ॐ वीरेश्वराय ववद्महेे
वववेकानन्दाय
धीमवे ।
तन्नो वीर :
प्रचोदयात् ।
सफल युवा युवा भारत अभभयान
तृतीय चरण का युवा प्रभिक्षण भिभवर
सफल युवा युवा भारत अभभयान के अंतर्गत
छत्तीसर्ढ़ के १२ भिल्लो से चयभनत १५८ युवा भाई बहन
और व्यवस्था व् सञ्चालन चमू को भमलाकर कु ल संख्या २३८ रही I
भिभवर संरक्षक – श्री अिोक चतुवेदी
भिभवर सवागभिकारी – श्री उल्लाह्स वारे
भिभवर प्रमुख – श्री सुभाष चंद्राकर
भिभवर व्यवस्था – श्री माविीभाई पटेल
भविेष उपभस्थभत – मा. भानुदास िी
मा. भकिोर िी
आ. रामभुवन भसंह िी
आ. रािपूत िी
इन अभिकाररओंके मार्गदिगन में भिभवर सम्पन हुआ
भदनांक ८ िून को िाम ४ बिे आर्मन और १२ िून सुबह ९ बिे
सभी भिभवराथीओंका प्रस्थान रहा I
सरस्वभत भििु मंभदर, रोभहणी पुरम, रायपुर
युवा प्रेरणा भिभवर, रायपुर २०१५
०९ िून, २०१५ युर्ाब्ि ५११७
मंर्लवार अषाढ़ सप्तमी, कृ ष्ण पक्ष
उद्घाटन सत्र
आिीवगचन : श्रद्धेय स्वामी सत्यरूपानंद िी
उद्बोिन : मा. भकिोर िी
अध्यक्ष : श्री अिोक चतुवेदी िी
भिभवर पररचय : श्री सुभाष चंद्राकर िी
मंचासीन
अभतभथ
युवा प्रेरणा भिभवर, रायपुर २०१५
०९ िून, २०१५ युर्ाब्ि ५११७
मंर्लवार अषाढ़ सप्तमी, कृ ष्ण पक्ष
भितीय सत्र : साथगक िीवन
- श्री श्रीर्ोपाल व्यास िी
युवा प्रेरणा भिभवर , रायपुर
१० िून, २०१५ युर्ाब्ि ५११७
बुिवार अषाढ़ अष्टमी, कृ ष्ण पक्ष
- श्री ओमप्रकाि वमाग िी
तृतीय बौभिक
स्वामी भववेकानन्द और संर्ठन कला
संस्कार वर्ग
युवा प्रेरणा भिभवर , रायपुर
१० िून, २०१५ युर्ाब्ि ५११७
बुिवार अषाढ़ अष्टमी, कृ ष्ण पक्ष
चतुथग सत्र
भववेकानन्द भिला स्मारक
और मा. एकनाथ रानडे
- श्री सच्चीदानंद िोिी िी
संस्कार वर्ग
युवा प्रेरणा भिभवर , रायपुर
११ िून, २०१५ युर्ाब्ि ५११७
र्ुरुवार अषाढ़ नवमी, कृ ष्ण पक्ष
पंचम सत्र
कृ भत संकल्प
- आ. िीतल दीदी
संस्कार वर्ग
युवा प्रेरणा भिभवर , रायपुर
११ िून, २०१५ युर्ाब्ि ५११७
र्ुरुवार अषाढ़ नवमी, कृ ष्ण पक्ष
भविेष सत्र
मा. श्री दयालदास बघेल िी
मंत्री सहकाररता, संस्कृ भत एवं पयगटन भवभार् – छत्तीसर्ढ़ िासन
संस्कार वर्ग
युवा प्रेरणा भिभवर , रायपुर
११ िून, २०१५ युर्ाब्ि ५११७
र्ुरुवार अषाढ़ नवमी, कृ ष्ण पक्ष
समारोप
मा. भानुदास िी
राभष्िय महा सभचव, भववेकानन्द के न्द्र कन्याकु मारी
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योर्ाभ्यास
भजन संध्या
र्ीता पठन
श्रम संस्कार
योर् वर्ग भोिन
खेल सत्र
श्रम संस्कार
अभिकारी
कक्ष
साभहत्य भवक्रय
वतगमान पत्रों से
वतगमान पत्रों से
व
तग
मा
न
प
त्रों
से
िार् उठी है तरुणाई..........
व्यक्ति व्यक्ति में जर्ायें रा्ट्र  ेतनना,
जन मन संस्कार करत यही साधना,
साधना क्तनत्य साधना,
साधना अखंड साधना,
साधना अनन्न साधना…..

Yuva Prerna Shivir at Raipur