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Puta
INDEX
• Introduction Of puta
• Importance of aagni
• Definition of puta
• Etymology
• Synonyms of puta
• Uses of puta
• Puta sankhya
• Puta karma
• Types of puta
• Chandraput
• Suryaput
• Aagniput
• Types according to aagni
• mahaput
• Gajaputa
• kukkotput
• Varahputa
• kapotput
• Laghuput
• Bhudharput
• Lawakput
• kumbhaput
• Balukaput
• Gobar put
Rasashastrais the branch of Ayurveda which was developed in the
medieval period. It mainly deals with the drugs of mineral origin. Various
impurities and toxins are present in these minerals. In order to eliminate
these toxins and to make them therapeutically suitable for internal
administrationprocedures like shodhana, marana are done. The process
by which metals and minerals are converted into bhasma form is called
Marana. Puta plays a vital role in bhasmikarana of metals and minerals.
For proper attainment of paka of Rasadi dhatus an ideal quantity of heat
is required which should be neither less nor more, that is called puta. By
utilising puta as a device, one can judge whether Samyak Paka of the
drug have been achieved or not. The fire generated with the cow dung
cakes help to achieve this Paka
INTRODUCTION OF PUTA
• Importance of Agni
• Agni is the basic.
• One of the panchmahabhoota.
• Plays a very important role in formation of any type of
medicine.
• Transformationand conversion of dravya and making them for
suitable for use.
• Arkaprakash explained 6 types of agni.i.e.Dhumaagni,
Mandaagni, Deepaagni,Madhymaagni, Kharagni,Bhutaagni.
IMPORTANCE OF AAGNI
• The word puta is derived from श्लेष being suffixed by प्न्चप्रत्यय which
has the meaning of संश्लेषणे or adhesion or to give support and classified
under तुदादद गण with the meaning of adhesion.
• Puta indicates the heating device in which the material is to be heated in
closed earthen saucers.
पुट संश्लेषणे तुदादद संसर्गे पुटयातत तुदादद
ETYMOLOGY (निरुक्ती)
• Agni used for the paka of Rasa,Maharas, Uprasa, Sadharanarasa, Dhatu,
Updhatu, Ratan, Upratan known as Puta.
• If less or more agni subjected to dravya can destroy its properties.
• when Rasadidravyas undergo any heating procedure, the proper stage of
end product obtained is known as Paka. Paka obtained should be
optimum unit of heat required to obtain the optimum paka (supaka) is
called as Puta.
रसाददद्रव्यपाकानाम् प्रमाणज्ञापनम्पुटम्
नेष्टो न्यूनाधिकः पाकः सुपक्वम्दितमौषिम्॥
DEFINITION OF PUTA
रस, मिारस, उपरस, सािारण रस, िातु, उपिातु,
रत्न, उपरत्न आदद द्रव्यों क
े पाक या भस्म करने
क
े ललए अग्नन क
े मान को सूधित कराने वाले
माध्यम को पुट किते िैं न्यून या अधिक पाक
करना अभीष्ट नि ं िोता िै, क्योंकक अच्छी प्रकार
पक्व औषधि ि लाभकार िोती िै
पररभाषा
•Putena
• Dagdham
• Putam
• Putet (Rasendra Mangala)
SYNONYMS OF PUTA
• BHASMIKARNAN.
• DOSHA NIRHARAN.
• GUNA VARDHAN.
• CONVERT DRUGS OF MINERAL ORIGIN –
TO LIGHT FORM - VARITARA, REKHAPURNATWA.
• DEVELOP DEEPANA PROPERTY WHICH
STIMULATEWHOLE METABOLIC PROCESS OF BODY.
USES OF PUTA
Dravya sangrahana →Churnikarana → Shodhana
→ Bhavana → Chakrika nirmana (Pellets) →Dry
→ Sharava samputa → Sandhibandhana→ Dry →
Puta → Swangasheeta → Collection of Bhasma
→ Bhasma pareeksha.
PUTA KARMA
1.Shodhana 2.Cakrika
nirmana
3.Sarava
samputikarana
4.putana
STEPS IN THE PUTAPROCESS
भवेद्यतः पुटादेव दोषिातनर्गुुणोदयः रसोपरसलोिानां पुटपाकस्ततः स्मृतः
पुटपाक
े नलोिादेतनुरुत्थत्वञ्ि द पनम ् भवेद्वाररतरत्वञ्िपुटपाकस्ततःस्मृतः
(र. त.3/4)
पुटपाक की गयी औषधियााँ निदोष एवं गुणज्ञ होती है। पुट द्वारा
पाधचत औषधियााँ निरुत्थ, वाररतर, दीपि-पाचि गुणों से युक्त
हो जाती है। पुट द्वारा भस्म में ववशेष गुण प्राप्नत होते है। अतः
रसशास्रीय द्रव्यों का पाक पुट द्वारा ही ककया जाता है।
पुट का प्रयोजन एवं पररणामः-
पुट देिे पर लोहादद िातु भस्म होकर अपुिभभव एवं उसक
े गुणों में
वृद्धि हो जाती है। उिमें रेखापूणभ एवं वाररतरत्व गुण आ जाते है।
पुट क
े प्रभाव से भारी पत्थर भी हल्का होकर शरीर में शीघ्रता से
फ
ै लिे वाला एवं अग्नि को प्रदीप्नत करिे वाला हो जाता है। जाररत
पारद की अपेक्षा पुटपाक द्वारा निर्मभत लौहादद भस्में अधिक
गगुणवाि हो जाती है।
लोिादेरपुनभाुवो र्गुणाधिक्यं ततोऽग्रता अनप्सुमज्जनं रेखापूणुता पुटतो भवेत्
पुटाद्याव्यो लघुत्वञ्ि शीघ्रव्याग्प्तश्ि द पनम् जाररतादपप सूतेन्द्राल्लोहालोिानामधिको र्गुणः
यथाश्मतन पवशेद्वग्ननर्ुदिस्थपुटयोर्गतः िूणुत्वाद्धिर्गुणावाग्प्तस्तथा लोिेषु तनग्श्ितम्
(र. र. स. 10/48-50)
(1) दोषहानि
(2) गुणोदय
(3) निरुत्थत्व
(4) दीपि
(5) वाररतरत्व
(6) रेखापूणभता
(7) शीघ्रव्याग्प्नत
(8) सूक्ष्मता
भवेत्यतः पुटादेव दोषिातनर्गुुणोदयः रसोपरसलोिानां पुटपाकस्ततः स्मृतः
पुटपाक
े न लोिादेतनुरुत्थत्वञ्ि द पनम् भवेत्वाररतरत्वञ्ि पुटपाकस्ततः स्मृतः
(र. त. 3/33-34)
पुट का प्रभाव
Puta sankhya depends on drug subjected for puta i.e. Mridu, Madyam,
Kathin dravya. Varies according to different Acharyas .
• Normally it contains 10 – 100 Puta.
• In case of Rasayana Karma of Abhraka it contains100-1000 puta.
• For vajikarna 10 – 500 (R.S.S. – 1/35)
• In somala – 1 puta
• Sankha, shukti – 3 puta
• In Suvarna and Tamra number varies from 1 – 40.
• Depends upon the process and nature of drug.
PUT SANKHAYA
# Divided in to 3 types, depending upon source of energy :-
• Chandra Puta
• Surya Puta
• Agni PutaDivided
# Above 3, Chandra and Surya Puta depends on the natural
source of energy. i.e. on sun and moon.
TYPES OF PUTA
• च्द्रमा की ककरणों से प्राप्नत होिे
वाली ताप ऊजाभ क
े र्लए भस्मीय
द्रव्य को लेकर भाविा देते हुए
च्द्रमा की चांदिी में रखा जाता
है। उसे च्द्रपुटकहते है।
• यथाः-च्द्रपुटी प्रवाल भस्म
(रसत्रसार, भाग प्रथम, पृष्ठ-
191)
CHANDRAPUT
द्रव्याणां भापवतानान्तु भावनौषिजै रसैः
शोषणं सूयुतापे यत्तत्सूयुपुटमुच्यते
(र.त. 3/37)
• ककसी भी द्रव्य को भाविा देिे वाली औषधियों क
े स्वरस कषाय आदद से भाववत या
तर करक
े में रखकर सुखािे की ववधि को सूयभपुट कहते है।
• इसे रौद्रपुट या भािुपाक भी कहते हैं।
SURYAPUTA (Bhanupaka and Raudraputa)
• Artificial source of energy.
Types explained depending upon agni(Fire).
Direct:-
• Mridu agni: Lavaka puta & Kapota puta.
• Madyama agni: Kukkuta puta, Varaha puta.
• Tivra agni: Gaja puta, Maha puta etc.
Indirect:-
• Valuka puta Lavana puta Gorvara puta.
AAGNIPUT
# According to aagni
• Mahaputa
• Gajaputa
• kukkutputa
• Varahputa
• Kapootputa (Laghuputa)
• Bhudharputa
# According to fule / instrument use
• Gobarputa (Lavakputa)
• Bhanda (kumbhaputa)
• Balukaputa
TYPES
Dimensions and temperature attained by different Puta
भूर्म में दो-दो हाथ (48 अंगुल = 91
से. मी.) लंबा, चौडाऔर गहरा गड्ढा
खोदकर 1000 उपलें िीचे डालकर,
कफर शराव सम्पुट रखकर ऊपरसे शेष
500 उपलें रखकर अग्नि प्रज्वर्लत
की जाती है, इसे महापुट कहते है।
इसकाउपयोग लौह, अभ्रक, ताम्र आदद
द्रव्यों की भस्म बिािे में ककया जाता
है।
तनम्ने पवस्तरतः क
ु ण्डे द्पविस्ते ितुरस्रक
े वनोत्पल सिस्रेण पूररते पुटनौषिम्
क्रोच्या रुद्िं प्रयत्नेन पपग्ष्टकोपरर तनक्षिपेत् वनोत्पल सिस्राद्ुि क्रोधथकोपरर पवन्यसेत्
वदि प्रज्वालयेत्तत्र मिापुटलमदं स्मृत (र. र. स. 10/51-52)
MAHAPUTA
MAHAPUTA
राजा क
े हाथ क
े बराबर (30 अंगुल)
लम्बा, चौडा और गहराचौकोर गड्ढा
खोदकर 750 व्योपल कण्ठ तक
भरकर, मूषा या शराव सम्पुट
कोरखकर ऊपर 250 व्योपल भर
कर अग्नि जला देते है, इसे गजपुट
कहते है। इसमें1000 उपलों की
आवश्यकता होती है।
राजिस्तप्रमाणेन ितुरस्रञ्ि तनम्नकम् पूणुञ्िोपलशाठीलभः कण्ठावध्यथ पवन्यसेत्
पवन्यसेत्क
ु मुद तत्र पुटनद्रव्यपूररताम् पूणुञ्छर्गणतोऽिाुतन धर्गररण्डातन पवतनक्षिपेत्
(र. र.स.10/53-54 )
GAJAPUTA
GAJAPUTA
भूर्म में 2 ववत्ता (ववतग्स्त) लंबा, चौडा एवं गहरा
गड्ढाखोदकर उसक
े आिे भाग में ऊपले भरकर
सम्पुट को रखकर, कफर शेष उपलें भरकरअग्नि दी
जाती है। इसे क
ु क्क
ु टपुट कहते है।
आचायों में क
ु क्क
ु टपुट क
े बारे में मतर्भ्िता है:-
यथाः- एक हाथ लम्बे.चौडे एवं गहरे गड्ढे में 10
व्योपल द्वारा अग्नि देिे पर क
ु क्क
ु टपुट कहलाता
है। एकववतग्स्त लंबा चौडा एवं गहरा गड्ढा क
ु क्क
ु टपुट
कहलाता है। सोलह अंगुल लंबा,चौडा एवं गहरा गड्ढा
भी क
ु क्क
ु टपुट कहलाता है। छ: अंगुल लंबा, चौडा एवं
गहरागड्ढे में उपलों द्वारा अग्निदेिा क
ु क्क
ु टपुट
कहलाता है। इसका उपयोग स्वणभभस्म एवंरजतभस्म
निमाभण में ककया जाता है।
पुटंभूलम तले यत्तग्व्दतग्स्तग्व्दतयोच्रयम्
तावच्ितलपवस्तीणं तत्स्यात्क
ु क्क
ु टक
ं पुटम्
KUKKUTPUTA
• A pit of two vitastis (24 inches) in length,depth andwidth is dug on the earth and
incineration is done.
Difference of opinion.
• 2 vittasti is bigger than varaha
seems uncorrect
• The term bhumitale may be
inferred as on theground
without digging.
• Bhavamishra-16 angula
• Dhanvantari Samhitakar-6
angula
• While few acharyas say it should
be taken as 1vitasti (12 inches)
KUKKUTPUTA
एक अरनि (22 अंगुल) लम्बा, चौडा
और गहरा चौकोर गड्ढा खोदकर िीचे
350 व्योपल, मध्य में शराव सम्पुट
तथा 150 उपलें ऊपर से रखकर अग्नि
दी जाती है, इसे वाराहपुट कहते है।
इसका उपयोग अभ्रक, ताम्र, रजत,
स्वणभमाक्षक्षक भस्म बिािे में ककया
जाता है।
क
ु ण्डे त्वरग्त्नमानेन ितुरस्रे तथोग्च्रते
पुटं यद् द यते तत्तु वारािपुटमुच्यते
VARAHPUTA
VARAHPUTA
• Also known as laghu/swalpa/mraudu
puta.
• भूर्म क
े अ्दर एक छोटा गड्ढा खोदकर
आठ व्योपलों द्वारा औषधियुक्त पारद
को भस्म करिे क
े र्लए शराव सम्पुट कर
अग्नि देिे को कपोतपुटकहते है।
• USED:- used of incineration of parada.
यत्पुटं द यते भूमावष्टसङ्ख्यैवुनोपलैः
र्द्ध्वा सूताक
ु भस्माथं कपोतपुटमुच्यते
. (र.र.स. 10/57)
KAPOOTPUTA
• भूर्म गतभ में औषिद्रव्य युक्त मूषा
रखकर उसक
े चारों ओर दो
अंगुलर्मट्टी या बालू को रखकर ढक
ददया जावें, कफर ऊपर व्योपल
बबछाकर अग्नि दी जातीहै। इसे
भूिरपुट कहते है। इसका उपयोग पारद
एवं संखखया भस्म बिािे में ककया
जाता है।
वदिग्न्मत्रा क्षितौ सम्यक् तनखन्याद्वयङ्खर्गुलादिः
उपररष्टात्पुटं यत्रपुटं तद् भूिरानवयम् (र. र. स. 10/62)
BHUDHARPUTA
गोशाला में गाय क
े खुर से मददभत गोबर
का शुष्कचूणभ ही गोमयकहलाता है।
पारद भस्म निमाभण क
े र्लए गोबर या
तुषों द्वारा अग्नि देिे को गोबरपुटकहते
है। इसका उपयोग रसभस्म र्सद्ि करिे
में होता है।'
र्गोष्ठान्तर्गोिुरिुण्णं शुष्क
ं िूर्णुतर्गोमयम् र्गोवुरं तत्समाददष्टं वररष्ठं रससािने
र्गोवरैवाु तुषैवाुपप पुटं यत्र प्रद यते तद् र्गोवुरपुटं प्रोक्तं लसद्िये रसभस्मनः
(र.र.स. 10/58-59)
GOBARPUTA(lavakputa
एक बडा र्मट्टी का घडा लेकर
उसमें तुष भरकर मध्य मेंशराव
सम्पुट रखकर, कफर तुष भरकर
अग्नि दी जाती है, इसे क
ु म्भपुट
या भाण्डपुटकहते है। इसका
उपयोग हरताल, सोमल आदद की
भस्म बिािे में ककया जाता है।
स्थूलभाण्डे तुषापूणे मध्ये मूषासमग्न्वते
वग्ननना पवदिते पाक
े तद्भाण्डपुटमुच्यते
BHANDAPUTA(KUMBHPUTA) Pot incineration
• Also known as Bhandaputa, mridubhandaputa.
• Tusha is taken in earthen mud pot.
• Fill it up to neck and put the shrava samputain
middle of pot and ignite fire.
• Bhavaprakash also explained the same.
• Used for Hartala , Somal Bhasma.
• No explanation about duration of agni.
KUMBHAPUTA
• If a concealed crusible is
kept amidst heated sand
incineration is performed.
• It is called Valukaputa.
• This is done in two ways.
अिस्तादुपररष्टाश्ि क्रौग्ञ्िकाऽछाद्यते खलु
वालुकालभः प्रतप्तालभयुत्र तद्वालुकापुटम्
BALUKAPUTA (sand incineration)
• Compared with Furnace.
• A furnace is a deviceused for heating.
• Sometimesas a synonym for kiln, a device used to fire clay to produce
ceramics.
• In British Englishthe term furnace is used exclusively to mean industrial
furnaces which are used for many things, such as the extraction of metal
from ore (smelting).
• Furnace can also refer to a direct fired heater, used in boiler applications
in chemical industriesor for providing heat to chemical reactionsfor
processeslike cracking, and is part of the standard Englishnames for man
metallurgical furnaces worldwide.
PUTA IN PRESENT DAY
• Blast furnace
• Steel making furnaces
• Puddling furnace
• Bessemer converter
• Open hearth furnace
• Basic oxygen furnace
• Electric arc furnace
• Electric induction furnace
• Furnaces used to remelt
• Furnaces used to reheat
• Vacuum furnaces
• Muffle furnace
TYPES OF FURNACE
•Furnace can also refer to a direct fired
heater, used in boiler applications in
chemical industries or for providing
heat to chemical reactions for
processes like cracking, and is part of
the standard.
MUFFLE FURNANCE
•A muffle furnace or muffle
oven (sometimes retort
furnace in historical usage)
is a furnace in which the
subject material is isolated
from the fuel and all of the
products of combustion,
including gases and flying
ash.
MUFFLE FURNANCE • TEMPERATURE:
• OPTIONAL ACCESSORIES :
• MaXimum Temperature
1000/1200/1400/1500°C
• Working Temperature
900/1150/1300/1450°C
• 100mm x 100mm x 225mm1.5kw
• 125mm x 125mm x 250mm2.0kw
• 250mm x 150mm x 300mm3.0kw
• 125mm x 175mm x 475mm 4.0kw
• 175mm x 175mm x 475mm 4.5kw
• 200mm x 200mm x 300mm5.okw
Temperatureranges upto 1100°Cand 1450°C
Model No.Size (HxWxD)
MF-4490 (4×4×9)
MF-5510 (5×5×10)
MF. 5512 (5×5×12)
MF-4612 (4×6×12)
MF-6612 (6×6×12)
• Ashing organic, inorganic samples.
• Heat treating small steel parts.
• Ignition tests.
• Gravimetric analysis.
• Determination of volatile and suspended solids.
• Material testing.
• Pre-heating, melting, incinerating.
• Drying.
• Melting glass
• Creating enamel coatings
• Technical ceramics
• Soldering and brazing.
APPLICATION
•No standard made for Cow Dung in classical text. E.g.
about shape, size , weight etc.
•No explanation found regarding temperature and its
duration.
•Some times not possible to use on large scale
(Industrial level).
•Non Availability of Standard Cow Dung in present time.
PRESENT DAY NEED
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Puta

  • 2. INDEX • Introduction Of puta • Importance of aagni • Definition of puta • Etymology • Synonyms of puta • Uses of puta • Puta sankhya • Puta karma • Types of puta • Chandraput • Suryaput • Aagniput • Types according to aagni • mahaput • Gajaputa • kukkotput • Varahputa • kapotput • Laghuput • Bhudharput • Lawakput • kumbhaput • Balukaput • Gobar put
  • 3. Rasashastrais the branch of Ayurveda which was developed in the medieval period. It mainly deals with the drugs of mineral origin. Various impurities and toxins are present in these minerals. In order to eliminate these toxins and to make them therapeutically suitable for internal administrationprocedures like shodhana, marana are done. The process by which metals and minerals are converted into bhasma form is called Marana. Puta plays a vital role in bhasmikarana of metals and minerals. For proper attainment of paka of Rasadi dhatus an ideal quantity of heat is required which should be neither less nor more, that is called puta. By utilising puta as a device, one can judge whether Samyak Paka of the drug have been achieved or not. The fire generated with the cow dung cakes help to achieve this Paka INTRODUCTION OF PUTA
  • 4. • Importance of Agni • Agni is the basic. • One of the panchmahabhoota. • Plays a very important role in formation of any type of medicine. • Transformationand conversion of dravya and making them for suitable for use. • Arkaprakash explained 6 types of agni.i.e.Dhumaagni, Mandaagni, Deepaagni,Madhymaagni, Kharagni,Bhutaagni. IMPORTANCE OF AAGNI
  • 5. • The word puta is derived from श्लेष being suffixed by प्न्चप्रत्यय which has the meaning of संश्लेषणे or adhesion or to give support and classified under तुदादद गण with the meaning of adhesion. • Puta indicates the heating device in which the material is to be heated in closed earthen saucers. पुट संश्लेषणे तुदादद संसर्गे पुटयातत तुदादद ETYMOLOGY (निरुक्ती)
  • 6. • Agni used for the paka of Rasa,Maharas, Uprasa, Sadharanarasa, Dhatu, Updhatu, Ratan, Upratan known as Puta. • If less or more agni subjected to dravya can destroy its properties. • when Rasadidravyas undergo any heating procedure, the proper stage of end product obtained is known as Paka. Paka obtained should be optimum unit of heat required to obtain the optimum paka (supaka) is called as Puta. रसाददद्रव्यपाकानाम् प्रमाणज्ञापनम्पुटम् नेष्टो न्यूनाधिकः पाकः सुपक्वम्दितमौषिम्॥ DEFINITION OF PUTA
  • 7. रस, मिारस, उपरस, सािारण रस, िातु, उपिातु, रत्न, उपरत्न आदद द्रव्यों क े पाक या भस्म करने क े ललए अग्नन क े मान को सूधित कराने वाले माध्यम को पुट किते िैं न्यून या अधिक पाक करना अभीष्ट नि ं िोता िै, क्योंकक अच्छी प्रकार पक्व औषधि ि लाभकार िोती िै पररभाषा
  • 8. •Putena • Dagdham • Putam • Putet (Rasendra Mangala) SYNONYMS OF PUTA
  • 9. • BHASMIKARNAN. • DOSHA NIRHARAN. • GUNA VARDHAN. • CONVERT DRUGS OF MINERAL ORIGIN – TO LIGHT FORM - VARITARA, REKHAPURNATWA. • DEVELOP DEEPANA PROPERTY WHICH STIMULATEWHOLE METABOLIC PROCESS OF BODY. USES OF PUTA
  • 10. Dravya sangrahana →Churnikarana → Shodhana → Bhavana → Chakrika nirmana (Pellets) →Dry → Sharava samputa → Sandhibandhana→ Dry → Puta → Swangasheeta → Collection of Bhasma → Bhasma pareeksha. PUTA KARMA
  • 12. भवेद्यतः पुटादेव दोषिातनर्गुुणोदयः रसोपरसलोिानां पुटपाकस्ततः स्मृतः पुटपाक े नलोिादेतनुरुत्थत्वञ्ि द पनम ् भवेद्वाररतरत्वञ्िपुटपाकस्ततःस्मृतः (र. त.3/4) पुटपाक की गयी औषधियााँ निदोष एवं गुणज्ञ होती है। पुट द्वारा पाधचत औषधियााँ निरुत्थ, वाररतर, दीपि-पाचि गुणों से युक्त हो जाती है। पुट द्वारा भस्म में ववशेष गुण प्राप्नत होते है। अतः रसशास्रीय द्रव्यों का पाक पुट द्वारा ही ककया जाता है। पुट का प्रयोजन एवं पररणामः-
  • 13. पुट देिे पर लोहादद िातु भस्म होकर अपुिभभव एवं उसक े गुणों में वृद्धि हो जाती है। उिमें रेखापूणभ एवं वाररतरत्व गुण आ जाते है। पुट क े प्रभाव से भारी पत्थर भी हल्का होकर शरीर में शीघ्रता से फ ै लिे वाला एवं अग्नि को प्रदीप्नत करिे वाला हो जाता है। जाररत पारद की अपेक्षा पुटपाक द्वारा निर्मभत लौहादद भस्में अधिक गगुणवाि हो जाती है। लोिादेरपुनभाुवो र्गुणाधिक्यं ततोऽग्रता अनप्सुमज्जनं रेखापूणुता पुटतो भवेत् पुटाद्याव्यो लघुत्वञ्ि शीघ्रव्याग्प्तश्ि द पनम् जाररतादपप सूतेन्द्राल्लोहालोिानामधिको र्गुणः यथाश्मतन पवशेद्वग्ननर्ुदिस्थपुटयोर्गतः िूणुत्वाद्धिर्गुणावाग्प्तस्तथा लोिेषु तनग्श्ितम् (र. र. स. 10/48-50)
  • 14. (1) दोषहानि (2) गुणोदय (3) निरुत्थत्व (4) दीपि (5) वाररतरत्व (6) रेखापूणभता (7) शीघ्रव्याग्प्नत (8) सूक्ष्मता भवेत्यतः पुटादेव दोषिातनर्गुुणोदयः रसोपरसलोिानां पुटपाकस्ततः स्मृतः पुटपाक े न लोिादेतनुरुत्थत्वञ्ि द पनम् भवेत्वाररतरत्वञ्ि पुटपाकस्ततः स्मृतः (र. त. 3/33-34) पुट का प्रभाव
  • 15. Puta sankhya depends on drug subjected for puta i.e. Mridu, Madyam, Kathin dravya. Varies according to different Acharyas . • Normally it contains 10 – 100 Puta. • In case of Rasayana Karma of Abhraka it contains100-1000 puta. • For vajikarna 10 – 500 (R.S.S. – 1/35) • In somala – 1 puta • Sankha, shukti – 3 puta • In Suvarna and Tamra number varies from 1 – 40. • Depends upon the process and nature of drug. PUT SANKHAYA
  • 16. # Divided in to 3 types, depending upon source of energy :- • Chandra Puta • Surya Puta • Agni PutaDivided # Above 3, Chandra and Surya Puta depends on the natural source of energy. i.e. on sun and moon. TYPES OF PUTA
  • 17. • च्द्रमा की ककरणों से प्राप्नत होिे वाली ताप ऊजाभ क े र्लए भस्मीय द्रव्य को लेकर भाविा देते हुए च्द्रमा की चांदिी में रखा जाता है। उसे च्द्रपुटकहते है। • यथाः-च्द्रपुटी प्रवाल भस्म (रसत्रसार, भाग प्रथम, पृष्ठ- 191) CHANDRAPUT
  • 18. द्रव्याणां भापवतानान्तु भावनौषिजै रसैः शोषणं सूयुतापे यत्तत्सूयुपुटमुच्यते (र.त. 3/37) • ककसी भी द्रव्य को भाविा देिे वाली औषधियों क े स्वरस कषाय आदद से भाववत या तर करक े में रखकर सुखािे की ववधि को सूयभपुट कहते है। • इसे रौद्रपुट या भािुपाक भी कहते हैं। SURYAPUTA (Bhanupaka and Raudraputa)
  • 19. • Artificial source of energy. Types explained depending upon agni(Fire). Direct:- • Mridu agni: Lavaka puta & Kapota puta. • Madyama agni: Kukkuta puta, Varaha puta. • Tivra agni: Gaja puta, Maha puta etc. Indirect:- • Valuka puta Lavana puta Gorvara puta. AAGNIPUT
  • 20. # According to aagni • Mahaputa • Gajaputa • kukkutputa • Varahputa • Kapootputa (Laghuputa) • Bhudharputa # According to fule / instrument use • Gobarputa (Lavakputa) • Bhanda (kumbhaputa) • Balukaputa TYPES
  • 21. Dimensions and temperature attained by different Puta
  • 22. भूर्म में दो-दो हाथ (48 अंगुल = 91 से. मी.) लंबा, चौडाऔर गहरा गड्ढा खोदकर 1000 उपलें िीचे डालकर, कफर शराव सम्पुट रखकर ऊपरसे शेष 500 उपलें रखकर अग्नि प्रज्वर्लत की जाती है, इसे महापुट कहते है। इसकाउपयोग लौह, अभ्रक, ताम्र आदद द्रव्यों की भस्म बिािे में ककया जाता है। तनम्ने पवस्तरतः क ु ण्डे द्पविस्ते ितुरस्रक े वनोत्पल सिस्रेण पूररते पुटनौषिम् क्रोच्या रुद्िं प्रयत्नेन पपग्ष्टकोपरर तनक्षिपेत् वनोत्पल सिस्राद्ुि क्रोधथकोपरर पवन्यसेत् वदि प्रज्वालयेत्तत्र मिापुटलमदं स्मृत (र. र. स. 10/51-52) MAHAPUTA
  • 24. राजा क े हाथ क े बराबर (30 अंगुल) लम्बा, चौडा और गहराचौकोर गड्ढा खोदकर 750 व्योपल कण्ठ तक भरकर, मूषा या शराव सम्पुट कोरखकर ऊपर 250 व्योपल भर कर अग्नि जला देते है, इसे गजपुट कहते है। इसमें1000 उपलों की आवश्यकता होती है। राजिस्तप्रमाणेन ितुरस्रञ्ि तनम्नकम् पूणुञ्िोपलशाठीलभः कण्ठावध्यथ पवन्यसेत् पवन्यसेत्क ु मुद तत्र पुटनद्रव्यपूररताम् पूणुञ्छर्गणतोऽिाुतन धर्गररण्डातन पवतनक्षिपेत् (र. र.स.10/53-54 ) GAJAPUTA
  • 26. भूर्म में 2 ववत्ता (ववतग्स्त) लंबा, चौडा एवं गहरा गड्ढाखोदकर उसक े आिे भाग में ऊपले भरकर सम्पुट को रखकर, कफर शेष उपलें भरकरअग्नि दी जाती है। इसे क ु क्क ु टपुट कहते है। आचायों में क ु क्क ु टपुट क े बारे में मतर्भ्िता है:- यथाः- एक हाथ लम्बे.चौडे एवं गहरे गड्ढे में 10 व्योपल द्वारा अग्नि देिे पर क ु क्क ु टपुट कहलाता है। एकववतग्स्त लंबा चौडा एवं गहरा गड्ढा क ु क्क ु टपुट कहलाता है। सोलह अंगुल लंबा,चौडा एवं गहरा गड्ढा भी क ु क्क ु टपुट कहलाता है। छ: अंगुल लंबा, चौडा एवं गहरागड्ढे में उपलों द्वारा अग्निदेिा क ु क्क ु टपुट कहलाता है। इसका उपयोग स्वणभभस्म एवंरजतभस्म निमाभण में ककया जाता है। पुटंभूलम तले यत्तग्व्दतग्स्तग्व्दतयोच्रयम् तावच्ितलपवस्तीणं तत्स्यात्क ु क्क ु टक ं पुटम् KUKKUTPUTA
  • 27. • A pit of two vitastis (24 inches) in length,depth andwidth is dug on the earth and incineration is done. Difference of opinion. • 2 vittasti is bigger than varaha seems uncorrect • The term bhumitale may be inferred as on theground without digging. • Bhavamishra-16 angula • Dhanvantari Samhitakar-6 angula • While few acharyas say it should be taken as 1vitasti (12 inches) KUKKUTPUTA
  • 28. एक अरनि (22 अंगुल) लम्बा, चौडा और गहरा चौकोर गड्ढा खोदकर िीचे 350 व्योपल, मध्य में शराव सम्पुट तथा 150 उपलें ऊपर से रखकर अग्नि दी जाती है, इसे वाराहपुट कहते है। इसका उपयोग अभ्रक, ताम्र, रजत, स्वणभमाक्षक्षक भस्म बिािे में ककया जाता है। क ु ण्डे त्वरग्त्नमानेन ितुरस्रे तथोग्च्रते पुटं यद् द यते तत्तु वारािपुटमुच्यते VARAHPUTA
  • 30. • Also known as laghu/swalpa/mraudu puta. • भूर्म क े अ्दर एक छोटा गड्ढा खोदकर आठ व्योपलों द्वारा औषधियुक्त पारद को भस्म करिे क े र्लए शराव सम्पुट कर अग्नि देिे को कपोतपुटकहते है। • USED:- used of incineration of parada. यत्पुटं द यते भूमावष्टसङ्ख्यैवुनोपलैः र्द्ध्वा सूताक ु भस्माथं कपोतपुटमुच्यते . (र.र.स. 10/57) KAPOOTPUTA
  • 31. • भूर्म गतभ में औषिद्रव्य युक्त मूषा रखकर उसक े चारों ओर दो अंगुलर्मट्टी या बालू को रखकर ढक ददया जावें, कफर ऊपर व्योपल बबछाकर अग्नि दी जातीहै। इसे भूिरपुट कहते है। इसका उपयोग पारद एवं संखखया भस्म बिािे में ककया जाता है। वदिग्न्मत्रा क्षितौ सम्यक् तनखन्याद्वयङ्खर्गुलादिः उपररष्टात्पुटं यत्रपुटं तद् भूिरानवयम् (र. र. स. 10/62) BHUDHARPUTA
  • 32. गोशाला में गाय क े खुर से मददभत गोबर का शुष्कचूणभ ही गोमयकहलाता है। पारद भस्म निमाभण क े र्लए गोबर या तुषों द्वारा अग्नि देिे को गोबरपुटकहते है। इसका उपयोग रसभस्म र्सद्ि करिे में होता है।' र्गोष्ठान्तर्गोिुरिुण्णं शुष्क ं िूर्णुतर्गोमयम् र्गोवुरं तत्समाददष्टं वररष्ठं रससािने र्गोवरैवाु तुषैवाुपप पुटं यत्र प्रद यते तद् र्गोवुरपुटं प्रोक्तं लसद्िये रसभस्मनः (र.र.स. 10/58-59) GOBARPUTA(lavakputa
  • 33. एक बडा र्मट्टी का घडा लेकर उसमें तुष भरकर मध्य मेंशराव सम्पुट रखकर, कफर तुष भरकर अग्नि दी जाती है, इसे क ु म्भपुट या भाण्डपुटकहते है। इसका उपयोग हरताल, सोमल आदद की भस्म बिािे में ककया जाता है। स्थूलभाण्डे तुषापूणे मध्ये मूषासमग्न्वते वग्ननना पवदिते पाक े तद्भाण्डपुटमुच्यते BHANDAPUTA(KUMBHPUTA) Pot incineration
  • 34. • Also known as Bhandaputa, mridubhandaputa. • Tusha is taken in earthen mud pot. • Fill it up to neck and put the shrava samputain middle of pot and ignite fire. • Bhavaprakash also explained the same. • Used for Hartala , Somal Bhasma. • No explanation about duration of agni. KUMBHAPUTA
  • 35. • If a concealed crusible is kept amidst heated sand incineration is performed. • It is called Valukaputa. • This is done in two ways. अिस्तादुपररष्टाश्ि क्रौग्ञ्िकाऽछाद्यते खलु वालुकालभः प्रतप्तालभयुत्र तद्वालुकापुटम् BALUKAPUTA (sand incineration)
  • 36. • Compared with Furnace. • A furnace is a deviceused for heating. • Sometimesas a synonym for kiln, a device used to fire clay to produce ceramics. • In British Englishthe term furnace is used exclusively to mean industrial furnaces which are used for many things, such as the extraction of metal from ore (smelting). • Furnace can also refer to a direct fired heater, used in boiler applications in chemical industriesor for providing heat to chemical reactionsfor processeslike cracking, and is part of the standard Englishnames for man metallurgical furnaces worldwide. PUTA IN PRESENT DAY
  • 37. • Blast furnace • Steel making furnaces • Puddling furnace • Bessemer converter • Open hearth furnace • Basic oxygen furnace • Electric arc furnace • Electric induction furnace • Furnaces used to remelt • Furnaces used to reheat • Vacuum furnaces • Muffle furnace TYPES OF FURNACE
  • 38. •Furnace can also refer to a direct fired heater, used in boiler applications in chemical industries or for providing heat to chemical reactions for processes like cracking, and is part of the standard.
  • 39. MUFFLE FURNANCE •A muffle furnace or muffle oven (sometimes retort furnace in historical usage) is a furnace in which the subject material is isolated from the fuel and all of the products of combustion, including gases and flying ash.
  • 40. MUFFLE FURNANCE • TEMPERATURE: • OPTIONAL ACCESSORIES : • MaXimum Temperature 1000/1200/1400/1500°C • Working Temperature 900/1150/1300/1450°C • 100mm x 100mm x 225mm1.5kw • 125mm x 125mm x 250mm2.0kw • 250mm x 150mm x 300mm3.0kw • 125mm x 175mm x 475mm 4.0kw • 175mm x 175mm x 475mm 4.5kw • 200mm x 200mm x 300mm5.okw
  • 41. Temperatureranges upto 1100°Cand 1450°C Model No.Size (HxWxD) MF-4490 (4×4×9) MF-5510 (5×5×10) MF. 5512 (5×5×12) MF-4612 (4×6×12) MF-6612 (6×6×12)
  • 42. • Ashing organic, inorganic samples. • Heat treating small steel parts. • Ignition tests. • Gravimetric analysis. • Determination of volatile and suspended solids. • Material testing. • Pre-heating, melting, incinerating. • Drying. • Melting glass • Creating enamel coatings • Technical ceramics • Soldering and brazing. APPLICATION
  • 43. •No standard made for Cow Dung in classical text. E.g. about shape, size , weight etc. •No explanation found regarding temperature and its duration. •Some times not possible to use on large scale (Industrial level). •Non Availability of Standard Cow Dung in present time. PRESENT DAY NEED