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 लेप्रोसी एक संचारी रोग है जो एक जीवाणु
माइक्रोबैक्टीररयम लेप्रा क
े कारण होता है। रोग
मुख्य रूप से पररधीय नसों को प्रभाववत करता
है। यह त्वचा, मांसपेशियों, आंखों, हड्डियों,
वृषण और आंतररक अंगों को भी प्रभाववत कर
सकता है।
 क
ु ष्ठ रोग Micobacterium laprae क
े
कारण होता है। वे एशसि-फास्ट बेशसलस
हैं और मानव मेजबान में होते हैं। उनक
े
पास श्वान कोशिकाओं और रेटटक
ु लो-
एंिोथेशलयल शसस्टम की कोशिकाओं क
े
शलए एक affinity है।
 "सक्रक्रय क
ु ष्ठ" वाले सभी
रोगगयों को संक्रामक माना
जाता है। क
ु ष्ठ रोग क
े मानव
मामले संक्रमण का मुख्य स्रोत
हैं।
 नाक bacili बाहर ननकलने का एक प्रमुख मागग है। क
ु ष्ठ
रोगी क
े नाक क
े म्यूकोसा में लाखों एम लेप्राइ ननवास करते
हैं जजन्हें नाक से छ ंकने या झटका देने पर नाक से बाहर
जाते है। बेशसली क
ु ष्ठ रोग क
े जीवाणुजननत positive
मामलों में अल्सर या टूटी हुई त्वचा क
े माध्यम से भी बाहर
ननकल सकते है
 तो यह स्पष्ट है क्रक क
ु ष्ठ रोग क
े संचरण की ववगध है-
 ड्रॉपलेट संक्रमण - क
ु ष्ठ रोग को एम लेप्रेज़ वाले एरोसोल क
े माध्यम
से प्रेवषत क्रकया जा सकता है।
 सीधे संपक
ग - रोगी क
े साथ त्वचा से सीधे संपक
ग
 अप्रत्यक्ष संपक
ग - शमट्टी क
े साथ संपक
ग , और दूवषत कपडे और
शलनन जैसे फोमाइट्स
 क
ु ष्ठ रोग में लंबे समय तक incubation
period माना जाता है, औसतन 3 से 5 साल
या अगधक
 ट्यूबरक
ु लॉइि क
ु ष्ठ रोग में एक छोटा ऊष्मायन
अवगध माना जाता है
 a) हाइपो-वपगमेंटेि पैच
 b) प्रभाववत क्षेत्रों में त्वचीय
sensation का आंशिक या
पूणग loss (प्रभाववत होने वाली
सबसे प्रारंशभक sensation
आमतौर पर हल्का स्पिग है)
 c) मोटी nerves की
उपजस्थनत, और
 d) नोड्यूल्स या गांठ की
उपजस्थनत वविेष रूप से चेहरे
और कान की त्वचा में।
 e. ववकृ नत की उपजस्थनत जैसे क्रक
planter अल्सर, उंगशलयों या पैर
की उंगशलयों पंजे की उंगशलयों क
े
नुकसान, नाक की depression,
foot-ड्रॉप, आटद।
क
ु ष्ठ को इस प्रकार वगीकृ त क्रकया गया है-
 Indeterminate
 Tuberculoid;
 Borderline
 Lepromatous
 इस प्रकार क
े क
ु ष्ठ रोग प्रारंशभक अवस्था में
एक या दो अस्पष्ट हाइपोवपगमेंटेि मैक्यूल और
ननजश्चत संवेदी Sensation impairment साथ
होते हैं। घाव जीवाणुजननत रूप से नकारात्मक हैं
 इस तरह क
े क
ु ष्ठ मामलों में एक या दो अच्छ तरह से
पररभावषत घावों क
े साथ मामूली अगिम चरण में होते
हैं, जो फ्लैट या raised हो सकते हैं, हाइपोवपगमेंटेि या
एररथेमेटस होते हैं और एनेस्थेटटक होते हैं। घाव
जीवाणुजननत रूप से नकारात्मक हैं।
 इस तरह क
े क
ु ष्ठ मामलों में चार या अगधक घावों क
े
साथ मामूली अगधक अगिम चरण में होते हैं जो फ्लैट
या raised हो सकते हैं, अच्छ तरह से या अननधागररत,
हाइपोवपगमेंटेि या एररथेमेटस और संवेदी हानन या हानन
टदखाते हैं। इन घावों की बैक्टीररयोलाजजकल
सकारात्मकता पररवतगनिील है।
 इस प्रकार क
े क
ु ष्ठ मामलों में infiltration
spread क
े साथ अगिम चरण में या कई फ्लैट या
raised, खराब पररभावषत, चमकदार, गचकनी,
समशमत रूप से ववतररत घाव हैं। ये घाव
जीवाणुजननत रूप से सकारात्मक हैं,
(i) िारीररक परीक्षण: संक
े त और लक्षण
जैसे क्रक हाइपोवपगमेंटेि जेल, संवेदनाओं
की हानन क
ु ष्ठ रोग क
े शलए एक ववचार
प्रदान कर सकती है।
 (ii) Bacteriological Examination :
जस्कन स्मीयर, नाक स्मीयर या नाक को
खुरचने की zeihl neelsen मेथि द्वारा जााँच
क
ु ष्ठ रोग क
े बारे में स्पष्ट संक
े त प्रदान
करेगी।
 (iii) अन्य परीक्षण: अन्य परीक्षणों में िाशमल हैं-
 टहस्टामाइन परीक्षण
 लेप्रोशमन परीक्षण
 त्वचा बायोप्सी आटद।
क
ु ष्ठ रोग का इलाज MDT द्वारा क्रकया
जाता है। मल्टी ड्रग थेरेपी में ररफ
ै जम्पशसन,
िैपसोन, क्लोफाजज़माइन, एगथओनामाइि
और प्रोटटओनामाइि जैसे जीवाणुरोधी दवाएं
िाशमल हैं
 एमिीटी प्रदान करने क
े शलए, क
ु ष्ठ रोग संक
े त और लक्षणों
क
े अनुसार दो समूहों में ववभाजजत क्रकया गया है:
 (i) पौसीबैशसलरी क
ु ष्ठ रोग: 1-5 त्वचा घाव वाला व्यजक्त
और / या क
े वल एक तंत्रत्रका involvement (6 महीने का
इलाज) ररफ
ै जम्पशसन- महीने में एक बार 600 शमलीिाम,
पयगवेक्षण • िैपसोन- प्रनतटदन 100 शमलीिाम, स्व-प्रिाशसत
 (ii) मल्टीबैशसलरी क
ु ष्ठ रोग: 6 या अगधक त्वचा क
े घावों और / या
एक से अगधक तंत्रत्रका भागीदारी वाले व्यजक्त (12 महीने का इलाज)
• ररफाजम्पशसन -600 शमलीिाम, एक बार माशसक, पयगवेक्षण क
े
तहत टदया जाता है •
 िैप्सोन -100 शमलीिाम दैननक, स्व-प्रिाशसत •
 क्लोफाजज़माइन -300 शमलीिाम एक बार माशसक पयगवेक्षण क
े बाद;
और 50 शमलीिाम दैननक, स्व-प्रिाशसत।
 पुनवागस क
ु ष्ठ रोग क
े उपचार का एक टहस्सा है,
जजसका अथग है "िारीररक और मानशसक बहाली,
जहााँ तक संभव हो, सभी उपचाररत रोगगयों को
सामान्य गनतववगध क
े शलए, ताक्रक वे घर, समाज
और उद्योग में अपनी जगह क्रफर से िुरू कर
सक
ें "।
By – SURESH KUMAR ( Nursing Tutor )

Leprosy in hindi leprosy

  • 1.
  • 2.
     लेप्रोसी एकसंचारी रोग है जो एक जीवाणु माइक्रोबैक्टीररयम लेप्रा क े कारण होता है। रोग मुख्य रूप से पररधीय नसों को प्रभाववत करता है। यह त्वचा, मांसपेशियों, आंखों, हड्डियों, वृषण और आंतररक अंगों को भी प्रभाववत कर सकता है।
  • 3.
     क ु ष्ठरोग Micobacterium laprae क े कारण होता है। वे एशसि-फास्ट बेशसलस हैं और मानव मेजबान में होते हैं। उनक े पास श्वान कोशिकाओं और रेटटक ु लो- एंिोथेशलयल शसस्टम की कोशिकाओं क े शलए एक affinity है।
  • 4.
     "सक्रक्रय क ुष्ठ" वाले सभी रोगगयों को संक्रामक माना जाता है। क ु ष्ठ रोग क े मानव मामले संक्रमण का मुख्य स्रोत हैं।
  • 5.
     नाक baciliबाहर ननकलने का एक प्रमुख मागग है। क ु ष्ठ रोगी क े नाक क े म्यूकोसा में लाखों एम लेप्राइ ननवास करते हैं जजन्हें नाक से छ ंकने या झटका देने पर नाक से बाहर जाते है। बेशसली क ु ष्ठ रोग क े जीवाणुजननत positive मामलों में अल्सर या टूटी हुई त्वचा क े माध्यम से भी बाहर ननकल सकते है
  • 6.
     तो यहस्पष्ट है क्रक क ु ष्ठ रोग क े संचरण की ववगध है-  ड्रॉपलेट संक्रमण - क ु ष्ठ रोग को एम लेप्रेज़ वाले एरोसोल क े माध्यम से प्रेवषत क्रकया जा सकता है।  सीधे संपक ग - रोगी क े साथ त्वचा से सीधे संपक ग  अप्रत्यक्ष संपक ग - शमट्टी क े साथ संपक ग , और दूवषत कपडे और शलनन जैसे फोमाइट्स
  • 7.
     क ु ष्ठरोग में लंबे समय तक incubation period माना जाता है, औसतन 3 से 5 साल या अगधक  ट्यूबरक ु लॉइि क ु ष्ठ रोग में एक छोटा ऊष्मायन अवगध माना जाता है
  • 8.
     a) हाइपो-वपगमेंटेिपैच  b) प्रभाववत क्षेत्रों में त्वचीय sensation का आंशिक या पूणग loss (प्रभाववत होने वाली सबसे प्रारंशभक sensation आमतौर पर हल्का स्पिग है)
  • 9.
     c) मोटीnerves की उपजस्थनत, और  d) नोड्यूल्स या गांठ की उपजस्थनत वविेष रूप से चेहरे और कान की त्वचा में।
  • 10.
     e. ववकृनत की उपजस्थनत जैसे क्रक planter अल्सर, उंगशलयों या पैर की उंगशलयों पंजे की उंगशलयों क े नुकसान, नाक की depression, foot-ड्रॉप, आटद।
  • 11.
    क ु ष्ठ कोइस प्रकार वगीकृ त क्रकया गया है-  Indeterminate  Tuberculoid;  Borderline  Lepromatous
  • 12.
     इस प्रकारक े क ु ष्ठ रोग प्रारंशभक अवस्था में एक या दो अस्पष्ट हाइपोवपगमेंटेि मैक्यूल और ननजश्चत संवेदी Sensation impairment साथ होते हैं। घाव जीवाणुजननत रूप से नकारात्मक हैं
  • 13.
     इस तरहक े क ु ष्ठ मामलों में एक या दो अच्छ तरह से पररभावषत घावों क े साथ मामूली अगिम चरण में होते हैं, जो फ्लैट या raised हो सकते हैं, हाइपोवपगमेंटेि या एररथेमेटस होते हैं और एनेस्थेटटक होते हैं। घाव जीवाणुजननत रूप से नकारात्मक हैं।
  • 14.
     इस तरहक े क ु ष्ठ मामलों में चार या अगधक घावों क े साथ मामूली अगधक अगिम चरण में होते हैं जो फ्लैट या raised हो सकते हैं, अच्छ तरह से या अननधागररत, हाइपोवपगमेंटेि या एररथेमेटस और संवेदी हानन या हानन टदखाते हैं। इन घावों की बैक्टीररयोलाजजकल सकारात्मकता पररवतगनिील है।
  • 15.
     इस प्रकारक े क ु ष्ठ मामलों में infiltration spread क े साथ अगिम चरण में या कई फ्लैट या raised, खराब पररभावषत, चमकदार, गचकनी, समशमत रूप से ववतररत घाव हैं। ये घाव जीवाणुजननत रूप से सकारात्मक हैं,
  • 16.
    (i) िारीररक परीक्षण:संक े त और लक्षण जैसे क्रक हाइपोवपगमेंटेि जेल, संवेदनाओं की हानन क ु ष्ठ रोग क े शलए एक ववचार प्रदान कर सकती है।
  • 17.
     (ii) BacteriologicalExamination : जस्कन स्मीयर, नाक स्मीयर या नाक को खुरचने की zeihl neelsen मेथि द्वारा जााँच क ु ष्ठ रोग क े बारे में स्पष्ट संक े त प्रदान करेगी।
  • 18.
     (iii) अन्यपरीक्षण: अन्य परीक्षणों में िाशमल हैं-  टहस्टामाइन परीक्षण  लेप्रोशमन परीक्षण  त्वचा बायोप्सी आटद।
  • 19.
    क ु ष्ठ रोगका इलाज MDT द्वारा क्रकया जाता है। मल्टी ड्रग थेरेपी में ररफ ै जम्पशसन, िैपसोन, क्लोफाजज़माइन, एगथओनामाइि और प्रोटटओनामाइि जैसे जीवाणुरोधी दवाएं िाशमल हैं
  • 20.
     एमिीटी प्रदानकरने क े शलए, क ु ष्ठ रोग संक े त और लक्षणों क े अनुसार दो समूहों में ववभाजजत क्रकया गया है:  (i) पौसीबैशसलरी क ु ष्ठ रोग: 1-5 त्वचा घाव वाला व्यजक्त और / या क े वल एक तंत्रत्रका involvement (6 महीने का इलाज) ररफ ै जम्पशसन- महीने में एक बार 600 शमलीिाम, पयगवेक्षण • िैपसोन- प्रनतटदन 100 शमलीिाम, स्व-प्रिाशसत
  • 21.
     (ii) मल्टीबैशसलरीक ु ष्ठ रोग: 6 या अगधक त्वचा क े घावों और / या एक से अगधक तंत्रत्रका भागीदारी वाले व्यजक्त (12 महीने का इलाज) • ररफाजम्पशसन -600 शमलीिाम, एक बार माशसक, पयगवेक्षण क े तहत टदया जाता है •  िैप्सोन -100 शमलीिाम दैननक, स्व-प्रिाशसत •  क्लोफाजज़माइन -300 शमलीिाम एक बार माशसक पयगवेक्षण क े बाद; और 50 शमलीिाम दैननक, स्व-प्रिाशसत।
  • 22.
     पुनवागस क ुष्ठ रोग क े उपचार का एक टहस्सा है, जजसका अथग है "िारीररक और मानशसक बहाली, जहााँ तक संभव हो, सभी उपचाररत रोगगयों को सामान्य गनतववगध क े शलए, ताक्रक वे घर, समाज और उद्योग में अपनी जगह क्रफर से िुरू कर सक ें "।
  • 23.
    By – SURESHKUMAR ( Nursing Tutor )