प मोरा।।
अस क ह गई अपछरा जबह ं। न सचर नकट गयउ क प तबह ं।।
कह क प मु न गु रद छना लेहू । पाछ हम ह मं तु ह दे हू ।।
सर लंगू र लपे ट पछारा। नज तनु गटे स मरती बारा।।
राम राम क ह छाड़े स ाना। सु न मन हर ष चलेउ हनु माना।।
दे खा सैल न औषध ची हा। सहसा क प उपा र ग र ल हा।।
ग ह ग र न स नभ धावत भयऊ। अवधपु र उपर क प गयऊ।।
दो0-दे खा भरत बसाल अ त न सचर मन अनु मा न।
बनु फर सायक मारे उ चाप वन ल ग ता न।।58।।
–*–*–
परे उ मु छ म ह लागत सायक। सु मरत राम राम रघु नायक।।
सु न

य बचन भरत तब धाए। क प समीप अ त आतु र आए।।

बकल बलो क क स उर लावा। जागत न हं बहु भाँ त जगावा।।
मु ख मल न मन भए दुखार । कहत बचन भ र लोचन बार ।।
जे हं ब ध राम बमुख मो ह क हा। ते हं पु न यह दा न दुख द हा।।
ज मोर मन बच अ काया। ी त राम पद कमल अमाया।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

तौ क प होउ बगत म सू ला। ज मो पर रघु प त अनु क ला।।
ू
सु नत बचन उ ठ बैठ कपीसा। क ह जय जय त कोसलाधीसा।।
सो0-ल ह क प ह उर लाइ पु ल कत तनु लोचन सजल।
ी त न दयँ समाइ सु म र राम रघु कल तलक।।59।।
ु
तात क सल कहु सु ख नधान क । स हत अनु ज अ मातु जानक ।।
ु
क प सब च रत समास बखाने। भए दुखी मन महु ँ प छताने।।
अहह दै व म कत जग जायउँ । भु क एकहु काज न आयउँ ।।
े
जा न कअवस मन ध र धीरा। पु न क प सन बोले बलबीरा।।
ु
तात गह होइ ह तो ह जाता। काजु नसाइ ह होत भाता।।
चढ़ु मम सायक सैल समेता। पठव तो ह जहँ कृ पा नकता।।
े
सु न क प मन उपजा अ भमाना। मोर भार च ल ह क म बाना।।
राम भाव बचा र बहोर । बं द चरन कह क प कर जोर ।।
दो0-तव ताप उर रा ख भु जेहउँ नाथ तु रंत।
अस क ह आयसु पाइ पद बं द चलेउ हनु मंत।।60(क)।।
भरत बाहु बल सील गु न भु पद ी त अपार।
मन महु ँ जात सराहत पु न पु न पवनक मार।।60(ख)।।
ु
–*–*–
उहाँ राम ल छमन हं नहार । बोले बचन मनु ज अनु सार ।।
अध रा त गइ क प न हं आयउ। राम उठाइ अनु ज उर लायउ।।
सकहु न दु खत दे ख मो ह काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सु भाऊ।।
मम हत ला ग तजेहु पतु माता। सहे हु ब पन हम आतप बाता।।
सो अनु राग कहाँ अब भाई। उठहु न सु न मम बच बकलाई।।
ज जनतेउँ बन बंधु बछोहू । पता बचन मनतेउँ न हं ओहू ।।
सु त बत ना र भवन प रवारा। हो हं जा हं जग बार हं बारा।।
अस बचा र िजयँ जागहु ताता। मलइ न जगत सहोदर ाता।।

जथा पंख बनु खग अ त द ना। म न बनु फ न क रबर कर ह ना।।
अस मम िजवन बंधु बनु तोह । ज जड़ दै व िजआवै मोह ।।
जैहउँ अवध कवन मु हु लाई। ना र हे तु

य भाइ गँवाई।।

ब अपजस सहतेउँ जग माह ं। ना र हा न बसेष छ त नाह ं।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

अब अपलोक सोक सु त तोरा। स ह ह नठु र कठोर उर मोरा।।
ु
ु
नज जननी क एक कमारा। तात तासु तु ह ान अधारा।।
े
ु
स पे स मो ह तु ह ह ग ह पानी। सब ब ध सु खद परम हत जानी।।
उत काह दै हउँ ते ह जाई। उ ठ कन मो ह सखावहु भाई।।
बहु ब ध सचत सोच बमोचन।

वत स लल रािजव दल लोचन।।

उमा एक अखंड रघु राई। नर ग त भगत कृ पाल दे खाई।।
सो0- भु लाप सु न कान बकल भए बानर नकर।
आइ गयउ हनु मान िज म क ना महँ बीर रस।।61।।
हर ष राम भटे उ हनु माना। अ त कृ त य भु परम सु जाना।।
तु रत बैद तब क ह उपाई। उ ठ बैठे ल छमन हरषाई।।
दयँ लाइ भु भटे उ ाता। हरषे सकल भालु क प ाता।।
क प पु न बैद तहाँ पहु ँ चावा। जे ह ब ध तब हं ता ह लइ आवा।।
यह बृ तांत दसानन सु नेऊ। अ त बषअद पु न पु न सर धु नेऊ।।
याक ल कंु भकरन प हं आवा। ब बध जतन क र ता ह जगावा।।
ु
जागा न सचर दे खअ कसा। मानहु ँ कालु दे ह ध र बैसा।।
ै
कंु भकरन बू झा कहु भाई। काहे तव मु ख रहे सु खाई।।
कथा कह सब ते हं अ भमानी। जे ह कार सीता ह र आनी।।
तात क प ह सब न सचर मारे । महामहा जोधा संघारे ।।
दुमु ख सु र रपु मनु ज अहार । भट अ तकाय अकपन भार ।।
ं
अपर महोदर आ दक बीरा। परे समर म ह सब रनधीरा।।
दो0-सु न दसकधर बचन तब कंु भकरन बलखान।
ं

जगदं बा ह र आ न अब सठ चाहत क यान।।62।।
–*–*–
भल न क ह त न सचर नाहा। अब मो ह आइ जगाए ह काहा।।
अजहू ँ तात या ग अ भमाना। भजहु राम होइ ह क याना।।
ह दससीस मनु ज रघु नायक। जाक हनू मान से पायक।।
े

अहह बंधु त क ि ह खोटाई। थम हं मो ह न सु नाए ह आई।।
क हे हु भू बरोध ते ह दे वक। सव बरं च सु र जाक सेवक।।
े
नारद मु न मो ह यान जो कहा। कहतेउँ तो ह समय नरबहा।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

अब भ र अंक भटु मो ह भाई। लोचन सू फल करौ म जाई।।
याम गात सरसी ह लोचन। दे ख जाइ ताप य मोचन।।
दो0-राम प गु न सु मरत मगन भयउ छन एक।
रावन मागेउ को ट घट मद अ म हष अनेक।।63।।
–*–*–
म हष खाइ क र म दरा पाना। गजा ब ाघात समाना।।
कंु भकरन दुमद रन रं गा। चला दुग तिज सेन न संगा।।
दे ख बभीषनु आग आयउ। परे उ चरन नज नाम सु नायउ।।
अनु ज उठाइ दयँ ते ह लायो। रघु प त भक् त जा न मन भायो।।
तात लात रावन मो ह मारा। कहत परम हत मं

बचारा।।

ते हं गला न रघु प त प हं आयउँ । दे ख द न भु क मन भायउँ ।।
े
सु नु सु त भयउ कालबस रावन। सो क मान अब परम सखावन।।
ध य ध य त ध य बभीषन। भयहु तात न सचर कल भू षन।।
ु
बंधु बंस त क ह उजागर। भजेहु राम सोभा सु ख सागर।।
दो0-बचन कम मन कपट तिज भजेहु राम रनधीर।
जाहु न नज पर सू झ मो ह भयउँ कालबस बीर। 64।।
–*–*–
बंधु बचन सु न चला बभीषन। आयउ जहँ ैलोक बभू षन।।
नाथ भू धराकार सर रा। कंु भकरन आवत रनधीरा।।
एतना क प ह सु ना जब काना। कल कलाइ धाए बलवाना।।
लए उठाइ बटप अ भू धर। कटकटाइ डार हं ता ऊपर।।
को ट को ट ग र सखर हारा। कर हं भालु क प एक एक बारा।।
मु र ् यो न मन तनु टर् यो न टार् यो। िज म गज अक फल न को माय ।।
तब मा तसु त मु ठका ह यो। पर् यो धर न याकल सर धु यो।।
ु
पु न उ ठ ते हं मारे उ हनु मता। घु मत भू तल परे उ तु रंता।।
ं
पु न नल नील ह अव न पछारे स। जहँ तहँ पट क पट क भट डारे स।।
चल बल मु ख सेन पराई। अ त भय

सत न कोउ समु हाई।।

दो0-अंगदा द क प मु छत क र समेत सु ीव।
काँख दा ब क पराज कहु ँ चला अ मत बल सींव।।65।।
–*–*–
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

उमा करत रघु प त नरल ला। खेलत ग ड़ िज म अ हगन मीला।।
भृक ट भंग जो काल ह खाई। ता ह क सोहइ ऐ स लराई।।
ु
जग पाव न क र त ब त रह हं। गाइ गाइ भव न ध नर त रह हं।।
मु छा गइ मा तसु त जागा। सु ीव ह तब खोजन लागा।।
सु ीवहु क मु छा बीती। नबु क गयउ ते ह मृतक तीती।।
ै
काटे स दसन ना सका काना। गरिज अकास चलउ ते हं जाना।।
गहे उ चरन ग ह भू म पछारा। अ त लाघवँ उ ठ पु न ते ह मारा।।
पु न आयसु भु प हं बलवाना। जय त जय त जय कृ पा नधाना।।
नाक कान काटे िजयँ जानी। फरा

ोध क र भइ मन लानी।।

सहज भीम पु न बनु ु त नासा। दे खत क प दल उपजी ासा।।
दो0-जय जय जय रघु बंस म न धाए क प दै हू ह।
एक ह बार तासु पर छाड़ेि ह ग र त जू ह।।66।।
–*–*–
कंु भकरन रन रं ग ब ा। स मु ख चला काल जनु ु ा।।
को ट को ट क प ध र ध र खाई। जनु ट ड़ी ग र गु हाँ समाई।।
को ट ह ग ह सर र सन मदा। को ट ह मीिज मलव म ह गदा।।
मु ख नासा वनि ह क ं बाटा। नस र परा हं भालु क प ठाटा।।
रन मद म त नसाचर दपा। ब व

स ह जनु ए ह ब ध अपा।।

मु रे सु भट सब फर हं न फरे । सू झ न नयन सु न हं न हं टे रे।।
े
कंु भकरन क प फौज बडार । सु न धाई रजनीचर धार ।।
दे ख राम बकल कटकाई। रपु अनीक नाना ब ध आई।।
दो0-सु नु सु ीव बभीषन अनु ज सँभारे हु सैन।
म दे खउँ खल बल दल ह बोले रािजवनैन।।67।।
–*–*–
कर सारं ग सािज क ट भाथा। अ र दल दलन चले रघु नाथा।।
थम क ह भु धनु ष टँ कोरा। रपु दल ब धर भयउ सु न सोरा।।
स यसंध छाँड़े सर ल छा। कालसप जनु चले सप छा।।
जहँ तहँ चले बपु ल नाराचा। लगे कटन भट बकट पसाचा।।
कट हं चरन उर सर भु जदं डा। बहु तक बीर हो हं सत खंडा।।
घु म घु म घायल म ह परह ं। उ ठ संभा र सु भट पु न लरह ं।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

लागत बान जलद िज म गाजह ं। बहु तक दे खी क ठन सर भाज हं।।
ं ड चंड मु ंड बनु धाव हं। ध ध मा मा धु न गाव हं।।
दो0-छन महु ँ भु क सायकि ह काटे बकट पसाच।
े
पु न रघु बीर नषंग महु ँ बसे सब नाराच।।68।।
–*–*–
कंु भकरन मन द ख बचार । ह त धन माझ नसाचर धार ।।
भा अ त ु

महाबल बीरा। कयो मृगनायक नाद गँ भीरा।।

को प मह धर लेइ उपार । डारइ जहँ मकट भट भार ।।
आवत दे ख सैल भू भारे । सरि ह का ट रज सम क र डारे ।।।
पु न धनु ता न को प रघु नायक। छाँड़े अ त कराल बहु सायक।।
तनु महु ँ

ब स नस र सर जाह ं। िज म दा म न घन माझ समाह ं।।

सो नत

वत सोह तन कारे । जनु क जल ग र गे पनारे ।।

बकल बलो क भालु क प धाए। बहँ सा जब हं नकट क प आए।।
दो0-महानाद क र गजा को ट को ट ग ह क स।
म ह पटकइ गजराज इव सपथ करइ दससीस।।69।।
–*–*–
भागे भालु बल मु ख जू था। बृक बलो क िज म मेष ब था।।
ु
चले भा ग क प भालु भवानी। बकल पु कारत आरत बानी।।
यह न सचर दुकाल सम अहई। क पकल दे स परन अब चहई।।
ु
कृ पा बा रधर राम खरार । पा ह पा ह नतार त हार ।।
सक न बचन सु नत भगवाना। चले सु धा र सरासन बाना।।
राम सेन नज पाछ घाल । चले सकोप महा बलसाल ।।
ख च धनु ष सर सत संधाने। छ टे तीर सर र समाने।।
ू
लागत सर धावा रस भरा। कधर डगमगत डोल त धरा।।
ु
ल ह एक ते हं सैल उपाट । रघु क ल तलक भु जा सोइ काट ।।
ु
धावा बाम बाहु ग र धार । भु सोउ भु जा का ट म ह पार ।।
काट भु जा सोह खल कसा। प छह न मंदर ग र जैसा।।
ै
उ

बलोक न भु ह बलोका। सन चहत मानहु ँ लोका।।
े
दो0-क र च कार घोर अ त धावा बदनु पसा र।
गगन स सु र ा सत हा हा हे त पु का र।।70।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

–*–*–
सभय दे व क ना न ध जा यो। वन जंत सरासनु ता यो।।
ब सख नकर न सचर मु ख भरे ऊ। तद प महाबल भू म न परे ऊ।।
सरि ह भरा मु ख स मु ख धावा। काल ोन सजीव जनु आवा।।
तब भु को प ती सर ल हा। धर ते भ न तासु सर क हा।।
सो सर परे उ दसानन आग। बकल भयउ िज म फ न म न याग।।
धर न धसइ धर धाव चंडा। तब भु का ट क ह दुइ खंडा।।
परे भू म िज म नभ त भू धर। हे ठ दा ब क प भालु नसाचर।।
तासु तेज भु बदन समाना। सु र मु न सब हं अचंभव माना।।
सु र दुं दभीं बजाव हं हरष हं। अ तु त कर हं सु मन बहु बरष हं।।
ु
क र बनती सु र सकल सधाए। तेह समय दे व र ष आए।।
गगनोप र ह र गु न गन गाए।

चर बीररस भु मन भाए।।

बे ग हतहु खल क ह मु न गए। राम समर म ह सोभत भए।।
छं 0-सं ाम भू म बराज रघु प त अतु ल बल कोसल धनी।
म बंद ु मु ख राजीव लोचन अ न तन सो नत कनी।।
भु ज जु गल फरत सर सरासन भालु क प चहु द स बने।
े
कह दास तु लसी क ह न सक छ ब सेष जे ह आनन घने।।
दो0- न सचर अधम मलाकर ता ह द ह नज धाम।
ग रजा ते नर मंदम त जे न भज हं ीराम।।71।।
–*–*–
दन क अंत फर ं दोउ अनी। समर भई सु भट ह म घनी।।
राम कृ पाँ क प दल बल बाढ़ा। िज म तृन पाइ लाग अ त डाढ़ा।।
छ ज हं न सचर दनु अ राती। नज मु ख कह सु कृ त जे ह भाँती।।
बहु बलाप दसकधर करई। बंधु सीस पु न पु न उर धरई।।
ं
रोव हं ना र दय ह त पानी। तासु तेज बल बपु ल बखानी।।
मेघनाद ते ह अवसर आयउ। क ह बहु कथा पता समु झायउ।।
दे खेहु का ल मो र मनु साई। अब हं बहु त का कर बड़ाई।।
इ टदे व स बल रथ पायउँ । सो बल तात न तो ह दे खायउँ ।।
ए ह ब ध ज पत भयउ बहाना। चहु ँ दुआर लागे क प नाना।।
इत क प भालु काल सम बीरा। उत रजनीचर अ त रनधीरा।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

लर हं सु भट नज नज जय हे तू । बर न न जाइ समर खगकतू ।।
े
दो0-मेघनाद मायामय रथ च ढ़ गयउ अकास।।
गजउ अ हास क र भइ क प कटक ह ास।।72।।
–*–*–
सि त सू ल तरवा र कृ पाना। अ स क लसायु ध नाना।।
ु
डारह परसु प रघ पाषाना। लागेउ बृि ट करै बहु बाना।।
दस द स रहे बान नभ छाई। मानहु ँ मघा मेघ झ र लाई।।
ध ध मा सु नअ धु न काना। जो मारइ ते ह कोउ न जाना।।
ग ह ग र त अकास क प धाव हं। दे ख ह ते ह न दु खत फ र आव हं।।
अवघट घाट बाट ग र कदर। माया बल क हे स सर पंजर।।
ं
जा हं कहाँ याक ल भए बंदर। सु रप त बं द परे जनु मंदर।।
ु
मा तसु त अंगद नल नीला। क हे स बकल सकल बलसीला।।
पु न ल छमन सु ीव बभीषन। सरि ह मा र क हे स जजर तन।।
पु न रघु प त स जू झे लागा। सर छाँड़इ होइ लाग हं नागा।।
याल पास बस भए खरार । वबस अनंत एक अ बकार ।।
नट इव कपट च रत कर नाना। सदा वतं एक भगवाना।।
रन सोभा ल ग भु हं बँधायो। नागपास दे व ह भय पायो।।
दो0- ग रजा जासु नाम ज प मु न काट हं भव पास।
सो क बंध तर आवइ यापक ब व नवास।।73।।
–*–*–
च रत राम क सगु न भवानी। त क न जा हं बु बल बानी।।
े
अस बचा र जे त य बरागी। राम ह भज हं तक सब यागी।।
याक ल कटक क ह घननादा। पु न भा गट कहइ दुबादा।।
ु
ु
जामवंत कह खल रहु ठाढ़ा। सु न क र ता ह

ोध अ त बाढ़ा।।

बू ढ़ जा न सठ छाँड़उँ तोह । लागे स अधम पचारै मोह ।।
े
अस क ह तरल

सू ल चलायो। जामवंत कर ग ह सोइ धायो।।

मा र स मेघनाद क छाती। परा भू म घु मत सु रघाती।।
ै
पु न रसान ग ह चरन फरायौ। म ह पछा र नज बल दे खरायो।।
बर साद सो मरइ न मारा। तब ग ह पद लंका पर डारा।।
इहाँ दे व र ष ग ड़ पठायो। राम समीप सप द सो आयो।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

दो0-खगप त सब ध र खाए माया नाग ब थ।
माया बगत भए सब हरषे बानर जू थ। 74(क)।।
ग ह ग र पादप उपल नख धाए क स रसाइ।
चले तमीचर बकलतर गढ़ पर चढ़े पराइ।।74(ख)।।
–*–*–
मेघनाद क मु रछा जागी। पत ह बलो क लाज अ त लागी।।
े
तु रत गयउ ग रबर कदरा। कर अजय मख अस मन धरा।।
ं
इहाँ बभीषन मं

बचारा। सु नहु नाथ बल अतु ल उदारा।।

मेघनाद मख करइ अपावन। खल मायावी दे व सतावन।।
ज

भु स होइ सो पाइ ह। नाथ बे ग पु न जी त न जाइ ह।।

सु न रघु प त अ तसय सु ख माना। बोले अंगदा द क प नाना।।
ल छमन संग जाहु सब भाई। करहु बधंस ज य कर जाई।।
तु ह ल छमन मारे हु रन ओह । दे ख सभय सु र दुख अ त मोह ।।
मारे हु ते ह बल बु

उपाई। जे हं छ जै न सचर सु नु भाई।।

जामवंत सु ीव बभीषन। सेन समेत रहे हु ती नउ जन।।
जब रघु बीर द ि ह अनु सासन। क ट नषंग क स सािज सरासन।।
भु ताप उर ध र रनधीरा। बोले घन इव गरा गँभीरा।।
ज ते ह आजु बध बनु आव । तौ रघु प त सेवक न कहाव ।।
ज सत संकर कर हं सहाई। तद प हतउँ रघु बीर दोहाई।।
दो0-रघु प त चरन नाइ स चलेउ तु रंत अनंत।
अंगद नील मयंद नल संग सु भट हनु मंत।।75।।
–*–*–
जाइ क प ह सो दे खा बैसा। आहु त दे त धर अ भसा।।
क ह क प ह सब ज य बधंसा। जब न उठइ तब कर हं संसा।।
तद प न उठइ धरे ि ह कच जाई। लाति ह ह त ह त चले पराई।।
लै

सु ल धावा क प भागे। आए जहँ रामानु ज आगे।।

आवा परम

ोध कर मारा। गज घोर रव बार हं बारा।।

को प म तसु त अंगद धाए। ह त

सू ल उर धर न गराए।।

भु कहँ छाँड़े स सू ल चंडा। सर ह त कृ त अनंत जु ग खंडा।।
उ ठ बहो र मा त जु बराजा। हत हं को प ते ह घाउ न बाजा।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

फरे बीर रपु मरइ न मारा। तब धावा क र घोर चकारा।।
आवत दे ख ु

जनु काला। ल छमन छाड़े ब सख कराला।।

दे खे स आवत प ब सम बाना। तु रत भयउ खल अंतरधाना।।
ब बध बेष ध र करइ लराई। कबहु ँ क गट कबहु ँ दु र जाई।।
दे ख अजय रपु डरपे क सा। परम ु
ल छमन मन अस मं

तब भयउ अह सा।।

ढ़ावा। ए ह पा प ह म बहु त खेलावा।।

सु म र कोसलाधीस तापा। सर संधान क ह क र दापा।।
छाड़ा बान माझ उर लागा। मरती बार कपटु सब यागा।।
दो0-रामानु ज कहँ रामु कहँ अस क ह छाँड़े स ान।
ध य ध य तव जननी कह अंगद हनु मान।।76।।
–*–*–
बनु यास हनु मान उठायो। लंका वार रा ख पु न आयो।।
तासु मरन सु न सु र गंधबा। च ढ़ बमान आए नभ सबा।।
बर ष सु मन दुं दभीं बजाव हं। ीरघु नाथ बमल जसु गाव हं।।
ु
जय अनंत जय जगदाधारा। तु ह भु सब दे वि ह न तारा।।
अ तु त क र सु र स

सधाए। ल छमन कृ पा स धु प हं आए।।

सु त बध सु ना दसानन जबह ं। मु छत भयउ परे उ म ह तबह ं।।
मंदोदर

दन कर भार । उर ताड़न बहु भाँ त पु कार ।।

नगर लोग सब याकल सोचा। सकल कह हं दसकधर पोचा।।
ु
ं
दो0-तब दसकठ ब बध ब ध समु झा सब ना र।
ं
न वर प जगत सब दे खहु दयँ बचा र।।77।।
–*–*–
त ह ह यान उपदे सा रावन। आपु न मंद कथा सु भ पावन।।
पर उपदे स कसल बहु तेरे। जे आचर हं ते नर न घनेरे।।
ु
नसा सरा न भयउ भनु सारा। लगे भालु क प चा रहु ँ वारा।।
सु भट बोलाइ दसानन बोला। रन स मु ख जा कर मन डोला।।
सो अबह ं ब जाउ पराई। संजु ग बमु ख भएँ न भलाई।।
नज भु ज बल म बय बढ़ावा। दे हउँ उत जो रपु च ढ़ आवा।।
अस क ह म त बेग रथ साजा। बाजे सकल जु झाऊ बाजा।।
चले बीर सब अतु लत बल । जनु क जल क आँधी चल ।।
ै
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

असगु न अ मत हो हं ते ह काला। गनइ न भु जबल गब बसाला।।
छं 0-अ त गब गनइ न सगु न असगु न

व हं आयु ध हाथ ते।

भट गरत रथ ते बािज गज च करत भाज हं साथ ते।।
गोमाय गीध कराल खर रव वान बोल हं अ त घने।
जनु कालदूत उलू क बोल हं बचन परम भयावने।।
दो0-ता ह क संप त सगु न सु भ सपनेहु ँ मन ब ाम।
भू त ोह रत मोहबस राम बमु ख र त काम।।78।।
–*–*–
चलेउ नसाचर कटक अपारा। चतु रं गनी अनी बहु धारा।।
ु
ब बध भाँ त बाहन रथ जाना। बपु ल बरन पताक वज नाना।।
चले म त गज जू थ घनेरे। ा बट जलद म त जनु ेरे।।
बरन बरद बरदै त नकाया। समर सू र जान हं बहु माया।।
अ त ब च बा हनी बराजी। बीर बसंत सेन जनु साजी।।
चलत कटक दग सधु ंर डगह ं। छ भत पयो ध कधर डगमगह ं।।
ु
ु
उठ रे नु र ब गयउ छपाई। म त थ कत बसु धा अक लाई।।
ु
पनव नसान घोर रव बाज हं। लय समय क घन जनु गाज हं।।
े
भे र नफ र बाज सहनाई। मा राग सु भट सु खदाई।।
कह र नाद बीर सब करह ं। नज नज बल पौ ष उ चरह ं।।
े
कहइ दसानन सु नहु सु भ ा। मदहु भालु क प ह क ठ ा।।
े
ह मा रहउँ भू प वौ भाई। अस क ह स मु ख फौज रगाई।।
यह सु ध सकल क प ह जब पाई। धाए क र रघु बीर दोहाई।।
छं 0-धाए बसाल कराल मकट भालु काल समान ते।
मानहु ँ सप छ उड़ा हं भू धर बृंद नाना बान ते।।
नख दसन सैल महा मायु ध सबल संक न मानह ं।
ु
जय राम रावन म त गज मृगराज सु जसु बखानह ं।।

दो0-दुहु द स जय जयकार क र नज नज जोर जा न।
भरे बीर इत राम ह उत रावन ह बखा न।।79।।
–*–*–
रावनु रथी बरथ रघु बीरा। दे ख बभीषन भयउ अधीरा।।
अ धक ी त मन भा संदेहा। बं द चरन कह स हत सनेहा।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

नाथ न रथ न हं तन पद ाना। क ह ब ध िजतब बीर बलवाना।।
े
सुनहु सखा कह कृ पा नधाना। जे हं जय होइ सो यंदन आना।।
सौरज धीरज ते ह रथ चाका। स य सील ढ़ वजा पताका।।
बल बबेक दम पर हत घोरे । छमा कृ पा समता रजु जोरे ।।
ईस भजनु सारथी सु जाना। बर त चम संतोष कृ पाना।।
दान परसु बु ध सि त चंड़ा। बर ब यान क ठन कोदं डा।।
अमल अचल मन ोन समाना। सम जम नयम सल मु ख नाना।।
कवच अभेद ब गु र पू जा। ए ह सम बजय उपाय न दूजा।।
सखा धममय अस रथ जाक। जीतन कहँ न कतहु ँ रपु ताक।।
दो0-महा अजय संसार रपु जी त सकइ सो बीर।
जाक अस रथ होइ ढ़ सु नहु सखा म तधीर।।80(क)।।
सु न भु बचन बभीषन हर ष गहे पद कज।
ं
ए ह मस मो ह उपदे सेहु राम कृ पा सु ख पु ंज।।80(ख)।।
उत पचार दसकधर इत अंगद हनु मान।
ं
लरत नसाचर भालु क प क र नज नज भु आन।।80(ग)।।
–*–*–
सु र मा द स मु न नाना। दे खत रन नभ चढ़े बमाना।।
हमहू उमा रहे ते ह संगा। दे खत राम च रत रन रं गा।।
सु भट समर रस दुहु द स माते। क प जयसील राम बल ताते।।
एक एक सन भर हं पचार हं। एक ह एक म द म ह पार हं।।
मार हं काट हं धर हं पछार हं। सीस तो र सीस ह सन मार हं।।
उदर बदार हं भु जा उपार हं। ग ह पद अव न पट क भट डार हं।।
न सचर भट म ह गाड़ ह भालू । ऊपर ढा र दे हं बहु बालू ।।
बीर ब लमु ख जु

ब

े। दे खअत बपु ल काल जनु ु े।।

छं 0- ु े कृ तांत समान क प तन

वत सो नत राजह ं।

मद हं नसाचर कटक भट बलवंत घन िज म गाजह ं।।
मार हं चपेटि ह डा ट दात ह का ट लात ह मीजह ं।

च कर हं मकट भालु छल बल कर हं जे हं खल छ जह ं।।
ध र गाल फार हं उर बदार हं गल अँताव र मेलह ं।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

हलादप त जनु ब बध तनु ध र समर अंगन खेलह ं।।
ध मा काटु पछा घोर गरा गगन म ह भ र रह ।
जय राम जो तृन ते क लस कर क लस ते कर तृन सह ।।
ु
ु
दो0- नज दल बचलत दे खे स बीस भु जाँ दस चाप।
रथ च ढ़ चलेउ दसानन फरहु फरहु क र दाप।।81।।
–*–*–
धायउ परम ु दसकधर। स मु ख चले हू ह दै बंदर।।
ं
ग ह कर पादप उपल पहारा। डारे ि ह ता पर एक हं बारा।।
लाग हं सैल ब

तन तासू । खंड खंड होइ फट हं आसू ।।
ू

चला न अचल रहा रथ रोपी। रन दुमद रावन अ त कोपी।।
इत उत झप ट दप ट क प जोधा। मद लाग भयउ अ त

ोधा।।

चले पराइ भालु क प नाना। ा ह ा ह अंगद हनु माना।।
पा ह पा ह रघु बीर गोसाई। यह खल खाइ काल क नाई।।
ते ह दे खे क प सकल पराने। दसहु ँ चाप सायक संधाने।।
छं 0-संधा न धनु सर नकर छाड़े स उरग िज म उ ड़ लागह ं।
रहे पू र सर धरनी गगन द स बद स कहँ क प भागह ं।।
भयो अ त कोलाहल बकल क प दल भालु बोल हं आतु रे।
रघु बीर क ना संधु आरत बंधु जन र छक हरे ।।
दो0- नज दल बकल दे ख क ट क स नषंग धनु हाथ।
ल छमन चले ु

होइ नाइ राम पद माथ।।82।।
–*–*–
रे खल का मार स क प भालू । मो ह बलोक तोर म कालू ।।
ु
खोजत रहे उँ तो ह सु तघाती। आजु नपा त जु ड़ावउँ छाती।।
अस क ह छाड़े स बान चंडा। ल छमन कए सकल सत खंडा।।
को ट ह आयु ध रावन डारे । तल वान क र का ट नवारे ।।
पु न नज बान ह क ह हारा। यंदनु भंिज सारथी मारा।।
सत सत सर मारे दस भाला। ग र सृंगन ह जनु
्

बस हं याला।।

पु न सत सर मारा उर माह ं। परे उ धर न तल सु ध कछ नाह ं।।
ु
उठा बल पु न मु छा जागी। छा ड़ स
छं 0-सो

म द ि ह जो साँगी।।

म द त चंड सि त अनंत उर लागी सह ।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

पय बीर बकल उठाव दसमु ख अतु ल बल म हमा रह ।।
मांड भवन बराज जाक एक सर िज म रज कनी।
ते ह चह उठावन मू ढ़ रावन जान न हं

भु अन धनी।।

दो0-दे ख पवनसु त धायउ बोलत बचन कठोर।
आवत क प ह ह यो ते हं मु ि ट हार घोर।।83।।
–*–*–
जानु टे क क प भू म न गरा। उठा सँभा र बहु त रस भरा।।
मु ठका एक ता ह क प मारा। परे उ सैल जनु ब

हारा।।

मु छा गै बहो र सो जागा। क प बल बपु ल सराहन लागा।।
धग धग मम पौ ष धग मोह । ज त िजअत रहे स सु र ोह ।।
अस क ह ल छमन कहु ँ क प यायो। दे ख दसानन बसमय पायो।।
कह रघु बीर समु झु िजयँ ाता। तु ह कृ तांत भ छक सु र ाता।।
सु नत बचन उ ठ बैठ कृ पाला। गई गगन सो सक त कराला।।
पु न कोदं ड बान ग ह धाए। रपु स मु ख अ त आतु र आए।।
छं 0-आतु र बहो र बभंिज यंदन सू त ह त याकल कयो।
ु
गर् यो धर न दसकधर बकलतर बान सत बे यो हयो।।
ं
सारथी दूसर घा ल रथ ते ह तु रत लंका लै गयो।
रघु बीर बंधु ताप पु ंज बहो र भु चरनि ह नयो।।
दो0-उहाँ दसानन जा ग क र करै लाग कछ ज य।
ु
राम बरोध बजय चह सठ हठ बस अ त अ य।।84।।
–*–*–
इहाँ बभीषन सब सु ध पाई। सप द जाइ रघु प त ह सु नाई।।
नाथ करइ रावन एक जागा। स भएँ न हं म र ह अभागा।।
पठवहु नाथ बे ग भट बंदर। कर हं बधंस आव दसकधर।।
ं
ात होत भु सु भट पठाए। हनु मदा द अंगद सब धाए।।
कौतु क क द चढ़े क प लंका। पैठे रावन भवन असंका।।
ू
ज य करत जबह ं सो दे खा। सकल क प ह भा

ोध बसेषा।।

रन ते नलज भािज गृह आवा। इहाँ आइ बक यान लगावा।।
अस क ह अंगद मारा लाता। चतव न सठ वारथ मन राता।।
छं 0-न हं चतव जब क र कोप क प ग ह दसन लात ह मारह ं।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

ध र कस ना र नका र बाहे र तेऽ तद न पु कारह ं।।
े
तब उठे उ ु

कृ तांत सम ग ह चरन बानर डारई।

ए ह बीच क प ह बधंस कृ त मख दे ख मन महु ँ हारई।।
दो0-ज य बधं स कसल क प आए रघु प त पास।
ु
चलेउ नसाचर ु

होइ या ग िजवन क आस।।85।।
ै
–*–*–
चलत हो हं अ त असु भ भयंकर। बैठ हं गीध उड़ाइ सर ह पर।।
भयउ कालबस काहु न माना। कहे स बजावहु जु

नसाना।।

चल तमीचर अनी अपारा। बहु गज रथ पदा त असवारा।।
भु स मु ख धाए खल कस। सलभ समू ह अनल कहँ जस।।
इहाँ दे वत ह अ तु त क ह । दा न बप त हम ह ए हं द ह ।।
अब ज न राम खेलावहु एह । अ तसय दु खत हो त बैदेह ।।
दे व बचन सु न भु मु सकाना। उ ठ रघु बीर सु धारे बाना।
जटा जू ट ढ़ बाँधै माथे। सोह हं सु मन बीच बच गाथे।।
अ न नयन बा रद तनु यामा। अ खल लोक लोचना भरामा।।
क टतट प रकर क यो नषंगा। कर कोदं ड क ठन सारं गा।।
छं 0-सारं ग कर सु ंदर नषंग सल मु खाकर क ट क यो।
भु जदं ड पीन मनोहरायत उर धरासु र पद ल यो।।
कह दास तु लसी जब हं भु सर चाप कर फरन लगे।
े
मांड द गज कमठ अ ह म ह संधु भू धर डगमगे।।
दो0-सोभा दे ख हर ष सु र बरष हं सु मन अपार।
जय जय जय क ना न ध छ ब बल गु न आगार।।86।।
–*–*–
एह ं बीच नसाचर अनी। कसमसात आई अ त घनी।
दे ख चले स मु ख क प भ ा। लयकाल क जनु घन घ ा।।
े
बहु कृ पान तरवा र चमंक हं। जनु दहँ द स दा मनीं दमंक हं।।
गज रथ तु रग चकार कठोरा। गज हं मनहु ँ बलाहक घोरा।।
क प लंगू र बपु ल नभ छाए। मनहु ँ इं धनु उए सु हाए।।
उठइ धू र मानहु ँ जलधारा। बान बु ंद भै बृि ट अपारा।।
दुहु ँ द स पबत कर हं हारा। ब पात जनु बार हं बारा।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

रघु प त को प बान झ र लाई। घायल भै न सचर समु दाई।।
लागत बान बीर च करह ं। घु म घु म जहँ तहँ म ह परह ं।।
व हं सैल जनु नझर भार । सो नत स र कादर भयकार ।।
छं 0-कादर भयंकर

धर स रता चल परम अपावनी।

दोउ कल दल रथ रे त च
ू

अबत बह त भयावनी।।

जल जंतु गज पदचर तु रग खर ब बध बाहन को गने।
सर सि त तोमर सप चाप तरं ग चम कमठ घने।।
दो0-बीर पर हं जनु तीर त म जा बहु बह फन।
े
कादर दे ख डर हं तहँ सु भट ह क मन चेन।।87।।
े
–*–*–
म ज ह भू त पसाच बेताला। मथ महा झो टंग कराला।।
काक कक लै भु जा उड़ाह ं। एक ते छ न एक लै खाह ं।।
ं
एक कह हं ऐ सउ स घाई। सठहु तु हार द र न जाई।।
कहँ रत भट घायल तट गरे । जहँ तहँ मनहु ँ अधजल परे ।।
खच हं गीध आँत तट भए। जनु बंसी खेलत चत दए।।
बहु भट बह हं चढ़े खग जाह ं। जनु नाव र खेल हं स र माह ं।।
जो ग न भ र भ र ख पर संच हं। भू त पसाच बधू नभ नंच हं।।
भट कपाल करताल बजाव हं। चामु ंडा नाना ब ध गाव हं।।
जंबु क नकर कट कट क हं। खा हं हु आ हं अघा हं दप हं।।
को ट ह ं ड मु ंड बनु डो ल हं। सीस परे म ह जय जय बो ल हं।।
छं 0-बो ल हं जो जय जय मु ंड ं ड चंड सर बनु धावह ं।
ख प र ह ख ग अलु ि झ जु झ हं सु भट भट ह ढहावह ं।।
बानर नसाचर नकर मद हं राम बल द पत भए।
सं ाम अंगन सु भट सोव हं राम सर नकरि ह हए।।
दो0-रावन दयँ बचारा भा न सचर संघार।

म अकल क प भालु बहु माया कर अपार।।88।।
े
–*–*–
दे व ह भु ह पयाद दे खा। उपजा उर अ त छोभ बसेषा।।
सु रप त नज रथ तु रत पठावा। हरष स हत मात ल लै आवा।।
तेज पु ंज रथ द य अनू पा। हर ष चढ़े कोसलपु र भू पा।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

चंचल तु रग मनोहर चार । अजर अमर मन सम ग तकार ।।
रथा ढ़ रघु नाथ ह दे खी। धाए क प बलु पाइ बसेषी।।
सह न जाइ क प ह क मार । तब रावन माया ब तार ।।
ै
सो माया रघु बीर ह बाँची। ल छमन क प ह सो मानी साँची।।
दे खी क प ह नसाचर अनी। अनु ज स हत बहु कोसलधनी।।
छं 0-बहु राम ल छमन दे ख मकट भालु मन अ त अपडरे ।
जनु च

ल खत समेत ल छमन जहँ सो तहँ चतव हं खरे ।।

नज सेन च कत बलो क हँ स सर चाप सिज कोसल धनी।
माया हर ह र न मष महु ँ हरषी सकल मकट अनी।।
दो0-बहु र राम सब तन चतइ बोले बचन गँ भीर।
वंदजु दे खहु सकल

मत भए अ त बीर।।89।।
–*–*–
अस क ह रथ रघु नाथ चलावा। ब चरन पंकज स नावा।।
तब लंकस
े

ोध उर छावा। गजत तजत स मु ख धावा।।

जीतेहु जे भट संजु ग माह ं। सु नु तापस म त ह सम नाह ं।।
रावन नाम जगत जस जाना। लोकप जाक बंद खाना।।
खर दूषन बराध तु ह मारा। बधेहु याध इव बा ल बचारा।।
न सचर नकर सु भट संघारे हु । कंु भकरन घननाद ह मारे हु ।।
आजु बय सबु लेउँ नबाह । ज रन भू प भािज न हं जाह ं।।
आजु करउँ खलु काल हवाले। परे हु क ठन रावन क पाले।।
े
सु न दुबचन कालबस जाना। बहँ स बचन कह कृ पा नधाना।।
स य स य सब तव भु ताई। ज प स ज न दे खाउ मनु साई।।
छं 0-ज न ज पना क र सु जसु नास ह नी त सु न ह कर ह छमा।
संसार महँ पू ष

बध पाटल रसाल पनस समा।।

एक सु मन द एक सु मन फल एक फलइ कवल लागह ं।
े

एक कह हं कह हं कर हं अपर एक कर हं कहत न बागह ं।।
दो0-राम बचन सु न बहँ सा मो ह सखावत यान।
बय करत न हं तब डरे अब लागे य ान।।90।।
–*–*–
क ह दुबचन ु दसकधर। क लस समान लाग छाँड़ै सर।।
ं
ु
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

नानाकार सल मु ख धाए। द स अ

ब दस गगन म ह छाए।।

पावक सर छाँड़उ रघु बीरा। छन महु ँ जरे नसाचर तीरा।।
े
छा ड़ स ती सि त ख सआई। बान संग भु फ र चलाई।।
े
को टक च

सू ल पबारै । बनु यास भु का ट नवारै ।।

नफल हो हं रावन सर कस। खल क सकल मनोरथ जैस।।
ै
े
तब सत बान सारथी मारे स। परे उ भू म जय राम पु कारे स।।
राम कृ पा क र सू त उठावा। तब भु परम
छं 0-भए ु

जु

ब

ोध कहु ँ पावा।।

रघु प त ोन सायक कसमसे।

कोदं ड धु न अ त चंड सु न मनु जाद सब मा त से।।
मँदोदर उर कप कप त कमठ भू भू धर से।
ं
ं
च कर हं द गज दसन ग ह म ह दे ख कौतु क सु र हँ से।।
दो0-तानेउ चाप वन ल ग छाँड़े ब सख कराल।
राम मारगन गन चले लहलहात जनु याल।।91।।
–*–*–
चले बान सपच ्छ जनु उरगा। थम हं हतेउ सारथी तु रगा।।
रथ बभंिज ह त कतु पताका। गजा अ त अंतर बल थाका।।
े
तु रत आन रथ च ढ़ ख सआना। अ

स

छाँड़े स ब ध नाना।।

बफल हो हं सब उ यम ताक। िज म पर ोह नरत मनसा क।।
े
े
तब रावन दस सू ल चलावा। बािज चा र म ह मा र गरावा।।
तु रग उठाइ को प रघु नायक। ख च सरासन छाँड़े सायक।।
रावन सर सरोज बनचार । च ल रघु बीर सल मु ख धार ।।
दस दस बान भाल दस मारे । नस र गए चले
वत

धर पनारे ।।

धर धायउ बलवाना। भु पु न कृ त धनु सर संधाना।।

तीस तीर रघु बीर पबारे । भु जि ह समेत सीस म ह पारे ।।
काटतह ं पु न भए नबीने। राम बहो र भु जा सर छ ने।।

भु बहु बार बाहु सर हए। कटत झ ट त पु न नू तन भए।।

पु न पु न भु काटत भु ज सीसा। अ त कौतु क कोसलाधीसा।।
रहे छाइ नभ सर अ बाहू । मानहु ँ अ मत कतु अ राहू ।।
े
छं 0-जनु राहु कतु अनेक नभ पथ
े

वत सो नत धावह ं।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

रघु बीर तीर चंड लाग हं भू म गरन न पावह ं।।
एक एक सर सर नकर छे दे नभ उड़त इ म सोहह ं।
जनु को प दनकर कर नकर जहँ तहँ बधु ंतु द पोहह ं।।
दो0-िज म िज म भु हर तासु सर त म त म हो हं अपार।
सेवत बषय बबध िज म नत नत नू तन मार।।92।।
–*–*–
दसमु ख दे ख सरन ्ह क बाढ़ । बसरा मरन भई रस गाढ़ ।।
ै
गजउ मू ढ़ महा अ भमानी। धायउ दसहु सरासन तानी।।
समर भू म दसकधर को यो। बर ष बान रघु प त रथ तो यो।।
ं
दं ड एक रथ दे ख न परे ऊ। जनु नहार महु ँ दनकर दुरेऊ।।
हाहाकार सु र ह जब क हा। तब भु को प कारमु क ल हा।।
सर नवा र रपु क सर काटे । ते द स ब दस गगन म ह पाटे ।।
े
काटे सर नभ मारग धाव हं। जय जय धु न क र भय उपजाव हं।।
कहँ ल छमन सु ीव कपीसा। कहँ रघु बीर कोसलाधीसा।।
छं 0-कहँ रामु क ह सर नकर धाए दे ख मकट भिज चले।
संधा न धनु रघु बंसम न हँ स सरि ह सर बेधे भले।।
सर मा लका कर का लका ग ह बृंद बृंदि ह बहु मल ं।
कर

धर स र म जनु मनहु ँ सं ाम बट पू जन चल ं।।
दो0-पु न दसकठ ु
ं

होइ छाँड़ी सि त चंड।

चल बभीषन स मु ख मनहु ँ काल कर दं ड।।93।।
–*–*–
आवत दे ख सि त अ त घोरा। नतार त भंजन पन मोरा।।
तु रत बभीषन पाछ मेला। स मु ख राम सहे उ सोइ सेला।।
ला ग सि त मु छा कछ भई। भु कृ त खेल सु र ह बकलई।।
ु
दे ख बभीषन भु म पायो। ग ह कर गदा ु

होइ धायो।।

रे कभा य सठ मंद कबु े। त सु र नर मु न नाग ब
ु
ु

े।।

सादर सव कहु ँ सीस चढ़ाए। एक एक क को ट ह पाए।।
े
ते ह कारन खल अब ल ग बाँ यो। अब तव कालु सीस पर ना यो।।
राम बमु ख सठ चह स संपदा। अस क ह हने स माझ उर गदा।।
छं 0-उर माझ गदा हार घोर कठोर लागत म ह पर् यो।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

दस बदन सो नत

वत पु न संभा र धायो रस भर् यो।।

वौ भरे अ तबल म लजु

ब

एक एक ह हनै।
ु

रघु बीर बल द पत बभीषनु घा ल न हं ता कहु ँ गनै।।
दो0-उमा बभीषनु रावन ह स मु ख चतव क काउ।
सो अब भरत काल य ीरघु बीर भाउ।।94।।
–*–*–
दे खा मत बभीषनु भार । धायउ हनू मान ग र धार ।।
रथ तु रंग सारथी नपाता। दय माझ ते ह मारे स लाता।।
ठाढ़ रहा अ त क पत गाता। गयउ बभीषनु जहँ जन ाता।।
ं
पु न रावन क प हतेउ पचार । चलेउ गगन क प पूँछ पसार ।।
ग ह स पूँछ क प स हत उड़ाना। पु न फ र भरे उ बल हनु माना।।
लरत अकास जु गल सम जोधा। एक ह एक हनत क र
ु

ोधा।।

सोह हं नभ छल बल बहु करह ं। क जल ग र सु मे जनु लरह ं।।
बु ध बल न सचर परइ न पार् यो। तब मा त सु त भु संभार् यो।।
छं 0-संभा र ीरघु बीर धीर पचा र क प रावनु ह यो।
म ह परत पु न उ ठ लरत दे व ह जु गल कहु ँ जय जय भ यो।।
हनु मंत संकट दे ख मकट भालु

ोधातु र चले।

रन म त रावन सकल सु भट चंड भु ज बल दलमले।।
दो0-तब रघु बीर पचारे धाए क स चंड।
क प बल बल दे ख ते हं क ह गट पाषंड।।95।।
–*–*–
अंतरधान भयउ छन एका। पु न गटे खल प अनेका।।
रघु प त कटक भालु क प जेते। जहँ तहँ गट दसानन तेते।।
दे खे क प ह अ मत दससीसा। जहँ तहँ भजे भालु अ क सा।।
भागे बानर धर हं न धीरा। ा ह ा ह ल छमन रघु बीरा।।
दहँ द स धाव हं को ट ह रावन। गज हं घोर कठोर भयावन।।
डरे सकल सु र चले पराई। जय क आस तजहु अब भाई।।
ै
सब सु र िजते एक दसकधर। अब बहु भए तकहु ग र कदर।।
ं
ं
रहे बरं च संभु मु न यानी। िज ह िज ह भु म हमा कछ जानी।।
ु
छं 0-जाना ताप ते रहे नभय क प ह रपु माने फरे ।
ु
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

चले बच ल मकट भालु सकल कृ पाल पा ह भयातु रे।।
हनु मंत अंगद नील नल अ तबल लरत रन बाँक रे ।
ु
मद हं दसानन को ट को ट ह कपट भू भट अंक रे ।।
ु
दो0-सु र बानर दे खे बकल हँ यो कोसलाधीस।
सिज सारं ग एक सर हते सकल दससीस।।96।।
–*–*–
भु छन महु ँ माया सब काट । िज म र ब उएँ जा हं तम फाट ।।
रावनु एक दे ख सु र हरषे। फरे सु मन बहु भु पर बरषे।।
ु
भु ज उठाइ रघु प त क प फरे । फरे एक एक ह तब टे रे।।
े
भु बलु पाइ भालु क प धाए। तरल तम क संजु ग म ह आए।।
अ तु त करत दे वति ह दे ख। भयउँ एक म इ ह क लेख।।
े
सठहु सदा तु ह मोर मरायल। अस क ह को प गगन पर धायल।।
हाहाकार करत सु र भागे। खलहु जाहु कहँ मोर आगे।।
दे ख बकल सु र अंगद धायो। क द चरन ग ह भू म गरायो।।
ू
छं 0-ग ह भू म पार् यो लात मार् यो बा लसु त भु प हं गयो।
संभा र उ ठ दसकठ घोर कठोर रव गजत भयो।।
ं
क र दाप चाप चढ़ाइ दस संधा न सर बहु बरषई।
कए सकल भट घायल भयाक ल दे ख नज बल हरषई।।
ु
दो0-तब रघु प त रावन क सीस भु जा सर चाप।
े
काटे बहु त बढ़े पु न िज म तीरथ कर पाप। 97।।
–*–*–
सर भु ज बा ढ़ दे ख रपु कर । भालु क प ह रस भई घनेर ।।
े
मरत न मू ढ़ कटे उ भु ज सीसा। धाए को प भालु भट क सा।।
बा लतनय मा त नल नीला। बानरराज दु बद बलसीला।।
बटप मह धर कर हं हारा। सोइ ग र त ग ह क प ह सो मारा।।
एक नखि ह रपु बपु ष बदार । भअ ग चल हं एक लात ह मार ।।
तब नल नील सरि ह च ढ़ गयऊ। नखि ह ललार बदारत भयऊ।।
धर दे ख बषाद उर भार । त ह ह धरन कहु ँ भु जा पसार ।।
गहे न जा हं करि ह पर फरह ं। जनु जु ग मधु प कमल बन चरह ं।।
को प क द वौ धरे स बहोर । म ह पटकत भजे भु जा मरोर ।।
ू
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

पु न सकोप दस धनु कर ल हे । सरि ह मा र घायल क प क हे ।।
हनु मदा द मु छत क र बंदर। पाइ दोष हरष दसकधर।।
ं
मु छत दे ख सकल क प बीरा। जामवंत धायउ रनधीरा।।
संग भालु भू धर त धार । मारन लगे पचा र पचार ।।
भयउ ु

रावन बलवाना। ग ह पद म ह पटकइ भट नाना।।

दे ख भालु प त नज दल घाता। को प माझ उर मारे स लाता।।
छं 0-उर लात घात चंड लागत बकल रथ ते म ह परा।
ग ह भालु बीसहु ँ कर मनहु ँ कमलि ह बसे न स मधु करा।।
मु छत बलो क बहो र पद ह त भालु प त भु प हं गयौ।
न स जा न यंदन घा ल ते ह तब सू त जतनु करत भयो।।
दो0-मु छा बगत भालु क प सब आए भु पास।
न सचर सकल रावन ह घे र रहे अ त ास।।98।।
मासपारायण, छ बीसवाँ व ाम
–*–*–
तेह न स सीता प हं जाई। जटा क ह सब कथा सु नाई।।
सर भु ज बा ढ़ सु नत रपु कर । सीता उर भइ ास घनेर ।।
े
मु ख मल न उपजी मन चंता।

जटा सन बोल तब सीता।।

होइ ह कहा कह स कन माता। क ह ब ध म र ह ब व दुखदाता।।
े
रघु प त सर सर कटे हु ँ न मरई। ब ध बपर त च रत सब करई।।
मोर अभा य िजआवत ओह । जे हं हौ ह र पद कमल बछोह ।।
जे हं कृ त कपट कनक मृग झू ठा। अजहु ँ सो दै व मो ह पर ठा।।
जे हं ब ध मो ह दुख दुसह सहाए। ल छमन कहु ँ कटु बचन कहाए।।
रघु प त बरह स बष सर भार । त क त क मार बार बहु मार ।।
ऐसेहु ँ दुख जो राख मम ाना। सोइ ब ध ता ह िजआव न आना।।
बहु ब ध कर बलाप जानक । क र क र सु र त कृ पा नधान क ।।
कह

जटा सु नु राजक मार । उर सर लागत मरइ सु रार ।।
ु

भु ताते उर हतइ न तेह । ए ह क दयँ बस त बैदेह ।।
े
छं 0-ए ह क दयँ बस जानक जानक उर मम बास है ।
े
मम उदर भु अन अनेक लागत बान सब कर नास है ।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

सु न बचन हरष बषाद मन अ त दे ख पु न

जटाँ कहा।

अब म र ह रपु ए ह ब ध सु न ह सु ंद र तज ह संसय महा।।
दो0-काटत सर होइ ह बकल छ ट जाइ ह तव यान।
ु
तब रावन ह दय महु ँ म रह हं रामु सु जान।।99।।
–*–*–
अस क ह बहु त भाँ त समु झाई। पु न जटा नज भवन सधाई।।
राम सु भाउ सु म र बैदेह । उपजी बरह बथा अ त तेह ।।
न स ह स स ह नंद त बहु भाँती। जु ग सम भई सरा त न राती।।
कर त बलाप मन हं मन भार । राम बरहँ जानक दुखार ।।
जब अ त भयउ बरह उर दाहू । फरकउ बाम नयन अ बाहू ।।
े
सगु न बचा र धर मन धीरा। अब म लह हं कृ पाल रघु बीरा।।
इहाँ अध न स रावनु जागा। नज सार थ सन खीझन लागा।।
सठ रनभू म छड़ाइ स मोह । धग धग अधम मंदम त तोह ।।
ते हं पद ग ह बहु ब ध समु झावा। भौ भएँ रथ च ढ़ पु न धावा।।
सु न आगवनु दसानन करा। क प दल खरभर भयउ घनेरा।।
े
जहँ तहँ भू धर बटप उपार । धाए कटकटाइ भट भार ।।
छं 0-धाए जो मकट बकट भालु कराल कर भू धर धरा।
अ त कोप कर हं हार मारत भिज चले रजनीचरा।।
बचलाइ दल बलवंत क स ह घे र पु न रावनु लयो।
चहु ँ द स चपेटि ह मा र नखि ह बदा र तनु याक ल कयो।।
ु
दो0-दे ख महा मकट बल रावन क ह बचार।
अंतर हत होइ न मष महु ँ कृ त माया ब तार।।100।।
–*–*–
छं 0-जब क ह ते हं पाषंड। भए गट जंतु चंड।।
बेताल भू त पसाच। कर धर धनु नाराच।।1।।
जो ग न गह करबाल। एक हाथ मनु ज कपाल।।
क र स य सो नत पान। नाच हं कर हं बहु गान।।2।।
ध मा बोल हं घोर। र ह पू र धु न चहु ँ ओर।।
मु ख बाइ धाव हं खान। तब लगे क स परान।।3।।
जहँ जा हं मकट भा ग। तहँ बरत दे ख हं आ ग।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

भए बकल बानर भालु । पु न लाग बरषै बालु ।।4।।
जहँ तहँ थ कत क र क स। गजउ बहु र दससीस।।
ल छमन कपीस समेत। भए सकल बीर अचेत।।5।।
हा राम हा रघु नाथ। क ह सु भट मीज हं हाथ।।
ए ह ब ध सकल बल तो र। ते हं क ह कपट बहो र।।6।।
गटे स बपु ल हनु मान। धाए गहे पाषान।।
त ह रामु घेरे जाइ। चहु ँ द स ब थ बनाइ।।7।।
मारहु धरहु ज न जाइ। कटकट हं पूँछ उठाइ।।
दहँ द स लँ गू र बराज। ते हं म य कोसलराज।।8।।
छं 0-ते हं म य कोसलराज सु ंदर याम तन सोभा लह ।
जनु इं धनु ष अनेक क बर बा र तु ंग तमालह ।।
भु दे ख हरष बषाद उर सु र बदत जय जय जय कर ।
रघु बीर एक ह तीर को प नमेष महु ँ माया हर ।।1।।
माया बगत क प भालु हरषे बटप ग र ग ह सब फरे ।
सर नकर छाड़े राम रावन बाहु सर पु न म ह गरे ।।
ीराम रावन समर च रत अनेक क प जो गावह ं।
सत सेष सारद नगम क ब तेउ तद प पार न पावह ं।।2।।
दो0-ताक गु न गन कछ कहे जड़म त तु लसीदास।
े
ु
िज म नज बल अनु प ते माछ उड़इ अकास।।101(क)।।
भु

काटे सर भु ज बार बहु मरत न भट लंकस।
े

ड़त सु र स मु न याक ल दे ख कलेस।।101(ख)।।
ु
–*–*–
काटत बढ़ हं सीस समु दाई। िज म त लाभ लोभ अ धकाई।।
मरइ न रपु म भयउ बसेषा। राम बभीषन तन तब दे खा।।
उमा काल मर जाक ं ईछा। सो भु जन कर ी त पर छा।।

सु नु सरब य चराचर नायक। नतपाल सु र मु न सु खदायक।।
ना भकंु ड पयू ष बस याक। नाथ िजअत रावनु बल ताक।।
सु नत बभीषन बचन कृ पाला। हर ष गहे कर बान कराला।।
असु भ होन लागे तब नाना। रोव हं खर सृकाल बहु वाना।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

बोल ह खग जग आर त हे तू । गट भए नभ जहँ तहँ कतू ।।
े
दस द स दाह होन अ त लागा। भयउ परब बनु र ब उपरागा।।
मंदोद र उर कप त भार ।
ं

तमा

व हं नयन मग बार ।।

छं 0- तमा द हं प बपात नभ अ त बात बह डोल त मह ।
बरष हं बलाहक

धर कच रज असु भ अ त सक को कह ।।

उतपात अ मत बलो क नभ सु र बकल बोल ह जय जए।
सु र सभय जा न कृ पाल रघु प त चाप सर जोरत भए।।
दो0-खै च सरासन वन ल ग छाड़े सर एकतीस।
रघु नायक सायक चले मानहु ँ काल फनीस।।102।।
–*–*–
सायक एक ना भ सर सोषा। अपर लगे भु ज सर क र रोषा।।
लै सर बाहु चले नाराचा। सर भु ज ह न ं ड म ह नाचा।।
धर न धसइ धर धाव चंडा। तब सर ह त भु कृ त दुइ खंडा।।
गजउ मरत घोर रव भार । कहाँ रामु रन हत पचार ।।
डोल भू म गरत दसकधर। छ भत संधु स र द गज भू धर।।
ं
ु
धर न परे उ वौ खंड बढ़ाई। चा प भालु मकट समु दाई।।
मंदोद र आग भु ज सीसा। ध र सर चले जहाँ जगद सा।।
बसे सब नषंग महु जाई। दे ख सु र ह दुं दभीं बजाई।।
ु
तासु तेज समान भु आनन। हरषे दे ख संभु चतु रानन।।
जय जय धु न पू र

मंडा। जय रघु बीर बल भु जदं डा।।

बरष ह सु मन दे व मु न बृंदा। जय कृ पाल जय जय त मु कंु दा।।
छं 0-जय कृ पा कद मु कद वंद हरन सरन सु ख द भो।
ं
ं
खल दल बदारन परम कारन का नीक सदा बभो।।
सु र सु मन बरष हं हरष संक ल बाज दुं द ु भ गहगह ।
ु
सं ाम अंगन राम अंग अनंग बहु सोभा लह ।।

सर जटा मु कट सू न बच बच अ त मनोहर राजह ं।
ु
जनु नील ग र पर त ड़त पटल समेत उड़ु गन ाजह ं।।
भु जदं ड सर कोदं ड फरत
े

धर कन तन अ त बने।

जनु रायमु नीं तमाल पर बैठ ं बपु ल सु ख आपने।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

दो0-कृ पा ि ट क र भु अभय कए सु र बृंद।
भालु क स सब हरषे जय सु ख धाम मु कद।।103।।
ं
–*–*–
प त सर दे खत मंदोदर । मु छत बकल धर न ख स पर ।।
जु ब त बृंद रोवत उ ठ धा । ते ह उठाइ रावन प हं आई।।
प त ग त दे ख ते कर हं पु कारा। छटे कच न हं बपु ष सँभारा।।
ू
उर ताड़ना कर हं ब ध नाना। रोवत कर हं ताप बखाना।।
तव बल नाथ डोल नत धरनी। तेज ह न पावक स स तरनी।।
सेष कमठ स ह सक हं न भारा। सो तनु भू म परे उ भ र छारा।।
ब न कबेर सु रेस समीरा। रन स मु ख ध र काहु ँ न धीरा।।
ु
भु जबल िजतेहु काल जम सा । आजु परे हु अनाथ क ना ।।
जगत ब दत तु हार

भु ताई। सु त प रजन बल बर न न जाई।।

राम बमु ख अस हाल तु हारा। रहा न कोउ कल रोव नहारा।।
ु
तव बस ब ध पंच सब नाथा। सभय द सप नत नाव हं माथा।।
अब तव सर भु ज जंबु क खाह ं। राम बमु ख यह अनु चत नाह ं।।
काल बबस प त कहा न माना। अग जग नाथु मनु ज क र जाना।।
छं 0-जा यो मनु ज क र दनु ज कानन दहन पावक ह र वयं।
जे ह नमत सव

मा द सु र पय भजेहु न हं क नामयं।।

आज म ते पर ोह रत पापौघमय तव तनु अयं।
तु हहू दयो नज धाम राम नमा म

म नरामयं।।

दो0-अहह नाथ रघु नाथ सम कृ पा संधु न हं आन।
जो ग बृंद दुलभ ग त तो ह द ि ह भगवान।।104।।
–*–*–
मंदोदर बचन सु न काना। सु र मु न स सबि ह सु ख माना।।
अज महे स नारद सनकाद । जे मु नबर परमारथबाद ।।
भ र लोचन रघु प त ह नहार । ेम मगन सब भए सु खार ।।
दन करत दे खीं सब नार । गयउ बभीषनु मन दुख भार ।।
बंधु दसा बलो क दुख क हा। तब भु अनु ज ह आयसु द हा।।
ल छमन ते ह बहु ब ध समु झायो। बहु र बभीषन भु प हं आयो।।
कृ पा ि ट भु ता ह बलोका। करहु

या प रह र सब सोका।।
भु

कि ह

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

या भु आयसु मानी। ब धवत दे स काल िजयँ जानी।।
दो0-मंदोदर आ द सब दे इ तलांज ल ता ह।

भवन गई रघु प त गु न गन बरनत मन मा ह।।105।।
–*–*–
आइ बभीषन पु न स नायो। कृ पा संधु तब अनु ज बोलायो।।
तु ह कपीस अंगद नल नीला। जामवंत मा त नयसीला।।
सब म ल जाहु बभीषन साथा। सारे हु तलक कहे उ रघु नाथा।।
पता बचन म नगर न आवउँ । आपु स रस क प अनु ज पठावउँ ।।
तु रत चले क प सु न भु बचना। क ह जाइ तलक क रचना।।
सादर संहासन बैठार । तलक सा र अ तु त अनु सार ।।
जो र पा न सबह ं सर नाए। स हत बभीषन भु प हं आए।।
तब रघु बीर बो ल क प ल हे । क ह

य बचन सु खी सब क हे ।।

छं 0- कए सु खी क ह बानी सु धा सम बल तु हार रपु हयो।
पायो बभीषन राज तहु ँ पु र जसु तु हारो नत नयो।।
मो ह स हत सु भ क र त तु हार परम ी त जो गाइह।
संसार संधु अपार पार यास बनु नर पाइह।।
दो0- भु क बचन वन सु न न हं अघा हं क प पु ंज।
े
बार बार सर नाव हं गह हं सकल पद कज।।106।।
ं
–*–*–
पु न भु बो ल लयउ हनु माना। लंका जाहु कहे उ भगवाना।।
समाचार जान क ह सु नावहु। तासु कसल लै तु ह च ल आवहु ।।
ु
तब हनु मंत नगर महु ँ आए। सु न न सचर नसाचर धाए।।
बहु कार त ह पू जा क ह । जनकसु ता दे खाइ पु न द ह ।।
दूर ह ते नाम क प क हा। रघु प त दूत जानक ं ची हा।।
कहहु तात भु कृ पा नकता। कसल अनु ज क प सेन समेता।।
े
ु
सब ब ध कसल कोसलाधीसा। मातु समर जी यो दससीसा।।
ु
अ बचल राजु बभीषन पायो। सु न क प बचन हरष उर छायो।।
छं 0-अ त हरष मन तन पु लक लोचन सजल कह पु न पु न रमा।
का दे उँ तो ह लोक महु ँ क प कम प न हं बानी समा।।
े
सु नु मातु म पायो अ खल जग राजु आजु न संसयं।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

रन जी त रपु दल बंधु जु त प या म राममनामयं।।
दो0-सु नु सु त सदगु न सकल तव दयँ बसहु ँ हनु मंत।
सानु क ल कोसलप त रहहु ँ समेत अनंत।।107।।
ू
–*–*–
अब सोइ जतन करहु तु ह ताता। दे ख नयन याम मृदु गाता।।
तब हनु मान राम प हं जाई। जनकसु ता क कसल सु नाई।।
ै ु
सु न संदेसु भानु क लभू षन। बो ल लए जु बराज बभीषन।।
ु
मा तसु त क संग सधावहु । सादर जनकसु त ह लै आवहु ।।
े
तु रत हं सकल गए जहँ सीता। सेव हं सब न सचर ं बनीता।।
बे ग बभीषन त ह ह सखायो। त ह बहु ब ध म जन करवायो।।
बहु कार भू षन प हराए। स बका

चर सािज पु न याए।।

ता पर हर ष चढ़ बैदेह । सु म र राम सु खधाम सनेह ।।
बेतपा न र छक चहु ँ पासा। चले सकल मन परम हु लासा।।
दे खन भालु क स सब आए। र छक को प नवारन धाए।।
कह रघु बीर कहा मम मानहु । सीत ह सखा पयाद आनहु ।।
दे खहु ँ क प जननी क ना । बह स कहा रघु नाथ गोसाई।।
सु न भु बचन भालु क प हरषे। नभ ते सु रनह सु मन बहु बरषे।।
्
सीता थम अनल महु ँ राखी। गट क ि ह चह अंतर साखी।।
दो0-ते ह कारन क ना न ध कहे कछ क दुबाद।
ु
सु नत जातु धानीं सब लागीं करै बषाद।।108।।
–*–*–
भु क बचन सीस ध र सीता। बोल मन म बचन पु नीता।।
े
ल छमन होहु धरम क नेगी। पावक गट करहु तु ह बेगी।।
े
सु न ल छमन सीता क बानी। बरह बबेक धरम न त सानी।।
ै
लोचन सजल जो र कर दोऊ। भु सन कछ क ह सकत न ओऊ।।
ु
दे ख राम ख ल छमन धाए। पावक ग ट काठ बहु लाए।।
पावक बल दे ख बैदेह । दयँ हरष न हं भय कछ तेह ।।
ु
ज मन बच

म मम उर माह ं। तिज रघु बीर आन ग त नाह ं।।

तौ कृ सानु सब क ग त जाना। मो कहु ँ होउ ीखंड समाना।।
ै
छं 0- ीखंड सम पावक बेस कयो सु म र भु मै थल ।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

जय कोसलेस महे स बं दत चरन र त अ त नमल ।।
त बंब अ लौ कक कलंक चंड पावक महु ँ जरे ।
भु च रत काहु ँ न लखे नभ सु र स मु न दे ख हं खरे ।।1।।
ध र प पावक पा न ग ह ी स य ु त जग ब दत जो।
िज म छ रसागर इं दरा राम ह समप आ न सो।।
सो राम बाम बभाग राज त

चर अ त सोभा भल ।

नव नील नीरज नकट मानहु ँ कनक पंकज क कल ।।2।।
दो0-बरष हं सु मन हर ष सु न बाज हं गगन नसान।
गाव हं कं नर सु रबधू नाच हं चढ़ ं बमान।।109(क)।।
जनकसु ता समेत भु सोभा अ मत अपार।
दे ख भालु क प हरषे जय रघु प त सु ख सार।।109(ख)।।
–*–*–
तब रघु प त अनु सासन पाई। मात ल चलेउ चरन स नाई।।
आए दे व सदा वारथी। बचन कह हं जनु परमारथी।।
द न बंधु दयाल रघु राया। दे व क ि ह दे व ह पर दाया।।
ब व ोह रत यह खल कामी। नज अघ गयउ कमारगगामी।।
ु
तु ह सम प

म अ बनासी। सदा एकरस सहज उदासी।।

अकल अगु न अज अनघ अनामय। अिजत अमोघसि त क नामय।।
मीन कमठ सू कर नरहर । बामन परसु राम बपु धर ।।
जब जब नाथ सु र ह दुखु पायो। नाना तनु ध र तु हइँ नसायो।।
यह खल म लन सदा सु र ोह । काम लोभ मद रत अ त कोह ।।
अधम सरोम न तव पद पावा। यह हमरे मन बसमय आवा।।
हम दे वता परम अ धकार । वारथ रत भु भग त बसार ।।
भव बाहँ संतत हम परे । अब भु पा ह सरन अनु सरे ।।
दो0-क र बनती सु र स सब रहे जहँ तहँ कर जो र।

अ त स ेम तन पु ल क ब ध अ तु त करत बहो र।।110।।
–*–*–
छं 0-जय राम सदा सु खधाम हरे । रघु नायक सायक चाप धरे ।।
भव बारन दारन संह भो। गु न सागर नागर नाथ बभो।।
तन काम अनेक अनू प छबी। गु न गावत स मु नीं कबी।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

जसु पावन रावन नाग महा। खगनाथ जथा क र कोप गहा।।
जन रं जन भंजन सोक भयं। गत ोध सदा भु बोधमयं।।
अवतार उदार अपार गु नं। म ह भार बभंजन यानघनं।।
अज यापकमेकमना द सदा। क नाकर राम नमा म मु दा।।
रघु बंस बभू षन दूषन हा। कृ त भू प बभीषन द न रहा।।
गु न यान नधान अमान अजं। नत राम नमा म बभु ं बरजं।।
भु जदं ड चंड ताप बलं। खल बृंद नकद महा कसलं।।
ं
ु
बनु कारन द न दयाल हतं। छ ब धाम नमा म रमा स हतं।।
भव तारन कारन काज परं । मन संभव दा न दोष हरं ।।
सर चाप मनोहर ोन धरं । जरजा न लोचन भू पबरं ।।
सु ख मं दर सु ंदर ीरमनं। मद मार मु धा ममता समनं।।
अनव य अखंड न गोचर गो। सब प सदा सब होइ न गो।।
इ त बेद बदं त न दं तकथा। र ब आतप भ नम भ न जथा।।
कृ तकृ य बभो सब बानर ए। नरखं त तवानन सादर ए।।
धग जीवन दे व सर र हरे । तव भि त बना भव भू ल परे ।।
अब द न दयाल दया क रऐ। म त मो र बभेदकर ह रऐ।।
जे ह ते बपर त

या क रऐ। दुख सो सु ख मा न सु खी च रऐ।।

खल खंडन मंडन र य छमा। पद पंकज से वत संभु उमा।।
नृप नायक दे बरदान मदं । चरनांबु ज ेम सदा सु भदं ।।
दो0- बनय क ि ह चतु रानन ेम पु लक अ त गात।

सोभा संधु बलोकत लोचन नह ं अघात।।111।।
–*–*–
ते ह अवसर दसरथ तहँ आए। तनय बलो क नयन जल छाए।।
अनु ज स हत भु बंदन क हा। आ सरबाद पताँ तब द हा।।
तात सकल तव पु य भाऊ। जी य अजय नसाचर राऊ।।

सु न सु त बचन ी त अ त बाढ़ । नयन स लल रोमाव ल ठाढ़ ।।
रघु प त थम ेम अनु माना। चतइ पत ह द हे उ ढ़ याना।।
ताते उमा मो छ न हं पायो। दसरथ भेद भग त मन लायो।।
सगु नोपासक मो छ न लेह ं। त ह कहु ँ राम भग त नज दे ह ं।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

बार बार क र भु ह नामा। दसरथ हर ष गए सु रधामा।।
दो0-अनु ज जानक स हत भु कसल कोसलाधीस।
ु
सोभा दे ख हर ष मन अ तु त कर सु र ईस।।112।।
–*–*–
छं 0-जय राम सोभा धाम। दायक नत ब ाम।।
धृत ोन बर सर चाप। भु जदं ड बल ताप।।1।।
जय दूषना र खरा र। मदन नसाचर धा र।।
यह दु ट मारे उ नाथ। भए दे व सकल सनाथ।।2।।
जय हरन धरनी भार। म हमा उदार अपार।।
जय रावना र कृ पाल। कए जातु धान बहाल।।3।।
लंकस अ त बल गब। कए ब य सु र गंधब।।
े
मु न स नर खग नाग। ह ठ पंथ सब क लाग।।4।।
पर ोह रत अ त दु ट। पायो सो फलु पा प ट।।
अब सु नहु द न दयाल। राजीव नयन बसाल।।5।।
मो ह रहा अ त अ भमान। न हं कोउ मो ह समान।।
अब दे ख भु पद कज। गत मान द दुख पु ंज।।6।।
ं
कोउ

म नगु न याव। अ य त जे ह ु त गाव।।

मो ह भाव कोसल भू प। ीराम सगु न स प।।7।।
बैदे ह अनु ज समेत। मम दयँ करहु नकत।।
े
मो ह जा नए नज दास। दे भि त रमा नवास।।8।।
दे भि त रमा नवास ास हरन सरन सु खदायक।
ं
सु ख धाम राम नमा म काम अनेक छ ब रघु नायक।।
ं
सु र बृंद रं जन वंद भंजन मनु ज तनु अतु लतबलं।
मा द संकर से य राम नमा म क ना कोमलं।।
दो0-अब क र कृ पा बलो क मो ह आयसु दे हु कृ पाल।
काह कर सु न

य बचन बोले द नदयाल।।113।।
–*–*–
सु नु सु रप त क प भालु हमारे । परे भू म नसचरि ह जे मारे ।।
मम हत ला ग तजे इ ह ाना। सकल िजआउ सु रेस सु जाना।।
सु नु खगेस भु क यह बानी। अ त अगाध जान हं मु न यानी।।
ै
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

भु सक

भु अन मा र िजआई। कवल स
े

ह द ि ह बड़ाई।।

सु धा बर ष क प भालु िजआए। हर ष उठे सब भु प हं आए।।
सु धाबृि ट भै दुहु दल ऊपर। िजए भालु क प न हं रजनीचर।।
रामाकार भए त ह क मन। मु त भए छटे भव बंधन।।
े
ू
सु र अं सक सब क प अ र छा। िजए सकल रघु प त क ं ईछा।।
राम स रस को द न हतकार । क हे मु कत नसाचर झार ।।
ु
खल मल धाम काम रत रावन। ग त पाई जो मु नबर पाव न।।
दो0-सु मन बर ष सब सु र चले च ढ़ च ढ़
दे ख सु अवस

चर बमान।

भु प हं आयउ संभु सु जान।।114(क)।।

परम ी त कर जो र जु ग न लन नयन भ र बा र।
पु ल कत तन गदगद गराँ बनय करत पु रा र।।114(ख)।।
–*–*–
छं 0-माम भर य रघु क ल नायक। धृत बर चाप चर कर सायक।।
ु
मोह महा घन पटल भंजन। संसय ब पन अनल सु र रं जन।।1।।
अगु न सगु न गु न मं दर सु ंदर। म तम बल ताप दवाकर।।
काम

ोध मद गज पंचानन। बसहु नरं तर जन मन कानन।।2।।

बषय मनोरथ पु ंज कज बन। बल तु षार उदार पार मन।।
ं
भव बा र ध मंदर परमं दर। बारय तारय संस ृ त दु तर।।3।।
याम गात राजीव बलोचन। द न बंधु नतार त मोचन।।
अनु ज जानक स हत नरं तर। बसहु राम नृप मम उर अंतर।।4।।
मु न रं जन म ह मंडल मंडन। तु ल सदास भु ास बखंडन।।5।।
दो0-नाथ जब हं कोसलपु र ं होइ ह तलक तु हार।
कृ पा संधु म आउब दे खन च रत उदार।।115।।
–*–*–
क र बनती जब संभु सधाए। तब भु नकट बभीषनु आए।।
नाइ चरन स कह मृदु बानी। बनय सु नहु भु सारँ गपानी।।
सकल सदल भु रावन मार् यो। पावन जस
ु

भु वन ब तार् यो।।

द न मल न ह न म त जाती। मो पर कृ पा क ि ह बहु भाँती।।
अब जन गृह पु नीत भु क जे। म जनु क रअ समर म छ जे।।
दे ख कोस मं दर संपदा। दे हु कृ पाल क प ह कहु ँ मु दा।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

सब ब ध नाथ मो ह अपनाइअ। पु न मो ह स हत अवधपु र जाइअ।।
सु नत बचन मृदु द नदयाला। सजल भए वौ नयन बसाला।।
दो0-तोर कोस गृह मोर सब स य बचन सु नु ात।
भरत दसा सु मरत मो ह न मष क प सम जात।।116(क)।।
तापस बेष गात कृ स जपत नरं तर मो ह।
दे ख बे ग सो जतनु क सखा नहोरउँ तो ह।।116(ख)।।
बीत अव ध जाउँ ज िजअत न पावउँ बीर।
सु मरत अनु ज ी त भु पु न पु न पु लक सर र।।116(ग)।।
करे हु क प भ र राजु तु ह मो ह सु मरे हु मन मा हं।
पु न मम धाम पाइहहु जहाँ संत सब जा हं।।116(घ)।।
–*–*–
सु नत बभीषन बचन राम क। हर ष गहे पद कृ पाधाम क।।
े
े
बानर भालु सकल हरषाने। ग ह भु पद गु न बमल बखाने।।
बहु र बभीषन भवन सधायो। म न गन बसन बमान भरायो।।
लै पु पक भु आग राखा। हँ स क र कृ पा संधु तब भाषा।।
च ढ़ बमान सु नु सखा बभीषन। गगन जाइ बरषहु पट भू षन।।
नभ पर जाइ बभीषन तबह । बर ष दए म न अंबर सबह ।।
जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेह ं। म न मु ख मे ल डा र क प दे ह ं।।
हँ से रामु ी अनु ज समेता। परम कौतु क कृ पा नकता।।
े
दो0-मु न जे ह यान न पाव हं ने त ने त कह बेद।
कृ पा संधु सोइ क प ह सन करत अनेक बनोद।।117(क)।।
उमा जोग जप दान तप नाना मख त नेम।
राम कृ पा न ह कर हं त स ज स न कवल ेम।।117(ख)।।
े
–*–*–
भालु क प ह पट भू षन पाए। प ह र प ह र रघु प त प हं आए।।
नाना िजनस दे ख सब क सा। पु न पु न हँ सत कोसलाधीसा।।
चतइ सबि ह पर क ि ह दाया। बोले मृदुल बचन रघु राया।।
तु हर बल म रावनु मार् यो। तलक बभीषन कहँ पु न सार् यो।।
नज नज गृह अब तु मह सब जाहू । सु मरे हु मो ह डरपहु ज न काहू ।।
्
सु नत बचन ेमाक ल बानर। जो र पा न बोले सब सादर।।
ु
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

भु जोइ कहहु तु ह ह सब सोहा। हमरे होत बचन सु न मोहा।।
द न जा न क प कए सनाथा। तु ह लोक ईस रघु नाथा।।
े
सु न भु बचन लाज हम मरह ं। मसक कहू ँ खगप त हत करह ं।।
दे ख राम ख बानर र छा। ेम मगन न हं गृह क ईछा।।
ै
दो0- भु े रत क प भालु सब राम प उर रा ख।
हरष बषाद स हत चले बनय ब बध ब ध भा ष।।118(क)।।
क पप त नील र छप त अंगद नल हनु मान।
स हत बभीषन अपर जे जू थप क प बलवान।।118(ख)।।
दो0- क ह न सक हं कछ ेम बस भ र भ र लोचन बा र।
ु
स मु ख चतव हं राम तन नयन नमेष नवा र।।118(ग)।।
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–*–*–
–*–*–
अ तसय ी त दे ख रघु राई। ल हे सकल बमान चढ़ाई।।
मन महु ँ ब चरन स नायो। उ तर द स ह बमान चलायो।।
चलत बमान कोलाहल होई। जय रघु बीर कहइ सबु कोई।।
संहासन अ त उ च मनोहर। ी समेत भु बैठै ता पर।।
राजत रामु स हत भा मनी। मे सृंग जनु घन दा मनी।।
चर बमानु चलेउ अ त आतु र। क ह सु मन बृि ट हरषे सु र।।
परम सु खद च ल

बध बयार । सागर सर स र नमल बार ।।

सगु न हो हं सु ंदर चहु ँ पासा। मन स न नमल नभ आसा।।
कह रघु बीर दे खु रन सीता। ल छमन इहाँ ह यो इँ जीता।।
हनू मान अंगद क मारे । रन म ह परे नसाचर भारे ।।
े
कंु भकरन रावन वौ भाई। इहाँ हते सु र मु न दुखदाई।।
दो0-इहाँ सेतु बाँ यो अ थापेउँ सव सु ख धाम।
सीता स हत कृ पा न ध संभु ह क ह नाम।।119(क)।।
जहँ जहँ कृ पा संधु बन क ह बास ब ाम।
सकल दे खाए जान क ह कहे सबि ह क नाम।।119(ख)।।
े
–*–*–
तु रत बमान तहाँ च ल आवा। दं डक बन जहँ परम सु हावा।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

कंु भजा द मु ननायक नाना। गए रामु सब क अ थाना।।
सकल र ष ह सन पाइ असीसा। च क ट आए जगद सा।।
ू
तहँ क र मु न ह कर संतोषा। चला बमानु तहाँ ते चोखा।।
े
बहु र राम जान क ह दे खाई। जमु ना क ल मल हर न सु हाई।।
पु न दे खी सु रसर पु नीता। राम कहा नाम क सीता।।
तीरथप त पु न दे खु यागा। नरखत ज म को ट अघ भागा।।
दे खु परम पाव न पु न बेनी। हर न सोक ह र लोक नसेनी।।
पु न दे खु अवधपु र अ त पाव न।

बध ताप भव रोग नसाव न।।।

दो0-सीता स हत अवध कहु ँ क ह कृ पाल नाम।
सजल नयन तन पु ल कत पु न पु न हर षत राम।।120(क)।।
पु न भु आइ

बेनीं हर षत म जनु क ह।

क प ह स हत ब

ह कहु ँ दान ब बध ब ध द ह।।120(ख)।।
–*–*–
भु हनु मंत ह कहा बु झाई। ध र बटु प अवधपु र जाई।।

भरत ह क सल हमा र सु नाएहु ।समाचार लै तु ह च ल आएहु ।।
ु
तु रत पवनसु त गवनत भयउ। तब भु भर वाज प हं गयऊ।।
नाना ब ध मु न पू जा क ह । अ तु ती क र पु न आ सष द ह ।।
मु न पद बं द जु गल कर जोर । च ढ़ बमान भु चले बहोर ।।
इहाँ नषाद सु ना भु आए। नाव नाव कहँ लोग बोलाए।।
सु रस र ना घ जान तब आयो। उतरे उ तट भु आयसु पायो।।
तब सीताँ पू जी सु रसर । बहु कार पु न चरनि ह पर ।।
द ि ह असीस हर ष मन गंगा। सु ंद र तव अ हवात अभंगा।।
सु नत गु हा धायउ ेमाक ल। आयउ नकट परम सु ख संक ल।।
ु
ु
भु ह स हत बलो क बैदेह । परे उ अव न तन सु ध न हं तेह ।।
ी त परम बलो क रघु राई। हर ष उठाइ लयो उर लाई।।

छं 0- लयो दयँ लाइ कृ पा नधान सु जान रायँ रमापती।
बैठा र परम समीप बू झी कसल सो कर बीनती।
ु
अब कसल पद पंकज बलो क बरं च संकर से य जे।
ु
सु ख धाम पू रनकाम राम नमा म राम नमा म ते।।1।।
भु

ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood )

सब भाँ त अधम नषाद सो ह र भरत य उर लाइयो।
म तमंद तु लसीदास सो भु मोह बस बसराइयो।।
यह रावना र च र पावन राम पद र त द सदा।
कामा दहर ब यानकर सु र स मु न गाव हं मु दा।।2।।
दो0-समर बजय रघु बीर क च रत जे सु न हं सु जान।
े
बजय बबेक बभू त नत त ह ह दे हं भगवान।।121(क)।।
यह क लकाल मलायतन मन क र दे खु बचार।
ीरघु नाथ नाम तिज ना हन आन अधार।।121(ख)।।
मासपारायण, स ताईसवाँ व ाम
——————इ त ीम ामच रतमानसे सकलक लकलु ष व वंसने
ष ठः सोपानः समा तः।
(लंकाका ड समा त)
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Shri ram katha lanka kand

  • 1.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) लंका का ड ी गणेशाय नमः ी जानक व लभो वजयते ी रामच रतमानस ष ठ सोपान (लंकाका ड) लोक रामं कामा रसे यं भवभयहरणं कालम तेभ संहं योगी ं ानग यं गु ण न धमिजतं नगु णं न वकारम ्। मायातीतं सु रेशं खलवध नरतं मवृ दै कदे वं व दे क दावदातं सर सजनयनं दे वमु व श पम ्।।1।। शंखे वाभमतीवसु दरतनु ं शादूलचमा बरं काल यालकरालभू षणधरं गंगाशशांक यम ्। काशीशं क लक मषौघशमनं क याणक प मं ु नौमी यं ग रजाप तं गु ण न धं क दपहं श करम ्।।2।। यो ददा त सतां श भु ः कव यम प दुलभम ्। ै खलानां द डकृ योऽसौ श करः शं तनोतु मे।।3।। दो0-लव नमेष परमानु जु ग बरष कलप सर चंड। भज स न मन ते ह राम को कालु जासु कोदं ड।। –*–*– सो0- संधु बचन सु न राम स चव बो ल भु अस कहे उ। अब बलंबु क ह काम करहु सेतु उतरै कटक ।। े ु सु नहु भानु कल कतु जामवंत कर जो र कह। ु े नाथ नाम तव सेतु नर च ढ़ भव सागर त र हं।। यह लघु जल ध तरत क त बारा। अस सु न पु न कह पवनक मारा।। ु भु ताप बड़वानल भार । सोषेउ थम पयो न ध बार ।। तब रपु नार दन जल धारा। भरे उ बहो र भयउ ते हं खारा।। सु न अ त उक त पवनसु त कर । हरषे क प रघु प त तन हे र ।। ु े
  • 2.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) जामवंत बोले दोउ भाई। नल नील ह सब कथा सु नाई।। राम ताप सु म र मन माह ं। करहु सेतु यास कछ नाह ं।। ु बो ल लए क प नकर बहोर । सकल सु नहु बनती कछ मोर ।। ु राम चरन पंकज उर धरहू । कौतु क एक भालु क प करहू ।। धावहु मकट बकट ब था। आनहु बटप ग र ह क जू था।। े सु न क प भालु चले क र हू हा। जय रघु बीर ताप समू हा।। दो0-अ त उतंग ग र पादप ल ल हं ले हं उठाइ। आ न दे हं नल नील ह रच हं ते सेतु बनाइ।।1।। –*–*– सैल बसाल आ न क प दे ह ं। कदुक इव नल नील ते लेह ं।। ं दे ख सेतु अ त सु ंदर रचना। बह स कृ पा न ध बोले बचना।। परम र य उ तम यह धरनी। म हमा अ मत जाइ न हं बरनी।। क रहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे दयँ परम कलपना।। सु न कपीस बहु दूत पठाए। मु नबर सकल बो ल लै आए।। लंग था प ब धवत क र पू जा। सव समान य मो ह न दूजा।। सव ोह मम भगत कहावा। सो नर सपनेहु ँ मो ह न पावा।। संकर बमु ख भग त चह मोर । सो नारक मू ढ़ म त थोर ।। दो0-संकर य मम ोह सव ोह मम दास। ते नर कर ह कलप भ र धोर नरक महु ँ बास।।2।। –*–*– जे रामे वर दरसनु क रह हं। ते तनु तिज मम लोक सध रह हं।। जो गंगाजलु आ न चढ़ाइ ह। सो साजु य मु ि त नर पाइ ह।। होइ अकाम जो छल तिज सेइ ह। भग त मो र ते ह संकर दे इ ह।। मम कृ त सेतु जो दरसनु क रह । सो बनु म भवसागर त रह ।। राम बचन सब क िजय भाए। मु नबर नज नज आ म आए।। े ग रजा रघु प त क यह र ती। संतत कर हं नत पर ीती।। ै बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृ पाँ जसु भयउ उजागर।। बू ड़ हं आन ह बोर हं जेई। भए उपल बो हत सम तेई।। म हमा यह न जल ध कइ बरनी। पाहन गु न न क पन ्ह कइ करनी।। दो0= ी रघु बीर ताप ते संधु तरे पाषान।
  • 3.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) ते म तमंद जे राम तिज भज हं जाइ भु आन।।3।। –*–*– बाँ ध सेतु अ त सु ढ़ बनावा। दे ख कृ पा न ध क मन भावा।। े चल सेन कछ बर न न जाई। गज हं मकट भट समु दाई।। ु सेतु बंध ढग च ढ़ रघु राई। चतव कृ पाल संधु बहु ताई।। दे खन कहु ँ भु क ना कदा। गट भए सब जलचर बृंदा।। ं मकर न नाना झष याला। सत जोजन तन परम बसाला।। अइसेउ एक त ह ह जे खाह ं। एक ह क डर ते प डेराह ं।। भु ह बलोक हं टर हं न टारे । मन हर षत सब भए सु खारे ।। त ह क ओट न दे खअ बार । मगन भए ह र प नहार ।। चला कटक भु आयसु पाई। को क ह सक क प दल बपु लाई।। ु दो0-सेतु बंध भइ भीर अ त क प नभ पंथ उड़ा हं। अपर जलचरि ह ऊपर च ढ़ च ढ़ पार ह जा हं।।4।। –*–*– अस कौतु क बलो क वौ भाई। बहँ स चले कृ पाल रघु राई।। सेन स हत उतरे रघु बीरा। क ह न जाइ क प जू थप भीरा।। संधु पार भु डेरा क हा। सकल क प ह कहु ँ आयसु द हा।। खाहु जाइ फल मू ल सु हाए। सु नत भालु क प जहँ तहँ धाए।। सब त फरे राम हत लागी। रतु अ क रतु काल ग त यागी।। ु खा हं मधु र फल बटप हलाव हं। लंका स मु ख सखर चलाव हं।। जहँ कहु ँ फरत नसाचर पाव हं। घे र सकल बहु नाच नचाव हं।। दसनि ह का ट ना सका काना। क ह भु सु जसु दे हं तब जाना।। िज ह कर नासा कान नपाता। त ह रावन ह कह सब बाता।। सु नत वन बा र ध बंधाना। दस मु ख बो ल उठा अक लाना।। ु दो0-बां यो बन न ध नीर न ध जल ध संधु बार स। स य तोय न ध कप त उद ध पयो ध नद स।।5।। ं –*–*– नज बकलता बचा र बहोर । बहँ स गयउ ह क र भय भोर ।। मंदोदर ं सु यो भु आयो। कौतु कह ं पाथो ध बँधायो।। कर ग ह प त ह भवन नज आनी। बोल परम मनोहर बानी।।
  • 4.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) चरन नाइ स अंचलु रोपा। सु नहु बचन पय प रह र कोपा।। नाथ बय क जे ताह स । बु ध बल स कअ जी त जाह स ।। तु ह ह रघु प त ह अंतर कसा। खलु ख योत दनकर ह जैसा।। ै अ तबल मधु कटभ जे हं मारे । महाबीर द तसु त संघारे ।। ै जे हं ब ल बाँ ध सहजभु ज मारा। सोइ अवतरे उ हरन म ह भारा।। तासु बरोध न क िजअ नाथा। काल करम िजव जाक हाथा।। दो0-राम ह सौ प जानक नाइ कमल पद माथ। सु त कहु ँ राज सम प बन जाइ भिजअ रघु नाथ।।6।। –*–*– नाथ द नदयाल रघु राई। बाघउ सनमु ख गएँ न खाई।। चा हअ करन सो सब क र बीते। तु ह सु र असु र चराचर जीते।। संत कह हं अ स नी त दसानन। चौथपन जाइ ह नृप कानन।। तासु भजन क िजअ तहँ भता। जो कता पालक संहता।। सोइ रघु वीर नत अनु रागी। भजहु नाथ ममता सब यागी।। मु नबर जतनु कर हं जे ह लागी। भू प राजु तिज हो हं बरागी।। सोइ कोसलधीस रघु राया। आयउ करन तो ह पर दाया।। ज पय मानहु मोर सखावन। सु जसु होइ तहु ँ पु र अ त पावन।। दो0-अस क ह नयन नीर भ र ग ह पद क पत गात। ं नाथ भजहु रघु नाथ ह अचल होइ अ हवात।।7।। –*–*– तब रावन मयसु ता उठाई। कहै लाग खल नज भु ताई।। सु नु तै या बृथा भय माना। जग जोधा को मो ह समाना।। ब न कबेर पवन जम काला। भु ज बल िजतेउँ सकल दगपाला।। ु दे व दनु ज नर सब बस मोर। कवन हे तु उपजा भय तोर।। नाना ब ध ते ह कहे स बु झाई। सभाँ बहो र बैठ सो जाई।। मंदोदर ं हदयँ अस जाना। काल ब य उपजा अ भमाना।। सभाँ आइ मं ह त ह बू झा। करब कवन ब ध रपु स जू झा।। कह हं स चव सु नु न सचर नाहा। बार बार भु पू छहु काहा।। कहहु कवन भय क रअ बचारा। नर क प भालु अहार हमारा।। दो0-सब क बचन वन सु न कह ह त कर जो र। े
  • 5.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) न त बरोध न क रअ भु म ं ह म त अ त थो र।।8।। –*–*– कह हं स चव सठ ठकरसोहाती। नाथ न पू र आव ए ह भाँती।। ु बा र ध ना घ एक क प आवा। तासु च रत मन महु ँ सबु गावा।। छधा न रह तु ह ह तब काहू । जारत नग कस न ध र खाहू ।। ु सु नत नीक आग दुख पावा। स चवन अस मत भु ह सु नावा।। जे हं बार स बँधायउ हे ला। उतरे उ सेन समेत सु बेला।। सो भनु मनु ज खाब हम भाई। बचन कह हं सब गाल फलाई।। ु तात बचन मम सु नु अ त आदर। ज न मन गु नहु मो ह क र कादर।। य बानी जे सु न हं जे कहह ं। ऐसे नर नकाय जग अहह ं।। बचन परम हत सु नत कठोरे । सु न हं जे कह हं ते नर भु थोरे ।। थम बसीठ पठउ सु नु नीती। सीता दे इ करहु पु न ीती।। दो0-ना र पाइ फ र जा हं ज तौ न बढ़ाइअ रा र। ना हं त स मु ख समर म ह तात क रअ ह ठ मा र।।9।। –*–*– यह मत ज मानहु भु मोरा। उभय कार सु जसु जग तोरा।। सु त सन कह दसकठ रसाई। अ स म त सठ क हं तो ह सखाई।। ं े अबह ं ते उर संसय होई। बेनु मू ल सु त भयहु घमोई।। सु न पतु गरा प ष अ त घोरा। चला भवन क ह बचन कठोरा।। हत मत तो ह न लागत कस। काल बबस कहु ँ भेषज जैस।। ै सं या समय जा न दससीसा। भवन चलेउ नरखत भु ज बीसा।। लंका सखर उपर आगारा। अ त ब च तहँ होइ अखारा।। बैठ जाइ तेह मं दर रावन। लागे कं नर गु न गन गावन।। बाज हं ताल पखाउज बीना। नृ य कर हं अपछरा बीना।। दो0-सु नासीर सत स रस सो संतत करइ बलास। परम बल रपु सीस पर त य प सोच न ास।।10।। –*–*– इहाँ सु बेल सैल रघु बीरा। उतरे सेन स हत अ त भीरा।। सखर एक उतंग अ त दे खी। परम र य सम सु तहँ त बसेषी।। कसलय सु मन सु हाए। ल छमन र च नज हाथ डसाए।।
  • 6.
    भु ता पर ी रामजी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) चर मृदुल मृगछाला। तेह ं आसान आसीन कृ पाला।। भु कृ त सीस कपीस उछं गा। बाम द हन द स चाप नषंगा।। दुहु ँ कर कमल सु धारत बाना। कह लंकस मं ल ग काना।। े बड़भागी अंगद हनु माना। चरन कमल चापत ब ध नाना।। भु पाछ ल छमन बीरासन। क ट नषंग कर बान सरासन।। दो0-ए ह ब ध कृ पा प गु न धाम रामु आसीन। ध य ते नर ए हं यान जे रहत सदा लयल न।।11(क)।। पू रब दसा बलो क भु दे खा उ दत मंयक। कहत सब ह दे खहु स स ह मृगप त स रस असंक।।11(ख)।। –*–*– पू रब द स ग रगु हा नवासी। परम ताप तेज बल रासी।। म त नाग तम कंु भ बदार । स स कसर गगन बन चार ।। े बथु रे नभ मु कताहल तारा। न स सु ंदर कर संगारा।। ु े कह भु स स महु ँ मेचकताई। कहहु काह नज नज म त भाई।। कह सु ग़ीव सु नहु रघु राई। स स महु ँ गट भू म क झाँई।। ै मारे उ राहु स स ह कह कोई। उर महँ पर यामता सोई।। कोउ कह जब ब ध र त मु ख क हा। सार भाग स स कर ह र ल हा।। छ सो गट इंद ु उर माह ं। ते ह मग दे खअ नभ प रछाह ं।। भु कह गरल बंधु स स करा। अ त े य नज उर द ह बसेरा।। बष संजु त कर नकर पसार । जारत बरहवंत नर नार ।। दो0-कह हनु मंत सु नहु भु स स तु हारा य दास। तव मू र त बधु उर बस त सोइ यामता अभास।।12(क)।। नवा हपारायण।। सातवाँ व ाम पवन तनय क बचन सु न बहँ से रामु सु जान। े दि छन द स अवलो क भु बोले कृ पा नधान।।12(ख)।। –*–*– दे खु बभीषन दि छन आसा। घन घंमड दा म न बलासा।। मधु र मधु र गरजइ घन घोरा। होइ बृि ट ज न उपल कठोरा।। कहत बभीषन सु नहु कृ पाला। होइ न त ड़त न बा रद माला।। लंका सखर उपर आगारा। तहँ दसकघर दे ख अखारा।। ं
  • 7.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) छ मेघडंबर सर धार । सोइ जनु जलद घटा अ त कार ।। मंदोदर वन ताटं का। सोइ भु जनु दा मनी दमंका।। बाज हं ताल मृदं ग अनू पा। सोइ रव मधु र सु नहु सु रभू पा।। भु मु सु कान समु झ अ भमाना। चाप चढ़ाइ बान संधाना।। दो0-छ मु क ट ताटं क तब हते एकह ं बान। ु सबक दे खत म ह परे मरमु न कोऊ जान।।13(क)।। अस कौतु क क र राम सर बसेउ आइ नषंग। रावन सभा ससंक सब दे ख महा रसभंग।।13(ख)।। –*–*– कप न भू म न म त बसेषा। अ स कछ नयन न दे खा।। ं ु सोच हं सब नज दय मझार । असगु न भयउ भयंकर भार ।। दसमु ख दे ख सभा भय पाई। बह स बचन कह जु गु त बनाई।। सरउ गरे संतत सु भ जाह । मु कट परे कस असगु न ताह ।। ु सयन करहु नज नज गृह जाई। गवने भवन सकल सर नाई।। मंदोदर सोच उर बसेऊ। जब ते वनपू र म ह खसेऊ।। सजल नयन कह जु ग कर जोर । सु नहु ानप त बनती मोर ।। कत राम बरोध प रहरहू । जा न मनु ज ज न हठ मन धरहू ।। ं दो0- ब व प रघु बंस म न करहु बचन ब वासु । लोक क पना बेद कर अंग अंग त जासु ।।14।। –*–*– पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग ब ामा।। भृक ट बलास भयंकर काला। नयन दवाकर कच घन माला।। ु जासु ान अि वनीकमारा। न स अ ु दवस नमेष अपारा।। वन दसा दस बेद बखानी। मा त वास नगम नज बानी।। अधर लोभ जम दसन कराला। माया हास बाहु दगपाला।। आनन अनल अंबु प त जीहा। उतप त पालन लय समीहा।। रोम रािज अ टादस भारा। अि थ सैल स रता नस जारा।। उदर उद ध अधगो जातना। जगमय भु का बहु कलपना।। दो0-अहं कार सव बु अज मन स स च त महान। मनु ज बास सचराचर प राम भगवान।।15 क।।
  • 8.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) अस बचा र सु नु ानप त भु सन बय बहाइ। ी त करहु रघु बीर पद मम अ हवात न जाइ।।15 ख।। –*–*– बहँ सा ना र बचन सु न काना। अहो मोह म हमा बलवाना।। ना र सु भाउ स य सब कहह ं। अवगु न आठ सदा उर रहह ं।। साहस अनृत चपलता माया। भय अ बबेक असौच अदाया।। रपु कर प सकल त गावा। अ त बसाल भय मो ह सु नावा।। सो सब या सहज बस मोर। समु झ परा साद अब तोर।। जा नउँ या तो र चतु राई। ए ह ब ध कहहु मो र भु ताई।। तव बतकह गू ढ़ मृगलोच न। समु झत सु खद सु नत भय मोच न।। मंदोद र मन महु ँ अस ठयऊ। पय ह काल बस म त म भयऊ।। दो0-ए ह ब ध करत बनोद बहु ात गट दसकध। ं सहज असंक लंकप त सभाँ गयउ मद अंध।।16(क)।। सो0-फ लह फरइ न बेत जद प सु धा बरष हं जलद। ू मू ख दयँ न चेत ज गु र मल हं बरं च सम।।16(ख)।। –*–*– इहाँ ात जागे रघु राई। पू छा मत सब स चव बोलाई।। कहहु बे ग का क रअ उपाई। जामवंत कह पद स नाई।। सु नु सब य सकल उर बासी। बु ध बल तेज धम गु न रासी।। मं कहउँ नज म त अनु सारा। दूत पठाइअ बा लक मारा।। ु नीक मं सब क मन माना। अंगद सन कह कृ पा नधाना।। े बा लतनय बु ध बल गु न धामा। लंका जाहु तात मम कामा।। बहु त बु झाइ तु ह ह का कहऊ। परम चतु र म जानत अहऊ।। ँ ँ काजु हमार तासु हत होई। रपु सन करे हु बतकह सोई।। सो0- भु अ या ध र सीस चरन बं द अंगद उठे उ। सोइ गु न सागर ईस राम कृ पा जा पर करहु ।।17(क)।। वयं स सब काज नाथ मो ह आद दयउ। अस बचा र जु बराज तन पु ल कत हर षत हयउ।।17(ख)।। बं द चरन उर ध र भु ताई। अंगद चलेउ सब ह स नाई।। भु ताप उर सहज असंका। रन बाँकरा बा लसु त बंका।। ु
  • 9.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) पु र पैठत रावन कर बेटा। खेलत रहा सो होइ गै भटा।। बात हं बात करष ब ढ़ आई। जु गल अतु ल बल पु न त नाई।। ते ह अंगद कहु ँ लात उठाई। ग ह पद पटकउ भू म भवाँई।। े न सचर नकर दे ख भट भार । जहँ तहँ चले न सक हं पु कार ।। एक एक सन मरमु न कहह ं। समु झ तासु बध चु प क र रहह ं।। भयउ कोलाहल नगर मझार । आवा क प लंका जेह ं जार ।। अब ध कहा क र ह करतारा। अ त सभीत सब कर हं बचारा।। बनु पू छ मगु दे हं दखाई। जे ह बलोक सोइ जाइ सु खाई।। दो0-गयउ सभा दरबार तब सु म र राम पद कज। ं संह ठव न इत उत चतव धीर बीर बल पु ंज।।18।। –*–*– तु रत नसाचर एक पठावा। समाचार रावन ह जनावा।। सु नत बहँ स बोला दससीसा। आनहु बो ल कहाँ कर क सा।। आयसु पाइ दूत बहु धाए। क पकंु जर ह बो ल लै आए।। अंगद द ख दसानन बस। स हत ान क जल ग र जैस।। भु जा बटप सर सृंग समाना। रोमावल लता जनु नाना।। मु ख ना सका नयन अ काना। ग र कदरा खोह अनु माना।। ं गयउ सभाँ मन नेक न मु रा। बा लतनय अ तबल बाँकरा।। ु ु उठे सभासद क प कहु ँ दे खी। रावन उर भा ौध बसेषी।। दो0-जथा म त गज जू थ महु ँ पंचानन च ल जाइ। राम ताप सु म र मन बैठ सभाँ स नाइ।।19।। –*–*– कह दसकठ कवन त बंदर। म रघु बीर दूत दसकधर।। ं ं मम जनक ह तो ह रह मताई। तव हत कारन आयउँ भाई।। उ तम कल पु लि त कर नाती। सव बरं च पू जेहु बहु भाँती।। ु बर पायहु क हे हु सब काजा। जीतेहु लोकपाल सब राजा।। नृप अ भमान मोह बस कं बा। ह र आ नहु सीता जगदं बा।। अब सु भ कहा सु नहु तु ह मोरा। सब अपराध छ म ह भु तोरा।। दसन गहहु तृन कठ कठार । प रजन स हत संग नज नार ।। ं ु सादर जनकसु ता क र आग। ए ह ब ध चलहु सकल भय याग।।
  • 10.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) दो0- नतपाल रघु बंसम न ा ह ा ह अब मो ह। आरत गरा सु नत भु अभय करै गो तो ह।।20।। –*–*– रे क पपोत बोलु संभार । मू ढ़ न जाने ह मो ह सु रार ।। कहु नज नाम जनक कर भाई। क ह नात मा नऐ मताई।। े अंगद नाम बा ल कर बेटा। तास कबहु ँ भई ह भेटा।। अंगद बचन सु नत सकचाना। रहा बा ल बानर म जाना।। ु अंगद तह ं बा ल कर बालक। उपजेहु बंस अनल कल घालक।। ु गभ न गयहु यथ तु ह जायहु । नज मु ख तापस दूत कहायहु ।। अब कहु क सल बा ल कहँ अहई। बहँ स बचन तब अंगद कहई।। ु दन दस गएँ बा ल प हं जाई। बू झहु कसल सखा उर लाई।। े ु राम बरोध कसल ज स होई। सो सब तो ह सु नाइ ह सोई।। ु सु नु सठ भेद होइ मन ताक। ीरघु बीर दय न हं जाक।। दो0-हम क ल घालक स य तु ह कल पालक दससीस। ु ु अंधउ ब धर न अस कह हं नयन कान तव बीस।।21। –*–*– सव बरं च सु र मु न समु दाई। चाहत जासु चरन सेवकाई।। तासु दूत होइ हम कल बोरा। अइ सहु ँ म त उर बहर न तोरा।। ु सु न कठोर बानी क प कर । कहत दसानन नयन तरे र ।। े खल तव क ठन बचन सब सहऊ। नी त धम म जानत अहऊ।। ँ ँ कह क प धमसीलता तोर । हमहु ँ सु नी कृ त पर य चोर ।। दे खी नयन दूत रखवार । बू ड़ न मरहु धम तधार ।। कान नाक बनु भ ग न नहार । छमा क ि ह तु ह धम बचार ।। धमसीलता तव जग जागी। पावा दरसु हमहु ँ बड़भागी।। दो0-ज न ज प स जड़ जंतु क प सठ बलोक मम बाहु । ु लोकपाल बल बपु ल स स सन हे तु सब राहु ।।22(क)।। पु न नभ सर मम कर नकर कमलि ह पर क र बास। सोभत भयउ मराल इव संभु स हत कलास।।22(ख)।। ै –*–*– तु हरे कटक माझ सु नु अंगद। मो सन भ र ह कवन जोधा बद।।
  • 11.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) तव भु ना र बरहँ बलह ना। अनु ज तासु दुख दुखी मल ना।। तु ह सु ीव कल म दोऊ। अनु ज हमार भी अ त सोऊ।। ू ु जामवंत मं ी अ त बू ढ़ा। सो क होइ अब समरा ढ़ा।। सि प कर्म जान हं नल नीला। है क प एक महा बलसीला।। आवा थम नग ज हं जारा। सु नत बचन कह बा लकमारा।। ु स य बचन कहु न सचर नाहा। साँचेहु ँ क स क ह पु र दाहा।। रावन नगर अ प क प दहई। सु न अस बचन स य को कहई।। जो अ त सु भट सराहे हु रावन। सो सु ीव कर लघु धावन।। े चलइ बहु त सो बीर न होई। पठवा खब र लेन हम सोई।। दो0-स य नग क प जारे उ बनु भु आयसु पाइ। फ र न गयउ सु ीव प हं ते हं भय रहा लु काइ।।23(क)।। स य कह ह दसकठ सब मो ह न सु न कछ कोह। ं ु कोउ न हमार कटक अस तो सन लरत जो सोह।।23(ख)।। ी त बरोध समान सन क रअ नी त अ स आ ह। ज मृगप त बध मेड़ु कि ह भल क कहइ कोउ ता ह।।23(ग)।। ज य प लघु ता राम कहु ँ तो ह बध बड़ दोष। तद प क ठन दसकठ सु नु छ जा त कर रोष।।23(घ)।। ं ब उि त धनु बचन सर दय दहे उ रपु क स। तउ तर सड़ स ह मनहु ँ काढ़त भट दससीस।।23(ङ)।। जो हँ स बोलेउ दसमौ ल तब क प कर बड़ गु न एक। तपालइ तासु हत करइ उपाय अनेक।।23(छ)।। –*–*– ध य क स जो नज भु काजा। जहँ तहँ नाचइ प रह र लाजा।। ना च क द क र लोग रझाई। प त हत करइ धम नपु नाई।। ू अंगद वा मभ त तव जाती। भु गु न कस न कह स ए ह भाँती।। म गु न गाहक परम सु जाना। तव कटु रट न करउँ न हं काना।। कह क प तव गु न गाहकताई। स य पवनसु त मो ह सु नाई।। बन बधं स सु त ब ध पु र जारा। तद प न ते हं कछ कृ त अपकारा।। ु सोइ बचा र तव कृ त सु हाई। दसकधर म क ि ह ढठाई।। ं
  • 12.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) दे खेउँ आइ जो कछ क प भाषा। तु हर लाज न रोष न माखा।। ु ज अ स म त पतु खाए क सा। क ह अस बचन हँ सा दससीसा।। पत ह खाइ खातेउँ पु न तोह । अबह ं समु झ परा कछ मोह ।। ु बा ल बमल जस भाजन जानी। हतउँ न तो ह अधम अ भमानी।। कहु रावन रावन जग कते। म नज वन सु ने सु नु जेते।। े ब ल ह िजतन एक गयउ पताला। राखेउ बाँ ध ससु ह हयसाला।। खेल हं बालक मार हं जाई। दया ला ग ब ल द ह छोड़ाई।। एक बहो र सहसभु ज दे खा। धाइ धरा िज म जंतु बसेषा।। कौतु क ला ग भवन लै आवा। सो पु लि त मु न जाइ छोड़ावा।। दो0-एक कहत मो ह सकच अ त रहा बा ल क काँख। ु इ ह महु ँ रावन त कवन स य बद ह तिज माख।।24।। –*–*– सु नु सठ सोइ रावन बलसीला। हर ग र जान जासु भु ज ल ला।। जान उमाप त जासु सु राई। पू जेउँ जे ह सर सु मन चढ़ाई।। सर सरोज नज करि ह उतार । पू जेउँ अ मत बार पु रार ।। भु ज ब म जान हं दगपाला। सठ अजहू ँ िज ह क उर साला।। जान हं द गज उर क ठनाई। जब जब भरउँ जाइ ब रआई।। िज ह क दसन कराल न फटे । उर लागत मू लक इव टू टे ।। े ू जासु चलत डोल त इ म धरनी। चढ़त म त गज िज म लघु तरनी।। सोइ रावन जग ब दत तापी। सु ने ह न वन अल क लापी।। दो0-ते ह रावन कहँ लघु कह स नर कर कर स बखान। रे क प बबर खब खल अब जाना तव यान।।25।। –*–*– सु न अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभा र अधम अ भमानी।। सहसबाहु भु ज गहन अपारा। दहन अनल सम जासु कठारा।। ु जासु परसु सागर खर धारा। बू ड़े नृप अग नत बहु बारा।। तासु गब जे ह दे खत भागा। सो नर य दससीस अभागा।। राम मनु ज कस रे सठ बंगा। ध वी कामु नद पु न गंगा।। पसु सुरधेनु क पत खा। अ न दान अ रस पीयू षा।। बैनतेय खग अ ह सहसानन। चंताम न पु न उपल दसानन।।
  • 13.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) सु नु म तमंद लोक बैकंु ठा। लाभ क रघु प त भग त अकंु ठा।। दो0-सेन स हत तब मान म थ बन उजा र पु र जा र।। कस रे सठ हनु मान क प गयउ जो तव सु त मा र।।26।। –*–*– सु नु रावन प रह र चतु राई। भज स न कृ पा संधु रघु राई।। जौ खल भए स राम कर ोह । म सक रा ख न तोह ।। मू ढ़ बृथा ज न मार स गाला। राम बयर अस होइ ह हाला।। तव सर नकर क प ह क आग। प रह हं धर न राम सर लाग।। े ते तव सर कदुक सम नाना। खेलह हं भालु क स चौगाना।। ं जब हं समर कोप ह रघु नायक। छ टह हं अ त कराल बहु सायक।। ु तब क च ल ह अस गाल तु हारा। अस बचा र भजु राम उदारा।। सु नत बचन रावन परजरा। जरत महानल जनु घृत परा।। दो0-कंु भकरन अस बंधु मम सु त स स ा र। मोर परा म न हं सु ने ह िजतेउँ चराचर झा र।।27।। –*–*– सठ साखामृग जो र सहाई। बाँधा संधु इहइ भु ताई।। नाघ हं खग अनेक बार सा। सू र न हो हं ते सु नु सब क सा।। मम भु ज सागर बल जल पू रा। जहँ बू ड़े बहु सु र नर सू रा।। बीस पयो ध अगाध अपारा। को अस बीर जो पाइ ह पारा।। दगपाल ह म नीर भरावा। भू प सु जस खल मो ह सु नावा।। ज पै समर सु भट तव नाथा। पु न पु न कह स जासु गु न गाथा।। तौ बसीठ पठवत क ह काजा। रपु सन ी त करत न हं लाजा।। े हर ग र मथन नरखु मम बाहू । पु न सठ क प नज भु ह सराहू ।। दो0-सू र कवन रावन स रस वकर का ट जे हं सीस। हु ने अनल अ त हरष बहु बार सा ख गौर स।।28।। –*–*– जरत बलोकउँ जब हं कपाला। ब ध क लखे अंक नज भाला।। े े नर क कर आपन बध बाँची। हसेउँ जा न ब ध गरा असाँची।। सोउ मन समु झ ास न हं मोर। लखा बरं च जरठ म त भोर।। आन बीर बल सठ मम आग। पु न पु न कह स लाज प त यागे।।
  • 14.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) कह अंगद सल ज जग माह ं। रावन तो ह समान कोउ नाह ं।। लाजवंत तव सहज सु भाऊ। नज मु ख नज गु न कह स न काऊ।। सर अ सैल कथा चत रह । ताते बार बीस त कह ।। सो भु जबल राखेउ उर घाल । जीतेहु सहसबाहु ब ल बाल ।। सु नु म तमंद दे ह अब पू रा। काट सीस क होइअ सू रा।। इं जा ल कहु क हअ न बीरा। काटइ नज कर सकल सर रा।। दो0-जर हं पतंग मोह बस भार बह हं खर बृंद। ते न हं सू र कहाव हं समु झ दे खु म तमंद।।29।। –*–*– अब ज न बतबढ़ाव खल करह । सु नु मम बचन मान प रहरह ।। दसमु ख म न बसीठ ं आयउँ । अस बचा र रघु बीष पठायउँ ।। बार बार अस कहइ कृ पाला। न हं गजा र जसु बध सृकाला।। मन महु ँ समु झ बचन भु करे । सहे उँ कठोर बचन सठ तेरे।। े ना हं त क र मु ख भंजन तोरा। लै जातेउँ सीत ह बरजोरा।। जानेउँ तव बल अधम सु रार । सू न ह र आ न ह परनार ।। त न सचर प त गब बहू ता। म रघु प त सेवक कर दूता।। ज न राम अपमान ह डरउँ । तो ह दे खत अस कौतु क करऊ।। ँ दो0-तो ह पट क म ह सेन ह त चौपट क र तव गाउँ । तव जु ब त ह समेत सठ जनकसु त ह लै जाउँ ।।30।। –*–*– जौ अस कर तद प न बड़ाई। मु ए ह बध न हं कछ मनु साई।। ु कौल कामबस कृ पन बमू ढ़ा। अ त द र अजसी अ त बू ढ़ा।। सदा रोगबस संतत ोधी। ब नु बमू ख ु त संत बरोधी।। तनु पोषक नंदक अघ खानी। जीवन सव सम चौदह ानी।। अस बचा र खल बधउँ न तोह । अब ज न रस उपजाव स मोह ।। सु न सकोप कह न सचर नाथा। अधर दसन द स मीजत हाथा।। रे क प अधम मरन अब चहसी। छोटे बदन बात ब ड़ कहसी।। कटु ज प स जड़ क प बल जाक। बल ताप बु ध तेज न ताक।। दो0-अगु न अमान जा न ते ह द ह पता बनबास। सो दुख अ जु बती बरह पु न न स दन मम ास।।31(क)।।
  • 15.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) िज ह क बल कर गब तो ह अइसे मनु ज अनेक। े खाह ं नसाचर दवस न स मू ढ़ समु झु तिज टे क।।31(ख)।। –*–*– जब ते हं क ह राम क नंदा। ोधवंत अ त भयउ क पंदा।। ै ह र हर नंदा सु नइ जो काना। होइ पाप गोघात समाना।। कटकटान क पकंु जर भार । दुहु भु जदं ड तम क म ह मार ।। डोलत धर न सभासद खसे। चले भािज भय मा त से।। गरत सँभा र उठा दसकधर। भू तल परे मु कट अ त सु ंदर।। ं ु कछ ते हं लै नज सरि ह सँवारे । कछ अंगद भु पास पबारे ।। ु ु आवत मु कट दे ख क प भागे। दनह ं लू क परन ब ध लागे।। ु क रावन क र कोप चलाए। क लस चा र आवत अ त धाए।। ु कह भु हँ स ज न दयँ डेराहू । लू क न अस न कतु न हं राहू ।। े ए कर ट दसकधर करे । आवत बा लतनय क ेरे।। ं े े दो0-तर क पवनसु त कर गहे आ न धरे भु पास। कौतु क दे ख हं भालु क प दनकर स रस कास।।32(क)।। उहाँ सको प दसानन सब सन कहत रसाइ। धरहु क प ह ध र मारहु सु न अंगद मु सु काइ।।32(ख)।। –*–*– ए ह ब ध बे ग सू भट सब धावहु । खाहु भालु क प जहँ जहँ पावहु ।। मकटह न करहु म ह जाई। िजअत धरहु तापस वौ भाई।। पु न सकोप बोलेउ जु बराजा। गाल बजावत तो ह न लाजा।। म गर का ट नलज कलघाती। बल बलो क बहर त न हं छाती।। ु रे य चोर कमारग गामी। खल मल रा स मंदम त कामी।। ु स यपात ज प स दुबादा। भए स कालबस खल मनु जादा।। याको फलु पाव हगो आग। बानर भालु चपेटि ह लाग।। रामु मनु ज बोलत अ स बानी। गर हं न तव रसना अ भमानी।। ग रह हं रसना संसय नाह ं। सरि ह समेत समर म ह माह ं।। सो0-सो नर य दसकध बा ल ब यो जे हं एक सर। ं बीसहु ँ लोचन अंध धग तव ज म कजा त जड़।।33(क)।। ु तब सो नत क यास तृ षत राम सायक नकर।
  • 16.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) तजउँ तो ह ते ह ास कटु ज पक न सचर अधम।।33(ख)।। मै तव दसन तो रबे लायक। आयसु मो ह न द ह रघु नायक।। अ स रस हो त दसउ मु ख तोर । लंका ग ह समु महँ बोर ।। गू ल र फल समान तव लंका। बसहु म य तु ह जंतु असंका।। म बानर फल खात न बारा। आयसु द ह न राम उदारा।। जु ग त सु नत रावन मु सु काई। मू ढ़ स ख ह कहँ बहु त झु ठाई।। बा ल न कबहु ँ गाल अस मारा। म ल तप स ह त भए स लबारा।। साँचेहु ँ म लबार भु ज बीहा। ज न उपा रउँ तव दस जीहा।। समु झ राम ताप क प कोपा। सभा माझ पन क र पद रोपा।। ज मम चरन सक स सठ टार । फर हं रामु सीता म हार ।। सु नहु सु भट सब कह दससीसा। पद ग ह धर न पछारहु क सा।। इं जीत आ दक बलवाना। हर ष उठे जहँ तहँ भट नाना।। झपट हं क र बल बपु ल उपाई। पद न टरइ बैठ हं स नाई।। पु न उ ठ झपटह ं सु र आराती। टरइ न क स चरन ए ह भाँती।। पु ष कजोगी िज म उरगार । मोह बटप न हं सक हं उपार ।। ु दो0-को ट ह मेघनाद सम सु भट उठे हरषाइ। झपट हं टरै न क प चरन पु न बैठ हं सर नाइ।।34(क)।। भू म न छाँडत क प चरन दे खत रपु मद भाग।। को ट ब न ते संत कर मन िज म नी त न याग।।34(ख)।। –*–*– क प बल दे ख सकल हयँ हारे । उठा आपु क प क परचारे ।। गहत चरन कह बा लक मारा। मम पद गह न तोर उबारा।। ु गह स न राम चरन सठ जाई। सु नत फरा मन अ त सक चाई।। ु भयउ तेजहत ी सब गई। म य दवस िज म स स सोहई।। संघासन बैठेउ सर नाई। मानहु ँ संप त सकल गँवाई।। जगदातमा ानप त रामा। तासु बमु ख क म लह ब ामा।। उमा राम क भृक ट बलासा। होइ ब व पु न पावइ नासा।। ु तृन ते क लस क लस तृन करई। तासु दूत पन कहु क म टरई।। ु ु पु न क प कह नी त ब ध नाना। मान न ता ह कालु नअराना।।
  • 17.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) रपु मद म थ भु सु जसु सु नायो। यह क ह च यो बा ल नृप जायो।। हत न खेत खेलाइ खेलाई। तो ह अब हं का कर बड़ाई।। थम हं तासु तनय क प मारा। सो सु न रावन भयउ दुखारा।। जातु धान अंगद पन दे खी। भय याकल सब भए बसेषी।। ु दो0- रपु बल धर ष हर ष क प बा लतनय बल पु ंज। पु लक सर र नयन जल गहे राम पद कज।।35(क)।। ं साँझ जा न दसकधर भवन गयउ बलखाइ। ं मंदोदर रावन ह बहु र कहा समु झाइ।।(ख)।। –*–*– कत समु झ मन तजहु कम तह । सोह न समर तु ह ह रघु प तह ।। ं ु रामानु ज लघु रे ख खचाई। सोउ न हं नाघेहु अ स मनु साई।। पय तु ह ता ह िजतब सं ामा। जाक दूत कर यह कामा।। े े कौतु क संधु नाघी तव लंका। आयउ क प कहर असंका।। े रखवारे ह त ब पन उजारा। दे खत तो ह अ छ ते हं मारा।। जा र सकल पु र क हे स छारा। कहाँ रहा बल गब तु हारा।। अब प त मृषा गाल ज न मारहु । मोर कहा कछ दयँ बचारहु ।। ु प त रघु प त ह नृप त ज न मानहु । अग जग नाथ अतु ल बल जानहु ।। बान ताप जान मार चा। तासु कहा न हं माने ह नीचा।। जनक सभाँ अग नत भू पाला। रहे तु हउ बल अतु ल बसाला।। भंिज धनु ष जानक बआह । तब सं ाम िजतेहु कन ताह ।। सु रप त सु त जानइ बल थोरा। राखा िजअत आँ ख ग ह फोरा।। सू पनखा क ग त तु ह दे खी। तद प दयँ न हं लाज बषेषी।। ै दो0-ब ध बराध खर दूषन ह ल लाँ ह यो कबंध। बा ल एक सर मारयो ते ह जानहु दसकध।।36।। ं –*–*– जे हं जलनाथ बँधायउ हे ला। उतरे भु दल स हत सु बेला।। का नीक दनकर कल कतू । दूत पठायउ तव हत हे तू ।। ु े सभा माझ जे हं तव बल मथा। क र ब थ महु ँ मृगप त जथा।। अंगद हनु मत अनु चर जाक। रन बाँकरे बीर अ त बाँक।। े ु े ते ह कहँ पय पु न पु न नर कहहू । मु धा मान ममता मद बहहू ।।
  • 18.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) अहह कत कृ त राम बरोधा। काल बबस मन उपज न बोधा।। ं काल दं ड ग ह काहु न मारा। हरइ धम बल बु बचारा।। नकट काल जे ह आवत सा । ते ह म होइ तु हा र ह ना ।। दो0-दुइ सु त मरे दहे उ पु र अजहु ँ पू र पय दे हु । कृ पा संधु रघु नाथ भिज नाथ बमल जसु लेहु ।।37।। –*–*– ना र बचन सु न ब सख समाना। सभाँ गयउ उ ठ होत बहाना।। बैठ जाइ संघासन फल । अ त अ भमान ास सब भू ल ।। ू इहाँ राम अंगद ह बोलावा। आइ चरन पंकज स नावा।। अ त आदर सपीप बैठार । बोले बहँ स कृ पाल खरार ।। बा लतनय कौतु क अ त मोह । तात स य कहु पू छउँ तोह ।।। रावनु जातु धान कल ट का। भु ज बल अतु ल जासु जग ल का।। ु तासु मु क ट तु ह चा र चलाए। कहहु तात कवनी ब ध पाए।। ु सु नु सब य नत सु खकार । मु क ट न हो हं भू प गु न चार ।। ु साम दान अ दं ड बभेदा। नृप उर बस हं नाथ कह बेदा।। नी त धम क चरन सु हाए। अस िजयँ जा न नाथ प हं आए।। े दो0-धमह न भु पद बमु ख काल बबस दससीस। ते ह प रह र गु न आए सु नहु कोसलाधीस।।38(((क)।। परम चतु रता वन सु न बहँ से रामु उदार। समाचार पु न सब कहे गढ़ क बा लकमार।।38(ख)।। े ु –*–*– रपु क समाचार जब पाए। राम स चव सब नकट बोलाए।। े लंका बाँक चा र दुआरा। क ह ब ध ला गअ करहु बचारा।। े े तब कपीस र छे स बभीषन। सु म र दयँ दनकर कल भू षन।। ु क र बचार त ह मं ढ़ावा। चा र अनी क प कटक बनावा।। ु जथाजोग सेनाप त क हे । जू थप सकल बो ल तब ल हे ।। भु ताप क ह सब समु झाए। सु न क प संघनाद क र धाए।। हर षत राम चरन सर नाव हं। ग ह ग र सखर बीर सब धाव हं।। गज हं तज हं भालु कपीसा। जय रघु बीर कोसलाधीसा।। जानत परम दुग अ त लंका। भु ताप क प चले असंका।।
  • 19.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) घटाटोप क र चहु ँ द स घेर । मु ख हं नसान बजावह ं भेर ।। दो0-जय त राम जय ल छमन जय कपीस सु ीव। गज हं संघनाद क प भालु महा बल सींव।।39।। –*–*– लंकाँ भयउ कोलाहल भार । सु ना दसानन अ त अहँ कार ।। दे खहु बनर ह क र ढठाई। बहँ स नसाचर सेन बोलाई।। े आए क स काल क ेरे। छधावंत सब न सचर मेरे।। े ु अस क ह अ हास सठ क हा। गृह बैठे अहार ब ध द हा।। सु भट सकल चा रहु ँ द स जाहू । ध र ध र भालु क स सब खाहू ।। उमा रावन ह अस अ भमाना। िज म ट भ खग सू त उताना।। चले नसाचर आयसु मागी। ग ह कर भं डपाल बर साँगी।। तोमर मु दर परसु चंडा। सु ल कृ पान प रघ ग रखंडा।। िज म अ नोपल नकर नहार । धाव हं सठ खग मांस अहार ।। च च भंग दुख त ह ह न सू झा। त म धाए मनु जाद अबू झा।। दो0-नानायु ध सर चाप धर जातु धान बल बीर। कोट कगू रि ह च ढ़ गए को ट को ट रनधीर।।40।। ँ –*–*– कोट कगू रि ह सोह हं कसे। मे क सृंग न जनु घन बैसे।। ँ ै े बाज हं ढोल नसान जु झाऊ। सु न धु न होइ भटि ह मन चाऊ।। बाज हं भे र नफ र अपारा। सु न कादर उर जा हं दरारा।। दे ख ह जाइ क प ह क ठ ा। अ त बसाल तनु भालु सु भ ा।। े धाव हं गन हं न अवघट घाटा। पबत फो र कर हं ग ह बाटा।। कटकटा हं को ट ह भट गज हं। दसन ओठ काट हं अ त तज हं।। उत रावन इत राम दोहाई। जय त जय त जय पर लराई।। न सचर सखर समू ह ढहाव हं। क द धर हं क प फ र चलाव हं।। ू े दो0-ध र कधर खंड चंड ककट भालु गढ़ पर डारह ं। ु झपट हं चरन ग ह पट क म ह भिज चलत बहु र पचारह ं।। –*–*– अ त तरल त न ताप तरप हं तम क गढ़ च ढ़ च ढ़ गए। क प भालु च ढ़ मं दर ह जहँ तहँ राम जसु गावत भए।।
  • 20.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) दो0-एक एक न सचर ग ह पु न क प चले पराइ। ु ु ऊपर आपु हे ठ भट गर हं धर न पर आइ।।41।। –*–*– राम ताप बल क पजू था। मद हं न सचर सु भट ब था।। चढ़े दुग पु न जहँ तहँ बानर। जय रघु बीर ताप दवाकर।। चले नसाचर नकर पराई। बल पवन िज म घन समु दाई।। हाहाकार भयउ पु र भार । रोव हं बालक आतु र नार ।। सब म ल दे हं रावन ह गार । राज करत ए हं मृ यु हँ कार ।। नज दल बचल सु नी ते हं काना। फ र सु भट लंकस रसाना।। े े जो रन बमु ख सु ना म काना। सो म हतब कराल कृ पाना।। सबसु खाइ भोग क र नाना। समर भू म भए ब लभ ाना।। उ बचन सु न सकल डेराने। चले ोध क र सु भट लजाने।। स मु ख मरन बीर क सोभा। तब त ह तजा ान कर लोभा।। ै दो0-बहु आयु ध धर सु भट सब भर हं पचा र पचा र। याक ल कए भालु क प प रघ सू लि ह मार ।।42।। ु –*–*– भय आतु र क प भागन लागे। ज य प उमा जी तह हं आगे।। कोउ कह कहँ अंगद हनु मंता। कहँ नल नील दु बद बलवंता।। नज दल बकल सुना हनु माना। पि छम वार रहा बलवाना।। मेघनाद तहँ करइ लराई। टू ट न वार परम क ठनाई।। पवनतनय मन भा अ त ोधा। गजउ बल काल सम जोधा।। क द लंक गढ़ ऊपर आवा। ग ह ग र मेघनाद कहु ँ धावा।। ू भंजेउ रथ सारथी नपाता। ता ह दय महु ँ मारे स लाता।। दुसर सू त बकल ते ह जाना। यंदन घा ल तु रत गृह आना।। दो0-अंगद सु ना पवनसु त गढ़ पर गयउ अकल। े रन बाँक रा बा लसु त तर क चढ़े उ क प खेल।।43।। ु –*–*– जु ब ु वौ बंदर। राम ताप सु म र उर अंतर।। रावन भवन चढ़े वौ धाई। कर ह कोसलाधीस दोहाई।। कलस स हत ग ह भवनु ढहावा। दे ख नसाचरप त भय पावा।।
  • 21.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) ना र बृंद कर पीट हं छाती। अब दुइ क प आए उतपाती।। क पल ला क र त ह ह डेराव हं। रामचं कर सु जसु सु नाव हं।। पु न कर ग ह कचन क खंभा। कहे ि ह क रअ उतपात अरं भा।। ं े गिज परे रपु कटक मझार । लागे मद भु ज बल भार ।। काहु ह लात चपेटि ह कहू । भजहु न राम ह सो फल लेहू ।। े दो0-एक एक स मद हं तो र चलाव हं मु ंड। रावन आग पर हं ते जनु फट हं द ध कंु ड।।44।। ू –*–*– महा महा मु खआ जे पाव हं। ते पद ग ह भु पास चलाव हं।। कहइ बभीषनु त ह क नामा। दे हं राम त हहू नज धामा।। े खल मनु जाद वजा मष भोगी। पाव हं ग त जो जाचत जोगी।। उमा राम मृदु चत क नाकर। बयर भाव सु मरत मो ह न सचर।। दे हं परम ग त सो िजयँ जानी। अस कृ पाल को कहहु भवानी।। अस भु सु न न भज हं म यागी। नर म तमंद ते परम अभागी।। अंगद अ हनु मंत बेसा। क ह दुग अस कह अवधेसा।। लंकाँ वौ क प सोह हं कस। मथ ह संधु दुइ मंदर जैस।। ै दो0-भु ज बल रपु दल दलम ल दे ख दवस कर अंत। कदे जु गल बगत म आए जहँ भगवंत।।45।। ू –*–*– भु पद कमल सीस त ह नाए। दे ख सु भट रघु प त मन भाए।। राम कृ पा क र जु गल नहारे । भए बगत म परम सु खारे ।। गए जा न अंगद हनुमाना। फरे भालु मकट भट नाना।। जातु धान दोष बल पाई। धाए क र दससीस दोहाई।। न सचर अनी दे ख क प फरे । जहँ तहँ कटकटाइ भट भरे ।। वौ दल बल पचा र पचार । लरत सु भट न हं मान हं हार ।। महाबीर न सचर सब कारे । नाना बरन बल मु ख भारे ।। सबल जु गल दल समबल जोधा। कौतुक करत लरत क र ोधा।। ा बट सरद पयोद घनेरे। लरत मनहु ँ मा त क ेरे।। े अ नप अकपन अ अ तकाया। बचलत सेन क ि ह इ ह माया।। ं भयउ न मष महँ अ त अँ धयारा। बृि ट होइ धरोपल छारा।।
  • 22.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) दो0-दे ख न बड़ तम दसहु ँ द स क पदल भयउ खभार। एक ह एक न दे खई जहँ तहँ कर हं पु कार।।46।। –*–*– सकल मरमु रघु नायक जाना। लए बो ल अंगद हनु माना।। समाचार सब क ह समु झाए। सु नत को प क पकंु जर धाए।। पु न कृ पाल हँ स चाप चढ़ावा। पावक सायक सप द चलावा।। भयउ कास कतहु ँ तम नाह ं। यान उदयँ िज म संसय जाह ं।। भालु बल मु ख पाइ कासा। धाए हरष बगत म ासा।। हनू मान अंगद रन गाजे। हाँक सु नत रजनीचर भाजे।। भागत पट पटक हं ध र धरनी। कर हं भालु क प अ ु त करनी।। ग ह पद डार हं सागर माह ं। मकर उरग झष ध र ध र खाह ं।। दो0-कछ मारे कछ घायल कछ गढ़ चढ़े पराइ। ु ु ु गज हं भालु बल मु ख रपु दल बल बचलाइ।।47।। –*–*– नसा जा न क प चा रउ अनी। आए जहाँ कोसला धनी।। राम कृ पा क र चतवा सबह । भए बगत म बानर तबह ।। उहाँ दसानन स चव हँ कारे । सब सन कहे स सु भट जे मारे ।। आधा कटक क प ह संघारा। कहहु बे ग का क रअ बचारा।। ु मा यवंत अ त जरठ नसाचर। रावन मातु पता मं ी बर।। बोला बचन नी त अ त पावन। सु नहु तात कछ मोर सखावन।। ु जब ते तु ह सीता ह र आनी। असगु न हो हं न जा हं बखानी।। बेद पु रान जासु जसु गायो। राम बमु ख काहु ँ न सु ख पायो।। दो0- हर या छ ाता स हत मधु कटभ बलवान। ै जे ह मारे सोइ अवतरे उ कृ पा संधु भगवान।।48(क)।। मासपारायण, पचीसवाँ व ाम काल प खल बन दहन गु नागार घनबोध। सव बरं च जे ह सेव हं तास कवन बरोध।।48(ख)।। –*–*– प रह र बय दे हु बैदेह । भजहु कृ पा न ध परम सनेह ।। ताक बचन बान सम लागे। क रआ मु ह क र जा ह अभागे।। े
  • 23.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) बू ढ़ भए स न त मरतेउँ तोह । अब ज न नयन दे खाव स मोह ।। ते ह अपने मन अस अनु माना। ब यो चहत ए ह कृ पा नधाना।। सो उ ठ गयउ कहत दुबादा। तब सकोप बोलेउ घननादा।। कौतु क ात दे खअहु मोरा। क रहउँ बहु त कह का थोरा।। सु न सु त बचन भरोसा आवा। ी त समेत अंक बैठावा।। करत बचार भयउ भनु सारा। लागे क प पु न चहू ँ दुआरा।। को प क पन ्ह दुघट गढ़ु घेरा। नगर कोलाहलु भयउ घनेरा।। ब बधायु ध धर न सचर धाए। गढ़ ते पबत सखर ढहाए।। छं 0-ढाहे मह धर सखर को ट ह ब बध ब ध गोला चले। घहरात िज म प बपात गजत जनु लय क बादले।। े मकट बकट भट जु टत कटत न लटत तन जजर भए। ग ह सैल ते ह गढ़ पर चलाव हं जहँ सो तहँ न सचर हए।। दो0-मेघनाद सु न वन अस गढ़ु पु न छका आइ। उतय बीर दुग त स मु ख च यो बजाइ।।49।। –*–*– कहँ कोसलाधीस वौ ाता। ध वी सकल लोक ब याता।। कहँ नल नील दु बद सु ीवा। अंगद हनू मंत बल सींवा।। कहाँ बभीषनु ाता ोह । आजु सब ह ह ठ मारउँ ओह ।। अस क ह क ठन बान संधाने। अ तसय ोध वन ल ग ताने।। सर समु ह सो छाड़ै लागा। जनु सप छ धाव हं बहु नागा।। जहँ तहँ परत दे खअ हं बानर। स मु ख होइ न सक ते ह अवसर।। े जहँ तहँ भा ग चले क प र छा। बसर सब ह जु क ईछा।। ै सो क प भालु न रन महँ दे खा। क हे स जे ह न ान अवसेषा।। दो0-दस दस सर सब मारे स परे भू म क प बीर। संहनाद क र गजा मेघनाद बल धीर।।50।। –*–*– दे ख पवनसु त कटक बहाला। ोधवंत जनु धायउ काला।। महासैल एक तु रत उपारा। अ त रस मेघनाद पर डारा।। आवत दे ख गयउ नभ सोई। रथ सारथी तु रग सब खोई।। बार बार पचार हनु माना। नकट न आव मरमु सो जाना।।
  • 24.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) रघु प त नकट गयउ घननादा। नाना भाँ त करे स दुबादा।। अ स आयु ध सब डारे । कौतु कह ं भु का ट नवारे ।। दे ख ताप मू ढ़ ख सआना। करै लाग माया ब ध नाना।। िज म कोउ करै ग ड़ स खेला। डरपावै ग ह व प सपेला।। दो0-जासु बल माया बल सव बरं च बड़ छोट। ता ह दखावइ न सचर नज माया म त खोट।।51।। –*–*– नभ च ढ़ बरष बपु ल अंगारा। म ह ते गट हो हं जलधारा।। नाना भाँ त पसाच पसाची। मा काटु धु न बोल हं नाची।। ब टा पू य धर कच हाड़ा। बरषइ कबहु ँ उपल बहु छाड़ा।। बर ष धू र क हे स अँ धआरा। सू झ न आपन हाथ पसारा।। क प अकलाने माया दे ख। सब कर मरन बना ए ह लेख।। ु कौतु क दे ख राम मु सु काने। भए सभीत सकल क प जाने।। एक बान काट सब माया। िज म दनकर हर त मर नकाया।। कृ पा ि ट क प भालु बलोक। भए बल रन रह हं न रोक।। े े दो0-आयसु मा ग राम प हं अंगदा द क प साथ। ल छमन चले ु होइ बान सरासन हाथ।।52।। –*–*– छतज नयन उर बाहु बसाला। हम ग र नभ तनु कछ एक लाला।। ु इहाँ दसानन सु भट पठाए। नाना अ स ग ह धाए।। भू धर नख बटपायु ध धार । धाए क प जय राम पु कार ।। भरे सकल जो र ह सन जोर । इत उत जय इ छा न हं थोर ।। मु ठक ह लात ह दात ह काट हं। क प जयसील मा र पु न डाट हं।। मा मा ध ध ध मा । सीस तो र ग ह भु जा उपा ।। अ स रव पू र रह नव खंडा। धाव हं जहँ तहँ ं ड चंडा।। दे ख हं कौतु क नभ सु र बृंदा। कबहु ँ क बसमय कबहु ँ अनंदा।। दो0- धर गाड़ भ र भ र ज यो ऊपर धू र उड़ाइ। जनु अँगार रा स ह पर मृतक धू म र यो छाइ।।53।। –*–*– घायल बीर बराज हं कसे। कसु मत कं सु क क त जैसे।। ै ु े
  • 25.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) ल छमन मेघनाद वौ जोधा। भर हं परसपर क र अ त ोधा।। एक ह एक सकइ न हं जीती। न सचर छल बल करइ अनीती।। ोधवंत तब भयउ अनंता। भंजेउ रथ सारथी तु रंता।। नाना ब ध हार कर सेषा। रा छस भयउ ान अवसेषा।। रावन सु त नज मन अनु माना। संकठ भयउ ह र ह मम ाना।। बीरघा तनी छा ड़ स साँगी। तेज पु ंज ल छमन उर लागी।। मु छा भई सि त क लाग। तब च ल गयउ नकट भय याग।। े दो0-मेघनाद सम को ट सत जोधा रहे उठाइ। जगदाधार सेष क म उठै चले ख सआइ।।54।। –*–*– सु नु ग रजा ोधानल जासू । जारइ भु वन चा रदस आसू ।। सक सं ाम जी त को ताह । सेव हं सु र नर अग जग जाह ।। यह कौतू हल जानइ सोई। जा पर कृ पा राम क होई।। ै सं या भइ फ र वौ बाहनी। लगे सँभारन नज नज अनी।। यापक म अिजत भु वने वर। ल छमन कहाँ बू झ क नाकर।। तब ल ग लै आयउ हनु माना। अनु ज दे ख भु अ त दुख माना।। जामवंत कह बैद सु षेना। लंकाँ रहइ को पठई लेना।। ध र लघु प गयउ हनु मंता। आनेउ भवन समेत तु रंता।। दो0-राम पदार बंद सर नायउ आइ सु षेन। कहा नाम ग र औषधी जाहु पवनसु त लेन।।55।। –*–*– राम चरन सर सज उर राखी। चला भंजन सु त बल भाषी।। उहाँ दूत एक मरमु जनावा। रावन कालने म गृह आवा।। दसमु ख कहा मरमु ते हं सु ना। पु न पु न कालने म स धु ना।। दे खत तु ह ह नग जे हं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा।। भिज रघु प त क हत आपना। छाँड़हु नाथ मृषा ज पना।। नील कज तनु सु ंदर यामा। दयँ राखु लोचना भरामा।। ं म त मोर मू ढ़ता यागू । महा मोह न स सू तत जागू ।। काल याल कर भ छक जोई। सपनेहु ँ समर क जी तअ सोई।। दो0-सु न दसकठ रसान अ त ते हं मन क ह बचार। ं
  • 26.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) राम दूत कर मर ब यह खल रत मल भार।।56।। –*–*– अस क ह चला र च स मग माया। सर मं दर बर बाग बनाया।। मा तसु त दे खा सु भ आ म। मु न ह बू झ जल पय जाइ म।। रा छस कपट बेष तहँ सोहा। मायाप त दूत ह चह मोहा।। जाइ पवनसु त नायउ माथा। लाग सो कहै राम गु न गाथा।। होत महा रन रावन राम हं। िजतह हं राम न संसय या म हं।। इहाँ भएँ म दे खेउँ भाई। यान ि ट बल मो ह अ धकाई।। मागा जल ते हं द ह कमंडल। कह क प न हं अघाउँ थोर जल।। सर म जन क र आतु र आवहु । द छा दे उँ यान जे हं पावहु ।। दो0-सर पैठत क प पद गहा मकर ं तब अक लान। ु मार सो ध र दव ्य तनु चल गगन च ढ़ जान।।57।। –*–*– क प तव दरस भइउँ न पापा। मटा तात मु नबर कर सापा।। मु न न होइ यह न सचर घोरा। मानहु स य बचन क प मोरा।। अस क ह गई अपछरा जबह ं। न सचर नकट गयउ क प तबह ं।। कह क प मु न गु रद छना लेहू । पाछ हम ह मं तु ह दे हू ।। सर लंगू र लपे ट पछारा। नज तनु गटे स मरती बारा।। राम राम क ह छाड़े स ाना। सु न मन हर ष चलेउ हनु माना।। दे खा सैल न औषध ची हा। सहसा क प उपा र ग र ल हा।। ग ह ग र न स नभ धावत भयऊ। अवधपु र उपर क प गयऊ।। दो0-दे खा भरत बसाल अ त न सचर मन अनु मा न। बनु फर सायक मारे उ चाप वन ल ग ता न।।58।। –*–*– परे उ मु छ म ह लागत सायक। सु मरत राम राम रघु नायक।। सु न य बचन भरत तब धाए। क प समीप अ त आतु र आए।। बकल बलो क क स उर लावा। जागत न हं बहु भाँ त जगावा।। मु ख मल न मन भए दुखार । कहत बचन भ र लोचन बार ।। जे हं ब ध राम बमुख मो ह क हा। ते हं पु न यह दा न दुख द हा।। ज मोर मन बच अ काया। ी त राम पद कमल अमाया।।
  • 27.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) तौ क प होउ बगत म सू ला। ज मो पर रघु प त अनु क ला।। ू सु नत बचन उ ठ बैठ कपीसा। क ह जय जय त कोसलाधीसा।। सो0-ल ह क प ह उर लाइ पु ल कत तनु लोचन सजल। ी त न दयँ समाइ सु म र राम रघु कल तलक।।59।। ु तात क सल कहु सु ख नधान क । स हत अनु ज अ मातु जानक ।। ु क प सब च रत समास बखाने। भए दुखी मन महु ँ प छताने।। अहह दै व म कत जग जायउँ । भु क एकहु काज न आयउँ ।। े जा न कअवस मन ध र धीरा। पु न क प सन बोले बलबीरा।। ु तात गह होइ ह तो ह जाता। काजु नसाइ ह होत भाता।। चढ़ु मम सायक सैल समेता। पठव तो ह जहँ कृ पा नकता।। े सु न क प मन उपजा अ भमाना। मोर भार च ल ह क म बाना।। राम भाव बचा र बहोर । बं द चरन कह क प कर जोर ।। दो0-तव ताप उर रा ख भु जेहउँ नाथ तु रंत। अस क ह आयसु पाइ पद बं द चलेउ हनु मंत।।60(क)।। भरत बाहु बल सील गु न भु पद ी त अपार। मन महु ँ जात सराहत पु न पु न पवनक मार।।60(ख)।। ु –*–*– उहाँ राम ल छमन हं नहार । बोले बचन मनु ज अनु सार ।। अध रा त गइ क प न हं आयउ। राम उठाइ अनु ज उर लायउ।। सकहु न दु खत दे ख मो ह काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सु भाऊ।। मम हत ला ग तजेहु पतु माता। सहे हु ब पन हम आतप बाता।। सो अनु राग कहाँ अब भाई। उठहु न सु न मम बच बकलाई।। ज जनतेउँ बन बंधु बछोहू । पता बचन मनतेउँ न हं ओहू ।। सु त बत ना र भवन प रवारा। हो हं जा हं जग बार हं बारा।। अस बचा र िजयँ जागहु ताता। मलइ न जगत सहोदर ाता।। जथा पंख बनु खग अ त द ना। म न बनु फ न क रबर कर ह ना।। अस मम िजवन बंधु बनु तोह । ज जड़ दै व िजआवै मोह ।। जैहउँ अवध कवन मु हु लाई। ना र हे तु य भाइ गँवाई।। ब अपजस सहतेउँ जग माह ं। ना र हा न बसेष छ त नाह ं।।
  • 28.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) अब अपलोक सोक सु त तोरा। स ह ह नठु र कठोर उर मोरा।। ु ु नज जननी क एक कमारा। तात तासु तु ह ान अधारा।। े ु स पे स मो ह तु ह ह ग ह पानी। सब ब ध सु खद परम हत जानी।। उत काह दै हउँ ते ह जाई। उ ठ कन मो ह सखावहु भाई।। बहु ब ध सचत सोच बमोचन। वत स लल रािजव दल लोचन।। उमा एक अखंड रघु राई। नर ग त भगत कृ पाल दे खाई।। सो0- भु लाप सु न कान बकल भए बानर नकर। आइ गयउ हनु मान िज म क ना महँ बीर रस।।61।। हर ष राम भटे उ हनु माना। अ त कृ त य भु परम सु जाना।। तु रत बैद तब क ह उपाई। उ ठ बैठे ल छमन हरषाई।। दयँ लाइ भु भटे उ ाता। हरषे सकल भालु क प ाता।। क प पु न बैद तहाँ पहु ँ चावा। जे ह ब ध तब हं ता ह लइ आवा।। यह बृ तांत दसानन सु नेऊ। अ त बषअद पु न पु न सर धु नेऊ।। याक ल कंु भकरन प हं आवा। ब बध जतन क र ता ह जगावा।। ु जागा न सचर दे खअ कसा। मानहु ँ कालु दे ह ध र बैसा।। ै कंु भकरन बू झा कहु भाई। काहे तव मु ख रहे सु खाई।। कथा कह सब ते हं अ भमानी। जे ह कार सीता ह र आनी।। तात क प ह सब न सचर मारे । महामहा जोधा संघारे ।। दुमु ख सु र रपु मनु ज अहार । भट अ तकाय अकपन भार ।। ं अपर महोदर आ दक बीरा। परे समर म ह सब रनधीरा।। दो0-सु न दसकधर बचन तब कंु भकरन बलखान। ं जगदं बा ह र आ न अब सठ चाहत क यान।।62।। –*–*– भल न क ह त न सचर नाहा। अब मो ह आइ जगाए ह काहा।। अजहू ँ तात या ग अ भमाना। भजहु राम होइ ह क याना।। ह दससीस मनु ज रघु नायक। जाक हनू मान से पायक।। े अहह बंधु त क ि ह खोटाई। थम हं मो ह न सु नाए ह आई।। क हे हु भू बरोध ते ह दे वक। सव बरं च सु र जाक सेवक।। े नारद मु न मो ह यान जो कहा। कहतेउँ तो ह समय नरबहा।।
  • 29.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) अब भ र अंक भटु मो ह भाई। लोचन सू फल करौ म जाई।। याम गात सरसी ह लोचन। दे ख जाइ ताप य मोचन।। दो0-राम प गु न सु मरत मगन भयउ छन एक। रावन मागेउ को ट घट मद अ म हष अनेक।।63।। –*–*– म हष खाइ क र म दरा पाना। गजा ब ाघात समाना।। कंु भकरन दुमद रन रं गा। चला दुग तिज सेन न संगा।। दे ख बभीषनु आग आयउ। परे उ चरन नज नाम सु नायउ।। अनु ज उठाइ दयँ ते ह लायो। रघु प त भक् त जा न मन भायो।। तात लात रावन मो ह मारा। कहत परम हत मं बचारा।। ते हं गला न रघु प त प हं आयउँ । दे ख द न भु क मन भायउँ ।। े सु नु सु त भयउ कालबस रावन। सो क मान अब परम सखावन।। ध य ध य त ध य बभीषन। भयहु तात न सचर कल भू षन।। ु बंधु बंस त क ह उजागर। भजेहु राम सोभा सु ख सागर।। दो0-बचन कम मन कपट तिज भजेहु राम रनधीर। जाहु न नज पर सू झ मो ह भयउँ कालबस बीर। 64।। –*–*– बंधु बचन सु न चला बभीषन। आयउ जहँ ैलोक बभू षन।। नाथ भू धराकार सर रा। कंु भकरन आवत रनधीरा।। एतना क प ह सु ना जब काना। कल कलाइ धाए बलवाना।। लए उठाइ बटप अ भू धर। कटकटाइ डार हं ता ऊपर।। को ट को ट ग र सखर हारा। कर हं भालु क प एक एक बारा।। मु र ् यो न मन तनु टर् यो न टार् यो। िज म गज अक फल न को माय ।। तब मा तसु त मु ठका ह यो। पर् यो धर न याकल सर धु यो।। ु पु न उ ठ ते हं मारे उ हनु मता। घु मत भू तल परे उ तु रंता।। ं पु न नल नील ह अव न पछारे स। जहँ तहँ पट क पट क भट डारे स।। चल बल मु ख सेन पराई। अ त भय सत न कोउ समु हाई।। दो0-अंगदा द क प मु छत क र समेत सु ीव। काँख दा ब क पराज कहु ँ चला अ मत बल सींव।।65।। –*–*–
  • 30.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) उमा करत रघु प त नरल ला। खेलत ग ड़ िज म अ हगन मीला।। भृक ट भंग जो काल ह खाई। ता ह क सोहइ ऐ स लराई।। ु जग पाव न क र त ब त रह हं। गाइ गाइ भव न ध नर त रह हं।। मु छा गइ मा तसु त जागा। सु ीव ह तब खोजन लागा।। सु ीवहु क मु छा बीती। नबु क गयउ ते ह मृतक तीती।। ै काटे स दसन ना सका काना। गरिज अकास चलउ ते हं जाना।। गहे उ चरन ग ह भू म पछारा। अ त लाघवँ उ ठ पु न ते ह मारा।। पु न आयसु भु प हं बलवाना। जय त जय त जय कृ पा नधाना।। नाक कान काटे िजयँ जानी। फरा ोध क र भइ मन लानी।। सहज भीम पु न बनु ु त नासा। दे खत क प दल उपजी ासा।। दो0-जय जय जय रघु बंस म न धाए क प दै हू ह। एक ह बार तासु पर छाड़ेि ह ग र त जू ह।।66।। –*–*– कंु भकरन रन रं ग ब ा। स मु ख चला काल जनु ु ा।। को ट को ट क प ध र ध र खाई। जनु ट ड़ी ग र गु हाँ समाई।। को ट ह ग ह सर र सन मदा। को ट ह मीिज मलव म ह गदा।। मु ख नासा वनि ह क ं बाटा। नस र परा हं भालु क प ठाटा।। रन मद म त नसाचर दपा। ब व स ह जनु ए ह ब ध अपा।। मु रे सु भट सब फर हं न फरे । सू झ न नयन सु न हं न हं टे रे।। े कंु भकरन क प फौज बडार । सु न धाई रजनीचर धार ।। दे ख राम बकल कटकाई। रपु अनीक नाना ब ध आई।। दो0-सु नु सु ीव बभीषन अनु ज सँभारे हु सैन। म दे खउँ खल बल दल ह बोले रािजवनैन।।67।। –*–*– कर सारं ग सािज क ट भाथा। अ र दल दलन चले रघु नाथा।। थम क ह भु धनु ष टँ कोरा। रपु दल ब धर भयउ सु न सोरा।। स यसंध छाँड़े सर ल छा। कालसप जनु चले सप छा।। जहँ तहँ चले बपु ल नाराचा। लगे कटन भट बकट पसाचा।। कट हं चरन उर सर भु जदं डा। बहु तक बीर हो हं सत खंडा।। घु म घु म घायल म ह परह ं। उ ठ संभा र सु भट पु न लरह ं।।
  • 31.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) लागत बान जलद िज म गाजह ं। बहु तक दे खी क ठन सर भाज हं।। ं ड चंड मु ंड बनु धाव हं। ध ध मा मा धु न गाव हं।। दो0-छन महु ँ भु क सायकि ह काटे बकट पसाच। े पु न रघु बीर नषंग महु ँ बसे सब नाराच।।68।। –*–*– कंु भकरन मन द ख बचार । ह त धन माझ नसाचर धार ।। भा अ त ु महाबल बीरा। कयो मृगनायक नाद गँ भीरा।। को प मह धर लेइ उपार । डारइ जहँ मकट भट भार ।। आवत दे ख सैल भू भारे । सरि ह का ट रज सम क र डारे ।।। पु न धनु ता न को प रघु नायक। छाँड़े अ त कराल बहु सायक।। तनु महु ँ ब स नस र सर जाह ं। िज म दा म न घन माझ समाह ं।। सो नत वत सोह तन कारे । जनु क जल ग र गे पनारे ।। बकल बलो क भालु क प धाए। बहँ सा जब हं नकट क प आए।। दो0-महानाद क र गजा को ट को ट ग ह क स। म ह पटकइ गजराज इव सपथ करइ दससीस।।69।। –*–*– भागे भालु बल मु ख जू था। बृक बलो क िज म मेष ब था।। ु चले भा ग क प भालु भवानी। बकल पु कारत आरत बानी।। यह न सचर दुकाल सम अहई। क पकल दे स परन अब चहई।। ु कृ पा बा रधर राम खरार । पा ह पा ह नतार त हार ।। सक न बचन सु नत भगवाना। चले सु धा र सरासन बाना।। राम सेन नज पाछ घाल । चले सकोप महा बलसाल ।। ख च धनु ष सर सत संधाने। छ टे तीर सर र समाने।। ू लागत सर धावा रस भरा। कधर डगमगत डोल त धरा।। ु ल ह एक ते हं सैल उपाट । रघु क ल तलक भु जा सोइ काट ।। ु धावा बाम बाहु ग र धार । भु सोउ भु जा का ट म ह पार ।। काट भु जा सोह खल कसा। प छह न मंदर ग र जैसा।। ै उ बलोक न भु ह बलोका। सन चहत मानहु ँ लोका।। े दो0-क र च कार घोर अ त धावा बदनु पसा र। गगन स सु र ा सत हा हा हे त पु का र।।70।।
  • 32.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) –*–*– सभय दे व क ना न ध जा यो। वन जंत सरासनु ता यो।। ब सख नकर न सचर मु ख भरे ऊ। तद प महाबल भू म न परे ऊ।। सरि ह भरा मु ख स मु ख धावा। काल ोन सजीव जनु आवा।। तब भु को प ती सर ल हा। धर ते भ न तासु सर क हा।। सो सर परे उ दसानन आग। बकल भयउ िज म फ न म न याग।। धर न धसइ धर धाव चंडा। तब भु का ट क ह दुइ खंडा।। परे भू म िज म नभ त भू धर। हे ठ दा ब क प भालु नसाचर।। तासु तेज भु बदन समाना। सु र मु न सब हं अचंभव माना।। सु र दुं दभीं बजाव हं हरष हं। अ तु त कर हं सु मन बहु बरष हं।। ु क र बनती सु र सकल सधाए। तेह समय दे व र ष आए।। गगनोप र ह र गु न गन गाए। चर बीररस भु मन भाए।। बे ग हतहु खल क ह मु न गए। राम समर म ह सोभत भए।। छं 0-सं ाम भू म बराज रघु प त अतु ल बल कोसल धनी। म बंद ु मु ख राजीव लोचन अ न तन सो नत कनी।। भु ज जु गल फरत सर सरासन भालु क प चहु द स बने। े कह दास तु लसी क ह न सक छ ब सेष जे ह आनन घने।। दो0- न सचर अधम मलाकर ता ह द ह नज धाम। ग रजा ते नर मंदम त जे न भज हं ीराम।।71।। –*–*– दन क अंत फर ं दोउ अनी। समर भई सु भट ह म घनी।। राम कृ पाँ क प दल बल बाढ़ा। िज म तृन पाइ लाग अ त डाढ़ा।। छ ज हं न सचर दनु अ राती। नज मु ख कह सु कृ त जे ह भाँती।। बहु बलाप दसकधर करई। बंधु सीस पु न पु न उर धरई।। ं रोव हं ना र दय ह त पानी। तासु तेज बल बपु ल बखानी।। मेघनाद ते ह अवसर आयउ। क ह बहु कथा पता समु झायउ।। दे खेहु का ल मो र मनु साई। अब हं बहु त का कर बड़ाई।। इ टदे व स बल रथ पायउँ । सो बल तात न तो ह दे खायउँ ।। ए ह ब ध ज पत भयउ बहाना। चहु ँ दुआर लागे क प नाना।। इत क प भालु काल सम बीरा। उत रजनीचर अ त रनधीरा।।
  • 33.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) लर हं सु भट नज नज जय हे तू । बर न न जाइ समर खगकतू ।। े दो0-मेघनाद मायामय रथ च ढ़ गयउ अकास।। गजउ अ हास क र भइ क प कटक ह ास।।72।। –*–*– सि त सू ल तरवा र कृ पाना। अ स क लसायु ध नाना।। ु डारह परसु प रघ पाषाना। लागेउ बृि ट करै बहु बाना।। दस द स रहे बान नभ छाई। मानहु ँ मघा मेघ झ र लाई।। ध ध मा सु नअ धु न काना। जो मारइ ते ह कोउ न जाना।। ग ह ग र त अकास क प धाव हं। दे ख ह ते ह न दु खत फ र आव हं।। अवघट घाट बाट ग र कदर। माया बल क हे स सर पंजर।। ं जा हं कहाँ याक ल भए बंदर। सु रप त बं द परे जनु मंदर।। ु मा तसु त अंगद नल नीला। क हे स बकल सकल बलसीला।। पु न ल छमन सु ीव बभीषन। सरि ह मा र क हे स जजर तन।। पु न रघु प त स जू झे लागा। सर छाँड़इ होइ लाग हं नागा।। याल पास बस भए खरार । वबस अनंत एक अ बकार ।। नट इव कपट च रत कर नाना। सदा वतं एक भगवाना।। रन सोभा ल ग भु हं बँधायो। नागपास दे व ह भय पायो।। दो0- ग रजा जासु नाम ज प मु न काट हं भव पास। सो क बंध तर आवइ यापक ब व नवास।।73।। –*–*– च रत राम क सगु न भवानी। त क न जा हं बु बल बानी।। े अस बचा र जे त य बरागी। राम ह भज हं तक सब यागी।। याक ल कटक क ह घननादा। पु न भा गट कहइ दुबादा।। ु ु जामवंत कह खल रहु ठाढ़ा। सु न क र ता ह ोध अ त बाढ़ा।। बू ढ़ जा न सठ छाँड़उँ तोह । लागे स अधम पचारै मोह ।। े अस क ह तरल सू ल चलायो। जामवंत कर ग ह सोइ धायो।। मा र स मेघनाद क छाती। परा भू म घु मत सु रघाती।। ै पु न रसान ग ह चरन फरायौ। म ह पछा र नज बल दे खरायो।। बर साद सो मरइ न मारा। तब ग ह पद लंका पर डारा।। इहाँ दे व र ष ग ड़ पठायो। राम समीप सप द सो आयो।।
  • 34.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) दो0-खगप त सब ध र खाए माया नाग ब थ। माया बगत भए सब हरषे बानर जू थ। 74(क)।। ग ह ग र पादप उपल नख धाए क स रसाइ। चले तमीचर बकलतर गढ़ पर चढ़े पराइ।।74(ख)।। –*–*– मेघनाद क मु रछा जागी। पत ह बलो क लाज अ त लागी।। े तु रत गयउ ग रबर कदरा। कर अजय मख अस मन धरा।। ं इहाँ बभीषन मं बचारा। सु नहु नाथ बल अतु ल उदारा।। मेघनाद मख करइ अपावन। खल मायावी दे व सतावन।। ज भु स होइ सो पाइ ह। नाथ बे ग पु न जी त न जाइ ह।। सु न रघु प त अ तसय सु ख माना। बोले अंगदा द क प नाना।। ल छमन संग जाहु सब भाई। करहु बधंस ज य कर जाई।। तु ह ल छमन मारे हु रन ओह । दे ख सभय सु र दुख अ त मोह ।। मारे हु ते ह बल बु उपाई। जे हं छ जै न सचर सु नु भाई।। जामवंत सु ीव बभीषन। सेन समेत रहे हु ती नउ जन।। जब रघु बीर द ि ह अनु सासन। क ट नषंग क स सािज सरासन।। भु ताप उर ध र रनधीरा। बोले घन इव गरा गँभीरा।। ज ते ह आजु बध बनु आव । तौ रघु प त सेवक न कहाव ।। ज सत संकर कर हं सहाई। तद प हतउँ रघु बीर दोहाई।। दो0-रघु प त चरन नाइ स चलेउ तु रंत अनंत। अंगद नील मयंद नल संग सु भट हनु मंत।।75।। –*–*– जाइ क प ह सो दे खा बैसा। आहु त दे त धर अ भसा।। क ह क प ह सब ज य बधंसा। जब न उठइ तब कर हं संसा।। तद प न उठइ धरे ि ह कच जाई। लाति ह ह त ह त चले पराई।। लै सु ल धावा क प भागे। आए जहँ रामानु ज आगे।। आवा परम ोध कर मारा। गज घोर रव बार हं बारा।। को प म तसु त अंगद धाए। ह त सू ल उर धर न गराए।। भु कहँ छाँड़े स सू ल चंडा। सर ह त कृ त अनंत जु ग खंडा।। उ ठ बहो र मा त जु बराजा। हत हं को प ते ह घाउ न बाजा।।
  • 35.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) फरे बीर रपु मरइ न मारा। तब धावा क र घोर चकारा।। आवत दे ख ु जनु काला। ल छमन छाड़े ब सख कराला।। दे खे स आवत प ब सम बाना। तु रत भयउ खल अंतरधाना।। ब बध बेष ध र करइ लराई। कबहु ँ क गट कबहु ँ दु र जाई।। दे ख अजय रपु डरपे क सा। परम ु ल छमन मन अस मं तब भयउ अह सा।। ढ़ावा। ए ह पा प ह म बहु त खेलावा।। सु म र कोसलाधीस तापा। सर संधान क ह क र दापा।। छाड़ा बान माझ उर लागा। मरती बार कपटु सब यागा।। दो0-रामानु ज कहँ रामु कहँ अस क ह छाँड़े स ान। ध य ध य तव जननी कह अंगद हनु मान।।76।। –*–*– बनु यास हनु मान उठायो। लंका वार रा ख पु न आयो।। तासु मरन सु न सु र गंधबा। च ढ़ बमान आए नभ सबा।। बर ष सु मन दुं दभीं बजाव हं। ीरघु नाथ बमल जसु गाव हं।। ु जय अनंत जय जगदाधारा। तु ह भु सब दे वि ह न तारा।। अ तु त क र सु र स सधाए। ल छमन कृ पा स धु प हं आए।। सु त बध सु ना दसानन जबह ं। मु छत भयउ परे उ म ह तबह ं।। मंदोदर दन कर भार । उर ताड़न बहु भाँ त पु कार ।। नगर लोग सब याकल सोचा। सकल कह हं दसकधर पोचा।। ु ं दो0-तब दसकठ ब बध ब ध समु झा सब ना र। ं न वर प जगत सब दे खहु दयँ बचा र।।77।। –*–*– त ह ह यान उपदे सा रावन। आपु न मंद कथा सु भ पावन।। पर उपदे स कसल बहु तेरे। जे आचर हं ते नर न घनेरे।। ु नसा सरा न भयउ भनु सारा। लगे भालु क प चा रहु ँ वारा।। सु भट बोलाइ दसानन बोला। रन स मु ख जा कर मन डोला।। सो अबह ं ब जाउ पराई। संजु ग बमु ख भएँ न भलाई।। नज भु ज बल म बय बढ़ावा। दे हउँ उत जो रपु च ढ़ आवा।। अस क ह म त बेग रथ साजा। बाजे सकल जु झाऊ बाजा।। चले बीर सब अतु लत बल । जनु क जल क आँधी चल ।। ै
  • 36.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) असगु न अ मत हो हं ते ह काला। गनइ न भु जबल गब बसाला।। छं 0-अ त गब गनइ न सगु न असगु न व हं आयु ध हाथ ते। भट गरत रथ ते बािज गज च करत भाज हं साथ ते।। गोमाय गीध कराल खर रव वान बोल हं अ त घने। जनु कालदूत उलू क बोल हं बचन परम भयावने।। दो0-ता ह क संप त सगु न सु भ सपनेहु ँ मन ब ाम। भू त ोह रत मोहबस राम बमु ख र त काम।।78।। –*–*– चलेउ नसाचर कटक अपारा। चतु रं गनी अनी बहु धारा।। ु ब बध भाँ त बाहन रथ जाना। बपु ल बरन पताक वज नाना।। चले म त गज जू थ घनेरे। ा बट जलद म त जनु ेरे।। बरन बरद बरदै त नकाया। समर सू र जान हं बहु माया।। अ त ब च बा हनी बराजी। बीर बसंत सेन जनु साजी।। चलत कटक दग सधु ंर डगह ं। छ भत पयो ध कधर डगमगह ं।। ु ु उठ रे नु र ब गयउ छपाई। म त थ कत बसु धा अक लाई।। ु पनव नसान घोर रव बाज हं। लय समय क घन जनु गाज हं।। े भे र नफ र बाज सहनाई। मा राग सु भट सु खदाई।। कह र नाद बीर सब करह ं। नज नज बल पौ ष उ चरह ं।। े कहइ दसानन सु नहु सु भ ा। मदहु भालु क प ह क ठ ा।। े ह मा रहउँ भू प वौ भाई। अस क ह स मु ख फौज रगाई।। यह सु ध सकल क प ह जब पाई। धाए क र रघु बीर दोहाई।। छं 0-धाए बसाल कराल मकट भालु काल समान ते। मानहु ँ सप छ उड़ा हं भू धर बृंद नाना बान ते।। नख दसन सैल महा मायु ध सबल संक न मानह ं। ु जय राम रावन म त गज मृगराज सु जसु बखानह ं।। दो0-दुहु द स जय जयकार क र नज नज जोर जा न। भरे बीर इत राम ह उत रावन ह बखा न।।79।। –*–*– रावनु रथी बरथ रघु बीरा। दे ख बभीषन भयउ अधीरा।। अ धक ी त मन भा संदेहा। बं द चरन कह स हत सनेहा।।
  • 37.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) नाथ न रथ न हं तन पद ाना। क ह ब ध िजतब बीर बलवाना।। े सुनहु सखा कह कृ पा नधाना। जे हं जय होइ सो यंदन आना।। सौरज धीरज ते ह रथ चाका। स य सील ढ़ वजा पताका।। बल बबेक दम पर हत घोरे । छमा कृ पा समता रजु जोरे ।। ईस भजनु सारथी सु जाना। बर त चम संतोष कृ पाना।। दान परसु बु ध सि त चंड़ा। बर ब यान क ठन कोदं डा।। अमल अचल मन ोन समाना। सम जम नयम सल मु ख नाना।। कवच अभेद ब गु र पू जा। ए ह सम बजय उपाय न दूजा।। सखा धममय अस रथ जाक। जीतन कहँ न कतहु ँ रपु ताक।। दो0-महा अजय संसार रपु जी त सकइ सो बीर। जाक अस रथ होइ ढ़ सु नहु सखा म तधीर।।80(क)।। सु न भु बचन बभीषन हर ष गहे पद कज। ं ए ह मस मो ह उपदे सेहु राम कृ पा सु ख पु ंज।।80(ख)।। उत पचार दसकधर इत अंगद हनु मान। ं लरत नसाचर भालु क प क र नज नज भु आन।।80(ग)।। –*–*– सु र मा द स मु न नाना। दे खत रन नभ चढ़े बमाना।। हमहू उमा रहे ते ह संगा। दे खत राम च रत रन रं गा।। सु भट समर रस दुहु द स माते। क प जयसील राम बल ताते।। एक एक सन भर हं पचार हं। एक ह एक म द म ह पार हं।। मार हं काट हं धर हं पछार हं। सीस तो र सीस ह सन मार हं।। उदर बदार हं भु जा उपार हं। ग ह पद अव न पट क भट डार हं।। न सचर भट म ह गाड़ ह भालू । ऊपर ढा र दे हं बहु बालू ।। बीर ब लमु ख जु ब े। दे खअत बपु ल काल जनु ु े।। छं 0- ु े कृ तांत समान क प तन वत सो नत राजह ं। मद हं नसाचर कटक भट बलवंत घन िज म गाजह ं।। मार हं चपेटि ह डा ट दात ह का ट लात ह मीजह ं। च कर हं मकट भालु छल बल कर हं जे हं खल छ जह ं।। ध र गाल फार हं उर बदार हं गल अँताव र मेलह ं।
  • 38.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) हलादप त जनु ब बध तनु ध र समर अंगन खेलह ं।। ध मा काटु पछा घोर गरा गगन म ह भ र रह । जय राम जो तृन ते क लस कर क लस ते कर तृन सह ।। ु ु दो0- नज दल बचलत दे खे स बीस भु जाँ दस चाप। रथ च ढ़ चलेउ दसानन फरहु फरहु क र दाप।।81।। –*–*– धायउ परम ु दसकधर। स मु ख चले हू ह दै बंदर।। ं ग ह कर पादप उपल पहारा। डारे ि ह ता पर एक हं बारा।। लाग हं सैल ब तन तासू । खंड खंड होइ फट हं आसू ।। ू चला न अचल रहा रथ रोपी। रन दुमद रावन अ त कोपी।। इत उत झप ट दप ट क प जोधा। मद लाग भयउ अ त ोधा।। चले पराइ भालु क प नाना। ा ह ा ह अंगद हनु माना।। पा ह पा ह रघु बीर गोसाई। यह खल खाइ काल क नाई।। ते ह दे खे क प सकल पराने। दसहु ँ चाप सायक संधाने।। छं 0-संधा न धनु सर नकर छाड़े स उरग िज म उ ड़ लागह ं। रहे पू र सर धरनी गगन द स बद स कहँ क प भागह ं।। भयो अ त कोलाहल बकल क प दल भालु बोल हं आतु रे। रघु बीर क ना संधु आरत बंधु जन र छक हरे ।। दो0- नज दल बकल दे ख क ट क स नषंग धनु हाथ। ल छमन चले ु होइ नाइ राम पद माथ।।82।। –*–*– रे खल का मार स क प भालू । मो ह बलोक तोर म कालू ।। ु खोजत रहे उँ तो ह सु तघाती। आजु नपा त जु ड़ावउँ छाती।। अस क ह छाड़े स बान चंडा। ल छमन कए सकल सत खंडा।। को ट ह आयु ध रावन डारे । तल वान क र का ट नवारे ।। पु न नज बान ह क ह हारा। यंदनु भंिज सारथी मारा।। सत सत सर मारे दस भाला। ग र सृंगन ह जनु ् बस हं याला।। पु न सत सर मारा उर माह ं। परे उ धर न तल सु ध कछ नाह ं।। ु उठा बल पु न मु छा जागी। छा ड़ स छं 0-सो म द ि ह जो साँगी।। म द त चंड सि त अनंत उर लागी सह ।
  • 39.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) पय बीर बकल उठाव दसमु ख अतु ल बल म हमा रह ।। मांड भवन बराज जाक एक सर िज म रज कनी। ते ह चह उठावन मू ढ़ रावन जान न हं भु अन धनी।। दो0-दे ख पवनसु त धायउ बोलत बचन कठोर। आवत क प ह ह यो ते हं मु ि ट हार घोर।।83।। –*–*– जानु टे क क प भू म न गरा। उठा सँभा र बहु त रस भरा।। मु ठका एक ता ह क प मारा। परे उ सैल जनु ब हारा।। मु छा गै बहो र सो जागा। क प बल बपु ल सराहन लागा।। धग धग मम पौ ष धग मोह । ज त िजअत रहे स सु र ोह ।। अस क ह ल छमन कहु ँ क प यायो। दे ख दसानन बसमय पायो।। कह रघु बीर समु झु िजयँ ाता। तु ह कृ तांत भ छक सु र ाता।। सु नत बचन उ ठ बैठ कृ पाला। गई गगन सो सक त कराला।। पु न कोदं ड बान ग ह धाए। रपु स मु ख अ त आतु र आए।। छं 0-आतु र बहो र बभंिज यंदन सू त ह त याकल कयो। ु गर् यो धर न दसकधर बकलतर बान सत बे यो हयो।। ं सारथी दूसर घा ल रथ ते ह तु रत लंका लै गयो। रघु बीर बंधु ताप पु ंज बहो र भु चरनि ह नयो।। दो0-उहाँ दसानन जा ग क र करै लाग कछ ज य। ु राम बरोध बजय चह सठ हठ बस अ त अ य।।84।। –*–*– इहाँ बभीषन सब सु ध पाई। सप द जाइ रघु प त ह सु नाई।। नाथ करइ रावन एक जागा। स भएँ न हं म र ह अभागा।। पठवहु नाथ बे ग भट बंदर। कर हं बधंस आव दसकधर।। ं ात होत भु सु भट पठाए। हनु मदा द अंगद सब धाए।। कौतु क क द चढ़े क प लंका। पैठे रावन भवन असंका।। ू ज य करत जबह ं सो दे खा। सकल क प ह भा ोध बसेषा।। रन ते नलज भािज गृह आवा। इहाँ आइ बक यान लगावा।। अस क ह अंगद मारा लाता। चतव न सठ वारथ मन राता।। छं 0-न हं चतव जब क र कोप क प ग ह दसन लात ह मारह ं।
  • 40.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) ध र कस ना र नका र बाहे र तेऽ तद न पु कारह ं।। े तब उठे उ ु कृ तांत सम ग ह चरन बानर डारई। ए ह बीच क प ह बधंस कृ त मख दे ख मन महु ँ हारई।। दो0-ज य बधं स कसल क प आए रघु प त पास। ु चलेउ नसाचर ु होइ या ग िजवन क आस।।85।। ै –*–*– चलत हो हं अ त असु भ भयंकर। बैठ हं गीध उड़ाइ सर ह पर।। भयउ कालबस काहु न माना। कहे स बजावहु जु नसाना।। चल तमीचर अनी अपारा। बहु गज रथ पदा त असवारा।। भु स मु ख धाए खल कस। सलभ समू ह अनल कहँ जस।। इहाँ दे वत ह अ तु त क ह । दा न बप त हम ह ए हं द ह ।। अब ज न राम खेलावहु एह । अ तसय दु खत हो त बैदेह ।। दे व बचन सु न भु मु सकाना। उ ठ रघु बीर सु धारे बाना। जटा जू ट ढ़ बाँधै माथे। सोह हं सु मन बीच बच गाथे।। अ न नयन बा रद तनु यामा। अ खल लोक लोचना भरामा।। क टतट प रकर क यो नषंगा। कर कोदं ड क ठन सारं गा।। छं 0-सारं ग कर सु ंदर नषंग सल मु खाकर क ट क यो। भु जदं ड पीन मनोहरायत उर धरासु र पद ल यो।। कह दास तु लसी जब हं भु सर चाप कर फरन लगे। े मांड द गज कमठ अ ह म ह संधु भू धर डगमगे।। दो0-सोभा दे ख हर ष सु र बरष हं सु मन अपार। जय जय जय क ना न ध छ ब बल गु न आगार।।86।। –*–*– एह ं बीच नसाचर अनी। कसमसात आई अ त घनी। दे ख चले स मु ख क प भ ा। लयकाल क जनु घन घ ा।। े बहु कृ पान तरवा र चमंक हं। जनु दहँ द स दा मनीं दमंक हं।। गज रथ तु रग चकार कठोरा। गज हं मनहु ँ बलाहक घोरा।। क प लंगू र बपु ल नभ छाए। मनहु ँ इं धनु उए सु हाए।। उठइ धू र मानहु ँ जलधारा। बान बु ंद भै बृि ट अपारा।। दुहु ँ द स पबत कर हं हारा। ब पात जनु बार हं बारा।।
  • 41.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) रघु प त को प बान झ र लाई। घायल भै न सचर समु दाई।। लागत बान बीर च करह ं। घु म घु म जहँ तहँ म ह परह ं।। व हं सैल जनु नझर भार । सो नत स र कादर भयकार ।। छं 0-कादर भयंकर धर स रता चल परम अपावनी। दोउ कल दल रथ रे त च ू अबत बह त भयावनी।। जल जंतु गज पदचर तु रग खर ब बध बाहन को गने। सर सि त तोमर सप चाप तरं ग चम कमठ घने।। दो0-बीर पर हं जनु तीर त म जा बहु बह फन। े कादर दे ख डर हं तहँ सु भट ह क मन चेन।।87।। े –*–*– म ज ह भू त पसाच बेताला। मथ महा झो टंग कराला।। काक कक लै भु जा उड़ाह ं। एक ते छ न एक लै खाह ं।। ं एक कह हं ऐ सउ स घाई। सठहु तु हार द र न जाई।। कहँ रत भट घायल तट गरे । जहँ तहँ मनहु ँ अधजल परे ।। खच हं गीध आँत तट भए। जनु बंसी खेलत चत दए।। बहु भट बह हं चढ़े खग जाह ं। जनु नाव र खेल हं स र माह ं।। जो ग न भ र भ र ख पर संच हं। भू त पसाच बधू नभ नंच हं।। भट कपाल करताल बजाव हं। चामु ंडा नाना ब ध गाव हं।। जंबु क नकर कट कट क हं। खा हं हु आ हं अघा हं दप हं।। को ट ह ं ड मु ंड बनु डो ल हं। सीस परे म ह जय जय बो ल हं।। छं 0-बो ल हं जो जय जय मु ंड ं ड चंड सर बनु धावह ं। ख प र ह ख ग अलु ि झ जु झ हं सु भट भट ह ढहावह ं।। बानर नसाचर नकर मद हं राम बल द पत भए। सं ाम अंगन सु भट सोव हं राम सर नकरि ह हए।। दो0-रावन दयँ बचारा भा न सचर संघार। म अकल क प भालु बहु माया कर अपार।।88।। े –*–*– दे व ह भु ह पयाद दे खा। उपजा उर अ त छोभ बसेषा।। सु रप त नज रथ तु रत पठावा। हरष स हत मात ल लै आवा।। तेज पु ंज रथ द य अनू पा। हर ष चढ़े कोसलपु र भू पा।।
  • 42.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) चंचल तु रग मनोहर चार । अजर अमर मन सम ग तकार ।। रथा ढ़ रघु नाथ ह दे खी। धाए क प बलु पाइ बसेषी।। सह न जाइ क प ह क मार । तब रावन माया ब तार ।। ै सो माया रघु बीर ह बाँची। ल छमन क प ह सो मानी साँची।। दे खी क प ह नसाचर अनी। अनु ज स हत बहु कोसलधनी।। छं 0-बहु राम ल छमन दे ख मकट भालु मन अ त अपडरे । जनु च ल खत समेत ल छमन जहँ सो तहँ चतव हं खरे ।। नज सेन च कत बलो क हँ स सर चाप सिज कोसल धनी। माया हर ह र न मष महु ँ हरषी सकल मकट अनी।। दो0-बहु र राम सब तन चतइ बोले बचन गँ भीर। वंदजु दे खहु सकल मत भए अ त बीर।।89।। –*–*– अस क ह रथ रघु नाथ चलावा। ब चरन पंकज स नावा।। तब लंकस े ोध उर छावा। गजत तजत स मु ख धावा।। जीतेहु जे भट संजु ग माह ं। सु नु तापस म त ह सम नाह ं।। रावन नाम जगत जस जाना। लोकप जाक बंद खाना।। खर दूषन बराध तु ह मारा। बधेहु याध इव बा ल बचारा।। न सचर नकर सु भट संघारे हु । कंु भकरन घननाद ह मारे हु ।। आजु बय सबु लेउँ नबाह । ज रन भू प भािज न हं जाह ं।। आजु करउँ खलु काल हवाले। परे हु क ठन रावन क पाले।। े सु न दुबचन कालबस जाना। बहँ स बचन कह कृ पा नधाना।। स य स य सब तव भु ताई। ज प स ज न दे खाउ मनु साई।। छं 0-ज न ज पना क र सु जसु नास ह नी त सु न ह कर ह छमा। संसार महँ पू ष बध पाटल रसाल पनस समा।। एक सु मन द एक सु मन फल एक फलइ कवल लागह ं। े एक कह हं कह हं कर हं अपर एक कर हं कहत न बागह ं।। दो0-राम बचन सु न बहँ सा मो ह सखावत यान। बय करत न हं तब डरे अब लागे य ान।।90।। –*–*– क ह दुबचन ु दसकधर। क लस समान लाग छाँड़ै सर।। ं ु
  • 43.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) नानाकार सल मु ख धाए। द स अ ब दस गगन म ह छाए।। पावक सर छाँड़उ रघु बीरा। छन महु ँ जरे नसाचर तीरा।। े छा ड़ स ती सि त ख सआई। बान संग भु फ र चलाई।। े को टक च सू ल पबारै । बनु यास भु का ट नवारै ।। नफल हो हं रावन सर कस। खल क सकल मनोरथ जैस।। ै े तब सत बान सारथी मारे स। परे उ भू म जय राम पु कारे स।। राम कृ पा क र सू त उठावा। तब भु परम छं 0-भए ु जु ब ोध कहु ँ पावा।। रघु प त ोन सायक कसमसे। कोदं ड धु न अ त चंड सु न मनु जाद सब मा त से।। मँदोदर उर कप कप त कमठ भू भू धर से। ं ं च कर हं द गज दसन ग ह म ह दे ख कौतु क सु र हँ से।। दो0-तानेउ चाप वन ल ग छाँड़े ब सख कराल। राम मारगन गन चले लहलहात जनु याल।।91।। –*–*– चले बान सपच ्छ जनु उरगा। थम हं हतेउ सारथी तु रगा।। रथ बभंिज ह त कतु पताका। गजा अ त अंतर बल थाका।। े तु रत आन रथ च ढ़ ख सआना। अ स छाँड़े स ब ध नाना।। बफल हो हं सब उ यम ताक। िज म पर ोह नरत मनसा क।। े े तब रावन दस सू ल चलावा। बािज चा र म ह मा र गरावा।। तु रग उठाइ को प रघु नायक। ख च सरासन छाँड़े सायक।। रावन सर सरोज बनचार । च ल रघु बीर सल मु ख धार ।। दस दस बान भाल दस मारे । नस र गए चले वत धर पनारे ।। धर धायउ बलवाना। भु पु न कृ त धनु सर संधाना।। तीस तीर रघु बीर पबारे । भु जि ह समेत सीस म ह पारे ।। काटतह ं पु न भए नबीने। राम बहो र भु जा सर छ ने।। भु बहु बार बाहु सर हए। कटत झ ट त पु न नू तन भए।। पु न पु न भु काटत भु ज सीसा। अ त कौतु क कोसलाधीसा।। रहे छाइ नभ सर अ बाहू । मानहु ँ अ मत कतु अ राहू ।। े छं 0-जनु राहु कतु अनेक नभ पथ े वत सो नत धावह ं।
  • 44.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) रघु बीर तीर चंड लाग हं भू म गरन न पावह ं।। एक एक सर सर नकर छे दे नभ उड़त इ म सोहह ं। जनु को प दनकर कर नकर जहँ तहँ बधु ंतु द पोहह ं।। दो0-िज म िज म भु हर तासु सर त म त म हो हं अपार। सेवत बषय बबध िज म नत नत नू तन मार।।92।। –*–*– दसमु ख दे ख सरन ्ह क बाढ़ । बसरा मरन भई रस गाढ़ ।। ै गजउ मू ढ़ महा अ भमानी। धायउ दसहु सरासन तानी।। समर भू म दसकधर को यो। बर ष बान रघु प त रथ तो यो।। ं दं ड एक रथ दे ख न परे ऊ। जनु नहार महु ँ दनकर दुरेऊ।। हाहाकार सु र ह जब क हा। तब भु को प कारमु क ल हा।। सर नवा र रपु क सर काटे । ते द स ब दस गगन म ह पाटे ।। े काटे सर नभ मारग धाव हं। जय जय धु न क र भय उपजाव हं।। कहँ ल छमन सु ीव कपीसा। कहँ रघु बीर कोसलाधीसा।। छं 0-कहँ रामु क ह सर नकर धाए दे ख मकट भिज चले। संधा न धनु रघु बंसम न हँ स सरि ह सर बेधे भले।। सर मा लका कर का लका ग ह बृंद बृंदि ह बहु मल ं। कर धर स र म जनु मनहु ँ सं ाम बट पू जन चल ं।। दो0-पु न दसकठ ु ं होइ छाँड़ी सि त चंड। चल बभीषन स मु ख मनहु ँ काल कर दं ड।।93।। –*–*– आवत दे ख सि त अ त घोरा। नतार त भंजन पन मोरा।। तु रत बभीषन पाछ मेला। स मु ख राम सहे उ सोइ सेला।। ला ग सि त मु छा कछ भई। भु कृ त खेल सु र ह बकलई।। ु दे ख बभीषन भु म पायो। ग ह कर गदा ु होइ धायो।। रे कभा य सठ मंद कबु े। त सु र नर मु न नाग ब ु ु े।। सादर सव कहु ँ सीस चढ़ाए। एक एक क को ट ह पाए।। े ते ह कारन खल अब ल ग बाँ यो। अब तव कालु सीस पर ना यो।। राम बमु ख सठ चह स संपदा। अस क ह हने स माझ उर गदा।। छं 0-उर माझ गदा हार घोर कठोर लागत म ह पर् यो।
  • 45.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) दस बदन सो नत वत पु न संभा र धायो रस भर् यो।। वौ भरे अ तबल म लजु ब एक एक ह हनै। ु रघु बीर बल द पत बभीषनु घा ल न हं ता कहु ँ गनै।। दो0-उमा बभीषनु रावन ह स मु ख चतव क काउ। सो अब भरत काल य ीरघु बीर भाउ।।94।। –*–*– दे खा मत बभीषनु भार । धायउ हनू मान ग र धार ।। रथ तु रंग सारथी नपाता। दय माझ ते ह मारे स लाता।। ठाढ़ रहा अ त क पत गाता। गयउ बभीषनु जहँ जन ाता।। ं पु न रावन क प हतेउ पचार । चलेउ गगन क प पूँछ पसार ।। ग ह स पूँछ क प स हत उड़ाना। पु न फ र भरे उ बल हनु माना।। लरत अकास जु गल सम जोधा। एक ह एक हनत क र ु ोधा।। सोह हं नभ छल बल बहु करह ं। क जल ग र सु मे जनु लरह ं।। बु ध बल न सचर परइ न पार् यो। तब मा त सु त भु संभार् यो।। छं 0-संभा र ीरघु बीर धीर पचा र क प रावनु ह यो। म ह परत पु न उ ठ लरत दे व ह जु गल कहु ँ जय जय भ यो।। हनु मंत संकट दे ख मकट भालु ोधातु र चले। रन म त रावन सकल सु भट चंड भु ज बल दलमले।। दो0-तब रघु बीर पचारे धाए क स चंड। क प बल बल दे ख ते हं क ह गट पाषंड।।95।। –*–*– अंतरधान भयउ छन एका। पु न गटे खल प अनेका।। रघु प त कटक भालु क प जेते। जहँ तहँ गट दसानन तेते।। दे खे क प ह अ मत दससीसा। जहँ तहँ भजे भालु अ क सा।। भागे बानर धर हं न धीरा। ा ह ा ह ल छमन रघु बीरा।। दहँ द स धाव हं को ट ह रावन। गज हं घोर कठोर भयावन।। डरे सकल सु र चले पराई। जय क आस तजहु अब भाई।। ै सब सु र िजते एक दसकधर। अब बहु भए तकहु ग र कदर।। ं ं रहे बरं च संभु मु न यानी। िज ह िज ह भु म हमा कछ जानी।। ु छं 0-जाना ताप ते रहे नभय क प ह रपु माने फरे । ु
  • 46.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) चले बच ल मकट भालु सकल कृ पाल पा ह भयातु रे।। हनु मंत अंगद नील नल अ तबल लरत रन बाँक रे । ु मद हं दसानन को ट को ट ह कपट भू भट अंक रे ।। ु दो0-सु र बानर दे खे बकल हँ यो कोसलाधीस। सिज सारं ग एक सर हते सकल दससीस।।96।। –*–*– भु छन महु ँ माया सब काट । िज म र ब उएँ जा हं तम फाट ।। रावनु एक दे ख सु र हरषे। फरे सु मन बहु भु पर बरषे।। ु भु ज उठाइ रघु प त क प फरे । फरे एक एक ह तब टे रे।। े भु बलु पाइ भालु क प धाए। तरल तम क संजु ग म ह आए।। अ तु त करत दे वति ह दे ख। भयउँ एक म इ ह क लेख।। े सठहु सदा तु ह मोर मरायल। अस क ह को प गगन पर धायल।। हाहाकार करत सु र भागे। खलहु जाहु कहँ मोर आगे।। दे ख बकल सु र अंगद धायो। क द चरन ग ह भू म गरायो।। ू छं 0-ग ह भू म पार् यो लात मार् यो बा लसु त भु प हं गयो। संभा र उ ठ दसकठ घोर कठोर रव गजत भयो।। ं क र दाप चाप चढ़ाइ दस संधा न सर बहु बरषई। कए सकल भट घायल भयाक ल दे ख नज बल हरषई।। ु दो0-तब रघु प त रावन क सीस भु जा सर चाप। े काटे बहु त बढ़े पु न िज म तीरथ कर पाप। 97।। –*–*– सर भु ज बा ढ़ दे ख रपु कर । भालु क प ह रस भई घनेर ।। े मरत न मू ढ़ कटे उ भु ज सीसा। धाए को प भालु भट क सा।। बा लतनय मा त नल नीला। बानरराज दु बद बलसीला।। बटप मह धर कर हं हारा। सोइ ग र त ग ह क प ह सो मारा।। एक नखि ह रपु बपु ष बदार । भअ ग चल हं एक लात ह मार ।। तब नल नील सरि ह च ढ़ गयऊ। नखि ह ललार बदारत भयऊ।। धर दे ख बषाद उर भार । त ह ह धरन कहु ँ भु जा पसार ।। गहे न जा हं करि ह पर फरह ं। जनु जु ग मधु प कमल बन चरह ं।। को प क द वौ धरे स बहोर । म ह पटकत भजे भु जा मरोर ।। ू
  • 47.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) पु न सकोप दस धनु कर ल हे । सरि ह मा र घायल क प क हे ।। हनु मदा द मु छत क र बंदर। पाइ दोष हरष दसकधर।। ं मु छत दे ख सकल क प बीरा। जामवंत धायउ रनधीरा।। संग भालु भू धर त धार । मारन लगे पचा र पचार ।। भयउ ु रावन बलवाना। ग ह पद म ह पटकइ भट नाना।। दे ख भालु प त नज दल घाता। को प माझ उर मारे स लाता।। छं 0-उर लात घात चंड लागत बकल रथ ते म ह परा। ग ह भालु बीसहु ँ कर मनहु ँ कमलि ह बसे न स मधु करा।। मु छत बलो क बहो र पद ह त भालु प त भु प हं गयौ। न स जा न यंदन घा ल ते ह तब सू त जतनु करत भयो।। दो0-मु छा बगत भालु क प सब आए भु पास। न सचर सकल रावन ह घे र रहे अ त ास।।98।। मासपारायण, छ बीसवाँ व ाम –*–*– तेह न स सीता प हं जाई। जटा क ह सब कथा सु नाई।। सर भु ज बा ढ़ सु नत रपु कर । सीता उर भइ ास घनेर ।। े मु ख मल न उपजी मन चंता। जटा सन बोल तब सीता।। होइ ह कहा कह स कन माता। क ह ब ध म र ह ब व दुखदाता।। े रघु प त सर सर कटे हु ँ न मरई। ब ध बपर त च रत सब करई।। मोर अभा य िजआवत ओह । जे हं हौ ह र पद कमल बछोह ।। जे हं कृ त कपट कनक मृग झू ठा। अजहु ँ सो दै व मो ह पर ठा।। जे हं ब ध मो ह दुख दुसह सहाए। ल छमन कहु ँ कटु बचन कहाए।। रघु प त बरह स बष सर भार । त क त क मार बार बहु मार ।। ऐसेहु ँ दुख जो राख मम ाना। सोइ ब ध ता ह िजआव न आना।। बहु ब ध कर बलाप जानक । क र क र सु र त कृ पा नधान क ।। कह जटा सु नु राजक मार । उर सर लागत मरइ सु रार ।। ु भु ताते उर हतइ न तेह । ए ह क दयँ बस त बैदेह ।। े छं 0-ए ह क दयँ बस जानक जानक उर मम बास है । े मम उदर भु अन अनेक लागत बान सब कर नास है ।।
  • 48.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) सु न बचन हरष बषाद मन अ त दे ख पु न जटाँ कहा। अब म र ह रपु ए ह ब ध सु न ह सु ंद र तज ह संसय महा।। दो0-काटत सर होइ ह बकल छ ट जाइ ह तव यान। ु तब रावन ह दय महु ँ म रह हं रामु सु जान।।99।। –*–*– अस क ह बहु त भाँ त समु झाई। पु न जटा नज भवन सधाई।। राम सु भाउ सु म र बैदेह । उपजी बरह बथा अ त तेह ।। न स ह स स ह नंद त बहु भाँती। जु ग सम भई सरा त न राती।। कर त बलाप मन हं मन भार । राम बरहँ जानक दुखार ।। जब अ त भयउ बरह उर दाहू । फरकउ बाम नयन अ बाहू ।। े सगु न बचा र धर मन धीरा। अब म लह हं कृ पाल रघु बीरा।। इहाँ अध न स रावनु जागा। नज सार थ सन खीझन लागा।। सठ रनभू म छड़ाइ स मोह । धग धग अधम मंदम त तोह ।। ते हं पद ग ह बहु ब ध समु झावा। भौ भएँ रथ च ढ़ पु न धावा।। सु न आगवनु दसानन करा। क प दल खरभर भयउ घनेरा।। े जहँ तहँ भू धर बटप उपार । धाए कटकटाइ भट भार ।। छं 0-धाए जो मकट बकट भालु कराल कर भू धर धरा। अ त कोप कर हं हार मारत भिज चले रजनीचरा।। बचलाइ दल बलवंत क स ह घे र पु न रावनु लयो। चहु ँ द स चपेटि ह मा र नखि ह बदा र तनु याक ल कयो।। ु दो0-दे ख महा मकट बल रावन क ह बचार। अंतर हत होइ न मष महु ँ कृ त माया ब तार।।100।। –*–*– छं 0-जब क ह ते हं पाषंड। भए गट जंतु चंड।। बेताल भू त पसाच। कर धर धनु नाराच।।1।। जो ग न गह करबाल। एक हाथ मनु ज कपाल।। क र स य सो नत पान। नाच हं कर हं बहु गान।।2।। ध मा बोल हं घोर। र ह पू र धु न चहु ँ ओर।। मु ख बाइ धाव हं खान। तब लगे क स परान।।3।। जहँ जा हं मकट भा ग। तहँ बरत दे ख हं आ ग।।
  • 49.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) भए बकल बानर भालु । पु न लाग बरषै बालु ।।4।। जहँ तहँ थ कत क र क स। गजउ बहु र दससीस।। ल छमन कपीस समेत। भए सकल बीर अचेत।।5।। हा राम हा रघु नाथ। क ह सु भट मीज हं हाथ।। ए ह ब ध सकल बल तो र। ते हं क ह कपट बहो र।।6।। गटे स बपु ल हनु मान। धाए गहे पाषान।। त ह रामु घेरे जाइ। चहु ँ द स ब थ बनाइ।।7।। मारहु धरहु ज न जाइ। कटकट हं पूँछ उठाइ।। दहँ द स लँ गू र बराज। ते हं म य कोसलराज।।8।। छं 0-ते हं म य कोसलराज सु ंदर याम तन सोभा लह । जनु इं धनु ष अनेक क बर बा र तु ंग तमालह ।। भु दे ख हरष बषाद उर सु र बदत जय जय जय कर । रघु बीर एक ह तीर को प नमेष महु ँ माया हर ।।1।। माया बगत क प भालु हरषे बटप ग र ग ह सब फरे । सर नकर छाड़े राम रावन बाहु सर पु न म ह गरे ।। ीराम रावन समर च रत अनेक क प जो गावह ं। सत सेष सारद नगम क ब तेउ तद प पार न पावह ं।।2।। दो0-ताक गु न गन कछ कहे जड़म त तु लसीदास। े ु िज म नज बल अनु प ते माछ उड़इ अकास।।101(क)।। भु काटे सर भु ज बार बहु मरत न भट लंकस। े ड़त सु र स मु न याक ल दे ख कलेस।।101(ख)।। ु –*–*– काटत बढ़ हं सीस समु दाई। िज म त लाभ लोभ अ धकाई।। मरइ न रपु म भयउ बसेषा। राम बभीषन तन तब दे खा।। उमा काल मर जाक ं ईछा। सो भु जन कर ी त पर छा।। सु नु सरब य चराचर नायक। नतपाल सु र मु न सु खदायक।। ना भकंु ड पयू ष बस याक। नाथ िजअत रावनु बल ताक।। सु नत बभीषन बचन कृ पाला। हर ष गहे कर बान कराला।। असु भ होन लागे तब नाना। रोव हं खर सृकाल बहु वाना।।
  • 50.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) बोल ह खग जग आर त हे तू । गट भए नभ जहँ तहँ कतू ।। े दस द स दाह होन अ त लागा। भयउ परब बनु र ब उपरागा।। मंदोद र उर कप त भार । ं तमा व हं नयन मग बार ।। छं 0- तमा द हं प बपात नभ अ त बात बह डोल त मह । बरष हं बलाहक धर कच रज असु भ अ त सक को कह ।। उतपात अ मत बलो क नभ सु र बकल बोल ह जय जए। सु र सभय जा न कृ पाल रघु प त चाप सर जोरत भए।। दो0-खै च सरासन वन ल ग छाड़े सर एकतीस। रघु नायक सायक चले मानहु ँ काल फनीस।।102।। –*–*– सायक एक ना भ सर सोषा। अपर लगे भु ज सर क र रोषा।। लै सर बाहु चले नाराचा। सर भु ज ह न ं ड म ह नाचा।। धर न धसइ धर धाव चंडा। तब सर ह त भु कृ त दुइ खंडा।। गजउ मरत घोर रव भार । कहाँ रामु रन हत पचार ।। डोल भू म गरत दसकधर। छ भत संधु स र द गज भू धर।। ं ु धर न परे उ वौ खंड बढ़ाई। चा प भालु मकट समु दाई।। मंदोद र आग भु ज सीसा। ध र सर चले जहाँ जगद सा।। बसे सब नषंग महु जाई। दे ख सु र ह दुं दभीं बजाई।। ु तासु तेज समान भु आनन। हरषे दे ख संभु चतु रानन।। जय जय धु न पू र मंडा। जय रघु बीर बल भु जदं डा।। बरष ह सु मन दे व मु न बृंदा। जय कृ पाल जय जय त मु कंु दा।। छं 0-जय कृ पा कद मु कद वंद हरन सरन सु ख द भो। ं ं खल दल बदारन परम कारन का नीक सदा बभो।। सु र सु मन बरष हं हरष संक ल बाज दुं द ु भ गहगह । ु सं ाम अंगन राम अंग अनंग बहु सोभा लह ।। सर जटा मु कट सू न बच बच अ त मनोहर राजह ं। ु जनु नील ग र पर त ड़त पटल समेत उड़ु गन ाजह ं।। भु जदं ड सर कोदं ड फरत े धर कन तन अ त बने। जनु रायमु नीं तमाल पर बैठ ं बपु ल सु ख आपने।।
  • 51.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) दो0-कृ पा ि ट क र भु अभय कए सु र बृंद। भालु क स सब हरषे जय सु ख धाम मु कद।।103।। ं –*–*– प त सर दे खत मंदोदर । मु छत बकल धर न ख स पर ।। जु ब त बृंद रोवत उ ठ धा । ते ह उठाइ रावन प हं आई।। प त ग त दे ख ते कर हं पु कारा। छटे कच न हं बपु ष सँभारा।। ू उर ताड़ना कर हं ब ध नाना। रोवत कर हं ताप बखाना।। तव बल नाथ डोल नत धरनी। तेज ह न पावक स स तरनी।। सेष कमठ स ह सक हं न भारा। सो तनु भू म परे उ भ र छारा।। ब न कबेर सु रेस समीरा। रन स मु ख ध र काहु ँ न धीरा।। ु भु जबल िजतेहु काल जम सा । आजु परे हु अनाथ क ना ।। जगत ब दत तु हार भु ताई। सु त प रजन बल बर न न जाई।। राम बमु ख अस हाल तु हारा। रहा न कोउ कल रोव नहारा।। ु तव बस ब ध पंच सब नाथा। सभय द सप नत नाव हं माथा।। अब तव सर भु ज जंबु क खाह ं। राम बमु ख यह अनु चत नाह ं।। काल बबस प त कहा न माना। अग जग नाथु मनु ज क र जाना।। छं 0-जा यो मनु ज क र दनु ज कानन दहन पावक ह र वयं। जे ह नमत सव मा द सु र पय भजेहु न हं क नामयं।। आज म ते पर ोह रत पापौघमय तव तनु अयं। तु हहू दयो नज धाम राम नमा म म नरामयं।। दो0-अहह नाथ रघु नाथ सम कृ पा संधु न हं आन। जो ग बृंद दुलभ ग त तो ह द ि ह भगवान।।104।। –*–*– मंदोदर बचन सु न काना। सु र मु न स सबि ह सु ख माना।। अज महे स नारद सनकाद । जे मु नबर परमारथबाद ।। भ र लोचन रघु प त ह नहार । ेम मगन सब भए सु खार ।। दन करत दे खीं सब नार । गयउ बभीषनु मन दुख भार ।। बंधु दसा बलो क दुख क हा। तब भु अनु ज ह आयसु द हा।। ल छमन ते ह बहु ब ध समु झायो। बहु र बभीषन भु प हं आयो।। कृ पा ि ट भु ता ह बलोका। करहु या प रह र सब सोका।।
  • 52.
    भु कि ह ी रामजी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) या भु आयसु मानी। ब धवत दे स काल िजयँ जानी।। दो0-मंदोदर आ द सब दे इ तलांज ल ता ह। भवन गई रघु प त गु न गन बरनत मन मा ह।।105।। –*–*– आइ बभीषन पु न स नायो। कृ पा संधु तब अनु ज बोलायो।। तु ह कपीस अंगद नल नीला। जामवंत मा त नयसीला।। सब म ल जाहु बभीषन साथा। सारे हु तलक कहे उ रघु नाथा।। पता बचन म नगर न आवउँ । आपु स रस क प अनु ज पठावउँ ।। तु रत चले क प सु न भु बचना। क ह जाइ तलक क रचना।। सादर संहासन बैठार । तलक सा र अ तु त अनु सार ।। जो र पा न सबह ं सर नाए। स हत बभीषन भु प हं आए।। तब रघु बीर बो ल क प ल हे । क ह य बचन सु खी सब क हे ।। छं 0- कए सु खी क ह बानी सु धा सम बल तु हार रपु हयो। पायो बभीषन राज तहु ँ पु र जसु तु हारो नत नयो।। मो ह स हत सु भ क र त तु हार परम ी त जो गाइह। संसार संधु अपार पार यास बनु नर पाइह।। दो0- भु क बचन वन सु न न हं अघा हं क प पु ंज। े बार बार सर नाव हं गह हं सकल पद कज।।106।। ं –*–*– पु न भु बो ल लयउ हनु माना। लंका जाहु कहे उ भगवाना।। समाचार जान क ह सु नावहु। तासु कसल लै तु ह च ल आवहु ।। ु तब हनु मंत नगर महु ँ आए। सु न न सचर नसाचर धाए।। बहु कार त ह पू जा क ह । जनकसु ता दे खाइ पु न द ह ।। दूर ह ते नाम क प क हा। रघु प त दूत जानक ं ची हा।। कहहु तात भु कृ पा नकता। कसल अनु ज क प सेन समेता।। े ु सब ब ध कसल कोसलाधीसा। मातु समर जी यो दससीसा।। ु अ बचल राजु बभीषन पायो। सु न क प बचन हरष उर छायो।। छं 0-अ त हरष मन तन पु लक लोचन सजल कह पु न पु न रमा। का दे उँ तो ह लोक महु ँ क प कम प न हं बानी समा।। े सु नु मातु म पायो अ खल जग राजु आजु न संसयं।
  • 53.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) रन जी त रपु दल बंधु जु त प या म राममनामयं।। दो0-सु नु सु त सदगु न सकल तव दयँ बसहु ँ हनु मंत। सानु क ल कोसलप त रहहु ँ समेत अनंत।।107।। ू –*–*– अब सोइ जतन करहु तु ह ताता। दे ख नयन याम मृदु गाता।। तब हनु मान राम प हं जाई। जनकसु ता क कसल सु नाई।। ै ु सु न संदेसु भानु क लभू षन। बो ल लए जु बराज बभीषन।। ु मा तसु त क संग सधावहु । सादर जनकसु त ह लै आवहु ।। े तु रत हं सकल गए जहँ सीता। सेव हं सब न सचर ं बनीता।। बे ग बभीषन त ह ह सखायो। त ह बहु ब ध म जन करवायो।। बहु कार भू षन प हराए। स बका चर सािज पु न याए।। ता पर हर ष चढ़ बैदेह । सु म र राम सु खधाम सनेह ।। बेतपा न र छक चहु ँ पासा। चले सकल मन परम हु लासा।। दे खन भालु क स सब आए। र छक को प नवारन धाए।। कह रघु बीर कहा मम मानहु । सीत ह सखा पयाद आनहु ।। दे खहु ँ क प जननी क ना । बह स कहा रघु नाथ गोसाई।। सु न भु बचन भालु क प हरषे। नभ ते सु रनह सु मन बहु बरषे।। ् सीता थम अनल महु ँ राखी। गट क ि ह चह अंतर साखी।। दो0-ते ह कारन क ना न ध कहे कछ क दुबाद। ु सु नत जातु धानीं सब लागीं करै बषाद।।108।। –*–*– भु क बचन सीस ध र सीता। बोल मन म बचन पु नीता।। े ल छमन होहु धरम क नेगी। पावक गट करहु तु ह बेगी।। े सु न ल छमन सीता क बानी। बरह बबेक धरम न त सानी।। ै लोचन सजल जो र कर दोऊ। भु सन कछ क ह सकत न ओऊ।। ु दे ख राम ख ल छमन धाए। पावक ग ट काठ बहु लाए।। पावक बल दे ख बैदेह । दयँ हरष न हं भय कछ तेह ।। ु ज मन बच म मम उर माह ं। तिज रघु बीर आन ग त नाह ं।। तौ कृ सानु सब क ग त जाना। मो कहु ँ होउ ीखंड समाना।। ै छं 0- ीखंड सम पावक बेस कयो सु म र भु मै थल ।
  • 54.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) जय कोसलेस महे स बं दत चरन र त अ त नमल ।। त बंब अ लौ कक कलंक चंड पावक महु ँ जरे । भु च रत काहु ँ न लखे नभ सु र स मु न दे ख हं खरे ।।1।। ध र प पावक पा न ग ह ी स य ु त जग ब दत जो। िज म छ रसागर इं दरा राम ह समप आ न सो।। सो राम बाम बभाग राज त चर अ त सोभा भल । नव नील नीरज नकट मानहु ँ कनक पंकज क कल ।।2।। दो0-बरष हं सु मन हर ष सु न बाज हं गगन नसान। गाव हं कं नर सु रबधू नाच हं चढ़ ं बमान।।109(क)।। जनकसु ता समेत भु सोभा अ मत अपार। दे ख भालु क प हरषे जय रघु प त सु ख सार।।109(ख)।। –*–*– तब रघु प त अनु सासन पाई। मात ल चलेउ चरन स नाई।। आए दे व सदा वारथी। बचन कह हं जनु परमारथी।। द न बंधु दयाल रघु राया। दे व क ि ह दे व ह पर दाया।। ब व ोह रत यह खल कामी। नज अघ गयउ कमारगगामी।। ु तु ह सम प म अ बनासी। सदा एकरस सहज उदासी।। अकल अगु न अज अनघ अनामय। अिजत अमोघसि त क नामय।। मीन कमठ सू कर नरहर । बामन परसु राम बपु धर ।। जब जब नाथ सु र ह दुखु पायो। नाना तनु ध र तु हइँ नसायो।। यह खल म लन सदा सु र ोह । काम लोभ मद रत अ त कोह ।। अधम सरोम न तव पद पावा। यह हमरे मन बसमय आवा।। हम दे वता परम अ धकार । वारथ रत भु भग त बसार ।। भव बाहँ संतत हम परे । अब भु पा ह सरन अनु सरे ।। दो0-क र बनती सु र स सब रहे जहँ तहँ कर जो र। अ त स ेम तन पु ल क ब ध अ तु त करत बहो र।।110।। –*–*– छं 0-जय राम सदा सु खधाम हरे । रघु नायक सायक चाप धरे ।। भव बारन दारन संह भो। गु न सागर नागर नाथ बभो।। तन काम अनेक अनू प छबी। गु न गावत स मु नीं कबी।।
  • 55.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) जसु पावन रावन नाग महा। खगनाथ जथा क र कोप गहा।। जन रं जन भंजन सोक भयं। गत ोध सदा भु बोधमयं।। अवतार उदार अपार गु नं। म ह भार बभंजन यानघनं।। अज यापकमेकमना द सदा। क नाकर राम नमा म मु दा।। रघु बंस बभू षन दूषन हा। कृ त भू प बभीषन द न रहा।। गु न यान नधान अमान अजं। नत राम नमा म बभु ं बरजं।। भु जदं ड चंड ताप बलं। खल बृंद नकद महा कसलं।। ं ु बनु कारन द न दयाल हतं। छ ब धाम नमा म रमा स हतं।। भव तारन कारन काज परं । मन संभव दा न दोष हरं ।। सर चाप मनोहर ोन धरं । जरजा न लोचन भू पबरं ।। सु ख मं दर सु ंदर ीरमनं। मद मार मु धा ममता समनं।। अनव य अखंड न गोचर गो। सब प सदा सब होइ न गो।। इ त बेद बदं त न दं तकथा। र ब आतप भ नम भ न जथा।। कृ तकृ य बभो सब बानर ए। नरखं त तवानन सादर ए।। धग जीवन दे व सर र हरे । तव भि त बना भव भू ल परे ।। अब द न दयाल दया क रऐ। म त मो र बभेदकर ह रऐ।। जे ह ते बपर त या क रऐ। दुख सो सु ख मा न सु खी च रऐ।। खल खंडन मंडन र य छमा। पद पंकज से वत संभु उमा।। नृप नायक दे बरदान मदं । चरनांबु ज ेम सदा सु भदं ।। दो0- बनय क ि ह चतु रानन ेम पु लक अ त गात। सोभा संधु बलोकत लोचन नह ं अघात।।111।। –*–*– ते ह अवसर दसरथ तहँ आए। तनय बलो क नयन जल छाए।। अनु ज स हत भु बंदन क हा। आ सरबाद पताँ तब द हा।। तात सकल तव पु य भाऊ। जी य अजय नसाचर राऊ।। सु न सु त बचन ी त अ त बाढ़ । नयन स लल रोमाव ल ठाढ़ ।। रघु प त थम ेम अनु माना। चतइ पत ह द हे उ ढ़ याना।। ताते उमा मो छ न हं पायो। दसरथ भेद भग त मन लायो।। सगु नोपासक मो छ न लेह ं। त ह कहु ँ राम भग त नज दे ह ं।।
  • 56.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) बार बार क र भु ह नामा। दसरथ हर ष गए सु रधामा।। दो0-अनु ज जानक स हत भु कसल कोसलाधीस। ु सोभा दे ख हर ष मन अ तु त कर सु र ईस।।112।। –*–*– छं 0-जय राम सोभा धाम। दायक नत ब ाम।। धृत ोन बर सर चाप। भु जदं ड बल ताप।।1।। जय दूषना र खरा र। मदन नसाचर धा र।। यह दु ट मारे उ नाथ। भए दे व सकल सनाथ।।2।। जय हरन धरनी भार। म हमा उदार अपार।। जय रावना र कृ पाल। कए जातु धान बहाल।।3।। लंकस अ त बल गब। कए ब य सु र गंधब।। े मु न स नर खग नाग। ह ठ पंथ सब क लाग।।4।। पर ोह रत अ त दु ट। पायो सो फलु पा प ट।। अब सु नहु द न दयाल। राजीव नयन बसाल।।5।। मो ह रहा अ त अ भमान। न हं कोउ मो ह समान।। अब दे ख भु पद कज। गत मान द दुख पु ंज।।6।। ं कोउ म नगु न याव। अ य त जे ह ु त गाव।। मो ह भाव कोसल भू प। ीराम सगु न स प।।7।। बैदे ह अनु ज समेत। मम दयँ करहु नकत।। े मो ह जा नए नज दास। दे भि त रमा नवास।।8।। दे भि त रमा नवास ास हरन सरन सु खदायक। ं सु ख धाम राम नमा म काम अनेक छ ब रघु नायक।। ं सु र बृंद रं जन वंद भंजन मनु ज तनु अतु लतबलं। मा द संकर से य राम नमा म क ना कोमलं।। दो0-अब क र कृ पा बलो क मो ह आयसु दे हु कृ पाल। काह कर सु न य बचन बोले द नदयाल।।113।। –*–*– सु नु सु रप त क प भालु हमारे । परे भू म नसचरि ह जे मारे ।। मम हत ला ग तजे इ ह ाना। सकल िजआउ सु रेस सु जाना।। सु नु खगेस भु क यह बानी। अ त अगाध जान हं मु न यानी।। ै
  • 57.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) भु सक भु अन मा र िजआई। कवल स े ह द ि ह बड़ाई।। सु धा बर ष क प भालु िजआए। हर ष उठे सब भु प हं आए।। सु धाबृि ट भै दुहु दल ऊपर। िजए भालु क प न हं रजनीचर।। रामाकार भए त ह क मन। मु त भए छटे भव बंधन।। े ू सु र अं सक सब क प अ र छा। िजए सकल रघु प त क ं ईछा।। राम स रस को द न हतकार । क हे मु कत नसाचर झार ।। ु खल मल धाम काम रत रावन। ग त पाई जो मु नबर पाव न।। दो0-सु मन बर ष सब सु र चले च ढ़ च ढ़ दे ख सु अवस चर बमान। भु प हं आयउ संभु सु जान।।114(क)।। परम ी त कर जो र जु ग न लन नयन भ र बा र। पु ल कत तन गदगद गराँ बनय करत पु रा र।।114(ख)।। –*–*– छं 0-माम भर य रघु क ल नायक। धृत बर चाप चर कर सायक।। ु मोह महा घन पटल भंजन। संसय ब पन अनल सु र रं जन।।1।। अगु न सगु न गु न मं दर सु ंदर। म तम बल ताप दवाकर।। काम ोध मद गज पंचानन। बसहु नरं तर जन मन कानन।।2।। बषय मनोरथ पु ंज कज बन। बल तु षार उदार पार मन।। ं भव बा र ध मंदर परमं दर। बारय तारय संस ृ त दु तर।।3।। याम गात राजीव बलोचन। द न बंधु नतार त मोचन।। अनु ज जानक स हत नरं तर। बसहु राम नृप मम उर अंतर।।4।। मु न रं जन म ह मंडल मंडन। तु ल सदास भु ास बखंडन।।5।। दो0-नाथ जब हं कोसलपु र ं होइ ह तलक तु हार। कृ पा संधु म आउब दे खन च रत उदार।।115।। –*–*– क र बनती जब संभु सधाए। तब भु नकट बभीषनु आए।। नाइ चरन स कह मृदु बानी। बनय सु नहु भु सारँ गपानी।। सकल सदल भु रावन मार् यो। पावन जस ु भु वन ब तार् यो।। द न मल न ह न म त जाती। मो पर कृ पा क ि ह बहु भाँती।। अब जन गृह पु नीत भु क जे। म जनु क रअ समर म छ जे।। दे ख कोस मं दर संपदा। दे हु कृ पाल क प ह कहु ँ मु दा।।
  • 58.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) सब ब ध नाथ मो ह अपनाइअ। पु न मो ह स हत अवधपु र जाइअ।। सु नत बचन मृदु द नदयाला। सजल भए वौ नयन बसाला।। दो0-तोर कोस गृह मोर सब स य बचन सु नु ात। भरत दसा सु मरत मो ह न मष क प सम जात।।116(क)।। तापस बेष गात कृ स जपत नरं तर मो ह। दे ख बे ग सो जतनु क सखा नहोरउँ तो ह।।116(ख)।। बीत अव ध जाउँ ज िजअत न पावउँ बीर। सु मरत अनु ज ी त भु पु न पु न पु लक सर र।।116(ग)।। करे हु क प भ र राजु तु ह मो ह सु मरे हु मन मा हं। पु न मम धाम पाइहहु जहाँ संत सब जा हं।।116(घ)।। –*–*– सु नत बभीषन बचन राम क। हर ष गहे पद कृ पाधाम क।। े े बानर भालु सकल हरषाने। ग ह भु पद गु न बमल बखाने।। बहु र बभीषन भवन सधायो। म न गन बसन बमान भरायो।। लै पु पक भु आग राखा। हँ स क र कृ पा संधु तब भाषा।। च ढ़ बमान सु नु सखा बभीषन। गगन जाइ बरषहु पट भू षन।। नभ पर जाइ बभीषन तबह । बर ष दए म न अंबर सबह ।। जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेह ं। म न मु ख मे ल डा र क प दे ह ं।। हँ से रामु ी अनु ज समेता। परम कौतु क कृ पा नकता।। े दो0-मु न जे ह यान न पाव हं ने त ने त कह बेद। कृ पा संधु सोइ क प ह सन करत अनेक बनोद।।117(क)।। उमा जोग जप दान तप नाना मख त नेम। राम कृ पा न ह कर हं त स ज स न कवल ेम।।117(ख)।। े –*–*– भालु क प ह पट भू षन पाए। प ह र प ह र रघु प त प हं आए।। नाना िजनस दे ख सब क सा। पु न पु न हँ सत कोसलाधीसा।। चतइ सबि ह पर क ि ह दाया। बोले मृदुल बचन रघु राया।। तु हर बल म रावनु मार् यो। तलक बभीषन कहँ पु न सार् यो।। नज नज गृह अब तु मह सब जाहू । सु मरे हु मो ह डरपहु ज न काहू ।। ् सु नत बचन ेमाक ल बानर। जो र पा न बोले सब सादर।। ु
  • 59.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) भु जोइ कहहु तु ह ह सब सोहा। हमरे होत बचन सु न मोहा।। द न जा न क प कए सनाथा। तु ह लोक ईस रघु नाथा।। े सु न भु बचन लाज हम मरह ं। मसक कहू ँ खगप त हत करह ं।। दे ख राम ख बानर र छा। ेम मगन न हं गृह क ईछा।। ै दो0- भु े रत क प भालु सब राम प उर रा ख। हरष बषाद स हत चले बनय ब बध ब ध भा ष।।118(क)।। क पप त नील र छप त अंगद नल हनु मान। स हत बभीषन अपर जे जू थप क प बलवान।।118(ख)।। दो0- क ह न सक हं कछ ेम बस भ र भ र लोचन बा र। ु स मु ख चतव हं राम तन नयन नमेष नवा र।।118(ग)।। ~ –*–*– –*–*– अ तसय ी त दे ख रघु राई। ल हे सकल बमान चढ़ाई।। मन महु ँ ब चरन स नायो। उ तर द स ह बमान चलायो।। चलत बमान कोलाहल होई। जय रघु बीर कहइ सबु कोई।। संहासन अ त उ च मनोहर। ी समेत भु बैठै ता पर।। राजत रामु स हत भा मनी। मे सृंग जनु घन दा मनी।। चर बमानु चलेउ अ त आतु र। क ह सु मन बृि ट हरषे सु र।। परम सु खद च ल बध बयार । सागर सर स र नमल बार ।। सगु न हो हं सु ंदर चहु ँ पासा। मन स न नमल नभ आसा।। कह रघु बीर दे खु रन सीता। ल छमन इहाँ ह यो इँ जीता।। हनू मान अंगद क मारे । रन म ह परे नसाचर भारे ।। े कंु भकरन रावन वौ भाई। इहाँ हते सु र मु न दुखदाई।। दो0-इहाँ सेतु बाँ यो अ थापेउँ सव सु ख धाम। सीता स हत कृ पा न ध संभु ह क ह नाम।।119(क)।। जहँ जहँ कृ पा संधु बन क ह बास ब ाम। सकल दे खाए जान क ह कहे सबि ह क नाम।।119(ख)।। े –*–*– तु रत बमान तहाँ च ल आवा। दं डक बन जहँ परम सु हावा।।
  • 60.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) कंु भजा द मु ननायक नाना। गए रामु सब क अ थाना।। सकल र ष ह सन पाइ असीसा। च क ट आए जगद सा।। ू तहँ क र मु न ह कर संतोषा। चला बमानु तहाँ ते चोखा।। े बहु र राम जान क ह दे खाई। जमु ना क ल मल हर न सु हाई।। पु न दे खी सु रसर पु नीता। राम कहा नाम क सीता।। तीरथप त पु न दे खु यागा। नरखत ज म को ट अघ भागा।। दे खु परम पाव न पु न बेनी। हर न सोक ह र लोक नसेनी।। पु न दे खु अवधपु र अ त पाव न। बध ताप भव रोग नसाव न।।। दो0-सीता स हत अवध कहु ँ क ह कृ पाल नाम। सजल नयन तन पु ल कत पु न पु न हर षत राम।।120(क)।। पु न भु आइ बेनीं हर षत म जनु क ह। क प ह स हत ब ह कहु ँ दान ब बध ब ध द ह।।120(ख)।। –*–*– भु हनु मंत ह कहा बु झाई। ध र बटु प अवधपु र जाई।। भरत ह क सल हमा र सु नाएहु ।समाचार लै तु ह च ल आएहु ।। ु तु रत पवनसु त गवनत भयउ। तब भु भर वाज प हं गयऊ।। नाना ब ध मु न पू जा क ह । अ तु ती क र पु न आ सष द ह ।। मु न पद बं द जु गल कर जोर । च ढ़ बमान भु चले बहोर ।। इहाँ नषाद सु ना भु आए। नाव नाव कहँ लोग बोलाए।। सु रस र ना घ जान तब आयो। उतरे उ तट भु आयसु पायो।। तब सीताँ पू जी सु रसर । बहु कार पु न चरनि ह पर ।। द ि ह असीस हर ष मन गंगा। सु ंद र तव अ हवात अभंगा।। सु नत गु हा धायउ ेमाक ल। आयउ नकट परम सु ख संक ल।। ु ु भु ह स हत बलो क बैदेह । परे उ अव न तन सु ध न हं तेह ।। ी त परम बलो क रघु राई। हर ष उठाइ लयो उर लाई।। छं 0- लयो दयँ लाइ कृ पा नधान सु जान रायँ रमापती। बैठा र परम समीप बू झी कसल सो कर बीनती। ु अब कसल पद पंकज बलो क बरं च संकर से य जे। ु सु ख धाम पू रनकाम राम नमा म राम नमा म ते।।1।।
  • 61.
    भु ी राम जीका आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) सब भाँ त अधम नषाद सो ह र भरत य उर लाइयो। म तमंद तु लसीदास सो भु मोह बस बसराइयो।। यह रावना र च र पावन राम पद र त द सदा। कामा दहर ब यानकर सु र स मु न गाव हं मु दा।।2।। दो0-समर बजय रघु बीर क च रत जे सु न हं सु जान। े बजय बबेक बभू त नत त ह ह दे हं भगवान।।121(क)।। यह क लकाल मलायतन मन क र दे खु बचार। ीरघु नाथ नाम तिज ना हन आन अधार।।121(ख)।। मासपारायण, स ताईसवाँ व ाम ——————इ त ीम ामच रतमानसे सकलक लकलु ष व वंसने ष ठः सोपानः समा तः। (लंकाका ड समा त) ———— –*–*–