ज़ िंदगी
ज़ िंदगीजाने अनजाने में तुझसे मेरी पहचान बन गई,
बात मुज़किल नहीिं थी इसीललए आसान बन गई।
पास होते हुए भी तू िभी न र नहीिं आई,
दूर रहिर भी तेरी िभी ख़बर नहीिं आई।
ज़ िंदगी पाि ररकते से तेरे मैं ही अिंजान रहा,
िारवािं बनाया मगर ददलों में फासला वीरान रहा।
ताित तो बहुत थी लेकिन अना ने मौका ही नहीिं ददया,
अपनी शानो-शौकत में समझौता िभी ख़ुद से न किया।
जहााँ िी वाह वाह ख़ूब बटोरी मगर िोई िाम न आई,
ज़ िंदगी िी न रों में झााँिा नहीिं तू भी पास न आई।
ज़ िंदगी आगोश में आ जा तुझे सज़्दे ह ार दूाँगा,
एि मौका और दे दे बस तुझे प्यार ही प्यार दूाँगा।
बीरेन्द्र श्रीवास्तव उफ
फ िक्ि
ू
12/01/2022