जिन सर्वनामों सेकिसी ननजचित र्स्तु िा बोध नह ीं होता उन्हें
अननचियर्ािि सर्वनाम िहते हैं। िैसे- िोई, ि
ु छ ।
(i) िोई आ गया तो क्या िरोगे ?
(ii) उसने ि
ु छ नह ीं लिया।
िभी-िभी ि
ु छ शब्द-समूह' भी अननचिय सर्वनाम ि
े रूप में
प्रयुक्त होते हैं। िैसे- 1. ि
ु छ न ि
ु छ, 2. िोई न िोई, 3.
सब ि
ु छ, 4. हर िोई, 5. ि
ु छ भी, 6. ि
ु छ - ि
ु छ आदद ।
5.
जिस सर्वनामसे किसी दूसरे सर्वनाम या सींज्ञा से सींबींध
स्थापपत किया िाय, उसे सींबींधर्ािि सर्वनाम िहते हैं। िैसे-
िो, सो।
िो आया है, सो िायेगा यह ध्रुर् सत्य है। (सो-सर्वनाम) िो
िरेगा र्ह भरेगा।
6.
प्रचन िरनेि
े लिए प्रयुक्त होने र्ािे सर्वनाम शब्दों िो
प्रचनर्ािि सर्वनाम िहा िाता है। िैसे िौन, क्या ।
(i) िौन आया था ?
(ii) र्ह क्या िह रहा था ?
(iii) दूध में क्या गगर पडा ?
7.
िो सर्वनामतीनों पुरुषों ( प्रथम, द्पर्तीय और तृतीय पुरुष) में ननित्र् िा बोध
िराये, उसे ननिर्ािि सर्वनाम िहते हैं। िैसे - यह िायव मैं आप िर िूूँगा। तुम
अपने-आप खा िेना। र्ह स्र्यीं (खुद) गाडी ििाती है।
इन र्ाक्यों में प्रयुक्त 'आप', 'अपने-आप' और 'स्र्यीं' ('खुद') शब्द ननिर्ािि
सर्वनाम हैं। इस प्रिार स्पष्ट है कि 'आप', 'अपने' 'अपने-आप', 'स्र्तः', 'स्र्यीं',
'खुद' आदद शब्द ननिर्ािि सर्वनाम ि
े लिए प्रयुक्त होते हैं।
ननिर्ािि सर्वनाम 'आप' : यह िायव मैं आप ह िर िूींगा- इस र्ाक्य में प्रयुक्त
'आप' स्र्यीं ि
े लिए प्रयुक्त है िो कि पुरुषर्ािि मध्यम पुरुष आदरसूिि सर्वनाम
'आप' से अिग है।
8.
ननिर्ािि सर्वनाम'आप' िा प्रयोग इन जस्थनतयों में होता है-
(i) किसी सींज्ञा या सर्वनाम ि
े अर्धारण/ननचिय ि
े लिए: िैसे-
मैं आप र्ह ीं से आया हूूँ।
(ii) दूसरे व्यजक्त ि
े ननरािरण ि
े लिए; िैसे- र्ह औरों िो
नह ीं, अपने िो सुधार रहा है ।
(iii) सर्वसाधारण ि
े अथव में; िैसे - आप भिा तो िग भिा।
अपने से बडों िा आदर िरना िादहए ।
9.
पुरुषर्ािि और ननिर्ाििसर्वनाम में अींतर
पुरुषवाचक सववनाम क
े उदाहरण : आप आििि क्या पढ़ रहे हैं ?
(आप - मध्यम पुरुष) लशर्ानी दहन्द िी सुप्रलसद्ध उपन्यासिार हैं,
आप बडी सींर्ेदनशीि हैं। (आप - अन्य पुरुष)
ननजवाचक सववनाम क
े उदारण : मैं आप िि िाऊ
ूँ गी। ( आप
प्रथम पुरुष) तुम इसे आप ह िरो। (आप-मध्यम पुरुष) - र्ह आप
ह पढ़ िेगा। (आप - अन्य पुरुष)