Hanuman

445 views

Published on

0 Comments
0 Likes
Statistics
Notes
  • Be the first to comment

  • Be the first to like this

No Downloads
Views
Total views
445
On SlideShare
0
From Embeds
0
Number of Embeds
3
Actions
Shares
0
Downloads
4
Comments
0
Likes
0
Embeds 0
No embeds

No notes for slide

Hanuman

  1. 1.    ौी हनुमान चालीसा न स   दोहा  ौीगुरु चरन सरोज रज िनज मनु मुकर सुधािर.  नु ु ि बरनउँ रघबर िबमल जसु जो दायक फ़ल चािर.  ल ा ु ि बुिद्ध िद्धहीन तनु जािनक, सुिमरौं पवन-कमार. ा े ु बल बिध िबद्या दे हु मोिहं , हरहु कलेस िवकार.  बु र चौपाई  जय हनुमान ज्ञान गुन सा ागर, जय कपी ितहुँ लोक उजागर.  ीस क राम दत अ िलत बल ध ू अतु धामा, अंजनी-पुऽ पवन सुत नामा.  पु महाबीर िब िबबम बजरं गी ु मित िनवा सुमित क संगी.  ी, क वार े कचन बर िबराज सुबसा, कानन कडक किचत कसा.  ं रन बे ुं ुं े हाथ बळ औ ध्वजा ि ळ िबराजै, काँधे मूँज जनेऊ साजै.  संकर सुमन कसरीनंद े दन, तेज ूताप महा जग बंदन.  प िबद्यावान गुनी अित चा र, राम काज किरबे को आतुर.  ातु ज ूभु चिरऽ सुिनबे को रिस िसया, राम लखन सीता मन बिसया.  ख सूआम रुप ध िसयिहं िद धिर िदखावा, िबकट रुप धिर लंक जरावा.  भीम रुप धिर असुर सहारे , रामचन्ि क काज सँवारे .  प सँ ि े लाय सजीव लखन िज वन िजयाये, ौी रघुबीर हरािष उर लाये.  र रघुपित कीन्ह बहुत बड़ाई म मम िू भरतिह सम भाई.  ही ई, तु िूय
  2. 2.   सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस किह ौीपित कठ लगावैं.  ं सनकािदक ॄह्मािद मुनीसा, नारद सारद सिहत अहीसा.  जम कबेर िदगपाल जहाँ ते, किब कोिबद किह सक कहाँ ते.  ु े तुम उपकार सुमीविहं कीन्हा, राम िमलाय राज पद दीन्हा.  तुम्हरो मंऽ िबभीषन माना, लंकःवर भए सब जग जाना.  े जुग सहस्तर् जोजन पर भानू , लील्यो तािह मधुर फ़ल जानू.  ूभु मुििका मेिल मुख माहीं, जलिध लाँिघ गये अचरज नाहीं.  दगम काज जगत क जेते, सुगम अनुमह तुम्हरे तेते.  ु र् े राम दआरे तुम रखवारे , होत न आज्ञा िबनु पैसरे .  ु सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रच्छक काहू को डर ना.  आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक ते काँप.  ै भूत िपचास िनकट निहं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै.  नासै रोग हरै सब पीरा, जपत िनरं तर हनुमत बीरा.  संकट से हनुमान छड़ावै, मन बम बचन ध्यान जो लावै.  ु सब पर राम तपःवी राजा, ितन क काज सकल तुम साजा.  े और मनोरथ जो कोई लावै, सोइ अिमत जीवन फ़ल पावै.  चारों जुग ूताप तुम्हारा, हे ूिसद्ध जगत उिजयारा.  साधु संत क तुम रखवारे , ससुर िनकदन राम दलारे .  े ं ु अष्ट िसिद्ध नव िनिध क दाता, अस बर दीन जानकी माता.  े राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपित क पासा.  े तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम क दख िबसरावे.  े ु
  3. 3.   अंत काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हिर भक्त कहाई.  और दे वता िचत्त न धरई, हनुमत से सब सुख करई.  संकट कटे िमटे सब पीरा, जो सुिमरै हनुमंत बलबीरा.  जै जै जै हनुमान गोसाई, कृ पा करहु गुरु दे व की नाई.  जो सत बार पाठ कर कोई, छटिह बंिद महा सुख होई.  ू जो यह पढ़े हनुमान चालीसा, होय िसिद्ध साखी गौरीसा.  तुलसीदास सदा हिर चेरा, कीजै नाथ ह्र्दय महँ डे रा.  दोहा  पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरित रुप   राम लखन सीता सिहत, ॑दय बसहु सुर भूप 

×