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History Notes
TUTORIALSDUNIYA.COM
B.A. Programme - 3rd Year
Prepared By: Sartaz Sir
(University of Delhi)
2.
प्रश्न 1 .इटली में फासीवाद और जममनी में नाजीवाद क
े उदय क
े कारणो पर प्रकाश डाललये
अथवा
युरोप मे अधिनायाकवाद क
े उद्य पर टटप्पणी करें
उत्तर:- इटली मे फासीवाद का जन्म प्रथम ववश्व युद्ध क
े बाद हुआ | इटली प्रथम ववश्व युद्ध में ममत्र राष्ट्रों क
े साथ
ममलकर लड़ा था तथा युद्ध में इटली को भारी नुक्सान उठाना पड़ा| इटली क
े छः लाख सैननक मारे गए और 12 अरब डॉलर
खर्च हुए परंतु छनतपूनतच क
े नाम पर इटली को जो धनरामि प्राप्त हुई | वह उसकी अपेक्षा क
े अनुरूप नहीं थी| ववश्व युद्ध क
े
कारण इटली की आर्थचक दिा दयनीय हो गई थी उसकी मुद्रा का मूल्य 70 % तक कम हो गया वस्तुओं की कीमतें आसमान छ
ू ने
लगी लोगो का लोकतंत्र ववश्वास उठ गया क्योंकक लोकतंत्र सरकार जनता की आवश्यकताओं को पूरा कर पाने में असमथच हो रही
थी | ऐसी स्स्थनत में इटली की राजनीनत में मुसोलीनी का उदय हुआ | उसने इटली की जनता को उसका खोया हुआ
आत्मसम्मान पुन : प्राप्त करने का आश्वासन ददया जनता उसक
े ववर्ारो और व्यस्क्तत्व से बहुत प्रभाववत हुई व जनता ने
मुसोलीनी क
े फासीस्ट दल को समथचन दे ददया |
फासीवाद का अथम : फासीवाद को अंग्रेजी में fascism कहते हैं जो इटैमलयन भाषा क
े िब्द fascio से बना हैं स्जसका अथच हैं
लकड़ड़यों का बण्डल तथा क
ु ल्हाड़ी स्जसमें लकड़ी का बण्डल एकता का प्रतीक हैं और क
ु ल्हाड़ी िस्क्त का | मुसोलीनी क
े
फासीवादी दल ने इसी र्र्न्ह को अपनाया | सेबाइन क
े अनुसार :- " फासीवाद ववमभन्न स्रोतो से मलए गए ऐसे ववर्ारों का समूह
है स्जन्हे पररस्थनत कक आवश्यकतानुसार एकत्र कर मलया गया है "
फ्रासीवाद क
े उदय क
े कारण
i) वसामय की संधि :- प्रथम ववश्व युद्ध क
े पश्र्ात ् इटली को यह आिा थी कक छनतपूनतच क
े रूप में उसे उर्र्त
लाभ प्राप्त होगा परन्तु वसाचय की संर्ध में ममत्र राष्ट्रों ने इटली को अनदेखा कर ददया स्जससे इटली को जैसी
अपेक्षा थी वैसा लाभ प्राप्त नही हुआ स्जसक
े कारण इटली को काफी ननरािा हुई इटली, आस्स्रया और अफ्रीका क
े
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3.
क
ु छ भागोमे अपना साम्राज्य स्थावपत करना र्ाहता था परन्तु वसाचय की संर्ध में उसकी ये आिा पूणच न हो सकी
स्जसक
े कारण इटली में असंतोष उत्पन्न हो गया जो फासीवाद क
े उदय का कारण बना |
ii) लोकतंत्र की असफलता :- प्रथम ववश्व युद्ध क
े बाद इटली की पररस्स्थनतयां बहुत बदल गयी तथा वहां
अराजकता, असंतोष , बेरोजगारी तथा मंहगाई बहुत बढ़ गई स्जस पर लोकतांत्रत्रक सरकार ननयंत्रण न रख सकी
स्जसका लाभ मुसोलीनी क
े फासीवाद दल को ममला क्योंकक जनता क
े मुसोलीनी क
े अलावा अन्य कोई ववकल्प नहीं
था| जो इटली की बदतर हालत में सुधर कर सक
े
तत्कालीन इटली सरकार से पूंजीपनत, मजदूर, छात्र सरकारी कमचर्ारी, दुकानदार आदद सभी लोगो को नाराजगी थी
ऐसी स्स्थनत मे फासीवाद दल ही उन्हे उम्मीद की एकमात्र ककरण नजर आता था इसमलए धीरे – धीरे फासीवाद दल
क
े समथचको की संख्या मे ववस्तार होने लगा |
iii) साम्यवाद का भय :- रूस मे सम्यवादी क्ांनत होने क
े पश्र्ात ् यूरोप क
े सभी देि धीरे – धीरे साम्यवाद की
ओर आकवषचत हो रहे थे और इटली मे भी जनता साम्यवाद को पसंद करने लगी थी स्जससे जमीदार व पूंजीपनत
वगच भयभीत था जबकक मुसोलीनी साम्यवाद का कहर ववरोधी था | इसमलए उसे पूंजीपनत व जमीदार वगच का भी
समथचन प्राप्त हो गया तथा फासीवाद का ववकास तेजी से होने लगा |
iv) मुसोलीनी का व्यक्ततत्व :- मुसोमलनी एक उग्रवादी ववर्ारक था और उसका एक मात्र लक्ष्य इटली क
े खोए हुए
आत्म सम्मान को प्राप्त करना था स्जसक
े मलए उसने उर्र्त –अनुर्र्त, धमच-अधमच आदद की भी र्र्ंता नही की उसने
राष्ट्रीय एकता पर बहुत ज़ोर ददया | मुसोलीनी ने नारा ददया “ व्यवस्था, अनुिासन तथा सत्ता” जो इटली में बहुत
लोक वप्रय हुआ| और इटली की जनता ने पुर जोर – िोर क
े साथ मुसोमलनी का सहयोग आरंभ कर ददया स्जससे
फासीवाद क
े ववकास में बढ़ावा हुआ|
आधथमक संकट :- फासीवाद क
े ववकास का एक मुख्य कारण इटली मे छाई महामंदी थी स्जससे इटली की
अथचव्यवस्था बुरी तरह र्रमरा गई | 1920 क
े बाद इटली की अथचव्यवस्था को भरी क्षनत पहुुँर्ी थी | सरकार आर्थचक
सुधार क
े जो प्रयास कर रही थी उनका कोई वविेष प्रभाव नहीं पड़ रहा था जगह – जगह पर ववद्रोह , हड़तालें और
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4.
दंगे होने लगेस्जन पर सरकार ननयंत्रण करने में असफल रही | 1921 में र्ुनाव हुए परन्तु बहुमत न होने क
े कारण
कोई भी स्स्थर सरकार नही बन सकी मुसोमलनी ने इटली की इस दुदचिा का स्जम्मेदार सरकार को ठहराया तथा वह
खुलेआम सत्ता पर कब्जा करने की धमककयाुँ देने लगा |
हीगल क
े लसद्दांतो का प्रचार :- प्रथम ववश्व युद्ध क
े बाद इटली में हीगल क
े राज्य सम्बन्धी ववर्ारों का प्रर्ार
बढ़ने लगा| हीगल क
े समान मुसोमलनी भी िस्क्त को राज्य का आधार मानता है | मुसोमलनी क
े अनुसार “ सब क
ु छ
राज्य क
े भीतर है राज्य क
े बहार क
ु छ नहीं और राज्य क
े ववरुद्ध क
ु छ नहीं “| राज्य की सवोच्र्ता सम्बंधी इन
ववर्ारों ने अराजकता क
े वातावरण में फासीवादी दल को लोकवप्रय बनाने में सहायता की|
ननष्कर्म :- प्रथम ववश्व युद्ध में जीत क
े पश्र्ात ् भी इटली हार गया तथा भरी हानन उठाने क
े बावजूद उसे उसका
दहस्सा नही ददया गया ववश्व युद्ध में भाग लेने क
े कारण इटली की बड़ी दुदचिा हो गई पर लोकतांत्रत्रक सरकार इस
स्स्थनत को सुधारने में नाकाम रही स्जसका लाभ उठाकार मुसोमलनी ने इटली में फासीवाद को बढ़ावा देना आरंभ कर
ददया | िुरू मे उसने लोकतांत्रत्रक तरीक
े से सत्ता हामसल करने की कोमिि की परन्तु 1921 क
े र्ुनावों में उसक
े दल
को क
े वल 35 सीटे प्राप्त हुई | पर इस समय तक फासीवादी दल बहुत िस्क्तिाली हो र्ुका था मुसोमलनी अब
जबरन सत्ता पर कब्जा करने की धमककयाुँ देने लगा |
27 अक्टूबर 1922 को उसने 30 हजार फामसस्टो क
े साथ रोम क
े मलए क
ू र् ककया भयंकर युद्ध से बर्ने क
े मलए
सम्राट इमेनुअल III ने उसे प्रधानमंत्री ननयुक्त कर ददया इसक
े बाद वह धीरे – धीरे इटली का सवेसवी बन गया
उसने ववरोर्धयो को या तो मरवा ददया या जेलों में ठूंस ददया | सम्यवादी आंदोलनों को सख्ती से क
ु र्ल ददया गया
तथा ववस्तारवादी नीनत को अपनाया| मुसोमलनी की ये उग्रता ही IInd ववश्व युद्ध का कारण भी बनी |
जममनी में नाज़ीवाद
प्रथम ववश्व युद्ध में परास्जत होने क
े पश्र्ात ् जमचनी ने आत्म सम्पणच कर ददया इसक
े बाद जमचनी क
े साथ ममत्र
राष्ट्रों ने बहुत बुरा बताचव ककया तथा उसे सैननक आर्थचक रूप से कमज़ोर करने क
े मलए वसाचय की संर्ध का
आयोजन ककया गया इसक
े बाद जमचनी की अंतररक पररस्स्थनतयाुँ तेजी से बदलने लगी अराजकता , आर्थचक संकट
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5.
और छनतपूनतच कीभारी भरकम धन रामि ने जमचनी की दुदचिा कर दी तथा वाइमार गणतंत्र बुरी तरह असफल हो
गया और इन्ही खराब पररस्स्थनतयो क
े कारण दहटलर का नाज़ी दल जमचनी की सत्ता में आया|
नाज़ी क्ांनत क
े उदय क
े कारण
नाज़ीदल का मूल नाम “ रास्ष्ट्रय समाजवादी जमचन मजदूर दल” था स्जसका संस्थापक ऐडोल्फ दहटलर था 1923 से
1929 तक नाज़ीदल ने पाटी को मजबूत बनाने में समय खर्च ककया | इसक
े बाद 1932 क
े र्ुनावों में नाज़ीदल को
13 स्थान प्राप्त हुए 30 जनवरी 1933 को दहण्डेनबगच ने दहटलर को जमचनी का र्ांसलर ननयुक्त ककया | नाज़ीदल
की इस सफलता को हम ननम्ममलखखती प्रकार से समझ सकते है|
वसामय की संधि :- प्रथम ववश्व युद्ध क
े हारने क
े पश्र्ात ् जमचनी को ममत्र राष्ट्रों क
े साथ वसाचय में संर्ध करनी पड़ी
| ममत्र राष्ट्टों का उद्देश्य जमचनी को आर्थचक व सैननक रूप से कमजोर करना था अत: ममत्र राष्ट्रों ने जमचनी को
युद्ध का स्जम्मेदार ठहराते हुए बहुत बड़ी रकम क्षनतपूनतच क
े रूप में देने क
े मलए मजबूर ककया तथा उसकी 15%
क्वष योग्य भूमम 12% पिुधन और 10% कारखाने उससे छीन मलए गए तथा सार घाटी की कोयला खाने छीनकर
फ्रांस को दे दी गई तथा राईन घाटी का अंतराष्ट्रीयकरण कर ददया गया |
जमचनी की सैननक संख्या एक लाख ननस्श्र्त की गई तथा पंडु्ब्बीयाुँ और लडाक ववमान रखने पर पूरी तरह प्रनतबंध
लगा ददया स्जससे जमचनी भववष्ट्य में ममत्र राष्ट्रों का सामना न कर सक
े | जमचनी अपने साथ हुए अपमान का बदला
लेना र्ाहता था
आधथमक संकट :- ववश्व में 1929 से लेकर 1933 तक गंभीर आर्थचक संकट का दौर रहा जमचनी की हालत आर्थचक
संकट व क्षनतपूनतच की भारी रकम क
े कारण और अर्धक खराब हो गई 1930 में अक
े ले जमचनी में 50 लाख लोग
बेरोजगार हो गए दहटलर ने जमचनी सरकार को इस स्स्थनत का स्जम्मेदार ठहराया तथा जनता को यह ववश्वास
ददलाया की जमचनी की बुरी हालतो में अब क
े वल वही सुधार कर सकता है इसमलए जनता दहटलर क
े साथ हो गई |
साम्यवाद का भय :- 1917 की रूसी क्ांनत क
े पश्र्ात ् ववश्व क
े ववमभन्न देिो में साम्यवाद का तेज़ी से प्रसार होने
लगा| तथा जमचनी क
े पूंजीपनत साम्यवाद क
े बढ़ते प्रभाव से बहुत अर्धक भयभीत थे| दहटलर भी साम्यवाद को
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6.
अपने मागच मेंबाधा मानता था इसमलए दहटलर को जमचनी पूंजीपनत व ज़मीदार वगच का भी समथचन प्राप्त हो गया
स्जससे नाज़ीवाद को बढ़ावा ममला |
यहूदी ववरोिी आंदोलन :- जमचन जनता का समथचन प्राप्त करने क
े मलए दहटलर ने व्रहद यहूदी सफ़ाई अमभयान
र्लाया | इस समय यहूदी जमचनी में अच्छी स्स्थनत में थे जमचनी में बड़े – बड़े उधोगों पर यहूददयों का ननयंत्रण था |
साधारण जनता उन्हे िोषक मानकर उनसे घृणा करती थी इसमलए दहटलर ने जमचनी क
े लोगो की बुरी स्स्थनत का
स्जम्मेदार यहूददयों को ठहराया उसकी यहूदी ववरोधी िैली जमचन जनता में बहुत लोकवप्रय हुई फलस्वरूप जमचनी में
नाज़ीवाद क
े ववस्तार को बढ़ावा ममला |
टहटलर का व्यक्ततत्व :- नाज़ीदल की सफलता का एक मुख्य कारण दहटलर का आकषचक व्यस्क्तत्व भी था |
उसक
े भाषणों में जनता को मंत्रमुग्ध करने की अदभुत िस्क्त थी | तथा वह जनता की भावनाओं को भली भांनत
जनता था उसमें नेता बनने क
े सभी गुण मौजूद थे हाडी क
े अनुसार – “ उसमें ववलक्षण प्रनतभ्प िस्क्त थी र्ाहे वह
प्रनतभा ददव्य न होकर राक्षसी थी” |
गुंथर क
े अनुसार “ उसने अपनी जादू भरी वाणी से जमचन जनता पर अपना अर्धकार स्थावपत कर मलया जब वह
जमचन जानत क
े एक सूत्र में बांधकर वविाल जमचन साम्राज्य का ननमाचण करने की बात कहता तो जमचन जनता
पागल हो जानत और यह अनुभव करने लगती की जमचनी का उदार क
े वल दहटलर और नाजीदल ही कर सकता है |
नाजीदल का आकर्मक कायमक्म :- नाजीदल का आकषचक कायचक्म जनता क
े अनुरूप था स्जसक
े कारण
नाजीदल को अपार लोकवप्रयता ममली | नाजीदल क
े कायचक्म नन॰मल॰ थे|
i) वसाचय की संर्ध को समाप्त करना
ii) जमचनी एकता को समाप्त करना
iii) जमचनी से छीने उपननवेिों को पुन: प्राप्त करना
iv) यहूददयों को जमचनी से बहार ननकालना
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7.
v) साम्यवाद कानाि करना तथा संसदीय प्रणाली का अंत करना |
दहटलर क
े इस कायचक्म से जनता अत्यार्धक प्रभाववत हुए तथा उसने नाजीदल को समथचन दे ददया |
जातीय उत्क्ष्टता का प्रचार :- दहटलर ने जमचनी जानत की सवोच्र्ता का प्रर्ार ककया उसने जमचन नस्ल की
सवोच्र्ता का प्रभावपूणच ढंग में मनोवैज्ञाननक प्रभाव स्थावपत ककया | फ्र
े डररक महान् , त्रबस्माक
च और क
ै सर ववमलयम
द्ववतीय जैसे वीर नायकों की पूजा से और उनक
े नेतृतव में जमचनी क
े प्रभुत्व क
े प्रर्ार क
े कारण जमचन जनता में
स्वाभाववक रूप से सैननक मनोव्रवत्त का ववकास हुआ | अत: जमचन की महान परम्परा और जातीय सवोच्र्ता की
भावना भी नाजी उत्पान का एक कारण थी
सैना तथा नौकरशाही का समथमन :- दहटलर को सेना और नौकर िाही से भी प्रबल समथचन प्राप्त हुआ उसका
उग्रवादी कायचक्म और जमचनी क
े िस्त्रीकरण की मांग सैननको और भूतपूवच सैननको को पसंद आई | उसक
े
पररणामस्वरूप सेना उसकी समथचक बन गई | दूसरी तरफ दहटलर द्वारा अनुिासन तथा देि – प्रेम पर अत्यार्धक
जोर देने क
े कारण नौकरिाही भी उससे सहानुभूनत रखने लगी | नौकरिाही वाइमर गणतंत्र की लोकतांत्रत्रक प्रणाली
से असंतुष्ट्ट थी और ऐसी सरकार र्ाहती थी जो मजबूत तथा अनुिासन वप्रय हो | नाजीदल जनता की इस आिा
को पूरा कर सकता था|
वाईमर गणतंत्र की असफलता :- प्रथम ववश्व में हार क
े पश्र्ात ् जमचनी क
े एथेंस वाइमर में एक नए सववधान का
ननमाचण ककया गया परंतु ववश्व युद्ध , क्षनतपूनतच की रामि और महान आर्थचक मंदी ने वाईमर गणतंत्र को सफल नही
होने ददया यहाुँ तक की जमचनी की खराब दिा क
े कारण जमचनी को राष्ट्र संघ का सदस्य भी नही समझा गया
स्जसमें जमचन जनता में वाईमर गणतंत्र क
े ववरुद्ध रोष उत्पन्न हो गया स्जससे नाजीवाद को बढ़ावा ममला |
ननष्कर्म :- नाजीवाद क
े उदय का मुख्य कारण वसाचय में जमचनी का अपमान ही था परंतु लगातार बदलती
पररस्स्थनतयों क
े कारण जमचनी की हालत बद्तर होती र्ली गई | आर्थचक मंदी, साम्यवाद क
े भय ने जमचनी में
दहटलर की लोकवप्रयता में और अर्धक वृद्दद की | 1932 में दहटलर ‘दहण्डेनबगच’ क
े ववरुद्ध राष्ट्रपनत र्ुनावों में हार
गया परंतु उसे 37% मत प्राप्त हुए | ‘पोपेन’ की सलाह पर ‘दहण्डेनबगच’ ने उसे प्रधान मंत्री बना ददया | 1933 में
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8.
जमचनी संसद मेंआग लग गई दहटलर ने इसे साम्यवादी षड्यंत्र कहकर , साम्यवादी दलों पर प्रनतबंध लगा ददया
तथा नेताओं को जेल में डाल ददया ‘दहण्डेनबगच’ की म्रत्यु क
े पश्र्ात ् उसने राष्ट्रपनत और प्रधानमंत्री दोनों पदों को
ममला ददया और जमचन का राष्ट्रपनत बन गया |
प्रश्न 2. प्रथम ववश्व युद्ि क
े कारणों का वववेचन कीक्जए ?
उत्तर : प्रथम ववश्व युद्ध 28जुलाई 1914 से आरंभ हुआ और 11 नवम्बर , 1918 को समाप्त हुआ | मानव
इनतहास में 1914 से पूवच इंतना भयंकर युद्ध नही हुआ था स्जसमे लाखों जाने गई, अरबों की सम्पनत नष्ट्ट हुई
तथा करोड़ो लोग बेघर तथा अपंग हो गए | प्रथम ववश्व युद्ध क
े आरंभ होने क
े पीछे सम्पूणच यूरोप में होने वाले
राजनीनतक पररवतचनों, संर्धयों व समझौता का महत्वपूणच योगदान रहा इसक
े अलावा देिो की साम्राज्य ववस्तार की
होड़ ने यूरोप में प्रनतद्ड़ता को बढ़ावा ददया और देिो में टकराव पैदा होने लगा | 28 जून 1914 में ऑस्स्रया क
े
राजक
ु मार की सत्रबचया की यात्रा करते हुए हत्या कर दी गई और इस घटना ने पहले यूरोप और बाद में ननकटवती
यूरोपीय देिों को भी युद्ध की भयंकर अस्ग्न में धक
े ल ददया | ववश्व इनतहास में इसे ही प्रथम ववश्व युद्ध क
े नाम
से जाना जाता है|
ववश्व युद्ि क
े कारण
i) उग्र राष्रवाद :- फ्रांसीसी क्ांनत ने यूरोप क
े देिो में राष्ट्रीयता की भावना का ववकास ककया यह भावना आगे
र्लकर अत्यंत उग्र बन गई | जमचनी, फ्रांस , त्रिटेन , इटली और अस्स्रया आदद देिो में भी उग्रवाद का तेजी से
प्रसार होने लगा | सभी राष्ट्र अपने – अपने दहतो की पूनतच उर्र्त तथा अनुर्र्त कायच करने लगे इसक
े अलावा छोटे
राज्य भी बड़े राज्य बनने का सपना देखने लगे स्जससे साम्राज्यवाद को बढ़ावा ममला अत: यह उग्र राष्ट्रवादी भावना
प्रथम ववश्व युद्ध का कारण बनी |
ii) साम्राज्य ववस्तार की नीनत : यूरोप क
े िस्क्तिाली देिो ने साम्राज्य ववस्तार की नीनत को बढ़ावा ददया| त्रिटेन,
फ्रांस, इटली और रूस आदद देिो ने अफ्रीका तथा एमिया क
े देिो में अपना प्रभाव जमाना आरंभ कर ददया स्जसक
े
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9.
कारण महािस्क्तयों मेंप्रनतस्पधाच िुरू हो गयी और इसी प्रनतस्पधाच क
े कारण टकराब में वृद्र्ध हुई और ववश्व युद्ध
को बढ़ावा ममला |
iii) औघोधगक क्षेत्र में प्रनतस्पिाम :- इंग्लैण्ड में औघोर्गक क्ांनत क
े पश्र्ात ् व्यवसाय क
े क्षेत्र में बहुत तरक्की कर
ली थी| 20 वीं सदी क
े आरंभ में जमचनी और इटली ने भी काफी प्रगनत कर की थी| अब इन देिो को अपने माल
क
े बेर्ने और कच्र्ा माल प्राप्त करने क
े मलए बाजारो की तलाि थी इसमलए इन देिो ने अपने उपननवेिों का
ववस्तार आरंभ ककया स्जससे तनाव बढ़ने लगा और प्रथम ववश्व युद्ध को बढ़ावा ममला |
iv) युरोप में सैननकवाद का उदय : प्रथम ववश्व युद्ध का एक बड़ा कारण युरूप में बढ़ता सैननकवाद भी था
क्योंकक साम्राज्यवादी नीनत क
े र्लते हर्थयारों की होड़ को बढ़ावा ममला | 1870 में जमचनी से हारने क
े बाद फ्रांस
ने बड़े पैमाने पर अपनी सैन्य क्षमता में वृद्र्ध करना जारी रखा | जमचनी की सैननक िस्क्त में ववस्तार को देखकर
त्रिटेन ने भी हर्थयारों का ननमाचण करना आरंभ कर ददया था फलस्वरूप पूरे युरोप में भय, संदेह व तनाव का
वातावरण उत्पन्न हो गया | स्जसक
े कारण प्रथम ववश्व युद्ध को बढ़ावा ममला|
v) बिस्माक
म की क
ू टनीनत संधियााँ : जमचनी क
े प्रधानमंत्री त्रबस्माक
च क
े समय जमचनी की िस्क्त असाधारण तौर पर
बढ़ गई थी | उसने फ्रांस क
े ववरुद्ध स्वंय को िस्क्तिाली बनाने क
े मलए 1882 में आस्स्रया , हंगरी व इटली क
े
साथ संर्धयाुँ कर मल ववश्व इनतहास में इसे ‘त्रत्रगुट’ संर्ध क
े नाम से जाना जाता है स्जसमे तीनो ने युद्ध क
े समय
एक दुसरे को सहायता देने का भी वर्न ददया था |
vi) जममन सम्राट का चररत्र : जमचनी का सम्राट क
ै सर ववमलयम भी काफी हद तक प्रथम ववश्व युद्ध क
े मलए
स्जम्मेदार था उसने जमचनी की सैननक िस्क्त में वृद्र्ध की स्जसक
े कारण इंग्लैण्ड उसक
े ववरुद्ध हो गया | उसने
जमचनी में सैननक मिक्षा को अननवायच कर ददया | जमचन सम्राट क
े इन कायो से प्रभाववत होकर त्रिटेन , फ्रांस और
रूस जमचनी क
े ित्रु बन गए |
vii) जममनी की महत्त्वकांक्षा:- जमचनी युरोप में स्वय को सबसे अर्धक िस्क्तिाली बनाना र्ाहता था इसमलए उसने
अपनी सैननक िस्क्त में ववस्तार को महत्त्व ददया | इसक
े आलावा 1889 में जमचनी ने बमलचन से बगदाद तक रेलवे
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10.
लाइन त्रबछाने कीआज्ञा प्राप्त कर ली स्जसक
े कारण इंग्लैण्ड फ्रांस व रूस तीनो भयभीत हो गए क्योंकक इस
रेलमागच क
े ननमाचण क
े बाद टकी पर जमचनी का ननयंत्रण स्थावपत हो सकता था
ववर्ातत एवं झूठा प्रचार :- प्रथम ववश्व युद्ध का एक मुख्य कारण यह था कक समार्ार पत्रों व पत्रत्रकाओं में झूठी
खबरे छापकर राष्ट्रवादी भावना को भड़काने का प्रयास ककया | अखबार दूसरे देिो की गलत स्स्थनत क
े बारे में गलत
और बड़ा र्ढ़ाकर छापते थे स्जससे ववमभन्न देिो क
े बीर् वववादों को बढ़ावा ममला |
तत्कालीन कारण :- 28 जून 1914 को आस्स्रया का राजक
ु मार फडीनेण्ड अपनी पत्नी क
े साथ बोसाननया की
राजधानी सेरास्जवो पुँहुर्ा जहाुँ उन दोनों की हत्या कर दी गई | अस्स्रया ने इसका आरोप सत्रबचया पर लगाते हुए
उसे युद्ध की र्ेतावनी दी और युद्ध से बर्ने क
े मलए सत्रबचया क
े सामने क
ु छ िते रखी सत्रबचया ने अर्धकतर ितों
को मान मलया परन्तु एक ितच को मानने से इनकार कर ददया जो उसकी प्रभुसत्ता क
े मलए घातक थी |
अस्स्रया को जमचनी का समथचन प्राप्त था परंतु सत्रबचया को रूस ने सहायता देने का वर्न ददया था फलस्वरूप रूस
ने सत्रबचया को िते न मानने क
े मलए कहा इसी कारण अस्स्रया ने सववचया क
े ववरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी धीरे –
धीरे दोनों पक्षों क
े सहयोगी राष्ट्र इस युद्ध में िाममल होते गए और ववश्व युद्ध ने भयंकर रूप धारण कर मलया |
प्रथम ववश्व युद्ि क
े पररणाम
राजतंत्र का अंत व लोकतंत्र की स्थापना :- प्रथम ववश्व युद्ध क
े कारण अस्स्रया , हंगरी, जमचनी तथा रूस आदद
में राजतंत्र की समास्प्त हुई तथा राजतंत्र को समाप्त करक
े इन देिो में गणतंत्र की स्थापना हुई
महाशक्ततयों में पररवतमन :- प्रथम युद्ध से पूवच युरोप में त्रिटेन – फ्रांस ,जमचनी, अस्स्रया ,हंगरी , रूस और इटली
आदद महािस्क्तयां थी परंतु प्रथम ववश्व युद्ध क
े पश्र्ात ् पररस्स्थनतयाुँ बदल गई तथा रूस जमचनी, आस्स्रया व टकी
सभी आर्थचक व सैननक रूप से वपछड़ गए |
नए राष्रों का उदय :- प्रथम ववश्व युद्ध क
े पश्र्ात ् अनेक छोटे – छोटे राज्यों का जन्म हुआ युरूप में आठ नवीन
राष्ट्रों का उदय हुआ जैसे इण्टोननया,लैटववया,मलथुआननया, कफनलैंड जैसे नए राज्य बने |
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11.
USA की प्रनतष्ठामें वृद्धि :- प्रथम ववश्व युद्ध क
े पश्र्ात ् USA का तेजी से ववकास हुआ तथा अमेररका
अंतराष्ट्रीय स्तर पर एक महािस्क्त क
े रूप में स्थावपत हो गया |
जन िन की हानन :- प्रथम ववश्व युद्ध में अपार जन – धन की हानन हुई दोनों ओर क
े लगभग 17 लाख सैननक
अपंग हुए और एक करोड़ तीस लाख से ननक मारे गए और 1 अरब 70 लाख डॉलर खर्च हुए |
वसामय की संधि :- प्रथम ववश्व युद्ध क
े पश्र्ात ् वसाचय की संर्ध का आयोजन ककया गया स्जसमे जमचनी और
उसक
े सहयोगी देिों को युद्ध का स्जम्मेदार ठहराते हुए उन पर भारी जुमाचना लगाया गया |
जापान की शक्तत में वृद्धि :- प्रथम ववश्व युद्ध क
े पश्र्ात ् जापान की र्गनती महािस्क्तयों की जाने लगी तथा
जापान को एमिया का त्रिटेन कहा जाने लगा |
अधिनायकवाद का उदय :- प्रथम ववश्व युद्ध क
े पश्र्ात ् युरूप क
े कई देिो में ताना िाही िासन की स्थापना हुई
जैसे जमचनी में दहटलर, इटली में मुसोमलनी और स्पेन में जनरल फ्रांको |
ननष्कर्म : प्रथम ववश्व युद्ध ननस्श्र्त रूप से युरूप क
े िस्क्तिाली देिो की आपसी होड़ तथा प्रनतस्वधाच का नतीजा
है स्जसमे भारी जन – धन की हानन हुई और ववश्व मानर्र्त्र में अनेक बदलाव हुए जहाुँ एक ओर इटली और जमचनी
कमजोर हो गए वहीं दूसरी ओर अमरीका और जापान क
े महत्व में वृद्र्ध हुई | रूस में साम्यवाद की स्थापना हुई
इसक
े अलावा िांनत बनाए रखने क
े मलए राष्ट्र संघ का ननमाचण ककया गया | ववश्व महान आर्थचक मंदी में फ
ं स गया
स्जसका लाभ उठाकर कई देिों में अर्धनायकवाद का ववकास हुआ|
प्रश्न:3 िोल्शोववक क्ांनत (मातसवादी क्ांनत ) क
े कारण एवं पररणामो पर चचाम करे .
उत्तर: रूस में बोल्िोववक क्ांनत से पहले जार का िासन था तथा उसक
े िासनकाल में देि की आर्थचक दिा बहुत
खराब थी | मिक्षा स्वास्थ रोजगार व अन्य मूलभूत सुववधाओं का अभाव था क्वष की स्स्थनत बहुत खराब थी रूस
कजे क
े बोझ से दबा हुआ था | जार ननरंक
ु ि िासक था उसने जनता की आवश्यकताओं का ख्याल नही ककया |
इसक
े आलावा रूस को कीममया और जापान क
े साथ युद्ध में हार का सामना करना पड़ा जो रूस क
े मलए बहुत
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अपमानजनक था फलस्वरूपजनता जार ननकोलि की िासन व्यवस्था से बुरी तरह तंग आ र्ुकी थी और जनता ने
1917 में जार क
े ववरुद्ध क्ांनत कर दी हालाुँकक क्ांनत दो र्रणों में हुई पहली मार्च 1917 तथा दूसरी नवम्बर 1917
में और रूस में साम्यवाद की स्थापना हुई | इसे ही बोल्िोत्रबक क्ांनत भी कहते है |
िोल्शेबिक क्ांनत क
े कारण
i) जारशाही की ननरंक
ु शता :- जार ननकोलस एक ननरंक
ु ि राजा था वह स्वयं को ईश्वर का दूत मानता था और
जनता पर उसका कठोर ननयंत्रण था हालांकक 1905 क
े पश्र्ात ् रूस में संसद की स्थापना की गई परंतु िासन क
े
सभी प्रमुख पदों पर राजा का ही ननयंत्रण था तथा जार जनता क
े ववकास क
े मलए कोई वविेष कायच नही करता था
राजा धनी , र्र्च व क
ु लीनवगच का वविेष ध्यान रखता था स्जससे आम जनता क
े अंदर राजा क
े ववरुद्ध क्ोध की
भावना उत्पन्न हो रही थी |
ii) ककसानों की दयनीय दशा :- 19 वी िताब्दी क
े अंत तक युरोप क
े सभी प्रमुख देिो में ओघोर्गक क्ांनत हो
र्ुकी पर रूस अभी तक वपछड़ा हुआ था तथा एक क्वष प्रधान देि था | यहाुँ ककसानों पर जार ने भरी कर लगा रखे
थे पर उत्पादन कम होने से कृ षको की स्स्थनत अत्यंत दयनीय थी जमीदार भूममहीन ककसानों का िोषण करते थे |
अत: ककसानों में सरकार क
े खखलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा था 1905 ई॰ में स्थानों पर ककसानों क
े दंगे हुए और
क्ांनत क
े समय ककसानों ने िांनत क्ांनतकाररयों का पूरा सहयोग ककया |
iii) समाजवाद का ववकास :- 19 वी िताब्दी में समाजवादी ववर्ारों का उदय हुआ और रूस में समाजवादी
आंदोलन दो भागों में बंट गया क्ांनतकारी समाजवादी दल तथा सामास्जक लोकतास्न्त्रक दल बाद में 1903 में
समाजवादी लोकतांत्रत्रक दल दो भागों बंटा बोल्िेत्रबक तथा मेन्िेववक बोल्िेत्रबक दल का नेता लेननन था वह उच्र्
ववर्ारों का समथचक था जार ननकोलस ने समाजवाद को रोकने क
े अनेक कदम उठाये परंतु रूस में समाजवादी
ववर्ारों का तीव्र गनत से प्रसार होता रहा |
iv) गैर रूसी जानतयों का असंतोर् :- जार ननकोलस ने गैर रूसी जानतयों क
े साथ बड़ी कठोरता का व्यवहार ककया
था रूस में यहूददयों और अमेननयन क
े उपर भीषण अत्यार्ार ककये गए इसक
े अलावा बास्ल्टक प्रान्तों में भी जबरन
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14.
रूमसकरण की नीनतअपनाई गई | फलस्वरूप वहाुँ लोगो ने जार क
े खखलाफ आंदोलन िुरू ककये पर इन आंदोलनों
को सख्ती क
े क
ु र्ल ददया गया इसका नतीजा हुआ कक गैर रूसी जानतयाुँ भी जार क
े ववरुद्ध हो गई |
v) भ्रष्ट ननरंक
ु श नौकरशाही :- रूस में िासन क
े संर्ालन क
े मलए नौकरिाही का ननमाचण ककया गया परंतु जार
ननकोलि में योग्य व्यस्क्तयों का र्ुनाव करने की क्षमता नही थी और नौकरिाही जनता क
े प्रनत कोई सहानुभूनत
नही रखती थी वह मनमाने ढंग से अत्यार्ार करती व जनता का िोषण ककया जाता इससे रूस की जनता में
नाराजगी बढ़ने लगी थी |
क्ांनतकारी नेताओं का उदय :- रूस की क्ांनत का श्रेय लेननन , राटस्की तथा सटामलन आदद नेताओं को जाता है
क्योंकक इन नेताओं ने तत्कालीन पररस्स्थयों का लाभ उठाया और जनता क
े अंदर क्ांनत की भावना का प्रर्ार ककया
और जनता इनक
े क्ांनतकारी ववर्ारों से प्रभाववत हुई इन सभी नेताओं में लेननन ने क्ांनत में सबसे महत्वपूणच
योगदान ददया |
vii) युरोप में लोकतंत्र का प्रसार :- युरोप क
े अर्धकतर देिो में लोकतांत्रत्रक सरकारे बन र्ुकी थी और रूस की
जनता भी पस्श्र्मी देिो की लोकतांत्रत्रक िासन प्रणाली से बहुत प्रभाववत थी और जनता रूस में भी लोकतंत्र
र्ाहती थी | इससे भी क्ांनत को बढ़ावा ममला |
तात्कालीन कारण :- उपरोक्त कारणों से क्ांनत का वातावरण तैयार हो र्ुका था इसक
े पश्र्ात ् नन॰ दोनो
घटनाओं ने क्ांनत का कायच पूरा कर ददया |
(क) ववश्व युद्ि में रूस की पराजय :- प्रथम ववश्व युद्ध में जार ने सैननकों क
े साथ आम आदममयों को भी
युद्ध क
े मैदान में भेज ददया स्जससे भरी संख्या में रूसी सैननक व नागररक मर गए और रूस की सैना युद्ध क
े
आरंमभक ददनों में ही हर गई | इससे रूसी सेना और उसमे काम करने वालोँ क
े सम्बधी जार क
े ववरुद्ध हो गए |
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15.
(ख ) सन् 1916 – 17 का अकाल :- 1916 – 17 में रूस में भयंकर अकाल पड़ा| कृ वष उत्पादन बहुत कम हुआ
खाने – पीने की वस्तुए ममलनी मुस्श्कल हो गई कीमते आसमान छ
ू ने लगी ऐसी स्स्थनत में जार ने जनता क
े कष्ट्टों
पर कोई ध्यान नहीं ददया स्जससे जनता जार क
े ववरुद्ध हो गई |
क्ांनत का आरंभ :- 5 मार्च 1917ई॰ को क्ांनत की िुरुआत हुई ककसानों और मजदूरों ने जलसों और सभाओं का
आयोजन ककया राजा ने क्ांनतकाररयों पर गोली र्लाने क
े आदेि पर संसद ने इसे स्वीकार नही ककया | अंत में
सम्राट को आत्मसम्पणच करना पड़ा और जार ने गद्दी छोड़ दी|
क्ांनत क
े पररणाम
i) जारशाही का अंत:- क्ांनत क
े पश्र्ात ् रूस में लंबे समय से र्ले आ रहे जार िासन का अंत हो गया|
ii) साम्यवाद का ववकास :- रूस में क्ांनत क
े पश्र्ात ् एक नई साम्यवादी व्यव्स्था का जन्म हुआ स्जसका उद्देश्य
पूुँजीवाद का अंत करक
े एक िोषण मुक्त समाज की स्थापना करना था |
iii) रूस की शक्तत में वृद्धि :- क्ांनत क
े पश्र्ात ् रूस ने तेजी से ववकास करना आरंभ कर ददया, तथा रूस ववश्व
क
े मानर्र्त्र पर एक महािस्क्त क
े रूप में उभरने लगा |
iv) दुननया क
े मजदूरों की प्ररेणा :- इस क्ांस्न्त ने रूसी ककसान तथा मजदूर वगच को समाज में उच्र् स्थान
प्रदान ककया उन्हे सामास्जक, आर्थचक और राजनैनतक अर्धकार प्रदान ककये गए | इसक
े अलावा ववश्व में मजदूरों की
स्स्थनत में उनक
े बदलाव हुए |
v) समाजवाद का प्रचार :- रूस की क्ांस्न्त ने ववश्व में समाजवाद का प्रसार ककया इस क्ांस्न्त क
े पश्र्ात ्
माक्सचवादी ववर्ारों को मान्यता प्राप्त हुई और पुरे ववश्व में माक्सचवाद क
े अध्यन क
े प्रनत रुर्र् बढ़ने लगी |
ननष्कर्म :- रूसी क्ांनत ने ववश्व राजनीनत में सामास्जक , आर्थचक एवं राजनैनतक बदलाव ककये | क्ांनत ने जहाुँ एक
और दल क
े अर्धनायकवाद को बढ़ावा ददया वही दूसरी और आर्थचक समानता को बढ़ावा ददया |
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16.
क्ांनत क
े बादरूस की िस्क्त में वृद्दद होती र्ली गई और रूस 1945 क
े दूसरे ववश्व क
े पश्र्ात ् अमरीका क
े साथ
संयुक्त महािस्क्त बन गया तथा क
े वल ववश्व में अमरीका ही ऐसा देि बर्ा था जो USA को सैननक क्षेत्र में र्ुनौती
दे सकता था और ये सब USSR में बोल्िेववक क्ांनत क
े पश्र्ात ् ही संभव हो सका |
प्रशन:4 द्ववतीय ववश्व युद्ि क
े कारणों पर प्रकाश डाललये ?
उत्तर : आमतोर पर कहा जाता ह की द्ववतीय ववश्व युद्ध क
े कारण वसाचय की संर्ध में ही नछपे थे क्योंकक वसाचय
की संर्ध बदले की भावना पर आधाररत थी तथा इस संर्ध का उद्देश्य हारे हुए राष्ट्रों को अपमाननत करना था |
वसाचय की संर्ध क
े पश्र्ात ् युरोप की राजनीनत में अनेक बदलाव आये स्जनक
े कारण यह स्पष्ट्ट हो गया की
महायुद्ध को लम्बे समय तक नही टाला जा सकता | जमचनी, जापान व इटली तानािाही िासको क
े आने क
े बाद
ववस्तारवादी नीनत को बढ़ावा ददया | त्रिटेन तथा फ्रांस की तुस्ष्ट्टकरण की नीनत ने इन साम्राज्यवादी िस्क्तयों क
े
हौंसले बढ़ा ददए फलस्वरूप युरूप में टकराव की स्स्थनत पैदा होने लगी और आगे र्लकर ववश्व युद्ध में पररवनतचत
हो गई
द्ववतीय ववश्व युद्ि क
े कारणों को ननम्नललखखत प्रकार से ववस्तार पूवमक समझ सकते हैं|
i) वसामय की संधि :- प्रथम ववश्व युद्ध में हारने क
े पश्र्ात ् जमचनी को ममत्र राष्ट्रों द्वारा आयोस्जत पेररस िांनत
सम्मेलन में वसाचय की संर्ध पर हस्ताक्षर करने पड़े | ममत्र राष्ट्रों का उद्देश्य इस संर्ध क
े माध्यम से जमचनी और
उसक
े सहयोगी देिो को आर्थचक व सैननक रूप से कमजोर करना था अत: ममत्र राष्ट्रों ने जमचनी को युद्ध का
स्जम्मेदार ठहराते हुए बड़ी रकम क्षनतपूनतच क
े रूप में देने को बाध्य ककया इसक
े अलावा उसकी 15 % कृ वष योग्य
भूमम 12 % पिुधन और 10 % कारखाने छीन मलए गए, सार घाटी की कोयला खाने फ्रांस को दे दी गई और
राईन घाटी का अंतरराष्ट्रीयकरण कर ददया गया |
जमचनी की सैननक संख्या एक लाख ननस्श्र्त कर दी गई तथा पनडुब्बी व लड़ाक
ू ववमान रखने पर पूरी तरह प्रनतबंध
लगा ददया गया स्जससे जमचनी भववष्ट्य में ममत्र राष्ट्रों को र्ुनौती न दे सक
े |
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17.
ii) अधिनायकवाद काउदय :- प्रथम ववश्व युद्ध क
े पश्र्ात ् युरोप में अर्धनायकवाद का ववकास हुआ और सोववयत
संघ में लेननन ने नेतृत्व में साम्यवाददयों की तानािाही स्थावपत हो गई , मुसोमलनी इटली का, जरनल फ्रांको स्पेन
का तथा दहटलर जमचनी का तानािाह बन गया | इन तानािाहों ने युरोप में साम्राज्य ववस्तार की नीनत को अपनाया
इंग्लैण्ड तथा फ्रांस इन साम्राज्यवादी िस्क्तयों को रोकने में असफल रहे स्जससे द्ववतीय ववश्व युद्ध को बढ़ावा
ममला |
सैननक गुटिंटदयााँ :- अंतराचष्ट्रीय स्तर पर सैननक गुटबंददयाुँ भी द्ववतीय ववश्व युद्ध का बड़ा कारण बनी एक ओर
फ्रांस , पौलेण्ड , रूमाननया , युगोस्लाववया तथा र्ेकोस्लोवाककया ने गुटबंदी कर ली और बाद में त्रिटेन भी इस गुट
में िाममल हो गया तथा दूसरी ओर रोम – बमलचन – टोक्यो धुरी का ननमाचण हुआ | इस प्रकार युरोप दो गुटों में
ववभास्जत हो गया स्जसक
े कारण द्ववतीय ववश्व युद्ध को बढ़ावा ममला |
तुक्ष्टकरण की नीनत :- जब जमचनी ने अपनी ववस्तारवादी नीनत पर र्लते हुए युरोप क
े देिों पर आक्मण
कायचवाही करनी िुरू की तथा वसाचय की ितों को मानने से इंकार कर ददया तो आरंभ में फ्रांस ने इसका ववरोध
ककया परंतु इंग्लैण्ड ने अपने दहतों की पूनतच क
े र्लते तुस्ष्ट्टकरण की नीनत को अपनाया क्योंकक वह फासीवादी
िस्क्तयों का प्रयोग युरोप में साम्यवाद क
े प्रसार को रोकने क
े मलए करना र्ाहते थे | स्जसक
े कारण तुस्ष्ट्टकरण की
यह नीनत आगे र्लकर घातक मसद्ध हुई |
ननशस्त्रीकरण की ववफलता :- ममत्र राष्ट्रों ने वसाचय की संर्ध द्वारा जमचनी का ननिस्त्रीकरण करक
े उसकी सैननक
िस्क्त को बहुत कम कर ददया परंतु ममत्र राष्ट्र अपना ननिस्त्रीकरण सदैव टालते रहे | परंतु जब दहटलर जमचनी की
सत्ता में आया तो उसने वसाचय की संर्ध का उल्लंघन करना आरंभ कर ददया 1934 में दहटलर ने जमचनी का
िस्त्रीकरण आरंभ कर ददया देखा – देखी युरोप क
े अन्य देि भी हर्थयारों का ननमाचण करने लगे जो आगे र्लकर
ववनाि का कारण बना |
राष्र संघ की दुिमलता :- राष्ट्र संघ की स्थापना ववश्व िांनत को स्थावपत करने क
े मलए की गई थी पर वह अपने
उदेश्य में सफल नही हो सका | वविेषज्ञों का मानना था कक राष्ट्र संघ इसमलए सफल नही हो सका क्योंकक अमरीका
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18.
इसका सदस्य नहीथा और न ही इसकी अपनी कोई सैना थी | इसी कारण जब 1931 में जापान ने मंर्ूररया पर ,
1936 में इटली ने अबीसीननया पर , व 1938 में जमचनी ने आस्स्रया पर अर्धकार कर मलया परंतु राष्ट्र संघ इन
साम्राज्यवादी िास्क्तयों क
े ववरुद्ध कोई कायचवाही न कर सका फलस्वरूप साम्राज्यवादी िस्क्तयों क
े होंसले बढ़ गए
और ये कारण ववश्व युद्ध का उत्तरदायी बना |
साम्राज्य ववस्तार की होड़ :- प्रथम ववश्व में भारी ववनाि को देखने क
े बाद भी साम्राज्यवादी देिों ने अपनी
साम्राज्यवाद ववस्तार की नीनत में कोई पररवतचन नही ककया इंग्लैण्ड व फ्रांस लगातार अपने प्रभाव क्षेत्र में वृद्र्ध
करते रहे सुदूर पूवच में जापान ने र्ीन में हस्तक्षेप ककया तथा मंर्ूररया पर भी कब्जा कर मलया इसी प्रकार जमचनी
ने आस्स्रया व इटली ने अबीसीननया को हड़प मलया इस प्रकार साम्राज्यवाद का ववस्तार भी द्ववतीय ववश्व युद्ध का
कारण बना |
महान आधथमक मंदी :- सन् 1930 में ववश्व में एक महान् आर्थचक संकट आया, स्जसका प्रत्येक देि की
अथचव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा | इस आर्थचक संकट क
े कारण ववमभन्न देिो मे कई करोड़ लोग बेरोजगार हो गए
इसी आर्थचक मंदी का लाभ उठाकर जमचनी में दहटलर ने नाजीवाद को बढ़ावा ददया और जापान ने भी मंर्ूररया पर
ननयंत्रण कर मलया |
पोलैण्ड पर जममनी का आक्मण:- उपरोक्त कारणों से युद्ध की पृष्ट्टभूमम तैयार हो र्ुकी थी तथा जैसे ही जमचनी
ने पोलैण्ड पर आक्मण ककया द्ववतीय ववश्व युद्ध आरंभ हो गया |दहटलर ने पोलैण्ड से माुँग की कक वह डेंस्जग
बंदरगाह तक सड़क व रेल लाइन त्रबछाने क
े मलए पोमलि गमलर्ारे की माुँग की| फ्रांस ने इस समस्या को सुलझाने
क
े मलए िांनत और बातर्ीत का सुझाब ददया परंतु दहटलर 1 मसतम्बर 1939 को पौलेण्ड क
े नगरों पर बमबारी कर
दी | इंग्लैण्ड तथा फ्रांस ने दहटलर को र्ेतावनी दी और जमचनी से कोई उत्तर न ममलने पर दो ददन बाद दोनों देिों
ने जमचनी क
े ववरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी इस घोषणा क
े साथ दह द्ववतीय ववश्व युद्ध आरंभ हो गया |
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19.
ननष्कर्म :- उपरोक्तिीषचकों से हमे पता र्लता है कक द्ववतीय ववश्व युद्ध क
े मलए कोई एक देि स्जम्मेदार नही है
| ववश्व युद्ध की नीव वसाचय की संर्ध में ही रख दी गई थी स्जसमे ममत्र राष्ट्रों ने जमचनी को सैननक , आर्थचक रूप
से कमजोर बना ददया था परंतु जब दहटलर सत्ता में आया तो उसने जमचनी क
े ववस्तार की नीनत को अपनाया |
इटली भी ममत्र राष्ट्रों क
े रवैये से संतुष्ट्ट नही था अत: जमचनी और इटली में ममत्रता हो गई |
आरंभ में जब फासीवादी िस्क्तयों ने छोटे देिो क
े ववरुद्ध आक्मण की नीनत अपनाई तो ममत्र राष्ट्रों ने उन्हे रोकने
की बजाय तुस्ष्ट्टकरण की नीनत अपनाई इससे सम्राज्यवादी िस्क्तयों को हौंसले बढ़ गए| इसक
े अलावा राष्ट्र संघ भी
युद्ध रोकने में नाकाम रहा और अमरीका भी आरंभ मे तटस्थ ही रहा इन्ही सभी कारणों से द्ववतीय ववश्व युद्ध
िुरू हुआ|
प्रश्न:5 शीत युद्ि से आप तया समझते है इसक
े कारणों तथा प्रभावों पर चचाम करें ?
उत्तर :- द्ववतीय ववश्व युद्ध क
े पश्र्ात ् ववश्व दो गुटों में ववभास्जत हो र्ुका था एक USA क
े नेतृत्व वाला पूुँजीवादी
गुट तथा दूसरा USSR क
े नेतृत्व वाला साम्यवादी गुट तथा दोनों गुटों में वैर्ाररक मतभेद थे तथा दोनों ही
महािस्क्तयों क
े पास भारी मात्रा में अस्त्र –िस्त्र थे परंतु दोनों क
े बीर् प्रत्यक्ष युद्ध नही हुआ , दोनों महािस्क्तयो
क
े सम्बंध अत्यार्धक तनावपूणच थे इन्ही तनावपूणच सम्बंधो को िीत युद्ध कहा जाता
िीत युद्ध से अमभप्राय एक ऐसी स्स्थनत से है स्जसमे युद्ध क
े जैसा वातावरण तो हो परंतु युद्ध न हो | इस घटना
ने न क
े वल अमरीका और सोववयत संघ को प्रभाववत ककया बस्ल्क पुरे ववश्व में भय , और िंका का वातावरण पैदा
कर ददया था |
शीत युद्ि क
े कारण
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20.
i) ऐनतहालसक कारण:- िीत युद्ध का मुख्य कारण 1917 की रूसी क्ांनत है इस क्ांनत क
े पश्र्ात ् साम्यवादी
व्यवस्था का जन्म हुआ | साम्यवाद का मुख्य उदेश्य पूुँजीवाद को समाप्त करना था | स्जसक
े कारण पूुँजीवादी और
साम्यवादी िस्क्तयों क
े बीर् तनाव पैदा हो गया और िीत युद्ध आरंभ हुआ
ii) द्ववतीय मोचे का प्रश्न :- ववश्व युद्ध क
े दौरान जब दहटलर ने सोववयत संध पर आक्मण ककया तो सोववयत
नेता स्टामलन ने ममत्र राष्ट्रों से जमचनी क
े ववरुद्ध दूसरा मोर्ाच खोलने का अनुरोध ककया तथा रूस पर दबाव क
ु छ
कम हो जाए परंतु ममत्र राष्ट्र इस अनुरोध को महीनो तक टालते रहे वे र्ाहते थे कक जमचनी सोववयत संघ को नष्ट्ट
कर दे स्जससे सोववयत संघ और ममत्र राष्ट्रों क
े बीर् तनाव में वृद्र्ध हुई |
iii) सोववयत संघ द्वारा याल्टा और िाल्कन समझौते का उल्लंघन :- सन् 1944 में र्र्र्चल ने पूवी युरोप क
े
ववभाजन को स्वीकार ककया था और यह तय हुआ था कक बुल्गाररया और रूमाननया पर सोववयत संघ का प्रभाव
रहेगा तथा यूनान पर त्रिटेन का, इसक
े अलावा हंगरी तथा युगोरलाववया में दोनों का प्रभाव बराबर रहेगा परंतु युद्ध
समास्प्त क
े बाद USSR ने इस समझौते की परवाह न करते हुए पूवी युरोप क
े सभी देिो में साम्यवाद का प्रसार
करना आरंभ कर ददया स्जससे तनाव में वृद्र्ध हुई |
iv) ईरान से सोववयत सेना का न हटना :- द्ववतीय ववश्व युद्ध क
े दौरान सोववयत सेना ने त्रिटेन की सहमनत
से उत्तरी ईरान पर अर्धकार कर मलया था परंतु युद्ध की समास्प्त क
े बाद आंग्ल – अमरीकी सेना दक्षक्षणी ईरान से
हट गई पर सोववयत संघ ने अपनी सेनाएुँ हटाने से इंकार कर ददया और बाद मे UNO क
े दबाव क
े बाद वहाुँ से
सेनाएुँ हटाई | परंतु इस घटना ने तनाव मे वृद्र्धकर दी |
v) यूनान में सोववयत हस्तक्षेप :- 1944 क
े समझौते क
े अनुसार त्रिटेन का प्रभुत्व यूनान पर स्वीकार ककया गया
था | परंतु युद्ध क
े पश्र्ात ् त्रिटेन कमजोर हो गया इसमलए उसने यूनान से अपने सैननक अड्डो को समाप्त करने
की घोषणा कर दी स्जसका लाभ उठाकर सोववयत संध ने इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना आरंभ कर ददया |
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21.
vi) टकी परसोववयत दिाव :- द्ववतीय ववश्व युद्ध क
े बाद टुकी पर सोववयत संघ दबाव डाल रहा था कक उसे
टकी में अपने सैननक अड्डे बनाने का अर्धकार ददया जाए लेककन पस्श्र्मी देिो ने इसका ववरोध ककया और
अमरीका ने इस मामले को सुरक्षा पररषद् में उठाने की र्ेतावनी दी |
vii) अणु िम का अववष्कार :- द्ववतीय ववश्व का अंत परमाणु हमले क
े साथ हुआ अमरीका ने जापान क
े
दहरोमिमा और नागासाको िहरो पर अणु बम र्गराये इन घातक बमों क
े ववषय में USA त्रिटेन को तो बताया था
परंतु USSR से इसे गुप्त रखा गया था सोववयत संघ ने इसे ववश्वासघात माना और सोववयत संघ को भी इस
प्रकार क
े बमों की जरूरत महसूस हुई |
पक्श्चम द्वारा साम्यवाद का ववरोि :- पस्श्र्मी देिो त्रिटेन, USA आदद ने भी सोववयत संघ की आलोर्ना की
तथा उन्होंने साम्यवादी व्यवस्था की तुलना फासीवादीयों से की और सोववयत जनता को गुलाम बताया पस्श्र्मी देिो
क
े नेताओं ने सोववयत ववरोधी बयान ददये स्जससे बढ़ता गया |
िललमन की नाक
े िंदी :- सोववयत द्वारा लंदन प्रोटोकाल ( जून – 1948) का उल्लंघन करते हुए बमलचन की नाक
े बंदी
कर दी गई | इससे पस्श्र्मी देिों ने सुरक्षा पररषद् में सोववयत संघ की नाक
े बंदी क
े ववरुद्ध मिकायत की और इसे
िांनत क
े मलए घातक बताया |
सोववयत द्वारा वीटो का दुरूपयोग :- सुरक्षा पररषद् मे सोववयत संघ ने वीटो का अत्यार्धक बार प्रयोग ककया
जैसे अगस्त 1961 तक USA ने 1 बार भी वीटो का प्रयोग नही ककया था जबकक USSR 95 बार इसका प्रयोग
कर र्ुका था स्जसमे ये माना जाने लगा की सोववयत संघ इस संगठन को समाप्त करना र्ाहता है |
लैण्डलीज सहायता पर रोक :- अमरीका द्वारा लैण्डलीज अर्धननयम द्वारा जो आर्थचक सहायता USSR को दी
जा रही थी USSR पहले ही उससे असंतुष्ट्ट था परंतु युरोप में ववजय क
े पश्र्ात ् राष्ट्रपनत ट्रूमेन ने वह भी बंद कर
दी स्जससे USSR और अर्धक नाराज हो गया |
शीत युद्ि क
े प्रभाव
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22.
i) ववश्व कादो गुटों मे ववभाजन :- िीत युद्ध क
े कारण ववश्व का दो गुटों में ववभाजन हो गया एक गुट का
नेतृतव USA ने ककया जस्ब्क दूसरे गुट का नेतृत्व USSR ने ककया |
ii) तनावपूणम वातावरण :- िीत युद्ध क
े कारण पुरे ववश्व में तनाव का वातावरण था और कई बार दोनों
महािस्क्तयों क
े बीर् भयंकर युद्ध की स्स्थनत उत्पन्न हुई थी | जैसे क्यूबा ममसाइल संकट, बमलचन की नाक
े बंदी
आदद |
iii) सैननक संधियों का ननमामण :- िीत युद्ध क
े दौरान दोनों महािस्क्तयों ने अपनी सुरक्षा और िस्क्त में वृद्र्ध
करने क
े मलए ववमभन्न सैननक गुटो का ननमाचण ककया जैसे USA ने नाटो, सीटो और सेटो सैननक गुट बनाए तो
बदले मे USSR ने वारसा पैक्ट का ननमाचण ककया |
iv) हधथयारों की होड़ :- िीत युद्ध क
े कारण सभी देिो की सुरक्षा क
े मलए एक बार कफर खतरा उत्पन्न हो गया
तथा देिो ने अपनी सुरक्षा क
े मलए हर्थयारों का ननमाचण आरंभ कर ददया स्जससे हर्थयारों की होड़ को बढ़ावा ममला
|
v) UNO क
े महत्व मे कमी :- िीत युद्ध क
े दौर में महािस्क्तयों क
े आपसी टकराव क
े कारण कई बार तनाव
की स्स्थनत बनी तथा UNO क
े द्वारा जो िांनत प्रयास ककये जा रहे थे वे नाकाम रहे और कई बार ऐसा प्रतीक हुआ
की UNO एक व्यथच संस्था है क्योंकक महािस्क्तयाुँ इसक
े उद्देश्यों की पूनतच क
े मागच में बाधा उत्पन्न कर रही थी |
vi) गुट ननरपेक्षता का उदय :- िीत युद्ध क
े दौर में महािस्क्तयां छोटे और नव स्वतंत्र राष्ट्रो को अपने गुट में
िाममल करने का दबाव डाल रही थी फलस्वरूप उनकी स्वतंत्रता क
े मलए खतरा उत्पन्न हो गया और इन देिो ने
अपनी स्वतंत्रता को बनाए रखने क
े मलए गुट ननरपेक्षता की नीनत को अपनाया |
शीत युद्ि का अंत :- 1989 में बमलचन की दीवार को र्गरा ददया, जमचनी का पुन : एकीकरण हो गया , वारसा
पैक्ट को भंग कर ददया गया और दोनों महािस्क्तयों ने सहयोग को बढ़ावा ददया | यह िीत युद्ध की समास्प्त का
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23.
ही पररणाम थाकक प्रथम खाड़ी संकट क
े समय USA और USSR ने ममलकर सुरक्षा पररषद् क
े प्रस्तावों का
समथचन ककया था |
िीत युद्ध क
े अंत का मुख्य कारण युरोप में साम्यवाद का पतन होना था और सोववयत संघ आर्थचक व राजनैनतक
रूप से वपछड़ गया था तथा वह USA को र्ुनौती देने की स्स्थनत में नही था अत: गोबाचर्ोव ने िीत युद्ध का त्याग
करक
े ममत्रता पर जोर ददया |
प्रश्न:6 टदतान्त (तनाव शैधथल्य) एंव इसक
े ववश्व राजनीनत पर पड़ने वाले प्रभावों पर चचाम करें|
उत्तर : 1962 क
े क्यूबा ममसाइल संकट क
े बाद ववश्व राजनीनत में एक नया मोड़ आया तथा USA और USSR क
े
तनावपूणच सम्बंध कम होने लगे तथा दोनों ने आपसी सहयोग को बढ़ावा देने की नीनत अपनाई | अमरीका और
सोववयत संघ क
े सम्बंधो में इस नवीन पररवतचन को तनाव – िैर्थल्य या ददतांत क
े नाम से जाना जाता है |
अमरीका तथा सोववयत संघ क
े नेताओं ने अपने – अपने देिो की जनता को ये समझाना आरंभ कर ददया कक िीत
युद्ध दोनों ही देिो क
े मलए घातक है इससे कोई लाभ नही होगा|
टदतांत का अथम :- ददतांत फ्र
ें र् भाषा का िब्द है स्जसका अथच है ‘ तनाव में मिर्थलता‘ अंतराष्ट्रीय राजनीनत
क
े सम्बन्ध में इस िब्द का प्रयोग USA तथा USSR क
े बीर् िीत युद्ध क
े तनाव में कमी आने क
े बाद
सम्बंधो में आई मधुरता क
े मलए ककया जाता है |
ददतांत क
े उदय क
े कारण
i) राष्रीय टहतों की पूनतम :- दोनों महािस्क्तयों को िीत युद्ध क
े समय यह अहसास होने लगा कक हर्थयारों
पर धन खर्च करने क
े बजाए आम – आदमी क
े जीवन स्तर में सुधार लाने क
े मलए खर्च ककया जाए अत: दोनों
देिो में तनाव में कमी आने लगी थी |
ii) सोववयत संघ की आधथमक क्स्थनत :- िीत युद्ध क
े दौरान USSR आर्थचक व तकनीकी रूप से वपछड़ गया
था धन का अर्धकतर भाग हर्थयार बनाने में खर्च हो जाता था इसमलए सोववयत संघ में कृ वष व उघोग वपछड़े
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24.
हुए थे सोववयतसंघ क
े संसाधनो का पूणच ववकास नही हो पा रहा था अत: सोववयत संघ ने तनाव में कमी
लाकर ववकास को बढ़ावा ददया |
iii) अमरीकी उघोगो क
े ललए कच्चे माल की आवश्यकता :- अमरीकी नेताओं ने ये महसूस ककया कक
USSR में कच्र्े माल क
े भण्डार हैं और उन्हे प्राप्त करने क
े मलए मधुर सम्बंध आवश्यक है अत: ननक्सन ने
दोनों देिो की अथचव्यवस्था को एक दूसरे का पूरक बताया |
ननक्सन क
े अनुसार USSR में गैस, पैरोमलयम आदद क
े वविाल भंडार है स्जन्हें व्यापाररक आधार पर प्राप्त
ककया जा सकता है इससे अमरीका की अन्य देिो पर ननभचरता समाप्त हो जाएगी |
iv) परमाणु शक्तत संतुलन :- प्रारंभ में क
े वल अमरीका क
े पास परमाणु िस्क्त थी परंतु जब USSR भी
परमाणु िस्क्त सम्पन्न राष्ट्र बन गया तो दोनो क
े बीर् िस्क्त का संतुलन स्थावपत हो गया | इसक
े अलावा
क्यूबा ममसाइल संकट और बमलचन संकट से दोनों को अहसास हो गया था कक यदद युद्ध हुआ तो भयंकर तबाही
होगी फलस्वरूप दोनों ने SALT और SALT -2 संर्ध की|
v) शीत युद्ि का तनावपूणम वातावरण :- िीत युद्ध एक मनोवैज्ञाननक युद्ध था यह ऐसा था जैसे ननलंत्रबत
मृत्यु दण्ड इसमलए इसे वास्तववक युद्ध से भी अर्धक खतरनाक मन गया दोनो देिो को अहसास था कक िीत
युद्ध कभी भी वास्तववक युद्ध में बदल सकता है | स्जसक
े पररणाम भयंकर होंगे इसमलए दोनों देि तनाव कम
करने क
े मलए बाध्य हो गए |
vi) साम्यवादी गुट का टूटना :- सोववयत संघ क
े प्रनत अमरीकी नीनत में बदलाव आने का एक मुख्य कारण
यह था कक साम्यवादी गुट धीरे –धीरे टूटने लगा था और USSR से खतरा कम हो गया था इसमलए USA ने
आपसी टकराव को कम करने का ननणचय मलया |
vii) गुट ननरपेक्ष राज्यों की भूलमका :- िीत युद्ध को कम करने में गुट ननरपेक्ष राष्ट्रों की भूममका भी
महत्वपूणच थी क्योंकक ये राष्ट्र स्वयं ककसी गुट में िाममल नहीं हुए तथा तनाव को कम करने क
े मलए प्रयास भी
ककये |
टदतांत की प्रमुख घटनाएाँ
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25.
i) मास्कोबिन समझौता:- िीत युद्ध क
े दौर में जमचनी तनाव का क
ें द्र त्रबंदु था क्योंकक पस्श्र्मी जमचनी में
पूुँजीवादी और पूवी जमचनी में साम्यवादी सरकार थी | इस तनाव को कम करने क
े मलए अगस्त 1970 में
USSR और पस्श्र्मी जमचनी क
े बीर् एक संर्ध हुई स्जसमे कहा गया कक USSR , पस्श्र्मी जमचनी क
े ववरुद्ध
सैननक कायचवाही नही करेगा|
ii) िललमन समझौता :- जमचनी में तनाव को कम करने क
े मलए 1971 में एक समझौता हुआ इस समझौते क
े
अनुसार पस्श्र्मी जमचनी क
े लोगों को पूवी जमचनी आने – जाने की स्वतंत्रता दे दी गई | इससे भी तनाव में कमी
आई |
कोररया समझौता :- 1972 में उत्तरी कोररया और दक्षक्षणी कोररया क
े बीर् तनाव बहुत बढ़ गया था अत:
जुलाई 1972 में दोनों देिो क
े बीर् समझौता हुआ कक वे एक दूसर को कमजोर करने का प्रयास नही करेंगे और
एकीकरण क
े मलए एक सममनत गदठत की गई |
मास्को मिखर वाती:- मई 1972 में USA क
े राष्ट्रपनत ननक्सन ने USSR की यात्रा की और साम्यवादी दल क
े
नेता िेझनेव से समझौता ककया कक वे आपसी वववादों को िांनत से हल करेंगे |
शस्त्र ननयंत्रण संधि :- USA तथा USSR दोनों ने तनाव को कम करने व हर्थयारों की होड़ को रोकने क
े
मलए िस्त्र ननयंत्रण संर्धयों पर हस्ताक्षर ककये|
ब्रेझनेव की अमरीका यात्रा :- जून 1973 में सोववयत राष्ट्रपनत ने USA की यात्रा की इस यात्रा क
े दौरान देिो
में तकनीकी सहयोग क
े मलए ववर्ार ववमिच हुआ
यूरोवपयन सुरक्षा सम्मेलन :- जुलाई 1973 में कफनलैण्ड की राजधानी हेल मसंकी में यूरोपीय सुरक्षा सम्मेलन
आरंभ हुआ इसमें युरोप और अमरीका क
े 35 देिों ने भाग मलया |
टदतांत पर संकट और नव शीत युद्ि
सन् 1979 में ददतांत पर संकट क
े बादल मंडराने लगे थे और ननम्नमलखखत घटनाओं ने दोनो महािस्क्तयों क
े
सम्बंधो को समाप्त कर ददया |
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26.
i) 1975 मेंपुतचगाल और सोववयत समथचन वाली पुतचगाली कम्युननस्ट पाटी क
े सम्बध मधुर होने लगे फलस्वरूप
अमरीककयों ने आरोप लगाया की सोववयत संघ पुतचगाल को नाटो से अलग करना र्ाहता है
ii) अंगोला क
े ग्रह युद्ध और इथोवपया और सोमामलया क
े संघषच में USSR और क्यूबा क
े हस्तक्षेप से अमरीका
में तीव्र प्रनत कक्या हुई और राष्ट्रपनत काटचर ने नाटो की िस्क्त बढ़ाने पर बल ददया |
1979 में सोववयत सेनाओं ने अफगाननस्तान पर कब्जा कर मलया स्जससे िीत युद्ध दोबारा आरंभ हो गया |
नाव शीत युद्ि क
े उदय क
े कारण
i) USSR की शक्तत में वृद्टद:- ददतांत युग में USSR परमाणु और नौसेननक िस्क्त में USA की बराबरी
करने का प्रयास कर रहा था और उस समय USA ववयतनाम युद्ध में उलझा हुआ था स्जसका लाभ उठाकर
USSR ने तेजी से सैननक ववकास ककया और अब वह USA को र्ुनौती देने की स्स्थनत में आ गया |
ii) रीगन का राष्रपनत िनना :- 1980 में रोनाल्ड रीगन अमरीका क
े राष्ट्रपनत बने उन्होंने सत्ता में आते ही
उग्र नीनतयों को बढ़ावा ददया उन्होंने हर्थयारों क
े ननमाचण और ममत्र राष्ट्रों क
े सैन्यकरण को बढ़ावा ददया इससे
सोववयत संघ में नाराजगी उत्पन्न हुई |
iii) अंतररक्ष अनुसंिान में होड़ :- अंतररक्ष अनुसंधान में होड़ क
े कारण भी दोनो देिो क
े बीर् तनाव में वृद्र्ध
हुई | USSR ने प्रथम नागररक युरी गागररन को अंतररक्ष मे भेजा तो अमरीका ने र्ंद्रमा से ममटटी और र्ट्टानें
ला कर ददखा दी इसी प्रकार दोनों देिो ने अन्तररक्ष क
े रहस्यों को सुलझाने की होड़ आरंभ कर दी स्जससे तनाव
में लगातार वृद्र्ध होती गई |
iv) अंतररक्ष युद्ि पररयोजना :- 1983 मे राष्ट्रपनत रोनाल्ड रीगन ने ‘स्टारवासच’ नाम पररयोजना आरंभ कर
दी | इस अमभयान क
े तहत लगभग दो हजार युद्ध क
े ववमान अंतररक्ष में तैरेंगे और घुसपैदठयों को नष्ट्ट करेंगे
स्जससे एक सुरक्षा कवर् का ननमाचण होगा उनकी इस पररयोजना ने भी सोववयत संघ को उकसाने मे महत्वपूणच
भूममका ननभाई |
v) अफगान मे सोववयत हस्तक्षेप :- 1979 में अफगान की सत्ता पर USSR क
े कब्जे से USA को धक्का
लगा अत: USA क
े राष्ट्रपनत ने सोववयत संघ की कड़ी ननंदा की और राष्ट्रपनत काटचर ने ‘हॉट लाईन’ पर
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27.
सोववयत नेताओं कोकड़े िब्दों में र्ेतावनी दी तथा 1980 मे होने वाले मास्को ओलस्म्पक खेलो का बदहष्ट्कार
कर ददया | स्जससे टकराव और अर्धक बढ़ गया |
vi) दक्षक्षण – पूवी एलशया में िढ़ता सोववयत प्रभाव :- दक्षक्षण पूवी एमिया में साम्यवादी सोववयत संध का
प्रभाव लगातार बढ़ रहा था स्जसे रोकने क
े मलए अमरीका और र्ीन ने संयुक्त मोर्ाच बनाया | अमरीका से प्रेरणा
पाकर र्ीन ने ववयतनाम को सबक मसखाने क
े मलए ववयतनाम पर आक्मण कर ददया पर ववयतनाम ने
सोववयत संघ से ममत्रता कर ली |
नव शीत युद्ि क
े पररणाम
i) टदतांत की समाक्प्त :- नव िीत युद्ध में ददतांत को समाप्त कर ददया क्योंकक ददतांत क
े दौर में
महािस्क्तयों का आपसी तनाव कम हो गया था जो नव िीत क
े कारण दोबारा बढ़ गया |
ii) तनाव क्
ें दो का स्थानातरण :- पुराने िीत युद्ध में जमचनी, इटली, कोररया आदद युरोवपय देि तनाव क
े
मुख्य क
ें द्र थे जस्ब्क नव िीत युद्ध में अफगाननस्तान , कम्पूर्र्या, अल – सल्बाडोर आदद तनाव का क
ें द्र बन
गए थे|
iii) ननशस्त्रीकरण का अंत: ददतांत क
े साथ ननिस्त्रीकरण जुड़ा हुआ था लेककन नव िीत युद्ध ने
ननिस्त्रीकरण की प्रकक्या को समाप्त कर ददया जैसे हर्थयारों पर रोक लगाने वाली संर्धया NPT , SALT
आदद प्रभावहीन हो गई और आपसी बातर्ीत का दौर समाप्त हो गया |
ननष्कर्म :- ददतांत क
े कारण िीत युद्ध क
े प्रभाव मे कमी आने लगी थी और दोनों महािस्क्तयों क
े बीर्
सम्बध मधुर होने लगे थे तथा दोनों ने परस्पर सहयोग की नीनत को अपनाया स्जससे भय, तनाव और संघषच में
कमी आई परंतु यह मधुर सम्बंधो का दौर ज्यादा लम्बे समय तक न र्ल सका दोनों देिो में उग्र नेताओ क
े
सत्ता में आने क
े पश्र्ात ् पुन: प्रनतस्पधाच का दौर आरंभ हो गया
अमरीका और सोववयत संघ दोनों में स्वय को श्रेष्ट्ठ सात्रबत करने की होड़ लग गई अब र्ाहे वो आर्थचक क्षेत्र हो
या तकनीकी अथवा सैननक दोनों एक दूसरे को नीर्ा ददखने का प्रयास करने लगे|
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28.
प्रश्न : 1929से 1933 क
े िीच ववश्व व्यापी आधथमक मंदी पर टटप्पणी करे
उत्तर : प्रथम ववश्व युद्ध की समास्प्त क
े पश्र्ात ् सभी देिो ने अपनी – अपनी आर्थचक स्स्थनत में सुधार करने क
े
प्रयास आरंभ कर ददए थे | प्रथम ववश्व युद्ध में स्जन देिो ने भाग मलया था उनमे लगभग सभी देिो को भरी हानन
उठानी पड़ी थी क्योंकक ववश्व युद्ध क
े कारण अरबों की सम्पनत नष्ट्ट हो गई थी और करोड़ो लोग प्रभाववत हुए थे |
1929 ई॰ में अर्ानक पररस्स्थनतयों में बड़े बदलाव हुए और ववश्व में भीषण आर्थचक संकट आरंभ हो गया | इस
संकट से रूस क
े अलावा कोई भी देि बर् नही सका | इस मंदी का आरंभ USA से हुआ अक्टूबर 1929 में न्यूयाक
च
िेयर बाजार में अर्ानक जबरदस्त मंदी छा गयी और िेयरो का मूल्य बहुत अर्धक र्गर गया | आर्थचक संकट
इतना गंभीर हो गया था कक मसतम्बर 1931ई॰ से त्रिटेन को भी स्वणच मुद्रा क
े संदभच में अनेक छ
ू ट मांगनी पड़ी |
इसक
े अलावा स्वीडन, नावे, कफनलैंड, भारत , र्ीन और फारस ने अपनी स्वणच मुंद्रा का त्याग कर ददया और जमचनी
ने क्षववपूनतच देने से इंकार कर ददया |
महा मंदी क
े कारण
i) सोने का असंतुलन :- क
ु छ अथच िास्स्त्रयों का मानना है कक आर्थचक मंदी का बड़ा कारण अनेक देिो क
े
पास सोने की कमी थी | युद्ध काल में अमेररका ने अनेक देिो को ॠण ददये थे और इस ॠण का भुगतान
सोने में हो रहा था| फ्रांस को छनतपूनतच की रामि भी सोने में ममल रही थी इस प्रकार अर्धकांि सोना USA और
फ्रांस क
े पास जमा हो गया था और ववश्व में सोने की कमी हो गई और मुद्रा का अवमूल्यन हो गया |
ii) औघोधगकरण:- अनेक ववद्वानों का ववर्ार है कक उत्पादन में वैज्ञाननक ववर्धयों का लगातार प्रयोग हो रहा
था इसक कारण कृ वष उत्पादन का कोई खरीदार नही बर्ा | कारखानों में मिीनों क
े प्रयोग में अनेक श्रममक
बेकार हो गए | स्जससे लोगो की कृ वष िस्क्त कम हो गई|
iii) क्षनतपूनतम की रालश :- वसाचय की संर्ध में हारे हुए राष्ट्रों को भारी रकम छनतपूनतच क
े रूप में र्ुकाने क
े मलए
बाध्य ककया गया और युद्ध क
े मलए गए श्रणों ने 1929 में आर्थचक संकट को और बढ़ा ददया | इसक
े कारण
अंतराष्ट्रीय व्यापार और अथचव्यवस्था बुरी तरह अस्त व्यस्त हो गई |
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29.
iv) चांदी कीसप्लाई िढ़ना :- क
ु छ ववद्वानों का कहना है कक र्ांदी की सप्लाई बहुत अर्धक बढ़ गई थी |
स्जससे इसका मूल्य बहुत कम हो गया फलस्वरूप स्जन देिो की मुद्रा का आधार र्ांदी था उनकी क्र् िस्क्त
कम हो गई और आर्थचक मंदी आ गई |
v) वॉल स्रीट का ध्वस्त होना :- अमेररका क
े वॉल स्रीट में ववश्व का सबसे बड़ा िेयर बाजार था | 1929
ई॰ में इस बाजार में महामंदी आ गयी | 23 अक्टूबर से िेयरो क
े दाम बहुत र्गर गए यह आर्थचक संकट का
तात्कालीन कारण था अमेररकी सरकार और पूंजीपनतयों ने इस पर काबू पाने का पूरा प्रयास ककया परंतु सफलता
नही ममल सकी| पूंजीपनतयों ने दूसरे देिो में धन लगाना बंद कर ददया तथा अमेररकी सरकार ने दूसरे देिो को
श्रण देने पर भी प्रनतबंध लगा ददया फलस्वरूप श्रण लेने वाले देिो की क्य िस्क्त कम हो गई और आर्थचक
संकट उत्पन्न हो गया |
vi) आक्स्रया क
े िैंक का टदवाललया होना :- ववश्व व्यापी मंदी का एक कारण अस्स्रया क
े सबसे बड़े बैंक का
ददवामलया होना था अस्स्रया का क्
े डडट एण्ड ओस्टाल्ड बैंक सबसे बड़ा बैंक था| इसक
े कारण अस्स्रया में
आर्थचक संकट आ गया था|
vii) बब्रटेन का आधथमक संकट :- इंग्लैण्ड भी इस आर्थचक मंदी से नही बर् सका| लंदन अन्तराष्ट्रीय व्यापार
का मुख्य क
ें द्र था जहाुँ व्यापार अस्त-व्यस्त हो गया | अगस्त 1931 ई॰ में फ्रांस तथा अमेररका क
े संधीय बैंक
ने त्रिटेन क
े प्रत्येक बैंक को श्रण ददया परंतु इससे आर्थचक संकट कम नही हुआ|
आधथमक संकट क
े पररणाम
i) इससे अंतराष्ट्रीय सहयोग समाप्त हो गया| देिो ने राष्ट्र संध क
े आदिो को भुला ददया
ii) अनेक देिो में उग्र राष्ट्रवाद को बढ़ावा ममला| जैसे इटली,जमचनी
iii)युरोप क
े कई देिो में राजनैनतक अस्स्थरता उत्पन्न हो गई |
iv) ववमभन्न देिो क
े बीर् संदेह और अववश्वास को बढ़ावा ममला
v) महामंदी क
े कारण पूुँजीवादी देिो में भारी असंतोष फ
ै ल गया और जनता साम्यवाद की ओर आकृ वषत होने
लगी|
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30.
vi) अन्तराष्ट्रीय व्यापारनष्ट्ट हो गया| फलस्वरूप राष्ट्रीय आय कम हो गयी , बेरोगारी बढ़ी और आर्थचक ववनाि
िुरू हो गया|
महामंदी क
े प्रभाव
i) जममनी पर प्रभाव:- इस महामंदी का सबसे अर्धक जमचनी पर पड़ा| उसका आयात – ननयाचत अस्त – व्यस्त
हो गया था|
1932 ई॰ तक जमचनी में बेरोजगारों की संख्या 60 लाख तक पहुुँर् गयी| जमचनी की तात्कालीन सरकार वाइमर
गणराज्य को अनेक कदठनाइयों का सामना करना पड़ा|
दहटलर ने जमचनी की इस स्स्थनत का भरपूर लाभ उठाया और सरकार को बदनाम ककया उसने मध्यमवगच तथा
बेरोजगारों की सहायता से मार्च 1930 ई॰ मे सत्ता पर कब्जा कर मलया जमचनी क
े बैंक आर्थचक संकट क
े कारण
बरबाद हो गए| छनतपूनतच की रकम देना मुस्श्कल हो गया फलस्वरूप दहटलर ने छनतपूनतच देने से इंकार कर ददया
तथा धीरे-धीरे दहटलर ने जमचनी की आर्थचक, सैननक और राजनैनतक व्यवस्था पर पूणच ननयंत्रण कर मलया|
ii) बब्रटेन पर प्रभाव :- आर्थचक मंदी ने त्रिटेन को ववमभन्न प्रकार से प्रभाववत ककया| 1925 में त्रिटेन ने अपनी
मुद्रा पौंड का मूल्य ऊ
ुँ र्ा कर ददया स्जससे अंग्रेजी समाज की कीमते बढ़ गई और महामंदी क
े कारण त्रिटेन का
जहाजरूनी उघोग ठप्प हो गया| युद्ध क
े समय उसक
े ऊपर भारी कजच था|
उसक
े अनेक प्रदेि छीन मलये गए| इस दुव्यचवहार क
े प्रनत राष्ट्र संघ की उदांसीनता क
े कारण हारे हुए देिो में
राष्ट्र संघ क
े प्रनत कोई ननष्ट्ठा नही रही| वे वसाचय संर्ध को नष्ट्ट करना र्ाहते थे| अत: इसी संर्ध क
े फलस्वरूप
राष्ट्रसंघ का पतन हुआ|
ननणमय में एकमत का आभाव:- राष्ट्र संघ की स्थापना क
े समय यह ननस्श्र्त ककया गया था कक सभी ननणचय
सदस्य राष्ट्रों की सहमनत से मलये जायेंगे| ककं तु छोटे- बड़े सभी राष्ट्रों को इस प्रकार वीटो का अर्धकार प्राप्त हो
जाने से बड़े राष्ट्र छोटे राष्ट्रों को आगे करक
े ककसी ननणचय को रद्द कर देते थे|
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31.
ननशस्त्रीकरण की समस्या:-राष्ट्रसंघ ने ववश्व िांनत की स्थापना क
े मलए सभी राष्ट्रों को िास्त्रों में कटौती
करने की सलाह दी क्योंकक िास्त्रों की होड़ तनाव का बड़ा कारण थी| परंतु महािस्क्तयों ने िास्त्रों क
े ननमाचण
की होड़ जारी रखी और राष्ट्र संघ अपने उद्देश्य में सफल न हो सका|
सैननक शक्तत का अभाव:- राष्ट्र संघ क
े पास स्वय की कोई सैना नही थी| अपने आदेिो को लागू करने क
े
मलए सैना का होना अत्यंत आवश्यक था| वह छोटे राष्ट्रों पर तो दबाव डाल सकता था परंतु िस्क्त क
े अभाव में
बड़े राष्ट्रों क
े साथ दमन की नीनत नही अपना सकता था| इसमलए बड़े राष्ट्र मनमाने ढंग से कायच करने लगे|
और राष्ट्रसंघ ननबचल हो गया|
युरूप का राजनीनतक आिार :- राष्ट्र संघ की असफलता में युरोप की राजनीनत भी सहायक थी प्रथम ववश्व
युद्ध का उद्देश्य प्रजातंत्र की स्थापना तथा भववष्ट्य में होने वाले युद्धों को रोकना था, परंतु सही अथो में यह
साम्राज्यवादी युद्ध था| इस युद्ध क
े द्वारा िस्क्तिाली राष्ट्रों ने उपननवेिी का बंटबारा ककया | वसाचय संर्ध से
पहले इन राष्ट्रों में गुप्त संर्धयाुँ हो र्ुकी थी|
राजनीनतज्ञो का ईमानदार न होना:- संघ क
े नेता स्वाथी थे| जब तक उनका स्वाथच था तब तक वे राष्ट्र संघ
में बने रहे| वास्तव में वे संघ की सत्तात्मक स्स्थनत को नही देखना र्ाहते थे| उदाहरण क
े मलए जब जापान ने
मंर्ूररया तथा इटली ने अबीसीननया पर आक्मण ककया तो राष्ट्र संघ ने अपने ननणचय जापान और इटली क
े
ववरुद्ध ददये| इससे असंतुष्ट्ट होकर इन महािस्क्तयों ने राष्ट्र संघ की सदस्यता से त्याग पत्र दे ददया | इस
समय तक उनका स्वाथच पूरा हो र्ुका था|
सभा तथा पररषद् क
े कायों का अस्पस्ष्ट्टकरण :- राष्ट्र संघ क
े दो अंगो सभा तथा पररषद् क
े कायो को स्पष्ट्ट
नही ककया गया था| इनमे अनेक कायो को लेकर वववाद होता रहता था इसमलए इसक
े अंगो क
े बीर् तालमेल
नही था| इनक
े आपसी संघषो क
े कारण संघ की स्स्थनत कमजोर हो गई और वह असफल हो गया|
राष्र संघ की सफलताए
प्रशासननक कायम:- राष्ट्र संघ ने प्रिासन क
े क्षेत्र में महत्त्वपूणच कायच ककये हैं जैसे सार घाटी में जनमत कराकर
इसे जमचनी को सौंप ददया गया| डेस्जंग बंदरगाह को राष्ट्र संघ ने एक स्वतंत्र नगर घोवषत कर ददया|
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32.
संरक्षण कायम:- राष्ट्रसंघ ने जमचनी उपननवेिों क
े कल्याण तथा उन्ननत की व्यवस्था की और उनक
े प्रबंध का
कायच राष्ट्र संघ ने ववमभन्न देिो को सौंपा राष्ट्र संघ में एक स्थायी संरक्षण आयोग की स्थापना की गई थी|
राष्र संघ द्वारा सुलझाये गए वववाद:-
i) 1920- 1921 में जमचनी और बेस्ल्जयम में युक्
े न तथा नारमंडी क
े प्रदेिो को लेकर वववाद हुआ राष्ट्र संघ ने
ये प्रदेि बेस्ल्जयम को ददला ददये और मामले का ननपटारा ककया|
ii) 1931 ई॰ मे पौलेंड और जमचनी में सीमा वववाद उत्पन्न हुआ राष्ट्र संघ ने इस वववाद का ननपटारा कराया|
iii) 1925 में यूनान और बुल्गाररया और यूनान का युद्ध हुआ इस मामले में राष्ट्र संघ ने यूनान को दोषी
ठहराया और युद्ध त्रबराम करा |
iv) 1935ई॰ में सार घाटी में जनमत कराया गया कक जनता फ्रांस क
े साथ रहना र्ाहती है या जमचनी क
े साथ
जनमत का फ
ै सला जमचनी क
े पक्ष में गया इस मामले मे भी राष्ट्र संघ की भूममका महत्त्वपूणच थी|
आधथमक उपलक्व्ियााँ:- प्रथम ववश्व युद्ध में बबाचद हुए देिो की आर्थचक स्स्थनत में सुधार लाने क
े मलए राष्ट्र
संघ में एक ववतीय सममनत का गठन ककया गया| इसी क्म में आगे र्लकर अंतराचष्ट्रीय बैंक की स्थापना हुई |
सामाक्जक और मानवीय क्षेत्र में उपलक्धियााँस:- राष्ट्र संघ में सामास्जक और आर्थचक क्षेत्रो में सुधार क
े मलए
अनेक संस्था और आयोगो का गठन ककया गया तथा स्जनक
े द्वारा मजदूरों ,अल्पसंख्यको,त्रबमारो आदद क
े
जीवन स्तर में सुधार ककया जा सक
े जैसे अंतराचष्ट्रीय मजदूर संघ , स्वास्थ संगठन, अंतराष्ट्रीय न्यायालय आदद|
प्रश्न:7 पयामवरण क
े सम्िंि में अंतर व दक्षक्षण आंदोलनों पर चचाम करें?
अथवा
“ववकलसत और ववकासशील राष्रों की पयामवरण धचंताए अलग – अलग है”
इस कथन को स्पष्ठ करें ?
उत्तर : ‘पयाचवरण’ िब्द ववमभन्न तत्त्वों से ममलकर बना है जैसे भौनतक, जैववक,मानमसकता, सामास्जकता और
संस्कृ नत आदद| पयाचवरण िब्द की उत्पवत्त जमचन क
े जीव ववज्ञानी हेक्कल ने ‘ओसोलोजी’ िब्द से की थी| उनक
े
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33.
अनुसार ववज्ञान कासम्बन्ध सजीव जीवों उनक
े प्राकृ नतक आवाज स्थान परजीववयों, परजीव भक्षी और ववमभन्न
प्रकार की ममट्टी, जीवाणु इत्यादद से है| पयाचवरण आन्दोलन प्राकृ नतक पयाचवरण को बर्ाने क
े मलए ककया गया
था, स्जसका इनतहास बहुत पुराना हैं| पयाचवरण आंदोलन में “मानव प्राकृ नत का सह-सम्बंध और उसक
े कारणों
और पररणामों पर र्र्ाच की जाती है” 20वीं सदी क
े पयाचवरण आंदोलनों पर र्र्ाच नन॰ मल॰ प्रकार से ककजा सकती
है
उत्तर में पयामवरणवाद
औघोधगक क्ांनत का प्रभाव:- औघोर्गक क्ांनत क
े पश्र्ात ् पस्श्र्म में पयाचवरण को अपार क्षनत पहुुँर्ी जैसे
उत्पादन भारी मात्रा में करने क
े मलए संसाधनों को नष्ट्ट ककया गया जंगलो को बबाचद ककया गया फलस्वरूप वनों
और पयाचवरण को बर्ाने क
े मलए आंदोलनों का जन्म हुआ|
िुटहजीवी वगम की ववचार एंव नीनतयां: ऐसा माना जाता है कक पयाचवरण क
े इनतहास क
े मलए िस्क्तिाली
सफलतापूणच नीनतयां अत्यंत महत्त्वपूणच है स्जनक
े मलए अनेक बुदहजीववयों ने एक सफल भूममका ननभाई है जैसे
i) पररस्स्थनत क
े ववषय में अमेररकी राष्ट्रपनत रूजवेल्ट ने अमरीका क
े पयाचवरण को लेकर गंभीर र्र्ंता व्यक्त की
और 1985 में “यूनाइटेड स्टेट एन्वायरमेंट पोललटटतस” में पयाचवरण को बर्ाने क
े मलए सुझाब रखे गए|
ii) मैरीन जीव ववज्ञानी रिेल कासचन ने अपनी पुस्तक “साइलेंट स्पीकर” में कीटनािकों क
े उपयोग क
े भयंकर
प्रभावों को बताया, क्योंकक सबसे ज्यादा DDT(डाईक्लोरो-डाईकफनाइल-राइक्लोरो –ईथेन )
का प्रयोग USA ने ककया 1960 में इसका प्रयोग 6.34 मममलयन था| फलस्वरूप 1974 क
े जहरीले पदाथच
ननयंत्रण एक्ट क
े द्वारा DDT पर प्रनतबंध लगा ददया गया |
iii) रोम में 1964 मे तैयार की गई ररपोटच “मलममट्स ऑफ ग्रोथ” में संसाधनों क
े तीव्र गनत से नष्ट्ट होने पर
र्र्ंता व्यक्त की गई| फलस्वरूप लोगो में सतक
च ता बढ़ी और बड़े-बड़े जुलूस ननकाले गए|
सामाक्जक आंदोलन
i) हाल ही में नावे क
े दिचन िास्त्री ‘आने नेसे’ ने 1972 में ‘गहरे पयाचवरण’ का उदाहरण ददया स्जसमें जैव
क
ें दीत पर जोर डाला गया और ‘मानव क
े स्न्द्रत’ को अस्वीकार कर ददया|
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34.
ii) लव नहरक
े मलए “एन्टी टोककस्क” र्लाया गया क्योंकक “हुकर रसायन कम्पनी” क
े बड़े- बड़े रासायननक
ननक्षेपों क
े कारण लव क
े नाल में जीवो की संख्या कम हो रही थी| इसक
े खखलाफ लुईस र्गबस ने आंदोलन ककया
जो लव नहर की सफाई को लेकर था|
iii) औघोर्गकरण क
े कारण पयाचवरण पर पड़ रहे प्रभावों एव पररणामों से सतक
च करने क
े मलए न्यूजीलैण्ड में एक
“वैल्यू पाटी” का जन्म हुआ जो पहली “ग्रीना पाटी’’ क
े नाम से जानी गई|
iv) 1978 में, जमचनी क
े व्यस्क्तओं क
े समूहों ने एक “ग्रीन पाटी” बनाई जो अन्य देिो क
े मलए एक दीप की
तरह सात्रबत हुई इसका लाभ हुआ कक “ग्रीन पाटी” ने बेस्ल्जयम, इटली और स्वीडन में बना मलया|
दक्षक्षण में आंदोलन
ब्राजील का “धचको” आंदोलन:- 1976 में पेड़ो की कटाई को रोकने क
े मलए “र्र्को” नाम का आंदोलन र्लाया
गया इसका आंदोलन र्र्को मेन्डेस ने ककया था| यह आंदोलन रैंर्सच और लोगसच क
े खखलाफ हुआ स्जन्होने दस
हजार रबड़ ननकालने वालो को अपने स्थान से हटा ददया था| परंतु 1988, में र्र्को मेन्डेस का खून कर ददया
गया लेककन उनका प्रभाव पड़ा|
भारत में धचपको आंदोलन:- पयाचवरण को बर्ाने क
े मलए एक महत्त्वपूणच आंदोलन “र्र्पको आंदोलन” था जो
1970 क
े दिक में सुंदर लाल बहुगुणा व र्ंडी प्रसाद बट्ट ने िुरू ककया|
इसमें पेड़ो को कटने से बर्ाने क
े मलए गाुँव वाले पेड़ो से र्र्पक गये|
नममदा िचाओ आंदोलन :- नमचदा बर्ाओ आंदोलन ‘मेधा पाटकर’ द्वारा र्लाया गया था आंदोलन नमचदा नदी
पर बांध बनाए जाने क
े ववरुद्ध था| एक सरकारी योजना क
े अनुसार 30बड़े, 135माध्यम, 3000 छोटे बाुँध
बनाने की योजना थी| स्जसक
े कारण लाखो लोगो क
े ववस्थापन की समस्या हुई|
उत्तर व दक्षक्षण क
े आंदोलनों में लभन्नता:- उत्तरी व दक्षक्षणी पयाचवरण आंदोलन क
ु छ तथ्यों से मभन्न थे|
अमेररका में जो पयाचवरण आंदोलन हुए है वे अपनी जरूरतों को पूरा करने क
े मलए थे ताकक उनका रहन-सहन
का स्तर और उनक
े आस – पास का वातावरण बेकार न हो |
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35.
भारत में जोपयाचवरण आंदोलन र्लाये गए वे दो प्रनतयोगी समूहों क
े बीर् ये जैसे ‘ककसान व उघोग’ दोनों को
ही प्राकृ नतक संसाधनो की जरूरत थी| उत्तर में ये आंदोलन राजनीनतक संगठनों द्वारा जारी थे और दक्षक्षण में
बहुत दह पुराने ढंग से हुए|
वैक्श्वक स्तर क
े सम्मेलन
i) पयाचवरण को लेकर 1972 में स्टाक होम .................................
इस सम्मेलन में पयाचवरण को बर्ाने क
े मलए 26 सामान्य मसद्दांतो को स्वीकार ककया गया|
ii) 1987 में UNO ने ववश्व ववकास पर एक सम्मेलन ककया स्जसमे एक ररपोटच तैयार की गई इस ररपोटच का
नाम नावे क
े राष्ट्रपनत “िुन्डलैण्ड’’ क
े नाम पर रखा गया इसमे सतत ववकास को महत्त्वपूणच बताया गया|
iii) 1992 मे िाजील क
े ररयो-डी-जेनेररयो में ‘पृथ्वी सम्मेलन’ का आयोजन ककया गया इस सम्मेलन में
पयाचवरण को बर्ाने क
े मलए एजेन्डा-21 जारी ककया गया|
iv) 1997 मे जापान क
े क्योटो िहर मे “ क्योटो प्रोटोकाल” का आयोजन ककया गया स्जसमे ग्रीन हाऊस गैसों
मे कटौती करने का लक्ष्य रखा गया| भारत ने भी इस पर हताक्षर ककये|
ववकलसत और ववकासशील देशो का वववाद
i) तीसरी दुननया क
े देिो को यह लगता है कक ववकमसत देि इन देिो क
े तकनीकी व औघोर्गक ववकास को
रोकना र्ाहते है इसमलए पयाचवरण का बहाना करा|
ii) वपछले 16 सालो से उत्तर क
े देि दक्षक्षण को पयाचवरण ह्रास क
े मलए स्जम्मेदार ठहराते रहे हैं परंतु
ववकासिील राष्ट्रों का मानना है कक औघोर्गक राष्ट्र स्वंय इसक
े मलए स्जम्मेदार है 97% ग्रीन हाऊस गैसों का
उत्सजचन उनक
े द्वारा ही ककया गया है|
iii) ववकमसत देिो का आरोप है कक वनो का उन्मूलन करने क
े मलए ववकास राष्ट्रों की जीवन िैली स्जम्मेदार है|
परंतु ववकमसत राष्ट्रों पर ववकासिील राष्ट्र आरोप लगाते है| कक औघोर्गकरण क
े मलए वनो का सवाचर्धक
ववनाि ववकमसत देिो ने ककया है|
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36.
प्रश्न:8 िदलते सांस्क्नतकपररवेश में आिुननकता से आप तया समझते है
आलोचनात्मक मूल्यांकन करें?
उत्तर: आधुननकता की िुरुआत कब से है इस बात पर बड़ा बाद वववाद रहता है| बहुत से इनतहासकार और
सामास्जक वैज्ञाननको ने यह स्वीकारा कक समाज में आधुननकता की उत्पनत त्रिटेन व उसक
े उपननवेिों द्वारा हुई|
16वीं िताब्दी से आधुइकता से आधुननकता का समय है| इस समय पूुँजीवाद बहुत बढ़ रहा था स्जनमें क
ु छ
राजिाही थे| 1750 से 1820 क
े बीर् औघोर्गक क्ांनत हुई परंतु समाजवाददयों क
े अनुसार यह आधुननक युग का
आरंभ नही था|
19वीं िताव्दी में आधुननकता ववमभन्न क्षेत्रों जैसे समाज, अथचव्यवस्था, संस्कृ नत बदलाव में ददखी तथा 20 वीं
िताब्दी तक आधुननकता पुरे ववश्व में फ
ै ल र्ुकी थी|
आिुननकता की ववशेर्ताएाँ
i) उत्पादन बड़े पैमाने पर मिीनो द्वारा ककया जाता है|
ii) व्यवहाररक प्रयोगों क
े स्वाथच और तक
च में वृद्दद होना
iii) राष्ट्र ननयंत्रण में समाज की महत्त्वपूणच भूममका है| अब कोई ननजी ननयंत्रण नही क्योंकक इसे समय-समय पर
लोकतंत्र की जरूरत होती है|
iv) वतचमान समय में सभी वस्तुओं का आपस में बदलाव हो सकता है|
आिुननकता की प्रकक्याएं
i) राजनीनतक आिुननकता: राजनीनतक क्षेत्र में आधुननकता लोन में 1776 की अमेररकी तथा 1889 की
फ्रांसीसी क्ांनत का महत्त्वपूणच योगदान है| इन क्ांनतयो ने सामन्तवाद और तानािाही का अंत करक
े मध्यम वगच
को उपर उसाया, लोकतंत्र का ववकास ककया तथा र्र्च की सत्ता का अंत कर ददया इस प्रकार यह स्पष्ट्ट है कक
वतचमान समय में कोई भी राजनैनतक वप्रकक्या तभी वैध होगी जब वह जनता की इच्छाओं पर आधाररत होगी|
ii) आधथमक क्षेत्र में आिुननकता:- युरोप में औघोर्गक क्ांनत क
े पश्र्ात ्...........................
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37.
देिों की उत्पादनक्षमता बढ़ गई, जनसंख्या सम्रद्द हो गयी, पूंजी का ववस्तार हो गया और वैज्ञाननक तकनीकी
खोजें िुरू हो गयी| धीरे-धीरे व्यापार का ववस्तारीकरण होने लगा लोगो क
े धन व उपभोग में वृद्र्ध हो गई
फलस्वरूप युरोप में पूुँजीवाद का जन्म हुआ और धीरे-धीरे रुदढ़वादी अथचव्यवस्था में बदल गया|
सामाक्जक क्षेत्र में आिुननकता:- सामास्जक आन्दोलनों ने सामास्जक क्षेत्र में आधुननकता लाने में महत्त्वपूणच
योगदान ददया युरोप में माटटमन लूथर ने र्र्च की सत्ता का ववरोध ककया भारत में राजा राम मोहन राय ने सती
प्रथा का ववरोध ककया इसी प्रकार ववमभन्न देिो में ववर्ारकों ने समाज में पररवतचन लाने वाले अनेक ववर्ारो का
प्रनतपादन ककया|
संस्कृ नतक क्षेत्र में आिुननकता :- संस्कृ नतक क्षेत्र में आधुननकता युरोप में पुनमजागरण युग क
े साथ हुए इसक
े
बाद युरोप में र्र्च की सत्ता का अंत हुआ और धाममचक राज्य क
े स्थान पर िममननरपेक्ष
राज्य की स्थापना की अवधारणा को बल ममला|
सामररक क्षेत्र में आिुननकता:- युद्ध की पररस्स्थनतयों में नए प्रकार की राइफल, क
ै नन, गन, टैंक,जैट,प्लेन
और ममसाइल आदद का ववकास हुआ स्जससे उनमे भी बदलाव हुआ| हर्थयारों में आस्ण्वकबम और हाइड्रोजन
बम, रासायननक हर्थयार और जैववक हर्थयार जो पुरे एक ग्रह का ममनटों में सफाया कर सकते हैं| आधुननक
समाज की ही पहर्ान हैं|
संचार क्षेत्र में आिुननकता :- संर्ार क
े क्षेत्र में व्यापक पररवतचन हुआ है पत्र, पत्रत्रकाओं का स्थान इंटरनेट ,
टी॰वी , और रेड़डयो ने मलया यातायात क्षेत्र में भी व्यापक बदलाव आये हैं अब एक देि से दूसरे देि में यात्रा
करना ममनटों में संभव हो गया है|
धचककत्सा क्षेत्र में आिुननकता :- र्र्ककत्सा क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे है तथा स्वास्थ क
े संसाधनों में
सुधार रहे है स्जसक
े कारण मृत्युदर में कमी आई है और जदटल बीमाररयों को रोकने में सफलता ममली है|
आिुननकता की आलोचना
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38.
i) 20 वींिताब्दी में मदहलाओं की स्वतंत्रता और अर्धकारों को लेकर अनेक संघषच हुए तथा युरोप क
े देिो में
मदहलाओं की स्स्थनत में व्यापक बदलाव आये परंतु ववकासिील समाजों में मदहलाओं की स्स्थनत आज भी
दयनीय बनी हुई है तथा मदहलाओं को पुरूषों क
े समान अर्धकार प्राप्त नही हुए हैं|
ii) ववकमसत तथा पस्श्र्मी देिो का प्रभाव ववकासिील देिों पर बढता जा रहा है तथा ववकासिील देिो की
मिक्षा संस्कृ नत नष्ट्ट होती जा रही है|
iii) आधुननक समाज अपनी जदटलता से जाना जाता है वह उपभोग वस्तुओं में वृद्दद व जीवन क
े नए तरीको
को सामने लाया फलस्वरूप उत्पादन में वृद्दद की आवश्यकता पड़ी स्जसक
े कारण प्राकृ नतक संसाधनों का ह्रास
होता जा रहा है|
iv) आधुननकता की वतचमान धारणा ने क
े वल पस्श्र्मी देिों को ही लाभ पुँहुर्ाया| एमिया और अफ्रीका क
े अनेक
राष्ट्र अभी भी ववकास की दौड़ में बहुत अर्धक वपछड़े हुए है तथा इन देिो में लोग अभी तक अपनी मौमलक
सुववधाओं को जुटाने क
े मलए समथच नही हैं|
v) आधुननकारण क
े फलस्वरूप आय की असमानता में वृद्दद हुई है
ननष्कर्म :- आधुननक एक सरल िब्द है स्जसका अथच है मानव क
े जीवन में ववकल्पों का बढ़ना 1500 वीं सदी
का समय आधुननकता का समय है बहुत सी घटनाओं क
े कारण पस्श्र्मी दुननया में बड़े बदलाव आए| समुंद्री
यात्रा कोलम्बस और वास्को डी गामा ने अनेक नए राष्ट्रों को खोज ननकाला| ववज्ञान और तकनीकी में जो
क्ांनतयाुँ हुई व उतना प्रभाववत नही कर सकी स्जतना राजनीनतक क्ांनतयाुँ आधुननक ववश्व का आकार बदल रही
है| मिक्षक्षत और युवा लोगों का दुननया को देखने का नजररया बदल गया|
तकनीकी आधुननकता की सबसे बड़ी सफलता है| कक यांत्रत्रकी और वैज्ञाननक खोजों ने मानवीय स्वास्थ न समाज
क
े सभी पक्षों को बदल ददया है आर्थचक, धाममचक, सामास्जक व सैद्दस्न्तक आदद उदहारण क
े मलए त्रिटेन में
आधुननक मिीनों क
े द्वारा कपड़े और लोहे क
े उत्पादन में तीव्र वृद्दद हुई स्जसने जानवरों की जगह ले ली| नए
अववष्ट्कार इंजन िस्क्त, कार,रेलगाड़ी, जहाज और हवाई जहाज की क्ांनतयो ने लोगों क
े यात्रा करने क
े तरीको में
बदलाव ला ददया है परंतु आधुननकता हमे भववष्ट्य में संसाधन त्रबहीन ववश्व की ओर ले जा रही है|
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