शिक्षक-शिक्षा संकाय
एम०एड० (शितीयवर्ष)
सत्र: 2018-19
शवर्य- उच्च शिक्षा तकनीकी
कक्षा-7
प्रकरण-जीवों में श्वसन
मार्षदिषक
डॉ० राजीव अग्रवा
(शवभार्ाध्यक्ष)
प्रस्तुतकताष
सुिी कु मार कु िवाहा
अनुक्रमांक- 25
3.
सभी जीव सूक्ष्मइकाइयों के बने होते हैं, जजन्हें कोजिकाएं
कहते हैं| कोजिका जीव की सबसे छोटी संरचनात्मक और
जियात्मक इकाई होती है| जीव की प्रत्येक कोजिका पोषण,
पररवहन, उत्सजजन और जनन जैसे कुछ कायों को सम्पाजित
करने में कुछ न कुछ भूजमका जनभाती है| इन कायों को करने के
जिए कोजिका को ऊजाज की आवश्यकता होती है| िेजकन यह
ऊजाज आती कहााँ से है? भोजन में संजचत ऊजाज श्वसन के समय
जनमुजक्त होती है| अतः सभी जीवों को भोजन से ऊजाज प्राप्त करने
के जिए श्वसन की आवश्यकता होती है| श्वसन के प्रिम में हम
पहिे सााँस द्वारा वायु को िरीर के अन्िर िे जाते हैं जो
ऑक्सीजन होती हैं| जिर हम सााँस छोड़ते हुए वायु को िरीर से
बाहर जनकािते हैं जो काबजन डाइऑक्साइड होती है|ऑक्सीजन
िरीर के सभी भागों में और अंततः प्रत्येक कोजिका में िे जाई
जाती है| कोजिका में यह ऑक्सीजन भोजन के जवखंडन में
सहायता करती है| कोजिका में भोजन के जवखंडन के प्रिम में
ऊजाज मुक्त होती है| इसे कोशिकीय श्वसन कहते हैं|
हम श्वसन क्यों करते हैं?
4.
Ikz”u&सभी जीवों कोभोजन से ऊजाष प्राप्त करने के श ए
शकसकी आवश्यकता होती है?
¼v½-पाचन
¼ब½- पोषण
(स½ अवशोषण -
¼द½ श्वसन -
5.
Ikz”u& सभी जीवोंको भोजन से ऊजाष प्राप्त करने के श ए
शकसकी आवश्यकता होती है?
¼v½ पाचन
¼ब½ पोषण
¼स½ अवशोषण
¼द½ श्वसन
6.
Ikz”u& सभी जीवोंको भोजन से ऊजाष प्राप्त करने के श ए
शकसकी आवश्यकता होती है?
¼v½ पाचन
¼ब½ पोषण
(स½ अवशोषण
¼द½ श्वसन
7.
Ikz”u& सभी जीवोंको भोजन से ऊजाष प्राप्त करने के श ए
शकसकी आवश्यकता होती है?
¼v½ पाचन
¼ब½ पोषण
¼स½ अवशोषण
¼द½ श्वसन
8.
Ikz”u& सभी जीवोंको भोजन से ऊजाष प्राप्त करने के श ए
शकसकी आवश्यकता होती है?
¼v½ पाचन
¼ब½ पोषण
¼स½ अवशोषण
¼द½ श्वसन
9.
श्वसन
श्वसन या सााँसिेने का अर्ज है ऑक्सीजन से समृद्ध
वायु को अन्िर खींचना या ग्रहण करना और काबजन
डाइऑक्साइड से समृद्ध वायु को बाहर जनकािना|
ऑक्सीजन से समृद्ध वायु को िरीर के अन्िर िेना अन्तः
श्वसन और काबजन डाइऑक्साइड से समृद्ध वायु को बाहर
जनकािना उच््वसन कहिाता है| यह एक सतत प्रिम
है, जो प्रत्येक जीव के जीवन में हर समय अर्ाजत
जीवनपयंत होता रहता है|
कोई व्यजक्त एक जमनट में जजतनी बार श्वसन करता है,
वह उसकी श्वसन दर कहिाती है| अन्तः श्वसन और
उच्छ्वसन िोनों सार् सार् होते रहते हैं|एक श्वास का अर्ज
है, एक अन्तः श्वसन और एक उच्छ्वसन|
mRrj&एक शमनट मेंशजतनी बार श्वसन करते हैं,
उसे श्वसन दर नहीं कहते हैं|
12.
mRrj& एक शमनटमें शजतनी बार श्वसन करते
हैं, उसे श्वसन दर कहते हैं|
13.
हम श्वास कैसे लेते हैं?
सामान्यतः हम अपने नर्ुनों से वायु अन्िर िेते हैं| जब हम
वायु को अन्तःश्वसन द्वारा अन्िर िेते हैं, तो यह हमारे नर्ुनों से
नासा-र्ुहा में चिी जाती है| नासा-गुहा से वायु, श्वास निी से होकर
हमारे फे फड़ों में जाती है| िेिड़े वक्ष-र्ुहा में जथर्त होते हैं| वक्ष-
गुहा पाश्वज में पसजियों से जिरी रहती है|एक बड़ी पेिीय परत, जो
डायाफ्राम कहिाती है, वक्ष-गुहा को आधार प्रिान करती है| श्वसन
में डायाफ्राम और पसजियों से बने जपंजर की गजत सजम्मजित होती
है|
अन्तः श्वसन के समय पसजियााँ ऊपर और बाहर की ओर गजत
करती हैं और डायाफ्राम नीचे की ओर गजत करता है| यह गजत हमारी
वक्ष-गुहा के आयतन को बढ़ा िेती है और वायु िेिड़ों में आ जाती
है| िेिड़े वायु से भर जाते हैं| उच्छ्वसन के समय पसजियााँ नीचे
और अन्िर की ओर आ जाती हैं, जबजक डायाफ्राम ऊपर की ओर
अपनी पूवज जथर्जत में आ जाता है|इससे वक्ष-गुहा का आयतन कम
हो जाता है इस कारण वायु िेिड़ों से बाहर धकेि िी जाती है|
अन्य जन्तुओंमें श्वसन
हार्ी,िेर, गाय, बकरी, मेंढक, जछपकिी, सपज और पजक्षयों
आजि जन्तुओंकी वक्ष-गुहाओंमें मनुष्यों की भांजत िेिड़े होते हैं|
कॉकरोच: कॉकरोच के िरीर के पाश्वज भाग में छोटे-छोटे जछद्र होते
हैं|ये जछद्र श्वास रंध्र कहिाते हैं| कीटों में गैस के जवजनमय के जिए
वायु नजियों का जाि जबछा होता है, जो श्वासप्रणा या वातक
कहिाते हैं| ऑक्सीजन समृद्ध वायु श्वास रंध्रों से श्वास नािों में
जाकर िरीर के ऊतकों में जवसररत होती है और िरीर की प्रत्येक
कोजिका में पहुाँचती है| इसी प्रकार कोजिकाओं से काबजन
डाइऑक्साइड श्वासनािों में आती है और श्वास रंध्रों से बाहर जनकि
जाती है| श्वासनाि अर्वा श्वासप्रणाि केवि कीटों में ही पाए जाते
हैं| जन्तुओंके अन्य समूहों में ऐसी व्यवथर्ा नहीं पायी जाती है|
कें चुआ: केंचुए अपनी त्वचा से श्वसन करते हैं| केंचुए की त्वचा
थपिज करने पर आद्रज और थिेष्मीय प्रतीत होती है| इसमें से गैसों का
आवागमन आसानी से हो जाता है| यद्यजप, मेंढक में मनुष्य की भांजत
िेिड़े होते हैं तर्ाजप, वे अपनी त्वचा से भी श्वसन करते हैं जो आद्रज
और थिेष्मीय होती है|
अन्य जन्तुओंमें श्वसन
हार्ी,िेर, गाय, बकरी, मेंढक, जछपकिी, सपज और पजक्षयों
आजि जन्तुओंकी वक्ष-गुहाओंमें मनुष्यों की भांजत िेिड़े होते हैं|
कॉकरोच: कॉकरोच के िरीर के पाश्वज भाग में छोटे-छोटे जछद्र होते
हैं|ये जछद्र श्वास रंध्र कहिाते हैं| कीटों में गैस के जवजनमय के जिए
वायु नजियों का जाि जबछा होता है, जो श्वासप्रणा या वातक
कहिाते हैं| ऑक्सीजन समृद्ध वायु श्वास रंध्रों से श्वास नािों में
जाकर िरीर के ऊतकों में जवसररत होती है और िरीर की प्रत्येक
कोजिका में पहुाँचती है| इसी प्रकार कोजिकाओं से काबजन
डाइऑक्साइड श्वासनािों में आती है और श्वास रंध्रों से बाहर जनकि
जाती है| श्वासनाि अर्वा श्वासप्रणाि केवि कीटों में ही पाए जाते
हैं| जन्तुओंके अन्य समूहों में ऐसी व्यवथर्ा नहीं पायी जाती है|
कें चुआ: केंचुए अपनी त्वचा से श्वसन करते हैं| केंचुए की त्वचा
थपिज करने पर आद्रज और थिेष्मीय प्रतीत होती है| इसमें से गैसों का
आवागमन आसानी से हो जाता है| यद्यजप, मेंढक में मनुष्य की भांजत
िेिड़े होते हैं तर्ाजप, वे अपनी त्वचा से भी श्वसन करते हैं जो आद्रज
और थिेष्मीय होती है|
जल में श्वसन
ऐसेअनेक जीव हैं, जो जि में रहते हैं|
वे जि में श्वसन करते हैं| मछजियों में क्िोम
या जगि पाए जाते हैं| क्िोम जि में िुिी
ऑक्सीजन का उपयोग करने में उनकी
सहायता करते हैं| क्िोम त्वचा से बाहर की
ओर जनकिे होते हैं| क्िोम में रक्त वाजहजनयों
की संख्या अजधक होती है, जो गैस जवजनमय
में सहायता करती है|
26.
Ikz”u& क्िोम जिमें िुिी ऑक्सीजन का उपयोग
करने में मछजियों की सहायता करते हैं|
vlR; lR;
27.
mRrj क्िोम जिमें िुिी ऑक्सीजन का
उपयोग करने में मछजियों की सहायता नहीं करते हैं|
28.
mRrj& क्िोम जिमें िुिी ऑक्सीजन का
उपयोग करने में मछजियों की सहायता करते हैं|
29.
क्या पादप भीश्वसन करते हैं
अन्य जीवों की भााँजत पािप भी जीजवत रहने के
जिए श्वसन करते हैं| ये वायु से ऑक्सीजन अन्िर िे िेते हैं
और काबजन डाइऑक्साइड को जनमुजक्त कर िेते हैं| इनकी
कोजिकाओंमें भी ऑक्सीजन का उपयोग अन्य जीवों की
भांजत ही ग्िूकोस के काबजन डाइऑक्साइड और जि में
जवखंडन करने के जिए जकया जाता है| पािप में प्रत्येक अंग
वायु से थवतंत्र रूप से ऑक्सीजन ग्रहण करके काबजन
डाइऑक्साइड को जनमुजक्त कर सकता है| पािप की पजियों
में ऑक्सीजन और काबजन डाइऑक्साइड के जवजनमय के
जिए सूक्ष्म जछद्र होते हैं, जो रंध्र कहिाते हैं|
सभी जीव सूक्ष्मइकाइयों के बने होते हैं, जजन्हें कोजिकाएं
कहते हैं| कोजिका जीव की सबसे छोटी संरचनात्मक और
जियात्मक इकाई होती है| जीव की प्रत्येक कोजिका पोषण,
पररवहन, उत्सजजन और जनन जैसे कुछ कायों को सम्पाजित
करने में कुछ न कुछ भूजमका जनभाती है| इन कायों को करने के
जिए कोजिका को ऊजाज की आवश्यकता होती है| िेजकन यह
ऊजाज आती कहााँ से है? भोजन में संजचत ऊजाज श्वसन के समय
जनमुजक्त होती है| अतः सभी जीवों को भोजन से ऊजाज प्राप्त करने
के जिए श्वसन की आवियकता होती है| श्वसन के प्रिम में हम
पहिे सााँस द्वारा वायु को िरीर के अन्िर िे जाते हैं जो
ऑक्सीजन होती हैं| जिर हम सााँस छोड़ते हुए वायु को िरीर से
बाहर जनकािते हैं जो काबजन डाइऑक्साइड होती है|ऑक्सीजन
िरीर के सभी भागों में और अंततः प्रत्येक कोजिका में िे जाई
जाती है| कोजिका में यह ऑक्सीजन भोजन के जवखंडन में
सहायता करती है| कोजिका में भोजन के जवखंडन के प्रिम में
ऊजाज मुक्त होती है| इसे कोशिकीय श्वसन कहते हैं|
हम श्वसन क्यों करते हैं?
जल में श्वसन
ऐसेअनेक जीव हैं, जो जि में रहते हैं|
वे जि में श्वसन करते हैं| मछजियों में क्िोम
या जगि पाए जाते हैं| क्िोम जि में िुिी
ऑक्सीजन का उपयोग करने में उनकी
सहायता करते हैं| क्िोम त्वचा से बाहर की
ओर जनकिे होते हैं| क्िोम में रक्त वाजहजनयों
की संख्या अजधक होती है, जो गैस जवजनमय
में सहायता करती है|
अन्य जन्तुओंमें श्वसन
हार्ी,िेर, गाय, बकरी, मेंढक, जछपकिी, सपज और पजक्षयों
आजि जन्तुओंकी वक्ष-गुहाओंमें मनुष्यों की भांजत िेिड़े होते हैं|
कॉकरोच: कॉकरोच के िरीर के पाश्वज भाग में छोटे-छोटे जछद्र होते
हैं|ये जछद्र श्वास रंध्र कहिाते हैं| कीटों में गैस के जवजनमय के जिए
वायु नजियों का जाि जबछा होता है, जो श्वासप्रणा या वातक
कहिाते हैं| ऑक्सीजन समृद्ध वायु श्वास रंध्रों से श्वास नािों में
जाकर िरीर के ऊतकों में जवसररत होती है और िरीर की प्रत्येक
कोजिका में पहुाँचती है| इसी प्रकार कोजिकाओं से काबजन
डाइऑक्साइड श्वासनािों में आती है और श्वास रंध्रों से बाहर जनकि
जाती है| श्वासनाि अर्वा श्वासप्रणाि केवि कीटों में ही पाए जाते
हैं| जन्तुओंके अन्य समूहों में ऐसी व्यवथर्ा नहीं पायी जाती है|
कें चुआ: केंचुए अपनी त्वचा से श्वसन करते हैं| केंचुए की त्वचा
थपिज करने पर आद्रज और थिेष्मीय प्रतीत होती है| इसमें से गैसों का
आवागमन आसानी से हो जाता है| यद्यजप, मेंढक में मनुष्य की भांजत
िेिड़े होते हैं तर्ाजप, वे अपनी त्वचा से भी श्वसन करते हैं जो आद्रज
और थिेष्मीय होती है|