ौी गुरु ःतोऽम ्
|| ौी महादे युवाच ||
गुरुमर्न्ऽःय देवःय धमर्ःय तःय एव वा |
िवशेषःतु महादेव ! तद् वदःव दयािनधे ||
ौी महादेवी (पावर्ती) ने कहा : हे दयािनिध शंभु ! गुरुमंऽ के देवता अथार्त ्ौी गुरुदेव एवं
उनका आचारा द धमर् क्या है - इस बारे में वणर्न करें |
|| ौी महादेव उवाच ||
जीवात्मनं परमात्मनं दानं ध्यानं योगो ज्ञानम ् |
उत्कल काशीगंगामरणं न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||१||
ौी महादेव बोले : जीवात्मा-परमात्मा का ज्ञान, दान, ध्यान, योग पुर , काशी या गंगा
तट पर मृत्यु - इन सबमें से कु छ भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||१||
ूाणं देहं गेहं राज्यं ःवग भोगं योगं मुि म ् |
भायार्िम ं पुऽं िमऽं न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||२||
ूाण, शर र, गृह, राज्य, ःवगर्, भोग, योग, मुि , प ी, इ , पुऽ, िमऽ - इन सबमें से कु छ
भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||२||
वानूःथं यितिवधधम पारमहंःयं िभक्षुकचिरतम ् |
साधोः सेवां बहसुखभुि ंु न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||३||
वानूःथ धमर्, यित िवषयक धमर्, परमहंस के धमर्, िभक्षुक अथार्त ्याचक के धमर् - इन
सबमें से कु छ भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||३||
िवंणो भि ं पूजनरि ं वैंणवसेवां मातिर भि म ् |
िवंणोिरव िपतृसेवनयोगं न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||४||
भगवान िवंणु क भि , उनके पूजन में अनुरि , िवंणु भ क सेवा, माता क भि ,
ौीिवंणु ह िपता रूप में ह, इस ूकार क िपता सेवा - इन सबमें से कु छ भी ौी गुरुदेव से बढ़कर
नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||४||
ूत्याहारं चेिन्िययजनं ूाणायां न्यासिवधानम ् |
इ े पूजा जप तपभि नर् गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||५||
ूत्याहार और इिन्िय का दमन, ूाणायाम, न्यास-िवन्यास का िवधान, इ देव क पूजा,
मंऽ जप, तपःया व भि - इन सबमें से कु छ भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर
नह ं है ||५||
काली दगार्ु कमला भुवना िऽपुरा भीमा बगला पूणार् |
ौीमातंगी धूमा तारा न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||६||
काली, दगार्ु , लआमी, भुवने िर, िऽपुरासुन्दर , भीमा, बगलामुखी (पूणार्), मातंगी,
धूमावती व तारा ये सभी मातृशि याँ भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है
||६||
मात्ःयं कौम ौीवाराहं नरहिररूपं वामनचिरतम ् |
नरनारायण चिरतं योगं न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||७||
भगवान के मत्ःय, कू मर्, वाराह, नरिसंह, वामन, नर-नारायण आ द अवतार, उनक
लीलाएँ, चिरऽ एवं तप आ द भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||७||
ौीभृगुदेवं ौीरघुनाथं ौीयदनाथंु बौ ं कल्क्यम ् |
अवतारा दश वेदिवधानं न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||८||
भगवान के ौी भृगु, राम, कृ ंण, बु तथा किल्क आ द वेद में विणर्त दस अवतार ौी
गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||८||
गंगा काशी कान्ची ारा मायाऽयोध्याऽवन्ती मथुरा |
यमुना रेवा पुंकरतीथर् न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||९||
गंगा, यमुना, रेवा आ द पिवऽ न दयाँ, काशी, कांची, पुर , हिर ार, ािरका, उज्जियनी,
मथुरा, अयोध्या आ द पिवऽ पुिरयाँ व पुंकरा द तीथर् भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से
बढ़कर नह ं है ||९||
गोकु लगमनं गोपुररमणं ौीवृन्दावन-मधुपुर-रटनम ्|
एतत ् सव सुन्दिर ! मातनर् गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||१०||
हे सुन्दर ! हे माते र ! गोकु ल याऽा, गौशालाओं में ॅमण एवं ौी वृन्दावन व मधुपुर
आ द शुभ नाम का रटन - ये सब भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है
||१०||
तुलसीसेवा हिरहरभि ः गंगासागर-संगममुि ः |
कमपरमिधकं कृ ंणेभि नर् गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||११||
तुलसी क सेवा, िवंणु व िशव क भि , गंगा सागर के संगम पर देह त्याग और अिधक
क्या कहँू परात्पर भगवान ौी कृ ंण क भि भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर
नह ं है ||११||
एतत ् ःतोऽम ् पठित च िनत्यं मोक्षज्ञानी सोऽिप च धन्यम ् |
ॄ ाण्डान्तयर्द्-यद् ध्येयं न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||१२||
इस ःतोऽ का जो िनत्य पाठ करता है वह आत्मज्ञान एवं मोक्ष दोन को पाकर धन्य हो
जाता है | िनि त ह समःत ॄ ाण्ड मे िजस-िजसका भी ध्यान कया जाता है, उनमें से कु छ भी
ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||१२||
|| वृहदिवज्ञान परमे रतंऽे िऽपुरािशवसंवादे ौीगुरोःःतोऽम ् ||
||यह गुरुःतोऽ वृहद िवज्ञान परमे रतंऽ के अंतगर्त िऽपुरा-िशव संवाद में आता है ||

Sri guru strotram

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    ौी गुरु ःतोऽम् || ौी महादे युवाच || गुरुमर्न्ऽःय देवःय धमर्ःय तःय एव वा | िवशेषःतु महादेव ! तद् वदःव दयािनधे || ौी महादेवी (पावर्ती) ने कहा : हे दयािनिध शंभु ! गुरुमंऽ के देवता अथार्त ्ौी गुरुदेव एवं उनका आचारा द धमर् क्या है - इस बारे में वणर्न करें | || ौी महादेव उवाच || जीवात्मनं परमात्मनं दानं ध्यानं योगो ज्ञानम ् | उत्कल काशीगंगामरणं न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||१|| ौी महादेव बोले : जीवात्मा-परमात्मा का ज्ञान, दान, ध्यान, योग पुर , काशी या गंगा तट पर मृत्यु - इन सबमें से कु छ भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||१|| ूाणं देहं गेहं राज्यं ःवग भोगं योगं मुि म ् | भायार्िम ं पुऽं िमऽं न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||२|| ूाण, शर र, गृह, राज्य, ःवगर्, भोग, योग, मुि , प ी, इ , पुऽ, िमऽ - इन सबमें से कु छ भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||२|| वानूःथं यितिवधधम पारमहंःयं िभक्षुकचिरतम ् | साधोः सेवां बहसुखभुि ंु न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||३|| वानूःथ धमर्, यित िवषयक धमर्, परमहंस के धमर्, िभक्षुक अथार्त ्याचक के धमर् - इन सबमें से कु छ भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||३|| िवंणो भि ं पूजनरि ं वैंणवसेवां मातिर भि म ् | िवंणोिरव िपतृसेवनयोगं न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||४||
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    भगवान िवंणु कभि , उनके पूजन में अनुरि , िवंणु भ क सेवा, माता क भि , ौीिवंणु ह िपता रूप में ह, इस ूकार क िपता सेवा - इन सबमें से कु छ भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||४|| ूत्याहारं चेिन्िययजनं ूाणायां न्यासिवधानम ् | इ े पूजा जप तपभि नर् गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||५|| ूत्याहार और इिन्िय का दमन, ूाणायाम, न्यास-िवन्यास का िवधान, इ देव क पूजा, मंऽ जप, तपःया व भि - इन सबमें से कु छ भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||५|| काली दगार्ु कमला भुवना िऽपुरा भीमा बगला पूणार् | ौीमातंगी धूमा तारा न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||६|| काली, दगार्ु , लआमी, भुवने िर, िऽपुरासुन्दर , भीमा, बगलामुखी (पूणार्), मातंगी, धूमावती व तारा ये सभी मातृशि याँ भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||६|| मात्ःयं कौम ौीवाराहं नरहिररूपं वामनचिरतम ् | नरनारायण चिरतं योगं न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||७|| भगवान के मत्ःय, कू मर्, वाराह, नरिसंह, वामन, नर-नारायण आ द अवतार, उनक लीलाएँ, चिरऽ एवं तप आ द भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||७|| ौीभृगुदेवं ौीरघुनाथं ौीयदनाथंु बौ ं कल्क्यम ् | अवतारा दश वेदिवधानं न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||८|| भगवान के ौी भृगु, राम, कृ ंण, बु तथा किल्क आ द वेद में विणर्त दस अवतार ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||८|| गंगा काशी कान्ची ारा मायाऽयोध्याऽवन्ती मथुरा | यमुना रेवा पुंकरतीथर् न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||९||
  • 3.
    गंगा, यमुना, रेवाआ द पिवऽ न दयाँ, काशी, कांची, पुर , हिर ार, ािरका, उज्जियनी, मथुरा, अयोध्या आ द पिवऽ पुिरयाँ व पुंकरा द तीथर् भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||९|| गोकु लगमनं गोपुररमणं ौीवृन्दावन-मधुपुर-रटनम ्| एतत ् सव सुन्दिर ! मातनर् गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||१०|| हे सुन्दर ! हे माते र ! गोकु ल याऽा, गौशालाओं में ॅमण एवं ौी वृन्दावन व मधुपुर आ द शुभ नाम का रटन - ये सब भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||१०|| तुलसीसेवा हिरहरभि ः गंगासागर-संगममुि ः | कमपरमिधकं कृ ंणेभि नर् गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||११|| तुलसी क सेवा, िवंणु व िशव क भि , गंगा सागर के संगम पर देह त्याग और अिधक क्या कहँू परात्पर भगवान ौी कृ ंण क भि भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||११|| एतत ् ःतोऽम ् पठित च िनत्यं मोक्षज्ञानी सोऽिप च धन्यम ् | ॄ ाण्डान्तयर्द्-यद् ध्येयं न गुरोरिधकं न गुरोरिधकं ||१२|| इस ःतोऽ का जो िनत्य पाठ करता है वह आत्मज्ञान एवं मोक्ष दोन को पाकर धन्य हो जाता है | िनि त ह समःत ॄ ाण्ड मे िजस-िजसका भी ध्यान कया जाता है, उनमें से कु छ भी ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है, ौी गुरुदेव से बढ़कर नह ं है ||१२|| || वृहदिवज्ञान परमे रतंऽे िऽपुरािशवसंवादे ौीगुरोःःतोऽम ् || ||यह गुरुःतोऽ वृहद िवज्ञान परमे रतंऽ के अंतगर्त िऽपुरा-िशव संवाद में आता है ||