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Shri ram katha ayodhya kand

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Shri ram katha ayodhya kand

  1. 1. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) अयो या का ड ीगणेशायनमः ीजानक व लभो वजयते ीरामच रतमानस वतीय सोपान अयो या-का ड लोक य या क च वभा त भू धरसु ता दे वापगा म तक े े भाले बाल वधु गले च गरलं य योर स यालरा । सोऽयं भू त वभू षणः सु रवरः सवा धपः सवदा शवः सवगतः शवः श श नभः ीश करः पातु माम ्।।1।। स नतां या न गता भषेकत तथा न म ले वनवासदुःखतः। मु खा बु ज ी रघु न दन य मे सदा तु सा म जु लमंगल दा।।2।। नीला बु ज यामलकोमला गं सीतासमारो पतवामभागम ्। पाणौ महासायकचा चापं नमा म रामं रघु वंशनाथम ्।।3।। दो0- ीगु चरन सरोज रज नज मनु मु क सु धा र। ु बरनउँ रघु बर बमल जसु जो दायक फल चा र।। ु जब त रामु या ह घर आए। नत नव मंगल मोद बधाए।। भु वन चा रदस भू धर भार । सु कृ त मेघ बरष ह सु ख बार ।। र ध स ध संप त नद ं सु हाई। उम ग अवध अंबु ध कहु ँ आई।। म नगन पु र नर ना र सु जाती। सु च अमोल सु ंदर सब भाँती।। क ह न जाइ कछ नगर बभू ती। जनु एत नअ बरं च करतू ती।। ु सब ब ध सब पु र लोग सु खार । रामचंद मु ख चंद ु नहार ।। मु दत मातु सब सखीं सहे ल । फ लत बलो क मनोरथ बेल ।। राम पु गु नसीलु सु भाऊ। मु दत होइ दे ख सु न राऊ।। दो0-सब क उर अ भलाषु अस कह हं मनाइ महे सु । आप अछत जु बराज पद राम ह दे उ नरे सु ।।1।।
  2. 2. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) –*–*– एक समय सब स हत समाजा। राजसभाँ रघु राजु बराजा।। सकल सु कृ त मू र त नरनाहू । राम सु जसु सु न अ त ह उछाहू ।। नृप सब रह हं कृ पा अ भलाष। लोकप कर हं ी त ख राख।। तभु वन ती न काल जग माह ं। भू र भाग दसरथ सम नाह ं।। मंगलमू ल रामु सु त जासू । जो कछ क हज थोर सबु तासू ।। ु रायँ सु भायँ मु क कर ल हा। बदनु बलो क मु कट सम क हा।। ु ु वन समीप भए सत कसा। मनहु ँ जरठपनु अस उपदे सा।। े नृप जु बराज राम कहु ँ दे हू । जीवन जनम लाहु कन लेहू ।। दो0-यह बचा उर आ न नृप सु दनु सु अवस पाइ। ेम पु ल क तन मु दत मन गु र ह सु नायउ जाइ।।2।। –*–*– कहइ भु आलु सु नअ मु ननायक। भए राम सब ब ध सब लायक।। सेवक स चव सकल पु रबासी। जे हमारे अ र म उदासी।। सब ह रामु य जे ह ब ध मोह । भु असीस जनु तनु ध र सोह ।। ब स हत प रवार गोसा । कर हं छोहु सब रौ र ह नाई।। जे गु र चरन रे नु सर धरह ं। ते जनु सकल बभव बस करह ं।। मो ह सम यहु अनु भयउ न दूज। सबु पायउँ रज पाव न पू ज।। अब अ भलाषु एक मन मोर। पू ज ह नाथ अनु ह तोर।। ु मु न स न ल ख सहज सनेहू । कहे उ नरे स रजायसु दे हू ।। दो0-राजन राउर नामु जसु सब अ भमत दातार। फल अनु गामी म हप म न मन अ भलाषु तु हार।।3।। –*–*– सब ब ध गु स न िजयँ जानी। बोलेउ राउ रहँ स मृदु बानी।। नाथ रामु क रअ हं जु बराजू । क हअ कृ पा क र क रअ समाजू ।। मो ह अछत यहु होइ उछाहू । लह हं लोग सब लोचन लाहू ।। भु साद सव सबइ नबाह ं। यह लालसा एक मन माह ं।। पु न न सोच तनु रहउ क जाऊ। जे हं न होइ पाछ प छताऊ।। सु न मु न दसरथ बचन सु हाए। मंगल मोद मू ल मन भाए।।
  3. 3. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) सु नु नृप जासु बमु ख प छताह ं। जासु भजन बनु जर न न जाह ं।। भयउ तु हार तनय सोइ वामी। रामु पु नीत ेम अनु गामी।। दो0-बे ग बलंबु न क रअ नृप सािजअ सबु इ समाजु । सु दन सु मंगलु तब हं जब रामु हो हं जु बराजु ।।4।। –*–*– मु दत म हप त मं दर आए। सेवक स चव सु मं ु बोलाए।। क ह जयजीव सीस त ह नाए। भू प सु मंगल बचन सु नाए।। ज पाँच ह मत लागै नीका। करहु हर ष हयँ राम ह ट का।। मं ी मु दत सु नत य बानी। अ भमत बरवँ परे उ जनु पानी।। बनती स चव कर ह कर जोर । िजअहु जगतप त ब रस करोर ।। जग मंगल भल काजु बचारा। बे गअ नाथ न लाइअ बारा।। नृप ह मोदु सु न स चव सु भाषा। बढ़त ब ड़ जनु लह सु साखा।। दो0-कहे उ भू प मु नराज कर जोइ जोइ आयसु होइ। राम राज अ भषेक हत बे ग करहु सोइ सोइ।।5।। –*–*– हर ष मु नीस कहे उ मृदु बानी। आनहु सकल सु तीरथ पानी।। औषध मू ल फल फल पाना। कहे नाम ग न मंगल नाना।। ू चामर चरम बसन बहु भाँती। रोम पाट पट अग नत जाती।। म नगन मंगल ब तु अनेका। जो जग जोगु भू प अ भषेका।। बेद ब दत क ह सकल बधाना। कहे उ रचहु पु र ब बध बताना।। सफल रसाल पू गफल करा। रोपहु बी थ ह पु र चहु ँ फरा।। े े रचहु मंजु म न चौक चा । कहहु बनावन बे ग बजा ।। पू जहु गनप त गु र क लदे वा। सब ब ध करहु भू मसु र सेवा।। ु दो0- वज पताक तोरन कलस सजहु तु रग रथ नाग। सर ध र मु नबर बचन सबु नज नज काज हं लाग।।6।। –*–*– जो मु नीस जे ह आयसु द हा। सो ते हं काजु थम जनु क हा।। ब साधु सु र पू जत राजा। करत राम हत मंगल काजा।। सु नत राम अ भषेक सु हावा। बाज गहागह अवध बधावा।।
  4. 4. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) राम सीय तन सगु न जनाए। फरक हं मंगल अंग सु हाए।। पु ल क स ेम परसपर कहह ं। भरत आगमनु सू चक अहह ं।। भए बहु त दन अ त अवसेर । सगु न ती त भट भरत स रस य कर ।। े य को जग माह ं। इहइ सगु न फलु दूसर नाह ं।। राम ह बंधु सोच दन राती। अंडि ह कमठ दउ जे ह भाँती।। दो0-ए ह अवसर मंगलु परम सु न रहँ सेउ र नवासु । सोभत ल ख बधु बढ़त जनु बा र ध बी च बलासु ।।7।। –*–*– थम जाइ िज ह बचन सु नाए। भू षन बसन भू र त ह पाए।। ेम पु ल क तन मन अनु रागीं। मंगल कलस सजन सब लागीं।। चौक चा सु म ाँ पु र । म नमय ब बध भाँ त अ त र ।। आनँद मगन राम महतार । दए दान बहु ब हँ कार ।। पू जीं ामदे ब सु र नागा। कहे उ बहो र दे न ब लभागा।। जे ह ब ध होइ राम क यानू । दे हु दया क र सो बरदानू ।। गाव हं मंगल को कलबयनीं। बधु बदनीं मृगसावकनयनीं।। दो0-राम राज अ भषेक सु न हयँ हरषे नर ना र। ु लगे सु मंगल सजन सब ब ध अनु क ल बचा र।।8।। ू –*–*– तब नरनाहँ ब स ठु बोलाए। रामधाम सख दे न पठाए।। गु र आगमनु सु नत रघुनाथा। वार आइ पद नायउ माथा।। सादर अरघ दे इ घर आने। सोरह भाँ त पू िज सनमाने।। गहे चरन सय स हत बहोर । बोले रामु कमल कर जोर ।। सेवक सदन वा म आगमनू । मंगल मू ल अमंगल दमनू ।। तद प उ चत जनु बो ल स ीती। पठइअ काज नाथ अ स नीती।। भु ता तिज भु क ह सनेहू । भयउ पु नीत आजु यहु गेहू ।। आयसु होइ सो कर गोसाई। सेवक लहइ वा म सेवकाई।। दो0-सु न सनेह साने बचन मु न रघु बर ह संस। राम कस न तु ह कहहु अस हं स बंस अवतंस।।9।। –*–*–
  5. 5. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) बर न राम गु न सीलु सु भाऊ। बोले ेम पु ल क मु नराऊ।। भू प सजेउ अ भषेक समाजू । चाहत दे न तु ह ह जुबराजू ।। राम करहु सब संजम आजू । ज ब ध कसल नबाहै काजू ।। ु गु सख दे इ राय प हं गयउ। राम दयँ अस बसमउ भयऊ।। जनमे एक संग सब भाई। भोजन सयन क ल ल रकाई।। े करनबेध उपबीत बआहा। संग संग सब भए उछाहा।। बमल बंस यहु अनु चत एक। बंधु बहाइ बड़े ह अ भषेक।। ू ू भु स ेम प छता न सु हाई। हरउ भगत मन क क टलाई।। ै ु दो0-ते ह अवसर आए लखन मगन ेम आनंद। सनमाने य बचन क ह रघु क ल करव चंद।।10।। ु ै –*–*– बाज हं बाजने ब बध बधाना। पु र मोदु न हं जाइ बखाना।। भरत आगमनु सकल मनाव हं। आवहु ँ बे ग नयन फलु पाव हं।। हाट बाट घर गल ं अथाई। कह हं परसपर लोग लोगाई।। का ल लगन भ ल क तक बारा। पू िज ह ब ध अ भलाषु हमारा।। े कनक संघासन सीय समेता। बैठ हं रामु होइ चत चेता।। सकल कह हं कब होइ ह काल । बघन मनाव हं दे व कचाल ।। ु त ह ह सोहाइ न अवध बधावा। चोर ह चं द न रा त न भावा।। सारद बो ल बनय सु र करह ं। बार हं बार पाय लै परह ं।। दो0- बप त हमा र बलो क ब ड़ मातु क रअ सोइ आजु । रामु जा हं बन राजु तिज होइ सकल सु रकाजु ।।11।। –*–*– सु न सु र बनय ठा ढ़ प छताती। भइउँ सरोज ब पन हमराती।। दे ख दे व पु न कह हं नहोर । मातु तो ह न हं थो रउ खोर ।। बसमय हरष र हत रघु राऊ। तु ह जानहु सब राम भाऊ।। जीव करम बस सु ख दुख भागी। जाइअ अवध दे व हत लागी।। बार बार ग ह चरन सँकोचौ। चल बचा र बबु ध म त पोची।। ऊच नवासु नी च करतू ती। दे ख न सक हं पराइ बभू ती।। ँ आ गल काजु बचा र बहोर । करह हं चाह कसल क ब मोर ।। ु
  6. 6. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) हर ष दयँ दसरथ पु र आई। जनु ह दसा दुसह दुखदाई।। दो0-नामु मंथरा मंदम त चेर ककइ क र। ै े े अजस पेटार ता ह क र गई गरा म त फ र।।12।। े –*–*– द ख मंथरा नग बनावा। मंजु ल मंगल बाज बधावा।। पू छे स लोग ह काह उछाहू । राम तलक सु न भा उर दाहू ।। ु करइ बचा कबु ु कजाती। होइ अकाजु कव न ब ध राती।। ु दे ख ला ग मधु क टल कराती। िज म गवँ तकइ लेउँ क ह भाँती।। ु े भरत मातु प हं गइ बलखानी। का अनम न ह स कह हँ स रानी।। ऊत दे इ न लेइ उसासू । ना र च रत क र ढारइ आँसू ।। हँ स कह रा न गालु बड़ तोर। द ह लखन सख अस मन मोर।। तबहु ँ न बोल चे र ब ड़ पा प न। छाड़इ वास का र जनु साँ प न।। दो0-सभय रा न कह कह स कन कसल रामु म हपालु । ु लखनु भरतु रपु दमनु सु न भा कबर उर सालु ।।13।। ु –*–*– कत सख दे इ हम ह कोउ माई। गालु करब क ह कर बलु पाई।। े राम ह छा ड़ कसल क ह आजू । जे ह जनेसु दे इ जु बराजू ।। ु े भयउ कौ सल ह ब ध अ त दा हन। दे खत गरब रहत उर ना हन।। दे खेहु कस न जाइ सब सोभा। जो अवलो क मोर मनु छोभा।। पू तु बदे स न सोचु तु हार। जान त हहु बस नाहु हमार।। नीद बहु त य सेज तु राई। लखहु न भू प कपट चतु राई।। सु न य बचन म लन मनु जानी। झु क रा न अब रहु अरगानी।। पु न अस कबहु ँ कह स घरफोर । तब ध र जीभ कढ़ावउँ तोर ।। दो0-काने खोरे कबरे क टल कचाल जा न। ू ु ु तय बसे ष पु न चे र क ह भरतमातु मु सु का न।।14।। –*–*– यबा द न सख द ि हउँ तोह । सपनेहु ँ तो पर कोपु न मोह ।। सु दनु सु मंगल दायक सोई। तोर कहा फर जे ह दन होई।। ु ु जेठ वा म सेवक लघु भाई। यह दनकर कल र त सु हाई।। ु
  7. 7. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) राम तलक ज साँचेहु ँ काल । दे उँ मागु मन भावत आल ।। ु कौस या सम सब महतार । राम ह सहज सु भायँ पआर ।। मो पर कर हं सनेहु बसेषी। म क र ी त पर छा दे खी।। ज ब ध जनमु दे इ क र छोहू । होहु ँ राम सय पू त पु तोहू ।। ान त अ धक रामु य मोर। त ह क तलक छोभु कस तोर।। दो0-भरत सपथ तो ह स य कहु प रह र कपट दुराउ। हरष समय बसमउ कर स कारन मो ह सु नाउ।।15।। –*–*– एक हं बार आस सब पू जी। अब कछ कहब जीभ क र दूजी।। ु फोरै जोगु कपा अभागा। भलेउ कहत दुख रउरे ह लागा।। कह हं झू ठ फ र बात बनाई। ते ु य तु ह ह क इ म माई।। हमहु ँ कह ब अब ठकरसोहाती। ना हं त मौन रहब दनु राती।। ु क र क प ब ध परबस क हा। बवा सो लु नअ ल हअ जो द हा।। ु कोउ नृप होउ हम ह का हानी। चे र छा ड़ अब होब क रानी।। जारै जोगु सु भाउ हमारा। अनभल दे ख न जाइ तु हारा।। तात कछक बात अनु सार । छ मअ दे ब ब ड़ चू क हमार ।। ु दो0-गू ढ़ कपट य बचन सु न तीय अधरबु ध रा न। सु रमाया बस बै र न ह सु द जा न प तआ न।।16।। –*–*– सादर पु न पु न पूँछ त ओह । सबर गान मृगी जनु मोह ।। त स म त फर अहइ ज स भाबी। रहसी चे र घात जनु फाबी।। तु ह पूँछहु म कहत डेराऊ। धरे उ मोर घरफोर नाऊ।। ँ ँ सिज ती त बहु ब ध ग ढ़ छोल । अवध साढ़साती तब बोल ।। य सय रामु कहा तु ह रानी। राम ह तु ह य सो फ र बानी।। ु रहा थम अब ते दन बीते। समउ फर रपु हो हं पंर ते।। भानु कमल क ल पोष नहारा। बनु जल जा र करइ सोइ छारा।। ु ज र तु हा र चह सव त उखार । ँ धहु क र उपाउ बर बार ।। दो0-तु ह ह न सोचु सोहाग बल नज बस जानहु राउ। मन मल न मु ह मीठ नृप राउर सरल सु भाउ।।17।।
  8. 8. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) –*–*– चतु र गँभीर राम महतार । बीचु पाइ नज बात सँवार ।। पठए भरतु भू प न नअउर। राम मातु मत जानव रउर।। सेव हं सकल सव त मो ह नीक। गर बत भरत मातु बल पी क।। सालु तु हार कौ सल ह माई। कपट चतु र न हं होइ जनाई।। राज ह तु ह पर ेमु बसेषी। सव त सु भाउ सकइ न हं दे खी।। रची ंपचु भू प ह अपनाई। राम तलक हत लगन धराई।। यह कल उ चत राम कहु ँ ट का। सब ह सोहाइ मो ह सु ठ नीका।। ु आ ग ल बात समु झ ड मोह । दे उ दै उ फ र सो फलु ओह ।। दो0-र च प च को टक क टलपन क हे स कपट बोधु ।। ु क ह स कथा सत सव त क जे ह ब ध बाढ़ बरोधु ।।18।। ै –*–*– भावी बस ती त उर आई। पूँछ रा न पु न सपथ दे वाई।। का पू छहु ँ तु ह अबहु ँ न जाना। नज हत अन हत पसु प हचाना।। भयउ पाखु दन सजत समाजू । तु ह पाई सु ध मो ह सन आजू ।। खाइअ प ह रअ राज तु हार। स य कह न हं दोषु हमार।। ज अस य कछ कहब बनाई। तौ ब ध दे इ ह हम ह सजाई।। ु राम ह तलक का ल ज भयऊ।þ तु ह कहु ँ बप त बीजु ब ध बयऊ।। रे ख खँ चाइ कहउँ बलु भाषी। भा म न भइहु दूध कइ माखी।। ज सु त स हत करहु सेवकाई। तौ घर रहहु न आन उपाई।। दो0-क ूँ बनत ह द ह दुखु तु ह ह कौ सलाँ दे ब। भरतु बं दगृह सेइह हं लखनु राम क नेब।।19।। े –*–*– ककयसु ता सु नत कटु बानी। क ह न सकइ कछ सह म सु खानी।। ै ु तन पसेउ कदल िज म काँपी। कबर ं दसन जीभ तब चाँपी।। ु क ह क ह को टक कपट कहानी। धीरजु धरहु बो ध स रानी।। फरा करमु य ला ग कचाल । ब क ह सराहइ मा न मराल ।। ु सु नु मंथरा बात फ र तोर । द ह न आँ ख नत फरकइ मोर ।। ु दन त दे खउँ रा त कसपने। कहउँ न तो ह मोह बस अपने।। ु
  9. 9. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) काह करौ स ख सू ध सु भाऊ। दा हन बाम न जानउँ काऊ।। दो0-अपने चलत न आजु ल ग अनभल काहु क क ह। क हं अघ एक ह बार मो ह दै अँ दुसह दुखु द ह।।20।। े –*–*– नैहर जनमु भरब ब जाइ। िजअत न कर ब सव त सेवकाई।। अ र बस दै उ िजआवत जाह । मरनु नीक ते ह जीवन चाह ।। द न बचन कह बहु ब ध रानी। सु न कबर ं तयमाया ठानी।। ु अस कस कहहु मा न मन ऊना। सु खु सोहागु तु ह कहु ँ दन दूना।। जे हं राउर अ त अनभल ताका। सोइ पाइ ह यहु फलु प रपाका।। जब त कमत सु ना म वा म न। भू ख न बासर नींद न जा म न।। ु पूँछेउ गु न ह रे ख त ह खाँची। भरत भु आल हो हं यह साँची।। भा म न करहु त कह उपाऊ। है तु हर ं सेवा बस राऊ।। दो0-परउँ कप तु अ बचन पर सकउँ पू त प त या ग। ू कह स मोर दुखु दे ख बड़ कस न करब हत ला ग।।21।। –*–*– कबर ं क र कबु ल ककई। कपट छर उर पाहन टे ई।। ु ै े ु लखइ न रा न नकट दुखु कसे। चरइ ह रत तन ब लपसु जैस।। सु नत बात मृदु अंत कठोर । दे त मनहु ँ मधु माहु र घोर ।। कहइ चे र सु ध अहइ क नाह । वा म न क हहु कथा मो ह पाह ं।। दुइ बरदान भू प सन थाती। मागहु आजु जु ड़ावहु छाती।। सु त ह राजु राम ह बनवासू । दे हु लेहु सब सव त हु लासु ।। भू प त राम सपथ जब करई। तब मागेहु जे हं बचनु न टरई।। होइ अकाजु आजु न स बीत। बचनु मोर य मानेहु जी त।। दो0-बड़ कघातु क र पात क न कहे स कोपगृहँ जाहु । ु काजु सँवारे हु सजग सबु सहसा ज न प तआहु ।।22।। –*–*– कब र ह रा न ान य जानी। बार बार ब ड़ बु बखानी।। ु तो ह सम हत न मोर संसारा। बहे जात कइ भइ स अधारा।। ज ब ध पु रब मनोरथु काल । कर तो ह चख पू त र आल ।।
  10. 10. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) बहु ब ध चे र ह आद दे ई। कोपभवन गव न ककई।। ै े बप त बीजु बरषा रतु चेर । भु इँ भइ कम त ककई कर ।। ु ै े े पाइ कपट जलु अंक र जामा। बर दोउ दल दुख फल प रनामा।। ु कोप समाजु सािज सबु सोई। राजु करत नज क म त बगोई।। ु राउर नगर कोलाहलु होई। यह कचा ल कछ जान न कोई।। ु ु दो0- मु दत पु र नर ना र। सब सज हं सु मंगलचार। एक बस हं एक नगम हं भीर भू प दरबार।।23।। –*–*– बाल सखा सु न हयँ हरषाह ं। म ल दस पाँच राम प हं जाह ं।। भु आदर हं ेमु प हचानी। पूँछ हं क सल खेम मृदु बानी।। ु फर हं भवन य आयसु पाई। करत परसपर राम बड़ाई।। को रघु बीर स रस संसारा। सीलु सनेह नबाह नहारा। ज ह ज ह जो न करम बस मह ं। तहँ तहँ ईसु दे उ यह हमह ं।। सेवक हम वामी सयनाहू । होउ नात यह ओर नबाहू ।। अस अ भलाषु नगर सब काहू । ककयसु ता दयँ अ त दाहू ।। ै को न कसंग त पाइ नसाई। रहइ न नीच मत चतु राई।। ु दो0-साँस समय सानंद नृपु गयउ ककई गेहँ। ै े गवनु नठु रता नकट कय जनु ध र दे ह सनेहँ।।24।। –*–*– कोपभवन सु न सकचेउ राउ। भय बस अगहु ड़ परइ न पाऊ।। ु सु रप त बसइ बाहँ बल जाक। नरप त सकल रह हं ख ताक।। े सो सु न तय रस गयउ सु खाई। दे खहु काम ताप बड़ाई।। सू ल क लस अ स अँगव नहारे । ते र तनाथ सु मन सर मारे ।। ु सभय नरे सु या प हं गयऊ। दे ख दसा दुखु दा न भयऊ।। भू म सयन पटु मोट पु राना। दए डा र तन भू षण नाना।। कम त ह क स कबेषता फाबी। अन अ हवातु सू च जनु भाबी।। ु ु जाइ नकट नृपु कह मृदु बानी। ान या क ह हे तु रसानी।। े छं 0-क ह हे तु रा न रसा न परसत पा न प त ह नेवारई। े मानहु ँ सरोष भु अंग भा म न बषम भाँ त नहारई।।
  11. 11. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) दोउ बासना रसना दसन बर मरम ठाह दे खई। तु लसी नृप त भवत यता बस काम कौतु क लेखई।। सो0-बार बार कह राउ सु मु ख सु लो च न पकबच न। कारन मो ह सु नाउ गजगा म न नज कोप कर।।25।। अन हत तोर या कइँ क हा। क ह दुइ सर क ह जमु चह ल हा।। े े े कहु क ह रं क ह करौ नरे सू । कहु क ह नृप ह नकास दे सू ।। े े सकउँ तोर अ र अमरउ मार । काह क ट बपु रे नर नार ।। जान स मोर सु भाउ बरो । मनु तव आनन चंद चको ।। या ान सु त सरबसु मोर। प रजन जा सकल बस तोर।। ज कछ कहौ कपटु क र तोह । भा म न राम सपथ सत मोह ।। ु बह स मागु मनभाव त बाता। भू षन सज ह मनोहर गाता।। घर कघर समु झ िजयँ दे खू । बे ग ु या प रहर ह कबेषू ।। ु दो0-यह सु न मन गु न सपथ ब ड़ बह स उठ म तमंद। भू षन सज त बलो क मृगु मनहु ँ करा त न फद।।26।। ं –*–*– पु न कह राउ सु द िजयँ जानी। ेम पु ल क मृदु मंजु ल बानी।। भा म न भयउ तोर मनभावा। घर घर नगर अनंद बधावा।। राम ह दे उँ का ल जु बराजू । सज ह सु लोच न मंगल साजू ।। दल क उठे उ सु न दउ कठो । जनु छइ गयउ पाक बरतो ।। ु ऐ सउ पीर बह स ते ह गोई। चोर ना र िज म ग ट न रोई।। लख हं न भू प कपट चतु राई। को ट क टल म न गु पढ़ाई।। ु ज य प नी त नपु न नरनाहू । ना रच रत जल न ध अवगाहू ।। कपट सनेहु बढ़ाइ बहोर । बोल बह स नयन मु हु मोर ।। दो0-मागु मागु पै कहहु पय कबहु ँ न दे हु न लेहु । दे न कहे हु बरदान दुइ तेउ पावत संदेहु ।।27।। –*–*– जानेउँ मरमु राउ हँ स कहई। तु ह ह कोहाब परम य अहई।। था त रा ख न मा गहु काऊ। बस र गयउ मो ह भोर सु भाऊ।। झू ठेहु ँ हम ह दोषु ज न दे हू । दुइ क चा र मा ग मक लेहू ।। ै ु
  12. 12. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) रघु क ल र त सदा च ल आई। ान जाहु ँ ब बचनु न जाई।। ु न हं अस य सम पातक पु ंजा। ग र सम हो हं क को टक गु ंजा।। स यमू ल सब सु कृ त सु हाए। बेद पु रान ब दत मनु गाए।। ते ह पर राम सपथ क र आई। सु कृ त सनेह अव ध रघु राई।। बात ढ़ाइ कम त हँ स बोल । क मत क बहग क लह जनु खोल ।। ु ु ु ु दो0-भू प मनोरथ सु भग बनु सुख सु बहं ग समाजु । भ ल न िज म छाड़न चह त बचनु भयंक बाजु ।।28।। मासपारायण, तेरहवाँ व ाम –*–*– सु नहु ान य भावत जी का। दे हु एक बर भरत ह ट का।। मागउँ दूसर बर कर जोर । पु रवहु नाथ मनोरथ मोर ।। तापस बेष बसे ष उदासी। चौदह ब रस रामु बनबासी।। सु न मृदु बचन भू प हयँ सोक। स स कर छअत बकल िज म कोक ।। ू ु ू गयउ सह म न हं कछ क ह आवा। जनु सचान बन झपटे उ लावा।। ु बबरन भयउ नपट नरपालू । दा म न हनेउ मनहु ँ त तालू ।। माथे हाथ मू द दोउ लोचन। तनु ध र सोचु लाग जनु सोचन।। मोर मनोरथु सु रत फला। फरत क र न िज म हतेउ समू ला।। ू अवध उजा र क ि ह कक । द ह स अचल बप त क ने ।। ै े ै दो0-कवन अवसर का भयउ गयउँ ना र ब वास। जोग स फल समय िज म ज त ह अ ब या नास।।29।। –*–*– ए ह ब ध राउ मन हं मन झाँखा। दे ख क भाँ त कम त मन माखा।। ु ु भरतु क राउर पू त न होह ं। आनेहु मोल बेसा ह क मोह ।। जो सु न स अस लाग तु हार। काहे न बोलहु बचनु सँभारे ।। दे हु उत अनु करहु क नाह ं। स यसंध तु ह रघु क ल माह ं।। ु दे न कहे हु अब ज न ब दे हू । तजहु ँ स य जग अपजसु लेहू ।। स य सरा ह कहे हु ब दे ना। जानेहु लेइ ह मा ग चबेना।। स ब दधी च ब ल जो कछ भाषा। तनु धनु तजेउ बचन पनु राखा।। ु अ त कटु बचन कह त ककई। मानहु ँ लोन जरे पर दे ई।। ै े
  13. 13. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) दो0-धरम धु रंधर धीर ध र नयन उघारे रायँ। स धु न ल ि ह उसास अ स मारे स मो ह कठायँ।।30।। ु –*–*– आग द ख जरत रस भार । मनहु ँ रोष तरवा र उघार ।। मू ठ कबु ु धार नठु राई। धर कबर ं सान बनाई।। ू लखी मह प कराल कठोरा। स य क जीवनु लेइ ह मोरा।। बोले राउ क ठन क र छाती। बानी स बनय तासु सोहाती।। या बचन कस कह स क भाँती। भीर ती त ी त क र हाँती।। ु मोर भरतु रामु दुइ आँखी। स य कहउँ क र संक साखी।। अव स दूतु म पठइब ाता। ऐह हं बे ग सुनत दोउ ाता।। सु दन सो ध सबु साजु सजाई। दे उँ भरत कहु ँ राजु बजाई।। दो0- लोभु न राम ह राजु कर बहु त भरत पर ी त। म बड़ छोट बचा र िजयँ करत रहे उँ नृपनी त।।31।। –*–*– राम सपथ सत कहु उँ सु भाऊ। राममातु कछ कहे उ न काऊ।। ु म सबु क ह तो ह बनु पूँछ। ते ह त परे उ मनोरथु छछ।। ू रस प रह अब मंगल साजू । कछ दन गएँ भरत जु बराजू ।। ु एक ह बात मो ह दुखु लागा। बर दूसर असमंजस मागा।। अजहु ँ दय जरत ते ह आँचा। रस प रहास क साँचेहु ँ साँचा।। कहु तिज रोषु राम अपराधू । सबु कोउ कहइ रामु सु ठ साधू ।। तु हू ँसराह स कर स सनेहू । अब सु न मो ह भयउ संदेहू ।। जासु सु भाउ अ र ह अनु क ला। सो क म क र ह मातु ू दो0- तकला।। ू या हास रस प रहर ह मागु बचा र बबेक। ु जे हं दे खाँ अब नयन भ र भरत राज अ भषेक।।32।। ु –*–*– िजऐ मीन ब बा र बह ना। म न बनु फ नक िजऐ दुख द ना।। ु कहउँ सु भाउ न छलु मन माह ं। जीवनु मोर राम बनु नाह ं।। समु झ दे खु िजयँ या बीना। जीवनु राम दरस आधीना।। सु न दु बचन कम त अ त जरई। मनहु ँ अनल आहु त घृत परई।। ु
  14. 14. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) कहइ करहु कन को ट उपाया। इहाँ न ला ग ह राउ र माया।। दे हु क लेहु अजसु क र नाह ं। मो ह न बहु त पंच सोहाह ं। रामु साधु तु ह साधु सयाने। राममातु भ ल सब प हचाने।। जस कौ सलाँ मोर भल ताका। तस फलु उ ह ह दे उँ क र साका।। दो0-होत ात मु नबेष ध र ज न रामु बन जा हं। मोर मरनु राउर अजस नृप समु झअ मन मा हं।।33।। –*–*– अस क ह क टल भई उ ठ ठाढ़ । मानहु ँ रोष तरं ग न बाढ़ ।। ु पाप पहार गट भइ सोई। भर ोध जल जाइ न जोई।। दोउ बर कल क ठन हठ धारा। भवँर कबर बचन चारा।। ू ू ढाहत भू प प त मू ला। चल बप त बा र ध अनु क ला।। ू लखी नरे स बात फ र साँची। तय मस मीचु सीस पर नाची।। ु ग ह पद बनय क ह बैठार । ज न दनकर क ल हो स कठार ।। ु ु मागु माथ अबह ं दे उँ तोह । राम बरहँ ज न मार स मोह ।। राखु राम कहु ँ जे ह ते ह भाँती। ना हं त ज र ह जनम भ र छाती।। दो0-दे खी या ध असाध नृपु परे उ धर न धु न माथ। कहत परम आरत बचन राम राम रघु नाथ।।34।। –*–*– याक ल राउ स थल सब गाता। क र न कलपत मनहु ँ नपाता।। ु कठु सू ख मु ख आव न बानी। जनु पाठ नु द न बनु पानी।। ं पु न कह कटु कठोर ककई। मनहु ँ घाय महु ँ माहु र दे ई।। ै े ज अंतहु ँ अस करतबु रहे ऊ। मागु मागु तु ह क हं बल कहे ऊ।। े दुइ क होइ एक समय भु आला। हँ सब ठठाइ फ लाउब गाला।। ु दा न कहाउब अ कृ पनाई। होइ क खेम कसल रौताई।। ु छाड़हु बचनु क धीरजु धरहू । ज न अबला िज म क ना करहू ।। तनु तय तनय धामु धनु धरनी। स यसंध कहु ँ तृन सम बरनी।। दो0-मरम बचन सु न राउ कह कहु कछ दोषु न तोर। ु लागेउ तो ह पसाच िज म कालु कहावत मोर।।35।।û –*–*–
  15. 15. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) चहत न भरत भू पत ह भोर। ब ध बस कम त बसी िजय तोर।। ु सो सबु मोर पाप प रनामू । भयउ कठाहर जे हं ब ध बामू ।। ु सु बस ब स ह फ र अवध सु हाई। सब गु न धाम राम भु ताई।। क रह हं भाइ सकल सेवकाई। होइ ह तहु ँ पु र राम बड़ाई।। तोर कलंक मोर प छताऊ। मु एहु ँ न मट ह न जाइ ह काऊ।। ु अब तो ह नीक लाग क सोई। लोचन ओट बैठु मु हु गोई।। जब ल ग िजऔं कहउँ कर जोर । तब ल ग ज न कछ कह स बहोर ।। ु फ र प छतैह स अंत अभागी। मार स गाइ नहा लागी।। दो0-परे उ राउ क ह को ट ब ध काहे कर स नदानु । कपट सया न न कह त कछ जाग त मनहु ँ मसानु ।।36।। ु –*–*– राम राम रट बकल भु आलू । जनु बनु पंख बहं ग बेहालू ।। दयँ मनाव भो ज न होई। राम ह जाइ कहै ज न कोई।। उदउ करहु ज न र ब रघु क ल गु र। अवध बलो क सू ल होइ ह उर।। ु भू प ी त ककइ क ठनाई। उभय अव ध ब ध रची बनाई।। ै बलपत नृप ह भयउ भनु सारा। बीना बेनु संख धु न वारा।। पढ़ हं भाट गु न गाव हं गायक। सु नत नृप ह जनु लाग हं सायक।। मंगल सकल सोहा हं न कस। सहगा म न ह बभू षन जैस।। ै ते हं न स नीद पर न ह काहू । राम दरस लालसा उछाहू ।। दो0- वार भीर सेवक स चव कह हं उ दत र ब दे ख। जागेउ अजहु ँ न अवधप त कारनु कवनु बसे ष।।37।। –*–*– प छले पहर भू पु नत जागा। आजु हम ह बड़ अचरजु लागा।। जाहु सु मंतर जगावहु जाई। क िजअ काजु रजायसु पाई।। ् गए सु मं ु तब राउर माह । दे ख भयावन जात डेराह ं।। धाइ खाइ जनु जाइ न हे रा। मानहु ँ बप त बषाद बसेरा।। पू छ कोउ न ऊत दे ई। गए ज हं भवन भू प ककई।। ै ै क ह जयजीव बैठ स नाई। दै ख भू प ग त गयउ सु खाई।। सोच बकल बबरन म ह परे ऊ। मानहु ँ कमल मू लु प रहरे ऊ।।
  16. 16. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) स चउ सभीत सकइ न हं पूँछ । बोल असु भ भर सु भ छछ ।। ू दो0-पर न राज ह नीद न स हे तु जान जगद सु । रामु रामु र ट भो कय कहइ न मरमु मह सु ।।38।। –*–*– आनहु राम ह बे ग बोलाई। समाचार तब पूँछेहु आई।। चलेउ सु मं राय ख जानी। लखी कचा ल क ि ह कछ रानी।। ु ु सोच बकल मग परइ न पाऊ। राम ह बो ल क ह ह का राऊ।। उर ध र धीरजु गयउ दुआर। पू छँ हं सकल दे ख मनु मार।। समाधानु क र सो सबह का। गयउ जहाँ दनकर कल ट का।। ु रामु सु मं ह आवत दे खा। आद क ह पता सम लेखा।। नर ख बदनु क ह भू प रजाई। रघु कलद प ह चलेउ लेवाई।। ु रामु कभाँ त स चव सँग जाह ं। दे ख लोग जहँ तहँ बलखाह ं।। ु दो0-जाइ द ख रघु बंसम न नरप त नपट कसाजु ।। ु सह म परे उ ल ख सं घ न ह मनहु ँ बृ गजराजु ।।39।। –*–*– सू ख हं अधर जरइ सबु अंगू । मनहु ँ द न म नह न भु अंगू ।। स ष समीप द ख ककई। मानहु ँ मीचु घर ग न लेई।। ै े क नामय मृदु राम सु भाऊ। थम द ख दुखु सु ना न काऊ।। तद प धीर ध र समउ बचार । पूँछ मधु र बचन महतार ।। मो ह कहु मातु तात दुख कारन। क रअ जतन जे हं होइ नवारन।। सु नहु राम सबु कारन एहू । राज ह तु म पर बहु त सनेहू ।। दे न कहे ि ह मो ह दुइ बरदाना। मागेउँ जो कछ मो ह सोहाना। ु सो सु न भयउ भू प उर सोचू । छा ड़ न सक हं तु हार सँकोचू ।। दो0-सु त सनेह इत बचनु उत संकट परे उ नरे सु । सकहु न आयसु धरहु सर मेटहु क ठन कलेसु ।।40।। –*–*– नधरक बै ठ कहइ कटु बानी। सु नत क ठनता अ त अक लानी।। ु जीभ कमान बचन सर नाना। मनहु ँ म हप मृद ु ल छ समाना।। जनु कठोरपनु धर सर । सखइ धनु ष ब या बर बी ।।
  17. 17. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) सब संगु रघु प त ह सु नाई। बै ठ मनहु ँ तनु ध र नठु राई।। मन मु सकाइ भानु क ल भानु । रामु सहज आनंद नधानू ।। ु बोले बचन बगत सब दूषन। मृदु मंजु ल जनु बाग बभू षन।। सु नु जननी सोइ सु तु बड़भागी। जो पतु मातु बचन अनु रागी।। तनय मातु पतु तोष नहारा। दुलभ जन न सकल संसारा।। दो0-मु नगन मलनु बसे ष बन सब ह भाँ त हत मोर। ते ह महँ पतु आयसु बहु र संमत जननी तोर।।41।। –*–*– भरत ान य पाव हं राजू । ब ध सब ब ध मो ह सनमु ख आजु । ज न जाउँ बन ऐसेहु काजा। थम ग नअ मो ह मू ढ़ समाजा।। सेव हं अरँ डु कलपत यागी। प रह र अमृत ले हं बषु मागी।। तेउ न पाइ अस समउ चु काह ं। दे खु बचा र मातु मन माह ं।। अंब एक दुखु मो ह बसेषी। नपट बकल नरनायक दे खी।। ु थो र हं बात पत ह दुख भार । हो त ती त न मो ह महतार ।। राउ धीर गु न उद ध अगाधू । भा मो ह ते कछ बड़ अपराधू ।। ु जात मो ह न कहत कछ राऊ। मो र सपथ तो ह कहु स तभाऊ।। ु दो0-सहज सरल रघु बर बचन कम त क टल क र जान। ु ु चलइ ज क जल ब ग त ज य प स ललु समान।।42।। –*–*– रहसी रा न राम ख पाई। बोल कपट सनेहु जनाई।। सपथ तु हार भरत क आना। हे तु न दूसर मै कछ जाना।। ै ु तु ह अपराध जोगु न हं ताता। जननी जनक बंधु सु खदाता।। राम स य सबु जो कछ कहहू । तु ह पतु मातु बचन रत अहहू ।। ु पत ह बु झाइ कहहु ब ल सोई। चौथपन जे हं अजसु न होई।। तु ह सम सु अन सु कृ त जे हं द हे । उ चत न तासु नराद क हे ।। लाग हं कमुख बचन सु भ कसे। मगहँ गया दक तीरथ जैसे।। ु ै राम ह मातु बचन सब भाए। िज म सु रस र गत स लल सु हाए।। दो0-गइ मु छा राम ह सु म र नृप फ र करवट ल ह। स चव राम आगमन क ह बनय समय सम क ह।।43।।
  18. 18. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) –*–*– अव नप अक न रामु पगु धारे । ध र धीरजु तब नयन उघारे ।। स चवँ सँभा र राउ बैठारे । चरन परत नृप रामु नहारे ।। लए सनेह बकल उर लाई। गै म न मनहु ँ फ नक फ र पाई।। राम ह चतइ रहे उ नरनाहू । चला बलोचन बा र बाहू ।। सोक बबस कछ कहै न पारा। दयँ लगावत बार हं बारा।। ु ब ध ह मनाव राउ मन माह ं। जे हं रघु नाथ न कानन जाह ं।। सु म र महे स ह कहइ नहोर । बनती सु नहु सदा सव मोर ।। आसु तोष तु ह अवढर दानी। आर त हरहु द न जनु जानी।। दो0-तु ह ेरक सब क दयँ सो म त राम ह दे हु । े बचनु मोर तिज रह ह घर प रह र सीलु सनेहु ।।44।। –*–*– अजसु होउ जग सु जसु नसाऊ। नरक परौ ब सु रपु जाऊ।। सब दुख दुसह सहावहु मोह । लोचन ओट रामु ज न ह ह ।। अस मन गु नइ राउ न हं बोला। पीपर पात स रस मनु डोला।। रघु प त पत ह ेमबस जानी। पु न कछ क ह ह मातु अनु मानी।। ु दे स काल अवसर अनु सार । बोले बचन बनीत बचार ।। तात कहउँ कछ करउँ ढठाई। अनु चतु छमब जा न ल रकाई।। ु अ त लघु बात ला ग दुखु पावा। काहु ँ न मो ह क ह थम जनावा।। दे ख गोसाइँ ह पूँ छउँ माता। सु न संगु भए सीतल गाता।। दो0-मंगल समय सनेह बस सोच प रह रअ तात। आयसु दे इअ हर ष हयँ क ह पु लक भु गात।।45।। े –*–*– ध य जनमु जगतीतल तासू । पत ह मोदु च रत सु न जासू ।। चा र पदारथ करतल ताक। य पतु मातु ान सम जाक।। आयसु पा ल जनम फलु पाई। ऐहउँ बे ग हं होउ रजाई।। बदा मातु सन आवउँ मागी। च लहउँ बन ह बहु र पग लागी।। अस क ह राम गवनु तब क हा। भू प सोक बसु उत न द हा।। नगर या प गइ बात सु तीछ । छअत चढ़ जनु सब तन बीछ ।। ु
  19. 19. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) सु न भए बकल सकल नर नार । बे ल बटप िज म दे ख दवार ।। जो जहँ सु नइ धु नइ स सोई। बड़ बषादु न हं धीरजु होई।। दो0-मु ख सु खा हं लोचन व ह सोक न दयँ समाइ। ु मनहु ँ ०क न रस कटकई उतर अवध बजाइ।।46।। –*–*– मले ह माझ ब ध बात बेगार । जहँ तहँ दे हं ककइ ह गार ।। ै े ए ह पा प न ह बू झ का परे ऊ। छाइ भवन पर पावक धरे ऊ।। ु नज कर नयन का ढ़ चह द खा। डा र सु धा बषु चाहत चीखा।। क टल कठोर कबु ु ु अभागी। भइ रघु बंस बेनु बन आगी।। पालव बै ठ पेड़ु ए हं काटा। सु ख महु ँ सोक ठाटु ध र ठाटा।। सदा रामु ए ह ान समाना। कारन कवन क टलपनु ठाना।। ु स य कह हं क ब ना र सु भाऊ। सब ब ध अगहु अगाध दुराऊ।। नज त बंबु ब क ग ह जाई। जा न न जाइ ना र ग त भाई।। ु दो0-काह न पावक जा र सक का न समु समाइ। ु का न करै अबला बल क ह जग कालु न खाइ।।47।। े –*–*– का सु नाइ ब ध काह सु नावा। का दे खाइ चह काह दे खावा।। एक कह हं भल भू प न क हा। ब बचा र न हं कम त ह द हा।। ु जो ह ठ भयउ सकल दुख भाजनु । अबला बबस यानु गु नु गा जनु ।। एक धरम पर म त प हचाने। नृप ह दोसु न हं दे हं सयाने।। स ब दधी च ह रचंद कहानी। एक एक सन कह हं बखानी।। एक भरत कर संमत कहह ं। एक उदास भायँ सु न रहह ं।। कान मू द कर रद ग ह जीहा। एक कह हं यह बात अल हा।। सु कृ त जा हं अस कहत तु हारे । रामु भरत कहु ँ ान पआरे ।। दो0-चंद ु चवै ब अनल कन सु धा होइ बषतू ल। सपनेहु ँ कबहु ँ न कर हं कछ भरतु राम तकल।।48।। ु ू –*–*– एक बधात हं दूषनु दह ं। सु धा दे खाइ द ह बषु जेह ं।। खरभ नगर सोचु सब काहू । दुसह दाहु उर मटा उछाहू ।।
  20. 20. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) ब बधू कलमा य जठे र । जे ु य परम ककई कर ।। ै े े लगीं दे न सख सीलु सराह । बचन बानसम लाग हं ताह ।। भरतु न मो ह य राम समाना। सदा कहहु यहु सबु जगु जाना।। करहु राम पर सहज सनेहू । क हं अपराध आजु बनु दे हू।। े कबहु ँ न कयहु सव त आरे सू । ी त ती त जान सबु दे सू ।। कौस याँ अब काह बगारा। तु ह जे ह ला ग ब पु र पारा।। दो0-सीय क पय सँगु प रह र ह लखनु क र हह हं धाम। राजु क भू ँजब भरत पु र नृपु क िजइ ह बनु राम।।49।। –*–*– अस बचा र उर छाड़हु कोहू । सोक कलंक को ठ ज न होहू ।। भरत ह अव स दे हु जु बराजू । कानन काह राम कर काजू ।। ना हन रामु राज क भू खे। धरम धु र न बषय रस खे।। े गु र गृह बसहु ँ रामु तिज गेहू । नृप सन अस ब दूसर लेहू ।। ज न हं ल गहहु कह हमारे । न हं ला ग ह कछ हाथ तु हारे ।। ु ज प रहास क ि ह कछ होई। तौ क ह गट जनावहु सोई।। ु राम स रस सु त कानन जोगू । काह क ह ह सु न तु ह कहु ँ लोगू ।। उठहु बे ग सोइ करहु उपाई। जे ह ब ध सोक कलंक नसाई।। ु ु छं 0-जे ह भाँ त सोक कलंक जाइ उपाय क र क ल पालह । ु ु ु ह ठ फ राम ह जात बन ज न बात दूस र चालह ।। े िज म भानु बनु दनु ान बनु तनु चंद बनु िज म जा मनी। त म अवध तु लसीदास भु बनु समु झ ध िजयँ भा मनी।। सो0-स ख ह सखावनु द ह सु नत मधु र प रनाम हत। तेइँ कछ कान न क ह क टल बोधी कबर ।।50।। ु ु ू उत न दे इ दुसह रस खी। मृ ग ह चतव जनु बा घ न भू खी।। या ध असा ध जा न त ह यागी। चल ं कहत म तमंद अभागी।। राजु करत यह दै अँ बगोई। क हे स अस जस करइ न कोई।। ए ह ब ध बलप हं पु र नर नार ं। दे हं कचा ल ह को टक गार ं।। ु जर हं बषम जर ले हं उसासा। कव न राम बनु जीवन आसा।। बपु ल बयोग जा अक लानी। जनु जलचर गन सू खत पानी।। ु
  21. 21. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) अ त बषाद बस लोग लोगाई। गए मातु प हं रामु गोसाई।। मु ख स न चत चौगु न चाऊ। मटा सोचु ज न राखै राऊ।। दो-नव गयंद ु रघु बीर मनु राजु अलान समान। छट जा न बन गवनु सु न उर अनंद ु अ धकान।।51।। ू रघु क ल तलक जो र दोउ हाथा। मु दत मातु पद नायउ माथा।। ु द ि ह असीस लाइ उर ल हे । भूषन बसन नछाव र क हे ।। बार बार मु ख चु ंब त माता। नयन नेह जलु पु ल कत गाता।। गोद रा ख पु न दयँ लगाए। वत ेनरस पयद सु हाए।। ेमु मोदु न कछ क ह जाई। रं क धनद पदबी जनु पाई।। ु सादर सु ंदर बदनु नहार । बोल मधु र बचन महतार ।। कहहु तात जननी ब लहार । कब हं लगन मु द मंगलकार ।। सु कृ त सील सु ख सीवँ सु हाई। जनम लाभ कइ अव ध अघाई।। दो0- जे ह चाहत नर ना र सब अ त आरत ए ह भाँ त। िज म चातक चात क तृ षत बृि ट सरद रतु वा त।।52।। –*–*– तात जाउँ ब ल बे ग नहाहू । जो मन भाव मधु र कछ खाहू ।। ु पतु समीप तब जाएहु भैआ। भइ ब ड़ बार जाइ ब ल मैआ।। मातु बचन सु न अ त अनु क ला। जनु सनेह सु रत क फला।। ू े ू सु ख मकरं द भरे यमू ला। नर ख राम मनु भव ँ न भू ला।। धरम धु र न धरम ग त जानी। कहे उ मातु सन अ त मृदु बानी।। पताँ द ह मो ह कानन राजू । जहँ सब भाँ त मोर बड़ काजू ।। आयसु दे ह मु दत मन माता। जे हं मु द मंगल कानन जाता।। ज न सनेह बस डरप स भोर। आनँद ु अंब अनु ह तोर।। दो0-बरष चा रदस ब पन ब स क र पतु बचन मान। आइ पाय पु न दे खहउँ मनु ज न कर स मलान।।53।। –*–*– बचन बनीत मधु र रघु बर क। सर सम लगे मातु उर करक।। े े सह म सू ख सु न सीत ल बानी। िज म जवास पर पावस पानी।। क ह न जाइ कछ दय बषादू। मनहु ँ मृगी सु न कह र नादू।। ु े
  22. 22. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) नयन सजल तन थर थर काँपी। माज ह खाइ मीन जनु मापी।। ध र धीरजु सु त बदनु नहार । गदगद बचन कह त महतार ।। तात पत ह तु ह ान पआरे । दे ख मु दत नत च रत तु हारे ।। राजु दे न कहु ँ सु भ दन साधा। कहे उ जान बन क हं अपराधा।। े तात सु नावहु मो ह नदानू । को दनकर कल भयउ कृ सानू ।। ु दो0- नर ख राम ख स चवसु त कारनु कहे उ बु झाइ। सु न संगु र ह मू क िज म दसा बर न न हं जाइ।।54।। –*–*– रा ख न सकइ न क ह सक जाहू । दुहू ँ भाँ त उर दा न दाहू ।। लखत सु धाकर गा ल ख राहू । ब ध ग त बाम सदा सब काहू ।। धरम सनेह उभयँ म त घेर । भइ ग त साँप छ छंु द र कर ।। ु े राखउँ सु त ह करउँ अनु रोधू । धरमु जाइ अ बंधु बरोधू ।। कहउँ जान बन तौ ब ड़ हानी। संकट सोच बबस भइ रानी।। बहु र समु झ तय धरमु सयानी। रामु भरतु दोउ सु त सम जानी।। सरल सु भाउ राम महतार । बोल बचन धीर ध र भार ।। तात जाउँ ब ल क हे हु नीका। पतु आयसु सब धरमक ट का।। दो0-राजु दे न क ह द ह बनु मो ह न सो दुख लेसु । तु ह बनु भरत ह भू प त ह ज ह चंड कलेसु ।।55।। –*–*– ज कवल पतु आयसु ताता। तौ ज न जाहु जा न ब ड़ माता।। े ज पतु मातु कहे उ बन जाना। त कानन सत अवध समाना।। पतु बनदे व मातु बनदे वी। खग मृग चरन सरो ह सेवी।। अंतहु ँ उ चत नृप ह बनबासू । बय बलो क हयँ होइ हराँसू ।। बड़भागी बनु अवध अभागी। जो रघु बंस तलक तु ह यागी।। ज सु त कहौ संग मो ह लेहू । तु हरे दयँ होइ संदेहू ।। पू त परम य तु ह सबह क। ान ान क जीवन जी क।। े े े ते तु ह कहहु मातु बन जाऊ। म सु न बचन बै ठ प छताऊ।। ँ ँ दो0-यह बचा र न हं करउँ हठ झू ठ सनेहु बढ़ाइ। मा न मातु कर नात ब ल सु र त बस र ज न जाइ।।56।।
  23. 23. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) –*–*– दे व पतर सब तु ह ह गोसाई। राखहु ँ पलक नयन क नाई।। अव ध अंबु य प रजन मीना। तु ह क नाकर धरम धु र ना।। अस बचा र सोइ करहु उपाई। सब ह िजअत जे हं भटे हु आई।। जाहु सु खेन बन ह ब ल जाऊ। क र अनाथ जन प रजन गाऊ।। ँ ँ सब कर आजु सु कृ त फल बीता। भयउ कराल कालु बपर ता।। बहु ब ध बल प चरन लपटानी। परम अभा ग न आपु ह जानी।। दा न दुसह दाहु उर यापा। बर न न जा हं बलाप कलापा।। राम उठाइ मातु उर लाई। क ह मृदु बचन बहु र समु झाई।। दो0-समाचार ते ह समय सु न सीय उठ अकलाइ। ु जाइ सासु पद कमल जु ग बं द बै ठ स नाइ।।57।। –*–*– द ि ह असीस सासु मृदु बानी। अ त सु क मा र दे ख अकलानी।। ु ु बै ठ न मतमु ख सोच त सीता। प रा स प त ेम पु नीता।। चलन चहत बन जीवननाथू । क ह सु कृ ती सन होइ ह साथू ।। े क तनु ान क कवल ाना। ब ध करतबु कछ जाइ न जाना।। े ु चा चरन नख लेख त धरनी। नू पु र मु खर मधु र क ब बरनी।। मनहु ँ ेम बस बनती करह ं। हम ह सीय पद ज न प रहरह ं।। मंजु बलोचन मोच त बार । बोल दे ख राम महतार ।। तात सु नहु सय अ त सु क मार । सासु ससु र प रजन ह पआर ।। ु दो0- पता जनक भू पाल म न ससु र भानु क ल भानु । ु प त र बकल करव ब पन बधु गु न प नधानु ।।58।। ु ै –*–*– म पु न पु बधू य पाई। प रा स गु न सील सु हाई।। नयन पु त र क र ी त बढ़ाई। राखेउँ ान जा न क हं लाई।। कलपबे ल िज म बहु ब ध लाल । सीं च सनेह स लल तपाल ।। फलत फलत भयउ ब ध बामा। जा न न जाइ काह प रनामा।। ू पलँ ग पीठ तिज गोद हंड़ोरा। सयँ न द ह पगु अव न कठोरा।। िजअनमू र िज म जोगवत रहऊ। द प बा त न हं टारन कहऊ।। ँ ँ
  24. 24. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) सोइ सय चलन चह त बन साथा। आयसु काह होइ रघु नाथा। चंद करन रस र सक चकोर । र ब ख नयन सकइ क म जोर ।। दो0-क र कह र न सचर चर हं दु ट जंतु बन भू र। े बष बा टकाँ क सोह सु त सु भग सजीव न मू र।।59।। –*–*– बन हत कोल करात कसोर । रचीं बरं च बषय सु ख भोर ।। पाइन कृ म िज म क ठन सु भाऊ। त ह ह कलेसु न कानन काऊ।। क तापस तय कानन जोगू । िज ह तप हे तु तजा सब भोगू ।। ै सय बन ब स ह तात क ह भाँती। च ल खत क प दे ख डेराती।। े सु रसर सु भग बनज बन चार । डाबर जोगु क हं सक मार ।। ु अस बचा र जस आयसु होई। म सख दे उँ जान क ह सोई।। ज सय भवन रहै कह अंबा। मो ह कहँ होइ बहु त अवलंबा।। सु न रघु बीर मातु दो0-क ह य बानी। सील सनेह सु धाँ जनु सानी।। य बचन बबेकमय क ि ह मातु प रतोष। लगे बोधन जान क ह ग ट ब पन गु न दोष।।60।। मासपारायण, चौदहवाँ व ाम –*–*– मातु समीप कहत सकचाह ं। बोले समउ समु झ मन माह ं।। ु राजकमा र सखावन सु नहू ।आन भाँ त िजयँ ज न कछ गु नहू ।। ु ु आपन मोर नीक ज चहहू । बचनु हमार मा न गृह रहहू ।। आयसु मोर सासु सेवकाई। सब ब ध भा म न भवन भलाई।। ए ह ते अ धक धरमु न हं दूजा। सादर सासु ससु र पद पू जा।। जब जब मातु क र ह सु ध मोर । होइ ह ेम बकल म त भोर ।। तब तब तु ह क ह कथा पु रानी। सु ंद र समु झाएहु मृदु बानी।। कहउँ सु भायँ सपथ सत मोह । सु मु ख मातु हत राखउँ तोह ।। दो0-गु र ु त संमत धरम फलु पाइअ बन हं कलेस। हठ बस सब संकट सहे गालव नहु ष नरे स।।61।। –*–*– म पु न क र वान पतु बानी। बे ग फरब सु नु सु मु ख सयानी।।
  25. 25. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) दवस जात न हं ला ग ह बारा। सु ंद र सखवनु सु नहु हमारा।। जौ हठ करहु ेम बस बामा। तौ तु ह दुखु पाउब प रनामा।। काननु क ठन भयंक भार । घोर घामु हम बा र बयार ।। कस कटक मग काँकर नाना। चलब पयादे हं बनु पद ाना।। ु ं चरन कमल मु द ु मंजु तु हारे । मारग अगम भू मधर भारे ।। कदर खोह नद ं नद नारे । अगम अगाध न जा हं नहारे ।। ं भालु बाघ बृक कह र नागा। कर हं नाद सु न धीरजु भागा।। े दो0-भू म सयन बलकल बसन असनु कद फल मू ल। ं ते क सदा सब दन म ल हं सबु इ समय अनु क ल।।62।। ू –*–*– नर अहार रजनीचर चरह ं। कपट बेष ब ध को टक करह ं।। लागइ अ त पहार कर पानी। ब पन बप त न हं जाइ बखानी।। याल कराल बहग बन घोरा। न सचर नकर ना र नर चोरा।। डरप हं धीर गहन सु ध आएँ। मृगलोच न तु ह भी सु भाएँ ।। हं सगव न तु ह न हं बन जोगू । सु न अपजसु मो ह दे इ ह लोगू ।। मानस स लल सु धाँ तपाल । िजअइ क लवन पयो ध मराल ।। नव रसाल बन बहरनसीला। सोह क को कल ब पन कर ला।। रहहु भवन अस दयँ बचार । चंदबद न दुखु कानन भार ।। दो0-सहज सु द गु र वा म सख जो न करइ सर मा न।। सो प छताइ अघाइ उर अव स होइ हत हा न।।63।। –*–*– सु न मृदु बचन मनोहर पय क। लोचन ल लत भरे जल सय क।। े े सीतल सख दाहक भइ कस। चकइ ह सरद चंद न स जस।। उत न आव बकल बैदेह । तजन चहत सु च वा म सनेह ।। बरबस रो क बलोचन बार । ध र धीरजु उर अव नक मार ।। ु ला ग सासु पग कह कर जोर । छम ब दे ब ब ड़ अ बनय मोर ।। द ि ह ानप त मो ह सख सोई। जे ह ब ध मोर परम हत होई।। म पु न समु झ द ख मन माह ं। पय बयोग सम दुखु जग नाह ं।। दो0- ाननाथ क नायतन सु ंदर सु खद सु जान।
  26. 26. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) तु ह बनु रघु कल कमु द बधु सु रपु र नरक समान।।64।। ु ु –*–*– मातु पता भ गनी य भाई। य प रवा सु द समु दाई।। सासु ससु र गु र सजन सहाई। सु त सु ंदर सु सील सु खदाई।। जहँ ल ग नाथ नेह अ नाते। पय बनु तय ह तर नहु ते ताते।। तनु धनु धामु धर न पु र राजू । प त बह न सबु सोक समाजू ।। भोग रोगसम भू षन भा । जम जातना स रस संसा ।। ाननाथ तु ह बनु जग माह ं। मो कहु ँ सु खद कतहु ँ कछ नाह ं।। ु िजय बनु दे ह नद बनु बार । तै सअ नाथ पु ष बनु नार ।। नाथ सकल सु ख साथ तु हार। सरद बमल बधु बदनु नहार।। दो0-खग मृग प रजन नग बनु बलकल बमल दुकल। ू नाथ साथ सु रसदन सम परनसाल सु ख मू ल।।65।। –*–*– बनदे वीं बनदे व उदारा। क रह हं सासु ससु र सम सारा।। कस कसलय साथर सु हाई। भु सँग मंजु मनोज तु राई।। ु कद मू ल फल अ मअ अहा । अवध सौध सत स रस पहा ।। ं छनु छनु भु पद कमल बलो क। र हहउँ मु दत दवस िज म कोक ।। बन दुख नाथ कहे बहु तेरे। भय बषाद प रताप घनेरे।। भु बयोग लवलेस समाना। सब म ल हो हं न कृ पा नधाना।। अस िजयँ जा न सु जान सरोम न। लेइअ संग मो ह छा ड़अ ज न।। बनती बहु त कर का वामी। क नामय उर अंतरजामी।। दो0-रा खअ अवध जो अव ध ल ग रहत न ज नअ हं ान। द नबंधु संदर सु खद सील सनेह नधान।।66।। –*–*– मो ह मग चलत न होइ ह हार । छनु छनु चरन सरोज नहार ।। सब ह भाँ त पय सेवा क रह । मारग ज नत सकल म ह रह ।। पाय पखार बै ठ त छाह ं। क रहउँ बाउ मु दत मन माह ं।। म कन स हत याम तनु दे ख। कहँ दुख समउ ानप त पेख।। सम म ह तृन त प लव डासी। पाग पलो ट ह सब न स दासी।।
  27. 27. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) बारबार मृदु मू र त जोह । लाग ह तात बया र न मोह । को भु सँग मो ह चतव नहारा। संघबधु ह िज म ससक सआरा।। म सु क मा र नाथ बन जोगू । तु ह ह उ चत तप मो कहु ँ भोगू ।। ु दो0-ऐसेउ बचन कठोर सु न ज न दउ बलगान। तौ भु बषम बयोग दुख स हह हं पावँर ान।।67।। –*–*– अस क ह सीय बकल भइ भार । बचन बयोगु न सक सँभार ।। दे ख दसा रघु प त िजयँ जाना। ह ठ राख न हं रा ख ह ाना।। कहे उ कृ पाल भानु कलनाथा। प रह र सोचु चलहु बन साथा।। ु न हं बषाद कर अवस आजू । बे ग करहु बन गवन समाजू ।। कह य बचन या समु झाई। लगे मातु पद आ सष पाई।। बे ग जा दुख मेटब आई। जननी नठु र बस र ज न जाई।। फर ह दसा ब ध बहु र क मोर । दे खहउँ नयन मनोहर जोर ।। सु दन सु घर तात कब होइ ह। जननी िजअत बदन बधु जोइ ह।। दो0-बहु र ब छ क ह लालु क ह रघु प त रघु बर तात। कब हं बोलाइ लगाइ हयँ हर ष नर खहउँ गात।।68।। –*–*– ल ख सनेह कात र महतार । बचनु न आव बकल भइ भार ।। राम बोधु क ह ब ध नाना। समउ सनेहु न जाइ बखाना।। तब जानक सासु पग लागी। सु नअ माय म परम अभागी।। सेवा समय दै अँ बनु द हा। मोर मनोरथु सफल न क हा।। तजब छोभु ज न छा ड़अ छोहू । करमु क ठन कछ दोसु न मोहू ।। ु सु न सय बचन सासु अक लानी। दसा कव न ब ध कह बखानी।। ु बार ह बार लाइ उर ल ह । ध र धीरजु सख आ सष द ह ।। अचल होउ अ हवातु तु हारा। जब ल ग गंग जमु न जल धारा।। दो0-सीत ह सासु असीस सख द ि ह अनेक कार। चल नाइ पद पदुम स अ त हत बार हं बार।।69।। –*–*– समाचार जब ल छमन पाए। याक ल बलख बदन उ ठ धाए।। ु
  28. 28. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) कप पु लक तन नयन सनीरा। गहे चरन अ त ेम अधीरा।। ं क ह न सकत कछ चतवत ठाढ़े । मीनु द न जनु जल त काढ़े ।। ु सोचु दयँ ब ध का हो नहारा। सबु सु खु सु कृ त सरान हमारा।। मो कहु ँ काह कहब रघु नाथा। र खह हं भवन क लेह हं साथा।। राम बलो क बंधु कर जोर। दे ह गेह सब सन तृनु तोर।। बोले बचनु राम नय नागर। सील सनेह सरल सु ख सागर।। तात ेम बस ज न कदराहू । समु झ दयँ प रनाम उछाहू ।। दो0-मातु पता गु वा म सख सर ध र कर ह सु भायँ। लहे उ लाभु त ह जनम कर नत जनमु जग जायँ।।70।। –*–*– अस िजयँ जा न सु नहु सख भाई। करहु मातु पतु पद सेवकाई।। भवन भरतु रपु सू दन नाह ं। राउ बृ मम दुखु मन माह ं।। म बन जाउँ तु ह ह लेइ साथा। होइ सब ह ब ध अवध अनाथा।। गु पतु मातु जा प रवा । सब कहु ँ परइ दुसह दुख भा ।। रहहु करहु सब कर प रतोषू । नत तात होइ ह बड़ दोषू ।। जासु राज य जा दुखार । सो नृपु अव स नरक अ धकार ।। रहहु तात अ स नी त बचार । सु नत लखनु भए याकल भार ।। ु सअर बचन सू ख गए कस। परसत तु हन तामरसु जैस।। दो0-उत न आवत ेम बस गहे चरन अक लाइ। ु नाथ दासु म वा म तु ह तजहु त काह बसाइ।।71।। –*–*– द ि ह मो ह सख नी क गोसा । ला ग अगम अपनी कदरा ।। नरबर धीर धरम धु र धार । नगम नी त कहु ँ ते अ धकार ।। म ससु भु सनेहँ तपाला। मंद मे क ले हं मराला।। गु र पतु मातु न जानउँ काहू । कहउँ सु भाउ नाथ प तआहू ।। जहँ ल ग जगत सनेह सगाई। ी त ती त नगम नजु गाई।। मोर सबइ एक तु ह वामी। द नबंधु उर अंतरजामी।। धरम नी त उपदे सअ ताह । क र त भू त सु ग त मन य जाह ।। म बचन चरन रत होई। कृ पा संधु प रह रअ क सोई।।
  29. 29. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) दो0-क ना संधु सु बंध क सु न मृदु बचन बनीत। े समु झाए उर लाइ भु जा न सनेहँ सभीत।।72।। –*–*– मागहु बदा मातु सन जाई। आवहु बे ग चलहु बन भाई।। मु दत भए सु न रघु बर बानी। भयउ लाभ बड़ गइ ब ड़ हानी।। हर षत दयँ मातु प हं आए। मनहु ँ अंध फ र लोचन पाए। जाइ जन न पग नायउ माथा। मनु रघु नंदन जान क साथा।। पूँछे मातु म लन मन दे खी। लखन कह सब कथा बसेषी।। गई सह म सु न बचन कठोरा। मृगी दे ख दव जनु चहु ओरा।। लखन लखेउ भा अनरथ आजू । ए हं सनेह बस करब अकाजू ।। मागत बदा सभय सकचाह ं। जाइ संग ब ध क ह ह क नाह ।। ु दो0-समु झ सु म ाँ राम सय प सु सीलु सु भाउ। नृप सनेहु ल ख धु नेउ स पा प न द ह कदाउ।।73।। ु –*–*– धीरजु धरे उ कअवसर जानी। सहज सु द बोल मृदु बानी।। ु तात तु हा र मातु बैदेह । पता रामु सब भाँ त सनेह ।। अवध तहाँ जहँ राम नवासू । तहँ इँ दवसु जहँ भानु कासू ।। जौ पै सीय रामु बन जाह ं। अवध तु हार काजु कछ ना हं।। ु गु र पतु मातु बंधु सु र साई। सेइअ हं सकल ान क ना ।। रामु ान य जीवन जी क। वारथ र हत सखा सबह क।। े ै पू जनीय य परम जहाँ त। सब मा नअ हं राम क नात।। े अस िजयँ जा न संग बन जाहू । लेहु तात जग जीवन लाहू ।। दो0-भू र भाग भाजनु भयहु मो ह समेत ब ल जाउँ । जौम तु हर मन छा ड़ छलु क ह राम पद ठाउँ ।।74।। –*–*– पु वती जु बती जग सोई। रघु प त भगतु जासु सु तु होई।। नत बाँझ भ ल बा द बआनी। राम बमु ख सु त त हत जानी।। तु हरे हं भाग रामु बन जाह ं। दूसर हे तु तात कछ नाह ं।। ु सकल सु कृ त कर बड़ फलु एहू । राम सीय पद सहज सनेहू ।।
  30. 30. भु ी राम जी का आशीवाद सब पर सदा बना रहे (S. Sood ) राग रोषु इ रषा मदु मोहू । ज न सपनेहु ँ इ ह क बस होहू ।। े सकल कार बकार बहाई। मन म बचन करे हु सेवकाई।। तु ह कहु ँ बन सब भाँ त सु पासू । सँग पतु मातु रामु सय जासू ।। जे हं न रामु बन लह हं कलेसू । सु त सोइ करे हु इहइ उपदे सू ।। छं 0-उपदे सु यहु जे हं तात तु हरे राम सय सु ख पावह ं। पतु मातु य प रवार पु र सु ख सु र त बन बसरावह ं। तु लसी भु ह सख दे इ आयसु द ह पु न आ सष दई। र त होउ अ बरल अमल सय रघु बीर पद नत नत नई।। सो0-मातु चरन स नाइ चले तु रत सं कत दयँ। बागु र बषम तोराइ मनहु ँ भाग मृगु भाग बस।।75।। गए लखनु जहँ जान कनाथू। भे मन मु दत पाइ य साथू ।। बं द राम सय चरन सु हाए। चले संग नृपमं दर आए।। कह हं परसपर पु र नर नार । भ ल बनाइ ब ध बात बगार ।। तन कृ स दुखु बदन मल ने। बकल मनहु ँ माखी मधु छ ने।। कर मीज हं स धु न प छताह ं। जनु बन पंख बहग अकलाह ं।। ु भइ ब ड़ भीर भू प दरबारा। बर न न जाइ बषादु अपारा।। स चवँ उठाइ राउ बैठारे । क ह य बचन रामु पगु धारे ।। सय समेत दोउ तनय नहार । याक ल भयउ भू मप त भार ।। ु दो0-सीय स हत सु त सु भग दोउ दे ख दे ख अक लाइ। ु बार हं बार सनेह बस राउ लेइ उर लाइ।।76।। –*–*– सकइ न बो ल बकल नरनाहू । सोक ज नत उर दा न दाहू ।। नाइ सीसु पद अ त अनु रागा। उ ठ रघु बीर बदा तब मागा।। पतु असीस आयसु मो ह द जै। हरष समय बसमउ कत क जै।। तात कएँ य ेम मादू। जसु जग जाइ होइ अपबादू।। सु न सनेह बस उ ठ नरनाहाँ। बैठारे रघु प त ग ह बाहाँ।। सु नहु तात तु ह कहु ँ मु न कहह ं। रामु चराचर नायक अहह ं।। सु भ अ असु भ करम अनु हार । ईस दे इ फलु दयँ बचार ।। करइ जो करम पाव फल सोई। नगम नी त अ स कह सबु कोई।।

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