Polity topic-bharat-ka-samvaodhanik-itihas-1a

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  1. 1. भारतीय राजव्यवस्था एवं अभभशासन www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM भारत का संवैधाननक इनतहास
  2. 2. ● भारत में ब्रिटिश 1600 ई. में ईस्ि इंडिया कं पनी के रूप में, व्यापार करने आए। ● महारानी एलिजाबेथ प्रथम के चािटर द्वारा उन्हें भारत में व्यापार करने के ववस्तृत अधिकार प्राप्त थे। कं पनी, जजसके कायट अभी तक लसर्ट व्यापाररक कायों तक ही सीलमत थे, ने 1765 में बंगाि, ब्रबहार और उड़ीसा के दीवानी (अथाटत राजस्व एवं दीवानी न्याय के अधिकार) अधिकार प्राप्त कर लिए। ● 1858 में, लसपाही ववद्रोह के पररणामस्वरूप ब्रिटिश ताज ने भारत के शासन का उत्तरदाययत्व प्रत्यक्षतः अपने हाथों में िे लिया। Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  3. 3. ● यह शासन 15 अगस्त, 1947 में भारत की स्वतंत्रता प्राजप्त तक अनवरत रूप से जारी रहा । ● स्वतंत्रता लमिने के साथ ही भारत में एक संवविान की आवश्यकता महसूस हुई। ● ब्रिटिश शालसत भारत में सरकार और प्रशासन की ववधिक रूपरेखा यनलमटत की गई। इन घिनाओं ने हमारे संवविान और राजतंत्र पर गहरा प्रभाव छोड़ा। इन घिनाओं का क्रमवार व्यौरा यनम्नानुसार है Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  4. 4. 1773 का रैगुलेट ंग एक् इस अधियनयम का अत्यधिक संवैिायनक महत्व है, यथाः ● भारत में ईस्ि इंडिया कं पनी के कायों को यनयलमत और यनयंब्रत्रत करने की टदशा में ब्रिटिश सरकार द्वारा उठाया गया यह पहिा कदम था, ● इसके द्वारा पहिी बार कं पनी के प्रशासयनक और राजनैयतक कायों को मान्यता लमिी, एवं ● इसके द्वारा भारत में कें द्रीय प्रशासन की नींव रखी गयी । Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  5. 5. अधधननयम की ववशेषताएं ● इस अधियनयम द्वारा बंगाि के गवनटर को बंगाि का गवनटर जनरि पद नाम टदया गया एवं उसकी सहायता के लिए एक चार सदस्यीय कायटकारी पररषद का गठन ककया गया। उल्िेखनीय है कक ऐसे पहिे गवनटर जनरि िाॅिट वारेन हेजस्िंग्स थे । ● इसके द्वारा मद्रास एवं बंबई के गवनटर, बंगाि के गवनटर जनरि के अिीन हो गये, जबकक पहिे सभी प्रेलसिेंलसयों के गवनटर एक- दूसरे से अिग थे । ● अधियनयम के अंतगटत किकत्ता में 1774 में एक उच्चतम न्यायािय की स्थापना की गई, जजसमें मुख्य न्यायािीश और तीन अन्य न्यायािीश थे । Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  6. 6. ● इसके तहत कं पनी के कमटचाररयों को यनजी व्यापार करने और भारतीय िोगों से उपहार व ररश्वत िेना प्रयतबंधित कर टदया गया । ● इस अधियनयम के द्वारा, ब्रिटिश सरकार का कोिट आॅर् िायरेक्िसट (कं पनी की गवयनिंग बाॅिी) के माध्यम से कं पनी पर यनयंत्रण सशक्त हो गया। इसे भारत में इसके राजस्व, नागररक और सैन्य मामिों की जानकारी ब्रिटिश सरकार को देना आवश्यक कर टदया गया Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  7. 7. 1784 का विट्स इंडिया एक् ● रेगुिेटिंग एक्ि, 1773 की कलमयों को दूर करने के लिए ब्रिटिश संसद ने एक संशोधित अधियनयम 1781 में पाररत ककया, जजसे एक्ि आॅर् सैििमेंि के नाम से भी जाना जाता है। ● इसके बाद एक अन्य महत्वपूणट अधियनमय वपिस इंडिया एक्ि, 1784 में अजस्तत्व में आया । Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  8. 8. अधधननयम की ववशेषताएं ● इसने कं पनी के राजनैयतक और वाणणजययक कायों को पृथक-पृथक कर टदया । ● इसने यनदेशक मंिि को कं पनी के व्यापाररक मामिों के अिीक्षण की अनुमयत तो दे दी िेककन राजनैयतक मामिों के प्रबंिन के लिए यनयंत्रण बोिट (बोिट आॅर् कं ट्रोि) नाम से एक नए यनकाय का गठन कर टदया। इस प्रकार, द्वैि शासन की व्यवस्था का शुभारंभ ककया गया । Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  9. 9. ● यनयंत्रण बोिट को यह शजक्त थी कक वह ब्रिटिश यनयंब्रत्रत भारत में सभी नागररक, सैन्य सरकार व राजस्व गयतववधियों का अिीक्षण एवं यनयंत्रण करे। इस प्रकार, यह अधियनयम दो कारणों से महत्वपूणट था- पहिा भारत में कं पनी के अिीन क्षेत्र को पहिी बार ब्रिटिश आधिपत्य का क्षेत्र कहा गया दूसरा ब्रिटिश सरकार को भारत में कं पनी के कायों और इसके प्रशासन पर पूणट यनयंत्रण प्रदान ककया गया । Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  10. 10. 1833 का चा टर अधधननयम ● ब्रिटिश भारत के कें द्रीयकरण की टदशा में यह अधियनयम यनणाटयक कदम था। इस अधियनयम की ववशेषतायें यनम्नानुसार थीं: अधधननयम की ववशेषताएं ● इसने बंगाि के गवनटर जनरि को भारत का गवनटर जनरि बना टदया, जजसमें सभी नागररक और सैन्य शजक्तयां यनटहत थीं। इस प्रकार, इस अधियनयम ने पहिी बार एक ऐसी सरकार का यनमाटण ककया, जजसका ब्रिटिश कच्चे वािे संपूणट भारतीय क्षेत्र पर पूणट यनयंत्रण था। िाॅिट ववलियम बैंटिक भारत के प्रथम गवनटर जनरि थे । Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  11. 11. ● इसने मद्रास और बंबई के गवनटरों को वविाययका संबंिी शजक्त से वंधचत कर टदया। भारत के गवनटर जनरि को पूरे ब्रिटिश भारत में वविाययका के असीलमत अधिकार प्रदान कर टदये गये। इसके अंतगटत पहिे बनाए गए कानूनों को यनयामक कानून कहा गया और नए कानून के तहत बने कानूनों को एक्ि या अधियनयम कहा गया ● ईस्ि इंडिया कं पनी की एक व्यापाररक यनकाय के रूप में की जाने वािी गयतववधियों को समाप्त कर टदया गया। अब यह ववशुद्ध रूप से प्रशासयनक यनकाय बन गया। इसके तहत कं पनी के अधिकार वािे क्षेत्र ब्रिटिश राजशाही और उसके उत्तराधिकाररयों के ववश्वास के तहत ही कब्जे में रह गए । Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  12. 12. ● चािटर एक्ि 1833 ने लसववि सेवकों के चयन के लिए खुिी प्रयतयोधगता का आयोजन शुरू करने का प्रयास ककया। इसमें कहा गया कक कं पनी में भारतीयों को ककसी पद, कायाटिय और रोजगार को हालसि करने से वंधचत नहीं ककया जायेगा। हािांकक कोिट आॅर् िायरेक्िसट के ववरोि के कारण इस प्राविान को समाप्त कर टदया गया । Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  13. 13. 1853 का चा टर अधधननयम ● 1793 से 1853 के दौरान ब्रिट श संसद द्वारा िाररत ककए गए चा टर अधधननयमों की श्रंखला में यह अंनतम अधधननयम था। ● संवैधाननक ववकास की दृष्ट से यह अधधननयम एक महत्विूर्ट अधधननयम था। इस अधधननयम की ववशेषतायें ननम्नानुसार थींः ● 1793 से 1853 के दौरान ब्रिट श संसद द्वारा िाररत ककए गए चा टर अधधननयमों की श्रंखला में यह अंनतम अधधननयम था। ● संवैधाननक ववकास की दृष्ट से यह अधधननयम एक महत्विूर्ट अधधननयम था। इस अधधननयम की ववशेषतायें ननम्नानुसार थींः अधधननयम की ववशेषताएं ● इसने िहली बार गवनटर जनरल की िररषद के ववधायी एवं प्रशासननक कायों को अलग कर टदया। इसके तहत िररषद में छह नए िाषटद और जोड़े गए इन्हें ववधान िाषटद कहा गया। ● इसने िहली बार गवनटर जनरल की िररषद के ववधायी एवं प्रशासननक कायों को अलग कर टदया। इसके तहत िररषद में छह नए िाषटद और जोड़े गए इन्हें ववधान िाषटद कहा गया। Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  14. 14. ● इसने लसववि सेवकों की भती एवं चयन हेतु खुिी प्रयतयोधगता व्यवस्था का शुभारंभ ककया, इस प्रकार ववलशष्ि लसववि सेवा भारतीय नागररकों के लिए भी खोि दी गई और इसके लिए 1854 में (भारतीय लसववि सेवा के संबंि में) मैकािे सलमयत की यनयुक्त की गई । ● इसने कं पनी के शासन को ववस्ताररत कर टदया और भारतीय क्षेत्र को इंग्िैंि राजशाही के ववश्वास के तहत कच्चे में रखने का अधिकार टदया। िेककन पूवट अधियनयमों के ववपरीत इसमें ककसी यनजश्चत समय का यनिाटरण नहीं ककया गया था। Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  15. 15. ● इसने प्रथम बार भारतीय कें द्रीय वविान पररषद में स्थानीय प्रयतयनधित्व प्रारंभ ककया। गवनटर-जनरि की पररषद में छह नए सदस्यों में से, चार का चुनाव बंगाि, मद्रास, बंबई और आगरा की स्थानीय प्रांतीय सरकारों द्वारा ककया जाना था। Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  16. 16. 1858 का भारत शासन अधधननयम ● इस महत्वपूणट कानून का यनमाटण 1857 के ववद्रोह के बाद ककया गया, जजसे भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम या लसपाही ववद्रोह भी कहा जाता है। भारत के शासन को अच्छा बनाने वािा अधियनयम नाम के प्रलसद्ध इस कानून ने, ईस्ि इंडिया कं पनी को समाप्त कर टदया और गवनटरों, क्षेत्रों और राजस्व संबंिी शजक्तयां ब्रिटिश राजशाही को हस्तांतररत कर दीं। अधधननयम की ववशेषताएं ● इसके तहत भारत का शासन सीिे महारानी ववक्िोररया के अिीन चिा गया। गवनटर जनरि का पदनाम बदिकर भारत का वायसराय कर टदया गया। वह (वायसराय) भारत में ब्रिटिश ताज का प्रत्यक्ष प्रयतयनधि बन गया। िाॅिट कै यनंग भारत के प्रथम वायसराय बने । Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  17. 17. ● इस अधियनयम ने यनयंत्रण बोिट और यनदेशक कोिट समाप्त कर भारत में शासन की द्वैि प्रणािी समाप्त कर दी । ● एक नए पद, भारत के रायय सधचव, का सृजन ककया गया जजसमें भारतीय प्रशासन पर संपूणट यनयंत्रण की शजक्त यनटहत थी। यह सधचव ब्रिटिश कै ब्रबनेि का सदस्य था और ब्रिटिश अंततः संसद के प्रयत उत्तरदायी था । ● भारत सधचव की सहायता के लिए 15 सदस्यीय पररषद का गठन ककया गया, जो एक सिाहकार सलमयत थी। पररषद का अध्यक्ष भारत सधचव को बनाया गया।ण ् Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  18. 18. ● इस कानून के तहत भारत सधचव की पररषद का गठन ककया गया. जो एक यनगलमत यनकाय थी और जजसे भारत और इंग्िैंि में मुकदमा करने का अधिकार था। इस पर भी मुकदमा ककया जा सकता था । ● 1858 के कानून का प्रमुख्य उद्देश्य, प्रशासयनक मशीनरी में सुिार था, जजसके माध्यम से इंग्िैंि में भारतीय सरकार का अिीक्षण उसका यनयंत्रण हो सकता था। इसने भारत में प्रचलित शासन प्रणािर में कोई ववशेष पररवतटन नहीं ककया। Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
  19. 19. 1861, 1892 और 1909 के िररषद अधधननयम ● 1857 की महान क्रांयत के बाद ब्रिटिश सरकार ने महसूस ककया कक भारत में शासन चिाने के लिए भारतीयों का सहयोग िेना आवश्यक, है। इस सहयोग नीयत के तहत ब्रिटिश संसद ने 1861, 1892 और 1909 में तीन नए अधियनयम पाररत ककए। 1861 का पररषद अधियनयम भारतीय संवैिायनक और राजनैयतक में एक महत्वपूणट अधियनयम था । Click Here To Join Online IAS Pre Online Coaching www.iasexamportal.com © IASEXAMPORTAL.COM
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