हेलेन के लर
 हेलेन एडम्स के लर (27 जून 1880 - 1 जून 1968)
एक अमेररकी लेखक, राजनीतिक कार्यकिाय और आचार्य
थीीं।
 वह कला स्नािक की उपाधि अर्जयि करने वाली पहली
बधिर और दृर्टिहीन थी। ऐनी सुलेवन के प्रशिक्षण में ६
वर्य की अवस्था से िुरु हुए ४९ वर्ों के साथ में हेलेन
सक्रिर्िा और सफलिा की ऊीं चाइर्ों िक पहुुँची।
 ऐनी और हेलेन की चमत्कार लगने वाले कहानी ने
अनेक क्रफल्मकारों को आकर्र्यि क्रकर्ा। हहींदी में २००५ में
सींजर् लीला भींसाली ने इसी कथानक को आिार
बनाकर थोडा पररवियन करिे हुए ब्लैक क्रफल्म बना।।
हेलेन के लर
हेलेन के लर
बेहिरीन लेखखका के लर अपनी रचनाओीं में
र्ुद्ि र्वरोिी के रूप में नजर आिीीं हैं।
समाजवादी दल के एक सदस्र् के रूप में
उन्होंने अमेररकी और दुतनर्ा भर के श्रशमकों
और महहलाओीं के मिाधिकार, श्रम
अधिकारों, समाजवाद और कट्िरपींथी
िर्तिर्ों के खखलाफ अशभर्ान चलार्ा।
 ब्रेल पद्धति एक िरह की शलर्प है, र्जसको र्वश्व भर में
नेत्रहीनों को पढ़ने और शलखने में छू कर व्र्वहार में लार्ा
जािा है। इस पद्िति का आर्वटकार 1831 में एक
नेत्रहीन फ्ाींसीसी लेखक लु। ब्रेल ने क्रकर्ा था। र्ह अलग-
अलग अक्षरों, सींख्र्ाओीं और र्वराम धचन्हों को दिायिे हैं। ब्रेल
के नेत्रहीन होने पर उनके र्पिा ने उन्हें पेररस के Royal
National Institute For Blind children में भिी करवा हदर्ा।
उस स्कू ल में "वेलन्िीन होउ" द्वारा बना। ग। शलर्प से पढ़ा।
होिी थी, पर र्ह शलर्प अिूरी थी। इस र्वद्र्ालर् में एक बार
फ्ाींस की सेना के एक अधिकारी कै प्िन चाल्सय बार्बयर्र एक
प्रशिक्षण के शलर्े आए और उन्होंने सैतनकों द्वारा अुँिेरे में
पढ़ी जाने वाली "नाइि राइहिींग" र्ा "सोनोग्राफी" शलर्प के बारे
में व्र्ाख्र्ान हदर्ा।
 अींिे लोग चलने के शलए और अपने आस पास के जगहों की
जानकारी के शलए बहुि सारे उपार्ों का प्रर्ोग करिे हैं ...
 पहला है सुनने की िर्ति . र्वज्ञान र्े सार्बि क्रकर्ा है की अींिे लोग
के बाकी इन्रीर् िर्ति बहुि ही सक्षम होिे हैं. अींिे लोग अपने कान
के उपर्ोग से अपने आसपास के जगहों को सुनिे हैं और चलिे हैं.
 अींिे लोग स्पिय से भी जीवन र्बिािे हैं . अींिे लोग ब्रेल र्स्िप्ि की
मदद से पढ़ सकिे हैं . स्पिय िर्ति से वे मुर्श्कल जगहों पे भी चल
सकिे हैं.
 अींिे लोग , एक पालिू जानवर भी रखिे हैं िाक्रक वे आगे रास्िा
हदखा सके . र्े पालिू जानवर बहुि ही वफादार होिे हैं.....
 द स्िोरी ऑफ़ मार् लाइफ द वल््य इ शलव इन
 लाइि इन मार् ्ाकय नेस मार् लािर लाइफ
 थे सोंग ऑफ़ थे स्िोन वाल थ्री ्ेज िो सी
 हेलेन के लर के पापा जो दर्वद्सोंन .....
 1. 'र्जन लोगों के पास आुँखें हैं, वे सचमुच बहुि कम देखिे हैं' - हेलेन के लर को ऐसा तर्ों
लगिा था?
 उत्तर
 लोगों के पास जो चीज़ उपलब्ि होिी है, उसका उपर्ोग वे नहीीं करिे इसशलए हेलेन के लर को
ऐसा लगिा है क्रक र्जन लोगों के पास आुँखें हैं, वे सचमुच बहुि कम देखिे हैं।
 2. 'प्रकृ ति का जादू' क्रकसे कहा गर्ा है?
उत्तर
 प्रकृ ति के सौंदर्य और उनमें होने वाले हदन-प्रतिहदन बदलाव को 'प्रकृ ति का जादू' कहा गर्ा है।
 3. 'कु छ खास िो नहीीं'- हेलेन की शमत्र ने र्ह जवाब क्रकस मौके पर हदर्ा और र्ह सुनकर हेलेन को आश्चर्य तर्ों
हुआ?
उत्तर
 एक बार हेलेन के लर की र्प्रर् शमत्र जींगल में घूमने ग। थी। जब वह वापस लौिी िो हेलेन के लर ने उससे जींगल के
बारे में जानना चाहा िब उनकी शमत्र ने जवाब हदर्ा क्रक 'कु छ खास िो नहीीं'। र्ह सुनकर हेलेन को आश्चर्य इसशलए
हुआ तर्ोंक्रक लोग आुँखें होने के बाद भी कु छ नहीीं देख पािे क्रकन्िु वे िो आुँखें न होने के बावजूद भी प्रकृ ति की
बहुि सारी चीज़ों को के वल स्पिय से ही महसूस कर लेिी हैं।
4. हेलेन के लर प्रकृ ति की क्रकन चीज़ों को छू कर और सुनकर पहचान लेिी थीीं? पाठ पढ़कर इसका उत्तर शलखो।
उत्तर

हेलन के लर भोज-पत्र के पेड की धचकनी छाल और ची् की खुरदरी छाल को स्पिय से पहचान लेिी थी। वसींि के
दौरान वे िहतनर्ों में नर्ी कशलर्ाुँ, फू लों की पींखुड्र्ों की मखमली सिह और उनकी घुमावदार बनावि को भी वे
छू कर पहचान लेिी थीीं। धचड्र्ा के मिुर स्वर को वे सुनकर जान लेिी थीीं।
 5. 'जबक्रक इस तनर्ामि से र्ज़ींदगी को खुशिर्ों के इन्रिनुर्ी रींगों
से हरा-भरा जा सकिा है।' - िुम्हारी नज़र में इसका तर्ा अथय हो
सकिा है?
उत्तर
इन पींर्तिर्ों में हेलेन के लर ने र्जींदगी में आुँखों के महत्व को बिार्ा
है। वह कहिी हैं की आुँखों के सहर्ोग से हम अपने र्जींदगी को
खुशिर्ों के रींग-र्बरींगे रींगों से रींग सकिे हैं।
जो  देखकर भी नहीं देखते

जो देखकर भी नहीं देखते

  • 1.
  • 3.
     हेलेन एडम्सके लर (27 जून 1880 - 1 जून 1968) एक अमेररकी लेखक, राजनीतिक कार्यकिाय और आचार्य थीीं।  वह कला स्नािक की उपाधि अर्जयि करने वाली पहली बधिर और दृर्टिहीन थी। ऐनी सुलेवन के प्रशिक्षण में ६ वर्य की अवस्था से िुरु हुए ४९ वर्ों के साथ में हेलेन सक्रिर्िा और सफलिा की ऊीं चाइर्ों िक पहुुँची।  ऐनी और हेलेन की चमत्कार लगने वाले कहानी ने अनेक क्रफल्मकारों को आकर्र्यि क्रकर्ा। हहींदी में २००५ में सींजर् लीला भींसाली ने इसी कथानक को आिार बनाकर थोडा पररवियन करिे हुए ब्लैक क्रफल्म बना।। हेलेन के लर
  • 4.
    हेलेन के लर बेहिरीनलेखखका के लर अपनी रचनाओीं में र्ुद्ि र्वरोिी के रूप में नजर आिीीं हैं। समाजवादी दल के एक सदस्र् के रूप में उन्होंने अमेररकी और दुतनर्ा भर के श्रशमकों और महहलाओीं के मिाधिकार, श्रम अधिकारों, समाजवाद और कट्िरपींथी िर्तिर्ों के खखलाफ अशभर्ान चलार्ा।
  • 10.
     ब्रेल पद्धतिएक िरह की शलर्प है, र्जसको र्वश्व भर में नेत्रहीनों को पढ़ने और शलखने में छू कर व्र्वहार में लार्ा जािा है। इस पद्िति का आर्वटकार 1831 में एक नेत्रहीन फ्ाींसीसी लेखक लु। ब्रेल ने क्रकर्ा था। र्ह अलग- अलग अक्षरों, सींख्र्ाओीं और र्वराम धचन्हों को दिायिे हैं। ब्रेल के नेत्रहीन होने पर उनके र्पिा ने उन्हें पेररस के Royal National Institute For Blind children में भिी करवा हदर्ा। उस स्कू ल में "वेलन्िीन होउ" द्वारा बना। ग। शलर्प से पढ़ा। होिी थी, पर र्ह शलर्प अिूरी थी। इस र्वद्र्ालर् में एक बार फ्ाींस की सेना के एक अधिकारी कै प्िन चाल्सय बार्बयर्र एक प्रशिक्षण के शलर्े आए और उन्होंने सैतनकों द्वारा अुँिेरे में पढ़ी जाने वाली "नाइि राइहिींग" र्ा "सोनोग्राफी" शलर्प के बारे में व्र्ाख्र्ान हदर्ा।
  • 12.
     अींिे लोगचलने के शलए और अपने आस पास के जगहों की जानकारी के शलए बहुि सारे उपार्ों का प्रर्ोग करिे हैं ...  पहला है सुनने की िर्ति . र्वज्ञान र्े सार्बि क्रकर्ा है की अींिे लोग के बाकी इन्रीर् िर्ति बहुि ही सक्षम होिे हैं. अींिे लोग अपने कान के उपर्ोग से अपने आसपास के जगहों को सुनिे हैं और चलिे हैं.  अींिे लोग स्पिय से भी जीवन र्बिािे हैं . अींिे लोग ब्रेल र्स्िप्ि की मदद से पढ़ सकिे हैं . स्पिय िर्ति से वे मुर्श्कल जगहों पे भी चल सकिे हैं.  अींिे लोग , एक पालिू जानवर भी रखिे हैं िाक्रक वे आगे रास्िा हदखा सके . र्े पालिू जानवर बहुि ही वफादार होिे हैं.....
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     द स्िोरीऑफ़ मार् लाइफ द वल््य इ शलव इन
  • 21.
     लाइि इनमार् ्ाकय नेस मार् लािर लाइफ
  • 22.
     थे सोंगऑफ़ थे स्िोन वाल थ्री ्ेज िो सी
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     हेलेन केलर के पापा जो दर्वद्सोंन .....
  • 28.
     1. 'र्जनलोगों के पास आुँखें हैं, वे सचमुच बहुि कम देखिे हैं' - हेलेन के लर को ऐसा तर्ों लगिा था?  उत्तर  लोगों के पास जो चीज़ उपलब्ि होिी है, उसका उपर्ोग वे नहीीं करिे इसशलए हेलेन के लर को ऐसा लगिा है क्रक र्जन लोगों के पास आुँखें हैं, वे सचमुच बहुि कम देखिे हैं।  2. 'प्रकृ ति का जादू' क्रकसे कहा गर्ा है? उत्तर  प्रकृ ति के सौंदर्य और उनमें होने वाले हदन-प्रतिहदन बदलाव को 'प्रकृ ति का जादू' कहा गर्ा है।
  • 29.
     3. 'कुछ खास िो नहीीं'- हेलेन की शमत्र ने र्ह जवाब क्रकस मौके पर हदर्ा और र्ह सुनकर हेलेन को आश्चर्य तर्ों हुआ? उत्तर  एक बार हेलेन के लर की र्प्रर् शमत्र जींगल में घूमने ग। थी। जब वह वापस लौिी िो हेलेन के लर ने उससे जींगल के बारे में जानना चाहा िब उनकी शमत्र ने जवाब हदर्ा क्रक 'कु छ खास िो नहीीं'। र्ह सुनकर हेलेन को आश्चर्य इसशलए हुआ तर्ोंक्रक लोग आुँखें होने के बाद भी कु छ नहीीं देख पािे क्रकन्िु वे िो आुँखें न होने के बावजूद भी प्रकृ ति की बहुि सारी चीज़ों को के वल स्पिय से ही महसूस कर लेिी हैं। 4. हेलेन के लर प्रकृ ति की क्रकन चीज़ों को छू कर और सुनकर पहचान लेिी थीीं? पाठ पढ़कर इसका उत्तर शलखो। उत्तर  हेलन के लर भोज-पत्र के पेड की धचकनी छाल और ची् की खुरदरी छाल को स्पिय से पहचान लेिी थी। वसींि के दौरान वे िहतनर्ों में नर्ी कशलर्ाुँ, फू लों की पींखुड्र्ों की मखमली सिह और उनकी घुमावदार बनावि को भी वे छू कर पहचान लेिी थीीं। धचड्र्ा के मिुर स्वर को वे सुनकर जान लेिी थीीं।
  • 30.
     5. 'जबक्रकइस तनर्ामि से र्ज़ींदगी को खुशिर्ों के इन्रिनुर्ी रींगों से हरा-भरा जा सकिा है।' - िुम्हारी नज़र में इसका तर्ा अथय हो सकिा है? उत्तर इन पींर्तिर्ों में हेलेन के लर ने र्जींदगी में आुँखों के महत्व को बिार्ा है। वह कहिी हैं की आुँखों के सहर्ोग से हम अपने र्जींदगी को खुशिर्ों के रींग-र्बरींगे रींगों से रींग सकिे हैं।