हर समाज क
ेक
ु छ मूलभूत नियम होते हैं उनहहीं से समाज का
स्वरूप तय होता है | नियमों को आम सहमनत क
े जररए तय ककया
जाता है | आधुनिक देशों में यह सहमनत आमतौर पर ललखित रूप
में पाई जाती हैं, जजस दस्तावेज में यह नियम लमलते हैं
उसे संविधान कहा जाता है|
सींववधाि कई उद्देश्यों की पूनति करते है |---
पहला-- यह दस्तावेज उि आदशों को सूत्र बद्ध करता है
जजिक
े आधार पर िागररक अपिे देश को अपिी इच्छा और
सपिों क
े अिुसार रि सकता है | अर्ाित सींववधाि हह बताता है कक
हमारे समाज का मूलभूत स्वरूप क्या है |
3.
सींववधाि कादूसरा मुख्य उद्देश्य होता है देश की राजिीनतक
व्यवस्र्ा को तय करिा | जजि देशों िे लोकताींत्रत्रक शासि पद्धनत
या राजव्यवस्र्ा चुिी है वहाीं निर्िय प्रकिया क
े नियम तय करिे में
सींववधाि बहुत अहम भूलमका अदा करता है सींववधाि में जिता
द्वारा चुिे प्रनतनिधधयों क
े बावजूद सत्ता का दुरुपयोग होिे का
ितरा बिा रहता है जजस से बचिे का उपाय सींववधाि में लमलता है
| कई बार लोकतींत्र में ऐसी जस्र्नतयाीं बि जाती है कक अल्पसींख्यकों
क
े हहतों पर ितरा मींडरािे लगता है ऐसी ववकृ नतयों से बचािा तर्ा
बहुमत की निरींक
ु शता पर प्रनतबींध लगािा भी सींववधाि का
महत्वपूर्ि कायि है |
सींववधाि का तीसरा मुख्य कायि है कक वह ऐसे फ
ै सले लेिे से भी
रोकता है जजससे उि बडे लसद्धाींतों को ठेस पहुींच सकती है जजिमें
देश आस्र्ा रिते हैं | यह ऐसे प्रावधािों को आसािी से ित्म िहहीं
होिे देता जजिसे िागररकों क
े अधधकारों और स्वतींत्रता की रक्षा
होती है |
4.
भारि कासंविधान---
भारतीय सींववधाि को तैयार करिे में लगभग 300 लोगों िे
योगदाि हदया जो 1946 में गहठत की गई सींववधाि सभा क
े
सदस्य र्े | सींववधाि सभा की बैठक
े 3 वर्षों तक चलह | सदस्यों िे
अपिे ऐनतहालसक दानयत्व को बहादुरह से पूरा ककया तर्ा देश को
एक ऐसा कल्पिाशील दस्तावेज हदया जजसमें राष्ट्रहय एकता को
बिाए रिते हुए ववववधता क
े प्रनत गहरा सम्माि हदिाई देता है |
हमारे संविधान क
े क
ु छ मुख्य ब ंदु तनम्नलिखिि हैं-----
5.
संघिाद----
सींघवादका अर्ि होता है देश में से एक ज्यादा स्तर की सरकारों
का होिा|
हमारे देश में तीि स्तरों पर कायि सींपनि होता है | क
ें द्र स्तर
,राज्य स्तर तर्ा स्र्ािीय शासि व्यवस्र्ा |
कायिक्षेत्र की स्पष्ट्टता क
े ललए सींववधाि में क
ु छ सूधचयाीं दह गई है
जजिमें बताया गया है कक कौि से स्तर की सरकार ककि मुद्दों पर
कािूि बिा सकती है |
6.
मौलिक अधधकार---
मौललक अधधकारों को सींववधाि की अींतरात्मा भी कहते हैं | मौललक
अधधकार देश क
े सभी िागररकों को राज्य की सत्ता की मिमािी
और निरींक
ु श इस्तेमाल से बचाता है |अल्पसींख्यकों क
े हहतों क
े
ललए भी प्रावधाि सींववधाि में हदए गए हैं
सींववधाि में उल्लेखित मौललक अधधकार निम्िललखित है ---
1.समािता का अधधकार
2.स्वतींत्रता का अधधकार
3.शोर्षर् क
े ववरुद्ध अधधकार
4.धालमिक स्वतींत्रता का अधधकार
5.साींस्कृ नतक और शैक्षखर्क अधधकार
6.सींवैधानिक उपचार का अधधकार
7.
शक्तियों कांटिारा---
हमारे देश में सरकार क
े तीि अींग है-- ववधानयका ,कायिपाललका तर्ा
नयायपाललका|
1. ववधानयका कािूि बिाती है|
2. कायिपाललका कािूिों का पालि करवाती है तर्ा शासि व्यवस्र्ा
देिती हैं |
3.नयायपाललका नयायव्यवस्र्ा को नियींत्रत्रत करती है |
तीिों अींग एक दूसरे से अलग है परींतु प्रत्येक अींग एक दूसरे पर
अींक
ु श रिता है और इस तरह तीिों अींगों क
े बीच सत्ता का सींतुलि
बिा रहता है |
8.
राज्य क
ेनीति तनदेशक ित्ि ---
इस भाग को सींववधाि में लािे का उद्देश्य र्ा कक स्वतींत्र भारतीय
राज्य जिता की गरहबी दूर करिे तर्ा सामाजजक और आधर्िक
सुधार लािे क
े ललए बिािे वाले कािूिों तर्ा िीनतयों मे इि
लसद्धाींतों को मागिदशिक क
े रुप में सदैव अपिे सामिे रिें |
9.
संसदीय शासनपद्धति----
हमारे देश में सरकार क
े सभी स्तरों पर प्रनतनिधधयों का चुिाव लोग
िुद करते हैं | भारत का सींववधाि अपिे सभी वयस्क िागररकों को
मत देिे का अधधकार देता है इससे िा क
े वल लोकताींत्रत्रक सोच व
तौर-तरहकों को प्रोत्साहि लमलेगा बजल्क जानत ,वगि और स्त्री- पुरुर्ष
क
े फक
ि पर आधाररत ऊ
ीं च-िीच की बेडडयों को भी तोडा जा सकता
है | साविभौलमक मताधधकार का मतलब है कक ककसी भी पृष्ट्ठभूलम
का व्यजक्त मतदाि करिे क
े ललए पूर्ि रुप से स्वतींत्र है तर्ा वह
स्वयीं भी चुिाव लड सकता है |
10.
IMPORTANT POINTSDIRECT FROM BOOK ---
सींववधाि सभा की अींनतम बैठक 26 जिवरह 1950 को हुई
• भारत का सींववधाि लागू होते समय---
िाद एवीं कृ वर्ष मींत्री- श्री जयराम दास दौलतराम
स्वास््य मींत्री -राजक
ु मारह अमृत कौर
ववत्त मींत्री- डॉक्टर जॉि मर्ाई
उप प्रधािमींत्री -सरदार वल्लभभाई पटेल
श्रम मींत्री -श्री जगजीवि राम
• राज्य एक ऐसी राजिीनतक सींस्र्ा होती है जो निजश्चत भूभाग में
रहिे वाले सींप्रभु लोगों का प्रनतनिधधत्व करती हैं |
• 2008 में राजतींत्र को ित्म करिे क
े बाद िेपाल लोकतींत्र बि गया
|
11.
IMPORTANTTERMS DIRECT FROMBOOK---
आदशश-- जब कोई लक्ष्य या लसद्धाींत अपिे शुद्ध या सविश्रेष्ट्ठ रूप
में होता है तो उसे आदशि कहा जाता है |
तनरंक
ु शिा -- इसका मतलब सत्ता या अधधकारों क
े ि
ू र एवीं अनयाय
पूर्ि इस्तेमाल से है |
12.
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