B.J.P.S Samiti’s
M.V.HERWADKAR ENGLISH MEDIUM HIGH SCHOOL
कविता
प्रस्तुततकरण –लता .क
ु ततकोटि
Program:
Semester:
Course: NAME OF THE
COURSE
1
कक्षा-१० वी
ववषय- ह िंदी
मातृभूमम
मातृभूमम
• कवव-भगवतिचरण वर्ाा जी का जन्र् उन्नाव
जजले क
े शफ़ीपुर गााँव र्ें ३० अगस्ि १९०३
को ुआ था।
• इल ाबाद से इन् ोने बी.ए ,एल.एल.बी की
डिग्रि प्राप्ि की।
• “ववचार” “नवजीवन” पत्रिकाओिं का सिंपादन
ककया ।
• इनसे रग्रचि “अग्रचलेखा” उपन्यास पर दो
बार कफ़ल्र् तनर्ााण ुआ ै।
• “भूले-त्रबसरे ग्रचि” उपन्यास को साह त्य
अकािर्ी पुरस्कार प्राप्ि ुआ ै।
• उपन्यास,क ानी, नाटक , कवविाओिं की
रचना इन् ोंने ककया ै।
• कवव प्रस्िुि कवविा क
े द्वारा र्ािॄभूमर्
की ववशेषिाओिं पर प्रकाश िालले ैं।
 र्ािृभूमर् को प्रणार् करिे ुए कवव
वनसिंपदा,खतनज सिंपवि का वणान करिे
ुए देश क
े ववभूतियों का स्र्रण करिे ैं।
 कवव भारि र्ािा को शि-शि बार नर्न
करना चा िे ैं।
 इस पावन धरिी पर कई वीरों ने जन्र्
लेकर भारि र्ािा की सेवा ककया ै।
 भारि र्ािा क
े गोद र्ें गााँधी,बुद्ध ,रार्
जैसे कई र् ान जस्ियााँ सोए ैं।
 ऐसे पावन भूमर् क
े नागररक वे ैं इसमलए
वे प्रणार् करना चा िे ैं।
पर्ातर्िाची शब्द
प्रणार् अमभवादन,नर्स्कार जननी-र्ािा,र्ााँ
भू- धरिी, भूमर् शतयि- सोया ुआ
 नैसग्रगाक रूप र्ें भारि अत्यिंि सर्ृद्ध ै।
 य ााँ क
े खेि रे-भरे,वन,बगीचें फ़ल-फ़
ू लों से
ल रािे ैं।
 य ााँ की मर्ट्टी र्ें अपार खतनज सिंपवि प
ु पी ैं।
 भारि र्ािा अपने र्ुक्ि ाथों से इस सिंपवि को
अपने सिंिानों र्ें बााँट र ी ै।
पर्ातर्िाची शब्द
 सु ाना- र्नर्ो क-आकषाक
फ़
ू ल- क
ु सुर्,सुर्न
 उपवन- बगीचा, वाहटका
स्ि- ाथ ,कर
 कवव भारि र्ािा का स्वरूप का वणान
करिे ुए क िे ैं कक उसक
े एक ाथ र्ें
ज्ञान दीप ै, िो दूसरे ाथ र्ें न्याय
पिाका।
 आज र्ािा क
े साथ करोिों की सिंख्या
र्ें उनक
े सिंिान उनक
े साथ ैं।
 र्ााँ कवव जग का काया पलट करने की
प्रथाना करिे ैं।
 नगर और िार्ों र्ें “जय ह िंद” का नाद
गूाँज उठे ये उनकी इच्पा ै।
पर्ातर्िाची शब्द
 पिाका- झिंिा,ध्वज
 जग- दुतनया,सिंसार
गूाँज- प्रतिध्वतन
 शब्द युग्र्
रे-भरे फ़ल-फ़
ू ल सुख –सिंपवि
धन-धार्
 द्ववरूजक्ि
शि-शि कोहट-कोहट
गृ काया
• कवव पररचय मलखखए।
• पद्य का दूसरा चरण क
िं ठस्थ कीजजए।

10th matrubhoomi final kavitaNew Microsoft Office PowerPoint Presentation.pptx

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    B.J.P.S Samiti’s M.V.HERWADKAR ENGLISHMEDIUM HIGH SCHOOL कविता प्रस्तुततकरण –लता .क ु ततकोटि Program: Semester: Course: NAME OF THE COURSE 1
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    मातृभूमम • कवव-भगवतिचरण वर्ााजी का जन्र् उन्नाव जजले क े शफ़ीपुर गााँव र्ें ३० अगस्ि १९०३ को ुआ था। • इल ाबाद से इन् ोने बी.ए ,एल.एल.बी की डिग्रि प्राप्ि की। • “ववचार” “नवजीवन” पत्रिकाओिं का सिंपादन ककया ।
  • 5.
    • इनसे रग्रचि“अग्रचलेखा” उपन्यास पर दो बार कफ़ल्र् तनर्ााण ुआ ै। • “भूले-त्रबसरे ग्रचि” उपन्यास को साह त्य अकािर्ी पुरस्कार प्राप्ि ुआ ै। • उपन्यास,क ानी, नाटक , कवविाओिं की रचना इन् ोंने ककया ै।
  • 7.
    • कवव प्रस्िुिकवविा क े द्वारा र्ािॄभूमर् की ववशेषिाओिं पर प्रकाश िालले ैं।  र्ािृभूमर् को प्रणार् करिे ुए कवव वनसिंपदा,खतनज सिंपवि का वणान करिे ुए देश क े ववभूतियों का स्र्रण करिे ैं।  कवव भारि र्ािा को शि-शि बार नर्न करना चा िे ैं।
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     इस पावनधरिी पर कई वीरों ने जन्र् लेकर भारि र्ािा की सेवा ककया ै।  भारि र्ािा क े गोद र्ें गााँधी,बुद्ध ,रार् जैसे कई र् ान जस्ियााँ सोए ैं।  ऐसे पावन भूमर् क े नागररक वे ैं इसमलए वे प्रणार् करना चा िे ैं।
  • 10.
    पर्ातर्िाची शब्द प्रणार् अमभवादन,नर्स्कारजननी-र्ािा,र्ााँ भू- धरिी, भूमर् शतयि- सोया ुआ  नैसग्रगाक रूप र्ें भारि अत्यिंि सर्ृद्ध ै।  य ााँ क े खेि रे-भरे,वन,बगीचें फ़ल-फ़ ू लों से ल रािे ैं।  य ााँ की मर्ट्टी र्ें अपार खतनज सिंपवि प ु पी ैं।  भारि र्ािा अपने र्ुक्ि ाथों से इस सिंपवि को अपने सिंिानों र्ें बााँट र ी ै।
  • 12.
    पर्ातर्िाची शब्द  सुाना- र्नर्ो क-आकषाक फ़ ू ल- क ु सुर्,सुर्न  उपवन- बगीचा, वाहटका स्ि- ाथ ,कर  कवव भारि र्ािा का स्वरूप का वणान करिे ुए क िे ैं कक उसक े एक ाथ र्ें ज्ञान दीप ै, िो दूसरे ाथ र्ें न्याय पिाका।
  • 13.
     आज र्ािाक े साथ करोिों की सिंख्या र्ें उनक े सिंिान उनक े साथ ैं।  र्ााँ कवव जग का काया पलट करने की प्रथाना करिे ैं।  नगर और िार्ों र्ें “जय ह िंद” का नाद गूाँज उठे ये उनकी इच्पा ै।
  • 14.
    पर्ातर्िाची शब्द  पिाका-झिंिा,ध्वज  जग- दुतनया,सिंसार गूाँज- प्रतिध्वतन  शब्द युग्र् रे-भरे फ़ल-फ़ ू ल सुख –सिंपवि धन-धार्  द्ववरूजक्ि शि-शि कोहट-कोहट
  • 15.
    गृ काया • कववपररचय मलखखए। • पद्य का दूसरा चरण क िं ठस्थ कीजजए।