Communication Skills for
Improving Personality
Presented By:
Ms. Precilla B. Thoppil
Self-Introduction
• आत्म-परिचय (Self-Introduction) आत्मविश्वास और व्यक्तित्व सुधारने का सबसे पहला कदम है।
• यहाँ हिंदी में एक छोटा, स्पष्ट और आत्मविश्वासी परिचय का उदाहरण दिया गया है:
• “नमस्ते/प्रणाम, मेरा नाम राहुल शर्मा है। मैं कटनी से हूँ। प्रभु यीशु मसीह ने मुझे अपने वचन के
द्वारा छुड़ाया और नई ज़िंदगी दी। उसी बुलाहट के साथ मैं लोगों तक सुसमाचार पहुँचाने और
उनकी मदद करने का काम कर रहा हूँ। मुझे परमेश्वर का वचन साझा करना और लोगों को आशा
तथा प्रेम का संदेश देना बहुत पसंद है। मेरा उद्देश्य है कि और लोग भी यीशु को जानें और उनके
”
जीवन में बदलाव आए।
Verbal Communication
मौखिक संचार
•स्पष्ट और विनम्रता से बोलें।
•नकारात्मक या कठोर शब्दों से बचें → सकारात्मक वाक्य प्रयोग करें।
•आवाज़ का संतुलन रखें (ना बहुत ऊँ ची, ना बहुत धीमी)।
•शब्द भंडार (Vocabulary) बढ़ाएँ ताकि विचार बेहतर तरीके से व्यक्त कर सकें।
2. गैर-मौखिक संचार (Non-Verbal Communication)
•शारीरिक हाव-भाव → सीधे खड़े रहें, ठीक से बैठें,
झुककर न बैठें।
•आँखों से संपर्क (Eye Contact) → आत्मविश्वास
दर्शाता है।
•मुस्कान → आपको मिलनसार और सहज बनाती है।
•हाथों के इशारे (Gestures) → स्वाभाविक रूप से
प्रयोग करें, अधिक न करें।
सुनने की कला (Listening Skills)
• ध्यान से सुनें → सिर हिलाना, “ ”
कहना मैं समझ रहा हूँ , “यह सही
”
है ।
• बीच में न बोलें।
• विवरण याद रखें → सामने वाले को महत्व महसूस होता है।
• इससे सम्मान और संबंध मजबूत होते हैं।
4. बातचीत बनाना (Conversation Building)
•छोटी-छोटी बातें शुरू करें (मौसम, समाचार, पढ़ाई,
शौक)।
•खुले प्रश्न पूछें → “आपका क्या विचार है…?”
•संवेदनशील या नकारात्मक विषयों से बचें (धर्म,
राजनीति, चुगली)।
•बातचीत हमेशा विनम्रता से समाप्त करें।
5. सार्वजनिक बोलना और समूह चर्चा (Public Speaking &
Group Discussions)
•दर्पण (Mirror) या दोस्तों के सामने छोटे भाषण का अभ्यास
करें।
•अपनी बातों को रोचक बनाने के लिए कहानी का प्रयोग करें।
•समूह चर्चा में शामिल हों → स्पष्टता और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
•इससे नेतृत्व और प्रभावशाली व्यक्तित्व विकसित होता है।
6. आत्मविश्वास और व्यक्तित्व बढ़ाने वाले अभ्यास
(Confidence & Personality Boosters)
•रोज़ाना 5 मिनट आईने के सामने स्वयं से बातचीत करें।
•किताबें/अख़बार ऊँ ची आवाज़ में पढ़ें।
•अपनी आवाज़ रिकॉर्ड करें → गलतियाँ पहचानकर सुधारें।
•प्रशंसा को विनम्रता से स्वीकार करें (“धन्यवाद”)।
7. संचार में मूल्य (Values in Communication)
•सच्चाई से बोलें → विश्वास बढ़ता है।
•सभी का सम्मान करें (बड़ों, छोटों, सहकर्मियों का)।
•अपनी बातचीत से दूसरों को प्रोत्साहित और प्रेरित करें।
•याद रखें: व्यक्तित्व केवल “आप कैसे दिखते हैं” से नहीं, बल्कि “लोग आपको
सुनकर कैसा महसूस करते हैं” से भी बनता है।

Communication Skills for Improving Personality.pptx

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    Communication Skills for ImprovingPersonality Presented By: Ms. Precilla B. Thoppil
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    Self-Introduction • आत्म-परिचय (Self-Introduction)आत्मविश्वास और व्यक्तित्व सुधारने का सबसे पहला कदम है। • यहाँ हिंदी में एक छोटा, स्पष्ट और आत्मविश्वासी परिचय का उदाहरण दिया गया है: • “नमस्ते/प्रणाम, मेरा नाम राहुल शर्मा है। मैं कटनी से हूँ। प्रभु यीशु मसीह ने मुझे अपने वचन के द्वारा छुड़ाया और नई ज़िंदगी दी। उसी बुलाहट के साथ मैं लोगों तक सुसमाचार पहुँचाने और उनकी मदद करने का काम कर रहा हूँ। मुझे परमेश्वर का वचन साझा करना और लोगों को आशा तथा प्रेम का संदेश देना बहुत पसंद है। मेरा उद्देश्य है कि और लोग भी यीशु को जानें और उनके ” जीवन में बदलाव आए।
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    Verbal Communication मौखिक संचार •स्पष्टऔर विनम्रता से बोलें। •नकारात्मक या कठोर शब्दों से बचें → सकारात्मक वाक्य प्रयोग करें। •आवाज़ का संतुलन रखें (ना बहुत ऊँ ची, ना बहुत धीमी)। •शब्द भंडार (Vocabulary) बढ़ाएँ ताकि विचार बेहतर तरीके से व्यक्त कर सकें।
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    2. गैर-मौखिक संचार(Non-Verbal Communication) •शारीरिक हाव-भाव → सीधे खड़े रहें, ठीक से बैठें, झुककर न बैठें। •आँखों से संपर्क (Eye Contact) → आत्मविश्वास दर्शाता है। •मुस्कान → आपको मिलनसार और सहज बनाती है। •हाथों के इशारे (Gestures) → स्वाभाविक रूप से प्रयोग करें, अधिक न करें।
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    सुनने की कला(Listening Skills) • ध्यान से सुनें → सिर हिलाना, “ ” कहना मैं समझ रहा हूँ , “यह सही ” है । • बीच में न बोलें। • विवरण याद रखें → सामने वाले को महत्व महसूस होता है। • इससे सम्मान और संबंध मजबूत होते हैं।
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    4. बातचीत बनाना(Conversation Building) •छोटी-छोटी बातें शुरू करें (मौसम, समाचार, पढ़ाई, शौक)। •खुले प्रश्न पूछें → “आपका क्या विचार है…?” •संवेदनशील या नकारात्मक विषयों से बचें (धर्म, राजनीति, चुगली)। •बातचीत हमेशा विनम्रता से समाप्त करें।
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    5. सार्वजनिक बोलनाऔर समूह चर्चा (Public Speaking & Group Discussions) •दर्पण (Mirror) या दोस्तों के सामने छोटे भाषण का अभ्यास करें। •अपनी बातों को रोचक बनाने के लिए कहानी का प्रयोग करें। •समूह चर्चा में शामिल हों → स्पष्टता और आत्मविश्वास बढ़ेगा। •इससे नेतृत्व और प्रभावशाली व्यक्तित्व विकसित होता है।
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    6. आत्मविश्वास औरव्यक्तित्व बढ़ाने वाले अभ्यास (Confidence & Personality Boosters) •रोज़ाना 5 मिनट आईने के सामने स्वयं से बातचीत करें। •किताबें/अख़बार ऊँ ची आवाज़ में पढ़ें। •अपनी आवाज़ रिकॉर्ड करें → गलतियाँ पहचानकर सुधारें। •प्रशंसा को विनम्रता से स्वीकार करें (“धन्यवाद”)।
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    7. संचार मेंमूल्य (Values in Communication) •सच्चाई से बोलें → विश्वास बढ़ता है। •सभी का सम्मान करें (बड़ों, छोटों, सहकर्मियों का)। •अपनी बातचीत से दूसरों को प्रोत्साहित और प्रेरित करें। •याद रखें: व्यक्तित्व केवल “आप कैसे दिखते हैं” से नहीं, बल्कि “लोग आपको सुनकर कैसा महसूस करते हैं” से भी बनता है।