एकात्म मानववाद
पं. दीनदयाल उपाध्याय
सूत्रात्मक वाक्य
भारतमाता
रत्नाकराधौतपदाां हिमालयककरीहिनीम
ब्रह्मराजर्षिरत्नाढ्याम वन्दे भारतमातरम ॥
“उत्तरम यत समुद्रस्य, हिमाद्रेश्चैव दक्षिणां
वषं तद भारतां नाम भारती यत्र सांततत:”
हिन्दू
िीनां दूषयतत इतत हिन्दू (शब्द कल्पद्रुम)
प्रामाण्य बुद्धधविदेषु तनयमानामनेकता
उपस्यनाम तनयमो हिन्दूधमिस्य लिणां (लोकमान्य ततलक)
आससन्धो: ससन्धुपयिन्ता यस्य भारतभूसमका
र्पतृभू: पुण्यभूयश्च स वै हिन्दुररतत स्मृत: (सावरकर)
न राज्यां न राजासीत न दण्डो न च दण्ण्डका: !
धमेणेव प्रजा: सवाि: रिण्न्तस्म परस्परम !!
(मिाभारत)
बुभुक्षित: ककां न करोतत पापम,
िीणा: नरा: तनष्करुणा: भवण्न्त !
वैश्ववक दर्शन व राज्य पद्धतियााँ
पूंजीवाद
समाजवाद
सामन्िवाद
पररणाम
तनधशन- धनवान संघर्श
सामररक संघर्श
जाति, क्षेत्र, मजिब संघर्श
श्रममक- उद्योगपति संघर्श
राज्य- प्रजा संघर्श
पररणाम
अर्ाश्न्ि
तनधशनिा
पयाशवरण प्रदूर्ण
आिंकवाद
भारि में
४२ वें संववधान संर्ोधन से १९७७ में
SECULARISM
SOCIALISM
DEMOCRACY
FEDERALISM
INTEGRAL HUMANISM
एकात्म मानववाद
एकात्मिा
व्यश्तिगि
सामाश्जक
राष्ट्रीय
वैश्ववक
धमश- भारि का प्राण
र्रीरमाद्यम खलु धमशसाधनम
धमश मजिब- सम्प्प्रदाय- Religion निीं
चािुवशर्णयश व्यवस्था – एकात्मिा का प्रिीक
चिुववशध पुरुर्ाथश – धमश, अथश, काम, मोक्ष
यद्देर्स्य यो जंिु: िद्देर्स्य
िस्यौर्धम
ववदेर्ज ववचार की र्ाववििा पर प्रवन-चचह्न
निीं
ककन्िु उसके अन्धानुकरण की अपेक्षा उसे
देर्ानुकु ल बनाना अपेक्षक्षि
HEGEL- THESIS/ANTI-THESIS/SYNTHESIS
KARL MARX-ECONOMIC INTERPRETATATION
CHARLES DARWIN- SURVIVAL OF THE FITTEST
धमश आधाररि एकात्मिा
परस्पर पूरकिा, परस्परानुकू लिा, समरसिा
असन्िोर्- अर्ाश्न्ि- संघर्श- वववव युद्ध
सन्तोष, समृद्धध, शाण्न्त, प्रगतत
MAN IS A SOCIAL ANIMAL
व्यश्ति
मन- बुद्चध- आत्मा- र्रीर का समुच्चय
चारों में एकात्मिा से िी व्यश्तिगि सुख संभव
HONESTY IS THE BEST BUSINESS POLICY- US
HONESTY IS THE BEST POLICY- EUROPE
Honesty is not a policy but a Principle.
धमश/नैतिक मूल्य िमारी नीति निीं मसद्धान्ि िै तयोंकक धमश
भारि का प्राण िै और िमारी संस्कृ ति का आधार धमश और
प्रकृ ति
MONEY
THE ULTIMATE GOAL IN
CAPITALISM/SOCIALISM
अथश
साधन, साध्य निीं
अथोपाजशन में धमशपालन अतनवायश
EAT DRINK AND BE MERRY
कामनाओं की िृश्ति
(धमश तनयश्न्त्रि)
SOCIETY- GROUP OF PEOPLE
SOCIAL CONTRACT THEORY
स्वयंभू समाज
समाज की एक चचति िै
समाज के भी र्रीर- मन- बुद्चध और आत्मा िैं
NATION- STATES
राष्ट्र- एक ध्येय, ववचार, आदर्श....एक भूमम ववर्ेर् के मलए
मािृभाव
राष्ट्र की चचति- जन्मजाि मूल प्रकृ ति- आत्मा
भारि- एक स्वयंभू राष्ट्र, राज्य उसकी एक संस्था
समाज की वणश-व्यवस्था
ववराट पुरुर् की कल्पना
बिुरंगी समरस समाज
राजा स्वयंभू निीं
राज्य का प्रतितनचध मात्र
धमश की पररचध में राज्य व्यवस्था का सञ्चालन
धमितनरपेिता का प्रश्न िी किााँ
भारत कभी THEOCRATIC STATE निीां रिा
भारत में SECULARISM तनरर्िक
भारत की धचतत के र्वपरीत
अथश व्यवस्था
मानवीयिा का ववकास
मौमलक संसाधनों का उत्पादन
भरण- पोर्ण
जीवन का ववकास
राष्ट्रधारणा
कमाने वाला खाएगा
(पूंजीवादी- समाजवादी व्यवस्था)
कमाने वाला खखलाएगा
जन्मा सो खाएगा
(एकात्म मानववाद)
प्रजा के मर्क्षण, रक्षण, भरण-पोर्ण की
व्यवस्था का किाश िोने से राजा हदलीप को
वपिा किा गया (रघुवंर् मिाकाव्य)
भरणाि रक्षणाि च- भरि
एकात्म मानववादी राज्य व्यवस्था
तन:र्ुल्क मर्क्षा चचककत्सा
पुरुर्ाथश
मानवीय दृश्ष्ट्टकोण
पुरुर्ाथश
खाने वाला कमाएगा
प्रत्येक समथश को काम
संयममि पूंजी तनमाशण
संयममि यांत्रत्रकीकरण
7 M- MACHINE
Man
Material
Money
Motive
Management
Market
Machine
एकात्म मानववादी अथश-व्यवस्था
प्रत्येक व्यश्ति के न्यूनिम जीवन स्िर की आववश्स्ि व
राष्ट्र सुरक्षा सामर्थयश की व्यवस्था
उत्तरोत्तर समृद्चध- राष्ट्र व वववव की प्रगति में योगदान
प्रत्येक सवय व स्वस्थ को सामभप्राय काम
प्राकृ तिक संसाधनों का ममिव्ययिा से उपयोग
राष्ट्रानुकू ल प्रौद्योचगकी (Skill India, Make in India) का
ववकास
सांस्कृ तिक जीवन मूल्यों की रक्षा
ववमभन्न उद्योगों में राज्य, व्यश्ति िथा अन्य संस्थाओं
के स्वाममत्व के तनणशय का व्यविाररक आधार
ववकें द्रीकरण िथा स्वदेर्ी पर बल
अपने प्राचीन गौरव के प्रतत
अश्रद्धा भाव निीां
ककन्तु जड़ता त्याज्य
भारतीय सांस्कृ तत के शाश्वत मूल्यों
के सार् राष्रीयता- प्रजातन्त्र-
समता और र्वश्व एकता के आदशों
का समन्वय
सांस्कृ तत का मात्र सांरिण निीां
अर्पतु उसे गतत देकर सजीव
बनाना
ववराट जाग्रि करें
ववराट- राष्ट्रधारणा की र्श्ति
ववराट जागरण से ववववधिा बाधक निीं र्श्ति
बनिी िै, संघर्श के स्थान पर सद्भाव और
एकात्मिा िोगी
भारि परम वैभव को प्राति करेगा
भारि मािा की जय
डॉ. जय प्रकार् गुति,
अम्प्बाला (भारि)
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Integral humanism

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    भारतमाता रत्नाकराधौतपदाां हिमालयककरीहिनीम ब्रह्मराजर्षिरत्नाढ्याम वन्देभारतमातरम ॥ “उत्तरम यत समुद्रस्य, हिमाद्रेश्चैव दक्षिणां वषं तद भारतां नाम भारती यत्र सांततत:”
  • 5.
    हिन्दू िीनां दूषयतत इततहिन्दू (शब्द कल्पद्रुम) प्रामाण्य बुद्धधविदेषु तनयमानामनेकता उपस्यनाम तनयमो हिन्दूधमिस्य लिणां (लोकमान्य ततलक) आससन्धो: ससन्धुपयिन्ता यस्य भारतभूसमका र्पतृभू: पुण्यभूयश्च स वै हिन्दुररतत स्मृत: (सावरकर)
  • 7.
    न राज्यां नराजासीत न दण्डो न च दण्ण्डका: ! धमेणेव प्रजा: सवाि: रिण्न्तस्म परस्परम !! (मिाभारत) बुभुक्षित: ककां न करोतत पापम, िीणा: नरा: तनष्करुणा: भवण्न्त !
  • 8.
    वैश्ववक दर्शन वराज्य पद्धतियााँ पूंजीवाद समाजवाद सामन्िवाद
  • 9.
    पररणाम तनधशन- धनवान संघर्श सामररकसंघर्श जाति, क्षेत्र, मजिब संघर्श श्रममक- उद्योगपति संघर्श राज्य- प्रजा संघर्श
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    ४२ वें संववधानसंर्ोधन से १९७७ में
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    धमश- भारि काप्राण र्रीरमाद्यम खलु धमशसाधनम धमश मजिब- सम्प्प्रदाय- Religion निीं चािुवशर्णयश व्यवस्था – एकात्मिा का प्रिीक चिुववशध पुरुर्ाथश – धमश, अथश, काम, मोक्ष
  • 16.
    यद्देर्स्य यो जंिु:िद्देर्स्य िस्यौर्धम ववदेर्ज ववचार की र्ाववििा पर प्रवन-चचह्न निीं ककन्िु उसके अन्धानुकरण की अपेक्षा उसे देर्ानुकु ल बनाना अपेक्षक्षि
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    HEGEL- THESIS/ANTI-THESIS/SYNTHESIS KARL MARX-ECONOMICINTERPRETATATION CHARLES DARWIN- SURVIVAL OF THE FITTEST धमश आधाररि एकात्मिा परस्पर पूरकिा, परस्परानुकू लिा, समरसिा असन्िोर्- अर्ाश्न्ि- संघर्श- वववव युद्ध सन्तोष, समृद्धध, शाण्न्त, प्रगतत
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    MAN IS ASOCIAL ANIMAL व्यश्ति मन- बुद्चध- आत्मा- र्रीर का समुच्चय चारों में एकात्मिा से िी व्यश्तिगि सुख संभव
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    HONESTY IS THEBEST BUSINESS POLICY- US HONESTY IS THE BEST POLICY- EUROPE Honesty is not a policy but a Principle. धमश/नैतिक मूल्य िमारी नीति निीं मसद्धान्ि िै तयोंकक धमश भारि का प्राण िै और िमारी संस्कृ ति का आधार धमश और प्रकृ ति
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    MONEY THE ULTIMATE GOALIN CAPITALISM/SOCIALISM अथश साधन, साध्य निीं अथोपाजशन में धमशपालन अतनवायश
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    EAT DRINK ANDBE MERRY कामनाओं की िृश्ति (धमश तनयश्न्त्रि)
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    SOCIETY- GROUP OFPEOPLE SOCIAL CONTRACT THEORY स्वयंभू समाज समाज की एक चचति िै समाज के भी र्रीर- मन- बुद्चध और आत्मा िैं
  • 23.
    NATION- STATES राष्ट्र- एकध्येय, ववचार, आदर्श....एक भूमम ववर्ेर् के मलए मािृभाव राष्ट्र की चचति- जन्मजाि मूल प्रकृ ति- आत्मा भारि- एक स्वयंभू राष्ट्र, राज्य उसकी एक संस्था
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    समाज की वणश-व्यवस्था ववराटपुरुर् की कल्पना बिुरंगी समरस समाज राजा स्वयंभू निीं राज्य का प्रतितनचध मात्र धमश की पररचध में राज्य व्यवस्था का सञ्चालन
  • 25.
    धमितनरपेिता का प्रश्निी किााँ भारत कभी THEOCRATIC STATE निीां रिा भारत में SECULARISM तनरर्िक भारत की धचतत के र्वपरीत
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    अथश व्यवस्था मानवीयिा काववकास मौमलक संसाधनों का उत्पादन भरण- पोर्ण जीवन का ववकास राष्ट्रधारणा
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    कमाने वाला खाएगा (पूंजीवादी-समाजवादी व्यवस्था) कमाने वाला खखलाएगा जन्मा सो खाएगा (एकात्म मानववाद)
  • 28.
    प्रजा के मर्क्षण,रक्षण, भरण-पोर्ण की व्यवस्था का किाश िोने से राजा हदलीप को वपिा किा गया (रघुवंर् मिाकाव्य) भरणाि रक्षणाि च- भरि
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    एकात्म मानववादी राज्यव्यवस्था तन:र्ुल्क मर्क्षा चचककत्सा पुरुर्ाथश मानवीय दृश्ष्ट्टकोण
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    पुरुर्ाथश खाने वाला कमाएगा प्रत्येकसमथश को काम संयममि पूंजी तनमाशण
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    संयममि यांत्रत्रकीकरण 7 M-MACHINE Man Material Money Motive Management Market Machine
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    एकात्म मानववादी अथश-व्यवस्था प्रत्येकव्यश्ति के न्यूनिम जीवन स्िर की आववश्स्ि व राष्ट्र सुरक्षा सामर्थयश की व्यवस्था उत्तरोत्तर समृद्चध- राष्ट्र व वववव की प्रगति में योगदान प्रत्येक सवय व स्वस्थ को सामभप्राय काम प्राकृ तिक संसाधनों का ममिव्ययिा से उपयोग राष्ट्रानुकू ल प्रौद्योचगकी (Skill India, Make in India) का ववकास सांस्कृ तिक जीवन मूल्यों की रक्षा ववमभन्न उद्योगों में राज्य, व्यश्ति िथा अन्य संस्थाओं के स्वाममत्व के तनणशय का व्यविाररक आधार ववकें द्रीकरण िथा स्वदेर्ी पर बल
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    अपने प्राचीन गौरवके प्रतत अश्रद्धा भाव निीां ककन्तु जड़ता त्याज्य भारतीय सांस्कृ तत के शाश्वत मूल्यों के सार् राष्रीयता- प्रजातन्त्र- समता और र्वश्व एकता के आदशों का समन्वय सांस्कृ तत का मात्र सांरिण निीां अर्पतु उसे गतत देकर सजीव बनाना
  • 34.
    ववराट जाग्रि करें ववराट-राष्ट्रधारणा की र्श्ति ववराट जागरण से ववववधिा बाधक निीं र्श्ति बनिी िै, संघर्श के स्थान पर सद्भाव और एकात्मिा िोगी भारि परम वैभव को प्राति करेगा
  • 35.
    भारि मािा कीजय डॉ. जय प्रकार् गुति, अम्प्बाला (भारि) +९१-९३१५५१०४२५, ७०१५३५९१०१ chikitsak@rediffmail.com, chikitsakindia@gmail.com https://www.facebook.com/jaiprakash.gupta https://twitter.com/9315510425