हिंदी परियोजना कार्य का वर्णन इस प्रस्तुति में ह .pptx
To study Hindi. हिंदी बहुत सरल भाषा है . हिंदी में वर्णन काफी कम मिलता है. यह पीपीटी काफी हेल्प करेगा.
हिंदी मात्रभाषा है. हिंदी बहुत ही स्वीट भाषा है.
उत्तर भारत में हिंदी भाषा का ही उपयोग किया जाता है
जामुन का पेड़
शीर्षककी
सार्थकता
रूप रेखा
पात्र परिचय
कहानी का उ
द्देश्य चरित्र चित्र
ण
लेखक परि
चय
सारांश
उपसंहार
3.
उनका जन्म1914 में पंजाब में स्थित एक छोटे से गांव वजीराबाद
में हुआ था। वे एक सरल भाषा लिखते थे जिसे आम आदमी द्वारा
समझा जा सकता था। उन्होंने कहानियां और उपन्यास, फिल्मी
नाटक लिखे थे। उनके द्वारा लिखित एक व्यंग्य उपन्यास 'गधे की
आत्मकथा' बहुत लोकप्रिय है।उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक
विषमताओं पर एक तीखा व्यंग्य किया।उनकी भाषा आसान,
सजीव और मुहावरेदार है।
लेखक परिचय
कहानी ‘’
जामुन का पेड़ का शीर्षक सटीक, सार्थक और उपयुक्त है।
यह कहानी जो जामुन का पेड़ गिरने की दुर्घटना के साथ शुरू
होती है। कवि ने व्यंग्य के साथ सरकार का काम करने का तरीका
दिखाया है। जामुन के पेड़ को काटने के फै सले के लिए फाइल
प्रधानमंत्री तक पहुंची, जिसका समाधान माली द्वारा दिया गया
था। जामुन का पेड़ सभी घटनाओं का केंद्र है। तो कहानी का
शीर्षक उपयुक्त है।
शीर्षक की सार्थकता
6.
जामुन कापेड़ उर्दू/हिंदी शायर और उपन्यासकार कृष्ण चन्दर द्वारा रचित व्यंग है जो
सरकारी लाल फीताशाही पर एक करारी चोट है। जामुन के पेड़ के गिरने के माध्यम से
लेखक ने दिखाया है कि भले ही आदमी कि जान चली जाए परन्तु सरकारी विभाग छोटे से
छोटे मुद्दे को जरुरत से ज़्यादा जटिल बना देते हैं। एक बार आंधी के दौरान सेक्रेटेरिएट के
लॉन में पर जामुम का पड़े गिर जाता है और उसके नीचे एक आदमी दब जाता है।
चपरासी इसकी सुचना सुपरिंटेंडेंट को देता है, लोग इकट्ठे हो जाते हैं और याद करते हैं कि
कैसे वो जामुन तोड़ कर घर ले जाते थे और बच्चे पसंद करते थे। जब उनका ध्यान दबे हुए
व्यक्ति पर जाता हैं तो पेड़ को काटने का फै सला होता हैं जिससे कि उस आदमी को निकला
जा सके। परन्तु फाइल वाणिज्य विभाग, कृषि विभाग और साहित्य विभाग के बीच घूमती
रहती हैं परन्तु पेड़ काटने कि इज़ाज़त नहीं मिलती. बातों के दौरान पता चलता हैं कि दबे
हुए व्यक्ति एक उर्दू कवी हैं तो सारे लेखक, शायर और साहित्यकार आकर चर्चा करते हैं पर
पेड़ नहीं हिल सकता। साहित्य अकादमी कि सेक्रेटरी आकर उन्हें अपनी अकादमी की
सदस्यता देते हैं पर उनको पेड़ की नीचे से निकलने क़े लिए पेड़ कटवाने में असमर्थ हैं। अंत
में प्रधान मंत्री से पेड़ काटने की अनुमति लायी जाती हैं परन्तु तब तक दुर्भाग्य से शायर
दुनिया से कूच कर गए होते हैं।
सारांश
7.
माली :-
वहसमझदार है, और स्थिति के महत्व को
समझता है। वह एक दयालु व्यक्ति है और दूसरों के
बारे में सोचता है। वह हर दिन दबे हुए आदमी को खाना खिलाता
था। वह उसका हाल पूछता और हौसला बढ़ाता।
वह संवेदनाशील है, वह कवि की उदासीनता को समझता है और
उसकी हालत को देखने पर बेचैन हो जाता है। वह आशावादी है। वह
भी आशा रखता है कि वह कवि को बचाएगा और कवि को यह भी
विश्वास दिलाता है कि वह बच जाएगा।
चरित्र चित्रण
8.
सरकारी कर्मचारी:-
इसकहानी में कई
सरकारी कर्मचारी हैं। माली को छोड़कर अन्य सभी
कर्मचारी गैर जिम्मेदार, आलसी, सुस्त और हमेशा
किसी और को अपना काम देने के बारे में सोचते हैं
जिसके परिणामस्वरूप उर्द कवि की मृत्यु हुई।
कवि:-
वह एक आत्मविश्वास और आशावादी
व्यक्ति था। वह आशा रखकर लंबे समय तक अपने
जीवन से लड़ रहा था कि वह जीवित रहे।
9.
इस कहानीका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में काम करने की प्रणाली पर
व्यंग्य करना है।सरकारी कार्यालयों में किसी समस्या का समाधान
आसानी से नहीं मिलता है।जिस चीज पर तुरंत निर्णय लिया जाना
चाहिए, वह कई दिनों के बाद लिया जाता है ।फ़ाइल एक विभाग से
दूसरी विभाग में दौड़ती है ।अपनी उत्तदायित्व न लेकर लोग इसे किसी
और को देने की कोशिश करते हैं। लेखक हमें यह संदेश देना चाहता है कि
नियम हमारी सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि
इसके पीछे किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जैसे कवि। एक साधारण मामले के
लिए फाइल प्रधान मंत्री तक पहुँच गई। जो सुझाव माली ने दीया था की
चार लोग मिलकर पेड़ उथा ले और आदमी को बहर निकाल ले उसके
लिय पुरा सरकार तंत्र फ़ाइल घुमाता राहा और कवि की मौत हो गेई।
इस कहानी में कवि ने सरकारी तंत्र पर करारा व्यंग्य किया है
कहानी का उद्देश्य
10.
इस कहानीके माध्यम से लेखक ने सरकारी कर्मचारियों और
अधिकारियों में फै ली अकर्मण्यता पर भी करारा व्यंग्य किया है।
हर विभाग अपनी ज़िम्मेदारी को दूसरे विभाग पर तरह-तरह के
बहाने बनाकर डाल सेता है। फ़ाइल एक विभाग से दूसरे विभाग
तक घूमती रहती है किन्तु परिणाम कुछ नहीं निकलता है। प्रस्तुत
कहानी सरकारी विभागों की लापरवाही और ज़िम्मेदारी से मुँह
मोड़ने की प्रवृत्ति को उजागर करती है। इस तरह की कार्य-शैली के
अंर्तगत अनावश्यक नियमों का उल्लेख कर विभाग अपनी
ज़िम्मेदारी एक-दूसरे पर थोप देते हैं।
उपसंहार